WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 Question Answer – नीलू

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
नीलू पाठ हिन्दी साहित्य की कौन-सी गद्य विधा है?
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) रेखाचित्र
(घ) प्रहसन
उत्तर :
(ख) संस्मरण

प्रश्न 2.
नीलू किस प्रजाति का कुत्ता था?
(क) अल्सेशियन
(ख) भूटिया
(ग) अल्लेशियन-भूटिया वर्ण संकर
(घ) देशी
उत्तर :
(ग) अल्सेशियन-भूटिया वर्ण संकर

प्रश्न 3.
महादेवी वर्मा की जन्म-मृत्यु की कौन-सी तिथि सही है?
(क) सन् 1907-1980
(ख) सन् 1980-2014
(ग) सन् 1807-1887
(घ) सन् 1907-1987
उत्तर :
(ग) सन् 1907,1987

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 4.
लूसी की मृत्यु कैसे हुई?
(क) ठंड लगने से
(ख) भूटिया कुत्ते द्वारा मारने
(ग) लकड़बग्घे द्वारा
(घ) कजली और बादल के द्वारा
उत्तर :
(ग) लकड़बघ्घे द्वारा

प्रश्न 5.
‘नीलू’ किस गद्य विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) रेखाचित्र
(घ) प्रहसन
उत्तर :
(ख) संस्मरण

प्रश्न 6.
लूसी किस प्रजाति का कुत्ता था ?
(क) भूटिया
(ख) अल्सेशियन
(ग) जंगली
(घ) देशी
उत्तर :
(ख) अल्सेशियन

प्रश्न 7.
लूसी ने कितने बच्चों को जन्म दिया था ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सा गुण नीलू में था ?
(क) पूँछ हिलाना
(ख) अकारण भौंकना
(ग) दीनभाव से पीछे घूमना
(घ) दर्प्भाव
उत्तर :
(घ) दर्पभाव

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 9.
किन दौनों में गहरी दोस्ती थी ?
(क) नीलू-लूसी में
(ख) कजली-बादल में
(ग) नीलू-कजली में
(ङ) नीलू-बादल में
उत्तर :
(ग) नीलू-कजली में

प्रश्न 10.
नीलू का जीवन-काल कितने वर्षों का था ?
(क) ग्यारह
(ख) बारह
(ग) तेरह
(घ) चौदह
उत्तर :
(घ) चौदह

प्रश्न 11.
नीलू की मृत्यु कैसी थी ?
(क) शांत-निर्लिप्त
(ख) दैन्य
(ग) भयानक
(घ) असामयिक
उत्तर :
(क) शांत-निर्लिप्त

प्रश्न 12.
कौन रोशनदानों से नीचे गिर जाते थें ?
(क) नीलू
(ख) गौरैया
(ग) गौरैया के बच्चे
(घ) लूसी
उत्तर :
(ग) गौरैया के बच्चे

प्रश्न 13.
रात को कंपाउंड का चक्कर लगाकर कौन पहरेदारी करता था ?
(क) लूसी
(ख) नीलू
(ग) खरगोश
(घ) लेखक
उत्तर :
(ख) नीलू

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 14.
किसको बिल्ला और सियार का आहार बनना पड़ा ?
(क) खरगोश को
(ख) गौरया को
(ग) नोलू
(घ) मोर को
उत्तर :
(क) खरगोश को

प्रश्न 15.
सरदी लगने से किसको निमोनिया हो गया ?
(क) नीलू को
(ख) लेखक को
(ग) खरगोश को
(घ) मोर को
उत्तर :
(क) नीलू को

प्रश्न 16.
लेखिका सबसे अधिक किसको महत्व देती थी ?
(क) लूसी को
(ख) नीलू को
(ग) खरगोश को
(घ) मोर को
उत्तर :
(ख) नीलू को

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
लूसी कौन थी?
उत्तर :
लूसी उत्तरायण में रहने वाली एक अल्सेशियन कुतिया थी। वह नीलू की माँ थी।

प्रश्न 2.
उत्तरायण के लोग लूसी से सामान कैसे मँगवाते थे?
उत्तर :
उत्तरायण के लोग लूसी के गले में रुपये और सामग्री की सूची के साथ एक कपड़ा बाँध कर उससे सामान लाने का अनुरोध करते थे। लूसी दुकान तक पहुँच जाती थी। दुकानदार उसके गले से कपड़ा खोलकर रुपया, सूची लेने के बाद सामान की गठरी उसके गले या पीठ से बाँध देता और लूसी बोझ के साथ बर्फोला रास्ता पार कर सकुशल लौट आती थी। लोग अपना सामान प्राप्त कर लेते थे।

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प्रश्न 3.
लेखिका को मित्र के आने की सूचना नीलू से कैसे मिलती थी?
उत्तर :
नीलू किसी विशेष परिचित को आया देखकर, धीरे-धीरे भीतर आकर लेखिका के कमरे के दरवाजे पर खड़ा हो जाता। नीलू का इस प्रकार आना ही लेखिका के लिए किसी मित्र के आने की सूचना थी।

प्रश्न 4.
नीलू अकेले कैसे रह गया?
उत्तर :
नीलू कुत्तों में केवल कजली के सामीप्य से प्रसन्न रहता था, परंतु कजली और बादल एक क्षण के लिए भी एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे। इस प्रकार बेचारा नीलू अकेला रह गया।

प्रश्न 5.
अल्सेशियन और भूटिया कुत्तों के स्वभाव में क्या अन्तर होता है?
उत्तर :
अल्सेशियन कुत्ते आखेट प्रिय होते हैं। भूटिया कुत्ते हिंसक और कोधी स्वभाव के होते हैं।

प्रश्न 6.
गौरैया कहाँ अपना घोंसला बना लेती थी?
उत्तर :
गौरैया लेखिका के बँगले के रोशनदानों में अपना घोंसला बना लेती थी।

प्रश्न 7.
नीलू की मृत्यु क्या सामान्य कुत्तों की भाँति हुई?
उत्तर :
नीलू की मृत्यु सामान्य कुत्तों की भौंति नहीं हुई। सामान्य कुत्ते बड़े टुःख के साथ कराहते हुए मरते हैं। पर नीलू की मृत्यु कष्ट रहित, शांत निर्लिप्त भाव से हुई।

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प्रश्न 8.
महादेवी वर्मा जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च, 1907 ई० को उत्तर प्रदेश के फरूरखाबाद जिला में हुआ था।

प्रश्न 9.
जब लेखिका दाना देने निकलती है, तो कौन प्रत्येक कक्ष का निरीक्षण करता था ?
उत्तर :
जब लेखिका मोर, खरगोश आदि को दाना देने निकलती तो नीलू सदा उनके साथ घूमता और प्रत्येक कक्ष का निरीक्षण करता।

प्रश्न 10.
नीलू कैसे अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होता था ?
उत्तर :
रात में सबके सो जाने पर वह पूरे कंपाउंड का चक्कर लगाकर पहरेदारी करता था। जाड़ा हो, गरमी या बरसात वह अपने कर्त्तव्य से कभी विमुख नहीं होता था।

प्रश्न 11.
मोटर दुर्घटना में किसे अस्पताल जाना पड़ा ?
उत्तर :
एक बार मोटर दुर्घटना में आहत होने पर लेखिका को असताल जाना पड़ा।

प्रश्न 12.
नीलू कुत्तों में किसके निकटता से प्रसन्न रहता था ?
उत्तर :
कुत्तों में वह केवल कजली की निकटता से ही प्रसन्न रहता।

प्रश्न 13.
अपरिचित को देखकर नीलू क्या करता था ?
उत्तर :
अपरिचित को आया देखकर वह कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ा हो जाता, फिर लेखिका के संकेत करने पर पुन: दरवाजे पर जा बैठता था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 14.
नीलू का स्वभाव आश्चर्यजनक था कैसे ?
उत्तर :
तेरह वर्ष के जीवन में नोलू कभी भी किसी पशु पक्षी पर नहीं झपटा। उसका यह स्वभाव सचमुच आश्चर्यजनक था।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
लूसी की रूपाकृति का वर्णन करो।
उत्तर :
लूसी सामान्य कुत्तों से भिन्न थी। हिरणी के समान वह तीव्रगति वाली थी। उसकी देह मानों साँचे में ढली हुई थी। काला लगनेवाले पीली कांति वाले रोयें थे। आँखेे काली छोटी, सजग खड़े कान, रोएँदार लंबी पूँछ थी। वह बड़ी आकर्षक प्रतीत होती थी।

प्रश्न 2.
लूसी का स्वभाव स्वच्छंद सहचरी के समान क्यों था?
उत्तर :
अल्सेशियन कुत्ता एक ही स्वामी को स्वीकार करता है। यदि एक व्यक्ति का स्वामित्व उसे नहीं मिल पाता तो वह सब के साथ सहचर जैसा आवरण करने लगता है। वह आदेश किसी का नहीं मानता, पर सबके सेहपूर्ण अनुरोध की रक्षा करता है। अल्लेशियन जाति होने के कारण लूसी की स्थिति भी स्वच्छंद सह चरी के समान हो गई थी।

प्रश्न 3.
नीलू ने खरगोशों की प्राण रक्षा किस प्रकार की?
उत्तर :
खरगोश सुरंग कर दूसरे कंपाउंड में जा निकले। आगे पहुँचने वाले खरगोशों के अंग जंगली बिल्ला द्वार क्षतविक्षत कर दिए गए। कुछ खरगोश बिल्ले या सियार के आहार बन गएं। पहरे के नित्य क्रम में घूमते हुए नींलू ने चाहरदीवारी के पार देखा। खरगोशों के संकट को देखकर वह कूदकर उस पार पहुँच गया। उसके पहुँचते ही बिल्ला भाग गया। खरगोश को बाहर निकलने से रोकने और उनकी सुरक्षा के लिए वह रात भर ओस से भींगता हुआ सुरंग के द्वार पर खड़ा रहा। इस प्रकार नीलू ने खरगोशों की रक्षा की।

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प्रश्न 4.
नीलू के स्वभाव गत विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर :
नीलू का स्वभाव अन्य कुत्तों से बिलकुल भिन्न था। वह खाने के लिए लालांयित नहीं रहता था। प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए पूँछ हिलाना, कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए चाहना, स्वामी के पीछे-पीछे घूमना, अकारण भौंकना, काटना आदि उसके स्वभाव में नहीं था। वह दीनता से रहित दर्प भाव से युक्त था। अपनी सहज चेतना से वह अपरिचित को पहचान लेता था। वह हिंसक स्वभाव का नहीं था।

प्रश्न 5.
लेखिका का नीलू प्रेम अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
नीलू की माँ के मर जाने पर लेखिका शावक नीलू को दुग्ध-चूर्ण से दूध बनाकर पिलाया। कोमल ऊन डालिया रख कर उसमें सुलाया। आने के समय उसे प्रयाग ले आई। नीलू हमेशा घर के बाहरी बरामदे में ही बैठा करता। नीलू के निमोनिया हो जाने पर उसे दवा तथा इंजेक्शन लगवाकर उसे स्वस्थ्य बनाया। जन्म से मृत्युतक वह हमेशा. लेखिका के साथ रहा।

प्रश्न 6.
लूसी के अभाव में नीलू का पालन-पोषण कैसे हुआ?
उत्तर :
माँ के अभाव में नीलू दूध के लिए शोर मचाने लगा। लेखिका ने दुग्ध-चूर्ण से दूध बनाकर पिलाया। रजाई में भी उसे माँ के पेट की गर्मी न मिलती और रोने चिल्लाने लगता। फिर लेखिका ने उसे कोमल ऊन और अधबुने स्वेटर की डालिया में रख दिया। अब वह आराम से सोने लगा। आने के समय लेखिका उसे भी प्रयाग लेते आई।

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प्रश्न 7.
‘जीवन के समान उसकी मृत्यु भी दैन्य से रहित थी’ आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में लेखिका ने स्पष्ट किया है कि नीलू का जीवन मस्ती और आनंद से भरा था। उसमें दीनता की हीन भावना नहीं थी। उसी प्रकार उसकी मृत्यु भी कष्ट रहित थी। उसकी मृत्यु अत्यंत शांत भाव से हुई। मृत्यु के समय वह निर्लिप्त बना रहा।

प्रश्न 8.
‘एक व्यक्ति का स्वामित्व उसे सुलभ नहीं होता, तो वह सबके साथ सहचर जैसा आचरण करने लगता है।’ आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत अवतरण में लेखिका ने अल्सेशियन कुत्ते के स्वभाव का चित्रण किया है। अल्सेशियन कुत्ते को यदि कोई एक स्वामी (मालिक) नहीं मिल जाता तो वह सब के साथ सहचर जैसा व्यवहार करने लगता है। वह किसी का आदेश नहीं मानता, परंतु सहचर की तरह प्रेम भरे अनुरोध को स्वीकार करता है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
‘नीलू’ के माध्यम से स्पष्ट कीजिए कि पशु मानव समाज के लिए बड़े उपयोगी होते हैं?
उत्तर :
लेखिका ने अपने पालतू कुत्ते नीलू और उसकी माँ लूसी की जीवन गाथा से उनके संबंध, क्रिया कलाप, स्वामिभक्ति, कर्त्तव्यपरायणता का सहज वर्णन किया है। इनके क्रिया कलाप से यह सिद्ध हो जाता है कि पशु मानव के लिए बड़े उपयोगी हैं।

उत्तरायण में लूसी की स्थिति स्वच्छंद सहचरी के समान थी। उत्तरायण से एक रास्ता दो पहाड़ियों के बीच से मोटर मार्ग तक जाता था। उसके अन्त में मोटर स्टाप पर एक ही दुकान थी। जिसमें आवश्यक खाद्य सामग्री प्राप्त हो सकती थी। शीतकाल में बर्फ से ढक जाने से रास्ते का चिह्न भी नहीं रह जाता था। उस समय उत्तरायण के निवासी दुकान तक पहुंचने में असमर्थ हो जाते थे। ऐसी स्थिति में लूसी ही उनका सहयोग करती थी। उत्तरायण के निवासी लूसी के गले में रुपये और सामग्री की सूची के साथ एक कपड़ा या चादर बाँध कर सामान लाने का अनुरोध करते थे।

वंश परपरा से बर्फ में मार्ग बना लेने की सहज चेतना के कारण लूसी सारे व्यवधान पार कर दुकान तक पहुँच जाती थी। दुकानदार उसके गले से कपड़ा खोलकर रुपया सूची आदि लेने के बाद सामान की गठरी उसको गले या पीठ से बाँध देता और लूसी सारे बोझ के साथ बर्फीला मार्ग पार करती हुई सकुशल लौट आती। किसी किसी दिन उसे कई बार आना-जाना पड़ता था। इस प्रकार वह चीनी, चाय, आटा, आलू आदि सामग्री लोगों को पहुँचाकर उनकी भलाई किया करती थी।

नीलू अत्यंत समझदार कुत्ता था। वह बारह वर्ष तक लेखिका के घर के बाहरी बरामदे में रहता था। वह प्रत्येक आनेजाने वाले की भली-भाँति देखता था। लेखिका से मिलने वालों में सभी को पहचानता था। किसी अपरिचित को देखकर भीतर आकर कमरे के दरवाजे पर खड़े हो कर भौंकता था। इस प्रकार वह लेखिका को किसी मित्र की उपस्थिति की सूचना दे देता था। नीलू का ध्वनिज्ञान सूँबने का अत्यंत गहरा था। बाहर घूमतें समय यदि कोई कह देता कि तुम्हें गुरुजी बुला रही हैं तो तुरंत कमरे के सामने आकर खड़ा हो जाता था। कभी किसी पशु या पक्षी पर आक्रमण नहीं करता था। बँगले के रोशन दानों में गौरैया के घोंसले बने थे। उनसे कभी उनके बच्चे गिर पड़ते थें। उस समय नीलू बड़ी सतर्कता के साथ कुत्तों तथा बिल्लियों से उन शावकों की रक्षा किया करता था।

सब के सो जाने पर गरर्मियों में बाहर लॉन पर और सर्दियों में बरामदे में बैठकर पहरेदारी सजगता के साथ किया करता था। एक रात में लेखिका के खरगोश बिल खोदकर दूसरे कंपाउंड में निकल गए। जैसे ही वे बाहर निकलते सियार यां मार्जार उन्हें आहार बना डालते। संकेत से यह जानकर नीलू कूदकर दूसरी ओर सुरंग के पास पहुँच गया। उसे देखते ही बिल्ला भाग गया। खरगोशों की रक्षा के लिए वह रातभर जाड़े में खड़ा रहा। मोटर-दुर्टटना में आहत हो जाने पर लेखिका अस्पताल में भर्ती हुई। नोलू वहाँ भी पलंग के चारों घूमता और प्रहरी की तरह पलंग के नीचे जा बैठता। इन क्रिया कलापों से स्पष्ट हो जाता है कि पशु कितने समझदार और मनुष्य के सहायक तथा मित्र होते हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

भाषा बोध :

1. निम्न शब्दों का संधि विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए।

उत्तरायण = उत्तर + अयन – स्वर संधि
कालान्तर = काल + अन्तर – स्वर संधि
स्वभाव = सु + भाव – स्वर संधि
कुहराच्छन्न = कुहरा + आच्छन्न – स्वर संधि
प्रतिक्षा = प्रति + इक्षा – स्वर संधि

2. निम्नलिखित शब्दों से मूल शब्द और उपसर्ग अलग कीजिए-

परिस्थिति परि + स्थिति
आचरण आ + चरण
सकुशल स + कुशल
सुडौल सु + डौल
निर्लिप्त निर + लिप्त
सतर्क स + तर्क

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

3. क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रिया विशेषण कहते है। जैसे- नीलू धीरे-धीरे खरगोशों के पास गया। ऐसे कुछ क्रियाविशेषण चुनिए-
(क) स्वामी के पीछे-पीछे घूमना उसे पसंद न था।
(ख) वह सदर्प धीरे-धीरे आकर दरवाजे पर खड़ा हो जाता।

4. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करो-

कुत्ते की मौत मरना – बुरी तरह मरना।
उत्तरायण होना – उत्तर की ओर, उत्तर गति होना।
अवज्ञा होना – उपेक्षा या तिरस्कार करना।
कुत्ते की मौत मरना – जो व्यक्ति जीवन में बुरा आचरण करता है, वह अन्त में कुत्ते की मौत मरता है।
उत्तरायण होना – भीष्म पितामह उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे।
अवज्ञा करना – हमें बड़ों को कभी अवज्ञा नहीं करनी चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi नीलू Summary

लेखक-परिचय :

आधुनिक युग की मीरा हिन्दी साहित्य की यशस्वी कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के फरूखाबाद में सन् 1907 ई. में होली के दिन हुआ था। छायावादी काव्य चेतना के उन्नयकों में महादेवी जी का अन्यतम स्थान हैं। इन्होंने संस्कृत में प्रथम श्रेणी में एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। प्रयाग महिला पीठ की प्रधानाचार्य के पद पर रहकर उन्होंने नारी-शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सन् 1987 ई. में इनका देहावसान हो गया।

इनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ – नीहार, रशिम, नीरजा, दीपा शिखा, यामा तथा गद्य रचनाएँ- अतीत के चलचित्र, श्रृंखला की कड़ियाँ, पथ के साथी और मेरा परिवार आदि हैं। कविता और गद्य पर उनका समान अधिकार है। भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ अलंकार में सम्मानित किया। ‘यामा’ और ‘दीप शिखा’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से विभूषित किया गया। महादेवी जी की भाषा शुद्ध संस्कृत निष्ठ, कोमल खड़ी बोली है। इन्होंने गद्ध और पद्य दोनों विधाओं में रचनाकर हिन्दी साहित्य को नये शिखर पर पहुँचा दिया।

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साराश :

प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने अपने पालित कुत्ते नीलू तथा उसकी माँ लूसी की जीवन गाथा के साथ जुड़ी स्मृतियों का सहज वर्णन किया है। नीलू की अल्सेशियन माँ उत्तरायण में लूसी नाम से पुकारी जाती थी। लूसी सामान्य कुत्तों से भिन्न थी। काली छोटी आँखें, सघन खड़े कान, लंबी पूँछ से युक्त लूसी की देह साँचे में ढली हुई लगती थी। लूसी स्वछंद सहचरी की तरह साथ के स्नेहपूर्ण अनुरोध की रक्षा करती थी। उत्तरायण से मोटर स्टाप तक एक पगडंडी जाती थी। वहीं एक दुकान थी जिसमें आवश्यक खाद्य-सामग्री प्राप्त हो सकती थी। शीतकाल में बर्फ के भर जाने से यह रास्ता चिद्न लुप्त हो जाता था।

आवागमन बंद हो जाता था। उत्तरायण के निवासी दुकान तक पहुँचने में असमर्थ हो जाने पर लूसी से सामान मँगवाते थे। वे लूसी के गले में रुपये और सामग्री की सूची के साथ एक अँगोछा या चादर बाँधकर उससे सामान लाने का अनुरोध करते थे। वह सारे व्यवधान पार कर दुकान तक पहुँच जाती थी। दुकानदार उसके गले से कपड़ा खोलकर रुपया, सूची लेकर सामान की गठरी गले या पीठ से बाँध देता था। लूसी बर्फीला रास्ता पार कर सकुशल लौट जाती थी। इस प्रकार चीनी, चाय, आटा, आलू आदि लोग उससे मँगबाते थे। एक दिन भटकता एक भूटिया कुत्ता दुकान पर आ गया और लूसी से उसकी मिश्रता हो गई। उन्हीं सरदियों में लूसी ने दो बच्चों को जन्म दिया। एक बच्चा तो शीत के कारण मर गया पर दूसरा जीवित बचा रहा। चार-पाँच दिन के बाद लूसी बच्चे को छोड़ कर फिर दुकान तक आने जाने लगी। एक संध्या लूसी गई फिर लौट न सकी। हुआ यह कि एक लकड़बग्घे से संघर्ष करती वह दम तोड़ दी।

लूसी के लिए गाँव के सभी लोग रोए। उसके बच्चे को दुग्ध चूर्ण से दूध बनाकर पिलाया गया। आने के समय लेखिका उसे अपने साथ प्रयाग ले आई। बड़े होने पर वह अपनी माँ के समान ही विशिष्ट था। उसका सिर बड़ा और चौड़ा, पूँछें सघन रोमों से युक्त, पैर लंबे, पंजे मजबूत, आँखें शहद के रंग के समान थीं। नीलू के बल और स्वभाव में भी विशेषता थी। अन्य कुत्तों की भाँति वह दीनभाव से स्वामी के पीछे-पीछे घुमना, अकारण भौंकना, काटना आदि कुत्तों के स्वाभाविक गुणों का उसमें अभाव था। नीलू कभी प्रिय खाद्य-पदार्थ को यदि अवज्ञा से दिया जाता तब स्वीकार न करता।

इसमें अलभ्य दर्प का भाव था। डाँट देने पर फिर उसकी भिन्न करनी पड़ती थी। वह सदा लेखिका के घर के बाहरी बरामदे में ही बैठता था और घर आने जाने वालों का निरीक्षण करता था। घर मिलने वाले को पहचानता था। अपरिचित को आया देखकर वह कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ा हो जाता, फिर लेखिका के संकेत करने पर पुनः दरवाजे पर जा बैठता था।

नीलू का ध्वनि ज्ञान बड़ा गहरा था। बाहर या रास्ते में घूमते समय यदि उसे किसी से संकेत मिलता तो वह तुरंत जाकर, उनके सामने खड़ा हो जाता, फिर जब तक जाने का संकेत नहीं मिलता तब तक खड़ा रहता। उसमें हिंसा की प्रवृत्ति बिलकुल नहीं थी। तेरह वर्ष के जीवन में नीलू कभी भी किसी पशु पक्षी पर नहीं झपटा। उसका यह स्वभाव सचमुच आश्चर्य जनक था।

लेखिका के बँगले के रोशनदानों में प्राय: गौरैया तिनकों से घोंसला बना लेती थी। कभी-कभी गौरैया के बच्चे उड़ने में असफल प्रयास में रोशन दानों से नीचे गिर जाते थे। इन दिनों नीलू सावधानी से इनकी रक्षा करता था। कोई भी कुत्ता या बिल्ली उसके भय से यहाँ आने, उन्हें हानि पहुँचाने की हिम्मत नहीं कर पाता था। कभी-कभी वह छोटे पक्षी-शावकों को मुख में हौले से दबाकर लेखिका के पास ले आता, ताकि वे पुनः उन बच्चों को घोंसलें में पहुँचा दें। जब लेखिका मोर, खरगोश आदि को दाना देने निकलती तो नीलू सदा उनके साथ घूमता और प्रत्येक कक्ष का निरीक्षण करता।

रात में सबके सो जाने पर वह पूरे कंपाउंड का चक्कर लगाकर पहरेदारी करता था। जाड़ा हो या गर्मी या बरसात वह अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होता था। एक रात लेखिका के खरगोश बिल खोद कर दूसरे कंपाउंड में निकल गये। बाहर निकलने पर उन्हें बिल्ला और सियार का आहार बनना पड़ा। नीलू खरगोशों के संकट को पहचान कर कूद कर दूसरी ओर पहुँच गया। उसके पहुँचते ही बिल्ला तो भाग गया, पर नीलू खरगोशों को रोकने के लिए रात भर ओस से भींगता हुआ सुरंग के द्वार पर खड़ा रहा। सरदी लगने से नीलू को न्यूमोनिया हो गया। वह शांति पूर्वक कड़वी दवा खा लेता तथा सुई लेने का कष्ट सहता।

