WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 संस्कृति

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 Question Answer – संस्कृति

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर :

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए ।

प्रश्न 1.
लेखक अपने तरीके से क्या समझाने की बात करता है ?
(क) धर्म-अधर्म को
(ख) न्याय-अन्याय को
(ग) संस्कृति और सम्यवा को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) संस्कृति और सभ्यता को

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 संस्कृति

प्रश्न 2.
मोती भरा थाल का क्या अभिप्राय है ?
(क) धाल में भरा हुआ मोती
(ख) आकाश में जगमगाते तारे
(ग) घास पर झिलामिलती ओस की बूँदें
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) आकाश में जगमगाते तारे

प्रश्न 3.
मानव संस्कृति है –
(क) एक विभाज्य वस्तु
(ख) एक अविभाज्य वस्तु
(ग) अकल्याणकारी वस्तु
(घ) अस्थायी वस्तु
उत्तर :
(ख) एक अविभाज्य वस्तु

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 संस्कृति

प्रश्न 4.
भदंत आंनंद कौसल्यायन का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1900
(ख) सन् 1905
(ग) सन् 1910
(घ) सन् 1915
उत्तर :
(ख) सन् 1905

प्रश्न 5.
भदंत आंनद कौसल्यायन के बचपन का क्या नाम था ?
(क) हरिदास
(ख) नामधारौ दास
(ग) हरनाम दास
(घ) नागदास
उत्तर :
(ग) हरनाम दास

प्रश्न 6.
लेखक के अनुसार ऐसे दो शब्द जो कम समझ में आते हैं –
(क) देश-विदेश
(ख) सभ्यता-संस्कृति
(ग) धर्म-अधर्म
(घ) न्याय-अन्याय
उत्तर :
(ख) सभ्यता-संस्कृति

प्रश्न 7.
जो चीज अपने या दूसरे के लिए आविष्कृत की गई है उसे कहते हैं ?
(क) सभ्यता
(ख) संस्कृति
(ग) धर्म
(घ) कर्म
उत्तर :
(क) सभ्यता

प्रश्न 8.
गुरुत्वाकर्षण की खोज किसने की ?
(क) न्यूटन
(ख) आइंस्टाइन
(ग) मैडम क्यूरी
(घ) एडिसन
उत्तर :
(क) न्यूटन

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 संस्कृति

प्रश्न 9.
लेखक ने रूस का भाग्यविधाता किसे कहा है ?
(क) रूस के जार को
(ख) लेनिन को
(ग) ब्लादिमीर पूतिन को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) लेनिन को

प्रश्न 10.
मजदूरों को सुखी करने का स्वप्न किसने देखा ?
(क) हिटलर ने
(ख) मुसोलिनी ने
(ग) नेपोलियन ने
(घ) कार्ल मार्क्स ने
उत्तर :
(घ) कार्ल मार्क्स ने

प्रश्न 11.
लेखक के अनुसार संस्कृति का परिणाम क्या है ?
(क) धर्म
(ख) सभ्यता
(ग) अपसंस्कृति
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सभ्यता

प्रश्न 12.
किसने मजदूरों को सुखी देखने का स्वपन देखते-देखते सारा जीवन दुःख में बिता दिया ?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) लेखक
(ग) वैज्ञानिक
(घ) न्यूटन
उत्तर :
(क) कार्ल मार्क्स

प्रश्न 13.
लेनिन कहाँ रहता था ?
(क) अमेरिका
(ख) रूस
(ग) जापान
(घ) चीन
उत्तर :
(ख) रूस

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प्रश्न 14.
मानव संस्कृति एक …………… वस्तु है।
(क) अनायस
(ख) अविभाज्य
(ग) भौतिक
(घ) संस्कृति
उत्तर :
(ख) अविभाज्य

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1.
संस्कृति क्या है?
उत्तर :
जिस योग्यता, प्रवृत्ति अथवा प्रेरणा के बल से व्यक्ति आविष्कार करता है उसे, उस व्यक्ति की संस्कृति कहते हैं, संस्कृति का शाद्धिक अर्थ है – संस्कार या परिष्कार।

प्रश्न 2.
सभ्यता का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
संस्कृति का परिणाम ही सभ्यता है। हमारे खाने-पीने के तरीके, हमारे पहनने के तरीके, हमारे गमना-गमन के साधन, हमंरे परस्पर कट मरने के तरीके सब हमारी सभ्यता है।

प्रश्न 3.
संस्कृति पाठ के लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
‘संस्कृति’ पाठ के लेखक का नाम भदंत आनंद कौसल्यायन है।

प्रश्न 4.
मनीषी का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
वुद्धिमान, मेधावी विचारशील व्यक्ति को मनीषी कहते हैं।

प्रश्न 5.
भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
भंतंत आंद कौसल्यायन का जन्म सन् 1905 में पंजाब के अम्बाला जिला के सोहाना नामक गाँव में हुआ था।

प्रश्न 6.
लेखक के अनुसार कौन निठल्ला नहीं बैठ सकता ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार जो वास्तव में संस्कृत व्यक्ति है, वह तमाम सुख-सुविधाओं से युक्त होने पर भी निठल्ला नहीं बैठ सकता।

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प्रश्न 7.
लेखक के अनुसार संस्कृति के कारक क्या हैं ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार ज्ञानेप्सा, भौतिक प्रेरणा और कल्याणकारी भावना संस्कृति के कारक हैं।

प्रश्न 8.
संस्कृति कैसे असंस्कृति बन जाती है ?
उत्तर :
संस्कृति से कल्याणकारी तत्व को निकाल देने पर वह असंस्कृति बन जाती है।

प्रश्न 9.
संस्कृति का यदि कल्याण की भावना से नाता टूट जाये तो क्या होगा ?
उत्तर :
संस्कृति का यदि कल्याण की भावना से नाता दूट जायेगा तो वह असंस्कृति होकर ही रहेगी।

प्रश्न 10.
मानव संस्कृति क्या है ?
उत्तर :
मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

प्रश्न 1.
आग की खोज किन कारणों से हुई?
उत्तर :
आग की खोज में पेट की ज्वाला की प्रेरणा एक कारण रही। जब आग का आविष्कार नहीं हुआ उस समय स्वयं जिस मनुष्य ने पहले आग का आविष्कार किया होगा वह महान आविष्कर्ता होगा। उसे भी पेट की ज्वाला से ही प्रेरणा मिली होगी।

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प्रश्न 2.
न्यूटन कौन थे? उन्होंने किस सिद्धांत की स्थापना की?
उत्तर :
न्यूटन एक महान वैज्ञानिक थे। वे संस्कृत मानव थे। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की स्थापना थी।

प्रश्न 3.
संस्कृत व्यक्ति किसे कहा जाता है?
उत्तर :
जिस व्यक्ति ने अपनी बुद्धि अथवा विवेक से मानव के कल्याण के लिए किसी नये तथ्य की खोज की, उसे संस्कृत व्यक्ति कहते हैं।

प्रश्न 4.
सिद्धार्थ ने अपना घर क्यों त्याग दिया?
उत्तर :
सिद्धार्थ ने अपना घर इसलिए त्याग दिया कि किसी तरह तृष्णा के वशीभूत लड़ती-कटती मानवता सुख से रह सके।

प्रश्न 5.
संस्कृति और सभ्यता में मौलिक अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
सभ्यता संस्कृति का परिणाम है। जिस योग्यता, प्रवृत्ति और प्रेरणा से कोई आविष्कार होता है, उसे सभ्यता कहते हैं।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-

(क) जिस व्यक्ति में पहली चीज, जितनी अधिक व जैसी परिष्कृत मात्रा में होगी, वह व्यक्ति उतना ही अधिक एवं वैसा ही परिष्कृत आविष्कर्ता होगा।

प्रश्न 1.
यह पंक्ति किस पाठ से उद्दुत है ? पहली चीज का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
यह पंक्ति ‘संस्कृति’ पाठ से उद्धुत है। पहली चीज है किसी व्यक्ति विशेष की आग का आविष्कार करने की शक्ति। पहले व्यक्ति के मन में इसकी प्रेरणा उत्पन्न हुई होगी। फिर आविष्कार हुआं होगा।

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प्रश्न 2.
प्रस्तुत पंक्ति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
लेखक ने स्पष्ट किया है कि जिस व्यक्ति में योग्यता होगी, तभी प्रेरणा होने पर वह आविष्कार करता है । योग्यता और प्रेरणा जितनी सुरुचिपूर्ण होगी वह उतनी ही अधिक सुन्दर खोज कर सकेगा।

(ख) ‘संस्कृति’ का यदि मानव कल्याण से नाता टूट जाएगा तो वह असंस्कृति होकर रहेगी और ऐसी संस्कृति का अवश्यंभावी परिणाम असभ्यता के अतिरिक्त दूसरा क्या होगा?

प्रश्न 1.
असंस्कृति और असभ्यता का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मानव की जो योग्यता उससे आत्म विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है उसे असंस्कृति कहते हैं। जिन साधनों के बल पर वह दिन-रात आत्म विनाश में जुटा रहता है उसे असभ्यता कहते हैं।

प्रश्न 2.
संस्कृति का कल्याण की भावना से नाता टूटने का परिणाम क्या होगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
संस्कृति का यदि कल्याण की भावना से नाता दूट जाएगा तो वह असंस्कृति होकर ही रहेगी और ऐसी संस्कृति का परिणाम निश्चित रूप से असभ्यता होगा।

भाषा-बोध

1. उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए :

  • उपयोग – उप + योग
  • अनेक – अन + एक
  • प्रवृत्ति – प्र + वृत्ति
  • अपरिचित – अ + परिचित
  • महानायक – महा + नायक
  • अविभाज्य – अ + विभाज्य

2. प्रत्यय पृथक कीजिए :

  • शब्द मूलशब्द प्रत्यय
  • सभ्यता – सभ्य + ता
  • योग्यता – योग्य + ता
  • पूर्वज – पूर्व + ज
  • मानवता – मानव + ता
  • रक्षणीय – रक्ष + अणीय
  • आध्यात्क्क – अध्यात्म + इक

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3. विलोम शब्द लिखिए :

  • एक – अनेक
  • बड़ा – छोटा
  • अनायास – आयास
  • अपेक्षा – उपेक्षा
  • प्रथम – अन्तिम
  • कल्याण-अकल्याण

4. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग वाक्य में कीजिए :

  • आविष्कर्ता – आग की खोज करने वाला महान आविष्कर्ता होगा।
  • संस्कृति – भारतीय संस्कृति गौरवपूर्ण है।
  • परिष्कृत – जिसका स्वभाव परिष्कृत हो वह सबका प्रिय बन जाता है।
  • संसार – संसार में अनेक प्रकार के लोग रहते हैं।

WBBSE Class 7 Hindi संस्कृति Summary

जीवक्र फरिच्य

भदंत आनंद् कौसल्यायन का जन्म सन् 1895 ई० में पंजाब के अंबाला जनपद के सोहाना गाँव में हुआ था। कौसल्यायन बौद्ध भिक्षु थे। उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। सन् 1988 ई० में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। उनकी प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ-भिक्षु के पात्र जो भूल न सका, यदि बाबा न होते, कहाँ क्या देखा आदि प्रमुख हैं। उन्होंने सहज, सरल भाषा में जातक कथाओं का अनुवाद किया। उन्होंने देश-विदेश में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में स्तुत्य योगदान दिया।

शब्दार्थ :-

  • भौतिक-पार्थिव
  • आध्यात्मिक – ब्रह्म और जीव संबंधी
  • साक्षात – प्रत्यक्ष
  • आविष्कार – खोज
  • आविष्कर्ता-खोज करने वाला
  • ज्ञानेप्सा – ज्ञाने पाने की इच्छा
  • प्रज्ञा – बुद्धि
  • तथ्य-सत्य, यथार्थता
  • तृष्णा – लालच
  • अविभाज्य – जिसे बाँटा न जा सके।
  • पूर्वज-पुरखा
  • अनायास – बिना प्रयत्न के
  • शीतोष्ण – ठंडा और गर्म
  • स्थूल-बड़ा
  • मनीषियों – मेधावी, ज्ञांनी, विचारशील
  • रक्षणीय – रक्षा करने योग्य
  • मैन्री – मित्रता
  • कल्याण – भलाई
  • परिष्कृत – संस्कार किया हुआ।
  • निठल्ल – बेकार

गुरुत्वाकर्षण – वह शक्ति जिसके द्वारा कोई पिंड किसी दूसरे पिंड को अपनी ओर आकृष्ट करता है अथवा उसकी ओर आकर्षित होता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 संस्कृति

पाठ का सारांश –

प्रस्तुत पाठ में कौसल्यायन ने सभ्यता और संस्कृति के स्वरूप पर प्रकाश डाला है। मानव संस्कृति को अंविभाज्य बतलाया है। एक समय था जब मनुष्य आग से परिचित नहीं था। आग की खोज करने वाला महान आविष्कर्ता होगा। सुई की खोज करने वाला भी महान आविष्कार्ता रहा होगा। इन उदाहरणों से स्पष्ट हो जाता है कि एक वस्तु का आविष्कार करने की शक्ति और दूसरी वस्तु है आविष्कार। जिस योग्य प्रवृत्ति अथवा प्रेरणा से आग का, सुईधागे का आविष्कार हुआ वह व्यक्ति की संस्कृति है और संस्कृति द्वारा जो आविष्कार, हुआ, जो चीज उसने अपने तथा दूसरों के लिए आविष्कृत की, उसका नाम सभ्यता है।

संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है। उसकी संतान सभ्य भले हों पर वह संस्कृत नहीं कहला सकता। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी न्यूटन से अधिक सभ्य भले हो पर वे न्यूटन जैसा संस्कृत नहीं हो सकते। आग के आविष्कार में कदाचित पेट की ज्वाला की प्रेरणा एक कारण रही। सुई-धागे के आविष्कार में शायद शीतोष्ण से बचने तथा शरीर को सजाने की प्रवृत्ति रही होगी। पेट भरा और तन ढँका होने पर भी संस्कृत मानव कभी निठल्ला नहीं बैठ सकता। रात के तारों को देखकर न सो सकने वाला मनीषी आज के ज्ञान का प्रथम पुरस्कर्ता है।

भौतिक प्रेरणा, ज्ञानेप्सा ये दो ही मानव संस्कृति के माता-पिता हैं। यही कारण है कि एक व्यक्ति दूसरे के मुँह में कौर डालने के लिए अपने मुँह का कौर छोड़ देता है। रोगी बच्चे को सारी रात गोद में लिए माता बैठी रहती है। लेनिन डबल रोटी के सूखे टुकड़े स्वयं न खाकर दूसरों को खिला देते थे। संसार के मजदूरों के सुखी देखने के लिए कार्ल मार्क्स ने सारा जीवन दु:ख में बिता दिया। सिद्धार्थ ने मानवता के सुख के लिए गृह त्याग कर दिया। जो योग्यता किसी महामानव से सर्वस्व त्याग कराती है, वह भी संस्कृति है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 4 संस्कृति

संस्कृति का परिणाम ही सभ्यता है। हमारे खाने-पीने के तरीके, पहनने के तरीके, गमना-गमन के साधन सब हमारी सभ्यता है। मानव की जो योग्यता उससे आत्मविनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे संस्कृति नहीं, बल्कि, असंस्कृति कह सकते हैं। संस्कृति का कल्याण की भावना से नाता टूट जाएगा तो असंस्कृत हो जाएगी। ऐसी संस्कृति का परिणाम असभ्यता ही होगा। संस्कृति के नाम पर जिसे कूड़े-करकट के ढेर का बोध होता है वह न संस्कृति है, न रक्षणीय वस्तु। मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है, उसमें जितना अंश कल्याण का है, वह अकल्याण की अपेक्षा श्रेष्ठ ही नहीं स्थायी भी है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 Question Answer – संन्यासी

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखिए ।

प्रश्न 1.
पालू किस राज्य का निवासी था?
(क) गुजरात
(ख) राजस्थान
(ग) पंजाब
(घ) महाराष्ट्र
उत्तर :
(क) गुजरात

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

प्रश्न 2.
‘यह न होगा’ किसका कथन है?
(क) पालू के पिता का
(ख) बालू का
(ग) पालू का
(घ) सुचालू का
उत्तर :
(ग) पालू का

प्रश्न 3.
पालू की स्त्री किस रोग का शिकार होकर मर गई?
(क) मलेरिया
(ख) हैजा
(ग) टाइफाइड
(घ) तपेदिक
उत्तर :
(ख) हैजा

प्रश्न 4.
सुदर्शन जी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1885
(ख) सन् 1895
(ग) सन् 1905
(घ) सन् 1915
उत्तर :
(ख) सन् 1895

प्रश्न 5.
सुदर्शन जी किस युग के कथाकार हैं ?
(क) द्विवेदीयुगीन
(ख) प्रेमचंदयुगीन
(ग) प्रेमचंदोत्तर युगीन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) प्रेमचंद्युगीन

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

प्रश्न 6.
पालू कितने भाई थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ग) तीन

प्रश्न 7.
पालू के पुत्र का क्या नाम था ?
(क) दीनदयाल
(ख) दादूदयाल
(ग) दयाराम
(घ) सुखदयाल
उत्तर :
(घ) सुखदयाल

प्रश्न 8.
पालू के गुरु कौन थे ?
(क) शंकराचार्य
(ख) वल्लभाचार्य
(ग) रामानंद
(घ) प्रकाशानंद
उत्तर :
(घ) प्रकाशानंद

प्रश्न 9.
भोलानाथ कौन था ?
(क) पालू का मित्र
(ख) पालू का भाई
(ग) पालू का गुरु
(ग) पालू का शिष्य
उत्तर :
(क) पालू का मित्र

प्रश्न 10.
पालू कितने समय बाद घर वापस लौटा ?
(क) एक वर्ष बाद
(ख) दो वर्ष बाद
(ग) तीन वर्ष बाद
(घ) चार वर्ष बाद
उत्तर :
(ख) दो वर्ष बाद

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

प्रश्न 11.
पालू की भाभी का क्या नाम था ?
(क) सुखमति
(ख) सुखदेवी
(ग) सुखवती
(घ) सुखरानी
उत्तर :
(ख) सुखदेवी

प्रश्न 12.
पालू किस त्योहार के दिन घर वापस आया ?
(क) होली
(ख) दीवाली
(ग) दशहरा
(घ) लोहड़ी
उत्तर :
(घ) लोहड़ी

प्रश्न 13.
सुक्खू का मुख किस प्रकार चमक रहा था ?
(क) सूर्य
(ख) चंद्रमा
(ग) तारे
(घ) आग
उत्तर :
(ख) चंद्रमा

प्रश्न 14.
शांति के लिए कौन से मार्ग की अवश्यकता है ?
(क) सेवा
(ख) कठिन
(ग) युद्ध
(घ) उपदेश
उत्तर :
(क) सेवा

प्रश्न 15.
पालू के स्थान पर कौन खड़े थे ?
(क) सुखदयाल
(ख) भोलानाथ
(ग) साधु-महात्मा
(घ) सुखदेवी
उत्तर :
(ग) साधु-महात्मा

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

प्रश्न 16.
कौन अंदर से निकला और रोता हुआ स्वामी जी से लिपट गया ?
(क) बालकराम
(ख) पालू
(ग) भोलानाथ
(घ) सुखदेवी
उत्तर :
(क) बालकराम

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

प्रश्न 1.
पालू किस गाँव का रहने वाला था?
उत्तर :
पालू लखनवाल गाँव का रहने वाला था।

प्रश्न 2.
पालू की भाभी अवाक् क्यों रह गई?
उत्तर :
पालू की भाभी को आशंका थी कि पालू संपत्ति बाँटने के लिए झगड़ा करेगा, लेकिन पालू घर-बार छोड़ जाने को तैयार हो गया और भाभी से बोला कि अब वह घर में नहीं रहेगा। इसलिए उसके बेटे को संभालो। यह सुनकर भाभी अवाक् रह गई।

प्रश्न 3.
स्वामी विद्यानंद कौन थे?
उत्तर :
पालू सन्यास ग्रहण कर ऋषिकेश में रहने लगा और अब वही पालू ही स्वामी विद्यानंद के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

प्रश्न 4.
भोलानाथ कैसा पुरुष था?
उत्तर :
भोलानाथ हाँडा का बड़ा सज्जन पुरुष था। उसके मन में स्नेह, दया तथा परोपकार की भावना थी। पालू का वह सच्चा मित्र था। सुक्खू (सुखदयाल) के प्रति उसके मन में सच्चा स्नेह था।

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प्रश्न 5.
लोहड़ी क्या है?
उत्तर :
लोहड़ी एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार बड़े समारोह के रूप में पंजाब में मनाया जाता है।

प्रश्न 6.
पालू अपने पुत्र को किसके आश्रय में छोड़ गया था?
उत्तर :
पालू अपने पुत्र को अपनी भाभी के आश्रय में छोड़ गया था।

प्रश्न 7.
पालू क्या करता था ?
उत्तर :
पालू एक दुकान चलाता था।

प्रश्न 8.
पालू का विवाह किससे हुआ ?
उत्तर :
पालू का विवाह चौधरी की बेटी से हुआ।

प्रश्न 9.
विद्यानंद के मन से क्या आवाज आती रहती थी ?
उत्तर :
विद्यानंद के मन से आवाज आती रहती थी कि वह अपने आदर्श से दूर जा रहा है।

प्रश्न 10.
विद्यानंद उर्फ पालू की अशांति का मूल कारण क्या था ?
उत्तर :
विद्यानंद की अशांति का मूल कारण उसके पुत्र के प्रति स्नेह था।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

प्रश्न 11.
भोलानाथ को देखकर सुखदयाल क्या अनुभव करता था ?
उत्तर :
भोलानाथ को देखकर सुखदयाल पितृ-प्रेम का अनुभव करता था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) पालू किस बात में उस्ताद था?
उत्तर :
पालू बाँसुरी और घड़ा बजाने में उस्ताद था। हीर-राँझे का किस्सा पढ़ने तथा जोग सहती के प्रश्नोत्तर पढ़ने में भी वह बेजोड़ था।

(ख) पालू मन ही मन क्यों कुढ़ता था?
उत्तर :
गाँव के लोग पालू के व्यवहार, उत्सवों के प्रति उसकी तत्परता तथा कला को देख सुनकर मुग्ध होते और उसकी अतिशय प्रशंसा करते थे। पर उसके घर के लोग उसके गुणों की कदर न करते थे। घर में उसे ठंडी रोटियाँ माँ की गालियाँ, भाभियों के ताने मिलते थे। इसी कारण पालू मन ही मन कुढ़ता था।

(ग) पालू के जीवन में किस तरह का परिवर्तन आ गया?
उत्तर :
पालू की तैंतीस वर्ष की अवस्था में शादी हो गई। स्त्री के आते ही उसका संसार ही बदल गया। बाँसुरी, किस्से, कहानी सब को वह भूल गया। अब घर उसके लिए फूलों की वाटिका बन गया। कभी वह दिन के अधिकांश समय घर के बाहर रहता था किन्तु अब वह घर के बाहर ही नहीं निकलता। इस प्रकार विवाह के पश्चात् पालू के चरित्र और व्यवहार में बड़ा परिवर्तन आ गया।

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(घ) स्वामी प्रकाशानंद के पास स्वामी विद्यानंद क्यों गए?
उत्तर :
स्वामी विद्यानन्द की भक्ति की सर्वत्र धूम मच गई। पर उनके मन को शांति नहीं मिली। सुख की नींद नहीं आती थी। पूजा-पाठ में मन एकाग्र नहीं होता। उनके मन में ऐसी आवाज आती थी कि वे अपने आदर्श से दूर जा रहे हैं। वे चौंक उठते, पर कारण समझ में न आता। वे घबरा कर रोने लग जाते, परंतु चित्त को शांति न मिलती। इसी अशांति के समाधान के लिए वे स्वामी प्रकाशानंद के पास गए।

(ङ) सुखदयाल का कलेजा क्यों काँप गया?
उत्तर :
भोलानाथ के घर से सुखदयाल अपने घर पहुँचा। भोलानाथ के घर उसने चिमटे से ताई द्वारा मारने की जो बात कही थी, वह ताई के कानों तक पहुँच गई। ताई के क्रोध की कोई सीमा न रही। रात अधिक बीत जाने पर मुहल्ले की स्त्रियाँ अपने-अपने घर चली गई। अब अपना क्रोध उतारने के लिए ताई सुखदयाल को पकड़ कर डाँटने लगी। उसके रौद्र रूप और व्यवहार को देखकर सुखदयाल का कलेजा काँप गया।

(च) पालू के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर :
पालू अनपढ़ था, पर मूर्ख नहीं था। गुणों की खान था। बाँसुरी बजाने, किस्से-कहानी सुनाने में वह बेजोड़ था। गाँव में होली, दीपाबली तथा दशहरे में होनेवाले उत्सवों में उसी की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। उसके घर के लोग उसके गुणों की कदर नहीं करते थे। घर के बाहर वह गाँव वालों के साथ बड़ा ही व्यावहारिक था।

