WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 3 भारत वर्ष to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – भारत वर्ष

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निर्वासित राजकुमार कौन थे?
(क) अशोक
(ख) राम
(ग) दधीचि
(घ) सिद्धार्थ
उत्तर :
(ख) राम

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प्रश्न 2.
भारतवर्ष कविता के कवि हैं :
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तर :
(ग) जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 3.
रताकर का शाब्दिक अर्थ है :
(क) गागर
(ख) सागर
(ग) नदी
(घ) रत्न का आकार
उत्तर :
(ख) सागर

प्रश्न 4.
दधीचि कौन थे?
(क) एक राजा
(ख) बौद्ध भिक्षु
(ग) एक ऋषि
(घ) एक भिखारी
उत्तर :
(ग) एक ऋषि

प्रश्न 5.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) इलाहाबाद
(ख) काशी
(ग) महिषादल
(घ) दरभंगा
उत्तर :
(ख) काशी ।

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प्रश्न 6.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ था?
(क) सन् 1889 में
(ख) सन् 1890 में
(ग) सन् 1891 में
(घ) सन् 1888 में
उत्तर :
(क) सन् 1889 में।

प्रश्न 7.
जयशंकर प्रसाद के पूर्वज किस नाम से प्रसिद्ध थे?
(क) मुरली बाबू
(ख) सुंघनी साहू
(ग) मंगल्ला बाबू
(घ) जीवन बाबू
उत्तर :
(ख) सुंघनी साहू।

प्रश्न 8.
जयशंकर प्रसाद किस वाद के कवि हैं?
(क) छाम्यावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) जनवाद
उत्तर :
छायावाद।

प्रश्न 9.
हिमालय का औँगन किस देश को कहा गया है ?
(क) भारतवर्ष
(ख) श्रौलंका
(ग) नेपाल
(घ) भूटान
उत्तर :
(क) भारतवर्ष

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प्रश्न 10.
‘रत्नाकर’ का शाब्दिक अर्थ है –
(क) रत्न में आकार
(ख) सागर
(ग) नदी
(घ) रत्ल का आकार
उत्तर :
(ख) सागर

प्रश्न 11.
किसने पहनाया हीरक हार ?
(क) तम ने
(ख) उषा ने
(ग) मोहन ने
(घ) साहेब ने
उत्तर :
(ख) उषा ने

प्रश्न 12.
महर्षि दधीचि ने देवराज इन्द्र को क्या दान दिया ?
(क) हड्डुयाँ
(ख) रल
(ग) देवलोक
(घ) जल
उत्तर :
(क) हड्डियाँ

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
द्धीचि ने क्या दान किया था तथा क्यों?
उत्तर :
दर्धीचि ने अस्थि दान किया था। उनकी हड्डी से इन्द्र ने वज का निर्माण कर वृत्रासुर का वध किया। अत: देवताओं की विजय तथा असुरों की पराजय के लिए दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान किया।

प्रश्न 2.
बौद्ध भिभ्यु बनकर घूमनेवाले राजा कौन थे? इसका कारण क्या था?
उत्तर :
बौद्ध भिक्षु बनकर घूमने वाले राजा अशोक थे। बौद्ध धर्म के प्रचार तथा मानवता के कल्याण के लिए सम्वाट अशोक घर-घर जाकर दौन-दुखियों के प्रति द्या तथा करुण भावना व्यक्त करते थे।

प्रश्न 3.
निर्वासित राजा की प्रसिद्धि का क्या कारण है ?
उत्तर :
निर्वांसित राजकुमार राम ने रावण का विनाश करने के लिए तथा देवताओं, ॠषियों, और मानवता के संकट को दूर करने के लिए सागर की छाती पर सेतु का निर्माण तथा रावण को पराजित कर देव संस्कृति की रक्षा की। यही उनकी प्रसिद्धि का कारण है।

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प्रश्न 4.
हिमालय का आँगन किसे और क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
हिमालय का आँगन भारतवर्ष को कहा गया है, क्योंकि भारत हिमालय के चरणों में स्थित है। हिमालय भारत का गौरव है । हिमालय का सांस्कृतिक महत्त्व है।

प्रश्न 5.
जयशंकर प्रसाद की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
जयशंकर पसाद की मृत्यु 1937 ई० में हुई थी ।

प्रश्न 6.
जयशंकर प्रसाद के पिता का क्या नाम था ?
उत्तर :
जयशांकर प्रसाद के पिता का नाम सुँघनी साहू था।

प्रश्न 7.
सुष्टि का बीज किसने बचाया ?
उत्तर :
सृष्टि का बौज मनु ने बथाया।

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प्रश्न 8.
पुरन्द्र किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
पुरन्दर इन्द्र को कहा जाता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) भारत के प्राचीन गौरव का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
कविवर जयशंकर म्रसाद ने ‘भारतवर्ष’ कविता में भारत के अतीत का गौरवमय चित्रण किया है। सर्वम्मथम हिमालय की गोद में स्थित भारत में ही सभ्यता और ज्ञान की किरणें फूटीं। संगीत के सात स्वरो को सरस्वती ने वीणा के तारों से झंकृत किया। सामवेद की रचना इसी भारत भूमि में हुई । हमारे आदि पुरुष मनु ने बीज रूप में सृष्टि को बचाया। महर्षि दर्धीचि का अस्थिदान हमारी जातीयता के विकास का उदाहरण है।

उनकी अस्थि से देवराज इन्द्र ने वज्र बनाकर वृत्रासुर का वध किया। इस प्रकार देव-संस्कृति की रक्षा हुई। निर्वासित होते हुए भी त्री राम ने राक्षसी संस्कृति के विनाश तथा रावण को पराजित करने के हेतु समुद्र पर सेतु का निर्माण कर दिया। भगवान बुद्ध और महावीर ने धर्म के नाम पर हो रही नर बलि तथा पशु बलि को समाप्त कर विश्व को शांति और अहिसा का संदेश दिया। भारतीय वीरों ने तलवार के द्वारा विजय के स्थान पर धर्म और प्रेम की विजय को विश्व में प्रचारित किया।

सामाट अशोक भिक्षु बनकर घूम-घूम कर शांति, अहिंसा और प्रेम का प्रचार करते रहे। सम्माट चन्द्रगुप्त ने युद्ध में यवन सेनापति सेल्युकस को पराजित करके भी उसे प्राण दान देकर अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। हमारे पूर्वज भारतवासी चरित्रवान, शक्तिशाली, दृढ़ प्रतिश तथा परोपकारी थे। शब्ति सम्पन्न होकर भी विनप्र थे।

(ख) ‘पुरंदर ने पवि से है लिखा अस्थियुग का मेरे इतिहास’ में वर्णित इस पौराणिक कथा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
देवासुर संग्राम की घटना का युग अस्थियुग था। देवताओं के राजा इन्द्र संग्राम में असुरों के सेनापति वृत्रासुर से भयमीत थे। जहा के निर्देश से वे महर्धि दधीचि के पास आए, क्योंकि दधीचि की हद्धियों से निर्मित अस्व से ही वृद्रासुर का वध हो सकता था। राक्षस राज वृश्रासुर के संहार के लिए देवराज इन्द्र ने महार्षि दधीीचि से अस्थिदान की माँग की। महर्षि ने देवत्व की रक्षा के लिए सहर्ष इन्द्र का प्रस्ताव स्वीकार कर प्राण त्यागकर अपनी हड्डियाँ दे दीं। इन्द्र ने उनकी अस्थि से वज्र का निर्माण कर राक्षस राज वृत्रासुर का संहार किया। दधीचि का यह अस्थि त्याग भारतीय जाति के त्याग का अनुपम उदाहरण है।

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(ग) ‘भारतवर्ष’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रसादजी ने प्रस्तुत कविता में भारत के अतीत का गौरव, भारतीयों की जातीय, चारिप्रिक विशेषताओं का वर्णन किया है।
सर्वपथम उषा ने हिमालय की गोद में स्थित भारत को अपनी स्वर्णिम किरणों का उपहार दिया। सर्वप्रथम भारतवासी ही ज्ञान संपन्न हुए और विश्व के अन्य भागों में भी ज्ञान का विस्तार और प्रसार किए। हमारे आदि पुरुष मनु ने पेलय से सृष्टि को यनाया। यहीं पर सरस्वती की वीणा के तारों से संगीत के सातों स्वर फूटे। सामवेद की रचना इसी भारत भूमि में हुई। महार्षि दर्धीचि ने अस्थिदान देकर राक्षस राजा वृन्रासुर का संहार किया था।

राजकुमार राम ने सागर की छाती पर सेतु का निर्माण कर रावणत्व का समूल नाश किया। भगवान बुद्ध तथा स्वामी महावीर ने पशु बलि प्रथा को बन्द कर विश्व को प्रेम, शांति, अहिंसा का उपदेश दिया। सम्माट अशोक ने भिक्षु बनकर घर-घर जाकर दया, करुणा का पाठ पदा़ाया। समाट चन्द्रगुप्त ने रणक्षेत्र में यवन सेनापति सेल्युकास को पराजित करके भी प्राणदान दे दिया। हमने चीन को धर्म दृष्टि, लंका तथा सिंहल को शील की शिक्षा दी।

जातियों का उत्थान-पतन यहाँ होता रहा। विदेशियों के बर्बर आक्रमणों को झेलते हुए भी हम अडिग बने रहे । हमारी जन्मभूमि यही है, हम कहीं बाहर से नहीं आए हैं। हमने किसी का कुछ भी छीना नहीं। हम परोपकारी अतिधि सेवी, दृढ़, प्रतिश, साहसी तथा शांति के हिमायती रहे। हम भारत के गौरव की रक्षा के लिए सर्वस्व त्याग के लिए मस्तुत रहेंगे। इस प्रकार इस कविता में देश प्रेम तथा राष्ट्रोय भावना का चित्रण हुआ है।

(घ) निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या ससन्दर्भ कीजिए ।

प्रश्न 1.
हमारे संचय में था दान अतिधि थे सदा हमारे देव।
उत्तर :
यह अंश कविवर जयशंकर प्रसाद की रचना ‘भारतवर्ष’ कविता से उद्धृत है। इस पंक्ति में कवि ने अतीत मे भारतीयों की दानशीलता तथा उदारता का चिद्रण किया है। हमारे पूर्वज अपने सुख के लिए, भोग की कामना के लिए धन-संचय नही करते थे। अपने अर्जित धन से गरीबों-अनाधों को दान देकर उनकी सहायता करते थे। उनमे परोपकार की भावना थी। अतिथियों का देवतुल्य सत्कार करते थे। वे सच्चे अर्थों में अतिथि सेवी थे। अतिथि देवो भव’ उनका सिद्धांत था।

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प्रश्न 2.
बचाकर बीज रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय की शीत।
उत्तर :
हमारे आदि पुरुष ने बीज रूप में सृष्टि की रक्षा की। प्रलय के समय सबय कुछ जल- मग्न हो गया। अकेले मनु एक नाव में बैठकर हिमालय की चोटी पर पहुँच गए। प्रयय कालीन शीत लहरी को सहकर भी निडर बने रहे। श्रद्धा के सहयोग से उन्होंने सृष्टि को बचाया।

प्रश्न 3.
जिएँ तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष।
उत्तर :
यह अंश ‘भारतवर्ष’ कविता से उद्धृत है। इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद है।
यहाँ कवि की राष्ट्रीय भावना तथा देश प्रेम की इच्छा व्यक्त हुई है। कवि का कथन है कि हमारा जीवन स्वदेश भारतवर्ष के लिए है। अतः हम जोएँ तो भारत के लिए और मरें तो भारत के लिए। हमें इस बात का अभिमान तथा हर्ष होना चाहिए कि हमारा जीवन अपने देश के लिए ही है। हमें स्वदेश के लिए अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व अर्षण कर देने के लिए सदैव प्रस्तुत रहना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दधीचि के त्याग को कवि ने जातीयता का विकास क्यों कहा है?
उत्तर :
दधीचि एक महान त्यागी-तपस्वी कषि थे। भारत के इतिहास में वह युग अस्थियुग था। देवराज इन्द्र असुरों के सेनापति वृत्रासुर से संत्रस्त थे। उसे पराजित करने के लिए इन्द्र दधीचि ॠषि के पास जाकर उनसे उनकी अस्थियों (हड्युयों) की याचना की। देव जाति की रक्षा के लिए महर्षि दरीचि अपनी अस्थियों का दान देकर अनुपम त्याग का परिचय दिया।

दधीचि की अस्थियों से वज्र बनाकर इन्द्र ने वृत्रासुर का वध कर देवजाति की रक्षा की। इस प्रकार इन्द्र ने अस्थियुग के इतिहास को वज्र से लिखा। ॠषि दधीचि के इस अनुपम त्याग और बलिदान से स्षष्ट हो जाता है कि उस युग में सामाजिक स्तर पर भारतीय जाति कितनी विकसित, कितनी महान तथा आदर्शमयी थी।

प्रश्न 2.
कवि ने भारत को प्रकृति का पालना क्यों कहा है?
उत्तर :
हमारा देश प्राकृतिक शोभा तथा सुषमा का आँगन है। यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता निराली है। पर्वतों, वन प्रदेशों, नदियों तथा शस्य-श्यामला धरती का सौन्दर्य अतीव मोहक एवं निराला है। षड्कतुओं की शोभा अपने आप में चित्ताकर्षक है। इसीलिए कवि ने इसे प्रकृति का पालना कहा है।

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प्रश्न 3.
पाठ में आए पौराणिक तथा ऐतिहासिक पुरुषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मनु – पौराणिक कथाओं के अनुसार मनु हमारे आदि पुरुष हैं। प्रलय काल में सृष्टि के जलमग्न हो जाने पर मनु एक नाव पर सवार हो गए। उनकी नाव उस बाढ़ में उत्तर गिरि से टकराई। वहाँ उतर कर मनु ने श्रद्धा के संपर्क से बीज रूप में सृष्टि को बचाया।

पुरन्दर (इन्द्र) – ये देवताओं के अधिपति तथा स्वर्ग के राजा थे। देवासुर संग्राम में वे देवजाति के सेनापति थे। वृत्रासुर का वध कर इन्होंने देवजाति की रक्षा की।

राम – अयोध्यापति महाराज दशरथ के पुत्र राम भगवान के अवतार माने जाते है। निर्वासित होते हुए भी राम ने सागर की छाती पर सेतु का निर्माण कर रावण को समाप्त कर देवत्व की रक्षा की।

बुद्ध – कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन के पुत्र राजकुमार गौतम ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध कहलाए। इन्हें भगवान का अवतार माना जाता है। ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी) में दिया।

अशोक – ये भारत के प्रसिद्ध सम्राट थे। प्रजा की भलाई के लिए इन्होंने अनेक कल्याण- कारी योजनाओं को मूर्तरूप दिया। बौद्ध धर्म स्वीकार कर ये भिक्षु बनकर, करुणा, दया तथा प्रेम का संदेश देने लगे।

चन्द्रगुप्त – चन्द्रगुप्त भारत के प्रतापी सम्माट थे। महान् नीतिज्ञ चाणक्य के शिष्य थे। सम्राट अशोक इनके पौत्र थे। चन्द्रगुप्त यवन सेनापति सेल्युकस को युद्ध में पराजित कर उसे प्राण दान दिया। सेल्युकस की पुत्री राजकुमारी हेलेन (कार्नेलिया) से शादी की। इस प्रकार उन्होंने यवन को दया का दान दिया।

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भाषा-बोध

(क) उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष 1

(ख) संधि विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए।
हिमालय – हिम + आलय – स्वर संधि
संसृति – सम् + सृति – व्यंजन संधि
निर्वासित – नि: + वासित – विसर्ग संधि
संचय – सम् + चय – व्यंजन संधि
रत्नाकर – रत्न + आकर – स्वर संधि

(ग) सामासिक पदों का विग्रह कर समास का नाम लिखिए ।
सप्त स्वर – सात स्वरों का समाहार – द्विगु समास
उत्थान-पतन – उत्थान और पतन – द्वनन्द् समास
शान्ति संदेश – शांति का संदेश – तत्पुरुष समास
अस्थियुग – अस्थि का युग – तत्पुरुष समास

(घ) प्रत्ययों से बने शब्द –
इत – निर्वासित
ता – जातीयता, नम्रता
यों – जातियों
ई – हमी, वही
आ- लिखा

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(ङ) अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग कीजिए-
पुरन्दर – इन्द्र – पुरन्दर ने वज्र से वृत्रासुर का वध किया।
रत्नाकर – समुद्र – राम ने रत्नाकर की छाती पर पुल बना दिया।
सर्वस्व – सबकुछ – हमें स्वदेश पर सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहिए।
नम्रता – विनय – हमारे पूर्वजों में सदा नम्रता बनी रही।
अभिनंदन – प्रशंसा, स्वागत-हमें महान पुरुषों का अभिनंदन करना चाहिए।

WBBSE Class 7 Hindi भारत वर्ष Summary

जीवन वरचचय

जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई० में वाराणसी के एक सुप्रसिद्ध वैश्य कुल में हुआ था। स्कूली शिक्षा मात्र सातवीं कक्षा तक मिली, तदनंतर घर पर ही इन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, बंगला आदि का अध्ययन किया।1937 ई० में इनका देहावसान हो गया। घरेलू समस्याओं के बावजूद प्रसादजी अध्ययन, मनन, पर्यवेक्षण तथा लेखन से विमुख न हुए। इन्हें जन्म से ही कवि हृदय मिला था। प्रसादजी की भाषा साहित्यिक, परिमार्जित, संस्कृत निष्ठ होते हुए भी बोधगम्य है।

उसकी सरलता तथा प्रवाह मन को मुग्ध कर लेता है। ये छायावाद के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्रसादजी बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न साहित्यकार थे। शब्द विन्यास, वस्तु चयन, अलंकार योजना, भाषा की सरलता आदि सभी दृष्टियों से प्रसाद जी का काव्य हिन्दी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता हैं। प्रसादजी अपने युग के सबसे बड़े पौरुषवान कवि थे।

इनकी काव्य रचनाएँ- लहर, झरना, आँसू, महाराणा का महत्त्व तथा कामायनी आदि हैं। नाटक-स्कदंगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुव स्वामिनी, जनमेजय का नागयज्ञ आदि। कहानी संग्रह-छाया, प्रतिध्वनि, इन्द्रजाल आँधी, आकाशदीप। उपन्यास-कंकाल, तितली, इरावती। प्रसादजी की रचनाओं में प्रेम-सौन्दर्य तथा देश प्रेम की मनोरम झाँकी मिलती है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

पद – 1

हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार,
उषा ने हँस अभिनंदन किया और पहनाया हीरक हार।
जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक,
व्योम तम पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।।

शब्दार्थ :

  • किरण – रश्मि व्योम – आकाश
  • उपहार – भेंट
  • आंगन – प्रांगण
  • हीरक-हीरा
  • किरणों का उपहार – ज्ञान का प्रकाश
  • संसृति – संसार, सृष्टि
  • हम – भारतवासी
  • तम पुंज – अंधकार का समूह
  • आलोक-प्रकाश
  • अखिल – संपूर्ण, समस्त
  • अशोक – शोक रहित, खुश
  • उषा- प्रभात, अरुणोदय

सन्दर्भ – प्रस्तुत अंश ‘भारतवर्ष’ शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद हैं।

प्रसंग – इस अंश में कवि ने भारत के गौरवपूर्ण अतीत का वर्णन किया है। सर्वप्रथम भारत में ही ज्ञान-विज्ञान का प्रकाश फैला।

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कथन है कि सर्वप्रथम हिमालय प्रांगण भारत में ज्ञान रूपी सूर्य का उदय हुआ। प्रभात की किरणों ने हँसकर हीरों का हार पहनाकर उसका स्वागत किया। भारत ही सर्वपथम ज्ञान की ज्योति से सुशोभित हुआ। भारतवासियों ने ज्ञान संपन्न होकर सारे विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। सारा संसार ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो उठा। सारे विश्व का अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट हो गया। संपूर्ण संसार शोक रहित हो गया। सर्वत्र प्रसन्नता का वातावरण छा गया।

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पद – 2

विमल वाणी ने वीणा ली, कोमल-कमल-कर में सप्रीत।
सप्तस्वर सप्तसिन्धु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम संगीत।
बचाकर बीज-रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय का शीत।
अरुण-केतन लेकर निज हाथ, वरुण-पथ में हम बढ़े अभीत।।

शब्दार्थ :

  • विमल – स्वच्छ, निर्मल
  • वाणी – सरस्वती
  • कर – हाथ
  • सम्रीत – प्रेमपूर्वक
  • सप्तस्वर – संगीत के सात स्वर
  • वरुण पथ – जल मार्ग
  • साम संगीत – साम वेद का संगीत
  • सृष्टि – संसार
  • प्रलय – सर्वनाश
  • अरुण केतन- लाल पताका
  • सप्त सिन्धु – सप्त सैन्धव प्रदेश
  • अभीत – निडर

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कथन है कि ज्ञान की देवी दिव्य रूप वाली सरस्वती ने अपने कमल के समान कोमल हाथों में वीणा धारण कर सर्वप्रथम संगीत के स्वर निःसृत की। उनकी वीणा से नि:सृत संगीत के सातों स्वर इसी आर्यावर्त (सप्त सिन्धु – सप्त सैन्धव) में गूँज उठे। संगीत शास्त्र के आदि ग्रंथ सामवेद की रचना इसी देश में हुई। सामवेद के संगीत के स्वर सर्वप्रथम इसी देश में प्रसारित हुए। प्रलयकालीन जल प्लावन के समय भारतपुत्र मनु बीज के रूप में सृष्टि को विनाश से बचाये। नाव पर बैठ कर प्रलयकालीन शीत लहरी को सहते हुए उन्होंने सृष्टि का उद्धार किया। हमारे पूर्वज भारतवासी ने स्वदेश की लाल पताका लेकर जल मार्ग से जाकर प्रेम, सद्भावना का संदेश दिया।

पद – 3

सुना है दधीचि का वह त्याग, हमारा जातीयता-विकास।
पुरन्दर ने पवि से है लिखा, अस्थि-युग का मेरे इतिहास।
सिन्धु-सा विस्तृत और अथाह, एक निर्वासित का उत्साह।
दे रही अभी दिखायी भग्न, मग्न रत्नाकर में वह राह ।।

शब्दार्थ :

  • जातीयता – जाति का भाव, गुण
  • निर्वासित – निकाला हुआ (राम)
  • पवि – वज्र
  • अस्थि – हड्डी
  • राह – रास्ता, मार्ग
  • पुरन्दर – इन्द्र
  • उत्साह – जोश
  • भग्न – डूबे हुए
  • रत्नाकर – समुद्र
  • भग्न-खण्डहर

व्याख्या – दधीचि एक महर्षि थे। देवासुर संग्राम में असुरों के सेनापति वृत्रासुर के संहार के लिए इन्द्र ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थियों (हड्डियों) की माँग की। उनकी हड्डी से वज्र का निर्माण कर इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। दधीचि का यह अस्थि त्याग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। महर्षि दधीचि ने सहर्ष अस्थिदान कर यह स्पष्ट कर दिया कि त्याग, बलिदान आदि गुणों के क्षेत्र में यह त्याग जातीयता के विकास को प्रमाणित करता है। इन्द्र ने वज्र से वृत्रासुर का संहार कर अस्थियुग के इतिहास को अमर बना दिया। निर्वासित राम का उत्साह सागर की भाँति अथाह और असीम था। राम ने रावण का विनाश करने के लिए सागर की छाती पर सेतु बाँध कर लंका पर चढ़ाई की थी। सागर में सेतु के भग्नावशेष आज भी जल में दिखाई पड़ते हैं।

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पद – 4

धर्म का ले लेकर जो नाम, हुआ करती बलि, कर दी बन्द।
हमीं ने दिया शान्ति-सन्देश, सुखी होते देकर आनन्द।
विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम ।
भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाते घर-घर घूम ।।

शब्दार्थ :

  • बलि – वह पशु जो किसी देवता के निमित्त मारा जाए
  • भिक्षु – संन्यासी
  • धूम – प्रसिद्धि
  • सम्राट – महाराजाधिराज
  • आनंद – खुशियाँ

व्याख्या – प्राचीन काल में यज्ञों में देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धर्म के नाम पर पशुबलि की प्रथा प्रचलित थी। धर्म के नाम पर होने वाली इस बलि-प्रथा को भगवान बुद्ध तथा महावीर ने अपने उपदेशों द्वारा बन्द करवाया। सारे विश्व को हमने प्रेम, शांति तथा अहिंसा का दिव्य संदेश दिया। हम भारतवासी दूसरों को आनंद प्रदान कर स्वयं सुखी होते थे।

तलवार द्वारा बर्बरतापूर्ण विजय में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि धर्म के प्रचार-प्रसार से विश्व में अपनी कीर्ति स्थापित करते थे। इसी देश में सम्राट आशोक बौद्ध धर्म स्वीकार कर भिक्षु के रूप में घूम-घूम कर धर्म का प्रचार करते रहे। वे घर-घर जाते और सभी को दया तथा करुणा का उपदेश देते थे।

पद – 5

यवन को दिया दया का दान, चीन को मिली धर्म की दृष्टि ।
मिला था स्वर्ण-भूमि को रत्न, शील की सिंहल को भी सृष्टि ।
किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं ।
हमारी जन्म भूमि थी यहीं, कहीं से हम आये थे नहीं ।।

शब्दार्थ :

  • यवन – यूनान के निवासी स्वर्ण
  • भूमि – वर्मा, सुमात्रा
  • रत्न – मणि
  • पालना – झूला
  • शील – उत्तम स्वभाव, आचरण
  • सृष्टि – संसार

व्याख्या – भारतवर्ष के सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने युद्ध भूमि में यवन सेनापति सेल्युकस को पराजित कर उस पर दया दिखलाते हुए प्राण दान दिया। चीन को धर्म-दृष्टि, वर्मा, सुमात्रा को, त्रित्न (ज्ञान, दर्शन, चरित्र) की तथा लंका को शील की शिक्षा देकर उपकृत किया। भारतीयों ने किसी भी देश या जाति से बलपूर्वक कुछ नहीं प्राप्त किया। यह देश प्राकृतिक शोभा, सुंदरता तथा सुषमा का आंगन है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है । हम भारतीय इसी देश के मूल निवासी हैं। हम आर्यों की संतान हैं। आर्य बाहर से यहाँ आए, यह कथन भ्रमपूर्ण तथा असत्य है। अत: आर्यों का मूल देश भारत ही है। हम कहीं बाहर से नहीं आए थे।

पद – 6

जातियों का उत्थान-पतन, आँधियाँ झड़ीं प्रचण्ड समीर ।
खड़े देखा, झेला हँसते, प्रलय में पले हुए हम वीर ।
चरित के पूत, भुजा में शक्ति, नप्रता रही सदा सम्पन्न ।
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न ।।

शब्दार्थ :

  • उत्थान – प्रगति
  • पतन – विनाश
  • पूत – पवित्र नम्रता – विनय
  • गौरव – बड़प्पन, आदर
  • विपन्न – दु:खी
  • प्रचंड – उग्र, भयंकर
  • समीर – हवा
  • गर्व – स्वाभिमान
  • सम्पन्न – धनी, परिपूर्ण

व्याख्या – हमारे देश में कई जातियों का विकास हुआ, लेकिन कालक्रम से वे नष्ट भी हो गये। इस देश पर कई बार विदेशी लुटेरों तथा विजय एवं धन की कामना करने वाले विजेताओं के आक्रमण हुए। हमने अशांति, संकट और आक्रमण रूपी आँधियों तथा तूफानों का सामना किया। वीर भारतवासी उन भयंकर संकटों को सहते रहे, हँसते हुए जूझते रहे। पर कभी डरे नहीं, साहस नहीं छोड़े, सदा स्थिर बने रहे। वीरतापूर्वक मुकाबला करते रहे। हम प्रलय जैसी विभीषिका को भी पार कर चुके हैं। हमारा चरित्र पवित्र था। हम शारीरिक शक्ति से भी सम्पन्न थे। फिर भी अतिशय विनम्र तथा शालीन बने रहे। हृदय में स्वाभिमान की भावना भरी हुई थी। हम किसी की विपन्नता, अभाव को नहीं देख सकते थे। पर सेवा तथा परोपकर की भावना से परिपूर्ण थे।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

पद – 7

हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव ।
वचन में सत्य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव ।
वही है रक्त, वही है देश, वही साहस है, वैसा मान ।
वही है शान्ति, वही है शक्ति, वही हम दिव्य आर्य-सन्तान ।
जिएँ तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष ।
निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।।

शब्दार्थ :

  • संचय – संग्रह
  • वचन – वाणी
  • टेव – हठ, दृढ़ता
  • अभिमान – गर्व
  • निछावर-उत्सर्ग
  • अतिथि – मेहमान
  • प्रतिज्ञा – प्रण, शपथ
  • दिव्य – भव्य, अलौकिक
  • हर्ष – खुशी, आनंद
  • सर्वस्व – सब कुछ

व्याख्या – हम भारतवासी परोपकार तथा दान के लिए धन-संग्रह करते थे। स्वार्थ के लिए नहीं। अतिथि का सम्मान देवता की तरह करते थे। हमारी वाणी में सत्य का संचार था। हृदय में तेजस्विता थी, प्रतिज्ञा में दृढ़ता थी। प्राण देकर की हुई प्रतिज्ञा का पालन करते थे। हम भारतवासी आर्यों की मूल संतान हैं। हमारी नसों में उन्हीं का खून विद्यमान है। उन्हीं की भाँति हममें साहस तथा ज्ञान है। हम उन दिव्य आर्यों के वंशज हैं, इसलिए हम में वही शान्ति तथा शक्ति है। हममें हर्ष तथा स्वाभिमानपूर्वक यह भाव होना चाहिए कि हमारा जीवन स्वदेश भारत के लिए है। हम अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व प्यारे स्वदेश के लिए न्योछावर कर दें। यही प्यारा देश हमारी जन्मभूमि है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 Question Answer – वृंद के दोहे