एक बार मोटर दुर्घटना में आहत होने पर लेखिका को अस्पताल जाना पड़ा। कपड़े-चादर, कंबल आदि अस्पताल ले जाते देख नीलू की सहज चेतना के किसी अनिष्ट का आभास हो गया। तीन दिन तक उसने न खाया, न पिया। डॉक्टर से अनुर्मति लेकर उसे अस्पताल लाया गया। वह पलंग के चारों ओर घूमता और रक्षक की तरह पलंग के नीचे बैठता। वह नियमित रूप से अस्पताल आने लगा। डॉक्टर और नर्सें भी उससे परिचित हो गई।

नीलू को चौदह वर्ष का जीवन मिला था। वह जन्म से मृत्यु के क्षण तक लेखिका के पास ही रहा। कुत्तों में वह केवल कजली की निकटता से ही प्रसन्न रहता। पर कजली और बादल एक क्षण के लिए एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे। इसलिए नीलू सदा एकाकी ही रहा। अत्यंत शांत निर्लिप्त भाव से नीलू की मृत्यु हुई। लेखिका अपने पाले हुए अनेक जीव-जंतुओं में नीलू को ही सर्वाधिक महत्त्व देती थी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

शब्दार्थ :

  • अल्सेशियन = कुत्तों की एक नस्ल।
  • ऊष्मा = ऊर्जा, गर्मी, आवेश।
  • वेगवती = तेज गति वाली ।
  • स्तब्ध = हक्काबक्का हो जाना, जड़ीभूत।
  • पीताभ = पीली कांति।
  • भूटिया = कुत्ते की एक नस्ल।
  • स्वच्छंद = स्वतंत्र, मुक्त।
  • तुषार = बर्फ, हिम।
  • व्यवधान = रुकावट।
  • अनगढ़, शिलखंड = ऊबड़-खाबड़, पत्थर।
  • पनीले = जल युक्त। अवज्ञा = उपेक्षा।
  • वर्ण संकर = दो विभिन्न जातियों से उत्पन्न।
  • निरपेक्ष =तटस्थ, उदासीन ।
  • स्तब्धता = सन्नाटा, स्थिरता।
  • व्यतिक्रम = बिना क्रम के।
  • अलभ्य दर्प = असाधारण गर्व।
  • विषादमयी = दु:ख से भरी।
  • निर्लिप्त = जो किसी विषय में आसक्त न हो।
  • काम्य = बांछनीय, प्रिय।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 2 सुभान खाँ to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – सुभान खाँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
लेखक सुभान दादा से कौन-सी सौगात लाने के लिए कहता है?
(क) बादाम
(ख) खजूर
(ग) छुआरे
(घ) मटर
उत्तर :
(ग) बुआरे

प्रश्न 2.
जियारत का अर्थ है-
(क) यात्रा करना
(ख) भ्रमण करना
(ग) तीर्थ यात्रा करना
(घ) नौका यात्रा करना
उत्तर :
(ग) तीर्थ यात्रा करना

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 3.
किस दिन लेखक को बचपन में मुसलमान बच्चों की तरह कूदना पड़ता था।
(क) ईद
(ख) बकरीद
(ग) मुहर्रम
(घ) शबे-बारात
उत्तर :
(ग) मुहर्रम

प्रश्न 4.
सुभान दादा का क्या अरमान था?
(क) वृद्धा आश्रम बनाने का
(ख) बाल सुधार गृह बनवाने का
(ग) अस्पताल बनाने का
(घ) मस्जिद बनाने का
उत्तर :
(घ) मस्जिद बनाने का।

प्रश्न 5.
सुभान खाँ थे –
(क) हिन्दू
(ख) राजमिस्त्री
(ग) हलवाई
(घ) दर्जी
उत्तर :
(ख) राजमिस्त्री

प्रश्न 6.
सुभान खाँ सिर पर कैसी टोपी पहनते थे ?
(क) लाल
(ख) सफेद
(ग) दुपलिया
(घ) हरे
उत्तर :
(ग) दुपलिया

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 7.
सुभान खाँ की वाणी कैसी थी ?
(क) मधुर
(ख) कठोर
(ग) कर्कस
(घ) तोतला
उत्तर :
(क) मधुर

प्रश्न 8.
अल्लाह के रसूल किस मुल्क से आए थे ?
(क) पुर्वी मुल्क
(ख) पश्चिम के मुल्क
(ग) उत्तरी मुल्क
(घ) दक्षिण मुल्क
उत्तर :
(ख) पश्चिम के मुल्क

प्रश्न 9.
सुभान खाँ कैसे करके पैसे इकट्दे करते थे ?
(क) परिश्रम करके
(ख) बचत करके
(ग) चोरी करके
(घ) भीख माँग करके
उत्तर :
(क) परिश्रम करके

प्रश्न 10.
सुभान खाँ ने लेखक के लिए मक्का से क्या लाने को कहा ?
(क) प्रसाद
(ख) छुआरे
(ग) काजु
(घ) जल
उत्तर :
(ख) छुआरे

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 11.
सुभान खाँ किसको लेकर करबला की ओर चले?
(क) बच्चों को
(ख) लेखक को
(ग) दादी को
(घ) दादा को
उत्तर :
(ख) लेखंक को

प्रश्न 12.
किसके बगीचे से मस्जिद बनाने के लिए लकड़ी गई थी ?
(क) सुभान दादा
(ख) लेखक
(ग) मौलवी साहब
(घ) मामा के बगीचे से
उत्तर :
(घ) मामां के बगीचे से

प्रश्न 13.
रामवृक्ष बेनीपुरी की मृत्यु किस वर्ष हुई ?
(क) 1966 ई० में
(ख) 1967 ई० में
(ग) 1968 ई॰ में
(घ) 1969 ई० में
उत्तर :
(ग) 1968 ई० में

प्रश्न 14.
मक्का कहाँ है ?
(क) भारत में
(ख) पाकिस्तान में
(ग) अरब में
(घ) बंगलादेश में
उत्तर :
(ग) अरब में

प्रश्न 15.
कर्ज लेकर जियारत करने से क्या नहीं मिलता है ?
(क) पाप
(ख) पुण्य
(ग) दान
(घ) सौगात
उत्तर :
(ख) पुण्य

प्रश्न 16.
खुदा किससे बातें करता है ?
(क) इस्सान से
(ख) फकीर से
(ग) रसूल से
(घ) किसी से नहीं
उत्तर :
(ग) रसूल से

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प्रश्न 17.
सुभान खाँ के दिल में किस चीज की मंदाकिनी बहा करती थी ?
(क) इर्ष्या की
(ख) द्वेष की
(ग) हिंसा की
(घ) प्रेम की
उत्तर :
(घ) प्रेम की

प्रश्न 18.
लेखक को बचपन में सुभान खाँ की दाढ़ी में क्या मिलता था ?
(क) अबीर
(ख) रंग
(ग) मिट्टी
(घ) पानी
उत्तर :
(क) अबीर

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
सुभान खाँ का घर किसका अखाड़ा था?
उत्तर :
सुभान खाँ का घर बच्चों का आखाड़ा था। पोते-पोतियों, नाती-नातियों की भरमार उनके घर में थी।

प्रश्न 2.
मजदूरी करने की विषय में उनकी क्या राय थी?
उत्तर :
उनकी राय थी कि काम करते हुए अल्लाह को न भूलना और अल्लाह से फुर्सत पाकर फिर अपने कांम में जुट जाना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 3.
लेखक के मामा और सुभान दादा अपने किन पर्वों पर एक दूसरे की नहीं भूलते थे।
उत्तर :
लेखक के मामा होली, दिवाली पर और सुभान दादा ईद-बकरीद पर एक दूसरे को नहीं भूलते थे।

प्रश्न 4.
लेखक के सौगात माँगने पर सुभान दादा ने क्या कहा?
उत्तर :
लेखक के सौगात माँगने पर सुभान दादा ने कहा कि वहाँ के लोग खजूर और छुआरें लाते हैं।

प्रश्न 5.
पश्चिम दिशा की तरफ मुँह करके सुभान दादा क्यों नमाज पढ़ते थे?
उत्तर :
पश्चिम ओर से मुल्क में अल्लाह के रसूल आए थे। जहाँ से रसूल आए थे वहाँ तीर्थ है। इसलिए सुभान दादा तीर्थों की ओर मुँह करके नमाज पढ़ते थे।

प्रश्न 6.
प्रस्तुत कहानी में लेखक ने क्या प्रकाश डाला है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में लेखक ने सुभान खाँ के चरित्र के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम एकता पर प्रकाश डाला है।

प्रश्न 7.
सुमान खाँ लेखक के साथ कैसा व्यवहार करते थे ?
उत्तर :
सुभान खाँ लेखक के साथ अत्यंत स्नेहपूर्वक व्यवहार करते थे।

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प्रश्न 8.
सुभान खाँ क्यों पैसे इकट्टे कर रखे थे ?
उत्तर :
जिससे एक-दो साल में मक्का की तीर्थ यात्रा कर सके।

प्रश्न 9.
सुभान खाँ ने लेखक को क्या बतलाया ?
उत्तर :
सुभान खाँ ने लेखक को बतलाया कि केवल रसूल की उनसे बातें होती थीं। रसूल की दाढ़ी के कुछ बाल मक्का में रखे हैं। मक्का तीर्थ में उन बालों को दर्शन होते हैं।

प्रश्न 10.
सुभान खाँ को क्या दो चीजें सबसे प्यारी थी ?
उत्तर :
सुभान खाँ को दो ही चीजें सबसे प्यारी थी – काम करते हुए भी अल्लाह को न भूलना और अल्लाह से समय पाकर काम में जुट जाना।

प्रश्न 11.
सुभान दादा का अरमान क्या था ?
उत्तर :
सुभान दादा को एक मस्जिद बनाने का अरमान था।

प्रश्न 12.
अब तक लोगों ने क्या नहीं भूला था ?
उत्तर :
अब तक भी लोग उस मस्जिद के उद्घाटन के दिन की दादा की मेहमानदारी भूले नहीं थे।

प्रश्न 13.
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 23 दिसम्बर, 1899 ई० को बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के बेनीपुर नामक एक छोटे-से गाँव में हुआ था।

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प्रश्न 14.
इस्लाम के रसूल कौन थे ?
उत्तर :
पैगम्बर हजरत मोहम्मद को इस्लाम धर्म का रसूल माना जाता है।

प्रश्न 15.
लेखक के मामा और सुभान दादा अपने किन पर्वों पर एक-दूसरे को नहीं भूलते थे ?
उत्तर :
लेखक के मामा होली-दीवाली पर एवं सुभान दादा ईद-बकरीद में एक-दूसरे को नहीं भूलते थे।

प्रश्न 16.
मक्का में क्या रखा गया है ?
उत्तर :
मक्का में हजरत मुहम्मद के दाढ़ी के बाल रखे गये हैं।

प्रश्न 17.
सुभान दादा ने मस्जिद का उद्घाटन समारोह किस दिन रखा था ?
उत्तर :
सुभान दादा ने मस्जिद का उद्घाटन समारोह जुमा (शुक्रवार) के दिन रखा था।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
सुभान दादा कर्ज के पैसे से क्यों नहीं जाना चाहते थे?
उत्तर :
कर्ज के पैसे से तीर्थ करने में सवाब नहीं मिलतां। इसलिए दादा कर्ज के पैसे से नहीं जाना चाहते थे।

प्रश्न 2.
सुभान दादा का क्या अरमान था, वह कैसे पूर्ण हुआ?
उत्तर :
सुभान दादा का अरमान मस्जिद बनाने का था। दादा एक साधारण राजमिस्त्री थे, पर उनका दृढ़ निश्चय था मस्जिद बनवाने का। उनके लड़के पैसे कमा लिए थे। लेखक के मामा ने अपने बगीचे से मस्जिद की सारी लकड़ी दी। दादा ने अपनी जिन्दगी भर की सारी कमाई लगा दी। सारे नक्शे उन्होंने खींचे थे। उनकी निगरानी में मस्जिद बनकर तैयार हो गई।

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प्रश्न 3.
इस पाठ की किन घटनाओं से साम्प्रदायिक एकता का पता चलता है?
उत्तर :
लेखक का बचपन में सुभान खाँ के साथ जो स्नेहपूर्ण व्यवहार, बातें होती थी उससे साम्पदायिक एकता स्पष्ट होती है। ईद-बकरीद के दिन सुभान खाँ लेखक की नहीं भूलते तथा होली-दीवाली के दिन सुभान खाँ को नानी पूए, खीर तथा गोश्त परोसकर खिलाती थी। लेखक अपने हाथों से अबीर लेकर उनकी दाढ़ी में मलता था। सुभान दादा मक्का से छुआरे लाकर बड़े ही प्रेम से लेखक को दिए। सुभान दादा की मस्जिद की सारी लकड़ी लेखक के मामा के बगीचे से गई। मस्जिद के तैयार हो जाने पर क्षेत्र के सभी मुसलमानों तथा हिन्दुओं को दादा ने न्योता दिया। हिन्दुओं के सत्कार के लिए मिठाइयाँ, पान, इलायची का अलग से प्रबंध किये थे। इन्हीं घटनाओं से साम्प्रदायिक एकता का पता चलता है।

प्रश्न 4.
सुभान दादा ने हिन्दुओं का सत्कार किस प्रकार किया?
उत्तर
हिन्दुओं के सत्कार के लिए सुभान दादा ने हिन्दू हलवाई रख कर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनवाई थी, पान इलायची का प्रबंध किया था।

प्रश्न 5.
सुभान दादा का चरित्र-चित्रण संक्षेप में कीजिए : (छ: वाक्यों में)
उत्तर :
सुभान दादा एक अच्छे परिश्रमी राज मिस्त्री थे। उनमें जाति, धर्म, संप्रदाय को लेकर संकीर्णता की भावना नहीं थी। वे सीधे-सादे सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। बच्चों के प्रति उनके मन में बड़ा कोमल, स्नेहभरा भाव था। वे धार्मिक प्रवृत्ति के थे। पर दूसरे धर्म की भी इज्जत करते थे। हिन्दुओं का भी सत्कार करते थे। ईमानदारी के कारण झगड़ों की पंचायतों में उन्हें पंच निश्चित किया जाता था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
‘सुभान खाँ’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी से हमें राष्ट्रीय एकता की शिक्षा मिलती है। इस कहानी में लेखक ने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल दिया है। कहानी के प्रमुख पात्र सुभान खाँ के जीवन व्यवहार, अनुपम चरित्र को स्पष्ट किया है कि मानवता का स्थान सर्वोपरि है। सुभान खाँ धार्मिक प्रवृत्ति के परिश्रमी व्यक्ति थे। वे उदार उपकारी थे। धार्मिक, साम्पदायिक संकीर्णता की भावना उनमें बिलकुल नहीं। सुभान खाँ मुसलमान थे, परवे हिन्दू बालक पर अत्याधिक स्नेह वात्सल्य का भाव रखते थे।

उनके मन में नफरत का स्पर्श भी नहीं था। लेखक को अपनी गोद में लेकर घुमाते कहानियाँ सुनाते उनका मन बहलाते थे। उनके मन में मक्का की तीर्थ यात्रा करने की उत्कट अभिलाषा थी पर अपने परिश्र्रम से अर्जित धन से ही तीर्थयात्रा करना पुण्यदायक समझते थे। कर्ज लेकर या दूसरों की सहायता लेकर वे तीर्थयात्रा न कर सकते। मुहर्रम के दिन लेखक दादा ने यहाँ जाते। फिर शाम को दादा के कंधे पर चढ़कर घर आते। इर्द-बकरीद की सुभान दादा लेखक को नहीं भूल सकते थे, होली दीपावली के दिन लेखक के घर में दादा का खान-पान से सत्कार होता था।

सुभान खाँ की आर्थिक हालत ठीक हो गई और वह हज कर आए। लेखक भी अब बड़ा हो गया था। बचपन में वादा किए छुआरे लाने की बात दादा न भूले थे। इसलिए छुआरे ले आए। अरब से लाए हुए छुआरे को पाकर लेखक ने आनंद व्यक्त किया। सुभान दादा का मस्जिद बनवाने का अरमान भी पूरा होने का समय आ गया। मस्जिद बनकर तैयार हो गई। लेखक के मामाजी के बगीचे से ही काम आनेवाली सारी लकड़ी मुफ्त में आ गई। जिस दिन मस्जिद बनकर तैयार हुई, उस दिन सुभान दादा ने समस्त क्षेत्र के लोगों को न्योता दिया। हिन्दू-मुसलमान दोनों ही इस उत्सव में प्रसन्न चित्त से

आए। मुसलमानों ने मस्जिद में नमाज पढ़ी। हिन्दुओं के सत्कार के लिए सुभान दादा ने हिन्दू हलवाई रखकर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनवाई थी, पान इलायची का भी प्रबंध किया था। मस्जिद को उद्धाटन के दिन सुभान दादा की मेहमानदारी लोग कभी नहीं भूलें। इस प्रकार सुभान खाँ के चरित्र, कार्य तथा व्यवहार से स्पष्ट हो जाता है। कि साम्पदायिक संकीर्णता भेद भाव, धर्म के लेकर समाज में नफरत पैदा करना, तुच्छ स्वार्थी लोगों की ही चेष्टा होती है। सुभान दादा जैसे लोग ही अपनी सद्भावना से प्रेम, सौमनस्य तथा एकता का भाव पैदा कर समाज का कल्याण कर सकते हैं।

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भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए :

  • संसार = सम् + सार – व्यंजन संधि
  • पवित्र = पो + इत्र – स्वर संधि
  • शिष्टाचार = शिष्ट + आचार – स्वर संधि
  • आनंदातिरेक = आनंद + अतिरेक – स्वर संधि
  • सज्जनता = सत् + जनता – व्यंजन संधि
  • सत्कार = सत् + कार – व्यंजन संधि
  • उद्घाटन = उत् + घाटन – व्यंजन संधि

2. निम्नलिखित सामासिक पदों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

  • दाढ़ी-मूँछ = दाढ़ी और मूँछ – द्वनन्द्व समास
  • पूरब-पश्चिम = पूरब और पश्चिम – द्वनन्द्य समास
  • भाव-विभार = भाव में विभारे = तत्पुरुष समास
  • बड़ी-बड़ी = बड़ी-बड़ी – कर्म धारण समास
  • रस-भरी = रस से भरी – तत्पुरुष समास
  • लाल-छड़ियाँ = लाल हैं जो छड़ियाँ – कर्म धारय समास

3. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लीखिए –

  • अरमान – इच्छा, कामना, चाह।
  • मुल्क – राष्ट्र, जनपद, राज्य।
  • नूर – रोशनी, प्रकाश, उजाला।
  • तकदीर – भाग्य, नसीब, किस्मत।
  • सौगात- भेंट, उपहार, तोहफा।
  • पेड़ – वृक्ष, तरु, विटप।
  • बगीचे – बाग, उपवन, उद्यान।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

4. निम्नलिखित उर्दू शब्दों के हिन्दी अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  • पैक – परिक्रमा – मुहर्रम के दिन ताजिये का पैक किया जाता है।
  • तसबीह – माला – बुजुर्ग हाथ में तसबी के दाने फेरते हैं।
  • रसूल – पैगंबर – ईश्वर के दूत को रसूल कहते हैं।
  • पेशानी – मसाफ – उनकी पेशानी पर चमक थी।
  • उम्र-दराज – बड़ी उम्र का – पंचायत में उम्र दराज के लोग थे।
  • नूरानी – प्रकांशमान – उनके चेहरे पर नूरानी झलकती थी।
  • मुकर्रर – निश्चित – लोग दादा को पंच मुकर्रर करते थे।

WBBSE Class 8 Hindi सुभान खाँ Summary

लेखक-परिचय :

बेनीपुरी जी का जन्म 1902 में बिहार के मुजफ्फरपुर जनपद के बेनीपुर गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनका देहावसान सन् 1968 ई. में हुआ। बेनीपुर जी एक सुपसिद्ध शब्द चित्रकार थे। उन्होंने उपन्यास, नाटक, कहानी, संस्मरण, निबंध, यात्रा विवरण, शब्दचित्र आदि सभी गद्य विधाओं में श्रेष्ठ रचना की। इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ – अंबपाली (नाटक), पतितों के देश में (उपन्यास), चिता के फूल (कहानी), माटी की मूरतें (रेखाचिच्र) गेहूँ, और गुलाब (निबंध और रेखाचित्र) आदि हैं। बेनीपुरी जी एक कर्मठ देशभक्त थे। उन्होनें अनेक पत्रिकाओं का संपादन किया।

सारांश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने सुभान खाँ के चरित्र के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम एकता पर प्रकाश डाला है। सुभान खाँ एक अच्छे राज मिस्त्री थे। इनका बदन लम्बा-चौड़ा तगड़ा था। लम्बी सफेद दाढ़ी थी। वे सिर पर दुपलिया टोपी, शरीर में आधे बाँह का कुर्ता, कमर में कच्छेवाली धोती, पैर में चमरोधा जूता पहनते थे। वे भद्रलोगों की तरह आचरण व्यंवहार का पालन करते थे। उनका चेहरा प्रकाशमान था। वाणी बड़ी मधुर थी। बचपन में लेखक की घनिष्ठता सुभान खाँ से हो गई थी। सुभान खाँ लेखक के साथ अत्यंत सेहपूर्वक व्यवहार करते थे। लेखक के पूछने पर उन्होंने बतलाया कि अल्लाह के रसूल पश्चिम के मुल्क से आए थे। जहाँ से रसूल आए थे, वह हमारा तीर्थ है। उसी तीर्थ की ओर मुँह करके हम अल्लाह को याद करते हैं। सुभान खाँ ने यह भी बतलाया कि वे परिश्रम करके पैसे इकट्ठे कर रखे है। जिससे एक-दो साल में मक्का की तीर्थ यात्रा कर सके। लेखक के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सुभान खां ने कहा कि वे लेखक के लिए मक्का से छुआरे आवश्य लाएँगे।

नमाज के समय सुभान खाँ धारीदार और सादा कुरता पहन घुटने टेक, दोनों हाथ छाती से जरा ऊपर उठा, आधी आँखें मूँदकर जब मंत्र सा पढ़ने लगते तो लेखक विस्मय विमुग्ध होकर उन्हें देखता और सोचता कि सचमुच उनके अल्लाह वहाँ आ गए है और ये होठों से उन्हीं से बातें कर रहे हैं। सुभान खाँ ने लेखक को बतलाया कि केवल रसूल की उनसे बातें होती थीं। रसूल की दाढ़ी के कुछ बाल मक्का में रखे हैं। मक्का तीर्थ में उन बालों को दर्शन होते हैं।

फिर लेखक को कंधे पर लेकर बातें और कहानियाँ सुनाकर उनका मन बहलाते, फिर अपने काम में लग जाते। उन्हें दो ही चीजें सबसे प्यारी थी – काम करते हुए भी अल्लाह को न भूलना और अल्लाह से समय पाकर काम में जुट जाना। काम और अल्लाह का यह ताल मेल से उनके दिल में प्रेम की गंगा बहती रहती थी।

एक दिन नानी ने लेखक को सुभान खाँ के साथ हुसैन साहब के पैक जाने के लिए तैयार होने को कहा । नौ साल की उम्र तक, जनेऊ होने के पहले लेखक मुहर्रम के दिन मुसलमान बच्चों की तरह नई रंगीन घड़ी लेकर ताजिये के चारों ओर कूदता। खुशी के साथ नये-नये कपड़े पहनकर उछलता कूदता / सुभान दादा आए और लेखक के कंधे पर लेकर अपने गाँव गए। वहाँ सभी बच्चों की तरह कमर में घंटी बाँध कर दो लाल छड़ियाँ दे दी और लेखक को लेकर करबला की ओर चल दिए। फिर शाम को सुभान दादा घर पहुँचा दिए। ईद-बकरीद के दिन सुभान दादा लेखक को नहीं भूल सकते थे। दीवाली, होली के दिन लेखक की नानी उन्हें पूए, खीर तथा गोश्त खिलाती थी। होली के दिन लेखक अबीर लेकर अपने हाथों से उनकी दाढ़ी की रंगीन बना देता था।

लेखक अब कुछ बड़े हो गए। सुभान दादा भी हज कर आए। दादा अनुपम सौगात छुआरे लेकर लेखक के पास पहुँचे। अब बेटों की मेहनत से दादा सम्पन्न हो गए थे, पर उनमें वही विनम्रता और सज्जनता थी। छुआरे लेखक को देकर वे अत्यधिक आनंदित हुए। लेखक छुआरे लेकर सिर चढ़ाया। लेखक का बचपना अब बीत चुका था। इसलिए वह अपने प्रेम के आँसुओं से अपने को पवित्र कर उनके चरणों में अपनी श्रद्धांजलि चढ़ा दी। हज से लौटने के बाद दादा का ज्यादा वक्त नमाज-बंदगी में ही बीतता। अपने क्षेत्र में वे पंच निश्चित किए जाते थे।

