WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 7 कठोर कृपा

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 7 Question Answer – कठोर कृपा

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘कठोर कृपा’ कहानी के लेखक कौन हैं ?
(क) मुंशीप्रेमचंद
(ख) काका कलेलकर
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) हजारी प्रसाद द्विवेदी
उत्तर :
(ख) काका कलेलकर।

प्रश्न 2.
अच्छे खानदान में कितने भाई थे ?
(क) एक
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर :
(ग) चार।

प्रश्न 3.
चारों भाई कैसे थे ?
(क) हुनरमंद व पढ़े-लिखे
(ख) बेवकूफ
(ग) काहिल
(घ) चालाक
उत्तर :
(क) हुनरमंद व पढ़े-लिखे।

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प्रश्न 4.
घर के पास बगीचे में किसका पेड़ था ?
(क) आम का
(ख) सहिजन का
(ग) कटहल का
(घ) फुलों का
उत्तर :
(ख) सहिजन का।

प्रश्न 5.
कौन सहिजन खरीद ले जाती थी ?
(क) दुकानदार
(ख) कुंजड़िन
(ग) रिश्तेदार
(घ) मेहमान
उत्तर :
(ख) कुंजड़िन।

प्रश्न 6.
दिवाली के कितने दिनों के बाद रिश्तेदार आया ?
(क) एक दिन
(ख) दो दिन
(ग) चार दिन
(घ) पाँच दिन
उत्तर :
(क) एक दिन।

प्रश्न 7.
कौन मेहमान से खाने का आग्रह करती है ?
(क) बूढ़ी माँ
(ख) दूसरा भाई
(ग) चौथा भाई
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) बूढ़ी माँ।

प्रश्न 8.
कितने बजे कुंजड़िन आई ?
(क) आठ बजे
(ख) पाँच बजे
(ग) छ: बचे
(घ) दस बजे
उत्तर :
(घ) दस बजे।

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प्रश्न 9.
कौन जाग रहा था ?
(क) बूढ़ी मां
(ख) मेहमान
(ग) तीसरा भाई
(घ) कुंजड़िन
उत्तर :
(ख) मेहमान ।

प्रश्न 10.
कौन सहिजन को धरती पर काटकर गिरा देता है ?
(क) मेहमान
(ख) बुजुर्ग
(ग) बूढ़ी माँ
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) मेहमान।

प्रश्न 11.
घर का एक मात्र सहारा क्या था ?
(क) आम का पेड़
(ख) सहिजन का पेड़
(ग) व्यवसाय
(घ) नौकरी
उत्तर :
(ख) सहिजन का पेड़ ।

प्रश्न 12.
किसने बड़े भाई को नौकरी पर रख लिया?
(क) धनी व्यक्ति ने
(ख) मेहमान ने
(ग) साहुकार ने
(घ) ठाकुर ने
उत्तर :
(क) धनी व्यक्ति ने।

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प्रश्न 13.
कितने साल बीतने के बाद चारों की हालत अच्छी हो गई ?
(क) एक साल
(ख) दो साल
(ग) तीन साल
(घ) चार साल
उत्तर :
(क) एक साल।

प्रश्न 14.
‘कठोर कृपा’ किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) कहानी
(ग) नाटक
(घ) उपन्यास
उत्तर :
(ख) कहानी।

प्रश्न 15.
काका कालेलकर का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) सतारा (महाराष्ट्र) में
(ख) नागपुर में
(ग) कोलकाता में
(घ) ग्वालियर में
उत्तर :
(क) सतारा (महाराष्ट्र) में ।

प्रश्न 16.
काका कालेलकर का वास्तविक नाम क्या था ?
(क) दत्तात्रेय बालकृष्ण
(ख) दत्तात्रेय रामकृष्ण
(ग) दत्तात्रेय परमकृष्ण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) दत्तात्रेय बालकृष्ण।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
किस कारण से चारों भाई नौकरी या घंधा नहीं करते थे ?
उत्तर :
पुरानी इज्जत के कारण वे कहीं नौकरी या काम-धंधा नहीं करते थे।

प्रश्न 2.
भोजन बन जाने के बाद भाइयों ने क्या बहाना बनाया ?
उत्तर :
भोजन बन जाने पर तीनों भाइयों ने न खाने का बहाना बना लिया।

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प्रश्न 3.
प्रतिष्ठित खानदान के नौजवान क्यों कष्ट पा रहे थे ?
उत्तर :
प्रतिष्ठित खानदान के ये नौजवान झूठी बनावटी इज्जत के कारण कष्ट पा रहे थे।

प्रश्न 4.
घर के बगीचे में किस चीज का पेड़ था?
उत्तर :
घर के बगीचे में सहिजन का पेड़ था।

प्रश्न 5.
सबेरे बड़े भाई ने क्या देखा ?
उत्तर :
सबेरे बड़े भाई ने देखा मेहमान जा चुका है और बगीचे में सहिजन का पेड़ कटा हुआ है।

प्रश्न 6.
बड़े भाई ने बुढ़िया से क्या कहा ?
उत्तर :
बड़े भाई ने बुढ़िया से कहा-अब गुजारा के लिए कहीं काम-धंधा ढूँढ़ना पड़ेगा।

प्रश्न 7.
बस्ती में चारों भाई क्यों प्रसिद्ध थे ?
उत्तर :
उस बस्ती में चारों भाई अपनी इज्जत और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे।

प्रश्न 8.
किसने पेड़ काटना स्वीकार किया ?
उत्तर :
मेहमान ने पेड़ काटना स्वीकार किया ।

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प्रश्न 9.
चारों भाई ने वास्तविकता जान कर क्या किया ?
उत्तर :
चारों भाई भी वास्तविकता जानकर मेहमान का सम्मान किए।

प्रश्न 10.
किसी शहर में कैसा खानदान रहता था ?
उत्तर :
किसी शहर में एक अच्छा खानदान रहता था।

प्रश्न 11.
किनकी जायदाद और धन-दौलत बरबाद हो चुकी थी?
उत्तर :
शहर के अच्छे खानदान के चारों भाइयों की जायदाद व धन-दौलत बरबाद हो चुकी थी।

प्रश्न 12.
किनके घर में गरीबी दिन-ब-दिन बढ़ रही थी ?
उत्तर :
किसी शहर में रहने वाले चारों भाई पुश्तैनी इज्जत के कारण नौकरी या धंधा नहीं करते थे। इसलिए उनके घर में गरीबी दिन-ब-दिन बढ़ रही थी।

प्रश्न 13.
क्या कारण था कि बीबी बच्चों का सारा जेवर बेचना पड़ा ?
उत्तर :
दिनोंदिन परिवार में गरीबी बढ़ती गई। एक दिन ऐसा भी आया कि घर में कुछ भी न बचा। खाने-पीने की भी परेशानी आ गई। विवश होकर उन्हें बीबी-बच्चों का सारा जेवर बेचना पड़ा।

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प्रश्न 14.
चारों भाई ने मेहमान को विदा करते समय क्या कहा ?
उत्तर :
मेहमान को विदा करते समय कहा- उस सहिजन का पेड़ काटकर आपने हमारे आलस्य और दुर्भाग्य को काट डाला। हमारी किस्मत को ऊँचा उठा दिया। संबंधी हो तो ऐसा ही हो।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न क.
चारों भाई हुनरमंद होने के बावजूद काम-धंधा क्यों नहीं कर पाते थे ?
उत्तर :
वारों भाई हुनरमंद व पढ़े-लिखे थे। वे अपनी झूठी शान और समाज में अपनी झूठी मान-मर्यादा को दिखाना चाहते थे। अतः अपनी पुरानी खानदानी इज्जत के कारण कोई काम-धंधा नहीं करना चाहते थे ।

प्रश्न ख.
परिवार का गुजारा चलाने के लिए वे क्या करते थे?
उत्तर :
इनकें घर के बगीचे में एक सहिजन का पेड़ था। उसमें लंबी-लंबी हरी-हरी फलियाँ लटक रही थीं। शाम के समय एकांत में चारों भाइयों में से कोई एक भाई पेड़ पर चुपके से चढ़ जाता और फलियों को तोड़ कर नीचे गिरा देता। कुछ रात बीते एक कुंजड़िन आती और सहिजन खरीद कर ले जाती। इससे जो थोड़े से पैसे मिल जाते उसी से परिवार का गुजारा चलता था।

प्रश्न ग.
मेहमान क्या ताड़ गया ?
उत्तर :
मेहमान ने घर में दो बार भोजन किया। उसके साथ केवल एक भाई खाने के लिए बैठता था। वह भी सधा हुआ था, इसलिए दुबारा परोसने के पहले ही मना कर देता। यह देखकर मेहमान ताड़ गया कि ये लोग गरीबी के शिकार हो रहे हैं । खाने-पोने की तकलीफ बढ़ रही है। इन्हें अपनी गरीबी तथा अभाव की चिन्ता नहीं है।

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प्रश्न घ.
मेहमान ने पेड़ को क्यों काट डाला ?
उत्तर :
मेहमान बरामदे में सो जाने का ढोंग रचा। बड़ा भाई टोकरी में सहिजन लेकर कुंजड़िन को कम पैसे में दिया। मेहमान सब कुछ देख कर समझ गया कि यह अच्छा प्रतिष्ठित खानदान झूठी और बनावटी इन्जत के कारण खाने-पीने की भी तकलीफ सह रहा है। इस सहिजन के पेड़ से ही अपना गुजारा कर रहा है। वह दूरदर्शी मेहमान उनकी काहिली दूर कर उन्हें कर्मठ बनाने की नीयत से पेड़ को काट डाला।

प्रश्न ङ.
पेड़ काटने का क्या परिणाम हुआ ?
उत्तर :
जीविका के एकमात्र आधार पेड़ के कट जाने से बड़े भाई ने सोचा कि अब आगे गुजारा चलना मुश्किल है। इसलिए हमें अब कहीं न कहीं काम ढूँढना पड़ेगा। बड़े भाई ने धनी व्यक्ति के यहाँ नौकरी पकड़ ली । दूसरे भाई भी कहीं न कहीं काम पर लग गए। एक साल में ही चारों भाइयों की दशा अच्छी हो गई, घर का काम-काज सुचारु ढंग से चलने लगा। अब घर में किसी चीज की कमी न रही। इस प्रकार पेड़ काटने के परिणामस्वरूप उनकी किस्मत ऊँची उठ गई।

प्रश्न च.
“आपने हमारा सहिजन का पेड़ नहीं काटा, हमारी काहिली और बदकिस्मती को काट कर फेंक दिया था।” कहने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
दूसरी दीवाली पर आकर मेहमान ने स्वीकार कर लिया कि सहिजन का पेड़ उसी ने काट कर गिरा दिया था। इस कठोर कर्म के पीछे उसके मन में अच्छी भावना थी। मेहमान का उचित सत्कार कर उसे विदा करते समय भाइयों ने भी कहा कि उन्होंने हमारा सहिजन का पेड़ नहीं काटा बल्कि हमारे आलस्य और दुर्भाग्य को काट कर फेंक दिया। इससे हमलोग झूठी बनावटी इज्जत को छोड़कर परिश्रमी बनकर नौकरी करने लगे। हमारी आर्थिक दशा सुधर गई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘कठोर कृपा’ कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी के माध्यम से लेखक ने श्रम और मेहनत के महत्व को स्पष्ट किया है। एक शहर में एक अच्छा खानदान रहता था। उनमें चार भाई थे। उनकी सारी सम्पत्ति बब्बाद हो चुकी थी। चारों भाई कुशल कर्मठ होते हुए भी पुरानी खानदानी इज्जत के कारण कोई काम धंधा नहीं करते थे। अंत में गरीबी के कारण घर के सारे आभूषण भी बिक गए। खाने-पीने के लाले पड़ने लगे। उनके बगीचे में एक सहिजन का पेड़ ही उनकी जीविका का आधार बना। रात के समय कोई एक भाई सहिजन की फलियों को तोड़ देता था। रात के समय एक कुंजड़िन आती और उन्हें खरीद कर ले जाती। उन थोड़े से पैसों से उनका गुजारा चल रहा था।

दीवाली के बाद एक दिन उनका एक रिश्तेदार आया। उसे उनकी बुरी हालत का अंदाजा लग गया। उसके साथ खाने के लिए केवल एक भाई बैठा। भोजन के बाद मेहमान समझ गया कि ये लोग गरीबी के शिकार हो रहे हैं। रात के समय वह मेहमान बरामदे में सोया नहीं, सोने का ढोंग रचा। रात में कुँजड़िन आई और मेहमान के मौजूद होने का लाभ उठाकर फलियों के दाम और घटा दिये। कुँजड़िन के चले जाने पर चारों भाई सो गए।

दूरदर्शी मेहमान जागता रहा और सोचने लगा कि यह बहुत ही प्रतिष्ठित खानदान है, पर झूठी और बनावटी इज्जत के ख्याल से ये नौजवान लड़के खानेपीने की तकलीफ सह रहे हैं और इस मामूली सहिजन के सहारे अपना गुजर कर रहे हैं। उस बुद्धिमान मेहमान ने उन्हें कर्मठ बनाने का निश्चय किया। बरामदे के एक कोने में पड़ी हुई कुल्हाड़ी उठाकर बगीचे में सहिजन के पेड़ के पास पहुँचा। उसने पेड़ को जड़ से काटकर जमीन पर गिरा दिया। फिर सबेरा होते ही चुपचाप वहाँ से चल दिया।

सबेरा होने पर मेहमान के गायब होने और सहिजन के पेड़ के कटे होने से घर में मातम छा गया। सभी लोग उस मेहमान को अनाप-सनाप कहने लगे और अपना शत्रु बतलाए, क्योंकि उनके परिवार का एकमात्र सहारा वही पेड़ कट गया था। बड़े भाई ने कहा कि अब हमें किसी न किसी प्रकार की नौकरी ही करनी पड़ेगी, सभी को कहीं न कहीं काम ढूँढ़ना पड़ेगा। उस बस्ती में चारों भाइयों की बड़ी इज्जत थी। अपनी ईमानदारी के लिए वे प्रसिद्ध थे। इसलिए सभी का कहीं न कहीं काम लग गया। एक साल में ही घर की स्थिति पटरी पर आ गई। घर का सारा काम-काज ठीक से चलने लगा।

अब वहाँ किसी चीज की कमी न रही। दूसरी दीवाली के समय वही मेहमान फिर आया और स्वीकार किया कि उसी ने उस पेड़ को काटकर गिरा दिया था, लेकिन उस कठोर कर्म के पीछे नेकनीयत थी। कोई खराब इरादा न था। वह उन्हें कर्मठ बनाकर उनकी दशा सुधारना चाहता था। घर के लोग भी उसकी सद्भावना समझ गए । चारों भाइयों ने मेहमान का अभार मानते हुए कहा कि उसने हमारे आलस्य व दुर्भाग्य को काटकर फेंक दिया। भाग्य को बदल दिया। इस प्रकार इस कहानी से स्पष्ट हो जाता है कि परिश्रम से व्यक्ति अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 7 कठोर कृपा

भाषा-बोध :

(क) प्रस्तुत पाठ से पाँच-पाँच संज्ञा, सर्वनाम, एवं विशेषण शब्दों को छाँटकर लिखो।
संज्ञा शब्द – शहर, भाई, बगीचे, सहिजन, पेड़।
सर्वनाम शब्द – उनके, उसे, यह, किसी, उसने।
विशेषण शब्द – अच्छा, पुरानी, लम्बे, हरे, खराब।

(ख) विलोम शब्द –
अच्छा – बुरा ।
शहर – देहात ।
गरीब – अमीर ।
नीचे – ऊपर ।
दोस्त – दुश्मन।

WBBSE Class 6 Hindi कठोर कृपा Summary

जीवन-परिचय :

काका कालेलकर का जन्म सन् 1885 में महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था। वे गाँधीवादी विचारधारा के समाज सेवी तथा लेखक थे। हिन्दी के प्रचार में उन्होंने आजीवन योगदान किया।

कहानी का सारांश – किसी शहर में एक अच्छा खानदान रहता था। उसके चार भाई थे। उनकी संपत्ति नष्ट हो चुकी थी। चारों भाई कुशल तथा पढ़े-लिखे थे। पुरानी इज्जत के कारण वे कहीं नौकरी या काम-धंधा नहीं करते थे। गरीबी बढ़ती गई जिससे घर के सारे गहने भी छिपकर कम दामों में बेच डाले। घर में कुछ न बचा और खाने-पीने की समस्या आ गई। उनके घर के पास बगीचे में एक सहिजन का पेड़ था। अब वही पेड़ उनकी जीविका का आधार बन गया। शाम को सूनसान हो जाने पर एक भाई पेड़ पर चढ़ कर फलियाँ तोड़ कर नीचे गिरा देता। कुछ रात के बीत जाने पर एक कुंजड़िन आकर सहिजन खरीद ले जाती और जो पैसे देती उसी से परिवार का गुजर होता था।

दीवाली के बाद एक दिन उनका कोई रिश्तेदार आया। उसे उन लोगों की बुरी दशा का ज्ञान न था। भोजन बन जाने पर तीनों भाइयों ने न खाने का बहाना बना लिया। चौथा भाई मेहमान के साथ खाने बैठा। बूढ़ी माँ मेहमान से खाने का आग्रह करती थी। साथ में बैठा हुआ छोटा भाई हाथ हिलाकर परेसने से मना कर देता था। दो बार भोजन करने के बाद मेहमान को उनकी गरीबी का एहसास हो गया। वह सोचने लगा कि भुखमरी के बावजूद इन्हें काम-धंधे की चिंता नहीं है। रात दस बजे कुंजड़िन आई। बड़ा भाई ने सहिजन की फलियाँ तोड़ी, कुंजड़िन ने उस दिन उनकी गरज जानकर कम पैसे दिए।

सोने का बहाने बनाने वाला मेहमान सब कुछ देख रहा था। कुंजड़िन के चले जाने पर चारों भाई गहरी नींद में सो गए। पर मेहमान जाग रहा था। उसने सोचा कि प्रतिष्ठित खानदान के ये नौजवान झूठी बनावटी इज्जत के कारण कष्ट पा रहे हैं। इस मामूली सहिजन के भरोसे गुजारा कर रहे हैं। रात में ही मेहमान बरामदे से एक कुल्हाड़ी लेकर पेड़ को जड़ से काटकर धरती पर गिरा दिया और सबेरा होने के पहले ही वहाँ से चल दिया।

सबेेरे बड़े भाई ने देखा मेहमान जा चुका है और बगीचे में सहिजन का पेड़ कटा हुआ है। घर में मातम छा गुया। बुढ़िया ने कहा कि वह मेहमान पहले जन्म का दुश्मन था। परिवार का एकमात्र सहारा समाप्त कर दिया। बड़े भाई ने बुढ़िया से कहा-अब गुजारा के लिए कहीं काम-धंध ढूँढ़ना पड़ेगा। जब तक बस चला हमने पुश्तैनी इज्जत बचाई। उस बस्ती में चारों भाई अपनी इज्जत और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक धनी व्यक्ति ने बड़े भाई को अपने यहाँ नौकरी में रख लिया। दूसरे भाई भी कहीं न कहीं काम पर लग गए।

एक साल बीतते ही चारों की हालत अच्छी हो गई। खाने-पीने की आजादी हो गई । दीवाली पर वही मेहमान फिर उनके यहाँ आया। उसने पेड़ काटना स्वीकार किया। उस कठोर कर्म के पीछे उसके दिल में नेकनीयत थी। खराब इरादा न था। चारों भाई भी वास्तविकता जानकर मेहमान का सम्मान किए। मेहमान को विदा करते समय कहा- उस सहिजन का पेड़ काटकर आपने हमारे आलस्य और दुर्भाग्य को काट डाला। हमारी किस्मत को ऊँचा उठा दिया। संबंधी हो तो ऐसा ही हो।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 7 कठोर कृपा

शब्दार्थ :

  • जायदाद = संपत्ति ।
  • लाले पड़ना = अभाव होना ।
  • हुनरमंद = कारीगर।
  • गरज = प्रयोजन, लाँचारी।
  • शरीक = शामिल।
  • आहट = आवाज।
  • बुजुर्ग = वृद्ध ।
  • रतिष्ठित = इज्जतवाला।
  • पुश्तैनी = परंपरागत।
  • काहिली = आलस्य।
  • मातम = शोक, दुखद स्थिति।
  • कद्रदां = कद्र करनेवाला।
  • नासपिटा = बरबाद करनेवाला।
  • फाकाकशी = उपवास।
  • सन्नाटा = निर्जनता, चुप्पी ।
  • कबूल = स्वीकार ।
  • बदाकिस्मती = दुर्भाग्य।
  • किस्मत = भाग्य।
  • मुश्किल = कठिन।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 अकेली

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Chapter 6 अकेली to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 Question Answer – अकेली

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
सोमा बुआ है –
(क) जवान
(ख) बुढ़िया
(ग) बच्ची
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) बुढ़िया।