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
वृंद किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(ग) रीतिकाल।

प्रश्न 2.
कवि वृंद के पिता का क्या नाम था ?
(क) रूपजी
(ख) स्वरूपजी
(ग) भूपजी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रूपजी।

प्रश्न 3.
वृंद के गुरु कौन थे ?
(क) रामानंद
(ख) तारा पंडित
(ग) नरहरिदास
(घ) बल्लभाचार्य
उत्तर :
(ख) तारा पंडित।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 4.
वृंद किसके दरबारी कवि थे ?
(क) अकबर के
(ख) शाहजहाँ के
(ग) औरंगजेब के
(घ) बहादुरशाह के
उत्तर :
(ग) औरंगजेब के।

प्रश्न 5.
युद्ध में क्या शोभा नहीं देता हैं ?
(क) तलवार
(ख) वीरता
(ग) श्रृंगार
(घ) भाला
उत्तर :
(ग) शृंगार।

प्रश्न 6.
सौर का क्या अर्थ हैं ?
(क) सूर्य
(ख) चादर
(ग) पेड़
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चादर ।

प्रश्न 7.
विष को कंठ में किसने बसाया हैं ?
(क) बह्मा ने
(ख) विष्णु ने
(ग) शिव ने
(घ) इन्द्र ने
डत्तर :
(ग) शिव ने।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार सब लोग किसकी सहायता करते हैं ?
(क) निर्बल की
(ख) सबल की
(ग) दुर्बल की
(घ) इनमें से किसी की नहीं
उत्तर :
(ख) सबल की

प्रश्न 9.
हमें दान किसको देना चाहिए ?
(क) हीन को
(ख) प्रवीन को
(ग) दीन को
(घ) किसीं को नहीं
उत्तर :
(ग) दीन को

प्रश्न 10.
कौन आग को बढ़ा देता है और दीपक को बुझा देता है ?
(क) पानी
(ख) बादल
(ग) हवा
(घ) वर्षा
उत्तर :
(ग) हवा

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दान किसको देना चाहिए ?
उत्तर :
दान दीन को अर्थात् गरीब व्यक्ति को देना चाहिए।

प्रश्न 2.
विद्या की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम तथा उद्यम करना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 3.
मीठी बोली बोल कर तोता कहाँ कैद हो जाता है ?
उत्तर :
मीठी बोली बोलकर तोता पिंजड़े में कैद हो जाता है।

प्रश्न 4.
कौन अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है ?
उत्तर :
दुष्ट अर्थात् नीच व्यक्ति अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है।

प्रश्न 5.
विष कौन-सा गुण नहीं त्यागता है ?
उत्तर :
विष अपनी स्यामला अर्थात् कालिमा गुण को नहीं त्यागता है।

प्रश्न 6.
कवि वृंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
कवि वृदद का जन्म 1643 ई० मे बीकानेर के मेड़ता नामक गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
कवि वृंद ने किस प्रकार की रचनाएँ लिखी हैं ?
उत्तर :
कवि वृंद ने रीति और नीतिपरक रचनाएँ लिखी हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 8.
वृंद की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर :
बारहमासा, नयन पचीसी, यमक-सतसई, इत्यादि वृंद की कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं।

प्रश्न 9.
प्यास कहाँ नहीं बुझती हैं?
उत्तर :
रीते सरवर अर्थात् सूखे तालाब के पास जाने से प्यास नहीं बुझुती है।

प्रश्न 10.
औषधि किसको देनी चाहिए ?
उत्तर :
औषधि बीमार व्यक्ति को देनी चाहिए।

प्रश्न 11.
सबकी चिंता कौन करता है ?
उत्तर :
सबकी चिंता ईश्वर करता है।

प्रश्न 12.
रिश्ता तोड़कर जोड़ने पर क्या होता है?
उत्तर :
रिश्ता तोड़कर पुनः जोड़ने पर मन में एक गाँठ पड़ जाती है अर्थात् शंका रह जातीं है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दुष्ट की दुष्टता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
दुष्ट व्यक्ति कभी भी अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। उसे कितना ही बड़ा स्थान मिल जाय अथवा बड़े लोगों की संगति मिल जाय पर वह अपनी दुष्टता को, अपनी बुराइयों को नहीं छोड़ पाता। जैसे विष अपने स्वाभाविक धर्म-गुण को नहीं छोड़ता, उसी प्रकार दुष्ट लोग भी अपने दोष को कभी नहीं छोड़ सकते।

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प्रश्न 2.
बिना अवसर की बात कैसी लगती है ?
उत्तर :
बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। शृंगार की बात संभी को अच्छी लगती है लेकिन युद्ध या लड़ाई के समय यदि भृंगार रस की बात कही जाय तो वह किसी को अच्छी नहीं लगेगी। उचित अवसर पर ही उचित बात का महत्व होता है। कितनी भी अन्छी बात हो, पर अनुपयुक्त अवसर पर कही जाती है तो किसी को अच्छी नहीं लगती।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
“जाही ते कछु पाइये ………. कैसे बुझत पिआस’
(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।
उत्तर :
प्रस्तुत दोहा ‘वृंद के दोहे’ पाठ से लिया गया है। इसके कवि का नाम वृंद है।

(ii) उपर्युक्त अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत नीति-परक दोहे में कवि वृंद ने यह व्यावहारिक शिक्षा दी है कि जिससे कुछ प्राप्त करने की उम्मीद हो, उसी की आशा करनी चाहिए। ऐसे व्यक्ति से कभी भी कुछ आशा नहीं करनी चाहिए जो स्वयं अक्षम हो। वहाँ से निराशा ही हाथ लगेगी। जैसे सूखे, जलहीन सरोवर में जाने पर किसी की प्यास नहीझ सकती।

प्रश्न 2.
“विद्या धन उद्यम बिना ………… ज्यों पंखे का पौन।”
(i) विद्या रूपी धन की प्राप्ति कैसे हो सकती है ?
उत्तर :
विद्या रूपी धन की प्राप्ति प्रयास, परिश्रिम तथा उद्यम करने से हो सकती है। आलसी व्यक्ति को, परिश्रम से जी चुराने वाले व्यक्ति को विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि वृंद ने बतलाया है कि परिश्रमी व्यक्ति ही अपनी मेहनत से विद्या रूपी धन की प्राप्ति कर सकता है। आलसी तथा निठल्ला व्यक्ति कभी भी विद्या को नहीं प्राप्त कर सकता। इस संबंध में कवि ने पंखे की हवा का उदाहरण दिया है। हवा की प्राप्ति के लिए, शरीर को सुख पहुँचाने के लिए पंखे को हिलाने का श्रम करना पड़ता है। बिना डुलाए, बिना परिश्रम किए हवा नहीं मिल सकती। उसी प्रकार विद्या-रूपी अमूल्य धन को पाने के लिए सद़ा परिश्रम करना ही पड़ता है।

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प्रश्न 3.
“कबहूँ प्रीति न जोरिये ………… गाँठि परति गुन माहि।’
(i) कवि यहाँ क्या नहीं करने को कहता है ?
उत्तर :
कवि यहाँ प्रीति न जोड़ने और जोड़ कर न तोड़ने के लिए कह रहा है।

(ii) इस दोहे से कवि क्या संदेश देना चाहता है ?
उत्तर :
इस दोहे से कवि व्यावहारिक जीवन में सफल होने का संदेश देना चाहता है। कवि ने इस सच्चाई को सष्ट किया है कि प्रीति कर के उसे तोड़ देने का परिणाम अच्छा नहीं होता।

इसलिए यदि किसी से लगाव बनाते हैं तो उसका निर्वाह कीजिए। प्रीति करके कभी उसे मत तोड़िए क्योंकि एक बार जब प्रीति दूट जाती है तो फिर नहीं जुड़ती, यदि जुड़ती भी है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। एक रस्सी के उदाहरण से कवि ने इसे समझाया है। जिस प्रकार रस्सी के तोड़ने तथा फिर जोड़ने से उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रीति के टूट जाने पर फिर सच्चा प्रेम नहीं हो पाता। संदेह की गाँठ पड़ जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
वृंद के दोहों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
कवि वृंद को मानव प्राकृति और व्यवहार का अच्छा ज्ञान था। इनके नीतिपूर्ण दोहे मानव जीवन में बड़े ही उपयोगी हैं। इनके कुछ दोहे लोक-जीवन की वाणी बने हुए हैं। कवि ने व्यावहारिक शिक्षा देते हुए कहा है कि मनुष्य को अवसर के अनुकूल ही कोई बात कहनी चाहिए। बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। जैसे युद्ध के की उम्मीद हो, जो समर्थ हो, उसी से पाने की आशा रखनी चाहिए। जलहीन सूखे तालाब में जाने पर प्यास नहीं बुझ सकती।

कवि ने कहा है कि मनुष्य को अपनी क्षमता, साधन तथा स्थिति के अनुकूल ही कार्य करना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करता तो कष्ट में पड़ जाता है, उसे उसका कुफल भोगना पड़ता है। कहा भी गया है कि चादर जितनी लंबी हो हमें अपना पाँव उतना ही फैलाना चाहिए। चादर के बाहर पैर पसारना कष्ट को आमंत्रित करना है। कार्य आरंभ करने के पूर्व अपनी क्षमता, स्थिति तथा साधन का मूल्यांकन कर लेना चाहिए। यदि हम अपनी क्षमता और साधन के अनुकूल कार्य करते हैं तो हम निश्चय ही सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति करने में सफल होंगे।

परिश्रम के बिना इस संसार में कोई भी व्यक्ति विद्या-रूपी अमूल्य धन नहीं पा सकता। इस जगत् में शक्ति संपन्न व्यक्ति की ही सब लोग सहायता करते हैं। कभी-कभी गुण भी दोष बन जाता है। अच्छाई भी दु:ख का कारण बन जाती है। मधुर वाणी बोलने के कारण ही तोता को पिंजड़े में कैद होना पड़ता है। कवि बड़ी उपयेगीी बात बतलाई है कि हमें अभावग्रस्त, पीड़ित गरीब व्यक्ति को ही दान देना चाहिए जिससे उसकी दरिद्रता दूर हो जाए। दबा उसी को दी जानी चाहिए जिसके शरीर में रोग हो। अतः सम्पन्न व्यक्ति को दान देना व्यर्थ है। महान स्थान पाकर भी दुष्ट अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। महादेव के गले में स्थान पाकर भी विष अपनी कालिमा का परित्याग नहीं करता।

कवि ने परमेश्वर की प्राणियों पर असीम अनुकेपा का वर्णन किया है। ईश्वर जगत के सभी प्राणियों के कल्याण की चिन्ता करते हैं। बच्चे के जन्म के पहले ही प्रभु उसे जीवित रहने के लिए माता की छाती में दूध की व्यवस्था कर देते हैं। बच्चे को दुग्ध पान की व्यवस्था ईश्वर की अतिशय कृपा है। फिर नीति की उपयोगी बात कवि ने बतलाई है। व्यक्ति को कभी भी अपने परस्पर के प्रेम संबंध को नहीं तोड़ना चाहिए। एक बार यदि प्रेम संबंध टूट जाता है फिर वह नहीं जुड़ता है। जुड़ता भी है तो उसमें संदेह की गाँठ पड़ जाती है। पूर्व जैसी एकरसता नहीं रह जाती। कवि ने रस्सी के उदाहरण से स्पष्ट किया है रस्सी के टूट जाने पर यदि पुनः उसे जोड़ा जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। अतः हमें अपने प्रेम संबंध को बचाकर रखना चाहिए।

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भाषा-बोध :

(क) शब्दों के शुद्ध रूप –

सिंगार – शृंगार
पिआस – प्यास
करतब – कर्त्तव्य
पौन – पवन
सबन – सब
प्रीति – प्रीति (प्रेम)

(ख) पर्यायवाची शब्द –

अवसर – मौका, समय, संयोग।
सरवर – सरोवर, तालाब, जलाशय।
पवन – वायु, हवा, अनिल।
आग – अग्नि, पावक, अनल।
शरीर – तन, देह, बदन, काया।

WBBSE Class 6 Hindi वृंद के दोहे Summary

जीवन-परिचय :

वृंद का जन्म सन् 1643 में जोधपुर के मेड़ते ग्राम में एक बाह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही ये सुशील, गंभीर और तीव्र बुद्धि के थे। काशी में तारा पंडित के पास रहकर इन्होंने, व्याकरण, वेदान्त, साहित्य तथा गणित आदि का ज्ञान प्राप्त किया। औरंगजेब के दरबारी कवि रहे। इनकी मृत्यु सन् 1723 में हुई । इनकी प्रमुख रचनाएं बारह मासा, नयन पचीसी, पवन पचीसी और यमक सतसई हैं। इनके दोहे सरल, सरस तथा कलापूर्ण हैं। इनके दोहे लोकजीवन की वाणी बन गए हैं। सूक्तिकार के रूप में ही ये अधिक प्रसिद्ध हैं। इनकी भाषा परिष्कृत ब्रज भाषा है। नीति काव्य रचना के क्षेत्र में कवि वृन्द का स्थान अन्यतम है।

पद – 1, 2

नीकी पै फीकी लगै, बिन अवसर की बात।
जैसे बरनत युद्ध में, नहिं सिंगार सुहात ।।
जाही ते कछु पाइये, करिये ताकी आस ।
रीतै सरवर पर गये, कैसे बुझत पिआस ।।

शब्दार्थ :

  • नीकी = अच्छी।
  • जाही ते = जिससे।
  • फीकी = बुरी, खराब।
  • ताकी = उसकी।
  • बरनत = वर्णन करना।
  • आस = आशा।
  • सिंगार = शृंगार।
  • रीते = खाली।
  • सुहात = अच्छा लगना।
  • सरवर = तालाब।
  • बुझत = बुझना ।
  • पिआस = प्यास।

सन्दर्भ – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘वृंद के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। यहाँ कवि ने नीति की उपयोगी शिक्षा दी है।

व्याख्या – कविवर वृंद कहते हैं कि अच्छी बात भी अगर बिना अवसर के कही जाती है तो वह खराब लगती है। अर्थात् उपयुक्त अवसर पर कही गई बात ही अन्छी लगती है। जैसे युद्ध के समय यदि श्रृंगार का वर्णन किया जाता है तो वह किसी को अच्छा नहीं लगता।

कवि ने यह व्यावहारिक शिक्षा दी है कि जिससे कुछ पाने का निश्चय हो, उसी की आशा करनी चाहिए। जैसे खाली (जल रहित) तालाब में जाने पर कैसे प्यास बुझ सकती है। अर्थात् बिना जलवाले सूखे तालाब में जाने पर किसी की प्यास नहीं बुझ सकती। अतः जिसके दिल में दया, परोपकार की भावना नहीं है, जो स्वभाव से कंजूस है, उसके पास जाना, उससे कुछ पाने की आशा रखना व्यर्थ है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 3,4

अपनी पहुँच विचारि कै, करतब करिये दौर ।
तेते पाँव पसारिये, जेती लंबी सौर ।।
विद्या धन उद्यम बिना, कहा जु पावै कौन ।
बिना डुलाये ना मिले, ज्यों पंखे का पौन।।

शब्दार्थ :

  • पहुँच = सामर्थ्य।
  • उद्यम = उद्योग।
  • करतब = कर्त्रव्य ।
  • पावै = पाना ।
  • दौर = दौड़कर ।
  • डुलाये = हिलाना।
  • तेते = उतना।
  • ज्यों = जिस प्रकार ।
  • पाँव = पैर।
  • पौन = हवा।
  • पसारिये = फैलाइए।
  • सौर = चादर।

संदर्भ – प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने यह शिक्षा दी है कि अपने साधनों के अनुसार ही व्यक्ति को काम करना चाहिए। व्याख्या – मनुष्य को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही दौड़ कर अपना कर्त्वव्य करना चाहिए। जितनी लंबी चादर हो, उतना ही पैर फैलाना चाहिए अर्थात् अपनी आमदनी के अनुसार ही खर्च करना चाहिए। आमदनी से अधिक खर्च करने से मुसीबत का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार इस दोहे में कवि ने शिक्षा दी है कि मनुष्य को अपनी क्षमता तथा साधन के अनुसार ही कोई कार्य करना चाहिए। तभी उसे सफलता मिल सकती है।

प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम तथा उद्यम की आवश्यकता पर बल दिया है।
विद्या रूपी धन परिश्रम के बिना कोई कैसे पा सकता है , अर्थात् प्रयत्न और मेहनत के बिना कोई भी मनुष्य विद्या रूपी धन को प्राप्त नहीं कर सकता। इस संबंध में कवि ने पंखे की हवा का उदाहरण दिया है। पंखा हिलाए बिना पंखे की हवा नहीं मिल सकती। हमें हवा प्राप्त करने के लिए पंखा हिलाने का परिश्रम करना पड़ता है। अत: विद्या की प्राप्ति के लिए हमें परिश्रम करना ही होगा। आलसी को विद्या नहीं मिल सकती।

पद – 5, 6

सबै सहायक सबल को, कोई न निबल सहाय।
पवन जगावत आग को, दीपहि देत बुझाय।।
कहूँ-कहूँ गुन ते अधिक, उपजत दोष सरीर।
मधुरी बानी बोलि कै, परत पींजरा कीर।।

शब्दार्थ :

  • सबल = शक्तिशाली।
  • कहूँ = कहीं।
  • निबल = कमजोर।
  • गुन = गुण।
  • पवन = हवा।
  • उपजत = उत्पन्न होना।
  • दीपहि = दीये को।
  • मधुरी = मीठी।
  • सहाय = सहायक।
  • बानी = वाणी।
  • जगावत = जगाना।
  • कीर = तोता।

सन्दर्भ : प्रस्तुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि सभी लोग ताकतवर व्यक्ति की ही सहायता करते हैं, कमजोर की कोई नहीं।

व्याख्या : इस संसार में शक्तिशाली व्यक्ति के सहायक सभी हो जाते हैं पर कमजोर-दुर्बल व्यक्ति की सहायता कोई नहीं करता। हवा और दीपक के उदाहरण से कवि ने इसे समझाया है। हवा आग को जगा देती है अर्थात् तीव्र बना देती है पर वही हवा छोटे दीपक को अपने झोंके से बुझा भी देती है।

प्रतुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि कभी-कभी गुण भी दोष बन जाता है और प्राणी के जीवन को दु:खी कर देता है।
कहीं-कहीं शरीर का गुण ही दोष उत्पन्न कर देता है। तोता की मीठी बोली ही उसके लिए बुराई बन जाती है। मधुर वाणी के कारण वह पींजरे में पड़कर बन्दी का जीवन जीता है। मीठी बोली के कारण ही लोग तोते को पिंजड़े में बन्द करके पालते हैं।

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पद – 7, 8

दान दीन को दीजिए, मिटै दरिद की पीर ।
औषधि वाको दीजिए, जाके रोग शरीर।।
दुष्ट न छाड़ै दुष्टता, बड़ी ठौर हूँ पाय।
जैसे तजत न स्यामला, विष शिव कंठ बसाय।

शब्दार्थ :

  • दीन = गरीब।
  • दुष्ट = नीच।
  • मिटै = खतम होना।
  • दुष्टता = नीचता।
  • दरिद = दरिद्र, गरीब।
  • ठौर = स्थान ।
  • पीर = पीड़ा।
  • तजत = छोड़ना।
  • औषधि = दवा।
  • स्यामला = कालिमा।

संदर्भ : प्रस्तुत नीति परक दोहे में कवि ने गरीब की सहायता करने के लिए कहा है।

व्याख्या : गरीब व्यक्ति को ही दान देकर उसकी सहायता करनी चाहिए। इससे उस दीन-हीन दुखी व्यक्ति की पीड़ा, उसकी दरिद्रता खत्म हो जायगी। दवा उसी को दी जानी चाहिए जिसके शरीर में कोई रोग हो। नीरोगी को दवा देना व्यर्थ है। उसी प्रकार जरूरतमंद की ही सहायता करनी चाहिए।

प्रस्तुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि सम्मानजनक बड़ा स्थान पाकर भी दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्टता को, अपनी स्वाभाविक बुराई को नहीं छोड़ता। जैसे विष शिव जी के गलेमें स्थान पाकर भी अपनी कालिमा को, अपने दोष को नहीं छोड़ता।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 9

प्रभु को चिन्ता सबन की, आपु न करिये ताहिं।
जनम आगरू भरत है, दूध मातृ-धन माहिं।।

शब्दार्थ :

  • प्रभु = ईश्वर।
  • जनम = जन्म।
  • सबन = सब।
  • आगरू = पहले ही।
  • आपु = स्वयं।
  • भरत = भर देते हैं।
  • चिन्ता = सोच, फिक्र।
  • मातृ = माँ।

व्याख्या : प्रस्तुत दोहे में ईश्वर की महिमा का वर्णन करते हुए कवि ने बतलाया है कि ईश्वर सब प्रकार से सभी प्राणियों की रक्षा करते हैं। सचमुच ईश्वर सभी की चिन्ता करते हैं। सभी के हित के विषय में सोचते हैं। इसलिए व्यक्ति को स्वयं चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। प्रभु को लोगों के हित की इतनी चिन्ता रहती है कि शिशु के जन्म के पहले ही वे माँ की छाती में दूध भर देते हैं, जिससे जन्म लेते ही बच्चे को माँ का दूध मिलने लगता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 10

कबहूँ प्रीति न जोरिए, जोरि तोरिये नाहिं।
ज्यों तोरे-जोरे बहुरि, गाँठ परति गुन माहिं।।

शब्दार्थ :

  • प्रीति = प्रेम ।
  • ज्यों = जैसे, जिस प्रकार।
  • जोरिये = जोड़ना।
  • बहुरि = फिर, पुनः।
  • तोरिये = तोड़ना।
  • गुन = रस्सी।

व्याख्या : इस दोहे में कवि ने नीति की उपयोगिता पर शिक्षा दी है। कवि का कथन है कि बहुत सोच-समझकर ही प्रेम संबंध बनाना चाहिए। बिना विचारे प्रेम नहीं करना चाहिए। प्रेम संबंध बनाकर तोड़ना नहीं चाहिए। प्रेम के टूट जाने पर यदि पुन: जोड़ने की चेष्टा की जाती है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। जिस प्रकार रस्सी के टूट जाने पर यदि उसे जोड़ा जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रेम के टूट जाने पर यदि फिर प्रेम संबंध जोड़ा जाता है तो उसमें संदेह की गाँठ पड़ जाती है। पहले जैसे प्रेम की सरसता नहीं रह जाती।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 नया रास्ता

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 Question Answer – नया रास्ता

अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर :

प्रश्न 1.
आनेवाले मेहमान को विशेष महत्व क्यों दिया जा रहा है?
उत्तर :
आनेवाले मेहमान मेरठ वालों को मीनू का फोटो पसंद आ गया है। इसलिए वे मीनू को देखने तथा रिश्ता निश्धित करने के लिए आ रहे हैं। पहले भी कई लड़कों ने देखा पर शादी करने से इनकार कर दिया। इस परिवार में मीनू को पसंद किया है। मीनू के परिवार को विश्चास है कि अब मीनू का रिश्ता पक्का हो जाएगा। इसलिए मेहमान का विशेष महत्व दिया जा रहा है। उनके स्वागत के लिए हर प्रकार की तैयारीयाँ की जा रही हैं।

प्रश्न 2.
आनेवाले मेहमान से परिवार के लोगों को क्या उम्मीद है?
उत्तर :
आनेवाले मेहमान से परिवार के लोगों को यह उम्मीद है कि इस बार मीनू का रिश्ता पक्का हो जाएगा । निश्चित रुप से मीनू को वे लोग पसंद कर लेगें।

प्रश्न 3.
लेखिका मीनू को दृढ़ता और साहस की मूर्ति क्यों कहा है?
उत्तर :
मीनू योग्य तथा होनहार युवती थी। कई लड़कों ने छोटे कद तथा साँवले रंग के कारण रिश्ते से इनकार कर दिया था। पर इससे मीनू हतप्रभ तथा निराश न हुई उसने साहस से काम लिया। उसने नया रास्ता चुना। विवाह का सपना देखना ही छोड़ दिया। वह अपनी जिन्दगी का एक क्षण भी व्यर्थ नहीं होने देना चाहती थी। उसने वकील बनकर अपने पैरों पर खड़ी होने का निश्धय किया। रुढ़िवादी समाज की संकीर्ण विचार धारा को नकारते हुए उसने स्वयं अपना भविष्य निर्धारित किया। इसी कारण लेखिका ने उसे दृढ्ता एवं साहस की मूर्ति कहा है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 नया रास्ता

प्रश्न 4.
विवाह के अलावा मीनू के जीवन का लक्ष्य क्या था?
उत्तर :
विवाह के अलावा मीनू के जीवन का लक्ष्य था वकील बनकर अपने पैरों पर खड़ा होना। उसके मन में लगन थी कुछ बनने की कुछ कर दिखाने की। अपने पाँव पर खड़े होकर वह इतना पैसा कमा लेना चाहती थी कि जिससे समाज में सिर ऊँचा करके रह सके।

प्रश्न 5.
मीनू समाज के झूठे आवरण को हटाकर एक सत्य दिखाना चाहती है -स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मीनू आधुनिक प्रबुद्ध विचारों की दृढ़ व साहसी युवती है। समाज में व्याप्त रूढ़ियों, अंध विध्रासों, सड़ी गली परंपराओं को वह नकार देती है। दकियानूसी समाज की मान्यता रही है कि लड़कियों का कार्य क्षेत्र घर की चारदीवारी के भीतर है। उनकी मान्यता है कि माता-पिता की इच्छानुसार विवाह कर लड़कियाँ घर के भीतर गृह कार्य संपन्न करे। मीनू इस झूठे आवरण हटा कर सत्य का रास्ता दिखाना चाहती है। वह चाहती है कि पुरुषों की तरह लड़कियाँ भी अपनी प्रगति और विकास का मार्ग चुन सकती हैं। अपने दृढ़ आत्मबल से मीनू वकालत प्रथम श्रेणी में पास कर सफल वकील बनकर समाज को जीवन की सच्चाई दिखा देती है।

प्रश्न 6.
धनीमल और मायाराम कौन हैं? उनके बीच क्या बातचीत हो रही है?
उत्तर :
धनीमल शहर के एक धनी और सम्पन्न व्यक्ति थे। मायाराम अमित के पिता थे जो मीनू को देखने और रिश्ता तय करने के लिए मीनू के घर जा चुके थे। धनीमल अपनी बेटी सरिता का रिश्ता लेकर मायाराम के घर आए थे। यहाँ धनीमल और मायाराम के बीच अमित और सरिता के रिश्ते के विषय में बातचीत हो रही है। मायाराम ने कहा कि हुम एक लड़की देखकर आए हैं, सब को लड़की पसंद आ गई है। एक बड़े घर की लड़की लेकर वे बेटे को बेच डालना नहीं चाहते । धनीमल शादी में पाँच लाख रुपये लगाने के लिए कहा। धनीमल जी रुपये का लोभ देकर सरिता की शादी के लिए प्रयास कर रहे थे। वे चाहते हैं कि बेटी सरिता का विवाह मायाराम के बेटे अमित संग संपन्न हो जाए।

प्रश्न 7.
अमित और सरिता किस विषय में बात कर रहे थे?
उत्तर :
अमित और सरिता को एकान्त में बातें करने का अवसर दिया गया। अमित ने सरिता से उसकी रुचि के बारे में पूछा। सरिंता ने जवाब दिया कि पेंटिग व कार ड्राइविंग में उसकी विशेष रुि है। फिर अमित ने घर के काम काज के विषय में पूछा तो सरिता ने स्पष्ट बतला दिया कि उसे घर के काम नहीं आतें। घर में चार-चार नौकर हैं। अत: उसे काम करने की न जररत ही है न घर के काम में उसकी रुचि ही है। उसने यह भी कहा कि पिता जी शादी के बाद उसके साथ एक नौकर घर का काम करने के लिए भेज देंगे।

प्रश्न 8.
“मुझे पेंटिग व कार ड्राइविंग में विशेष रुचि है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
यह कथन शहर के अमीर व्यक्ति धनीमल की बेटी सरिता का है। अमित ने सरिता से उसकी रुचि और पसंद के बारे पूछा तो धनी बाप की बेटी सरिता ने अमीरों की बेटियों की भौंत स्सष्ट कह दिया कि उसकी रुचि पेंटिग में तथा कार ड्राइविंग में है। इस कथन से सप्ट हो जाता है कि सरिता का जीवन विलासिता पूर्ण वातावरण में बीत रहा है। घर में उसे सुख और आराम की सभी सुविधाएँ थीं। गृह काम-काज से उसे कोई मतलब नहीं था।

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प्रश्न 9.
अमीत की स्मृतियों में डूब जाने पर मीनू उदास क्यों हो जाती है?
उत्तर :
मीनू को अपनी जिन्दगी के कुछ क्षण याद आ गए। पहले भी कई लड़कों ने उसे देखा था, पर किसी ने कद की छोटी व किसी ने साँवली बताते हुए शादी करने से इनकार कर दिया था। हर बार उसके मीठे सपने चूर हो जाते थे। यह अतीत की याद उसके लिए पीड़ादायक हो जाती थी। इसी कारण अतीत की स्मृतियों में डूब जाने पर वह उदास हो जाती थी।

