WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – कठपुतली

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
गुस्से से कौन उबली ?
(क) कठपुतली
(ख) लड़की
(ग) खेल्ली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कठपुतली।

प्रश्न 2.
कठपुतली के आगे-पीछे क्या है ?
(क) कठपुतली
(ख) धागा
(ग) आदमी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) धागा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 3.
कठपुतली ने दूसरी कठपुतिलयों से क्या कहा ?
(क) बंधन तोड़ने के लिए
(ख) आत्मनिर्भर होने के लिए
(ग) स्वतंत्र होने के लिए
(घ) दिए गए सभी
उत्तर :
(घ) दिए गए सभी।

प्रश्न 4.
कठपुतलियों ने पहली कठपुतली के समक्ष क्या सहमति दी ?
(क) स्वतंत्र हो जाए
(ख) भाग जाए
(ग) धीरे-धीरे आगे बढ़ने की
(घ) एक साथ मिलकर आगे बढ़ने की
उत्तर :
(क) स्वतंत्र हो जाए।

प्रश्न 5.
‘हमें अपने मन के छंद हुए’ से क्या तात्पर्य है ?
(क) अपने लिए जीना
(ख) अपने मन की बात सुनना
(ग) इशारों पर नाचना
(घ) नया जीवन जीना
उत्तर :
(ख) अपने मन की बात सुनना।

प्रश्न 6.
पहली कठपुतली क्या सोचने लगी ?
(क) क्या बंधन टूट जाएँगे ?
(ख) क्या स्वतंत्र होना सुखमय होगा ?
(ग) क्या आगे बढ़ पाएँगे ?
(घ) क्या लक्ष्य पा लेंगे ?
उत्तर :
(ख) क्या स्वतंत्र होना सुखमय होगा ?

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प्रश्न 7.
क्या कठपुतलियाँ स्वतंत्र हो पाई ? यदि हो पाई तो कौन-सी ?
(क) नहीं, कोई भी नहीं
(ख) आधी हो गई
(ग) हाँ
(घ) सबसे छोटी वाली हो गई
उत्तर :
(क) नहीं, कोई भी नहीं।

प्रश्न 8.
‘कठपुतली’ शब्द का क्या अर्थ है?
(क) कटी हुई पुतली
(ख) काठ की पुतली
(ग) काठ और पुतली
(घ) उपर्युक्त सभी गलत
उत्तर :
(ख) काठ की पुतली।

प्रश्न 9.
कठपुतली का जीवन कैसा था ?
(क) रस्सी में बँधा हुआ
(ख) स्वतंत्र का
(ग) परतंत्रता का
(घ) आजादी का
उत्तर :
(ग) परतंत्रता का।

प्रश्न 10.
कठपुतली को किस बात का दु:ख था ?
(क) हर समय नाचने का
(ख) मुस्कराते रहने का
(ग) धागे में बँधने का
(घ) दूसरों के इशारे पर नाचने का
उत्तर :
(घ) दूसरों के इशारे पर नाचने का।

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प्रश्न 11.
‘पाँवों पर छोड़ देने’ का क्या भाव है ?
(क) स्वतंत्र कर देना
(ख) गुलाम बना लेना
(ग) सहारा लेना
(घ) सहारा छीन लेना
उत्तर :
(क) स्वतंत्र कर देना।

लघूतरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर :
कठपुतली ने सोचा कि वह धागे से बँधी हुई पराधीन है। उसके आगे-पीछे धागे हैं। वह अपने पाँव पर खड़ी नहीं हो सकती। इसीलिए कठपुतली को गुस्सा आया।

प्रश्न 2.
कठपुतली क्या तोड़ने के लिए कहती है ?
उत्तर :
कठपुतली अपने आगे-पीछे के धागों के बंधन को तोड़ने के लिए कहती है ।

प्रश्न 3.
कठपुतली की बात का समर्थन किसने किया ?
उत्तर :
कठपुतली की बात का समर्थन सभी कठपुतलियों ने किया।

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प्रश्न 4.
पहली कठपुतली क्या सोचने लगी ?
उत्तर :
पहली कठपुतली सोचने लगी कि हमारे मन में यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई। यह चुनौती भरा कदम समझदारी से उठाना चाहिए।

प्रश्न 5.
उपर्युक्त पद्यांश किस कविता से लिया गया है ?
उत्तर :
उपर्युक्त पद्यांश ‘कठपुतली’ नामक कविता से लिया गया है।

प्रश्न 6.
कठपुतली क्यों कोधित हो गई ?
उत्तर :
कठपुतली धागे से बँधे-बँधे तथा दूसरों के इशारों पर नाचते-नाचते परेशान हो गई थी, इसलिए वह क्रोधित हो गई थी।

प्रश्न 7.
कठपुतली ने क्या कहा ?
उत्तर :
कठपुतली ने कहा कि मेरे आगे-पीछे ये धागे क्यों हैं, इन्हें तोड़कर मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

प्रश्न 8.
“मुझें मेरे पाँवों पर छोड़ दो।” पंक्ति से कठपुतली का क्या आशय है ?
उत्तर :
कठपुतली आत्मनिर्भर होना चाहती है। वह अपनी इच्छानुसार कार्य करना चाहती है, इसलिए उसने कहा कि मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।

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प्रश्न 9.
कठपुतली के कथन का क्या आशय है ?
उत्तर :
कठपुतली के कथन का आशय है कि वह स्वतंत्र होना चाहती है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कठपुतली कविता का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने कठपुतली के माध्यम से स्वतंत्रता के महत्त्व को स्सष्ट किया है। पराधीनता किसी को भी अच्छी नहीं लगती। गुलामी की बेड़ययों को सभी उतार कर फेंक देना चाहते हैं। धागे में बँधी हुई पराधीन कठपुतली को दूसरों के इशारे पर नाचने से दु:ख होता है। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। गुलामी को दूर करने के लिए वह विद्रोह का स्वर मुखर करती है। स्वाधीनता के महत्त्व को बतलाना ही कविता का उद्देश्य है।

प्रश्न 2.
कठपुतली स्वयं को अपने पांवों परँछोड़ द्रेने के लिए क्यों कहती है ?
उत्तर :
कठुपुली को धागों का बंधन पसंद नहीं है। वह धागों में बँधी हुई पराधीन है। उसे दूसरों के इशारे पर नाचना पड़ता है। वह अपने पाँवों पर खड़ा होना चाहती है। इसीलिए वह ख्वयं को अपने पाँवों पर छोड़ देने के लिए कहती है।

प्रश्न 3.
‘ये कैसी इच्छा मेरे मन में जगी’ पहली कठपुतली के ऐसा सोचने का क्या कारण है ?
उत्तर :
पहली कठपुतली की बात सभी को अच्छी लगी। सभी कठपुतलियाँ स्वतंत्र होना चाहती थीं। अब पहली कठपुतली पर सब की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आ गई तो उसने भली-भाँति सोच-विचार कर ही कोई कदम उठाना चाही। इसीलिए पहली कठपुतली सोचने लगी कि मेरे मन में एकाएक यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई?

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प्रश्न 4.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर :
कठपुतली बहुत दिनों से धागे से बँधी थी तथा उसे दूसरे लोग अपनी अँगुलियों के इशारों पर नचा रहे थे। वह इस पराधीनता से मुक्त होना चाहती थी। वह आज़ाद रहना चाहती थी तथा अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहती थी, इसलिए उसे गुस्सा आया।

प्रश्न 5.
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती ?
उत्तर :
कठपुतली को स्वतंत्र रूप से अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा है, लेकिन वह खड़ी नहीं होती क्योंकि वह धागों से बँधी हुई है। वह दूसरों के अधीन है। उसका स्वयं पर कोई वश नहीं चलता। दूसरों की इच्छा पर ही वह अपने हाथ-पैर हिला सकती है।

प्रश्न 6.
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी ?
उत्तर :
आज़ादी सबको अच्छी लगती है। पराधीन रहना किसी को पसंद नहीं। सभी अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहते हैं। किसी भी कठपुतली को धागे से बँधे रहना और दूसरों की इच्छा से नाचना पसंद नहीं था। इसीलिए पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को अच्छी लगी।

प्रश्न 7.
पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि – ‘ये धागे क्यों हैं मेरे पीछे-आगे / इन्हें तोड़ दो / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।’ तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि – ‘ये कैसी इच्छा / मेरे मन में जगी ?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए –
उसे दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी महसूस होने लगी।
उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।
वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने ली।
वह डर गई, क्योंकि उसकी उप्र कम थी।
उत्तर :
जब पहली कठपुतली बंधन का जीवन जीते-जीते दु:खी हो गई थी, उसे अपनी पराधीनता पर कोध आ गया, तब उसने स्वतंत्र होने की इच्छा जताई, लेकिन जब सारी कठपुतलियाँ उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिलाने लगी और उसके नेतृत्व में विद्रोह के लिए तैयार होने लगी, तो वह डर गई। वह सोच में पड़ गई कि सबकी जिम्मेदारी लेकर वह इतना बड़ा कदम कैसे उठाए। अब तक सभी दूसरों पर आश्रित रहे हैं, एकदम से मिली स्वतंत्रता में कहीं उनके कदम लड़खड़ा तो नहीं जाएँगे। यही कारण था कि पहली कठपुतली चिंतित होकर अपने फैसले के विषय में सोचने लगी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

(क) सुनकर बोली और – और
कठपुतलियाँ
कि हाँ
बहुत दिन हुए
हमें अपने मन के छंद छुए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश किस कवि की किस रचना से उद्धुत है ?
उत्तर :
प्सस्तुत पद्यांश भवानी प्रसाद मिश्र रचित ‘कठुुतली’ कविता से उद्धृत हैं।

(ii) ‘मन के छंद छुए’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पहली कठपुतली की स्वतंग्रता की बात सुन कर सभी कठुुतलियाँ कहने लगी कि बहुत दिनों से हमारे मन में कोई उमंग, कोई खुशी नहीं आई। बंधन के कारण मन सदा वुझा सा रहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘कठपुतली’ कविता के आधार पर बतलाइए कि पराधीनता या गुलामी का जीवन हर प्रकार से दु:खद है।
उत्तर :
कठपुतली अपने हाथ-पाँव धागे या रस्सियों से बँधा देखकर क्रोध से उबल पड़ती है। वह उन धागों को तोड़कर स्वतंत्र होने तथा अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा व्यक्त करती हैं। अन्य कठपुतलियाँ भी उसके प्रस्ताव का समर्थन करती है। दीर्घकाल से वे सभी पराधीनता के कारण अपने मन के स्वतंत्र विचार को व्यक्त करने की इच्छानुसार व्यवहार करने में असमर्थ बनी रहीं। पहली कठपुतली सोचने लगी कि एकाएक मन में यह इच्छा क्यों उत्पन्न हुई? विचार कर परिणाम सोचकर ही किसी क्रांति या आन्दोलन का नेतृत्व करना चाहिए।

इस प्रकार इस कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि पराधीनता का जीवन हर प्रकार से दुखदाई होता है। पराधीनता में सपने में भी सुख नहीं होता। पशु-पक्षी भी पराधीनता को अभिशाप समझते हैं। पराधीनता की जंजीरों को तोड़कर सभी आजाद होना चाहते हैं। अपने अधीन रहना, स्वाधीन जीवन जीना सब प्रकार से सुखद होता है। पर वश में रहना कभी सुख संतोष, शांतिमय नहीं हो सकता। क्रांति या आन्दोलन द्वारा स्वतंत्र होना कौन नहीं चाहता। पर इसका अगुआ होना सभी के वश की बात नहीं। परिणाम क्या होगा इसे कोई नहीं सोच सकता।

अत: सफलता-असफलता के गंभीर परिणाम को भलीभाँति सोच-विचार कर उचित कदम उठाना चाहिए। दूसरे के अधीन और नियंत्रण में रहना कोई नहीं चाहता। पराधीनता की स्थिति में मन तथा बुद्धि कुंठित हो जाती है। अनुचित बंधन से मन उबलने लगता है। प्राण और मन पर यह बोझ जीवन को धोर निराशा तथा पीड़ा से भर देता है। गुलामी की स्थिति में सुख के सारे साधक भी व्यर्थ प्रतीत होते हैं। सोने के पिंजड़े में कैद पक्षी मुक्त होना चाहता है। अत: स्वाधीनता हर प्रकार के सुख, शांति एवं उल्लास से जीवन को भर देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द लिखें –
मुन – चित्त, जी, अंतर, मानस।
इच्छा – चाह, कामना, अभिलाषा।
गुस्सा – कोप, कोध, रोष, क्षोभ।
दिन – वार, दिवस, वासर, दिवा।

(ख) लिंग बताइए –
कठपुतली – स्त्रीलिंग
दिन – पुलिंग
छंद – पुलिंग
इच्छा – स्व्रीलिंग
मन – पुलिंग

WBBSE Class 6 Hindi कठपुतली Summary

जीवन-परिचय :

इनका जन्म सन् 1913 ई० में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ था। प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा सोहागपुर, जबलपुर एवं होशंगाबाद में हुई थी। बी. ए. की शिक्षा के बाद ये कल्पना में सम्पादक हुए फिर ऑल इन्डिया रेडियो में नौकरी की। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कमल के फूल, वाणी की दीनता, सतपुड़ा के जंगल आदि हैं। इनकी मृत्यु सन् 1985 ई० में हुई ।

कविता का सारांश – प्रस्तुत कविता में कठपुतलियाँ स्वाधीन होने की इच्छा व्यक्त करती हैं। पहली कठपुतली सभी धागों को तोड़ देने की बात कहती है। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। उसकी बात सुनकर सभी कठपुतलियाँ प्रसन्न होती हैं। पर पहली कठपुतली स्वतंग्रता की जिम्मेदारी के प्रश्न पर सोच-समझकर कदम उठाना चाहती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

शब्दार्थ :

  • कठपुतली – काठ की बनी हुई पुतली ।
  • गुस्से – कोध ।
  • पुतली – गुड़िया ।
  • पाँवों – पैरों ।
  • इच्छा-कामना; चाह ।
  • जगी – पैदा हुई।
  • उबली – नाराज हुई ।

पद -1

कठपुतली
गुस्से से उबली
क्यों हैं मेरे पीछे-आगे ?
इन्हें तोड़ दो
मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ कठपुतली पाठ से ली गई है। इसके कवि भवानी प्रसाद मिश्र हैं। इन पंक्तियों में पहली कठपुतली स्वतंत्र होने की इच्छा व्यक्त कर रही है।

व्याख्या – धागे में बँधी हुई कठपुतली अपनी पराधीनतां को देखकर क्रोध और आवेग से भर उठती है। वह जोश में आकर कहने लगती है कि उसके आगे-पीछे ये धागे क्यों हैं ? इन धागों को तोड़ दीजिए, मुझे मेरे चरणों पर खड़े होने तथा चलने के लिए मुक्त कर दीजिए। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। इस प्रकार पराधीनता के दुःख से बाहर निकलने के लिए वह विद्रोह कर देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

पद – 2

सुंनकर बोली और- और
कठपुतलियाँ
कि हाँ ।
बहुत दिन हुए।
हमें अपने मन के छंद हुए।

व्याख्या – पहली कठपुतली की बात सभी कठपुतलियों को अच्छी लगती है क्योंकि स्वतंत्र रहना सभी चाहती हैं। अजादी सभी को अच्छी लगती है। वे कहने लगती हैं कि बहुत दिनों से हमारे मन में कोई उमंग, कोई खुशी नहीं आई। धागे में बँधी हुई हम सदा से पराधीन हैं। दूसरों के इशारे पर हमें नाचना पड़ता है। अपने मन के अनुसार हम कोई काम नहीं कर सकतीं।

पद -3

मगर
पहली कठपुतली सोचने लगी
ये कैसी इच्छा
मेरे मन में जगी।

व्याख्या – पहली कठपुतली के द्वारा कही गई स्वतंत्र होने की इच्छा का सभी कठपुतलियों ने स्वागत किया लेकिन पहली कठपुतली पर जब स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आती है तो वह सोच समझ कर कदम उठाना चाहती है। इस लिए वह कहने लगती है कि मेरे मन में एकाएक यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई? यह चुनौती भरा कदम समझदारी से समझ-बूझ कर ही उठाना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 6 जीवन का झरना to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – जीवन का झरना

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झारने से
(घ) समुद्र से
उत्तर :
(ग) झरने से

प्रश्न 2.
निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर :
(क) आगे बढ़ने को

प्रश्न 3.
जीवन रूपी निर्झर के दो तीर हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दु;ख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर :
(ख) सुख-दुख

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 4.
यह जीवन क्या है ?
(क) नदी
(ख) निर्झर
(ग) आकाश
(घ) वायु
उत्तर :
(ख) निर्झर।

प्रश्न 5.
निईर का जन्म कहाँ होता है?
(क) पर्वत के भीतर
(ख) जल में
(ग) तालाब में
(घ) आकश में
उत्तर :
(क) पर्वत के भीतर।

प्रश्न 6.
‘जीवन का झरना’ किसकी रचना है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) श्रीधर पाठक
(ग) आरसी प्रसाद सिंह
(घ) भवानी प्रसाद मिश्र
उत्तर :
(ग) आरसी प्रसाद सिंह।

प्रश्न 7.
‘आरसी प्रसाद सिंह’ का जन्म किस राज्य में हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) हरियाणा
उत्तर :
(क) बिहार।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 8.
चंदा मामा किस तरह की रचना है ?
(क) स्त्री साहित्य
(ख) दलित साहित्य
(ग) प्रबंध काव्य
(घ) बाल साहित्य
उत्तर :
(घ) बाल साहित्य।

प्रश्न 9.
कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झरने से
(घ) समुद्र से
उत्तर :
(ग) झरने से।

प्रश्न 10.
निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर :
(क) आगे बढ़ने को।

प्रश्न 11.
जीवन रूपी निर्झर के दो किनारे (तीर) हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दुःख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर :
(ख) सुख-दु:ख।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 12.
‘दुर्दिन’ शब्द का क्या अर्थ है ?
(क) दु:ख भरे दिन
(ख) दूर के मित्र
(ग) दूर के दिन
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर :
(क) दु:ख भरे दिन।

प्रश्न 13.
‘निई्झर कहता है
(क) लड़े चलो
(ख) भाग चलो
(ग) बढ़े चलो
(घ) सोये रहो
उत्तर :
(ग) बढ़े चलो।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें सतत् गतिशील बने रहने, जीवन-पथ पर सदा आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है।

प्रश्न 2.
निर्झर की धुन क्या है ?
उत्तर :
निई्ईर की सिर्फ एक धुन सतत् चलते रहने, आगे बढ़ते रहने की है।

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प्रश्न 3.
झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
झरने की गति रुक जाने पर उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 4.
जीवन का आनंद किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनंद सतत कर्म करते रहने तथा जीवन में आगे बढ़ते रहने में ही है।

प्रश्न 5.
जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा झरना से दी गई है।

प्रश्न 6.
आरसी प्रसाद सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
आरसी प्रसाद सिंह का जन्म 19 अगस्त, 1911 ई० को बिहार के दरभंगा जिला के एरोट नामक गाँव में हुआ था ।

प्रश्न 7.
निर्झर’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘निर्झर’ झरना का पर्याय है और झरना जीवन की गतिशीलता का।

प्रश्न 8.
झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है ।

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प्रश्न 9.
निईरार हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
निईर की बस एक ही धुन है – सतत् चलते रहने की ।

प्रश्न 10.
झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
झरने की गति रुक जाने पर वह सूख जाएगा, अर्थात् उसकी मृत्यु हो जाएगी।

प्रश्न 11.
जीवन का आनन्द किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनन्द सतत् आगे बढ़ने, मुसीबतों को हराकर पार करने तथा सुख-दुःख दोनों में अविचलित हुए बगैर चलते रहने में है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने किन कारणों से जीवन की तुलना निईरा से की है?
उत्तर :
कवि ने जीवन की तुलना झरने से की है क्योंकि मनुष्य का जीवन झरने के समान है। जिस प्रकार झरना दो किनारों के बीच स्वच्छंद गति से चलता है उसी प्रकार मनुष्य भी सुख-दु:ख दो किनारों के बीच जीवन बिताता है।

प्रश्न 2.
जीवन का झरना कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर :
पाठ के प्रारंभ में दिया गया हैं।

