WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – यदि फूल नहीं बो सकते तो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) कविता
(घ) एकांकी
उत्तर :
(ग) कविता

प्रश्न 2.
कवि के अनुसार किसका मन कमजोर है?
(क) दानव
(ख) मानव
(ग) राघव
(घ) उपरोक्त में कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) मानव।

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प्रश्न 3.
‘कटुता का शमन’ कहाँ होता है ?
(क) माता की शीतल छाया में
(ख) भाता के कोमल काया में
(ग) पिता के सान्निध्य में
(घ) उपरोक्त मे कोई नहीं
उत्तर :
(घ) उपरोक्त में कोई नहीं।

प्रश्न 4.
पग-पग पर शोर मचाने से क्या नहीं जमता है?
(क) विकल्प
(ख) संकल्प
(ग) कायाकल्प
(घ) प्रकल्प
उत्तर :
संकल्प।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार ज्ञान की घाटी है –
(क) दुर्गम
(ख) सहज
(ग) कमजोर
(घ) शीतल
उत्तर :
(क) दुर्गम

प्रश्न 6.
शुक्ल अंचल का जन्म किस जिले में हुआ ?
(क) बनारस
(ख) मेदिनीपुर
(ग) फतेहपुर
(घ) मिर्जापुर
उत्तर :
(ग) फतेहपुर

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प्रश्न 7.
‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) कविता
(घ) एकांकी
उत्तर :
(क) कहानी

प्रश्न 8.
चेतना की घाटी कैसी है ?
(क) विशाल
(ख) अगम
(ग) सुगम
(घ) क्षुद्र
उत्तर :
(ख) अगम

प्रश्न 9.
क्षुब्द शब्द का क्या अर्थ है ?
(क) अशांत
(ख) प्रशांत
(ग) शांत
(घ) निशांत
उत्तर :
(क) अशांत

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प्रश्न 10.
जो सुख की अभिमानी मदिरा में जाग सका वह क्या है ?
(क) जड़
(ख) चेतन
(ग) रुढ़िवादी
(घ) परंपरावादी
उत्तर :
(ख) चेतन

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
ममता की शीतल छाया में किसका शमन होता है?
उत्तर :
ममता की शीतल छाया में कटुता का शमन होता है।

प्रश्न 2.
मन में संकल्प कब नहीं जमता है?
उत्तर :
हर पं पर निंरतर शोर मचाने से मन में संकल्प नहीं जमता है।

प्रश्न 3.
‘मारुत’ शब्द का प्रयोग कैसे व्यक्ति के लिए किया गया है ?
उत्तर :
मारुत शब्द का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया गया है जो वायु की तरह गतिशील तथा कर्त्तव्यपरायण रहता है। वह किसी भी अवरोध सेरुकता नहीं।

प्रश्न 4.
कवि ने ‘चेतन’ किसे कहा है?
उत्तर :
कवि न कवि ने चेतन प्रबुद्ध व्यक्तियों को कहा है, जो सुख में भी सचेत बने रहते हैं।

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प्रश्न 5.
मन के भीतर की ज्वाला जब ठंडी होती है तो क्या होता है ?
उत्तर :
मन के भीतर की ज्वाला जब ठंडी होती है, तब बंद आँखें खुल जाती है।

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार हमारा उद्देश्य कैसा होना चाहिए ?
उत्तर :
कवि कहते हैं कि दुःख, तकलीफ और विपत्तियों में अगर हमारे होठों पर मुस्कान न हो, तो भय से घबड़ाकर आँसू बहाना भी हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 7.
“आप माथे पर चाँदनी अर्थात शीतलता का चंदन लगाये” का तात्पर्य है –
उत्तर :
तात्पर्य है कि मन और बुद्धि को निर्मल, शान्त और विकारहीन बनाये रखें।

प्रश्न 8.
रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म 1 मई 1915 ई० को फतेहपुर जिला के किशनपुर गाँव में हुआ था।

प्रश्न 9.
‘भय से कातर’ का क्या आश्य है ?
उत्तर :
डर से व्याकुल।

प्रश्न 10.
संकट का वेग कैसे कम नहीं होता है ?
उत्तर :
संकट से मुँह फेर लेने से भी उसका वेग कम नहीं होता है।

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प्रश्न 11.
दुनिया की रीति क्या है ?
उत्तर :
मानव शरीर दु:खों को सहन करता है, फिर भी मानव मन दूसरे के हिते के लिए व्याकुल रहता है, यही संसार की वास्तविक रीति है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि अपने सपनों पर विश्वास करने के लिए क्यों कहते हैं?
उत्तर :
मनुष्य को अपने सपनों पर विश्वास करना चाहिए। मनुष्य की दृढ़ इच्छा शक्ति में कलात्मक सर्जना शक्ति होती है। उसका आत्म बल बढ़ता है। वह आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ता है। बिना आत्म विश्वास के व्यक्ति अक्षम बन जाता है। मनुष्य की भावना, उसकी कल्पना उसका मार्ग दर्शन कराती है।

प्रश्न 2.
कवि ने लोगों को क्या-क्या करने की सलाह दी है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने लोगों को सलाह दी है कि वे मानव मात्र की भलाई करें। यदि दूसरों की भलाई न सकें तो किसी का बुरा भी न करें। अपनत्व की भावना अपनाकर आपसी वैर-भाव, कहुता को शांत कर दें। कठिन मुसीबत के समय भी हँसते रहे, भय से व्याकुल न हो। अपने सपनों पर सदा विश्वास करें। अतीत के दु:खों को याद न करें। जो बीत गया उसे बीत गया ही समझें। सुख-ऐश्वर्य के समय भी सावधान बने रहें। घमंड में चूर होकर कर्त्तव्य पथ न भूलें। विलासिता का जीवन न अपनाएँ। मन में संदेह को न पनपने दें। क्योंकि संदिग्ध आत्मा वाले व्यक्ति के मन में विश्वास नहीं ठहरता। पुराने मूल्यहीन विचारों को त्याग कर नये प्रगतिशील विचारों को अपनाएँ।

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प्रश्न 3.
प्रस्तुत कविता के मूल भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने लोगों को सलाह दिये हैं कि मनुष्य यदि दूसरों की भलाई नहीं कर सकते तो उसे किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए। सब के साथ मधुर व्यवहार कर वैर-भाव को समाप्त कर देना चाहिए। मन की शांति तथा पवित्र भावना से मन की व्याकुलता समाप्त हो जाती है। मन को शांति तथा सुख की अनुभूति होती है। विपत्ति में हँसनां यदि संभव न हो तो रोना भी नहीं चाहिए। अपनी कल्पना शक्ति पर विश्वास करना चाहिए। अतीत के दुःखों को कभी याद नहीं करना चाहिए। उससे शांति नहीं, दु:ख ही बढ़ता है। सुख-आनन्द के समय सावधान तथा सजग बने रहना ही उचित है। घमंड में सन्मार्ग को नहीं भूलना चाहिए। शोर मचाने से मन में दृढ़ संकल्प नहीं जमता। मन में यदि संदेह का भाव है तो उसमें विश्वास नहीं टिक सकता।पुरानी रुढ़ियों को छोड़कर प्रगति के मार्ग पर निरंतर गतिशील बने रहना चाहिए। आंत्म विश्वास तथा दृढ़ इच्छा शक्ति से व्यक्ति जीवन में सफल होता है।

प्रश्न 4.
‘अनसूना-अचीन्हा करने से संकट का बेग नहीं कमता’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जो व्यक्ति अपने जीवन में आए हुए संकटों तथा विपत्ति-बाधाओं को अनसुना कर देता है, उन्हें नहीं पहचानता और समझता है इस प्रकार हम उन संकटों पर ध्यान नहीं देंगे, उसकी परवाह नहीं करेंगे तो संकट से हम मुक्त . रहेंगे, पर यह सोचना गलता है। इससे संकट कम नहीं होगा, बल्कि अवसर और संकट बढ़ता ही जाएगा। अतः संकट की नब्ज को पहचानकर तुरंत प्रतिकार करना चाहिए।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. पग पग पर शोर मचाने से मन में संकल्प नहीं जमता, अनसुना अचिन्हा करने से संकट का वेग नहीं कमता, संशय का सूक्ष्म कुहासों में विश्वास नहीं क्षणभर रमता, बादल के घेरों में भी तो जयघोष न मारूत का क्षमता, यदि बढ़ न सको विश्वासों पर, साँसों के मुरदे मत ढोओ, यदि फूल नहीं बो सकते तो, काँटे कम से कम मत बोओ।

प्रश्न :
(क) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उद्धृत है?
(ख) मन में संकल्प कब नहीं जमा है?
(ग) इसका भवार्थ लिखिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ रचित कविता ‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ कविता से उद्धृत है।
(ख) केवल शोरगुल मचाने और नारेबाजी करने से मन में संकल्प नहीं जगता है।
(ग) कवि ने स्पष्ट किया है कि संकल्पों की पूर्ति शोरगुल मचाने तथा नारे लगाने से नहीं होती। उसके लिए तो दृढ़ निश्चय तथा कर्म साधना की जरूरत होती है। व्यक्ति को कभी भी आए हुए संकटों को टालना उन्हें नजर अंदाज कर देना उचित नहीं है। बल्कि तुरंत उनका समाधान कर डालना चाहिए। संकटों को ऐेलकर ही व्यक्ति उससे मुक्ति पा सकता हैं। संशय से मुक्त को झेलकर ही व्यक्ति उससे मुक्ति पा सकता है, संशय से मुक्त हो कर ही मन में विश्वास को टिकाया जा सकता है। जहाँ विश्वास नहीं वहाँ जीवन व्यर्थ है। हमें आत्म विश्वास के बल पर ही जीना चाहिए। हमें अपने कर्म, वचन, मन से दूसरों की लिए दु:ख का सुजन नहीं करना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों के विपरीत शब्द लिखिए –

शीतल – उष्ण
कटुता – मधुरता
कातर – निडर, साहसी
शोर – शान्ति
मुर्दा – जिन्दा

2. निम्नलिखित शब्दों का वचन परिवर्तित कीजिए –

ज्वालाएँ – ज्वाला
नयन – नयनों
काँटे – काँटा
रीति – रीतियाँ
साँसों – साँस

WBBSE Class 8 Hindi यदि फूल नहीं बो सकते तो Summary

कवि परिचय :

रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म सन् 1915 ई. में फतेहपुर जनपद के किशनपुर ग्राम में हुआ। अंचल ने कानपुर विश्वविद्यालय से एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी प्रमुख रचनाएँ – अपराजिता; मधूलिका, किरण बेला, करील, लालचूनर, वर्षात के बादल, विराम चिह्न आदि हैं। इनकी भाषा सरल तथा प्रवाहपूर्ण है।

1. यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।
है अगम चेतना की घाटी, कमजोर बड़ा मानव का मन,
ममता की शीतल छाया में होता कटुता का स्वयं शमन।
ज्वालाएँ जब धुल जाती हैं, खुल-खुल जाते है मुँदे नयन,
होकर निर्मलता में प्रशांत बहता प्राणों का क्षुब्ध पवन।
संकट में यदि मुसका न सको, भय से कातर हो मत रोओ।
यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।

शब्दार्थ :

  • अगम = दुर्गम, कठिन, अपार।
  • कटुता = अप्रिय, कडुआ।
  • चेतना = ज्ञान, इच्छा, मन, बुद्धि।
  • शमन = निवारण करना।
  • घाटी = स्थान, दरी ।
  • ज्वालाएँ = दाह, ताप ।
  • ममता = ममत्व, अपनापन।
  • प्रशांत = शांत, स्थिर ।
  • क्षुब्ध = व्याकुल, अधीर।
  • कातर = व्याकुल, भयभीत।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार श्री रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ हैं।

प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि यदि हम दूसरों की भलाई नहीं कर सकते तो किसी का अनभल (अहित) भी नहीं करना चाहिए।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने बड़ी ही उपयोगी शिक्षा दी है कवि ने बताया है कि यदि मनुष्य दूसरों के हित के लिए कुछ नहीं कर सकता तो उसे किसी का अहित या बुरा भी नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की बुद्धि तथा इच्छा का धरातल अत्यंत दुर्गम तथा कठिन है मनुष्य की इच्छा शक्ति अपार, असीम है, पर उसका मन अत्यंत कमजोर है। सबके साथ ममत्व तथा अपनापन के मधुर वातावरण में ही आपस की कटुता, वैमनस्य का भाव शांत होता है। सभी प्राणियों में अपनत्व का भाव सभी को अपना बना लेता है। जब कठोर प्रवृत्तियाँ साफ हो जाती है, तो बंद नेत्र खुल जाते हैं। आँखों को सही दिशा दिखलाई पड़ने लगती है। पवित्र भावना में प्राणों की व्याकुलता शांत हो जाती है। विपत्ति के समय यदि आदमी मुस्करा नहीं सकता तो भय से बेचैन होकर रोना नहीं चाहिए। दु:ख को धैर्य पूर्वक सहना चाहिए। जितना हो सके, दूसरों का कल्याण करना चाहिए, यदि ऐसा न हो सके तो किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

2. हर सपने पर विश्वास करो, लो लगा चाँदनी का चंदन,
मत याद करो, मत सोचो – ज्वाला में कैसे बीता जीवन,
इस दुनिया की है रीति यही – सहता है तन, बहता है मन,
सुख की अभिमानी मदिरा में जो जाग सका, वह है चेतन,
इसमें तुम जाग नहीं सकते, तो सेज बिछाकर मत सोओ।
यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।

शब्दार्थ :

  • सपना = भावना, कल्पना।
  • अभिमानी = अहंकारी, गर्वयुक्त।
  • ज्वाला = आग की लपट, कष्ट के दिन।
  • चेतन = बुद्धि युक्त।
  • रीति = ढंग, नियम, परिपाटी।
  • मदिरा = शराब।

प्रसंग – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने हमें अपने सपनों पर विश्वास करने तथा अतीत के दु:खों को याद न करने की सलाह दी है।

व्याख्या – कवि ने लोगों को यह सलाह दी है कि अपनी कल्पना, अपनी शक्ति पर विश्वास करें। अपने तन-मन, मस्तिष्क को सदा शान्त एवं सुस्थिर रखें। अतीत के दुःख भरे दिनों को याद कर दुःख का अनुभव न करें। जो बीत गया उसे याद न करें। संसार के लोगों की यही परिपाटी है। जीने का यही ढंग है कि उनका मन पर नियंत्रण नहीं होता, मन भटकता है, पर शरीर को सहना पड़ता है। सुख के समय लोग अभिमानी बनकर कर्त्तव्य मार्ग भूल जाते हैं, परन्तु उस समय जो सावधान सचेत रह सका वही प्रबुद्ध है। इस स्थिति में यदि मनुष्य त्याग नहीं सकता, सजग नहीं होता, तो भी उसे सुख पूर्वक आराम नहीं करना चाहिए। अपने कर्त्तव्य को नहीं भूलना चाहिए। सुख के समय सदा सचेत रहना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