उसका रूप रंग सुन्दर था, शरीर भी सुडौल था। उसमें य्यार तथा सेह की भावना भरी थी। अपने नन्हें पुत्र तथा नई प्ली से वह अत्यधिक प्यार करता था। वह अपने हठ तथा सिद्धांत पर अडिग रहने वाला दृढ़ पुरुष था। उसमें कष्ट सहिष्युता भरी थी। संन्यासी बनने पर वह पर्वत पर रहता तथा पत्थरों पर सोता था। उसमें ईश्वर भक्ति तथा आत्मसयम की भावना थी। अपने गुण के पति उसमें गहरी श्रद्धा थी। वह सदाचारी था। गुरु के आदेश को स्वीकार कर ही उसने पुन: गृहस्थाश्रम को स्वीकार किया।

(छ) संन्यासी कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि गृहस्थ के उत्तरादायित्व का निर्वाह करना ही वास्तविक संन्यास है। गृहस्थ जीवन का निर्वाह किए बिना संन्यासी बनने से मन को शांति नहीं मिलती। सेवा मार्ग वन में भटकने से श्रेष्ठ होता है। पुत्र, परिवार और अपने आश्रित जनों की सेवा करने से ही शांति मिल सकती है। कर्त्तव्य पालन ही सच्चा संन्यास है।

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यथा निर्देश उत्तर दीजिए :

(क) मनुष्य सब कुछ सह लेता है, पर अपमान नहीं सह सकता।

प्रश्न 1.
इस पंक्ति के लेखक का नाम लिखिए ।
उत्तर :
इस पंक्ति के लेखक का नाम सुदर्शन है।

प्रश्न 2.
सप्रसंग इस पंक्ति का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पालू अनपढ़ था, पर मूर्ख नहीं था। पिता प्रकारान्तर से उसे निर्लज्ज कहते, आलोचना करते पर वह स्वभाव से बेपरवाह था, इसलिए हैसकर टाल देता। पर भाई और भाभियाँ भी बात-बात में ताने देने और घृणा की दृष्टि से देखने लगी। पालू सब कुछ सह सकता था, पर अपना इस प्रकार का अपमान नहीं सह सकता था। इसलिए इस अपमान को देखकर उसने प्रतिकार स्वरूप पिता के पास जाकर शिकायत की।

(ख) सारे गाँव में तुम्हारी मिद्टी उड़ रही है। अब भी बताने की बात बाकी रह गई है।

प्रश्न 1.
‘तुम्हारी’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? मिट्टी उड़ने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
यहाँ तुम्हारी’ शब्द का प्रयोग पालू के लिए किया गया है। मिद्टी उड़ने का तात्पर्य है बदनामी होना। पालू के पिता उसे बता रहे हैं कि समस्त गाँव में उसकी बदनामी हो रही है।

प्रश्न 2.
इस अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
पालू के पिता पालू से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कह रहे हैं कि तुम सदा स्वी के पास ही बैठे रहते हो। तुम्हहारा अनोखा विवाह हुआ है। अपना विचार प्रकट करते हुए कहने लगे कि गाँव भर में तुम्हारी बदनामी हो रही है। सारा गाँव तुम्हारी आलोचना कर रहा है। इससे अधिक बात क्या हो सकती है। हमें कुछ बताने, कहने की जरूरत ही नहीं है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

(ग) ‘बात साधारण थी, परन्तु हददोों में गाँठ बँध गई।’

प्रश्न 1.
यह पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
उत्तर :
यह पंक्ति ‘संन्यासी’ पाठ से उद्रतत है।

प्रश्न 2.
किनके हूदयों में गाँठ बँध गई और क्यों?
उत्तर :
पालू और उसके पिता के हृदयों में गाँठ बँध गई। पल्नी को उसके घर भेज देने का पिता का प्रस्ताव स्पष्ट शब्दों में पालू ने अस्वीकार कर दिया, पिता कोधित होकर उसे घर से किनारे करने के लिए कह दिया। अब पालू ने भी कड़ा मत्तर देते हुए कहा कि वह कहीं नहीं जाएगा। इसी घर में रहेगा, खाएगा। कौन उसे निकाल सकता है। इसी बात पर दोनों के हैदयों में गाँठ बँध गई।

(घ) ‘स्वामी विद्यानंद की आँखों में आँसू आ गए।’

प्रश्न 1.
स्वामी विद्यानंद कौन थे?
उत्तर :
पालू ही स्वामी विद्यानंद थे। गृहस्थ जीवन त्याग पालू ॠषिकेश जाकर स्वामी विद्यानंद के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

प्रश्न 2.
उनकी आँखों में आँसू क्यों आ गए? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
स्वामी विद्यानंद घर के अंदर गए। उन्होंने भतीजियों को चमेली के फूल की तरह खिला हुआ देखा। पर कभी मैना के समान चहकने वाला सभी को प्यारा नटखट बालक सुखदयाल उदासीनता की मूर्ति बना था। उसका मुख कुम्हलाया हुआ था। बाल रूखे थे, वस्त्र मैल-कुचेले थे। लगता था किसी भिखारी का लड़का है। अपने उस प्यारे पुत्र की इस दशा को देखकर स्वामी विद्यानंद पालू की आँखों में आँसू आ गए।

भाषा-बोध

1. निम्नलिखि शब्दों से उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए :

  • अभिमान – अभि + मान
  • असंभव – अ + संभव
  • निष्ठुर – निः + ठुर
  • निर्लज्ज – नि: (नि) + लज्ज
  • अनपढ़ – अ (अन) + पढ़
  • अपमान – अप + मान
  • प्रतिक्षण – प्रति + क्षण

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

2. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक् कीजिए :

  • झांकियों – झाँकी + यों
  • धीरता – धीर + ता
  • नमता – नम + ता
  • व्याकुलता – व्याकुल + ता
  • प्रसन्नता – प्रसन्न + ता
  • सुंदरता – सुंदर + ता

3. पर्यायवाची शब्द लिखिए :

  • विधाता – बह्ला, विरंचि, चतुरानन।
  • चिड़िया – खग, विहग, पक्षी।
  • संसार – विश्व, जगत्, दुनिया।
  • चित्र- तस्वीर, आकृति, आकार।
  • वस्थ्र – कपड़ा, अम्बर, वसन, पट।
  • वाटिका – उद्यान, बागीचा, बाग

4. विलोम शब्द लिखिए :

  • सुन्दर-असुंदर, कुरूप
  • मूख्ख-विद्वान
  • विष-अमृत
  • चंचल – शान्त, स्थिर
  • अशांति – शांति ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 संन्यासी

5. वाक्य प्रयोग कीजिए :

  • पिंजरा – पिंजरा में कैद पक्षी उड़ नहीं सकता।
  • गृहस्थी – गृहस्थी संभालना हर व्यक्ति का फर्ज है।
  • एकाग्र – एकाग्र चित्त होकर पढ़ना चाहिए।
  • धर्मशाला – धर्मशाला में यात्री ठहरते हैं।
  • समारोह – विवाह का समारोह धूम-धाम से मनाया जा रहा है।

WBBSE Class 7 Hindi संन्यासी Summary

जीवक्र फरिच्य

सुदर्शन का जन्म सन् 1895 ई० में अविभाजित पंजाब के स्यालकोट नगर में हुआ था। मुम्बई में 1967 ई० में इनका देहावसान हो गया। सुदर्शन उर्दू से हिन्दी कहानी लेखन की ओर उन्मुख हुए। आर्य समाजी विचारधारा से वे प्रभावित थे। आपने उपन्यास, कहानी, नाटक सभी क्षेत्रों में लेखनी चलाई। इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह हैं – पुष्पलता, सुपभात, सुदर्शन सुधा, सुदर्शन सुमन, पनघट और चार कहानियाँ। परिवर्तन, भागवंती और राजकुमार इनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। अंजना, सिकदर और भाग्यचक्र इनके नाटक हैं। इनकी भाषा सीधी, सरल, सरस, प्रसाद गुण संपन्न तथा मुहावरेदार हैं। इनकी कहानियों में आदर्शवाद की झलक मिलती है।

कहानी का सारांश

कथानायक पालू गुजरात के लखनवाल का रहनेवाला था। वह गुणों का भण्डार था। उसे अशिक्षित और अकर्मण्य नहीं कह सकते। वह गाँव में होने वाली होलियों में झाँकियों का, दिवाली पर जुए का, दशहरे पर रामलीला का प्रबंध बड़े उत्साह से संपन्न करवाता था। बाँसुरी बजाने में वह उस्ताद था।

हीर-राँझे की कहानी कहने तथा जोग और सहती के प्रश्नोत्तर पढ़ने में वह बेजोड़ था। उसके घर में उसके गुणों की कदर न थी। पालू तीन भाई था। उसका एक भाई सुचालू (सुच्चालामाल) व्यायाम मास्टर था। दूसरा भाई बालू (बालकराम) दुकान चलाता था। पिता के उपदेश और भाइयों-भाभियों के निष्ठुर व्यवहार का पालू पर कोई असर नहीं पड़ता था। पालू की जीवन-दशा निराली थी। अपने घर में वह उपेक्षित तथा तिरस्कृत था, पर बाहर अपेक्षित तथा सम्मानित था।

तैंतीस वर्ष की अवस्था में पालू का विवाह हो गया। विवाह के पश्चात् पालू के चरित्र और व्यवहार में बड़ा बदलाव आ गया। पहले वह दिन में घंटों घर से बाहर रहता था, पर अब वह घर से बाहर ही नहीं निकलता। बाँसुरी और किस्से छोड़कर पत्नी के प्रेम में डूबा रहता था। घर में माता-पिता, भाई-भाभी सभी व्यंग्य करते थे। पालू ने एक दिन अपने पिता के सामने जाकर अपनी झुँझलाहट व्यक्त किया। पिता उस पर चिढ़ते थे। सारा दिन स्वी के पास बैठे रहना, पिता को भी अच्छा नहीं लगता था। पिता ने कहा कि स्त्री को मायके भेज दो। पर इस प्रस्ताव को उसने बिल्कुल स्वीकार नहीं किया। वह रात-दिन पत्नी के प्यार में डूबा रहता था। पत्नी की गोद में दो वर्ष का बालक भी खेलता था। दुर्भाग्य से पालू की स्वी हैजे से चल बसी। पालू की आनंदवाटिका उजड़ गई।

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पालू पत्नी के वियोग को सह न सका। तीन मास के अंदर ही उसके माता-पिता भी चल बसे। पालू का मन संसार से विरक्त हो उठा। वह अपने पुत्र सुखदयाल को भाभी को सौंप कर घर-बार छोड़ कर संन्यासी बनने के लिए निकल पड़ा।

पालू दो वर्ष वन में रहा। कठिन साधना और तपस्या से पूरे हरिद्वार में उसकी धूम मब गई। पर उसे वहाँ शांति न मिल सकी। उसके मन में सदा आग सुलगने लगी। अंत में वह अपने मन की पीड़ा को अपने गुरु पकाशानंद से व्यक्त किया। गुरु ने उससे उसकी सारी बाते पूछकर यह मालूम किया कि उसका चार वर्ष का बालक अनाथ की तरह घर पर है। गुरु को उसकी अशांति का कारण ज्ञात हो गया। इसलिए गुरु ने उसे तुरंत घर जाने का आदेश दिया।

पालू का मित्र भोलानाथ पालू के चले जाने पर उसके पुन्त सुखदयाल पर सेह दिखाने लगा। उसके बड़े भाई बालू की स्त्री सुखदयाल के साथ बड़ी ही निर्ममता का व्यवहार किया करती थी। यहाँ तक कि भोलानाथ के घर जाने पर भी उसे डाँटती और मारती थी। उसे रूख-सूखे भोजन और फटे-पुराने कपड़े देती थी। स्नेह के अभाव में बालक मुरझा गया था। एक दिन वह जैसे ही बेलन उठाकर मारना चाही, तभी उसकी बेटी ने पालू चाचा के आगमन की सूचना दी।

पालू संन्यासी विद्यानंद के रूप में घर आया। सुखदेवी और बालकराम दोनों ही उसे देखकर हैरान हो गए। पालू ने घर में भतीजियों को सुंदर वस्त्रों में चमेली के फूल की तरह चमकते हुए देखा। सुखदयाल जल के बिना सूखे-मुरझाए पौषे के समान था। बालक की यह स्थिति देखकर पालू की आँखों में आँसू आ गए। अब वह सब कुछ समझ गया। रात के

समय सोने के लिए वह अपने कमरे में पहुँचा। वहाँ उसकी वाटिका उजड़ चुकी थी। प्रेम का राज्य लुट चुका था। पालू सोचने लगा कि प्यार के बिना यह बालक धूल में मिल गया। रात के समय झपपकी आ जाने पर उसे अनुभव हुआ कि सुख और शांति के लिए सेवा मार्ग की आवश्यकता है। पुत्र की सेवा करने से ही मन को शांति प्राप्त हो सकती है। मन की शांति कर्त्तव्य पालन से ही मिल सकती है। उसने सुखदयाल को गले लगाया और उसके सूखे मुख को चूम लिया।

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शब्दार्थ :-

  • गुथन – समूह, भंडार
  • सुध – याद, होश
  • लीन – संलग्न, तत्पर
  • उस्ताद – गुरु, प्रवीण
  • निष्ठुर – कठोर, क्रूर
  • अपमान – निरादर
  • अनोखा – विचित्र
  • दारुण – भीषण
  • झकोरे – झोंके
  • धीरता – धैर्य
  • पददलित – पैरों से कुचले हुए
  • लोहड़ी – एक त्योहार
  • कुम्हलाया – मुरझाया
  • रौनक-चमक, शोभा
  • पितृवात्सल्य-पिता का प्यार
  • उत्तरदायित्व – जिम्मेदारी
  • प्रबंध – इंतजाम, व्यवस्था
  • गँवार- मूर्ख, अनपढ़
  • अभिमान – घमंड
  • विधाता – ईश्वर
  • अनपढ़ – अशिक्षित
  • अवाक् – मौन, आश्चर्य चकित
  • संकल्प – प्रण
  • कंदरा – गुफा
  • निमित्त – कारण
  • आघात – चोट
  • सदाचारी – अच्छे आचरण वाला
  • जागीर – संपत्ति
  • हलचल – आन्दोलन
  • व्याकुलता – बेचैनी
  • शिशिर – सर्दी
  • हृदय बेधक- दिल को दर्द देनेवाला

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – सरदार वल्लभभाई पटेल

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए।

प्रश्न 1.
सरदार वल्लभ भाई पटेल पाठ के लेखक हैं :
(क) डॉ० जाकिर हुसैन
(ख) डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद
(ग) डॉ॰ राधा कृष्णन
(घ) डॉ॰ अवुल कलाम
उत्तर :
(ग) डॉ॰ राधा कृष्णन

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल

प्रश्न 2.
आज चारों ओर किसकी काफी चर्चा रहती है?
(क) दुराचार की
(ख) भ्रष्टाचार की
(ग) अत्याचार की
(घ) व्यभिचार की
उत्तर :
(ख) भषष्टाचार की

प्रश्न 3.
स्वतंत्रा के दिनों में महात्मा गांधी के विश्वसनीय लेफ्टिनेंट थे :
(क) पं० जवाहरलाल नेहरू
(ख) सरदार वल्लभ भाई पटेल
(ग) मदन मोहन मालवीय
(घ) राजेन्र्र पसाद
उत्तर :
(ख) सरदार वल्लभ भाई पटेल

प्रश्न 4.
हमें अपने मतभेदों को क्या करके देश में पूर्ण संगठन और एकता लानी होगी?
(क) जगाकर
(ख) भुलाकर
(ग) फैलाकर
(घ) सुलाकर
उत्तर :
(ख) भुलाकर

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल

प्रश्न 5.
‘सरदार वल्लभ भाई पटेल’ पाठ के लेखक हैं –
(क) डों० जाकिर हुसैन
(ख) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(ग) डॉ० राधाकृष्णन
(घ) डॉ० अकुल कलाम आजाद
उत्तर :
(ग) डॉं० राधाकृष्णन

प्रश्न 6.
डॉ० राधाकृष्णन् का जन्म कब हुआ ?
(क) 5 सितंबर 1888 ई०
(ख) 5 अक्टूबर 1888 ई०
(ग) 5 नवंबर 1888 ई०
(घ) 5 दिसंबर 1888 ई०
उत्तर :
(क) 5 सितंबर 1888 ई०

प्रश्न 7.
डॉ० राधाकृष्णान् का जन्म दिवस किस रूप में मनाया जाता है ?
(क) बाल दिवस
(ख) विद्यार्थी दिवस
(ग) शिक्षक दिवस
(घ) युवा दिवस
उत्तर :
(ग) शिक्षक दिवस

प्रश्न 8.
डॉ० राधाकृष्णन् के अनुसार पटेल के जीवन को निम्नलिखित किस रूप में नहीं देखा जा सकता ?
(क) क्रांतिकारी
(ख) राजनेता
(ग) प्रशासन
(घ) व्यवसायी
उत्तर :
(घ) व्यवसायी

प्रश्न 9.
लेखक ने पटेल को स्वाधीनता-पूर्व किस रूप में परिभाषित किया है ?
(क) राजनेता
(ख) प्रशासन
(ग) अनुशासित सिपाही
(घ) शिक्षाविद्
उत्तर :
(ग) अनुशासित सिपाही

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल

प्रश्न 10.
सरदार पटेल किस परिवार से संबंध रखते थे ?
(क) मजदूर
(ख) व्यवसायी
(ग) कृषक
(घ) राज परिवार
उत्तर :
(ग) कृषक

प्रश्न 11.
लेखक ने पटेल जी के जीवन को कितने भागों में बाँटा है ?
(क) दो.
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर :
(ख) तीन

प्रश्न 12.
पटेल जी किस परिवार से थे ?
(क) राज परिवार
(ख) कृषक परिवार
(ग) गरीब परिवार
(घ) धनी परिवार
उत्तर :
(ख) कृषक परिवार

प्रश्न 13.
पूर्व में किन देशों ने सबसे अधिक प्रगति की है ?
(क) चौन-जापान
(ख) ब्रिटेन-फ्रांस
(ग) उत्तर कोरिया एवं दक्षिण कोरिया
(घ) अमेरिका-नीदरलैण्ड
उत्तर :
(क) चीन-जापान

प्रश्न 14.
राजेन्द्र बाबू कौन-सी नगरपालिका के अध्यक्ष थे ?
(क) इलाहाबाद
(ख) पटना
(ग) अहमदाबाद
(घ) बनारस
उत्तर :
(ख) पटना

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
सरदार वल्लभ भाई पटेल कौन थे?
उत्तर :
सरदार वल्लभ भाई पटेल स्वतंत्रता के निर्माताओं में से एक थे। भारत स्वतंत्र होने पर वे भारत के गृहमंत्री बने।

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प्रश्न 2.
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कैसे परिवार में जन्म लिया था?
उत्तर :
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कृषक परिवार में जन्म लिया था।

प्रश्न 3.
पटेल किसके आदेशों का पालन करते थे?
उत्तर :
पटेल अपने नेता महात्मा गांधी के आदेशों का पालन करते थे।

प्रश्न 4.
सबसे पहले और सबसे ऊपर हमें अपने आपको क्या मानना चाहिए।
उत्तर :
सबसे पहले और सबसे ऊपर हमें अपने आपको भारतीय मानना चाहिए।

प्रश्न 5.
पटेल के जीवन को हम कितने भागों में देख सकते हैं?
उत्तर :
पटेल के जीवन को हम तीन भागों में देख सकते हैं- एक क्रांतिकारी, एक राजनेता और एक प्रशासक।

प्रश्न 6.
पटेल के कार्यों का सबसे महत्वपूर्ण भाग किस रूप में था?
उत्तर :
पटैल के कार्यों का सबसे महत्वपूर्ण भाग राजनेता के रूप में था।

प्रश्न 7.
नेहरू जी ने पटेल जी के बारे में क्या कहा था?
उत्तर :
नेहरूजी ने पटेल जी के बारे में कहा था – पटेल भारतीय एकता के संस्थापक थे। समझाने की अपनी शक्ति, राजनयिक दक्षता और राजनैतिक चातुर्य से वह देश में प्रशासनिक एकता लाने में सफल हुए, जो सबल भारत के निर्माण के लिए आवश्यक आधार है।

प्रश्न 8.
डॉ० राधाकृष्णन् का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ० राधाकृष्णन् का जन्म 5 सितंबर 1888 ई० को तमिलनाडू के तिरुत्तणी नामक स्थान पर हुआ था।

प्रश्न 9.
पंडित नेहरू ने सरदार पटेल के विषय में क्या कहा था ?
उत्तर :
पंडित नेहरू ने सरदार पटेल को भारतीय एकता का संस्थापक कहा था।

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प्रश्न 10.
आज भी हमारे सार्वजनिक जीवन पर क्या छाए हुए है ?
उत्तर :
साम्प्रदायिक भेदभाव और जातिगत तीव्र घृणा अब भी हमारे सार्वजनिक जीवन पर छाए हुए हैं।

प्रश्न 11.
आज देश को किस बात की सबसे अधिक आवश्यकता है ?
उत्तर :
आज देश के पूर्ण एकीकरण करने की सबसे अधिक आवश्यकता है।

प्रश्न 12.
लंदन टाइम्स ने पटेल जी के बारे में क्या कहा ?
उत्तर :
“यह सरदार पटेल की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जिसकी तुलना अधिक नहीं तो कम से कम बिस्मार्क से की जा सकती है।”

प्रश्न 13.
हमारा देश निरंतर कैसे प्रगति करेगा ?
उत्तर :
यदि हम सरदार वल्लभ भाई पटेल के गुणों को याद रखें तो देश निरंतर प्रगति करेगा।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
राज्यों के एकीकरण के लिए पटेल ने क्या किया?
उत्तर :
राज्यों के एकीकरण के लिए पटेल स्वतंत्रता की प्राप्ति के तत्काल बाद दो वर्षो में अपनी सूझबूझ और लोगों को समझाने की शक्ति से 500 छोटे-छोटे राज्यों को भारत के संघ में मिला दिया। यह प्राशसनिक एकता भारत के निर्माण के लिए आवश्यक आधार है।

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प्रश्न 2.
एक प्रशासक के रूप में पटेल के कार्यों का परिचय दीजिए।
उत्तर :
प्रशासक रूप में जब गुजरात में बाढ़ आई, पटेलजी ने बारदौली आन्दोलन संगठित किया। उन्होंने उन सभी क्षेत्रों में जहाँ-जहाँ कार्य किया अपनी संगठन क्षमता दिखलाई। वे अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे और उन्होंने उसे आधुनिक बनाया।

प्रश्न 3.
सरदार पटेल के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सरदार पटेल ने सदा अनुशासन में कार्यं किया। राष्ट्र के हितों को अपने हितों से ऊपर रखा। वे बहुत कम बोलते थे। उनमें स्पष्टवादिता, दृढ़ता और दूरदर्शिता थी। किसानों के हित में उनकी गहरी रचि थी। वे साहसी, देशभक्त तथा कुशल प्रशासक थे। उनमें समझाने की अपनी शक्ति, राजनयिक दक्षता तथा राजनैतिक चातुर्य था। उनमें कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, आज्ञापालन, साहस तथा अपने प्राण उत्सर्ग करने की तत्परता थी। उनमें जनसेवा और त्याग की भावना थी।

प्रश्न 4.
एक राजनेता के रूप में पटेल के महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पटेल के कार्य का सबसे महत्वपूर्ण भाग राजनेता के रूप में था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होने अपनी सूझबूझ और लोगों को समझाने की शक्ति से 500 छोटे-छोटे राज्यों को भारतीय संघ में मिला दिया। वे भरतीय एकता के संस्थापक थे। वे देश में प्रशासनिक एकता लाने में सफल हुए। यह कार्य भारत के निर्माण के लिए आवश्यक था। अपनी राजनैतिक दक्षता से वे पशासनिक एकता लाने में सफल हुए। यह एकीकरण आज भी हमारा उद्देश्य है। पटेल की यह उपलब्चि ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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प्रश्न 5.
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

(क) यह वह कार्य है जो आज भी किया जाना शेष है।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पंक्ति के लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्स्तुत पंक्ति के लेखक का नाम डा॰ राधाकृष्णन है।

प्रश्न 2.
कौन-सा कार्य किया जाना शेष है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
सरदार पटेल ने महात्मा गाँधी के नेतृत्व में जो आन्दोलन चलाया वे संबंधित स्थानीय लोगों को एकत्र करने के उद्देश्य से चलाए जाते थे ताकि वे संगठित हो सके और उनका उद्देश्य एक हो सके, जिससे वे जाति और संपदाय के मतभेदों को भुलाकर एक होकर कार्य करें। यही कार्य है जो आज भी किया जाना शेष है।

(ख) ‘यह एक ऐसा एकीकरण है जो आज भी हमारा उद्देश्य है।’

प्रश्न 1.
यह पंक्ति किस पाठ से उद्दृत है?
उत्तर :
यह पंक्ति सरदार वल्लभ भाई पटेल पाठ से उद्धूत है।

प्रश्न 2.
एकीकरण का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
एकीकरण का तात्वर्य है भारत के सभी राज्यों को एक में मिलाकर भारतीय संघ में सम्मिलित करना। पटेल ने 500 राज्यों का एकीकरण कर उन्हें भारतीय संघ में सम्मिलित किया।