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प्रश्न 3.
निर्झर का जन्म कहाँ होता है? वह अपनी यात्रा में किन-किन अवरोधों का सामना करता है ?
उत्तर :
निर्झर का जन्म पर्वत के अन्तस्थल से होता है। वह अपनी यात्रा में अनेक अवरोधों का सामना करता है। उसके रास्ते पर रोड़े आकर बाधा डालते हैं, कठोर चट्टानें पड़ जाती हैं। जंगल के वृक्ष रास्ते में पड़ जाते हैं पर वह सभी बाधाओं को पार कर आगे बढ़ता जाता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) यह जीवन क्या ……….. मनमानी है।
(i) इस अंश के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर :
इस अंश के रचनाकार आरसी प्रसाद सिंह हैं।

(ii) जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा निर्झर से दी गई है ।

(iii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता संख्या 1 की व्याख्या देखिए।

(ख) चलना है केवल चलना है ……….. निईर झर कर यह कहता है।
(i) यह अंश किस पाठ से लिया गया है ?
उत्तर :
यह अंश जीवन का झरना पाठ से लिया गया है।

(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता सात की व्याख्या देखिए ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

(ग) बाधा के रोड़ों से लड़ता ……….. यौवन से मदमाता।
(i) बाधा के रोड़ों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
निई्झर के रास्ते में पत्थर के कठोर टुकड़े आ जाते हैं। वे इसके मार्ग को रोककर बाधा बनते हैं। पर निर्झर अपनी शक्ति से उनसे लड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है।

(ii) इस अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता की व्याख्या देखिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
कवि ने इस कविता में जीवन की तुलना झरने से किस प्रकार की है? यह कविता हमें क्या संदेश देती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने जीवन की तुलना झरने से की है। कवि ने झरने के माध्यम से जीवन को समझाने की कोशिश की है कि मनुष्य का यह जीवन एक झरना है। इस जीवन रूपी झरने के पानी जीवन का आनंद है। सुख और दु:ख इस जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं। मानव जीवन सदा सुख-दुःख में बीतता रहता है। जीवन में सदा सुख-दुःख का क्रम बना रहता है। झरना पर्वत से निकल कर विभिन्न अंचलों से नीचे उतरता है। फिर विभिन्न घाटियों से होता हुआ समतल क्षेत्र में बहने लगता है। व्यक्ति का जीवन भी अनेक पड़ावों से गुजरता हुआ, अपनी समस्याओं का समाधान करता हुआ स्थिर शान्त जीवन बिताने लगता है।

झरना अपनी मस्ती में गाता हुआ निरंतर गतिशील बना रहता है। आगे बढ़ते रहना ही उसका जीवन है। मनुष्य को भी सादा अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ते रहने का दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए। झरना अपने मार्ग में पड़ने वाले पत्थरों से लड़ता हुआ, पेड़ों से टकराता हुआ अपने यौवन की शक्ति से संपन्न वह आगे बढ़ता रहता है। मनुष्य भी अपने जीवन पथ में आने वाली समस्त बाधाओं से संघर्ष करता हुआ अपने लक्ष्य तक पहुँचता है ।

झरने की गतिशीलता ही उसका जीवन है। जिस दिन उसकी गति रूक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मनुष्य के जीवन में ही चलते रहना, कर्म करते रहना ही जीवन है, रुकना, जड़ हो जाना ही मौत है। जिस दिन मनुष्य अपने कर्त्तव्य से विमुख होकर निष्क्रिय बन जाएगा, उस दिन उसका भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसलिए जीवित रहना है तो कर्त्तव्य करते रहना चाहिए। झरना कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता, सदा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहता है, अन्त में अपने लक्ष्य पर पहुँच कर ही दम लेता है। मनुष्य को भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। मनुष्य को किसी प्रकार सोच-विचार में न पड़कर केवल अपने लक्ष्य पर चलना ही उचित है। मनुष्य को जीवन में निरतंतर चलते रहना चाहिए। रुकना मर जाना है। कर्म से विरत हो जाने, निष्क्रिय हो जाने से जीवन का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है।

‘जीवन का झरना’ कविता हमें संदेश देती है कि निरंतर आगे बढ़ते रहना, गतिशील बने रहना ही जीवन है। चलना, गतिशील रहना तथा सक्रिय रहने में ही जीवन में सुख शांति है। जीवन-पथ पर गतिशील रह कर ही बाधाओं तथा विपत्तियों को परास्त कर अपना जीवन प्रशस्त बना सकते हैं। गतिशीलता एवं सक्रियता में ही जीवन का सच्चा आनंद है। निष्क्रियता तो नारकीय पीड़ा है। चलते रहना ही जीवन की निशानी है।

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भाषा-बोध :

(क) लिंग निर्णय कीजिए –
जीवन -पुलिंग
गति – स्त्री लिंग
पानी – पुलिंग
चट्टान – स्त्री लिंग

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखिए –
पानी – जल, नीर, वारि, तोय
पेड़ – वृक्ष, विटप, तरु, पादप
मानव – मनुष्य, आदमी, इंसान, मनुज
जग – संसार, विश्व, जगत्, दुनिया
गिरि – पहाड़, अचल, पर्वत, नग

(ग) विलोम शब्द लिखें –
समतल – असमतल, खुरदरा
सुख – दु:ख
अन्तर – समान
गति – रुकना
दुर्दिन-सुदिन

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

(घ) वचन बदलिए –
तारों – तारा
पेड़ों – पेड़
चट्टानों – चट्टान
राह – राहें
बाधा – बाधाएँ
मानव – मानवों

WBBSE Class 6 Hindi जीवन का झरना Summary

जीवन-परिचय :

इनका जन्म सन् 1911 ई॰ में बिहार के दरभंगा जनपद में ‘एरोट’ गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रकृति और जीवन की विविध प्रवृत्तियों का सरल, सुगम व मधुर हिन्दीभाषा में रचित रचनाओं द्वारा अत्यन्त सरस एवं प्रभावपूर्ण किया है। इनकी प्रमुख रचनाएं-शतदल, सूर्यमुखी, जीवन और यौवन, पांचजन्य आदि हैं। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य-साधना में लगा दिया।

कविता का सारांश – प्रस्तुत कविता में कवि झरने के माध्यम से बतलाया है कि मनुष्य का जीवन झरने के समान होना चाहिए। सुख-दु:ख जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं। झरना पर्वत के ह्रदय से फूटकर विभिन्न प्रदेशों से नीचे उतरता है। वह समतल भूमि पर आकर बहने लगता है। इसलिए वह मस्ती से गाते हुए आगे बढ़ता रहता है। रास्ते में पत्थरों से लड़ता हुआ, पेड़ों से टकराता हुआ चट्टानों पर चढ़ जाता है।

आगे बढ़ते रहना ही उसका जीवन है। जिस दिन उसकी गति रुक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। उसी दिन वह भी इस संसार से दिन गिनकर समाप्त हो जाएगा। मनुष्य भी जिस दिन रुक जाएगा, कर्त्तव्य से विमुख हो जाएगा । झरना, सदा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता रहता है। कहता है कि चलते रहना ही जीवन है । रूक जाना ही मृत्यु है। अत: मनुष्य को सदा सन्मार्ग पर चलते रहना चाहिए।

शब्दार्थ :

  • निर्झर – झरना।
  • मस्ती – आनंद।
  • तीर – किनारा।
  • गिरि – पर्वत।
  • अन्तर – हृदय।
  • अंचल – प्रदेश।
  • गति – चाल।
  • धुन – लगन।
  • समतल – समान भूमि।
  • रोड़ा – चट्टान।
  • जग – संसार।
  • दुर्दिन – बुरा समय।
  • राह – रास्ता।
  • यौवन – जवानी।
  • बाषा – रुकावट ।
  • घड़ियाँ – क्षण, पल।
  • घाटी – पर्वतों के बीच की समतल भूमि।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 1

यह जीवन क्या है ? निई्झर है,
मस्ती ही इसका पानी है।
सुख – दुःख के दोनों तीरों से,
चल रहा चाल मनमानी है।

व्याख्या – प्रस्तुत कविता ‘जीवन का झारना’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि आरसी प्रसाद सिंह हैं। यहाँ कवि ने मनुष्य जीवन की तुलना झरने से की है। यह संदेश दिया है कि झरने की तरह मनुष्य को सदा गतिशील रहना चाहिए। क्योंकि गतिशीलता ही जीवन है । मनुष्य का जीवन झरने के समान है। उसके जीवन की खुशियाँ ही उसका जल है। जिस प्रकार झरना दोनों किनारों के बीच स्वच्छंद गति से आगे बढ़ता है, उसी प्रकार मनुष्य सुख-दु:ख इन दो किनारों के बीच जीवन जीता रहता है।

पद – 2

कब फूटा गिरि के अन्तर से,
किस अंचल से उतरा नीचे।
किस घाटी से बहकर आया,
समतल में अपने को खींचे।

व्याख्या – यह झरना पहाड़ के भीतर से न जाने कब निकला और न जाने किस प्रदेश से नीचे उतरा । विभिन्न घाटियों से बहता हुआ यह अपने को आगे खींचता हुआ मैदान की समतल भूमि पर आ गया।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 3

निर्झर में गति है, यौवन है,
वह आगे बढ़ता जाता है।
धुन एक सिर्फ है चलने की
अपनी मस्ती में गाता है।

व्याख्या : झारने में गति है, जवानी की शक्ति है। इसलिए वह तेज गति से आगे बढ़ता जाता है। उसके मन में केवल आगे बढ़ने की लगन है। अपनी मस्ती में वह कल-कल की ध्वनि करता हुआ आगे बढ़ता जाता है।

पद – 4

बाधा के रोड़ों से लड़ता,
वन के पेड़ों से टकराता।
बढ़ता चट्टानों पर चढ़ता,
चलता यौवन से मदमाता।

व्याख्या : झरने के रास्ते में पत्थर के टुकड़े आकर उसे बाधा पहुँचाते हैं, परंतु झरना अपनी शक्ति से उनसे लड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है। कठोर चट्टानों पर भी चढ़ जाता है। जंगल के वृक्षों से टकराकर आगे निकल जाता है। जवानी की शक्ति से भरा हुआ वह मस्ती के साथ आगे बढ़ता रहता है।

पद – 5

निर्झर में गति ही जीवन है,
रुक जाएगी यह गति जिस दिन ।
उस दिन मर जाएगा मानव,
जग-दुर्दिन की घड़ियाँ गिन-गिन ।

व्याख्या : हमेशा आगे बढ़ते रहना, गतिशील बने रहना ही झरने का जीवन है। जिस दिन उसकी गति रुक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मनुष्य भी जब तक गतिशील है तभी तक उसका जीवन है। जिस दिन उसके जीवन की गति रुक जाएगी, वह चलना, आगे बढ़ना बंद कर देगा, उसी दिन वह सांसारिक बुरे क्षण को देख कर समाप्त हो जाएगा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 6

निईर कहता है – ‘बढ़े चलो’
तुम पीछे मत देखो मुड़कर।
यौवन कहता है – बढ़े चलो,
सोचो मत क्या होगा चलकर।

व्याख्या : झारना हमेशा यह संदेश देता रहता है कि गतिहीन हो जाने पर मनुष्य का जीवन निस्सार एवं मृत्यु-तुल्य हो जाता है। अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़ता जाए। कभी भी पीछे मुड़कर न देखे। मनुष्य की शक्ति, उसका यौवन (जवानी) भी यही प्रेरणा देता है कि जीवन में सदा आगे बढ़ते चलो। परिणाम के विषय में मत सोचो।

पद – 7

चलना है केवल चलना है,
जीवन चलता ही रहता है।
मर जाना है बस, रूक जाना,
निर्झर झरकर यह कहता है।

व्याख्या : मनुष्य का जीवन आगे बढ़ते रहने के लिए ही है। मनुष्य जीवन की सार्थकता आगे बढ़ने में ही है। सदा आगे बढ़ता हुआ झरना भी यही संदेश देता है कि चलते रहना ही जीवन है और रुक जाना ही मृत्यु है। इसलिए मनुष्य को सदा कर्त्रव्य करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। जीवन में सदा गतिशील बने रहना ही सच्चा जीवन है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – कोई चिराग नहीं हैं

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इस पाठ के कवि कौन हैं ?
(क) साबीर अली
(ख) बशीर बद्र
(ग) जाबीर बद्र
(घ) कैफी आजमी
उत्तर :
(ख) बशीर बद्र

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प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता का छंद है –
(क) दोहा
(ख) चौपाई
(ग) गज़ल
(घ) रुबाई
उत्तर :
(ग) गज़ल

प्रश्न 3.
क्या नहीं हैं मगर उजाला है ?
(क) चन्दा
(ख) चिराग
(ग) फूल
(घ) सुरज
उत्तर :
(ख) चिराग

प्रश्न 4.
गजल की शाख पे क्या खिलने वाला है ?
(क) बेली
(ख) भँवरा
(ग) फूल
(घ) पत्ती
उत्तर :
(ग) फूल

प्रश्न 5.
‘कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है’ किसकी रचना है ?
(क) साबीर अली
(ख) बशीर बद्र
(ग) जाबीर बद्र
(घ) कौफी आजमी
उत्तर :
(ख) बशीर बद्र

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

प्रश्न 6.
बशीर बद्र का जन्म कब हुआ था ?
(क) 18 फरवरी 1930 ई०
(ख) 15 फरवरी 1932 ई०
(ग) 15 फरवरी 1934 ई०
(घ) 15 फरवरी 1936 ई०
उत्तर :
(घ) 15 फरवरी 1936 ई०

प्रश्न 7.
बशीर बद्र का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) कानपुर
(ख) नागपुर
(ग) मेरठ
(घ) इलाहाबाद
उत्तर :
(क) कानपुर

प्रश्न 8.
बरसात का दुशाला कहाँ है ?
(क) नदी में
(ख) पहाड़ पर
(ग) समुद्र में
(घ) पठार पर
उत्तर :
(ख) पहाड़ पर

प्रश्न 9.
मस्जिद से निकलकर बच्चे ने कहाँ फूल डाला है ?
(क) जली मूरत पर
(ख) लाश पर
(ग) मजार पर
(घ) कहीं पर नहीं
उत्तर :
(क) जली मूरत पर

प्रश्न 10.
अजीब लहजा है दुश्मन की …………. का –
(क) बहादुरी का
(ख) तलवार का
(ग) मुस्कुराहट का
(घ) विचार का
उत्तर :
(ग) मुस्कुराहट का

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प्रश्न 11.
दुशाला का अर्थ है –
(क) चादर
(ख) पट्टा
(ग) शर्ट
(घ) दुपट्टा
उत्तर :
(क) चादर

प्रश्न 12.
तमाम वादियों में सेहरा में क्या रोशन हैं ?
(क) खुशियां
(ख) खुशबू
(ग) आग
(घ) दीपक
उत्तर :
(ग) आग

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने दुश्मन के किस लहजे को अजीब कहा है और क्यों?
उत्तर :
कवि ने दुश्मन की मुस्कराहट के लहजे को अजीब कहा है क्योंकि दुश्मन अपने उस लहजे से कभी उसे पतन की और ढकेलता है, कभी संभालता है। दुश्मन की परिवर्तित विचारधारा को कवि अजीब मानता है।

प्रश्न 2.
गज़ल की शाख का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इसका आशय यह है कि कवि की कविता की हर पंक्ति में फूल खिला है। अर्थात् हर पंक्ति में विचारो भावों की खुशबू है।

प्रश्न 3.
‘फसाद में जली मूरत पे हार डाला है’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर :
कवि का कथन है कि दंगों में निर्दोष लोग जलाए जाते है, लोगों को बेसहारा बना दिया जाता है। निर्दोष ही प्रभावित होते हैं। अबोध बालक इन दंगों या अग्नि कांड से अपरिचित है। उस निरीह मासूम बच्चे को क्या पता कि इस आदमी को क्यों जलाया गया। कवि ने दंगों के अमानवीय पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

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प्रश्न 4.
बेलिवास का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बेलिवास का अर्थ है बिना लिवास के, बिना परिधान या अच्छादन के यहाँ बेलिवास पत्थर का जिक्र है। पत्थर बिल्कुल नग्न अर्थात् आच्छादन रहित है। भाव यह है कि दंगों के कारण समाज बेपर्द हो जाता है।

प्रश्न 5.
बशीर बद्र का वास्तविक नाम क्या है ?
उत्तर :
बशीर बद्र का वास्तविक नाम सैयद मोहम्मद बशीर है।

प्रश्न 6.
बशीर बद्र को पद्मश्री पुरस्कार कब मिला ?
उत्तर :
बशीर बद्र को पद्मश्री पुरस्कार 1999 ई० में मिला।

प्रश्न 7.
‘बेंलिवास’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘बेलिवास’ का तात्पर्य नग्न या वस्व विहीन है।

प्रश्न 8.
कवि को कैसे मौसमों ने पाला है ?
उत्तर :
कवि को खिजाँ अर्धात् पतझड़ वाले मौसमों ने पाला है। स्सष्ट है कि कवि विपरीत परिस्थितियों के मध्य पले हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) इस कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए :
उत्तर :
प्रस्तुत काव्यांश में सुप्रसिद्ध शायर बशीर बद्र ने गजल या कविता के महत्व को स्पष्ट करते हुए बतलाया है कि सत्य स्थिर नहीं रहता, उसका मापदंड समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार बदलतर है। बिना दीपक के ही गजल के विचार प्रकाश फैलाते है। गजल के विचार डाली पर खिले फूल की भांति चारों ओर अपनी खुशबू बिखेरते हैं। कविता मन की संकीर्णता तथा अझ्ञान-अंधकार को दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाती है। प्रकृति के क्रियाकलाप अद्भुत हैं।

पहाड़ के प्रस्तर खंड पर कहीं कठोर भूप पड़ती है कहीं वर्षा की चादर बिक्छ-बिछ जाती है। इसलिए समय, दशा और परिस्थिति के अनुसार व्यक्ति को कद्टरपन छोड़कर उदार होना चाहिए। शत्रु की मुस्कान विचित्र होती है। उसकी मुस्कराहट कभी पतन की और ले जाती है तो कभी पतन से संभाल भी लेती है।

उसकी मुस्कान कभी चिढ़ाने के लिए होती है, कभी हददय को खुशियों से भर देती है। कवि ने मंदिर-मस्जिद को लेकर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले, साम्पदायिक हिंसा को प्रश्रय देने वालों को निंदनीय बतलाया है। कुछ समाज विरोधी लोग ही हिंसा और उपद्रव करते हैं। दंगे के कारण एक निर्दोष बालक मस्जिद में पनाह लेता है। उपद्रव के शान्त हो जाने पर बाहर जली हुई एक मूर्ति के गले में फूलों की माला पहना देता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

अत: मन्दिर -मस्जिद को लेकर धार्मिक हिंसा निंदनीय है क्योंकि कोई भी मजहब शत्रुता की शिक्षा नहीं देता। अन्तिम गजल में कवि ने बतलाया की प्रतिकूल परिस्थिति तथा वातावरण में उसका जीवन अग्रसर हुआ है। कवि का जीवन वसन्त में नहीं पतझड़ में बीता है। विषम परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए कवि ने अपने जीवन का निर्माण किया है । संघर्षो में आगे बढ़ना ही सच्चा जीवन दर्शन है।

(ख) ‘कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है’ – कवि ऐसा क्यों कहता है? इसका प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी दीपक के चारों ओर रोशनी फैली हुई है। दीपक का उजाला वहाँ फैलता है जहाँ अंधकार रहता है, परतु जहाँ प्रकाश है वहाँ तो दीपक की रोशनी के बिना उजाला रहता है। कवि अपनी कविता की पंक्तियों में फूल की महक की बात कह कर यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि जाँँ पविश्र भाव हो, संकीर्णता नही हो, वहाँ मानवता का प्रकाश स्वत: बिना दीपक के प्रकाशमान बना रहता है।

(ग) निम्नलिखित पंक्तियों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए –

प्रश्न  1.
निकल के पास की मस्जिद से एक बच्चे ने
फसाद में जली मूरत पै हार डाला है।
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘कोई चिराग नहीं मगर उजाला है’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि बशीर बद्र हैं। इस अंश में कवि ने दंगों की भयंकरता का वर्णन किया है। दंगा-फसाद असामाजिक तत्वों द्वारा किया जाता है। परंतु इसमें निरीहनिर्दोष लोगों को जान गँवानी पड़ती है। मस्जिद में लोगों को पनाह लेनी पड़ती है। ऐसे ही एक दंगे की ओर कवि ने संकेत किया है। दंगे की आग में जल जाने से किसी का शरीर बाहर पड़ा हुआ है। पास की मस्जिद से निकलकर एक बच्या उस पर फूलों की माला डाल कर सम्मान करता है।