प्रश्न 2.
पति सोमा बुआ को तजकर क्या हो गए ?
(क) तीरथवासी
(ख) जंगलवासी
(ग) शहरवासी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) शहरवासी।

प्रश्न 3.
सोमा बुआ के जवान बेटे का नाम क्या था?
(क) किशोरीलाल
(ख) पंसारीलाल
(ग) हरखू
(घ) हरीलाल
उत्तर :
(ग) हरखू।

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प्रश्न 4.
सोमा बुआ कितने रुपये खर्च कर के लाल-हरी चूड़ियों के बंद पहने ?
(क) एक रुपया
(ख) दो रुपया
(ग) चार रुपया
(घ) पाँच रुपया
उत्तर :
(क) एक रुपया।

प्रश्न 5.
छोटा सा बक्स के अंदर डिबिया में कितने रुपये थे ?
(क) चार रुपये
(ख) पाँच रुपये
(ग) सात रुपये
(घ) आट रुपये
उत्तर :
(ग) सात रुपये

प्रश्न 6.
सोमा बुआ कितने मास (महीना) के लिए घर आती है ?
(क) दो मास
(ख) एक मास
(ग) तीन मास
(घ) चार मास
उत्तर :
(ख) एक मास।

प्रश्न 7.
सोमा बुआ किसे बेटे के समान समझती थी ?
(क) किशोरीलाल को
(ख) सन्यासी को
(ग) लेखक को
(घ) पड़ोसी को
उत्तर :
(क) किशोरीलाल को।

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प्रश्न 8.
लिस्ट में किसका नाम था ?
(क) ननद का
(ख) भाभी का
(ग) सोमा बुआ का
(घ) सन्यासी का
उत्तर :
(ग) सोमा बुआ का।

प्रश्न 9.
सन्यासी बार-बार क्या देते रहे ?
(क) ताकीद
(ख) फल
(ग) प्रसाद
(घ) ज्राण
उत्तर :
(क) ताकीद।

प्रश्न 10.
कौन बुलावा की प्रतीक्षा करने लगी ?
(क) संन्यासी
(ख) राधा भाभी
(ग) सोमा बुआ
(घ) ननद
उत्तर :
(ग) सोमा बुआ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 अकेली

प्रश्न 11.
कितने वर्ष का मुहूर्त है ?
(क) तीन वर्ष
(ख) चार वर्ष
(ग) पाँच वर्ष
(घ) सात वर्ष
उत्तर :
(ग) पाँच वर्ष।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
बुआ का नाम क्या है ?
उत्तर :
बुआ का नाम सोमा है।

प्रश्न 2.
बुआ के पति छोड़ कर क्यों चले गए थे ?
उत्तर :
पुत्र की मृत्यु के सदमे के कारण बुआ के पति छोड़ कर चले गए थे।

प्रश्न 3.
साल में कितने महीने बुआ का पति घर में रहता है ?
उत्तर :
साल में केवल एक महीने बुआ का पति घर में रहता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 अकेली

प्रश्न 4.
सोमा बुआ का स्वभाव कैसा है ?
उत्तर :
सोमा बुआ का स्वाभाव मेल-मिलाप का था।

प्रश्न 5.
सोमा बुआ ने साड़ी में क्या लगाकर सुखा दिया ?
उत्तर :
सोमा बुआ ने साड़ी में मांड़ लगाकर सुखा दिया।

प्रश्न 6.
सोमा बुआ कैसी नारी है ?
उत्तर :
सोमा बुआ अकेली परित्यक्ता नारी है।

प्रश्न 7.
किसकी मौत से सोमा बुआ को गहरा आघात लगा ?
उत्तर :
इकलौते बेटे हरखू की मौत हो जाने से सोमा बुआ को गहरा आधात लगा।

प्रश्न 8.
सोमा बुआ राधा भाभी को क्या बतलाती है ?
उत्तर :
सोमा बुआ राधा भाभी को बतलाती है कि कल किशोरी लाल के बेटे के मुंडन पर वह बिना बुलाए चली गई थी।

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प्रश्न 9.
सोमा बुआ राधा भाभी से किस विषय पर परामर्श करती है ?
उत्तर :
सोमा बुआ राधा भाभी से विवाह में जाने और उपहार ले जाने के विषय में परामर्श करती हैं।

प्रश्न 10.
सोमा बुआ राधा भाभी को क्या देती है ?
उत्तर :
सोमा बुआ पाँच रुपये तथा मृत पुत्र की एकमात्र निशानी अँगूठी लाकर राधा भाभी को देती है।

प्रश्न 11.
राधा भाभी ने सोमा बुआ को क्या लाकर दी ?
उत्तर :
राधा भाभी ने सोमा बुआ को चाँदी की एक सिंदूरदानी, एक साड़ी और एक ब्लाउज का कपड़ा लाकर दी।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
सोमा बुआ के पति का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर –
सोमा बुआ के पति का स्वभाव स्नेहहीन था। वे एकांत प्रवृत्ति के हो गए थे। लोगों से मिलना-जुलना उन्हें पसंद न था। सोमा बुआ पर भी अंकुश लगाया करते थे। पुत्र की मौत के सदमे ने उनके स्वभाव को नीरस बना दिया था।

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प्रश्न 2.
बुआ के पति का व्यवहार बुआ के प्रति कैसा था ?
उत्तर –
बुआ के पति का व्यवहार बुआ के प्रति बिल्कुल स्नेहहीन था। उनके अंकुश से बुआ के दैनिक जीवन की गतिविधि मंद हो जाती थी। उनका घूमना-फिरना, मिलना-जुलना बंद हो जाता था। बुआ के हर कार्य कलाप पर वे नजर रखते तथा अंकुश लगाते। उनके निष्ठुर व्यवहार से बुआ को मानसिक उत्पीड़न सहना पड़ता था।

प्रश्न 3.
बुआ का पास-पड़ोस के साथ कैसा व्यवहार था ?
उत्तर :
बुआ का पास-पड़ोस के साथ अत्यंत आत्मीयतापूर्ण व्यवहार था। उन्हें अपनी जिन्दगी पास-पड़ोस वालों के भरोसे ही काटनी पड़ती थी। किसी के घर मुण्डन हो, छठी हो, जनेऊ हो, शादी हो या गमी बुआ पहुँच जाती और अपने ही घर की तरह पूरी जिम्मेदारी और शक्ति से हर काम किया करती थी।

प्रश्न 4.
बुआ के पति बिना बुलावे के किसी के पास जाने से क्यों मना करते थे ?
उत्तर :
पुत्र की मौत के सदमे के कारण बुआ के पति के स्वभाव में नीरसता आ गई थी। बुआ पर वे अंकुश लगाया करते थे । वे सामाजिक मर्यादा को समझते थे कि बुलावे के बिना कहीं जाना आत्म सम्मान के खिलाफ है। इसलिए वे बुलावे के बिना जाने से मना करते थे। नाते-रिश्तेवालों से भी वे संबंध नहीं रखते थे।

प्रश्न 5.
बुआ देवर जी के ससुराल वालों से क्या उम्मीद लगा बैठी थी ?
उत्तर :
बुआ सोचने लगी कि देवर जी को मरे पच्चीस वर्ष हो गए, उसके बाद से तो कोई संबंध ही नहीं रखा। देवर जी के बाद उन लोगों से कोई संबंध नहीं रहा, फिर हैं तो समधी ! इसलिए वे अवश्य बुलाँएगे। समधी को छोड़ नहीं सकते। वे प्रसन्र थी कि इस विवाह में सम्मिललत होने से पुराना संबंध ताजा हो जाएगा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 अकेली

प्रश्न 6.
‘अरे वाह बुआ ! तुम्हारा नाम कैसे नहीं हो सकता। तुम तो समधिन ठहरी। संबंध में न रहे कोई रिश्ता थोड़े ही टूट जाता है।” इस पंक्ति की संसदर्भ व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत अवतरण मन्नू भंडारी की कहानी अकेली से उदृत है। देवर जी के समधी के यहाँ से बुलावा आने के विषय में बुआ के मन में संदेह था। उनके संदेह को दूर करने के लिए घर की बड़ी बहू ने यह उक्ति कही। बड़ी बहू ने निश्चय के स्वर में कहा कि तुम्हारा नाम बुलावे की सूची में अवश्य होगा, क्योंक तुम तो समधिन हो। रिश्ता कभी दूट नहीं सकता। संबंध के रिश्ते अटूट होते हैं। इसलिए अपने मन से संदेह को तुम दूर कर दो। विवाह के उत्सव में कोई समधिन को नहीं भूल सकता।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘अकेली’ कहानी में सोमा बुआ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
लेखक ने ‘अकेली’ कहानी में सोमा बुआ के मानसिक संसार तथा सामाजिक व्यवहार का हृ्यस्पर्शी चित्रण किया है। सोमा बुआ एक परित्यक्ता, अकेली नारी थी। इकलौते पुत्र की मृत्युं से उसे अत्यधिक मानसिक संताप हुआ। पुत्र की मृत्यु से दुःखी होकर उसके पति भी संन्यासी होकर हरिद्वार जा बैठे। संन्यासी जी साल मेंकवेल एक मास के लिए आते थे। इस मास में सोमा बुआ को मानसिक उत्तीड़न सहना पड़ता था। उनका दैनिक स्वभाव व व्यवहार बदल जाता था। सोमा बुआ अपना जीवन आस-पास की दुनिया में लोक-हित कार्यों में व्यस्त रखती थीं।

एक दिन किशोरीलाल के बेटे के मुंडन में सारी बिरादरी का न्यौता था। किशोरी लाल बुआ को बहुत सम्मान देते थे। उन्हें अम्मा समझते थे, इसलिए बुलावे के बिना भी बुआ वहाँ जाकर उनके सारे काम सम्पन्न कर दिए। यदि बुआ न गई होती तो वहाँ उनकी भद्द मच जाती। बुआआ का वहाँ जाना संन्यासी जी को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। इसके लिए संन्यासी जी ने बुआ को डाँटा, फटकारा भी। एक सप्ताह के बाद बुआ ने सुना कि उनके देवर के ससुराल वालों के किसी लड़की का संबंध भगीरथ के यहाँ तय हुआ है।

बुआ ने सोचा कि उन्हें निमंत्रण आएगा, इसलिए प्रसन्न होकर उन्होंने संन्यासी जी को बताया पर संन्यासी जी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मात्र इतना संकेत किया कि बिना बुलावे वहाँ नहीं जाना है। पर बुआ को निमंत्रण आने का संदेह बना हुआ था। घर की बड़ी बहू तथा विधवा ननद ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनका नाम अतिथि सूची में है और उनका बुलावा अवश्य आएगा। बुआ अपने को समध्रिन समझती थी, इसलिए वहाँ जाने की तैयारी करने लगी। अभाव की स्थिति में भी बुआ अपने स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा करना चाहती थी।

इसलिए उसने अपने पास से कुछ रुपए और मृत पुत्र की एकमात्र निशानी अँगूठी देकर राधा को उचित उपहार लाने के लिए कहा। राधा ने चाँदी की एक सिन्दूरदानी, एक साड़ी और ब्लाउज का एक कपड़ा लाकर दिया। बुआ प्रसन्न होकर अपनी धोती रंग ली और चूड़ियाँ भी पहन ली। सारी तैयारी कर लेने पर वह बुलावे की प्रतीक्षा करने लगी। बुआ के मन में आशा बनी हुई थी कि निश्चित ही उसे बुलावा आएगा। छत पर खड़ी वह प्रतीक्षा करती रह गई । सात बज जाने के बाद राधा ने उसे वेताया कि सात बज गए और खाना बनाने का समय हो गया। निराश बुआ का दिल टूट गया। उनकी सारी आशाओं पर पानी फिर गया।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 अकेली

भाषा-बोध :

(i) वाक्य प्रयोग :-

परिवर्तन – परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
संबंध – संबंध के रिश्तों का निर्वाह करना चाहिए।
समस्या – आजकल बेरोजगारी बड़ी समस्या है।
गरूर – धन पाकर गरूर नहीं करना चाहिए।
प्रतीक्षा – सोमा बुआ बुलाने की प्रतीक्षा देर तक करती रही।

(ii) विलोम शब्द लिखें :-

बुढ़िया – बच्ची
वियोग – संयोग
उपस्थित – अनुपस्थित
सजीव – निर्जीव
दुःख – सुख

WBBSE Class 6 Hindi अकेली Summary

जीवन-परिचय :

मन्नू भंडारी नयी कहानी आन्दोलन की प्रतिनिधि कहानीकार हैं। इनके साहित्य में नारी जीवन से जुड़ी सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक व सांस्कृतिक समस्याओं का मार्मिक चित्रण मिलता है। वे घटनाओं की अपेक्षा आधुनिक संसार का कुशल चित्रण करती हैं। इनके प्रमुख कहानी संग्रह – ‘मैं हार गई’, ‘तीन निगाहों की एक तस्वीर’, ‘यही सच हैं आदि हैं ।

कहानी का सारांश :- सोमा बुआ अकेली परित्यक्ता नारी है। इकलौते बेटे हरखू की मौत हो जाने से सोमा बुआ को गहरा आधात लगा। उनके पति पुत्र-वियोग के संदर्भ में पत्नी और घर-बार छोड़कर संन्यासी होकर हरिद्वार जा बैठे। वे वर्ष में केवल एक मास के लिए घर आते हैं। उनके स्नेहीनन व्यवहार से सोमा बुआ के मन में उनके प्रति कोई आकर्षण नहीं था। उनकी दैनिक गतिविधियों पर संन्यासी जी अंकुश लगा देते हैं। उनका अड़ोस-पड़ोस के लोगों से मिलने-जुलने पर नियंत्रण हो जाता है। इस एक मास में सोमा बुआ को मानसिक उत्पीड़न सहना पड़ता है।

उनका दैनिक स्वभाव बदल जाता है। इन दिनों संन्यासी जी आए हुए हैं। सोमा बुआ राधा भाभी को बतलाती है कि कल किशोरी लाल के बेटे के मुंडन पर वह बिना बुलाए चली गई थी। इसी कारण संन्यासी जी से कहासुनी हो गई। सोमा बुआ किशोरी लाल के घर जाकर गुलाब जामुन बनाकर उनकी इज्जत रख ली, क्योंकि पहले बहुत कम गुलाब जामुन बनी थी। बुआ किशोरी लाल को अपने बेटे के समान समझती थी। इसलिए बिना बुलाए चली गई।

एक सप्ताह बाद सोमा बुआ ने संन्यासी जी से कहा कि देवर जी के ससुराल वालों की किसी लड़की का संबंध भगीरथ जी के यहाँ हुआ है। देवर के नाते वे समधी लगते हैं। वे आपको भी अवश्य बुलाएँगे किन्तु संन्यासी जी पर इसका कोई प्रभाव न पड़ा। उन्होंने किसी प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त न की। सोमा बुआ सोचती है कि देवर जी के मरे पच्चीस वर्ष हो गए, उसके बाद कोई संबंध न रहा। इसलिए बुलावा आएगा या नहीं। घर की बड़ी बहू ने कहा कि तुम तो समधिन हो, अत: अवश्य बुलावा आएगा । विधवा ननद ने कहा कि लिस्ट में सोमा बुआ का नाम है।

सोमा बुआ राधा भाभी से विवाह में जाने और उपहार ले जाने के विषय में परामर्श करती हैं। बुआ पाँच रुपये तथा मृत पुत्र की एकमात्र निशानी अंगूठी लाकर राधा भाभी को देती है जिससे वह जो ठीक समझे खरीद ले। ताकि शोभा और सम्मान बना रहे। संन्यासी जो बार-बार ताकीद देते रहे कि बिना बुलावा के वह कदापि न जाए। शाम को राधा भाभी ने सोमा बुआ को चाँदी की एक सिंदूरदानी, एक साड़ी और एक ब्लाउज का कपड़ा लाकर दी। देखकर बुआ प्रसत्र हो उठी। बुआ ने अपनी सफेद साड़ी पीले रंग में रंग कर मांड़ देकर सुखा डाला। चूड़ियाँ भी पहन ली।

एक नई थाली में साड़ी, सिंदूरदानी, एक नारियल, थोड़े से बताशे सजा लिए। अब बुआ बुलावा की प्रतीक्षा करने लगी। फिर राधा भाभी से बोली-पाँच बजे का मुहूर्त है, चार बजे तक जाऊँगी। छत पर खड़ी होकर बुआ बुलावा की प्रतीक्षा करती रही। सात बज जाने पर राधा भाभी ने कहा-बुआ क्या कर रही हो। भोजन नहीं बनाओगी। सोमा बुआ नीचे जाकर सारी सामगी एक संदूक में रख दी। बुझे दिल से अंगीठी जलाने लगी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 अकेली

शब्दार्थ :

  • सदमा – आघात।
  • परित्यक्तता – त्यागी हुई।
  • व्यवधान – बाधा ।
  • तजकर – छोड़कर।
  • अंकुश – नियंत्रण।
  • एकाकीपन – अकेला।
  • संबल – सहारा।
  • परिवर्तन – बदलाव।
  • प्रतीक्षा – इंतजार।
  • उपेक्षा – तिरस्कार ।
  • कुंठित – मंद।
  • अवयव – अंग।
  • संयत – नियंत्रित।
  • भद्दउड़ना – अपमान होना।
  • आक्रोश – गुस्सा।
  • हंगामा – शोरगुल।
  • एकरसता – नीरसता।
  • अनमना – खिन्न।
  • स्वच्छंद – स्वतंत्र।
  • अव्यक्त – गुप्त ।
  • धारा – प्रवाह ।
  • मुहूर्त – शुभ समय।
  • आसरा – उम्मीद।
  • दावत – भोज।
  • गरूर – घमंड।
  • छायामूर्ति – परछाई।
  • पुलकित – रोमांचित, प्रसन्नचित्त।
  • पंगत – पंक्ति।
  • कलदार – यंत्र से बना (रुपया)।
  • रईस – संपन्न।
  • मेजपोश – मेज पर बिछाने वाला कपड़ा।
  • टाँग अड़ाना – किसी के काम में दखल देना।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 Question Answer – क्या निराश हुआ जाए

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
एक बड़े आदमी ने किसे सुखी कहा है ?
(क) जो कुछ करता है
(ख) जो कुछ नहीं करता
(ग) जो सब कुछ करता है
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) जो कुछ नहीं करता।

प्रश्न 2.
कौन सा चित्र सब समय आदर्शों द्वारा चालित नहीं होता ?
(क) व्यक्ति चित्र
(ख) पशु चित्र
(ग) प्रतिष्ठित चित्र
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) व्यक्ति चित्र।

प्रश्न 3.
आजकल हर व्यक्ति किस दृष्टि से देखा जा रहा है ?
(क) प्रेम की दृष्टि से
(ख) शक की दृष्टि से
(ग) घृणा की दृष्टि से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) शक की दृष्टि से।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

प्रश्न 4.
भारतवर्ष किसे सदा धर्म के रूप में देखता आ रहा है ?
(क) कानून को
(ख) रंगून को
(ग) मानव को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कानून को।

प्रश्न 5.
किसमें रस लेना बुरी बात है ?
(क) अच्छाई में
(ख) बुराई में
(ग) फरेब में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) बुराई में ।

प्रश्न 6.
लोग दूसरों में क्या खोजते हैं?
(क) गुण
(ख) दोष
(ग) गौरव
(घ) कष्ट
उत्तर :
(ख) दोष।

प्रश्न 7.
नियम कानून किसके लिए बनते हैं ?
(क) प्रष्टाचारी के लिए
(ख) ईमानदारो के लिए
(ग) सब के लिए
(घ) चोरो के लिए.
उत्तर :
(ग) सब के लिए।

प्रश्न 8.
आज किसको लोग मजाक समझने लगे ?
(क) आदर्शों को
(ख) शिक्षा को
(ग) स्वास्थ्य को
(घ) ईमानदारी को
उत्तर :
(क) आदर्शों को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

प्रश्न 9.
लेखक गलती से रेलवे स्टेशन पर कितने का नोट दे दिया ?
(क) 20 की जगह 100 के नोट
(ख) 10 की जगह 100 के नोट
(ग) 50 की जगह 100 के नोट
(घ) 20 की जगह 10 के नोट
उत्तर :
(ख) 10 की जगह 100 के नोट।

प्रश्न 10.
कौन चकित रह गए ?
(क) लेखक
(ख) टिकट बाबू
(ग) पत्नी
(घ) बच्चे
उत्तर :
(क) लेखक।

प्रश्न 11.
कौन साइकिल लेकर तुरंत चल दिया ?
(क) लेखक
(ख) बस कंडक्टर
(ग) टिकट बाबू
(घ) ड्राइवर
उत्तर :
(ख) बस कंडक्टर।

प्रश्न 11.
ड्राइवर को किसने बचाया ?
(क) टिकट बाबू
(ख) बस कंडक्टर
(ग) यात्री
(घ) लेखक
उत्तर :
(घ) लेखक।

