WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 6 उष्मा

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Physical Science Book Solutions Chapter 6 उष्मा offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Physical Science Chapter 6 Question Answer – उष्मा

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
क्या पदार्थों के अवस्था परिवर्तन के समय उनका तापमान परिवर्तित होता है ?
उत्तर :
नहीं, पदार्थों के अवस्था परिवर्तन के समय उनका तापमान अपरिवर्तित रहता है।

प्रश्न 2.
किसी वस्तु में उष्मा की मात्रा उसके द्रव्यमान पर किस प्रकार निर्भर करती है ?
उत्तर :
किसी वस्तु में उपस्थित उष्मा की मात्रा इसके द्रव्यमान के सीधा समानुपाति होती है।

प्रश्न 3.
जल का घनत्व 4° C पर कितना होता है ?
उत्तर :
4° C पर जल का घनत्व 1 g / c.c. होता है।

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प्रश्न 4.
कैलोरी किसकी इकाई है।
उत्तर :
उष्मा की।

प्रश्न 5.
एक कैलोरी का मान कितना जूल होता है ?
उत्तर :
4.2 d

प्रश्न 6.
4.2 × 103 जूल कितना कैलोरी के बराबर होता है ?
उत्तर :
1000

प्रश्न 7.
उष्मा की मात्रा की इकाई क्या है ?
उत्तर :
उष्मा की मात्रा की इकाई कैलोरी है।

प्रश्न 8.
कार्य, ऊर्जा और उष्मा की व्यावहारिक इकाई क्या है ?
उत्तर :
जूल।

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प्रश्न 9.
4° C तापमान के ऊपर जल को गर्म करने पर उसके आयतन में क्या परिवर्तन होता है ?
उत्तर :
जल को 4° C के ऊपर गर्म करने पर इसका आयतन बढ़ता है।

प्रश्न 10.
कैलोरी एवं जूल में क्या संबंध है ?
उत्तर :
1 कैलोरी = 4.1855 जूल = 4.2 जूल

प्रश्न 11.
औद्योगिक शहर में शीतकाल में अक्सर क्या देखा जाता है ?
उत्तर :
औद्योगिक शहर में शीतकाल के समय अक्सर कुहरा देखा जाता है।

प्रश्न 12.
वाष्पन से क्या उत्पन्न होता है ?
उत्तर :
वाष्पन से प्रशीतन उत्पन्न होता है।

प्रश्न 13.
बर्फ के पिघलने की गुप्त उष्पा कितनी होती है ?
उत्तर :
80 कैलोरी/ग्राम।

प्रश्न 14.
जल के वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा कितनी होती है ?
उत्तर :
540 कैलोरी /ग्राम।

प्रश्न 15.
जूल/किलोग्राम किसका मात्रक है ?
उत्तर :
गुप्त उष्मा।

प्रश्न 16.
जूल के नियम के अनुसार W = ? है।
उत्तर :
dH

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प्रश्न 17.
किसी वस्तु पर कार्य करने पर उसके तापमान में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर :
किसी वस्तु में उष्मा के प्रवेश से तापमान में वृद्धि होंती है, जो कार्य में रुपान्तरित हो जाता है अर्थात् कार्य एवं तापमान समानुपाती होते है ।

प्रश्न 18.
गर्मी के दिनों में गली में जल छिड़कने से क्या होता है ?
उत्तर :
ठण्डक उत्पत्र होती है।

प्रश्न 19.
उष्मा क्या है ?
उत्तर :
उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है जो पदार्थो के संघात या आपस में घर्षण के फलस्वरूप उत्पन्न होती है।

प्रश्न 20.
SI पद्धति में उष्मा की इकाई क्या है ?
उत्तर :
जूल

प्रश्न 21.
तापमान को किस यंत्र से मापते हैं?
उत्तर :
थर्मामीटर से तापमान को मापा आता है।

प्रश्न 22.
अवस्था परिवर्तन के समय खर्च उष्मा को क्या कहते हैं?
उत्तर :
गुप्त उष्मा के अवस्था परिवर्तन के समय खर्च उष्मा कहते हैं।

प्रश्न 23.
ऊष्मा की व्यावहारिक इकाई S.I. मात्रक में क्या है?
उत्तर :
जूल।

प्रश्न 24.
ऊष्मा मापने वाले यंत्र का क्या नाम है?
उत्तर :
कैलोरीमीटर।

प्रश्न 25.
C.G.S. पद्धति में कार्य का इकाई क्या है?
उत्तर :
अर्ग।

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प्रश्न 26.
ऊष्मा ऊर्जा के रूपन्तरण गतिज ऊर्जा में होता है। उसका एक उदारहण दो।
उत्तर :
वाष्म इंजन।

प्रश्न 27.
भाप की गुप्त 537 cal / gm इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर :
भाप की गुप्त उष्मा 537 cal / g है। इस कथन का तात्पर्य यह है कि 100° C की 1 ग्राम भाप को 100° C के 1 ग्राम जल में परिवर्तित करने पर 537 कैलोरी उष्मा प्राप्त होगी।

प्रश्न 28.
उष्मा को किस यंत्र के माध्यम से मापा जाता है?
उत्तर :
Calorimeters

प्रश्न 29.
यांत्रिक तुल्यांक का मान C.G.S. पद्धति में क्या है?
उत्तर :
4.2 × 107 erg / cal.

प्रश्न 30.
उष्मा ग्रहण करने बाद वस्तु में क्या परिवर्तन आता है?
उत्तर :
उष्मा ग्रहण करेन बाद वस्तु के अवस्था में परिवर्तन आता है ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
किसी वस्तु में उपस्थित उष्मा की मात्रा किन-किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
किसी वस्तु में उपस्थित उष्मा की मात्रा (Q), उसके द्रव्यमान (mass) विशिष्ट उष्मा (specific heat) तथा तापमान (temperature) पर निर्भर करती है। अर्थात् Q = mst

प्रश्न 2.
गुप्त उष्मा को गुप्त उष्मा क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
गुप्त उष्मा को गुप्त उष्मा कहने का कारण : चूँकि गुप्त उष्मा के द्वारा केवल पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन होता है तथा पदार्थ का तापक्रम अपरिवर्तित रहता है, इसीलिए गुप्त उष्मा को गुप्त उष्मा कहा जाता है।

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प्रश्न 3.
वाष्पशील एवं अवाष्पशील पदार्थ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
वाष्पशील पदार्थ (Volatile substances) : जिन द्रवो के वाष्पीकरण की दर अधिक होती है, उन द्रवों को वाष्पशील द्रव कहते हैं। वाष्पशील द्रवों का b.p. कम होता है। जिस द्रव का b.p. जितना ही कम होगा वह द्रव उतना ही वाष्पशील होगा। उदाहरण के लिए क्लोरोफार्म, स्मिट, ईथर आदि।
अवाष्पशील पदार्थ (Non-Valatile substances) : जिन द्रवों के वाष्पीकरण की दर कम होती है, उन द्रवो को अवाष्पशील कहते हैं। ऐसे द्रवों का b.p. अधिक होता है। उदाहरण के लिए जल, गिसरीन, तेल आदि।

प्रश्न 4.
उष्मा से आप क्या समझते हैं। इसकी S.I. पद्धति इकाई क्या होती है ?
उत्तर :
उष्मा (Heat) : हम अपने दैनिक जीवन में गर्मी और ठंडक का अनुभव करते हैं। बर्फ के टुकड़े को स्पर्श करने पर ठंडक का अनुभव होता है जबकि गर्म जल को स्पर्श करने पर गर्मी का अनुभव होता है। इसी प्रकार की अनेक घटनाएँ हमारे दैनिक जीवन में घटती हैं तथा हम उनका अनुभव करते हैं। उष्मा को ग्रहण कर वस्तुएँ गर्म हो जाती हैं और उष्मा को त्याग कर वस्तुएँ ठण्डी हो जाती हैं। अत: उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है, जिसको ग्रहण कर वस्तुएँ गर्म और त्याग कर ठण्डी हो जाती हैं।
S.I. प्रणाली में उष्मा की इकाई जूल है।

प्रश्न 5.
उष्माभीति का सिद्धान्त किन शर्तो पर लागू होता है ?
उत्तर :
उष्माभीति का सिद्धान्त निम्नलिखित शर्तों पर लागू होता है –
(i) प्रयोग बंद निकाय में होना चाहिए, जिससे वातावरण से उष्मा का आदान प्रदान न हो सके।
(ii) गर्म एवं ठंडी वस्तुएँ एक दूसरे के सम्पर्क मे होनी चाहिए।

प्रश्न 6.
उष्मा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उष्मा (Heat) : उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है जो पदार्थ के अणुओं की गति से उत्पन्न होती है तथा जिसके कारण किसी वस्तु के गर्म या ठण्डा होने का बोध होता है।

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प्रश्न 7.
विशिष्ट उष्मा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
विशिष्ट उष्मा (Specific heat) : विभिन्न पदार्थों में उष्मा धारण करने की क्षमता अलग-अलग होती है। मात्रा तथा तापक्रम समान होते हुए भी जिस गुण के कारण वस्तुओं में उष्मा ग्रहण या त्याग करने की क्षमता अलग-अलग होती है, उस गुण को विशिष्ट उष्मा कहते हैं।-यह पदार्थ का एक मौलिक गुण है।
किसी पदार्थ की इकाई मात्रा का तापक्रम 1° C बढ़ाने में जितनी उष्मा की आवश्यकता पड़ती है, उष्मा की इस मात्रा को उस पदार्थ की विशिष्ट उष्मा (Specific Heat) कहते हैं।

प्रश्न 8.
संघनन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संघनन या द्रवण (Condensation or liquification) : उष्मा त्याग कर किसी पदार्थ की गैसीय अवस्था से द्रव अवस्था में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं। वह तापक्रम जिसपर कोई पदार्थ गैसीय अवस्था से द्रव अवस्था में बदलता है, उस तापक्रम को संघनन बिन्दु (Condensation point) कहते हैं।

प्रश्न 9.
कुहरा तथा कुहासा क्या है ?
उत्तर :
ओस या कुहरा (Dew) : रात्रि के समय पृथ्वी द्वारा उष्मा विकरित (Radiate) होने लगती है जिसके कारण पृथ्वी के आस-पास की वायु ठण्डी होने लगती है। जैसे-जैसे तापक्रम घटता है, वायु में उपस्थित जलवाष्प से वायु संतृप्त (saturated) होने लगती है। ओसांक (Dew Point) से और कम वायु का तापक्रम होने पर वायु से कुछ जलवाष्प घनीभूत होकर घासों,पेड़ों की पत्तियों आदि पर जल के रूप में जमा हो जाता है। उसे ही ओस (Dew) कहते हैं।
कुहासा या ओसांक (Dew Point) : जिस तापक्रम पर किसी निश्चित परिमाण वाली वायु, उसमें उपस्थित जलवाष्प के द्वारा संतृप्त हो जाती है, उस तापक्रम को ओसांक (Dew Point) कहते हैं।

प्रश्न 10.
मिट्टी के पात्र में रखा जल गर्मी के दिनों में क्यों ठंडा रहता है ?
उत्तर :
गर्मी के दिनों में मिट्टी के घड़े में रखा पानी ठंडा हो जाता है। कारण मिट्टी के बर्तन में बहुत से बारीक छेद (Pores) रहते हैं जिससे होकर पानी बर्तन की बाहरी सतह पर आकर (हवा के सम्पर्क में आने से) वाष्प में बदलता रहता है। वाष्प में बदलने के लिए आवश्यक गुप्त उष्मा पात्र तथा पात्र के अन्दर स्थित जल से ली जाती है। फलस्वरूप जल ठंडा हो जाता है।

प्रश्न 11.
संतृप्त जल वाष्प से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संतृप्त वाष्प (Saturated vapour) : जब किसी निश्चित आयतन वाली वायु में अधिकतम सम्भव मात्रा में वाष्प उपस्थित हो, तो उस वाष्प को संतुप्त वाष्प कहते हैं।

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प्रश्न 12.
ओस किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ओस (Dew) : वायुमण्डल के वायु में वाष्प धारण करने की क्षमता वायुमण्डल के तापक्रम पर निर्भर करती है। वायुमण्डल का तापक्रम अधिक रहने पर वायु में वाष्प ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है। दिन में सूर्य की गर्मी के प्रभाव से तापक्रम अधिक रहता है, जिससे वायुमण्डल असंतृप्त रहता है। रात के समय वायुमण्डल का तापक्रम कम हो जाता है जिससे पृथ्वी तथा पृथ्वी से सटी वस्तुएँ उष्मा खोकर ठंडी हो जाती हैं। वायुमण्डल का तापक्रम ओसांक (Dew point) से कम हो जाने पर वायुमण्डल की वायु सघनित होकर छोटे-छोटे जल कणों में बदल कर घास, पेड़ की पत्तियों आदि पर जमा हो जाती है। इसी जल को ओस (Dew) कहते हैं।

प्रश्न 13.
ओस पड़ने के लिये कौन-सी स्थिति अनुकूल होती है ?
उत्तर :
ओस के बनने की आवश्यक शर्तें (Essential requirements for formation of Dew) :
आकाश के बादलरहित और स्वच्छ रहने पर पृथ्वी से उष्मा का विकिरण तेजी से होता है और पृथ्वी जल्दी ठंडी हो जाती है। अत: भू-पृष्ठ से लगी वायु का तापक्रम ओसांक (Dew point) से कम हो जाता है और ओस जमने की क्रिया आरम्भ हो जाती है।
वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा अधिक होने पर वायु जल्दी संतृप्त होती है और ओस का बनना तीव्र हो जाता है।
पृथ्वी के धरातल के समीप उष्मा के अच्छे विकिरण और उष्मा की कुचालक वस्तुओं की उपस्थिति से ओस बनने की क्रिया तीव्र हो जाती है।

प्रश्न 14.
समुद्री प्रदेश में गर्मी ज्यादा तकलीफदेह क्यों होती है ?
उत्तर :
समुद्री प्रदेशों में गर्मी के मौसम में वायुमण्डल का तापमान बढ़ने से सामुद्रिक जल का वाष्पीकरण अधिक होता है जिससे वायु. की आर्द्रता बढ़ जाती है। इसके फलस्वरूप शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर में बराबर चिपचिपाहट रहती है। इसी कारण से समुद्री प्रदेशों गर्मी ज्यादा तकलीफदेह होती है।

प्रश्न 15.
उष्मा गति का प्रथम नियम क्या है ?
उत्तर :
उष्मा गति का प्रथम नियम : जूल नामक वैज्ञानिक ने अपने प्रयोगों द्वारा एक सम्बन्ध स्थापित किया जिसके अनुसार ‘जब की यांत्रिक कार्य (Mechnical work) उष्मा में या उष्मा कार्य में बदलंती है तो वे एक दूसरे के समानुपाती होते हैं।’ यह उष्मा गति का प्रथम नियम (first law of thermodynamics) मी कहलाता है।

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प्रश्न 16.
गुप्त उष्मा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
गुप्त उष्मा (Latent Heat) : स्थिर तापक्रम पर किसी पदार्थ के इकाई मात्रा द्वारा अवस्था परिवर्तन के लिए जितनी उष्मा शोषित की जाती है या त्यागी जाती है, उष्मा के इस परिमाण को उस पदार्थ की गुप्त उष्मा कहते हैं।

प्रश्न 17.
संतुप्त वाष्प से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
संतुप्त वाष्प (Saturated vapour) : जब किसी निश्चित आयतन वाली वायु में अधिकतम सम्भव मात्रा में वाष्प उपस्थित हो, तो उस वाष्प को संतुप्त वाष्प कहते हैं।

प्रश्न 18.
जल का असंगत प्रसार क्या कहलाता है ?
उत्तर :
सामान्यत: गर्म करने पर सभी द्रवों में प्रसार होता है और ठंडा करने पर वे सिकुड़ जाते हैं किन्तु जल के प्रसार की अपनी मौलिक विशेषता है। यदि पानी को धीरे-धीरे ठंडा किया जाए तो 4° C तक उसका आयतन धीरे-धीरे कम होता है, परन्तु ताप 4° C के बाद पानी का आयतन बढ़ने लगता है।

प्रश्न 19.
कार्य तथा उष्मा में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
कार्य एवं उष्मा में समानुपाती सम्बन्ध (Relation between equivalence of work and heat) : हम जानते हैं कि किसी भी मशीन द्वारा उत्पन्न उष्मा (कार्य के दौरान) उस मशीन द्वारा किए गए कार्य के समानुपाती होता है। इस सम्बन्ध को उष्मा का यांत्रिक समानुपात कहते हैं। अर्थात्
W ∝ W
या, W = JH
जहाँ W = कार्य जूल में (J)
J = स्थिरांक = 4.18 Joules/Calories (J / C ) ‘J’ को उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक (Mechanical equivalent of heat)
H = उत्पन्न उष्मा (कैलोरी)
इस समीकरण का उपयोग कार्य एवं कार्य के समय उत्पत्र ऊर्जा प्रवाह (उष्मा) की माप करने में किया जाता है। विपरीत क्रम में भी समीकरण का उपयोग किया जा सकता है।
उदाहरण – H= \(\frac{W}{J}\) या W = JH ;[J=4.18 J* /. cal] J* = Joule.

प्रश्न 20.
वाष्पन की गुप्त उष्मा से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
वाष्पन की गुप्त उष्मा : प्रामाणिक दबाव पर उष्मा की वह मात्रा जो किसी इकाई मात्रा वाले द्रव को क्वथनांक पर बिना तापक्रम बदले ही द्रव अवस्था से वाष्प अवस्था में परिणत कर दे।

प्रश्न 21.
कैलोरीमिति का सिद्धान्त लिखो।
उत्तर :
कैलोरीमिति का सिद्धान्त (Principle of Calorimetry) : जब कैलोरीमीटर के अंदर विभित्र तापमान की वस्तुओं को रखा जाता है तो उष्मा गर्म वस्तु से ठंडी वंस्तु की तरफ प्रवाहित होती है एवं उष्मा का यह प्रवाह तब तक जारी रहता है, जब तक कि दोनों वस्तुओं का तापमान समान न हो जाय। यदि यह मान लिया जाय कि कैलोरी मीटर के अंदर विभिन्न तापमान वाली वस्तुओं के रखने से बाहर से उष्मा न कैलोरीमीटर के अन्दर आ रही है और न तो अंदर की उष्मा कैलोरीमीटर से बाहर जा रही है तथा रखी गयी वस्तुओं के बीच कोई रासायनिक प्रतिक्रिया भी नहीं हो रही है तो ऊर्जा की अविनाशिता के सिद्धांत के अनुसार –
गर्म वस्तु द्वारा छोड़ी गई उष्मा = ठंडी वस्तु द्वारा ग्रहण की गई उष्मा।
∴ उष्मा त्याग = उष्मा ग्रह्रण
यही कैलोरीमिति का सिद्धांत है।

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प्रश्न 22.
जूल का क्या नियम है ?
उत्तर :
जूल का नियम (Joule’s law) : किसी यांत्रिक कार्य के फलस्वरूप उष्मा उत्पन्न होती है या उष्मा के योग से कार्य सम्पादित होता है तो सम्पादित कार्य तथा उत्पत्र उष्मा एक दूसरे के समानुपाती होती हैं।
यदि W कार्य के द्वारा H उष्मा उत्पत्न होती है या H उष्मा से W कार्य सम्पादित होता है तो जूल के नियमानुसार W α H Or W = JH (जहाँ J एक स्थिरांक. (Constant)) है जिसे उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक या जूल का तुल्यांक (Mechanical equivalent of heat or Joule’s equivalent) कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
अणु गति सिद्धान्त के आधार पर उष्मा की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
अणु गति सिद्धान्त के अनुसार पता चलता है कि प्रत्येक पदार्थ अणुओं से मिलकर बने होते हैं। अणु सदैव अन्तर आणविक स्थान (Intermolecular space) में गति करते रहते हैं। इन अणुओं की मात्रा और वेग के कारण ही इनमें गतिज ऊर्जा पायी जाती है। यही गतिज ऊर्जा अणुओं से मिलकर बने पदार्थ की तापीय ऊर्जा का साधन बन जाती है। अतः इस सिद्धान्त के अनुसार उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है, जो पदार्थ के अणुओं की गति से प्राप्त होती है। किसी वस्तु के तापमान के घटने या बढ़ने का कारण उसके अणुओं की गति का घटना या बढ़ना है।
अत: उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है जो पदार्थ के अणुओं की गति से प्राप्त होती है तथा जिसके कारण वस्तुओं के गर्म या ठंडे होने का बोध होता है।

प्रश्न 2.
पदार्थों के अवस्था परिवर्तन का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर :
उष्मा द्वारा पदार्थ को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित करने की क्रिया को अवस्था परिवर्तन कहते हैं। पदार्थ के उष्मा ग्रहण और निष्कासन के फलस्वरूप अवस्था परिवर्तन होता है जैसे – बर्फ को गर्म करने पर जल तथा वाष्प (गैस) में बदलता है। बर्फ एक ठोस पदार्थ है, उष्मा पाकर जल (द्रव) में बदल जाता है। जल को उष्मा देने पर वाष्प (गैस) में बदलता है।

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प्रश्न 3.
पदार्थों का ठोस से गैस में बदलने की प्रक्रिया को ग्राफ द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर :
किसी ठोस पदार्थ को गर्म करने पर ठोस से वाष्प में बदलने की क्रिया को यदि तापमान वृद्धि तथा नियत दर से उष्मा देने के समय के बीच ग्राफ खींचा जाय तो ग्राफ चित्र के अनुसार होगा। O बिन्दु पर पदार्थ ठोस अवस्था में है। भाग O A ठोस की तापमान वृद्धि को प्रदर्शित करता है, बिन्दु A के संगत तापमान Tm पदार्थ का गलनांक है। भाग A B में ठोस अपने गलनांक पर द्रव अवस्था में बदल रहा है। B बिन्दु पर सम्पूर्ण ठोस द्रव रूप में है। A से B के मध्य पदार्थ द्वारा ग्रहण की गयी उष्मा गुप्त उष्मा है क्योंकि इस दौरान पदार्थ के अवस्था परिवर्तन के समय ग्रहण की गयी उष्मा का थर्मामीटर द्वारा प्रदर्शन नहीं होता। इसे गलन की गुप्त उष्मा कहते हैं।

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भाग BC पुन: द्रव के तापमान वृद्धि को प्रदर्शित करता है। बिन्दु C के संगत तापमान द्रव का क्वथनाक TB है। इस तापमान पर द्रव वाष्प में बदलने लगता है। भाग CD में द्रव अपने क्वथनांक पर वाष्प अथवा गैस में बदलता है। पुन: इस दौरान द्रव द्वारा ग्रहण की गयी उष्मा का प्रदर्शन थर्मामीटर द्वारा नहीं होता है। इस दौरान ग्रहण की गयी उष्मा को वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा कहते हैं। D बिन्दु पर सम्पूर्ण द्रव वाष्ष में बदल जाता है। भाग DE पुन: वाष्ष की तापमान वृद्धि को दर्शाता है।

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प्रश्न 4.
संतृप्त एवं असंतृप्त वाष्प क्या है ? ओस का बनना कैसे संभव होता है ?
उत्तर :
संतृप्त एवं असंतृप्त वाष्प (Saturated and unsaturated vapour) : जब किसी निश्चित आयतन वाली वायु में अधिकतम सम्भव मात्रा में वाष्प (vapour) उपस्थिति हो, तो उस वाष्प को संतृप्त वाष्प (Saturated vapour) कहते हैं। जब किसी निश्चित आयतन वाली वायु (given volume of air) में अधिकतम सम्भव मात्रा से कम मात्रा में वाष्प उपस्थित हो, तो उस वाष्प को असंतृप्त वाष्प (unsaturated vapour) कहते हैं। किसी स्थान पर वायु में उपस्थित जल वाष्प (Water vapour) की मात्रा को उस स्थान की आर्द्रता (humidity) कहते हैं।

ओस का बनना : पृथवी के ऊपरी भाग में जब किसी कारण से वायु का तापक्रम कम हो जाता है तो वायु जलवाष्ष से संतृप्त होने लगती है और जब वायु का तापक्रम ओसांक से कम हो जाता है तो संतृप्त वायु घनीभूत होकर वायुमण्डल में तैरते हुए धूलकण या धूम्र कणों पर छोटे-छोटे जल के कणों के रूप में संघनित हो जाती है और हवा में तैरती रहती है उसे कुहासा कहते हैं। कुहासा Mist के घने रूप को कोहरा (Fog) कहते हैं। तेज धूप या दोपहर के समय कोहरा समाप्त हो जाता है क्योंकि धूल या धूम्र कणों पर संघनित जल कणों का वाष्पीकरण हो जाता है।

प्रश्न 5.
जल के असंगत प्रसार को ग्राफ द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर :
जल का असंगत प्रसार (Anomalous expansion of water) : सामान्य वायुमण्डल दबाव पर प्राय: सभी द्रव गर्म किए जाने पर आयतन में बढ़ते हैं, लेकिन जल को 0° C से 4° C तक गर्म करने पर पहले इसका आयतन घटता है तथा 4° C के बाद इसका आयतन बढ़ना शुरू होता है। जैसा कि चित्र (a) में ग्राफ द्वारा प्रदर्शित है।

इसका अर्थ है कि जल के एक निश्चित द्रव्यमान का आयतन 4° C पर सबसे कम होता है, अर्थात् 4° C पर जल का घनत्व सबसे अधिक (1.0000 ग्राम/सेमी०) होती है।

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चित्र (b) में जल के घनत्व का तापमान के साथ परिवर्तन दिखाया गया है। 0° C से 4° C तक जल का घनत्व बढ़ता है, 4° C पर घनत्व सबसे अधिक हो जाता है तथा 4° C से ऊपर तापमान बढ़ाने पर घनत्व पुन घटने लगता है। जब जल को 4° C से नीचे ठण्डा करते है, तो उसका आयतन बढ़ता जाता है। जब वह 0° C पर जम कर बर्फ बन जाता है, तो बर्फ का आयतन, जल के आयतन से अधिक होता है। यही कारण है कि बर्फ का घनत्व, जल के घनत्व से कम होता है तथा बर्फ जल पर तैरता है। इस गुण के दैनिक जीवन में अनेक प्रभाव पाये जाते हैं।

प्रश्न 6.
जाड़े के समय में तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से भी नीचे पहुँचाने पर भी जलीय जन्तु जीवित रहते हैं। कैसे?
उत्तर :
ठंडे प्रदेशों में जब वायुमण्डल का तापमान 0° C से कम हो जाता है तो तालाबों, झीलों आदि का तापमान घटकर पहले 4° C पहुँच जाता है क्योंकि 4° C पर जल का घनत्व सबसे अधिक होता है। जल की ऊपरी सतह का तापमान धीरेधीरे और कम हो जाता है और 0° C पर पहुँच जाता है। फलत: जल ठंडा होकर बर्फ में बदलने लगता है। बर्फ बनने पर जल के आयतन में वृद्धि होती है। अतः उसका घनत्व कम हो जाता है। बर्फ का घनत्व नीचे स्थित 4° C वाला जल रहता है। वह जमने नहीं पाता और इस तरह उस जल में जलीय जन्तु जीवित रहते हैं।
विभिन्न प्रकार की गुप्त उष्मा निम्नलिखित हैं –
पिघलने की गुप्त उष्मा (Latent heat of fusion) : किसी पदार्थ द्वारा ठोस से द्रव में बदलते समय तापमान में परिवर्तन के बिना ली गयी उष्मा की मात्रा को पिघलने को गुप्त उष्मा कहते हैं।
जमने की गुप्त उष्मा (Latent heat of solidification) : किसी पदार्थ द्वारा द्रव से ठोस में बदलते समय बिना तापमान में परिवर्तन के निकाली गयी उष्मा की मात्रा को जमने की गुप्त उष्मा कहते हैं।
वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा (Latent heat of vaporisaiton) : किसी पदार्थ द्वारा द्रव से वाष्प में बदलते समय बिना तापमान में परिवर्तन के ली गयी उष्मा की मात्रा को वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा कहते हैं।
संघनन की गुप्त उष्मा (Latent heat of condensation) : किसी पदार्थ द्वारा वाष्प से द्रव में बदलते समय बिना तापमान में परिवर्तन के त्यागी गयी उष्मा की मात्रा को संघनन की गुप्त उष्मा कहते हैं।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 6 उष्मा

प्रश्न 7.
जल के आयतन और तापक्रम को ग्राफ चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए कि जल के आयतन में उष्मा ग्रहण या त्याग द्वारा असामान्य व्यवहार होता है ?
उत्तर :
जल का असामान्य फैलाव (Anomalous Expansion of Water) : सभी द्रव गर्म करने पर फैलते हैं। लेकिन जल को जब 0° C से 4° C तक गर्म किया जाता है, तो जल का आयतन घटता है और यह 4° C तक सबसे कम हो जाता है। किन्तु जब तापमान 4° C से बढ़ता है, तब जल का आयतन पुन: बढ़ने लगता है। अर्थात् तब जल का घनत्व 4° C पर सर्वाधिक होता है। ठीक इसी प्रकार जल को जब गर्म से ठण्डा किया जाता है, तो जल का आयतन 4° C तक घटता है और 4° C पर जल का आयतन सबसे कम होता है। आगे 4° C से कम 0° C तक ठण्डा (Cooling) किया जाता है तो जल का आयतन घटने की जगह बढ़ने लगता है और जल का घनत्व 0° C पर सबसे कम हो जाता है।

जल के लिए आयतन-ताप वक्र (Volume – Temperature curve for water) : जल को जब ठण्डा किया जाता है, तो इसका आयतन 4° C तक घटता है। 4° C के नीचे जल का आयनिक स्वभाव (lonic nature) के कारण जल के आयतन में फैलाव होता है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 6 उष्मा 4

चित्र में देखते हैं कि 4° C के नीचे जल का आयतन बढ़ता है। अतः जल का 4° C पर सबसे अधिक घनत्व होता है। 4° C पर बर्फ का आयतन लगभग 0.93 g / ml होता है जबकि ज़ का 1.00 g / ml आयतन होता है। यही कारणा है कि बर्फ पानी के ऊपर तैरती है।
ग्राफ में हम देखते हैं कि जब जल ठंडा होकर जमता है, तब आयतन में फैलाव होता है। अर्थात् आयतन अधिक होता है। चित्र से स्पष्ट है कि 4° C पर जल का घनत्व अधिकतम 1 gm / c . c बिन्दु ‘ P ‘ होता है।

प्रश्न 8.
ठण्डे प्रदेशों में जाड़े की रातों में शहरी जल वितरण के पुराने लोहे के पाइप क्यों फट जाते हैं ? पाइप कभी-कभी फट जाते हैं ?
उत्तर :
वायुमण्डलीय तापमान के 0° C के नीचे गिर जाने पर जल के पाइप का फटना : शीत प्रधान क्षेत्रों में वायुमण्डल का तापक्रम घटकर 0° C से भी कम हो जाने पर पाइप में स्थित जल जमकर बर्फ में बदल जाता है। बर्फ़ बनने से उसके आयतन में वृद्धि होती है। आयतन बढ़ने के फलस्वरूप प्रचण्ड दाब की सृष्टि होती है और इस दबाव के फलस्वरूप लोहे के पाइप फ़ जाते हैं।

प्रश्न 9.
वाष्प से क्या समझते हैं। वाष्पन किन-किन कारकों पर निर्भर करता है ? गर्मी में पसीने से तर कपड़ा होने पर पंखे के नीचे बैठने पर ठंडक क्यों महसूसू होती है ?
उत्तर :
(i) जल (Vapour) : किसी द्रव पदार्थ को गर्म करने पर जब वह गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, तो उसे वाष्प कहते हैं। किसी द्रव पदार्थ की वाष्प वण्डरवाल के नियम का पालन करती है। किसी द्रव पदार्थ के वाष्प का तापमान क्रांतिक तापमान के बराबर या उससे कम होता है।
(ii) वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करने वाले कारक (Factors) : (a) द्रव की प्रकृति (b) द्रव का तापक्रम (c) द्रव की खुली सतह का क्षेत्रफल (d) द्रव की सतह पर वायु का दबाव।
(iii) पसीना आने पर पंखे के नीचे बैठने पर आराम मिलने का कारण यह है कि जब हम पंखे के नीचे बैठते हैं, तो हमारे शरीर के पसीने का वाष्पीकरण तेजी से होता है। इसके लिए गुप्त उष्मा हमारे शरीर से ग्रहण की जाती है, जिससे शरीर का तापमान गिरता है और हमें ठंडक महसूस होती है।

प्रश्न 10.
उष्मा को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
उष्मा की मात्रा को प्रभावित करने वाले कारक (Factors determining the quantity of heat) : चूँकि, किसी वस्तु में उष्मा की कुल मात्रा (H) = m × S × θ
जहाँ S = वस्तु की विशिष्ट उष्मा (Sp. heat) और = तापमान में परिवर्तन है।
अतः किसी वस्तु में उष्मा की मात्रा (H), निम्न तीन बातों पर निर्भर करती है।
वस्तु की मात्रा (m) पर : किसी वस्तु में उष्मा की कुल मात्रा (H) तापमान परिवर्तन (m) के समानुपाती होता है जबकि उसकी विशिष्ट उष्मा ( Sp. heat (S) ) और तापमान में परिवर्तन (θ) स्थिर हो। अर्थात् H ∝ m जबकि S और स्थिर θ हो।
तापमान परिवर्तन (θ) पर : किसी वस्तु में उष्मा की मात्रा (H) तापमान परिवर्तन (q) के समानुपाती होता है, जबकि वस्तु की मात्रा (m) और विशिष्ट उष्मा (Sp.heat (S)) स्थिर हो। अर्थात्, H ∝ θ जबकि m और s स्थिर हो।
वस्तु की विशिष्ट उष्मा (s) (या वस्तु की प्रकृति) पर : किसी वस्तु में उष्मा की मात्रा (H), वस्तु की विशिष्ट उष्मा (Sp.heat (S)) के समानुपाती होता है, जबकि वस्तु की मात्रा (m) और तापमान में परिवर्तन (θ) स्थिर हों। अर्थात् H ∝ S जबकि m और θ स्थिर हो।

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प्रश्न 11.
उष्मा गति के प्रथम नियम को लिखो।
उत्तर :
प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेम्स प्रेसकाट जूल (James Prescott Joule) ने अपने प्रयोगों के आधार पर उष्मा और कार्य में पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित किया। जिसे जूल का नियम (Joule’s law) या उष्मा गति का प्रथम नियम (First law of-Thermodynamics) कहते हैं। उनके अनुसार, जब किसी यांत्रिक कार्य के फलस्वरूप उष्मा उत्पन्न होती है या उष्मा के प्रयोग से किसी कार्य को सम्पादन किया जाता है तो सम्पादित कार्य का परिमाण तथा उष्मा एक दूसरे के सीधा समानुपाती होता है।

यदि W कार्य करने के फलस्वरूप H परिमाण की उष्मा उत्पत्न होती है या H परिमाण की उष्मा द्वारा W परिमाण का कार्य सम्पन्न होता है तो जूल के नियम के अनुसार :
W α H
W = JH (यहाँ J एक स्थिरांक है।)

यहाँ स्थिरांक J को उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक या जूल तुल्यांक कहते हैं।

प्रश्न 12.
गुप्त उष्मा को ग्राफ द्वारा चित्र सहित वर्णन करो।
उत्तर :
ग्राफ के आधार पर गुप्त उष्मा (Graph based on latent heat) : गुप्त उष्मा को ग्राफ के आधार पर वर्णन करने के लिए एक बीकर में बर्फ का चूरा लेते हैं, उसमें एक सेल्सियस थर्मामीटर को बर्फ में घुसाकर स्टैंड के सहारे लटका देते हैं। बीकर को एक त्रिपाद स्टैंड के ऊपर लोहे की जाली पर चित्रानुसार रख देते हैं, त्रिपाद स्टैंड के नीचे एक स्पिट लैम्प रखते हैं जिसकी लो लोहे की जाली पर पड़े। अब बर्फ का तापक्रम (0° C) नोट कर लेते हैं और स्मीट लैम्प को जला देते हैं और प्रत्येक मिनट पर थर्मामीटर का तापक्रम नोट करते हैं तो काफी समय तक बर्फ का तापक्रम 0° C पाते हैं जब तक पूरा बर्फ गलकर जल न बन जाये। अब धीरे-धीरे जल का तापक्रम बढ़ता मिलता है उसे नोट करते रहते हैं। काफी समय तक जल का तापक्रम 100° C मिलता है जब तक पूरा जल वाष्प न बन जाये, लेकिन इस अवस्था तक ताप नियत (100° C) बना रहता है। अब प्रत्येक मिनट पर लिये गये ताप और समय के बीच ग्राफ खींचते हैं तो निम्न प्रकार की आकृति मिलती है।

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ग्राफ का O-A भाग निश्थित ताप 0° C पर बर्फ पिघलकर जल बनने में और B-C भाग निध्धित ताप 100° C पर जल का उबलकर वाष्प बनने की घटना को दर्शाता है। अवस्था परिवर्तन भाग O-A तथा B-C को अध्ययन करने पर पता चलता है कि पदार्थ को उष्मा तो मिल रही है परन्तु थर्मामीटर का ताप में कोई परिवर्तन नहीं मिलता है क्योंकि यह ताप ठोस पदार्थ के अणुओं के आकर्षण के विरुद्ध कार्य करता है जिससे पदार्थ की अवस्था बदल सके। इसी प्रकार द्रव से वाष्प बनने में यह उष्मा ऊर्जा व्यय होती है जिससे द्रव पदार्थ गैसीय अवस्था में बदल सके।

प्रश्न 13.
जल का असंगत प्रसार का प्रभाव जलीय जीवन पर कैसे पड़ता है ?
उत्तर :
जल के अनियमित या अनोखे प्रसार का समुद्री जीवन पर प्रभाव (Consequences of anomalous expansion of water on marine life) : ठंडे प्रदेशों में समुद्री जीवन की सुरक्षा में जल के अनोखे प्रसार की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
ठंडे मदेशों में जाड़े के दिनों में वायु का ताप 0° C से भी कम हो जाता है। अत: वहाँ की नदियों, तालाबों, समुद्र आदि की सतह का जल ठंडा हो जाता है एवं ज़मने लगता है। यह भारी होकर नीचे चला जाता है तथा नीचे से हल्का जल ऊपर आ जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि पूरे तालाब, नदी, समुद्र आदि के जल का तापमान 4° C तक नहीं आ जाता।

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सतह पर जब जल का तापमान 4° C से नीचे आने लगता है तो इसका घनत्व कम होने लगता है। अत: जल के जमने की क्रिया ऊपर से नीचे की ओर होती है एवं ऊपरी सतह पर का जल बर्फ बन जाता है। बर्फ के निचले स्तर में 4° C तापमान पर जल उपस्थित रहता है। चूँकि बर्फ, उष्मा का कुचालक है, अतः 4° C वाले जल की उष्मा को बाहर नहीं जाने देता एवं नीचे में 4° C पर जल बना रहता है एवं वह जमने से बच जाता है। इस जल में मछलियाँ एवं अन्य जीव आसानी से जीवित रहते हैं।

प्रश्न 14.
उष्मा मापने के सिद्धान्त का वर्णन करें।
उत्तर :
उष्मा मापने का सिद्धान्त (Principle of Measurement of Heat) : कैलोरीमीटर ताँबे का एक बेलनाकार पात्र होता है जिसमें द्रव को हिलाने के लिए एक ताँबे का विडोलक (stirrer) लगा रहता है। उष्मा के क्षय रोकने के लिए पात्र के चारों तरफ रूई या ऊन की मोटी गद्दी लगी रहती है। पात्र का मुँह लकड़ी के ढक्कन से ढंका रहता है तथा ढक्कन के मध्य छिद्र बना होता है जिसमें थर्मामीटर लगा रहता है। यह सारा उपकरण एक अन्य लकड़ी या ताँबे के बेलनाकार प्रात्र में रखा रहता है।
माना कि A और B दो वस्तुओं को एक दूसरे के सम्पर्क में रखा जाय तथा वस्तु A का तापक्रम वस्तु B के तापक्रम से अधिक हो तो वस्तु A उष्मा का त्याग करेगी तथा वस्तु B उष्मा ग्रहण करेगी।
फिर माना कि वस्तु A की मात्रा = M1, विशिष्ट उष्मा = S1, तथा तापक्रम = t1 है।
वस्तु B की मात्रा = M2, विशिष्ट उष्मा = S2 तथा तापक्रम = t2 है।
दोनों वस्तुओं को एक दूसरे के सम्पर्क में रखने पर अंतिम तापक्रम t होता है।
∴ A द्वारा त्यागी गयी उष्मा की मात्रा = M1 S1(t1-t)
तथा B द्वारा ग्रहण की गयी उष्मा की मात्रा = M2 S2(t – t2)
∴ कैलोरीमिति तथा ऊर्जा की अविनाशिता के सिद्धान्त के अनुसार,
M1 S1(t1 – t) = M2 S2(t-t2)
यदि एक वस्तु की विशिष्ट उष्मा ज्ञात हो तो दूसरी की विशिष्ट उष्मा उपरोक्त समीकरण द्वारा ज्ञात की जा सकती है। यह सिद्धान्त ठोस तथा द्रवों की विशिष्ट उष्मा ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।

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प्रश्न 15.
पिघलने की गुप्त उष्मा की व्याख्या करो।
उत्तर :
पिघलने की गुप्त उष्मा (Latent heat of fusion) : किसी ठोस पदार्थ की इकाई मात्रा द्वारा ग्रहण की गयी वह उष्मा की मात्रा, जो तापक्रम में परिवर्तन किए बिना उसको ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में परिवर्तन कर देती है, उस ठोस पदार्थ के पिघलने की विशिष्ट गुप्त उष्मा कहलाती है।
बर्फ के पिघलने की गुप्त उष्मा 80 cal / gm
इस कथन का तात्पर्य यह है कि एक ग्राम बर्फ को 0° C तापक्रम पर ही ठोस अवस्था से द्रव अवस्थां में परिवर्तित करने के लिए 80 cal उष्मा की आवश्यकता होगी। यदि बर्फ की एक सिल्ली में एक छिद्र बनाकर उसमें जल भर दिया जाय तो जल का तापक्रम धीरे-धीरे घटकर 0° C हो जाएगा लेकिन जल बर्फ में परिवर्तित नहीं होगा। इसका कारण यह है कि 0° C पर 1 gm जल 80 cal उष्मा त्यागकर बर्फ में परिवर्तित होगा लेकिन यह उसी समय सम्भव है जब आस-पास का तापक्रम 0° C से कम हो। चूँकि जल के आस-पास का तापक्रम 0° C से कम नहीं रहता इसलिए जल, बर्फ के रूप में परिवर्तित नहीं होता।

प्रश्न 16.
भाप की गुप्त उष्मा की व्याख्या करो।
उत्तर :
भाप की गुप्त उष्मा : भाप की गुप्त उष्मा 537 cal / gm है। इस कथन का तात्पर्य यह है कि सामान्य वायुमण्डलीय दबाव पर 100° C तापक्रम वाले 1 gm जल को बिना तापक्रम बदले ही भाप (steam) में बदलने के लिये 537 cal उष्मा की आवश्यकता पड़ती है।
S.I. पद्धति में भाप की गुप्त उष्मा 2.555 × 10^5 joul / kg है। इस कंथन का तात्पर्य यह है कि सामान्य वायुमण्डलीय दबाव पर 100° C तापक्रम वाले 1 kg जल को 100° C तापक्रम वाले भाप में बदलने के लिए 2.555 × 106 joul उष्मा की आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 17.
पानी के असंगत प्रसार पर समुद्री जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
ठण्डे प्रदेशों का तापक्रम 0° C से कम हो जाता है उस समय नदियों तथा झीलों की ऊपरी सतह का जल जमकर बर्फ बन जाता है। जल से बर्फ का आयतन अधिक होने के कारण बर्फ का घनत्व कम हो जाता है जिसे बर्फ ऊपरी सतह पर तैरते रहता है नीचे डूब नहीं पाता है।

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नीचे स्तर के जल का तापक्रम कम होते-होते 4° C पर पहुँच जाता है जिससे जल का घनत्व सबसे अधिक हो जाता है। जिसके कारण नीचे का जल ऊपर उठकर बर्फ नहीं बन पाता और नीचे का जल द्रव रूप में बना रहता है। जिस कारण जल में पलनेवाले जीव तथा पौधे बर्फ के नीचे के जल में जिंदा तथा सजीव रह जाते है नष्ट नहीं हो पाते हैं।

प्रश्न 18.
उष्मा तथा कार्य की समानता से क्या समझते हो ?
उत्तर :
उष्मा तथा कार्य की समानता (Equivalent of heat and work) : जूल ने कार्य और उष्मा के संबंध को एक नियम द्वारा प्रस्तुत किया जिसे उष्मा-गति विज्ञान का प्रथम नियम (First law of thermodynamios) कहते हैं। यह निम्न प्रकार हैं – किसी कार्य के सम्पन्न होने से उष्मा उत्पन्न हो या उष्मा द्वारा कोई कार्य संपन्न हो, तो दोनों अवस्था में कार्य और उष्मा एक दूसरे के समानुपाती होते हैं।
यदि कार्य और उत्पन्न उष्मा का परिमाण क्रमश: W और H हो, तो –
W ∝ H ∴ W=J H; यहाँ J एक स्थिरांक है, जिसे जूल तुल्यांक या Mechanical Equivalent of Heat. कहते हैं।
उष्मा तथा कार्य की तुल्यता का परिमाणात्मक अध्ययन जूल (Joule) ने अनेक प्रयोगों द्वारा किया। उन्होंने यह देखा कि 4.2 × 103 जूल कार्य से तापमान में उतनी ही वृद्धि होती है जितनी कि 1 किलो कैलोरी उष्मा से 1 जूल ने विभिन्न पदार्थों में भिन्न-भिन्न रीतियों द्वारा कार्य करके, कार्य तथा तापमान में वृद्धि को मापा तथा प्रत्येक दशा में वही फल पाया। इस प्रकार जूल ने प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध किया कि 4.2 × 103 जूल कार्य 1 किलो कैलोरी उष्मा के तुल्य है।

प्रश्न 19.
जूल नियम क्या है ?
उत्तर :
प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेम्स प्रेसकाट जूल (James Prescott Joule) ने अपने प्रयोगों के आधार पर उष्मा और कार्य में पारस्परिक सम्बन्ध स्थापित किया जिसे जूल का नियम (Joule’s law) या उष्मा गति का प्रथम नियम (First law of Thermodynamics) कहते हैं। उनके अनुसार, जब किसी यांत्रिक कार्य के फलस्वरूप उष्मा उत्पन्न होती है या उष्मा के प्रयोग से किसी कार्य को सम्पादन किया जाता है तो सम्पादित कार्य का परिमाण तथा उष्मा एक दूसरे के सीधा समानुपाती होता है।
यदि W कार्य करने के फलस्वरूप H परिमाण की उष्मा उत्पन्न होती है या H परिमाण की उष्मा द्वारा W परिमाण का कार्य सम्पन्न होता है तो जूल के नियम के अनुसार :
W α H
W = JH (यहाँ J एक स्थिरांक है।)
यहाँ स्थिरांक J को उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक या जूल तुल्यांक कहते हैं।

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प्रश्न 20.
किसी वस्तु द्वारा ग्रहण या त्याग की गई उष्मा की मात्रा कितनी होती है ?
उत्तर :
किसी वस्तु द्वारा ग्रहण या त्याग की गई उष्मा की मात्रा का निर्धारण : तापमान में वृद्धि के लिए आवश्यक उष्मा की मात्रा, वस्तु की मात्रा के समानुपाती होता है।
∴ H α m, जब s एवं t स्थिर हो
यहाँ H = उष्मा (Heat), m = मात्रा (mass)
s = विशिष्ट उष्मा (Specific Heat), t = तापमान (Temperature)
किसी वस्तु में उष्मा की मात्रा, ताप परिवर्तन के समानुपाती होता है।
∴ H α t, जब s एवं m स्थिर हों .
समीकरण (i) एवं (ii) को संयुक्त करने पर,
H ∝ m . t
Or, H = s.m.t जहाँ s एक स्थिरांक है, जिसे पदार्थ की विशिष्ट उष्मा (Specific Heat) कहते हैं।
∴ H = m.s.t.
यदि m = 1, t = 1 हो तो H = s अर्थात् इकाई मात्रा की वस्तु का तापमान इकाई डिग्री बढ़ाने के लिए आवश्यक उष्मा की मात्रा को विशिष्ट उष्मा कहते हैं।

प्रश्न 21.
कैलोरीमिति का सिद्धान्त किन-किन शर्तो पर आधारित है ?
उत्तर :
कैलोरीमिति का सिद्धांत निम्नलिखित शर्तो पर आधारित है –
(i) कैलोरीमीटर में आस-पास के वातावरण से कोई उष्मा न तो अंदर प्रवेश करनी चाहिये एवं न ही केलोरीमीटर से बाहर जानी चाहिये।
इसके लिये कैलोरीमीटर को इस तरह सुरक्षित किया जाता है कि चालन (Conduction), संवहन (Convection) एवं विकिरण (Radiation) विधियों से उष्मा न तो कैलोरीमीटर के अंदर से बाहर और न बाहर से अंदर प्रवाहित हो पाये। कैलोरीमीटर की सतह को पॉलिश कर देने से विकिरण बिधि से उष्मा का क्षय नही होता। कैलोरीमीटर को उष्मारोधक जैकेट (Heat insulating jacket) से ढंक देने पर संवहन विधि से उष्मा का क्षय नहीं होता। कैलोरीमीटर को कार्क जैसे कुचालक से ढँक देने पर चालन एवं वाष्पीकरण विधि से उष्मा प्रवाहित नहीं हो पाती है।

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(ii) गर्म वस्तु को कैलोरीमीटर में तुरंत स्थानान्तरित कर देना चाहिए।
(iii) कैलोरीमीटर के अंदर के द्रव को लगातार हिलाते रहना चाहिए।
(iv) कैलोरीमीटर के अंदर उपस्थित प्रदार्थों का चयन ऐसा होना चाहिए कि वे आपस में रासायनिक क्रिया न करें। रासायनिक प्रतिक्रिया में हमेशा उष्मा उत्पन्न या अवशोषित होती है जिसका कैलोरीमितिक गणना में कोई भूमिका नहीं होती।

प्रश्न 22.
एक अच्छे कैलोरीमितिक द्रव के क्या गुण होने चाहिये ?
उत्तर :
एनीलिन (Aniline) में एक अच्छे केलोरीमितिक द्रव के सभी गुण पाये जाते है। अत: यह सबसे अधिक उपयुक्त कैलोरीमितिक द्रव (Best Calorimetric liquid) माना जाता है।

प्रश्न 23.
बोधगम्य उष्मा एवं गुप्त उष्मा में अन्तर क्या है ?
उत्तर :
बोधगम्य उष्मा और गप्त उष्मा में निम्नलिखित अंतर :

बोधगम्य उष्मा गुप्त उष्मा
i. यह थर्मामीटर द्वारा व्यक्त होती है। i. इसे थर्मामीटर व्यक्त नहीं कर पाता।
ii. इसके प्रभाव से ताप परिवर्तन होता है। ii. इसके प्रभाव से ताप परिवर्तन नहीं होता है।
ii. इसकी इकाई कैलोरी है। iii. इसकी इकाई कैलोरी/ग्राम है।
iv. इसका मान वस्तु की मात्रा, पदार्थ की विशिष्ट उष्मा और तापांतर पर निर्भर करता है। H = m × s × t iv. इसका मान वस्तु की मात्रा और पदार्थ की गुप्त उष्मा के ऊपर निर्भर करता है। गुप्त उष्मा = m.L

प्रश्न 24.
रेखाचित्र की सहायता से गुप्त उष्मा की प्रकृति का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रयोग : एक बीकर में बर्फ का चूरा लेते हैं। उसमें एक सेल्सियस थर्मामीटर को बर्फ में घुसाकर स्टैण्ड के सहारे लटका देते हैं। बीकर को एक त्रिपाद स्टैण्ड पर रखे लोहे की जाली पर रखकर स्पिट लैम्प की सहायता से गर्म करते हैं। सर्वप्रथम बर्फ का तापमान (0° C) नोट कर लेते हैं एवं स्पिट लैम्प के जलने के बाद प्रत्येक मिनट पर थर्मामीटर का तापमान नोट करते हैं। जब तक बर्फ पूरा पिघल नहीं जाता, तब तक बर्फ का तापमान 0° C नोट कर लेते है। अब धीरेधीरे जल का तापमान बढ़ता है एवं बहुत समय तक तापमान 100° C रहता है, जब तक पूरा जल वाष्प न बन जाये।
अब समय एवं तापमान का एक ग्राफ खींचते हैं तो प्रस्तुत ग्राफ प्राप्त होता है।
ग्राफ का O-A भाग 0° C पर बर्फ पिघलकर जल बनने को प्रदर्शित करता है एवं B-C भाग 100° C पर जल के उबलकर वाष्प बनने को दर्शाता है। अवस्था परिवर्तन भाग O-A तथा B-C को अध्ययन करने पर पता चलता है कि पदार्थ को उष्मा तो प्राप्त होती है लेकिन थर्मामीटर के ताप में परिवर्तन नहीं होता है क्योकि यह ताप ठोस पदार्थ के अणुओं के आकर्षण के विरुद्ध कार्य करता है जिससे पदार्थ की अवस्था बदल सके। इसी प्रकार द्रव से वाष्प बनने में वह उष्मा ऊर्जा व्यय होता है जिससे द्रव, गैस में बदल सके।

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प्रश्न 25.
संतृप्त वाष्प एवं असंतृप्त वाष्प में क्या अंतर है ?
उत्तर :
संतृप्त वाष्प एवं असंतृप्त वाष्प में अंतर : जब किसी निश्चित आयतन वाली वायु में अधिकतम सम्भव मात्रा में वाष्प (vapour) उपस्थिति हो, तो उस वाष्प को संतृप्त वाष्प (Saturated vapour) कहते हैं। जब किसी निश्चित आयतन वाली वायु (given volume of air) में अधिकतम सम्भव मात्रा से कम मात्रा में वाष्प उपस्थित हो, तो उस वाष्प को असंतृप्त वाष्प (unsaturated vapour) कहते हैं। किसी स्थान पर वायु में उपस्तिथ जल वाष्प (Water vapour) की मात्रा को उस स्थान की आर्द्रता (humidity) कहते हैं।
वायु में जलवाष्प के रूप में उपस्थित जल के संघनन अथवा द्रवण से कई प्राकृतिक घटनाएं जैसे – बादलों का बनना, ओस पड़ना तथा कुहरा (fog) एवं कुहासा (mist) का बनना इत्यादि हैं।

प्रश्न 26.
आपेक्षिक आर्द्रता का महत्व क्या है ?
उत्तर :
आपेक्षिक आर्द्रता का महत्व (Importance of relative humidity) :
विभिन्न उद्देश्यों के लिए आपेक्षिक आर्द्रता के बारें में सूचना आवश्यक है। यह देखा गया है कि आपेक्षिक आर्द्रता का मान 50-60 % से अधिक हो जाने पर हमलोगों को पसीना होने लगता है एवं बेचैनी अनुभव होने लगती है। गर्मी के समय यदि आपेक्षिक आर्द्रता 30 % हो जाती है तो लू लगने का डर रहता है।
आपेक्षिक आर्द्रता का उच्च प्रतिशत वर्षा होने की सूचना देता है।
कुछ औद्योगिक प्रकल्पों के लिए आर्द्र जलवायु अनुकूल होती है। यही कारण है कि सूती कारखाने (Cotton mills) आर्द्र जलवायु में साधारणत: स्थित होते हैं।
कुछ जीवाणु आर्द्र जलवायु में बहुत अधिक उत्पत्र हो जाते हैं। अत: स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग वायुमंडल की आर्द्रता पर अपनी दृष्टि रंखता है।
विमानचालक आपेक्षिक आर्द्रता वाले क्षेत्र से बचने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 27.
गुप्त उष्मा क्या है ? बर्फ के गलन की गुप्त उष्मा से आप क्या समझते हैं ? 0° C पर जल तथा 0° C स्थित बर्फ में कौन अधिक ठंडा महसूस होगा और क्यों ?
उत्तर :
गुप्त उष्मा (Latent heat) : किसी पदार्थ की गुप्त उष्मा (Latent heat) उष्मा का वह परिमाण है, जो बिना तापक्रम बदले उसे एक अवस्था से दूसरी अवस्था (जैसे, ठोस से द्रव अवस्था अथवा द्रव से वाष्प) में बदलने के लिए आवश्यक है। अथवा गुप्त उष्मा, वह उष्मा है, जो केवल पदार्थ की अवस्था परिवर्तन करती है, तापक्रम में कोई परिवर्तन नहीं करती है।
बर्फ के गलन की गुप्त उष्मा (Latent heat of melting of ice) : सामान्यतया बर्फ 0° C पा पिघलना शुरू करती है। 0° C की बर्फ को 0° C के जल में परिवर्तित होने के खर्च हुई उष्मा की मात्रा को बर्फ के गलन की गुप्त उष्मा कहते हैं।
S.I. पद्धति में बर्फ के गलने की गुप्त उष्मा 336000 जूल/कि॰ग्रा० है अर्थात् 0° C पर 1 कि॰ग्रा० बर्फ को 0° C के 1 कि०ग्रा० पानी में बदलने के लिए 336000 जूल उष्मा की आवश्यकता पड़ती है।
0° C के जल की तुलना में 0° C के बर्फ से अधिक ठंडी महसूस होने का कारण : बर्फ की गुप्त उष्मा 80 केलोरी प्रति ग्राम होता है। अतः: 0° C तापमान की 1 ग्राम बर्फ 80 कैलोरी उष्मा ग्रहण कर 0° C तापमान के 1 ग्राम जल में परिवर्तित होती है। अर्थात् 0° C के जल की तुलना में 0° C के बर्फ में उष्मा की मात्रा कम होती है जिससे बर्फ ठंडी महसूस होती है।

आंकिक प्रश्नोत्तर (Numrical Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
100 ग्राम वाले तांबे के एक टुकड़े का तापमान 100° C से 20° C तक लाया गया। कितनी मात्रा में उष्मा की हानि होगी ? (ताँबे की वि.उ. = 0.09)
हल : तांबे द्वारा ली गयी उष्मा = mst(100-20)
= 100 × 0.09 × 20
= 100 × \(\frac{9}{100}\) × 80
= 720 Cal

प्रश्न 2.
50 ग्राम वाले लोहे के एक टुकड़े का तापमान 100° C से 150° C तक बढ़ाया गया। लोहे द्वारा ग्रहण की गयी उष्मा की मात्रा ज्ञात कीजिए। (लोहे की वि.उ. = 0.12
हल :
लोहा द्वारा ग्रहण की गई उष्मा = mst
= 50 × 0.12 × (150-100)
= 50 × \(\frac{12}{100}\) × 50 = 300 Cal

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प्रश्न 3.
-20° C पर स्थित 1 kg बर्फ को 20° C जल में बदलने में कितनी कैलोरी उष्मा लगेगी। दिया है L = 80 cal / gm
हल :
1 kg वाले बर्फ को -20° C से 0° C पर आने का
आवश्यक उष्मा = ms(t-t)
= 1000 × 1 {0 (-20)}
= 200000 Cal
1 kg बर्फ को 0° C वाले जल में बदलने में आवश्यक
उष्मा = mL
= 100 × 80
= 80000 Cal
0° C वाले 1 kg पानी का तापक्रम 20° C करने में आवश्यक उष्मा = ms(t-t1)
= 1000 × 1(20-0)
= 20000 Cal
कुल उष्मा = 20000 + 80000 + 20000
= 120000
= 12 × 104 Cal

प्रश्न 4.
200° C तापक्रम पर 40 ग्राम पानी को 100 ग्राम ठण्डे पानी में मिलाने पर मिश्रण का तापक्रम 60° C हो जाता है। ठण्डे पानी का प्रारम्भिक तापक्रम ज्ञात कीजिए।
हल :
माना ठण्डे पानी का प्रारम्भिक तापक्रम x है।
ठण्डे पानी द्वारा ली गई उष्मा = m1 s1 t1
= 100 × 1 × (60-x)
गर्म पानी द्वारा दी गई उष्मा = m2 s2 t2
= 40 × 1(200-60)
m2 s2 t2 = m1 s1t1
40 × 1 × (200-60) = 100 × 1 × (60-x)
40 × 140 = 100 ×(60-x)
56 = 60 – x
x = 60 – 56
∴ x = 4° C

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प्रश्न 5.
0° C ताप वाली बर्फ की एक बड़ी सिल्ली पर 1 kg. मात्रा तांबे के एक टुकड़ा को 300° C गर्म करके रख देने से कितनी बर्फ पिघल जायेगी। दिया है -तांबे की विशिष्ट उष्मा 0 Kal° / gm° C, बर्फ के गलन की गुप्त उष्मा 80 / Fal / gm
हल :
माना x gm बर्फ पिघल कर 0° C वाला पानी बनता है
बर्फ द्वारा पिघलने में ली गई उष्मा = ML
= x × 80 Cal
तांबा द्वारा छोड़ी गई उष्मा = mst
= 1000 gm × .1 × (300-0)
= 1000 × \(\frac{1}{10}\) × 300
= 30000 Cal
80 x = 30000
x = \(\frac{30000}{80}\)
= 375 gm

प्रश्न 6.
40° C के 500 ग्राम जल में 10° C का 250 ग्राम जल मिलाने पर मिश्रण का अंतिम तापक्रम क्या होगा ?
हल :
माना मिश्रण का अन्तिम तापक्रम t° C है
ग्रहण की गई उष्मा = त्यागी गई उष्मा
m1 = 250 gm m2 = 550 gm
s1 = 1 s2 = 1
t1 = (t-10) t2 = (40-t)
m1 s, t = m2 s2 t2
250 × 1 × (t2 -10) = 500 × 1 × (40-t)
t-10 = 80 – 2 t
3 t = 90
∴ t = 30° c

प्रश्न 7.
2 कि० ग्राम जल का ताप 70° C है। इसे 45° C वाले 1 कि०ग्राम जल में मिश्रित करने पर मिश्रण का अंतिम तापक्रम क्या होगा ?
हल :
माना मिश्रित जल का तापक्रम t° C हुआ है
यहाँ ग्रहण किया उष्मा =m1 s1 t1
यहाँ m1=1 kg, m2 = 2 kg
s1 = 1 s2 = 1
t1 = (t-45), t2 = (70-t)
m1 s1 t1 = mz s2 t2
1 × 1 × (t-45) = 2 × 1 ×(70-t)
t = 45 = 140 – 27
3 t = 185
t = \(\frac{185}{3}\)=61.666
∴ t = 61.67° c (लगभग)

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 6 उष्मा

प्रश्न 8.
100 ग्राम बर्फ को 500 ग्राम पानी में डाला जाता है जिसका ताप 30° C था। मिश्रण का ताप क्या होगा ?
हल :
100 gm बर्फ का जल में बदलने के लिए आवश्यक उष्मा = M 2
= 100 × 80
L = बर्फ की गुप्त उष्मा = 8000 Cal
500 gm पानी को 8000 Cal देने से तापक्रम में मान t° C कम गया
अत: 500(30-t) = 8000
150 – 5 t = 80
57 = 70
t = 14° C
500 gm पानी को 8000 Cal देने से तापक्रम में मान t° C कम गया
अब 500 gm पानी का तापक्रम 30° C न होकर 14° C हो गया
अब माना मिश्रण का तापक्रम T° C है
100 gm पानी द्वारा ली गई उष्मा = 100 × 1 × (t4 – 0)
500 gm पानी द्वारा दी गई उष्मा = 500 × 1(t4 – Tt)
अत:
100 × 1(T-0) = 500 × 1(14-T)
T = 70 – 5 T
T + 5 T = 70
6 T = 70
T = \(\frac{70}{6}\) = 11.66° C = 11.7° C

प्रश्न 9.
यदि 50 ग्राम जल का तापक्रम 20° C वृद्धि करने के लिए उष्मा द्वारा कितना कार्य करना होगा ?
हल :
आवश्यक उष्मा =mst
= 50 × 1 ×(20-0°)
= 1000 Cal
w = JH
= 4.2 × 1000 जूल
= 4.2 × 1000 × 107 अर्ग
= 4.2 × 1010 अर्ग

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प्रश्न 10.
उष्मा द्वारा कितना कार्य सम्पन्न होगा यदि 0° C पर 10 ग्राम बर्फ को 10 gm ज़ल का तापक्रम 0° C में बदलने पर होगा ?
हल : बर्फ से पानी में बदलने की आवश्यक उष्मा
(4) = ML
= 10 × 80
= 800 Cal
कार्य (w) = JH
= 4.2 × 800
= 3360.0
= 3360 जूल
जहाँ L = बर्फ की गुप्त उष्मा
= 80 Cal

प्रश्न 11.
100 ग्राम कॉपर वाल का तापक्रम 25° C से 100° C बढ़ाने में कितनी उष्मा की जरूरत पड़ेगी जबकि कॉपर की गुप्त उष्मा 0.09 Cal° gm° C ?
हल : दिया गया है, m = 100 g, s = 0.09, t1 = 25° c
t2 = 100° C
∴ उष्मा की अभीष्ट मात्रा = m × s × (t2 – t1)
= 100 × 0.09 × (100-25)
= 9 × 75 कैलोरी
= 675 कैलोरी
उत्तर :
675 कैलोरी

प्रश्न 12.
50 gm जल को 30° से 70° C तक गर्म करने में कितनी उष्मा की आवश्यकता होगी ?
हल : उष्मा की अभीष्ट मात्रा
= m × s × (t2-t1)
= 50 × 1 × (70-30)
= 50 × 40 = 2000 कैलोरी
उत्तर :
200 कि० कैलोरी

प्रश्न 13.
8.4 जूल कार्य करने पर कितनी कैलोरी उष्मा उत्पन्न होगी।
हल :
∵ 4.2 जूल कार्य करने पर 1 कैलोरी उष्मा उत्पन्न होती है।
∴ 8.4.” ” ” = \(\frac{8.4}{4.2}\) = 2 Cal

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 6 उष्मा

प्रश्न 14.
400 जूल कार्य के समतुल्य उष्मा की गणना कीजिए। (उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक 4.2 जूल कैलोरी-1 है।)
हल :
∵ 4.2 जूल कार्य करने पर 1 कैलोरी उष्मा उत्पन्न होती है
∴ 400 ” ” ” = \(\frac{400}{4.2}\)
= \(\frac{400}{4.2}\) = 95.24 कैलोरी

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Physical Science Book Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Physical Science Chapter 5 Question Answer – कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
विज्ञान के दृष्टिकोण से हम कब कहते हैं कि कार्य किया गया है ?
उत्तर :
जब बल लगाने पर वस्तु में बल की दिशा में विस्थापन हो।

प्रश्न 2.
जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल इसके विस्थापन की दिशा में हो तो किए गए कार्य का व्यंजक लिखें।
उत्तर :
बल की दिशा में विस्थापन होने पर किया गया कार्य = बल x विस्थापन या, F = F. . .

