WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण संज्ञा

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WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण संज्ञा

संज्ञा शब्द ‘सम्’ और ‘ज्ञा’ के योग से बना है जिसका अर्थ है ‘सम्यक् ज्ञान्’ या पूर्ण और सही परिचय (सम + ज्ञा = संज्ञा, अर्थात् सम्यक् ज्ञान कराने वाला)। संज्ञा का दूसरा पर्याय है – नाम। व्यक्ति, वस्तु या स्थान आदि के सम्यक् ज्ञान, पूर्ण परिचय के लिए भाषा में उन्हें कुछ नाम दे दिए गए हैं। ये नाम ही संज्ञा है।

परिभाषा – किसी भी वस्तु, व्यक्ति, गुण, भाव, स्थिति का परिचय कराने वाले शब्द को ‘संज्ञा’ कहते हैं।
अथवा, किसी भी प्राणी, व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण –

  • सौरभ दिल्ली में निवास करता है।
  • नारियाँ स्वभाव से कोमल होती हैं।
  • मानव प्रेम सुंदरता-असुंदरता को नहीं देखता।
  • गाय एक उपयोगी पशु है।
  • बुढ़ापा दुखों का घर है और यौवन आनंद का।
  • आगरा यमुना के किनारे बसा हुआ है।

उपर्युक्त काले शब्द संज्ञा शब्द हैं। संज्ञा शब्दों का इसलिए भी विशेष महत्व है कि संज्ञा शब्दों के बिना भाषा बन ही नहीं सकती। हम जब भी कोई बात कहते हैं, पूछते हैं, करते हैं तो अनायास ही संज्ञा शब्दों का प्रयोग करते हैं। व्याकरण में जो शब्द किसी के नाम को बताता है संज्ञा शब्द कहलाते हैं। किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, स्थिति, गुण अथवा भाव के नाम का बोध करानेवाले शब्दों को संज्ञा कहते हैं।
संज्ञा के भेद (Kinds of Nouns)
संज्ञा शब्दों से प्रायः किसी व्यक्ति, जाति अथवा भाव के नाम का बोध होता है। इसलिए संज्ञा के तीन प्रमुख भेद बताए गए हैं –

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
  • जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
  • भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)

व्यक्तिवाचक संज्ञा : जो शब्द किसी विशेष व्यक्ति, विशेष वस्तु, विशेष स्थान अथवा विशेष प्राणी के नाम का बोध कराते हैं, उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे –

महात्मा गाँधी, सुभाषचंद्र बोस, सीता, राधा, राम, कृष्ण, कुसुम, रेखा, पूनम, सौरभ, सचेत, अपर्णा, अपराजिता – व्यक्तियों के नाम
कपिला (गाय), गौरा (गाय), सोना (हिरनी), ऐरावत (हाथी) – प्राणियों के नाम
दिल्ली, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मद्रास, देहरादून, शिमला, बिजौली, अंबाला, गुड़गाँव, जापान स्थानों के नाम
रामचरितमानस, रामायण, गीता, कुरान, कावेरी, नीलगिरि, गांडीव, हल्दी, नमक, चीनी – वस्तुओं के नाम

जातिवाचक संज्ञा : जो शब्द किसी प्राणी, पदार्थ या समुदाय की पूरी जाति का बोध कराते हैं, वे जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। उदाहरणार्थ – हाथी, कुत्ता, फल, गाय, विद्यार्थी तथा अध्यापक आदि।

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ये शब्द संपूर्ण जाति के परिचायक हैं किसी एक मनुष्य, एक नर या एक प्रांत के नहीं। जातिवाचक संज्ञा के दो उपभेद हैं-

(क) द्रव्यवाचक संज्ञा (ख) समूहवाचक संज्ञा। अंग्रेजी व्याकरण के अनुसार संज्ञा के पाँच भेद स्वीकार किए गए हैं। उसी आधार पर हिंदी के कुछ विद्वान भी संज्ञा के पाँच भेद मानते हैं। वैसे, द्रव्यवाचक संज्ञा तथा समूहवाचक संज्ञाएँ भी एक प्रकार से जाति का बोध कराती हैं। अत: इन्हें जातिवाचक संज्ञा के उपभेदों के रूप में ही स्वीकार किया गया है।
(क) द्रव्यवाचक संज्ञा – किसी पदार्थ अथवा द्रव्य का बों कराने वाले शब्दों को द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- स्टोल, पीतल, लोहा (फर्नीचर के लिए), सोना-चाँदो (आभूषण के लिए)।
द्रव्यवाची संज्ञा शब्दों का प्रयोग प्राय: एकवचन में ही किया जाता है क्योंकि ये शब्द गणनीय नहीं हैं।

(ख) समूहवाचक संज्ञा – जो संज्ञा शब्द किसी समुदाय या समूह का बोध कराते हैं वे समूहवाचक संज्ञा शब्द कहलाते हैं। जहाँ भी समूह होगा वहाँ एक से अधिक सदस्यों की संभावना होगी, जैसे – सेना, कक्षा, झुंड, भीड़, जुलूस, दरबार, दल सभी समूहवाचक शब्द हैं।

इन शब्दों का प्रयोग एकवचन में ही होता है क्योंकि ये एक ही जाति के सदस्यों के समूह को एक इकाई के रूप में व्यक्त करते हैं। गौरा, सोना, ऐरावत, कामधेनु जानवर हैं, कुसुम, रेखा, पूनम, सौरभ मनुष्य हैं, गंगा, यमुना, गोमती, कावेरी नदियाँ हैं। इस प्रकार ‘नगर’, ‘जानवर’, ‘मनुष्य’, ‘नदी’ आदि शब्द किसी जाति विशेष का बोध कराते हैं।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जो शब्द किसी जाति, पदार्थ, प्राणी, समूह आदि का बोध कराते हैं, ‘जातिवाचक संज्ञा’ शब्द कहलाते हैं।
तुलना देखिए –

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भावाचक संज्ञा

जिन संज्ञा शब्दों से किसी व्यक्ति अथवा वस्तु के गुण-धर्म, दोष, शील, स्वभाव, भाव, संकल्पना आदि का बोध होता है, वे ‘भाववाचक संज्ञा शब्द’ कहे जाते हैं। जैसे –
गुण-दोष-लंबाई, चौड़ाई, सुंदरता, कुरूपता, चतुरता, ऊँचाई, नीचाई
दशा – बचपन, बुढ़ापा, यौवन, भूख, प्यास
भाव – आशा, निराशा, कोध, वैर, युद्ध, शान्ति, मित्रता, शत्रुता, भय, प्रेम
कार्य – सहायता, निंदा, प्रशंसा, सलाह
एक संज्ञापद का दूसरे संज्ञापद के रूप में प्रयोग – कभी-कभी जातिवाचक और व्यक्तिवाचक संज्ञापद का एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग जातिवाचक के रूप में कर दिया जाता है।

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व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग – कुछ व्यक्तियों के जीवन में प्राय: अन्य लोगों के जीवन से भिन्न कोई ऐसी विशेषता, गुण अथवा अवगुण होता है जिसके कारण उनका नाम उस गुण या अवगुण का प्रतिनिधित्व करने लगता है। ऐसी स्थिति में वह नाम व्यक्ति-विशेष का नाम होकर जातिवाचक शब्द बन जाता है। जैसे भीष्म पितामह का नाम दृढ़ प्रतिज्ञा के लिए प्रसिद्ध है। जैसे –

  • आज कौन हरिश्चंद्र हो सकता है।
  • भारत तो सीता-सावित्री का देश है।
  • विभीषणों से बचो।
  • इन्हीं जयचंदों के कारण देश गुलाम हुआ।
  • देश में जयचंदों की कमी नहीं है ।
  • तुम तो एकलव्य हो जो गुरु के लिए कुछ्छ भी कर सकते हो।

यहाँ हरिश्चंद्र ‘सच्चाई’ का, सीता-सावित्री ‘पवित्रता’ का, विभीषण ‘विश्वासघात’ का, जयचंद ‘गद्दार’ का, एकलव्य ‘गुरुभक्ति’ का प्रतीक है।

जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिचावक संज्ञा के रूप में प्रयोग – कभी-कभी कुछ जातिवाचक शब्द किसी व्यक्ति-विशेष या स्थान विशेष के अर्थ में रूढ़ हो जाते हैं तब वे जाति का बोध न कराकर केवल एक ‘व्यक्ति या स्थानविशेष’ का बोध कराते हैं। जैसे –

महात्मा जी ने भारत को आजाद् कराया
– महात्मा गाँधी

स्वतंत्रता के बाद सरदार ने रियासतें समाप्त की
– सरदार पटेल

पंडित जी देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे
– पं० जवाहरलाल नेहरू

शास्त्री जी भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री थे।
– लाल बहादुर शास्त्री

पुरी की पवित्रता सर्वविदित है
– जगन्नाथपुरी

भाववाचक संज्ञा शब्दों का जातिवाचक संज्ञा के रूप में पयोग – भाववाचक संज्ञा शब्दों का प्रयोग एकवचन में होता है, किन्तु जब कभी कुछ भाववाचक संज्ञा शब्द बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं तब वे जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे –
बुराई से बुराइयाँ – हम सभी में अनेक बुराइयाँ व्याप्त हैं।
पढ़ाई से पढ़ाइयाँ – निर्धन व्यक्ति की बच्चों की पढ़ाइयाँ मार देती हैं।
दूरी से दूरियाँ – कभी-कभी दूरियाँ ही अपनेपन का आभास कराती हैं।
प्रार्थना से प्रार्थनाएँ – गरीबों की प्रार्थनाएँ व्यर्थ नहीं जातीं।
ऊँचाई से ऊँचाइयाँ – ऊँचाइयाँ नापनी हैं तो हिमालय का भ्रमण करो।
हिंदी के भाववाचक संज्ञा शब्दों में मूल शब्द तथा यौगिक शब्द दोनों ही मिलते हैं।

मूल भाववाचक संज्ञा शब्द-यौगिक भाववाचक संज्ञा शब्दों की रचना सभी प्रकार के शब्दों से हो सकती है। ये प्राय: पाँच प्रकार के शब्दों से बनती है –

  • जातिवाचक संज्ञाओं से
  • सर्वनामों से
  • विशेषणों से
  • क्रियाओं से
  • अव्ययों से

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(हिंदी के भाववाचक संज्ञा शब्दों के मूल शब्द तथा यौगिक शब्दों को भाववाचक संज्ञाएँ रूढ़ तथा निर्मित भी कहा जाता है)
जातिवाचक संज्ञा से –

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सर्वनामों से –

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विशेषण से –

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क्रिया पद से (क्रियाओं से)

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अव्ययों से (अविकारी शब्दों से) –

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संज्ञा शब्दों की रूप-रचना
हिंदी से संज्ञा शब्द वाक्य के अंतर्गत कभी अपने मूल रूप में तथा कभी परिवर्तित रूप में प्रयुक्त होते हैं, जैसे –
लड़का खेल रहा है।
लड़के खेल रहे है ।
लड़कों को बुलाकर लाओ।

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पहले वाक्य में ‘लड़का’ शब्द मूल रूप में प्रयोग हुआ है जबकि दूसरे व तीसरे वाक्य त्रमश: ‘लड़के’ तथा ‘लड़कों’ – शब्दों का प्रयोग ‘लड़का’ शब्द का ही परिवर्तित रूप है।