प्रश्न  2.
तमाम वादियों से सेहरा में आग रोशन है,
मुझे खिजाँ के इन्हीं मौसमों ने पाला है।
इस पंक्ति की भावार्थ सहित व्याख्या करें।
उत्तर :
सभी घटियों में, तटों पर, बस्तियों में आग प्रदीप्त हो रही है। बड़े-बड़े लोगों पर भी इसका प्रभाव है। इन्हीं वीरान स्थितियों में इन्हीं मुरझाए वातवरण ने कवि का पालन किया है। कवि कह रहा है कि ऐसे पतझड़ के मौसम में ही उसका जीवन बीत रहा है। प्रतिभाशाली व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल बना लेता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

प्रश्न 3.
गजब की धूप है इक बेलिवास पत्थर पर
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।
इस पंक्ति की संदर्भ सहित व्याख्या करें।
उत्तर :
कवि स्पष्ट कर रहा है कि इन नंगे पत्थरों पर विचित्र धूप पड़ रही है। पहाड़ पर बरसात की चादर बिछी हुई है। कहीं नग्न स्थिति है। कहीं परिषान, कोई बेपर्द है तो कहीं आवरण से नग्नता ढुकी हुई है।

भाषा-बोध

(क) पाठ में आए निम्नलिखित उर्दू के शब्दों का हिन्दी रूप लिखिए।

  • रोशन- प्रकाशमान
  • वादियों- घाटियों
  • खिजां- पतझड़
  • फसाद – उपद्रव
  • शाख-टहनी

(ख) वाक्य प्रयोग

  • मस्जिद – मस्जिद मुसलमानों का प्रार्थना स्थल है।
  • मुस्कराहट – बच्चे के चेहरे पर स्वच्छ मुस्कुराहट है।
  • दुशाला – कश्मीर का ऊनी दुशाला प्रसिद्ध है।
  • चिराग – चिराग के नीचे अंधेरा होता है।
  • अजीब-यह बालक अजीब स्वभाव का है।

(ग) विलोम शब्द :

  • धूप – छाया
  • बेलिवास – लिवास
  • दुश्मन – मित्र
  • आग-पानी
  • फसाद – शान्ति

(घ) दुश् उपसर्ग के तीन शब्द बनाओ।
दुश्- दुश्चरित्र, दुश्मन, दुष्कर्म, दुस्साहस

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर यथा निर्देश लिखिए-

1. अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कराहट का कभी गिराया है, मुझको कभी सँभाला है।
(क) प्रस्सुत पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उदधृत है ?
(ख) ‘अजीब लहजा’ से क्या तात्र्य है?
(ग) कवि दुश्मन की मुस्कराहट को अजीब क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ बशीर बद्र रचित ‘कोई चिराग नहीं मगर उजाला है’ शीर्षक कविता से उद्धृत हैं।
(ख) यहाँ ‘अजीब लहजा’ का तात्पर्य शत्रु के विचित्र ढंग या तरीके से है।
(ग) कवि ने बतलाया है कि दुश्मन की चाल, उसका ढंग बड़ा ही निराला है। उसकी मुर्कराहट में भी विचित्रता भरी है। वह अपनी चेष्टा से कभी हमें गिरा देता है। परास्त कर देता है, पर कभी संभाल भी लेता है।

WBBSE Class 7 Hindi कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है Summary

जीवन शिचाय

डॉ० बशीर का जन्म सन् 1936 ई० को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ है। बशीर हिन्दी और उर्दू के प्रसिद्ध शायर हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ- उजाले, अपनी यादों के, उजालों की परियाँ, आस रोशनी के घरौंदे आदि हैं। साहित्य और अकादमी में इनके उल्लेखनीय योगदन के लिए इन्हे पदम्र्री से सम्मानित किया गया।

पद -1

कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है,
गजल की शाख पे इक फूल खिलनेवाला है।

शब्दार्श :

  • चिराग – दीपक।
  • शाख – टहनी।
  • मगर – लेकिन।
  • उजाला- प्रकाश।

अर्थ : प्रख्यात शायर डॉ० बशीर बद्र ने प्रस्तुत गजल में स्पष्ट किया है कि आधुनिक जीवन और जगत में गजल ही धार्मिक रूढ़ियों, सांपदायिक संकीर्णताओं को दूर कर भाईचारे और उदार विचारों के प्रसार से समाज में नई रोशनी ला सकता है। गजलकार का कथन है कि जिस प्रकार पुष्प की डाली पर खिला हुआ फूल सुगंधि को चारों ओर फैला देता है, उसी प्रकार गजल में व्यक्त विचार फूल की भाँति खुशबू बिखेरते हैं। बिना दीपक के ही गजल के विचार और शिक्षाओं से प्रकाश फैल जाता है। वास्तव में कविता ही मन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। अच्छे विचारों की खुशबू फैलती है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

पद -2

गजब की घूप है इक बेलिवास पत्थर पर,
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।

शब्दार्थ :

  • बेलिवास – नग्न।
  • दुशाला – चादर।

अर्थ : प्रस्तुत गजल में बद्र जी ने बतलाया है कि प्रकृति के क्रियाकलाप अद्भुतु है। एक ही समय में कहीं धूप पड़ती है कहीं छाया। कहीं शहनाई बजती है कहीं मातम होता है। पहाड़ पर कहीं तेज बरसात की चादर फैल जाती है उसी पहाड़ के अंश में एक ओर नग्न पत्थर पर कठोर धूप पड़ती है। पहाड़ पर सर्वत्र एक समान धूप तथा वर्षा का प्रभाव नहीं पड़ता। इस तथ्य को देखकर व्यक्ति को कट्टरवादी ने होकर परिवर्तन शील स्वभाव और विचार का होना चाहिए। सदा एक ही विचार पर दृढ़ बने रहना ठीक नहीं। समय, दशा तथा परिस्थिति के अनुसार उदार होकर परिस्थिति के अनुसार अपने आप को ढाल लेना चाहिए।

पद – 3

अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कराहट का,
कभी गिराया है मुझको कभी सँभाला है।

शब्दार्थ :

  • अजीब – अनोखा, विचित्र।
  • लहजा – तरीका, ढंग।
  • दुश्मन – शत्रु ।
  • गिराया – अवनत किया।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने शब्रु के मुस्कराने के ढंग को विलक्षण बतलाया है क्योंकि शत्रु की मुस्कराहट रहस्यपूर्ण होती है, कभी तो उसका उद्देश्य पतन की ओर ढकेलना असफलता की ओर बढ़ाना होता है, कभी उसकी मुस्कराहट में कल्याणकारी भाव भरा रहता है, वह गिरने से सभांल लेता है। सचमुच मुस्कराहट चाहे शत्रु की हो चाहे प्रेमिका की हो, वह रहस्यपूर्ण होती है, उसमें दोनों प्रकार के भाव भरे रहते हैं। मुस्कराहट कभी तो चिढ़ाने के लिए होती है कभी प्रेम पूर्ण होती है कि हृदयकलिका को प्रफुल्ल बना देती है।

पद – 4

निकल के पास की मस्जिद से एक बच्चे ने,
फ़साद में जली मूरत पे हार डाला है।

शब्दार्थ :

  • फसाद – दंगा, उपद्रव।
  • मूरत – मूर्ति।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि धर्म या संप्रदाय विशेष को अथवा मंदिर मस्जिद को लेकर दंगा करना, उपद्रव मचाना धार्मिक उन्माद के कारण हिंसा करना सर्वथा निंदनीय है। देगे के समय उपद्रवी मानवीय मूल्यों तथा संवेदनाओं को भूल जाते है। दंगे के समय एक निर्दोष बालक एक मस्जिद में शरण लेता है, जब उपद्रव शान्त हो जाता है तो वह मस्जिद से निकलकर बाहर देखता है कि एक मूर्ति को दंगे में उपद्रवियों ने जला दिया है, बच्चा जाकर उस मूर्ति के गले में फूलों की माला पहना देता है। बच्चे के हुदय में धार्मिक उन्माद नहीं, वह तो निर्मल एवं पवित्र है।

अतः धर्म के केन्द्र मंदिर-मस्जिद को दंगे से जोड़ना अनुचित है। इन दंगो में सच्चे धार्मिक पवित्र दिल वाले इंसान भाग नहीं लेते। केवल स्वार्थी, संकीर्ण मनोवृत्ति के लोग धर्म के नाम पर उपद्रव रचते हैं। कहा है मजहब नहीं सिखाते आपस में बैर करना। देखा गया है क उपद्रव के समय कितने मुसलमान हिन्दू मित्रों को पनाह देते हैं, कितने हिन्दू मुस्लिम भाइयों की रक्षा करते है। सांम्पदायिकता समाज के लिए कलंक है। अत हिन्दू. मुस्लिम दोनों के बीच भाई-चारे का प्रेम का, सौहार्र का सम्बन्ध होना चाहिए।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

पद – 5

तमाम वादियों में सेहरा में आग रोशन है,
मुझे खिजाँ के इन्हीं मौसमों ने पाला है।

शब्दार्थ :

  • वादियों – घाटी, जंगल।
  • सेहरा – पगड़ी, मुकुट।
  • खिजाँ – पतझड़।
  • मौसम – वातावरण।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि चाहे जैसा भी वातावरण हो, अनुकूल हो या प्रतिकूल हो, उसे अपने अनुकूल बना लेना चाहिए। जिस समय सर्वं्र विपरीत स्थिति हो सर्वत्र विध्वंस हो रहा हो, उस समय भी दृढ़ विचार वाला व्यक्ति स्थिर बना रहता है। कवि ने अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बतलाया है कि अत्यंत भयावह विषम वातावरण में उसका निर्वाह हुआ है।

संघर्षो या बाधाओं में व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है। सोना आग में जलकर ही कुन्दन बनता है। समस्त घाटियाँ, जंगलों तथा राजमुकुटों में आग की ज्वाल दहक रही है। इसी विकट परिवेश में पतझड़ के मौसम में ही कवि का पालन पोषण हुआ है। पर कवि पर इनका प्रभाव न पड़ा। वह बसन्त की वयार के लिए कभी परेशान नहीं हुआ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 5 धानों का गीत to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – धानों का गीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 2.
कवि किसको आने के लिए कहता है ?
(क) चन्दा को
(ख) सूरज को
(ग) बादल को
(घ) हवा को
उत्तर :
(ग) बादल को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 3.
आगे कौन पुकारेगा ?
(क) अँखड़ियाँ
(ख) डगरिया
(ग) गुजरिया
(घ) कलगियाँ
उत्तर :
(ख) डगरिया।

प्रश्न 4.
‘धान का गीत’ किसकी रचना है ?
(क) केदारनाथ अग्रवाल
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) नागार्जुन
(घ) निराला
उत्तर :
(ख) केदारनाथ सिंह।

प्रश्न 5.
‘धान का गीत’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) गीत
(ग) कविता
(घ) नाटक
उत्तर :
(ग) कविता।

प्रश्न 6.
खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 7.
ज्वार कब झारेंगे ?
(क) सुबह
(ख) दोपहर
(ग) रात
(घ) पूजा की बेला में
उत्तर :
(घ) पूजा की बेला में।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 8.
किस पौधे को पवित्र माना जाता है ?
(क) धान
(ख) तुलसी
(ग) कनेर
(घ) बेंत
उत्तर :
(ख) तुलसी।

प्रश्न 9.
भारतीय गाँवों के किसानों के जीवन का आधार क्या है ?
(क) धान
(ख) मकई
(ग) ज्वार
(घ) चाय
उत्तर :
(क) धान।

प्रश्न 10.
कवि किसको कच्ची धान की बालियां कहते है ?
(क) सूरज को
(ख) चंदा को
(ग) तारे को
(घ) जल को
उत्तर :
(ख) चंदा को ।

प्रश्न 11.
कवि किसको सूखी रेत में बाँधने की बात कहता है ?
(क) चंदा को
(ख) पानी को
(ग) सूर्य को
(घ) आग को
उत्तर :
(ग) सूर्य को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 12.
धूप के ढलते ही किसके पत्ते झरने लगते हैं ?
(क) आम के
(ख) बेर के
(ग) तुलसी के
(घ) ज्वार के
उत्तर :
(ग) तुलसी के।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 13.
कवि चंदा को किसमें बाँधने की बात कहता है ?
उत्तर :
कवि चंदा को धान की कच्ची बालियों में बाँधने की बात कहता है।

प्रश्न 14.
गीली अँखड़ियाँ किसे पुकारेगी ?
उत्तर :
गीली अँखड़ियाँ संझा को पुकारेंगी।

प्रश्न 15.
धानों का गींत किस प्रकार की कविता है ?
उत्तर :
धानों का गीत ग्रामीण परिवेश का ग्राम्य कविता है।

प्रश्न 16.
केदारनाथ सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
केदारनाथ सिंह का जन्म 1 जुलाई, 1934 ई० में बलिया जिला के चकिया गाँव में हुआ था ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 17.
किसके घिरने पर ज्वार झरने लगते हैं ।
उत्तर :
शाम के घिरने पर कनेर तथा पूजा की बेला में ज्वार झरने लगते हैं।

प्रश्न 18.
हमारे खेतों में क्या प्राण के समान हैं?
उत्तर :
हमारे खेतो में पके हुए धान हमारे प्राण के समान हैं ।

प्रश्न 19.
कवि धान की खेती के लिए किसका आह्वान करते हैं ?
उत्तर :
कवि धान की खेती के लिए वादल की आह्लान करते हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किनके द्वारा किया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किसानों द्वारा किया गया है। किसानों के अतिरिक्त चंदा, सूरज, पेड़, पौधे, खेत-आदि सभी बादल का स्वागत करते हैं।

प्रश्न 2.
कवि ‘आनाजी बादल जरूर’ कहकर बादलों का आह्बान क्यों करता है?
उत्तर :
बादल कृषि प्रधान भारतवर्ष के लोगों के जीवन का आधार है। जल के अभाव में खेतों में धान की फसल सूख जाती है। सभी पेड़-पौधे, वन-उपवन वर्षा के लिए बेचैनी से बादलों की ओर निहारते रहते हैं। नदियाँ सूख जाती हैं। वर्षा होते ही सारी धरती हरी-भरी हो जाती है। सारि-सरोवर जल से परिपूर्ण हो जाते हैं। सर्वत्र आनंदमय वातावरण बन जाता है। इसीलिए कवि बादलों का आह्नान करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 3.
बादल का स्वागत कौन-कौन और कब-कब करते हैं ?
उत्तर :
बादल का स्वागत किसान, वन पर्वत, खेत-खलिहान, रास्ते तथा खेतों की फसलें करती हैं। जब धरती वर्षा के अभाव में वीरान बन जाती है। फसलें जल के बिना-सूखने लगती हैं। गर्मी की कतु के बाद खेती करने का समय आषाढ़ का महीना आ जाता है। उस समय सभी बादल का स्वागत करते हैं।

प्रश्न 4.
‘धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे’ इस पंक्ति में धान को प्राण क्यों कहा गया है?
उत्तर :
कहा गया है कि अन्न ही प्राण है। अन्न के बिना प्राण की रक्षा नहीं हो सकती है। धान के पक जाने पर लोगों के प्राण की रक्षा करने वाला अन्न तैयार हो जाता है। धान लोगों की जीविका का आधार है। धान के पक जाने पर अर्थात् धान की फसल तैयार हो जाने पर लोग प्रसन्न हो उठते हैं। इसीलिए धान को प्राण कहा गया है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) धूप ढरे तुलसी वन झेरेंगे ……….. धान दिये की बेर।
(i) साँझ घिरने पर कौन झरता है?
उत्तर :
साँझ घिरने पर तुलसी-वन, कनेर, ज्वार झरता है।

(ii) ऊपर की पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पद 3 का अर्थ देखें।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

(ख) आगे पुकारेगी सूनी डगरिया पीछे झुके वन-बेंत।
(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ धानों का गीत पाठ से ली गई हैं। इसके कवि का नाम केदारनाथ सिंह है।

(ii) सूनी डगरिया से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर :
बादल के आने में देरी होने तथा वर्षा न होने से सब जगह वातावरण वीरान बन जाता है। कठिन गर्मी तथा धूप के कारण लोग घरों से नहीं निकल पाते। इसलिए सारे रास्ते सुनसान बन जाते हैं। कहीं चहल-पहल नहीं रह जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
कवि ने बादलों का आह्वान क्यों किया है? कविता के माध्यम से बादलों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य के जीवन में बादलों का बहुत अधिक महत्व है। बादलों के आने पर ही वर्षा होती है। धरती पर हरियाली और सरसता की सृष्टि होती है। भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है। इसलिए बादल और बादलों से होने वाली वर्षा ही कृषि का आधार है। वर्षा ही जीवन का आधार है। वर्षा के बिना धरती वीरान बन जाती है। जीवन की सरसता समाप्त हो जाती है। इसलिए कवि ने किसान के स्वर में बादल का स्वागत किया है।

जल से ही खेतों में धान की फसलें लहलहाती हैं और यही लोगों के प्राणों का आधार है। सूने रास्ते, वीरान वन-प्रदेश, पेड़-पौधे सभी बादल के लिए बेचैन हो उठते हैं। जब बादल धरती पर झुकेकर जल से उसे तृप्त कर देता है, पूरी पृथ्वी आनंदित हो उठती है। धान की फसल भी लहलहाने लगती है। पानी के बिना धान की खेती हो ही नहीं सकती । इसीलिए गाँव के किसान निरंतर बादल की प्रतीक्षा करते रहते हैं।

आकाश में बादल छा जाते हैं, जल की वर्षा करने लगते हैं, तो किसानों का मन ताजा हो जाता है। उनका मुर्झाया मन खिल जाता है। धान की बालियाँ लहलहा उठती हैं। जब धान खेत में पक जाते हैं तो किसान का सारा परिश्रम सफल हो जाता है। धान के पक जाने से किसान के प्राण भी ताजगी से भर उठते हैं। ज्वार आदि अन्य फसलें भी तैयार हो जाती हैं। इस प्रकार कवि ने कृषि प्रधान देश भारत के लोगों के जीवन में बादल के महत्व को स्पष्ट किया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

भाषा-बोध :

(क) तद्भव – तत्सम साँझ –
प्रान – प्राण अँखड़ियाँ –
चंदा _ चंद्रमा गीली –
खेत – क्षेत्र डगरिया –
सरज – सूर्य

(ग) पर्यायवाची शब्द लिखें :-
बादल – मेघ, घन, जलद
साँझ – संध्या, सायंकाल, दिनांत
भोर – प्रभात, सवेरा, प्रातःकाल
वन – कानन, जंगल, अरण्य

WBBSE Class 6 Hindi धानों का गीत Summary

जीवन-परिचय :

केदारनाथ सिंह का जन्म सन् 1934 ई० में उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुआ था। ये दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यापक रह चुके हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक गई, अकाल में सावन आये आदि हैं।

शब्दार्थ :

  • उगना – उपजना ।
  • कलगियाँ – धन की बालियाँ ।
  • रेत – बालू।
  • डगरिया – रास्ते ।
  • कनेर – एक वृक्ष।
  • संझा – शाम ।
  • तुलसी – एक पवित्र पौधा।
  • बेला – समय।
  • ढरे – ढलना ।
  • ज्वार – एक अन्न ।
  • बेर – बेला।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

पद – 1

धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे
उगेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर!
चन्दा को बाँधेंगी कच्ची कलगियाँ
सूरज को सूखी रेत में
आना जी बादल जरूर !

संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने किसान के स्वर में धान, चाँदनी तथा गाँव में प्रचलित विश्वास का सरस वर्णन किया है। कवि ने किसानों के स्वर में बादलों का स्वागत करते हुए उनका आह्वान किया है।

व्याख्या : भारतीय गाँवों के किसानों के जीवन का आधार खाद्यान्न धान है। उनके खेतों में उपजने वाले धान उनके प्राण के समान हैं। धान की खेती के लिए आवश्यक जल की वर्षा करने वाले बादल का वह आह्बान (पुकार) करता है कि बादल जरूर आएँ और जल की वर्षा करें। कवि चंदा को कच्ची धान की बालियों और सूर्य को सूखी रेत में बाँधने की बात कहता है।

पद – 2

आगे पुकारेगी सूनी डगरिया
पीछे झुके वन-बेंत,
संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ
भोर हुए धन-खेत,
आना जी बादल जरूर
धान कँपेंगे कि प्रान कँपेंगे
कँपेंगे हमारे खेत में
आना जी बादल जरूर !