प्रश्न 10.
‘कई लड़के उसे नापसंद कर चुके थे’ -स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मौंनू छोटे कद की तथा साँवले रंग की लड़की थी। कई रिश्ते उसकी शादी के लिए आए पर उसके कद तथा रंग के कारण अस्वीकार कर दिए। यद्वापि वह कुरुप नहीं थी, पर अधिक सुंदर भी नहीं थी इसलिए कई लड़के उसे पसद न किए।

प्रश्न 11.
मीनू अपनी सहेलियों के साथ कहाँ जा रही है?
उत्तर :
मीनू अपनी सहेलियों के साथ होस्टल के बाहर चाय-समोसे खाने जा रही है।

प्रश्न 12.
नवयुवक कौन है?
उत्तर :
नवयुवक अमित है जो मेरठ से विवाह के निमित्त्र उसे देखने आया था, पर माता-पिता के दबाव से वह शादी न कर सका। यद्यापि वह मीनू को पसंद कर चुका था।

प्रश्न 13.
मीनू उस नवयुवक को देखकर क्यों चौंक गई?
उत्तर :
निलिमा के विवाह के अवसर पर मीनू के गीत की प्रशंसा उस नवयुवक ने की थी। मीनू ने जैसे ही उसकी ओर देखा तो वह चौंक गई, क्योंक वह नवयुवक वही अमित था जो उसे देखने मेरठ से आया था। स्वयं वह मीनू को पसंद कर लिया था, पर माता-पिता के सामने उसकी एक न चली।

प्रश्न 14.
मीनू अपनी प्रशंसा सुनकर खुश क्यों नहीं हुई?
उत्तर :
अपनी प्रशंसा सुनने के बाद भी मीनू अपने दिल में बिलकुल खुश न हुई, बल्कि उसका हृदय पीड़ा से आकुण्ठ हो उठा। क्यों कि जिस नवयुवक अमित ने उसकी प्रशंसा की थी, जिसने उसे देखने के बाद उसका दिल तोड़ा था।

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प्रश्न 15.
हमारे समाज में लड़के के विवाह की अपेक्षा लड़की के विवाह को आज इतना महत्व क्यों दिया जाता है?
उत्तर :
हमारे समाज में लड़की के विवाह को अधिक महत्व दिया जाता है। लड़को का विवाह माता-पिता के लिए कठिन मालूम पड़ता है। समाज में दहेज प्रथा अभिशाप बन गई है। लड़की सयानी हो जाती है, विवाह में और अधिक कठिनाई होती है। बिना पर्याप्त दहेज के योग्य शादी मिलते नहीं। लड़की के विवाह में देर ही जाने से समाज में लोग ऊँगली उठाने लगते हैं। लड़की की शादी होने पर माँ-बाप चिन्ता मुक्त हो जाते है। क्वाँरा लड़का घर में रह सकता है, पर क्वाँरी लड़की घर में बेठे तो समाज नाना प्रकार से लाँछन लगाता है।

प्रश्न 16.
नीलिमा कौन है? वह मीनू को राय क्यों दे रही है?
उत्तर :
नीलिमा मीनू की सबसे प्रिय सहेली है। नीलिमा चाहती है कि मीनू की शादी उसके भाई अशोक से हो जाए। अशोक मीनू को बहुत पसंद करता है। सदा उसकी प्रशंसा करता है। नीलिमा मीनू से कहने लगी अशोक भैया तेरे बहुत दिवाने हैं। तू तैयार हो जा तेरी शादी अशोक भइया से करा दूँगी। नीलिमा मीनू को शादी के लिए तैयार कर लेना चाहती है, परंतु मीनू के हठ के आगे उसकी एक न चली।

प्रश्न 17.
शादी के नाम से मीनू उदास क्यों हो जाती है?
उत्तर :
मीनू का रुप रंग साधारण था। उसे बहुत सुंदर नहीं कह सकते। उसकी शादी के लिए कई रिश्ते आए पर लड़के शादी करने से इनकार कर दिए। बार-बार रिश्ते टूटने से मीनू अत्यंत दुखी व उदस हो जाती मेरठ वालों को उसका फोटो पसंद आ गया। इसलिए मीनू और उसके परिवार को विश्वास हो गया कि यह रिश्ता निध्धित हो जाएगा। पर धन के लोभ में अमित के माता-पिता ने इस रिश्ते को अस्वीकार कर दिया। इससे रिश्ते के इनकार के कारण मीनू का दिल बिलकुल टूट गया। अब शादी के नाम से मीनू उदास हो जाती है।

प्रश्न 18.
नीलिमा उसकी (मीनू) शादी के लिए इतनी उत्साहित क्यों है?
उत्तर :
नीलिमा अपनी प्रियतम सहेली मीनू की शादी जल्दी हो जाए, यह दिल से चाहती थी। कई लड़को के इनकार कर देने से मीनू उदास तथा दुखी थी, नीलिमा उसकी इस उदासी को दूर करना चाहती थी। नीलिमा का भाई अशोक दिल से मीनू को पसंद करता था और चाहता था कि मीनू संग उसकी शादी हो जाए। इसलिए मीनू को शादी के लिए तैयार कर अपने भाई अशोक संग उसका विवाह संपन्न करा देना चाहती है। इसीलिए वह मीनू की शादी के लिए इतनी उत्साहित है।

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प्रश्न 19.
वर्षो के प्यार दुलार के बाद लड़की को बिद्धुड़ना क्यों पड़ता है ?
अथवा
प्रश्न 20.
‘बेटी पराया धन होती है’ का अर्थ स्प्ट्ट कीजिए।
उत्तर :
प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में बेटी को पराया धन माना जाता है। कालिदास ने भी कहा है ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ अर्थात् कन्या पराया धन है। माता-पिता भी लड़की के सयानी होते ही उसका विवाह कर जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते है। माता-पिता अपनी पुत्री को लाड़-य्यार करते हैं, उसका पालन-पोषण करते हैं, पर उस प्यार-दुलार के बाद लड़की को विछ्छुड़ना पड़ता है। पुरुष प्रधान समाज में घर का उत्तराधिकारी लड़का होता है। लड़की विवाह के अनंतर पराये घर की संपत्ति बन जाती है, वही घर उसका अपना हो जाता है। यह एक सामाजिक व्यवस्था तथा परंपरा है। पति तथा सास-ससुर की सेवा करना उसका धर्म हो जाता है। हर लड़की भी इस तथ्य को समझती है कि एक दिन उसे अपने माता-पिता का घर छोड़कर अन्यत्र पति के घर जाना ही है।

प्रश्न 21.
दीपक कौन है? वक्ता का उससे क्या संबंध है?
उत्तर :
दीपक मायाराम की पत्नी का भतीजा है। अमित की माँ वक्ता है । उसका दीपक से संबंध है कि वह उनके भाई का लड़का है।

प्रश्न 22.
शादी में जाने के लिए वे इतने उत्साहित क्यों हैं?
उत्तर :
मायाराम की पल्नी को अपने भाई के पास गए हुए कई वर्ष हो गए थे। इसलिए उन्होंने सोचा कि इस बार वे शादी में जाएँगी, और कुछ दिनों के लिए वहाँ रुकेंगी। इसीलिए वे शादी में जाने-के लिए इतनी उत्साहित हैं।

प्रश्न 23.
अमित मीनू के आने पर क्यों खुश हो गया?
उत्तर :
अमित ने जब पहली बार मीनू को देखा था तो समझा कि यह मीनू ही मेरे अरमानों की मंजिल है। वह सब प्रकार से मीनू को पसंद कर लिया। पर माता-पिता के दबाव के आगे उसकी एक न चली। मीनू की पीड़ा को वह समझ गया कि निराश हो कर मीनू ने वकालत पढ़कर अपने पैरों पर खड़ा होने का निश्थय कर लिया है। दिल दूट जाने से मीनू उससे घृणा करने लगी थी। जब उसे पता चला कि असताल में अक्सीडेंट से पीड़ित था अमित ने उसे याद किया है। अब मीनू के हूदय के कोने में अमीत के लिए कुछ सेह भाव उत्पन्न हो गया था। इसलिए अमित से मिलने अंसताल पहुँच गई। मीनू को देख कर अमित के उदास मुरझाये चेहरे पर प्रसन्रता झलक पड़ी। इस प्रकार अमित खुश हो गया।

प्रश्न 24.
वक्ता के वकालत पास करने से उन्हें विशेष खुशी क्यों हो रही है?
उत्तर :
वक्ता मीनू के वकालत पास करने से अमित को विशेष खुशी हो रही थी, क्योंकि मीनू ने वकालत पढ़ने व अपने पाँव पर खड़े होने का फैसला कर लिया था। इसीलिए उसने अभी तक उससे कुछ नहीं कहा। आज जब वकालत पूरी कर चुकी है तब कुछ कहने का समय आया।

प्रश्न 25.
समाज में स्त्री और पुरुष में इतना भेद क्यों है?
उत्तर :
हमारा समाज परंपरावादी समाज़ है। पुरुष प्रधान समाज परंपरा से पुरुष का अधिक महत्व देता रहा है। पुरुष ही घर का मालिक और समस्त सामाजिक क्रिया कलाप का कर्ता होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात रही कि पुरुष ही अर्थोपार्जन करता रहा है इसीलिए उसका वर्चस्व बना रहा। सभी बस परुष की अश्रित बन कर रह गई। उसका कार्य क्षेत्र घर के भीतर रहा है शिक्षा, नौकरी, व्यापार आदि क्रिया कलाप पुरुषों के अधीन रहा नारी का कार्य क्षेत्र चारदीवारी के भीतर रहा। अर्थ तंत्र पर उसका अधिकार न रहा। बेटी को पराया धन माना जाता है। वह कभी स्वाधीन न रही। पर आज कल यह व्यवस्था खतम हो चुकी है। अब स्त्री-पुरुष में भेद भाव नहीं बल्कि बराबर का दर्जा है। नारियाँ अब शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय सब में कंधे से कंधा मिलाकर पुरुष के साथ काम कर रही है।

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प्रश्न 26.
लड़की के जीवन में इतनी कठिनाइयाँ क्यों आती हैं?
उत्तर :
पुरुष प्रधान समाज में लड़कियों का कार्यक्षेत्र घर की सीमा के भीतर रहा है। उनका कार्य घर के भीतर का काम करना संतान उत्पन्न करना रहा है। अर्थतंत्र पर उनका कोई अधिकार नहीं था। हमेशा पुरुष का अनुगामी बनकर रहना पड़ता था। पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, व्यवसाय आदि पर पुरुषों का एकाधिपत्य था तथा बेटियाँ पराया धन समझी जाती थी। उनका विवाह कर विदा कर माता-पिता संतुष्ट हो जाते थे। इसीलिए लड़की के जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं। हर काम में उन्हे पुरुष का ही मुँह देखना पड़ता था। पर स्थिति बदल गई है। अब उच्च शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन होकर स्त्रियाँ समाज का महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है।

प्रश्न 27.
सामाजिक बंधन से क्या मीनू मुक्त हो सकी?
उत्तर :
निश्चित रुप से मीनू सामाजिक बंधन से मुक्त हो सकी। वकालत की प्रेक्टिश शुरू कर मीनू अर्थोपार्जन कर सशक्त बन गई। अब वह समाज का मुँहताज नहीं। समाज के झूठे आवरण को हटाकर वह सत्य और वास्तविकता का मार्ग स्वीकार की। किसी पर न रही। विवाह जैसा पवित्र संस्कार अब उसकी इच्छा पर आधारित हो गया। सक्षम होकर वह नया रास्ता दिखाने में समर्थ बन गई।

प्रश्न 28.
‘विशेष ख्याति’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
विशेष ख्याति से तात्पर्य है मीनू की बड़ी सफलता। प्रसिद्ध वकील बनकर मीनू आत्मविश्वास व लगन से विशेष ख्याति प्राप्त कर ली। जिस नारी को अबला कहा जाता रहा, जो सदा पुरुष की अनुगामिनी बनकर रहने को बाध्य हो जाती रही, वह नारी मीनू चतुर्दिक प्रशंसा तथा सम्मान का पात्र बनी।

प्रश्न 29.
उपन्यास के आधार पर मीनू का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर :
मीनू ‘नया रास्ता’ उपन्यास में सर्वाधिक सशक्त, प्रभावशाली, आदर्श नारी पात्र है। वह समाज में व्याप्त रूढ़ियों, सड़ीगली परंपराओं दकियानूसी विचारों को नहीं स्वीकारती। समाज ने सदा उसका तिरस्कार किया, उसके दिल को ठेस पहुँचाया, पर मीनू ने किसी की परवाह न की, साहस और आत्मबल को न खोई। अपना रास्ता स्वयं बनाया, अपने भाग्य का निर्माण स्वयं किया। अपनी दृढ़ता, साहस लगन तथा धैर्य से अपनी महत्वाकांक्षा को पूर्ण सफलता प्राप्त की। मीनू प्रगतिशील विचारों की प्रबुद्ध आधुनिक नारी है। उसके चरित्र की रुपरेखा इस प्रकार द्रस्टण्य है-

सुशिक्षित प्रबुद्ध नारी – मीनू मध्यम श्रेणी के परिवार की प्रबुद्ध नारी है। दकियानूसी विचारों और अंध विश्वासों को नहीं स्वीकारती। वह उच्चशिक्षा प्राप्त नारी है। वकालत की परीक्षा सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उच्च शक्षा प्राप्त करने के बाद भी उसमें अभिमान की भावना बिलकुल नहीं थी।

व्यवहार कुशल- मीनू व्यवहार में अत्यंत कुशल थी। अपने माता-पिता तथा भाई के प्रति सदा सरल सौम्य व्यवहार करती थी। अपने आचरण तथा बातचीत से कभी भी माता-पिता को ठेस नहीं लगने देती। वह एक आदर्श सहेली थी। उसकी सौम्य व्यवहार ही था कि नीलिमा सदा उसके हित के लिए प्रस्तुत थी। हास्टेल में माया से भी उसका प्रीतिपूर्ण व्यवहार था।

धैर्य और साहस की मूर्ति – मीनू के रुप रंग तथा आकार के कारण कितने लड़कों ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। पर मीनू कभी अपना धैर्य और साहस नहीं छोड़ती। सदा दृढ़ बनी रहती है। सच तो यह है कि इन्हीं परिस्थितियों ने मीनू को दृढ़ साहसी बना दिया। उसके वकालत पढ़ने, प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने तथा एक सफल वकील बनने में अद्भुत साहस और जोश था।

भावुकता एवं संवेदनशीलता – मीनू अत्यंत भावुक तथा संवेदनशील नारी थी। उसकी छोटी बहन आशा का विवाह हो गया सहेली नीलिया का विवाह ही नहीं पुत्र भी उत्पन्न हो गया, पर मीनू क्वाँरी ही बनी रही। उसके दिल में भावना कितनी प्रबल रही हो गी। पिता की बीमारी की खबर सुनते ही वह सब कुछ छोड़कर पिताजी को देखने चली गई। नीलिमा को तीव्र ज्वर था। उस समय मीनू नीलिमा के घर जाकर उसकी सेवा की, अपने हाथ से दवाई पिलाई। शादी से इनकार के बाद मीनू अमित से घृणा करती थी, पर अमित के एक्सीडेंट की खबर सुनकर वह उसे देखने अस्पताल पहुँच गई। अमित के नेत्रों में आँसू देखकर मीनू का दिल भी भर आया। वह भावविभोर हो उठी। अमित के प्रति उसके हुदय में प्यार व दया की भावना उमड़ पड़ी।

देश प्रेम की भावना – मीनू के हदय में अपने देश के प्रति लगाव था। वह चाहती थी कि पढ़ लिखकर नवयुवक देश की उन्नति में योगदान दें। नीलिमा ने बतलाया कि उसकै भाई अशोक पढ़ने के लिए अमेरिका गए है, वहाँ जाने पर लोग वही बस जाते है। मीनू ने अपना भाव व्यक्त किया कि भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है पर वे पैसे के लोभ से विदेश में जा बसें, यह बिलकुल उचित नहीं। यदि बुद्धिजीवी विदेशों में बस जाएँगे तो देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।

कर्मठ तथा महत्वाकांक्षी – मीनू कर्त्तव्यपरायण परिश्रम शील तथा दृढ़ निश्धयवाली स्वाभिमानी नारी थी। अपने परिश्रमी स्वभाव के कारण वह प्रत्येक परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। विपरीत परिस्थितियों में भी वह हार नहीं मानती। कभी निराश नहीं होती। विवाह का रिश्ता टूट जाने पर उसके मनोबल में नूतन निखार आ गया। वह एक प्रसिद्ध वकील बनना चाहती थी। अपने इस दृढ़ निश्धय को उसने पूर्ण रूप दे दिया। आत्मविश्षास व लगन से वह प्रसिद्ध वकील बनकर विशेष ख्याति प्राप्त कर ली। निश्चित रुप सें दृढ़ता और साहस की मूर्ति मीनू का चरित्र व जीवन आधुनिक युग की युवतियों के आदर्श स्वरूप है।

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प्रश्न 30.
अमित का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
अमित ‘नया रास्ता’ उपन्यास में प्रसिद्ध पुरुष पात्र है। संपूर्ण उपन्यास में उसका महत्वपूर्ण स्थान है। आदि से अन्त तक अमित कथा में प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से प्रभावशाली बना हुआ है। अमित पवित्र दिल का स्वाभिमानी युवक है। वह एक आदर्श पुत्र, आदर्श मित्र तथा सच्चा नि:-स्वार्थ प्रेमी है। यद्धपि अपने संकोची स्वभाव तथा माता-पिता के प्रति प्रेम और सद्भाव के कारण वह अपने दिल की भावना को दृढ़ता से व्यक्त न कर सका, माता-पिता का खुलकर विरोध न कर सका, पर वह अपने सच्ची प्रेम भावना फर सदा दृढ़ बना रहा। अमित के चरित्र की संक्षिप्त रूप-रेखा इस प्रकार है-

माता-पिता के प्रति आदर – अमित के हद्य में अपने माता-पिता के प्रति आदर सम्मान का भाव है। उसकी सबसे बड़ा इच्छा थी कि उसे ऐसी पत्नी मिले जो उसके माता-पिता के साथ ठीक से रह सके। उनका आदर सत्कार कर सके। मीनू ने संयुक्त परिवार में माता-पिता व बहन के साथ रहना स्वीकार कर लिया। इससे अमित को बड़ी प्रसन्नता हुई। वह नहीं चाहता कि कोई धनी बाप की लड़की माता-पिता से अलग रहे। इसीलिए वह सरिता को मन से स्वीकार न कर सका। यद्यपि माता-पिता का विरोध न कर सका।

निश्चल पवित्र स्वभाव – अमित पवित्र स्वभाव का निश्छल नवयुवक था। उसने प्रथम दृष्टि में ही मीनू को देखकर उसके भोले चेहरे के प्रति समर्पित हो गया। मीनू के प्रति उसका सच्चा प्यार आजीवन बना रहा। सरिता संग रिश्ता न होने पर वह प्रसन्न हो उठा। पर मीनू की स्नेह के प्रति सच्चे प्रेम के कारण शादी के लिए तैयार न हुआ। विवाह किया तो अन्त में मीनू के ही संग।

आदर्श चरित्र एवं समर्पण की भावना – अमित दृढ़ व्यक्तित्व का नवयुवक था। वह मीनू के प्रति समर्पित था। उसने संकोचवश सरिता संग रिश्ते का विरोध नहीं किया तथा माता-पिता के सामेने अपना दृढ़ निश्धय न बता सका। अपनी इसी भूल का प्रायाध्चित करने के लिए वह कहीं विवाह के लिए तैयार न हुआ। अस्पताल में मीनू के सामने उसने अपने दिल का सच्चा उद्गार अपनी सारी संवेदना प्रकट कर दी। मीनू के अलावा वह कहीं अन्यत्र विवाह के लिए राजी न रहा। पिता से उसने स्पष्ट कह दिया जहाँ तक मेरी पसंद की बात है मुझे तो सरिता बिल्कुल पसंद नहीं है।
अमित पढ़ा लिखा चरित्रवान नवयुवक था। अपने सिद्धान्त तथा दृढ़निश्चय के प्रति सदा तत्पर बना रहा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 Question Answer – कारतूस

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
खेमा कहाँ के जंगल में लगाया गया?
(क) गोरखपुर
(ख) बनारस
(ग) इलाहाबाद
(घ) लखनऊ
उत्तर :
(क) गोरखपुर

प्रश्न 2.
यहाँ किस जमाने की कहानी कही गई हैं?
(क) सन् 1899 .
(ख) सन् 1799
(ग) सन् 1977
(घ) सन् 1988
उत्तर :
(ख) सन् 1977

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प्रश्न 3.
किसके अफसाने सुनकर रॉबिन हुड की याद आ जाती थी?
(क) शाहेजमा
(ख) सुल्तान
(ग) वजीर अली
(घ) शमसुद्दौला
उत्तर :
(ग) वजीर अली।

प्रश्न 4.
वजीर अली के दिल में किसके प्रति नफरत कूट-कूट कर भरी थी?
(क) हिन्दुओं के
(ख) अंग्रेजों के
(ग) सिखों के
(घ) फौजियों के
उत्तर :
(ख) अंग्रेजों के

प्रश्न 5.
कारतूस किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) एकांकी
(घ) उपन्यास
उत्तर :
(ग) एकांकी

प्रश्न 6.
एकांकी में कितने अंक (दृश्य) होते हैं ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(क) एक

प्रश्न 7.
हबीब तनवीर ने ‘नया थियेटर’ की स्थापना कब की ?
(क) 1947 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1959 ई० में
(घ) 1963 ई० में
उत्तर :
(ग) 1959 ई० में

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प्रश्न 8.
‘कारतूस’ नामक रचना में किस जमाने की कहानी कही गई है ?
(क) 1899 ई० के
(ख) 1799 ई० के
(ग) 1977 ई० के
(घ) 1988 ई० के
उत्तर :
(ख) 1799 ई० के

प्रश्न 9.
वजीर अली ने कितने समय तक हुकूमत की ?
(क) पाँच दिन
(ख) पाँच सप्ताह
(ग) पाँच महीने
(घ) पाँच साल
उत्तर :
(ग) पाँच महीने

प्रश्न 10.
शाहे-जमा कहाँ का बादशाह था ?
(क) भारत
(ख) नेपाल
(ग) अरब
(घ) अफगानिस्तान
उत्तर :
(घ) अफगानिस्तान

प्रश्न 11.
कंपनी शासन ने किसके समय में सबसे ज्यादा विस्तार किया ?
(क) लार्ड वेलेजली
(ख) लार्ड क्लाइव
(ग) लार्ड कर्जन
(घ) लार्ड डलहौजी
उत्तर :
(ख) लार्ड क्लाइव

प्रश्न 12.
“दीवार हमगोश दारद, तन्हाई” – किसने कहा ?
(क) वजीर अली
(ख) सआद्त अली
(ग) शामसुद्दौला
(घ) आशिफुद्दौला
उत्तर :
(क) वजीर अली

प्रश्न 13.
कर्नल ने सवार को कितने कारतूस दिये ?
(क) एक
(ख) दस
(ग) सौ
(घ) हजार
उत्तर :
(ख) दस

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प्रश्न 14.
एंकाकी के प्रमुख पात्र कौन है ?
(क) अंग्रेज
(ख) वजीर अली
(ग) कर्नल लेफ्टीनेंट
(घ) सिपाही
उत्तर :
(ग) कर्नल लेफ्टीनेंट

प्रश्न 15.
किसने कंपनी के वकील की हत्या की ?
(क) वजीर
(ख) सिपाही
(ग) अंग्रेज
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) वजीर

प्रश्न 16.
वजीर को गर्वनर जनरल ने कहाँ तलब किया ?
(क) मुम्बई
(ख) कलकत्ता
(ग) दिल्ली
(घ) आगरा
उत्तर :
(ख) कलकत्ता

प्रश्न 17.
कौन सन्नाटे में स्तब्ध रह गया ?
(क) वजीर अली
(ख) कर्नल
(ग) लेफ्टीनेंट
(घ) सआदत अली
उत्तर :
(ख) कर्नल

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए क्यों कहा?
उत्तरः
सवार सरपट घोड़ा दौड़ाए सीधा लेफ्टीनेंट तथा कर्नल की तरफ आता हुआ मालूम पड़ा। कर्नल सिपांहियों से नजर रखने के लिए कहा, जिससे पता लगे कि वह किस तरफ जा रहा है।

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प्रश्न 2.
सवार ने क्यों कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है?
उत्तर :
सवार स्वयं वजीर अली ही था। उसने कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल हैं, क्योंकि वह एक जाँबाज सिपाही है। वह प्राण की बाजी लगाने वाला निडर सिपाही है।

प्रश्न 3.
सआदत अली कौन था? उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों कहा ?
उत्तर :
सआदत अली आसिफउद्दौला का भाई था। नवाब आसिफ उद्दौला के यहाँ लड़के की कोई उम्मीद नहीं थी। इस कारण वजीर अली की पैदाइश को सआदत अली ने अपनी मौत कहा।

प्रश्न 4.
सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?
उत्तर :
कर्नल ने उसे समझा कि वह वजीर अली को गिरफ्तार करने के लिए कारतूस मॉग रहा है। इसलिए तुरंत उसे दस कारतूस दे दिए। पर जब उसने अपना नाम वजीर अली बताया तो यह सुनकर कर्नल अपने को ठगा हुआ महसूस किए। फिर उन्हें किसी भी प्रकार का मौका दिए बिना वह सवार घोड़े पर बैठकर नौ-दो ग्यारह हो गया। किरिर्त्तव्य विमूढ़ होकर कर्नल हक्का-बक्का हो गए।

प्रश्न 5.
जाँबाज सिपाही किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर :
जाँबाज सिपाही वजीर अली को कहा गया है। पूरी एक फौज उसे गिरफ्तार करने के लिए उसका पीछा कर रही थी। वर्षों से वह कर्नल तथा उनकी फौज की आँखों से धूल झोंकता रहा, पर गिरफ्तार न हुआ। कर्नल केपास आकर उन्हें प्रमित कर उनसे कारतूस लेकर बाहर निकल गया। इसी कारण उसे जाँबाज सिपाही कहा गया है।

प्रश्न 6.
हबीब तनवीर का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
हबीब तनवीर का जन्म 1 सितंबर, 1923 ई० को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था।

प्रश्न 7.
तनवीर के बचपन का नाम क्या था ?
उत्तर :
तनवीर के बचपन का नाम हबीब अहमद खान था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस

प्रश्न 8.
‘कारतूस’ नामक रचना का मुख्य पात्र कर्नल का नाम क्या है ?
उत्तर :
कर्नल कालिंज।

प्रश्न 9.
शमसुद्दौला कौन था ?
उत्तर :
शमसुद्दौला भी नवाब का भाई और अंग्रेजों का विरोधी था।

प्रश्न 10.
सवार ने कर्नल से क्या माँगा ?
उत्तर :
सवार ने कर्नल से कारतूस माँगा।

प्रश्न 11.
सवार कौन था ?
उत्तर :
सवार वजीर अली था।

प्रश्न 12.
“दीवार हमगोश दारद” – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
दीवारों के भी कान होते हैं।

प्रश्न 13.
कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था ?
उत्तर :
कर्नल कालिंज का खेमा वजीर अली को पकड़ने के लिए जंगल में डेरा डाले हुए था।

प्रश्न 14.
वजीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे ?
उत्तर :
सिपाही वजीर अली से इसलिए तंग आ चुके थे क्योंकि हफ्तों डेरा डालने और छापा मारने के बावजूद वजीर अली उनके हाथ नहीं आया था। वे जंगल की कष्ट-भरी जिंदगी से तंग आ चुके थे।

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प्रश्न 15.
कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए क्यों कहा ?
उत्तर :
कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि वह सवार वजीर अली का कोई दूत या जानकार या कोई साथी हो सकता था।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
सआदत अली को अवध के तख पर बैठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?
उत्तर :
सआदत अली कर्नल का दोस्त था। वह ऐश पसंद आदमी था, इसलिए कर्नल को आधी जायदाद तथा दस लाख रुपये नगद दिए। इसी कारण कर्नल ने सआदत अली को अवध के तख्त पर बैठाया।

प्रश्न 2.
कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली अपने को कैसे बचाया?
उत्तर :
वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली आजमगढ़ की तरफ तुरंत भाग गया। आजमगढढ़ के शासक ने उसे और उसके साथियों को अपनी हिफाजत में घागरा तक पहुँचा दिया। अब वे सब इन जंगलों में कई साल से भटक रहे थे। इस प्रकार सआदत अली ने अपने को बचाया।

प्रश्न 3.
वजीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
उत्तर :
कर्नल ने वजीर अली को अपने पद से हटाकर बनारस भेज दिया और तीन लाख रुपये वजीफा तय कर दिया। कुछ महीने बाद गर्वनर जनरल ने उसे कोलकाता तलब किया। वजीर अली वकील के पास जाकर शिकायत की कि गर्वनर जनरल उसे कोलकाता क्यों तलब करते है। वकील ने उसकी शिकायत की परवाह नहीं कि बल्कि उल्टा उसे बुरा भला सुना दिया। वजीर अली के दिल में अंग्रेजों के खिलाफ नफरत कूट-कूट कर भरी हुई थी। इसलिए उसने वकील का कत्ल कर दिया।

