WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – नौबतखाने में इबादत

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. नौबतखाने में इबादतं पाठ का साराश लिखें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘नबतखाने में इबादत’ पाठ का मूल भाय अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 3. जौबतखाने में इबादत’ पाठ में व्यक्त लेखक के विचारों को लिखें।
अथवा
प्रश्न 4. ‘जौबतखाने में इबादत’ पाठ का उद्देश्य लिखें।
अथवा
प्रश्न 5. नौबतखाने में इबादत’ पाठ के आधार पर बिस्पिल्ला खाँ के जीवन पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 6. निस्भिल्ना खाँ के जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है ? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
प्रश्न 7. बिस्थिल्ला खाँ के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए, जिससे आप बहुत अधिक प्रथादित हुए।
उत्तर :
विश्रुप्रसिद्ध शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ आज हमारे बीच नहीं है लेकिन शहनाई की दुनिया में उनका नाम हमेशा अमर रहेगा। “नौबतखाने में इबादत” में यतीन्द्र मिश्र ने इसी बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्ति-चित्र उकेरा है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत

अमीरुद्दीन अर्थांत् बिस्मिल्ला खाँ का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहाँ शहनाई-वादन ही खानदानी पेशा था। दादा और नाना दोनों के परिवार में शहनाई बजाना ही उनका पेशा था। छ वर्ष की उम से ही उन्होने शहनाई में रुचि लेनी शुरू कर दी थी।

14 वर्ष की उम्र में बिस्मिल्ला खाँ ने रियाज के लिए काशी के बालाजी मंदिर में जाना शुरू किया। रास्ते में दो गायिका बहनों रसूलनबाई और बतूलनबाई के ठुमरी, ठापे आदि को सुनकर संगीत के प्रति उनके मन में विशेष आसक्ति हुई।

बिस्मिल्ला खाँ जैसे शहनाईवादक का सहज मानवीय रूप मुहर्रम में दिखाई पड़ता था जब वे आठवीं तारीख को दालमंडी फातमान तक पैदल शहनाई बजाते जाते थे। उनकी आँखें इमाम हुसैन और उनके परिवार के लोगों की शहादत में नम रहती थीं।

काशी से बिस्मिल्ला खाँ का अपार लगाव था। उसके कारण भी थे। काफी में एक ओर पडित कठे महाराज, बड़े रामदास, मौजूद्दीन खाँ जैसे बड़े गायक हैं तो दूसरी ओर उनकी कद्र करने वाला अपार जन-समूह भी है। संस्कृति, बोली, उत्सव, संगीत, भक्ति- जिसकी भी बाते करें- काशी की अपनी एक अलग पहचान है।

भारतरल प्राप्त बिस्मिल्ला खाँ घरेलू जीवन में काफी सादगी से रहते थे। एक बार फटी लुंगी पहने रहने पर उनकी शिष्या ने टोका तो उन्होंने जवाब भी उसी सादगी से दिया – “धत्! पगली, ई भारतरत्न हमको शहनाईया पे मिला है, लुँगिया पे नाहीं। … मालिक से यही दुआ है, फटा सुर न बखों। लुंगिया का क्या है, आज फटी है तो कल सी जाएगी।

जीवन के अंतिम वर्षो में बिस्मिल्ला खाँ को कुछ चीजों की कमी काफी खलती थी, जैसे- संगतियों के मन में गायकों के लिये सम्मान न होना, बहुत सारी परम्पराओं का लुप्त होना, फिर भी वे आजीवन अपने संगीत के द्वारा भाईचारे का संदेश देते रहे। नब्बे वर्ष की आयु में 21 अगस्त 2006 को बिस्मिल्ला खाँ ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन जब-जब शहनाई की आवाज गूँजेगी, बिस्मिल्ला खाँ हमारी यादों में बसे रहेंगे।

प्रश्न 8. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालें। अथवा
प्रश्न 9. रचनाकार यतीन्द्र मिश्र ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ का उल्लेख प्रसिद्ध शाहनाई वादक के प्रति किस प्रकार की है ? स्पष्ट कीजिए ।
अथवा
प्रश्न 10. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की जिन विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया है उसके बारे में लिखें। अथवा
प्रश्न 11. बिस्पिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की खूबियों पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 12. बिस्मिल्ला खाँ की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 13.’पगली ई, भारतरल हमको शहनाईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं’-कथन के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 14. लय और ताल की तमीज सिखाने वाले नायाब हीरे के रूप में बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखें।
अथवा
प्रश्न 15. ‘बिस्भिल्ला खाँ का मतलल-बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई’ के आधार पर शहनाई के ताज के रूप में बिस्मिल्ला खाँ की विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 16. “एक बड़े कलाकार का सहज मानवीय रुप ऐसे अवसर पर आसानी से दिख जाता है” – प्रस्तुत कथन के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 17. “अपने मजहब के प्रति अत्यधिक समर्पित उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की श्रद्धा काशी विश्वनाय के प्रति भी अपार है के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा

प्रश्न 18.
“बिस्मिल्ला खाँ को गंगाद्वार से अलग करके नहीं देख सकते’ – के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर –
“नौबतखाने में इबादत” यतीन्द्र मिश्र की रचना है जिसमें प्रसिद्ध शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्ति चित्र उकेरा गया है। आज बिस्मिल्ला खाँ हमारे बीच नहीं हैं लेकिन शहनाई की दुनिया में उनका नाम अमर है। बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

(क) व्यक्तित्व के धनी – व्यक्तित्य के धनी बिस्मिल्ला खाँ केवल एक शहनाईवादक ही नहीं, हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक भी थे। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने शहनाई का रियाज भी काशी के बालाजी के मंदिर से शुरू किया था।

(ख) सादगी – विश्रपसिद्ध कलाकार होने के बाद भी उनमें अहंकार नाम की कोई चीज नहीं थी। उनका जीवन अत्यंत ही सादगीपूर्ण था। घर पर वे फटी लुँगी भी पहन लेते थे। इस बात पर जब एक बार उनकी एक शिष्या ने टोका तो उन्होंने उसी सादगी से उत्तर दिया – ” धत् पगली ! ई भारतरत्न हमको शहनाईया पे मिला है, लुँगिया पे नाहीं।”

(ग) सच्चे सुर-साधक – बिस्मिल्ला खाँ ने अपना सारा जीवन सुर की साधना में लगा दिया तथा वे कला की उस ऊँचाई तक पहुँचे जिससे पूरी दुनिया में उनकी पहचान बनी। वे कितने बड़े साधक थे, वह इनके इस सजदे (प्रार्थना) से पता चल जाता है – “मेरे मालिक एक सुर बखरा दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।’

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(घ) काशी के प्रति असीम श्रद्धा – बिस्मिल्ला खाँ में काशी के प्रति असीम श्रद्धा थी। वे अक्सर कहा करते थे’ ई काशी छोड़कर कहाँ जा गंगा मइया यहाँ, बाबा विश्चाथ यहाँ, बालाजी का मंदिर यहाँ, यहाँ हमारे खानदान की कई पुश्तों ने शहनाई बजाई है…… शहनाई और काशी से बढ़कर कोई जन्नत नहीं इस धरती पर हमारे लिए।’

(ङ) थार्मिक एकता व भाईचारे के प्रतीक – बिस्मिल्ला खाँ वह हीरा थे जो हमेशा धार्मिक एकता तथा भाईचारे की प्रेरणा देते रहे । मुस्मिलम होते हुए भी उन्होंने हिन्दू धर्म तथा संस्कृति का उतना ही सम्मान किया जितना अपने धर्म का। सच कहा जाए तो ऐसे महामानव धर्म व जाति से ऊपर होते हैं। स्वयं लेखक के शब्दों में- ‘ आप यहाँ (काशी में) संगीत को भक्ति से, भक्ति को किसी भी धर्म के कलाकार से, कजरी को चैती से, विक्षानाथ को विशालाक्षी से, बिस्मिल्ला खाँ को गंगाद्वार से अलग करके नहीं देख सकते।”

(च) संगीत के नायक – उपरोक्त सारी विशेषताओं के अतिरिक्त बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की जो सबसे बड़ी विशेषता थी- वह यह कि पूरे अस्सी वर्षो तक उन्होंने संगीत के प्रति अपने लगाव को कभी कम नहीं होने दिया। संगीत के लिए उन्हें अनेक विश्धविद्यालयों से मानद उपाधि, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मभूषण एवं भारतरत्न जैसी उपाधियाँ प्रदान की गई। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्च में अनेक विशेषताओं का समावेश था और इन्हों गुणों के कारण वे संगीत की दुनिया में हमेशा याद किए जाएँगे।

प्रश्न 19.
बिस्भिल्ला खाँ के जीवन पर गगा-जमुनी तहजीब का क्या असर रहा है?
उत्तर :
व्यक्तित्व के धनी बिस्मिल्ला खाँ केवल एक शहनाईवादक ही नहीं, हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक भी थे । इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने शहनाई का रियाज भी काशी के बालाजी के मंदिर से शुरू किया था।

विश्चपसिद्ध कलाकार होने के बाद भी उनमें अहंकार नाम की कोई चीज नहीं थी। उनका जीवन अत्यंत ही सादगीपूर्ण था। घर पर वे फटी लुँगी भी पहन लेते थे। इस बात पर जब एक बार उनकी एक शिष्या ने टोका तो उन्होंने उसी सादगी से उत्तर दिया – “धत् पगली ! ई भारतरत्न हमको शहनाईया पे मिला है, लुँगिया पे नाहीं।”

बिस्मिल्ला खाँ ने अपना सारा जीवन सुर की साधना में लगा दिया तथा वे कला की उस ऊँचाई तक पहुँचे जिससे पूरी दुनिया में उनकी पहचान बनी। वे कितने बड़े साधक थे, वह इनके इस सजदे (मार्थना) से पता चल जाता है – ‘ मेरे मालिक एक सुर बखा दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।”

बिस्मिल्ला खाँ के जीवन पर गंगा-जमुनी तहजीब (संस्कृति) का सबसे बड़ा असर तो वहीं देखने को मिलता है कि मुसलमान होते हुए भी उन्होंने रियाज के लिए काशी के बालाजी के मंदिर को चुना। चाहे अवसर हिन्दुओं के उत्सव का होया मुसलमानों के उत्सव का – बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई के बगैर अधूरा रहता था । उनके इस कथन से कि “ई काशी छोड़कर कहाँ जाएँ, गंगा मइया यहाँ, बाबा विश्वनाथ यहाँ, बालाजी का मंदिर यहाँ………. शहनाई और काशी से बढ़कर कोई जन्नत नहीं इस धरती पर हमारे लिए’ से यह बात साफ जाहिर हो जाती है कि उनके जीवन पर गंगा-जमुनी तहजीब का पूरा-पूरा असर रहा है ।

बिस्मिल्ला खाँ वह हीरा थे जो हमेशा धार्मिक एकता तथा भाईचारे की प्रेरणा देते रहे । मुस्मिलम होते हुए भी उन्होंने हिन्दू धर्म तथा संस्कृति का उतना ही सम्मान किया जितना अपने धर्म का। सच कहा जाए तो ऐसे महामानव धर्म व जाति से ऊपर होते हैं। स्वयं लेखक के शब्दों में- ‘ आप यहाँ (काशी में) संगीत को भक्ति से, भक्ति को किसी भी धर्म के कलाकार से, कजरी को चैती से, विश्वनाथ को विशालाक्षी से, बिस्मिल्ला खाँ को गंगाद्वार से अलग करके नहीं देख सकते।”

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प्रश्न 20.
मुहरम से बिस्मिल्ला खाँ के लगाव को अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
मुहर्रम में हज़रत इमाम एवं उनके कुछ वशजों के प्रति दस दिनों तक शोक मनाया जाता है । मुहर्रम के महीने में उस्ताद विस्मिल्ला खाँ किसी कार्यक्रम में नहीं बजाते थे। फातमान के करीब आठ किलोमीटर तक पैदल रोते हुए नौहा बजाते जाते थे। इस दिन राग-रागिनियों का निषेध है । उस समय उनका सहज मानवीय रूप दिखाई देता है।

लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शहनाई के साथ किस स्थान का नाम जुड़ता है?
उत्तर :
डुमराँव का।

प्रश्न 2.
‘रीड’ कितने मिनट के अन्दर गीली हो जाती है ?
उत्तर :
‘रीड’ 15 से 20 मिनट के अन्दर गीली हो जाती है ?

प्रश्न 3.
पंचगंगा घाट पर किसका मंदिर है ?
उत्तर :
बालाजी का मंदिर।

प्रश्न 4.
संगीत शास्त्र के अंतर्गत शहनाई को किस वाद्य में गिना जाता है ?
उत्तर :
शहनाई को सुषिर वाद्यों में गिना जाता है । सुषिर वाद्य अर्थात् फूँककर बजाए जानेवाला बाजा।

प्रश्न 5.
‘बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे’ – इस वाक्य को प्रश्नवाचक वाक्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
प्रश्नवाचक वाक्य – क्या बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे?

प्रश्न 6.
अमीरुदीन के बड़े भाई का नाम क्या है?
उत्तर :
शम्सुद्दीन खाँ।

प्रश्न 7.
अमीरुद्दीन का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर :
अमीरुद्दीन का जन्म बिहार के डुमराँव नामक गाँव में हुआ था।

प्रश्न 8.
अमीरूद्दीन जमीन पर पत्थर क्यों मारता था ?
उत्तर :
अमीरूद्दीन को बचपन में ही यह पता चल गया था कि संगीत में सम क्या होता है। जब अपके मामू शहनाई बजाते हुए सम पर आते थे तो वह धड़ से एक पत्थर जमीन पर मारता था।

प्रश्न 9.
काशी को ‘संस्कृति की पाठशाला’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
काशी में साहित्य, संगीत, कला की अनोखी परंपरा वर्षों से चली आ रही है इसलिए इसे ‘संस्कृति की पाठशाला’ कहा जाता है।

प्रश्न 10.
चार साल का अमीरूद्दीन फिल्म देखने के लिए पैसों का प्रबंध किस प्रकार से करता था ?
उत्तर :
फिल्म देखने के लिए अमीरूद्दीन दो पैसे मामू से, दो पैसे मौसी से और दो पैसे नानी से लेता था।

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प्रश्न 11.
शहनाई के साथ किस स्थान का नाम जुड़ता है ?
उत्तर :
डुमराँव का।

प्रश्न 12.
शहनाई बजाने के लिए किस चीज का इस्तेमाल होता है ?
उत्तर :
शहनाई बजाने के लिए नरकट की रीड का इस्तेमाल होता है।

प्रश्न 13.
‘रीड’ क्या होती है ?
उत्तर :
रीड एक प्रकार की घास (नरकट) होती है जो अंदर से पोली (खोखली) होती है।

प्रश्न 14.
नरकट मुख्यत: कहाँ पाई जाती है ?
उत्तर :
नरकट मुख्यतः डमुराँव में सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।

प्रश्न 15.
बिस्पिल्ला खाँ के परदादा का नाम क्या था ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के परदादा का नाम उस्ताद सलार हुसैन खाँ था।

प्रश्न 16.
बिस्मिल्ला खाँ के परदादा कहाँ के निवासी थे ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के परदादा बिहार के डुमराँव के निवासी थे।

प्रश्न 17.
बिस्मिल्ना खाँ शहनाई के रियाज (अभ्यास) के लिए कहाँ जाते थे ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ शहनाई के रियाज के लिए बालाजी के मंदिर जाया करते थे।

प्रश्न 18.
अपने ढेरों साक्षात्कारों में बिस्मिल्ला खाँ ने क्या स्वीकार किया है ?
उत्तर :
अपने ढेरों साक्षात्कारों में बिस्मिल्ला खाँ ने यह स्वीकार किया है कि उन्हे जीवन के आरंभिक दिनों में संगीत के प्रति आसक्ति रसूलन और बतूलन-गायिका बहनों के संगीत को सुनकर मिली है।

प्रश्न 19.
किस इतिहास में शहनाई का उल्लेख नहीं मिलता ?
उत्तर :
वैदिक इतिहास में शहनाई का उल्लेख नहीं मिलता है।

प्रश्न 20.
‘नय’ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अरब देश में फूककर बजाए जाने वाले वाद्य को ‘नय’ कहते हैं।

प्रश्न 21.
बिस्मिल्ला खाँ ने कितने वर्ष की उप्र में शहनाई बजाने का रियाज शुरू किया ?
उत्तर :
चौदह वर्ष की उम्र में।

प्रश्न 22.
‘सुषिर वाद्यों’ में किस वाद्य को ‘शाह’ की उपाधि दी गई है ?
उत्तर :
शहनाई को।

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प्रश्न 23.
अवधी के पारंपरिक लोकगीतों एवं चैती में किस वाद्य का उल्लेख बार-बार मिलता है ?
उत्तर :
शहनाई का।

प्रश्न 24.
बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद सजदे में क्या गिड़गिड़ाते थे ?
उत्तर :
“मेरे मालिक एक सुर बखा दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।”

प्रश्न 25.
बिस्मिल्ला खाँ को खुदा पर किस बात का यकीन था ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ को इस बात का यकीन था कि खुदा कभी न कभी उन पर मेहरबान होगा और अपनी झोली से सुर का फल निकालकर उनकी ओर उछालेगा, फिर कहेगा, ले जा अमीरूद्दीन इसको खा ले और कर ले अपनी मुराद पूरी।

प्रश्न 26.
अस्सी वर्षों तक या अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक क्या सोचते रहे ?
उत्तर :
अपनी पूरी जिंदगी बिस्मिल्ला खाँ यही सोचते आए कि सातों सुरों को बजाने की तमीज उन्हें सलीके से अभी तक क्यों नहीं आई।

प्रश्न 27.
बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई के साथ किस मुस्लिम पर्व का नाम जुड़ा हुआ है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई के साथ जिस मुस्लिम पर्व का नाम जुड़ा हुआ है, वह है मुहर्रम।

प्रश्न 28.
मुहर्रम का महीना क्या होता है ?
उत्तर :
जिस महीने शिया मुसलमान हज़रत इमाम हुसैन तथा उनके वंशजों के प्रति दस दिनों तक शोक मनाते हैं, वह मुहर्रम का महीना होता है।

प्रश्न 29.
बिस्मिल्ला खाँ का सहज मानवीय रूप किस अवसर पर आसानी से दिख जाता है ?
उत्तर :
मुहर्रम के अवसर पर।

प्रश्न 30.
काशी में किस आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है ?
उत्तर :
शास्त्रीय संगीत के आयोजन की।

प्रश्न 31.
काशी में हनुमान जयंती के अवसर पर क्या होता है ?
उत्चर :
काशी में हनुमान जयंती के अवसर पर शहर के लंका नामक स्थान में पाँच दिनों तक शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन-वादन का आयोजन होता है।

प्रश्न 32.
काशी को किसका पाठशाला कहा गया है ?
उत्तर :
काशी को संस्कृति की पाठशाला कहा गया है।

33.
बिस्मिल्ला खाँ के लिए इस धरती पर सबसे बड़ा जन्नत क्या है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के लिए इस धरती पर शहनाई और काशी ही सबसे बड़ा जन्नत है।

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प्रश्न 34.
शास्त्रों में काशी किस नाम से प्रतिष्ठित है ?
उत्तर :
शास्ब्रों में काशी ‘आनन्दकानन’ के नाम से प्रतिष्ठित है।

प्रश्न 35.
बिस्मिल्ला खाँ का मतलब लोग किससे लेते हैं ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ का मतलब लोग उनकी शहनाई से लेते हैं।

प्रश्न 36.
बिस्मिल्ला खाँ को किस फकीर की दुआ लगी ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ को उस फकीर की दुआ लगी जिसने कहा था – “बजा, बजा।”

37.
फटी लुंगी पहनने पर जब बिस्मिल्ला खाँ को उनकी शिष्या ने टोका तो उन्होने क्या जबाव दिया ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ ने शिष्या के टोकने पर यह जबाव दिया कि ” धत् ! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।”

प्रश्न 38.
बिस्मिल्ला खाँ मालिक (अल्लाह) से क्या दुआ करते हैं ?
उत्तर :
बिस्मिला खाँ मालिक से यही दुआ करते हैं कि फटा सुर न बखों।

प्रश्न 39.
बिस्मिल्ला खाँ को काशी में किसकी कमी खलती है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ को काशी में मलाई बरफ बेचने वाले, देशी घी में तली जाने वाली कचौड़ी-जलेबी तथा संगतियों के मन में गायकों के प्रति सम्मान की भावना की कमी खलती है।

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प्रश्न 40.
काशी से दिन-प्रति-दिन कौन-सी परंपराएँ लुप्त होती जा रही हैं ?
उत्तर :
काशी से दिन-प्रति-दिन संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परंपराएँ लुप्त होती जा रही हैं।

प्रश्न 41.
बिस्मिल्ला खाँ भविष्य में किसके नायक बने रहेंगे ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ भविष्य में हमेशा संगीत के नायक बने रहेंगे।

प्रश्न 42.
बिस्मिल्ला खाँ की हमे सबसे बड़ी देन क्या है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ की हमें सबसे बड़ी देन यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होने संगीत को संपूर्णता तथा एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।

प्रश्न 43.
नादस्वरम् कहाँ का वाद्य है ?
उत्तर :
नादस्वरम् दक्षिण भारत का वाद्य है।

प्रश्न 44.
शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है ?
उत्तर :
शहनाई में जिस रीड का इस्तेमाल किया जाता है वह केवल डुमराँव के सोन नदी के किनारे पाया जाता है। इसीलिए शहनाई की दुनिया में डुमराँव को याद किया जाता है।

प्रश्न 45.
शहनाई बजाने के लिए किसका प्रयोग होता है ?
उत्तर :
शहनाई बजाने के लिए नरकट नामक घास की रीड का प्रयोग होता है।

प्रश्न 46.
रीड क्या होती है ? इसका क्या उपयोग है ?
उत्तर :
रीड एक प्रकार की घास नरकट से बनाई जाती है। यह अंदर से खोखली होती है। इसी के सहारे शहनाई को फूंका जाता है।

प्रश्न 47.
बिस्मिल्ला खाँ के अनुभव की स्लेट पर संगीत प्रेरणा की वर्णमाला किसने उकेरी है ?
उत्तर :
रसूलनबाई तथा बतूलनबाई नामक गायिका बहनो ने।

प्रश्न 48.
शहनाई किसका संपूरक है ?
उत्तर :
शहनाई प्रभाती (सुबह) की मंगलध्वनि का सूचक है।

प्रश्न 49.
हजार वर्ष की परंपरा किसमें संपन्न होती है ?
उत्तर :
मुहर्रम में।

प्रश्न 50.
बिस्मिल्ला खाँ की पसंदीदा हीरोइन कौन थी ?
उत्तर :
सुलोचना।

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प्रश्न 51.
बालाजी मंदिर में शहनाई बजाने पर बिस्मिल्ला खाँ को रोज कितने पैसे मिलते थे ?
उत्तर :
एक अठन्नी (पचास पैसे)।

प्रश्न 52.
बिस्मिल्ला खाँ को किसकी कमी खलती है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ को काशी की लुप्त होती पररपरा की कमी खलती है।

प्रश्न 53.
अब गायकों के मन में किसके लिए सम्मान नहीं रह गया है ?
उत्तर :
अब गायकों के मन में संगतियों (संगीत में साथ देनेवाले) के लिए सम्मान नहीं रह गया है।

प्रश्न 54.
सच्चा सुर साधक और सामाजिक किसे कहा गया है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ को।

प्रश्न 55.
‘नौबतखाने में इबादत’ के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर :
यतीन्द्र मिश्र।

प्रश्न 56.
बिस्मिल्ला खाँ के दोनों मामा क्या करते थे?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के दोनों मामा देश के जाने-माने शहनाईवादक थे।

प्रश्न 57.
शहनाई की दुनिया में डुमरॉव को क्यों याद किया जाता है ?
उत्तर :
शहनाई में लगनेवाली रीड जो एक प्रकार की घास से बनती है – वह डुमरॉव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है। इसी के कारण डुमरॉव याद किया जाता है।

प्रश्न 58.
फटी लुंगी पहनने पर बिस्मिल्ला खाँ को उनकी शिष्या ने टोका तो उन्होंने क्या जवाब दिया ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ ने अपनी शिष्या को जवाब दिया – “पगली ई भारत रत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाही ।”

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प्रश्न 59.
बिस्मिल्ला खाँ बचपन में किन गायिका बहनों से प्रभावित हुए ?
उत्तर :
रसूलन बाई और बतूलन बाई।

प्रश्न 60.
शहनाई किसका संपूरक है ?
उत्तर :
प्रभाती की मंगलध्वनि का संपूरक है।

प्रश्न 61.
‘नय’ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अरब देश में फूंककर बजाए जाने वाले वाद्य जिसमें रीड लगी होती है – ‘नय’ कहते हैं।

प्रश्न 62.
काशी से दिन प्रतिदिन कौन-सी परंपराएँ लुप्त होती जा रही हैं ?
उत्तर :
काशी से दिन-प्रतिदिन संगीत, साहित्य और अदब की परंपराएँ लुप्त होती जा रही हैं।

प्रश्न 63.
‘रीड’ क्या होती है ? इसका क्या उपयोग है ?
उत्तर :
शहनाई की आवाज की मधुरता का मुख्य कारण ‘रीड’ है। रीड अंदर से खोखली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।

प्रश्न 64.
शहनाई बनाने मे किस घास का उपयोग किया जाता है ?
उत्तर :
शहनाई बनाने में नरकट नामक घास का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 65.
बिस्मिल्ला खाँ अपने शहनाई वादन को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ अपने शहनाई वादन को खुदा की इबादत के रूप में देखते हैं।

प्रश्न 66.
बिस्मिल्ला खाँ को किसकी कमी खलती है ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ को पक्का महाल से मलाई बरफ की कमी खलती है।

प्रश्न 67.
बिस्मिल्ला खाँ में धार्मिक सद्भाव भरा था – स्पष्ट करें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ जितना सम्मान खुदा की इबादत को देते थे उतना ही सम्मान बाबा विश्वनाथ, बालाजी को भी देते थे। इसी से उनके धार्मिक सद्भाव का पता चलता है।

प्रश्न 68.
बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का नाम क्या था ?
उत्तर :
अमीरूद्दीन।

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प्रश्न 69.
महुर्रम के महीने में उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ क्या करते थे ?
उत्तर :
मुहर्रम के महीने में उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ किसी कार्यक्रम में नहीं बजाते थे। फातमान के करीब आठ किलोमीटर तक पैदल रोते हुए नौहा बजाते जाते थे।

प्रश्न 70.
अमीरुदीन छिपकर क्या सुनता था ?
उत्तर :
अमीरुद्दीन छिपकर नाना के शहनाईवादन को सुनता था।

प्रश्न 71.
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ कौन थे ?
उत्तरः
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ विश्वप्रसिद्ध शहनाईवादक थे।

प्रश्न 72.
बिस्मिल्ला खाँ मुहर्रम किस प्रकार मनाया करते थे ?
उत्तर :
मुहर्रम के महीने में उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ किसी कार्यक्रम में नहीं बजाते थे। फातमान के करीब आठ किलोमीटर तक पैदल रोते हुए नौहा बजाते जाते थे।

प्रश्न 73.
किस घटना से पता चलता है कि बिस्मिल्ला खाँ के मन में बालाजी के प्रति सच्ची आस्था थी ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के इस कथन से पता चलता है कि उनमें बालाजी के प्रति सच्ची आस्था थी – ‘हमारे नाना तो वहीं बालाजी के मंदिर में बड़े प्रतिष्ठित शहनाईनवाज रह चुके हैं ……. शहनाई और काशी से बढ़कर कोई जन्नत नहीं हमारे लिए।”

प्रश्न 74.
बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद सज़दे में क्या माँगते थे ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद सज़दे में यह माँगते थे कि सुर में वह तासीर (असर) पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।

प्रश्न 75.
अमीरूद्दीन के उस्ताद कौन थे ?
उत्तर :
अलीबखा खाँ।

प्रश्न 76.
‘सुषिर वाधों’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :
‘सुषिर वाधों’ से अभिप्राय है – फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य।

प्रश्न 77.
‘गंगा-जमुनी संस्कृति’ का आशय क्या है ?
उत्तर :
हिन्दु-मुस्लिम संस्कृति।

प्रश्न 78.
बिस्मिल्ला खाँ की शिष्या ने डरते-डरते उन्हें किसलिए टोका ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ की शिष्या ने डरते- डरते उन्हें फटी लुंगी न पहनने के लिए टोका।

प्रश्न 79.
बिस्मिल्ला खाँ को सरकार ने कौन-सा सम्मान दिया ?
उत्तर :
भारत-रल।

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प्रश्न 80.
शहनाई की मंगल – ध्वनि को बिस्मिल्ला खाँ कितने वर्षों से सुर दे रहे थे ?
उत्तर :
अस्सी वर्षों से।

प्रश्न 81.
बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई के साथ किस मुस्लिम पर्व का नाम जुड़ा है ?
उत्तर :
मुहर्रम।

प्रश्न 82.
बिस्मिल्ला खाँ को संगीत की आरंभिक प्रेरणा किससे मिली ?
उत्तर :
रसूलनबाई और बतूलन बाई से।

प्रश्न 83.
बिस्मिल्ला खाँ का मूल नाम क्या है ?
उत्तर :
अमीरूद्दीन खाँ।

प्रश्न 84.
बिस्मिल्ला खाँ के मामा द्वय का नाम लिखें।
उत्तर :
साद्कि हुसैन तथा अलीबखा हुसैन।

प्रश्न 85.
बिस्मिल्ला खाँ के ननिहाल का खानदानी पेशा क्या था ?
उत्तर :
शहनाई बजाना ही बिस्मिल्ला खाँ के ननिहाल का खानदानी पेशा था।

प्रश्न 86.
किस अवसर पर बिस्मिल्ला खाँ का सहज मानवीय रूप आसानी से दिख जाता है ?
उत्तर :
मुहर्रम के अवसर पर।

प्रश्न 87.
बिस्मिल्ला खाँ के मामू का नाम क्या था ?
उत्तर :
सादिक हुसैन तथा अलीबखा हुसैन।

प्रश्न 88.
बिस्मिल्ला खाँ के माता-पिता का नाम क्या था ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ की माता का नाम मिट्ठन तथा पिता का नाम पैगंबरबखर खाँ था।

89.
बिस्मिल्ला खाँ ने बचपन के कितने वर्ष डुमराँव में बिताए ?
उत्तर :
पाँच-छ: वर्ष।

प्रश्न 90.
बिस्मिल्ला खाँ के परदादा का नाम क्या था ?
उत्तर :
उस्ताद सलार हुसैन खाँ।

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प्रश्न 91.
अपनी जिंदगी के अस्सी वर्ष तक बिस्मिल्ला खाँ क्या सोचते आए ?
उत्तर :
सातों सुरों को बरतने की तमीज उन्हें सलीके से अभी तक क्यों नहीं आई।

प्रश्न 92.
अमीरूद्धीन को किस फकीर की दुआ लगी ?
उत्तर :
अमीरूद्दीन को उस फकीर की दुआ लगी जिसने कहा था – “बजा, बजा” ।

प्रश्न 93.
बिस्मिल्ला खाँ किसे कम और किसे ज्यादा याद करते हैं ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ अपने अब्बाजान और उस्ताद को कम, पक्का महल की कुलसुम हलवाइन की कचौड़ीवाली दुकान व गीताबाली आर सुलोचना को ज्यादा याद करते हैं।

प्रश्न 94.
पंचगंगा घाट पर किसका मंदिर है ?
उत्तर :
बालाजी का मंदिर।

प्रश्न 95.
‘नौबतखाने में इबादत’ में किस समय के काशी का वर्णन किया गया है ?
उत्तर :
सन् 1916 से 1922 के आसपास की काशी का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 96.
बिस्मिल्ला खाँ का ननिहाल कहाँ था ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ का ननिहाल काशी में था।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रोजनामचे में बालाजी का मंदिर सबसे ऊपर आता है।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

(ख) कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के दोनों मामू भी शहनाईवादक थे। वे विभिन्न रियासतों के दरबार में शहनाई बजाने जाया करते थे। लेकिन काशी में रहने पर उनके दिन की शुरूआत बालाजी के मंदिर में शइनाई बजाने से होती थी।

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प्रश्न 2.
ये खानदानी पेशा है अलीबख़ा के घर का।

(क) अलीबखा कौन हैं ?
उत्तर :
अलीबखश बिस्मिल्ला खाँ के मामा हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के ननिहाल में शहनाई बजाना खानदानी पेशा है। उनके नाना तथा दोनों मामा भी अच्छे शहनाईवादक थे।

प्रश्न 3.
शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

(क) रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार यतौंद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
शहनाई में जो रीड लगती है वह हुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है। रीड के बिना शहनाई नहीं बज सकती। इसीलिए शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

प्रश्न 4.
उनका जन्म-स्थान भी डुमराँव ही है।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

(ख) किसका जन्म-स्थान डुमराँव है ? उस व्यक्ति की विशेषता लिखें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ का जन्म-स्थान डुमराँव है। वे विश्व-प्रसिद्ध शहनाईवादक थे। संगीत्येमी होने के साथ-साथ वे मानवताप्रेमी भी थे। जितनी आस्था उन्हें अपने धर्म में थी उतनी ही आस्था बालाजी के मंदिर पर भी। अपने संगती के माध्यम से बिस्मिल्ला खाँ ने भाईचारे का संदेश दिया। विश्वप्रसिद्ध होने के बावजूद उनका व्यक्तित्व सादगी भरा था।

प्रश्न 5.
मगर एक रास्ता है बालाजी मंदिर तक जाने का।

(क) पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम है – ‘नौबतखाने में इबादत’।

(ख) पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
बालाजी के मंदिर तक जाने का एक दूसरा रास्ता भी था जो रसूलनबाई और बतूलनबाई के यहाँ से होकर जाता था। जब बिस्मिल्ला खाँ रियाज के लिए बालाजी मंदिर जाते थे तो इस रास्ते से जाना इन्हें अच्छा लगता था क्योंकि न जाने कितने ही तरह के बोल-बनाव, ठुमरी-ठप्पे तो कभी दादरा उनकी कानों तक पहुँचते रहते थे।

प्रश्न 6.
इसे संगीत शास्त्रांतर्गत ‘सुषिर-वाद्यों’ में गिना जाता है।

(क) ‘इसे’ से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
‘इसे’ से शहनाई संकेतित है।

(ख) पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
फूंक कर बजाए जाने वाले वाद्य को सुषिर वाद्य कहते हैं। शहनाई को भी फूंक कर बजाया जाता है इसलिए इसकी गिनती संगीत शास्त्रों में सुषिर वाद्य में की जाती है।

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प्रश्न 7.
दक्षिण भारत के मंगलवाद्य ‘नागस्वरम्’ की तरह शहनाई, प्रभाती की मंगलध्वनि का सूचक है।

(क) पाठ के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ के रचनाकार यतीद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
दक्षिण भारत में मांगलिक अवसरों पर नागस्वरम् बजाया जाता है । यह शुभ का सूयक है। इसी तरह उत्तरी भारत में शहनाई का स्थान है। यह मंगल ध्वनि का सूचक है तथा इसे शुभ अवसरों पर बजाया जाता है।

प्रश्न 8.
वे नमाज के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते हैं।

(क) ‘वे’ से कौन संकेतित हैं ?
उत्तर :
‘वे’ से बिस्मिल्ला खाँ संकेतित हैं।

(ख) वे नमाज के बाद सजदे में क्या गिड़गिड़ाते हैं ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते हैं कि ” मेरे मालिक एक सुर बख्रा दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।”

प्रश्न 9. आठवीं तारीख इनके लिए खास महत्व की है।
अथवा
प्रश्न 10. इस दिन खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते हैं।
अथवा
प्रश्न 11. इस दिन कोई राग नहीं बजता।
अथवा
प्रश्न 12. राग-रागनियों की अदायगी का निषेध है इस दिन।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतीद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
मुहर्रम के दिनों का बिस्मिल्ला खाँ के लिए विशेष महत्व था। इसके आठवें दिन ये खड़े होकर शहनाई बजाते थे तथा दालमंडी में फातमान के करीब आठ किलोमीटर की दूरी तक पैदल ही रोते हुए नौहा बजाते हुए जाते थे। इस दिन कोई राग नहीं बजाया जाता था क्योंकि इस दिन राग-रागनियों का पूर्ण निषेध है। इतना ही नहीं, मुहर्रम के दिनों इनके खानदान का कोई व्यक्ति किसी कार्यक्रम में भी शिरकत नहीं करता था।

प्रश्न 13.
हजार बरस की परंपरा पुनर्जीवित।

(क) पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम है – ‘नौबतखाने में इबादत’।

(ख) पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
मुहर्रम में हजार वर्ष की परंपरा फिर से जीवित हो उठती है। लोगों की आँखें इमाम हुसैन तथा इसके परिवार के लोगों की शहादत की याद में नम हो उठती है। हजारों नम आँखों से अजादारी की जाती है। बिस्मिल्ला खाँ जैसे महान कलाकार का भी सहज मानवीय रूप ऐसे अवसर पर आसानी से देखा जा सकता है।

प्रश्न 14. अमीरूद्धीन तब सिर्फ चार साल का रहा होगा।
अथवा
प्रश्न 15. वह छिपकर नाना को शहनाई बजाते हुए देखते थे।
अथवा
प्रश्न 16. लगता है मीठीवाली शहनाई नाना कहीं और रखते हैं।

(क) रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

(ख) इस कथन का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जब बिस्मिल्ला खाँ केवल चार वर्ष के थे तब से शहनाई उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी। वे छुपकर अपने नाना को शहनाई बजाते हुए देखते थे। जब नाना उठकर चले जाते तो वह उनकी शहनाइयों में से एक-एक शहनाई को उठाकर बजाते और वैसे मीठी धुन न निकलने पर उसे यह कह कर खारिज कर देते कि लगता है कि मीठी वाली शहनाई नाना कहीं और छिपाकर रखते हैं।

प्रश्न 17. यह आयोजन पिछले कई वर्षों से संकटमोचन मंदिर में होता आया है ।
अथवा

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प्रश्न 18.
काशी में संगीत-आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।

(क) रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार यत्तीद्र मिश्र हैं।

(ख) इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
काशी में हुनमान जंयती बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है। हनुमान जयंती का मुख्य आयोजन संकटमोचन मंदिर से होता है । यह मंदिर काशी शहर के दक्षिण लंका में स्थित है। जयंती के अवसर पर पाँच दिनों तक शास्वीय तथा उपशास्त्रीय गायन-वादन का आयोजन होता है। इस आयोजन में काशी के उत्कृष्ट कलाकार भाग लेते हैं।

प्रश्न 19. काशी संस्कृति की पाठशाला है।
अघवा
प्रश्न 20. शास्त्रों में आनंदकानन के नाम से प्रतिष्ठित।
अथवा

प्रश्न 21.
यह एक अलग काशी है।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
काशी को भारतीय संस्कृति का पाठशाला कहा गया है क्योंकि यहाँ विभिन्न कलाओं का अद्भुत संगम है। इसी विशेषता के कारण शास्ब्रों में काशी को आनंदकानन नाम से प्रतिष्ठित किया गया है। काशी में एक से बढ़कर एक संगीत के कलाकार हैं, इनके संगीत से आनंद उठानेवाला रसिक अपार लोगों का समूह है।

यहाँ की अपनी संस्कृति है, अपनी बोली है, अपना उत्सव है, अपना गम है, अपनी खुशियाँ हैं। यहाँ संगीत और भक्ति, मंदिर और मस्जिद, कजरी और चैती, बिस्मिल्ला खाँ और बालाजी का मंदिर – सब आपस में इस प्रकार घुलमिल गए हैं कि उन्हें अलग करके देखना संभव नहीं है।

प्रश्न 22.
उस फकीर की दुआ लगी जिसने अमीरूहीन से कहा था – “बजा, बजा।”

(क) यह पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
उत्तर :
यह पंक्ति ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ से उद्धत है।

(ख) इस वाक्य का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
एक बार रात्रि के समय बिस्मिल्ला खाँ काशी में मंदिर के अहाते के अंदर शहनाई का रियाज कर रहे थे। मंदिर में प्रवेश करने के सभी दरवाजे बंद् थे। तभी उनके सामने एक फकीर आकर खड़े हो गए। भय से बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई बजाना बंद कर दिया कि ये फकीर अचानक यहाँ कैसे प्रकट हो गए। तभी उस फकीर ने मुस्कुराते हुए कहा ‘बजा बजा।’ इतना कहकर वो गायब हो गए।

भय से बदहवास बिस्मिल्ला खाँ ने तुरंत घर लौटकर इस घटना का उल्लेख नाना से किया। नाना ने पूरी घटना सुनी और एक जोर का तमाचा बिस्मिल्ला खाँ के गाल पर मारा। साथ ही उन्होंने यह हिदायत दी कि आगे कभी कोई घटना घटे तो किसी से मत कहना और बिस्मिल्ला खाँ ने ऐसा ही किया।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसे संस्कृति की पाठशाला कहा गया है?
(क) कोलकाता को
(ख) काशी को
(ग) मुम्बई को
(घ) दिल्ली को
उत्तर :
(ख) काशी को

प्रश्न 2.
अमीरूहीन का जन्म किस राज्य में हुआ था ?
(क) वंगाल
(ख) उड़ीसा
(ग) बिहार
(घ) उत्तर प्रदेश
उत्तर :
(ग) बिहार

प्रश्न 3.
बिस्मिल्ला खाँ की मृत्यु कितने वर्ष की आयु में हुई ?
(क) 60
(ख) 70
(ग) 80
(घ) 90
उत्तर :
(घ) 90

प्रश्न 4.
अमीरुद्दीन का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) पटना
(ख) मुजफ्फरपुर
(ग) डुमराँव
(घ) समस्तोपुर
उत्तर :
(ग) डुमराँव

प्रश्न 5.
बिस्मिल्ला खाँ किसको जन्नत से भी बढ़कर मानते थे?
(क) काशी और शहनाई को
(ख) लाहौर और ढोलक को
(ग) काशी और ढोलक को
(घ) लाहौर और शहनाई को
उत्तर :
(क) काशी और शहनाई को

प्रश्न 6.
भीमपलासी और मुलतानी के नाम हैं।
(क) मिद्टी
(ख) गंगा घाट
(ग) राग
(घ) कोई नहीं
उत्तर :
(ग) राग

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प्रश्न 7.
बिस्मिल्ला खाँ किस दिन खड़े होकर शहनाई बजाते हैं ?
(क) मुहर्रम के दिन
(ख) हनुमान जयंती के दिन
(ग) ईद के दिन
(घ) गाँधी जयती के दिन
उत्तर :
(क) मुहर्रम के दिन

प्रश्न 8.
‘नौबतखाने में इबादत’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) राजेश जोशी
(ख) यतींद्र मिश्र
(ग) गुणाकर मुले
(घ) डॉ० रामदरश मिश्र
उत्तर :
(ख) यतींद्र मिश्र।

प्रश्न 9.
बिस्मिल्ला खाँ का मूल क्या है ?
(क) शम्सुद्दीन
(ख) अलीबखा
(ग) अमीरूद्दीन
(घ) सादिक् हुसैन
उत्तर :
(ग) अमीरूद्दीन।

प्रश्न 10.
बिस्मिल्ला खाँ किसके छोटे साहबजादे (पुत्र) हैं ?
(क) उस्ताद पैगंबरबख़ खाँ और मिट्ठन
(ख) अलीबखा और मिट्ठन
(ग) अलीबख्श और मिट्ठन
(घ) पैगंबर बखा
उत्तर :
(क) उस्ताद पैगंबरबखा खाँ और मिट्ठन

प्रश्न 11.
शहनाई का उल्लेख किस साहित्य में नहीं मिलता ?
(क) वैदिक इतिहास
(ख) संस्कृत इतिहास
(ग) वाद्य इतिहास
(घ) संगीत इतिहास
उत्तर :
(क) वैदिक इतिहास।

प्रश्न 12.
दक्षिण भारत का मंगल वाद्य कौन-सा है ?
(क) ढोल
(ख) नगाड़ा
(ग) हारमोनियम
(घ) नागस्वरम्
उत्तर :
(घ) नागस्वरम्।

प्रश्न 13.
बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई के साथ किस पर्व का नाम जुड़ा हुआ है ?
(क) ईद
(ख) बकरीद
(ग) मुहर्रम
(घ) सबेरात
उत्तर :
(ग) मुहर्रम।

प्रश्न 14.
मुहर्रम की कौन-सी तारीख बिस्मिल्ला खाँ के लिए खास महत्व की है ?
(क) पाँचवीं
(ख) छठीं
(ग) सातवीं
(घ) आठवी
उत्तर :
(घ) आठवीं।

प्रश्न 15.
मुहर्रम के कौन-से दिन राग-रागनियों की अदायगी का निघेध है ?
(क) आठवीं
(ख) सातवाँ
(ग) छठा
(घ) पहला
उत्तर :
(क) आठवीं।

प्रश्न 16.
बिस्मिल्ला खाँ का सहज मानवीय रूप किस अवसर पर आसानी से दिख जाता है ?
(क) इंद के अवसर पर
(ख) मुहर्रम के अवसर पर
(ग) दशहरे के अवसर पर
(घ) कार्यक्रम के अवसर पर
उत्तर :
(ख) मुहर्रम के अवसर पर।

प्रश्न 17.
काशी में किसके आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है ?
(क) नृत्य
(ख) संगीत
(ग) घुड़दौड़
(घ) शहनाईवादन
उत्तर :
(ख) संगीत।

प्रश्न 18.
काशी में मरण को भी क्या माना गया है ?
(क) मंगल
(ख) अमंगल
(ग) दुखदायी
(घ) सुखदायी
उत्तर :
(क) मंगल।

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प्रश्न 19.
बिस्मिल्ला खाँ को भारत सरकार ने कौन-सा सम्मान प्रदान किया ?
(क) पद्भूषण
(ख) संगीत सम्माट
(ग) भारत रल्न
(घ) परमवीर चक्र
उत्तर :
(ग) भारत-रत्ल।

प्रश्न 20.
अलीबखश के घर का खानदानी पेशा क्या है ?
(क) नृत्य
(ख) संगीत
(ग) शहनाईवादन
(घ) लेखन
उत्तर :
(ग) शहनाईवादन।

प्रश्न 21.
बिस्मिल्ला खाँ का ननिहाल कहाँ था ?
(क) राँची
(ख) डुमराँव
(ग) बिहार
(घ) काशी
उत्तर :
(घ) काशी।

प्रश्न 22.
शहनाई में लगनेवाली रीड कहाँ पाई जाती है ?
(क) सोन नदी के किनारे
(ख) गंगा नदी के किनारे
(ग) यमुना नदी के किनारे
(घ) इनमें से कहीं नहीं
उत्तर :
(क) सोन नदी के किनारे।

प्रश्न 23.
बिस्मिल्ला खाँ के परदादा का नाम क्या था ?
(क) सादिक हुसैन
(ख) उस्ताद सलार हुसैन खाँ
(ग) अलीबखा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) उस्ताद सलार हुसैन खाँ।

प्रश्न 24.
बिस्मिल्ला खाँ रियाज के लिए कहाँ जाते थे ?
(क) बजरंग बली-मंदिर
(ख) मस्जिद
(ग) बालाजी-मंदिर
(घ) रसूलन बाई के घर
उत्तर :
(ग) बालाजी-मंदिर

प्रश्न 25.
सुषिरवाद्यों में किसे ‘शाह’ की उपाधि दी गई है ?
(क) तुरही को
(ख) रणभेरी को
(ग) शहनाई को
(घ) बाँसुरी को
उत्तर :
(ग) शहनाई को।

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प्रश्न 26.
प्रभाती की मंगल-ध्वनि का संपूरक कौन है ?
(क) बाँसुरी
(ख) शहनाई
(ग) अलगोजा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) शहनाई।

प्रश्न 27.
मुहर्रम की आठवीं तारीख को बिस्मिल्ला खाँ शहनाई पर क्या बजाते हैं ?
(क) भीमपलासी
(ख) मुलतानी
(ग) नौहा
(घ) कल्याण
उत्तर :
(ग) नौहा।

प्रश्न 28.
बिस्मिल्ला खाँ ने किन गायिका बहनों का उल्लेख किया है ?
(क) रसूलन और बतूलन
(ख) रसूलन और सुरैया
(ग) सुरेया और बतूलन
(घ) इनमें से किसी का नहीं
उत्तर :
(क) रसूलन और बतूलन।

प्रश्न 29.
‘नौबतखाने में इबादत’ की विधा क्या है ?
(क) संस्मरण
(ख) कहानी
(ग) व्यक्ति-चित्र
(घ) निबंध
उत्तर :
(ग) व्यक्ति-चित्र।

प्रश्न 30.
निम्नलिखित में से कौन-सा वाद्य बिस्मिल्ला खाँ बजाते थे?
(क) मुरली
(ख) बंशी
(ग) मुरह्दुंग
(घ) शहनाई
उत्तर :
(घ) शहनाई।

प्रश्न 31.
संगीत के प्रति ललक के कारण बिस्मिल्ला खाँ की तुलना किससे की गई है ?
(क) हिरण
(ख) तानसेन
(ग) बैजूबाबरा
(घ) नरहरिदास
उत्तर :
(क) हिरण।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से कौन काशी के रसिकों में नहीं है ?
(क) कंठे महाराज
(ख) विद्याधरी
(ग) मौजुद्दीन खाँ
(घ) गुलाम अली
उत्तर :
(घ) गुलाम अली।

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प्रश्न 33.
लेखक ने ‘नायाब हीरा’ किसे कहा है ?
(क) केठे महाराज को
(ख) बिस्मिल्ला खाँ को
(ग) इमाम हुसैन को
(घ) सादिक् हुसैन को
उत्तर :
(ख) बिस्मिल्ला खाँ को।

प्रश्न 34.
काशी में कौन दोनों एक-दूसरे के पूरक रहे हैं ?
(क) संगीत और साहित्य
(ख) अदब और रियाज
(ग) बाबा विश्वनाथ और विसिमलल्ला खाँ(घ) देशी घी और कचौड़ी-जलेबी
उत्तर :
(ग) बाबा विश्वनाय और बिस्मिल्ला खाँ।

प्रश्न 35.
मुहर्रम में कितने दिनों का शोक मनाया जाता है ?
(क) सात
(ख) आठ
(ग) नौ
(घ) दस
उत्तर :
(घ) दस।

प्रश्न 36.
शहनाई बजाने के लिए किसका प्रयोग होता है ?
(क) रस्सी
(ख) रीड
(ग) नौबतखाना
(घ) ज्योढ़ी
उत्तर :
(ख) रीड।

प्रश्न 37.
पक्का महाल इलाका कहाँ है ?
(क) काशी
(ख) इलाहाबाद
(ग) दिल्ली
(घ) देहरादून
उत्तर :
(क) काशी।

प्रश्न 38.
बिस्मिल्ला खाँ हमेशा किसकी प्रेरणा देते रहे ?
(क) संगीत की
(ख) मुहरंम मनाने का
(ग) भाईचारे का
(घ) कौमी एकता का
उत्तर :
(ग) भाईचारे का।

प्रश्न 39.
नागस्वरम् कहाँ का वाद्य है ?
(क) दक्षिण भारत का
(ख) उत्तर भारत का
(ग) पूर्जी भारत का
(घ) पश्चिमी भारत का
उत्तर :
(क) दक्षिण भारत का।

प्रश्न 40.
‘नय’ का क्या अर्थ है ?
(क) नया
(ख) शहनाई
(ग) फूँककर बजाया जानेवाला वाद्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) फूंककर बजाया जानेवाला वाद्य।

प्रश्न 41.
बिस्मिल्ला खाँ खुदा से क्या माँगते हैं ?
(क) खुशी
(ख) श्रोताओं की खुशी
(ग) एक अच्छी शहनाई
(घ) एक सच्चा सुर
उत्तर :
(घ) एक सच्चा सुर।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत

प्रश्न 42.
सुषिरवाद्यों में किसे ‘शाह’ की उपाधि दी गई है ?
(क) तुरही
(ख) रणभेरी
(ग) बाँसुरी
(घ) शहनाई
उत्तर :
(घ) शहनाई।

प्रश्न 43.
‘नागस्वरम्’ कहाँ का वाद्ययंत्र है ?
(क) दक्षिण भारत का
(ख) उत्तर भारत का
(ग) पूर्वी भारत का
(घ) पश्चिमी भारत का
उत्तर :
(क) दक्षिण भारत का।

प्रश्न 44.
भीमपलासी और मुलतानी के नाम हैं ?
(क) मिद्टी
(ख) गायिका बहनों
(ग) राग
(घ) स्थान
उत्तर :
(ग) राग।

प्रश्न 45.
संगीत के प्रति ललक के कारण बिस्मिल्ला खाँ की तुलना किससे की गई है ?
(क) हिरण
(ख) तानसेन
(ग) बैजूबावरा
(घ) नरहरिदास
उत्तर :
(क) हिरण।

प्रश्न 46.
काशी में कौन एक-दूसरे के पूरक रहे हैं ?
(क) संगीत और साहित्य
(ख) अदब और रियाज
(ग) बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ
(घ) कचौड़ी-जलेबी
उत्तर :
(ग) बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ।