प्रश्न 12.
हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) आरा
(ख) बलिया
(ग) छपरा
(ग) गाजीपुर
उत्तर :
(ख) बलिया ।

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प्रश्न 13.
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म कब हुआ था?
(क) सन् 1906 ई.
(ख) सन् 1907 ई.
(ग) सन् 1908 ई.
(घ) सन् 1909 ई.
उत्तर :
(ख) सन् 1907 ई.।

प्रश्न 14.
द्विवेदी जी निम्न में से किस विश्वविद्यालय में हिन्दी-विभागाध्यक्ष के पद पर नहीं रहे?
(क) शांति-निकेतन
(ख) काशी हिन्दू विश्चविद्यालय
(ग) दिल्ली विश्धविद्यालय
(घ) पंजाब विश्चविद्यालय
उत्तर :
(ग) दिल्ली विश्वविद्यालय।

प्रश्न 15.
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के पिता का नाम क्या था ?
(क) पंडित अनमोल द्विवेदी
(ख) पंडित श्यामसुंदर द्विवेदी
(ग) पंडित मोहन प्रसदा द्विवेदी
(घ) पंडित श्रीधर द्विवेदी
उत्तर :
(क) पंडित अनमोल द्विवेदी।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कौन अपने गौरव को त्याग नहीं सकता ?
उत्तर :
भारत कभी अपने गौरव को त्याग नहीं सकता।

प्रश्न 2.
आज कौन लोग कष्ट पा रहे हैं ?
उत्तर :
आज ईमानदार तथा सच्चे इंसान कष्ट पा रहे हैं।

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प्रश्न 3.
आज कौन लोग फल-फूल रहे हैं ?
उत्तर :
बेईमान, धोखेबाज लोग फल-फूल रहे हैं।

प्रश्न 4.
सच्चाई कैसे लोग के हिस्से पड़ी है ?
उत्तर :
सच्चाई केवल भीरू और लाचार लोगों के हिस्से पड़ी है।

प्रश्न 5.
किसके प्रति लोगों का विश्वास हिलने लगा ?
उत्तर :
जीवन के महान मूल्यों के प्रति लोगों का विश्वास हिलने लगा है।

प्रश्न 6.
भारत में किन वस्तुओं के संग्रह को महत्व नहीं दिया जाता ?
उत्तर :
भारत में कभी भी भौतिक वस्तुओं के संग्रह को महत्त्व नहीं दिया।

प्रश्न 7.
आज लोग किस संग्रह को अच्छा नहीं समझते ?
उत्तर :
भ्रष्टाचार तथा गलत तरीके से धन संग्रह को अच्छा नहीं समझता।

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प्रश्न 8.
लेखक के बच्चे क्यों चिल्ला रहे थे ?
उत्तर :
लेखक के बच्चे पानी के लिए चिल्ला रहे थे।

प्रश्न 9.
कौन ड्राइवर को मारने के लिए उतारू हो गये ?
उत्तर :
कुछ यात्री बस ड्राइवर को मारने के लिए उतारू हो गए।

प्रश्न 10.
लेखक के अनुसार आज के समाज में कौन-कौन सी बुराइयाँ दिखाई देती हैं ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार आज के समाज में ठगी, डकेती, चोरी, तस्करी, भ्रष्टाचार की बुराइयाँ दिखाई देती हैं। हर आदमी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

प्रश्न 11.
क्या कारण है कि आज हर आदमी में दोष अधिक दिखाई दे रहे हैं ?
उत्तर :
आज जो आदमी जो कुछ भी करता है उसमें उतने अधिक दोष दिखाए जाते हैं। उसके सारे गुण भुला दिए जाते हैं, दोषों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाने लगा है। यही कारण है कि आज हर आदमी में दोष अधिक दिखाई देता है।

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प्रश्न 12.
लेखक दोषों का पर्दाफाश करते समय किस बात से बचने के लिए कहता है ?
उत्तर :
लेखक का विचार है – दोषों का पर्दाफाश करते समय किसी के आचरण के गलत पक्ष को उद्घाटित करके उसमें रस नहीं लेना चाहिए। दोष उद्घाटन को एकमात्र कर्त्तव्य नहीं मान लेना चाहिए। बुराई में रस लेना उचित नहीं है।

प्रश्न 13.
कुछ यात्री बस ड्राइवर को मारने के लिए क्यों उतारू हो गए ?
उत्तर :
यात्रियों ने सोचा कि कंडक्टर डाकुंओं को बुलाने चला गया है। इस भय के कारण कुछ यत्रियों ने ड्राइवर को मारने के लिए उतारू हो गए।

प्रश्न 14.
लेखक क्या देखकर चकित हो जाता है ?
उत्तर :
टिकट बाबू लेखक को पहचान कर विनम्रता के साथ उनके हाथ में नब्बे रुपये रख दिए और अपनी गलती भी स्वीकार की। अपनी ईमानदारी के कारण टिकट बालू के चेहरे पर संतोष और गरिमा झलकने लगी। इसे देखकर लेखक चकित हो गया।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
हमारे महापुरुषों के सपनों का भारत का क्या स्वरूप था ?
उत्तर :
हमारे महापुरुषों ने एक महान भारत का सपना देखा था। तिलक और गाँधी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जहाँ कोई दु:खी न हो, किसी प्रकार समाज में भेद-भाव न हो। सत्य-अहिंसा लोगों का व्रत हो, ईमानदारी, सच्चाई का ही माहौल हो। रवीन्द्रनाथ ठाकुर, मालवीय जैसे महान व्यक्तियों ने संस्कृतिमय भारत की कल्पना की थी। विभिन्न संस्कृतियों को आत्मसात् एक महान विश्वव्यापी संस्कृति की कल्पना की थी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

प्रश्न 2.
भ्रष्टाचार आदि के विरुद्ध आक्रोश प्रकट करना किस बात को प्रमाणित करता है ?
उत्तर :
भष्टाचार आदि के विरुद्ध आक्रोश से यह प्रमाणित होता है कि आज भी लोग गलत तरीके से धन या मान संग्रह करने वालों को गलत समझते हैं और ऐसे तत्त्वों की समाज में प्रतिष्ठा कम करना चाहते हैं।

प्रश्न 3.
जीवन के महान मूल्यों के प्रति आज हमारी आस्था क्यों हिलने लगी है ?
उत्तर :
इन दिनों ऐसा वातावरण बन गया है कि ईमानदारी से मेहनत करके जीविका चलाने वाले निरीह और भोलेभाले मजदूर पिस रहे हैं और झूठ तथा फरेब का रोजगार करने वाले फल-फूल रहे हैं। ईमानदारी को मूख्खता समझा जा रहा है। केवल भीरु और लाचार लोग ही सच्चाई पर चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में आज जीवन के महान् मूल्यों के प्रति हमारी आस्था हिलने लगी है।

प्रश्न 4.
जो आज ऊपर-ऊपर दिखाई दे रहा है वह कहाँ तक मनुष्य निर्मित नीतियों की त्रुटियों की देन है ?
उत्तर :
जो आज ऊपर-ऊपर दिखाई दे रहा है वह मनुष्य निर्मित नीतियों की त्रुटियों की देन हैं। मनुष्य अपनी बुद्धि से नई परिस्थितियों का सामना करने के लिए नये सामाजिक विधि-निषेधों को बनाता है। ठीक साबित न होने पर उन्हें बदलता है। एक ही नियम-कानून कभी-कभी सब के लिए सुखकर नहीं होते। कानून कभी आदर्शों से टकराते है। कभी ऊपरी सतह पर उनका मंथन होता है पर इससे निराश नहीं होना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

प्रश्न 5.
रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने भगवान से क्या प्रार्थना की और क्यों ?
उत्तर :
कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भगवान से प्रार्थना की कि संसार में केवल नुकसान ही उठाना पड़े, धोखा ही खाना पड़े तो ऐसे अवसरों पर प्रभु उन्हें ऐसी शक्ति दे कि वे उनपर संदेह न करें।

प्रश्न 6.
“वर्तमान परिस्थितियों में भी हताश हो जाना ठीक नहीं है।” इस कथन की पुष्टि में लेखक ने क्या-क्या उदाहरण दिया हैं ?
उत्तर :
आज विषम से विषम परिस्थितियों में भी मनुष्य को निराश नहीं होना चाहिए। इस कथन की पुष्टि लेखक ने टिकट बाबू की ईमानदारी तथा बस कंडक्टर की कर्त्त्य्यपरायणता तथा मानवता का उदाहरण देकर स्पष्ट किया है।

प्रश्न 7.
“महान भारतवर्ष को पाने की संभावना बनी हुई है और बनी रहेगी।” लेखक के इस कथन से हमें क्या संदेश मिलता है ?
उत्तर :
लेखक के इस कथन से यह संदेश मिलता है कि अभी आशा की रोश्नी बुझी नहीं है। मन को निराश होने की जरूरत नहीं है। सच्चाई, ईमानदारी जैसे गुण अभी लुप्त नहीं हुए हैं। गलत परिणाम तक पहुँचने वाली मनुष्य निर्मित विधियों को बदल कर मानव हित में उपयोगी विधियों को अमल में लाना होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
लेखक के साथ घटी दोनों घटनाओं का उल्लेख कीजिए तथा बताइए कि इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
जीवन में सैकड़ों घटनाएँ घटती हैं जिन्हें उजागर करने से लोक चित्त में अच्छाई के प्रति अच्छी भावना जगती है। एक बार रेलवे स्टेशन पर टिकट लेते हुए गलती से लेखक ने दस के बजाय सौ रुपये के नोट दिये। फिर जल्दी-जल्दी जाकर गाड़ी में बैठ गए। थोड़ी देर में टिकट बाबू सेकण्ड क्लास के डिब्बे में हर आदमी का चेहरा पहचानता हुआ आया। उसने लेखक को पहचान कर बड़ी विन्रता के साथ उनके हाथ में नब्बे रुपये रख दिए। अपनी भूल स्वीकार की। उनके चेहरे पर विचिर्र संतोष की गरिमा थी। लेखक चकित रह गए।

दूसरी घटना इस प्रकार है कि एक बार लेखक अपनी पत्ली और तीन बच्चों के साथ बस में यूत्रा कर रहे थे। बस में कुछ खराबी आ गई इसलिए गंतव्य से आठ किलोमीटर पहले ही एक सुनसान स्थान में रुक गई। रात के दस बजे थे, सभी यात्री घबरा गए। कंडक्टर उतर गया और एक साइकिल लेकर चलता बना। लोगों को संदेह हो गया कि उन्हें धोखा दिया जा रहा है। डकैती की आशंका से लोग भयभीत हो गए। लोगों ने ड्राइवर को पकड़ कर उसे मारने-पीटने का निश्चय किया। ड्राइवर ने कातर दृष्टि से लेखक की ओर देखने लगा और बोला कि हमलोग बस का कोई उपाय कर रहे हैं, इसलिए हमें बचाइए। लेखक ने यात्रियों को समझाया कि मारना ठीक नहीं है। लोगों ने ड्राइवर को मारा तो नहीं पर, एक जगह घेर कर रखा।

यात्रियों ने सोचा कि यदि दुर्घटना होती है तो ड्राइवर को समाप्त कर देना उचित होगा। इसी समय बस कंडक्टर अड्डे से एक नयी बस लेकर आग गया। सभी यात्रियों को उसमें बैठने के लिए कहा। लेखक के पास एक लोटा पानी और थोड़ा सा दूध लेकर आया और बोला पंडितजी बच्चों का रोना मुझसे देखा नहीं गया, वहीं से थोड़ा दूध और पानी लेता आया हूँ। सबने उसे धन्यवाद दिया। ड्राइवर से माफी मांगी। बारह बजे से पहले ही सब लोग बस अन्डे पर पहुँच गए।

इन कहानियों से यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्यता एकदम समाप्त नहीं हो गई है। लोगों में अब भी दया-माया की भावन बची हुई है। अत: ईमानदारी, सच्चाई, सेवा, परोपकार जैसे सद्गुण अभी लुप्त नहीं हुए हैं। इसलिए व्यक्ति को निराश नहीं होना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

भाषा-बोध :

(क) निम्नलिखित वाक्यों में सर्वनाम छाँटते हुए उनके नाम बताइए।

  1. मेरा मन कभी-कभी बैठ जाता है।
  2. दोष किसमें नहीं होता।
  3. इन दिनों कुछ ऐसा माहौल बना है।
  4. आज भी वह मनुष्य से प्रेम करता है।
  5. रात के कोई दस बजे हैं।

उत्तर :

  1. मेरा – संबंध वाचक सर्वनाम।
  2. किसमें – प्रश्नवाचक सर्वनाम।
  3. कुछ – अनिश्चयवाचक सर्वनाम।
  4. वह – पुरुषवाचक सर्वनाम।
  5. कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम।

(ख) विलोम शब्द लिखें :-

ईमानदार – बेईमान
सुखी – दुःखी
गुण – दोष
निश्चय – अनिश्चय
रोजगार – बेरोजगारी

WBBSE Class 6 Hindi क्या निराश हुआ जाए Summary

जीवन-परिचय :

द्विवेदी जी का जन्म सन् 1907 में बलिया जिला के दूबेछपरा गाँव में हुआ था। 20 वर्षों तक द्विवेदी जी शान्ति निकेतन में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के भी अष्यक्ष रहे। सन् 1971 में इनका देहान्त हो गया। इनकी प्रमुख रचनाएँ – हिन्दी साहित्य की भूमिका, अशोक के फूल, बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचन्द्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा आदि हैं। भारत सरकार ने इन्हे पद्यविभूषण की उपाधि से सम्मानित किया।

सारांश – समाचार पत्रों में चोरी, तस्करी, भ्रष्टाचार आदि की खबरों से लेखक का मन बैठ जाता है। दोषारोपण के कारण लगता है कि देश में कोई ईमानदार रह ही नहीं गया है। लोग दूसरों में दोष ही खोजते हैं, गुणों को भुला दिया जाता है पर हमारे मनीषियों का भारत के प्रति जो सपना है वह समाप्त नहीं हो सकता। विभिन्न संस्कृति का मिलन केन्द्र भारत कभी अपने गौरव को त्याग नहीं सकता।

आज ईमानदार तथा सच्चे इंसान कष्ट पा रहे हैं। बेईमान, धोखेंबाज लोग फल-फूल रहे हैं। सच्चाई केवल भीरू और लाचार लोगों के हिस्से पड़ी है। जीवन के महान मूल्यों के प्रति लोगों का विश्वास हिलने लगा है।

नियम-कानून सब के लिए बनते हैं पर सदा वे नियम सबके लिए सुखकर नहीं होते। भारत में कभी भी भौतिक वस्तुओं के संप्रह को महत्त्व नहीं दिया। लोभ-मोह-कोध आदि स्वाभाविक विचारों के इशारेषर मन तथा बुद्धि को छोड़ देना बुरा आचरण है। उन पर संयम रखने का प्रयत्न करना चाहिए। गरीबों की अवस्था को सुधारने, कृषि, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ को उन्नत और सुचारु बनाने की जिम्मेदारी जिन्हें सौंपी जाती है वे लक्ष्य को भूलकर अपनी सुख-सुविधा पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

आज आदर्शों को लोग मजाक समझने लगे हैं। संयम को पुरातनपंधी मान लिया गया है। पर भारत के प्राचीन आदर्श महान और उपयोगी बने हुए हैं। भारतवर्ष सदा कानून को धर्म के रूप में देखता है। धर्म कानून से बड़ी चीज है। अब भी सेवा, सच्चाई, ईमानदारी, आध्यात्मिकता के मूल्य बने हुए हैं। आज भी मनुष्य एक दूसरे से प्रेम करता है। महिलाओं का सम्मान करता है, झूठ, चोरी, पर पीड़ा को पाप समझता है। भ्रष्टाचार तथा गलत तरीके से धन संग्रह को अच्छा नहीं समझता। बुराई में रस लेना बुरी बात है। दोषपूर्ण कथन को कर्त्तव्य मान लेना अनुचित है। किसी के सदुगुणों को उजागर न करना बुरी बात है। अच्छी घटनाओं के उजागर करने से लोगों के मन में अच्छी भावना जगती है।

एक बार लेखक ने रेलवे स्टेशन पर टिकट लेते हुए गलती से दस के बजाय सौ रुपये का नोट दे दिए। फिर जल्दी से जाकर गाड़ी में बैठ गए। थोड़ी देर में टिकट बाबू ने डिब्बे में आकर उन्हें पहचान लिया और उनके हाथ में नब्बे रुपये देकर संतोष की गरिमा का अनुभव किया। लेखक चकित रह गए। इससे स्पष्ट होता है कि दुनिया से सच्चाई- ईमानदारी लुप्त नहीं हुई है।

एक बार लेखक अपनी पत्नी तथा तीन बच्चों के साथ बस में यात्रा कर रहे थे। कुछ खराबी के कारण बस गंतव्य से पहले ही एक सूनसान स्थान में रुक गई। बस कंडक्टर एक साइकिल लेकर तुरंत चल दिया। लोगों को संदेह हुआ कि उन्हें धोखा दिया जा रहा है। लेखक के बच्चे पानी के लिए चिल्ला रहे थे। कुछ यात्री बस ड्राइवर को मारने के लिए उतारू हो गए। लेखक ने किसी तरह ड्राइवर को बचाया। इसी समय बस कंडक्टर अड्डु से एक नई बस लेकर आ गया और लोगों को उसमें बैठने के लिए कहा। लेखक के बच्चों के लिए एक लोटे में पानी और थोड़ा दूध भी लेता आया था। वह बोला कि बच्चों का रोना मुझसे देखा नहीं गया। सबने उसे धन्यवाद दिया। ड्राइवर से माफी माँगी। बारह बजे से पहले सब लोग बस अड्डे पर पहुँच गए। इन घटनाओं से सिद्ध हो जाता है कि मनुष्यता एकदम समाप्त नहीं हो गई है। लोगों में दयामाया, सेवा की भावना आज भी मौजूद है।

दोनों प्रकार की स्थितियाँ समाज में बनी हुई है। धोखा, छल, कपट, विश्वासघात भी है तो लोगों के द्वारा दूसरे की अकारण सहायता भी है। इससे निराश मन को सांत्वना मिलती है। कविवर रवीन्द्रनाथ ने भगवान से प्रार्थना की कि संसार में केवल नुकसान ही उठाना पड़े, धोखा ही खाना पड़े तो ऐसे अवसरों पर प्रभु उन्हें ऐसी शान्ति दे कि वे उनपर संदेह न करें। अभी आशा की ज्योति बुझी नहीं है। महान भारतवर्ष को पाने की संभावना बनी हुई है, बनी रहेगी। अत: निराश होने की जरूरत नहीं है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 क्या निराश हुआ जाए

शब्दार्थ :

  • तस्करी – चोरी।
  • भीरु – डरपोक।
  • भ्रष्टाचार – घूसखोरी।
  • निरीह – असहाय।
  • आरोप – इलजाम।
  • बेवश – लाचार।
  • दोष – बुराई, अवगुण।
  • आस्था – विश्वास।
  • अतीत – बीता हुआ।
  • विधि-निषेध – करने न करने का नियम ।
  • गह्वर – गुफा।
  • परीक्षित – परखे हुए।
  • मनीषियों – ज्ञानी, विचारशील।
  • निर्मित – बनाया।
  • माहौल – वातावरण।
  • तुटियाँ – गलतियाँ।
  • संदेह – शक।
  • जीविका – रोजी-रोटी।
  • विकार – बुराई।
  • श्रमजीवी – मजदूर।
  • निकृष्ट – बुरा आचरण।
  • फरेब – धोखा।
  • संग्रह – जमा।
  • आलोड़न – सोच विचार, मंथन।
  • दकियानूसी – पुरातन पंथी।
  • मनुष्यता मानवीय गुण।
  • उपेक्षा – निरादर, तिरस्कार।
  • अकारण – बिना कारण के ।
  • अवांछित – अनचाहा।
  • ढाढ़स – दिलासा, सांत्वना।
  • लुप्त – गायब।
  • नुकसान – हानि।
  • वंचना – धोखा, छल।
  • ज्योति – रोशनी।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 आदर्श विद्यार्थी

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – आदर्श विद्यार्थी

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लेखक किस दिन खिलौने खरीदने बाजार पहुँचा?
(क) होली
(ख) दीपावली
(ग) दशहरा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) दीपावली

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प्रश्न 2.
लेखक को किस बात पर आश्चर्य हुआ?
(क) नवयुवक के साहस पर
(ख) बाजार में खिलौने की बड़ी-बड़ी दुकानें देखकर
(ग) नवयुवक के हाथों में साधारण आकार की डालिया देखकर
(घ) इनमें से काई नहीं
उत्तर :
(क) नवयुवक के साहस पर