प्रश्न 4.
वजीर अली एक जाँबाज सिपाही था। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
वजीर अली बहुत बहादुर सिपाही था। वह निडर। साहसी तथां प्राण की भी चिन्ता नहीं करता था। तभी तो वह वकील का कत्ल कर दिया। पूरी फौज के साथ कर्नल उसका पीछा वर्षों तक किया पर गिरफ्तर न कर सका। निर्भय होकर वह कर्नल के पास जाकर उनसे दस करतूस लेता है। अपना नाम बताकर उनके सामने से प्रस्थान कर दिया। कर्नल हक्का-बक्का रह गया। उसके इन कारनामों से स्पष्ट हो जाता है कि वह एक जाँबाज सिपाही था।

प्रश्न 5.
‘मुट्ठी भर आदमी और ये दमखम” आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
वजीर अली अपने थोड़े से साथी.सैनिकों के साथ जंगल में घूमता फिरता रहा। कर्नल एक फौज के साथ उसका पीछा करते रहे, पर कामयाब न हो सके। कर्नल ने स्वयं स्वीकार किया कि वजीर अली के साथ थोड़े से लोग है, पर वे जान की बाजी लगाने वाला है, उनमें अद्भुत शक्ति तथा दृढ़ता भरी हुई है, स्वयं वजीर अली अत्यंत बहादुर आदमी है।

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प्रश्न 6.
वजीर अली के अफसाने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी ?
उत्तर :
वजीर अली बहुत हिम्मती, दिलेर और बहाटुर व्यक्ति था। उसके साहस के कारनामे लोगों की जबान पर थे। उसने कंपनी के वकील को उसके घर जाकर मार डाला था। ऐसे-ऐसे साहस-भरे किस्से सुनकर उसे रॉबिनहुड नामक साहसी योद्धा की याद आ जाती थी।

प्रश्न 7.
सआदत अली कौन था ? उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा ?
उत्तर :
सआदत अली अवध के नवाब आसिफउद्दौला का छोटा भाई था। उसे उम्मीद थी कि आसिफउद्दौला की कोई संतान नहीं होगी। इसलिए वही अवध का नवाब बनेगा। परंतु जैसे ही वजीर अली का जन्म हुआ, उसके सपने चूरचूर हो गए। उसे अपनी नवाबी खतरे में जान पड़ी। अत: उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत समझा।

प्रश्न 8.
लेफ्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है ?
उत्तर :
लेफ्टीनेंट ने कर्नल से जाना कि कंपनी के खिलाफ केवल वजीर अली ही नहीं है, बल्कि दक्षिण में टीपू सुल्तान और बंगाल के नवाब का भाई शमसुद्दौला भी उनके खिलाफ है। तीनों ने कंपनी के विरुद्ध अफगानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को आक्रमण करने का निमंत्रण दिया था। इससे उसे आभास हुआ कि कंपनी के खिलाफ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है।

प्रश्न 9.
सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए ?
उत्तर :
सवार स्वयं वजीर अली था। उसे कारतूस चाहिए थे। उसे पता था कि कर्नल कालिंज उसे पकड़ने के लिए अपनी फौज के साथ जंगल में डेरा डाले हुए है। उसके पास कारतूस हैं। अत: वह बिना डरे कर्नल के डेरे में चला आया। उसने कर्नल के कमरे में जाकर एकांत में कर्नल से भेंट की। कर्नल ने सोचा कि यह सीवार उसे वजीर अली को पकड़ने में कुछ सहायता देगा। इसलिए उसने सवार के माँगने पर दस कारतूस उसे दे दिए।

प्रश्न 10.
सआदत अली वजीर अली का दुश्मन क्यों बन गया था ?
उत्तर :
सआदत अली आसिफड़द्दौला का छोटा भाई था। उसकी नजर अवध की नवाबी पर थी। उसे आशा थी कि आसिफउद्दोला की संतान नहीं होगी। परंतु जैसे ही वजीर अली का जन्म हुआ, उसे अपने सपने टूटते दिखे। वजीर अली उसकी नवाबी में सबसे बड़ी बाधा था। अतः वह उसका दुश्मन बन गया।

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प्रश्न 11.
वजीर अली किस बात पर गवर्नर जनरल से नाराज हो गया था ?
उत्तर :
वजीर अली गवर्नर जनरल की दो बातों से नाराज था। पहली यह कि उसने वजीर अली की रियासत अपने अधिकार में ले ली थी। दूसरी बात यह थी कि उसने वजीर अली को अपने कार्यालय कलकत्ता में बुलाया था। यह बात वजीर अली को बहुत बुरी लगी।

प्रश्न 12.
वजीर अली किस पद पर था ? उसे पद से क्यों हटाया गया था ?
उत्तर :
वजीर अली अवध का शासक था। उसे पद से इसलिए हटाया गया था क्योंकि वह अंग्रेजों के विरुद्ध था। अंग्रेज अवध की गद्दी पर अपने पिट्रू को बिठाना चाहते थे।

प्रश्न 13.
वजीर अली के मन में क्या योजना थी ? वह किसे हटाकर कब्जा करना चाहता था ?
उत्तर :
वजीर अली के मन में योजना यह थी कि वह किसी तरह नेपाल पहुँच जाए और वहाँ जाकर अफगानिस्तान के आक्रमण की प्रतीक्षा करे। तब तक वह सेना जुटाकर अवध की गद्दी से सआदत अली को हटाकर अंग्रेजों को देश से बाहर करना चाहता था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।
(क) ‘वो एक जाँबाज सिपाही है।’
1. यह उक्ति किस पाठ से उद्धृत है? इसके रचनाकार कौन हैं?
2. यह किसने, कब और किससे कहा?
3. जाँबाज सिपाही कौन हैं? उसकी विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
1. प्रस्तुत उक्ति ‘कारतूस’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार हबीब तनवीर है।
2. यह कथन सवार ने कर्नल से सवार कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी में मदद देने के लिए यह फौज रखी गई है। सवार वजोर अली की गिरफ्तारी को मुश्किल कार्य बताया। उसी समय सवार ने कर्नल से यह उक्ति कहीं।
3. जाँबाज सिपाही वजीर अली है। वजीर अली को कर्नल बहुत ही खतरनाक आदमी समझता था। वजीर अली ने अफगानिस्ता के समाट को हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने की दावत दी थी। वजीर अली बहुत ही बहादुर आदमी था। उसके दिल में अंग्रेजों के खिलाफ नफरत कूट-कूट कर भरी हुई थी। कंपनी के वकील का निर्भय होकर उसने हत्या कर दी। पाँच महीने की अपनी हुकूमत में उसने अंग्रेजों का दूर कर दिया। अंग्रेज सैनिक तंग आ गए। पर उसे पकड़ न सकें। वर्षों से वह अंग्रेजों आँखों में धूल झोकता रहा। जिस कर्नल ने उसे गिरफ्तार करने के लिए एक फौज लेकर वर्षों से परेशान था। उन्हीं कर्नल से मिलकर उनसे दस करतूस लिया और अपना वजीर अली नाम बताकर उनके नजरों के सामने से गायब हो गया। कर्नल स्तब्ध रहकर देखते ही रह गए।

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2. वजीर अली को एक जाँबाज सिपाही क्यों कहा गया है ? उसके सैनिक जीवन के क्या लक्ष्य थे ? “कारतूस” पाठ के आधार पर विस्तार से लिखिए।
उत्तर :
वजीर अली जाँबाज सिपाही था। वह अपने लक्ष्य के लिए जान न्योछावर करना जानता था। उसने अंग्रेज शासक के वकील की ही हत्या कर दी। इस प्रकार उसने अंग्रेज सरकार को खुली चुनौती दे दी। उसने अंग्रेजों की सत्ता स्वीकार करने की बजाय जंगल-जंगल भटकना उचितं समझा। वह इतना हिम्मती था कि जो अंग्रेज अधिकारी उसे ढूँढ़ने के लिए जिस डेरे में बैठा हुआ था, वह वहाँ अकेले जाकर उसे जान से मारने की धमकी दे आया।
वजीर अली के सैनिक जीवन का लक्ष्य था – अपने अधिकारों के लिए लड़ना और अंग्रेजों की अधीनता को चुनौती देना।

भाषा बोध :

1. कारक वाक्य में संज्ञा सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है।
निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनका नाम लिखें-
(क) जंगल की जिन्दगी बड़ी खतरनाक होती है-
(ख) कंपनी के खिलाफ सारे हिन्दुस्तान में एक लहर दौड़ गई-
(ग) वजीर को उसके पद से हटा दिया गया-
(घ) फौज के लिए कारतूस की आवश्यकता हैं।
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था
उत्तर :
(क) वजीर को – संबंध कारक
(ख) कंपनी के- संबंध कारक हिन्दुस्तान में – अधिकरण कारक
(ग) वीर को – कर्म कारक
पद से – अपादान कारक
(घ) फौज के लिए – संप्रदान कारक
(ङ) घोड़े पर – अधिकरण कारक

2. निम्नलिखित वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-

(क) घोड़ा पानी पी रहा था।
उत्तर :
घोड़े ने पानी लिया।

(ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
उत्तर :
बच्चों ने दशहरे का मेला देखा।

(ग) रॉबिन हुड गरीबों को मदद करता थां।
उत्तर :
रांबिन हुड ने गरीबों की मदद की।

(घ) देश भर के लोग उसकी प्रशंसा की।
उत्तर :
देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

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3. निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय शब्द लिखिएखिलाफ, उम्मीद, हासिल, कामयाब, नफरत, इंतजार।
उत्तर :
खिलाफ – विरोध, विरुद्ध।
उम्मीद – आशा, भरोसा।
हासिल – प्राप्त, पाया हुआ।
कामयाब – सफल, कृतकार्य।
नफरत – घृणा, अरुचि।
इतजार – प्रतीक्षा।

4. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

आँखों में धूल झोंकना – मेरी आँखों में धूल झोंकर ठग मेरे समान गायब कर दिया।
काम तमाम कर देना – भारतीय सैनिकों ने आतंकवादियों का काम तमाम कर दिया।
जान बखा देना – आपने ने मेरी भलाई की इसलिए आपकी जान बखा करता हूँ।
हक्का-बक्का रह जाना – उचक्का मेरे हाथ से घड़ी छीनकर भाग गया, मैं हक्का-बक्का रह गया।
फूट-फूट कर भरना – शत्रु के मन में घृणा कूट-कूट कर भरी हुई है।

5. निम्नलिखित संवादों को अनुच्छेद के रूप में बदलिए-

सवार – (बाहर से) मुझे कर्नल से मिलना है।
गोरा – (चिल्लाकर) बहुत खूब।
सवार – (बाहर से) से।
गोरा – (अंदर जाकर) हुजूर सवार आप से मिलना चाहता है।
कर्नल – भेज दो
लेफ्टीनेंट – वजीर अली का कोई आदमी होगा हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा।
कर्नल – खामोश रहो (सवार सिपाही के साथ अंदर आता है।)
सवार (आते ही पुकार उठता है) तन्हाई! तन्हाई!
कर्नल – साहब यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है, आप राजे दिल कह दे।
सवार – दीवार, हम गोरा दारद तन्हाई।
उत्तर :
सवार कर्नल से मिलने के लिए गोरा से कहता है। गोरा कर्नल के पास जाकर सूचित करता है। कर्नल भेज देने के लिए कहते हैं। लेफ्टीनेंट ने कहा कि वह वजीर का कोई आदमी होगा और हमसें मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा। कर्नल उन्हें शान्त रहने के लिए कहते हैं। सवार आते ही बिल्कुल एकांत की बातकरता है। कर्नल ने कहा कि यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है, इसलिए वह अपने मन की बात बेहिचक कह सकता है।

WBBSE Class 8 Hindi कारतूस Summary

लेखक-परिचय :

हबीब तनवीर का जन्म सन् 1923 ई० को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। हाबीब तनवीर नाटककार, कवि, पत्रकार, अभिनेता, नाद्य निर्देशक आदि क्षेत्रों में ख्याति अर्जित किए। 1982 ई० में वे पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित किये गएं। साहित्य तथा कला के क्षेत्र में इन्हें विविध संस्थाओं ने सम्मानित किया। भारतीय रंगमंच को समृद्ध करने में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 2009 ई० में इनका देहावसान हो गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस

सारांश :

एकांकी के प्रमुख पात्र कर्नल लेफ्टीनेंट, सिपाही, सवार गोरखपुर के जंगल में रात्रि में कर्नन कालिंग और एक लेफ्टीनेंट खेमे के बाहर बातें कर रहे हैं। हफ्तों से बजीर अली को पकड़ने के लिए डेस डाले हुए हैं। सिपाही भी तंग आ गए हैं। पर वह हाथ नहीं लग रहा है। कर्नल उसके कारनामे बतला रहे हैं कि पाँच महीने के अपने शासनकाल में उसने अवध के दरबार को अंग्रेजों के प्रभाव से मुक्त कर दिया। कर्नल ने अपने मित्र सआदत अली को अवध तख्त पर बैठा दिया। सआदत अली आसिफउद्दौला का भाई है। बजीर अली, टीपू सुल्तान, शमसुद्दौला ने अफगानिस्तान के सम्राट को हिन्दुस्तान पर हमला करने के लिए दिल्ली बुलाया है। कम्पनी के खिलाफ यदि वे कामयाब हो गए तो क्लाइव की सफलता मिट्टी में मिल जाएगी।

कर्नल ने कहा कि वजीर वर्षों से आँखों में धूल झोंक रहा हैं। पकड़ में नहीं आ रहा है। उसके साथ थोड़े से सैनिक हैं, पर वे जान पर बाजी लगाने वाले हैं। उसी ने कंपनी के वकील की हत्या कर दी। वजीर अली के पद से हटाकर बनारस में रखकर उसे 3 लाख सालाना वजीफा निश्चित कर दिया था, कुछ दिन बाद गर्वनर जनरल ने उसे कोलकाता तलब किया। वजीर ने वकील से इसकी शिकायत की। वकील ने उसे बुरा-भला सुना दिया। चिढ़कर वजीर ने उसकी हत्या कर दी। वहाँ से अपने साथियों के साथ जंगलों में छिपा है। उसकी योजना है कि नेपाल पहुँचकर अफगानी हमले की प्रतीक्षा करें। अपनी शक्ति बढ़ाकर सआदत अली को पद से हटाकर अवध पर कब्जा करे और अंग्रेजों को हिन्दुस्तान से निकाल दे। हमारी सेना कड़ाई से उसका पीछा कर रही है।

उसी समय एक सिपाही दूर से गर्द उठने की सूचना दी। कर्नल सिपाहियों को तैयार रहने का आदेश देता है। खिड़की के पास जाकर कर्नल ने देखा कि एक सवार तेजी से घोड़े दौड़ाए आ रहा है। लेफ्टीनेंद ने इसी तरफ आने की बात कही। समीप आकर सवार ने गोरा से कहा कि वह कर्नल से मिलना चाहता है। कर्नल ने सोचा कि वह वजीर अली का कोई आदमी है जो हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा। सिपाही के साथ सवार कर कर्नल से बिल्कुल एकांत में बात करने का प्रस्ताव रखा। सब के बाहर चले जाने पर खेमे में अकेले कर्नल से सवार ने वहाँ खेमा डालने का कारण पूछा।

कर्नल ने उत्तर दिया कि कंपनी की आज्ञा है कि वजीर अली को गिरफ्तार किया जाए। इसीलिए इस फौज के साथ यहाँ टिका हूँ। सवार ने कहा कि वजीर अली एक जाँबाज सिपाही है, इसलिए उसकी गिरफ्तारी मुश्किल है। कर्नल ने सवार से उसका अभिप्राय पूछा। सवार ने बताया कि बजीर अली को गिरफ्तार करने के लिए कुछ कारतूस चाहिए। कारतूस पाकर सवार ने कर्नल को शुक्रिया दिया। कर्नल ने उससे उसका नाम पूछा। सवार ने अपना नाम वजीर अली बतलाकर कहा कि कारतूस देने के कारण वह उनकी जान नहीं ली। यह कह कर तुरंत प्रस्थान कर दिया। कर्नल सन्नाटे में स्तब्ध रह गया। लेफ्टीनेंट के पूछने पर कहा कि वह एक जाँबाज सिपाही था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस

शब्दार्थ :

  • अंदरूनी – भीतरी
  • खेमा – डेरा, तंबू
  • अफसाने – कहानियाँ
  • करनामे – स्मरणीय कार्य
  • हुकूमत – शासन
  • तख्ञ – सिंहासन
  • मसलेहत – रहस्य
  • हिफाजत – सुरक्षा, देखभाल
  • सन्नाटा – एकांत, निर्जनता
  • गिरफ्तारी – कैद करना
  • कामयाब – सफल
  • जाँबाज – जान की बाजी लगाने वाला
  • दमखम – शक्ति, साहस
  • जाती तौर से – व्यक्तिगत रूप से
  • वजीफा – वृत्ति, निर्वाह के लिए दी जाने वाली राशि
  • मुकर्रर – निश्चित, तय करना
  • तलब किया – सामने हाजिर किया
  • हुकमराँ – शासक
  • ऐश प्रसंद – भोग विलास पसंद करने वाला
  • हुक्म – आज्ञा, आदेश
  • इशारा – संकेत
  • काम तमाम करना – मार डालना, खत्म कर देना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 8 पानी की कहानी to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 Question Answer – पानी की कहानी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘पानी की कहानी’ पाठ किस शैली में लिखा गया है?
(क) वर्णनात्मक शैली
(ख) पत्र शैली
(ग) आत्मकथात्मक
(घ) डायरी शैली
उत्तर :
(ग) आत्मकथात्मक

प्रश्न 2.
ओस कहाँ से आई थी?
(क) घास से
(ख) पीपल के पेड़ से
(ग) आम के पेड़ से
(घ) बेर के पेड़ से
उत्तर :
(घ) बेर के पेड़ से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 3.
किसके लिए ओस के असंख्य बंधुओं ने अपने प्राण नाश किए?
(क) मनुष्य
(ख) पक्षी
(ग) जीव
(घ) पेड़
उत्तर :
(घ) पेड़

प्रश्न 4.
ओस के पुरखे कौन-कौन से गैस हैं?
(क) नाइट्रोजन ओषजन
(ख) हद्रजन कार्क्म डाईआक्साइड
(ग) हद्रजन – ओषजन
(घ) हद्रजन नाइट्रोजन
उत्तर :
(ग) हद्रजन ओषजन।

प्रश्न 5.
पृथ्वी प्रारंभ में कैसा गोला थी?
(क) लोहे का
(ख) ताँबे का
(ग) मिट्टी का
(घ) आग का
उत्तर :
(घ) आग का।

प्रश्न 6.
रामचंद्र तिवारी की मृत्यु कब हुई ?
(क) 4 जनवरी 2009 ई०
(ख) 4 फरवरी 2009 ई०
(ग) 4 मार्च 2009 ई०
(घ) 4 अप्रैल 2009 ई०
उत्तर :
(क) 4 जनवरी 2009 ई०

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 7.
पृथ्वी प्रारंभ में कैसा गोला थी ?
(क) लोहे का
(ख) ताँबे का
(ग) मिट्टी का
(घ) आग का
उत्तर :
(घ) आग का

प्रश्न 8.
ओस की बूँद के अनुसार जड़ों के रोएँ कैसे होते हैं ?
(क) दयालु
(ख) प्रेमी
(ग) निर्द्यी
(घ) कोमल
उत्तर :
(ग) निर्दयी

प्रश्न 9.
बूँद को उड़ने की शक्ति कौन देता है ?
(क) चंद्रमा
(ख) तारें
(ग) ग्रह
(घ) सूर्य
उत्तर :
(घ) सूर्य

प्रश्न 10.
बूँद भाग्य पर भरोसा करके कहाँ सिकुड़ी रही ?
(क) जड़ में
(ख) तना में
(ग) पत्ते में
(घ) धरती पर
उत्तर :
(ग) पत्ते में

प्रश्न 11.
अपने जन्म के आरंभिक काल में बूँद किस रूप में घूमा करती थी ?
(क) जल के रूप में
(ख) भाप के रूप में
(ग) बर्फ के रूप में
(घ) ओस के रूप में
उत्तर :
(घ) ओस के रूप में

प्रश्न 12.
बूँद को आरंभ में समुद्र की कौन-सी चीज अच्छी नहीं लगी ?
(क) विस्तार
(ख) गहराई
(ग) खारापन
(घ) धाराएँ
उत्तर :
(ग) खारापन

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 13.
ऊपर आकाश में पहुँचकर बूँद को किस पुरानी सहेली के दर्शन हुए ?
(क) तूफान
(ख) आँधी
(ग) बाढ़
(घ) ज्वार-भाटा
उत्तर :
(ख) आँधी

प्रश्न 14.
कौन धीरे-धीरे आँखों से ओझल हो गई ?
(क) लेखक
(क) बूँद
(ग) सूर्य
(घ) चन्द्रमा
उत्तर :
(क) बूँद

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
क्रोध और घृणा से कौन काँप उठी?
उत्तर :
ओस क्रोध और घृणा से काँप उठी।

प्रश्न 2.
किसके शरीर से चमक निकलती थी?
उत्तर :
प्रकाश पिंड के शरीर से चमक निकलती थी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 3.
इनका शरीर कब ओषजन और हद्रजन में विभाजित हो गया?
उत्तर :
उनका शरीर अरबों वर्ष पहले ओषजन और हद्रजन में विभाजित हो गया।

प्रश्न 4.
किस कारण वह बूँद बनकर नीचे कूद पड़ी?
उत्तर :
बहुत से भाप जल कणों के मिलने के कारण उसका शरीर भारी हो चला और नीचे झुक आया और एक बूँद ननकर नीचे कूद पड़ी।

प्रश्न 5.
पहाड़ों के पत्थरों का रेत रूप कैसे बनता है?
उत्तर :
बूँदों के प्रहार से पहाड़ों के पत्थर टूटकर खंड-खंड हो गए। इस प्रकार वे रेत के रूप में बन गए।

प्रश्न 6.
रामचंद्र तिवारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामघंद्र तिवारी का जन्म 4 जून, 1924 ई० को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के कुकुढ़ा नामक ग्राम में हुआ था।

प्रश्न 7.
ओस को लेखक के किस भाव से दु:ख हुआ ?
उत्तर :
ओस को लेखक के अविश्वास भाव से दु:ख हुआ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 8.
बूँद का शरीर कब ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित हो गया ?
उत्तर :
एक ऊँचे तापमान वाले स्थान पर जाने के बाद बूँद का शरीर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित हो गया।

प्रश्न 9.
बूँद को कब बाहर फेंक दिया गया ?
उत्तर :
बूँद जब ज्वालामुखी के निचले हिस्से में पहुँची, तब लावा के साथ उसे भी बाहर फेंक दिया गया।

प्रश्न 10.
बूँद नल से कैसे निकलकर भागी ?
उत्तर :
नल के पाइप में घूमते हुए बूँद एक ऐसी जगह पहुँची जहाँ नल टूटा हुआ था, वहीं से निकलकर वह भागी।

प्रश्न 11.
समुद्र के तल में कैसे पौधें उगे हुए हैं ?
उत्तर :
समुद्र की गहरी तल के नीचे छोटे ठिंगले मोटे पत्तों वाले पेड़ उगे हुए हैं।

प्रश्न 12.
बूँद ऊँची शिखर पर से कहाँ गिरें ?
उत्तर :
बूँद ऊँची शिखर पर से कूद कर एक चट्टान पर गिरी।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार मूलक प्रश्न
(क) ‘क्रोध और घुणा से उसका शरीर काँप उठा।’
1. यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत हैं? इसके रचनाकार का नाम लिखिए।
2. इसका पंक्ति का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
3. किसका शरीर काँप उठा और क्यों?
उत्तर :
1. प्रस्तुत पंक्ति ‘पानी की कहानी’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार रामचंद्र तिवारी है।
2. पेड़ जितना बड़ा ऊपर दिखाई देता है, पृथ्वी के भीतर भी उतनी बड़ी उसका जड़ रहती है। उसकी जड़े और जड़ों के रोए अनगिनत जल कणों को सोख लेतें हैं। इस प्रसंग में यह पंक्ति कही गई है।
3. जल की बूँद शरीर के क्रोध और घृणा से काँप उठी। बूँद पेड़ के पास की भूमि में बहुत दिनों तक इधर-उधार घूमती रही, एकाएक पकड़ी गई, पेंड़ की जड़े तथा उनके रोएँ असंख्य जल कणों को बलपूर्वक पृथ्वी से खींच लेती हैं। कुछ को पेड़ बिल्कुल खा जाते है। अधिकांश का सब कुछ छीनकर उन्हें बाहर निकाल दूते हैं। यह देख कर बूँद का शरीर काँप उठा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
पानी का जन्म कैसे हुआ?
उत्तर :
हद्रजन और ओषजन गैसों से उत्पन्न भाप पृथ्वी के चारों ओर घूमने लगी। फिर वह ठोस बर्फ के रूप में बदल गई। फिर नीचे दबे हुए ठोस बर्फ दबकर पानी के रूप में परिवर्तित हो गई।

प्रश्न 2.
प्रारंभ में पानी के शरीर का रूप कैसा था और क्रमशः कैसा हो गया?
उत्तर :
प्रारंभ में पानी का शरीर हद्रजन और ओषजन गैसों के रूप में था। बाद में उन गैसों का अस्तित्व खत्म हो गया। फिर उनसे बनी ओस बूँदें, भाप बन गई। भाप पृथ्वी के चारों ओर घूमती-फिरती थी। उसके बाद वे ठोस बर्फ के रूप में बन गई। ठोस बर्फ ही पिघल कर पानी बन गए।

प्रश्न 3.
समुद्र के भीतर उसने क्या-क्या देखा?
उत्तर :
समुद्र के भीतर उसने धीरे-धीरे रेंगनेवाले घों, जालीदार मछालयाँ, कई-कई मनभारी कछुवे और हाथों वाली मछलियाँ देखा। एक मछली के आठ हाथ थे। उनसे वह अपने शिकार पकड़ लेती थी। समुद्र की गहराई में जाकर एक सुंदर मछली देखा, जिसके शरीर से एक प्रकार की चमक निकलती थी। समुद्र की गहरी तह में छोटे-ठिंगने मोटे पत्ते वाले पेड़, पहाड़ियों, घाटियों, गुफाओं में अनेक जीव-जन्तु को देखा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 4.
ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के फट जाने से उसमें धुआँ, रेत, पिघली, धातुएँ तथा लपटें निकलती हैं। इसे ज्वालामुखी कहते हैं।

प्रश्न 5.
पहाड़ से गिर सरिता बन वह क्या करती है और कहाँ पहुँचती है?,
उत्तर :
पहाड़ से गिर सरिता बन वह कभी भूमि को काटती, कभी पेड़ों, की खोखला कर उन्हें गिरा देती है। बहते-बहते वह एक दिन एक नगर के पास पहुँचती है।

भाषा बोध :

1. संस्कृत के वे शब्द जिनका हिन्दी में वैसे ही प्रयोग किया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे-दुर्ध, दधि, अग्न, वर्षा आदि।
संस्कृत के जिन शब्दों को हिन्दी में बदलकर प्रयोग किया जाता है, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। जैसे- दूध, दही, आग, बारिश।

निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम शब्द और तद्भव शब्द को अलग कीजिए-
मोती, उज्ज्वल, हाथ, कार्य, दृश्य, छेद, क्षण, पत्थर, मुँह, कार्य, धुँआ, पुरखे, भूमि, प्रत्यक्ष, मनुष्य।
तत्सम शब्द –  तद्भव शब्द

  • उज्ज्यल – मोती
  • कार्य – हाथ
  • दृश्य – छेद
  • क्षण – पत्थर
  • कार्य – मुंह
  • भूमि – धुआँ
  • प्रत्यक्ष – पुरखे
    मनुष्य

2. जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं उन्हें विशेषण कहते हैं। जैसे- दयालु, भारतीय, सुन्दर आदि।
निम्नलिखित शब्दों के विशेषण रूप बनाइए-

  • अंगल – जंगली
  • प्रकृति – प्राकृतिक
  • नगर – नागरिक
  • दर्शन – दर्शनीय, दार्शनिक
  • श्रद्धा – श्रद्यालु
  • साहस – साहसी
  • अनुभव – अनुभवी
  • शक्ति – शक्तिमान, शक्तिशाली

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

3. निम्नलिखित शब्द युग्मों को वाक्य में प्रयोग कीजिए –

  • इधर-उधर – इधर-उधर देखकर चलना चाहिए।
  • उथल-पुथल – वर्षा के कारण उथल-पुथल मच गई।
  • बंधु-बांधवों – मैने जन्म-दिन पर बंधु बाँधनों को निमंत्रित किया।
  • जैसे-तैसे – जैसे-तैसे उसने अपना काम सम्पन्न कर लिया।
  • चहल-पहल – मेले में बड़ी चहल-पहल थी।
  • आस-पास – हमारे घर के आस-पास वृक्षों की छाया बनी रहती है।
  • मैली-कुचैली – भिखारिन मैली-कुचैली धोती पहन रखी है।
  • लाल-पीला – मुझे देखते ही वह लाल-पोला हो गया।
  • उछलने-कूदने – बच्चों को उछलने-कूदने में मजा आता है।

4. निम्नलिखित शब्दों के अंग्रेजी के समान अर्थ वाले शब्द लिखिए –

  • हद्रजन – हाइड्रोजन
  • ओषजन – ऑक्सीजन
  • रासायनिक क्रिया – कैमिकल रिएक्शन
  • तापक्रम – टेम्परेचर
  • दुर्घटना – एक्सीडेंट
  • धुन्यवाद – थैंक्स

WBBSE Class 8 Hindi पानी की कहानी Summary

लेखक-परिचय :