प्रश्न 47.
शहनाई में लगनेवाली रीड कहाँ पाई जाती है ?
(क) सोन नदी के किनारे
(ख) गंगा नदी के किनारे
(ग) यमुना नदी के किनारे
(घ) इनमें से कहीं नहीं
उत्तर :
(क) सोन नदी के किनारे।

प्रश्न 48.
अमीरूद्दीन के मामाद्वय का नाम क्या था ?
(क) सादिक हुसैन – शमसुद्दीन
(ख) अलीबख़ा – शमसुद्दीन
(ग) सादिक हुसैन – अलीबखा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सादिक हुसैन – अलीबखा।

प्रश्न 49.
बिस्मिल्ला खाँ का मतलब –
(क) बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई
(ख) शहनाईवादक
(ग) भारत-रल्न
(घ) गंगा-जमुनी संस्कृति
उत्तर :
(क) बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई।

प्रश्न 50.
गीताबाली और सुलोचना कौन थी ?
(क) गायिका
(ख) अभिनेत्री
(ग) हलवाइन
(घ) शिष्या
उत्तर :
(ख) अभिनेत्री।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत

प्रश्न 51.
‘नौबतखाने में इबादत’ निबंध में किस समय के काशी का वर्णन है ?
(क) 1906-1912 ई० का
(ख) 1912-1918 ई० का
(ग) 1916-1922 ई० का
(घ) 1918-1920 ई० का
उत्तर :
(ग) 1916-1922 ई० का।

प्रश्न 52.
बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का नाम क्या था ?
(क) अलाउद्दीन
(ख) ग्यासुद्दीन
(ग) अलबसूनी
(घ) अमीरूद्दीन
उत्तर :
(घ) अमीरूहीद्दीन

प्रश्न 53.
‘भारत-रत्न’ का पुरस्कार किसको मिला था ?
(क) रंग्या को
(ख) बिस्मिल्ला खाँ को
(ग) भंबल दा को
(घ) लहना सिंह को
उत्तर :
(ख) बिस्मिल्ला खाँ को।

प्रश्न 54.
गंगा-यमुनी संस्कृति का आशाय है ?
(क) हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति
(ख) मिली-जुली संस्कृति
(ग) भ्रष्ट संस्कृति
(घ) खिचड़ी संस्कृति
उत्तर :
(क) हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति।

प्रश्न 55.
बिस्मिल्ला खाँ की मृत्यु हुई थी ?
(क) 2015 ई० में
(ख) 2009 ई० में
(ग) 2006 ई० में
(घ) 2001 ई० में
उत्तर :
(ग) 2006 ई० में।

प्रश्न 56.
लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सिल जाएगी – वक्ता कौन है ?
(क) रंगैख्या
(ख) अलीबखा
(ग) बिस्मिल्ला खाँ
(घ) सलार हुसैन
उत्तर :
(ग) बिस्मिल्ला खाँ।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत

प्रश्न 57.
दुनिया कहती है –
(क) यह काशी है
(ख) सन् 2000 की बात है
(ग) बजा, बजा
(घ) ये बिस्मिल्ला खाँ हैं
उत्तर :
(घ) ये बिस्मिल्ला खाँ हैं।

WBBSE Class 10 Hindi नौबतखाने में इबादत Summary

लेखक – परिचय

यतींन्द्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम. ए. की उपाधि प्राप्त की। ये स्वतंत्र-लेखन के साथ-साथ एक अर्द्धवार्षिक पत्रिका के संपादन के कार्य के अतिरिक्त एक सांस्कृतिक संस्था ‘विमला देवी फांउडेशन’ का भी संचालन कर रहे हैं। यह संस्था सन् 1999 से ही साहित्य तथा कला के क्षेत्र में प्रोत्साहन का कार्य कर रही है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत 1

प्रमुख रचनाएँ :- ‘यदा-कदा’, ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’, ‘डयोढ़ी पर आलाप’ के अलावे शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन तथा उनकी संगीत-साधना पर एक पुस्तक ‘गिरिजा’।

संपादन-कार्य :- रीतिकाल के अंतिम प्रमुख कवि ‘द्विजदेव-ग्रंथावली’ का सह-संपादन : कुँवर नारायण पर केंद्रित दो पुस्तकों के अतिरिक्त रूपकर कलाओं पर केंद्रित पुस्तक ‘थाती’ का भी संपादन।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 2 नौबतखाने में इबादत

पुरस्कार व सम्मान :- हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल कविता सम्मान, ॠतुराज सम्मान।

शब्दार्थ

पृष्ठ संख्या – 63

  • ङ्योढ़ी = बरामदा।
  • नौबतखाना = वह स्थान जहाँ बैठकर शहनाई बजाई जाती है।
  • मंगल ध्वनि = शुभ ध्वनि।
  • राग = संगीत व धुन को समय के अनुसार गाने व बजाने की शैली। भौमपलासी,
  • मुलतानी = रागों के नाम।
  • वाज़िब = सही।
  • लिहाज = मायने, माने।
  • गोया = बल्कि।
  • मामाद्वय = दो मामा।
  • शहनाई वादक = शहनाई बजानेवाले।
  • रियासत = जमींदारों, राजाओं।
  • रोजनामचे = (रूटीन) रोज का कार्यक्रम। कल्याण, ललित,
  • भैरव = रागों के नाम।
  • महत्ता = महत्व।
  • वाद्य = बाजा।
  • परदादा = दादा के पिता।
  • उस्ताद = गुरू।
  • साहबजादे = पुत्र।
  • मसलन = जबकि।
  • रियाज = अभ्यास। ठुमरी, ठपे,
  • दादरा = संगीत की शैली।
  • मार्फत = द्वारा।
  • आसक्ति = लगाव।
  • अबोध = जिसे बोध, ज्ञान न हो।
  • उकेरी = लिखा।

पृष्ठ संख्या – 64

  • उत्तरार्द्ध = बाद वाले समय में। शृंगी,
  • मुरहंग = एक प्रकार का वाद्य।
  • चैती = लोकसंगीत का एक प्रकार जो चैत्र महीने में गाया जाता है।
  • मंगल = शुभ।
  • परिवेश = वातावरण।
  • प्रयुक्त = प्रयोग में लाया गया।
  • प्रभाती = प्रातः काल गाया जाने वाला राग।
  • संपूरक = पूरा करने वाला।
  • सुर रहे हैं = गा रहे हैं।
  • नेमत = । सजदे = प्रार्थना, इबादत।
  • बखा दे = प्रदान कर दे ।
  • तासीर = प्रभाव।
  • यकीन = विश्वास।
  • मेहरबान = खुश।
  • मुराद = इच्छा।
  • ऊहापोहों = असमंजस, दुविधा।
  • दुश्चिंताओं = बुरी चिंताओं |
  • तिलिस्म = जादू ।
  • महक = सुगंध।

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पृष्ठ संख्या – 65

  • गमक = खुशबू ।
  • तमीज = व्यवहार।
  • सलीके = अच्छी तरह से।
  • शिरकत = शामिल।
  • निषेध = मना।
  • शहादत = बलिदान।
  • अजादारी = ताजियया-यात्रा, ताजिया निकाला जाता है।
  • गमजदा = शोक से भरा।
  • माहौल = वातावरण ।
  • सुकून = निश्चिंतता, आराम।
  • जुनून = दीवानापन।
  • पसंदीदा = मनपसंद।
  • बदस्तूर = पहले की तरह ।
  • कायम = चालू।
  • नैसर्गिक = स्वर्गीय ।
  • खारिज = रह ।
  • दाद = शाबासी।
  • हासिल = प्राप्त।

पृष्ठ संख्या – 66

  • मेहनताना = पारिश्रमिक काम करने के बदले प्राप्त धन।
  • कलकलाते = खौलते।
  • आरोह-अवरोह = उतार-चढ़ाव।
  • रियाजी = अभ्यास करनेवाले।
  • संकटमोचन = संकट को दूर करने वाले, बजरंगबली।
  • मजहब = धर्म
  • अपार = जिसका पार न पाया जा सके।
  • पुश्तों = पीढ़ियों।
  • शहनाईवाज = शहनाई बजाने वाले।
  • तालीम = शिक्षा।
  • अदब = इज्ज़त।
  • जन्नत = स्वर्ग।
  • आनंदकानन = आनंद की फुलवारी।

पृष्ठ संख्या – 67

  • तहजीब = संस्कृति।
  • विशिष्ट = विशेष।
  • सरगम = सातों सुर ।
  • बेताले = बिना ताल के
  • परवरदिगार = अल्लाह।
  • नसीहत = उपदेश।
  • करतब = करिश्मा।
  • अजान की तासीर = नमाज का प्रभाव।
  • सरताज = सिर का ताज।
  • भारतरत्म = भारत सरकार द्वारा साहित्य, कला आदि के क्षेत्र में दिया जानेवाला सबसे बड़ा पुरस्कार ।
  • तहमद = लुंगी।
  • खलती = बुरी लगती है ।
  • शिद्धत = समय।
  • संगतियों = संगीत में साथ देने वाले ।

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पृष्ठ संख्या – 68

  • लुप्त = गायब।
  • थापों = थपकी ।
  • नायाब = दुर्लभ।
  • कौमों = धर्मों, जातियों।
  • मानद = सम्मान में दिया गया।
  • अजेय = जिसे जीता न जा सके ।
  • रसिकों = प्रेमियों।
  • जिजीविषा = प्रचंड इच्छा।
  • एकाधिकार = एक का अधिकार।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण समास to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
समास किसे कहते हैं ?
उत्तरः
समास शब्द का अर्थ है-संक्षिप्त करने की रचना-विधि या छोटा करने का ढंग। अपनी बात को कम से कम शब्दों में कहना मानव का स्वभाव है। इसीलिए वह अनेक बार भाषा के एक से अधिक शब्दों को मिलाकर एक शब्द बना देता है। एक से अधिक शब्दों को मिलाने की यह विधि ही समास कहलाती है।
अथवा
परस्पर संबंध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्दों के मेल को समास कहते हैं।
अथवा
समास वह शब्द रचना है जिसमें अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले दो या दो से अधिक शब्द मिलकर किसी अन्य स्वतंत्र शब्द की रचना करते हैं।
जैसे – रसो
ई + घर = रसोईघर : पीत + अम्बर = पीताम्बर।

प्रश्न 2.
समास-विग्रह किसे कहते हैं ?
उत्तरः
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नये शब्द बनाने की क्रिया को समास कहते हैं। इस विधि से बने शब्दों को समस्त-पद कहते हैं। जब समस्त-पदों को पृथक-पृथक किया जाता है तो उसे समास-विप्रह कहते हैं।
अथवा
जब समस्त-पद के सभी पद अलग-अलग किए जाते हैं, तब उस प्रकिया को ‘समास विप्रह’ कहते हैं जैसे ‘मातापिता’ समस्त पद का विग्रह होगा माता और पिता।

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प्रश्न 3.
‘पूर्वपद’, ‘उत्तरपद’ तथा ‘समस्त-पद’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
समास रचना में दो शब्द (पद) होते हैं। पहला पद ‘पूर्वपद’ कहा जाता है और दूसरा पद ‘उत्तरपद’ तथा इन दोनों के समास से बना नया शब्द समस्त-पद’ कहलाता है। समास रचना के क्रम में का विभक्ति लोप हो जाता हैं। जैसे-

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प्रश्न 4.
हिन्दी में समास प्रक्रिया के अंतर्गत कितने प्रकार से शब्दों की रचना हो सकती है ?
उत्तरः
हिन्दी में समास प्रक्रिया के अंतर्गत तीन प्रकार से शब्दों की रचना हो सकती है-

  • तत्सम + तत्सम शब्दों के समास से, जैसे – राजा + पुत्र = राजपुत्र
  • तद्भव + तद्भव शब्दों के समास से, जैसे – बैल + गाड़ी = बैलगाड़ी
  • विदेशी + विदेशी शब्दों के समास से, जैसे – जेब + खर्च = जेबखर्च

प्रश्न 5.
संकर समास किसे कहते हैं ? सोदाहरण लिखें।
उत्तरः
हिन्दी में ऐसे समास भी मिलते है जो दो भिन्न भाषाओं के मेल से बने हैं। इन्हें ही संकर समास कहते हैं। जैसे –

  • योजना कमीशन (तत्सम् + विदेशी)
  • डाकखाना (तद्भव + विदेशी)
  • पॉकेटमार (विदेशी + तद्भव)

प्रश्न 6.
समास की विशेषताओं को लिखें।
उत्तरः
समास की निम्नलिखित विशेषताएँ है –

  •  समास में दो या दो से अधिक पदों का एक पद के रूप में संक्षेपीकरण अथवा योग होता है।
  • समास में दो या अधिक पदों के बीच के विभक्ति चिह्न, प्रत्यय आदि का लोप हो जाता है।
  • समास की प्रक्रिया में पदों के बीच संधि की स्थिति पैदा हो जाने पर संधि अवश्य हो जाती है। इस नियम का पालन हिन्दी की बजाय संस्कृत में अति आवश्यक है।

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प्रश्न 7.
सन्धि और समास में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
सन्धि और समास में निम्नांकित अंतर हैं :-
सन्धि में अक्षरों का और समास में पदों (शब्दों) का मेल होता है –
सन्धि
विद्यालय = विद्या + आलय
नयन = ने + अन्

समास
विद्या का आलय
माता-पिता=माता और पिता

समास में सन्धि के नियमों का पालन आवश्यक है, पर सन्धि में समास का नियम पालन आवश्यक नहीं है। यह ऊपर के उदाहरणों से स्पष्ट हो गया है।
समास और सन्धि दोनों में पदों को तोड़ते हैं। समास में पदों को तोड़ने की क्रिया ‘विग्रह’ कहलाती हैं और सन्धि में इसे ‘विच्छेद’ कहते हैं।
समास में जोड़ (+) चिन्ह की कोई आवश्यकता नहीं होती, पर सन्धि में (+) चिह्न आवश्यक है।
समास में शब्द का यथार्थ रूप सामान्यत: बना रहता है, किन्तु सन्धि में कभी एक अक्षर और कभी दोनों में परिवर्तन होता है। कभी-कभी दोनों के बदले तीसरा अक्षर आ जाता है। जैसे-
समास
गृह-प्रवेश = गृह में प्रवेश
भाई-बहन = भाई और बहन
गंगाजल = गंगा का जल
नीलगाय = नीली है जो गाय

प्रश्न 8.
समास के कितने भेद हैं ?
प्रश्न 8.
समास के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
हिन्दी में समास के निम्नलिखित छ: भेद है :-

  • तत्पुरुष
  • कर्मधारय
  • द्विगु
  • द्वन्द्ध
  • बहुवीहि और
  • अव्ययी भाव।

कुछ वैयाकरण नज्’ नामक सातवाँ भेद भी मानते हैं।

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प्रश्न 9.
तत्पुरुष समास किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित लिखें।
उत्तरः
तत्पुरुष समास – जिस समास में दूसरा पद प्रधान हो तथा पहले पद की विभक्ति आदि का लोप हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –

राजपुत्र = राजा का पुत्र। पाठशाला = पाठ के लिए शाला आदि।
ऊपर के उदाहरणों में ‘का’, के लिए’ का लोप है।

प्रश्न 10.
तत्पुरुष समास के भेदों को सोदाहरण लिखें :-
उत्तरः
तत्पुरुष समास के छ: भेद हैं – (क) कर्म तत्पुरुष, (ख) करण तत्पुरुष, (ग) सम्प्रदान तत्पुरुष, (घ) अपादान तत्पुरुष, (ङ) सम्बन्ध तत्पुरुष, (च) अधिकरण तत्पुरुष।
(क) कर्म तत्पुरुष :- इसमें कर्म का चिह्न को’ समास होने पर लुप्त हो जाता है। जैसे – गिरहकट = गिरह को काटने वाला; जलज = जल को देने वाला।
(ख) करण तत्पुरुष :- इसमें करण का ‘से’ या द्वारा’ चिह्न लुप्त रहता है। जैसे-शोकाकुल = शोक से आकुल; तुलसीकृत = तुलसी द्वारा कृत (बनाई गई)।
(ग) सम्प्रदान तत्पुरुष :- इसमें सम्प्रदान का चिह्न को’ या ‘के लिए’ हट जाता है। जैसे-देश-प्रेम = देश के लिए प्रेम; मार्गव्यय = मार्ग के लिए व्यय।
(घ) अपादान तत्पुरुष :- इसमें अपादान का चिह्न ‘से’ हट जाता है। जैसे-पदच्युत = पद से च्युत, धर्मविमुख = धर्म से विमुख।
(ङ) सम्बन्ध तत्पुरुष :- इसमें सम्बन्ध के चिह्न ‘का’, के, की’ हट जाते हैं। जैसे-यंगाजल = गंगा का जल; राजपुत्र = राजा का पुत्र।
(च) अधिकरण तत्पुरुष :- इसमें अधिकरण का चिह्न ‘में’, पर’ लुप्त रहता है। जैसे-वनवास = वन में वास; प्रेममग्न = प्रेम में मग्न।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :-
कर्मधारय समास, द्विगु समास, द्वन्न्व समास।
उत्तरः
कर्मधारय समास :- जिस सामासिक पद में विशेषण और विशेष्य (संज्ञा), विशेषण तथा उपमान और उपमेय का मेल होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे-पीताम्बर = पीत अम्बर; नीलगाय = नीली गाय।
लाल-पीला (दोनों विशेषण); चन्द्रमुख = चन्द्र की तरह मुख (उपमान-उपमेय का मेल)।
द्विगु समास :- जिस सामासिक पद (शब्द) का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसेत्रिभुवन = तीनों भुवनों का समाहार; चौराहा = चार राहों का समाहार।
द्वन्द्ध समास :- जिस सामासिक पद (शब्द) के दोनों या सभी पद प्रधान हों, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। जैसेमाँ-बाप = माँ और बाप; दालभात = दाल और भात (इसमें और, एवं, या हट जाते हैं)।

प्रश्न 12.
द्वन्द्व समास के कितने भेद हैं ? परिभाषा व उदाहरण भी लिखें।
उत्तरः
द्वन्द्ध समास के तोन भेद हैं – (क) इतरेतर द्वृन्द्ध (ख) वैकल्पिक द्वन्द्व और (ग) समाहार द्वन्द्व।
(क) इतरेतर द्वन्द्व :- जिस दून्द्व समास में ‘और का लोप होता है, उसे इतरेतर दून्द्ध समास कहते हैं। जैसे-सीताराम = सीता और राम; राजा-रानी = राजा और रानी।
(ख) वैकल्पिक द्वन्द्ध :- जिस द्वन्द्ध समास में विरोधी शब्दों का मेल हो और उन शब्दों के बीच का विकल्पसूचक समुच्चयबोधक व’ या ‘अथवा’ का लोप हो उसे वैकल्पिक द्वन्द्ध कहते हैं। जैसे – मान-अपमान = मान व अपमान; पाप-पुण्य = पाप अथवा पुण्य।
(ग) समाहार द्वन्द्ध : जिस द्वन्द्ध समास में विरोधी शब्दों के पदों के अलावा उसी तरह का दूसरा अर्थ व्यंजित हो, उसे समाहार द्वन्द्ध समास कहते हैं। जैसे-चोर-डाकू; भूल-चूक; हाथ-पाँव आदि।

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प्रश्न 13.
बहुव्रीहि समास की परिभाषा व उदाहरण लिखें।
उत्तरः
बहुव्रीहि समास :- जिस सामासिक पद (शब्द) का कोई भी पद प्रधान न हो, बल्कि समस्त पद अपना विशेष अर्थ व्यक्त करे, वहाँ बहुवीहि समास होता है। जैसे-नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका (शिवजी); लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका (गणेश जी)।

प्रश्न 14.
बहुव्रीहि समास के कितने भेद हैं ? परिभाषा व उदाहरण लिखें।
उत्तरः
बहुव्रीहि समास के चार निम्नलिखित भेद माने जाते हैं –
(क) समानाधिकरण बहुव्वोहि, (ख) व्यधिकरण बहुवीहि, (ग) तुल्ययोग या सहबहुवीहिहि तथा (घ) व्यतिहार बहुवीहि।
(क) समानाधिकरण बहुवीहि समास :- जिस बहुव्रीहि समास का समस्त पद कर्तांकारक की विभक्ति का हो और विग्रह करने पर कर्म से लेकर अधिकरण कारक तक किसी का भी कारक चिह्न (विभक्ति) उसमें लगा हो और उसका विशेष अर्थ व्यंजित हो, तो उसे समानाधिकरण बहुव्रीहि समास कहते हैं। जैसे-दशानन = दस हैं आनन जिसके = सम्बन्ध तत्पुरुष। जितेन्द्रिय = इन्द्रियाँ जीती गई हैं जिसके द्वारा (से )= करण तत्पुरुष।
(ख) व्यधिकरण बहुव्रीहि समास :-जिस बहुव्वीहि समास के विग्रह करने पर पहले पद में कर्त्ताकारक और दूसरे पद में सम्बन्ध या अधिकरण का चिह्न लगता है, उसे अधिकरण बहुव्रीह समास कहते हैं। जैसे-चक्रपाणि = चक्र हैं पाणि में जिसके। चन्द्रचूड़ = चन्द्र है चूड़ पर जिसके
(ग) तुल्ययोग या सहबहुव्रीहि समास :- जिस बहुव्रीहि समास का पहला पद सह (साथ) हो, उसे तुल्ययोग या सहबहुवीहि समास कहते हैं। जैसे-सतेज = तेज के साथ जो हो। सकुशल = कुशल के साथ जो हो।
(घ) व्यतिहार बहुव्रीहि समास :- जिस बहुवीहि समास से घात-प्रतिघात का भाव प्रकट होता है, उसे व्यतिहार बहुवीहि समास कहते हैं। जैसे- बाताबाती = बात-बात में लड़ाई का बोध होता है। लातालाती = लात-लात से लड़ाई का बोध होता है।

प्रश्न 15.
व्यतिहार बहुव्रीहि के कितने भेद माने जाते हैं ? परिभाषा व उदाहरण भी लिखें।
उत्तरः
व्यतिहार बहुव्रीहि के निम्नलिखित भेद माने जाते हैं –
(क) करण बहुवीहि,
(ख) सम्प्रदान बहुव्रीहि
(ग) अपादान बहुवीहि
(घ) सम्बन्ध बहुव्वीहि और
(ङ) अधिकरण बहुवीहि।
विशेष :- इस समास के भेद में कर्ता, कर्म और सम्बोधन को छोड़कर (कारकों के चिह्न – ने, को, हे, अरे) शेष जिस कारक का चिह्न (विभक्ति) लगता है, उसी के अनुसार इसका नाम होता है। जैसे-
(क) करण बहुव्वीहि समास :- कृतकार्य = किया गया है काम जिससे (जिसके द्वारा), वही।
(ख) सम्प्रदान बहुव्रीहि समास :- दिया गया है धन जिसको, वह।
(ग) अपादान बहुव्राहि समास :- निर्मल = निर्गत है मल जिससे, वह।
(घ) सम्बन्ध बहुव्रीहि समास :- चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसकी, वह।
(ङ) अधिकरण बहुव्रीहि समास :- प्रफुल्लकुसुम = फूले हैं कुसुम जिसमें, वह।

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प्रश्न 16.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें :- अव्ययीभाव समास।
उत्तरः
अव्ययीभाव समास :- जिस सामासिक पद (शब्द) का पहला या दोनों शब्द अव्यय हों, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इसमें पहला पद प्रधान होता है और समस्त पद क्रिया-विशेषण के रूप में प्रयोग में आता है।
विशेष-द्रष्टव्य :- संज्ञा की आवृत्ति (द्विरुक्ति) से भी अव्ययीभाव समास बनते हैं। जैसे-
(क) घर-घर, कदम-कदम, दर-दर आदि।
(ख) क्रिया-विशेषण की द्विरुक्ति से भी अव्ययीभाव समास बनते हैं।
जैसे – धीरे – धीरे, पहले -पहले आदि।
(ग) अव्ययीभाव में कभी-कभी पहला पद अव्यय नहीं रहता, पर वह क्रिया-विशेषण रूप में काम करता है। जैसे – मन ही मन; डगर-डगर आदि।
(घ) कुछ अव्ययीभाव समास के पूर्वपद विकृत होकर आते हैं। जैसे-हाथों-हाथ, बीचो-बीच आदि।

प्रश्न 17.
कर्मधारय समास तथा बहुव्रीहि समास में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
कर्मधारय समास और बहुव्रीहि समास में अन्तर :-
कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य (संज्ञा) के रूप में आता है, किन्तु बहुव्वीहि समास में सभी पद किसी दूसरे पद का विशेषण होता है। जैसे-
कर्मधारय समास
बहुव्रीहि समास
पीताम्बर = पीला वस्त्र
पीला वस्त्र हो जिसका, वह (कृष्ण)
ऊपर के उदाहरणों में कर्मधारय में विशेषण-विशेष्य का मेल दिखाया गया है और बहुवीहि में एक विशेष अर्थ का बोध होता है।

प्रश्न 18.
तत्पुरुष समास और कर्मधारय समास में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
तत्पुरुष समास और कर्मधारय समास में अन्तर :-
तत्पुरुष समास में अलग-अलग विभक्तियाँ लगते हैं और कर्मधारय समास में खण्ड करते समय केवल एक ही विर्भिक्ति लगाई जाती है।
जैसे –
तत्पुरुष समास-
राजपुत्र = राजा का पुत्र
माखनचोर = माखन का चोर

कर्मधारय समास-
चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख
नीलकमल = नीला कमल

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 19.
तत्पुरुष तथा बहुव्रीहि समास में अन्तर को सोदाहरण बताएँ।
उत्तरः
तत्पुरुष और बहुव्रीहि समास में अन्तर :- तत्पुरुष और बहुव्वीहि में यह भेद है कि तत्पुरुष में प्रथम पद द्वितीय पद का विशेषण होता है, जबकि बहुव्रीहि में प्रथम और द्वितीय दोनों पद मिलकर अपने से अलग किसी तीसरे के विशेक्ण होते हैं। जैसे-पीत + अम्बर = पीताम्बर (पीला कपड़ा) कर्मधारय तत्पुरुष है, तो पीत है अम्बर जिसका वह-पीताम्बर (विष्णु) बहुव्रीहि। इस प्रकार यह विग्रह के अन्तर से ही समझा जा सकता है कि कौन तत्पुरुष है और कौन बहुवीहि। विग्रह के अन्तर होने से समास का और उसके साथ ही अर्थ का भी अन्तर हो जाता है। पीताम्बर’ का तत्रुरुष में विग्रह करने पर पीला कपड़ा’ और बहुव्रीहि में विग्रह करने पर ‘विष्यु’ अर्थ होता है।

प्रश्न 20.
बहुव्रीहि तथा द्विगु समास के अंतर को उदाहरण के साथ दिखलाएँ।
उत्तरः
बहुवीहि और द्विगु समास में अन्तर –
जहाँ पहला पद संख्यावाचक होता है और दूसरा पद ‘विशेष्य’ की विशेषता ‘संख्या में’ बताता है वहाँ “द्विगु’ समास होता है।
जहाँ समस्त पद किसी तीसरे की ओर संकेत करता है वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।
उदाहरण :
(i) चतुरानन = चार आननों का समाहार (द्विगु)
चतुरानन = चार आनन हों जिसके – बहा (बहुव्रीहि)
(ii) त्रिलोचन = तीन लोचनों का समाहार (द्विगु)
त्रिलोचन = तीन लोचन हैं जिसके = शिव (बहुव्रीहि)

प्रश्न 21.
बहुव्रीहि समास की विशेषताओं को लिखें।
उत्तरः
बहुवीहि समास की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

  • यह दो या दो से अधिक पदों का समास होता है।
  • इसका विम्रह शब्दात्मक या पदात्मक न होकर वाक्यात्मक होता है।
  • इसमें अधिकतर पूर्वपद कर्ता कारक का होता है या विशेषण।
  • इस समास से बने पद विशेषण होते हैं। अतः, उनका लिंग विशेष्य के अनुसार होता है।

प्रश्न 22.
टिप्पणी लिखें – नअ समास।
उत्तरः
“नअ समास ” तत्पुरुष का एक भेद है जिसमें पूर्व पद “अभाव” अथवा “निषेध” का अर्थ व्यक्क करता है। अभाव एवं निषेध को व्यक्त करने वाले उपसर्ग हिन्दी में ‘अ’ तथा ‘अन’ है। इनके उदाहरण हैं-अधर्म (न धर्म), अन्याय (न न्याय), असमर्थ (नहीं समर्थ), अनिष्ट (न् इष्ट), अनचाहा (न चाहा), अनधिकार (न अधिकार), अपूर्ण (न पूर्ण), अनकहा (न कहा) आदि।
विशेष : (क) उर्दू में “ना” तथा “गैर” से बननेवाले शब्द, जिनका हिन्दी में प्रयोग होता है, नज् समास में ही माने जाएंगे। यथा – नालायक (नहीं लायक), नाबालिग (नहीं बालिग), नापसन्द (नहीं पसन्द), गैर हाजिर (नहीं हाजिर), गैरवाजिब (नहीं वाजिब) आदि।
(ख) हिन्दी में निषेध का अर्थ व्यक्त करने वाले ‘न’ अव्यय से बननेवाले शब्द नज्’ समास के अन्तर्गत आते हैं, जैसे – नास्तिक (न आस्तिक), नगण्य (नहीं गण्य), नक्षत्र (नहीं क्षत्र) आदि।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 1.
समास के समस्त भेदों के अनुसार समासों की सूची प्रस्तुत करें तथा उनका विग्रह भी करें।
उत्तरः
समास-सूची (तत्पुरुष समास) :-
द्वितीय तत्पुरुष (कर्म-तत्पुरुष) :-

समस्त पद – विग्रह

गिरिधर – गिरि (को) धारण करनेवाला।
जलधर – जल (को) धारण करनेवाला।
हलधर – हल (को) धारण करनेवाला।
भूधर – भू (को) धारण करनेवाला।
वंशीधर – वंशी (को) धारण करनेवाला।
विषधर – विष (को) धारण करनेवाला।
मनोहर – मन (को) हरनेवाला।
स्वर्गप्राप्त – स्वर्ग (को) प्राप्त करनेवाला।
मोक्षप्राप्त – मोक्ष (को) प्राप्त करनेवाला।
यशप्राप्त – यश (को) प्राप्त करनेवाला।
सुख्याप्त – सुख (को) प्राप्त करनेवाला।
पॉकेटमार – पॉकेट (को) मारनेवाला।
चिड़ीमार – चिड़ियों (को) मारनेवाला।
कठखोदवा – काठ (को) खोदनेवाला।
कठफोड़वा – काठ (को) फोड़नेवाला।
दु:खापन्न – दु:ख को आपन्न (प्राप्त)।
संकटापन्न – संकट को आपन्न।
स्थानापन्न – स्थान को आपन्न।
अग्निभक्षी – अग्नि (को) भक्षण करनेवाला।
सर्वभक्षी – सर्व या सब (को) भक्षण करनेवाला।
गगनचुम्बी – गगन (को) चूमनेवाला।
गृहागत – गृह को आगत।

तृतीया तत्पुरुष (करण-तत्पुरुष) :-

समस्त पद – विग्रह

देहघोर – देह से चोर
मुंहवोर – मुँह से चोर
कामचोर – काम से चोर
प्रेमसिक्त – प्रेम से सिक्त
जलसिक्त – जल से सिक्त
अकालपीड़ित – अकाल से पीड़ित
रोगपीड़ित – रोग से पीड़ित
धर्मान्ध – धर्म से अंधा
जन्मान्ध – जन्म से अंधा
मदान्ध – मद से अंधा
शोकार्त्त – शोक से आर्त्त
दुखार्त्त – दुःख से आर्त्त
आतपजीवी – आतप से जीनेवाला
श्रमजीवी – श्रम से जीनेवाला
शोकमस्त – शोक से प्रस्त
रोगग्रस्त – रोग से मसस्त
करुणापूर्ण – करुणा से पूर्ण
कष्टसाध्य – कष्ट से साध्य
रसभरा – रस से भरा
मदमाता – मद से माता
जलावृत्त – जल से आवृत्त
मेघाच्छन्न – मेघ से आव्छन्न
तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत
नियमबद्ध – नियम से आबद्ध
मुँहमाँगा – मुँह से माँगा
पददालित – पद से दलित
दु:ख-संतप्त – दु:ख से संतप्त
फलावेष्टित – फल से आवेष्टित
शोकाकुल – शोक से आकुल
रोगमुक्त – रोग से मुक्त

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

चतुर्थी तत्पुरुष (संप्रदान-तत्पुरुष) :-

समस्त पद – विग्रह
शिवालय – शिव के लिए आलय
न्यायालय – न्याय के लिए आलय
गोशाला – गाय के लिए शाला
धर्मशाला – धर्म के लिए शाला
रसोईघर – रसोई के लिए घर
स्नानघर – स्नान के लिए घर
देशभक्ति – देश के लिए भक्ति
भक्ति – गुरु के लिए भक्ति
त्रशोक – पुत्र के लिए शोक
पितुशोक – पितृ (लिता) के लिए शोक
हुदक्षिणा – गुरु के लिए दक्षिणा
शिवार्पण – शिव के लिए अर्पण
देवबलि – देव के लिए बलि
सभाभवन – सभा के लिए भवन
फलाकांक्षी – फल के लिए आकांक्षी
लोकहितकारी – लोक के लिए हितकारी
मार्गव्यय – मार्ग के लिए व्यय
मालगोदाम – माल के लिए गोदाम
राहखर्च – राह के लिए खर्च
डाकमहसूल – डाक के लिए महसूल
विधानसभा – विधान के लिए सभा

पंचमी तत्पुरुष (अपादान-तत्पुरुष) :-

समस्त पद – विग्रह

शक्तिहीन – शक्ति से हीन
अन्नहीन – अन्न से हीन
दयाहीन – दया से हीन
क्रियाहीन – क्रिया से हीन
बलहीन – बल से हीन
नेत्रहीन – नेत्र से हीन
जातिभ्रष्ट – जाति से भ्रष्ट
पथभ्रष्ट – पथ से भ्रष्ट
स्थानभ्रष्ट – स्थान से भ्रष्ट
पदभष्ट – पद से भ्रष्ट
ॠणमुक्क – ॠण से मुक्त
पापमुक्त – पाप से मुक्त
व्ययमुक्त – व्यय से मुक्त
बंधनमुक्त – बंधन से मुक्त
मरणमुक्त – मरण से मुत्ता
धनहीन – धन से हीन
पदच्युत – पद से च्युत
धर्मव्य्यत – धर्म से च्युत
स्थानच्युत – स्थान से च्युत
वनरहित – वन से रहित
लक्षणरहित – लक्षण से रहित
धनरहित – धन से रहित
मायारिक्त – माया से रिक्त
ईश्वरविमुख – ईश्वर से विमुख
जलरिक्त – जल से रिक्क
प्रेमरिक्त – प्रेम से रिक्त
धर्मविमुख – धर्म से विमुख
मरणोत्तर – मरण से उत्तर
जजात – जल से जात
ज्ञर – लोक से उत्तर

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

षष्ठी तत्पुरुष (संबंध-तत्पुरुष) :-

समस्त पद – विग्रह
अन्नदान – अन्न का दान
कन्यादान – कन्या का दान
श्रमदान – क्रम का दान
भूदान – भू का दान
विद्यालय – विद्या का आलय
देवालय – देव का आलय
देशसेवा – देश की सेवा
बालुकाराशि – बालुका की राशि
राजकन्या राजा की कन्या
राजमहल – राजा का महल
राजगृह – राजा का गृह
राजभवन – राजा का भवन
औषधालय – औषध का आलय
न्यायालय – न्याय का आलय
हिमालय – हिम का आलय
पुस्तकालय – पुस्तक का आलय
मदिरालय – मदिरा का आलय
सेनानायक- सेना का नायक
जननायक – जनों का नायक
गुरुसेवा – गुरु की सेवा
वीरकन्या – वीर की कन्या
कृष्णोषासक – कृष्ण का उपासक
त्रिपुरारि – त्रिपुर का अरि
शकारि – शक का अरि
दनुजारि – दनुजों का अरि
शांतिदूत – शांति का दूत
राजदूत – राजा का दूत
आनन्दमठ – आनन्द का मठ
आनन्दाश्रम – आनन्द का आश्रम
अमृतपात्र – अमृत का पात्र
रामायण – राम का अयन
उल्कापात – उल्का का पात
राजपुत्र – राजा का पुत्र
राजदरबार – राजा का दरबार
सभापति – सभा का पति
राष्ट्रपति – राष्ट्र का पति
सेनाध्यक्ष – सेना का अध्यक्ष
सभाध्यक्ष – सभा का अध्यक्ष
विद्यार्थी – विद्या का अर्थी
शिक्षार्थी – शिक्षा का अर्थी
प्रेमोपासक – प्रेम का उपासक
गंगाजल – गंगा का जल
गणेश – गण का ईश
चन्द्रोदय – चन्द्र का उदय
देशभक्त – देश का भक्त
चरित्रचित्रण – चरित्र का चिन्रण
अमरस – आम का रस
विद्यासागर – विद्या का सागर
मामोद्धार – प्राम का उद्धार
सभाभवन – सभा का भवन
विद्याभ्यास – विद्या का अभ्यास
रत्नागार – रत्नों का आगार

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

सप्तमी तत्पुरुष (अधिकरण-तत्पुरुष) :-

समस्त पद – विग्रह

कविश्रेष्ठ – कवियों में श्रेष्ठ
मुनिश्रेष्ठ – मुनियों में श्रेष्ठ
कुलश्रेष्ठ – कुल में श्रेष्ठ
यतिश्रेष्ठ – यतियों में श्रेष्ठ
नरोत्तम – नरों में उत्तम
पुरुषोत्तम – पुरुषो मे उत्तम
सर्वोत्तम – सर्व में उत्तम
आनन्दमग्न – आनन्द में मग्न
ध्यानमग्न – ध्यान में मग्न
प्रेममग्न – प्रेम में मग्न
प्रेमासक्त – प्रेम में आसक्त
फलासक्त – फल में आसक्त
नराधम – नरों में अधम
क्षत्रियाधम – क्षत्रियों में अधम
पुरुषससिंह – पुरुषों में सिंह
कार्यकुशल – कार्य में कुशल
म्रामवास – ग्राम में वास
गृहपववेश – गृह में प्रवेश
शास्भ्भवीण – शास्त्रों में प्रवीण
रणशूर – रण में शूर
शरणागत – शरण में आगत
दानवीर – दान में वीर
धर्मवीर – धर्म में वीर
रणवीर – रण में वीर
हरफ.नमौला – हर फन में मौल
घुड़सवार – घोड़े पर सवार
आपबीती – आप पर बीती
आत्मनिर्भर – आत्म पर निर्भर

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

कर्मधारय समास :

 विशेषणवाचक :-

समस्त पद विग्रह
पीताम्बर – पीत अम्बर
महाकाव्य – महान् काव्य
महात्मा – महान् आत्मा
महावीर – महान् वीर
महापुरुष – महान् पुरुष
सद्भावना – सत् भावना
सज्जन – सत् जन
नवयुवक – नवयुवक
श्वेताम्बर – श्वेत अम्बर
कापुरुष – कुत्सित पुरुष
कदन्न – कुत्सित अन्न
छुटभैये – छोटे भैये
नीलकमल – नीला कमल
नीलोत्पल – नील उत्पल
परमेश्वर – परम ईश्वर
वीरबाला – वीर बाला

उपमावाचक :-

समस्त पद – विग्रह
चरणकमल – कमले समान चरण
नेत्रकमल – कमल के समान नेत्र
करकमल – कमल के समान कर
मुखकमल – कमल के समान मुख
कमलनयन – कमल के समान नयन
कुसुमकोमल – कुसुम के समान कोमल
किसलय कोमल – किसलय के समान कोमल
शोकसागर – शोकरूपी सागर
ज्ञानसागर – ज्ञानरूपी सागर
संसारसागर – संसाररूपी सागर
विरहसागर – सागर के समान विरह
घनश्याम – घन के समान श्याम
मेघ कुन्तल – मेघ के समान कुन्तल
शैलोन्नत – शैल के समान उन्नत
विद्युन्चंचला – विद्युत्-जैसी चंचला
विद्युतवेग – विद्युत के सामन वेग
ज्ञानालोक – ज्ञानरूपी आलोक
शोकानल – शोकरूपी अनल
भक्ति सुधा – भक्तिरूपी सुधा
प्राणधान – प्राणरूपी धन
कीर्तिलता – कीर्तिरूपी लता
मुखचन्द्र – चन्द्र के समान मुख
मुखारविन्द – अरविन्द के समान मुख
प्राणप्रिय – प्राण के समान प्रिय
लौह पुरुष – लौह के समान पुरुष
मृगनैनी – मृग के नयन के समान नयनवाली
शशिमुख – शशि के समान मुख

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

नज् (नकारात्मक) :-

समस्त पद – विग्रह

अकर्म – नकर्म
अगोचर – न गोचर
अचल – न चल
अचेतन – न चेतन
अदृश्य – न दृश्य
अधर्म – न धर्म
अछूत – न छूत
अजात – न जात
अज्ञात – न ज्ञात
अतृप्त – न तृप्त
अपढ़ – न पढ़
अपार – न पार
अधीर – न धीर
अनादि – न आदि
अन्मचार – न आधार
अनिष्ट – न इष्ट
अनिच्छुक – न इच्छुक
अमंगल – न मंगल
अव्यय – न व्यय
असभ्य – न सभ्य
असार – न सार
अहित – न हित

द्विगु समास :

समस्त पद – विग्रह

दोपहर – दो पहरों का समाहार
दुअन्नी – दो आनों का समाहार
काल – तीन कालों का समाहार
नित्र – तीन नत्रों का समाहार
कला – तीन फलों का समाहार
लोक – तीन लोकों का समाहार
भुवन – तीन भुवनों का समाहार
गन – तीन गुणों का समाहार
पाद – तीन पादों का समाहार
शूल – तीन शूलों का समाहार
देव – तीन देवों का समाहार
तिकोना – तीन कोनों का समाहा
तिमाही – तीन माहों का समाहा
चवन्नी – चार आनों का समाहार
चौमासा – चार मासों का समाहार
चतुर्वेद – चार वंदों का समाहार
पसेरी – पाँच सेरों का समाहार
पंचवटी – पाँच वटों का समाहार
सप्तशती – सात सौ (श्लोक) का समाहार
पंचपात्र – पाँच पात्रों का समाहार
पंचमुख – पाँच मुखों का समाहार
षड्रस – छ: रसों का समाहार
सतसई – सात सौ (दोहा) का समाहार
अठकोना – आठ कोनों का समाहार
अष्टाध्यायी – आठ अध्यायों का समाहार
चौराहा – चार राहों का समाहार

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

बहुव्रीहि समास :

समस्त पद – विग्रह

चतुरानन – चार हैं आनन जिसके
पंचानन – पाँच हैं आनन जिसके
दशानन – दश हैं आनन जिसके
बडानन – बट् हैं आनन जिसके
सहस्साक्ष – सहस्त हैं अक्ष जिसे
सहस्तानन – सहस्स हैं आनन जिसके
दिगम्बर – दिक् है अम्बर जिसका
दशमुख – दश (दस) हैं मुख जिसे
निर्धन – नहीं है धन जिसको
शांतिप्रिय – शांति है प्रिय जिसे
बोदोर – लम्बा है उदर जिसका
हिरण्यगर्भ – हिरण गर्भ है जिसका
नीलाम्बर – नीला है अम्बर जिसका
पीताम्बर – पीत है अम्बर जिसका
चतुर्भुज – चार हैं भुजाएँ जिसका
जितेन्द्रिय – जीती है इन्द्रियाँ जिसने
नेकनाम – नेक है नाम जिसका
वजदेह – वज है देह जिसकी
वजायुध – वज्ज है आयुध जिसका
मरीचिमाली – मरीचि है माला जिसकी
मिठबोला – मीठी है बोली जिसकी
शूलपाणि – शूल है पाणि में जिसके
वीणापाणि – वीणा है पाणि में जिसके
हभान – चन्द्र है भाल पर जिसके

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

अव्ययीभाव :

समस्त पद – विग्रह

प्रत्यक्ष – अक्षि के प्रति (आगे)
समक्ष – अक्षि के सामने
परोक्ष – अक्षि के परे
बेरहम – बिना रहम के
बेकाम – बिना काम का
बेलाग – बिना लाग के
बेफायदा – बिना फायदे का
बेखटके – बिना खटके का
प्रत्यंग – हर अंग
प्रतिमास – हर मास
प्रत्येक – हर एक
भरसक – सक (शक्ति) भर
यथार्थ – अर्थ के अनुसार
शक्ति – शक्ति के अनुसार
रपेट – पेट भरकर
यथासंभव – जितना संभव हो
यथाशीघ्र – जितना शीघ्र हो
अनजाने – बिना जाने हुए
निर्भय – बिना भय का
निधड़क – बिना धड़क के
निर्विकार – बिना विकार के
निर्विवाद – बिना विवाद के
प्रत्युपकार – उपकार के प्रति
आपादमस्तक – पाद से मस्तक तक
उपकूल – कूल के समीप
बख़बी – खूबी के साथ
अकारण – बिना कारण के
अभूतपूर्व – जो पूर्व (पहले) नही भूत (हुआ) है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

द्वंद्व समास :

समस्त पद – विग्रह

राधाकृष्ण – राधा और कृष्ण
सीताराम – सीता और राम
गौरीशंकर – गौरी और शंकर
शिवपार्वती -शिव और पार्वती
देवासुर – देव और असुर
भाई-बहन – भाई और बहन
माँ-बाप – माँ और बाप
राजा-रानी – राजा और रानी
हरिशंकर – हरि और शंकर
हाथी-घोड़ा – हाथी और घोड़ा
गाय-बैल – गाय और बैल
अन्न-जल – अन्न और जल
लोटा-डोरी – लोटा और डोरी
नाक-कान – नाक और कान
भात-दाल – भात और दाल
एड़ी-चोटी – एडी़ और चोटी
आग-पानी – आग और पानी
आगा-पीछा – आगा और पीछा
फल-फूल – फल और फूल
भला-बुरा – भला और बुरा
शीतोष्ग – शीत और उष्ण
लेन-देन – लेना और देना

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
प्रयोग की दृष्टि से समास के कितने भेद हैं ? प्रत्येक की परिभाषा व उदाहरणालिखें।
उत्तरः
प्रयोग की दृष्टि से समास के तीन भेद किए जा सकते हैं :

  • संयोगमूलक समास
  • आश्रयमूलक समास
  • वर्णनमूलक समास

संयोगमूलक समास :- संयोगमूलक समास को द्वनन्दू समास अथवा संज्ञा-समास कहते हैं। इस प्रकार के समास में दोनों पद संज्ञा होते हैं। दूसरे शब्दों में, इसमें दो संज्ञाओं का संयोग होता है। जैसे -माँ-बाप, भाई-बहन, माँ-बेटी, सास-पतोहू, दिन-रात, बेटा-बेटी, माता-पिता, दही-बड़ा, दूध-दही, थाना-पुलिस, सूर्य-चन्द्र इत्यादि। इसमें सभी पद प्रधान होते है। किन्तु, जहाँ योजक चिह्न (-) नहीं लगता, वहाँ तत्पुरुष समास होता है। तत्पुरुष में भी दो संज्ञाओं का संयोग होता है। जैसे – पाठशाला, गंगाजल, राजपुत, पर्णकुटीर इत्यादि।

आश्रयमूलक समास :- यह विशेषण प्राय: कर्मधारय समास होता है। इस समास में प्रथम पद विशेषण होता है, किन्तु द्वितीय पद का अर्थ बलवान होता है। कर्मधारय का अर्थ है कर्म अथवा वृत्ति धारण करनेवाला। यह विशेषणविशेष्य, विशेष्य-विशेषण, विशेष्य पदों द्वारा सम्पन्न होता है। जैसे –
(क) जहाँ पूर्वपद विशेषण हो; यथा-कच्चाकेला, शीशमहल, महारानी।
(ख) जहाँ उत्तरपद विशेषण हो; यथा-घनश्याम।
(ग) जहाँ दोनों पद विशेषण हो, यथा-लाल-पीला, खट्टा-मीठा।
(घ) जहाँ दोनों पद विशेष्य हों, यथा-मौलवीसाहब, राजबहादुर।
वर्णनमूलक समास :- इसके अन्तर्गत बहुवीहि और अव्ययीभाव समास का निर्माण होता है। इस समास (अव्ययीभाव) में प्रथम पद साधारणत: अव्यय होता है और दूसरा पद संज्ञा। जैसे-यथार्ति, यथासाध्य, प्रतिमास, यथासम्भव, घड़ी-घड़ी, प्रत्येक, भरपेट, यथाशीघ्र इत्यादि।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 2.
दून्द्ध समास के कितने भेद हैं ? परिभाषा व उदाहरण सहित वर्णन करें।
उत्तरः
द्वन्द्व समास के तीन भेद हैं –

  • इतरेतर द्वन्द्ध
  • समाहार द्वन्द्ध और
  • वैकल्पिक द्वृन्द्ध।

इतरेतर द्वन्द्ध :- यह द्वन्द्, जिसमें ‘और से सभी पद जुड़े हुए हों और पृथक अस्तित्व रखते हों, इतरेतर द्वनन्द कहलाता है। इस समास से बने पद हमेशा बहुवचन मे प्रयुक्त होते हैं, क्योंकि ये दो या दो से अधिक पदों के मेल से बने होते हैं।
जैसे – राम और कृष्ण = राम-कृष्ण, भरत और शतुछ्न = भरत-शत्रुछ्न, ॠषि और मुनि = कषि-मुनि, गाय और बैल = गाय-बैल, भाई और बहन = भाई-बहन आदि।

समाहार दून्द् :- ‘समाहार का अर्थ है समष्टि या समूह। जब दृन्द्व समास के दोनों पद ‘और समुच्चयबोधक से जुड़े होने पर भी पृथक्-पृथक् अस्तित्व न रखे, बल्कि समूह का बोध कराये, तब वह समाहार दून्दू कहलाता है। समाहार द्वनन्द्व में दोनों पदों के अतिरिक्त अन्य पद भी छिपे रहते हैं और अपने अर्थ का बोध अप्रत्यक्ष रूप से कराते हैं। जैसे-आहारनिद्रा = आहार और निद्रा (केवल आहार और निद्रा ही नहीं, बल्कि इसी तरह की और बातें भी); दालरोटी = दाल और रोटी (अर्थात्, भोजन के सभी मुख्य पदार्थ); हाथपाँव = हाथ और पाँव (अर्थात्, हाथ और पाँव तथा शरीर के दूसरे अंग भी)।

कभी-कभी विपरीत अर्थवाले या सदा विरोध रखनेवाले पदों का भी योग हो जाता है। जैसे-ऊँच-नीच, लेन-देन, आगा-पीछा, चूहा-बिल्ली, शीतोष्ण इत्यादि।

जब दो विशेषण-पदों का संज्ञा के अर्थ में समास हो, तो समाहार द्वन्द होता है। जैसे-लँगड़ा-लूला, भूखा-प्यासा, अंधा-बहरा इत्यादि। उदाहरण लँगड़े-लूले यह काम नहीं कर सकते ; भूखे-प्यासे को निराश नहीं करना चाहिए, इस गाँव में बहुत से अंधे बहरे हैं।

द्रष्टव्य :- यहाँ यह ध्यान रखना चाहिए कि जब दोनों पद विशेषण हों और विशेषण के ही अर्थ में आये हों तब वहाँ द्वान्द्व समास नहीं होता, वहाँ कर्मधारय समास हो जाता है। जैसे-लँगड़ा-लूला आदमी यह काम नहीं कर सकता; भूखा-प्यासा लड़का सो गया; इस गाँव में बहुत से लोग अंधे-बहरे हैं-इन प्रयोगों में लाँगड़ा-लूला, , भूखा-प्यासा और ‘अंधा-बहरा’ द्वन्द् समास नहीं है।

वैकल्पिक द्वन्न्व :- जिस द्वन्द्ध समास मे दो पदों के बीच ‘या, ‘अथवा’ आदि विकल्पसूचक अव्यय छिपे हों, उसे वैकल्पिक द्वन्द्व कहते हैं। इस समास में बहुधा दो विपरीतार्थक शब्दों का योग रहता है। जैसे-पाप-पुण्य, धर्माधर्म, भला-बुरा, थोड़ा-बहुत इत्यादि। यहाँ पाप-पुण्य’ का अर्थ ‘पाप’ और ‘पुण्य’ भी प्रसंगानुसार हो सकता है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – धूमकेतु