रूप रचना से यह ज्ञात होता है कि प्रयुक्त शब्दों में क्या परिवर्तन आया है ? यह परिवर्तन क्यों और कैसे आया है ? परिवर्तन आने से शब्द के जो रूप बनते हैं उनको दर्शाना अथवा अंकित करना ही रूप-रचना कहलाती है। संज्ञा शब्दो का रूप-परिवर्तन लिंग, वचन और परसर्ग (विभक्ति) के कारण होता है। यही संज्ञा की रूप-रचना कहलाती है।
संज्ञा शब्दों में वचन का प्रभाव
हिंदी में ‘लिंग’ संज्ञा शब्दों की प्रमुख विशेषता है। शब्दों के बहुवचन रूप बनाने के लिए और वाक्य में इनका सही प्रयोग करने हेतु शब्दों के सही लिंग की पहचान अति आवश्यक हो जाती है। हिंदी में पुलिंग तथा स्त्रीलिंग शब्दों के बहुवचन बनाने के नियम अलग-अलग हैं।
शब्दों को पुलिंग और स्त्रीलिंग दों वर्गों में विभक्त कर सकते हैं-
पुलिंग शब्द – बेटा, बच्चा, कवि, पानी, कमरा, धोबी, नौकर, सेवक , लड़का, छाता, पाठक, मित्र, घर, घोड़ा, भालू, शेर, हाथी।

स्त्रीलिंग शब्द – बेटी, लड़की, गायिका, वस्तु, वधू, बहन, मोरनी, माला, रानी, बुढ़िया, बछिया, विधि, गति, गली, कुर्सी, आँख, मेज, किलाब, शेरनी।

हिंदी के संज्ञा शब्दों की रूप-रचना और परसर्ग (विभक्ति) के अनुसार होती है।
परसर्ग (विभक्ति) रहित शब्द को मूल शब्द कहते हैं। जैसे – बालक-बालिका।

परसर्ग (विभक्ति) सहित शब्द को तिर्यक् शब्दो के बहुवचन रूप में ‘याँ’, ‘ओं’, नहीं ‘या’ तथा ‘ओ’ परसर्ग लगता है। हिंदी के संज्ञा शब्द रूप-रचना की दृष्टि से चार वर्गों में विभक्त किए जा सकते हैं –

1. आकारांत पुलिंग शब्द – जैसे-बेटा, बच्चा, कमरा, लड़का, घोड़ा, लाला आदि । इस वर्ग में कुछ अपवाद भी मिलते है – कुछ संज्ञा शब्द ऐसे है जो ‘आकारांत’ होते हुए भी इस रूप-रचना अथवा रूपावली के अंतर्गत नहीं आते। जैसे – (क) संस्कृत शब्द – महात्मा, योद्धा, नेता, पिता, राजा, दाता आदि।
(ख) संबंध सूचक शब्द – चाचा, जीजा, मामा, दादा, नाना, बाबा आदि।
(ग) तद्भव शब्द – अगुआ, मुखिया आदि।
2. “आकारांत”‘से भिन्न पुलिंग शब्द। जैसे – कवि, रवि, पति, मुनि, माली, गुरु, घर, बालक, डाकू, साधु आदि।
3. “इ/ई” अथवा ” इया” प्रत्यांत स्त्रीलिंग शब्द, जैसे- चिड़िया, कुटिया, बुढ़िया, कोठरी, बेटी, नदी, विधि, रीति आदि।
4. “इ/ई” अथवा “इया’ प्रत्यांत से भिन्न स्त्रोलिंग शब्द, जैसे – माता, गीता, वधू, बालू, बहन, वस्तु, गौ आदि। संज्ञा शब्दों (लड़का, लड़कें, लड़कियों) में होने वाले परिवर्तन से संबंधित कुछ नियम इस प्रकार हैं –

1. अकारांत शब्दों (जैसे घर) में विभिक्ति-प्रत्यय मात्रा के रूप में लगते हैं। जैसे – घरों।
2. आकारांत पुलिंग शब्दों में भी विभिक्ति प्रत्यय मात्रा के रूप में लगत हैं। जैसे –
लड़का-लड़कें-लड़कों, घोड़ा-घोड़ें-घोड़ों।
जिन स्र्रीलिंग शब्दों के अंत में इया प्रत्यय आता है उनमें भी यही नियम लागू होता हैं जैसे – बुढ़िया-बुढ़ियाँ-बुढ़ियों
3. आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों के बाद में एँ तथा ओं लगाकर नए शब्द बनते हैं जैसे – माता-माताएँ-माताओ।
4. अकारांत अथवा आकारांत प्रत्ययों से भिन्न शब्दों के साथ विभक्ति प्रत्यय उनके मूल रूपों में एँ तथा ओं लगाकर बनते हैं। जैसे –
गुरु-गुरुओं, वस्तु-वस्तुएँ-वस्तुओं
इकारांत/ईकारांत शब्दों के बाद प्रत्ययों से पहले ‘य’ का आगम भी होता है। जैसे –
साली-सालियों, नदी-नदियों
5. संबोधन बहुवचन में ‘ओं’ नहीं, ‘ओ’ प्रयुक्त होता है। जैसे –
हे छात्रों ! अरे लड़कों-लड़कियों !
कुछ अपवदों को छोड़कर आकारांत पुलिंग शब्दों जैसे – बेटा, लड़का, घोड़ा, बच्चा आदि के रूप निम्न प्रकार हो सकते हैं।

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आकारांत पुलिंग शब्द-बच्चा

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बेटा

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इसमें बेटा, बेटे, बेटो और बेटों – ये चार रूप बनते हैं।
अपवाद – राजा, पिता, योद्धा, दाता, महात्मा, नेता, वह्मा, नाना, बाबा, मामा, चाचा, दादा, जोजा, मुखिया, अगआ आदि।

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“आकारांत” से भिन्न पुलिंग शब्द

माली

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अकारांत ‘बालक’ के रूप

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इकारान्त पुलिंग ‘मुनि’ के रूप

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(रावि, कवि, पति, क्रसषि आदि पुलिंग शब्दों के रूप भी इसी प्रकार बनते हैं, ईकारांत पुलिंग धोबी, माली, ऊकारांत शब्द डाकू, गुरु के रूप में इसी प्रकार बनते हैं।)

लड़की

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“’इया प्रत्यांत’” स्र्रीलिंग शब्द-कुटिया

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(निर्जीव संज्ञाओं के साथ संबोधन कारक का प्रयोग नहीं किया जाता है।)
इकारांत/ईकारांत अथवा ”इया” प्रत्यांत से भिन्न स्त्रीलिंग शब्द

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औकारांत स्त्रीलिंग ‘गौ’

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अन्य कारकों में भी रूप इसी प्रकार होंगे, किंतु चिह्न उन कारकों के अनुसार लगंगे। ‘गो’ जैसे अन्य औकारांत स्त्रीलिंग शब्दों के रूप भी इसी प्रकार बनेंगे।

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रूप-रचना हेतु विशेष निर्देश

1. सभी “आकारांत” (स्व्वीलिग/पुलिंग), “आकारांत” पुलिंग तथा “इया प्रत्यांत” शब्दों में विभिक्ति प्रत्यय मात्रा रूप में लगते हैं। जैसे -लड़के, लड़कों, बहनें, बहनों, बालक, बालकों आदि।
2. “अकारांत” और ‘आकारांत’ से भिन्न शब्दों में विभक्ति-प्रत्यय अपने मूलरूप (एँ, ओं) में लगते हैं। जैसेवस्तु-वस्तुएँ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 13 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 13 Question Answer – मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के व्यक्तित्व की विशेषताओं का उल्लेख करें ।
प्रश्न – 2 : मौलाना आज़ाद के अनुसार हमें अपनी स्वतंत्रता का उपयोग कैसे करना चाहिए – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 3 : मौलाना आज़ाद के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं को लिखें, जिन्हें हमें अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है ।
प्रशश्न – 4 : महान व्यक्तित्व, भव्य उपस्थिति, अदम्य साहस और भय-मुक्त आचरण का व्यक्ति किसे कहा गया है ? उनकी विशेषताओं का उल्लेख करें ।
उत्तर :
मौलाना अबुल कलाम का व्यक्तित्व साहस, ईमानदारी, निडरता तथा स्वंतत्रता-प्रेमी का व्यक्तित्व था। सन् 1920 में कांग्रेस में शामिल होने से पहले ये क्रांतिकारी थे । अपने अनेनानेक गुणों के कारण इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया । यह एक ऐसा पद था जिसे उन्होंने अनेक वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में भी संभाले रखा।

मौलाना आजाद यद्यपि मुसलमान थे फिर भी हिन्दू, मुसलमान, सिख एवं ईसाई में उनके लिए कोई भेद-भाव नहीं था। राष्ट्रीय भावना उनके जीवन की प्रेरणा-शक्ति थी। वे राष्ट्रीय एकता तथा सामुदायिक सद्भावना के प्रतीक थे । इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यदि किसी ने उनका व्यक्तिगत अपमान किया तो उसे वे आसानी से भुला सकते थे लेकिन राष्ट्रीय अपमान को नहीं । उन्होंने हमेशा सच्चाई तथा ईमानदारी का साथ दिया।

आज़ादी मिलने के बाद मौलाना ने सबसे पहले इस बात पर जोर दिया कि इस आज़ादी का उपयोग सामाजिक कल्याण में, देश से बीमारी गंदगी तथा निरक्षरता दूर करने में किया जाय । वे स्वयं खुले दिल-दिमाग के थे तथा चाहते थे कि आज़ाद भारत भी जातिगत, भाषागत, प्रांतगत तथा बोलीगत संकीर्ण पूर्वाग्रहों से मुक्त हो। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय एकता के आदर्शों, प्रशासन में ईमानदारी तथा आर्थिक प्रगति के लिए ही उनका प्रत्येक कदम था।

किताबें मौलाना आज़ाद की हर समय की साथी थीं। उन्होंने कुरान पर एक प्रसिद्ध रचना की। इसके अलावे उन्होंने पूर्वी तथा पाश्चात्य दर्शनशास्त्र की भूमिका पर भी एक किताब लिखी जो अपने-आप में अन्यतम है। इस पुस्तक में ब्रह्यांड की तुलना एक ऐसी प्राचीन पांडुलिपि से कि गई है जिसका पहला और अंतिम पृष्ठ कहीं खो गया हो ।

मौलाना आज़ाद की सबसे बड़ी सीख जो हमें आज भी याद रखने की जरूरत है – वह यह है कि देश में आज भी विभाजित करने वाली शक्तियाँ प्रभावी हैं । यदि हम राष्ट्रीय एकता के बारे में सोचते हैं तो हमें उन शक्तियों से सावधान रहने की जरूरत है । दूसरी जो उनकी सीख है कि कोई व्यक्ति तब तक सच्चा नेता नहीं हो सकता जब तक वह अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करके अपनी लोकप्रियता को जोखिम में नहीं डालता । सच तो यही है कि जो सब को प्रसन्न करना चाहते हैं वे अंत तक किसी को भी प्रसन्न नहीं कर पाते ।

WBBSE Class 9 Hindi मौलाना अबुल कलाम आज़ाद Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 13 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद 2

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 72

  • निडर = नहीं डरने वाला ।
  • दायित्व = कर्म ।
  • जोखिम = खतरे ।
  • कमियों = कमी ।
  • पराधीन = गुलाम।
  • सद्भावना = अच्छी भावना ।
  • भेद-भाव = अंतर ।

पृष्ठ सं० – 73

  • भाषागत = भाषा से जुड़ी ।
  • प्रांतगत = प्रांत या राज्य से जुड़ी ।
  • सुविदित = अच्छी तरह जानी हुई।
  • तथापि = फिर भी ।
  • टस से मस न होना = अड्गि रहना, अपनी बात पर बने रहना ।
  • समुचित = पूरी।
  • अवहेलना = न मानना ।
  • आघात = चोट ।
  • हामी = पक्षधर, पक्ष लेने वाले ।
  • समीचीन = समय के अनुकूल ।
  • सबक = पाठ, शिक्षा, सीख ।