आचार्य रामचंद्र तिवारी का जन्म सन् 1924 ई० में वाराणसी जनपद के कुकुढ़ा ग्राम में हुआ था। हिन्दी साहित्य में ये आलोचक के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी महत्वपूर्ण रचनाएँ- हिन्दी का गद्य साहित्य, मध्ययुगीय काल साधना, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, कबीर मीमांसा, आलोचना का दायित्व आदि है। सन् 2009 में इनका देहावसान हो गया।

सारांश :

एक दिन लेखक के हाथ पर मोती-सी एक बूँद आ पड़ी। वह बूँद लेखक को अपनी कहानी सुनाने लगी। बूँद कहने लगी कि में बेर के पेड़ से आई हूँ। सामने का पेड़ का ऊपरी हिस्सा जितना बड़ा है पृथ्वी के नीचे उसकी जड़ भी उतनी बड़ी है। हमारे असंख्य बन्धुओं ने इसे इतना बड़ा बनाने में अपने प्राण नाश किए हैं। पेड़ के रोएँ असंख्य जल कणों को खींचकर खा जाते हैं, कुछ को बाहर निकाल देते हैं। लगभग तीन दिन तक मैं एक कोठरी में साँसत भोगती रही। फिर पत्तों के छेदों से होकर भागी। रक्षा पाने के लिए तुम्हारे हाथ पर कूद पड़ी। सूर्य के निकलने पर उड़ने को शक्ति मिल जाएगी। मेरा जीवन विभिन्न घटनाओं से परिपूर्ण है। उसकी कहानी मैं तुम्हें सुना रहा हूँ।

बहुत दिन पहले मेरे पुरखे हद्रजन और ओषजन नामक दो गैसें सूर्य मंडल में लपटों के रूप में विद्धमान थीं। एक दिन बाह्मण्ड के उथल पुथल होने से अनेक ग्रह और उपग्रह बन गए। एक दिन एक प्रचंड प्रकाश पिंड सूर्य की ओर बढ़ने लगा। उसकी आकर्षक शक्ति से सूर्य का एक भाग टूट कर फिर से कई टुकड़ों में टूट गया। उन्हीं में से एक टुकड़ा हमारी पृथ्वी है। यह प्रारंभ में एक बड़ा आग का गोला थी। अरबों वर्ष पहले हद्रजन और ओषजन के रासायनिक क्रिया के कारण मैं पानी बन गई। मेरा शरीर पहले भाप रूप में था। बाद में मैं ठोस बर्फ के रूप में परिवर्तित हो गई।

भार के कारण मेरे कुछ भाई पानी हो गए। कई मास मैं समुद्र में घूमती रही। एक दिन गर्म धारा से पिघल कर मैं पानी बनकर समुद्र में मिल गई। समुद्र का दृश्य अद्भुत था। समुद्र में दूसरे जीवों की चहल पहल है। उसमें निरा नमक भरा है। एक दिन समुद्र की गहराई में जाकर मैने विचित्र विचित्र जीव देखें। धीरे-धीरे रेंगने वाले घोंघे, जालीदार, मछलियाँ, कई कई मन भांरी कछुये, और हाथों वाली मछलियाँ देखी। एक लंबी मछली के आठ हाथ थे।

और गहराई में जाने पर अँधकार में एक सुन्दर मछली दिखलाई पड़ी, जिसके शरीर से चमक निकल रही थी। छोटी-छोटी मछलियों को वह खा जाती थी। नीचे समुद्र की गहरी तल में जंगल में छोटे ठिंगले मोटे पत्तों वाले पेड़ उगे हुए हैं। वहाँ पर पहाड़ियों घाटियों की गुफाओं में जीव जन्तु रहते हैं। फिर मैं चट्टान में घुल गई। एक जगह ताप क्रम बहुत ऊँचा था। एक जोर के धक्के से ऊँचे आकाश में उड़ चलो। देखा कि पृथ्वी से धुँआ, रेत, पिघली, धातुएँ तथा लपटें निकल रही है। इसे ज्वाला मुखी कहते हैं।

बहुत से भाप जल कणों के मिलने के कारण भारी होकर एक दिन बूँद बनकर नीचे कूद पड़ी। ऊँची शिखर पर से कूद कर एक चट्टान पर गिरी। हमारे प्रहार से टूटकर खंड-खंड होकर पत्थर रेत बन गया। फिर समतल भूमि देखने की इच्छा से मैं एक छोटी धारा सरिता में मिल गई। नदी के तट पर एक मीनार से निकलनेवाली हवा को देखने के लिए मैं आगे बढ़ी और साथियों के साथ एक मोटे नल में खींच ली गई। एकाएक टूटे नल में पहुँचकर उसमें से भाग निकली। पृथ्वी के अंदर घूमते-घूमते इस बेर के पेड़ के पास पहुँची। सूर्य के निकलते ही मैं लेखक के पास न रह सकी। इस प्रकार ओस की बूँद धीरे-धीरे आँखों से ओझल हो गईई।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

शब्दार्थ :

  • टटोलना – जाँच करना, परखना
  • साँसत – कठिनाई में पड़ना
  • दीर्घ जीवी – लंबे समय तक जीनेवाला
  • ज्ञान – जानकारी
  • वार्तालाप – बातचीत
  • किलकारी – हर्षध्वनि
  • खंड-खंड – टुकड़े-टुकड़े
  • रेत – धूल
  • विद्यमान – मौजूद
  • अस्तिव – विद्यमानता, सत्ता
  • ओझल-लुप्त, आँखों से परे
  • बहुतायत – अधिक
  • असहय – न सहने योग्य
  • अबाध – बाधा रहित, निर्विघ्न
  • किलोले- आनन्दं लहर
  • दृश्य – नजारा
  • अगुवा – आगे चलने वाला
  • शिखर – चोटी
  • प्रहार – आघात, हनन
  • वर्णनातीत – जिसका वर्णन न किया जा सके

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 Question Answer – शाप मुक्ति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
शाप मुक्ति किस विद्या की रचना है?
(क) क्रविता
(ख) कहानी
(ग) निबंध
(घ) नाटक
उत्तर :
(ख) कहानी

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात के बचपन का क्या नाम था?
(क) चिंदू
(ख) बब्बू
(ग) मंदू
(घ) ढब्बू
उत्तर :
(ग) मंटू

प्रश्न 3.
डॉ० प्रभात किसके डॉक्टर थे?
(क) दाँतो के
(ख) हदय के
(ग) आँखों के
(घ) हड्डी के
उत्तर :
(ग) आँखों के

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 4.
डॉ प्रभात के पास बब्दू किसका इलाज करने आया था?
(क) अपनी नानी का
(ख) अपनी दादी का
(ग) अपनी माँ का
(घ) अपनी बहन का
उत्तर :
(ख) अपनी दादी का

प्रश्न 5.
दादी किसके समझाने पर इलाज कराने को तैयार हो गई?
(क) बब्बू
(ख) डॉ० प्रभात
(ग) मंटू
(घ) परिवार जन
उत्तर :
(ख) डॉ० प्रभात।

प्रश्न 6.
शाप-मुक्ति किसकी रचना है ?
(क) डॉं० रमेश उपाध्याय
(ख) रमेशचंद्र शाह
(ग) रामचंद्र शुक्ल
(घ) रामचंद्र तिवारी
उत्तर :
(क) डॉ० रमेश उपाध्याय

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 7.
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1 मार्च, 1942 ई०
(ख) 1 अप्रैल, 1942 ई०
(ग) 1 मई, 1942 ई०
(घ) 1 जून, 1942 ई०
उत्तर :
(क) 1 मार्च, 1942 ई०

प्रश्न 8.
मंदू के पिता पेशे से क्या थे ?
(क) डॉक्टर
(ख) वकील
(ग) इंजीनियर
(घ) शिक्षक
उत्तर :
(ख) वकील

प्रश्न 9.
मंटू ने पिल्लों की आँखों में क्या डाला ?
(क) गाय का दूध
(ख) सरसों का तेल
(ग) आक का दूध
(घ) तालाब का पानी
उत्तर :
(ग) आक का दूध

प्रश्न 10.
मंदू ने कितने पिल्लों की आँखों को खराब किया ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ग) तीन

प्रश्न 12.
मंटू और बब्बू में क्या संबंध था ?
(क) भाई
(ख) मित्र
(ग) रिश्तेदार
(घ) अजनबी
उत्तर :
(ख) मित्र

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 13.
आक के दूध से होनेवाले नुकसान की जानकारी मंदू को किसने दी ?
(क) शिक्षक ने
(ख) दादी ने
(ग) डॉक्टर ने
(घ) मंटू को खुद पता था
उत्तर :
(क) शिक्षक ने

प्रश्न 14.
बड़ा होकरें मंटू क्या बना ?
(क) नेत्र चिकित्सक
(ख) इन्जीनीयर
(ग) पुलीस
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) नेत्र चिकित्सक

प्रश्न 15.
कौन डॉ० प्रभात से इलाज करवाने से इन्कार कर दिया।
(क) डॉ० रमेश
(ख) दादी
(ग) पड़ोसी
(घ) बब्बू
उत्तर :
(ख) दादी

प्रश्न 16.
डॉ० प्रभात ने अपने गलती के लिए किससे माफी माँगी ?
(क) बब्यू
(ख) चिंदू
(ग) दादी
(घ) लेखक
उत्तर :
(ग) दादी

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
डॉ० प्रभात के पास दादी क्यों गई?
उत्तर :
दादी आँखों का इलाज कराने के लिए डॉ० प्रभात के पास गई।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात किस प्रकार के डॉक्टर थे?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक थे। दूर-दूर से लोग उनके पास अपनी आँखों का इलाज कराने आते थे। वे देश के माने हुए डॉक्टर थे।

प्रश्न 3.
डॉ० प्रभात कहाँ के रहने वाले थे?
उत्तर :
डा० प्रभात इलाहाबाद के रहने वाले थे।

प्रश्न 4.
मंदू कौन था?
उत्तर :
डॉ० प्रभात का ही बचपन का नाम मंदू था।

प्रश्न 5.
दादी डॉक्टर के पास क्यों नहीं जाना चाहती थी?
उत्तर :
डॉक्टर अपने बचपन में तीन पिल्लों की आँखों फोड़ दी थी। दादी को यह घटना याद थी। उस समय दादी उन्हें शाप भी दी थी। बचपन की इसी घटना को लेकर दादी उनके पास नहीं जाना चाहती थी।

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प्रश्न 6.
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
आक के दूध का क्या अवगुण है ?
उत्तर :
यदि आक का दूध आँखों में पड़ जाय तो आँखें अंधी हो जायेंगी।

प्रश्न 8.
दादी ने मंटू को क्या शाप दिया था ?
उत्तर :
जिस तरह मंदू ने पिल्लों की आँखें फोड़ी थी, उसी तरह मंदू की आँखें भी फूट जाय। यही शाप दादी ने मंदू को दिया था।

प्रश्न 9.
पिल्लों की मौत कैसे हुई ?
उत्तर :
मंदू द्वारा पिल्लों की आँखों में आक का दूध डालने के कारण उनकी मौत हो गई।

प्रश्न 10.
बब्नू ने एक पिल्ले को बचाने के लिए क्या प्रयास किया ?
उत्तर :
बब्बू ने एक पिल्ले को बचाने के लिए उसे पाल लिया और उसके आँखों का इलाज भी करवाया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 11.
तीसरा पिल्ला कैसे मरा ?
उत्तर :
तीसरा पिल्ला सड़क पर किसी गाड़ी के नीचे आकर मारा गया।

प्रश्न 12.
मंटू ने अपने अपराध का प्रायश्चित कैसे किया ?
उत्तर :
मंदू ने निश्चय किया कि वह आँख का डॉक्टर बनेगा और लोगों की आँखों को फिर से रोशन कर अपने अपराध का प्रायश्चित करेगा।

प्रश्न 13.
अंत में दादी ने मंदू को क्या आशीर्वाद दिया ?
उत्तर :
अंत में दादी ने मंदू को दीर्घायु होने और उसकी आँखों की ज्योति के हमेशा बने रहने का आशीर्वाद दिया।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
बब्बू ने मंदू के पापा का भेद क्यों खोल दिया?
उत्तर :
बब्बू ने पहले बात छिपाकर मित्र मंदू को बचाने की कोशिश की। दो पिल्ले तो मर गए तीसरे जीवित पिले को बचाना मंदू के कुकृत्य का भेद बता देने, और उसे पिटाई से बचाने से ज्यादा जरूरी था। इसलिए रोते हुए बब्बू ने भेद खोल दिया।

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात ने बचपन में किए पाप का प्रायश्चित किस प्रकार किया?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात नेत्र चिकित्सक बनकर हजारों लोगों को उनकी खोई हुई नेत्र-ज्योति ल्रौटाकर पाप का प्रायशचित कर लिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 3.
शाप मुक्ति कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर पाठ का सारांश में देखिए।

प्रश्न 4.
‘शाप मुक्ति’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीव जन्तुओं के प्रति हमें सद्भाव रखना चाहिए। यदि कोई अपराध अनजान या जानबूझ में हो गया है तो अपने शुभ चिन्तकों से पूछकर प्रायश्चित कर लेना चाहिए। प्रायश्चित कर लेना, अपने पाप का अपराध के लिए अपनी गलती स्वीकार कर लेना सर्वथा उचित है। डॉ॰ प्रभात ने अपने बचपन की अबोध अवस्था में जो पाप कर्म किया था उसका प्रायश्चित उन्होंने नेत्र चिकित्सक बनकर हजारों लोगों की आँखों को ज्योति देकर कर लिया।

प्रश्न 5.
‘चेहरा किसी दुखदाई स्पृति में काला-सा हो गया’ किसका चेहरा दुखदाई स्मृति में काला हो गया था? वह दुखदाई स्मृति क्या है?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात का चेहरा किसी दुखदाई स्मृति में काला-सा हो गया। वह दुखदाई स्मृति डॉ॰ प्रभात का बचपन में अबोध अवस्था में किया गया पाप था उन्होंने एक कुतिया के तीन पिल्लों की आँखों में आक का दूध डाल कर उन्हें अंधा बना दिया था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
‘जीते रहो, मेरे लाल! तुम्हारी आँखों की ज्योति हमेशा बनी रहे।’
(क) यह गद्यांश किस पाठ का है और इसके लेखक कौन हैं?
(ख) इस पंक्ति का वक्ता कौन हैं? वक्ता ने ऐसा कब और क्यों कहा ?
(ग) इस कथन के अनुसार स्पष्ट कीजिए कि प्रायश्चित कर लेने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है?
उत्तर :
(क) यह गद्यांश ‘शाप मुक्ति’ पाठ से उदधृत है। इस पाठ के लेखक डॉ० रमेश उपाध्याय हैं।

(ख) इस पंक्ति की वक्ता दादी है। डॉ० प्रभात दादी के घर आकर दादी को तसल्ली देने लगे। बचपन में दादी के द्वारा दिए गए शाप की याद दिला कर बोले कि उन्हें उस घटना से बचपन की अबोध अवस्था में किए गए पाप का बोध हुआ और तभी उन्होंने निश्चय कर लिया कि उन्हें जीवन में नेत्र चिकित्सक बनना है। डॉ० प्रभात की बातों से प्रभावित होकर दादी ने उन्हें आशीर्वाद् देते हुए यह कहा।

(ग) सचमुच प्रायश्चित कर लेने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है। बचपन मे अज्ञान की स्थिति में इस प्रभात ने पिल्लों की आँखें फोड़कर अपराध किया था। उन्हें इस अपराध का स्वयं ज्ञान हुआ। उन्होंने नेत्र चिकित्सक बनकर न जाने कितने लोगों की आँखों की ज्योति दीं। उनके पाप बोध पश्चाताप तथा नेत्र चिकित्सक बनकर अनेक आँखों को ज्योति देने से वे निष्पाप हो गये। स्वयं दादी ने अपने शाप को आशीर्वाद में बदल दिया। इस प्रकार डॉ० प्रभात निष्पाप हो गए।

भाषा बोध :

1. ‘बचपन’ में बच शब्द में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाई गई है। इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाइए।

(क) लड़ाका + पन = लड़कपन।
(ख) अजनवी + पन = अजनवीपन।
(ग) अन्धा + पन = अन्धापन।
(घ) अपना + पन = अपनापन।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

2. निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए-

पढ़ना – पढ़ाना
चलना – चलाना
रंगना – रंगाना
लिखना – लिखाना
पढ़वाना
चलवाना
रंगवाना
लिखवाना

3. किसी वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध क्रिया के साथ स्पष्ट होता है, उसे कारक कहते हैं-

(क) डॉ० प्रभात ने कोई उत्तर न दिया। कर्त्ता कारक
(ख) दादी के लिए दवाई का पर्ची लिखी। संप्यदान कारक
(ग) बाजार से दवा मँगवा लेना। अपादान कारक
(घ) दूध पिल्लों के आँखों में डाल रहा था। अधिकरण कारक
(ङ) सब लोगों ने मंदू को बुरा भला कहा। कर्म कारक

4. निम्नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  • दिन – आज का दिन बहुत अच्छा है।
  • दीन – दीन जनों पर दिया दिखाना चाहिए।
  • कहा – मैं ने कुछ नहीं कहा।
  • कहाँ – तुम कहाँ रहते हो।
  • दादी – दादी माँ कहानी सुनाती है।
  • दीदी – हर भाई अपनी दीदी का सम्मान करता है।
  • बांग – बाग में बहुत पेड़ हैं।
  • बाघ – बाघ एक हिंसक जानवर है।
  • कल – मैं कल घर जाऊँगा।
  • काल – सदा काल बीतता रहता है।
  • बाहर – घर के बाहर बच्चे खेल रहे हैं।
  • बहार – इस ऋतु में बाटिका में बहार आ गई है।
  • भला – सब का भला हो।
  • भाला – भाला एक अस्त्र है।
  • धुल – उसका चेहरा धुल गया।
  • धूल – धूल में मत खेलो।
  • सुन – मैं सब कुछ सुन रहा हूँ।
  • सुन्न – उसके अंग सुन्न हो गए हैं।

WBBSE Class 8 Hindi शाप मुक्ति Summary

लेखक-परिचय :

डॉ० रमेश उपाध्याय का सन् 1942 ई० में उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था। डॉ० उपाध्याय आधुनिक युग के महत्वपूर्ण कहानीकार हैं। इनकी कहानियों में भारतीय संस्कृति तथा समाज का यथार्थ चित्रण मिलता है। अपनी पैनी दृष्टि से उन्होंने रूढ़ियों तथा अंधविश्वासों की तह तक पहुँच कर उनका पर्दाफाश किया है। इन्होने पन्द्रह कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, तीन-नाटक तथा अनेक आलोचनात्मक पुस्तकों की रचना की। साहित्य और संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका ‘कथन’ के वे संस्थापक सम्पादक रहे। वे अनेक पुरस्कार तथा सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन कार्य में संलग्न है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

सारंश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने अबोध अवस्था में एक बालक द्वारा हुए अपराध और उसके प्रायश्चित की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। एक दिन लेखक अपनी बूढ़ी दादी की आँखों का इलाज कराने दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ॰ प्रभात के पास गया। कुछछ बातचीत के बाद डॉक्टर हँसते हुए दादी से बात करते हुए दादी की आँखों की जाँच की।

लेखक को डॉ० प्रभात की हँसी तथा उनका चेहरा कुछ परिचित सा जान पड़ा। लेखक के पूछने पर डॉक्टर साहब ने अपने को इलाहाबाद का बतलाया। लेखक भी इलाहाबाद का ही था। इलाहाबाद का पता पूछने पर दादी ने घर का पता बतला दिया। डॉंक्टर ने तुरंत पहचान कर लेखक के बचपन के नाम बब्बू को याद कर पूछा कि वह बब्बू हैं। लेखक ने अपने बाल सखा मंदू को पहचान लिया।

डॉक्टर ने पुराने मित्र से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की। दादी ने बतलाया कि इलाहाबाद में हमारे पड़ोस में एक वकील साहब रहते थे। इसी मंदू नाम का उनका लड़का बड़ा बदमाश था। सहसा डॉ॰ प्रभात बहुत गंभीर हो गए। दादी के लिए दवाई का पर्चा लिखते हुए फिर कभी बातें करने का इरादा व्यक्त किया। फिर उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह आँखों का ऑपरेशन होगा। ईश्वर की कृपा से आँखें ठीक हो जाएँगी।

बाहर आते ही दादी यह जान गई यही वकील का बेटा मंदू है, जिसने आक के पौधे का दूध डाल कर कुतिया के तीनों पिल्लों की आँखें फोड़ दी थी। दादी ने निश्चय किया कि अब इस दुष्ट से अपनी आँखें नहीं फुड़वाऊँगी। दवा लेना भी जिद्द करके नामंजूर कर दी। लेखक के समझाने पर भी दादी उस डॉक्टर से इलाज कराने को तैयार न हुई।

दादी के द्वारा याद दिलाए जाने पर लेखक के मन में वह दुखद स्मृति ताजी हो गई। इलाहाबाद में लेखक के पड़ोसी वकील साहब की कोठी के पीछे बाग की मेड़ पर आक के बहुत से पौधे उगे हुए थे। प्रक दिन स्कूल के अध्यापक ने लेखक को आक के पत्ते तोड़ते देखकर बतलाया कि इसका सफेद दूध यदि आँखों में चला जाए तो आदमी अंधा हो जाता है। इसकी सच्चाई जानने के लिए मंदू ने कुतिया के तीन पिल्लों की आँखों में आक के पौधे का दूध डाल दिया। लेखक ने इस बेवकूफी के लिए उसे झिड़का और कहा कि ये पिल्ले अब अंधे हो जाएँगे। तीनों पिल्ले अंधे हो गए।

मंदू को भी एहसास हो गया कि प्रयोग के रूप में उसने बड़ा पाप कर डाला। मंदू ने गिड़गिड़ाकर लेखक से कहा कि वह किसी को न बताए। दो पिल्ले तो मर गये, तीसरे को बचाने की इच्छा से लेखक ने सारी बात बताकर तीसरे पिल्ले को बचाने के लिए उसका इलाज कराने की जिद्द पकड़ ली। सब लोगों ने मंदू को बुरा-भला कहा। वकील साहब ने उसकी पिटाई भी की। तीसरे पिल्ले को लेखक ने पाल लिया। लेखक और उसकी दादी ने पिल्ले की बड़ी सेवा की। एक दिन वह सड़क पर किसी वाहन से कुचल कर मर गया आज वही मंटू इतनाबड़ा नेत्र चिकित्सक बन गया। दादी को पैंतीस साल की पुरानी घटना अब भी याद थी। प्रभात को भी वह घटना याद थी।

लेखक ने दादी को समझाया कि डॉ० प्रभात ने हजारों की नेत्र ज्योति लौटाई। अत: उनका बचपन का अबोध अवस्था में किया गया पाप अब धुल गया होगा। पर दादी टस से मस न हुई। उनसे अपना इलाज न कराने की जिद्द न छोड़ी। डॉ० प्रभात यह सुनकर बोले कि मैं आकर दादी को समझाऊँगा। डॉ० प्रभात हमारे घर आकर दादी से कहने लगे। दादी माँ, बचपन के पाप को मैं नहीं भूला हूँ। आप ने जो शाप दिया था कि ‘तुम्हारी भी आँख फूटेगी।’

वह भी नहीं भूला हूँ। आप के इस शाप से मुझे पाप का बोध हुआ। मैंने नेत्र-चिकित्सक बनने का फैसला कर लिया। अपनी आँख फूटने के पहले मैं बहुत सी आँखों को रोशनी दूँगा, उसमें दो आँखें आप की भी होंगी। डॉ० प्रभात की बातों में ऐसा जादू था कि सब की आँखों में आँसू आ गये। दादी भाव विद्धल होकर उन्हें हृदय से लगा लिया और आशीर्वाद दिया कि मेरे लाल तुम्हारों आँखों की ज्योति सदा बनी रहे।’ फिर लेखक से कहने लगी कि अपने बाल सखा की खातिरदारी करो। अच्छी सी मिठाई लाओ और मेरी आँखों के लिए जो दवाई लिखी थी वह भी खरीद लाना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

शब्दार्थ :

  • अबोध – अनजान, अज्ञान
  • दुबारा – पुन: एक बार
  • आक – मदार
  • तकलीफ – कष्ट
  • अचरज-आश्चर्य
  • लुप्त – गायब
  • भाव – विचार, अभिप्राय
  • परिवर्तन – बदलाव
  • मासूम – कोमल, भोला
  • बाल सखा -बचपन का मित्र
  • उपकरण – सामग्री, सामान, यंत्र
  • असर – प्रभाव
  • स्मृति – याद
  • नेत्र चिकित्सक – आँखों का डॉक्टर
  • ज्योति – रोशनी
  • अकसर – प्राय:
  • कुकृत्य – बुरा कार्य
  • एहसास – समझ
  • जिज्ञासा – जानने की इच्छा
  • प्रयास – कोशिश
  • वाहन – सवारी
  • पिल्ला – कुत्ते का बच्चा
  • प्रायश्चित – जिस कृत्य को करने से पाप से छुटकारा मिल जाए।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – संगठन

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
कवि किसकी सेवा करने की कामना करता है?
(क) माता-पिता की
(ख) गुरुजनो की
(ग) स्वदेश की
(घ) दुश्मनों की।
उत्तर :
(ग) स्वदेश की।

प्रश्न 2.
कवि बीस वर्षों तक किस व्रत का पालन करना चाहता है?
(क) बृहस्पति व्रत
(ख) वहायर्य वत
(ग) वाणप्रस्थ वत
(घ) गृहस्थ व्रत।
उत्तर :
(ख) बहाचर्य व्रत

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प्रश्न 3.
हमारी वीरता किसके लिए भय का कारण बने ?
(क) दोस्त के लिए
(ख) दुश्मनों के लिए
(ग) अपनों के लिए
(घ) भिखारी के लिए
उत्तर :
(ख) दुश्मनों के लिए।

प्रश्न 4.
कवि किस बंधन को तोड़ना चाहता है?
(क) पारिवारिक
(ख) सामाजिक
(ग) कुरीति
(घ) मेल-जोल
उत्तर :
(ग) कुरीति

प्रश्न 5.
‘संगठन’ किस कवि की रचना है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मुकुटधर पाण्डेय
(ग) रामनरेश त्रिपाठी
(घ) श्रीधर पाठक
उत्तर:
(ग) रामनरेश त्रिपाठी

प्रश्न 6.
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) जौनपुर
(ख) गोरखपुर
(ग) भोजपुर
(घ) सुस्तानपुर
उत्तर :
(क) जौनपुर

प्रश्न 7.
‘संगठन’ कविता में कवि ने किनको तोड़ने की बात की है ?
(क) परंपरा को
(ख) कुरीतियों को
(ग) संबंधों को
(घ) रीतियों को
उत्तर :
(ख) कुरीतियों को

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प्रश्न 8.
हमारी वीरता किसके लिए भय का कारण बने ?
(क) दोस्त के लिए
(ख) दुश्मन के लिए
(ग) अपनों के लिए
(घ) भिखारी के लिए
उत्तर :
(ख) दुश्मन के लिए

प्रश्न 9.
हमारी वीरता से कौन कांप जाए ?
(क) दुष्ट
(ग) कवि
(ग) गुजन
(घ) अनामिका
उत्तर :
(क) दुष्ट

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
कवि ईश्वर से क्या प्रार्थना करता है?
उत्तर :
कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि हमें देश सेवा एवं मानव की भलाई में लगे रहने की प्रेरणा दें ।

प्रश्न 2.
इस कविता के माध्यम से कवि ने हमें क्या सन्देश दिया है?
उत्तर :
इस कविता के माध्यम से कवि ने हमें कर्तव्य मार्ग से न चूकने, स्वदेश की रक्षा के लिए तत्पर बने रहने तथा कभी निर्बल न बनने का संदेश दिया है।

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प्रश्न 3.
कवि किन साधनों को प्राप्त करने की कामना करता है?
उत्तर :
कवि बल, बुद्धि, विद्या तथा धन जैसे अनेक साधनों को प्राप्त करने की कामना करता है।

प्रश्न 4.
किन परिस्थितियों में कवि हिम्मत न हारने की सलाह हमें दे रहा है?
उत्तर :
संकटों में चाहे हम दरिद्र बन जाएँ, विपत्ति-बाधाओं से चाहे हम घिर जाएँ, ऐसी परिस्थिति में हिम्मत न हारने की सलाह कवि हमें दे रहा है।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए ?
उत्तर :
उनके अनुसार बल, बुद्धि, विद्या रूपी धन को प्राप्त कर देश को सर्मां्षित कर देना ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए।

प्रश्न 6.
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था ?
उत्तर :
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 1889 ई० में हुआ था।

प्रश्न 7.
कवि देश को क्या समर्पित करना चाहते हैं ?
उत्तर :
कवि देश को बल, बुद्धि और विद्या को प्राप्त कर देश को समार्षित करना चाहते हैं।

प्रश्न 8.
कवि किनकी शक्तियाँ लगाना चाहता है ?
उत्तर :
कवि मन और देह (आध्यात्म और भौतिक) शक्तियाँ लगाना चाहता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) संगठन कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्सुत कविता में कवि भगवान से ऐसी शान्ति पाने की प्रार्थना करता है कि भारत संगठित बना रहे। हम अपना सर्वस्ब देश के लिए समर्मित कर दें। मन और तन को शान्ति संपन्न बनाने के लिए बहलचर्य का पालन करें। सारी कुरीतियों को तोड़ डालें। किसी भी संकट के समय साहस न छोड़े। हमारी वीरता से शत्रु भयभीत हो उठे। प्राण रहते हम स्वदेश की रक्षा करते रहें। सारे संसार को हम अपना बना सकें। सर्वत्र हमारी सुकीर्ति गूँजे।