व्याख्या : सुनसान गाँवों के रास्ते आगे पुकारेंगे । पीछे वन प्रदेश के बेंत झुके हुए हैं। गीली आँखें संध्या बेला में पुकारेंगी। खेतों में धान पक रहे हैं। हमारे खेतों में ये पके हुए धान ही हमारे पके प्राण के समान हैं। यहाँ धान को प्राण कहा गया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

पद – 3

धूप ढरे तुलसी-वन झरेंगे
साँझ घिरे पर कनेर,
पूजा की बेला में ज्वार झारेंगे
धान-दिये की बेर,
आना जी बादल जरूर,
धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे
पकेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर !

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने गाँवों के निवासियों के विश्वास की ओर संकेत किया है। धूप के ढलते ही तुलसी के पत्ते झरने लगते हैं। शाम के घिरने पर कनेर तथा पूजा की वेला में ज्वार झरने लगते हैं। हमारे खेतों में धान पक कर तैयार हो गए हैं, इसलिए इन धानों के रूप में हमारे प्राणों को नव जीवन मिल गया है। इसलिए खेती के लिए, अन्य पेड़पौधों के लिए बादल अवश्य आए। हम उसका स्वागत करते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – भगवान के डाकिए

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
पक्षी और बादल किसके डाकिए हैं ?
(क) मनुष्य के
(ख) भगवान के
(ग) धरती के
(घ) पक्षियों के
उत्तर :
(ख) भगवान के।

प्रश्न 2.
एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है?
(क) धन
(ख) अन्न
(ग) सुगंध
(घ) स्नेह
उत्तर :
(ग) सुगंग।

प्रश्न 3.
भगवान के डाकिए की चिट्ठी कौन बाँचता है ?
(क) पेड़
(ख) पौधे
(ग) पानी और पहाड़
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 4.
‘भगवान के डाकिए’ कविता के रचयिता कौन हैं ?
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर :
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’।

प्रश्न 5.
‘भगवान के डाकिए’ कविता में डाकिए किन्हे कहा गया है?
(क) मनुष्यों को
(ख) पक्षी तथा बादलों को
(ग) बच्चों को
(घ) उपर्युक्त सभी को
उत्तर :
(ख) पक्षी तथा बादलों को।

प्रश्न 6.
भगवान के द्वारा भेजे गए संदेश कौन पढ़ पाते हैं ?
(क) मनुष्य
(ख) अध्यापक
(ग) पेड़-पौधे, पानी, पहाड़
(घ) केवल भगवान के दूत
उत्तर :
(ग) पेड़-पौधे, पानी, पहाड़।

प्रश्न 7.
एक देश की धरती दूसरे देश की धरती को क्या भेजती हैं ?
(क) संदेश
(ख) चट्टान
(ग) पेड़-पौधे
(घ) सुगंध
उत्तर :
(घ) सुगंध।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 8.
इनमें ‘पंक्षी’ शब्द का पर्यायवाची है –
(क) खग
(ख) पंख
(ग) पर
(घ) प्रकाश
उत्तर :
(क) खग।

प्रश्न 9.
एक देश की भाप दूसरे देश तक किस रूप में जाती हैं ?
(क) फूल के रूप में
(ख) पानी के रूप में
(ग) हवा के रूप में
(घ) चट्टान के रूप में
उत्तर :
(ख) पानी के रूप में।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
भगवान के डकिए कौन हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं।

प्रश्न 2.
भगवान के डाकिए कहाँ जाते हैं ?
उत्तर :
भगवान के डाकिए एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं।

प्रश्न 3.
एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है ?
उत्तर :
एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है ?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 4.
सौरभ कहा तैरता है?
उत्तर :
सौरभ हवा में और पक्षियों के पंखों पर तैरता है।

प्रश्न 5.
एक देश का भाप दूसरे देश में क्या बनकर गिरता है ?
उत्तर :
एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।

प्रश्न 6.
कवि ने डाकिए किन्हें और क्यों कहा ?
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादलों को डाकिए कहा है क्योंकि ये भगवान का संदेश पृथ्वी पर लाते हैं।

प्रश्न 7.
पक्षी और बादलों द्वारा लाए गए संदेश कौन पढ़ पाते हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादलों द्वारा लाए गए संदेश पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 8.
‘पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ में कौन-सा अलंकार’ है ?
उत्तर :
‘पेड़, पौधे, पानी तथा पहाड़’ में अनुप्रास अलंकार है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 9.
काव्यांश में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है ?
उत्तर :
काव्यांश की भाषा सरल तथा सहज है, जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 10.
कवि और कविता का नाम लिखिए ।
उत्तर :
कवि का नाम रामधारी सिंह ‘ दिनकर’ तथा कविता का नाम ‘भगवान के डाकिए’ है।

प्रश्न 11.
‘पक्षियों की पंखों पर’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
उत्तर :
‘पक्षियों की पंखों पर’ पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 12.
‘सौरभ’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर :
‘सौरभ’ शब्द के पर्यायवाची हैं – सुगंध, खुशबू।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए बताया है क्योंकि ये हमेशा एक देश से दूसरे देश में जाते रहते हैं और एक दूसरे की चिट्ठियाँ दूसरी जगह ले जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल के महत्त्व को बतलाया है। ये दोनों एक देश के समाचार दूसरे देश में ले जाते हैं। वहाँ के पेड़-पौधों तथा पहाड़ पर इनका प्रभाव पड़ता है। इनके माध्यम से एक देश की धरती दूसरे देश को अपनी खुशबू भेजती है। बादल के द्वारा एक देश का भाप दूसरे देश में जल की वर्षा करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 3.
ये डाकिए परंपरागत डाकियों से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर:
परंपरागत डाकिए मनुष्य द्वारा मनुष्यों को भेजे गए संदेश लाते हैं जिन्हें मनुष्य स्वयं पढ़ लेता है, जबकि पक्षी और बादल भगवान के संदेश पृथ्वी पर लाते हैं, जिन्हें मनुष्य नहीं पढ़ पाता है, बल्कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ ही पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 4.
पद्यांश में पक्षियों तथा बादलों की किस क्रिया का वर्णन किया गया है ?
उत्तर :
इस प्यांश में कवि का कहना है कि पृथ्वी पर एक देश के फूलों की सुगंध बिना किसी बाधा के दूसरे देश को जाती है। यह सुगंध पक्षियों के उड़ते पंखों के सहारे चारों ओर फैल जाती है और बादलों के द्वारा एक देश का पानी भाप बनकर दूसरे देश में बरस जाता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :-

प्रश्न 1.
हम तो केवल यह आँकते हैं कि एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है ?
(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से ली गई हैं। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस अंश में कवि ने यह अनुमान व्यक्त किया है कि पक्षी और बादल के माध्यम से एक देश की पृथ्वी दूसरे देश को अपनी खुशबू भेज देती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में किस प्रकार स्पष्ट किया है ? पक्षी और बादल डाकिए की भूमिका किस प्रकार निभाते हैं?
उत्तर :
आधुनिक जीवन में डाकिए का महत्व बढ़ गया है। यों तो आधुनिक युग में संचार माध्यमों के द्वारा डाकिए की भूमिका का निर्वाह किया जा रहां है। प्रस्तुत कविता में दिनकर जी ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में चित्रित किया है। पक्षी और डाकिए दोनों ही भगवान के डाकिए माने जाते हैं। पक्षी भी एक देश से दूसरे देश उड़कर जाते हैं। बादलों की भी कोई सीमा नहीं होती, वे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में विचरण करते रहते हैं। मनुष्य भले ही उन्हें न समझ सके, मगर पेड़-पौधे, पानी और पर्वत उनके पत्रों को पढ़ते और समझते हैं। बादल भाप भरी हवाओं को लेकर जहाँ जाते हैं, वहाँ जल की वर्षा कर देते हैं। इस समाचार से पेड़-पौधे हरे-भरे और प्रफुल्ल बन जाते हैं। जलते हुए वीरान पर्वत प्रदेश भी जल प्राप्त कर तृप्त हो जाते हैं।

हम सब भी यही समझते हैं और अनुमान लगाते हैं कि एक देश की पृथ्वी, वहाँ के वातावरण और फूलों की सुगंधि दूसरे देशों में तैरने लगती है। पक्षी अपने पंखों को फैलाए हुए पवन के सहारे दूसरे देशों में जाते हैं। एक देश की सुगंधि दूसरे देश में इस प्रकार पहुँच जाती है। एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बन कर गिरता है । इस प्रकार पक्षी और बादल दोनों ही एक दूसरे देश की प्रकृति का, वातवरण का प्रचार-प्रसार करते हैं। अतः पक्षी और बादल सचमुच ईश्वर के डाकिए हैं, वे मनुष्य की चिट्ठियाँ नहीं ले जाते पर देशों व महादेशों को संदेशवाहक बनकर जोड़ते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

भाषा-बोध :

(क) महा + देश = महादेश ।
महा + पुरुष = महापुरुष ।

(ख) निम्नलिखित शब्दों का लिंग बताइए :-
चिट्ठी – स्त्रीलिंग
पहाड़ – पुलिंग
पेड़ – पुलिंग
सुगंध – स्त्रीलिंग
पक्षी – पुलिंग

(ग) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :-
पहाड़ – पर्वत, गिरि, अचल।
सौरभ – सुगंध, खुशबू, महक।
पंख – पर, डैना।
पानी – जल, नीर, वारि।
धरती – पृथ्वी, धरा, भू।

WBBSE Class 6 Hindi भगवान के डाकिए Summary

जीवन-परिचय :

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908-1974) का जन्म सन् 1908 में बिहार के मुंगेर जनपद के सिमरिया गाँव में हुआ था। दिनकर जी राष्ट्रीय धारा के नवीन कवियों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इनके विचार राष्ट्रीय जन जागरण में बहुत सहायक हुए हैं। इन्होंने बी.ए, तक की शिक्षा प्राप्त की। ये हाई स्कूल के प्र,धानाध्यापक से लेकर विभिन्न पदों से होते हुए भारत सरकार के हिन्दी के सलाहकार भी रहे। भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया। इनकी मृत्यु सन् 1974 में हुई। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कुरुक्षेत्र, रशिमरथी, हुंकार, उर्वशी आदि हैं। इनके काव्य ‘उर्वशी’ पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

पक्षी और बादल

पद – 1

ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते है
मगर उनकी लाई चिद्ठियाँ,
पेड़, पौघे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।

शब्दार्थ :

  • डाकिए – डाक, चिट्ठी बाँटने वाले कर्मचारी ।
  • महादेश – महाद्वीप, चिट्ठियाँ – पत्र ।
  • बाँचना – पढ़ना।

संदर्भ – प्रस्तुत कविता हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।
इस कविता में कवि ने पक्षी और बादल को भगवान का डाकिया बतलाया है क्योंक ये विभिन्न देशों में विचरण करते हैं।

व्याख्या – कवि ने बतलाया है कि पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं। ये हमेशा एक देश से दूसरे देश में भ्रमण करते हैं। इनके द्वारा लाए गए समाचार को हम समझ नहीं पाते। लेकिन पेड़, पौधे, जल और पर्वत इनके द्वारा लाई गई चिट्ठियों को पढ़ते हैं। पक्षी और बादल जहाँ भी जाते हैं वहाँ के पेड़-पौधों, जल तथा पहाड़ों पर इनका प्रभाव पड़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

पद – 2

हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।

शब्दार्थ :

  • आँकना – अनुमान करना ।
  • सुगंध – महक ।
  • सौरभ – सुगंध।
  • पाँखों – पंखों ।
  • भाप – वाष।

व्याख्या :- इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि डाकियों – पक्षी और बादल का दूसरे देशों पर क्या ग्रभाव पड़ता है। पक्षी और बादल एक देश से दूसरे देश में जाते हैं और उस देश के वातावरण को प्रभावित करते हैं। हमारा तो केवल यही अनुमान है कि इनके माध्यम से एक देश की पृथ्वी दूसरे देश को अपनी खुशबू भेजती है। वह सुगंध हवा में तिरता रहता है और पक्षियों के पंखों पर तैरने लगता है। बादल के द्वारा एक देश का वाष्य दूसरे देश में जल की वर्षा करता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 1.
इस कविता में कवि ने जीवन को क्या कहा है?
(क) खण्डहर
(ख) महासंग्राम
(ग) वरदान
(घ) नदी
उत्तर :
(ख) महासंग्राम

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 2.
कवि इस कविता में किसकी प्रेरणा देता है?
(क) संधर्ष एवं कर्च्वव्य परायणता
(ख) स्मृति की
(ग) संपत्ति प्राप्ति की
(घ) भौख माँगने की
उत्तर :
(क) संघर्ष एवं कर्त्तव्य परायणता

प्रश्न 3.
‘सुमन’ किसका उपनाम है ?
(क) शिवमंगल सिंह
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) शामशेर बहादुर सिंह
उत्तर :
(क) शिवमंगल सिंह

प्रश्न 4.
‘वरदान माँगूँगा नहीं’ किसकी रचना है ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ख) गजानंद माधव ‘मुक्तिबोध’
(ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
(घ) श्रौधर पाठक
उत्तर :
(ग) शिवमंगल सिह ‘सुमन’

प्रश्न 5.
शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म कब हुआ ?
(क) सन् 1905
(ख) सन् 1910
(ग) सन् 1915
(घ) सन् 1920
उत्तर :
(ग) सन् 1915

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 6.
शिवमंगल सिंद ‘सुमन’ का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) गढ़कोला
(ख) उम्नाव
(ग) ग्वालियर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) उन्नाव

प्रश्न 7.
कवि कैसी भीख नहीं चाहता ?
(क) प्रेम
(ख) दया
(ग) धन
(घ) बल
उत्तर :
(ख) दया

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार जीवन क्या है ?
(क) महासंग्राम
(ख) महान
(ग) हार
(घ) जय
उत्तर :
(क) महासंग्राम

प्रश्न 9.
कवि ने क्या माँगूँगा नही कहते हैं ?
(क) भीख
(ख) वरदान
(ग) भोजन
(घ) सुख
उत्तर :
(ख) बरदान

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 10.
कविता में ताप का अर्थ क्या है ?
(क) झूठा
(ख) श्राप
(ग) कष्ट
(घ) गर्मी
उत्तर :
(ग) कष्ट

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसके लिए कवि विश्व की संपत्ति नहीं चाहता?
उत्तर :
कवि अपने सुखद क्षणों को यादगार बनाने के लिए, अपने अभाबों की पूर्णता के लिए, भग्न अवशेषों के निर्माण के लिए विश्व की संपत्ति नहीं चाहता है।

प्रश्न 2.
‘लघुता’ शब्द से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
‘लघुता’ का अर्थ है तुच्छता या हल्कापन। यहाँ कवि ने बड़े लोगों से तुलना करते हुए अपने को उनके दृष्टिकोण से छोटा या अल्प शक्ति, सामर्थ्य वाला कहा है।

प्रश्न 3.
कवि किससे वरदान की कामना नहीं कर रहा है?
उत्तर :
कवि अपने को सामान्य वर्ग का व्यक्ति मानता है। वह अपने आपको महान, श्रेष्ठ, सर्वसाधन संपन्न समझने वाले लोगों से दूर ही रखना चाहता है। वे महान बने रहें। कवि ऐसे लोगों से वरदान की कामना नहीं कर रहा है।

प्रश्न 4.
कवि ने हार को क्या माना है ?
उत्तर :
कवि ने हार को विराम माना है।

प्रश्न 5.
संघर्ष पथ पर कवि को क्या-क्या स्वीकार है ?
उत्तर :
संघर्ष पथ पर कवि को हार-ज़ीत सब स्वीकार है।

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प्रश्न 6.
कवि कहाँ से भागना नहीं चाहता है ?
उत्तर :
कवि कर्तव्य पथ से भागना नहीं चाहता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ कविता का संक्षिप्त सार लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि जीवन को एक महासंग्राम तथा जीवन में पराजय को एक पड़ाव मानता है। वह किसी भी परिस्थिति में दया की भिक्षा नहीं माँग सकता। अपने सुखद यादों के लिए या अपने अभाव को पूरा करने के लिए भी वह विश्व का वैभव नहीं चाहता। महान बने लोगों से दूर रहकर वह अपने दिल के दर्द को नहीं छोड़ेगा। उसे कष्ट मिले या श्राप किन्तु वह कर्त्तव्य मार्ग पर अडिग बना रहेगा। वह कभी भी किसी से वरदान की याचना नहीं करेगा।

(ख) कवि किन-किन परिस्थितियों में वरदान नहीं माँगने की बात करता है?
उत्तर :
कवि अपने जीवन में चाहे तिल-तिल कर मिट जाए पर वह वरदान नहीं माँग सकता। अपनी सुखद यादों के लिए, अपनी कमी को पूर्ण करने के लिए, अपने हुदय की पीड़ा को दूर करने के लिए तथा संताप या अभिशाप की स्थिति में भी कवि वंरदान नहीं माँगना चाहता।

(ग) निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

प्रश्न 1.
संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही, वरदान माँगूँगा नहीं।
उत्तर :
कवि जीवन को महा संग्राम बतलाता है। यह जीवन यात्रा में आने वाली भयंकर स्थितियों से संघर्ष करना चाहता है। इस संघर्ष में हार या जीत होती है। पराजय एक पड़ाव के समान है। इस जीवन युद्ध में कवि तिल-तिल कर मिट जाने के बावजूद किसी से दया की भिक्षा स्वीकार नहीं कर सकता। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी की अनुकंपा नहीं चाहता। वह किसी से वरदान नहीं माँग सकता। वह किसी देवता या गुरुजन के सम्मुख इष्ट फल की प्राप्ति के लिए याचना नहीं कर सकता।

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प्रश्न 2.
कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु भाँगूँगा नहीं।
उत्तर :
कवि किसी भी महान व्यक्ति से, देवता से अथवा धन-कुबेर या राजनेता से किसी भी प्रकार की इष्ट वस्तु नहीं चाहता। चाहे उसके ह्बदय को पीड़ा मिले, चाहे श्राप मिले या उस पर मिथ्यावाद लगे। उससे चाहे जैसा भी व्यवहार हो, पर वह किसी भी परिस्थिति में कर्त्तव्य मार्ग से दूर नहीं हटेगा। कवि अपने जीवन को संघर्ष से ही सफल बनाना चाहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें अपने जीवन को सफल बनाने के लिए संघर्ष और कर्त्तव्य परायण बनने की प्रेरणा दी है। देश के लोगों को बतलाया है कि जीवन में पराजय एक विराम की तरह है। समग्र जीवन ही एक महासंग्राम है। इसलिए हर मुसीबत के बावजूद उन्हें भिक्षा याचना नहीं करनी चाहिए। किसी से इष्ट बस्तु भी माँगना नहीं

चाहिए। अपनी अतीत की यादों को सुखद बनाने के लिए, अपने जीवन की कमियों को पूरा करने के लिए भी वरदान नहीं माँगना चाहिए। संसार में संपत्ति प्राप्त करने के लिए याचना करना स्वाभिमान के खिलाफ है। जीवन एक संग्राम है। इसमें चाहे जय मिले या पराजय, पर व्यक्ति को विन्दुमात्र भी भयभीत या निराश नहीं होना चाहिए। हार-जीत तो होती ही रहती हैं। संघर्ष के पथ पर सदा अग्रसर होते रहना हीं सच्चा कर्त्रव्य है। जय या पराजय दोनों को सही समझ कर स्वीकार करना चाहिए। ऐसे समय में भी किसी के सामने हाथ फैलाना उचित नहीं है।

जो भी व्यक्ति अपने को सब प्रकार से संपन्न तथा महान समझता है, समझता रहे, उसकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए। अगर हमें छोटा समझता है तो उसकी भी परवाह नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने मन की पीड़ा को अपने मन में ही रखना चाहिए। व्यर्थ में उस पीड़ा को नहीं त्यागना चाहिए। अन्तर्वेदना को दूर करने के लिए किसी से भी वरदान माँगना उचित नहीं।