प्रश्न 3.
हमारा उद्देश्य क्या है ? उद्देश्य कैसे पूर्ण होगा?
उत्तर :
हमारा उद्देश्य है कि राज्यों का जो एकीकरण सरदार पटेल ने आरंभ क्रिया था वह तब तक जारी रहना चाहिए जब तक हम सब अनुभव न करें कि हम एक राष्ट्र हैं। सार्वजनिक जीवन में जाति या धर्म को नहीं आने देना चाहिए। देश की हित के लिए समझना चाहिए कि हम सब भारतीय हैं।

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(ग) ‘वह हमारी हार्दिक आशा है कि देश को इस प्रकार की दिशा मिले।’

प्रश्न 1.
यह किसका कथन है?
उत्तर :
यह कथन डॉ॰ राधाकृष्णन का है।

प्रश्न 2.
वक्ता देश को कैसी दिशा मिलने की आशा प्रकट करता है?
उत्तर :
भारत के लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना और अपने देश के युवक-युवतियों को सही दृष्टिकोण प्रदान करना साथ ही अपने पड़ोसियों से गहरा संबंध बनाना वक्ता का उद्देश्य है और इसी प्रकार की दिशा मिलने की आशा वह प्रकट करता है।

भाषा-बोध

1. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग एवं मूल शब्द पृथक् कीजिए :

  • अनुशासित — अनु + शासित
  • सबल — स + बल
  • अपव्यय — अप + व्यय
  • सुनिश्चित — सु + निश्चित

2. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय पृथक कीजिए :

  • क्रांतिकारी — क्रांति + कारी
  • साम्पदायिक — सम्पद्राय + इक
  • आध्यात्मिक — आध्यात्म + इक
  • मानसिक — मन (मानस) + इक
  • इच्छाओं — इच्छा + ओं

3. विलोम शब्द लिखिए :

  • भिन्न – अभिन्न
  • अनुकूल – प्रतिकूल
  • एकता- अनेकता
  • धर्म – अधर्म
  • उत्थान – पतन
  • नैतिक-अनैतिक

WBBSE Class 7 Hindi सरदार वल्लभभाई पटेल Summary

जीवन-परिचाय

डॉ० राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 ई० को तिरुत्तणी (तमिलनाडु) नामक स्थान में हुआ था। आप 21 वर्ष की आयु में चेन्नई के प्रेसीडेन्सी कालेज में अध्यापक नियुक्त हुए थे। आपने कलकत्ता विश्वविद्यालय में भी दर्शन साहित्य का अध्यापन किया था। आप उच्चकोटि के चिन्तक, विचारक एवं लेखक थे। ‘द हिन्दू व्यू ऑफ’, ‘कल्की,’ गौतम दी बुद्ध’, ‘पूर्वी एवं पश्चिमी विचार’ आदि आपकी प्रसिद्ध पुस्तके हैं। आप महान शिक्षाविद एवं राष्ट्र नेता थे। आपको देशरत्न की उपाधि से विभूषित किया गया। आपका निधन चेन्नई में 17 अप्रैल 1975 ई० में हुआ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल

पाठ का सारांश :

सरदार पटेल स्वतंत्रता के निर्माताओं में से एक थे। प्रस्तुत लेख में डॉ० राधा कृष्णन ने उनके व्यक्तित्त्व एवं कृतित्त्व का सटीक चित्रांकन किया है। पटेल के जीवन को हम तीन भागों में देख सकते हैं। एक क्रांतिकारी, एक राजनेता और एक प्रशासक। स्वतंत्रता से पूर्व वे एक अनुशासित सिपाही थे जो अपने नेता महात्मा गाँधी के आदेश का पालन करते थे। जो भी कार्य उन्होंने किया महात्मा गाँधी की इच्छाओं के अनुकूल किया। बोरसद, बारदोली और स्वतंग्रता की अनेक लड़ाइयों में उन्होंने अपने को सबसे आगे रखा। वे बहुत कम बोलते थे, उनमें स्पष्टवादिता, दृढ़ता और दूरदर्शिता थी, वे कृषक परिवार के थे और उन्होंने किसानों के हितों में गहरी रुचि ली।

उनके कार्य का सबसे महत्वपूर्ण भाग राजनेता के रूप में था। स्वतंत्रता की प्राप्ति के तत्काल बाद दो वर्षों में उन्होंने अपनी सूझबूझ और लोगों को समझाने की शक्ति से 500 छोटे-छोटे राज्यों को भारतीय संघ में मिला दिया।

जैसा कि प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था- पटेल भारतीय एकता के संस्थापक थे। समझाने की अपनी शक्ति, राजनयिक दक्षता और राजनैतिक चातुर्य से वह देश में प्रशासनिक एकता लाने में सफल हुए। जो सबल भारत के निर्माण के लिए आवश्यक आधार है। देश के विभिन्न भागों को देखिए – जहाँ साम्पदायिक भेदभाव और जातिगत तीव घृणा अब भी हमारे सार्वजनिक जीवन पर छाई हुई है। सबसे पहले और सबसे ऊपर हमें अपने को भारतीय मानना चाहिए।

सरदार पटेल की उपलब्धि के बारे में लंदन के एक दैनिक की टिप्पणी याद आती है- ‘.यह सरदार पटेल की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जिसकी तुलना अधिक नहीं तो कम से कम बिस्मार्क से की जा सकती है, जब उनकी मृत्यु हुई तो लंदन टाइम्स ने यही उनके बारे में कहा।

वे एक साहसी देशभक्त और प्रशासन में महान सूझूूझ वाले व्यक्ति थे, मुझे याद है कि उस समय हमारे तीन महान नेता तीन विभिन्न नगरपालिकाओं के एक ही समय में अध्यक्ष थे। राजेन्द्र बाबू पटना नगरपालिका के अध्यक्ष थे। हमारे प्रधानमंत्री इलाहाबाद नगरपालिका के और सरदार पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे। इनका कहना था कि हमें अपने मतभेदों को भुलाकर, देश में पूर्ण संगठन और एकता लानी होगी। हमें अपने सामने मानवता के जीवन अंश के रूप में महान भारत के विचार को रखना होगा।

प्रशासक के रूप में जब गुजरात में बाढ़ आयी, उन्होंने बारदौली आंदोलन संगठित किया। उन्होंने उन सभी क्षेत्रों में जहाँ-जहाँ कार्य किया, अपनी संगठन क्षमता दिखलाई । वे अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे और उन्होंने उसे आधुनिकतम बनाया। जब तक हम गरीबी के राक्षस को, जो अंतत: जातिगत और संपदायगत मतभेदों के कारण नहीं मिटाते और जब तक हम भूख, बेरोजगारी और बीमारी को नहीं कम कर पाते, तब तक अपने लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा नहीं उठा पायेंगे।

सरदार पटेल का जीवन हमें आधुनिक भारत के महान निर्माताओं के आत्मत्याग की याद दिलाता है। उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, आज्ञापालन, उनका साहस और अपने प्राण उत्सर्ग करने और कुछ उनके गुण हैं , जिनको आदर्श मानकर हमें सीखना चाहिए स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के दिनों में वे महात्मा गाँधी के विश्वसनीय लेफ्टिनेंट थे। गाँधीजी का प्रत्येक शब्द उनके लिए कानून था और उनके मार्ग दर्शन में उन्होंने बोरसद और बारदौली में सिविल असहयोग आन्दोलन चलाया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 सरदार वल्लभभाई पटेल

महाराजा ग्वालियर ने जो उनके पुनर्गठन के निर्णय से प्रभावित हुए थे – स्वयं सरदार पटेल की दूरदर्शिता और कार्य की सराहना की थी। वे क्रोधित होते थे लेकिन उन्होंने शायद ही कभी अपना मानसिक संतुलन खोया हो। वे दंभी नंहीं थे। उनमें अतीत से अटूट लगाव था। जीवन को अतीत के परिवेश में समझना चाहिए और भविष्य की ओर जीना चाहिए। हमें अतीत से चिपके नहीं रहना चाहिए। राजनीति में और जीवन में भी हमें अतीत को लेकर दु:खी नहीं होना चाहिए।

आवश्यक यह है कि आदर्शों से हम जुड़े रहें और क्रांति के मूल सिद्धांतों को न छोड़ें।
अनुशासित आज्ञाकारिता के माध्यम से सरदार पटेल ने स्वतंत्रता का उदाहरण सामने रखा।
सरदार पटेल के रूप में हमारे पास एक साहसी क्रांतिकारी, विद्वान, राजनेता और आदर्श प्रशासक था। यदि हम सरदार वल्लभ भाई पटेल के इन गुणों को याद रखें तो देश निरतंतर प्रगति करेगा। मुझे आशा है कि उनके ये गुण हमें भविष्य में प्रेरणा देते रहेंगे।

शब्दार्थ :

  • उत्थान – उन्नति
  • उपलब्धि – प्राप्ति
  • प्रगति – उत्थान, विकास
  • आर्थिक – धन संबंधी
  • तबाही – बरबादी, नाश
  • धुरी – मुख्य, प्रधान
  • प्रेरणा – चेष्टा, सक्रियता
  • सामान्यत: – साधारण तौर पर
  • दृष्टिकोण – विचार, नजरिया
  • कृषक – किसान
  • दक्षता – कुशलता
  • अपनत्व – अपनापन
  • सराहना – प्रशंसा
  • निरतर – लगातार, सदा

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 आदर्श विद्यार्थी

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – आदर्श विद्यार्थी

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लेखक किस दिन खिलौने खरीदने बाजार पहुँचा?
(क) होली
(ख) दीपावली
(ग) दशहरा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) दीपावली

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प्रश्न 2.
लेखक को किस बात पर आश्चर्य हुआ?
(क) नवयुवक के साहस पर
(ख) बाजार में खिलौने की बड़ी-बड़ी दुकानें देखकर
(ग) नवयुवक के हाथों में साधारण आकार की डालिया देखकर
(घ) इनमें से काई नहीं
उत्तर :
(क) नवयुवक के साहस पर

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लेखक नवयुवक को देखकर क्यों महसूस करता है कि यह साधारण व्यक्ति नहीं है।
उत्तर :
नवयुवक की आकृति तथा बातचीत से लेखक को पता चला कि यह साधारण व्यक्ति नहीं है। वह पढ़ा-लिखा तथा सूरत-शक्ल से अन्छे खानदान का जान पड़ता है। किसी असाधारण विपत्ति में पड़ने से इसे यह व्यवसाय करना पड़ा है।

प्रश्न 2.
नवयुवक ने लेखक को जो राम कहानी सुनाई उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर कहानी के सारांश के अन्तिम अनुच्छेद में देखिए।

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प्रश्न 3.
आदर्श विद्यार्थी के किन्हीं दो चारित्रिक गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
आदर्श विद्यार्थी में अद्भुत साहस तथा घैर्यं था। पिता की मृत्यु एक नवयुवक के जीवन की सबसे दुःखद एवं चिन्ताकारक स्थिति होती है। नवयुवक परिवार के एकमात्र सहारे की मृत्यु हो जाने पर भी धैर्य नहीं छोड़ता है। धैर्य पूर्वक अपने खाने-पीने के लिए खिलौने बेचने का धंधा करने लगता है । ईमानदारी से धनोपार्जन करने को वह बुरा नहीं मानता। वह परिश्रमी तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए अडिग रहने वाला साहसी युवक है। परिश्रम, धैर्य, साहस व लगन से वह अपने लब्य्य सिद्धि में सफल हो जाता है। वस्तुत: वह एक आदर्श विद्यार्थी से एक आदर्श अध्यापक बन जाता है।

प्रश्न 4.
‘आदर्श विद्यार्थी’ कहानी के उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में लेखक ने सष्ट किया है कि जीवन में घेर्य, परिश्रम, साहस तथा लगन से व्यक्ति अपने किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। एक नवयुवक के माध्यम से लेखक इसे सिद्ध किया है कि पिता की मौत हो जाने पर एवं आय के साधन समाप्त हो जाने पर भी वह निराश नहीं होता, साहस नहीं छोड़ता। वह खिलौना बेचकर कुछ अर्जित कर अपने लक्ष्य पर पहुँच जाता है। बी०ए० पास कर अध्यापक का पद पा लेता है। इस प्रकार लेखक ने यह संदेश दिया है कि ईमानदारी से धनोपार्जन में कोई शर्म नहीं है। यदि धैर्य तथा लगन हो तो व्यक्ति किसी भी मुसीबत को पार कर लक्ष्य पर पहुँचता है। यही बताना लेखक का उद्देश्य है।

व्याख्या मूलक प्रश्न

(क) मैने सोचा यह बड़ा विचित्र आदमी है।

प्रश्न 1.
किसने किसके विषय में सोचा?
उत्तर :
लेखक ने नवयुवक के विषय में सोचा।

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प्रश्न 2.
वक्ता को संकेतित व्यक्ति विचित्र क्यों प्रतीत हुआ?
उत्तर :
लेखक ने नवयुवक की आर्यिक दशा को सुधारने के लिए नौकरी करने का प्रस्ताव रखा। फिर यह भी कहा कि यदि उसे नौकरी मिलने में कठिनाई हो तो वे उसके विषय में चेष्टा कर सकते हैं। पर नवयुवक ने कहा कि अभी उसे नौकरी नहीं करनी है। जब आवश्यकता होगी तब उनसे कहेगा। लेखक ने सोचा कि नौकरी नहीं करना चाहता, इस खिलौने से इसे क्या मिलता होगा। इसी कारण लेखक को वह नवयुवक विचित्र प्रतीत हुआ।

(ख) ‘इसलिए मुझे चिन्ता हुई।’

प्रश्न 1.
यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत है? इसके लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
यह पंक्ति ‘आदर्श विद्यार्थी’ पाठ से उद्धत है। इसके लेखक का नाम श्री विश्वम्भर नाथ शर्मा ‘कौशिक’ है।

प्रश्न 2.
वक्ता को किसके लिए चिन्ता हुई?
उत्तर :
वक्ता नवयुवक ने सोचा कि वह बी०ए० अवश्य पास करेगा, चाहे इसके लिए उसे भीख ही क्यों न माँगनी पड़े। उसने चेष्टा करके अपनी फीस माफ करवा ली, परन्तु खाने-पीने के लिए कुछ मासिक आय की आवश्यकता थी। इसलिए वक्ता को चिन्ता हुई।

(ग) ‘भाई ईमानदारी से पैसा कमाने में कुछ शर्म नहीं है।’

प्रश्न 1.
यह किसने किससे कहा?
उत्तर :
यह नवयुवक ने कालेज के कुछ लड़कों से कहा।

प्रश्न 2.
इस पंक्ति का आशय अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस पंक्ति में यह सषष्ट किया गया है कि पैसा कमाने के लिए ईमानदारी से जो काम किया जाता है उसमें लज्जा की कोई बात नहीं है। ईमानदारी तथा परिश्रम से किया गया कोई काम बुरा नहीं होता। कोई भी काम करने से कोई छोटा नहीं हो जाता है। खिलौने बेच कर अपना मासिक खर्च चलाना न बुरा और न शर्म की बात है। यह कदम तो प्रशंसनीय है।

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1. उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए :

  • आसाधारण – अ + साधारण
  • विवश – वि + वश
  • सदुपयोग – सत् + उपयोग
  • सुअवसर – सु + अवसर
  • अनपढ़़ – अन + पढ़

2. प्रत्यय पृथक् कीजिए :

  • आवश्यकता – आवश्यक + ता
  • जीवित – जीव + इत
  • कठिनाई – कठिन + आई
  • व्यापारिक-व्यापार + इक
  • उत्सुकता-उत्सुक + ता

3. विलोम शब्द लिखिए :

  • अधीर – धीर
  • अशिक्षित – शिक्षित
  • नित्य – अनित्य
  • जीवित-मृत

4. शब्द का प्रयोग वाक्यों में करें :

  • धन्धा – हर व्यक्ति को कोई न कोई धन्धा करना चाहिए।
  • व्यवसाय- आजकल व्यवसाय की ओर लोगों का झुकाव है।
  • विचित्र – इस आदमी का व्यवहार विचित्र लगता है।
  • धनोपार्जन- ईमानदारी से धनोपार्जन करना उचित है।
  • निरुत्तर – नवयुवक की बात सुनकर लेखक निरुत्तर हो गया।

WBBSE Class 7 Hindi आदर्श विद्यार्थी Summary

जीवन्-परिचय

कौशिक का जन्म सन् 1891 ई० में अम्बाला छावनी में हुआ था। ये गौड़ ब्राह्मण थे। वे प्रेमचन्द के समकालीन थे। हिन्दी साहित्य में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। सन् 1947 ई० में इनका देहावसान हो गया। इनकी पहली कहानी रक्षा बंधन सन् 1912 ई० में सरस्वती पत्रिका में छपी। इन्होंने व्यंग्यात्मक साहित्य की भी रचना की।

इनकी भाषा सहज, सरल तथा व्यावहारिक है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कहानी संग्रह, चित्रशाला, गल्पमंदिर, कल्लोल, मणिमाला, मिलन मंदिर, प्रेम प्रतिमा हैं। ‘माँ’ और ‘भिखारी’ इनके मुख्य उपन्यास हैं। इनकी व्यंग्यात्मक रचना ‘दुबे जी की चिट्ठी हैं। कौशिक जी द्विवेदी युग के यशस्वी कथाकार माने जाते हैं।

कहानी का सारांश 

दीपावली का दिन था। लेखक कुछ खिलौने खरीदकर नौकर को दे उसे घर भेज दिया। आगे बढ़कर उसने देखा कि एक नवयुवक खिलौने बेच रहा था। उसके हाथ की डालिया में पन्द्रह-बीस खिलौने थे।’बाबू जी! खिलौने लीजिए, खिलौने’ उसके इस स्वर को सुनकर लेखक ने उसे देखा। खिलौने की बड़ी-बड़ी दुकानों के बावजूद वह साहसी युवक पन्द्रह- बीस खिलौने लेकर बाजार में पहुँचा था। लेखक को खिलौने की आवश्यकता नहीं थी।

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इसलिए मुस्कराकर आगे बढ़ गया। दो-तीन दिन पश्चात् लेखक पुन: चौंक गया। उसी नवयुवक का स्वर बाबूजी खिलौने लीजिएगा – खिलौने फिर सुनाई पड़ा। लेखक ने उससे पूछा कि वह यह धन्धा क्यों करता है। नवयुवक ने अपना संक्षिप्त परिचय भी बतलाया कि वह अभी यही काम करता है। उसके पिता नहीं हैं केवल माता है। यहाँ अकेले किसी परिचित के यहाँ रहता है। उस नवयुवक की आकृति तथा बात-चीत से लेखक को पता चला कि वह साधारण व्यक्ति नहीं है। वह अच्छे खानदान का पढ़ा-लिखा व्यक्ति मालूम पड़ता है। किसी विपत्ति के कारण यह धंधा कर रहा है। लेखक ने उसे अपने मकान का पता बता कर कहा कि घर आने पर कुछ खिलौने ले लिया करूँगा।

एक सप्ताह पश्चात् वह नवयुवक लेखक के मकान पर खिलौने लिये पहुँचा। तीन-चार खिलौने खरीदकर लेखक ने उससे कहा कि इस धंधे से अच्छा है कि कोई नौकरी कर लो। मैं तुम्हारे लिए नौकरी के लिए चेष्टा कर सकता हूँ। पर उसने कहा कि जरूरत होने पर आपसे कहूँगा। लेखक को उसकी बात पर आश्चर्य हुआ कि अभी वह नौकरी क्यों नहीं करना चाहता है। इस प्रकार कभी-कभी वह खिलौने लेकर लेखक के पास आया करता था।

एक दिन वह लेखक के पास आया। उसके पास केवल तीन खिलौने थे । लेखक ने एक-एक खिलौने तीन बच्चों को दे दिए। लेखक के आग्रह करने पर भी वह इस बार खिलौनों के पैसे नहीं लिए। उसने कहा कि इन बच्चों की बदौलत उसे बहुत कुछ मिल चुका है, और मिलता रहेगा। लेखक के द्वारा नौकरी का प्रस्ताव करने पर भी उसका वही उत्तर था कि अभी नौकरी नहीं करनी है।

कुछ दिन के बाद वह एक गठरी में कागज, पेन्सिल, कलम, निब, दवात तथा होल्डर आदि लेकर आया। उसकी सोच थी कि ऐसी चीजें रखनी चाहिए जिससे ग्राहकों के पैसे का सदुपयोग हो। लेखक ने आवश्यकतानुसार सामान खरीद लिए। फिर आवश्यक किताबें भी उससे मँगाने लगे। छ: सात महीने तक यह क्रम चला। फिर उसका आना बन्द हो गया। लेखक ने सोचा कि शायद वह बीमार हो गया हो, अथवा अपने घर चला गया होगा।

जुलाई का महीना था, लेखक अपने पुत्र को स्कूल में भर्ती करने के लिए ले गया। प्रधानाध्यापक ने आवश्यक कार्यं करने के बाद भी लड़के को कक्षा में जाने के लिए कहा। लेखक लड़के को लेकर कक्षा में गए। कक्षाध्यापक ने उन्हें देखकर मुस्कराकर कहा आइए।लेखक उसी खिलौने वाले को यहाँ अध्यापक के रूप में देखकर चकित हो गए। नवयुवक ने बतलाया कि वह परसों यहाँ अध्यापक होकर आया है। आज शाम को वह उनकी सेवा में उर्पस्थित होने वाला था। शाम को लेखक के घर आकर अपनी राम कहानी सुनाई।

नवयुवक की राम कहानी – वह एक साधारण स्थिति के पिता का पुत्र था। पिता बैंक में सत्तर रुपये मासिक वेतन पर नौकर थे। उस समय वह कालेज में बी०ए० के अन्तिम वर्ष में पढ़ रहा था। उसी समय पिता की मृत्यु हो गई। पर मैने निश्चय किया कि बी०ए० अवश्य पास करूंगा। चाहे भीख ही माँगनी पड़े। फीस तो मैंने माफ करवा ली, पर खाने-पीने की चिन्ता थी। दशहरे का दिन था। उसने देखा कि कुछ खिलौने वाले कागज के खिलौने लिए मेले में जा रहे हैं। सोचा कि ये अशिक्षित लोग यही धंधा कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। मुझे भी ऐसा ही कोई काम करना चाहिए।

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उसने उसी समय एक मित्र से दस रुपये उधार लिए और बाजार से दस रुपये के खिलौने ले डलिया में रखकर सीधे मेले में पहुँच गया। शाम तक सारे खिलौने बिक गए। उसे दो रुपये मुनाफे के मिले। उसने कहा कि ईमानदारी से पैसा कमाने में कोई शर्म नहीं है। नित्य शाम को दो घंटे के लिए खिलौने लेकर निकलता था। इस प्रकार उसने बी०ए० पास किया। मेरी लगन से प्रसन्न होकर प्रिन्सिपल साहब ने खर्च देकर ट्रेनिंग कालेज भेजा। वहाँ मैने बी०एड० पास किया। अब यहाँ सौ रुपये मासिक पर अध्यापक होकर आया हूँ। यही मेरी राम कहानी है। उसकी कहानी सुनकर लेखक दंग रह गया। उसके चरण छूकर उन्हें धन्यवाद दिया। लेखक ने कहा कि आप जैसे बुद्धिमान ही ऐसा कर सकते हैं।

शब्दार्थ :

  • आश्चर्य – अचरज, विस्मय
  • पश्चात् – बाद
  • नवयुवक – नव जवान
  • धन्धा – व्यवसाय
  • धनोपार्जन – धन कामना
  • आँखें चार होना – आमना-सामना होगा
  • लालसापूर्ण – कामना से पूर्ण
  • परिचित – जान पहचान का
  • भ्रम – सन्देह
  • नित्य – हमेशा, सदा
  • ग्राहक – खरीददार
  • अकस्मात – अचानक
  • राम कहानी – दु:ख भरी कहानी
  • खानदान – वंश कुल।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – कोई चिराग नहीं हैं

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इस पाठ के कवि कौन हैं ?
(क) साबीर अली
(ख) बशीर बद्र
(ग) जाबीर बद्र
(घ) कैफी आजमी
उत्तर :
(ख) बशीर बद्र

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प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता का छंद है –
(क) दोहा
(ख) चौपाई
(ग) गज़ल
(घ) रुबाई
उत्तर :
(ग) गज़ल

प्रश्न 3.
क्या नहीं हैं मगर उजाला है ?
(क) चन्दा
(ख) चिराग
(ग) फूल
(घ) सुरज
उत्तर :
(ख) चिराग

प्रश्न 4.
गजल की शाख पे क्या खिलने वाला है ?
(क) बेली
(ख) भँवरा
(ग) फूल
(घ) पत्ती
उत्तर :
(ग) फूल

प्रश्न 5.
‘कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है’ किसकी रचना है ?
(क) साबीर अली
(ख) बशीर बद्र
(ग) जाबीर बद्र
(घ) कौफी आजमी
उत्तर :
(ख) बशीर बद्र

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प्रश्न 6.
बशीर बद्र का जन्म कब हुआ था ?
(क) 18 फरवरी 1930 ई०
(ख) 15 फरवरी 1932 ई०
(ग) 15 फरवरी 1934 ई०
(घ) 15 फरवरी 1936 ई०
उत्तर :
(घ) 15 फरवरी 1936 ई०