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(ख) कवि मातृभूमि की सेवा कैसे करना चाहता है ?
उत्तर :
कवि चाहता है कि स्वदेश की सेवा में ही अपना शरीर अर्पित कर दें। बल, बुद्धि, विद्या, धन के सभी साधनों को देश के लिए सर्मार्पित कर देना चाहता है। वह चाहता है कि स्वदेश के प्रति उसमें सच्चाप्देम बना रहे। जब तक उसके शरीर में प्राण का संचार हो, तब तक देश की रक्षा करता रहे । इस प्रकार कवि देश सेवा को ही सबसे बड़ी सेवा और देश पर मर मिटने को ही सबसे बड़ा बलिदान मानता है। इस प्रकार कवि मातृभूमि की सेवा करना चाहता है।

(ग) कवि निर्बलता एवं पतन से बचने के लिए हमें क्या सलाह देता है?
उत्तर :
कवि यह सलाह देना चाहता है कि हम समाज में फैली सारी कुरीतियों के बंधन को तोड़ दें और बीस वर्ष तक बहाचर्य का पालन कर मानसिक और शारीरिक दृष्टि से शक्ति संपन्न बन जाएँ। जिससे हम कभी निर्बल न हों और कभी हमारा पतन न हो।

(घ) कवि ईश्वर से शक्ति क्यों माँगता है?
उत्तर :
कवि ईश्वर से शक्ति माँगता है, ताकि उसे पाकर वह सारे संसार को अपना बना सके। प्रभु को फिर से देश में बुला सके। सुख के समय प्रभु को न भूले तथा टु:ख में हार न माने। कर्तव्य से कभी न हटे। समस्त संसार में उसकी सुकीर्ति गूंज उठे।

(ङ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर यथा निर्देश दीजिए-

(अ) छीने न कोई हमसे प्यारा वतन हमारा।

प्रश्न 1.
कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर :
मस्तुत पंक्ति के कवि श्री रामनरेश त्रिपाठी हैं। यह संगठन कविता से उद्धृत है।

प्रश्न 2.
उक्त अंश में कवि क्या संदेश देता है और क्यों?
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर कविता 4 की व्याख्या देखें।

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(ब) गाएँ सुयश खुशी से जग में सुजन हमारा।

प्रश्न 1.
सुयश और सुजन का अर्थ लिखिए-
उत्तर :
सुयश का अर्थ है- सुन्दर प्रशंसनीय कीर्ति और सुजन का अर्थ है- भले लोग जो सदा अछ्छा कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
संसार के लोग हमारा सुयश कैसे गा सकते हैं?
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर कविता 5 की व्याख्या में देखें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘संगठन’ कविता द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश प्रेम की भावना को व्यक्त किया है। इस कविता से हमें देश सेवा तथा मानव कल्याण में लगे रहने की प्रेरणा मिलती है। प्रभु से हमें ऐसी शक्ति मिले जिससे हमारा संगठन, पारस्परिक समन्वय सदा बना रहे। हम अपनी सारी शक्ति, बुद्धि धन, अर्थात् सर्वस्व देश को समर्पित कर दें। देश की सेवा में अपने को न्योछावर कर दें। समाज में युगों से व्याप्त रूढ़ियों, गलत कुरीतियों के बन्धन को तोड़कर अपने धर्म और विवेक पर दृढ़ बने रहे।

मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों के लिए ब्रह्मचर्य व्वत का पालन करें। अपने देश की रक्षा तथा सम्मान के लिए हँसते हुए प्राण त्यागने के लिए सदा प्रस्तुत रहें। हम पर लाखों संकट आए, मुसीबतें सिर पर सवार हो जाएँ, चाहे हम भिखारी बन जाएँ, पर कभी भी हिम्मत न हारें, निराश न हों। हर हालत में अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखें। कहा गया है- मन के हारे हार है मन के जीते जीत। अत: मन को विचलित न होने दें, सदा मन स्थिर बना रहे।

कवि देशवासियों को प्रेरणा दे रहा है कि हमें ऐसी शक्ति प्राप्त करना है जिससे हमारी वीरता को सुनकर सभी दुष्ट अत्याचारी भयभीत हो उठें। भारतवासियों के भय से कोई भी व्यक्ति न्याय के पथ से विचलित न हो। सभी लोग सच्चे न्याय के पथ पर दृढ़ बने रहें। जब तक शरीर में एक भी नस फड़क रही हो, जब तक एक भी साँस बाकी हो, जब तक शरीर में रक्त की एक बूँद भी शेष रहे, तब तक हम स्वदेश की रक्षा में तत्पर बने रहें। हमारे प्यारे वतन को कोई न छीन सकें। हम अपनी स्वाधीनता की, अपने देश की रक्षा प्राणों से करते रहें।

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कवि चाहता है कि उसमें ऐसी शक्ति तथा विवेक का भाव हो जिससे अखिल विश्व को अपना बना सकें। सुख के समय हम ईश्वर को न भूल सकें। विपत्ति के समय भी कभी हार न माने, मन में कभी हीन ग्रंथि की भावना न लाएँ। कर्त्तव्य मार्ग पर सदा आरुढ़ बने रहें। कवि की अभिलाषा है सारे संसार में हमारी सुकीर्ति, हमारी न्याय परंपरा का डंका बजे। सारा संसार हमारी महत्ता को स्वीकार करे। अपने सद्कर्त्तव्य, उदारता, सेवा, सहानुभूति, देश प्रेम जैसे महान कार्यों से हम अपने देश और समाज को उत्कृष्ट बना सकते हैं।

भाषा – बोध

(क) उपसर्ग अलग करो-
शब्द — उपसर्ग
संगठन — सम् + गठन
स्वदेश — स्व + देश
निरंतर — नि: + अन्तर
कुरीति — कु + रीति
सुजन — सु + जन

(ख) पर्यायवाची शब्द-
देश – राष्ट्र, जनपद, जन्मभूमि।,
विद्या – ज्ञान, बोध, विद्वता।,
देह – शरीर, तन, बदन।
जग – संसार, विश्व, दुनिया।,
भिखारी – भिक्षुक, याचक, मांगनेवाला।

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(ग) कुछ तत्सम शब्द –
स्वदेश, समर्पण, शक्ति, धर्म, न्याय, सुयश।

(घ) विलोम शब्द –
निर्बल – सबल
संगठन – विघटन
स्वदेश – विदेश
पतन – उत्थान
भिखारी – दाता, दानी

WBBSE Class 7 Hindi संगठन Summary

जीवन वरचचय

श्री रामनरेश त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के कोइरीपुर गाँव में सन् 1889 में हुआ था। नौवीं कक्षा तक विद्यालय में शिक्षा प्राप्तकर इन्होंने घर पर ही रहकर अध्ययन किया और साहित्य साधना में लग गए। सन् 1962 में इनका स्वर्गवास हो गया। त्रिपाठी के काव्य में गंगा-यमुना के कछारों तथा विन्ध्याचल की रमणीय घाटियों का सुन्दर चित्रण मिलता है।

वे उच्चकोटि के आदर्शवादी कवि, कथाकार, नाटककार, आलोचक तथा संपादक थे। लोकगीतों के क्षेत्र में इन्होंने योगदान किया। इनकी रचनाओं में राष्ट्रीयता के साथ-साथ आदर्शवाद का पुट भी मिलता हैं। इनकी भाषा सरल, सरस, प्रवाहमय, तथा बोधगम्य है। इनकी प्रमुख रचनाएँ पथिक, मिलन, स्वप्न, मानसी, ग्राम्यगीत, कविता कौमुदी, आदि हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

पद – 1

भगवन् रहे निरंतर दृढ़ संगठन हमारा।
छूटे स्वदेश की ही सेवा में तन हमारा।।
बल, बुद्धि और विद्या धन के अनेक साधन।
कर प्राप्त हम करेंगे निज देश को समर्पण।।
वह शक्ति दो कि भगवन् निभ जाय प्रण हमारा।। छूटे।।

शब्दार्थ :

  • निरंतर – लगातार
  • दृढ़ – मजबूत
  • निज – अपना
  • स्वदेश – अपना देश
  • समर्पण-अर्पण, बलिदान
  • निभ – निर्वाह होना
  • प्रण – अटल निश्चय, प्रतिज्ञा
  • संगठन – बिखरी हुई शक्तियों या
    लोगों का एकत्रीकरण, लोगों का मिलना।

सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘संगठन’ पाठ से ली गईहैं। इसके कवि श्री रामनरेश त्रिपाठी हैं।

प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने की शक्ति प्राप्त करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

व्याख्या – कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हमारे देश की बिखरी हुई शक्तियाँ संगठित हों और लोगों का संगठन सदा दृढ़ बना रहे। अपने प्यारे देश की सेवा करते हुए ही हमारा यह शरीर छूटे । शक्ति, बुद्धि, विद्या तथा धन के सभी उपायों को प्राप्त कर हम अपने देश पर सब न्योछावर कर दें। देश सेवा तथा देश के लिए अपना बलिदान कर देना ही हमारा लक्ष्य है। हे प्रभु, हमें ऐसी शक्ति दीजिए, जिससे हमारी प्रतिज्ञा, बलिदान-भावना का निर्वाह हो जाए। देश की सेवा करते हुए ही हम अपना जीवन समर्पित कर दें।

पद – 2

हममें विवेक जागे, हम धर्म को न छोड़ें,
बन्धन कुरीतियों के हम एक-एक तोड़ें।
व्रत ब्रह्मचर्य कम से कम बीस वर्ष पालें,
मन और देह दोनों की शक्तियाँ कमा लें।
निर्बल न हों कभी हम, कि न हो पतन हमारा।। छूटे।।

शब्दार्थ :

  • विवेक-बुद्धि, भले बुरे का ज्ञान
  • व्रत – पवित्र संकल्प, दृढ़ निश्चय
  • बन्धन – प्रतिबंध निर्बल – कमजोर
  • कुरीति – बुराई पतन – ह्रास, विनाश, अधोगति

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने सद्बुद्धि प्राप्त कर मानसिक तथा दैहिक शक्तियों को प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की है। कवि का कथन है कि हम भारतवासियों में सद्बुद्धि जागे, सत् असत् का ज्ञान हो। हम अपने धर्म का परित्याग न करें। समाज में व्याप्त सभी बुराइयों के जाल को हम तोड़ डालें। कम से कम बीस वर्ष तक बह्मचर्य व्रत का पालन करें। ब्रह्मचर्य पालन के दृढ़ निश्चय से हमारा मन तथा तन दोनों शक्ति सम्पन्न बने। हम कभी भी शक्तिहीन न बने। यदि हमारे तन-मन की शक्ति बनी रहेगी तो कभी भी हमारा विनाश नहीं होगा, बल्कि सदा उत्थान, प्रगति होती रहेगी।

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पद – 3

मरना अगर पड़े तो मर जायें हम खुशी से,
निज देश के लिए पर छूटे लगन न जी से।
पर संकटों में चाहे बन जायें हम भिखारी,
सिर पर मुसीबतें ही आ जायें क्यों न सारी।
हिम्मत कभी न हारें, विचले न मन हमारा ।। छूटे।।

शब्दार्थ :

  • लगन – लगाव, प्रेम
  • संकटों – कठिनाइयाँ
  • मुसीबतें – विपत्ति, तकलीफ
  • हिम्मत – साहस
  • विचले – विचलित होन
  • जी – मन

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि भारतीयों की वीरता तथा भय से सभी दुष्ट लोग डर से काँप उठें। हम भारतवासियों के शौर्य तथा पराक्रम को सुनकर सारे दुष्टजन भयभीत हो उठें। हमारे दबदबे तथा प्रभाव को देखकर कोई भी न्याय के पथ से विचलित न हो। जब तक हमारे शरीर में एक भी नस फड़कती रहे, जब तक शरीर में रक्त की एक बूँद भी बची रहे, जब तक शरीर में प्राण का संचार रहे, तब तक दुनिया की कोई भी शक्ति हमारी प्यारी जन्मभूमि भारतवर्ष को छीन न सके। देश की रक्षा तथा देश पर मर-मिटना हर भारतवासी का पुनीत कर्त्तव्य होना चाहिए।

पद – 4

सुन वीरता हमारी काँप जाएँ दुष्ट सारे,
कोई न न्याय छोड़े आतंक से हमारे।
जब तक रहे फड़कती नस एक भी बदन में,
हो रक्त बूँदभर भी जब तक हमारे तन में।
छीने न हमसे कोई प्यारा वतन हमारा। छछूटे।।

शब्दार्थ :

  • आतंक – रोब, दबदबा, भय
  • नस – रक्तवाहिनी नाड़ी
  • बदन – शरीर
  • वतन- जन्मभूमि, स्वदेश
  • फड़कती – हिलती-डुलती
  • दुष्ट – खल, नीच

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि भारतीयों की वीरता तथा भय से सभी दुष्ट लोग डर से काँप उठें।
हम भारतवासियों के शौर्य तथा पराक्रम को सुनकर सारे दुष्टजन भयभीत हो उठें। हमारे दबदबे तथा प्रभाव को देखकर कोई भी न्याय के पथ से विचलित न हो। जब तक हमारे शरीर में एक भी नस फड़कती रहे, जब तक शरीर में रक्त की एक बूँद भी बची रहे, जब तक शरीर में प्राण का संचार रहे, तब तक दुनिया की कोई भी शक्ति हमारी प्यारी जन्मभूमि भारतवर्ष को छोन न सके। देश की रक्षा तथा देश पर मर-मिटना हर भारतवासी का पुनीत कर्त्तव्य होना चाहिए।

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पद – 5

वह शक्ति दो कि जग को अपना बना सकें हम,
वह शक्ति दो कि तुमको फिर से बुला सकें हम।
सुख में तुम्हें न भूलें, दु:ख में न हार मानें,
कर्त्तव्य से न चूकें, तुम को परे न जानें।
गाएँ सुयश खुशी से जग में सुजन तुम्हारा। ।छूटे।।

शब्दार्थ :

  • जग – संसार
  • हार – पराजय
  • सुयश – सुन्दर कीर्ति
  • चूकें- सुअवसर को खो देना, भूल करना
  • परे – पराया
  • सुजन- भले लोग

व्याख्या – प्रस्तुत.पंक्तियों में कवि ईश्वर से ऐसी शक्ति की याचना कर रहा है जिससे वह कर्त्तव्य मार्ग पर स्थिर बना रहे और प्रभु को न भूले। कवि ईश्वर से वह शक्ति देने के लिए कह रहा है जिससे वह समस्त संसार को अपना हितैषी बना सके। उस शक्ति को पाकर वह प्रभु को फिर भारत के पवित्र धरती पर बुला सके।

आनंद के समय में वह प्रभु को न भूले और दु:ख- विपत्ति के समय पराजित होने की मनोवृत्ति न बनाएँ। कभी मन में हीन भावना न ले आएँ। सत्कर्त्तव्य के सुअवसर को न खोएँ, अर्थात् कर्त्तव्य पथ पर दृढ़ बने रहें। प्रभु को वह पराया न समझे। सारे संसार के लोग सानंद भारतीयों की कीर्ति का, महत्व का गुणगान करें। हे प्रभु ऐसी शक्ति दीजिए।

पद – 6

तोड़ दो मन में कसी सब श्रृंखलाएँ,
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिंदु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूँगा,
सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • शृंखलाएँ – बन्धन, जंजीर।
  • संकीर्णता – क्षुद्रता, ओछापन

व्याख्या – कवि लोगों को प्रेरणा है दे रहा कि वे अपने मन के सारे बंधनों को, मन में स्थित समस्त तुच्छ ओछी भावनाओं, विचारों को छोड़ दे। उदार एवं स्वच्छ मन वाला बने। कवि उन्हें बिन्दु से सागर बनाना चाहता है। वह उन्हें तुच्छ स्थिति में नहीं रहने देगा, सागर की भाँति महान तथा उदार बनाना चाहता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 Question Answer – अपराजिता

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
डॉ० चन्द्रा का शरीर जन्म से कितने दिनों में पोलियो ग्रस्त हो गया?
(क) आठवें दिन
(ख) अद्ठारहवें दिन
(ग) अट्ठारहवें महीने
(घ) अट्ठारहवें वर्ष
उत्तर :
(ग) अट्ठारहवें महीने।

प्रश्न 2.
किस वर्ष डॉ० चन्द्रा को डॉक्टरेट की उपाधि मिली?
(क) 1966
(ख) 1978
(ग) 1986
(घ) 1976
उत्तर :
(घ) 1976 ई०

प्रश्न 3.
डॉ० चन्द्रा ने किस विषय में एम०एस०सी० पास किया?
(क) रसायन शास्त्र
(ख) प्राणिशास्त्र
(ग) वनस्पति शास्त्र
(घ) भौतिक शास्त्र
उत्तर :
(ख) प्राणि शास्त्र

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 4.
डॉ० चन्द्रा ने स्नातकोत्तर किस श्रेणी में पास की?
(क) द्वितीय
(ख) तृतीय
(ग) प्रथम
(घ) सातकोत्तर पास नहीं की
उत्तर :
(ग) प्रथम

प्रश्न 5.
डॉ० चन्द्रा ने कितने वर्षों में शोध कार्य पूरा किया?
(क) सात
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) तीन
उत्तर :
(ग) पाँच

प्रश्न 6.
शिवानी का पूरा नाम क्या था ?
(क) गौरीपंत शिवानी
(ख) गौरापंत शिवानी
(ग) गोरापंत शिवानी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) गौरापंत शिवानी

प्रश्न 7.
शिवानी ने स्नातक की पढ़ाई कहाँ से पूरी की ?
(क) प्रेसीडेन्सी कॉलेज
(ख) शांतिनिकेतन
(ग) रवीन्द्रभारती विश्वविद्यालय
(घ) कलकत्ता विश्वविद्यालय
उत्तर :
(ख) शांतिनिकेतन

प्रश्न 8.
डॉ० चंद्रा का शरीर जन्म के कितने दिनों में पोलियो ग्रस्त हो गया ?
(क) आठवें दिन
(ख) अट्ठारहवें दिन
(ग) अट्टारहवें महीनें
(घ) अद्टारहवें वर्ष
उत्तर :
(ग) अट्टारहवें महीनें

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 9.
डॉ० चंद्रा ने किस विषय में एम० एस-सी० पास किया ?
(क) रसायन शास्त्र
(ख) प्राणि शास्त्र
(ग) वनस्पति शास्त्र
(घ) भौतिक शास्त्र
उत्तर :
(ख) प्राणिशास्त्र

प्रश्न 10.
डॉ० चंद्रा ने कितने वर्षों में शोधकार्य पूरा किया ?
(क) सात
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) तीन
उत्तर :
(ग) पाँच

प्रश्न 11.
हवाई द्वीप के ईस्ट-वेस्ट सेंटर में कौन काम करता था ?
(क) डॉ० चंद्रा
(ख) लेखिका
(ग) लेखिका के दामाद
(घ) डॉ० चंद्रा की माँ
उत्तर :
(ग) लेखिका के दामाद

प्रश्न 12.
किस डॉक्टर के उपचार से डॉ॰ चंद्रा के हाथों में थोड़ी-बहुत जान आई ?
(क) इ० एन० टी० सर्जन के
(ख) त्वया रोग विशेष्ज के
(ग) ऑर्थेंपिडिक सर्जन के
(घ) जेनेरल फिजिशियन के
उत्तर :
(ग) ऑर्थोपिडिक सर्जन के

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प्रश्न 13.
डॉ० चंद्रा की माँ ने उसका दाखिला किस विद्यालय में करवाया ?
(क) सेंट जेवियर स्कूल
(ख) सेंट जोसेफ स्कूल
(ग) माउंट कारमेल कॉन्वेंट
(घ) उपरोक्त कोई नहीं
उत्तर :
(ग) माउंट कारमेल कॉन्वेंट

प्रश्न 14.
डॉ० चंद्रा के माता-पिता ने चंद्रा के लिए कहाँ से व्कील चेयर मँगवाया ?
(क) लंदन
(ख) न्यूयार्क
(ग) वाशिंगटन
(घ) पेंसिलवानिया
उत्तर :
(घ) पेंसिलवानिया

प्रश्न 15.
कौन नूरमंजिल में शरण लिया है ?
(क) नवयुवक
(ख) शिवानी
(ग) लेखिका
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) नवयुवक

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प्रश्न 16.
कौन ‘जननी पुरस्कार’ ग्रहण कर रही है ?
(क) लेखिका
(ख) डॉ॰ चन्द्रा
(ग) श्रीमती सुबह्मणयम
(घ) लड़की
उत्तर :
(ख) डॉ० चन्द्रा

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
लेखिका किसके जीवन में प्रभावित हुई?
उत्तर :
लेखिका डॉ॰ चन्द्रा के जीवन से प्रभावित हुई,

प्रश्न 2.
डॉ० चन्द्रा कब पोलियोग्रस्त हुई?
उत्तर :
डा० चन्द्रा जन्म के अट्ठारहवें महीने में पोलियोग्रस्त हुई।

प्रश्न 3.
डॉ० चन्द्रा की माँ का नाम लिखिए।
उत्तर :
डॉ॰ चन्द्रा की माँ का नाम श्रीमती शारदा सुबह्हण्यम था।

प्रश्न 4.
विज्ञान के अतिरिक्त डॉ०चन्द्रा किन-किन कार्यों में दक्ष थी?
उत्तर :
विज्ञान के अतिरिक्त डॉ॰ चन्द्रा काव्य रचना, कढ़ाई, बुनाई, जर्मन भाषा का ज्ञान, भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत आदि में दक्ष थी।

प्रश्न 5.
डॉ० मेरीवर्गीज कौन थी?
उत्तर :
डॉ॰ मेरीवर्गीज एक अपंग महिला होते हुए भी मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर सेवा कार्य किया था।

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प्रश्न 6.
डॉ॰ चन्द्रा ने अपनी माँ का चित्र कहाँ लगा रखा था?
उत्तर :
डॉ॰ चन्द्रा ने अपने एलबम के अन्तिम पृष्ठ पर अपनी माँ का बड़ा-सा चित्र लगा रखा था।

प्रश्न 7.
लखनऊ का मेधावी युवक इलाहाबाद क्यों गया था ?
उत्तर :
लखनऊ का मेधावी युवक आई० ए० एस० की परीक्षा देने इलाहाबाद गया था।

प्रश्न 8.
डॉ० चंद्रा ने किसके निर्देशन में शोधकार्य पूरा किया ?
उत्तर :
डॉ॰ चंद्रा ने प्रोफेसर सेठना के निर्देशन में शोधकार्य पूरा किया।

प्रश्न 9.
चंद्रा की माता को कौन-सा पुरस्कार मिला ?
उत्तर :
चंद्रा की माता को ‘वीर जननी’ पुरस्कार मिला।

प्रश्न 10.
डॉ० चंद्रा के प्रोफेसर ने उनकी प्रशंसा में क्या कहा ?
उत्तर :
डॉ० चंद्रा के प्रोफेसर ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ० चंद्रा ने विज्ञान की प्रगति में महान् योगदान दिया है।

प्रश्न 11.
‘अपराजिता’ किस विधा की रचना है ?
उत्तर :
‘अपराजिता’ शिवानी द्वारा लिखित एक संस्मरण है।

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प्रश्न 12.
रवीन्द्रनाथ टैगोर शिवानी को क्या कहकर बुलाते थे ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर शिवानी को ‘गोरा’ कहकर बुलाते थे।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
लेखिका का परिचय डॉ० चन्द्रा से कब और कहाँ हुआ?
उत्तर :
लेखिका ने डॉ० चन्द्रा को पहली बार कार से उतरते देखा। किस प्रकार वह निर्जीव धड़ के होते हुए भी कार से उतर कर कील चेयर पर बैठकर घर के भीतर जाती थी। लेखिका नित्य अपनी कोठी से उसे देखती। आश्चर्य चकित होकर प्रभावित हुई। धीरे-धीरे लेखिका का उससे परिचय हो गया।

प्रश्न 2.
डॉ० चन्द्रा को मेडिकल में प्रवेश क्यों नहीं मिला?
उत्तर :
निचला धड़ निर्जीव होने के कारण वह सफल शल्य चिकित्सक नहीं बन सकती थी। यही सोचकर डॉ० चन्द्रा को मेड़िकल में प्रवेश नहीं मिला।

प्रश्न 3.
चन्द्रा की माँ को चन्द्रा को शिक्षा प्राप्ति में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर :
चन्द्रा की माँ कील चेयर लेकर प्रत्येक पीरिएड में उसके पीछे खड़ी रहती। अपने सारे सुख त्याग कर नित्य छाया बनी पुर्री की पहिया लगी कुर्सी के पीछे चक्र सी घूमती रहती। पच्चीस वर्ष तक सहिष्यु माँ पुर्री के साथ-साथ कठिन साधना की।

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प्रश्न 4.
‘वीर जननी’ का पुरस्कार किसे और क्यों दिया गया?
उत्तर :
‘वीर जननी’ का पुरस्कार डॉ० चन्द्रा की माँ श्रीमती टी० सुबह्मण्यम को मिला। चन्द्रा की माँ ने जीवन के सारे सुख त्याग कर पुत्री की चिकित्सा तथा उसकी शिक्षा के लिए अपना जीवन लगा दिया। उनकी कठिन साधना के कारण डा० चन्द्रा सफल हुई और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। सचमुच वे अद्भुत साहसी तथा कष्ट सहिष्णु महिला थी। इसी कारण उन्हें यह पुरस्कार दिया गया।

प्रश्न 5.
डॉ० चन्द्रा के विषय में उनके प्रोफेसर का क्या विचार है?
उत्तर :
डॉ० चन्द्रा के विषय में उनके प्रेफ्फेसर का विचार है कि चन्द्रा ने विज्ञान की प्रगति में महान योगदन दिया है।

प्रश्न 6.
डॉ० चन्द्रा का चिरित्र चित्रण लिखिए।
उत्तर :
डॉ॰ चन्द्रा का व्यक्तित्व विलक्षण है। उस में अद्भुत साहस, अदम्य उत्साह उत्कृट.निजीविषा का भाव तथा महत्वाकांक्षाएँ भरी हुई है। अपने अद्भुत साहस से नियति को अंगूठा दिखा डॉक्टरेट प्राप्त कर ली। उसमें अद्भुत प्रतिभा थी। प्रत्येक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीत सकी। कढ़ाई बुनाई तथा संगीत में भी उसकी रुचि है। अपने प्रयोगशाला में अपना संचांलन उसने सुगम बना लिया। अपना सारा काम स्वयं निपटा लेती है। ऐसी भयंकर परिस्थिति में भी वह दृढ़ता से खड़ी रही। नियति के कठोर आघात को धैर्य और साहस से झेलती हुई वह देवांगना से कम नहीं लगी। विज्ञान की प्रगति में डा० चन्द्रा ने महान योगदान दिया है।

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प्रश्न 7.
‘चिकित्सा ने जो खोया, वह विज्ञान ने पाया’ उक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
डॉ० चन्द्रा की डॉक्टर बनने की प्रबल इच्छा थी। परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर भी उसे मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला, क्यों कि उसका निचला धड़ निर्जीव था। इसलिए वह चिकित्सा के क्षेत्र में अपना योगदान न कर सकी। चिकित्सा ने इस प्रकार आदर्श सेविका को खो दिया। डॉ० चन्द्रा डॉक्टर नहीं बनी पर अच्छीवैज्ञानिक बन गई। विज्ञान उसे पाकर गैरवान्वित हुआ। विज्ञान की प्रगति में डॉ० चन्द्रा ने महत्पूपर्ण योगदान दिया है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –
‘नियति के प्रत्येक कठोर आघात को अति मानवीय धैर्य एवं साहस के झेलती वह वित्ते मर की लड़की मुझे किसी देवांगना से कम नहीं लगी।
(क) उद्धृत पंक्तियाँ किस रचनाकार की किस रचना से उद्धृत है?
(ख) यहाँ ‘वहाँ तथा ‘मुझे’ शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
(ग) इस अवतरण की व्यख्या कीजिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ सुश्री श्विानी कृत ‘अपराजिता’ से उद्धुत है।
(ख) यहाँ ‘वह’ शब्द का प्रयोग चन्द्रा के लिए तथा ‘मुझे’ शब्द का प्रयोग लेखिका शिवांनी के लिए हुआ है।
(ग) प्सस्तुत अवतरण में लेखिका ने चन्द्रा के धैर्य एवं साहस का वर्णन किया है। धीरे-धीरे लेखिका का परिचय चन्द्रा से हुआ। चन्द्रा की कहानी सुनकर लेखिका आश्चर्य चकित रह गई। चन्द्रा पक्षाघात से अपंग बन गई थी। उसका निचला धड़ निष्पाण केवल मांस पिंडमात्र रह गया। भाग्य ने बचपन में उस पर कठोर प्रहार कर दिया था। पर उसमें अद्भुत साहस एवं धैर्य था। सारे कष्टों को झेलती हुई वह नह्हीं सी बालिका कभी हार नहीं मानी, कभी निराश नहीं हुई। लेखिका उसके इस अपूर्व धैर्य और उत्साह उसकी मानसिक शक्ति तथा लगन को देखकर उसकी तुलना देवांगना (देवी) से की है। वह मानवी भाव विचार से बहुत ऊपर थे।

भाषा बोध :

1. इस पाठ से पाँच तत्सम शब्द चुनकर उसके तद्भव शब्द लिखिए:

  • आश्चर्य – अचरज
  • द्वार – दरवाजा
  • उच्च – ऊँचा
  • स्वर्ण – सोना
  • धैर्य – धीरज

2. निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग अलग कीजिए :