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हर स्थिति में कर्त्तव्य मार्ग पर दृढ़ बने रहना चाहिए। हृदय को चाहे कितनी भी पौड़ा मिले, चाहे हमें अभिशाप ही मिले, पर कभी भी सत्कर्त्तव्य पथ से भागना नहीं चाहिए।

भाषा-बोध

(क) विलोम शब्द

  • हार – जीत
  • जीवन-मृत्यु
  • स्मृति – विस्मृति
  • लघुता – गुरुता
  • वरदान – अभिशाप

(घ) उपसर्ग अलग कीजिए –

  • वरदान — वर + दान
  • अभिशाप — अभि + शाप
  • विराम — वि + राम
  • प्रहर — प्र + हर
  • सुखद — सु+खद
  • संग्राम — सम् + ग्राम
  • व्यर्थ — वि + अर्थ

(ग) पाठ से ता, ना और ओ प्रत्ययों से बने शब्दों को चुनकर लिखिए।
ता = लघुता, ओ – प्रहरों, खंडहरों। ना = वेदना

(घ) वाक्य प्रयोग – अभिशाप – प्रदूषण आज अभिशाप बन गया है।
कर्त्तव्य – सभी को अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए।
महासंग्राम – जीवन एक महासंग्राम है।
खण्डहर – सेतु के खण्डहर दिखलाई पड़ते हैं।
संघर्ष – संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

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WBBSE Class 7 Hindi वरदान माँगूँगा नहीं Summary

जीवन्रिचिय

डॉ० शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद के झगरपुर नामक ग्राम में सन् 1916 ई० में हुआ। सुमन ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम०ए० और डी० लिट० की उपाधियाँ प्राप्त की। इनकी रचनाओं में प्रगतिवादी विचारों के साथ प्रेम और शृंगार का भी चित्रण हुआ है। इन्होंने अपनी रचनाओं में शोषित मानव की पीड़ा, सामाजिक विषमता, वर्ग संघर्ष का भी चित्रण किया है।

इनकी रचनाएँ सहज, सरल तथा प्रभावोत्पादक हैं। इनकी रचनाएँ हिल्लोल, जीवन के गान, प्रलय सृजन पर आँखें नहीं भरी, विं्न हिमालय, विश्वास बढ़ता ही गया तथा मिट्टी की बारात आदि हैं। ‘मिट्टी की बारात’ पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

पद – 1

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिट्यूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • तिल-तिल मिटना – कण-कण खत्म हो जाना।
  • हार – पराजय, असफलता।
  • वरदान – देवता अथवा गुरुजन की प्रसन्नता के फलस्वरूप प्राप्त फल, इष्ट वस्तु की फल प्राप्ति।
  • विराम – पड़ाव, ठहराव, विश्राम।
  • महासंग्राम – जीवन यात्रा में आनेवाली कठिनाइयों से लड़ना, जीवन संग्राम।
  • संदर्भ – प्रस्तुत अंश ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ कविता से उद्धृत है। इस कविता के लेखक डॉ० शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।
  • प्रसंग – कवि इन पंक्तियों में अपनी अभिलाषा व्यक्त की है कि वह किसी भी स्थिति में वरदान नहीं माँगेगा।

व्याख्या – कवि जीवन को महा संग्राम बतलाता है। यह जीवन यात्रा में आने वाली भयंकर स्थितियों से संघर्ष करना चाहता है। इस संघर्ष में हार या जीत होती है। पराजय एक पड़ाव के समान है। इस जीवन युद्ध में कवि तिल-तिल कर मिट जाने के बावजूद किसी से दया की भिक्षा स्वीकार नहीं कर सकता। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी की अनुकंपा नहीं चाहता। वह किसी से वरदान नहीं माँग सकता। वह किसी देवता या गुरुजन के सम्मुख इष्ट फल की प्राप्ति के लिए याचना नहीं कर सकता।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

पद – 2

स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्व की सम्पत्ति चाहूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • खंडहर – भग्नावशेष, दूटा फूटा घर
  • सुखद – सुख देने वाली
  • प्रहर – समय संपत्ति – वैभव
  • स्मृति – याद
  • जान लो – समझ लो

व्याख्या – कवि कह रहा है कि वह अपने जीवन में सुख की अनुभूति कराने वाली स्मृतियों के लिए तथा टूटे-फूटे को सजाने या अपनी अधूरी, बिखरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी किसी भी देवता या महान लोगों से वरदान की याचना नहीं कर सकता। सब को अपने विचारों से समझा देना चाहता है कि वह अपने जीवन में समस्त संसार के ऐश्वर्य एवं वैभव की कामना नहीं करता है। उसे जीवन में सुख, अधूरी इच्छा की पूर्ति तथा धन संपत्ति की कामना नहीं है।

पद – 3

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • किंचित- कुछ, थोड़ा
  • भयभीत – डर
  • संघर्ष – विरोध, टकराव
  • सही – सच।

व्याख्या – कवि ने स्पष्ट किया है कि जीवन यात्रा में चाहे विजय मिले या पराजय, मैं किसी भी परिस्थिति में तनिक भी भयभीत नहीं हो सकता। जीवन में विरोधी स्थिति भी आती है, टकराव भी होते हैं, पर मैं सभी को सच माऩकर स्वीकार करूँगा। किसी के सामने याचना नहीं करूँगा।

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पद – 4

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम ही महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • छुआ – स्पर्श करना
  • लघुता – तुच्छता, छोटापन, हल्कापन
  • त्यागूँगा – छोडूँगा
  • वेदना – पीड़ा

व्याख्या – प्रस्तुत अंश में कवि का कथन है कि वह अपनी स्थिति को यथावत् बनाए रखना चाहता है। इसलिए वह कहता है कि मेरी तुच्छता का मेरे हल्केपन को स्पर्श भी मत कीजिए। अपनी महानता को लेकर अहंकारी जीवन बिताते रहिए। अपने दिल के दर्द को मैं बेकार में नहीं छोड़ सकता। मेरी पीड़ा सदा मेरे मन में बनी रहेगी। पीड़ा को सहते हुए भी मैं किसी के सामने हाथ नहीं फैलाऊँगा। किसी से वरदान की याचना नहीं करूँगा।

पद – 5

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु मैं भागूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • ताप – कष्ट पीड़ा
  • कर्त्तव्य पथ – करने योग्य मार्ग या कार्य
  • अभिशाप – श्राप, झूठा दोष

व्याख्या – कवि किसी भी महान व्यक्ति से, देवता से अथवा धन-कुबेर या राजनेता से किसी भी प्रकार की इष्ट वस्तु नहीं चाहता। चाहे उसके ह्बदय को पीड़ा मिले, चाहे श्राप मिले या उस पर मिथ्यावाद लगे। उससे चाहे जैसा भी व्यवहार हो, पर वह किसी भी परिस्थिति में कर्त्तव्य मार्ग से दूर नहीं हटेगा। कवि अपने जीवन को संघर्ष से ही सफल बनाना चाहता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – वह चिड़िया जो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
चिड़िया के पंख हैं –
(क) नीले
(ख) पीले
(ग) हरे
(घ) लाल
उत्तर :
(क) नीले।

प्रश्न 2.
चिड़िया कैसी है ?
(क) मोटी
(ख) बड़ी
(ग) छोटी
(घ) काली
उत्तर :
(ग) छोटी।

प्रश्न 3.
चिड़िया किसके लिए गाती है ?
(क) आदमी के लिए
(ख) बच्चों के लिए
(ग) पशु-पक्षियों के लिए
(घ) बूढ़े वन-बाबा के लिए
उत्तर :
(घ) बूढ़े वन-बाबा के लिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 4.
चिड़िया कौन-से मोती ले जाती है ?
(क) सोने के
(ख) चाँदी के
(ग) जल के
(घ) दाने के
उत्तर :
(ग) जल के।

प्रश्न 5.
चिड़िया किसका दिल टटोलती है ?
(क) बूढ़े बाबा का
(ख) कवि का
(ग) इस्सान का
(घ) नदी का
उत्तर :
(घ) नदी का।

प्रश्न 6.
कविता के रचयिता कौन हैं ?
(क) केदारनाथ अप्रवाल
(ख) सरोजिनी नायडू.
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(क) केदारनाथ अप्रवाल।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 7.
चिड़िया किसके दाने खाती है
(क) मूँगफली के
(ख) जुंडी के
(ग) चने के
(घ) धान के
उत्तर :
(ख) जुंडी के।

प्रश्न 8.
दूध से भरे हुए क्या हैं?
(क) नदियाँ
(ख) तालाब
(ग) जुंडी के दाने
(घ) मक्का के दाने
उत्तर :
(ग) जुंडी के दाने।

प्रश्न 9.
चिड़िया का गीत कैसा है ?
(क) उबाऊ
(ख) नीरस
(ग) कर्कश
(घ) मधुर
उत्तर :
(घ) मधुर।

प्रश्न 10.
चिड़िया का स्वभाव कैसा हैं ?
(क) संतोपी
(ख) चिड़चिड़ा
(ग) घुमक्कड़
(घ) फुर्तोला
उत्तर :
(क) संतोषी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 11.
चिड़िया कैसे गाती है ?
(क) तीव स्वर में
(ख) कंठ खोलकर
(ग) धीरे-धीरे
(घ) मंद स्वर में
उत्तर :
(ख) कंठ खोलकर।

प्रश्न 12.
‘संतोषी’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय लगा हुआ है ?
(क) षी
(ख) तोषी
(ग) ई
(घ) सम्
उत्तर :
(ग) ई।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में कौन-सा अन्न का नाम है ?
(क) चना
(ख) जुंडी
(ग) गेहूँ
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

प्रश्न 14.
‘नदी’ शब्द का बहुवचन रूप कौन-सा है ?
(क) नदियाँ
(ख) नदियों
(ग) नदीएँ
(घ) नदें
उत्तर :
(क) नदियाँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 15.
इनमें ‘जल’ शब्द का पर्यायवाची कौन-सा है ?
(क) नीर
(ख) तोय
(ग) वारि
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

प्रश्न 16.
चिड़िया स्वयं को ‘छोटी संतोषी’ कहती है, क्योंकि –
(क) वह छोटी-छोटी चीजों से ही संतोष कर लेती है
(ख) वह जौ-बाजरे के दाने खाकर ही संतोष कर लेती है
(ग) वह यह मानकर संतोष कर लेती है कि वह छोटी है
(घ) वह केवल चोंच मारकर ही खा लेती है
उत्तर :
(ख) वह जौ-बाजरे के दाने खाकर ही संतोष कर लेती है।

प्रश्न 17.
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है, क्योंकि –
(क) वह अन्न का महत्व समझती है
(ख) अन्न उगाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है
(ग) उसे अन्न खाना ही अच्छा लगता है
(घ) वह छोटी और संतोषी चिड़िया है
उत्तर :
(क) वह अन्न का महत्व समझती है।

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प्रश्न 18.
चिड़िया बूढ़े वन-बाबा की खातिर रस उँड़ेलकर गाती है, क्योंकि –
(क) वह जानती है कि वन-बाबा बूढ़े हैं
(ख) वन-बाबा को रसीले गीत सुनना अच्छा लगता है
(ग) वन-बाबा को धन्यवाद देना चाहती है
(घ) वह छोटी, मुँहबोली और नीले पंखोंवाली है
उत्तर :
(घ) वह छोटी, मुँहबोली और नीले पंखोंवाली है।

प्रश्न 19.
चिड़िया को विजन से बहुत प्यार है, क्योंकि –
(क) विजन उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है
(ख) उसे एकांत स्थान में रहना अच्छा लगता है
(ग) विजन में उसके अलावा कोई नहीं रहता
(घ) विजन में वन-बाबा रहते हैं
उत्तर :
(ख) उसे एकांत स्थान में रहना अच्छा लगता है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कविता में कैसी चिड़िया की बात की गई है।
उत्तर :
कविता मे छोटी संतोषी चिड़िया की बात की गई है।

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प्रश्न 2.
चिड़िया अपनी चोंच से किस प्रकार के दाने खाती है ?
उत्तर :
विड़िया अपनी चोंच से दूध से भरे अधपके जुंडी अर्थात् ज्वार-बाजरा की बालियों के दानें ख्वादपूर्वक खाती है।

प्रश्न 3.
चिड़िया का स्वभाव कैसा है ?
उत्तर :
चिड़िया का संतोषी स्वभाव है।

प्रश्न 4.
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है। कैसे ?
उत्तर :
चिड़िया का पेट अन्न से ही भरता है। वह अन्न के दानों को पूरे मन और स्वाद से खाती है। इसालिए उसे अन्न से बहुत प्यार है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए –
(क) जुंडी
(ख) संतोषी
उत्तर :
(क) जुंडी : ज्वार-बाजरा की बालियाँ।
(ख) संतोषी : जिसे संतोष हो या संतोष करने वाली।

प्रश्न 6.
कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर :
कवि का नाम केदारनाथ अम्रवाल एवं कविता का नाम वह चिड़िया जो।

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प्रश्न 7.
चिड़िया किसकी खातिर गाती है?
उत्तर :
चिड़िया बूढ़े (पुराने) जंगल की खातिर गाती है।

प्रश्न 8.
चिड़िया का गाना कैसा है ?
उत्तर :
चिड़िया का गाना सुरीला, रसीला तथा आकर्षक है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के अर्थ लिखिए –
(क) कंठ
(ख) विजन
उत्तर :
(क) कंठ : गला।
(ख) विजन : एकांत जंगल।

प्रश्न 10.
चिड़िया नदी से जल कैसे लेती है ?
उत्तर :
चिड़िया जल की मोती के समान बूँद लेने से पूर्व उसका हृदय टटोलती है अर्थात् उसकी इच्छा जानती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 11.
चिड़िया को किससे प्यार है ?
उत्तर :
चिड़िया को अन्न, वन और नदी से प्यार है।

प्रश्न 12.
“जल का मोती ले जाती है।” पंक्ति का क्या आशय है ?
उत्तर :
पंक्ति का आशय है – जल से मोती रूपी बूँद ग्रहण करना।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘वह चिड़िया जो’ कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर :
इस कविता में कवि ने एक छोटी सी चिड़िया की विशेषताओं का वर्णन किया है। वह छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच से ज्वार के दाने प्रेम से खाती है। वह सदा संतुष्ट रहती है, अन्र से प्यार करती है। बूढ़े वन-बाबा के लिए मधुर कंठ से गीत गाती है। उस प्यारी चिड़िया को एकान्त से बहुत प्यार है। वह बढ़ी हुई नदी के जल से मोती निकाल लेती है। वह गर्वीले स्वभाव की है। उसे नदी से बहुत प्यार है।

प्रश्न 2.
चिड़िया कौन-कौन से कार्य करती है ?
उत्तर :
चिड़िया अपनी चोंच मारकर ज्वार के दाने खाती है। बूढ़े वन-बाबा के लिए गीत गाती है। बढ़ी नदी के जल से मोती लाती है। नदी से प्यार करती है।

(क) वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।
(i) इस पद्यांश के कवि कौन हैं ? यह किस शीर्षक से उद्धुत है ?
उत्तर :
इस पद्यांश के कवि श्री केदारनाथ अप्रवाल हैं। यह कविता ‘वह चिड़िया जो’ शीर्षक से उद्धृत है।

(ii) चिड़िया को किससे प्यार है ? उसे संतोषी क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है। चिड़िया को संतोषी कहा गया है क्योंकि वह जुंडी के दूध भरे दाने को बड़े शौक तथा आनंद से खाकर प्रसन्न हो जाती है। इसी से संतुष्ट हो जाती है।

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(ख) वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ।
मुझे विजन से बहुत प्यार है।
(i) चिड़िया को मुँह बोली क्यों कहा गया है?
उत्तर :
चिड़िया सभी को बहुत प्यारी होती है। वह मधुर बोलती है तथा मधुर गीत गाती है। इसलिए चिड़िया को मुँह बोली कहा गया है।

(ii) विजन का क्या अर्थ है? चिड़िया को विजन से क्यों प्रेम है ?
उत्तर :
विजन का अर्थ एकांत प्रदेश से है। चिड़िया को विजन से प्रेम है क्योंकि एकांत में चिड़िया निडर होकर विचरती तथा गीत गाती है। वहाँ बूढ़े वन-बाबा के लिए वह मधुर कंठ से गीत गाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘वह चिड़िया जो’ कविता के माध्यम से क्या सीख दी गई है? उसे हम अपने जीवन में कैसे अपना सकते हैं?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में प्रगतिवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल ने चिड़िया के माध्यम से हमें उदार, संतोषी, सेवा परायण तथा परिश्रमशील बनने की प्रेरणा दी है। चिड़िया, संतोषी स्वभाव वाली है। वह जुंडी के दाने से अपनी रुचि और लगन से दूध खींच लेती है। वह अन्न से बहुत प्यार करती है। मनुष्य को भी अपने परिश्रम तथा प्रयल्न से जीवन में आनंद ग्रहण करना चाहिए। बिना परिश्रम के उसे कुछ नहीं मिल सकता। उसे समझनना चाहिए कि अन्न ही प्राण है। अन्न से प्यार करना चाहिए। अन्न उत्पादन तथा रक्षण के लिए सदा प्रयत्न करना चाहिए। अन्न सृष्टि जीवन मात्र का आधार है। अत: अन्न का एक कण भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

चिड़िया खुले कंठ से बूढ़े वन बाबा के प्रति सम्मान का भाव रखती है। वह उनके आनंद के लिए अपने कंठ से सरस मीठे गीत गाती है। उसे एकोंत से, जंगल से, वन वृक्षों से अतिशय प्रेम और लगाव है। हमें भी अपने जीवन में वृद्धजनों की सेवा करनी चाहिए। उनकी प्रसनता के लिए मधुर वचन और उनके मनोरंजन के लिए मीठे गान का आयोजन करना चाहिए। चिड़िया की तरह हमें भी वन से, वहाँ के पेड़-पौधों से तथा एकांत से प्यार करना चाहिए। यह प्रकृति ही जीवन का आधार है। वन रहेंगे तब हम भी रहेंगे। इसलिए आज हमें प्रकृति की ओर बढ़ने की जरूरत है।

चिड़िया नदी से प्यार करती है। स्वाभिमान का भाव रखती है। वह नदी की बाढ़ को देखकर भयभीत नहीं होती, बल्कि नदी से मोती प्राप्त कर लेती है। मनुष्य को भी नदी से प्यार करना सीखना चाहिए। जल ही जीवन है। नदी अपने जल से सभी प्राणियों की नि: ख्वार्थ भाव से सेवा करती है। हमें साहस औरपरिश्रम से गहरे पानी में जाकर मोती प्राप्त करना चाहिए व्योंकि गहरे पानी में प्रवेश करने से ही मोती मिल सकता है। बड़ी वस्तु पाने के लिए ठोस प्रयल करना चाहिए। इस प्रकार हमें चिड़िया की सीख को अपने जीवन में अपना लेना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द :
चिड़िया -खग, विहग, पक्षी।
नदी-सरिता, सरि, तटनी।
मोती- मुक्ता, मौक्तिक, सीपिज।
दूध-दुग्ध, क्षीर, पय, गोरस।
वन- कानन, जंगल, विपिन।
(ख) चिड़िया, जड़िया, डाकिया, धुनिया।

WBBSE Class 6 Hindi वह चिड़िया जो Summary

जीवन-परिचय :

केदारनाथ अप्रवाल का जन्म बाँदा जनपद के कमासिन गाँव में सन् 1911 में हुआ था। प्रगतिवादी कवियों में इनका प्रमुख स्थान है। गाँव में जन्मे केदारनाथ अग्रवाल का गाँव से गहरा लगाव रहा। इनकी कविताओं में मानव और प्रकृति के सौन्दर्य का बड़ा ही सहज और उन्मुक्त चित्रण मिलता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ–युग की गंगा, लोक और आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं आदि हैं। इनकी मृत्यु सन् 2000 में हुई।

पद – 1

वह चिड़िया जो –
चोंच मारकर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से रस से खा लेती है
वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ :

  • जुंडी – ज्वार।
  • रुचि – शौक।
  • रस – आनंद।
  • संतोषी – संतुष्ट।
  • अन्न – अनाज।

