WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 Question Answer – मोतीलाल नेहरू

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : उनका व्यक्तित्व देखकर हमें रोम के वाणिज्य दूतों की याद आती थी – पंक्ति के आधार पर मोंतीलाल नेहरू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का वर्णन करें ।
प्रश्न – 2 : वे एक महान् वकील थे, महान देश-भक्त, महान व्यक्ति – पंक्ति के आधार मोतिलाल नेहरु की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें ।
प्रश्न – 3 : उन्हें मानव की आत्मा में और उससे इतिहास को बदल देने की क्षमता में पूर्ण विश्वास था – के आधार पर मोतीलाल नेहरू का वर्णन करें ।
प्रश्न – 4 : संसदीय संस्थाओं के विकास में मोतिलाल नेहरू के योगदान की चर्चा संकलित पाठ के आधार पर करें।
उत्तर :
भारत में संसदीय संस्थाओं के विकास के लिए मोतीलाल नेहरू के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। मोतोलाल नेहरू उस सर्वदलीय समिति के अध्यक्ष थे जिसे हमारे देश के संविधान का मसौदा तैयार करने का दायित्व दिया गया था । उन्होंने संविधान का निर्माण करने में निम्नलिखित बातों का ध्यान प्रमुखता से रखा –

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

  • संसद का स्वरूप प्रजातांत्रिक हो।
  • हम हठधर्मिता का दृष्टिकोण न रखें ।
  • अन्तर्रोश्रीय संबंधों में मध्यम मार्ग अपनाएँ।
  • धर्म को राजनीति से नहीं जोड़ा जाय।

हमारा भारतीय संविधान समाज के जिन उद्देश्यों तथा सिद्धांतों पर आधारित है – वह मोतीलाल नेइरू की ही देन है। उन उद्देश्यों को पूरा करने में हम आज तक सफल नहीं हो पाए हैं क्योंकि हमारे अंदर वह कर्त्तव्य-भावना, उर्जा, परिश्रम तथा संगठन का अभाव है ।

मोतीलाल नेहरू के व्यक्तित्व तथा कायों से प्रभावित होकर तथा महात्मा गाँधी से पेरित होकर उनका पूरा परिवार ही राट्रीय आंदोलन का हिस्सा बन गया था। वे स्वतंत्र मस्तिष्क, पूर्वाग्रहों से मुक्त थे तथा हिन्दू, मुस्लिम और अंग्रेज सभी के अच्छे प्रभावों को ग्रहण करने वाले थे ।

एक महान वकील, महान देशभक्त तथा महान व्यक्तित्व के धनी होने के कारण उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि वे कोई निदनीय कार्य करेंगे त्येक अर्थ में वे एक विशाल हृदय के व्यक्ति थे ।

स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने पर उन्होंने अपनी विदेशी पोशाक का त्याग कर दिया और खादी को अपना लिया और खादी पहनने के बाद उनका व्यक्तित्व और भी आकर्षक हो उठा। इतना ही नहीं, उन्होंने इलाहाबाद की गलियों में खादी भी बेची । सन् 1930 ई० में गाँधी जी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें सजा भी भोगनी पड़ी ।

मोतीलाल नेहरू अपने जीवन के अंतिम दिनों में गायत्री मंत्र का जाप करने लगे थे । लेकिन ऐसा वे किसी ईश्वरीय भय के कारण नहीं करते थे क्योंकि उनका यह मानना था कि ईश्वर न तो कोधी पिता है और न ही कोई कठोर जज।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

मोतौलाल नेहरू के बारे में जो अंतिम बात कही जा सकती है – वह यह कि उनमें मानव की आत्मा तथा उनके इतिहास को बदल देने की क्षमता में पूरा पूरा विश्वास था। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है क्शि4 सितंबर, सन् 1924 में मोतोलाल नेहरू ने जिस एकता सम्मेलन की अध्यक्षता की उसमें उन्होंने यह संकल्प पारित किया –
“किसी भी धर्म के पूजा स्थलों को अपवित्र करना या किसी व्यक्ति को धर्म बदलने के लिए यातना या सजा देने जैसे कार्य निन्दा के योग्य हैं । दूसरे लोगों को विवश करके अपना धर्म स्वीकार करवाना या दूसरों की कीमत पर अपना धर्म लागू करना जैसे कार्य भी निन्दनीय हैं।”‘

WBBSE Class 9 Hindi मोतीलाल नेहरू Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 37

  • प्रगति = विकास ।
  • विविध = अनेक प्रकार की ।
  • उल्लेखनीय = उल्लेख करने योग्य ।
  • विशिष्ट = विशेष ।
  • योगदान = सहयोग ।
  • मसौदा = प्रारूप ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • अचूकता = सटीकता ।
  • उग्रवाद = हिंसा ।
  • फासीवाद = जर्मनी की एक विचारधारा ।
  • बहुधा = अक्सर ।
  • हठधर्मिता = जिद को ही धर्म बना लेना ।
  • अपेक्षित = आवश्यक ।
  • दुराग्रह = बुरा आग्रह ।
  • एकाधिकार = एक का अधिकार ।
  • मध्यस्थता = बीच-बचाव ।
  • संयम = संतोष।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

पृष्ठ सं० – 38

  • सम्पदाय = धर्म ।
  • पारित = स्वीकृत ।
  • नामित = मनोनीत ।
  • कडुता = कड़वाहट ।
  • उपनिवेशवाद = साप्राज्यवाद ।
  • परिसर = चहारदीवारी, आँगन ।
  • स्मरण = याद ।
  • मनोग्रंथि = मन की ग्रंधि/गांठ ।
  • आधुनिकतम = आधुनिक से आधुनिक ।
  • सुसज्जित = अच्छी तरह सजा हुआ ।
  • मनमानी = अपने मन की ।
  • उद्यम = परिश्रम ।

पृष्ठ सं० – 39

  • वृतान्त = कहानी ।
  • समस्त = पूरा ।
  • ग्रहणशील = ग्रहण करने वाले ।
  • शाही = राजाओं की तरह।
  • सर्वथा = सब प्रकार से ।
  • अमिट = नहीं मिटने वाला ।

पृष्ठ सं० – 40

  • तत्कालीन = उस समय का ।
  • आदी = अभ्यस्त ।
  • कताई = धागा कातना ।
  • खद्दर = खादी ।
  • सविनय = विनय के साथ।
  • अवज्ञा = आज्ञा नहीं मानना ।
  • मानक = स्वीकृत रूप ।
  • अनुकरणीय = अनुकरण करने योग्य ।
  • कुशाग्र = कुश की तरह तेज ।
  • अर्द्ध = आधा ।
  • सौहार्द् = प्रेम ।
  • चाह = इच्छा ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

पृष्ठ सं० – 41

  • अतीत = बीता हुआ समय ।
  • नासूर = घाव ।
  • सुचिंतित = अच्छाई के लिए घिंतित ।
  • उन्माद = उग्र भाव ।
  • दुर्गम = जहाँ आसानी से नहीं पहुँचा जा सके
  • ऊजाड़ = जहाँ कोई पेड़-पौधा न हो ।
  • गल्प = कहानी ।
  • आधात = चोट।
  • सजग = सावधान ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 Question Answer – बाल गंगाधर तिलक

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर बाल गंगाधर तिलक की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
प्रश्न – 2 : स्वाधीनता संघर्ष में बाल गंगाधर तिलक के योगदान पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 3 : बाल गंगाधर तिलक के स्वाधीनता संबंधी विचारों पर प्रकांश डालें।
प्रश्न – 4 : तिलक का जीवन कर्म-योग के आदर्श का दृष्टांत था – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : तिलक का जीवन आध्यात्म और समाजिकता का संयोग था – अपने विचार लिखें।
प्रश्न – 6 : संकलित पाठ के आधार पर तिलक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर :
भारत के दूसरे शिवाजी तथा स्वाधीनता संग्राम के ‘सिद्ध महात्मा’ लोकमान्य बाल ‘गंगाधर ने 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के एक ब्राह्यण परिवार में अंधकार में ‘प्रकाश ज्योति’ की तरह जन्म लिया। अभिमन्यु की तरह उनमें सहज प्रतिभा तथा संघर्ष के लिए साहस का असीम भण्डार था।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

सन् 1879 में कानून की डिग्री लेने के बाद वे देश के स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गए। अपने विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने दो साप्ताहिक पत्र मराठी भाषा में ‘केसरी’ तथा अंग्रेजी भाषा में ‘मराठा’ प्रकाशित किए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा, बहिष्कार तथा सत्याग्रह को प्रमुख कार्यक्रम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने महाराष्ट्र के लोकप्रिय त्योहारों को भी देशभक्ति से जोड़ दिया।

तिलक उदारवादियों की ‘राजनीतिक भिक्षावृत्ति’ की नीति में विश्वास नहीं करते थे। उनका कहना था ‘हमारा आदर्श दया याचना नहीं, आत्म निर्भरता है।’ उनका मानना था – ‘महान उद्देश्य (पूर्ण स्वराज) की प्राप्ति के लिए सभी साधन न्यायोचित हैं।

तिलक बाँस के वृक्ष की तरह नहीं थे कि जिधर हवा बहे, उधर ही झुक जाए। वे अपने उग्र विचारों पर दृढ़ थे, लेकिन इसकी कीमत उन्हें 1897 में चुकानी पड़ी, जब उन्हें 18 माह का कठोर कारावास मिला। सजा सुनाए जाने के बाद उन्होंने कहा –
“‘इस ट्रिब्यूनल से ऊपर भी कोई सत्ता है जो हमलोगों के भाग्य को शासित करती है और वह उसी सत्ता की इच्छा से हो सकती है कि मैं जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता हूँ वह मेरे मुक्त रहने की अपेक्षा जेल की यातना से अधिक फलीभूत हो।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

वास्तव में देखा जाए तो वे महात्मा गाँधी के अग्रदूत थे। लगान न देने का आन्दोलन, सरकारी नौकरियों का बहिष्कार, शराबबंदी तथा स्वदेशी जैसे आन्दोलन जो गाँधी जी ने चलाए थे, तिलक पहले ही इन पर प्रयोग कर चुके थे। उनका जीवन दिव्य था।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भारतीय चेतना का जनक कहा जाता है।भारत-मंत्री मांटेग्यू ने ठीक ही कहा था –
“भारत में केवल एक ही अकृत्रिम उग्र राष्ट्रवादी था और वह थे – तिलक।”
तिलक के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा कर्मयोगी होने से देशवासियों ने उन्हें न केवल ‘लोकमान्य’ की उपाधि दी वरन् उन्हें ‘तिलक भगवान’ कहकर भी पुकारा।

WBBSE Class 9 Hindi बाल गंगाधर तिलक Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 34

  • ज्वलन्त = जलता हुआ।
  • दुर्लभ = जिसे आसानी से पाया न जा सके।
  • अदम्य = जिसका दमन न किया जा सके, जिसे दबाया न जा सके।
  • आकृष्ट = आकर्षित।
  • हाशिये = चौपाई।
  • पारावार = सीमा।
  • कर्मपरक = कर्म करने वाले।
  • मुक्त = आजाद ।
  • लोक-संग्हह = लोगों को एकजुट करना।
  • दृष्टांत = उदाहरण।
  • नि:स्वार्थ = बिना स्वार्थ के।
  • आराधना = पूजा, अर्चना।
  • शोधकर्ता = खोज करने वाला।
  • प्राच्यविद्या = प्राचीन विद्या।
  • सर्वोत्कृष्ट = सबसे उत्कृष्ट/अच्छा।
  • पराधीन = दूसरे के अधीन/गुलाम।
  • विकल्प = पर्याय।
  • स्वराज = अपना राज।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

पृष्ठ सं० – 35

  • अन्तरक = अंतर करने वाला।
  • गणन-विधि = गिनती करने की विधि।
  • बायकाट = बहिष्कार ।
  • सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह।
  • मद्य-निषेध = शराबबंदी , नशाबंदी।
  • अस्पृश्यता = छुआछूत।
  • उन्मूलन = खात्मा।
  • रक्तपात = खून बहाना।
  • उग्रवाद = हिंसा में विश्वास करने वाली विचारधारा।
  • आत्मघाती = अपने-आप को नष्ट करना।
  • केसरी = सिंह।
  • उकसाना = प्रेरित करना।
  • कायरता = डरपोकपना, भीरूता ।
  • मान्यताओं = विचारों।
  • यातनाएँ = कष्ट।
  • ट्रिब्यूनल = न्यायालय।
  • फलीभूत = फलदायी।

पृष्ठ सं० – 36

  • वर्ग = श्रेणी।
  • अनुचित = जो उचित न हो।
  • भावी = आनेवाला।
  • मतभेद = विचार का भेद।
  • सहिष्णुता = सहने की शक्ति।
  • निष्ठावान = विश्वास रखनेवाला।
  • निर्भय = जिसे भय न हो।
  • स्पष्ट वक्ता = दो टूक कहने वाला/साफ-साफ कहने वाला।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 Question Answer – गोपाल कृष्ण गोखले

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : गोपाल कृष्ण गोखले एक सच्चे राजनैतिक कार्यकर्ता थे – पठित पाठ के आधार पर उनकी चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 2 : ‘वे हमारे राष्ट्रीय आचरण के सबसे बड़े संत सिपाही थे’ – पंक्ति के आधार पर गोपाल कृष्ण गोखले के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 3 : गाँधी जी गोखले की किन विशेषताओं के आधार पर उन्हें गुरू मानते थे – उल्लेख करें।
प्रश्न – 4 : गोपाल कृष्ण गोखले के राजनीतिक विचारों पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 5 : संकलित पाठ के आधार पर बताएँ कि गोपाल कृष्ण गोखले के जीवन से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
युग पुरूष, अहिंसा के पुजारी, मानवता के उद्धारक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के राजनीतिक गुरू – गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई, 1866 ई० को महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के कोतलुक नामक प्राम में हुआ था। 13 वर्ष की अवस्था मे पिता का देहांत हो जाने पर अपने जीवन का निर्माण उन्होंने अपने चिंतन, लगन एवं अथक परिश्रिम से किया। 1884 ई० में एलफिन्सटन कॉलेज, बम्बई से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सन् 1886 ई० में फर्ग्युसन कॉलेज में इतिहास और अर्थशास्त्र के प्राध्यापक नियुक्त हुए। वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत 22 वर्ष की आयु में बाम्बे विधान परिषद का सदस्य बनकर की।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

गोखले आधुनिक भारत के सर्वपथम कूटनीतिज्ञ थे। काउंसिल के सदस्य के रूप में उन्होने नि:शुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रारंभ करने, नमक कर को समाप्त करने और राजकीय सेवा में भारतीयों को अधिक संख्या में नियुक्त किए जाने पर जोर दिया।

गोखले का ब्रिटिश उदारवाद में अत्यधिक विश्वास था। वे अंग्रेजों की न्यायप्पियता, निष्पक्षता एवं सदाशयता में पूर्ण विश्वास करते थे। वे भारत के भविष्य के प्रति काफी आशावान थे। उदारवादी होने के कारण संवैधानिक साधनों तथा तोड़फोड़ की प्रवृत्ति में उनका विश्वास नहीं था। उनके संवैधानिक साधनों में प्रार्थना, विरोध, अनशन एवं सुधार का प्रमुख स्थान था। उन्होंने अंग्रेजी शासन की अच्छाइयों की प्रशंसा और बुराइयों का विरोध किया।

ब्रिटिश शासन के पक्षधर होते हुए भी उनके लिए राष्ट्रीय हित सबसे बड़ा था। सरोजिनी नायडू ने गोखले के बारे. में कहा था कि, “वे हमारे राष्ट्रीय आचरण के सबसे बड़े संत सिपाही थे, जिनका जीवन पवित्र था।”
गोखले की इन्हीं खूबियों से प्रभावित होकर गाँधी जी ने गोखले के बारे में कहा था –
” वे मुझे ऐसे लगे जैसा कि मैं एक सच्चे राजनैतिक कार्यकर्ता को देखना चाहता हूँ – स्फटिक की भांति स्वच्छ, मेमने की तरह सीधे, सिंह की भांति साहसी और हद पार करने की सीमा तक उदार। …….”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

ऐसी महान प्रतिभा का देहावसान 19 फरवरी, 1915 को 49 वर्ष की अल्पायु में ही हो गया। उनके आश्चर्यजनक कार्यों को देखकर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी, उग्रदल के प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक जी से भी उनकी प्रशंसा के शब्द नियंत्रित न हो सके। उनके अनुसार –
“गोखले भारत का रत्न तथा महाराष्ट्र का सपूत था। वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अग्रणी था।”
उनके बारे में महात्मा गाँधी ने भी कहा –
“मेरे लिए इतना ही पर्याप्त है कि इसके विपरीत उनमें कोई दोष नहीं मिला। मेरे लिए वे हमेशा राजनीति के क्षेत्र के पूर्ण व्यक्ति थे और रहेंगे।”

WBBSE Class 9 Hindi गोपाल कृष्ण गोखले Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 29

  • जटिल = उलझा हुआ।
  • पूर्वाग्रहों = पूर्व के विचार से ग्रसित।
  • बहुधा = अक्सर ।
  • जमाखोरी = आवश्यकता की चीजों को छिपाकर रखना ताकि अभाव की स्थिति में उसे ऊँचे मूल्य पर बेचा जा सके।
  • सत्यनिष्ठा = सच्चे विश्वास।
  • लगन = रुचि।
  • राजद्रोह = राष्ट्र के प्रति विद्रोह की भावना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

पृष्ठ सं० – 30

  • तर्क सम्मत = तर्क की कसौटी पर खरा।
  • आदिम जाति = आदिवासी।
  • मध्यमार्गी = बीच का रास्ता अपनाने वाला।
  • ध्येय = लक्ष्य।
  • अनुलंघनीय = उल्लंघन न करने लायक।
  • इतिश्री = समाप्ति।
  • आकृष्ट = आकर्षित।
  • दुर्भावना = बुरी भावना।
  • आगामी = आने वाला।
  • हेतु = कारण।

पृष्ठ सं० – 31

  • तिलांजलि = त्याग।
  • एकत्र = जमा, इकट्ठा।
  • व्यवसाय = रोजगार।
  • कर्तव्यनिष्ठ = जिनमें कर्त्वव्य के प्रति निष्ठा हो।
  • निकाय = संस्था।
  • विधान = नियम।
  • सुसज्जित = अच्छी तरह सजकर ।
  • संघर्षरत = संघर्ष में रहना।
  • प्रकोष्ठों = खानों।
  • नि:शुल्क = बिना शुल्क के।
  • अनिवार्य = जरूरी।

पृष्ठ सं० – 32

  • उदारवाद = उदारता में विश्वास करनेवाली विचारधारा।
  • दमन = अत्याचार।
  • सम्मति = सहमति।
  • तत्परता = जल्दीबाजी।
  • अंतर्मन = हृदय।
  • सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह।
  • विलीन = गायब।
  • कृतज्ञ = उपकार को माननेवाला।
  • सन्मार्ग = सही मार्ग।
  • हित = भलाई।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

पृष्ठ सं० – 33

  • अजनबी = अपरिचित।
  • विकार = दोष।
  • सुधारवाद = सुधार में विश्वास करने वाली विचारधारा।
  • न्यायोचित = न्याय की दृष्टि से उचित।
  • समानता = बराबरी।
  • निरर्थक = जिसका कोई अर्थ नहीं है।
  • आदर्श = अच्छा रूप, वह जो होना चाहिए ।
  • कर्मठ = कर्म में विश्वास रखने वाला।
  • सत्यनिष्ठा = सत्य में श्रद्धा रखने वाला।
  • खड्यंत्र = कुचक्र।
  • विधर्मी = धर्म को नहीं माननेवाला।
  • स्फटिक = मणि।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 Question Answer – आचार्य जगदीश चंद्र बोस

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : आचार्य जगदीश चंद्र बोस के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 2 : ‘आचार्य जगदीश चन्द्र बोस को विज्ञान की देन’ पर एक संक्षिप्त निबंध लिखें।
प्रश्न – 3 : प्राकृतिक विज्ञान के शोध के प्रणेता के तौर पर आचार्य जगदीश चंद्र बोस का मूल्यांकन करें।
प्रश्न – 4 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस वैज्ञानिक होने के साथ-साथ धार्मिक तथा आस्तिक भी थेपठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस में विज्ञान, कला और धर्म का संतुलित सामंज्यस था – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 6 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस ने अपने शोध कार्यों के द्वारा भारतीय ॠषियों की गहन अंतर्दृष्टि की वैज्ञानिक व्याख्या और सत्यता प्रदान की – संकलित पाठ के आधार पर लिखें।
उत्तर :
आचार्य जगदीश चन्द्र बोस का जन्म सन् 1854 ई० में बंगाल के मैमनसिंह जिले के फरीद्युर गाँव में हुआ था। आचार्य बोस अद्भूत प्रतिभा के धनी थे। वे वेदों तथा क्रषियों की गहन अंतर्दृष्टि से विशेष प्रभावित थे जिसमें प्रकृति को सजीव मानकर उनकी विशद व्याख्या की गई है। संस्कृत कवियों ने भी लाजवंती तथा सूयंमूखी फूलों के माध्यम से उनकी संवेदनशोलता का वर्णन किया है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

हमारे ॠषियों की इन्हीं आंतरिक विवेकशीलता को आचार्य बोस ने अपने वर्णन किया है। हमारे ॠषियों की इन्हीं आंतरिक विवेकशीलता को आचार्य बोस ने अपने शोधकार्यों के द्वारा सत्यता प्रदान की। उन्होंने यहि सिद्ध किया कि पौधों तथा पशुओं के भावावेग समान होते है। इस सच्चाई को उन्होंने अपने द्वारा निर्मित जटिल यंत्रों से सिद्ध करके दिखाया।

आचार्य बोस ने प्रकृति को विज्ञान से श्रेष्ठतर बताया क्योकि उनका कहना था – रासायनिक, विद्युतीय और इलेक्टिक क्रियाएँ वह नहीं कर सकती जो गेहूँ के बीज का एक दाना वसन्त में अंकुरित होकर कर देता है।

आचार्य बोस ने अपने वैज्ञानिक शोधों के दौरान यह अनुभव किया कि मनुष्य प्रकृति के बारे में कितना कम जानता है तथा ज्ञान की अपेक्षा अज्ञान कितना विस्तृत है। उन्होने यह स्वीकार किया कि धार्मिक संत के लिए प्रकृति निष्ठा का विषय है जो स्वयसिद्ध हो जाता है लेकिन वैज्ञानिक उसे प्रयोगों द्वारा सिद्ध करने की कोशिश करते हैं।

जगदीश चन्द्र बोस के वैज्ञानिक शोधों का उद्देश्य मानवता का कल्याण, ईश्वर की गरिमा को बनाए रखना, विश्व को समृद्ध करना तथा स्थायी विश्वबंधुत्व था। पौधों में जीवन-विषय पर उनके शोध का मूल आधार भारतीय ॠषियों द्वारा निरूपित ये सत्य थे –

  • भारतीय ॠषि विश्व को सकल रूप में देखते हैं तथा उनके अनुसार पिण्ड और श्रहाण्ड एक-दूसरे के बिम्बप्रतिबिम्ब है।
  • विश्व का विस्तार निस्प्राण नहीं बल्कि प्राणवान है।
  • प्रकृति में कहीं व्यतिरेक नहीं है।

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि आचार्य जगदीशघन्द्र बोस धार्मिक होने के साथ-साथ आस्तिक भी थे। उनके व्यक्तित्व में विज्ञान, कला तथा धर्म का अद्भुत सामंज्यस था।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वेद कितने हैं ?
उत्तर :
चार।

प्रश्न 2.
वेदों के नाम लिखें ।
उत्तर :
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 3.
‘वेदों का वेद’ किसे कहा गया है ?
उत्तर :
‘पुराण’ को ।

प्रश्न 4.
भारत में पुनर्जागृति कब आई ?
उत्तर :
उन्नीसवीं शताब्दी में ।

प्रश्न 5.
भारत की प्रगति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर किसने बल दिया ?
उत्तर :
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार ने।

प्रश्न 6.
‘भारतीय संघ’ की स्थापना किसने की ?
उत्तर :
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार ने

प्रश्न 7.
भारतीय ॠषि विश्व को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर :
पूर्ण रूप में ।

प्रश्न 8.
भारतीय ऋषि के अनुसार पिण्ड और व्रह्वाण्ड क्या हैं ?
उत्तर :
एक-दूसरे के बिंब-पतिबिंब।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 9.
‘स्वाह रात्रो पत्र-संकोच:’ – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
रात में पत्तियों में संकुचन होता है ।

प्रश्न 10.
उदयन के पौधे में किसके समान गतिविधियाँ दिखायी दी ?
उत्तर :
मानव के समान ।

प्रश्न 11.
हमांर :ग्रि्षियों की अंतः प्रज्ञा को किसने वैज्ञानिक सत्यता प्रदान की ?
उत्तर :
जगदीश द्र बोस ने ।

प्रश्न 12.
विज्ञान अर्भी तक किसकी व्याख्या नहीं कर पाया है ?
उत्तर :
जैविक विकास और उसके पुनरूत्थान की व्याख्या ।

प्रश्न 13.
किसने यह प्रमाणित कि पौधों में भी जीवन है ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने।

प्रश्न 14.
‘मैन ऑन दिज नेचर’ के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
सर चार्ल्स शेरिंगटन ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 15.
अरस्तू ने दो हजार वर्ष क्या पूछा था ?
उत्तर :
मस्तिष्क का शरीर से क्या संबंध है ?