पृष्ठ सं० – 74

  • पांडुलिपि = लिखावट ।
  • भय-मुक्त = डर से मुक्त ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 Question Answer – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर डॉ० राजेन्द्र प्रसाद का परिंचय दें ।
प्रश्न – 2 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान में भारत के लिए जो आदर्श रखे उनका वर्णन करें।
प्रश्न – 3 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद महात्मा गाँधी के निष्ठावान शिष्य थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 4 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के विश्व-शांति तथा परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में विचार लिखें ।
प्रश्न – 5 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद सच्चा प्रजातंत्र किसे मानते थे ? विवेचना करें ।
प्रश्न – 6 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व तथा कार्यों का उल्लेख करें ।
उत्तर :
है राजेन्द्र प्रसाद वह नाम आदर जिसे इतिहास देता है,
बढ़कर जिसके पद-चिह्नों को अंकित दिल पर कर देता है ।

अपनी सादगी तथा सरलता के कारण किसान जैसा व्यक्तित्व पाकर भी पहले राष्प्रपति बनने का गौरव पाने वाले डॉ० राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर सन् 1884 ई० के दिन बिहार राज्य के सरना जिले के एक मान्य एवं सभान्त कायस्थ परिवार में हुआ था । इन्होंने बारह वर्षों से भी अधिक समय तक देश को भविष्य का मार्ग दिखाया।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

आरंभ में राजेन्द्र बाबू राष्ट्रीय नेता गोपाल कृष्ण गोखले से, पर बाद में महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से सबसे अधिक प्रभावित रहे । दोनों का प्रभाव इनके जीवन पर स्सष्ट रूप से दिखाई देता था । जाँधी जी के सच्चे शिष्य के रूप में उन्होंने हमेशा निम्नलिखित बातों पर बल दिया –

  • हम सभी प्रकार की हिंसा से बचें ।
  • सभी राष्ट्रों के बीच शांति और मित्रता स्थापित करने के लिए संघर्ष करें ।
  • एकपक्षीय परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रस्ताव पारित एवं स्वीकृत किए जायं।
  • हमें उन कारणों को भी समाप्त करना होगा जो युद्धों का कारण बनते हैं।
  • यदि हम विश्व में एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में जीवित रहना चाहते हैं तो परस्पर भय, अविश्वास, वैरभाव तथा असुरक्षा के कारणों को दूर करना होगा ।
  • मनुष्य को यह अनुभव करना चाहिए कि समस्त मानवता एक है, भले ही उसमें जातिगत, संप्रदायगत और वर्गभेद हैं ।
  • सभी राष्ट्रों को अपनी सोच का क्षितिज व्यापक बनाना होगा, ज्ञान में वृद्धि करनी होगी, सभ्य जीवन जीना होगा और यह अनुभव करना होगा कि जब विश्व का कोई व्यक्ति या देश कष्ट उठाता है तो सभी कष्ट उठाते हैं।
  • हम एक-दूसरे से घृणा करना, शत्रुता छोड़ दें तथा प्रेमपूर्वक एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें ।

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि राजेन्द्र प्रसाद गाँधी जी के निष्ठावान शिष्य थे। प्रजातंत्र में उनका पूरापूरा विश्वास था और उनका यह मानना था कि जब तक यह पूरे संसार में व्याप्त न हो जाय, संसार के सभी समुदायों को प्रसन्नता न प्रदान करे तब तक वह सच्चा प्रजातंत्र नहीं है।

WBBSE Class 9 Hindi डॉ. राजेन्द्र प्रसाद Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 1
शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 69

  • सर्वोत्कृष्ट = सबसे अच्छा ।
  • शिखर वर्ष = अच्छे साल ।
  • बल = जोर ।
  • निरस्त्रीकरण = हथियारों पर रोक लगाना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

पृष्ठ सं० – 70

  • वैरभाव = दुश्मनी का भाव ।
  • भ्रातृत्व = भाईचारे की भावना ।
  • हासिल = प्राप्त ।
  • उतावलेपन = जल्दीबाजी।
  • अंततोगत्वा = अंत में जाकर ।

पृष्ठ सं० – 70

  • श्रोताओं = सुननेवाले ।
  • संतोषजनक = संतोष को जन्म देने वाला ।
  • निरंतर = लगातार ।
  • व्यापक = फैला ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 11 सरदार वल्लभ भाई पटेल

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 11 Question Answer – सरदार वल्लभ भाई पटेल

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर सरदार वल्लभ भाई पटेल का संक्षिप्त परिचय दें।
प्रश्न – 2 : सरदार वल्लभ भाई पटेल के व्यक्तित्व तथा कृतित्व का परिचय दें ।
प्रश्न – 3 : पटेल भारतीय एकता के संस्थापक थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 4 : सरदार को उनके जिन गुणों के आधार पर उन्हें ‘लौह पुरुष’ कहा गया – उनकी विवेचना करें ।
प्रश्न – 5 : एक गुहमंत्री के तौर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की उपलब्धियों का वर्णन करें।
प्रश्न – 6 : सरदार पटेल का जीवन हमें आधुनिक भारत के महान निर्माताओं के आत्मत्याग की याद दिलाता है – विवेचना करें ।
प्रश्न – 7 : सरदार पटेल के रूप में हमारे पास एक साहसी क्रांतिकारी, विद्वान राजनेता और आदर्श प्रशासक था-अपने विचार लिखें ।
उत्तर :
संयम, सादगी, सहिष्णुता, सत्यवादी तथा दृढ़ता के प्रतीक सरदार का जन्म 31 अक्टूबर, सन् 1875 को गुजरात में हुआ था । 22 वर्ष की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर वकालत के पेशे में आ गए। सन् 1908 में विलायत की अंतरिम परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर बैरिस्टर बन गए। फौजदारी वकालत में उन्होंने खूब यश कमाया।

जनसेवा तथा त्याग-भावना के कारण ही पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए । बोरसद सत्याग्रह, नागपुर का झण्डा सत्याग्रह, बारडोली ताल्लुका सत्याग्रह तथा गुजरात की बाढ़ के समय पटेल ने जो अपना योगदान दिया वह हमेशा याद रखा जाएगा ।

सरदार पटेल उद्देश्य के प्रति स्थिर लक्ष्य, संगठन कार्य में अप्रतिम तथा अपने आदर्शों के प्रति अटल थे । उनके चट्टानी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हे ‘लौह पुरुष’ कहा । उनकी तुलना महान राजनीतिज मैकियावेली तथा बिस्मार्क से की जाती है।

सितंबर, 1946 में जब नेहरु जी की अस्थायी सरकार बनी तो सरदार पटेल को गृहमंत्री नियुक्त किया गया । गृहमंत्री के तौर पर उन्होंने देशवासियों से कहा कि यदि हम अपने देश को प्रथम वर्ग की शक्ति बनाना चाहत हैं तो हमें कुछ अधिक करने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें अपने मतभेदों को भुलाकर देश में पूर्ण संगठन और एकता लानी होगी । जब देश में राज्यों के एकीकरण करने की बात आई तो इस समस्या को पटेल ने बिना खून-खराबी के बड़ी खूबी से हल किया।

देशी राज्यों में राजकोट, जूनागढ़, बहावलपुर, बड़ौदा, कश्मीर, हैदराबाद को भारतीय महासंघ में सम्मिलित करने में सरदार को कई पेचीदगियों का सामना करना पड़ा फिर भी उन्होंने इसे हल किया।

निष्कर्ष तौर पर यह कहा जा सकता है कि महात्मा गाँधी ने कांग्रेस में प्राणों का संचार किया तो नेहरु ने उस कल्पना और दृष्टिकोण को विस्तृत आयाम दिया । डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद से उसको आचरण मिला था और सरोजिनी नायडू ने कांग्रेस को आभार प्रदान की थी लेकिन इसके साथ ही जो शक्ति और सम्पूर्णता कांग्रेस को प्राप्त हुई वह सरदार पटेल की कार्यक्षमता का ही परिणाम था 1 15 दिसंबर, 1950 को प्रातःकाल 9 बजकर 37 मिनट पर 76 वर्ष की आयु में इस महापुरुष का निधन हो गया लेकिन उनकी राष्ष्र के प्रति की गई सेवाओं का भारतीय जन-मानस पर अमिट प्रभाव है ।

WBBSE Class 9 Hindi सरदार वल्लभ भाई पटेल Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 11 सरदार वल्लभ भाई पटेल 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 64

  • पूर्व = पहले ।
  • अनुकूल = अनुसार ।
  • राय = विचार, सलाह ।
  • परे = अलग ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • स्पष्टवादिता = स्पष्ट बोलने की आदत ।
  • दूरदर्शिता = भविष्य को देखने की गुण ।
  • शेष = बाकी ।
  • दक्षता = कुशलता।
  • चातुर्य = चतुरता ।
  • सबल = मजबूत ।
  • परिवर्तित = बदलना ।
  • एकीकरण = एक करने का प्रयास ।
  • प्रांतों = राज्यों।

पृष्ठ सं० – 65

  • कम्भा, रेड्डी, लिंगायत, वोकलीगर, कायस्थ, राजपूत = जातियों के नाम हैं।
  • नितांत = बिल्कुल।
  • गौण = एकदम साधारण ।
  • निजी = व्यक्तिगत ।
  • दूषित = गंदा ।
  • दैनिक = रोज निकलने वाला समाचार-पत्र ।
  • संगठन-क्षमता = लोगों को एकत्र करने की क्षमता।

पृष्ठ सं० – 66

  • अंश = भाग, हिस्सा ।
  • प्रण = संकल्प ।
  • चहुँमुखी = चारों ओर से ।
  • गबन = घपला ।
  • अपव्यय = गलत तरीके से खर्च करना’ ।
  • उजागर = प्रकट ।
  • मूल = मुख्य ।
  • उत्थान = विकास ।
  • संपदा = धन ।
  • अपनत्व = अपनापन ।

पृष्ठ सं० – 67

  • नैतिक आचरण = व्यक्तिगत व्यवहार ।
  • अंतराल = अंतर, दूरी ।
  • आंतरिक = भीतरी ।
  • अनंत = जिसका अंत न हो ।
  • सर्वोपरिसत्ता = ईश्वर ।
  • गहनतम = अत्यंत गहरा ।
  • प्रकृति = स्वभाव ।
  • सुचारु = अच्छे तरीके से ।

पृष्ठ सं० – 68

  • परे = अलग ।
  • कार्यान्वित = कार्य रूप देना, कार्य करना ।
  • दंभी = घमंडी, अहंकारी ।
  • पूर्वाग्रह = पहले की बातों के प्रति आग्रह ।
  • अटूट = नहीं टूटने वाला ।
  • प्रबल = शक्तिशाली ।
  • सराहना = प्रशंसा।
  • पदचिह्न = पैरों के चिह्न।
  • धूमिल = गंदा ।
  • परास्त = पराजित ।
  • कामियों = कमी ।
  • निराकरण = हल, समाधान ।
  • आकांक्षाओं = इच्छाओं ।
  • आशंका = भय से भरा संदेह ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 Question Answer – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : रवीन्द्रनाथ ठाकुर सर्वतोमुखी प्रतिभासंपन्न , साहित्यकार, कलाकार, शिक्षक, कवि, गीतकार और अभिनेता थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 2 : बहुमुखी साहित्यकार के रूप में रवीन्द्रनाथ ठाकुर का मूल्यांकन करें ।
प्रश्न – 3 : संकलित पाठ के आधार पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर का साहित्यिक परिचय दें ।
उत्तर :
अगर हम ऐसा कहें कि कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि थे तो ऐसा कहना अतिशयोक्ति न होगी। इनका जन्म 7 मई, सन् 1861 को सोमवार के दिन जोड़ासाँकू (कलकत्ता) में हुआ था।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर एक ही साथ कवि, कलाकार, शिक्षक, कवि, संत, विचारक और मानवता के सच्चे पुजारी थे। साहित्य की कोई ऐसी विधा नहीं थी, जिसमें उन्होंने न लिखा हो – कहानी, उपन्यास, नाटक, प्रहसन, गीत, गीतिका, कीर्त्तन, आलोचना आदि उन्होंने सब लिखा।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