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘धूमकेतु’ का शाब्दिक परिचय दें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘धूमकेतु’ का अर्थ स्पष्ट करें।
अथवा
प्रश्न 3. ‘धूमकेतु’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके अन्य नामों की भी चर्चा करें।
अथवा
प्रश्न 4. ‘घूमकेतु’ शब्द की उत्पत्ति के बारे में लिखें।
अथवा
प्रश्न 5. ‘धूमकेतु’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि इसका उल्लेख कहाँ और किस प्रकार किया गया है?
उत्तर:
धूमकेतु दो शब्दों के मिलने से बना है ‘धूम’ अर्थात् धुंआ तथा ‘केतु’ अर्थात् पताका। पताका (तिकोना) की तरह दिखाई पड़ने के कारण ही इसे धूमकेतु कहा जाता है। धूमकेतु को लोग ‘पुच्छल तारे’ (पूँछवाला तारा) के नाम से भी जानते हैं। पश्चिमी देशों में धूमकेतु को ‘कॉमेट’ के नाम से जाना जाता है। कॉमेट शब्द यूनानी भाषा के ‘कोमते’ शब्द से बना है। ‘कोमते’ का अर्थ होता है – ‘लंबे बालों वाला’। धूमकेतु का यह नामकरण उसके झाडू जैसे आकार के कारण ही पड़ा है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 6. ‘शूमकेतु’ शब्द की ऐतिहासिकता के बारे में लिखें।
अथवा
प्रश्न 7. प्राचीन ग्रंथों में धूमकेतु के बारे में क्या कहा गया है?
अथवा
प्रश्न 8. हमारे प्राचीन साहित्य में धूमकेतु का वर्णन किस रूप में हुआ है?
अथवा
प्रश्न 9. प्राचीन काल में लोगों की धूमकेतु के बारे में क्या धारणा थी?
अथवा
प्रश्न 10. धूमकेतुओं के बारे में प्राचीन काल में कैसी अवधारणा थी?
अथवा
प्रश्न 11. प्राचीन काल में लोग घूमकेतु के बारे में क्या सोचते थे?
अथवा
प्रश्न 12. धूमकेतु के विषय में क्या जानते हो ? पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
हमारे पौराणिक ग्रंथों में धूमकेतु का वर्णन कई स्थानों पर मिलता है। अथर्ववेद, महाभारत तथा ‘वृहत्संहिता’ में धूमकेतु का उल्लेख किया गया है। इसी से धूमकेतु शब्द की प्राचीनता का पता चल जाता है। ‘महाभारत’ में कहा गया है –
“महाभयंकर धूमकेतु जब पुष्य नक्ष्त्र के पार पहुँचेगा तो भयंकर युद्ध होगा।”
छठी शताब्दी के प्रख्यात ज्योतिषी वराह मिहिर ने ‘वृहत्संहिता’ में धूमकेतु के दिखाई पड़ने पर उसके शुभ तथा अशुभ फल के बारे में विस्तार से लिखा है। कुल मिलाकर लोग धूमकेतु को भयंकर खतरे का सूचक मानते थे।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 13. दूसरे देश के लोग धूमकेतु के बारे में क्या सोचते थे?
अथवा
प्रश्न 14. यूरोपीय ग्रंध में सन् 1528 ई० के धूमकेतु के बारे में क्या कहा गया है?
अथवा
प्रश्न 15. सन् 1528 ई० में यूरोप के आकाश में धूमकेतु दिखाई पड़ने पर लोगों पर उसका क्या प्रभाव पड़ा?
अथवा
प्रश्न 16. अब लोगों में धूमकेतु का भय क्यों नहीं रह गया है?
उत्तर :
भारत की तरह दूसरे देशों के लोग भी धूमकेतु का प्रकट होना अशुभ का सूचक समझते थे। जब 1528 ई० में यूरोप में धूमकेतु प्रकट हुआ तो वहाँ के लोगों में भय की लहर दौड़ गई। ‘आकाश के राक्षस’ नामक पुस्तक में उसके लेखक आमोई पेरी ने लिखा है –
“यह धूमकेतु इतना भयंकर था कि डर के मारे कई लोग मर गए और बहुत-से बीमार पड़ गए।”
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। धूमकेतु के बारे में जानकारी प्राप्त होने के कारण लोगों को अब धूमकेतु से भय नहीं लगता है।

प्रश्न 17. धूमकेतुओं के विषय में हेली ने अपने अध्ययन से क्या निष्कर्ष प्रस्तुत किया?
अथवा
प्रश्न 18. एडमंड हेली कौन थे? उन्होने धूमकेतु के बारे में अपने क्या विचार प्रस्तुत किए?
अथवा
प्रश्न 19. एडमंड हेली ने धूमकेतुओं के अध्ययन के बाद क्या भविष्यवाणी की? क्या वह भविष्यवापी सच निकली ?
अथवा
प्रश्न 20. एडमंड हेली ने धूमकेतु के बारे में क्या भविष्यवाणी की थी?
अथवा
प्रश्न 21.
आज धूमकेतु को ‘हेली का धूमकेतु’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
एडमंड हेली प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइजेक न्यूटन के मित्र थे। हेली ने अपने अध्ययन से यह जाना कि 1531 ई० तथा 1607 ई० में धूमकेतु दिखाई पड़े थे। इन दोनों के प्रकट होने में 75-76 वर्ष का अंतर था। उन्हे यह लगा कि धूमकेतु भी अन्य महों की तरह एक निश्चित समय में सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

यदि यह अंदाजा ठीक है तो 1758 ई० में यह धूमकेतु फिर प्रकट होगा। हेली की यह भविष्यवाणी सच निकली लेकिन वे स्वयं इस भविष्यवाणी को सच होते नहीं देख सके क्योंकि 1742 में ही वे इस दुनिया से चल बसे। धूमकेतु के बारे में ऐसी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ही आज धूमकेतु को ‘हेली का धूमकेतु’ कहा जाता है।

प्रश्न 22.
हेली का घूमकेतु 1742 ई० के बाद कब प्रकट हुआ और क्यों?
उत्तर :
हेली का धूमकेतु 1742 ई॰ के बाद 1910 ई० में प्रकट हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 75-76 वर्ष में धूमकेतु एक बार सूर्य की परिक्रमा कर लेता है। यह नेपच्यून की कक्षा से अलग होकर करीब 76 साल के बाद फिर सूर्य के निकट पहुँचता है। इसीलिए 1986 ई० में यह धूमकेतु फिर से प्रकट हुआ।

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प्रश्न 23. खगोलविदों ने अब तक धूमकेतुओं के बारे में क्या-क्या जानकारियाँ प्राप्त की है?
अथवा
प्रश्न 24. धूमकेतुओं के बारे में क्या-क्या नई जानकारियाँ प्राप्त हुई हैं?
अथवा
प्रश्न 25. धूमकेतुओं की बनावट का संक्षिप्त वर्णन करें।
अथवा
प्रश्न 26.
थूमकेतुओं के कितने भाग होते हैं ? प्रत्येक भाग का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
हाल के अनुसंधान के बाद हमारे वैज्ञानिकों तथा खगोलविदों ने धूमकेतुओं के बारे में अनेक नई जानकारी प्राप्त की है। जहाँ तक धूमकेतु के बनावट की बात है, धूमकेतु के तीन प्रमुख भाग होते हैं –

(क) नाभिक : धूमकेतु का अधिकांश द्रव्य इसके नाभिक में होता है। नाभिक का व्यास आधा किलोमीटर से 50 किलोमीटर तक हो सकता है। इसके नाभिक बर्फ से बनी हुई गैसों तथा अन्य पदार्थो के टुकड़ों के मेल से बने होते हैं।

(ख) सिर : धूमकेतु के सूर्य के सामने वाला भाग का गैस ताप से गर्म होकर फैल जाती है तथा चमकने लगती है। इसे ही ‘धूमकेतु का सिर’ कहते हैं। धूमकेतु के सिर का घेरा हजारों-लाखों किलोमीटर हो सकता है। धूमकेतु के सिर का छोटा-बड़ा होना सूर्य से इसकी दूरी पर निर्भर करता है। यह सूर्य से जितना दूर होगा-सिर छोटा होगा तथा सूर्य के जितना निकट होगा, सिर उतना ही बड़ा होगा।

(ग) पूँछ : धूमकेतु के नाभिक से प्रति सेकेंड 10 टन धूल और 30 टन गैसें निकलती रहती है और यही इसकी पूँछ का निर्माण करता है। कुछ धूमकेतुओं की पूँछ 20 करोड़ किलोमीटर तक की होती है।

प्रश्न 27.
थूमकेतु सूर्य की परिक्रमा किस प्रकार करते हैं?
अथवा
प्रयन 28.
धूमकेतुओं के परिक्रमा-पथ का वर्णन करें। क्या कोई धूमकेतु इस नियम का अपवाद भी है?
उत्तर :
धूमकेतु भी अन्य ग्रहों की तरह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उसकी परिक्रमा की कक्षा अन्य गहों की अपेक्षा काफी बड़ी होती है। उसे एक बार सूर्य की परिक्रमा करने में लगभग 75-76 वर्ष लगते हैं। ग्रहों की अपेक्षा धूमकेतु समतल के साथ-साथ कई अंशों का कोण बनाते हुए परिक्रमा करते हैं। सभी धूमकेतु नजदीक से सूर्य की परिक्रमा नहीं करते।

बहुत सारे धूमकेतु वृहसति, शानि, यूरेनस, नेपच्यून तथा प्लूटो ग्रहों के काफी दूर से चक्कर लगाकर लौटते हैं। कुछ धूमकेतु का यह परिक्रमा-पथ इतना बड़ा होता है कि इनको एक बार सूर्य की परिक्रमा करने में हजारों साल लग जाते हैं। हाँ परिक्रमा-पथ के बारे में एक बात सामान्य है कि सारे धूमकेतु अण्डाकार कक्ष में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। कुछ धूमकेतुओं का परिक्रमा-पथ छोटा होता है तथा ये लगभग 3 से 10 साल में अपनी परिक्रमा पूरी कर लेते हैं।

प्रश्न 29. वायुमंडल में उल्काओं की वर्षा क्यों होती है?
अथवा
प्रश्न 30. उल्का क्या होती है? वायुमंडल में उल्काओं की वर्षा का क्या कारण है?
अथवा
प्रश्न 31. कुछ धूमकेतुओं के नष्ट होने के पीछे क्या कारण होता है? ऐसी स्थिति में क्या होता है?
अथवा
प्रश्न 32.
1872 ई० में खगोलविदों को घूमकेतुओं के बारे में कौन-सी नई जानकारी मिली?
उत्तर :
1872 ई० में खगोलविदों को एक नई बात का पता चला कि वायुमंडल में उल्काओं की वर्षा होने के पीछे क्या कारण है । दरअसल जो धूमकेतु निकट से सूर्य की परिक्रमा करते हैं, वे जल्द ही नष्ट हो जाते हैं। पृथ्वी जब उनके पास से गुजरती है तो धूमकेतु के अवशेष उल्का के रूप में बरसते हैं। वायुमंडल में उल्का की वर्षा का यही कारण है।

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प्रश्न 33.
धूमकेतु की पूँछ हमेशा सूर्य की उल्टी दिशा में क्यों रहती है?
उत्तर :
धूमकेतु के नाभिक वाले भाग का गैस सूर्य के ताप में फैल जाता है तथा इसके नाभिक से धूली तथा गैस पीछे की और निकलती है जिससे पूँछ का निर्माण होता है। यही कारण है कि धूमकेतु की पूँछ हमेशा सूर्य की उल्टी दिशा में ही रहती है।

प्रश्न 34.
धूमकेतुओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है, यह कैसे सिद्ध हुआ ?
उत्तर :
अधिकांश धूमकेतु बहुत दूर से ही सूर्य की परिक्रमा करते हैं इसलिए उनकी परिक्रमा में 75-76 वर्ष का समय लगता है। लेकिन कुछ धूमकेतु बहुत छोटी अंडाकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इसमें उन्हें 3 से 10 साल लगते हैं। सूर्य के अधिक निकट होने के कारण ऐसे धूमकेतु सूर्य के ताप से जल्दी ही नष्ट हो जाते हैं। उदाहरण के लिए बिएला के धूमकेतु का नाम लिया जा सकता है।

प्रश्न 35.
धूमकेतुओं से डरने की कोई बात क्यों नहीं है ?
उत्तर :
धूमकेतु केवल पृथ्वी से ही नहीं, चन्द्रमा से भी काफी दूर होते हैं। दूसरी बात यह है कि धूमकेतु की पूँछ ठोस नहीं गैसीय अवस्था में होती है। इसके अतिरिक्त धूमकेतु की पूँ्छ में कोई गुरूत्वाकर्षण शक्ति नहीं होती इसिलए इसके पृथ्वी से टकराने की संभावना नहीं के बराबर है। इन कारणों से धूमकेतुओं से डरने की कोई बात नहीं है।

प्रश्न 36.
1985-86 ई० में हेली के घूमकेतु के अध्ययन के लिए विभिन्न देशों के द्वारा कौन-सी योजनाएँ बनाई गई थीं?
अथवा
प्रश्न 37. धूमकेतु के अध्ययन के लिए विभिन्न देशों द्वारा भेजे गए यानों का संक्षिप्त परिचय दें।
उत्तर :
1985-86 में हेली के धूमकेतु के अध्ययन के लिए सोवियत संघ ने ‘वीहे’ (वीनस-हेली) नामक दो यान, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘जोतो’ यान तथा जापान ने भी अपने दो यान धूमकेतु के पास भेजे। ये यान स्वचालित तथा कैमरे से युक्त थे। इन यानों ने धुमकेतु का नजदीक से अध्ययन किया तथा इससे संबंधित जानकारी व चित्र पृथ्वी पर भेजे।

प्रश्न 38.
वैज्ञानिक के रूप में गुणाकर मुले का संक्षिप्त परिचय दें।
उत्तर :
हिन्दी साहित्य में गुणाकर मुले अपने शोधपरक निबंधों के लिए जाने जाते हैं। ये राहुल सांकृत्यायन के शिष्य थे। हिन्दी में शोधपरक वैज्ञानिक लेखन की परंपरा की शुरूआत इन्होंने ही की। इन्होंने हिन्दी में करीब 3000 तथा अंग्रेजी में 250 से भी अधिक लेख लिखे हैं। इसके अलावे ये लिपिविज्ञान के भी बहुत बड़े विद्वान थे। ये NCERT के पाठ्य पुस्तक के सपादक मंडल तथा नेशनल बुक ट्रस्ट की हिन्दी प्रकाशन सलाहकार समिति के भी सदस्य थे।

इनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘भारतीय अंक-पद्धति की कहानी, ‘भारतीय सिक्कों की कहानी’, ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ आदि प्रमुख हैं, जो हिन्दी जगत की अनुपम निधि हैं। इनके अविस्मरणीय शोधपूर्ण लेखन-कार्य के लिए हिन्दी अकाद्मी का साहित्यकार सम्मान, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के आत्माराम पुरस्कार, बिहार के कर्पूरी ठाकुर स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।

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प्रश्न 39.
हेली इस निष्कर्ष पर कैसे पहुँचे कि धूमकेतु सौरमण्डल के सदस्य हैं?
उत्तर :
हेली ने शोध से यह जाना कि धूमकेतु भी 75 या 76 साल में सौरमंडल की दूर की सीमाओं का चक्कर लगाकर वापस लौटते हैं । उन्होंने 1531,1607 और 1682 ई० में दिखाई दिए धूमकेतु के बारे में यह भविष्यवाणी की कि 1758 ई० में यह फिर से दिखाई देगा । हेली की भविष्यवाणी सच निकली क्योंकि 1758 में वह धूमकेतु दिखाई दिया। इस प्रकार हेली का निष्कर्ष सही निकला कि धूमकेतु सौरमण्डल के सदस्य हैं।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ब्राहे ने 1577 ई० में क्या सिद्ध किया?
उत्तर :
बाहे ने 1577 ई० में यह सिद्ध किया कि धूमकेतु पृथ्वी से बहुत दूर होते हैं, चंद्रमा से भी अधिक दूर।

प्रश्न 2.
न्यूटन का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर :
न्यूटन का पूरा नाम आइज़क न्यूटन है ।

प्रश्न 3.
‘कोमिट’ का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
‘कोमिट’ का दूसरा नाम – कोमेत, पुच्छल तारा, धूमकेतु है ।

प्रश्न 4.
धूमकेतु की पूंछ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
धूमकेतु की पूँछ से तात्पर्य धूमकेतु के नाभिक से निकलने वाली धूल एवं गैसों से है ।

प्रश्न 5.
‘कॉमेट’ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पाश्चात्य ज्योतिष में धूमकेतु को कॉमेट कहा जाता है ।

प्रश्न 6.
वाराहमिहिर कौन थे ?
उत्तर :
वृहत्संहिता ग्रंथ के लेखक।

प्रश्न 7.
धूमकेतु पृथ्वी के लिए भयकारी क्यों है?
उत्तर :
धूमकेतु के बारे में लोगों की यह धारणा है कि यह अशुभ का सूचक है इसलिए यह पृथ्वी के लिए भयकारी है।

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प्रश्न 8.
धूमकेतु सभी ग्रहों में अपवाद क्यों है ?
उत्चर :
धूमकेतु सभी ग्रहों में इसलिए अपवाद हैं क्योंकि हमारे सौर-मंडल के म्रह तथा उपग्रह एक ही मार्ग में सूर्य की परिक्रमा करते हैं लेकिन धूमकेतु ग्रहों के समतल के साथ कई अंशों का कोण बनाते हुए परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 9.
प्राचीन काल में धूमकेतु को किसका सूचक समझा जाता था?
उत्तर :
प्राचीन काल में धूमकेतु को भयंकर खतरे का सूचक समझा जाता था।

प्रश्न 10.
वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ का नाम लिखें।
उत्तर :
‘वृहत्संहिता’।

प्रश्न 11.
वराहमिहिर के किस ग्रंथ में धूमकेतु के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है?
उत्तर :
वराहमिहिर के ‘वृहत्संहिता’ प्रंथ के ‘केतुचार’ नामक अध्याय में धूमकेतुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।

प्रश्न 12.
वराहमिहिर ने धूमकेतुओं के दर्शन के बारे में क्या कहा है?
उत्तर :
किसी भी धूमकेतु के दर्शन होने या अस्त होने का काल गणित की किसी विधि से नहीं जाना जा सकता।

प्रश्न 13.
यूरोप में धूमकेतु कब प्रकट हुआ था?
उत्तर :
सन् 1528 ई० में।

प्रश्न 14.
‘आकाश के राक्षस’ के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
आभोई पेरी।

प्रश्न 15.
आम्रोई पेरी ने 1528 ई० में दिखे धूमकेतु के बारे में क्या लिखा है?
उत्तर :
“यह धूमकेतु इतना भयंकर था कि डर के मारे कई लोग मर गए और बहुत से बीमार पड़ गए।

प्रश्न 16.
तीखे ब्राहे कौन थे?
उत्तर :
तीखे ब्राहे यूरोप के एक महान ज्योतिषी थे।

प्रश्न 17.
एडमंड हेली कौन थे?
उत्तर :
एडमंड हेली प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइजेक न्यूटन के मित्र थे।

प्रश्न 18.
न्यूटन के गुरूत्वाकर्षण सिद्धान्त के प्रकाशन में किसका बहुत बड़ा सहयोग था?
उत्तर :
एडमंड हेली का।

प्रश्न 19.
एडमंड हेली ने धूमकेतुओं के विषय में अपने अध्ययन से क्या निष्कर्ष प्रस्तुत किया?
उत्तर :
अन्य ग्रहों की तरह धूमकेतु भी हमारे सौर मंडल के सदस्य हैं और ये सूर्य की परिकमा करते हैं तथा यह7576 साल में सूर्य की परिक्रमा कर लेते हैं।

प्रश्न 20.
हेली के अनुसार धूमकेतु कब-कब दिखाई दिए?
उत्तर :
1531 ई०, 1607 ई० तथा 1682 ई० में।

प्रश्न 21.
धूमकेतु के दिखाई देने के बारे में हेली ने क्या भविष्यवाणी की?
उत्तर :
यदि मेरी बात ठीक है तो 76 साल बाद 1758 ई० में यह धूमकेतु पुन: प्रकट होगा।

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प्रश्न 22.
धूमकेतु के बारे में हेली के द्वारा की गई भविष्यवाणी क्या सच निकली?
उत्तर :
धूमकेतु के बारे में हेली ने यह भविष्यवाणी की थी कि 1758 में यह धूमकेतु पुनः प्रकट होगा और यह भविष्यवाणी सच निकली।

प्रश्न 23.
धूमकेतु को ‘हेली का धूमकेतु’ क्यों कहते हैं?
उत्तर :
हेली ने ही सर्वप्रथम धूमकेतु के बारे में सटीक भविष्यवाणी की थी इसलिए इसे ‘हेली का धूमकेतु’ भी कहते हैं।

प्रश्न 24.
धूमकेतु पिछली बार कब प्रकट हुआ था?
उत्तर :
1910 ई० तथा 1986 ई० में।

प्रश्न 25.
खगोलविदों ने अब तक धूमकेतुओं की कितनी कक्षाएँ निर्धारित की हैं?
उत्तर :
करीब डेढ़ हजार।

प्रश्न 26.
धूमकेतु के कितने भाग होते हैं?
उत्तर :
तीन – नाभिक, सिर और पूँछ।

प्रश्न 27.
धूमकेतु का अधिकांश द्रव्य कहाँ होता है?
उत्तर :
धूमकेतु के नाभिक में धूमकेतु का अधिकांश द्रव्य होता है।

प्रश्न 28.
धूमकेतु के नाभिक का व्यास कितना हो सकता है?
उत्तर :
आधे से लेकर पचास किलोमीटर तक।

प्रश्न 29.
घूमकेतु का नाभिक किससे बना होता है?
उत्तर :
धूमकेतु का नाभिक बर्फ से बनी हुई गैसों तथा अन्य पदार्थों के टुकड़ों के मेल से बने होते हैं।

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प्रश्न 30.
धूमकेतु का सिर किस प्रकार बनता है?
उत्तर :
सूर्य के निकट पहुँचकर धूमकेतु गर्म हो जाता है और इसकी बर्फीली गैसें, धूलि-कण तथा नाभिक की गैसें फैलकर चमकने लगती है – इस प्रकार धूमकेतु का सिर बनता है।

प्रश्न 31.
धूमकेतु के सिर का घेरा कितना हो सकता है?
उत्तर :
हजारों-लाखों किलोमीटर।

प्रश्न 32.
थूमकेतु की पूँछ सूर्य की विपरीत दिशा में क्यों रहती है?
उत्तर :
सौर-वायु अथवा विकिरण के प्रभाव से धूमकेतु की पूँछ फैलती और चमकती है, इसीलिए यह सूर्य की विपरीत दिशा में रहती है।

प्रश्न 33.
धूमकेतु किस प्रकार की कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं?
उत्तर :
धूमकेतु अत्यंत चपटी अण्डाकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 34.
किन धूमकेतुओं को अक्सर अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है?
उत्तर :
जो धूमकेतु तीन से दस साल के भीतर ही सूर्य की एक परिक्रमा कर लेते हैं उन्हें सूर्य के ताप के प्रभाव से अक्सर अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

प्रश्न 35.
कौन-सा धूमकेतु सूर्य के प्रभाव से अपनी जान से हाथ धो बैठा?
उत्तर :
बिएला का धूमकेतु।

प्रश्न 36.
बिएला का धूमकेतु कितने वर्ष में सूर्य का एक चक्कर लगाता था?
उत्तर :
करीब सात साल में।

प्रश्न 37.
बिएला का धूमकेतु अपने पूरे आकार में अंतिम बार कब देखा गया था?
उत्तर :
1939 ई० में।

प्रश्न 38.
आकाश में किसी एक स्थान से होनेवाली उल्काओं की वर्षा वास्तव में क्या होती है?
उत्तर :
विखंडित धूमकेतु के कण।

प्रश्न 39.
कब कोई घूमकेतु सौर मंडल को छोड़कर बाहरी अंतरिक्ष में निकल जाता है?
उत्तर :
जब कोई धूमकेतु किसी बाहरी पिंड के प्रभाव से अपनी कक्षा बदल लेता है तब वह सौर मंडल को छोड़कर बाहरी अंतरिक्ष में निकल जाता है।

प्रश्न 40.
धूमकेतुओं से पृथ्वी को डरने की बात क्यों नहीं है ?
उत्तर :
किसी धूमकेतु के पृथ्वी से टकराने की संभावना नहीं के बराबर होती है। साथ ही यह उसकी पूँछों के बीच से भी आराम से गुजर जा सकता है इसलिए पृथ्वी को इससे डरने की कोई बात नहीं है।

प्रश्न 41.
घूमकेतु के पास किस देश ने अपना कौन-सा यान भेजा?
उत्तर :
धूमकेतु के पास सोवियत संघ ने ‘वीहे’ नामक दो यान भेजे।

प्रश्न 42.
‘वीहे’ यान का नामकरण किस आधार पर किया गया है?
उत्तर :
वीनस तथा हेली के नाम के आधार पर।

प्रश्न 43.
‘वीहे’ का नामकरण वीहे क्यों किया गया ?
उत्तर :
सोवियत संघ द्वारा भेजे गए यान पहले वीनस (शुक्र ग्रह) तथा फिर हेली के धूमकेतु केपास गए, इसलिए वीनस तथा हेली के नाम के पहले अक्षर के आधार पर इसका नामकरण किया गया।

प्रश्न 44.
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा धूमकेतु के पास भेजे गए यान का नाम क्या था?
उत्तर :
जोतो।

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प्रश्न 45.
सोवियत संघ तथा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अतिरिक्त किसने अपना यान थूमकेतु के पास भेजा?
उत्तर :
जापान ने।

प्रश्न 46.
नई जानकारी के अनुसार हेली के धूमकेतु का नाभिक कितना है?
उत्तर :
16×9 किलोमीटर।

प्रश्न 47.
हेली के धूमकेतु का चक्रण-काल कितने घंटे है?
उत्तर :
करीब 54 घंटे।

प्रश्न 48.
हेली का धूमकेतु पुनः कब दिखाई देगा?
उत्तर :
सन् 2062 ई० में।

प्रश्न 49.
धूमकेतु के पास मानव को भेजना कब संभव होगा?
उत्तर :
जब धूमकेतु 2062 ई० में पुन: सूर्य और पृथ्वी के निकट आएगा तब उसके पास मानव को भेजना संभव होगा।

प्रश्न 50.
‘धूमकेतु’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर :
गुणाकर मुले।

प्रश्न 51.
घूमकेतु किसे कहते हैं?
उत्तर :
लगभग प्रत्येक 75 या 76 वर्ष के बाद अंतरिक्ष में जो पुच्छल तारा अर्थांत् झाडूनुमा तारा दिखता है उसे ही ‘धूमकेतु’ कहते हैं।

प्रश्न 52.
दूसरे देशों के लोगों की धूमकेतु के बारे में क्या धारणा थी?
उत्तर :
दूसरे देशों के लोगों की धूमकेतु के बारे में यह धारणा थी कि धूमकेतु का दिखाई देना भयंकर युद्ध तथा खतरे का सूचक है।

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प्रश्न 53.
जब 1528 ई० में यूरोप के आकाश में धूमकेतु दिखाई पड़ा तो से लोगों पर उसका क्या असर हुआ?
उत्तर :
जब 1528 ई० में यूरोपीय आकाश में धूमकेतु दिखाई पड़ा तो उसका विशाल आकार देखकर बहुत से लोग बीमार पड़ गए तथा कई तो डर के कारण मर गए।

प्रश्न 54.
पाश्चात्य ज्योतिष में धूमकेतु को क्या कहते हैं?
उत्तर :
पाश्चात्य ज्योतिष में धूमकेतु को ‘कॉमेट’ कहते हैं।

प्रश्न 55.
प्राचीन काल में धूमकेतु को क्या समझा गया ?
उत्तर :
प्राचीन काल में धूमकेतु को विनाशक, युद्ध तथा खतरे का सूचक माना गया।

प्रश्न 56.
हेली ने धूमकेतु के बारे में क्या सोचा?
उत्तर :
हेली ने धूमकेतु के बारे में यह सोचा कि जिस प्रकार आकाश के अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा एक निश्चित समय में करते हैं, ठीक उसी प्रकार धूमकेतुओं को भी एक निश्चित समय में सूर्य का एक चक्कर लगा लेना चाहिए।

प्रश्न 57.
हेली धूमकेतु के बारे में किस निष्कर्ष पर पहुँचे?
उत्तर :
हेली धूमकेतु के बारे में इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि वास्तव में एक ही धूमकेतु है और वहसौर-मंडल की दूर की सीमाओं का चक्कर लगाकर 75 या 76 साल में फिर सूर्य के पास पहुँचता है।

प्रश्न 58.
हेली की भविष्यवाणी से धूमकेतु के बारे में क्या सिद्ध हुआ?
उत्तर :
हेली की भविष्यवाणी से धूमकेतु के बारे में यह सिद्ध हुआ कि धूमकेतु भी सौर-मंडल के अन्य ग्महों की तरह सौर-मंडल के सदस्य हैं तथा सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 59.
धूमकेतु की बनावट का वर्णन करें।
उत्तर :
धूमकेतु अंतरिक्ष में एक झाडू की तरह दिखाई देता है। इसके तीन भाग होते हैं- नाभिक (केन्द्र), सिर और पूँछ। नाभिक 50 किलोमीटर तक के व्यास का हो सकता है तथा इसका सिर का व्यास (घेरा) हजारों लाखों किलोमीटर हो सकता है। कुछ धूमकेतु की पूँछ तो 20 करोड़ किलोमीटर तक फैल जाती है।

प्रश्न 60.
धूमकेतु कहाँ तक जाते हैं?
उत्तर :
धूमकेतु वहाँ तक जाते हैं जहाँ तक सौर-मंडल का विस्तार है।

प्रश्न 61.
धूमकेतु के निकट जाने वाले यानों की क्या विशेषताएँ थी?
उत्तर :
धूमकेतु के निकट जाने वाले यान स्वचालित तथा कैमरे से युक्त थे तथा पृथ्वी पर धूमकेतु से जुड़ी जानकारी तथा वित्र भेजने में सक्षम थे।

प्रश्न 62.
हेली के धूमकेतु के बारे में क्या नई जानकारी प्राप्त हुई है?
उत्तर :
प्राप्त नई जानकारी के अनुसार हेली के धूमकेतु का नाभिक 16×9 किलोमीटर है। इससे प्रति सेकेंड 10 टन घूल और 30 टन गैसे निकलती रहती हैं। जिससे इसकी लंबी पूँछ का निर्माण होता है। इसका चक्रण-काल करीब 54 घंटे है। यह पुनः 2062 में पृथ्वी और सूर्य के करीब आएगा।

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प्रश्न 63.
धूमकेतु के निकट मानव को भेजना कब संभव होगा?
उत्तर :
जब सन् 2062 में धूमकेतु पुथ्वी और सूर्य के निकट आएगा तब इसके निकट मानव को भेजना संभव होगा।

प्रश्न 64.
‘धूमकेतु’ का क्या अर्थ है?
उत्तर :
घूमकेतु दो शब्दों के मिलने से बना है – धूम तथा केतु। । घू का अर्थ ‘धुंआ’ तथा केतु का अर्थ ‘पताका’ होता है।

प्रश्न 65.
धूमकेतु के पूँछ से यदि पृथ्वी गुजरे तो क्या होगा ?
उत्तर :
धूमकेतु के पूँछ से पृथ्वी गुजरे तो कुछ नहीं होगा क्योंकि इसकी पूँछ गैस से बनी होती है।

प्रश्न 66.
धूमकेतुओं से पृथ्वी को डरने की बात क्यों नहीं है ?
उत्तर :
धूमकेतु पृथ्वी से बहुत दूर होते हैं इसलिए इससे पृथ्वी को डरने की बात नहीं है।

प्रश्न 67.
हेली की भविष्यवाणी से धूमकेतु के बारे में क्या सिद्ध हुआ ?
उत्तर :
हेली की भविष्यवाणी से धूमकेतु के बारे में यह सिद्ध हुआ कि सौरमंडल की सीमाओं का चक्कर लगाकर 75 या 76 साल में फिर सूर्य के पास लौटता है।

प्रश्न 68.
एडमंड हेली ने घूमकेतु के बारे में क्या निर्णय दिया ?
उत्तर :
एडमंड हेली ने धूमकेतु के बारे में निर्णयय लिया कि धूमकेतु भी हमारे सौरमंडल के सदस्य हैं और ये भी पृथ्वो की तरह सूर्य की परिकमा करते हैं।

प्रश्न 69.
कौन-सा घूमकेतु सूर्य के प्रभाव से अपनी जान से हाथ थो बैठा ?
उत्तर :
बिएला का धूमकेतु।

प्रश्न 70.
बिएला का धूमकेतु अपने पूरे आकार में अंतिम बार कब देखा गया ?
उत्तर :
1939 ई० में अंतिम बार देखा गया।

प्रश्न 71.
धूमकेतु किसकी परिक्रमा करते हैं ?
उत्तर :
धूरमकेतु सूर्य की परिक्कमा करते हैं।

प्रश्न 72.
पाश्चात्य ज्योतिष में ‘घूमकेतु’ को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
कॉमेट।

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प्रश्न 73.
यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेन्सी ने हेली के घूमकेतु के पास किस यान को भेजा ?
उत्तर :
जोतो।

प्रश्न 74.
धूमकेतु का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
पुच्छल तारा।

प्रश्न 75.
कुछ छोटे धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा कैसे करते हैं ?
उत्तर :
छोटे अंडाकार कक्ष में सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 76.
प्राचीनकाल में घूमकेतु को किसका सूचक माना जाता था ?
उत्तर :
भयंकर खतरे का सूचक माना जाता था।

प्रश्न 77.
धूमकेतु सभी ग्रहों में अपवाद क्यों है ?
उत्तर :
धूम।

प्रश्न 78.
आप्रोई पेरी ने धूमकेतु के बारे में क्या लिखा था ?
उत्तर :
आमोई पेरी ने धूमकेतु के बारे में लिखा धा कि धूमकेतु के भय से कई लोग मर गए और बहुत से बीमार पड़ गए।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 79.
यूरोप के महान ज्योतिषी तीखे ब्राहे ने क्या सिद्ध किया है ?
उत्तर :
तीखे ब्राहे ने यह सिद्ध किया कि धूमकेतु पृथ्वी से बहुत दूर होते हैं, चंद्रमा से भी दूर।

प्रश्न 80.
‘ब्राहे यान’ द्वारा क्या नई जानकारी प्राप्त हुई ?
उत्तर :
बाहे यान द्वारा यह नई जानकारी प्राप्त हुई कि धूमकेतु का नाभिक 16×9 किलोमौटर है। इससे 10 टन धूलि और 30 टन गैसें उत्सर्जित होती है जिससे इसकी पूँछ बनती है।

प्रश्न 81.
धूमकेतु को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर :
धूमकेतु को अन्य ‘पुच्छल तारे’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 82.
आइजेक न्यूटन के मित्र का नाम क्या था ?
उत्तर :
आइजेक न्यूटन के मित्र का नाम एडमंड हेली था।

प्रश्न 83.
‘कॉमेट’ का क्या अर्थ होता है?
उत्तर :
कॉमेट शब्द यूनानी भाषा के ‘कोमते’ शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है – ‘लंबे बालोंवाला।’

प्रश्न 84.
‘धूमकेतु’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर :
धुएँ से बना पताका।

प्रश्न 85.
‘धूम’ का क्या अर्थ होता है ?
उत्तर :
धुआँ।

प्रश्न 86.
घूमकेतु के तीन भाग कौन-कौन होते हैं ?
उत्तर :
नाभिक, सिर और पूँछ।

प्रश्न 87.
सभी धूमकेतु किस तरह सूर्य की परिक्रमा करते हैं ?
उत्तर :
सभी धूमकेतु बहुत छोटी अंडाकार कक्ष मे सूर्य की परिक्रमा करते है।

प्रश्न 88.
धूमकेतु की पूँछ कहाँ रहती है ?
उत्तर :
पिछले हिस्से में।

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प्रश्न 89.
किसने अपने यान घूमकेतु के पास भेजे हैं ?
उत्तर :
सोवियत संघ, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी तथा जापान ने।

प्रश्न 90.
किस महाकाव्य में धूमकेतु का उल्लेख मिलता है ?
उत्तर :
‘वृहत्संहिता’ में।

प्रश्न 91.
किस वेद में धूमकेतु का उल्लेख हुआ है ?
उत्तर :
‘अथर्ववेद’ में धूमकेतु का उल्लेख हुआ है।

प्रश्न 92.
भारत के किस पौराणिक ग्रंथ में धूमकेतु का उल्लेख है?
उत्तर :
‘महाभारत’ में।

प्रश्न 93.
‘महाभारत’ में घूमकेतु के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर :
“महाभयंकर धूमकेतु जब पुष्य नक्षत्र के पार पहुँचेगा तो भयंकर युद्ध होगा।”

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रोजनामचे में बालाजी का मंदिर सबसे ऊपर आता है।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

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(ख) कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के दोनों मामू भी शहनाईवादक थे। वे विभिन्न रियासतों के दरबार में शहनाई बजाने जाया करते थे। लेकिन काशी में रहने पर उनके दिन की शुरूआत बालाजी के मंदिर में शइनाई बजाने से होती थी।

प्रश्न 2.
ये खानदानी पेशा है अलीबखश के घर का।

(क) अलीबख़ा कौन हैं ?
उत्तर :
अलीबख़ बिस्मिल्ला खाँ के मामा हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ के ननिहाल में शहनाई बजाना खानदानी पेशा है। उनके नाना तथा दोनों मामा भी अच्छे शहनाईवादक थे।

प्रश्न 3.
शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

(क) रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार यतौंद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
शहनाई में जो रीड लगती है वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है। रीड के बिना शहनाई नहीं बज सकती। इसीलिए शहनाई और हुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

प्रश्न 4.
उनका जन्म-स्थान भी डुमराँव ही है।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतीद्र मिश्र हैं।

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(ख) किसका जन्म-स्थान डुमराँव है ? उस व्यक्ति की विशेषता लिखें।
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ का जन्म-स्थान हुमराँव है। वे विश्व-प्रसिद्ध शहनाईवादक थे। संगीतमेमी होने के साथ-साथ वे मानवताप्रेमी भी थे। जितनी आस्था उन्हें अपने धर्म में थी उतनी ही आस्था बालाजी के मंदिर पर भी। अपने संगती के माध्यम से बिस्मिल्ला खाँ ने भाईचारे का संदेश दिया। विश्वपसिद्ध होने के बावजूद उनका व्यक्तित्व सादगी भरा था।

प्रश्न 5.
मगर एक रास्ता है बालाजी मंदिर तक जाने का।

(क) पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम है – ‘नौबतखाने में इबादत’।

(ख) पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
बालाजी के मंदिर तक जाने का एक दूसरा रास्ता भी था जो रसूलनबाई और बतूलनबाई के यहाँ से होकर जाता था। जब बिस्मिल्ला खाँ रियाज के लिए बालाजी मंदिर जाते थे तो इस रास्ते से जाना इन्हें अच्छा लगता था क्योंकि न जाने कितने ही तरह के बोल-बनाव, ठुमरी-ठपे तो कभी दादरा उनकी कानों तक पहुँचते रहते थे।

प्रश्न 6.
इसे संगीत शास्त्रांतर्गत ‘सुषिर-वाद्यों’ में गिना जाता है।

(क) ‘इसे’ से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
‘इसे’ से शहनाई संकेतित है।

(ख) पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
फूंक कर बजाए जाने वाले वाद्य को सुषिर वाद्य कहते हैं। शहनाई को भी फूंक कर बजाया जाता है इसलिए इसकी गिनती संगीत शास्त्रों में सुषिर वाद्य में की जाती है।

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प्रश्न 7.
दक्षिण भारत के मंगलवाद्य ‘नागस्वरम्’ की तरह शहनाई, प्रभाती की मंगलध्वनि का सूचक है।

(क) पाठ के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ के रचनाकार यतीद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
दक्षिण भारत में मांगलिक अवसरों पर नागस्वरम् बजाया जाता है। यह शुभ का सूयक है। इसी तरह उत्तरी भारत में शहनाई का स्थान है। यह मंगल ध्वनि का सूचक है तथा इसे शुभ अवसरों पर बजाया जाता है।

प्रश्न 8.
वे नमाज के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते हैं।

(क) ‘वे’ से कौन संकेतित हैं ?
उत्तर :
‘वे’ से बिस्मिल्ला खाँ संकेतित हैं।

(ख) वे नमाज के बाद सजदे में क्या गिड़गिड़ाते हैं ?
उत्तर :
बिस्मिल्ला खाँ नमाज के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते हैं कि ” मेरे मालिक एक सुर बख्रा दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।”

प्रश्न 9. आठवीं तारीख इनके लिए खास महत्व की है।
अथवा
प्रश्न 10. इस दिन खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते हैं।
अथवा
प्रश्न 11. इस दिन कोई राग नहीं बजता।
अथवा

प्रश्न 12.
राग-रागनियों की अदायगी का निषेध है इस दिन।
(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यत्तीद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
मुहर्रम के दिनों का बिस्मिल्ला खाँ के लिए विशेष महत्व था। इसके आठवें दिन ये खड़े होकर शहनाई बजाते थे तथा दालमंडी में फातमान के करीब आठ किलोमीटर की दूरी तक पैदल ही रोते हुए नौहा बजाते हुए जाते थे। इस दिन कोई राग नहीं बजाया जाता था क्योंकि इस दिन राग-रागनियों का पूर्ण निषेध है। इतना ही नहीं, मुहर्रम के दिनों इनके खानदान का कोई व्यक्ति किसी कार्यक्रम में भी शिरकत नहीं करता था।

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प्रश्न 13.
हजार बरस की परंपरा पुनर्जीवित।

(क) पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम है – ‘नौबतखाने में इबादत’।

(ख) पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
मुहर्रम में हजार वर्ष की परंपरा फिर से जीवित हो उठती है। लोगों की आँखें इमाम हुसैन तथा इसके परिवार के लोगों की शहादत की याद में नम हो उठती है। हजारों नम आँखों से अजादारी की जाती है। बिस्मिल्ला खाँ जैसे महान कलाकार का भी सहज मानवीय रूप ऐसे अवसर पर आसानी से देखा जा सकता है।

प्रश्न 14. अमीरूद्दीन तब सिर्फ चार साल का रहा होगा।
अथवा
प्रश्न 15. वह छिपकर नाना को शहनाई बजाते हुए देखते थे।
अथवा

प्रश्न 16.
लगता है मीठीवाली शहनाई नाना कहीं और रखते हैं।

(क) रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

(ख) इस कथन का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जब बिस्मिल्ला खाँ केवल चार वर्ष के थे तब से शहनाई उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी। वे छुपकर अपने नाना को शहनाई बजाते हुए देखते थे। जब नाना उठकर चले जाते तो वह उनकी शहनाइयों में से एक-एक शहनाई को उठाकर बजाते और वैसे मीठी धुन न निकलने पर उसे यह कह कर खारिज कर देते कि लगता है कि मीठी वाली शहनाई नाना कहीं और छिपाकर रखते हैं।

प्रश्न 17.
यह आयोजन पिछले कई वर्षों से संकटमोचन मंदिर में होता आया है ।
अथवा
प्रश्न 18.
काशी में संगीत-आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।
(क) रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार यर्तीद्र मिश्र हैं।

(ख) इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
काशी में हुनमान जंयती बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है । हनुमान जयंती का मुख्य आयोजन संकटमोचन मंदिर से होता है। यह मंदिर काशी शहर के दक्षिण लंका में स्थित है। जयंती के अवसर पर पाँच दिनों तक शास्वीय तथा उपशास्वीय गायन-वादन का आयोजन होता है। इस आयोजन में काशी के उत्कृष्ट कलाकार भाग लेते हैं।

प्रश्न 19.
काशी संस्कृति की पाठशाला है।
अथवा
प्रश्न 20.
शास्त्रों में आनंदकानन के नाम से प्रतिष्ठित।
अथवा

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प्रश्न 21.
यह एक अलग काशी है।

(क) रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौबतखाने में इबादत’ है तथा इसके रचनाकार यतींद्र मिश्र हैं।

(ख) पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
काशी को भारतीय संस्कृति का पाठशाला कहा गया है क्योंकि यहाँ विभिन्न कलाओ का अद्भुत संगम है। इसी विशेषता के कारण शास्वों में काशी को आनंदकानन नाम से प्रतिष्ठित किया गया है। काशी में एक से बढ़कर एक संगीत के कलाकार हैं, इनके संगीत से आनंद उठानेवाला रसिक अपार लोगों का समूह है। यहाँ की अपनी संस्कृति है, अपनी बोली है, अपना उत्सव है, अपना गम है, अपनी खुशियाँ हैं। यहाँ संगीत और भक्ति, मंदिर और मस्जिद, कजरी और चैती, बिस्मिल्ला खाँ और बालाजी का मंदिर – सब आपस में इस प्रकार घुलमिल गए हैं कि उन्हें अलग करके देखना संभव नहीं है।

प्रश्न 22.
उस फकीर की दुआ लगी जिसने अमीरूद्रीन से कहा था – “बजा, बजा।”

(क) यह पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
उत्तर :
यह पंक्ति ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ से उद्दृत है।

(ख) इस वाक्य का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
एक बार रात्रि के समय बिस्मिल्ला खाँ काशी में मंदिर के अहाते के अंदर शहनाई का रियाज कर रहे थे। मंदिर में प्रवेश करने के सभी दरवाजे बंद थे। तभी उनके सामने एक फकीर आकर खड़े हो गए। भय से बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई बजाना बंद कर दिया कि ये फकीर अचानक यहाँ कैसे प्रकट हो गए। तभी उस फकीर ने मुस्कुराते हुए कहा ‘बजा बजा।’ इतना कहकर वो गायब हो गए।

भय से बदहवास बिस्मिल्ला खाँ ने तुरंत घर लौटकर इस घटना का उल्लेख नाना से किया। नाना ने पूरी घटना सुनी और एक जोर का तमाचा बिस्मिल्ला खाँ के गाल पर मारा। साथ ही उन्होंने यह हिदायत दी कि आगे कभी कोई घटना घटे तो किसी से मत कहना और बिस्मिल्ला खाँ ने ऐसा ही किया।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘अंतहिली का धूमकेतु पृख्वी और सूर्य के समीप कब आएगा?
(क) 2045 ई० में
(ख) 3062 ई० में
(ग) 2062 ई० में
(घ) 2030 ई० में
उत्तर :
(ग) 2062 ई० में

प्रश्न 2.
न्यूटन ने क्या आविष्कार किया था ?
(क) उत्तकर्षण
(ख) गुरुत्वाकर्षण
(ग) विकर्षण
(घ) महत्वाकर्षण
उत्तर :
(ख) गुरुत्वाकर्षण

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प्रश्न 3.
धूमकेतु को कैसा तारा कहते हैं?
(क) गुच्छल तारा
(ख) उज्ज्वल तारा
(ग) पुच्छल तारा
(घ) निश्छल तारा
उत्तर :
(ग) पुच्छल तारा

प्रश्न 4.
‘आकाश के राक्षस’ क्या हैं ?
(क) कविता
(ख) उपन्यास
(ग) धूमकेतु
(घ) पुस्तक
उत्तर :
(घ) पुस्तक

प्रश्न 5.
‘अंतरिक्ष-यात्रा’ के लेखक हैं ?
(क) रामकुमार वर्मा
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) गुणाकर मुले
(घ) न्यूटन
उत्तर :
(ग) गुणाकर मुले।

प्रश्न 6.
‘नक्षत्रलोक’ के रचनाकार हैं ?
(क) वराहमिहिर
(ख) गुणाकर मुले
(ग) न्यूटन
(घ) शिवमूर्ति
उत्तर :
(ख) गुणाकर मुले।

प्रश्न 7.
‘संसार के महान गणितज्ञ’ पुस्तक के लेखक हैं ?
(क) गुणाकर मुले
(ख) शैल रस्तोगी
(ग) बच्चन
(घ) प्रसाद
उत्तर :
(क) गुणाकर मुले।

प्रश्न 8.
‘महान वैज्ञानिक’ के रचनाकार का नाम है ?
(क) अनामिका
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) कैलाश गौतम
(घ) गुणाकर मुले
उत्तर :
(घ) गुणाकर मुले।

प्रश्न 9.
‘अक्षरों की कहानी’ के रचनाकार हैं ?
(क) गुणाकर मुले
(ख) कन्हैयालाल नंदन
(ग) कैलाश गौतम
(घ) रघुवीर सहाय
उत्तर :
(क) गुणाकर मुले।

प्रश्न 10.
‘आँखों की कहानी’ किसके द्वारा लिखी गई ?
(क) ॠतुराज
(ख) गुणाकर मुले
(ग) कैलाश गौतम
(घ) कीर्ति चौधरी
उत्तर :
(ख) गुणाकर मुले।

प्रश्न 11.
‘गणित की कहानी’ के लेखक हैं ?
(क) रामनरेश त्रिपाठी
(ख) ॠतुराज
(ग) अनामिका
(घ) गुणाकर मुले
उत्तर :
(घ) गुणाकर मुले।

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प्रश्न 12.
‘ज्यामिति की कहानी’ के लेखक हैं ?
(क) गुणाकर मुले
(ख) कन्हैयालाल नंदन
(ग) राजेश जोशी
(घ) अनामिका
उत्तर :
(क) गुणाकर मुले।

प्रश्न 13.
‘लिपियों की कहानी’ किसके द्वारा लिखी गई ?
(क) दिनकर
(ख) गुणाकर मुले
(ग) पंत
(घ) बच्चन
उत्तर :
(ख) गुणाकर मुले।

प्रश्न 14.
गुणाकर मुले को बिहार के किस सम्मान से सम्मानित किया गया ?
(क) कर्पूरी ठाकुर स्मृति सम्मान
(ख) स्मृति सम्मान
(ग) कर्पूरी सम्मान
(घ) ठाकुर स्मृति सम्मान
उत्तर :
(क) कर्पूरी ठाकुर स्मृति सम्मान।

प्रश्न 15.
गुणाकर मुले को केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा कौन-सा पुरस्कार दिया गया ?
(क) साहित्य रत्न
(ख) भारत रल
(ग) आत्माराम पुरस्कार
(घ) मंगला प्रसाद पारितोषिक
उत्तर :
(ग) आत्माराम पुरस्कार।

प्रश्न 16.
गुणाकर मुले को हिन्दी अकादमी के किस सम्मान से सम्मानित किया गया?
(क) साहित्यकार सम्मान
(ख) सरस्वती सम्मान
(ग) पुलित्जर सम्मान
(घ) नेहरू शांति सम्मान
उत्तर :
(क) साहित्यकार सम्मान।

प्रश्न 17.
गुणाकर मुले की कितनी पुस्तकें छपी हैं ?
(क) 25
(ख) 30
(ग) 35
(घ) 40
उत्तर :
(ग) 35

प्रश्न 18.
गुणाकर मुले के कितने निबंध हिन्दी में छपे हैं ?
(क) 35
(ख) 300
(ग) 300
(घ) 4000
उत्तर :
(ख) 300

प्रश्न 19.
गुणाकर मुले के कितने निबंध अंग्रेजी में छपे हैं ?
(क) 250 से अधिक
(ख) 300 से अधिक
(ग) 350 से अधिक
(घ) 400 से अधिक
उत्तर :
(क) 250 से अधिक।

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प्रश्न 20.
‘भारतीय अंक-पद्धति की कहानी’ के लेखक कौन हैं ?
(क) जहीर
(ख) ग्रेजिया डेलेडा
(ग) गुणाकर मुले
(घ) संजीव
उत्तर :
(ग) गुणाकर मुले।

प्रश्न 21.
‘भारतीय सिक्कों की कहानी’ के लेखक कौन हैं ?
(क) प्रेमवंद
(ख) गुणाकर मुले
(ग) जैनेनेन्द्र
(घ) प्रसाद
उत्तर :
(ख) गुणाकर मुले।

प्रश्न 22.
‘भारतीय लिपियों की कहानी’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) शैल रस्तोगी
(ख) शिवमूर्ति
(ग) गुणाकर मुले
(घ) संजीव
उत्तर :
(ग) गुणाकर मुले।

प्रश्न 23.
गुणाकर मुले का जन्म कब हुआ था?
(क) 3 जनवरी 1935
(ख) 4 जनवरी 1936
(ग) 5 जनवरी 1937
(घ) 6 जनवरी 1938
उत्तर :
(क) 3 जनवरी 1935 ।

प्रश्न 24.
गुणाकर मुले का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) पटना
(ख) लखनऊ
(ग) अमरावती
(घ) हैदराबाद
उत्तर :
(ग) अमरावती।

प्रश्न 25.
गुणाकर मुले किस संग्रहालय से वर्षों जुड़े रहे ?
(क) प्रेमचंद संम्महालय
(ख) गाँधी संग्रहालय
(ग) राहुल संमहालय
(घ) निराला संग्रहालय
उत्तर :
(ग) राहुल संप्रहालय।

प्रश्न 26.
गुणाकर मुले किनके शिष्य थे ?
(क) निराला के
(ख) राहुल सांकृत्यायन के
(ग) जयशंकर प्रसाद के
(घ) अझेय के
उत्तर :
(ख) राहुल सांकृत्यायन के।

प्रश्न 27.
‘धूम’ का अर्थ है :
(क) कण
(ख) गैस
(ग) धुआँ
(घ) पानी
उत्तर :
(ग) धुआं।

प्रश्न 28.
‘केतु’ का अर्थ है :
(क) पटाखा
(ख) पत्ताका
(ग) पूँछ
(घ) सिर
उत्तर :
(ख) पताका।

प्रश्न 29.
‘ब्रह्यांड परिचय’ के रचनाकार हैं ?
(क) आइजक न्यूटन
(ख) गुणाकर मुले
(ग) तौखे ब्राहे
(घ) हेली
उत्तर :
(ख) गुणाकर मुले।

प्रश्न 30.
किस पौराणिक ग्रंथ में धूमकेतु का उल्लेख है?
(क) रामायण
(ख) महाभारत
(ग) गीता
(घ) रामचरितमानस
उत्तर :
(ख) महाभारत।