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लेखक नवयुवक को देखकर क्यों महसूस करता है कि यह साधारण व्यक्ति नहीं है।
उत्तर :
नवयुवक की आकृति तथा बातचीत से लेखक को पता चला कि यह साधारण व्यक्ति नहीं है। वह पढ़ा-लिखा तथा सूरत-शक्ल से अन्छे खानदान का जान पड़ता है। किसी असाधारण विपत्ति में पड़ने से इसे यह व्यवसाय करना पड़ा है।

प्रश्न 2.
नवयुवक ने लेखक को जो राम कहानी सुनाई उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर कहानी के सारांश के अन्तिम अनुच्छेद में देखिए।

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प्रश्न 3.
आदर्श विद्यार्थी के किन्हीं दो चारित्रिक गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
आदर्श विद्यार्थी में अद्भुत साहस तथा घैर्यं था। पिता की मृत्यु एक नवयुवक के जीवन की सबसे दुःखद एवं चिन्ताकारक स्थिति होती है। नवयुवक परिवार के एकमात्र सहारे की मृत्यु हो जाने पर भी धैर्य नहीं छोड़ता है। धैर्य पूर्वक अपने खाने-पीने के लिए खिलौने बेचने का धंधा करने लगता है । ईमानदारी से धनोपार्जन करने को वह बुरा नहीं मानता। वह परिश्रमी तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए अडिग रहने वाला साहसी युवक है। परिश्रम, धैर्य, साहस व लगन से वह अपने लब्य्य सिद्धि में सफल हो जाता है। वस्तुत: वह एक आदर्श विद्यार्थी से एक आदर्श अध्यापक बन जाता है।

प्रश्न 4.
‘आदर्श विद्यार्थी’ कहानी के उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में लेखक ने सष्ट किया है कि जीवन में घेर्य, परिश्रम, साहस तथा लगन से व्यक्ति अपने किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। एक नवयुवक के माध्यम से लेखक इसे सिद्ध किया है कि पिता की मौत हो जाने पर एवं आय के साधन समाप्त हो जाने पर भी वह निराश नहीं होता, साहस नहीं छोड़ता। वह खिलौना बेचकर कुछ अर्जित कर अपने लक्ष्य पर पहुँच जाता है। बी०ए० पास कर अध्यापक का पद पा लेता है। इस प्रकार लेखक ने यह संदेश दिया है कि ईमानदारी से धनोपार्जन में कोई शर्म नहीं है। यदि धैर्य तथा लगन हो तो व्यक्ति किसी भी मुसीबत को पार कर लक्ष्य पर पहुँचता है। यही बताना लेखक का उद्देश्य है।

व्याख्या मूलक प्रश्न

(क) मैने सोचा यह बड़ा विचित्र आदमी है।

प्रश्न 1.
किसने किसके विषय में सोचा?
उत्तर :
लेखक ने नवयुवक के विषय में सोचा।

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प्रश्न 2.
वक्ता को संकेतित व्यक्ति विचित्र क्यों प्रतीत हुआ?
उत्तर :
लेखक ने नवयुवक की आर्यिक दशा को सुधारने के लिए नौकरी करने का प्रस्ताव रखा। फिर यह भी कहा कि यदि उसे नौकरी मिलने में कठिनाई हो तो वे उसके विषय में चेष्टा कर सकते हैं। पर नवयुवक ने कहा कि अभी उसे नौकरी नहीं करनी है। जब आवश्यकता होगी तब उनसे कहेगा। लेखक ने सोचा कि नौकरी नहीं करना चाहता, इस खिलौने से इसे क्या मिलता होगा। इसी कारण लेखक को वह नवयुवक विचित्र प्रतीत हुआ।

(ख) ‘इसलिए मुझे चिन्ता हुई।’

प्रश्न 1.
यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत है? इसके लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
यह पंक्ति ‘आदर्श विद्यार्थी’ पाठ से उद्धत है। इसके लेखक का नाम श्री विश्वम्भर नाथ शर्मा ‘कौशिक’ है।

प्रश्न 2.
वक्ता को किसके लिए चिन्ता हुई?
उत्तर :
वक्ता नवयुवक ने सोचा कि वह बी०ए० अवश्य पास करेगा, चाहे इसके लिए उसे भीख ही क्यों न माँगनी पड़े। उसने चेष्टा करके अपनी फीस माफ करवा ली, परन्तु खाने-पीने के लिए कुछ मासिक आय की आवश्यकता थी। इसलिए वक्ता को चिन्ता हुई।

(ग) ‘भाई ईमानदारी से पैसा कमाने में कुछ शर्म नहीं है।’

प्रश्न 1.
यह किसने किससे कहा?
उत्तर :
यह नवयुवक ने कालेज के कुछ लड़कों से कहा।

प्रश्न 2.
इस पंक्ति का आशय अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस पंक्ति में यह सषष्ट किया गया है कि पैसा कमाने के लिए ईमानदारी से जो काम किया जाता है उसमें लज्जा की कोई बात नहीं है। ईमानदारी तथा परिश्रम से किया गया कोई काम बुरा नहीं होता। कोई भी काम करने से कोई छोटा नहीं हो जाता है। खिलौने बेच कर अपना मासिक खर्च चलाना न बुरा और न शर्म की बात है। यह कदम तो प्रशंसनीय है।

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1. उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए :

  • आसाधारण – अ + साधारण
  • विवश – वि + वश
  • सदुपयोग – सत् + उपयोग
  • सुअवसर – सु + अवसर
  • अनपढ़़ – अन + पढ़

2. प्रत्यय पृथक् कीजिए :

  • आवश्यकता – आवश्यक + ता
  • जीवित – जीव + इत
  • कठिनाई – कठिन + आई
  • व्यापारिक-व्यापार + इक
  • उत्सुकता-उत्सुक + ता

3. विलोम शब्द लिखिए :

  • अधीर – धीर
  • अशिक्षित – शिक्षित
  • नित्य – अनित्य
  • जीवित-मृत

4. शब्द का प्रयोग वाक्यों में करें :

  • धन्धा – हर व्यक्ति को कोई न कोई धन्धा करना चाहिए।
  • व्यवसाय- आजकल व्यवसाय की ओर लोगों का झुकाव है।
  • विचित्र – इस आदमी का व्यवहार विचित्र लगता है।
  • धनोपार्जन- ईमानदारी से धनोपार्जन करना उचित है।
  • निरुत्तर – नवयुवक की बात सुनकर लेखक निरुत्तर हो गया।

WBBSE Class 7 Hindi आदर्श विद्यार्थी Summary

जीवन्-परिचय

कौशिक का जन्म सन् 1891 ई० में अम्बाला छावनी में हुआ था। ये गौड़ ब्राह्मण थे। वे प्रेमचन्द के समकालीन थे। हिन्दी साहित्य में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। सन् 1947 ई० में इनका देहावसान हो गया। इनकी पहली कहानी रक्षा बंधन सन् 1912 ई० में सरस्वती पत्रिका में छपी। इन्होंने व्यंग्यात्मक साहित्य की भी रचना की।

इनकी भाषा सहज, सरल तथा व्यावहारिक है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कहानी संग्रह, चित्रशाला, गल्पमंदिर, कल्लोल, मणिमाला, मिलन मंदिर, प्रेम प्रतिमा हैं। ‘माँ’ और ‘भिखारी’ इनके मुख्य उपन्यास हैं। इनकी व्यंग्यात्मक रचना ‘दुबे जी की चिट्ठी हैं। कौशिक जी द्विवेदी युग के यशस्वी कथाकार माने जाते हैं।

कहानी का सारांश 

दीपावली का दिन था। लेखक कुछ खिलौने खरीदकर नौकर को दे उसे घर भेज दिया। आगे बढ़कर उसने देखा कि एक नवयुवक खिलौने बेच रहा था। उसके हाथ की डालिया में पन्द्रह-बीस खिलौने थे।’बाबू जी! खिलौने लीजिए, खिलौने’ उसके इस स्वर को सुनकर लेखक ने उसे देखा। खिलौने की बड़ी-बड़ी दुकानों के बावजूद वह साहसी युवक पन्द्रह- बीस खिलौने लेकर बाजार में पहुँचा था। लेखक को खिलौने की आवश्यकता नहीं थी।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 आदर्श विद्यार्थी

इसलिए मुस्कराकर आगे बढ़ गया। दो-तीन दिन पश्चात् लेखक पुन: चौंक गया। उसी नवयुवक का स्वर बाबूजी खिलौने लीजिएगा – खिलौने फिर सुनाई पड़ा। लेखक ने उससे पूछा कि वह यह धन्धा क्यों करता है। नवयुवक ने अपना संक्षिप्त परिचय भी बतलाया कि वह अभी यही काम करता है। उसके पिता नहीं हैं केवल माता है। यहाँ अकेले किसी परिचित के यहाँ रहता है। उस नवयुवक की आकृति तथा बात-चीत से लेखक को पता चला कि वह साधारण व्यक्ति नहीं है। वह अच्छे खानदान का पढ़ा-लिखा व्यक्ति मालूम पड़ता है। किसी विपत्ति के कारण यह धंधा कर रहा है। लेखक ने उसे अपने मकान का पता बता कर कहा कि घर आने पर कुछ खिलौने ले लिया करूँगा।

एक सप्ताह पश्चात् वह नवयुवक लेखक के मकान पर खिलौने लिये पहुँचा। तीन-चार खिलौने खरीदकर लेखक ने उससे कहा कि इस धंधे से अच्छा है कि कोई नौकरी कर लो। मैं तुम्हारे लिए नौकरी के लिए चेष्टा कर सकता हूँ। पर उसने कहा कि जरूरत होने पर आपसे कहूँगा। लेखक को उसकी बात पर आश्चर्य हुआ कि अभी वह नौकरी क्यों नहीं करना चाहता है। इस प्रकार कभी-कभी वह खिलौने लेकर लेखक के पास आया करता था।

एक दिन वह लेखक के पास आया। उसके पास केवल तीन खिलौने थे । लेखक ने एक-एक खिलौने तीन बच्चों को दे दिए। लेखक के आग्रह करने पर भी वह इस बार खिलौनों के पैसे नहीं लिए। उसने कहा कि इन बच्चों की बदौलत उसे बहुत कुछ मिल चुका है, और मिलता रहेगा। लेखक के द्वारा नौकरी का प्रस्ताव करने पर भी उसका वही उत्तर था कि अभी नौकरी नहीं करनी है।

कुछ दिन के बाद वह एक गठरी में कागज, पेन्सिल, कलम, निब, दवात तथा होल्डर आदि लेकर आया। उसकी सोच थी कि ऐसी चीजें रखनी चाहिए जिससे ग्राहकों के पैसे का सदुपयोग हो। लेखक ने आवश्यकतानुसार सामान खरीद लिए। फिर आवश्यक किताबें भी उससे मँगाने लगे। छ: सात महीने तक यह क्रम चला। फिर उसका आना बन्द हो गया। लेखक ने सोचा कि शायद वह बीमार हो गया हो, अथवा अपने घर चला गया होगा।

जुलाई का महीना था, लेखक अपने पुत्र को स्कूल में भर्ती करने के लिए ले गया। प्रधानाध्यापक ने आवश्यक कार्यं करने के बाद भी लड़के को कक्षा में जाने के लिए कहा। लेखक लड़के को लेकर कक्षा में गए। कक्षाध्यापक ने उन्हें देखकर मुस्कराकर कहा आइए।लेखक उसी खिलौने वाले को यहाँ अध्यापक के रूप में देखकर चकित हो गए। नवयुवक ने बतलाया कि वह परसों यहाँ अध्यापक होकर आया है। आज शाम को वह उनकी सेवा में उर्पस्थित होने वाला था। शाम को लेखक के घर आकर अपनी राम कहानी सुनाई।

नवयुवक की राम कहानी – वह एक साधारण स्थिति के पिता का पुत्र था। पिता बैंक में सत्तर रुपये मासिक वेतन पर नौकर थे। उस समय वह कालेज में बी०ए० के अन्तिम वर्ष में पढ़ रहा था। उसी समय पिता की मृत्यु हो गई। पर मैने निश्चय किया कि बी०ए० अवश्य पास करूंगा। चाहे भीख ही माँगनी पड़े। फीस तो मैंने माफ करवा ली, पर खाने-पीने की चिन्ता थी। दशहरे का दिन था। उसने देखा कि कुछ खिलौने वाले कागज के खिलौने लिए मेले में जा रहे हैं। सोचा कि ये अशिक्षित लोग यही धंधा कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। मुझे भी ऐसा ही कोई काम करना चाहिए।

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उसने उसी समय एक मित्र से दस रुपये उधार लिए और बाजार से दस रुपये के खिलौने ले डलिया में रखकर सीधे मेले में पहुँच गया। शाम तक सारे खिलौने बिक गए। उसे दो रुपये मुनाफे के मिले। उसने कहा कि ईमानदारी से पैसा कमाने में कोई शर्म नहीं है। नित्य शाम को दो घंटे के लिए खिलौने लेकर निकलता था। इस प्रकार उसने बी०ए० पास किया। मेरी लगन से प्रसन्न होकर प्रिन्सिपल साहब ने खर्च देकर ट्रेनिंग कालेज भेजा। वहाँ मैने बी०एड० पास किया। अब यहाँ सौ रुपये मासिक पर अध्यापक होकर आया हूँ। यही मेरी राम कहानी है। उसकी कहानी सुनकर लेखक दंग रह गया। उसके चरण छूकर उन्हें धन्यवाद दिया। लेखक ने कहा कि आप जैसे बुद्धिमान ही ऐसा कर सकते हैं।

शब्दार्थ :

  • आश्चर्य – अचरज, विस्मय
  • पश्चात् – बाद
  • नवयुवक – नव जवान
  • धन्धा – व्यवसाय
  • धनोपार्जन – धन कामना
  • आँखें चार होना – आमना-सामना होगा
  • लालसापूर्ण – कामना से पूर्ण
  • परिचित – जान पहचान का
  • भ्रम – सन्देह
  • नित्य – हमेशा, सदा
  • ग्राहक – खरीददार
  • अकस्मात – अचानक
  • राम कहानी – दु:ख भरी कहानी
  • खानदान – वंश कुल।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 Question Answer – अपूर्व अनुभव

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
तोत्तो-चान कहाँ की रहने वाली थी ?
(क) तोमोए
(ख) कूहोन्बुत्सु
(ग) डेनेन चोफु
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर :
(क) तोमोए

प्रश्न 2.
बच्चे अपने-अपने पेड़ को मानते थे –
(क) निजी संपत्ति
(ख) परायी संपत्ति
(ग) तोत्तो-चान की सम्पत्ति
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) निजी संपत्ति

प्रश्न 3.
तोत्तो-चान एवं यासुकी-चान में क्या थी।
(क) मित्रता
(ख) शत्रुता
(ग) भाईचारा
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) मित्रता

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

प्रश्न 4.
तोत्तो-चान किसे अपने पेड़ पर चढ़ाने वाली थी ?
(क) यासुकी-चान को
(ख) तेत्सुको कुरियानागी को
(ग) सुमोयान को
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर :
(क) यासुकी-चान

प्रश्न 5.
यासुकी-चान को कौन-सा रोग था ?
(क) लकवा
(ख) पोलियो
(ग) मिरगी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) पोलियो

प्रश्न 6.
कौन संघर्ष कर अन्त में ऊपर पहुँच गया ?
(क) यासुकी-चान
(ख) तेत्सुको कुरियानागी
(ग) तोत्तो-चान
(घ) वान-फू
उत्तर :
(क) यासुकी-चान

प्रश्न 7.
यासुकी-चान की बहन कहाँ रहती थी ?
(क) जापान
(ख) लंदन
(ग) अमेरिका
(घ) भारत
उत्तर :
(ग) अमेरिका

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

प्रश्न 8.
उन दिनों किसके बारे में कोई नहीं जानता था ?
(क) टेलीविजन
(ख) मोबाइल
(ग) मोटर कार
(घ) साईकिल
उत्तर :
(क) टेलीविजन

प्रश्न 9.
यासुकी-चान का घर कहाँ था ?
(क) नागीसाका
(ख) तोमोए
(ग) कुछोन्बुत्सु
(घ) डेनेनचोफु
उत्तर :
(घ) डेनेनचोफु

प्रश्न 10.
तेत्सुको कुरियानागी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1930 में
(ख) सन् 1931 में
(ग) सन् 1932 में
(घ) सन् 1933 में
उत्तर :
(घ) सन् 1933 में।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

प्रश्न 11.
तेत्सुको कुरियानागी का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) जापान में
(ख) अमेरिका में
(ग) चीन में
(घ) कोरिया में
उत्तर :
(क) जापान में।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
तोत्तो-चान के लिए एक बड़ा साहस करने का दिन कब आया ?
उत्तर :
सभागार में शिविर लगने के दो दिन बाद तोत्तो-चान के लिए एक बड़ा साहस करने का दिन आया। उस दिन उसने यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ने का निमंत्रण दिया था।

प्रश्न 2.
यासुकी-चान कौन था ?
उत्तर :
यासुकी-चान डेनेनचोफु का रहने वाला था। उसे पोलियो की बीमारी थी। वह तोत्तो-चान का मित्र था।

प्रश्न 3.
तोत्तो-चान का पेड़ कहाँ था ?
उत्तर :
तोत्तो-चान का पेड़ मैदान के बाहरी हिस्से में कुहोन्बुत्सु जाने वाली सड़क के पास था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

प्रश्न 4.
द्विशाखा क्या है ?
उत्तर :
किसी पेड़ पर दो डालों के मिलन विन्दु को द्विशाखा कहते हैं।

प्रश्न 5.
यासुकी-चान के हाथ-पैर कैसे थे ?
उत्तर :
यासुकी-चान के हाथ-पैर पोलियो के कारण कमजोर और बेकार हो गए थे। उसके हाथ की उँगलियाँ पिचकी और अकड़ी थीं। उसके पाँव चलने में असमर्थ थे।

प्रश्न 6.
तोत्तो-चान स्कूल पहुँची तो मैदान में उसे कौन मिल गया ?
उत्तर :
तोत्तो-चान स्कूल पहुँची तो मैदान में उसे यासुकी चान मिल गया।

प्रश्न 7.
तोत्तो-चान क्या सोचने लगी ?
उत्तर :
तोत्तो-चान सोचने लगी कि छोटे डिब्बे से टेलीविजन में सूमो पहलवान कैसे समा-सकते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

प्रश्न 8.
तोत्तो-चान ने यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने में कैसे सफलता हासिल की ?
उत्तर :
तोत्तो-चान ने अपनी दृढ़ इच्छा के द्वारा ही अपंग यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने में सफलता हासिल की।

प्रश्न 9.
यासुकी-चान पेड़ पर क्यों नहीं चढ़ पाता था ?
उत्तर :
यासुकी-चान को पोलियो था, इसलिए वह किसी पेड़ पर नहीं चढ़ पाता था।

प्रश्न 10.
कौन अपने नन्हें हाथों से यासुकी-चान को खींचने लगी ?
उत्तर :
तोत्तो-चान अपने नन्हें हाथों से यासुकी-चान को खींचने लगी ।

प्रश्न 11.
कौन पेड़ की द्विशाखा पर थे ?
उत्तर :
तोत्तो-चान और यासुकी-चान।

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प्रश्न 12.
यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह कैसा मौका था ?
उत्तर :
यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अन्तिम मौका था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
तोत्रो-चान यासुकी-चान को अपने पेड़ पर क्यों चढ़ने देना चाहती थी?
उत्तर :
तोत्तो-चान यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाकर तमाम नई-नई चीजें दिखाना चाहती थी। यासुकी-चान से उसकी मित्रता तथा सहानुभूति थी। इसलिए उसे अपने पेड़ पर चढ़ने देना चाहती थी।

प्रश्न 2.
तोत्तो-चान माँ से क्या कहकर घर से निकली ?
उत्तर :
तोत्तो-चान ने माँ से कहा कि वह यासुकी-चान के घर डेनेन चोफु जा रही है। इस प्रकार माँ से झूठ कह कर घर से निकली।

प्रश्न 3.
‘अपूर्व अनुभव’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि किसी भी प्रकार की दृढ़ इच्छा बुद्धि और कठोर परिश्रम से अवश्य पूरी हो जाती है । तोत्तो-चान की योजना अपंग यासुंकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने की थी। यह जोखिम भरा कठिन काम था। पर एक लड़की ने अपनी तीव्व इच्छा शक्ति और बुद्धि के उपयोग से सफलता प्राप्त कर ली।