विषय की बात करें तो उन्होने धर्म, शिक्षा, समाज, राजनीति, इतिहास, अर्थशास्व, विज्ञान, संगीत आदि सभी विषयों पर लिखा । यह भी लिए गर्व की बात है कि किसी भी भारतीय साहित्यकार की रचनाओं का अनुवाद उतनी भाषाओं में नहीं हुआ जितनन रवीन्द्धनाथ ठाकुर की रचनाओं का । संसार की अनेक भाषाओं में इनके ग्रंध आ चुके हैं। श्री ठाकुर का दर्शन-ज्ञान भी अपूर्व था। भारतीय दर्शन पर उनके व्याख्यान को सुनकर यूरोप और अमेरिकावाले भी दंग रह जाते थे । इनकी कविताओं की पंक्ति-पंक्ति में संगीत भरा है । कंठ भी सुंदर था । जब ये गाने लगते तो ऐसा प्रतीत होता मानो संगीत पंख लगाकर चारों और मंडराते हुए उड़ रहे हों ।

सत्तर वर्ष की आयु में इन्होंने चित्रकला प्रारंभ की । टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों से रंगों का समन्वय कुछ ऐसा किया कि संसार के चित्रकला-मर्मझ भी विस्मय-विमुग्ध रह गए। संसार की बड़ी-बड़ी आर्ट-गैलरियों में इनके चित्र रखे गए। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल साहित्यिक या कवि ही नहीं थे, उनका व्यक्तित्व भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में ऊँचा स्थान प्राप्त कर चुका था।

वास्तव में रवीन्द्र की प्रतिभा में भारतीय संस्कृति के विविध अंगों का समावेश और समन्वय की सामर्श्य प्रचुरता से पायी जाती है । इसलिए उनकी काव्यधारा में एक साथ ही वेदान्त, वैष्णववाद, यौद्धदर्शन, सूफी मत, बाऊल सम्पदाय, ईसाई धर्म सभी का एक अभूतपूर्व समन्वय माप्त होता है । सन् 1941 में यह ‘भारत-रवि’ अस्त हो गया।

प्रश्न – 4 : संकलित पाठ के आधार पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर के ईश्वर-संबंधी विचारों को लिखें।
प्रश्न – 5 : रवीन्द्रनाथ का धर्म उनकी दृष्टि और अनुभव पर आधारित है, न कि ज्ञान पर – विवेचना करें।
प्रश्न – 6 : टैगोर के लिए ईश्वर, मानव और प्रकृति एक में ही समाविष्ट है – पठित पाठ के आधार पर टैगोर के थर्म-संबंधी विचारों को लिखें ।

प्रश्न – 7 :
धर्म को आचरण के आडा्बर या समारोहपूर्वक पूजा-पाठ मानकर भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए प्रस्तुत पंक्ति के आलोक में रवीन्दनाथ ठाकुर के धर्म तथा ईश्वर-संबंधी विचारों को लिखें।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ धार्मिक, ईश्वरवादी के साथ-साथ मानवतावादी भी थे । यह उनके दर्शन की विशिश्रता है कि भारतीय वेदान्तिक परम्परा से प्रेरणा लेते हुए मानव को ईश्वर का ही अंश माना । ईश्वर और मानव का संबंध रबीन्द्रकाव्य में एक अपूर्व रूप ले लेता है । असीम ईश्वर और ससीम (जिसकी सीमा हो) मानव में कोई भेद नहीं है । मानव और ईश्वर दोनों में एक सेतु (पुल) है – प्रेम का सेतु । संत रविदास ने भी ईश्वर को नरहरि कहकर संबोधित किया है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर का ईश्वर संबंधी दर्शन भक्तकवि चण्डीदास से प्रभावित था –

“सुन हे मानुष भाई
सबार ऊपरे मानुष सत्य
ताहार ऊपरे नाई ।”

हैगोर के लिए यह संसार विविध, सुन्दर और नवीन है । उनके अनुसार मानव तो प्रेम और प्रेम पाने के लिए ही पैदा हुआ है । इस प्रेम को पाने के लिए आत्मिक शुद्धि बहुत आवश्यक है। इसलिए मनुष्य को धर्म के नाम पर आडम्बर या समरोहपूर्वक पूजा-पाठ न मना कर भ्रम से दूर ही रहना चाहिए। अहंकार के लोप से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

टैगोर के लिए सामाजिक उद्देश्य और आध्यात्मिक जीवन में कोई टकराहट नही है। रवान्द्रनाथ के लिए आत्मसंयम ही तपस्या है और वह सांसारिक कर्मों से पलायन नहीं है। यही वह बिन्दु है उन्हें मानवधर्म या मानवतावाद की ओर ले जाता है। रवौन्द्रनाथ अंधविश्वासों से रहित, मानव स्वतंगता की सर्जनात्मकता तथा विवेक की सार्थक्ता को ही ईश्वर-दर्शन मानते थे । उनका यह कहना था कि प्राचीन अंधविश्वास हमारे दिल-दिमाग को नहीं कृते – उन्हें बंदलना होगा।

टैगोर ने अपने मानवतावादी — ईश्वरवाद का प्रतिपादन अपने सर्व श्रेष्ठ ग्रंथ, जो धर्म-दर्शन पर है – “The Religion of Man” में विस्तृत रूप से किया है । उनके धर्म-दर्शन का साराश यह है कि ईश्वर मानव की आत्मा में ही निवास करता है । मानव से प्रेम करना ही ईश्वर से प्रेम करना है ।

प्रश्न – 8 : भारतीय स्वाथीनता-संग्राम में रवीन्र्रनाथ ठाकुर के योगदान का उल्लेख करें ।
प्रश्न – 9 : “जब बुराई पनपने लगे तो यह हमारे लिए जरूरी हो जाता है कि हम आवाज उठाएँ” प्रस्तुत पंक्ति के आलोक में रवीन्द्रनाथ ठाकुर के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करें।
प्रश्न – 10 : रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल कवि – साहित्यकार ही नहीं महान क्रांतिकारी भी थे संकलित पाठ के आधार पर लिखें ।
उत्तर :
रबीन्द्ननाथ ठाकुर मूलतः साहित्यिक कलाकार थे लेकिन जब भी देश में अन्याय हुआ तो उन्होंने उसका विरोध किया। उनका यह विचार था कि जब भी वुराई पनपने लगे तो हमारा यह दायित्व बनता है कि विरोध करें। सन् 1995 में जब राजद्रोह विधेयक पास हुआ और तिलक को गिरफ्तार कर लिया, टैगोर ने ऐसे समय में सरकार की दमन-नीति के विरुद्ध आवाज उठाई और उनके बचाव के लिए धन इकट्टा करने में अपना योगदान दिया। जन सन् 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ तो इसने टैगोर को विचलित कर दिया। उस समय उन्होने देशप्रेम से भरे गीतों की रचना करके लोगो में चेतना जगाने की कोशिश की।

जब जालियांवाला बाग में हजारों निर्दोष मारे गए तो उन्होने अंग्रेजी सरकार को अपना ‘नाइटहुड’ का खिताब लौटा दिया। इतना ही नहीं विरोध व्यक्त करने के लिए उन्हांने वायसराय चेम्सफोर्ड को पत्र लिखा। इस पत्र का अंतिम अंश था –
“अब समय आ गबा है जब सम्मान के तमगे विशिप्टता के उस विसंगत संदर्भ में, जिसमें मेरे देशवासी अपनी तथाकथित हीनता के कारण वह अपमान सह रहे हैं, जो मानवोचित नहीं है – हमारी शर्म को और उजागर करते हैं ।'”

अंग्रेजों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति के विरोध में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जहाँ-जहाँ अलगाव की भावना सर्वोपरि है वहाँ-वहाँ अंधकार का राज्य है। वे राजनीति में हिंसा के विरोधी थे। उनका कहना था – सभ्यता हिंसा में जीवित नहीं रह सकती। केवल आध्यात्मिक मूल्यों को पुन: अपनाकर ही मानवता को विनास से बचाया जा सकता है । उनके मन में किसी भी जाति या सम्पदाय के लिए घृणा का भाय न था –

“‘इन मुसलमानों का जिन्होंने प्राचीनकाल से और अनेक पीढ़ियों से अपने जन्म और मरण से इस मिद्वी को अपना कहा है, उसका भी भारत के इतिहास में स्थान है ।.यहाँ तक कि अंग्रेज भी हमारे इतिहास के अंग हैं ।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

राजनीति में मानव-मात्र से प्रेम का उदाहरण सी०एफ०एण्डुज को लिखे पत्र में उनके इस कथन में मिलता है –
“बिटेन राप्प्र से अपनी सभी शिकायतों के बावजूद मैं आपके देश को प्रेम करने के लिए विवश हूँ. जिन्होंने मुझे अनेक परम प्रिय मित्र दिए हैं । मैं इस सच्चाई के कारण अत्यंत प्रसन्न हूँ क्योंकि धृणा करना एक घृणित कार्य है । सत्य बह है कि सभी देशों के सबसे अच्छे लोग आपस में प्रेम करते हैं ।”

WBBSE Class 9 Hindi रवीन्द्रनाथ ठाकुर Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 45

  • सर्वतोमुखी = बहुमुखी ।
  • अभिनेता = अभिनय करनेवाले ।
  • उदार = खुले दिल का ।
  • मान्यताएँ = विचार ।
  • आलोक = प्रकाश ।
  • सौहाद्र = प्रेम ।
  • साकार = आकार के साथ ।
  • शाश्वत = जो हमेशा से है ।
  • जीवन्त = जिंदा।
  • उद्दाम = साहस।
  • मिश्रित = मिला हुआ ।
  • कौतूहल = जानने की उत्सुकता ।
  • हिमायत = पैरवी ।
  • क्रूर = कठोर ।
  • संक्रमण = बीमारियों से ग्रस्त होना ।
  • परिधानों = वस्त्रों ।
  • दुराग्रहों = बुरे चीजों के लिए आग्रह, जिद्न ।
  • जड़ता = मूखर्खता ।

पृष्ठ सं० – 46

  • पुनर्नवीकरण = पुन: नया करना ।
  • पुनसर्मपण = फिर से सर्मपण ।
  • सार = तत्व ।
  • असीम = जिसकी सीमा न हो।
  • राग = प्रेम ।
  • व्यक्त = प्रकट ।
  • परिष्कृत = अच्छा ।
  • एकांतसेवी = एकांत में रहनेवाले।
  • पूर्वानुभूति = पहले से होनेवाली अनुभूति ।
  • भावी = होनेवाला ।
  • पूर्वपीठिका = भूमिका ।
  • नीड़ = घोंसला।
  • अवास्तविकता = जो वास्तविक नहीं है ।

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पृष्ठ सं० – 47

  • स्मारक = स्मृति का स्थान ।
  • कामना = इच्छा ।
  • सामंज्यस = तालमेल ।
  • प्रशांत = विशाल ।
  • सहकार = सहयोग करने वाले ।
  • परिवेश = वातावरण ।
  • अतृप्त = जो तृप्त न हो ।
  • द्वंद्व = युद्ध ।
  • अपयशकारी = कलंक लगाने वाली ।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • तपोवन = वह वन जहाँ ॠषि तप किया करते थे ।

पृष्ठ सं० – 48

  • नगण्य = नहीं गिनने योग्य ।
  • उपरान्त = बाद ।
  • कतिपय = कुछ ।
  • प्रवासी = जो दूसरे देश में वास करता हो ।
  • एकत्व = एक होने की भावना ।
  • विखण्डत्व = अलगाव ।