प्रश्न 31.
प्राचीन काल में धूमकेतु को किसका सूचक माना जाता था?
(क) सौभाग्य का
(ख) समृद्धि का
(ग) भयकर खतरे का
(घ) सुख का
उत्तर :
(ग) भयकर खतरे का।

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प्रश्न 32.
वराहमिहिर थे :
(क) ज्योतिषी
(ख) वैज्ञानिक
(ग) शिक्षक
(घ) कुशल कारीगर
उत्तर :
(क) ज्योतिषी।

प्रश्न 33.
‘वृहत्संहिता’ के रचनाकार हैं :
(क) वराहमिहिर
(ख) हेली
(ग) वाल्मीकि
(घ) पाणिनी
उत्तर :
(क) वराहमिहिर।

प्रश्न 34.
पाश्चात्य ज्योतिष में घूमकेतु को कहते हैं :
(क) लॉकेट
(ख) कॉमेट
(ग) पॉंकेट
(घ) सॉकेट
उत्तर :
(ख) कॉमेट।

प्रश्न 35.
‘कोमते’ शब्द किस भाषा का है :
(क) यूनानी
(ख) पुर्तगाली
(ग) यूरोपीय
(घ) फ्रांसीसी
उत्तर :
(क) यूनानी।

प्रश्न 36.
‘कोमते’ शब्द का अर्थ होता है :
(क) लंबी गर्दन वाला
(ख) बड़ा सिर वाला
(ग) लंबे बालों वाला
(घ) लंबी पूँछ वाला
उत्तर :
(ग) लंबे बालों वाला।

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प्रश्न 37.
यूरोप के आकाश में धूमकेतु कब प्रकट हुआ?
(क) 1528 ई० में
(ख) 1529 ई० में
(ग) 1530 ई० में
(घ) 1531 ई० में
उत्तर :
(क) 1528 ई० में।

प्रश्न 38.
तीखे ज्राहे कौन थे?
(क) यूरोप के महान साहित्यकार
(ख) यूरोप के महान वैज्ञानिक
(ग) यूरोप के महान नाटककार
(घ) यूरोप के महान ज्योतिष
उत्तर :
(घ) यूरोप के महान ज्योतिष।

प्रश्न 39.
तीखे क्राहे कहाँ के थे?
(क) भारत के
(ख) यूरोप के
(ग) अमेरिका के
(घ) अफीका के
उत्तर :
(ख) यूरोप के।

प्रश्न 40.
‘आकाश के राक्षस’ के रचनाकार कौन हैं?
(क) आमोई पेरी
(ख) न्यूटन
(ग) प्रेमचंद्व
(घ) गुणाकर मुले
उत्तर :
(क) आमोई पेरी।

प्रश्न 41.
धूमकेतु पृथ्वी से होते हैं :
(क) बहुत निकट
(ख) बहुत दूर
(ग) अदृश्य
(घ) जुड़े हुए
उत्तर :
(ख) बहुत दूर।

प्रश्न 42.
आइजेक न्यूटन के मित्र थे :
(क) शेक्सपियर
(ख) गुणाकर मुले
(ग) एडमंड हेली
(घ) एडमंड हिलेरी
उत्तर :
(ग) एडमंड हेली।

प्रश्न 43.
न्यूटन के गुरूत्वाकर्षण सिद्धांत के प्रकाशन में किसका बड़ा योगदान था?
(क) एडमंड हिलेरी का
(ख) एडमंड हेली का
(ग) वराहमिहिर का
(घ) तौखे ब्वाहे का
उत्तर :
(ख) एडमंड हेली का।

प्रश्न 44.
हेली ने धूमकेतु कब देखा था?
(क) 1680 ई० में
(ख) 1682 ई० में
(ग) 1582 ई० में
(घ) 1782 ई० में
उत्तर :
(ख) 1682 ई० में।

प्रश्न 45.
न्यूटन का कौन-सा सिद्धांत विश्वप्रसिद्ध है?
(क) गुरूत्वाकर्षण का सिद्धांत
(ख) पूँजीवाद का सिद्धान्त
(ग) मार्क्सवाद का सिद्धांत
(घ) समाजवाद का सिद्धान्त
उत्तर :
(क) गुरूत्वाकर्षण का सिद्धांत।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 46.
धूमकेतु किसकी परिक्रमा करते हैं?
(क) पृथ्वी की
(ख) वृहस्पति की
(ग) चन्द्रमा की
(घ) सूर्य की
उत्तर :
(घ) सूर्य की।

प्रश्न 47.
धूमकेतु प्राय: कितने साल में सूर्य का एक चक्कर लगा लेता है?
(क) 75-76 साल
(ख) 50-51 साल
(ग) 30-35 साल
(घ) 700-800 साल
उत्तर :
(क) 75-76 साल।

प्रश्न 48.
हेली ने धूमकेतु के कब प्रकट होने की ब्ञात कही?
(क) 1902 ई० में
(ख) 1758 ई० में
(ग) 1896 ई० में
(घ) 2012 ई० में
उत्तर :
(ख) 1758 ई० में।

प्रश्न 49.
प्रश्नहेली की मृत्यु कब हुई ?
(क) 1542 ई० में
(ख) 1642 ई० में
(ग) 1842 ई० में
(घ) 1742 ई० में
उत्तर :
(घ) 1742 ई० में।

प्रश्न 50.
हेली का धूमकेतु पिछली बार कब प्रकट हुआ था ?
(क) 1910 ई० में
(ख) 1911 ई० में
(ग) 1912 ई० में
(घ) 1913 ई० में
उत्तर :
(क) 1910 ई० में।

प्रश्न 51.
1910 के बाद धूमकेतु फिर कब प्रकट हुआ?
(क) 1700 ई० में
(ख) 1800 ई० में
(ग) 1986 ई॰ में
(घ) 1900 ई० में
उत्तर :
(ग) 1986 ई० में।

प्रश्न 52.
घूमकेतु के कितने भाग होते हैं?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तौन
(घ) चार
उत्तर :
(ग) तीन।

प्रश्न 53.
धूमकेतु का अधिकांश द्रव्य कहाँ होता है?
(क) पूँछ में
(ख) नाभिक में
(ग) सिर में
(घ) कहीं नहीं
उत्तर :
(ख) नाभिक में।

प्रश्न 54.
धूमकेतु के नाभिक का व्यास कितना हो सकता है?
(क) आधे से पचास किलोमीटर
(ख) आधे से सौ किलोमीटर
(ग) आधे से डेढ़ सौ किलोमीटर
(घ) आधे से दो सौ किलोमीटर
उत्तर :
(ग) आधे से डेढ़ सौ किलोमौटर।

प्रश्न 55.
धूमकेतु के सिर का घेरा कितना हो सकता है?
(क) 50 कि॰मी०
(ख) 100 कि०मी०
(ग) 25 कि॰मी०
(घ) 5 कि०मी०
उत्तर :
(क) 50 कि०मी०।

प्रश्न 56.
धूमकेतु के सिर का आकार घटता-बढता है ?
(क) पृथ्वी से धूमकेतु की दूरी के अनुसार
(ख) वृहस्पति से धूमकेतु की दूरी के अनुसार
(ग) सूर्य से धूमकेतु की दूरी के अनुसार
(घ) चन्द्रमा से धूमकेतु की दूरी के अनुसार
उत्तर :
(ग) सूर्य से धूमकेतु की दूरी के अनुसार।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 57.
कुछ धूमकेतु की पूँछ फैल जाती है ?
(क) 20 करोड़ किलोमीटर
(ख) 15 करोड़ किलोमीटर
(ग) 10 करोड़ किलोमीटर
(घ) 5 करोड़ किलोमीटर
उत्तर :
(क) 20 करोड़ किलोमीटर।

प्रश्न 58.
धूमकेतु की पूँछ रहती है?
(क) पृथ्वी के विपरीत
(ख) सूर्य के विपरीत
(ग) चन्द्रमा के विपरीत
(घ) शनि के विपरीत
उत्तर :
(ख) सूर्य के विपरीत।

प्रश्न 59.
सभी धूमकेतु कैसी कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं?
(क) अण्डाकार
(ख) गोल
(ग) षटकोण
(घ) अष्टकोण
उत्तर :
(क) अण्डाकार।

प्रश्न 60.
कुछ धूमकेतु कितने वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा कर लेते हैं?
(क) तीन से बीस साल
(ख) तीन से पंद्रह साल
(ग) तीन से दस साल
(घ) तीन से पाँच साल
उत्तर :
(ग) तीन से दस साल।

प्रश्न 61.
सूर्य के प्रभाव से जल्द नष्ट हो जाने वाला धूमकेतु था ?
(क) बिएला
(ख) सिएला
(ग) रिएला
(घ) जोतो
उत्तर :
(क) बिएला।

प्रश्न 62.
जल्द नष्ट हो जाने वाले धूमकेतु किसकी परिक्रमा नजदीक से करते हैं?
(क) पृथ्वी की
(ख) वृहस्तपति की
(ग) नेपच्यून की
(घ) सूर्य की
उत्तर :
(घ) सूर्य की।

प्रश्न 63.
उल्काओं की वर्षा वास्तव में होती है ?
(क) धूमकेतु के कण
(ख) सूर्य के कण
(ग) गैस के कण
(घ) खनिज के कण
उत्तर :
(क) धूमकेतु के कण।

प्रश्न 64.
कुछ धूमकेतु कितने साल बाद लौटते हैं?
(क) साठ साल
(ख) पाँच सौ साल
(ग) हजारों साल
(घ) लाखों साल
उत्तर :
(ग) हजारों साल।

प्रश्न 65.
कभी-कभी कोई धूमकेतु अपनी कक्षा बादल लेता है?
(क) सूर्य के प्रभाव से
(ख) बाहरी पिंड के प्रभाव से
(ग) नाभिक के प्रभाव से
(घ) पूँछ के प्रभाव से
उत्तर :
(ख) बाहरी पिंड के प्रभाव से

प्रश्न 66.
धूमकेतु के पृथ्वी से टकरा जाने की संभावना है ?
(क) हाँ
(ख) नहीं
(ग) साल में एक बार
(घ) हजार साल में एक बार
उत्तर :
(ख) नहीं।

प्रश्न 67.
1985-86 में हेली का धूमकेतु किसके नजदीक आया?
(क) चन्द्रमा के
(ख) यूरेनस के
(ग) प्लूटो के
(घ) पृथ्वी के
उत्तर :
(घ) पृथ्वी के।

प्रश्न 68.
सोवियत संघ द्वारा धूमकेतु के निकट भेजे गए यान का नाम था?
(क) वीहे
(ख) जीतो
(ग) हीवे
(घ) तोहे
उत्तर :
(क) वीहे।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 69.
हेली के धूमकेतु का नाभिक है?
(क) 16 x 8 कि०मी०
(ख) 16 x 9 कि०मी०
(ग) 18 x 9 कि०मी०
(घ) 19 x 8 कि०मी०
उत्तर :
(ख) 16 x 9 कि॰मी०

प्रश्न 70.
‘भारतीय अंक-पद्धति की कहानी’ के रचयिता हैं ?
(क) गुणाकर मुले
(ख) शैल रस्तोगी
(ग) शिवमूर्ति
(घ) वराहमिहिर
उत्तर :
(क) गुणाकर मुले।

प्रश्न 71.
हेली के धूमकेतु से प्रति सेकेंड कितनी घूल निकलती है?
(क) 10 टन
(ख) 20 टन
(ग) 30 टन
(घ) 40 टन
उत्तर :
(क) 10 टन।

प्रश्न 72.
हेली के धूमकेतु से प्रति सेकेंड कितनी गैस निकलती है?
(क) 20 टन
(ख) 30 टन
(ग) 40 टन
(घ) 50 टन
उत्तर :
(ख) 30 टन।

प्रश्न 73.
किसकी सहायता से ‘जोतो’ को धूमकेतु के नजदीक पहुँचाया गया?
(क) वीहे यानों की सहायता से
(ख) हवाई जहाज को सहायता से
(ग) ‘नासा’ की सहायता से
(घ) विश्व बैंक की सहायता से
उत्तर :
(क) वीहे यानों की सहायता से।

प्रश्न 74.
गुणाकर मुले किस क्षेत्र के जाने-माने हस्ताक्षर थे ?
(क) लिपि विज्ञान
(ख) अभिलेख विज्ञान
(ग) रसायन विज्ञान
(घ) भौतिक विज्ञान
उत्तर :
(क) लिपि विज्ञान।

प्रश्न 75.
‘वीहे’ यान का नामकरण किसके नाम पर किया गया है?
(क) वीनस तथा हेली
(ख) वीनस तथा हिलेरी के नाम पर
(ग) वौनस तथा हीले हर्क्यूलस के नाम पर
(घ) वीनस तथा सूर्य के नाम पर
उत्तर :
(क) वीनस तथा हेली।

प्रश्न 76.
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा धूमकेतु के पास भेजे गए यान का नाम था?
(क) जोतो
(ख) सोतो
(ग) कावासाकी
(घ) जोजो
उत्तर :
(क) जोतो।

प्रश्न 77.
सारे धूमकेतु किसके सदस्य हैं?
(क) अन्य सौर मंडल के
(ख) हमारे सौर-मंडल के
(ग) चन्द्रमा के
(घ) पृथ्वी के
उत्तर :
(ख) हमारे सौर-मंडल के।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 78.
जापान ने कितने यान धूमकेतु के पास भेजे?
(क) एक भी नहीं
(ख) एक
(ग) तौन
(घ) दो
उत्तर :
(घ) दो।

प्रश्न 79.
आकाश के ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं ?
(क) सूर्य के गुरूत्वाकर्षण के कारण
(ख) सौर ऊर्जा के कारण
(ग) गति के कारण
(घ) घूर्णन के कारण
उत्तर :
(क) सूर्य के गुरूत्वाकर्षण के कारण।

प्रश्न 80.
1682 में हेली ने स्वयं क्या देखा था ?
(क) एक सूर्य
(ख) एक धूमकेतु
(ग) एक पृथ्वी
(घ) एक वृहस्पति
उत्तर :
(ख) एक धूमकेतु।

प्रश्न 81.
कौन अपनी भविष्यवाणी सच होते नहीं देख पाए ?
(क) हेली
(ख) वराहमिहिर
(ग) न्यूटन
(घ) तीखे ब्राहे
उत्तर :
(क) हेली।

प्रश्न 82.
थूमकेतु को इस नाम से भी जाना जाता है :
(क) पुच्छल तारा
(ख) ग्रह
(ग) उपग्रह
(घ) सूर्य
उत्तर :
(क) पुच्छल तारा।

प्रश्न 83.
हेली का धूमकेतु पृथ्वी और सूर्य के समीप कब आएगा ?
(क) सन् 2045 में
(ख) सन् 3026 में
(ग) सन् 2062 में
(घ) सन् 2020 में
उत्तर :
(ग) सन् 2062 में।

प्रश्न 84.
‘कम्यूटर क्या है ?’ – के लेखक हैं ?
(क) संजीव
(ख) कृष्णा सोबती
(ग) गुणाकर मुले
(घ) प्रसाद
उत्तर :
(ग) गुणाकर मुले।

प्रश्न 85.
किसकी सहायता से ‘जोतो’ को धूमकेतु के नजदीक पहुँचाया गया ?
(क) वीहे यानों की सहायता से
(ख) हवाई जहाज की सहायता से
(ग) नासा की सहायता से
(घ) विश्वब्बैंक की सहायता से
उत्तर :
(क) वीहे यानों की सहायता से।

प्रश्न 86.
धूमकेतुओं के उदय में कितने वर्षों का अंतराल होता है ?
(क) 50-60 वर्ष
(ख) 75-80 वर्ष
(ग) 80-90 वर्ष
(घ) 90-95 वर्ष
उत्तर :
(ख) 75-80 वर्ष।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 87.
‘आकाश दर्शन’ के लेखक हैं ?
(क) गुणाकर मुले
(ख) वराहमिहिर
(ग) हेली
(घ) गुलेरी
उत्तर :
(क) गुणाकर मुले।

प्रश्न 88.
‘धूमकेतु’ शब्द यूनानी भाषा के ‘कोमते’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ?
(क) भयंकर पिंड
(ख) लंबी पूँछ्वाला
(ग) लंबे बालों वाला
(घ) दिशाहीन पिंड
उत्तर :
(ग) लंबे बालों वाला।

प्रश्न 89.
पाश्चात्य ज्योतिष में धूमकेत को कहते हैं ?
(क) सॉनेट
(ख) कॉमेट
(ग) रॉंकेट
(घ) सॉकेट
उत्तर :
(ख) कॉमेट।

प्रश्न 90.
सभी धूमकेतु अंडाकार कक्ष में परिक्रमा करते हैं ?
(क) पृथ्वौ की
(ख) चन्द्रमा की
(ग) सूर्य की
(घ) वृहस्पति की
उत्तर :
(ग) सूर्य की।

प्रश्न 91.
धूमकेतुओं के शुभ-अशुभ फलों का जिक्र किया है ?
(क) पाणिनी ने
(ख) गुणाकर मुले ने
(ग) बराहमिहिर ने
(घ) विष्युगुप्त ने
उत्तर :
(ग) बराहमिहिर ने।

प्रश्न 92.
धूमकेतु से प्रति सेकेण्ड कितने टन धूलि उत्सर्जित होती है ?
(क) 5 टन
(ख) 10 टन
(ग) 2 टन
(घ) 15 टन
उत्तर :
(ख) 10 टन।

प्रश्न 93.
‘महाभारत’ में महाभंकर धूमकेतु के किस नक्षत्र के पार पहुँचने पर भयंकर युद्ध होने की बात कही गई है?
(क) मृगसिरा
(ख) रोहिणी
(ग) पुष्य
(घ) केतु
उत्तर :
(ग) पुष्य।

प्रश्न 94.
न्यूटन का कौन-सा सिद्धांत विश्व प्रसिद्ध है ?
(क) गुरूत्चाकर्षण का सिद्धांत
(ख) समाजवाद का सिद्धांत
(ग) मार्स्सवाद का सिद्धांत
(घ) समाजवाद का सिद्धांत
उत्तर :
(क) गुरूत्वाकर्षण का सिद्धां।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

प्रश्न 95.
धूमकतुओं की पूँछ होती है –
(क) सफेद
(ख) मटमैली
(ग) नोली
(घ) चमकीली
उत्तर :
(घ) चमकीली।

प्रश्न 96.
‘धूमकेतु’ को अंग्रेजी में क्या कहते हैं ?
(क) कोमते
(ख) पुच्छल तारा
(ग) कॉमेट
(घ) पोल स्टार
उत्तर :
(ग) कॉमेट।

प्रश्न 97.
‘कॉमेट’ का यूनानी में क्या अर्थ है ?
(क) छोटे बालों वाला
(ख) भूरे बालों वाला
(ग) लंबे यालों वाला
(घ) घुंघराले बालों वाला
उत्तर :
(ग) लंबे बालों वाला।

प्रश्न 98.
आज हम धूमकेतु को किसका यूमकेतु कहते हैं ?
(क) न्यूटन का
(ख) हेली का
(ग) पृथ्वो का
(घ) सूर्य का
उत्तर :
(ख) हेली का।

प्रश्न 99.
‘उल्का’ शब्द किस वेद मे प्रयुक्त हुआ है ?
(क) ॠग्वेद
(ख) सामवेद
(ग) यजुर्वेद
(घ) अथर्वंवेद
उत्तर :
(घ) अथर्ववेद।

प्रश्न 100.
‘वृहत्संहिता’ के रचनाकार’ हैं ?
(क) पाणिनी
(ख) वराहमिहिर
(ग) गुणाकर मुले
(घ) विष्यु गुप्त
उत्तर :
(ख) वराहूमिहिर।

WBBSE Class 10 Hindi धूमकेतु Summary

लेखक – परिचय

हिन्दी साहित्य में वैज्ञानिक शोधपूर्ण निबंधों के लिए विख्यात गुणाकर मुले का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले के सिंधु वुजुर्ग गाँव में 3 जनवरी सन् 1935 को हुआ था। मराठी मूल के तथा मराठी भाषा-भाषी होने के बावजूद इन्होंने लेखन के लिए हिन्दी तथा अंग्रेजी को ही अपना माध्यम बनाया। राहुल सांकृत्यायन के शिष्य होने कारण उनकी विद्वता तथा जिज्ञासु प्रवृत्ति का पूरा-पूरा असर इनकी लेखनी में दिखाई पड़ता है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु 2

गुणाकर मुले ने 3000 से अधिक निबंध हिन्दी में तथा 250 से अधिक लेख अंग्रेजी में लिखे हैं। वैज्ञानिक साहित्य-लेखन जैसे कठिन कार्य को गुणाकर मुले ने बड़ी सहजता से किया है। केवल इतना ही नहीं, हिन्दी में वैज्ञानिक-लेखन प्रारंभ करने का श्रेय भी गुणाकर मुले को ही जाता है। सहज, सरल तथा रोचकता से पूर्ण होने के कारण इनकी रचनाएँ छात्रों को आकर्षित करती है।

गुणाकर मुले एन० सी० ई० आर० टी० के संपादक-मंडल तथा नेशनल बुक ट्रस्ट की हिन्दी प्रकाशन सलाहकार समिति के भी सदस्य रह चुके है। ऐसे प्रतिभावान व्यक्तित्व का निधन 16 अक्टूबर, सन् 2009 को एक गंभीर बीमारी से पांडव नगर में हो गया।

गुणाकर मुले द्वारा लिखित कुछ प्रमुख पुस्तकों के नाम इस प्रकार हैं-
भारतीय अंक-पद्धति की कहानी, भारतीय सिक्कों की कहानी, भारतीय लिपियों की कहानी, ब्रह्माण्ड परिचय, आकाश-दर्शन, अंतरिक्ष-यात्रा, नक्षत्रलोक, कम्यूटर क्या है? भारतीय अंक-पद्धति की कहानी, संसार के महान गणितज्ञ, महान वैज्ञानिक, अक्षरों की कहानी, आँखों की कहानी, गणित की कहानी, ज्यामिति की कहानी, आदि।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

पुरस्कार व सम्मान :
हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का आत्माराम पुरस्कार, बिहार का कर्पूरी ठाकुर स्मृति सम्मान।

शब्दार्थ

पृष्ठ संख्या 51.

  • पुच्छल = पूँछ वाला।
  • पाश्चात्य = पश्चिमी, यूरोपीय।
  • यूनानी = यूनान का।
  • उल्लेख = जिक।
  • पुष्य = पूस, पौष।
  • सूचक = सूचना देने वाला।
  • विनाशक = विनाश करनेवाला।

पृष्ठ संख्या – 52

  • शुभाशुभ = शुभ और अशुभ।
  • स्पष्ट = साफ-साफ।
  • विधि = तरीके, उपाय।
  • गुरूत्वाकर्षण = गुरुत्व के कारण आकर्षण-शक्ति, पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति।
  • सौर-मंडल = सूर्य और उसके नौ ग्रह तथा उन ग्रहों के उपग्रह।
  • परिकमा = चारों ओर गोलाकार या अण्डाकार घूमना।
  • नतीजे= परिणाम।
  • पुन: = फिर।
  • भविष्यवाणी = भविष्य के बारे में की गई बातें।

पृष्ठ संख्या – 53

  • परे = दूर ।
  • समीप = निकट ।
  • निर्धारित = तय।
  • नाभिक = केन्द्र।
  • व्यास = गोल घेरा।
  • मेल = मिलने।
  • विपरीत = उल्टी।
  • अंडाकार = अंडे के आकार का ।
  • समतल = बराबर सतह ।
  • खलोगविद = ब्रह्मांड की बाते जानने वाले विद्वान ।
  • उल्का = आग के कण।
  • विखंडित = टूटे हुए।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions निबंध Chapter 1 धूमकेतु

पृष्ठ संख्या – 54

  • रचना = बनावट।
  • अजेय = अज्ञात।
  • तदनतर = बाद में।
  • स्वचालित = अपने-आप चलने वाले।
  • सहयोग = मदद।
  • उत्सर्जित = निकलती।
  • सृजन = निर्माण।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण अव्यय to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
अविकारी या अव्यय शब्द से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
अविकारी या अव्यय शब्द :- अविकारी या अव्यय शब्द वे हैं जिनमें कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता है । इनमें लिंग, वचन, कारक तथा काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता। जैसे-हाथी जल्दी-जल्दी चलता है। वह कदापि नहीं आएगा। इसमें ‘जल्दी-जल्दी’ और कदापि’ दोनों अविकारी शब्द हैं।

प्रश्न 2.
अविकारी शब्द कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तरः
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया एवं क्रिया-विशेषण के अतिरिक्त भी हिन्दी में विशाल शब्द राशि है, जिनका प्रयोग वाक्यों के अन्वय में अनिवार्य रूप से घटित होता रहता है । यही नहीं, उनमें ऐसे भी शब्द सम्मिलित हैं जो वाक्य को विचित्र स्कूर्ति प्रदान करते है, वाक्यों को चमत्कारपूर्ण बनाकर भावों में मनोहारिता भरते हैं। इसके अन्तर्गत तीन प्रकार के शब्द आते हैं –

  • अव्यय रूप संयोजक, आवेगसूचक एवं आलंकारिक शब्दावली
  • वाक्य में अन्वय सूचक शब्दावली
  • सापेक्ष शब्द युग्म

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

प्रश्न 3.
अव्यय रूप संयोजक, आवेगसूचक तथा आलंकारिक शब्दावली से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
अव्यय रूप संयोजक, आवेग सूचक एवं आलंकारिक शब्दावली :- ये सब शब्द वाक्य में शब्द एवं वाक्य-समूह के संयोजन में, मन के आवेग के अनुरूप उच्चारण में एवं वाक्य के अलंकरण (सुंदरता बढ़ाने में) में अद्दुत रूप से उत्कर्ष लाते हैं। इनमें प्रथम अव्यय रूप संयोजक है जिसमें निम्नलिखित प्रकार के शब्द सन्निविष्ट हैं –

  • संयोजक
  • वियोजक
  • संकोचक
  • हेतुबोधक
  • सिद्धान्तमूलक
  • क्रिया-विशेषक तथा
  • व्यतिरेकात्मक।

प्रश्न 4.
संयोजक शब्द का परिचय दें ।
उत्तरः
संयोजक शब्द :- ये एकाधिक शब्दों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों का संयोजन करके उन्हें वृहत्तम करते हैं। इनमें प्रमुख हैं – और, तथा, एवं आदि ।

  • इंग्लैण्ड तथा अमेरिका आतंकवाद का अन्त चाहते हैं।
  • पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी अभियान का खुले जगत् में समर्थन करता है साथ ही अपनी सीमा में विभिन्न आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण भी दिलवाता है ।
  • आतंकवाद में जन्मा और आतंकवाद में फला-फूला समुदाय कभी किसी दशा में आतंकरहित नहीं रह सकता।
  • आतंकवाद का अन्त होगा एवं बहुत शीघ्र ही होगा ।
  • आतंकवादी दूसरों को आतंकित करते हैं उसी तरह स्वयं भी अपने में ही आतंकित रहते हैं।

प्रश्न 5.
वियोजक शब्द क्या है ? सोदाहरण समझाएँ ।
उत्तरः
वियोजक शब्द :- ये एकाधिक शब्दों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों में विकल्प बताकर उन्हें एक-दूसरे से पृथक् करते हैं । इनमें प्रमुख है – या, वा, अथवा ।

  • तुम अपने देश की संप्रभुता की रक्षा करो या अपनी सीमा के अन्तर-बाहर जी-हजूरी करो।
  • मनुष्यों जैसा आचरण अथवा पशुओं जैसी आचरण अपनाने में आज का मनुष्य स्वतंत्र है।
  • तुम्हारी मौत का रास्ता तुम चुनो या तुम्हारी मौत ही चुने ।
  • विकास वा विनाश अवश्यम्भावी है।

प्रश्न 6.
संकोचक शब्द के क्या कार्य हैं ?
उत्तरः
संकोचक शब्द :- ये एकाधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों में से उत्तर द्वारा पूर्व के अर्थ को सीमित या संकोचित करते हैं । इनमें प्रमुख हैं – किन्तु, परन्तु, लेकिन, मगर आदि ।

  • इंग्लैण्ड और अमेरिका अब आतंकवाद का अन्त चाह रहे हैं, किन्तु अब भी वे दूसरों को माध्यम बनाकर ही अपना उल्लू सीधा करने के फेर में हैं ।
  • सरकारी अनुमान के अनुसार इस वर्ष गेहूँ की उपज कम होगी, परन्तु सरकार आयात करने के पक्ष में नहीं है।
  • जाओ मगर आओ भी ।
  • हम देश की सेवा के लिए उद्यत हैं, लेकिन परिस्थितियों से अवरुद्ध होने के लिए बाध्य हैं।

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प्रश्न 7.
हेतुबोधक शब्द की उपयोगिता क्या है ?
उत्तरः
हेतुबोधक शब्द :- ये एक शब्द, वाक्यांश या वाक्य द्वारा दूसरे शब्द, वाक्यांश या वाक्य की कारणता बताते हैं । इनमें कारण, क्योंकि, चूँकि, ताकि, कि इत्यादि प्रमुख हैं ।

  • इस बयान पर हस्ताक्षर करता हूँ, ताकि आपको समय पर काम आए ।
  • मैं समय से आया, कारण आप समय से चूकते नहीं ।
  • चोरी की क्योंकि भूखा था’ को भारतीय दण्ड संहिता कम देखती है ।
  • डरा कि मरा ।
  • चूँकि यह आपका मामला था, मुझसे ना करते ना बना ।

प्रश्न 8.
सिद्धांतमूलक शब्द क्या हैं ?
उत्तरः
सिब्धान्तमूलक :- ये दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों में से एक में दूसरे की फल निष्पन्नता या परिणामधर्मिता दिखाते हैं । इनमें प्रमुख हैं – अतएव, फलतः, परिणामस्वरूप, इसलिए, अत: इत्यादि ।

  • पिता हो फलत: तुम इस देय के भागी हो ।
  • कई बार असफल हुए हो, अतएव अब अवसर से वंचित हो ।
  • तुम्हारा बार-बार गिरना, अतः तुम्हारा चरम शिखर पर पहुँचना स्वयंसिद्ध है ।
  • तुमने शातिर : अपराधी को धर दबोचने में जान की बाजी लगाकर पुलिस की मदद की है, इसलिए तुम्हारे जालिम को दबाने में ही नहीं, तुम्हारे हर सही काम मेंसाथ देने के लिए थाने में रिकार्ड है।
  • इस लड़के ने अबतक अथक परिश्रम किया था, परिणामस्वरूप आज आई० ए० एस० अधिकारी है।

प्रश्न 9.
क्रिया-विशेषण शब्द क्या प्रकट करते हैं ? प्रमुख शब्दों को उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तरः
क्रियाविशेषण शब्द :- ये एकाधिक शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ते हुए एक मे प्रयुक्त क्रिया की विशेषता भी प्रकट करते हैं । इनमें प्रमुख हैं-संयोगतः, निसर्गतः, दिष्ट्या, दैवात्, भाग्येन इत्यादि ।

  • मुम्बई में घनघोर वृष्टि से तबाही थी, संयोगतः वहाँ समुद्र जल में आग भी लग गई ।
  • मैं सीतान्वेषण में सफलता से निराश हो रहा था, दिष्ट्या ही तुमसे परिचय हुआ।
  • वसन्त में आमों की वृक्षों में मजरियाँ लगती हैं, निसर्गत: कोयलों की तान गूँजने लगती है ।
  • मुझे अपनी संस्था के लिए स्नातकोत्तर उपाधिधारिणी अंग्रेजी अध्यापिका की आवश्यकता थी, भाग्येन अपनी पौत्री सदृश तू अपने घर की जैसी ही निकली ।
  • भरत उधेड़बुन में ही थे कि दैवात् हनुमान् हाथ जोड़े प्रसन्न मुद्रा में सामने खड़े दिखाई दिये।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

प्रश्न 10.
व्यतिरेकात्मक शब्द को सोदाहरण समझाएँ :-
उत्तरः
व्यतिरेकात्मक शब्द :-वियोजक शब्दों से मिलते-जुलते फिर भी उनसे भिन्न ये व्यतिरेकात्मक शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों में अन्यथा परिणाम की घोषणा करते हैं । इनमें प्रमुख हैं – अन्यथा, नहीं तो, फिर तो, तब तो इत्यादि ।

  • प्रत्याशियों को समस्त बाध्यताओं को अंगीकार करना होगा, अन्यथा रिक्तिपूर्ति परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित होना होगा ।
  • तुम प्रशिक्षित नहीं, तब तो तुमसे अधिक योग्यतावाले ही इस पद के योग्य ठहरे ।
  • निर्धारित आयु सीमा के नीचे हो, फिर तो कुछ दिन प्रतीक्षा के बाद प्रयास करना ।
  • कम्प्यूटर, कामर्स और अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त करो, नहीं तो आज किसी प्राइवेट फर्म में काम न मिलेगा ।
  • पन्द्रह जुलाई तक सारा सरकारी बकाया चुका दो अन्यथा जेल में बन्द कर दिया जाएगा।

प्रश्न 11.
आवेग सूचक शब्द क्या हैं ?
उत्तरः
आवेग सूचक शब्द :- इस प्रकार के शब्दों द्वारा मन के हर्ष, विस्मय, विषाद, घुणा, कामना आदि आकस्मिक भाव प्रकट किये जाते हैं।

  • कामना :- काश! आज सरदार वल्लभ भाई पटेल होते !
  • घृणा :- धिक्कार! आडवानी जी, आपसे ऐसी आशा न थी ।
  • विषाद :- हाय ! श्यामा प्रसाद मुखर्जी को खोकर देश आज हताश है ।
  • हर्ष :- सच ! मनमोहनजी ने कई देशों से सम्बन्ध सुधारा है !
  • विस्मय :- गजब । सुभाष बाबू के निधन की गुत्थी देश अब तक सुलझा न सका !

प्रश्न 12.
आलंकारिक शब्द का परिचय देते हुए उसके प्रयोग के बारे में लिखें ।
उत्तरः
आलंकारिक शब्द :- यद्यपि काव्यशास्त्र में आज रस तत्व के सामने ध्वनि, रीति, अलंकार आदि सब पिछड़े सिद्ध हो चुके हैं, तथापि आज भी अलंकारों का महत्व कम नहीं हैं।
भाषा में मुख्य शब्दावली के साथ-साथ कुछ गौण शब्दावली भी प्रयुक्त होती रहती है, जो भावगाम्भीर्य व्यक्त करने के स्थान पर चामत्कारिक प्रभाव तो उत्पन्न कर ही देती है । हिन्दी भाषा में प्रयुक्त होने वाले कतिपय शब्द ये हैं – न, तो, वह, अब, और, जो, क्या, ही, नहीं ।
उदाहरण :- हरगोबिन ने फिर लम्बी साँस ली । जब तक यह मोदिआइन आँगन से नहीं टलती, बड़ी बहुरिया हरगोबिन से कुछ नहीं बोलेगी । वह अब चुप नहीं रह सका – (फणीश्वर नाथ रेणु)।
यहाँ ‘नहीं का प्रयोग तीन स्थानों पर बोली की तीन भिन्न शैलियों में, तीन भिन्न अर्थों को व्यक्त करते हुए हुआ है। इन तीनों स्थानों पर इस शब्द के उच्चरित होने वाले स्वरों की मात्रा की भिन्नता और भी आकर्षक है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

प्रश्न 13.
सम्बन्धसूचक अव्यय क्या है ?
उत्तरः
सम्बन्धसूचक या सम्बोधन अव्यय (Preposition) :- जिन अव्यय का प्रयोग वाक्य में किसी संज्ञा या सर्वनाम के साथ आकर वाक्य के किसी दूसरे शब्द के सम्बन्ध को सूचित करने के लिए किया जाता है, उसे सम्बन्धबोधक अव्यय कहते हैं । जैसे-रमेश अपने भाइयों सहित रहता है । कमला के बिना सबकुछ शून्य है।
इसमें ‘सहित’ और बिना, सम्बन्धसूचक अव्यय हैं, जो सम्बन्ध बताते हैं।

प्रश्न 14.
समुच्चयबोधक अव्यय की परिभाषा सोदाहरण लिखें ।
उत्तरः
जो अव्यय दो शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को मिलाते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं जैससे- मुकेश और सुदेश परम मित्र हैं । उसने कहा पर नहीं आया । ऊपर दोनों वाक्यों में ‘और’ तथा पर’ क्रमशः दो शब्दों और उपवाक्यों को जोड़ रहे हैं, इसलिए ‘और’ तथा पर’ समुच्चयबोधक अव्यय हैं।

प्रश्न 15.
समुच्चयबोधक अव्यय के भेदों के नाम लिखें ।
उत्तरः
समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद हैं –
1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक।

प्रश्न 16.
टिप्पणी लिखें :-
(क) स्वरूपबोधक व्यधिकरण
(ख) सम्बोधनसूचक शब्द
(ग) सादृश्यमूलक शब्द
(घ) प्रश्नसूचक शब्द
(ङ) निषेधसूचक शब्द
(च) संशयमूलक शब्द।
उत्तरः
(क) स्वरूपबोधक व्यधिकरण :- जिस अव्यय से प्रथम शब्द या उपवाक्य का स्पष्टीकरण द्वितीय शब्द या उपवाक्य से होता है, उसे स्वरूपबोधक व्यधिकरण कहते हैं। जैसे-अपने गुरुजन की पूजा करना अर्थात् ईश्वर की पूजा करना है । यहाँ ‘अर्थात्’ स्वरूपबोधक है ।
इसी प्रकार – माने, यानी, याने, कि, जो आदि भी स्वरूपबोधक हैं।
(ख) सम्बोधनसूचक शब्द :-जिन शब्दों का प्रयोग किसी को सम्बोधित करने के लिए किया जाता है, उन्हें सम्बोधनसूचक शब्द कहते हैं । जैसे – हे, अरं, ओ, रे आदि । हे राम ! सुनो। अरे! यह क्या किया । अरे भाई! यहाँ बैठो।
(ग) सादृश्यमूलक शब्द :- सादृश्यमूलक शब्द उनको कहते हैं, जिनका प्रयोग तरह, सामान्य, जैसा, सादृश्य आदि के द्वारा किया जाता है । जैसे-वह राम की तरह है । तुम अपने पिता जैसे हो।
(घ) प्रश्नसूचक शब्द :- जिन शब्दों का प्रयोग प्रश्न के रूप में आता है, उनको प्रश्नसूचक शब्द कहते हैं। जैसे-क्यों ? क्या ? क्यों नहीं ? जैसे-क्या तुम देखते रहते हो ? क्यों कायर की तरह जा रहे हो ?
(ङ) निषेधसूचक या असम्मतिसूचक :- जिन शब्दों का प्रयोग असम्मति या निषेध के रूप में किया जाता है, उनको असम्मतिसूचक अथवा निषेधसूचक कहते हैं । जैसे- नहीं, न, मत, ना, बिल्कुल नहीं आदि ।
उदाहरण – राम और श्याम एक जैसे नहीं है । मैं नहीं जा सकता।
(च) संशयमूलक शब्द :-जिस शब्द से संशय या संदेह का बोध होता है, उसे संशयमूलक शब्द कहते हैं। जैसे-शायद, सम्भवतः आदि । उदाहरण-शायद कल वर्षा हो । हो सकता है राम आज आए ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

प्रश्न 17.
सापेक्ष शब्द-युग्म से क्या तात्पर्य है ?
उत्तरः
सापेक्ष शब्द-युग्म से तात्पर्य उन शब्दों से है, जो जोड़े में आते हैं । युग्म या जोड़े के शब्दों में एक शब्द दूसरे पर आधारित रहता है । जिन वाक्यों में सापेक्ष युग्म शब्दों का उपयोग होता है, उनमें दो वाक्यांश रहते हैं और दोनो इन शब्दों द्वारा जुड़े रहते हैं; जैसे-ज्यों-ज्यों, ऐसा-वैसा, जिधर-उधर, जहाँ-वहाँ, जैसा-वैसा, जितना-उतना, जो-सो, या तो, ना तो आदि । जैसे तुम दूसरों से जैसे अपेक्षा करते हो, वैसे ही दूसरे तुमसे । जिधर जाओगे, उधर ही तुम्हारा स्वागत होगा। जहाँ रहो, वहाँ की प्रतिष्ठा का ख्याल रखो । जैसा कर्म करोगे, वैसा फल मिलेगा आदि ।

प्रश्न 18.
सम्बन्धबोधक अव्यय के भेदों के नाम लिखें ।
उत्तरः
सम्बन्धबोधक अव्यय के भेद :-
(क) प्रयोग के अनुसार,
(ख) अर्थ के अनुसार और
(ग) व्युत्पत्ति के अनुसार।

प्रश्न 19.
प्रयोग के अनुसार सम्बन्धबोधक अव्यय के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
प्रयोग के अनुसार सम्बन्धबोधक अव्यय के दो भेद हैं – (1) सम्बद्ध और (2) अनुबद्ध।
1. सम्बव्ध सम्बन्धसूचक अव्यय :- जो अव्यय सम्बन्धसूचक संज्ञा अथवा कारक चिह्नों से सम्बद्ध होते हैं, उन्हें सम्बद्ध सम्बन्धसूचक अव्यय कहते हैं । जैसे-पशु की नाई, आपके पास, रमेश बिना, डर के मारे आदि ।
2. अनुबद्ध सम्बन्धसूचक अव्यय :- संज्ञा के विकृत रूप के साथ आने वाले सम्बन्धसूचक अव्यय को अनुबद्ध सम्बन्धसूचक अव्यय कहते हैं।
जैसे-साधियों सहित, कमरों तक, थैली भर आदि ।

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प्रश्न 20.
अर्थ के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के भेदों के नाम उदाहरणसहित लिखें ।
उत्तरः
अर्थ के अनुसार सम्बन्धसूचक अव्यय के निम्नलिखित भेद हैं –

  • कालवाचक – बाद, पश्चात्, पीछे, उपरान्त आदि ।
  • स्थानवाचक – ऊपर, नीचे, भीतर, पास, निकट आदि ।
  • दिशावाचक – ओर, तरफ, प्रति, आर-पार आदि ।
  • विषयवाचक – भरोसे, लेखे, नामक, बाबत आदि ।
  • विरोधवाचक – विपरीत, विरुद्ध, खिलाफ आदि ।
  • विनिमयवाचक – बदले, जगह, पलटे आदि ।
  • सादृश्यवाचक – जैसा, समान, सरीखा, बराबर आदि ।
  • तुलनावाचक – अपेक्षा, सामने, आगे आदि ।
  • सामनावाचक – द्वारा, जरिए, सहारे आदि ।
  • भिन्नतावाचक – अतिरिक्त, गैर, सिवा आदि।
  • सहकारवाचक – संग, साथ, सहित, समेत आदि ।
  • संग्रहवाचक – पर्यन्त, मात्र, भर, तक आदि ।
  • कार्यकालवाचक -लिए, कारण, हेतु, खातिर आदि ।

प्रश्न 21.
व्युत्पत्ति के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के भेदों के नाम उदाहरण सहित लिखें।
उत्तरः
व्युत्पत्ति के अनुसार सम्बन्धसूचक अव्यय के निम्नलिखित भेद हैं :-
1. मूल सम्बन्धसूचक – भर, तक, नाई, पर्यंत आदि ।
2. यौगिक सम्बन्धसूचक – अपेक्षा, मार्फत, समान, ऐसा, वैसा, बाहर, भीतर, पास, जाने, लिए आदि।

प्रश्न 22.
वाक्य में अन्वय करने वाले शब्दों का संक्षिप्त परिचय दें ।
उत्तरः
वाक्य में अन्वय करने वाले शब्द :- छोटे शब्द जो वाक्य में व्यवहतत होकर शब्द के साथ शब्द का, वाक्य के साथ वाक्य का अन्वय करते हैं अथवा सम्बन्ध स्थापित करते हैं, उन्हें अन्वयसूचक शब्द कहते हैं, जैसे हे, अरे, रे, नहीं, सदृश, क्यों, ना, हाँ, है आदि । इन शब्दों को पाँच भागों में बाँटा गया है, जिनका वर्णन नीचे दिया गया है –
सम्बोधन-सूचक :- इन शब्दों का उपयोग किसी के सम्बोधन के लिए होता है, जैसे – है, अरे, आओ, बढ़ो आदि । हे भगवन्, तुम सबके कष्टों को दूर करो । अरे, तुम कहाँ गये थे । अरे भाई, तुम्हारा मन्तव्य क्या है, बताओ तो । आओ, आगे बढ़ो, सब कष्ठ भगवान् दूर करेंगे ।
सादृश्य-मूलक :- इन शब्दों का उपयोग सादृश्य दिखाने के लिये होता है । जैसे-सदृश, समान । तुम्हारे सदृश उपकारी इस पृथ्वी पर कोई नहीं । गांधी के समान सत्यवादी आधुनिक युग में कौन हुआ ? पृथ्वी सदृश सहनशील कौन है ?
प्रश्न-सूचक :- इन शब्दों का प्रयोग प्रश्न करने के लिए होता है, जैसे – कौन, कैसा, कितना, क्यों, ताकि, तो आदि । कौन लड़का बिना पढ़े पास हो सकता है ? कितना खाओगे कि तुम्हारा पेट भरेगा ? कैसा कपड़ा पाने पर तुम संतुष्ट होगे ? आदि ?
निषेध या असम्मति सूचक :- इन शब्दों का प्रयोग असहमति या निषेध के लिए होता है, जैसे-न, नहीं, मत, अहँ, असम्भव, किसी प्रकार नहीं आदि । जैसे-सत्य और असत्य एक नहीं है । चाँद और सूरज की तुलना नहीं हो सकती। तुम मत जाओ । यह काम असम्भव है । मैं किसी प्रकार इस पर सहमत नहीं हूँ ।
संशय-मूलक :- इन शब्दों का प्रयोग संशय व्यक्त करने के लिए किया जाता है; जैसे शायद, यदि, न तो, जैसे आदि । शायद वह आये । यदि वह आये तो अच्छा हो । तुम न तो जाओगे न चुप रहोगे । दिसम्बर महीने में जैसे वर्षा होगी ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

प्रश्न 23.
व्यधिकरण समुच्चयबोधक क्या है ? इसके भेदों की परिभाषा उदाहरण सहित लिखें।
उत्तरः
व्यधिकरण समुच्चयबोधक :- जिन अव्ययों के योग से एक मुख्य वाक्य में एक से अधिक आश्रित वाक्य जोड़े जाते हैं, उन्हें व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे-तुमने कहा था कि वह कल आएगा। इस वाक्य में ‘कि व्यधिकरण है ।
व्यधिकरण समुच्चय के प्रमुख भेद – (क) कारणबोधक व्यधिकरण, (ख) उद्देश्यबोधक व्यधिकरण, (ग) संकेतबोधक व्यधिकरण और (घ) स्वरूपबोधक व्यधिकरण।
(क) कारणबोधक व्यधिकरण – जिस अव्यय से प्रथम उपवाक्य का कारण दूसरे के व्यापार अथवा अर्थ से ज्ञात होता है, उसे कारणबोधक व्यधिकरण कहते हैं । जैसे – राम सब कुछ जानता है, क्योंकि पास रहता है। यहाँ क्योंकि कारणबोधक व्यधिकरण है ।
इसी प्रकार – इसीलिए, जो, कि आदि भी कारणबोधक हैं।
(ख) उद्देश्यबोधक व्यधिकरण :-जिस अव्यय से दूसरे वाक्य के कार्य या व्यापार के उद्देश्य का बोध होता है, उसे उद्देश्यबोधक व्यधिकरण कहते हैं। जैसे-पिताजी रात-दिन काम में लगे रहते हैं, ताकि हम पढ़ सकें । यहाँ ‘ताकि उद्देश्यबोधक व्यधिकरण है ।
इसी प्रकार – कि, जो, इसलिए आदि भी उद्देश्यबोधक हैं ।

प्रश्न 24.
संकेतबोधक व्यधिकरण किसे कहते हैं ?
उत्तरः
संकेतबोधक व्यधिकरण :- जिस अव्यय से पहले उपवाक्य की घटना से दूसरे उपवाक्य की किसी घटना की सूचना देने का बोध होता है, उसे संकेतबोधक व्यधिकरण कहते हैं। जैसे-आप में दम है तो उसका सामना करें । यहाँ ‘तो’ संकेतबोधक व्यधिकरण है ।
इसी प्रकार – जो, यदि, तो, यद्यपि, तथापि, चाहे, परन्तु, कि आदि भी संकेतबोधक हैं।

प्रश्न 25.
समानाधिकारण समुच्चयबोधक से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
समानाधिकरण समुच्चयबोधक :- जो अव्यय दो मुख्य शब्दों या मुख्य वाक्यों को जोड़ता या अलग करता है, उसे समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे – राम और श्याम टहल रहे हैं। यहाँ और राम और श्याम दो शब्दों को जोड़ रहा है ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण अव्यय

प्रश्न 26.
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के भेदों की चर्चा करें ।
उत्तरः
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के निम्नलिखित मुख्य चार भेद हैं –
(क) संयोजक समानाधिकरण अव्यय :- जो अव्यय दो या दो से अधिक शब्दों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें संयोजक समानाधिकरण अव्यय कहते हैं । जैसे -वल बनाता है और प्रमोद बिगाड़ता है। नरेश एवं सुरेश पढ़ते हैं। इनमें ‘और तथा ‘एवं संयोजक समानाधिकरण अव्यय हैं।
कुछ अन्य संयोजक – तथा, व आदि ।
(ख) विभाजक समानाधिकरण अव्यय :-जो अव्यय दो या दो से अधिक वाक्यों में विभाजन करते हैं, उन्हें विभाजक समानाधिकरण कहते हैं। जैसे- यह पुस्तक सुनन्दा की है अथवा सुलेखा की । इसमें ‘अथवा विभाजक समानाधिकरण अव्यय है।
इसी प्रकार – या, वा, किंवा, कि, चाहे-चाहे, न-न, न कि, नहीं तो आदि भी विभाजक समानाधिकरण अव्यय हैं।
(ग) विरोधदर्शक समानाधिकरण अव्यय :- दो या अधिक वाक्यों में विरोध बतानेवाले अव्यय को विरोधदर्शक समानाधिकरण अव्यय कहते हैं ।जैसे-आप आए पर सुलेखा नहीं आई। यहाँ पर विरोधदर्शक समानाधिकरण अव्यय है।
कुछ अन्य विरोधदर्शक समानाधिकरण अव्यय :-किन्तु, लेकिन, परन्तु, बल्कि, वरन् आदि।
(घ) परिणामदर्शक समानाधिकरण अव्यय :- जिस समुच्चयबोधक अव्यय से किसी वाक्य का परिणाम दूसरे वाक्य पर पड़ता है, उसे परिणामदर्शक समानाधिकरण अव्यय कहते हैं। जैसे-वह सो रहा था, इसलिए खेलने न जा सका । इसमें इसलिए परिणामदर्शक है ।
इसी प्रकार अतः, सो, अतएव अदि भी परिणामदर्शक समानाधिकरण अव्यय है ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण क्रिया to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
क्रिया किसे कहते हैं ?
उत्तरः
क्रिया :- वह विकारी शब्द जिससे किसी काम का होना या करना जाना जाय, उसे किया (Verb) कहते है। जैसे – राम खाता है । अवन्तिका दौड़ती है । इसमें खाता’ है और दौड़ती’ है, ये दोनों क्रियाएँ हैं।

प्रश्न 2.
क्रियापद की परिभाषा लिखें ।
उत्तरः
क्रियापद :- जिस विकारी शब्द के द्वारा किसी वस्तु या व्यक्ति के सम्बन्ध में कुछ विधान किया जाता है, उसे क्रियापद कहते हैं।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया

प्रश्न 3.
धातु तथा क्रिया धातु में संबंध स्थापित करें ।
उत्तरः
(क) धातु और क्रिया का पारस्परिक संबंध :-
क्रिया के अन्त में ना’ को हटा देने के बाद जो उसका रूप बचता है, उसे धातु रूप कहते हैं। जैसे – करना कर; पढ़ना – पढ; चलना – चल; लिखना – लिख आदि ।
क्रिया के रूप में परिवर्तन के साथ ही धातु के रूप में भी परिवर्तन होता रहता है । इससे यह ज्ञात होता है कि धातु और क्रिया दोनों में गहरा संबंध है।

प्रश्न 4.
यौगिक धातु कितने प्रकार से बनता है ? उदाहरण सहित लिखें ।
उत्तरः
यौगिक धातु तीन प्रकार से बनता है –
मूल धातु और दूसरे मूल धातु के संयोग से जो यौगिक धातु बनता है, उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं । जैसे –

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया 1

मूल धातु में प्रत्यय लगने से जो यौगिक धातु बनता है, वह अकर्मक या सकर्मक या प्रेरणार्थक क्रिया होती है। जैसे-
मूल धातु + प्रत्यय = यौगिक धातु
जग + ना = जगना (अकर्मक क्रिया)
जग + अना = जगाना (सकर्मक क्रिया)
जग + वाना = जगवाना (प्रेरणार्थक क्रिया)

संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि शब्दों में प्रत्यय लगने से जो यौगिक धातु बनता है, उसे नाम धातु कहते हैं। जैसे-
संज्ञा / सर्वनाम / विशेषण + प्रत्यय = यौगिक धातु