सुभान दादा को एक मस्जिद बनाने का अरमान था। अल्लाह की कृपा से उनकी मस्जिद बनकर तैयार हो गई। उनकी निगरानी में छोटी सी परंतु कलात्मक खूबसूरत मस्जिद बनी। लेखक के मामा के बगीचे से मस्जिद की सारी लकड़ी गई थी। जिस दिन मस्जिद बनकर तैयार हुई थी, सुभान दादा ने क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठित लोगों को निमंत्रित किया था। मुसलमानों ने मस्जिद में नमाज पढ़ी। हिन्दुओं के सत्कार के लिए दादा ने हिन्दू हलवाई रखकर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनवाई थी, पान-इलायची का प्रबंध किया था। अब तक भी लोग उस मस्जिद के उद्घाटन के दिन की दादा की मेहमानदारी भूले नहीं है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

शब्दार्थ :

  • अल्लाह = ईश्वर।
  • उम्रदराज = अधिक उम्र का
  • पेशानी = मस्तक
  • नीम- आस्तीन = आधी बाँह का कुर्ता।
  • उल्लास = खुशी, प्रसन्नता।
  • नूर = रोशनी, प्रकाश।
  • नमाज = प्रार्थना।
  • मजहब = धर्म।
  • मुलक = देश।
  • सामंजस्य = मेल।
  • रसूल = पैगंबर, ईश्वर का दूत।
  • अनुपम = अनोखा।
  • पाक = पवित्र।
  • फरमाइश = आज्ञा, माँग।
  • जियारत = तीर्थ यात्रा।
  • तसबीह = माला।
  • सौगात = भेंट, उपहार।
  • ज्वार (ज्वार) भर = क्षेत्रभर।
  • मुकर्रर = निश्चित, नियुक्त।
  • मेहरबानी = कृपा, अनुकंपा।
  • आनंदातिरेक = बहुत अधिक खुशी।
  • दयानतदारी = सच्चाई।
  • रोमांचकारी = पुलकित, रोगटे खड़े करने वाला।
  • नूरानी = प्रकाशमान।
  • न्योता = निमंत्रण।
  • तुनककर = चिढ़कर।
  • प्रतिष्ठित = सम्मानित।
  • विस्मय = विमुग्ध, आश्चर्य से मुग्ध।
  • ख्वाहिश = मन में इच्छा।
  • पैक = ताजिये की परिक्रमा।
  • बुजुर्गी = बुढ़ापा।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 1 मीरा के पद to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 Question Answer – मीरा के पद

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गिरधर का अर्थ है-
(क) गिर कर उठना
(ख) गिरगिट
(ग) कृष्ण
(घ) गिरि को धारण करनेवाला
उत्तर :
(ग) कृष्ण

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

प्रश्न 2.
कृष्ण ने किसकी लाज बचाई?
(क) मीरा की
(ख) द्रौपदी की
(ग) धुव की
(घ) प्रहाद की
उत्तर :
(ख) द्रौपदी की

प्रश्न 3.
राजा हरिश्चन्द्र किसके यहाँ काम किए?
(क) माली के यहाँ
(ख) कुम्हार के यहाँ
(ग) डोम के यहाँ
(घ) बाह्यण के यहाँ
उत्तर :
(ग) डोम के यहाँ

प्रश्न 4.
इन्द्रासन पाने के चक्कर में पाताल कौन गया?
(क) रावण
(ख) मेघनाद
(ग) बलि
(घ) कुम्भकर्ण
उत्तर :
(ग) बलि

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

प्रश्न 5.
मीरा किस काल की रचनाकार हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिककाल
उत्तर :
(ख) भक्तिकाल

प्रश्न 6.
मीरा के पिता का क्या नाम था ?
(क) जोधराज
(ख) रत्नसिंह
(ग) राणा सांगा
(घ) भोजराज
उत्तर :
(ख) रलसिंह

प्रश्न 7.
मीरा की मृत्यु कब हुई ?
(क) 1246 ई०
(ख) 1346 ई०
(ग) 1446 ई。
(घ) 1546 ई०
उत्तर :
(घ) 1546 ई०

प्रश्न 8.
मीरा की भाषा क्या है ?
(क) खड़ी बोली
(ख) अवधी
(ग) राजस्थानी मिश्रित ब्रज
(घ) मैथिली
उत्तर :
(ग) राजस्थानी मिश्रित ब्रज

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

प्रश्न 9.
कृष्णा की सूरत कैसी है ?
(क) मोहनी
(ख) साँवरी
(ग) गोरा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) साँवरी

प्रश्न 10.
डूबते गजराज की रक्षा किसने की ?
(क) राम
(ख) रावण
(ग) कृष्ण
(घ) कंस
उत्तर :
(ग) कृष्ण

प्रश्न 11.
हाड़ का क्या अर्थ है ?
(क) माँस
(ख) रक्त
(ग) हड्डी
(घ) धमनी
उत्तर :
(ग) हड्डी

प्रश्न 12.
सतबादी (सत्यवादी) किनको कहा जाता है ?
(क) हरिश्चंद्र
(ख) ईश्वरचंद्र
(ग) केशवचंद्र
(घ) प्रेमचंद
उत्तर :
(क) हरिश्चंद्र

प्रश्न 13.
माता यशोदा किस बेला में कन्हैया को जगा रही है ?
(क) दोपहर बेला
(ख) प्रभात बेला
(ग) संध्या बेला
(घ) रागी बेला
उत्तर :
(ख) प्रभात बेला

प्रश्न 14.
इस संसार में हर व्यक्ति को किसका परिणाम भोगना पड़ता है ?
(क) कर्म का
(ख) पुन्य का
(ग) गति का
(घ) विष का
उत्तर :
(क) कर्म का

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

प्रश्न 15.
किसने विष को अमृत बना दिया ?
(क) यशोदा ने
(ख) मीरा ने
(ग) प्रभु ने
(घ) राजा ने
उत्तर :
(ग) प्रभु ने

प्रश्न 16.
कौन स्वर्ग नहीं पहुँचे ?
(क) बलि
(ख) हरिश्चन्द्र
(ग) अधम
(घ) राणा जी
उत्तर :
(क) बलि

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मीरा किसकी भक्तन थी?
उत्तर :
मीरा भगवान श्रीकृष्ण की भक्तन थी।

प्रश्न 2.
द्रौपदी की लाज किसने और कैसे बचाई?
उत्तर :
द्रौपदी की लाज प्रभु कृष्ण ने उसकी चीर (साड़ी) बढ़ाकर बचाई।

प्रश्न 3.
कृष्ण के होठों पर क्या सुशोभित हो रहा है?
उत्तर :
कृष्ण के होठो पर बाँसुरी (मुरली) सुशोभित हो रही है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

प्रश्न 4.
गडवन के रखवारे किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर :
गउवन के रखवारे कृष्णाजी को कहा गया है क्योंकि वे गायों के रक्षक गोपाल थे।

प्रश्न 5.
विष से अमृत का क्या अर्थ है?
उत्तर :
राणा ने मीरा को मारने के लिए विष का प्याला भेजा था, पर प्रभु की कृपा से विष अमृत बन गया है। मीरा पर विष का कोई प्रभाव न पड़ा।

प्रश्न 6.
मीरा का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
मीरा का जन्म 1504 ई० में जोधपुर (राजस्थान) में हुआ था।

प्रश्न 7.
द्रोपदी की लाज किसने और कैसे बचाई ?
उत्तर :
द्रोपदी की लाज कृष्ण ने उसका वस्त्र (चीर) बढ़ाकर बचाई।

प्रश्न 8.
पाण्डव कितने थे ? उनके नाम लिखें।
उत्तर :
पाण्डब पाँच थे – युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, और सहदेव।

प्रश्न 9.
भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए कौन-सा रूप थारण किये थे ?
उत्तर :
भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए नरसिंह रूप धारण किये थे।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

प्रश्न 10.
प्रभु ने हाथी की रक्षा किससे की थी ?
उत्तर :
प्रभु ने हाथी को मगरमच्छ के मुँह से बचाया था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) मीरा के नेत्रों में कृष्ण का कौन-सा रूप बस चुका है?
उत्तर :
जिसकी मूर्ति मन को मुग्ध कर लेती है, जिसका रूप साँवला सलोना है, आँखें विशालहैं, मस्तक पर मोर मुकुट, कानों में मकर के आकार के कुंडल, मस्तक पर लाल टीका, अधरों पर मुरली, वक्षस्थल पर वैजंती माला, कमर की करधनी में घुँचरू, पैरों में नूपुर शोभाय- मान हो रहे हैं। कृष्णा का यही रूप मीरा के नेत्रों में बस चुका है।

(ख) कृष्ण ने अपने किन-किन भक्तों की कैसे रक्षा की?
उत्तर :
श्री कृष्ण ने द्रौपदी के लाज की रक्षा उसका चीर (साड़ी) बढ़ाकर, भक्त प्रह्षाद की रक्षा नृसिंह का रूप धारण कर हिरण्यकश्यप को मारकर, जल में डूबते हुए गजराज की रक्षा उसे जल से बाहर निकाल कर की ।

(ग) गोकुल के प्रभात का वर्णन कीजए।
उत्तर :
गोकुल में प्रभात (सुबह) हो जाने पर हर घर के दरवाजे खुल गए। सभी लोग जाग गए। गोपियाँ दधि (दही) मथने लर्गी। उनके कंगन की ध्वनि सुनाई पड़ने लगी। कृष्ण के दरवाजे पर देवता, मनुष्य सभी खड़े हो गए। गोप बालक जय-जयकार करने लगे।

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(घ) ‘करम गति टारे नाहिं टरे’ के सन्दर्भ में मीरा ने किन-किन उदाहरणों को प्रस्तुत किया है?
उत्तर :
इस सन्दर्भ में मीरा ने उदाहरण दिया है कि सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र को वाराणसी में डोम के यहाँ काम करना पड़ा। पाण्डवों, कुन्ती तथा द्रौपदी को हिमालय के बर्फ में गल जाना पड़ा। बलि ने स्वर्ग के लिए यज्ञ किया पर उसे पाताल जाना पड़ा। अत: कर्म की गति अटल है।

(ङ) निम्नलिखित पंक्तियों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए।

(अ) ‘उठो लाल जो भोर भयी है, सुरनर ठाढ़े द्वारे।
ग्वाल बाल सब करत कोलाहल जय जय सबद उचारे।’
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में माता यशोदा सबेरा हो जाने पर प्यारे कन्हैया को जगाते हुए कहती है-हे लाल, प्रभात वेला हो गई है, इसलिए अब जाग जाओ। देवता और मनुष्य दरवाजे पर तुम्हारे दर्शन और तुम्हारी वंदना करने के लिए खड़े हैं।
सबेरा हो जाने पर सभी गोप बालक जयकार शब्द का उच्चारण करते हुए कोलाहल कर रहे हैं। सभी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।

(ब) ‘यज्ञ किया बलि लेन इन्द्रासन, से पाताल धरे।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, विष से अमृत करे।’
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा ने स्यष्टिया है कि भाग्य प्रबल होता है। संसार में हर व्यक्ति को कर्म का परिणाम भोगना पड़ता है। राजा बलि ने इन्द्र का साम्राज्य स्वर्ग प्राप्त करने के लिए महान यज्ञ किया पर कर्म की गति के अनुसार पाताल लोक में जाना पड़ा। कहावत है कि बलि चाहा आकाश (स्वर्ग) को भेज दिया पात्राल। गिरि को धारण करने वाले भगवान कृष्ण मीरा के एकमात्र स्वामी हैं। उन्होंने कृपा कर विष को भी अमृत बना दिया। राणा ने मीरा को मारने के लिए प्याले में विष भेजा, पर प्रभु ने विष को अमृत बना कर मीरा की रक्षा की।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पठित पदों के आधार पर मीरा की भक्ति भावना का परिचय दीजिए।
उत्तर :
मीरा कृष्ण भक्ति में पूर्णतया आसक्त थी। उनके काव्य में कृष्ण भक्ति का बड़ा ही सरस तथा मधुर रूप मिलता है। मीरा अपने इष्टदेव कृष्ण की प्रेमिका थीं। मीरा के लिए उनके आराध्य कृष्ण ही सर्वस्व थे। प्रिय के लिए ही मीरा ने सभी-सगे संबंधियों तथा कुल-मर्यादा के बंधनों को त्याग दिया।

मीरा अपने नेत्रों में अपने प्रिय कृष्ण की मूर्ति को बसाना चाहती थीं। वे नंदलला के उसी रूप को आँखों में बसाना चाहती थी जिनका साँवला सलोना रूप अत्यंत मोहक है, जिनके नेत्र विशाल हैं। जिनके माथे पर तिलक तथा सिर पर मयूर पंखों से निर्मित मुकुट शोभायमान है। अधरो पर मुरली, वक्ष पर बैजन्ती माला, कमर में करधनी तथा पैरों में नूपुर शोभायमान है। मीरा का स्पष्ट कथन है कि प्रभु कृष्णा सन्तों को सुख देने वाले तथा भक्तों के अत्यंत प्यारे हैं।

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मीरा अपने प्रिय के ऐसे मोहक रूप की उपासिका थीं। वंशीधारण करने वाले प्रिय कृष्ण सदा उनके इदय में बसते हैं। कृष्ण अत्यंत चतुर हैं। उन्होंने ब्रज वासियों की रक्षा के लिए गोवर्षन पर्वत को अपनी उँगली पर उठा लिया था। ऐसे प्रभु को संबोधित करते हुए मीरा निवेदन करती हैं कि हे प्रभु मैं आपके शरण में हूँ। अत: इस संसार सागर से मेरा उद्धार कर मुझे अपना लीजिए।

मीरा कर्म की गति को स्वीकार करती थी। इस संदर्भ में उन्होंने सत्यवादी हरिश्चन्र, पाण्डवों, द्रौपदी तथा बलि का उदाहरण दिया है। प्रभु की महिमा का वर्णन करते हुए बतलाया है कि प्रभु अपने भक्तो की रक्षा के लिए विष को भी अमृत बना देते हैं। तल्कालीन राणा जी ने मीरा की इहलीला समाप्त करने के लिए विष का प्याला भेजा। मीरा हैसते हुए प्रभु का स्मरण कर उसे पी गई। ईश्वर की कृपा से विष अमृत बन गया। उसे पीकर मीरा अमर हो गई। सासारिक बाधाओं, कष्टों को झेलते हुए भी मीरा अपनी दृढ़ निष्ठा के साथ अनन्य भक्ति-भावना पर अडिग बनी रहीं। मीरा का समग्र जीवन ही कृष्णमय बन गया था। मीरा के लिए कृष्ण भक्ति उनके जीवन का शाश्वत वरदान तथा अमूल्य संपत्ति है। मीरा की यह माधुर्य भाव की भक्ति सचमुच अनुपम थी।

प्रश्न 2.
भगवान ने अपने भक्तों की रक्षा किस प्रकार की ? मीरा उन भक्तों का हवाला क्यों देती हैं ? क्या मीरा का ऐसा करना आपकी दृष्टि से उचित है ? तर्क सहित उत्तर लिखिए।
उत्तर :
भगवान ने अपने भक्तों की रक्षा अनेक प्रकार से की। उन्होंने द्रौपदी की लाज बचाने के लिए उसे वस्त्र प्रदान किए। जब दुर्योधन और उसके साथियों द्वारा भरी सभा में द्रैपदी की साड़ी उतारी जा रही थी तो कृष्ण ने वहाँ उपस्थित होकर उसे वस्व प्रदान किए। उन्होंने प्रहलाद को बचाने के लिए हिरण्यकश्यप का नाश किया। इसके लिए उन्होंने नरसिंह का रूप धारण किया और उसका पेट फाड़ा डाला। इसी प्रकार उन्होंने डूबते हुए हाथी को अपना सहारा देकर मगरमच्छ के मुँह से बचा लिया।

मीरा इन भक्तो का हवाला इसलिए देती हैं ताकि वह ईश्वर के हुदय में अपने प्रति दया जगा सकें। एक भक्त का ऐसा करना बिल्कुल स्वाभाविक है। हर भक्त अपने आराध्य की कृपा चाहता है। वह अपने कष्टों की मुक्ति के लिए उससे अपेक्षा रखता है। एक भक्त अपने आराध्य से नहीं माँगेगा तो फिर वह किसी सांसरिक व्यक्ति से अपेक्षा रखेगा जिससे उसका सम्मान भी कम होगा। संसार की अपेक्षा भगवान से रखना अधिक अच्छा है।

प्रश्न 3.
मीराबाई ने हरि से स्वयं का कष्ट दूर करने की जो विनती की है, उसमें स्वयं का कृष्ण से कौनसा संबंध बताया है ? जिन भक्तों के उदाहरण दिए हैं उनमें से एक पर की गई कृष्ण-कृपा को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
मीराबाई ने स्वयं को कृष्ण की दासी बताया है। इस रूप में उसने कृष्ण से अपने कष्ट हरने की विनती की है। कृष्ण ने अपने भक्तों पर बहुत कृपा की थी। उनका एक भक्त प्रहलाद अपने पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से बहुत दुखी था। हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और कृष्ण के बजाय अपनी भक्ति कराना चाहता था। प्रहलाद ने तब हरि को याद किया तो हरि ने प्रहलाद के दुखों का अंत करने के लिए नरासंह का रूप धारण करके उस दुष्ट का नाश किया था और प्रहलाद को अत्याचारों से मुक्त किया था।

प्रश्न 4.
कृष्ण का चीर बढ़ाना किस कथा की ओर संकेत करता है ?
उत्तर :
महाभारत की कथा में कौरवो ने दुर्योधन के संकेत पर पांडवों की वधू द्रौपदी को भरे दरबार में नग्न करने का बड्यंत्र किया था। तब कृष्ण ने द्रौपदी की लाज-रक्षा के लिए अपनी और से चीर अर्षित किया था।

प्रश्न 5.
अपने आराध्य श्रीकृष्ण के दर्शन पाने के लिए मीरा क्या-क्या उपाय करती हैं ?
उत्तर :
मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण के दर्शन पाने के लिए अनेक उपाय करती हैं। वे उनकी चाकर बनकर उनके महल में रहना चाहती हैं। वे उनके लिए बाग लगाना चाहती हैं जिसमें वे आनंदपूर्वक विहार कर सकें। वे वृन्दावन की गलियों में जा जाकर उनकी आराधना के गीत गाना चाहती हैं ताकि वे उनके प्रति प्रेम प्रकट कर सकें और उनका ध्यान अपनी और खींच सकें। वे कृष्ण का स्नेह और सान्निध्य पाने के लिए कोई भी वेश धारण करने के लिए तैयार हैं।

व्याकरण एवं बोध

(क) शब्दों के शुद्ध रूप
सोभित – शोभित ।
सबद – शब्द ।
कारन – कारण ।
सरीर – शरीर ।
सतबादी – सत्यवादी ।
मूरति – मूर्ति

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(ख) पर्यायवाची शब्द
नन्दलाल – कृष्ण, श्याम, मोहन, गिरिधर।
नीर – जल, पानी, तोय, वारि।
सरीर – तन, काया, देह, बदन।
रजनी – रात, निशा, रात्रि, रैन, विभावरी।
विष-जहर, गरल, हलाहल, माहुर।

(ग) विलोम शब्द
अमृत-विष । पाताल – आकाश । भक्त – भगवान । साँवरी – गोरी । दधि – दूध । छुद्र-विशाल ।

(घ) अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग कीजिए –
गिरिधर-कृष्ण – भगवान कृष्ण को गिरिधर कहते हैं।
गजराज – श्रेष्ठ हाथी – भगवान ने जल में डूबते गजराज की रक्षा की।
पीर – पीड़ा – भगवान भक्तों की पीर हर लेते हैं।
माखन – मक्खन – बच्चों को माखन रोटी अच्छी लगती है।
इन्द्रासन – स्वर्ग का राज्य – बलि ने इन्द्रासन के लिए यज्ञ किया।

WBBSE Class 7 Hindi मीरा के पद Summary

जीवन वरचचय

कृष्ण प्रेम में दीवानी मीरा का जन्म सन् 1503 ई० में राजस्थान में मेड़ता के पास कुड़की नामक ग्राम में हुआ था। ये मेड़तिया के राठौर रत्नसिंह की पुत्री थी। इनका विवाह उदयपुर के राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ हुआ। विवाह के कुछ समय के बाद ही इनके पति का देहांत हो गया। मीरा बचपन से ही कृष्ण भक्ति में लीन रहती थी। इनकी कृष्णभक्ति दिन प्रति दिन बढ़ती गई। मीरा प्रायः मंदिरों में जाकर श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने भक्तों और सन्तों के बीच आंंदमग्न होकर नाचती और भक्तिमय पदों को गाया करती थी।

इनके इस आचरण को राजकीय मर्यादा के प्रतिकूल समझकर तत्कालीन राणा ने विष देकर इनकी जीवन लीला समाप्त करने की चेष्टा की। पर भगवान की कृपा से विष का कोई प्रभाव न पड़ा। इनकी मृत्यु सन् 1546 ई० में द्वारका में हुई। मीरा अपने इष्टदेव भगवान कृष्ण को प्रियतम या पति के रूप में मानकर उनकी उपासना करती थी। मीरा का संपूर्ण काव्य कृष्ण प्रेम और भक्ति का काव्य है। इनकी भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रज भाषा है। भाषा अत्यंत मधुर, सरस तथा प्रभावपूर्ण हैं। मीरा रचित चार काव्य पुस्तकें प्राप्त हैं-नरसीजो मायरो, गीत-गोविन्द टीका, राग गोविन्द, राग सोरठा के पद। मीरा की माधुर्य भाव की भक्ति सचमुच साहित्य की अनुपम निधि है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 1 मीरा के पद

पद -1

बसौ मेरे नैनन में नंदलाल।
मोहिनी मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।
मोर मुकुट मकराकृत कुंडल, अरुण तिलक दिए भाल।
अधर सुधारस, मुरली राजति, उर वैजंती माल।
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर शब्द रसाल।
मीरा के प्रभु सन्तन सुखदाई, भगत बछल गोपाल।।

शब्दार्थ :

  • नैनन – आँखों
  • नंदलाल – नंद के कुमार कृष्ण
  • मोहिनी – मन मोह लेने वाली
  • सूरति – रूप, आकृति
  • विशाल – बड़े
  • मकराकृत – मकर के आकर का
  • अरुण – लाल
  • भाल – मस्तक
  • बछल (वत्सल) प्रेम से पूर्ण
  • अधर – ओठ
  • सुधारस – अमृतरस
  • राजाति – सुशोभित होती है।
  • उर – हृदय
  • छुद्र (क्षुंद्रे) – छोटा
  • कटि – कमर
  • नूपुर – घुँधरू, पायल
  • रसाल-मधुर
  • गोपाल – गौ पालक (श्री कृष्ण)

सन्दर्भ – प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘मीरा के पद’ नामक पाठ से लिया गया है। इसकी रचयिता मीराबाई हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत पद में कवयित्री मीरा ने अपने इष्टदेव भगवान कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति भावना प्रकट की है। वे गोपाल कृष्ण की सुन्दर छवि (शोभा) को अपने नेत्रों में बसा लेना चाहती हैं।

व्याख्या – मीरा नंद के कुमार श्री कृष्ण को अपने नेत्रों में बसाना चाहती हैं। वे कहती हैं कि हे प्रभु, आप सदा हमारे नयनों में निवास कीजिए। मीरा कृष्ण का वह रूप अपने नेत्रों में बसाना चाहती हैं, जिनका रूप मन भावन है, जो साँवले, सलोने रूपवाले हैं, नेत्र विशाल हैं और जिनके मस्तक पर मयूर पंखों से बना मुकुट शोभायमान है।

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मकर के आकार के कुंडल कानों में शोभित हैं। मस्तक पर लाल टीका है। उनके अधरों पर अमृत रस का पान करती मुरली सुशोभित होती हैं। वक्षस्थल पर वैजयन्ती की माला है। कमर में छोट-छोटे घुँघरू सुशोभित हैं। पैरों में नुपुर की ध्वनि बड़ी मधुर है। मीरा कहती हैं कि प्रभु कृष्ण सन्तों को आनंद प्रदान करनेवाले तथा अपने भक्तों के प्यारे हैं। मनभावन कन्हैया का यही भव्य रूप मीरा के नेत्रों में बस चुका है।

पद – 2

हरि तुम हरो जन की पीर।
द्रोपदी की लाज राख्यौ, तुम बढ़ायो चीर।
भक्त कारनरूप नर हरि, धर्यो आप शरीर।
हिरनकस्यप मारि लीन्हों, धर्यो नाहिन धीर।
डूबते गजराज राख्यौ, कियो बाहर नीर।
दासी मीरा लाल गिरधर, हरो मेरी पीर।।

शब्दार्थ :

  • हरो – दूर करना, हर लेना
  • पीर- कष्ट, पीड़ा
  • चीर – वस्त्र
  • जन – भक्त, सेवक
  • धर्यो – धारण किया
  • नरहरि – नृसिंह
  • नीर – पानी
  • राख्यों – रक्षा किया
  • गिरधर – कृष्ण (गिरि को धारण करनेवाले)