प्रश्न 16.
सध्चा विज्ञान उसके प्रणेता को क्या बना देता है ?
उत्तर :
विनाम्म।

प्रश्न 17.
चार्ल्स डारविन के शोध-प्रबंध का नाम क्या है ?
उत्तर :
‘द डिसेंट ऑंक मैन’ ।

प्रश्न 18.
किसकी नींव पर हम बेहतर भविष्य बना सकते हैं ?
उत्तर :
अतीत की नींव पर ।

प्रश्न 19.
वैज्ञानिकों की जीवन्त आत्मा किसका प्रतिबिंब हैं ?
उत्तर :
देवी रहस्य का।

प्रश्न 20.
जगदीश चन्द्र बोस की महत्वाकांक्षा क्या थी ?
उत्तर :
हम लोग खोज और शोध-कार्य जारी रखें।

प्रश्न 21.
सच्चा विज्ञान उसके प्रणेता को क्या अनुभव करा देता है ?
उत्तर :
वास्तव में वह (मणेता) कितना कम जानता है और अझान बहुत विस्तृत है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 22.
जगदीश चन्द्र बोस की रुचि किस सुमेल में थी ?
उत्तर :
व्रहाण्ड की निरतरता तथा सुमेल में ।

प्रश्न 23.
जैन तथा वैशेघिक लेखक गुणारल और शंकर मिश्र ने पौधों के किन गुणों की चर्चा की है ?
उत्तर :
पौधों में अंतर्निह्नित चेतना है और वे सुख-दु ख अनुभव करते हैं।

प्रश्न 24.
संस्कृत कवियों ने किस फूल की चर्चा की है ?
उत्तर :
सूर्यमुखी।

प्रश्न 25.
किस उपनिषद में ज्ञान-विज्ञान के विषयों का उल्लेख है ?
उत्तर :
छान्दोग्य उपनिषद् में ।

प्रश्न 26.
भारतीयों की गहन रुचि किन नियमों को जानने में रही है ?
उत्तर :
उन नियमों मे जो बह्नाण्ड के विविध पक्षों को शासित करते हैं।

प्रश्न 27.
जगदीश चन्द्र बोस किस शोध के प्रणेता थे ?
उत्तर :
प्राकृतिक विज्ञान के ।

प्रश्न 28.
जर्मनी के प्रो० हीबरलैण्ड किस विषय के वैज्ञानिक थे ?
उत्तर :
वनस्पति विज्ञान के ।

प्रश्न 29.
‘न्याय-बिन्दु टीका’ के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर :
धर्मोत्तर ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 30.
‘मिमोसा पुदिका’ को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
लाजवन्ती या हुई-मुई।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विज्ञान के विकास में भारत का एक लम्बा और सतत् इतिहास रहा है – कैसे ?
उत्तर :
प्राचीन भारत के उपलब्य ग्रथों से यह पता चलता है कि विज्ञान के विकास में भारत का एक लंबा और सतत् इतिहास रहा है । उदाहरण के लिए, हमारे चारों वेदों, छान्दोग्य उपनिषद्, महाकाव्यों तथा पुराणों में ज्ञान-विज्ञान के विषयों का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 2.
भारत की वैज्ञानिक प्रगति में डॉ० महेन्द्रलाल सरकार के योगदान की चर्चा करें ।
उत्तर :
19 वीं सदी में डॉ॰ महेन्दलाल सरकार ने भारत की प्रर्गति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने ‘भारतीय संघ’ की स्थापना की। प्रो० सी० वी० रमन तथा के० एस० कृष्ण जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने उस समय इस संघ में कार्य किया।

प्रश्न 3.
जगदीश चन्द्र बोस ने भारतीय कषियों की किन बातों की वैज्ञानिक व्याख्या की तथा उन्हें सत्यता प्रदान की ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने भारतीय ॠषियों की जिन बातों की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए उन्हें सत्यता प्रदान की, वे निम्नांकित हैं –

  • पिण्ड और बह्ाणण्ड एक दूसरे के बिम्ब-प्रतिबिम्ब हैं।
  • सम्पूर्ण विश्व तथा बहाण्ड प्राणवान है।
  • प्रकृति में कहीं अवरोध नही है।
  • पौंधों में भी जीवन है तथा वे भी सुख-दुःख अनुभव करते हैं।

प्रश्न 4.
जगदीश चन्द्र बोस ने पौधे की जीवंतता को समझाने के लिए किसका उदाहरण दिया ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने पौधै की जीवंतता को समझाने के लिए पत्वर के टुकड़े तथा आम की गुठली का उदाहरण दिया। पत्थर का टुकड़ा वर्षो तक यूँ ही पड़ा रहेगा लेकिन गुठली के लिए परिस्थितिया अनुकूल होने पर वह एक बड़े वृक्ष में बदल सकती हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 5.
अतीत के बारे में जगदीश चन्द्र बोस ने क्या कहा ?
उत्तर :
अतीत के बारे में बताते हुए जगदीश चन्द्र बोस ने कहा कि अतीत को तो हम वापस नहीं ला सुके लेकिन उसकी नींव पर एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते है । अगर हम प्रयत्ल करें तो अपने वर्तमान को अच्छे भविष्य में बदल सकते हैं।

प्रश्न 6.
भारतीबों की रुचि किन नियमों को जानने में रही है ?
उत्तर :
भारतौयों की रुचि उन नियमों को जानने में रही है जो पूरे बह्नाण्ड को शासित करते हैं, उसे एक नियम में बाँधकर रखते हैं। इसका पता हमारे प्राचीन ग्रंथों से भी मिलता है। यही कारण है कि विज्ञान के विकास में भारत का एक लम्बा और सतत इतिहास रहा है ।

प्रश्न 7.
विज्ञान आज तक किसकी व्याख्या नहीं कर पाया है ?
उत्तर :
विज्ञान आज तक जैविक विकास तथा उसके पुनरुत्यान की व्याख्या नहीं कर पाया है । उदाहरण के लिए रासायनिक, विद्युतीय और इलेक्ट्रानिक क्रियाएँ वह नहीं कर सकती जो गेहूँ के बीज का एक दाना वसंत में अंकुरित होकर कर देता है।

WBBSE Class 9 Hindi आचार्य जगदीश चंद्र बोस Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 24

  • दक्षता = कुशलता।
  • कायल = प्रभावित।
  • वेदी = धर्म के काम के लिए प्रयोग में लाया जानेवाला चबूतरा।
  • उत्साहजन्य = उत्साह से जन्मा हुआ।
  • शोध = खोज।
  • ख्याति = प्रसिद्धि।
  • सतत = लगातार ।
  • पितरों = पूर्वजों।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

पृष्ठ सं० – 25

  • खगोल-विद्या = भूगोल ।
  • सघन = बहुत अधिक।
  • सुषुप्त = सोया हुआ।
  • पिपासा = प्यासा।
  • प्रणेता = जनक, प्रारंभ करनेवाले।
  • पादप = पौधा।
  • बिम्ब = छाया।
  • प्रतिबिम्ब = प्रतिच्छाया।
  • चराचर = हमेशा।
  • संचरण-व्यतिरेक = बाधा।

पृष्ठ सं० – 26

  • अन्तर्निहित = अंदर में निहित/विद्यमान ।
  • मन्द = धीमी।
  • अंतः प्रज्ञा = अंदर का विवेक ।
  • सत्यता = सच्चाई।
  • आघात = चोट।
  • प्रहारों = चोरों।
  • स्नायुतंत्र = इंद्रियाँ।
  • अवयवों = अंगों।
  • वनस्पति = पौधे।
  • आवेग = आवेश/उत्तेजना।
  • नितांत = बिल्कुल।
  • भावावेग = भाव का आवेग।
  • तथ्य = सच्चाई।
  • दर्शाने = दिखाने।
  • वक्र = टेढ़ा।
  • सुमेल = अच्छा मेल।
  • गुटिका = टुकड़ा।
  • गुठली = बीज (आम के अंदर का कड़ा भाग)

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

पृष्ठ सं० – 27

  • कालान्तर = समय का अंतर।
  • अज्ञात = अनजाना।
  • पुनरूत्पादन = फिर से उत्पादन।
  • जीवेतर = जीव से भिन्न।
  • उत्कर्ष = विकास ।
  • संचरित = फैलते।

पृष्ठ सं० – 28

  • ज्ञात = मालूम।
  • चयन = चुनना।
  • उर्जा = शक्ति।
  • अपरिवर्तनीय = परिवर्तन न होने वाला।
  • अनसुलझे = जिसे सुलझाया नहीं जा सका।
  • हल = सिद्ध।
  • अविराम = बिना आराम किए।
  • पोषित = पोसा गया, पाला गया।
  • अतीत = बीता हुआ समय।
  • सृजन = रचना।
  • भागीदार = हिस्सेदार, सहायक।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 Question Answer – राजा राममोहन राय

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : समाज सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय का परिचय दें ।
प्रश्न – 2 : राजा राममोहन राय आधुनिक भारत का पुनर्जागरण का सूत्रपात करनेवाले थे – विवेचना करें।
प्रश्न – 3 : राजा राममोहन राय के धर्म संबंधी विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 4 : राजा राममोहन राय आधुनिक भारत के प्रणेता थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : राजा राममोहन राय मानव मात्र की समानता चाहते थे – संकलित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 6 : संकलित पाठ के आधार पर राजा राममोहन राय के आदर्शों को लिखें ।
प्रश्न – 7 : सहायक पाठ में संकलित ‘राजा राममोहन राय’ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
अंध विश्वास और अनेक कुरीतियों से ग्रस्त भारतीय जनजीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जानेवाले राजा राममोहन राय भारतीय विभूतियों में से एक थे । वे प्रतिक्रिया तथा प्रगति के मध्य-बिन्दु थे। भारतीय पुनर्जागरण के प्रभात तारा थे ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

राजा राममोहन राय अनेक भाषा के ज्ञाता होने के कारण विभिन्न धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया था। अध्ययन के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि सभी धर्मों में एकेश्वरवाद का ही प्रचलन है। ईश्वर एक है, सर्वोपरि है, संसार का रचयिता है जिसका वर्णन अनेक रूपों में मिलता है । सबका सार तत्व एक है । यदि हम उस सर्वोपरि सत्य के स्वरूप को जान पाएँ तोधर्म के नाम पर कोई विवाद ही नहीं रह जाएगा । इसी दृष्टिकोण को अपनाकर हम उस परमेश्वर को अच्छी तरह समझ पाएँगे ।

समाज सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय विशेष रूप से याद किए जाते हैं। उन्होंने सती-प्रथा, बाल-विवाह, जाति-प्रथा, अस्पृश्यता जैसे रोगों से ग्रसित और विकृत भारतीय समाज में नवचेतना का संचार किया । राष्ट्रीय एकता व अखंडता के लिए वे एक समर्पित कर्मवीर थे । ऊँच-नीच तथा छुआख्यूत की भावना को भी उन्होंने मानवता का महान शत्रु बताया । स्वयं उनके ही शब्दों में – ”जाति-भेद, जिससे हिन्दू समाज अनेक जाति-उपजाति में बँट गया है – हमारी गुलामी का प्रमुख कारण रहा है । एकता के अभाव में ही हम दासता की जंजीर में जकड़े रहे ।

राजा राममोहन राय भारत की आज़ादी के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता को बहुत ही आवश्यक मानते थे । रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने उनके बारे में सही कहा था –
“उनके हृदय में हिन्दू, मुस्लिम, इसाई आदि सबके लिए जगह थी । वस्तुतः उनकी आत्मा भारत की आत्मा थी ।”
राजा राममोहन राय समाज सुधारक के साथ ही एक महान शिक्षाशास्वी भी थे । वे भारत के विकास के लिए पाश्चात्य शिक्षा और अंग्रेजी शिक्षा को आवश्यक मानते थे । सन् 1885 ई० में उन्होंने कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की भी स्थापना की । ऐसे सर्वतोन्मुखी प्रतिभाशाली महापुरुष का देहांत 27 दिसंबर सन् 1883 को ब्रिस्टल में तब हुआ, जब वे इंग्लैण्ड में भारतवासियों के कल्याण-कार्य में लगे हुए थे ।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक भारतीय पुर्नजागरण का सूत्रपात करने वाले कौन थे ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय।

प्रश्न 2.
राजा राममोहन राय किसमें विश्वास रखते थे ?
उत्तर :
मानवीय स्वतंत्रता में ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

प्रश्न 3.
भारत ने किसे अपना पवित्र ग्रंथ माना ?
उत्तर :
उपनिषदों को ।

प्रश्न 4.
राजा राममोहन राय ने किन धर्मग्रंथों का अध्ययन किया ?
उत्तर :
हिन्दू, इस्लाम और ईसाई धर्मग्रंथों का।

प्रश्न 5.
भारत किन विवादों में फंस गया ?
उत्तर :
कर्मकांड तथा खंडन-मंडन के विवादों में ।

प्रश्न 6.
हम अपने छोटे-छोटे मतभेदों को कैसे भुला सकते हैं ?
उत्तर :
विश्व प्रेम तथा सत्यप्रेम को अपना कर ।

प्रश्न 7.
राजा राममोहन राय के अनुसार सच्चा धार्मिक कौन है ?
उत्तर :
जो व्यक्ति अपने को परमात्मा का अंश मानता है।

प्रश्न 8.
राजा राममोहन राय के अनुसार समानता का मूल सिद्धांत क्या है ?
उत्तर :
मानव-मात्र की समानता।

प्रश्न 9.
प्राचीन काल में नारियों को कौन-से अधिकार मिले हुए थे ?
उत्तर :
जो अधिकार पुरुषों के थे।

प्रश्न 10.
राजा राममोहन राय हमें कौन-से महान आदर्श देना चाहते थे ?
उत्तर :
सत्य का धर्म, सामाजिक समानता, तथा मानव-मात्र की एकता का महान आदर्श।

प्रश्न 11.
विश्व का निर्माण या परिवर्तन किन व्यक्तियों के द्वारा होता है ?
उत्तर :
जो विश्व का सबसे अधिक विरोध करते हैं।

प्रश्न 12.
हमें किन बातों को तिलांजलि देने में प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए ?
उत्तर :
जो हमारे अंतःकरण की पूर्णता में बाधक है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

प्रश्न 13.
मानव की गरिमा को कौन कम करता है ?
उत्तर :
अंधविश्वास, कुरीतियाँ तथा सामाजिक बुराइयाँ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
राजा राममोहन राय ने किन धर्मग्रंथों का अध्ययन किया तथा उन्होंने क्या पाय्या ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय ने हिंदू, इस्लाम तथा ईसाई धर्मग्रंथों का अध्ययन किया। अध्ययन के बाद उन्होंने यह पाया कि ईश्वर में आस्था ही सभी धर्मो का सार है। सारे धर्म ये बताते है कि ईश्वर एक है, सर्वोपरि हैं।

प्रश्न 2.
राजा राममोहन राय किस स्वतंत्रता में विश्वास करते थे ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय मानवीय स्वतंत्रता में विश्वास करते थे । उन्होंने कहा कि जो देश अपने-आप को सत्य कहता है उसे भी मानव-मात्र की स्वतंत्रता तथा समानता में विश्वास करना चाहिए। मानवता प्रेम के नाते उन्होंने भारत की स्वतंग्रता के लिए फांस तथा बिटेन के विधायकों से जो अपील की थी – उसे सब जानते हैं। उनका यह मानना था कि यदि हम अपने देश की बुराइयों को मिटाना चाहते हैं तो हमें प्रतिबंधों को हटाना होगा।

प्रश्न 3.
राजा राममोहन राय के महान आदर्श क्या थे ?
उत्तर :
सत्य का धर्म, सामाजिक समानता तथा मानव-मात्र की एकता राजा राममोहन राय के महान आदर्श थे। लेकिन दु:ख की बात है कि हम आज भी इन आदर्शों से बहुत दूर हैं। वे जिन आदर्शों के लिए जीवन-भर संघर्ष करते रहे, वे अब तक प्राप्त नहीं हो सके हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

प्रश्न 4.
राजा राममोहन राय का सम्पूर्ण जीवन किन कार्यों में बीता ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय अपने पूरे जीवन भर समानता, व्यक्ति-स्वतंत्रता तथा मानव-प्रेम के लिए संघर्ष करते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने भारतीय समाज में फैले अंधविश्वासों, कुरीतियों, बुराइयों, जातिवाद तथा अधिनायकवाद के विरुद्ध संघर्ष किया।

WBBSE Class 9 Hindi राजा राममोहन राय Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 21

  • प्रणेता = निर्माणकर्ता ।
  • सूत्रपात = आरंभ ।
  • पुनर्जागरण = फिर से जागना ।
  • पुनस्थ्थापना = फिर से स्थापना ।
  • समन्वय = तालमेल ।
  • तार्किक = तर्क की ।
  • असंगत = बेमेल ।
  • निर्ममता = बिना ममता के।
  • कुरीतियों = बुरी प्रथाएँ।
  • गरिमा = सम्मान
  • लोचन = आँख।
  • मानस = मनुष्य ।
  • खंडन = गलत साबित करना ।
  • मंडन = सही साबित करना।
  • सार = मूल तत्व ।
  • अपूर्ण = जो पूरा नहीं है ।
  • मौन = चुपचाप।
  • आराधना = उपासना, पूजन ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

पृष्ठ सं० – 22

  • गूढ़ = गहरा ।
  • प्रकृति = स्वभाव ।
  • गंवा = बिता ।
  • प्रतिबंध = रोक ।
  • सदियाँ = सैकड़ों वर्ष ।
  • पराधीनता = गुलामी।
  • निष्ठा = विश्वास ।

पृष्ठ सं० – 23

  • हामी = समर्थक ।
  • संगत = उचित ।
  • कार्यान्वित = कार्य पूरा करना ।
  • यातनाएँ = कष्ट ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 Question Answer – स्वामी दयानंद सरस्वती

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : भारत के उत्थान के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने क्या सुझाव दिए ?
प्रश्न – 2 : स्वामी दयानंद द्वारा समाज-सुधार के लिए दिए गए उपायों पर विचार करें ।
प्रश्न – 3 : सामाजिक तथा व्यक्ति के उत्थान के लिए स्वामी दघानंद सरस्वती ने भारतीयों से किन बातों को अपनाने को कहा ?
प्रश्न – 4 : समाज-सुधारक के तौर पर स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करें।
प्रश्न – 5 : स्वामी दयानंद सरस्वती के धर्म संबंधी विचारों को पठित पाठ के आधार पर लिखें।
उत्तर :
आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इनका अविर्भाव ऐसे समय में हुआ जब भारत की अनेक परंपराएँ क्कृत हो रही थीं । लोग अंध विश्वासों से घिरे थे। ऐसे समय में स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों के आधार पर लोगों को धर्म का स्वरूप समझाया।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

स्वामी दयानंद के अनुसार ईश्वर सर्वव्यापक है, निराकार है, सर्वोपरि है, उसकी सत्ता को अनुभव किया जा सकता है तथा तर्क के आधार पर जाँचा जा सकता है । उन्होंने कहा कि ईश्वर एक है, हम सब उसकी संतान हैं तो फिर भेदभाव क्यों, जाति-प्रथा क्यों और नारियों पर अनेक पाबंदियाँ क्यों ? मनुष्य होने के नाते, मानवता के नाते प्रत्येक को आध्यात्मिक अराधना का अधिकार है।
दयानंद सरस्वती ने आत्मिक उत्नति तथा सामाजिक सुधार के लिए निम्नोक्त सुझाव दिए –

(क) यदि तुम परमात्मा में विश्वास करते हो तो तुम्हें सभी व्यक्तियों और नारियों की समानता में विश्वास करना पड़ेगा।
(ख) विश्व में किसी पर ऐसी पाबंदी नहीं लगायी जा सकती कि वह वेद न पढ़ सके ।
(ग) इस देश के किसी भी व्यक्ति को आध्यात्मिक क्रिया-कलापों से रोका नहीं जाना-चाहिए।
(घ) प्रत्येक व्यक्ति को सत्यसिद्धि के लिए उसे सर्वोपरि अवसर प्रदान करने का प्रयत्ल करना चाहिए
(ङ) हम अपने राष्ट्र को उसी स्थिति में सबल बना सकते हैं जब मानव द्वारा बनाए गए भेद-भावों कों समाप्त कर दें ।
(च) यदि हम अपने अतीत से सबक नहीं लेंगे तो हमें बार-बार अतीत में जीना पड़ेगा ।

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उन्होने सन् 1875 में आर्य समाज की स्थापना की तथा आर्य समाज के लिए दस नियमों को बनाया जो निम्नांकित हैं –

  • सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उन सबका आदि मूल परमेश्वर है ।
  • ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अनत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है । उसी की उपासना करने योग्य है ।
  • वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक हैं । वेदों का पढ़ना-पढ़ाना, सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है ।
  • सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने में सर्वदा उद्यत (तैयार) रहना चाहिए ।
  • सब काम धर्म के अनुसार सत्य और असत्य का विचार करके करना चाहिए।
  • संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उश्नति करना।
  • सबसे प्रीतिपूर्वक (प्रेमपूर्वक) धर्मानुसार (धर्म के अनुसार) व्यवहार करना चाहिए ।
  • अविद्या (अज्ञान) का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए ।
  • प्रत्येक को अपनी ही उत्राति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए । किन्तु सबकी उव्नति में अपनी उन्नति समझानी चाहिए ।
  • सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वहितकारी नियम का पालन करने में परतंत्र रहना चाहिए और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतंत्र रहें ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

आज भी आर्य समाज स्वामी दयानंद सरस्वती के बताए मार्ग पर चलकर देश-विदेश में आत्मिक-सामाजिक उश्नति के कार्य कर रहा है।

अति लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वामी दयानंद सरस्वती में किसके प्रति घनिष्ठ निष्ठा थी ?
उत्तर :
सत्य के प्रति।

प्रश्न 2.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने किसके उद्धार के लिए कार्य किया ?
उत्तर :
धर्म, राजनीति, समाज तथा संस्कृति के उद्धार के लिए।

प्रश्न 3.
इस संसार में किसे सर्वोपरि स्थान दिया गया है ?
उत्तर :
ईश्वर की सर्वव्यापकता को ।

प्रश्न 4.
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार ईश्वर को किस विधि से प्राप्त किया जा सकता है ?
उत्तर :
ध्यान तथा धारणा की विधि से ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

प्रश्न 5.
वेद हमें क्या बताते हैं ?
उत्तर :
सभी देवों का देव परमात्मा मूलतः एक है और उसके अनेक रूप नहीं हो सकते।

प्रश्न 6.
विश्व का सर्वोपरि देव कौन है ?
उंत्तर :
परमात्मा।

प्रश्न 7.
स्वामी दयानन्द सरस्वती ने क्या ज्ञात करने को कहा ?
उत्तर :
अंतिम सत्य क्या है ?