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प्रश्न 4.
“सूरज का ताप उन पर चढ़ रहा था। पर दोनों का ध्यान यासुकी-चान के ऊपर तक पहुँचने में रमा था।’ ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
तोत्तो-चान तथा यासुकी-चान दोनों को यह पता न चला कि यासुकी-चान को ऊपर चढ़ने में कितना समय लगा। सूर्य की तेज धूप उन पर पड़ने लगी थी। सूर्य कहाँ तक आकाश में चढ़ गए हैं, तेज धूप पड़ने लगी है। इस बात का उन्हें कोई ज्ञान न हो सका । दोनों का ध्यान केवल इस बात में लगा हुआ था कि यासुकी-चान कब पेड़ पर ऊपर चढ़ जाता है। किसी भी कार्य में मन के रम जाने पर समय का ज्ञान नहीं हो पाता कि कितना समय हो गया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि दृढ़ इच्छा, बुद्धि और कठोर परिश्रम से किसी भी काम में सफलता मिल जाती है।
उत्तर :
यदि आदमी में दृढ़ इच्छा शक्ति है तो वह अपनी बुद्धि और परिश्रम से असंभव प्रतीत होने वाले काम को संभव बना कर संपन्न कर डालता है। तेत्सुको को कुरियानागी ने तोत्तो-चान के उदाहरण से इसे स्पष्ट किया है। तोत्तोचान ने अपनी दृढ़ इच्छा के द्वारा ही अपंग यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने में सफलता हासिल की। यासुकी-चान को पोलियो था, इसलिए वह किसी पेड़ पर नहीं चढ़ पाता था। तात्तो-चान ने गुप्त रूप से यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ने के लिए आमंत्रित किया, योजना को सफल बनाने के लिए वह यासुकी-चान को अपने पेड़ की ओर ले गई।

उसने चौकीदार की छत से एक सीढ़ी घसीटते हुई लाई। सहारे के लिए सीढ़ी को द्विशाखा तक पहुँचने के लिए तने के सहारे खड़ा कर दिया। सीढ़ी को पकड़कर उसने उसी प्रकार उसे ऊपर चढ़ने के लिए कहा। हाथ-पैर अत्यंत कमजोर होने के कारण वह पहली सीढ़ी पर बिना सहारे नहीं चढ़ पाता। तोत्तो-चान के धकियाने पर भी वह नहीं चढ़ पाया और अपना पैर सीढ़ी पर से हटा लिया। दोनों में उत्साह था दोनों इस काम में सफल होना चाहते थे। अन्त में वह चौकीदार के छपर से एक तिपाईसीढ़ी ले आई। तिपाई-सीढ़ी द्विशाखा तक पहुँच रही थी।

यासुकी-चान निश्चय के साथ चढ़ने लगा। ऊपर तक चढ़ गया। तोत्तो-चान तो सीढ़ी पर से छलांग लगा कर द्विशाखा पर पहुँच गई। पर यासुकी-चान को सीढ़ी से पेड़ पर लाने की हर कोशिश बेकार हो गई। अन्त में तोत्तो-चान उसका हाथ अपने हाथ में थाम ली । फिर उसे लेट जाने के लिए कहा और उसे पेड़ पर खींचने की कोशिश करने लगी। कड़ी धूप के बावजूद बादल उन्हें छाया दे रहा था। काफी मेहनत के बाद दोनों आमने-सामने पेड़ की द्विशाखा पर थे। यासुकी-चान ने आज जीवन में पहली बार दुनियी की एक झलक देखी। वह खुश था। दोनों पेड़ पर बातें करते रहे। दोनों बेहद प्रसन्न थे। इस प्रकार तोत्तो-चान ने अपनी लगन, साहस, दृढ़ इच्छा-शक्ति से जोखिम भरे काम में सफलता प्राप्त कर ली।

इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति में यदि किसी भी कार्य को संपन्न करने की गहरी रुचि तथा शक्ति है तो वह अपने साहस, लगन तथा कर्मठता से सफलता प्राप्त कर लेता है। कार्य करते समय बीच-बीच में बाधाएं भी आती हैं। काम कठिन प्रतीत होने लगता है। पर ऐसी स्थिति में व्यक्ति को निराश नहीं होना चाहिए। बुद्धि का उपयोग नये-नये साधन जुटा कर कार्य में लग जाना चाहिए। साहसी, कर्मठ और आशावादी पुरुष के पाँव को सफलता अवश्य चूमती है।

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भाषा-बोध :

1. वाक्य प्रयोग करें –

शिविर – सैनिक शिविर में आराम करते हैं।
न्योता – रमा ने अपनी सहेली को न्योता दिया।
छुट्टी – रविवार को छुट्टी रहती है।
संपत्ति – मेरे पास थेड़ी सी संपत्ति है।
उल्लास – उसके मन में बड़ा उल्लास था।

2. विलोम शब्द लिखें :-

ऊपर – नीचे
आकाश – पाताल
झूठ – सच
पीछे – आगे
गरमी – जाड़ा

WBBSE Class 6 Hindi तिवारी का तोता Summary

जीवन-परिचय :

तेत्सुको कुरियानागी का जन्म जापान के नागी साका में सन् 1933 में हुआ था। इनकी रचनाओं में समाजिक तथा मानवीय मूल्यों का आधार परिलक्षित होता है।

कहानी का सारांश – तोत्तो-चान के लिए एक बड़ा साहस करने का दिन आया, जब उसने यासूनी चान को अपने पेड़ पर चढ़ने का निमंत्रण दिया। तोमोए में प्रत्येक बालक बाग के एक-एक पेड़ को अपने चढ़ने का पेड़ मानता था। तोत्तोचान का पेड़ बहुत बड़ा था। परंतु छह फुट की ऊँचाई पर एक द्विशाखा थी। वहाँ झूले सी आरामदायक जगह थी। बच्चे अपने पेड़ को अपनी निजी संपत्ति समझते थे। तोत्तो-चान उस पर चढ़कर लोगों को देखती थी। यासुकी-चान को पोलियो था। इसलिए वह पेड़ पर नहीं चढ़ पाता था। तोत्तो-चान ने सभी से छिपाकर उसे न्योता दिया था। तोत्तो-चान स्कूल पहुँची तो मैदान में उसे यासुकी चान मिल गया। यासुकी-चान पैर घसीटता हुआ उसकी ओर बढ़ा। तोत्तो-चान भी उत्तेजित थी। उल्लास में दोनों हँसने लगे।

तोत्तो-चान उसे पेड़ की ओर ले गई। फिर चौकीदार के छपर से एक सीढ़ी घसीटती हुई लाई। उसे तने के सहारे लगाकर एक कुरसी पर चढ़कर सीढ़ी के किनारे को पकड़ लिया। यासुकी-चान पहली सीढ़ी पर बिना सहारे नहीं चढ़ पाया। छोटी और नाजुक सी तोत्तो-चान उसे पीछे से धकियाने लगी। पर सफल न हो सकी। यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने की उसकी हार्दिक इच्छा थी। यासुकी-चान के मन में भी उत्साह था। फिर वह चौकीदार के छपर से एक तिपाई लाई। तिपाई की ऊपरी सीढ़ी द्विशाखा तक पहुँच रही थी। यासुकी-चान निश्चय के साथ पाँव उठाकर पहली सीढ़ी पर रखा।

तोत्तो-चान नीचे से उसका एक-एक पैर सीढ़ी पर रखने में मदद कर रही थी। यासुकी-चान पूरी शक्ति के साथ संघर्ष कर अन्त में ऊपर पहुँच गया। तोत्तो-चान छलांग लगा कर द्विशाखा पर पहुँची, पर यासुकी-चान सीढ़ी से पेड़ पर न आ सका। तोत्तो-चान उसका हाथ पकड़ कर बोली तुम लेट जाओ, मैं तुम्हें पेड़ पर खींचने की कोशिश करूँगी। वह अपने नन्हें हाथों से पूरी ताकत से यासुकी-चान को खींचने लगी।

काफी मेहनत के बाद दोनों आमने-सामने पेड़ की द्विशाखा पर थे। तोत्तो-चान ने अपने पेड़ पर उसका स्वागत किया। उस दिन यासुकी-चान ने अत्यंत प्रसन्न होकर दुनिया की एक नई झलक देखी। दोनों बड़ी देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे। यासुकी-चान ने कहा कि उसकी बहन अमेरिका में है । उसने बताया कि टेलीविजन एक ऐसी वस्तु है, जिसमें घर बैठे ही सूमो-कुश्ती देख सकेंगे। तोत्तो-चान सोचने लगी कि छोटे डिब्बे से टेलीविजन में सूमो पहलवान कैसे समासकते हैं। उन दिनों टेजीविजन के बारे में कोई नहीं जानता था। यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अन्तिम मौका था। दोनों अपनी सफलता पर बेहद खुश थे।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 4 अपूर्व अनुभव

शब्दार्थ :

  • शिविर – डेरा, छावनी।
  • चौकीदार – पहरेदार।
  • न्योता – निमंत्रण।
  • हताशा – निराशा।
  • उदास – निराश।
  • द्विशाखा – दो डालियों का मिलन केन्द्र ।
  • निजी – अपनी।
  • शक्ति – बल।
  • शिष्टता – व्यावहारिकता।
  • हैरान आश्चर्य।
  • पोलियो – एक बीमारी।
  • थामे रहना – पकड़े रहना।
  • उल्लास – खुशी।
  • ताप – गर्मी।
  • रम – लीन।
  • तरबतर भींगा हुआ।
  • बेहद – बहुत।
  • टेलीविजन – दूरदर्शन।
  • मौका – अवसर।
  • गषें लड़ाना – बातें करना।
  • लुभावनी – मन मोहने वाली।
  • जूझना – संघर्ष करना।
  • उत्तेजित – प्रोत्साहित।
  • उमंग – उत्साह

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 Question Answer – तिवारी का तोता

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
तिवारी का तोता किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) कहानी
(ग) नाटक
(घ) एकांकी
उत्तर :
(ख) कहानी।

प्रश्न 2.
पण्डित तिवारी कहाँ रहते थे ?
(क) मथुरा
(ख) काशी
(ग) आगरा
(घ) दिल्ली
उत्तर :
(ख) काशी।

प्रश्न 3.
तिवारी का तोता कहाँ रहता था ?
(क) जंगल में
(ख) पिंजरे में
(ग) मंगल पर
(घ) खेतों में
उत्तर :
(ख) पिंजरे में।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 4.
तिवारी के पास कितने तोते थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(क) एक।

प्रश्न 5.
पिंजरे के तोते के पास दूसरा तोता कहाँ से आया ?
(क) गाँव से
(ख) शहर से
(ग) जंगल से
(घ) पड़ोस से
उत्तर :
(ग) जंगल से।

प्रश्न 6.
पिंजरे का तोता किस कारण मरा ?
(क) जहर खाकर
(ख) सींक से घाव हो जाने के कारण
(ग) सदमा लगने से
(घ) ठंड से
उत्तर :
(ख) सींक से घाव हो जाने के कारण।

प्रश्न 7.
पिंजरे का तोता किसकी प्रशंसा करने लगा ?
(क) नौकर का
(ख) मालिक का
(ग) लता का
(घ) तिवारी के बेटा का
उत्तर :
(ख) मालिक का।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 8.
किसकी बात न सुनने पर भयंकर परिणाम हो सकता था ?
(क) मालिक का
(ख) जंगल से आया तोता का
(ग) तिवारी के बेटा का
(घ) नौकर का
उत्तर :
(क) मालिक का ।

प्रश्न 9.
सुदर्शन का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1886 में
(ख) सन् 1896 में
(ग) सन् 1906 में
(घ) सन् 1916 में
उत्तर :
(ख) सन् 1896 में।

प्रश्न 10.
सुदर्शन का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) सियालकोट
(ख) पठानकोट
(ग) कोलकाता
(घ) पंजाब
उत्तर :
(क) सियालकोट।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 11.
सुदर्शन का पुरा नाम क्या था ?
(क) कालीचरण
(ख) बदरीनाथ
(ग) रामनाथ
(घ) नवकुमार
उत्तर :
(ख) बदरीनाथ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
पंडित तिवारी कहाँ रहते थे ?
उत्तर :
पंडित तिवारी काशी की पवित्र नगरी में रहते थे।

प्रश्न 2.
एक दिन पिंजरे के सामने कौन आकर बैठ गया ?
उत्तर :
एक दिन पिंजरे के सामने एक जंगली तोता आकर बैठ गया।

प्रश्न 3.
पिंजरे का तोता पिंजरे की प्रशंसा क्यों करता है ?
उत्तर :
पिंजरे का तोता पिंजरे के अपने मकान को मजबूत और सुरक्षित और जंगलनमें खतरा समझता है। इसलिए पिंजरे की प्रशंसा करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 4.
पंडित तिवारी के बेटे ने पिंजरे में क्या डाला ?
उत्तर :
पंडित तिवारी के बेटे ने पिंजरे में सींक डाला।

प्रश्न 5.
मरे हुए तोते की मरी हुई आत्मा ने क्या कहा ?
उत्तर :
मरे हुए तोते की मरी हुई आत्मा ने जंगली तोते को चूरी देने के लिए कहा, क्योंकि इसने एक कैदी को छुड़ाया है और मुर्दे को जिन्दा किया है।

प्रश्न 6.
जंगली तोते ने धिक्कारते हुए पिंजरे के तोते को क्या कहा ?
उत्तर :
जंगली तोते ने उसे धिक्कारते हुए कहा कि तुम्हारी देह तथा आत्मा कैद में है।

प्रश्न 7.
जंगल के तोते ने पिंजरे के तोते को क्या समझाया ?
उत्तर :
जंगल के तोते ने उसे समझाया कि किसी दिन मालिक की बात न सुनने पर, उसकी बोली में जवाब न देने पर भयंकर परिणाम हो सकता है।

प्रश्न 8.
पिंजरे के तोते ने क्या निश्चय किया ?
उत्तर :
पिंजरे के तोते ने निश्चय किया कि आज वह किसी की बात न सुनेगा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 9.
तिवारी के बेटे ने लोहे की सींक लेकर क्या किया ?
उत्तर :
तिवारी के बेटे ने लोहे की सींक लेकर तोते को बार-बार चुभोई ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
पिंजरे के तोते से जंगल के तोते ने क्या कहा ?
उत्तर :
पिंजरे के तोते से जंगल के तोते ने कहा- तुम्हारी सूरत मुझसे मिलती है परंतु स्वभाव मुझसे नहीं मिलता और तुम्हें किसी ने कैद कर रखा है। तेरी आजादी मर चुकी है। तेरी आँखें अँधी हो चुकी हैं। इस पिंजरे ने तुम्हारी देह ही नहीं, तुम्हारी आत्मा को भी कैद कर लिया है।

प्रश्न 2.
अभागा कहने पर जंगल के तोते से पिंजरे के तोते ने क्या पूछा ?
उत्तर :
अभागा कहने पर जंगल के तोते से पिंजरे के तोते ने पूछा – वह कौन-सा दुर्भाग्य है जिसे मेरी आँखें नहीं देखती। मैं तेरी बात को अपने दिल में टटोलूँगा।

प्रश्न 3.
पिंजरे के तोते ने अपने मालिक को मेहरबान और स्वयं को खुश किस्मत क्यों कहा ?
उत्तर :
पिंजरे के तोते ने कहा कि मेरा मालिक मेरे लिए यह सुरक्षित घर बना दिया है। वह मुझे पानी पिलाता है, दाना खिलाता है, बिल्लियों से मेरी रक्षा करता है। अत: मेरा मालिक मेहरबान है और मैं खुशकिस्मत हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 4.
मालिक का कहना न मानने पर पिंजरे के तोते का क्या हाल हुआ ?
उत्तर :
पिंजरे के तोते ने तिवारी के बेटे की बात का जवाब न दिया। तब तिवारी के बेटे ने बार-बार उसे सींक चुभाई। पर तोता घाव सहता रहा, पर मालिक की बात मानने से इनकार कर दिया। परिणामस्वरूप घाव खाकर वह मर गया।

प्रश्न 5.
मरे हुए तोते की आत्मा ने जंगल के तोते को चूरी देने की बात क्यों कही ?
उत्तर :
मरे हुए तोते की आत्मा ने जंगल के तोते को चूरी देने की बात कही, क्योंकि उसने एक कैदी को छुड़ाया है और मुर्दे को जिंदा किया है।

प्रश्न 6.
“तेरी आजादी का रंग मुर्दा हो गया है और तेरी आँखें अंधी हो गई।” आशय स्पष्ट़ कीजिए।
उत्तर :
तिवारी का तोता अपने पिंजरे रूपी मकान को मजबूत तथा सुरक्षित बतलाया और जंगल में खतरा बताया। उसका उत्तर देते हुए जंगल के तोते ने कहा कि- तुम्हें धिक्कार है। तुम्हारे मन की आजादी की भावना मर चुकी है। तू सच्चाई को नहीं देख पा रहा है। तुममें विवेक शक्ति नहीं रह गई है। क्योंकि तुम्हारी देह ही नहीं तुम्हारी आत्मा भी गुलाम हो गई है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

प्रश्न 7.
तिवारी का तोता शीर्षक कहानी का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
लेखक ने प्रस्तुत कहानी में बतलाया है कि हर प्रकार की सुविधा के बावजूद पराधीन प्राणी की आत्मां को सच्ची संतुष्टि नहीं मिल सकती। पराधीन जीवन में कभी भी सुख-शान्ति नहीं मिल सकती। पराधीनता जीवन के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कहानी के आधार पर बतलाइए कि स्वाधीन जीवन में ही सच्चा सुख-शांति तथा संतुष्टि मिलती है।
उत्तर :
‘तिवारी का तोता’ कहानी के माध्यम से लेखक ने इस हकीकत को उजागर किया है कि पराषीन जीवन में यदि सैकड़ों प्रकार की सुविधाएँ मिल भी जाएँ फिर भी प्राणी की आत्मा को सच्चा सुख-शांत और संतुष्टि नहीं मिलती। स्वाधीन जीवन में ही सच्चा सुख और संतोष मिलता है। पराधीन जीवन में सपने में भी सुख नहीं मिलता। मालिक की बात न मानने पर सारा सुख दूर भागता है। मौत को गले लगाना पड़ता है। तिवारी का तोता पिंजरे में रहकर अपने को हर प्रकार से सुखी और सुरक्षित समझता था। सोचता था कि उसका मालिक उसे पानी-दाना देता है। बिल्लियों से रक्षा के लिए सुन्दर पिंजड़ा बनवा दिया है। उसे यहाँ कोई भय नहीं।

वह अपने पिंजरे को कैद खाना नहीं समझता और अपने को गुलाम नहीं मानता था। वह पिंजरे में आजादी से घूमता, सीटियाँ बाजाता। इसलिए अपने को सुखी समझता था। जंगल के तोते ने उसे समझाया कि कैद में रहने से उसकी आत्मा बेगानी हो गई है। तू सदा मालिक की बात सुनता है और उसके कथनानुसार बोलता और उत्तर देता है। यदि एक दिन भी तू मालिक की बात न सुनो और उसकी बोली में जवाब न दो तो देखो परिणाम कितना भयंकर हो सकता है।

पिंजरे के तोते ने निश्चय कर लिया कि आज वह किसी की नहीं सुनेगा, केवल अपनी बोली ही बोलेगा। पंडित तिवारी का बेटा आकार तोते से बातें करने लगा। पर तोता ने अपने निश्चय के अनुसार उसकी बात का जवाब न दिया। तिवारी का बेटा लोहे की सींक लेकर उसकी गरदन में चुभोकर उसे बोलने के लिए दवाब देने लगा।

पर तोता घाव सहता रहा, पीड़ा झेलता रहा, पर आदमी की बोली में जवाब देने से इनकार कर दिया। फलस्वरूप सींकों की चुभन से घायल हो कर तोता ने मौत को प्राप्त कर लिया। जो गुलाम मालिक की बात नहीं सुनता उसका यही हाल होता है। गुलामी का जीवन नारकीय जीवन होता है। पशु-पक्षी या मनुष्य कोई भी प्राणी पराधीन रह कर सुखी नहीं रह सकता। मालिक के इव्छानुसार ही उसे आचरण करना पड़ता है।

अपनी इच्छा या अपनी मानवता को प्रकट करने का भी उसे अधिकार नहीं रह जाता। स्वच्छंद रहना मन की मूल प्रवृत्ति है। संसार में कोई भी प्राणी दूसरे के अधीन और नियंंद्रण में रहना नहीं चाहता। पराधीनता में अशांति, व्याकुलता तथा निराशा की भावना प्रबल हो जाती है। गुलामी की स्थिति में सोने का पिंजड़ा, सोने का महल भी कोई पसन्द नहीं कर सकता। किसी भी देश या व्यक्ति के लिए गुलामी अभिशाप तथा कलंक है। स्वाधीनता सुख शांति, उल्लास तथा उमंग का मूल है। कहा गया है ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

भाषा-बोध :

(क) ‘प्र’ उपसर्ग लगाकर शब्द रचना करो –
उत्तर :
प्रबल, प्रभाव, प्रताप, प्रगति, प्रतिज्ञा।
(ख) उपसर्ग अलग करके शब्द लिखिए –
सुगंध = सु + गंध, सुप्र = सु + पुत्र, सुगम = सु + गम,
सुअवसर = सु + अवसर, सुरत = सु + रत।