व्याख्या – प्रस्तुत पद में माता यशोदा प्रभात वेला में प्यारे कन्हैया को जगा रही हैं। यशोदा जी कह रही हैं प्यारे ललन, वंशी वर कन्हैया जाग जाओ। रात बीत गई, सुन्दर प्रभात हो गया है। हर घर के दरवाजे खुल गए हैं। हर घर के लोग जाग गए हैं। गोपियाँ दही मथने लगी हैं। उनके दही मथने की ध्वनि सुनाई पड़ती है। उनके कंगन की झंकार (ध्वनि) गूँज रही है।

प्यारे लाल उठो, सबेरा हो गया है । दरवाजे पर देव तथा मनुष्य सभी खड़े हैं। गोप बालक जयकार शब्द का उच्चारण कर रहे हैं। उनकी आवाज सुनाई पड़ रही है। मैं हाथ में मक्खन रोटी ले रखी है। तुम तो गायों के रक्षक गोपाल हो उठो। गिरि को धारण करने वाले प्रिय चतुर कृष्ण को संबोधित करते हुए मीरा कहती हैं – हे प्रभु आप मेरे स्वामी हैं। मैंने आपका आश्रय (शरण) ग्रहण किया है। अत: आप मुझे इस संसार-सागर से उद्धार कर दीजिए।

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पद – 3

जागो वंशी वाले, ललना, जागो मेरे प्यारे।
रजनी बीती भोर भयो है, घर-घर खुले किवारे।
गोपी दधि मथियत सुनियत हैं, कंगन के झनकारे।
उठो लाल जो भोर भयी है, सुरनर ठाढ़े द्वारे।
ग्वाल बाल सब करत कोलाहल, जय जय सबद उचारे।
माखन रोटी हाथ में लीनी, गउवन के रखवारे।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण गहे को तारे।।

शब्दार्थ :

  • रजनी – रात
  • भोर – प्रभात, सबेरा
  • किवारे – दरवाजे
  • कंगन – कलाई पर पहनने का आभूषण
  • तारे – उद्धार करता
  • सुरनर – देव-मनुष्य
  • कोलाहल – शोर हल्ला
  • गउवन – गायों
  • रखवारे – रक्षक
  • नागर – चतुर

व्याख्या – प्रस्तुत पद में माता यशोदा प्रभात वेला में प्यारे कन्हैया को जगा रही हैं। यशोदा जी कह रही हैं प्यारे ललन, वंशी वर कन्हैया जाग जाओ। रात बीत गई, सुन्दर प्रभात हो गया है। हर घर के दरवाजे खुल गए हैं। हर घर के लोग जाग गए हैं। गोपियाँ दही मथने लगी हैं। उनके दही मथने की ध्वनि सुनाई पड़ती है। उनके कंगन की झंकार (ध्वनि) गूँज रही है।

प्यारे लाल उठो, सबेरा हो गया है। दरवाजे पर देव तथा मनुष्य सभी खड़े हैं। गोप बालक जयकार शब्द का उच्चारण कर रहे हैं। उनकी आवाज सुनाई पड़ रही है। मैं हाथ में मक्खन रोटी ले रखी है। तुम तो गायों के रक्षक गोपाल हो उठो। गिरि को धारण करने वाले प्रिय चतुर कृष्ण को संबोधित करते हुए मीरा कहती हैं – हे प्रभु आप मेरे स्वामी हैं। मैंने आपका आश्रय (शरण) ग्रहण किया है। अत: आप मुझे इस संसार-सागर से उद्धार कर दीजिए।

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पद – 4

करम गति टारे नाहिं टरे।
सतबादी हरिश्चन्द्र से राजा नीच घर नीर भरे।
पाँच पाण्डु अरु कुन्ती द्रोपदी, हाड़, हिमालय गरे,
यज्ञ किया बलि लेन इन्द्रासन से पाताल धरे।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, विष से अमृत करे।।

शब्दार्थ :

  • करम – कर्म, भाग्य
  • गति – दशा, परिणाम
  • सतबादी- सत्यवादी
  • नीर – पानी
  • गरे – गल गए
  • हाड़ – हड्डी
  • अरु – और
  • विष – जहर

व्याख्या – प्रस्तुत पद में मीरा का कथन है कि इस संसार में हर व्यक्ति को कर्म का परिणाम भोगना पड़ता है, मीरा कहती हैं कि कर्म का परिणाम सभी को भोगना पड़ता है। कर्म की गति टालने से नहीं टल सकती। पौराणिक उदाहरणों से इस तथ्य को समझाया गया है। प्राचीन युग में राजा हरिश्चन्द्र बड़े ही सत्यवादी थे, पर उन्हें अधम (डोम) के घर पानी भरना पड़ा।

पाण्डवों ने महाभारत युद्ध में विजय हासिल की। उनकी वीरता अनुपम थी। पर पाँचों पांडव, कुन्ती तथा द्रौपदी सभी की हड्डियाँ हिमालय के बर्फ में गल गईं। राजा बलि ने इन्द्र का आसन-स्वर्ग का राज्य पाने के लिए यज्ञ किया, पर वे स्वर्ग नहीं पहुँचे। बल्कि पाताल में जाना पड़ा। मीरा का कथन है कि गिरिधर गोपाल ही उसके जीवन के सर्वस्व हैं। प्रभु ने अपनी कृपा से विष को भी अमृत बना दिया। राणा जी ने उन्हें मारने के लिए विष का प्याला दिया, लेकिन उनका कुछ नहीं बिगड़ा। प्रभु ने विष को अमृत बना दिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 8 वापसी to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – वापसी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि लौटकर किस वृक्ष पर बसेरा बनाया चाहता है?
(क) आम
(ख) बरगद
(ग) नीम
(घ) पीपल
उत्तर :
(ग) नीम।

प्रश्न 2.
पलाश के फूलों का रंग होता है-
(क) पीला
(ख) हरा
(ग) नीला
(घ) लाल
उत्तर :
(घ) लाल।

प्रश्न 3.
हम किसे लक्ष्य नहीं कर पाएँगे?
(क) कवि को
(ख) नई छाल को
(ग) फूलों को
(घ) हरियाली को
उत्तर :
कवि को।

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प्रश्न 4.
हरियाली से हमें क्या मिलता है?
(क) दुःख और पीड़ा
(ख) राहत और सुख
(ग) क्रोध और घृणा
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) राहत और सुख।

प्रश्न 5.
कौन पक्षी के रूप में वापस आएगी ?
(क) पंरपराएँ
(ख) लेखक
(ग) जीवन
(घ) हरियाली
उत्तर :
(क) पंरपराएँ

प्रश्न 6.
‘वापसी’ कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है ?
(क) शहर अब भी संभावना है
(ख) बहुरि अकेला
(ग) तत्पुरूष
(घ) घास में दूब का आकाश
उत्तर :
(क) शहर अब भी संभावना है

प्रश्न 7.
हो सकता है हम लौटें –
(क) पक्षी की तरह
(ख) हवा की तरह
(ग) रेत की तरह
(घ) नदी की तरह
उत्तर :
(क) पक्षी की तरह

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

प्रश्न 8.
कवि कहाँ घोंसला बनाने की बात करता है ?
(क) पेड़ पर
(ख) छत पर
(ग) दरवाजे पर
(घ) बरामदे के पंखे के ऊपर
उत्तर :
(घ) बरामदे के पंखे के ऊपर

प्रश्न 9.
कवि के अनुसार कौन वापस आयेंगे और पहचाने न जायेंगे ?
(क) पक्षी
(ख) परंपरा
(ग) बगीचा
(घ) फूल-पेड़
उत्तर :
(ख) परंपरा

प्रश्न 10.
गडुमडु का अर्थ है –
(क) आपस में मिल जाना
(ख) अलंग-अलग होना
(ग) अबोध होना
(घ) विलुप्त होना
उत्तर :
(क) आपस में मिल जाना

प्रश्न 11.
कौन एक जैसे रहेंगे ?
(क) प्राकृतिक तत्व
(ख) लेखक
(ग) पक्षी
(घ) जीवन
उत्तर :
(क) प्राकृतिक तत्व

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि कहाँ घोंसला बनाना चाहता है ?
उत्तर :
कवि बरामदे में पंखे के ऊपर घोंसला बनाना चाहता है।

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प्रश्न 2.
कवि को क्यों लगता है कि हम उसे नहीं पहचान सकेंगे?
उत्तर :
कवि पक्षी की तरह रूप बदलकर आएगा, और बारिश के बाद हरियाली में वह बिखरा हुआ रहेगा। इसी से उसे लगता है कि हम उसे पहचान नहीं सकेंगे।

प्रश्न 3.
बारिश के बाद क्या छा जाती है?
उत्तर :
बारिश के बाद हरियाली छा जाती है।

प्रश्न 4.
कवि की पहचान को कौन बदल देगा?
उत्तरः
कवि की पहचान को आधुनिक जीवन संस्कृतियों की चकाचौंध में बेसुध लोग बदल देंगे।

प्रश्न 5.
अशोक वाजपेयी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
अशोक वाजपेयी का जन्म 16 जनवरी सन् 1941 को मध्य प्ददेश के दुर्ग जिला में हुआ था।

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार हम कैसे बदल जाएँगे ?
उत्तर :
कवि के अनुसार हम बिना रूप बदले ही बदल जाएँगे।

प्रश्न 7.
परंपरा को क्यों लक्ष्य नहीं किया जा सकता ?
उत्तर :
परंपरा विविध प्रकार के चकाचौंध के मध्य छिपी रहती है, जिसे आसानी से लक्ष्य नहीं किया जा सकता।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार हमें क्या पता नहीं चलेगा ?
उत्तर :
कभी-कभी परंपराएँ और मूल्य बहुत ही चुपके से हमारे जीवन के आकर्षणों के बीच सरल रूप से प्रवेश कर जाएँगे कि हमें पता भी नहीं चलेगा।

प्रश्न 9.
किन-चीजों को अलग कर पाना संभव नहीं हो पायेगा ?
उत्तर :
जीवन-मूल्य और परंपराएँ इस कदर एकाकार हो जायेंगे कि उनको इन चीजों से अलग कर पाना संभव नहीं हो पायेगा।

प्रश्न 10.
किसका मात्र रूप बदलेगा ?
उत्तर :
परंपराओं का मात्र रूप बदलेगा।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘तुम बिना रूप बदले भी, बदल जाओगे….. का क्या आशय है?
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर व्याख्या-३ में देखिए।

प्रश्न 2.
हमें अपनी परंपरा, अपने पूर्वजों और अपनी प्रकृति के प्रति सहिष्णु क्यों होना चाहिए?
उत्तर :
मनुष्य व्यक्तित्व का निर्माण उसकी परंपरा, पूर्वजों के संस्कार तथा अपनी स्वाभाविक प्रकृति से होता है। अपनी पुरानी परंपरा ने हमारे रीति रिवाज का गठन किया है। हमें एक सुव्यस्थित संस्कार दिया है। परंपराएँ ही हमारी पहचान है। कुछ विकृत रूढ़िवादी विचारों का हम त्याग कर सकते हैं, पर पुराना सब खराब है अनुपयोगी है यह कहा नहीं जा सकता। हमारे सामाजिक ढाँचे की रचना इसी परंपरा की है। हमारे पूर्वजों ने अपने ज्ञान, आदर्श से दुनिया में अपना स्थान बनाया था। इसलिए हम अपनी परंपरा तथा पूर्वजों को नजर अंदाज नहीं कर सकते। अतः हमें अपनी परंपरा, पूर्वजों तथा अपनी प्रकृति के प्रति सहिष्णु होना चाहिए।

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व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. या फिर थोड़ी सी बारिश के बाद
तुम्हारे घर के सामने छा गयी
हरियाली की तरह वापस आएँ हम
जिससे राहत और सुख मिलेगा तुम्हें
पर तुम जान नहीं पाओगे कि
उस हरियाली में हम छिटके हुए हैं।

प्रश्न :
(क) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उद्ध्धत है?
(ख) बारिश के बाद क्या परिवर्तन हो जाता है?
(ग) इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ अशोक बाजपेयी रचित कविता ‘वापसी से उद्धृत है।
(ख) बारिश के बाद वातावरण में शीतलता का सुखद अहसास होता है। चांरों ओर हरियाली छा जाती है।
(ग) कवि का कथन है कि बारिश के बाद हरियाली छा जाने पर वह अपनी प्रकृति तथा परंपरा में आएगा। लोगों को सुख-सुविधा की अनुभूति होगी। पर वे कवि को पहचान नहीं पाएँगे।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित वाक्यांश में आए कारक विभक्तियों का नाम लिखिए-
(क) पक्षी की तरह
(ख) पलाश के पेड़ पर नई छाल की तरह
(ग) हमारी पहचान हमेशा क लिए गड्डमड्ड हो जाएगी।
उत्तर :
(क) पक्षी की – सम्बंध कारक।
(ख) पलाश के – संबंध कारक
पेड़ पर-अधिकरण कारक
छाल की – संबंध कारक।
(ग) हमारी – संबंध कारक, के लिए संप्रदान कारक।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

2. वाक्यों में प्रयोग कर लिंग निर्णय कीजिए-

पक्षी – पक्षी डाल पर बैठा है- पुल्लिंग।
बगिया – हमारे घर के सामने छोटी-सी बगिया है- स्त्रीलिंग।
घोंसला – वृक्ष पर घोंसला बना हुआ है- पुल्लिग।
हरियाली – बारिश के बाद हरियाली छा गई – स्त्रीलिंग।
रूप – लड़का का रूप अच्छा लग रहा है- पुल्लिंग।

WBBSE Class 8 Hindi वापसी Summary

कवि परिचय :

अशोक वाजपेयी का जन्म सन् 1941 ई० में मध्य प्रदेश में हुआ था। वाजपेयी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम०ए० की परीक्षा पास की। उन्होने भारत सरकार के संस्कृति विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर भी कार्य किया। इनकी प्रमुख रचनाएँ – शहर अब भी संभावना है, एक पतंग अनंत में, तत्पुरुष, बहुरि अकेला, कहीं नहीं वहीं इनके काव्य संग्रह है। वाजपेयी जी रागवृत्ति के कवि हैं। उनकी कविता के मुख्य विषय हैं- प्रेम, प्रकृति जीवन और मृत्यु। इनकी भाषा सरल, बोधगाम्य है। इन्होंने काव्य को नये राग में सँवारा।

शब्दार्थ :

  • बरजो = मना करना।
  • बसेरा = आश्रय।
  • राहत = आराम, छुटकारा।
  • छिटके = बिखरा होना, अलग होना।
  • बगिया = बगीचा। रक्तिम = लाल।
  • लक्ष्य = निशाना, उद्देश्य।
  • चकाचौंध = तिलमिलाहट, रंगीनियाँ।
  • गड्डमड्ड = घालमेल, तालमेल अव्यवस्थित रूप से एक दूसरे से मिलाया हुआ।

1. जब हम वापस आयेंगे
तो पहचाने न जायेंगे –
हो सकता है हम लौटें
पक्षी की तरह
और तुम्हारी बगिया के किसी नीम पर बसेरा करें
फिर जब तुम्हारे बरामदे के पंखे के ऊपर
घोंसला बनायें
तो तुम्हीं हमें बार-बार बरजो –

सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्यांश ‘वापसी’ कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता अशोक वाजपेयी है।
सन्दर्भ – इस कविता में कवि ने ‘आज के जीवन में परपपरा और स्थापित जीवन मूल्यों के प्रति लोगों की अनभिज्ञता को दिखलाया हैं।

व्याख्या – कवि का कथन है कि जब वह लौटकर पुनः आएगा तो लोग उसे पद्नचान नहीं सकेंगे। संभव है कि वह पक्षी की तरह लौटकर तुम्हारे बगीचे में किसी नीम के पेड़ पर अपना बसेरा घोसला बनाए। फिर वह तुम्हारे बरामदे में पंखे के ऊपर अपना घोसला बनाए। लेकिन बार-बार तुम ना करोगे, हटाने की चेष्टा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

2. या फिर थोड़ी सी बारिश के बाद
तुम्हारे घर के सामने छा गयी
हरियाली की तरह वापस आयें हम
जिससे राहत और सुख मिलेगा तुम्हें
पर तुम जान नहीं पाओगे कि
उस हरियाली में हम छिटके हुए हैं

व्याख्या – कवि कह रहा है कि यदि थोड़ा-सी वर्षा हो जाएगी तो बारिश के बाद तुम्हारे घर के सामने हरियाली छा जाएगी। उस समय वह हरियाली की तरह उल्लास पूर्वक आएगा। हरियाली से तुम्हें आराम और सुख-शांति की अनुभूति होगी। पर तुम अपने सुख-चैन में इस प्रकार बेसुध बने रहोगे कि हमें पहचान नहीं पाओगे। उस हरे भरे वातावरण में हम बिखरे हुए रहेंगे।

3. हो सकता है हम आयें
पलाश के पेड़ पर नयी छाल की तरह
जिसे फूलों की रक्तिम चकाचौंध में
तुम लक्ष्य भी नहीं पर पाओगे
हम रूप बदलकर आयेंगे
तुम बिना रूप बदले भी
बदल जाओगे –

व्याख्या : कवि ने स्पष्ट किया है कि संभव है कि वह दुबारा पलाश वृक्ष पर नवीन छाल की तरह आए। पलास के लाल-लाल फूलों की चमक में तुम मुझे देख भी न पाओगे। इस प्रकार कवि ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक जीवन संस्कृति तथा शैली में लोग अपने पुरानी संस्कृति परंपरा से अनजान बन गए हैं। फिर कवि कह रहा है कि वह तो रूप बदलकर आएगा। पर तुम बिना बदले ही बदल जाओगे।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

4. हालाँकि घर, बगिया,पक्षी-चिड़िया,
हरियाली फूल-पेड़ वहीं रहेंगे
हमारी पहचान हमेशा के लिए गड्डमड्ड कर जायेगा
वह अन्त
जिसके बाद हम वापस आयेंगे
और पहचाने न जायेंगे

व्याख्या : कवि ने स्पष्ट किया है कि घर, बाग-बगीचे, पक्षी-चिड़िया फूल, वृक्ष तथा वातावरण की हरियाली वैसे ही अपरवर्तित बनी रहेगी। पर हमारी पहचान खो जाएगी। सदा के लिए हमारी पहचान अव्यवस्थित रूप से एक दूसरे से मिल जाएगी। इस घालमेल के कारण हमारी पहचान अबोध बन जाएगी। इस प्रकार हमारा अन्त इसी रूप में होगा कि पुन: वापस आने पर पहचाने नहीं जाएँगे। हमारी पहचान ही विलुप्त हो जाएगी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – नई नारी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
नई नारी किस चाल से चलती है?
(क) तामसी
(ख) सादगी
(ग) राजसी
(घ) निर्भीक
उत्तर :
(ख) सादगी भरी

प्रश्न 2.
‘नई नारी’ कविता के रचयिता है?
(क) सुब्रह्मण्य स्वामी
(ख) राधाकृष्ण भारती
(ग) सुबह्मण्य भारती
(घ) केशवदास
उत्तर :
(ग) सुब्रह्मण्य भारती।

प्रश्न 3.
नई नारी किससे गौरवान्वित है?
(क) शृंगार की दीप्ति से
(ख) विद्या की दीप्ति से
(ग) धन की दीप्ति से
(घ) शक्ति की दीप्ति से।
उत्तर :
(ख) विद्या की दीप्ति से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 4.
नई नारी को कहाँ भटकना स्वीकार नहीं है?
(क) मिथ्या परंपराओं में
(ख) अज्ञान के अंधेरे में
(ग) सुख-सुविधाओं के संसार में
(घ) अंधविश्वास के बंधन में
उत्तर :
(ख) अज्ञान के अंधेरे में।

प्रश्न 5.
नारी अपने व्यवहार से किससे प्रशंसा प्राप्त कर लेगी ?
(क) कवि से
(ख) पुरूषों से
(ग) समाज से
(घ) देवता से
उत्तर :
(ख) पुरूषों से

प्रश्न 6.
नई नारी कविता के रचनाकार कौन हैं ?
(क) निराला
(ख) गोपाल दास
(ग) सी० सुब्रह्मण्य भारती
(घ) बाजपेयी
उत्तर :
(ग) सी० सुब्रह्मण्य भारती

प्रश्न 7.
हिकारत का अर्थ है –
(क) घृणा
(ख) झूठ
(ग) प्रथा
(घ) अंधविश्वास
उत्तर :
(क) घृणा

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 8.
आज की नारी कैसी अनुभूति कर रही है ?
(क) गौरव की
(ख) चकाचौंध
(ग) विलासिला
(घ) विकास
उत्तर :
(क) गौरव की

प्रश्न 9.
कैसे विहीन जीवन को आज की नारी हिकारत से नामंजूर कर देती है ?
(क) सुःख
(ख) संस्कृति
(ग) विद्या
(घ) दु:ख
उत्तर :
(ख) संस्कृति

प्रश्न 10.
कवि के अनुसार कौन सभी अंधविश्वासों को तोड़ फेंकेंगी ?
(क) आज की नारी
(ख) कविं
(ग) भारती जी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) आज की नारी

प्रश्न 11.
नई नारी ने किसका अध्ययन कर ज्ञान प्राप्त किया हैं ?
(क) विचारों का
(ख) संस्कृति का.
(ग) शास्त्रों का
(घ) आचरण का
उत्तर :
(ग) शास्त्रों का

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 12.
सी० सुब्रह्यण्य भारती मूलतः किस भाषा के रचनाकार हैं ?
(क) हिन्दी
(ख) अंग्रजी
(ग) बंगला
(घ) तमिल
उत्तर :
(घ) तमिल

प्रश्न 13.
नई नारी किस चीज को तोड़ फेकेंगी ?
(क) परंपरा,
(ख) विश्वास
(ग) संस्कृति
(घ) अंधविश्वास
उत्तर :
(घ) अंधविश्वास

प्रश्न 14.
सुक्रह्यण्य भारती को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
(क) महाकवि कालिदास
(ख) महाकवि भरतियार
(ग) महाकवि तुलसीदास
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) महाकवि भरतियार

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
नई नारी को क्या स्वीकार नहीं है?
उत्तर :
नई नारी को अज्ञान, अशिक्षा के गहरे अंधकार में भटक जाना स्वीकार नहीं है।

प्रश्न 2.
नई नारी किसका अध्ययन करेंगी?
उत्तर :
नई नारी अनेकानेक शास्त्रों का अध्ययन करेंगी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 3.
कवि किनको तोड़ने और हटाने की कामना करता है ?
उत्तर :
कवि पुरानी गलत परंपराओं को हटाने और सभी अंधविश्वासों को तोड़ने की कामना करता है।

प्रश्न 4.
नई नारी निर्भीक क्यों है?
उत्तर :
नई नारी अपनी शिक्षा, स्थिर बुद्धि, विचार के कारण निर्भीक है।

प्रश्न 5.
आधुनिक युग में स्त्रियाँ कौन-सा स्थान प्राप्त कर ली हैं ?
उत्तरः
आधुनिक युग में स्तियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर उसके प्रकाश से समाज तथा देश में गैरवपूर्ण स्थान प्राप्त कर ली हैं।

प्रश्न 6.
सुक्रह्मण्य भारती का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
सुबह्हण्य भारती का जन्म 11 दिसंबर 1882 ई० को तिरुनेवेली जिला (तमिलनाडूर) के एट्टयपुरम गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
नई नारी कविता का हिन्दी अनुवाद किसने किया है ?
उत्तर :
नई नारी कविता का हिन्दी अनुवाद प्रभाकर द्विवेदी ने किया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 8.
नई नारी किसका ध्यान रखेंगी ?
उत्तर :
नई नारी हर प्रकार के मानव गतिविधि का ध्यान रखेंगी।

प्रश्न 9.
नई नारी किसको देवतुल्य बनाना चाहती हैं ?
उत्तर :
नई नारी सभी मनुष्यों को देवतुल्य बनाना चाहती हैं।

प्रश्न 10.
आज की नारी किस ओर अग्रसर हो रही है ?
उत्तर :
आज की नारी विकास के विभिन्न क्षेत्रों की ओर अग्रसर हो रही है।

प्रश्न 11.
कवि के अनुसार आज की नारी कैसी है ?
उत्तर :
कवि के अनुसार आज की नारी शिक्षित, ज्ञानी, और अध्ययनशील है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि सुब्रह्यण्य भारती ने नई नारी में किन-किन गुणीं की कल्पना की है?
उत्तर :
नई नारी विद्या की आभा से सम्मानित होती है। वह दृढ़ चित्त वृत्ति वाली वर्तमान जीवन की चकाचौंध से अप्रभावित, अज्ञान से मुक्त होगी। वह सभ्य संस्कृति के जीवन स्वीकार करेगी। शास्त्रों का अध्ययन कर जीवन को सुखद बना देगी। पुरानी गलत परंपराओं, अंधविश्वासों को तोड़ देगी। मानव के आचरण व्यवहार पर ध्यान रखेगी। कवि ने इन्हीं गुणों की कल्पना की है।