प्रश्न 8.
पाणिनी के अनुसार तप क्या है ?
उत्तर :
चिंतन-मनन तथा आलोचना है।

प्रश्न 9.
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार परमात्मा में विश्वास करनेवाले को किंसकी समानता में विश्वास करना पड़ेगा ?
उत्तर :
सभी व्यक्तियों तथा नारियों की समानता में ।

प्रश्न 10.
स्वामी जी ने किस नियम की उद्योषणा की ?
उत्तर :
नारी और पुरुष की समानता के नियम की।

प्रश्न 11.
स्वामी जी के हृदय में किसके विरुद्ध आग थी ?
उत्तर :
सामाजिक अन्याय के विरुद्ध।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

प्रश्न 12.
स्वामी दयानंद सरस्वती के दो मूल सिद्धान्त क्या थे ?
उत्तर :
एक-एक ईश्वर की उपासना तथा दो – जाति, रंग और संप्रदाय के पेद के बिना मानव की सेवा।

प्रश्न 13.
स्वामी दयानन्द ने किस समाज की स्थापना की ?
उत्तर :
आर्य समाज।

प्रश्न 14.
स्वामी जी का कौन-सा सबक हमेशा मस्तिष्क में रहना चाहिए ?
उत्तर :
यदि हम अतीत से सबक नहीं लेंगे तो बार-बार हमें अतीत में जीना पड़ेगा ।

प्रश्न 15.
स्वतंत्रता के बाद हमारे सामाजिक कानून में क्या परिवर्तन आया है ?
उत्तर :
पुरुष और नारी को समानता प्रदान की गई है।

प्रश्न 16.
धर्म का मार्गदर्शक क्या था ?
उत्तर :
तर्क का नियम ।

प्रश्न 17.
ज्ञानियों के लिए परमात्मा का वास कहाँ है ?
उत्तर :
अपनी ही आत्मा में ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

प्रश्न 18.
समाज में मूर्तिपूजा को स्थान क्यों मिला ?
उत्तर :
हमारी सस्कृति ने ईश्वर तक पहुँचने के लिए सभी माग्गों को स्थान दिया इसालिए मूर्तिपूजा को भी स्थान मिला।

प्रश्न 19.
संसार की प्रगति और व्यवस्था करनेवाला कौन है ?
उत्तर :
एक महान रहस्य अर्थांत् ईश्वर।

प्रश्न 20.
परम सत्य को कैसे समझा जा सकता है ?
उत्तर : हदयय, ज्ञान तथा इच्छा से ।

प्रश्न 21.
स्वामी जी के अनुसार संसार में किसी पर भी कौन-सी पाबंदी नहीं लगाई जा सकती ?
उत्तर : वेद को पढ़ने से रोकना या गायत्री मंत्र का जाप करने से रोकना।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती का स्थान प्रमुख क्यों है ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद सरस्वती का अर्विभाव ऐसे समय में हुआ था जब सम्पूर्ण भारत में आध्यात्मिक प्रांतियों का जाल फैला हुआ था तथा लोग अंधविश्वासों से घिरे थे। स्वामी जी ने उस समय धर्म, राजनीति, समाज तथा संस्कृति का उद्दार करने के लिए पूरे भारत में घूम-घूमकर कार्य किया। यही कारण है कि आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती का स्थान प्रमुख है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

प्रश्न 2.
मूर्त्रि-पूजा के प्रचलन के बारे में स्वामी दयानंद सरस्वती ने क्या बताया है ?
उत्तर :
भारतीय संस्कृति में ईश्वर तक पहुँचने के लिए लोग जलाशयों, नदियों, पेड़, पर्वतों, ग्रहों आदि की पूजा किया करते थे । इसी क्रम में कुछ लोग मिट्टी और पत्थर की प्रतिमाओं की भी पूजा करते थे क्योंकि हमने ईश्वर तक पहुँचने के लिए सभी मार्गो को अपनाया। इसी कारण से मूर्त्ति-पूजा का भी प्रचलन हो गया।

प्रश्न 3.
वेदों में परमात्मा के बारे में क्या कहा गया है ?
उत्तर :
वेदों में परमात्मा के बारे में कहा गया है कि परमात्मा एक है और उसके अनेक रूप नहीं हो सकते। परमात्मा ही सर्वोपरि देव है – अजन्मा, अंनत, अनादि, निराकार, अजर, अमर और सृष्टिकर्ता है।

प्रश्न 4.
स्वामी दयानंद सरस्वती का विश्वास किसमें था ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद सरस्वती का विश्वास एक मानव, एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर और एक ही पूजा-पद्धति में अटूट विश्वास था।

प्रश्न 5.
पाणिनी के अनुसार तप क्या है ?
उत्तर :
पाणिनी के अनुसार तप चिंतन-मनन की प्रक्रिया है । इसके अंतर्गत विश्व की रचना, इसका कर्ता, आदि पर विचार किया जाता है तथा उसे तर्क और ज्ञान के नियमों से जाँच किया जाता है।

प्रश्न 6.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने परमात्मा में विश्वास करने के बारे में क्या कहा ?
उत्तर :
ख्वामी दयानद ने परमात्मा में विश्वास करने के बारे में यह कहा कि यदि हम परमात्मा में विश्वास करते हैं तो हमें नर-नारी की समानता में विश्वास करना पड़ेगा। हम किसी पर यह पाबंदी नहों लगा सकते कि कोई जाति, धर्म अथवा लिंग के आधार पर वेदों को नहीं पढ़ सकता या फिर गायत्री मंत्र का जाप नहीं कर सकता।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

प्रश्न 7.
असहिष्णुता भारत के लिए विनाशकारी रही है – कैसे ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद ने कहा कि हम भारतवासी – जाति, धर्म, भाषा आदि के आधार पर आपस में लड़ते रहे हैं। आपसी लड़ाई के कारण ही हम गुलामी में फंसे। यदि हमने सहिष्युता से काम लिया होता तो भारत का विनाश नहीं होता।

प्रश्न 8.
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार अगर हम अपने अतीत से सबक नहीं लेंगे तो क्या होगा ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार हमें अतीत से शिक्षा लेनी चाहिए तथा आपसी मतभेदों, लड़ाई-झगड़ों को मिटाकर एक ही परमात्मा में विश्वास करना चाहिए। अगर हम अपने अतीत से सबक नहीं लेंगें तो हमें बार-बार अतीत में जाना पड़ेगा।

WBBSE Class 9 Hindi स्वामी दयानंद सरस्वती Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 17

  • भांतियाँ = भ्रम ।
  • विकृत = बुरा ।
  • सशक्त = मजबूत ।
  • सर्वव्यापकता = जो हरेक जगह मौजूद है ।
  • घुमंतू = घुम्मकड़
  • प्रकृति = स्वभाव ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

पृष्ठ सं० – 18

  • ज्ञात = पता, मालूम ।
  • औचित्य = अर्थ ।
  • स्फुलिंग = चिनगारी ।
  • पाबंदियाँ = रोक ।

पृष्ठ सं० – 19

  • यत्न = कोशिश ।
  • अपितु = बल्क ।

पृष्ठ सं० – 20

  • भ्रमण = घूमना ।
  • सबल = मजबूत ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • सहिष्णुता = सहन नहीं करना ।
  • अतीत= बीता हुआ समय।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 Question Answer – गुरु नानक

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : गुरु नानक के धर्म-संबंधी विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 2 : ‘ईश्वर ही सत्य है, और सत्य से ऊपर कुछ भी नहीं है’ – गुरु नानक के इस कथन के आलोक में उनके धर्म-संबंधी विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 3 : गुरु नानक ने सतनाम के बारे में क्या कहा है ?
प्रश्न – 4 : गुरु नानक ने ईश्वर-प्राप्ति के बारे में क्या कहा है ?
प्रश्न – 5 : गुरु नानक के अनुसार ईश्वर को कैसे अनुभव किया जा सकता है ?
प्रश्न – 6 : गुरु नानक की वाणी को सच्चे धर्म का केन्द्रीय सिद्धान्त कहा जा संकता है – कैसे?
प्रश्न – 7 : हममें से अधिकांश व्यक्ति बाह्य जीवन जीते हैं और जीवन के अंतर में नहीं झांकते – पठित पाठ ‘गुरु नानक’ के आधार पर विवेचना करें ।
उत्तर :
गुरु नानक का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब भारत में राजनैतिक या सामाजिक नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक संकट छाया हुआ था । लोग धर्म के सच्चे स्वरूप को भूल गए थे। धर्म के नाम पर अंधविश्वास करना तथा अर्थहीन धर्माधंता ही धर्म कहा जाने लगा था। धर्म लोगों को जोड़ने की जगह एक दूसरे से अलग कर रहा था।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

ऐसे समय में गुरु नानक ने हमारे सामने ऐसे विचार रखे जो किसी भी सच्चे धर्म के केन्द्रीय सिद्धांत कहे जा सकते हैं। उन्होंने सर्वपथम ‘ओंकार’ पर बल दिया । यह तीन अक्षरों अर्थात् ‘अ’ (अकार), ‘उ’ (उकार) और ‘म्’ (मकार) का संयुक्त रूप है। ‘अ’ का अर्थ जाग्रत अवस्था, ‘उ’ का स्वप्नावस्था तथा ‘म’ का अर्थ है सुपुप्ति अवस्था । ओंकार हमें सत्य से मिलाता है। ओंकार अदृश्य, गुणों से परे तथा भावों से परे है – शिवम् शान्तम् अद्वैतम् ! यह एक मूल सत्य है। सत्य ही सबसे ऊपर है – सतनाम । ईश्वर ही सत्य है और सत्य से बढ़कर कुछ भी नही है।

ये सारी बाते हमारे पाचीन ॠषियों ने भी हमें बतायी थी लेकिन हम उनके बताए हुए मार्ग से भटक गए हैं। जब जब उनके बताए मार्ग से भटक जाते हैं तब-तब अंधकार, दुःख और पराजय का हमारे जीवन में बोलबाला हो जाता है।

गुरु नानक के अनुसार यदि कोई इस सत्य को पाना चाहता है तो उसे अपने छददय के अंदर पवेश करना होगा। परमात्मा, वास, समुद्द, आसमान, तारों, मंदिरों, मस्जिदों आदि में नहीं है, वह तो मनुष्य के हेदय में है । कबीर ने भी कहा है –

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग दृँढ़े बन मांहि ।
ऐसे घटि घटि राम हैं, दुनियां देखे नांहि ।।

प्रत्येक व्यक्ति के हदयय में एक ऐसा गुप्त स्थान है जहाँ ईश्वर है, जहाँ उसे हुआ जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है । प्रार्थना, ध्यान तथा आध्यात्मिक क्रियाएँ उसे पाने के साधन हैं। गुर नानक ने कहा कि सच्चा धर्म प्रेम व्यवहार है, दया की भावना है। जो लोग धर्म के नाम पर लोगों को तोड़ने का काम करते हैं वे ईश्वर के शन्तु हैं। हम सब मिलकर ही परमात्मा-ईश्वर के शरीर हैं।

दूसरी महत्वपूर्ण शिक्षा जो गुरू नानक ने हमें दी-वह यह कि हम ईश्वर के विभिन्न रूपों को लेकर आपस में लड़ते हैं। यह भूल जाते हैं कि हम सभी एक ही लक्ष्य की खोज में तीर्थयात्री हैं । सभी जानना चाहते हैं कि वह परमात्मा कहाँ है ? कुरान और पुराण हमें एक ही शिक्षा देते हैं ? मंदिर हो या मस्जिद हमें एक ही परमात्मा दिखायी देता है।

अब वह समय आ गया है कि गुरु नानक की वाणी को स्वीकार करें । सतनाम और सदावार के महान् उपदेशों को याद रखें । हमें अपने जीवन के पत्येक क्षण अपने-आप से यह पूछना चाहिए कि हम जो उपदेश दूसरो को देते हैं क्या अपने दैनिक जीवन में उसका पालन भी करते हैं ? जिस दिन हम जीवन के प्रात ऐसा दृष्टिकाण अपनाएंगे उस दिन हमारी आत्मा सच्ची धार्मिक आत्मा होगी । अगर हम इसकी अवहेलना करते हैं तो अपने अंतःकरण से विमुख हो जाते हैं। हम जीवन में गहरे प्रवेश न करके केवल ऊपरी जीवन, दिखावे का जीवन जीते हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न – 8 : गुरु नानक के अनुसार सच्चा धार्मिक व्यक्ति कौन है ?
प्रश्न – 9 : गुरु नानक के अनुसार किन दोषों को अपने से दूर कर हम सच्चे धार्मिक हो सकते हैं?
प्रश्न – 10 : नानक के फटकार की हमें आज भी उतनी ही आवश्यकता है – पठित पाठ के आधार पर ल्बिखें ।
प्रश्न – 11 : गुरु नानक के अनुसार व्यक्ति सच्चा धार्मिक कैसे बनता है ?
प्रश्न – 12 : सन्त जीवन गैर-संसारी नहीं है – गुरु नानक के विचार को स्पष्ट करें ।
प्रश्न – 13 : गुरु नानक के अनुसार सबसे बड़े पैगेम्बर कौन हैं – विवेचना करें ।
प्रश्न – 14 : साघुता या पविव्रता संसार-विमुखता नहीं है – इस बारे में गुरु नानक के विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं।
प्रश्न – 15 : गुरु नानक ने धार्मिक जीवन किसे कहा है ? पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
उत्तर :
गुरु नानक ने हमें यह कहा था कि हम हमेशा धर्म का पालन अपनी रीद़ की हड्डी, मन्रोवारण तथा जप आदि के माध्यम से करते रहे हैं और यह सोचते रहे हैं कि हम धार्मिक हैं। हम धोखे में हैं। ऐसा करके कोई सच्चा धार्मिक व्यक्ति नहीं बना है और न ही बनेगा।
गुरु नानक के अनुसार जो व्यक्ति अपने अंतः करण में ईश्वर का अनुभव करता है, जिसे परमात्मा का नशा है, जो परमात्मा को अपने में मानता है तथा जिसने अपने होने का अर्थ समझ लिया है – वही सच्चा धार्मिक है। वैसे लोग जो मंदिर-मस्जिदों में जाते हैं लेकिन जीवन में नाना प्रकार के पाप करते हैं – कभी धार्मिक नहीं हो सकते।

जो गेरुआ वस्र धारण कर लेता है तथा हायों में भिक्षा पात्र थाम लेता है, सांसारिक जीवन से विमुख हो जाता हैवह कभी भी धार्मिक या पैंगेम्बर नहीं हो सकता। सबसे बड़े पैगेम्बर तो वे हैं जो भूखों को खिलाते हैं, बीमारों का उपचार करते हैं तथा पापियों को क्षमा करते हैं । ऐसे व्यक्ति की साधुता या पविव्रता को हम संसार-विमुखता नहीं कह सकते।
अगर हमने अंदर के ईश्वर को अनुभव नहीं किया है, यदि हम आपस में लड़ते हैं, यदि हम किसी को सूली पर चढ़ाते हैं तो हम धर्म, संस्कृति तथा मानवता के हत्यारे हैं। ईश्वर हमें कभी भी ऐसा करने को नहीं कहता क्योंकि उसी ने तो सबों को रचा है।

वैसे गुरु जो जाति प्रथा तथा बुआघूत को दूर करने को कहते हैं लेकिन स्वयं उस पर अमल नहीं करते या हम उसपर अमल नहीं करते तो भला हम किस प्रकार धार्मिक हो सकते हैं।

प्राचीन काल में हमारे ॠषियों ने हमें ‘वसुधैव कुटंबकम’ अर्थात् सम्पूर्ण मानवता के लिए सद्भावना का संदेश दिया था – लेकिन हममें से कितने लोग इसे अपने जीवन में उतार पाते हैं। गुरु नानक ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि धर्म ऐसी चीज़ नहीं जिसे हम दक्षिणा देकर खरीद सकते हैं, मंदिर, मस्जिद या गुरुद्धारे में जाकर प्राप्त कर सकते हैं।

यदि हम सच्चा धार्मिक बनना चाहते हैं तो हमें इन बुराइयों से अपने-आप को दूर रखना होगा । हमें महान ऋषि तथा गुरु की बातों को अपने जीवन में उतारना होगा।
निष्कर्ष के तौर पर गुरु नानक हमें यह सीख देते हैं कि जात-पाँत, छूआवूत, धार्मिक मतभेद – हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि भेद-भावों से अपने-आप को दूरखें क्योंकि हम सभी उसी एक परमात्मा के परिवार के सदस्य हैं।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नानक ने किस पर बल दिया ?
उत्तर :
‘ओंकार’ (ओइम) पर ।

प्रश्न 2.
‘ओंकार’ कितने अक्षरों से मिलकर बना है ?
उत्तर :
‘ओंकार’ तीन अक्षरों से मिलकर’ बना है – अ, उ और म्।

प्रश्न 3.
‘ओंकार’ ‘अ’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
जाग्रत अवस्था।

प्रश्न 4.
‘ओंकार’ के ‘उ’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
स्वपावस्था या स्वप्न की अवस्था।

प्रश्न 5.
‘ओंकार’ के ‘म्’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
सुषुप्तावस्था या सोने की अवस्था।

प्रश्न 6.
ओंकार किससे हमारा साक्षात्कार कराता है ?
उत्तर :
सत्य से ।

प्रश्न 7.
गुरु नानक किस विवाद में नहीं पड़ते थे ?
उत्तर :
धार्मिक हठवादिता के विवाद में।

प्रश्न 8.
‘ओंकार’ को क्या कहा गया है ?
उत्तर :
अदृशय, गुणों से परे तथा भाव से परे ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 9.
मूल सत्य क्या है ?
उत्तर :
ओंकार।

प्रश्न 10.
परमात्मा का वासं कहाँ है ?
उत्तर :
मनुष्य के अंतःकरण (हदय) में ।

प्रश्न 11.
हमारे देश में कैसे लोगों को धार्मिक कहा गया है ?
उत्तर :
जो परमात्मा को अपने में मानते हैं।

प्रश्न 12.
हमारा कर्त्तव्य क्या है ?
उत्तर :
ईश्वर को अपने हृय में अनुभव करना।

प्रश्न 13.
किसके माध्यम से ईश्वर को अनुभव किया जा सकता है ?
उत्तर :
प्रार्थना, ध्यान तथा आध्यात्मिक क्रियाओ से।

प्रश्न 14.
कैसे लोगों को गुरु नानक ने ईश्वर का शब्रु कहा है ?
उत्तर :
जो लोग केवल ईश्वर का नाम लेते हैं लेकिन अपना कर्त्तव्य नहीं करते ।

प्रश्न 15.
अज्ञानी पुरुष कौन हैं ?
उत्तर :
जिन्हें यह नहीं पता कि सत्य क्या है ?

प्रश्न 16.
सच्चा धार्मिक कौन है ?
उत्तर :
जिसने ईश्वर को अनुभव किया है ?

प्रश्न 17.
गुरु नानक के अनुसार सतनाम क्या है ?
उत्तर :
जीवन में सदाचार या सात्विक जीवन बिताना।

प्रश्न 18.
सतनाम से भी बड़ा क्या है ?
उत्तर :
प्रेम तथा दया का व्यवहार ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 19.
सही अर्थों में धार्मिक व्यक्ति कौन है ?
उत्तर :
जिसके हुदय में प्रकाश, आनंद और संपूर्ण मानवता के लिए दयाभाव है ।

प्रश्न 20.
मानक जैसे महापुरुषों के वचन हमारे लिए क्या है ?
उत्तर :
प्रेरणा और प्रताड़ना देने वाले ।

प्रश्न 21.
हममें से अधिकांश व्यक्ति कैसा जीवन जीते हैं ?
उत्तर :
बाहरी जीवन।

प्रश्न 22.
नानक हमें क्यों फटकारते हैं ?
उत्तर :
अपना सही स्वरूप भूल जाने के कारण।

प्रश्न 23.
कौन-सी चीज संसार-विमुखता नहीं है ?
उत्तर :
साधुता या पवित्रता।

प्रश्न 24.
गुरु नानक की पहली शिक्षा क्या है ?
उत्तर :
ईश्वर ही सत्य है और सत्य से ऊपर कुछ भी नहीं है।

प्रश्न 25.
गुरु नानक की दूसरी शिक्षा क्या है ?
उत्तर :
संसार के अनेक धर्मो का एक सामान्य आधार है ।

प्रश्न 26.
हम सभी क्या क्या जानना चाहते हैं ?
उत्तर :
परमात्मा कहाँ है।

प्रश्न 27.
किसके फटकार की हमें आज भी जरुरत हैं ?
उज्ञर :
गुरु नानक के फटकार की।

प्रश्न 28.
गुरु नानक के फटकार की जरूरत क्यों है ?
उत्तर :
क्योंकि हम दिखावटी जीवन जी रहे हैं।

प्रश्न 29.
कौन-सा जीवन संसार से पलायन नहीं है ?
उत्तर :
सन्त-जीवन।

प्रश्न 30.
महान कलाएँ किसके आस-पास घूमती हैं ?
उत्तर :
धार्मिक पथ-प्रदर्शकों के आसपास।

प्रश्न 31.
महान गुरुओं ने हमें क्या अपनाने को कहा था ?
उत्तर :
नयी चेतना ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 32.
हम सब किसके परिवार के सदस्य हैं ?
उत्तर :
परमात्मा के परिवार के सदस्य हैं।

प्रश्न 33.
हमारे देश में कौन-से काल (समय) आते रहे हैं ?
उत्तर :
प्रकाश और अंधकार, सुख और दुःख तथा जय और पराजय के ।

प्रश्न 34.
हम किसके बताए मार्ग से भटक गए हैं ?
उत्तर :
महान ॠषियों के बताए मार्ग से।

प्रश्न 35.
गुरु नानक का जन्म कैसे समय में हुआ था ?
उत्तर :
नैतिक और आध्यात्मिक संकट के समय में ।

प्रश्न 36.
गुरु नानक का युग कैसा था ?
उत्तर :
सामाजिक अव्यवस्था का ।

प्रश्न 37.
मूल सत्य क्या है ?
उत्तर :
ओकार।

प्रश्न 38.
सच्चे अर्थों में धार्मिक कौन है ?
उत्तर :
जिसे परमात्मा का नशा है ।

प्रश्न 39.
अब कौन-सा समय आ गया है ?
उत्तर :
गुरु नानक की वाणी को अपने जीवन में उतारने का।