प्रश्न 3.
किसी वस्तु का त्वरण शून्य हो सकता है चाहे उस पर कई बल कार्य कर रहे हों। क्या आप इससे सहमत हैं ? बताइये क्यों ?
उत्तर :
हाँ, त्वरण शून्य हो सकता है क्योंकि विभिन्न दिशाओं से लगने वाले बल एक दूसरे को निष्क्रिय कर देते हैं।

प्रश्न 4.
कार्य की व्यावहारिक इकाई क्या है ?
उत्तर :
जूल।

प्रश्न 5.
ऊर्जा दैशिक राशि है या अदैशिक ?
उत्तर :
ऊर्जा अदैशिक राशि है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 6.
जब आप साइकिल चलाते हैं तो कौन-कौन सी ऊर्जा रूपांतरित होती है ?
उत्तर :
साइकिल चलाते समय मांसपेशीय ऊर्जा गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती है।

प्रश्न 7.
ऊपर की ओर फेंकी गई कोई वस्तु जैसे-जैसे ऊपर जाती है, उसकी गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है या कमी ?
उत्तर :
जब किसी वस्तु को ऊपर फेंका जाता है, तो इसकी गतिज ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती है।

प्रश्न 8.
समान द्रव्यमान की दो वस्तुओं को h तथा 2h ऊँचाइयों पर रखा गया है। उनकी स्थितिज ऊर्जाओं का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर :
स्थितिज ऊर्जा का अभीष्ट अनुपात = mgh : mg(2h) = 1 : 21

प्रश्न 9.
कार्य क्या है ?
उत्तर :
किसी वस्तु पर बल लगाने पर यदि वस्तु में बल की दिशा में विस्थापन हो, तो कार्य का होना कहा जाता है।

प्रश्न 10.
न्यूटन और डाइन में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
1 N = 310° dyne

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 11.
कार्य की C.G.S. और M.K.S. पद्धति में गुरुत्वीय इकाई क्या-क्या है ?
उत्तर :
C.G.S. में अर्ग, M.K.S. में जूल।

प्रश्न 12.
शक्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर :
कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।

प्रश्न 13.
ऊर्जा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 14.
C.G.S. पद्धति में कार्य की इकाई क्या है ?
उत्तर :
अर्ग।

प्रश्न 15.
1 वाट शक्ति को परिभाषित करें।
उत्तर :
जब 1 जूल कार्य 1 सेकेण्ड में किया जाता है, तो शक्ति 1 वाट कहलाती है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 16.
1 किलोवाट घंटा (1 kWh) की परिभाषा दें।
उत्तर :
जब एक किलोवाट क्षमता वाली मशीन एक घंटे तक उपयोग में लायी जाती है, तो पयुक्त ऊर्जा का मान एक किलोवाट घण्टा (1 kwh) होता है।

प्रश्न 17.
ऊर्जा रूपांतरण की दर को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
ऊर्जा रूपांतरण की दर को शक्ति कहते हैं।

प्रश्न 18.
शक्ति की SI unit क्या होती है ?
उत्तर :
वाट

प्रश्न 19.
1 किलो वाट का मान कितने वाट के बराबर होता है?
उत्तर :
1 किलो वाट का मान 1000 वाट के बराबर होता है।

प्रश्न 20.
गतिज ऊर्जा का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर :
गतिज ऊर्जा गतिशील वाय में विद्यमान रहती है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 21.
धनुप की प्रत्यंचा खींचने पर उसमें कौन-सी ऊर्जा उत्पन्न होता है।
उत्तर :
स्थितिज ऊर्जा।

प्रश्न 22.
बन्दूक से निकली गोली में कौन-सी ऊर्जा होती है ?
उत्तर :
गतिज ऊर्जा

प्रश्न 23.
कार्य का होना कब कहा जाता है ?
उत्तर :
जब किसी वस्तु पर बल लगाने से वस्तु में बल की दिशा में विस्थापन हो, तो कार्य का होना कहा जाता है।

प्रश्न 24.
कार्यविहीन बल क्या है ?
उत्तर :
जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाने से वस्तु में विस्थापन बल के लम्बवत कार्य करता है, उस बल को कार्यविहीन बल कहते हैं।

प्रश्न 25.
गतिज ऊर्जा की माप कैसे की जाती है ?
उत्तर :
KE = \(\frac{1}{2}\) mv2

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 26.
गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा में कौन ‘g’ पर निर्भर करता है ?
उत्तर :
स्थितिज ऊर्जा।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
क्या किसी पिंड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में, इसका विस्थापन हो सकता है ? अपने उत्तर की व्याख्या करें।
उत्तर :
किसी पिण्ड पर लगने वाले बल की अनुपस्थिति में इसका विस्थापन नहीं हो सकता है क्योंकि वस्तु में विस्थापन के लिए उस पर वल लगाना आवश्यक है। वस्तु पर आरोपित बल स्थितिज जड़ता को निष्क्रिय करके उसमे गति उत्पत्न करता है।

प्रश्न 2.
कार्य किसे कहते हैं ? कार्य की माप कैसे की जाती है ?
उत्तर :
कार्य (Work) : किसी वस्तु पर बल लगाने से यदि वस्तु बल की दिशा में अपने स्थान से स्थानान्तरित हो जाय, तो बल द्वारा कार्य का होना कहा जाता है।
कार्य की माप (Measurement of work) : कार्य की माप वस्तु पर लगाये गये बल और बल की दिशा में वस्तु द्वारा तय की गयी दूरी का गुणनफल से की जाती है।
माना कि किसी वस्तु पर F बल लगाने से वस्तु बल की दिशा में d दूरी तक विस्थापित हो जाती है तो किया गया कार्य W = F × d.
अत: किया गया कार्य = बल x बल की दिशा में विस्थापन।

प्रश्न 3.
CGS तथा SI पद्धति में शक्ति की इकाई लिखो।
उत्तर :
शक्ति की इकाइयाँ (Units of Power) : शक्ति की इकाई को दो भागों में बाँटा गया है।
(A) परम इकाइयाँ (Absolute Units) : (i) C.G.S. पद्धति में कार्य की इकाई Erg (अर्ग) होती है।
(ii) M.K.S. गा S.I. पद्धति में कार्य की इकाई जूल या न्यूटन मीटर होती है।
(B) गुरुत्वीय इकाइयाँ (Gravitational units) : (i) C.G.S. पद्धति में शक्ति की गुरुत्वीय इकाई ग्रामसेन्टीमीटर/सेकेण्ड (Gram cmisec) है।
(ii) M.K.S. या S.I. पद्धति में शक्ति की गुरुत्वीय इकाई किलोग्राम मीटर/सेकेण्ड (Kg.m / sec) है।

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प्रश्न 4.
जूल तथा अर्ग में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
जूल तथा अर्ग में सम्बन्ध (Relation between Joule and Erg.) :

1 Joule = 1 Newton × 1 m
= 105 dyne × 102 cm.
= 107 dyne × cm
∴ 1 Joule = 107 Erg.

प्रश्न 5.
कोई मनुष्य किसी बोझ को अपने सिर पर आधे घंटे तक रखे रहता है और थक जाता है। क्या उसने कोई कार्य किया या नहीं ?
उत्तर :
जब कोई मनुष्य अपने सिर पर कोई बोझ रखता है, तो उसके द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता, क्योंकि जब वह खड़ा रहता है, तो बोझ को उठाने पर उसके द्वारा लगाए गए बल से बोझ में कोई विस्थापन नहीं होता। यदि वह चलता है, तो बोड में विस्थापन उसके द्वारा लगाए गए बल को दिशा के लम्बवत विस्थापन होता है। इस स्थिति में भी कार्य नहीं होता है।

प्रश्न 6.
किसी वस्तु का द्रव्यमान दुगुना करने पर या उसका वेग दुगुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा किस स्थिति में अधिक प्रभावित होगी ?
उत्तर :
मान लिया वस्तु का द्रव्यमान m एवं वेग v है।
अत: वस्तु की गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2

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अत: वेग को दो गुना कर देने पर गतिज ऊर्जा अधिक प्रभावित होगी।

प्रश्न 7.
जब कोई चालक किसी पहाड़ी पर अपना वाहन चढ़ाता है तब उसकी चाल को क्यों बढ़ा देता है ?
उत्तर :
समतल सड़क पर वाहन चलाने की तुलना में पहाड़ी पर वाहन चलाने के लिए वाहन को ऊँचाई पर चढ़ना पड़ता है, जिससे वाहन की स्थितिज ऊर्जा mgh बढ़ती जाती है। अत: वाहन को पहाड़ी पर ऊपर चढ़ाने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। वाहंन का द्रव्यमान स्थिर रहते हुए इसकी गति को बढ़ाना पड़ता है।

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प्रश्न 8.
मुक्त रूप से गिरते हुए एक पिंड की स्थितिज ऊर्जा लगातार कम होती जाती है। क्या यह ऊर्जासंरक्षण नियम का उल्लंघन करता है ? कारण बताएँ।
उत्तर :
स्वतंत्रता पूर्वक पृथ्वी की ओर गिरती हुई किसी वस्तु में ऊर्जा का कुल परिमाण सदैव, स्थिर रहता है। अत: गिरती हुई वस्तु की स्थितिज ऊर्जा में लगातार ह्रास होने पर ऊर्जा की अविनाशिता के नियम का उल्लघन नही होता है।

प्रश्न 9.
कार्य, शक्ति और ऊर्जा में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर :
कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा में अन्तर (Difference between work, power and energy) :

कार्य शक्ति ऊर्जा
i. किसी वस्तु पर बल लगाने पर वस्तु में बल की दिशा में विस्थापन होने की क्रिया को कार्य कहते हैं। i. किसी कर्ता के कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। i. किसी कर्ता के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते है।
ii. कार्य का मान समय पर निर्भर नहीं करता है। ii. शक्ति का मान समय पर निर्भर करता है। ii. ऊर्जा का मान समय पर निर्भग नहीं करता है।
iii. कार्य की S.I. इकाई जूल है। iii. शक्ति की S.I. इकाई जूल/सें॰या वाट है। iii. ऊर्जा की S.I. इकाई जूल है।

प्रश्न 10.
बल के द्वारा किया गया कार्य तथा बल के विपरीत कार्य की सोदाहरण परिभाषा दो।
उत्तर :
बल द्वारा किया गया कार्य (Work done by the force) : किसी वस्तु पर बल लगाने से यदि वस्तु में विस्थापन लगाये गये बल की दिशा में हो तो इसे बल के द्वारा किया गया कार्य कहा जाता है। जैसे – जब कोई व्यक्ति ठेला गाड़ी पर बल लगाता है और ठेला उसी दिशा में गतिशील हो जाता है।

बल के विपरीत कार्य (Work done against the force) : किसी वस्तु पर बल लगाने से यदि वस्तु में विस्थापन लगाये गए बल की दिशा के विपरीत हो तो इसे बल के विपरीत किया गया कार्य कहा जायेगा। जैसे – सीढ़ी पर कोई व्यक्ति ऊपर की ओर चढ़ता है तो किया गया कार्य पृथ्वी के आकर्षण बल के विपरीत होगा। अतः विस्थापन ॠणात्मक कहलाता है।

प्रश्न 11.
CGS तथा SI पद्धति में कार्य की परम इकाई लिखो तथा परिभाषा दो।
उत्तर :
C.G.S. पद्धति में कार्य की इकाई Erg (अर्ग) होती है।
M.K.S. या S.I. पद्धति में कार्य की इकाई जूल या न्यूटन मीटर होती है।

प्रश्न 12.
शक्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर :
शक्ति (Power) : कार्य करने की दर को शक्ति (Power) कहते हैं।
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प्रश्न 13.
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक लिखें।
उत्तर :
\(\frac{1}{2}\) mv2, यहाँ m वस्तु का द्रव्यमान एवं v वस्तु का वेग है।

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प्रश्न 14.
आप एक हाथ में भारी सूटकेश लेकर टहल रहे हैं क्या यह कार्य है ? क़ारण दीजिए।
उत्तर :
एक हाथ में भारी सूटकेश लेकर टहलने पर कोई कार्य नहीं होता क्योंकि इस स्थिति में सूटकेस में लगाए जाने वाले बल की लम्बवत् दिशा में सूट केस में विस्थापन होता है।

प्रश्न 15.
एक वाट शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
एक वाट शक्ति (1 watt powers) : जब 1 जूल कार्य 1 सेकेण्ड में किया जाता है, तो शक्ति 1 वाट कहलाती है।

प्रश्न 16.
ऊर्जा की अविनाशिता का नियम क्या है ?
उत्तर :
ऊर्जा की अविनाशिता का नियम : ऊर्जा की अविनाशिता के नियम के अनुसार ऊर्जा को न तो उत्पत्र किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। बल्कि इसे एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। ब्राण्ड की कुल ऊर्जा सदैव स्थिर रहती है।

प्रश्न 17.
कार्यहीन बल क्या है ?
उत्तर :
कार्यहीन बल (Workless force) : जब किसी वस्तु पर बल लगाने पर उसमें विस्थापन न हो या बल की दिशा के लम्बवत् विस्थापन हो, तो इसे कार्यहीन बल कहते हैं।
उदाहरण : कुली द्वारा सिर पर बोझ उठाना कार्यहीन बल का उदाहरण है।

प्रश्न 18.
कार्य तथा शक्ति में अन्तर लिखो।
उत्तर :
कार्य तथा शक्ति में अन्तर :

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प्रश्न 19.
गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा में अन्तर लिखो।
उत्तर :
गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा में अन्तर :

स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा
i. यह किसी वस्तु में उसकी स्थिति या दशा के कारण होती है i. यह किसी वस्तु में उसकी गति के कारण होती है।
ii. इसकी माप वस्तु के प्रारम्भिक स्थिति या दशा में आने तक किये गये कार्य द्वारा होती है। ii. इसकी माप गति की अवस्था से स्थिर अवस्था तक आने में वस्तु द्वारा अवरोधक बल के विरुद्ध किये गये कार्य के द्वारा की जाती है।

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प्रश्न 20.
गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा लिखो। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दो।
उत्तर :
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) : किसी वस्तु की गति अवस्था के कारण उसमें जो कार्य करने की क्षमता उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) कहते हैं।
उदाहरण : बंदूक से छोड़ी गयी गोली, धनुष से छोड़ा गया तीर।
स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) : किसी वस्तु की स्थिति या अवस्था के कारण उसमें जो कार्य करने की क्षमता उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) कहते हैं।
उदाहरण : यदि किसी स्प्रिंग के एक सिरे को दृढ़ आधार से बाँधकर इसके दूसरे सिरे पर कोई पिण्ड लटकाया जाय, तो सन्तुलन की अवस्था में यह स्थिर हो जाता है। अब यदि पिण्ड को इस स्थिर अवस्था से थोड़ा नीचे खींचकर छोड़ दिया जाये तो यह ऊपर-नीचे दोलन करने लगता है।

प्रश्न 21.
ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर :
ऊर्जा के संरक्षण का सिद्धान्त : ऊर्जा न तो उत्पन्न और न तो नष्ट की जा सकती है किन्तु एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरण हो सकती है।

प्रश्न 22.
कार्य का होना कब कहा जाता है ?
उत्तर :
किसी कार्य के सम्पन्न होने के लिए निम्नलिखित दो कारको का होना आवश्यक है –
(i) किसी वस्तु पर लगाया जाने वाला बल-वाह्म कारक तथा
(ii) लगाये गये बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन।

प्रश्न 23.
कार्य की माप कैसे की जाती है ?
उत्तर :
कार्य का मापन (Measurement of work) : किसी वस्तु पर लगाये गये बल से होने वाले कार्य की माप उस वस्तु पर लगाये गये बल तथा लगाव बिन्दु से विस्थापन के गुणनफल से की जाती है।
कार्य (Work) = बल (force) × विस्थापन (displacement)
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प्रश्न 24.
कार्य की इकाई C.G.S. तथा M.K.S. पद्धति में क्या है ?
उत्तर :
(i) C.G.S. system में कार्य की परम इकाई अर्ग या डाइन x से॰मी॰ है।
(ii) S.I. या M.K.S. पद्धति में कार्य की परम इकाई जूल या न्यूटन मीटर है।

प्रश्न 25.
कार्य की व्यावहारिक इकाई क्या है ?
उत्तर :
(i) कार्य की व्यावहारिक इकाई जूल है।
(ii) जूल के अतिरिक्त कार्य की बड़ी व्यावहारिक इकाइयाँ :
(a) किलो जूल एवं
(b) मेगाजूल एवं जूल में सम्बन्ध : 1 मेगा जूल (M.J.) = 1 × 103 जूल।

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प्रश्न 26.
ऊर्जा किसे कहते हैं ? यह कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर :
ऊर्जा (Energy) : किसी कार्यकर्ता के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा कहने का तात्पर्य कार्य के परिणाम से है इसलिए ऊर्जा को कार्य की इकाइयों में ही व्यक्त किया जाता है। ऊर्जा एक अदैशिक राशि है।
ऊर्जा दो प्रकार की होती है – (i) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy), (ii) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)।

प्रश्न 27.
गतिज ऊर्जा की माप कैसे की जाती है ?
उत्तर :
कोई गतिशील वस्तु गति अवस्था से स्थिर अवस्था तक आने के पहले तक वह किसी अवरोध बल के विरुद्ध कार्य करती है वही उस वस्तु की गतिज ऊर्जा की माप है।
यदि किसी वस्तु की मात्रा m हो तथा वह v वेग से गतिमान हो तो उस वस्तु की गतिज ऊर्जा का मान होगा।
गतिज ऊर्जा Ek = \(\frac{1}{2}\) × मात्रा × (वेग)2 = \(\frac{1}{2}\) mv2

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
कार्य की परिभाषा लिखें। धनात्मक कार्य, ऋणात्मक कार्य और शून्य कार्य की सोदाहरण व्याख्या करें।
उत्तर :
कार्य की परिभाषा : किसी वस्तु पर बल लगाने पर उसमें बल की दिशा में विस्थापन होने की क्रिया को कार्य कहते हैं।
धनात्मक कार्य या बल द्वारा किया गया कार्य (Positive work or Work done by force) : जब. विस्थापन लगाये गये बल की दिशा में होता है, तब θ = 0 अर्थात cos θ = +1
अत: W = F × S × (+1) = + FS
धनात्मक कार्य का एक उदाहरण : किसी वस्तु को ऊपर से छोड़ देने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वबल के अधीन नीचे की तरफ गिरती है। यह वस्तु का विस्थापन गुरुत्वबल की दिशा में हुआ है। यह विस्थापन धनात्मक कहलाता है। अतः इस तरह का कार्य धनात्मक या बल द्वारा किया गया कार्य है।

ॠणात्मक कार्य या बल के विरुद्ध कार्य (Negative work or work done against the force) : जब विस्थापन लगाये गए बल की विपरीत दिशा में होता है, तब θ = 180° cos 180° = -1
अत: W = F × S × (-1) = -FS
ॠणात्मक कार्य का एक उदाहरण : कुएँ से जल से भरी बाल्टी खींचने में पृथ्वी के गुरुत्वबल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।
शून्य कार्य (Zero work) : जब वस्तु का विस्थापन और लगने वाले बल के बीच समकोण बनता है, तो θ = 90° अर्थांत cos 90° = 0
अत: W = F × S × 0 या, W = 0
अर्थात किये गये कार्य का परिमाण शुन्य होगा।

प्रश्न 2.
गतिज ऊर्जा की परिभाषा दें। v वेग से गतिशील m द्रव्यमान के पिंड की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त करें।
उत्तर :
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) : किसी वस्तु की गति अवंस्था के कारण उसमें जो कार्य करने की क्षमता उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) कहते हैं।

गतिज ऊर्जा का गणितीय स्वरूप (Mathematical Expression) : माना ‘m’ द्रव्यमान की एक वस्तु को u वेग से पृथ्वी की सतह के ऊपर लम्बक्त् प्रक्षेपित किया जाता है तथा वस्तु h ऊँचाई ऊपर जाने के बाद विरामावस्था में आ जाती है। पुन: गुरुत्वीय बल के अधीन गिरते हुए पृथ्वी की सतह पर लौट आती है।
गति के समीकरण v2-u2 = 2 as
यहाँ s = h
u = um / s
a = -g
v = 0
∴ o – u2 = 2gh
∴ h = \(\frac{u^2}{2 g}\)
गति के दौरान वस्तु की गति द्वारा गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किया कार्य = mgh
= mg × \(\frac{u^2}{2 g}\)
= \(\frac{1}{2}\) mu2
∴ Ek = \(\frac{1}{2}\) मात्रा × (वेग)2
यह स्पष्ट है कि किया गया कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर है।
अत: Ek = \(\frac{1}{2}\) mv2 T
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प्रश्न 3.
स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा दें। पृथ्वी-तल से h ऊँचाई पर m द्रव्यमान के किसी पिंड की स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजनाक प्राप्त करें।
उत्तर :
स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) : किसी वस्तु की स्थिति या अवस्था के कारण उसमें जो कार्य करने की क्षमता उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) कहते हैं।
किसी वस्तु का विन्यास (configeration) या स्थिति (position) के कारण, वस्तु में जो कार्य करने की क्षमता होती है, उसे उस वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) कहते हैं। जैसे चाबी देने के बाद स्पिंग में (विन्यास के कारण), छत पर रखी टंकी के जल में (स्थिति के कारण) स्थितिज ऊर्जा होती है।

पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर स्थित m मात्रा की वस्तु में स्थितिज ऊर्जा (Ep) : जब भी किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर उठाया जाता है, तो वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। वस्तु पर किया गया कार्य ही वस्तु की स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अर्थात् यदि उस वस्तु को स्वतंत्र छोड़ दिया जाय तो वस्तु स्वत: पृथ्वी की सतह पर लौट आती है और उसमें जमा स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। इस प्रकार h ऊँचाई पर स्थित वस्तु की स्थितिज ऊर्जा = गुरुत्वीय बल (वस्तु का भार) x विस्थापन (ऊँचाई)

Ep = mg × h = mgh

यहाँ m = वस्तु की मात्रा
g = गुरुत्वीय त्वरण है।
[∴ बल = मात्रा × त्वरण]

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गणितीय स्वरूप (Mathematical Expression) : माना ‘m’ द्रव्यमान की वस्तु को धरती से ‘h’ ऊँचाई तक ऊपर उठाया जाता है। वस्तु को उठाने के लिए आवश्यक न्यूनतम बल वस्तु के भार के बराबर अर्थात् mg लगता है।
माना वस्तु पर गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किया गया कार्य W है। तब, कार्य (W) = बल x विस्थापन
= mg × h
= mgh
चूँकि वस्तु पर किया गया कार्य mgh के बराबर है, इसलिए वस्तु में mgh इकाई के बराबर ऊर्जा उत्पन्न होगी। यह वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Ep) है।
∴ Ep = mgh.

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प्रश्न 4.
दिखाएँ कि मुक्त रूप से गिरते हुए पिंड की कुल ऊर्जा नियत रहती है।
उत्तर :
यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण (Conservation of Mechanial Energy) : हम जानते हैं कि ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरित हो सकती है, न तो इसकी उत्पत्ति की जा सकती है और न ही विनाश। इसे ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते हैं।

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माना कि m मात्रा की वस्तु किसी h ऊँचाई की छत से विरामावस्था से गिरायी जाती है।
यदि प्रथम स्थिति (h ऊँचाई पर) बीच की स्थिति (h-x ऊँचाई पर) तथा पृथ्वी को ठीक स्पर्श करने से पहले अंतिम स्थिति (h = 0) पर यांत्रिक ऊर्जा का मान बराबर रहता हो, तो यहाँ सिद्ध हो जाता है कि गुरुत्वाकर्षण बल के अधीन स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा अचर/संरक्षित (Constant/conserved) रहती है।
प्रथम स्थिति में –
∴ यांत्रिक ऊर्जा (Ep) + गतिज ऊर्जा (Ek)

(A) E = PE + KE
= mgh + 0 [वेग u = 0]
= mgh
मध्य रास्ते पर, E = PE + KE

(B) = mg(h-x) + \(\frac{1}{2}\) mv2 [∴ ऊँचाई = h – x]
= mgh – mgx + \(\frac{1}{2}\) m(√2gx)2\left[v2 – u2 = 2 gh से u = 0, h = x]
= mgh-m g x + m g x
= mgh ……. – (ii)
अंतिम स्थिति में, E = PE + KE से

(C) = 0 + (√2 gh)2[∴ ऊँचाई = 0 और h ऊँचाई से गिरने पर वेग = √2 gh]
= \(\frac{1}{2}\) m × 2gh
= mgh
तीनों ही स्थितियों में (i), (ii) तथा (iii) समीकरण से स्पष्ट है कि यांत्रिक ऊर्जा (E) का मान एक समान (mgh) स्थिर रहता है।
इससे सिद्ध होता है कि गुरुत्वीय बल के अधीन गतिशील वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है।

ऊपर के उदाहरण से हमें ऊपर से नीचे की गति में यह भी पता चलता है कि गति के दौरान स्थितिज ऊर्जा-गतिज ऊर्जा में (नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे की गति) और गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा (नीचे से ऊपर की गति) परस्पर बदलती रहती हैं। आगे हम सब यह भी समझ पायेंगे कि कोई भी एक प्रकार की ऊर्जा दूसरे प्रकार की ऊर्जा में रूपान्तरित की जा सकती है।

प्रश्न 5.
बल के विरुद्ध कार्य से क्या समझा जाता है ? उदाहरण सहित लिखिए। S.I. प्रणाली में कार्य की इकाई क्या है ?
उत्तर :
बल के विरुद्ध कार्य (Work done against the force) : किसी वस्तु पर बल लगाने से यदि वस्तु में विस्थापन लगाये गए बल की दिशा के विपरीत हो तो इसे बल के विपरीत किया गया कार्य कहा जायेगा। जैसे –
(a) किसी पत्यर के टुकड़े को नीचे से ऊपर फेंका जाता है तो पत्थर का स्थानान्तरण गुरुत्व बल के विपरीत होता है। अत: यहाँ पर कार्य गुरुत्व बल के विपरीत कहा जायेगा। कुएँ से जल से भरी बाल्टी को ऊपर खींचना गुरुत्व बल के विपरीत कार्य होता है तथा विस्थापन ऋणात्मक होता है।
(b) सीढ़ी पर कोई व्यक्ति ऊपर की ओर चढ़ता है तो किया गया कार्य पृथ्वी के आकर्षण बल के विपरीत होगा। अतः विस्थापन ऋणात्मक कहलाता है।
S.I. प्रणाली में कार्य की इकाई : M.K.S. या S.I. पद्धति में कार्य की इकाई जूल या न्यूटन मीटर होती है।

प्रश्न 6.
ऊर्जा अदैशिक राशि है या दैशिक राशि ? यांत्रिक ऊर्जा कितने प्रकार की होती है ? स्पष्ट करें। उत्तर : ऊर्जा अदैशिक राशि है।
यांत्रिक ऊर्जा के प्रकार : यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है –
(i) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy), (ii) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)।
(i) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) : किसी वस्तु की स्थिति या अवस्था के कारण उसमें जो कार्य करने की क्षमता उत्पन्न होती है उसे उस वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) कहते हैं।
(ii) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) : किसी वस्तु की गति अवस्था के कारण उसमें जो कार्य करने की क्षमता उत्पत्र होती है उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) कहते हैं।

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प्रश्न 7.
स्थितिज ऊर्जा का मापन कैसे किया जाता है ? किसी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा को मापने का सूत्र ज्ञात करो।
उत्तर :
किसी वस्तु की मूल स्थिति बदलने के लिए जो कार्य किया जाता है, वह उस वस्तु में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अब बदली हुई अवस्था से मूल अवस्था में वापस आते समय वस्तु जितना कार्य करती है, वही स्थितिज ऊर्जा की माप होती है।

यदि m मात्रा वाली वस्तु को पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर ले जाएँ तथा गुरुत्वीय त्वरण g हो, तो वस्तु में स्थितिज ऊर्जा (P.E. = मात्रा × गुरुत्वीय त्वरण × ऊँचाई;
∴ P.E. = mgh
अथवा, स्थितिज ऊर्जा = द्रव्यमान × गुरुत्वीय त्वरण × ऊँचाई
चूँकि यह स्थितिज ऊर्जा, गुरुत्व के विरुद्ध कार्य करने के कारण है, इसलिए इसे गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

सूत्र से स्पष्ट है कि यदि वस्तु h ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा mgh के रूप में घटने लगती है। अर्थात् वस्तु की स्थितिज ऊर्जा से mgh परिमाण का कार्य प्राप्त किया जा सकेगा। वस्तु में एक ही समय में स्थितिज तथा गतिज दोनों प्रकार की ऊर्जा हो सकती है। इन दोनों प्रकार की ऊर्जा के योग को यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 8.
गतिज ऊर्जा का मापन किस प्रकार होता है ? m मात्रा वाली वस्तु का वेग v हो तो उसमें उत्पन्न गतिज ऊर्जा का सूत्र ज्ञात करो।
उत्तर :
कोई गतिशील वस्तु गति अवस्था से स्थिर अवस्था तक आने के पहले तक वह किसी अवरोध बल के विरुद्ध कार्य करती है वही उस वस्तु की गतिज ऊर्जा की माप है।

यदि किसी वस्तु की मात्रा m हो तथा वह v वेग से गतिमान हो तो उस वस्तु की गतिज ऊर्जा का मान होगा।
गतिज ऊर्जा Ek = \(\frac{1}{2}\) × मात्रा × (वेग)2= mv2
माना कि भारी वस्तु की मात्रा M एवं वेग V है।
तथा हल्की वस्तु की मात्रा m और वेग v है।
यहाँ दोनों वस्तुओं का संवेग समान है।
∴ MV = mv या, \(\frac{M}{m}\)= \(\frac{v}{V}\)
यहाँ ∵ M > m, ∴ v > V
पुन: ∵ mv = MV
∴ mv × V >MV × V [∵ v > V]
या, mv2 > MV2
या, \(\frac{1}{2}\) mv2 > \(\frac{1}{2}\) Mv2
अर्थात् हल्की वस्तु की गतिज ऊर्जा, भारी वस्तु की गतिज ऊर्जा की तुलना में अधिक होगी।

प्रश्न 9.
एक स्वतंत्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करती है-सिद्ध करो।
उत्तर :
गुरुत्व बल के अधीन स्वतंत्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु में ऊर्जा का संरक्षण : माना कि पृथ्वी से ‘h’ ऊँचाई पर स्थित छत ‘m’ मात्रा वाला एक पत्थर रखा हुआ है। चूंकि वस्तु विराम में है अत: गतिज ऊर्जा शून्य (0) है और उसकी स्थितिज ऊर्जा mgh है।
∴ उस पत्थर में कुल ऊर्जा = 0 + mgh = mgh.
यदि अब उस वस्तु को गुरुत्व बल के अधीन मूल रूप नीचे गिरने दिया जाता है तो कुछ दूर तक गिरने के पश्चात् P.E. के मान में कमी तथा K.E. के मान में वृद्धि होती है। जब वस्तु A से S दूरी तय करके B स्थिति पर जाती है तो तब पृथ्वी तल से वस्तु की ऊँचाई (h-s) है। इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा = m g(h-s) है। वस्तु का प्रारंभिक वेग शून्य था इसलिए B बिन्दु पर वस्तु का वेग V है।
∴ V2 = U2 + 2 gs
या V2 = 0 + 2 gs
∴ V2 = 2 gs
∴ B बिन्दु पर गतिज ऊर्जा (K.E.) = \(\frac{1}{2}\) mv2
गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) m.2gs.
∴ गतिज ऊर्जा =mgs होगी।
∴ कुल ऊर्जा का योग = mg(h-s) + mgs = mgh – mgs + mgs = mgh.

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अत: गुरुत्व के अधीन किसी ऊँचाई से गिरती हुई वस्तु की कुल ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। पृथ्वी तुल से टकराने के ठीक पहले वस्तु में गतिज ऊर्जा का मान सर्वोच्च होगा तथा स्थितिज ऊर्जा का मान शून्य होने के कारण गतिज ऊर्जा का परिमाण =mgh होगा।
पृथ्वी से टकराने के पश्चात् h = 0, ∴ P.E. = 0 तथा V = 0, ∴ K.E. = \(\frac{1}{2}\) mv2 = 0
∴ P.E. तथा K.E. दोनों शून्य हो जाने पर कुल ऊर्जा का रूपान्तरण ध्वनि ऊर्जा, उष्मा ऊर्जा आदि में हो जाता है।

आंकिक प्रश्नोत्तर (Numrical Answer Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
10 N का बल लगाने पर कोई वस्तु 50 cm से विस्थापित होती है, तों संपादित कार्य की गणना करें।
हल :
यहाँ बल (F) = 10 N
विस्थापित दूरी (d) = 50 cm = \(\frac{50}{100}\) मी०
संपादित कार्य (w) = F × d
= 10 × \(\frac{50}{100}\) = 5 J

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प्रश्न 2.
कुतुबमीनार की ऊँचाई 72 m है। 50 kg का मनुष्य ऊपर तक चढ़ने में कितना कार्य करता है ?
g = 10 m / s2
हल :
यहाँ मनुष्य की मात्रा: = 50 kg
मीनार की ऊँचाई = 72 m
g = 10 m / s2
मनुष्य द्वारा किया गया कार्य = mgh
= 50 × 10 × 72 = 36000 जूल
= 36 kilo jule

प्रश्न 3.
600 kg का कोई पिंड 30 m / s के वेग से चल रहा है। यदि प्रतिरोधी बल लगाकर इसे 150 m की दूरी पर रोक लिए जाए, तो बल का मान क्या होगा? इस अवधि में किए गए कार्य की भी गणना करें।
हल :
v = 0, μ = 30 m / s, s =150 m
v2 = u2 – 2 s
(0)2 = (30)2 – 2 × f × 150
0 =900 – 300 f mf
300 f = 900 = 600 × 3
f = 3 m / s2 = 1800 N
प्रतिरोध बल = 1.8 × 103
किया गया कार्य (w) = F. S.
= 1800 × 150
= 270000
= 27 × 104 J

प्रश्न 4.
60 g द्रव्यमान वाली कोई गेंद 3 m की ऊँचाई से गिरती है। पृथ्वी की सतह पर पहुँचने के समय उसकी गतिज ऊर्जा की गणना करें। g = 10 m / s 2
हल :
g = 10 m / s2
v = अन्तिम वेग, μ = प्रारम्भिक वेग = 0
v2 = μ2 + 2 gs
= (0)2 + 2 × 10 × 3 m
= 60 m / s
गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) m v2
= \(\frac{1}{2}\) × 60 × 60
= 1800 जूल / sec
= 1800 वाट
= 1.8 kw

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प्रश्न 5.
यदि किसी कार का द्रव्यमान 1500 kg है तो उसके वेग को 30 km h-1 से 60 km h-1 तक 5 सेकेण्ड में बढ़ाने में कितना बल लगाना पड़ेगा ?
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प्रश्न 6.
किसी वस्तु पर 7 N का बल लगता है। मान लीजिए बल की दिशा में विस्थापन 8 m है। मान लीजिए वस्तु के विस्थापन के समय लगातार वस्तु पर बल लगता है। इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
हल :
W = F × S
= 7 × 8
= 56 न्यूटन मी०
= 56 जूल

प्रश्न 7.
5 m s-1 के वेग से गतिशील किसी m द्रव्यमान की वस्तु की गतिज ऊर्जा 25 J है। यदि इसके वेग को दोगुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी ? यदि इसके वेग को तीनगुना बढ़ा दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी ?
हल :
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा 10
= \(\frac{1}{2}\) × 2 ×(15)2
= 225 जूल

प्रश्न 8.
12 kg द्रव्यमान की एक वस्तु धरती से एक निश्चित ऊँचाई पर स्थित है। यदि वस्तु की स्थितिज ऊर्जा 480 J है तो वस्तु की धरती के सापेक्ष ऊँचाई ज्ञात कीजिए। दिया है, परिकलन में सरलता के लिए g का मान 10 ms-2 लें।
हल : यहाँ m = 12 kg, g = 10 ms-2
mgh = स्थितिज ऊर्जा
12 × 10 × h = 480
∴ h = 4 मीटर

प्रश्न 9.
एक लैंप 1000 J विद्युत ऊर्जा 10 s} में व्यय करता है। इसकी शक्ति कितनी है ?
हल :
किया गया कार्य = 1000 J
समय = 10 S
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा 11
= \(\frac{1000}{10}\)
= 100 जूल/sec
= 100 वाट

प्रश्न 10.
10 न्यूटन का बल लगाने पर कोई वस्तु 50 मीटर विस्थापित होती है तो किये गये कार्य का मान निकालो।
हल :
बल (f) = 10 न्यूटन ; विस्थापन (d) = 50 m = 0.5 m
कार्य = F × d
= 10 × 0.5
= 5.0 = 5 जूल

प्रश्न 11.
5 न्यूटन के बल से कोई वस्तु 75 cm विस्थापित होती है तो बल द्वारा संपादित कार्य कितना होगा?
हल :
बल (f) = 5 न्यूटन, विस्थापन (d) = 75 cm = 0.75 m
किया गया कार्य = F × d
= 5 × 9.75
= 3.75 जूल

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प्रश्न 12.
कोई पम्प 100 kg पानी 10 सेकेण्ड में 18 मीटर की ऊँचाई तक पहुँचता है तो पम्प की शक्ति कितनी है ?
हल :
यहाँ, मात्रा (m) = 100 kg
ऊँचाई (h) = 18 मीटर
g = 9.8
समय (t) = 10 sec
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा 12
= \(\frac{100 \times 9.8 \times 15}{10}\)
= 10 × 9.8 × 15
= 1764.0 जूल/Sec
= 1764 वाट

प्रश्न 13.
6 kg मात्रा वाला एक पत्थर का टुकड़ा विराम अवस्था में गिरता है जहाँ g का मान 9.8 m / sec2 है। 5 सेकेण्ड के बाद गतिज ऊर्जा कितनी होगी ?
हल :
5 सेकेण्ड बाद वस्तु का वेग (v) u = 0, f = 9.8
v = 4 + ft
=0 + 9.8 × 5
= 49.0
∴ v = 49 m / sec
m = 6 kg
वस्तु में गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2
= \(\frac{1}{2}\) × 63 × (49)2
= 3 × 2401
= 7203 वाट

प्रश्न 14.
25 kg मात्रा वाले पत्थर को जमीन से 40 मीटर की ऊँचाई तक ले जाया जाता है तो स्थितिज ऊर्जा कितनी होगी ?
हल :
वस्तु की मात्रा (m) = 25 kg
ऊँचाई (h) = 40 मीटर
g = 9.8
बस्तु में स्थितिज ऊर्जा = mgh
= 25 × 9.8 × 40
= 9800.0
= 9800 जूल

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 15.
यदि कोई 5 Newton का बल वस्तु के विस्थापन के 45° का कोण बनाते हुए लगता है और वस्तु का 2 m का विस्थापन होता है तो किया गया कार्य बताइए।
हल :
F = 5 न्यूटन
D = 2 m
θ = 45°
किया गया कार्य (w) = F × D Cos
= 5 × 2 cos 45
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा 13

प्रश्न 16.
यदि 3 J का कार्य 0.3 Sec. में किया जाता है तो शक्ति का निर्धारण कीजिए।
हल :
यहाँ w = 3 J
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा 14

प्रश्न 17.
यदि 10 kg की वस्तु को 10 metre ऊपर उठाया गया तो वस्तु में संचित स्थितिज ऊर्जा बताइए।
हल : यहाँ वस्तु की मात्रा (m) = 10 kg, ऊँचाई (h) = 10 m
वस्तु में संचित स्थितिज ऊर्जा =mgh}
= 10 × 9.8 × 10
= 980 J

प्रश्न 18.
यदि किसी वस्तु की मात्रा 5 ग्राम है और उसका वेग 4 cm / sec है तो वस्तु की गतिज ऊर्जा निकालिए।
हल :
यहाँ वस्तु की मात्रा (m) = 5 gm
वस्तु का वेग (v) = 4 cm / sec
वस्तु की गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv 2
= \(\frac{1}{2}\) × 5 × (4)2
= \(\frac{1}{2}\) × 5 × 16
= 40 erg

प्रश्न 19.
एक पम्प 15 मिनट में 500 लीटर जल 15 मी० की ऊँचाई तक उठठा सकता है तो पम्प की शक्ति ज्ञात करो (1Lit जल की मात्रा)
हल :
यहाँ m = 500 ली० = 500 kg
h = 15 मी०
g = 9.8
समय (t) = 15 मिनट = 15 × 60 सेकेण्ड ।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा 15

प्रश्न 20.
10 kg मात्रा वाली वस्तु को 10 मी० की ऊँचाई तक उठाया गया तो उस उच्चतम अवस्था में उसकी स्थितिज ऊर्जा ज्ञात करो ?
हल :
वस्तु की मात्रा (m)=10 kg
ऊँचाई (h) = 10 मीटर
g = 9.8
स्थितिज ऊर्जा = mgh
= 10 × 9.8 × 10
= 980 जूल।

प्रश्न 21.
एक मशीन की शक्ति 6 वाट है। यह 1 मिनट में कितना कार्य कर सकती है।
हल :
मशीन की शक्ति (p)=6 वाट
समय (t) = 1 मिनट =60 सेकेण्ड
कार्य = शक्ति × समय
= 6 × 60 = 360 जूल

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प्रश्न 22.
3 किलोवाट शक्ति वाली मशीन 15 मिनट में कितना कार्य कर सकती है।
हल :
शक्ति (p) = 3 किलोवाट =3000 वाट
समय (t) = 15 मिनट =15 × 60 सेकेण्ड
कार्य = शक्ति x समय
= 3000 × 15 × 60
= 2700000
= 2.7 × 106 जूल

प्रश्न 23.
20 N बल लगाने से कोई वस्तु बल की दिशा में 10 मीटर विस्थापित होती है। किये गये का परिमाण बताओ।
हल :
यहाँ F = 20 N, S = 10 M
किया गया कार्य = F × S
= 20 × 10
= 200 जूल

प्रश्न 24.
1 \(\frac{1}{2}\) घण्टे में 40 वाट शक्ति की मशीन द्वारा कितना कार्य संपादित होगा ?
हल :
समय = 1 \(\frac{1}{2}\) घण्टे = \(\frac{3}{2}\) × 60 × 60 s = 5400 s
शक्ति =40 वाट
किया गया कार्य = शक्ति x समय
= 40 × 5400
= 216000 जूल

प्रश्न 25.
50 किग्रा. का एक व्यक्ति 15 सेकेण्ड में 30 सीढ़ी ऊपर चढ़ता है। यदि प्रत्येक सीढ़ी की ऊँचाई 20 सेमी. हो, तो मनुष्य की शक्ति बताओ। (g = 9.8 m / s2)
हल :
h = 30 × 20
= 600 cm
= 6 m .
मनुष्य द्वारा किया गया कार्य = mgh
= 50 × 9.8 × 6 जूल
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प्रश्न 26.
20,000 न्यूटन भार का एक मोटरवाहन 8 मीटर/से. की समान चाल से 100 से. में 120 मी. ऊँची पहाड़ी पर चढ़ जाता है, तो बताओ-(i) मोटरवाहन के द्वारा किया गया कार्य, (ii) मोटरवाहन के ईंधन की शक्ति।
हल :
F = 20,000 न्यूटन भार
S = 120 मी॰
मोटरवाहन द्वारा किया गया कार्य = F x S
= 20,000 × 120
= 2400000
= 24 × 105 जूल

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प्रश्न 27.
एक थैले में 75 किग्रा. गेहूँ है। कितनी ऊँचाई तक इस थैले को उठाया जाय कि इसकी स्थितिज ऊर्जा 7350 जूल हो ?
हल :
यहाँ m=75 kg
g = 98 m / sec
mgh = स्थितिज ऊर्जा
75 × 9.8 × h = 7350
735 × h = 7350
h = \(\frac{7350}{735}\)
h = 10 m

प्रश्न 28.
10 किग्रा. मात्रा की एक गतिशील वस्तु की गतिज ऊर्जा 20 जूल है। वस्तु की चाल बताओ। हल :
वस्तु की मात्रा (m) = 10 किग्रा, वस्तु की चाल = v
गतिज ऊर्जा = 20
\(\frac{1}{2}\) mv2 = 20
\(\frac{1}{2}\) × 10 × v2 = 20
v2 = 4
v = 2 m / sec

प्रश्न 29.
50 किग्रा. मात्रा की वस्तु जमीन से 4 मीटर ऊपर स्थित है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा बताओ। यदि गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वस्तु स्वतंत्रतापूर्वक नीचे गिरती है तो जमीन को स्पर्श करने के समय इसका वेग कितना होगा ?
हल :
v2 = μ2 + 2 f s
μ= प्रारम्भिक वेग = 0
v2 = 02 + 2 × 9.8 × 4
v2 = 78.4
यहाँ v = अन्तिम वेग
S = दूरी = 4 मीटर
v = √78.4
गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2
v’ = 8.9 m / s
= \(\frac{1}{2}\) × 51 × 78.4 = 1960 जूल

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 5 कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा

प्रश्न 30.
50 ग्राम मात्रा की कोई वस्तु 10 cm / s के वेग से गतिशील है तो वस्तु की गतिज ऊर्जा ज्ञात करो। हल :
मात्रा (m) = 50 gm
वर्ग (v) = 10 cm / sec
वस्तु की गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2= \(\frac{1}{2}\) × 50 × (10)2
= \(\frac{1}{2}\) × 50 × 100 = 2500 अर्ग

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Physical Science Book Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Physical Science Chapter 4 Question Answer – पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
पृथ्वी का कितना भाग जल से ढँका हुआ है ?
उत्तर :
पृथ्वी का 75 % भाग जल से ढँका है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का कितना प्रतिशत जल मीठा जल है ?
उत्तर :
पृथ्वी पर पीने योग्य जल की मात्रा कुल उपलब्थ जल का 0.01 प्रतिशत है।

प्रश्न 3.
जल के किस गुण के कारण पेड़ पौधे फलते-फूलते हैं ?
उत्तर :
रसारोहण।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 4.
द्रव में द्रव के घोल का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
पानी में अल्कोहल।

प्रश्न 5.
घोल की सान्द्रता की इकाई क्या है ?
उत्तर :
ग्राम/लीटर।

प्रश्न 6.
पायस किस प्रकार का घोल है ?
उत्तर :
द्रव मे द्रव का।

प्रश्न 7.
एक ठोस एरोसॉल का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
धुआँ।

प्रश्न 8.
एवोगैड्रो संख्या का मान कितना होता है ?
उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 9.
हाइड्रोजन के कितने आइसोटोप होते हैं ?
उत्तर :
तीन।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 10.
इथाइल अल्कोहल का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
इथेनॉल।

प्रश्न 11.
निर्देशक क्या है ?
उत्तर :
वह रासायनिक पदार्थ जो स्वयं अपने रंग परिवर्तन द्वारा किसी उदासीन प्रतिक्रिया को पूर्ण होने की सूचना देता है, निर्देशक कहलाता है।

प्रश्न 12.
क्लोरोफार्म का आणविक सूत्र लिखिए।
उत्तर :
CHCl3

प्रश्न 13.
परमाणु के केन्द्रक में पाये जानेवाले कणों के नाम लिखो।
उत्तर :
म्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन।

प्रश्न 14.
शुद्ध जल के pH का मान कितना होता है ?
उत्तर :
7.0

प्रश्न 15.
ऐरोसोल क्या है?
उत्तर :
ऐरोसोल गैस में ठोस कणों के मिश्रण को कहते हैं।

प्रश्न 16.
दो रेडियो सक्रिय तत्व का नाम लिखो।
उत्तर :
यूरेनियम, रेडियम।

प्रश्न 17.
परमाणु के केन्द्रक में कौन धन आवेशित कण रहता है।
उत्तर :
प्रोट्रान।

प्रश्न 18.
एवोगैड्रो संख्या का मान क्या होता है?
उत्तर :
6.023 × 1023

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प्रश्न 19.
1 ग्राम अणु का आयतन कितना होता है?
उत्तर :
22.4 लीटर।

प्रश्न 20.
हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान 1.675 × 10-24 ग्राम है। 1 मोल हाइड्रोजन का द्रव्यमान क्या होगा ?
उत्तर :
1 मोल हाइड्रोजन का द्रव्यमान 3.350 × 10-24 g होगा।

प्रश्न 21.
NA से क्या प्रदर्शित किया जाता है ?
उत्तर :
NA से एवोगैड्रो संख्या को प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 22.
1.8 ग्राम जल में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
उत्तर :
6.022 × 1022 होगी।

प्रश्न 23.
यदि STP पर V लीटर हाइड्रोजन में अणुओं की संख्या n हो, तो V10 लीटर CO2 में STP पर अणुओं की संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
अणुओं की अभीष्ट संख्या \(\frac{n}{10}\) होगी।

प्रश्न 24.
मनुष्य के शरीर में कितना प्रतिशत जल होता है ?
उत्तर :
मनुष्य के शरीर में 80 % जल होता है।

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प्रश्न 25.
क्या जल एक परिवर्तनशील या बहुमुखी घोलक है ?
उत्तर :
हाँ, जल एक बहुमुखी अथवा सार्वत्तिक (Universal) घोलक (Solvent) है।

प्रश्न 26.
किस उपधातु की अधिकता के कारण जल प्रदूषण होता है ?
उत्तर :
आर्सेनिक !

प्रश्न 27.
किसने बताया कि परमाणु एक समान आवेशित गोला है ?
उत्तर :
जे. जे. थामसंन ने।

प्रश्न 28.
परमाणु का व्यास कितना सेमी० होता है ?
उत्तर :
10-6 से॰मी०।

प्रश्न 29.
समांग मिश्रण का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जल में चीनो का घोल।

प्रश्न 30.
परमाणु के नाभिक में कैसा विद्युत आवेश रहता है ?
उत्तर :
धनावेश।

प्रश्न 31.
परमाणु उदासीन क्यों होता है ?
उत्तर :
परमाणु में धन आवेशित कण प्रोटॉन एव ऋण आवेशित कण इलेक्ट्रॉन समान संख्या मे पाए जाते है जो एक दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।

प्रश्न 32.
नाभिक का आवेश उसके किस कण पर निर्भर करता है।
उत्तर :
प्रोटान पर।

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प्रश्न 33.
परमाणु संख्या क्या है ?
उत्तर :
परमाणु में उपस्थित प्रोटान या इलेक्ट्रॉन की संख्या।

प्रश्न 34.
परमाणु द्रव्यमान क्या है ?
उत्तर :
परमाणु द्रव्यमान का मान परमाणु की द्रव्यमान संख्या अर्थात् परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन की संख्या एवं न्यूट्रॉन की संख्या के योगफल के बराबर होता है।

प्रश्न 35.
आयन कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
आयन दो प्रकार के होते हैं – (i) धनायन, (ii) ॠणायन।

प्रश्न 36.
समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान में क्यों भिन्नता होती है ?
उत्तर :
उनके नाभिक में न्यूट्रॉन की संख्या भित्र-भिन्न होती है।

प्रश्न 37.
विसर्ग नली में कैथोड किरणें कहाँ से निकलती हैं ?
उत्तर :
कैथोड से।

प्रश्न 38.
किसी परमाणु में 13 प्रोटॉन हैं। इसकी परमाणु संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
परमाणु संख्या 13 होगी।

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प्रश्न 39.
संकेत \({ }_7^{14} \mathrm{~N}\) में परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या बताएँ।
उत्तर :
परमाणु संख्या = 7, द्रव्यमान संख्या = 14।

प्रश्न 40.
किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में 3 प्रोटॉन तथा 4 न्यूट्रॉन हैं। उस तत्व की द्रव्यमान संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
तत्व की द्रव्यमान संख्या 7 होगी।

प्रश्न 41.
किसी लिटमस पर अमोनियम क्लोरायड के जलीय विलयंन की क्रिया से क्या होता है ?
उत्तर :
नीला लिटमस पत्र लाल हो जाता है।

प्रश्न 42.
मधुमक्खी के डंक मारने से प्रभावित क्षेत्र की राहत के लिए किसी भस्मीय पदार्थ का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर :
क्योंकि भस्मीय पदार्थ के उपयोग से पभावित क्षेत्र की जलन से राहत मिलती है।

प्रश्न 43.
एक ठोस द्रव मिश्रण का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
चीनी एवं पानी का घोल।

प्रश्न 44.
बारूद एवं चूना पत्थर में कौन मिश्रण है ?
उत्तर :
बारूद।

प्रश्न 45.
STP पर ऑक्सीजन के एक नमूने का आयतन 22.4 लीटर है। इसमें अणुओं की संख्या कितनी है ?
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 46.
यदि STP पर V लीटर हाइड्रोजन में अणुओं की संख्या n हो, तो लीटर CO2 में STP पर अणुओं की संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
\(\frac{n}{10}\)

प्रश्न 47.
परमाणु के मौलिक कणों के नाम बताएँ।
उत्तर :
इलेक्ट्रान, प्रोटॉन, न्यूट्रान 1

प्रश्न 48.
परमाणु के नाभिक में उपस्थित मौलिक कणो के नाम लिखें।
उत्तर :
प्रोटॉन, न्यूट्रान।

प्रश्न 49.
इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के आविष्कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन के आविष्कारक के नाम जे॰ जे० थाम्सन है । प्रोटॉन के आविष्कारक के नाम अर्नेस्ट रदरफोर्ड है।

प्रश्न 50.
हाईड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम बताएँ।
उत्तर :
Protium, Deuterium, Tritium

प्रश्न 51.
उस तत्व का नाम बताएँ जिसके परमाणु में सिर्फ दो मूल कण पाए जाते हैं?
उत्तर :
हाइड्रोजन।

प्रश्न 52.
परमाणु-संरचना के किस भाग पर तत्व के रासायनिक गुण निर्भर करते हैं।
उत्तर :
केन्द्रक।

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प्रश्न 53.
हाइड्रोजन परमाणुओं के नाभिक में क्या होते हैं?
उत्तर :
1 प्रोटॉन।

प्रश्न 54.
किस कण में द्रव्यमान होता है परंतु आवेश नहीं?
उत्तर :
न्यूट्रान।

प्रश्न 55.
कैल्सियम हाइड्राक्साइड के घुलनशीलता पर तापक्रम का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
घटती।

प्रश्न 56.
शुद्ध पेय जल में आर्सेनिक का मात्रा क्या होता है?
उत्तर :
6.5 – 8.5

प्रश्न 57.
पेय जल में आर्सेनिक का मात्रा क्या होता है?
उत्तर :
0.05 mg / L

प्रश्न 58.
फ्लोराइड के अधिकता से होने वाला रोग है?
उत्तर :
दन्तक्षय।

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प्रश्न 59.
इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण कितना होता है ?
उत्तर :
1.60 × 10-19 कुलम्ब (c)

प्रश्न 60.
रेड़ियो सक्रिय तत्व को विद्युतीय क्षेत्र में रखने पर कितनी किरणें निकलती हैं ?
उत्तर :
3 किरणें।

प्रश्न 61.
ग्लाउबर लवण का रासायनिक नाम क्या है ?
उत्तर :
सोडियम सल्फेट Na2 SO4 10 H2O।

प्रश्न 62.
हाइपो का रासायनिक नाम क्या है ?
उत्तर :
Na2 S2 O3 5 H2O सोडियम थायो सल्फेट।

प्रश्न 63.
वाष्पीकरण क्या है ?
उत्तर :
द्रव का वाष्प में बदलने की क्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।

प्रश्न 64.
अल्कोहल और जल में किसका क्वथनांक कम होता है ?
उत्तर :
अल्कोहल और जल में अल्कोहल का क्वथनांक कम होता है।

प्रश्न 65.
कच्चे तेल से बिटुमिन प्राप्त करने के लिए तापक्रम कितना ° C चाहिए ?
उत्तर :
कच्चे तेल से बिटुमिन पदार्थ करने के लिए तापक्रम 500° C होना चाहिए।

प्रश्न 66.
पेट्रोलियम का जेट जलावन क्या है ?
उत्तर :
गैसोलीन।

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प्रश्न 67.
परमाणु के मौलिक कणों में सबसे हल्का कण कौन-सा है ?
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन।

प्रश्न 68.
एक अम्ल का नाम बताओ।
उत्तर :
नाइट्रिक एसिड (HNO3) ।

प्रश्न 69.
हाइड्रोजन युक्त यौगिक जिनके जलीय घोल विद्युत विच्छेदन करने पर क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर :
हाइड्रोजन युक्त जल का विद्युत विच्छेदन करने पर हाइड्रोजन (H+) एवं हाइड्रांक्सिल (OH) आयन प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 70.
घोल की अम्लीय या भास्मिक प्रकृति किस स्केल से प्राप्त करते हैं ?
उत्तर :
घोल की अम्लीय या भास्मिक प्रकृति pH स्केल से ज्ञात करते हैं।

प्रश्न 71.
एक सूचक (Indicator) का नाम बताओ।
उत्तर :
मिथाइल ऑरेंज है।

प्रश्न 72.
जेल का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
जिलेटीन ।

प्रश्न 73.
α-कण क्या होते हैं?
उत्तर :
होलियम नाभिक।

प्रश्न 74.
एक मोल हाइड्रोजन में अणुओं की संख्या कितनी होगी?
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 75.
STP 16 ग्राम आक्सीजन का आयतन क्या है?
उत्तर :
11.2 लोटर

प्रश्न 76.
पदार्थ के परिमाण की इकाई क्या है?
उत्तर :
Mole

प्रश्न 77.
NA से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर :
नाइट्रोजन के 4 परमाणु।

प्रश्न 78.
नाइट्रोजन का ग्राम अणुभार कितना है?
उत्तर :
28 ग्राम है।

प्रश्न 79.
वास्तविक घोल में वितरित कणों का आकार क्या होता है?
उत्तर :
वास्तविक घोल में वितरति कणों का आकार 10-8 से॰मी॰ से 10-7 से॰मी०।

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प्रश्न 80.
CaOCl2 यौगिक का प्रचलित का नाम क्या है?
उत्तर :
Calcium oxy chloride

प्रश्न 81.
वह अभिक्रिया क्या कहलाती है जब कोई अम्ल किसी भष्म से अभिक्रिया कर लवण एवं जल बनाते हैं।
उत्तर :
उदासीकरण।

प्रश्न 82.
किसी ऐसे अम्ल का नाम बतायें जिसका प्रयोग स्नानघर साफ करने में किया जाता हैं।
उत्तर :
Hcl

प्रश्न 83.
किसी ऐसे गैस का नाम बतायें जिसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
उत्तर :
NH3

प्रश्न 84.
विस्थापित हाइड्रोजन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
अम्ल में उपस्थित हाइड्रोज जो धातु द्वारा प्रतिस्थापित होता है । यह H+होता है ।

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प्रश्न 85.
जल की विशिष्ट उष्मा कितनी होती है?
उत्तर :
जल की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता 4.186 J / g° C होती है।

प्रश्न 86.
जल का क्वथनांक कितना होता है?
उत्तर :
100° C

प्रश्न 87.
जल की अस्थाई कठोरता को किस विधि दूर किया जा सकता है?
उत्तर :
जल की अस्थायी कठोरता को आयन विनिमय प्रक्रिया द्वारा दूर किया जा सकता है।

प्रश्न 88.
जल में कैल्सियम एवं मैग्नीशियम के सल्फेट एवं क्लोराइड घुले रहने पर किस प्रकार की कठोरता उत्पन्न होती है?
उत्तर :
स्थाई कठोरता।

प्रश्न 89.
अम्ल का स्वाद कैसा होता है ?
उत्तर :
खट्टा।

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प्रश्न 90.
एक तनु अम्ल का नाम बताओ।
उत्तर :
टारटेरिक अम्ल, एसिटिक अम्ल।

प्रश्न 91.
फिनाल्फ्थैलीन का स्वाभाविक तथा क्षारीय रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
स्वाभाविक रंग रंगहीन तथा क्षारीय रंग गुलाबी होता है।

प्रश्न 92.
मिथाइल आरेंज का स्वाभाविक तथा अम्लीय रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
मिथाइल आरेंज का स्वाभाविक रंग नारंगी तथा अम्लीय रंग गुलाबी होता है।

प्रश्न 93.
Ca(OH)2 की अम्लीयता कितनी है ?
उत्तर :
2 ।

प्रश्न 94.
pH स्केल का मान कितना से कितना होता है ?
उत्तर :
0 से 14 तक।

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प्रश्न 95.
शुद्ध जल का pH colour code क्या है ?
उत्तर :
71

प्रश्न 96.
भास्मिक आक्साइड के दो उदाहरण दें।
उत्तर :
C2O, MgO।

प्रश्न 97.
एक अम्लीय लवण का उदाहरण दो।
उत्तर :
NaHSO4

प्रश्न 98.
एक भास्मिक लवण का उदाहरण दें।
उत्तर :
PbCOHCl।

प्रश्न 99.
भूमिगत जल के अधिक दोहन से क्या होता है ?
उत्तर :
आर्सेनिक युक्त जल निकलता है।

प्रश्न 100.
विभिन्न घनत्व वाले द्रवों के मिश्रण को किस विधि द्वारा अलग करते हैं ?
उत्तर :
पृथक्करण कीप द्वारा अलग करते हैं।

प्रश्न 101.
PVC का पूरा नाम क्या है?
उत्तर :
Poly Vinyl Chloride.

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प्रश्न 102.
ATP का पूरा नाम क्या है?
उत्तर :
Adenosine Triphosphate.

प्रश्न 103.
H2SO4 के घोल में नीले लिटमस को डुबाने पर कौन-सा रंग प्राप्त होता है ?
उत्तर :
लाल रंग प्राप्त होता है।

प्रश्न 104.
जल में कार्बन-डाई-ऑक्साइड के मिलने से कौन-सा अम्ल प्राप्त होता है ?
उत्तर :
कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) प्राप्त होता है।

प्रश्न 105.
वर्षा जल की सान्द्रता क्या होनी चाहिए।
उत्तर :
71

प्रश्न 106.
एक लवण का नाम बताओ जिससे जल में स्थाई कठोरता उत्पन्न होती है।
उत्तर :
कैल्सियम क्लोराइड (CaCl2)

प्रश्न 107.
एक मोल Na+ आयन में कणों की संख्या बताओ।
उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 108.
एक मोल जल (H2O) में जल अणुओं की संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 109.
C-12 समस्थानिक के एक मोल में कार्बन की मात्रा कितनी होती है ?
उत्तर :
12 g।

प्रश्न 110.
1 ग्राम ऑक्सीजन मोल में आक्सीजन अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
उत्तर :
1.88 × 1022

प्रश्न 111.
6.023 × 1023 हाइड्रोजन परमाणुओं का भार कितना होगा ?
उत्तर :
1.008 g।

प्रश्न 112.
N.T.P. पर 22.4 लीटर गैस के आयतन में अणुओं की संख्या बताओ।
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 113.
एक मोल CO2 अणु में, अणुओं के कणों की संख्या बताओ।
उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 114.
एक नन एक्वश साल्वेन्ट का नाम बताओ।
उत्तर :
अल्कोहल।

प्रश्न 115.
क्या चीनी की घुलनशीलता कोलकाता और दार्जिलिंग में समान होगी ?
उत्तर :
चीनी की घुलनशीलता कोलकाता एवं दार्जिलिंग में समान नहीं होगी।

प्रश्न 116.
प्रोटान और न्यूट्रान परमाणु में कहाँ स्थित है?
उत्तर :
केन्द्रक में।

प्रश्न 117.
परमाणु कौन-सा मौलिक कण केन्द्र के बाहर घूमता रहता है?
उत्तर :
Electron

प्रश्न 118.
क्या संतृत्प घोल को असंतृप्त घोल में तैयार किया जा सकता है?
उत्तर :
हाँ, घोलक की मात्रा बढ़ाकर।

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प्रश्न 119.
आयनमुक्त जल क्या है ?
उत्तर :
आसवित जल (Distilled Water) !