प्रश्न 2.
‘वे कभी चकाचौंघ में राह नहीं भूल सकती’ – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
नई नारी अपनी विद्या, ज्ञान के प्रभाव से स्थिर विचार वाली होगी और जीवन की रंगीनियों में पड़कर अपना सही मार्ग नहीं भूलेंगी। कभी भी गलत आचरण, व्यवहार को नहीं अपनाएँगी। वह सदा सच्चे राह पर ही चलना पसंद करती है। अपने आचरण व्यवहार को सदा मर्यादित बनाए रखेंगी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 3.
नई नारी के विकास का मार्ग में कौन-सी बाधाएँ हैं और वह कैसे दूर कर सकते है?
उत्तर :
नई नारी के मार्ग में अशिक्षा, पुरानी गलत परंपराएँ अंधविश्वास आदि बाधाएँ है नारी उसे अपनी शिक्षा, ज्ञान, दृढ़ चित्त वृत्ति, सादगी, अपने शास्त्र अध्ययन से दूर कर सकती हैं।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
देश एवं समाज के सर्वांगीण विकास के लिए नारी का शिक्षित और प्रगतिशील होना आवश्यक है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
आधुनिक युग में नारी सुश्शिक्षित होकर आगे बढ़ रही और हैं विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर हो रही है। यह देश और समाज के लिए शुभ और कल्याणकारी है। यह निर्विवाद सत्य है कि नारी के उत्थान तथा योग़दान के बिना किसी भी देश या समाज की सच्ची प्रर्गति नहीं हो सकती। जैसे एक पहिये से रथ की गति आगे नहीं बढ़ती वैसे ही नारी के बिना समाज का प्रगति का रथ आये नहीं बढ़ सकता।

आज नारियाँ सुशिक्षित होकर विद्या-ज्ञान की चमक से गौरवान्वित हो रही हैं। पढ़ी-लिखी प्रबुद्ध नारियाँ दृढ़ चित्तवृत्ति वाली होती हैं। वातावरण की चकाचौंध में वे कभी सन्मार्ग से नहीं भटक सकती। ज्ञान की कांति से वे सदा जगमगाती रहती है। कभी अज्ञान के अंधकार में भटक नहीं सकतीं। अपना सच्चा रास्ता कभी भूल नहीं सकतीं। वे अपनी संस्कृति, सभ्यता, चाल, व्यवहार, नम्रता को कभी छोड़ नहीं सकती असंस्कृत जीवन को घृणा पूर्वक अस्वीकार कर देती हैं।

शिक्षित विदुषी, नारियाँ ही सभी शास्तों का अध्ययन कर सकती हैं। अपने व्यवहार तथा सद्जान और विवेक से जीवन को सुख-सुविधाओं से संपन्न बना देती है। वे नारियाँ युगों से व्याप्त अंध-विश्वासों अनुपयोगी दकियानूसी विचारों को त्यागकर समाज-घर को वातावरण को दिव्य तथा सुखद बनाएँगी। घर में नवनिता आधुनिकता लाएँगी। । पत्येक मानव की गतिविधियों को जाँच परख कर सभी में दैवी गुणों का संचार कर सभी को देवता के समान दिव्य एवं लोकहितकारी बना देगी। अत: आधुनिक युग में प्रबुद्ध नारी समाज को नई दिशा, नई गति दे सकती है।

भाषा बोध :

1. ‘ना’ उपसर्ग जोड़कर शब्द बनाइए-
नामंजूर, नालायक, नापाक, नापसंद, नाकाबिल, नाखुश, नाबालिग।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

2. निम्नलिखित समोच्चरित भिन्नार्थक शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

  • नारी – नारी आज विद्या के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
  • नाड़ी – वैद्य नाड़ी देखकर रोग का निदान करते हैं।
  • विद्या- विद्या सबसे बड़ा धन है।
  • विधा – सदा सही विधा पर अमल करना चाहिए।
  • घन – आकाश में घन छाये हुए हैं।
  • धन – जीवन में धन का महत्व है।
  • शास्त्र – आज की नारी शास्त्र अध्ययन करती है।
  • शस्त्र – शस्त्र से शुत्र नहीं, मित्र बनाना चाहिए।
  • देव – शिव महान देव है।
  • देह – देह रक्षा करना सब का कर्त्तव्य है।

WBBSE Class 8 Hindi नई नारी Summary

कवि परिचय :

सुब्रह्मण्य ज़ी का जन्म सन् 1882 ई. में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जनपद के एट्टयपुरम में हुआ था। तमिल पुनर्जागरण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन्होंने अनेक पत्रिकाओं का संपादन तथा प्रकाशन किया। पांचाली, शपथम, कन्नन पाटदु (कृष्णगीत) और कुचिल पाट्दु (कोयल गीत) इनकी तीन महत्वपूर्ण कविताएँ हैं। देश प्रेम तथा भारत महिमा पर भी इन्होंने अच्छे गीतों की रचना की। सन् 1921 ई० में इनका देहावसान हो गया।

1. और वह गौरवान्वित है अपनी विद्या की दीप्ति से।
ऐसी स्त्रियाँ स्थिरमति वाली होती हैं और
वे कभी चकाचौंध में राह नहीं भूल सकतीं।
अज्ञान के घने अंधकार में
भटक जाना उन्हें कतई स्वीकार नहीं।

शब्दार्थ :

गौरवान्वित = सम्मानित।
चकाचौंध = तिलमिलाहट, तीव्र प्रकाश के कारण आखों का झँपना।
दीप्ति = चमक, प्रकाश।
घन = घना, अधिक।
स्थिरमति = दृढ़ बुद्धि विचार।
कतई = पक्का, बिलकुल।

सन्दर्भ – प्रस्तुत अवतण ‘नई नारी’ कविता से उद्धृत है। इसके रचनाकार सी० सुबह्मण्य है।
प्रसंग – प्रस्तुत कविता में कवि ने आधुनिक प्रर्गतिशील, प्रबुद्ध नारी के जीवन के विविध क्षेत्रों में अग्रसर होने की ओर ध्यान केन्द्रित किया है।

व्याख्या – आधुनिक युग में स्त्रियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर उसके प्रकाश से समाज तथा देश में गौरव पूर्ण स्थान प्राप्त कर ली हैं, और सम्मानित भी हुई हैं। ऐसी सुशिक्षित स्त्रियाँ दृढ़ बुद्धि-विचार वाली होती हैं। वे जीवन की रंगीनियों में पड़कर कभी अपना सच्चा रास्ता नहीं भूलतीं। सदा सन्मार्ग पर ही अग्रसर होती है। अज्ञान के सघन अंधकार में कभी भी भटक नहीं सकती। पथ भ्रष्ट होना, गलत रास्ते पर बढ़ना उन्हें बिल्कुल स्वीकार नहीं है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

2. संस्कृति विहीन जीवन को
वे हिकारत से नामंजूर कर देती है।
वे अनेकानेक शास्त्रों का अध्ययन करेंगी।
जीवन में और भी सुखों-सुविधाओं को लाएँगी।
युगों पुरानी मिथ्या परंपराओं को वे हटाएँगी,
और सभी अंधविश्वासों को तोड़ फेंकेंगी,
हर मानव गतिविधि का वे ध्यान रखेंगी
ताकि सभी देव तुल्य बन सकें।
वे पुरुषों की प्रशंसा को जीत लेंगी।

शब्दार्थ : संस्कृति = संस्कार, मानसिक विकास सभ्यता। मिथ्या = झूठ, असत्य। हिकारत = घृणा, उपेक्षा। परंपरा $=$ प्रथा, परिपाटी। अंधविश्वास $=$ विचार रहित विश्वास। गति विधि = आचरण व्यवहार आदि के रंग ढंग। तुल्य = समान। नामंजूर = अस्वीकार।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि प्रबुद्ध शिक्षित नारी अपने व्यवहार से पुरुषों की प्रशंसा प्राप्त कर लेंगी। शिक्षित नारी संस्कार रहित, असम्भ्य जीवन की उपेक्षा करते हुए उसे अस्वीकार कर देती है। वह असभ्य, संस्कृति रहित जीवन को स्वीकार नहीं कर सकती। आधुनिक युग की नारी अनेक शास्त्रों का अध्ययन करेगी। जीवन को तमाम सुख सुविधाओं से.सम्पन्न कर देगी। पुरानी जीर्ण शीर्ण झूठी प्रथाओं को दूर कर देगी। अंधविश्वासों तथा रूढ़ियों को समाप्त कर देंगी। समाज के प्रत्येक व्यवहार, आचरण के रंग ढंग और नियम तरीके पर अपनी पैनी नजर रखेंगी। उसका लक्ष्य होगा कि सभी देवता के समान निष्याप पवित्र तथा सर्वहितकारी बने। इस प्रकार अपने व्यवहार, आचरण, कर्त्तव्य से आधुनिक युग की शिक्षितनारी पुरुष समाज की प्रशंसा जीत सकेंगी।

इस प्रकार कवि ने स्सष्ट किया है कि आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर नारी पुरानी दकियानूसी परंपराओं को खत्म कर समाज को एक नई दिशा देगी। समाज का कायाकल्प कर डालेगी। आज नारी विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रसर हो रही है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – कोई नहीं पराया

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि गोपालदास ‘नीरज’ किसे अपना घर मानते हैं?
(क) सारे घर को
(ख) सारे संसार को
उत्तर :
(ख) सारे संसार को।

प्रश्न 2.
कवि ‘नीरज’ का आराध्य कौन हैं?
(क) गुलाम
(ख) भीड़
(ग) आदमी
(घ) देवता।
उत्तर :
(ग) आदमी।

प्रश्न 3.
‘काई नहीं पराया’ में कवि क्या सिखलाना चाहते हैं?
(क) सिर्फ अपने लिये सुख की तलाश
(ख) स्वर्ग पाने की कोशिश
(ग) जियो और जीने दो की भावना
(घ) देवत्व पाने की भावना
उत्तर :
(ग) जियो और जीने दो की भावना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 4.
इस कविता का मुख्य संदेश क्या है ?
(क) संसार के सभी प्राणी समान है
(ख) सारा संसार अपना घर है
(ग) सुख-दु:ख आते-जाते रहते हैं
(घ) हमेशा हसते रहना चाहिए
उत्तर :
(ख) सारा संसार अपना घर है।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार ईश्वर का निवास कहाँ है ?
(क) मन्दिर में
(ख) मस्जिद में
(ग) हर मनुष्य में
(घ) जल में
उत्तर :
(ग) हर मनुष्य में

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार सबसे प्रिय कौन है ?
(क) ईश्वर
(ख) मनुष्य
(ग) गाय
(घ) दलित
उत्तर :
(ख) मनुष्य

प्रश्न 7.
‘नीरज’ किसका उपनाम है ?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) गोपाल दास
(घ) रामेश्वर शुक्ल
उत्तर :
(ग) गोपाल दास

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 8.
‘कोई नहीं पराया’ नामक कविता किस काव्य-संग्रह से लिया गया है ?
(क) संघर्ष
(ख) अंतध्विनि
(ग) विभावरी
(घ) प्राण-गीत
उत्तर :
(घ) प्राण-गीत

प्रश्न 9.
कवि को क्या भाता है ?
(क) देवत्व
(ख) मनुषत्व
(ग) अमरत्व
(घ) पशुता
उत्तर :
(ख) मनुष्त्व

प्रश्न 10.
हमारे अपने सुख में और किसका हिस्सा है ?
(क) नदी का
(ख) पहाड़ का
(ग) हवा का
(घ) संसार का
उत्तर :
(घ) संसार का

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि मंदिर मस्जिद के बजाय कहाँ सिर टेकना चाहता है?
उत्तर :
कवि मंदिर मस्जिद के बजाय हर द्वार पर सिर टेकना चाहता है, क्योंकि हर द्वार उसके लिए देवालय है और आदमी ही आराध्य है।

प्रश्न 2.
कवि को किस पर अभिमान है और उसे क्या भाता है?
उत्तर :
कवि को अपनी मानवता पर अभिमान है और उसे मनुष्य (मानवता) भाता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 3.
कवि को स्वर्ग-सुख की कहानियों से ज्यादा क्या प्रिय है?
उत्तर :
कवि को स्वर्ग सुख की कहानियों से ज्यादा प्रिय अपनी धरती है।

प्रश्न 4.
कवि किस प्रकार हँसने और चलने का संदेश देता है?
उत्तर :
कवि संदेश देता है कि इस प्रकार हँसों कि तुम्हारे साथ पैरों से कुचली धूल भी हँसे और इस प्रकार चलों कि स तुम्हारे चरणों से कोई काँटा भी न कुचल जाये।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत अंश में कवि ने क्या स्पष्ट किया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश में कवि ने क्या स्पष्ट अंश में कवि स्पष्ट किया है कि सारा संसार ही अपना घर है। यहाँ कोई भी पराया नहीं है, सभी अपने हैं।

प्रश्न 6.
कवि अपने आप को क्यों असमर्थ मानते हैं ?
उत्तर :
कवि अवि मन्दिर-मस्जिद के सामने सिर झुकाने में स्वयं को असमर्थ मानते हैं।

प्रश्न 7.
गोपाल दास ‘नीरज’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
गोपाल दास ‘नीरज’ का जन्म 4 जनवरी 1925 ई० को इटावा जिला (उत्तर प्रदेश) के पुंरावली गाँव में हुआ था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 8.
गोपाल दास ‘नीरज’ के चार प्रमुख काव्य-संग्रहों के नाम लिखें।
उत्तर :
दर्द दिया, प्राण-गीत, बादल बरस गये, दो गीत, संघर्ष आदि।

प्रश्न 9.
कवि के अनुसार हमारी धरती कैसी है ?
उत्तर :
कवि के अनुसार हमारी धरती सैकड़ों स्वर्गों से ज्यादा सुकुमार है।

प्रश्न 10.
कवि लोगों में क्या बाँटने का संदेश देते हैं ?
उत्तर :
कवि लोगों में प्रेम बाँटने का संदेश देते हैं।

प्रश्न 11.
विश्व को शांति और सुखमय कैसे बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
‘जिवो और जीने दो’ का शाश्वत् सिद्धांत अपनाकर ही विश्व को शांति और सुखमय बनाया जा सकता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 12.
डाली का फूल डाली का नहीं पहले बगीचे की शोभा बढ़ाये इसका निष्कर्ष क्या है ?
उत्तर :
इसका निष्कर्ष यह है कि व्यक्ति को केवल अपने सुख स्वार्थ की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। परमार्थ की चिन्ता होनी चाहिए। पृथ्वी को अपना परिवार समझना चाहिए।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
इस कविता को पढ़कर क्या आपको लगता है कि आज भी एकता विद्यामान है?
उत्तर :
जाति, धर्म संप्रदाय की विभिन्नता के होते हुए भी मानव समुदाय में एकता विद्यमान है। सभी धर्म के लोग एक साथ रहते हैं। सभी के सुख-दुःख में सम्मिलित होते हैं। सभी अपने देश से प्यार करते हैं। विभिन्न विचार, रहन-सहन के बावजूद मानवता सभी में मौजूद हैं। संकीर्णता को त्याग कर आज उदारता का माहौल बना है। अपनी धरती सभी को प्यारी है। सभी अपने देश, अपनी संस्कृति पर गर्व का अनुभव करते हैं। करुणा, परोपकार मानवता की भावनासभी को एकता के सूत्र में जोड़े हुए है। विश्व बंधुत्व की भावना को सभी स्वीकार करते हैं। एकता के रास्ते में व्यवधान के बावजूद एकता का अस्तित्व बना हुआ है।

प्रश्न 2.
‘मुझको अपनी मानवता पर बहुत-बहुत अभिमान है।’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने स्पष्ट किया है कि मानव का परिचय मानवता ही होता है। मानवता ही जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है। कवि को मानवता पर अर्थात् मानव के सद्युणों पर गर्व है। मनुष्य ही अपने दिव्य गुणों से, सेवा, त्याग, स्नेह, परोपकार की भावना से पूजनीय बन जाता है। इसीलिए कवि को मानवता पर गर्व का अनुभव होता है।

प्रश्न 3.
‘हँसों इस तरह, हैसे तुम्हारे साथ दलित यह धूल भी’ का क्या तात्पर्य हैं?
उत्तर :
कवि ने लोगों को सलाह दी है कि वे इस प्रकार हँसे कि उनके पैरों के नीचे दबी, कुचली, धूल भी हँस पड़े। व्यक्ति मन से खुश होकर मन की खुशी को प्रकट करने के लिए हँसता है पर उसे दबे, कुचले, दुर्बल कमजोर लोगों को प्रसन्न बनाना चाहिए। उनके मन में भी खुशियों का संचार होना चाहिए। तभी वे भी अपनीप्रसन्नता को व्यक्त करने के लिए हँसेंगे। हँसने का सच्चा आनन्द तभी है, जब उसके आश्रित कमजोर लोग भी हँसे।

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प्रश्न 4.
कवि प्यार को बाँटने की सलाह क्यों देता है ?
उत्तर :
कवि ने लोगों को यह सलांह दी है कि वे प्यार बाँटकर विश्व प्रेम तथा विश्व मानवता की भावना को प्रतिष्ठित करें। प्यार बाँटने से अर्थात् ध्रर्म, जाति, संप्रदाय, के भेद-भाव को त्याग कर सभी के साथ प्रेम करने से भाई-चारे की भावना आएगी। एकता की भवना दृढ़ बनेगी। प्यार या प्रेम ऐसी शक्ति हैं जिससे पराये भी अपने हो जाते हैं। इसी कारण जीवन को सुखमय बनाने के लिए कवि ने प्यार बाँटने की सलाह दी है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
हम कविता के द्वारा कवि ने क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
इस कविता में कवि ने सभी प्राणियों के प्रति अपनापन का भाव रखते अपने पराये के संकीर्ण विचार को त्यागने एकता तथा भाईचारा के सूत्र में बाँधने की प्रेरणा दी है। मनुष्य को चाहिए कि वह देश, जाति, धर्म, संप्रदाय, ऊँच-नीच की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर विश्व को एक परिवार के रूप में देखें। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सारी पृथ्वी ही हमारा परिवार है, इस विचार को प्रश्रय दे।

व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि इस दुनिया में कोई भी प्राणी पराया नहीं है। सारा संसार अपने घर के समान है। किसी धर्म का गुलाम न बनकर मंदिर या मस्जिद में माथा न टेककर हर आदमी को देवता तथा हर घर को मंदिर समझना चाहिए। संसार के किसी भी कोने में रहे, पर इंसान के प्रति प्यार तथा ममत्व की भावना बनी रहे। अपनी मानवता तथा मानवीय गुणों-सत्य, धर्म, दया, परोपकार की भावना से हममें अभिमान बना रहे। देवत्व नहीं मनुज्त्व अर्थात् मानवता हो मुझे सदा प्रिय बनी रहे। सच्चे मनुष्य प्यार को छोड़कर अमरता की प्राप्ति भी स्वीकार नहीं। स्वर्गीय सुख की कोमल कहानियाँ उतनी प्रिय तथा ग्राह्व नहीं है, जितनी प्रिय धरती की कोमलता, सहजता तथा दिव्यता है।

अपनी पृथ्वी की गाथा ही सबसे प्यारी तथा रुचिकर है। सारी मानवता को ‘जिओ ओर जीने दो’ के शाश्वत् सिद्धान्त की शिक्षा देकर विश्व में शान्ति सुख और अमन-चयन का केन्द्र बनाया जा सकता है। अपना प्यार बाँटना सभी से सच्चा प्यार करना ही सबसे महत्वपूर्ण कर्त्वव्य है। अपनी हँसी – खुशी को सार्वजनिक बनाना संसार के कण-कण को हँसी से सम्मित करना चाहिए। अपने कर्त्तव्य के व्यवहार से एक काँटो को भी दबाना या पीड़ा देना उचित नहीं है। अपने व्यक्तिगत सुख में सारे संसार को भी भागीदार बना लेना चाहिए। सोचना यह चाहिए कि हमारे सुख में संसार भर के लोगों की भागीदारी है। फूल की डाली के पहले उपवन का श्रृंगार करना चाहिए। हमेशा इस तथ्य को स्वीकार कि करना चाहिए सारा संसार ही हमारा घर है।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –
संसार – विश्व, दुनिया।
उपवन – बाग, बगीचा।
इंसान- मानव, आदमी।
शूल-काँटा, कंटक।
घर – गृह, सदन।

2. निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-
देश काल – देश और काल – द्वन्न्व समास।
घट-घट – प्रत्येक घट – अव्ययी भाव समास
देवालय – देव के लिए आलय – तत्पुरुष समास।
स्वर्ग-सुख-स्वर्ग का सुख-तत्पुरुष समास।

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3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –

पराया – अपना
गुलाम – स्वामी
प्यार – नफरत, घृणा
स्वर्ग – नरक
स्वीकार – अस्वीकार
शूल-फूल
मानवता – दानवता

WBBSE Class 8 Hindi कोई नहीं पराया Summary

कवि परिचय :

श्री गोपाल दास ‘नीरज’ का जन्म सन् 1926 ई. में उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के पुराबला नामक ग्राम में हुआ था। नीरज वर्तमान समय के लोकप्रिय कवि एवं गीतकार हैं। ये मंचीय गीतकार के रूप में पर्याप्त लोक प्रिय हुए हैं। इनके गीतों में अतृष्ति, नियति तथा मृत्युबोध की छाया है। इसके प्रमुख गीत संग्रह-संर्ष, विभावरी, अन्तर्ध्वीने, प्राण-गीत, दर्द दिया है, आसावरी, बादल बरस गए, नदी किनारे आदि हैं। नीरज की भाषा सरल, सरस, तथा प्रवाहपूर्ण है।

1. कोई नहीं पराया, मेरा घर सारा संसार हैं।
मैं न बाँधा हूँ देश काल की जंग लगी जंजीर में,
मैं न खड़ा हूँ जाति-पाँति की ऊँची-नीची भीड़ में।
मेरा धर्म न कुछ स्याही-शब्दों का सिर्फ गुलाम है,
मै बस कहता हूँ कि प्यार है तो घट-घट में राम है।
मुझसे तुम न कहो मन्दिर-मस्जिद पर मैं सर टेक दूँ,
मेरा तो आराध्य आदमी देवालय हर द्वार है।
कोई नही पराया मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ :

  • पराया = दूसरा।
  • जंग = लोहे का मोरचा।
  • स्याही शब्दों = काले अक्षरों।
  • जंजीर = बेड़ी।
  • गुलाम = दास, पराधीन।
  • घट-घट में = प्रत्येक प्राणी के हृदय में।
  • आराध्य = पूजनीय।
  • देवालय = मंदिर, देवस्थान।

सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘कोई नहीं पराया’ कविता से ली गई हैं। इसके रचनाकार श्री गोपालदास ‘नीरज’ है।
प्रसंग – इस अवतरण में कवि ने समस्त मानव को अपना समझने की प्रेरणा दी है। संकीर्णता को छोड़कर विश्व को ही परिवार समझना चाहिए।

व्याख्या – प्रस्तुत अंश में कवि ने स्पष्ट किया है कि सारा संसार ही अपना घर है। यहाँ कोई भी पराया नहीं है, सभी अपने हैं। देश तंथा कालकी जंग लगी बेड़ी में मैं नहीं बँध हूँ। अर्थात् देश काल की संकुचित सीमा को तोड़कर पृथ्वी को ही परिवार समझता हूँ। जाति-पाँति, ऊँचा-नीच की संकीर्ण विचारधारा को मैने त्याग दिया है। हर प्राणी के हृदय में ईश्वर विराजमान है, इसलिए हर प्राणी से प्यार करना ईश्वर प्रेम का रूप है। मंदिर तथा मस्जिद में माथा टेकना, उपासना करना व्यर्थ है, मुझे वह स्वीकार नहीं है। मेरे लिए हर घर का दर वाजा मन्दिर-देव स्थान है तथा व्यक्ति हमारे लिए पूजनीय है। ईश्वर मंदिर-मस्जिद में नहीं, हर व्यक्ति के हृदय में निवास करते हैं। इसी कारण मैं सारे संसार को ही अपना घर मंदिर समझता हूँ। अपने-पराये का भेद-भाव मैंने छोड़ दिया है। क्योंकि इस विश्व में मेरा कोई पराया नहीं है।

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2. कहीं रहे कैसे भी मुझको प्यारा यह इंसान है,
मुझको अपनी मानवता पर बहुत-बहुत अभिमान है।
अरे नहीं देवत्व, मुझे तो भाता है मनुजत्व ही,
और छोड़ कर प्यार नहीं स्वीकार सकल अमरत्व भी।
मुझे सुनाओ तुम न स्वर्ग-सुख की सुकुमार कहानियाँ,
मेरी धरती, सौ-सौ स्वर्गों से ज्यादा सुकुमार हैं।
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ :

  • अभिमान = स्वाभिमान।
  • देवत्व = देवता की विशेषता।
  • इंसान = मनुष्य।
  • अमरत्व = अमरता, मृत्यु का अभाव
  • मानवता = आदमीयत।
  • धरती = पृथ्वी।
  • मनुजत्व = मानव के गुण।
  • सुकुमार = कोमल।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने बताया है कि यह धरती स्वर्ग से भी अधिक प्रिय तथा आकर्षक है। कवि को संसार में सबसे प्रिय मनुष्य है। उसे अपनी मानवीय विशेषताओं उसकी अच्छाइयों पर बहुत अभिमान है। मानवता को ही वह सबसे प्यारा समझता है। देवत्व की उपेक्षा वह मनुजत्व को ही अधिक प्रिय समझता है। उसे देवता नहीं मनुष्य ही बन्दनीय है। मानव मानवता से प्यार करे, यही कवि की अभिलाषा है। वह मानवता के प्यार को ठुकरा कर अमरता को भी स्वीकार नहीं कर सकता। कवि को स्वर्ग के सुख, वैभव की कहानियाँ प्रिय नहीं है, उन्हें वह सुनना नहीं चाहता। कवि इसं पृथ्वी को सैकड़ों स्वर्ग से भी कोमल तथा मनोरमा समझता है। वह सारी पृथ्वी को ही अपना घर समझता है।

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3. मैं सिखलाता हूँ कि जियो और जीने दो संसार को,
जितना ज्यादा बाँट सको तुम बाँटो अपने प्यार को।
हँसो इस तरह, हँसे तुम्हारे साथ दलित यह घूल भी,
चलो इस तरह कुचल न जाय पग से कोई शूल भी।
सुख न तुप्हारा सुख केवल, जग का भी उसमें भाग है,
फूल डाल का पीछे, पहले उपवन का श्रृंगार है।
कोई नहीं पराया, मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ :

  • दलित = दबाया हुआ, कुचला हुआ।
  • उपवन = बगीचा।
  • कुचल = पैरों से रौंदना।
  • शृंगार = साज-सज्जा।
  • शूल = काँटा।
  • जग = संसार।

व्याख्या – कवि ने इस अवतरण में बतलाया है कि ‘जिओ और जीने दो’ का शाश्वत् सिद्धांत अपनाकर ही विश्व को शांति और सुखमय बनाया जा सकता है। कवि संपूर्ण संसार को ‘जियो और जीने दो’ की शिक्षा दे रहा है। जितना भी संभव हो सके सभी में अपनत्व बाँटो। इस तरह हँसों कि तुम्हारे पैरों से दबी-कुचली धूल भी हँसने लगे। इस तरह खुशी मनाओं जिससे लोग भी खुशी में भागीदार बने। इस प्रकार चलो कि कोई काँटा भी तुम्हारे पैरों से दबा या कुचला जाये, ने ऐसी चेष्टा हो कि तुम्हारे किसी भी क्रिया कलाप से तुम्हारे शत्रु को भी कष्ट न हो। तुम्हारे सुख में संसार भी सम्मिलित हो। अपने को विस्तृत कर सारे संसार को सुखी बनाने का प्रयास करो। डाली का फूल डाली का नहीं, पहले बगीचे की शोभा बढ़ाए। निष्कर्ष यह है कि व्यक्ति को केवल अपने सुख स्वार्थ की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। परमार्थ की चिन्ता होनी चाहिए। पृथ्वी को परिवार समझना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – यदि फूल नहीं बो सकते तो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) कविता
(घ) एकांकी
उत्तर :
(ग) कविता

प्रश्न 2.
कवि के अनुसार किसका मन कमजोर है?
(क) दानव
(ख) मानव
(ग) राघव
(घ) उपरोक्त में कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) मानव।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

प्रश्न 3.
‘कटुता का शमन’ कहाँ होता है ?
(क) माता की शीतल छाया में
(ख) भाता के कोमल काया में
(ग) पिता के सान्निध्य में
(घ) उपरोक्त मे कोई नहीं
उत्तर :
(घ) उपरोक्त में कोई नहीं।

प्रश्न 4.
पग-पग पर शोर मचाने से क्या नहीं जमता है?
(क) विकल्प
(ख) संकल्प
(ग) कायाकल्प
(घ) प्रकल्प
उत्तर :
संकल्प।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार ज्ञान की घाटी है –
(क) दुर्गम
(ख) सहज
(ग) कमजोर
(घ) शीतल
उत्तर :
(क) दुर्गम

प्रश्न 6.
शुक्ल अंचल का जन्म किस जिले में हुआ ?
(क) बनारस
(ख) मेदिनीपुर
(ग) फतेहपुर
(घ) मिर्जापुर
उत्तर :
(ग) फतेहपुर

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प्रश्न 7.
‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) कविता
(घ) एकांकी
उत्तर :
(क) कहानी

प्रश्न 8.
चेतना की घाटी कैसी है ?
(क) विशाल
(ख) अगम
(ग) सुगम
(घ) क्षुद्र
उत्तर :
(ख) अगम

प्रश्न 9.
क्षुब्द शब्द का क्या अर्थ है ?
(क) अशांत
(ख) प्रशांत
(ग) शांत
(घ) निशांत
उत्तर :
(क) अशांत

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प्रश्न 10.
जो सुख की अभिमानी मदिरा में जाग सका वह क्या है ?
(क) जड़
(ख) चेतन
(ग) रुढ़िवादी
(घ) परंपरावादी
उत्तर :
(ख) चेतन

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
ममता की शीतल छाया में किसका शमन होता है?
उत्तर :
ममता की शीतल छाया में कटुता का शमन होता है।

प्रश्न 2.
मन में संकल्प कब नहीं जमता है?
उत्तर :
हर पं पर निंरतर शोर मचाने से मन में संकल्प नहीं जमता है।

प्रश्न 3.
‘मारुत’ शब्द का प्रयोग कैसे व्यक्ति के लिए किया गया है ?
उत्तर :
मारुत शब्द का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया गया है जो वायु की तरह गतिशील तथा कर्त्तव्यपरायण रहता है। वह किसी भी अवरोध सेरुकता नहीं।

प्रश्न 4.
कवि ने ‘चेतन’ किसे कहा है?
उत्तर :
कवि न कवि ने चेतन प्रबुद्ध व्यक्तियों को कहा है, जो सुख में भी सचेत बने रहते हैं।

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प्रश्न 5.
मन के भीतर की ज्वाला जब ठंडी होती है तो क्या होता है ?
उत्तर :
मन के भीतर की ज्वाला जब ठंडी होती है, तब बंद आँखें खुल जाती है।

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार हमारा उद्देश्य कैसा होना चाहिए ?
उत्तर :
कवि कहते हैं कि दुःख, तकलीफ और विपत्तियों में अगर हमारे होठों पर मुस्कान न हो, तो भय से घबड़ाकर आँसू बहाना भी हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 7.
“आप माथे पर चाँदनी अर्थात शीतलता का चंदन लगाये” का तात्पर्य है –
उत्तर :
तात्पर्य है कि मन और बुद्धि को निर्मल, शान्त और विकारहीन बनाये रखें।

प्रश्न 8.
रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म 1 मई 1915 ई० को फतेहपुर जिला के किशनपुर गाँव में हुआ था।

प्रश्न 9.
‘भय से कातर’ का क्या आश्य है ?
उत्तर :
डर से व्याकुल।

प्रश्न 10.
संकट का वेग कैसे कम नहीं होता है ?
उत्तर :
संकट से मुँह फेर लेने से भी उसका वेग कम नहीं होता है।

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प्रश्न 11.
दुनिया की रीति क्या है ?
उत्तर :
मानव शरीर दु:खों को सहन करता है, फिर भी मानव मन दूसरे के हिते के लिए व्याकुल रहता है, यही संसार की वास्तविक रीति है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि अपने सपनों पर विश्वास करने के लिए क्यों कहते हैं?
उत्तर :
मनुष्य को अपने सपनों पर विश्वास करना चाहिए। मनुष्य की दृढ़ इच्छा शक्ति में कलात्मक सर्जना शक्ति होती है। उसका आत्म बल बढ़ता है। वह आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ता है। बिना आत्म विश्वास के व्यक्ति अक्षम बन जाता है। मनुष्य की भावना, उसकी कल्पना उसका मार्ग दर्शन कराती है।

प्रश्न 2.
कवि ने लोगों को क्या-क्या करने की सलाह दी है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने लोगों को सलाह दी है कि वे मानव मात्र की भलाई करें। यदि दूसरों की भलाई न सकें तो किसी का बुरा भी न करें। अपनत्व की भावना अपनाकर आपसी वैर-भाव, कहुता को शांत कर दें। कठिन मुसीबत के समय भी हँसते रहे, भय से व्याकुल न हो। अपने सपनों पर सदा विश्वास करें। अतीत के दु:खों को याद न करें। जो बीत गया उसे बीत गया ही समझें। सुख-ऐश्वर्य के समय भी सावधान बने रहें। घमंड में चूर होकर कर्त्तव्य पथ न भूलें। विलासिता का जीवन न अपनाएँ। मन में संदेह को न पनपने दें। क्योंकि संदिग्ध आत्मा वाले व्यक्ति के मन में विश्वास नहीं ठहरता। पुराने मूल्यहीन विचारों को त्याग कर नये प्रगतिशील विचारों को अपनाएँ।

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प्रश्न 3.
प्रस्तुत कविता के मूल भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने लोगों को सलाह दिये हैं कि मनुष्य यदि दूसरों की भलाई नहीं कर सकते तो उसे किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए। सब के साथ मधुर व्यवहार कर वैर-भाव को समाप्त कर देना चाहिए। मन की शांति तथा पवित्र भावना से मन की व्याकुलता समाप्त हो जाती है। मन को शांति तथा सुख की अनुभूति होती है। विपत्ति में हँसनां यदि संभव न हो तो रोना भी नहीं चाहिए। अपनी कल्पना शक्ति पर विश्वास करना चाहिए। अतीत के दुःखों को कभी याद नहीं करना चाहिए। उससे शांति नहीं, दु:ख ही बढ़ता है। सुख-आनन्द के समय सावधान तथा सजग बने रहना ही उचित है। घमंड में सन्मार्ग को नहीं भूलना चाहिए। शोर मचाने से मन में दृढ़ संकल्प नहीं जमता। मन में यदि संदेह का भाव है तो उसमें विश्वास नहीं टिक सकता।पुरानी रुढ़ियों को छोड़कर प्रगति के मार्ग पर निरंतर गतिशील बने रहना चाहिए। आंत्म विश्वास तथा दृढ़ इच्छा शक्ति से व्यक्ति जीवन में सफल होता है।

प्रश्न 4.
‘अनसूना-अचीन्हा करने से संकट का बेग नहीं कमता’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जो व्यक्ति अपने जीवन में आए हुए संकटों तथा विपत्ति-बाधाओं को अनसुना कर देता है, उन्हें नहीं पहचानता और समझता है इस प्रकार हम उन संकटों पर ध्यान नहीं देंगे, उसकी परवाह नहीं करेंगे तो संकट से हम मुक्त . रहेंगे, पर यह सोचना गलता है। इससे संकट कम नहीं होगा, बल्कि अवसर और संकट बढ़ता ही जाएगा। अतः संकट की नब्ज को पहचानकर तुरंत प्रतिकार करना चाहिए।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. पग पग पर शोर मचाने से मन में संकल्प नहीं जमता, अनसुना अचिन्हा करने से संकट का वेग नहीं कमता, संशय का सूक्ष्म कुहासों में विश्वास नहीं क्षणभर रमता, बादल के घेरों में भी तो जयघोष न मारूत का क्षमता, यदि बढ़ न सको विश्वासों पर, साँसों के मुरदे मत ढोओ, यदि फूल नहीं बो सकते तो, काँटे कम से कम मत बोओ।

प्रश्न :
(क) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उद्धृत है?
(ख) मन में संकल्प कब नहीं जमा है?
(ग) इसका भवार्थ लिखिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ रचित कविता ‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ कविता से उद्धृत है।
(ख) केवल शोरगुल मचाने और नारेबाजी करने से मन में संकल्प नहीं जगता है।
(ग) कवि ने स्पष्ट किया है कि संकल्पों की पूर्ति शोरगुल मचाने तथा नारे लगाने से नहीं होती। उसके लिए तो दृढ़ निश्चय तथा कर्म साधना की जरूरत होती है। व्यक्ति को कभी भी आए हुए संकटों को टालना उन्हें नजर अंदाज कर देना उचित नहीं है। बल्कि तुरंत उनका समाधान कर डालना चाहिए। संकटों को ऐेलकर ही व्यक्ति उससे मुक्ति पा सकता हैं। संशय से मुक्त को झेलकर ही व्यक्ति उससे मुक्ति पा सकता है, संशय से मुक्त हो कर ही मन में विश्वास को टिकाया जा सकता है। जहाँ विश्वास नहीं वहाँ जीवन व्यर्थ है। हमें आत्म विश्वास के बल पर ही जीना चाहिए। हमें अपने कर्म, वचन, मन से दूसरों की लिए दु:ख का सुजन नहीं करना चाहिए।

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भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों के विपरीत शब्द लिखिए –

शीतल – उष्ण
कटुता – मधुरता
कातर – निडर, साहसी
शोर – शान्ति
मुर्दा – जिन्दा

2. निम्नलिखित शब्दों का वचन परिवर्तित कीजिए –

ज्वालाएँ – ज्वाला
नयन – नयनों
काँटे – काँटा
रीति – रीतियाँ
साँसों – साँस

WBBSE Class 8 Hindi यदि फूल नहीं बो सकते तो Summary

कवि परिचय :

रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ का जन्म सन् 1915 ई. में फतेहपुर जनपद के किशनपुर ग्राम में हुआ। अंचल ने कानपुर विश्वविद्यालय से एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी प्रमुख रचनाएँ – अपराजिता; मधूलिका, किरण बेला, करील, लालचूनर, वर्षात के बादल, विराम चिह्न आदि हैं। इनकी भाषा सरल तथा प्रवाहपूर्ण है।

1. यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।
है अगम चेतना की घाटी, कमजोर बड़ा मानव का मन,
ममता की शीतल छाया में होता कटुता का स्वयं शमन।
ज्वालाएँ जब धुल जाती हैं, खुल-खुल जाते है मुँदे नयन,
होकर निर्मलता में प्रशांत बहता प्राणों का क्षुब्ध पवन।
संकट में यदि मुसका न सको, भय से कातर हो मत रोओ।
यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।

शब्दार्थ :

  • अगम = दुर्गम, कठिन, अपार।
  • कटुता = अप्रिय, कडुआ।
  • चेतना = ज्ञान, इच्छा, मन, बुद्धि।
  • शमन = निवारण करना।
  • घाटी = स्थान, दरी ।
  • ज्वालाएँ = दाह, ताप ।
  • ममता = ममत्व, अपनापन।
  • प्रशांत = शांत, स्थिर ।
  • क्षुब्ध = व्याकुल, अधीर।
  • कातर = व्याकुल, भयभीत।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘यदि फूल नहीं बो सकते तो’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार श्री रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ हैं।

प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि यदि हम दूसरों की भलाई नहीं कर सकते तो किसी का अनभल (अहित) भी नहीं करना चाहिए।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने बड़ी ही उपयोगी शिक्षा दी है कवि ने बताया है कि यदि मनुष्य दूसरों के हित के लिए कुछ नहीं कर सकता तो उसे किसी का अहित या बुरा भी नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की बुद्धि तथा इच्छा का धरातल अत्यंत दुर्गम तथा कठिन है मनुष्य की इच्छा शक्ति अपार, असीम है, पर उसका मन अत्यंत कमजोर है। सबके साथ ममत्व तथा अपनापन के मधुर वातावरण में ही आपस की कटुता, वैमनस्य का भाव शांत होता है। सभी प्राणियों में अपनत्व का भाव सभी को अपना बना लेता है। जब कठोर प्रवृत्तियाँ साफ हो जाती है, तो बंद नेत्र खुल जाते हैं। आँखों को सही दिशा दिखलाई पड़ने लगती है। पवित्र भावना में प्राणों की व्याकुलता शांत हो जाती है। विपत्ति के समय यदि आदमी मुस्करा नहीं सकता तो भय से बेचैन होकर रोना नहीं चाहिए। दु:ख को धैर्य पूर्वक सहना चाहिए। जितना हो सके, दूसरों का कल्याण करना चाहिए, यदि ऐसा न हो सके तो किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

2. हर सपने पर विश्वास करो, लो लगा चाँदनी का चंदन,
मत याद करो, मत सोचो – ज्वाला में कैसे बीता जीवन,
इस दुनिया की है रीति यही – सहता है तन, बहता है मन,
सुख की अभिमानी मदिरा में जो जाग सका, वह है चेतन,
इसमें तुम जाग नहीं सकते, तो सेज बिछाकर मत सोओ।
यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।

शब्दार्थ :

  • सपना = भावना, कल्पना।
  • अभिमानी = अहंकारी, गर्वयुक्त।
  • ज्वाला = आग की लपट, कष्ट के दिन।
  • चेतन = बुद्धि युक्त।
  • रीति = ढंग, नियम, परिपाटी।
  • मदिरा = शराब।

प्रसंग – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने हमें अपने सपनों पर विश्वास करने तथा अतीत के दु:खों को याद न करने की सलाह दी है।

व्याख्या – कवि ने लोगों को यह सलाह दी है कि अपनी कल्पना, अपनी शक्ति पर विश्वास करें। अपने तन-मन, मस्तिष्क को सदा शान्त एवं सुस्थिर रखें। अतीत के दुःख भरे दिनों को याद कर दुःख का अनुभव न करें। जो बीत गया उसे याद न करें। संसार के लोगों की यही परिपाटी है। जीने का यही ढंग है कि उनका मन पर नियंत्रण नहीं होता, मन भटकता है, पर शरीर को सहना पड़ता है। सुख के समय लोग अभिमानी बनकर कर्त्तव्य मार्ग भूल जाते हैं, परन्तु उस समय जो सावधान सचेत रह सका वही प्रबुद्ध है। इस स्थिति में यदि मनुष्य त्याग नहीं सकता, सजग नहीं होता, तो भी उसे सुख पूर्वक आराम नहीं करना चाहिए। अपने कर्त्तव्य को नहीं भूलना चाहिए। सुख के समय सदा सचेत रहना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 5 यदि फूल नहीं बो सकते तो

3. पग-पग पर शोर मचाने से मन में संकल्प नहीं जमता,
अनसुना-अचीन्हा करने से संकट का वेग नहीं कमता,
संशय के सूक्ष्म कुहासों में विश्वास नहीं क्षण-भर रमता,
बादल के घेरों में भी तो जय-घोष न मारुत का थमता,
यदि बढ़ न सको विश्वासों पर, साँसों के मुरदे मत ढोओ,
यदि फूल नहीं बो सकते, तो काँटे कम से कम मत बोओ।

शब्दार्थ :

  • सूक्ष्म = बारीक, महीन।
  • कुहासों = कुहरा।
  • संकल्प = दृढ़ निश्चय।
  • वेग = गति।
  • संशय = संदेह।
  • मारुत = वायु।

प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने लोगों को अपने मन में दृढ़ इच्छाशक्ति बनाए रखने की सलाह दी है।

व्याख्या – प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि निरंतर हर पग पर शोर गुल करने से मन में दृढ़ निश्चय नहीं हो पाता। मनुष्य जीवन का संकट उसकी उपेक्षा करने या उसके प्रति अनभिज्ञता प्रकट करने से दूर नहीं होता, बल्कि डटकर मुकाबला करना चाहिए। यदि मन में किसी भी प्रकार की संदेह भावना है तो उसके मन में विश्वास नहीं ठहर सकता। संशय भरे चित्त में विश्वास टिक नहीं सकता। वायु की विजय घोषणा बांदल के फैलाव में भी कम नहीं होती। अर्थात् जो साहसी हैं, निरंतर गतिशील तथा कर्त्तव्य परायण हैं, उनकी विजय गर्जना को भीड़ भी नहीं रोक सकती। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उसे मृत दकियानूसी विचारों में पड़कर नहीं रुकना चाहिए। निरंतर प्रर्गतिशील रहकर मन-वच-कर्म से दूसरों के हित की बात करना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – जनगीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
जन-गीत के रचनाकार है-
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(घ) सुमित्रानंदन पंत

प्रश्न 2.
‘विषाद की निशा”‘ क्यूँ बीत रही है?
(क) एक प्राण होने से
(ख) नई सुबह होने से
(ग) निशान उड़ने से
(घ) गीत गाने से।
उत्तर :
(ख) नई सुबह होने से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 3.
‘शोषित”‘ का अर्थ है-
(क) जो शोषण करता है
(ख) जिसका शोषण किया गया हो
(ग) जो रस खींचता हो
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) जिसका शोषण किया गया हो।

प्रश्न 4.
“नवयुग” में नया क्या हैं?
(क) नई सरकार
(ख) नये नेता
(ग) नये प्रशासक
(घ) नये नियम
उत्तर :
(घ) नये नियम

प्रश्न 5.
हमारे जीवन में संकट आ गये।
(क) गहरे
(ख) शोषीत
(ग) पीड़िता
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) गहरे

प्रश्न 6.
सब में कैसी भावना हो ?
(क) पीड़ा
(ख) प्रेम
(ग) शोषीत
(घ) विकास
उत्तर :
(ख) प्रेम

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 7.
अब कैसा जमाना आ गया ?
(क) नया
(ख) पुराना
(ग) रंगीन
(घ) सदगुण
उत्तर :
(क) नया

प्रश्न 8.
पंतजी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1600
(ख) सन् 1700
(ग) सन् 1800
(घ) सन् 1900
उत्तर :
(घ) सन् 1900

प्रश्न 9.
पंत को किस रचना के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला ?
(क) गुंजन
(ख) चिदंबरा
(ग) युगांत
(घ) ग्राम्या
उत्तर :
(ख) चिदंबरा

प्रश्न 10.
‘जन-गीत’ के रचनाकार हैं –
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(घ) सुमित्रानंदन पंत

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 11.
कवि ने जन-मन का ताज किसे कहा है ?
(क) शक्ति
(ख) सौंदर्य
(ग) गुण
(घ) भक्ति
उत्तर :
(ग) गुण

प्रश्न 12.
कवि के अनुसार कैसा समाज होना चाहिए ?
(क) संगठित
(ख) विभाजित
(ग) कमजोर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) संगठित

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि पंत के अनुसार हम एकजुट कब होते हैं?
उत्तर :
कवि पंत के अनुसार विषाद की निशा बीत जाने पर जीवन में नया सबेर आने पर हम एकजुट होते हैं।

प्रश्न 2.
भारतवासी किस नींद से जगे हैं?
उत्तर :
भारतवासी शुद्ध स्वार्थ और काम की नींद से जगे हैं।

प्रश्न 3.
कवि का मन अब क्या नहीं सहना चाहता?
उत्तर :
कवि का मन किसी का शोषण किया गया हो तथा पीड़ा और अन्याय नहीं सहना चाहता।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 4.
पंतजी समाज को किस रूप में देखना चाहते हैं?
उत्तर :
पंतजी संकट, पीड़ा अभाव से मुक्त सुसंगठित समाज को देखना चाहते हैं।

प्रश्न 5.
कवि जन मानस में क्या भाव भर रहे हैं ?
उत्तर :
कवि जन मानस में जोश तथा उत्साह का भाव भर रहें है।

प्रश्न 6.
कवि का क्या कथन है ?
उत्तर :
कवि का कथन है कि अब फिर जीवन में नया सबेरा आए।

प्रश्न 7.
हम भारतवासियों में कैसी भावना हो गई थी ?
उत्तर :
हम भारतवासियों में धर्म, जाति संप्रदाय को लेकर आपस में नफरत की भावना हो गई थी।

प्रश्न 8.
हमारी फूट का क्या परिणाम हुआ ?
उत्तर :
हमारी फूट का परिणाम हुआ कि हम विनाश के गर्त में गिर गए।

प्रश्न 9.
हम किस कारणवश उत्यान की ओर अग्रसर हो रहे हैं ?
उत्तर :
एकता तथा एकरूपता के कारण आज हम प्रगति और उत्थान की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 10.
कवि लोगों को क्या प्रेरणा दे रहा हैं ?
उत्तर :
कवि लोगों को यह प्रेरणा दे रहा है कि अब समाज में, देश में आमूल परिवर्तन हो रहा है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि कैसी निशा के बीत जाने की बात कह रहा है? और क्यों?
उत्तर :
कवि विषाद (दु:ख) की निशा बीत जाने की बात कह रहा है क्योंकि दुःख की रात अब बीतने जा रही है। नया सबेरा आ रहा है। सभी निर्भय होकर प्रगति की ओर प्रयाण कर रहे हैं, अब सभी लोग मिलकर समवेत स्वर में जयगान का उच्चारण करेंगे।

प्रश्न 2.
जन-गीत कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में पंतजी ने स्पष्ट किया है कि नई सुबह होने से विषाद की रात बीत रही है। अब सब एकजुट हो कर निडर होकर प्रगति के पंथ पर बढ़ेंगे। आपसी वैमनस्य तथा भेद भाव से हमारा पतन तथा एकता, परस्पर मेल मिलाप से विकास संभव है। भारतवासी अब स्वार्थ तथा काम की नींद से जाग गए हैं। अब जन निर्माण, समाज उत्थान के काम में जुट जाएँ। सभी के रक्त में जोश है, अत: उत्साह से लोग देश की प्रगति में समर्पित हो जाएँ। अब कहीं किसी का शोषण न हो, अन्याय, परपीड्न, अब असह्य है। जीवन निर्माताओं को प्रमुखता मिले। कष्ट अभाव से रहित सुसंगठित समाज का निर्माण हो। लोगों में सद्युणों का समादर हो। अब नये युग के लिए नये नियम बने।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