प्रश्न 40.
हमें सतनाम के बारे में किसने बताया ?
उत्तर :
गुरुनानक ने ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 41.
क्या करना ईश्वर को सूली पर चढ़ाने जैसा है ?
उत्तर :
जाति, धर्म आदि के आधार पर मानवों को अलग-अलग करना ईश्वर को सूली पर चढ़ाने के जैसा है।

प्रश्न 42.
हमारा जीवन नीरस क्यों होता जा रहा है ?
उत्तर :
सांसारिक माया-मोह के कारण।

प्रश्न 43.
गुरुनानक की वाणी से हम क्या अनुभव करते हैं ?
उत्तर :
जीवन के आध्यात्मिक पहलू को ।

प्रश्न 44.
कौन-से लोग समाज के दु:ख या विफलताओं के प्रति कठोर दृष्टिकोण नहीं रखते हैं ?
उत्तर :
जो परमात्मा का साक्षात्कार करते हैं।

प्रश्न 45.
कौन-से दो ग्रंथ एक ही शिक्षा देते हैं ?
उत्तर :
‘पुराण’ और ‘कुरान’।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 46.
गुरु नानक ने किन बातों पर बल दिया ?
उत्तर :
आन्तरिक सजगता और बाह्म कुशलता ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गुरु नानक का जन्म कैसे समय में हुआ था ?
उ्तर :
गुरु नानक का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब देश में नैंतिक और आध्यात्मिक संकट छाया हुआ था। लोग दिखावे के लिए धर्म का आचरण कर रहे थे । एक-दूसरे से जुड़ने की बजाय वे अलग हो रहे थे। चारों ओर असामाजिक अव्यवस्था फैली हुई थी ।

प्रश्न 2.
गुरु नानक ने ‘ओंकार’ के बारे में क्या बताया ?
उत्तर :
गुरु नानक ने ओंकार को काफी महत्व दिया है । यह अ, उ ओ म् के मिलने से बना है जिसके अर्थ क्रमशः जाग्रतवस्था, स्वप्नावस्था तथा सुपुज्तावस्था हैं। ये तीनों अवस्थाएँ मिलकर ओंकार में एकाकार हो जाती है। ओंकार ही हमें सत्य से साक्षात्कार कराता है । यह औंकार अदृश्य, गुणातीत और भावातीत है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 3.
गुरु नानक ने परमात्मा के बारे में क्या कहा है ?
उत्तर :
गुरू नानक के अनुसार परमात्मा का वास आसमान, तारे या समुद्र में नहीं है। वह तो मनुष्य के हृदय में रहता है। व्यक्ति चाहे तो प्रार्थना, ध्यान तथा आध्यात्मिक क्रियाओं से उसे अनुभव कर सकता है ।

प्रश्न 4.
गुरु नानक ने सतनाम के बारे में क्या बताया है ?
उत्तर :
गुरु नानक के अनुसार सतनाम का अर्थ है – जीवन में सदाघार या सात्विक जीवन व्यतीत करना।

प्रश्न 5.
गुरु नानक के अनुसार कैसा व्यक्ति धार्मिक है ?
उत्तर :
गुरु नानक के अनुसार वह व्यक्ति धार्मिक है जिसने ईश्वर को अनुभव किया है । धार्मिक व्यक्ति कभी कोई ऐसा काम नहीं करता जो उसकी आत्मा के प्रतिकूल है या किसी भी तरह से अपविव्र है । धार्मिक व्यक्ति के मन में प्रकाश, आनंद और संपूर्ण मानवता के लिए दयाभाव रहता है।

प्रश्न 6.
गुरु नानक जैसे महापुरुषों के वचन हमारे लिए किस प्रकार के हैं ?
उत्तर :
गुरु नानक जैसे महापुरुषों के वचन हमारे लिए प्रेरणा और प्रताड़ना देनेवाले हैं। प्रेरणा इसलिए कि उनसे हम आध्यात्मिक जीवन के बारे में जानते है। नानक के वघन प्रताड़ना इस अर्थ में हैं कि हम धर्म का सही स्वरूप भूल गए है , सतही जीवन जी रहे हैं तथा दिखावे का व्यवहार कर रहे हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 7.
गुरु नानक की शिक्षा क्या है ?
अथवा
प्रश्न 8.
गुरु नानक की धर्म के बारे में क्या धारणा है ?
उत्तर :
गुरु नानक की धर्म के बारे में सबसे बड़ी शिक्षा यह है कि सभी धर्मो का एक सामान्य आधार है। ‘पुराण’ तथा ‘कुरान’ दोनों ही लोगों को प्रेम तथा भाइचारे का संदेश देते हैं। मान्दिर हो या मस्जिद परमात्मा एक है तथा ईश्वर का निवास मंदिर, मस्जिद, तारे या आसमान में नहीं है। वह तो सबके हूदय में वास करता है ।

प्रश्न 9.
गुरु नानक के अनुसार कैसे लोग ईश्वर के शत्रु हैं ?
अथवा
प्रश्न 10.
कैसे लोग ईश्वर को सूली पर चढ़ा रहे हैं ?
उत्तर :
जो लोग ईश्वर की अनुभूति अपने द्वयय में न करके धर्म के नाम पर लोगों के बीच द्वेष की भावना फैलाते है, आपस में लड़ाते हैं वे लोग ईश्वर के शत्रु हैं तथा ईश्वर को सूली पर चढ़ा रहे हैं।

प्रश्न 11.
पहले की तुलना में हिंसा आज कहीं अधिक आम हो गयी है – क्यों ?
उत्तर :
इतिहास के प्रारंभ से ही हमारे अषियों ने हमें ‘वसुधैव कुटुम्यकम्’ का पाठ पढ़ाया था । कहने का भाव यह है कि हमें सम्मूर्ण मानवता के लिए सद्भावना रखनी चाहिए। लैकिन अधिकांश लोगों ने इस सीख को अनदेखा किया है । यही कारण है कि पहले की तुलना में हिंसा आज कहीं अधिक आम हो गयी है।

WBBSE Class 9 Hindi गुरु नानक Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 11

  • जय = जीत ।
  • पराजय = हार ।
  • अवतरित = प्रकट ।
  • अपितु = बल्कि ।
  • धर्माचरण = धर्म का आचरण।
  • अरुचिकर = नापसंद ।
  • ओंकार = ओहम् (तीन अक्षरों अ, उ और म का मेल) ।
  • समाहित = मिली हुई ।
  • हठधर्मिता = हठ को धर्म बना लेना
  • विवाद = झमेले ।
  • अदृश्य = जो दिखायी न दे।
  • गुणातीत = गुण से परे ।
  • भावातीत = भाव से परे ।
  • शिवम् = कल्याणकारी
  • अद्वैतम् = एक ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • सतनाम = सच्चा नाम ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

पृष्ठ सं० – 12

  • अनिवार्य = जरूरी
  • अन्त:करण = हृदय ।
  • अभिप्राय = अर्थ, तात्पर्य ।
  • मठ = मंदिर ।
  • विहार = बौद्ध-मंदिर।
  • यातना = कष्ट ।
  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • गहन = गहरा ।
  • निष्ठा = विश्वास ।
  • व्यक्त = प्रकट।
  • सदाचार = सच्चा व्यवहार।

पृष्ठ सं० – 13

  • मतभेद = विचार का अंतर ।
  • संयम = अपने पर काबू रखना ।
  • सहिष्णुता = सहने की शक्ति ।
  • दृष्टिकोण = देखने का तरीका ।
  • अंधविश्वास = वह विश्वास जो अंधा हो ।
  • यन्त्रवत = मशीन की तरह।
  • बुद्धिवादी = केवल बुद्धि में विश्वास
  • रखने वाले ।
  • धर्मनिरपेक्ष = धर्म से अलग ।
  • आयाम = पहलू।
  • अपूर्ण = अधूरा ।
  • प्रताड़ना = कष्ट ।

पृष्ठ सं० – 14

  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • विमुख = दूर ।
  • सतही = ऊपरी ।
  • बाह्य = बाहरी ।
  • कालातीत = काल से परे।
  • विद्यमान = मौजूद ।
  • हेतु = कारण ।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • गैर-संसारी = संसार से अलग ।
  • पैगम्बर = देवदूत ।

पृष्ठ सं० =15

  • पलायन = भागना ।
  • वस्तुत: = वास्तव में ।
  • स्थापत्य = वास्तु, गृह-निर्माण कला ।
  • अमल = अपनाना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

पृष्ठ सं० – 16

  • प्रवृत्तियों = गुणों ।
  • एषणाओं = इच्छाओं ।
  • चरितार्थ = उतारना ।
  • आम = सामान्य ।
  • मन्त्रोचारण = मंत्र का उच्चारण।
  • अस्पर्श्यता = छुआछूत ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 1 हरिहर काका to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 Question Answer – कालिदास

दीर्य उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : कालिदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का मूल्यांकन करें ।
प्रश्न – 2 : संस्कृत साहित्य के प्रमुख कवि के रूप में कालिदास का परिचय दें ।
प्रश्न – 3 : कालिदास का सामान्य परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख करें ।
प्रश्न – 4: भारत की आत्मा, सौंदर्य एवं प्रतिभा के महान प्रतिनिधि कवि के रूप में कालिदास का परिचय दें ।
प्रश्न – 5 : कालिदास संस्कृत साहित्य के प्रथम और अंतिम कवि हैं – अपने विचार लिखें ।
प्रश्न – 6 : कालिदास का जीवन-परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करें ।
उत्तर :
कालिदास भारत के संस्कृत साहित्य के महान कवि और नाटककार हैं। संस्कृत-साहित्य में उनकी बराबरी करनेवाला कोई दूसरा साहित्यकार पैदा न हुआ । कालिदास और उनकी रचनाएँ कालजयी हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

कालिदास के जीवन के बारे में हमें विशेष जानकारी प्राप्त नहीं होती है क्योंकि अपने साहित्य में उन्होंने अपने बारे में विशेष कुछ नहीं लिखा है। उनके जीवन से संबंधित अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं लेकिन उनका कोई ऐतिहासिक महत्व नहीं है । प्राप्त ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार कालिदास उज्जयनी के राजा विक्रमादित्य के राजदरबारी कवि थे ।

अन्य साक्ष्य के अनुसार कालिदास गुप्तकाल के थे । उन्हें विक्रमादित्य की पदवी प्राप्त थी। वे 345 ई० में सत्ता में आए तथा 414 ई० तक शासन किया ।

कालिदास की रचनाओं से प्राप्त विवरण के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि उनका अर्विभाव ऐसे युग में हुआ था, जो वैभव और सुख-सुविधा से परिपूर्ण था। कालिदास को संगीत, नृत्य तथा चित्रकला से विशेष प्रेम था। उन्हें विज्ञान, कानून, दर्शन तथा संस्कारों का भी ज्ञान था।

जहाँ तक कालिदास की रचनाओं का प्रश्न है, निम्नलिखित सात रचनाओं को कालिदास की मौलिक रचना मानी जाती है तथा इनके बारे में कोई विवाद नहीं है –

अभिज्ञान शांकुतल :- यह सात अंकों का नाटक है । इसमें राजा दुष्यंत और शंकुतला के प्रेम और विवाह का वर्णन है ।

विक्रमोर्वशीय :- यह पाँच अंकों का नाटक है । इसमें पुरुखा और उर्वशी के प्रेम और विवाह का वर्णन है। मालविकाग्निमित्र :- यह भी पाँच अंकों का नाटक है। इसमें मालविका और अग्निमित्र के प्रेम का वर्णन है। रघुवंश :- उन्नीस सर्गों के इस महाकाव्य में सूर्यवंशी राजाओं के जीवन चरित्र हैं।

कुमारसम्भव :- सरह सर्गो के इस महाकाव्य में शिव-पार्वती के विवाह तथा युद्ध के देवता कुमार के जन्म का वर्णन हैं। मेघदूत :- इसमें यक्ष द्वारा अपनी प्रेयसी को मेघ द्वारा पहुँचाए गए संदेश का वर्णन एक सौ ग्यारह छंदों में किया गया है।
ॠतुसंहार :- इसमें विभिन्न ॠतुओं का वर्णन है । इन रचनाओं के कारण कालिदास की गणना विश्व के सर्वश्रेष्ठ कवियों और नाटककारों में होती है । उनकी रचनाओं का साहित्य के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी है।

कालिदास ने अपने संपूर्ण काव्य में इतना स्वाभाविक वर्णन किया है कि पाठक आनंदविभोर हो उठता है । उनके शब्द-चित्र मानों हमारी आँखों के सामने साकार हो उठते हैं । उपमा तथा रूपक का जितना सुंदर प्रयोग कालिदास ने किया है – वह दूसरे कवियों में देखने को नहीं मिलता है । अपने इन्हीं गुणों के कारण कालिदास संस्कृत साहित्य के सिरमौर तथा कालजयी कवि हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न – 7 : ‘कालिदास’ पाठ के आधार पर उनकी धर्म-संबंधी विचारों पर प्रकाश डालें ।
प्रश्न – 8 : कालिदास सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करनेवाले थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 9 : कालिदास को सभी धर्मों के प्रति सहानुभूति थी – स्पष्ट करें ।
उत्तर :
कालिदास के सारे ग्रंथ हिन्दु धर्म तथा सस्कृति से जुड़े हैं । इसका यह अर्थ नहीं है कि वे कट्टर हिंदू थे । कालिदास सभी धर्मों को समान सम्मान देते थे । धर्म के प्रति उनमें कोई दुराग्रह नहीं था और न ही वे धर्माध थे । उनका यह मानना था कि निराकार ईश्वर एक है भले ही उसके रूप अनेक हैं। इसलिए व्यक्ति को यह स्वतंत्रता है कि ईश्वर तक पहुँचने का कोई भी मार्ग चुन ले ।

भारत में जितने भी धर्म हैं सबका विश्वास पुनर्जन्म में है । पुनर्जन्म का आशय है कि व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार फिर से जन्म लेना पड़ता है । यह जन्म हमें पूर्णता की ओर ले जाने वाला हो सकता है अगर हम इस जन्म में अच्छे कर्म कर लें। मनुष्य के कर्म जन्म-जन्मांतर तक उसका पीछा करते हैं।

कालिदास आध्यात्मिक जीवन में विश्वास करते हैं लेकिन काम(Sex) से भी उनका विरोध नहीं है। अगर काम संयमित है तो वह अपनी प्रकृति में आध्यात्मिक है । उनके अनुसार कोई गृहस्थ जीवन जीने के साथ-साथ साधु भी हो सकता है। कबीर इसके उदाहरणस्वरूप रखे जा सकते हैं । उपनिषद में भी कहा गया है – ‘त्यक्तेन भुंजीथा’ ।
अर्थात् त्याग से भोग करो। कहने का भाव यह है कि जीवन का उद्देश्य आंन और सात्विकता है, न कि विलासिता या इन्द्रिय सुख-भोग|

कालिदास का धर्म के प्रति व्यापक दृष्टिकोण था। उन्होंने मानव को ब्रह्नांड तथा धर्म की शक्तियों से अलग करके नहीं देखा । वे जीवन में चार पुरुषार्थों – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में सामंज्यस देखना चाहते थे । उन्होंने राजनीति और कला को भी धर्म से अलग करके नहीं देखने की बात कही। यही कारण था कि तुलसीदास ने जीवन, लोके, चित्रों और फूलों में समान आनंद लिया।

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि कालिदास के लिए धर्म जीवन के विभिन्न उद्देश्यों के समन्वित पालन और व्यक्तित्व के सुगठित विकास में निहित है । कालिदास के लिए जीवन और धर्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

प्रश्न – 10 : ‘कालिदास’ ने राजाओं के किन आवश्यक गुणों का उल्लेख किया है ? लिखें।
प्रश्न – 11 : कालिदास के अनुसार एक आदर्श राजा में किन गुणों का समावेश होना आवश्यक है ?
प्रश्न – 12 : पठित पाठ ‘कालिदास’ के आधार पर बताएँ कि राजा में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर :
कालिदास मात्र कवि एवं नाटककार ही नहीं थे, उन्होंने अपने ग्रथथों में राजनीति विषयक बातों का भी उल्लेख किया है । इससे पता चलता है कि वे एक नीतिज़ भी थे । कालिदास के अनुसार एक आदर्श राजा में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –

(क) धार्मिक, न्यायप्रिय तथा प्रजापालक :- कालिदास के अनुसार राजा को धार्मिक, न्यायप्रिय तथा प्रजापालक होना चाहिए। प्रजा से वसूले गए धन को जन-कल्याण के लिए उसी प्रकार खर्च किया जाना चाहिए जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी से लिए गए जल को सहस्त्र गुणा करके लौटा देता है । राजा को प्रजा का सच्चा पिता, शिक्षक, रक्षक तथा जीविका प्रदान करने वाला होना चाहिए ।
‘अभिज्ञान शांकुतल’ में राजा से तपस्वी कहता है – ”आपके शस्त्र दुखी और पीड़ितों की रक्षा के लिए है न कि निदोर्षो पर प्रहार के लिए ।”

(ख) आत्मसंयम :- कालिदास ने राजा के लिए आत्म-संयम को अनिवार्य बताया है। दुष्यंत एवं शंकुंतला का पुत्र भरत, जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा है – उसका सबसे बड़ा गुण आत्मसयंम था। इसके विपरीत ‘रघुवंश’ में अग्निवर्ण दुराचारी होने के कारण क्षय रोग से असमय ही मर जाता है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

(ग) अंतरात्मा की आवाज सुननेवाला :- राजा को अंतिम निर्णय के लिए अंतरात्मा की आवाज सुननेवाला होना चाहिए । अर्जुन ने क्षत्रिय होने के नाते समाज द्वारा आरोपित युद्ध करने के अपने दायित्व से मना कर दिया था। दूसरा उदाहरण सुकरात का है जब वे एथेंसवासियों से कहते हैं – “एथेसवासियों ! मैं ईश्वर की आज्ञा का पालन करूँगा, तुम्हरीी आशा का नहीं।”

(घ) निष्कलंक :- राजा को सभी प्रकार के कलंकों से मुक्त होना चाहिए। उदाहरण के लिए रघुवंश के राजा जन्म से ही निष्कलंक थे । इन्होंने धन का संग्रह दान के लिए किया, सत्य के लिए चुने हुए शब्द कहे, विजय की आकांक्षा यश के लिए की और गृहस्थ जीवन पुत्र-प्राप्ति के लिए अपनाया।

अति लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
साहित्य में कालजयी रचनाएँ कैसे जन्म लेती हैं ?
उत्तर :
गहन-गंभीर मानवीय अनुभवों से ।

प्रश्न 2.
किस चेतना के मूल से कालिदास की कृतियों का जन्म हुआ है ?
उत्तर :
भारतौय राष्र्रीय चेतना के मूल से।

प्रश्न 3.
कालिदास की रचनाओं में कौन-से गुण हैं ?
उत्तर :
भाषा की सरलता, उक्तियों की सटीकता, गहन कवित्व संवेदना तथा भावों व विचारों का प्रस्कुटन आदि।

प्रश्न 4.
कालिदास के नाटकों की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
शक्ति, सौदर्य, कथा के गठन तथा पात्रों के चरित्र-चित्रण में अनुपम कौशल।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 5.
भारत के संस्कृत साहित्य में कालिदास का क्या स्थान है ?
उत्तर :
सर्वश्रेष्ठ कवि तथा नाटक कार होने का स्थान ।

प्रश्न 6.
कालिदास किस राजा के समकालीन थे ?
उत्तर :
राजा विक्रमादित्य के समकालीन ।

प्रश्न 7.
विक्रम संवत किसने चलाया ?
उत्तर :
राजा विक्रमादित्य ने ।

प्रश्न 8.
‘अभिज्ञान शाकुंतल’ में किसका वर्णन हैं ?
उत्तर :
दुष्यंत और शकुंतला के प्रेम तथा विवाह का वर्णन।

प्रश्न 9.
‘विक्रमोर्वशीय’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
पुरुखा और उर्वशी के प्रेम तथा विवाह का।

प्रश्न 10.
‘रघुवंश’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
सूर्यवंशी राजाओं के जीवन-चरित्र का वर्णन है।

प्रश्न 11.
‘कुमार संभव’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
शिव-पार्वती के विवाह तथा युद्ध के देवता कुमार के जन्म का वर्णन।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 12.
‘मेघदूत’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
यक्ष द्वारा अपनी पत्नी को पहुँचाए गए सन्देश का वर्णन।

प्रश्न 13.
‘ऋतुसंहार’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
सभी ऋतुओं का।

प्रश्न 14.
कालिदास अपने साहित्य का विषय-वस्तु कहाँ से चुनते हैं ?
उत्तर :
देश की सांस्कृतिक विरासत से ।

प्रश्न 15.
सर्वज्ञ, सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान क्या है ?
उत्तर :
चरम सत्य।

प्रश्न 16.
कालिदास को किस धर्म के प्रति सहानुभूति है ?
उत्तर :
सभी धर्मों के प्रति।

प्रश्न 17.
कालिदास किस सिद्धांत को मानते हैं ?
उत्तर :
पुनर्जन्म के सिद्धान्त को।

प्रश्न 18.
कालिदास का उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
अपनी संबंधो को स्वच्छ और उज्ज्वल बनाना।

प्रश्न 19.
कालिदास के अनुसार इतिहास क्या है ?
उत्तर :
कालिदास के अनुसार इतिहास मानव की नैतिक इच्छा का फल है, जिसकी अभिव्यक्तियाँ स्वतंत्रता और सृजन हैं ।

प्रश्न 20.
रघुवंश का शासन-क्षेत्र क्या था ?
उत्तर :
धरती से लेकर समुद्र तक।

प्रश्न 21.
राजा अज के राज्य में प्रत्येक व्यक्ति का क्या मानना था ?
उत्तर :
राजा प्रजा का व्यक्तिगत मित्र है।

प्रश्न 22.
किसके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा है ?
उत्तर :
दुष्यंत एवं शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर।

प्रश्न 23.
शालीन मानव-जीवन के लिए क्या अनिवार्य है ?
उत्तर :
संयम अनिवार्य है ।

प्रश्न 24.
राजा के लिए क्या अनिवार्य है ?
उत्तर :
आत्मसंयम अनिवार्य है ।

प्रश्न 25.
कालिदास के काव्य में किसको भव्यता प्रदान की गई है ?
उत्तर :
तप को।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 26.
आरंभिक वैदिक साहित्य में किसका निरूपण है ?
उत्तर :
जड़-चेतन की एकरूपता का निरूपण ।

प्रश्न 27.
कालिदास के पात्र किसके प्रति संवेदनशील हैं ?
उत्तर :
पेड़-पौधों, पर्वतों तथा नदियों तथा पशुओं के प्रति।

प्रश्न 28.
शंकुतला किसकी कन्या है ?
उत्तर :
प्रकृति की।

प्रश्न 29.
सीता के परित्याग का प्रकृति पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
सीता के परित्याग के समय मयूरों ने नाचना बंद कर दिया, वृक्ष पुष्परहित हो गए और हिरणों ने मुँह के आधे चबाए हुए दुर्वादलों (घासों) को नीचे गिरा दिया।

प्रश्न 30.
कालिदास का प्रकृति का ज्ञान कैसा था ?
उत्तर :
यथार्थ एवं सहानुभूतिपूर्ण।

प्रश्न 31.
कालिदास को किस विषय ने अपनी ओर आकर्षित किया ?
उत्तर :
पुरुष और नारी के प्रेम ने।

प्रश्न 32.
दुष्यंत शकुंतला को क्यों नहीं पहचान पाते ?
उत्तर :
अपंनो कमजोर स्मरणशक्ति के कारण।

प्रश्न 33.
संस्कृत साहित्य के किस कवि को प्रथम और अंतिम कवि माना जाता है ?
उत्तर :
कालिदास को।