3. पग-पग पर शोर मचाने से मन में संकल्प नहीं जमता,
अनसुना-अचीन्हा करने से संकट का वेग नहीं कमता,
संशय के सूक्ष्म कुहासों में विश्वास नहीं क्षण-भर रमता,
बादल के घेरों में भी तो जय-घोष न मारुत का थमता,
यदि बढ़ न सको विश्वासों पर, साँसों के मुरदे मत ढोओ,
यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।

शब्दार्थ :

  • सूक्ष्म = बारीक, महीन।
  • कुहासों = कुहरा।
  • संकल्प = दृढ़ निश्चय।
  • वेग = गति।
  • संशय = संदेह।
  • मारुत = वायु।

प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने लोगों को अपने मन में दृढ़ इच्छाशक्ति बनाए रखने की सलाह दी है।

व्याख्या – प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि निरंतर हर पग पर शोर गुल करने से मन में दृढ़ निश्चय नहीं हो पाता। मनुष्य जीवन का संकट उसकी उपेक्षा करने या उसके प्रति अनभिज्ञता प्रकट करने से दूर नहीं होता, बल्कि डटकर मुकाबला करना चाहिए। यदि मन में किसी भी प्रकार की संदेह भावना है तो उसके मन में विश्वास नहीं ठहर सकता। संशय भरे चित्त में विश्वास टिक नहीं सकता। वायु की विजय घोषणा बांदल के फैलाव में भी कम नहीं होती। अर्थात् जो साहसी हैं, निरंतर गतिशील तथा कर्त्तव्य परायण हैं, उनकी विजय गर्जना को भीड़ भी नहीं रोक सकती। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उसे मृत दकियानूसी विचारों में पड़कर नहीं रुकना चाहिए। निरंतर प्रर्गतिशील रहकर मन-वच-कर्म से दूसरों के हित की बात करना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 4 जनगीत to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – जनगीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
जन-गीत के रचनाकार है-
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(घ) सुमित्रानंदन पंत

प्रश्न 2.
‘विषाद की निशा”‘ क्यूँ बीत रही है?
(क) एक प्राण होने से
(ख) नई सुबह होने से
(ग) निशान उड़ने से
(घ) गीत गाने से।
उत्तर :
(ख) नई सुबह होने से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 3.
‘शोषित”‘ का अर्थ है-
(क) जो शोषण करता है
(ख) जिसका शोषण किया गया हो
(ग) जो रस खींचता हो
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) जिसका शोषण किया गया हो।

प्रश्न 4.
“नवयुग” में नया क्या हैं?
(क) नई सरकार
(ख) नये नेता
(ग) नये प्रशासक
(घ) नये नियम
उत्तर :
(घ) नये नियम

प्रश्न 5.
हमारे जीवन में संकट आ गये।
(क) गहरे
(ख) शोषीत
(ग) पीड़िता
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) गहरे

प्रश्न 6.
सब में कैसी भावना हो ?
(क) पीड़ा
(ख) प्रेम
(ग) शोषीत
(घ) विकास
उत्तर :
(ख) प्रेम

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 7.
अब कैसा जमाना आ गया ?
(क) नया
(ख) पुराना
(ग) रंगीन
(घ) सदगुण
उत्तर :
(क) नया

प्रश्न 8.
पंतजी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1600
(ख) सन् 1700
(ग) सन् 1800
(घ) सन् 1900
उत्तर :
(घ) सन् 1900

प्रश्न 9.
पंत को किस रचना के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला ?
(क) गुंजन
(ख) चिदंबरा
(ग) युगांत
(घ) ग्राम्या
उत्तर :
(ख) चिदंबरा

प्रश्न 10.
‘जन-गीत’ के रचनाकार हैं –
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(घ) सुमित्रानंदन पंत

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 11.
कवि ने जन-मन का ताज किसे कहा है ?
(क) शक्ति
(ख) सौंदर्य
(ग) गुण
(घ) भक्ति
उत्तर :
(ग) गुण

प्रश्न 12.
कवि के अनुसार कैसा समाज होना चाहिए ?
(क) संगठित
(ख) विभाजित
(ग) कमजोर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) संगठित

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि पंत के अनुसार हम एकजुट कब होते हैं?
उत्तर :
कवि पंत के अनुसार विषाद की निशा बीत जाने पर जीवन में नया सबेर आने पर हम एकजुट होते हैं।

प्रश्न 2.
भारतवासी किस नींद से जगे हैं?
उत्तर :
भारतवासी शुद्ध स्वार्थ और काम की नींद से जगे हैं।

प्रश्न 3.
कवि का मन अब क्या नहीं सहना चाहता?
उत्तर :
कवि का मन किसी का शोषण किया गया हो तथा पीड़ा और अन्याय नहीं सहना चाहता।

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प्रश्न 4.
पंतजी समाज को किस रूप में देखना चाहते हैं?
उत्तर :
पंतजी संकट, पीड़ा अभाव से मुक्त सुसंगठित समाज को देखना चाहते हैं।

प्रश्न 5.
कवि जन मानस में क्या भाव भर रहे हैं ?
उत्तर :
कवि जन मानस में जोश तथा उत्साह का भाव भर रहें है।

प्रश्न 6.
कवि का क्या कथन है ?
उत्तर :
कवि का कथन है कि अब फिर जीवन में नया सबेरा आए।

प्रश्न 7.
हम भारतवासियों में कैसी भावना हो गई थी ?
उत्तर :
हम भारतवासियों में धर्म, जाति संप्रदाय को लेकर आपस में नफरत की भावना हो गई थी।

प्रश्न 8.
हमारी फूट का क्या परिणाम हुआ ?
उत्तर :
हमारी फूट का परिणाम हुआ कि हम विनाश के गर्त में गिर गए।

प्रश्न 9.
हम किस कारणवश उत्यान की ओर अग्रसर हो रहे हैं ?
उत्तर :
एकता तथा एकरूपता के कारण आज हम प्रगति और उत्थान की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 10.
कवि लोगों को क्या प्रेरणा दे रहा हैं ?
उत्तर :
कवि लोगों को यह प्रेरणा दे रहा है कि अब समाज में, देश में आमूल परिवर्तन हो रहा है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि कैसी निशा के बीत जाने की बात कह रहा है? और क्यों?
उत्तर :
कवि विषाद (दु:ख) की निशा बीत जाने की बात कह रहा है क्योंकि दुःख की रात अब बीतने जा रही है। नया सबेरा आ रहा है। सभी निर्भय होकर प्रगति की ओर प्रयाण कर रहे हैं, अब सभी लोग मिलकर समवेत स्वर में जयगान का उच्चारण करेंगे।

प्रश्न 2.
जन-गीत कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में पंतजी ने स्पष्ट किया है कि नई सुबह होने से विषाद की रात बीत रही है। अब सब एकजुट हो कर निडर होकर प्रगति के पंथ पर बढ़ेंगे। आपसी वैमनस्य तथा भेद भाव से हमारा पतन तथा एकता, परस्पर मेल मिलाप से विकास संभव है। भारतवासी अब स्वार्थ तथा काम की नींद से जाग गए हैं। अब जन निर्माण, समाज उत्थान के काम में जुट जाएँ। सभी के रक्त में जोश है, अत: उत्साह से लोग देश की प्रगति में समर्पित हो जाएँ। अब कहीं किसी का शोषण न हो, अन्याय, परपीड्न, अब असह्य है। जीवन निर्माताओं को प्रमुखता मिले। कष्ट अभाव से रहित सुसंगठित समाज का निर्माण हो। लोगों में सद्युणों का समादर हो। अब नये युग के लिए नये नियम बने।

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प्रश्न 3.
‘नवयुग का अब नया विधान हो’- इस पंक्ति के आधार पर बताइए कि कवि नये युग को किस रूप में देखना चाहता है?
उत्तर :
कवि देखना चाहता है कि नये युग के लिए नये नियम कानून बने। जिसमें शोषण पीड़ा, अन्याय के लिए कोई स्थान न हो सद्गुणों की कद्र हो। दुःख रहित सुसंगठित समाज का निर्माण हो। पुरानी परंपराओं के स्थान पर नवीन परंपरा, नवीन विचार धारा के आधार पर नये समाज का गठन हो।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘जन-गीत’ कविता में कवि ने क्या आशा व्यक्त की है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने यह आशा व्यक्त की है कि भारतवासियों के जीवन में नया सुपभात हो। सभी का एक ही विचार शक्ति हो सभी एक ही स्वर समता, सरसता, प्रेम के गीत गाएँ। अब दुःख की काली रात बीत गई है। प्रस्थान के प्रगति की राह दिखाई पड़ रही है। हमारा आकाश का प्रगति की राह दिखाई पड़ रही है। हमारा आकाश को छूने वाला ऐसा, चिह्न हो जो सब प्रकार से भय रहित हो। यह निश्चित सिद्धांतं है – मतभेदों में विनाश होता है, संगठन में मतैक्य एवं प्रगति होती है। आपसी नफरत, भेदभाव तथा फूट के कारण ही हमारा विनाश हुआ। लेकिन आज हम सारे मत भेदों को भूल कर एक सूत्र में बांध रहे हैं, इसलिए अब हम निश्चित रूप से प्रगति एवं विकास के शिखर पर पहुँच सकते हैं।

सभी का कल्याणकारी उत्तम एक ही धर्म हो, सब का सब के प्रति समान, प्रेम भाव होना चाहिए। अपनी व्यक्ति तुच्छ कामनाओं, तथा स्वार्थ को छोड़ कर सभी महान, मंगलदायक लोक कर्म में प्रवृत्त बने। सभी में शक्ति, उत्साह का भाव बना रहे । सभी के रक्त में उष्गता, तेजस्विता उफनती रहे। समाज से शोषण, परपीड़िन, अन्याय का कहीं भी बोलबाला न हो। कहीं कोई गरीब, मजदूर शोषित न हो। जीवन के जो सच्चे कलाकार हैं उन्हें समाज तथा देश में प्रमुखता मिले। हमारा समाज हर प्रकाश स्वतंर, दु:ख रहित बने। दृढ़ संगठन बन सके। समाज में जितने भी शिल्पी, कलाकार, गुणों के आगार लोग हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। हमेशा के लिए नया विधान-नई प्रणाली हो जिससे समाज का कल्याण हो।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

अभय – न भय – नज् समास।
अभिन्न – नहीं है भिन्न जो – बहुवीहि समास,
लोककर्म – लोक का कर्म – तत्पुरुष समास।
जीवन-शिल्पी – जीवन का शिल्पी – तंत्रुषु समास।
नवयुग – नया युग – कर्मधारण समास

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

2. विशेषण और विशेष्य का मिलान कीजिए :-

अभय – निशान
शुद्ध – स्वार्थ
काम – नींद्
संगठित – समाज
नव-युग

WBBSE Class 8 Hindi जनगीत Summary

कवि परिचय :

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म सन् 1900 ई॰ में अल्मोड़ा जनपद के कौसानी नामक ग्राम में हुआ था। सन् 1921 में असहयोग आन्दोलन प्रारंभ होने पर पंतजी पढ़ाई छोड़कर साहित्य साधना में लग गए। सन् 1977 ई. में पंतजी का देहावसान हो गया। अरबिन्द के जीवन दर्शन से ये अत्यधिक प्रभावित हुए। इनकी प्रमुख काव्य रचनाएं-पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, स्वर्ण किरण, उत्तरा और चिदम्बरा आदि है। इनकी पाँच कहानियाँ और ज्योत्सना नामक नाटक भी प्रसिद्ध हैं। ‘चिदम्बरा’ काव्य पर इन्हें भारतीय ज्ञान पीठ का पुरस्कार प्रदान किया गया। भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मभूषण’ अलंकार से सम्मानित किया। पंतजी छायावाद के स्तंभ माने जाते हैं। पंतजी की भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है यह कोमल कान्त पदावली से युक्त है। छायावादी कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हुए पंतजी प्रगतिवादी काल का सूर्रपात्र करनेवालों में प्रमुख माने जाते हैं। पंतजी के काव्य में प्रकृति के विविध सुन्दर तथा मनोरम चित्र प्राप्त होते हैं।

शब्दार्थ :

  • निशान = लक्षण, ध्वजा।
  • विहान = सुबह।
  • विनाश = ध्वंस, संकट।
  • विषाद = दु:ख।
  • अभिन्न = एक रूप, घनिष्ठ, जो भिन्न न हो।
  • निशा = रात।
  • श्रेय = श्रेष्ठ, मंगलदायक धर्म, राश।
  • प्रयाण = गमन, प्रस्थान, युद्ध यात्र।
  • उफान = उबाल, जोश।
  • अभय = निडर, निर्भय।
  • शोषित = जिसका शोषण किया गया हो।
  • शिल्मी = कलाकार
  • मुक्त = स्वतंत्र।
  • व्यथित = दु:खी।
  • किरीट = मुकुट।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

1. जीवन में फिर नया विहान हो,
एक प्राण, एक कंठ गान हो!
बीत अब रही विषाद की निशा,
दिखने लगी प्रयाण की दिशा,
गगन चूमता अभय निशान हो!

सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के जन-गीत कविता से उद्धृत हैं। इस कविता के कवि श्री सुमित्रानंदन पंत है।

प्रसंग – इन पंक्तियों में पंतजी ने स्षष्ट किया है कि अब नव युग नई समृद्धि तथा खुशहाली के साथ हमारे जीवन में आ रहा है।

व्याख्या – कवि जन मानस में जोश तथा उत्साह का भाव भर रहा है। कवि का कथन है कि अब फिर जीवन में नया सबेरा आए। सभी में एक प्राण शक्ति हो, सभी अपने कंठ से एक ही स्वर, एक ही.गीत गाएँ। उनके दु:ख की रात समाप्त हो रही है। लोगों के जीवन का अभाव पीड़ा, निराशा अब समाप्त हो रही है। सामने बढ़ने प्रगति पंथ पर अग्रसर होने की दिशा दिखाई पड़ रही है। निर्भय होकर जनता आकाश की ओर प्रगति के निशान को स्पर्श कर रही है।

2. हम विभिन्न हो गये विनाश में;
हम अभिम्न हो रहे विकास में,
एक श्रेय, प्रेम अब समान हो।
शुद्ध स्वार्थ काम-नींद से जगे,
लोक-कर्म में महान सब लगें,
रक्त मे उफान हो, उठान हो।

व्याख्या – हम भारतवासियों में धर्म, जाति संप्रदाय को लेकर आपस में नरफरत की भावना हो गई थी। हमारी फूट का परिणाम हुआ कि हम विनाश के गर्त में पड़ गए। हमारे जीवन में गहरे संकट आ गए। पर एकता तथा एकरूपता के कारण आज हम प्रगति और उत्थान की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हमारा अब एक श्रेय अर्थात् मंगलदायक धर्म हो। सब में समान प्रेम की भावना हो। हम स्वार्थ और अपनेपन की नींद से जागें। स्वार्थ को छोड़ कर सब के साथ हमदर्दी दिखलाएँ। सभी लोग लोक कल्याण के कर्म में अपने को समर्पित कर दें। सभी के रक्त में नया जोश तथा उबाल हो। इस प्रकार शक्ति तथा उत्साह के साथ लोग लोक सेवा तथा लोक निर्माण के कार्य में जुट जाएँ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

3. शोषित कोई कहीं न जन रहें,
पीड़न-अन्याय अब न मन सहे
जीवन-शिल्पी प्रथम, प्रधान हो।
मुक्त व्यथित, संगठित समाज हो,
गुण ही जन-मन किरीट ताज हो,
नव-युग़ का अब नया विधान हो।

व्याख्या – कवि लोगों को यह प्रेरणा दे रहा है कि अब समाज में, देश में आमूल परिवर्तन हो रहा है। इसलिए अब हमारे बीच कोई व्यक्ति शोषण का शिकार न हो। किसी भी व्यक्ति का कहीं दमन न हो। पीड़ा तथा अत्याचार अब किसी को भी सहना न पड़े। जो लोग जीवन निर्माता है, जीवंन का समाज का न्याय पूर्वक गठन करने वाले हैं, उन्हें महत्व मिले। समाज में उनकी प्रधानता हो। जिससे उनका मनोबल बढ़े। एक ऐसा सुव्यवस्थित सुसंगठित समाज बने, जिसमें कोई पीड़ित न हो। सभी मुक्त जीवन बिताएँ, सद्गुण, सत्य, न्याय, परोपकार ही जनमानस का मूर्धन्य बने। समाज में सद्युणों की ही प्रतिष्ठा हो। अब नया जमाना आ गया। अत: हमारा नया विधान नये नियम हैं। पुराने दकियानूसी विचारों तथा विधि विधानों को किनारा कर देने की जरूरत है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – प्रियतम

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
विष्णु ने नारद को किसे अपना प्रधान भक्त बताया?
(क) लक्ष्मी को
(ख) राम को
(ग) सज्जन किसान को
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सज्जन किसान को।

प्रश्न 2.
‘प्रियतम’ कविता के रचयिता का उपनाम है ?
(क) नीरज
(ख) निराला
(ग) पंत
(घ) अज्य
उत्तर :
(ख) निराला।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 3.
सज्जन किसान ने दिन भर में कितनी बार ईश्वर का नाम लिया?
(क) छह बार
(ख) पाँच बार
(ग) चार बार
(घ) तीन बार
उत्तर :
(घ) तीन बार

प्रश्न 4.
नारद का दूसरा नाम है –
(क) भक्त राज
(ख) देवराज
(ग) योगिराज
(घ) मुनिराज
उत्तर :
(ग) योगिराज

प्रश्न 5.
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म किस प्रदेश में हुआ था ?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) बिहार
(घ) पश्चिम बंगाल
उत्तर :
(घ) पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 7.
‘निराला’ का जन्म किस जिले में हुआ था ?
(क) गढ़ाकोला
(ख) सीही गाम
(ग) मेदिनीपुर
(घ) कौसानी
उत्तर :
(ग) मेदिनीपुर।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 8.
निराला के अध्यात्मीक गुरु हैं ?
(क) विवेकानंद
(ख) रामकृष्ण परमहंस
(ग) स्वामी रामतीर्थ
(घ) अरविंद
उत्तर :
(क) विवेकानंद।

प्रश्न 9.
‘निराला’ किस कवि का उपनाम है ?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) गुप्त जी
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर :
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी।

प्रश्न 10.
किसने सज्जन किसान की परीक्षा लेने की बात कही ?
(क) विष्णुजी
(ख) नारदजी
(ग) योगिराज
(घ) रामजी
उत्तर :
(ख) नारदजी

प्रश्न 11.
नारदजी पृथ्वी पर किसके घर पहुँचे ?
(क) योगिराज के
(ख) किसान के
(ग) दुकानदार के
(घ) बनिया के
उत्तर :
(ख) किसान के

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 12.
विषणु जी ने नारद को किसे अपना प्रधान भक्त बताया ?
(क) लक्षमी को
(ख) राम को
(ग) किसान को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) किसान को

प्रश्न 13.
वैकुंठ का क्या अर्थ है ?
(क) नरकलोक
(ख) स्वर्गलोक
(ग) मृत्युलोक
(घ) पताललोक
उत्तर :
(ख) स्वर्गलोक

प्रश्न 14.
कौन लज्जित हुए ?
(क) किसान
(ख) नारदजी
(ग) विष्गुजी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) नारदजी

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
नारद क्या पूछने विष्णु के पास गए?
उत्तर :
नारद जी विष्णु के पास यह पूछ्छेे के लिए गए कि पृथ्वी परउनका सबसे प्रधान भक्त कौन है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 2.
नारद जी किसकी परीक्षा लेने उसके पास गए?
उत्तर :
नारदजी विष्णु के प्रधान भक्त एक सज्जन किसान की परीक्षा लेने उसके पास गए।

प्रश्न 3.
नारदजी भक्त के पास पहुँचकर क्या देखा?
उत्तर :
नारदजी ने भक्त के पास पहुँचकर देखा कि वह किसान दोपहर को हल जोत कर आने पर, फिर शाम को दरवाजे पर आकर, और सबेरे काम पर जाते समय राम का नाम लिया। इस प्रकार दिन-भर में केवल तीन बार राम का नाम लिया।

प्रश्न 4.
नारदजी भगवान विष्णु के पास जाकर क्या बोले?
उत्तर :
नारदजी भगवान विष्णु के पास जाकर बोले कि वह किसान दिन-भर में केवल तीन बार राम का नाम लेता है।

प्रश्न 5.
नारद ने लज्जित होकर क्या कहा?
उत्तर :
नारदजी ने लज्जित होकर कहा कि यह सत्य है।

प्रश्न 6.
कौन-सा व्यक्ति श्रेष्ठ एवं ईश्वर को प्रिय होता है ?
उत्तर :
कर्त्तव्य का पालन करने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ तथा ईश्वर को प्रिय होता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 7.
नारदजी को आश्चर्य क्यों हुआ ?
उत्तर :
नारदजी को आश्चर्य इसलिये हुआ कि दिन में केवल तीन बार ही भगवान का नाम लिया हैं।

प्रश्न 8.
विष्णुजी ने नारदजी को क्या दिया ?
उत्तर :
इन्होंने नारदजी को तेल से भरा हुआ एक बर्तन दिया।

प्रश्न 9.
नारदजी ने विष्णु भगवान को क्या उत्तर दिया ?
उत्तर :
नारदजी ने विष्णु भगवान को उत्तर दिया कि आपके दिये हुए काम पर ही ध्यान लगा रहा, फिर नाम क्या लेता।

प्रश्न 10.
विष्णु भगवान ने नारदजी को अंत में क्या समझाया ?
उत्तर :
भगवान विष्णुजी नारदजी को समझाए की किसान का काम भी मेरा दिया हुआ है, किसान अपने परिवार का उत्तरदायित्व निभाते हुए भी मेरा नाम तीन बार लेता है। यह उसकी मेरे प्रति सच्ची निष्ठा है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
नारदजी क्यों परेशान थे? उनकी परेशानी का समाधान किस प्रकार्र हुआ?
उत्तर :
नारदजी इस बात को लेकर परेशान थे कि किसान दिनभर में केवल तीन बार राम का नाम लेता है, फिर भी वह विष्णु भगवान का सबसे प्रधान भक्त क्यों है। भगवान विष्णु ने उनकी परेशानी का समाधान करने के लिए उन्हें एक तेल से भरा पात्र देकर पृथ्वी की परिक्रमा कर आने के लिए कहा। नारदजी परिक्रमा करके सानंद सफल होकर लौट आए विष्यु के पूछने पर उन्होंने बतलाया कि इस परिक्रमा के समय उन्होंने एक बार भी ईश्वर का नाम नहीं लिया, क्योंकि वे उनके द्वारा दिए गए काम में पूरा ध्यान लगाए रहे। विष्णुजी ने समाधान करते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह किसान भी मेरे द्वारा दिए गए काम तथा जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए भी दिनभर में तीन बार राम का नाम लेता है। इसी कारण वह प्रधान भक्त है। इस प्रकार नारदजी की परेशानी का समाधान हो गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 2.
निरालाजी ने कर्म और भक्ति का सामंजस्य किस प्रकार दर्शाया है, स्पष्ट करें?
उत्तर :
निरालाजी ने सष्ट किया है कि जीवन में कर्म ही पूजा और भक्ति है। अपने कर्त्तव्य तथा उत्तरदायित्व को निभानेवाला व्यक्ति ही सच्ची भक्ति का भी निर्वाह करता है। कर्म की उपेक्षा कर भक्ति करनेवाला कभी भगवान का सच्चा भक्त नहीं हो सकता। मनुष्य को संसार में रहकर अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए और ईश्वर का नाम भी लेना चाहिए। कविता में निरालाजी ने किसान के उदाहरण से इस सत्य को स्पष्ट किया है कि किसान दिन भर अपना काम करता है, फिर भी समय निकाल कर तीन बार राम का नाम भी ले लेता है। इसी कारण वह विष्णु काम सबसे प्रधान भक्त है। अत: कर्म की उपेक्षा कर भक्ति का महत्व नहीं हो सकता। क्योंकि यह संसार कर्म भूमि है, सभी को अपना कर्म करना ही पड़ता है। अतः जो कर्म की उपेक्षा कर भक्ति का ढोंग रचता है वह भगवान को प्रिय नहीं। इसलिए वह सच्चा भक्त भी नहीं। अतः कर्म करते हुए भक्ति करना सर्वथा उचित और सही मार्ग है।

प्रश्न 3.
नारद लज्जित हुए
कहा, ‘यह सत्य है।’
– उपरोक्त पंक्तियों का आशय सप्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भगवान विष्णु द्वारा सौपे हुए कार्य को संपन्न कर नारदजी प्रसन्न होकर विष्णु के पास आए। विष्णु ने नारद से पूछा कि पृथ्वी की परिक्रमा करते समय उन्होंने कितनी बार अपने इष्ट देव का नाम लिया। नारदजी ने कहा कि वह तो उन्हीं के द्वारा दिए हुए काम में ध्यान मग्न रहे, इसलिए एक बार भी नाम नहीं लिया। विष्यु ने कहा कि वह किसान भी मेंरे द्वारा ही दिए गए काम करता है, फिर दिनभर में तीन बार राम का नाम लेता है। यह सुनकर नारदजी लज्जित हो गए। उन्होंने सत्य को स्वीकार कर लिया। यह मान लिया कि सचमुच वह किसान भगवान को सबसे प्रिय है, यह सर्वथा उचित और सत्य है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
नारदजी ने किस प्रकार किसान की परीक्षा ली ? विष्णु वे उनकी शंका का समाधान किस प्रकार किया?
उत्तर :
एक दिन योगिराज नारद, विष्णुजी के पास जाकर उनके सर्वश्रेष्ठ भक्त के बारे में पूछे। विष्णुजी ने एक सज्जन किसान को अपना सबसे प्रिय भक्त बतलाया। नारद, विष्णुजी की स्वीकृति लेकर उस प्रियतम के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए पृथ्वी पर उस किसान के पास पहुँचे। वह किसान दोपहर के समय हल जोत कर घर आया और प्रभु के नाम का स्मरण किया। स्नान, भोजन के पुन: बाद अपने काम पर चला गया। संध्या समय पर आकर फिर ईश्वर का नाम लिया। सबेरे काम पर जाते समय राम के नाम का स्मरण किया। नारद की आश्चर्य हुआ कि दिन में केवल तीन बार स्मरण करने वाला किसान ही भगवान को परम प्रिय क्यों है ?

नारदजी भगवान विष्णु के यास जाकर यह जानना चाहे कि दिन भर में केवल तीन बार ही भगवान का नाम लेने वाला किसान उन्हें प्रिय क्यों है। विष्णुजी बड़ी ही युक्ति से नारद की जिज्ञासा का समाधान करना चाहते थे। इसलिए नारदजी से एक आवश्यक काम करने के लिए कहे और इस विषय पर बाद में चर्चा करने का प्रस्ताव रखे। विध्यु ने नारदजी से कहा कि तेल से भरे हुए इस पात्र को लेकर समस्त पृथ्वी की प्रदक्षिणा कर आएँ, पर विशेष रूप से ध्यान रहे कि तेल की एक बूँद भी पात्र से गिरने न पाए। नारदजी लक्ष्य को निश्चित कर विश्व का भ्रमण पूरा कर स्वर्गधाम पहुँचे। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा आदिष्ट कर्म का निर्वाह कर दिया था। पात्र से एक बूँद भी तेल गिराए बिना विश्व की परिक्रमा की थी। तेल के इस रहस्य की जानकारी के लिए उनके मन में उल्लास भरा हुआ था।

नारदजी को देखकर भगवान विष्णु ने उन्हें प्रेम से बैठाकर कहा कि उनके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। भगवान ने उुनसे पूछा कि तेल पात्र ले जाते समय उन्होंने कितनी बार अपने इष्ट देव का नाम लिया। नारदजी ने शंकित हुदय से कहा कि नाम तो मैंने एक बार भी नहीं लिया, क्योंकि आप के द्वारा सौंपे गए काम में ही ध्यान लगा रहा। भगवान विष्णु ने नारदजी की जिज्ञासा का समांधान करते हुए बतलाया कि वह किसान भी उनके द्वारा दिए गए कार्य करता है। वह अपने घर-गृहस्थी के कर्त्रव्य व उत्तरदायित्व का भली-भाँति निर्वाह करते हुए भी उनका नाम लेता है, इसी से वह भगवान का सबसे प्रिय और श्रेष्ठ भक्त है। लज्जित होकर नारदजी ने इस सत्य को स्वीकार कर लिया।

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भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

मृत्युलोक-मृत्यु का लोक-तत्पुरुष समास।
सज्जन-सत् है जो जन-कर्मधारय समास।
दोपहर – दूसरा पहर – द्विगु समास
नाम स्मरण – नाम का स्मरण – तत्पुरुष समास।

2. निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए-

उल्लास – उल् + लास – व्यंजन संधि
प्रात:काल – प्रात: + काल – विसर्ग संधि

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3. निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए-

विष्णु – हरि, नारायण, श्रीपति।
परीक्षा – इम्तहान, समीक्षा, निरीक्षण।
प्रांतःकाल – प्रभात, भोर, सबेरा।
इष्ट – इच्छित, अभीष्ट, वांछनीय।
विश्व – संसार, दुनिया, जगत्।

WBBSE Class 8 Hindi प्रियतम Summary

कवि परिचय :

निरालाजी का जन्म सन् 1896 ई. में बंगाल के महिषा-दल राज्य में हुआ था। इनके पिता उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद के निवासी थे। वे महिषादल राज्य में रियासत के उच्च कर्मचारी थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा महिषादल में हुई। इन्होंने घर पर ही संस्कृत, बंगला और अंग्रेजी का अध्ययन किया। सन् 1961 ई में इनका देहावसान हो गया। निरालाजी छायावाद के प्रमुख कवि थे। बहुमुखी प्रतिमा संपन्न निराला जी ने कविता कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संस्मरण सभी पर अपना सिक्का जमाया। इनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ- परिमल, गीतिका, अनामिका, अपरा, तुलसीदास, अर्चना, सरोज स्मृति, आराधना आदि है। इनकी भाषा परिमार्जित हिन्दी खड़ी बोली है। हिन्दी साहित्य में निराला जी का गौरवपूर्ण स्थान है।

शब्दार्थ :

  • प्रियतम = सबसे प्रिय।
  • स्मरण = याद।
  • पुण्यश्लोक = यशस्वी।
  • प्रदक्षिणा = परिक्रमा।
  • मृत्युलोक = पृथ्वी।
  • सविशेष = विशेष प्रकार से।
  • साधारण = मामूली।
  • घृत = रखकर ।
  • विवाद = वार्ता, बहस।
  • पर्यटन = भ्रमण।
  • पात्र = बर्तन।
  • योगिराज = श्रेष्ठ योगी, नारदजी।
  • उल्लास = खुशी।
  • रहस्य = भेद।
  • अवगत = मालूम।
  • उत्तरदायित्व = जिम्मेदारी।
  • धृत लक्ष्य = एकाग्र।
  • इष्ट = आराध्य।

1. एक दिन विष्णुजी के पास गए नारदजी
‘पूछा मृत्युलोक में वह कौन है पुण्यश्लोक
भक्त तुम्हारा प्रधान”‘?
विष्णुजी ने कहा, “एक सज्जन किसान है
प्राणें से प्रियतम।”
उसकी परीक्षा लूँगा।’
हँसे विष्णु सुनकर यह
“कहा ले सकते हो।”

सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक साहित्य मेला की ‘प्रियतम’ नामक कविता से ली गई है। इसके रचयिता सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है।

प्रसंग : प्रस्तुत कविता में कवि ने विष्णु और नारद से संबंधित एक पौराणिक प्रसंग के माध्यम से स्पष्ट किया है कि अपने कर्त्तव्य का पालन करने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ तथा ईश्वर को प्रिय होता है।

व्याख्या : कवि कहते हैं कि एक दिन नारद जी भवगान विष्णु के पास आए। उन्होंने भगवान से पूछा कि पृथ्वी पर कौन यशस्वी पुण्यात्मा उनका प्रधान भक्त है। विष्णुजी ने उत्तर दिया कि एक सज्जन किसान उनका प्राणों से भी प्यारा सबसे प्रिय भक्त है। नारदजी ने उसकी परीक्षा लेने की बात कही, तो विष्णुजी ने हँसकर कहा कि परीक्षा ले सकते हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

2. नारदजी चल दिए
पहुँचे भक्त के यहाँ
देखा, हल जोत कर आया वह दोपहर को
दरवाजे पहुँच कर रामजी का नाम लिया,
स्नान-भोजन करके
फिर चला गया काम पर
शाम को आया दरवाजे पर
फिर नाम लिया राम का,
प्रात:काल चलते समय
एक बार फिर उसने
मधुर नाम-स्मरण किया।

व्याख्या – नारदजी वहाँ से चलकर पृथ्वी पर उस किसान के घर पहुँचे। नारदजी ने देखा कि वह किसान हल जोत कर दोपहर को घर आया और दरवाजे पर पहुँचकर रामजी का नाम लिया। स्नान और भोजन करके अपने काम पर चला गया। शाम को वह दरवाजे पर पहुँचकर फिर रामजी का नाम लिया। सुबह काम पर जाते समय फिर राम का मुधर नाम लिया।

3. “बस केवल तीन बार’।”
नारद चकरा गए
किन्तु भगवान को किसान ही क्यों याद आया?
गए विष्णु लोक, बोले भगवान से
“देखा किसान को
दिन-भर में तीन बारं
नाम उसने लिया है राम का।”

व्याख्या – नारदजी को आश्चर्य हुआ कि दिन में केवल तीन बार ही भरगवान का नाम लिया हैं, फिर भी भगवान को वह किसान ही क्यों याद आया और वह भगवान का परम प्रिय भक्त क्यों हैं। नारदजी ने विष्णु लोक जाकर भगवान से कहा कि उन्होंने उस किसान को देखा। उसने दिन-भर में केवल तीन बार राम का नाम लिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

4. बोले विष्णु, “नारदजी
आवश्यक दूसरा
एक काम आया है
तुम्हें छोड़कर कोई
और नहीं कर सकता
साधारण विषय यह।
बाद को विवाद होगा
तब तक यह आवश्यक कार्य पूरा कीजिए।”
“तेल-पूर्ण पात्र यह
लेकर प्रदक्षिणा कर आइए भूमंडल की
ध्यान रहे सविशेष
एक बूँद भी इससे
तेल न गिरने न पाए।”
लेकर चले नारद जी
आज्ञा पर धृत लक्ष्य
एक बूँद तेल उस पात्र से गिरे नहीं।

व्याख्या – विष्णुजी नारदजी की बात सुनकर बोले कि नारदजी एक दूसरा आवश्यक काम आ गया है। यह काम उन्हें छोड़कर दूसरा कोई नहीं कर सकता। इस साधारण विषय की चर्चा तो बाद में हो जाएगी। इस आवश्यक काम को तब तक पूरा कर लीजिए। इन्होंने नारदजी को तेल से भरा हुआ एक बर्तन दिया और कहा कि इस पात्र को लेकर समस्त पृथ्वी की परिक्रमा कर आइए। पर विशेष रूप से ध्यान रहे कि इस पात्र में से तेल की एक बूँद भी पात्र से गिरने न पाए। नारदजी विष्णु की आज्ञा पर ध्यान रखा कि उस पात्र से एक बूँद भी तेल नीचे न गिरे।

5. योगिराज जल्द ही
विश्व पर्यटन करके
लौटे बैकुण्ठ को
तेल एक बूँद भी उस पात्र से गिरा नहीं
उल्लास मन में भरा था।
यह सोचकर तेल का रहस्य एक
अवगत होगा नया।

व्याख्या – योगिराज नारदजी जल्द ही पृथ्वी की परिक्रमा करके विष्णु लोक लौट आए। उनके मन में प्रसन्नता थी कि पात्र से एक बूँद भी तेल नीचे नहीं गिरा। उनके मनमें उल्लास तथा उत्सुकता थी कि उन्हें इस तेल का रहस्य मालूम पड़ जाएगा।

6. नारद को देखकर विष्णु भगवान ने
बैठाया स्नेह से
कहा-‘यह उत्तर तुम्हारा यहीं आ गया
बतलाओ, पात्र लेकर जाते समय कितनी बार
नाम इष्ट का लिया?’
‘एक बार भी नहीं,’
शंकित हददय से कहा नारद ने विष्णु से-
‘काम तुम्हारा ही था
ध्यान उसी में लगा रहा
नाम फिर क्या लेता और।’

व्याख्या – नारदजी को देखकर भगवान विष्णु ने प्रेम से उन्हें बैठाया और कहा कि तुम्हारे प्रश्न का उत्तर यहीं आ गया। बतलाओ तेल पात्र लेकर जाते समय तुमने कितनी बार अपने इष्ट देव का नाम लिया। नारदजी ने मन में शंकित होकर कहा कि उन्होंने एक बार भी नाम नहीं लिया, क्योंकि उनका ध्यान तो उनके (विष्णुजी) द्वारा दिए गए काम में ही लगा रहा, फिर वे कैसे नाम लेते।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

7. विष्णु ने कहा – “नारद!
उस किसान का भी काम
मेरा दिया हुआ है
उत्तरदायित्व भी लादे है
एक साथ सबको निभाता और
काम करता हुआ
नाम भी वह लेता है
इसी से है प्रियतम”
नारद लज्जित हुए
कहा “यह सत्य है।”

व्याख्या – विष्गुजी ने नारद से कहा उस किसान का भी काम मेरे द्वारा ही दिया हुआ है। उस पर घर गृहस्थी की अनेक जिम्मेदारियाँ भी है। वह उन सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए तथा सभी काम करते हुए भी राम का नाम लेता है, इसी कारण वह हमारा सबसे प्रिय श्रेष्ठ भक्त है। नारदजी यह सुनकर लज्जित हुए और बोले कि यह सत्य है। इस प्रकार नारदजी ने सत्य स्वीकार कर लिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – भारतमाता का मंदिर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत माता के मंदिर में किसका संवाद होता है?
(क) क्षमता का
(ख) ममता का
(ग) समता का
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।

प्रश्न 2.
‘ईसा’ किस धर्म के संस्थापक थे?
(क) हिन्दू धर्म
(ख) बौद्ध धर्म
(ग) ईसाई धर्म
(घ) जैन धर्म
उत्तर :
(ग) ईसाई धर्म ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रश्न 3.
‘मिला सत्य का हमें पुजारी’ किसे कहा गया है?
(क) महात्मा गाँधी को
(ख) जवाहरलाल नेहरू को
(ग) अब्दुल कलाम को
(घ) लाल बहादुर शास्त्री को
उत्तर :
(क) महात्मा गाँधी को।

प्रश्न 4.
‘अज्ञात शत्रु’ बनने के लिए क्या आवश्यकता है?
(क) सभी शत्रुओं को मार देना
(ख) सब के समक्ष नत मस्तक होना
(ग) सदा खामोश रहना
(घ) सब को मित्र बना लेना
उत्तर :
सबको मित्र बना लेना।

प्रश्न 5.
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1686 ई० में
(ख) 1786 ई० में
(ग) 1886 ई० में
(घ) 1986 ई० में
उत्तर :
(ग) 1886 ई० में

प्रश्न 6.
बुद्ध ने किस धर्म की स्थापना की –
(क) इस्लाम
(ख) जैन
(ग) बौद्ध
(घ) सिख
उत्तर :
(ग) बौद्ध

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रश्न 7.
‘विषाद’ का क्या अर्थ है –
(क) खुशी
(ख) दु:ख
(ग) क्रोध
(घ) प्रेम
उत्तर :
(ख) दु:ख

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार भारत क्या है ?
(क) केवल देश
(ख) राज्य
(ग) भारत माता का मंदिर
(घ) भारत-भूमि
उत्तर :
(ग) भारत माता का मंदिर

प्रश्न 9.
यहाँ सबसे अधिक किसको महत्व दिया जाता है ?
(क) समन्वय
(ख) समानता
(ग) धर्म
(घ) रीतिरीवाजों
उत्तर :
(ख) समानता

प्रश्न 10.
भव का क्या अर्थ है ?
(क) समानता
(ख) संसार
(ग) भौंरा
(घ) समानता
उत्तर :
(ख) संसार

प्रश्न 11.
कवि एकजुट होकर क्या करने का आह्वान करते हैं ?
(क) जयनाद
(ख) बराबरी
(ग) कल्याण
(घ) उपकार
उत्तर :
(क) जयनाद

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रश्न 12.
सभी लोगों को किसका परिचय देना चाहिए ?
(क) सुख: दुख:
(ख) एकजुटता
(ग) भाई-भाई
(घ) जयनाद
उत्तर :
(ख) एकजुटता

प्रश्न 13.
सभी को आपस में क्या बाँट लेना चाहिए ?
(क) एकजुटता
(ख) भाई-चारा
(ग) सुख: दुख:
(घ) स्वप्न
उत्तर :
(ग) सुख: दुख:

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत का मंदिर किसे कहा गया है?
उत्तर :
भारत का मंदिर भारत वर्ष को कहा गया है।

प्रश्न 2.
भारत में किस बात का भेद-भाव नहीं है?
उत्तर :
भारत में जाति, धर्म, या संप्रदाय का भेद-भाव नहीं है।

प्रश्न 3.
तीर्थ किसे कहते है ?
उत्तर :
किसी पवित्र स्थल या पुण्य स्थान को तीर्थ कहते हैं। यहाँ पवित्र हृदय को तीर्थ कहा गया है।

प्रश्न 4.
भारत के लोग किसके अनुयायी है?
उत्तर :
भारत के लोग महात्मा गांधी के अनुयायी है।

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प्रश्न 5.
भाई-भाई आपस में क्या बाँटते है?
उत्तर :
भाई-भाई आपस में हर्ष और विषाद बाँटते हैं।

प्रश्न 6.
किसकी आराधना इसी भूमि पर संभव है ?
उत्तर :
राम, रहीम, बुद्ध और ईसा सबकी आराधना इसी भूमि पर संभव है।

प्रश्न 7.
भारत माता के मंदिर में किसके लिए कोई भी स्थान नहीं है ?
उत्तर :
भारतमाता के इस पावन मंदिर में शत्रुता और वैर भाव के लिए कोई भी स्थान नहीं है।

प्रश्न 8.
किसके द्वारा शत्रुओं को भी मित्र बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
ब्दय की पवित्रता और प्रेम के द्वारा ही अपने शत्रुओं को भी मित्र बनाया जा सकता है।

प्रश्न 9.
गाँधीजी किस दम पर भारत को स्वतंत्र करा पाये ?
उत्तर :
गाँधीजी सत्य और अहिंसा के दम पर ही देश के स्वाधीनता आंदोलन को सफल बनाया और भारत स्वतंत्र हो पाया।

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प्रश्न 10.
हमें गाँधीजी के रूप में क्या मिला ?
उत्तर :
हमें गाँधीजी के रूप में सत्य का पुजारी मिला।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘भारत माता का मंदिर’ कविता के रचनाकार ने भारतीयों से क्या अपेक्षा की है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि गुप्तजी ने भारतीयों से यहु अपेक्षा की है कि वे सभी धर्म, संप्रदाय का स्वागत करें। सभी का सम्मान करें। वैर-भाव को छोड़कर आपस में प्रेम तथा सद् भाव का व्यवहार करें। सबको अपना मित्र बनाकर आदर्श चरित्र का गठन करें। सभी अपने देश के लिए विजय की घोषणा करें। आपस में भाई-चारे को महत्त्व दें। सुख-दु:ख में सदा सबके साथ रहे। सबके साथ सहानुभूति दिखलाएँ।