प्रश्न 120.
अम्ल के गुण बताओ।
उत्तर :
अम्ल का स्वाद खट्टा होता है यह भस्म या क्षार से क्रिया कर लवण बनाते हैं तथा धातु से क्रिया कर H2 देता है।

प्रश्न 121.
नाइट्रिक अम्ल का औद्योगिक उपयोग लिखो।
उत्तर :
खाद्य बनाने में।

प्रश्न 122.
घोल में ठोस घोल का उदाहरण बताइये।
उत्तर :
धुआँ का हवा में मिलना।

प्रश्न 123.
रंग में किरासिन मिलाने से वाष्प के कारण क्या हानियाँ होती हैं ?
उत्तर :
शरीर के चमड़े की पपड़ी जल जाती है अम्लीयता या भस्मीकृत के कारण।

प्रश्न 124.
ग्राम परमाणु से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
किसी तत्व के परमाणु द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करने पर ग्राम परमाणु कहलाता है।

प्रश्न 125.
किस उपधातु के जल में घुले रहने पर जल प्रदूषित होता है?
उत्तर :
यूरेनियम, थोरियम।

प्रश्न 126.
एवोगैड्रो संख्या का मान कितना होता है ?
उत्तर :
6.023 × 1023

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
शुद्ध पदार्थ क्या हैं ? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
शुद्ध पदार्थ (Pure matter) : हमारे दैनिक जीवन में शुद्ध पदार्थ अत्यन्त आवश्यक हैं। शुद्ध पदार्थों के अपने निक्वित गुण होते है। सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा तथा सभी रासायनिक योगिक शुद्ध पदार्थों के उदाहरण हैं। सभी ठास शुद्ध पदार्थों का एक निध्चित गलनांक होता है।

प्रश्न 2.
मिश्रण से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :
मिश्रण : जब किसी शुद्ध पदार्थ में अन्य पदार्थ मिले होते हैं तो वह मिश्रण कहलाता है। मिश्रण में मिले हुए पदार्थों को उनके अवयव कहा जाता है। कुछ मिश्रण ऐसे होते है जिनमें इन अवयवों को आसानी से देखा जा सकता है। किन्तु कुछ मिश्रण में इन्हें अलग-अलग देखना सम्भव नहीं होता।

प्रश्न 3.
समांगी मिश्रण के बारे में उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) : ऐसे मिश्रण जिनमें दो या दो से अधिक अवयव उपस्थित हो किन्तु उन्हें अलग-अलग देखा न जा सके, समांगी मिश्रण कहलाते हैं। जेसै चीनी एवं पानी के मिश्रण में चीनी और पानी को अलग-अलग देखा नहीं जा सकता है। अतः चीनी और पानी का मिश्रण एक समांग मिश्रण है।

प्रश्न 4.
विषमांगी मिश्रण के बारे में उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture) : ऐसे मिश्रण जिनमें उनके अवयवी पदार्थों को अलगअलग देखा जा सकता है, विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं। जैसे बालू और लोहे के मिश्रण में बालू और लोहे को अलग-अलग देखा जा सकता है।

प्रश्न 5.
कैथोड किरण किस मौलिक कण का गतिशील समूह है ?
उत्तर :
कैथोड किरणे मौलिक कण इलेक्ट्रॉन का गतिशील समूह है।

प्रश्न 6.
प्रोटॉन की खोज का क्या आधार था ?
उत्तर :
प्रोटॉन की खोज का आधार इलेक्ट्रॉन को खोज थी क्योंकि इलेक्ट्रॉन पर ऋण आवेश होता है और परमाणु उदासीन होता है। अत: परमाणुओं में धन आवेश युक्त कण की उपस्थित अनिवार्य थी।

प्रश्न 7.
रदरफोर्ड के α – विकर्णन प्रयोग में α – कण क्या हैं ?
उत्तर :
रदरफोर्ड के α प्रकीर्णन प्रयोग में α-कण हीलियम परमाणु (2H4) के समतुल्य धन आवेशित कण हैं।

प्रश्न 8.
रदरफोर्ड ने α कण विकर्णन प्रयोग किस धातु की पत्तर पर किया ?
उत्तर :
रदरफोर्ड में α – कर्ण प्रकीर्णन का प्रयोग सोने की पत्तर पर किया था।

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प्रश्न 9.
जल को उबालने से जल की किस प्रकार की अशुद्धि दूर होती है ?
उत्तर :
जल को उबालने से जल की अस्थाई कठोरता दूर होती है।

प्रश्न 10.
निथारना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
निथारना (Decantation) : “वह विधि जिसमें द्रव के रूप में किसी मिश्रण में उपस्थित अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव के नीचे अवक्षेपित करके ऊपर स्थित द्रव को पृथक कर लिया जाता है, उसे निथारना कहते है। बालू एवं पानी के मिश्रण से अघुलनशील ठोस बालू को पानी से अलग करना।

प्रश्न 11.
छानना क्या है ?
उत्तर :
छानना (Filtration) : “वह विधि जिसमें छन्ना कागज की सहायता से किसी मिश्रण में उपस्थित ठोस एवं तरल पदार्थों को पृथक किया जाता है, उसे छानना कहते हैं।” इस विधि का प्रयोग उस समय किया जाता है जब किसी मिश्रण में अघुलनशील ठोस पदार्थ के कण अत्यन्त छोटे-छोटे रहते हैं एव द्रव में तैरते रहते हैं।

प्रश्न 12.
पृथक्कारी कीप क्या है ? इसके उपयोग का उल्लेख करें।
उत्तर :
पृथक्कारी कीप एवं इसका उपयोग (Use of separating funnel) : पृथक्कारी कीप काँच का एक बल्ब होता है जिसकी डंडी में एक स्टॉप कांक (stopcock) लगा रहता है। इसका उपयोग दो या दो से अधिक अमिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है । उदाहरण के लिए, तेल एवं जल के मिश्रण से तेल और जल को पृथक्कारी कीप की सहायता से पृथक किया जा सकता है।

प्रश्न 13.
मोलर मात्रा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
मोलर मात्रा (Molar mass) : किसी तत्व अथवा यौगिक की मोलर मात्रा का निर्धारण पारमाणविक, आणविक अथवा अणुसूत्र भार ज्ञात करके इस मान को ग्राम/मोल में व्यक्त किया जाता है। यथा बोमिन (Br) की मोलर मात्रा 79.904 ग्राम/मोल तथा क्लोरिन (Cl) की मोलर मात्रा 35.4527 ग्राम/मोल है।.
किसी विशिष्ट प्रकार के प्रारम्भिक कणों (परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनो) के एक मोल की ग्राम में अभिव्यक्त मात्रा उस कण की मोलर मात्रा (Molar Mass) कहलाती है। यह वास्तविक रूप उस वस्तु के 6.023 × 1023 कणों की ग्राम में अभिव्यक्त मात्रा है।

प्रश्न 14.
साथारण साबुन के व्यवहार सें जल को वर्गीकृत करो।
उत्तर :
जिस जल के साथ साबुन का जल्द झाग बनता है वह जल मृदुल जल (Soft Water) होता है। जिस जल के साथ सुगमता से झाग कम बनता है वह कठोर जल (Hard Water) होता है।

प्रश्न 15.
परमाणु को परिभाषित करें।
उत्तर :
किसी तत्व की सबसे, छोटी इकाई जो स्वतंत्र अवस्था में नहीं पायी जाती है बल्कि जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकती है उसे परमाणु कहते है। हर ठोस, तरल, गैस, और प्लाज्मा तटस्थ या आयनन परमाणुओं से बना है।

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प्रश्न 16.
घोल से क्या समझते हो?
उत्तर :
दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को घोल कहते हैं। किसी निश्वित तापमान पर घोल के उपादानों का आपेक्षकि अनुपात एक सीमा तक परिवर्तित किया जा सकता है। जब नमक को पानी में घोला जाता है तो एक समांगी मिश्रण बनता है। यह समांगी मिश्रण नमक का पानी में घोल कहलाता है।

प्रश्न 17.
आसवन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
आसवन (Distillation) : वह प्रक्रिया, जिसमें किसी द्रव को गर्म करके वाष्प में परिवर्तित किया जाता है, फिर उस वाष्य को ठडा करके पुन: द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।

प्रश्न 18.
पेट्रोलियम के शोधन की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर :
पेट्रोलियम के शोधन की आवश्यकता (Necessity of refining of petroleum) : पेट्रोलियम भूरे-काले रंग का गाढ़ा द्रव होता है। यह एक जीवाश्म ईधन है जो भूमि में जल के गहरे कुए खोद करके प्राप्त किया जाता है। यह तेल अनेक हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है। इसमें पानी, मिट्टी तथा नमक के कण मिले होते हैं। यह चिपचिपा एक प्रतिदीप्तिशील, दुर्ग्धयुक्त द्रव होता है और इसमें एल्केन हाइड्रोकार्बन भी मिश्रित होता है। इसलिये इसे उपयोग में लाने के लिये इसका परिष्करण करते हैं।

प्रश्न 19.
भंजक आसवन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
भंजक या प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) : यह विधि दो या दो से अधिक मिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवी द्रवों को पृथक करने में अपनाई जाती है, जिनके अवयवी द्रवों के क्वथनांक का अंतर बहुत कम (10° C. या कम) हो। उदाहरण के लिए, मेथिल अल्कोहॉल (क्वथनांक 65° C) को ऐसीटोन (क्वथनांक 56° C) से इस विधि द्वारा पृथक किया जा सकता है।

प्रश्न 20.
परमाणु में इलेक्ट्रॉन की स्थिति बताएँ।
उत्तर :
परमाणु में इलेक्ट्रॉन केन्द्रक के चारों तरफ विभिन्न कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं।

प्रश्न 21.
रदरफोर्ड के उस प्रयोग का संक्षिप्त वर्णन करें जिससे किसी परमाणु के नाभिक का पता चलता है।
उत्तर :
रदरफोर्ड ने अपन α – कण प्रकीर्णन प्रयोग के अंतर्गत रेडियोसक्रिय पदार्थ रेडियम द्वारा तीव्र गति से निकले α कणों का सोने की पत्तर (foil) पर प्रहार कराया तो देखा कि अधिकांश α-कण अपने मार्ग से बिना विचलित हुए स्वर्ण पत्तर को पार करके सीधे निकल जाते हैं, तथा कुछ α – कण अपने मार्ग से थोड़ा विचलित हो जाते हैं एवं बहुत ही कम – कण (20,000 में से एक कण) टकराकर अपने मार्ग पर पुन: वापस आ जाते हैं।

इस प्रयोग से रदरफोर्ड ने निम्नांकित निष्कर्ष निकाले।
(i) परमाणु में अधिकतर स्थान रिक्त हैं जिसके कारण अधिकतर α कण उसमें से सीधे निकल जाते हैं। (ii) धन आवेशित α – कणों का सभी दिशाओं में विचलित होना यह दर्शाता है कि परमाणु के मध्य स्थान पर कोई समान आवेश (धन आवेश) उपस्थित है। α-कणों की संख्या बहुत कम होती है, अत: परमाणु के अन्दर उपस्थित धन आवेशित वस्तु का आयतन अत्यंत ही कम होता है।

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प्रश्न 22.
परमाणु की कक्षाओं को ऊर्जा स्तर क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
ऊर्जा स्तर (Energy Level) : केन्द्रक के चारो तरफ विभित्र कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन बिना ऊर्जा क्षय (loss of energy) के लगातार चक्कर लगाते रहते हैं। अत:, इन कक्षों को मुख्य ऊर्जा स्तर (energy level) या क्वांटम स्तर (Quantam level) कहते हैं। इन ऊर्जा स्तरों को क्वाटम संख्या (Quantam Number) n द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। पहली से सातवीं कक्ष अर्थात् K से Q तक के सेल का ऊर्जा स्तर n का मान क्रमशः 1 से 7 तक होता है। n का मान जितना ही कम होगा वह कक्ष केन्द्र से उतना ही नजदीक होगा तथा उसकी ऊर्जा उतनी ही कम होगी।

प्रश्न 23.
समस्थानिक क्या है ?
उत्तर :
समस्थानिक (Isotope) : यदि किसी तत्व के परमाणु इस प्रकार पाये जाएँ कि उनकी परमाणु संख्या समान किन्तु द्रव्यमान संख्या विभिन्न हो, तो उन्हें उस तत्व का समस्थानिक कहते हैं।
जैसे हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक, \({ }_1 H^1\), \({ }_1 H^2\) तथा, \({ }_1 H^3\) हैं।

प्रश्न 24.
मात्रा संख्या किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन की संख्या के योगफल को मात्रा संख्या कहते है।

प्रश्न 25.
केन्द्रक बल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
केन्द्रक बल (Nuclear force) : केन्द्रक पर उपस्थित प्रोटानों तथा न्यूट्रॉनों के बीच आवेश का आदानप्रदान होता रहता है जिसके फलस्वरूप एक तीव्र आकर्षण बल की सृष्टि होती है। इस आकर्षण बल को केन्द्रीय बल (Nuclear force) कहते हैं।

प्रश्न 26.
तनु तथा सांद्र घोल में मुख्य किस चीज का अन्तर होता है ?
उत्तर :
तनु में घोलक (जल) की मात्रा अधिक और सान्द्र में जल की मात्रा कम होती है।

प्रश्न 27.
प्रबल अम्ल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रबल अम्ल या तीव्र अम्ल (Strong Acid) : वह अम्ल जो जलीय घोल में पूर्णत: आयनीकृत होकर अधिक हाइड्रोजन आयन (H+)उत्पन्न करते हैं, प्रबल अम्ल या तीव्र अम्ल कहलाते हैं।
जैसे – HCl, HNO3, H2SO4 आदि।

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प्रश्न 28.
कॉपर तथा चाँदी के साथ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल प्रतिक्रिया क्यों नहीं करता है ?
उत्तर :
कॉपर तथा चाँदी हाइड्रोजन से अधिक विद्युतात्मक है।

प्रश्न 29.
सोडियम हाइड्राक्साइड के साथ तनु HCl प्रतिक्रिया करके क्या बनता है ?
उत्तर :
साथारण नमक अैर पानी बनता है।

प्रश्न 30.
Universal Indicator क्या है ?
उत्तर :
Universal Indicator : यह एक Litmus paper की तरह ही एक सूचक है जो यह दिये गये घोल का strength कितना pH है ज्ञात करने में करते हैं। इसक रंग हरा होता है । यदि किसी घोल में इस Universal incicator को डुबा कर उसके रंग में आये परिवर्तन को दिये गये ऊपर रंग chart से मिलाने पर जो रंग मिलता है वही उसका pH होता है। इस तरह तुम अपने रक्त, मूत्र, लार, दूध तथा नींबू का भी pH निकाल सकते हो।

प्रश्न 31.
जल की कठोरता के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
जल की कठोरता के कारण : धातुएँ जैसे कैल्सियम (Ca), मैग्नेशियम (Mg) तथा लोहा (Iron) के क्लोराइड, सल्फेटस या नाइट्रेट्स और बाईकार्बोनेट लवणों का प्राकृतिक जल मे घुला होना जल की कठोरता के कारण हैं। इन धातुओं के क्लोराइड और सल्फेट साधारणतया मिट्टी में उपस्थित रहते हैं जो जल में सीधे घुलकर जल को कठोर बना देते हैं। इन धातुओं के बाईकार्बोनेट मिट्टी में उपस्थित नहीं होते लेकिन इनके कार्बेनेटस जल में कुछ मात्रा में घुली वायुमण्डलीय कार्बनडाईक्साईड से प्रतिक्रिया कर बाईकार्बोनेट उत्पन्न करते हैं और जल कठोर हो जाता है।

प्रश्न 32.
समभारिक क्या है ?
उत्तर :
समभारिक (Isobar) : ऐसे तत्वों को समभारिक (isobars) कहा जाता है जिनका परमाणु द्रव्यमान समान होता है, किन्तु परमाणु संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती है। परमाणु संख्या में अन्तर का कारण उन तत्वों के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्याओं का भिन्न-भित्र होना है।

प्रश्न 33.
अधिकतर तत्वों के परमाणु द्रव्यमान भिन्नांक क्यों होते हैं ?
उत्तर :
परमाणु भार भिन्न के रूप में होने का कारण : अधिकांश तत्वों के दो या दो से अधिक आइसोटोप होते हैं। चूँक किसी तत्व का परमाणु भार उसके सभी आइसोटोप के भारों का औसत होता है, अत: यह प्राय: भिन्न के रूप में प्राप्त है।

प्रश्न 34.
संकेत \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\) क्या सूचना देता है ?
उत्तर :
संकेत \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\) क्लोरीन परमाणु की सूचना देता है जिससे पता चलता है कि क्लोरीन की द्रव्यमान संख्या 35 एवं परमाणु संख्या 17 होती है।

प्रश्न 35.
ताजा दूध का pH मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH मान में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर :
दूध से दही बनने पर यह अम्लीय हो जाता है, अत: इसका pH मान 6 से कम हो जायेगा।

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प्रश्न 36.
क्षार क्या होते हैं ? क्षार के दो उदाहरण दें।
उत्तर :
क्षार (Alkali) : जल में घुलनशील भसम (base) क्षार कहलाते हैं। उदाहगण के लिए, सोडियम एवं पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड, कैल्सियम के हाइड्रॉंक्साइड इत्यादि जल में घुलनशील होते है, अत: ये क्षार हैं। लेकिन कॉपर के हाइड्रॉक्साइड, लोहे के हाइड्रॉक्साइड, अल्युमिनियम का हाइड्रॉक्साइड इत्यादि जल में घुलनशील नहीं हैं, इसलिए ये भस्म क्षार नहीं है।

प्रश्न 37.
निम्नलिखित अम्लों में सामान्य लवण एवं अम्लीय लवण को चुनें –
(a) कैल्सियम सल्फेट (CaSO4)
(b) सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3)
(c) सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट (NaHSO4)
(d) द्वि सोडियम हाइड्रोजन-फॉस्फेट (Na2HPO4)
उत्तर :
(a) कैल्सियम सल्फेट (CaSO4) सामान्य लवण
(b) सोडियम काबोंनेट (Na2CO3) सामान्य लवण
(c) सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट (NaHSO4) अम्लीय लवण
(d) द्वि सोडियम हाइड्रोजन-फॉस्फेट (Na2 HPO4) अम्लीय लवण

प्रश्न 38.
आप कैसे दिखायेंगे कि मैग्निशियम धातु तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है ?
उत्तर :
मैग्नेशियम तथा लोहा जैसी धातुएँ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कर सल्फेट लवण उत्पन्न करती हैं तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।

Mg + H2SO4 arrow MgSO4 + H2
Fe + H2SO4 arrow FeSO4 + H2

प्रश्न 39.
क्या होता है जब कैल्सियम कार्बोनेट हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करता है ? इस अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण भी लिखें।
उत्तर :
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से केल्सियम कार्बोनेट की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप कैल्सियम लवण एवं कार्बन डाई आक्साइड उत्पव्न होती है।

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प्रश्न 40.
मोल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
मोल (Mole) : अत्यन्त कम मात्रा वाले पदार्थों में भी अणुओं, परमाणुओं या आयनों की संख्या बहुत अधिक होती है। यह संख्या बहुत अधिक होने के कारण उनकी गणना असुविधाजनक होती है। अतः जिस प्रकार अपने दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुओं की गणना दर्जन (1 दर्जन = 12), सैकड़ा (1 सैकड़ा =100), ग्रुस (1 ग्रुस = 144) आदि में करना सुविधाजनक होता है उसी प्रकार से परमाणु, अणु या आयन की संख्या की गणना के लिए 6.022 × 1023 को इकाई मान लिया जाता है। इस इकाई को मोल (Mole) कहते हैं।
अत: 1 mole = 6.022 × 1023 अणु, परमाणु या आयन।

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प्रश्न 41.
मोल के किसी दो महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मोल का महत्व (Importance of mole) : मोल से हमें निम्नलिखित बातों की जानकारी प्राप्त होती है।

  1. यह पदार्थ के 6.022 × 1023 काणों का निरूपण करता है।
  2. किसी तत्व के 1 मोल का द्रव्यमान उसके 6.022 × 1023 परमाणुओं के कुल द्रव्यमानों के बराबर होता है।
  3. पदार्थ का एक मोल उस पदार्थ के एक ग्राम-सूत्र द्रव्यमान को व्यक्त करता है।

प्रश्न 42.
एवोगैड्रो संख्या की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या (Avogadro number) : किसी पदार्थ के 1 ग्राम अणु (1 mole) में उपस्थित अणुओं की संख्या को ऐवोगैड़ो संख्या कहते हैं। इसे ‘NA‘ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसका मान 6.022 × 1023 होता है। मोल (Mole) का प्रयोग अणु, परमाणु और आयन तीनों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 43.
एवोगैड्रो संख्या का संकेत क्या है ? इसका मान कितना होता है ?
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या को NA से प्रदर्शित करते हैं। इसका मान 6.022 × 1023 होता है।

प्रश्न 44.
जल के एक अणु का ग्राम में भार कैसे ज्ञात करेंगे ?
उत्तर :
जल के एक आणु का ग्राम में भार ज्ञात करने के लिए जल के ग्राम अणुभार में एवोगैड्रो संख्या से भाग दिया जाता है। जैसे – जल (H2O) का अणु भार =18
18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या = 6.022 × 1023
जल के एक्र उगुण का ग्राम में भार = \(\frac{18}{6.022}\) × 1023 = 2.989 × 10-33

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प्रश्न 45.
ग्राम परमाणु की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
ग्राभ पारमाणविक द्रव्यमान (Gram Atomic Mass Or Weight) : किसी तत्व के परमाणु द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करने पर वह ग्राम परमाणु द्रव्यमान कहलाता है।
जैसे – आक्सीजन (O) का पारमाणविक द्रव्यमान = 16
अत: आवसीजन का ग्राम पारमाणविक द्रव्यमान = 16 ग्राम।
इसी प्रकार नाइट्रोजन (N) का ग्राम पारमाणविक द्रव्यमान = 14 ग्राम।
हाइड्रोजन (H) का ग्राम पारमाणविक द्रव्यमान = 1 ग्राम।

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प्रश्न 46.
ग्राम अणु की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
ग्राम अणु या ग्राम आणविक द्रव्यमान (Gram-mole or gram molecular mass or Weight) : आणविक द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करने पर वह ग्राम-अणु या ग्राम-आणविक द्रव्यमान (Gram mole or gram molecular mass) कहलाता है।
जैसे – आवसीजन (O2) का आणविक द्रव्यमान = 32
अत: आक्सीजन (O2) का ग्राम-आणविक द्रव्यमान = 32 ग्राम
इसी प्रकार हाइड़ोजन (H2) का ग्राम-आणविक द्रव्यमान = 2 ग्राम
नाइट्रोजन (N2) का ग्राम-आणविक द्रव्यमान = 28 ग्राम
जल (H2O) का ग्राम आणविक द्रव्यमान =  18 ग्राम

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प्रश्न 47.
ग्राम अणु या मोलर आयतन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
ग्राभ अणु या मोलर आयतन (Molar Volume or gram-molecular volume) : सामान्य तापमान व दाब (STP) पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है और इस गैस में 6.022 × 1023 अणु होंते हैं। इस आयतन को ग्राम-आणविक आयतन या मोलर आयतन (Molar Volume) कहते हैं। उदाहरण के लिए, STP पर 22.4 लीटर हाइड्रोजन का द्रव्यमान 2.016 ग्राम होता है। अर्थात् 1 मोल H2 का भार =2.016 ग्राम। इतनी से में 6.022 × 10^{33 अणु रहते हैं। इसी प्रकार STP पर 22.4 लीटर ऑक्सीजन का भार 32.00 ग्राम होता है तथा इसमे 6.022 × 10-3 अणु रहते हैं।

प्रश्न 48.
जल की विशिए्ट उष्मा पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति एवं उसके रख-रखाव को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर :
जल की विशिष्ट उष्मा पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति एवं रख-रखाव : जल की विशिष्ट उष्मा 1 कैलोरी/ग्राम ° C = 4.186 जूल/ग्राम ° C होती है जो किसी अन्य सामान्य पदार्थों से उच्च होता है।

परिणामस्वरूप, तापमान के नियत्रण में जल महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसके साथ-साथ जल के वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा भी अधिक हांती है। इसका मान 40.65 किलो जूल/मोल होता है। जल की उच्च विशिष्ट उष्मा एवं उच्च वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा के फलस्वरूप हाइड्रोजन के अणुओं के बीच विस्तृत बंधन (bonding) की उत्पत्ति होती है। जल के ये दोनों असामान्य गुण तापमान के बंड़े उतार-चढ़ाव में प्रतिरोध उत्पन्न करके जल को पृथ्वी की जलवायु (Climate) को संतुलित रखने में मदद करते हैं। इससे पृथ्वी पर प्राणियों एवं वनस्पतियों का लगातार समुचित विकास संभव होता है।

प्रश्न 49.
जल के उच्च क्वथनांक का क्या महत्व है ?
उत्तर :
जल के उच्च क्वथनांक का महत्व (Importance of high boiling point of water) : “‘सामान्य वायुमण्डलीय दबाव पर वह निधित तापक्रम जिस पर किसी द्रव के सम्पूर्ण भाग से तेजी से वाष्पन की क्रिया होने लगती है, उस निध्वित तापक्रम को उस द्रव का ववथनाक कहते हैं।” यह तापक्रम तब तक स्थिर रहता है जब तक सम्पूर्ण दत्र वाष्पित न हो जाये। जल एवं अन्य सभी पदार्थो का क्वथनांक बैरोमीटर के दबाव पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, वृंकि अक्षांश वायुमण्डलीय दबाव में थोड़ा परिवर्तन करता है, अत: समुद्र तल पर जल के 100° C (212° F) पर उबलने की तुलना में माउण्ट एवरेस्ट पर जल 68°C

(154° F) पर उबलता है। इसके त्रिपरोत समुद्र की गहराई में भू-उष्मीय निकास द्वार के पास जल का तापमान सैकड़ों डिग्री तक पहुँच जाता है फिर भी जल द्रव के ही रूप मे रहल है। फलस्वरूप समुद्री जीव-जन्तु एवं वनस्पतियों का लगातार समुचित उद्भव एवं विकास जारी रहता है

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प्रश्न 50.
जल के कोशिकीय कार्य के महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
जल के कोशिकीय कार्य के महत्व (Importance of capillary action of water) : चाँक जल के अणु रेखीय नहीं हैं और हाइड्रोजन परमाणुओं की तुलना में आक्सीजन परमाणुओं की निद्युत ऋणात्मकता (electrogativity) अधिक होती है, अत: ऑक्सीजन परमाणु थोड़ा ऋणात्मक आवेश वहन करते हैं, जबकि हाइड्रोजन परमाणु थोड़ा धन आवेशित होते हैं। परिणामस्वरूप, जल विद्युतीय द्विधुवोय आघूर्ण वाला एक ध्रुवीय अणु है। जल अपने आकार वाले अणु के लिए एक असाधारण तौर से बड़ी संख्या में (4) अन्तर आणविक हाइड्रोज बच भी उत्पन्न कर सकता है। इन कारकों की वजह से जल के अणुओं के बीच प्रब्बल (strong) आकर्षाण बल पाया जाता है जो जल के उच्च पृष्ट तनाव (surface tension) एवं कोशिकीय बल (capillary force) को उत्पन्न करता है। कोशिकींय क्रिया (capillany action) गुरुत्व बल के विरुद्ध एक पतली नलो से होकर जल के ऊपर चढ़ने की प्रतृत्ति को निर्देशित करती है। जल के इसी गुण पर सभी वैस्कुलर (vascular) पौधे जैसे तृक्ष, निर्भर करते हैं।

प्रश्न 51.
क्लोरीनीकरण क्या है ? इसकी कमियों का उल्लेख करें।
उत्तर :
क्लोरीनीकरण (Chlorination) : इस विधि के द्वारा पेय जल को शुद्ध करने के लिए इसमे क्लोरीन (Cl2) या हाइपोक्लोराइट मिला दिया जाता है। इससे पेय जल में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु नए्ट हो जाते हैं। इस प्रकार उनकी वृद्धि रुक जाती है और जल हमारे लिए पीने योग्य हो जाता है। इस नरह पोने योग्य जल से उत्पन्न होने वाली बोमारियों को रोका जा सकता है। यह जल शुद्धीकरण की सुस्थापित तकनीक है।

कमियाँ (Limitation) : जल क्लोरीनीकरण विधि की कमियों में से एक disinfection by product प्रोडक्य (HCP) का बनना है जिसमें से अधिकतर ट्राइक्लोरोमीथेन (THM), क्लोरोफार्म, डाइक्लोरोमोशेन, डाइब्रोमोक्लोरोमीथेन एवं बोमोफार्म हैं। इनका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 52.
पराबैंगनी किरणों द्वारा जल को कैसे शुद्ध किया जा सकता है ?
उत्तर :
पराबैंगनी किरणों द्वारा पेयजल का शुद्धीकरण (Purification of drinking water by ultra violet rays) : पराबैंगनी किरणों द्वारा जल का शुद्धीकरण करने के लिए पराबेगनी प्रकाश का उपयोग किया जाता है जो सूर्य के प्रकाश की तरह होती हैं। इन किरणों को पेय जल से गुजारने पर उसमें उपस्थित माइक्रोब्स (microbes) इसके सम्पर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। पेय जल के शुद्धीकरण मे रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया के कोटाणुओं को नष्ट करने के लिए यह विधि सबसे अधिक प्रभावी है।
पेय जल आपूर्ति के लिए पराबेंगनी शुद्धीकरण लैम्प का इस्तेमाल करना चाहिए। जल शुद्धीकरण के लिए पराबेगनी लैप ही एकमात्र विधि है। पराबैंगनी जल शुद्धीकरण लैम्प UVC या “germicidal UV” उत्पन्न करते हैं जिनकी तीवता (intensity) सूर्य की किरणों से कहीं अंधिक होती है।

प्रश्न 53.
मृदु जल एवं कठोर जल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
कठोर जल (Hard Water) : वह जल जा साबुन के साथ कम झाग उत्पन्न करता है, कठोर जल कहलाता है। जल की कठोरता जल में कैल्सियम व मैग्नीशियम लवणों की उपस्थिति के कारण होंती है। ये लवण साबुन से रासायनिक अभिक्रिया करके अविलेय पदार्थ बनाते हैं। इसलिए कठोर जल से कपड़ा धोना कठिन होता है।
मृदु जल (Soft Water) : वह जल जो साबुन के साथ आसानी से अधिक झाग उत्पत्र करता है, मृदु जल कहलाता है। इसलिए मृदु जल से कपड़ा धोना आसान होता है।

प्रश्न 54.
जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जल प्रदूषण (Water Pollution) : जल में आवश्यकता से अधिक खानज पदार्थ, लवण, कार्बीनक और अकार्बनिक पदार्थ, कल-कारखाने और औद्योगिक प्रंतिष्ठानों से निर्गत कचरा, मल-मूत्र, कूड़ा-करक्रट आदि के मिश्रत हो जाने से जल के लाभदायक गुण नष्ट हो जाते हैं और वह पीने योग्य नहीं रह जाता। ऐसा जल प्रदूषित जल (Polluted water) कहलाता है।
अत: “मानव के क्रिया-कलापों के फलस्वरूप जल के प्राकृतिक गुणों में प्रतिकूल परिवर्तन का उत्पन्न होना जिससे उसकी उपयोगिता में कमी आ जाती है, जल प्रदूषण कहलाता है।”

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प्रश्न 55.
जल प्रदूषण के कारण तालाबों में शैवाल प्रस्फुट का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर :
जल प्रदूषण के कारण तालाबों में शैवाल प्रस्फुट़न डिटर्जेंट द्वारा वातावरण प्रदूषण : डिटर्जेट में उपस्थित फास्फेट साल्ट के कारण जलाशयों में एल्गी (algae) की उत्पत्ति जभ वन्कि लहुन तेजी से होती है जिसके फलस्वरूप जल का अनाक्सीकरण (Deoxygenation) होता है जिससे जलाशयों में उपस्थित मछली जैसे जलीय जन्तु आक्सीजन की कमी के कारण मर जाते हैं। साबुन की अपेक्षा अंधिक उपयोगी होने के बावजूद डिटर्जेंट का उपयोग करने पर जल प्रदूषण अधिक खतरनाक हो सकता है।

प्रश्न 56.
पेट्रोलियम के शोधन की क्यों आवश्यकता है ?
उत्तर :
पेट्रोलियम के शोधन की आवश्यकता है क्योकि इसमें अनेक पदार्थ मौजूद पाये जाते हैं।

प्रश्न 57.
पेयजल गुणवत्ता के मापदंड क्या हैं ?
उत्तर :
पेयजल गुणवत्ता के मापदंड (Quality parameters of drinkings water) : पेय जल रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन एवं स्वच्छ होना चाहएि । इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ या अवांछित तत्व, बैक्टीरिया के कीटाणु इत्यादि; जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हों, नहीं घुले होने चाहिए।
पेय जल के pH का मान (pH value of drinking water) : पेय जल में अम्लीबता एवं क्षार के अंश का अभाव होना चाहिए। यह पूर्ण रूप से उदासीन (neutral) होना चाहिए। इसका pH मान 7 होना चाहिए।
पेयजल में घुलित आक्सीजन की मात्रा (Quantity of dissolved oxygen in drinking water) : (i) एल्बेर्टा पर्यावरण 1977 (Alberta Environment 1977) के अनुसार स्वच्छ पेय जल में घुलित ऑक्सीजन की न्यूनतम मात्रा किसी भी समय 5 mg / L होनी चाहिए। (ii) अलास्का (Alaska) 1979 के अनुसार पेय जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 4 mg / L होनी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) के अनुसार पीने योग्य जल में –

  1. घुलित आर्सेनिक की मात्रा 10 μ g / L
  2. घुलित फ्लूराइड की मात्रा 1.5 mg / L या 1500 μ g / L
  3. कार्बन ट्रेटाक्लोराइड की मात्रा 4 μ g / L
  4. विनालय क्लोराइड की मात्रा (यूरोपियन यूनिनय स्टैण्डर्ड के अनुसार) 0.50 μ g / L होनी चाहिए।

प्रश्न 58.
जल की कठोरता दूर करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
जल की कठोरता दूर करने की विधियाँ :
कठोर जल के साथ साबुन का अधिकांश भाग कैल्सियम या मैग्नेशियम के विलेय लवणों से अभिक्रिया करने में व्यय हो जाता है। केवल अभिक्रिया के बाद शेष बचा साबुन ही जल के साथ झाग बनाता है। चूँकि झाग के द्वारा ही मैल दूर होती है। अत: धुलाई के काम के लिए कठोर जल उपयुक्त नहीं है।

जल उबालने के पात्रों में जब कठोर जल उबाला जाता है, तो जल वाष्मीकृत हो जाता है और पात्र की दीवारों पर जल में घुले लवणों की पपड़ी जम जाती है। यह पपड़ी उष्मा की कुचालक है। अत:, पपड़ी लगे पात्रों में जल उबालने से अधिक उष्मा लगती है। अत: कठोर जल उपयुक्त नहीं है।

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प्रश्न 59.
जल में किसकी अधिकता से दंत क्षय, हडी क्षय, पैर में काले चकते जैसे रोग होते हैं ?
उत्तर :
जल में आर्सेनिक एवं प्लूराइड जैसे तत्वों के अधिक मात्रा में घुले रहने से दंत क्षय, पैर में काले चकते जैसे रोग होते हैं।.

प्रश्न 60.
छानना विधि द्वारा किस प्रकार के मिश्रण को अलग किया जाता है ?
उत्तर :
छानना विधि द्वारा द्रव मिश्रण में मिले ठोस पदार्थो को अलग किया जाता है।

प्रश्न 61.
केन्द्रक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
केन्द्रक (Nucleus) : परमाणु का वह भीतरी भाग जहाँ परमाणु की लगभग सम्पूर्ण मात्रा निहित होती है, उसे केन्द्रक (Nucleus) कहते हैं। यह परमाणु के आयतन की तुलना में अति सूक्ष्म आयतन वाला क्षेत्र है।

प्रश्न 62.
न्यूट्रॉन के आविष्कारक कौन थे ? परमाणु में ये कहाँ उपस्थित होते हैं ?
उत्तर :
न्यूट्रॉन के आविष्कारक सर जेम्स चैडविक थे। यह परमाणु के केन्द्रक में उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 63.
अम्ल एवं भस्म में दो अन्तर बताओ।
उत्तर :
अम्ल का स्वाद खट्टा है, अम्ल धातु से क्रिया कर हाइड्रोजन देता है। भस्म कड़वा होता है, यह OH देता है।

प्रश्न 64.
सभी क्षार भस्म है परन्तु सभी भस्म क्षार नहीं – की व्याख्या करो ?
उत्तर :
सभी क्षार भस्म हैं परन्तु सभी भस्म क्षार नहीं : सभी क्षार भस्म है परन्तु सभी भस्म क्षार नहीं क्योंकि वे भस्म जो जल में घुलनशील होते हैं, क्षार कहलाते हैं। सभी भस्म जल में घुलनशील नहीं होते। इसलिए सभी भस्म क्षार नहीं होते। बल्कि सभी क्षार भस्म होते हैं।.जैसे -Na2 O भस्म है लेकिन यह जल में घुलकर NaOH उत्पन्न करता है इसलिये यह क्षार है और OH आयन उत्पत्न करता है। इसी प्रकार Zn(OH)2 या Fe(OH)3 भस्म है, क्षार नहीं क्योंकि ये जल में घुलनशील नहीं होते हैं।

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प्रश्न 65.
1 amu का मान कितना है?
उत्तर :
1 amu सामान्य कार्बन परमाणु के बारहवे हिस्से के बराबर द्रव्यमान का होता है। एक हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान लगभग 1 amu के बराबर होता है ।

प्रश्न 66.
वास्तविक घोल किसे कहते हैं?
उत्तर:
वास्तविक घोल (True Solution) : वास्तविक घोल में ठोस घुलित होकर वितरण (dispersion) के कारण घोलक में घुल जाते हैं। घुलित के इस प्रकार वितरित (dispersed) कणों का आकार 1-10 A°(108-10. 7 सेमी० व्यास) होता है। दूसरे शब्दों में घुलित के कण True घोल में अणु के रूप में (non-electrolyte दशा में) या lonic size (Electrolyte दशा) में रहते हैं।

प्रश्न 67.
इमल्सन किसे कहते हैं? जल में तेल का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
इमल्सन दो या इससे अधिक अमिश्रणीय तरल पदार्थो से बना एक मिश्रण है। इमल्सन के उदाहररण में शामिल हैं, मक्खन और मार्जरीन, दूध और क्रीम, फोटो फिल्म का प्रकाश संवेदी पक्ष, मैग्मा और धातु काटने मे काम आने वाले तरल। जल में तेल का उदाहरण दूध और वैनिशिंग क्रीम है ।

प्रश्न 68.
असंतृप्त घोल किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी निश्चित ताप पर यदि किसी घोल में विलेय की ओर अधिक मात्रा को घोला जा सकता है अर्थात जब किसी विलयन में इतना सामर्थ्य हो कि वह ओर विलेय को घोलने की क्षमता रखे तो एसे घोल को असतृत्त घोल कहते है ।

प्रश्न 69.
pH स्केल क्या है?
उत्तर :
pH किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता का एक माप है। इसे द्रवीभूत हाइड्रोजन आयनों (H+)की गतिविधि के सह-लघुगण़क (कॉलॉगरिदम) के रूप में परिभाषित किया जाता है।

प्रश्न 70.
अम्लीय आक्साइड किसे कहते हैं?
उत्तर :
अधातुओं के ऑक्साइड जो जल के साथ अभिक्रिया करके अम्ल बनाते है, उसे अम्लीय ऑक्साइड कहते हैं। (CO2),(SO2)(P2 O5),(SO3),(NO2) आदि ।

प्रश्न 71.
उभयधर्मी आक्साइड किसे कहते हैं?
उत्तर :
अधिकतर धात्विक ऑक्साइड क्षारीय ऑक्साइड होते हैं। लेकिन कुछ धात्चिक ऑक्साइड अम्लीय और क्षारीय दोनों अभिलक्षण दर्शाते हैं, अर्थात यह अम्ल और क्षारों दोनों से अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाते हैं। ऐसे ऑक्साइडों को उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं। जिंक, ऐलुमिनियम, काँच और टिन के ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं।

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प्रश्न 72.
एन्टासीड क्या है इसका उपयोग क्यो करते हैं?
उत्तर :
एंटासिड ऐसी दवाएं होती हैं जो अपच और सीने की जलन को दूर करने के लिए आपके पेट में एसिड को बेअसर करती हैं ! एंटासिड का उपयोग एसिडिटी, पेट फूलना और पेट का अल्सर के इलाज में किगा जाता है। यह पेट में दर्द या जलन जैसे लक्षणों से राहत देने में मदद करता है।

प्रश्न 73.
कोलाइडल घोल से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
समांगी (Homogeneous) तथा विषमांगी (Heterogeneous mixture) मिश्रणों के बीच के गुण वाला एक मिश्रण जिसके कण घोल में समान रूप से फैले होते हैं, कोलाइडल घोल कहलाते है।

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प्रश्न 74.
रवाकरण से क्या समझते हैं?
उत्तर :
रसायन विज्ञान में रवाकरण विधि के द्वारा अकाबनिक ठोस मिश्रण को अलग किया जाता है। इस विधि में अशुद्ध ठोस मिश्रण को उचित विलायक के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है तथा गर्म अवस्था में ही कीप द्वारा छान लिया जाता है। छानने के बाद विलयन को कम ताप पर धीरे-धीरे ठण्डा किया जाता है।

प्रश्न 75.
पेयजल में आर्सेनिक की अधिकता से उत्पन्न रोगों का नाम बताओ।
उत्तर :
आर्सेनिक प्रदूषित जल के उपयोग से चर्म रोग, चर्म कैंसर, यकृत, फेफड़े, गुर्दे एवं गक्त विकार संबंधी रोगों के अलावा हाइपर केरोटोसिस, काला पांव, मायोकॉर्डयल, स्थानिक अरक्तता आदि होने का खतरा होता है।

प्रश्न 76.
पेयजल में उपस्थित फ्लोराइड की अधिकता से उत्पन्न रोगों के नाम बताओ।
उत्तर :
पेयजल में अधिक फ्लोराइड की उपस्थिति गर्दन, पीठ, कंध व घुटनों के जोड़ों व हट्द्धियों को प्रभावित करता है। कैंसर, स्मरण शक्ति कमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बाझझपन जैसी समस्या भी इससे हो सकती है। विदेश में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक सामान्य मानी जाती है, जबकि भारत में यह दर 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
मिश्रण के अवयवों को पृथक करने की क्या आवश्यकता है ? पृथक्करण की खास विधियों का चुनाव आप कैसे करेंगे ?
उत्तर :
मिश्रण के अवयवों को पृथक करने की आवश्यकता : किसी मिश्रण से उसके अवयवों को निम्नलिखित उद्देशयों की पूर्ति के लिए अलग किया जाता है।

  1. अवांछित अवयवों को पृथक करने के लिए,
  2. लाभदायक अवयवों को प्राप्त करने के लिए,
  3. शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए,
  4. मिश्रण के अवयवों की तुलनात्मक मात्रा ज्ञात करने के लिए।

पृथक्करण की खास विधियों का चुनाव : किसी मिश्रण के अवयवों को एक दूसरे से पृथक करने के लिए एक अवयव के उन गुणों को जानना होता है जो दूसरे अवयव के गुण से अलग हों। इसी गुण के आधार पर प्रथक्करण की खास विधियों का चयन करते हैं।

उदाहरण के लिए लोहे एवं गंधक के मिश्रण से लोहे को पृथक करने में लोहे के चुम्बकीय गुण को आधार माना जाता है। चुम्बक लोहे को आकर्षित करता है, गन्धक को नहीं। इसी प्रकार चीनी एवं बालू के मिश्रण से चीनी को पृथक करने की प्रक्रिया में पानी में चीनी की घुलनशीलता को आधार माना जाता है। चीनी पानी में घुलनशील है किन्तु बालू पानी में अघुलनशील है। इस प्रकार पृथक्करण की प्रक्रिया में मिश्रण के एक अवयव के उस गुण का उपयोग किया जाता है जो दूसरे अवयवों में न हों।

किसी मिश्रण से उनके अवयवों को पृथक करने के लिए उनके भार, आकार, आकृति, रंग, घुनलशीलता तथा चुम्बक के प्रति आकर्षण इत्यादि को आधार मानकर निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है।

  1. ठोस को ठोस से पृथक करने के लिए : इस प्रकार के पृथक्करण में पटकना और ओसाना, बीनना, चालना, चुम्बकीय पृथक्करण तथा ऊर्ष्वपातन जैसी विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  2. अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से पृथक करने के लिए : इस प्रकार के पृथक्करण में तलछटीकरण और निथारना, छानना तथा भारण इत्यादि विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  3. घुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से पृथक करने के लिए : इस प्रकार के पृथक्करण में आंशिक आसवन तथा क्रीस्टलीकरण जैसी विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  4. अघुलनशील द्रव पदार्थों को अन्य द्रवों से पृथक करने के लिए पृथक्कारी कीप का उपयोग किया जाता है।
  5. ठोस पदार्थों को गैसों से पृथक करने के लिए : धुआँ, कार्बन के छोटे-छोटे कणों तथा वाष्पशील गैसों का मिश्रण होता है।

इस प्रकार के मिश्रण से कार्बन के कणों को पृथक करने के लिए आजकल कल-कारखानों की चिमनी की निचली सतह पर विशेष चुम्बकीय युक्ति द्वार कार्बन के कणों को गैसों से पृथक कर दिया जाता है। यह कार्बन पृथक होकर चिमनी की निचली सतह पर एकत्र होता रहता है। समय समय पर इसे चिमनी से हटा दिया जाता है। इस विधि का उपयोग आजकल थर्मल पावर स्टेशनों में किया जाता है।

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प्रश्न 2.
मिश्रण के अवयवों को पृथक करने की आसवन विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तरं :
आसवन (Distillation) : वह प्रक्रिया, जिसमें किसी द्रव को गर्म करके वाष्प में परिवर्तित किया जाता है, फिर उस वाष्प को ठंडा करके पुन: द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।

आसवन की क्रिया एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में कराई जाती है। इसे आसवन फ्लास्क कहते हैं। इस फ्लास्क की गरदन में एक पाश्श्व नली (sidetube) रहती है जो एक संघनक से जुड़ी रहती है। इसे लीबिंग संघनक (Libig condenser) कहते हैं। इसी संघनक में द्रव की वाष्प ठंड़क पाकर द्रवीभूत हो एक ग्राहक (receiver) में एकत्र होती है। उपकरणों की सजावट को पाश्व्व चित्र में दिखाया गया है। द्रव को आसवन फ्लास्क में लेकर बालू ऊष्मक पर धीरे-धीरे गर्म करके उबालते हैं तथा द्रव की वाष्प को संघनक से होकर प्रवाहित होने देते हैं। वाष्प संघनक में ठंडी होकर द्रव में परिणत हो जाती है जिससे ग्राहक में एकत्र कर लिया जाता है। द्रव में उपस्थित ठोस अशुद्धियाँ आसवन फ्लास्क में ही रह जाती हैं।

प्रश्न 3.
मिश्रण के अवयवों को अलग करने की प्रभाजी आसवन विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) : यह विधि दो या अधिक मिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवों को पृथक करने में अपनाई जाती है, जिनके अवयवी द्रवों के क्वथनांक का अंतर बहुत कम (10° C. या कम) हो। उदाहरण के लिए, मेथिल एल्कोहॉल (ववथनांक 65° C) को एसीटोन (क्वथनांक 56° C) से इस विधि द्वारा पृथक किया जा सकता है।

मिश्रण को एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में लेकर बालू उष्मक पर गर्म करते हैं। यह फ्लास्क एक प्रभाजक स्तभ (factionating column) से जुड़ा रहता है, जैसा कि पार्श्व चित्र में दिखाया गया है। प्रभाजक स्तभ में कई फदे (traps) होते हैं जिनमें उच्च क्वथनांक वाले या काम वाष्पशील द्रव की वाष्प संघनक में जाकर संघनित हो जाते है, जिसे एक अलग ग्राहक में एकत्र कर लिया जाता है। इस द्रव के क्वथनांक पर तापमान तब तक स्थिर रहता है जब तक कि यह द्रव पूर्णत: वाष्पित होकर निकल नहीं जाता। इसके पश्थात तापमान बढ़ने लगता है और अगले उच्च क्वथनांक वाले द्रव के क्वथनांक पर पुन: स्थिर हो जाता है। यह द्रव भी पूर्णतः वाष्पित होकर संघनक में द्रवीभूत होता है जिसे एक दूसरे ग्राहक में एकत्र कर लिया जाता है। इस प्रकार से मिश्रण के सभी अवयवों को अलग-अलग प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 4.
पृथक्कारी कीप क्या है ? इसके उपयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पृथक्कारी कीप एवं इसका उपयोग (Use of separating funnel) : पृथक्कारी कीप काँच का एक बल्ब होता है जिसकी डंडी में एक स्टॉप कॉक (stopcock) लगा रहता है। इसका उपयोग दो या दो से अधिक अमिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है उदाहरण के लिए, तेल और जल को इसके मिश्रण से पृथक्कारी कीप की सहायता से पृथक किया जा सकता है।

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जब द्रवों के मिश्रण के अवयव अमिश्रणीय (Immiscible) होते हैं, तो उन्हें पृथक्कारी कीप द्वारा अलग करते हैं। सर्वप्रथम दो द्रवों के मिश्रण को पृथक्कारी कीप में डालते हैं। पृथक्कारी कीप में डालने पर दोनों द्रव अलग-अलग सतहों में बँट जाते हैं। अब पृथक्कारी कीप में लगी टोटी को खोलकर भारी द्रव को, जो नीचे की सतह में जमा है, अलग कर लिया जाता है। पुन: पृथक्कारी कीप के हल्के द्रव को भी अलग पात्र में निकाल लिया जाता है। जल एवं किरासन तेल के मिश्रण से जल एवं किरासन तेल को इसी विधि से अलग करते हैं। किरासन तेल से जल का घनत्व अधिक होने के कारण यह नीचे की सतह में जमा होता है। इस प्रकार उपरोक्त प्रक्रिया के द्वारा इसे मिश्रण से पृथक कर लिया जाता है।

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प्रश्न 5.
प्रकृति में आर्सेनिक की उपस्थिति एवं इसके दुष्मभाव का उल्लेख कीजिए ?
उत्तर :
प्रकृति में आर्सेनिक की उपस्थिति (Occurrance of arsenic in nature) : प्रकृति में आर्सेनिक की उपस्थिति मुख्य रूप से दो कारणों से है – प्राकृतिक एवं मानव विकास के इतिहास से संबंधित। प्रकृति में आर्सेनिक वृहत रूप में उपस्थित है एवं प्रधान रूप से अकार्बनिक एवं कार्बनिक यौगिकों के रूप में पायी जाती है न कि मुक्त अवस्था में आर्सेनिक तत्व के रूप में। अकार्बनिक यौगिकों आर्सेनाइट, सबसे अधिक विषेले रूप में एवं आर्सेनिक कम विषेले रूप में पाया जाता है।

आर्सेनिक के मुख्य अयस्क आर्सेनोपाइराइट, एर्पीमिट, रीलगर एवं आर्सेनोपैलेडेनाइट हैं। यह प्रकृति में आयरन आर्सेनेट, आयरन, सल्फेट एवं कैल्केरियस मिट्टी में कैल्केरियस आर्सेनोलाइट के रूप में पाया जाता है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में यह आर्सेनाइट के रूप में पाया जाता है। मानव विकास के इतिहास के क्षेत्र में इसके मुख्य स्रोत औद्योगिक वर्ज्य पदार्थ, फास्फेट, उर्वरक, कोयला, तेल, सीमेंट, भूमिगत खनन के उत्पाद, स्मेल्टिंग, अयस्क प्रसंस्करण, धातु निष्कर्षण, धातु शुद्धीकरण रासायनिक पदार्थ, सीसा, चमड़ा, वस्त, क्षार, पेट्रोलियम शोधक कारखाने, अम्ल की खाने, मिश्र धातुएँ वर्णक (pigments), कीटनाशक एवं उत्पेरक इत्यादि हैं।

आजकल कृषि कार्य में अनेक प्रकार की कीटनाशक दवायें उपयोग में लायी जाती हैं। इनमें से कुछ कीटनाशक दवाओं में आर्सेनिक मौजूद होता है, जैसे – कैल्शियम आर्सेनेट, सोडियम आर्सेनेट आदि। इन कीटनाशकों के प्रयोग से इनमे उपस्थित आर्सेनिक मिट्टी में मिल जाता है जो वर्षा के जल या कृषि कार्य में प्रयुक्त जल के माध्यम से नदियों, झीलों तथा तालाबों में प्रवाहित होता है जिससे प्राकृतिक जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं।

आर्सेनेट, आर्सेनाइट एवं फ्लूराइड का विषैला प्रभाव (Toxic effects of arsenate, arsenite and fluride) : (i) पीने योग्य जल में आर्सेनिक की अधिक मात्रा की उपस्थिति से ब्लैक फुट (Black foot), लकवा मारना (paralysis of nerves) तथा अस्थिमज्जा का प्रभावित होना, आर्सेनिक डर्मेटोसिड (Arsenic Dermatosis), हाइपरकेराटोसिस (hyper keratosis), मेलानोसिस (melanosis) विभिन्न अंगों में कैसर तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधित बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं।

पीने योग्य जल में फ्लूराइड की अधिक मात्रा घुली रहने के कारण दाँत की बीमारी, श्वसन तंत्र का ठीक ढंग से काम न करना, अस्थिपंजर का क्षतिग्रस्त होना, लकवा मारना (paralysis) जैसी बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 6.
जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं ?-जल प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
जल प्रदृषण : जल में आवश्यकता से अधिक खनिज पदार्थ, लवण, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ, कलकारखानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निर्गत कचरा, मल-मूत्र, कूड़ा-करकट आदि के मिश्रित हो जाने से जल के लाभदायक गुण नष्ट हो जाते हैं और वह पीने योग्य नहीं रह जाता है। ऐसा जल प्रदूषित जल (Polluted water) कहलाता है।
अत:’ ‘मानव के क्रिया-कलापों के फलस्वरूप जल के प्राकृतिक गुणों में प्रतिकूल परिवर्तन का उत्पन्न होना जिससे उसकी उपयोगिता में कमी आ जाती है, जल प्रदूषण कहलाता है।”
जल प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव (Harmful effects of water pollution) :

  1. प्रदूषित जल का सेवन करने से हैजा, टायफाइड एवं पेचिश जैसी जानलेवा बीमारियाँ पैदा होती हैं।
  2. जल प्रदूषण के कारण पेय जल संकट का सामना करना पड़ता है।
  3. प्रदूषित जल से सिंचाई करने पर फसलों के उत्पादन में कमी आती है तथा कृषि क्षेत्र से प्राप्त होने वाले अनाज, फल-फूल एवं साग सब्जी की गुणवत्ता में कमी आती है।
  4. जल प्रदूषण के कारण जलाशयों में शैवाल की तेजी से वृद्धि होने पर जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है। इसके फलस्वरूप जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है।

प्रश्न 7.
कैथोड किरण की नली का प्रायोगिक उपयोग क्या है ?
उत्तर :
कैथोड किरण नली का प्रायोगिक उपयोग :
इलेक्ट्रॉन की खोज (Discovery of electron) : काँच की एक विसर्ग नली (discharge tube) में किसी गैस को लेकर अत्यंत कम दाब (0.01 mmHg) तथा उच्च विभवांतर (10.000 v) पर विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विसर्ग नली के कैथोड से एक प्रकार की किरणें निकलती हैं जो सीधी रेखा में गमन करते हुए सामने की दीवार पर पड़ती हैं। इन किरणों का नाम कैथोड किरण रखा गया है।

कैथोड किरणों के गुण (Properties of cathod rays) :

  1. ये किरणें कैथोड से निकलकर अतितीव्र वेग से सीधी रेखा में गमन करती हैं।
  2. इनके मार्ग में अपारदर्शक वस्तु के रखने पर वस्तु की छाया कैथोड के दूसरी तरफ बनती है। इससे प्रमाणित होता है कि ये किरणें सीधी रेखा में चलती हैं।
  3. इन किरणों के मार्ग में हल्का पाद-चक्र (paddle wheel) रखने पर यह अपनी धुरी पर नाचने लगंती है। इससे सिद्ध होता है कि ये किरणें अत्यंत छोटे-छोटे द्रव्यकणों से बनी होती हैं।
  4. वैद्युत या चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से ये किरणें विचलित होती हैं।

इनके विचलन की दिशा से ज्ञात होता है कि ये किरणे ऋण आवेशित हैं। विसर्ग नली में भित्र-भिन्न गैसों तथा भिन्न-भिन्न धातुओं के कैथोडों का प्रयोग करने पर पता चलता है कि हर हालत में एक ही प्रकार के कण निकलते हैं। अत: ॠण आवेशित ये कण प्रत्येक तत्व के प्रत्येक परमाणु के मौलिक अवयव हैं। टॉमसन (Thomson) ने इन कणों के आवेश (θ) और द्रव्यमान (m) का अनुपात (e / m) प्रयोगों द्वारा ज्ञात किया। इन्होंने विभिन्न विसर्ग नलियों का उपयोग किया, विभिन्न धातुओं के इलेक्ट्रोडों को काम में लाया तथा विसर्ग नली में विभिन्न गेसों का प्रयोग किया। हर हालत में (e / m) का मान (1.76 × 103) कूलॉम/ग्राम ही पाया गया। इससे सिद्ध होता है कि वे कण सभी परमाणुओं के मौलिक अवयव हैं। इन्हीं कणों का नाम इलेक्ट्रॉन (electron) रखा गया।

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प्रश्न 8.
वास्तविक घोल, कोलायडी घोल एवं निलंबन की उदाहरण सहित परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
आलम्बन (Suspension) : जब एक ठोस पदार्थ को महीन चूर्ण के रूप में एक द्रव (माना जल) जिसमें ठोस पदार्थ अघुलनशील है, में डालकर हिलाते हैं, तो ठोस के महीन कण कुछ समय तक घोल में फैले रहते हैं और फिर बर्तन की पेंदी में बैठ जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त मिश्रण आलम्बन (Suspension or Course suspension) कहलाता है। परीक्षणों से ज्ञात होता है कि द्रव में इस प्रकार निलंबित (suspended) ठोस के कणों का आकार 1000 AO(10-5 – 10-3 सेमी॰ व्यास) से अधिक होता है। ये खुली आँख शक्तिशाली Hand-lens या साधारण सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा अक्सर देखे जाते है।

वास्तविक घोल (True Solution) : वास्तविक घोल में ठोस घुलित होकर वितरण (dispersion) के कारण घोलक में घुल जाते हैं। घुलित के इस प्रकार वितरित (dispersed) कणों का आकार 1-10 A°(10-6-10-7. सेमी० व्यास) होता है। दूसरे शब्दों में घुलित के कण True घोल में अणु के रूप में (non-electrolyte दशा में) या lonic size (Electrolyte दशा) में रहते हैं।
कोलाइडल घोल में कण, द्रव माष्यम में ही वितरित रहते हैं। इसमें पदार्थ के कणों का आकार निलंबन (suspension) और वास्तविक (True) घोल के बीच का होता है। अर्थात् इसमें पदार्थ के कणों का व्यास 10-7-10-5 सेमी० का होता है।

कोलायड (Colloidal solution) की परिभाषा : कोलायड घोल एक स्थाई असमांग सिस्टम (Stable hetrogenerous system) है जिसमें वितरित प्रावस्था (disperesed phase) एवं वितरण माध्यम (dispersion medium) दो अवस्थाएँ (phases) होती हैं। वितरित पावस्था (dispersed phase) पदार्थ के सूक्ष्म कणों का बना होता है जिसका व्यास 10-7 से॰मी॰ से 10-5 से॰मी॰ होता है तथा लगातार माध्यम (continuous medium) वितरण माध्यम (dispersion medium) कहलाता है। इसमें घुलित के कण समान रूप से बिखरे (dispersed) होते हैं। कोलायडल घोल साधारण फिल्टर पेपर से पार हो सकता है लेकिन पार्चमेंनट पेपर से नहीं। ऐसे घोल के वितरित कण (dispersed particle) घोल को काफी देर तक स्थिर छोड़ देने पर भी नीचे नहीं बैठ पाते हैं।

प्रश्न 9.
विभिन्न कोलायडी घोल को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कुछ प्रमुख कलिलीय गोल (कोलायड) के उदाहरण नीचे दिये गये हैं –
साल (Sols) : इनमें वितरित प्रावस्था ठोस और वितरण माध्यम द्रव होता है। जैसे – गोल्ड, सिल्वर, फेरिक हाइड्राक्साइड आदि कलिलीय घोल हैं। जब वितरण माध्यम जल होता है तो साल को हाइड्रोसाल (Hydrosol) कहते हैं।

पायस (Emulsions) : इनमें वितरित प्रावस्था और वितरण माध्यम दोनों ही द्रव होते हैं अर्थात् यदि किसी द्रव में कोई दूसरा अमिश्रणीय (Immiscible) द्रव कलिलीय आकार के कणों में वितरित हों, तो उस घोल को पायस कहते हैं। दूध प्राकृतिक पायस का एक अच्छा उदाहरण हैं। इसमें द्रव वसा (fat) के कण जल में वितरित रहते हैं। किरासन तेल की कुछ बूँदों को पानी के साथ एक बोतल में हिलाने से पानी में वितरित तेल का पायस मिलता है। यह पायस अस्थायी होता है क्योंकि थोड़ी ही देर में पानी तथा तेल अलग-अलग हो जाते हैं।

जेल्स (Gels) : जब किसी ठोस में द्रव वितरित रहता है तो उसे जेल्स (gels) कहते हैं। जैसे – जेली, पनीर; मक्खन। मक्खन में वितरित प्रावस्था द्रव और वितरण माध्यम ठोस वसा होता है। इसी प्रकार द्रव में गैस का कलिलीय घोल फेन (Forth) है। ठोस में गैस के कलिलीय घोल का उदाहरण प्यूमिस पत्थर है।

प्रश्न 10.
घोल में कणों की गति की व्याख्या करें।
उत्तर :
घोल में कणों की गति (Motion of particles in solution) : अति सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा यह देखा गया है कि कलिलीय घोल में कोलायड के कण स्थिर रूप से और टेढ़ी-मेढ़ी (Zig-Zag) तीव्र गति में रहते हैं, जिसे बाउनियन गति (Brownian movement) कहते हैं। इस महत्वपूर्ण घटना का परीक्षण रॉबर्ट ब्राउन ने 1827 ई० में किया था। निलम्बन एवं वास्तविक घोल में बाउनियन गति नहीं पायी जाती है।

ब्राउनियन गति की व्याख्या : कलिलीय घोल में ब्राउनियन गति वितरण माध्यम (dispersion medium) के अणुओं का कोलायड के कणों पर बमबारी (bombardment) के कारण होती है। जब दूसरी तरफ की अपेक्षा एक तरफ से अधिक अणु टकराते हैं, तो गति की दिशा बदल जाती है। इस तरह इस लगातार बमबारी के प्रभाव में कलिलीय घोल के कण लगातार टेढ़ी-मेढ़ी गति से गतिशील रहते हैं।

महत्व (Significance): (a) गतिज सिद्धान्त (Kinetic theory) के अनुसार घोल के अणुओं में अनवरत बिना रुके गति होती रहती है। (b) तीव्र एवं टेढ़ी-मेढ़ी गति कोलायडल कणों को गुरुत्व के प्रभाव से स्थिर होकर जमा होने से रोकती है और इस तरह कलिलीय घोल को कुछ हद तक स्थिर रखने में मदद करती है।

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प्रश्न 11.
मोल की अवधारणा के बारे में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
मोल की अवधारणा (Molar concept) : हमलोग जानते हैं कि किसी पदार्थ का अंतिम कण परमाणु या अणु होता है। प्रयोगशाला में कार्य करते समय हमें किसी पदार्थ के परमाणुओं या अणुओं की एक निश्चित संख्या का ही उपयोग करना पड़ता है। अत: हमें प्रयुक्त होने वाले परमाणुओं या अणुओं की संख्या की स्पष्ट जानकारी रखना आवश्यक है। इसके लिए मोल की परिकल्पना अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है।
लैटिन भाषा में मोल शब्द का अर्थ ढेर या अंबार होता है।

परमाणुओं का एक मोल, परमाणुओं का वह अंबार है जिसका कुल द्रव्यमान एक ग्राम-परमाणु द्रव्यमान के बराबर होता है। चूँकि विभिन्न तत्वों के मोलों की समान संख्या में उनके परमाणुओं की संख्या समान रहती है, अतः तत्वों की मात्रा को मोल में व्यक्त करना अधिक सुविधाजनक होता है। मोल कणों (परमाणु, अणु, आयन या इलेक्ट्रॉन) की एक निध्चित संख्या को व्यक्त करता है । इस निश्थित संख्या को एवोगेड्रो संख्या कहा जाता था परन्तु अब हम इस संख्या को एवोगैड्रो स्थिरांक कहते हैं, जो कुल 6.022 × 1023 कणों के बराबर होता है। अत: मोल को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है।

” मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें मूल कणों (परमाणु, अणु, आयन, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि) की संख्या उतनी ही होती है जितनी कार्बन – 12 के ठीक, 12 ग्राम में उसके परमाणुओं का संख्या होती है।”

किसी तत्व के परमाणुओं के एक मोल का द्रव्यमान ग्राम में व्यक्त उसका सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान है। उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान 23.0 amu होता है। अत: 1 मोल सोडियम का द्रव्यमान ठीक 23.0 ग्राम है। 1 मोल सोडियम = 23.0 ग्राम सोडियम

इसी प्रकार 1 मोल अणुओं का द्रव्यमान 17.031 ग्राम होता है। अतः 1 मोल अमोनिया का द्रव्यमान 17.031 ग्राम है। 1 मोल आमोनिया = 17: 031 ग्राम अमोनिया।

प्रश्न 12.
मोल का क्या महत्व है ?
उत्तर :
मोल का महत्व (Importance of mole) : मोल से हमें निम्नलिखित बातों की जानकारी प्राप्त होती है।

  1. मोल का द्रव्यमान उसके 6.022 × 1023कणों का निरूपण करता है।
  2. किसी तत्व के 1 मोल का द्रव्यमान उसके 6.022 × 1023परमाणुओं के कुल द्रव्यमानों के बराबर होता है।
  3. पदार्थ का एक मोल उस पदार्थ के एक ग्राम-सूत्र द्रव्यमान को व्यक्त करता है।

उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) का 1 मोल = (1 + 35.5) g या 36.5 g हाइड्रोजन क्लोराइड अत:, मोल हाइड्रोजन क्लोराइड के 6.022 × 1023 अणुओं के कुल द्रव्यमान का निरूपण करता है।
4 मानक तापमान और दाब पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 l होता है। (मानक तापमान = 0° C या 273 K और मानक दाब = पारा का 76 cm दाब।

प्रश्न 13.
एवोगैड्रो संख्या के बारे में विस्तार से समझाइए।
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या (Avogadro’s Number) NA : एवोगैड्रो के नियम के अनुसार, तापमान एवं दबाव को समान शर्तों पर बराबर आयतन वाली सभी गैसों में अणुओं की संख्या समान होती है। पुन: यह प्रमाणित किया जा चुका है कि मानक तापमान एवं दबाव (S.T.P.) पर किसी गैस या वाष्प के एक मोल या ग्राम मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है। इस प्रकार यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि किसी पदार्थ के एक ग्राम मोल में अणुओं की संख्या समान होती है यद्यपि विभिन्न पदार्थो के एक मोल का भार भिन्न-भिन्न होता है।
‘किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के एक मोल में उपस्थित कणों की संख्या को एवोगैड्रो संख्या (Avogadro’s Number) कहते हैं।”
एवोगैड्रो संख्या का मान 6.022 × 1023 होता है। एवोगैड्रो संख्या को NA से प्रदर्शित किया जाता है।

इस प्रकार, किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के एक ग्राम मोल में अणुओं की संख्या 6.022 × 1023 होती है एवं किसी तत्व के एक ग्राम परमाणु में परमाणुओं की संख्या 6.022 × 1023 होती है।
चूँकि S.T.P. पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है, अत: एवोगैड्रो संख्या को इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है कि “S.T.P. पर किसी गैस के 22.4 लीटर में उपस्थित अणुओं की संख्या को एवोगैड्रो संख्या कहते हैं।”

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प्रश्न 14.
एवोगैड्रो संख्या की व्यापकता का उल्लेख करें।
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या की व्यापकता (Enormity of Avogadro’s number (NA) :
भौतिक विज्ञान एवं जीव विज्ञान में महत्व (Importance in Physics and Biology) : एवोगैड्रो संख्या स्थूल दुनिया एवं सूक्ष्म दुनिया के बीच कड़ी का काम करता है।

6.022 × 1023 संख्या के परिमाण के बारे में कल्पना करना कठिन है। इसके बारे में कुछ जानकारी के लिए, 1 मोल सेकेण्ड उस समयावधि के 4 मिलियन (1 मिलियन = दस लाख) गुना समय को प्रदर्शित करता है जितना पृथ्वी को अपने अस्तित्व में आए हुए बीता है अर्थात् जितना अभी तक पृथ्वी की उम्र है एवं एक मोल संगमरमर के द्वारा पूरी पृथ्वी को 40 मील की गहराई तक ढ़का जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ, चूँकि परमाणु इतने छोटे होते हैं कि एक मोल परमाणुओं अथवा अणुओं को रासायनिक क्रिया में प्रयोग के लिए पूर्णरूपेण प्रबंध किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
एवोगैड्रो संख्या के रसायन विज्ञान में महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
एवंगैड्रो संख्या का रसायन विज्ञान में महत्व : ऐवोगैड्रो संख्या की सहायता से तत्वों के परमाणुओं तथा तत्वों या यौगिकों के वास्तविक द्रव्यमान निकाले जा सकते हैं।

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हाइड्रोजन परमाणु का वास्तविक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए, हाइड्रोजन के ग्राम परमाणु भार में एवोगैड्रो संख्या से भाग देते हैं। जैसे – हाइड्रोजन का परमाणु भार = 1.008
∴ हाइड्रोजन का ग्राम परमाणु भार = 1.008 ग्राम
∴ 1.008 ग्राम हाइड्रोजन में परमाणुओं की संख्या = 6.022 × 1023
∴ हाइड्रोजन के 1 परमाणु का द्रव्यमान = \(\frac{1.008}{6.022}\) × 1023 ग्राम = 1.67386 × 10-24 ग्राम
∴ H परमाणु का द्रव्यमान = 1.67358 × 10-24 ग्राम

प्रश्न 16.
परमाणु द्रव्यमान इकाई क्या है ? इसके आधार पर तत्व के सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
परमाणु द्रव्यमान इकाई : परमाणु के द्रव्यमान को सरलतापूर्वक व्यक्त करने के लिए एक इकाई का चुनाव किया गया है जिसे परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic mass unit) कहते हैं। इसे संक्षेप में a.m.u. लिखा जाता है। \({ }^{12} \mathrm{C}\) = 12.00 स्केल पर सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान :
किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान एक संख्या है जो यह बताती है कि उस तत्व के परमाणु का द्रव्यमान कार्बन 12 परमाणु के द्रव्यमान के 12 वे भाग से कितना गुना अधिक है।

अत: किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान एक सापेक्ष राशि है।

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1 amu = \(\frac{1}{12}\) × C – 2 परमाणु का द्रव्यमान = 1.66 × 10-24 g = 1.66 × 10-27 kg

प्रश्न 17.
STP पर गैसों के मोलर आयतन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
मानक तापमान एवं दबाव पर गैसों का मोलर आयतन (Molar Volume of Gases at S.T.P.) : एवोगैड्डो के नियमानुसार समान तापमान एवं दबाव पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। इसके विपरीत सभी गैसों के समान अणुओं का आयतन समान दबाव और समान तापक्रम पर बराबर होता है। किसी भी पदार्थ के एक मोल में अणुओं की संख्या 6.022 × 1023 होती है। अत: S.T.P. पर सभी गैसो के एक मोल का आयतन भी एक समान होगा।
S.T.P. पर किसी भी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है, इस आयतन को 22.4 लीटर होता है, इस आयतन को S.T.P. मोलर आयतन (S.T.P. Molar Volume) कहते हैं।
S.T.P. पर गैसों के मोलर आयतन का मान दबाव स्थिर रखते हुए तापमान बढ़ाने पर बढ़ता है तथा तापमान स्थिर रखते हुए दबाव बढ़ाने पर आयतन घटता है।

उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन के एक मोल (32gram) या नाइट्रोज़न के एक मोल (= 28 gram) या CO2 के एक मोल (= 44 gram) का आयतन S.T.P. पर 22.4 लीटर होता है।.