प्रश्न 34.
कालिदास को किन कलाओं से विशेष प्रेम था ?
उत्तर :
संगीत, नृत्य तथा चित्रकला से।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 35.
कालिदास को किन विषयों का विशेष ज्ञान था?
उत्तर :
तत्कालीन ज्ञान-विज्ञान, विधि, दर्शन-शास्त्र तथा संस्कारों का विशेष ज्ञान था।

प्रश्न 36.
कालिदास अपने किन गुणों कें कारण प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
कम शब्दों में अधिक भा्बि प्रकट करना तथा कथन की स्वाभाविकता।

प्रश्न 37.
कालिदास किन अलंकारों के प्रयोग में सर्वोपरि हैं ?
उत्तर :
उपमा तथा रूपक अलंकार।

प्रश्न 38.
कालिदास की शैली किस प्रकार की है ?
उत्तर :
निवेदन-शैली।

प्रश्न 39.
किसकी अनेक पंक्तियाँ संस्कृत में सूक्तियाँ बन गयी हैं ?
उत्तर :
कालिदास की।

प्रश्न 40.
कालिदास किसके उपासक थे ?
उत्तर :
भगवान शिव के।

प्रश्न 41.
कालिदास ने किन चीजों का समान आनंद लिया ?
उत्तर :
जीवन, लोक, चिर्रों तथा फूलों का।

प्रश्न 42.
मानव जीवन के चार पुरुषार्थ कौन-से हैं ?
उत्तर :
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ।

प्रश्न 43.
कालिदास किसकी रचना में बेजोड़ हैं ?
उत्तर :
मानस-चित्रों की रचना में ।

प्रश्न 44.
कालिदास के अनुसार जीवन का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
आनंद और सात्विकता न कि विलासिता या इन्द्रयय सूख- भोग।

प्रश्न 45.
शिव और पार्वती के जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
कुमार का जन्म ।

प्रश्न 46.
कालिदास किन चीजों में चेतन व्यक्तित्व मानते हैं ?
उत्तर :
नदियों, पर्वतों, वन-वृक्षों में ।

प्रश्न 47.
कालिदास के अनुसार प्रत्येक को सही आचरण के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
अपने अंत:करण में झांकना चाहिए ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 48.
रात और दिन, ॠतु-परिवर्तन – ये सब किसके प्रतीक हैं ?
उत्तर :
मानव-मन के परिवर्तन, विविधता और चंचलता के प्रतीक हैं।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कालिदास की रचनाओं से उनके जीवन के बारे में हमें क्या जानकारी प्राप्त होती है ?
उत्तर :
कालिदास की रचनाओं से उनके जीवन के बारे में यह जानकारी प्राप्त होती है कि वे ऐसे युग में हुए थे जो वैभव और सुख-सुविधाओं से पूर्ण था। संगौत, चृत्य, चित्र कला से उन्हें विशेष प्रेम था। उन्हें तत्कालौन ज्ञान-विज्ञान, विधि (कानून), दर्शन-शास्त्र तथा संस्कार विधि का विशेष ज्ञान था। वे हिमालय से कन्याकुमारी तक की भौगोलिक स्थिति से पूरी तरह परिचित थे।

प्रश्न 2.
कालिदास की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखें ।
उत्तर :
कालिदास की पमुख रचनाएँ है – अभिज्ञान, शकुंतला, विक्रमोर्वशीय, मालविकागिन्निन्र, रघुवंश, कुमार संभव, मेघदूत, ऋतुसंहार।

प्रश्न 3.
धर्म के बारे में कालिदास के क्या विचार थे ?
उत्तर :
कालिदास सभी धर्मों को समान आदर देते थे । धर्म के बारे में उनका कोई पू प्वाग्रह या अंधविश्वास नहीं था 1 उनका यह मानना था कि ईश्वर एक है, निराकार है तथा उसके विभिन्न रूप एक ही हैं।

प्रश्न 4.
कालिदास की रचनाओं से किस गलत धारणा का निराकरण हो जाता है ?
उत्तर :
कालिदास की रवनाओं से हिन्दू धर्म की इस गलत धारणा का निराकण हो जाता है कि हिन्दुओं ने भाव की अपेक्षा ज्ञान को अधिक महत्व दिया तथा उन्होंने सासारिक दु:ख-दद्दों की अवहेलना की।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 5.
प्राचीन काल में राजा राजस्व की वसूली क्यों करते थे ?
उत्तर :
प्रायीन काल में राजा राजस्व की वसूली इसालिए किया करते थे ताकि उस राशि से जन-कल्याण का काम किया जा सके । ठीक वैसे ही जैसे सूर्य जितना जल लेता है उसका सहस्तगुणा करके लौटा देता है ।

प्रश्न 6.
शकुंतला कौन थी ? उसका लालन-पालन किसने किया ?
उत्तर :
शंकुतला प्रकृति की कन्या (पुत्री) थी। कठोर हृदय की माँ मेनका ने जब उसे त्याग दिया तो आकाश में विचरण करनेवाले पक्षियों ने उसे उठाया तथा उसका पालन-पोषण तब तक किया जब तक कि कण्व ॠषि उसे अपने आश्रम में नहीं ले गए । कण्व ॠषि ने ही उसे पाल-पोष कर बड़ा किया।

प्रश्न 7.
शकुंतला के विवाह के अवसर पर किसने क्या किया ?
उत्तर :
शंकुतला के विवाह के अवसर पर वन के वृक्षों ने उपहार दिया, वन की देवियों ने उस पर फूलों की वर्षा की तथा कोयलों ने खुशियों के गौत गाए ।

प्रश्न 8.
जब राम ने सीता का परित्याग किया तो उसका प्रकृति पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
राम के द्वारा सीता के परित्याग किए जाने पर मयूरों ने नृत्य करना बंद कर दिया, वृक्षों ने अपने पुष्षों का त्याग कर दिया तथा मृगियों (हिरणियों) ने मुँह के आधे चबाए हुए दुर्वादलों (घासों) को अपने मुँह से गिरा दिया।

प्रश्न 9.
शकुंतला की विदाई का आश्रमवासियों, प्रकृति तथा वन्यप्राणियों पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
शकु गला की विदाई के समय सारे आश्रमवासी दुःखी हो उठे । मयूरों ने नृत्य करना बंद कर दिया। मृगों के मुखों से चारा छूट कर रडड़ा तथा लताओं ने अश्रु के रूप में अपने पत्रों (पत्तों) को गिराया।

प्रश्न 10.
कालिदास प्रक्ति को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर :
कालिदास प्रकृतति को निर्जाव-रूप में नहीं देखते हैं। उनके लिए नदियों, पर्वतो, वन-वृक्षों में भी प्राण हैं जैसा कि पशुओं, मनुष्यों तथा देवताओं में है।

प्रश्न 11.
यक्ष मेघ को अपनी पत्नी का विवरण किस प्रकार देता है ?
उत्तर :
यक्ष मेघ को अपनी पत्नी का विवरण देते हुए कहता है कि समस्त नारियों में वह इतनी सुंदर है मानो ईश्वर ने सबसे पहले उसी की रचना की है। वह पतली, गोरी है, उसके दाँत सुंदर है । नोचे के ओठ बिम्ब फल की तरह लाल हैं। कमर पतली है । आँखें चकित हिरणी की आँखों के समान हैं । नाभि गहरी है । नितंब के भार से उसकी चाल धीमी है तथा स्तन के भार से वह आगे की ओर झुकी हुई है ।

प्रश्न 12.
कालिदास के समय में लोगों का सामाजिक जीवन कैसा था ?
उत्तर :
कालिदास के समय में लोगों का सामाजिक जीवन समृद्ध था। लोगों की रुचि विभिन्न कलाओं में थी। राजा जनकल्याण के कार्य में रुचि लेते थे । नारियों का समाज में सम्मानपूर्ण स्थान था तथा पुरुषों का जीवन संदेहमुक्त था। पुरुषों के लिए एक से अधिक विवाह करना साधारण बात थी। पत्नी पति की सहर्धर्मिणी हुआ करती थी।

प्रश्न 13.
कालिदास का जीवन के प्रति क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर :
कालिदास आध्यात्मिक जीवन को सर्वोच्च मानते थे लेकिन जीवन में काम (Sex) से भी विरोध नहीं था। उनका यह मानना था कि नियम और संयम में बँधा हुआ काम भी अपनी प्रकृति में आध्यात्मिक ही है । इसलिए कोई गृहस्थ-जीवन बिताते हुए भी स्वभाव से साधु हो सकता है।

प्रश्न 14.
कालिदास के अनुसार जीवन का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
कालिदास के अनुसार जीवन का उद्देश्य आनंद और सात्विकता है । केवल विलासिता या सुखों का भोग करना जीवन का उद्देश्य नहीं है। इनके अनुसार जीवन में प्रेम का उद्देश्य पुरुष और नारी का सुखद सामंजस्य है । दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, एक-दूसरे से मिलकर ही दोनों का जीवन पूर्ण हो सकता है।

WBBSE Class 9 Hindi कालिदास Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 1

  • कालजयी = काल पर विजयी ।
  • गहन = गहरा ।
  • अंतराल = अंतर ।
  • नितान्त = बिल्कुल ।
  • परे = अलग ।
  • कृतियों = रचनाओं ।
  • आत्मसात = आत्मा में लीन करना ।
  • परिवेश = वातावरण ।
  • आयामों = पहलुओं ।
  • प्रस्कुटन = खिलना।
  • अनुपम = जिसकी उपमा न दी जा सके ।
  • शृंगों = शिखरों, वोटियों।
  • गणना = गिनती ।
  • समकालीन = बराबर समय के ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

पृष्ठ सं० – 2

  • सुविख्यात = बहुत प्रसिद्ध ।
  • विशिष्टता = महत्व ।
  • उत्कर्ष = उत्थान ।
  • शिलालेख = पत्थर पर खुदा लेख ।
  • मान्यता = विचार ।
  • सर्गों = अध्याय, पर्व ।

पृष्ठ सं० – 3

  • अनुरूप = अपने अनुसार ।
  • वियोग = विछोह, बिद्धुड़ना ।
  • समग्रता = संपूर्णता ।
  • माधुर्य = मधुरता
  • किंवदंतियाँ = कहावत ।
  • विदित = मालूम ।
  • विधि = कानून ।
  • विशद = विस्तृत ।

पृष्ठ सं० – 4

  • उपदेशात्मक = उपदेश देनेवाली ।
  • मनुहार = मनाना ।
  • समक्ष = सामने ।
  • आचरण =व्यवहार ।
  • मोक्ष = जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाना ।
  • अवगत = जानकारी ।
  • विखण्डता = अनेकता ।
  • संरक्षित = सुरक्षित ।
  • प्रारब्ध = भाग्य, किस्मत ।
  • नित = रोज ।
  • वर्णनातीत = वर्णन से परे ।
  • सूक्तियाँ = कथन।
  • आध्यात्मिक = आत्मा से जुड़ी।
  • संकीर्ण = संकरी ।
  • कालातीत = काल, समय से परे ।
  • सर्वज्ञ = सब जानने वाला ।
  • कर्ता = जन्म देनेवाला ।
  • पालक = पालन करनेवाला ।
  • संहारक = संहार करने वाला।
  • उपासक = उपासना करने वाले ।
  • श्लोक = दोहा ।
  • दृष्टिकोण = देखने का तरीका, नज़रिया।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

पृष्ठ सं० – 5

  • दुराग्रह = बुरा आग्रह ।
  • धर्मान्धता = धर्म को अंधे की तरह मानना ।
  • निराकार = बिना आकार के।
  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • निष्कलंक = बिना कलंक के ।
  • आकांक्षा = इच्छा ।
  • पुत्रेष्ण = पुत्र-प्राप्ति ।

पृष्ठ सं० – 6

  • राजस्व = कर (टैक्स) ।
  • दुराचारी = बुरे आचरण वाला ।
  • क्षय = यक्ष्मा (टी०बी०) ।
  • जड़ = निर्जीव।
  • नाना = विविध ।

पृष्ठ सं० – 7

  • यन्त्रवत् = यंत्र (मशीन) की तरह ।
  • भातृभावना = भाई की तरह भावना ।
  • षट = छ: ।
  • हृदयस्पर्शी = हदय को छूने वाला ।
  • चेतन = सजीव ।
  • अमानुषी = जो मानवी न हो ।
  • आकाशगामी = आकाश में गमन करनेवाला ।
  • दुर्वादलों = घास।
  • सतही = ऊपरी ।
  • अन्तरतम = हृदय ।

पृष्ठ सं० – 8

  • सुसंस्कार = अच्छे संस्कार ।
  • सामंज्यस = तालमेल ।
  • विधाता = ईश्वर ।
  • निष्ठावान = विश्वास रखना ।
  • प्रेममय = प्रेम से भरा हुआ ।
  • यातनाएँ = दु:खों ।
  • धरिणी = धरती ।
  • अविवेकी = बिना विवेक के ।
  • इन्द्रियपरक = शारीरिक।
  • स्वार्थजन्य = स्वार्थ से जन्मा हुआ ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

पृष्ठ सं० – 9

  • विस्मरणशीलता = भूलने की आदत ।
  • काम = इंद्रिय-सुख, शारीरिक मिलन ।
  • सहधर्मकारिणी = साथ-साथ धर्म का कार्य करनेवाली।

पृष्ठ सं० – 10

  • हृषित = खुश ।
  • निहित = समाया हुआ ।
  • सर्वाधिक = सबसे अधिक ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण प्रत्यय to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(क) लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं ?
उत्तरः
वे शब्दांश, जो धातु रूप या शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।
उदाहरण – होन + हार = होनहार, महान + ता = महानता, गा + वैया = गवैया।

प्रश्न 2.
प्रत्यय के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
प्रत्यय के दो भेद हैं –
(क) कृत या कृदन्त प्रत्यय
(ख) तद्वित प्रत्यय

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 3.
कृत प्रत्यय की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तरः
जो प्रत्यय क्रिया के मूल धातु-रूप के साथ लगकर संज्ञा अथवा विशेषणों का निर्माण करते हैं, वे कृत प्रत्यय कहलाते हैं।
उदाहरण – घिस + आई = घिसाई। इसमें ‘आई ‘रत्यय है।
कृत प्रत्यय के कुछ अन्य उदाहरण नीचे दिए गए हैं –

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 1

प्रश्न 4.
हिन्दी में प्रचलित कृत प्रत्ययों को लिखें तथा उनसे कम से कम दो-दो शब्द बनाएँ।
उत्तरः
हिन्दी में प्रचलित कृत प्रत्यय और उनसे निर्मित शब्द निम्नलिखित हैं –
अन – ढक + अन = ढक्कन, मनन, झाड़न, मरण, चिन्तन।
अक्कड़ – घूम + अक्कड़ = घुमक्कड़, पियक्कड़, रुअक्कड़।
अंत – गढ़ + अन्त = गढ़ंत, रटंत।
आ – सोच + आ = सोचा, भूला, समझा, पढ़ा, लिखा, भटका।
आई – पिटा + आई = पिटाई, लिखाई, लड़ाई, चढ़ाई, कमाई, पढ़ाई।
आऊ – कमा + आऊ = कमाऊ, बिकाऊ, चलाऊ, टिकाऊ।
आक – तैर + आक = तैराक , चालाक।
आका – लड़ + आका = लड़ाका, धड़ाका।
आकू – लड़ + आकू = लड़ाकू , पढ़ाकू, उड़ाकू।
आन – मिल + आन = मिलान, लगान, उठान, कटान, उड़ान, चालान।
आवट – सज + आवट = सजावट, मिलावट, लिखावट , बनावट , थकावट।
आवना – सुह + आवना = सुहावना, लुभावना, डरावना।
आवा – दिख + आवा = दिखावा, भुलावा, बुलावा, पहनावा।
आलू – झगड़ + आलु = झगड़ालु, दयालु, लजालु।
आस – पी + आस = प्यास, छपास, निकास।
आहट – चिल्ला + आहट = चिल्लाहट, घबराहट, मुस्कराहट।
इयल – मर + इयल = मरियल, सड़ियल, दड़ियल।
इया – बढ़ + इया = बढ़िया, जड़िया, घटिया।
ई – हँस + ई = हँसी, खिड़की, घुड़की, धमकी, बुहारी, बोली।
ऊ – खा + ऊ = खाऊ, चालू, रददू, उतारू, झाडू।
एरा – लूट + एरा = लुटेरा, कमेरा।
ऐया – खेव + ऐया = खिवैया, गवैया, पढ़ैया, रखैया।
ऐल – रख + ऐल = रखैल।
औती – मान + औती = मनौती, फिरौती।
औना – बिछ + औना = बिछौना, खिलौना।
क – लिख + क = लेखक, पालक।
कर – लिख + कर = लिखकर, पढ़कर, गिनकर, सोचकर, सोकर।
त – बच + त = बचत, खपत, लिखत।
ता – डूब + ता = डूबता, जाता, रमता, बहता, पीटता, मारता।
ती – चल + ती = चलती, फिरती, गिनती, बढ़ती, घटती।
न – बेल + न = बेलन, चलन, पान, खान, लेन-देन।
ना – लिख + ना = लिखना, पढ़ना, टहलना, पाना, जीना, बैठना।
नी – जन + नी = जननी, चटनी, मथनी, करनी, भरनी, ओढ़नी।
या – बो + या = बोया, खोया, पाया, जाया, सोया।
वाई – सुन + वाई = सुनवाई, कटवाई, चिरवाई, तुलवाई।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 5.
संस्कृत के निम्नलिखित प्रत्ययों से शब्द-निर्माण करें –
अन, अनीय, अना, आ, ई, उक, ऐया, क, ता, ति, य, र, व्य, स्थ।
उत्तरः
संस्कृत के प्रत्ययों से बने शब्द –

  • अन – गमन, भवन, जलन, चलन, श्रवण, करण।
  • अनीय – पठनीय, गोपनीय, करणीय।
  • अना – भावना, वंदना, प्रार्थना, कामना।
  • आ – पूजा, इच्छा, विद्या।
  • ई – त्यागी, उपकारी।
  • उक – भिक्षुक, भावुक।
  • ऐया – शख्या।
  • क – पाठक, सेवक, गायक, चालाक, कारक।
  • ता – नेता, दाता, कर्ता, वक्ता, विक्रेता, अभिनेता।
  • ति – गति, मति, यति, शक्ति, नीति।
  • य – देय, गेय, पेय।
  • र – नम्र, हिंस्त।
  • व्य – कर्त्तव्य, मंतव्य, गंतव्य।
  • स्थ – गृहस्थ, स्वस्थ, दूरस्थ।

प्रश्न 6.
तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं ?
उत्तरः
तद्धित प्रत्यय :- जो प्रत्यय क्रिया के धातु रूपों को छोड़कर संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण सूचक शब्दों के साथ जुड़ते हैं, वे तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे – पंजाब + ई = पंजाबी। यहाँ ‘ई तद्धित प्रत्यय है, क्योंकि यह पंजाब’ नामक संज्ञा के साथ मिलकर नया शब्द बना रहा है। हिन्दी में संस्कृत के अतिरिक्त अरबी-फारसी के प्रत्यय भी पर्याप्त मात्रा में प्रचलित हैं।

प्रश्न 7.
हिन्दी के तद्धित प्रत्ययों को लिखें तथा उनसे शब्द् बनाएँ।
उत्तरः
हिन्दी के तद्वित प्रत्यय और उनसे बने शब्द निम्नलिखित हैं –
आ – मैल + आ = मैला, ठंडा, भूखा, प्यासा, घना।
आई – भला + आई = भलाई, बुराई, मिठाई, चतुराई, ठकुराई, पंडिताई, अच्छाई।
आऊ – 34 + जाऊ = उपजाऊ, पंडिताऊ।
आना – साल + आना = सालाना, जुर्माना, घराना, रोजाना।
आनी – जेठ + आनी = जेठानी, देवरानी, मेहतरानी, पंडितानी।
आर – चम + आर = चमार, तुहार, सुनार।
आरी – जुआ + आरी = जुआरी, भिखारी, पुजारी।
आस – मीठा + आस = मिठास, खटास, भड़ास।
आहट – गरम + आहट = गरमाहट, चिकनाहट, कड़वाहट।
इक – समाज + इक = सामाजिक, साहित्यिक, धार्मिक, वैदिक, नैतिक, दैनिक।
इम – सुनार + इन = सुनारिन, लुहारिन, पुजारिन, कहारिन।
ई – बुद्धिमान + ई = बुद्धिमानी, चाची, नानी, धनी, लालची, घंटी, रस्सी, ऊनी।
इन – नमक + ईन = नमकीन, शौकीन, रंगीन।
ईला – रंग + ईला = रंगीला, चमकीला, नुकीला, सुरीला, रसीला, बर्फीला।
एरा – साँप + एरा = संपेरा, चितेरा, ममेरा, फुफेरा, मौसेरा, अन्धेरा।
एँ – पुस्तक + एँ = पुस्तके, बोतलें, सड़कें।
कार – पत्र + कार = पत्रकार, कथाकार, कलाकार, स्वर्णकार, चित्रकार, नाटककार, साहित्यकार, कहानीकार, इतिहासकार।
खोर – हराम + खोर = हरामखोर, सूदखोर, घूसखोर।
गर – सौदा + गर = सौदागर, कारीगर, जादूगर।
गुना – सौ + गुना = सौगुना, तिगुना, दुगना, चौगुना।
ची – अफीम + ची = अफीमची, तोपची, खजांची।
ड़ा – दुख + ड़ा = दुखड़ा, मुखड़ा, बछड़ा।
तया – विशेष + तया = विशेषतया, सामान्यतया, मुख्यतया।
दार – देन + दार = देनदार, लेनदार, दुकानदार, ईमानदार, जमींदार।
पन – बच्चा + पन = बचपन, लड़कपन, कालापन।
पा – मोटा + पा = मोटापा, बुढ़ापा, पुजापा।
री – कोठी + री = कोठरी, बाँसुरी, छतरी।
ला – पीछे + ला = पिछला, अगला, लाड़ला।
वाँ – दस + वाँ = दसवाँ, पाँचवाँ, सातवाँ, आठवाँ।
वान – कोच + वान = कोचवान, गाड़ीवान, देहवान, धनवान।
वाला – चाय + वाला = चायवाला, रिक्शावाला, इक्केवाला, ताँगेवाला, मिठाईवाला, बंदरवाला।
हरा – इक + हरा = इकहरा, दुहरा, तिहरा।
हारा – सर्व + हारा = सर्वहारा, लकड़हारा।
वान् – गुण + वान् = गुणवान्, बलवान्, धनवान्, दयावान्।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 8.
उर्दू के निम्नलिखित प्रत्ययों से शब्द-निर्माण करें :- अंदाज, आना, इंदा, इश, ई, ईना, दान, मन्द, बाज, साज।
उत्तरः

  • अंदाज – गोलदांज, तीरंदाज।
  • आना – सालाना, मेहनताना, शुकराना, नजराना।
  • इंदा – आइंदा, जिंदा।
  • इश – कोशिश, फरमाइश, आजमाइश।
  • ई – आमदनी।
  • ईना – महीना, पसीना, कमीना।
  • दान – पीकदान, कलमदान, इत्रदान।
  • मन्द – दौलतमंद, जरूरतमंद, अक्लमंद।
  • बाज – चालबाज, धोखेबाज, पतंगबाज।
  • साज – जालसाज।

प्रश्न 9.
उपसर्ग तथा प्रत्यय का प्रयोग एक साथ किस प्रकार होता है ? उदाहरण सहित दिखाएँ।
उत्तरः
हिंदी में शब्द-रचना के लिए उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का एक साथ भी प्रयोग होता है और उनसे एक नया शब्द बन जाता है। जैसे –
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 2