प्रश्न 2.
भारत माता के मंदिर की क्या विशेषताएँ है?
उत्तर :
भारत माता के मंदिर में सबके साथ बराबरी का वर्ताव होता है। किसी को बड़ा या छोटा नहीं समझा जाता। सभी को भलाई तथा सभी को वरदान मिलता है। यहाँ जाति धर्म या संप्रदाय को लेकर भेद-भाव नहीं है। विभिन्न संस्कृतियों की विशेषताओं का यहाँ महत्व है। यहाँ परस्पर शत्रुता नहीं, प्रेम का वातावरण है। इस पावन मंदिर में अपने हृदय को पवित्र बनाने, सभी को अपना मित्र बनाने की प्रेरणा मिलती है। करोड़ों कठठों से यहाँ विजय की घोषणा होती है। यहाँ गाँधीजी के निर्देशों से स्वाधीनता को मुख्य कर्तव्य माना जाता है। इस पवित्र आँगन में भाई चारे की भावना हैं। सभी एक दूसरे के सुख-दुःख में सम्मिलित हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के गुण गौरव का ज्ञान यहाँ के माध्यम से क्या संदेश देने की कोशिश की गई है?
उत्तर :
कवि ने यह संदेश दिया है कि अलग-अलग संस्कृतियों का यहाँ समन्वय हो। सांस्कृतिक समन्वय की गरिमा का, उसकी महत्ता का सर्वर्र प्रचार हो। हमें सारे भेद-भाव, जाति-धर्म, संम्पदाय की संकीर्ण भावना को त्यागकर भारतीय संस्कृति की गरिमा की रक्षा तथा प्रचार करना चाहिए। भारत एक ऐसा गौरवमय देश है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय हुआ है। यही समन्वय की भावना भारतीय एकता का मूल मंत्र है।

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प्रश्न 4.
‘एक साथ मिल’ बाँट लो बैठ अपना हर्ष-विषाद यहाँ, का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि हमें अपने सुख-दु:ख को मिलकर बाँट लेना चाहिए। व्यक्ति को केवल अपने ही सुख-दुःख की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। एक दूसरे के प्रति हमदर्दी होनी चाहिए। दूसरों के दर्द को दूर करने के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए। अपने सुख को बढ़ा कर सभी को सुखी बनाने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। उसे स्वार्थी नहीं परमार्थी होना चाहिए। हर व्यक्ति को उदार विचार रखना चाहिए। यह समझना चाहिए कि सहानुभूति ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत माता का मंदिर कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता से हमें एकता, समता तथा समन्वय की भावना की प्रेरणा मिलती है। जाति, धर्म तथा संप्रदाय के संकीर्ण भेदभाव को छोड़कर हमें समस्त मानव के साथ आदर, समान सम्मान तथा सभी के स्वागत का भाव रखना चाहिए। हमें राम-रहीम, बुद्ध-ईसा के आदर्शों का समान रूप से स्मरण-ध्यान करना चाहिए। भारत एक ऐसा महान देश है जहाँ भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का समन्वय हुआ है। उसकी गरिमा को बनाए रखना है। शत्रुता, आपसी नफरत को छोड़कर परस्पर प्रेम, सौहाद्र तथा भाई-चारा की भावना को प्रश्रय देना चाहिए। सभी के कल्याण तथा प्रगति की बात को महत्व देना चाहिए। हुदय की पवित्रता में ही समस्त तीर्थों की पवित्रता निहित है। हमें सभी को मित्र बनाकर अज्ञात शत्रु बनना है। संसार के सभी महानीय आदर्शों को लेकर हमें एक चरित्र का गठन करना है। भारतवर्ष के कोटि-कोटि निवासियों के केठों से सदा विजय घोष की दर्शन का उच्चारण होना चाहिए।

हमारे देश को भारतवासियों का सौभाग्य है कि हमें सत्य-अहिंसा के महान पुजारी, मानवता के शुभ चिन्तक के रूप में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी मिल गए। इन्होंने न्याय विवेक संद्धर्भ से लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्ण सफलता प्राप्त कर ली। गाँधी जी समस्त अनुयायियों को मुक्ति के लिए हर संभव कर्त्तव्य का निर्वाह किया। अत: भारत माता के पवित्र प्रांगण मैं सभी भेद-भाव को त्याग कर परस्सर भाई-चारे के बंधन में बंध जाना चाहिए। अपनी प्रसन्रता तथा पीड़ा, हर्ष तथा विषाद आपस में मिलकर उसे भोगना चाहिए। सभी के सुख-दु:ख सम्मिलित होने के लिए कवि ने प्रेरित किया है।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित समानोच्चरित शब्दों के अन्तर बताइए :

  • प्रासाद – महल बहुत बड़ा मकान।
  • प्रसाद – प्रसन्नता, देवता को चढ़ाई जानेवाली वस्तु।
  • बाट – रास्ता, बटखरा।
  • बाँट – बाँटना, वितरण करना।
  • बेर – एक प्रकार का फल, बदरी।
  • बैर – शत्रुता, विरोधी।
  • मुक्त – बंधन रहित।
  • मुक्ति – छुटकारा, स्वतंत्रता
  • भव – संसार
  • भाव – विचार, अभिप्राय।

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2. विशेषण बनाइए – इक, इत, ई प्रत्यय जोड़कर

  • धर्म – धार्मिक।
  • संप्रदाय – सांप्रदायिक।
  • हर्ष – हर्षित।
  • प्रेम – प्रेमी।
  • उन्माद – उन्मादी।
  • अर्थ – आर्थिक
  • विकास – विकसित
  • जापान – जापानी

WBBSE Class 8 Hindi भारतमाता का मंदिर Summary

कवि परिचय :

गुप्तजी का जन्म सन् 1886 ई. उत्तर प्रदेश में झाँसी जनपद के चिरगाँव में एक प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार में हुआ था। इनके पिता सेठ रामचरण निष्ठावान राम भक्त तथा कवि थे। राम भक्ति तथा कवित्व शक्ति इन्हे पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त हुई। गुप्तजी ने संस्कृत, हिन्दी, बंगला का गहन अध्ययन किया। इनके काव्य गुरु आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी थे। गुप्त जी अनेक वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे । आगरा विश्व विद्यालय ने इन्हें डी० लिद्० की उपाधि से सुशोभित किया।

भारत सरकार ने ‘पद्म भूषण’ अलंकार से सम्मानित किया। सन्1964 ई. को इनका देहावसान हो गया। गुप्तजी की प्रमुख रचनाएँ साकेत, यशोधरा, द्वापर, जयभारत, सिद्धराज, पंचवटी, जयद्रथ वध आदि है। झंकार इनके गीतों का संग्रह है। गुप्त जी की रचनाओं में प्राचीन भारतीय संस्कृति तथा गौरव की झाँकी मिलती है। ‘साकेंत’ महाकाव्य पर इन्हें मंगला प्रसाद’ पारितोषिक मिल चुका है। ‘भारत भारती’ रचना में राष्ट्र के अतीत वर्त्तमान तथा भविष्य पर ओजस्वी विचार प्रस्तुत है।

1. भारत माता का मन्दिर यह समता का संवाद जहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।
जाति धर्म या सम्रदाय का नहीं भेद व्यवधान यहाँ,
सबका स्वागत, सबका आदर, सबका सम सम्मान यहाँ।
राम-रहीम, बुद्ध-ईसा का सुलभ एक-सा ध्यान यहाँ,
भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों कें गुण गौरव का ज्ञान यहाँ।

शब्दार्थ :

  • प्रसाद = आशीर्वाद ।
  • कल्याण = भलाई, शुभ, मंगलम्रद।
  • समता = बराबरी।
  • व्यवधान = अड़चन ।
  • संवाद = बातचीत।
  • सम = बराबर।
  • शिव = मंगलकारी।
  • सुलभ = सहज प्राप्त।
  • भिन्न-भिन्न = अलग-अलग।
  • भव = संसार।
  • ‘गुण = निपुणता, प्रशंसनीय।
  • गौरव = बड़प्पन, आदर।

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प्रसंग : प्रस्तुत्त अवतरण में कवि श्री गुप्तजी ने भारतवर्ष की सांस्कृतिक एकता व सभी धर्मों में समन्वय की भावना को स्पष्ट किया है।

व्याख्या – भारत माता के मंदिर की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कवि ने स्पष्ट किया है कि इस मंदिर में हर प्रकार के भेद-भाव को छोड़कर बराबरी की ही बातचीत तथा व्यवहार होता है। यहाँ किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं, सभी के मंगल तथा शुभ भलाई का ही यहाँ स्थान है। यहाँ बिना भेद-भाव के सभी को उनके मंगल के लिए आशीर्वाद मिलता है।

यहाँ जाति, धर्म, संप्रदाय को लेकर किसी प्रकार का भेदभाव या अड़चन नहीं है। चाहे किसी भी जाति का हो, अथवा किसी धर्म, मत का अनुयायी हो, यहाँ सभी को समान सम्मान प्राप्त है। सभी का यहाँ स्वागत होता है। सभी का आदर सम्मान होता है। सभी को एक समान समझकर सम्मान दिया जाता है। यहाँ धर्म को लेकर भेद भाव नहीं है। सभी धर्म के आराध्य यहाँ सभी के द्वारा सम्मानित होते हैं। ‘यहाँ राम-रहीम, गौतम बुद्ध, ईसामसीह सभी का एक समान सर्वत्र ध्यान, आराधना सहज सुलभ है। धर्म के मामलें में कोई विरोध या रोक टोक नहीं। एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के आराध्य का सम्मान करते हैं। संसार की भिन्न-भिन्न संस्कृतियों की विशेषताओं को यहाँ गौरव मिलता है। सभी का आदर किया जाता है।

2. नहीं चाहिए बुद्धि वैर की, भला प्रेम उन्माद यहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।
सब तीर्थों का एक तीर्थ यह हुदय पवित्र बना लें हम,
आओ यहाँ अजात शत्रु बन, सबको मित्र बना लें हम।
रेखाएँ प्रस्तुत हैं अपने मन के चित्र बना लें हम,
सौ-सौ आदर्शों को लेकर, एक चरित्र बना लें हम।

शब्दार्थ :

  • वैर = शत्रुता।
  • आदर्श = अनुकरणीय, श्रेष्ठ।
  • उन्माद = विक्षिप्तता, उन्मत्तता।
  • अजात शत्रु = जिसका कोई शत्रु न हो।

व्याख्या : भारत माता के इस पावन मंदिर में किसी के प्रति किसी के मन में शत्रुता या विरोध का विचार पैदा ही नहीं होता। यहाँ सभी एक दूसरे के प्रति प्रेम तथा सद्भावना में उन्मत्त बने रहते हैं। यह सभी की भलाई, सभी के हित तथा उत्थान का स्थान है। सभी को यहाँ मंगलमय आशीर्वाद मिलता है।

यहाँ सभी तीर्थों का तीर्थ है। सभी को यहाँ अपना हुदय पवित्र बना लेना है। हृदय की कलुषता दूर कर लेना है। हम लोग यहाँ सभी को अपना मित्र बनाकर अजात शत्रु बन जाएँ। धरती पर कोई भी हमारा शत्रु न रहे। अपने व्यवहार से हम सभी को अपना बना लें। आज हमारे सामने सच्चे उदार आदर्श हैं, रेखाएँ हैं, उनसे हमें अपने मन का चित्र बना लेना चाहिए। सैकड़ों श्रेष्ठ आदर्शों को लेकर हमें अपना श्रेष्ठ अनुकरणीय आदर्श चरित्र बना लेना चाहिए।

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3. कोटि-कोटि कंठों से मिलकर उठे एक जयनाद यहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।
मिला सत्य का हमें पुजारी, सफल काम उस न्यायी का
मुक्ति-लाभ कर्त्तव्य यहाँ है, एक-एक अनुयायी का,
बैठो माता के आंगन में, नाता, भाई-भाई का,
एक साथ मिल बैठ बाँट लो, अपना हर्ष-विषाद यहाँ।

शब्दार्थ :

  • कोटि-कोटि = करोड़ो।
  • जयनाद = विजय की घोषणा।
  • मुक्तिलाभ = स्वतंत्रता प्राप्ति ।
  • हर्ष = प्रसन्नता, खुशी।
  • नाता = संबंध।
  • विषाद = दु:ख।.
  • अनुयायी = अनुसरण करनेवाला।

व्याख्या : स्वदेश भारतवर्ष के करोड़ों नर-नारियों के कंठ से विजय की घोषणा उठती रहे। विजय के मार्ग पर लोग बढ़ते रहें। यहाँ सभी की प्रगति हो सभी का जीवन सफल एवं प्रसन्न बने, सभी को यहाँ वरदान प्राप्त हो।

हमारे देश के समस्त लोगों को सत्य-अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी मिल गए हैं। वे सदा सच्चे न्याय के रास्ते पर अडिग बने रहे। उन्होंने अपने जीवन में भारत को मुक्ति का लाभ दिया। उनकें सत्पयास से भारत को स्वतंत्रा मिली। भारत के लोग उनके सच्चे अनुयायी हैं। हर अनुयायी का यह कर्त्तव्य है कि इस मुक्ति का सही उपयोग करे।

कवि ने हमें यह प्रेरणा दी है कि भारत माता के इस पावन मंदिर में बैठकर हम परस्मर भाई-चारे को जीवन में सच्चे अर्थो में स्वीकार करें, एक दूसरे को बन्धु समझे। एक साथ बैठकर सभी यहाँ एक दूसरे की खुशी तथा दुःख में सम्मिलित हों। सभी के साथ सहानुभूति की भावना रखें।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – श्रम की प्रतिष्ठा

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘श्रम की प्रतिष्ठा’ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) कविता
(ग) निबंध
(घ) एकांकी
उत्तर :
(ग) निबंध

प्रश्न 2.
‘श्रम की प्रतिष्ठा’ के लेखक का नाम है-
(क) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) आचार्य विनोबा भावे
(घ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
उत्तर :
(ग) आचार्य विनोबा भावे

प्रश्न 3.
जो शखस पसीने से रोटी कमाता है वह हो जाता है-
(क) वीर पुरुष
(ख) धर्म पुरुष
(ग) कायर पुरुष
(घ) महापुरुष
उत्तर :
(ख) धर्म पुरुष