प्रश्न 18.
उदासीनीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं ? इसे दो उदाहरण के द्वारा समझायें।
उत्तर :
उदासीनीकरण (Neutralisation) : जिस रासायनिक प्रतिक्रिया में अम्ल तथा क्षार परस्पर प्रतिक्रिया करके अपने-अपने गुणों को त्याग कर लवण तथा जल उत्पन्न करते हैं, उसे उदासीनीकरण (Neutralisation) कहते हैं।

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इस क्रिया में अम्ल तथा क्षार क्रमश: अम्लीय तथा क्षारीय गुणों को त्याग कर उदासीन (Neutral) हो जाते हैं।

प्रश्न 19.
‘जल ही जीवन है’-क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
जल की व्यापकता तथा प्रचुरता के कारण यह सभी जीवधारियों के लिए अति आवश्यक पदार्थ है। यह मुक्त अवस्था में पृथ्वी के 75 % भागों में पाया जाता है। इसकी अनुपस्थिति में पृथ्वी के सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे तथा मनुष्य जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। अत: जल ही जीवन है।

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प्रश्न 20.
जल के कौन से भौतिक गुण जीवन की उत्पत्ति एवं रख-रखाव को प्रभावित करते हैं ?
उत्तर :
जल की भूमिका (Role of Water) :
जल की विशिष्ट उष्मा उच्चतम होती है। इसी कारण से स्वचालित वाहनों के रेडिएटरों में शीतलता के लिए जल का प्रयोग किया जाता है। सेकने के लिए Water bottle में जल को तापक (heater) के रूप में व्यवहार किया जाता है।
जल की उच्च वाष्पन उष्मा तथा उच्च उष्मा धारिता ही जीवों के शरीर तथा जलवायु के ताप को सामान्य बनाए रखते हैं। वनस्पतियों तथा प्राणियों के Matabolism (उपापचय) में जल एक उत्तम घोलक का कार्य करता है।
जल ठोस में बदलता है तो उसका आयतन बढ़ता है क्योकि जल के हाइड्रोजन अणु कठोरता से एक दूसरे के साथ होते हैं, जिसके कारण इनके अणु को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ताप शक्ति की आवश्यकता होती है। इसीलिए जल का क्वथनांक तथा गलनांक अधिक होता है।
जल में Capillary action (केशिकाएँ प्रभाव) के कारण ही पौधे के पतले-पतले मूल रोम (Root hair) मिट्टी के कणों से जल का अवशोषण कर लेते हैं। Cappilary action के कारण ही Paint करनेवाले ब्रश के Hair में रंग उठ जाता है तथा पतली नली में गुरुत्व बल के विरुद्ध में भी जल भर जाता है।

प्रश्न 21.
किसी घोल में घोलक तथा घुलित का निर्णय कैसे करते हैं ? उदाहरण सहित समझाओ।
उत्तर :
घोल के जिस उपादान की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो एवं जो किसी अन्य पदार्थ (ठोस, द्रव या गैस) में घुल कर समांग मिश्रण बनाए उसे घुलित (Solute) कहते हैं। जैसे – चीनी, नमक, तूतिया, शोरा आदि जल में घुल जाता है। अत: चीनी, नमक, तूतिया, शोरा आदि को घुलित (Solute) कहेंगे।
घोल में जिस उपादान की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो एवं उसकी भौतिक अवस्था के समान घोल की भौतिक अवस्था हो तो उसे घोलक (Solvent) कहते हैं।

साधारणत: किसी घोल में घोलक द्रव रूप में होता है और घुलित ठोस रूप में किन्तु घोलक का सदैव द्रव अवस्था में होना आवश्यक नहीं है। यदि किसी घोल में घुलित तथा घोलक की भौतिक अवस्था समान हो तो उन दोनों में जिसकी मात्रा अधिक होगी वह घोलक के रूप में माना जाता है।
घोल, घोलक तथा घुलित से बना होता है। घोल सदा द्रव रूप में नहीं होता। यह घोलक तथा घुलित की अवस्था पर निर्भर करता है। जिसकी मात्रा अधिक होगी वही घोल की अवस्था होगी।

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प्रश्न 22.
परमाणु के अन्दर में कण कहाँ एवं कैसे स्थित होते हैं तथा इनपर कौन सा आवेश होता है ?
उत्तर :
परमाणु के मौलिक कण के नाम (i) इलेक्ट्रॉन, (ii) प्रोटॉन, (iii) न्यूट्रॉन।

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान एवं आवेश (Mass and charge of Electron):
द्रव्यमान (Mass) : एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 × 10-28 ग्राम (लगभग) 9.1 × 10-31 kg होता है। एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (Mass) एक हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग \(\frac{1}{1838}\) होता है।

आवेश (Charge) : प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर 1.602 × 10-19 कूलम्ब ऋण आवेश रहता है। सबसे हल्का और सबसे कम आवेग वाला कण इलेक्ट्रॉन ही है। अत: इलेक्ट्रॉन के ॠण आवेश को ही विद्युत आवेश की न्यूनतम इकाई मानी गयी है।
अत: इलेक्ट्रॉन एक ऐसा कण है, जिसका द्रव्यमान लगभग शून्य होता है तथा जिस पर इकाई ऋण-आवेश (Negative charge) रहता है।
प्रोटॉन का द्रव्यमान एवं आवेश (Mass and charge of Proton) : किसी एक प्रोटॉन का द्रव्यमान (Mass of Proton) हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है। यह मान 1.00753 amu = 1.6726 × 10-24 ग्राम = 1.6726 × 1-27 किलोग्राम होता है।

प्रोटॉन का आवेश : प्रोटॉन एक धन-आवेशयुक्त कण है। इसका आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर, किन्तु विपरीत आवेश वाला होता है.। इसके आवेश का परिमाण 1.602 × 10-19 कूलॉम होता है। इस इकाई को इकाई धन आवेश (Unit positive charge) कहते हैं।

न्यूट्रॉन का द्रव्यमान एवं आवेश (Mass and charge of Neutron)
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान : न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है। न्यूट्रॉन का द्रंव्यमान = 1.008 amu = 1.67493 × 10-24 ग्राम या 1.67493 × 1-27 किलोग्राम होता है।

प्रश्न 23.
चार्ट बनाकर इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन की प्रकृति, स्थिति, मात्रा, आवेश की मात्रा, त्रिज्या का विवरण दें।
उत्तर :
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प्रश्न 24.
निम्न का परिचय देते हुए उनका उपयोग लिखें – (a) क्लोरोफार्म (b) एसीटोन (c) मिथाइल अल्कोहल।
उत्तर :
(a) क्लोरोफार्म : इसका दूसरा नाम ट्राई क्लोरो मिथेन है। इसका सूत्र CHCl3 है। यह जल से भारी है तथा जल में नहीं घुलते हैं।
उपयोग : (i) यह कार्बनिक घोल में घुलनशील है। (ii) इसका उपयोग शल्य चिकित्सा में रोगी को बेहोश करने में किया जाता है।
(b) एसीटोन : इसका दूसरा नाम डाई मिथाइल किटोन है तथा इसकां सूत्र CH3 COCH3 है। यह एक रंगहीन द्रव है। उपयोग : (i) इसका उपयोग क्लोरोफार्म के उत्यादन में होता है। (ii) रेजिन, प्लास्टिक, एसीटिलिन इसमें घुल जाते हैं।
(c) मिथाइल अल्कोहल : इसका दूसरा नाम मेथेनाल है तथा इसका सूत्र CH3 OH है। यह एक रंगहीन द्रव है।
उपयोग : (i) इसका उपयोग वार्निश तथा पालिश में घोलक के रूप में प्रयोग किया जाता है। (ii) इसका उपयोग मोटरगाड़ी के ईंधन के रूप में होता है।

प्रश्न 25.
जल की स्थायी अशुद्धि दूर करने की एक विधि का सचित्र वर्णन करें। सान्द्र व तनु अम्ल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जल की स्थायी कठोरता को lon-exchange resins process का प्रयोग किया जाता है। रेजिन दो प्रकार के होते हैं।
(i) धनायन विनिमय रोजिन में अघुलनशील अम्लीय कार्बनिक रेजिन का दाना तथा -SO3 H या – COOH का बहुलक अणु होता है।
(ii) ॠणायन विनिमय रेजिन में Amines से प्राप्त क्षारीय वर्ग का कार्बनिक बहुलक अणु होता-है।

जल को सबसे पहले Cation Exchanger रेजिन से भरे स्तम्भ में प्रवाहित करके कठोर जल में उपस्थित Ca+, Na+, Mg+आदि धनायनों का रेजिन के H+में विनिमय हो जाता है।
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धनायन विनिमय रेजिन में से प्रवाहित करने के बाद जल को ऋणायन विनिमय रेजिन से भरे स्तम्भ से प्रवाहित करने पर जल उपस्थित \(\mathrm{Cl}^{-1}, \mathrm{SO}_4^{-2}, \mathrm{NO}_3^{-1}\) ॠण्यायनों का रेजिन के OHआयनों से विनिमय हो जाता है।

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H+, OHद्वारा उदासीन कर देता है तथा H2 O बनाते हैं।
H+ + OH + = H2 O

इस विधि द्वारा आसुत जल या मृदुजल प्राप्त होता है जो प्रयोगशाला में व्यवहार किया जाता है। प्रथम टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सान्द्र HCl से अभिक्रिया कराते हैं।

(RCOO) 2 Ca + 2 HCl → CaCl2 + 2 RCOOH

इसी प्रकार दूसरे टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सोडियम हाइड्राक्साइड से अभिक्रिया कराते हैं।

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सान्द्र अम्ल : जिस अम्ल में सतृप्त करने योग्य जंल मौजूद रहता है उस अम्ल को सान्द्र अम्ल कहते हैं।
तनु अम्ल : जिस अम्ल में संतृप्त करने योग्य जल की मात्रा से अधिक जल मौजूद रहता है उसे तनु अम्ल कहते हैं। सान्द्र अम्ल तनु अम्ल से ज्यादा सक्रिय होता है।

प्रश्न 26.
निम्न में इलेक्ट्रॉन, प्रोट्रॉन व न्यूटॉन की संख्या ज्ञात करें :
\({ }_{11} \mathrm{Na}^{+}, 19^{\mathrm{K}^{+}}, 20^{\mathrm{Ca}^{++}}, 12^{\mathrm{Mg}^{+}}\)
उत्तर :
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प्रश्न 27.
रदरफोर्ड का α-कण के प्रयोग को लिखो।
उत्तर :
रदरफोर्ड का α-कण का प्रयोग (Rutherford’s alpha Particle experiment) :
प्रयोग : रदरफोर्ड ने सन् 1911 ई० में एक वायु शुन्य नली में सोने की पतली पत्तर (लगभग 0.0004 ~mm} मोटाई वाले) पर α किरणों का आघात करने पर α किरणों के गमन पथ का सूक्ष्म निरीक्षण करने पर पाया कि :

  • α-कणों का अधिकांश सूक्ष्म धनावेशित भाग बिना विक्षेपित हुए सोने की पत्तर का भेद कर सरल रेखीय पथ से बाहर निकल जाता है।
  • कुछ α-कण 90° या उससे अधिक कोण में विक्षेपित होते हैं।
  • बहुत कम संख्या में (लगभग 20,000 में से एक कण) α-कण जिस पथ से आते हैं, उसी पथ पर 180° पर मुड़ जाते हैं।

निष्कर्ष : (i) परमाणु के अन्दर अधिकांश भाग खाली (Empty) होता है।
क्योंकि सोने की पत्तर परमाणुओं का बना होता है। यदि परमाणु के अन्दर खाली स्थान नहीं होते तो α-कण परमाणुओं से टकराकर अपने मूल पथ से विचलित हो जाते। लेकिन ऐसा न होकर अधिकांश α-कण बिना विचलित हुए पत्तर को पार करके सीधा निकल जाते हैं। अत: परमाणुओं के अन्दर अधिकांश खाली स्थान होता है।

(ii) कुछ ही धनावेशित α-कण विक्षेपित होते हैं।
क्योंकि यह विक्षेपण अवश्य ही अत्यधिक प्रतिकर्षण बल (Repulsive force) के कारण होगा। परमाणु के अन्दर धनावेश समान रूप से बँटा हुआ नहीं है। धनावेश बहुत कम आयतन के अन्दर संकेन्द्रित होगा, जिससे धनावेशित अल्फा कणों का प्रतिकर्षण और विक्षेपण हुआ है।
ऊंपर दिये गये परिणामों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का केन्द्रक (Nucleus) मॉडल प्रस्तुत किया जो निम्न है :

(i) परमाणु का धनावेश तथा अधिकांश मात्रा एक अति अल्प क्षेत्र में केन्द्रित होती है। इस क्षेत्र को परमाणु का रदरफोर्ड ने केन्द्रक (Nucleus) कहा 1

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(ii) परमाणु की सम्मूर्ण मात्रा तथा सम्पूर्ण धन आवेश केन्द्रक में केन्द्रित होता है इसलिए केन्द्रक पर धन आवेश पाया जाता है।
(iii) परमाणु ठोस नहीं होते हैं क्योंकि परमाणु के भीतर अधिकांश भाग रिक्त होता है। क्योंकि केन्द्रक का अर्द्धव्यास 10-13 से॰मी॰ तथा सम्पूर्ण परमाणु के अर्द्धव्यास 10-8 से॰मी॰ होता है। अर्थात् केन्द्रक का अर्द्धव्यास, परमाणु के अर्द्धव्यास का \(\frac{1}{100000}\) भोग होता है। यदि केन्द्रक को क्रिकेट की गेंद जितना माना जाए तो परमाणु का अर्द्धव्यास लगभग 5 किलोमीटर होगी।
(iv) इन्हीं कारणों से केन्द्रक का आयतन परमाणु के कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है।
(v) परमाणु उदासीन होता है। इसका कारण यह है कि केन्द्रक के धन आवेश को संतुलित करने के लिए इसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार पथ में अनवरत परिक्रमा करते रहते हैं।
(vi) केन्द्रक तथा इलेक्ट्रॉन के बीच अपकेन्द्र बल (Centrifugal force) उत्पन्न होता है, वह इलेक्ट्रॉन को बाहर की ओर खींचकर केन्द्रक से दूर रखने का चेष्टा करता है, किन्तु धन आवेश युक्त केन्द्रक स्थिर-विद्युत बल के द्वारा विपरीत आवेश (ऋण आवेश) वाले इलेक्ट्रॉन को अपनी ओर आकृष्ट करता है जिसे अभिकेन्द्र बल (Centripetal force) कहते हैं।
इन्हीं दोनों विपरीतमुखी बल के कारण इलेक्ट्रॉन केन्द्रक के चारों तरफ एक निश्धित कक्ष (orbit) में परिभ्रमण करते रहते हैं।

प्रश्न 28.
कोई घोल संतृप्त है, असंतृप्त या अति संतृप्त है, इसकी पहचान कैसे करेंगे ?
उत्तर :
किसी निध्वित तापक्रम पर जब किसी घोलक में घुलित की अधिकतम मात्रा घुली हो और उस घोलक में और अधिक घुलित घुलने की क्षमता न हो तो उस विशेष तापक्रम पर उस घोल को संतृप्त घोल (Saturated solution) कहा जाता है।
साधारण तापक्रम पर एक बीकर में कुछ जल लेकर थोड़ा-थोड़ा साधारण नमक मिलाते हैं तथा काँच की छड़ से मिश्रण को हिलाते रहते हैं। साधारण नमक मिलाने की क्रिया तब तक करते हैं जब तक साधारण नमक जल में घुलता रहे। कुछ समय के पश्वात् हम देखते हैं कि साधारण नमक बीकर की पेंदी में अघुलित के रूप में बैठ जाता है अर्थात् उस जल में और अधिक साधारण नमक घोलने की क्षमता नहीं है। अब इस घोल को फिल्टर पेपर से छान लेते हैं। छानने के पश्वात् जो घोल प्राप्त होता है उस तापक्रम पर साधारण नमक के संतृप्त घोल होता है।
इस संतृप्त घोल का तापक्रम बढ़ाने से तथा घोलक के परिमाण को बढ़ाने से घोल को असंतृप्त घोल में बदला जा सकता है। किसी निथित तापक्रम पर वह घोल जिसमें घुलित की मात्रा संतुप्त करने वाली मात्रा से अधिक घुली हो तो वह घोल अतिसंतृप्त घोल कहलाता है।

प्रश्न 29.
बोर परमाणु संरचना क्या है ?
उत्तर :
बोर मॉडल के अनुसार (According to Bohr’s model) :
इलेक्ट्रॉन जिस किसी अर्द्धव्यास वाले वृत्ताकार कक्ष में परिभमण नहीं करता है। इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित अर्द्धव्यास वाले वृत्ताकार कक्षों में ही परिभ्रमण कर सकते हैं। यह कक्ष स्थायी होते हैं।
प्रत्येक कक्ष की ऊर्ज़ा निर्दिष्ट होती है। जिसे कक्ष का ऊर्जा स्तर (Energy level) कहते हैं। इसलिए परिभ्रमण के समय इलेक्ट्रॉन में से ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है। जिसके कारण इलेक्ट्रॉन को केन्द्रक में गिररे की सम्भावना नहीं रहती है।
जब कोई इलेक्ट्रॉन बाहर कक्ष से अन्दर के कक्ष में जाता है तब इस इलेक्ट्रॉन से तरंग के रूप में एक निश्चित परिमाण की ऊर्जा बाहर निकलती है और अन्दर वाले कक्ष से कोई इलेक्ट्रॉन बाहर वाले कक्ष में जाता है तो वहाँ ऊर्जा का शोषण होता है। यहाँ ऊर्जा का निकलना तथा ऊर्जा का शोषण होना बराबर होता है। अत: केन्द्रक के निकट कक्ष की ऊर्जा कम होती है तथा दूर स्थित कक्ष की ऊर्जा का स्तर अधिक होता है।
इसमें कक्षों की संख्या सात होती है, जो क्रमश: K, L, M,N …. आदि अक्षरों द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न 30.
घुलनशीलता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
घुलनशीलता या विलेयता (Solubility) : किसी निध्वित तापक्रम और दाब पर 100 ग्राम घोलक में घुलने वाली घुलित की अधिकतम मात्रा को उस घुलित पदार्थ की उस घोलक में घुलनशीलता (Solubility) कहलाता है।
माना कि t° C तापक्रम पर W ग्राम जल में किसी घुलित पदार्थ के अधिक से अधिक w ग्राम घुले हुए हैं तो उस तापक्रम पर उस घुलित की जल में घुलनशीलता होगी।
घुलनशीलता = \(\frac{w \times 100}{w}\) होगी।

प्रश्न 31.
सोल तथा जेल कोलायडल क्या हैं ? उदाहरण सहित बतायें।
उत्तर :
सोल (Sols) : वे कोलाइडल जिसमें ठोस कण द्रव में परिक्षेपित (Dispersed) होते हैं। उसे सोल (sols) कहते हैं। जैसे – कोशिका का तरल, पेन्ट इत्यादि।
जेल (Gels) : वे कोलाइडल जिसमें ठोस कण द्रव में परिक्षेपित (Dispersed) होते हैं लेकिन उसमें प्रवाह (Flow) नहीं होता है, इसलिए कि वे जम जाते हैं। जैसे – जेली तथा जिलेटिन।

प्रश्न 32.
मोलरता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
1 लीटर घोलक में घुले हुए घुलित के मोलों की संख्या को उस घोल की मोलरता (Molarity) (M) कहते हैं।

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प्रश्न 33.
अजलीय घोलक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अजलीय घोलक (Non-aqueous solvent) : जल के अतिरिक्त अन्य घोलक जो कुछ्छ पदार्थों को ही घोल पाता है उसे अजलीय घोलक (Non-aqueous solvent) कहलाता है। जैसे – इथाइल अल्कोहल, मिथाइल अल्कोहल, एसीटोन, क्लोरोफार्म तथा केरोसिन इत्यादि।

प्रश्न 34.
आरहेनियस के अनुसार अम्ल की परिभाषा दें।
उत्तर :
आरहेनियस के अनुसार अम्ल की परिभाषा : वे हाइड्रोजन युक्त यौगिक जिनका जलीय घोल का विद्युत विच्छेदन करने पर धनायन (cation) के रूप में केवल H+ आयन प्राप्त होता है, उन्हें अम्ल (acid) कहते हैं। जैसे –

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प्रश्न 35.
आरहेनियस के अनुसार भस्म की परिभाषा उदाहरण सहित दें।
उत्तर :
आरहेनियस के अनुसार भस्म की परिभाषा : जिन योगिकों के जलीय घोल आयनित (lonised) होकर हाइड्राक्साइड (OH) आयन उत्पन्न करते हैं और OHके अलावा अन्य कोई ॠणायन (anion) उत्पत्र नहीं करते हैं उन्हें भस्म (Base) कहते हैं। जैसे –

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प्रश्न 36.
सोडियम हाइड्राक्साइड का औद्योगिक क्षेत्र में क्या उपयोग है ?
उत्तर :
सोडियम हाइड्राक्साइड (NaOH) : सोडियम हाइड्राक्साइड का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में निम्न हैं –

  1. साबुन तथा डिटर्जेण्ट बनाने में।
  2. कृत्रिम रेयॉन का सूता बनाने में।
  3. अखबार और पेपर उद्योग में।
  4. बाक्साइड अयस्क का शुद्धीकरण करके अल्यूमिनियम धातु निकालने में।
  5. तेलशोधन में, रंग तथा ब्लीचिंग करने में।

प्रश्न 37.
सल्फ्यूरिक अम्ल की पहचान की रासायनिक प्रतिक्रिया क्या है ?
उत्तर :
सल्फ्यूरिक अम्ल की पहचान (Identification of H2 SO4) : एक परखनली में स्वच्छ बेरियम क्लोराइड (BaCl2) का स्वच्छ घोल बनाकर उसमें कुछ बूँद सान्द्र या तनु सल्फ्यूरिक अम्ल को डालते हैं तो इस परख नली में सफेद अपक्षय प्राप्त होता है। जो सान्द्र HCl या HNO3 में अघुलनशील होता है। लेकिन BaCl2 का HCl या HNO3 के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है। अत: यह अम्ल H2 SO4 है।

BaCl2 + H2 SO4 = BaSO4 ↓ + 2 HCl

प्रश्न 38.
मत्स्य पालन पर अम्ल वर्षा का प्रभाव क्या पड़ता है ?
उत्तर :
मत्स्य पालन में (Pisciculture) : जिस तरह मनुष्य के शरीर का pH 7 से 7.8 के बीच रहने पर वह सही ढंग से कार्य करता है उसी प्रकार जलीय प्राणी (मछली) के लिए भी झील तथा नदियों का pH इसी श्रेणी में रहना चाहिए। लेकिन अम्ल वर्षा (Acid rain) के कारण झील तथा तालाबों का जल का pH 5.6 हो जाता है जिससे जलीय प्राणी का बचना कठिन हो जाता है और यह अम्लीय जल जलीय प्राणी (मछली) को मार देता है। अत: अम्लीय जल को उदासीन करने के लिए जल में बीच-बीच में कैल्सियम कार्बेनेट का छिड़काव करते रहना चाहिए जो मछली को मरने से बचाता है।

मछली पालन में भी उस तालाब में बीच-बीच में कैल्सियम आक्साइड (Calcium oxide) का छिड़काव किया जाता है जिससे छोटी-छोटी मछलियों को कोई रोग न हो जाय।

प्रश्न 39.
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या है तथा इस मॉडल की त्रुटियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford’s model of an atom) : रदरफोर्ड ने अपने प्रयोगों के आधार पर जो निष्कर्ष निकाला उसके अनुसार, परमाणु का केन्द्र धनावेशित होता है जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है। अपने निष्कर्षो के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया। इसके अनुसार,

  1. परमाणु का संपूर्ण द्रव्यान उसके नाभिक में स्थित होता है।
  2. परमाणु के अन्दर अधिकांश स्थान रिक्त (empty) होता है।
  3. परमाणु में ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉनों और धन आवोशित प्रोटॉनों की संख्याएँ समान होने के कारण परमाणु विद्युत: उदासीन (electrically neutral) होता है।
  4. नाभिक का आयतन परमाणु के आयतन की तुलना में काफी कम (नगण्य) होता है।
  5. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्तीय पथों पर चक्कर लगाते हैं। इन वृत्तीय पथों को कक्षाएँ (Orbit) कहते हैं। इलेक्ट्रॉन के वेग से उत्पन्न अपकेन्द्री बल (centrifugal force) नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच लगे आकर्षण बल (centripetal force) को संतुलित करता है।

रदरफोर्ड परमाणु मॉडल के दोष (Limitations of Rutherford’s model of an atom) : रदरफोर्ड परमाणु मॉडल के निम्नलिखित दोष हैं –
रदरफोर्ड के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाया करते हैं, युक्तिसंगत नहीं लगता, व्योंकि इस प्रकार का परमाणु कभी स्थायी नहीं हो सकता। विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार चक्कर लगाने वाले ऋण-आवेशित इलेक्ट्रॉन से लगातार ऊर्जा का हास होता रहेगा और नाभिक के आकर्षण बल के कारण यह नाभिक मे गिर जाएगा और परमाणु का विनाश हो जाएगा। लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता है, क्योंकि परमाणु स्थायी है।
रदरफोर्ड मॉडल की कक्षाओं में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या निश्चित नहीं की गई थी।

प्रश्न 40.
नगरों में वितरित होनेवाले पेय जल के शुद्धीकरण की विधियों का वर्णन करो।
उत्तर :
नदियों, कुओं तथा नलकूपों से प्राप्त जल को उबाल कर शुद्ध करके नगरों में पेयजल का वितरण करना सम्भव नहीं है। उसे निम्नलिखित जलशोधन प्रक्रिया द्वारा शुद्ध करके नगरों में वितरण किया जाता है।
जो निम्नलिखित है :
(a) एकत्रीकरण : नगर को पेय जल उपलब्ध कराने होते जल का शोधन करने के लिए सर्वप्रथम नदी में से पम्प द्वारा जल खींचकर टैंकों में एकत्रित किया जाता है जिसे निलम्बित (suspension) अशुद्धिया टैंकों के पेंदे में बैठ जाती हैं। इस टैंक को अवसादन टैंक कहते हैं। कोलायड (Colloid) अशुद्धियों का अवक्षेपण करने के लिए जल में थोड़ी फिटकरी भी डाली जाती है जिससे अशुद्धियाँ जमा हो जाती हैं।
(b) छानना : अवसादन टैंकों से अशुद्ध जल फिल्टर टैंकों में डाला जाता है। फिल्टर में नीचे से ऊपर की ओर क्रमश: ककड़, ईंट, रेत तथा लकड़ी के कोयले की मोटी परत बिछि होती है। अशुद्धियों के सूक्ष्म कण इन परतों में रह जाते है तथा शुद्ध जल छनकर नीचे निकल जाता है।
(c) जल का जीवाणुनाशक (Sterilization) : अब जल में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करना भी आवश्यक होता है। इसके लिए निम्न विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं।

क्लोरोनीकरण : क्लोरीन जीवाणुनाशक पदार्थ है। जल में जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए द्रव क्लोरीन या विरंजक चूर्ण (CaOCl2) की उचित मात्रा प्रयोग में लायी जाती है।
ओजोनीकरण : ओजोन (O3) भी जीवाणुनाशक है । जल में ओजोन गैस प्रवाहित की जाती है जिससे जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। जल को एक स्तम्भ में ऊपर से डाला जाता है, स्तम्भ में कोक के टुकड़े भरे होते हैं। नीचे से ओजोन गैस प्रवाहित की जाती है। जल की धारा ओजोन से मिलती है जिसमें जल के जीवाणु नष्ट हो जाते है।
पराबैंगनी किरणों से (U.V. Method) : पराबैंगनी किरणें भी जीवाणु नष्ट करने का उपयुक्त साधन हैं। इन किरणों को मरकरी लैम्प से प्राप्त करके जल की धारा पर प्रवाहित किया जाता है। इससे बहुत ही कम समय में जीवाणुओं का नाश हो जाता है तथा जल में कोई अन्य गन्थ या स्वाद भी नहीं उत्पत्र होता है।
वायु प्रवाह द्वारा : जल को वायु में फव्वारों के रूप में उछाला जाता हैं जिसमें सूर्य की पैराबैंगनी किरणें प्रभावित होती हैं तथा जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 41.
समांग एवं विषमांग मिश्रण की परिभाषा देते हुए दोनों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
समांग पदार्थ : यह दो या दो से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण है। इसके कणों का आकार 10-8 ~cm} होता है जो परिक्षेपण माध्यम में इस प्रकार घुल जाता है कि उनका विभेद करना कठिन हो जाता है। यह छन्न पत्र से पार हो जाते हैं। यह स्थायी तथा पारदर्शक होते हैं। जैसे नमक पानी का घोल, चीनी पानी का घोल।
विषमांग पदार्थ : यह दो या से अधिक पदार्थों का विषमांग मिश्रण है। इसका आकार Colliode से बड़ा 10-5 cm इससे अधिक होता है। यह छन्ना पत्र के आर-पार नहीं जा सकता है। इसे खुली आँखों से देख सकते हैं। यह अस्थायो होता है। इसे परिक्षेपण माध्यम से अलग किया जा सकता है। जैसे – नदी का गंदा जल, वायु में धुआँ आदि।.

प्रश्न 42.
आयन विनिमय रेजिन विधि द्वारा जल की कठोरता को कैसे दूर किया जा सकता है ?
उत्तर :
lon Exchange resins process : आजकल प्रयोगशालाओं तथा उद्योगों में, अस्थाई तथा स्थायी भारीपन दोनों तरह के भारी जल को lon Exchange resins द्वारा मुदु जल बनाया जाता है। जल में उपस्थित ion या Mineral को बहुत उच्च अणुभार, जल में अघुलनशील तथा कार्बनिक बहुलक (Polymer) पदार्थ आयन विनिमय रेजिन हटा दिया जाता है। रेजिन दो प्रकार का होता है।
(i) धनायन विनिमय रेजिन में अघुलनशील अम्लीय कार्बनिक रेजिन का दाना तथा -SO3 H या – COOH का बहुलक अणु होता है।
(ii) ऋणायन विनिमय रेजिन में Amines से प्राप्त क्षारीय वर्ग का कार्बनिक बहुलक अणु होता है।

जल को सबसे पहले Cation Exchanger रेजिन से भरे स्तम्भ में प्रवाहित करके कठोर जल में उपस्थित Ca+, Na+, Mg}+आदि धनायनों का रेजिन के H+में विनिमय हो जाता है।

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धनायन विनिमय रेजिन में से प्रवाहित करने के बाद जल को ऋणायन विनिमय रेजिन से भरे स्तम्भ से प्रवाहित करने पर जल उपस्थित Cl-1, \(\mathrm{NO}_3\), \(\mathrm{NO}_3^{-1}\) ॠणायनों का रेजिन के OH आयनों से विनिमय हो जाता है।

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H+, OH द्वारा उदासीन कर देता हैं तथा H2 O बनाते हैं।
H+ + OH = H2 O

इस विधि द्वारा आसुत जल या मृदुजल प्राप्त होता है जो प्रयोगशाला में व्यवहार किया जाता है।-
प्रथम टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सान्द्र HCl से अभिक्रिया कराते हैं।

(RCOO)2 Ca + 2 HCl → CaCl2 + 2 RCOOH

इसी प्रकार दूसरे टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सोडियम हाइड्राक्साइड से अभिक्रिया कराते हैं।

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प्रश्न 43.
बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य तथ्य लिखो।
उत्तर :
बोर परमाणु मॉडल (Bohr’s atomic model) : रदरफोर्ड मॉडल के दोषों को दूर करने के लिए नील बोर ने सन् 1913 में परमाणु की संरचना के संबंध में संशोधित सिद्धांत प्रस्तुत किया जिसे बोर का परमाणु मॉडल कहा जाता है। इसके अनुसार –
(i) परमाणु में इलेक्ट्रान केवल निश्चित अर्द्धव्यास वाले वृत्ताकार कक्षों में ही परिभ्रमण कर सकते हैं। ये कक्ष स्थायी होते हैं।
(ii) प्रत्येक कक्ष की ऊर्जा निर्दिष्ट होती है, जिसे कक्ष का ऊर्जा स्तर (Energy level) कहते हैं। इसलिए परिभ्रमण के समय इलेक्ट्रान से ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है जिसके कारण इलेक्ट्रान को केंद्रक में गिरने की संभावना नहीं रहती है।
(iii) इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर (Energy level) या ऊर्जा शेल (Energy shell) कहते हैं। इनमें कक्षों की संख्या सात होती है जो क्रमशः अंदर से बाहर की ओर K, L, M, N, ….. या 1, 2, 3, 4, ….. द्वारा प्रदर्शित की जाती हैं।
(iv) जब कोई इलेक्ट्रान बाहरी कक्ष से अंदर के कक्ष में जाता है, तब इस इलेक्ट्रान से तरंग के रूप में एक निश्चित परिमाण की ऊर्जा बाहर निकलती है और अंदर वाले कक्ष से कोई इलेक्ट्रान बाहरी कक्ष में जाता है तो वहाँ ऊर्जा का शोषण होता है। यहाँ ऊर्जा का उत्सर्जन तथा ऊर्जा का शोषण दोनों समान होता है। अतः केंद्रक के निकटवर्ती कक्ष की ऊर्जा कम होती है तथा दूरवर्ती कक्ष की ऊर्जा का स्तर अधिक होता है।

प्रश्न 44.
जे०जे० थामसन परमाणु मॉडल का वर्णन करो।
उत्तर :
तत्वों के परमाणु में तीन प्रकार के मौलिक कण इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन उपस्थित रहते हैं। केवल साधारण हाइड्रोजन के परमाणु में न्यूट्रॉन नहीं पाया जाता है। परमाणु पर कोई आवेश नहीं होता है। अत: इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की संख्या परस्पर समान होती है। परमाणु में ये तीन कण किस रूप में उपस्थित है, इसके विषय में विभिन्र वैज्ञानिकों ने समयसमय पर विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किये।
इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के आविष्कार के बाद 1901 ई० में जोसेफ जॉन थॉमसन (J.J. Thomson) ने परमाणु के स्वरूप के सम्बन्ध में अपनी अवधारणा को प्रस्तुत किया। इनके अनुसार, (i) परमाणु एक भारी धनाविष्ट गोला है, जिसमें धनाविष्ट कण प्रोटॉन समान रूप में वितरित रहते हैं। (ii) गोले के अन्दर इलेक्ट्रॉन इस प्रकार से समाए (Embeded) रहते हैं कि परमाणु विद्युतः उदासीन बन जाता है।

प्रश्न 45.
pH स्केल का सिद्धान्त बताइये।
उत्तर :
सन् 1909 ई० में Sorenson ने अम्ल तथा क्षार के घोल की अम्लीयता तथा क्षारीयता का ताकत (Strength) ज्ञात करने के लिए एक स्केल का निर्माण किया जिसे pH स्केल (pH Scale) कहते हैं।
pH की कोई इकाई नहीं होती है, यह एक शुद्ध संख्या है। इस स्केल में स्केल का मान 0 से 14 है।
pH, हाइड्रोजन आयन H+ की सान्द्रता का अर्थ अधिक pH से होता है।
अत: किसी घोल में हाइड्रोजन आयनों के सान्द्रता के व्युत्क्रम Logaithm को उस घर का pH कहते हैं।
pH = log \(\frac{1}{\left[\mathrm{H}^{+}\right]}\)
या pH = -log10[H+]

चूँकि उदासीन जल में हाइड्रोजन आयनों की सान्द्रता 10-7 M होती अत: [H+] = 10-7 M.

∴ pH = -log [H+]
= -log 10-7
= -(-7) log 10
= 7.

प्रश्न 46.
H2SO4 HCl का रासायनिक गुण लिखो।
उत्तर :
सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) का रासायनिक गुण : H2SO4 के रासायनिक गुण निम्न हैं :
क्षार के साथ H2SO4 की प्रतिक्रिया : H2 SO4 तीव अम्ल तथा द्विभास्मिक अम्ल है। इसलिए H2SO4 क्षार के साथ प्रतिक्रिया करके प्रथम अम्लीय लवण तथा बाद में भार की अधिकता में सामान्य लवण उत्पन्नकरता है।

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A कार्बोनेट से प्रतिक्रिया : H2SO4 कार्बोनेट लवणों के साथ क्रिया करके सल्फेट लवण, CO2 तथा जल उत्पत्न करता है।

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B बाई कार्बोनेट से प्रतिक्रिया : यह बाई कार्बोनेट लवणों के साथ प्रतिक्रिया करके बाइसल्फेट लवण, CO2 तथा जल उत्पन्न करता है।

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धातुओं से प्रतिक्रिया : विद्युत रासायनिक श्रेणी में रखी गयी धातुओं में हाइड्रोजन के ऊपर के सभी धातु में ठण्डे तथा तनु H2 SO4 से प्रतिक्रिया करके हाइड्रोजन उत्पत्न करता है।

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लेकिन विद्युत रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन के नीचे के धातु ठण्डा तथा तनु H2SO4 से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है। यह धातु सान्द्र तथा गर्म H2SO4 से Zn Al, Sn, Fe तथा Cu आदि धातुओं को उसके सल्फाइड लवण में ऑक्सीकृत करता है तथा स्वयं अवकृत होकर SO2 गैस उत्पत्र करता है।

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सान्द्र तथा ठण्डे H2 SO4 के साथ हाइड्रोजन के नीचे वाली धातुओं में जैसे Pb, Ag, Cu, Au से प्रतिक्रिया नही करता है। HCl अम्ल का रासायनिक गुण : सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के घोल में HCl.अम्ल मिलाने पर सफेद अवक्षेप सिल्वर क्लोराइड प्राप्त होता है। यह अवक्षेप नाइट्रिक अम्ल (HNO3) अघुलनशील होता है, लेकिन अतिरिक्त NH4 OH में घुलनशील होता है।

प्रश्न 47.
अम्ल और क्षार का उपयोग करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए ?
उत्तर :
अम्ल तथा भस्म (कार) से सावधानियाँ : सान्द्र अम्ल तथा सान्द्र क्षार का प्रयोग करते हुए बहुत ही सावधानियाँ रखनी पड़ती हैं।
खनिज से प्राप्त अम्ल जैसे HCl, H2SO4 तथा HNO3 से अधिक सावधान रहना चाहिए क्योंकि यदि किसी असावधानी से हमारे शरीर पर गिर जाये तो यह त्वचा को जला देता है तथा लकड़ी पर गिर जाये तो उस पर काला धब्बा उत्पन्न कर देता है। यह तीनों अम्ल सान्द्र रूप में बहुत ही क्षयकारी होते हैं। इसका प्रभाव धातु के वस्तु तथा संगमरमर पर भी पड़ता है तथा उसे भी क्षय कर देता है। इसलिए प्रयोगशाला में अम्ल को धातु के बर्तन में न रख कर कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में रखते हैं।

उसी प्रकार प्रबल क्षार (भस्म) (Strong bases) भी हमारी त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं जैसे सोडियम हाइड्राक्साइड। इसकी भी सान्द्र प्रकृति (गुण) क्षयकारी होती है। इसलिए खनिज अम्ल तथा सान्द्र सोडियम हाइडाक्साइड रखे बर्तन पर आकास्मिक दुर्घटना का चि्न बना होता है। सान्द्र अम्ल में जल मिलाने पर तन् अम्ल प्राप्त होता है लेकिन यह एक उष्मादायक विधि है इसलिए यहाँ भी सावधानी रखनी पड़ती है कि जल में सान्द्र अम्ल धीरे-धीरे मिलना चाहिए कभी भी सान्द्र अम्ल में जल नहीं डालना चाहिए अन्यथा दुर्घटना घट सकती है।

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प्रश्न 48.
कृषि और मछली पालन में pH मान का क्या महत्व है ?
उत्तर :
कृषि क्षेत्र (Agriculture) : कृषि भूमि का pH 7 के लगभग रहने पर पैदावार अच्छी होती है। लेकिन मिट्टी यदि अधिक अम्लीय तथा अधिक क्षारीय हो जाने दोनों ही कारण से पैदावार में कमी आ जाती है।
यदि मिट्टी अम्लीय हो जानें पर उसे उदासीन करने के लिए क्षार, जैसे चूना (Calcium oxide), बुझा चूना (Calcium Hydroxide) या चाक (Calcium Carbonate) का छिड़काव किया जाता है। यदि मिट्टी क्षारीय हो जाने पर उसे उदासीन करने के लिए अम्ल जैसे कार्बनिक खाद का प्रयोग किया जाता है जो मिट्टी की क्षारीयता को कम कर देता है। मछली पालन में (Pisciculture): जिस तरह मनुष्य के शरीर का pH 7 से 7.8 के बीच रहने पर वह सही ढंग से कार्य करता है उसी प्रकार जलीय प्राणी (मछली) के लिए भी झील तथा नदियों का pH इसी श्रेणी में रहना चाहिए। लेकिन अम्ल वर्षा (Acid rain) के कारण झील तथा तालाबों का जल का pH 5.6 हो जाता है जिससे जलीय प्राणी का बचना कठिन हो जाता है और यह अम्लीय जल जलीय प्राणी (मछली) को मार देता है। अतः अम्लीय जल को उदासीन करने के लिए जल में बीच-बीच में केल्सियम कार्बेनिट का छिड़काव करते रहना चाहिए जो मछली को मरने से बचाता है।
मछली पालन में भी उस तालाब में बीच-बीच में कैल्सियम आक्साइड (Calcium oxide) का छिड़काव किया जाता है जिससे छोटी-छोटी मछलियों को कोई रोग न हो जाय।

प्रश्न 49.
20° C पर लेड नाइट्रेट की घुलनशीलता 54.4 है। इस कथन का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
20° C पर लेड नाइट्रेट की घुलनशीलता 54.4 है इस कथन का अर्थ है कि 20° C पर 100 gm जल में 54.4 gm लेड नाइट्रेट घुलकर संतृप्त घोल बनता है।

प्रश्न 50.
सोडियम क्लोराइड के भारानुसार 10 प्रतिशत (w/w) जलीय घोल का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :
100 m / घोलक (जल) में घुल घुलित (सोडियम क्लोराइड) के द्रव्यमान को द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत कहते हैं। यह इकाई औषधियों तथा फार्मेसी में उपयोग होता है। इसका इकाई % \(\frac{W}{V}\) होता है।

प्रश्न 51.
जल के भौतिक गुणों को लिखो।
उत्तर :
जल का भौतिक गुण (Physical Properties of water) :

  1. द्ध जल एक रंगहीन, स्वादहीन तथा गंधहीन द्रव है।
  2. जल 0° C पर जम जाता है तथा 100° C पर क्वथन होता है।
  3. जल का घनत्व 4° C पर 1 gm cm3 होता है।
  4. यह विद्युत का कुचालक है।
  5. जल की विशिष्ट उष्मा सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 52.
कैथोड किरणों के गुण लिखो।
उत्तर :
कैथोड किरणों के गुण निम्नलिखित हैं –

  1. ये सरल रेखा में गमन करती हैं।
  2. इनमें गतिज ऊर्जा होती है।
  3. इनमें ऋण आवेश होता है।
  4. ये विद्युतीय तथा चुम्बकीय क्षेत्र में विक्षेपित होती हैं।
  5. ये प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती हैं।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 53.
प्रोटॉन का आविष्कार कैसे हुआ ?
उत्तर :
चूँकि परमाणु विद्युतीय रूप से उदासीन होता है एवं इलेक्ट्रान परमाणु का एक मौलिक कण है जो ऋणावेशित होता है। अतः परमाणु में कोई धनावेशित कण अवश्य होना चाहिए। इस धनआवेश युक्त कणों के अस्तित्व का प्रमाण गोल्डस्टीन (Goldstein) ने 1886 ई० में विसर्जन नली में कैशोड के लिए किद्रयुक्त इलेक्ट्रोड का प्रयोग करके दिया। विसर्जन नली में कम दबाव पर विद्युत विसर्जन करने पर कैथोड से कैथोड किरणें निकलने के साथ ही साथ एनोड से कैथोड की ओर अदृश्य किरणें तीव्र वेग से निकलती हैं एवं कैथोड के छिद्रों से होकर सरल रेखा में बाहर निकल जाती हैं जो जिंक सल्फाइड लेप किये हुए दीवार से टकराकर हरे रंग की प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती है।

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सन् 1907 में सर ज़ेजेे॰ थॉमसन ने इसे धनात्मक किरण (Positive rays) कहा। एनोड से निकलने के कारण इसे एनोड किरण (Anode rays) भी कहा जाता है। ये किरणे विद्युत धनात्मक क्षेत्र द्वारा विकर्षित होती हैं, किन्तु विद्युत ॠणात्मक क्षेत्र द्वारा आकर्षित होती हैं। अत: इनमें धनावेशित कण उपस्थित हैं। सन् 1920 में लॉर्ड रदरफोर्ड ने इस कण का नाम म्रोटॉन (Proton) रखा।

प्रश्न 54.
जल एक उत्तम एवं बहुआयामी घोलक है – व्याख्या करो।
उत्तर :
जल व्यापक घोलक है (Water as versatile solvent) : जल एक उत्तम घोलक है तथा इसे व्यापक घोलक कहते हैं। इसका कारण यह है कि अधिकांश पदार्थ – ठोस, तरल या गैस जल में घुलनशील हैं। वह घोल जिसमें जल घोलक हो उसे जलीय घोल (aqueous solution) कहते हैं। जल एक अकार्बनिक घोलक है। जल में सभी लवण, क्षार, अम्ल घुल जाते हैं। सभी विद्युत संयोजक यौगिक (Electrovalent compound) जल में घुलनशील होते हैं साथ ही कुछ सह संयोजक यौगिक (Co-valent compound) भी ज़ल में घुलनशील होते हैं जैसे चीनी, यूरिया, एसीटान, इथाईल अल्कोहल, मिथाईल अल्कोहल आदि।

जल के अतिरिक्त और भी घोलक है। जैसे – अल्कोहल, ईथर, बेन्जीन, क्लोरोफार्म, कार्बन-ट्रेटा-क्लोराइड आदि। लेकिन जल की व्यापकता सभी घोलक से अधिक है। अत: जल एक Versatile solvent है।

प्रश्न 55.
न्यूट्रॉन का आविष्कार कैसे हुआ ?
उत्तर :
सन् 1930 में बूथ तथा बेकर ने दिखाया कि जब हल्की धातु बेरिलियम (Be9) के ऊपर अल्फा किरणों से आघात किया जाता है तो विशेष प्रकार की अदृश्य किरणें निर्गत होती हैं जो विद्युतीय या चुम्बकीय क्षेत्र से श्रभावित नहीं होती हैं।
ये किरणें उदासीन या आवेशरहित होती हैं।

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बूथ और बेकर इसका सही नामकरण नहीं कर पाये, किन्तु लॉर्ड रदरफोर्ड के छात्र जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने 1932 ई० में प्रयोगों के आधार पर प्रमाणित किया कि ये किरणे विद्युतीय रूप से उदासीन किरणों के समूह हैं जिनका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के समान है। उन्होंने इसका नाम न्यूट्रान (Neutron) रखा।

लीथियम, बोरॉन, इत्यादि अन्य हल्के तत्वों पर अल्फा-कणों की बमबारी करने पर न्यूट्रॉन प्राप्त होते हैं, अनेक नाभिकीय अभिक्रियाओं के अध्ययन से अब यह ज्ञात हो चुका है कि केवल साधारण हाइड्रोजन के परमाणु को छोड़कर सभी तत्वों के परमाणु में न्यूट्रॉन उपस्थित है, अर्थात् न्यूट्रॉन द्रव्य (Matter) का एक मूल कण है।

प्रश्न 56.
रदरफोर्ड के प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकलता है ?
उत्तर :
रदरफोर्ड के प्रयोग से निष्कर्ष : विभिन्न स्थानों पर उत्पत्र चमक की जाँच से यह ज्ञात हुआ कि-

  1. अधिकतर α-कण धातु की पन्नी को पार करके एक सीधी रेखा में चले जाते हैं। चित्र में यह प्रदर्शित करता है कि परमाणु में अधिकांश स्थान रिक्त (खोखला) है।
  2. कुछ α-कण अपने मूल पथ से थोड़ा विक्षेपित (deflect) हो जाते हैं। यह प्रदर्शित करता है कि परमाणु के केंद्र में धनावेशित भाग है जो कि अति सूक्ष्म स्थान घेरे हुए हैं।
  3. बहुत कम α-कण 90° के कोण से अधिक कोण पर विक्षेपित हो पाते हैं। यह प्रदर्शित करता है कि परमाणु के केंद्र में जो अति सूक्ष्म धनावेशित भाग है वह भारी (सघन) और दृढ़ (rigid) है.।

α-कण प्रकीर्णन से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि परमाणु का कुल धनावेश और लगभग समस्त द्रव्यमान परमाणु के केंद्र में एक अति सूक्ष्म स्थान में संचित है। परमाणु के केंद्रीय भाग को, जिसमें परमाणु का कुल धनावेश और लगभग समस्त द्रव्यमान संकेंद्रित हैं, परमाणु का नाभिक (nucleus) कहते हैं।

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α-कण प्रकीर्णन प्रयोग से प्राप्त जानकारी के आधार पर रदरफोर्ड नें परमाणु संरचना के संबंध में यह विचार अकट किया कि परमाणु में भिन्न प्रकार के दो भाग है – (i) अति सूक्ष्म धनावेशित नाभिक और (ii) नाभिक के बाहर का अपेक्षाकृत विशाल क्षेत्र, जिसमें इलेक्ट्रान रहते हैं। नाभिक की त्रिज्या लगभग 10-13 से 10-12 सेमी० और इलेक्ट्रान की त्रिज्या लगभग 10-13 सेमी० होती है। परमाणु की तुलना में नाभिक बहुत सघन (dense) और दृढ़ (rigid) होता है, वयोंकि परमाणु का लगभग समस्त द्रव्यमान बहुत छोटे आयतन के नाभिक में संकेद्रित रहता है। नाभिक का आयतन परमाणु के आयतन का लगभग 10-12 भाग होता है तथा नाभिक का घनत्व परमाणु के घनत्व से लगभग 10^{12} गुना अधिक होता है।

इलेक्ट्रान परमाणु के नाभिक में नहीं रहते हैं, वे नाभिक के बाहर जो विशाल क्षेत्र है उसमें रहते हैं तथा नाभिक के चारों ओर कक्षाओं (orbits) में गतिशील रहते हैं। परमाणु में इलेक्ट्रानों की संख्या परमाणु नाभिक पर स्थित धनावेश की यूनिटों की संख्या के बराबर होती है, इसीलिए परमाणु विद्युत उदासीन होते हैं।

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प्रश्न 57.
समस्थानिकों के उपयोग क्या हैं ?
उत्तर :
समस्थानिकों का उपयोग : किसी तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है किन्तु केन्द्रक (Nucleus) पर उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या में विभित्रता के कारण उनकी मात्रा संख्या (mass number) भिन्न-भिन्न होती है उन्हें आइसोटोप (Isotope) कहते हैं।

आइसोटोप को किसी रासायनिक विधि द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनका रासायनिक गुण समान होता है। आइसोटोप की खोज केवल Mass number के विभिन्नता के आधार पर की जाती है।

हिलियम के दो समस्थानिक (isotopes) होते हैं। इसके भारी परमाणु में 2 इलेक्ट्रॉन तथा केन्द्रक में 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं। इसे 2 He4 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसके हल्के परमाणु में 2 इलेक्ट्रॉन तथा केन्द्रक में 2 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होते हैं। इसे 2 He3 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

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हिलियम के दोनों Isotopes का Atomic number -2 , Proton no, -2 तथा Electron no. -2 होती है। परन्तु Mass number क्रमश: 4 और 3 होता है। इस Isotopes में न्यूट्रान की संख्या क्रमशः (4-2) = 2 तथा (3 -2) = 1 होती है।

प्रश्न 58.
हाइड्रोजन के समस्थानिकों के केन्द्रक में क्या अंतर है ? उनके परमाणु की संरचना दिखाओ।
उत्तर :
हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of hydrogen) : हाइड्रोजन के तीन Isotopes हैं।
(a) साधारण हाइड्रोजन (Ordinary Hydrogen) या प्रोटियम (Protium) : इसके केन्द्रक में केवल एक प्रोटॉन पाया जाता है, न्यूट्रॉन नहीं होता है। इसका atomic number 1 तथा mass number भी 1 होता है। इसे \({ }_1 H^{\prime}\) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(b) भारी हाइड्रोजन (Heavy hydroge) या ड्यूटीरियम (Deuterium) : इसके केन्द्रक में एक प्रोटॉन तथा एक न्यूट्रॉन होता है। अत: इसका atomic number 1 तथा mass number 2 होता है। इसे, H2 द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

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(c) ट्राइटियम (Tritium) : 2 इसके केन्द्रक में एक प्रोटॉन तथा दो न्यूट्रान होता है। इसका atomic number 1 तथा Mass number 3 होता है। इसे H3 द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
अतः हाइड्रोजन के तीनों Isotopes में atomic number 1 लेकिन mass number क्रमशः 1, 2 और 3 है जो भिन्न-भिन्न हैं।

प्रश्न 59.
सोडियम (11 Na23) की परमाणु संरचना बताओ। सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखो एवं सोडियम की संयोजकता बताओ।
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन की संख्या = 11
प्रोटॉन की संख्या = 11
न्यूट्रॉन की संख्या = 23 – 11 = 12
सोडियम का इलेक्ट्रानिक विन्यास 2,8,1 इसकी संयोजकता 1 है।

प्रश्न 60.
वृहत् जगत एवं सूक्ष्म जगत के बीच एवोगैड्रो संख्या एक कड़ी का कार्य करती है – कैसे ?
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या स्थूल दूनियाँ एवं सूक्ष्म दुनिया के बीच कड़ी का काम करता है।
6.022 × 1023 संख्या के परिमाण के बारे में कल्पना करना कठिन है। इसके बारे में कुछ जानकारी के लिए, 1 मोल सेकेण्ड उस समयावधि के 4 मिलियन (1 मिलियन = दस लाख) गुना समय को प्रदर्शित करता है जितना पृथ्वी को अपने अस्ति में आगे बीता है अर्थात् जितना अभी तक पृथ्वी की उम्र है एवं एक मोल संगमरमर के द्वारा पूरी पृथ्वी को 40 मील की गहराई तक ढंका जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ, चूँकि परमाणु इतने छोटे होते हैं कि एक मोल परमाणुओं अथवा अणुओं को रासायनिक क्रिया में प्रयोग के लिए पूर्णरूपेण प्रबंध किया जा सकता है।

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प्रश्न 61.
वायु को प्रदूषित करने वाले कौन-कौन से निलंबित पदार्थ हैं ?
उत्तर :
यदि किसी छिद्र से सूर्य का प्रकाश आता है तो उस प्रकाश में देखते हैं कि धूल के छोटे-छोटे कण उड़ते हुए दिखाई पड़ते है यही घूल कण वायु को प्रदूषित कर देता है। इन कणों का आकार निलंबन के आकार का होता है।

वायु में उड़नेवाले ठोस तथा द्रव कण जिसका आकार Colloide के समान होता है उसे Suspended particulate matter (SPM) कहते हैं।
इन्हीं Suspended particulate matter के कारण वायु प्रदूषित होता है।

ये suspended particulate पदार्थ धूलकण है, जो शहरों तथा खेतों की धूल होते हैं, राख (Fly ash), जो Thermal Power station से निकलता है, कार्बन, जो गाड़ियों से निकलता है तथा धातु के कण जो उद्योग से तथा खदान से निकलता है। ये suspended particulate वायु से मिलकर उसे मदूषित कर देता है।
इन धूलकणों से फेफड़े की बीमारी, त्वचा की बीमारी, श्वास की बीमारी तथा कैंसर आदि रोग हो जाता है।

प्रश्न 62.
तेल-जल तथा साबुन-जल से इमल्सन कैसे बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
किरासन तेल की कुछ बूँदों को पानी के साथ एक बोतल में हिलाने पर पानी में वितरित (dispersed) तेल का पायस (emulsion) प्राप्त होता है। यह पायस अस्थाई होता है क्योंकि थोड़ी देर बाद पानी तथा तेल अलग-अलग हो जाते हैं।
इसी प्रकार एक बरतन में पानी लेकर उसमें साबुन को पानी में घोलते हैं। पानी में साबुन के वितरीत होने पर साबुन का पायस (Emulsion) प्राप्त होता है। यह पायस भी अस्थाई होता है क्योंकि कुछ समय पश्चात् साबुन बरतन की पेंदी में जमा हो जाता है और पानी उसके ऊपर अलग जमा रहता है।

प्रश्न 63.
सान्द्र HCl से भींगे हुए ग्लास छड़ को एक गैसजार में प्रवेश कराते हैं जिससे सफेद घुआँ उत्पन्न होता है। गैसजार में गैस का नाम बताओ। समीकरण दो।
उत्तर :
गैस से भरे गैस जार के अन्दर सान्द्र HCl से भींगे ग्लास छड़ को प्रवेश कराने पर जो सफेद धुआँ बनता है वह धुआँ अमोनियम क्लोराइड (NH4 Cl) का होता है। गैस जार में अमोनिया (NH3) गैस है।

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प्रश्न 64.
Na2O एक भास्मिक ऑक्साइड है, जबकि ZnO एक उभयधर्मी ऑक्साइड है-क्यों ?
उत्तर :
Na2 O एक भास्मिक ऑक्साइड है क्योंकि यह केवल अम्ल से क्रिया कर लवण तथा जल देते हैं। यह क्षार से क्रिया नहीं करता है।
Na2 O + 2 HCl = 2 NaCl + H2O
ZnO एक उभय धर्मी ऑक्साइड है जो अम्ल और क्षार प्रतिक्रिया लवण तथा जल बनाते हैं।

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प्रश्न 65.
रासायनिक समीकरण की सहायता से बताओ क्या होता है जब –
(i) सान्द्र HNO3 को ताँबे की छीलन के साथ गर्म करते हैं ?
(ii) अल्युमिनियम पावडर को सान्द्र NaOH के जलीय घोल के साथ गर्म करते हैं।
उत्तर :
(i) (क) सान्द्र HNO3 को ताँम्बे की छीलन के साथ गर्म करते हैं।
(ख) अल्युमीनियम पाउडर को सान्द्र NaOH के जलीय घोल के साथ गर्म करते हैं।
(ii) (क) सान्द्र HNO3 को ताँबे की छीलन के साथ गर्म करते हैं तो नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (NO2) भूरे रंग के साथ निकलता है।

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(ख) अल्युम्मिनियम पाउडर को सान्द्र NaOH के जलीय घोल के साथ गर्म करते हैं तो हाइड्रोजन गैस निकलती है और सोडियम अल्युमिनेट बनता है।

2 Al + NaOH + 2 H2O = 2 NaAlO2 + H2

प्रश्न 66.
गैसीय ऑक्साइडों को जल में घुलने से जल का अम्लीकरण कैसे होता है ?
उत्तर :
जल का अम्लीकरण (Acidification of water) : कल-कारखानों, बिजलीघरों तथा स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधनों (Fossil fuels), (डीजल, पेट्रोल आदि), का प्रयोग किया जाता है। इन इधनों के जलने से SO2CO2 तथा NO2 गैस उत्पन्न होती है जो वायु में मिलकर वायु को प्रदूषित कर देती है। वायु में उपस्थित जलवाष्प में SO2 ऑक्सीकृत होकर H2SO4 में CO2 ऑक्सीकृत होकर H2CO3 में तथा NO2 ऑक्सीकृत होकर HNO3 में परिवर्तित जाता है। यही अम्ल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आते हैं, जिसे अम्ल वर्षा (Acid rain) कहते हैं।
2 SO2 + 2 H2O = 2 H2SO4 सल्फ्यूरिक अम्ल
CO2 + H2O = H2CO3 कार्बोनिक अम्ल
3 NO2 + H2O = 2 HNO3 + NO नाइट्रिक अम्ल

प्रश्न 67.
अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव बताओ।
उत्तर :
अम्ल वर्षा का हानिकारक प्रभाव (Harmful effects of Acid Rains) :

  1. यह पेड़-पौधों की पत्तियों को क्षति पहुँचाता है तथा उसके पोषक तत्वों को निष्कासित कर देता है।
  2. नदियों, झीलों तथा तालाबों के जल को यह अम्लीय बना देता है जिससे स्वच्छ जल में रहनेवाले जीव-जन्तु प्रभावित होते है तथा उनकी आबादी काफी कम हो जाती है।
  3. यह मिट्टी में मिलकर उसे अम्लीय बना देता है जिससे मिट्टी की उर्वराशक्ति नष्ट हो जाती है।
  4. इससे बड़ी-बड़ी ऐतिहासिक इमारतो जो संगमरमर से बनी होती हैं, जैसे ताजमहल, विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता, बिड़ला तारामण्डल कोलकाता को काफी क्षति पहुँचती है।

अम्ल वर्ष संगमरमर से प्रतिक्रिया करके कैल्सियम सल्फेट बनाता है तथा CO2 गैस मुक्त करता है जिससे उसकी सुन्दरता तथा चमक नष्ट हो रही है।

CaCO3 + H2 SO4 = CaSO4 + H2O + CO2

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प्रश्न 68.
दंतक्षय, कृषि एवं मत्स्य पालन में pH का महत्व बताओ।
उत्तर :
pH का प्रभाव (Effect of pH ) : pH का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन तथा हमारे शरीर पर पड़ता है।
दन्त क्षय (Tooth decay) : जब हम चीनी युक्त कोई पदार्थ खाते हैं, तो मुख के अन्दर का बैक्टीरिया उस चीनी को अम्ल में तोड़ देता है। यह अम्ल हमारे मुख के pH को कम कर देता है। जब मुख का pH 5.5 से नीचे होने पर यह अम्ल हमारे दन्त के मसूड़ों (Enamel) को जो कैल्शियम फॉस्फेट नामक कठोरतम पदार्थ से बना होता है, उसको भी नष्ट कर देता है।

सुरक्षा : (i) इससे बचने का सरल उपाय यह कि प्रत्येक खाने के बाद कुल्ला करें तथा मुख को अच्छी तरह से धो लें।
(ii) उत्पन्न अम्ल को उदासीन करने के लिए अच्छे Tooth Paste से बश करें, जो अम्ल को क्षार में बदल देता है।
(iii) मिठाई, चॉकलेट, आइसक्रीम इत्याद का प्रयोग कम करना चाहिए।

कृषि क्षेत्र (Agriculture) : कृषि भूमि का pH 7 के लगभग रहने पर पैदावार अच्छी होती है। लेकिन मिट्टी यदि अधिक अम्लीय या अधिक क्षारीय हो जाती है, तो इन दोनों ही कारणों से पैदावार में कमी आ जाती है।
मिट्टी की अम्लीयता सामान्य करने हेतु क्षार, जैसे चूना (Calcium oxide) बुझा चूना (Calcium Hydroxide) या चॉक (Calcium Carbonate) का छिड़काव किया जाता है। इसी प्रकार मिट्टी क्षारीय हो जाने पर उसकी क्षारीयता नियत्रित करने के लिए अम्ल, जैसे कार्बनिक खाद, का प्रयोग किया जाता है।

मत्स्य पालन में (Pisciculture) : जिस तरह मनुष्य के शरीर का pH 7 से 7.8 के बीच रहने पर वह सही ढंग से कार्य करता है, उसी प्रकार जलीय प्राणी (मछली) के लिए भी झील तथा नदियों का pH इसी श्रेणी में रहना चाहिए। लेकिन अम्ल वर्षा (Acid rain) के कारण झील तथा तालाबों के जल का pH 5.6 हो जाता है, जिससे यह जलीय प्राणी (मछली) को मार देता है। अत: अम्लीय जल को सामान्य करने के लिए जल में बीच-बीच में कैल्सियम कार्बोनेट का छिड़काव करते रहना चाहिए।
मछली पालन में भी उस तालाब में Calcium oxide का छिड़काव किया जाता है, जिससे छोटी-छोटी मंछलियों को कोई रोग न हो जाय।