  • अमानवीय अ + मानवीय
  • प्रसद्धि प्र + सिद्ध
  • उल्लास उत् + लास
  • विज्ञान वि + ज्ञान
  • प्रगति प्र + गति
  • अवरुद्ध अव + रुद्ध

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :-

  • पिछली – अगली
  • निर्जीव – सजीव
  • उजले – अंधेरे
  • साहसी – कायर
  • अभिशाप – वरदान
  • इच्छा – अनिच्छा
  • सर्वेच्च – सर्वनिम्न

4. संज्ञा और दूसरे विकारी शब्दों की संख्या का गिनती का जिससे बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं – (क) एक वचन (ख) बहुवचन।
निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तित कीजिए –

  • कोठी – कोठियाँ
  • बैशाखियों – बैशाखी
  • वस्त्र – वस्बों
  • पंक्ति – पंक्तियों
  • महत्वाकांक्षाएँ – महत्वाकांक्षा
  • टाँग – टाँगों
  • स्त्री – स्त्रियाँ
  • पुरुष – पुरुषों
  • लड़की – लड़कियाँ
  • कठिन -कठिनाइयाँ
  • वर्ष – वर्षो

WBBSE Class 8 Hindi टोबा टेक सिंह Summary

लेखक-परिचय :

शिवानी का जन्म राजकोट गुजरात में सन् 1933 ई० में हुआ। इनकी शिक्षा शान्तिनिकेतन तथा कोलकाता में हुई। इनकी प्रमुख रचनाएँ- कृष्णकली, चौदह फेरे, पाताल भैरवी, श्मशान, चम्पा, कैंजा, यात्रिक आदि हैं। इन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनकी सहज, सरल, प्रवाहपूर्ण भाषा में लोच तथा कोमलता भरी है। पाठक इनकी रचनाओं को पढ़ने में तल्लीन हो जाते हैं। भाषा को प्रवाह और माधुर्य से परिपूर्ण शैली अत्यंत हलययग्राही है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

सारांश :

प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने बताया है कि एक अपंग पोलियो अभिशप्त लड़की आत्मशक्ति, साहस तथा धैर्य से अपने जीवन को अभिशाप से वरदान बना दिया। विषम परिस्थितियों में भी दृढ़ बनी रही। कहानी डॉ॰ चन्द्रा की है। लेखिका उसके निर्जीव निचले धड़ को कुशलता से कार से उतरते, बैशाखियों से कीलचेयर तक पहुँचने, फिर उसे चलकर कोठी के भीतर पहुँच, देखकर आश्चर्य चकित रह जाती थी। लेखिका अपनी यह रचना एक मेधावी नवयुवक को पढ़ने के लिए कह रही है। जो एक हाथ के कट जाने से बिल्कुल निराश होकर मानसिक संतुलन भी खो बैठा। नशे की गोलियाँ खाने लगा और नूरमंजिल में शरण लिया है।

जन्म के अट्ठारहवें महीने में चन्र्रा की गर्दन के नीचे का पूरा शरीर पोलियों से निर्जीव हो गया। सामान्य ज्वर के चौथे दिन पक्षाघात से यह घटना घटी। उसकी माँ ने बड़े-बड़े डाक्टरों को दिखलाया, पर सभी डॉक्टरों से जवाब मिल गया। फिर भी माँ श्रीमती सुब्रह्हण्यम् ने आशा न छोड़ी। एक आर्थेपिडिक डॉक्टर के इलाज से इसके ऊपरी धड़ में गति आ गई। हाथ की उँगलियाँ हिलने लगी। निर्जीव धड़ को सहारा देकर बैठना सीख गई।

बंगलौर के प्रसिद्ध माउंट कारमेल में प्रवेश हो जाने पर उसकी माँ कील चेयर लेकर अपंग पुत्री को कक्षाओं में पहुँचाती। मेधावी चन्द्रा ने प्रत्येक परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीते। बी०एस०सी० किया। फिर प्राणिशास्त्र में एम० एस० सी० में प्रथम स्थान प्राप्त किया और बंगलुरू के प्रख्यात इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस में स्पेशल सीट प्राप्त कर ली। अपनी निष्ठा, धैर्य एवं साहस से प्रोफेसर सेठना के निर्देशन में पाँच वर्ष शोध कार्य किया। सन् 1976 में चन्द्रा को माइकोबायोलॉजी में डॉक्टरेट मिली। अपंग स्त्री पुरुषों में इस विषय में डॉक्टरेट पाने वाली डॉ० चन्द्रा प्रथम भारतीय है।

डा० चन्द्रा ने मार्मिक कविताओं की रचना की। कढ़ाई-बुनाई के काम में भी सफलता हासिल की। जर्मन भाषा में माता-पुत्री दोनों ने मैक्समूलर भवन से विशेष योग्यता सहित परीक्षा उत्तीर्ण की। भारतीर्य एवं पाश्चात्य संगीत में उसकी समान रुचि थी। गर्ल गाइड में राष्ट्रपति का स्वर्ण कार्ड पानेवाली यह प्रथम अपंग बालिका थी। अपने एलबम को वह लेखिका को दिखाने लगी। पुरस्कार ग्रहण करती डॉ० चन्द्रा, प्रधान मंत्री के साथ मुस्कराती डॉ० चन्द्रा, राष्ट्रपति को सलामी देती डॉ० चन्द्रा, कील चेयर में लैदर जैकेट में जकड़ी बैसाखियों का सहारा देकर अपनी डॉक्टरेट ग्रहण करती डॉ० चन्द्रा०।

निचला घड़, निर्जीव होने के कारण चन्द्रा को मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला। पर चिकित्सा ने जो खोया विज्ञान ने पाया। डा० चन्द्रा के एलबम के अन्तिम पृष्ठ पर उनकी माता का बड़ा-सा चित्र है, जिसमें वे जे० सी० बंगलुरू द्वारा प्रदत्त विशिष्ट ‘जननी पुरस्कार’ ग्रहुण कर रही है। पुत्री के प्रेम में अपने सारे सुख त्याग कर छाया की तरह उसकी सेवा में तत्पर अद्भुत साहसी जननी शारदा सुब्रह्माण्यम् के शब्द – ईश्वर सब द्वार एक साथ बंद नहीं करता। यदि एक द्वार बंद करता भी है तो दूसरा द्वार खोल भी देता है। आज भी गूँज रहे हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

शब्दार्थ :

  • प्रौढ़ा – अधिक अवस्था वाली स्त्री
  • नियति – भाग्य
  • आघात – चोट, प्रहार, धक्का
  • विलक्षण- अद्भुत
  • रिक्तता – खालीपन
  • आवागमन – आना-जाना
  • मेधावी – बुद्धिमान
  • उत्फुल्ल – प्रसन्न
  • नियत – निश्चित
  • साधना- तपस्या
  • यातनाप्रद – कष्ट दायक
  • पक्षाघात -लकवा मारना
  • सर्वाग – सारा अंग
  • निष्ठा – आस्था
  • विशिष्ट – विशेष, खास
  • विचित्र – अलग कर देना
  • देवांगना – दिव्य गुणवाली स्त्री, देवी
  • विषाद – दु:ख
  • अदम्य – जिसे दबाया न जा सके, प्रचंड, प्रबल
  • उत्कट – प्रबल
  • जिरह बख्तर – कवच, जिससे शरीर की रक्षा हो
  • क्षत-विक्षत – बुरी तरह घायल
  • आभामंडित – तेजस्वी, कांति से शोभायान
  • जिजीविषाा – जीने की इच्छा
  • अभिशाप – शाप से ग्रस्त
  • अचल – निष्क्रिय, जो हिल न सके
  • आर्थेपिडिक – हड्डी संबंधित
  • पटुता – चतुरता, कुशलता
  • सुदीर्घ – अधिक समय, लंबा
  • अधर- ओठ
  • अपंग – अंगहीन, असमर्थ, लंगड़ा
  • पाश्चात्य – पश्चिमी

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 Question Answer – टोबा टेक सिंह

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘टोबाटेक’ सिंह कहानी पर आधारित है-
(क) देश विभाजन पर
(ख) स्वाधीनता आन्दोलन
(ग) पागलों की हरकत पर
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(क) देश विभाजन पर

प्रश्न 2.
‘टोबाटेक’ सिंह स्थित है-
(क) बंगलादेश में
(ख) हिन्दुस्तान में
(ग) पाकिस्तान में
(घ) श्रीलंका मे
उत्तर :
(ग) पाकिस्तान में

प्रश्न 3.
‘कायदे आजम’ की उपाधि मिली थी-
(क) खान अन्दुल गफफार खाँ को
(ख) लियाकत अली को
(ग) मोहम्मद अली जिन्ना को
(घ) याहिया खान को
उत्तर :
(ग) मोहम्मद अली जिन्ना को

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 4.
बिशन सिंह की बेटी का नाम था-
(क) हर प्रीत कौर
(ख) रूपमती
(ग) रूप कौर
(घ) हरमीत कौर।
उत्तर :
(ग) रूप कौर

प्रश्न 5.
बिशन सिंह किस शहर के पागल खाने में था?
(क) सयाल कोट
(ख) अमृतसर
(ग) चियौट
(घ) लाहौर
उत्तर :
(घ) लाहौर

प्रश्न 6.
सआदत हसन मंटो किस भाषा के लेखक थे ?
(क) हिंदी
(ख) अंग्रेजी
(ग) बंगला
(घ) उर्दू
उत्तर :
(घ) उर्दू

प्रश्न 7.
इनमें से कौन-सा सम्मान सआदत हसन मंटो को मिला –
(क) निशान-ए-पाक
(ख) निशान-ए-इम्तियाज
(ग) निशान-ए-हिन्द
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) निशान-ए-इम्तियाज

प्रश्न 8.
मंटो ऑल इंडिया रेडियो की किस शाखा में काम करते थे ?
(क) कलकत्ता
(ख) दिल्ली
(ग) बम्बई
(घ) तमिलनाडु
उत्तर :
(ख) दिल्ली

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प्रश्न 9.
मंटो की मृत्यु कब हुई ?
(क) सन् 1947 में
(ख) सन् 1950 में
(ग) सन् 1955 में
(घ) सन् 2005 में
उत्तर :
(क) सन् 1947 में

प्रश्न 10.
मुसलमानों के लिए अलहदा कौन-सा मुल्क बना ?
(क) भारत
(ख) पाकिस्तान
(ग) श्रीलंका
(घ) नेपाल
उत्तर :
(ख) पाकिस्तान

प्रश्न 11.
एंग्लो-इंडियन पागल किस वार्ड में रखे गये थे –
(क) हिन्दू वार्ड में
(ख) मुस्लिम वार्ड में
(ग) यूरोपियन वार्ड में
(घ) सिख वार्ड में
उत्तर :
(ग) यूरोपियन वार्ड में

प्रश्न 12.
स्वयं को खुदा कहने वाले पागल के अनुसार टोबा टेक सिंह कहाँ था ?
(क) हिंदुस्तान में
(ख) पाकिस्तान में
(ग) दोनों जगह
(घ) कहीं नहीं
उत्तर :
(घ) कहीं नहीं

प्रश्न 13.
बिशन सिंह के मुसलमान दोस्त का क्या नाम था ?
(क) करमदीन
(ख) फजलदीन
(ग) फरमुद्दीन
(घ) फजलुद्दीन
उत्तर :
(ख) फजलदीन

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 14.
बिशन सिंह कितने साल पागलखाने में रहा ?
(क) 5 वर्ष
(ख) 10 वर्ष
(ग) 15 वर्ष
(घ) 20 वर्ष
उत्तर :
(ग) 15 वर्ष

प्रश्न 15.
कौन बेहोश हो गया ?
(क) हिन्दू पागल
(ख) मुसलमान पागल
(ग) अधिकारी
(घ) लेखक
उत्तर :
(ख) मुसलमान पागल

प्रश्न 16.
सिख पागल कितने वर्षों तक सोया नहीं ?
(क) आठ वर्षों
(ख) नौ वर्षों
(ग) दस वर्षों
(घ) पन्द्रह वर्षों
उत्तर :
(घ) पन्द्रह वर्षों

प्रश्न 17.
पागल खाने में एक पागल अपने आप को क्या कहता था ?
(क) प्रधानमंत्री
(ख) वकील
(ग) खुदा
(घ) पुलिस
उत्तर :
(ग) खुदा

प्रश्न 18.
अधिकतर पागल किसके पक्ष में नहीं थे ?
(क) पाकिस्तान के
(ख) हिन्दुस्तान के
(ग) तबादले
(घ) अधिकारी
उत्तर :
(ग) तबादले

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प्रश्न 19.
कौन समाप्त हो गया ?
(क) विशन सिंह
(ख) फजलद्दीन
(ग) लेखक
(घ) पागल
उत्तर :
(क) विशन सिंह

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
मुसलमानों के लिए अलग देश किसने बनाया?
उत्तर :
मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाया।

प्रश्न 2.
एक पागल दरख् पर क्यों चढ़ गया?
उत्तर :
एक पागल हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के चक्कर में पड़कर और ज्यादा पागल हो गया। झाडू देते समय वह दरख्त पर चढ़ गया।

प्रश्न 3.
पागल हिन्दू वकील लीडरों को क्यों गालियाँ देने लगा?
उत्तर :
हिन्दू वकील प्रेम में असफल हो जाने के कारण पागल हो गया। अमृतसर की एक लड़की से वह प्रेम करता था। लड़की ने उसे ठुकरा दिया, पर वह दीवानगी में उस लड़की को नहीं भूला था। जब उसने सुना कि अमृतसर हिन्दुस्तान में चला गया, जहाँ वह लड़की रहती है तो उसे बहुत दु:ख हुआ। इसलिए वह लीडरों को गालियाँ देने लगा।

प्रश्न 4.
बिशन सिंह कैसे परिवार का सदस्य था?
उत्तर :
विशन सिंह एक जमींदार परिवार का सदस्य था।

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प्रश्न 5.
बिशन सिंह ने हिन्दुस्तान जाने से इन्कार क्यों किया?
उत्तर :
विशन सिंह समझता था कि पाकिस्तान में उसकी जमीन हैं, उसके साथी है। पागलखाने में भी उसके साथी थे। इसलिए वह हिन्दुस्तान जाने से इन्कार कर दिया।

प्रश्न 6.
सआदत हसन मंटो का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
सआदत हसन मंटो का जन्म 11 मई, 1912 ई० को लुधियाना जिला के समराल नामक क्षेत्र के पपरौदी गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
मंटो के माता-पिता का क्या नाम था ?
उत्तर :
मंटो के पिता का नाम गुलाम हसन मंटो और माता का नाम सरदारी बेगम थी।

प्रश्न 8.
मुसलमानों के लिए अलग देश किसने बनाया ?
उत्तर :
कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाया।

प्रश्न 9.
बिशन सिंह क्या बड़बड़ाता रहता था ?
उत्तर :
‘ओंपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्सदि बेध्यानाँ दि मुंग दि दाल आफ दी लालटेन’।

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प्रश्न 10.
बिशन सिंह ने क्या मिन्नत की ?
उत्तर :
बिशन सिंह ने स्वयं को खुदा मानने वाले पागल से मिन्नत की कि वह हुक्म दे दे कि टोबा टेक सिंह हिंदुस्तान में रहे या पाकिस्तान में।

प्रश्न 11.
बिशन सिंह से मिलने कौन लोग आते थे ?
उत्तर :
बिशन सिंह से मिलने उसके रिश्तेदार आया करते थे।

प्रश्न 12.
खामोश होकर सड़क पर कौन टहलता था ?
उत्तर :
एक एम० एस-सी० पास रेडियो इंजीनियर पागल खामोश होकर सड़क पर टहलता था।

प्रश्न 13.
एक सिख पागल ने दूसरे सिख पागल से क्या पूछा ?
उत्तर :
एक सिख पागल ने दूसरे सिख पागल से पूछा कि उन्हें हिन्दुस्तान क्यों भेजा जा रहा है ?

प्रश्न 14.
मोहम्मद अली नामक पागल ने क्या ऐलान किया था ?
उत्तर :
मोहम्मद अली नामक पागल ने खुद को कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना घोषित कर दिया था।

प्रश्न 15.
बिशन सिंह के परिवारवालों ने फजलदीन के पास क्या छोड़ा ?
उत्तर :
बिशन सिंह के परिवारवालों ने फजलदीन के पास अपनी भैंस छोड़ी।

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प्रश्न 16.
बिशन सिंह की मौत कहाँ हुई ?
उत्तर :
बिशन सिंह की मौत भारत-पाकिस्तान की सीमा (बागाह बॉर्डर) पर हुई।

प्रश्न 17.
‘टोबा टेक सिंह’ कहानी का हिंदी अनुवाद किसने किया है ?
उत्तर :
‘टोबा टेक सिंह’ कहानी का हिंदी अनुवाद नरेन्द्र शर्मा ने किया है।

प्रश्न 18.
प्रस्तुत कहानी में किसकी त्रासदी को दिखाया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के विभाजन की त्रासदी को दिखाया गया है।

प्रश्न 19.
कौन प्यार में असफल हो जाने से पागल हो गया था ?
उत्तर :
अमृतसर की एक लड़की से प्यार करने वाला हिन्दू वकील प्यार में असफल हो जाने से पागल हो गया था।

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प्रश्न 20.
एंग्लो इंडियन पागल क्या सुनकर दु:खी हो गया ?
उत्तर :
एंग्लो इंडियन पागल आजाद करके अंग्रेजों के चले जाने की खबर सुनकर दु:खी हो गया।

बोधमूलक प्रश्न :

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार दीजिए-
(क) … और यह भी कौन सीने पर हाथ रखकर कह सकता है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, दोनों किसी दिन सिरे से गायब हो जाएँगे।’ उद्धुत पंक्तियों में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के समय कोई भी पागल टोबा टेक सिंह को सटीक उत्तर न दे सका कि वह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। सभी उलझन में थे कि कौन क्षेत्र किस देश में है और फिर भविष्य में क्या परिवर्तन हो जाएगा, यह निश्चित नहीं है। अत: दृढ़ता और पूरे विश्वास के साथ कौन कह सकता हैं कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का अलग-अलग आस्तित्व ही कभी समाप्त हो सकता है।

(ख) आधिकांश पागल अदला-बदली के पक्ष में क्यों नहीं थे और इस अदला-बदली से उनकी क्या दशा थी?
उत्तर :
अधिकांश पागल की समझ में नहीं आ रहा था कि उन्हें अपनी जगह से उखाड़ कर कहाँ फेंका जा रहा है। कुछ पागल, नारेबाजी करने लगे, जिससे कई बार दंगा होते-होते बचा। कुछ मुसलमानों तथा सिखों को यह नारे सुनकर तैश आ गया था । पागलों को उनके दूसरे अफसरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था। कुछ पागल आपस में झगगड़ने लगे, कुछ रोने लगे, कुछ अपने कपड़े उतार कर नंगे होने लगे। कुछ पागल औरतें शोर शराबा करने लगीं। कड़ाके की सर्दी भी पड़ रही थी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

(ग) टोबा टेक सिंह उर्फ बिशन सिंह का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर :
बिशन सिंह पहले खाता-पीता जमींदार था। एकाएक उसका दिमाग उलट गया, जिससे उसके रिश्तेदार पागलखाने में दाखिल कर गए। बिशन सिंह हृष्ट-पुष्ट तथा मजबूत शरीर का था। पागल होते हुए भी वह साहसी तथा दृढ़ निश्चयवाला था। पंद्रह वर्षों तक वह कभी सोया नहीं। हर वक्त खड़ा रहने से उसके पाँव सूज गए। तकलीफ के बावजूद वह टस से मस न हुआ। तबादले के समय पागलों की बातें वह ध्यान से सुनता। हमेशा यह जानने की कोशिश करता कि वह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। मिलने के लिए आनेवाले रिश्तेदारों से वह नहाकर कपड़े बदलकर उनसे मिलता था। तबादले के समय उसे मालूम हुआ कि अभी वह पाकिस्तान में है। वह प्रसन्न होकर अपने साथियों से मिलने लगा। बहुत समझाने पर भी वह हिन्दुस्तान जाने को तैयार न हुआ। जबर्दस्ती करने पर वह अपनी सूजी हुई टाँगों पर खड़ा हो गया, पर हिला नहीं। अन्त में चीखकर प्राण त्याग दिया। वह अपने दृढ़ निश्चय पर अडिग था। कष्ट सहने की उसमें अद्भुत शक्ति थी।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

यथानिर्देश प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. ‘आदमी चूँकि बे-जरर था, इसलिए उसमें मजीद जबर्दस्ती न की गई।’
(क) उपर्युक्त पंक्ति किस लेखक के लिए पाठ से उद्धृत है?
(ख) इसका प्रसंग बतलाइए।
(ग) पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंति सआदत हसन मेटो रचित ‘टोबा टेक सिंह’ पाठ से उद्धृत है।
(ख) निर्णय के अनुसार पागलों का तबादला होने लगा। टोबाटेक सिंह को सिपाहियों ने पकड़ लिया और उसे दूसरी तरफ ले जाने लगे। पर टस से मस न हुआ। वह एक जगह खड़ा हो गया, उसे कोई हालत न हिला सकी। इसी प्रसंग में यह उक्ति उद्धृत है।
(ग) टोबाटेक सिंह (बिशन सिंह) एक जगह अपनी सूजी टाँगों पर दृढ़ता पूर्वक खड़ा हो गया, जिससे उसे कोई हिला न सके। वह बिल्कुल निडर व्यक्ति था। इसलिए उसके साथ जबर्दस्ती न की गई। उसे बल पूर्वक उसके स्थान से हटाने का इरादा छोड़ दिया गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

भाषा बोध :

1. इस पाठ में आए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूप –

कान्फेंन्स – सम्मेलन
इंजीनियर – यंत्रकार
प्रैक्टिस – अभ्यास
ब्रेकफास्ट – नाश्ता
गवर्नमेंट – सरकार
एनेक्स – पूरक अंश
सुपरिंटेंडेंट – अधीक्षक

2. नीचे दिए गए वाक्यों में से पहचान कर बताइए कि इनमें साधारण, संयुक्त, मिश्र वाक्यों कौन है।

(क) एक सिक्ख था जिसे पागलखाने में दाखिल हुए पंद्रह वर्ष हो चुके थे- मिश्र वाक्य।
(ख) महीने में एक बार मुलाकात के लिए यह लोग आते थे और उसकी खैर – खैरियत दरयाफ्त करके चले जाते थेसंयुक्त वाक्य।
(ग) यूरोपियन वार्ड में दो एंग्लो इंडियन पागल थे – साधरण वाक्य।
(घ) पागलों की लारियों में निकलना और उनको दूसरे अफसरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था – संयुक्त वाक्य।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

3. निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय पृथक् कीजिए।

हुकूमतों – हुकुमत + ओं।
गिरफ्तारी – गिरफ्तार + ई।
तब्दीली – तब्दील + ई।
जमीनें – जमीन + एँ।
मिठाइयाँ – मिठाई + इयाँ।
हमदर्दों – हमदर्द + ई।
मुसलमानों – मुसलमान + ओं

WBBSE Class 8 Hindi टोबा टेक सिंह Summary

लेखक-परिचय :

सआदत हसन मंटो का जन्म सन् 1912 ई० में पंजाब प्रांत के लुधियाना जनपद के सम्बराला नामक गाँव में हुआ था। ये उर्दू कहानीकार के रूप में प्रसिद्ध रहे। सन् 1955 में लाहौर में इनका देहावसान हो गया। इन्होंने अपनी कहानियों में देश-विभाजन की त्रासदी, संकीर्ण साप्रदायिकता के भयावह परिणाम, समाज की विकृत स्थितियों का कच्चा चिंट्ठा उजागर किया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

सारांश :

प्रस्तुत्त कहानी में हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के विभाजन की त्रासदी को दिखाया गया है। विभाजन के दो-तीन साल बाद दोनों देशों की सरकारों के ध्यान में आया कि दोनों देशों के पागलों का भी तबदला होना चाहिए। दोनों तरफ के अधिकारियों ने परामर्श कर तबादले का दिन निश्चित कर दिया। छानबीन कर हिन्दू तथा मुसलमान पागलों को बार्डर पर पहुँचा दिया गया। लाहौर के पागलखाने में इस खबर पर शोर-शराबे होने लगे। मुसलमान पागल तथा हिन्-सिख पागल सभी अपने पागलपन में अनाप शनाप प्रश्नोत्तर करने लगे।

एक मुसलमान पागल जोर से पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगाकर फिसल गया और बेहोश हो गया। कुछ पागल ऐसे थे जो पागल नहीं थे, पर उनके संबंधियों ने उनके अपराध से उन्हें फाँसी से बचाने के लिए अधिकारियों से मिलकर उन्हें पागलखाने में भेज दिया था। उन्हें भी हिन्दुस्तान पाकिस्तान के विषय में कोई जानकारी नहीं थी। उन्हें इतना मालूम था कि मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान नामक एक अलग देश बनाया है। पर वे किस देश में हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

एक पागल एक दिन वृक्ष की टहनी पर दो घंटे बैठकर पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के नाजुक मसले पर तकरार करता रहा। सिपाहियों के कहने पर भी न उतरा और कहा कि वह इस वृक्ष पर ही रहेगा। जब दौरा ठंडा पड़ा तो उतर कर हिन्दू-सिख मित्रों को गले लगाकर रोने लगा। उसने सोचा कि ये दोस्त उसे छोड़कर हिन्दुस्तान चले जाएँगे। एक इंजोनियर मुसलमान पागल नंग धडंग होकर बाग में घूमता रहा। दो पागल अपने को मोहम्मद अली जिन्ना तथा मास्टर तारा सिंह कहने लगे। अमृतसर की एक लड़की से प्यार करने वाला हिन्दू वकील प्यार में असफल हो जाने से पागल हो गया था। इस विभाजन को जानकर वह नेताओं को गाली देने लगा। एंग्लो इंडियन पागल आजाद करके अंग्रेजों के चले जाने की खबर सुनकर दु:खी हो गए।

एक सिख पागल पंद्रह वर्षों में कभी भी सोया नहीं। कभी-कभी किसी दीवार के साथ टेंक लगा लेता था। शरीरिक तकलीफ के बावजूद भी वह आराम नहीं करता था। पागलों के तबादले की बातों को वह गौर से सुनता था। वह इसे जानने के लिए उत्सुक रहता था कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। वह बहुर्त कम नहाता था। किसी से झगड़ा नहीं करता था। पाकिस्तान में जमींदार था। दिमाग उलट जाने से उसके रिश्तेदार पागलखाने में दाखिल कर गए। उसका नाम विशन सिंह था, मगर सब उसे टोबा टेक सिंह कहते थे। हर महीने उसके रिश्तेदार उससे मिलने आते थे।

विभाजन के बाद यह क्रम समाप्त हो गया। उसकी एक लड़की भी थी। पागल खाने में एक पागल अपने को खुदा कहता था। उससे भी उसने पूछा कि वह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में, पर उससे भी उत्तर न मिला। एक दिन उसका दोस्त फजलदीन मिलने आया। उसने बतलाया कि तुम्हारे सब आदमी सकुशल हिन्दुस्तान चले गए। यथा संभव उनकी मदद मैंने की। उसने बतलाया कि तुम अभी पाकिस्तान में ही हो।

तबादले की तैयारियाँ निश्चित हो गई थी। बड़ी कठिनाई से पागलों को दूसरे अफसरों के हवाले किए जाने लगा। कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। पागलों में कोई गालियाँ बकने लगा। कोई गाना गाने लगा। जो नंगे हो जाते उन्हें कपड़े पहनाए जाते। कुछ रोते तथा झगड़ रहे थे। अधिकतर पागल तवादले के पक्ष में नहीं थे। वे नारे लगा रहे थे। बिशन सिंह को अफसर ने बतलाया कि वह पाकिस्तान में है। यह सुनकर वह बचे हुए साथियों के पास पहुँच गया।

पाकिस्तानी सिपाही उसे पकड़ कर दूसरी तरफ ले जाने लगे, मगर वह हिलने से इन्कार कर दिया। उसे समझाया गया कि अब टोबा टेक सिंह हिन्दुस्तान में चला गया है। उसे जबर्दस्ती दूसरी तरफ से ले जाने की कोशिश की गई। किन्तु वह अपनी सूजी हुई टाँगों पर खड़ा हो गया। इसलिए उसे वहीं खड़ा रहने दिया गया। सूर्य निकलने से पहले शान्त एवं खामोश विशन सिंह के मुँह से एक चीख निकली। अफसरों ने देखा कि जो आदमी पंद्रह वर्ष तक दिन-रात अपनी टाँगों पर खड़ा रहा, आज वह समाप्त हो गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

शब्दार्थ :