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 4.
आज समाज में किसकी प्रतिष्ठा है?
(क) श्रम की
(ख) मन की
(ग) तन की
(घ) धन की
उत्तर :
(घ) धन की।

प्रश्न 5.
किसने कहा कि वे आदरणीय तो है पर नालायक नहीं ?
(क) भगवान ने
(ख) ज्ञानी ने
(ग) कर्मयोगी ने
(घ) मजदूर ने
उत्तर :
(क) भगवान ने

प्रश्न 6.
लाचारी से काम करने वाले क्या नहीं हो सकते हैं ?
(क) धर्मयोगी
(ख) कर्मयोगी
(ग) प्रतिष्ठित
(घ) सम्मानित
उत्तर :
(ख) कर्मयोगी

प्रश्न 7.
श्रम करने वाले को कैसा वेतन मिलता है ?
(क) ज्यादा
(ख) कम से कम
(ग) आधा
(घ) एक चौथाई
उत्तर :
(ख) कम

प्रश्न 8.
कौन समय निकाल कर सूत काट लेते थे ?
(क) मजदुर
(ख) महात्मा गाँधी
(ग) लेखक
(ङ) कर्मयोगी
उत्तर :
(ख) महात्मा गाँधी

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 9.
पहले कौन धोती तथा खाने का अधिकारी था ?
(क) मजदूर
(ख) लेखक
(ग) ब्राह्मण
(घ) मेहतर
उत्तर :
(ग) बाह्मण

प्रश्न 10.
लेखक ने क्या प्रेरणा दी है ?
(क) श्रम करने का
(ख) विद्या का
(ग) पढ़ने का
(घ) सम्मान करने का
उत्तर :
(क) श्रम करने का

प्रश्न 11.
‘श्रम की प्रतिष्ठा’ किसने लिखा है ?
(क) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) आचार्य विनोबा भावे
(घ) आचार्य हजारी प्रसाद द्विकेदी
उत्तर :
(ग) आचार्य विनोबा भावे

प्रश्न 12.
विनोबा भावे ने शेषनाग किसे माना है ?
(क) ज्ञानी को
(ख) गुरू को
(ग) श्रमिक को
(घ) वैद्य को
उत्तर :
(ग) श्रमिक को

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 13.
थका-मादा शरीर क्या चाहता है ?
(क) दौड़-भाग
(ख) आराम
(ग) कोलाहल
(घ) अशांति
उत्तर :
(ख) आराम

प्रश्न 14.
कैसे लोगों को जीवन में ज्यादा पाप दिखता है ?
(क) फुरसती
(ख) मेहनती
(ग) कायर
(घ) श्रमिक
उत्तर :
(क) फुरसती

प्रश्न 15.
आंज समाज में किसकी प्रतिष्ठा नहीं है ?
(क) श्रम की
(ख) मन की
(ग) तन की
(घ) धन की
उत्तर :
(क) श्रम की

प्रश्न 16.
दिमागी काम के मुकाबले आज श्रम का मूल्य आंका जाता है।
(क) कम
(ख) अधिक
(ग) बराबर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कम

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
आचार्य विनोबा भावे का वास्तविक नाम क्या था?
उत्तर :
आचार्य विनोबा भावे का वास्तविक नाम विनायक राव भावे था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 2.
पृथ्वी का भार किसके मस्तक पर स्थित है?
उत्तर :
पृथ्वी का भार शेषनाग के मस्तक पर स्थित है।

प्रश्न 3.
किसने मजदूरों का कर्मयोगी कहा है?
उत्तर :
भगवान ने मजदूरों को कर्मयोगी कहा है।

प्रश्न 4.
कौन-सा शख्स धर्म-पुरुष हो जाता है?
उत्तर :
जो शखस पसीने से रोटी कमाता है वह धर्म पुरुष हो जाता है।

प्रश्न 5.
अपने समाज में किसकी प्रतिष्ठा नहीं है?
उत्तर :
अपने. समाज में श्रम की प्रतिष्ठा नहीं है।

प्रश्न 6.
लेखक के अनुसार पृथ्वी किसके मस्तक पर स्थित है –
उत्तर :
पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर स्थित है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 7.
कौन कर्मयोगी नहीं हो सकता है ?
उत्तर :
जो श्रम से बचना चाहता है वह कर्मयोगी नहीं हो सकता है।

प्रश्न 8.
देहाती लोग अपने बच्चे को क्यों पढ़ाते हैं ?
उत्तर :
देहाती लोग अपने बच्चे को धार्मिक, विचारशील बनाने के लिए नहीं पढ़ाते, बल्कि चाहते हैं कि लड़के को नौकरी मिले।

प्रश्न 9.
लेखक ने किसका उदाहरण देकर श्रम के महत्व को स्थापित किया है ?
उत्तर :
लेखक ने रामायण में सीताजी तथा महाभारत में से भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देकर श्रम के महत्व को स्थापित किया है।

प्रश्न 10.
लेखक के अनुसार किस वर्ग के कारण बेकारी बढ़ेगी ?
उत्तर :
ज्ञानी, योगी, बूढ़े, व्यापारी, वकील, अध्यापक, विद्यार्थी को काम नहीं करना चाहिए। इतने बेकार वर्ग के कारण बेकारी बढ़ेगी।

प्रश्न 11.
किस कारण से समाज में श्रम की प्रतिष्ठा नहीं हैं ?
उत्तर :
जो काम टालते हैं, काम नहीं करते उनका जीवन धार्मिक नहीं होता। इस कारण अपने समाज में श्रम की प्रतिष्ठा नहीं है।

प्रश्न 12.
कैसे श्रम करने वालों को लोग नीच समझते हैं ?
उत्तर :
शरीर से श्रम करने वाले को लोग नीच समझते हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 13.
जीवन कैसे पापी बनता है ?
उत्तर :
बिना काम किए खाने से जीवन पापी बनता है।

प्रश्न 14.
सभी श्रम की प्रतिष्ठा कब होगी ?
उत्तर :
कामों का मूल्य समान होना चाहिए। जब यह होगा तब श्रम की प्रतिष्ठा होगी।

प्रश्न 15.
किसका मुल्य ज्यादा कम रखना ठीक नहीं है ?
उत्तर :
दिमागी काम और श्रम का मुल्य ज्यादा कम रखना ठीक नहीं है।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
धर्म पुरुष किसे कहा जाता है?
उत्तर :
कुछ मजदूर दिन भर मजदूरी करते हैं और पसीने से रोटी कमाते हैं। जो पसीने से रोटी कमाता है वह व्यक्ति धर्म पुरुष कहा जाता है।

प्रश्न 2.
कौन से लोग हैं जो खा सकते हैं और आशीर्वाद दे सकते हैं, काम नहीं करते?
उत्तर :
ज्ञानी अर्थात् विद्वान लोग खा सकते हैं और आशीर्वाद दे सकते हैं, पर काम नहीं करते।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न 3.
‘श्रम की प्रतिष्ठा’ निबेंध का सारांश लीखिए।
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर पाठ का सरांश में देखिए।

प्रश्न 4.
‘श्रम की प्रतिष्ठा’ पाठ से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर :
इस पाठ से लेखक ने प्रत्येक व्यक्ति को कुछ न कुछ काम करने की प्रेरणा दी है। हमारे देश में सम्पन्न व बौद्धिक लोग श्रम से बचते हैं। शारीरिक श्रम करनेवालों को निम्न श्रेणी का मानते हैं और हेय दृष्टि से देखते हैं। परंतु श्रम करने वाला व्यक्ति श्रेष्ठ होता है। श्रम करने वालों के जीवन में पाप नहीं होता। दिमागी काम का और श्रम का मूल्य कम ज्यादा रखना ठीक नहीं है। हर व्यक्ति को थोड़ा-थोड़ा शारीरिक श्रम करना चाहिए। इससे सभी की इज्जत और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। हर काम का मूल्य समान होने से ही श्रम की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

प्रश्न 5.
‘लेकिन सिर्फ कर्म करने से कोई कर्मयोगी नहीं होता।’ इसके रचनाकार का नाम बताते हुए पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस पंक्ति के रचनकार आचार्य विनोबा भावे हैं। केवल काम करने से कोई कर्मयोगी नहीं होता। विवशता से जो कर्म करता है, कर्म को वो पूजा नहीं समझता, वह कर्मयोगी नहीं है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
‘श्रम की प्रतिष्ठा’ निबंध का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत निबंध के लेखके ने परिश्रम के महत्व को स्पष्ट किया है। प्रत्येक व्यक्ति को कुछ न.कुछ परिश्रम करने की प्रेरणा दी है। हमारे देश मे सम्पन्न व बौद्धिक लोग श्रम से बचते हैं। शारीरिक परिश्रम करने वालों को हेय दृष्ट से देखा जाता है। लेखक श्रम करने वालों का महत्व (श्रेष्ठ) समझता है। श्रमिकों को शेष नाग सिद्ध करते हुए उन्हें ही आधुनिक जगत की प्रगति और जीवन का आधार माना है। श्रम करने वालों के जीवन में पाप नहीं होता, रामायण में सीताजी तथा महाभारत से श्री कृष्ण का उदाहरण देकर श्रम की महत्ता को स्थापित किया है। दिमागी काम करने वालों तथा शारीरिक परिश्रम करने वलों का वेतन समान होना चाहिए। हर काम का मूल्य समान होने से ही श्रम की प्रतिष्ठा होगी। हर व्यक्ति को थोड़ा-थोड़ा परिश्रम करना ही चाहिए इससे सभी की इज्जत और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इस प्रकार श्रम की महत्ता को लेखक ने स्पष्ट किया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न :
पाठ में वर्णित महाभारत की कथा का उल्लेख कीजिए। उससे हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
पाण्डवों में सबसे बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर थे। वे सत्यवादी तथा धर्मपुरुष शे। महाभारत युद्ध में विजय के बाद धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के सम्राट बने। उन्होंने राजसूय यज्ञ किया। उस यज्ञ में भारत के सभी राजे-महाराजे उपस्थित हुए। कृष्ण भी वहाँ गए थे। कृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर से उस समारोह के अपने लिए कुछ काम करने के लिए प्रस्ताव रखा। धर्मराज ने कहा कि आपको हम क्या काम दे। आप तो हमारे लिए पुज्य है। आदरणीय है। इसलिए आपके लायक हमारे पास कोई काम नहीं है।

भगवान कृष्ण ने कहा – हम आदरणीय तो हैं लेकिन नालायक या अकर्मण्य नहीं है। हम काम कर सकते हैं। धर्मराज ने कहा कि आप ही अपना काम ढूँढ़ लीजिए। भगवान ने अपने करने के लिए जूठी पत्तले उठाने और पोंछा लगाने का काम लिया। इस प्रकार द्वारिकाधीश, सभी राजा, महाराजाओं से सम्मानित भगवान कृष्ण ने यह काम स्वीकार कर सभी कोयह शिक्षा दी है कि किसी भी काम को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। छोट़ा काम करने से कोई भी महान पुरुष छोटा नहीं हो जाता, बल्कि उसकी महत्ता बढ़ जाती है। जूठी पत्तलें उठाने और पोंछा लगाने से भगवान का महत्व घटा नहीं, बल्कि जन मानस में उनका स्थान और भी महान आदरणीय बन गया।

भाषा बोध

1. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कर लिंग निर्णय करें-

  • पृथ्वी – यह पृथ्वी धन-धान्य से भरी है- स्त्रीलिंग।
  • कर्मयोगी – कर्मयोगी काम को पूजा समझता है- पुलिंग।
  • तालीम – हर लड़के को अच्छी तालीम मिलनी चाहिए- स्ब्रीलिंग
  • प्रतिष्ठा – अच्छे आचरण से प्रतिष्ठा मिलती है- स्व्रीलिंग।
  • मजदूर – मजदूर दिन भर परिश्रम करता है-पुलिंग।
  • इज्जत – अच्छे काम से इज्जत बढ़ती है- स्त्रीलिंग।
  • व्यवस्था – हमारे यहाँ खान-पान की अच्छी व्यवस्था है- स्र्रीलिंग।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

2. निम्नलिखित वाक्यांशों में आए कारक विभक्तियों का नाम लिखिए-

(क) रामायण में भी कहानी है।
(ख) सीता का जाना कैसे होगा।
(ग) धर्मराज ने राजसूय यज्ञ किया।
(घ) बूढ़ों को काम से मुक्त रहना ही चाहिए।
उत्तर :
(क) रामायण में – अधिकरण कारक।
(ख) सीता का – सम्बन्ध कारक।
(ग) धर्मराज ने – कर्त्ताकारक, राजसूय यज्ञ – कर्म कारक।
(घ) बूढ़ों को – कर्म कारक। काम से – अपादान कारक

3. निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए –

पृथ्वी – आकाश
पाप – पुण्य
नालायक – लायक
जीवन – मरण, मृत्यु
उपकारी – अपकारी
उचित – अनुचिन
नीच – ऊँच

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

4. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –

पृथ्वी – धरती, धरा, भूमिं।
भगवान – परमात्मा, प्रभु, जगदीश।
रात – रात्रि, निशा, रजनी।
शरीर – देह, तन, काया।
लज्जा – लाज, शर्म, हया।

WBBSE Class 8 Hindi श्रम की प्रतिष्ठा Summary

लेखक-परिचय :

आचार्य विनोबा भावे का जन्म सन् 1895 ई. में महाराष्ट्र के गगोदा गाँव में हुआ था। वे बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में गणित तथा संस्कृत का गहन अध्ययन किया। महात्मा गांधी के प्रभाव से वे लंबे समय तक साबरमती आश्रम में उनके संपर्क में रहे। उन्होंने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत को अपना मूल आधार बनाया। सर्वोदय उनका मूल दर्शन था। वे भूदान, ग्रामदान, तथा संपत्तिदान के द्वारा क्रांति लाने के लिए प्रयत्नशील रहें। भारतीय दर्शन में उनकी गहरी आस्था थी। हिन्दी को उन्होंने राष्ट्रभाषा के रूप में उपयुक्त माना। उनकी प्रमुख रचनाएँ- गीता प्रवचन, विनोबा के विचार, शांतियात्रा, भूदान यज्ञ, जमाने की माँगे, सर्वोदय यात्रा, साहित्यिकों से, जीवन और शिक्षण आदि हैं। आचार्य विनोबा भावे का वास्तविक नाम विनायक राव भावे था।

सारांश :