प्रश्न 7.
बशीर बद्र का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) कानपुर
(ख) नागपुर
(ग) मेरठ
(घ) इलाहाबाद
उत्तर :
(क) कानपुर

प्रश्न 8.
बरसात का दुशाला कहाँ है ?
(क) नदी में
(ख) पहाड़ पर
(ग) समुद्र में
(घ) पठार पर
उत्तर :
(ख) पहाड़ पर

प्रश्न 9.
मस्जिद से निकलकर बच्चे ने कहाँ फूल डाला है ?
(क) जली मूरत पर
(ख) लाश पर
(ग) मजार पर
(घ) कहीं पर नहीं
उत्तर :
(क) जली मूरत पर

प्रश्न 10.
अजीब लहजा है दुश्मन की …………. का –
(क) बहादुरी का
(ख) तलवार का
(ग) मुस्कुराहट का
(घ) विचार का
उत्तर :
(ग) मुस्कुराहट का

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प्रश्न 11.
दुशाला का अर्थ है –
(क) चादर
(ख) पट्टा
(ग) शर्ट
(घ) दुपट्टा
उत्तर :
(क) चादर

प्रश्न 12.
तमाम वादियों में सेहरा में क्या रोशन हैं ?
(क) खुशियां
(ख) खुशबू
(ग) आग
(घ) दीपक
उत्तर :
(ग) आग

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने दुश्मन के किस लहजे को अजीब कहा है और क्यों?
उत्तर :
कवि ने दुश्मन की मुस्कराहट के लहजे को अजीब कहा है क्योंकि दुश्मन अपने उस लहजे से कभी उसे पतन की और ढकेलता है, कभी संभालता है। दुश्मन की परिवर्तित विचारधारा को कवि अजीब मानता है।

प्रश्न 2.
गज़ल की शाख का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इसका आशय यह है कि कवि की कविता की हर पंक्ति में फूल खिला है। अर्थात् हर पंक्ति में विचारो भावों की खुशबू है।

प्रश्न 3.
‘फसाद में जली मूरत पे हार डाला है’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर :
कवि का कथन है कि दंगों में निर्दोष लोग जलाए जाते है, लोगों को बेसहारा बना दिया जाता है। निर्दोष ही प्रभावित होते हैं। अबोध बालक इन दंगों या अग्नि कांड से अपरिचित है। उस निरीह मासूम बच्चे को क्या पता कि इस आदमी को क्यों जलाया गया। कवि ने दंगों के अमानवीय पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

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प्रश्न 4.
बेलिवास का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बेलिवास का अर्थ है बिना लिवास के, बिना परिधान या अच्छादन के यहाँ बेलिवास पत्थर का जिक्र है। पत्थर बिल्कुल नग्न अर्थात् आच्छादन रहित है। भाव यह है कि दंगों के कारण समाज बेपर्द हो जाता है।

प्रश्न 5.
बशीर बद्र का वास्तविक नाम क्या है ?
उत्तर :
बशीर बद्र का वास्तविक नाम सैयद मोहम्मद बशीर है।

प्रश्न 6.
बशीर बद्र को पद्मश्री पुरस्कार कब मिला ?
उत्तर :
बशीर बद्र को पद्मश्री पुरस्कार 1999 ई० में मिला।

प्रश्न 7.
‘बेंलिवास’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘बेलिवास’ का तात्पर्य नग्न या वस्व विहीन है।

प्रश्न 8.
कवि को कैसे मौसमों ने पाला है ?
उत्तर :
कवि को खिजाँ अर्धात् पतझड़ वाले मौसमों ने पाला है। स्सष्ट है कि कवि विपरीत परिस्थितियों के मध्य पले हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) इस कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए :
उत्तर :
प्रस्तुत काव्यांश में सुप्रसिद्ध शायर बशीर बद्र ने गजल या कविता के महत्व को स्पष्ट करते हुए बतलाया है कि सत्य स्थिर नहीं रहता, उसका मापदंड समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार बदलतर है। बिना दीपक के ही गजल के विचार प्रकाश फैलाते है। गजल के विचार डाली पर खिले फूल की भांति चारों ओर अपनी खुशबू बिखेरते हैं। कविता मन की संकीर्णता तथा अझ्ञान-अंधकार को दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाती है। प्रकृति के क्रियाकलाप अद्भुत हैं।

पहाड़ के प्रस्तर खंड पर कहीं कठोर भूप पड़ती है कहीं वर्षा की चादर बिक्छ-बिछ जाती है। इसलिए समय, दशा और परिस्थिति के अनुसार व्यक्ति को कद्टरपन छोड़कर उदार होना चाहिए। शत्रु की मुस्कान विचित्र होती है। उसकी मुस्कराहट कभी पतन की और ले जाती है तो कभी पतन से संभाल भी लेती है।

उसकी मुस्कान कभी चिढ़ाने के लिए होती है, कभी हददय को खुशियों से भर देती है। कवि ने मंदिर-मस्जिद को लेकर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले, साम्पदायिक हिंसा को प्रश्रय देने वालों को निंदनीय बतलाया है। कुछ समाज विरोधी लोग ही हिंसा और उपद्रव करते हैं। दंगे के कारण एक निर्दोष बालक मस्जिद में पनाह लेता है। उपद्रव के शान्त हो जाने पर बाहर जली हुई एक मूर्ति के गले में फूलों की माला पहना देता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

अत: मन्दिर -मस्जिद को लेकर धार्मिक हिंसा निंदनीय है क्योंकि कोई भी मजहब शत्रुता की शिक्षा नहीं देता। अन्तिम गजल में कवि ने बतलाया की प्रतिकूल परिस्थिति तथा वातावरण में उसका जीवन अग्रसर हुआ है। कवि का जीवन वसन्त में नहीं पतझड़ में बीता है। विषम परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए कवि ने अपने जीवन का निर्माण किया है । संघर्षो में आगे बढ़ना ही सच्चा जीवन दर्शन है।

(ख) ‘कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है’ – कवि ऐसा क्यों कहता है? इसका प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी दीपक के चारों ओर रोशनी फैली हुई है। दीपक का उजाला वहाँ फैलता है जहाँ अंधकार रहता है, परतु जहाँ प्रकाश है वहाँ तो दीपक की रोशनी के बिना उजाला रहता है। कवि अपनी कविता की पंक्तियों में फूल की महक की बात कह कर यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि जाँँ पविश्र भाव हो, संकीर्णता नही हो, वहाँ मानवता का प्रकाश स्वत: बिना दीपक के प्रकाशमान बना रहता है।

(ग) निम्नलिखित पंक्तियों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए –

प्रश्न  1.
निकल के पास की मस्जिद से एक बच्चे ने
फसाद में जली मूरत पै हार डाला है।
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘कोई चिराग नहीं मगर उजाला है’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि बशीर बद्र हैं। इस अंश में कवि ने दंगों की भयंकरता का वर्णन किया है। दंगा-फसाद असामाजिक तत्वों द्वारा किया जाता है। परंतु इसमें निरीहनिर्दोष लोगों को जान गँवानी पड़ती है। मस्जिद में लोगों को पनाह लेनी पड़ती है। ऐसे ही एक दंगे की ओर कवि ने संकेत किया है। दंगे की आग में जल जाने से किसी का शरीर बाहर पड़ा हुआ है। पास की मस्जिद से निकलकर एक बच्या उस पर फूलों की माला डाल कर सम्मान करता है।

प्रश्न  2.
तमाम वादियों से सेहरा में आग रोशन है,
मुझे खिजाँ के इन्हीं मौसमों ने पाला है।
इस पंक्ति की भावार्थ सहित व्याख्या करें।
उत्तर :
सभी घटियों में, तटों पर, बस्तियों में आग प्रदीप्त हो रही है। बड़े-बड़े लोगों पर भी इसका प्रभाव है। इन्हीं वीरान स्थितियों में इन्हीं मुरझाए वातवरण ने कवि का पालन किया है। कवि कह रहा है कि ऐसे पतझड़ के मौसम में ही उसका जीवन बीत रहा है। प्रतिभाशाली व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल बना लेता है।

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प्रश्न 3.
गजब की धूप है इक बेलिवास पत्थर पर
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।
इस पंक्ति की संदर्भ सहित व्याख्या करें।
उत्तर :
कवि स्पष्ट कर रहा है कि इन नंगे पत्थरों पर विचित्र धूप पड़ रही है। पहाड़ पर बरसात की चादर बिछी हुई है। कहीं नग्न स्थिति है। कहीं परिषान, कोई बेपर्द है तो कहीं आवरण से नग्नता ढुकी हुई है।

भाषा-बोध

(क) पाठ में आए निम्नलिखित उर्दू के शब्दों का हिन्दी रूप लिखिए।

  • रोशन- प्रकाशमान
  • वादियों- घाटियों
  • खिजां- पतझड़
  • फसाद – उपद्रव
  • शाख-टहनी

(ख) वाक्य प्रयोग

  • मस्जिद – मस्जिद मुसलमानों का प्रार्थना स्थल है।
  • मुस्कराहट – बच्चे के चेहरे पर स्वच्छ मुस्कुराहट है।
  • दुशाला – कश्मीर का ऊनी दुशाला प्रसिद्ध है।
  • चिराग – चिराग के नीचे अंधेरा होता है।
  • अजीब-यह बालक अजीब स्वभाव का है।

(ग) विलोम शब्द :

  • धूप – छाया
  • बेलिवास – लिवास
  • दुश्मन – मित्र
  • आग-पानी
  • फसाद – शान्ति

(घ) दुश् उपसर्ग के तीन शब्द बनाओ।
दुश्- दुश्चरित्र, दुश्मन, दुष्कर्म, दुस्साहस

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर यथा निर्देश लिखिए-

1. अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कराहट का कभी गिराया है, मुझको कभी सँभाला है।
(क) प्रस्सुत पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उदधृत है ?
(ख) ‘अजीब लहजा’ से क्या तात्र्य है?
(ग) कवि दुश्मन की मुस्कराहट को अजीब क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ बशीर बद्र रचित ‘कोई चिराग नहीं मगर उजाला है’ शीर्षक कविता से उद्धृत हैं।
(ख) यहाँ ‘अजीब लहजा’ का तात्पर्य शत्रु के विचित्र ढंग या तरीके से है।
(ग) कवि ने बतलाया है कि दुश्मन की चाल, उसका ढंग बड़ा ही निराला है। उसकी मुर्कराहट में भी विचित्रता भरी है। वह अपनी चेष्टा से कभी हमें गिरा देता है। परास्त कर देता है, पर कभी संभाल भी लेता है।

WBBSE Class 7 Hindi कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है Summary

जीवन शिचाय

डॉ० बशीर का जन्म सन् 1936 ई० को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ है। बशीर हिन्दी और उर्दू के प्रसिद्ध शायर हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ- उजाले, अपनी यादों के, उजालों की परियाँ, आस रोशनी के घरौंदे आदि हैं। साहित्य और अकादमी में इनके उल्लेखनीय योगदन के लिए इन्हे पदम्र्री से सम्मानित किया गया।

पद -1

कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है,
गजल की शाख पे इक फूल खिलनेवाला है।

शब्दार्श :

  • चिराग – दीपक।
  • शाख – टहनी।
  • मगर – लेकिन।
  • उजाला- प्रकाश।

अर्थ : प्रख्यात शायर डॉ० बशीर बद्र ने प्रस्तुत गजल में स्पष्ट किया है कि आधुनिक जीवन और जगत में गजल ही धार्मिक रूढ़ियों, सांपदायिक संकीर्णताओं को दूर कर भाईचारे और उदार विचारों के प्रसार से समाज में नई रोशनी ला सकता है। गजलकार का कथन है कि जिस प्रकार पुष्प की डाली पर खिला हुआ फूल सुगंधि को चारों ओर फैला देता है, उसी प्रकार गजल में व्यक्त विचार फूल की भाँति खुशबू बिखेरते हैं। बिना दीपक के ही गजल के विचार और शिक्षाओं से प्रकाश फैल जाता है। वास्तव में कविता ही मन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। अच्छे विचारों की खुशबू फैलती है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

पद -2

गजब की घूप है इक बेलिवास पत्थर पर,
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।

शब्दार्थ :

  • बेलिवास – नग्न।
  • दुशाला – चादर।

अर्थ : प्रस्तुत गजल में बद्र जी ने बतलाया है कि प्रकृति के क्रियाकलाप अद्भुतु है। एक ही समय में कहीं धूप पड़ती है कहीं छाया। कहीं शहनाई बजती है कहीं मातम होता है। पहाड़ पर कहीं तेज बरसात की चादर फैल जाती है उसी पहाड़ के अंश में एक ओर नग्न पत्थर पर कठोर धूप पड़ती है। पहाड़ पर सर्वत्र एक समान धूप तथा वर्षा का प्रभाव नहीं पड़ता। इस तथ्य को देखकर व्यक्ति को कट्टरवादी ने होकर परिवर्तन शील स्वभाव और विचार का होना चाहिए। सदा एक ही विचार पर दृढ़ बने रहना ठीक नहीं। समय, दशा तथा परिस्थिति के अनुसार उदार होकर परिस्थिति के अनुसार अपने आप को ढाल लेना चाहिए।

पद – 3

अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कराहट का,
कभी गिराया है मुझको कभी सँभाला है।

शब्दार्थ :

  • अजीब – अनोखा, विचित्र।
  • लहजा – तरीका, ढंग।
  • दुश्मन – शत्रु ।
  • गिराया – अवनत किया।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने शब्रु के मुस्कराने के ढंग को विलक्षण बतलाया है क्योंकि शत्रु की मुस्कराहट रहस्यपूर्ण होती है, कभी तो उसका उद्देश्य पतन की ओर ढकेलना असफलता की ओर बढ़ाना होता है, कभी उसकी मुस्कराहट में कल्याणकारी भाव भरा रहता है, वह गिरने से सभांल लेता है। सचमुच मुस्कराहट चाहे शत्रु की हो चाहे प्रेमिका की हो, वह रहस्यपूर्ण होती है, उसमें दोनों प्रकार के भाव भरे रहते हैं। मुस्कराहट कभी तो चिढ़ाने के लिए होती है कभी प्रेम पूर्ण होती है कि हृदयकलिका को प्रफुल्ल बना देती है।

पद – 4

निकल के पास की मस्जिद से एक बच्चे ने,
फ़साद में जली मूरत पे हार डाला है।

शब्दार्थ :

  • फसाद – दंगा, उपद्रव।
  • मूरत – मूर्ति।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि धर्म या संप्रदाय विशेष को अथवा मंदिर मस्जिद को लेकर दंगा करना, उपद्रव मचाना धार्मिक उन्माद के कारण हिंसा करना सर्वथा निंदनीय है। देगे के समय उपद्रवी मानवीय मूल्यों तथा संवेदनाओं को भूल जाते है। दंगे के समय एक निर्दोष बालक एक मस्जिद में शरण लेता है, जब उपद्रव शान्त हो जाता है तो वह मस्जिद से निकलकर बाहर देखता है कि एक मूर्ति को दंगे में उपद्रवियों ने जला दिया है, बच्चा जाकर उस मूर्ति के गले में फूलों की माला पहना देता है। बच्चे के हुदय में धार्मिक उन्माद नहीं, वह तो निर्मल एवं पवित्र है।

अतः धर्म के केन्द्र मंदिर-मस्जिद को दंगे से जोड़ना अनुचित है। इन दंगो में सच्चे धार्मिक पवित्र दिल वाले इंसान भाग नहीं लेते। केवल स्वार्थी, संकीर्ण मनोवृत्ति के लोग धर्म के नाम पर उपद्रव रचते हैं। कहा है मजहब नहीं सिखाते आपस में बैर करना। देखा गया है क उपद्रव के समय कितने मुसलमान हिन्दू मित्रों को पनाह देते हैं, कितने हिन्दू मुस्लिम भाइयों की रक्षा करते है। सांम्पदायिकता समाज के लिए कलंक है। अत हिन्दू. मुस्लिम दोनों के बीच भाई-चारे का प्रेम का, सौहार्र का सम्बन्ध होना चाहिए।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

पद – 5

तमाम वादियों में सेहरा में आग रोशन है,
मुझे खिजाँ के इन्हीं मौसमों ने पाला है।

शब्दार्थ :

  • वादियों – घाटी, जंगल।
  • सेहरा – पगड़ी, मुकुट।
  • खिजाँ – पतझड़।
  • मौसम – वातावरण।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि चाहे जैसा भी वातावरण हो, अनुकूल हो या प्रतिकूल हो, उसे अपने अनुकूल बना लेना चाहिए। जिस समय सर्वं्र विपरीत स्थिति हो सर्वत्र विध्वंस हो रहा हो, उस समय भी दृढ़ विचार वाला व्यक्ति स्थिर बना रहता है। कवि ने अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बतलाया है कि अत्यंत भयावह विषम वातावरण में उसका निर्वाह हुआ है।

संघर्षो या बाधाओं में व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है। सोना आग में जलकर ही कुन्दन बनता है। समस्त घाटियाँ, जंगलों तथा राजमुकुटों में आग की ज्वाल दहक रही है। इसी विकट परिवेश में पतझड़ के मौसम में ही कवि का पालन पोषण हुआ है। पर कवि पर इनका प्रभाव न पड़ा। वह बसन्त की वयार के लिए कभी परेशान नहीं हुआ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 1.
इस कविता में कवि ने जीवन को क्या कहा है?
(क) खण्डहर
(ख) महासंग्राम
(ग) वरदान
(घ) नदी
उत्तर :
(ख) महासंग्राम

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 2.
कवि इस कविता में किसकी प्रेरणा देता है?
(क) संधर्ष एवं कर्च्वव्य परायणता
(ख) स्मृति की
(ग) संपत्ति प्राप्ति की
(घ) भौख माँगने की
उत्तर :
(क) संघर्ष एवं कर्त्तव्य परायणता

प्रश्न 3.
‘सुमन’ किसका उपनाम है ?
(क) शिवमंगल सिंह
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) शामशेर बहादुर सिंह
उत्तर :
(क) शिवमंगल सिंह

प्रश्न 4.
‘वरदान माँगूँगा नहीं’ किसकी रचना है ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ख) गजानंद माधव ‘मुक्तिबोध’
(ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
(घ) श्रौधर पाठक
उत्तर :
(ग) शिवमंगल सिह ‘सुमन’

प्रश्न 5.
शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म कब हुआ ?
(क) सन् 1905
(ख) सन् 1910
(ग) सन् 1915
(घ) सन् 1920
उत्तर :
(ग) सन् 1915

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 6.
शिवमंगल सिंद ‘सुमन’ का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) गढ़कोला
(ख) उम्नाव
(ग) ग्वालियर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) उन्नाव

प्रश्न 7.
कवि कैसी भीख नहीं चाहता ?
(क) प्रेम
(ख) दया
(ग) धन
(घ) बल
उत्तर :
(ख) दया

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार जीवन क्या है ?
(क) महासंग्राम
(ख) महान
(ग) हार
(घ) जय
उत्तर :
(क) महासंग्राम

प्रश्न 9.
कवि ने क्या माँगूँगा नही कहते हैं ?
(क) भीख
(ख) वरदान
(ग) भोजन
(घ) सुख
उत्तर :
(ख) बरदान

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 10.
कविता में ताप का अर्थ क्या है ?
(क) झूठा
(ख) श्राप
(ग) कष्ट
(घ) गर्मी
उत्तर :
(ग) कष्ट

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसके लिए कवि विश्व की संपत्ति नहीं चाहता?
उत्तर :
कवि अपने सुखद क्षणों को यादगार बनाने के लिए, अपने अभाबों की पूर्णता के लिए, भग्न अवशेषों के निर्माण के लिए विश्व की संपत्ति नहीं चाहता है।

प्रश्न 2.
‘लघुता’ शब्द से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
‘लघुता’ का अर्थ है तुच्छता या हल्कापन। यहाँ कवि ने बड़े लोगों से तुलना करते हुए अपने को उनके दृष्टिकोण से छोटा या अल्प शक्ति, सामर्थ्य वाला कहा है।

प्रश्न 3.
कवि किससे वरदान की कामना नहीं कर रहा है?
उत्तर :
कवि अपने को सामान्य वर्ग का व्यक्ति मानता है। वह अपने आपको महान, श्रेष्ठ, सर्वसाधन संपन्न समझने वाले लोगों से दूर ही रखना चाहता है। वे महान बने रहें। कवि ऐसे लोगों से वरदान की कामना नहीं कर रहा है।

प्रश्न 4.
कवि ने हार को क्या माना है ?
उत्तर :
कवि ने हार को विराम माना है।

प्रश्न 5.
संघर्ष पथ पर कवि को क्या-क्या स्वीकार है ?
उत्तर :
संघर्ष पथ पर कवि को हार-ज़ीत सब स्वीकार है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 6.
कवि कहाँ से भागना नहीं चाहता है ?
उत्तर :
कवि कर्तव्य पथ से भागना नहीं चाहता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ कविता का संक्षिप्त सार लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि जीवन को एक महासंग्राम तथा जीवन में पराजय को एक पड़ाव मानता है। वह किसी भी परिस्थिति में दया की भिक्षा नहीं माँग सकता। अपने सुखद यादों के लिए या अपने अभाव को पूरा करने के लिए भी वह विश्व का वैभव नहीं चाहता। महान बने लोगों से दूर रहकर वह अपने दिल के दर्द को नहीं छोड़ेगा। उसे कष्ट मिले या श्राप किन्तु वह कर्त्तव्य मार्ग पर अडिग बना रहेगा। वह कभी भी किसी से वरदान की याचना नहीं करेगा।

(ख) कवि किन-किन परिस्थितियों में वरदान नहीं माँगने की बात करता है?
उत्तर :
कवि अपने जीवन में चाहे तिल-तिल कर मिट जाए पर वह वरदान नहीं माँग सकता। अपनी सुखद यादों के लिए, अपनी कमी को पूर्ण करने के लिए, अपने हुदय की पीड़ा को दूर करने के लिए तथा संताप या अभिशाप की स्थिति में भी कवि वंरदान नहीं माँगना चाहता।

(ग) निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

प्रश्न 1.
संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही, वरदान माँगूँगा नहीं।
उत्तर :
कवि जीवन को महा संग्राम बतलाता है। यह जीवन यात्रा में आने वाली भयंकर स्थितियों से संघर्ष करना चाहता है। इस संघर्ष में हार या जीत होती है। पराजय एक पड़ाव के समान है। इस जीवन युद्ध में कवि तिल-तिल कर मिट जाने के बावजूद किसी से दया की भिक्षा स्वीकार नहीं कर सकता। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी की अनुकंपा नहीं चाहता। वह किसी से वरदान नहीं माँग सकता। वह किसी देवता या गुरुजन के सम्मुख इष्ट फल की प्राप्ति के लिए याचना नहीं कर सकता।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 2.
कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु भाँगूँगा नहीं।
उत्तर :
कवि किसी भी महान व्यक्ति से, देवता से अथवा धन-कुबेर या राजनेता से किसी भी प्रकार की इष्ट वस्तु नहीं चाहता। चाहे उसके ह्बदय को पीड़ा मिले, चाहे श्राप मिले या उस पर मिथ्यावाद लगे। उससे चाहे जैसा भी व्यवहार हो, पर वह किसी भी परिस्थिति में कर्त्तव्य मार्ग से दूर नहीं हटेगा। कवि अपने जीवन को संघर्ष से ही सफल बनाना चाहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें अपने जीवन को सफल बनाने के लिए संघर्ष और कर्त्तव्य परायण बनने की प्रेरणा दी है। देश के लोगों को बतलाया है कि जीवन में पराजय एक विराम की तरह है। समग्र जीवन ही एक महासंग्राम है। इसलिए हर मुसीबत के बावजूद उन्हें भिक्षा याचना नहीं करनी चाहिए। किसी से इष्ट बस्तु भी माँगना नहीं

चाहिए। अपनी अतीत की यादों को सुखद बनाने के लिए, अपने जीवन की कमियों को पूरा करने के लिए भी वरदान नहीं माँगना चाहिए। संसार में संपत्ति प्राप्त करने के लिए याचना करना स्वाभिमान के खिलाफ है। जीवन एक संग्राम है। इसमें चाहे जय मिले या पराजय, पर व्यक्ति को विन्दुमात्र भी भयभीत या निराश नहीं होना चाहिए। हार-जीत तो होती ही रहती हैं। संघर्ष के पथ पर सदा अग्रसर होते रहना हीं सच्चा कर्त्रव्य है। जय या पराजय दोनों को सही समझ कर स्वीकार करना चाहिए। ऐसे समय में भी किसी के सामने हाथ फैलाना उचित नहीं है।

जो भी व्यक्ति अपने को सब प्रकार से संपन्न तथा महान समझता है, समझता रहे, उसकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए। अगर हमें छोटा समझता है तो उसकी भी परवाह नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने मन की पीड़ा को अपने मन में ही रखना चाहिए। व्यर्थ में उस पीड़ा को नहीं त्यागना चाहिए। अन्तर्वेदना को दूर करने के लिए किसी से भी वरदान माँगना उचित नहीं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