संदर्भ : प्रस्तुत कविता ‘वह चिड़िया जो’ पाठ से ली गई है। इसके कवि श्री केदारनाथ अग्रवाल हैं।

व्याख्या : इस कविता में कवि ने चिड़िया की विशेषताओं का वर्णन किया है । वह छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच मारकर जुंडी के दानें जिसमें दूध भरे रहते हैं उसे खाकर अपनी भूख मिटाती है। उस दाने को वह बड़े शौक तथा आनंद से खाती है। वह सदा संतुष्ट एवं प्रसन्न रहने वाली है, जिसके पंख नीले रंग के हैं। वह चिड़िया मैं ही हूँ। मैं अन्न को बहुत रुचिकर एवं प्यारा समझती हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

पद – 2

वह चिड़िया जो –
कंठ खोलकर
बूंढ़े वन-बाबा की खातिर
रस उड़ेलकर गा लेती है
वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखोंवाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ :

  • कंठ – गला।
  • मुँहबोली – प्यारी, मधुर बोलने वाली ।
  • विजन – एकांत ।
  • वन – बाबा-जंगल।

संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने छोटी चिड़िया के स्वरूप, उसकी विशेषताओं तथा कार्यों का वर्णन किया है।

व्याख्या : जो छोटी सी प्यारी चिड़िया वृद्ध वन -बाबा (जंगल) की प्रसन्नता के लिए खुले गले से मधुर गीत गाती है। अपने मधुर कंठ से रस भर देती है अर्थात् आनंद से भर देती है। वह चिड़िया सभी को अत्यंत प्यारी तथा मीठी बोली बोलनेवाली लगती है। उसके पंख नीले रंग के हैं। उसे एकांत से बहुत प्यार है। वह चिड़िया मैं ही हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

पद – 3

वह चिड़िया जो –
चोंच मारकर
चढ़ी नदी का दिल टटोलकर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ –

  • चढ़ी – जल से भरी ।
  • दिल – मन ।
  • टटोलना – जाँचना ।
  • परख करना, गरबीली – गर्ववाली, घमंडी।

संदर्भः प्रस्तुत कविता में कवि ने चिड़िया के दिल की परख, प्रयत्न, उसके स्वभाव तथा नदी के प्रति प्यार का वर्णन किया है।

व्याख्या : जो चिड़िया निडर होकर बढ़ी नदी के भीतर जाँच-परख कर जल के भीतर से मोती प्राप्त कर लेती है। वह छोटी सी चिड़िया गर्वीले स्वभाव वाली है। उसके पंख नीले हैं। वह नदी से बहुत प्यार करती है। वह चिड़िया मैं ही हूँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 5 रक्षा बंधन to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – रक्षा बंधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
राखी कौन बाँधती है?
(क) माँ
(ख) बेटी
(ग) बहन
(घ) पत्नी
उत्तर :
(ग) बहन

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 2.
भाई कहाँ जा रहा है?
(क) विद्यालय
(ख) मन्दिर
(ग) घर
(घ) समर में
उत्तर :
(घ) समर में।

प्रश्न 3.
मूल रूप से इस कविता का स्रोत है :
(क) बहन-भाई प्रेम
(ख) प्रकृति प्रेम
(ग) वात्सल्य प्रेम.
(घ) देश प्रेम एवं स्वतंत्रता
उत्तर :
(घ) देश प्रेम एवं स्वतंत्रता

प्रश्न 4.
रक्षा बंधन के लिए भाई अपनी बहन को कौन-सा उपहार देना चाहता है?
(क) अमूल्य उपहार
(ख) आँखों के आँसू
(ग) स्वतंत्रता
(घ) निद्रा
उत्तर :
(ख) आँखों के आँसू

प्रश्न 5.
‘प्रेमी’ किस कवि का उपनाम है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ग) हरिकृष्ण
(घ) सोहनलाल
उत्तर :
(ग) हरिकृष्ण

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प्रश्न 6.
हरिकृष्ण प्रेमी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1909
(ख) सन् 1910
(ग) सन् 1911
(घ) सन् 1912
उत्तर :
(क) सन् 1909

प्रश्न 7.
हरिकृष्ग ‘प्रेमी’ का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) झाँसी
(ख) ग्वालियर
(ग) गुड़गाँव
(घ) गाजियानाद
उत्तर :
(ख) ग्वालियर

प्रश्न 8.
शीश का अर्थ क्या है ?
(क) मस्तक
(ख) पहाड़
(ग) कुटिया
(घ) पावन
उत्तर :
(क) मस्तक

प्रश्न 9.
भाई-बहन से क्या बनकर दर-दर घूमने को कहता है ?
(क) सैनिक
(ख) भिखारीन
(ग) बंधु
(घ) फेरीवाला
उत्तर :
(ख) भिखारीन

प्रश्न 10.
भाई-बहन से अंतिम बार क्या बाँधने को कहता हैं ?
(क) राखी
(ख) रक्षा सूत्र
(ग) कंगन
(घ) फांसी
उत्तर :
(क) राखी

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रक्षा बंधन कविता में किसके किस अत्याचार की बात कही जा रही है?
उत्तर :
रक्षा बंधन कविता में अंग्रेज शासकों के अत्याचार की बात कही जा रही है। अन्यायी शासकों ने लाखों युवतियों को विधवा बना डाला। हमारे देश को बेसहारा बना दिया।

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प्रश्न 2.
आश्रयहीन होने पर बहन का माथा ऊँचा कैसे होगा?
उत्तर :
आश्रयहीन होने पर भी बहन का माथा इसलिए ऊँचा होगा कि उसका भाई मातृभूमि की आजादी के लिए, देश को जालिमों के अत्याचार से बचाने के लिए आत्म बलिदान कर दिया। देश के नवयुवक वीरों को देश पर मिटने के लिए अलख जगाने का उसे अवसर मिल जाएगा।

प्रश्न 3.
बहन भाई के उपहार को क्या कहती है?
उत्तर :
भाई के उपहार आँसुओं की बूदों को बहन मणियों की भाँति बहुमूल्य कहती है क्योंकि उन मणियों पर संसार योयावर हो जाता है।

प्रश्न 4.
भाई अमर नशे में कब झूमने की कामना करता है?
उत्तर :
भाई रणक्षेत्र में आत्म बलिदान करने के लिए प्रस्थान की तैयारी कर रहा है। वह अपनी बहन को उपहार के रूप में आँखों के आँसुओं को देना चाहता है। उसी समय वह बहन से कहता है कि बहन अपने चरण कमल बढ़ाओ में उन्हें चूम लूँ। उसी समय भाई उसके पवित्र स्नेह से अमर नशे में झूमने की कामना करता है।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत कविता में भाई अपनी बहन से कहाँ जाने की बात कहता हैं ?
उत्तर :
पसस्तुत कविता में भाई अपनी बहन से युद्ध में जाने की बात कहता है।

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प्रश्न 6.
भाई अपनी बहन से क्या आशीर्वाद चाहता है ?
उत्तर :
भाई अपने बहन से सिर-कटने के पहले नहीं ज्ञुकने का आर्शीबाद चाहता है।

प्रश्न 7.
‘रक्षा बन्धन’ कविता में जननी किसे कहा गया है ?
उत्तर :
‘रक्षा बन्धन’ कविता में जननी ‘मातृभूमि’ को कहा गया है।

प्रश्न 8.
भाई को कौन-सा दुःख मिटाना है ?
उत्तर :
भाई को गुलामी का दुःख मिटाना है।

प्रश्न 9.
भाई अपने साथियों को कब निद्रा लेने को कहता है ?
उत्तर :
भाई अपने साधियों को स्वाधीनता प्राप्त करने के बाद निद्रा लेने को कहता है।

प्रश्न 10.
बहन मणियाँ किसको कहती है ?
उत्तर :
बहन मणियाँ भाईयों के अश्रुकणों (आँसू की बूँदों) को कहती है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) ‘रक्षा बन्धन’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवकों को गुलामी की जंजीर तोड़ देने के लिए तथा सहर्ष बलिदान कर देने की प्रेरणा दी है। आजादी की लड़ाई में जाने से पूर्व भाई-बहन से कह रहा है कि उसे समर में जाना है, इसलिए वह उसे राखो बाँध दे आशीर्वाद दे कि वह भारत माता के चरणो पर आत्म-और बलिदान कर दे। जिस अन्यायी शासकों ने देश को वीरान तथा अनाथ बना दिया उनकी प्यास वुझाने के लिए देश के लाखो वीर नवयुवक विजय पथ पर जा रहे हैं।

बहन उसके मस्तक पर हांथ रख दे जिससे उसका मस्तक कभी झुुके नहीं। उन हत्यारों ने हमारे देश को तहस-नहस कर डाला। आज हमारे पास बहन को उपहार देने के लिए केवल मेरी आँखों के आँसू हैं, जिन्हें वह मणियों के समान बहुमूल्य समझती है। भाई प्रस्थान करने के पूर्व बहन के चरण छूकर उसके पवित्र स्नेह में झूमना चाहता है।

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(ख) इस कविता के माध्यम से आप कैसे कह सकते हैं कि यह स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी? जिन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है, उन्हें लिखिए।
उत्तर :
इस कविता के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कविता स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी। निम्न पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है।

  • यह पोंछ ले अश्रु गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है।
  • उस हत्यारे ने तेरा माथ।

(ग) भाई बहन को समर में जाने के पूर्व क्या-क्या कह रहा है?
उत्तर :
भाई समर में जाने के पूर्व बहन को कह रहा है कि वह उसे आशिष दे, उसके आँस पोंछ ले। अन्तिम बार राखी बाँधकर प्यार कर ले। मस्तक पर स्नेहपूर्वक अपना हाथ रख दे। अंग्रेज शासकों ने न जाने कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया। कितने भारतीय वीरों को समापन कर डाला। आश्रयहीन होने पर वह सर्वत्र लोगों को विजय पाने के लिए प्रेरित करे। अन्तिम बार वह बहन के चरण कमलों का स्पर्श करने के लिए कहता है।

(घ) हमारा देश कब और किस प्रकार अनाथ हो गया?
उत्तर :
हमारा देश जब पराधीन था, अत्यायारी अंग्रेज यहाँ के शासक थे, उस समय हमारा देश अनाथ हो गया। अन्यायी सरकार ने भारतीयों पर अनेक जुल्म किये। हमारे देश की सारी संपत्ति लूट कर अपने देश ले गए। देश को वीरान बना डाला। देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नवुयवकों को शूली पर चढ़ा दिए। न जाने कितनी युवतियों के सौभाग्य लुट गये। इस प्रकार देश अनाथ हो गया।

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(ङ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न 1.
अपना शीश कटा जननी की, जय का मार्ग बनाना है।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि का कथन है कि अन्यायी शासकों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक रण क्षेत्र के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। सभी देशभक्त वीर पुरुष अपना मस्तक बलिदान कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। अर्थांत् अपने को न्योछावर कर भारत को स्वाधीन बनाएँगे ।

प्रश्न 2.
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दुःख मिटाना है।
उत्तर :
भाई बहन से कह रहा है कि वह उसके आँसू पोंछ कर उसे निर्द्वन्द्व बना दे। जिससे वह निश्चिन्त होकर रणक्षेत्र में अपनी वीरता से देश को स्वाधीन बना सके। शासकों को परास्त कर ही पराधीनता के दुःखों से देश को हुटकारा दिलाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
उठो बन्धुओं, विजय वथू को वरो तभी निद्रा लेना।
उत्तर :
कवि भारतीय वीर युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे उठें, शक्तिशाली बनकर विजय प्राप्त करें, विजय रूपी दुल्हन का वरण करें। विजय हासिल कर लेने के बाद ही सुख की नींद सोऐं, जब तक विजय नहीं मिलती तब तक आराम से दूर रहें।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर 

(क) ‘रक्षा बन्धन’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवकों को गुलामी की जंजीर तोड़ देने के लिए तथा सहर्ष बलिदान कर देने की प्रेरणा दी है। आजादी की लड़ाई में जाने से पूर्व भाई-बहन से कह रहा है कि उसे समर में जाना है, इसलिए वह उसे राखी बाँध दे आशीर्वाद दे कि वह भारत माता के वरणों पर आत्म-और बलिदान कर दे।

जिस अन्यायी शासकों ने देश को वीरान तथा अनाथ बना दिया उनकी प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वौर नवयुवक विजय पथ पर जा रहे हैं। बहन उसके मस्तक पर हाथं रख दे जिससे उसका मस्तक कभी युके नहीं। उन हत्यारों ने हमारे देश को तहस-नहस कर डाला। आज हमारे पास बहन को उपहार देने के लिए केवल मेरी आँखों के आँसू हैं, जिन्हें वह मणियों के समान बहुमूल्य समझती है। भाई प्रस्थान करने के पूर्व बहन के चरण छूकर उसके पवित्र स्नेह में झूमना चाहता है।

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(ख) इस कविता के माध्यम से आप कैसे कह सकते हैं कि यह स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी? जिन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है, उन्हें लिखिए।
उत्तर :
इस कविता के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कविता स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी। निम्न पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है।

  • यह पोंक ले अभ्रु गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है।
  • उस हत्यारे ने तेरा माथ।

(ग) भाई बहन को समर में जाने के पूर्व क्या-क्या कह रहा है?
उत्तर :
भाई समर में जाने के पूर्व बहन को कह रहा है कि वह उसे आशिष दे, उसके आँसू पोंछ ले। अन्तिम बार राखी बाँधकर प्यार कर ले। मस्तक पर स्नेहपूर्वक अपना हाथ रख दे। अंग्रेज शासकों ने न जाने कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया। कितने भारतीय वीरों को समापन कर डाला। आश्रयहीन होने पर वह सर्वत्र लोगों को विजय पाने के लिए प्रेरित करे। अन्तिम बार वह बहन के चरण कमलों का स्पर्श करने के लिए कहता है।

(घ) हमारा देश कब और किस प्रकार अनाथ हो गया?
उत्तर :
हमारा देश जब पराधीन था, अत्याचारी अंग्रेज यहाँ के शासक थे, उस समय हमारा देश अनाथ हो गया। अन्यायी सरकार ने भारतीयों पर अनेक जुल्म किये। हमारे देश की सारी संपत्ति लूट कर अपने देश ले गए। देश को वीरान बना डाला। देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नवुयवकों को शूली पर चढ़ा दिए। न जाने कितनी युवतियों के सौभाग्य लुट गये। इस प्रकार देश अनाध हो गया।

(ङ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न 1.
अपना शीश कटा जननी की, जय का मार्ग बनाना है।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि का कथन है कि अन्यायी शासकों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक रण क्षेत्र के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। सभी देशभक्त वीर पुरुष अपना मस्तक बलिदान कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। अर्थात् अपने को न्योछावर कर भारत को स्वाधीन बनाएँगे ।

प्रश्न 2.
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दुःख मिटाना है।
उत्तर :
भाई बहन से कह रहा है कि वह उसके आँसू पोंछ कर उसे निर्द्वन्द्ध बना दे। जिससे वह निश्चिन्त होकर रणक्षेत्र में अपनी वीरता से देश को स्वाधीन बना सके। शासकों को परास्त कर ही पराधीनता के दु:खों से देश को छुटकारा दिलाया जा सकता है।

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प्रश्न 3.
उठो बन्धुओं, विजय वधू को वरो तभी निद्रा लेना।
उत्तर :
कवि भारतीय वीर युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे उठें, शक्तिशाली बनकर विजय प्राप्त करें, विजय रूपी दुल्हन का वरण करें । विजय हासिल कर लेने के बाद ही सुख की नींद सोएँ, जब तक विजय नहीं मिलती तब तक आराम से दूर रहें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
‘रक्षा बंधन’ कविता के कवि ने देश के नवयुवकों को क्या शिक्षा दी है?
उत्तर :
खवतंत्रता के पूर्व लिखी गई प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवको को स्वतंत्रता के महत्व को बतलाकर उन्हें मातृभूमि की बलि वेदी पर अपने को समर्पित कर देने के लिए कहा है। घर, परिवार, भाई-बहन की ममता को छोड़कर स्वतंग्रता के युद्ध में जाने के लिए हर नवयुवक तैयार है। पराधीनता की पीड़ा को दूर करना है। भारत माता के वरणों में शीश चढ़ाने की शुभ बेला आ गई है। बहन की या परिवार की ममता इसमें बाधक न बने। प्यार के बंधन को तोड़कर ही इस महान लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। अत्याचारी अंग्रेज शासकों ने फाँसी देने की सारी तैयारी पूरी कर ली है।

पापी अंग्रेजों ने लाखों नारियों की मांगों के सिन्दूर पोछकर उन्हें विधवा बना दिया। अब नव-युवकों के विनाश के लिए वे तत्पर हैं। न जाने देश के कितने नर-नारियों के हैदयों को इन्होंने चकनाचूर कर दिया। इसलिए उन पापियों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वोर नवयुवक अपना बलिदान कर देने के लिए युद्ध भूमि में जाने के लिए उतावले है। लोगों में उत्साह है कि अपने बलिदान से वे निश्चय ही विजय प्राप्त कर भारत माता को पराधीनता के चंगुल से मुक्त कर लेंगे। शीश भले कट जाए पर कभी दुकेंगे नहीं। गर्व के साथ हमेशा मस्तक ऊँचा बना रहे। हत्यारे शासको ने हमारे देश को वीरान बना डाला। सारा देश अनाथ हो गया। लोगों के दर्द को सुनने वाला कोई न रहा।

नवयुवकों के बलिदान से आहत बहनो को भी कवि ने प्रेरित किया है। उन्हें दीन, भिखासि बन कर हर गली, कूचे में घूमघूम कर लोगों को जगाना है। नवयुवकों को आराम करना छोड़कर विजय के लिए आगे बढ़ना है। नवयुवक भाइयों के पास अपनी बहनों को उपहार देने के लिए केवल उनकी आँखों में आसू हैं। ये आँसू साधारण मूल्यहीन नहीं हैं।

बल्कि ये अमूल्य मगि रत के समान हैं। नवयुवक युद्ध के लिए प्रस्थान करने की शुभ घड़ी में बहन के चरणों को चूम लेना चाहता है। बहन के पवित्र स्वर्गीय स्नेह के शाश्वत् नशे में झूमते हुए वह स्वतंग्रता संग्राम में बलिदान करने को जाना चाहता है। इस प्रकार कवि ने देश के नवयुवकों को बतलाया है कि देश सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है और देश पर मर मिटना ही सबसे बड़ा बलिदान है।

भाषा-बोध

(क) इन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।

  • भीषण-युद्ध में भीषण अस्त्रों का प्रयोग होता है ।
  • क्रूर – क्रूर शासको ने देश पर जुल्म उहाया।
  • विमल – विमल जल पीने लायक होता है।
  • आँचल – वह आँचल फेला कर दया की भीख माँग रही थी।

(ख) शब्दों के अर्थ में अन्तर बतलाइए ।

  • स्नेह (छोटो से) – बच्चों से स्नेह।
  • प्यार – प्रेम-लोगों से प्रेम।
  • अमूल्य – बेहद कीमती – कोहीनूर हीरा अमूल्य है।
  • बहुमूल्य – कीमती – यह कपड़ा बहुमूल्य है।
  • ऊंचा – उन्नत, ऊपर उठा हुआ।
  • ऊँचाई – उठान, श्रेष्ठता।
  • डाल – शाखा, तलवार का फल ।
  • ढाल – आधात रोकने का एक साधन।

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(ग) ‘अ’ और ‘उप’ उपसर्गों से शब्द बनाइए-

  • अ – अमूल्य, अकर्म, अचल, अजर, अधर्म।
  • उप – उपहार, उपकार, उपवन, उपकरण।

(ख) इन, ईय, हीन प्रत्ययों के योग से शब्द बनाइए।

  • इन – भिखारिन, मालकिन, नातिन, पडोसिन।
  • ईय – स्वर्गीय, जातीय, भारतीय, राष्ट्रीय।
  • हीन- आश्रयहीन, जलहीन, शक्तिहीन।

WBBSE Class 7 Hindi रक्षा बंधन Summary

जीवनन परिचया

हरिकृष्ण प्रेमी का जन्म सन् 1909 ई० में ग्वालियर के गुना नामक स्थान में हुआ था। प्रेमी ने स्वाधीनता संग्राम में भी योगदान दिया। इन्हें कविता तथा नाटक के क्षेत्र में विशेष सफलता मिली। इनकी भाषा सहज, संयत तथा बोधगम्य है। गाँधी जी का इनपर विशेष प्रभाव था। इनकी प्रमुख रचनाएँ शिव साधना, रक्षा बंधन, प्रतिशोध, अनंत के पथ पर आदिहैं।