WBBSE Class 6 Hindi तिवारी का तोता Summary

जीवन-परिचय :

सुदर्शन का जन्म सियालकोट में सन् 1896 ई० में हुआ था। सुदर्शन का पूरा नाम बदरीनाथ था। बी० ए० तक की शिक्षा प्राप्त कर आपने कहानियाँ लिखिनी शुरू की। इनकी कहानियाँ भारतीय आदर्श का संदेश होती है। इनकी भाषा सहज एवं सरल है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – राम कुटिया, पुष्पलता, सुप्रात, तोर्थयात्रा, विज्ञान वाटिका आदि हैं। करीब 1950 से 1967 ई० तक आपने हिन्दी की सेवा की। सन् 1967 के अन्त में इनकी मृत्यु हुई। ये प्रेमचंद के समकालीन कथाकार थे।

कहानी का सारांश – काशी की पवित्र नगरी में पंडित तिवारी रहते थे। उनके पास एक तोता था। तोता तिवारी के पिंजरे में रहता था। तिवारी का दिया हुआ खाना खाता था और तिवारी की बोली में घर वालों से बातें करता था। एक दिन एक जंगली तोता पिंजरे के सामने आकर उससे कहा कि तुम्हारी सूरत तो हमसे मिलती है पर स्वभाव नहीं मिलता। तुम्हे किसी ने कैद कर रखा है। पिंजरे के तोते ने उत्तर दिया कि तू जंगल में रहता है और मैं इस मजबूत मकान में रहता हूँ। जंगली तोते ने उसे धिक्कारते हुए कहा कि तुम्हारी देह तथा आत्मा कैद में है। मैं यही बताने आया हूँ। तू खुले आकाश में विचरण नहीं कर सकता। तू ने कभी जीवन का आनंद नहीं प्राप्त किए। तुम्हें अपने मालिक की इच्छा के अनुसार जीना है । पिंजरे का तोता अपने मालिक की प्रशंसा करने लगा। मालिक मुझे खिलाता-पिलाता है, बिल्लियों के प्रहार से बचाता है। मैं पिंजरे में इच्छा से घूम सकता हूँ। पिंजरे में मेरा राज है। मैं गुलाम नहीं हूँ।

जंगल के तोते ने उसे समझाया कि किसी दिन मालिक की बात न सुनने पर, उसकी बोली में जवाब न देने पर भयंकर परिणाम हो सकता है। पिंजरे का तोता निश्चय किया कि आज वह किसी की बात न सुनेगा। किसी की बोली न बोलकर सिर्फ अपनी बोली बोलेगा। तिवारी का बेटा आकर तोते से बातें करने लगा। पर आज तोता उसकी बोली में उसकी बात का जवाब न दिया। तिवारी के बेटे ने लोहे की सींक लेकर तोते को बार-बार चुभोई पर तोता घाव खाता रहा किन्तु उसकी बोली में उत्तर न दिया। परिणामस्वरूप घाव सहकर तोता मर गया। दूसरे दिन जंगल का तोता आकर देखा और कहा कि गुलाम अपने मालिक की बात नहीं सुनता है-तो उसका यही हाल होता है। मरे हुए तोते की आत्मा ने जंगल के तोते को चूरी देने की बात कही, क्योंकि उसने एक कैदी को छुड़ाया और मुर्दे को जिन्दा किया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 3 तिवारी का तोता

शब्दार्थ :

  • सूरत – रूप, आकृति।
  • आजादी – स्वतंत्रता।
  • कैद – बंधन, कारावास।
  • तारीफ – प्रशंसा। फर्क अन्तर।
  • देह – शरीर।
  • लानत – धिक्कार।
  • अभागा – बुरी किस्मत वाला।
  • मुर्दा – मृत।
  • अख्तियार – वशं।
  • टटोलना – जाँचना, परखना।
  • तले – नीचे।
  • दुर्भाग्य – बद किस्मती।
  • मेहरबान – कृपालु।
  • मजे – अनंद।
  • खुश – किस्मती भाग्यशाली।
  • मुसीबत – संकट ।
  • गुलाम – पराधीन।
  • प्रतिज्ञा – प्रण।
  • चूरी – मीठी चीज।
  • कैदी – गुलाम।
  • चुभाना – गड़ाना, धँसाना

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Chapter 2 कश्मीर to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – कश्मीर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कश्मीर हमारे देश का क्या है ?
(क) संकट
(ख) मुकुट
(ग) राजधानी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) मुकुट।

प्रश्न 2.
कश्मीर की घाटी में बहने वाली नदी है –
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) झेलम
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) झेलम।

प्रश्न 3.
अछबल क्या है।
(क) नदी
(ख) तालाब
(ग) झरना
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) झरना।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 4.
अवन्ति वर्मा ने किस मंदिर का निर्माण करवाया था ?
(क) शिव
(ख) गणेश
(ग) विष्णु
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) विष्णु।

प्रश्न 5.
मुगल सम्राटों ने किसे अपना विश्राम शिविर बनाया था ?
(क) नैनीताल
(ख) मंसूरी
(ग) कश्मीर
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) कश्मीर।

प्रश्न 6.
राजतरंगिणी के लेखक हैं –
(क) कालिदास
(ख) कल्हण
(ग) मुद्राराक्षस
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) कल्हण।

प्रश्न 7.
‘कश्मीर’ निबंध के लेखक हैं –
(क) रामचंद्र शुक्ल
(ख) रामकुमार वर्मा
(ग) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(घ) रामविलास शर्मा
उत्तर :
(ख) रामकुमार वर्मा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 8.
डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) ग्वालियर
(ख) सागर
(ग) नागपुर
(घ) भोपाल
उत्तर :
(ख) सागर।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कश्मीर को हमारे कवियों ने क्या कहा है?
उत्तर :
कश्मीर को हमारे कवियों ने स्वर्ग का एक कोना कहा है।

प्रश्न 2.
जम्मू और कश्मीर राज्य का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
जम्मू और कश्मीर राज्य का क्षेत्रफल लग भग पचास हजार वर्गमील है।

प्रश्न 3.
राजतरंगिणी के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
राजतरंगिणी के लेखक महाकवि कल्हण हैं।

प्रश्न 4.
पहलगाँव किस घाटी में स्थित है ?
उत्तर :
पहलगाँव लिदर की घाटी में स्थित है ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 5.
झेलम के उत्तरी भाग में स्थित झरने का क्या नाम है ?
उत्तर :
झेलम के उत्तरी भाग में स्थित झरने का नाम अछबल झरना है।

प्रश्न 6.
डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ॰ रामकुमार वर्मा का जन्म 15 सितंबर, 1905 ई० में मध्यपद्रदेश के सागर जिला में हुआ था।

प्रश्न 7.
कश्मीर का वरदान किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
झेलम नदी को कश्मीर का वरदान कहा जाता है।

प्रश्न 8.
कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध झीलों के नाम लिखें।
उत्तर :
कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध झीलों में वुलर झील एवं मानसबल झील प्रमुख हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 9.
मेवों का देश किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
कश्मीर को मेवों का देश कहा जाता है ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
मुगल बादशाह जहाँगीर ने कश्मीर के संबंध में क्या कहा है ?
उत्तर :
मुगल बादशाह जहाँगीर ने कश्मीर के संबंध में कहा है कि यदि जमीन पर बहिश्त (स्वर्ग) है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है।

प्रश्न 2.
राजतरंगिणी में क्या वर्णित है ?
उत्तर :
राजतरंगिणी में कश्मीर के इतिहास का वर्णन है। कश्मीर के ऐतिहासिक वैभव का खंडहर इसमें दृष्टिगत होता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 3.
मार्तण्ड मंदिर का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मार्तण्ड मंदिर के नीचे से सरोवरों के छोटे-बड़े आकार की बड़ी कलात्मक कृतियाँ बनी हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानों एक बड़े थाल में कलाकंद के छोटे-बड़े टुकड़े तराशे गए हैं। इन कुंडों में मछलियाँ स्वच्छंदता से विचरण करती हैं। इन्हें देख कर मन मुग्ध हो जाता है।

प्रश्न 4.
अछबल झरने की सुंदरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अछबल झरने को देखकर ऐसा लगता है मानों सौन्दर्य और संगीत तरल होकर निर्झर रूप से बह रहे हैं। इस झरने की सुंदरता पर मुग्ध होक़र सम्राट जहाँगीर ने यहाँ एक सुंदर बगीचा बनवाया था। भूमि के कोड़ से तीन धाराएँ ऊपर उभरती हैं, मानों ये जलधाराएँ भूमि की नाभि से ऊपर तक जाने वाली त्रिवली रेखाएँ हैं।

प्रश्न 5.
कोकड़ नाग के बारे में आपको क्या ज्ञात हुआ है?
उत्तर :
कुक्कुट शब्द का कश्मीरी रूप कोकड़ है। यहाँ भूमि के अनेक स्थानों से जल-धारा प्रवाहित होती है। लगता है जल आँख-मिचौनी खेल रहा है। कितने स्थानों से जल की पतली-पतली धाराएँ निकल कर स्थूल बन जाती है। अत्यंत शीतल निर्मल जल तीव्र गति से बहता है।

प्रश्न 6.
कश्मीर को धरती का स्वर्ग क्यों कहा गया है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा गया है। यहाँ के लहलहाते खेत, कल-कल की ध्वनि करते झरने, गाती हुई नदियाँ, मनोरम प्राकृतिक दृश्य मन को मुग्ध कर देते हैं। इस मधुर प्रदेश में जीवन मुस्कान से भर उठता है। ईश्वर ने प्रकृति के सौन्दर्य से इसे अनेक प्रकार से सँवारा है। उपत्यकाएँ, हिमशैल, बादल, पुष्पराशि और वृक्ष-राशि ने कश्मीर की सुषमा को सौन्दर्य के एक नवीन स्वर्ग में आसीन कर दिया है। कवियों ने इसे स्वर्ग का एक कोना कहा है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 7.
जब यात्री गण्र उस मार्ग पर चलते हैं तो ऐसा लगता है जैसे किसी विश्वामित्र की शक्ति से अनेक त्रिशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं – इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
चन्दनबाड़ी जाते समय दूर तक रास्ता साफ-सुथरा और सीधा है फिर पहाड़ों के निकट चढ़ाई है। लेखक ने पहाड़ी पर चढ़ते यात्रियों की तुलना स्वर्ग की चढ़ाई करने वाले त्रिशंकु से की है। विश्वामित्र ॠषि ने अपने तपोबल की शक्ति से त्रिशंकु को स्वर्ग भेजने का प्रयल् किया था। इस पहाड़ी पर चढ़ने वाले यात्री ऐसे लगते थे मानों विशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य तथा धरती की रमणीयता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
कश्मीर की नैसर्गिक सुषमा निराली है। ईश्वर ने प्रकृति के सौदर्य से इसे अनेक प्रकार से सजाया है। उपत्यकाएँ, हिमशैल, पुष्पराशि, वृक्षराशि ने कश्मीर की सुषमा को सौन्दर्य के एक नवीन स्वर्ग में आसीन कर दिया है। शीतल, मंद और सुगंधित समीर हर समय और हर स्थान पर बहती रहती है। वृक्षों के हरे-हरे पत्ते, वाटिकाओं में रंगबिरंगे पुष्ष, उन पर भ्रमरों की गुंजार चित्त को मोहित करती हैं।

सम्राट जहाँगीर ने कहा था यदि धरती पर स्वर्ग है तो यहीं है। वसन्त ॠतु में सारा पठार फूलों का एक विशाल साप्राज्य प्रतीत होता है, झेलम नदी के कारण सारे भू भाग के झरनों, लहरों तथा झीलों का जाल बिछा हुआ है। कश्मीर की घाटी के बीच बहने वाली झेलम नदी तुलर झील, मान सबल झील तथा चन्दनबाड़ी इस प्रदेश की शोभा है। हरे -भरे खेत केसर की क्यारियाँ, सेव, अंगूर, सुबार्नी आदि मेवे इस घाटी के उपज की विशेषताएँ हैं। इसीलिए कश्मीर को मेवों का देश कहा जाता है ।

सफेद वृक्षों की घनी छाया, चिनार वृक्ष वनउपवन की शोभा बढ़ाते हैं। झेलम के उत्तरी भाग में अछबल का झरना है। मटन स्थान में मार्तण्ड का मंदिर है। यहाँ नीचे सरोवरों के छोटे-बड़े आकार की कलात्मक आकृतियाँ हैं। अछबल में संगीत और सौन्दर्य का रूप साकार हो उठता है। यहाँ सम्माट जहाँगीर ने एक बगीचा बनवाया था। विशाल वृक्ष यहाँ सौन्दर्य के प्रहरी प्रतीत होते हैं। कोकड़ानाग में अनेक स्थानों से जलधारा प्रवाहित होती है। कितने स्थानों से जल की पतली-पतली धाराएँ निकलकर स्थूल बन जाती हैं। बहता हुआ जल पत्थरों से अठखेलियाँ करता हुआ हँस पड़ता है।

लिदर की घाटी में पहाड़ियों के नीचे छोटी सी बस्ती पहलगाँव है । दाहिनी ओर हटकर लिदर नदी है। यह अपने अनवरत नाद में प्रकृति के सौन्दर्य का जयघोष करती है । तीनों ओर गौरव से मस्तक उठाए हुए गिरि-भृृर हैं। इनके कोने में कभी-कभी हिम राशि स्थिर हो जाती है। चन्दनबाड़ी यहाँ से दस मील दूर है। पहाड़ों के निकट चढ़ाई पर चढ़ते हुए यात्री गण ऐसे लगते हैं मानों अनेक त्रिशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं। पहाड़ियों के बीच की समतल भूमि पर बर्फ के बड़े-बड़े मैदान बन गए हैं। ऊँची पहाड़ियों पर भूर्ज-पत्र के अनेक वृक्ष हैं। कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। कश्मीर की नैसर्गिक सुषमा मन में आनंद की धारा बहा देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

भाषा-बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए : –

सौन्दर्य – कश्मीर का सौन्दर्य मन को मोह लेता है।
कश्मीर – कश्मीर हमारे देश का मुकुट है।
झेलम – झेलम के उत्तरी भाग में अछबल झरना है।
राजतरंगिणी – कवि कल्हण ने राजतरंगिणी की रचना की है।
कलात्मक – मंदिर में अनेक कलात्मक आकृतियाँ हैं।

2. विलोम शब्द लिखें –

मानव – दानव
महान – तुच्छ
स्वर्ग – नरक
समाट – प्रजा
आयात – निर्यात

WBBSE Class 6 Hindi कश्मीर Summary

जीवन-परिचय :

रामकुमार वर्मा का जन्म सन् 1905 ई。 में मध्य प्रदेश के सागर जनपद में हुआ था। वर्मा बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार हैं। वे कवि, कथाकार, आलोचक तथा निबंधकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी प्रसिद्ध काव्य रचनाएँएकलव्य, चित्तौड़ की चिता, निशीथ आदि हैं। इनके प्रसिद्ध एकांकी संग्रह-पृथ्वीराज की आँखें, रेशमी टाई आदि हैं। वर्मा प्रयाग विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्रध्यापक तथा विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।

पाठ का सारांश – प्रस्तुत पाठ में लेखक ने कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुपम चिर्रण किया है। फूलों से परिपूर्ण कश्मीर की धरती सौन्दर्य का आगार है। देश का मुकुट कश्मीर की सुषमा को देखकर ही कवियों ने इसे धरती का स्वर्ग कहा है। जम्मू और कश्मीर का क्षेत्रफल लगभग पचास हजार वर्ग मील है। सारा पठार फूलों से परिपूर्ण अत्यंत मोहक लगता है। झेलम नदी, वुलर झील, मानसबल झील, चंदनबाड़ी आदि कश्मीर की शेभा है। झेलम के उत्तरी भाग में अछबल का झरना है। राजतरंगिणी में कश्मीर के ऐतिहासिक वैभव के खंडहर दृष्टिगत होते हैं। अवन्ति वर्मा के द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर के खंडहर आज बिखरे पड़े हैं। मार्तण्ड मंदिर की कलात्मक आकृतियाँ आकर्षक है। अछबल झरने की सुन्दरता पर लोग मुग्ध हो जाते हैं। कोंकड़नाग में भूमि के अनेक स्थानों से जलधारा प्रवाहित होती है।

लिदर की घाटी में पहलगाँव स्थित है। लिदर नदी अपने नाद से प्रकृति के सौन्दर्य का जयघोष करती है। चन्दनबाड़ी यहाँ से दस मील दूर है। पहाड़ों के निकट की चढ़ाई स्वर्ग की चढ़ाई के समान प्रतीत होती है।

ऊँची पहाड़ियों पर भूर्ज-पत्र के अनेक वृक्ष हैं। इन्हीं वृक्षों के छालों पर हमारे महर्षियों ने अमर साहित्य की रचना की है। वस्तुत: कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। उसकी सुरक्षा और उसके प्रति श्रद्धा-समर्पण प्रत्येक भारतीय का कर्त्तव्य है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

शब्दार्थ :

  • मुकुट – ताज।
  • सँवारा – सजाया।
  • सुषमा – सुंदरता।
  • सर्पिल – साँप जैसा, टेढ़ा।
  • मनोरम – सुंदर।
  • कलकल – मधुर शब्द।
  • निनाद – शब्द, आवाज।
  • स्थूलकाय – पुष्ट शरीर, विशाल शरीर।
  • शिविर – छावनी, डेरा।
  • स्मृतियाँ – यादें।
  • सर्पण – अर्पण।
  • विपुलता – अधिकता।
  • प्रशस्त – मजबूत।
  • मेहरबान – कृपालु ।
  • खुश किस्मती भाग्यशाली।
  • उपत्यकाएँ – घाटी, पर्वत के पास की भूमि।
  • वरदान – इष्ट वस्तु की प्राप्ति।
  • खंडहर – भग्नावशेष।
  • वैभव – धन-संपत्ति।
  • उत्कीर्णित – खुदे हुए।
  • विर्गलित – द्रवित।
  • अवसाद – विषाद, दीनता।
  • भंगिमा – हाव-भाव।
  • अठखेलियाँ – ठिठोली, चुलबुलापन।
  • अनवरत – निरंतर, लगातार।
  • फेनाज्ज्वल – उज्ज्वल फेन।
  • हिम-शैल – बर्फीले पहाड़।
  • उत्तरीय – चादर।
  • मार्तण्ड – सूर्य।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – दो भाई

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कलावती के कितने बेटे थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 2.
कलावती के दोनों बेटों का नाम था –
(क) माधव और जाधव
(ख) माधव और राघव
(ग) माधव और केदार
(घ) केदार और जाधव
उत्तर :
(ग) माधव और केदार

प्रश्न 3.
कलावती के दोनों बहुओं का नाम था –
(क) गीता और सीता
(ख) चंपा और श्यामा
(ग) गीता और चंपा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चंपा और श्यामा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 4.
केदार क्या पढ़ रहे थे?
(क) गीता
(ख) रामायण
(ग) महाभारत
(घ) कुरान
उत्तर :
(ख) रामायण।

प्रश्न 5.
केदार की बुद्धि थी –
(क) सुस्त
(ख) चुस्त
(ग) मंद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चुस्त ।

प्रश्न 6.
प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था ?
(क) प्रेम प्रकाश.
(ख) धनपतराय
(ग) नबाब राय
(घ) मुंशीराय
उत्तर :
(ख) धनपतराय ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 7.
प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1880 में
(ख) सन् 1882 में
(ग) सन् 1884 में
(घ) सन् 1886 में
उत्तर :
(क) सन् 1880 में ।

प्रश्न 8.
प्रेमचंद के जन्म स्थान का नाम क्या था?
(क) सोरों
(ख) लमही
(ग) विसपी
(घ) छतरपुर
उत्तर :
(ख) लमही ।

प्रश्न 9.
प्रेमचंद के प्यार का नाम क्या था?
(क) नबाबराय
(ख) राम
(ग) धनपतराय
(घ) अजबराय
उत्तर :
(क) नबाबराय ।

प्रश्न 10.
प्रेमचंद के पिता का नाम क्या था?
(क) शिवचंद्रराय
(ख) अजायब राय
(ग) सुंघनीसाहू
(घ) श्रीरामचंद्र
उत्तर :
(ख) अजायब राय ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 11.
प्रेमचंद् की माता का नाम क्या था ?
(क) आनंदी देवी
(ख) लक्ष्मी देवी
(ग) राधा देवी
(घ) मंगला देवी
उत्तर :
(क) आनंदी देवी ।

प्रश्न 12.
रेहन लिखने वाला कौन था ?
(क) केदार
(ख) माधव
(ग) शिवदत्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) माधव।