पृष्ठ सं० – 49

  • प्रज्ञा = विवेक, ज्ञान ।
  • दार्शनिक = विचारक ।
  • प्रखर = तेज ।
  • बौद्विक = बुद्धि से जुड़ा हुआ ।
  • आभास = अनुभव।
  • दृष्टिगोचर = दृष्टि से दिखाई देने वाली ।
  • स्पर्श = छूने ।
  • अपितु = बल्कि ।
  • अन्तरिक्ष = शून्य ।
  • यन्त्रवत् = मशीन की तरह।
  • अन्धाधुन्ध = बिना सोचे-समझे ।
  • नकारने = नहीं मानना ।

पृष्ठ सं० – 50

  • मुक्ति = आज़ादी ।
  • सुदूर = बहुत दूर ।
  • छोर = सिरे ।
  • तान = धुन ।
  • धरातल = धरती का तल, सतह ।
  • अन्यतम = जिसके समान अन्य न हो ।
  • गहन = घना।
  • अज्ञान = नहीं जानना ।
  • ज्ञान = जानना।

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पृष्ठ सं० =51

  • सघन = बहुत घना ।
  • बोध = ज्ञान ।
  • कोहरा = धुंध ।
  • आन्तरिक = अंदर का ।
  • आलोक = प्रकाश।
  • निरर्थक = जिसका कोई अर्थ न हो ।
  • एकाकार = एक में सिमटना ।
  • दीप्तिमान = उज्ज्चल ।
  • वर्णनातीत = वर्णन से परे, अलग।
  • परम सत्य = सबसे बड़ा सत्य
  • अमर = नहीं मरनेवाला ।
  • रीति = विधि, तरीका ।
  • अनन्त = जिसका अंत न हो ।
  • नितांत = बिलकुल ।
  • निजी = अपना ।
  • मुख = चेहरा, मुँह ।
  • स्मरण = याद ।
  • कृपापात्र = कृपा पाने का अधिकारी ।

पृष्ठ सं० – 52

  • परे = अलग ।
  • अभिव्यक्ति = अपने विचारों को प्रकट करना ।
  • आत्म-प्रकटीकरण = अपने भावों को प्रकट करना।
  • संज्ञाहीन = जिसका कोई नाम न हो ।
  • पालनहार = पालन करनेवाला ।
  • समाविष्ट = समाये हुए ।
  • कटु = कड़वा ।

पृष्ठ सं० – 53

  • अन्यथा = वरना ।
  • अस्तित्व = होना ।
  • आडम्बर = दिखावा ।
  • भम = जो वस्तु जो नहीं है उसे वही मना लेना, जैसे – रस्सी को साँप या साँप को रस्सी मान लेना ।
  • पुननिर्माण = फिर से निर्माण ।
  • अहम् = अहंकार।
  • लोप = गायब।
  • अर्पण = अर्पित करना, न्योछावर करना, बलिदान करना

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पृष्ठ सं० – 54

  • बिम्ब = चित्र ।
  • एकाकार = मिलकर एक हो जाना ।
  • बन्धुवत् = मित्र की तरह ।
  • स्कुलिंग = चिनगारी।
  • इंगित = ईशारा ।
  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • अन्धविश्वास = अंधे की तरह विश्वास करना ।
  • वंचित = जिसे प्राप्त न हुआ हो ।
  • स्वप्नद्रष्टा = सपने देखने वाला ।
  • भविष्यवक्ता = भविष्य के बारे में बोलने वाला ।
  • निरंतर = लगातार ।
  • संतरी = रक्षक ।

पृष्ठ सं० – 55

  • आत्मसंयम = अपने पर संयम रखना ।
  • आशय = भाव ।
  • सृजन = सृष्टि ।

पृष्ठ सं० – 56

  • निष्क्रिय = क्रियाहीन ।
  • अनुसरण = पीछे चलना ।
  • शिवम् = कल्याण ।
  • पूर्ण संयोग = पूरी तरह मिलना ।
  • कर्मच्युत = कर्म से भागना ।
  • समक्ष = सामने ।
  • विस्तृत = फैला हुआ ।
  • शिखर = चोटी ।
  • आकृष्छ = आकार्षि ।

पृष्ठ सं० – 57

  • चिरयौवन = हमेशा युवा ।
  • तरुणाई = युवावस्था ।
  • कालखण्ड = समय का टुकड़ा ।
  • अभिपाय = मतलब ।
  • तरुण = जवान ।
  • सचेत = सावधान ।

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पृष्ठ सं० – 58

  • स्वर्ण = सोना ।
  • संकोच = लज्जा ।
  • सर्जक = सृष्टि करने वाला, सृजन करनेवाला ।
  • परे = अलग।
  • संयोग = मिलना।
  • वियोग = बिद्धुरना ।
  • अपरिहार्य = जरूरी, आवश्यक ।
  • परिवेश = वातावरण ।

पृष्ठ सं० =59

  • विकासवाद = वह विचारधारा जो यह विश्वास करती है कि मनुष्य क्रमश: विकास करता हुआ इस अवस्था तक पहुँचा है ।
  • फ्रायड = एक मनोविज्ञानी ।
  • अचेतन = जहाँ चेतना न हो ।
  • प्रतिवर्ती = एक-दूसरे से जुड़ी ।
  • योगदान = सहायता ।
  • रहित = बिना ।
  • अपशकुन = बुरा, अमंगल का सूचक ।
  • बाधित = बाधा पहुँचाना ।
  • तानाशाह = मनमानी करने वाला ।
  • उन्नायक = विकास कराने वाला ।
  • हनन = दबाना ।
  • अमूल्य = जिसका मूल्य न हो सके।
  • अर्जित = इकट्ठा।
  • धरोहर = याती, पूर्वजों द्वारा दी गई संपत्ति ।

पृष्ठ सं० -60

  • अम्बार = ढ़ेर ।
  • अशक्तता = कमज़ोरी ।

पृष्ठ सं० – 61

  • खिताब = सम्मान ।
  • विसंगत = विशेष संगत ।
  • हीनता = बुरीस्थिति ।
  • मानवोचित = मानव के लिए उचित ।
  • घातक = घात करनेवाला, चोट पहुँचानेवाला ।
  • दायित्व = जिम्मेवारी ।
  • आकृष्ट = आकर्षित।

पृष्ठ सं० – 62

  • विचलित = व्याकुल, चिंतित ।
  • बर्बरता = जंगलीपन ।
  • उबार = निकाल ।
  • विध्वंसक = विध्वंश करने वाला ।
  • विलगाव = अलगाव ।
  • गरिमा = सम्मान ।

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पृष्ठ सं० – 63

  • पुनरूत्थान = फिर से उत्थान ।
  • पथप्रदर्शक = रास्ता दिखानेवाला ।
  • प्रवक्ता = उपदेशक ।
  • वसीयत = अंतिम इच्छा।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 Question Answer – लाला लाजपत राय

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : “लाला लाजपत राय जैसे व्यक्ति तब तक नहीं मर सकते जब तक भारतीय आकाश में सूर्य चमक रहा है” – संकलित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 2 : लाला लाजपत राय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें ।
प्रश्न – 3 : लाला लाजपत राय को उनकी किन विशेषताओं के आधार पर ‘पंजाब केसरी’ नाम से जाना जाता है – लिखें ।
प्रश्न – 4 : संकलित पाठ के आधार पर लाला लाजपत राय का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करें ।
उत्तर :
पंजाब की उर्वर भूमि, जुझारु एवं कर्मठ व्यक्तित्व को जन्म देती रही है । इसी प्रांत के लुधियाना जिले के घुड़ी गाँव में 28 जनवरी, 1865 को एक बालक का जन्म हुआ जो आगे चलकर पंजाब केसरी लाला लाजपत राय्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ । इनके पिता श्री राधाशरण अग्रवाल शिक्षक थे तथा माँ गुलाब देवी भी विदुषी महिला थी । लाहौर से कानून की पढ़ाई पूरी कर ये हिसार की जिला अदालत में वकालत का काम करने लगे ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

आगे चलकर ये आर्य समाजी बनकर शिक्षा, धर्म, मानव-सेवा और साहित्य सभी क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी तथा वकालत छोड़कर स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। उन्होंने ‘भारत सुधा’ तथा ‘पंजाबी’ पत्र के माध्यम से भी लोगों को जगाने का प्रयास किया । उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व एवं स्वाधीनता-संग्राम में उनकी सक्रियता देखकर अंग्रेजी सरकार सतर्क हुई तथा इन्हें भारत से निर्वासित कर माण्डले जेल भेज दिया गया । उनपर विद्रोह भड़काने तथा अंग्रेजी राज मिटाने का आरोप भी लगाया गया। उनके निर्बासन की खबर पूरे देश में फैल गई तथा चारों ओर से अंग्रेजी सरकार पर दबाब बढ़ने लगा । परिणाम यह हुआ कि 11 नवंबर, 1907 को 6 महीने के भीतर ही उन्हें मुक्त कर लाहौर पहुँचाया गया । इसी एक घटना से उनकी लोकप्रियता का अदांजा लगाया जा सकता है।

लाला लाजपत राय महान मानवतावादी थे । वे दलितों, पीड़ितों, अनाथों, विधवाओं, असहायों के सच्चे सेवक थे। अछूतों की दुर्दशा के प्रति कट्टर हिन्दूवादियों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से 1912-13 में उन्होंने काशी, प्रयाग, बरेली तथा मुरादाबाद की यात्रा की तथा अपने ओजस्वी भाषणों द्वारा हिन्दुओं से इस कलंक को मिटाने की भी अपील की थी । सन् 1913 ई० में गुरुकुल कांगड़ी में उनकी अध्यक्षता में एक अछूत सम्मेलन भी हुआ था । उन्होंने अकाल, महामारी एवं भूकम्प पीड़ितों की भी तन-मन-धन से सेवा की । उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा, देश-भाषा तथा देश की सभ्यता पर विशेष जोर दिया ।

भारत में शासन-सुधार कैसा हो ? इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए बिटिश सरकार ने साइमन कमीशन को भारत भेजा । इसके सभी सदस्यों के अंग्रेज होने के कारण भारतीय ने इसका उटकर विरोध किया। 30 अक्टूबर, 1928 को इसके लाहौर पहुँचने पर, लाला लाजपत राय ने विरोध करनेवाले जुलूस का नेतृत्व किया।

पंजाब केसरी के ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारे से आकाश गूंज उठा । क्रूर अंग्रेज सैनिक एवं निष्ठुर पुलिस प्रमुख साण्डर्स ने देशभक्तों की आवाज को दबाने का पूरा प्रयास किया और भारत माँ के इस वीर सपूत को लाठियों से लहूलुहान कर दिया। “मेरे शरीर पर पड़ी हर एक लाठी की चोट बिटिश सरकार के कफ़न में कील साबित होगी” का सिंहनाद करता हुआ भारतमाता का यह सपूत 17 नवंबर, 1928 को भारत माँ की गोद में सदा-सदा के लिए सो गया ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

इस देशभक्त के बारे में राष्ट्रपिता गाँधी ने जो कहा था वे शत-प्रतिशत सही थे –
“‘उन्हें पंजाब केसरी की उपाधि यों ही नहीं मिली थी । जब तक भारतीय क्षितिज में सूर्य चमकता रहेगा, तबतक देशवासी उन्हें विस्मृत नहीं कर सकते ।”

WBBSE Class 9 Hindi लाला लाजपत राय Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 42

  • केसरी = सिंह ।
  • निर्वासन = निकाल देना, देशानकाला ।
  • ख्याति = प्रसिद्धि ।
  • अर्जित = पाना ।
  • पीड़ित = दु:खी ।
  • कटृरता = कठोरता ।
  • दासता = गुलामी ।
  • अस्त्र = हथियार ।
  • कृतज्ज = किए गए उपकार को माननेवाला ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