आंकिक प्रश्नोत्तर (Numrical Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
यदि 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n हो, तो 100 ग्राम CaCO3 एवं 44 ग्राम CO2 में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
हल : जल (H2 O) के अणुभार = 2 × 1 + 2 × 16 = 18 g
CaCO3 का अणुभार = 40 + 12 + 16 × 3 = 100 g
CO2 का अणुभार = 12 + 16 × 2 = 44 g
एवोग्गड्रो के नियमानुसार, चूँकि प्रत्येक पदार्थ के 1 मोल में अणुओं की संख्या समान होती है एवं एक मोल जल (H2O) अर्थात् 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n हैं।
∴ 1 मोल CaCO3 एवं 1 मोल CO2 अर्थात् 100 ग्राम CaCO3 एवं 44 ग्राम CO2 में भी अणुओं की संख्या n होगी।
उत्तर :
अणुओं की अभीष्ट संख्या = n

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प्रश्न 2.
STP पर 8 ग्राम आक्सीजन का आयतन ज्ञात करें।
हल : ऑक्सीजन का अणुभार = 2 × 16 = 32 g
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उत्तर :
5.6 लीटर।

प्रश्न 3.
22 ग्राम कार्बन डाई आक्साइड में आक्सीजन परमाणुओं की संख्या क्या है ?
हल : 44 ग्राम CO2 में अणुओं की संख्या = 6.022 × 1023

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उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 4.
STP पर 4 ग्राम सल्फर डाई आक्साइड का आयतन क्या है ?
हल : सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2) का अणुभार = 32 + 2 × 16 = 64 g
∵ S.T.P. पर 64 g SO2 का आयतन 22.4 लीटर है।
∴ S.T.P. 1 g का आयतन \(\frac{22.4}{64}\) लीटर
∴ S.T.P. 1 g का आयतन \(\frac{4 × 22.4}{64}\) लीटर = 1.4 ली०
उत्तर :
1.4 लीटर।

प्रश्न 5.
द्रव्यमान प्रतिशत के रूप में उस घोल के सान्द्रण की गणना करें जिसके 150 g जल में 10 g पोटैशि़यम नाइट्रेट घुला हुआ है।
हल : ग्राम प्रतिशत में घोल का सान्द्रण

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= \(\frac{10}{160}\) × 100 = 6.25 %
उत्तर :
6.25 %

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प्रश्न 6.
40 g साधारण नमक 320 ml जल में घुला हुआ है। इस घोल का सान्द्रण द्रव्यमान प्रतिशत में ज्ञात करें। हल : घोल का सान्द्र OP द्रव्यमान प्रतिशत में
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उत्तर :
12.5 %

प्रश्न 7.
मैंगनीज डाई ऑक्साइड मिश्रित 122.5 ग्राम पोटैशियम क्लोरेट गर्म करने पर N.T.P. पर कितना ग्राम पोटैशियम क्लोराइड बनेगा ? यहाँ मैंगनीज डाई ऑक्साइड की क्या भूमिका है ?
हल : 2 KclO3+[MnO2] heat = 2 KCl + 3 O2 + [MnO2]
2[39 + 35.5 + 16 × 3] = 2[39 + 35.5]
= 2 × 122.5 = 2 × 74.5
= 245 gm = 149 gm
∵ 245 gm KclO3 से N.T.P. पर 149 gm Kcl प्राप्त होता है।

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उत्तर :
यहाँ MnO2 एक धन उत्प्रेरक का काम करता है।

प्रश्न 8.
260 ग्राम K2 SO4 में कितना मोल K2 SO4 होगा ?
हल :
K2 SO4 = 39 × 2 + 32 + 16 × 4
= 78 + 32 + 64
= 174 gm
∵ 174 gm K2SO4 में 1 mole K2 SO4 है।
∴ 260 gm ” ” = \(\frac{1}{174}\) × 260 = 1.5 mole K2 SO4
उत्तर :
1.5 mole 2 SO4

प्रश्न 9.
यदि S.T.P पर 22.4 लीटर CO2 गैस में अणुओं की संख्या 6.022 × 1023 हों, तो, S.T.P पर 11.2 लीटर O2 गैस में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
हल :
∵ 22.4 लीटर O2 गैस में S.T.P. पर 6.022 × 1023 अणु
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उत्तर :
3.011 × 1023 अणु

प्रश्न 10.
प्रमाणित तापक्रम एवं दाबव पर 7 ग्राम नाइट्रोजन गैस का आयतन क्या होगा ?
हल :
∵ 14 gm नाइट्रोजन गैस का N.T.P. आयतन 22.4 लीटर है।
∴ 7 gm ” ” ” “= \(\frac{22.4}{14}[latex] × 7 = 11.2 लीटर
उत्तर :
11.2 लीटर

प्रश्न 11.
27° C और 750 मि० मी० पारे के दबाव पर 500 C . C HCl गैस में 1.2 × 1023 अणु उपस्थित हैं। सामान्य तापक्रम एवं दाबव पर 2.5 लीटर गैस में अणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।

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उत्तर :
6.6 × 1022 अणु।

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प्रश्न 12.
2.3 ग्राम सोडियम में Na परमाणुओं की संख्या कितनी है ? हल :
∵ 23 ग्राम सोडियम में 6.023 × 1023 परमाणु है।

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प्रश्न 13.
0.2 मोल H2 अणुओं का द्रव्यमान बताओ (H2 का अणु भार = 2 )
हल :
∵ 1 मोल H2 अणुओं को द्रव्यमान 2 ग्राम है।
∴ 0.2 ” ”  ” ” ” = 2 × 0.2
उत्तर :
= 0.4 gm है।

प्रश्न 14.
साधारण नमक की घुलनशीलता 30° C पर 45 gm है। नमक साधारण घोल का 90 gm तैयार करने के लिए जल का भार ज्ञात कीजिए।
हल :
∵ 45 gm नमक 30° पर घुले हैं 100 gm जल में
∴ 90 gm ” ” ” ” = [latex]\frac{100}{45}\) × 90
= 200 gm जल।
उत्तर :

प्रश्न 15.
जब 100 gm संतुप्त घोल 50° C वाष्पित होता है और 50 gm ठोस रह जाता है तब 50° C पर पदार्थ की घुलनशीलता क्या होगी ?
हल : 100 घोल से 50 gm ठोस मिला
∴ घोलक = 100-50 = 50 gm
∵ 50 gm घोलक में 50° C पर ठोस 50 gm घुले हैं

∴ 100gm ” ” ” ” = \(\frac{50gm}{50gm}\) × 100 = 100gm
उत्तर :
ठोस की घुलनशीलता = 100 gm है।

प्रश्न 16.
10 ग्राम कैल्सियम कार्बोनेट में उसके कितने मोल होंगे। परमाणु संख्या : Ca = 40, C = 12, O = 16]
हल : CaCO3 = 40 + 12 + 16 × 3 = 100
∵ 100 gm CaCO3 में CaCO3 का 1 मोल है।
∴ 10gm ” ” ” = \(\frac{1}{100}\) × 10 = 0.1 मोल
उत्तर :
0.1 मोल।

प्रश्न 17.
यदि हाइड्रोजन के एक परमाणु द्रव्यमान 1.6736 × 10-24 ग्राम हो तो amu में हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान कितना होगा ?
हल :
∵ 1 a.m.u. = 1.6603 × 10-24
∴ 1.6603 × 10-24 का H2 परमाणु का द्रव्यमान 1 a.m.u
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= 1.008 a.m.u
उत्तर :
1.008 a.m.u

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प्रश्न 18.
(a) हाइड्रोजन (b) ऑक्सीजन एवं (c) कार्बन परमाणुओं का द्रव्यमान a m u में व्यक्त करो। (1 amu = 1.6603 × 10-24 ग्राम)
हल : (a) हाइड्रोजन का एक परमाण द्रव्यमान = 1.6736 × 10-24

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उत्तर :
H = 1.008 a.m.u, O = 15.99 a.m.u, C = 12.0002 a.m.u

प्रश्न 19.
(a) एक हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान एवं
(b) जल के एक अणु का द्रव्यमान ज्ञात करो।
हल : (a) हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान = 1.6603 × 10-24 × 1.008 = 1.67358 × 10-24 gm
(b) जल के एक अणु का द्रव्यमान = 1.6603 × 10-24 × 6.03 = 2.989 × 10-23
उत्तर :
हाइड्रोजन (H) = 1.67358 × 10-24 ग्राम, H2 O = 2.989 × 10-23 ग्राम

प्रश्न 20.
हीलियम (He) के 9.033 × 1024 परमाणुओं में कितने मोल हैं ?
हल : 1 मोल हीलियम में 6.023 × 1024 परमाणु हैं।
∵ 6.023 × 1024 परमाणु हीलियम के 1 मोल में हैं।

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उत्तर :
15 मोल।

प्रश्न 21.
ऑंक्सीजन के 0.2 मोल में अणुओं की संख्या बताओ। हल : 0.2 मोल में आक्सीजन के अणु = 6.023 × 1024 × 0.2 अणु
= 1.2046 × 1024 अणु
उत्तर :
1.2046 × 1024 अणु।

प्रश्न 22.
11 ग्राम कार्बन डाई-ऑक्साइड में कितने मोल होंगे ?
हल : CO2 = 12 + 16 × 2 = 44 gm
∵ 44 gm CO2 में कार्बन-डाई-आक्साइड का 1 मोल
∴ 11gm ” ” ” ” ” ” \(\frac{1}{44}\) × 11=0.25 मोल।
उत्तर :
0.25 मोल।

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प्रश्न 23.
0.5 मोल सोडियम में परमाणुओं की संख्या बताओ।
हल :
∵ 1 मोल सोडियम 6.023 × 1023 परमाणु
∴ 0.5 ,, = 6.023 × 1023 × 0.5
= 3.0115 × 1023 परमाणुं
उत्तर :
3.0115 × 1023 परमाणु।

प्रश्न 24.
4 मोल अल्युमिनियम परमाणुओं की मात्रा ज्ञात करो। (AI का पारमाणविक द्रव्यमान = 27 U) हल :
∵ 1 मोल अल्यूमिनियम परमाणु की मात्रा 27
∴ 4 मोल अल्यूमिनियम परमाणु की मात्रा = 27 × 4 = 108 u

प्रश्न 25.
यदि 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n हो, तो 100 ग्राम CaCO3 और 44 ग्राम CO2 में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
हल : 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n है।
100 ग्राम CaCO3 में भी अणुओं की संख्या n है।
44 ग्राम CO3 में भी अणुओं की संख्या n है।

प्रश्न 26.
22 ग्राम कैल्सियम कार्बोनेट तनु HCl की अधिकता में प्रतिक्रिया करके NTP पर कितना लीटर CO2 गैस उत्पन्न करता है? (Ca = 40 u, O = 16 u, C = 12 u)
हल :

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प्रश्न 27.
24.5 ग्राम पोटैशियम क्लोरेट NTP पर कितना लीटर ऑक्सीजन गैस उत्पन्न करता है ?
(K = 39 u, Cl = 3 5 . 5 u,O = 16u)
हल :
2 KClO3 = 2 Kacl + 3 O2
2[39 + 35.5 + 16 × 3] ,, 3[16 × 2]
= 2 × 122.5 = 96 gm
= 245 gm
∵ 245 gm KClO3 से 96 gm आक्सीजन मिलती है

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प्रश्न 28.
60° C पर 80 ग्राम जल में 16 ग्राम पोटैशियम सल्फेट घुलता है, तो इसी तापमान पर पोटैशियम सल्फेट की घुलनशीलता बताओ।
हल : पोटाशियम की घुलनशीलता (60° C) = \(\frac{16}{80}\) × 100 = 20

प्रश्न 29.
यदि 20 ग्राम जल में 13 ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट 40° C तापमान पर घुलकर संतृप्त घोल बनाता है तो 40° C पर पोटैशियम नाइट्रेट की घुलनशीलता निर्णय करो।
हल : 40° C पर पोटैशियम नाइट्रेट की घुलनशीलता = \(\frac{13}{20}\) × 100 = 65

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 30.
सोडियम क्लोराइड की घुलनशीलता 20° C पर 36 है। यदि सोडियम क्लोराइड के संतृप्त घोल को 20° C तापमान पर वाष्पीकृत किया जाय तो 25 ग्राम संतृप्त घोल में कितना लवण रहेगा?
हल :
100 gm जल में 36 gm NaCl है
संतृप्त घोल की मात्रा = 100+36 = 136 gm
∵ 136 gm संतृप्त घोल (20° C. पर) में 36 gm सोडियम क्लोराइड है

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण 47

प्रश्न 31.
5 लीटर सोडियम हाइड्राक्साइड के जलीय घोल में 40 ग्राम NaOH है तो घोल की सान्द्रता ग्राम प्रति लीटर में ज्ञात करो।
हल :
5 लीटर घोल में 40 gm NaOH
1 ,, ,, ,, = \(\frac{40}{5}\) = 8 ग्राम/लीटर

प्रश्न 32.
1 लीटर सोडियम क्लोराइड के जलीय घोल में 25 ग्राम सोडियम क्लोराइड घुला हुआ है तो घोल की सांद्रता प्रतिशत में ज्ञात करो।
हल :
∵ 1000 gm NaCl के जलीय घोल में 25 gm सोडियम क्लोराइड है
∴ 100 ,, ,, ,, = \(\frac{25}{1000}\) × 100 = 2.5 gm

प्रश्न 33.
यदि 6 ग्राम तूतिया 44 ग्राम जल में घुला हो तो तूतिया का प्रतिशत भार ज्ञात करो।
हल : 6 ग्राम तूतिया 44 ग्राम जल में घुला है
संतृप्त घोल की मात्रा = 44 + 6 = 50
∵ 50 gm संतृप्त घोल में 6 gm तूतिया है
∴ 100 ,, ,, ,, = \(\frac{6}{50}\) × 100 = 12 gm

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 34.
किसी घोल के 250 मिलीलीटर में एक पदार्थ का 0.5 ग्राम अणु घुला हुआ हो तो घोल की मोलरता क्या होगी ?
हल :
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण 48

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Physical Science Book Solutions Chapter 7 ध्वनि offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Physical Science Chapter 7 Question Answer – ध्वनि

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
तरंग कितने प्रकार की होती हैं ? उनके नाम बताएँ।
उत्तर :
ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य एवं अनुप्रस्थ दो प्रकार की होती हैं।

प्रश्न 2.
वायु में ध्वनि-तरंगे अनुदैर्घ्य हैं या अनुप्रस्थ ?
उत्तर :
वायु में छ्वनि तरंगें अनुदैर्घ्य होती हैं।

प्रश्न 3.
ध्वनि का संचरण किन-किन माध्यमों में हो सकता है ?
उत्तर :
ध्वनि का गमन ठोस, द्रव एवं गैस तीनों माष्यमों में हो सकता है।

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प्रश्न 4.
क्या ध्वनि के परावर्तन में आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होता है।
उत्तर :
हाँ, ध्वनि के परावर्तन में आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होता है।

प्रश्न 5.
सूर्य की सतह पर होनेवाले विस्फोट पृथ्वी से क्यों नहीं सुनाई पड़ते ?
उत्तर :
क्योंकि सूर्य एवं पृथ्वी के बीच का अधिकांश भाग माध्यमहीन अर्थात् शून्य है। अत: पदार्थीय माध्यम के अभाव हैं ध्वनि का गमन नहीं होने के कारण सूर्य की सतह पर होनेवाले धमाकों को पृथ्वी से नहीं सुन पाते।

प्रश्न 6.
मनुष्य के मस्तिष्क पर किसी ध्वनि का प्रभाव कितने समय तक रहता है ?
उत्तर :
\(\frac{1}{10}\) से॰ तक।

प्रश्न 7.
किसी माध्यम के कंपित कणों का माध्यम स्थिति से महत्तम विस्थापन को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
किसी माष्यम के कम्पित कणों की माष्यम स्थिति से अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं।

प्रश्न 8.
क्या दो क्रमिक शीर्षों अथवा गर्तो के बीच की दूरी को तरंग का तरंगदैर्ध्य कहते हैं ?
उत्तर :
हाँ, तरंग लम्बाई।

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प्रश्न 9.
सांगीतिक ध्वनि की विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर :

  • तीव्रता
  • तारत्व
  • गुणता।

प्रश्न 10.
ध्वनि की तीव्रता की इकाई क्या है ?
उत्तर :
डेसीबल।

प्रश्न 11.
ध्वनि किस प्रकार की ऊर्जा है?
उत्तर :
गतिज ऊर्जा (यात्रिक ऊर्जा)।

प्रश्न 12.
प्रतिध्वनि उत्पत्र करने के लिए परावर्तक सतः दूरी कितनी होनी चाहिए?
उत्तर :
16.6 m

प्रश्न 13.
कान की सबसे छोटी अस्थि का नाम क्या है ?
उत्तर :
स्टिरप अस्थि या स्टापेस।

प्रश्न 14.
किसी तरंग (जैसे ध्वनि-तरंग) की चाल किन दो राशियों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
किसी माध्यम में तरंग की चाल माध्यम की प्रकृति एवं उसके घनत्व पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 15.
एक व्यक्ति अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गया हुआ है। क्या वह व्यक्ति अपने मित्र द्वारा वहाँ उत्पन्न ध्वनि को सुन सकता है ?
उत्तर :
नहीं, चन्द्रमा पर वायुमण्डल (गैसीय माष्यम) की अनुपस्थिति के कारण व्यक्ति अपने मित्र द्वारा उत्पम्न ष्वनि को नहीं सुन सकता।

प्रश्न 16.
किसी ध्वनि-तरंग की आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य उसकी चाल से किस प्रकार संबंधित है ?
उत्तर :
तरंग की चाल = आवृत्ति x तरंग दैर्ष्य
या, V = π

प्रश्न 17.
क्या किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के तापमान पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
हाँ, किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के तापमान पर निर्भर करती है।

प्रश्न 18.
वायु, जल तथा लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि की चाल सबसे तेज होती है ?
उत्तर :
लोहे में ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है।

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प्रश्न 19.
क्या आप बता सकते हैं कि (i) सितार तथा (ii) कार का हार्न में से किसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि का तारत्व अधिक है ?
उत्तर :
सितार से उत्पत्न ध्वनि का तारत्व (Pitch) अधिक होगा।

प्रश्न 20.
सामान्य मानव कान के लिए श्रव्यता परास क्या है ?
उत्तर :
सामान्य मानव कर्ण के लिए श्रव्यता का परास 20 c/s से 20,000 c/s है।

प्रश्न 21.
हर्ज्ज किस राशि का मात्रक है ?
उत्तर :
आवृत्ति का मात्रक Hz से अधिक।

प्रश्न 22.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
किसी विस्तृत अवरोध से परावर्तित होकर ध्वनि के पुन: सुनने की घटना को ध्वनि की प्रतिध्वनि कहते हैं।

प्रश्न 23.
एक ध्वनि-तरंग के आवर्तकाल का मान 0.01s ध्वनि-तरंग की आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर :
ध्वनि की तरंग की आवृत्ति  \(\frac{1}{0.01}\) Hz या 100 Hz होगी।

प्रश्न 24.
ध्वनि तरंगों का यांत्रिक तरंगे क्यों कहते हैं?
उत्तर :
यह माध्यम में गमन करती है ।

प्रश्न 25.
क्या प्रकाश-तरंगें अनुप्रस्थ तरंगे हैं?
उत्तर :
हाँ, क्योंकि इसके घटक इसके प्रसार की दिशा के लम्बवत कम्पन करते है।

प्रश्न 26.
तरंग का कौन-सा गुण (i) प्रबलता और (ii) तारत्व को निर्धारित करता है?
उत्तर :
प्रबलता – आयाम पर । तारत्व – आवृत्ति पर ।

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प्रश्न 27.
दिए गए ध्वनियों से संबंधित आवृत्तियों का परास लिखें – (क) अवश्रव्य तरंगे तथा (ख) पराश्रव्य तरंगे।
उत्तर :
अवश्रव्य तरंगे – जिनकी आवृत्ति 20 Hz से नीचे होती है ।
पराश्रव्य तरंगे – जिनकी आवृत्ति 20000 Hz से अधिक होती है ।

प्रश्न 28.
20 Hz से कम आवृत्तिवाली ध्वनि को क्या कहते हैं – अवश्रव्य या पराश्रव्य ध्वनि?
उत्तर :
अवश्रव्य ध्वनि।

प्रश्न 29.
ध्वनि की आवृत्ति 500 Hz है। आवर्तकाल का मान क्या होगा?
उत्तर :
T=\(\frac{1}{t}=\frac{1}{500}\) Sec.

प्रश्न 30.
ध्वनि का तारत्व और ध्वनि स्रोत की आवृत्ति में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
ध्वनि का तारत्व ध्वनि सोत की आवृत्ति के सीधा समानुपाती होता है।

प्रश्न 31.
क्या ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है?
उत्तर :
हाँ, ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है।

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प्रश्न 32.
क्या मनुष्य पराश्रव्य ध्वनि सुन सकता हैं?
उत्तर :
नही, मनुष्य पराश्रव्य ष्वनि नहीं सुन सकता है।

प्रश्न 33.
मनुष्यों के लिए श्रव्य-परास कितना होता है?
उत्तर :
मनुष्यों के लिये श्रव्य-परास 20-20,000 cs होता है।

प्रश्न 34.
ध्वनि कैसे उत्पत्र होता है?
उत्तर :
कम्पन से।

प्रश्न 35.
क्या ध्वनि शून्य में गमन करती है?
उत्तर :
नहीं।

प्रश्न 36.
अनुदैर्घ्य तरंग में दो लगातार संपीडन के बीच की दूरी क्या कहलाता है?
उत्तर :
तरंग, दैर्ध्य।

प्रश्न 37.
गर्भस्थ शिशु की जानाकरी किसके द्वारा प्राप्त करते हैं?
उत्तर :
सोनोग्राफी द्वारा।

प्रश्न 38.
कान का कार्य सुनना तथा और क्या है?
उत्तर :
कान का कार्य सुनने के अलावा शरीर का संतुलन बनाये रखना है।

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प्रश्न 39.
ध्वनि के गमन के लिये कैसे माध्यम की आवश्यकता होती है ?
उत्तर :
लचीला तथा अविच्छित्र पदार्थीय माध्यम (Elastic and continuous material medium.)

प्रश्न 40.
आवर्तकाल की SI इकाई क्या है ?
उत्तर :
सेकेण्ड।

प्रश्न 41.
Hertz किस भौतिक राशि की इकाई है?
उत्तर :
आवृत्ति

प्रश्न 42.
ध्वनि के परावर्तन का एक व्यावहारिक उपयोग क्या है?
उत्तर :
Sonar

प्रश्न 43.
प्रतिध्वनि सुनाई देने की कोई एक शर्त लिखिए।
उत्तर :
स्रोत से परावर्त्तक तल की न्यूनतम दूरी 56ft या 16.6m होनी चाहिए ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
ध्वनि के परावर्तन क्या हैं ? ध्वनि के परावर्तन के नियमों को लिखो।
उत्तर :
ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) : ध्वनि तरंग जब एक माष्यम से चलकर किसी अन्य माध्यम के संस्पर्श तल (line of separation) पर आपतित होती है, तो इस आपतित ध्वनि तरंग का कुछ्छ अंश पुन: पहले वाले माध्यम में वापस लौट आता है। इस घटना को छ्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) कहते हैं।

ध्वनि के परावर्तन के नियम (Laws of Reflection of Sound) : ध्वनि के परावर्तन के निम्नलिखित दो नियम हैं-

  • आपतित ध्वनि तरंग, परावर्तित ष्वनि तरंग और परावर्तक सतह के ऊपर आपतन बिन्दु से खींचा गया अभिलंब एक ही तल (Plane) में स्थित होते हैं।
  • आपतन कोण और परावर्तन कोण परस्पर समान होते हैं।

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प्रश्न 2.
ध्वनि के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखो।
उत्तर :
ध्वनि के परावर्तन का व्यावहारिक उपयोग (Practical Applications of Reflection of Sound) : ध्वनि के परावर्तन के निम्नलिखित व्यावहारिक उपयोग होते हैं –

(i) स्टेथोस्कोप (Stethoscope) : रोगी के हृय की घड़कन, फेफड़ों (lungs) या श्वॉस नली में जमे कफ की प्रवृत्ति को जाँचने के लिए डॉक्टर स्टेथोस्कोप यंत्र की सहायता लेते हैं। इसमें रबर की दो नलियाँ, ग्राहक (receiver) से जुड़ी होती हैं। दोनों नलियों के सिरो को कान में लगाकर और गोल चकतीनुमा ग्राहुक को रोगी की छाती या पीठ पर रख कर शरीर के भीतर की धीमी ध्वनि को भी सुना जा सकता है। इस यंत्र में इदय के स्पंदन की धीमी ध्वनि नलियों के भीतरी दीवार से बार-बार परावर्तित होकर चिकित्सक के कान तक पहुँचती हैं। इसमें ध्वनि तरंगे बाहर की ओर फैल नहीं पातीं, इसलिए धीमी होने पर भी स्पष्ट सुनाई देती हैं।

(ii) बात-चीत की नली (Speaking Tube) : एक ही समान व्यास की नली के सिरे पर धीरे से भी बोली गई बात या अक्षर दूसरे सिरे पर स्थित व्यक्ति को स्पष्ट सुनाई पड़ती है। वास्तव में ध्वनि, नली की दीवारों के बीच बार-बार परावर्तित होकर श्रोता तक पहुँचती है। इस व्यवस्था में ध्वनि ऊर्जा का कहीं हास नहीं होता।

प्रश्न 3.
श्रुति निर्बध क्या है ?
उत्तर :
किसी ध्वनि को कान से सुनने पर जितने समय तक घ्वनि का प्रभाव मष्तिष्क में बना रहता है, श्रुति निर्बध (Persistence of Hearing) कहलाता है।

प्रश्न 4.
ध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ध्वनि (Sound) : किसी कंपनशील वस्तु से उत्पत्र वह ऊर्जा जो किसी प्रत्यास्थ पदार्थीय माष्यम से होकर तरंगों के रूप में गमन करते हुए हमारे कानों में पहुँचती है और मस्तिष्क मे एक विशेष प्रकार की संवेदना की अनुभूति उत्पन्न करती है, उसे छ्वनि (Sound) कहते हैं।

प्रश्न 5.
प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक शर्त क्या हैं ?
उत्तर :
प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक शर्त (Essential conditions for hearing an echo) :

  • परावर्तक तल विशाल होना चाहिये।
  • मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के श्रोता के पास पहुँचने का कम से कम \(\frac{1}{10}\) से० का अंतर होना चाहिए क्योंकि किसी ध्वनि की अनुभूति हमारे कान में \(\frac{1}{10}\) से॰ तक बनी रहती है। यदि परावर्तित ध्वनि \(\frac{1}{10}\) से॰ के अंदर ही हमारे कान तक पहुँच जाएगी तो दोनों छ्वनियाँ मिल जाएंगी एवं प्रतिष्वनि नहीं सुन पायेंगे।

प्रश्न 6.
किसी ध्वनि की गुणवत्ता किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
ध्वनि की गुणवत्ता को प्रभावित करनेवाले कारक निम्नलिखित हैं –

  • मूलसुर के साथ उपस्थित उपसुर की संख्या।
  • ध्वनि द्वारा उत्पत्र तरंग।
  • मूलसुर तथा उपसुर की आवृत्ति का अनुपात।

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प्रश्न 7.
ध्वनि प्रदूषण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) : विभिन्न म्रकार की अवाछ्छीय ध्वनियों के कारण हमारे वातावरण मे जो हलचल उत्पन्न होती है उसे ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) कहा जाता है। ष्वनि प्रदूषण ओद्योगिकीकरण तथा आधुनिक सभ्यता की देन है। ध्वनि पदूषण को डेसीबल (Decibel) ‘db’ में मापा जाता है। वह ध्वनि जिसकी तीव्रता 70 db या इससे अधिक होती है ष्वनि प्रदूषण उत्पन्न करती है। साधारणतया मनुष्य 30 -40 डेसिबल ‘db’ तक की ध्वनि सहन कर सकता है।

प्रश्न 8.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रतिध्वनि (Echo) : जब कोई ध्वनि दूर स्थित किसी विस्तृत परावर्तक तल से परावर्तित होकर पुन: अलग एवं स्पष्ट सुनाई पड़ती है तो वह दुहराई गई छ्वनि, मूल ध्वनि की प्रतिष्वनि कहलाती है।

प्रश्न 9.
प्रतिध्वनि कैसे उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
जब हम किसी पहाड़ी के सामने या किसी गहरी घाटी के दूर के सिरे पर या किसी भवन की बड़ी दीवार के सामने बोलते हैं तो हमें प्रतिष्वनि सुनाई देती है। यहाँ प्रतिष्वनियों के बनने में पहाड़ी, घाटी या भवन परावर्तक तल का कार्य करते है।

प्रश्न 10.
छोटे कमरे में प्रतिध्वनि क्यों नहीं सुनाई देती है ?
उत्तर :
छोटे कमरे में प्रतिध्वनि का सुनाई नहीं देना : चूँकि छोटे कमरे की लंबाई 16.6 मीटर से कम होती है। अतः परावर्तित ध्वनि \(\frac{1}{10}\) सेकेंड के अंदर ही हमारे कान में पहुँच जाती है, जबंकि मूल ध्वनि की अनुभृति अभी बनी रहती है। फलतः दोनों ध्वाियाँ मिल जाती हैं एवं हम प्रतिष्वनि सुन नहीं पाते हैं।

प्रश्न 11.
ध्वनि की गूँज से क्या समझते हो ?
उत्तर :
गुँज (Reverberation): जब ध्वनि विभिन्न विशाल परावर्तक तलों से बार-बार परावर्तित होकर काफी देर तक सुनाई देती है तो इसे ध्वनि की गूँज (Reverberation of sound) कहते हैं।

प्रश्न 12.
चमगादड़ रात में भी अपने शिकार को पकड़ने के लिए पराश्रय तरंगों का उपयोग किस प्रकार करता है ?
उत्तर :
चमगादड़ों की श्रवण सीमा बहुत अधिक होती है। ये 100,000 Hz की तरंगें उत्पन्न कर सकते हैं एव सुन सकते हैं। इसलिए वे प्रतिष्वनि का उपयोग कर अपने रास्ते में पड़नेवाले अवरोष का पता कर लेते हैं एवं बचकर निकल जाते हैं। पराश्रव्य ध्वनि की प्रतिष्वनि को सुनने में लगे समय अंतराल से परावर्तक सतह अर्थात् अवरोध की दूरी का अनुमान लगा लेते हैं एवं उनसे टकराने से बच जाते है। अवरोघ यदि उनका शिकार ही हो तो उसे पकड़ लेते हैं।

प्रश्न 13.
किसी मोटरगाड़ी के निकट पहुँचने के पहले ही उसके हॉर्न की आवाज क्यों सुनाई पड़ जाती है ?
उत्तर :
मोटर गाड़ी के होर्न द्वारा उतन ध्चनि की तीबता अधिक होने के कारण इसकी मबल्ता अधिक होती है। अतः ध्वनि अधिक जोर तथा अधिक दूरी तक सुनाई पड़ती है, जिससे मोटर गाड़ी के निकट पहुँनने के पहले ही हार्न की आवाज सुनाई पड़ जाती है।

प्रश्न 14.
ध्वनि-तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों है ?
उत्तर :
ध्वनि तरंगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर माध्यम के कणों के संपीडन एवं विरलन के माध्यम से होता है, जिसमें माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानान्तर होता है। अत: ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्घ्य होती है।

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प्रश्न 15.
ध्वनि-तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
छ्वनि-तरंगों को यांत्रिक तरंगे कहते हैं क्योंकि इनके संचरण के लिए किसी द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 16.
एक व्यक्ति अपने मित्र के साथ चंद्रमा पर गया हुआ है। क्या वह व्यक्ति अपने मित्र द्वारा वहाँ उत्पन्न ध्वनि को सुन सकता है ?
उत्तर :
नहीं क्योंकि वहाँ वायुमण्डल नहीं है।

प्रश्न 17.
अनुप्रस्थ तरंग और अनुदैर्ध्य तरंग में क्या अंतर है ?
उत्तर :
अनुप्रस्थ तरंग और अनुदैर्ध्य तरंग में अंतर :

अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal wave)
(i) इसमें माध्यम के कणों का कम्पन ध्वनि संचरण की दिशा के लम्बवत् होता है। (i) इसमें माध्यम के कणों का कम्पन ध्वनि संचरण की दिशा के समानान्तर होता है।
(ii) पानी में पत्थर फ़ेंकने से उत्पन्न तरंग एवं प्रकाश तरंग। (ii) गैस एवं वायु में उत्पत्न तरंग इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 18.
किसी ध्वनि की तीव्रता और प्रबलता में क्या अंतर है ? समझाइए।
उत्तर :
ध्वनि की तीव्रता एवं प्रबलता में अन्तर :

तीव्रता (Intensity) प्रबलेता (Loudness)
(i) ध्वनि गमन की दिशा के लम्बवत् रखे तल के इकाई क्षेत्रफल से होकर प्रति सेकेण्ड गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा के परिमाण को तीव्रता कहते हैं। (i) यह ध्वनि का वह लक्षण है जिससे पता चलता है कि ध्वनि तेज है या धीमी।
(ii) अधिक तीव्रता वाली ध्वनि की प्रबलता अधिक होती है। (ii) ध्वनि प्रबलता की माप उसकी तीव्रता से की जाती है।

प्रश्न 19.
वैसे तो आकाश में तड़ित (बिजली) की चमक तथा मेघगर्जन साथ-ही-साथ उत्पत्र होते हैं, परंतु चमक पहले दिखाई पड़ती है और मेघगर्जन कुछ समय बाद। क्यों ?
उत्तर :
वायु में प्रकाश का वेग ष्वनि के वेग से बहुत अधिक होता है। वर्षा के समय आकाश में बादलों के आपस में टकराने से उत्पत्र होने वाली बिजली की चमक एवं आवाज दोनों एक साथ ही उत्पन्न होते हैं। लेकिन बिजली की चमक तुरन्त दिखाई देती है और बादलों की गरज कुछ देर बाद सुनाई पड़ती है। इस प्राकृतिक घटना के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वायु में प्रकाश का वेग ध्वनि के वेग से काफी अधिक होता है।

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प्रश्न 20.
क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका प्रकाश-तरंगें करती हैं ? इन नियमों को लिखें।
उत्तर :
ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) : प्रकाश तरंगों के परावर्तन के समान ही ध्वनि तरंगों में भी परावर्तन होता है। ध्वनि का परावर्तन भी समतल अथवा गोलाकार सतह पर होता है तथा ध्वनि तरंगें परावर्तन के निम्नलिखित दो नियमो का पालन करती है –

  • आपतित ध्वनि, परावर्तित ष्वनि और आपतन बिन्दु से परावर्तक सतह पर डाला गया अभिलम्ब तीनों एक ही
    समतल में होते हैं।
  • आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं।

प्रश्न 21.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं ? यह कब सुनाई पड़ती है ?
उत्तर :
प्रतिष्वनि (Echo) : किसी ध्वनि से उत्पन्न ध्वनि दूर स्थित किसी विशाल अवरोध से परांवर्तित होकर उसे पुन : सुने जाने की घटना को ध्वनि की प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं। विशाल परावर्तक तल जैसे पहाड़ी, घाटी, ऊँची दीवार, गहरा कुआँ अदि से ध्वनि परावर्तन होती है। जब हम कुएँ के मुँह पर बोलते है तो हमारी आवाज दोहराई जाती है। यह दोहराई जानेवाली ध्वनि ही हमारी मूल ध्वनि (आवाज) की प्रतिध्वनि होती है। यहाँ प्रतिष्वनि के बनने में कुएँ का जल परावर्तक तल का काम करता है।

प्रश्न 22.
पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तुओं को साफ करने में कैसे किया जाता है ?
उत्तर :
पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तुओं को साफ करने में : पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तु के उन भागों को साफ करने में किया जाता है जिन तक पहुँचना कठिन होता है; जैसे – सर्पिलाकार नली, इत्यादि। जिन वस्तुओं को साफ करना होता है उन्हें साफ करनेवाले घोल में रखा जाता है और इस घोल में पराश्रव्य तरंगें भेजी जाती हैं। इन तरंगों की उच्च आवृत्ति के कारण घूल, गंदगी के कण तथा चिकने पदार्थ (greasy material) अलग होकर नीचे गिर जाते हैं और वस्तु पूरी तरह साफ हो जाती है।

प्रश्न 23.
क्या ध्वनि निर्वात में गमन कर सकती है ? मान लो दोनों आपस में बातचीत कर सकते हो ?
उत्तर :
छ्वनि निर्वात या शून्य में गमन नहीं कर सकती। चंद्रमा पर बातचीत संभव नहीं हो सकता क्योंकि वहाँ पर कोई वायुमंडल या माध्यम नहीं है जिससे छ्वनि गमन कर सके।

प्रश्न 24.
ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव को लिखो।
उत्तर :

  • ध्वनि प्रदूषण हमारे शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति चिड़िंड़ा स्वभाव का हो जाता है एवं वह अच्छी तरह से सो भी नहीं सकता है। उसकी निद्रा भंग हो जाती है।
  • ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। व्यक्ति को घीरे-धीरे कम सुनाई देने लगता है एवं अंत में वह बहरा भी हो सकता है।
  • खासतौर से एयरपोर्ट इलाके के लोग कम सुनते हैं। कल-कारखानों की मशीनों की भीषण आवाज से उसमें काम करने वाले लोग क्रोधी एवं चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते है।
  • छात्र अपनी पढ़ाई में ठीक ढ़ंग से अपने मस्तिष्क को केंद्रित नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 25.
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के दो उपाय बताइए।
उत्तर :

  • कल कारखानों को आबादी से दूर लगाना चाहिए।
  • सड़कों के किनारे पेड़-पौधों को लगाना चाहिए।

प्रश्न 26.
ध्वनि की गुणवत्ता किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
ध्वनि की गुणवत्ता निम्न कारकों पर निर्भर करती हैं –

  • मूल स्वर के साथ उपस्थित उपसुर की संख्या
  • मूल सुर तथा उपसुर की मस्तिष्क का अनुपात
  • मूलसुर तथा उपसुर की आपेक्षिक तीवत्रता
  • ध्वनि सोत से उत्पन्न ध्वनि तरंग का रूप
  • उपसुर की आवृत्ति में विभिम्नता।

प्रश्न 27.
सुरीली ध्वनि की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :

  • तीव्रता (Intensity) : यह ष्वनि का वह लक्षण है, जिससे पता चलता है कि ध्वनि तेज है या धीमी।
  • तारत्व (Pitch) : यह सुरीली ध्वनि का वह लक्षण है, जिससे पता चलता है कि कौन ध्वनि मोटी और कौन पतली है।

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प्रश्न 28.
पराश्रव्य ध्वनि का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर :
पराश्रव्य ध्वनि का एक उपयोग : पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग समुद्रु की गहराई तथा पनहुब्बी का पता लगाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 29.
श्रुतिनिबंध किसे कहते हैं ? इसका मान कितना है ?
उत्तर :
जब कोई ध्वनि हमारे कानों से टकराती है, तो इसका असर हमारे मस्तिष्क में \(\frac{1}{10}\) सेकेंड होता है।

प्रश्न 30.
प्रतिध्वनि या पराश्रव्य ध्वनि की सहायता से निम्नलिखित को कैसे ज्ञात करेंगे-
(i) समुद्र की गहराई
(ii) उड़ते हुए हवाई जहाज की ऊँचाई।
उत्तर :
(i) समुद्र की गहराई ज्ञात करने में (Depth of Sea) : पराश्रव्य ध्वनि तरंग द्वारा समुद्र की गहराई ज्ञात करने में तथा समुद्र के अन्दर उपस्थित दुश्मनो की पनडुल्बो की स्थिति को ज्ञात किया जाता है।

(ii) वायुयान की ऊँचाई (Height of an aeroplane) : इसी प्रकार पराश्रव्य ध्वनि द्वारा वायुयान की ऊँचाई ज्ञात की जाती है कि वायुयान पृथ्वी तल से कितनी ऊंचाई पर उड़ान भर रहा है। हवाई अड्डों पर वायुयानों के मार्ग दर्शन में किया जाता है।

प्रश्न 31.
ध्वनि के गमन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
ध्वनि का गमन (Propagation of Sound) : ध्वनि के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की क्रिया को ध्वनि का गमन कहते हैं। ध्वनि ऊर्जा के रूप में तरंग द्वारा आगे बढ़ती है और हमारे कान तक पहुँचती है। जब कोई वस्तु किसी माध्यम में कंपन करती है तो वह माध्यम के उन कणो को, जो वस्तु के समीप हैं, गति में ला देती है। ये कण अपने समीपवर्ती कणों को भी उसी प्रकार से गतिमय कर देते हैं। इस प्रकार माध्यम में हलचल (Disturbance) उत्पन्न हो जाती है जो उस माध्यम में आगे बढ़ती है।

प्रश्न 32.
किसी कंपित वस्तु के संदर्भ में परिभाषा दो –
(i) पूर्ण कंपन
(ii) आयाम
(iii) आवर्तकाल
(iv) आवृत्ति
उत्तर :
(i) पूर्ण कंपन (Complete Oscillation) : जब कोई कंपन करता हुआ कण, अपने किसी स्थान से चलकर पुन: उसी स्थान पर दुबारा उसी दिशा में गति करता हुआ पहुँचता है तो इस पूरी यात्रा को एक पूर्ण कंपन कहते हैं।

(ii) आयाम (Amplitude) : कोई मी कंपित कण अपनी मध्यमान स्थिति के दोनों तरफ जितनी अंधिकतम दूरी तक विस्थापित होता है, उस दूरी को कंपन का आयाम (Amplitude) कहते हैं।

(iii) आवर्तकाल (Time Period) : किसी कपित वस्तु को एक पूर्ण कंपन में जितना समय लगता है, आवर्तकाल (Time Period) कहलाता है। इसे प्राय: ‘T ‘ अक्षर से सूचित किया जाता है। आवर्तकाल की S.I. इकाई सेकेंड है।

(iv) आवृत्ति (Frequency) : कोई भी कंपित कण एक सेकेंड में जितनी बार पूर्ण कपन करता है, उसे उसकी आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। इसकी इकाई साइकिल/सेकेंड है। आवृत्ति को ‘n’ अक्षर से सूचित करते हैं।

C.G.S. या S.I. पद्धति में आवृत्ति की इकाई सायकिल्स प्रति सेकेंड cycles/second या c.p.s. अथवा हटर्ज (Hertz या Hz) होती है। प्रसिद्ध जर्मन वैज्ञानिक हेनरिख हट्र्ज के नाम पर आवृत्ति (Frequency) की इकाई Hertz ली गई है।

प्रश्न 33.
तरंग के संदर्भ में निम्नलिखित की परिभाषा दो।
(i) तरंग आयाम
(ii) आवर्तकाल
(iii) तरंग आवृत्ति
(iv) तरंग-दैर्घ्य
(v) तरंग वेग
उत्तर :
(i) तरंग आयाम (Wave amplitude) : एक तरग के किसी कण का उसकी मध्यमान स्थिति से दायें या बायें जितना अधिकतम विस्थापन होता है, उसे ही तरंग आयाम कहते हैं। चित्र में BP या QD तरंग आयाम हैं।

(ii) आवर्तकाल (Time period) : किसी तरंग कण (Wave particle) को एक पूर्ण कंपन करने में जो समय लगता है, उसे ही तरंग का आवर्त काल कहते हैं। इसे ‘ T ‘ द्वारा पदरशित करते है।

(iii) तरंग आवृत्ति (Wave frequency) : किसी माध्यम में तरंग संचारित होने पर, माध्यम का कोई कण एक सेकेण्ड में जितनी बार कंपन करता है, उसे ही तरंग आवृत्ति कहते है। इसे ‘n’ द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

(iv) तरंग-दैर्ध्य (Wave-length) : किसी तरंग गति में समान काल में दोलन करने वाले दो क्रमागत कणों के बीच की दूरी को तरंग लंबाई कहते हैं। चित्र में BF या DH दूरी तरंग-लंबाई है।

(v) तरंग वेग (Wave velocity) : तरंग द्वारा एक सेकेण्ड में तय की गई दूरी को तरग वेग कहते है, इसे ‘v’ द्वारा प्रदर्शिंत करते हैं।

प्रश्न 34.
पराश्रव्य ध्वनि के क्या उपयोग हैं ?
उत्तर :
पराश्रव्य ध्वनि के उपयोग (Uses of Uitrasonic sound) :

  • समुद्र की गहराई ज्ञात करने में,
  • वायुयान की ऊँचाई ज्ञात करने में,
  • दुर्घटनाग्रस्त जलयान या वायुमान के अवशेषों का समुद्र के अंदर जानकारी करने एवं निशानदेही करने में,
  • मत्स्यसमूहो की गहराई एवं उनकी गतिविधियों की जानकारी करने में,
  • मानव शरीर में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में,
  • गर्भस्थ शिशु की जानकारी प्राप्त करने में,
  • वृक्क (Kidney) के पत्थर को तोड़ने में।

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प्रश्न 35.
SONAR क्या है ?
उत्तर :
SONAR का पूरा नाम है – Sound Navigation And Ranging.
यह वह विधि है जिसमें जल के अंदर ध्रनि के गमन का उपयोग मार्ग निर्देशन के लिये या जल की सतह के नीचे की वस्तुओं, जैसे पनड्बी या जल के ऊपर की वस्तुओं का पता लगाने के लिये या दूसरे जहाज से वार्ता करने के लिये किया जाता है।

प्रश्न 36.
शेर की दहाड़ एवं मच्छर की भिनभिनाहट में क्या अंतर है ?
उत्तर :
शेर को दहाड़ जोर से सुनाई पड़ती है क्योंकि शेर की दहाड़ की तीवता अधिक एवं तारत्व कम होता है, जबकि मच्छर की भिनभिनाहट में तीव्रता कम एवं तारल्व अधिक होता है। इसलिए मच्छर की आवाज में तीक्षणा अधिक होती है।

प्रश्न 37.
ध्वनि किस माध्यम में सुचारु रूप से गमन करती है ?
उत्तर :
ध्वनि का संचरण (Propogation of Sound) : यदि ध्वनि सोत और हमारे कान के बीच कोई माध्यम न हो, तो हमें कोई ध्वनि सुनाई नहीं पड़ेगी। ध्वनि शून्य (vaccum) से होकर नहीं जा सकतो है। ध्वनि के संघरण के लिए, किसी पदार्थीय माध्यम का होना आवश्यक है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
0°C पर वायु का वेग 332 मी॰/से॰ होने पर प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक तल के बीच कम से कम दूरी कितनी होनी चाहिए ?
उत्तर :
मनुष्य के मस्तिष्क में सुनी हुई ध्वनि का प्रभाव लगभग \(\frac{1}{10}\) सेकेंड तक रहता है। इसे श्रुतिनिबंध (persistence of hearing) कहते हैं। अत: दूसरी ष्वनि (यहाँ प्रतिष्वनि) उसे साफ-साफ उसी अवस्था में सुनाई पड़ेगी, जब वह पहली ध्वनि के पहुँचने के \(\frac{1}{10}\) सेकेंड के बाद उसके पास पहुँचे। ध्वान का वेग 0°C पर हवा में 332 मी०/सेकेंड होता है। धन्वनि का हा में वेग =332 मी॰/से०
∴ \(\frac{1}{10}\) सेकेंड में छ्वनि द्वारा तय की गई दूरी =33.2 मी०
1 सेकेंड में ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी =332 मी०
∴ \(\frac{1}{10}\) सेकेंड में ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी = 332 x \(\frac{1}{10}\) = 33.2 मी०

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अर्थांत् ध्वनि द्वारा ध्वनि सोत तथा परावर्तक सतह तक तथा परावर्तक सतह से परावर्तित होकर ध्वनि स्रोत तक तय की गई दूरी 33.2 मी० है। अत: श्रोता तथा परावर्तक तल के बीच की आवश्यक न्यूनतम दूरी =\(\frac{33.2}{2}\) = 16.6 मी०

प्रश्न 2.
एक प्रयोग से सिद्ध करो कि ध्वनि के गमन के लिए पदार्थीय माध्यम की आवश्यकता होती है।
उत्तर :
ध्वनि का गमन ठोस माध्यम से होकर होता है। इसे निम्नलखित उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।
(i) एक लम्बे मेज के एक सिरे पर एक घड़ी को रखकर, मेज के दूसरे सिरे से कान को सटाकर रखने पर घड़ी की टिक्टिक् की ध्वनि स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ती है। यहाँ ध्वनि का विस्तार ठोस माध्यम (लकड़ी) द्वारा होती है।

(ii) एक लोहे के लम्बे पाइप के एक सिरे को धीरे-धीरे लकड़ी द्वारा चोट करने पर यदि दूसरे सिरे पर कोई कान लगाकर रखता है तो यह ध्वनि स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ती है। यहाँ ध्वनि ठोस माध्यम (पाइप) द्वारा होती है।

(iii) यदि दूर से आती हुई अदृश्य ट्रेन की आवाज वायु में सुनाई नहीं पड़ती है लेकिन रेल की पटरी पर कान रख करके सुनने पर ट्रेन के पहिये का घर्षण की आवाज सुनाई पड़ती है। यह आवाज पटरी (ठोस) के माध्यम से पहुँचती है। ठोस में ध्वनि का वेग वायु की अपेक्षा अधिक होता है।

प्रश्न 3.
तरंग और तरंग गति से क्या समझते हो ? तरंग कितने प्रकार की होती हैं ? उदाहरण के साथ परिभाषा दो।
उत्तर :
तरंग (Wave) : तरंग किसी विक्षोभ का वह रूप है जो किसी पदार्थीय माध्यम के एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ऊर्जा को संचालित करती है, किन्तु माध्यम के कण स्थान परिवर्तन नहीं करते।

तरंग गति (Wave motion) : जिस पद्धति द्वारा ऊर्जा एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक स्थानांतरित होती है, उसे तरंग गति (Wave motion) कहते हैं। तरंग दो प्रकार की होती है –

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(i) अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) : वह तरंग जिसमें माध्यम के कंणों का कंपन तरंग चलने की दिशा के लंबवत् होता है, अनुप्पस्थ तरंग (Transverse wave) कहलाती है। तालाब के शांत जल में एक पत्थर के टुकड़े को फेकने से जल में उत्पत्न तरंगें अनुप्थ तरंगें होती हैं।
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(ii) अनुदैध्ध्य तरंग (Longitudinal wave) : वह तरंग जिसमें माध्यम के कण अपनी मध्यमान स्थिति के आगे और पीछे उसी दिशा में कंपन करते हैं जिस दिशा में माध्यम में तरंग आगे बढ़ती है अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal wave) कहलाती है। स्वरित्र, घंटी, ढोल आदि के कंपन से आस-पास की हवा में उत्पत्न तरंग अनुदैर्ध्य तरंग होती है।
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प्रश्न 4.
मानव कान की संरचना का वर्णन करो।
उत्तर :
मानव कान की संरचना (Structure of human ear) : मनुष्य के कान को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

  • बाह्य कर्ण (External ear),
  • मध्य कर्ण (Middle ear),
  • अंतःकर्ण (Internal ear)।

बाह्य कर्ण (External ear) : बाह्य कर्ण में तीन भाग होते हैं –

  • कर्ण पल्लव (Ear Pinna),
  • बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal),
  • कर्ण पटल (Eardrum or Tympanic membrance or Tympanum)।

कर्ण पल्लव (Ear Pinna) : यह बाह्य कर्ण का सबसे बाहरी भाग है जो अनियमित एवं कीप के आकार का होता है। यह कार्टिलेज से बना होता है।

बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal) : कर्ण पल्लव से कर्णपटल तक फैली हुई नलिका को बाह्य कर्ण नलिका कहते हैं। इसकी दीवारें कार्टिलेज की बनी होती है जिसमें ग्रंथियाँ (Cerumen glands) पाई जाती हैं जो सेरूमेन या ear wax का स्राव करती है।

कर्ण पटल (Ear drum or Tympanic membrane or Tympanum) : बाह्य कर्ण नलिका एवं मध्यकर्ण के संयोग स्थल पर उपस्थित पतली झिल्ली को कर्ण पटल कहते हैं।

मध्यकर्ण (Middle ear) : कर्ण पटल से अंत:कर्ण के बीच के भाग को मध्य कर्ण कहते हैं।

कर्ण अस्थियाँ (Ear ossicles) : मध्य कर्ण में तीन छोटी-छोटी अस्थियाँ – मैलियस (Malleus), इन्कस (Incus) तथा स्टापेस (Stapes) पाई जाती हैं जो लिगामेंद्स के द्वारा एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं।

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प्रश्न 4.
मानव कान की संरचना का वर्णन करो।
उत्तर :
मानव कान की संरचना (Structure of human ear) : मनुष्य के कान को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –
(i) बाह्य कर्ण (External ear)
(ii) मध्य कर्ण (Middle ear)
(iii) अंतःकर्ण (Internal ear)।

(i) बाद्य कर्ण (External ear) : बाह्य कर्ण में तीन भाग होते हैं –
(a) कर्ण पल्लव (Ear Pinna), (b) बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal), (c) कर्ण पटल (Ear drum or Tympanic membrance or

Tympanum)।

  • कर्ण पल्लव (Ear Pinna) : यह बाह्य कर्ण का सबसे बाहरी भाग है जो अनियमित एवं कीप के आकार का होता है। यह कार्टिलेज से बना होता है।
  • बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal) : कर्ण पल्लव से कर्णपटल तक फैली हुई नलिका को बाह्य कर्ण नलिका कहते हैं। इसकी दीवारें कार्टिलेज की बनी होती है जिसमें ग्रंथियाँ (Cerumen glands) पाई जाती हैं जो सेरूमेन या ear wax का साव करती है।
  • कर्ण पटल (Ear drum or Tympanic membrane or Tympanum) : बाह्य कर्ण नलिका एवं मध्यकर्ण के संयोग स्थल पर उपस्थित पतली झिल्ली को कर्ण पटल कहते हैं।

(ii) मध्यकर्ण (Middle ear) : कर्ण पटल से अंत:कर्ण के बीच के भाग को मध्य कर्ण कहते हैं।

  • कर्ण अस्थियाँ (Ear ossicles) : मध्य कर्ण में तीन छोटी-छोटी अस्थियाँ – मैलियस (Malleus), इन्कस (Incus) तथा स्टापेस (Stapes) पाई जाती हैं जो लिगामेंद्स के द्वारा एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं।
  • यूस्टेचियन नलिका (Eustachian tube) : यह मध्य कर्ण तथा ग्रसनी के बीच एक वायुपूर्ण नली है जो मध्य कर्ण तथा ग्रसनी के बीच के वायुदाब को नियंत्रित करती है।
  • फेनेस्ट्रा ओवैलिस (Fenestra Ovalis) : स्टापेस का अंतिम सिरा एक अंडाकार झिल्लीदार खिड़की से जुड़ा होता है जिसे फेनेस्ट्रा ओवैलिस या Oval window कहते हैं।

(iii) अंतःकर्ण (Internal ear) : इसकी रचना दो प्रकार के लेबिरिन्थ अस्थिलेबिरिन्थ (Bony Labyrinth) तथा मेम्ब्रेनस लेबिरिन्थ (Membraneous labyrinth) से होती है। दोनों लेबिरिन्थ में पेरिलिम्फ (PArilymph) नामक द्रव पाया जाता है। मेम्ब्रेनस लेबिरिन्थ में चार प्रकार की रचनाएँ – सेकुल (Saccule), यूट्रीकल (Utricle), अर्द्धचंद्राकार नलियाँ (Semicircular Canals) तथा काक्लिया (Cochlea) पाई जाती है। इनमें प्रथम तीन रचनाओं को वेस्टीबुलर ऐपरेटस (Vestibular Apparatus) कहते हैं। इसमें इण्डोलिम्फ (Endolymph) नामक द्रव भरा रहता है। सेकुल एक छोटी-सी गोल रचना है जो पीछे की तरफ बढ़कर घुमावदार काक्लिया का निर्माप्प करता है।

काक्लिया (Cochlea) : यह एक घुमावदार रचना है जो सेकुल के पिछ्ले भाग से बनती है। इसकी आंतरिक गुहा तीन समानांतर नलियों में बँटी होती है जो झिल्ली द्वारा एक-दूसरे से अलग रहती है। इनमें से ऊपरी एवं निचली नलिकाओं में पेरिलिम्फ तथा मध्यवाली नलिका में इण्डोलिम्फ भरा रहता है। मध्य नलिका में एक ध्वनिग्राहक संवेदी अंग पाया जाता है जिसे ऑर्गन ऑफ कार्टी (Organ of corti) कहते हैं। यह संवेदी अंग ध्वनि तंत्रिका द्वारा जुड़ा होता है।

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प्रश्न 5.
मानव कान द्वारा ध्वनि के सुनने की क्रियाविधि का वर्णन करो।
उत्तर :
मानव कान द्वारा ध्वनि सुनने की क्रियाविधि (Mechanism of hearing of sound by human ear) : कोई भी कंपित ध्वनि-स्रोत हवा में संपीडन एवं विरलन उत्पन्न करते हैं। जब ये बाह्य कान पर पहुँचते हैं तब ये कर्णनलिका में प्रवेश करके कर्णपट के निकट पहुँच कर इसे धकेलते हैं जिससे यह कंपन करने लगता है। कर्णपट के कंपित होने से आपस में जुड़ी तीनों अस्थियाँ कंपन करने लगती हैं। ये अस्थियाँ एक लीवर का कार्य करती है, जिससे कंपन के समय विस्थापन बढ़ जाता है।

इससे वलयक (Stirrup or stapes) का विस्थापन कर्णपट के कंपन के आयाम से कई गुना बढ़ जाता है। इस तरह जब कपन वलयक तक पहुँचता है तो कंपन का आयाम बढ़ जाता है। वलयक, जो कर्णावर्त (Cochlea) से जुड़ा होता है, कर्णावर्त के तरल में संपीडन और विरलन के स्पन्दन को प्रतिष्ठापित करता है और ये स्पन्दन विद्युत संकेतों में परिवर्तित हो जाते हैं जो श्रवण तंत्रिका (Auditory nerve) द्वारा मस्तिष्क को भेज दिये जाते हैं। मस्तिष्क इनकी व्याख्या ध्वनि के रूप में करता है।

प्रश्न 6.
एक स्वच्छ चित्र की सहायता से बताएँ कि ध्वनि के स्रोत के निकट की वायु में संपीडन तथा विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं ?
उत्तर :
अनुदैर्ध्य तरंग-गति के प्रदर्शन के लिए एक प्रयोग : एक सर्पिल कमानी (spiral spring) को किसी टेबुल पर रखकर इसके एक सिरे B को दीवार में लगी कील से जकड़कर, दूसरे सिरे, A को हाथ से लम्बाई की दिशा में दबाकर छोड़ देते हैं। दबाने से बाएँ सिरे के पास कमानी के फेरे (turns) एक-दूसरे के निकट हो जाते हैं। इस सिकुड़े भाग, को संपीडन (compression), C कहते हैं। दाब हटाते ही दबे हुए फेरे कमानी के लचीलेपन के कारण अपनी पुरानी स्थिति में आना चाहेंगे, जिस कारण कमानी की लंबाई की दिशा में आगे के कुछ फेरों को दबाएँगे और इस प्रकार संपीडन, C दाएं ओर निश्चित चाल से बढ़ता जाएगा।

अब यदि कमानी के सिरे A को बायीं ओर खींचकर छोड़ दिया जाए, तो इस सिरे के पास कमानी के फेरे एक-दूसरे से दूर होकर फैल जाएंगे ऐसे फैले हुए भाग को विरलन (rarefaction) R कहते हैं। कमानी के लचीलेपन के कारण विरलन निश्चित चाल से दायीं ओर बढ़ेगा।

यदि सर्पिल कमानी के सिरे A को किसी ऐसे दोलक से जोड़ दें, जो कमानी की लंबाई की दिशा में दोलित हो, तो कमानी पर एक के बाद एक संपीडन C तथा विलन, R उत्पन्न होंगे और ये निश्चित चाल से आगे बढ़ते जाएंगे, किन्तु कमानी के फेरे आगे नहीं बढ़ंगे केवल अपनी विरामावस्था की स्थिति के आगे-पीछे कंपन करेंगे। कमानी के फेरे पर कागज के छोटे टुकड़े को रखकर यह आसानी से देखा जा सकता है।

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प्रश्न 7.
ध्वनि की प्रबलता से आप क्या समझते हैं ? यह किन-किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
ध्वनि की प्रबलता : ध्वनि की प्रबलता (loudness) इसका वह गुण है जिसके कारण यह कान को धीमी अथवा तेज सुनाई पड़तीं है। वस्तुतः ध्वनि की प्रबलता कान में उत्पत्र एक संवेदना है जिसके आधार पर ध्वनि को तेज (तीव्र) अथवा धीमी कहते हैं। ध्वनि की प्रबलता मूल रूप से श्रोता के कान की सुग्राहिता पर निर्भर करती है। ध्वनि की प्रबलता ध्वनि के आयाम (amplitude) से जानी जा सकती है। चूँकि ध्वनि ऊर्जा से संबंधित है, इसलिए प्रबल ध्वनि में ऊर्जा अधिक होती है और मृदु ध्वनि में कम।

ध्वनि की तीव्रता या प्रबलता (Intensity of loudness) निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है –

  • ध्वनि स्रोत की दूरी पर
  • माध्यम के घनत्व पर
  • कम्पन आयाम पर तथा
  • ध्वनि स्रोत के आधार पर।

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प्रश्न 8.
बताएँ कि चमगादड़ हवा में अपने शिकार को पकड़ने के लिए पराश्रव्य तरंगों का उपयोग किस प्रकार करता है ?
उत्तर :
चमगादड़ तथा डालफिन के द्वारा उपयोग : चमगादड़ रात को भोजन की खोज में निकलते हैं तो यह अपना रास्ता आँखों से देखकर नहीं तय करते हैं बल्कि पराश्रव्य तरंगों को सुनकर करते हैं। इस तरंग को सुनने की क्षमता उसमें है।

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इसी कारण यदि कोई बाधा उसके रास्ता में आती है तो तुरन्त अपना रास्ता बदल लेता है। चमगादड़ शिकार को पकड़ने के लिए एक लाख हर्ज्ज की आवृत्तिवाला कम्पन उत्पन्न करता है तथा इसके मार्ग में आनेवाले किसी शिकार से परावर्तित होने वाली प्रतिध्वनि को सुनकर शिकार को पकड़ता है।

प्रश्न 9.
ध्वनि, वस्तु के कंपन से उत्पन्न होती है- सिद्ध करो।
उत्तर :
निम्नलिखित प्रयोग से यह सिद्ध किया जा सकता है कि किसी वस्तु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है एक स्वरित्र द्विभुज को रबर के पैड से चोट करते हैं तो उससे ध्वनि उत्पत्र होती है। इसकी भुजाएँ बहुत तेजी से कंपन करती हैं। इन कंपनों को हम स्पष्ट रूप से नहीं देख पाते, परंतु कंपन करती हुई भुजाएँ धुँधले रूप से दिखाई देती हैं। अब यदि एक सरकण्डे की गोली (Pith ball) को धागे से लटकाया जाता है। अत: इस प्रयोग से इस बांत की पुष्टि होती है कि कंपित वस्तुएँ ही ध्वनि के स्रोत हैं।

प्रश्न 10.
सुरीली ध्वनि और कोलाहल में दो अन्तर का उल्लेख कीजिए। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के एक संभावित उपाय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
सुरीली ध्वनि और कोलाहल में अन्तर :

सुरीली ध्वनि (Musical sound) कोलाहल (Noise)
सुरीली ध्वनि कर्णप्रिय ध्वनि होती है। कोलाहल का प्रभाव कानों के लिये अप्रिय होता है।
सुरीली ध्वनि कर्णप्रिय ध्वनि होती है। कोलाहल के रूप में ध्वनि निम्न आवृत्ति की होती है।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के एक संभावित उपाय :

  • कल-कारखानों में ध्वनिविहीन यंत्रों को लगाना चाहिए।
  • कल-कारखानों के निकट लोगों को नहीं बसने देना चाहिये।
  • घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कानून बनाकर कल-कारखानों के बनने पर रोक लगानी चाहिये।
  • कानून बनाकर अनावश्यक रूप से वाहनों द्वारा हॉर्न (horn) के बजाने पर रोक लगानी चाहिए।
  • ध्वनि विस्तारक यंत्र (loud speaker) के बजने पर रोक लगानी चाहिए।
  • कानून बनाकर पटाखों के बजाने पर रोक लगानी चाहिए।
  • विज्ञापन द्वारा ध्वनि प्रदूषण के कुप्रभाव से लोगों को अवगत कराना चाहिए।

प्रश्न 11.
कुछ उदाहरण दो जिनसे यह सिद्ध होता है कि किसी वस्तु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
उत्तर :
वस्तुओं के कपन से ध्वनि उत्पन्न होती है – निम्नलिखित उदाहरणों से इसकी पुष्टि की जा सकती है –
(i) पीतल के घंटे को लकड़ी के हथौड़े से चोट करने पर घंटा बजता है। घंटे को स्पर्श करने पर अनुभव होता है कि घंटे में कंपन हो रहा है।

(ii) एक नगाड़े (बाजा) पर बालू के कुछ कण को फैला देते हैं। अब एक छड़ी से नगाड़े पर हल्के-हल्के चोट करते हैं तो नगाड़े पर रखे हुए बालू के कण थिरकते हुए दिखाई पड़ते हैं, साथ ही साथ क्वनि भी उत्पत्र होती है। जैसे ही नगाड़े को अंगुली से स्पर्श करते हैं, ध्वनि उत्पत्र होना बंद हो जाता है तथा बालू के कण स्थिर हो जाते हैं। अत: वस्तु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।

(iii) सितार, वायलिन, गिटार आदि वाद्ययंत्रों के तारों को जब अंगुलियों से छेड़ते हैं तो एक मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है। इन वाद्य-यंत्रों में तार, ध्वनि के स्रोत हैं। बाँसुरी, शहनाई आदि को मुँह से फूँकने पर एक मधुर ध्वनि निकलती है। यहाँ वायु की परतें, ध्वनि के स्रोत का कार्य करती हैं। तबला, ढोलक आदि में चमड़े की झिल्ली को हाथों से ठोंकने पर ध्वनि उत्पत्न होती है। यहाँ चमड़े की झिल्ली ध्वनि के स्रोत हैं।