हर स्थिति में कर्त्तव्य मार्ग पर दृढ़ बने रहना चाहिए। हृदय को चाहे कितनी भी पौड़ा मिले, चाहे हमें अभिशाप ही मिले, पर कभी भी सत्कर्त्तव्य पथ से भागना नहीं चाहिए।

भाषा-बोध

(क) विलोम शब्द

  • हार – जीत
  • जीवन-मृत्यु
  • स्मृति – विस्मृति
  • लघुता – गुरुता
  • वरदान – अभिशाप

(घ) उपसर्ग अलग कीजिए –

  • वरदान — वर + दान
  • अभिशाप — अभि + शाप
  • विराम — वि + राम
  • प्रहर — प्र + हर
  • सुखद — सु+खद
  • संग्राम — सम् + ग्राम
  • व्यर्थ — वि + अर्थ

(ग) पाठ से ता, ना और ओ प्रत्ययों से बने शब्दों को चुनकर लिखिए।
ता = लघुता, ओ – प्रहरों, खंडहरों। ना = वेदना

(घ) वाक्य प्रयोग – अभिशाप – प्रदूषण आज अभिशाप बन गया है।
कर्त्तव्य – सभी को अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए।
महासंग्राम – जीवन एक महासंग्राम है।
खण्डहर – सेतु के खण्डहर दिखलाई पड़ते हैं।
संघर्ष – संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

WBBSE Class 7 Hindi वरदान माँगूँगा नहीं Summary

जीवन्रिचिय

डॉ० शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद के झगरपुर नामक ग्राम में सन् 1916 ई० में हुआ। सुमन ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम०ए० और डी० लिट० की उपाधियाँ प्राप्त की। इनकी रचनाओं में प्रगतिवादी विचारों के साथ प्रेम और शृंगार का भी चित्रण हुआ है। इन्होंने अपनी रचनाओं में शोषित मानव की पीड़ा, सामाजिक विषमता, वर्ग संघर्ष का भी चित्रण किया है।

इनकी रचनाएँ सहज, सरल तथा प्रभावोत्पादक हैं। इनकी रचनाएँ हिल्लोल, जीवन के गान, प्रलय सृजन पर आँखें नहीं भरी, विं्न हिमालय, विश्वास बढ़ता ही गया तथा मिट्टी की बारात आदि हैं। ‘मिट्टी की बारात’ पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

पद – 1

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिट्यूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • तिल-तिल मिटना – कण-कण खत्म हो जाना।
  • हार – पराजय, असफलता।
  • वरदान – देवता अथवा गुरुजन की प्रसन्नता के फलस्वरूप प्राप्त फल, इष्ट वस्तु की फल प्राप्ति।
  • विराम – पड़ाव, ठहराव, विश्राम।
  • महासंग्राम – जीवन यात्रा में आनेवाली कठिनाइयों से लड़ना, जीवन संग्राम।
  • संदर्भ – प्रस्तुत अंश ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ कविता से उद्धृत है। इस कविता के लेखक डॉ० शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।
  • प्रसंग – कवि इन पंक्तियों में अपनी अभिलाषा व्यक्त की है कि वह किसी भी स्थिति में वरदान नहीं माँगेगा।

व्याख्या – कवि जीवन को महा संग्राम बतलाता है। यह जीवन यात्रा में आने वाली भयंकर स्थितियों से संघर्ष करना चाहता है। इस संघर्ष में हार या जीत होती है। पराजय एक पड़ाव के समान है। इस जीवन युद्ध में कवि तिल-तिल कर मिट जाने के बावजूद किसी से दया की भिक्षा स्वीकार नहीं कर सकता। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी की अनुकंपा नहीं चाहता। वह किसी से वरदान नहीं माँग सकता। वह किसी देवता या गुरुजन के सम्मुख इष्ट फल की प्राप्ति के लिए याचना नहीं कर सकता।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

पद – 2

स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्व की सम्पत्ति चाहूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • खंडहर – भग्नावशेष, दूटा फूटा घर
  • सुखद – सुख देने वाली
  • प्रहर – समय संपत्ति – वैभव
  • स्मृति – याद
  • जान लो – समझ लो

व्याख्या – कवि कह रहा है कि वह अपने जीवन में सुख की अनुभूति कराने वाली स्मृतियों के लिए तथा टूटे-फूटे को सजाने या अपनी अधूरी, बिखरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी किसी भी देवता या महान लोगों से वरदान की याचना नहीं कर सकता। सब को अपने विचारों से समझा देना चाहता है कि वह अपने जीवन में समस्त संसार के ऐश्वर्य एवं वैभव की कामना नहीं करता है। उसे जीवन में सुख, अधूरी इच्छा की पूर्ति तथा धन संपत्ति की कामना नहीं है।

पद – 3

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • किंचित- कुछ, थोड़ा
  • भयभीत – डर
  • संघर्ष – विरोध, टकराव
  • सही – सच।

व्याख्या – कवि ने स्पष्ट किया है कि जीवन यात्रा में चाहे विजय मिले या पराजय, मैं किसी भी परिस्थिति में तनिक भी भयभीत नहीं हो सकता। जीवन में विरोधी स्थिति भी आती है, टकराव भी होते हैं, पर मैं सभी को सच माऩकर स्वीकार करूँगा। किसी के सामने याचना नहीं करूँगा।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

पद – 4

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम ही महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • छुआ – स्पर्श करना
  • लघुता – तुच्छता, छोटापन, हल्कापन
  • त्यागूँगा – छोडूँगा
  • वेदना – पीड़ा

व्याख्या – प्रस्तुत अंश में कवि का कथन है कि वह अपनी स्थिति को यथावत् बनाए रखना चाहता है। इसलिए वह कहता है कि मेरी तुच्छता का मेरे हल्केपन को स्पर्श भी मत कीजिए। अपनी महानता को लेकर अहंकारी जीवन बिताते रहिए। अपने दिल के दर्द को मैं बेकार में नहीं छोड़ सकता। मेरी पीड़ा सदा मेरे मन में बनी रहेगी। पीड़ा को सहते हुए भी मैं किसी के सामने हाथ नहीं फैलाऊँगा। किसी से वरदान की याचना नहीं करूँगा।

पद – 5

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु मैं भागूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • ताप – कष्ट पीड़ा
  • कर्त्तव्य पथ – करने योग्य मार्ग या कार्य
  • अभिशाप – श्राप, झूठा दोष

व्याख्या – कवि किसी भी महान व्यक्ति से, देवता से अथवा धन-कुबेर या राजनेता से किसी भी प्रकार की इष्ट वस्तु नहीं चाहता। चाहे उसके ह्बदय को पीड़ा मिले, चाहे श्राप मिले या उस पर मिथ्यावाद लगे। उससे चाहे जैसा भी व्यवहार हो, पर वह किसी भी परिस्थिति में कर्त्तव्य मार्ग से दूर नहीं हटेगा। कवि अपने जीवन को संघर्ष से ही सफल बनाना चाहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – रक्षा बंधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
राखी कौन बाँधती है?
(क) माँ
(ख) बेटी
(ग) बहन
(घ) पत्नी
उत्तर :
(ग) बहन

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 2.
भाई कहाँ जा रहा है?
(क) विद्यालय
(ख) मन्दिर
(ग) घर
(घ) समर में
उत्तर :
(घ) समर में।

प्रश्न 3.
मूल रूप से इस कविता का स्रोत है :
(क) बहन-भाई प्रेम
(ख) प्रकृति प्रेम
(ग) वात्सल्य प्रेम.
(घ) देश प्रेम एवं स्वतंत्रता
उत्तर :
(घ) देश प्रेम एवं स्वतंत्रता

प्रश्न 4.
रक्षा बंधन के लिए भाई अपनी बहन को कौन-सा उपहार देना चाहता है?
(क) अमूल्य उपहार
(ख) आँखों के आँसू
(ग) स्वतंत्रता
(घ) निद्रा
उत्तर :
(ख) आँखों के आँसू

प्रश्न 5.
‘प्रेमी’ किस कवि का उपनाम है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ग) हरिकृष्ण
(घ) सोहनलाल
उत्तर :
(ग) हरिकृष्ण

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 6.
हरिकृष्ण प्रेमी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1909
(ख) सन् 1910
(ग) सन् 1911
(घ) सन् 1912
उत्तर :
(क) सन् 1909

प्रश्न 7.
हरिकृष्ग ‘प्रेमी’ का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) झाँसी
(ख) ग्वालियर
(ग) गुड़गाँव
(घ) गाजियानाद
उत्तर :
(ख) ग्वालियर

प्रश्न 8.
शीश का अर्थ क्या है ?
(क) मस्तक
(ख) पहाड़
(ग) कुटिया
(घ) पावन
उत्तर :
(क) मस्तक

प्रश्न 9.
भाई-बहन से क्या बनकर दर-दर घूमने को कहता है ?
(क) सैनिक
(ख) भिखारीन
(ग) बंधु
(घ) फेरीवाला
उत्तर :
(ख) भिखारीन

प्रश्न 10.
भाई-बहन से अंतिम बार क्या बाँधने को कहता हैं ?
(क) राखी
(ख) रक्षा सूत्र
(ग) कंगन
(घ) फांसी
उत्तर :
(क) राखी

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रक्षा बंधन कविता में किसके किस अत्याचार की बात कही जा रही है?
उत्तर :
रक्षा बंधन कविता में अंग्रेज शासकों के अत्याचार की बात कही जा रही है। अन्यायी शासकों ने लाखों युवतियों को विधवा बना डाला। हमारे देश को बेसहारा बना दिया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 2.
आश्रयहीन होने पर बहन का माथा ऊँचा कैसे होगा?
उत्तर :
आश्रयहीन होने पर भी बहन का माथा इसलिए ऊँचा होगा कि उसका भाई मातृभूमि की आजादी के लिए, देश को जालिमों के अत्याचार से बचाने के लिए आत्म बलिदान कर दिया। देश के नवयुवक वीरों को देश पर मिटने के लिए अलख जगाने का उसे अवसर मिल जाएगा।

प्रश्न 3.
बहन भाई के उपहार को क्या कहती है?
उत्तर :
भाई के उपहार आँसुओं की बूदों को बहन मणियों की भाँति बहुमूल्य कहती है क्योंकि उन मणियों पर संसार योयावर हो जाता है।

प्रश्न 4.
भाई अमर नशे में कब झूमने की कामना करता है?
उत्तर :
भाई रणक्षेत्र में आत्म बलिदान करने के लिए प्रस्थान की तैयारी कर रहा है। वह अपनी बहन को उपहार के रूप में आँखों के आँसुओं को देना चाहता है। उसी समय वह बहन से कहता है कि बहन अपने चरण कमल बढ़ाओ में उन्हें चूम लूँ। उसी समय भाई उसके पवित्र स्नेह से अमर नशे में झूमने की कामना करता है।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत कविता में भाई अपनी बहन से कहाँ जाने की बात कहता हैं ?
उत्तर :
पसस्तुत कविता में भाई अपनी बहन से युद्ध में जाने की बात कहता है।

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प्रश्न 6.
भाई अपनी बहन से क्या आशीर्वाद चाहता है ?
उत्तर :
भाई अपने बहन से सिर-कटने के पहले नहीं ज्ञुकने का आर्शीबाद चाहता है।

प्रश्न 7.
‘रक्षा बन्धन’ कविता में जननी किसे कहा गया है ?
उत्तर :
‘रक्षा बन्धन’ कविता में जननी ‘मातृभूमि’ को कहा गया है।

प्रश्न 8.
भाई को कौन-सा दुःख मिटाना है ?
उत्तर :
भाई को गुलामी का दुःख मिटाना है।

प्रश्न 9.
भाई अपने साथियों को कब निद्रा लेने को कहता है ?
उत्तर :
भाई अपने साधियों को स्वाधीनता प्राप्त करने के बाद निद्रा लेने को कहता है।

प्रश्न 10.
बहन मणियाँ किसको कहती है ?
उत्तर :
बहन मणियाँ भाईयों के अश्रुकणों (आँसू की बूँदों) को कहती है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) ‘रक्षा बन्धन’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवकों को गुलामी की जंजीर तोड़ देने के लिए तथा सहर्ष बलिदान कर देने की प्रेरणा दी है। आजादी की लड़ाई में जाने से पूर्व भाई-बहन से कह रहा है कि उसे समर में जाना है, इसलिए वह उसे राखो बाँध दे आशीर्वाद दे कि वह भारत माता के चरणो पर आत्म-और बलिदान कर दे। जिस अन्यायी शासकों ने देश को वीरान तथा अनाथ बना दिया उनकी प्यास वुझाने के लिए देश के लाखो वीर नवयुवक विजय पथ पर जा रहे हैं।

बहन उसके मस्तक पर हांथ रख दे जिससे उसका मस्तक कभी झुुके नहीं। उन हत्यारों ने हमारे देश को तहस-नहस कर डाला। आज हमारे पास बहन को उपहार देने के लिए केवल मेरी आँखों के आँसू हैं, जिन्हें वह मणियों के समान बहुमूल्य समझती है। भाई प्रस्थान करने के पूर्व बहन के चरण छूकर उसके पवित्र स्नेह में झूमना चाहता है।

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(ख) इस कविता के माध्यम से आप कैसे कह सकते हैं कि यह स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी? जिन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है, उन्हें लिखिए।
उत्तर :
इस कविता के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कविता स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी। निम्न पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है।

  • यह पोंछ ले अश्रु गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है।
  • उस हत्यारे ने तेरा माथ।

(ग) भाई बहन को समर में जाने के पूर्व क्या-क्या कह रहा है?
उत्तर :
भाई समर में जाने के पूर्व बहन को कह रहा है कि वह उसे आशिष दे, उसके आँस पोंछ ले। अन्तिम बार राखी बाँधकर प्यार कर ले। मस्तक पर स्नेहपूर्वक अपना हाथ रख दे। अंग्रेज शासकों ने न जाने कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया। कितने भारतीय वीरों को समापन कर डाला। आश्रयहीन होने पर वह सर्वत्र लोगों को विजय पाने के लिए प्रेरित करे। अन्तिम बार वह बहन के चरण कमलों का स्पर्श करने के लिए कहता है।

(घ) हमारा देश कब और किस प्रकार अनाथ हो गया?
उत्तर :
हमारा देश जब पराधीन था, अत्यायारी अंग्रेज यहाँ के शासक थे, उस समय हमारा देश अनाथ हो गया। अन्यायी सरकार ने भारतीयों पर अनेक जुल्म किये। हमारे देश की सारी संपत्ति लूट कर अपने देश ले गए। देश को वीरान बना डाला। देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नवुयवकों को शूली पर चढ़ा दिए। न जाने कितनी युवतियों के सौभाग्य लुट गये। इस प्रकार देश अनाथ हो गया।

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(ङ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न 1.
अपना शीश कटा जननी की, जय का मार्ग बनाना है।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि का कथन है कि अन्यायी शासकों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक रण क्षेत्र के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। सभी देशभक्त वीर पुरुष अपना मस्तक बलिदान कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। अर्थांत् अपने को न्योछावर कर भारत को स्वाधीन बनाएँगे ।

प्रश्न 2.
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दुःख मिटाना है।
उत्तर :
भाई बहन से कह रहा है कि वह उसके आँसू पोंछ कर उसे निर्द्वन्द्व बना दे। जिससे वह निश्चिन्त होकर रणक्षेत्र में अपनी वीरता से देश को स्वाधीन बना सके। शासकों को परास्त कर ही पराधीनता के दुःखों से देश को हुटकारा दिलाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
उठो बन्धुओं, विजय वथू को वरो तभी निद्रा लेना।
उत्तर :
कवि भारतीय वीर युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे उठें, शक्तिशाली बनकर विजय प्राप्त करें, विजय रूपी दुल्हन का वरण करें। विजय हासिल कर लेने के बाद ही सुख की नींद सोऐं, जब तक विजय नहीं मिलती तब तक आराम से दूर रहें।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर 

(क) ‘रक्षा बन्धन’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवकों को गुलामी की जंजीर तोड़ देने के लिए तथा सहर्ष बलिदान कर देने की प्रेरणा दी है। आजादी की लड़ाई में जाने से पूर्व भाई-बहन से कह रहा है कि उसे समर में जाना है, इसलिए वह उसे राखी बाँध दे आशीर्वाद दे कि वह भारत माता के वरणों पर आत्म-और बलिदान कर दे।

जिस अन्यायी शासकों ने देश को वीरान तथा अनाथ बना दिया उनकी प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वौर नवयुवक विजय पथ पर जा रहे हैं। बहन उसके मस्तक पर हाथं रख दे जिससे उसका मस्तक कभी युके नहीं। उन हत्यारों ने हमारे देश को तहस-नहस कर डाला। आज हमारे पास बहन को उपहार देने के लिए केवल मेरी आँखों के आँसू हैं, जिन्हें वह मणियों के समान बहुमूल्य समझती है। भाई प्रस्थान करने के पूर्व बहन के चरण छूकर उसके पवित्र स्नेह में झूमना चाहता है।

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(ख) इस कविता के माध्यम से आप कैसे कह सकते हैं कि यह स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी? जिन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है, उन्हें लिखिए।
उत्तर :
इस कविता के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कविता स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी। निम्न पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है।

  • यह पोंक ले अभ्रु गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है।
  • उस हत्यारे ने तेरा माथ।

(ग) भाई बहन को समर में जाने के पूर्व क्या-क्या कह रहा है?
उत्तर :
भाई समर में जाने के पूर्व बहन को कह रहा है कि वह उसे आशिष दे, उसके आँसू पोंछ ले। अन्तिम बार राखी बाँधकर प्यार कर ले। मस्तक पर स्नेहपूर्वक अपना हाथ रख दे। अंग्रेज शासकों ने न जाने कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया। कितने भारतीय वीरों को समापन कर डाला। आश्रयहीन होने पर वह सर्वत्र लोगों को विजय पाने के लिए प्रेरित करे। अन्तिम बार वह बहन के चरण कमलों का स्पर्श करने के लिए कहता है।

(घ) हमारा देश कब और किस प्रकार अनाथ हो गया?
उत्तर :
हमारा देश जब पराधीन था, अत्याचारी अंग्रेज यहाँ के शासक थे, उस समय हमारा देश अनाथ हो गया। अन्यायी सरकार ने भारतीयों पर अनेक जुल्म किये। हमारे देश की सारी संपत्ति लूट कर अपने देश ले गए। देश को वीरान बना डाला। देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नवुयवकों को शूली पर चढ़ा दिए। न जाने कितनी युवतियों के सौभाग्य लुट गये। इस प्रकार देश अनाध हो गया।

(ङ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न 1.
अपना शीश कटा जननी की, जय का मार्ग बनाना है।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि का कथन है कि अन्यायी शासकों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक रण क्षेत्र के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। सभी देशभक्त वीर पुरुष अपना मस्तक बलिदान कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। अर्थात् अपने को न्योछावर कर भारत को स्वाधीन बनाएँगे ।

प्रश्न 2.
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दुःख मिटाना है।
उत्तर :
भाई बहन से कह रहा है कि वह उसके आँसू पोंछ कर उसे निर्द्वन्द्ध बना दे। जिससे वह निश्चिन्त होकर रणक्षेत्र में अपनी वीरता से देश को स्वाधीन बना सके। शासकों को परास्त कर ही पराधीनता के दु:खों से देश को छुटकारा दिलाया जा सकता है।

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प्रश्न 3.
उठो बन्धुओं, विजय वधू को वरो तभी निद्रा लेना।
उत्तर :
कवि भारतीय वीर युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे उठें, शक्तिशाली बनकर विजय प्राप्त करें, विजय रूपी दुल्हन का वरण करें । विजय हासिल कर लेने के बाद ही सुख की नींद सोएँ, जब तक विजय नहीं मिलती तब तक आराम से दूर रहें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
‘रक्षा बंधन’ कविता के कवि ने देश के नवयुवकों को क्या शिक्षा दी है?
उत्तर :
खवतंत्रता के पूर्व लिखी गई प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवको को स्वतंत्रता के महत्व को बतलाकर उन्हें मातृभूमि की बलि वेदी पर अपने को समर्पित कर देने के लिए कहा है। घर, परिवार, भाई-बहन की ममता को छोड़कर स्वतंग्रता के युद्ध में जाने के लिए हर नवयुवक तैयार है। पराधीनता की पीड़ा को दूर करना है। भारत माता के वरणों में शीश चढ़ाने की शुभ बेला आ गई है। बहन की या परिवार की ममता इसमें बाधक न बने। प्यार के बंधन को तोड़कर ही इस महान लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। अत्याचारी अंग्रेज शासकों ने फाँसी देने की सारी तैयारी पूरी कर ली है।

पापी अंग्रेजों ने लाखों नारियों की मांगों के सिन्दूर पोछकर उन्हें विधवा बना दिया। अब नव-युवकों के विनाश के लिए वे तत्पर हैं। न जाने देश के कितने नर-नारियों के हैदयों को इन्होंने चकनाचूर कर दिया। इसलिए उन पापियों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वोर नवयुवक अपना बलिदान कर देने के लिए युद्ध भूमि में जाने के लिए उतावले है। लोगों में उत्साह है कि अपने बलिदान से वे निश्चय ही विजय प्राप्त कर भारत माता को पराधीनता के चंगुल से मुक्त कर लेंगे। शीश भले कट जाए पर कभी दुकेंगे नहीं। गर्व के साथ हमेशा मस्तक ऊँचा बना रहे। हत्यारे शासको ने हमारे देश को वीरान बना डाला। सारा देश अनाथ हो गया। लोगों के दर्द को सुनने वाला कोई न रहा।

नवयुवकों के बलिदान से आहत बहनो को भी कवि ने प्रेरित किया है। उन्हें दीन, भिखासि बन कर हर गली, कूचे में घूमघूम कर लोगों को जगाना है। नवयुवकों को आराम करना छोड़कर विजय के लिए आगे बढ़ना है। नवयुवक भाइयों के पास अपनी बहनों को उपहार देने के लिए केवल उनकी आँखों में आसू हैं। ये आँसू साधारण मूल्यहीन नहीं हैं।

बल्कि ये अमूल्य मगि रत के समान हैं। नवयुवक युद्ध के लिए प्रस्थान करने की शुभ घड़ी में बहन के चरणों को चूम लेना चाहता है। बहन के पवित्र स्वर्गीय स्नेह के शाश्वत् नशे में झूमते हुए वह स्वतंग्रता संग्राम में बलिदान करने को जाना चाहता है। इस प्रकार कवि ने देश के नवयुवकों को बतलाया है कि देश सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है और देश पर मर मिटना ही सबसे बड़ा बलिदान है।

भाषा-बोध

(क) इन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।

  • भीषण-युद्ध में भीषण अस्त्रों का प्रयोग होता है ।
  • क्रूर – क्रूर शासको ने देश पर जुल्म उहाया।
  • विमल – विमल जल पीने लायक होता है।
  • आँचल – वह आँचल फेला कर दया की भीख माँग रही थी।

(ख) शब्दों के अर्थ में अन्तर बतलाइए ।

  • स्नेह (छोटो से) – बच्चों से स्नेह।
  • प्यार – प्रेम-लोगों से प्रेम।
  • अमूल्य – बेहद कीमती – कोहीनूर हीरा अमूल्य है।
  • बहुमूल्य – कीमती – यह कपड़ा बहुमूल्य है।
  • ऊंचा – उन्नत, ऊपर उठा हुआ।
  • ऊँचाई – उठान, श्रेष्ठता।
  • डाल – शाखा, तलवार का फल ।
  • ढाल – आधात रोकने का एक साधन।

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(ग) ‘अ’ और ‘उप’ उपसर्गों से शब्द बनाइए-

  • अ – अमूल्य, अकर्म, अचल, अजर, अधर्म।
  • उप – उपहार, उपकार, उपवन, उपकरण।

(ख) इन, ईय, हीन प्रत्ययों के योग से शब्द बनाइए।

  • इन – भिखारिन, मालकिन, नातिन, पडोसिन।
  • ईय – स्वर्गीय, जातीय, भारतीय, राष्ट्रीय।
  • हीन- आश्रयहीन, जलहीन, शक्तिहीन।

WBBSE Class 7 Hindi रक्षा बंधन Summary

जीवनन परिचया

हरिकृष्ण प्रेमी का जन्म सन् 1909 ई० में ग्वालियर के गुना नामक स्थान में हुआ था। प्रेमी ने स्वाधीनता संग्राम में भी योगदान दिया। इन्हें कविता तथा नाटक के क्षेत्र में विशेष सफलता मिली। इनकी भाषा सहज, संयत तथा बोधगम्य है। गाँधी जी का इनपर विशेष प्रभाव था। इनकी प्रमुख रचनाएँ शिव साधना, रक्षा बंधन, प्रतिशोध, अनंत के पथ पर आदिहैं।

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पद – 1

बहन बाँध दे रक्षा बंधन मुझे समर में जाना है,
अब के घन गर्जन में रण का भीषण छिड़ा तराना है ।
दे आशिष, जननी के चरणों में यह शीश चढ़ाना है,
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है ।।

अन्तिम बार बाँध ले राखी,
कर ले प्यार अखिरी बार ।
मुझको, जालिम ने फाँसी की,
डोरी कर रखी तैयार ।।

शब्दार्थ :

  • समर – युद्ध तराना – गाना, विशेष प्रकार के गीत
  • घन गर्जन – मेघ की गर्जना
  • भीषण-भयंकर
  • रण-युद्ध जालिम- दुष्ट, शत्रु, चालबाज
  • आशिष – आशीर्वाद
  • शीश – मस्तक

संदर्भ – प्रस्तुत अंश रक्षा बंधन कविता से उद्धृत है। इसके कवि हरिकृष्ण प्रेमी हैं।

प्रसंग – इस अंश में कवि ने स्वाधीनता संग्राम में जाने के लिए प्रस्तुत नवयुवक के मन की आत्म बलिदान की भावना का मार्मिक चित्रण किया है।

व्याख्या – स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई इस कविता में एक नवयुवक भाई अपनी बहन से कह रहा है कि बहन मेरी कलाई में तुम रक्षा सूत्र बाँध दो। बादलों की गर्जना में युद्ध का भयंकर गीत छिड़ा हुआ है। भारत माता के चरणों में हमें अपना मस्तक चढ़ा देना है । अत: मुझे आशीर्वाद दो और आँसू पोंछ लो। मुझे भारतवर्ष की पराधीनता की पीड़ा को दूर करना है। बलिदान के लिए भाई कह रहा है कि अन्तिम बार मुझे राखी बाँधकर प्यार कर लो, क्योंकि अन्यायी दुश्मनों ने मुझे शूली पर चढ़ाने के लिए फाँसी की रस्सी तैयार कर रखी है।

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पद – 2

जिसने लाखों ललनाओं के पोंछ दिए सिर के सिंदूर,
गड़ा रहा कितनी कुटियाओं के दीपों पर आँखें कूर ।
वज्र गिराकर कितने कोमल हृद्य कर दिए चकनाचूर,
उस पापी की प्यास बुझाने, बहन जा रहे लाखों शूर ।।

अपना शीश कटा जननी की,
जय का मार्ग बनाना है।
बहन बाँध दे रक्षा बन्धन,
मुझे समर में जाना है ।।

शब्दार्थ :

  • ललनाओं – युवतियों
  • कुटिया – झोपड़ी
  • क्रूर – निष्ठुर
  • वज्र – इन्द्र का अस्त्र
  • चकनाचूर – नष्ट, समाप्त कर देना
  • शूर – वीर, योद्धा।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने अंग्रेज शासकों के अत्याचारों और उनकी क्रूरता का चित्रण किया है। भाई अपनी बहन से कह रहा है कि अंग्रेज शासकों ने अनगिनत युवतियों के सिर का सिंदूर पोंछ दिया। उनके पति की हत्या कर उन्हें विधवा बना दिया। अनेक झोपड़ियों के दीपकों पर अपनी निष्ठुर आँखें गड़ा रखा है।

वज्रपात कर तथा भयंकर अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग कर न जाने कितने नव युवकों को खत्म कर दिया। पापी, अन्यायी शासकों की प्यास शान्त करने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक प्रस्थान कर रहे हैं। सभी वीर पुरुष अपना मस्तक अर्पण कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। इसलिए बहन, मुझे राखी बाँध दो, मैं रण-क्षेत्र में जाने के लिए तैयार हूँ।.