पृष्ठ सं० – 43

  • पारित = पास, स्वीकृत ।
  • अतिनाटकीयता = बहुत ज्यादा अभिनय (over acting) ।
  • अतिसंवेदन नीीलता = बहुत
  • अधिक भावुक होना ।
  • शतकों = सैकड़ों वर्षों ।
  • पैगम्बर = देवदूत ।
  • स्वप्नद्रष्ट = स्वप्न देखनेवाला ।
  • दूरदर्शी = दूर तक
  • देखने वाले, भविष्यद्रष्टा ।
  • संगीन = तलवार ।
  • यातना = दु:ख ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

पृष्ठ सं० – 44

  • धैर्य = साहस ।
  • भरसक = शक्ति- भर ।
  • प्रमाणों = सबूतों ।
  • सबक = शिक्षा ।
  • जोखिम = खतरा ।
  • शहादत = बलिदान।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 Question Answer – मोतीलाल नेहरू

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : उनका व्यक्तित्व देखकर हमें रोम के वाणिज्य दूतों की याद आती थी – पंक्ति के आधार पर मोंतीलाल नेहरू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का वर्णन करें ।
प्रश्न – 2 : वे एक महान् वकील थे, महान देश-भक्त, महान व्यक्ति – पंक्ति के आधार मोतिलाल नेहरु की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें ।
प्रश्न – 3 : उन्हें मानव की आत्मा में और उससे इतिहास को बदल देने की क्षमता में पूर्ण विश्वास था – के आधार पर मोतीलाल नेहरू का वर्णन करें ।
प्रश्न – 4 : संसदीय संस्थाओं के विकास में मोतिलाल नेहरू के योगदान की चर्चा संकलित पाठ के आधार पर करें।
उत्तर :
भारत में संसदीय संस्थाओं के विकास के लिए मोतीलाल नेहरू के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। मोतोलाल नेहरू उस सर्वदलीय समिति के अध्यक्ष थे जिसे हमारे देश के संविधान का मसौदा तैयार करने का दायित्व दिया गया था । उन्होंने संविधान का निर्माण करने में निम्नलिखित बातों का ध्यान प्रमुखता से रखा –

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

  • संसद का स्वरूप प्रजातांत्रिक हो।
  • हम हठधर्मिता का दृष्टिकोण न रखें ।
  • अन्तर्रोश्रीय संबंधों में मध्यम मार्ग अपनाएँ।
  • धर्म को राजनीति से नहीं जोड़ा जाय।

हमारा भारतीय संविधान समाज के जिन उद्देश्यों तथा सिद्धांतों पर आधारित है – वह मोतीलाल नेइरू की ही देन है। उन उद्देश्यों को पूरा करने में हम आज तक सफल नहीं हो पाए हैं क्योंकि हमारे अंदर वह कर्त्तव्य-भावना, उर्जा, परिश्रम तथा संगठन का अभाव है ।

मोतीलाल नेहरू के व्यक्तित्व तथा कायों से प्रभावित होकर तथा महात्मा गाँधी से पेरित होकर उनका पूरा परिवार ही राट्रीय आंदोलन का हिस्सा बन गया था। वे स्वतंत्र मस्तिष्क, पूर्वाग्रहों से मुक्त थे तथा हिन्दू, मुस्लिम और अंग्रेज सभी के अच्छे प्रभावों को ग्रहण करने वाले थे ।

एक महान वकील, महान देशभक्त तथा महान व्यक्तित्व के धनी होने के कारण उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि वे कोई निदनीय कार्य करेंगे त्येक अर्थ में वे एक विशाल हृदय के व्यक्ति थे ।

स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने पर उन्होंने अपनी विदेशी पोशाक का त्याग कर दिया और खादी को अपना लिया और खादी पहनने के बाद उनका व्यक्तित्व और भी आकर्षक हो उठा। इतना ही नहीं, उन्होंने इलाहाबाद की गलियों में खादी भी बेची । सन् 1930 ई० में गाँधी जी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें सजा भी भोगनी पड़ी ।

मोतीलाल नेहरू अपने जीवन के अंतिम दिनों में गायत्री मंत्र का जाप करने लगे थे । लेकिन ऐसा वे किसी ईश्वरीय भय के कारण नहीं करते थे क्योंकि उनका यह मानना था कि ईश्वर न तो कोधी पिता है और न ही कोई कठोर जज।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

मोतौलाल नेहरू के बारे में जो अंतिम बात कही जा सकती है – वह यह कि उनमें मानव की आत्मा तथा उनके इतिहास को बदल देने की क्षमता में पूरा पूरा विश्वास था। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है क्शि4 सितंबर, सन् 1924 में मोतोलाल नेहरू ने जिस एकता सम्मेलन की अध्यक्षता की उसमें उन्होंने यह संकल्प पारित किया –
“किसी भी धर्म के पूजा स्थलों को अपवित्र करना या किसी व्यक्ति को धर्म बदलने के लिए यातना या सजा देने जैसे कार्य निन्दा के योग्य हैं । दूसरे लोगों को विवश करके अपना धर्म स्वीकार करवाना या दूसरों की कीमत पर अपना धर्म लागू करना जैसे कार्य भी निन्दनीय हैं।”‘

WBBSE Class 9 Hindi मोतीलाल नेहरू Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 37

  • प्रगति = विकास ।
  • विविध = अनेक प्रकार की ।
  • उल्लेखनीय = उल्लेख करने योग्य ।
  • विशिष्ट = विशेष ।
  • योगदान = सहयोग ।
  • मसौदा = प्रारूप ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • अचूकता = सटीकता ।
  • उग्रवाद = हिंसा ।
  • फासीवाद = जर्मनी की एक विचारधारा ।
  • बहुधा = अक्सर ।
  • हठधर्मिता = जिद को ही धर्म बना लेना ।
  • अपेक्षित = आवश्यक ।
  • दुराग्रह = बुरा आग्रह ।
  • एकाधिकार = एक का अधिकार ।
  • मध्यस्थता = बीच-बचाव ।
  • संयम = संतोष।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

पृष्ठ सं० – 38

  • सम्पदाय = धर्म ।
  • पारित = स्वीकृत ।
  • नामित = मनोनीत ।
  • कडुता = कड़वाहट ।
  • उपनिवेशवाद = साप्राज्यवाद ।
  • परिसर = चहारदीवारी, आँगन ।
  • स्मरण = याद ।
  • मनोग्रंथि = मन की ग्रंधि/गांठ ।
  • आधुनिकतम = आधुनिक से आधुनिक ।
  • सुसज्जित = अच्छी तरह सजा हुआ ।
  • मनमानी = अपने मन की ।
  • उद्यम = परिश्रम ।

पृष्ठ सं० – 39

  • वृतान्त = कहानी ।
  • समस्त = पूरा ।
  • ग्रहणशील = ग्रहण करने वाले ।
  • शाही = राजाओं की तरह।
  • सर्वथा = सब प्रकार से ।
  • अमिट = नहीं मिटने वाला ।

पृष्ठ सं० – 40

  • तत्कालीन = उस समय का ।
  • आदी = अभ्यस्त ।
  • कताई = धागा कातना ।
  • खद्दर = खादी ।
  • सविनय = विनय के साथ।
  • अवज्ञा = आज्ञा नहीं मानना ।
  • मानक = स्वीकृत रूप ।
  • अनुकरणीय = अनुकरण करने योग्य ।
  • कुशाग्र = कुश की तरह तेज ।
  • अर्द्ध = आधा ।
  • सौहार्द् = प्रेम ।
  • चाह = इच्छा ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

पृष्ठ सं० – 41

  • अतीत = बीता हुआ समय ।
  • नासूर = घाव ।
  • सुचिंतित = अच्छाई के लिए घिंतित ।
  • उन्माद = उग्र भाव ।
  • दुर्गम = जहाँ आसानी से नहीं पहुँचा जा सके
  • ऊजाड़ = जहाँ कोई पेड़-पौधा न हो ।
  • गल्प = कहानी ।
  • आधात = चोट।
  • सजग = सावधान ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 Question Answer – बाल गंगाधर तिलक

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर बाल गंगाधर तिलक की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
प्रश्न – 2 : स्वाधीनता संघर्ष में बाल गंगाधर तिलक के योगदान पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 3 : बाल गंगाधर तिलक के स्वाधीनता संबंधी विचारों पर प्रकांश डालें।
प्रश्न – 4 : तिलक का जीवन कर्म-योग के आदर्श का दृष्टांत था – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : तिलक का जीवन आध्यात्म और समाजिकता का संयोग था – अपने विचार लिखें।
प्रश्न – 6 : संकलित पाठ के आधार पर तिलक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर :
भारत के दूसरे शिवाजी तथा स्वाधीनता संग्राम के ‘सिद्ध महात्मा’ लोकमान्य बाल ‘गंगाधर ने 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के एक ब्राह्यण परिवार में अंधकार में ‘प्रकाश ज्योति’ की तरह जन्म लिया। अभिमन्यु की तरह उनमें सहज प्रतिभा तथा संघर्ष के लिए साहस का असीम भण्डार था।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

सन् 1879 में कानून की डिग्री लेने के बाद वे देश के स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गए। अपने विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने दो साप्ताहिक पत्र मराठी भाषा में ‘केसरी’ तथा अंग्रेजी भाषा में ‘मराठा’ प्रकाशित किए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा, बहिष्कार तथा सत्याग्रह को प्रमुख कार्यक्रम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने महाराष्ट्र के लोकप्रिय त्योहारों को भी देशभक्ति से जोड़ दिया।

तिलक उदारवादियों की ‘राजनीतिक भिक्षावृत्ति’ की नीति में विश्वास नहीं करते थे। उनका कहना था ‘हमारा आदर्श दया याचना नहीं, आत्म निर्भरता है।’ उनका मानना था – ‘महान उद्देश्य (पूर्ण स्वराज) की प्राप्ति के लिए सभी साधन न्यायोचित हैं।

तिलक बाँस के वृक्ष की तरह नहीं थे कि जिधर हवा बहे, उधर ही झुक जाए। वे अपने उग्र विचारों पर दृढ़ थे, लेकिन इसकी कीमत उन्हें 1897 में चुकानी पड़ी, जब उन्हें 18 माह का कठोर कारावास मिला। सजा सुनाए जाने के बाद उन्होंने कहा –
“‘इस ट्रिब्यूनल से ऊपर भी कोई सत्ता है जो हमलोगों के भाग्य को शासित करती है और वह उसी सत्ता की इच्छा से हो सकती है कि मैं जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता हूँ वह मेरे मुक्त रहने की अपेक्षा जेल की यातना से अधिक फलीभूत हो।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

वास्तव में देखा जाए तो वे महात्मा गाँधी के अग्रदूत थे। लगान न देने का आन्दोलन, सरकारी नौकरियों का बहिष्कार, शराबबंदी तथा स्वदेशी जैसे आन्दोलन जो गाँधी जी ने चलाए थे, तिलक पहले ही इन पर प्रयोग कर चुके थे। उनका जीवन दिव्य था।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भारतीय चेतना का जनक कहा जाता है।भारत-मंत्री मांटेग्यू ने ठीक ही कहा था –
“भारत में केवल एक ही अकृत्रिम उग्र राष्ट्रवादी था और वह थे – तिलक।”
तिलक के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा कर्मयोगी होने से देशवासियों ने उन्हें न केवल ‘लोकमान्य’ की उपाधि दी वरन् उन्हें ‘तिलक भगवान’ कहकर भी पुकारा।

WBBSE Class 9 Hindi बाल गंगाधर तिलक Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 34