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया 2

प्रश्न 5.
क्रिया के प्रमुख कार्यों का उल्लेख करें।
उत्तरः
क्रिया के निम्नलिखित प्रमुख कार्य है –
गतिशीलता या स्थिरता का बोध करना :- क्रिया किसी व्यक्ति / वस्तु की गतिशीलता या स्थिरता का बोध कराती है। जैसे-
लड़के दौड़ रहे हैं।
लड़कियाँ कूद रही हैं। गतिशीलता
मैंटहल रहा हूँ।
पक्षी वृक्ष पर बैठे हैं।
कुत्ता सोया हुआ है । स्थिरता
घोड़ा मरा पड़ा है ।

किसी काम के करने या होने का बोध कराना :- किया इस बात का बोध कराती है कि कोई काम जानबूझकर किया जा रहा है या स्वत: हो रहा है । जैसे-
मैं किताब पढ़ रहा हूँ।
(किये जाने का बोध)
हवा बह रही है।
(स्वत: होने का बोध)

समय का बोध कराना :-क्रिया समय का भी बोध कराती है । जैसे –
मैं पढ़ रहा हूँ ।
(वर्तमान समय का बोध)
मैं पढ़ रहा था।
(बीते समय का बोध)
मैं कल पढूँगा।
(आनेवाले समय का बोध)

शारीरिक स्थिति का बोध कराना :- किया से किसी की शारीरिक स्थिति का पता चलता है । जैसेवह तैर रहा है । मैं बैठा हूँ।
मानसिक स्थिति का बोध कराना :- क्रिया से मानसिक स्थिति का बोध होता है । जैसे-
श्याम रो रहा है ।
राम हँस रहा है ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया

प्रश्न 6.
क्रिया के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
किया के मुख्यत: दो भेद हैं –
1. सकर्मक क्रिया (Transitive Verb)
2. अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb)

प्रश्न 7.
टिप्पणी लिखें :- (क) सकर्मक क्रिया (ख) अकर्मक क्रिया ।
उत्तरः
सकर्मक क्रिया :- जिस किया के साथ कर्म हो या कर्म के रहने की संभावना हो, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – खाना, पीना, पढ़ना, लिखना, गाना, बजाना, मारना, पीटना आदि ।
उदाहरण :
वह आम खाता है ।
प्रश्न : वह क्या खाता है ?
उत्तर : वह आम खाता है ।
यहाँ कर्म (आम) है या किसी-न-किसी कर्म (भात, रोटी आदि) के रहने की संभावना है, अतःखाना सकर्मक क्रिया है।
अकर्मक क्रिया :- जिस क्रिया के साथ कर्म न हो या किसी कर्म के रहने की संभावना न हो, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे-
आना, जाना, हँसना, रोना, सोना, जगना, चलना, टहलना आदि ।
उदाहरण :
वह रोता है ।
प्रश्न : वह क्या रोता है ?
ऐसा न तो प्रश्न होगा और न ही इसका कुछ उत्तर
यहाँ कर्म कुछ नहीं है और न किसी कर्म के रहने की संभावना है, अतः रोना अकर्मक क्रिया है।
नोट- लेकिन, कुछ अकर्मक कियाओं-रोना, हँसना, सोना, जगना, टहलना आदि में प्रत्यय जोड़कर सकर्मक बनाया जाता है । जैसे-

रुलाना, हँसाना, सुलाना, जगाना, टहलाना आदि।
अकर्मक किया + प्रत्यय = सकर्मक क्रिया
रो.(ना) + लाना = रुलाना (वह बच्चे को रुलाता है ।)
जग (ना) + आना = जगाना (वह बच्चे को जगाता है ।)

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया

प्रश्न :
वह किसे रुलाता/जगाता है ?
उत्तर :
वह बच्चे को रुलाता/जगाता है ।
अकर्मक क्रिया के कुछ अन्य उदाहरण :-
(ख -i) मौलिक (Monosyllabic) मूलाधातु-एकाक्षरीय -मूल क्रिया (Root verb) – मूलधातुओं से बनी क्रिया को मूल क्रिया कहते हैं । जैसे – पढ़ से पढ़ना, चल से चलना, खा से खाना, इत्यादि।
(ख-ii) यौगिक (Polysyllabic) साधितु-बहुक्षरीय – यौगिक क्रिया (Compound Verb) – दो या दो से अधिक धातुओं और अन्य शब्दों के योग से बनी क्रिया को यौगिक क्रिया कहते हैं ।जैसे – कर सकना, पढ़ लेना, दौड़ जाना इत्यादि । क्रिया और धातु से बनी) बतियाना, थरथराना, तड़पना आदि यौगिक (संयुक्त) क्रियाएँ संज्ञा से बनी हैं।

प्रश्न 8.
यौगिक क्रिया के भेदों का नामोल्लेख करें ।
उत्तरः
यौगिक क्रिया के भेद हैं –
(क) प्रेरणार्थक क्रिया
(ख) संयुक्त क्रिया
(ग) अनुकरणमूलक या ध्वनिमूलक (ध्वन्यात्मक) क्रिया।

प्रश्न 9.
टिप्पणी लिखें –
(क) प्रेरणार्थक क्रिया
(ख) संयुक्त क्रिया
(ग) नामधातु क्रिया और
(घ) अनुकरणमूलक या ध्वनिमूलक क्रिया ।
उत्तरः
(क) प्रेरणार्थक क्रिया :- जिस क्रिया से यह ज्ञात हो कि कर्ता स्वयं कार्य न कर किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, तो उस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे-
माँ दाई से बच्चे को दूध पिलवाती है।
(पिलवाना-प्रेरणार्थक क्रिया)
राम श्याम से पत्र लिखवाता है।
(लिखवाना-प्रेरणार्थक क्रिया)
प्रेरणार्थक क्रिया भी दो तरह के होते हैं-प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया । अब मूल क्रिया (धातु) से बनी प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया की एक संक्षिप्त सूची को देखें-

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया 3

(ख) संयुक्त क्रिया (Compound Verb) :- जिस क्रिया का निर्माण दो या दो से अधिक क्रियाओं के योग से होता है, उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे – कर डालना, कर सकना, पा लेना, चल देना, पढ़ चुकना आदि । इसमें प्रथम क्रियाएँ – दे, कर, पा, चल, और पढ़ – मुख्य क्रियाएँ हैं और कर डालना, कर सकना, लेना, देना और चुकना- सहायक क्रियाएँ हैं ।

संयुक्त क्रिया बनाने में प्राय: निम्नलिखित क्रियाओं की सहायता ली जाती है – चुकना, सकना, उठना, बैठना, आना, जाना, देना, लेना, करना, चाहना, बताना, रहना, पाना, होना, डालना, पढ़ना आदि ।

कुछ उदाहरण :- राणा पढ़ने लगा है । अशोक खा चुका है । सरला आ गई है । ऊपर के उदाहरणों में पढ़ने लगा है, खा चुका है और आ गई है संयुक्त क्रिया है ।
(ग) अनुकरणमूलक या ध्वन्यात्मक (ध्वनिवाचक) क्रिया (Onomatopoeia Verb) -जो क्रिया किसी ध्वर्नि के अनुकरण पर बनाई जाती है, उसे अनुकरणमूलक या ध्वन्यात्मक क्रिया कहते हैं । जैसे-

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया 4

प्रश्न 10.
संयुक्त क्रिया कितने प्रकार की है ?
उत्तरः
संयुक्त क्रियाएँ अनेक प्रकार की हैं । अर्थ के अनुसार संयुक्त क्रियाओं के निम्नलिखित भेद हैं –

  • निश्चयबोधक
  • इच्छाबोधक
  • शक्तिबोधक
  • आरम्भबोधक
  • नित्यताबोधक
  • अवकाशबोधक
  • अभ्यासबोधक
  • पूर्णताबोधक
  • तत्कालबोधक
  • परतन्त्रताबोधक
  • योग्यताबोधक
  • पुनरुक्त संयुक्त क्रिया
  • अनुमतिबोधक ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण क्रिया

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :-

  1. निश्चयबोधक
  2. इच्छाबोधक
  3. शक्तिबोधक
  4. आरंभबोधक
  5. नित्यताबोधक
  6. अवकाशबोधक
  7. अभ्यासबोधक
  8. पूर्णताबोधक
  9. तत्कालबोधक
  10. परतंत्रताबोधक
  11. योग्यबोधक
  12. पुनरुक्त संयुक्त क्रिया
  13. अनुमतिबोधक।

उत्तरः

  1. निश्चयबोधक :- इस मुख्य क्रिया से कार्य की निश्चयता का बोध होता है । जैसे – वह उठ गया है। मैं तोड़ डालूँगा ।
  2. इच्छाबोधक :- इस संयुक्त क्रिया से कार्य करने की इच्छा का बोध होता है । जैसे – मैं जानना चाहता हूँ। वह कहना चाहता है ।
  3. शक्तिबोधक :-इस संयुक्त क्रियाओं की रचना धातु के आगे ‘सकना’ जोड़ने से होती है। जैसे-वह चल सकत। ने. तुम दौड़ सकते हो ।
  4. आरम्भबोधक :- इस संयुक्त क्रिया से कार्य के आरम्भ होने का बोध होता है । जैसे-लतिका दौड़ने लगी । प्रकाश पान लगा । (इसमें ना’ को ‘ने’ कर देते हैं।)
  5. नित्यताबोधक :- इस संयुक्त क्रिया से कार्य की नित्यता अर्थात् निरन्तरता का बोध होता है। जैसे अखिल श चान भर चलता रहा। बच्चा घण्टों रोता रहा।
  6. वकाशबोधक :- इस संयुक्त क्रिया से कार्य के सम्पन्न होने में कठिनता का बोध होता है। जैसे- मैं लिख नहीं पणा उम्ने परिता को जाने दिया ।
  7. अभ्यासबोधक :- इस संयुक्त क्रिया से अभ्यास का बोध होता है । जैसे-वह लिखा करता है । आप गाया करते हैं।
  8. पूर्णताबोधक (समाप्तिबोधक) :- इस संयुक्त क्रिया से कार्य की पूर्णता या समाप्ति का बोध होता है । जैसे-रंजन पढ़ चुका है। नन्दिता खा चुकी है।
  9. तत्कालबोधक :- इस संयुक्त क्रिया से तत्काल का बोध होता है। जैसे- तुम्हें सावधान किए देता हूँ। वह अपना धन दिए डालता है।
    (इस सामान्य भूतकाल की क्रिया के ‘आ’ को ‘ए करके ‘देता’ और ‘डालना’ कियाओं का रूप लगाते हैं।)
  10. परन्तन्रताबोधक :- संयुक्त क्रिया के इस रूप से परतन्त्रता का बोध होता है । जैसे – नागपाल को जाना पड़ा । उसे स्टेशन पर रहना पड़ा।
  11. योग्यताबोधक :- इन संयुक्त क्रियाओं से योग्यता का बोध होता है । जैसे- आप से लिखते नहीं बनता। उससे चलते नहीं बनता।
    (इनमें वर्तमानकालिक कृदन्त के ‘आ को ए करके बनना क्रिया लगाते हैं ।)
  12. पुनरूक्त संयुक्त क्रिया :- इस संयुक्त क्रिया में समान ध्वनि या समानार्थक क्रियाओं का मेल होता है। जैसे-आप आते-जाते रहिएगा । राकेश पहले आया-जाया करता था।
  13. अनुमतिबोधक :-इस संयुक्त क्रिया से अनुमति का बोध होता है। जैसे-बच्चों को खेलने दो। मुझे सोने दो।

प्रश्न 12.
नाम धातु क्रिया बनाने के नियमों को लिखें ।
उत्तरः
नाम धातु क्रिया बनाने के निम्नलिखित नियम हैं –
नामधातु क्रिया बनाने में नाम में आ’ अथवा या’ प्रत्यय लगाते हैं। शब्द का पहले दीर्घ स्वर हसस्व हो जाता है।’या प्रत्यय के परे होने पर अकारान्त (अ) का इकारान्त (इ) हो जाता है। जैसे-

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कुछ नाम ही सीधे नामधातु के समान प्रयोग में आते हैं । जैसे-

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कुछ नामधातु अनुकरणवाचक (ध्वनिवाचक) शब्दों से बनते हैं । जैसे-

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प्रश्न 13.
असमापिका क्रिया के कितने भेद हैं ? नाम लिखें ।
उत्तरः
असमापिका क्रिया के तीन भेद हैं –
(क) तात्कालिक क्रिया
(ख) अपूर्ण क्रिया और
(ग) पूर्वकालिक क्रिया।

प्रश्न 14.
टिप्पणी लिखें :-
(क) तात्कालिक क्रिया
(ख) अपूर्ण क्रिया
(ग) पूर्वकालिक क्रिया।
उत्तरः
(क) तात्कालिक क्रिया :- जिस असमापिका क्रिया से यह जाना जाय कि कर्ता के कार्य के समाप्त होते ही दूसरा कार्य भी समाप्त हो गया, उसे तात्कालिक क्रिया कहते हैं। जैसे-तुम्हारे पहुँचते ही वह चला गया। अध्यापक को देखते ही छात्र भाग गये ।
ऊपर के दोनों वाक्यों में कार्य एक के बाद दूसरा तत्काल होता है और क्रिया में ‘ते ही’ का योग हुआ है । इसलिए पहुँचते ही’ और ‘देखते ही’ तात्कालिक क्रियाएँ है ।
(ख) अपूर्ण क्रिया :- जिस असमापिका क्रिया से यह ज्ञात हो कि वाक्य में मुख्य क्रिया के पहले होने वाली क्रिया अपूर्ण है, उसे अपूर्ण असमापिका क्रिया कहते हैं।जैसे-श्रीधर ने तुम्हें जाते हुए देखा । मैंने साँप को भागते देखा । इन वाक्यों में ‘जाते हुए’ और ‘भागते’ अपूर्ण क्रियाएँ हैं। धातु के आगे ‘ते’ और ‘हुए’ लगाकर ये क्रियाएँ बनाई जाती हैं।
(ग) पूर्वकालिक क्रिया :-क्रिया का वह रूप जिससे मुख्य क्रिया के पहले होनेवाले कार्य की समाप्ति का बोध हो, उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं । जैसे – राधा खाकर बैठी। ममता पढ़के उठी । इसमें धातु के आगे ‘कर, ‘करके’ और के’ जोड़कर पूर्वकालिक किया बनाते हैं।

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प्रश्न 15.
सकर्मक और अकर्मक क्रिया की पहचान कैसे की जा सकती है ?
उत्तरः
‘क्या’ लगाकर प्रश्न करने पर यदि उत्तर मिलता है, तो वह सकर्मक क्रिया होती है और उसका उत्तर न मिलने पर अकर्मक क्रिया होती है । जैसे-
अकर्मक क्रिया :- राम सोया । क्या’ सोया ? इसका उत्तर नहीं मिलता है। कौन सोया ? इसका ही उत्तर मिलता है – राम । इसलिए ‘सोया’ (सोना) क्रिया अकर्मक है ।
सकर्मक क्रिया (माध्यमिक परीक्षा – 2011) :- राम ने आम खाया । क्या खाया ? उत्तर है – ‘आम’। इसलिए ‘खाया’ (खाना) क्रिया सकर्मक है ।
विशेष द्रष्टव्य :- कुछ क्रियाए प्रयोग के अनुसार सकर्मक और अकर्मक रूपों में आती है, इन्हेंडभयविधि धातु कहते हैं। जैसे – ऐंठना, ललचाना, खुजलाना, घबराना, बदलना, घिसना आदि ।
उदाहरण –

अकर्मक
मेरा सिर खुजलाता है ।
मेरा मन ललचाता है।

सकर्मक
राम मेरा सिर खुजलाता है ।
वह मुझे ललचाता है ।

प्रश्न 16.
सकर्मक क्रिया के कितने भेद हैं ? परिभाषा तथा उदाहरण लिखें ।
उत्तरः
सकर्मक क्रिया के दो भेद हैं – (क) पूर्ण सकर्मक, (ख) अपूर्ण सकर्मक।
(क) पूर्ण सकर्मक क्रिया :-जिस क्रिया का अर्थ (आशय) एक ही कर्म से प्रकट होता है, उसे पूर्ण सकर्मक किया कहते हैं । जैसे – कला दूध पीती है । यहाँ पीने वाली कला है और पीने का प्रभाव दूध कर्म पर पड़ता है, इसलिए यह पूर्ण सकर्मक क्रिया है
(ख) अपूर्ण सकर्मक क्रिया :- जिस सकर्मक क्रिया का आशय एक कर्म से पूरा नहीं होता और आशय की पूर्ति के लिए वाक्य में कुछ और पद आवश्यक हो जाते हैं, उसे अपूर्ण सकर्मक क्रिया कहते हैं । जैसे – देना, बनाना, मानना, बतलाना, कहना, सिखाना, पूछना आदि ।
उदाहरण :- नगेन्द्र ने भूखों को भोजन दिया । इसमें दो कर्म हैं – ‘भूखों’ और ‘भोजन’ । इसलिए यह अपूर्ण सकर्मक क्रिया है।

प्रश्न 17.
अपूर्ण सकर्मक क्रिया के भेद-उपभेद को परिभाषा तथा उदाहरण सहित लिखें ।
उत्तरः
अपूर्ण सकर्मक क्रिया के दो भेद हैं – (1) द्विकर्मक और (2) कर्मपूर्तियुक्त क्रिया (Objective Complement)।
द्विकर्मक क्रिया :- जिस सकर्मक क्रिया को अपना अर्थ पूरा करने के लिए दो कर्मों की आवश्यकता होती है, उसे द्विकर्मक किया कहते हैं। जैसे- पुत्री ने पिता को पत्र दिया । यहाँ ‘पिता’ और ‘पत्र दो कर्म हैं। इसमें प्रथम कर्म प्राणिवाचक और दूसरा कर्म अप्राणिवाचक होता है। क्रिया का लिंग, वचन आदि ऐसी द्विकर्मक क्रियाओं में अप्राणिवाचक कर्म के अनुसार ही होते हैं।
इस प्रकार इसमें दो कर्म हुए – (क) मुख्य कर्म (Direct Object) और (ख) गौण कर्म (Indirect Object)।
(क) मुख्य कर्म (Direct Object) :- जिस कर्म के अनुसार क्रिया का लिंग, वचन आदि होता है, उसे मुख्य कर्म कहते हैं । यह बहुधा वस्तुबोधक (अप्राणिवाचक) होता है । जैसे-मनीष ने प्रियशील को पुस्तक दी।

ऊपर के उदाहरण में पुस्तक मुख्य कर्म है – व्योंकि क्रिया का लिंग आदि इसी अप्राणिबोधक (वस्तुबोधक) कर्म के अनुसार है – एकवचन, स्त्रीलिंग ।
(ख) गौण कर्म (Indirect Object) :- जब किसी वाक्य में दो कर्म हों और उसमें से जिस कर्म के अनुसार क्रिया का लिंग, वचन आदि न हो, उसे गोण कर्म कहते है । जैसे-ऊपर के उदाहरण में मनीष ने प्रियशील को पुस्तक दी । यहाँ प्रियशील गौण कर्म है, क्योंकि इसके अनुसार क्रिया का लिंग, वचन आदि नहीं हैं। ऐसे कर्म कोप्राणिबोधक कर्म भी कहते हैं।

कर्मपूर्तियुक्त क्रिया (Objective Complement) :- जिस सकर्मक क्रिया का अर्थ कर्म रहने पर भी पूरा नहीं होता और अर्थ की पूर्ति के लिए किसी संज्ञा या विशेषण की सहायता लेनी पड़ती है, उसे कर्मपूर्तियुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे – मैने तुम्हें मन्त्री बनाया । यहाँ बनाया कर्मपूर्तियुक्त क्रिया है और मन्त्री कर्मपूरक है।
कुछ अन्य उदाहरण :- मैं आपको अपना मित्र मानता हूँ । बच्चों ने तुमकों नेता बनाया ।

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प्रश्न 10.
कर्मक क्रिया के कितने भेद हैं ? परिभाषा तथा उदाहरण लिखें ।
उत्तरः
अकर्मक 1 ‘Intransitive Verb) के दो भेद है – (1) पूर्ण अकर्मक किया और (2) अपूर्ण अकर्मक क्रिया ।
पूर्ण अकर्मक या :- जो अकर्मक क्रिया अपना अर्थ बिना किसी संज्ञा या विशेषण के पूरा करती है, उसे पूर्ण अकर्मक क्रिया कहां है।जैसे – हाथी आता है । इसमें हाथी कर्ता के द्वारा ही कार्य की पूर्ति (आता है’) हो रही है । इसलिए ‘आता है’ क्कया पूर्ण अकर्मक है ।

अपूर्ण अकर्मक क्रिया :- जिस अकर्मक क्रिया को अर्थ की पूर्ति के लिए कर्ता के आत्तिक्त किसी अन्य संज्ञा या विशेषण की आवश्यकता होती है, उसे अपूर्ण अकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे ॠचा चालाक है । इसमें अपूर्ण अकर्मक क्रिया है, जिसका अर्थ चालाक पूरक (Complement) के द्वारा पूरा होता है ।

बनना, दिखना, निकलना, ठहरना, दीखना, होना, रहना आदि कुछ ऐसी अकर्मक क्रियाएँ है जां बिना किसी सहायता के अपना अर्थ पूरा कर लेती हैं (विशेष अर्थ में) । जैसे – रमेश सज्जन दीखता है ।

सजातीय कर्म (Cognate Object) :- जब कोई अकर्मक क्रिया अपनी ही धातु से बने कर्म के साथ आती है तो वह सकर्मक हो जाती है और उसे सजातीय क्रिया तथा उससे बने कर्म को सजातीय कर्म कहते हैं। जैसे-उसने दौड़ दौड़ी। यहाँ ‘दौड़ी सजातीय क्रिया है और ‘दौड़’ सजातीय कर्म है।
कुछ अन्य उदाहरण :- लड़ाइयाँ लड़ी । खेल खेले । काम किया आदि ।

प्रश्न 19.
अकर्मक से सकर्मक बनाने के कौन-कौन से नियम हैं ?
उत्तरः
अकर्मक से सकर्मक बनाने के निम्नलिखित नियम हैं-

  1. कुछ अकर्मक कियाओं मे पहला स्वर दोर्घ करके सकर्मक बनाते है, जैसे – चटना- चाटना; मरना-मारना; तरना-तारना आदि ।
  2. कभी-कभी अकर्मक क्रियाओं के दूसरे वर्ण का स्वर दीर्घ करके सकर्मक बनाते हैं । जैसे-चलना-चलाना; उखड़ना-उखाड़ना; निकलना-निकालना आदि ।
  3. कुछ अकर्मक क्रियाओं के अन्त में ‘ए’ या ‘ओ’ होता है तो ‘ए” के लिए इ’ और ‘ओं के लिए ‘उ’ का प्रयोग करके सकर्मक क्रिया बनाते हैं । जैसे-देखना-दिखाना; बोलना-बुलाना आदि।
  4. कुछ अकर्मक क्रियाओं के पहले ‘ई और उ’ को क्रमश: ए’ और ‘आं करके सकर्मक बनाते हैं । जैसे छुटना – छोड़ना; दूटना-तोड़ना; खुलना-खोलना आदि।
  5. कुछ अकर्मक क्रियाओं से सकर्मक क्रियाएँ अनियमित रूप से बनाई जाती हैं। जैसं-रहना से रखना, सिलना से सीना आदि ।

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प्रश्न 20.
विधि क्रिया के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
विधि क्रिया के दो भेद हैं –
(क) सामान्य विधि (प्रत्यक्ष विधि) और
(ख) असामान्य विधि (परोक्ष विधि)।

प्रश्न 21.
टिप्पणी लिखें :- (क) सामान्य विधि क्रिया (ख) कर्म (ग) पूरक (घ) सहायक क्रिया (ङ) विधि क्रिया (च) द्विकर्मक क्रिया (छ) क्रियार्थक क्रिया।
उत्तरः
(क) सामान्य विधि क्रिया (प्रत्यक्ष विधि) :- समापिका क्रिया के जिस रूप से प्रार्थना, आज्ञा, उपदेश आदि का प्रत्यक्ष या सामान्य ज्ञान होता है, उसे सामान्य विधि (प्रत्यक्ष विधि) कहते हैं। जैसे – आप इधर बैठें । तुम ऊपर जांओ ।
असामान्य विधि क्रिया (अप्रत्यक्ष विधि) :- क्रिया के जिस रूप से आज्ञा, उपदेश, प्रार्थना आदि का परोक्ष या अप्रत्यक्ष बों होता है, उसे असामान्य विधि (अप्रत्यक्ष-विधि) कहते हैं। जैसे- तुम उससे मिलते रहना। आप आंते रहियेगा ।
(ख) कर्म :- वाक्य में सकर्मक क्रिया होने पर क्रिया का फल जिस पर पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं ।जैसे-आपने उसको फल दिया । इसमें उसको और फल दो कर्म हैं । इसमें अप्राणिबोधक फल की ही प्रधानता है ।
(ग) पूरक :- वाक्य में जब कर्त्ता या कर्म अपना अर्थ पूरा नहीं कर पाता है और अर्थ की पूर्ति के लिए किसी संज्ञा या विशेषण की सहायता लेता है, तो उस संज्ञा या विशेषण को पूरक कहते हैं। जैसे-राम ने मुझे मूख बनाया। मूख विशेषण की सहायता से वाक्य के अर्थ की पूर्ति होती है, इसलिए ‘मूखं पूरक है।
(घ) सहायक क्रिया :- मुख्य क्रिया की सहायता करने वाली क्रिया को सहायक क्रिया कहते हैं । जैसे –
हूं, है, हैं, रहा, रही, रहे, था, थे, थी, थी आदि ।
उदाहरण :-
मैं खा रहा हू । (रहा, हूँ-सहायक क्रिया)
वह पढ़ता है ।
(है-सहायक क्रिया)
यहाँ मुख्य क्रिया ‘खाना’ और ‘पढ़ना’ है, जिसकी सहायता सहायक क्रिया कर रही है।
मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया के संबंध में कुछ और बाते हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है-
किसी वाक्य में सहायक क्रिया हो या न हो, एक मुख्य किया अवश्य होती है । जैसे-
वह पटना गया ।
(जाना-मुख्य क्रिया)
उसने शुभम् से कहा ।
(कहना-मुख्य क्रिया)

हूँ, है, हैं, था, थे, थी, थीं आदि सहायक क्रियाएँ हैं, लेकिन किसी वावय में कोई दूसरी क्रिया न हो, तो इनमें से कोई मुख्य क्रिया बन जाती है । जैसे-
में खाता हूँ।
(हूँ-सहायक क्रिया)
मैं अच्छा हूँ ।
(हूँ-मुख्य क्रिया)
उसने खाया है ।
(है-सहायक क्रिया)
उसके पास एक कलम है।
(है-मुख्य क्रिया)

संयुक्त क्रिया में प्रथम क्रिया मुख्य क्रिया होती है और बाकी सहायता करने वाली सहायक क्रिया’ । जैसे-
वह बैठ गया था।
(बैठ गया-संयुक्त किया)
वह खा रहा है ।
(खा रहा-संयुक्त क्रिया)
यहाँ, ‘बैठ’ (बैठना) एब ‘खा (खाना) मुख्य क्रियाएँ है । गया’ (जाना), ‘था, ‘रहा’ (रहना) एवं है’-सहायक कियाएँ हैं ।

नोट – गा, गे, गी को कुछ लोग भ्रमवश सहायक क्रिया समझते हैं, लेकिन ये सहायक क्रियाएँ नहीं हैं । ये प्रत्यय हैं । जैसं-
मै खाऊँगा । (मुख्य क्रिया – खाना) (सहायक किया – 0 )
ऊपर प्रयुक्त खाऊँगा क्रिया में मूल धातु खा है और इसमें दो प्रत्यय जुड़े हुए हैं- ऊँ एवं गा’ अर्थात्खा (मूलधातु ) + ऊँ (पहला प्रत्यय) + गा (दूसरा प्रत्यय) = खाऊँगा ।

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(ङ) विधि क्रिया :-क्रिया के जिस रूप से आज्ञा, अनुमति, अनुरोध, प्रार्थना, उपदेश आदि का बोध हो, उसे विधि क्रिया कहते हैं। जैसे-
आज्ञा : अन्दर आओ ।
(आओ-विधि क्रिया)
प्रार्थना : हे ईश्वर, मेरी सहायता करो।
(करो-विधि क्रिया)
उपदेश : बड़ों का कहना मानो।
(मानो-विधि क्रिया)
अनुरोध : कृपया मेरे यहाँ जरूर आइए ।
(अएए-विधि किया)
(च) द्विकर्मक क्रिया :- जिस क्रिया के दो कर्म होते हैं, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं । जैसे-
शिक्षक विद्यार्थी को पढ़ाते हैं।
(एक कर्म-विद्यार्थी)
शिक्षक विद्यार्थी को हिन्दी पढ़ाते हैं।
(दो कर्म-विद्यार्थी एवं हिन्दी)
प्रथम वाक्य में पढ़ाना क्रिया का एक कर्म है, लेकिन दूसरे वाक्य में पढ़ाना क्रिया के दो कर्म हैं, अतः द्वितीय वाक्य में प्रयुक्त ‘पढ़ाना’ क्रिया द्विकर्मक क्रिया कहलाएगी ।

क्रियार्थक क्रिया :- जिस क्रिया का प्रयोग मुख्य किया के पहले संज्ञा के रूप में होता है, उसे क्रियार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे –
टहलना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है ।
(क्रियार्थक क्रिया-टहलना)
वह टहलने गया ।
(क्रियार्थक क्रिया-टहलने)
वह टहलने के लिए गया है ।
(क्रियार्थक क्रिया-टहलने के लिए)

प्रश्न 22.
क्रिया की सोदाहरण परिभाषा लिखें ।
उत्तरः
क्रिया का वह रूपान्तर, जिससे क्रिया के व्यापार का समय, उसकी पूर्ण अथवा अपूर्ण अवस्था का बोध हो, काल (क्रिया का काल) कहा जाता है । जैसे- (1) वह सोता है । (2) वह सोता था। (3) वह सोयेगा।
वह सोता है – इसमें कार्य-व्यापार वर्तमान समय में हो रहा है ।
वह सोता था – इसमें व्यापार (सोता था) बीते समय में हुआ है ।
वह सोयेगा – इसमें व्यापार (सोयेगा) आने वाले समय में होगा।

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प्रश्न 23.
क्रिया का रूपान्तर किसे कहते हैं ? इसके प्रकार का वर्णन करें ।
उत्तरः
क्रियाओं के रूप वाच्य, काल, पुरुष, लिंग, वचन और प्रकार के कारण रूपान्तरित होते हैं, इन्हें क्रिया का रूपान्तर कहते हैं। जैसे-
वाच्यकृत विकार :- सन्तन पुस्तक पढ़ता है । सन्तन से पुस्तक पढ़ी जाती है ।
कालकृत विकार :- वह खाता है । वह खाएगा । वह खा रहा था ।
पुरुषकृत विकार :- मैं खाऊँगा । तुम खाओगे । वे खायेंगे।
लिंगकृत विकार :- ज्योत्स्ना सोती है । जगत सोता है ।
वचनकृत विकार :- यह दौड़ता है। वे दौड़ते हैं।

प्रश्न 24.
टिप्पणी लिखें :- (क) पूर्वकालिक क्रिया (ख) विशेषणार्थक क्रिया ।
उत्तरः
(क) पूर्वकालिक क्रिया (Perfect Participle) :- क्रिया का वह रूप जहाँ कर्ता एक काम समाप्त कर दूसरा कार्य किसी काल में करे तो पहली क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है । जैसे-नरोत्तम खाकर सोता है । तुम उठकर कहाँ चले ? वह पढ़कर बैठा है । इनमें ‘खाकर, उठकर और पढ़कर पूर्वकालिक क्रियाएँ हैं ।

(ख) विशेषणार्थक क्रिया या क्रियाद्योतक संज्ञा :- जिस क्रिया-रूप से क्रिया और विशेषण दोनों का भाव प्रकट हो, उसे विशेषणार्थक क्रिया या क्रियाद्योतक संज्ञा कहते हैं । जैसे-वह चलते- चलते थक गया । रतन पढ़तेपढ़ते उठ गया । इनमें चलते-चलते’ और ‘पढ़ते-पढ़ते’ विशेषणार्थक कियाएँ (क्रियाद्योतक संज्ञा) हैं।

प्रश्न 38.
क्रिया का भाव किसे कहते हैं ? इसके भेद को परिभाषा व उदाहरण सहित लिखें ।
उत्तरः
क्रिया का भाव (Mood) :- क्रिया के निज्नन्न होने की नीति को क्रिया का भाव कहा जाता है। यह दो प्रकार का है – (1) निर्देशक भाव (Indicative) और (2) अनुज्ञाभाव (Imnerative)।

1. निर्देशक भाव (Indicative) :- जब किसी काम को करने के लिए उसके होने, न होने, किसी प्रश्न अथवा विस्मय के द्वारा काम का निर्देश दिया जाता है, तो ऐसी क्रिया को निर्देशक क्रिया भाव कहा जाता है । जैसे – मैं प्रात: काल उठता हूँ । वाह ! मैंने तुम्हारा कारनामा देखा।
2. अनुज्ञा भाव (Imperative) :- जब किसी काम को करने के लिए अनुरोध, कामना, प्रार्थना, उपदेश, आदेश आदि दिया जाता है, तब वहाँ अनुजा भाव होता है । जैसे-वहाँ बैठो। सदा सत्य बोलो। हमेशा कुशल रहो। यह अनुज्ञा वर्तमान काल और भविष्यत् काल में पाया जाता है ।
वर्तमानकाल :- मेरे सामने बैठो । एक गाना गाओ।
भविष्यत्काल :- तुम कल आना । परसों काशी चले जाना ।

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प्रश्न 39.
क्रिया के काल के अनुसार क्रिया की विभक्ति का रूप-परिवर्तन कितने प्रकार से होता है?
उत्तरः
क्रिया के काल के अनुसार क्रिया की विर्भक्ति का रूप-परिवर्तन होता रहता है । यह तीन प्रकार का है –
(1) भूतकाल, (2) वर्तमानकाल, (3) भविष्यत्काल ।
1. भूतकाल :- भूतकाल की क्रिया के अन्त में या, ली, दी, या और ई लगाते हैं । जैसे – उसने खा लिया। मैंने परीक्षा दी।
2. वर्तमानकाल :- क्रिया के अन्त में ई, ए और अ लगाते हैं, जैसे-करती है । की है, किया है, आदि।
3. भविष्यत्काल :- भविष्यत्काल की क्रिया के अन्त में गा, गी, गे आदि लगाते है, जैसे – वह पढ़ेगा, राम जायेगा।

(ख) दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के नियमों का उल्लेख करें ।
उत्तरः
सकर्मक और अकर्मक क्रियाओं के धातु के अन्त में ‘आ’ जोड़ने से प्रथम प्रेरणार्थक और वा जोड़ने से द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया बनती है। आना, जाना, सकना, रुकना, चुकना, होना आदि कुछ अकर्मक क्रियाओं से प्रेरणार्थक क्रियाएँ नहीं बनतीं । आगे प्रेरणार्थक क्रियाओं के कुछ उदाहरण दिये गये हैं –

कर सकना, पढ़ लेना, दौड़ जाना इत्यादि क्रिया और धातु से बनी हैं। बतियाना, थरथराना, तड़पना आदि यौगिक (संयुक्त) कियाएँ संज्ञा से बनी हैं।
1. अकर्मक धातु से बने सकर्मक और प्रेरणार्थक रूप –

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2. यदि क्रिया का पहला अक्षर दीर्घ हो तो ऊपर के ‘आ’ और ‘वा’ प्रत्यय लगाते समय स्वर को हुस्व कर देते हैं-

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3. सकर्मक धातु में सभी क्रियाओं से (धातुओं से) ऊपर के नियमों के अनुसार ही प्रथम और द्वितीय प्रेरणार्थक क्रियाएँ बनती हैं –

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4. एक अक्षर वाली धातुओं में ‘ला और ‘लवा’ लगाकर प्रेरणार्थक क्रियाएँ बनाते हैं

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5. कुछ प्रेरणार्थक क्रियाएँ बिना नियम के बनती हैं –

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प्रश्न 2.
अर्थ या विकार की दृष्टि से क्रिया के भेदों की परिभाषा तथा उदाहरण लिखें ।
उत्तरः
अर्थ या विकार की दृष्टि से क्रिया के दो भेद हैं – (1) समापिका क्रिया (Finite Verb) और (2) असमापिका क्रिया (Verb of Incomplete Prediction) ।
समापिका क्रिया (Finite Verb) :- जिस क्रिया से कार्य की पूर्णता का बोध होता है, उसे समापिका क्रिया कहते हैं । जैसे-राम बैठा है । तुम गये । वह आया आदि।
इसमें वाक्य काल, पुरुष, लिंग और वचन के अनुसार विरक्ति लगाकर क्रिया बनाते हैं।

असमापिका क्रिया (Verb of Incomplete Prediction) :- इस क्रिया से अपूर्णता का बोध होता है। इसके कार्य की समाप्ति या सीमा नहीं होती । जैसे-वह दखते ही चला गया। वह पढ़ते ही रो उठा। इसमें देखतें’ और पढ़ते असमापिका क्रियाएँ हैं।
समापिका क्रिया के भेद (अवस्थाकृत भेद – Moods)
समापिका क्रिया के तीन भेद हैं – (क) साधारण समापिका क्रिया, (ख) सम्भाव्य समापिका क्रिया और (ग) आज्ञार्थक समापिका या विधि समापिका क्रिया।
(क) साधारण समापिका क्रिया :- किया का वह रूप जिससे किसी विधान का निश्चय जाना जाता है, उसे साधारण समापिका क्रिया कहतं हैं।जैसे-सुजाता ने सामान खरीदा। आप कहाँ जाते हैं ? वह आया है।
(ख) सम्भाव्य समापिका क्रिया :- क्रिया का वह रूप जिससे सम्भावना, सन्देह, इच्छा, अनुमान आदि का बोध होता है, उसे संभाव्य समापिका किया कहते हैं। जैसे-
इच्छा – प्रभो ! मुझे शरण दें ।
उपदेश – सर्वदा समय से पाठशाला जाओ ।
आज्ञा – यहाँ से अभी न उठना ।
प्रश्न – क्या आप ने खा लिया ?

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 7 देश-प्रेम

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions Poem 7 देश-प्रेम to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – देश-प्रेम

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘देश-प्रेम’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘देश-प्रेम’ कविता का भावार्थ लिखें तथा उसके उद्देश्य को भी लिखें।
अथवा
प्रश्न 3. ‘देश-प्रेम’ कविता में निहित कवि के संदेश को लिखें।
अथवा
प्रश्न 4. ‘देश-प्रेम’ कविता का मूल भाव लिखें।
उत्तर :
जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 7 देश-प्रेम

जन्मभूमि के प्रति निष्ठा रखना मनुष्य का प्राकृतिक गुण है। जिसकी धूली में लोट-लोट कर हम बड़े हुए हैं, जिसने हमें रहने के लिए अपने अतुल अंक में बसाया, उसे भुला देना मातृभूमि के प्रति, राष्ट्र के प्रति कृतध्नता है। अपनी इन्हीं भावनाओं को कवयित्री अनामिका ने अपनी कविता ‘देश-प्रेम’ में व्यक्त किया है।

कवयित्री जीवन की एक साधारण-सी बात से कविता की शुरूआत करती है। अक्सर जब हमारे कोट के पुराने पड़ जाने पर अंदर का अस्तर फट जाता है तब कभी छुट्टे पैसे जेब में जाने के बजाय इन्हीं फटे अस्तरों के किसी कोने में जा बैठते हैं।

कवयित्री कहती हैं कि कभी फटे अस्तर की गहराई से अचानक ही ऊँगलियाँ उस छुट्टे पैसे से छू जाती हैं, जिसे भुला दिया गया था। ठीक उसी प्रकार अचानक ही कवयित्री के हुदय के किसी कोने से उन्हें वह भरी-भरकम चीज मिली जिसका नाम है – देश-प्रेम ! न जाने वह हदय के किस कोने में खो गया था।

चीज को बहुत दिनों के बाद पाकर उसे प्रसन्नता हुई कि वह आज भी उसके दिल के किसी कोने में जीवित है। इसलिए कवयित्री ने अपने अंदर के देशप्रेम को प्यार भरी नजरों से देखा।

कवयित्री को छब्बीस जनवरी की वह ठंडी सुबह आज भी याद है। उनके तकिए के नीचे ट्रांजिस्टर खुला रह गया था। तभी उसपर राष्ट्रगान आने लगा। कम्बल के नीचे दुबकी कवयित्री ने एक बार तो उसे अनसुना करने की सोची। फिर अचानक न जाने मन में क्या आया कि वह जाड़े की उस सुबह में कम्बल फेंककर सावधान की मुद्रा में खड़ी हो गई।

कवयित्री याद करती हैं उन दिनों की जब सिनेमा हॉल में भी फिल्म के बाद परदे पर राष्ट्रगान होता था तथा सारे दर्शक राष्ट्रगान के खत्म होने तक सावधान की मुद्रा में खड़े होकर उसका सम्मान किया करते थे। लेकिन अब तो वो गुज़रे जमाने की कहानी बनकर रह गई है –

कवयित्री उन दिनों को याद करती हैं जब सिनेमा-जगत में हेलेन के सभ्य, साफ-सुथरे कैबरे और हास्य अभिनेता मुकरी की भोली फुलझड़ियों से जनता का मनोरंजन हुआ करता था। बात केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं थी। फिल्म के समाप्त होने पर ‘द एंड’ दिखाई देने के तुरंत बाद लहराते हुए तिरंगे के चित्र के साथ ‘जनगणमन ……’ राष्ट्रगान शुरू होता था। राष्ट्रगान के समाप्त होने तक सभी दर्शक अपनी-अपनी सीटों से उठकर सावधान की मुद्रा में खड़े रहकर उसका सम्मान करते थे।

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कवयित्री सोचती है कि देशप्रेम, तिरंगे को लेकर आम आदमी के दिल में जो भावना थी – वह क्यों कर धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। अब मोबाइल के कालरट्यून पर ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ सुन-सुनाकर ही हम अपने देशप्रेम को देखते-दिखाते हैं। जेब से आनेवाली यह धुन दरअसल हमारी देश भक्ति का परिचायक नहीं, औपचारिकता निभाने का सूचक है।

अंत में यह कहा जा सकता है कि हम देश के प्रति अपने प्रेम, अपने कर्तव्य को न भुलाएं। आज देश के उत्थान के लिए हमें ऐसे देशभक्तों की आवश्यकता है, जो अपना तन, मन धन सब कुछ देश के चरणों पर चढ़ाने को तैयार हो, स्वार्थी या अवसरवादी देश-भक्तों की आवश्यकता नहीं।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सिनेमाघरों में राष्ट्रगान कब होता था?
अथवा सिनेमा के पर्दे पर ‘द एण्ड’ के बाद क्या शुरू होता था?
उत्तर :
सिनेमाधरों में राष्ट्रगान फिल्म की समाप्ति में ‘द एंड’ दिखाने के बाद राष्ट्रगान होता था।

प्रश्न 2.
कवयित्री के तकिए के नीचे क्या छूट गया था ?
उत्तर :
कवयित्री के तकिए के नीचे उनका ट्रांजिस्टर खुला छूट गया था।

प्रश्न 3.
वर्षों पहले सिनेमाधरों में दर्शक सीट छोड़कर कब खड़े हो जाते थे ?
उत्तर :
जब फिल्म के अंत में परदे पर झंडे के साथ राष्ट्रगान होता था तब लोग तिरंगे का सम्मान करने के लिए सीट छोड़कर खड़े हो जाते थे।

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प्रश्न 4.
सिनेमाघरों में लोगों द्वारा सीट छोड़कर खड़े होने का क्या कारण है ?
उत्तर :
सिनेमाघरों में लोगों के द्वारा सीट छोड़कर खड़े होने का कारण राष्ट्र तथा तिरंगे के प्रति स्मान प्रकट करना है।

प्रश्न 5.
‘देश-प्रेम’ के रचनाकार का जन्म कहाँ हुआ ?
उत्तर :
‘देश-प्रेम के रचनाकार (अनामिका) का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ।

प्रश्न 6.
अनामिका ने किन-किन विधाओं में लेखन-कार्य किया है ?
उत्तर :
अनामिका ने निबंध, स्तभ, कहानी, उपन्यास तथा कविता आदि विधाओं में लेखन-कार्य किया है।

प्रश्न 7.
अनामिका के काव्य-संग्रह के नाम लिखें।
उत्तर :
अनामिका के काव्य-संम्मह के नाम हैं – गलत पते की चिट्ठी, बीजाक्षर, समय के शहर में, अनुष्टुप, कविता में औरत, खुरदुरी हृथेलियाँ।

प्रश्न 8.
अनामिका के कहानी-संग्रह का नाम लिखें।
उत्तर :
प्रतिनायक।

प्रश्न 9.
अनामिका द्वारा रचित संस्मरणों के नाम लिखें।
उत्तर :
एक शहर था, एक थे शेक्सपियर, एक थे चार्ल्स डिकेंस, दस द्वारे का पींजरा।

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प्रश्न 10.
अनामिका द्वारा रचित उपन्यास का नाम लिखें।
उत्तर :
‘अवान्तर कथा’।

प्रश्न 11.
कवयित्री को मन के कोने से कौन-सी भारी-भरकम चीज मिली ?
उत्तर :
देशप्रेम।

प्रश्न 12.
कवयित्री को किन चीजों से डर लगता है ?
उत्तर :
भारी-भरकम चीजों से।

प्रश्न 13.
कवयित्री को क्या मिल गया ?
उत्तर :
कवयित्री को मन के कोने से देशघ्रेम मिल गया।

प्रश्न 14.
कवयित्री ने किसे प्यार से देखा ?
उत्तर :
कवयित्री ने अपनी देशप्रेम की भावना को प्यार से देखा।

प्रश्न 15.
कवयित्री के मन के कोने में कौन छिपा था ?
उत्तर :
कवयित्री के मन के कोने में देशणेम छिपा था।

प्रश्न 16.
किस दिन कवयित्री का ट्रांजिस्टर खुला रह गया था?
उत्तर :
26 जनवरी के दिन कवयित्री का ट्रांजिस्टर खुला रह गया था।

प्रश्न 17.
26 जनवरी की सुबह-सुबह ट्रांजिस्टर से क्या बजने लगा ?
उत्तर :
26 जनवरी की सुबह-सुबह ट्रांजिस्टर से राष्ट्रगान बजने लगा।

प्रश्न 18.
ट्रांजिस्टर से राष्ट्रगान सुनाई पड़ने पर कवयित्री ने क्या सोचा?
उत्तर :
ट्रांजिस्टर से राष्ट्रगान सुनाई पड़ने पर कवयित्री ने सोचा कि वह उसे अनसुना कर दे।

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प्रश्न 19.
राष्ट्रगान सुनने के बाद कवबित्री ने क्या किया ?
उत्तर :
राष्ट्रगान सुनने के बाद कवयित्री बिस्तर से कम्बल फेककर उठी और सावधान की मुद्रा में खड़ी हो गई।

प्रश्न 20.
कवयित्री ने किसे अजब चीज कहा है ?
उत्तर :
कवयित्री ने प्रेम (देशप्रेम) को अजब चीज कहा है।

प्रश्न 21.
‘जेमिनी कलर’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
जेमिनी कलर का अर्थ है – रंग-बिरंगा।

प्रश्न 22.
‘जनगणमन’ का आशय किससे है ?
उत्तर :
‘जनगणमन’ का आशय हमारे राष्ट्रगान से है।

प्रश्न 23.
‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ किसकी रचना है ?
उत्तर :
मशहूर शायर इकबाल की।

प्रश्न 24.
‘देशप्रेम’ कविता का उद्देश्य क्या है?
उत्तर :
‘देशप्रेम’ कविता का उद्देश्य हममें राष्ट्र और राष्ट्रगान का सम्मान करने की भावना को फिर से जगाना है।

प्रश्न 25.
‘क्या आपकी जेब से आ रही है ? – किसके बारे में कहा गया है ?
उत्तर :
यहाँ जेब में रखे मोबाइल के कालरट्यून की धुन के बारे में कहा गया है।

प्रश्न 26.
कवयित्री ने देशप्रेम का उदाहरण किससे दिया है?
उत्तर :
कवयित्री ने देशप्रेम का उदाहरण कोट की जेब के फटे अस्तर में छिपे छुट्टे पैसे से दिया है।

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प्रश्न 27.
‘मुँह की लगी’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘मुँह की लगी’ का अर्थ है – जिसकी लत लग जाती है।

प्रश्न 28.
सिनेमाघरों में फिल्म के अंत में क्या टिमका (चमका) करता था ?
उत्तर :
सिनेमाघरों में फिल्म के अन्त में ‘द एंड’ टिमका करता था।

प्रश्न 29.
‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा’ का क्या अर्थ है?
उत्तर :
हमारा हिन्दुस्तान सारी दुनिया से अच्छा है।

प्रश्न 30.
हेलेन कौन थी ?
उत्तर :
हेलेन फिल्मी दुनिया की अभिनेन्री थी तथा मुख्यरूप से कैबरे डांस के लिए मशहूर थी।

प्रश्न 31.
मुकरी कौन थे ?
उत्तर :
मुकरी फिल्मी दुनिया के मशहूर हास्य अभिनेता (कॉंमेडियन) थे जिनके अभिनय की बात तो दूर चेहरा देखकर ही लोगों की हैसी छूट जाया करती थी।

प्रश्न 32.
‘लेकिन वह मिल ही गया’ – में वह कौन है ?
उत्तर :
देशपेम।

प्रश्न 33.
‘कहती है औरत में’ – कविता संग्रह में किस प्रकार की कविताएँ संगृहीत हैं ?
उत्तर :
‘कहती है औरत में’ कविता-संमह में विश्व-साहित्य की स्वीवादी कविताएँ संप्रहीत हैं।

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प्रश्न 34.
अनामिका जी ने क्या सुनने को कहा ?
उत्तर :
अनामिका जी ने मोबाइल की धुन सुनने को कहा।

प्रश्न 35.
‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ – की धुन कहाँ से आ रही थी ?
उत्त :
यह धुन मोबाइल से आ रही थी।

प्रश्न 36.
ट्रांजिस्टर से राष्ट्रगान सुनाई पड़ने पर कवयित्री ने क्या सोचा ?
उत्तर :
ट्रांजिस्टर से राष्ट्रगान सुनाई पड़ने पर कवयित्री ने सोचा कि फटे पॉकेट के कोने में छिपाये गए चिल्लर की तरह हमारा देशप्रेम भी दिल के किसी कोने में खो गया है।

प्रश्न 37.
कोट की जेब के फटे अस्तर से कभी-कभी क्या मिल जाता है ?
उत्तर :
चिल्लर।

प्रश्न 38.
अनामिका ने गिरीश कार्नाड की पुस्तक का अनुवाद किस नाम से किया है ?
उत्तर :
‘नागमंडल’।

प्रश्न 39.
‘देशप्रेम’ किसकी और कैसी रचना है ?
उत्तर :
‘देशप्रेम’ अनामिका की देशाभक्तिपरक रचना है।

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प्रश्न 40.
कवयित्री किसे भारी-भरकम शब्द कहती है ?
उत्तर :
‘देशप्रेम’ शब्द को।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हमारे देश में गणतंत्र दिवस कब मनाया जाता है ?
(क) 2 अक्टूबर को
(ख) 15 अगस्त को
(ग) 26 जनवरी को
(घ) 14 नवम्बर को
उत्तर :
(ग) 26 जनवरी को

प्रश्न 2.
‘देशप्रेम’ कविता किसकी रचना है?
(क) अनामिका
(ख) कैलाश गौतम
(ग) ॠतुराज
(घ) राजेश जोशी
उत्तर :
(क) अनामिका।

प्रश्न 3.
कवयित्री अनामिका का जन्म किस राज्य में हुआ ?
(क) बंगाल
(ख) उड़ीसा
(ग) बिहार
(घ) छत्तीसगढ़
उत्तर :
(ग) बिहार।

प्रश्न 4.
कवयित्री अनामिका का जन्म किस शहर में हुआ ?
(क) पटना
(ख) मुजफ्फरपुर
(ग) उज्जैन
(घ) कोलकात्रा
उत्तर :
(ख) मुजफ्फरपुर।

प्रश्न 5.
अनामिका ने निम्न में से किस विधा में नहीं लिखा है?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) उपन्यास
(घ) नाटक
उत्तर :
(घ) नाटक।

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प्रश्न 6.
‘गलत पते की चिट्ठी’ किसकी रचना है?
(क) रघुवीर सहाय
(ख) अनामिका
(ग) कन्हैयालाल नंदन
(घ) कीर्ति चौधरी
उत्तर :
(ख) अनामिका।

प्रश्न 7.
‘समय के शहर में’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) प्रेमचंद
(ख) प्रसाद
(ग) कमलेश्वर
(घ) अनामिका
उत्तर :
(घ) अनामिका।

प्रश्न 8.
‘अनुष्टुप’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) मोहन राकेश
(ख) राजेश जोशी
(ग) अनामिका
(घ) गुणाकर मुले
उत्तर :
(ग) अनामिका।