प्रस्तुत निबंध में विनोबा जी ने श्रमिक को शेषनाग सिद्ध करते हुए उनके महत्व को स्पष्ट किया है। पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर स्थित है। अगर शेषनाग का आधार टूट जाए तो पृथ्वी स्थिर नहीं रह सकेगी। यह टुकड़े-टुकड़े में हो जाएगी। दिन भर परिश्रम करनेवाले मजदूर ही शेषनाग है। सबका आधार मजदूरों पर ही है। भगवान ने मजदूरों को कर्मयोगी कहा है। लेकिन सिर्फ कर्म करने से कोई कर्म योगी नहीं होता। हमारे देश में कुछ मजदूर खेतों में, कुछ रेलवे में, कुछ कारखानों में काम करते हैं। दिन भर मजदूरी कर अपने पसीने से रोटी कमाने वाला शख्स धर्म पुरुष हो जाता है। यह दिन भर काम करता है, इसलिए पाप कर्म करने के लिए उसे समय ही नहीं मिलता। रात को गहरी नींद में सो जाता है। जिस जीवन में पाप की गुंजाइश नहीं हो उसे धार्मिक जीवन होना चाहिए।

केवल श्रमं करने से कोई कर्मयोगी नहीं हो सकता। जो श्रम से बचना चाहता है वह कर्मयोगी नहीं हो सकता। जिनके पास खाली समय रहता है, वहाँ शैतान का काम शुरू होता है। जो लोग कर्म को पूजा नहीं समझते, लाचारी से कर्म करते हैं, यदि कर्म से मुक्ति मिले तो राजी हो जाएँगे। यह सच्चे कर्मयोगी की हालत नहीं है। देहाती लोग अपने बच्चे को धार्मिक, विचारशील बनाने के लिए नहीं पढ़ाते, बल्कि चाहते हैं कि लड़के को नौकरी मिले। उसे मजदूरों की तरह खटना न पड़े। दिमागी काम करने वाले मजदूरों को नीच समझते हैं। वे थोड़ी मजदूरी देकर ज्यादा काम कराना चाहते हैं। मजदूर भी काम से नफरत करते हैं, उन्हें काम सम्मान जनक नहीं लगता।

लेखक ने रामायण में सीता जी तथा महाभारत में से भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देकर श्रम के महत्व का स्थापित किया है। राम के वन गमन के समय सीताजी भी उनके साथ जाने के लिए तत्पर हो उठी। कौशल्या ने कहा कि सीताजी को मैने दीप की बाती भी जलाने नहीं दी। यहाँ काम की प्रतिष्ठा नहीं मानी गई। इसमें सच्चाई है कि ससुर के घर लड़की को बेटी के समान माना गया। पर मेहनत को हीन माना गया। धर्मराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में श्री कृष्ण ने अपने करने के लिए कोई काम माँगा। धर्मराज ने उन्हे पूज्य तथा आदरणीय समझकर उन्हें कोई काम देना उचित न समझा। भगवान ने कहा कि वे आदरणीय तो है पर नालायक नहीं। अन्त में भगवान ने स्वयं अपने लिए जूठी पत्तले उठाने और पोंछा लगाने का काम किया। इस कथा में श्रम की महत्ता दिखाई पड़ती है।

ज्ञानी खा सकते हैं और आशीर्वाद दे सकते हैं, पर काम नहीं कर सकते। ज्ञानी, योगी बूढ़े, व्यापारी, वकील, अध्यापक, विद्यार्थी को काम नहीं करना चाहिए। इतने बेकार वर्ग के कारण बेकारी बढ़ेगी। ऐसी समाज रचना में मजदूर भी काम से छुट्टी चाहता है। लाचारी से काम करने वाले कर्मयोगी नहीं हो सकते। जो काम टालते हैं, काम नहीं करते उनका जीवन धार्मिक नहीं होता। इस कारण अपने समाज में श्रम की प्रतिष्ठा नहीं है। दिमागी काम करने वालों को अधिक तथा श्रम करने वालों को कम से कम वेतन मिलता है। इसलिए दिमगी काम करने वालों का महत्व बढ़ गया है। महात्मा गांधी समय निकाल कर सूत कात लेते थे। अतः काम की इज्जत करनी चाहिए। कर्म सभी को करना चाहिए।

दिमागी काम और श्रम का मूल्य कम ज्यादा रखना ठीक नहीं है। पहले ब्राह्मण ज्ञानी होता था। वह केवल धोती तथा खाने का अधिकारी था। आजकल पढ़ाने वाले मूल्य माँगते हैं। विद्या बेचने लगे हैं। कर्मयोग की महिमा, श्रम की प्रतिष्ठा कायम करनी है तो कीमत में अन्तर नहीं होना चाहिए। शरीर-श्रम करने वाले को लोग नीच समझते हैं। उन्हें प्रतिष्ठा, सम्मान नहीं मिलता। मेहतर जो महत्तर है उसे हम नीच मानते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हर व्यक्ति थोड़ा श्रम करें। बिना काम किए खाने से जीवन पापी बनता है। दूसरी चीज यह है कि कामों का मूल्य समान होना चाहिए। जब यह होगा सब श्रम की प्रतिष्ठा होगी। इस प्रकार लेखक ने प्रत्येक व्यक्ति को कुछ न कुछ श्रम करते रहने की प्रेरणा दी है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 1 श्रम की प्रतिष्ठा

शब्दार्थ :

  • पृथ्वी = धरती।
  • तालीम = शिक्षा।
  • आधार = अवलंब, सहारा।
  • दिमागी = बौद्धिक।
  • श्रम = मेहनत।
  • वृत्ति = आदत।
  • प्रतिष्ठा = सम्मान।
  • नालायक = अयोग्य।
  • मस्तक = माथा।
  • अपरिग्रही = धन संग्रह न करने वाला।
  • जर्रा-जर्रा = नष्ट भ्रष्ट ।
  • मेहतर = सफाई कर्मी ।
  • कर्मयोगीं= कर्म में विश्वास करने वाला।
  • लचारी = मजबूरी।
  • शख्स = व्यक्ति ।
  • गौरव = सम्मान, गर्व।
  • गुंजाइस = संभावना।
  • निष्ठुरता = कठोरता, निर्दयता।
  • व्यसन = लत, दुर्गुण।
  • व्यवस्था = इंतजाम।
  • फाजिल = खाली, फजूल।
  • उपकारी = भलाई करने वाला।
  • पैदावार = उपज।
  • मुक्त = स्वतंत्र।
  • फुरसती = खाली।
  • फर्क = अन्तर।
  • महत्तर = किसी से बड़ा या अच्छा।
  • देहाती = गँवार।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 1 सूर के पद to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 Question Answer – सूर के पद

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
अनाथ होकर कवि कहाँ बैठे है ?
(क) पेड़ की डाल पर
(ख) छत पर
(ग) सड़क पर
(घ) नाव में
उत्तर :
(क) पेड़ की डाल पर।

प्रश्न 2.
कवि प्रसन्न होकर किसका जय-जयकार करता है ?
(क) बहेलिया का
(ख) सर्प का
(ग) ईश्वर का
(घ) पक्षी का
उत्तर :
(ग) ईश्वर का।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 3.
‘सुमिरत’ से क्या संकेत मिलता है?
(क) दर्शन करना
(ख) ईश्वर का नाम लेना
(ग) तीर्थ करना
(घ) पूजा करना
उत्तर :
(ख) ईश्वर का नाम लेना।

प्रश्न 4.
सर्प को दूध पिलाने का त्योहार किस दिन मनाया जाता है?
(क) होली में
(ख) दीपावली में
(ग) गणेश चतुर्थी के दिन
(घ) नाग पंचमी के दिन
उत्तर :
(घ) नाग पंचमी के दिन।

प्रश्न 5.
सूर्य के डूबते ही कमल की पंखुड़ियाँ क्या हो जाती हैं?
(क) फैंल जाती हैं
(ख) सिकुड़ जाती है
(ग) गिर जाती है
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सिकुड़ जाती हैं।

प्रश्न 6.
सूरदास का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1478 में
(ख) सन् 1479 में
(ग) सन् 1578 में
(घ) सन् 1579 में
उत्तर :
(क) सन् 1478 में ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 7.
सूरदास का जन्म किस गाँव में हुआ था ?
(क) तरौनी
(ख) रूनकता
(ग) ब्रज
(घ) गोकुल
उत्तर :
(ख) रूनकता ।

प्रश्न 8.
सूरदास के गुरू कौन थे ?
(क) रामानंद
(ख) कबीर
(ग) बल्लभाचार्य
(घ) विट्ठलदास
उत्तर :
(ग) बल्लभाचार्य ।

प्रश्न 9.
सूर किसके भक्त थे ?
(क) कृष्ण
(ख) कंस
(ग) नंद
(घ) यशोदा
उत्तर :
(क) कृष्ण ।

प्रश्न 10.
सूरदास की मृत्यु कहाँ हुई थी ?
(क) मिथिला में
(ख) गोवर्द्धन के निकट परसौली गांव में
(ग) बज में
(घ) काशी में
उत्तर :
(ख) गोवर्द्धन के निकट परसौली गांव में ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 11.
सूरदास की मृत्यु कब हुई ?
(क) सन् 1563 में
(ख) सन् 1663 में
(ग) सन् 1763 में
(घ) सन् 1863 में
उत्तर :
(क) सन् 1563।

प्रश्न 12.
खल शब्द का अर्थ है –
(क) विवेकवान
(ख) दयालु
(ग) दुष्ट
(घ) सज्जन
उत्तर :
(ग) दुष्ट

प्रश्न 13.
असहाय पक्षी किसका नाम जप करने लगा ?
(क) सुरदास का
(ख) ईश्वर का
(ग) बहेलिया का
(घ) बाज का
उत्तर :
(ख) ईश्वर का

प्रश्न 14.
किसके कृपा से बहेलिया तथा बाज दोनों खत्म हो गए ?
(क) कवि के
(ख) माता यशोदा के
(ग) प्रभु के
(घ) जसुदा के
उत्तर :
(ग)’प्रभु के

प्रश्न 15.
किसे पवित्र गंगा जल में स्नान कराने से कोई लाभ नहीं होता –
(क) कुत्ते को
(ख) बहेलिया को
(ग) कवि को
(घ) बाज को
उत्तर :
(क) कुत्ते को

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 16.
कठोर पत्थर पर किसका कोई असर नहीं पड़ता ?
(क) जल का
(ख) विमुख लोगों का
(ग) वाण का
(घ) कवि का
उत्तर :
(ग) वाण का

प्रश्न 17.
माता यशोदा किसे सुला रही है ?
(क) दाऊ को
(ख) कृष्ण को
(ग) सुदामा को
(घ) कवि को
उत्तर :
(ख) कृष्ण को

प्रश्न 18.
अरून शब्द का अर्थ है –
(क) कृष्ण
(ख) हृद्दय
(ग) लाल
(घ) शोभा
उत्तर :
(ग) लाल

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 19.
लोचन शब्द का अर्थ है –
(क) आँख
(ख) बह्मा
(ग) दशा
(घ) भौरा
उत्तर :
(क) आँख

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि किससे प्रार्थना करता हैं?
उत्तर :
कवि भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करता है।

प्रश्न 2.
बान कौन साधता है?
उत्तर :
बान एक बहेलिया (खग-भक्षक) साधता है।

प्रश्न 3.
मन को किसका साथ छोड़ देने के लिए कहा गया है?
उत्तर :
मन को ईश्वर के विराधी नास्तिकों का साथ छोड़ देने के लिए कहा गया है।

प्रश्न 4.
‘पय पान’ कराने पर भी कौन विष का त्याग नहीं करता?
उत्तर :
पय पान कराने पर भी सर्ष विष का त्याग नहीं करता।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 5.
गंगा नहाने की बात किसके लिए कही गई है?
उत्तर :
गंगा नहाने की बात कुत्ते के लिए कही गई है?

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार कौन कभी ईश्वर भक्त नहीं हो सकता ?
उत्तर :
जो काम क्रोध अंहंकार लोभ तथा अज्ञान में रातों दिन लिप्त रहता है।

प्रश्न 7.
इस पद में कवि ने किसका वर्णन किया है ?
उत्तर :
इस पद में भक्त कवि सूरदासजी ने ईश्वर की महिमा का वर्णन किया है।

प्रश्न 8.
किसके स्मरण से भयंकर संकट से मुक्ति मिल जाती है ?
उत्तर :
ईश्वर के स्मरण से भयंकर संकट से भी तत्काल मुक्ति मिल जाती है।

प्रश्न 9.
कौन असहाय होकर वृक्ष की डाली पर बैठा हुआ है ?
उत्तर :
पक्षी असहाय होकर वृक्ष की डाली पर बैठा हुआ है।

प्रश्न 10.
कौन ऊपर छिपा बैठा था ?
उत्तर :
ऊपर बाज भी छिपा बैठा था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 11.
किस परिणाम स्वरूप बहेलिया के हाथ से वाण छूट गया ?
उत्तर :
प्रभु की कृपा से एक सर्प ने बहेलिया को डँस लिया। परिणाम स्वरूप उसके हाथ से धुनष पर रखा हुआ वाण छूट गया।

प्रश्न 12.
कवि प्रसन्न होकर क्या कहते हैं ?
उत्तर :
कवि प्रसन्न होकर ईश्वर की जय-जयकार करते है।

प्रश्न 13.
किसके शरीर में सुन्दर आभूषण व्यर्थ है ?
उत्तर :
बन्दर के शरीर में सुन्दर आभूषण व्यर्थ है।

प्रश्न 14.
किस प्रकार के लोगों के स्वभाव को नहीं बदला जा सकता है ?
उत्तर :
ईश्वर से विमुख (नास्तिक) लोगों के स्वभाव को नहीं बदला जा सकता है।

प्रश्न 15.
बालक कृष्ण की किस क्रिया को देखकर तीनों लोक काँपने लगते हैं ?
उत्तर :
बालक कृष्ण की निद्रा लेने (सोने) की क्रिया (दशा) को देखकर प्रलय की आशंका से तीनों लोक भयभीत होकर काँपने लगते हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रश्न 16.
कृष्णा के साँसें लेते समय उनका हृदय किस प्रकार का लगता है ?
उत्तर :
साँसे लेते समय उनका हंदय इस प्रकार लगता है मानों दूध का समुद्र शोभायमान हो रहा हो।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
सूरदास ने भक्ति मार्ग में कौन-सी बाधाएँ पाई है और उनसे मुक्ति का क्या तरीका बताया है?
उत्तर :
सूरदास सगुण कृष्गमार्गी धारा के अनन्य कृष्ण भक्त थे। वे हरि से विमुख ईंश्वर विरोधी नास्तिकों को भक्ति मार्ग में सबसे बड़ी बाधा मानते है। नास्तिक व्यक्ति स्वयं तो ईश्वर की भक्ति नहीं करते, औरों की भक्ति में बाधा डालते हैं। ऐसे लोगों के संपर्क से मन में बुरे विचार पैदा होते हैं। ईश्वर की आराधना में भी बाधा पड़ती है। सूरदास जी ऐसे लोगों का साथ तुरतं छोड़ देने की सलाह देते हैं। अत: ईश्वर पर विश्वास न करने वालों का साथ छोड़ देने से ही भक्ति मार्ग की बाधा दूर हो जाती है, और भक्ति मार्ग प्रशस्त बन जाता है।