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पद – 3

बहन शीश पर मेरे रख दे, स्नेह सहित अपना शुभ हाथ,
कटने के पहले न झुके यह ऊँचा रहे गर्व के साथ ।
उस हत्यारे ने कर डाला अपना सारा देश अनाथ,
आश्रयहीन हुई यदि तो भी ऊँचा होगा मेरा माथ ।।

दीन भिखारिन बनकर तू भी,
गली-गली फेरी देना ।
उठो बंधुओं, विजयवधू को,
वरो, तभी निद्रा लेना ।।

शब्दार्थ :

  • स्नेह – प्रेम आश्रयहीन – बेसहारा
  • गर्व – स्वाभिमान
  • अनाथ – बेसहारा
  • वरो – चुनो फेरी देना – भ्रमण करना, घूमना
  • दीन – गरीब
  • विजयवधू – विजयरूपी दुल्हन

व्याख्या – भाई अपनी बहन से कह रहा है कि बहन तुम अपना शुभ हाथ प्रेमपूर्वक हमारे मस्तक पर रख दो। हमारा यह मस्तक कटने के पूर्व जालिमों के सामने न झुके। स्वाभिमान के साथ मस्तक सदा ऊँचा रहे। हत्यारें शासकों ने सारे देश को बेसहारा बना दिया। सभी अनाथ हो गए। हमारे बलिदान से यदि तुम बिना सहारे के हो गई तो भी तुम्हारा मस्तक सदा ऊँचा बना रहेगा। लाचार भिखारिन बनकर हर गली-मार्ग में जाकर, घूम-घूमकर लोगों को प्रेरणा देना कि बंधुओं उठो तैयार हो जाओ, जयरूपी दुल्हन का वरण करने के बाद नींद लेना, आराम करने की बात करना। विजय के बाद ही खुशियाँ मनाना।

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पद – 4

आज सभी देते हैं अपनी बहनों को अमूल्य उपहार,
मेरे पास रखा ही क्या है, आँखों के आँसू दो चार ।
ला दो चार गिरा दूँ, आगे अपना आँचल विमल पसार,
तू कहती है – “ये मणियाँ हैं, इन पर न्योछावर संसार ।।

बहन बढ़ा दे चरण कमल मैं,
अंतिम बार उन्हें लूँ चूम ।
तेरे शुचि स्वर्गीय स्नेह के,
अमर नशे में लूँ अब झूम ।।

शब्दार्थ :

  • अमूल्य-अनमोल, बहुमूल्य
  • उपहार – भेंट पसारो – फैलाओ
  • मणियाँ – रत्न न्योछावर – अर्पण
  • शुचि – पवित्र, शुद्ध
  • स्नेह-प्रेम
  • अमर – जो कभी न मरे
  • विमल – निर्मल, पवित्र
  • स्वर्गीय – स्वर्ग संबंधी जिसमें दिव्य पवित्रता है।
  • नशे – मद, गर्व, अभिमान

व्याख्या – भाई बहन से कहा रहा है कि इस रक्षा बंधन के पावन पर्व पर सभी भाई अपनी बहनों को मूल्यवान उपहार देते हैं। मेरे पास उपहार देने के लिए कुछ भी नहीं है, केवल मेरी आँखों में आँसू की बूँदे हैं। तुम अपना आँचल फैलाओ मैं उपहार के रूप में दो चार आँसुओं की बूँदें उस पर गिरा दूँ। तुम तो कहती हो कि ये आँसू रत्न के समान अमूल्य हैं, इन आँसुओं पर संसार समर्पित है। बहन तुम अपने कमल के समान कोमल चरणों को बढ़ा दो, मैं अन्तिम बार उन्हें चूम लूँ। तुम्हारे पवित्र, दिव्य प्रेम के शाश्वत् स्वभिमान में मैं मस्त हो जाऊँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 4 जागरण गीत to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – जागरण गीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
‘जागरण गीत’ कविता के कवि हैं :
(क) माखन लाल चतुर्वेदी
(ख) माहेश्वरी प्रसाद द्विवेदी
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) हरिकृष्ण प्रेमी
उत्तर :
(ग) सोहनलाल द्विवेदी

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प्रश्न 2.
कवि इस कविता के द्वारा कैसे लोगों को जगाने की बात कर रहा है ।
(क) वास्तविक जीने वाले को
(ख) कल्पनात्मक जीवन जीने वालों को
(ग) कर्मशील जीवन वाले को
(घ) निराश जीवन वाले को
उत्तर :
(ख) कल्पनात्मक जीवन जीने वाले को।

प्रश्न 3.
‘जागरण गीत’ कविता का कवि लोगों को कहाँ नहीं जाने देगा ?
(क) उदयाचल
(ख) अस्ताचल
(ग) विंध्याचल
(घ) अरूणांचल
उत्तर :
(ख) अस्ताचल

प्रश्न 4.
कवि इस कविता द्वारा कैसे लोगों को जगाने की बात कर रहा है ?
(क) वास्तविक जीवन वाले
(ख) कल्पनात्मक जीवन वाले
(ग) कर्मशील जीवन वाले
(घ) निराश जीवन वाले
उत्तर :
(ख) कल्पनात्मक जीवन वाले

प्रश्न 5.
कवि ने किसको तोड़ने की बात की है ?
(क) श्रृंखलाएँ संकीर्णताएँ
(ख) संबंध
(ग) आवरण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) श्रृंखलाएँ संकीर्णताएँ

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प्रश्न 6.
‘सिंधु’ शब्द का शाष्दिक अर्थ क्या है ?
(क) सागर
(ख) नदी
(ग) लहर
(घ) झरना
उत्तर :
(क) सागर

प्रश्न 7.
कवि शूल को क्या बनाने आ रहे हैं ?
(क) फूल
(ख) धूल
(ग) भूल
(घ) मूल
उत्तर :
(क) फूल

प्रश्न 8.
कविता में शूल तथा फूल किसका प्रतीक हैं ?
(क) दुख:सुख
(ख) हँसी-खुशी
(ग) न्याय-अन्याय
(घ) चल-अचल
उत्तर :
(क) दुख:सुख

प्रश्न 9.
‘शूल’ शब्द का अर्थ क्या है ?
(क) नदी
(ख) कवि
(ग) काँटा
(घ) फूल
उत्तर :
(ग) कॉटा

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 10.
कवि के अनुसार किसके उठने से धरती और आकाश का सिर उठेगा ?
(क) जीवन
(ख) लोगों
(ग) कल्पना
(घ) धीरज
उत्तर :
(ख) लोगों

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘उदयाचल’ और ‘अस्ताचल’ शब्दों का क्या अर्थ है?
उत्तर :
उदयाचल का अर्थ है- पूर्व दिशा में स्थित वह काल्पनिक पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है। यह जीवन में प्रगति का प्रतीक है। अस्ताचल का अर्थ है- पश्चिम का वह कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना माना जाता है।

प्रश्न 2.
‘विपथ’ होने का आशय क्या है?
उत्तर :
यह उनके लिए कहा गया है जो अज्ञान और अकर्मण्यता के कारण सच्चे रास्ते को छोड़कर पथभ्रष्ट बन जाते हैं। अपने लक्ष्य पथ से भटक जाते हैं।

प्रश्न 3.
‘कल्पना में उड़ने’ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
कल्पना में उड़ने से तात्पर्य है- कल्पना के हवाई महल बनाना, मन में ऊँची-ऊँची कल्पनाएँ करना, मन में करोड़ों की संपत्ति जोड़ना। ऐसे लोग कर्मठ बनकर कार्य सिद्ध करने की चेष्टा नहीं करते। केवल बड़ी-बड़ी बातें किया करते रहते हैं।

प्रश्न 4.
मँझधार में कवि किसको और कैसे पार लगाएगा?
उत्तर :
जो लोग मँझधार को देखकर घबड़ा जाते हैं उन्हें कवि पार लगाना चाहता है। उन्हें कवि सहारा दे रहा है कि पतवार लेकर घबड़ाएँ नहीं। कवि उन्हें तट पर थकने नहीं देगा, उन्हें पार लगाने की चेष्टा करेगा।

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प्रश्न 5.
सोहनलाल द्विवेदी के जन्म का समय लिखें।
उत्तर :
सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905, में हुआ था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) प्रस्तुत कविता में कवि किसे जगा रहा है तथा उन्हें क्या हिदायतें दे रहा है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि उन लोगों को जगा रहा है जो वास्तविक स्थितियों से मुंह मोड़कर कल्पनाओं की दुनिया में जीते हैं। कवि उन्हें हिदायत दे रहा है कि अब कल्पना करना छोड़कर वास्तविक जीवन जीने का प्रयास करें। अपने को पतन की ओर नहीं, प्रगति की ओर ले जाएँ। प्रयत्ल करने से वे पीछे न हटें। आकाश छोड़कर धरती पर अपनी निगाह रखें। कर्मठ, कर्त्तव्य परायण बनें। अज्ञान की नींद छोड़कर सजग सावधान बनें।

(ख) मानव मन की किन संकीर्णताओं का वर्णन पाठ में हुआ है? उनका वर्णन करें।
उत्तर :
कवि ने मानव मन की अनेक संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है। आज लोगों के मन में जाति, धर्म, संप्रदाय, अमीर, गरीब को लेकर संकीर्णताएँ बनी हुई हैं। लोगों में हीन ग्रंथि बनी हुई है। उनके मन को नाना प्रकार के सामाजिक बंधन, रूढ़ियाँ, अंध विश्वास जकड़ रखे हैं। जब तक मन में साहस शक्ति का संचार नहीं होगा, आत्मबल नहीं बढ़ेगा, तब तक वह प्रगति मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता।

(ग) कवि लोगों को क्या करने और क्या न करने का संदेश दे रहा है?
उत्तर :
कवि लोगों को यह संदेश दे रहा है कि वे सजग, सावधान होकर कर्त्तव्य पथ पर आगे बढ़ें। कल्यना लोक में विचरना बंद कर वास्तविक जगत् में रहे। मन में कवेल ऊँची-ऊँची कल्पनाएँ न करें। वास्तविक जीवन के बारे में सोचें। धरती के प्राणी बनें। कठिन कार्य के निर्वाह में सच्चा सुख मिलता है। प्रतिकूल स्थिति तथा रास्ते की कठिनाइयों को देखकर वे विचलित न हों। मन की संकीर्ण रूऩियों के बंधन को तोड़कर उदारवादी तथा मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाएँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

(घ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 1.
प्रगति के पथ पर बढ़ाने आ रहा हूँ।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में कवि कह रहा है कि वह लोगों को प्रगति की ओर ले जाने के लिए प्रस्तुत है। कवि लोगों के मन में शक्ति, साहस का संचार कर रहा है और मेरित कर रहा है कि वे आलस्य, अकर्मण्यता छोड़कर कर्त्तव्य परायण बने, कल्पना करना छोड़कर वास्तविक धरातल पर जोएँ। पथभष्टन बनें, सच्चे रास्ते का परित्याग न करें, मन में कभी हीन भावना न लाएँ, अपने को कमजोर न समझें । तभी निश्चित् रूप से वे जीवन में उन्नति करेंगे और प्रगति की और बढ़ेंगे।

(ङ) शूल तुम जिसको समझते थे अभी तक
फूल मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
उत्तर :
कवि लोगों को आश्वस्त कर रहा है कि वे जिसे काँटा समझ रहे हैं उसे वे फूल बनाने के लिए प्रस्तुत हैं। वे लोगों के दु:ख को दूर कर उसे सुख के रूप में बदलना चाहते है। इसलिए कवि ने स्सष्ट किया है कि बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करना ही सुख नहीं है। इस झूठे सुख में नहीं पड़ना चाहिए। साहस के साथ कठिन से कठिन कर्त्त्य का निर्वांह करना ही सच्चा सुख है। सच्चा सुख उत्तरदायित्व के निर्वाह में ही मिलता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न : प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने भारतवासियों को सजग, कर्मशील बनने की प्रेरणा दी है। अब इस बात की जरूरत है कि हमारे देशवासी आलस्य, निद्रा, अकर्मण्यता को छोड़कर कर्मठ बने, कवि उन्हें जगाने का प्रयल कर रहा है। अब वे पीछे न जाकर आगे बढ़े, सूर्योंय की भॉंति दीप्यमान बनकर चतुर्दिक रोशनी फैलाएँ।

कल्पना के महल बनाना छोड़ कर वास्तविक संसार में विचरण करें। आज तक वे कर्महीन एवं निश्चेष्ट रहकर प्रयत्न और परिश्रम से मुँह मोड़ते रहे। पर अब वे आकाश में उड़ने की कल्पना त्याग कर वास्तविक जीवन में रहें, धरती पर रहकर घरती के वास्तविक जीवन की बात करें। बड़े-बड़े सपने बनाना, बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करना कभी सुखद नहीं हो सकती, कल्पना के मोदक से कभी तन-मुन को संतुष्टि नहीं हो सकती।

उत्तरदायित्व का निर्वाह करने में, गुरुतर भार वहन करने से कभी दुःख नहीं होता, इससे तो मन और आत्मा को संतुष्टि मिलती है। जिसे लोग अभी तक काँटा अर्थात्दुःख समझते रहे, कवि उस कांटे को फूल बनाकर उनके मार्ग को प्रशस्त करना चाहता है। यदि मनुष्य प्रयत्न और परिश्रम का सदुपयोग करे तो निश्चय ही शूल को फूल अर्थात् पीड़ा को आंनद में बदल सकता है। व्यक्ति में इतना साहस और हिम्मत हो जिससे वह भयंकर लहरों वाली धारा को देखकर विचलित न हो, घबड़ाए नहीं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

वीर पुरुष सामने की कठिनाई को देखकर घबड़ाता नहीं, पतवार लेकर घबड़ाए नहीं, बल्कि तेज धारा की ओर पतवार घुमाकर आगे बढ़े। कवि चाहता है कि वह तट पर थके नहीं, बल्कि पार उतरने के लिए तत्पर होकर सफल हो। आज इस बात की आवश्यकता है कि व्यक्ति सारे बंधनों को तोड़ कर मन में युगों से मौजूद क्षुद्रता व तुच्छ भावना का परित्याग कर उदारता दिखलाए। सभी के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाए, उसे आज बूँद नहीं समुद्र बनने की जरूरत है।

अतः व्यक्ति हीन प्रवृत्ति को छोड़कर तेजस्वी बने। मन, कर्म और वचन से दिव्य कर्मों का अनुष्ठान करे। व्यक्ति के आगे बढ़ने, उन्नति के शिखर पर पहुँचने पर सारी पृथ्वी सारा आकाश उठकर उसका स्वागत करेगा। उसके गतिशील होने पर नवीन गति झनझ्षना उठेगी। कवि चाहता है कि व्यक्ति सन्मार्ग से कभी विचलित न हो। सही दिशा से कभी न भटके, व्यक्ति को प्रग्गति और विकास के चरम शिखर पर पहुंचना है। इस प्रकार कवि ने हमें साहसी, कर्त्तव्यपरायण, आशावादी, प्रगतिशील बनने की प्रेरणा दी है।

(क) वाक्य प्रयोग –

  • प्रगति – उत्थान- कर्मठ बनकर ही मनुष्य जीवन में प्रगति कर सकता है।
  • अरुण – लाल सूर्य – प्रभात होते ही बाल अरुण उदय हो जाता है।
  • शूल – काँटा (दु:ख) – मनुष्य प्रयत्न कर शूल को फूल बना सकता है।
  • शृंखला – बंधन – हमें सभी शृंखलाओं को तोड़ देना चाहिए।
  • पतवार – पार उतारने का साधन – हाथ में पतवार लेकर नाविक थकता नहीं।

(ख) विलोम शब्द –

  • आकाश – पाताल
  • कल्पना – यथार्थ
  • दु:ख-सुख
  • गुरु – लघु
  • फूल – शूल

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

(ग) उपसर्ग लगे शब्द –

  • प्र – प्रगति
  • वि-विपथ
  • अ – अतल.
  • सम् – संकीर्णताएँ

पर्यायवाची शब्द –

  • नभ – आकाश, गगन, आसमान।
  • धरती – धरा, पृथ्वी, भू।
  • फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम।
  • सिन्धु – सागर, समुद्र, रत्नाकर।

WBBSE Class 7 Hindi जागरण गीत Summary

जीवनल रिचय

सुकवि श्री सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905 ई० में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में बिंदकी गाँव में एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मालवीय जी के संपर्क से इनके हदय में राष्ट्रीयता की भावना जागी। काव्य रचना के साथ-साथ इन्होंने स्वाधीनता आन्दोलन में भी भाग लिया। इनकी कविता में गाँधीवादी विचारधारा दिखाई पड़ती है।

सन् 1988 ई० में इनका देहावसान हो गया। इनकी प्रमुख रचनाएँ – भैरवी, पूजा गीत, सेवाग्राम, प्रभाती, जय भारत, जय, कुणाल, वासवदता, वासंती आदि हैं। इन्होंने बालोपयोगी कविताएँ भी लिखी हैं। इनकी भाषा सीधी-सादी, सरल तथा बोधगम्य है। इनके काव्य में राष्ट्रीय जागरण, भारत की गरिमा, संस्कृति, ग्राम सुधार, समान सुधार की भावना है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 1

अब न गहरी नींद में तुम सो सकोगे,
गीत गाकर मैं जगाने आ रहा हूँ ।
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूँगा,
अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • अतल – अथाह, बहुत गहरा
  • अरुण – लाल

उदयाचल – पूर्व दिशा में स्थित वह पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है।
आस्ताचल – पश्चिम का कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना मानाजाता है, पश्चिमाचल पर्वत।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘जागरण गीत’ कविता से उद्धृत हैं। इसके कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी हैं।

प्रसंग – इस कविता में कवि ने लोगों को जगाने का प्रयास किया है। कवि लोगों में साहस, कर्म तथा आशावादी भावना का विकास करना चाहता है।

व्याख्या – कवि भारतवासियों को संबोधित करते हुए उन्हें प्रेरणा दे रहा है कि अब वे आलस्य तथा अकर्मण्यता की नींद को त्याग कर कर्मशील बनें। कवि उन्हें जगा कर कर्त्तव्य मार्ग पर लाना चाहता है। अब उन्हें अतल में अस्ताचल की ओर नहीं जाने देगा। वह तो अब जहाँ से बाल रवि उदित होते हैं उसे सजाने के लिए प्रस्तुत है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 2

कल्पना में आज तक उड़ते रहे तुम,
साधना से सिहरकर मुड़ते रहे तुम ।
अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूँगा,
आज धरती पर बसाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ :

  • कल्पना – भावना, अनुमान
  • साधना – किसी कार्य को सिद्ध करना
  • धरती-पृथ्वी
  • सिहर कर – डरकर

व्याख्या – कवि लोगों को कर्त्तव्यशील तथा प्रबुद्ध बनने के लिए कह रहा है। आज तक तो लोग कल्पना की दुनिया में हवाई महल बनाते रहे, सदा भावनाओं में बहते रहे। कार्य तथा साधना से डर कर पीछे हटते रहे, पर अब कवि उन्हें कोरी कल्पना नहीं करने देगा। उन्हें आकाश में उड़ने नहीं देगा। उन्हें पृथ्वी पर बसाने के लिए वह प्रयत्नशील है। अर्थात् कल्पना से हटाकर वास्तविकता की दुनिया में लाने की चेष्टा कर रहा है।

पद – 3

सुख नहीं यह, नींद में सपने सँजोना,
दुख नहीं यह, शीश पर गुरु भार ढोना ।
शूल तुम जिसको समझते थे अभी तक,
फूल में उसको बनाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • शूल – काँटा, कविता में शूल दु:ख का तथा फूल सुख का प्रतीत है।
  • सपने सजाना – बड़ी-बड़ी कल्पना करना।
  • गुरु भार – बड़ा उत्तरदायित्व्व।
  • शीश – मस्तक

व्याख्या – कवि लोगों को सावधान कर रहा है कि बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करने से सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। बड़े कर्त्तव्य का पालन करने, उत्तरदायित्व का निर्वाह करने से दु;ख नहीं होता। जिसे तुम अभी तक काँटा अर्थात् दु:ख समझते रहे, उसे मैं फूल अर्थात् सुख बनाने के लिए प्रयत्नशील हूँ।

पद – 4

देखकर मँझधार को घबरा न जाना,
हाथ ले पतवार को घबरा न जाना।
मैं किनारे पर तुम्हें थकने न दूँगा,
पार मैं तुमको लगाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • मंझधार – नदी के बीच की धारा,
  • किनारे – तद
  • पतवार – पार उतारने का साधन।

व्याख्या – कवि लोगों को उत्साहित करने के लिए कह रहा है कि नदी के बीच की धारा को देखकर घबराना नहीं चाहिए। हाथ में पतवार लेकर धैर्य नहीं खोना चाहिए। कवि तट पर उन्हें थकने नहीं देगा। वह लोगों को पार लगाने के लिए प्रस्तुत है। तात्पर्य यह है कि जीवन पथ पर कठिनाइयों को देखकर व्यक्ति को कभी घबड़ाना नहीं चाहिए। कवि उन्हें साहस प्रदान कर सफल करना चाहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 5

तोड़ दो मन में कसी सब श्रृंखलाएँ,
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिन्दु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूँगा,
सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ :

  • श्रृंखलाएँ- बंधन, जंजीर, कड़ियाँ।
  • संकीर्णता- क्रुद्रता, ओछापन, तंगदिली।

व्याख्या : कवि लोगों को उदार महान बनने की प्रेरणा दे रहा है। लोगों के मन में जकड़ी हुई जाति पाँति ऊँच-नीच छुआधूत, धर्म-संप्रदाय आदि की रूढ़ियों अंधविशासों के बंधन तथा क्नुद्रता, ओछापन को तोड़कर सागर की भाँति विशाल बनने की प्रेरणा दी है। कवि कह रहे हैं कि मैं तुम्हें बूँद की क्षुद्र-सीमित दायरे में नहीं रहने दूँगा, बल्कि सागर के विशाल कलेवर के समान विशाल एवं उदार बनाने के लिए तत्पर हूँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 3 भारत वर्ष to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – भारत वर्ष