प्रश्न 9.
‘कविता में औरत’ किसकी रचना है ?
(क) रामकुमार वर्मा
(ख) यतीन्द्र मिश्र
(ग) अनामिका
(घ) रामदरश मिश्र
उत्तर :
(ग) अनामिका।

प्रश्न 10.
‘खुरदुरी हथेलियाँ’ किसने लिखा है ?
(क) अनामिका
(ख) कीर्ति चौधरी
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(क) अनामिका।

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प्रश्न 11.
‘अनुष्टुप’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) नाटक
(घ) कविता
उत्तर :
(घ) कविता।

प्रश्न 12.
‘गलत पते की चिड्ठी’ किस विधा की रचना है ?
(क) नाटक
(ख) कविता
(ग) उपन्यास
(घ) संस्मरण
उत्तर :
(ख) कविता।

प्रश्न 13.
‘बीजाक्षर’ किस विधा की रचना है ?
(क) कवित्ता
(ख) कहानी
(ग) रेखाचिन्न
(घ) उपन्यास
उत्तर :
(क) कविता।

प्रश्न 14.
‘समय के शहर में’ किस विधा की रचना है ?
(क) निबंध
(ख) एकांकी
(ग) कविता
(घ) नाटक
उत्तर :
(ग) कविता।

प्रश्न 15.
‘कविता में औरत’ किस विधा में लिखा गया है?
(क) कविता
(ख) कहानी
(ग) संस्मरण
(घ) रेखाचित्र
उत्तर :
(क) कविता।

प्रश्न 16.
‘प्रतिनायक’ (कहानी) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कैलाश गौतम
(ख) अनामिका
(ग) ॠतुराज
(घ) कीर्ति चौधरी
उत्तर :
(ख) अनामिका।

प्रश्न 17.
‘एक ठो शहर’ (संस्मरण) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) राजेश जोशी
(ख) बच्चन
(ग) दिनकर
(घ) अनामिका
उत्तर :
(घ) अनामिका।

प्रश्न 18.
‘एक थे शेक्सपियर’ (संस्मरण) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अनामिका
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(क) अनामिका।

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प्रश्न 19.
‘एक थे चार्ल्स डिकेंस’ (संस्मरण) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रामदरश मिश्र
(ख) अनामिका
(ग) बच्चन
(घ) पन्त
उत्तर :
(ख) अनामिका।

प्रश्न 20.
‘दस द्वारे का पींजरा’ (संस्मरण) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) पंत
(ख) बच्चन
(ग) रैदास
(घ) अनामिका
उत्तर :
(घ) अनामिका।

प्रश्न 21.
‘अवान्तर कथा’ (उपन्यास) किसकी रचना है ?
(क) अनामिका
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) राजेश जोशी
(घ) कीर्ति चौधरी
उत्तर :
(क) अनामिका।

प्रश्न 22.
विश्व-साहित्य की स्त्रीवादी कविताओं का संग्रह अनामिका ने किस नाम से किया है ?
(क) स्वोत्व का मानचित्र
(ख) कहती है औरत में
(ग) कविता में औरत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कहती है औरत में।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित में से कौन-सा पुरस्कार अनामिका को नहीं मिला है ?
(क) राजभाषा परिषद पुरस्कार
(ख) भारत-रत्ल
(ग) भारत भूषण अम्रवाल पुरस्कार
(घ) साहित्यकार सम्मान
उत्तर :
(ख) भारत-रत्न।

प्रश्न 24.
निम्नलिखित में से कौन-सा पुरस्कार अनामिका को नहीं मिला है ?
(क) पद्मभूषण
(ख) गिरिजा कुमार माथुर सम्मान
(ग) परम्परा सम्मान
(घ) साहित्य सेतु सम्मान
उत्तर :
(क) पय्भभूषण।

प्रश्न 25.
‘पोस्ट एलिएट पोएट्री’ (आलोचना) किसकी रचना है ?
(क) य्रेजिया डेलेडा की
(ख) राजेश जोशी की
(ग) अनामिका की
(घ) अजेय की
उत्तर :
(ग) अनामिका की।

प्रश्न 26.
‘ऑ वॉएज फ्रॉम कांफ्लिक्ट टु आइसोलेशन’ (अलोचना) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अनामिका
(ख) प्रेजिया डेलेडा
(ग) शैल रस्तोगी
(घव) कृष्गा सोबती
उत्तर :
(क) अनामिका।

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प्रश्न 27.
‘डन क्रिटिसिज़्म डाउन द एज़ेज’ (आलोचना) के लेखक कौन हैं ?
(क) ग्रेजिया डेलेडा
(ख) अनामिका
(ग) पंत
(घ) बच्चन
उत्तर :
(ख) अनामिका।

प्रश्न 28.
‘चिल्लर’ का अर्थ क्या है?
(क) छुट्टे पैसे
(ख) रूपये
(ग) खोटा सिक्का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) छुट्टे पैसे।

प्रश्न 29.
कवयित्री अनामिका ने भारी-भरकम चीज किसे कहा है ?
(क) घर के सम्मान को
(ख) कोट के अस्तर को
(ग) कम्बल को
(घ) देश प्रेम को
उत्तर :
(घ) देशप्रेम को।

प्रश्न 30.
अनामिका ने प्यार से किसे देखा ?
(क) कोट के अस्तर को
(ख) चिल्लर को
(ग) देशप्रेम को
(घ) स्वयं को
उत्तर :
(ग) देशप्रेम को।

प्रश्न 31.
‘वह ठंडी सुबह’ किस सुबह के बारे में कहा गया है ?
(क) 15 अगस्त
(ख) 26 जनवरी
(ग) 2 अक्टूबर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) 26 जनवरी।

प्रश्न 32.
तकिए के नीचे क्या खुला छूट गया था ?
(क) बटुआ
(ख) रेडियो
(ग) किताब
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) रेडियो।

प्रश्न 33.
कवयित्री ने एक पल को क्या सोचा ?
(क) बुला दूँ
(ख) भुला दूँ
(ग) मटिया दूँ
(घ) मिटा दूँ
उत्तर :
(ग) मटिया दूँ।

प्रश्न 34.
कवयित्री ने किसे अजब चीज़ कहा है ?
(क) चिल्लर को
(ख) देशप्रेम को
(ग) अस्तर को
(घ) ट्रांजिस्टर को
उत्तर :
(ख) देशप्रेम को।

प्रश्न 35.
एक दिन सुबह-सुबह क्या बजने लगा ?
(क) लाउडसीकर
(ख) शहनाई
(ग) ट्रांजिस्टर
(घ) ढोल
उत्तर :
(ग) ट्रांजिस्टर।

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प्रश्न 36.
लोग पहले कहाँ सीट छोड़कर खड़े हो जाते थे ?
(क) बस में
(ख) रेलगाड़ी में
(ग) हवाई जहाज में
(घ) सिनेमाघर में
उत्तर :
(घ) सिनेमाघर में।

प्रश्न 37.
हेलेन कौन थी ?
(क) लेखिका
(ख) कवयित्री
(ग) कैबरे डांसर
(घ) समाज सेविका
उत्तर :
(ग) कैबरे डांसर।

प्रश्न 38.
किसकी भोली फुलझड़ियों की बात कही गयी है ?
(क) असरानी की
(ख) मुकरी की
(ग) केष्टो मुखर्जी की
(घ) जॉनी लीवर की
उत्तर :
(ख) मुकरी की।

प्रश्न 39.
‘द एंड’ कहाँ टिमका करता था ?
(क) पोस्टर पर
(ख) सिनेमा के परदे पर
(ग) टौ० वी० के स्क्रीन पर
(घ) इनमें से कहीं नहीं
उत्तर :
(ख) सिनेमा के परदे पर।

प्रश्न 40.
सिनेमा में जनगणमन कब शुरू होता था ?
(क) सिनेमा शुरू होने के पहले
(ख) सिनेमा के बीच में
(ग) सिनेमा खत्म होने पर
(घ) 26 जनवरी को
उत्तर :
(ग) सिनेमा खत्म होने पर।

प्रश्न 41.
‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ — किसकी रचना है ?
(क) कैफी आज़मी की
(ख) मजरूह सुल्तानपुरी की
(ग) इंशा अल्ला खां की
(घ) इकबाल की
उत्तर :
(घ) इकबाल की।

प्रश्न 42.
‘मुँह की लगी’ का अर्थ है ?
(क) जूठा
(ख) लत पड़ जाना
(ग) मुँह में लगाना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) लत पड़ जाना।

प्रश्न 43.
‘छुट्टे पैसे -सा’ किसे कहा गया है ?
(क) अस्तर को
(ख) खुले पैसे को
(ग) संगीत-प्रेम को
(घ) देश्पेम को
उत्तर :
(घ) देशप्रेम को।

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प्रश्न 44.
धीरे-धीरे क्या छीजने लगा है ?
(क) छाजन
(ख) आवेग
(ग) छत
(घ) भाव
उत्तर :
(ख) आवेग।

प्रश्न 45.
निम्न में कौन-सा हमारा राष्ट्रगान है ?
(क) सारे जहाँ से अच्छा
(ख) जनगणमन
(ग) हम होंगे कामयाब
(घ) सुजलां सफलां
उत्तर :
(ख) जनगणमन।

प्रश्न 46.
हमारे राष्ट्रगान के रचयिता कौन हैं ?
(क) प्रसाद
(ख) पंत
(ग) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(घ) बंकिम चंद्र
उत्तर :
(ग) रवीन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 47.
‘भोली फुलझड़ियों’ का क्या अर्थ है ?
(क) हास्य-मनोविनोद
(ख) फुलझड़ियाँ छोड़ना
(ग) छोटी फुलझड़ियाँ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) हास्य-मनोविनोद।

प्रश्न 48.
कवयित्री क्या फेंककर सावधान खड़ी हो गई ?
(क) चिल्लर
(ख) कोट
(ग) कम्बल
(घ) ट्रांजिस्टर
उत्तर :
(ग) कम्बल।

प्रश्न 49.
कवयित्री ने मोबाइल के किस धुन का उल्लेख किया है ?
(क) जनगणमन…..
(ख) हम होंगे कामयाब
(ग) सारे जहां से अच्छा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सारे जहां से अच्छा।

प्रश्न 50.
अनामिका ने समकालीन अंग्रेजी कविताओं का हिन्दी अनुवाद किस नाम से संगृहीत किया है ?
(क) अटलांत के आर-पार
(ख) रिल्के की कविताएँ
(ग) एफो-इंग्लिश पोएम्स
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) अटलांत के आर-पार।

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प्रश्न 51.
अनामिका ने किस साहित्य से पी-एच० डी० की है?
(क) हिन्दी
(ख) अंग्रेजी
(ग) फ्रेंच
(घ) जर्मन
उत्तर :
(ख) अंग्रेजी।

प्रश्न 52.
ट्रांजिस्टर से क्या बजने लगा था ?
(क) राष्ट्रगान
(ख) मधुरगान
(ग) फिल्मी गाने
(घ) भजन
उत्तर :
(क) राष्ट्रगान।

प्रश्न 53.
ट्रांजिस्टर पर सुबह-सुबह राष्ट्रगान सुनकर कवयित्री क्या करती है ?
(क) सो जाती है
(ख) गाने लगती है
(ग) नाचने लगती है
(घ) सावधान-मुद्रा में खड़ी हो जाती है
उत्तर :
(घ) सावधान-मुद्रा में खड़ी हो जाती है।

प्रश्न 54.
लोग पहले सीट छोड़कर खड़े हो जाते थे –
(क) बस में
(ख) रेलगाड़ी में
(ग) हवाई जहाज में
(घ) सिनेमाघरों में
उत्तर :
(घ) सिनेमाघरों में।

प्रश्न 55.
छब्बीस जनवरी की सुबह कैसी थी ?
(क) सुहानी
(ख) ठंडी
(ग) गरम
(घ) वर्षावली
उत्तर :
(ख) ठंडी।

प्रश्न 56.
‘द एंड’ कहाँ टिमका करता था ?
(क) पोस्टर पर
(ख) सिनेमा के परदे पर
(ग) टी० वी० के स्कीन पर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) टी० वी० के स्क्रीन पर।

प्रश्न 57.
निम्न में से कौन-सा हमारा राष्ट्रगान है ?
(क) सारे जहां से अच्छा
(ख) जनगण मन
(ग) हम होंगे कामयाब
(घ) सुजलां सफलां
उत्तर :
(ख) जनगणन मन।

प्रश्न 58.
‘छुद्टे पैसे’ किसे कहा गया हैं ?
(क) अस्तर को
(ख) देशप्रेम को
(ग) संगीत प्रेम को
(घ) कलाप्रेम को
उत्तर :
(ख) देश्पेम को।

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प्रश्न 59.
‘छुट गया था ट्रांजिस्टर खुला’ –
(क) पलंग के नीचे
(ख) तकिए के नीचे
(ग) मेज के नीचे
(घ) किताब के नीवे
उत्तर :
(ख) तकिए के नीचे।

प्रश्न 60.
‘देशप्रेम’ क़विता की काव्य-भाषा है ?
(क) भोजपुरी
(ख) खड़ी बोली हिन्दी
(ग) ब्रजभाषा
(घ) मैधिली
उत्तर :
(ख) खड़ी बोली हिन्दी।

प्रश्न 61.
किस कलर मे ‘द एंड’ टिमका करता था ?
(क) वायलट
(ख) जेमिनी
(ग) हरा
(घ) नीला
उत्तर :
(ख) जेमिनी।

प्रश्न 62.
‘बीजाक्षर’ किसकी रचना है ?
(क) अनामिका
(ख) प्रसाद
(ग) पंत
(घ) बच्चन
उत्तर :
(क) अनामिका।

WBBSE Class 10 Hindi देश-प्रेम Summary

कवि परिचय 

जन्म : 1961 के उत्तरार्द्ध में मुजफ्फरपुर, बिहार में ।
शिक्षा : अंग्रेजी साहित्य में पी-एच० डी०
संप्रति : निबंध – लेखन, विभित्र पत्र-पत्रिकाओं में स्तभलेखन, कहानियाँ और उपन्यासों की रवना, अनुवाद एवं संपादनकार्य तथा अंप्रेजी साहित्य का अध्ययन-मनन।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 7 देश-प्रेम 1

 

अभिरूचि : पब्लिक इंटलेक्चुअल के रूप में व्याख्यान देना, नारीवादी पब्लिक स्कियर में सकियता के साथ भागीदारी के अलावे और भो बहुत कुछ।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 7 देश-प्रेम

प्रमुख कृतियाँ :
कविता : ‘गलत पते की चिट्ठी’, ‘बीजाक्षर’, ‘समय के शहर में’ ‘अनुष्टुप’, ‘कविता में औरत’, ‘खुरदुरी हथेलियाँ’।
कहानी : प्रतिनायक’।
संस्मरण : ‘एक ठो शहर था’, ‘एक थे शेक्सपियर’, ‘एक थे चाल्ल डिकेस’, ‘दस द्वारे का पींजरा’।
उपन्यास : ‘अवान्तर कथा’।
स्त्री-विमर्श : ‘स्त्रीत्य का मानचिन्न’, ‘मन माँजने की जरूरत’, ‘पानी जो पत्थर पीता हैं। अनुवाद : नागमंडल (गिरीश कर्नाड), रिल्के की कविताएँ, एफो-इं्लिश पोएम्स, अटलांत के आर-पार (समकालीन अँग्रेजी कविता), कहती हैं औरत में (विश्व साहित्य की स्वीवादी कविताएँ)।

आलोचना : पोस्ट एलिएट पोएट्री, अ वॉंज फ्रॉंम कांफ्लिक्ट टु आइसोलेशन, डन किटिसिज़्म डाउन दि एजेज़, ट्रीटमेंट ऑव लव एंड डेथ, इन पोस्ट वार अमेरिकन विमेन पोएदस।

पुरस्कार व सम्मान : अनामिका राजभाषा परिषद पुरस्कार, (1987), भारतभूषण अम्रवाल पुरस्कार (1995), साहित्यकार सम्मान (1997), गिरिजाकुमार माथुर सम्मान (1998), परंपरा सम्मान (2001) एवं साहित्य-सेतु सम्मान (2004) ।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. कभी-कभी अन्दर से
फट जाता है कोट की जेब का अस्तर –
तो छुपकर
अस्तर के बिल में
जा बैठते हैं कुछ चिल्लर –

शब्दार्थ :

  • अस्तर = कोट के अंदर लगा कपड़ा।
  • चिल्लर = छुट्टे।

प्रश्न 1.
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘देशप्रेम’ है तथा इसकी रचनाकार अनामिका हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर : कवयित्री जीवन की एक साधारण-सी बात से कविता की शुरुआत करती है। अक्सर जब हमारे कोट के पुराने पड़ जाने पर अंदर का अस्तर फट जाता है। कभी छुट्टे पैसे जेब में जाने के बजाय इन्हीं फटे अस्तरों के किसी कोने में जा बैठते हैं।
बात इतनी साधारण भी नहीं है। जिस प्रकार हम अक्सर इन छुट्टे पैसों को भूल जाते हैं वैसे ही हमने देशप्रेम को भुला दिया है।

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2. कभी अचानक कुछ दूँढ़ते हुए
फदे में अगर अड़ गयी उँगलियाँ तो
उद्घाटित होते हैं
गद्वर से !
ऐसे ही छुट्टे पैसे-सा
छुपा हुआ मेरे ही कोने-अँतरों में
मुझे मिला वह
जिसका भारी-भरकम एक नाम है – देश-प्रेम !

शब्दार्थ :

  • उद्घाटित = सामने आते हैं।
  • गह्बर = गड्डे। अंतरों = भीतर।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश कहाँ से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश अनामिका की कविता ‘देशप्रेम’ से लिया गया है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
कवयित्री कहती हैं कि कभी फटे अस्तर की गहराई से अचानक ही ऊँगलियाँ उस छुट्टे पैसे से छू जाती हैं, जिसे भुला दिया गया था। ठीक उसी प्रकार अचानक ही कवयित्री के हूदय के किसी कीने से उन्हें वह भरी-भरकम चीज मिली जिसका नाम है – देशप्पेम ! न जाने वह हृदय के किस कोने में खो गया था। कहने का भाव यह है कि आज देशप्रेम जैसी भावनाओं को हमने सीने में कहीं दफन कर दिया है। मौके-बेमौके कभी अचानक हमें उसकी याद आ जाती हैं।

3. वैसे तो भारी-भरकम चीजों से मुझको
डर लगता है,
लेकिन वह मिल ही गया तो
मैंने उसे प्यार से देखा !

प्रश्न 1.
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार अनामिका हैं।

प्रश्न 2.
कवयित्री को कौन-सी भारी-भरकम चीज मिली ?
उत्तर :
कवयित्री को देशप्रेम जैसी भारी-भरकम चीज़ मिली।

प्रश्न 3.
किसने, किसे प्यार से देखा ?
उत्तर :
कवयित्री को दिल की गहराई में खो गए देशप्रेम का आभास होता है। कबयित्री को भारी-भरकम चीजों से एक भय-सा लगता है। लेकिन देशप्रेम जैसी भारी-भरकम चीज को बहुत दिनों के बाद पाकर उसे प्रसम्नता हुई कि वह आज भी उसके दिल के किसी कोने में जीवित है। इसीलिए कवयित्री ने अपने अंदर के देशप्रेम को प्यार भरी नजरों से देखा। कहने का भाव यह है कि आजादी के पहले जो देशप्रेम हमारा सर्वस्व (सब कुछ) हुआ करता था, आज वही न जाने कहाँ खो गया है।

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4. छब्बीस जनवरी की थी वह ठंडी सुबह ! तकिए के नीचें
छूट गया था ट्रांजिस्टर खलुला !
सुबह-सुबह बजने लगा राष्ट्रगान !
एक पल को सोचा – मटिया दूँ,
लेकिन फिर क्या जाने क्या हो गया,
कम्बल-वम्बल फेककर मैं खड़ी हो गयी
सावधान !

शब्दार्थ :

  • मटिया = अनसुना, सुन कर भी न सुनना।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश कहाँ से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश अनामिका की कविता ‘देशप्रेम’ से लिया गया है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कवयित्री को छब्बीस जनवरी की वह ठंडी सुबह आज भी याद है। उनके तकिए के नीचे ट्रांजिस्टर खुला रह गया था। तभी उसपर राष्ट्रगान आने लगा। कम्बल के नीचे दुबकी कवयित्री ने एक बार तो उसे अनसुना करने की सोची। फिर अचानक न जाने मन में क्या आया कि वह जाड़े की उस सुबह में कम्बल फेंककर सावधान की मुद्रा में खड़ी हो गई। यह वर्षो से संचित वह संस्कार तथा देशप्रेम ही था जिसने कवयित्री को राष्ट्रगान का सम्मान करने को विवश कर दिया आँखों के पोंछने से लगा आज का पता यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ।

5. अजब चीज है प्रेम भी, मुँह की लगी छूटती ही नहीं !
वर्षों पहले यों ही झटके से
सीट छोड़कर खड़े हो जाते थे हम
सिनेमाधरों में ।

शब्दार्थ :

  • मुँहलगी = आदत, लत।

प्रश्न 1.
कविता का नाम लिखें।
उत्तर :
कविता का नाम ‘देशाप्रेम’ है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कवयित्री कहती हैं कि यह देशप्रेम भी अजीब चीज है। शराब की तरह एक बार जिसे इसकी लत लग जाती है फिर लाख छुड़ाये छूटती ही नहीं –
आज गुलिस्तां में फैली है खुशबू तेरी यादों की मौसम-ए-गुल है, हम हैं तन्हा दिल पर गहरा दाग लिए। कवयित्री याद करती है उन दिनों की जब सिनेमा हॉल में भी फिल्म की समाष्ति के बाद् परदे पर राष्ट्रगान होता था तथा सारे दर्शक राष्ट्रगान के खत्म होने तक सावधान की मुद्रा में खड़े होकर उसका सम्मान किया करते थे। लेकिन अब तो वो गुज़रे जमाने की कहानी बनकर रह गई है।

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6. हेलेन के सभ्य कैबरे
और मुकरी की भोली फुलझड़ियों के बाद
जेमिनी कलर में
‘द एंड’ टिमका करता था
सिनेमा के पर्दे पर
और शुरू होता था जनगणमन ऐसे ही !

शब्दार्थ :

  • हेलेन = फिल्मी दुनिया की अभिनेत्री जो अपने कैबरे के लिए विख्यात थी।
  • मुकरी= फिल्मी दुनिया का एक कॉमेडियन।
  • जेमिनी कलर = रंग-बिरंगे।
  • द एंड = समाप्त।
  • टिमका = चमका।
  • जनगणमन = राष्ट्रगान के शुरूआती शब्द।

प्रश्न 1.
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘देशप्रेम’ है तथा रचनाकार अनामिका हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
कवयित्री उन दिनों को याद करती हैं जब सिनेमा-जगत में हेलेन के सभ्य, साफ-सुथरे कैबरे और हास्य अभिनेता मुकरी की भोली फुलझड़ियों से जनता का मनोरंजन हुआ करता था बात केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं थी। फिल्म के समाप्त होने पर ‘द एंड’ दिखाई देने के तुरंत बाद लहराते हुए तिरंगे के चित्र के साथ ‘जनगणमन ……’ राष्ट्रगान शुरू होता था। राष्ट्रगान के समाप्त होने तक सभी दर्शक अपनी-अपनी सीटों से उठकर सावधान की मुद्रा में खड़े रहकर उसका सम्मान करते थे। लेकिन अब तो यह 26 जनवरी तथा 15 अगस्त तक ही सीमित होकर रह गया है।

7. धीरे-धीरे क्योंकर
छीजने लगा सारा आवेग ?
अब जाने भी दीजिए, देखिए, सुनिए –
‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’,
यह धुन जो मोबाइल की है –
क्या आपकी जेब से आ रही है ?

शब्दार्थ :

  • छीजने = चूने, पसीजने।
  • आवेग = भाव।
  • जहाँ = दुनिया।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत अंश कहाँ से लिया गया है?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश अनामिका की कविता ‘देशप्रेम’ से लिया गया है।

प्रश्न 2.
‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ किसकी रचना है?
उत्तर :
मशहूर शायर इकबाल की रचना है।

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प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कवयित्री सोचती है कि देशप्रेम, तिरंगे को लेकर आम आदमी के दिल में जो भावना थी – वह क्यों कर धीरेधीरे खत्म होती जा रही है। अब मोबाइल के कालरट्यून पर ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ सुन-सुनाकर ही हम अपने देशप्रेम को देखते-दिखाते हैं। जेब से आनेवाली यह धुन दरअसल हमारी देश भक्ति का परिचायक नहीं, औपचारिकता निभाने का सूचक है। अगर यही हाल रहा तो न जाने आने वाले दिनों में देश-प्रेम, देशभक्ति जैसे शब्द भी अतीत की चीज बनकर रह जाएंगे –

ये दिल कहता है हर इक कैद से आज़ाद हो जाएँ
मगर ऐ ‘शाद’ जिम्मेदारियाँ कुछ और कहती हैं।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण विशेषण to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
विशेषण की परिभाषा लिखें तथा इसके पाँच उदाहरण भी दें। (माध्यमिक परीक्षा – 2011)
उत्तरः
संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, रंग, आकार-प्रकार आदि) बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं।
अथवा,
संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ :
एक किलो चीनी लाओ।
सफेद गाय कम दूध देती है।
प्रतिभाशाली बच्चे की सराहना होती है।
कुछ लोग सो रहे हैं।
मेरी कक्षा में बीस विद्यार्थी हैं।
उपर्युक्त वाक्यों में एक किलो, सफेद, कम, प्रतिभाशाली, कुछ, बीस आदि शब्द क्रमशः चीनी, गाय, दूध, बच्चे, लोग तथा विद्यार्थी की विशेषता बता रहे हैं। इनके बारे में कुछ विशेष ज्ञान देने के कारण इहे विशेषण कहते हैं। विशेषण का अर्थ है विशेषता उत्पन्न करने वाला, विशेषक।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 2.
विशेषण के कार्यों को सोदाहरण स्पष्ट करें।
उत्तरः
विशेषण के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं :-
1. गुण-दोष बतलाना :- विशेषण संज्ञा/सर्वनाम के गुण-दोष को बतलाता है। जैसे-

सोहन पढ़ने में तेज है। (गुण)
लेकिन, वह डरपोक है। (दोष)

2. निश्चित संख्या या परिमाण बतलाना :-यह संज्ञा/सर्वनाम की निश्चित संख्या या परिमाण बतलाता है। जैसे-
दो लड़के आ रहे हैं।

(दो लड़के-निश्चित संख्या)
दो लीटर दूध दो। (दो लीटर-निश्चित परिमाण)

3. अनिश्चित संख्या या परिमाण बतलाना :- कभी-कभी यह संज्ञा/सर्वनाम की अनिश्चित संख्या या परिमाण भी बतलाता है। जैसे-

कुछ लड़के आ रहे हैं। (कुछ लड़के-अनिश्चित संख्या)
थोड़ा दूध पी लो। (थोड़ा दूध-अनिश्चित परिमाण)

4. क्षेत्र सीमित करना :- यह संज्ञा/सर्वनाम के क्षेत्र को सीमित करता है। जैसे-
एक लाल रूमाल लाओ। (सिर्फ लाल-काला, पीला या नीला नहीं)
उस लड़के को बुलाओ। (किसी खास लड़के को, किसी दूसरे को नहीं)

5. दशा, अवस्था या आकार बतलाना :- यह संज्ञा/सर्वनाम की दशा, अवस्था या आकार को बतलाता है। जैसे-

वह बीमार है। (दशा का बोध)
मैं बूढ़ा हूँ। (अवस्था का बोध)
भाला नुकीला है। (आकार का बोध)

प्रश्न 3.
विशेषण के कितने भेद होते हैं ? अथवा, संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द कितने प्रकार के होते हैं ?
(माध्यमिक परीक्षा – 2011)
उत्तरः
संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द चार प्रकार के होते हैं, अर्थात् विशेषण के चार भेद हैं :-

  • नुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)
  • परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)
  • संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective)
  • सार्वनामिक विशेषण (संकेतवाचक अथवा निर्देशवाचक विशेषण) (Demonstrative or Adjective)।

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प्रश्न 4.
गुणवाचक विशेषण किसे कहते हैं ?
(माध्यमिक परीक्षा – 2014)
उत्तरः
गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality) :- संज्ञा अथवा सर्वनाम की किसी भी प्रकार के गुण, संबंध रखने वाली विशेषता का बोध कराने वाले शब्दों को गुणवाचक विशेषण कहते हैं।
‘विशेषण’ का अर्थ ही है-गुण’। किन्तु ‘गुण’ का अर्थ केवल अच्छी विशेषताओं से नहों है। यहाँ ‘गुण’ का तात्पर्य है – किसi भो वस्तु या व्यक्ति की विशेष स्थिति, विशेष दशा, विशेष दिशा, रग, गंध, काल, स्थान, आकार, रूप, स्वाद, बुराई, अ० ई आदि। अतः जो विशेषण किसी संज्ञा या सर्वनाम की उपर्युक्त विशेषताओं का बांध कराता है. उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं।

प्रश्न 5.
कुछ प्रमुख गुणवाचsक विशेषणों के उदाहरण प्रस्तुत करें।
उत्तरः
कुछ प्रमुख गुणवाचक विशेषण इस प्रकार हैं –
गुण : सरल, योग्य, उदार, परिश्रमी, ईमानदार, बुद्धिमान, चतुर, कृपालु, अच्छा, पवित्र, प्रतिभाशाली, उजला, मोहक, सच्चा, झूठा, दानी, दयालु, कृपण, बुरा आदि।
दोष : कठोर, बुरा, दुष्ट, हीन, नीच, अपवि्र, भयानक, कुटिल, अयोग्य, क्राधी, पापी, कपटो आदि।
रंग-रूप : गोरा, काला, गेहुँआ, गुलाबी, सुंदर, आकर्षक, प्रभावशाली, मधुर, सरस, कोमल, पीला, नोला, हरा, लाल, चमकीला, गुलाबी, सुनहरा, आदि।
आकार-प्रकार : गोल, चौरस, लंबा, खुरदरा, मोटा, पतला, लघु, दीर्घ, चौकोर, छोंटा, नौचा, बड़ा, स्थूल, हल्का, भारी, तिकोना आदि।
अवस्था : बलवान, कमजोर, रोगी, दरिद्र, अमीर, बन्चा, जवान, युवा, वृद्ध, बूढ़ा, अधड़, प्रैढ़ आदि।
स्थिति : पिछला, अगला, बाहरी, ऊपरी, स्थिर, डांवा-डोल आदि।
देशकाल : भारतीय, पंजाबी, बंगाली, नेपाली, गढ़वाली, गत, भावी, प्राचीन ऐतिहासिक, ताजा, बासी, आधुनिक आदि।
स्वाद : मीठा, खट्टा, कसैला, कड़वा, फीका, मधुर, नमकीन आदि।
गंध : सुगंधित, सुवासित, दुर्गन्धपूर्ण, गंधहीन, खुशबूदूर, बदवूदार , सोंधा आदि।
दिशा : पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी, पाश्चात्य, पश्चिमोत्तरी।
स्थान : देशी, विदेशी, बाहरी, ग्रामीण, भारतीय, रूसी, जापानी, चीनी, बनारसी, बिहारी आदि।
स्पर्श : नरम, कठोर, कोमल, चिकना, खुरदरा आदि।
इस प्रकार के अन्य अनेक भेद हैं, जो व्यक्तियों, स्थानों या वस्तुओं की विभिन्न विशेषताएँ बतात है . वे सभी शब्द गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
परिमाणवाचक विशेषण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity) :- “जिस विशेषण शब्द सं संज्ञा अथवा सर्वनाम के माप-तौल का ज्ञान हो, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते है।”
अथवा
जो शब्द संज्ञा अथवा सर्वनाम की माप-तौल संबंधी विशेषता को प्रकट करें वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे – मैं प्रतिदिन चार केले खाता हूँ। मैं कुछ मीठा भी खाता हूँ।

प्रश्न 7.
परिमाणवाचक विशेषण कितने प्रकार के होते हैं ? परिभाषा व उदाहरण भी लिखें।
उत्तरः
परिमाणवाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं –
(क) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण :- जो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिमाण का बोध कराते हैं, उन्हे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे :- दो लीटर दूध, दस मीटर कपड़ा, दस ग्राम सोना, दो किलो चाँदी, एक तोला सोना, दो किलो मिठाई, एक क्विंटल गेहूँ आदि।
(ख) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण :- जो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिमाण का नहीं, अपितु अनिश्चित परिमाण का बोध कराते है, उन्हें अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं-कुछ आम, थोड़ा दूध, बहुत घी, कम चीनी, जरा-सी चटनी, ढेर सारा मक्खन, बहुत लंबी रस्सी, हजारों गज जमीन, थोड़ा अचार आदि।
निश्चित परिमाणवाचक विशेषण शब्दों में “ओं” प्रत्यय लगाकर भी अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण बन जाते जैसे-मनों दूध, घड़ों पानी आदि।

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प्रश्न 8.
संख्यावाचक विशेषण किसे कहते हैं ? (मॉडल प्रश्न – 2011)
उत्तरः
संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective) :- जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या संबंधी विशेषता का बांध कराएँ, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।

प्रश्न 9.
संख्यावाचक विशेषण कितने प्रकार के होते हैं ? परिभाषा व उदाहरण लिखें।
उत्तरः
संख्यावाचक विशेषण दो प्रकार के होते है :-
(क) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण :- जैसे-कुछ आदमी, थोड़े घर, बहुत आम, कुछ, सब, बहुत, सैकड़ों, हजारों आदि। कुछ, सब, थोड़े, बहुत, अधिक आदि कुछ विशेषण ऐसे हैं जो परिमाणवाचक और संख्यावाचक दोनों ही रूपों में प्रयुक्त होते है। यदि विशेष्य गिनी जाने वाली वस्तु है तो उन्हें संख्यावाचक मानना चाहिए अन्यथा परिमाणवाचक। “अधिक आम” और “अधिक घी” इन दो प्रयोगों में पहला संख्यावाचक है और दूसरा परिमाणवाचक।
कुछ अन्य उदाहरण-

दो-चार आदमी बुला लो।
छात्रों ने सैकड़ों दुकानें जला दीं।
किताब पूरी लिख दी केवल कुछ पृष्ठ शेष हैं।
वहाँ काई पाँच सौ व्यक्ति होंगे।

(ख) निश्चित संख्यावाचक विशेषण :- जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या (गिनती) का बोध कराते हैं, उन्हे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं जैसे-दो बालक, पहली मंजिल, दो दर्जन केले, एक, आधा, दो, चार आदि।

प्रश्न 10.
निश्चित संख्यावाचक विशेषण के कितने भेद होते हैं ? संक्षिप्त जानकारी दें।
उत्तरः
निश्चित संख्यावाचक विशेषण के सात भेद होते हैं।
पूर्ण संख्यावाचक :- जहाँ एक, दो, तीन, पाँच, दस, सौ आदि शब्दों का प्रयोग हो।
अपूर्ण संख्यावाचक :- अपूर्ण संख्या का बोध कराने वाले शब्द अपूर्ण संख्यावाचक कहे जाते हैं। जैसे-डंढ़, साढ़े चार, सवा पाँच, पौंने छ: आदि।
क्रमवाचक :- जहाँ संख्यावाचक शब्दों को एक-दूसरे के बाद क्रम से प्राप्त किया जाता है। जैसे-पहला, दूसरा, पाँचवाँ, ग्यारहवाँँ, इक्कीसवाँ, पचपनवाँ, साठवाँ आदि।
आवृत्तिसूचक :- जिस विशेषण शब्द से गुणनात्मकता का बोध हो, उसे आवृत्तिसूचक संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसं-दुगुना, तिगुना, चौगुना, दुहरा, तिहरा, दसगुना आदि।
समुदायवाचक :-जिस विशेषण शब्द से संख्या का समूह रूप में बोध हो, उसे समुदायवाचक संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसं-दोनों, चारों, सभी, सब के सब, दस के दस।
समुच्चयवाचक :- जिस विशेषण शब्द से किसी वस्तु के समूह रूप में होने का बोध हो उसे समुच्चय संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैस-शतक, सैंकड़ा, पच्चीस हजार, जोड़ा आदि।
प्रत्येकवाचक :- जिस विशेषण शब्द से व्यक्ति या वस्तुओं आदि की पृथक्-पृथक् संख्या का बोध हो, उसे प्रत्येकवाचक विशेषण कहते है। जैसे-प्रत्येक, हरेक, प्रतिदिन, प्रतिमाह, प्रतिवर्ष, एक-एक, चार-चार।

अनेक बार निश्चित संख्यावाचक विशेषण भी निश्चित संख्या का बोध न कराकर अनिश्चय की स्थिति में ही रखते हैं। ऐसे विशेषण को अनिश्चित संख्यावाचक ही मानना चाहिए। जैसे-“सैकड़ों लोग”, “दो-तीन मित्र,” “पचासों घर” आदि के प्रयोगों में “सैंकड़ों,” “दो तीन” और “पचासों” अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण हैं।

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प्रश्न 11.
परिमाणवाचक और संख्यावाचक विशेषण में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तरः
परिमाणवाचक और संख्यावाचक विशेषण में अंन्तर :-
यदि विशेषण गिनी जाने वाली वस्तु हो तो उसके साथ प्रयुक्त विशेषण संख्यावाचक माना जाता है, अन्यथा उसे परिमाणवाचक विशेषण माना जाता है।
जैसे-

  • मोहित दस केले खा गया। (संख्यावाचक)
  • मोहित दस लीटर दूध पी गया। (परिमाणवाचक)
  • मैने अधिक सेब खा लिए। (संख्यावाचक)

प्रश्न 12.
सार्वनामिक विशेषण की परिभाषा उदाहरण सहित लिखें।
उत्तरः
सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective) :- जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे-
यह पुस्तक मेरी है।
कोई आदमी गा रहा है।
कौन लोग आए थे ?
इन वाक्यों में “यह”, “कोई” और “कौन” सर्वनाम क्रमश: “पुस्तक”, “आदमी” और “लोग” संज्ञाओं की विशेषता बताने के कारण विशेषण हो गए हैं। इन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
कुछ सर्वनाम तो ऊपर दिए गए तीनों उदाहरणों में आए सर्वनामों की तरह अपने मूल रूप में ही विशेषण रूप में प्रयुक्त होते हैं, परंतु कुछ थोड़े परिवर्तन के साथ प्रयुक्त होते हैं। जैसे –
यह से ऐसा, इतना; वह से वैसा, उतना, कौन से कैसा, कितना।
इन्हें संकेतवाचक या निर्देशवाचक विशेषण भी कहते हैं।

प्रश्न 13.
सार्वनामिक विशेषण के कितने भेद हैं ? संक्षिप्त परिचय दें।
उत्तरः
सार्वनामिक विशेषण के चार भेद हैं –
निश्चयवाचक/संकेतवाचक सार्वनामिक विशेषण :- ये संज्ञा या सर्वनाम की ओर निश्चयात्मक संकेत करते हैं। जैसे-

यह कलम उठा दो।
उस पुस्तक को यहाँ ले आइए।

अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण :- ये विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की ओर अनिश्चयात्मक संकेत करते हैं। जैसे-

किसी को कुछ दे दीजिए।
कोई व्यक्ति आपसे मिलने आया है।

प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण :-ये विशेषण संज्ञा या सर्वनाम से संबधत प्रश्नों का बोध कराते हैं। जैसे-

वे लोग कौन थे ?
कौन लड़की खड़ी है ?
आप क्या समाचार देना चाहते हैं ?
कौन-सी फिल्म देखनी है ?

संबंधवाचक सार्वनामिक विशेषण :- ये विशेषण एक संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य में प्रयुक्त अन्य संज्ञा या सर्वनाम शब्द के साथ जोड़ते हैं। जैसे-

जो बोया है, वही तो काटोगे।
जिस कार्य को करना हो, उसके बारे में अच्छी तरह विचार कर लो।
जो आदमी कल आया था, वह (आदमी) बाहर खड़ा है।

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प्रश्न 14.
सार्वनामिक विशेषण और सर्वनाम के बीच अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
सार्वनाममिक विशेषण और सर्वनाम में अंतर :- यदि सार्वनामिक विशेषणों का प्रयोग संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों से पहले हो तो सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं और यदि अकेले (संज्ञा के स्थान पर) प्रयुक्त हों, तो सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- यह आम पका है, और वह कच्चा। यहाँयह’ सार्वनामिक विशेषण है और ‘वह सर्वनाम है।)
उस घर में मेरी सहेली रहती है। (सार्वनामिक विशेषण)
उसने मुझे बुलाया है। (सर्वनाम)

प्रश्न 15.
प्रविषेषण से आप क्या समझते हैं ? प्रविशेषण का क्या कार्य है ?
उत्तरः
प्रविशेषण :- विशेषण की विशेषता बतलाने वाले विशेषण को “प्रविशेषण” कहते हैं। यह सामान्यत: विशेषण के गुणों में वृद्धि करता है। जैसे –
थोड़ा, बहुत, अति, अत्यंत, अधिक, अत्यधिक, बड़ा, बेहद, महा, घोर, ठीक, बिल्कुल, लगभग आदि।
दूध मीठा है। (मीठा-संज्ञा की विशेषता = विशेषण)
दूध थोड़ा मीठा है। (थोड़ा-विशेषण की विशेषता = प्रविशेषण)
वह पाँच बजे आएगा। (पाँच-संज्ञा की विशेषता = विशेषण)
वह ठीक पाँच बजे आएगा। (ठीक-विशेषण की विशेषण = प्रविशेषण)
स्पष्ट है कि उपर्युक्त वाक्यों मे प्रयुक्त ‘थोड़ा’ एवं ‘ठीक शब्द प्रविशेषण हैं, क्योंकि ये विशेषण की विशेषता बतलाते हैं।

प्रश्न 16.
विशेष्य किसे कहते हैं ?
उत्तरः
विशेष्य :- जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बतलायी जाती है, उस संज्ञा या सर्वनाम शब्द को विशेष्य’ कहते हैं। जैसे-

  • लड़का लम्बा है। (लड़का-विशेष्य)
  • वह लम्बा है। (वह-विशेष्य)
  • कलम लाल है। (कलम-विशेष्य)
  • यह लाल है। (यह-विशेष्य)

प्रश्न 17.
पदवाचक विशेषण किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तरः
हिन्दी और संस्कृत में कुछ ऐसे विशेषण हैं जो किसी खास विशेष्य के पहले प्रयुक्त होते हैं। ऐसे विशेषणों को पदवाचक विशेषण कहा जाता है। कुछ उदाहरण नीचे प्रस्तत हैं-

विशेषण – विशेष्य
अगाध – सागर, प्रेम
अप्रत्याशित – घटना
अमानुषिक – व्यवहार
अनन्य – भक्त, भक्ति, प्रेम
अनुपम – छवि, भेंट
आकुल – प्राण, मन, हृदय
उर्वर – भमि
उद्भट – योद्धा, विद्वान् (विद्वान)
ओजस्वी – भाषण
करुण – क्रन्दन

प्रश्न 18.
प्रयोग की दृष्टि से विशेषण के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
प्रयोग की दृष्टि से विशेषण के दो भेद हैं-
(i) विशेष्य-विशेषण और (ii) विधेय-विशेषण।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 19.
रूप-परिवर्तन या रूपांतर की दृष्टि से विशेषण के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
रूप-परिवर्तन या रूपांतर की दृष्टि से विशेषण के दो भेद हैं-

  • विकारी विशेषण और
  • अविकारी विशेषण।

प्रश्न 20.
विकारी विशेषण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
विकारी विशेषण :-विशेषण शब्दों में आकारांत विशेषण प्राय: विकारी होते हैं। दूसरे शब्दों में, उनके रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहते हैं। जैसे :- अच्छा, बुरा, काला, नीला, पीला, हरा, हलका, छोटा, बड़ा आदि।
लिंग के अनुसार :-
मोहन अच्छा/काला लड़का है। (पुल्लिंग)
गीता अच्छी/काली लड़की है। (स्त्रीलिंग)

वचन और पुरुष के अनुसार :-
मैं अच्छा/काला हूँ। (उत्तमपुरुष, एकवचन) –
हमलोग अच्छे/काले हैं। (उत्तमपुरुष, बहुवचन)
तू अच्छा/काला है। (मध्यमपुरुष, एकवचन)
तुमलोग अच्छ/काले हो। (मध्यमपुरुष, बहुवचन)

यदि विभक्ति का प्रयोग हो, तो कभी-कभी एकवचन में भी विशेषण का बहुवचन रूप प्रयुक्त होता है। जैसे-

इस अच्छे लड़के ने कहा। (एकवचन)
उस काले लड़के को बुलाओ। (एकवचन)

प्रश्न 21.
अविकारी विशेषण किसे कहते हैं ?
उत्तरः
अविकारी विशेषण :- वैसे विशेषण जो अपना रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार कभी नहीं बदलते, उन्हें अविकारी विशेषण कहते हैं। जैसे-
धनी, अमीर, भारी, सुन्दर, भीतरी, बाहरी, चतुर, टिकाऊ, जड़ाऊ आदि।
मोहन धनी/सुन्दर है। (पुल्लिंग)
गीता धनी/सुन्दर है। (स्त्रीलिंग)
मैं धनी/सुन्दर हूँ। (उत्तमपुरुष, एकवचन)
तुमलोग धनी/सुन्दर हो। (मध्यमपुरुष, बहुवचन)
स्पष्ट है कि इन विशेषण (धनी, सुन्दर) शब्दों पर लिग, वचन और पुरुष का कोई प्रभाव नही पड़ा। हर स्थिति में उनका एक ही रूप है।

प्रश्न 22.
विशेषित पद की प्रवृत्ति के अनुसार विशेषण पद कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तरः
विशेषित पद की प्रवृति के अनुसार विशेषण पद प्रधानतः सात प्रकार के है –

  • विशेष्य के विशेषण
  • सर्वनाम के विशेषण
  • विशेषण के विशेषण
  • संख्या विशेषण
  • पूरणवाचक विशेषण
  • सम्बन्ध विशेषण तथा
  • क्रिया-विशेषण।

प्रश्न 23.
निम्नांकित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें –
(क) क्रिया विशेषण
(ख) संख्यावाचक विशेषण
(ग) पूरणवाचक विशेषण
(घ) सम्बन्ध विशेषण।
उत्तरः
(क) क्रिया-विशेषण :- जो विशेषण पद किसी क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं ; जैसे-तेजी से दौड़ी, धीरे-धीरे उठा, जोर से बोले, घबराये हुए जगे, शान्तिपूर्वक बोला इत्यादि।
क्रिया-विशेषण के विशेष्य सहित अन्य उदाहरण :- कभी-कभी आता है, कल जा रहा है, परसों आएगा, अभी आई है, तुरन्त जाओ, आज करूगग, अब बन्द कीजिए, प्रात: उठा करो, हमेशा विलम्ब करते हो, लगातार वृष्टि हो रही है, दिनभर धूप रही, नित्य नहाओ, आजकल नहीं आते, प्रतिदिन पढ़ते हैं,

(ख) संख्यावाचक विशेषण :-जिस विशेषण पद द्वारा संख्या या परिमाण का बोध होता है, उसे संख्या या परिमाणवायक विशेषण कहते हैं। जैसे-पश्च पाण्डव, चार वेद, सभी देश, थोड़ा दूध, बहुत पानी इत्यादि।

संख्यावाचक विशेषण के विशेप्य सहित अन्य उदाहरण-
(क) तीन गुण, तीन देह, तीन अवस्था, तीन लोक, तीन देव, चार वेद, चार पुरुषार्थ, चार अन्तःकरण, चार साधन, पाँच भूत, पाँच कोश, पाँच ज्ञानेन्द्रिय, पाँच कर्मेन्द्रिय, पाँच प्राण, छः भाव विकार, छ: रिपु, छ: वेदांग, छ: दर्शन, कुछ लोग, बहुत लोग, कई फल, सभी छात्र, पहली कक्षा, दूसरा बच्चा, चौथी किताब, इकहरा बदन, दुहरी पर्त, तिगुना रुपया।

(ख) चार लीटर दूध, पाँच किलो आटा, बहुत धन, थोड़ी चीनी, दस क्विंटल गेहूँ, डेढ़ मीटर कपड़ा, तीन किलो घी, एक किलो चाय, तीन लीटर सरसो तेल, थोड़ा दूध, इतना काम, ज्यादा मिठाई, बहुत समय, कुछ नमक, बहुत मिट्टी।

(ग) पूरणवाचक विशेषण :-जिस विशेषण पद से क्रम का बोध होता है, उसे पूरणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – पाँचवीं कक्षा, सप्तम वर्ष, दसवीं दिशा, चौथा पुरुषार्थ इत्यादि।
पूरणवाचक विशेषण के विशेष्य सहित अन्य उदाहरण – सातवाँ आसमान, आठवाँ आश्चर्य, दसवें तुम, छठा प्रमाण, तृतीय नेत्र, आठवीं सिद्धि, नवीं निधि, ग्यारहवें रुद्र, बारहवें आदित्य, सातवाँ मन्वन्तर, अट्ठाईसवाँ कलियुग, चौबीसवाँ अवतार, सत्रहवाँ तत्त्व आदि।

(घ) सम्बन्ध विशेषण :- जब कोई सम्बन्ध पद विशेषण के रूप में व्यवहत होता है, उसे सम्बन्ध विशेषण कहते हैं ; जैसे – पद्वभूतों का शरीर, नगर का निवासी, शादी की शहनाई, दूर के मिश्र, कल्पना की सम्पत्ति इत्यादि।

सम्बन्ध विशेषण के विशेष्य सहित अन्य उदाहरण – अतिथि का आतिथ्य, नर का नरत्व, नारी का नारीत्व, किशोरी का कैशौर्य, रुण की चिकित्सा, कुमार या कुमारी का कौमार्य, देव का देवत्व, जनता का नेतृत्व, वक्ता का वक्तृत्व, ईश्वर का ऐश्वर्य, समिति की सदस्यता, अपना सर्वस्व, अज्ञों का ममत्व, घटना का औचित्य, मनुष्य का सौभाग्य, देश की एकता, उसका एकाकीपन, परिस्थिति की अनुकूलता, तुम्हारा आलस्य, हिमालय की ऊँचाई, समुद्र की गहराई, उषा की अरुणिमा, वेदना की असह्याता, प्रमाण की उपयुक्तता, अपराध की गम्भीरता, प्रकृति की अनुकूलता, मन की चंचलता, वायुमण्डल का ताप, घाटी की दुर्गमता, कर्ण की दानशीलता, ज्ञानी का धैर्य इत्यादि।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 24.
कृदंती विशेषण किसे कहते हैं ?
उत्तरः
कृदंती विशेषण :- क्रिया के अनुरूप विशेषणों को कृदंती विशेषण कहते हैं। जैसे-बहता नीर, चढ़ती जवानी, दलित मानव।

प्रश्न 25.
यौगिक सार्वनामिक विशेषण किसे कहते हैं ?
उत्तरः
वे सार्वनामिक विशेषण जो मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगाने से बनते हैं, यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं। जैसे-ऐसा आदमी, कैसा घर, जैसा दाम वैसा काम आदि।

प्रश्न 26.
व्यक्तिवाचक विशेषण किसे कहते हैं ?
उत्तरः
विशेषण की रचना जब किसी व्यक्तिवाचक संज्ञा से की जाती है, तब वह व्यक्तिवाचक विशेषण कहलाता है।
जैसे –
(क) मुझे बनारसी पान अच्छा लगता है।
(ख) नागपुरी संतरे प्रसिद्ध हैं।
(ग) कोल्हापुरी चष्पलें अच्छी होती हैं।

प्रश्न 27.
विशेषण पद की रचना या उपादान के अनुसार विशेषण के कितने प्रकार हैं ?
उत्तरः
विशेषण पद की रचना या उपादान के अनुसार विशेषण के सात प्रकार हैं-

  • एक पदीय विशेषण
  • बहुपदीय विशेषण
  • वाक्याश्रयी विशेषण
  • ध्वन्यात्मक विशेषण
  • शब्द द्वैताश्रयी विशेषण
  • पदान्तरित विशेषण तथा
  • प्रश्नवाचक विशेषण।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें –
(क) एकपदीय विशेषण
(ख) बहुपदीय विशेषण
(ग) वाक्याश्रयी विशेषण
(घ) छन्यात्मक विशेषण
(ङ) शब्द द्वैताश्रयी विशेषण
(च) पदान्तरित विशेषण
(छ) प्रश्नवाचक विशेषण।
उत्तरः
(क) एकपदीय विशेषण :- जो विशेषण केवल एक पद से निर्मित होता है, या उसकी निर्माण क्रिया एक ही पद से सम्पन्न हो जाती है, उसे एकपदीय विशेषण कहते हैं ; जैसे- प्रसृत रश्मि, जीर्ण हत, घनघोर सन्ध्या, सुन्द्र भवन, म्लान मुख, नील गगन, शुभ्र मेघ, स्वर्णिम धूप, तप्त वायु आदि।

(ख) बहुपदीय विशेषण :- जो विशेषण एकाधिक पदों के समूह से गठित होते हैं, उन्हें बहुपदीय विशेषण कहते हैं, जैसे-
धूलि-धूसरित कोमल शिशु देह बलात् मन को आकृष्ट कर लेता है।
अरुण विम्बाफल सदृश अधरों वाली यह रमणी चिन्तनशील है।
बहुपदीय विशेषण के विशेष्य सहित कुछ अन्य उदाहरण-करुणा कलित हंदय, वेदना विकल रागिनी, घनीभूत विरह पीड़ा, अतृप्त चिर तृषा, दीर्घ निरन्तर अभ्यास, सत्कार सेवित दृढ़ भूमि, चिर संचित पुण्यपुंज, मन्दस्मित युक्त मुखमण्डल, कृपाणयुक्त पाणि, माणिक्य रचित वलय, हेम रचित अंगद, कोमल रक्तांगुलीय युत, भव सिन्धु पोत, बह्मादि सुरनायक पूजनीय चरण, वेदान्त वेद्य विभवा, करुणा पुनीत मूर्ति, सौभाग्यद सुलालित स्तवन, झटिति प्रसन्ना वह, विमल सुख सहित कीर्ति, अन्धकारमय शून्य हृदय, झंझा झकोर गर्जन युक्त मेघमाला।

(ग) वाक्याश्रयी विशेषण : यदि कोई सम्पूर्ण वाक्य किसी पद को विशेषित करने के लिए विशेषण रूप में प्रयुक्त हो तो उसे वाक्याश्रयी विशेषण कहते हैं ; जैसे ‘ऐ अंग्रेजों भारत छोड़ो।’ नारा भारतीय स्वतंग्रता संप्राम के अन्तिम चरण का था। दिल्ली चलो पुकार ने उन दिनों सबके हुदय को उद्दीप्त कर दिया था। तत्कालीन नेताओं की मलेरिया उन्मूलन करो आवाज सबको संगठित करने लगी थी। ‘मानव प्राण रक्षार्थ वृक्षारोपण करो तरंग सर्वन्र फैल रही थी।

(घ) ध्वन्यात्मक विशेषण :- जहाँ ध्वन्यात्मक शब्दों की सहायता से निर्मित विशेषण पद विशेषित पदों के गुण, प्रकृति, अवस्थादि को समुत्तोलित करके उभाड़ देता है वहाँ उस विशेषण को ध्वय्यात्मक विशेषण कहते हैं। जैसे-सरसराती हवा निरन्तर बह रही थी। झरझराती वृष्टि बन्द होने का नाम नहीं ले रही थी। धधकती अग्नि ज्वाला देखते-देखते फैल गई।

ध्वन्यात्मक विशेषण के विशेष्य सहित अन्य उदाहरण :-गुड़गुड़ाते हुक्के, गुटगुटाते कबूतर, हिनहिनाती घोड़ियाँ, गुनगुनाते भ्रमर, चरमराती डालियाँ, चहचहाती चिड़ियाँ, फरफराते राष्ट्रीय ध्वज, सपसपाते बेंत, कँषपकँपाती सर्दियाँ, चिपचिपाती उमस, खनखनाती रजत मुद्रा, झनझनाती झालें, डबडबाती आँखें, चमचमाती किरणें, तमतमाती दोपहरी, थपथपाती पीठ, दनदनाती रेलें, धमधमाती ढोलें, मर्मराती पत्तियाँ, लड़खड़ाती चाल, सरसराता साँप, गदगदाती आवाज, फकफकाती रुलाई, ठहठहाती हँसी।

(ङ) शब्द द्वैताश्रयी विशेषण :- शब्दों की दो आवृत्ति से युक्त विशेषण शब्दों को शब्द द्वैताश्रयी विशेषण कहते हैं। बोलते या लिखते समय कभी-कभी, किसी-किसी शब्द को दो बार प्रयोग करके बोलना या लिखना पड़ता है।

दो आवृत्ति वाले शब्द जब विशेष्य शब्द को विशेषित करते हैं, तब उन्हें द्वैताश्रयी विशेषण कहा जाता है। जैसे हजार-हजार लोग चारों ओर से मेले में एकत्र हो रहे थे। बोरे-बोरे गेहूँ ट्रेन पर लादा गया। गाँठ-गाँठ कपड़ा गोदाम में भरा गया। टनों-टनों नमक नाव पर ही गल गया। क्विण्टल-क्विण्टल चीनी ट्रक से उठा ले गए। ए०सी० में बैठकर ठण्डी-ठण्डी साँस लो। गरम-गरम चाय पी रहा हूँ। वाहनों में सफर करो, मीठे-मीठे गाने सुनो।

(च) पदान्तरित विशेषण :- जब संज्ञा या सर्वनाम शब्दों से बने हुए विशेषणों के विशेष्ये शब्दों को विशेषित करने के लिए प्रयोग किया जाता है, तो ऐसे विशेषणों को पदान्तरित विशेषण कहते हैं। जैसे-ये लोग अभिनन्दनीय पुरुष हैं, इनका अनभिनन्दन दोष है। वे लोग अपूजनीय मनुष्य हैं, उनका पूजन होता है। उसकी प्रथम प्रदर्शित फिल्म हिट हो गई। देय धन का शीघ्र दान तथा आदेय धन का शी:य आदान प्रसनताकारक होता है। कर्त्तव्य कर्म को तत्काल करो। ओजस्वी भाषण पर तालियाँ गड़गड़ा उठीं। छन्दोमयी रचनाएँ कम हो रही हैं। कुलीन स्त्रियाँ समाज की शोभा हैं। रामराज्य में दैहिक, दैविक, भौतिक ताप नहीं थे।

(छ) प्रश्नवाचक विशेषण :- जब प्रश्नवाचक सर्वनामों अथवा क्रिया विशेषणों को विशेष्य पदों को विशेषित करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है, तब उन्हे प्रश्नवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – कौन-सी घटना घट गई? क्या बात हो गई ? कितनी दूरी तय करनी पड़ी ? कितना वजन उठाना पड़ा ?