प्रश्न 10.
कृदन्त’ किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तरः
क्रिया या धातु के अन्त में लगनेवाले प्रत्यय कृत’ प्रत्यय कहलाते हैं और कृत् प्रत्यय से बनने वाले शब्द ‘कृदन्त’ कहलाते हैं। जैसे – लड़ाई = लड़ (धातु) + आई (प्रत्यय); चलता = चल (धातु) + ता (प्रत्यय)। इनमें ‘आई’ और ता’ कृत् प्रत्यय हैं।
कृत् प्रत्यय जोड़ने से दो प्रकार के शब्द बनते हैं – 1. विकारी शब्द और 2. अविकारी शब्द।
विकारी कृदन्त :- विकारी कृदन्त से निम्नलिखित शब्द बनते हैं-
(क) कर्तृवाचक संज्ञा
(ख) भाववाचक संज्ञा
(ग) गुणवाचक विशेषण
(घ) क्रियार्थक संज्ञा
(ङ) वर्तमानकालिक कृदन्त और
(च) भूतकालिक कृदन्त।

अविकारी (शब्द) कृदन्त :- अविकारी (शब्द) कृदन्त से निम्न प्रकार के शब्द बनते हैं –
(क) पूर्ण क्रियाद्योतक शब्द
(ख) अपूर्ण कियाद्योतक शब्द
(ग) पूर्वकालिक शब्द और
(घ) प्रत्यय शब्द।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 11.
कृत और तद्धित प्रत्यय में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
कृत और तद्धित प्रत्यय में अंतर इस प्रकार है –
कृत प्रत्यय :- क्रिया के धातु रूप में जो प्रत्यय लगते हैं, उन्हें कृत प्रत्यय कहते हैं और बने हुए नये शब्दों को ‘कृदन्त’ कहते हैं। जैसे – पढ़ + आई = पढ़ाई; लिख + आई = लिखाई; खड़खड़ा + हट = खड़खड़ाहट; बना + वट = बनावट।

तद्धित प्रत्यय :- क्रिया को छोड़कर अन्य शब्दों के अन्त में जो प्रत्यय आते हैं, उन्हेंतद्धित प्रत्यय कहते हैं। इनसे बने शब्दों को ‘दद्धितान्त’ कहते हैं। जैसे-सुन्दर + ता = सुन्दरता; गाड़ी + वान = गाड़ीवान; झगड़ा + आलू = झगड़ालू ; नाक + ऐं = नाकें।

प्रश्न 12.
कृत और कृदन्त में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
क्रिया के धातु रूप में लगने वाले प्रत्यय को कृत प्रत्यय कहते हैं तथा इससे बने हुए नए शब्दों को कृदन्त कहते हैं।
उदाहरण :-
पढ़ + आई = पढ़ाई
यहाँ ‘आई’ कृत प्रत्यय है तथा थढ़ाई’ कृदन्त।

प्रश्न 13.
कृदन्त तथा तद्धितांत में क्या अंतर है ?
उत्तरः
क्रिया के धातु रूप में कृत प्रत्यय के लगने से बनने वाले शब्द को कृदन्त कहते हैं जब्बांक किया के धातु रूपों को छोड़कर संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण सूचक शब्दों के अंत में जब प्रत्यय के जुड़ने से नए शब्द बनते हैं तो उन्हें तद्धितांत कहते हैं।
उदाहरण :-
लड़ (क्रिया) + आई = लड़ाई – कृदंत
पत्र (संज्ञा) + कार = पत्रकार – तद्धितांत

प्रश्न 14.
कर्तुवाचक संज्ञा किसे कहते हैं ? कर्तृवाचक संज्ञाओं का निर्माण किन प्रत्ययों से होता है? उदाहरण सहित लिखें।
उत्तरः
कर्तुवाचक संज्ञा :- धातु या क्रिया के अन्त में प्रत्यय लगने से कर्ता अर्थात् करनेवाले का बोध होता है, उसे कर्तृवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – बेचना = बेचनहार, लिखना = लिखनेवाला इत्यादि।
ऊपर के उदाहरणों में हार और ‘वाला प्रत्यय लगाकर कर्तृवाचक संज्ञाएँ ‘बेचनहार’ और ‘लिखनेवाला’ बनाई गई हैं। कर्तवाचक संज्ञा निम्न प्रकार के प्रत्ययों से बनती है-

  • प्रत्यय – कर्विवाचक संज्ञाएँ
  • आक – तैरना-तैराक; पैरना-पैराक।
  • आका – लड़ना-लड़ाका; उड़ना-उड़ाका।
  • आकू – लड़ना-लड़ाकू; पढ़ना-पढ़ाकू।
  • आऊ – बिकना-बिकाऊ; टिकना-टिकाऊ।
  • इयल – मरना-मरियल; सड़ना-सड़ियल।
  • इया – गढ़ना-गढ़िया; जुड़ना-जुड़िया।
  • वैया – गाना-गवैया; खेना-खेवैया।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 15.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :-
(क) भाववाचक कृदन्त
(ख) गुणवाचक कृदन्त
(ग) क्रियार्थक कृदन्त
(घ) वर्तमानकालिक कृदन्त
(ङ) भूतकालिक कृदन्त।
उत्तरः
(क) भाववाचक कृदन्त :- धातु या क्रिया में प्रत्यय लगने से जो कृदन्त भाव, गुण, दशा, व्यापार आदि के नाम का बोध कराता है, उसे भाववाचक कृदन्त कहते हैं। जैसे-छापना-छापा, खाँसना-खाँसी।
इसमें ‘आ’ और, ‘ई’ अव्यय से (कृदन्त) भाववाचक संज्ञाएँ बनाई गई हैं।
निम्नम्रकार के प्रत्ययों से भाववाचक कृदन्त संज्ञाएँ बनती हैं – अ, आ, ई, आई, आ, आन, न, ती, आवट, आहट आदि।
लड़ना – लड़ाई; देना-देन; सजना-सजावट; उड़ना-उड़ान; घेरना-घेरा; चढ़ना-चढ़ाई आदि।

(ख) गुणवाचक कृदन्त :- जो कृदन्त प्रत्यय लगाने से गुणवाचक विशेषण का रूप धारण करते हैं, उन्हें गुणवाचक कृदन्त कहते हैं। जैसे-उपजना – उपजाऊ; जड़ना-जड़ाऊ; काँटा-कँटीला आदि।

(ग) क्रियार्थक कृदन्त :- क्रिया के (धातु) के अन्त में ‘ना प्रत्यय जोड़ने से जो कृदन्त बनते हैं, उन्हें क्रियार्थक कहते हैं। जैसे-टहल-टहलना; गान-गाना; पी-पीना आदि।

(घ) वर्तमानकालिक कृदन्त :- वर्तमानकालिक कृदन्त वर्तमान काल की क्रिया के धातु रूप में ‘ता’ प्रत्यय लगाकर बनते हैं। जैसे-चढ़ना-चढ़ता; चलना-चलता; उठना-उठता आदि। कभी-कभी ‘हुआ’ भी लगाकर बनाते हैं। जैसे – बहना – बहता हुआ; उड़ना-उड़ता हुआ आदि।

(ङ) भूतकालिक कृदन्त :- जिन प्रत्ययों के लगने से कृदन्त का भूतकालिक रूप बन जाता है, उन्हें भूतकालिक कृदन्त कहते हैं। जैसे-पढ़-पढ़ा, लिख-लिखा, छू-छुआ, बो-बोया आदि।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 16.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें :-
(क) अनुषंग शब्द
(ख) निष्पन्न शब्द
(ग) अनुकरणमूलक शब्द
(घ) द्वैत या द्वित् शब्द
(ङ) अपूर्ण क्रियाद्योतक शब्द
(च) पूर्वकालिक क्रिया शब्द
(छ) तात्कालिक शब्द।
उत्तरः
(क) अनुषंग शब्द :- हिन्दी में बहुत से ऐसे शब्द हैं जो ध्वनि के आधार पर बने हैं, इन्हें अनुषंग या ध्वन्यात्मक शब्द भी कहा जाता है। जैसे – टनटन, टपटप, खटखट, फटफट, कलकल आदि। इन्हीं ध्वनियों को हम अपनी रचनावली में अर्थ के अनुसार प्रयोग करते हैं। ये शब्द क्रिया और अन्य रूपों में भी प्रयोग में आते हैं।

(ख) निष्पन्न शब्द :- जो भाषा जितनी शब्द- भंडार से युक्त होती है, वह उतनी ही समृद्धशाली बनती है। धातु और अन्य शब्दों के अन्त में प्रत्यय लगा देने से नये-नये शब्दों की रचना होती है। ये प्रत्यय ही नवीन शब्दों को जन्म देते हैं। हिन्दी में संस्कृत और देशी भाषा के अतिरिक्त फारसी, अरबी, अंग्रेजी, पुर्तगाली आदि प्रत्यय भी शब्दों में जुड़कर नये शब्दों की सृष्टि करते हैं, उन्हें ‘निष्पन्न शब्द’ कहते हैं।

(ग) अनुकरणमूलक शब्द :- हिन्दी में बहुत से ऐसे शब्द हैं जो किसी ध्वनि या आवाज के आधार पर अपने अर्थ को व्यक्त करते हैं, जिन्हें अनुकरणमूलक शब्द कहते हैं। जैसे-कचकच, खटखट, टनटनाना, फड़फड़ाना, भनभनाना, भिनभिनाना आदि। इनके अन्त में प्राय: प्रत्यय लगते हैं।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(घ) द्वैत या द्वित् शब्द :- कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका उच्चारण हम एक साथ दो बार करते हैं और इस तरह उनके अर्थ भिन्न हो जाते हैं, इन्हें ही शब्द द्वैत’ या ‘द्वित्’ कहते हैं। कभी-कभी ये विपरीत शब्द, द्वन्द्ध समास आदि के रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। जैसे – बार-बार; घर-घर; बात-बात; हाथ-हाथ; साथ-साथ; संग-संग; भीतरभीतर; घन-घन आदि।

(ङ) अपूर्ण क्रियाद्योतक शब्द :- धातु में ए’ जोड़ने से जो शब्द बनते हैं, उन्हें अपूर्ण क्रियाद्योतक शब्द कहते हैं। जैसे-गाना-गाते; घबराना-घबराते आदि।

(च) पूर्वकालिक क्रिया शब्द :- धातु में ‘कर’ जोड़कर बनाए गए शब्द पूर्वकालिक क्रिया शब्द कहलाते हैं। जैसे – पढ़ना-पढ़कर; खाना-खाकर; सोना-सोकर आदि।

(छ) तात्कालिक शब्द :- अपूर्ण क्रियाद्योतक के बाद ‘ही’ जोड़कर बनाए गए शब्दों को तात्कालिक शब्द कहते हैं। जैसे – सोना-सोते ही, चलना-चलते ही, खाना-खाते ही आदि।

प्रश्न 17.
हिन्दी के कृत प्रत्ययों से शब्द-निर्माण करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 3

ये प्रत्यय सारी धातुओं (क्रियाओं) में लगते है। इन प्रत्यय से बना हुआ अव्यय पूर्व-कालिक कृदन्त कहलाता है। इसका प्रयोग क्रिया-विशेषण के समान तीनों कालों में होता है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 4

इस प्रत्यय से अपूर्ण कियाद्योतक कृदन्त बनाए जाते हैं जिनका प्रयोग क्रिया-विशेषण की तरह किया जाता है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 5

[कर (ना) + नी = करनी इसी तरह ऊपर दिए गए और उदाहरणों को समझें।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 6

यह प्रत्यय सारी क्रियार्थक संज्ञाओं में लगता है और इसके योग से संज्ञा और विशेषण बनते हैं। इस प्रत्यय के लगने से सामान्य क्रिया का ‘आ, ए’ में बदल जाता है। पढ़ना + वाला = पढ़नेवाला।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 7

प्रश्न 17.
तद्धित प्रत्ययों के योग से संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण आदि से शब्दों की रचना करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 8

प्रश्न 18.
ध्वन्यात्मक शब्द किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर समझाएँ
उत्तरः
ध्वन्यात्मक शब्द :- हिन्दी भाषा में विभिन्न ध्वनिमूलक शब्द प्रचलित हैं जिनका प्रयोग किन्हीं विशेष अर्थो में ही किया जाता है। ये ध्वनियाँ विभिन्न पशुओं तथा पक्षियों की होती हैं, अथवा एक प्रकार की अन्य प्राकृतिक उपादानों तथा जड़ वस्तुओं के प्रयोग से जन्म लेती हैं। यथा – चूँ-चूँ करना (चूहा), भिनभिनाना (मक्खी), झंकारना (झींगुर), गरजना (शेर), खनखनाना (चूड़ियाँ)। अन्य वाक्य प्रयोगगत उदाहरण –

  1. उल्लू घुघुआता है।
  2. ऊँट बलबलाता है।
  3. कबूतर गुटरता है।
  4. बकरी मिमियाती है।
  5. झींगुर झनकारता है।
  6. साँप फुफकारता है।
  7. मक्खियाँ भिनभिनाती हैं।
  8. बन्दर दाँत किटकटाते हैं।
  9. मेढक टरटराता है।
  10. साँड़ डकारता है।
  11. मेघ गरजते हैं।
  12. चिता चटचटाती है।
  13. पत्ते खड़खड़ाते हैं।
  14. शस्त्र झनझनाते हैं।
  15. जूता मचमचाता है।
  16. हवा सनसनाती है।
  17. चूड़ियाँ खनखनाती हैं।
  18. रुपये खनखनाते हैं।
  19. कपड़ा फड़फड़ाता है।
  20. बिजली कड़कती है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 19.
आवृत्ति-निर्मित शब्द किसे कहते हैं? वाक्य-प्रयोग द्वारा सोदाहरण समझाएँ।
उत्तरः
जहाँ एक ही शब्द कम से कम दो या उससे अधिक बार आता है, तो उसे आवृत्ति-निर्मित शब्द् कहते हैं।
(क) वह घर-घर घूम रहा है।
(ख) वह दाने-दाने को मोहताज है।
(ग) रेशा-रेशा अलग कर दो।
(घ) रंग-रंग के फूल खिले हैं।
(ङ) बच्चा रोते-रोते सो गया।

प्रश्न 20.
पर्यायवाची शब्दों की द्विरुक्ति के पाँच उदाहरण वाक्य-प्रयोग द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तरः
(क) ज्यादा लाड़-प्यार दिखाने की जरुरत नहीं है।
(ख) वह सीधी-सादी लड़की है।
(ग) माया-मोह छोड़ देने में ही भलाई है।
(घ) ये ऋषि-मुनियों की बातें हैं।
(ङ) रबड़ी-मलाई रोज नहीं मिलती।

प्रश्न 21.
वाक्य-प्रयोग द्वारा विपरीतार्थक शब्द-युग्म के पाँच उदाहरण दें।
उत्तरः
(क) मृत्यु राजा-रंक में भेद नहीं करती।
(ख) हार-जीत तो लगी ही रहती है।
(ग) हमेशा जीवन-मरण की बातें न करें।
(घ) अपना-पराया सोंचना नीच का काम है।
(ङ) बात आस्था-अनास्था की नहीं है।

प्रश्न 22.
भिन्नार्थक शब्द द्वित किसे कहते हैं ? वाक्य प्रयोग द्वारा उदाहरण दें।
उत्तरः
भिन्न-भिन्न अर्थों वाले शब्दों के जोड़े को भिन्नार्थक शब्द द्वित कहते हैं।
वाक्य प्रयोग द्वारा उदाहरण :-
(क) रोने-चिल्लाने से कोई फायदा नहीं।
(ख) तुम्हारी आशा-अभिलाषा पूरी हो।
(ग) वह खा-पीकर सो गया।
(घ) भूकंप में धन-जन की काफी क्षति हुई।
(ङ) घर-गृहस्थी से पीछा कैसे छूटे ?

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(ख) दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
तद्धित प्रत्यय से किस प्रकार के शब्द बनते हैं ? विस्तारपूर्वक तथा उदाहरणसहित लिखें।
उत्तरः
तद्धित प्रत्यय से निम्नप्रकार के शब्द बनते है –
(क) कर्तृवाचक संज्ञा
(ख) भावचाचक संज्ञा
(ग) अपत्यवाचक संज्ञा
(घ) उनवाचक संज्ञा
(ङ) करणवाचक संज्ञा
(च) अधिकारवाचक संज्ञा
(छ) वस्त्रवाचक संज्ञा
(ज) स्थानवाचक संज्ञा
(झ) समुदायवाचक संज्ञा
(अ) सम्बन्धवाचक संज्ञा
(ट) गुणवाचक संज्ञा
(ठ) सादृश्यवाचक संज्ञा और
(ङ) पूर्णतावाचक संज्ञा।

(क) कर्तृवाचक संज्ञा – जिन तद्धितान्त शब्दों से कर्ता का बोध होता है, उन्हें तद्धितान्त कर्तृवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – साँप + ऐरा = संपेरा, तेल + ई = तेली आदि।
इसमें एरा, आर, ई, इया, हारा, वाला, ऐत आदि प्रत्यय लगते हैं। दुखिया, लकड़हारा, लठैत, गाड़ीवाला, लोहार, पुजारी, भिखारी आदि।

(ख) भाववाचक संज्ञा – तद्धित प्रत्यय के योग से बने वे शब्द जिनसे भाव, दशा, स्थिति, गुण आदि का बोध होता है, उन्हें भाववाचक संज्ञा (तद्धितांत) कहते हैं। जैसे – बच्चा + पन = बच्चापन, चिकना + आहट = चिकनाहट आदि।
इनमें पा, पन, ता, त्व, आहट, आयत, आई, आ, आका, क, त, य, स आदि प्रत्यय लगते हैं – बचपन, बुढ़ापा, मूर्खता, भलाई, सौन्दर्य, ठंडक, रंगत आदि।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(ग) अपत्यवाचक संज्ञा – तद्धित प्रत्यय से बनी हुई वे संज्ञाएँ जो वंश, नाम का बोध कराती हैं, उन्हें अपत्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – पाण्डु से पाण्डव, कुन्ती से कौन्तेय आदि।
इसमें ‘अ’, इ, एय’, ई, य आदि प्रत्यय लगते हैं- वसुदेव, कौरव, दाशरथ, गांगेय, दैत्य, द्यानन्दी आदि।

(घ) ऊनवाचक संज्ञा – तद्धित प्रत्यय से बने हुए वे शब्द जो न्यूनता (लघु या छोटा) का बोध कराते हैं, उन्हें ऊनवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – छतरी, चुहिया, खटिया, पहाड़ी आदि। इसमें इइया’, ‘ई’, ‘ओला’, ‘डा’, ‘ली’, री’ आदि प्रत्यय लगते हैं।

(ङ) करणवाचक संज्ञा – जिन संज्ञाओं से करण (साधन) का बोध होता है, उन्हें करणवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – हाथ से हथौड़ा; लेख से लेखनी आदि। इसमें ‘औड़ा’ व ‘नी’ प्रत्यय लगते हैं।

(च) अधिकारवाचक संज्ञा – जिन तद्धितीय संज्ञाओं से अधिकार का बोध होता हैं, उन्हें अधिकारवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – पोलवान, द्वारपाल, दरवान आदि। इनमें ‘वान’ और पाल’ प्रत्यय लगते हैं।

(छ) वस्त्रवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे वस्त्रों का बोघ हो, उन्हें वस्त्रवाचक संज्ञा कहते हैं जैसे – जाँघिया, लँगोटी, अँगोछी आदि। इनमें इया’, ‘ओटी’, और ‘ओछी प्रत्यय लगते हैं।

(ज) स्थानवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे स्थान का बोध होता है, उन्हें स्थानवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – राजस्थान, राजपूताना, ससुराल, ननिहाल आदि।

(झ) समुदायवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे समूह या समुदाय का बोध होता है, उन्हें समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-कागजात, जवाहरात आदि। इसमें ऐरा’, ‘जो’, ‘आल, ‘ओई’ और ‘आन’ प्रत्यय अधिक लगते हैं।

(अ) सम्बन्धवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जो सम्बन्ध बताती हैं, उन्हें सम्बन्धवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-जेठानी, देवरानी, भतीजा, बहनोई, ननदोई आदि। इसमें ‘एरा’, ‘जो, ‘आल’, ‘ओई’ और ‘आन’ प्रत्यय अधिक लगते हैं।

(ट) गुणवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे गुण का बोध होता है, उन्हें गुणवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – झगड़ालू, जंगली, बनैला, बाजारू, शीलवंत, रसीला, लाडला, मानसिक, भूखा आदि। इसमें ‘आ’, ‘आलू, ‘इक, ‘ई, ईईला, ‘ऐला’, ‘ला’, ऊ’ और उआ’ प्रत्यय लगते हैं।

(ठ) सादृश्यवाचक संज्ञा – जिस शब्द से सादृश्य का बोध होता है, उसे सादृश्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – सुनहरा; मुझसा; काला-सा आदि। इसमें ‘सा’ और ‘हरा आदि प्रत्यय लगते हैं।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(ङ) पूर्णतावाचक संज्ञा – जिस शब्द से पूर्णता का बोध होता है, उसे पूर्णतावाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – पाँचवाँ, चौथा, दूसरा, तीसरा आदि। इसमें ला’, ‘रा, ‘वाँ, ‘था और ‘ठा आदि प्रत्यय लगते हैं।

प्रश्न 2.
प्रत्यय पृथक कीजिए एवं उनके रूप लिखिए –
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 9

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 Question Answer – बहू की विदा

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1: बही किदा एकांकी का सारोश अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 2 ‘बहू की विदा’ एकोकी दहेज-प्रथा की बुराइयों का पर्दाफाश करती है – समीक्षा करें।
प्रश्न – 3. ‘बहू की विदा’ देहज-प्रथा की समस्या पर आधारित एकांकी है – समीक्षा करें।
प्रश्न – 4: ‘बहू की विदा’ एकांकी के माध्यम से एकांकीकार ने क्या संदेश देना चाहा है ?
प्रश्न – 5 : ‘बहू की विदा’ में व्यक्त एकांकीकार के विचारों को अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 6 : ‘बहु की विदा’ एकांकी में किस समस्या को उठाया गया है – लिखें।
प्रश्न – 7 : ‘बहू की विदा’ एकाकी के उद्देश्य को अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
‘बहू की विदा’ विनोद रस्तोगी की एकांकी है, जिसकी पृष्ठभूमि समाज में कोढ़ की तरह फैली हुई दहेजप्रथा है। वैसे दहेज-प्रथा हमारे देश के लिए कोई नई प्रथा नहीं है। हमारे देश में यह वैदिक काल से ही चली आ रही है। यास्क ने अपने ‘निरूक्त’ में ‘दुहिता’ शब्द का अर्थ बताया है – ‘जो अपने पिता से धन दुहती हो, वह दुहिता है।’

पार्वती के विवाह के अवसर पर उसके पिता हिमवान ने दासी, घोड़े, रथ, हाथी, गाएँ, वस्ब, मणी आदि तरह-तहर की चीजें, अन्न तथा सोने के बरतन रथों में भरकर इतना दहेज दिया था कि उनका वर्णन नहीं हो सकता। लेकिन तब आज जैसी स्थिति नहीं थी। अभाव के दंश में पलते हुए पिता के ऊपर कोई अनिवार्य बंधन नहीं था।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