प्रश्न 3.
‘नवयुग का अब नया विधान हो’- इस पंक्ति के आधार पर बताइए कि कवि नये युग को किस रूप में देखना चाहता है?
उत्तर :
कवि देखना चाहता है कि नये युग के लिए नये नियम कानून बने। जिसमें शोषण पीड़ा, अन्याय के लिए कोई स्थान न हो सद्गुणों की कद्र हो। दुःख रहित सुसंगठित समाज का निर्माण हो। पुरानी परंपराओं के स्थान पर नवीन परंपरा, नवीन विचार धारा के आधार पर नये समाज का गठन हो।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘जन-गीत’ कविता में कवि ने क्या आशा व्यक्त की है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने यह आशा व्यक्त की है कि भारतवासियों के जीवन में नया सुपभात हो। सभी का एक ही विचार शक्ति हो सभी एक ही स्वर समता, सरसता, प्रेम के गीत गाएँ। अब दुःख की काली रात बीत गई है। प्रस्थान के प्रगति की राह दिखाई पड़ रही है। हमारा आकाश का प्रगति की राह दिखाई पड़ रही है। हमारा आकाश को छूने वाला ऐसा, चिह्न हो जो सब प्रकार से भय रहित हो। यह निश्चित सिद्धांतं है – मतभेदों में विनाश होता है, संगठन में मतैक्य एवं प्रगति होती है। आपसी नफरत, भेदभाव तथा फूट के कारण ही हमारा विनाश हुआ। लेकिन आज हम सारे मत भेदों को भूल कर एक सूत्र में बांध रहे हैं, इसलिए अब हम निश्चित रूप से प्रगति एवं विकास के शिखर पर पहुँच सकते हैं।

सभी का कल्याणकारी उत्तम एक ही धर्म हो, सब का सब के प्रति समान, प्रेम भाव होना चाहिए। अपनी व्यक्ति तुच्छ कामनाओं, तथा स्वार्थ को छोड़ कर सभी महान, मंगलदायक लोक कर्म में प्रवृत्त बने। सभी में शक्ति, उत्साह का भाव बना रहे । सभी के रक्त में उष्गता, तेजस्विता उफनती रहे। समाज से शोषण, परपीड़िन, अन्याय का कहीं भी बोलबाला न हो। कहीं कोई गरीब, मजदूर शोषित न हो। जीवन के जो सच्चे कलाकार हैं उन्हें समाज तथा देश में प्रमुखता मिले। हमारा समाज हर प्रकाश स्वतंर, दु:ख रहित बने। दृढ़ संगठन बन सके। समाज में जितने भी शिल्पी, कलाकार, गुणों के आगार लोग हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। हमेशा के लिए नया विधान-नई प्रणाली हो जिससे समाज का कल्याण हो।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

अभय – न भय – नज् समास।
अभिन्न – नहीं है भिन्न जो – बहुवीहि समास,
लोककर्म – लोक का कर्म – तत्पुरुष समास।
जीवन-शिल्पी – जीवन का शिल्पी – तंत्रुषु समास।
नवयुग – नया युग – कर्मधारण समास

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

2. विशेषण और विशेष्य का मिलान कीजिए :-

अभय – निशान
शुद्ध – स्वार्थ
काम – नींद्
संगठित – समाज
नव-युग

WBBSE Class 8 Hindi जनगीत Summary

कवि परिचय :

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म सन् 1900 ई॰ में अल्मोड़ा जनपद के कौसानी नामक ग्राम में हुआ था। सन् 1921 में असहयोग आन्दोलन प्रारंभ होने पर पंतजी पढ़ाई छोड़कर साहित्य साधना में लग गए। सन् 1977 ई. में पंतजी का देहावसान हो गया। अरबिन्द के जीवन दर्शन से ये अत्यधिक प्रभावित हुए। इनकी प्रमुख काव्य रचनाएं-पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, स्वर्ण किरण, उत्तरा और चिदम्बरा आदि है। इनकी पाँच कहानियाँ और ज्योत्सना नामक नाटक भी प्रसिद्ध हैं। ‘चिदम्बरा’ काव्य पर इन्हें भारतीय ज्ञान पीठ का पुरस्कार प्रदान किया गया। भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मभूषण’ अलंकार से सम्मानित किया। पंतजी छायावाद के स्तंभ माने जाते हैं। पंतजी की भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है यह कोमल कान्त पदावली से युक्त है। छायावादी कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हुए पंतजी प्रगतिवादी काल का सूर्रपात्र करनेवालों में प्रमुख माने जाते हैं। पंतजी के काव्य में प्रकृति के विविध सुन्दर तथा मनोरम चित्र प्राप्त होते हैं।

शब्दार्थ :

  • निशान = लक्षण, ध्वजा।
  • विहान = सुबह।
  • विनाश = ध्वंस, संकट।
  • विषाद = दु:ख।
  • अभिन्न = एक रूप, घनिष्ठ, जो भिन्न न हो।
  • निशा = रात।
  • श्रेय = श्रेष्ठ, मंगलदायक धर्म, राश।
  • प्रयाण = गमन, प्रस्थान, युद्ध यात्र।
  • उफान = उबाल, जोश।
  • अभय = निडर, निर्भय।
  • शोषित = जिसका शोषण किया गया हो।
  • शिल्मी = कलाकार
  • मुक्त = स्वतंत्र।
  • व्यथित = दु:खी।
  • किरीट = मुकुट।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

1. जीवन में फिर नया विहान हो,
एक प्राण, एक कंठ गान हो!
बीत अब रही विषाद की निशा,
दिखने लगी प्रयाण की दिशा,
गगन चूमता अभय निशान हो!

सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के जन-गीत कविता से उद्धृत हैं। इस कविता के कवि श्री सुमित्रानंदन पंत है।

प्रसंग – इन पंक्तियों में पंतजी ने स्षष्ट किया है कि अब नव युग नई समृद्धि तथा खुशहाली के साथ हमारे जीवन में आ रहा है।

व्याख्या – कवि जन मानस में जोश तथा उत्साह का भाव भर रहा है। कवि का कथन है कि अब फिर जीवन में नया सबेरा आए। सभी में एक प्राण शक्ति हो, सभी अपने कंठ से एक ही स्वर, एक ही.गीत गाएँ। उनके दु:ख की रात समाप्त हो रही है। लोगों के जीवन का अभाव पीड़ा, निराशा अब समाप्त हो रही है। सामने बढ़ने प्रगति पंथ पर अग्रसर होने की दिशा दिखाई पड़ रही है। निर्भय होकर जनता आकाश की ओर प्रगति के निशान को स्पर्श कर रही है।

2. हम विभिन्न हो गये विनाश में;
हम अभिम्न हो रहे विकास में,
एक श्रेय, प्रेम अब समान हो।
शुद्ध स्वार्थ काम-नींद से जगे,
लोक-कर्म में महान सब लगें,
रक्त मे उफान हो, उठान हो।

व्याख्या – हम भारतवासियों में धर्म, जाति संप्रदाय को लेकर आपस में नरफरत की भावना हो गई थी। हमारी फूट का परिणाम हुआ कि हम विनाश के गर्त में पड़ गए। हमारे जीवन में गहरे संकट आ गए। पर एकता तथा एकरूपता के कारण आज हम प्रगति और उत्थान की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हमारा अब एक श्रेय अर्थात् मंगलदायक धर्म हो। सब में समान प्रेम की भावना हो। हम स्वार्थ और अपनेपन की नींद से जागें। स्वार्थ को छोड़ कर सब के साथ हमदर्दी दिखलाएँ। सभी लोग लोक कल्याण के कर्म में अपने को समर्पित कर दें। सभी के रक्त में नया जोश तथा उबाल हो। इस प्रकार शक्ति तथा उत्साह के साथ लोग लोक सेवा तथा लोक निर्माण के कार्य में जुट जाएँ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 4 जनगीत

3. शोषित कोई कहीं न जन रहें,
पीड़न-अन्याय अब न मन सहे
जीवन-शिल्पी प्रथम, प्रधान हो।
मुक्त व्यथित, संगठित समाज हो,
गुण ही जन-मन किरीट ताज हो,
नव-युग़ का अब नया विधान हो।

व्याख्या – कवि लोगों को यह प्रेरणा दे रहा है कि अब समाज में, देश में आमूल परिवर्तन हो रहा है। इसलिए अब हमारे बीच कोई व्यक्ति शोषण का शिकार न हो। किसी भी व्यक्ति का कहीं दमन न हो। पीड़ा तथा अत्याचार अब किसी को भी सहना न पड़े। जो लोग जीवन निर्माता है, जीवंन का समाज का न्याय पूर्वक गठन करने वाले हैं, उन्हें महत्व मिले। समाज में उनकी प्रधानता हो। जिससे उनका मनोबल बढ़े। एक ऐसा सुव्यवस्थित सुसंगठित समाज बने, जिसमें कोई पीड़ित न हो। सभी मुक्त जीवन बिताएँ, सद्गुण, सत्य, न्याय, परोपकार ही जनमानस का मूर्धन्य बने। समाज में सद्युणों की ही प्रतिष्ठा हो। अब नया जमाना आ गया। अत: हमारा नया विधान नये नियम हैं। पुराने दकियानूसी विचारों तथा विधि विधानों को किनारा कर देने की जरूरत है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 3 प्रियतम to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – प्रियतम

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
विष्णु ने नारद को किसे अपना प्रधान भक्त बताया?
(क) लक्ष्मी को
(ख) राम को
(ग) सज्जन किसान को
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सज्जन किसान को।

प्रश्न 2.
‘प्रियतम’ कविता के रचयिता का उपनाम है ?
(क) नीरज
(ख) निराला
(ग) पंत
(घ) अज्य
उत्तर :
(ख) निराला।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 3.
सज्जन किसान ने दिन भर में कितनी बार ईश्वर का नाम लिया?
(क) छह बार
(ख) पाँच बार
(ग) चार बार
(घ) तीन बार
उत्तर :
(घ) तीन बार

प्रश्न 4.
नारद का दूसरा नाम है –
(क) भक्त राज
(ख) देवराज
(ग) योगिराज
(घ) मुनिराज
उत्तर :
(ग) योगिराज

प्रश्न 5.
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म किस प्रदेश में हुआ था ?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) बिहार
(घ) पश्चिम बंगाल
उत्तर :
(घ) पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 7.
‘निराला’ का जन्म किस जिले में हुआ था ?
(क) गढ़ाकोला
(ख) सीही गाम
(ग) मेदिनीपुर
(घ) कौसानी
उत्तर :
(ग) मेदिनीपुर।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 8.
निराला के अध्यात्मीक गुरु हैं ?
(क) विवेकानंद
(ख) रामकृष्ण परमहंस
(ग) स्वामी रामतीर्थ
(घ) अरविंद
उत्तर :
(क) विवेकानंद।

प्रश्न 9.
‘निराला’ किस कवि का उपनाम है ?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) गुप्त जी
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर :
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी।

प्रश्न 10.
किसने सज्जन किसान की परीक्षा लेने की बात कही ?
(क) विष्णुजी
(ख) नारदजी
(ग) योगिराज
(घ) रामजी
उत्तर :
(ख) नारदजी

प्रश्न 11.
नारदजी पृथ्वी पर किसके घर पहुँचे ?
(क) योगिराज के
(ख) किसान के
(ग) दुकानदार के
(घ) बनिया के
उत्तर :
(ख) किसान के

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 12.
विषणु जी ने नारद को किसे अपना प्रधान भक्त बताया ?
(क) लक्षमी को
(ख) राम को
(ग) किसान को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) किसान को

प्रश्न 13.
वैकुंठ का क्या अर्थ है ?
(क) नरकलोक
(ख) स्वर्गलोक
(ग) मृत्युलोक
(घ) पताललोक
उत्तर :
(ख) स्वर्गलोक

प्रश्न 14.
कौन लज्जित हुए ?
(क) किसान
(ख) नारदजी
(ग) विष्गुजी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) नारदजी

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
नारद क्या पूछने विष्णु के पास गए?
उत्तर :
नारद जी विष्णु के पास यह पूछ्छेे के लिए गए कि पृथ्वी परउनका सबसे प्रधान भक्त कौन है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 2.
नारद जी किसकी परीक्षा लेने उसके पास गए?
उत्तर :
नारदजी विष्णु के प्रधान भक्त एक सज्जन किसान की परीक्षा लेने उसके पास गए।

प्रश्न 3.
नारदजी भक्त के पास पहुँचकर क्या देखा?
उत्तर :
नारदजी ने भक्त के पास पहुँचकर देखा कि वह किसान दोपहर को हल जोत कर आने पर, फिर शाम को दरवाजे पर आकर, और सबेरे काम पर जाते समय राम का नाम लिया। इस प्रकार दिन-भर में केवल तीन बार राम का नाम लिया।

प्रश्न 4.
नारदजी भगवान विष्णु के पास जाकर क्या बोले?
उत्तर :
नारदजी भगवान विष्णु के पास जाकर बोले कि वह किसान दिन-भर में केवल तीन बार राम का नाम लेता है।

प्रश्न 5.
नारद ने लज्जित होकर क्या कहा?
उत्तर :
नारदजी ने लज्जित होकर कहा कि यह सत्य है।

प्रश्न 6.
कौन-सा व्यक्ति श्रेष्ठ एवं ईश्वर को प्रिय होता है ?
उत्तर :
कर्त्तव्य का पालन करने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ तथा ईश्वर को प्रिय होता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 7.
नारदजी को आश्चर्य क्यों हुआ ?
उत्तर :
नारदजी को आश्चर्य इसलिये हुआ कि दिन में केवल तीन बार ही भगवान का नाम लिया हैं।

प्रश्न 8.
विष्णुजी ने नारदजी को क्या दिया ?
उत्तर :
इन्होंने नारदजी को तेल से भरा हुआ एक बर्तन दिया।

प्रश्न 9.
नारदजी ने विष्णु भगवान को क्या उत्तर दिया ?
उत्तर :
नारदजी ने विष्णु भगवान को उत्तर दिया कि आपके दिये हुए काम पर ही ध्यान लगा रहा, फिर नाम क्या लेता।

प्रश्न 10.
विष्णु भगवान ने नारदजी को अंत में क्या समझाया ?
उत्तर :
भगवान विष्णुजी नारदजी को समझाए की किसान का काम भी मेरा दिया हुआ है, किसान अपने परिवार का उत्तरदायित्व निभाते हुए भी मेरा नाम तीन बार लेता है। यह उसकी मेरे प्रति सच्ची निष्ठा है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
नारदजी क्यों परेशान थे? उनकी परेशानी का समाधान किस प्रकार्र हुआ?
उत्तर :
नारदजी इस बात को लेकर परेशान थे कि किसान दिनभर में केवल तीन बार राम का नाम लेता है, फिर भी वह विष्णु भगवान का सबसे प्रधान भक्त क्यों है। भगवान विष्णु ने उनकी परेशानी का समाधान करने के लिए उन्हें एक तेल से भरा पात्र देकर पृथ्वी की परिक्रमा कर आने के लिए कहा। नारदजी परिक्रमा करके सानंद सफल होकर लौट आए विष्यु के पूछने पर उन्होंने बतलाया कि इस परिक्रमा के समय उन्होंने एक बार भी ईश्वर का नाम नहीं लिया, क्योंकि वे उनके द्वारा दिए गए काम में पूरा ध्यान लगाए रहे। विष्णुजी ने समाधान करते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह किसान भी मेरे द्वारा दिए गए काम तथा जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए भी दिनभर में तीन बार राम का नाम लेता है। इसी कारण वह प्रधान भक्त है। इस प्रकार नारदजी की परेशानी का समाधान हो गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

प्रश्न 2.
निरालाजी ने कर्म और भक्ति का सामंजस्य किस प्रकार दर्शाया है, स्पष्ट करें?
उत्तर :
निरालाजी ने सष्ट किया है कि जीवन में कर्म ही पूजा और भक्ति है। अपने कर्त्तव्य तथा उत्तरदायित्व को निभानेवाला व्यक्ति ही सच्ची भक्ति का भी निर्वाह करता है। कर्म की उपेक्षा कर भक्ति करनेवाला कभी भगवान का सच्चा भक्त नहीं हो सकता। मनुष्य को संसार में रहकर अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए और ईश्वर का नाम भी लेना चाहिए। कविता में निरालाजी ने किसान के उदाहरण से इस सत्य को स्पष्ट किया है कि किसान दिन भर अपना काम करता है, फिर भी समय निकाल कर तीन बार राम का नाम भी ले लेता है। इसी कारण वह विष्णु काम सबसे प्रधान भक्त है। अत: कर्म की उपेक्षा कर भक्ति का महत्व नहीं हो सकता। क्योंकि यह संसार कर्म भूमि है, सभी को अपना कर्म करना ही पड़ता है। अतः जो कर्म की उपेक्षा कर भक्ति का ढोंग रचता है वह भगवान को प्रिय नहीं। इसलिए वह सच्चा भक्त भी नहीं। अतः कर्म करते हुए भक्ति करना सर्वथा उचित और सही मार्ग है।

प्रश्न 3.
नारद लज्जित हुए
कहा, ‘यह सत्य है।’
– उपरोक्त पंक्तियों का आशय सप्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भगवान विष्णु द्वारा सौपे हुए कार्य को संपन्न कर नारदजी प्रसन्न होकर विष्णु के पास आए। विष्णु ने नारद से पूछा कि पृथ्वी की परिक्रमा करते समय उन्होंने कितनी बार अपने इष्ट देव का नाम लिया। नारदजी ने कहा कि वह तो उन्हीं के द्वारा दिए हुए काम में ध्यान मग्न रहे, इसलिए एक बार भी नाम नहीं लिया। विष्यु ने कहा कि वह किसान भी मेंरे द्वारा ही दिए गए काम करता है, फिर दिनभर में तीन बार राम का नाम लेता है। यह सुनकर नारदजी लज्जित हो गए। उन्होंने सत्य को स्वीकार कर लिया। यह मान लिया कि सचमुच वह किसान भगवान को सबसे प्रिय है, यह सर्वथा उचित और सत्य है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
नारदजी ने किस प्रकार किसान की परीक्षा ली ? विष्णु वे उनकी शंका का समाधान किस प्रकार किया?
उत्तर :
एक दिन योगिराज नारद, विष्णुजी के पास जाकर उनके सर्वश्रेष्ठ भक्त के बारे में पूछे। विष्णुजी ने एक सज्जन किसान को अपना सबसे प्रिय भक्त बतलाया। नारद, विष्णुजी की स्वीकृति लेकर उस प्रियतम के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए पृथ्वी पर उस किसान के पास पहुँचे। वह किसान दोपहर के समय हल जोत कर घर आया और प्रभु के नाम का स्मरण किया। स्नान, भोजन के पुन: बाद अपने काम पर चला गया। संध्या समय पर आकर फिर ईश्वर का नाम लिया। सबेरे काम पर जाते समय राम के नाम का स्मरण किया। नारद की आश्चर्य हुआ कि दिन में केवल तीन बार स्मरण करने वाला किसान ही भगवान को परम प्रिय क्यों है ?

नारदजी भगवान विष्णु के यास जाकर यह जानना चाहे कि दिन भर में केवल तीन बार ही भगवान का नाम लेने वाला किसान उन्हें प्रिय क्यों है। विष्णुजी बड़ी ही युक्ति से नारद की जिज्ञासा का समाधान करना चाहते थे। इसलिए नारदजी से एक आवश्यक काम करने के लिए कहे और इस विषय पर बाद में चर्चा करने का प्रस्ताव रखे। विध्यु ने नारदजी से कहा कि तेल से भरे हुए इस पात्र को लेकर समस्त पृथ्वी की प्रदक्षिणा कर आएँ, पर विशेष रूप से ध्यान रहे कि तेल की एक बूँद भी पात्र से गिरने न पाए। नारदजी लक्ष्य को निश्चित कर विश्व का भ्रमण पूरा कर स्वर्गधाम पहुँचे। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा आदिष्ट कर्म का निर्वाह कर दिया था। पात्र से एक बूँद भी तेल गिराए बिना विश्व की परिक्रमा की थी। तेल के इस रहस्य की जानकारी के लिए उनके मन में उल्लास भरा हुआ था।

नारदजी को देखकर भगवान विष्णु ने उन्हें प्रेम से बैठाकर कहा कि उनके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा। भगवान ने उुनसे पूछा कि तेल पात्र ले जाते समय उन्होंने कितनी बार अपने इष्ट देव का नाम लिया। नारदजी ने शंकित हुदय से कहा कि नाम तो मैंने एक बार भी नहीं लिया, क्योंकि आप के द्वारा सौंपे गए काम में ही ध्यान लगा रहा। भगवान विष्णु ने नारदजी की जिज्ञासा का समांधान करते हुए बतलाया कि वह किसान भी उनके द्वारा दिए गए कार्य करता है। वह अपने घर-गृहस्थी के कर्त्रव्य व उत्तरदायित्व का भली-भाँति निर्वाह करते हुए भी उनका नाम लेता है, इसी से वह भगवान का सबसे प्रिय और श्रेष्ठ भक्त है। लज्जित होकर नारदजी ने इस सत्य को स्वीकार कर लिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

मृत्युलोक-मृत्यु का लोक-तत्पुरुष समास।
सज्जन-सत् है जो जन-कर्मधारय समास।
दोपहर – दूसरा पहर – द्विगु समास
नाम स्मरण – नाम का स्मरण – तत्पुरुष समास।

2. निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए-

उल्लास – उल् + लास – व्यंजन संधि
प्रात:काल – प्रात: + काल – विसर्ग संधि

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

3. निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए-

विष्णु – हरि, नारायण, श्रीपति।
परीक्षा – इम्तहान, समीक्षा, निरीक्षण।
प्रांतःकाल – प्रभात, भोर, सबेरा।
इष्ट – इच्छित, अभीष्ट, वांछनीय।
विश्व – संसार, दुनिया, जगत्।

WBBSE Class 8 Hindi प्रियतम Summary

कवि परिचय :

निरालाजी का जन्म सन् 1896 ई. में बंगाल के महिषा-दल राज्य में हुआ था। इनके पिता उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद के निवासी थे। वे महिषादल राज्य में रियासत के उच्च कर्मचारी थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा महिषादल में हुई। इन्होंने घर पर ही संस्कृत, बंगला और अंग्रेजी का अध्ययन किया। सन् 1961 ई में इनका देहावसान हो गया। निरालाजी छायावाद के प्रमुख कवि थे। बहुमुखी प्रतिमा संपन्न निराला जी ने कविता कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संस्मरण सभी पर अपना सिक्का जमाया। इनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ- परिमल, गीतिका, अनामिका, अपरा, तुलसीदास, अर्चना, सरोज स्मृति, आराधना आदि है। इनकी भाषा परिमार्जित हिन्दी खड़ी बोली है। हिन्दी साहित्य में निराला जी का गौरवपूर्ण स्थान है।

शब्दार्थ :

  • प्रियतम = सबसे प्रिय।
  • स्मरण = याद।
  • पुण्यश्लोक = यशस्वी।
  • प्रदक्षिणा = परिक्रमा।
  • मृत्युलोक = पृथ्वी।
  • सविशेष = विशेष प्रकार से।
  • साधारण = मामूली।
  • घृत = रखकर ।
  • विवाद = वार्ता, बहस।
  • पर्यटन = भ्रमण।
  • पात्र = बर्तन।
  • योगिराज = श्रेष्ठ योगी, नारदजी।
  • उल्लास = खुशी।
  • रहस्य = भेद।
  • अवगत = मालूम।
  • उत्तरदायित्व = जिम्मेदारी।
  • धृत लक्ष्य = एकाग्र।
  • इष्ट = आराध्य।

1. एक दिन विष्णुजी के पास गए नारदजी
‘पूछा मृत्युलोक में वह कौन है पुण्यश्लोक
भक्त तुम्हारा प्रधान”‘?
विष्णुजी ने कहा, “एक सज्जन किसान है
प्राणें से प्रियतम।”
उसकी परीक्षा लूँगा।’
हँसे विष्णु सुनकर यह
“कहा ले सकते हो।”

सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक साहित्य मेला की ‘प्रियतम’ नामक कविता से ली गई है। इसके रचयिता सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है।

प्रसंग : प्रस्तुत कविता में कवि ने विष्णु और नारद से संबंधित एक पौराणिक प्रसंग के माध्यम से स्पष्ट किया है कि अपने कर्त्तव्य का पालन करने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ तथा ईश्वर को प्रिय होता है।

व्याख्या : कवि कहते हैं कि एक दिन नारद जी भवगान विष्णु के पास आए। उन्होंने भगवान से पूछा कि पृथ्वी पर कौन यशस्वी पुण्यात्मा उनका प्रधान भक्त है। विष्णुजी ने उत्तर दिया कि एक सज्जन किसान उनका प्राणों से भी प्यारा सबसे प्रिय भक्त है। नारदजी ने उसकी परीक्षा लेने की बात कही, तो विष्णुजी ने हँसकर कहा कि परीक्षा ले सकते हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