  • ज्वलन्त = जलता हुआ।
  • दुर्लभ = जिसे आसानी से पाया न जा सके।
  • अदम्य = जिसका दमन न किया जा सके, जिसे दबाया न जा सके।
  • आकृष्ट = आकर्षित।
  • हाशिये = चौपाई।
  • पारावार = सीमा।
  • कर्मपरक = कर्म करने वाले।
  • मुक्त = आजाद ।
  • लोक-संग्हह = लोगों को एकजुट करना।
  • दृष्टांत = उदाहरण।
  • नि:स्वार्थ = बिना स्वार्थ के।
  • आराधना = पूजा, अर्चना।
  • शोधकर्ता = खोज करने वाला।
  • प्राच्यविद्या = प्राचीन विद्या।
  • सर्वोत्कृष्ट = सबसे उत्कृष्ट/अच्छा।
  • पराधीन = दूसरे के अधीन/गुलाम।
  • विकल्प = पर्याय।
  • स्वराज = अपना राज।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

पृष्ठ सं० – 35

  • अन्तरक = अंतर करने वाला।
  • गणन-विधि = गिनती करने की विधि।
  • बायकाट = बहिष्कार ।
  • सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह।
  • मद्य-निषेध = शराबबंदी , नशाबंदी।
  • अस्पृश्यता = छुआछूत।
  • उन्मूलन = खात्मा।
  • रक्तपात = खून बहाना।
  • उग्रवाद = हिंसा में विश्वास करने वाली विचारधारा।
  • आत्मघाती = अपने-आप को नष्ट करना।
  • केसरी = सिंह।
  • उकसाना = प्रेरित करना।
  • कायरता = डरपोकपना, भीरूता ।
  • मान्यताओं = विचारों।
  • यातनाएँ = कष्ट।
  • ट्रिब्यूनल = न्यायालय।
  • फलीभूत = फलदायी।

पृष्ठ सं० – 36

  • वर्ग = श्रेणी।
  • अनुचित = जो उचित न हो।
  • भावी = आनेवाला।
  • मतभेद = विचार का भेद।
  • सहिष्णुता = सहने की शक्ति।
  • निष्ठावान = विश्वास रखनेवाला।
  • निर्भय = जिसे भय न हो।
  • स्पष्ट वक्ता = दो टूक कहने वाला/साफ-साफ कहने वाला।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 Question Answer – गोपाल कृष्ण गोखले

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : गोपाल कृष्ण गोखले एक सच्चे राजनैतिक कार्यकर्ता थे – पठित पाठ के आधार पर उनकी चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 2 : ‘वे हमारे राष्ट्रीय आचरण के सबसे बड़े संत सिपाही थे’ – पंक्ति के आधार पर गोपाल कृष्ण गोखले के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 3 : गाँधी जी गोखले की किन विशेषताओं के आधार पर उन्हें गुरू मानते थे – उल्लेख करें।
प्रश्न – 4 : गोपाल कृष्ण गोखले के राजनीतिक विचारों पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 5 : संकलित पाठ के आधार पर बताएँ कि गोपाल कृष्ण गोखले के जीवन से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
युग पुरूष, अहिंसा के पुजारी, मानवता के उद्धारक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के राजनीतिक गुरू – गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई, 1866 ई० को महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के कोतलुक नामक प्राम में हुआ था। 13 वर्ष की अवस्था मे पिता का देहांत हो जाने पर अपने जीवन का निर्माण उन्होंने अपने चिंतन, लगन एवं अथक परिश्रिम से किया। 1884 ई० में एलफिन्सटन कॉलेज, बम्बई से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सन् 1886 ई० में फर्ग्युसन कॉलेज में इतिहास और अर्थशास्त्र के प्राध्यापक नियुक्त हुए। वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत 22 वर्ष की आयु में बाम्बे विधान परिषद का सदस्य बनकर की।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

गोखले आधुनिक भारत के सर्वपथम कूटनीतिज्ञ थे। काउंसिल के सदस्य के रूप में उन्होने नि:शुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रारंभ करने, नमक कर को समाप्त करने और राजकीय सेवा में भारतीयों को अधिक संख्या में नियुक्त किए जाने पर जोर दिया।

गोखले का ब्रिटिश उदारवाद में अत्यधिक विश्वास था। वे अंग्रेजों की न्यायप्पियता, निष्पक्षता एवं सदाशयता में पूर्ण विश्वास करते थे। वे भारत के भविष्य के प्रति काफी आशावान थे। उदारवादी होने के कारण संवैधानिक साधनों तथा तोड़फोड़ की प्रवृत्ति में उनका विश्वास नहीं था। उनके संवैधानिक साधनों में प्रार्थना, विरोध, अनशन एवं सुधार का प्रमुख स्थान था। उन्होंने अंग्रेजी शासन की अच्छाइयों की प्रशंसा और बुराइयों का विरोध किया।

ब्रिटिश शासन के पक्षधर होते हुए भी उनके लिए राष्ट्रीय हित सबसे बड़ा था। सरोजिनी नायडू ने गोखले के बारे. में कहा था कि, “वे हमारे राष्ट्रीय आचरण के सबसे बड़े संत सिपाही थे, जिनका जीवन पवित्र था।”
गोखले की इन्हीं खूबियों से प्रभावित होकर गाँधी जी ने गोखले के बारे में कहा था –
” वे मुझे ऐसे लगे जैसा कि मैं एक सच्चे राजनैतिक कार्यकर्ता को देखना चाहता हूँ – स्फटिक की भांति स्वच्छ, मेमने की तरह सीधे, सिंह की भांति साहसी और हद पार करने की सीमा तक उदार। …….”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

ऐसी महान प्रतिभा का देहावसान 19 फरवरी, 1915 को 49 वर्ष की अल्पायु में ही हो गया। उनके आश्चर्यजनक कार्यों को देखकर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी, उग्रदल के प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक जी से भी उनकी प्रशंसा के शब्द नियंत्रित न हो सके। उनके अनुसार –
“गोखले भारत का रत्न तथा महाराष्ट्र का सपूत था। वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अग्रणी था।”
उनके बारे में महात्मा गाँधी ने भी कहा –
“मेरे लिए इतना ही पर्याप्त है कि इसके विपरीत उनमें कोई दोष नहीं मिला। मेरे लिए वे हमेशा राजनीति के क्षेत्र के पूर्ण व्यक्ति थे और रहेंगे।”

WBBSE Class 9 Hindi गोपाल कृष्ण गोखले Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 29

  • जटिल = उलझा हुआ।
  • पूर्वाग्रहों = पूर्व के विचार से ग्रसित।
  • बहुधा = अक्सर ।
  • जमाखोरी = आवश्यकता की चीजों को छिपाकर रखना ताकि अभाव की स्थिति में उसे ऊँचे मूल्य पर बेचा जा सके।
  • सत्यनिष्ठा = सच्चे विश्वास।
  • लगन = रुचि।
  • राजद्रोह = राष्ट्र के प्रति विद्रोह की भावना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

पृष्ठ सं० – 30

  • तर्क सम्मत = तर्क की कसौटी पर खरा।
  • आदिम जाति = आदिवासी।
  • मध्यमार्गी = बीच का रास्ता अपनाने वाला।
  • ध्येय = लक्ष्य।
  • अनुलंघनीय = उल्लंघन न करने लायक।
  • इतिश्री = समाप्ति।
  • आकृष्ट = आकर्षित।
  • दुर्भावना = बुरी भावना।
  • आगामी = आने वाला।
  • हेतु = कारण।

पृष्ठ सं० – 31

  • तिलांजलि = त्याग।
  • एकत्र = जमा, इकट्ठा।
  • व्यवसाय = रोजगार।
  • कर्तव्यनिष्ठ = जिनमें कर्त्वव्य के प्रति निष्ठा हो।
  • निकाय = संस्था।
  • विधान = नियम।
  • सुसज्जित = अच्छी तरह सजकर ।
  • संघर्षरत = संघर्ष में रहना।
  • प्रकोष्ठों = खानों।
  • नि:शुल्क = बिना शुल्क के।
  • अनिवार्य = जरूरी।

पृष्ठ सं० – 32

  • उदारवाद = उदारता में विश्वास करनेवाली विचारधारा।
  • दमन = अत्याचार।
  • सम्मति = सहमति।
  • तत्परता = जल्दीबाजी।
  • अंतर्मन = हृदय।
  • सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह।
  • विलीन = गायब।
  • कृतज्ञ = उपकार को माननेवाला।
  • सन्मार्ग = सही मार्ग।
  • हित = भलाई।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

पृष्ठ सं० – 33

  • अजनबी = अपरिचित।
  • विकार = दोष।
  • सुधारवाद = सुधार में विश्वास करने वाली विचारधारा।
  • न्यायोचित = न्याय की दृष्टि से उचित।
  • समानता = बराबरी।
  • निरर्थक = जिसका कोई अर्थ नहीं है।
  • आदर्श = अच्छा रूप, वह जो होना चाहिए ।
  • कर्मठ = कर्म में विश्वास रखने वाला।
  • सत्यनिष्ठा = सत्य में श्रद्धा रखने वाला।
  • खड्यंत्र = कुचक्र।
  • विधर्मी = धर्म को नहीं माननेवाला।
  • स्फटिक = मणि।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 Question Answer – आचार्य जगदीश चंद्र बोस

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : आचार्य जगदीश चंद्र बोस के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 2 : ‘आचार्य जगदीश चन्द्र बोस को विज्ञान की देन’ पर एक संक्षिप्त निबंध लिखें।
प्रश्न – 3 : प्राकृतिक विज्ञान के शोध के प्रणेता के तौर पर आचार्य जगदीश चंद्र बोस का मूल्यांकन करें।
प्रश्न – 4 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस वैज्ञानिक होने के साथ-साथ धार्मिक तथा आस्तिक भी थेपठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस में विज्ञान, कला और धर्म का संतुलित सामंज्यस था – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 6 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस ने अपने शोध कार्यों के द्वारा भारतीय ॠषियों की गहन अंतर्दृष्टि की वैज्ञानिक व्याख्या और सत्यता प्रदान की – संकलित पाठ के आधार पर लिखें।
उत्तर :
आचार्य जगदीश चन्द्र बोस का जन्म सन् 1854 ई० में बंगाल के मैमनसिंह जिले के फरीद्युर गाँव में हुआ था। आचार्य बोस अद्भूत प्रतिभा के धनी थे। वे वेदों तथा क्रषियों की गहन अंतर्दृष्टि से विशेष प्रभावित थे जिसमें प्रकृति को सजीव मानकर उनकी विशद व्याख्या की गई है। संस्कृत कवियों ने भी लाजवंती तथा सूयंमूखी फूलों के माध्यम से उनकी संवेदनशोलता का वर्णन किया है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

हमारे ॠषियों की इन्हीं आंतरिक विवेकशीलता को आचार्य बोस ने अपने वर्णन किया है। हमारे ॠषियों की इन्हीं आंतरिक विवेकशीलता को आचार्य बोस ने अपने शोधकार्यों के द्वारा सत्यता प्रदान की। उन्होंने यहि सिद्ध किया कि पौधों तथा पशुओं के भावावेग समान होते है। इस सच्चाई को उन्होंने अपने द्वारा निर्मित जटिल यंत्रों से सिद्ध करके दिखाया।

आचार्य बोस ने प्रकृति को विज्ञान से श्रेष्ठतर बताया क्योकि उनका कहना था – रासायनिक, विद्युतीय और इलेक्टिक क्रियाएँ वह नहीं कर सकती जो गेहूँ के बीज का एक दाना वसन्त में अंकुरित होकर कर देता है।

आचार्य बोस ने अपने वैज्ञानिक शोधों के दौरान यह अनुभव किया कि मनुष्य प्रकृति के बारे में कितना कम जानता है तथा ज्ञान की अपेक्षा अज्ञान कितना विस्तृत है। उन्होने यह स्वीकार किया कि धार्मिक संत के लिए प्रकृति निष्ठा का विषय है जो स्वयसिद्ध हो जाता है लेकिन वैज्ञानिक उसे प्रयोगों द्वारा सिद्ध करने की कोशिश करते हैं।