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प्रश्न 12.
मानव वाक् तंतु द्वारा ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
सामान्य तौर पर मुनष्य द्वारा उत्पन्न की जानेवाली ध्वनि की क्रियाविधि को तीन भागों में बाँटा जा सकता है फेफड़ा (Lungs), लारिक्स (Larynx) के अंदर वोकल फोल्ड्स (Vocal folds) एवं शब्दों का सही उच्चारण करने वाला अंग (articulaters) है। वाक् तंतु या वोकल कॉड्र्स (Vocal cords) ध्वनि के प्राथमिक स्रोत हैं। मनुष्य के गले में स्थित स्वरयंत्र (Vocal cord) में दो पतली झिल्लियाँ होती हैं जिनके कंपन के फलस्वरूप ध्वनि उत्पन्न होती है। जैसे यदि कागज के दो पतले टुकड़ों को एक साथ सटाकर दोनों किनारों को जोर से पकड़ कर उन टुकड़ों के बीच में मुँह से फूँकते हैं तो दोनों कागज के टुकड़ों में कंपन उत्पन्न होता|
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है तथा विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। हमारे फूँकने की क्रिया में परिवर्तन के साथ-साथ कागज के टुकड़ों के फड़फड़ाने एवं उनसे निकलनेवाली आवाजों के लक्षणों में भी परिवर्तन देखने को मिलता है। स्वरयंत्र (Vocal cord) जिस तरह से क्रियाशील होते हैं, उसी के अनुसार मुँह के बाहर फेफड़े से वायु बाहर आती है और कागज के टुकड़ों में कपन उत्पन्न होता है। तदनुसार कागज के टुकड़ों के कंपन से उनके मध्य उपस्थित वायु में कंपन होने से विभिन्न प्रकार की आवाजें उत्पत्र होती हैं।
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प्रश्न 13.
समतल सतह से ध्वनि के परावर्तन को दिखाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।
उत्तर :
समतल सतह पर ध्वनि का परावर्तन : टेबुल पर लकड़ी का एक समतल तख्ता AB सीधा खड़ा किया जाता है। एक-एक मीटर लम्बी दो नलियाँ (A और B) ली जाती हैं। इसमें एक नली को टेबुल पर इस प्रकार रखा जाता है कि इसका अक्ष तख्ते के Q बिन्दु पर कुछ कोण बनाए। नली के दूसरे मुँह पर एक टेबुल पर इस प्रकार रखते हैं कि उसका अक्ष भी Q बिन्दु पर पड़े।

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दूसरी नली के दूसरे मुँह पर कान लगाकर नली को टेबुल पर इस प्रकार रखते हैं कि घड़ी की टिक्-टटिक् की स्पष्ट ध्वनि सुनाई पड़े। दोनों नलियों के बीच लकड़ी का एक पर्दा खड़ा कर दिया जाता है जिससे घड़ी की आवाज सीथे कान तक न पहुँचे। इससे पता चलता है कि ध्वनि पहली नली के भीतर से चलकर समतल तख्ता AB से टकराती है और वहाँ से परावर्वित होकर दूसरी नली से होते हुए कान तक पहँचती है। यहाँ PQ आपतित ध्वनि, QR परावर्तित ध्वनि तथा QS अभिलम्ब को दर्शाते हैं। ये तीनों एक ही समतल में स्थित हैं। तथा आपतन कोण <PQS= परावर्तन कोण <RQS

प्रश्न 14.
कम्पन से सम्बन्धित भौतिक राशियाँ कौन-कौन हैं ? प्रत्येक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
कम्पन से सम्बन्धित भौतिक राशियाँ निम्नलिखित हैं –
(i) आयाम (Amplitude),
(ii) आवर्त काल (Time Period),
(iii) आवृत्ति (Frequency)।

(i) आयाम (Amplitude) : कोई कम्पन करने वाली वस्तु अपनी मध्यमान स्थिति की किसी एक तरफ जितना अधिक से अधिक विस्थापित होती है, उस विस्थापन को आयाम (Amplitude) कहते हैं। इसकी S.I. इकाई मीटर है।

(ii) आवर्त काल (Time Period) : कम्पन करने वाली किसी वस्तु को एक पूर्ण कम्पन करने में जो समय लगता है, उस समय को आवर्तकाल कहते हैं तथा इसे T द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(iii) आवृत्ति (Frequency) : किसी कम्पित वस्तु द्वारा एक सेकेण्ड में किये गये पूर्ण कम्पनों की संख्या को उस वस्तु की आवृत्ति कहते हैं। इसे n द्वारा प्रदर्शित करते हैं। कम्पनशील वस्तु जितनी देर में एक कम्पन करती है, उतने समय में एक तरंग की सृष्टि होती है। ∴ n = \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)

अत:, किसी माध्यम में प्रति सेकेण्ड उत्पन्न होने वाली पूर्ण तरंगों की संख्या को आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। S.I. पद्धति में आवृत्ति की इकाई सायकिल प्रति सेकेण्ड (Cycle/second) या हुर्ज (Hertz) होती है।

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प्रश्न 15.
ध्वनि के गुण क्या हैं ?
उत्तर :
ध्वनि के गुण (Quality or Timbre of Sound) : एक ही तारत्व और एक ही तीवता की दो ध्वनियों की पहचान जिस गुण द्वारा करते हैं, उसे गुणता (Quality or Timbre) कहते हैं। गुणता के द्वारा ही सिर्फ आवाज सुनकर हम उस व्यक्ति की पहचान कर लेते है।
सुरीली ध्वनि की गुणता स्वर (note) में उपस्थित उप सुरों (over tones) की संख्या एवं तरंग-रूप पर निर्भर करती है। विभिन्न स्वरों का तरंग रूप (wave form) भिन्न-भिन्न होता है।

प्रश्न 16.
श्रव्य, अपश्रव्य तथा पराश्रव्य ध्वनि से क्या समझते हो ?
उत्तर :
20 से 20,000 Cycle/sec आवृत्ति वाली ध्वनियों को श्रव्य ध्वनि (Audible sound) कहते हैं। 20 Cycle/sec से कम आवृत्ति वाली ध्वनियों को अपश्रव्य ध्वनि (Infrasonic sound) कहते हैं। इसे हम नहीं सुन सकते हैं। 20,000 Cycle/sec से अधिक आवृत्ति वाली छ्वनियों को पराश्रव्य घ्वनि (Super or ultra sonic sound) या अति श्राविक ध्वनि कहते हैं। इसे कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ आदि जन्तु सुन सकते हैं, लेकिन मनुष्य नहीं सुन सकता।

प्रश्न 17.
ध्वनि के परावर्तन का व्यावहारिक उपयोग क्या है ?
उत्तर :
ध्वनि परावर्तन का व्यावहारिक उपयोग (Practical application of reflection of sound) :

(i) दूर से आती हुई धीमी आवाज्ज को स्षष्ट रूप से सुनने के लिए हम अपनी हथेली को कर्ण पल्लव से सटाकर रखते हैं। यहाँ हथेली परावर्तक तल का कार्य करती है, जिससे ध्वनि परावर्तित होकर कर्ण मार्ग में प्रवेश करती है और ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ने लगती है।

(ii) बोलने की नलिका (Speaking tube) : यह धातु की बनी चोगा के आकार (Conical shape) वाली एक नली होती है। इसके पतले सिरे पर बोलने से ध्वनि तरंग बाहर नहीं फैलने पाती बल्कि नली की दीवार से परावर्तित होकर नली के दूसरे सिरे से बाहर निकलती है, जिससे ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती है। इसका उपयोग दूर से बोलने, भीड़ी-भाड़ या जनसमूह को सम्बोधित करने आदि में किया जाता है।

(iii) स्टेथोस्कोप (Stethoscope) : हुदय की धड़कन, फेफड़े में श्वसन नाड़ी की गति आदि की परीक्षा करने के लिए चिकित्सकों द्वारा इस यंत्र का उपयोग किया जाता है। इसकी कार्यपणाली भी ध्वनि के परावर्तन पर आधारित है।

(iv) मर्मश्रावी गैलरी (Whispering gallery) : बड़े-बड़े हालों, गिरजाघरों या संगीत घरों की दीवारें तथा छते अवतल आकार (concave shape) की बनाई जाती हैं, जिससे एक किनारे पर बोली गई ध्वनि लगातार परावर्तित होकर दूसरे सिरे पर स्षष्ट सुनाई पड़ती है। यह ध्वनि इतनी स्सष्ट होती है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पास में ही बैठा कोई व्यक्ति बात कर रहा है। इस प्रकार की गैलरी सर्वपथम लंदन में सेटपाल गिरिजाघर में बनाई गयी थी।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 18.
स्वरित्र क्या है ? ध्वनि के प्रयोग में स्वरित्र का इतना महत्वपूर्ण स्थान क्यों है ?
उत्तर :
स्वरित्र (Tuning Fork) : यह स्टील का बना हुआ U आकार का होता है। इसमें दो भुजाएँ होती हैं। इसके मोड़ पर एक हैंडिल लगा होता है। जब हैंडिल को पकड़ कर इसकी एक भुजा पर रबर पैड से चोट करते हैं तो इसकी दोनों भुजायें कपन करने लगती हैं।ध्वनि के प्रयोग में स्वरित्र का महत्व इसलिए है कि इससे उत्पत्न ध्वनि एक निर्दिष्ट आवृत्ति (Frequency) वाली होती है। इसलिए स्वरित्र से उत्पन्न ध्वनि को सुर (Tone) कहते हैं। ध्वनिविज्ञान में विभिन्न प्रयोगों में स्वरित्र का उपयोग किया जाता है।
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प्रश्न 19.
वायु में ध्वनि के गमन की क्रिया विधि को समझाओ।
उत्तर :
वायु में ध्वनि के गमन की क्रिया विधि (Mechanism of Propagation of Sound through air) : वायु में ध्वनि का गमन, संपीडन (compression) तथा विरलन (rarefaction) के बनने से होता है। संपीडन तथा विरलन ध्वनि उत्पादक वस्तु के कंपन करने से, वायु या किसी अन्य गैसीय माध्यम में उत्पन्न हो जाती है, जो एक निश्चित वेग से तरंग के रूप में आगे बढ़ती है और ये कान तक पहुँच कर ध्वनि का आभास कराती है। चित्र में ध्वनि उत्पादक वस्तु स्वरित्र (Tunning fork) है जिसकी एक भुजा RO के सामने बराबर दूरी पर स्थित सामानांतर वायु की असंख्य परतें हैं।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 9

चित्र में जब स्वरित्र की भुजा RP स्थिति से RQ स्थिति में कंपन करती हुई आती है तो अपने सामने की वायु परतों को दबाती हैं। ये परतें अपने से आगे वाली परतों को दब्वाती हैं। यह दबाव माध्यम की लगातार परतों पर पहुँचता जाता है और इस तरह संपीडित परत (compresed layer) A1 B1 की रचना हो जाती है। चूँकि स्वरित्र की भुजा के प्रत्येक बिंदु पर कंपन की गति समान नहीं होती। अत: A1B1 के सभी भागों पर संपीडन भी समान नहीं होता। स्वरित्र की भुजा की RO

स्थिति में वेग अधिकाधिक और सिरों RP तथा RQ स्थिति में करीब नहीं के बराबर होता है। अत: A1 B2 के बीच वाले भाग में संपीडन अधिकाधिक तथा A1 और B1 सिरों पर करीब-करीब नहीं के बराबर होता है। यह संपीडित परत A1 B1 इस संपीडन से स्वयं मुक्त होना चाहती है। अत: अपना संपीडन समान लंबाई की दूसरी परत को दे देती है।

यही क्रम लगातार जारी रहता है और संपीडन एक परत से दूसरी परत में एक निश्चित गति से आगे की तरफ बढ़ता चला जाता है। जब स्वरित्र की भुजा R Q स्थिति में पुन: लौटती है तो वह अपने पीछे आंशिक शून्य छोड़ने की कोशिश करती है जिससे उसके संपर्क वाली परत A2B2 से दबाव हटने से वह भुजा की ओर फैलती है। इस प्रकार A2B2 के अंदर विरलन.

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 20.
अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य तरंगों में अंतर लिखो।
उत्तर :
अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में अन्तर :

अनुप्रस्थ तरंग अनुदैर्ध्य तरंग
(i) इसमें माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा के लम्बवत् कम्पन करते हैं। (i) इसमें माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा के अनुदिश (समानान्तर) कम्पन करते हैं।
(ii) यह तरंग श्रृंगों तथा गर्तों के रूप में आगे बढ़ती है। एक श्रृंग तथा एक गर्त से मिलकर एक अनुप्थस्थ तरंग बनाती है। (ii) यह तरंग संपीडनों तथा विरलनों के रूप में आगे बढ़ती है। एक संपीडन तथा एक विरलन से मिलकर एक अनुदैर्ष्य तरंग बनाती है।
(iii) यह तरंग केवल ठोस माध्यम में तथा द्रव के ऊपरी तल पर उत्पन्न हो सकती है। द्रव के भीतर अथवा गैसों में नहीं। (iii) यह तरंग ठोस, द्रव तथा गैस तीनों प्रकार के माध्यमों में उत्पन्न हो सकती है।
(iv) इसमें दाब तथा घनत्व में परिवर्तन नहीं होते हैं। (iv) इसमें द्रव तथा घनत्व में परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 21.
प्रयोग विधि द्वारा ध्वनि के परावर्तन को प्रदर्शित करो और इसके नियमों की सत्यता को प्रमाणित करो।
उत्तर :
ध्वनि तरंग का परावर्तन (Reflection of Sound Waves) : समतल द्वारा ध्वनि परिवर्तन दिखाने के लिए दो नलियाँ N1 और N2 जो लगभग 1 मीटर लम्बी तथा 6 से॰मी॰ व्यासवाली लेते हैं। इसके लिए लकड़ी का (पद्दा) टुकड़ा, एक लकड़ी का बोर्ड तथा एक घंटी लेते हैं।

एक लकड़ी के मेज पर समतल लकड़ी का बोर्ड A B को लम्बवत् सीधा खड़ा करके रखते हैं। अब N1 और N2 को मेज पर इस प्रकार रखते हैं कि दोनों का अक्ष बोर्ड A B के C बिन्दु पर मिलते हैं। C से A B के लम्बवत् एक सरल रेखा C D खींचा जो N1 तथा N2 के साथ समान कोण बनायें।

अब C D (ध्वनि निरोधक पर्दा) को खड़ा करके रखते हैं। इसी अवस्था में N1 नली के मुख के पास एक घंटी को रखतें हैं तथा N2 नली के मुख के पास कान लाने से घंटी की टन-टन की ध्वनि सुनाई पड़ती है। यहाँ C D पर्दा घंटी की टन-टन सीधा कान तक आने से रोकता है। इस तरह घंटी की ध्वनि N1 से

होकर A B पर आपतित होती है तथा परावर्तित होकर N2 नली से होकर कान में प्रवेश करती है । यदि N2 नली की स्थिति को इधर-उधर खिसका देने पर ध्वनि सुनने की चेष्टा करते हैं किन्तु कोई ध्वनि नहीं सुनाई पड़ती है। इस अवस्था में हम देखते हैं कि दोनों नलियों का अक्ष, मेज पर खींचे गये अभिलम्ब C D के साथ बराबर कोण बनाता है। अत: आपतन तथा परावर्तन कोण बराबर है और आपतित ध्वनि तरंग तथा परावर्तित ध्वनि तरंग आपतन बिन्दु पर खींचा हुआ अभिलम्ब एक ही तल में स्थित रहते हैं।

प्रश्न 22.
ध्वनि की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर :
ध्वनि की प्रमुख विशेताएँ : हम प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की ध्वनियों को सुनते हैं। सितार या बाँसुरी की ध्वनि, तबला या वायलिन की ध्वन्वनि से भित्र होती है। मंदिर में बजनेवाली घंटी वहीं खड़े व्यक्ति को कर्णकटु लगती है, परंतु मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित व्यक्ति को वह कर्णप्रिय प्रतीत होती है । हमें छ्वनि सुनने में कैसी लगती है यह बहुत सी बातो पर निर्भर करता है। अभी हम उन्ही बातो की चर्चा करेंगे। सुरीली या संगीतात्मक ध्वनि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं।

  • प्रबलता (Loudness)
  • तारत्व (Pitch)
  • गुणता (Quality)।

प्रबलता (Loudness) : ध्वन का वह लक्षण, जिससे यह ज्ञात होता है कि ध्वनि तेज है या धीमी, उसे ध्वनि की प्रबलता (Loudness) कहते हैं। यह गुण सांगीतिक तथा कोलाहल दोनों प्रकार की ध्वनि में पाया जाता है । ध्वनि-प्रबलता की माप उसकी तीव्रता (Intensity) द्वारा की जाती है। ध्यनि गमन की दिशा के लम्बवत रखे तल के इकाई क्षेत्रफल से होकर प्रति सेकेण्ड जिस परिमाण में छ्वनि ऊर्जा गुजरती है, उसे ध्वनि की तीव्रता (Intensity) कहते हैं। अधिक तीव्रता वाली ध्वनि की प्रबलता (Loudness) अधिक होती है। अर्थांत् अधिक जोर (Loud) तथा अधिक दूरी तक सुनाई पड़ती है।

तारत्व (Pitch) : यह संगीतात्मक ध्वनि का वह लक्षण है, जिससे पता चलता है कि कौन ध्वनि मोटी है और कौन पतली है।
यह सांगीतिक ध्वनि का मौलिक गुण (Fundamental Property) है। यह वह गुण है जिसके आधार पर समान तीव्रता वाली ध्वानयों से पतली सुरीली (Shril) तथा मोटी (Flat) ध्वनियों को पृथक किया जाता है।

तारत्व ध्व्वान खोत की आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है अर्थांत् तारत्व आवृत्ति के सीधा समानुपाती होता है। अधिक आवृत्ति वाली ष्वनियाँ उच्च तारत्व (High Pitch) वाली होती हैं तथा Shrill और Sharp होती हैं। बच्चों की आवाज पतली अर्थात् उच्व तारत्व की होती है। पुरुषों की आवाज से स्त्रियों की आवाज पतली अर्थात् उच्च तारत्व की होती है।

गुणता (Quality) : गुणता सागीतात्मक ध्वनि का वह लक्षण जिसके द्वारा समान नीव्रता तथा तारत्व वाली ध्वनियों में अन्तर स्पष्ट किया जाता है, उसे गुणता (quality) कहते है। जैसे – सितार, सारंगी, बांसुरी या हारमोनियम आदि वाद्य यन्त्रों से समान तीव्रता एव तारत्व वाली कोई तार जैसे – सा, रे, गा, मा – सा बजाई जाए तो बिना आँख से देखे केवल ध्वनियों को सुनकर हम कह सकते है कि विभिन्न वाद्ययन्त्रो की गुणता (Quality) भिन्न-भिन्न होती है।

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प्रश्न 23.
स्वतंत्र कम्पन और प्रेरित कम्पन किसे कहते हैं ? प्रत्येक का एक एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
स्वतंत्र या स्वाभाविक कम्पन (Free or natural vibration) : जब कोई वस्तु अपने स्वत: के गुण जैसे लम्बाई, मात्रा आदि के आधार पर कम्पन करती है, तो इस कम्पन को स्वतः कम्पन (Natural vibration) कहते हैं। जैसे स्वरित्र का कम्पन।

प्रेरित कम्पन (Forced vibration) : जब कोई वस्तु एक शक्तिशाली आवर्त बल (Strong periodic force) के प्रभाव में कम्पन करती है, जिसकी आवृत्ति उसकी मूल आवृत्ति (Natural frequency) से भिन्र होती है, तो ऐसे कम्पन को प्रेरित कम्पन (Forced vibration) कहते हैं।

प्रश्न 24.
प्रतिध्वनि सुनने की शर्ते क्या हैं ?
उत्तर :
प्रतिध्वनि सुनाई देने की शर्ते (Conditions for hearing echo) : प्रतिष्वनि सुनाई देने के लिए निम्नलिखित शर्ते हैं –

  • परावर्तक तल का विस्तार अधिकतम होना चाहिए।
  • ध्वनि उत्पन्न करने वाले सोत से परावर्तक तल की कम से कम दूरी 16.6 मीटर होनी चाहिए।
  • एक अक्षर के उच्चारण वाली ध्वनि (articulate sound) की प्रतिध्वनि सुनने के लिये परावर्तक तल की दूरी 33.2 मीटर होनी चाहिए।

आंकिक प्रश्नोत्तर (Numrical Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
उस तरंग की आवृत्ति ज्ञात करें जिसका आवर्तकाल 0.002 s है।
हल : T = 0.002
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 11
∴ n=500 Hz
उत्तर :
n=500 Hz.

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंग का आवर्तकाल निकालें जिसकी आवृत्ति 400 Hz है।
हल:
n = 400 Hz
T = \(\frac{1}{\mathrm{n}}=\frac{1}{400}\) = 0.0025 s
उत्तर :
0.0025s

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 3.
उस ध्वनि- तरंग की तरंगदैर्ध्य की गणना करें जिसकी आवृत्ति 300 Hz और चाल 330ms है। हल : n=300 Hz, V =330m/s, λ= ?
λ = \(\frac{V}{n}\)
= \(\frac{330}{300}\) = 1.1m
उत्तर :
1.1m

प्रश्न 4.
एक ध्वनि-तरंग की आवृत्ति 1,000 Hz और तरंगदैर्ध्य 34 cm है। इस ध्वनि-तरंग को 1 km की दूरी तय करने में कितना समय लगेगा ?
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 12
उत्तर :
2.94 सेकेण्ड

प्रश्न 5.
एक ध्वनि-तरंग 340 m/s की चाल से चलती है। यदि इसका तरंगदैर्ध्य 2 cm हो, तो तरंगों की आवृत्ति क्या है ? क्या यह श्रव्य परास में होगा ?
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 13
उत्तर :
17000Hz

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 6.
एक पहाड़ी से 100 m दूर ध्वनि उत्पन्न होती है तथा 3/5 s पश्चात् प्रतिष्वनि सुनाई देती है। ध्वनि कीं चाल ज्ञात करें।
हल : D=100 × 2=200 मी०
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 14
उत्तर :
333.3 m/s

प्रश्न 7.
एक पहाड़ी से कुछ दूरी पर एक तीव्र ध्वनि वाले पटाखे से उत्पन्न ध्वनि की प्रतिध्वनि एक व्यक्ति 6 5 के बाद सुनता है। उस व्यक्ति से पहाड़ी की दूरी निकालें (हवा में ध्वनि की चाल =340m/s)
हल : v=340 m/s, t=6s, D= ?
D = vt
=340 × 6
= 2040 मी०
व्यक्ति से पहाड़ी की दूरी =\(\frac{D}{2}\)
=\(\frac{2040}{2}=1020 \) मी०
उत्तर :
1020 मी०

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 8.
एक गोताखोर A समुद्र के अंदर एक-दूसरे गोताखोर B को जो उससे 3km की दूरी पर है ध्वनिसंकेत भेजता है। B उस ध्वनि-संकेत को कितनी देर के बाद सुनेगा? (समुद्री जल में ध्वनि की चाल = 340 m/s)
हल : v=340m/s, t= ?, D=31 cm × 2=6 km
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 15
उत्तर :
17.6 sec.

प्रश्न 9.
एक मनुष्य 1.6 km की दूरी पर स्थित कारखाने की दोपहर वाली सीटी से अपनी घड़ी मिलाता है। बताएँ कि कारखाने की घड़ी से उसकी घड़ी कितनी सुस्त है। (हवा में ध्वनि की चाल =332 m/s)
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 16
उत्तर :
4.8s

प्रश्न 10.
सोगार का उपयोग कर पानी की सतह पर ध्वनि संकेत उत्पन्न किए जाते हैं। इन संकेतों का संस्चन पानी की तली से परावर्तन के बाद किया जाता है। यदि ध्वनि संकेत के उत्पादन से इनके संसूचन में लगा समय 4 s हो, तो पानी की गहराई निकालें। (पानी में ध्वनि की चाल =1530 m/s.
हल : केवल तल तक जाने में समय = \(\frac{4 \mathrm{~s}}{2}\) = 2s
पानी की गहराई d = v × t
=1530 × 2
=3060 × मी॰
उत्तर :
3060 मी०

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 11.
जब एक स्वरित्र को वायु में कपित किया जाता है तो 0.85 मीटर से तरंग लंबाई पैदा होती है। यदि ध्वनि का वेग वायु में 340 मी०/से० हो, तो स्वरित्र आवृत्ति ज्ञात करो।
उत्तर :
यहाँ v=340 m/s, x=0.85 m, n = ?
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 17
प्रश्न 12.
एक स्वरित्र वायु में कम्पन कर रहा है जिससे 1.7 मी॰ तरंग दैर्ध्य वाली तरंग उत्पन्न हो रही है। यदि वायु में ध्वनि का वेग 340 मी०/से० हो, तो स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल : v=340 m/s, λ=1.7 m, n= \(\frac{\mathrm{v}}{\lambda}\)
= \(\frac{340}{1.7}=\frac{3400}{17}\) = 200 Hz
उत्तर :
200 Hz

प्रश्न 13.
एक स्वरित्र की आवृत्ति 200 कम्पन/ सेकेण्ड है। ध्वनि का वेग यदि 330 मीटर/ से० हो, तो ध्वनि की तरंग की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल : v=330m/s, n=200 कम्पन/s
\(\lambda=\frac{v}{n}=\frac{330}{200}\) =1.65 मी०
उत्तर :
1.65 मीटर

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 14.
एक स्वरित्र हवा में कम्पन्न कर 1 1/2 मीटर लम्बी तरंग उत्पन्न करता है। हवा में ध्वनि की गति 330 मीटर/ सेकेण्ड है। उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति और आवर्त काल ज्ञात करो।
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 18
उत्तर :
0.0045 sec

प्रश्न 15.
ध्वनि का वेग गैस में 320 मीटर/ सेकेण्ड और स्वरित्र की आवृत्ति 500 cycle/sec है। ध्वनि तरंग लम्बाई ज्ञात करो।
हल : v=320 m/s, n=500 cycles/s
λ = \(\frac{v}{n}=\frac{320}{500}\) =0.64m
उत्तर :
0.64 metre

प्रश्न 16.
स्वरित्र की आवृत्ति 400 Cycle/sec और ध्वनि की तरंग लम्बाई 0.83 मीटर है। ध्वनि का वेग ज्ञात क
हल : λ =400 cycles/ s, λ = 0.83 m
v=n λ
=400 × 0.83
=332.00
=332 m/sec
उत्तर :
332 m/sec

प्रश्न 17.
ध्वनि का वेग हवा में 335 मीटर/सेकेण्ड और तरंग लम्बाई 0.8 मीटर है। स्वरित्र की आवृत्ति बताओ।
हल : v=335 m/s, λ = 0.8 m
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 19
उत्तर :
418.75 cycles/s

प्रश्न 18.
एक किले में निश्चित समय पर बन्दूक दागने पर प्रेक्षक अपनी घड़ी का समय ठीक करता है। बाद में पता लगता है कि घड़ी आधा मिनट देर से है। प्रेक्षक से किले की दूरी बताओ। ध्वनि का वेग 332 m/sec है।
हल : समय (t)= \(\frac{1}{2}\) मिनट =\(\frac{1}{2}\)×60 = 30sec
वेग (v)=332 m/sec
दूरी = वेग x समय
=332 × 30
=9960 × मी॰
उत्तर :
9960 मी०

प्रश्न 19.
बन्दूक से गोली दागने पर चमक के 6 sec के बाद ध्वनि प्रेक्षक को सुनाई पड़ती है। ध्वनि की गति 332 m/sec है। प्रेक्षक और बन्दूक दागने की जगह की दूरी बताओ।
हल : वेग =332 m/s} समय = 6 सेकेण्ड
दूरी = वेग x समय
=332 × 6
=1992  मी॰
उत्तर :
1992 मी०

प्रश्न 20.
प्रतिध्वनि छः अक्षरों को दोहराती है, तो परावर्तक तल की दूरी कितनी है ? ध्वनि की गति 332 m/sec है। हल : किसी मी ध्वनि का असर  \(\frac{1}{10}\) sec रहता
∴ \(\frac{1}{10}\) second में चली दूरी = \(\frac{332}{10}\) = 33.2
चूंकि प्रतिध्वनि दोहराता है अत:
दूरी =33.2 × 2=66.4
कुल दूरी λ से० में =332+66.4
= 398.4 मी०
उत्तर :
398.4 मी०

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 21.
दूर स्थित फैक्टरी के सायरन की आवाज सुनकर एक व्यक्ति अपनी घड़ी का समय ठीक करता है, पता चलता है कि घड़ी 5 सेकेण्ड देर से चल रही है। व्यक्ति से फैक्टरी की दूरी कितनी है ? ध्वनि की गति 332 m/sec है।
हल : दूरी = वेग x समय
=332 × 5
=1660 × मी॰
उत्तर :
1660 मी०

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Life Science Book Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Life Science Chapter 5 Question Answer – वातावरण तथा उसके संसाधन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
तापीय विद्युत ऊर्जा नवीकरणीय है या अनवीकरणीय ?
उत्तर :
नवींकरणीय।

प्रश्न 2.
वह साधन या वस्तु जिसपर लगातार निर्भर रहना चाहिए, क्या कहलाता है ?
उत्तर :
संसाधन।

प्रश्न 3.
निर्वहनीय जल प्रबंध का एक उपाय लिखिए।
उत्तर :
पानी का आवश्यकतानुसार, उचित एवं बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करें। पानी अत्यन्त सीमित है उसको भविष्य के लिए बचाएँ।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 4.
सजीवों के चारों ओर जो कारक होते हैं वे उनके लिए क्या निर्माण करते हैं ?
उत्तर :
वातावरण का।

प्रश्न 5.
आबादी किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी क्षेत्र या स्थान पर एक समय विशेष में एक या अनेक जातियों के जीवों की संख्या आबादी कहलाती है।

प्रश्न 6.
ऑक्सीजन चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर :
गैस को अपने सोत से निकलकर सजीवों में प्रवेश करने और जैविक क्रियाओं के सम्पन्न होने के बाद पुन: अपने स्रोत में लौट जाने की क्रिया को ऑक्सीजन चक्र कहते हैं।

प्रश्न 7.
पारितंत्र के कुछ कार्बनिक पदार्थों के नाम बताएँ।
उत्तर :
प्रोटीन, वसा, शर्करा।

प्रश्न 8.
‘द्स प्रतिशत नियम’ किसने प्रतिपादित किया है ?
उत्तर :
रेमन्ड लिण्डेमैन (1942)।

प्रश्न 9.
वनों को ज़लवायु का नियंत्रक क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
वन आर्द्रता (बादलों) को रोककर वर्षा कराते है। वे विभिन्न भू-जैविक रासायनिक चक्रों को संतुलित रखते है और तापमान का नियत्रण करते हैं। इस कारण वनो को जलवायु का नियत्रक कहा जाता है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 10.
द्वितीय उपभोक्ता का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
मेढ़क, मछलिया।.

प्रश्न 11.
मनुष्य के शरीर में जल की मात्रा कितनी प्रतिशत होती है ?
उत्तर :
60 %

प्रश्न 12.
हाइड्रा प्राणी के शरीर पर पाये जाने वाले शैवाल का क्या नाम है ?
उत्तर : कवक।

प्रश्न 13.
भारत में किसी व्यक्ति को प्रतिदिन आवश्यक जल की कितनी मात्रा मानी गई है?
उत्तर :
3 से 4 लीटर।

प्रश्न 14.
वायुमण्डल क्या है ?
उत्तर :
पुथ्वी की ऊपरी सतह में स्थित हवा के घेरे को वायुमण्डल (Atmosphere) कहते हैं।

प्रश्न 15.
संरक्षण में रखे गये कुछ जन्तुओं के नाम बताइये ?
उत्तर :
संरक्षण में रखे गये जन्तु-बाघ, गैण्डा, घड़ियाल आदि हैं।

प्रश्न 16.
बयोम क्या है?
उत्तर :
बायोम (जीवोम) स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र का ही एक प्रमुख भाग है।

प्रश्न 17.
ऑटेकोलॉजी क्या है?
उत्तर :
जीवधारियों का पारिस्थितिक अध्ययन को ऑंटेकोलॉजी कहते है।

प्रश्न 18.
सिनेकोलॉजी क्या है?
उत्तर :
एक विशेष जीव समुदाय के पारिस्थितिक तंत्र सम्बन्थ के अध्ययन को सिनेकोलॉजी कहते है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 19.
समुदाय कहने से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
समुदाय : किसी स्थान पर उपस्थित भिन्न-भिन्न जातियों की आबादी को सम्मिलित रूप से समुदाय कहते है।

प्रश्न 20.
भारतीय भैसों की प्रमुख प्रजातियों के नाम लिखो।
उत्तर :
मुर्रा, सुरती, जाफराबादी, मेहसाना, भदावरी, गोदावरी, नागपुरी, सांभलपुरी, तराई, टोड़ा, साथकनारा।

प्रश्न 21.
इकोतंत्र शब्द सबसे पहले किसने दिया ?
उत्तर :
A. G. Tansley

प्रश्न 22.
प्राथमिक उपभोक्ता कौन है ?
उत्तर :
शाकाहरी प्राणी।

प्रश्न 23.
दालों में किस प्रकार का खाद्य प्रांप्त होता है ?
उत्तर :
प्रोटीन।

प्रश्न 24.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सहजीवी बैक्टीरिया का नाम बताइये ?
उत्तर :
राइ्रोबियम।

प्रश्न 25.
गैर परम्परागत ऊर्जा में कौन प्रमुख ऊर्जा है ?
उत्तर :
सौर ऊर्जा।

प्रश्न 26.
नाइट्रोजन चक्र में कौन बैक्टीरियम नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदल देता है ?
उत्तर :
नाइट्रोसोमोनस।

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल के एक संरक्षित वन का नाम बताइये ?
उत्तर :
गोरूमारा।

प्रश्न 28.
एक संकट में पड़े जंगली जन्तु का नाम बताइये ?
उत्तर : शेर।

प्रश्न 29.
वातावरण के सजीव तथा निर्जीव के मध्य आपसी सम्बन्ध का पता किस शब्द से चलता है ?
उत्तर :
इकोसिस्टम (Ecosystem)

प्रश्न 30.
FAO का पूरा नाम क्या है?
उत्तर :
Food and Agricultre Organisation.

प्रश्न 31.
भारत में बाघ संरक्षण योजंना केन्द्र का नाम बताइये ?
उत्तर :
सुन्दरवन (पशिचम बंगाल)।

प्रश्न 32.
नाइट्रोजन युक्त यौगिकों से अमोनिया बनने की क्रिया को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
अमोनिफिकेशन।

प्रश्न 33.
जलदापाड़ा अभयारण्य किस प्राणी संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
एक सींग वाला गैण्डा।

प्रश्न 34.
किस जन्तु के लिए सुन्दरवन प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
रॉयल बंगाल टाइगर।

प्रश्न 35.
इकोसिस्टम के दो मुख्य अवयव कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
इकोसिस्टम के दो मुख्य अवयव है :-
(a) जैविक (Biotic) तथा
(b) अजैविक (Abiotic)

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 36.
आबादी क्या है ?
उत्तर :
किसी निश्चित इकाई क्षेत्र में एक ही जाति के समूह को आबादी कहते हैं।

प्रश्न 37.
जैव मण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जल, थल एव वायु का वह भाग जिसमें जीवधारी पाये जाते हैं, उसे जैवमण्डल (Biophere) कहते है।

प्रश्न 38.
स्थल मण्डल क्या है ?
उत्तर :
पृथ्वी के उस बाहरी भाग को जिसमें मिट्टी तथा चट्टानें पायी जाती हैं, उसे स्थलमण्डल(Lithosphere) कहते है।

प्रश्न 39.
जल मण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी के जलमग्न भाग को जल मण्डल (Hydrosphere) कहते हैं।

प्रश्न 40.
सजीव और निर्जीव के आपसी सम्बन्यों का अध्ययन है।
उत्तर :
पारिस्थितिकी तंत्र।

प्रश्न 41.
वह जन्तु जो एक दूसरे जन्तु को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।
उत्तर :
साँप, चील, शेर इत्यादि।

प्रश्न 42.
वह जीवधारी जो किसी अन्य जीवधारी द्वारा भोजन के रूप में उपयोग कर लिया जाता है।
उत्तर :
मेंढक, खरगोश।

प्रश्न 43.
एक स्वच्छ जल वाली मछली का नाम बताएँ।
उत्तर :
रोहू और कतला।

प्रश्न 44.
परजीविता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जब एक जीव अपने भोजन के लिए दूसरे पर आश्रित होता है, तो उसे परजीविता कहते हैं।

प्रश्न 45.
पौषे किस रूप में नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं ?
उत्तर :
पौधे मिट्टी से जड़ों द्वारा घुलनशील लवणों के रूप में N2 अहण करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2/3 MARKS

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी (Ecology) से आप क्या समझते है ?
उत्तर :
विजान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत सजीवों तथा उनके वातावरण के बीच क्रियात्मक सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है, उसे पारिस्थितिकी (Ecology) कहते हैं।

प्रश्न 2.
एक उदाहरण द्वारा समझाइए कि प्राणियों के उपापचय पर तापमान परिवर्तन का प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
तापक्रम के परिवर्तन से प्राणियों के उपापचय पर असप्पडता अत्याधिक है । शीत से बचने के लिए प्राणियों का शरीर घने बालों से ढका रहता है । इनकी त्वचा.के नीचे बसा का स्तर पाया जाता है ।

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प्रश्न 3.
परितन्त्र में उत्पादक का क्या कार्य है?
उत्तर :
परितंत्र में उत्पादक प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य की किरण से प्रकाश को अहण कर उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करके अपने शरीर में भोजन के रूप में संचित कर लेता है । जन्तु अपना भोजन प्रत्यक्ष या अपत्यक्ष रूप में पौधों से ही प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 4.
आबादी वृद्धि दर से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
आबादी वृद्धि दर (Growth rate of population) : जन्मदर तथा मृत्यु दर के अन्तर को आबादी अनुपात $37: 14$ था। बच्चों तथा बू़ों की चिकित्सकीय सुविधाओं में वृद्धि के कारण मृत्युदर में काफी वृद्धि हुई है।

प्रश्न 5.
स्थानान्तरण किसे कहते हैं ?
उत्तर :
स्थानान्तरण (Migration) : जब्न जीवधारी अपने गृह स्थान से स्थानान्तरित होकर दूसरी जगह जाते हैं परन्तु पुन: वापस अपने गृह स्थान आ जाते हैं, तो उसे स्थानान्तरण कहते है। जैसे – अत्यधिक सर्दी के कारण साइबेरिया के पक्षी भारत में आते हैं परन्तु गर्मी के दिनों में पुन: वापस चले जाते हैं।

प्रश्न 6.
आबादी वृद्धि दर को कम करने के दो उपाय बताइये ?
उत्तर :
आबादी वृद्धि दर को कम करने के उपाय :-

  • लोगों को परिवार नियोजन के सम्यन्ध में तथा उसके तरीकों की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
  • लोगों को शिक्षित कर बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्याओं से अवगत कराना चाहिए।

प्रश्न 7.
परजीविता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
परजीविता (Parasitism) : कुछ जीव ऐसे होते हैं कि बे अपने भोजन के लिए दूसरे असमान जीवधारी पर निर्भर रहते है। जैसे – अमरबेल (Cuscuta) किसी अन्य पौधे से अपना भोजन चूसती है। उसी प्रकार गोलकृमि हमारी आहारनाल में रहकर उससे अपना भोजन ग्रहण करती है। इस क्रिया को परजीविता (Parasitism) कहते हैं। इसमें जो सजीव भोजन के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहता है, उसे परजीवी (Parasite) और जिस पर वह निर्भर रहता है, उसे पोषक (Host) कहते हैं। जैसे – गोलकृमि परजीवी है और मनुष्य पोषक है।

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प्रश्न 8.
सहयोगिता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सहयोगिता (Co-operation) : दो जीव पौधे या जन्तु एक साथ रहकर एक दूसरे को भोजन या आवास में मदद करते हैं। इन दोनों जीवो को सहायोगी तथा एक साथ परस्पर सहयोग को सहयोगिता कहते हैं।

प्रश्न 9.
परितंत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वातावरण के जैविक तथा अजैविक अवयवों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। यह सम्बन्ध मिलकर एक तंत्र की रचना करते है यह तंत्र पारिस्थितिकी तंत्र या पारितंत्र कहलाता है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा पिरामिड की विशेषता बताएँ।
उत्तर :
ऊर्जा पिरामिड की विशेषताएँ : ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है, इसके आधार पर उत्पाद्कों में ऊर्जा का परिमाण सबसे अधिक तथा शीर्ष की ओर स्थित उपभोक्ताओं में ऊर्जा का परिमाण घटता जाता है। एक खाद्य स्तर से दूसरे खाद्य स्तर में ऊर्जा का हास लगभग 10%है।

प्रश्न 11.
वन किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी क्षेत्र पर स्थित पेड़-पौधों तथा जानवरों के समूह को वन कहते है। वनों में जंगली जानवर तथा जंगली पौधे पाए जाते है।

प्रश्न 12.
स्वपोषी को परितंत्र में उत्पादक क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
जो जीव स्वंय अपना भोजन बनाते हैं, उन्हें स्वपोषी या उत्पादक कहा जाता है। हरे पेड़-पौधे किसी परितंत्र के उत्पादक होते हैं। ये अकार्बनिक पदार्थों एवं सौर ऊर्जा द्वारा अपने भोजन का निर्माण प्रकाश-संश्लेषण क्रिया द्वारा करते हैं।

प्रश्न 13.
खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर :
उत्पादक से उच्च श्रेणी के उपभोक्ता तक खाद्य ऊर्जा का स्थानान्तरण खाद्य श्रृंखला कहलाता है। ओडम (Odum) के अनुसार, जिस शक्ति द्वारा खाद्ध ऊर्जा, उत्यादक पौधों से क्रमबद्ध रूपों में उपभोक्ताओं और विभिन्न प्राणी समूहों के मध्य से गुजरती है, उसे खाद्य श्रृंखला कहते हैं।

प्रश्न 14.
बागानी कृषि से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
बागानी कृषि (Horticuture) : सामान्य कृषि के अलावे फलोत्पादन के लिए फलों के बागान लगाए जाते हैं। जिन्हें बागानी कृषि कहा जाता है। यहाँ संख्या के रूप में मचुर मात्रा में विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होते हैं। जैसे – आम, केला, नींबू, अनार, पयीता, अमरूद, चीकू, कटहल, लीची, अंगूर, सेब; नाशपाती, आंलू बुखारा, खुबानी, बादाम, अखरोट आदि।

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प्रश्न 15.
खाद्य जाल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
खाद्य जाल (Food Web) : किसी इकोसिस्टम के जैव समुदाय में विभिन्न प्रकार की खाद्य शृंखलायें पायी जाती हैं। इन खाद्य श्रृंखलाओं के द्वारा जैव समुदाय एक दूसरे से परस्पर जुड़े रहते हैं। इस प्रकार खाद्य श्रृंखलायें एक जाल बनाती हैं, जिन्हें खाद्य जाल कहते हैं।

प्रश्न 16.
ऊर्जा हमारे लिए क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर :
कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। जीवधारियों को जीवित रहने के लिए तथा अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा आवश्यक है। समस्त जीवित तथा अजीवित प्राणियों तथा वस्तुओं के अस्तित्व के लिए ऊर्जा आवश्यक ही नहीं, बल्कि उनकी वृद्धि तथा प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी देश का विकास भौ ऊर्जा पर ही निर्भर है।

प्रश्न 17.
पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण देकर विभिन्न पोषी स्तर को बताओ।
उत्तर :
आहार श्रृंखला में उत्पादक और उपभोक्ता का स्थान ग्रहण करने वाले जीव जीवमंडल को कोई संरचना प्रदान करते हैं और इसे पोषी स्तर कहते हैं। आहार श्रृंखला में पहला स्थान उत्पादक का होता है। शाकाहारियों में सिर्फ उत्पादक (पौधे) उपभोक्ता होता है और माँसाहारियों की श्रृंखला में उपभोक्ता अधिक होते हैं।
आहार श्रृंखला का उदाहरण : घास → हिरन → शेर

इस खाद्य शृंखला में विभिन्न पोषी स्तर निम्नलिखित हैं –

  • प्रथम पोषी स्तर घास है यह उत्यादक है।
  • द्वितीय पोषी स्तर हिरन है यह प्रथम उपभोक्ता है इसे शाकाहारी भी कहते हैं।
  • तृतीय पोषी स्तर शेर है यह उच्च मांसाहारी है।

प्रश्न 18.
उत्पादक एवं उपभोक्ता में क्या अन्तर है?
उत्तर :
उत्पादक प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया से अपना भोजन बनाते हैं। हरे पौषे उत्पादक कहलाते हैं। उपभोक्ता अपने भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर करते हैं, सभी जन्तु उपभोक्ता कहलाते हैं।

प्रश्न 19.
पशुपालन की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
पशु पालन : विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत पालतू पशुओं के भोजन, आवास, प्रजनन, स्वास्थ्य आदि विषयों का अध्ययन किया जाता है, पशु पालन कहलाता है। पालतू पशु के चार वर्ग हैं :

  • दुधारू पशु
  • श्रमिक पशु
  • मांस तथा अण्डा उत्पादक पशु
  • चर्म उत्पादक पशु।

प्रश्न 20.
मिश्रित मछली संवर्धन किसे कहते हैं?
उत्तर :
इस तंत्र में एक ही तालाब में 5 से 6 प्रकार की मछलियों का पालन होता है। इसमें मंछलियाँ आहार के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं, वे अपना-अपना आहार तालाब के अलग-अलग क्षेत्रों से ग्रहण करती हैं। इसमें मछलियों के उत्पादन में दूसरे तंत्रों की अपेक्षा में शीघ्र वृद्धि होती है।

प्रश्न 21.
जन्तु उत्प्लावी किसे कहते हैं? उदाहरण दो।
उत्तर :
प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता जन्तु उत्लावी तथा बेन्थोस होते हैं। (जल की सतह पर तैरने वाले सूक्ष्मदर्शीय जन्तुओं को जन्तु उत्त्लावी कहते है। जैसे – अमीबा, कीट, लार्वा इत्यादि। जल की तलहटी में रहने वाले जन्तुओ को बेन्थोस कहते हैं; जैसे – सीप, घोधा इत्यादि।) ये हरे पौधों को अपने भोजन के रूप में उपयोग करते हैं।

प्रश्न 22.
विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तन्न्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
पारिस्थितिकी तंत्र के दो प्रकार हैं :
(i) प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र,
(ii) मानवनिर्मित पारिस्थितिकी तंत्र।

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(i) प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र : माकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र वह होता है जो पूरी तरह से प्राकृतिक द्वारा निर्मित होता है। इसके निर्माण में मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता। प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को दो भागों में बाटा जाता है :

  • जलीय पारिस्थितिकी तंत्र,
  • स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र।

(ii) मानवमिर्मित पारिस्थितिकी तंत्र : पारिस्थितिक तंत्र को मनुष्यों द्वारा अपने आवश्यकता के अनुसार ढालने के क्रिया मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र कहलाता है।

मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार : कृषि परितंत्र, वृक्षारोपण परितंत्र, नगरीय परितंत्र, एग्रीकल्वर परितंत्र, बाँध परितंत्र, जलाशय परितंत्र, ग्रामीण परितंत्र, आघ्योगिक परितंत्र, प्रयोगशाला परितंत्र।

प्रश्न 23.
जैव-भू-रासायनिक चक्र क्या है?
उत्तर :
जीवमंडल में प्राणियों तथा वातावरण के बीच रासायनिक पदार्थों के आदान-प्रदान की चक्रीय गति को जैव-भू -रासायनिक चक्र कहते है। पृथ्वी के वातावरण में सभी तत्वों की एक निध्चित मात्रा होती है। जिसकी आवश्यकता जीवधारियों को हमेशा रहती है।

प्रश्न 24.
ऊर्जा संरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) : अधिकतर उद्योगों एवं यातायात के साधनों में ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। उद्योगों को प्रदृषण का जनक कहा जाता है। ऊर्जा की बर्बादी इन्हीं उद्योगों में मुख्य रूप से होती हैं। पेट्रो रसायन उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग, वस्त्र उद्योग, कागज उद्योग के अतिरिक्त यातायात व्यवस्था में भी ऊर्जा की भारी बरादी होती है। हम अपने दैनिक जीवन में ऊर्जा की बचत के लिए बहुत सारे उपाय कर सकते हैं।

प्रश्न 25.
वातावरण के चार प्रमुख भाग कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
वातावरण के निम्नलिखित चार भाग होते हैं –

  • वायुमण्डल (Atmosphere)
  • जल मण्डल (Hydrosphere)
  • स्थलमण्डल (Lithosphere)
  • जीवमण्डल (Biosphere)

प्रश्न 26.
उत्पादक से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
किसी इकोतंत्र का वह जैविक अवयव जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य की किरण ऊर्जा को प्रहण कर उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करके अपने शरीर में संचित कर लेता है, उत्पादक कहलाता है। जैसे – हरे पौधे ।

प्रश्न 27.
वातावरण किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सजीवों के चारों तरफ पाये जाने वाले अवयवों को उसका वातावरण कहते हैं ।

प्रश्न 28.
उपभोक्ता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वे सभी सजीव जो अपने भोजन का निर्माण स्वयं नहीं करते हैं तथा अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या अग्रत्यक्ष रूप में उत्पादक पर निर्भर रहते है, उन्हें उपभोक्ता कहते हैं।

प्रश्न 29.
अपघटनकर्ता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वे सूष्मदर्शी जीव जो पौधों तथा जन्तुओं के शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में विघटित कर देते हैं, अपघटनकर्ता कहलाते हैं। जैसे – फंगस, मृतोपजीवी बैक्टीरिया आदि।

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प्रश्न 30.
ऊर्जा प्रवाह क्या है ?
उत्तर :
ऊर्जा प्रवाह (Energy) : सूर्य के प्रकाश में उपस्थित विकिरण ऊर्जा के रूपान्तरित होकर इकोसिस्टम के उत्पादक स्तर में प्रवेश कर तथा वहाँ से उपभोक्ता तथा अपघटनकर्ता स्तरों में स्थानान्तरित तथा रूपान्तरित होने की क्रिया को ऊर्जा प्रवाह कहते हैं।

प्रश्न 31.
जैवमण्डल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
जैवमण्डल : स्थलमण्डल, जलमण्डल, वायुमण्डल तथा इसमें पाये जाने वाले सभी जन्तुओं तथा पौघों को सम्मिलित रूप से जैवमण्डल कहा जाता है। इसका विस्तार वायुमण्डल से 40,000 फुट से अधिक ऊँचाई तक, समुद्र में 30,000 फुट से अधिक गहराई जक तथा जमीन पर 10,000 फुट नीचे तक होता है।

प्रश्न 32.
जीव आपसी सम्बन्ध बनाये रखने के लिए कौन-कौन सी क्रियाएँ करते हैं ?
उत्तर :
जीव आपसी सम्बन्ध बनाये रखने के लिए निम्नलिखित कियाएँ करते हैं।

  • परजीविता (Parasitism)
  • सहयोगिता (Co-operation)
  • प्रतियोगिता (Competition)
  • अन्योन्याश्रय (Predation)

प्रश्न 33.
मुख्य प्राकृतिक साधन क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
मुख्य प्राकृतिक साधनों में सौर ऊर्जा, वायु, जल, भूमि, पेड़-पौघे, प्रकाश, पृथ्वी का ताप, जीवाश्म ईधन, खनिज, जन्तु तथा सूक्ष्म जीव सम्मिलित हैं।

प्रश्न 34.
वैकल्पिक भोजन क्यों आवश्यक हैं।
उत्तर :
अनाओं की कमी और जनसंख्या में वृद्धि के कारण लोग भोजन के प्रमुख सोतों के अलावे कुछ अन्य सोतों का भी उपयोग कर रहें हैं। इन्हें वैकल्पिक खाद्य सोत कहते है। कुछ लोग भोजन के रूप में कीटो को तथा कुत्ते की मांस को भी खाते हैं। कीट पोषक पदार्थों के अच्छे स्रोत हैं। कुत्ते की मांस में अन्य मांस की अवेक्षा ऊर्जा अधिक मिलती है। मांस महंगा होने के कारण आजकल लोग उसके स्थान पर सोयाबीन का भी प्रयोग करते हैं। ये सभी भोजन के वैकल्पिक सोत हैं।

प्रश्न 35.
इकोसिस्टम के तीन कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थो के नाम बताइये ?
उत्तर :
कार्बनिक पदार्थ : कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड्स
अकार्बनिक पदार्थ : कैल्शियम, नाइट्रोजन, सल्फर, फास्फोरस, ज़ल, मिट्टी आदि।

प्रश्न 36.
वनों की उपयोगिता क्या-क्या है ?
उत्तर :
वनों की उपयोगिता :

  • वायुमण्डलीय कायों का नियंत्रण (Atmospheric Regulation)
  • अपरदन नियंत्रण (Erosion Control)
  • जल सम्पदा का संरक्षण (Watershed Protection)
  • स्थानीय तथा उत्पादन मूलक उपयोग (Local and productive use)

प्रश्न 37.
जल संरक्षण के कोई,तीन उपाय बताइये।
उत्तर :
जल संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए :

  • कारखानों से निकले बेकार पदार्थो से उपफल (By Prdocut) बनाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • शहरों के मलमूत्र को नदियों में नहीं गिराना चाहिए बल्कि इसे एकत्र कर किसी आर्थिक लाभ वाले काम में लगाना चहिए।
  • समुद्र तथा नदी में तेल से चलने वाले वाहनों पर प्रतिबंष लगा देना चाहिए।

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प्रश्न 38.
प्राकृतिक संसाधनों को कितने भागों में बाँटा गया है, वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्राकृतिक संसाधनों को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है –

  • नवीनीकरण योग्य प्राकृतिक साधन (Renewable natural Resourse) : वे प्राकृतिक संसाधन मिट्टी, जल, पेड़, जन्तु आदि हैं जिनकी पुन: आपूर्ति हो सकती है।
  • नवीनीकरण अयोग्य प्राकृतिक साघन (Non-renewable natural Resource): जिन प्राकृतिक सम्पदाओं की आपूर्ति क्षय के बाद सम्भव नही है। जैसे – प्राकृतिक गैसें, कोयला, पेट्रोलियम आदि।
  • अपरिवर्तनशील प्राकृतिक साधन (Unalterable natural Resource) : जिन प्राकृतिक साथनों का क्षय जल्दी सम्भव नहीं होता, जैसे – समुद्र, प्राकृतिक दृश्य आदि।

प्रश्न 39.
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की तीन विशेषताएं बताइये।
उत्तर :
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की विशेषताएँ :

  • ऊर्जा प्रवाह एक मुखी होता है। अर्थात यह प्रवाह उत्पादक से उपभोक्ता की ओर होता है।
  • पदार्थीय चक्रों (N, O, C आदि) की तरह ऊर्जा प्रवाह का चक्र नहीं चलता।
  • जब ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरित होती है तब कुछ ऊर्जा का नाश होता है।

प्रश्न 40.
जैव भू-रासायनिक चक्र का महत्व बताइये।
उत्तर :
जैव भू-रासायनिक चक का महत्व :

  • इन चक्रों के द्वारा सजीवों को आवश्यक तत्वों की आपूर्ति होती है।
  • इकोसिस्टम को संतुलित करने के लिए ये चक्र अत्यन्त आवश्यक होते हैं।
  • पृथ्वी पर सभी सजीवों का अस्तित्व बनाये रखने के लिए यह चक्र आवश्यक है।
  • मिट्टी की उर्वराशक्ति को बनाये रखने में इन चकों का महत्वपूर्ण योगदान है।
  • इन चकों के माष्यम से निर्जीव उपादान सजीव उपादान में परिवर्तित हो जाते हैं।

प्रश्न 41.
चरण खाद्य मृंखला क्या है ?
उत्तर :
चरण खाद्य श्रृंखला (Grazing food chain) : वह भोजन भृंखला जो पौधों से शुरू होकर मांसाहारी जन्तुओं के साथ समाप्त हो जाती है उसे चरण खाह श्रृंखला कहते हैं।
जैसे – उत्पादक → खरगोश → सियार → शेर
हरे पौधे → प्रथम उपभोक्ता → द्वितीय उपभोक्ता → तृतीय उपभोक्ता।

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प्रश्न 42.
खाद्य शंखला तथा खाद्य जाल में अन्तर बताइये।
उत्तर :
खाद्य शृंखला (Food Chain) तथा खाद्य जाल (Food Web) में अन्तर :

  • खाद्य शृंखला का निर्माण खाब्ध जाल से नहीं होता है बल्कि खाध जाल का निर्माण खाद्य भृंखला से होता है।
  • खाद्य जाल का कोई प्रकार नहीं होता है, जबकि खाद्य शृंखला कई प्रकार की होती है।
  • इकोसिस्टम के लिए खाद्य जाल, खाद्य भृंखला से अधिक मौलिक होता है।

प्रश्न 43.
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की तीन अवस्थायें बताइये।
उत्तर :
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की तीन अवस्थायें –

  • ऊर्जा का ग्रहण
  • ऊर्जा का उपयोग
  • ऊर्जा का स्थानान्तरण

प्रश्न 44.
खाद्य मृंखला तथा खाद्य जाल के बीच आपसी सम्बन्य को बताइये।
उत्तर :
खाद्य शृंखला तथा खाद्य जाल के बीच आपसी सम्बन्थ : किसी इकोसिस्टम में उत्पादक के उपभोक्ताओं तक भोज्य पदार्थ के क्रमबद्ध स्थानान्तरण से उत्पन्न शृंखला को खाद्य-शृंखला का सुंयक्त रूप खाद्य जाल (Food Web) कहलाता है। इसलिए खाद्य जाल का निर्माण खाद्य शृंखलाओं से होता है तो आपस में मिलकर इकोतंत्र का मूल आधार बनाता है। अत: खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल के बीच घनिष्ठ सम्बन्ष है।

प्रश्न 45.
प्रकृति में सजीव किस प्रकार संगठित होते हैं ?
उत्तर :
प्रकृति में सजीव चार स्तरों पर संगठित होते हैं –

  • व्यक्तिगत स्तर
  • आबादी स्तर
  • समुदाय स्तर
  • इकोतंत्र स्तर ।

प्रश्न 46.
अनुकूलन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सभी सजीवों के उस गुण को जिनके द्वारा ये अपने वातावरण में सहज ढंग से जीवन यापन करते हुए अपनी वंश परम्परा को कायम रखते हैं, उसे अनुकूलन कहते हैं।

प्रश्न 47.
पौधो में प्रकाश के प्रति अनुकूलन बताइए ।
उत्तर :
कुछ पौधे छाया में रहना पसंद करते है तो कुछ प्रकाश में । छाया में उगनेवाले पौधों की पत्तियों में क्लोरोफिल का वितरण असमान होता है । जैसे क्रोटान प्रकाश में उगने वाले पौधों में प्रकाश संश्लेषण और श्वसन की दर तेज होती है ।

प्रश्न 48.
जन्तुओं में प्रकाश के प्रति अनुकूलन बताइए।
उत्तर :
सुबह में सूर्य का प्रकाश मिलने के साथ ही जन्तुओं की दैनिक क्रिया का मारम्भ हो ज़ाता है । अंधकार में रहनेवाले जन्तुओं को दैनिक क्रिया और व्यवहार में भी अन्तर देखने को मिलता है । जैसे -ऊल्लू।

प्रश्न 49.
आर्द्रता के प्रति पौधों में अनुकूलन बताइए ।
उत्तर :
जल की अधिकता वाले पौधों की पत्तिया बड़े आकार की होती है। इनकी सतह पर स्टोमेंटा की संख्या अधिक होती है । जैसे – कमल । जल की कमी वाले स्थान में उगनेवाले पौधों की पत्तियाँ काँटे के रूप यें परिवर्तित हो जाती है। जैसे – नागफनी।

प्रश्न 50.
मानव जनसंख्या के वृद्धि के क्या कारण है ?
उत्तर :
मानव जनसंख्या के वृद्धि के कारण –

  • शिक्षा की कमी एवं बेरोजगारी।
  • मृत्यु दर में कमी।
  • अकाल एवं महामारी पर नियंत्रण ।

प्रश्न 51.
आबादी के विस्फोट के परिणाम के बारे में बताइए ।
उत्तर :
आबादी में अत्यधिक वृद्धि के निम्नलिखित परिणाम होंगे –

  • भूखमरी बढ़ेगी
  • बेरोजगारी बढ़ेंगी
  • पीने के जल की कमी होगी
  • कपड़े एवं आवास की भी कमी होगी।

प्रश्न 52.
किसी समुदाय में जंतु और पौधे किस प्रकार से एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं ?
उत्तर :
भोजन : सभी जन्तु अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में प्रकाश संश्लेषी पौधों पर निर्भर रहते हैं।
प्रजनन : पौधे परागण की क्रिया के लिए जन्तुओं जैसे कीट, चमगादड़, पक्षी इत्यादि पर निर्भर रहते हैं।
सुरक्षा : कुछ कीट पौधों में छिप कर रहते है । कुछ सुक्ष्म शैवाल मालुस्क जन्तुओं के शरीर पर चिपके हुए आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 53.
प्राकृतिक संसाधन किसे कहते हैं ? इनके नाम बताइए।
उत्तर :
प्रकृति में मिलने वाले पदार्थो को प्राकृतिक संसाधन कहते हैं।
नाम :

  • जंगल
  • जल
  • भोजन
  • ऊर्जा।

प्रश्न 54.
भोजन के स्रोत क्या है ?
उत्तर :
भोजन के सोत दो है –

  • पौधा
  • जन्तु ।

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प्रश्न 55.
कृषि की शाखाओं का नाम बताइए ।
उत्तर :
कृषि की निम्नलिखित शाखाएँ है –

  • एग्रोनामी
  • हार्टिकल्बर
  • ओलोरी कल्चरं।

प्रश्न 56.
फसल के कितने प्रकार होते हैं ?
उत्तर :
फसल के चार प्रकार होते हैं-

  • धान्य फसल – जैसे धान, गेहूँ, बाजरा ।
  • दाल फसल – जैसे बना, मटर, अरहर ।
  • तेल बीज फसल – जैसे सरसो, मूँगफली, सूर्यमुखी।
  • मसाले – जैसे मिर्चा, हल्दी, काली मिर्च ।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
इकोसिस्टम के विभिन्न जैविक घटक की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इकोसिस्टम के विभिन्न जैविक घटक की भूमिका :-
उत्पादक की भूमिका (Role of Producer) :

  • उत्पादक अजैविक वातावरण से जल, CO2 की सहायता से प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा ग्लूकोज़ का निर्माण कहते हैं।
  • ये सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं।
  • ये अजैविक अवयवों को जैविक अवयवों में बदलने में सहायता करते हैं।

उपभोक्ता की भूमिका (Role of Consumer) : प्रत्यक्ष रूप का अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता उत्पादक पर निर्भर हैं। ये उत्पादक द्वारा निर्मित भोजन को ग्रहण कर इकोसिस्टम को संतुलित बनाये रखने में सहायता करते हैं।
अपघटन कर्ता की भूमिका (Role of Decomposer): अपघटनकर्ता मृत जीवद्रव्य के जटिल यौगिकों को इन्जाइम की सहायता से सरल रूप में तोड़ देते हैं। इस क्रिया में अपघटित पुदार्थों को भोजन के रूप में अवशोषित करते हैं तथा कुछ सरल रूपों को वातावरण में लौटा देते हैं।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 2.
वनों के कार्य के बारे में लिखिए।
उत्तर :
वनों के कार्य :
(i) जल सम्पदा की सुरक्षा (Watershed Protection): वर्षा जल को सोखने तथा उसके प्रवाह को धीमा करने में वन भूमि की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके कारण भूमि में जल-स्तर और ऊपर आ जाता है और कुएं तथा ट्यूबवेल नहीं सूखते हैं। जल का संरक्षण कर इसे धीमी गति से नदियों, तालाबों झीलों तथा बाँध की ओर प्रवाहित करतें हैं। वनों से वायुमण्डलीय आर्द्रता बढ़ती है तथा वायुमण्डल में नमी बनी रहती है।

(ii) वायुमण्डलीय कार्यों में नियंत्रण (Atmospheric Regulation) : जलवाष्प के उत्सर्जन के दौरान सौर ऊर्जा का अवशोषण करना

  • पौधों की वृद्धि के लिए CO2 का स्तर बनाए रखना
  • स्थानीय जलवायु की दशायें बनायें रखना। मनुष्यों तथा सभी जीवों के श्वसन के लिए विभिन्न प्रकार के दहनों के लिए आवश्यक आक्सीजन तथा जो कार्बनडाईआक्साइड त्यागा जाता है, उसे अवशोषित करने के लिए हम पौधों पर ही निर्भर हैं।
  • अपरदन नियंत्रण (Erosion Control) : मृदा अपरदन रोकने के लिए पौधे मृदा का आवरण बनाते हैं। पौधों की जड़े, घास, झाड़ियाँ इत्यादि भूमि की ऊपरी उपजाऊ परत को जकड़े रखती हैं जिसमें भूमि का कटाव नहीं होता है। मिट्टी के पोषक तत्वों तथा ढाँचे को बनाए रखता है।

(iv) उत्पादक उपयोग (Productive use) : वन इकोसिस्टम में संतुलन बनाये रखने का काम करते हैं। वन अनेक जीव जन्तुओं के प्राकृतिक आवास होते हैं। वनों से प्राप्त उपयोगी काष्ठ (Timber) द्वारा अनेक घरेलू तथा औद्योगिक कार्यों तथा परिवहन के साधन तथा उपकरण बनाये जाते हैं। गोंद, रबर, रेजिन, कार्क, रेशे, मोम, तेल, तारपीन, कपूर, कुनैन, औषधीय पदार्थ आदि बहुत सारे उपयोगी पदार्थ वनों से प्राप्त होते हैं।

बहुत सारे आदिवासी वर्ग वनों में निवास करते है तथा इनसे आजीविका प्राप्त करते हैं। वनों से जलाने की लकड़ी प्राप्त होती है। लकड़ी एक उपयोगी कच्चा माल भी है जो कागज, लुगदी, दियासलाई, प्लाईडड, पैकिंग, सामर्गी, सिन्थेटिक रेशम आदि बनाने में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
ऊर्जा प्रवाह क्या है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) : सौर ऊर्जा का रूपान्तरण होकर उत्पादक स्तर में तथा यहाँ से उपभोक्ता व अपघटनकर्ता स्तरों में स्थानान्तरित होने की क्रिया को ऊर्जा प्रवाह कहते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का स्रोत सूर्य है। पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का बहाव एक ही दिशा में (Unidirectional) होता है। सौर ऊर्जा को अवशोषित कर हरे पड़े पौधे उसे रासायनिक ऊर्जा के रूप में परिवर्तित कर अपने शरीर में संचित कर लेते हैं।

उत्पादक में संचित इस ऊर्जा का उपयोग उनकी विभिन्न क्रियाओं में होता है तथा शेष ऊर्जा का स्थानान्तरण प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता में होता है। इस प्रकार प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा का कुछ भाग उनके मेटाबोलिक क्रियाओं में खर्च हो जाता है तथा शेष भाग द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता में स्थानान्तरित हो जाता है।