प्रश्न 2.
देखि सयन गति त्रिभुवन कपै ईस बिरंचि भ्रमावै।’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत अवतरण मे सूरदास जी ने स्पष्ट किया है कि माता यशोदा गोपाल कृष्ण को सुला रही हैं। बालक कृष्ण की निद्रा लेने की दशा को देखकर तीनों लोकों में हड़कंप मच जाता है। यहाँ तक कि महादेव शिव तथा व्रहा भी भ्रमित हो जाते हैं। इस पंक्ति में कृष्ण के ईश्वरत्व का बोध कराया गया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
सूरदास ने हरि विमुख लोगों कासाथ छोड़ देने की लिए क्यों कहाहै ?
उत्तर :
सूरदास ने ईश्वर से विमुख लोगों (नास्तिकों) का साथ छोड़ देने के लिए कहा है। वे ऐसे लोगों का साथ छोड़ देने के लिए कहते हैं जो ईश्वर के विरोधी हैं। ऐसे लोगों के साथ रहने से उनके सम्पर्क से मन में बुरे विचार पैदा होती है और ईश्वर के भजन, प्रार्थना तथा उपासना में बाधा पड़ती है। ऐसे लोग कभी भी अपना स्वभाव तथा विचार नहीं छोड़ सकते। किसी भी उपदेश या शिक्षा से उन्हें सुधारा नहीं जा सकता। वे कभी भी आस्तिक-ईश्वर भक्त नहीं बन सकते। कई उदाहरणों से कवि ने इसे स््ष्ट किया है। सर्ष को दूध पिलाने से कोई लाभ नहीं होता। क्योंकि दूध पीने पर भी वह अपना विष नहीं त्यागता। कौए को कपूर खिलाना भी व्यर्थ हो जाता है, क्यों कि कपूर खिलाने पर भी वह अपनी कॉवकॉव की कठोर आवाज नहीं छोड़ता। उसकी वाणी कभी मधुर नहीं हो सकती। गधे को सुगंधित चंदन का लेप करने से भी कोई लाभ नहीं होता।

इससे वह विद्वान नहीं बन जाता और कीचड़ में लोटने-पोटने लगता है। बन्दर के शरीर में आभूषण पहना देने से भी उसकी शोभा नहीं बढ़ती, वह तुरंत उन्हें तोड़-फोड़ कर फेंक देता है। हाथी को नदी के स्वच्छ जल में नहला देने से भी उसे स्वच्छ नहीं रखा जा सकता। वह तुरंत अपने शरीर को धूल-मिट्टी से धूसरित कर लेता है। कठोर पत्थर पर वाण का कोई असर नहीं पड़ता। तरकस के सारे वाण बेकार हो जाते हैं, वे वाण कभी भी कठोर पत्थर को बेध नहों पाते। काले कम्बल पर कभी दूसरा रंग नहीं चढ़ सकता। इसी प्रकार ईश्वर के विरोधी दुर्जनों का कभी भी सुधार कर ईश्वर भक्त आस्तिक नहीं बनाया जा सकता। ऐसे दुष्ट जन सदा काम, कोध, अहंकार, लोभ तथा मायाममता में रातों-दिन व्यस्त रहते हैं। इन्हीं कारणों से कवि ऐसे लोगों का साथ छोड़ देने के लिए कहा है।

भाषा बोध :

1. ब्रजभाषा के शब्द – खड़ी बोली हिन्दी रूप

डरिया – डाल
सुमिरत – स्मरण
बिमुखन – विमुख
तजत – त्याग
हवाये – नहलाए, स्नान
रीतो – रिक्त, खाली

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

2. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए –

ऊपर – उपरि
कपूर – कर्पूर
स्वान – श्वान
आलस – आलस्य
फन – फण

WBBSE Class 8 Hindi सूर के पद Summary

कवि परिचय :

सूरदास भक्तिकालीन सगुण कृष्ण मार्गी धारा के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवि थे। इनका जन्म सन् 1478 ई. में रूनकता नामक ग्राम (मथुरा) में हुआ था। सन् 1585 ई. के आसपास पारसोली नामक ग्राम में इनकी इह लीला समाप्त हुई। सूरदास महाप्रभु बल्लभाचार्य के शिष्य थे। भगवान कृष्ण इनके इष्टदेव थे। ये वात्सल्य और शृगार के अन्यतम कवि है। इनकी कविता ब्रजभाषा का शृंगार कही जाती है। इनके काव्य की भाषा सरल और मधुर ब्रजभाषा है। इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ सूर सागर, सूरसारावली और साहित्य-लहरी हैं। इनके काव्य में कृष्ण की बाल लीलाओं तथा प्रेम लीलाओं की मनोरम झाँकी मिलती है। सूर सागर में भक्ति और विनय संबंधी पदों की अधिकता है। सूर काव्य में साहित्य और संगीत का सुन्दर संयोग है।

पद 1.
अब कैं राखि लेहु भगवान ।
हौं अनाथ बैठ्यो द्नुम-डरिया, पारधि साधै बान।
ताकैं डर हौं भाज्यौ चाहत, ऊपर ढुक्यो सचान।
दुहूँ भाँति दुख भयौ आनि यह, कौन उबारै प्रान।
सुमिरत ही अही डस्यौ पारधी, कर छूटच्यौ संधान।
सूरदास सर लग्यौ सचानहि, जय-जय कृपानिधान।।

शब्दार्थ :

  • अनाथ = असहाय।
  • द्रुम-डरिया = वृक्ष की डाल।
  • पारधि = बहेलिया।
  • साधे = साधना।
  • बान = बाण।
  • भाज्यो = भागना।
  • सन्चान = बाज।
  • उबारै = उद्धार करना, मुक्त करना।
  • सुमिरत = ईश्वर के नाम का जप।
  • अहि = सर्प।
  • डस्यौ = डँसना।
  • ढुक्यो = छिपा।
  • कर = हाथ।
  • संधान = तीर, धनुष पर बाण रखना ।
  • सर = बाण।
  • कृपा निधान = दयालु भगवान करुणा के सागर।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रसंग – प्रस्तुत पद ‘साहित्य मेला’ के सूर के पद पाठ से उद्धृत है। इसके कवि महात्मा सूरदासजी है।
संदर्भ – इस पद में भक्त कव्रि सूरदासजी ने ईश्वर की महिमा का वर्णन किया है। कवि ने स्पष्ट किया है कि ईश्वर के स्मरण से भयंकर संकट से भी तत्काल मुक्ति मिल जाती है।

व्याख्या – सूरदासजी एक पक्षी के माध्यम से स्पष्ट किया है कि ईश्वर किस प्रकार भक्त की रक्षा करते हैं। एक अनाथ पक्षी वृक्ष की डाली पर बैठा हुआ था। वह ईश्वर से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु, अब मेरी रक्षा कर लीजिए। मैं असहाय होकर वृक्ष की डाली पर बैठा हुआ हूँ। नीचे से एक बहेलिया मुझे मारने के लिए बाण चलाने की तैयारी कर रहा है। उसके डर से मैं भागना चाहता हूँ, पर ऊपर बाज भी छिपा बैठा है। दोनों ओर से मेरे प्राणों पर संकट बना हुआ है। इस भयंकर दु:ख से अब आप के सिवा कौन मेरे प्राण बचा सकता है।

इस प्रकार वह असहाय पंक्षी ईश्वर के नाम का जप करने लगा। प्रभु की कृपा से एक सर्प बहेलिया को डँस लिया। परिणाम स्वरूप इसके हाथ से धुनष पर रखा हुआ बाण छूट गया। वह बाण ऊपर जाकर बाज को लगा। इस प्रकार प्रभु की कृपा से बहेलिया तथा बाज दोनों खत्म हो गए और ईश्वर के नाम को जपने वाला पक्षी के प्राण संकट से बच गये। सचमुच प्रभु अतिशय कृपालु हैं। कवि प्रसन्न होकर ईश्वर की जय-जयकार करता है।

पद 2.
छाँड़ि मन हरि बिमुखन को संग।
जाके संग कुबुद्धि उपजै, परत भजन में भंग।
काम क्रोध मद लोभ मोह में, निसि दिन रहत उमंग।
कहा भयो पय पान कराये, बिष नहिं तजत भुजंग।
कागहि कहा कपूर खवाये, स्वान न्हवाये गंग।
खर को कहा अरगजा लेपन, मरकत भूषन अंग।
पाहन पतित बान नहिं भेदत, रीतो करत निषंग।
सूरदास खल कारी कामरी, चढ़ै न दूजो रंग।।

शब्दार्थ :

  • विमुखन = ईश्वर के विरोधी, नास्तिक।
  • मद = अहंकार, घमंड।
  • तजो = छोड़ना।
  • मरकट = बंदर।
  • पयपान = दूध पिलाना।
  • पाहन = पत्थर।
  • कागहि = कौआ।
  • कारीकामोरी = काला कम्बल।
  • अरगजा = चन्दन।
  • दूजो = दूसरा।
  • भूषन = गहना ।
  • खल = दुष्ट ।
  • खर = गधा।
  • पतित = गिर हुआ।
  • कुबुद्धि = बुरे विचार ।
  • रीतो = खाली हो जाना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 1 सूर के पद

प्रसंग – प्रस्तुत पद में श्री कृष्ण के अनन्य भक्त सूरदासजी ने कई उदाहरण देकर बतलाया है कि जो ईश्वर के विरोधी हैं, उनका साथ छोड़ देने में ही भलाई है।

व्याख्या – सूरदास जी ईश्वर से विमुख लोगों (नास्तिकों) का साथ छोड़ देने के लिए कहते हैं। वे अपने मन को संबोधित करते हुए कहते हैं – हे मन, तू ऐसे लोगों का साथ छोड़ दे जो ईश्वर के विरोधी (नास्तिक) हैं। ऐसे लोगों के साथ से मन मे बुरे विचार पैदा होते हैं तथा भगवान के भजन-कीर्तन में बाधा पड़ती है। ऐसे लोग अपना स्वभाव नहीं छोड़ते। किसी भी उपदेश या शिक्षा से उन्हें सुधारा नहीं जा सकता। वे कभी ईश्वर भक्त (आस्तिक) नहीं हो सकते। वे काम, क्रोध, अहंकार, लोभ तथा अज्ञान में रातों दिन लिप्त रह कर आनंदित रहते है। जिस प्रकार सर्प को चाहे जितना दूध पिलाया जाये, पर वह अपना विष नहीं छोड़ता। कौआ को कपूर खिलाने पर भी वह कठोर वाणी ही बोलता है। कुत्ते को पवित्र गंगा जल में स्नान कराने से भी कोई लाभ नहीं होता। वह फिर गंदगी में ही मुँह डालता है। गधे को सुगंधित चंदन से लेप करने पर भी विद्वान नहीं बन जाता, फिर कीचड़ में लोटता है। बन्दर के शरीर में सुन्दर आभूषण व्यर्थ है, वह तुरंत तोड़-फोड़ कर फेंक देता है।

कठोर पत्थर पर बाण का कोई असर नहीं पड़ता। तरकश के सारे बाण खत्म हो जाते है, पर वे पत्थर को बेध नहीं पाते। काले कम्बल पर भी दूसरा रंग नहीं चढ़ संकता। इसी प्रकार ईश्वर से विमुख (नास्तिक) लोगों के स्वभाव को नहीं बदला जा सकता। वे कभी ईश्वर भक्त नहीं बन सकते।

पद 3.
जसुदा मदन गुपाल सोवाबै।
देखि सयन गति त्रिभुवन कपै ईस बिरंचि भ्रमावै।
असित अरून
सित आलस लोचन उभय पलक परिआवै।
जनु रवि गत संकुचित कमल जुग निसि अलि उड़न न पावै।
स्वास उदर उरसति यौं मानौ दुगध सिंधु छबि पाबै।
नाभि सरोज प्रगट पदमासन उतरि नाल पछितावै।।
कर सिर तर करि स्याम मनोहर अलक अधिक सोभावै।
सूरदास मानौ पन्नगपति प्रभु ऊपर फन छाबै।

शब्दार्थ :

  • जसुदा = यशोदा।
  • गति = दशा, परिणाम।
  • मदन गुपाल = श्रीकृष्ण।
  • अलि = भौंरा।
  • सयन = निद्रा लेने की क्रिया।
  • संकुचित = सिकुड़ना।
  • बिरंचि = बह्मा।
  • उरसति = हाय।
  • भ्रमावै = भ्रमित करना।
  • छवि = शोभा।
  • असित = काला, श्याम।
  • सरोज = कमल।
  • अरुन = लाल।
  • पदमासन = कमल का आसन।
  • सित = श्वेत, सफेद।
  • पन्नगपति = शेषनाग।
  • लोचन = आँख।
  • मनोहर = सुन्दर ।
  • जुग = दो।
  • ईस = महादेव, शिव।
  • अलक = केश, लट, बाल।
  • छाबै = शोमायमान।

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प्रसंग – प्रस्तुत पद में सूरदास जी ने भगवान कृष्ण की निद्रा लेने की क्रिया के प्रभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या – माता यशोदा बालक कृष्ण को सुला रही हैं। बालक कृष्ण की निद्रा लेने (सोने) की क्रिया (दशा) को देखकर प्रलय की आशंका से तीनों लोक भयभीत होकर काँपने लगते हैं। यहाँ तक कि महादेव शिव तथा ब्रह्मा भी भ्रमित हो जाते हैं। कृष्ण नींद के आलस्य से अपनी श्वेत, श्याम, रतनार (लाल) आँखों के पलको को हिलाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे सूर्य के डूबने पर कमल की पंखुरियाँ सिकुड़ गई हों और उसमें रसपान का लोभी भौरा बन्दी बन गया हो। वह उड़ नहीं पाता। साँसें लेते समय उनका हुदय इस प्रकार लगता है मानों दूध का समुद्र शोभायमान हो रहा हो। उनकी नाभि में कमल पदमासन के रूप में प्रतीत होता है। वह कमल की डंडी से उतर कर पछताने लगता है। कृष्ण अपने सिर के नीचे हाथ रख कर सो रहे हैं। उनकी अलकें अत्यधिक शोभायमान लग रही है। उस समय ऐसा लग रहा था मानो शेषनाग प्रभु कृष्ण के ऊपर अपना फण फैलाए हुए शोभित हो रहे हैं।

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