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प्रश्न 29.
विशेषण पदों का वर्ग-विभाजन कितने प्रकार से होता है ?
उत्तरः
विशेषण पदों का वर्ग-विभाजन मुख्यत: दो प्रकार से होता है-

  • विशेषित पद की प्रकृति के अनुसार, तथा
  • विशेषण पद की रचना या उपादान के अनुसार।

प्रश्न 30.
विशेष्य (संज्ञा) का विशेषण किसे कहते हैं ? संज्ञा से बनने वाले विशेषणों की एक सूची प्रस्तुत करें।
उत्तरः
विशेष्य (संज्ञा) का विशेषण :- जिस विशेषण पद से किसी विशेष्य पद के गुण, प्रकृति या अवस्था का बोध होता है, उसे विशेष्य का विशेषण कहते हैं। जैसे-सुरम्य घाटी, न्यायार्थ युद्ध, विचित्र इन्द्रधनुष, निर्मल चित्त, विस्तृत आकाश, स्वर्णमय कलश, शीतल वायु, कठोर भूमि इत्यादि।
विशेष्य पद के विशेषणों के विशेष्य सहित अन्य उदाहरण-
प्राय: संज्ञा को ही विशेष्य कहा जाता है। यहाँ विशेष्य-विशेषण की एक विस्तृत सुची दी जा रही है-

विशेष्य – विशेषण
अंक, अंकन – अंकित, अंकनीय, अंक्य
अंकुर – अंकुरित
अंडा – अंडैल
अंत – अंतिम, अंत्य
अंतर्वेद – अंतर्वेदी
अँकुड़ी – अँकुड़ीदार
अंगरेज – अंगरेजी
अंकंपन – अकंपित, अकंप्य
अकाल – अकालिक
अटक – अटकाऊ
अतिरंजन – अतिरंजित
अधर्म – अधर्मा, अर्धर्मिष्ठ
अधोगमन – अधोगामी
अनाचार – अनाचारी
अनिच्छा – अनिच्छित, अनिच्छुक
अनीश्वरवाद – अनीश्वरवादी
अनुकंपा – अनुकंपित
अनुकरण – अनुकरणीय, अनुकृत
अनुताप – अनुतप्त
अनुत्थान – अनुत्थित
अनुधावन – अनुधावक, अनुधावी, अनुधावित
अनुपकार – अनुपकारी, अनुपकारक
अनुभव – अनुभवी
अनुमान – अनुमानित, अनुमित
अनुयोजन – अनुयोजित, अनुयोज्य
अपहार – अपहारक, अपहारी, अपहारित, अपहार्य
अप्रतिकार – अप्रतिकारी
अप्रतिग्रहण – अप्रतिग्राह्य, अप्रतिगृहीत
अनुरंजन – अनुरंजित
अनुराग – अनुरागी
अनुशासन, अनुशासक, – अनुशासनीय, अनुशासित
अनुशीलन – अनुशीलनीय, अनुशीलित
अनुषंग – अनुषंगी, अनुषंगिक
अन्याय – अन्यायी
अन्येन्याश्रय – अन्योन्याश्रित
अन्वय – अन्वयी
अन्वेषण – अन्वेषित, अन्वेषी, अनवेष्टा
अपकार – अपकारक, अपकारी
अपक्षय – अपक्षीण
अपक्षेपण – अपक्षिप्त
अपचय – अपचयी
अपचार – अपचारी
अपध्वंस – अपध्वंसी, अपध्वस्त
अपनयन – अपनीत
अपभंश – अपभ्रष्ट
अपराध – अपराधी
अपिरहार – अपरिहारित, अपरिहार्य
अपवर्जन – अपवर्जित
अपवाद – अपवादित
अपवर्तन – अपवर्तित
अपवाहन – अपवाहित, अपवाहय
अपस्नान – अपस्नात
अपहरण – अपहरणीय, अपहरित, अपद्कत, अपहर्ता
अपेक्षा – अपेक्षित
अर्थ – अर्थी
अर्पण – अर्पित
अलंकार – अलंकृत
अवकलन – अवकलित
अप्रतिबंध – अप्रतिबद्ध
अबीर – अबीरी
अभिघात – अभिघातक, अभिघाती
अभिज्ञान – अभिज्ञात
अभिनंदन – अभिनंदनीय, अभिनंदित
अभिनय – अभिनीत, अभिनेय
अभिनिवेश – अभिनिविष्ट, अभिनिवेशित
अभिभ्भाय – अभिप्रेत
अभिभव – अभिभावुक, अभिभावी, अभिभूत
अभिमंडन – अभिमंडित
अभिमंत्रण – अभिमंत्रित
अभिमान – अभिमानी
अभियोग – अभियोगी, अभियुक्त, अभियोक्ता
अभिलाष – अभिलाषक, अभिलाषी, अभिलाषुक, अभिलषित
अभिवंदन – अभिवंदनीय, अभिवंदित अभिवंद्य
अभिशंका – अभिशंकित
अभिशाप – अभिशापित, अभिशाप्त
अभिसार – अभिसारिका, अभिसारी
अभेद – अभेदनीय, अभेद्य
अभ्यर्थना – अभ्यर्थनीय, अभ्यर्थित
अभ्यास – अभ्यस्त, अभ्यासी
अभ्युथान – अभ्युत्यायी, अभ्युत्थित अभ्यत्थेय
अभ्युद्य – अभ्युदित, आभ्युदयिक
अर्चन – अर्चनीय
असत्कार – असत्कृत
असदाचार – असदाचारी
असम्मति – असम्मत
अहंकार – अहंकारी
अहिवात – अहिवाती, अहिवातीन
आकंपन – आकंपित
आकर्षण – आकर्षित, आकृष्ट
आकलन – आकलनीय, आकलित
आकांक्षा – आकांक्षक, आकांक्षित, आकांक्षी
इच्छ – इच्छित, इच्छुक, ऐच्छिक
अवकिरण – अवकीर्ण, अवकृष्ट
अवक्षेपण – अवक्षिप्त
अवच्छेद – अवच्छेद्य, अवक्छिन्न
अवज्ञा – अवज्ञात, अवजेय
अवतरण – अवतीर्ण
अवधारण – अवधारणीय, अवधारित
अवध्वंस – अवध्वस्त
अवमर्दन – अवमर्दित
अवमान – अवमानित
अवरोधन – अवरोधक, अवरोधित, अवरोधी, अवरुद्ध
अवरोपण – अवरोपणीय, अवरोपित,
अवरोहण – अवरोहक, अवरोहित अवरोही
अवलंबन – अवलंबित, अवलंबी
अवलेह – अवलेहु
अवलोकन – अवलोकनीय, अवलोकित
अवशेष – अवशिष्ट
अवसाद – अवसन्न, अवसादित
अवहेलन – अवहेलित
अव्यवस्था – अव्यवस्थित
अशक्ति – अशक्त
अशांति – अशांत
अश्रद्धा – अश्रद्धेय
अश्वारोहण – अश्वारोही
अष्टांग – अष्टांगी
असंतोष – असंतोषी
असंभावना – असंभावित, असंभाव्य
आपत्काल – आपत्कालिक
आपस – आपसी
आपूर – आपूरित, अपूर्य
आप्लावन – आप्लावित
आफताब – आफताबी
आभूषण – आभूषित
आमंत्रण – आमंत्रित
आमर्दन – आमर्दित
आमोद – आमोदित, आमोदी
आयुर्वेद – आयुर्वेदीय
आयोजन – आयोजित
उत्साह – उत्साहित, उत्साही
इतमीनान – इतमीनानी
इतिहास – ऐतिहासिक
इत्तेफाक – इत्तफाकिया
इल्तिवा – मुल्तवी
इल्म – इल्मी
इश्क – आशिक, माशूक
इस्लाम – इस्लामिया
ईक्षण – ईक्षणीय, ईक्षित, ईक्ष्य
ईड़ा – ईड़ित, ईड़यत
ईप्सा – ईप्सित, ईप्सु
ईरान – ईरानी
ईर्षा – ईर्षालु, ईर्षित, इर्षु
ईश्वर – ईश्वरी, ईश्वरीय
उच्चरण – उच्चरणीय, उच्चरित
उच्चाकांक्षा – उच्चाकांक्षी
उच्चाटन – उच्चाटनीय, उच्चाटित
उच्चारण – उच्चारणीय, उच्चारित
उद्वेग – उद्विग्न
उन्माद – उन्मादक, उन्मादी
उन्मार्ग – उन्मार्गी
उन्मूलन – उन्मूलक, उन्मूलनीय, उन्मूलित
उन्मेष – उन्मिषित
उपकार – उपकारक, उपकारी उपकार्य, उपकृत
उपगमन – उपगृत
उपघात – उपघातक, उपघाती
उपचय – उपचयित, उपचित
उपचरण – उपचारित, उपचर्य
उपचार – उपचारक, उपचारित उपचारी, औपचारिक
उुपजीवन – उपजीवी, उपजीवित
उपदेश – उपदेश्य, औपदेशिक उपदिष्ट, उपदेशी
उपद्रव – उपद्रवी
उपधान – उपहित
उपनयन – उपनीत, उपनेतव्य, उपनेता
उपनिधि – औपनिधिक
उपनिवेश – उपनिवेशित, उपनिविष्ट
उदय – उदित
उदाहरण उदाहरणीय – उदाहार्य, उदाहृत
उद्गार – उद्गारी, उद्गारित
उद्घाटन – उद्घाटक, उद्घाटनीय, उद्घाटित, उद्घाट्य
उद्दीपन – उद्दीपनीय, उद्दीपक उद्दीपित, उद्दीप्त, उद्दीप्य
उद्देश्य – उद्दिष्ट, उद्ददेश्य, उद्देशित
उद्धरण – उद्धरणीय, उद्धत
उद्वार – उद्धारक, उद्धारित
उद्बोधन – उद्बोधक, उद्बोधनीय उद्बोधित
उद्भव – उद्भूत
उद्भावन – उद्भावनीय, उदभाव्य उद्भवित
उद्भेदन – उद्भेदक, उद्भेदनीय उद्भिन्न
उद्यम – उद्यत, उद्यमी
उद्योग – उद्योगी, उद्युक्त
उपलेपन – उपलेपित, उपलेप्य, उपलिप्त
उपवेशन – उपवेशित, उपवेशी उपवेश्य, उपविष्ट
उपस्थान – उपस्थानीय, उपस्थित
उपहास – उपहास्य
उपांत – उपांत्य
उपादान – उपादेय
उपाय – उपायी, उपेय
उपार्जन – उपार्जनीय, उपार्जित
उपालंभ – उपालब्ध
उपालंभन – उपालंभनीय, उपालंभित उपालंभ्य
उपासन – उपासनीय, उपासित उपासी, उपास्य
उपेक्षण – उपेक्षणीय, उपेक्षित, उपेक्ष्य
उल्लसन – उल्लसित, उल्लासी
उल्लास – उल्लासक, उल्लासित
उल्लेख – उल्लेखक, उल्लेखनीय उल्लेखित, उल्लेख्य
ऋण – ऋणी
ऋतुगमन – ऋतुगामी
ॠतुस्नान – ॠतुस्नाता
उपन्यास – उपन्यस्त
उपपादन – उपपन्न, उपपादक उपपादनीय, उपपादित
उप्लव – उप्लवित, उप्लव्य उप्लवी, उप्लुत
उपभोग – उपभोगी, उपभोग्य, उपभुक्त
उपमा – उपमान, उपमापक उपमित, उपमेय
उपयोग – उपयोगी, उपयुक्त
उपरंजन – उपरंजक, उपरंजनीय उपरंजित, उपरंज्य
कद – कद्दी
कदाचार – कदाचारी
कपट – कपटी
कपाल – कपाली, कापालिक
कपास – कपासी
कमानी – कमानीदार
करतब – करतबी
कर्षण – कर्षक, कर्षणीय, कर्षित, कर्ष्य
कलंक – कलंकित, कलंकी
कलह – कलहकारी, कलही
कवच – कवची
कवर्ग – कवर्गीय
कसरत – कसरती
कांक्षा – कांक्षणीय, कांक्षित, कांक्षी, कांक्ष्य
काँटा – कँटीला
कागज – कागजी
कानून – कानूनी
काफिर – काफिरी
काबुल – काबुली
काम – कामुक, कामी
काय – कायिक
कारबार – कारोबारी
किताब – किताबी
किशमिश – किशमिशी
कीमत – कीमती
कुआर – कुआँरा
कुक्कुरदंत – कुक्कुरदंता
कुतूहल – कुतहली
एकांतवास – एकांतवासी
एकीकरण – एकीकृत
एषणा – एषणीय, एषतव्य
ऐब – ऐबी
ओज – ओजस्वी, ओजित
कंकड – कंकड़ीला
कंटक – कंटकित
कंठ – कंठ्य
कंधार – कंधारी
कँगूरा – कँगूरेदार
कज्जल – कज्जलित
कुराह – कुराही
कुसुम – कुसुमित
कृपा – कृपालु
कृमि – कृमिल
कृषि – कृष्य
केंचुल – केंचुली
कैद – कैदी
कोढ़ – कोढ़ी
कोप – कुपित
कौतुक – कौतुकित, कौतुकी
कौरव – कौरवी
क्वाँरा – क्वाँरी
क्षण – क्षणिक
क्षुधा – क्षुधालु, क्षुधित
क्षोभ – क्षुब्ध, क्षुभित
खंडन – खंडनीय, खंडित, खंडी
खता – खतावार
खादन – खादनीय, खाद्य, खादित
खानदान – खानदानी
खेद – खेदित, खिन्न
खैरात – खैराती
खौफ – खौफनाक
ख्याल – ख्याली
ख्याहिश – ख्वाहिशमंद
गंधक – गंधकी
गँवई – गँवइयाँ
गजनी – गजनवी
गणन – गणनीय, गणित, गण्य
गमन – गमनीय, गम्य
कुत्सन – कुत्सित
कुमार्ग – कुमार्गी
कुपथ – कुपथी
गल्ला – गल्लई
गश्त – गश्ती
गाँठ – गँठीला
गाँव – गँवार
गान – गेय, गेतव्य
गाभा – गाभिन
गुंफ, गुंफन – गुंफित
गुजरात – गुजराती
गुण – गुणी
गुणन – गुण्य, गुणनीय, गुणित
गुणा – गुण्य, गुणित
गुस्सा – गुस्सावर, गुस्सैल
गृह – गृही
गोर – गोरी
ग्लानि – ग्लेय
घटन – घटनीय, घटित
घर – घराऊ, घरेलू, घरू
घात – घाती
घिन – घिनौना
घृणा – घृणित
घ्राण – प्रेय
चख – चखिया
चटपटी – चटपटिया
चमत्कार – चमत्कारी, चमत्कृत
चातुर्थक – चातुर्थिकी
चिंतन – चिंतनीय, चिंतित, चिंत्य
चिकित्सा – चिकित्सित, चिकित्स्य
चिकीर्षा – चिकीर्षित, चिकीर्ष्य
चित्र – चित्रित
चिरनिद्रा – चिरनिद्रित
चिह्न – चिह्नित
चुंबन – चुंबनीय, चुंबित
तर्षण – तर्षित
तारतम्य – तारतम्यिक
तिरस्कार – तिरस्कृत
तिरहुत – तिरहुतिया
तृष्णा – तृषित, तृष्य
गर्व – गर्वित, गर्ववान्
गर्हण – गर्हणीय, गर्हित गर्ही, गर्हितव्य
चूषण – चूषणीय, चूष्य
चौखंड – चौखंडी
छद्मवेश – छद्यवेशी
छलन – छालित
छवि – छबोला
छादन – छादित
छिद्र – छिद्रित
छिद्रान्वेषण – छिद्रान्वेषी
जंग – जंगी
जंगल – जंगली
जंजीर – जंजोरी
जक – जक्की
जड़िया – जड़ाऊ
जनून – जनूनी
जप – जपतव्य, जपनीय जपी, जप्य
जबान – जबानी
जरायु – जरायुज
जरूरत – जरूरी
जागीर – जागीरी
जाफरान – जाफरानी
जायका – जायकेदार
जिगर – जिगरी
जिद – जिद्दी
जिल्द – जिल्दी
जिहवामूल – जिहवामूलीय
जीवन – जावित
जुगुप्सन – जुगुप्स, जुगुप्सित
ज्ञापन – ज्ञापित, ज्ञाप्य
ड्योढ़ा – ड्योढ़ी
तर्जन – तर्जित
तर्पण – तर्पणीय, तर्पित, तर्पी
नि:सारण – नि:सारित
निक्षेपण – निक्षिप्य, निक्षेप्य
निबंधन – निबद्ध
निमंत्रण – निमंत्रित
नियमन – नियमित, नियम्य
तेजाब – तेजाबी
त्यजन – त्यजनीय
त्राण – त्रातक
दंडन – दंडनीय, दंडित, दंड्य
दंभ – दंभी
दंशन – दंशित, दंशी
दक्खिन – दक्खिनी
दरबार – दरबारी
दलन – दलित
दहन – दहनीय, दह्यमान
दाग – दागी
दीक्षण – दीक्षित
दीपन – दीपनीय, दीपित, दीप्य
दुराग्रह – दुराग्मही
दुराचार – दुराचारी
दुश्चेष्टा – दुश्चेष्टित
दृश – दृश्य
देह – देही
देहात – देहाती
द्रवण – द्रवित
धूपन – धूपित
ध्वंसन – ध्वंसनीय, ध्वंसित, ध्वस्त
नकटा – नकटी
नक्काशी – नक्काशीदार
नमन – नमनीय, नमित
नाम – नामी
निंदन – निंदनीय, निंदित, निंद्य
परिप्रेषण – परिप्रेषित, परिप्रेष्य
परिपोषण – परिपुष्ट:
परिभक्षण – पैर्रिभक्षितः
परिभावन – परिभावित
परिमाण – परिमित, परिमेय
परिमार्ज़न – परिमार्जित परिमृज्य, परिमृष्ट
परिमोहन – परिमोहित
परिवर्तन – परिवर्तनीय, परिवर्तित, परिवर्ती
परिवर्द्धन – परिवर्द्धित
परिवेषण – परिवेष्टव्य, परिवेष्य
परिशोधन – परिशुद्ध, परिशोधनीय, परिशोधित
नियोजन – नियोजित, नियोज्य नियुक्त
निराकरण – निराकरणीय, निराकृत
निराकांक्षा – निराकांक्षी
निराला – निराली
निराशावाद – निराशावादी
निरीक्षण – निरीक्षित, निरीक्ष्य निरीक्ष्यमाण
निर्वचन – निर्वचनीय
निवेश – निवेशित
निष्कासन – निष्कासित
निषेधन – निषेधित, निषिद्ध
नोक – नुकीली
न्यास – न्यस्त
पंजाब – पंजाबी
पत्थर – पथरीला
पराक्रम – पराक्रमी
परावर्तन – परावर्तित, परावृत्त
परिकल्पन – परिकल्पित
परिगणन – परिगणनीय, परिगणित, परिगण्य
परिचरण – परिचरणीय, परिचरितव्य
परिचारण – परिचारी, परिचार्य
परिचालन – परिचालित
परित्याग – परित्यागी
परिपालन – परिपाल्य, परिपालित
परिपीड़न – परिपीडित
पूजन – पूजक, पूजनीय पूजितव्य, पूज्य
पोषण – पोषित, पोषणीय, पुष्ट, पोष्य
प्रकंप – प्रकंपित
प्रच्छादन – प्रच्छादित
प्रच्छेदन – प्रच्छेद्य
प्रज्ज्वलन – प्रज्ज्वलनीय, प्रज्ज्वलित
प्रतिदान – प्रतिदत्त
प्रतिपादन – प्रतिपादित
प्रतिबंध – प्रतिबद्ध
प्रतिबिंब – प्रतिबिंबित
प्रतिरोध – प्रतिरोधक
प्रतिवर्त्तन – प्रतिवर्तित
प्रतिषेध – प्रतिषिद्ध, प्रतिषेधक
परिसरण – परिसारी, परिसृत
परिहरण – परिहरणीय परिहृत, परिहर्तव्य
पेरीक्षण – परीक्षित, परीक्ष्य
पर्यवेक्षण – पर्यवेक्षित
पहलू – पहलूदार
पाकिस्तान – पाकिस्तानी
पापलोक – पापलोक्य
पापाचार – पापाचारी
पालन – पालनीय, पालित, पाल्य
पितृघात – पितृघातन, पितृघाती, पितृघ्न
पिपासा – पिपासित
पोड़न – पीड़क, पीड़नीय, पीड़ित
पुनरावृक्ति – पुनरावृत्त
पुनरुक्ति – पुनरुक्त
पुरस्कार – पुरस्कृत
पूरण – पूरणीय
प्रस्तावन – प्रस्तावित
प्रस्थापन – प्रस्थापित, प्रस्थापी, प्रस्थाप्य
प्रांत – प्रांतिक
प्रातःकाल – प्रात:कालीन
प्रापण – प्रापणीय, प्राप्य, प्राप्त
प्रेषण – प्रेषित
प्रोत्साहन – प्रोत्साहित
फसाद – फसादी
फेन – फेनिल
बलगम – बलगमी
बहिष्कार – बहिष्कृत
बाधन – बाधित, बाधनीय, बाध्य
बुभूषा – बुभूषक, बुभूषु
बोधन – बोधनीय, बोधित, बोध्य
ब्रह्मदोष – ब्रह्मदोषी
भक्षण – भक्षणीय, भक्षित, भक्ष्य
भेदन – भेदनीय, भेद्य
मंजरी – मंजरित
मखमल – मखमली
मजलिस – मजलिसी
मजहब – मज़हबी
प्रतिहिंसा – प्रतिहिंसित
प्रत्याशा – प्रत्याशित
प्रपीडन – प्रपीड़ित
प्रलंभन – प्रलब्ध
प्रलाप – प्रलापी
प्रलेपन – प्रलेपक, प्रलेप्य
प्रलोभ – प्रलोभक
प्रवचन – प्रवचनीय
प्रवर्तन – प्रवर्तनीय, प्रवर्तित, प्रवर्त्य
प्रवासन – प्रवासित, प्रवास्य
प्रवाहन – प्रवाहित
प्रवेशन – प्रविष्ट, प्रवेशनीय, प्रवेशित, प्रवेश्य
प्रशंसन – प्रशंसनीय, प्रशंस्य
प्रशंसा – प्रशंसित
प्रसरण – प्रसरणीय, प्रसरित
प्रसारण – प्रसारित, प्रसार्य्य
प्रतिपालन – प्रतिपालित
मोदन – मोदनीय, मोदित
मौसिम – मौसिमी
मौसी – मौसेरा, मौसियाउत
रंज – रंजीदा
रंजन – रंजनीय
रईस – रईसाना
राजद्रोह – राजद्रोही
राष्ट्रवाद – राष्ट्रवादी
रियासत – रियासती
रुचि – रुचित
रोग – रोगी, रुगण
रोध, रोधन – रोधित
रोपण – रोपित, रोप्य
रोब – रोबीला
रोमांच – रोमांचित
रोष – रुष्ट
लज्जा – लज्जित
लवन – लवनीय, लव्य
लापरवाही – लापरवाह
लालच – लालची
लालन – लालनीय
लेखन – लेखनीय, लेख्य
मनोरंजन – मनोरंजक, मनोरंजनीय
मनोवांछा – मनोवांछित
मरीज – मरीजी
मसीहा – मसीही
मिथ्यावादी – मिथ्यावादिनी
मिश्रण – मिश्रणीय, मिश्रित
मीलन – मीलनीय, मीलित
मुद्दत – मुद्दती
मुल्क – मुल्की
मोद – मोदी
वर्तन – वर्तित
वर्द्धन – वर्द्धित
वशीकरण – वशीकृत
वसंत – वासंत, वासंतक
वस्तु – वासंतिक, वसंती वास्तव, वास्तविक
वहन – वहनीय, वहमान, वहित
वांछा – वांछनीय, वांछित
वासन – वासित
विकसन – विकसित
विकास – विकासक
विघटन – विघटित
विच्छेद – विच्छेदक
विजयी – विजयिनी
विज्ञाप्ति – विज्ञाप्त
विज्ञापन – विज्ञापनीय, विज्ञापित
विडंबना – विडंबनीय, विडंबित
विदेश – विदेशी, विदेशीय
विध्वंसन – विध्वंसित, विध्वस्त
विनाश – विनाशक
विनाशन – विनाशी, विनाश्य
विनोदन – विनोदित, विनोदी
विन्यास – विन्यस्त
विबोध – विबोधक
विबोधन – विबोधित
विभाजन – विभाजनीय, विभाज्य विभाजित
लेपन – लेपिता, लेष, लिप्त
लोप – लुप्त, लोपक, लोंप्ता, लोप्य
लोभ – लुष्ध, लोभी
वंचन – वंचिन
वंदना – वंदनीय, वंदिन
वमन – वाम्न
वर्गीकरण – वर्गीकृत्न
वर्चस् – वर्चस्वान्, वर्चस्वी
वर्जन – वर्जंनीय, वर्ज्य, वर्जित
वर्णन – वर्णनीय, वर्ण्य, वर्णित
विमोह – विमोहक
विमोहन – विमोहित, विमोही
विराग – विरागी
विराजन – विराजमान, विराजित
विरोध – विरोधक
विरोधन – विरोधी, विरोधित, विरोध्य
विरोपण – विरोपणीय, विरोपित विरोष्य
विरोहन – विरोहणीय, विरोहित
विलंबन – विलंबनीय, विलंबित, विलंबो
विश्वासघात – विश्वासघातक
विषाद – विषादी
वीक्षण – वीक्षणीय
व्याख्या – व्याख्यात
शरीरी – शरीरिणी
शाकाहार – शाकाहारी
शान – शानदार
शुश्रूषा – शुश्रूष्य
शोचन – शोचनीय, शोच्य, शोचितव्य
शोधन – शोधनीय, शोधित, शोध्य, शोद्धव्य
शोषण – शोषणीय, शोषित, शोषी
श्रवण – श्रवणीय
श्लेषण – श्लेषणीय, श्लेषित, श्लेषी
श्लाघन – श्लेषणीय, श्लेषित, श्लेषी, शिलष्ट
विभूषण – विभूषित, विभूष्य
विभेदन – विभेदनीय, विभेद्य
विमंडन – विमंडित
विमर्दन – विमर्दनीय, विमर्दित
विमोचन – विमोचनीय, विमोच्य
संचय – संचयी
संपर्क – संपृक्त
संपादन – संपादनीय, संपादी, संपाद्य
संपोषण – संपोषित
संप्रदाय – संप्रदायिक
संप्रयोजन – संप्रयोजनीय, संप्रयुक्त
संप्रवर्तक – संप्रयोजन, संप्रयोक्तव्य
संप्रवर्तन – संप्रवर्ती
संबोधन – संप्रवर्तिनी, संप्रवृत्त संबोधित, संबोध्य
संभवन – संभवनी, संभावित, संभावितव्य, संभाव्य
संभेदन – संभेदनीय, संभेद्य, संभिन्न
संयम – संयमी, संयमित, संयत
संयोजन – संयोगी, संयोजनीय संयोज्य, संयोजित
संवरण – संवरणीय, संरक्षित, संरक्षी, संरक्ष्य
संवरण – संवरणीय, संवृत्त
संवर्ग – संवर्ग्य
संवर्जन – संवर्जनीय, सवर्जित, संवृक्त
संवर्द्धन – संवर्द्धनीय, संवर्धित, संवृद्ध
संवादन – संवादनीय; संवादित, संवादी, संवाद्य
संवारण – संवारणीय, संवार्य, संवारित
संवाहन – संवाहणीय, संवाहित, संवाही, संवाह्य
संविभाग – संविभागी
संवेदन – संवेदनीय, संवेद्य, संवेदित
संशोधन – संशोधनीय, संशुद्ध, संशोधित, संशोध्य
संश्रवण – संश्रवणीय, संश्रुत
श्वसन – श्वसनीय, श्वसित
संकलन – संकलित
संकीर्तन – संकीर्तित
संकेत – संकेतित
संश्राव – संश्रावणीय, संश्रावित संश्राव्य
संश्लेषण – संश्लेषणीय, संश्लेषित, संश्लिष्ट
संसाधन – संसाधनीय, संसाधित संसाध्य
संसूचन – संसूचनीय, संसूचित, संसूच्य
संस्मरण – संस्मरणीय, संस्मृत
सन्निवेशन – सन्निवेशित, सन्निवेशी, सन्निवेश्य, सन्निविष्ट
समर्थन – समर्थनीय, समर्थक, समर्थ्य
समादर – समादरणीय, समादृत
समाधान – समाधानीय
समापन – समाप्य, समापनीय
समालिंगन – समालिंगित
समीक्षा – समीक्षित, समीक्ष्य
सम्मिश्रण – सम्मिश्र
सम्मोहन – सम्मोहक
सरकार – सरकारी
सरोकार – सरोकारी
सर्जन – सर्जनीय, सर्जित
सहकारी – सहकारिणी
साक्षी – साक्षिणी
सार्वभौम – सार्वभौमिक
सिंचन – सिंचित
सियासत – सियासती, सियासी
सेवन – सेवनीय, सेवित, सेव्य, सेवितव्य
सोपान – सोपानित
स्कूल – स्कूली

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 31.
सर्वनाम का विशेषण से आप क्या समझते हैं ? सर्वनाम का विशेषण में कैसे रूपान्तरण होता है ?
उत्तरः
सर्वनाम का विशेषण :- जिस विशेषण में किसी सर्वनाम पद का गुण, स्वभाव, अवस्था आदि का बोध होता है, उसे सर्वनाम का विशेषण कहते हैं। सुपरिचित मैं, व्यवधानरहित वह, मूर्खतावश तुम, स्मरणीय वे लोग इत्यादि। यह मैं, वह तुम, ये हमलोग, वे तुमलोग, यह मेरा, वह तुम्हारा, ये हमलोगों के, वे तुमलोगों के, यह उसका, ये उनलोगों के (प्रत्येक युग्म का विशेषण विपर्यय अर्थात् विशेषण का विशेष्य और विशेष्य का विशेषण किया जा सकता है।)

सर्वनाम पद के विशेषणों के विशेष्य सहित अन्य उदाहरण – अधर्मी वे लोग, अध्ययनशील आप, आदरणीय आप लोग, आलसी वह, कर्त्रव्य परायण।
तत्सम सर्वनाम का विशेषण में रूपान्तरण :-

  • अस्मद् – अस्मदीय, अस्मदर्थ, मामकीन, मादृश
  • युष्मद् – युष्मदीय, युष्मदर्थ, तावकीन, त्वादृश
  • भवत् – उद्रीय, भवदर्थ, भवादृश।
  • तद् – तदीय, तादृश।
  • यद् – यदीय, यदर्ष यादृश।
  • एतद् – एतदीय, एतदर्थ, एतादृश।
  • स्व, स्वक – स्वीय, स्वकीय, स्वार्थ, स्वकार्थ
  • सर्व – सर्वीय, सर्वार्थ
  • भवत् – भवदीय, भवदर्श, भवादृश।

तद्धव सर्वनाम का विशेषण में रूपान्तरण :-

  • मैं, हम – मुझसा, मुझसी, हमसा, हमसी, हमसे, मेरा, मेरी, मेरे, हमारा, हमारी, हमारे।
  • तू, तुम – तुमसा, तुमसी, तुमसे, तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे।
  • वह – उससा, उससी, उससे, वैसा, वैसी, वैसे, उसका, उसकी, उसके।
  • यह – इससा, इससी, इससे, ऐसा, ऐसी, ऐसे, इसका, इसकी, इसके।
  • कौन – किससा, किससी, किससे, कैसा, कैसी, कैसे, किसका, किसकी, किसके।
  • जो – जिससा, जिससी, जिससे, जैसा, जैसी, जैसे, जिसका, जिसकी, जिसके।
  • आप – आपसा, आपसी, आपसे, आप जैसा, आप जैसी, आप जैसे, आपका, आपकी, आपके।
  • ये – इनसा, इनसी, इनसे, इनका, इनकी, इनके।
  • वे – उनसा, उनसी, उनसे, उनका, उनकी, उनके।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 32.
विशेषण का विशेषण से आप क्या समझते हैं ? विशेषण का विशेषण में रूपान्तरण कैसे होता है ?
उत्तरः
विशेषण का विशेषण :- जिस विशेषण पद से किसी अन्य विशेषण पद के गुण, अवस्था या प्रकृति का बोध होता है, उसे विशेषण का विशेषण कहते हैं। जैसे -प्रचण्ड तपती दोपहरी, भीषण अंधेरी रात, परम उदार गृहस्थ इत्यादि। विशेषण का विशेषण में रूपान्तरण :-

विशेषण – विशेषण में रूपान्तरण
उज्ज्वल – उज्ज्वलित, उज्ज्वलीकृत
धवल – धर्वलित, धवलीकृत
स्थूल – स्थूलायित, स्थूलीकृत
सूक्ष्म – सूक्ष्मायित, सूक्ष्मीकृत
संक्षिप्त – संक्षिप्तायित, संक्षिप्तीकृत
मृदु – मुदुल, मृदुलायित, मृदुलीकृत
नवीन – नवीनीकृत, नवीनायित
आतुर – आतुरायित, आतुरीकृत
प्रिय – प्रियायित
प्राप्त – प्रापित
गत – गमयित
अन्ध – अन्धायित, अन्धीकृत
बधिर – बधिरायित, बधिरीकृत
मूक – मूकायित, मूकीकृत
भीत – भीतायित
भ्रष्ट – भ्रष्टायित
च्युत – च्यावित, च्युतीकृत
मुक्त – मोचित, मुक्तीकृत
उद्धूत – उद्धारित, उद्दृतीकृत
अनुकूल – अनुकूलायित, अनुकूलीकृत
मग्न – मग्नायित, मग्नीकृत
अधीन – अधीनीकृत, अधीनायित
लीन – लीनायित, लीनीकृत
स्वतंत्र – स्वतंत्र्यित, स्वतंत्रीकृत
परतंत्र – परतन्न्रायित, परतन्त्रीकृत
स्वायत्त – स्वायत्तीकृत, स्वायत्तायित
भूमिगत – भूमिगमयित
तरुण – तरुणायित, तरुणीकृत
नील – नीलायित, नीलीकृत
पीत – पीतायित, पीतीकृत
रक्त – रक्तायित, रक्तीकृत
श्षेत – श्वेतायित, श्वेतीकृत
कृष्ण – कृष्णायित, कृष्णीकृत
प्रवीन – प्रवीणायित, प्रवीणीकृत
निपुण – निपुणायित, निपुणीकृत
अभिज्ञ – अभिज्ञायित, अभिज्ञीकृत
निष्णात – निष्गायित, निष्णातीकृत
शिक्षित – शिक्षायित, शिक्षितीकृत
कुशल – कुशलायित, कुशलीकृत
वदान्य – वदान्यायित, वदान्यीकृत
प्रधित – प्रथितायित, प्रथितीकृत
ख्यात – ख्यातायित, ख्यातीकृत
समृद्ध – स्मृद्धायित, समृद्धीकृत
स्निग्ध – स्निग्धायित, स्निग्धीकृत
कुण्ठित – कुण्ठायित, कुण्ठीकृत
कर्मशील – कर्मशीलायित, कर्मशीलीकृत
वश्य – वश्यायित, वश्यीकृत
प्रणेय – प्रणेयायित, प्रणेयीकृत
विनीत – विनीतायित, विनीतीकृत
प्रगल्भ – प्रगल्भायित, प्रगल्भीकृत
शालीन – शालीनायित, शालीनीकृत
दीर्घसूत्री – दीर्घसूत्रायित, दीर्घसूत्रीकृत

प्रश्न 33.
निम्नांकित वाक्यों के सामने कोष्ठकों में दिए गए शब्दों से विशेषण बनाकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
उत्तरः
(क) विद्यार्थियों को अनुशासित रहना चाहिए। (अनुशासन)
(ख) रेडियो के अविष्कारक कौन हैं ? (अविष्कास)
(ग) मैं गणना जानता हूँ। (गणन)
(घ) पंजाबी बहुत मेहनती होते हैं। (पंजाब)
(ङ) ईश्वर बहुत कृपालु है। (कृपा)
(च) हमें विनयशील होना चाहिए। (विनय)
(छ) वह पैसेवाला है। (पैंसा)
(ज) कलाम प्रतिभाशाली हैं। (प्रतिभा)
(झ) राधा रूपवती है। (रूप)
(ज) भीम बलवान थे। (बल)

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 34.
निम्नांकित प्रत्ययों के योग से विशेषण बनाएँ :-
वानु, वती, शाली, वी, एरा, वाला, शील, आ, आलु।
उत्तरः
वान् : गुणवान्, धनवान्, ज्ञानवान्, नाशवान्, बलवान्, फलवान्।
वती : गुणवती, रसवती, फलवती, रूपवती, भगवती, विद्यावती, भाग्यवती, पुप्रवती।
शाली : भाग्यशाली, ऐश्वर्यशाली, प्रतिभाशाली, गौरवशाली, सम्पत्तिशाली, बलशाली।
वी : ओजस्वी, तेजस्वी, तपस्वी, यशस्वी, मनस्वी, वर्चस्वी।
एरा : ममेरा, फुफेरा, चचेरा, कैसेरा, मौसेरा, लुटेरा।
वाला : चायवाला, पैसावाला, कुल्फीवाला, दुकानवाला, घड़ीवाला, चनावाला, दिलवाला।
शील : कियाशील, प्रयत्नशील, विनयशील, उन्नतिशील।
आ : ठण्डा, प्यासा, नीला, भूखा, सूखा।
आलु : दयालु, कृपालु, ईर्ष्यालु, श्रद्धालु, लजालु।

प्रश्न 35.
निम्नांकित उपसर्गों के साथ संज्ञा को जोड़कर विशेषण बनाएँ :-
अ, नि:, नि, दु:, दु, स, बे, ला।
उत्तरः
अ – अयोग्य, अपूज्य, असमर्थ, अविकसित, अचल, अबोध, आदि।
नि: – निर्दोष, निर्गुण, निर्लज्ज, निर्भय, निःसार, नि:शेष आदि।
नि – निडर, निपूता, निकम्मा, निरकुश आदि।
दु: – दुर्जन, दुर्बल, दु:सह, दुधर्ष, दुर्जेय, दुर्जय।
दु – दुधारी, दुबला, दुबली, दुर्निवार आदि।
स – सपूत, सजल, सचल, सफल, सचित्र, सजीव आदि।
बे – बेशर्म, बेकसूर, बेचारा, बेईमान, बेहोश, बेवकूफ आदि।
ला – लावारिस, लापता, लाईलाज, लाचार।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 36.
निम्नांकित तत्सम् शब्दों के मूलावस्था के विशेषण में उचित प्रत्यय लगाकर उसे उत्तरावस्था तथा उत्तमावस्था विशेषण में बदलें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण 2

प्रश्न 37.
उत्तरावस्था तथा उत्तमावस्था का अन्तर बताएँ।
उत्तरः
उत्तरावस्था में विशेषण के मूल रूप में तर प्रत्यय का योग किया जाता है, जबकि उत्तमावस्था में विशेषण के मूल रूप में ‘तम प्रत्यय का योग किया जाता है।
उदाहरण :-
1. राम मोहन से श्रेष्ठतर है। (उत्तरावस्था)
2. राम समस्त छात्रों में श्रेष्ठतम है। (उत्तमावस्था)

प्रश्न 38.
शब्द द्वैताश्रयी विशेषण के चार उदाहरण दें।
उत्तरः

  • नव-नव उज्ज्वल धार नवल उपमानित धारण करती है।
  • काले-काले मेघ कितने भयानक हैं।
  • खेतों में लहराते पीले-पीले फूल मानों वसंत के दूत हैं।
  • यह भींगी-भींगी रात सुहावनी है।

प्रश्न 39.
ध्वन्यात्मक विशेषण के चार उदाहरण दें।
उत्तरः

  • सनसनाती हवा का झोंका अच्छा लगता है।
  • टनटनाते घण्टे की आवाज सुन लड़के दौड़ पड़े।
  • टनटनाती घण्टी की आवाज सुन सेवक दौड़ पड़ा।
  • झरझर वृष्टि में कहाँ चल पड़े ?

प्रश्न 40.
प्रश्नवाचक विशेषण के चार उदाहरण दें।
उत्तरः

  • आप क्या काम करते हैं ?
  • उसे कितना धन चाहिए ?
  • आप किससे मिलना चाहते हैं ?
  • मैंने किसका मन दुखाया है ?