उपभोक्ता के प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का क्षय होता है अत: उत्पादको द्वारा अर्जित कुल ऊर्जा (Gross energy) का कुछ भाग ही प्रथम उपभोक्ता ग्रहण करते है। उसी प्रकार प्रथम उपभोक्ता से क्रमश: द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता ऊर्जा का कुछ भाग ही ग्रहण करते हैं। उसका उपयोग करते हैं और कुछ ऊर्जा ताप ऊर्जा (Heat energy) में बदल जाती है।

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प्रश्न 4.
प्रवासन क्या है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
प्रवासन (Migration) : जब जीवधारी अपने गृह स्थान से स्थानान्तरित होकर अन्यत्र जाते हैं लेकिन पुन: अपने गृह क्षेत्र में लौट आते हैं, तो उसे स्थानान्तरण या प्रवासन कहा जाता है। इसे आव्रजन-प्रवजन भी कहा जाता है। इसका प्रभाव आबादी पर कम पड़ता है। उदाहरण के लिए साइबेरिया की कड़के की सर्दों से आक्रान्त बहुत सारे पक्षी भारत में आते हैं लेकिन ग्रौष्म ऋतु में पुन: वापस चले जाते हैं। बहुत सारे श्रमिक नगरों में अर्थोपार्जन के बाद अपने ग्रामीण गृह में लौट जाते हैं और कुछ समय के बाद पुन: शहर वापस आते हैं।

इसके अन्तर्गत आप्रवासन तथा उत्पवासन का उल्लेख किया जा सकता है।
आप्रवासन : उसी जाति के व्यक्तियों की वह संख्या है जो दी गई समय अवधि के दौरान आवास में कहतं और से आये हैं।
उत्रवासन : आबादी के व्यक्तियों की वह संख्या है जो दी गई समयावधि के दौरान आवास छोड़कर अन्यत्र चले गये हैं।

प्रश्न 5.
समुदाय स्तर किसे कहते हैं ? जीवों के आपसी सम्बन्धों का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
समुदाय स्तर (Community Level) : प्रकृति में विभिन्न जीवों की आबादियाँ या समष्टियाँ मिल-जुलकर रहती है, अर्थात् ये समष्टियाँ जोवन-संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु परस्पर आश्रित होती हैं। ऐसा कभी भी नहीं होता है कि हमें किसी स्थान पर एक ही प्रकार की जाति दिखाई पड़े, क्योंकि यह काफी समय तक जीवित नहीं रह सकती, जैसे गौरैया को खाने के लिए कीड़े, बीज आदि चाहिए एवं रहने के लिए वृक्ष भी चाहिए जहाँ उसका आवास-स्थान (habitat) या घोंसला बन सकता है।

इस तरह एक स्थान पर वातावरणीय अनुकूलता के अनुसार विभिन्न जाति के जीवधारी (जंतु तथा पौधे) एक साथ समूह बनाकर रहते हैं। अतः किसी विशिष्ट आवास-स्थान की जीव-समष्टियों का स्थानीय संघ समुदाय कहलाता है। इसे प्रायः बायोटा (biota) अथवा जैव समुदाय (biotic community) भी कहते हैं।

आवास-स्थान की भिन्नता के आधार पर जैव समुदाय में भी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं, जैसे जीव की विभिन्न जातियाँ जो तालाब में रहती हैं, उन्हें तालाब समुदाय (pond community) कहते है। इसी प्रकार, किसी भी पर्यावरण, जैसे वन, घास के मैदान, मरुस्थल आदि में पाई जानेवाली जीवो की जातियाँ पारस्परिक निर्भरता के आधार पर वन समुदाय (forest community), घासस्थली समुदाय (grassland community), मरुस्थल समुदाय (desert community) आदि बनाती हैं।

प्रश्न 6.
जंगल की कटाई के क्या-क्या कारण हैं ? वर्षा जल संचय क्या है?
उत्तर :
जंगल की कटाई के कारण : वर्तमान समय में जंगल की कढाई बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए चिन्ता का विषय है। बढ़ती आबादी, कृषि के लिए जमीन, नये-नये शहरों की बढ़ती खपत, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, आवासीय मकान आदि जंगल की कटाई के मुख्य कारण हैं। औद्योगिक फैलाव, सड़को का निर्माण, घाटी-बाँध योजनायें, खनिज उत्बन्न के कारण भी जंगल नष्ट होते जा रहे हैं।

वर्षा जल संचय (Rain Water Harvesting) : वर्षा के दिनों में छोटे-छोटे तालाब, जलाशय, झील बनाकर उसमें जल संचय करने से भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होती है। सूखाप्रस्त या जल की कमी वाले क्षेत्रो में इस संचय किये गये जल का घरेलू उपयोग, सिंचाई, उसे स्वच्छ कर पेय जल की आपूर्ति की जा सकती है। नगरों में छत के ऊपर टंकी बनाकर उसमें जल का संचय कर उसका उपयोग कपड़े घोने, बर्तन धोने, बागवानी आदि में किया जा सकता है। वर्षा के जल का इस तरह संचय कर भविष्य में इसके उपयोग करने की प्रकिया को जल-संचय कहते हैं।

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प्रश्न 7.
इकोसिस्टम क्या है ? पारिस्थितिकी तंत्र के जैविक तथा अजैविक अवयवों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इकोसिस्टम (Ecosystem) : किसी स्थान विशेष में रहने वाले जैव समुदाय तथा अजैविक वातावरण में स्थापित में स्थापित परस्पर क्रियात्मक संबंध को इकोसिस्टम कहते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र के अवयव (Components of Ecosystem) :

  • अजैविक (Abiotic) तथा
  • जैविक (Biotic)

अजैविक अवयव (Abiotic Component) : यह निम्न तीन प्रकार के होते हैं :-

  • अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic substance) : आक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर, फास्फोरस, कैल्शियम, खनिज लवण आदि।
  • कार्बनिक पदार्थ (Organic substance) : प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट लिपिड आदि। ये सभी जीवधारियों के शरीर में पाये जाते हैं। अपघटन कर्ता इनका विघटन कर देते हैं जिसे हरे पौधे पुन: ग्रहण कर लेते हैं।
  • भौतिक पदार्थ (Physical substance) : प्रकाश, तापक्रम, सौर ऊर्जा, वायु, जल, आर्द्रता, आदि सभी भौतिक अवयव हैं जो सजीवों की प्राणशक्ति को बनाये रखने में सहायक है।

जैविक अवयव (Biotic component) : इकोसिस्टम के जैविक अवयव निम्न है : –

  • उत्पादक (Producer),
  • उपभोक्ता (Consumer) तथा
  • अपघटनकर्ता (Decomposer)

उत्पादक (Producer) : वे जीवधारी जो अपने भोजन का निर्माण स्वय करते हैं, उत्पादक कहलाते हैं। ये हरे पौधे होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। आम, कटहल, पीपल, जल में तैरने वाले छोटेछोटे पौधे सभी उत्पादक कहलाते हैं।

उपभोक्ता (Consumer) : वे जीवधारी जो अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर करते हैं; उपभोक्ता कहलाते हैं। उपभोक्ता को निम्नलिखित तीन श्रेणीयों में बाँटा गया है :-

  • प्रथम श्रेणी का उपभोक्ता (Primary Consumer) : वे उपभोक्ता जो अपने भोजन के लिए पूर्णरूप से उत्पादक अर्थात हरे पेड़-पौधों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें प्रथम श्रेणी का उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – बकरी, गाय, टिड्डा, खरगोश, चूहा आदि।
  • द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता (Secondary Consumer) : वे उपभोक्ता जो अपने भोजन के लिए प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता पर निर्भर रहते हैं, उन्हें द्वितीय श्रेणी का उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – मकड़ी, टोड, सर्प, छूछून्दर आदि।
  • तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता (Teriary Consumer) : वे उपभोक्ता जो द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं को खाते है, उन्हें तृतीय श्रेणी का उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – चील, गिद्ध, बड़ी मछली, बाघ, शेर, चिता, शार्क, बाज आदि।

अपघटन कर्ता (Decomposer) : वे जीवधारी जो मृत पौधों तथा जन्तुओं के शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित कर देते हैं, अपघटनकर्ता कहलाते हैं। जैसे – जीवणु, फंगस आदि।

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प्रश्न 8.
खाद्य के वैकल्पिक स्रोतों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
खाद्य के वैकल्पिक स्रोत (Alternate food sources) : वर्तमान में विश्व में वैकल्पिक खाद्य के संसाधन काफि सिमटे हुए हैं। फिर भी खोज तथा प्रयास जारी है। ऐसी पैदावार की खोज हो रही है जो किसी भी मिट्टी तथा वातावरण में उपज सके तथा कम समय में ज्यादा उपज दे सकें।

उदाहरण स्वरूप मान्निगा ओलिफेरा (Mornige oleifera) जो सहजन वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है जो किसी भी मिट्टी तथा वातावरण में उगाया जा सकता है। इसके बीज में पाए जाने वाला एन्टिबोयोटिक जल को स्वच्छ बनाते हैं। इसकी पत्ती में प्रोटीन, गाजर से चार गुना विटामिन A तथा संतरे से सात गुना अधिक विटामिन C पाया जाता है। खाद्य का अभाव होने पर इसे पकाकर खाया जा सकता है।

ब्रोकली (Broccoli), काले (Kale), एवोकेडिज (Avocadoes), वी पोलेन (Bee pollen) इत्यादि भी अधिक उपजाक वाले कुछ अन्य वैकल्पिक खाद्य हैं। मैक्सिको, कोरिया तथा अफ्रीका आदि में कीटों को वैकल्पिक खाद्य में रूप में व्यवहार किया जाता है।

झींगुर, झींगा तथा तथा गोबरेला आदि ऐसे कीट है जो प्राय: सभी देशों में सामान्य हैं प्रोटीन, लौह तथा कैल्शियम आदि कीटों में पाये जाते हैं।कीटों को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। खाद्य के अभाव में वैकल्पिक खाद्ध के रूप में उपयोग करके जीवन की रक्षा हो सकती है।

प्रश्न 9.
विश्व खाद्य समस्या का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
विश्व खाद्य समस्या : विश्व की जनसंख्या में से 1.3 अरब लोग भुखमरी की हालत में रहते हैं और 80 करोड़ लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता तथा 50 करोड़ लोग कुपोषण की समस्याओं से ग्रस्त हैं। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अनेक देशों में हरित क्रान्ति के एक या दूसरे स्वरूपों में उपयोग के परिणामस्वरूप विश्व का खाद्य उत्पादन तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया है, परन्तु मानव आबादी की तीव्र वृद्धि, विशेषकर विकासशील राष्ट्रों ने खाद्य उत्पादन की इस प्रभावशाली वृद्धि को बहुत पीछे छोड़ दिया है। इसके बावजूद लगभग एक सौ से अधिक राष्ट्रों को आज भी विकसित राष्ट्रों से खाद्य सामग्रियाँ आयात करनी पड़ती हैं।

खाध्य पदार्थों की कमी के कारण अनेक विकासशील देशों में कुपोषण एवं भूखमरी फैली रहती है। ऐसे विकासशील राष्ट्रों में भुखमरी का मुख्य कारण निर्धनता या गरीबी होती है। निर्धनता खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद गरीबों के उत्थान और उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामगी खरीदने से रोकती है।

प्रश्न 10.
पारिस्थितिकी व्यवस्था के कितने स्तर होते हैं ? किसी एक का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
परिस्थितिकी व्यवस्था के चार स्तर होते हैं –

  • जीव या व्यष्टि स्तर (Individual Level)
  • जनसंख्या स्तर (Population Level)
  • समुदाय स्तर (Community Level)
  • परितंत्र स्तर (Ecosystem Level)

जीव या व्यष्टि स्तर (Individual Level) : यद्यपि जैव व्यवस्था के बहुत से स्तर हैं, लेकिन सबसे सुस्पष्ट इकाई जीव है। किसी जीव में अपनी जीव क्रिया होती है जो किसी अन्य जीव से भिन्न होती है। कुछ जीव, जैसे अमीबा, क्लेमाइडोमोनास आदि एक-कोशिकीय होते है, अर्थात् ऐसे जीवों का शरीर केवल एक कोशिका का बना होता है और इसी कोशिका के द्वारा जीवन-संबंधी सारे कार्य सम्पन्न होते है।

लेकिन जटिल जीव जैसे वृक्ष, अधिकांश जंतुएँ, मनुष्य आदि बहुकोशिकीय होते है, अर्थात् उनका शरीर असंख्य कोशिकाओं का बना होता है, जो अनेक विशिष्ट कार्य सम्पन्न करते हैं। प्राय: जीवों की गणना की जा सकती है, लेकिन बहुत से मामलों, जैसे घास, स्पंज या कोरल की कॉलोनियों में जीव कार्बनिक आधार पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं एवं ऐसे मामलों में जीवों के अष्ययन के लिए विशेष दक्षता की आवश्यकता होती है। कायिक, अलैंगिक या लेंगिक जनन-क्रिया द्वारा जीव जनन करते हैं एवं संतति गुणों में अपने माता-पिता सें मिलती-जुलती है।

इससे जीवन की तारतम्यता कायम रहती है। पृथ्वी तल पर पाये जाने वाले पौधे और प्राणी हजारों जातियों और प्रजातियों में विभक्त हैं जिनकी आनुवंशिकी, आकृति, संख्या और पारिस्थितिकी क्षमता भिन्न-भिन्न हैं । कुछ जातियों (Species), में पर्यावरण से अनुकूलन (Adaptation) की क्षमता अधिक होती है जबकि कुछ में यह बहुत कम पायी जाती है। फलत: जिन जातियों में यह क्षमता अधिक होती है उनकी कुल संख्या अधिक और पृथ्वी तल पर वितरण भी विस्तृत क्षेत्र में पाया जाता है।

एक विशेष भौतिक परिवेश में पलने वाली जैव जाति अपने जीवन चक्र को यथासम्भव संतुलित बनाये रखने का प्रयास करती है ताकि उसकी वंश पर म्परा चलती रहे। इस प्रकार पर्यावरण और जीवों की अन्त:प्रक्रिया एक निश्चित व्यवस्था से संचालित होती है जिसे हम प्राकृतिक नियम कह सकते हैं। इस शाश्वत नियम का अनुपालन प्रत्येक जीव को करना पड़ता है जो उसके आचरण से प्रकट होता है।

इस प्रकार पर्यावरण और जीवों की अन्तःप्रक्रिया पारिस्थितिकी तंत्र में दो रूप में देखने को मिलती है – पहला एकांकी जाति की अन्त:प्रक्रिया से उत्पन्न पारिस्थितिकी और दूसरी अनेक जातियों की सामूहिक अन्त:पक्रिया से उत्पन्न पारिस्थितिकी। जब एकाकी जाति (individual species) की पारिस्थितिकी के संदर्भ में उसके जीवन- चक्र की विविध अवस्थाओं की अन्त:प्रक्रिया को पर्यावरण और अन्य जीवों के संदर्भ में अध्ययन किया जाता है तो उसे स्वपारिस्थितिकी (Autecology) कहते हैं।

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प्रश्न 11.
प्रकृति जीवधारी को संगठित किस प्रकार से करती है ? संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
प्रकृति जीवों की जननी, पालनहारी और विनाशक है । जीव भी प्रकृति का उत्पादक, उपभोक्ता, आक्रामक एवं स्वार्थी तत्व हैं। प्रकृति द्वारा उत्पन्न जीव पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मानव पर्यावरण की गोद में पलते हैं और अपनी पारिस्थितिकी से अन्तःप्रक्रिया करते हुए पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। इस परस्पर सम्बन्ध को जीवन का आधार कहा जा सकता है क्योंकि बिना जीव प्रकृति का मूल्य नहीं है, और बिना प्रकृति का जीवन सम्भव नहीं है।

इसी गहरे सम्बन्ध की अभिव्यक्ति पारिस्थितिकी संतुलन में प्रकट होती है। वास्तव में परस्पर सम्बन्ध को संतुलित बनाये रखने में प्राकृतिक नियम अपने ढंग से क्रियाशील रहते है। पारिस्थितिकी तंत्र में भौतिक और जैविक शक्तियाँ एक दूसरे को प्रभावित करने में कभीकभार सीमा का अतिक्रमण भी कर जाती है, जिसे प्रकृति अपने ढंग से नियंत्रित करती है।

पारिस्थितिकी तंत्र में भौतिक तथा जैविक शक्तियाँ अपने ढंग से एक दूसरे को प्रभावित करती हैं। अतः पौधे की सफलता का कारण ज्ञात करना अत्यन्त कठिन कार्य है। इसके अतिरिक्त पौधे आनुवंशिक गुणों की सुघट्यता (Plasticity) में एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

प्रश्न 12.
जल का कृषि और उद्योग में क्या महत्व है ?
उत्तर :
जल का कृषि और उद्योग में महत्व :
(i) पीने के लिए (Drinking) : हम प्यास लगने पर पानी पीते हैं। जितने भी जीवधारी (भाणी या पौधे) हैं उनकी संरचना में पानी का एक बड़ा भाग है। मनुष्य के स्वयं की बनावट में 60 प्रतिशत पानी है। यही नहीं बल्कि उसकी सम्पूर्ण क्रियाओं में और उसके स्वयं के रखरखाव में भी पानी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह हड्डियों के बीच के जोड़ों को चिकना बनाये रखता है, ताकि वे आपस में रगड़कर एक दूसरे को हानि न पहुँचाए।

ऊतक (Tissues) और पेशियों (Muscles) को घेर कर उन्हें आपस में चिपकने से रोकता है। शरीर के अत्यन्त महत्तूर्ण अवयव जैसे हृदय, मस्तिष्क आदि को पानी से बने द्रव का एक कवच संरक्षण प्रदान करता है, और तो और यह शरीर के अन्दर महत्वपूर्ण संचार माध्यम भी है तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच सम्पर्क बनाये रहता है। यही पोषक तत्व, ऑक्सीजन, कार्बन डाई-ऑक्साइड का वाहक है और शरीर के मालन पदार्थों को पसीना, मल और मूत्र के जरिये बाहर ले जाती है। इसी कारण पानी की कमी मनुष्य को सहन नहीं हो पाती और अधिक जल की कमी से उसकी मृत्यु हो जाती है।

(ii) कृषि कार्य के लिए (Agricultural Use) : पूर्वी तथा दक्षिणी एशिया विश्व के सघन आबाद प्रदेश हैं। इन देशों में विशाल जनसंख्या के पोषण के लिए वर्ष में दो या तीन फसले उगायी जाती हैं। ये मानसूनी जलवायु के देश है जहाँ वर्षा वर्ष के सीमित महीनों में संकेन्द्रित होती हैं। अतएव यहाँ कृषि के लिए सिंचाई की बहुत आवश्यकता होती है। भारत, चीन एवं पाकिस्तान में गेहूँ, जौ, चना, तिलहन आदि शीतकालीन फसलों के लिये भी सिंचाई की बहुत आवश्यकता होती है।

(iii) औद्योगिक जल आपूर्ति (Industrial water supply) : औद्योगिक संयन्त्रों (plants) को घरेलू कार्यों की अपेक्षा अधिक जल की आवश्यकता होती है। उद्योगों में भाप (Steam) बनाने, रसायनों के घोलने, आर्द्रका (humidifierrs) एवं प्रशीतकों (refrigerators), गर्म धातुओं को ठण्डा करने (cooling) कोक धोने, रासायनिक उद्योगों में अम्लों (acids) तथा क्षारों (alkalies) के निर्माण खालों (hides) को धोने तथा रगने आदि में बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 13.
पारिस्थितिकी तंत्र क्या है ? पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
इकोसिस्टम : वातावनण के जैविक तथा अजैविक अवयवों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। यह सम्बन्ध मिलकर एक तंत्र की रचना करते हैं यह तंत्र पारिस्थितिकी तंत्र कहलाता है।

पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह : हरे पौधें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सूर्य से विकिरण ऊर्जा लेकर भोजन बनाते हैं। बनाये गये भोजन को जन्त अपना भोजन बनाते हैं। इस भोजन के माध्यम से सूर्य की विकिरण ऊर्जा रूपान्तरित होकर जीवमण्डल में प्रवेश करती है।

अब विकिरण ऊर्जा का रूप स्थितिज ऊर्जा के रूप में हो गया है। शाकाहारी जन्तुओं के भोजन का मुख्य स्रोत पौधे हैं अत: पौधों में संचित स्थितिज ऊर्जा भोजन के साथ जन्तु शरीर में चला जाता है। जन्तु शरीर ऊर्जा का उपयोग जन्तु अपने जैव कार्यों में करते हैं। इस प्रकार हम देखते है कि ऊर्जा का प्रवाह जीव मण्डल में एक श्रृंखला में होता है जिसको ऊर्जा प्रवाह कहते हैं।

प्रश्न 14.
खाद्य जाल से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :
खाद्य जाल (Food Web) : किसी इकोसिस्टम के जैव समुदाय में विभिन्न प्रकार की खाद्य- शृंखलायें पायी जाती है। इन खाद्य भृंखलाओं के द्वारा जैव समुदाय एक दूसरे से परस्पर सम्बन्धित रहते हैं। इस प्रकार खाध भृंखलायें एक जाल बनाती है, जिसे परस्पर सम्बन्धित रहते हैं। इस प्रकार खाद्य शृंखलाये एक जाल बनाती है, जिसे खाद्य जाल कहते हैं। जैसे –
(a) हरे पौधे → टिद्ड़ा → छिपकली → बाज
(b) हरे पौथे → खरगोश → बाज
(c) हरे पौधे → चूहा → साँप → बाज
(d) हरे पौधे → चूहा→ बाज
(e) हरे पौधे → कौट पतंग → मेढ़क → साँप → बाज
इस प्रकार हम देखते हैं कि हरे पेड़-पौधे (उत्पादक) तथा उच्च उपभोक्ता (बाज) विभिन्न खाद्य शृंखलाओं द्वारा परस्पर जुड़े हुए है। अत: ये पाँच खाद्य-श्रृंखलायें परस्पर मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं।

प्रश्न 15.
समुदाय और इसके सदस्यो के बीच अन्त: सबंध का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर :
समुदाय (Community) : प्रकृति में जीवधारी अकेले न रहकर एक दूसरे के साथ रहना पसन्द करते हैं। अर्थात् विभिन्न प्रकार के जीवधारी एक समूह के रूप में ऐसे स्थान पर रहते हैं जहाँ पर उनकी आवश्यकताएं पूरी होती हैं। अत: हम यह कह सकते हैं कि समुदाय किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र में रहने वाले पौधों और जन्तुओं का एक ऐसा समूह है जिसमें प्रत्येक जीवधारी अपनी कम से कम आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। जीवधारियों के इस समूह को समुदाय या

जैव समुदाय (Biotic community) कहते हैं। इसमें पौधे, जन्तुओं और सूक्ष्म जीवों के समुदाय ऊर्जा संसाधन और वास-स्थान के लिये एक दूसरे से अन्तःक्रियाएँ करते हैं। पौधे जन्तुओं को भोजन और ऑक्सीजन पदान करते हैं। इसके बदले उन्हे जन्तुओं से कार्बन डाई-आक्साइड प्राप्त होती है। जन्तु पौधों में परागण (Pollination) तथा उनके बीजों के विकिरण में सहायक हैं। सूक्ष्मजीव जन्तुओं और पौधों से विभिन्न प्रकार की पारस्परिक क्रियाएँ करते हैं।

ये जीयों में रोग उत्पत्र कर सकते हैं, नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर सकते हैं और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ा या घटा सकते है और ये कार्बनिक मृत पदार्थों को विघटित कर सकते हैं। इस पदार्थ को पुनः यौधे ग्रहण कर सकते हैं। सभी जीव पारिस्थितिकीतंत्र के सफल संचालन में तथा ऊर्जा-प्रवाह और पोषक तत्वों के चक्रण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। किसी विशेष समुदाय में रहने वाले जीवधारियों के बीच कई प्रकार की अन्त: क्रियाएँ होती रहती हैं।

प्रश्न 16.
पशुपालन से होने वाले आर्थिक लाभों का विवरण दो। अधिक अण्डे तथा मांस के उत्पादन हेतु मुर्गी पालन में कैसे सुधार लाया जा सकता है ? गाय की उन्नत प्रजातियों के नाम लिखो।
उत्तर :
पशुपालन (Animal husbandry) : विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत पालतू पशुओं के भोजन, आवास, स्वास्थ्य, प्रजनन आदि पक्षों का अध्ययन किया जाता है । उपयोगिता के आधार पर पालतू पशुओं के चार वर्ग है – दुधारू पशु (milk animals), मांस तथा अण्डा उत्पादक पशु (meat and egg giving animals), श्रमिक पशु (working animals) तथा चर्म उत्पादक पशु (skin-yielding animals)।

दुधारू पशुओं की अत्यधिक संख्या होने के बावजूद हमारे देश में दूध का उत्पादन संतोषजनक नहीं है। हमारे देश में औसतन एक गाय 200 किलो दूध प्रतिवर्ष देती है, जबकि यह औसत आस्ट्रेलिया तथा नीदरलैण्ड में 3500 किग्रा० तथा स्वीडेन में 3000 किग्रा० प्रतिवर्ष है। अत: हॉल्सटाइन-फीसिऑन, जर्सी जैसी गायों के विकास की आवश्यकता है जिससे क्षेत क्रान्ति (White revolution) आ सके।

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हमारे देश की प्रति व्यक्ति भोजन के रूप में मांस की खपत (वार्षिक) 131 ग्राम है जबकि अमेरिका में यह 1318 किग्रा०। जनसंख्या के अनुरूप भोजन की बढ़ती आवश्यकता की पूर्ति के लिए अधिक पुष्ट, मांसल तथा जल्दी बढ़ने वाली नस्ल की मुर्गियाँ तथा अण्डा उत्पादन के लिए मुर्गियाँ प्रजनन के द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं क्योंकि जनसंख्या के अनुरूप हमारे देश में अण्डे की खपत दिनोदिन बढ़ती जा रही है।

भारत में भोजन के रूप में अण्डे की प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत केवल 6 है जबकि अमेरिका में यह 295 । मछली उत्पादन (Fishery) की सम्भावना हमारे देश में बहुत अधिक है, प्रथानत: मृदुजल की मछलियाँ। हमारे देश में भोजन का एक प्रमुख सोत मछलियाँ हैं। इनसे पौष्टिक भोजन के अतिरिक्त तेल, उर्वरक जैसे अन्य उपयोगी पदार्थ भी मिलते हैं। देश को मछली उत्पादों के निर्यांत से करीब 4000 करोड़ रुपये की वार्षिक आमदनी होती है।

प्रश्न 17.
खाद्य श्रृंखला क्या है ? विभिन्न प्रकार के खाद्य श्रृंखला का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
खाद्य शृंखला (Food Chain) : उत्पादक से उच्य श्रेणी के उपभोक्ता तक खाद्य ऊर्जा का स्थानान्तरण खाद्य श्रृंखला कहलाता है। ओडम (Odum) ने सन् 1966 ई० में खाद्य श्रंखला की वैज्ञानिक विधि से व्याख्या की? उनके अनुसार, जिस शक्ति द्वारा खाद्य ऊर्जा, उत्पादक पौधों से कमबद्ध रूपों में उपभोक्ताओं और विभिन्न प्राणी समूहों के मध्य से गुजरती है, उसे खाद्य भृखला कहते हैं।

पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेषण क्रिया में सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं। यह ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के रूप में पौधों के विभिन्न संचयी अंगों में संचित हो जाती है। प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता उत्पादक को अपने भोजन के रूप में प्रहण करते हैं, फलस्वरूप पौधों में संचित ऊर्जा प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताओं के शरीर में पहुँच जाती है। पुन: द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता में स्थानान्तरित हो जाती है। इस तरह खाद्य ऊर्जा उत्पादक से क्रमश: प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी के उपभोक्ताओ में स्थानान्तरित होती रहती है तथा खाद्य शृंखला का अट्टूट क्रम बलता रहता है।

खाद्य शृंखला का प्रकार :-
(i) चारण आहार श्रृंखला (Grazing Food Chain) : वह भोजन श्रृंखला जो उत्पादक से शुरू होकर मांसाहारी जन्तु के साथ समाप्त हो जाती है। इसे चारण आहार श्रृखला कहते हैं।
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(ii) परजीवी आहार शृंखला (Parasitic Food Chain) : वह भोजन शृखला जो उत्पादक से शुरु होकर बड़ेबड़े जीवों से होते हुए अन्त में परजीवी जन्तु के साथ समाप्त होती है। इसे परजीवी आहार शृंखला कहते है।
हरे पौधे → मनुष्य → फीताकृमि या एन्ट अमीबा

(iii) अरपद आहार शृंखला (Saprophytic food chian) : वह भोजन श्रृंखला जो मृत कार्बनिक पदार्थों से प्रारम्भ होकर अन्य उपभोक्ताओं से होते हुए जीवाणुओं के साथ अन्त होती है, जिसे मृतोपजीवी भोजन श्रृंखला कहते हैं। मृत कार्बनिक पदार्थ → केंचुआ → जीवाणु

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(iv) डीट्रिटस भोजन शृंखला (Detritus food chain) : इस प्रकार की खाद्य श्रृंखला सड़े-गले पदार्थों से शुरू होकर विघटनकर्ता अर्थात सूक्ष्म जीवाणुओं से गुजरती हुई उपभोक्ता के शरीर में पहुँचती है। इसे डीट्रिटस भोजन शृंखला कहते हैं।WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन 3WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन 1

प्रश्न 18.
जनसंख्या स्तर किसे कहते हैं ? जन्म दर का आकलन कैसे किया जाता है ?
उत्तर :
जनसंख्या स्तर (Population Level) : समुदाय पारिस्थितिकी के अध्ययन में आबादी पारिस्थितिकी का अध्ययन विशेष महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी क्षेत्र के सम्पूर्ण जैविक समाज का मूल्यांकन किया जाता है। किसी क्षेत्र या स्थान पर एक समय विशेष में एक या अनेक जातियों (Species) के जीवों की संख्या आबादी कहलाती है। उदाहरण के लिए एक जनपद में किसी निश्चित समय पर मनुष्यों की संख्या या गोपशुओं की संख्या या फलदार पौधों की संख्या वहाँ की आबादी कहलाती है।

जातीय और भौतिक परिवेश के कारण विविध जातियों के जीवों की आबादी अनेक विशिष्टताओं से युक्त होती है। जैसे उनकी संख्या में उतार-चढ़ाव, लिंग अनुपात, जन्म एवं मृत्युदर, जनन क्षमता, आयु रचना, वितरण प्रतिरूप एवं आव्रजन-प्रव्रजन आदि में अन्तर पाया जाता है। जब आबादी के इन लक्षणों का अध्ययन व्याख्यामक दृष्टिकोण से किया जाता है तो उसे जनांकिकी (Demography) कहा जाता है। लेकिन जब आबादी का अध्ययन भौतिक पर्यावरण और जैविक गुण के संदर्भ में किया जाता है तो उसे आबादी पारिस्थितिकी कहा जाता है। एक जैव जाति की आबादी उसकी प्रजनन प्रक्रिया से जुड़ी रहती है।

अनुकूल परिवेश में एक जाति के जीव प्रजनन प्रक्रिया से अपनी आबादी बढ़ा लेते हैं और परिवेश के प्रतिकूल होने पर उनकी वशवृद्धि रुक जाती है जिससे आबादी घट जाती है। आबादी के बढ़ने से पर्यावरण भी प्रभावित होता है। एक समय ऐसा भी आ जाता है कि बदले हुए पर्यावरण के कारण उस जाति की प्रजनन प्रक्रिया बाधित होती है जिससे आबादी का ह्रास होता है। पर्यावरणीय बाधाओं के कारण प्राणियों का विसरण भी होता है।

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जिससे आबादी का वितरण प्रभावित होता है। कहा जाता है कि मध्य एशिया की जलवायु के शुष्क होने के कारण आदिमनुष्य अपने गृह स्थल को त्यागने के लिये बाध्य हुआ जिसके फलस्वरूप अनेक दिशाओं में प्रत्रजित होकर मानव प्रजातियों (Human Races) में विभक्त हो गया। नये पर्यावरण से समायोजन स्थापित करने की प्रक्रिया में उसमें अनेक शारीरिक-मानसिक अन्तर आ गये। पृथ्वी तल पर पर्यावरण की विविधता के कारण कोई एक जाति के जीव सर्वव्यापी नहीं हो सकते हैं क्योंकि किसी भी जाति के जीवों की पारिस्थितिकीय क्षमता (Ecological Tolerance) ऐसी नहीं होती कि वह सभी प्रकार के पर्यावरण में अपना जीवन-चक्र पूरा कर सके।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 4 जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Life Science Book Solutions Chapter 4 जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Life Science Chapter 4 Question Answer – जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
एण्टिभेनिम का उपयोग किस रोग के उपचार में किया जाता है?
उत्तर :
सर्प-दंश (साँप के काटने के उपचार में)।

प्रश्न 2.
जन्मजात रोग निरोधक क्षमता को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रतिरक्षा।

प्रश्न 3.
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले एक सूक्ष्मजीव का नाम लिखिए।
उत्तर :
राइजोबियम।

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प्रश्न 4.
इन्जेक्शन या मुँह के द्वारा पिलाकर शरीर में प्रविष्ट कराने वाली रोग निरोध क्षमता को क्या कहते हैं?
उत्तर :
टीकाकरण।

प्रश्न 5.
प्रोफाइलैक्सिस क्या है?
उत्तर :
टीकाकरण को वैज्ञानिक भाषा में प्राफाइलैक्सिस कहते हैं।

प्रश्न 6.
इम्यूनोजन्स किसे कहते हैं?
उत्तर :
इम्यूनोजेन्स एक पदार्थ हे जो प्रतिक्षा प्रतिकिया को प्रेरित करता है।

प्रश्न 7.
चेचक के टीका का आविष्कार किसने किया था ?
उत्तर :
एडवर्ड जेनर (Edward Jenner)

प्रश्न 8.
पोलियो वाइरस में किस प्रकार का केन्द्रक अम्ल पाया जाता है।
उत्तर :
RNA

प्रश्न 9.
रेबीज का टीका किसने तैयार किया था?
उत्तर :
लुई पास्वर

प्रश्न 10.
डायरिया नामक बीमारी कैसे होती है ?
उत्तर :
डायरिया नामक बीमारी आँत में जीवाणुओं, विषाणुओं तथा प्रोटोजोआ आदि के संक्रमण से होती है।

प्रश्न 11.
टीका शब्द का आविष्कार किसने किया था?
उत्तर :
एडवर्ड जेनर

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प्रश्न 12.
मलेरिया का कारक कौन हैं?
उत्तर :
प्लाज्मोडियम परजीवी।

प्रश्न 13.
DPT का टीका बच्चों को किस उग्र में लगवाना चाहिए ?
उत्तर :
18-24 माह।

प्रश्न 14.
डेंगू कैसे फैलता है ?
उत्तर :
डेंगू एक संक्रामक बीमारी है। यह मादा एडिस एजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है ।

प्रश्न 15.
मनुष्य के किस उम्र में टिटनस बूस्टर का टीका लगाया जाता है ?
उत्तर :
10 वर्ष के उम्म में टिटनस बूस्टर का टीका लगाया जाता है।

प्रश्न 16.
जल जनित तीन बीमारियों के नाम बताइये।
उत्तर :
जल जनित तीन बीमारियाँ है – हैजा, पेचिश तथा टायफायड।

प्रश्न 17.
AIDS रोग के कारक का नाम बताइये।
उत्तर :
HIV (Human Immunodeficiency Virus)

प्रश्न 18.
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया किस प्रकार हमारे लिए लाभदायक है?
उत्तर :
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूष को दही में बदलने के लिए काम में आता है।

प्रश्न 19.
WASH का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Water and Sanitation Hygiene.

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प्रश्न 20.
टैब क्या है ?
उत्तर :
टायफायड रोग जैसे हीन संक्रमण से बचाव के लिए उपयोग में लाने वाले टीके को टैब (TAB) कहते हैं।

प्रश्न 21.
मलेरिया रोग किस प्रोटोजोआ के कारण होता है?
उत्तर :
प्लास्मोडियम जाति के प्रोटोजोआ द्वारा।

प्रश्न 22.
डिप्थेरिया रोग के कारक का नाम क्या है ?
उत्तर :
डिप्थेरिया रोग का कारक कोरिन-बैक्टीरियम डिप्थेरा नामक जीवाणु है।

प्रश्न 23.
एक रोगाणुवाहक का नाम लिखिए।
उत्तर :
मच्छर, घरेलू मक्खी ।

प्रश्न 24.
प्रतिरक्षणता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रतिरक्षणता : हमारे शरीर में पायी जानेवाली रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रतिरक्षणता कहते हैं।

प्रश्न 25.
क्षयरोग की अवधि लिखो।
उत्तर :
2 – 10 सप्ताह।

प्रश्न 26.
ORS क्या है ? यह किस बीमारी में काम करता है ?
उत्तर :
ORS एक प्रकार का पावडर घोल है जो डायरिया बीमारी में काम करता है।

प्रश्न 27.
मिद्टी की उर्वरा शक्ति को किस प्रकार से बनाये रखा जा सकता है ?
उत्तर :
फसल चक्र द्वारा मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कायम रखा जाता है ।

प्रश्न 28.
एक हानिकारक वाइरस का नाम बताइये।
उत्तर :
HIV

प्रश्न 29.
एक लाभदायक जीवाणु का नाम बताइये।
उत्तर :
एजेटोबैक्टर।

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प्रश्न 30.
मलेरिया रोग किस प्रोटोजोआ के कारण होता है।
उत्तर :
प्लाज्मोडियम वाइवेक्स (Plasmodium Vivex)

प्रश्न 31.
एक हानिकारक कवक का नाम लिखिए।
उत्तर :
पक्सिनिया आ्मामिनिस (Puccinia graminis)

प्रश्न 32.
किस मच्छर के द्वारा डेंगू फैलता है?
उत्तर :
एडिस मच्छर।

प्रश्न 33.
एक ऐसे वाइरस का नाम बताइये जिसमें RNA तथा DNA दोनों पाया जाता है।
उत्तर :
पोलियो वाइरस।

प्रश्न 34.
पोलियो वाइरस में किस प्रकार का केन्द्रक अम्ल पाया जाता है।
उत्तर :
RNA

प्रश्न 35.
कौन-सा जीवाणु T.B. रोग फैलाता है ?
उत्तर :
माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस।

प्रश्न 36.
हैजा फैलाने वाले जीव का नाम बताइये।
उत्तर :
Vibrio cholera

प्रश्न 37.
टिटेनस किस जीवाणु के कारण होता है।
उत्तर :
क्लास्ट्रीडियम टेटानी।

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प्रश्न 38.
यकृत में होनेवाला जानलेवा रोग क्या है ?
उत्तर :
हेपेटाइटिस।

प्रश्न 39.
एक लाभदायक कवक का नाम बताइये।
उत्तर :
यीस्ट।

प्रश्न 40.
WHO का पूरा नाम बताइये ?
उत्तर :
वर्ड्ड हेल्य आर्गनाइजेशन (World Health Organisation)

प्रश्न 41.
AIDS का पूरा नाम बताइये ?
उत्तर :
Acquired Immuno Deficiency Syndrome

प्रश्न 42.
जैव उर्वरक क्या है ?
उत्तर :
जैव उर्वरक एक प्रकार का जीव है जो मृदा की उर्वरता तथा पोषक गुणवत्ता को बढ़ाता है।

प्रश्न 43.
डी० पी० टी० का टीका किस रोग का उपचार है।
उत्तर :
डिप्थेरिया, परटयूसिस और टिटनेस।

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प्रश्न 44.
जैव उर्वरक के मुख्य स्रोत क्या हैं ?
उत्तर :
जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया आदि जैव उर्वरक के मुख्य सोत हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2/3 MARKS

प्रश्न 1.
इम्यूनिटी किसे कहते हैं ? उदाहरण दें।
उत्तर :
हमारे शरीर में वातावरण में उपस्थित अनेक प्रकार के रोग उत्पादक (Pathogenic) विषाणुओं, जीवाणुओं, कवकों (Fungi) तथा परजीवी जीवधारियों का आक्रमण होता रहता है। वातावरण से अनेक विषेले पदार्थ भी हमारे शरीर में पहुँचते रहते हैं। शरीर के अन्दर भी आक्रमणकारी जीवों द्वारा विषैले पदार्थ मुक्त होते हैं। हमारे शरीर में इन हानिकारक पदार्थों (घतिजन) से प्रतिरोध करने की क्षमता को इम्यूनिटी (Immunity) कहते हैं।

प्रश्न 2.
एन्टीबाडीज़ क्या है ?
उत्तर :
प्रतिरक्षी (Antibodies) : प्रतिरक्षी पदार्थ (Antibodies) लम्फोसाइट्स द्वारा निर्मित वे प्रोटीन्स होते हैं जो शरीर में आने वाले प्रतिजन की क्रियाशीलता को नष्ट कर शरीर को रोगों से बचाते हैं।

प्रश्न 3.
सहज प्रतिरक्षा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सहज प्रतिरक्षा : सहज प्रतिरक्षा (इनेट इम्यूनिटी) एक प्रकार की आवेशिष्ट रक्षा है जो जन्म के समय से मौजूद होती है।

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प्रश्न 4.
पैथोजेनिक सूक्ष्म जीवों की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
शरीर में उपस्थित अनेक प्रकार के रोग उत्पादको जैसे विषाणु, जीवाणु, कवक तथा परजीवी जीवधारिंयों को पैथोजेनिक कहा जाता है।

प्रश्न 5.
अच्छे स्वास्थ्य की तीन मूल शर्तों के नाम लिखो।
उत्तर :

  • पीने का पानी शुद्ध एवं संक्रमणरहित होना चाहिए।
  • भोजन स्वास्थ्यकर तरीके से पकाना चाहिए।
  • वैज्ञानिक विधि से पास्तूरीकृत किया हुआ कीटाणुरहित दूध पीना चाहिए।

प्रश्न 6.
फैगोसाइटोसिस से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
श्वेत रक्त कणिकाओं द्वारा रोगाणुओं के भक्षण की विधि को फैगोसाइटोसिस (Phagocytosis) कहते हैं।

प्रश्न 7.
अर्जित प्रतिरक्षा किसे कहते हैं?
उत्तर :
मनुष्य के शरीर में रोगाणुओं द्वारा कुछ रोगों के होने या उनके मृत या कमजोर रोगाणुओं को शरीर में इंजेक्शन से खा मुँह द्वारा पिलाकर शरीर के अन्दर प्रवेश कराने से भविष्य में उनके प्रति स्थायी अथवा अस्थायी रोग प्रतिरोधकता उत्पन्न हो जाती है जिसे अर्जित प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 8.
एन्टीबायोटिक क्या है ?
उत्तर :
ये विशिष्ट जीवों जैसे बैक्टीरिया, कवक आदि के उपापचयी उत्पादों (metabolic products) से प्राप्त किये जाते हैं। इनका उपयोग अन्य सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 9.
टीकाकरण (Vaccination) क्या है ?
उत्तर :
ऐसी क्रिया जिसमें मृत या जीवित या विशिष्ट सूक्ष्म जीव के परिवर्तित लक्षण को सूई लगाकर अथवा मुख द्वारा स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कराया जाता है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो जाती है, टीकाकरण कहलाता है।

प्रश्न 10.
चेचक के टीके का आविष्कार कब और किसने किया?
उत्तर :
डॉ॰ एडवर्ड जेनर ने सन् 1898 में चेचक के टीके का आविष्कार किया था ।

प्रश्न 11.
WHO के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
W.H.O. के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा – “वह स्थिति जिसमें पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सम्पन्नता हो, न कि केवल बीमारियों या पीड़ा का न होना।”

प्रश्न 12.
निम्न के सम्पूर्ण नाम लिखो – WHO, DPT, BCG, AIDS, HIV तथा DOTS.
उत्तर :
WHO – World Health Organisation
DPT – Diphtheria, Pertussis and Tetanus,
BCG – Bacillus Calmette Guerin,
AIDS – Acquired Immune Deficiency Syndrome
HIV – Human Immuno Deficiency Syndrome Virus,
DOTS – Direct Observed Treatment Short Course.

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प्रश्न 13.
रोग-प्रतिरक्षण क्या है ?
उत्तर :
यह शरीर की स्वाभाविक रूप से या टीको के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता है। जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को टीका के माध्यम से किसी विशेष बीमारी के लिए प्रतिरोधी बनाया जाता है ।

प्रश्न 14.
रोग क्या है ?
उत्तर :
रोग हमारे शरीर की वह अवस्था है जिसमें सामान्य शारीरिक कियाएँ बाधित हो जाती हैं, शारीरिक अंग और अंग तंत्र सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 15.
हेपेटाइटिस की रोकथाम कैसे करोगे?
उत्तर :
हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए हेपेटाइटिस – B का टीका लगवाना चाहिए । दैनिक रहन-सहन पर पूर्ण स्वच्छता रखनी चाहिए, जिससे इस रोग का प्रादुर्भाव न होने पाए। संक्रमण से सुरक्षा के लिए पेयजल आयोडाइज्ड तथा UV-किरणों से उपचारित होना चाहिए।

प्रश्न 16.
हेपेटाइटिस रोग के लक्ष्षण क्या हैं ?
उत्तर :
हेपेटाइटिस रोग के लक्षण : विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस के लक्षण भिन्न-भिन्न होते हैं। सिर दर्द, हल्का बुखार, जॉन्डिस एवं गहरे रंग का मूत्र इस रोग के साधारण लक्षण हैं। भूख में कमी, शरीर का वजन घटने लगता है। यकृत में जलन होती है।

प्रश्न 17.
डिप्येरिया रोग के लक्षण क्या हैं ?
उत्तर :
तेज बुखार, त्वचा में अलसर, गले में सूजन आदि डिप्थेरिया रोग के लक्षण है r

प्रश्न 18.
प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया की तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :

  • आक्रामक को पहचानना
  • आकामक को नष्ट करना
  • आक्रामक को परद रखना

प्रश्न 19.
जैव नियंत्रण किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जैव नियंत्रण का अर्थ है वैज्ञानिक विधि से पौधों को रोगों तथा पोड़कों (Pests) का नियंत्रण करना। आजकल ये समस्याएँ विभिन्न रसायनों, कीटनाशकों एवं पीड़क नाशकों के फ्रयोग से नियत्रित की जाती हैं।

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प्रश्न 20.
उपार्जित प्रतिरक्षण किसे कहते हैं? टीका तथा टीकाकरण में अन्तर बताओ।
उत्तर :
कुछ रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता हम अपने जीवन काल में विकसित करते हैं। ऐसी प्रतिरक्षा को उपार्जित प्रतिरक्षा कहते हैं । टीका एक जीवों के शरीर का उपयोग करके बनाया गया द्रव्य है जिसके प्रयोग से शरीर में किसी रोग विशेष से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। टीकों को शरीर में प्रवेश कराने की विधि को टीकाकरण कहते है ।

प्रश्न 21.
रक्त शून्यता क्या है? इस बीमारी के लक्षण बताओ।
उत्तर :
रक्त शून्यता वह स्थिति है जिसमें आपके शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन ले जाने के लिए पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है। जिसे कम हीमोग्लोबिन भी कहा जाता है, आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कराता है।
लक्षण : थकान या सांस की तकलीफ।

प्रश्न 22.
शारीरिक रोध क्या है ? एक उदाहरण दो।
उत्तर :
शारीरिक रोध : हमारे शरीर पर त्वचा मुख्य अवरोधक है जो सूक्ष्मजीवों के मवेश को रोकता है। श्वसन जठरांत्र (गैस्ट्रोइटेटाइनल) और जननमूत्र पथ को आस्तरित करने वाली एपिथीलियम का श्लेष्मा आलेप (म्यूकस कोटिंग) भी शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं को रोकने में सहायता करता है।

प्रश्न 23.
एण्टीजेन तथा एण्टी बॉडी की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
एण्टीजेन (Antigen) : शरीर के अन्दर भी आक्रमणकारी जीवों द्वारा विषैले पदार्थ मुक्त होते हैं। इन विषैले पदार्थों (Toxins) को एण्टीजेन (Antigen) कहते हैं।

एण्टीबॉडी : हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले हानिकारक वाइरस या विषेलों पदार्थों या वाइरस के प्रभाव को समाप्त करने के लिए एक दूसरा पदार्थ उत्पन्न होता है। उसे एन्टीबॉडी (Antibody) कहते हैं।

प्रश्न 24.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
नाइट्रोजन स्थिरीकरण : वायुमण्डलीय नाइट्रोजन गैस को सरल एवं घुलनशील अकार्बनिक यौगिकों जैसे नाइट्रेट तथा नाइट्राइट आदि के रुप में बदलने की क्रिया को नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कहते हैं।

प्रश्न 25.
राइजोबियम क्या है ?
उत्तर :
राइजोबियम छड़ के आकार का एक लाभदायक बैक्टीरिया है। ये दलहन जातीय पौषे जैसे – चना, मटर आदि पौधों की जड़ों के ग्रंथों में उपस्थिति रहते हैं। इनमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता होती है जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

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प्रश्न 26.
माइक्रोब्स (Microbes) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
माइक्रोब्म (Microbes) : ऐसे सारे जीव जिन्हें हम अपनी खुली आँखों से देख नही पाते है, जिन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र (माइकोस्कोप) की आवश्यकता होती है, माइकाब्स कहलाते हैं।

प्रश्न 27.
प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्या है ?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural immunity) : कुछ रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता शरीर में जन्म से ही पाई जाती है, इसे ही प्राकृतिक प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 28.
वाइरस क्या है ?
उत्तर :
न्यूक्लिओ प्रोटीन गठित वह सूक्ष्मतम रोग कारक, अकोशिकीय परजीवी जिसमें सजीव तथा निर्जीव दोनों के गुण जाये जाते हैं, वाइरस कहलाता है।

प्रश्न 29.
दो रोग उत्पन्र करने वाले जीवाणुओं के नाम बताइये ?
उत्तर :

रोग का नाम जीवाण का नाम
डिष्थेरिया कोरिन बैक्टीरिया डिप्थेरी (Coryne bacterium diphtheriae)
टायफायड साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi)

प्रश्न 30.
फंगस क्या है?
उत्तर :
फंगस (Fungus) : क्लोरोफिल रहित मृतोपजीवी या परजीवी एक कोशिकीय या बहुकोशिकीय पौधों को फंगस कहते हैं। इसमें जड़, तना तथा पत्ती का अभाव होता है।

प्रश्न 31.
मच्छरों द्वारा संक्रमित रोग के नाम बताएँ ।
उत्तर :
मादा संक्रमित मच्छर द्वारा मलेरिया बुखार तथा मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फाइलेरिया संक्रमित होते हैं।

प्रश्न 32.
बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाले रोगों के नाम बताइये।
उत्तर :
बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाले रोग – न्यूमोनिया, हैजा, डायरिया, टी० बी०, प्लेग, टिटनेस, कोढ़ आदि हैं।

प्रश्न 33.
दो रोग फैलानेवाले प्रोटोजोआ के नाम लिखिए।
उत्तर :

प्रोटोजोआ रोग
प्लाज्मोडियम वाइवेक्स (Plassmodium vivax) मलेरिया (Malaria)
एण्टामिबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba Histolytica) अमीबियोसिस (Amoebiasis)

प्रश्न 34.
क्षयरोग या टी० बी० के लक्षण क्या हैं ?
उत्तर :
सामान्यत: हल्का बुखार होना, लगातार खाँसी आना, खाँसते समय कफ या बलगम के साथ रक्त निकलना तथा रात में शरीर में पसीना निकलना क्षयरोग के प्रमुख लक्षण हैं।

प्रश्न 35.
रक्तधान द्वारा संचारित रोगों के नाम बताइये ?
उत्तर :
रक्तधान द्वारा संचारित रोग :

  • Hepatitis
  • AIDS
  • Malaria

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प्रश्न 36.
मलेरिया रोग के लक्षण बताइए।
उत्तर :
मलेरिया में रोगी को जाड़ा तथा कँपकँपी के साथ तेज बुखार आता है। सिर तथा शरीर में अत्यधिक दर्द होता है।

प्रश्न 37.
जीवाणुओं का आर्थिक महत्व लिखिए।
उत्तर :

  • बैक्टीरिया का उपयोग चाय एवं तम्बाकू उद्योग, चर्म उद्योग, रबर उद्योग, टेक्स्टाइल उद्योग, प्लास्टिक उद्योग आदि में किया जाता है।
  • यह मक्खन, पनीर, दही, घी आदि के उत्पादन में सहायक होते हैं।

प्रश्न 38.
डायरिया से रोकथाम के लिए कुछ उपाय बताइये ।
उत्तर :
डायरिया से रोकेथाम के उपाय :

  • पीने का जल शुद्ध तथा संक्रमण रहित होना चाहिए
  • सभी को व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
  • भोजन को अच्छी तरह पकाना चाहिए।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्रतिरक्षा क्या है? प्रतिरक्षा कितने प्रकार की होती है? परिभाषा सहित लिखिए।
उत्तर :
प्रतिरक्षा (Immunity) : शरीर में प्रवेश करने वाले जीवाणु, विषाणु, विषाक्त पदार्थो इत्यादि को निष्किय कर उनके हानिकारक प्रभव से बचने की स्वयं की क्षमता को प्रतिरक्षा कहते हैं। प्रतिरक्षा निम्न दो प्रकार की होती हैं –

  • प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural immunity) : किसी सजीव में जन्म से ही प्राप्त अपनी रक्षा की क्षमता को प्राकृतिक प्रतिरक्षा कहते हैं। जैसे – प्लाज्मा में एन्टिबोंडिज का पाया जाना
  • उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired immunity) : किसी खास रोग के कीटाणुओं के प्रवेश करने पर इसके हानिकारक प्रभाव से बचने के लिए प्लाज्मा में एन्टिबॉंडिज उत्पन्न करने की घटना को उपार्जित प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 2.
टी॰ बी० के लक्षण तथा संचरण विधि लिखिए।
उत्तर :
टी० बी० के लक्षण : लगातार खाँसी आना, हल्का बुखार होना, खाँसते समय कफ ग़ा बलगम के साथ रक्त का निकलना, छाती में दर्द होना, थकान महसूस होना, श्वाँस लेने में तकलीफ, बेचैनी तथा शरीर का वजन लगातार घटते जाना आदि लक्षण हैं।
टी० बी० के संचरण : यह रोग संक्रमित रोगी के थूक, कफ, खाँसी के माध्यम से फैलता है।

प्रश्न 3.
AIDS क्या है ? एड्स रोग किस प्रकार फैलता है ?
उत्तर :
AIDS (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) रोग HIV (Human Immuno Deficiency Virus) के कारण होता है। इस अवस्था में शरीर की रोग निरोधी क्षमता कम हो जाती है तथा शरीर विभिन्न प्रकार के रोगजनक संक्रमण से संक्रमित हो जाता है। रोगी का जीवित रहना सम्भव नहीं हो पाता है।

एड्स रोग के फैलने के तरीके : यह रोग निम्नलिखित तरीक से फैलता है :-

  • मुख्यतः यह रोग अनैतिक यौन संबंधों के कारण होता है। एड्स से पीड़ित व्यक्ति से यौन सम्बन्ध स्थापित करने पर स्वस्थ मनुष्य भी एड्स का शिकार हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के रक्त को दूसरे व्यक्ति में चढ़ाने पर इस रोग के विषाणु का स्थानान्तरण हो जाता है।
  • HIV से संकमित इंजेक्शन की सूई के व्यवहार से भी AIDS का संचरण होता है।
  • एड्स पीड़ित गर्भवती महिला का शिशु भी AIDS का शिकार हो जाता है।

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प्रश्न 4.
जैव नियंत्रण कारक से आप क्या समझते हैं ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जैव नियंत्रण कारक (Biocontrol Agents) : फसलों में रोग पैदा करने वाले सूक्ष्म-जीव, फसलों को नष्ट करने वाले कीड़े-मकोड़े तथा खेतों में अनावश्यक उगने वाली घासों को सूक्ष्म जीवधारियों के उपयोग से नियंत्रित करने की प्रक्रिया को जैविक नियंत्रण कहते हैं। जैव नियत्रण के उपयोग में आने वाले जैविक कारको को जैव नियत्रण कारक (Biocontrol Agents) कहा जाता है।

जैव नियंत्रण में उपयोग किये जाने वाले सूक्ष्म जीवधारी : जीवाणु, विषाणु, कवक तथा एक कोशिकीय जन्तु शामिल है। जैव नियंत्रण कारको का उपयोग मुख्यतः फसलों को क्षति पहुँचाने वाले कीटों के नियंत्रण में किया जाता है, कभी-कभी इनका उपयोग खेतों में अनावश्यक घासों तथा फसलों तथा फसलों की बीमारियो को नियंत्रित करने के लिए भी किया जाता है।

प्रश्न 5.
टीकाकरण क्या है ? कुछ प्रचलित टीके तथा इनसे दूर होने वाले रोगों के नाम लिखिए ?
उत्तर :
टीकाकरण : टीकों को शरीर में प्रवेश की विधि को टीकाकरण कहते हैं।
कुछ प्रचलित टीके तथा उनसे दूर होने वाले रोगों के नाम निम्नलिखित है :-

टीका बीमारी
BCG T.B.
MMR Mumps, Measles & Rubella
Polio (Oral) Polio
Toxoid serum Diptheria
Cholera Vaccine Cholera
DPT Diptheria, Pertusis & Tetanus
TT Tetanus
Rubella Vaccine Small pox, German measles

प्रश्न 6.
‘WASH’ से आप क्या समझते हैं ? इसके दो उपयोग लिखें।
उत्तर :
जल-सफाई और स्वच्छता (WA-Water, S-Sanitation, H-Hygienc – WASH) : यूनिसेफ एक संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ जल तथा सफाई प्रदान करना और उनको स्वस्थ बनाना है। इस संस्था के कार्यकारी बोई ने 2006 ई० में इस कार्य को करने की मंजूरी दी। जावा और इंडोनेशिया में एक शौचालय के निर्माण से इस संस्था ने अपना कार्य प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित जल और बुनियादी स्वच्छता की सेवाओं को बेहतर ढग से

बढ़ावा देना है। इस संस्था के दो प्रमुख लक्ष्य है –

  • 2015 ई० तक सुरक्षित पीने का पानी और बुनियादी स्वच्छता के लक्ष्य को पूरा करना है।
  • सभी विद्यालयों में पर्याप्त बच्चों के अनुकूल पानी और शौचालय की सुविधा तथा स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम को सुनिश्चित करना है।

WASH के उपयोग : WASH के निम्नलिखित उपयोग हैं –

  • यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिये योगदान सुनिश्चित करता है कि सभी देश जागरूक होकर स्वच्छता के द्वारा सुधार लायें। यह पारिवारिक स्तर पर अधिक ध्यान केन्द्रित करके जल की गुणावत्ता, उन्नत स्वास्थ्य और आरोग्यता के क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाता है।
  • यूनिसेफ डब्ल्यूएचओ (WHO) के साथ वैथ्थिक क्षेत्र में निगरानी करता है। यह राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है। यह स्वास्थ सचेतना की उत्नति में तकनीकी सहयोग द्वारा शिक्षा, स्वयं एवं पोषण के माध्यम से व्यावहारिक परिवर्तन को बढ़ावा देगा एवं स्वस्थ जीवन और विकास को क्रियान्वयन में मदद करेगा। संक्षेप में WASH का प्रमुख उद्देश्य सभी को स्वच्छ जल, सफाई के साधन और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना और उनके विकास में सहयोग करना है।

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प्रश्न 7.
इम्यून प्रतिक्रियाओं से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
इम्यून प्रतिक्रियाएँ (Immune Responses) : इम्यून प्रतिरक्षा में दो विभिन्न प्रकार की, परन्तु परस्पर सम्बन्धित प्रतिक्रियाएँ होती है और दोनों ही प्रतिजनों (antigens) द्वारा उत्रेरित होती हैं। इनमें से एक प्रकार की प्रतिक्रियाओं को कोशिका-मध्यस्थीय अर्थात् कोशिकीय इम्यून प्रतिक्रियाएँ (cell-mediated or cellular immune responses – CMI) तथा दूसरी को प्रतिरक्षी-मध्यस्थीय अर्थात् इम्यून ह्यूमरल प्रतिक्रियाएँ (antibody-mediated or humoral immune responses – AMI) कहते हैं।

CMI प्रतिक्रियाओं में CD8+T कोशिकाएँ प्रचुरोद्भवन (proliferation) द्वारा अनक विनाशी टी-कोशिकाएँ (killer T-cells) बनाती हैं जो प्रतिजनों पर सीघे आक्रमण करती हैं। AMI प्रतिक्रियाओं में B- कोशिकाएँ प्लाज्मा कोशिकाओं (plasma cells) में रूपान्तरित होती हैं जो भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रतिजनों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की प्रतिरक्षा (antibodies) प्रोटीन्स का संश्लेषण करती हैं। इन प्रतिरक्षी प्रोटीन्स को इम्यूनोग्लोबुलिन्स (immunoglobulins) कहते हैं। ये सम्बन्धित प्रतिजनों से बँधकर इन्हे निष्किय करती हैं।

प्रश्न 8.
चेष्ट एवं निश्चेप्ट प्रतिरक्षा किसे कहते हैं।
उत्तर :
चेष्ट प्रतिरक्षा (Active Immunity) : टीका लगाने के बाद शरीर में अपनी प्रतिरक्षण प्रतिक्रियाओं द्वारा ही उपयुक्त एन्टीबॉडोज का संश्लेषण होता है। इसे इसीलिए चेष्ट प्रतिरक्षा कहते है।

निश्चेष्ट प्रतिरक्षा (Passive Immunity) : कुछ रोगों से बचाव के लिए उपयुक्त एन्टीबॉडीज (antibodies) प्रयोगशालाओं में तैयार करके रोग की सम्भावना से पहले ही, शरीर में इन्जेक्ट कर दिए जाते हैं। किसी ऐसे व्यक्ति के रुधिर सीरम (blood serum) को भी, जो रोग से प्रभावित होकर ठीक हो गया हो, दूसरे व्यक्ति के शरीर में इन्जेक्ट कर सकते है, क्योंकि इस सीरम में उपयुक्त एन्टीबॉडीज होते हैं।

ऐसे रुधिर सीरम को एन्टीसीरम (antiserum) कहते हैं। इसमें उप्पस्थित एन्टीबॉडीज कुछ समय के लिए शरीर में सक्रिय बने रहते हैं। यदि इस बीच सम्बन्धित रोगाणु या पतिजन शरीर में पहुंच जाते हैं तो इन्हें ये एन्टीबॉडीज नष्ट कर देते हैं। इसे शरीर की निश्चेष्ट (passive) प्रतिरक्षा कहते हैं। इसकी ख़ोज सन् 1890 में एमिल वान बेहरिंग (Emil von Behring) ने पशुओं में टिटेनस (tetanus) तथा मनुष्य में रोहिणी रोग अर्थात् डिथ्थीरिया (diptheria) नामक रोगों की रोकथाम के प्रयास के दौरान की।

प्रश्न 9.
एलर्जी क्या है ? यह किस प्रकार से होता है ?
उत्तर :
एलर्जी (Allergy) : यह प्रतिरक्षण का एक महत्वपूर्ण पार्श्व-प्रभाव (side effect) होता है।

एलजी होने की विधि एवं प्रभाव : यदि किसी ऐसे मलिजन की, जिसके लिए प्रतिरक्षण तंत्र अतिसंवेदनशील (hyperserisitive) हो चुका है, बहुत-सी मात्रा अचानक शरीर में पहुँचकर फैलती है, तो कुछ ही मिनटों में प्राय: पूर्ण शरीर में, तीव एवं असाधारण (abnormal) या विपथगामी (aberrant) प्रतिरक्षण प्रतिक्रिया होने लगती है। सभी ऊतकों में प्रदा (inflammation) प्रतिक्रिया के फलस्वरूप, पूरा शरीर फूल सकता है

या त्वचा पर दाने उभर आते हैं। इसे एलर्जी कहते हैं। इसमें उतको की विस्तृत क्षति और व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। कुछ लोगों को दवाइयों, सौन्दर्य-पसाधन (cosmetics) रंगों आदि से प्रायः सीमित एलर्जी हो जाती है । एलर्जी उत्पत्र करने वाले पदार्थों को एलर्जेन्स (allergens) भी कहते हैं। कभी-कभी अपने ही शरीर में बनने वाले किसी पदार्थ या अपने ही शरीर के किसी ऊतक के प्रति प्रतिरक्षण तंत्र अति संवेदनशील होकर एलर्जी उत्पन्न कर देता है।

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प्रश्न 10.
डेंगू की प्रकृति, लक्षण एवं प्रसार का वर्णन करें।
उत्तर :
डेंगू (Dengue) : डेंगू का वाइरस ऐडीज नामक मच्छरों की मादाओं में पाया जाता है। यह सभी उष्ण कटिबंधीय देशों में परन्तु मुख्यतः दक्षिणी-पूर्वी एशिया; अफ्रीका तथा अमेरिका के दक्षिणी एवं मध्य भागों में पाया जाता है। इसे सामान्यत: हड्डीतोड़ बुखार भी कहते हैं। इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं – तेज ज्वर, सिर दर्द तथा पेशियों में दर्द। पेशियों और हड्डियों में अत्यधिक पीड़ा होती है जिस कारण इसे हड्डीतोड़ बुखार कहा जाता है। प्रायः सभी देशों में इस रोग के वाइरस पाये जाते हैं। एडीज मच्छरों की मादाओं द्वारा इस रोग को फैलाया जाता है। यह एक सक्रामक बीमारी है।

प्रश्न 11.
स्वच्छता का क्या आशय है ? इसे कैसे उपयुक्त बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
पीने के लिए शुद्ध जल, रहने के लिए साफ सूथरा जगह और रोगों से रक्षा की व्यवस्था करना, स्वच्छता है। स्वच्छता की योजना को लागू करने के उपाय :-

  • यूनिसेफ सुधार स्वच्छता को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही तीन स्तम्भ दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जायेगा।
  • स्वच्छता, सफाई और पानी के कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर बच्चों का समुचित विकास किया ज़ायेगा और उन्हें स्वस्थ रखा जायेगा।
  • संतुलित राष्ट्रीय कार्यक्रमों के ढांचे को बढ़ावा देना।
  • स्थायी ‘WASH’ कार्यक्रमों को स्केलिंग के लिए उत्मेरक और निरंतर समर्धन प्रदान करना।
  • यह संस्था सक्रिय रूप से ‘WASH’ की सेवा को स्थिरता प्रदान करेगी।
  • सहायक यूनिसेफ नगर निगम, जिला और प्रांत आदि में मजबूत संस्थानों को बनाने में मदद करेगा।
  • जल संसाधन प्रबंधन के माध्यम से स्थाई जल की आपूर्ति को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही मीठे जल के संसाधनों को बचाने का उपाय भी करना इसका उद्देश्य है।