प्रश्न 13.
घर का रेहन कितने रुपये में लिखवाया गया ?
(क) पचास
(ख) साठ
(ग) अस्सी .
(घ) नब्बे
उत्तर :
(ग) अस्सी।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
माधव और केदार में बड़ा भाई कौन था ?
उत्तर :
माधव और केदार में बड़ा भाई केदार था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 2.
माधव के कितने पुत्र एवं पुत्रियाँ थीं ?
उत्तर :
माधव के चार पुत्र एवं चार पुत्रियाँ थीं ।

प्रश्न 3.
माधव को किसकी लालसा थी ?
उत्तर :
माधव को धन-संपत्ति की लालसा थी।

प्रश्न 4.
केदार को किसकी अभिलाषा थी ?
उत्तर :
केदार को संतान की अभिलाषा थी।

प्रश्न 5.
बेचारी चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में क्यों पिसना पड़ता था ?
उत्तर :
श्यामा अपने लड़कों को संवारने-सुधारने में लगी रहती थी। उसे घरेलू काम से फुरसत नहीं मिलती थी। इस कारण चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में पिसना पड़ता था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 6.
चम्पा और श्यामा का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर :
चम्पा कार्यकुशल और श्यामा शांत स्वभाव की थी।

प्रश्न 7.
रेहन लिखवाने के लिए किन्हें बुलाया गया था ?
उत्तर :
रेहन लिखवाने के लिए गाँव के मुखिया और नम्बरदार को बुलाया गया था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कलावती का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर :
कलावती का स्वभाव बड़ा ही उदार, कोमल तथा वात्सल्य से भरा हुआ था। उसके हृदय में प्रेम तथा नेत्रों में गर्व था। दोनों बेटों के स्नेह को देखकर वह फूली नहीं समाती थी। बेटों को गोद में खेलते देख कर उसके नेत्रों में अभिमान, हृदय में गर्व, उत्साह तथा उमंग का भाव था। वह दोनों बहुओं में सामंजस्य बैठाना चाहती थी। केदार की स्वार्थपरता को देखकर उसका हृदय शोक-संताप से भर उठा।

प्रश्न 2.
कलावती के दोनों बेटे वैमनस्य के शिकार कैसे हो गए ?
उत्तर :
दोनों बेटों की बहुओं के स्वभाव में भिन्नता थी। केदार को कोई संतान न हुई। माधव को चार पुत्र एवं चार पुत्रियाँ हुई। केदार को संतान की लालसा तथा माधव को धन-संपत्ति की चाह थी। भाग्य की इस कूटनीति ने धीरे-धीरे दोनों भाइयों में द्वेष का रूप धारण कर लिया। इस प्रकार दोनों वैमनस्य के शिकार हो गए।

प्रश्न 3.
माधव एवं केदार की पतियाँ कैसी थीं ?
उत्तर :
माधव की पत्नी सॉवली-सलोनी अत्यंत रूपवती थी। वह मधुर बोलनेवाली, सुंदर शीलवाली तथा शांत स्वभाव की थी। केदार की पत्नी अधिक बोलनेवाली तथा चंचल स्वभाव की थी। वह कार्य कुशल थी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 4.
माधव को केदार ने किस एवज में पैसे दिए ?
उत्तर :
माधव ने अपनी कन्या के गहने बंधक रखकर दो साल का बकाया लगान चुका दिया। सवा सौ रुपये में बंधक रखे गहनों को छुड़ाने के लिए माधव केदार के पास गया था। केदार ने रेहन लिखा कर माधव को पैसे दिए।

प्रश्न 5.
केदार के व्यवहार से कलावती दु:खी क्यों थी ?
उत्तर :
कलावती माँ थी। दोनों बेटे उसके हददय के टुकड़े थे। दोनों को अपनी छाती का दूध पिलाकर उसने बड़ा किया था। दोनों बेटों के प्रति उसके दिल में असीम स्नेह का भाव था। माधव की शोचनीय आर्थिक दशा पर वह क्षुब्ध थी। केदार ने माधव की सवा सौ रुपये के लिए उसका घर रेहन लिखा लिया। माँ ने जब यह सुना तो वह अत्यंत दु:खी हो गई। उसने सोचा कि क्या केदार बिना रेहन लिखाए छोटे भाई की मदद नहीं कर सकता था।

प्रश्न 6.
‘हृदय चाहे रोए पर होंठ हँसते रहें’ कहने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
माधव की आर्थिक दशा शोचनीय थी। आमदनी कम थी पर खर्च अधिक था। कुल की प्रतिष्ठा का भी निर्वाह करना था। इसलिए माधव अपने मन की व्यथा को मन में छिपा कर रखना चाहता था। उसके दिल में अपनी दरिद्रता का दर्द था, वह उस दर्द को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहता था। मन में भले पीड़ा सहे पर उस दर्द को वाणी से प्रकट नहीं करता था। हमेशा हँसता तथा प्रसन्नता प्रकट करता था।

प्रश्न 7.
इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भाई-भाई के बीच परिवार की तरह स्नेह एवं ममत्व का व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख एवं दु:ख में साथ देना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘दो भाई’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? इस कहानी के द्वारा लेखक ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर :
दो भाई कहानी द्वारा लेखक ने मानव समाज को यह शिक्षा दी है कि भाई-भाई के बीच कुटुम्ब-सा व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख-दु:ख में साथ देना चाहिए। कहानी में केदार और माधव दोनों भाइयों के उदाहरण से लेखक ने इस कटु सत्य को उजागर किया है कि संसार में स्वार्थ आदमी को संकीर्ण बना देता है अपने तथा परायेपन की भावना भाई-भाई में नफरत का भाव पैदा कर देती है। बचपन में दोनों भाइयों में कितना प्रेम था, कितनी सौम्यता थी, पर सयाना तथा समझदार होते ही सारी सरसता समाप्त हो गई। एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना पैदा हो गई। दूसरे के अभाव को अपने स्वार्थ पूर्ति तथा आनन्द का साधन माना जाने लगा।

भाई-भाई में अविश्वास उत्पन्न हो गया। एक माँ के गर्भ से उत्पन्न होने वाले, सहोदर कहे जाने वाले सगे भाई भी इतने स्वार्थी तथा लोलुप हो जाते हैं कि मनुष्यता भी लजाने लगती है। केदार ने अपने सहोदर भाई को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए उसे 80 रु० देने के लिए उससे उसका घर रेहन लिखवा लेता है। गाँव के मुखिया, नंबरदार तथा मुख्तार भी केदार के काम से विस्मित हो गए। लेखक ने इस भावना और संकीर्णता को निंदनीय बतलाया है। संसार में सहोदर भाई मिलना कठिन है। इसलिए कभी भी भाई का अपमान करना, उसे नफरत की दृष्टि से देखना मानवता के खिलाफ है।

हमारी भारतीय संस्कृति भ्रातृ पेम की, भाई-भाई के बीच मधुर व्यवहार की शिक्षा देती है। भाई के सुख-दुःख को अपना समझना एक दूसरे के प्रति हमदर्दी दिखलाना उचित कर्तुव्य है। भाई के दु:ख को अपना दु:ख समझ कर उसे दूर करने का प्रयल्ल करना चाहिए। उसे अपना अभिन्न अंग समझना चाहिए। जहाँ भाइयों में परस्पर मेल, सद्भावना एवं सहयोग की भावना है वहीं सुख, शांति तथा संतोष का वातावरण बना रहता है । जहाँ नफरत, घृणा, विद्वेष का भाव है वहाँ सुख शांति नहीं घुटन और पीड़ा का साम्राज्य है। अत: भाई-भाई के बीच मधुर स्नेह-पूर्ण संबंध बनाकर गृहस्थ जीवन को आनंदमय बना लेना चहिए। लेखक ने यही संदेश दिया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 2.
‘दो भाई’ कहानी के आधार पर माँ कलावती की पीड़ा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कलावती का हदय माता का हृदय था। वह ममत्व तथा सेह से परिपूर्ण था। उसके दोनों बेटे- केदार और माधव उसके हदय के टुकड़े थे। दोनों बेटों को जाँघों पर बैठाकर दूध और रोटी खिलाती। उन्हें पुचकार कर बुलाती और बड़े-बड़े कौर खिलाती। उसके हूदय में प्रेम की उमंग और नेत्रों में गर्व की झलक थी। दोनों भाई साथ-साथ स्नेहपूर्वक स्कूल जाते, साथ-साथ खाते और साथ ही रहते थे। दोनों को निहार कर माँ निहाल हो जाती थी।

दोनों भाइयों का विवाह हो गया। दोनों भाई अपनी पतियों पर मुग्ध थे, पर माँ कलावती का मन किसी से न मिला। दोनों से प्रसन्न और दोनों से अप्रसन्न थी। दोनों भाई सयाने और समझदार हो गए। माधव को धन की लालसा थी और केदार को संतान की। अब दोनों भाइयों में धीरे धीरे द्वेष का भाव उत्पन्न होने लगा। परिणामस्वरूप चंपा और श्यामा दोनों बहुएँ अलग हो गई। उस दिन एक ही घर में दो चूल्हे जले। कलावती विवश थी, वह सारे दिनरोती रही। दोनों बेटे माँ की तनिक परवाह न किए।

दोनों भाई कभी एक ही पलथी पर बैठते थे, एक ही थाली में खाते थे और एक ही छाती से दूध पीते थे, उन्हें अब एक घर में एक गाँव में रहना कठिन हो गया। अब उनमें मातृ स्नेह न था। केवल भाई के नाम की लाज थी, लड़कियों की शादी में खर्च के कारण माधव की दशा अत्यंत दयनीय बन गई। विवश होकर उसे बड़े भाई केदार के पास जाना पड़ा। केदार और चंपा को अवसर मिल गया श्यामा और माधव को नीचा दिखाने का। एक गोद में खेलने वाले, एक छाती में दूध पीने वाले आज इतने बेगाने हो गए। केदार ने माधव का घर अपने नाम रेहन लिखाकर उसे रुपये दिए। इस घटना से सभी लोग चकित हो गए। भाई-भाई के बीच इतना बड़ा अविश्वास। बूढ़ी माँ कलवाती ने सुना तो उसकी आँखों से आँसू की नदी उमड़ आई।

उसने आकाश की ओर देखकर अपना माथा ठोंक लिया। उसे दोनों बेटों की बचपन की याद आई। उस समय माँ के नेत्रों में कितना अभिमान था। हुदय में कितनी उमंग और कितना उत्साह था। आज लाचार बूढ़ी माँ के नेत्रों में लज्जा और हृदय में शोक-संताप था। उसने पृथ्वी को देखकर, अपने हृदय की गहरी पीड़ा से क्रुब्ध होकर कातर स्वर में ईश्वर को संबोधित कर कहने लगी कि ऐसे ही पुत्रों को मेरी कोख में जन्म लेना था। आज दोनों बेटों के जन्म को वरदान नहीं बल्कि अभिशाप समझने लगी।

भाषा-बोध :

(क) संज्ञा – सूर्य, रोटी, माधव, पाठशाला, कुशलता।
सर्वनाम – वह, उसे, अपना, मेरा, उसका।
विशेषण – चतुर, सलोनी, मलीन, खुश, प्यारी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखें।
प्रसन्न – खुश, संतुष्ट, हर्षित ।
मुरझाया – कुम्हलाया, सुस्त, उदास।
अभिलाषा – लालसा, इच्छा, चाह, कामना।
छोटा – लघु, न्यून, उम्र में कम।
भाई – भाता, भैया, बंधु।

WBBSE Class 6 Hindi दो भाई Summary

जीवन-परिचय :

इनका असली नाम मुंशी धनपतराय प्रेमचंद है । इनका जन्म सन् 1880 ई० में वाराणसी जनपद के लमही नामक गाँव में हुआ था। ये हिन्दी साहित्य जगत् में कथा सम्राट माने जाते हैं। इनका जीवन अनेक कठिनाइयों में बीता। इनकी रचनाओं में कृत्रिमता नहीं है। इनकी भाषा तथा शैली में एक अनोखी सजीवता तथा चुस्ती पाई जाती है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – सेवासदन, कर्मभूमि, गबन, गोदान, प्रतिज्ञा आदि हैं। इनकी कहानियाँ ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में प्रकाशित हैं। गोदान हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। इनकी मृत्यु सन् 1936 में हुई।

कहानी का सारांश – माँ कलावती अपने दोनों बेटों – केदार व माधव को जाँघों पर बैठा कर दूध-रोटी खिलाती, प्यार से पुचकारती थी । दोनों बेटे उसकी आँखों के तारे थे। दोनों में बड़ा स्नेह था। दोनों बेटों को निहारकर कलावती गर्व और प्रेम से भर जाती थी। दोनों साथ-साथ पाठशाला जाते, साथ-साथ खाते और साथ-साथ रहते थे। दोनों भाई बड़े हुए दोनों का विवाह हुआ। बड़े बेटे केदार की बहू चंपा चंचल स्वभाव की थी। छोटे भाई माधव की वधू श्यामा सांवली, सुन्दर एवं शान्त रूपराशि की खान थी। कलावती का मान किसी से न मिला। केदार को संतान की अभिलाषा थी। माधव को धन संपत्ति की। माधव को चार पुत्र तथा चार पुत्रियाँ थीं ।

दोनों भाई समझदार और बुद्धिमान हो गए। दोनों में धीरे-धीरे वैर-भाव पनपने लगा। दोनों भाई अलग हो गए। एक ही घर में दो चूल्हे जले। कलावती सारे दिन रोती रही। माँ के दिल के टुकड़े माँ के सामने ही अलग हो गए । उन्हें अब अपने पराये की पहचान हो गई। माधव की दशा शोचनीय थी। खर्च अधिक था, आमदनी कम। दो कन्याओं के विवाह में जमीन बिक गई। तीसरी लड़की के विवाह में घर में जो कुछ था समाप्त हो गया।

कन्या का गौना भी न हुआ था कि माधव पर दो साल के बकाया लगान का वारंट आ गया। कन्या के गहने बंधक रख कर उसका समाधान किया। चंपा ने नातेदारों को इसकी सूचना दे दी। दूसरे ही दिन एक नाई और दो ब्राह्मण माधव के दरवाजे पर आ गए। अब माधव अधीर तथा बेचैन हो उठा, कोई दूसरा रास्ता न देख, विवश था। केदार के सामने सहायता का प्रस्ताव रखा।

केदार और चंपा दोनों को अच्छा मन चाहा मौका मिल गया। चंपा ने कहा कि दोनों कोठरी पर कोई महाजन कदाचीत ही रुपये दे । केदार ने एक महाजन से अपनी जान-पहचान के बारे में बतलाया पर कोई महाजन सवा सौ रुपये नहीं दे सकता था । अंत में मामला तय हो गया। माधव की इच्छा पूरी नहीं हुई। केदार और चंपा दोनों की मनोकामना पूरी हुई। चंपा ने सोचा कि अब श्यामा रानी इस घर में कैसे शान से रहेंगी। सबेरे केदार के द्वार पर मुखिया, नंबरदार, मुंशी दातादयाल सब उपस्थित हुए। केदार और चंपा प्रसन्न थे। माधव विषाद से भरा हुआ था।

अभी तक माधव तथा आए हुए लोग समझते थे कि भाई की सहायता के लिए केदार किसी महाजन से रुपये दिला रहे हैं । पर रेहन का कागज लिखते समय केदार ने लिखने वाले का नाम माधव तथा लिखाने वाले का नाम केदार बतलाया तो सभी विस्मित हो गए। माधव चकित होकर बड़े भाई की ओर निहारने लगा। सभी ने सोचा – भाई-भाईके बीच इतना अविश्वास। सभी को आश्चर्य हुआ।

बूढ़ी माँ ने सुना तो उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उसने आकाश की ओर देखकर माथा ठोंक लिया। उसे उनके बचपन के दिनों की याद आई, जब दोनों उसकी गोद में उछल-कूद कर दूध रोटी खाते। उस समय माँ के नेत्रों में कितना अभिमान था, उमंग थी, उत्साह था, पर आज नयनों में लज्जा तथा हृदय में शोक-संताप है। पृथ्वी की ओर देख कर कातर स्वर में कहा है नारायण! क्या ऐसे पुत्रों को मेरी कोख से जन्म लेना था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

शब्दार्थ :

  • सुहावनी – सुंदर।
  • अमित भाषिणी – बहुत अधिक बोलने वाली।
  • हृदयोद्गार – मन का उबाल।
  • सलोनी – सुंदर ।
  • घाम – धूप।
  • मृदु भाषिणी – मधुर बोलने वाली।
  • कौर – निवाला।
  • रीझे – प्रसन्न हुए।
  • उमंग – उत्साह।
  • वधू – बहू। नेत्रों – आँखो।
  • गिरो – बंदक (बंधक) ।
  • व्यर्थ – बेकार।
  • विवश – लाचार।
  • व्यय – खर्च।
  • जायदाद – संपत्ति।
  • कुत्सित – बुरा।
  • मर्म भेदी – हदय में चुभने वाली।
  • लालसा – इच्छा।
  • सेंत – मुफ्त।
  • अभिलाषा – इच्छा।
  • सराहना प्रशंसा।
  • वैमनस्य – शत्रुता।
  • निपुण – चतुर।
  • रमणी – स्री।
  • बेगाने – पराये।
  • कातर – व्याकुल, विवश।
  • संताप – कष्ट।
  • गँवार – अनपढ़।
  • गवई – गाँव का।
  • छटा – शोभा।
  • मर्यादा – प्रतिष्ठा।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 8 माँ to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – माँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
माँ किसका फूल बिखरा देती है?
(क) कमल का
(ख) ममता का
(ग) क्रूरता का
(घ) घृणा का
उत्तर :
(ख) ममता का

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 2.
रचनाकार ने किसे परिवार और समाज से ऊपर माना है?
(क) पिता को
(ख) भाई-भतीजे को
(ग) सास-ससुर को
(घ) माँ को
उत्तर :
(घ) माँ को

प्रश्न 3.
‘माँ’ किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) कहानी
(ग) नाटक
(घ) एकांकी
उत्तर :
(क) कविता

प्रश्न 4.
‘माँ’ कविता किसने लिखी है ?
(क) ममता कालिया
(ख) रंजना श्रीवास्तव
(ग) मैन्रेयी पुष्पा
(घ) अलका सरावगी
उत्तर :
(ख) रंजना श्रीवास्तव

प्रश्न 5.
रंजना श्रीवास्तव का जन्म कब हुआ था ?
(क) 9 सितंबर 1959 ई०
(ख) 15 सितंबर 1969 ई०
(ग) 21 सितंबर 1949 ई०
(घ) 15 सितंबर 1939 ई०
उत्तर :
(क) 9 सितंबर 1959 ई०

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 6.
रंजना श्रीवास्तव का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) गोरखपुर
(ख) जौनपुर
(ग) आजमगद़
(घ) गाजीपुर
उत्तर :
(घ) गाजीपुर

प्रश्न 7.
कौन ममता की प्रतिमूर्ति होती है ?
(क) कवि
(ख) माँ
(ग) समाज
(घ) सास
उत्तर :
(ख) माँ

प्रश्न 8.
माँ किसकी डाँट-फटकार सहती है ?
(क) बच्चों का
(ख) समाज का
(ग) पिता का
(घ) कवि का
उत्तर :
(ग) पिता का

प्रश्न 9.
कौन ‘वंदनीय’ और ‘अतुलनीय’ है ?
(क) कवि
(ख) ममता
(ग) माँ
(घ) श्वसुर
उत्तर :
(ग) माँ

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवयित्री आश्चर्यचकित क्यों हो जाती है?
उत्तर :
माँ घर, परिवार के तमाम कष्टों को अपने भीतर ही आत्मसात् कर लेती है। अपनी पीड़ा को कभी प्रकट नहीं करती। सभी के साथ प्यार का व्यवहार करती है। अतः माँ की सहनशीलता तथा ममता की भावना पर कवयित्री आश्चर्यंकित हो जाती हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 2.
‘परम्परावादी’ और ‘बदरंग आदर्श’ से क्या समझते हो?
उत्तर :
परम्परावादी का अर्थ है पुरानी रीतियों का पोषक। वंश परंपरा से चली आ रही प्रथाओं को मानने वाले। बदरंग आदर्श से तात्पर्य है रंगहीन या बेमेल रंग के नमूने। वंशानुक्रम से चली आ रही अशोभनीय बेढंगी प्रथाएँ।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पाठ में किसकी किस दशा का चित्रण हुआ है?
उत्तर :
प्रस्तुत पाठ में माँ की पीड़ामयी दशा का चित्रण हुआ है। माँ समस्त परिवार के साथ ममता भरा व्यवहार रखते हुए भी सभी की उपेक्षा तथा तिरस्कार पाती है। अपनी पीड़ाको प्रकट नहीं करती। उसमें अद्भुत सहनशीलता है।