जगदीश चन्द्र बोस के वैज्ञानिक शोधों का उद्देश्य मानवता का कल्याण, ईश्वर की गरिमा को बनाए रखना, विश्व को समृद्ध करना तथा स्थायी विश्वबंधुत्व था। पौधों में जीवन-विषय पर उनके शोध का मूल आधार भारतीय ॠषियों द्वारा निरूपित ये सत्य थे –

  • भारतीय ॠषि विश्व को सकल रूप में देखते हैं तथा उनके अनुसार पिण्ड और श्रहाण्ड एक-दूसरे के बिम्बप्रतिबिम्ब है।
  • विश्व का विस्तार निस्प्राण नहीं बल्कि प्राणवान है।
  • प्रकृति में कहीं व्यतिरेक नहीं है।

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि आचार्य जगदीशघन्द्र बोस धार्मिक होने के साथ-साथ आस्तिक भी थे। उनके व्यक्तित्व में विज्ञान, कला तथा धर्म का अद्भुत सामंज्यस था।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वेद कितने हैं ?
उत्तर :
चार।

प्रश्न 2.
वेदों के नाम लिखें ।
उत्तर :
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।

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प्रश्न 3.
‘वेदों का वेद’ किसे कहा गया है ?
उत्तर :
‘पुराण’ को ।

प्रश्न 4.
भारत में पुनर्जागृति कब आई ?
उत्तर :
उन्नीसवीं शताब्दी में ।

प्रश्न 5.
भारत की प्रगति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर किसने बल दिया ?
उत्तर :
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार ने।

प्रश्न 6.
‘भारतीय संघ’ की स्थापना किसने की ?
उत्तर :
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार ने

प्रश्न 7.
भारतीय ॠषि विश्व को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर :
पूर्ण रूप में ।

प्रश्न 8.
भारतीय ऋषि के अनुसार पिण्ड और व्रह्वाण्ड क्या हैं ?
उत्तर :
एक-दूसरे के बिंब-पतिबिंब।

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प्रश्न 9.
‘स्वाह रात्रो पत्र-संकोच:’ – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
रात में पत्तियों में संकुचन होता है ।

प्रश्न 10.
उदयन के पौधे में किसके समान गतिविधियाँ दिखायी दी ?
उत्तर :
मानव के समान ।

प्रश्न 11.
हमांर :ग्रि्षियों की अंतः प्रज्ञा को किसने वैज्ञानिक सत्यता प्रदान की ?
उत्तर :
जगदीश द्र बोस ने ।

प्रश्न 12.
विज्ञान अर्भी तक किसकी व्याख्या नहीं कर पाया है ?
उत्तर :
जैविक विकास और उसके पुनरूत्थान की व्याख्या ।

प्रश्न 13.
किसने यह प्रमाणित कि पौधों में भी जीवन है ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने।

प्रश्न 14.
‘मैन ऑन दिज नेचर’ के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
सर चार्ल्स शेरिंगटन ।

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प्रश्न 15.
अरस्तू ने दो हजार वर्ष क्या पूछा था ?
उत्तर :
मस्तिष्क का शरीर से क्या संबंध है ?

प्रश्न 16.
सध्चा विज्ञान उसके प्रणेता को क्या बना देता है ?
उत्तर :
विनाम्म।

प्रश्न 17.
चार्ल्स डारविन के शोध-प्रबंध का नाम क्या है ?
उत्तर :
‘द डिसेंट ऑंक मैन’ ।

प्रश्न 18.
किसकी नींव पर हम बेहतर भविष्य बना सकते हैं ?
उत्तर :
अतीत की नींव पर ।

प्रश्न 19.
वैज्ञानिकों की जीवन्त आत्मा किसका प्रतिबिंब हैं ?
उत्तर :
देवी रहस्य का।

प्रश्न 20.
जगदीश चन्द्र बोस की महत्वाकांक्षा क्या थी ?
उत्तर :
हम लोग खोज और शोध-कार्य जारी रखें।

प्रश्न 21.
सच्चा विज्ञान उसके प्रणेता को क्या अनुभव करा देता है ?
उत्तर :
वास्तव में वह (मणेता) कितना कम जानता है और अझान बहुत विस्तृत है ।

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प्रश्न 22.
जगदीश चन्द्र बोस की रुचि किस सुमेल में थी ?
उत्तर :
व्रहाण्ड की निरतरता तथा सुमेल में ।

प्रश्न 23.
जैन तथा वैशेघिक लेखक गुणारल और शंकर मिश्र ने पौधों के किन गुणों की चर्चा की है ?
उत्तर :
पौधों में अंतर्निह्नित चेतना है और वे सुख-दु ख अनुभव करते हैं।

प्रश्न 24.
संस्कृत कवियों ने किस फूल की चर्चा की है ?
उत्तर :
सूर्यमुखी।

प्रश्न 25.
किस उपनिषद में ज्ञान-विज्ञान के विषयों का उल्लेख है ?
उत्तर :
छान्दोग्य उपनिषद् में ।

प्रश्न 26.
भारतीयों की गहन रुचि किन नियमों को जानने में रही है ?
उत्तर :
उन नियमों मे जो बह्नाण्ड के विविध पक्षों को शासित करते हैं।

प्रश्न 27.
जगदीश चन्द्र बोस किस शोध के प्रणेता थे ?
उत्तर :
प्राकृतिक विज्ञान के ।

प्रश्न 28.
जर्मनी के प्रो० हीबरलैण्ड किस विषय के वैज्ञानिक थे ?
उत्तर :
वनस्पति विज्ञान के ।

प्रश्न 29.
‘न्याय-बिन्दु टीका’ के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर :
धर्मोत्तर ।

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प्रश्न 30.
‘मिमोसा पुदिका’ को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
लाजवन्ती या हुई-मुई।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विज्ञान के विकास में भारत का एक लम्बा और सतत् इतिहास रहा है – कैसे ?
उत्तर :
प्राचीन भारत के उपलब्य ग्रथों से यह पता चलता है कि विज्ञान के विकास में भारत का एक लंबा और सतत् इतिहास रहा है । उदाहरण के लिए, हमारे चारों वेदों, छान्दोग्य उपनिषद्, महाकाव्यों तथा पुराणों में ज्ञान-विज्ञान के विषयों का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 2.
भारत की वैज्ञानिक प्रगति में डॉ० महेन्द्रलाल सरकार के योगदान की चर्चा करें ।
उत्तर :
19 वीं सदी में डॉ॰ महेन्दलाल सरकार ने भारत की प्रर्गति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने ‘भारतीय संघ’ की स्थापना की। प्रो० सी० वी० रमन तथा के० एस० कृष्ण जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने उस समय इस संघ में कार्य किया।

प्रश्न 3.
जगदीश चन्द्र बोस ने भारतीय कषियों की किन बातों की वैज्ञानिक व्याख्या की तथा उन्हें सत्यता प्रदान की ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने भारतीय ॠषियों की जिन बातों की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए उन्हें सत्यता प्रदान की, वे निम्नांकित हैं –

  • पिण्ड और बह्ाणण्ड एक दूसरे के बिम्ब-प्रतिबिम्ब हैं।
  • सम्पूर्ण विश्व तथा बहाण्ड प्राणवान है।
  • प्रकृति में कहीं अवरोध नही है।
  • पौंधों में भी जीवन है तथा वे भी सुख-दुःख अनुभव करते हैं।

प्रश्न 4.
जगदीश चन्द्र बोस ने पौधे की जीवंतता को समझाने के लिए किसका उदाहरण दिया ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने पौधै की जीवंतता को समझाने के लिए पत्वर के टुकड़े तथा आम की गुठली का उदाहरण दिया। पत्थर का टुकड़ा वर्षो तक यूँ ही पड़ा रहेगा लेकिन गुठली के लिए परिस्थितिया अनुकूल होने पर वह एक बड़े वृक्ष में बदल सकती हैं।

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प्रश्न 5.
अतीत के बारे में जगदीश चन्द्र बोस ने क्या कहा ?
उत्तर :
अतीत के बारे में बताते हुए जगदीश चन्द्र बोस ने कहा कि अतीत को तो हम वापस नहीं ला सुके लेकिन उसकी नींव पर एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते है । अगर हम प्रयत्ल करें तो अपने वर्तमान को अच्छे भविष्य में बदल सकते हैं।

प्रश्न 6.
भारतीबों की रुचि किन नियमों को जानने में रही है ?
उत्तर :
भारतौयों की रुचि उन नियमों को जानने में रही है जो पूरे बह्नाण्ड को शासित करते हैं, उसे एक नियम में बाँधकर रखते हैं। इसका पता हमारे प्राचीन ग्रंथों से भी मिलता है। यही कारण है कि विज्ञान के विकास में भारत का एक लम्बा और सतत इतिहास रहा है ।

प्रश्न 7.
विज्ञान आज तक किसकी व्याख्या नहीं कर पाया है ?
उत्तर :
विज्ञान आज तक जैविक विकास तथा उसके पुनरुत्यान की व्याख्या नहीं कर पाया है । उदाहरण के लिए रासायनिक, विद्युतीय और इलेक्ट्रानिक क्रियाएँ वह नहीं कर सकती जो गेहूँ के बीज का एक दाना वसंत में अंकुरित होकर कर देता है।

WBBSE Class 9 Hindi आचार्य जगदीश चंद्र बोस Summary

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शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 24

  • दक्षता = कुशलता।
  • कायल = प्रभावित।
  • वेदी = धर्म के काम के लिए प्रयोग में लाया जानेवाला चबूतरा।
  • उत्साहजन्य = उत्साह से जन्मा हुआ।
  • शोध = खोज।
  • ख्याति = प्रसिद्धि।
  • सतत = लगातार ।
  • पितरों = पूर्वजों।

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पृष्ठ सं० – 25

  • खगोल-विद्या = भूगोल ।
  • सघन = बहुत अधिक।
  • सुषुप्त = सोया हुआ।
  • पिपासा = प्यासा।
  • प्रणेता = जनक, प्रारंभ करनेवाले।
  • पादप = पौधा।
  • बिम्ब = छाया।
  • प्रतिबिम्ब = प्रतिच्छाया।
  • चराचर = हमेशा।
  • संचरण-व्यतिरेक = बाधा।

पृष्ठ सं० – 26

  • अन्तर्निहित = अंदर में निहित/विद्यमान ।
  • मन्द = धीमी।
  • अंतः प्रज्ञा = अंदर का विवेक ।
  • सत्यता = सच्चाई।
  • आघात = चोट।
  • प्रहारों = चोरों।
  • स्नायुतंत्र = इंद्रियाँ।
  • अवयवों = अंगों।
  • वनस्पति = पौधे।
  • आवेग = आवेश/उत्तेजना।
  • नितांत = बिल्कुल।
  • भावावेग = भाव का आवेग।
  • तथ्य = सच्चाई।
  • दर्शाने = दिखाने।
  • वक्र = टेढ़ा।
  • सुमेल = अच्छा मेल।
  • गुटिका = टुकड़ा।
  • गुठली = बीज (आम के अंदर का कड़ा भाग)

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पृष्ठ सं० – 27

  • कालान्तर = समय का अंतर।
  • अज्ञात = अनजाना।
  • पुनरूत्पादन = फिर से उत्पादन।
  • जीवेतर = जीव से भिन्न।
  • उत्कर्ष = विकास ।
  • संचरित = फैलते।

पृष्ठ सं० – 28

  • ज्ञात = मालूम।
  • चयन = चुनना।
  • उर्जा = शक्ति।
  • अपरिवर्तनीय = परिवर्तन न होने वाला।
  • अनसुलझे = जिसे सुलझाया नहीं जा सका।
  • हल = सिद्ध।
  • अविराम = बिना आराम किए।
  • पोषित = पोसा गया, पाला गया।
  • अतीत = बीता हुआ समय।
  • सृजन = रचना।
  • भागीदार = हिस्सेदार, सहायक।