प्रश्न 12.
आरोग्य विज्ञान क्या है ? विशेष अवस्थाओं के लिए सफाई-प्रबन्ध का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
व्यक्तिगत स्तर तथा घरेलू स्तर पर सफाई (Hygiene) स्वस्थ रहने के लिए नितान्त आवश्यक है । सोकर उटने के बाद नित्य कर्मो से निवृत्त होकर हमे प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। गर्मी के दिनों में सम्भव हो सके तो दो बार स्नान करना लाभप्रद होता है। स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए। यदि कपड़े साफ और शरीर स्वच्छ नहीं तो इनकी गंदगी सूक्ष्म जोवाणुओं की वृद्धि में सहायक होती है। गंदगी केवल दुर्गध ही पैदा नहीं करती, बल्कि यह शरीर को भी अस्वस्थ कर सकती है।

प्रतिदिन सुबह एवं रात्रि को सोने से पहले दाँतों को भी प्रभावित करते हैं, जिससे पायरिया नामक रोग हो सकता है । बढ़े हुए नाखूनों को काटना तथा उन्हें साफ करना भी निहायत आवश्यक है अन्यथा नाखूनों में मैल के जमा होने पर हंम प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। खाने के पहले तथा खाने के बाद में हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना, अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। बच्चों को यह शिक्षा घर के वातावरण से प्राप्त होनी वाहिए जिससे उनमें अच्छी आदते विकसित हों।

विद्यालयों में भी मध्याह्ल भोजन (Mid-day meal) के समय इस म्रकार की आदतों के विकास के लिए शिक्षिक/शिक्षिका की निगरानी में साबुन द्वारा हाथों को साफ करवाया जाता है। विद्यार्थियों के बर्तनों की जाँच समय-समय पर होती है, ताकि वे साफ व सुखे रहैं।

अच्चे स्वास्थ्य के लिए घर को साफ तथा हवादार रखना भी आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर कोटाणुओं (germs) का विकास होने लगता है। इसलिए यह भी आवश्यक है कि घर के अगल-बगल का स्थान स्वच्छ रहे, कहीं पानी का जमाव नहीं हो, नहीं तो मच्छर, मक्खियाँ वृद्धि करने लगते हैं। रोग उत्पन्न करने वाले जीव तथा रसायन, हमारे शरीर में भोजन तथा पानी के माष्यम से प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए स्वच्छ भोजन के साथ स्वच्छ जल का सेवन अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है

प्रश्न 13.
जैव-खाद क्या है ? जैविक खाद का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
जैव उर्वरकों के मुख्य सोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया (Cyanobateria) होते हैं। लेग्यूमिनस पौधों की जड़ों की गाँठों के अन्दर पाये जाने वाले राइजोबियम हवा की N2 को मिट्टी में स्थिर करने का कार्य करते हैं। यही N2 पौधे के शरीर में पादप प्रोटीन बनाने के काम आता है तथा हम जन्तुओं को भी प्रोटीन की प्राप्ति होती है । दुसरे जीवाणु जैसे ऐजोस्पाइरिलम तथा एजोबैक्टर मिट्टी में स्वतन्त्र अवस्था में रहकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण का कार्य करते है। इस तरह मिट्टी में N2 की मात्रा बढ़ जाती है।

सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित सूक्ष्म जीव है। जो जलीय तथा स्थलीय वातावरण में मिलते हैं तथा नाइट्रोजन के स्थिरीकरण (Nitrogen fixation) का कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए-ऐनाबीना, नॉसटाक, आंसिलेटोरिया आदि। धान के खेत के लिए सायनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव-उर्वरक की भूमिका निभाते हैं। कवक पादपों के साथ सहजीवी सम्बन्ध (Mycorrhiza) बनाते हैं। ग्लोमस जीनस के बहुत से सदस्य माइकोराइजा बनाते हैं। इससे भोजन में कवकीय सहजीवी मृदा से फॉस्फोरस (P) का अवशोषण कर उसे पादपों में भेज देते हैं।

इस प्रकार हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि हमारे किसानों द्वारा जैव-उर्वरकों का व्यवहार बढ़ रहा है। हमें यह भी मालूम होना चाहिए कि जैव-उर्वरकों की एक बड़ी संख्या, बड़े पैमाने पर बाजार में उपलब्य है। इनके प्रयोग से मृदा का संरक्षण निश्चित रूप में होगा और रासायनिक उर्वरकों पर हमारी निर्भरशीलता घटेगी।

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प्रश्न 14.
मलेरिया क्या है ? मलेरिया के लक्षण क्या हैं ? मलेरिया की रोकथाम के उपाय क्या हैं ?
उत्तर :
मलेरिया (Malaria) : मलेरिया एक प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम की विभिन्न प्रजातियों से होने वाला रोग है। प्लाज्मोडियम की चार प्रजातियाँ हैं – वाइवेक्स, ओवेल, फैल्सीपेरम तथा मलेरिआई। यह परजीवी मनुष्य के यकृत एवं R.B.C. में तथा मादा एनोफिलीज मच्छर के आमाशय में विभाजित होकर वृद्धि करता हैं। जब संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर किसी मनुष्य को काटता है तो उसके लार के साथ अनेक परजीवी मनुष्य के रक्त में चले जाते हैं।

लक्षण (Symptoms) : मलेरिया का साधारण लक्षण है – कंपन के साथ तेज बुखार, सिर दर्द एवं पेशियों में दर्द। RBC टूटने से रक्त शून्यता होने लगती है। प्लीहा का आकार बढ़ जाता है। रोगी को प्रति 48 घंटे पर तेज बुखार आता है। RBC के फटने से रक्त में एक विषैला पदार्थ हीमोजोइन (Haemozoin) मुक्त होता है। इसी विषैले पदार्थ के कारण मनुष्य को तेज बुखार होता है।

रोकथाम :

  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए तथा खुले भागों में मच्छर-निरोधक कीम या सरसों का तेल लगाना चाहिए।
  • मच्छर के प्रजनन स्थानों पर कीटनाशक रसायनों जैसे – DDT का छिड़क्तव करना चाहिए।
  • छोटे-छोटे नालों या गद्दे को भर देना चाहिए ताकि मच्छरों का नाश हो
  • मकान के आसपास टूटे-फूटे बरतन या ऐसे पात्र जिसमें जल जमा रहता है, नहीं रहने देना चाहिए।

प्रश्न 15.
संक्रामक बीमारी किसे कहते हैं ? कुछ संक्रामक रोग तथा उनके रोगाणुओं के नाम बताइये।
उत्तर :
संक्रामक बीमारी (Infectious disease) : सूक्ष्म जीव रोगाणुओं द्वारा होने वाले रोगों को संक्रामक बीमारी कहते हैं। जैसे – T.B., AIDS, मलेरिया आदि।

कुछ संक्रामक रोग तथा उनके रोगाणु |

रोग रोगाणु
1. AIDS, चेचक, डेंगू, पित्तज्वर आदि विषाणु
2. हैजा, डायरिया, प्लेग, न्यूमोनिया, कोढ़, टिटेनस, T.B. आदि जीवाणु
3. मलेरिया, कालाजार आदि प्रोटोजोआ
4. फाइलेरिया, हाथी रोग आदि कृमि
5. चर्मरोग, भोजन का विषाक्त होना आदि कवक

प्रश्न 16.
सूक्ष्म जीव मानव कल्याण में किस प्रकार सहायक हैं ?
उत्तर :
मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव :- सूक्षजीव सर्वव्यापी होते हैं। सूक्ष्म जीव उन स्थानों पर भी उपस्थित रहते हैं, जहाँ जीवन सम्भव नहीं है। ये सूक्ष्म वायु, जल, मिट्टी, प्राणी, पौषे आदि में व्याप्त होते हैं। ये सूक्ष्म जीव हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में कार्य करते हैं। सभी सूक्ष्म जीव रोग पैदा नहीं करते हैं, इनमें से कुछ तो बहुत ही लाभदायक होते हैं दूध को दही में बदलने का काम लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु करता है।

डोसा, इडली, बनाने में जीवाणु द्वारा किण्वन होता है। पावरोटी बनाने में भी आटे के साथ खमीर (Yeast) सारकोमाइसजी सेरीविसी का प्रयोग किया जाता है। सूक्ष्म जीवों का प्रयोग सोयाबिन, किण्वित मछली आदि के भोजन तैयार करने में किया जाता है। लाभप्रद सूक्ष्म जीवों द्वारा पेनिसिलीन नामक एन्टीबायोटिक का उत्पादन किया जाता है। सूक्ष्म जीव द्वारा उत्पन्न बायोगैस का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के रूप में किया जाता है। इस प्रकार मानव कल्याण में सूक्ष्म जीवों का बहुत बड़ा योगदान है, ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 17.
एडवर्ड जेनर कौन थे ? इन्होंने किसका आविष्कार किया ? किस प्रकार से टीकाकरण द्वारा हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ? लिखो।
उत्तर :
टीकाकरण की क्रिया का विचार सर्वप्रथम एडवर्ड जेनर (Edward Jenner 1748-1823) के मस्तिष्क में उत्पन्न हुआ। एडवर्ड जेनर एक डॉक्टर थे। एकबार इंग्लैण्ड में स्माल पॉक्स की बहुत ही भयकर बीमारी फैल गई। इसके प्रभाव से अधिकतर शहरी निवासियों की मृत्यु हो गई। परन्तु गायो के निवास स्थानों (गोशाला) में रहने वाले ग्रामीण लोगों अर्थात् ग्वालों पर इसका प्रभाव बहुत ही कम था।

अधिकतर किसान और दूथ उद्योग से संबंधित काउ पॉक्स द्वारा प्रभावित होकर शीघ्र ही स्वस्थ हो गये। इसे देखकर उन्होंने अनुभव किया कि ऐसे व्यक्ति जो काउ पोंक्स के वैक्सिन लिये हैं उनको स्माल पॉक्स से सुरक्षा हो जाती है। डॉ० जेनर ने मई 1796 ई० में अपनो इस टीकाकरण की विधि एक बच्चे के ऊपर प्रयोग करके सफलता प्राप्त की।

जेनर ने शरीर में जीवाणु के विषैले प्रभाव को नष्ट करने के लिए उत्पन्न हुए प्रतिरक्षी पदार्थ का नाम वैविसन (Vaccine) रखा और शरीर के अन्दर इसे प्रदान करने की क्रिया को टीकाकरण (Vaccination) कहा। किसी रोग से सुरक्षा करने के लिए वैक्सिन के उपयोग की विधि को वैक्सिनोधिरापी (Vaccinotherapy) कहते हैं। लुईस पास्तूर ने जेनर के सिद्धान्त को स्वीकार करके ऐंच्थेक्स, चिकेन पोंक्स, हैजा, रैबिस(Hydrophobia) का वैक्सिन तैयार किया।

प्रश्न 18.
वैक्सिन कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
वैक्सिन के प्रकार (Types of vaccine) : वैक्सिन निम्न प्रकार की होती हैं –

  • जीवित वैक्सिन (Live vaccine): यह सजीवों के शरीर से प्राप्त की जाती है। यह निर्जीव वैक्सिन से अधिक सक्रिय है। जैसे – ओरल पोलियो (B.C.G.), स्मालपॉक्स, मीजील्स (Measles) और मम्पस (Memps) की वैक्सि।
  • मृतजीवों से प्राप्त वैक्सिन (Killed vaccines) : इस वैक्सिन को प्राप्त करने के लिए पहले जीवधारी को उष्मा या रासायनिक पदार्थों द्वारा जान से मार दिया जाता है। इनकी कोशिकाओं से प्राप्त वैक्सिन को जब शरीर में प्रेषित किया जाता है तो यह शरीर में इम्यूनिटी उत्पत्र करती है।

प्रश्न 19.
जैव उर्वरक के रूप में सायनो बैक्टीरिया तथा माइकोराइजा के महत्व पर प्रकाश डालो।
उत्तर :
जीवाणु जैविक उर्वरक के रूप में (Bacteria as biofertilizer) : कुछ जीवाणु भूमि में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाते है। इस प्रकार पौधों को कृत्रिम उर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। ये जीवाणु सहजीवी (Symbiotic), स्वतंत्र रहने वाले और उच्च श्रेणी के पौधों की जड़ों के पास में जैसे-तैसे रहने वाले है।

जैविक उर्वरक (Biofertilizer) : जैविक उर्वरक वे सूक्ष्म जीवधारी हैं, जो अपनी जैविक क्रियाओं से भूमि में पोषक पदार्थो (Nutrients) की पूर्ति करते हैं। जीवाणु और साइनोजीवाणु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को भूमि में नाइट्रोजन के यौगिकों के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। इस कार्य में कुछ फफुंद (Fungi) भी सहायता करते हैं। जैसे माइकोराइजा।

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प्रश्न 20.
जैव उर्वरकों से क्या समझते हो ? इसके प्रयोग को किस प्रकार से प्रोत्साहित किया जायेगा ? जैव कृषक किनको कहते हैं ?
उत्तर :
जैव उर्वरकों : नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने के कारण कुछ जीवाणु जैव उर्वरक का कार्य करते हैं। एजोला एक तैरने वाला और तीव्र गति से उगने वाला फर्न का पौधा है। इसकी पत्तियों में उपस्थित रिक्त स्थानों में साइनोवैक्टिरियम और एनाबिना एजोला (Cynsbacterias and Anabaena azolla) रहते हैं।

ये वायु की स्वतंत्र नाइट्रोजन को पत्तियों के रिक्त स्थानों में ग्रहण कर नाइट्रोजन के यौगिकों के रूप में परिवर्तित करते हैं। यह एक उत्तम उर्वरक का कार्य करता है। इसके उपयोग से लगभग 50% फसल की उपज बढ़ जाती है। एनाबिना और नोस्टाक (Anabaena and Nostoc) भी प्रकाश-संश्लेषण से नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिये ऊर्जा प्राप्त करते है। अत: ये भी उर्वरक का कार्य करते हैं।

जैविक उर्वरक के रूप में फफूंद (Fungi as biofertilizer) : कुछ फंजाई वर्ग के पौधे परजीवी के रूप में पौरों की जड़ों के ऊपर या उनकी कोशिकाओ में रहते हैं। वाह्म माइकोराइजा (Ectomycorrhiza) पाइनस और ओक की रेशेदार जड़ों के साथ रहता है। यह पौधे से अपना पोषक पदार्थ प्राप्त करता है और उसे पोषण के लिए नाइट्रोजन फॉस्फोट और केल्शियम प्रदान करता है। अन्तः माइकोराइजा (Endomycorrhiza) फंगस पौधों की कोशिकाओं के मध्य या कॉर्टेक्स की कोशिकाओं के अन्दर सहजीवी के रूप में रहता है। यह तम्बाकू, बाय, रबर और आर्किड आदि पौथों की जड़ों में पाया जाता है।

प्रश्न 21.
एक शिशु को विभिन्न समय की किन-किन बीमारियों से बचाव हेतु टीके लगाये जाते हैं ?
उत्तर :
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प्रश्न 22.
हेपेटाइटिस क्या है ? हेपेटाइटिस के लक्षण क्या हैं ? यह रोग कैसे फैलता है ?
उत्तर :
हेपेटाइटिस यकृत में होने वाला मुख्य रूप से वाइरस से फैलने वाला एक रोग है। हेपेटाइटिस का नाम वाइरस के विभिन्न प्रकार के अनुसार दिया जाता है। इस रोग को उत्पन्न करने वाले 6 प्रकार के वाइरस होते हैं। ये Hepatitis A से लेकर Hepatitis F हैं।

लक्षण : विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस के लक्षण भिन्न भिन्न होते हैं। सिर दर्द, बुखार, जांन्डिस एवं गहरे पीले रंग का मूत्र इस रोग के साधारण लक्षण हैं। भूख न लगना, के होना, लिवर का आकार बढ़ जाना तथा जोड़ों में दर्द होना आदि भी इस रोग के लक्षण हैं।

रोग का फैलना : अनैतिक यौन संबंध स्थापित करने से, एक ही ब्लेड या रेजर से दाढ़ी बनवाने से, एक ही सीरिंज से कई लोगों को सूई लगाने से, नाक कान छेदाने से, थूक, लार आदि द्वारा यह रोग फैलता है। इस रोग से पीड़ित गर्भवती महिला का शिशु भी इस रोग का शिकार हो जाता है।

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प्रश्न 23.
प्राकृतिक प्रतिरक्षा के विभिन्न रोधों का वर्णन कीजिए?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रतिरक्षा के निम्न चार रोध है :-

  • शारीरिक रोध (Physical barriors) : हमारे शरीर पर त्वचा मुख्य अवरोधक है जो सूक्ष्म जीवों के प्रवेश को रोकती है।
  • कायकीय रोध (Physiological barriors) : आमाशय में अम्ल, मूँह में लार, आँखों के आँसू आदि कायकीय रोध हैं।
  • कोशिकीय रोध (Cellular barriors) : W.B.C. में उपस्थित मोनोसाइट्स, लिम्फोसाइट्स आदि।
  • साइटोकाइन रोध (Cytokine barriors) : विषाणु संक्रमित कोशिकायें इन्टरफेरॉन नामक प्रोटीन का स्नाव करती है जो असकमित कोशिकाओं को और आगे विषणणु के संक्रमण से बचाती है।

प्रश्न 24.
डायरिया क्या है ? डायरिया के लक्षण क्या हैं ? इसकी रोकथाम के उपाय क्या हैं ?
उत्तर :
डायरिया (Diarrhoea) : डायरिया आँत में जीवाणुओं, विषाणुओं तथा अमीबा आदि के संक्रमण से होता है। इसके रोगाणु आँत को संकमित करते हैं। तीक्ष्ण डायरिया में प्रायः उदरशूल तथा ज्वर भी हो जाता है।

लक्षण :

  • दस्त तथा उल्टी का बार-बार होना डायरिया के सामान्य लक्षण हैं।
  • लगातार दस्त होने के कारण शरीर में जल तथा आवश्यक लवण की कमी हो जाती है।

इसके कारण निर्जलीकरण होता है एवं रोगी प्यास का अनुभव करता है। आँखे अन्दर की ओर धँसने लगती है, साँसे तेज चलने लगती हैं, वजन घटने लगता है, रोगी को बुखार तथा जोड़ों में दर्द हो सकता है।

रोकथाम :

  • इस रोग के संक्रमण से बचने के लिए सभी को व्यक्तिगत सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
  • पीने का ज़ल शुद्ध तथा संक्रमण रहित होना चाहिए।
  • भोजन स्वस्थकर तरीके से पकाना चाहिए तथा इसे ढंककर रखना चाहिए।
  • हमेशा ताजा तथा गर्म भोजन करना चाहिए।
  • इस रोग के रोगी को ORS पिलाना चाहिए।

प्रश्न 25.
संक्रामक रोग क्या है ? संक्रामक रोग कितने तरीके से स्थानान्तरित होते हैं ?
उत्तर :
संक्रामक रोग (Communicable disease) : प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक कुछ कीटाणुओं द्वारा स्थानान्तरित होने वाले रोगों को संक्रामक रोग कहते है। इस प्रकार के रोग को छुआछूत की बीमारी (Infectious disease) भी कहा जाता है । यह रोग जीवाणु, विषणु, कवक तथा प्रोटोजोआ द्वारा फैलता है। संकामक रोग का स्थानान्तरण निम्नलिखित तरीके से होता है।

प्रश्न 26.
बैक्टीरिया से होने वाले विभिन्न रोगों तथा बैक्टीरिया के नाम लिखिए।
उत्तर :
मनुष्य में होंने वाले विभिन्न रोग तथा रोग को फैलाने वाले बैक्टीरिया के नाम निम्नलिखित हैं :-

(i) वायु द्वारा डिप्थेरिया, इन्फ्लूएंजा।
(ii) स्पर्श द्वारा Chiken pox
(iii) जल द्वारा हैजा, पेचिश
(iv) भोजन द्वारा वादुलिज्म (Batulism)
(v) काटने से रैबिज
(vi) कीटों द्वारा मलेरिया

प्रश्न 27.
घरेलू मक्खी मानव रोगों को फैलाने में किस प्रकार भूमिका निभाती है ?
उत्तर :
मक्खी एक कीटर समुदाय का प्राणी है जो गन्दे स्थानों, जैसे – थूक, खखार, मल, धाय, उल्टी आदि पर अपना भोजन महहण करने के लिए बैठती है। इन गन्दे स्थानों में उपस्थित रोग के कीटाणु उनके पैरों तथा मुखांग में चिपक जाते हैं।

पुन: जब यह भोजन खुले खाद्य पदार्थों, मिठाई आदि पर बैठती है तो पैरों तथा मुखांगों में चिपके रोग के कीटाणु भोज्य पदार्थें में मिल जाते हैं। जब कोई व्यक्ति इन भोज्य पदार्थों को खाता है तो रोगाणु शरीर में पहुँचक्र रोग उत्पन्न करते हैं।
हैजा के कीटाणु टायफायड के कीटाणु, T.B. के कीटाणु, डायरिया आदि के कीटाणुओं का संवहन मविखयों द्वारा होता है।

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प्रश्न 28.
रक्तधान से होने वाली बीमारियों के नाम लिखिए ? इन बिमारियों से होने वाली प्रमुख समस्यायें क्या हैं ?
उत्तर :
रक्तधान (Blood transfussion) से होने वाली बीमारियाँ :-

  • AIDS
  • मलेरिया
  • हेपेटाइटिस

इन बीमारियों से होने वाली समस्यायें :

  • AIDS : AIDS में मनुष्य के शरीर में प्रतिरक्षा क्षमता समाप्त हो जाती है।
  • मलेरिया : इसमें रोगी को कँपक्रेपी तथा जाड़े के साथ बुखार आता है। सिर तथा शरीर मे अत्यधिक दर्द होता है।
  • हेपेटाइटिस : इसमें यकृत की कोशिका नष्ट हो जाती है, जिसंमें पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। इसमें भूख में कमी, सिर दर्द, तेज बुखार आदि होने लगता है।

प्रश्न 29.
रोग क्या है ? मनुष्य के मच्छर तथा घरेलू मक्खियों द्वारा संचारित रोग का नाम बताइये ? मनुष्य में मलेरिया, फाइलेरिया, हैजा टायफायड पेचिश, पीत ज्वर आदि रोगों का संक्षेप में वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
रोग :- रोग हमारे शरीर की वह व्यवस्था है जिसमें सामान्य शारीरिक क्रियाएँ बाधित हो जाती हैं, शारीरिक अंग तथा अंग तंत्र सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं। मच्छरों द्वारा फैलाने वाले रोग :

  • मलेरिया
  • फाइलेरिया
  • पीत ज्वर
  • इन्सेफलाइटिस।

घरेलू मक्खियों द्वारा फैलने वाले रोग :

  • हैजा
  • पेचिश
  • टायफायड।

A. मलेरिया (Malaria) : यह एक प्रोटोजोआ द्वारा होने वाला रोग है जो मादा एनाफिलीज के कारण फैलता है। मलेरिया रोग प्लाज्मोडियम वाइवेक्स (Plasmodium Vivax) नामक एक प्रोटोजोआ द्वारा होता है। इसमें रोगी को कँपकंपी होकर तेज़ बुखार आता है तथा सिर दर्द होने लगता है, बदन दूटने लगता है। जाड़ा होकर बुखार आता है तथा बाद में पसीना आता है।

B. फाइलेरिया (Filaria) : फाइलेरिया रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फैलता है। इस रोग के परजीवी मनुष्य के रक्त तथा लसिका को प्रभावित करते हैं। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति का हाथ-पाँव फूल जाता है, तेज बुखार आ जाता है। इस रोग से ग्रसित रोगी का पैर इतना फूल जाता है कि हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है।

C. हैजा (Cholera) : हैजा से ग्रसित रोगी को दस्त तथा उल्टी होने लगता है, शरीर में जल की कमी हो जाती है। पेट में दर्द होने लगता है। शरीर सुस्त हो जाता है। रोगी को बुखार आ जाता है। पेशाब बन्द हो जाता है। ऐसे रोगी का शीष्र उपचार आवश्यक हो जाता है, अन्यथा मृत्यु भी हो सकती है।

D. टायफायड (Typhoid) : टायफायड साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु द्वारा होता है। इस रोग से प्रसित व्यक्ति को लगातार 3-4 सप्ताहों तक बुखार रहता है। इस रोग में हुदय की धड़कन कम हो जाती है। मस्तिष्क disorder हो जाता है। मल का रंग हरा हो जाता है। रोगी के शरीर में गुलाबी दाग आ जाता है।

E. पेचिश (Dysentry) : पेचिश ऐन्ट-अमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba Histolytica) के कारण होता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के मल-मूत्र त्यागने पर उनके मल के साथ ट्रोफोज्वाएट सिस्ट (Trophozoit cyst) भी बाहर निकल जाते हैं एवं अगल-बगल की सब्जियों तथा जल को दूषित कर देते हैं.। ये मक्खियो द्वारा भी संक्रमित होते हैं। हरी सब्जियाँ या जल इनको स्वस्थ पुरुष के शरीर में ले जाता है।

F. पीत ज्वर (Yellow fever) : पीत ज्वर मादा मच्छर द्वारा फैलता है। जब कोई व्यक्ति रोग से ग्रसित हो जाता है तो उसे तेज बुखार आ जाता है। रोगी कुछ ही दिनों में पीलिया रोग से प्रसित हो जाता है, ऐसे में रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।

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प्रश्न 30.
जीवित वैक्सिन क्या है ? वैक्सिन उपयोग की विधि को क्या कहते हैं।
उत्तर :
जीवित वैक्सिन (Live vaccine) : यह सजीवों के शरीर से प्राप्त की जाती है। यह निर्जीव वैक्सिन से अधिक सक्रिय है। जैसे – ओरल पोलियो (B.C.G.), स्मालपॉक्स, मीजील्स (Measles) और मम्पस (Memps) की वैक्सिन। टीकों को शरीर में प्रवेश कराने की विधि टीकाकरण (Vaccination) कहलाती है। यह वह विधि है जिसके द्वारा सूक्ष्म रोगाणुओं को किसी विशिष्ट रसायन के माध्यम से विकसित कर, अत्यन्त कम मात्रा में, किसी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कराया जाता है । रोगाणु मिश्रित इस विशिष्ट रसायन को टीका (Vaccine) कहते हैं।

इसे सूई लगाकर अथवा दवा के रूप में पिलाकर शरीर में प्रवेश कराया जाता है। किसी विशेष रोग का टीका जब शरीर में प्रवेश करता है तब शरीर का प्रतिरक्षक तन्न (Immune system) उस रोक के विरोध में एण्टीव विकसित कर लेता है जो शरीर में अस्थायी अथवा स्थायी रूप से उपस्थित रहता है। जब कभी रोग फैलाने वाला वह सूक्ष्म जीव शरीर के अन्दर पहुँच जाता है तो पहले से उपस्थित इस एण्टीबोंडीज के द्वारा वह नष्ट कर दिया जाता है। इस प्रकार से उस विशेष रोग से हमारे शरीर को छुटकारा

मिल जाता है। हैजा, पोलियो, चेचक जैसी बीमारियों के लिए टीकों का विकास किया जा चुका है तथा इसके प्रभावी नतीजे भी प्राप्त हुए है। भारत सरकार की योजना है कि देश से विभित्र बीमारियों; जैसे – मलेरिया, पोलियो आदि को जड़ से समाप्त कर दिया जाये। इस अभियान में राज्य सरकारे तथा विभिन्न संगठन अपनी-अपनी विशेष भूमिका निभा रहे हैं, ताकि भारत का हर बच्चा स्वस्थ रहे एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी को निभाये।

टीका बीमारी
BCG T.B.
MMR Mumps, Measles & Rubella
Polio (oral) Polio
Toxoid serum Diptheria
Cholera vaccine Cholera
Rubella vaccine German measles, Small pox
TT Tetanus
DPT Diptheria, Pertussis & Tetanus

हमें यह ज्ञात हो चुका है कि रोग उत्पन्न करने वाले कई सूक्ष्म जीवों के शरीर में प्रवेश करने से शारीरिक रोगों की उत्पत्ति होती है। अत: सूक्ष्म जीव रोगाणुओं (Pathogens) द्वारा होने वाले रोगों को संक्रामक बीमारी (Infectious disease) कहते हैं; जैसे – हैजा, T.B., AIDS, मलेरिया आदि।

प्रश्न 31.
द्यूबरकुलोसिस किस जीवधारी के कारण होता है ? इसके लक्षण लिखें।
उत्तर :
क्षयरोग या टी.बी. (Tuberculosis) : क्षयरोग या टी.बी. एक प्रकार के बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) के कारण होता है। शरीर में पहुँचने के बाद यह बैक्टीरिया एक जहरीला पदार्थ द्यूबरकुलीन (Tuberculin) मुक्त करता है। यह रोगाणु सामान्यत: फेफड़ा को प्रभावित कर उसके ऊतकों को क्षतिग्रस्त कर देता है।

रोग का समुचित इलाज न होने पर यह फेफड़ा के अतिरिक्त आहारनाल, मस्तिष्क तथा हड्डियों तक फैलकर उन्हें भी प्रभावित करता है। मनुष्य के शरीर में टी.बी. के बैक्टीरिया का उद्भव अवधि कुछ सप्ताह से कई वर्षों तक का होता है। यह रोग संक्रमित रोगी के थूक, कफ, खाँसी के माध्यम से फैलता है। क्षयरोग से ग्रसित गाय के दूध को बिना अच्छी तरह उबाले पीने से भी यह रोग होता है। यह तीव्रता से फैलने वाला संक्रामक रोग है।

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लक्षण :

  • सामान्यत: हलका बुखार होना, लगातार खाँसी आना, खाँसते समय कफ या बलगम के साथ रक्त निकलना तथा रात में शरीर से पसीना निकलना क्षयरोग के प्रमुख लक्षण हैं।
  • रोग के शीम्य उपचार न होने पर भूख लगना सामान्य से कम हो जाता है जिससे शरीर का वजन लगातार घटते जाता है।
  • इस रोग के लक्षण घीरे- धीरे प्रकट होते हैं। करीब 3 महीने सें ज्यादा खाँसी के साथ-साथ हलका बुखार रहना इस रोग के प्रारम्भिक लक्षण हैं। रोग पुराना होने पर कफ के साथ रक्त निकलता है। सीने में दर्द रहता है तथा चलने पर रोगी हाँफने लगता है।

प्रश्न 32.
जल स्वच्छता क्यों जरूरी है ? तथा इसके क्या उपाय किये जा सकते हैं ?
उत्तर :
यूनिसेफ एक संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ जल तथा सफाई प्रदान करना और उनको स्वस्थ बनाना है। इस संस्था के कार्यकारी बोर्ड ने 2006 ई० में इस कार्य को करने की मंजूरी दी। इसका जावा और इंडोनेशिया में एक शौचालय के निर्माण से कार्य प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के द्वारा बच्चों को सुरक्षित जल और बुनियादी स्वच्छता की सेवाओं को बेहतर ढंग से बढ़ावा देना है।

इस संस्था के दो प्रमुख लश्ष्य हैं –

  • 2015 ई० तक सुरक्षित पीने का पानी और बुनियादी स्वच्छता के लक्ष्य को पूरा करना है।
  • सभी विद्यालयों में पर्याप्त बच्चों के अनुकूल पानी और शौचालय की सुविधा तथा स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम को सुनिध्धित करना है।

प्रश्न 33.
स्वास्थ्य संरक्षण के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
स्वास्थ्य संरक्षण के लिए हमें निम्नलिखित उपाय करना चाहिए :-

  • व्यक्तिगत स्तर पर तथा घरेलू स्तर पर सफाई पर ध्यान रखना चाहिए।
  • हमे प्रतिदिन स्नान करना चाहिए।
  • भोजन को हमेशा ढंककर रखना चाहिए।
  • स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।
  • प्रतिदिन सुबह तथा रात को सोने से पहले दाँतों की सफाई अवश्य करनी चाहिए।
  • बढ़े हुए नाखून को काटना तथा साफ करना चाहिए।
  • शौचालय के उपयोग के बाद, घर की सफाई के पहले और बाद, भोजन बनाने के पहले, खाद्य पदार्थ सम्भालते समय, खाने के पहले तथा खाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
  • घर के आस-पास की सफाई करनी चाहिए। कचरा एकत्र करने के लिए कूड़ा-दान का व्यवहार करना चाहिए।
  • हमें अपशिष्ट पानी का खुले में बहाव नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि यह बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं तथा विषाणुओं को आकर्षित करता है।
  • पकाए हुए भोजन को साफ-सुथरे एवं ढ़ँके हुए बर्तन में रखना चाहिए।
  • शुद्ध पानी न होने पर पानी को उबालकर ठण्डा कर लेना चाहिए इसके बाद व्यवहार में लाना चाहिए।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 3 जीवन की शारीरिक क्रियाएँ

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Life Science Book Solutions Chapter 3 जीवन की शारीरिक क्रियाएँ offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Life Science Chapter 1 Question Answer – जीवन की शारीरिक क्रियाएँ

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
नेफ्रॉन में ग्लोमेरुलस को घेरने वाली रचना का क्या नाम है?
उत्तर :
वोमैन्स कैप्सूल।

प्रश्न 2.
प्राणी शरीर के किस अंग में ग्लोमेरुलस पाया जाता है?
उत्तर :
वृक्क

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प्रश्न 3.
सहजीवी पौधे का नाम लिखिए।
उत्तर :
लाइकेन (शैवाल और कवक)

प्रश्न 4.
रक्त की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
रक्त (Blood) : रक्त एक विशेष प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है जो खाद्य पदार्थ, ऑक्सीजन, कार्बनडाई – आक्साइड, हार्मोन, खनिज लवण, उत्सर्जी पदार्थ आदि के लिए परिवहन माध्यम का कार्य करता है।

प्रश्न 5.
पौधों के किस अंग द्वारा वाष्पोत्सर्जन की क्रिया सबसे अधिक होती है ?
उत्तर :
पौधों में पत्तियों द्वारा वाष्पोत्सर्जन की क्रिया सबसे अधिक होती है ।

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प्रश्न 6.
किस प्राणी में खुला रक्त परिवहन पाया जाता है ?
उत्तर :
तिलचट्टा, टिड्डा, झींगा आदि।

प्रश्न 7.
पौधों के पत्तों में बने भोजन का स्थानान्तरण किस उत्तक के द्वारा होता है।
उत्तर :
फ्लोएम।

प्रश्न 8.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से कौन-सा अंगाणु सम्बन्धित है ?
उत्तर :
क्लोरोप्लास्ट।

प्रश्न 9.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में ऊर्जा का स्रोत क्या है ?
उत्तर :
सूर्य का प्रकाश।

प्रश्न 10.
प्रकाश संश्लेषण की इकाई क्या है ?
उत्तर :
क्वान्टासोम (Quantasome)

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प्रश्न 11.
किस विधि में प्रकाश ऊर्जा का संग्रह स्थिति ऊर्जा में होता है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण।

प्रश्न 12.
किस रंग में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सबसे तेज होती है ?
उत्तर :
लाल रंग।

प्रश्न 13.
PGA का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Phospho Glyceric Acid.

प्रश्न 14.
प्रकाश संश्लेषण का नाम सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया ?
उत्तर :
Barnes (1898) ने।

प्रश्न 15.
किसने सर्वप्रथम प्रकाश अभिक्रिया की खोज की ?
उत्तर :
रोंबिन हिल (Robin Hill) नामक वैज्ञानिक ने।

प्रश्न 16.
श्वसन का केन्द्रस्थल क्या है ?
उत्तर :
माइटोकोण्ड़या तथा साइटोप्लाज्म।

प्रश्न 17.
एक ऐसे जन्तु का नाम बताइये जिसमें अनाक्सी श्वसन होता है।
उत्तर :
मोनोसिस्टिस।

प्रश्न 18.
किस श्वसन क्रिया में O2 आवश्यक है ?
उत्तर :
आक्सी श्वसन।

प्रश्न 19.
एक ऐसे जन्तु का नाम बताइये जो वायु के बिना श्वसन कर सकता है।
उत्तर :
फीताकृमि।

प्रश्न 20.
जल तथा वायु दोनों में श्वसन करने वाले जन्तु का नाम बताइये।
उत्तर :
टोड।

प्रश्न 21.
ग्लाइकोलाइसिस की क्रिया कहाँ होती है ?
उत्तर :
साइटोप्लाज्म में।

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प्रश्न 22.
किस जन्तु में श्वसन गीली त्वचा के द्वारा होती है ?
उत्तर :
केंुुआ।

प्रश्न 23.
तिलचड्टा का श्वसन अंग क्या है ?
उत्तर :
ट्रैकिया।

प्रश्न 24.
झंगा के रक्त में कौन सा श्वसन रंगा पाया जाता है ?
उत्तर :
हीमोसार्यनि।

प्रश्न 25.
शरीर की सतह द्वारा श्वसन करने वाले जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर :
अमीबा।

प्रश्न 26.
मनुष्य के पोषण की दूसरी अवस्था क्या है ?
उत्तर :
पाचन (Digestion)

प्रश्न 27.
कौन सा आहार आदर्श आहार कहलाता है ?
उत्तर :
दूध।

प्रश्न 28.
लार ग्रन्थि से उत्पन्न होने वाले एन्जाइम का नाम बताइये।
उत्तर :
टायलिन (Ptaylin)

प्रश्न 29.
कौन सा एन्जाइम वसा को वसीय अम्ल में तोड़ देता है ?
उत्तर :
लाइपेज।

प्रश्न 30.
किस पाचक रस में विकर अनुपस्थित रहता है ?
उत्तर :
पित्त रस (Bile)

प्रश्न 31.
B. M. R. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Basal Metabolic Rate

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प्रश्न 32.
किस पाचक रस द्वारा वसा का इमल्सिफिकेशन होता है ?
उत्तर :
पित्त (Bile)

प्रश्न 33.
जीवधारियों के शरीर में ऊर्जा का स्रोत क्या है ?
उत्तर :
भोजन (Food)

प्रश्न 34.
पाचन के बाद प्रोटीन किस भोज्य पदार्थ के रूप में आँतों में अवशोषित होते हैं ?
उत्तर :
अमीनो अम्ल।

प्रश्न 35.
नेफ्रान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वृक्क की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को नेफान कहते है।

प्रश्न 36.
कौन सा WBC घाव के भरने में सहायक है ?
उत्तर :
दीर्घ लिम्फोसाइट (Large Lymphosite)

प्रश्न 37.
सजीवों में प्रकाश संश्लेघण की क्रिया किस समय होती है ?
उत्तर :
सजीवों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दिन में प्रकाश की उपस्थिति में होती है।

प्रश्न 38.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया किस ऊत्तक में होती है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पत्तियों के ऊपरी तथा निचली बाह्य त्वचा के बीच उपस्थित मिजोफिल ऊत्तक में होती है।

प्रश्न 39.
क्या प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सभी जीवधारियों में होती है ?
उत्तर :
नही, प्रकाश संश्लेषण की क्रिया केवल क्लोरोफिल युक्त कोशिकाओं वाले जोवधारियों में होती है।

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प्रश्न 40.
प्रकाश संश्लेषण के अवयवों के नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक अवयव कार्बन डाई-आक्साइड, जल, क्लोरोफिल एवं प्रकाश है।

प्रश्न 41.
प्रकाश संश्लेषण का उपक्रिया फल क्या है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में O2 तथा H2O उपक्रिया फल है।

प्रश्न 42.
प्रकाश संश्लेषण क्रिया का कार्य स्थल क्या है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण किया का कार्यस्थल क्लोरोप्लास्ट का ग्रेना तथा स्ट्रोमा भाग है।

प्रश्न 43.
फोटान क्या है ?
उत्तर :
प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों को फोटान (Photan) कहते हैं।

प्रश्न 44.
उन जन्तुओं के नाम लिखिए जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया युग्लिना, क्रिसअमीबा आदि जन्तुओ में होती है।

प्रश्न 45.
प्रकाश संश्लेषण में आक्सीकारक तथा अवकारक क्या-क्या है ?
उत्तर :
आक्सीकारक – कार्बन डाई-आक्साइड CO2
अवकारक – जल (H2O)

प्रश्न 46.
श्वसन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर :
श्वसन से सजीवों में नियमित रूप से ऊर्जा की पर्ति होती है, इसलिए श्वसन आवश्यक है।

प्रश्न 47.
श्वसन की क्रिया सजीवों के शरीर में कहाँ होती है ?
उत्तर :
सजीवों के शरीर में श्वसन की क्रिया सभी जोवित कोशिकाओं मे होती है।

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प्रश्न 48.
श्वसन पदार्थ क्या है ?
उत्तर :
वे यौगिक जिनका आक्सीकरण कोशिकाओं के अन्दर होता है, उन्हें श्वसन पदार्थ कहते है ; जैसे – ग्लूकोज।

प्रश्न 49.
आक्सी श्वसन की दोनों अवस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
आक्सी श्वसन को दो अवस्याएँ – ग्लाइकोलाइसिस तथा केष्स चक्र हैं।

प्रश्न 50.
ग्लूकोज में उपस्थित तत्वों के नाम बताइये।
उत्तर :
ग्लूकोज में उपस्थित तत्व कार्बन (C) हाइड्रोजन (H) तथा आक्सीजन (O) होते है।

प्रश्न 51.
माइटोकोण्ड्रया का मुख्य कार्य क्या है ?
उत्तर :
माइटोकोण्डिया का मुख्य कार्य ATP का निर्माण करना है।

प्रश्न 52.
खाद्य के ऐसे दो अवयवों के नाम बताइये जिनसे ऊर्जा प्राप्त नहीं होती है।
उत्तर :
विटामिन तथा खनिज लवण ऊर्जा प्रदान नहीं करते है।

प्रश्न 53.
आमाशय में किस प्रकार के भोजन का पाचन होता है ?
उत्तर :
आमाशय में प्रोटीन तथा वसा का पाचन होता है।

प्रश्न 54.
मनुष्य के आमाशय के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।
उत्तर :
आमाशय के तीन भाग हैं – कार्डियक, फंडस तथा पाइलोरिक भाग।

प्रश्न 55.
संतुलित आहार किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर :
संतुलित आहार व्यक्ति के उम्म, लिग, जलवायु तथा कर्म आदि बातों पर निर्भर करता है।

प्रश्न 56.
एक व्यक्ति को प्रतिदिन कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है ?
उत्तर :
एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 2500-3000 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 57.
भोजन के किन-किन अवयवों के लिए पाचन की आवश्यकता नहीं होती है ?
उत्तर :
भोजन के विदामिन, जल तथा खनिज लवण के लिए पाचन की आवश्यकता नहीं होती है।

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प्रश्न 58.
ऊर्जा उत्पादक भोजन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पोषण प्रदान करने वाले भोजन को ऊर्जा उत्पादक भोजन कहते है, जैसे – कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि।

प्रश्न 59.
आवश्यक तत्व से क्या समझते हो ?
उत्तर :
वे तत्व जो सजीवों के शरीर की वृद्धि तथा पाषण के लिए अत्यन्त ही अनिवार्य होते है। इन तत्वो की अनुपस्थिती में किसी सजीव का जीवन वक्र ही पृरा नहीं हो सकता है उन्हें आवश्यक तत्व कहते हैं।

प्रश्न 60.
विकर (एन्जाइम) क्या है ?
उत्तर :
जीवित कोशिकाओ में उत्पन्न नाइट्रोजन युक्त कार्वनिक योगिको को जो अपनी उपस्थिति भाग से क्रिया दर को बदलती है उन्हे विकर या एन्जाइम कहते हैं। जैसे – एमाइलेज।

प्रश्न 61.
पेरिस्टेलसिस (Peristaisis) क्या है ?
उत्तर :
आहार नाल के भीतरी दोवारों पर होनेवाली संकुचन तथा परासरण की क्रमबद्ध क्रिया को पेरिस्टेलसिस कहते है।

प्रश्न 62.
मनुष्य के संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा का अनुपात क्या है ?
उत्तर :
मनुष्य के संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, ग्रोटीन तथा वसा का अनुपात 4: 1: 1 होता है।

प्रश्न 63.
पित्त किस अंग में अस्थाई रूप में जमा होता है ?
उत्तर :
अस्थायी तौर पर पित्त, पित्ताशय (Gail bladder) में जमा होता है।

प्रश्न 64.
पौधे में पोटाशिम के अभाव में कौन सा लक्षण प्रकट होता है ?
उत्तर :
पोटाशियम के अभाव में पौधों का किनारा पोला होने लगता है।

प्रश्न 65.
पाचक रस क्या है ?
उत्तर :
पाचन प्रंथि से स्रावित ऐसे सभी तरल जिससे पाचन क्रिया सम्पन्न होती है, उसे पाचक रस कहते हैं।

प्रश्न 66.
रक्त का रंग लाल क्यों होता है ?
उत्तर :
रक्त के लाल रक्त कणों में हिमोग्लोबिन नामक श्वसन कण पाये जाने के कारण रक्त का रंग लाल होता है।

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प्रश्न 67.
चिंगड़ी के रक्त में नीलापन क्यों होता है ?
उत्तर :
चिंगड़ी के रव्त में ताम्रयुक्त तथा प्रोटीन जातीय एक श्वसन कण होता है जो नीला रंग का होता है, हिमोसायनिन कहलाता है। हिमोसायनिन के कारण चिंगड़ी के रक्त का रंग नीला होता है।

प्रश्न 68.
लसिका (Lymph) क्या है ?
उत्तर :
लसिका एक स्वच्छ पोले रंग का क्षारीय तथा तरल यौगिक ऊत्तक है जो लसिका वाहिनियों में पाया जाता है।

प्रश्न 69.
हिमोसायनिन का क्या कार्य है ?
उत्तर :
हिमोसायनिन का प्रमुख कार्य O2 तथा CO2 का परिवहन करना है।

प्रश्न 70.
R. B.C. के दो कार्यों को लिखिए।
उत्तर :
R. B. C. के कार्य –
(i) O2 तथा CO2 का परिवहन करना।
(ii) रक्त की सान्द्रता बनाये रखना है।

प्रश्न 71.
संरक्षक आहार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
भोजन के वे उपादान जो शरीर को निरोग रखते है, संरक्षक आहार कहलाते हैं। जैसे – विटामिन, खनिज लवण तथां जल।

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प्रश्न 72.
विसरण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
विसरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें पदार्थ के गतिशील अणु अधिक सान्द्रता वाले स्थान से कम सान्द्रता वाले स्थान की ओर बहते हैं।

प्रश्न 73.
मानव शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा क्या है ?
उत्तर :
मानव शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा 14-16 ग्राम प्रति 100 मि० ली० है।

प्रश्न 74.
पित्ताशय कहाँ स्थित है ? क्या पित्ताशय एक ग्रंथि है ?
उत्तर :
पित्ताशय यकृत पिण्डों के बीच स्थित होता है। पित्ताशय एक ग्रंथि नहीं है।

प्रश्न 75.
मनुष्य के रक्त में कितने रक्त वर्ग हैं ?
उत्तर :
मनुष्य के रक्त में चार रक्त वर्ग पाए जाते है –

  • रक्त वर्ग – A
  • रक्त वर्ग – B
  • रक्त वर्ग – AB
  • रक्त वर्ग – O

प्रश्न 76.
लैटेक्स क्या है ? यह कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर :
लैटेक्स श्वेत, पीला व भूरे रंग का दूध जैसा तरल पदार्थ होता है। यह बरगद, मदार, पीपल, रबर आदि पौधों में पाया जाता है।

प्रश्न 77.
क्वीनिन क्या है ?
उत्तर :
क्वीनिन (Quinine) सिनकोना पेड़ की छाल में पाया जाता है। इससे मलेरिया बुखार की दवा बनाई जाती है।

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प्रश्न 78.
मनुष्य में वृक्क के अलावा दूसरा कौन उत्सर्जी अंग है ?
उत्तर :
मनुष्य में वृक्क (किडनी) के अलावा यकृत, त्वचा, छोटी आँत आदि उत्सर्जी अंग हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2/3 MARKS

प्रश्न 1.
क्या है? यह किस पौधे में पाया जाता है?
उत्तर :
लैटेक्स श्वेत, पीला व भूरे रंग का दूष जैसा तरल पदार्थ होता है। यह बरगद, मदार, पीपल, रबर आदि पौधों में पाया जाता है।

प्रश्न 2.
प्रकाशिक अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रकाशिक अभिक्रिया : प्रकाश-संश्लेषण की इस प्रक्रिया के लिये प्रकाश आवश्यक है। यह प्रक्रिया क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना वाले भाग में सम्पन्न होती है। इस प्रक्रिया के प्रारम्भ में प्रकाश की किरणें क्लोरोफिल अणु पर पड़तीहैं।

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प्रश्न 3.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया आक्सीकरण-अवकरण क्रिया कहलाती है, क्यों ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण क्रिया के अन्तर्गत जल का आक्सीकरण आक्सीजन में तथा कार्बन डाई-आक्साइड का अवकरण ग्लूकोज में होता है। इसलिए प्रकाश संश्लेषण की क्रिया आक्सीकरण-अवकरण क्रिया कहलाती है।

प्रश्न 4.
अप्रकाशिक अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अप्रकाशिक अभिक्रिया : प्रकाश-संश्लेषण की इस प्रक्रिया में प्रकाश की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह प्रक्रिया क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा वाले भाग में होती है। इसे ब्लैकमैन अभिक्रिया (Blackman’s reaction) भी कहतें हैं।

प्रश्न 5.
एक अल्केलाइड के नाम एवं उसके स्रोत बताएँ।
उत्तर :
एक अल्केलाइड का नाम निकोटिन है जिसका स्रोत तम्बाकू की पत्तियाँ है ।

प्रश्न 6.
एक जन्तु का नाम लिखो जिसमें प्रकाश संश्लेषण होता है तथा एक पौधे का नाम लिखो जो प्रकाश संश्लेषण में असमर्थ है।
उत्तर :
जन्तु का नाम – यूग्लिना (Euglena), पौधा का नाम – कवक।

प्रश्न 7.
पौधों में विभित्र पदार्थों का स्थानान्तरण कैसे होता है ।
उत्तर :
पौधे में जल का प्रवेश परासरण एवं खनिज पदार्थों का प्रवेश मिट्टी से जड़ में अवशोषण की विधि से होता है । जड़ की कोशिकाओं से जल रसारोहण विधि से पत्तियों में पहुँचता है। पत्तियों में बने भोजन का स्थानान्तरण फ्लोयम उत्तक की सहायता से होता है ।

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प्रश्न 8.
रात में पेड़ के नीचे सोना हानिकारक क्यों है ?
उत्तर :
रात में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रूक जाती है। पौधों के श्वसन के फलस्वरूप पौधों के आसपास कार्बन डाईआक्साइड की सांद्रता बढ़ जाती है जो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। अत: रात के समय पेड़ के नीचे नहीं सेना चाहिए।

प्रश्न 9.
NADP, PGA, ATP तथा CAC का सम्पूर्ण नाम लिखो।
उत्तर :
NADP : Nicotinamide Adenine Dinucleotide Phosphate.
PGA : Phospho Glyceric Acid.
ATP : Adenosine Tri Phosphate.
CAC: Citric Acid Cycle.

प्रश्न 10.
दौड़ते समय साँसें तेज चलती हैं क्यों ?
उत्तर :
व्यायाम करते समय शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोशिकाओं में भोज्य पदार्थ का आक्सीकरण तेज गति से होने लगता है। तेज गति से आक्सीकरण के लिए अधिक मात्रा में आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है अतः श्वसन क्रिया तेज हो जाती है।

प्रश्न 11.
मनुष्य के उत्सर्जन क्रिया में त्वचा की क्या भूमिका होती है?
उत्तर :
उत्सर्जन क्रिया में त्वचा की भूमिका :- त्वचा शरीर का सबसे बाहरी रक्षात्मक ‘आवरण है। त्वचा की भीतरी सतह पर रक्त वाहिनियाँ तथा अनेक पसीना ग्रंथियाँ (Sweat glands) होती हैं जिनसे पसीने (Sweat) का स्राव होता है। पसीना के साथ-साथ अनेक उत्सर्जी पदार्थ जैसे – यूरिया, लवण, अमोनिया इत्यादि बाहर निकलते हैं।

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प्रश्न 12.
मनुष्य के गैसीय उत्सर्जी पदार्थ क्या है?
उत्तर :
अमोनिया, एसीटोन, अल्कोहल, आदि ।

प्रश्न 13.
प्रकाश-संश्लेषण की रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 14.
सूक्ष्म पोषक तत्व की परिभाषा लिखो तथा एक उदाहरण दो।
उत्तर :
जिन आवाश्यक तत्वों की कम मात्रा की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों में लोहा, तांबा, बोरान, क्लोरिन, जस्ता और मोलिब्डेनम आदि शामिल हैं।

प्रश्न 15.
वसा में घुलनशील तथा पानी में घुलनशील एक-एक विटामिन का नाम लिखो।
उत्तर :
वसा में घुलनशील एक विटामिन का नाम : विटामिन A
पानी में घुलनशील एक विटामिन का नाम : विटामिन C

प्रश्न 16.
क्यूटिकूलर वाष्पोत्सर्जन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
क्यूटिकूलर वाष्पोत्सर्जन : इस प्रकार का वाष्पोत्सर्जन तने, पत्तियाँ तथा अन्य अंगों की सतह पर पाये जाने वाले क्यूटिकल (Cuticle) के द्वारा होता है।

प्रश्न 17.
वाष्पोत्सर्जन का एक महत्व बताए।
उत्तर :
वाष्पोत्सर्जन की क्रिया की तीव्रता के परिणामस्वरूप कोशिकाओं के अन्दर विलेय पदार्थों (Solutes) की सान्द्रता बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप फलो में शर्करा (Sugar) की मात्रा अधिक हो जाती है।

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प्रश्न 18.
विसरण क्या है ?
उत्तर :
विसरण (Diffusion) : विसरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें घुल्य के अणुओं का प्रवाह अधिक सान्द्रता से कम सान्द्रता की ओर होता है।

प्रश्न 19.
परासरण की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
परासरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें जल के अणुओं का प्रवाह कम सान्द्रता से अधिक सान्द्रता की ओर एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा होता है।

प्रश्न 20.
श्वसन क्या है ?
उत्तर :
श्वसन (Respiration) : श्वसन वह जैव रासायनिक क्रिया है जिसमें भोज्य पदार्थों के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 21.
जल का प्रकाशीय अपघटन क्या है?
उत्तर :
सूर्य के प्रकाश द्वारा क्लोरोफिल की सहायता से जल (H2O) को उनके आयन H+ तथा OH में विच्छेदित होने की क्रिया को जल का खिण्डन कहते हैं।

प्रश्न 22.
क्लोरोप्लास्ट के उस भाग का नाम बताइए जहाँ प्रकाश प्रतिक्रिया होती है।
उत्तर :
क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना (Grana) में प्रकाश-रासायनिक प्रतिकिया होती हैं।

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प्रश्न 23.
ग्रेनम किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ग्रेनम : पादप कोशिका के क्लोरोप्लास्ट के उस भाग को जिसमें क्लोरोफिल उपस्थित है और प्रकाश संश्लेषण की पहली अवस्था प्रकाश अभीक्रिया सम्पन्न होती है, उसे ग्रेनम कहते हैं।

प्रश्न 24.
पौधों में क्लोरोफिल अणु के निमार्ण में आवश्यक धात्विक तत्व का नाम बताएँ?
उत्तर :
पौधों में क्लोरोफिल अणु के निमार्ण में आवश्यक धात्विक तत्व का नाम मैग्नेसियम है।

प्रश्न 25.
ऑक्सी श्वसन का अन्तिम उत्पाद क्या है?
उत्तर :
ऑक्सी श्वसन का अन्तिम उत्पाद CO2 तथा H2O है।

प्रश्न 26.
वेनस हद्यय क्या है ? एक उदाहरण दो।
उत्तर :
वेनस हदय (Venous Heart) : वह हृदय जिसमें केवल अशुद्ध रक्त (impure or deoxygenated blood) प्रवाहित होता है उसे वेनस हृदय कहते हैं। इस प्रकार का हदय मछालयों में पाया जाता है।

प्रश्न 27.
पेस मेकर क्या है ?
उत्तर :
पेस मेकर (Pace maker) : हदय के दाहिने अलिन्द की दीवारों पर स्थित उस केन्द्र को जो हुय को स्पंदन करने की प्रेरणा देता है उसे पेस मेकर कहते हैं।

प्रश्न 28.
श्वसन में किसी अणु ग्लूकोज को संपूर्णतया ऑक्सीकृत करने के लिए कितने अणु ऑक्सीजन की आवश्यकता है?
उत्तर :
एक अणु ग्लुकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए 6 (छः) अणु ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है ।

प्रश्न 29.
श्वसन की क्रिया किस कोशकांग में होती है?
उत्तर :
सजीवों के शरीर में श्वसन की क्रिया माइटोकाण्ड्रिया में होती है।

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प्रश्न 30.
सहायक श्वसन अंग किस प्राणी में पाया जाता है? उदाहरणदें।
उत्तर :

  • कवई (Koi) – Labyrinthine organ (लेबिरिन्थीन आर्गन)
  • मांगुर (Mangur) – Arboresent organ (आर्बोरिसेन्ट आर्गन)
  • सिंघी (Singhi) – Extrabranchial diverticulum (एक्सट्रा ब्रांकियल डाइवर्टिकुलम)

प्रश्न 31.
प्रकाश-संश्लेषण किस प्रकार की उपापचयी क्रिया है और क्यों?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण क्रिया एक रचनात्मक क्रिया है, व्योंकि इस क्रिया में जल तथा कार्बन डाई-आक्साइड के संयोग से रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप ग्लूकोज के नये अणुओं का निर्माण होता है जिसके फलस्वरूप पौषे के शुष्क भार मे वृद्धि होती है। इस क्रिया के फलस्वरूप जीवद्रव्य का निर्माण होता है। अतः प्रकाश-संश्लेषण एक रचनात्मक क्रिया है।

प्रश्न 32.
अनॉक्सी श्वसन करने वाले एक पौधे और एक प्राणी का नाम बताएँ।
उत्तर :
पौधे का नाम – यीस्ट। प्राणी का नाम – फीताकृमि।

प्रश्न 33.
ग्लाइकोलिसिस किसे कहते हैं?
उत्तर :
ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis) : यह आक्सी श्वसन की पहली अवस्था है। यह आक्सीजन की अनुपस्थिति में कोशिका के अन्दर साइटोप्लाज्म में सम्पन्न होती है। इसमे ग्लूकोज का आंशिक आक्सीकरण होता है। इसका नियन्तण कोशिका के साइटोप्लाज्म में उपस्थित विभिन्न एन्जाइम द्वारा होता है। इस क्रिया के फलस्वरूप ग्लूकोज का प्रत्येक अणु आंशिक रूप से आक्सीकृत होकर पाइरूविक अम्ल में बदल जाता है।

प्रश्न 34.
प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की भूमिका :- क्लोरोफिल के अणु विकिरण ऊर्जा ग्रहण करके जल को H+ तथा OH आयनों में तोड़ देते हैं। क्लोरोफिल विकिरण ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देता है।

प्रश्न 35.
प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा सौर ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में किस प्रकार परिवर्तित हो जाती है?
उत्तर :
जीवधारियों के लिए ऊर्जा का एकमात्र स्रोत सूर्य से प्राप्त प्रकाशीय ऊर्जा है, परन्तु यह प्रकाशीय ऊर्जा जीवों के द्वारा प्रत्यक्ष रूप में ग्रहण नहीं की जा सकती है। केवल हरे पौधे ही इस ऊर्जा को ग्रहण कर सकते हैं। हरे पौधों की कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोफिल पाया जाता है। प्रकाशीय ऊर्जा का लगभग 20% भाग क्लोरोफिल के अणुओं द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। यह अवशोषित ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदल दिया जाता है।

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प्रश्न 36.
प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाई-आक्साइड की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाई-आक्साइड की भूमिका :- कार्बन डाई आक्साइड गैस प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए एक कच्यी सामग्री है । इसके कार्वन और आक्सीजन दोनों ही तत्व ग्लूकोज के निर्माण में भाग लेते है ।

प्रश्न 37.
विटामिन ‘C’ का स्रोत क्या है ? इसकी कमी से कौन-सा रोग होता है?
उत्तर :
विटामिन ‘C’ का स्रोत :- यह आवला, नींबू, सतरा, ताजा मांस, टमाटर आदि में पाया जाता है।
कमी से रोग :- इसकी कमी से स्कर्वी नामक रोग होता है।

प्रश्न 38.
ट्रेस तत्व क्या है ? एक ट्रेस तत्व का नाम लिखिए।
उत्तर :
ट्रेस तत्व : वे तत्व जो जीवधारियों के पाषण के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं उन्हें माइको या ट्रेस तत्व कहा जाता है। उदाहरण : जिंक (Zn), मोलिख्डेनम (MO), बोरान (B) इत्यादि।

प्रश्न 39.
एक पूर्ण परजीवी पौधे का नाम लिखिए।
उत्तर :
पूर्ण परीजवी : ऐसे पौधे जो अपने भोजन के लिए पूर्णतः पोषक पर निर्भर करते हैं, पूर्ण परजोवी कहलाते है। जैसे- अमरलता जैसे पौधों की जड़ें वूषकांग कहलाती है क्योंकि इन्हीं की सहायता से ये पोषक से भोजन चूसते हैं।

प्रश्न 40.
मानव शरीर में प्रोटीन का पाचन कैसे होता है?
उत्तर :
आमाशय में उपस्थित जठर ग्रंधियों द्वारा सावित जठर रस में उपस्थित Hcl भोजन को अम्लीय बनाता है तथा निष्क्रय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है। यह एन्जाइम प्रोटीन प्रकृति के खाद्य पदार्थों पर किया करता है। अतः यह आमाशय में आये प्रोटीन प्रकृति के खाद्य पदार्थों पर क्रिया करके, पेप्टोन (Peptone) तथा प्रोटीओजेज (Proteoses) में बदल देता है।

प्रश्न 41.
वृहत् पोषक क्या है?
उत्तर :
कुछ खनिज हैं जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है और किसी भी अन्य तत्वों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होते है । जैसे – कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्रोमियम, कोबाल, आयोडीन, लोहा, सेलेनियम और मैंगंनीज।

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प्रश्न 42.
अवशोषण तथा रसारोहण का संबंध बताओ।
उत्तर :
रसारोहण क्रिया का प्रारम्भ अवशोषण से ही होता है । अवशोषण के दौरान जल एवं खनिज लवण विसरण एवं परासरण की क्रिया द्वारा कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं और वहाँ से ये जाइलम वाहिनियों तक पहुँचाये जाते हैं। वाष्पोत्सर्जन खिंचाव और मूल दाब के कारण जड़ की जाइलम वाहिनियों से पत्तियों के जाइलम वाहनियों तक जल का एक निरंतर स्तम्भ बना रहता है जो रसारोहण की क्रिया द्वारा बनता है । इस प्रकार रसाराहण और अवशोषण की क्रिया परस्पर एक दूसरे की पूरक होती है। अवशोषण के अनुपस्थिति में रसारोहण की क्रिया नहीं हो सकती है ।

प्रश्न 43.
रक्त किस प्रकार से जमता है ?
उत्तर :
रक्त साव के समय रक्त में उपस्थित प्लेटेलेट्स हवा के सम्पर्क में आकर टूटने लगते हैं। इनके दूटने से थ्रम्बोप्लास्टीन (Thromboplastin) नामक इन्जाइम उत्पत्न होता है जो प्लाज्मा प्रोटीन के मोध्रोम्बिन के सम्पर्क में आकर विटामिन K की उपस्थिति में सक्रिय ध्रोम्बिन (Thrombin) नामक इन्जाइम बनाता है। सक्रिय वोम्बिन केल्शियम आयन (Ca++)की उपस्थिति में प्लाज्मा प्रोटीन फाइबिनोजेन (Fibrinogen) को फाइबिन (Fibrin) तन्तुओं में बदल देते हैं । रक्त कणिकाएँ इन फाइब्रिन तन्तुओं के जाल में फस कर रक्त का थक्का (clot) बनाती हैं और रक्त का साव बन्द हो जाता है।

प्रश्न 44.
केशिका गुच्छ कहाँ पाया जाता है? इसका कार्य क्या है?
उत्तर :
केशिका गुच्छ वोमेन सम्मुट में पायी जाती है । परानिस्पन्दन द्वारा गलोमेरूलर निस्पन्दन करना ।

प्रश्न 45.
परजीवी की परिभाषा दें। परजीवी पौथे का एक उदाहरण दें।
उत्तर :
परजीवी (Parasite) : जो अपने भोजन के लिए दूसरे जीवधारी या स्वपोषी पर निर्भर होते हैं, उन्हें परजीवी कहते हैं।
उदाहरण : अमरलता।

प्रश्न 46.
वाष्पोत्सर्जन क्या है ?
उत्तर :
पौधों के वायवीय भागों द्वारा आवश्यकता से अंधिक जल का वाष्प बनकर बाहर निकलने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।

प्रश्न 47.
मनुष्य के हृदय में दाएँ आलिन्द और दाएँ निलय के बीच स्थित कपाटिका (वाल्व) का नाम लिखिए।
उत्तर :
दाएँ आलिन्द और दाएँ निलय के बीच त्रिदलन कपाट (Tricuspid Valve) रहता है ।

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प्रश्न 48.
हिमोग्लोबिन में उपस्थित धात्विक तत्व का नाम क्या है?
उत्तर :
हिमोग्लोबिन में उपस्थित धात्विक तत्व का नाम लोहा है।

प्रश्न 49.
रक्तदान क्या है?
उत्तर :
रक्त दान (Blood Donation) : जरूरत मंद व्यक्तियों (रोगियों) को आवश्यकता पड़ने पर उसे दूसरे व्वस्थ व्यक्तियों का रक्त चढ़ाना पड़ता है । ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति का अपना रक्त दूसरे के प्राण की रक्षा के लिए देना । क्तदान कहलाता है ।

प्रश्न 50.
सीरम क्या है?
उत्तर :
कटे भाग पर रक्त स्वाव बन्द हो जाने पर वहाँ तुन्त संकुचित हो जाते हैं और हल्का पीला द्रव निकलता है, सीरम कहलाता है।

प्रश्न 51.
सामान्य अवस्था में रक्त नलिका में रक्त न जमने के दो कारण लिखिए।
उत्तर :
(i) रक्त में उपस्थित हिपैरिन रक्त को धमनी तथा शिराओं में नहीं जमने देती है।
(ii) रक्त वाहिनियों की भीतरी दोवारें चिकनी होती हैं जिससे रक्त का रूकावट नहीं होता है ।

प्रश्न 52.
माइट्रोकॉन्डिया किसे कहते हैं ?
उत्तर :
माइट्रोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) : यह सभी जन्तु तथा पादप कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य में बिखरी दण्डरूपी धागेनुमा, दानेदार या गोल छोटी आकृतियाँ हैं।

प्रश्न 53.
श्वसन अंगों की विशेषता बताएं।
उत्तर : इनकी सतह कोमल और नम होती है। इनकी सतह पर रक्त केशिकाओं का जाल बिछा रहता है। नम रहने के कारण इन पर उपस्थित श्लेष्म (mucous) में ऑक्सीजन घुल जाती है।