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निर्वासित राजकुमार कौन थे?
(क) अशोक
(ख) राम
(ग) दधीचि
(घ) सिद्धार्थ
उत्तर :
(ख) राम

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 2.
भारतवर्ष कविता के कवि हैं :
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तर :
(ग) जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 3.
रताकर का शाब्दिक अर्थ है :
(क) गागर
(ख) सागर
(ग) नदी
(घ) रत्न का आकार
उत्तर :
(ख) सागर

प्रश्न 4.
दधीचि कौन थे?
(क) एक राजा
(ख) बौद्ध भिक्षु
(ग) एक ऋषि
(घ) एक भिखारी
उत्तर :
(ग) एक ऋषि

प्रश्न 5.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) इलाहाबाद
(ख) काशी
(ग) महिषादल
(घ) दरभंगा
उत्तर :
(ख) काशी ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 6.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ था?
(क) सन् 1889 में
(ख) सन् 1890 में
(ग) सन् 1891 में
(घ) सन् 1888 में
उत्तर :
(क) सन् 1889 में।

प्रश्न 7.
जयशंकर प्रसाद के पूर्वज किस नाम से प्रसिद्ध थे?
(क) मुरली बाबू
(ख) सुंघनी साहू
(ग) मंगल्ला बाबू
(घ) जीवन बाबू
उत्तर :
(ख) सुंघनी साहू।

प्रश्न 8.
जयशंकर प्रसाद किस वाद के कवि हैं?
(क) छाम्यावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) जनवाद
उत्तर :
छायावाद।

प्रश्न 9.
हिमालय का औँगन किस देश को कहा गया है ?
(क) भारतवर्ष
(ख) श्रौलंका
(ग) नेपाल
(घ) भूटान
उत्तर :
(क) भारतवर्ष

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 10.
‘रत्नाकर’ का शाब्दिक अर्थ है –
(क) रत्न में आकार
(ख) सागर
(ग) नदी
(घ) रत्ल का आकार
उत्तर :
(ख) सागर

प्रश्न 11.
किसने पहनाया हीरक हार ?
(क) तम ने
(ख) उषा ने
(ग) मोहन ने
(घ) साहेब ने
उत्तर :
(ख) उषा ने

प्रश्न 12.
महर्षि दधीचि ने देवराज इन्द्र को क्या दान दिया ?
(क) हड्डुयाँ
(ख) रल
(ग) देवलोक
(घ) जल
उत्तर :
(क) हड्डियाँ

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
द्धीचि ने क्या दान किया था तथा क्यों?
उत्तर :
दर्धीचि ने अस्थि दान किया था। उनकी हड्डी से इन्द्र ने वज का निर्माण कर वृत्रासुर का वध किया। अत: देवताओं की विजय तथा असुरों की पराजय के लिए दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान किया।

प्रश्न 2.
बौद्ध भिभ्यु बनकर घूमनेवाले राजा कौन थे? इसका कारण क्या था?
उत्तर :
बौद्ध भिक्षु बनकर घूमने वाले राजा अशोक थे। बौद्ध धर्म के प्रचार तथा मानवता के कल्याण के लिए सम्वाट अशोक घर-घर जाकर दौन-दुखियों के प्रति द्या तथा करुण भावना व्यक्त करते थे।

प्रश्न 3.
निर्वासित राजा की प्रसिद्धि का क्या कारण है ?
उत्तर :
निर्वांसित राजकुमार राम ने रावण का विनाश करने के लिए तथा देवताओं, ॠषियों, और मानवता के संकट को दूर करने के लिए सागर की छाती पर सेतु का निर्माण तथा रावण को पराजित कर देव संस्कृति की रक्षा की। यही उनकी प्रसिद्धि का कारण है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 4.
हिमालय का आँगन किसे और क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
हिमालय का आँगन भारतवर्ष को कहा गया है, क्योंकि भारत हिमालय के चरणों में स्थित है। हिमालय भारत का गौरव है । हिमालय का सांस्कृतिक महत्त्व है।

प्रश्न 5.
जयशंकर प्रसाद की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
जयशंकर पसाद की मृत्यु 1937 ई० में हुई थी ।

प्रश्न 6.
जयशंकर प्रसाद के पिता का क्या नाम था ?
उत्तर :
जयशांकर प्रसाद के पिता का नाम सुँघनी साहू था।

प्रश्न 7.
सुष्टि का बीज किसने बचाया ?
उत्तर :
सृष्टि का बौज मनु ने बथाया।

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प्रश्न 8.
पुरन्द्र किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
पुरन्दर इन्द्र को कहा जाता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) भारत के प्राचीन गौरव का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
कविवर जयशंकर म्रसाद ने ‘भारतवर्ष’ कविता में भारत के अतीत का गौरवमय चित्रण किया है। सर्वम्मथम हिमालय की गोद में स्थित भारत में ही सभ्यता और ज्ञान की किरणें फूटीं। संगीत के सात स्वरो को सरस्वती ने वीणा के तारों से झंकृत किया। सामवेद की रचना इसी भारत भूमि में हुई । हमारे आदि पुरुष मनु ने बीज रूप में सृष्टि को बचाया। महर्षि दर्धीचि का अस्थिदान हमारी जातीयता के विकास का उदाहरण है।

उनकी अस्थि से देवराज इन्द्र ने वज्र बनाकर वृत्रासुर का वध किया। इस प्रकार देव-संस्कृति की रक्षा हुई। निर्वासित होते हुए भी त्री राम ने राक्षसी संस्कृति के विनाश तथा रावण को पराजित करने के हेतु समुद्र पर सेतु का निर्माण कर दिया। भगवान बुद्ध और महावीर ने धर्म के नाम पर हो रही नर बलि तथा पशु बलि को समाप्त कर विश्व को शांति और अहिसा का संदेश दिया। भारतीय वीरों ने तलवार के द्वारा विजय के स्थान पर धर्म और प्रेम की विजय को विश्व में प्रचारित किया।

सामाट अशोक भिक्षु बनकर घूम-घूम कर शांति, अहिंसा और प्रेम का प्रचार करते रहे। सम्माट चन्द्रगुप्त ने युद्ध में यवन सेनापति सेल्युकस को पराजित करके भी उसे प्राण दान देकर अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। हमारे पूर्वज भारतवासी चरित्रवान, शक्तिशाली, दृढ़ प्रतिश तथा परोपकारी थे। शब्ति सम्पन्न होकर भी विनप्र थे।

(ख) ‘पुरंदर ने पवि से है लिखा अस्थियुग का मेरे इतिहास’ में वर्णित इस पौराणिक कथा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
देवासुर संग्राम की घटना का युग अस्थियुग था। देवताओं के राजा इन्द्र संग्राम में असुरों के सेनापति वृत्रासुर से भयमीत थे। जहा के निर्देश से वे महर्धि दधीचि के पास आए, क्योंकि दधीचि की हद्धियों से निर्मित अस्व से ही वृद्रासुर का वध हो सकता था। राक्षस राज वृश्रासुर के संहार के लिए देवराज इन्द्र ने महार्षि दधीीचि से अस्थिदान की माँग की। महर्षि ने देवत्व की रक्षा के लिए सहर्ष इन्द्र का प्रस्ताव स्वीकार कर प्राण त्यागकर अपनी हड्डियाँ दे दीं। इन्द्र ने उनकी अस्थि से वज्र का निर्माण कर राक्षस राज वृत्रासुर का संहार किया। दधीचि का यह अस्थि त्याग भारतीय जाति के त्याग का अनुपम उदाहरण है।

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(ग) ‘भारतवर्ष’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रसादजी ने प्रस्तुत कविता में भारत के अतीत का गौरव, भारतीयों की जातीय, चारिप्रिक विशेषताओं का वर्णन किया है।
सर्वपथम उषा ने हिमालय की गोद में स्थित भारत को अपनी स्वर्णिम किरणों का उपहार दिया। सर्वप्रथम भारतवासी ही ज्ञान संपन्न हुए और विश्व के अन्य भागों में भी ज्ञान का विस्तार और प्रसार किए। हमारे आदि पुरुष मनु ने पेलय से सृष्टि को यनाया। यहीं पर सरस्वती की वीणा के तारों से संगीत के सातों स्वर फूटे। सामवेद की रचना इसी भारत भूमि में हुई। महार्षि दर्धीचि ने अस्थिदान देकर राक्षस राजा वृन्रासुर का संहार किया था।

राजकुमार राम ने सागर की छाती पर सेतु का निर्माण कर रावणत्व का समूल नाश किया। भगवान बुद्ध तथा स्वामी महावीर ने पशु बलि प्रथा को बन्द कर विश्व को प्रेम, शांति, अहिंसा का उपदेश दिया। सम्माट अशोक ने भिक्षु बनकर घर-घर जाकर दया, करुणा का पाठ पदा़ाया। समाट चन्द्रगुप्त ने रणक्षेत्र में यवन सेनापति सेल्युकास को पराजित करके भी प्राणदान दे दिया। हमने चीन को धर्म दृष्टि, लंका तथा सिंहल को शील की शिक्षा दी।

जातियों का उत्थान-पतन यहाँ होता रहा। विदेशियों के बर्बर आक्रमणों को झेलते हुए भी हम अडिग बने रहे । हमारी जन्मभूमि यही है, हम कहीं बाहर से नहीं आए हैं। हमने किसी का कुछ भी छीना नहीं। हम परोपकारी अतिधि सेवी, दृढ़, प्रतिश, साहसी तथा शांति के हिमायती रहे। हम भारत के गौरव की रक्षा के लिए सर्वस्व त्याग के लिए मस्तुत रहेंगे। इस प्रकार इस कविता में देश प्रेम तथा राष्ट्रोय भावना का चित्रण हुआ है।

(घ) निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या ससन्दर्भ कीजिए ।

प्रश्न 1.
हमारे संचय में था दान अतिधि थे सदा हमारे देव।
उत्तर :
यह अंश कविवर जयशंकर प्रसाद की रचना ‘भारतवर्ष’ कविता से उद्धृत है। इस पंक्ति में कवि ने अतीत मे भारतीयों की दानशीलता तथा उदारता का चिद्रण किया है। हमारे पूर्वज अपने सुख के लिए, भोग की कामना के लिए धन-संचय नही करते थे। अपने अर्जित धन से गरीबों-अनाधों को दान देकर उनकी सहायता करते थे। उनमे परोपकार की भावना थी। अतिथियों का देवतुल्य सत्कार करते थे। वे सच्चे अर्थों में अतिथि सेवी थे। अतिथि देवो भव’ उनका सिद्धांत था।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 2.
बचाकर बीज रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय की शीत।
उत्तर :
हमारे आदि पुरुष ने बीज रूप में सृष्टि की रक्षा की। प्रलय के समय सबय कुछ जल- मग्न हो गया। अकेले मनु एक नाव में बैठकर हिमालय की चोटी पर पहुँच गए। प्रयय कालीन शीत लहरी को सहकर भी निडर बने रहे। श्रद्धा के सहयोग से उन्होंने सृष्टि को बचाया।

प्रश्न 3.
जिएँ तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष।
उत्तर :
यह अंश ‘भारतवर्ष’ कविता से उद्धृत है। इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद है।
यहाँ कवि की राष्ट्रीय भावना तथा देश प्रेम की इच्छा व्यक्त हुई है। कवि का कथन है कि हमारा जीवन स्वदेश भारतवर्ष के लिए है। अतः हम जोएँ तो भारत के लिए और मरें तो भारत के लिए। हमें इस बात का अभिमान तथा हर्ष होना चाहिए कि हमारा जीवन अपने देश के लिए ही है। हमें स्वदेश के लिए अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व अर्षण कर देने के लिए सदैव प्रस्तुत रहना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दधीचि के त्याग को कवि ने जातीयता का विकास क्यों कहा है?
उत्तर :
दधीचि एक महान त्यागी-तपस्वी कषि थे। भारत के इतिहास में वह युग अस्थियुग था। देवराज इन्द्र असुरों के सेनापति वृत्रासुर से संत्रस्त थे। उसे पराजित करने के लिए इन्द्र दधीचि ॠषि के पास जाकर उनसे उनकी अस्थियों (हड्युयों) की याचना की। देव जाति की रक्षा के लिए महर्षि दरीचि अपनी अस्थियों का दान देकर अनुपम त्याग का परिचय दिया।

दधीचि की अस्थियों से वज्र बनाकर इन्द्र ने वृत्रासुर का वध कर देवजाति की रक्षा की। इस प्रकार इन्द्र ने अस्थियुग के इतिहास को वज्र से लिखा। ॠषि दधीचि के इस अनुपम त्याग और बलिदान से स्षष्ट हो जाता है कि उस युग में सामाजिक स्तर पर भारतीय जाति कितनी विकसित, कितनी महान तथा आदर्शमयी थी।

प्रश्न 2.
कवि ने भारत को प्रकृति का पालना क्यों कहा है?
उत्तर :
हमारा देश प्राकृतिक शोभा तथा सुषमा का आँगन है। यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता निराली है। पर्वतों, वन प्रदेशों, नदियों तथा शस्य-श्यामला धरती का सौन्दर्य अतीव मोहक एवं निराला है। षड्कतुओं की शोभा अपने आप में चित्ताकर्षक है। इसीलिए कवि ने इसे प्रकृति का पालना कहा है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 3.
पाठ में आए पौराणिक तथा ऐतिहासिक पुरुषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मनु – पौराणिक कथाओं के अनुसार मनु हमारे आदि पुरुष हैं। प्रलय काल में सृष्टि के जलमग्न हो जाने पर मनु एक नाव पर सवार हो गए। उनकी नाव उस बाढ़ में उत्तर गिरि से टकराई। वहाँ उतर कर मनु ने श्रद्धा के संपर्क से बीज रूप में सृष्टि को बचाया।

पुरन्दर (इन्द्र) – ये देवताओं के अधिपति तथा स्वर्ग के राजा थे। देवासुर संग्राम में वे देवजाति के सेनापति थे। वृत्रासुर का वध कर इन्होंने देवजाति की रक्षा की।

राम – अयोध्यापति महाराज दशरथ के पुत्र राम भगवान के अवतार माने जाते है। निर्वासित होते हुए भी राम ने सागर की छाती पर सेतु का निर्माण कर रावण को समाप्त कर देवत्व की रक्षा की।

बुद्ध – कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन के पुत्र राजकुमार गौतम ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध कहलाए। इन्हें भगवान का अवतार माना जाता है। ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी) में दिया।

अशोक – ये भारत के प्रसिद्ध सम्राट थे। प्रजा की भलाई के लिए इन्होंने अनेक कल्याण- कारी योजनाओं को मूर्तरूप दिया। बौद्ध धर्म स्वीकार कर ये भिक्षु बनकर, करुणा, दया तथा प्रेम का संदेश देने लगे।

चन्द्रगुप्त – चन्द्रगुप्त भारत के प्रतापी सम्माट थे। महान् नीतिज्ञ चाणक्य के शिष्य थे। सम्राट अशोक इनके पौत्र थे। चन्द्रगुप्त यवन सेनापति सेल्युकस को युद्ध में पराजित कर उसे प्राण दान दिया। सेल्युकस की पुत्री राजकुमारी हेलेन (कार्नेलिया) से शादी की। इस प्रकार उन्होंने यवन को दया का दान दिया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

भाषा-बोध

(क) उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष 1

(ख) संधि विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए।
हिमालय – हिम + आलय – स्वर संधि
संसृति – सम् + सृति – व्यंजन संधि
निर्वासित – नि: + वासित – विसर्ग संधि
संचय – सम् + चय – व्यंजन संधि
रत्नाकर – रत्न + आकर – स्वर संधि

(ग) सामासिक पदों का विग्रह कर समास का नाम लिखिए ।
सप्त स्वर – सात स्वरों का समाहार – द्विगु समास
उत्थान-पतन – उत्थान और पतन – द्वनन्द् समास
शान्ति संदेश – शांति का संदेश – तत्पुरुष समास
अस्थियुग – अस्थि का युग – तत्पुरुष समास

(घ) प्रत्ययों से बने शब्द –
इत – निर्वासित
ता – जातीयता, नम्रता
यों – जातियों
ई – हमी, वही
आ- लिखा

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

(ङ) अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग कीजिए-
पुरन्दर – इन्द्र – पुरन्दर ने वज्र से वृत्रासुर का वध किया।
रत्नाकर – समुद्र – राम ने रत्नाकर की छाती पर पुल बना दिया।
सर्वस्व – सबकुछ – हमें स्वदेश पर सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहिए।
नम्रता – विनय – हमारे पूर्वजों में सदा नम्रता बनी रही।
अभिनंदन – प्रशंसा, स्वागत-हमें महान पुरुषों का अभिनंदन करना चाहिए।

WBBSE Class 7 Hindi भारत वर्ष Summary

जीवन वरचचय

जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई० में वाराणसी के एक सुप्रसिद्ध वैश्य कुल में हुआ था। स्कूली शिक्षा मात्र सातवीं कक्षा तक मिली, तदनंतर घर पर ही इन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, बंगला आदि का अध्ययन किया।1937 ई० में इनका देहावसान हो गया। घरेलू समस्याओं के बावजूद प्रसादजी अध्ययन, मनन, पर्यवेक्षण तथा लेखन से विमुख न हुए। इन्हें जन्म से ही कवि हृदय मिला था। प्रसादजी की भाषा साहित्यिक, परिमार्जित, संस्कृत निष्ठ होते हुए भी बोधगम्य है।

उसकी सरलता तथा प्रवाह मन को मुग्ध कर लेता है। ये छायावाद के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्रसादजी बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न साहित्यकार थे। शब्द विन्यास, वस्तु चयन, अलंकार योजना, भाषा की सरलता आदि सभी दृष्टियों से प्रसाद जी का काव्य हिन्दी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता हैं। प्रसादजी अपने युग के सबसे बड़े पौरुषवान कवि थे।

इनकी काव्य रचनाएँ- लहर, झरना, आँसू, महाराणा का महत्त्व तथा कामायनी आदि हैं। नाटक-स्कदंगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुव स्वामिनी, जनमेजय का नागयज्ञ आदि। कहानी संग्रह-छाया, प्रतिध्वनि, इन्द्रजाल आँधी, आकाशदीप। उपन्यास-कंकाल, तितली, इरावती। प्रसादजी की रचनाओं में प्रेम-सौन्दर्य तथा देश प्रेम की मनोरम झाँकी मिलती है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

पद – 1

हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार,
उषा ने हँस अभिनंदन किया और पहनाया हीरक हार।
जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक,
व्योम तम पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।।

शब्दार्थ :

  • किरण – रश्मि व्योम – आकाश
  • उपहार – भेंट
  • आंगन – प्रांगण
  • हीरक-हीरा
  • किरणों का उपहार – ज्ञान का प्रकाश
  • संसृति – संसार, सृष्टि
  • हम – भारतवासी
  • तम पुंज – अंधकार का समूह
  • आलोक-प्रकाश
  • अखिल – संपूर्ण, समस्त
  • अशोक – शोक रहित, खुश
  • उषा- प्रभात, अरुणोदय

सन्दर्भ – प्रस्तुत अंश ‘भारतवर्ष’ शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद हैं।

प्रसंग – इस अंश में कवि ने भारत के गौरवपूर्ण अतीत का वर्णन किया है। सर्वप्रथम भारत में ही ज्ञान-विज्ञान का प्रकाश फैला।

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कथन है कि सर्वप्रथम हिमालय प्रांगण भारत में ज्ञान रूपी सूर्य का उदय हुआ। प्रभात की किरणों ने हँसकर हीरों का हार पहनाकर उसका स्वागत किया। भारत ही सर्वपथम ज्ञान की ज्योति से सुशोभित हुआ। भारतवासियों ने ज्ञान संपन्न होकर सारे विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। सारा संसार ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो उठा। सारे विश्व का अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट हो गया। संपूर्ण संसार शोक रहित हो गया। सर्वत्र प्रसन्नता का वातावरण छा गया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

पद – 2

विमल वाणी ने वीणा ली, कोमल-कमल-कर में सप्रीत।
सप्तस्वर सप्तसिन्धु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम संगीत।
बचाकर बीज-रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय का शीत।
अरुण-केतन लेकर निज हाथ, वरुण-पथ में हम बढ़े अभीत।।

शब्दार्थ :

  • विमल – स्वच्छ, निर्मल
  • वाणी – सरस्वती
  • कर – हाथ
  • सम्रीत – प्रेमपूर्वक
  • सप्तस्वर – संगीत के सात स्वर
  • वरुण पथ – जल मार्ग
  • साम संगीत – साम वेद का संगीत
  • सृष्टि – संसार
  • प्रलय – सर्वनाश
  • अरुण केतन- लाल पताका
  • सप्त सिन्धु – सप्त सैन्धव प्रदेश
  • अभीत – निडर

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कथन है कि ज्ञान की देवी दिव्य रूप वाली सरस्वती ने अपने कमल के समान कोमल हाथों में वीणा धारण कर सर्वप्रथम संगीत के स्वर निःसृत की। उनकी वीणा से नि:सृत संगीत के सातों स्वर इसी आर्यावर्त (सप्त सिन्धु – सप्त सैन्धव) में गूँज उठे। संगीत शास्त्र के आदि ग्रंथ सामवेद की रचना इसी देश में हुई। सामवेद के संगीत के स्वर सर्वप्रथम इसी देश में प्रसारित हुए। प्रलयकालीन जल प्लावन के समय भारतपुत्र मनु बीज के रूप में सृष्टि को विनाश से बचाये। नाव पर बैठ कर प्रलयकालीन शीत लहरी को सहते हुए उन्होंने सृष्टि का उद्धार किया। हमारे पूर्वज भारतवासी ने स्वदेश की लाल पताका लेकर जल मार्ग से जाकर प्रेम, सद्भावना का संदेश दिया।

पद – 3

सुना है दधीचि का वह त्याग, हमारा जातीयता-विकास।
पुरन्दर ने पवि से है लिखा, अस्थि-युग का मेरे इतिहास।
सिन्धु-सा विस्तृत और अथाह, एक निर्वासित का उत्साह।
दे रही अभी दिखायी भग्न, मग्न रत्नाकर में वह राह ।।

शब्दार्थ :

  • जातीयता – जाति का भाव, गुण
  • निर्वासित – निकाला हुआ (राम)
  • पवि – वज्र
  • अस्थि – हड्डी
  • राह – रास्ता, मार्ग
  • पुरन्दर – इन्द्र
  • उत्साह – जोश
  • भग्न – डूबे हुए
  • रत्नाकर – समुद्र
  • भग्न-खण्डहर

व्याख्या – दधीचि एक महर्षि थे। देवासुर संग्राम में असुरों के सेनापति वृत्रासुर के संहार के लिए इन्द्र ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थियों (हड्डियों) की माँग की। उनकी हड्डी से वज्र का निर्माण कर इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। दधीचि का यह अस्थि त्याग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। महर्षि दधीचि ने सहर्ष अस्थिदान कर यह स्पष्ट कर दिया कि त्याग, बलिदान आदि गुणों के क्षेत्र में यह त्याग जातीयता के विकास को प्रमाणित करता है। इन्द्र ने वज्र से वृत्रासुर का संहार कर अस्थियुग के इतिहास को अमर बना दिया। निर्वासित राम का उत्साह सागर की भाँति अथाह और असीम था। राम ने रावण का विनाश करने के लिए सागर की छाती पर सेतु बाँध कर लंका पर चढ़ाई की थी। सागर में सेतु के भग्नावशेष आज भी जल में दिखाई पड़ते हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

पद – 4

धर्म का ले लेकर जो नाम, हुआ करती बलि, कर दी बन्द।
हमीं ने दिया शान्ति-सन्देश, सुखी होते देकर आनन्द।
विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम ।
भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाते घर-घर घूम ।।

शब्दार्थ :

  • बलि – वह पशु जो किसी देवता के निमित्त मारा जाए
  • भिक्षु – संन्यासी
  • धूम – प्रसिद्धि
  • सम्राट – महाराजाधिराज
  • आनंद – खुशियाँ

व्याख्या – प्राचीन काल में यज्ञों में देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धर्म के नाम पर पशुबलि की प्रथा प्रचलित थी। धर्म के नाम पर होने वाली इस बलि-प्रथा को भगवान बुद्ध तथा महावीर ने अपने उपदेशों द्वारा बन्द करवाया। सारे विश्व को हमने प्रेम, शांति तथा अहिंसा का दिव्य संदेश दिया। हम भारतवासी दूसरों को आनंद प्रदान कर स्वयं सुखी होते थे।

तलवार द्वारा बर्बरतापूर्ण विजय में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि धर्म के प्रचार-प्रसार से विश्व में अपनी कीर्ति स्थापित करते थे। इसी देश में सम्राट आशोक बौद्ध धर्म स्वीकार कर भिक्षु के रूप में घूम-घूम कर धर्म का प्रचार करते रहे। वे घर-घर जाते और सभी को दया तथा करुणा का उपदेश देते थे।

पद – 5

यवन को दिया दया का दान, चीन को मिली धर्म की दृष्टि ।
मिला था स्वर्ण-भूमि को रत्न, शील की सिंहल को भी सृष्टि ।
किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं ।
हमारी जन्म भूमि थी यहीं, कहीं से हम आये थे नहीं ।।