  • बँटवारा – विभाजन
  • हुकूमत – शासन
  • तबादला – स्थानांतरण
  • अख्लाकी – सामाजिक
  • माकूल – उचित, ठीक
  • दानिशमंद – विद्वान, बुद्धिमान
  • मुकर्रर – निश्चित, निर्धारित
  • हिफाजत – सुरक्षा
  • लवाहकीब – संबंधी, रिश्तेदार
  • चेमेगोइयाँ – शोरगुल, बातचीत
  • मुतमाइन – संतुष्ट
  • बाज – कुछ
  • अक्सरीयत – अधिकार
  • तक्सीम – हिस्से में आना
  • अलहदा – अलग
  • महले वकू – भौगोलिक स्थिति
  • माऊफ – खराब, बिगड़ा
  • दरब-वृक्ष, दरख
  • मुसलसल – निरंतर लगातार
  • बाकीमांदा – बचे हुए शेष
  • मजीद – ज्यादा
  • शकित व शामित – शांति एवं खामोश
  • रविश – सड़क, मार्ग
  • नमूदार – प्रकट
  • दफेदार – प्रहरी, रक्षक
  • कारकुन – कार्यकर्ता
  • यकलख्त – एकदम
  • गुफ्तुगु – गुप्त बातचीत
  • जहर-माहर – जबर्दस्ती खाना
  • मुताल्लिक – बारे में, विषय में
  • बे-जरर – निर्भय, निडर
  • दरयाफ्त – जानकारी लेना
  • कत्अन – कतई
  • अजीबो-अकारिब – निकट संबंधी
  • इत्मीनान बखश – संतोषजनक
  • मसरुफ – व्यस्त
  • फेहरिस्त – सूची, तालिका
  • मुहाफिज – रक्षक
  • तरफैन – दोनों तरफ के
  • इब्तिदाई – आरंभिक, शुरू का
  • शोरो-गोगा – शोरगुल
  • शिगाफ – गगन भेदी
  • खिदमत – सेवा
  • दरमियान – मध्य, बीच

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 4 भिखारिन to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 Question Answer – भिखारिन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
रोजाना अंधी कहाँ जाकर खड़ी रहती है?
(क) झोपड़ी के दरवाजे पर
(ख) महल के दरवाजे पर
(ग) मस्जिद के दरवाजे पर
(घ) मन्दिर के दरवाजे पर
उत्तर :
(घ) मन्दिर के दरवाजे पर

प्रश्न 2.
झोपड़ी में उसके साथ कितने वर्ष का लड़का रहता था?
(क) पाँच
(ख) आठ
(ग) दस
(घ) बारह
उत्तर :
(ग) दस

प्रश्न 3.
उस लड़के का क्या नाम था ?
(क) सोहन
(ख) रोहन
(ग) मोहन
(घ) भुवन
उत्तर :
(ग) मोहन

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

प्रश्न 4.
सेठ के पास जमा नकदी को कितने वर्ष बाद वह माँगने गई?
(क) दो वर्ष
(ख) तीन वर्ष
(ग) चार वर्ष
(घ) पाँच वर्ष
उत्तर :
(क) दो वर्ष

प्रश्न 5.
‘नहीं तो, इस नाम पर एक पाई भी जमा नहीं है।’ कौन कहता है?
(क) सेठ
(ख) सेठानी
(ग) मुनीम
(घ) नौकर
उत्तर :
(ग) मुनीम

प्रश्न 6.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कब हुआ था ?
(क) 7 मई 1861 ई० में
(ख) 7 मई 1862 ई० में
(ग) 8 मई 1863 ई० में
(घ) 9 मई 1864 ई० में
उत्तर :
(क) 7 मई 1861 ई० में

प्रश्न 7.
‘नोबेल पुरस्कार’ पाने वाले पहले भारतीय कौन हैं ?
(क) सत्येन्द्र सत्यार्थी
(ख) अमर्त्य सेन
(ग) डॉ॰ हरगोविंद खुराना
(घ) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
उत्तर :
(घ) रवीन्द्रनाथ ठाकुर।

प्रश्न 8.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) महिषादल
(ख) जोड़ासाँकू
(ग) रवीन्द्र सदन
(घ) रवीन्द्र सारणी
उत्तर :
(ख) जोड़ासाँकू।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

प्रश्न 9.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने किस संस्था की स्थापना की ?
(क) शांतिनिकेतन
(ख) संगीत निकेतन
(ग) नृत्य निकेतन
(घ) बाऊल निकेतन
उत्तर :
(क) शांतिनिकेतन।

प्रश्न 10.
रवीन्द्रनाथ टैगोर की पत्नी का नाम था –
(क) शिवानी देवी
(ख) मृणालिनी देवी
(ग) साविश्री देवी
(घ) इसमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मृणालिनी देवी

प्रश्न 11.
सेठजी का पूरा नाम क्या था ?
(क) सेठ कन्हैयालाल
(क) सेठ बनवारी दास
(ग) सेठ बनारसी दास
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सेठ बनारसी दास

प्रश्न 12.
मोहन के शरीर के किस अंग पर लाल निशान था ?
(क) हाथ
(ख) पीठ
(ग) पेट
(घ) जाँघ
उत्तर :
(घ) जाँघ

प्रश्न 13.
बुखार उतरने पर मोहन के मुँह से सबसे पहला शब्द क्या निकला ?
(क) माँ
(ख) अम्मा
(ग) मम्मी
(घ) उपरोक्त कोई नहीं
उत्तर :
(क) माँ

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प्रश्न 14.
“इसमें तुम्हारी धरोहर है”‘ – यहाँ धरोहर का संबंध किससे है ?
(क) जमीन
(ख) रुपयाापैसा
(ग) संतान
(घ) सोना-चाँदी
उत्तर :
(ख) रुपया-पैसा

प्रश्न 15.
औरत क्या दे देती थी ?
(क) प्रसाद
(ख) पैसे
(ग) अनाज
(घ) पीने का पानी
उत्तर :
(ग) अनाज

प्रश्न 16.
बूढ़िया किसे आशिर्वाद देते हुए चली गयी ?
(क) बच्चे को
(ख) सेठजी को
(ग) मुनीमजी को
(घ) लेखक को
उत्तर :
(ख) सेठजी को

प्रश्न 17.
कितने वर्ष बाद लड़के को ज्वर हो गया ?
(क) दो वर्ष
(ख) तीन वर्ष
(ग) चार वर्ष
(घ) पाँच वर्ष
उत्तर :
(क) दो वर्ष

प्रश्न 18.
किसने कहा “भगवान तुम्हें बहुत्त दे”‘ –
(क) भिखारिन
(ख) सेठजी
(ग) भक्त
(घ) मुनीमजी
उत्तर :
(क) भिखारिन

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

प्रश्न 19.
अंधी को किससे नफरत हो गई ?
(क) सेठजी से
(ख) मन्दिर से
(ग) भक्त से
(घ) मुनीमजी से

प्रश्न 20.
मोहन के जाँघ पर किस रंग का चिन्ह था ?
(क) काले रंग का
(ख) नीले रंग का
(ग) लाल रंग का
(घ) हरे रंग का
उत्तर :
(ग) लाल रंग का

प्रश्न 21.
अंधी निराश होकर कहाँ चल दी ?
(क) झोपड़ी में
(ख) घर में
(ग) मन्दिर में
(घ) मस्जिद में
उत्तर :
(क) झोपड़ी में

प्रश्न 22.
मोहन कितने दिनों में स्वस्थ हो गया ?
(क) आठ-दस
(ख) दस-पन्द्रह
(ग) दस-बारह
(घ) सात से पन्द्रह
उत्तर :
(ख) दस-पन्द्रह

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
मन्दिर में कैसे लोग आते हैं?
उत्तर :
मंदिर में सहृदय और श्रद्धालु लोग आते हैं।

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प्रश्न 2.
अंधी को बच्चा कितने वर्ष पहले कहाँ मिला?
उत्तर :
अंधी को बच्चा पाँच वर्ष पहले किसी मेले में मिला था।

प्रश्न 3.
पैसा माँगने पर सेठ ने अंधी को गुस्से में क्या कहा?
उत्तर :
पैसा माँगने पर सेठ ने अंधी को गुस्से में कहा- जाती हो या फिर नौकर को बुलाऊँ।

प्रश्न 4.
अंधी को किस शब्द ने बेचैन कर दिया?
उत्तर :
सेठजी नेकहा कि बच्चा मेरा है, अब मिला है, इसलिए इसे कहीं जाने न दूँगा। सेठजी के ये शब्द सुनकर अंधी बेचैन हो गई।

प्रश्न 5.
अंधी माँ से मिलने पर वह कितने दिन में ठीक हुआ?
उत्तर :
अंधी माँ से मिलने पर वह दस-पन्द्रह दिन में ठीक हो गया।

प्रश्न 6.
निम्न पंक्तियाँ कौन किससे कह रहा है?
(क) ‘कैसी जमा-पूँजी? कैसे रुपये?’
उत्तर :
सेठजी अंधी भिखारिन से कह रहे हैं।
(ख) ‘अच्छा’ भगवान तुम्हें बहुत दे।’
उत्तर :
अंधी भिखारिन सेठजी से कह रही है।
(ग) ‘इसमें तुम्हारी धरोहर है, तुम्हारे रुपये। मेरा वह अपराध. . ।’
उत्तर :
सेठजी ने अंधी भिखारिन से कहा।

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प्रश्न 7.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर के माता-पिता का नाम लिखें।
उत्तर :
र्वीन्द्रनाथ ठाकुर के पिता का नाम श्री देवेन्द्रनाथ ठाकुर तथा माता का नाम शारदा देवी था।

प्रश्न 8.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर :
कलकत्ता (कोलकाता) के जोड़ासाँकू स्थित ‘प्रासादोपम भवन’ में हुआ था।

प्रश्न 9.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कब हुआ था?
उत्तर :
7 मई, सन् 1861 को।

प्रश्न 10.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्राथमिक शिक्षा कहाँ हुई थी?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्राथमिक शिक्षा घर पर ही हुई थी।

प्रश्न 11.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर बैरिस्ट्री पढ़ने के लिए कहाँ गए थे?
उत्तर :
लंदन।

प्रश्न 12.
रवीन्द्रनाथ ने नाईटहुड की उपाधि क्यों लौटा दी ?
उत्तर :
जालियाँवाला बाग हत्याकाण्ड से आहत होकर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाईटहुड की उपाधि लौटा दी।

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प्रश्न 13.
कौन लोग धन्नासेठों से महान तथा उदार होते हैं ?
उत्तर :
अभावग्रस्त लाचार लोग अपने विचारों तथा कर्मों से धन्नासेठों से महान तथा उदार होते हैं।

प्रश्न 14.
काशी के सेठ कैसे व्यक्ति थे ?
उत्तर :
काशी के सेठ बनारसी दास बहुत प्रसिद्ध देशभक्ल, धर्मात्मा व्यक्ति थे।

प्रश्न 15.
भिखारिन किसके लिये पैसे इकट्टे किये हैं ?
उत्तर :
भीख माँग कर बच्चे के लिए पैसे इकट्टे किए हैं।

प्रश्न 15.
भिखारिन किसलिए सेठजी को जमा पूँजी देने के लिये कहा ?
उत्तर :
अंधी ने किसी डॉक्टर से इलाज कराने का निश्चय किया। इसलिए वह सेठ जी के पास जाकर अपनी जमा पूँजी में से कुछ रुपये देने के लिए कहने लगी।

प्रश्न 16.
अंधी ने ठहाका लगाकर क्या कही ?
उत्तर :
अंधी ने ठहाका लगाकर कहीं कि तुम्हारा बच्चा है इसलिए लाख प्ययल् करके तुम बचाओगे, पर मेरा बच्चा होता तो उसे मर जाने देती।

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प्रश्न 17.
सेठजी निश्चय कर कहाँ पहुँचे ?
उत्तर :
सेठजी निश्चय कर अंधी की झोपड़ी में पहुँचे।

प्रश्न 18.
अंधी ने सेठ को क्या जवाब दिया ?
उत्तर :
अंधी ने जवाब दिया कि अब हम माँ-बेटे दोनों एक साथ स्वर्वलोक जाएँगे, वहाँ बच्चा सुख में रहेगा।

प्रश्न 19.
रवीन्द्रनाथ को नोबेल पुरस्कार कब और क्यों दिया गया ?
उत्तर :
सन् 1913 में रवीन्द्रनाथं को उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना ‘गीतांजलि’ के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया।

प्रश्न 20.
सफेद वस्त्र वाले राहगीरों का बूढ़िया के प्रति कैसा व्यवहार होता था ?
उत्तर :
सफेद वस्त्र वाले अधिकार राहगीर बूढ़िया को भिक्षा देने के बजाय झिड़कियाँ दिया करते थे।

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प्रश्न 21.
मोहन सेठ कौन था ?
उत्तर :
मोहन सेठ बनारसीदास का खोया हुआ बेटा था, जिसका पालन-पोषण अंधी भिखारिन ने किया।

प्रश्न 22.
अंधी भिखारिन ने सेठजी से कब विदाई माँगी ?
उत्तर :
मोहन के पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद अंधी भिखारिन ने सेठजी से विदाई माँगी।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
काशी के सेठ के बारे में लोग क्या जानते थे?
उत्तर :
काशी के सेठ के बारे में लोग जानते थे कि वे बहुत बड़े भक्त और धर्मात्मा है। धर्म में उनकी बड़ी रुचि है। स्नान-ध्यान में संलग्न रहते हैं।

प्रश्न 2.
अंधी भिखारिन से पैसे ले उसके साथ क्या व्यवहार किया गया?
उत्तर :
अंधी भिखारिन से पैसे लेकर उसके साथ बिल्कुल अन्याय किया। सेठजी बिल्कुल नकार गए कि उसकी पूँजी उनके पास जमा है। उसे धमकी मिली की कि वह तुरंत वहाँ से चली जाए। उसे मारने का डर दिखाया गया। उसके रोने गिड़गिड़ाने पर भी उसके पैसे उसे न मिले।

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प्रश्न 3.
अंधी ने ठहाका क्यों लगायी?
उत्तर :
सेठजी ने अंधी से कहा कि यह बच्चा उनका है, इसलिए वे इसे कहीं जाने नहीं देंगे और लाख कोशिशें करके भी इसके प्राण बचाएंगे। सेठजी के इसी वचन पर अंधी ने ठहका लगायी और कहा कि बच्चा तुम्हारा है, इसलिए लाख प्रयल करके उसे बचाएँगे। यदि मेरा बच्चाहोता तो उसे मर जाने देते क्यों? यह भी कोई न्याय है।

प्रश्न 4.
सेठ और भिखारिन में किसे महान कहा जा सकता है? और क्यों?
उत्तर :
सेठ और भिखारिन में भिखारिन को महान कहा जा सकता है। भिखारिन ने अपनी धरोहर के रुपये भी सेठजी को ही लौटा दिया। सेठजी को भिखारी बना दिया ओर स्वयं को देने वाली। सेठजी ने उससे बेईमानी की, बच्चे को भी छीन लिए, पर वह ममता के कारण बच्चे की सेवा की। स्वस्थ्य हो जाने पर सेठजी के यहाँ रहने को राजी न हुई। सेठ उसके सामने नतमस्तक हो गए।

प्रश्न 5.
इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी भी अपना धर्म-कर्त्तव्य, ईमानदारी को नहीं भूलना चाहिए। तुच्छ धन के लिए बेईमान बनना मानवता के खिलाफ है। सहुदयता, दया, प्रेम, दीनों, अपाहिजों, भिखारियों के प्रति सहद्य होना चाहिए। व्यक्ति को अपने विचारों तथा कर्मों से महान बनना चाहिए। महानता धन में नहीं ममता में मानवता में सहृदयता में होती है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
प्रस्तुत कहानी में मानवीय मूल्य बोध को मार्मिक ढंग से उजागर किया गया है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने एक अंधी भिखारिन के चरित्र से मानवीय मूल्य बोध को स्पष्ट किया है, तथा इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि अंधी भिखारिन अभावग्रस्त, अंधी थी, पर विचारों और कर्मों से वह अतिशय महान थी। प्रतिदिन वह मंदिर के दरवाजे पर खड़ी रहकरे भिक्षा माँगती थी। शाम के समय अपनी झोपड़ी में पहुँच कर दस साल के एक लड़के से स्नेह दिखाती, उसका माथा चूमती। वह लड़का काशी के बड़े सेठ का लड़का था, जो सात साल पूर्व एक मेले में खो गया था। न जाने कैसे वह भिखारिन के पास पहुँचा। वह भिखारिन को ही माँ समझने लगा। अंधी झोपड़ी में एक हंडिया गाड़ रखी थी। जो कुछ माँग कर लाती उसे सुरक्षा के लिए उसमें डाल देती थी।

काशी के सेठ बनारसी दास बहुत बड़े धर्मात्मा, देशभक्त तथा प्रसिद्ध व्यक्ति थे। अंधी अपनी पूँजी सेठ जी के पास धरोहर रूप में रखने के लिए आई। उसने सेठजी को अपनी हंडिया की पूँजी जमा कर लेने के लिए कहा। सेठजी के संकेत पर मुनीम ने बुढ़िया से उसका नाम पूछा और नकदी गिनकर जमा कर दिया। बुढ़िया सेठजी को आशीर्वाद देती हुई अपनी झोपड़ी में चली गई। दो वर्ष बाद एक दिन लड़के को तेज ज्वर हो गया। झाड़-फूँक टोने-टोटके के प्रयोग से लड़के का ज्वरन उतरा। उसने किसी डॉक्टर से इलाज कराने का निश्चय किया। अंधी सेठ जी के पास जाकर अपनी जमा पूँजी में से दस-पाँच रुपये इलाज के लिए माँगने लगी।

पर सेठजी अंधी की जमा-पूँजी को बिल्कुल नकार गए। सेठ जी के इशारे पर मुनीम ने भी कहा कि इस नाम पर एक पाई भी जमा नहीं है। रोती हुई बुढ़िया धर्म के नाम पर कुछ माँगने लगी जिससे उसका बच्चा जी जाए। पर पत्थर में कोमलता न आई। फिर वह सेठजी को आशीर्वाद देकर बुझे दिल से चली गई। इतना धनी आदमी उस अंधी का रुपये नकार गए इससे अधिक मानवीयता का लोप और क्या हो सकता है।

एक दिन अंधी तेज ज्वर से जलते शरीर वाले बच्चे को गोद में उठाकर ठोकरे खाती सेठजी के पास पहुँची। सेठजी ने नौकरों को उसे भगा देने के लिए कहा। पर वह अपने स्थान से न हिली। सेठजी बाहर आए और उस बच्चे को पहचान गए। सात वर्ष पहले मेले में उनका बेटा खो गया था। मोहन की जाँघ पर लाल चिह्न को देखकर निश्चय कर लिया कि अपना बच्चा है और उसे अपनी गोद में ले लिए। बुढ़िया अपने बच्चे के लिए चिल्लाने लगी। निराश वह चली गई। दूसरे दिन मोहन का बुखार उतर गया। वह माँ के लिए बेचैन हो उठा। फिर ज्वर से पीड़ित हो गया। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया।

फिर सेठजी ने विवश होकर बुढ़िया के सामने रोकर गिड़गिड़ाकरले आए बुढ़िया के हाथ के स्पर्श से मोहन स्वस्थ होकर माँ तुम आ गई कहने लगा। मोहन के पूरी तरह ठीक हो जाने पर बुढ़िया जाने के लिए तैयार हो गई सेठजी के मिन्नत करने पर भी वह न रुक सकी। सेठजी ने बुढ़िया की रुपयो की थैली देते हुए कहा कि यह तुम्हारी धरोहर है। मेरे अपराध को क्षमा कर दो। बुढ़िया ने कहा कि यह रुपये तो मैने तुम्हारे मोहन के लिए इकट्ठे किए थे, उसी को दे देना। एक भिखारिन होते हुए भी वह उस प्रसिद्ध सेठ से महान थी। इस समय सेठ भिखारी का और वह देने वाली थी। इस प्रकार लेखक ने मानवीय गुणों को स्पष्ट किया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

भाषा बोध :

1. निम्न शब्दों में तत्सम् और तद्भव शब्दों को अलग करें –

तत्सम् – तद्भव
सहृदय – हाथ
मिथ्या – आँसू
नेत्र – बुढ़िया
शाप – बच्चा
वस्तु – कोशिश
वस्त्र
याचना
दृष्टि

2. जिन शब्दों का प्रयोग किसी संज्ञा के स्थान पर किया जाता है, उसे सर्वनाम कहते हैं। नीचे दिए वाक्यों में सर्वनाम शब्द रेखांकित कीजिए।

(क) उसकी गोद में एक बच्चा देखा, वह रो रहा था।
(ख) मेरें रुपये तो हजम कर गए, अब क्या मेरा बच्चा भी मुझसे छीन लोगे।
(ग) मैं उसको अपने हृदय से नहीं जाने दूँगा।
(घ) तुम्हारे जाने से वह बच जाएगा।

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3. निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

मन-ही-मन – मन में ही – अव्ययी भाव समास
थोड़ा बहुत – थोड़ा या बहुत – द्वून्द्व समास
देश भक्त – देश का भक्त – तत्पुरुष समास
धर्मात्मा – धार्मिक है आत्मा जिसकी वह – बहुव्रीहि समास
खून पसीना – खून और पसीना – द्वन्द्ध समास

4. जो अक्षर या अक्षर समूह शब्दों के अन्त में लगाए जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं (क) कृत (ख) तद्धित।
निम्नलिखित शब्दों से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए-

नम्रता – नम्र + अता
बुढ़िया – बूढ़ा + इया
नकदी – नकद + ई
भिखारिन – भिखारी + इन
श्रद्धालु – श्रद्धा + आलु
चिन्तित – चिन्ता + इत
धनी – धन + ई
भिखारी – भिखार + ई

WBBSE Class 8 Hindi भिखारिन Summary

लेखक-परिचय :

रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता के जोड़ासाँकू में ठाकुर परिवार में 1861 ई. में हुआ। बचपन में रवीन्द्रनाथ ने अपने पिता से ध्यान, प्रार्थना, एकान्त्रेम, शांति आदि बाते सीखीं। साहित्य सृजन में इनकी रुचि बचपन से ही थी। रवीन्द्रनाथ ने लगभग एक हजार से अधिक कविताएँ दो हजार से अधिक गीत तथा उपन्यास, कहानी नाटक आदि लिखे।

उन्हें गीतांजलि रचना पर नोबेल पुरस्कार मिला। 1940 ई० में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्षिटी ने इन्हें डी० लिद् की उपाधि दी। वे एक सच्चे देश भक्त, समाज सेवी तथा शिक्षाविद् थे। साहित्यकार के साथ-साथ वे संगीतकार और कलाकार थे। स्मरण, खेवैया, नौका डूबी इनकी मार्मिक कृतियाँ है। विश्व साहित्य में सौन्दर्य पूजा की दृष्टि से चित्रा और उर्वशी उनकी बेजोड़ रचनाएँ हैं। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की साहित्यिक उपलब्धियाँ विशिष्ट हैं। इनका सन् 1941 अगस्त महीना मे देहावसान हो गया।

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सारांश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने एक अंधी भिखारिन की कथा के माध्यम से स्सष्ट किया है कि अभावग्रस्त लाचार लोग अपने विचारों तथा कर्मों से धन्नासेठों से महान तथा उदार होते हैं। एक अन्धी भिखारिन प्रतिदिन एक मंदिर के दरवाजे पर खड़ी रहकर दर्शन कर लौटने वालों से अपना हाथ फैलाकर नम्रता पूर्वक दया की याचना करती थीं। मन्दिर में आनेवाले सह्दय श्रद्धालु उसमे हाथ पर कुछ पैसे रख देते। औरतें कुछ अनाज दे देती थीं।

शाम को वह नगर से बाहर अपनी झोपड़ी में पहुँच जाती। एक दिन पड़ोस के लोगों ने उसकी गोद में एक बच्चा देखा। बच्चा अन्धी के पास था और प्रसन्न था। बच्चा दस साल का हो गया। अंधी के आते ही बच्चा उससे चिपट जाता। अंधी टटोल कर उसके माथे को चूमती.। अंधी अपने से अच्छा उसे खिलाती-पिलाती। अंधी अपनी झोपड़ी में एक हंडिया गाड़ रखी थी। शाम को जो कुछ माँग कर लाती उसमें डाल देती। सुबह वह बच्चे को खिलाकर फिर मंदिर के दर वाजे पर खड़ी हो जाती।

काशी के सेठ बनारसी दास बहुत प्रसिद्ध देशभक्त, धर्मात्मा व्यक्ति थे। सैकड़ों भिखारी अपनी जमा पूँजी उनके पास धरोहर के रूप में रखते थे। हॉडी के भर जाने पर अंधी भी उसे उखाड़ कर सेठ के पास जमा करने पहुँची। उसने बतलाया कि भीख माँग कर बच्चे के लिए पैसे इकट्ठे किए हैं। इन्हें जमा कर लीजिए। सेठ का इशारा पाकर मुनीमजी ने नकदी गिनकर उसके नाम पर जमा कर लिया। बुढ़िया सेठ जी को आशीर्वाद देते हुई चली गई। दो वर्ष बाद लड़के को ज्वर हो गया। झाड़-फूंक, टोटके से ठीक न हुआ। अंधी ने किसी डॉक्टर का इलाज कराने का निश्चय किया।

इसलिए वह सेठ जी के पास जाकर अपनी जमा पूँजी में से कुछ रुपये देने के लिए कहने लगी। सेठ बिल्कुल नकार गए। फिर सेठ जी के इशारे पर मुनीमजी से बही में नाम देखने को कहा कि इसके नाम पर कुछ जमा है, मुनीमजी बोले नहीं है। अंधी रो-रोकर प्रार्थना करने लगी कि परमात्मा के नाम पर धर्म के नाम पर कुछ दे दीजिए, जिससे मेरा बच्चा जी जाए। पर सेठजी क्रुद्ध हो कर उसे तुरंत हट जाने को कहा। अंधी उन्हें ‘भगवान तुम्हें बहुत दें’ कहकर चली गई।

अंधी को सेठ से नफरत हो गई। एक दिन वह बच्चे को अपनी गोद में उठाकर सेठजी के पास पहुँची और दरवाजे पर धरना देकर बैठ गई। नौकर के डराने धमकाने पर भी वह नहीं टली। सेठ जी स्वयं बाहर आए। बच्चे को देखकर उन्हें अचम्भा हुआ कि उसकी रूपाकृति उनके सात वर्ष पूर्व मेले में खोए बच्चे मोहन से मिलती-जुलती थी। मोहन की जाँघ पर एक लाल रंग का चिह्न था। उन्होंने बच्चे की जाँध पर चिह्न देखकर यकीन कर लिया कि यह उन्हीं का बच्चा है।

उन्होंने बच्चे को लेकर अपने कलेजे से चिपका लिया। बच्चे का शरीर बुखार से तप रहा था। नौकर को डॉक्टर लाने के लिए भेजा और स्वयं मकान के अंदर चले गए। अंधी बच्चे के लिए चिल्लाने लगी। सेठजी ने कहा कि बच्चा मेरा है, लाख प्रयत्न करके इसे बचाऊँगा। अंधी ने ठहाका लगाकर कहा कि तुम्हारा बच्चा है इसलिए लाख प्रयत्न करके तुम बचाओगे, पर मेरा बच्चा होता तो उसे मर जाने देते। अंधी निराश होकर अपनी झोपड़ी की ओर चल दी।

ईश्वर की कृपा से दवा ने प्रभाव डाला या टोटका ने। मोहन का बुखर उतर गया। होश में आने पर वह माँ कहकर अंधी को खोजने लगा। फिर उसका ज्वर तेज हो गया। डॉक्टरों ने जबाब दे दिया। सेठजी निश्चय कर अंधी की झोपड़ी में पहुँचे। अंधी का शरीर भी अग्नि की तरह तप रहा था। सेठजी ने कहा कि बच्चा तुम्हें पुकार रहा है। डॉक्टर निराश हो गए हैं। अब चलकर तुम्हीं उसके प्राण बचा सकती हो। अंधी ने जवाब दिया कि अब हम माँ-बेटे दोनों एक साथ स्वर्ग लोक जाएँगे, वहाँ बच्चा सुख में रहेगा। सेठजी रोने लगे। बोले कि ममता की लाज रख लो। तुम उसकी माँ हो- तुम्हारे जाने से बच जाएगा।

अंधी चलने को प्रस्तुत हो गई। फिटन पर बैठकर दोनों कोठी पर पहुँचे। सेठजी सहारा देकर अंधी को उतारकर अन्दर ले गए। अंधी मोहन के माथे पर हाथ फेरने लगी। बच्चे ने आँखें खोल दी। कहा कि माँ तुम आ गई। दस-पन्द्रह दिन में मोहन बिल्कुल स्वस्थ हो गया। मोहन के ठीक हो जाने पर अंधी वहाँ रहने के लिए राजी न हुई। वह चलने लगी तो सेठजी ने रुपयों की थैली उसके हाथ में देकर कहा कि यह तुम्हारी धरोहर है, तुम्हारे ही रुपये हैं। अंधी ने कहा कि यह रुपये तो मैने मोहन के लिए इकट्ठे किये थे, उसी को दे देना। अंधी थैली वहीं छोड़कर चल दी। बाहर घर की ओर नेत्र उठाए। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। एक भिखारिन होते हुए भी वह सेठजी से महान थी। इस समय सेठ भिखारी था, वह देनेवाली थी।

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शब्दार्थ :

  • सहृदय – दयालु, दूसरों के दुःख को समझनेवाला ।
  • पूँजी – धन, संपत्ति ।
  • श्रद्धालु – जिसके मन में श्रद्धा हो, श्रद्धावान् ।
  • ज्वर – बुखार ।
  • मिथ्या – गलत, असत्य ।
  • धरोहर – थाती ।
  • दुआएँ – आशीर्वाद ।
  • नफरत – घृणा ।
  • सराहती – प्रशंसा करती ।
  • राजी – तैयार हो जाना ।
  • बनिस्बत – मुकाबले में की अपेक्षा ।
  • जान में जान आना – संतोष मिलना ।
  • राहगीरो यात्रियों ।
  • टस से मस न होना – अपने स्थान से न डिगना ।
  • हंडिया – मिट्टी का बर्तन ।
  • खून पसीना एक करना – बहुत मेहनत करना ।
  • संलग्न – लीन, लगा हुआ।
  • सिरहाने – सिर के पास ।
  • चिपट – चिपकाना।
  • ममता – माता का पुत्र पर स्नेह, मोह।