प्रश्न 4.
माँ वन्दनीय और अतुलनीय कैसे होती है?
उत्तर :
माँ उदारता, ममता तथा सहनशीलता की प्रतिमूर्ति होती है। परिवार के अपने ही लोगों से उपेक्षा एवं तिरस्कार पाती है। सभी यातनाओं को सहते हुए भी मौन बनी रहती है। सबसे भिन्न होते हुए भी सभी को आत्मसात् कर लेती है। इसीलिए माँ वन्दननीय और पूजनीय होती है।

प्रश्न 5.
माँ किसकी डाँट-फटकार सहती रहती है ?
उत्तर :
माँ पिता की डाँट-फटकार को सहती रहती है।

प्रश्न 6.
कवयित्री ने माँ को कौन-कौन से उपमान दिये हैं ?
उत्तर :
कवयित्री ने माँ को साहस की जननी, ममता की प्रतिमूर्ति, वंदनीय और अतुलनीय जैसे उपमान दिये हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 7.
माँ की क्या खुखियाँ सबमें समहित करती हैं ?
उत्तर :
माँ दूसरों के सुख से सुखी एवं दु:ख से दु:खी होती है। यही उसको सबसे अलग पर सबसे समाहित करतीहै।

WBBSE Class 7 Hindi माँ Summary

जीवान पिचय

रंजना श्रीवास्तव का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में 1959 ई० में हुआ था। गोरखपुर विश्वविद्यालय से इन्होंने एम० ए०, बी०एड० किया। शिक्षिका तथा प्रधानाचार्या के पद पर कुछ समय बिताकर इन्होंने स्वतंत्र लेखन तथा संपादन में योगदन दिया। अनेक महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में इनके लेख तथा कहानियाँ प्रकाशित हुई हैं। बींसवीं सदी के महिला कथाकारों में इनका नाम सुपरिचित है।

पद – 1

ओह माँ! तुम
इतनी पीड़ाओं को
अपने में समाहित कर
कैसे जी लेती हो ?
और बिखरा देती हो
ममता के अनगिनत फूल

शब्दार्थ :

  • पीड़ाओं – कष्टों
  • बिखरा – फैलाना
  • समाहित – आत्मसात् कर लेना
  • ममता – प्यार, ममत्व, लगाव

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘माँ’ कविता से उद्धृत हैं । इसकी कवययित्री रंजना श्रीवास्तव हैं।

सन्दर्भ – प्रस्तुत अंश में कवयित्री ने माँ की पीड़ा और उसकी ममता का मार्मिक चित्रण किया है।

व्याख्या – कवयित्री माँ की सहनशीलता तथा ममता की भावना पर दु:ख तथा आश्चर्य प्रकट करती है। माँ अद्भुत सहनशील होती है जिससे जीवन के इतने कष्टों को आत्मसात् कर लेती है। सारी पीड़ाओं को सहते हुए भी न जाने कैसे जीती रहती है। जीवन से हार नहीं मानती। लोगों में प्यार के अनंत फूल बिखेर देती है। सभी बच्चों, बच्चियों तथा परिवार के सभी लोगों के प्रति ममत्व एवं प्यार का भाव रखती है। अपने सेह सूत्र में सभी को पिरो कर रखती है।

पद -2

अपने
कलेवर से
सहती हो पिता की
डाँट-फटकार
उनके फुफकारते हुए
कुद्ध अभिमान को…
सास को, श्वसुर को
भाई, भतीजों को
लिजलिजे परम्परावादी
बदरंग आदर्शों को
पीढ़ियों से घिसी-पिटी
अपमानजनक बातों को
अपने से जुड़ी छलनामयी
आघातों को

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

शब्दार्थ :

  • कलेवर – आकार, डोल-डौल
  • अभिमान – अहंकार, स्वाभिमान
  • परंपरावादी – पुरानी रीतियों के पोषक
  • आदर्श – नमूना, अनुकरणीय
  • छलनामयी – धोखा, प्रताड़ना
  • फुफकार – फुंकार
  • लिजलिजे – बेढंगे, अशोभनीय
  • बदरंग – रंगहीन
  • पीढ़ियों – पुश्त, वंशानुक्रम
  • आघातों – प्रहारों

व्याख्या- कवयित्री ने स्पष्ट किया है कि किस प्रकार माँ परिवार के लोगों के कटु व्यवहार सहती है, पिता की डाँटफटकार को, क्रोध से भरे हुए उनके अहंकार भरी फुंकार को वह अपने उदार स्वभाव,अपने व्यवहार से सहन कर लेती है। पुरानी रीतियों के पोषक सास, ससुर, भाई, भतीजों के अशोभनीय बेढंगी वंशानुक्रम से चली आ रही पुरानी अपमान एवं अन्य बातों को सहती है। अपने से संबंधित धोखों से परिपूर्ण आघातों को भी धैर्यपूर्वक सहन कर लेती है। इस प्रकार कवयित्री ने माँ की अद्भुत सहनशीलता का चित्रण किया है।

पद – 3

ओह माँ! साहस की जननी
ममता की प्रतिमूर्ति
क्या सूख गये हैं
तुम्हारे आँसू ?
या फिर उन्हें
जज्ब कर लेती हो
सहनशीलता के
दामन में
मौन हो जाती हैं संवेदनाएँ
तुम्हारी विशालता से
टकराकर….

शब्दार्थ –

  • जननी – माता
  • प्रतिमूर्ति – प्रतिकृति
  • संवेदनाएँ – सहनुभूति, अनुभूति
  • जज्ब – शोषण, आकर्षण
  • दामन – आँचल
  • मौन – चुप, शान्त

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने माँ के हृय की विशालता तथा अतिशय उदारता का वर्णन किया है। कवयित्री माँ के साहस तथा ममत्व के प्रति आश्चर्य क्रकट करते हुए कहती है कि माँ ऐसी माता है जो साहस तथा ममता की प्रतिमूर्ति है। परिवार से उत्पन्न पीड़ा को सहर्ष सहती है, क्या उसके आँसू सूख गए हैं। अथवा सभी पीड़ाओं को सहनशीलता के आँचल में सोख लेती है। माँ की अतिशय महानता तथा उदारता के कारण सारी संवेदनाएँ चुप हो जाती हैं।

पद – 4

ओह माँ ! तुम परिवार से
समाज से
कहीं बहुत ऊपर हो
तभी तो तुम्हारे
मन के आकाश में
खिले फूलों पर
तेज धूप पर
हवा के विपरीत रुख का
असर नहीं हो पाता

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

शब्दार्थ –

  • विपरीत – विरुद्ध, प्रतिकूल।
  • रुख – तरफ, सामने, दिशा

व्याख्या – माँ का हृदय इतना विशाल है कि जमाने का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। माँ का स्वभाव, विचार, परिवार तथा समाज से कहीं बहुत ऊपर है। इसी कारण माँ के हृदय रूपी आकाश में खिले फूलों पर तेज धूप का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। माँ का हृदय आकाश की तरह विशाल तथा खिले फूल की तरह दिव्य और पवित्र है। जमाने की कठोरता तथा संकीर्णता का माँ के विचारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । हवा की प्रतिकूल दिशा कभी उस पर कोई प्रभाव नहीं डालती, सामाजिक विषमता, परायापन, तुच्छता का उस पर कोई असर नहीं पड़ता।

पद – 5

वन्दनीय हो तुम
अतुलनीय भी
सबसे बिल्कुल अलग
फिर भी सबमें समाहित।

शब्दार्थ

  • न्दनीय – पूजनीय, वंदन करने योग्य।
  • अतुलनीय- बेजोड़, अपरिमित ।
  • समाहित-समालेना, आत्मसात् कर लेना।

व्याख्या – माँ अनंत गुणों का भंडार है। परिवार की तमाम यातनाओं को सहते हुए भी वह अपनी उदारता, उच्चाशयता को नहीं छोड़ती। इसीलिए माँ वंदना करने योग्य, पूजनीय है। वह परिवार और समाज में बेजोड़ है। सबसे बिल्कुल भिन्न अलग रहते हुए सभी को आत्मसात् कर लेती है। किसी के प्रति भी उसके मन में नफरत या द्वेष की भावना नहीं पनपती। सभी को वह अपना समझती है। सभी के कल्याण की कामना करती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 8 बादल चले गये वे to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – बादल चले गये वे

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
किसने अपने चित्रों से आकाश सजाया ?
(क) वर्षा ने
(ख) सूर्य ने
(ग) तारों ने
(घ) बादल ने
उत्तर :
(घ) बादल ने।

प्रश्न 2.
बादल के जाने के बाद आसमान कैसा दिखाई देता है ?
(क) हरा
(ख) सफेद
(ग) काला
(घ) नीला
उत्तर :
(घ) नीला।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 3.
इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं ?
(क) सुख
(ख) दुःख
(ग) सुख -दुःख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सुख -दुःख दोनों ।

प्रश्न 4.
त्रिलोचन किस साहित्यिक धारा के अंतिम कड़ी माने जाते हैं ?
(क) छायावाद
(ख) हालावाद
(ग) प्रगतिशील धारा
(घ) प्रयोगवादी धारा
उत्तर :
(ग) प्रगतिशील धारा।

प्रश्न 5.
‘चित्त’ का क्या अर्थ है ?
(क) मन
(ख) धन
(ग) गाड़ी
(घ) मस्तिष्क
उत्तर :
(क) मन।

प्रश्न 6.
इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं ?
(क) सुख
(ख) टु:ख
(ग) सुख और दु:ख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सुख और दु:ख दोनों।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 7.
कवि के अनुसार जीवन में कितने दिन दुःख-सुख रहता है ?
(क) दो दिन
(ख) तीन दिन
(ग) चार दिन
(घ) एक दिन
उत्तर :
(क) दो दिन।

प्रश्न 8.
कवि ने किसे मेहमान के समान बताया है ?
(क) दु:ख को
(ख) धरती को
(ग) बादल को
(घ) आसमान को
उत्तर :
(ग) बादल को।

प्रश्न 9.
कौन सदा आकाश में नहीं ठहरते ?
(क) जल
(ख) बादल
(ग) तारे
(घ) सूरज
उत्तर :
(ख) बादल।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 10.
बादल अपनी शोभा से लोगों के ………. मुग्ध बना देते हैं ?
(क) मन को
(ख) दिल को
(ग) पड़ोस को
(घ) खेतो को
उत्तर :
(क) मन को।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कौन अपनी छवि से चित्त चुरा लेता है ?
उत्तर :
सूने आकाश में सुन्दर चित्र सजाकर बादल अपनी छवि से चित्त चुरा लेता है।

प्रश्न 2.
धरती का रंग कैसा दिखाई देता है ?
उत्तर :
धरती का रंग पीला दिखाई देता है।

प्रश्न 3.
पाहुन किसे कहा गया है ?
उत्तर :
पाहुन आकाश में आकर चले जाने वाले बादल को कहा गया है।

प्रश्न 4.
शिशिर ॠतु का प्रभात कैसा होता है?
उत्तर :
शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला तथा ओस के कणों से भीगा होता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 5.
इस संसार में सभी का जीवन किससे युक्त रहता है ?
उत्तर :
इस संसार में सभी का जीवन नवीन तरंगों से युक्त रहता है ?

प्रश्न 6.
शीत काल का सबेरा कैसा दिखाई पड़ता है ?
उत्तर :
शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भीगा हुआ दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 7.
‘त्रिलोचन’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
‘त्रिलोचन’ का जन्म 20 अगस्त, 1917 ई० को उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिला के कठघरा चिराना पट्टी नामक गाँव. में हुआ था ।

प्रश्न 8.
‘त्रिलोचन’ का वास्तविक नाम क्या था ?
उत्तर :
‘त्रिलोचन’ का वास्तविक नाम ‘वासुदेव सिंह’ था।

प्रश्न 9.
‘त्रिलोचन’ किस दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे ?
उत्तर :
त्रिलोचन ‘जनवार्ता’ नामक दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 10.
आसमान का रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
आसमान का रंग नीला होता है ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
आसमान अब नीला-नीला क्यों दिखाई देने लगा है ?
उत्तर :
बादलों ने सूने आकाश में आकर सुन्दर चित्र बनाकर आकाश को सुन्दर तथा बहुरंगी बना दिया था। पर जब वे बादल आकाश से चले गए तो आकाश फिर सूना हो गया। उसका निरंतर बना रहने वाला रंग नीला दिखाई देने लगा।

प्रश्न 2.
बादलों ने सूने आकाश को किस प्रकार सजाया ?
उत्तर :
बादलों ने सूने आकाश में सुन्दर बहुरंगी चित्र बनाकर उसे सजा दिया। अपने विविध रंग, अपनी शोभा से, क्षण-क्षण परिवर्तित रूप से आकाश को सुसज्जित कर दिया।

प्रश्न 3.
सुख-दु:ख जीवन के संगी क्यों कहे गए हैं ?
उत्तर :
सुख-दुःख व्यक्ति के जीवन में सदा आते-जाते रहते हैं। दुःख भी थोड़े समय के लिए आता है, सुख भी थोड़े समय के लिए आता है। सुख-दु:ख के इस मधुर मिलन से जीवन परिपूर्ण होता है। इसीलिए सुख-दु:ख जीवन के संगी कहे गए हैं।

प्रश्न 4.
‘बादल चले गए वे’ कविता का मूलभाव लिखिए।
उत्तर :
‘कविता का सारांश देखिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –
(क) बना-बनाकर चित्र सलोने, यह सूना आकाश सजाया।
(i) पाठ और कवि का नाम बताइए ।
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘बादल चले गए वे’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि त्रिलोचन हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शिशिर ऋतु शीतकाल का मौसम है। इस ऋतु का सबेरा चमकीला होता है। सबेरे सूर्य की सुनहली किरणें चारों और फैल जाती हैं। रात में ओस के कण पड़ते हैं। इसलिए वातावरण सबेरे आर्द्र बना रहता है।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बादल के चले जाने के बाद आकाश नीला-नीला दिखाई देने लगा है। अब वह साँवला सजधज से युक्त नजर आने लगा है। धरती का रंग पीले रंग का दिखाई देता है। वह हरी भरी तथा रस से भरी हुई और आनंद से परिपूर्ण नजर आती है । शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भींगा हुआ दिखाई पड़ता है। अब बादल आकाश से चले गए हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
आकाश से बादलों के चले जाने पर प्रकृति में क्या परिवर्तन होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
ग्रीष्म ॠतु का अवसान होते ही वर्षा ऋतु का आगमन होता है। आकाश का कलेवर काले-काले बादलों से ढँक जाता है। सावन के आकाश में छाए बादलों की शोभा निराली बन जाती है। बादल अपनी विभिन्न प्रकार की आकृति के सुन्दर चित्र बनाकर सूने आकाश को अलंकृत कर देते हैं। आकाश की शोभा अत्यंत मोहक बन जाती है। अपने बहुरंगी रूपों तथा आकार से वे बादल आकाश को सुन्दर बना देते हैं। क्षण-क्षण परिवर्तित होने वाला उनका आकार उनकी शोभा मन को अपनी ओर खींच लेती है। बादलों के चले जाने पर आकाश का रंग नीला हो जाता है। आकाश नीले-साँवले रंग से सज जाता है।

धरती पीली हो जाती है। सर्वत्र हरियाली तथा सरंसता छा जाती है। प्रकृति बड़ी ही मोहक बन जाती है। शिशिर ॠतु का सबेरा तो बड़ा ही सुहावन बन जाता है। सारा वातावरण भीगा-भीगा तथा प्रकाशमान बन जाता है। प्रभात में सूर्योदय के समय सूर्य की सुनहली किरणें वातावरण को चमकीला बना देती हैं। जिस प्रकार ऋतु परिवर्तन से प्रकृति में परिवर्तन हो जाता है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी परिवर्तन होता रहता है। मनुष्य के जीवन में सुख-दु:ख दोनों आते-जाते रहते हैं।

न तो दु:ख ही स्थायी रहता है और न सुख ही। दोनों एक दूसरे के साथी हैं। आते-जाते रहना उनकी नियति है। जीवन में कभी हास्य है तो कभी रुदन है। सुख-दुःख के मधुर मिलन से जीवन पूर्ण होता है। जिस प्रकार घर में कोई मेहमान आता है और दो दिन रहकर चला जाता है, उसी प्रकार बादल भी वर्षा ऋतु के बीतते ही आकाश से कूच कर जाते हैं। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत् नियम है।

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भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द लिखें –
आसमान – नभ, आकाश
बादल – मेघ, घन, जलद
धरती – पृथ्वी, धरा, भूमि
अश्रु – आँसू, नयनजल, नयन नीर
सुख – आनंद, चैन, मजा

(ख) विलोम शब्द –
राग – द्वेष, विराग
दिन – रात
एक – अनेक
श्याम – श्वेत
जीवन – मृत्यु

WBBSE Class 6 Hindi बादल चले गये वे Summary

जीवन-परिचय :

त्रिलोचन (1917-2007) का मूल नाम वासुदेव सिंह था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम. ए. की परीक्षा पास की और लाहौर से शास्त्री की डिग्री ली। ये ‘आज’ और ‘जनवार्ता’ दैनिक समाचार पत्र से भी जुड़े रहे। इनकी कविता सहजता, कोमलता तथा माधुर्य से परिपूर्ण हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – मिट्टी की बारात, ताप के तपे हुए दिन हैं। इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

कविता का सारांश – कवि त्रिलोचन ने बादल के उदाहरण से स्पष्ट किया है कि जीवन में सुख-दुःख दोनों आतेजाते रहते हैं। बादल आकाश को अपने रंगों से सजाकर, अपनी शोभा से सभी को प्रसन्न कर छिप जाते हैं। आकाश नीले रंग -काले रंग में तथा धरती पीले रंग में हरी भरी बन जाती है। शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला हो जाता है। सुखदु:ख दोनों जीवन के संगी हैं क्योंकि जीवन में कभी खुशहाली तथा कभी रुदन आता है। इसी प्रकार मेहमान की तरह बादल भी आकर चले जाते हैं।

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शब्दार्थ :

  • सलोने – सुंदर ।
  • प्रभात – सबेरा ।
  • राग – प्रेम ।
  • पाहुन – मेहमान ।
  • चित्र – आकृति ।
  • समुज्ज्वल – चमकीला ।
  • छवि – शोभा ।
  • नवल – नया ।
  • हास – हँसी, खुशी ।
  • तरंगी – तरंग युक्त, मनमौजी ।
  • सजीला – सजधज के साथ रहने वाला।
  • शिशिर – शीतकाल ।

पद – 1

बना-बनाकर
चित्र सलोने
यह सूना आकाश सजाया
राग दिखाया
रंग दिखाया
क्षण-क्षण छवि से चित्त चुराया
बादल चले गये वे।

व्याख्या : प्रस्तुत पद्यांश त्रिलोचन कवि रचित ‘बादल चले गये वे’ कविता से उद्धृतं है। इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि सूने आकाश को बादल किस प्रकार सजा देते हैं।

सूने आकाश में आकर बादल अपने चिर्रों से आकाश को सुसज्जित कर देते हैं। वे सुन्दर चित्र बनाकर आकाश को सजा देते हैं। वे अपना प्रेम प्रकट करते हैं। अपना विविध रंग दिखलाते हैं। हर क्षण अपनी शोभा से लोगों के मन को मुग्ध बना देते हैं पर वे बादल सदा आकाश में नहीं ठहरते। अपनी सुन्दरता, अपना रंग दिखा कर वे चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

पद – 2

आसमान अब
नीला-नीला
एक रंग रस श्याम सजीला
धरती पीली
हरी रसीली
शिशिर प्रभात समुज्ज्वल गीला
बादल चले गये वे ।

व्याख्या – बादल के चले जाने के बाद आकाश नीला-नीला दिखाई देने लगा है। अब वह साँवला सजधज से युक्त नजर आने लगा है। धरती का रंग पीले रंग का दिखाई देता है। वह हरी-भरी तथा रस से भरी हुई आनंद से परिपूर्ण नजर आती है। शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भींगा हुआ दिखाई पड़ता है। अब बादल आकाश से चले गए हैं।

पद – 3

दो दिन दु:ख का
दो दिन सुख का
दु:ख-सुख दोनों संगी जग में
कभी हास है
कभी अश्रु है
जीवन नवल तरंगी जग में
बादल चले गये वे
दो दिन पाहुन जैसे रहकर।

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि सुख-दुःख जीवन के संगी हैं। जीवन में दुःख भी थोड़े दिनों के लिए आता है और सुख भी थोड़े दिनों के लिए आता है। सुख-दुःख का क्रम सदा बना रहता है। जीवन में कभी हासविलास अर्थात् खुशियाँ रहती हैं। कभी आँसू अर्थात्यु:ख भरे दिन होते हैं। इस संसार में सभी का जीवन नवीन तरंगों से युक्त बना रहता है। फिर कवि ने बादल को मेहमान के समान बतलाया है। जिस प्रकार किसी के घर मेहमान कुछ समय के लिए आते हैं फिर अपने घर चले जाते हैं, उसी प्रकार बादल आकाश में मेहमान की तरह आकर फिर चले जाते हैं।