आज स्थिति बिल्कुल विपरीत है। प्रस्तुत एकांकी में रस्तोगी जी ने इसे ही दिखाने की कोशिश की है। जीवनलाल अपनी बहू कमला को सावन में विदा नहीं करने की कसम खाए बैठे हैं। कारण यह है कि दहेज उनके मनलायक नहीं आया। कमला का भाई प्रमोद के लाख खुशामद करने के बाद भी उनका दिल नहीं पसीजता है। तभी कमला की सास राजेश्वरी प्रमोद से कहती है कि वह दहेज के बकाये पाँच हजार रुपया उससे लेकर जीवनलाल के मुँह पर मारे और कमला को विदा कराकर ले जाए।

तभी कमला का पति रमेश लौटकर आता है। उसकी बहन की शादी भी अभी-अभी हुई है तथा वह भी सावन के लिए उसे विदा कराने गया था। लेकिन दहेज के लोभी उसके ससुरालवालों ने गौरी को विदा नहीं किया। उन्हें दहेज में और भी बहुत कुछ चाहिए।

बस जूववनलाल का दिमाग ठिकाने आ जाता है। अब उसे राजेश्वरी की यह बात समझ में आ जाती है कि जब तक वे बहू और बेटी को एक-सा नहीं समझेंगे तबतक उन्हें सुख और शांति नहीं मिलेगी। जीवनलाल राजेश्वरी से कमला को विदा करने की तैयरी करने को कहते हैं। एकांकी यहीं समाप्त हो जाती है।

इस एकांकी के अंत में तो जीवनलाल को तो समझ आ जाती है लेकिन अधिकांश लोग ऐसे हैं जिनकी अक्ल पर पत्थर पड़ा हुआ है । प्रेमचंद ने भी दह्हेज-प्रथा की बुराईयों की करूण-गाथा अपने उपन्यास ‘निर्मला’ तथा ‘कर्मभूमम’ में पेश की है । वी० शांताराम ने भी ‘दहेज’ फिल्म बनाकर इसकी बुराइयों पर प्रकाश डाला है। अनगिनत टी. वी. धारावाहिक भी विषय पर दिखाए जाते हैं लेकिन परिणाम वही- ढाक के तीन पात। लेकन प्रयास आज भी जारी है। रस्तोगी जी ने इस एकांकी के माध्यम से दहेज-प्रथा के विरुद्ध एक संदेश देना चाहा है, दहेज-प्रथा की समाप्ति उनका उद्देश्य है – अपने प्रयास में उन्हें पूरी-पूरी सफलता मिली है ।

प्रश्न – 9 : ‘बहू की विदा’ एकांकी के जिस पात्र ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया है उसका चरित्र-चित्रण करें।
प्रश्न – 10 : ‘बहु की विदा’ की राजेश्वरी का चरित्र-चित्रण करें।
प्रश्न – 11 : राजेश्वरी का चरित्र एक आदर्श सास का चरित्र है – समीक्षा करें।
प्रश्न – 12 : ‘बहू की विदा’ की राजेश्वरी एक आदर्श चरित्र है – समीक्षा करें।
प्रश्न – 13 : ‘बहू की विदा’ की राजेश्वरी की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
उत्तर :
राजेश्वरी ‘बहू की विदा’ एकांकी की प्रमुख पात्रों में से एक है। हालॉंक उसका प्रवेश एकांकी के मध्य से होता है फिर भी वह पाठकों पर अपनी छाप छोड़ जाती है। उसके चरित्र में कई ऐसी विशेष्ताएँ है जिसके कारण वह मेरी प्रिय पात्र है ।
राजेश्वरी की चारित्रिक विशेषताओं को इन शीर्षकों के अंतर्गत देखा जा सकता है –

(क) अपने-पराए का भेद नहीं – जब तक प्रमोद कमला की सास राजेश्वरी से नहीं मिला था उसे लगता था कि वह भी जीवनलाल की ही तरह दहेज की लोभी होगी। लेकिन उसकी शंका निराधार साबित हो जाती है जब वह प्रमोद को यह कहती है –
“मुझसे शर्म कैसी ? मेरे लिए जैसा रमेश वैसे ही तुम। बोलो, कितना रुपया चाहते हैं वे ?”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

(ख) दूसरों के दर्द को समझनेवाली – राजेश्वरी स्वयं भी माँ है तथा एक माँ के दिल में अपनी बेटी के लिए क्या दर्द होता है वह इसे अच्छी तरह समझती है। दहेज के अभाव मे जब प्रमोद कमला को बिना विदा कराए ही जाने की बात करता है तो वह दो टूक शब्दों में कहती है –
‘ ‘मेरे रहते विदा न हो यह कभी नहीं हो सकता। मैं माँ हैँ, माँ के दिल को समझती हूँ। जिस तरह उतावली होकर मैं गौरी की राह देख रही हूँ, उसी तरह तुम्हारी माँ भी कमला की राह देख रही होगी।’’

(ग) बेटी और बहू में फर्क नहीं करनेवाली – राजेश्वरी एक सास होते हुए भी अपनी बेटी और बहू में कोई अंतर नहीं करती। जितना भरोसा वह बेटी पर करती है उतना ही बहू पर भी। यही कारण है कि वह तिजोरी से रुपये निकालने के लिए बहू को चाभियो का गुच्छा ही पकड़ा देती है। इतना ही नहीं, जब कमला सिसकती है तो वह ‘मेरी बेटी’ कहकर उसे हूदय से लगा देती है।

(घ) दहेज-लोभी नहीं – राजेश्वरी देहज-प्रथा की विरोधी है। अपने पति जीवनलाल से भी इस बारे में उसकी नहीं बनती। जब बाकी दहेज के लिए जीवनलाल प्रमोद को प्रताड़ित करते हैं तो वह प्रमोद से कहती है –
“ममं देती हूँ तुम्हें रुपये। उनके मुँह पर मारकर कहना कि ये लो कागज के रंग-बिरंगे टुकड़े, जिन्हें तुम आदमी से ज्यादा प्यार करते हो।”

(ङ) आदर्श सास के साथ आदर्श पत्नी भी – राजेश्वरी दहेज के नाम पर प्रमोद को प्रताड़ित करने पर पति को खड़ी-खोटी सुनाती है। लेकिन वह पाति को समझाने की भरसक कोशिश भी करती है –
” जो व्यवहार अपनी बेटी के लिए तुम दूसरे से चाहते हो, वही दूसरे की बेटी को भी दो। जब तक बहू. और बेटी को एक-सा नहीं समझोगे न तुम्हें सुख मिलेगा और न शांति।”

निष्कर्ष के तौर पर हम यह कह सकते हैं कि राजेश्वरी एक आदर्श नारी, आदर्श सास और आदर्श माँ है। यदि भारत के प्रत्येक घर में ऐसी नारी हो तो वह दिन दूर नहीं जब दहेज-प्रथा का कोई नामो-निशान न होगा ; दहेज के नाम पर किसी बहू को प्रताड़ित न किया जाएगा।

प्रश्न – 14 : ‘बहृ की विदा’ एकांकी के प्रमुख पुरुष पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
प्रश्न – 15 : जीवनलाल का चरित्र-चित्रण करें।
प्रश्न – 16 : ‘बहू की विदा’ शीर्षक एकांकी का जीवनलाल दहेज लोलुप व्यक्ति का प्रतीक है स्पष्ट करें।
प्रश्न – 17: जीवनलाल के चारित्रिक गुणों-अवगुणों की चर्चा करें।
उत्तर :
जीवनलाल ‘बहू की विदा’ एकांकी के प्रमुख पात्र हैं। एकांकी के प्रारंभ में जीवनलाल का चरित्र जितना रूखा, लालची तथा अहंकारी प्रतीत होता है – वह एकांकी के अंत में बिल्कुल विपरीत हो जाता है। यूँ कह सकते हैं कि एकांकी के अंत में जीवनलाल का हदय-परिवर्तन हो जाता है। एकांकी में जीवनलाल का चरित्र धीरे-धीरे आदर्श होता जाता है।
जीवनलाल के चारित्रिक गुण-अवगुण को इन शीर्षकों के अंतर्गत देखा जा सकता है-

(क) दहेज-लोलुप – जीवनलाल दहेज के बहुत बड़े लोभी हैं। यद्यापि वे बहू के परिवार की आर्थिक स्थिति को जानते हैं फिर भी प्रमोद के सामने बार-बार दहेज के बकाये रकम की ही रट लगाते हैं-
“‘अगर तुम्हारी सामार्थ्य कम थी तो अपनी बराबरी का घर देखते। झोपड़ी में रहकर महल से नाता क्यों जोड़ा।”
मानो वे कसम खाकर बैठै हों कि जब तक उन्हें बकाये पाँच हजार रुपये न मिलेंगे तबतक वे कमला को विदा न करेंगे।

(ख) प्रताड़ित करने वाले – जीवनलाल दहेज के बकाये पाँच हजार रूपये के लिए न केवल बहू को मानसिक प्रताड़ना देते है बल्कि वे उसके भाई प्रमोद को भी प्रताडित करने से बाज नहीं आते –
“देना तो दूर, बारात की खातिर भी ठीक से नहीं की गई। मेरे नाम पर जो धब्बा लगा, मेरी शान को जो ठेस पहुँची, भरी बिरादरी में जो हैँसी हुई उस करारी चोट का घाव आज भी गहरा है।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

(ग) अपने थन का घमंड – जीवनलाल को अपने धनी होने का बहुत घमंड है – यह उनके चेहेरे तथा हाव-भाव से ही झलकता है। धन के नशे में वे रिश्ते की मर्यादा को भी भूल जाते है। जब प्रमोद उनसे यह कहता है कि उनके बहनोई अगर रमेश बाबू सामने होते तो विदा कराने में दिक्कत नहीं होती- तो जीवनलाल का यहु जवाब होता है –
“तो वह क्या कर लेता ? मेरे सामने मुँह खोलने की हिम्मत नहीं है उसमें। वह मेरा बेटा है। तुप्हारी तरह बड़ों के मुँह लगने की बदतमीजी करनेवाला कोई आवारा छोकरा नहीं।”’

(घ) बेटी के ससुरालवालों से आहत – जब जीवनलाल की खुद की बेटी गौरी को उसके ससुराल वाले और अधिक दहेज पाने की लालच में विदा नहीं करते है तो उनका कलेजा दो टूक हो जाता है। अब उन्हें दहेज की बुराई सामने नज़र आने लगती है –
“हमने तो जीवन भर की कमाई दे दी और उनकी नज़र में दहेज पूरा नहीं दिया गया। लोभी कहीं के।”
जो जीवनलाल थोड़ी देर पहले प्रमोद के सामने अकड़े हुए थे वही अब शराफत और इन्सानियत को दुहाई देने लगते हैं।

(ङ) चोट खाकर हुदय-परिवर्तन-जब जीवनलाल अपनी बेटी के विदा न होने से चोट खाते हैं तब उन्हें पत्नी की ये बातें समझ में आने लगती हैं –
“जो व्यवहार अपनी बेटी के लिए तुम दूसरे से चाहते हो, वही दूसरे की बेटी को भी दो। जब तक बहू और बेटी को एक-सा नहीं समझोगे, न तुम्हें सुख मिलेगा न शांति।”

(च) अपनी गलती को स्वीकारने वाले – एकांकी के अंत में जीवनलाल को अपनी गलती का अहसास हो जाता है तथा वे इसे स्वीकारते हैं। अपनी गलती को सुधारने के लिए वे पत्नी राजेश्वरी को निर्देश देते हैं –
“अरे, खड़ी-खड़ी हमारा मुँह क्या ताक रही हो ? अंदर जाकर तैयारी क्यों नहीं करती ? बहू को विदा नहीं करना है क्या ?’

इस प्रकार जो जोवनलाल एकांकी के प्रारंभ में पत्थर का कलेजा रखनेवाले लगते हैं वही अंत में पिघलते मोम की तरह हो जाते है। यह उनका संतान-प्रेम ही है जो उन्हें दानव से देवता में बदल देता है तथा वे आदर्श पिता व ससुर में बदल जाते हैं।

प्रश्न – 18 : ‘बहू की विदा’ एकांकी के प्रमोद का चरित्र-चित्रण करें।
प्रश्न – 19 : ‘बहू की विदा’ का प्रमोद दहेज प्रथा के सामने एक विवश व्यक्ति नज़र आता है- समीक्षा करें।
प्रश्न – 20 : ‘बहू की विदा’ के प्रमोद की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
प्रश्न – 21 : ‘बहू की विदा’ आज के नवयुवकों के प्रतिकूल चरित्रवाला है – वर्णन करें।
उत्तर :
‘बहू की विदा’ एक उद्देश्यपूर्ण एकांकी है। इस एकांकी का उद्देश्य दहेज-प्रथा से उत्पन्न समस्याओं पर प्रकाश डालना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एकांकीकार रस्तोगी जी ने विभिन्न पात्रों की सृष्ठि की है। प्रमोद भी ऐसे ही पात्रों में से एक है ।

प्रमोद की चारित्रिक – विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
(क) आदर्श बवुक-प्रमांद आजकल के नवयुवकों की तरह बात-बात में उत्तेजित होने वाला तथा बड़ों की कद्र नहीं करने वाला नवयुवक नहीं है। उसमें एक आदर्श युवक के सारे गुण हैं। जीवनलाल जी बातों को वह सहता है तथा उत्तेजित नही होंता।

(ख) बहन से बहुत प्रेम करने वाला – प्रमोद के दिल में अपनी बहन कमला के लिए अथाह प्रेम है। उसकी खुशो के लिए वह बड़ा से बड़ा अपमान झेल सकता है तथा बड़ी से बड़ी कुर्बानी भी दे सकता है। इसीलिए वह तरह-तरह से बहन को बिदा कराने के लिए जीवनललाल जी को समझने की बेष्टा करता है –
‘”यदि मैं कमला को बिना लिए ही गया तो माँ का हृद्य टूट जाएगा।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

(ग) स्पष्ट वक्ता – यद्यषि प्रमोद जीवनलाल की कड़वी से कड़वी बाते भी सह लेता है लेकिन जहाँ आवश्यक है वह स्पष्ट बोलने में जरा-सा भी नहीं हिचकिचाता –
” यह तो सरासर अन्याय है। शिकायत आपको हमसे है। उस भोली-भोली लड़की ने आपका क्या बिगाड़ा है जो विदा न करके आप उससे बदला ले रहे हैं ?”

(घ) स्वाभिमानी – प्रमोद दहेज की रकम पूरी न कर पाने के कारण जीवनलाल जी से प्रताड़ित होंता है। जब जीवनलाल की पत्नी पाँच हजार रुपये अपने पास से प्रमोद को देकर उसे बहन को विदा कराने को कहती है तो उसका स्वाभिमान जाग उठता है –
“मुझे रुपये नहीं चाहिये। मैं बिना विदा कराये ही जा रहा हूँ।”

(ङ) धन के महत्व को स्वीकारने वाला – प्रमोद इस बात को अच्छी तरह समझता है कि इस ज्राने में धन ही लोगों का सबकुछ है। यदि उसके पास भी धन होता तो उसे यूँ प्रताड़ित नहीं होना पड़ता – जीवनलाल जी की इस बात को वह स्वीकार करता है –
“‘ठीक ही कहा है आपने, आज के युग में पैसा ही नाक और मूँछ है, जिसके पास पैसा नहीं वह नाक और मूँछ होते भी नकटा है, मूँछकटा है।”

इस प्रकार हम पाते हैं कि प्रमोद का चरित्र ही इस एकांकी की जान है, यदि हम इस एकांकी से प्रमोद का चरित्र निकाल दें तो जीवनलाल जी तथा राजेश्वरी का चरित्र भी अधूरा हो जाएगा। एकांकीकार के उद्देश्य को पूरा करने में प्रमोद का चरित्र अपनी अहम् भूमिका निभाता है।

अति लघूत्तरीय/लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘बहू की विदा’ के लेखक कौन हैं ?
उंत्तर :
विनोद रस्तोगो।

प्रश्न 2.
‘बहु की विदा’ किस विधा की रचना है ?
उत्तर :
एकांकी।

प्रश्न 3.
एकांकी के प्रारंभ में जीवनलाल क्या निर्णय लेते हैं ?
उत्तर :
बहू विदा नहीं होगी जबतक दहेज के बकाये पाँच हजार रुपये नहीं मिल जाते है

प्रश्न 4.
मैंने उसकी दशा का ठेका नहीं लिया है – वक्ता कौन है ?
उत्तर :
जीवनलाल।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 5.
हर लड़की जादी के बाद पहले सावन के बारे में क्या सपना देखती है ?
उत्तर :
हर लड़क. गदी के बाद पहले सावन के बारे में यह सपना देखती है कि उस सावन कों बह् अपनी सखीसहेलियों के साथ हँस-खल कर बिताए।

प्रश्न 6.
जीवनलाल प्र-नद से विवाह के बारे में क्या शिकायत करते हैं ?
उत्तर :
जीवनलाल प्रमोद से विवाह के बारे में यह शिकायत करते हैं कि पूरा दहज देना तो दूर, बारात की खातिर भी ठीक से नहीं की गई। इससे उनकी शान को धक्का लगा तथा भरी बिरादरी मे हँसी हुई सो अलग।

प्रश्न 7.
प्रमोद कमला की विदाई करने की बात पर जीवनलाल से क्या कहता है ?
उत्तर :
जब जोवनलाल कमला की विदाई के लिए तैयार नहीं होते है तो प्रमाद उनसे यह कहता है कि उनका ऐया करना सरासर अन्याय है। ऐसा करके वे भोली भाली कमला से बदला ले रहे है।

प्रश्न 8.
जीवनलाल अपनी बेटी गौरी की शादी के बारे में प्रमोद को क्या बतलाते हैं ?
उत्तर :
जीवनलाल प्रमोद को गौरी की शादी के बारे में कहते हैं कि उन्होंने बारातवालों की इतनी खातिरदारी की कि वे लोग दंग रह गये। दहेज देखकर देखने वालों ने दाँतों तले उंगली दबा ली।

प्रश्न 9.
जीवनलाल जी कमला के सपने के बारे में क्या कहते हैं ?
उत्तर :
जीवनलाल जी कमला के सपने के कभी पूरी न होने की बात करते हैं तथा यह भी कहने हैं कि उसके सपनों के खून का दाग प्रमोद के हाथों तथा उसकी माँ के आँघल पर होगा।

प्रश्न 10.
प्रमोद जीवनलाल की कठोरता के बारे में कमला से क्या कहता है ?
उत्तर :
जीवनलाल जी की कठोरता के बारे में प्रमोद कमला से यह कहता है कि तुप्हारे आसुओं का मूल्य समझनेवाला यहाँ कोई नहीं है। पानी में पत्थर नहीं पिघल सकता।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 11.
कमला अपनी ननद गौरी के बारे में क्या कहती है ?
उत्तर :
कमला गौरी की प्रशंसा करते हुए कहती है कि गौरी का स्वभाव बहुत अच्छा है। वह हर समय हैंसती-हैसाती रहती है। उसके आ जाने से कमला को अपनी सहेलियों की कमी नहीं खलेगी।

प्रश्न 12.
कमला किसे ममता की मूर्ति कहती है ?
उत्तर :
कमला अपनी सास राजेश्वरी को ‘ममता की मूर्ति’ कहती है।

प्रश्न 13.
राजेश्वरी बहू कमला की विदाई के बारे में प्रमोद को क्या बताती है ?
उत्तर :
राजेश्वरी बहू कमला की विदाई के बारे में ग्रमोद को यह बताती है कि विदाई की चिद्ठी आने के बाद से ही जीवनलाल मना कर रहे थे। उसके लाख समझाने पर भी जीवनलाल पर कोई असर नहीं पड़ा।

प्रश्न 14.
राजेश्वरी रुपये देने के बारे में प्रमोद से क्या कहती है ?
उत्तर :
राजेश्वरी जीवनलाल को रुपये देने के बारे मे प्रमोद से कहती है कि रुपये मैं तुम्हें देती हूँ। ये रुपये उनके मुँह पर मारकर कहना कि आदमी से भी ज्यादा प्यारे ये कागज के रंग-बिरंगे दुकड़े लो।

प्रश्न 15.
कमला के विदा न होने के बारे में राजेश्वरी प्रमोद से क्या कहती है ?
उत्तर :
कमला की विदाई न होने के बारे में राजेश्वरी कहती है कि ऐसा कभी नहीं हो सकता। मैं भी माँ हूँ तथा माँ के दिल को समझ्झती हूँ। मेरी तरह तुम्हारी माँ भी कमला की राह देख रही होगी। इसलिए कमला की विदाई जरूर होगी।

प्रश्न 16.
राजेश्वरी जीवनलाल को बहू से व्यवहार के बारे में क्या सीख देती है ?
उत्तर :
राजेश्वरी जीवनलाल को बहू से व्यवहार के बारे में यह सीख देती है कि आप जो व्यवहार अपनी बेटी के लिए चाहते हैं वही व्यवहार दूसरे की बेटी के साथ भी करें। जब तक बहू और बेटी को एक-सा नहीं समझेंगे तबतक आपको न तो सुख मिलेगा न शांति मिलेगी।

प्रश्न 17.
कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है – वक्ता और श्रोता के नाम लिखें।
उत्तर :
वक्ता जीवनलाल हैं तथा श्रोता प्रमोद, रमेश, कमला तथा राजेश्वरी हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 18.
‘बहू की विदा’ एकांकी में किस समस्या को उठाया गया है ?
उत्तर :
‘बहू की विदा’ एकांकी में दहेज-प्रथा की समस्या को उठाया गया है कि आखिर कब तक दहेज के कारण युव्वतियों को प्रताड़ित होना पड़ेगा। इतने युगों के बाद भी आज तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पाया है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘बहु की विदा’ किसकी रचना है ?
(क) शैल रस्तोगी की
(ख) विनोद रस्तोगी की
(ग) महादेवी वर्मा को
(घ) इनमें से किसी की नहीं
उत्तर :
(ख) विनोद रस्तोगी की।

प्रश्न 2.
‘बहू की विदा’ में कितने पात्र हैं ?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छ:
उत्तर :
(ग) पाँच।

प्रश्न 3.
परदा उठने पर जीवनलाल कहाँ खड़े दिखायी देते हैं ?
(क) दरवाजे के पास
(ख) राजेश्वरी के पास
(ग) खिड़की के पास
(घ) प्रमोद के पास
उत्तर :
(ग) स्विड़की के पास।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 4.
जीवनलाल की उम्र कितनी है ?
(क) 40 वर्ष
(ख) 45 वर्ष
(ग) 50 वर्ष
(घ) 55 वर्ष
उत्तर :
(ग) 50 वर्ष।

प्रश्न 5.
राजेश्वरी की उम्र कितनी है ?
(क) 36 वर्ष
(ख) 46 वर्ष
(ग) 56 वर्ष
(घ) 66 वर्ष
उत्तर :
(ख) 46 वर्ष।

प्रश्न 6.
मैं मजबूर हूँ – वक्ता कौन है ?
(क) प्रमोद
(ख) रमेश
(ग) कमला
(घ) जीवनलाल
उत्तर :
(घ) जीवनलाल

प्रश्न 7.
कमला के पति का नाम क्या है ?
(क) दिनेश
(ख) सुरेश
(ग) रमेश
(घ) विनोद्
उत्तर :
(ग) रमेश।

प्रश्न 8.
प्रमोद की उप्र कितनी है ?
(क) 19 वर्ष
(ख) 20 वर्ष
(ग) 22 वर्ष
(घ) 23 वर्ष
उत्तर :
(घ) 23 वर्ष।

प्रश्न 9.
कमला की उप्र कितनी है ?
(क) 18 वर्ष
(ख) 16 वर्ष
(ग) 19 वर्ष
(घ) 22 वर्ष
उत्तर :
(ग) 19 वर्ष।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 10.
रमेश की उम्र कितनी है ?
(क) 18 वर्ष
(ख) 20 वर्ष
(ग) 22 वर्ष
(घ) 24 वर्ष
उत्तर :
(ग) 22 वर्ष।