2. नारदजी चल दिए
पहुँचे भक्त के यहाँ
देखा, हल जोत कर आया वह दोपहर को
दरवाजे पहुँच कर रामजी का नाम लिया,
स्नान-भोजन करके
फिर चला गया काम पर
शाम को आया दरवाजे पर
फिर नाम लिया राम का,
प्रात:काल चलते समय
एक बार फिर उसने
मधुर नाम-स्मरण किया।

व्याख्या – नारदजी वहाँ से चलकर पृथ्वी पर उस किसान के घर पहुँचे। नारदजी ने देखा कि वह किसान हल जोत कर दोपहर को घर आया और दरवाजे पर पहुँचकर रामजी का नाम लिया। स्नान और भोजन करके अपने काम पर चला गया। शाम को वह दरवाजे पर पहुँचकर फिर रामजी का नाम लिया। सुबह काम पर जाते समय फिर राम का मुधर नाम लिया।

3. “बस केवल तीन बार’।”
नारद चकरा गए
किन्तु भगवान को किसान ही क्यों याद आया?
गए विष्णु लोक, बोले भगवान से
“देखा किसान को
दिन-भर में तीन बारं
नाम उसने लिया है राम का।”

व्याख्या – नारदजी को आश्चर्य हुआ कि दिन में केवल तीन बार ही भरगवान का नाम लिया हैं, फिर भी भगवान को वह किसान ही क्यों याद आया और वह भगवान का परम प्रिय भक्त क्यों हैं। नारदजी ने विष्णु लोक जाकर भगवान से कहा कि उन्होंने उस किसान को देखा। उसने दिन-भर में केवल तीन बार राम का नाम लिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

4. बोले विष्णु, “नारदजी
आवश्यक दूसरा
एक काम आया है
तुम्हें छोड़कर कोई
और नहीं कर सकता
साधारण विषय यह।
बाद को विवाद होगा
तब तक यह आवश्यक कार्य पूरा कीजिए।”
“तेल-पूर्ण पात्र यह
लेकर प्रदक्षिणा कर आइए भूमंडल की
ध्यान रहे सविशेष
एक बूँद भी इससे
तेल न गिरने न पाए।”
लेकर चले नारद जी
आज्ञा पर धृत लक्ष्य
एक बूँद तेल उस पात्र से गिरे नहीं।

व्याख्या – विष्णुजी नारदजी की बात सुनकर बोले कि नारदजी एक दूसरा आवश्यक काम आ गया है। यह काम उन्हें छोड़कर दूसरा कोई नहीं कर सकता। इस साधारण विषय की चर्चा तो बाद में हो जाएगी। इस आवश्यक काम को तब तक पूरा कर लीजिए। इन्होंने नारदजी को तेल से भरा हुआ एक बर्तन दिया और कहा कि इस पात्र को लेकर समस्त पृथ्वी की परिक्रमा कर आइए। पर विशेष रूप से ध्यान रहे कि इस पात्र में से तेल की एक बूँद भी पात्र से गिरने न पाए। नारदजी विष्णु की आज्ञा पर ध्यान रखा कि उस पात्र से एक बूँद भी तेल नीचे न गिरे।

5. योगिराज जल्द ही
विश्व पर्यटन करके
लौटे बैकुण्ठ को
तेल एक बूँद भी उस पात्र से गिरा नहीं
उल्लास मन में भरा था।
यह सोचकर तेल का रहस्य एक
अवगत होगा नया।

व्याख्या – योगिराज नारदजी जल्द ही पृथ्वी की परिक्रमा करके विष्णु लोक लौट आए। उनके मन में प्रसन्नता थी कि पात्र से एक बूँद भी तेल नीचे नहीं गिरा। उनके मनमें उल्लास तथा उत्सुकता थी कि उन्हें इस तेल का रहस्य मालूम पड़ जाएगा।

6. नारद को देखकर विष्णु भगवान ने
बैठाया स्नेह से
कहा-‘यह उत्तर तुम्हारा यहीं आ गया
बतलाओ, पात्र लेकर जाते समय कितनी बार
नाम इष्ट का लिया?’
‘एक बार भी नहीं,’
शंकित हददय से कहा नारद ने विष्णु से-
‘काम तुम्हारा ही था
ध्यान उसी में लगा रहा
नाम फिर क्या लेता और।’

व्याख्या – नारदजी को देखकर भगवान विष्णु ने प्रेम से उन्हें बैठाया और कहा कि तुम्हारे प्रश्न का उत्तर यहीं आ गया। बतलाओ तेल पात्र लेकर जाते समय तुमने कितनी बार अपने इष्ट देव का नाम लिया। नारदजी ने मन में शंकित होकर कहा कि उन्होंने एक बार भी नाम नहीं लिया, क्योंकि उनका ध्यान तो उनके (विष्णुजी) द्वारा दिए गए काम में ही लगा रहा, फिर वे कैसे नाम लेते।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 3 प्रियतम

7. विष्णु ने कहा – “नारद!
उस किसान का भी काम
मेरा दिया हुआ है
उत्तरदायित्व भी लादे है
एक साथ सबको निभाता और
काम करता हुआ
नाम भी वह लेता है
इसी से है प्रियतम”
नारद लज्जित हुए
कहा “यह सत्य है।”

व्याख्या – विष्गुजी ने नारद से कहा उस किसान का भी काम मेरे द्वारा ही दिया हुआ है। उस पर घर गृहस्थी की अनेक जिम्मेदारियाँ भी है। वह उन सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए तथा सभी काम करते हुए भी राम का नाम लेता है, इसी कारण वह हमारा सबसे प्रिय श्रेष्ठ भक्त है। नारदजी यह सुनकर लज्जित हुए और बोले कि यह सत्य है। इस प्रकार नारदजी ने सत्य स्वीकार कर लिया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – भारतमाता का मंदिर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत माता के मंदिर में किसका संवाद होता है?
(क) क्षमता का
(ख) ममता का
(ग) समता का
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।

प्रश्न 2.
‘ईसा’ किस धर्म के संस्थापक थे?
(क) हिन्दू धर्म
(ख) बौद्ध धर्म
(ग) ईसाई धर्म
(घ) जैन धर्म
उत्तर :
(ग) ईसाई धर्म ।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रश्न 3.
‘मिला सत्य का हमें पुजारी’ किसे कहा गया है?
(क) महात्मा गाँधी को
(ख) जवाहरलाल नेहरू को
(ग) अब्दुल कलाम को
(घ) लाल बहादुर शास्त्री को
उत्तर :
(क) महात्मा गाँधी को।

प्रश्न 4.
‘अज्ञात शत्रु’ बनने के लिए क्या आवश्यकता है?
(क) सभी शत्रुओं को मार देना
(ख) सब के समक्ष नत मस्तक होना
(ग) सदा खामोश रहना
(घ) सब को मित्र बना लेना
उत्तर :
सबको मित्र बना लेना।

प्रश्न 5.
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1686 ई० में
(ख) 1786 ई० में
(ग) 1886 ई० में
(घ) 1986 ई० में
उत्तर :
(ग) 1886 ई० में

प्रश्न 6.
बुद्ध ने किस धर्म की स्थापना की –
(क) इस्लाम
(ख) जैन
(ग) बौद्ध
(घ) सिख
उत्तर :
(ग) बौद्ध

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प्रश्न 7.
‘विषाद’ का क्या अर्थ है –
(क) खुशी
(ख) दु:ख
(ग) क्रोध
(घ) प्रेम
उत्तर :
(ख) दु:ख

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार भारत क्या है ?
(क) केवल देश
(ख) राज्य
(ग) भारत माता का मंदिर
(घ) भारत-भूमि
उत्तर :
(ग) भारत माता का मंदिर

प्रश्न 9.
यहाँ सबसे अधिक किसको महत्व दिया जाता है ?
(क) समन्वय
(ख) समानता
(ग) धर्म
(घ) रीतिरीवाजों
उत्तर :
(ख) समानता

प्रश्न 10.
भव का क्या अर्थ है ?
(क) समानता
(ख) संसार
(ग) भौंरा
(घ) समानता
उत्तर :
(ख) संसार

प्रश्न 11.
कवि एकजुट होकर क्या करने का आह्वान करते हैं ?
(क) जयनाद
(ख) बराबरी
(ग) कल्याण
(घ) उपकार
उत्तर :
(क) जयनाद

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रश्न 12.
सभी लोगों को किसका परिचय देना चाहिए ?
(क) सुख: दुख:
(ख) एकजुटता
(ग) भाई-भाई
(घ) जयनाद
उत्तर :
(ख) एकजुटता

प्रश्न 13.
सभी को आपस में क्या बाँट लेना चाहिए ?
(क) एकजुटता
(ख) भाई-चारा
(ग) सुख: दुख:
(घ) स्वप्न
उत्तर :
(ग) सुख: दुख:

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत का मंदिर किसे कहा गया है?
उत्तर :
भारत का मंदिर भारत वर्ष को कहा गया है।

प्रश्न 2.
भारत में किस बात का भेद-भाव नहीं है?
उत्तर :
भारत में जाति, धर्म, या संप्रदाय का भेद-भाव नहीं है।

प्रश्न 3.
तीर्थ किसे कहते है ?
उत्तर :
किसी पवित्र स्थल या पुण्य स्थान को तीर्थ कहते हैं। यहाँ पवित्र हृदय को तीर्थ कहा गया है।

प्रश्न 4.
भारत के लोग किसके अनुयायी है?
उत्तर :
भारत के लोग महात्मा गांधी के अनुयायी है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रश्न 5.
भाई-भाई आपस में क्या बाँटते है?
उत्तर :
भाई-भाई आपस में हर्ष और विषाद बाँटते हैं।

प्रश्न 6.
किसकी आराधना इसी भूमि पर संभव है ?
उत्तर :
राम, रहीम, बुद्ध और ईसा सबकी आराधना इसी भूमि पर संभव है।

प्रश्न 7.
भारत माता के मंदिर में किसके लिए कोई भी स्थान नहीं है ?
उत्तर :
भारतमाता के इस पावन मंदिर में शत्रुता और वैर भाव के लिए कोई भी स्थान नहीं है।

प्रश्न 8.
किसके द्वारा शत्रुओं को भी मित्र बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
ब्दय की पवित्रता और प्रेम के द्वारा ही अपने शत्रुओं को भी मित्र बनाया जा सकता है।

प्रश्न 9.
गाँधीजी किस दम पर भारत को स्वतंत्र करा पाये ?
उत्तर :
गाँधीजी सत्य और अहिंसा के दम पर ही देश के स्वाधीनता आंदोलन को सफल बनाया और भारत स्वतंत्र हो पाया।

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प्रश्न 10.
हमें गाँधीजी के रूप में क्या मिला ?
उत्तर :
हमें गाँधीजी के रूप में सत्य का पुजारी मिला।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘भारत माता का मंदिर’ कविता के रचनाकार ने भारतीयों से क्या अपेक्षा की है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि गुप्तजी ने भारतीयों से यहु अपेक्षा की है कि वे सभी धर्म, संप्रदाय का स्वागत करें। सभी का सम्मान करें। वैर-भाव को छोड़कर आपस में प्रेम तथा सद् भाव का व्यवहार करें। सबको अपना मित्र बनाकर आदर्श चरित्र का गठन करें। सभी अपने देश के लिए विजय की घोषणा करें। आपस में भाई-चारे को महत्त्व दें। सुख-दु:ख में सदा सबके साथ रहे। सबके साथ सहानुभूति दिखलाएँ।

प्रश्न 2.
भारत माता के मंदिर की क्या विशेषताएँ है?
उत्तर :
भारत माता के मंदिर में सबके साथ बराबरी का वर्ताव होता है। किसी को बड़ा या छोटा नहीं समझा जाता। सभी को भलाई तथा सभी को वरदान मिलता है। यहाँ जाति धर्म या संप्रदाय को लेकर भेद-भाव नहीं है। विभिन्न संस्कृतियों की विशेषताओं का यहाँ महत्व है। यहाँ परस्पर शत्रुता नहीं, प्रेम का वातावरण है। इस पावन मंदिर में अपने हृदय को पवित्र बनाने, सभी को अपना मित्र बनाने की प्रेरणा मिलती है। करोड़ों कठठों से यहाँ विजय की घोषणा होती है। यहाँ गाँधीजी के निर्देशों से स्वाधीनता को मुख्य कर्तव्य माना जाता है। इस पवित्र आँगन में भाई चारे की भावना हैं। सभी एक दूसरे के सुख-दुःख में सम्मिलित हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के गुण गौरव का ज्ञान यहाँ के माध्यम से क्या संदेश देने की कोशिश की गई है?
उत्तर :
कवि ने यह संदेश दिया है कि अलग-अलग संस्कृतियों का यहाँ समन्वय हो। सांस्कृतिक समन्वय की गरिमा का, उसकी महत्ता का सर्वर्र प्रचार हो। हमें सारे भेद-भाव, जाति-धर्म, संम्पदाय की संकीर्ण भावना को त्यागकर भारतीय संस्कृति की गरिमा की रक्षा तथा प्रचार करना चाहिए। भारत एक ऐसा गौरवमय देश है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय हुआ है। यही समन्वय की भावना भारतीय एकता का मूल मंत्र है।

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प्रश्न 4.
‘एक साथ मिल’ बाँट लो बैठ अपना हर्ष-विषाद यहाँ, का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि हमें अपने सुख-दु:ख को मिलकर बाँट लेना चाहिए। व्यक्ति को केवल अपने ही सुख-दुःख की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। एक दूसरे के प्रति हमदर्दी होनी चाहिए। दूसरों के दर्द को दूर करने के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए। अपने सुख को बढ़ा कर सभी को सुखी बनाने के लिए प्रयत्न करना चाहिए। उसे स्वार्थी नहीं परमार्थी होना चाहिए। हर व्यक्ति को उदार विचार रखना चाहिए। यह समझना चाहिए कि सहानुभूति ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
भारत माता का मंदिर कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता से हमें एकता, समता तथा समन्वय की भावना की प्रेरणा मिलती है। जाति, धर्म तथा संप्रदाय के संकीर्ण भेदभाव को छोड़कर हमें समस्त मानव के साथ आदर, समान सम्मान तथा सभी के स्वागत का भाव रखना चाहिए। हमें राम-रहीम, बुद्ध-ईसा के आदर्शों का समान रूप से स्मरण-ध्यान करना चाहिए। भारत एक ऐसा महान देश है जहाँ भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का समन्वय हुआ है। उसकी गरिमा को बनाए रखना है। शत्रुता, आपसी नफरत को छोड़कर परस्पर प्रेम, सौहाद्र तथा भाई-चारा की भावना को प्रश्रय देना चाहिए। सभी के कल्याण तथा प्रगति की बात को महत्व देना चाहिए। हुदय की पवित्रता में ही समस्त तीर्थों की पवित्रता निहित है। हमें सभी को मित्र बनाकर अज्ञात शत्रु बनना है। संसार के सभी महानीय आदर्शों को लेकर हमें एक चरित्र का गठन करना है। भारतवर्ष के कोटि-कोटि निवासियों के केठों से सदा विजय घोष की दर्शन का उच्चारण होना चाहिए।

हमारे देश को भारतवासियों का सौभाग्य है कि हमें सत्य-अहिंसा के महान पुजारी, मानवता के शुभ चिन्तक के रूप में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी मिल गए। इन्होंने न्याय विवेक संद्धर्भ से लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्ण सफलता प्राप्त कर ली। गाँधी जी समस्त अनुयायियों को मुक्ति के लिए हर संभव कर्त्तव्य का निर्वाह किया। अत: भारत माता के पवित्र प्रांगण मैं सभी भेद-भाव को त्याग कर परस्सर भाई-चारे के बंधन में बंध जाना चाहिए। अपनी प्रसन्रता तथा पीड़ा, हर्ष तथा विषाद आपस में मिलकर उसे भोगना चाहिए। सभी के सुख-दु:ख सम्मिलित होने के लिए कवि ने प्रेरित किया है।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित समानोच्चरित शब्दों के अन्तर बताइए :

  • प्रासाद – महल बहुत बड़ा मकान।
  • प्रसाद – प्रसन्नता, देवता को चढ़ाई जानेवाली वस्तु।
  • बाट – रास्ता, बटखरा।
  • बाँट – बाँटना, वितरण करना।
  • बेर – एक प्रकार का फल, बदरी।
  • बैर – शत्रुता, विरोधी।
  • मुक्त – बंधन रहित।
  • मुक्ति – छुटकारा, स्वतंत्रता
  • भव – संसार
  • भाव – विचार, अभिप्राय।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

2. विशेषण बनाइए – इक, इत, ई प्रत्यय जोड़कर

  • धर्म – धार्मिक।
  • संप्रदाय – सांप्रदायिक।
  • हर्ष – हर्षित।
  • प्रेम – प्रेमी।
  • उन्माद – उन्मादी।
  • अर्थ – आर्थिक
  • विकास – विकसित
  • जापान – जापानी

WBBSE Class 8 Hindi भारतमाता का मंदिर Summary

कवि परिचय :

गुप्तजी का जन्म सन् 1886 ई. उत्तर प्रदेश में झाँसी जनपद के चिरगाँव में एक प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार में हुआ था। इनके पिता सेठ रामचरण निष्ठावान राम भक्त तथा कवि थे। राम भक्ति तथा कवित्व शक्ति इन्हे पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त हुई। गुप्तजी ने संस्कृत, हिन्दी, बंगला का गहन अध्ययन किया। इनके काव्य गुरु आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी थे। गुप्त जी अनेक वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे । आगरा विश्व विद्यालय ने इन्हें डी० लिद्० की उपाधि से सुशोभित किया।

भारत सरकार ने ‘पद्म भूषण’ अलंकार से सम्मानित किया। सन्1964 ई. को इनका देहावसान हो गया। गुप्तजी की प्रमुख रचनाएँ साकेत, यशोधरा, द्वापर, जयभारत, सिद्धराज, पंचवटी, जयद्रथ वध आदि है। झंकार इनके गीतों का संग्रह है। गुप्त जी की रचनाओं में प्राचीन भारतीय संस्कृति तथा गौरव की झाँकी मिलती है। ‘साकेंत’ महाकाव्य पर इन्हें मंगला प्रसाद’ पारितोषिक मिल चुका है। ‘भारत भारती’ रचना में राष्ट्र के अतीत वर्त्तमान तथा भविष्य पर ओजस्वी विचार प्रस्तुत है।

1. भारत माता का मन्दिर यह समता का संवाद जहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।
जाति धर्म या सम्रदाय का नहीं भेद व्यवधान यहाँ,
सबका स्वागत, सबका आदर, सबका सम सम्मान यहाँ।
राम-रहीम, बुद्ध-ईसा का सुलभ एक-सा ध्यान यहाँ,
भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों कें गुण गौरव का ज्ञान यहाँ।

शब्दार्थ :

  • प्रसाद = आशीर्वाद ।
  • कल्याण = भलाई, शुभ, मंगलम्रद।
  • समता = बराबरी।
  • व्यवधान = अड़चन ।
  • संवाद = बातचीत।
  • सम = बराबर।
  • शिव = मंगलकारी।
  • सुलभ = सहज प्राप्त।
  • भिन्न-भिन्न = अलग-अलग।
  • भव = संसार।
  • ‘गुण = निपुणता, प्रशंसनीय।
  • गौरव = बड़प्पन, आदर।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

प्रसंग : प्रस्तुत्त अवतरण में कवि श्री गुप्तजी ने भारतवर्ष की सांस्कृतिक एकता व सभी धर्मों में समन्वय की भावना को स्पष्ट किया है।

व्याख्या – भारत माता के मंदिर की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कवि ने स्पष्ट किया है कि इस मंदिर में हर प्रकार के भेद-भाव को छोड़कर बराबरी की ही बातचीत तथा व्यवहार होता है। यहाँ किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं, सभी के मंगल तथा शुभ भलाई का ही यहाँ स्थान है। यहाँ बिना भेद-भाव के सभी को उनके मंगल के लिए आशीर्वाद मिलता है।

यहाँ जाति, धर्म, संप्रदाय को लेकर किसी प्रकार का भेदभाव या अड़चन नहीं है। चाहे किसी भी जाति का हो, अथवा किसी धर्म, मत का अनुयायी हो, यहाँ सभी को समान सम्मान प्राप्त है। सभी का यहाँ स्वागत होता है। सभी का आदर सम्मान होता है। सभी को एक समान समझकर सम्मान दिया जाता है। यहाँ धर्म को लेकर भेद भाव नहीं है। सभी धर्म के आराध्य यहाँ सभी के द्वारा सम्मानित होते हैं। ‘यहाँ राम-रहीम, गौतम बुद्ध, ईसामसीह सभी का एक समान सर्वत्र ध्यान, आराधना सहज सुलभ है। धर्म के मामलें में कोई विरोध या रोक टोक नहीं। एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के आराध्य का सम्मान करते हैं। संसार की भिन्न-भिन्न संस्कृतियों की विशेषताओं को यहाँ गौरव मिलता है। सभी का आदर किया जाता है।

2. नहीं चाहिए बुद्धि वैर की, भला प्रेम उन्माद यहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।
सब तीर्थों का एक तीर्थ यह हुदय पवित्र बना लें हम,
आओ यहाँ अजात शत्रु बन, सबको मित्र बना लें हम।
रेखाएँ प्रस्तुत हैं अपने मन के चित्र बना लें हम,
सौ-सौ आदर्शों को लेकर, एक चरित्र बना लें हम।

शब्दार्थ :

  • वैर = शत्रुता।
  • आदर्श = अनुकरणीय, श्रेष्ठ।
  • उन्माद = विक्षिप्तता, उन्मत्तता।
  • अजात शत्रु = जिसका कोई शत्रु न हो।

व्याख्या : भारत माता के इस पावन मंदिर में किसी के प्रति किसी के मन में शत्रुता या विरोध का विचार पैदा ही नहीं होता। यहाँ सभी एक दूसरे के प्रति प्रेम तथा सद्भावना में उन्मत्त बने रहते हैं। यह सभी की भलाई, सभी के हित तथा उत्थान का स्थान है। सभी को यहाँ मंगलमय आशीर्वाद मिलता है।

यहाँ सभी तीर्थों का तीर्थ है। सभी को यहाँ अपना हुदय पवित्र बना लेना है। हृदय की कलुषता दूर कर लेना है। हम लोग यहाँ सभी को अपना मित्र बनाकर अजात शत्रु बन जाएँ। धरती पर कोई भी हमारा शत्रु न रहे। अपने व्यवहार से हम सभी को अपना बना लें। आज हमारे सामने सच्चे उदार आदर्श हैं, रेखाएँ हैं, उनसे हमें अपने मन का चित्र बना लेना चाहिए। सैकड़ों श्रेष्ठ आदर्शों को लेकर हमें अपना श्रेष्ठ अनुकरणीय आदर्श चरित्र बना लेना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 2 भारतमाता का मंदिर

3. कोटि-कोटि कंठों से मिलकर उठे एक जयनाद यहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है, पावें सभी प्रसाद यहाँ।
मिला सत्य का हमें पुजारी, सफल काम उस न्यायी का
मुक्ति-लाभ कर्त्तव्य यहाँ है, एक-एक अनुयायी का,
बैठो माता के आंगन में, नाता, भाई-भाई का,
एक साथ मिल बैठ बाँट लो, अपना हर्ष-विषाद यहाँ।

शब्दार्थ :

  • कोटि-कोटि = करोड़ो।
  • जयनाद = विजय की घोषणा।
  • मुक्तिलाभ = स्वतंत्रता प्राप्ति ।
  • हर्ष = प्रसन्नता, खुशी।
  • नाता = संबंध।
  • विषाद = दु:ख।.
  • अनुयायी = अनुसरण करनेवाला।

व्याख्या : स्वदेश भारतवर्ष के करोड़ों नर-नारियों के कंठ से विजय की घोषणा उठती रहे। विजय के मार्ग पर लोग बढ़ते रहें। यहाँ सभी की प्रगति हो सभी का जीवन सफल एवं प्रसन्न बने, सभी को यहाँ वरदान प्राप्त हो।

हमारे देश के समस्त लोगों को सत्य-अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी मिल गए हैं। वे सदा सच्चे न्याय के रास्ते पर अडिग बने रहे। उन्होंने अपने जीवन में भारत को मुक्ति का लाभ दिया। उनकें सत्पयास से भारत को स्वतंत्रा मिली। भारत के लोग उनके सच्चे अनुयायी हैं। हर अनुयायी का यह कर्त्तव्य है कि इस मुक्ति का सही उपयोग करे।

कवि ने हमें यह प्रेरणा दी है कि भारत माता के इस पावन मंदिर में बैठकर हम परस्मर भाई-चारे को जीवन में सच्चे अर्थो में स्वीकार करें, एक दूसरे को बन्धु समझे। एक साथ बैठकर सभी यहाँ एक दूसरे की खुशी तथा दुःख में सम्मिलित हों। सभी के साथ सहानुभूति की भावना रखें।