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पद – 1

बहन बाँध दे रक्षा बंधन मुझे समर में जाना है,
अब के घन गर्जन में रण का भीषण छिड़ा तराना है ।
दे आशिष, जननी के चरणों में यह शीश चढ़ाना है,
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है ।।

अन्तिम बार बाँध ले राखी,
कर ले प्यार अखिरी बार ।
मुझको, जालिम ने फाँसी की,
डोरी कर रखी तैयार ।।

शब्दार्थ :

  • समर – युद्ध तराना – गाना, विशेष प्रकार के गीत
  • घन गर्जन – मेघ की गर्जना
  • भीषण-भयंकर
  • रण-युद्ध जालिम- दुष्ट, शत्रु, चालबाज
  • आशिष – आशीर्वाद
  • शीश – मस्तक

संदर्भ – प्रस्तुत अंश रक्षा बंधन कविता से उद्धृत है। इसके कवि हरिकृष्ण प्रेमी हैं।

प्रसंग – इस अंश में कवि ने स्वाधीनता संग्राम में जाने के लिए प्रस्तुत नवयुवक के मन की आत्म बलिदान की भावना का मार्मिक चित्रण किया है।

व्याख्या – स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई इस कविता में एक नवयुवक भाई अपनी बहन से कह रहा है कि बहन मेरी कलाई में तुम रक्षा सूत्र बाँध दो। बादलों की गर्जना में युद्ध का भयंकर गीत छिड़ा हुआ है। भारत माता के चरणों में हमें अपना मस्तक चढ़ा देना है । अत: मुझे आशीर्वाद दो और आँसू पोंछ लो। मुझे भारतवर्ष की पराधीनता की पीड़ा को दूर करना है। बलिदान के लिए भाई कह रहा है कि अन्तिम बार मुझे राखी बाँधकर प्यार कर लो, क्योंकि अन्यायी दुश्मनों ने मुझे शूली पर चढ़ाने के लिए फाँसी की रस्सी तैयार कर रखी है।

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पद – 2

जिसने लाखों ललनाओं के पोंछ दिए सिर के सिंदूर,
गड़ा रहा कितनी कुटियाओं के दीपों पर आँखें कूर ।
वज्र गिराकर कितने कोमल हृद्य कर दिए चकनाचूर,
उस पापी की प्यास बुझाने, बहन जा रहे लाखों शूर ।।

अपना शीश कटा जननी की,
जय का मार्ग बनाना है।
बहन बाँध दे रक्षा बन्धन,
मुझे समर में जाना है ।।

शब्दार्थ :

  • ललनाओं – युवतियों
  • कुटिया – झोपड़ी
  • क्रूर – निष्ठुर
  • वज्र – इन्द्र का अस्त्र
  • चकनाचूर – नष्ट, समाप्त कर देना
  • शूर – वीर, योद्धा।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने अंग्रेज शासकों के अत्याचारों और उनकी क्रूरता का चित्रण किया है। भाई अपनी बहन से कह रहा है कि अंग्रेज शासकों ने अनगिनत युवतियों के सिर का सिंदूर पोंछ दिया। उनके पति की हत्या कर उन्हें विधवा बना दिया। अनेक झोपड़ियों के दीपकों पर अपनी निष्ठुर आँखें गड़ा रखा है।

वज्रपात कर तथा भयंकर अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग कर न जाने कितने नव युवकों को खत्म कर दिया। पापी, अन्यायी शासकों की प्यास शान्त करने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक प्रस्थान कर रहे हैं। सभी वीर पुरुष अपना मस्तक अर्पण कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। इसलिए बहन, मुझे राखी बाँध दो, मैं रण-क्षेत्र में जाने के लिए तैयार हूँ।.

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पद – 3

बहन शीश पर मेरे रख दे, स्नेह सहित अपना शुभ हाथ,
कटने के पहले न झुके यह ऊँचा रहे गर्व के साथ ।
उस हत्यारे ने कर डाला अपना सारा देश अनाथ,
आश्रयहीन हुई यदि तो भी ऊँचा होगा मेरा माथ ।।

दीन भिखारिन बनकर तू भी,
गली-गली फेरी देना ।
उठो बंधुओं, विजयवधू को,
वरो, तभी निद्रा लेना ।।

शब्दार्थ :

  • स्नेह – प्रेम आश्रयहीन – बेसहारा
  • गर्व – स्वाभिमान
  • अनाथ – बेसहारा
  • वरो – चुनो फेरी देना – भ्रमण करना, घूमना
  • दीन – गरीब
  • विजयवधू – विजयरूपी दुल्हन

व्याख्या – भाई अपनी बहन से कह रहा है कि बहन तुम अपना शुभ हाथ प्रेमपूर्वक हमारे मस्तक पर रख दो। हमारा यह मस्तक कटने के पूर्व जालिमों के सामने न झुके। स्वाभिमान के साथ मस्तक सदा ऊँचा रहे। हत्यारें शासकों ने सारे देश को बेसहारा बना दिया। सभी अनाथ हो गए। हमारे बलिदान से यदि तुम बिना सहारे के हो गई तो भी तुम्हारा मस्तक सदा ऊँचा बना रहेगा। लाचार भिखारिन बनकर हर गली-मार्ग में जाकर, घूम-घूमकर लोगों को प्रेरणा देना कि बंधुओं उठो तैयार हो जाओ, जयरूपी दुल्हन का वरण करने के बाद नींद लेना, आराम करने की बात करना। विजय के बाद ही खुशियाँ मनाना।

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पद – 4

आज सभी देते हैं अपनी बहनों को अमूल्य उपहार,
मेरे पास रखा ही क्या है, आँखों के आँसू दो चार ।
ला दो चार गिरा दूँ, आगे अपना आँचल विमल पसार,
तू कहती है – “ये मणियाँ हैं, इन पर न्योछावर संसार ।।

बहन बढ़ा दे चरण कमल मैं,
अंतिम बार उन्हें लूँ चूम ।
तेरे शुचि स्वर्गीय स्नेह के,
अमर नशे में लूँ अब झूम ।।

शब्दार्थ :

  • अमूल्य-अनमोल, बहुमूल्य
  • उपहार – भेंट पसारो – फैलाओ
  • मणियाँ – रत्न न्योछावर – अर्पण
  • शुचि – पवित्र, शुद्ध
  • स्नेह-प्रेम
  • अमर – जो कभी न मरे
  • विमल – निर्मल, पवित्र
  • स्वर्गीय – स्वर्ग संबंधी जिसमें दिव्य पवित्रता है।
  • नशे – मद, गर्व, अभिमान

व्याख्या – भाई बहन से कहा रहा है कि इस रक्षा बंधन के पावन पर्व पर सभी भाई अपनी बहनों को मूल्यवान उपहार देते हैं। मेरे पास उपहार देने के लिए कुछ भी नहीं है, केवल मेरी आँखों में आँसू की बूँदे हैं। तुम अपना आँचल फैलाओ मैं उपहार के रूप में दो चार आँसुओं की बूँदें उस पर गिरा दूँ। तुम तो कहती हो कि ये आँसू रत्न के समान अमूल्य हैं, इन आँसुओं पर संसार समर्पित है। बहन तुम अपने कमल के समान कोमल चरणों को बढ़ा दो, मैं अन्तिम बार उन्हें चूम लूँ। तुम्हारे पवित्र, दिव्य प्रेम के शाश्वत् स्वभिमान में मैं मस्त हो जाऊँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – जागरण गीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
‘जागरण गीत’ कविता के कवि हैं :
(क) माखन लाल चतुर्वेदी
(ख) माहेश्वरी प्रसाद द्विवेदी
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) हरिकृष्ण प्रेमी
उत्तर :
(ग) सोहनलाल द्विवेदी

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 2.
कवि इस कविता के द्वारा कैसे लोगों को जगाने की बात कर रहा है ।
(क) वास्तविक जीने वाले को
(ख) कल्पनात्मक जीवन जीने वालों को
(ग) कर्मशील जीवन वाले को
(घ) निराश जीवन वाले को
उत्तर :
(ख) कल्पनात्मक जीवन जीने वाले को।

प्रश्न 3.
‘जागरण गीत’ कविता का कवि लोगों को कहाँ नहीं जाने देगा ?
(क) उदयाचल
(ख) अस्ताचल
(ग) विंध्याचल
(घ) अरूणांचल
उत्तर :
(ख) अस्ताचल

प्रश्न 4.
कवि इस कविता द्वारा कैसे लोगों को जगाने की बात कर रहा है ?
(क) वास्तविक जीवन वाले
(ख) कल्पनात्मक जीवन वाले
(ग) कर्मशील जीवन वाले
(घ) निराश जीवन वाले
उत्तर :
(ख) कल्पनात्मक जीवन वाले

प्रश्न 5.
कवि ने किसको तोड़ने की बात की है ?
(क) श्रृंखलाएँ संकीर्णताएँ
(ख) संबंध
(ग) आवरण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) श्रृंखलाएँ संकीर्णताएँ

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 6.
‘सिंधु’ शब्द का शाष्दिक अर्थ क्या है ?
(क) सागर
(ख) नदी
(ग) लहर
(घ) झरना
उत्तर :
(क) सागर

प्रश्न 7.
कवि शूल को क्या बनाने आ रहे हैं ?
(क) फूल
(ख) धूल
(ग) भूल
(घ) मूल
उत्तर :
(क) फूल

प्रश्न 8.
कविता में शूल तथा फूल किसका प्रतीक हैं ?
(क) दुख:सुख
(ख) हँसी-खुशी
(ग) न्याय-अन्याय
(घ) चल-अचल
उत्तर :
(क) दुख:सुख

प्रश्न 9.
‘शूल’ शब्द का अर्थ क्या है ?
(क) नदी
(ख) कवि
(ग) काँटा
(घ) फूल
उत्तर :
(ग) कॉटा

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 10.
कवि के अनुसार किसके उठने से धरती और आकाश का सिर उठेगा ?
(क) जीवन
(ख) लोगों
(ग) कल्पना
(घ) धीरज
उत्तर :
(ख) लोगों

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘उदयाचल’ और ‘अस्ताचल’ शब्दों का क्या अर्थ है?
उत्तर :
उदयाचल का अर्थ है- पूर्व दिशा में स्थित वह काल्पनिक पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है। यह जीवन में प्रगति का प्रतीक है। अस्ताचल का अर्थ है- पश्चिम का वह कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना माना जाता है।

प्रश्न 2.
‘विपथ’ होने का आशय क्या है?
उत्तर :
यह उनके लिए कहा गया है जो अज्ञान और अकर्मण्यता के कारण सच्चे रास्ते को छोड़कर पथभ्रष्ट बन जाते हैं। अपने लक्ष्य पथ से भटक जाते हैं।

प्रश्न 3.
‘कल्पना में उड़ने’ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
कल्पना में उड़ने से तात्पर्य है- कल्पना के हवाई महल बनाना, मन में ऊँची-ऊँची कल्पनाएँ करना, मन में करोड़ों की संपत्ति जोड़ना। ऐसे लोग कर्मठ बनकर कार्य सिद्ध करने की चेष्टा नहीं करते। केवल बड़ी-बड़ी बातें किया करते रहते हैं।

प्रश्न 4.
मँझधार में कवि किसको और कैसे पार लगाएगा?
उत्तर :
जो लोग मँझधार को देखकर घबड़ा जाते हैं उन्हें कवि पार लगाना चाहता है। उन्हें कवि सहारा दे रहा है कि पतवार लेकर घबड़ाएँ नहीं। कवि उन्हें तट पर थकने नहीं देगा, उन्हें पार लगाने की चेष्टा करेगा।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 5.
सोहनलाल द्विवेदी के जन्म का समय लिखें।
उत्तर :
सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905, में हुआ था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) प्रस्तुत कविता में कवि किसे जगा रहा है तथा उन्हें क्या हिदायतें दे रहा है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि उन लोगों को जगा रहा है जो वास्तविक स्थितियों से मुंह मोड़कर कल्पनाओं की दुनिया में जीते हैं। कवि उन्हें हिदायत दे रहा है कि अब कल्पना करना छोड़कर वास्तविक जीवन जीने का प्रयास करें। अपने को पतन की ओर नहीं, प्रगति की ओर ले जाएँ। प्रयत्ल करने से वे पीछे न हटें। आकाश छोड़कर धरती पर अपनी निगाह रखें। कर्मठ, कर्त्तव्य परायण बनें। अज्ञान की नींद छोड़कर सजग सावधान बनें।

(ख) मानव मन की किन संकीर्णताओं का वर्णन पाठ में हुआ है? उनका वर्णन करें।
उत्तर :
कवि ने मानव मन की अनेक संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है। आज लोगों के मन में जाति, धर्म, संप्रदाय, अमीर, गरीब को लेकर संकीर्णताएँ बनी हुई हैं। लोगों में हीन ग्रंथि बनी हुई है। उनके मन को नाना प्रकार के सामाजिक बंधन, रूढ़ियाँ, अंध विश्वास जकड़ रखे हैं। जब तक मन में साहस शक्ति का संचार नहीं होगा, आत्मबल नहीं बढ़ेगा, तब तक वह प्रगति मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता।

(ग) कवि लोगों को क्या करने और क्या न करने का संदेश दे रहा है?
उत्तर :
कवि लोगों को यह संदेश दे रहा है कि वे सजग, सावधान होकर कर्त्तव्य पथ पर आगे बढ़ें। कल्यना लोक में विचरना बंद कर वास्तविक जगत् में रहे। मन में कवेल ऊँची-ऊँची कल्पनाएँ न करें। वास्तविक जीवन के बारे में सोचें। धरती के प्राणी बनें। कठिन कार्य के निर्वाह में सच्चा सुख मिलता है। प्रतिकूल स्थिति तथा रास्ते की कठिनाइयों को देखकर वे विचलित न हों। मन की संकीर्ण रूऩियों के बंधन को तोड़कर उदारवादी तथा मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाएँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

(घ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 1.
प्रगति के पथ पर बढ़ाने आ रहा हूँ।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में कवि कह रहा है कि वह लोगों को प्रगति की ओर ले जाने के लिए प्रस्तुत है। कवि लोगों के मन में शक्ति, साहस का संचार कर रहा है और मेरित कर रहा है कि वे आलस्य, अकर्मण्यता छोड़कर कर्त्तव्य परायण बने, कल्पना करना छोड़कर वास्तविक धरातल पर जोएँ। पथभष्टन बनें, सच्चे रास्ते का परित्याग न करें, मन में कभी हीन भावना न लाएँ, अपने को कमजोर न समझें । तभी निश्चित् रूप से वे जीवन में उन्नति करेंगे और प्रगति की और बढ़ेंगे।

(ङ) शूल तुम जिसको समझते थे अभी तक
फूल मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
उत्तर :
कवि लोगों को आश्वस्त कर रहा है कि वे जिसे काँटा समझ रहे हैं उसे वे फूल बनाने के लिए प्रस्तुत हैं। वे लोगों के दु:ख को दूर कर उसे सुख के रूप में बदलना चाहते है। इसलिए कवि ने स्सष्ट किया है कि बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करना ही सुख नहीं है। इस झूठे सुख में नहीं पड़ना चाहिए। साहस के साथ कठिन से कठिन कर्त्त्य का निर्वांह करना ही सच्चा सुख है। सच्चा सुख उत्तरदायित्व के निर्वाह में ही मिलता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न : प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने भारतवासियों को सजग, कर्मशील बनने की प्रेरणा दी है। अब इस बात की जरूरत है कि हमारे देशवासी आलस्य, निद्रा, अकर्मण्यता को छोड़कर कर्मठ बने, कवि उन्हें जगाने का प्रयल कर रहा है। अब वे पीछे न जाकर आगे बढ़े, सूर्योंय की भॉंति दीप्यमान बनकर चतुर्दिक रोशनी फैलाएँ।

कल्पना के महल बनाना छोड़ कर वास्तविक संसार में विचरण करें। आज तक वे कर्महीन एवं निश्चेष्ट रहकर प्रयत्न और परिश्रम से मुँह मोड़ते रहे। पर अब वे आकाश में उड़ने की कल्पना त्याग कर वास्तविक जीवन में रहें, धरती पर रहकर घरती के वास्तविक जीवन की बात करें। बड़े-बड़े सपने बनाना, बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करना कभी सुखद नहीं हो सकती, कल्पना के मोदक से कभी तन-मुन को संतुष्टि नहीं हो सकती।

उत्तरदायित्व का निर्वाह करने में, गुरुतर भार वहन करने से कभी दुःख नहीं होता, इससे तो मन और आत्मा को संतुष्टि मिलती है। जिसे लोग अभी तक काँटा अर्थात्दुःख समझते रहे, कवि उस कांटे को फूल बनाकर उनके मार्ग को प्रशस्त करना चाहता है। यदि मनुष्य प्रयत्न और परिश्रम का सदुपयोग करे तो निश्चय ही शूल को फूल अर्थात् पीड़ा को आंनद में बदल सकता है। व्यक्ति में इतना साहस और हिम्मत हो जिससे वह भयंकर लहरों वाली धारा को देखकर विचलित न हो, घबड़ाए नहीं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

वीर पुरुष सामने की कठिनाई को देखकर घबड़ाता नहीं, पतवार लेकर घबड़ाए नहीं, बल्कि तेज धारा की ओर पतवार घुमाकर आगे बढ़े। कवि चाहता है कि वह तट पर थके नहीं, बल्कि पार उतरने के लिए तत्पर होकर सफल हो। आज इस बात की आवश्यकता है कि व्यक्ति सारे बंधनों को तोड़ कर मन में युगों से मौजूद क्षुद्रता व तुच्छ भावना का परित्याग कर उदारता दिखलाए। सभी के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाए, उसे आज बूँद नहीं समुद्र बनने की जरूरत है।

अतः व्यक्ति हीन प्रवृत्ति को छोड़कर तेजस्वी बने। मन, कर्म और वचन से दिव्य कर्मों का अनुष्ठान करे। व्यक्ति के आगे बढ़ने, उन्नति के शिखर पर पहुँचने पर सारी पृथ्वी सारा आकाश उठकर उसका स्वागत करेगा। उसके गतिशील होने पर नवीन गति झनझ्षना उठेगी। कवि चाहता है कि व्यक्ति सन्मार्ग से कभी विचलित न हो। सही दिशा से कभी न भटके, व्यक्ति को प्रग्गति और विकास के चरम शिखर पर पहुंचना है। इस प्रकार कवि ने हमें साहसी, कर्त्तव्यपरायण, आशावादी, प्रगतिशील बनने की प्रेरणा दी है।

(क) वाक्य प्रयोग –

  • प्रगति – उत्थान- कर्मठ बनकर ही मनुष्य जीवन में प्रगति कर सकता है।
  • अरुण – लाल सूर्य – प्रभात होते ही बाल अरुण उदय हो जाता है।
  • शूल – काँटा (दु:ख) – मनुष्य प्रयत्न कर शूल को फूल बना सकता है।
  • शृंखला – बंधन – हमें सभी शृंखलाओं को तोड़ देना चाहिए।
  • पतवार – पार उतारने का साधन – हाथ में पतवार लेकर नाविक थकता नहीं।

(ख) विलोम शब्द –

  • आकाश – पाताल
  • कल्पना – यथार्थ
  • दु:ख-सुख
  • गुरु – लघु
  • फूल – शूल

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

(ग) उपसर्ग लगे शब्द –

  • प्र – प्रगति
  • वि-विपथ
  • अ – अतल.
  • सम् – संकीर्णताएँ

पर्यायवाची शब्द –

  • नभ – आकाश, गगन, आसमान।
  • धरती – धरा, पृथ्वी, भू।
  • फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम।
  • सिन्धु – सागर, समुद्र, रत्नाकर।

WBBSE Class 7 Hindi जागरण गीत Summary

जीवनल रिचय

सुकवि श्री सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905 ई० में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में बिंदकी गाँव में एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मालवीय जी के संपर्क से इनके हदय में राष्ट्रीयता की भावना जागी। काव्य रचना के साथ-साथ इन्होंने स्वाधीनता आन्दोलन में भी भाग लिया। इनकी कविता में गाँधीवादी विचारधारा दिखाई पड़ती है।