प्रश्न 11.
‘कल के छोकरे’ किसे कहा गया है ?
(क) रमेश को
(ख) प्रमोद को
(ग) कमला को
(घ) जोवनलाल को
उत्तर :
(ख) प्रमोद को।

प्रश्न 12.
‘मरहम’ का सांकेतिक अर्थ क्या है ?
(क) दवा
(ख) मलहम
(ग) मरा हुआ
(घ) दहेज के रुपये
उत्तर :
(घ) दहेज के रुपये।

प्रश्न 13.
‘मुँह खोलना’ का अर्थ है ?
(क) मुँह को खुला रखना
(ख) मुँह बंद न करना
(ग) विरोध करना
(घ) थैले को खोलना
उत्तर :
(ग) विरोध करना।

प्रश्न 14.
‘आवारा छोकरा’ किसे कहा गया है ?
(क) रमेश को
(ख) प्रमोद को
(ग) लेखक को
(घ) कवि को
उत्तर :
(ख) प्रमोद् को।

प्रश्न 15.
‘दाँतों तले उँगली दबाना’ का अर्थ है ?
(क) उंगली को दाँत से दबाकर रखना
(ख) आश्चर्य करना
(ग) क्रोध करना
(घ) उँगली चबा जाना
उत्तर :
(ख) आश्चर्य करना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 16.
रमेश कहाँ गया था ?
(क) ऑफिस
(ख) बाजार
(ग) अपने ससुराल
(घ) बहन का ससुराल
उत्तर :
(घ) बहन का ससुराल।

प्रश्न 17.
रमेश की बहन का नाम क्या है ?
(क) राखी
(ख) गौरी
(ग) हीरा
(घ) कमला
उत्तर :
(ख) गौरी।

प्रश्न 18.
‘चाँद-सा सुंदर मुखड़ा’ किसको कहा गया है ?
(क) जीवनलाल को
(ख) राजेश्वरी को
(ग) गौरी को
(घ) कमला को
उत्तर :
(च) कमला को ।

प्रश्न 19.
जीवनलाल के मरहम की कीमत कितनी है ?
(क) पाँच सौ रुपये
(ख) पचास रुपये
(ग) हज्ञार रुपये
(घ) पाँच हजार रुपये
उत्तर :
(घ) पाँच हुजार रूपये।

प्रश्न 20.
जीवनलाल अपने लॉन में किसके लिए झूला डलवाते हैं ?
(क) राजेश्वरी के लिए
(ख) कमला के लिए
(ग) गौरी के लिए
(घ) अपने लिए
उत्तर :
(ग) गौरी के लिए।

प्रश्न 21.
पानी में पत्थर नहीं पिघल सकता – ‘पत्थर’ किसे कहा गया है ?
(क) प्रमोद को
(ख) राजेश्वरी को
(ग) रमेश को
(घ) जीवनलाल को
उत्तर :
(घ) जीवनलाल को।

प्रश्न 22.
कमला किस बात के लिए प्रमोद को सौगंध देती है ?
(क) जीवनलाल से बात न करने के लिए
(ख) विदा कराने के लिए
(ग) घर न बेचने के लिए
(घ) विमला के ब्याह के लिए
उत्तर :
(ग) घर न बेचने के लिए।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 23.
कमला की बहन का नाम क्या है ?
(क) श्यामला
(ख) विमला
(ग) निर्मला
(घ) गौरी
उत्तर :
(ख) विमला।

प्रश्न 24.
मुझसे शर्म कैसी – वक्ता कौन है ?
(क) रमेश
(ख) कमला
(ग) गौरी
(घ) राजेश्वरी
उत्तर :
(घ) राजेश्वरी।

प्रश्न 25.
मुझे रुपये नहीं चाहिए – वक्ता कौन है ?
(क) जीवनलाल
(ख) प्रमोद
(ग) रमेश
(घ) राजेश्वरी
उत्तर :
(ख) प्रमोद

प्रश्न 26.
तुम अकेले नहीं जाओगे – वक्ता कौन है ?
(क) राजेश्वरी
(ख) प्रमोद
(ग) जौवनलाल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) राजेश्वरी।

प्रश्न 27.
वह नहीं आयी – वक्ता कौन है ?
(क) जीवनलाल
(ख) राजेश्वरी
(ग) रमेश
(घ) कमला
उत्तर :
(ग) रमेश।

प्रश्न 28.
लोभी कहीं के – वक्ता कौन है ?
(क) रमेश
(ख) राजेश्वरी
(ग) प्रमांद
(घ) जोवनलाल
उत्तर :
(घ) जीवनलाल।

प्रश्न 29.
अब भी आँखें नहीं खुलीं ? – वक्ता कौन है ?
(क) प्रमोद
(ख) रमेश
(ग) राजेश्वरी
(घ) जीवनलाल
उत्तर :
(ग) राजेशवरी।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 30.
अजीब उलझने हैं – वक्ता कौन है ?
(क) जीवनलाल
(ख) प्रमोद
(ग) राजेश्वरो
(घ) गौरी
उत्तर :
(क) जीवनलाल।

ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या

प्रश्न 1.
मैने उसकी दशा का ठेका नहीं लिया है।
– रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें। पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रचना ‘बहू की विदा’ है तथा इसके रचनाकार विनोद रस्तोगी हैं।
जब प्रमोद जीवनलाल जी से यह कहता है कि अगर उन्होंने कमला की विदाई नहीं की तो न मालूम उसकी क्या दशा होगी। हर लड़की शादी के बाद पहला सावन अपनी सखी-सहेलियों के साथ हँस-खेलकर अपने मायके में बिताती है। अगर कमला मायके न जा पाई तो उसे बहुत बुरा लगेगा।

प्रश्न 2.
जानता हूँ।
– वक्ता कौन है ? पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता कमला के श्वसुर जीवनलाल जी हैं।
प्रमोद अपनी बहन के विदा कराने के लिए आया है। लेकिन जीवनलाल जी ने यह ठान रखा है कि वह कमला को विदा नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें दहेज की पूरी रकम नहीं मिली है । प्रमोद उन्हें यह समझाने की कोशिश करता है कि शादी के बाद हरेक लड़की पहला सावन मायके में अपनी सखी-सहेलियों के साथ हँसकर-खेलकर बिताने का सपना देखती है। इस पर जीवनलाल का टका-सा उत्तर मिलता है कि जानता हूँ। उनके कहने का भाव यह है कि उन्हें कमला के सपने से कोई लेना-देना नहीं है।

प्रश्न 3.
कल के छोकरे मुझे बेवकूफ बनाना चाहते हो।
– वक्ता और श्रोता का नाम लिखें। पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता कमला के श्वसुर जीवनलाल तथा श्रोता कमला का भाई प्रमोद है।
कमला को विदा कराने के संदर्भ में प्रमोद जीवनलाल जी से विनती करता है कि वे उसे विदा कर दें। गौने के समय वह उनकी सारी माँगें पूरी कर देगा। लेकिन जीवनलाल जी को लगता है कि प्रमोद उन्हें धोखा देने की कोशिश कर रहा है। वे प्रमोद से कहते हैं कि उनके बाल धूप में सफेद नहीं हुए हैं और प्रमोद उन्हें बेवकूफ बनाने की कोशिश न करे ।

प्रश्न 4.
मेरा फैसला आखिरी है।
– वक्ता कौन है ? आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता कमला के श्वसुर जीवनलाल जी हैं।
जीवनलाल जी ने ठान लिया है कि उन्हें जब तक बेटे रमेश के दहेज के बाकी पाँच हजार रुपये न मिलेंगे तब तक वे कमला को विदा न करेंगे चाहे कोंई कितना भी कुछ कहे । यह उनका आखिरी फैसला है तथा वे अपने फैसले पर अडिग हैं।

प्रश्न 5.
यह तो सरासर अन्याय है।
– वक्ता तथा श्रोता का नाम लिखें। वक्ता ऐसा क्यों कहता है ?
उत्तर :
वक्ता प्रमोद तथा श्रोता कमला के श्वसुर जीवनलाल जी हैं।
जीवनलाल जी प्रमोद को अपना आखिरी फैसला सुना देते हैं कि दहेज के बकाए रकम को लिए बिना वे उसकी बहन कमला को विदा नहीं करेंगे। यह बात प्रमोद को बहुत बुरी लगती है तथा वह प्रतिवाद करता हुआ यह कहता है कि यह सरासर अन्याय है। दहेज के नाम पर वे भोली-भाली लड़की को विदा न करके उससे प्रतिशोध ले रहे हैं। ऐसा लगता है कि दहेज की पूरी रकम न दे पाने के पीछे कमला का ही दोष है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 6.
लेकिन तुम्हारी तरह नहीं।
– पाठ का नाम लिखें। पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘बहू की विदा’ है।
प्रमोंद की बहन कमला के साथ जीवनलाल जी जो व्यवहार कर रहे हैं उससे प्रमोद बहुत दुःखी है। वह उन्हें यह याद दिलाता है कि वे यह न भूलें कि वे भी बेटी वाले हैं। इस पर जीवनलाल जी का यह खरा-सा उत्तर होता है कि हाँ, वे भी बेटी वाले है लेकिन प्रमोद की तरह नहीं। उनकी और प्रमोद के घरवालों की इस बारे में कोई तुलना नहीं।

प्रश्न 7.
बेटी बेटी है और बहू बहू।
– वक्ता कौन है ? वक्ता की मानसिकता के बारे में लिखें।
उत्तर :
वक्ता कमला के श्वसुर जीवनलाल जी हैं।
जीवनलाल की मानसिकता संकुचित है। वे बहू और बेटी में जमीन-आसमान का अंतर मानते हैं। उनकी नज़र में बहू कभी भी बेटी का स्थान नहीं ले सकती क्योंकि वह पराए घर से आयी है। पराए घर की लड़की कभी भी बेटी की बराबरी नहीं कर सकती।

प्रश्न 8.
पानी में पत्थर नहीं पिघल सकता।
– वक्ता कौन है ? वह ऐसा क्यों कहता है ?
उत्तर :
वक्ता प्रमोद है।
कमला अपने विदा न होने की बात पर रोने लगती है तो प्रमोद उसे चुप कराते हुए कहता है कि इस घर में तुम्हारे आँसुओं की कोई कीमत नहीं है। जीवनलाल पत्थर दिल इसान हैं और कमला के आसू उन्हें नहीं पिघला सकते। जिस व्यक्ति के लिए रूपये ही सबकुछ हो उसे किसी की भावना, आँसू से क्या लेना-देना ?

प्रश्न 9.
आपको मेरे सुख-सुहाग की सौगंध।
– कौन, किसे, किस बात की सौगंध दे रहा है और क्यों ?
उत्तर :
कमला का भाई प्रमोद यह निर्णय लेता है कि घर बेचकर दहेज के बाकी रुपये चुका देगा। इसी बात पर कमला प्रमोद को अपने सुख-सुहाग की सौगंध देती है कि वह ऐसा न करे क्योंक ब्याहने के लिए अभी छोटी बहन बिमला बची है। उसके ब्याह के लिए भी तो कुछ बचाकर रखना है।

प्रश्न 10.
बहुत अच्छा स्वभाव है उसका।
प्रश्न 11.
आप विश्वास करें, भैया !
– पाठ का नाम लिखें। पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
पाठ का नाम है – ‘बहू की विदा।’
विदा न होने की स्थिति में कमला प्रमोद से कहती है कि वह चिन्ता न करे। यदि वह सखी-सहेलियों से न मिल पायेगी तो कोई बात नहीं क्योकि उसकी ननद गौरी अपने ससुराल से आ रही है। उसके साथ रहकर कमला को अपनी किसी सखी-सहेली की कमी नहीं खलेगी।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 12.
मुझसे शर्म कैसी ?
– वक्ता कौन है ? पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता कमला की सास राजेश्वरी है।
जीवनलाल द्वारा माँगे गए पाँच हजार रुपयों की बात कमला का भाई प्रमोद राजेश्वरी से छिपाना चाहता है। इस पर राजेश्वरी कहती है तुम्हारे और रमेश में मेरे लिए कोई अंतर नहीं है। वो कहती है कि तुम शर्म मत करो तथा रुपये मुद्यसे लेकर जीवनलाल के मुँह पर दे मारो।

प्रश्न 13.
मुझे रुपये नहीं चाहिए।
– वक्ता कौन है ? उसे कौन-से रुपये नहीं चाहिए ?
उत्तर :
वक्ता कमला का भाई प्रमोद है।
कमला की सास राजेश्वरी प्रमोद को अपने पास से रुपये देने को कहती है ताकि कमला की विदाई हो सके। इस पर प्रमांद कहता है कि उसे रुपये नहीं चाहिए। वह अपनी बहन को विदा कराये बगैर ही जाने की बात करता है।

प्रश्न 14.
मैं माँ हैँ, माँ के दिल को समझती हूँ।
– ससंदर्भ पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति विनोद रस्तोगी के एकांकी ‘बहू की विदा’ से ली गई है।
कमला की सास राजेश्वरी कहती है कि वह हर हाल मे बहू को विदा करेगी। जिस तरह वह अपनी बेटी गौरी की प्रतीक्षा कर रही है ठीक उसी प्रकार कमला की माँ भी उसकी राह देख रही होगी। माँ होने के नाते वह माँ के दिल को अच्छी तरह समझती है। इसलिए उसके रहते उसकी बहू विदा न हो – ऐसा नहीं हो सकता।

प्रश्न 15.
गालियों के अलावा कभी सीधी बात नहीं निकलती मुँह से ?
– यह कौन, किसे, क्यों कह रहा है ?
उत्तर :
यह कमला की सास राजेश्वरी अपने पति जीवनलाल से कह रही है। जीवनलाल ने कटाक्ष करते हुएप्रमोद से कहा था कि जरा प्रमोद भी देख ले कि नाकवाले अपनी बेटी का ख्वागत कैसे करते हैं। इसी बात कें उत्तर में राजेश्वरी ने अपने पति से यह कहा कि उसके मुँह से कभी सीधी बात नहीं निकलती, निकलती है तो केवल गालियाँ।

प्रश्न 16.
उन्होंने विदा नहीं की।
प्रश्न 17.
विदा नहीं की ? क्यों नहीं की ?
– ससंदर्भ पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति विनोद रस्तोगी के एकांकी ‘बहू की विदा’ से ली गई है।
जब रमेश लौटकर जीवनलाल जी को यह बताता है कि गौरी के ससुरालवालों ने उसे विदा नहीं किया तो ऐसालगता है कि किसी ने उनकी छाती में जोर से घूँसा मारा हो। उसके ससुरालवालों को दहेज में और भी बहुत कुछ चाहिए।

प्रश्न 18.
लोभी कहीं के।
प्रश्न 19.
मगर शराफत और इन्सानियत……
– वक्ता कौन है ? पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता जीवनलाल हैं।
जब रमेश लौटकर पिता को यह बताता है कि और अधिक दहेज पाने की लालच में ससुरालवालों ने गौरी को विदा नहीं किया तो उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ जाता है। अब उन्हे लड़कीवाले होने की लाचारी और बेबसी नजर आती है और वे शराफत तथा इन्सानियत की दुहाई देने लगते हैं।

प्रश्न 20.
बहुत चुप रही । अब नहीं रहूँगी।
– वक्ता कौन है ? पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता जीवनलाल की पत्नी राजेश्वरी है।
जब रमेश गौरी की विदाई के बगैर ही लौट आता है तो जीवनलाल उल्टा-सीधा बोलना शुरू करते हैं। यह सुनकर राजेश्वरी से रहा नहीं जाता। वह विरोध करती है तो जीवनलाल उसे चुप रहने को कहते हैं। राजेश्वरी कहती है कि अब मैं चुप रहने वाली नहीं। यह तुम्हीं हो जो कुछ देर पहले तक दहेज की खातिर अपनी बहू को विदा नहीं करने की कसम खाए बैठे थे। और अब वही व्यवहार तुम्हारे साथ हो रहा है तो तुम्हें बुरा लग रहा है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

प्रश्न 21.
अब भी आँखें नहीं खुलीं ?
– वक्ता और श्रोता का नाम लिखते हुए पंक्ति का आशय स्पप्ट करें।
उत्तर :
वक्ता जीवनलाल की पल्ली राजेश्वरी तथा श्रोता जीवनलाल हैं।
राजेश्वरी कहती है कि दहेज के कारण तुम्हारी बेटी गौरी की विदाई रोक दी गई। यह सब देखने के बाद भी तुम्हारी आँखें नहीं खुलीं। तुम अपनी बेटी के लिए जो व्यवहार चाहते हो वही व्यवहार बहू को भी दो। बहू और बेटी को एक समझो। जबतक तुम ऐसा न करोगे तुम्हें सुख-शांति नहीं मिलेगी।

प्रश्न 22.
अजीब उलझंने हैं। कुछ समझ में नहीं आता।
– ससंदर्भ पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति विनोद रस्तोगी के एकांकी ‘बहू की विदा’ से ली गई है।
जीवनलाल ने दहेज लेने के चक्कर में जो जाल अपनी बहू के लिए बिछाया था उसमें वह खुद फंस गए। उनकी बेटी की विदाई भी उसके ससुरालवालों ने रोक दी। इधर प्रमोद के साथ-साथ पत्नी राजेश्वरी भी उनका खुलकर विरोध कर रही है। वे ऐसी उलझन में फैस गए हैं कि उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि इस उलझन को कैसे सुलझाएँ।

प्रश्न 23.
शायद तुम ठीक कहती हो।
– वक्ता कौन है ? वह किसकी ज्ञात को ठीक कह रहा है ?
उत्तर :
वक्ता जीवनलाल हैं।
राजेश्वरी उन्हें गौरी की विदाई रूक जाने के बाद काफी भला-बुरा कहती हैं। वह जीवनलाल को समझाते हुए कहती है कि अगर अपनी बेटी के साथ अच्छा व्यवहार चाहते हो तो बहू के साथ भी अच्छा व्यवहार करो। वह भी किसी की बेटी है। जबतक तुम ऐसा न करोगे, सुख-शांति मिलनेवाली नहीं है। जीवनलाल को पत्नी की यह बात सही लगती है। वे उसकी बातो का समर्थन करते हैं।

प्रश्न 24.
मेरी चोट का इलाज बेटी की ससुरालवालों ने दूसरी चोट से कर दिया है।

प्रश्न 25.
कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है।
– वक्ता का नाम लिखें। पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
वक्ता जीवनलाल हैं।
जीवनलाल की बेटी गौरी की विदाई उसके ससुरालवाले और अधिक दहेज के लालच में रोक देते हैं। इस घटना से उन्हे यह समझ में आ जाता है कि वे बहू के साथ क्या व्यवहार कर रहे थे। इसी घटना से उन्हें यह सीख मिलती है कि अधिक दहेज के लालच में बहू के साथ बुरा व्यवहार करना कितना दु खद है। इसी बात को स्वीकारते हुए वे कहते हैं कि कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है।

टिप्पणियाँ

1. चिद्ठी :- प्रस्तुत शब्द विनोद रस्तोगी के एकाकी ‘बहू की विदा’ से लिया गया है।
हिंदी में सामान्यत: पत्र के लिए ‘चिट्ठी’ शब्द का इस्तेमाल होता है। न केवल बोलचाल में, वल्कि साहित्यिक लेखों, निबंधों, पर्र-पत्रिकाओं आदि में भी पत्र के लिए ‘चिट्ठी’ शब्द का व्यापक प्रयोग मिलता है।

2. दहेज :- प्रस्तुत शब्द विनोद रस्तोगी के एकांकी ‘बहू की विदा’ से लिया गया है।
दहेज की पररपरा भारत में प्राचीन काल से ही चली आ रही है। मनुस्मृति मे लिखा है कि कन्या के विवाह के समय कन्या का पिता अपनी शक्ति-भर धन या भेंट आदि देता है वह ‘दहेज’ कहलाता है। लेकिन आज दहेज स्वेच्छा से नहीं विवशता से दिया जाता है।

पाठ्याधारित व्याकरण

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा 1
WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा 2

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा 3
WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा 4

WBBSE Class 9 Hindi कर चले हम फ़िदा Summary

लेखरनक- परिचाया 

हिन्दी एकांकी साहित्य एक समृद्ध साहित्य है, जिसमें विनोद रस्तोगी एक सफल नाम है। इनकी एकांकियों का विषय मुख्यतः सामाजिक समस्या ही है जहाँ समाज में हो रहे शोषण को दर्शाना है। यदि ये एकांकी में समस्या उठाते हैं तो उसका समाधान भी पाया जाता है। आज के वर्तमान समय में दहेज का दानव न जाने कितनी युवतियों का हंसता-खेलता संसार समाप्त कर चुका है। जीवन के बुनियादी अधिकारों से वंचित नारी समाज आखिर कब तक इस दशा को झेलता रहेगा और क्यों? यह एक यक्ष प्रश्न अभी भी अनुत्तरित रह गया है। रस्तोगी जी की यह एकांकी इस प्रश्न का एक छोटा उत्तर देती दिख रही है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 90

  • अवस्था = उम्न।
  • गंजा = जिसके सिर पर बाल न हो।
  • समृद्धि = अमीरी, संपन्नता।
  • विनम्र = विनीत।
  • निराशाजन्य = निराशा से जन्मा हुआ।

पृष्ठ सं० – 91

  • निर्णय = फैसला।
  • सामर्थ्य = क्षमता।
  • नाता = रिश्ता।
  • आवेश = कोध।
  • खातिर = स्वागत।
  • धब्बा = कलंक ।
  • ठेस = धक्का।
  • बिरादरी = अपनी जातिवाले।
  • करारी = तीखी।
  • गौने = विवाह के बाद लड़की के ससुराल से आने के बाद की विदाई।

पृष्ठ सं० – 92

  • सरासर = बिल्कुल ।
  • मुँह खोलने = बोलने।
  • बदतमीजी = बुरा व्यवहार ।
  • आवरा = लफंगा।
  • दंग = आश्चर्यचकित।
  • दाँतों तले उँगली दबाना = आश्चर्यचकित रह जाना।
  • एक तराजू में तोलना = एक समान समझना।
  • घटा = बादल।

पृष्ठ सं० – 93

  • आर्द्र = भीगे, करूण।
  • पानी में पत्थर का नहीं पिघलना = निर्दयों में दया नहीं होती।
  • कलेजे में घाव होना = दु:ख छोनाना।
  • सौगंध = कसम।
  • कामना = इच्छा।
  • कागज के टुकड़े = रुपये।

पृष्ठ सं० – 94

  • गूढ़ी = गहरी।
  • द्वार = दरवाजे।
  • मूर्तिवत = मूर्ति की तरह।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 बहू की विदा

पृष्ठ सं० – 95

  • राह देखेंगा = इतजजार करना।
  • कुंजियों = चाभियों।
  • नाकवाले = प्रतिष्ठा, इज्जतवाले।
  • नकटे = बिना नाक, बिना

पृष्ठ सं० – 96

  • ओट = आड़, पीछे।
  • बरसाती कोट = वर्षा से बचने के लिए कोट ।
  • अनसुनी = जान बूझकर न सुनना।

पृष्ठ सं० – 97

  • चीखकर = चिल्ला कर।
  • आँखें न खुलना = होश न होना,ज्ञान न होना।
  • हाथ मलना = पछताना।

पृष्ठ सं० – 98

  • आज्ञा = अनुमति ।
  • लज्जित = शर्मिंदा।
  • ताकना = देखना ।
  • शीघ्रता = तेजी ।
  • मन्द गति = धीमी चाल से ।
  • यवानिका = परदा।