शब्दार्थ :

  • यवन – यूनान के निवासी स्वर्ण
  • भूमि – वर्मा, सुमात्रा
  • रत्न – मणि
  • पालना – झूला
  • शील – उत्तम स्वभाव, आचरण
  • सृष्टि – संसार

व्याख्या – भारतवर्ष के सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने युद्ध भूमि में यवन सेनापति सेल्युकस को पराजित कर उस पर दया दिखलाते हुए प्राण दान दिया। चीन को धर्म-दृष्टि, वर्मा, सुमात्रा को, त्रित्न (ज्ञान, दर्शन, चरित्र) की तथा लंका को शील की शिक्षा देकर उपकृत किया। भारतीयों ने किसी भी देश या जाति से बलपूर्वक कुछ नहीं प्राप्त किया। यह देश प्राकृतिक शोभा, सुंदरता तथा सुषमा का आंगन है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है । हम भारतीय इसी देश के मूल निवासी हैं। हम आर्यों की संतान हैं। आर्य बाहर से यहाँ आए, यह कथन भ्रमपूर्ण तथा असत्य है। अत: आर्यों का मूल देश भारत ही है। हम कहीं बाहर से नहीं आए थे।

पद – 6

जातियों का उत्थान-पतन, आँधियाँ झड़ीं प्रचण्ड समीर ।
खड़े देखा, झेला हँसते, प्रलय में पले हुए हम वीर ।
चरित के पूत, भुजा में शक्ति, नप्रता रही सदा सम्पन्न ।
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न ।।

शब्दार्थ :

  • उत्थान – प्रगति
  • पतन – विनाश
  • पूत – पवित्र नम्रता – विनय
  • गौरव – बड़प्पन, आदर
  • विपन्न – दु:खी
  • प्रचंड – उग्र, भयंकर
  • समीर – हवा
  • गर्व – स्वाभिमान
  • सम्पन्न – धनी, परिपूर्ण

व्याख्या – हमारे देश में कई जातियों का विकास हुआ, लेकिन कालक्रम से वे नष्ट भी हो गये। इस देश पर कई बार विदेशी लुटेरों तथा विजय एवं धन की कामना करने वाले विजेताओं के आक्रमण हुए। हमने अशांति, संकट और आक्रमण रूपी आँधियों तथा तूफानों का सामना किया। वीर भारतवासी उन भयंकर संकटों को सहते रहे, हँसते हुए जूझते रहे। पर कभी डरे नहीं, साहस नहीं छोड़े, सदा स्थिर बने रहे। वीरतापूर्वक मुकाबला करते रहे। हम प्रलय जैसी विभीषिका को भी पार कर चुके हैं। हमारा चरित्र पवित्र था। हम शारीरिक शक्ति से भी सम्पन्न थे। फिर भी अतिशय विनम्र तथा शालीन बने रहे। हृदय में स्वाभिमान की भावना भरी हुई थी। हम किसी की विपन्नता, अभाव को नहीं देख सकते थे। पर सेवा तथा परोपकर की भावना से परिपूर्ण थे।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

पद – 7

हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव ।
वचन में सत्य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव ।
वही है रक्त, वही है देश, वही साहस है, वैसा मान ।
वही है शान्ति, वही है शक्ति, वही हम दिव्य आर्य-सन्तान ।
जिएँ तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष ।
निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।।

शब्दार्थ :

  • संचय – संग्रह
  • वचन – वाणी
  • टेव – हठ, दृढ़ता
  • अभिमान – गर्व
  • निछावर-उत्सर्ग
  • अतिथि – मेहमान
  • प्रतिज्ञा – प्रण, शपथ
  • दिव्य – भव्य, अलौकिक
  • हर्ष – खुशी, आनंद
  • सर्वस्व – सब कुछ

व्याख्या – हम भारतवासी परोपकार तथा दान के लिए धन-संग्रह करते थे। स्वार्थ के लिए नहीं। अतिथि का सम्मान देवता की तरह करते थे। हमारी वाणी में सत्य का संचार था। हृदय में तेजस्विता थी, प्रतिज्ञा में दृढ़ता थी। प्राण देकर की हुई प्रतिज्ञा का पालन करते थे। हम भारतवासी आर्यों की मूल संतान हैं। हमारी नसों में उन्हीं का खून विद्यमान है। उन्हीं की भाँति हममें साहस तथा ज्ञान है। हम उन दिव्य आर्यों के वंशज हैं, इसलिए हम में वही शान्ति तथा शक्ति है। हममें हर्ष तथा स्वाभिमानपूर्वक यह भाव होना चाहिए कि हमारा जीवन स्वदेश भारत के लिए है। हम अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व प्यारे स्वदेश के लिए न्योछावर कर दें। यही प्यारा देश हमारी जन्मभूमि है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 2 संगठन to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – संगठन

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
कवि किसकी सेवा करने की कामना करता है?
(क) माता-पिता की
(ख) गुरुजनो की
(ग) स्वदेश की
(घ) दुश्मनों की।
उत्तर :
(ग) स्वदेश की।

प्रश्न 2.
कवि बीस वर्षों तक किस व्रत का पालन करना चाहता है?
(क) बृहस्पति व्रत
(ख) वहायर्य वत
(ग) वाणप्रस्थ वत
(घ) गृहस्थ व्रत।
उत्तर :
(ख) बहाचर्य व्रत

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

प्रश्न 3.
हमारी वीरता किसके लिए भय का कारण बने ?
(क) दोस्त के लिए
(ख) दुश्मनों के लिए
(ग) अपनों के लिए
(घ) भिखारी के लिए
उत्तर :
(ख) दुश्मनों के लिए।

प्रश्न 4.
कवि किस बंधन को तोड़ना चाहता है?
(क) पारिवारिक
(ख) सामाजिक
(ग) कुरीति
(घ) मेल-जोल
उत्तर :
(ग) कुरीति

प्रश्न 5.
‘संगठन’ किस कवि की रचना है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मुकुटधर पाण्डेय
(ग) रामनरेश त्रिपाठी
(घ) श्रीधर पाठक
उत्तर:
(ग) रामनरेश त्रिपाठी

प्रश्न 6.
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) जौनपुर
(ख) गोरखपुर
(ग) भोजपुर
(घ) सुस्तानपुर
उत्तर :
(क) जौनपुर

प्रश्न 7.
‘संगठन’ कविता में कवि ने किनको तोड़ने की बात की है ?
(क) परंपरा को
(ख) कुरीतियों को
(ग) संबंधों को
(घ) रीतियों को
उत्तर :
(ख) कुरीतियों को

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

प्रश्न 8.
हमारी वीरता किसके लिए भय का कारण बने ?
(क) दोस्त के लिए
(ख) दुश्मन के लिए
(ग) अपनों के लिए
(घ) भिखारी के लिए
उत्तर :
(ख) दुश्मन के लिए

प्रश्न 9.
हमारी वीरता से कौन कांप जाए ?
(क) दुष्ट
(ग) कवि
(ग) गुजन
(घ) अनामिका
उत्तर :
(क) दुष्ट

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
कवि ईश्वर से क्या प्रार्थना करता है?
उत्तर :
कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि हमें देश सेवा एवं मानव की भलाई में लगे रहने की प्रेरणा दें ।

प्रश्न 2.
इस कविता के माध्यम से कवि ने हमें क्या सन्देश दिया है?
उत्तर :
इस कविता के माध्यम से कवि ने हमें कर्तव्य मार्ग से न चूकने, स्वदेश की रक्षा के लिए तत्पर बने रहने तथा कभी निर्बल न बनने का संदेश दिया है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

प्रश्न 3.
कवि किन साधनों को प्राप्त करने की कामना करता है?
उत्तर :
कवि बल, बुद्धि, विद्या तथा धन जैसे अनेक साधनों को प्राप्त करने की कामना करता है।

प्रश्न 4.
किन परिस्थितियों में कवि हिम्मत न हारने की सलाह हमें दे रहा है?
उत्तर :
संकटों में चाहे हम दरिद्र बन जाएँ, विपत्ति-बाधाओं से चाहे हम घिर जाएँ, ऐसी परिस्थिति में हिम्मत न हारने की सलाह कवि हमें दे रहा है।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए ?
उत्तर :
उनके अनुसार बल, बुद्धि, विद्या रूपी धन को प्राप्त कर देश को सर्मां्षित कर देना ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए।

प्रश्न 6.
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था ?
उत्तर :
रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 1889 ई० में हुआ था।

प्रश्न 7.
कवि देश को क्या समर्पित करना चाहते हैं ?
उत्तर :
कवि देश को बल, बुद्धि और विद्या को प्राप्त कर देश को समार्षित करना चाहते हैं।

प्रश्न 8.
कवि किनकी शक्तियाँ लगाना चाहता है ?
उत्तर :
कवि मन और देह (आध्यात्म और भौतिक) शक्तियाँ लगाना चाहता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) संगठन कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्सुत कविता में कवि भगवान से ऐसी शान्ति पाने की प्रार्थना करता है कि भारत संगठित बना रहे। हम अपना सर्वस्ब देश के लिए समर्मित कर दें। मन और तन को शान्ति संपन्न बनाने के लिए बहलचर्य का पालन करें। सारी कुरीतियों को तोड़ डालें। किसी भी संकट के समय साहस न छोड़े। हमारी वीरता से शत्रु भयभीत हो उठे। प्राण रहते हम स्वदेश की रक्षा करते रहें। सारे संसार को हम अपना बना सकें। सर्वत्र हमारी सुकीर्ति गूँजे।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

(ख) कवि मातृभूमि की सेवा कैसे करना चाहता है ?
उत्तर :
कवि चाहता है कि स्वदेश की सेवा में ही अपना शरीर अर्पित कर दें। बल, बुद्धि, विद्या, धन के सभी साधनों को देश के लिए सर्मार्पित कर देना चाहता है। वह चाहता है कि स्वदेश के प्रति उसमें सच्चाप्देम बना रहे। जब तक उसके शरीर में प्राण का संचार हो, तब तक देश की रक्षा करता रहे । इस प्रकार कवि देश सेवा को ही सबसे बड़ी सेवा और देश पर मर मिटने को ही सबसे बड़ा बलिदान मानता है। इस प्रकार कवि मातृभूमि की सेवा करना चाहता है।

(ग) कवि निर्बलता एवं पतन से बचने के लिए हमें क्या सलाह देता है?
उत्तर :
कवि यह सलाह देना चाहता है कि हम समाज में फैली सारी कुरीतियों के बंधन को तोड़ दें और बीस वर्ष तक बहाचर्य का पालन कर मानसिक और शारीरिक दृष्टि से शक्ति संपन्न बन जाएँ। जिससे हम कभी निर्बल न हों और कभी हमारा पतन न हो।

(घ) कवि ईश्वर से शक्ति क्यों माँगता है?
उत्तर :
कवि ईश्वर से शक्ति माँगता है, ताकि उसे पाकर वह सारे संसार को अपना बना सके। प्रभु को फिर से देश में बुला सके। सुख के समय प्रभु को न भूले तथा टु:ख में हार न माने। कर्तव्य से कभी न हटे। समस्त संसार में उसकी सुकीर्ति गूंज उठे।

(ङ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर यथा निर्देश दीजिए-

(अ) छीने न कोई हमसे प्यारा वतन हमारा।

प्रश्न 1.
कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर :
मस्तुत पंक्ति के कवि श्री रामनरेश त्रिपाठी हैं। यह संगठन कविता से उद्धृत है।

प्रश्न 2.
उक्त अंश में कवि क्या संदेश देता है और क्यों?
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर कविता 4 की व्याख्या देखें।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

(ब) गाएँ सुयश खुशी से जग में सुजन हमारा।

प्रश्न 1.
सुयश और सुजन का अर्थ लिखिए-
उत्तर :
सुयश का अर्थ है- सुन्दर प्रशंसनीय कीर्ति और सुजन का अर्थ है- भले लोग जो सदा अछ्छा कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
संसार के लोग हमारा सुयश कैसे गा सकते हैं?
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर कविता 5 की व्याख्या में देखें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘संगठन’ कविता द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश प्रेम की भावना को व्यक्त किया है। इस कविता से हमें देश सेवा तथा मानव कल्याण में लगे रहने की प्रेरणा मिलती है। प्रभु से हमें ऐसी शक्ति मिले जिससे हमारा संगठन, पारस्परिक समन्वय सदा बना रहे। हम अपनी सारी शक्ति, बुद्धि धन, अर्थात् सर्वस्व देश को समर्पित कर दें। देश की सेवा में अपने को न्योछावर कर दें। समाज में युगों से व्याप्त रूढ़ियों, गलत कुरीतियों के बन्धन को तोड़कर अपने धर्म और विवेक पर दृढ़ बने रहे।

मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों के लिए ब्रह्मचर्य व्वत का पालन करें। अपने देश की रक्षा तथा सम्मान के लिए हँसते हुए प्राण त्यागने के लिए सदा प्रस्तुत रहें। हम पर लाखों संकट आए, मुसीबतें सिर पर सवार हो जाएँ, चाहे हम भिखारी बन जाएँ, पर कभी भी हिम्मत न हारें, निराश न हों। हर हालत में अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखें। कहा गया है- मन के हारे हार है मन के जीते जीत। अत: मन को विचलित न होने दें, सदा मन स्थिर बना रहे।

कवि देशवासियों को प्रेरणा दे रहा है कि हमें ऐसी शक्ति प्राप्त करना है जिससे हमारी वीरता को सुनकर सभी दुष्ट अत्याचारी भयभीत हो उठें। भारतवासियों के भय से कोई भी व्यक्ति न्याय के पथ से विचलित न हो। सभी लोग सच्चे न्याय के पथ पर दृढ़ बने रहें। जब तक शरीर में एक भी नस फड़क रही हो, जब तक एक भी साँस बाकी हो, जब तक शरीर में रक्त की एक बूँद भी शेष रहे, तब तक हम स्वदेश की रक्षा में तत्पर बने रहें। हमारे प्यारे वतन को कोई न छीन सकें। हम अपनी स्वाधीनता की, अपने देश की रक्षा प्राणों से करते रहें।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

कवि चाहता है कि उसमें ऐसी शक्ति तथा विवेक का भाव हो जिससे अखिल विश्व को अपना बना सकें। सुख के समय हम ईश्वर को न भूल सकें। विपत्ति के समय भी कभी हार न माने, मन में कभी हीन ग्रंथि की भावना न लाएँ। कर्त्तव्य मार्ग पर सदा आरुढ़ बने रहें। कवि की अभिलाषा है सारे संसार में हमारी सुकीर्ति, हमारी न्याय परंपरा का डंका बजे। सारा संसार हमारी महत्ता को स्वीकार करे। अपने सद्कर्त्तव्य, उदारता, सेवा, सहानुभूति, देश प्रेम जैसे महान कार्यों से हम अपने देश और समाज को उत्कृष्ट बना सकते हैं।

भाषा – बोध

(क) उपसर्ग अलग करो-
शब्द — उपसर्ग
संगठन — सम् + गठन
स्वदेश — स्व + देश
निरंतर — नि: + अन्तर
कुरीति — कु + रीति
सुजन — सु + जन

(ख) पर्यायवाची शब्द-
देश – राष्ट्र, जनपद, जन्मभूमि।,
विद्या – ज्ञान, बोध, विद्वता।,
देह – शरीर, तन, बदन।
जग – संसार, विश्व, दुनिया।,
भिखारी – भिक्षुक, याचक, मांगनेवाला।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

(ग) कुछ तत्सम शब्द –
स्वदेश, समर्पण, शक्ति, धर्म, न्याय, सुयश।

(घ) विलोम शब्द –
निर्बल – सबल
संगठन – विघटन
स्वदेश – विदेश
पतन – उत्थान
भिखारी – दाता, दानी

WBBSE Class 7 Hindi संगठन Summary

जीवन वरचचय

श्री रामनरेश त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के कोइरीपुर गाँव में सन् 1889 में हुआ था। नौवीं कक्षा तक विद्यालय में शिक्षा प्राप्तकर इन्होंने घर पर ही रहकर अध्ययन किया और साहित्य साधना में लग गए। सन् 1962 में इनका स्वर्गवास हो गया। त्रिपाठी के काव्य में गंगा-यमुना के कछारों तथा विन्ध्याचल की रमणीय घाटियों का सुन्दर चित्रण मिलता है।

वे उच्चकोटि के आदर्शवादी कवि, कथाकार, नाटककार, आलोचक तथा संपादक थे। लोकगीतों के क्षेत्र में इन्होंने योगदान किया। इनकी रचनाओं में राष्ट्रीयता के साथ-साथ आदर्शवाद का पुट भी मिलता हैं। इनकी भाषा सरल, सरस, प्रवाहमय, तथा बोधगम्य है। इनकी प्रमुख रचनाएँ पथिक, मिलन, स्वप्न, मानसी, ग्राम्यगीत, कविता कौमुदी, आदि हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

पद – 1

भगवन् रहे निरंतर दृढ़ संगठन हमारा।
छूटे स्वदेश की ही सेवा में तन हमारा।।
बल, बुद्धि और विद्या धन के अनेक साधन।
कर प्राप्त हम करेंगे निज देश को समर्पण।।
वह शक्ति दो कि भगवन् निभ जाय प्रण हमारा।। छूटे।।

शब्दार्थ :

  • निरंतर – लगातार
  • दृढ़ – मजबूत
  • निज – अपना
  • स्वदेश – अपना देश
  • समर्पण-अर्पण, बलिदान
  • निभ – निर्वाह होना
  • प्रण – अटल निश्चय, प्रतिज्ञा
  • संगठन – बिखरी हुई शक्तियों या
    लोगों का एकत्रीकरण, लोगों का मिलना।

सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘संगठन’ पाठ से ली गईहैं। इसके कवि श्री रामनरेश त्रिपाठी हैं।

प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने की शक्ति प्राप्त करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

व्याख्या – कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हमारे देश की बिखरी हुई शक्तियाँ संगठित हों और लोगों का संगठन सदा दृढ़ बना रहे। अपने प्यारे देश की सेवा करते हुए ही हमारा यह शरीर छूटे । शक्ति, बुद्धि, विद्या तथा धन के सभी उपायों को प्राप्त कर हम अपने देश पर सब न्योछावर कर दें। देश सेवा तथा देश के लिए अपना बलिदान कर देना ही हमारा लक्ष्य है। हे प्रभु, हमें ऐसी शक्ति दीजिए, जिससे हमारी प्रतिज्ञा, बलिदान-भावना का निर्वाह हो जाए। देश की सेवा करते हुए ही हम अपना जीवन समर्पित कर दें।

पद – 2

हममें विवेक जागे, हम धर्म को न छोड़ें,
बन्धन कुरीतियों के हम एक-एक तोड़ें।
व्रत ब्रह्मचर्य कम से कम बीस वर्ष पालें,
मन और देह दोनों की शक्तियाँ कमा लें।
निर्बल न हों कभी हम, कि न हो पतन हमारा।। छूटे।।

शब्दार्थ :

  • विवेक-बुद्धि, भले बुरे का ज्ञान
  • व्रत – पवित्र संकल्प, दृढ़ निश्चय
  • बन्धन – प्रतिबंध निर्बल – कमजोर
  • कुरीति – बुराई पतन – ह्रास, विनाश, अधोगति

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने सद्बुद्धि प्राप्त कर मानसिक तथा दैहिक शक्तियों को प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की है। कवि का कथन है कि हम भारतवासियों में सद्बुद्धि जागे, सत् असत् का ज्ञान हो। हम अपने धर्म का परित्याग न करें। समाज में व्याप्त सभी बुराइयों के जाल को हम तोड़ डालें। कम से कम बीस वर्ष तक बह्मचर्य व्रत का पालन करें। ब्रह्मचर्य पालन के दृढ़ निश्चय से हमारा मन तथा तन दोनों शक्ति सम्पन्न बने। हम कभी भी शक्तिहीन न बने। यदि हमारे तन-मन की शक्ति बनी रहेगी तो कभी भी हमारा विनाश नहीं होगा, बल्कि सदा उत्थान, प्रगति होती रहेगी।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 2 संगठन

पद – 3

मरना अगर पड़े तो मर जायें हम खुशी से,
निज देश के लिए पर छूटे लगन न जी से।
पर संकटों में चाहे बन जायें हम भिखारी,
सिर पर मुसीबतें ही आ जायें क्यों न सारी।
हिम्मत कभी न हारें, विचले न मन हमारा ।। छूटे।।

शब्दार्थ :

  • लगन – लगाव, प्रेम
  • संकटों – कठिनाइयाँ
  • मुसीबतें – विपत्ति, तकलीफ
  • हिम्मत – साहस
  • विचले – विचलित होन
  • जी – मन

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि भारतीयों की वीरता तथा भय से सभी दुष्ट लोग डर से काँप उठें। हम भारतवासियों के शौर्य तथा पराक्रम को सुनकर सारे दुष्टजन भयभीत हो उठें। हमारे दबदबे तथा प्रभाव को देखकर कोई भी न्याय के पथ से विचलित न हो। जब तक हमारे शरीर में एक भी नस फड़कती रहे, जब तक शरीर में रक्त की एक बूँद भी बची रहे, जब तक शरीर में प्राण का संचार रहे, तब तक दुनिया की कोई भी शक्ति हमारी प्यारी जन्मभूमि भारतवर्ष को छीन न सके। देश की रक्षा तथा देश पर मर-मिटना हर भारतवासी का पुनीत कर्त्तव्य होना चाहिए।

पद – 4

सुन वीरता हमारी काँप जाएँ दुष्ट सारे,
कोई न न्याय छोड़े आतंक से हमारे।
जब तक रहे फड़कती नस एक भी बदन में,
हो रक्त बूँदभर भी जब तक हमारे तन में।
छीने न हमसे कोई प्यारा वतन हमारा। छछूटे।।

शब्दार्थ :

  • आतंक – रोब, दबदबा, भय
  • नस – रक्तवाहिनी नाड़ी
  • बदन – शरीर
  • वतन- जन्मभूमि, स्वदेश
  • फड़कती – हिलती-डुलती
  • दुष्ट – खल, नीच

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि भारतीयों की वीरता तथा भय से सभी दुष्ट लोग डर से काँप उठें।
हम भारतवासियों के शौर्य तथा पराक्रम को सुनकर सारे दुष्टजन भयभीत हो उठें। हमारे दबदबे तथा प्रभाव को देखकर कोई भी न्याय के पथ से विचलित न हो। जब तक हमारे शरीर में एक भी नस फड़कती रहे, जब तक शरीर में रक्त की एक बूँद भी बची रहे, जब तक शरीर में प्राण का संचार रहे, तब तक दुनिया की कोई भी शक्ति हमारी प्यारी जन्मभूमि भारतवर्ष को छोन न सके। देश की रक्षा तथा देश पर मर-मिटना हर भारतवासी का पुनीत कर्त्तव्य होना चाहिए।

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पद – 5

वह शक्ति दो कि जग को अपना बना सकें हम,
वह शक्ति दो कि तुमको फिर से बुला सकें हम।
सुख में तुम्हें न भूलें, दु:ख में न हार मानें,
कर्त्तव्य से न चूकें, तुम को परे न जानें।
गाएँ सुयश खुशी से जग में सुजन तुम्हारा। ।छूटे।।

शब्दार्थ :

  • जग – संसार
  • हार – पराजय
  • सुयश – सुन्दर कीर्ति
  • चूकें- सुअवसर को खो देना, भूल करना
  • परे – पराया
  • सुजन- भले लोग

व्याख्या – प्रस्तुत.पंक्तियों में कवि ईश्वर से ऐसी शक्ति की याचना कर रहा है जिससे वह कर्त्तव्य मार्ग पर स्थिर बना रहे और प्रभु को न भूले। कवि ईश्वर से वह शक्ति देने के लिए कह रहा है जिससे वह समस्त संसार को अपना हितैषी बना सके। उस शक्ति को पाकर वह प्रभु को फिर भारत के पवित्र धरती पर बुला सके।

आनंद के समय में वह प्रभु को न भूले और दु:ख- विपत्ति के समय पराजित होने की मनोवृत्ति न बनाएँ। कभी मन में हीन भावना न ले आएँ। सत्कर्त्तव्य के सुअवसर को न खोएँ, अर्थात् कर्त्तव्य पथ पर दृढ़ बने रहें। प्रभु को वह पराया न समझे। सारे संसार के लोग सानंद भारतीयों की कीर्ति का, महत्व का गुणगान करें। हे प्रभु ऐसी शक्ति दीजिए।

पद – 6

तोड़ दो मन में कसी सब श्रृंखलाएँ,
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिंदु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूँगा,
सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • शृंखलाएँ – बन्धन, जंजीर।
  • संकीर्णता – क्षुद्रता, ओछापन

व्याख्या – कवि लोगों को प्रेरणा है दे रहा कि वे अपने मन के सारे बंधनों को, मन में स्थित समस्त तुच्छ ओछी भावनाओं, विचारों को छोड़ दे। उदार एवं स्वच्छ मन वाला बने। कवि उन्हें बिन्दु से सागर बनाना चाहता है। वह उन्हें तुच्छ स्थिति में नहीं रहने देगा, सागर की भाँति महान तथा उदार बनाना चाहता है।