सन् 1988 ई० में इनका देहावसान हो गया। इनकी प्रमुख रचनाएँ – भैरवी, पूजा गीत, सेवाग्राम, प्रभाती, जय भारत, जय, कुणाल, वासवदता, वासंती आदि हैं। इन्होंने बालोपयोगी कविताएँ भी लिखी हैं। इनकी भाषा सीधी-सादी, सरल तथा बोधगम्य है। इनके काव्य में राष्ट्रीय जागरण, भारत की गरिमा, संस्कृति, ग्राम सुधार, समान सुधार की भावना है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 1

अब न गहरी नींद में तुम सो सकोगे,
गीत गाकर मैं जगाने आ रहा हूँ ।
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूँगा,
अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • अतल – अथाह, बहुत गहरा
  • अरुण – लाल

उदयाचल – पूर्व दिशा में स्थित वह पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है।
आस्ताचल – पश्चिम का कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना मानाजाता है, पश्चिमाचल पर्वत।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘जागरण गीत’ कविता से उद्धृत हैं। इसके कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी हैं।

प्रसंग – इस कविता में कवि ने लोगों को जगाने का प्रयास किया है। कवि लोगों में साहस, कर्म तथा आशावादी भावना का विकास करना चाहता है।

व्याख्या – कवि भारतवासियों को संबोधित करते हुए उन्हें प्रेरणा दे रहा है कि अब वे आलस्य तथा अकर्मण्यता की नींद को त्याग कर कर्मशील बनें। कवि उन्हें जगा कर कर्त्तव्य मार्ग पर लाना चाहता है। अब उन्हें अतल में अस्ताचल की ओर नहीं जाने देगा। वह तो अब जहाँ से बाल रवि उदित होते हैं उसे सजाने के लिए प्रस्तुत है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 2

कल्पना में आज तक उड़ते रहे तुम,
साधना से सिहरकर मुड़ते रहे तुम ।
अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूँगा,
आज धरती पर बसाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ :

  • कल्पना – भावना, अनुमान
  • साधना – किसी कार्य को सिद्ध करना
  • धरती-पृथ्वी
  • सिहर कर – डरकर

व्याख्या – कवि लोगों को कर्त्तव्यशील तथा प्रबुद्ध बनने के लिए कह रहा है। आज तक तो लोग कल्पना की दुनिया में हवाई महल बनाते रहे, सदा भावनाओं में बहते रहे। कार्य तथा साधना से डर कर पीछे हटते रहे, पर अब कवि उन्हें कोरी कल्पना नहीं करने देगा। उन्हें आकाश में उड़ने नहीं देगा। उन्हें पृथ्वी पर बसाने के लिए वह प्रयत्नशील है। अर्थात् कल्पना से हटाकर वास्तविकता की दुनिया में लाने की चेष्टा कर रहा है।

पद – 3

सुख नहीं यह, नींद में सपने सँजोना,
दुख नहीं यह, शीश पर गुरु भार ढोना ।
शूल तुम जिसको समझते थे अभी तक,
फूल में उसको बनाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • शूल – काँटा, कविता में शूल दु:ख का तथा फूल सुख का प्रतीत है।
  • सपने सजाना – बड़ी-बड़ी कल्पना करना।
  • गुरु भार – बड़ा उत्तरदायित्व्व।
  • शीश – मस्तक

व्याख्या – कवि लोगों को सावधान कर रहा है कि बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करने से सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। बड़े कर्त्तव्य का पालन करने, उत्तरदायित्व का निर्वाह करने से दु;ख नहीं होता। जिसे तुम अभी तक काँटा अर्थात् दु:ख समझते रहे, उसे मैं फूल अर्थात् सुख बनाने के लिए प्रयत्नशील हूँ।

पद – 4

देखकर मँझधार को घबरा न जाना,
हाथ ले पतवार को घबरा न जाना।
मैं किनारे पर तुम्हें थकने न दूँगा,
पार मैं तुमको लगाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • मंझधार – नदी के बीच की धारा,
  • किनारे – तद
  • पतवार – पार उतारने का साधन।

व्याख्या – कवि लोगों को उत्साहित करने के लिए कह रहा है कि नदी के बीच की धारा को देखकर घबराना नहीं चाहिए। हाथ में पतवार लेकर धैर्य नहीं खोना चाहिए। कवि तट पर उन्हें थकने नहीं देगा। वह लोगों को पार लगाने के लिए प्रस्तुत है। तात्पर्य यह है कि जीवन पथ पर कठिनाइयों को देखकर व्यक्ति को कभी घबड़ाना नहीं चाहिए। कवि उन्हें साहस प्रदान कर सफल करना चाहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 5

तोड़ दो मन में कसी सब श्रृंखलाएँ,
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिन्दु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूँगा,
सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ :

  • श्रृंखलाएँ- बंधन, जंजीर, कड़ियाँ।
  • संकीर्णता- क्रुद्रता, ओछापन, तंगदिली।

व्याख्या : कवि लोगों को उदार महान बनने की प्रेरणा दे रहा है। लोगों के मन में जकड़ी हुई जाति पाँति ऊँच-नीच छुआधूत, धर्म-संप्रदाय आदि की रूढ़ियों अंधविशासों के बंधन तथा क्नुद्रता, ओछापन को तोड़कर सागर की भाँति विशाल बनने की प्रेरणा दी है। कवि कह रहे हैं कि मैं तुम्हें बूँद की क्षुद्र-सीमित दायरे में नहीं रहने दूँगा, बल्कि सागर के विशाल कलेवर के समान विशाल एवं उदार बनाने के लिए तत्पर हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 2 इनसे सीखो to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – इनसे सीखो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
फूलों से हमें क्या सीखना चाहिए ?
(क) गाना
(ख) पढ़ना
(ग) हँसना
(घ) खिलना
उत्तर :
(ग) हँसना।

प्रश्न 2.
दीपक हमें क्या सिखाते हैं ?
(क) जलना
(ख) बुझना
(ग) अंधेरा हरना
(घ) अंधेरा करना
उत्तर :
(ग) अंधेरा हरना।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 3.
पृथ्वी सें हमें क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?
(क) सच्ची सेवा करनां
(ख) झगड़ा करना
(ग) कष्ट सहना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सच्ची सेवा करना।

प्रश्न 4.
ज़लधारा से हमें क्या सीखना चाहिए ?
(क) जीवन पथ पर चढ़ना
(ख) सच्ची सेवा करना
(ग) जगना और जगाना
(घ) चरित्र निज गढ़ना
उत्तर :
(क) जीवन पथ पर चढ़ना।

प्रश्न 5.
हरदम उँचे पर चढ़ना किससे सीखना चाहिए ?
(क) जल से
(ख) धुएं से
(ग) लता से
(घ) वृक्षों से
उत्तर :
(ख) धुएं से

प्रश्न 6.
अपने गुरु से क्या सीखना चाहिए ?
(क) खेलना
(ख) दीपक जलाना
(ग) पढ़ना
(घ) गले लगाना
उत्तर :
(ग) पढ़ना।

प्रश्न 7.
जगना और जगाना किससे सीखना चहिए ?
(क) सूरज से
(ख) चन्द्रमा से
(ग) तारा से
(घ) लोगों से
उत्तर :
(क) सूरज से

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 8.
चरित्र को आदर्शवान और व्यावहारिक बनाने के लिए कौन प्रेरणा देता है ?
(क) गुरु
(ख) दीपक
(ग) महान और सज्जन व्यक्ति
(घ) पृथ्वी
उत्तर :
(ग) महान और सज्जन व्यक्ति

प्रश्न 9.
श्रीधर पाठक का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) बंगाल
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) उड़ीसा
उत्तर :
(ग) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 10.
श्रीधर पाठक किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(घ) आधुनिक काल।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना श्रीधर पाठक की है ?
(क) भारत-भारती
(ख) भारत गीत
(ग) भारतवर्ष
(घ) भारतमाता
उत्तर :
(ख) भारत गीत।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 12.
लता और वृक्ष से क्या सीखना चाहिए ?
(क) हाथ मिलाना
(ख) सेवा करना
(ग) गले लगाना
(घ) आगे बढ़ना
उत्तर :
(ग) गले लगाना।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें क्या सिखाती हैं ?
उत्तर :
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें शीश झुकाना सिखाती हैं।

प्रश्न 2.
सूरज की किरणें हमें क्या शिक्षा देती हैं ?
उत्तर :
सूरज की किरणें हमें जागने और जगाने की शिक्षा देती हैं।

प्रश्न 3.
अपने गुरु से हमें क्या सीखनी चाहिए ?
उत्तर :
अपने गुरु से हमें उत्तम विद्या सीखना चाहिए।

प्रश्न 4.
हमारा चरित्र कौन गढ़ता है ?
उत्तर :
सत्पुरुषों का आदर्श जीवन हमारा चरित्र गढ़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 5.
श्रीधर पाठक का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक का जन्म 11 जनवरी, 1858 ई० में आगरा (उत्तर प्रदेश) जिला के जौंधरी नामक गाँव में हुआ था ।

प्रश्न 6.
श्रीधर पाठक ने किन भाषाओं में कविता लिखी है ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक ने बजभाषा और खड़ी बोली हिन्दी में कविताएँ लिखी हैं।

प्रश्न 7.
श्रीधर पाठक के पिता का नाम क्या था ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक के पिता का नाम पण्डित लीलाधर पाठक था।

प्रश्न 8.
श्रीधर पाठक की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
उनकी मृत्यु 13 सितम्बर, 1928 ई० में हो गई ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
हमारे जीवन में सत्पुरुष औरगुरु का क्या योगदान है ? स्पष्ट करे ।
उत्तर :
सज्जन पुरुष और गुरु का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। सत्पुरुषों के जीवन से हमें चरित्र गठन की शिक्षा मिलती है। हमारे अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। गुरु से बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है। शिक्षा के बिना व्यक्ति जीवन में उन्नति नहीं कर सकता। जिन्दगी में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा जरूरी है।

प्रश्न 2.
दीपक की क्या विशेषता है ? हमें उससे क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?
उत्तर :
दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर प्रकाश फैला देता है। हमें दीपक से शिक्षा लेनी चाहिए कि हम भी शक्ति भर अपने आस-पास के अंधकार को दूर करें। लोगों के मन के अज्ञान, अशिक्षा को दूर कर उनके मन में ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 3.
‘इनसे सीखो’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘इनसे सीखो’ कविता में कवि ने बच्चों को अपने आस-पास के परिवेश से शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा दी है। कवि ने बच्चों को प्रेरणा दी है कि वे फूलों से हँसना और खुश रहना सीखें। वृक्ष की डालियों से नग्र रहना सीखें। सूर्य की किरणों से प्रात: जागने और दूसरों को जगाना सीखें। लता और वृक्षों से दूसरों से प्रेम करना सीखें। दीपक से आसपास के अंधकार को दूर करने तथा पृथ्वी से प्राणियों की सच्ची सेवा करना सीखें। जल की धारा से सदा जीवन में आगे बढ़ने तथा धुएँ से सदा ऊपर चढ़ना, जीवन में उन्नति करना सीखें। सज्जनों से वरित्र निर्माण तथा गुरु से श्रेष्ठ विद्या ग्रहण करना सीखें। इस प्रकार इन सभी से शिक्षा प्राप्त कर बच्चे जीवन में उन्नति कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
‘इनसे सीखो’ कविता में किस-किस से क्या सीखने की प्रेरणा दी गई है?
उत्तर :
‘इनसे सीखो’ कविता में बच्चों को फूलों से, भौरों से, वृक्ष की डालियों से, सूर्य की किरणों से, लता और वृक्षों से, दीपक और पृथ्वी से, जलधारा से, धुएँ से, सत्पुरुषों से तथा अपने गुरु से सीखने की प्रेरणा दी गई है। फूलों से हँसने की, भौंरों से गुनगुनाने की, वृक्ष की डालियों से मस्तक ड्युकाने, सूर्य की किरणों से जगने और जगाने, लता वृक्षों से गले लगाने, दीपक से अंधकार हरने, पृथ्वी से जीवों की सेवा करने, जल-धारा से जीवन में आगे बढ़ने, धुएँ से ऊँचाई पर चढ़ने, सत्पुरुषों से चरित्र गठन करने तथा गुरु से उत्तम विद्या पढ़ने के लिए सीखने की प्रेरणा दी गई है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

(क) फूलों से नित …………. सीखो शीश झुकाना।
(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘इनसे सीखो’ पाठ से उद्धृत हैं। इसके कवि श्रीधर पाठक हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता की प्रथम संख्या में अर्थ दिया गया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

(ख) जलधारा से सीखो ………… ऊँचे पर ही चढ़ना।
(i) जीवन पथ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
जीवन-पथ का तात्पर्य है जिन्दगी का रास्ता। व्यक्ति को अपने जीवन में सदा अपने पथ पर-अपने लक्य्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिस प्रकार जल की धारा रुकती नहीं निरंतर अपने रास्ते पर बढ़ती रहती है, उसी प्रकार मनुष्य को सदा चलते रहने चाहिए।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता चार की व्याख्या को देखिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘इनसे सीखो’ कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
सुकवि श्रीधर पाठक ने प्रस्तुत कविता में बड़े ही सहज ढंग से हमें विनम्रता, सद्भावना, सेवा, सहानुभूति की भावना तथा जीवन में सच्ची शिक्षा प्राप्त कर प्रगतिशील होने की प्रेरणा दी है। मनुष्य को फूलों जैसा खिला हुआ, हँसता हुआ सदा प्रसन्नचित्त बने रहना चाहिए। भौरे सदा गुनगुनाया करते हैं। मनुष्य को भी उनसे सीख लेकर सदा गुनगुनाते रहना चाहिए। जिस प्रकार वृक्ष की डालियाँ द्रुकी रहती हैं, उसी प्रकार व्यक्ति को भी मस्तक द्युकाकर विन्म बने रहना चाहिए। इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है। सूर्य के उदित होते ही उसकी सुनहली किरणें सभी को जागरण की शिक्षा देती हैं।

उसी प्रकार हमें भी जागृत होने और दूसरों को भी जागरण के लिए उत्साहित करना चाहिए। लताओं और वृक्षों से शिक्षा लेकर हमें दूसरों से प्रेम से मिलना, गले लगना चाहिए। नन्हा सा दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर देता है, हमें भी उससे सीख लेकर चारों ओर प्रकाश फैलाना चाहिए। पृथ्वी समस्त प्राणियों की सेवा करती है, उसी प्रकार हमें भी सभी प्राणियों की सच्ची सेवा लगनपूर्वक पेम से करनी चाहिए।

कवि ने हमें जीवन में निरंतर उन्नति करने और प्रगतिशील बनने की प्रेरणा दी है। जिस प्रकार जल धारा सदा अपने लक्ष्य की ओर प्रवाहित होती रहती है, वैसे ही मनुष्य को भी सदा जीवन पथ पर लक्ष्य की ओर अग्रसर होते रहना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi इनसे सीखो Summary

जीवन-परिचय :

श्रीधर पाठक जी का जन्म उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के जौंधरी गाँव में सन् 1859 में हुआ था। बज भाषा तथा खड़ीबोली में इन्होंने स्वदेश प्रेम, समाज सुधार तथा देश प्रेम से संबंधित सरस कविताओं की रचना की है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कश्मीर सुषमा, जगत सच्चाई सार, भारत गीत हैं। इनकी रचना ‘एकांतवासी योगी’ में सीधी-सादी खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है । इसमें जनता की रुचि तथा रूप का निर्वाह हुआ है। सन् 1928 में इनकी मृत्यु हो गई।

पद – 1

फूलों से नित हँसना सीखो
भौरों से नित गाना,
तरु की झुकी डालियों से नित
सीखो शीश झुकना।

शब्दार्थ :

  • नित = प्रतिदिन, हमेशा।
  • तरु = वृक्ष, पेड़।
  • हँसना = खुश होना।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘इनसे सीखो’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बच्चों को यह नसीहत दी है कि फूलों, भौरों तथा वृक्ष की डालियों से सीख लें ।

व्याख्या : कवि ने बच्चों को प्रेरणा दी है कि वे खिले हुए हंसते फूलों से सदा प्रसन्न बने रहना तथा हँसते रहना सीखें। भौौंरों से सदा गुनगुनाना अर्थात् गाते रहना सीखें तथा वृक्ष की झुकी हुई डालियों से सर्वदा मस्तक झुकाना अर्थात् नम्र बने रहना सीखें। कवि चाहता है कि बच्चे हमेशा हँसते हुए, गाते हुए तथा विनम्र बने रहें।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 2
सूरज की किरणों से सीखो
जगना और जगाना,
लता और वृक्षों से सीखो
सबको गले लगाना।

शब्दार्थ :

गले लगाना = भेंटना, आलिंगन करना।

व्याख्या : इस कविता में कवि ने सूर्य की किरणों तथा लता-वृक्षों से सीखने की प्रेरणा दी है।

कवि ने बच्चों को यह प्रेरणा दी है कि वे सूर्य की किरणों से सबेरे जगना तथा जगाना सीखें। रात बीतते ही सूर्य उदय होता है, सूर्य की किरणों के प्रकाश में बच्चों को भी जाग कर दूसरों को जगाना चाहिए। जिस प्रकार लता और वृक्ष आपस में लिपटते-गले लगते है, उसी प्रकार बच्चों को भी उनसे शिक्षा लेकर आपस में प्रेम से एक दूसरे को गले लगाना चाहिए।

पद – 3

दीपक से सीखो जितना
हो सके अंधेरा हरना,
पृथ्वी से सीखो जीवों की
सच्ची सेवा करना।

शब्दार्थ :

  • दीपक = दीया, दीप ।
  • अंधेरा = अंधकार ।
  • जीवों = प्राणियों।

व्याख्या – इस कविता में कवि ने दीपक तथा पृथ्वी से सीखने की प्रेरणा दी है।,

कवि ने बन्चों से कहा है कि वे जितना हो सके दोपक से अंधकार दूर करने की शिक्षा लें। नन्हा-सा दीपक अपने चारों ओर के अंधकार को दूर कर रोशनी कर देता है। वैसे ही बच्चों को भी दीपक से सीख कर अपने आस-पास के अंधेरे को दूर कर देना चाहिए। जिस प्रकार पृथ्वी सभी प्राणियों की सच्ची सेवा करती है, उसी प्रकार बच्चों को भी पृथ्वी के सभी प्राणियों की सच्चाई के साथ सेवा करने की सीख लेनी चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 4

जलधारा से सीखो आगे
जीवन-पथ पर बढ़ना,
और धुएँ से सीखो हरदम
ऊँचे ही पर चढ़ना।

शब्दार्थ :

  • जलधारा = जल का प्रवाह ।
  • जीवन पथ = जीवन रूपी मार्ग ।
  • हरदम = हमेशा।

व्याख्या – इस कविता में कवि ने बच्चों को जल-धारा तथा धुएँ से सीखने की प्रेरणा दी है।

जल का प्रवाह सदा आगे बढ़ता रहता है। उससे सीख लेकर बच्चों को भी सदा अपने जीवन के मार्ग पर अर्थात् अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिस प्रकार आग से निकलने वाला धुआँ सदा ऊपर ही चढ़ता रहता है, उसी प्रकार बच्चों को भी धुएँए से सीख लेकर हमेशा ऊँचाई पर चढ़ते रहना चाहिए अर्थात् सदा उन्नति करते रहना चाहिए।

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पद – 5

सत्पुरुषों के जीवन से सीखो
चरित्र निज गढ़ना,
अपने गुरु से सीखो बच्चों
उत्तम विद्या पढ़ना।

शब्दार्थ :

  • सीख = शिक्षा, परामर्श।
  • गढ़ना = रचना, बनाना।
  • निज = अपना।
  • उत्तम = श्रेष्ठ।
  • सत्पुरुष = सज्जन व्यक्ति।

व्याख्या – प्रस्तुत कविता में कवि ने बच्चों को सज्जन लोगों तथा गुरु से सीखने की प्रेरणा दी है।

कवि ने बच्चों को गह परामर्श दिया है कि वे सज्जन पुरुषों के जीवन से शिक्षालेकर अपने चरित्र का निर्माण करें। अपने गुरु से वे सदा श्रेष्ठ अच्छी विद्या की शिक्षा प्राप्त करें। गुरु से अन्छी विद्या सीख कर ही वे जीवन में उन्नति कर सकते हैं।