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 41.
निम्नांकित वाक्यों में प्रयुक्त हुए विशेषणों के नाम लिखें :-
उत्तरः

  • मेरी कक्षा में पचीस छात्राएँ हैं। (निश्चित संख्यावाचक विशेषण)
  • ये गाँव बड़े सुन्दर हैं। (सार्वनामिक विशेषण)
  • मुझे एक किलो घी चाहिए। (परिमाणबोधक विशेषण)
  • सारी पुस्तकें बिक चुकी हैं। (अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण)
  • दूसरा छात्र अधिक बुद्धिमान है। (संख्यावाचक विशेषण)
  • धरती गोल न होकर अण्डाकार है। (गुणवाचक विशेषण)
  • शीला बड़ी नेक बालिका है। (प्रविशेषण)
  • वह व्यक्ति प्रतिदिन टहलने जाता है। (सार्वनामिक विशेषण)
  • आपका पालतू कुत्ता भयानक है। (गुणवाचक विशेषण)
  • लखनवी शिष्टाचार अपनाइये। (व्यक्तिवाचक विशेषण)

प्रश्न 42.
निम्नलिखित वाक्यों में से प्रविशेषण छाँटिए :-
उत्तरः
(क) उसे शाम को ठीक आठ बजे ले आना।
ठीक – प्रविशेषण
(ख) तुम तो बड़ा बढ़िया कपड़ा लाए हो।
बड़ा – प्रविशेषण
(ग) रमेश बहुत होशियार है।
बहुत – प्रविशेषण
(घ) मैं पूर्ण स्वस्थ हूँ।
पूर्ण – प्रविशेषण
(ङ) मेरे पिता बहुत बड़े व्यवसायी हैं।
बहुत – प्रविशेषण

प्रश्न 43.
निम्नलिखित संज्ञा शब्दों को विशेषण में रूपांतरित करें :-
उत्तरः
संज्ञा शब्द विशेषण में रूपांतरित

  • दया – दयालु
  • राग – रागी
  • विवेक – विवेकी
  • नमन – नत
  • सेवन – सेवित
  • रक्षण – रक्षित
  • मुखर – मुखरित
  • शाप – शापित
  • मोद – मुदित
  • पोषण – पोषित
  • लक्षण – लक्षित
  • अनुवाद – अनूदित
  • रचना – रमित
  • शमन – अमित
  • कम्प – क्रमित

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 44.
निम्नांकित विशेषण को विशेषण में रूपान्तरित करें :-
उत्तरः
विशेषण – विशेषण में रूपान्तरित

  • निष्णात – निष्णायित
  • कुशल – कुशलीकृत
  • समृद्ध – समृद्धीकृत
  • कुण्ठित – कुण्ठीकृत
  • विनीत – विनीतीकृत
  • शालीन – शालीनीकृत
  • मग्न – मग्नीकृत
  • अधीन – अधीनायित
  • नवीन – नवीनीकृत
  • प्राप्त – प्रापित
  • मूक – मूकीकृत
  • अनुकूल – अनुकूलीकृत
  • सूक्ष्म – सूक्ष्मीकृत
  • ख्यात – ख्यातीकृत
  • मुक्त – मुक्तीकृत
  • शिक्षित – शिक्षितीकृत
  • स्थूल – स्थूलीकृत

प्रश्न 45.
उन प्रत्ययों को लिखें जिनको संज्ञा शब्दों में जोड़कर विशेषण बनाए जाते हैं?
उत्तरः
इक, इत, इम, ई, ईय, इर, इल, ईन, ईला, निष्ठ, नीय, मान्, मती, मय, य, रत, वाने, वती, शाली, वी, एरा, वाला, शील, आ तथा आलु।

प्रश्न 46.
निम्नांकित संज्ञा शब्दों में ‘नीय’ प्रत्यय जोड़कर विशेषण में बदलें :- आदर, मान, प्रशंसा, निन्दा, पूजा, विश्वास, दया, मन, श्लाघा।
उत्तरः
आदरणीय, माननीय, प्रशंसनीय, निंदनीय, पूजनीय, विश्वसनीय, दबनीय, मननीय, श्लायणीय।

प्रश्न 47.
निम्नांकित संज्ञा में ‘मय’ प्रत्यय जोड़कर विशेषण में बदलें :-
जल, आनंद, दुःख, पाप, स्थल, गौरव, सुख, पुण्य।
उत्तरः
जलमय, आनंदमय, दुःखमय, पापमय, स्थलमय, गौरवमय, सुखमय, पुण्यमय।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 48.
‘य’ प्रत्यय जोड़कर विशेषण बनाएँ :-
निंदा, पूजा, वन, क्षमा, स्तन, उपासना, मूर्धन, दन्त, स्तुति, सेवा, कथा, चिन्ता।
उत्तरः
निंद्य, पूज्य, वन्य, क्षम्य, स्तन्य, उपास्य, मूर्धन्य, दन्त्य, स्तुत्य, सेव्य, कथ्य, चिन्न्य।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
विशेषण किसे कहते हैं ? इसके कितने भेद हैं ? सबकी परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। (माध्यमिक परीक्षा – 2013)
उत्तरः
विशेषण :- जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिमाण, रंग, आकार, दशा आदि) बतलाए, उसे विशेषण कहते हैं। जैसे-

सुंदर, कुरूप, लंबा, नाटा, अच्छा, बुरा, हलका, भारी, चतुर, मूख, लाल, पीला, कुछ, थोड़ा, दो, चार, गोल, चौड़ा, दुबला, पतला आदि।

  • सीता/वह सुंदर है। (गुण)
  • गीता/वह कुरूप है। (दोष)
  • तीन लड़के पढ़ रहे हैं। (संख्या)
  • थोड़ा दूध पी लो। (परिमाण)
  • यह/फूल लाल है। (रंग)

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त शब्द – सुंदर, कुरूप, तीन, थोड़ा, लाल इत्यादि संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं, अत: ये विशेषण हैं।
विशेषण के मुख्यत: चार भेद है-

  • संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective)
  • परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective)
  • गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective)
  • सार्वननामिक विशेषण (Demonstrative Adjective)

संख्यावाचक विशेषण :- जिस विशेषण से संज्ञा की संख्या (निश्चित या अनिश्चित) का बोध हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे –
दो, चार, पहला, चौथा, दोहरा, चौगुना, आधा, पाव, कुछ, बहुत, सैकड़ों, असंख्य आदि।
चार लड़के आ रहे हैं।
(चार लड़के-निश्चित संख्या)
कुछ लड़के जा रहे हैं।
(कुछ लड़के-अनिश्चित संख्या)

परिमाणवाचक विशेषण :- जो विशेषण वस्तु के परिमाण या मात्रा (निश्चित या अनिश्चित) का बोध कराए, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे –
दो लीटर, तीन मीटर, थेड़ा, बहुत, कुछ, कम, सारा, पूरा, इतना, उतना, जितना, कितना आदि।
दो लीटर दूध दें। (दो लीटर-निश्चित परिमाण)
तीन मीटर कपड़ा दें। (तीन मीटर-निश्चित परिमाण)
थोड़ा दूध चाहिए। (थोड़ा दूध-अनिश्चित परिमाण)
बहुत कपड़े चाहिए। (बहुत कपड़े-अनिश्चित परिमाण)

गुणवाचक विशेषण :- जिस विशेषण से गुण, दोष, रंग, आकार, स्वभाव, दशा, अवस्था आदि का बोध हो, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे-
अन्छा, बुरा, सच्चा, झूठा, नेक, भला, सुन्दर, कुरूप, आकर्षक, सीधा, टेढ़ा, लाल, पीला, हरा, नीला, लंबा, चौड़ा, छोटा, बड़ा, दयालु, कठोर, सूखा, गीला, दुबला, पतला, नया, पुराना, आधुनिक, प्राचीन, बनारसी, मुरादाबादी आदि।

  • वह भला/अच्छा आदमी है। (भला/अच्छा-गुणबोधक)
  • मोहन बुरा/दुष्ट लड़का है। (बुरा/दुष्ट-दोष बोधक)
  • कपड़ा लाल/पीला है। (लाल/पीला-रंगबोधक)
  • भाला नुकीला/लंबा है। (नुकीला/लंबा-आकारबोधक)
  • मोहन दुबला/मोटा है। (दुबला/मोटा-दशाबोधक)

सार्वनामिक विशेषण :- जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्ययुक्त हो, उसे सार्वननामिक विशेषण कहते है। जैसे-
यह, वह, कौन, क्या, कोई, कुछ आदि।
उपर्युक्त शब्द सर्वनाम और विशेषण दोनों हैं। यदि ये क्रिया के पहले प्रयुक्त हों, तो सर्वनाम और संज्ञा के पहले प्रयुक्त हों, तो सार्वनामिक विशेषण। जैसे –
यह देखो। (क्रिया के पहले-यह-सर्वनाम)
यह फूल देखो। (संज्ञा के पहले-यह-सार्वनामिक विशेषण)
वह खेलेगा। (क्रिया के पहले-वह-सर्वनाम)
वह लड़का खेलेगा (संज्ञा के पहले-वह-सार्वनामिक विशेषण)

उपर्युक्त बातों से स्पष्ट हो जाता है कि-यह’ और ‘वह’ शब्द सर्वनाम भी हैं और विशेषण भी। यह आप पर निर्भर करता है कि इनका प्रयोग आप किस रूप मे करते हैं। अत: इन शब्दों के प्रयोग में सावधानी रखें, अन्यथा अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 2.
मूल विशेषण किसे कहते हैं ? विशेषण शब्दों की रचना किन-किन शब्द-भेदों से होती है ? प्रत्येक के उदाहरण दें।
उत्तरः
हिन्दी में कुछ विशेषण ऐसे हैं जो मौलिक हैं, जिन्हें किसी शब्द या प्रत्यय के सहयोग से नहीं बनाया जाता। ऐसे विशेषणों को मूल विशेषण कहा जाता है। जैसे-

अच्छा, बुरा, काला, उजला, मोटा, पतला, अमीर, गरीब, छोटा, बड़ा, बूढ़ा, जवान, नया, पुराना, निम्न, उच्च, सुंदर, हल्का आदि।

इसके विपरीत अधिकांश विशेषण किसी-न-किसी प्रत्यय के जुड़ने से बनते हैं। ये प्रत्यय हैं-अ, अक, अनीय, आ, आई, आऊ, आड़ी, आना, आर, आल, आलु, इंदा, इक, इत, इल, इयल, ई, ईच, ईन, ईला, उ, उक, एय, एरा, एल, ऐल, ओड़, ओड़ा, क, था, दार, नाक, बाज, मंद, मान्, वान्, वाला, वार, वी, ल आदि। ये प्रत्यय संस्कृत, हिन्दी और उर्दू (अरबी-फारसी) के हैं। ये किन-किन शब्दों से जुड़ते हैं, इसे समझे :-
कुछ विशेषण अव्ययों में प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं। जैसे-

बाहर – बाहरी ऊपर – ऊपरी
भीतर – भीतरी अंदर – अंदरूनी
करीब-करीबी सामने – सामनेवाला।

कुछ विशेषण दो विशेषणों के मेल से बनते हैं। जैसे-

मोटा-मोटा नीले-नीले
पतला-पतला पीले-पीले।

कभी-कभी विशेषण के द्वित्व से भी नये-नये विशेषण बनते हैं। जैसे-

कुछ विशेषण क्रिया में प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं। जैसे-

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण 4

प्रश्न 3.
विशेष्य-विशेषण तथा विधेय-विशेषण से आप क्या समझते हैं ? सोदाहरण लिखें।
उत्तरः
विशेष्य (संज्ञा/सर्वनाम) के पहले आए विशेषण को विशेष्य-विशेषण तथा विशेष्य के बाद आए विशेषण को विधेय-विशेषण कहते हैं। जैसे –

वह लम्बा लड़का है। (लम्बा-विशेष्य-विशेषण)
वह लड़का लम्बा है। (लम्बा-विधेय-विशेषण)

नोट-यहाँ दो बातें ध्यान देने योग्य हैं –

विशेषण के लिंग एवं वचन विशेष्य के लिंग एवं वचन के अनुसार होते हैं, चाहे विशेषण विशेष्य के पहले आए या बाद में। जैसे-

वह अच्छा लड़का है। (अच्छा, लड़का-दोनों एकवचन, पुल्लिंग)
वह लड़का अच्छा है। (लड़का, अच्छा-दोनों एकवचन, पुल्लिंग)
वह अच्छी लड़की है। (अच्छी, लड़की-दोनों एकवचन, स्व्रीलिंग)
वे अच्छे लड़के हैं। (अच्छे, लड़के-दोनों बहुवचन, पुल्लिंग)
स्पष्ट है कि विशेषण के लिंग एवं वचन, विशेष्य के लिंग एवं वचन के अनुसार आये हैं।

अगर एक ही विशेषण के अनेक विशेष्य हों, तो विशेषण के लिंग और वचन प्रथम विशेष्य के लिंग और वचन के अनुसार होंगे। जैसे-

(i) काला कुरता, टोपी और जूते लाओ।
(प्रथम विशेष्य कुरता-पुल्लिंग, अत:-काला)
(ii) काली टोपी, कुरता और जूते लाओ।
(प्रथम विशेष्य टोपी-स्त्रीलिंग, अत:-काली)
(iii) काले जूते, कुरता और टोपी लाओ।
(प्रथम विशेष्य जूते-एकारांत पुल्लिंग, अतः-काले)

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण

प्रश्न 4.
विशेषणों की तुलनावस्था से क्या समझते हैं ? सोदाहरण स्पष्ट करें।
उत्तरः
कभी-कभी दो या दो से अधिक वस्तुओं के गुणों या अवगुणों की आपस में तुलना की जाती है। जिन विशेषणों द्वारा तुलना की जाए, उन्हे तुलनाबोधक विशेषण कहते हैं। ऐसे विशेषणों की तीन अवस्थाएँ होती है। जैसे-

  • मूलावस्था
  • उत्तरावस्था और
  • उत्तमावस्था।

1. मूलावस्था :- मूलावस्था में विशेषण बगैर किसी से तुलना किए हुए अपने मूल रूप में रहता है। जैसे-
राम श्रेष्ठ है।
वह छोटा है।
सीता सुन्दर है।
वह छोटी है।

2. उत्तरावस्था :- उत्तरावस्था में विशेषण दो व्यक्तियों या वस्तुओं की विशेषता की तुलना करता है। जैसे-
राम श्याम से श्रेष्ठ है। वह उसकी अपेक्षा छोटा है।
सीता गीता की तुलना में सुन्दर है। वह उसके मुकाबले छोटी है।

3. उत्तमावस्था :- उत्तमावस्था में विशेषण दो से भी अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं की तुलना करता है और उनमें एक को सबसे बढ़िया या घटिया बताता है। जैसे-
राम सबसे श्रेष्ठ है।
वह सबसे छोटा है।
सीता सबसे सुन्दर है।
वह सबसे छोटी है।
हिन्दी में विशेषणों की तुलना बहुत आसान है। सिर्फ-से, अपेक्षा, सबमें, सबसे, बनिस्बत लगाकर विशेषणों की तुलना की जाती है। कुछ और उदाहरण लें-
राम श्याम की अपेक्षा तेज है।
या, राम श्याम की बनिस्बत तेज है।
राम सभी लड़कों की अपेक्षा तेज है।
या, राम सभी लड़कों की बनिस्बत तेज है।
राम सबमें तेज है।
या राम सबसे तेज है।

संस्कृत में अंय्रेजी की तरह कुछ विशेषणों के रूप बदल जाते हैं | जहाँ अंगरेजी में प्राय:er और est लगाया जाता है, वहाँ संस्कृत में तर और तम। जैसे –

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण विशेषण 3

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions Poem 6 नौरंगिया to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – नौरंगिया

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.’नौरंगिया’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘नौरंगिया’ कविता का भावार्थ लिखें तथा उसके उदेश्य को भी लिखें।
अथवा
प्रश्न 3. ‘नौरंगिया’ कविता में निहित कवि के संदेश को लिखें।
अथवा
प्रश्न 4. ‘नौरंगिया’ कविता की नौरंगिया की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 5. ‘नौरंगिया’ श्रमिक युवती की गाथा है – स्पष्ट करें।
अथवा
प्रश्न 6. ‘नौरंगिया’ गंगा पार श्रमिक युवती का प्रतिनिधित्व करती है – कविता के आधार पर लिखें।
अथवा
प्रश्न 7. ‘नौरंगिया’ कविता के आधार पर नौरंगिया की दिनचर्या तथा चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन करें।
अथवा
प्रश्न 8. ‘नौरंगिया’ कविता का मूल भाव लिखें।
उत्तर :
कैलाश गौतम की कविताओं में ग्रामीण जीवन का वित्र है। कहीं हल जोतकर घर लौटने वाले किसानपरिवार का दृश्य है, कहीं खिन्रता है, कहीं निराशा है तो कहीं पुरुष से भी अधिक आशावान कर्मठता का पाठ पढ़ाने वाली युवती है। ‘नौरंगयया’ कैलाश गौतम की एक ऐसी ही कविता है। इसमें कवि ने एक ग्रामीण श्रमिक युवती का चित्रण किया है। नाम के ही अनुरूप उसके व्यक्तित्व में प्रकृति के नौ रंग बिखरे दिखाई देते हैं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

कवि ने जिस युवती का वर्णन किया है उसका नाम नौरंगिया है। वह देवी-देवता अर्थात् किसी धर्म के नाम पर किसी दिखावे में विश्वास नहीं करती। वह भोली है तथा उसकी प्रकृति में छल-कपट भी नहीं है। गाँव के प्रभावशाली व्यक्तियों से वह अन्याय के विरूद्ध लोहा लेती है। स्वी होते हुए भी अपने बल-बूते पर खेती का काम देखती है। उसका पति एकदम निकम्मा, ख्री की प्रकृति का है। वह उस पत्थर कोयले के समान हैं जो जलता नहीं है। अपने अनुरूप पति को न पाकर वह उससे घृणा नहीं करती बल्कि उसके साथ शान से जीती, खाती-पीती है। उसके इस व्यवहार की चर्चा पूरे गाँव में उसी प्रकार है जिस प्रकार अखबार के मुख्य समाचार की।

नौरंगिया जवान है, उसका बदन कसा है, ऐसा लगता है मानो शीशे के साँचे में पानी भरा हो। उसके शरीर में सौंदर्य की लहर उसी प्रकार उठती दिखाई देती है जिस प्रकार आम के छोटे-छोटे कोमल लालिमायुक्त पत्ते हवा में काँपते हैं। उसका चेहरा फूल की तरह सुंदर है तथा उसके काले-काले लट भँवरे के समान मुख पर मँडराते हैं।

वह ऐसी तरो-ताजा तथा आभायुक्त दिखाई देती है मानो सौ-सौ बार पानी में घुलकर आयी हो। उसके होंठ कुछ कहने की भंगिमा में खुले हैं। सचमुच नौरंगिया ईश्वर की अद्भुत रचना है। नौरंगिया के रूप-सौदर्य के कारण गाँव के मुंशी तथा ठेकेदार की कामुक दृष्टि लगी रहती है। उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि ऐसे नरभक्षियों से कैसे बचा जाए। लेकिन कोई हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करता क्योंकि वह गंगा पार की है।

कवि कहते है कि जब भी देखो नौरंगिया अपने काम में लगी रहती है। वह कटी फसल के सूखे पौधे को पीट-पीट कर उससे दाने निकालती है। किसी भी काम से वह हार नहीं मानती। जब तक उसकी आँखें खुली रहती हैं तब तक उसकी भाग-दौड़ काम के पीछे बनी ही रहती है। स्वी होते हुए भी वह बिच्छ, गोंजर या साँप से नहीं डरती, दिखाई पड़ते ही उसे

मार डालती है। उसके मनोरंजन का एक ही साधन है – विविध भारती से प्रसारित गाने को सुनना। वह सीधी-सादी है, उसकी बोली मीठी है तथा उसकी आँखों में सुनहले भविष्य के सपने तैर रहे हैं। वह उन दिनों की आस लगाए बैठी है जब अपने परिश्रम से वह हर दिन त्योहार के समान बिताएगी।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

नौरंगिया की कर्मठता के बावजूद उसके जीवन में आर्थिक तंगी है। उसके घर की दीवारें दह रही हैं, घर की छाजन भी पुरानी पड़ गई है। फसल जैसे ही पकती है वैसे ही महाजन कर्ज वसूलने के लिए सिर पर आ खड़े होते हैं। जो गहने उसने गिरवी रखे थे, उन्हें भी नहीं छुड़ा पाती है – मन मसोस कर रह जाती है। आखिर वह आर्थिक तंगी से कब तक जूझे।

अपनी आर्षिक तंगी से वह कैसे छूटे और इसका उपाय आखिर किससे पूछे । उसने जिंदगी में क्या-क्या नहीं खोया, क्या नहीं दूटा फिर भी उसकी हँसी नहीं छूटी। जिंदगी जीने की ललक कम नहीं हुई। उसने अपने पैरों में जो चपल पहने हैं वे भी किसी से माँगे हुए हैं तथा साड़ी भी उधार में लिया था। इन सबके बावजूद नौरंगिया के हौसले में कोई कमी नहीं आती क्योंकि वह गंगा पार की है।

इस प्रकार हम पाते हैं कि कैलाश गौतम ने इस कविता में नौरंगिया को दीन-हीन-लाचार नहीं बल्कि पुरूषों और परिस्थितियों से टक्कर लेनेवाली कर्मठ स्वी के रूप में दर्शाया है। नौरंगिया जैसी युवती से ही इस देश की नारियों को एक नई दिशा मिल सकती है। हुम कह सकते हैं कि नौरंगिया आनेवाली नारियों का प्रतीक है। कवि नारी को अब सशक्त रूप में देखना चाहते हैं और यही एक इस कविता का उद्देश्य है तथा नारियों को अबला नहीं, सबला बनने का संदेश इसमें निहित है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विविध भारती क्या है?
उत्तर :
विविध-भारती आकाशवाणी का एक कार्यक्कम है जिसमें श्रोताओं के आपह (फरमाइश) पर लोकपिय फिल्मी गाने सुनाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
नौरंगिया हमेशा किस कार्य में लिप्त रहती थी ?
उत्तर :
नौरंगिया सदैव कृषिकार्य एवं गृहकार्य में लिप्त रहती थी।

प्रश्न 3.
नौरंगिया का पति (मरद) कैसा है ?
उत्तर :
नौरंगिया का पति निखट्टू, खैण तथा पत्थर कोयले के समान है जो कभी जलकर लाल नहीं होता।

प्रश्न 4.
नौरंगिया देवी-देवता को क्यों नहीं मानती थी ?
उत्तर :
नौरंगिया कर्मपूजा को ही सबसे पड़ी पूजा मानती है, इसलिए वह देवी-देवता को नहीं मानती है।

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प्रश्न 5.
नौरंगिया की आँखों में कैसे सपने हैं?
उत्तर :
नौरंगिया की आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने हैं।

प्रश्न 6.
नौरंगिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है ?
उत्तर :
नौरंगिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती है – गाँव के प्रभावशाली व्यक्तियों से अपनी इज्जत को बचाना।

प्रश्न 7.
‘संग-संग खाती, संग-संग पीती’ – किसके बारे में कहा गया है ?
उत्तर :
यहाँ नौरंगिया के बारे में कहा गया है कि वह अपने पति के साथ-साथ खाती-पीती है। अपने पति को लेकर उसके मन में कोई़ी हीन भावना नहीं है।

प्रश्न 8.
गाँव-गली में किसकी चर्चा है ?
उत्तर :
गाँव-गली में नौरंगिया की कर्मठता, उसके रूप-सौंदर्य की चर्चा है।

प्रश्न 9.
नौरंगिया की चर्चा की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर :
नौरंगिया की चर्चा की तुलना अखबार की सुर्खी से की गई है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

प्रश्न 10.
नौरंगिया कहाँ की है ?
उत्तर :
नौरंगिया गंगा-पार की है।

प्रश्न 11.
‘काला भँवरा’ किसे कहा गया है ?
उत्तर :
नौरंगिया के झूलते काले लट को काला भँवरा कहा गया है।

प्रश्न 12.
नौरंगिया के शरीर की आभा कैसी है?
उत्तर :
नौरंगिया के शरीर की आभा ऐसी है मानो वह सौ-सौ बार पानी से धुली ही।

प्रश्न 13.
नौरंगिया के बदन की सिहरन की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर :
नौरंगिया के बदन की सिहरन की तुलना आम के पौधे के कोमल पत्ते की सिहरन से की गई है।

प्रश्न 14.
ईश्वर की अद्भुत रचना किसे और क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
नौरंगिया को ईश्वर की अद्भुत रचना कहा गया है क्योकि गरीब घर में जन्म लेने के बाद भी वह सुंदर और समझदार और कर्मठ है।

प्रश्न 15.
नौरंगिया क्या नहीं मानती और क्या नहीं जानती ?
उत्तर :
नौरंगिया देवी-देवता को नहीं मानती तथा छल-कपट नहीं जानती।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

प्रश्न 16.
‘जैसी नीयत’ का भावार्थ क्या है?
उत्तर :
‘जैसी नीयत’ का भावार्थ है – बुरी नीयत।

प्रश्न 17.
नौरंगिया जगे रहने तक किसके आगे-पीछे भागती रहती है ?
उत्तर :
नौरंगिया जगे रहने तक काम के आगे-पीछे भागती रहती है।

प्रश्न 18.
काम करने के दौरान नौरंगिया क्या करती रहती है ?
उत्तर :
काम करने के दौरान नौरंगिया विविध-भारती से गाने सुनती रहती है।

प्रश्न 19.
नौरंगिया किसे मारती है ?
उत्तर :
नौरंगिया बिच्छू, साँप, गोंजर को मारती है।

प्रश्न 20.
नौरंगिया के सीधेपन की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर :
नौरंगिया के सीधेपन की तुलना लाठी से की गई है।

प्रश्न 21.
नौरंगिया का चेहरा कैसा है ?
उत्तर :
नौरंगिया का चेहरा भोला-भाला है।

प्रश्न 22.
नौरंगिया की बोली कैसी है ?
उत्तर :
नौरंगिया की बोली मीठी है।

प्रश्न 23.
नौरंगिया किसकी मदद से खेती करती है?
उत्तर :
नौरंगिया किसी की मदद से नहीं, अपने बल-बूते पर ही खेती करती है।

प्रश्न 24.
नौरंगिया जिस घर में रहती है, वह कैसा है ?
उत्तर :
नौरंगिया जिस घर में रहती है, उसकी दीवारें ढहने लगी है तथा छाजन भी पुरानी पड़ गई है।

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प्रश्न 25.
नौरंगिया के फसल पकने पर क्या होता है ?
उत्तर :
फसल पकने पर महाजन नौरंगिया को दिए गए कर्ज को वसूलने के लिए सिर पर आ खड़ा होता है।

प्रश्न 26.
नौरंगिया किस बात पर मन मसोस कर रह जाती है ?
उत्तर :
गिरवी रखे गहने न छुड़ा पाने के कारण नौरंगिया मन मसोस कर रह जाती है।

प्रश्न 27.
नौरंगिया विपदा में भी क्या नहीं छोड़ती?
उत्तर :
नौरंगिया विपदा के दिनों में भी हंसना, साहस तथा कर्मठता नहीं छोड़ती है।

प्रश्न 28.
नौरंगिया ने नई साड़ी कैसे ली है ?
उत्तर :
नौरंगिया ने नई साड़ी उधार ली है।

प्रश्न 29.
नौरंगिया ने चप्पल कैसे पाया है ?
उत्तर :
नौरंगिया ने किसी से मंगनी कर (माँग कर) चप्पल पाया है।

प्रश्न 30.
‘लाल न होता ऐसा कोयला’ – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘लाल न होता ऐसा कोयला’ का अर्थ है वैसा कोयला जो जलने वाला नहीं है।

प्रश्न 31.
‘कसी देह और भरी जवानी’ किसके बारे में कहा गया है ?
उत्तर :
यह नौरंगिया के बारे में कहा गया है ?

प्रश्न 32.
नौरंगिया किसके साथ शान से जीती है ?
उत्तर :
नौरंगिया का पति उसके लायक नहीं है फिर भी वह उसके साथ शान से जीती है।

प्रश्न 33.
नौरंगिया के माध्यम से कवि ने किस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है ?
उत्तर :
नौरंगिया के माध्यम से कवि ने श्रमिक वर्ग की आर्थिक समस्या तथा साहूकारों द्वारा शोषण की समस्या की और ध्यान आकर्षित किया है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

प्रश्न 34.
नौरंगिया का जीवन-यापन कैसे होता है ?
उत्तर :
नौरंगिया का जीवन-यापन खेती से होता है।

प्रश्न 35.
‘जांगर पीटने’ का क्या अर्थ है?
उत्तर :
जांगर पीटने का अर्थ है – तैयार कटी फसल के डंठल को पटक-पटक कर उससे अनाज के दाने अलग करना।

प्रश्न 36.
कैलाश गौतम जी नौरंगिया और उसके पति के बारे में क्या बताते हैं ?
उत्तर :
कैलाश गौतम जी ने जहाँ नौरंगिया को सुंदर-सुघड़, मेहनती, निडर, छक्का-पंजा नहीं जाननेवाली बताया है वहीं उसके पति को निखद्टू, जनखा, न लाल होने वाला कायेला बताया है।

प्रश्न 37.
नौरंगिया के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
उत्तर :
नौरंगिया के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता कर्म में विश्वास करना है।

प्रश्न 38.
‘निखद्टू’ तथा ‘लाल न होता ऐसा कायेला’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘निखट्टू’ का अर्थ है – कामचोर तथा ‘लाल न होता ऐसा कोयला’ का अर्थ है कि किसी बात का कोई प्रभाव न पड़ना।

प्रश्न 39.
‘आँखों में जीवन के सपने, तैयारी त्योहार की है’ – यहाँ किसके, किस प्रकार के सपने की बात कही गई है ?
उत्तर :
यहाँ नौरंगिया के उस सपने की बात कही गई है जब उसके जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रहेगा तथा उसका प्रत्येक दिन त्योहार की तरह होगा।

प्रश्न 40.
ताकतवर से कौन लोहा लेती है ?
उत्तर :
ताकतवर से नौरंगिया लोहा लेती है।

प्रश्न 41.
‘लोहा लेना’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
लोहा लेना का अर्थ है – डटकर जबाव देना।

प्रश्न 42.
काम करने के दौरान नौरंगिया क्या करती रहती है ?
उत्तर :
काम करने के दौरान नौरंगिया विविध भारती से गाने सुनती रहती है।

प्रश्न 43.
नौरंगिया के अभावग्रस्त जीवन का संकेत कब मिलता है ?
उत्तर :
नौरंगिया के अभावप्रस्त जीवन का संकेत इससे मिलता है कि दूसरे से मंगनी का चपल पहनती है, साड़ी उधार लेती है, फसल पकते ही महाजन सिर पर सवार हो जाते है तथा अपने गिरवी रखे गहने नहीं छुड़ा पाती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नौरंगिया मारती रहती थी –
(क) अपने मरद को
(ख) अपने बच्चों को
(ग) बिच्छू, गोंजर, साँप को
(घ) किसी को नहीं
उत्तर :
(ग) बिच्छू, गोंजर, साँप को।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

प्रश्न 2.
नौरंगिया क्या सुनती रहती है ?
(क) राप्र्रीत
(ख) फिल्मी गीत
(ग) कुत्तों का भौंकना
(घ) विविध भारती
उत्तर :
(घ) विविध भारती।

प्रश्न 3.
‘नौरंगिया’ के कवि हैं?
(क) प्रसाद
(ख) कैलाश गौतम
(ग) राजेश जोशी
(घ) अनामिका
उत्तर :
(ख) कैलाश गौतम।

प्रश्न 4.
कैलाश गौतम का जन्म कब हुआ था ?
(क) 8 जनवरी 1944
(ख) 8 फरवरी 1945
(ग) 8 मार्च 1946
(घ) 8 अप्रैल 1947
उत्तर :
(क) 8 जनवरी 1944

प्रश्न 5.
‘जादुई कवि’ किसे कहा गया है ?
(क) प्रसाद को
(ख) रैदास को
(ग) कैलाश गौतम को
(घ) कबीर को
उत्तर :
(ग) कैलाश गौतम को।

प्रश्न 6.
कैलाश गौतम आकाशवाणी के किस केन्द्र में कार्यरत् थे ?
(क) इलाहाबाद
(ख) बनारस
(ग) कलकत्ता
(घ) दिल्ली
उत्तर :
(क) इलाहाबाद।

प्रश्न 7.
कैलाश गौतम का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) इलाहाबाद में
(ख) बनारस में
(ग) हैदराबाद में
(घ) कानपुर में
उत्तर :
(ख) बनारस में।

प्रश्न 8.
कैलाश गौतम का जन्म किस गाँव में हुआ था ?
(क) लमही
(ख) बाबू टोला
(ग) डिग्धी
(घ) कायस्थ टोला
उत्तर :
(ग) डिग्धी।

प्रश्न 9.
कैलाश गौतम ने अपना कर्मक्षेत्र किसे चुना था?
(क) प्रयाग को
(ख) बनारस को
(ग) कलकत्ता को
(घ) देहरादून को
उत्तर :
(क) प्रयाग को।

प्रश्न 10.
कैलाश गौतम किस वाद से प्रभावित थे ?
(क) छायावाद
(ख) प्रर्गतिवाद्
(ग) प्रयोगवाद
(घ) जनवादी सोच
उत्तर :
(घ) जनवादी सोच।

प्रश्न 11.
‘सीली माचिस की तीलियाँ’ (काव्य-संग्रह) के रचनाकार हैं ?
(क) निराला
(ख) कैलाश गौतम
(ग) प्रसाद
(घ) पंत
उत्तर :
(ख) कैलाश गौतम।

प्रश्न 12.
‘जोड़ा ताल’ (काव्य-संग्रह) के रचनाकार हैं ?
(क) पंत
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) अनामिका
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(घ) कैलाश गौतम।

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प्रश्न 13.
‘चिन्ता नए जूते की’ (निबंध-संग्रह) के लेखक हैं ?
(क) कैलाश गौतम
(ख) प्रेमचंद
(ग) अज्ञेय
(घ) निराला
उत्तर :
(क) कैलाश गौतम।

प्रश्न 14.
‘आदिम राग’ (गीत-संग्रह) के कवि हैं ?
(क) फणीश्वरनाथ रेणु
(ख) शिवपूजन सहाय
(ग) कैलाश गौतम
(घ) बंग महिला
उत्तर :
(ग) कैलाश गौतम।

प्रश्न 15.
‘तंबुओं का शहर’ किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) कहानी
(ग) कविता
(घ) रिपोतार्ज
उत्तर :
(क) उपन्यास।

प्रश्न 16.
‘तीन चौथाई अंश’ किसकी रचना है ?
(क) कन्हैयालाल नंदन
(ख) कीर्ति चौधरी
(ग) केलाश गौतम
(घ) रघुवीर सहाय
उत्तर :
(ग) कैलाश गौतम।

प्रश्न 17.
‘कविता लौट पड़ी’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कैलाश गौतम
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) यतीन्द्र मिश्र
(घ) नागार्जुन
उत्तर :
(क) कैलाश गौतम।

प्रश्न 18.
‘जै-जै सियाराम’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रैदास
(ख) कैलाश गौतम
(ग) कबीर
(घ) रवीन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(ख) कैलाश गौतम

प्रश्न 19.
‘अमौसा क मेला’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अनामिका
(ख) ₹तुराज
(ग) राजेश जोशी
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(घ) कैलाश गौतम।

प्रश्न 20.
‘कचहरी और गाँव गया था’ – किसकी रचना है ?
(क) कैलाश गौतम
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) यतीन्द्र मिश्र
(घ) गुणाकर मुले
उत्तर :
(क) कैलाश गौतम।

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प्रश्न 21.
‘गाँव से भागा’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रामदरश मिश्र
(ख) यतीन्द्र मिश्र
(ग) राम कुमार वर्मा
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(घ) कैलाश गौतम।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मान कैलाश गौतम को नहीं मिला है ?
(क) साहित्य अकादमी पुरस्कार
(ख) परिवार सम्मान
(ग) ऋतुराज सम्मान
(घ) यशभारती सम्मान
उत्तर :
(क) साहित्य अकादमी पुरस्कार।

प्रश्न 23.
कैलाश गौतम को मरणोपरांत कौन-सा पुरस्कार प्रदान किया गया ?
(क) पद्भूषण
(ख) यश भारती सम्मान
(ग) ऋतुराज सम्मान
(घ) परिवार सम्मान
उत्तर :
(ख) यशभारती सम्मान।

प्रश्न 24.
‘मरद निखद्टू’ किसे कहा गया है ?
(क) लेखपाल को
(ख) नौरंगिया के पति को
(ग) महाजन को
(घ) इनमें से किसी को नहीं
उत्तर :
(ख) नौरंगिया के पति को।

प्रश्न 25.
‘जनखा’ का अर्थ है ?
(क) जन्म देने वाला
(ख) जन्मा हुआ
(ग) जन्म से
(घ) स्त्रैण
उत्तर :
(घ) स्व्रैण।

प्रश्न 26.
‘जोइला’ का अर्थ है ?
(क) नपुंसक
(ख) जैसा है
(ग) जैसा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) नपुंसक।

प्रश्न 27.
‘लाल न होता ऐसा कोयला’ का अर्थ है ?
(क) बेशर्म
(ख) नहीं जलने वाला कोयला
(ग) काला
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) नहीं जलने वाला कोयला।

प्रश्न 28.
नौरंगिया की बोली कैसी है ?
(क) कड़वी
(ख) मीठी
(ग) व्यंग्यात्मक
(घ) प्रतीकात्मक
उत्तर :
(ख) मीठी।

प्रश्न 29.
‘उसको भी वह शान से जीती’ में ‘उसको’ से कौन संकेतित है ?
(क) पति
(ख) लेखपाल
(ग) ठेकेदार
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) पति।

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प्रश्न 30.
गाँव-गली में किसकी चर्चा है ?
(क) ठेकेदार की
(ख) महाजन की
(ग) नौरंगिया की
(घ) लेखपाल की
उत्तर :
(ग) नौरंगिया की।

प्रश्न 31.
अखबार की सुर्खी के समान किसे बताया गया है ?
(क) नौरंगिया की चर्चा को
(ख) समाचार को
(ग) फसल को
(घ) ढहती भीत को
उत्तर :
(क) नौरंगिया की चर्चा को।

प्रश्न 32.
नौरंगिया कहाँ की है ?
(क) डिग्धी की
(ख) बनारस की
(ग) चन्दौली की
(घ) गंगा पार की
उत्तर :
(घ) गंगा पार की।

प्रश्न 33.
‘शीशे के साँचे में पानी’ का अर्थ है ?
(क) सुघड़-सुन्दर
(ख) शीशे के बर्त्तन में भरा पानी
(ग) शीशे में जमा बर्फ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सुघड़-सुन्दर।

प्रश्न 34.
‘अमोले’ का अर्थ है ?
(क) आँवला का पौधा
(ख) आम का पौधा
(ग) अमूल्य
(घ) सुन्दर
उत्तर :
(ख) आम का पौधा।

प्रश्न 35.
‘काला भँवरा’ से किसे संकेतित किया गया है ?
(क) काले-काले लटो को
(ख) भौंरो को
(ग) काले चेहरे को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) काले-काले लटो को।

प्रश्न 36.
ईश्वर की अद्भुत रचना किसे कहा गया है ?
(क) नौरंगिया के पति को
(ख) लेखपाल को
(ग) नौरंगिया को
(घ) ठेकेदार को
उत्तर :
(ग) नौरंगिया को।

प्रश्न 37.
किन दोनों की नीयत एक जैसी है ?
(क) नौरंगिया और उसके पति की
(ख) नौरंगिया और ठेकेदार की
(ग) नौरंगिया और लेखपाल की
(घ) लेखपाल और ठेकेदार की
उत्तर :
(घ) लेखपाल और ठेकेदार की।

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प्रश्न 38.
नौरंगिया निम्नलिखित में से किसे नहीं मारती ?
(क) गाय
(ख) गोंजर
(ग) बिच्छू
(घ) साँप
उत्तर :
(क) गाय।

प्रश्न 39.
‘बिना कान का आदमी’ किसकी रचना है ?
(क) कैलाश गौतम
(ख) अनामिका
(ग) ऋतुराज
(घ) राजेश जोशी
उत्तर :
(क) कैलाश गौतम।

प्रश्न 40.
नौरंगिया के सीधेपन की तुलना किससे की गई है ?
(क) साँप से
(ख) गोंजर से
(ग) गाय से
(घ) लाठी से
उत्तर :
(घ) लाठी से।

प्रश्न 41.
नौरंगिया की आँखों में किसके सपने हैं ?
(क) खुशहाल जीवन के
(ख) पति के
(ग) अच्छी फसल के
(घ) सुंदर घर के
उत्तर :
(क) खुशहाल जीवन के।

प्रश्न 42.
गहने नहीं छुड़ा पाने पर नौरंगिया किस प्रकार रह जाती है ?
(क) गुस्सा कर
(ख) लाचार होकर
(ग) मन मसोस कर
(घ) आसू बहाकर
उत्तर :
(ग) मन मसोस कर।

प्रश्न 43.
‘ढहती भीत’ का अर्थ है ?
(क) ढहती दीवार
(ख) भयभीत
(ग) भय का न होना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) ढहती दीवार।

प्रश्न 44.
नौरंगिया के पैरों में चप्पल है ?
(क) खरीदा गया
(ख) मंगनी की
(ग) उधार का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मंगनी की।

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प्रश्न 45.
नौरंगिया की नई साड़ी है ?
(क) लाल
(ख) नकद खरीदी
(ग) नीली
(घ) उधार की
उत्तर :
(घ) उधार की।

प्रश्न 46.
नौरंगिया पर किसकी नीयत खराब है ?
(क) लेखपाल और ठेकेदार की
(ख) लेखपाल और महाजन की
(ग) लेखपाल और पति की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) लेखपाल और ठेकेदार की।

प्रश्न 47.
नौरंगिया किसके बूते (बल पर) खेती करती है?
(क) पति के
(ख) महाजन के
(ग) अपने
(घ) ठेकेदार के
उत्तर :
(ग) अपने ।

प्रश्न 48.
नौरंगिया किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) कविता
(ग) निबंध
(घ) संस्मरण
उत्तर :
(ख) कविता।

प्रश्न 49.
‘कहने को कुछ होंठ खुले हैं’ – किसके बारे में कहा गया है ?
(क) नौरंगिया
(ख) लेखपाल
(ग) ठेकेदार
(घ) महाजन
उत्तर :
(क) नौरंगिया।

प्रश्न 50.
नौरंगिया के सामने महाजन कब खड़ा हो जाता है?
(क) जब उसका पति घर पर नहीं होता
(ख) जब वह साँप मारती है
(ग) जब वह विविध भारती सुनती है
(घ) जब फसल पक जाती है
उत्तर :
(घ) जब फसल पक जाती है।

प्रश्न 51.
नौरंगिया क्या नहीं छुड़ा पाती है?
(क) गिरवी रखा घर
(ख) गिरवी रखे गहने
(ग) गिरवी रखी चप्पल
(घ) गिरवी रखी नई साड़ी
उत्तर :
(ख) गिरवी रखे गहने।

प्रश्न 52.
‘कसी देह और भरी जवानी’ किसके बारे में कहा गया है ?
(क) नौरंगिया के पति के बारे में
(ख) लेखपाल के बारे में
(ग) नौरंगिया के बारे में
(घ) महाजन के बारे में
उत्तर :
(ग) नौरंगिया के बारे में।

प्रश्न 53.
नौरंगिया किसे नहीं मानती है?
(क) देवी-देवता को
(ख) गाँव वालों को
(ग) पति को
(घ) महाजन को
उत्तर :
(क) देवी-देवता को।

प्रश्न 54.
नौरंगिया किससे लोहा लेती है ?
(क) लेखपाल से
(ख) ठेकेदार से
(ग) सरकार से
(घ) ताकतवार से
उत्तर :
(घ) ताकतवार से।

प्रश्न 55.
‘ग्राम्य संस्कृति का वाहक’ किस कवि को कहा गया है ?
(क) राजेश जोशी
(ख) कीर्ति चौधरी
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(घ) कैलाश गौतम।

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प्रश्न 56.
किसके सीधेपन की तुलना लाठी से की गई है ?
(क) अर्पणा
(ख) साफिया की
(ग) नौरंगिया की
(घ) अनामिका की
उत्तर :
(ग) नौरंगिया की।

प्रश्न 57.
‘पैरों में मंगनी के चप्पल, साड़ी नई उधार की हैं’ – यह किसे कहा गया है ?
(क) जनखा के बारे में
(ख) रंगैय्या के बारे में
(ग) नौरंगिया के बारे में
(घ) गंगा के बारे में
उत्तर :
(ग) नौरंगिया के बारे में।

प्रश्न 58.
कौन देवी-देवता नहीं मानती, छक्का-पंजा नहीं जानती ?
(क) ठेकेदारिन
(ख) लेखपाल
(ग) कवयित्री
(घ) नौरंगिया
उत्तर :
(घ) नौरंगिया।

WBBSE Class 10 Hindi नौरंगिया Summary

कवि परिचय 

जन-मानस को अपनी कलम तथा वाणी से झकझोरने वाले जादुई कवि कैलाश गौतम का जन्म 8 जनवरी, 1944 को वाराणसी के चंदौली नामक गाँव में हुआ था। ये आकाशवाणी इलाहाबाद में कार्यरत् थे। वहाँ से अवकाश प्राप्त करने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें हिन्दुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया। कैलाश गौतम एक प्रतिभावान कवि के साथ कुशल मंच-संचालक भी थे। इन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय काशी और प्रयाग (इलाहाबाद) में बिताया इसीलिए इनके व्यक्तित्व में दोनों ही स्थानों के संस्कार रचे-बसे थे।
WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया 1

कैलाश गौतम के रचना-संसार का परिचय इस प्रकार है –
कविता-संग्रह : सीली माचिस की तीलियाँ, जोड़ा ताल
भोजपुरी कविता-संग्रह : तीन चौथाई अंश
गीत-संग्रह : आदिम राग
दोहा-संकलन : बिना काम का आदमी
उपन्यास : जै जै सियाराम, तम्बुओं का शहर
अन्य लोकप्रिय रचनाएँ : अमौसा क मेला, कचहरी और गाँव गया था, गाँव से भागा। सम्मान : परिवार सम्मान, ॠतुराज सम्मान, यश भारती सम्मान (मरणोपरांत)।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

भावार्थ

1. देवी-देवता नहीं मानती, छक्का-पंजा नहीं जानती
ताकतवर से लोहा लेती, अपने बूते करती खेती,
मरद निखद्यू जनखा जोइला, लाल न होता ऐसा कोयला,
उसको भी वह शान से जीती, संग-संग खाती, संग-संग पीती
गाँव गली की चर्चा में वह सुर्खी-सी अख़़ारार की है
नौरंगिया गंगा पार की है।

शब्दार्थ :

  • छक्का-पंजा = छ:-पाँच, छल-कपट।
  • ताकतवर = मजवूत।
  • लोहा लेना = बदला लेना।
  • अपने बूते = अपने बल पर ।
  • निखद्टू = किसी काम का नहीं।
  • जनखा = स्वैण, स्वियों की तरह व्यवहार करने वाला।
  • जोइला = हिजड़ा।
  • सुर्खी = मुख्य समाचार, सनसनी खेज खबर।

व्याख्या :

प्रस्तुत पंक्तियों में कैलाश गौतम ने गंगा-पार की एक श्रमिक युवती का वर्णन किया है।
कवि ने जिस युवती का वर्णन किया है उसका नाम नौरंगिया है। वह देवी-देवता अर्थात् धर्म के नाम पर किसी दिखावे में विश्वास नहीं करती। वह भोली है तथा उसकी प्रकृति में छल-कपट भी नहीं है। गाँव के प्रभावशाली व्यक्तियों से वह अन्याय के विरुद्ध लोहा लेती है।

स्वी होते हुए भी अपने बल-बूते पर खेती का काम देखती है। उसका पति एकद्म निकम्मा स्व्री की प्रकृति का है। वह उस पत्थर कोयले के समान है जो जलता नहीं है। अपने अनुरूप पति को न पाकर भी वह उससे घृणा नहीं करती बल्कि उसके साथ शान से जीती, खाती-पीती है। उसके इस व्यवहार की चर्चा पूरे गाँव में उसी प्रकार है जिस प्रकार अखबार के मुख्य समाचार की। गंगा पार की होने के कारण ही उसकी प्रकृति में जिंदगी जिस प्रकार की है उसे पूरे राग-रंग के साथ जीने की इच्छा है।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कविता की इन पंक्तियों में नौरंगिया की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन किया गया है।
2. उसके लिए कर्म ही सच्ची पूजा है तथा वह अन्याय के आगे झुकनेवाली नहीं है।
3. पति के स्वैण प्रकृति का होने के बावजूद वह उसके सुख-दुख में साथ है, उसकी उपेक्षा नहीं करती।
4. ‘निखट्टू, जनखा, जोइला तथा पत्थर कोयले से उपमा दी गई है जो उसके पति के व्यक्तित्व की पोल खोलती है।
5. ‘छक्का-पंजा’, ‘लोहा लेना’ जैसे मुहावरे के प्रयोग ने भाषा को प्रभावी बना दिया है।
6. ‘जनखा, जोइला’ में अनुप्रास अलंकार है तथा ‘संग-संग’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
7. भाषा सहज, सरल तथा प्रवाहमयी है।

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2. कसी देह औ भरी जवानी, शीशे के साँचे में पानी
सिहरन पहने हुए अमोले, काला भँवरा पुँह पर डोले
सौ-सौ पानी रंग धुले हैं, कहने को कुछ होठ खुले हैं
अद्भुत है ईश्वर की रचना, सबसे बड़ी चुनौती बचना
जैसी नीयत लेखपाल की वैसी ठेकेदार की है।
नौरंगिया गंगा पार की है।

शब्दार्थ :

  • कसी = गठीली।
  • अमोले = आम का नन्हा पौधा।
  • सौ-सौ पानी रंग धुले = तीखे नाक-नक्शवाली, आभायुक्त।
  • अद्भुत = अनोखा।
  • नीयत = इमान ।
  • लेखपाल = मुंशी, लिखा-पढ़ी करनेवाला।

व्याख्या : प्रस्तुत कविता में नौरंगिया के रूप-सौंदर्य का वर्णन किया गया है। नौरंगिया जवान है, उसका बदन कसा है, ऐसा लगता है मानो शीशे के साँचे में पानी भरा हो। उसके शरीर में सौदर्य की लहर उसी प्रकार उठती दिखाई देती है जिस प्रकार आम के छोटे-छोटे कोमल लालिमायुक्त पत्ते हवा में काँपते हैं। उसका चेहरा फूल की तरह सुंदर है तथा उसके काले-काले लट भँवरे के समान मुख पर मंडराते हैं।

वह ऐसी तरो-ताजा तथा आभायुक्त दिखाई देती है मानो सीसौ बार पानी में घुलकर आयी हो। उसके होंठ कुछ कहने की भंगिमा में खुले हैं। सचमुच नौरंगिया ईश्वर की अद्भुत रचना है। नौरंगिया के रूप-सौंदर्य के कारण गाँव के मुंशी तथा ठेकेदार की कामुक दृष्टि लगी रहती है। उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि ऐसे नरभक्षियों से कैसे बचा जाए। लेकिन कोई हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करता क्योंकि वह गंगा पार की है। उसके तीखे तेवर से सभी परिचित हैं। निराला ने भी एक श्रमिक युवती का वर्णन कुछ इस प्रकार किया है –

श्याम तन, भर बँधा यौवन,
नत नयन, प्रिय कर्म रत मन।

काव्यगत सौंदर्य :

1. नौरंगिया अपने सौंदर्य, पति-भक्ति तथा कर्मठता के कारण गाँव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
2. इन पंक्तियों में ‘कसी देह’, ‘शीशे के साँचे में पानी’ ‘सिहरन पहने हुए अमोले’ तथा ‘काला भंवरा मुँह पर डोले’ जैसी उपमाओं से बिहारी की नायिका प्रत्यक्ष हो जाती है।
3. अपने सौदर्य के कारण नौरंगिया ईश्वर की अद्भुत रचना मालूम पड़ती है।
4. उसका सौदर्य ऐसा निखरा है मानो सौ-सौ बार पानी से धुला हो।
5. यहाँ ग्रामीण श्रमिक युवतियों के शारीरिक शोषण की ओर इशारा किया गया है।
6. ‘नौरंगिया गंगा पार की है’ – पंक्ति से नौरंगिया की चारित्रिक दृढ़ता प्रकट होती है।
7. ‘सौ-सौ’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
8. भाषा बहते पानी की तरह प्रवाहमयी है।

3. जब देखो तब जाँगर पीटे, हार न माने काम घसीटे
जब तक जागे, तब तक भागे, काम के पीछे, काम के आगे
बिच्छू, गोंजर, साँप मारती, सुनती रहती विविध-भारती
बिल्कुल है लाठी सी सीधी, भोला चेहरा बोली मीठी
आँखों में जीवन के सपने तैयारी त्यौहार की है।
नौरंगिया गंगा पार की है।

शब्दार्थ :

  • जाँगर = मटर, उरद आदि का डंठल जिससे दाने निकाल लिए गए हों।
  • गोंजर = एक प्रकार का जीव जिसके कई जोड़े पैर होते हैं।
  • विविध भारती = आकाशवाणी द्वारा प्रस्तुत फिल्मी गीतों का लोकप्रिय कार्यक्रम।

व्याख्या : कविता की इन पंक्तियों में कवि ने नौरंगिया की कर्मठता का वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि जब भी देखो नौरंगिया अपने काम में लगी रहती है। वह कटी फसल के सूखे पौधे को पीट-पीट कर उससे दाने निकालती है। किसी भी काम से वह हार नहीं मानती। जब तक उसकी आँखें खुली रहती हैं तब तक उसकी भाग-दौड़ काम के पीछे बनी ही रहती है।

स्वी होते हुए भी वह बिच्छू, गोंजर या साँप से नहीं डरती, दिखाई पड़ते ही उसे मार डालती है। उसके मनोरंजन का एक ही साधन है – विविध भारती से प्रसारित गाने को सुनना। वह सीधी-सादी है, उसकी बोली मीठी है तथा उसकी आँखों में सुनहले भविष्य के सपने तैर रहे हैं। वह उन दिनों की आस लगाए बैठी है जब अपने परिश्रम से वह हर दिन त्योहार के समान बिताएगी। गंगा पार की होने के कारण ही उसके जीवन में कर्मठता आई है।

काव्यगत सौंदर्य :

1. इन पंक्तियों में नौरंगिया की कर्मठता का वर्णन किया गया है।
2. ‘नौरंगिया’ के लिए कर्म ही पूजा है।
3. नौरंगिया आम स्वियों की तरह चूहे या तिलचट्टे (कॉकरोच) से डरने वाली नहीं है बल्कि वह बिच्छू, गोंजर और साँप जैसे विषैले जंतुओं से भी अपनी सुरक्षा खुद कर सकती है।
4. ‘विविध-भारती’ सुनना संगीत के प्रति उसके लगाव को दर्शाता है।
5. वह चाहती है कि भविष्य में आने वाला प्रत्येक दिन त्योहार की तरह हो।
6. ‘गंगा पार की’ में यह संकेत छिपा है कि एक दिन उसके सपने अवश्य पूरे होंगे।
7. ‘लाठी-सी सीधी’ में उपमा अलंकार है।
8. पंक्तियाँ संगीत का प्रभाव पैदा करती है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

4. ढहती भीत पुरानी छाजन, पकी फ़सल तो खड़े महाजन
गिरवी गहना छुड़ा न पाती, मन मसोस फिर-फिर रह जाती
कब तक आखिर कितना जूझे, कौन बताए किससे पूछे
जाने क्या-क्या टूटा-फूटा, लेकिन हँसना कभी न छूटा
पैरों में मंगनी की चप्पल, साड़ी नई उधार की है।
नौरंगिया गंगा पार की है।

शब्दार्थ :

  • ढहती = गिरती।
  • भीत = दीवार।
  • छाजन = फूस की छत।
  • महाजन = सूद पर कर्ज देने वाले।
  • गिरवी = बंधक, किसी वस्तु को किसी के पास रखकर उसके बदले रूपये लेना।
  • जूझे = संघर्ष करे।
  • मंगनी = किसी से माँगा हुआ।

व्याख्या : नौरंगिया की कर्मठता के बावजूद उसके जीवन में आर्थिक तंगी है। उसके घर की दीवारें ढह रही हैं, घर की छाजन भी पुरानी पड़ गई है। फसल जैसे ही पकती है वैसे ही महाजन कर्ज वसूलने के लिए सिर पर आ खड़े होते हैं। जो गहने उसने गिरवी रखे थे, उन्हे भी नहीं छुड़ा पाती है – मन मसोस कर रह जाती है।

आखिर वह आर्थिक तंगी से कब तक जूझे। अपनी आर्थिक तंगी से वह कैसे छूटे और इसका उपाय आखिर किससे पूछे । उसने ज़िंदरी में क्या-क्या नहीं खोया, क्या नहीं टूटा फिर भी उसकी हँसी नहीं छूटी। जिंदगी जीने की ललक कम नहीं हुई। उसने अपने पैरों में जो चपल पहने हैं वे भी किसी से माँगे हुए हैं तथा साड़ी भी उधार में लिया था। इन सबके बावजूद नौरंगिया के हौसले में कोई कमी नहीं आती क्योंकि वह गंगा पार की है।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कविता की इन पंक्तियों में नौरंगिया की दयनीय आर्थिक अवस्था का वर्णन किया गया है।
2. नौरंगिया की गरीबी का प्रमुख कारण महाजन द्वारा दिया गया कर्ज है जो कभी चुकने में ही नहीं आता।
3. ‘खड़े महाजन’ शब्द का प्रयोग ही यहाँ आतंक का पर्याय बनकर आया है।
4. वह इस सवाल में उलझ कर रह जाती है कि अपनी इस स्थिति से उबरने के लिए किससे रास्ता पूछे और बताने वाला कौन है ?
5. नौरंगिया अपने जीवन में बहुत कुछ खो चुकी है फिर भी वह उसे भूल कर हँसती ही रहती है।
6. ‘गिरवी-गहना’ तथा ‘मन-मसोस’ में अनुप्रास अलंकार तथा ‘फिर-फिर’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
7. पंक्ति के ‘क्या-क्या’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
8. भाषा में संगीत का-सा प्रभाव है।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. देवी-देवता नहीं मानती, छक्का-पंजा नहीं जानती
ताकतवर से लोहा लेती, अपने बूते करती खेती,

प्रश्न 1.
प्रस्तुत अंश किस कविता से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘नौरंगिया’ कविता से ली गई है।

प्रश्न 2.
कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कवि कैलाश गौतम हैं।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
कविता की इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि नौरंगिया धर्म के नाम पर किसी बाहरी दिखावे में विश्वास नहीं करती है, न ही वह छल-कपट जानती है। वह सही रास्ते पर चलने वाली है इसलिए गाँव के प्रभावशाली व्यक्ति के सामने भी नहीं छ्ञुकती है। वह खेती के काम के लिए भी किसी पर निर्भर नहीं है – सारा कार्य वह अपने बलवूते पर ही करती है। कठोर परिश्रम ही उसका धर्म है, ईमान है।

विशेष :

1. कविता की इन पंक्तियों में नौरंगिया की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन किया गया है।
2. उसके लिए कर्म ही सच्ची पूजा है तथा वह अन्याय के आगे झुकनेवाली नहीं है।
3. ‘छक्का-पंजा’, ‘लोहा लेना’ जैसे मुहावरे के प्रयोग ने भाषा को प्रभावी बना दिया है।
4. ‘देवी-देवता’ में अनुपास अलंकार है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 नौरंगिया

2. मरद निखद्टू जनखा जोइला, लाल न होता ऐसा कोयला,
उसको भी वह शान से जीती, संग-संग खाती, संग-संग पीती

प्रश्न 1.
कवि तथा कविता का नाम लिखें।
उत्तर :
कवि कैलाश गौतम हैं तथा कविता का नाम ‘नौरंगिया’ है।

प्रश्न 2.
किसका मरद निखद्यू है ?
उत्तर :
नौरंगिया का मरद निखड्टू है।

प्रश्न 3.
कौन, किसके साथ शान से जीती है ?
उत्तर :
नौरंगिया अपने निखद्टू पति के साथ शान से जीती है।

प्रश्न 4.
प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
नौरोंगया दिखने में सुंदर है, परिश्रमी है। लेकिन पति उसके लायक नहीं है । उसका पति काम-धाम न करने वाला और स्प्रैण है, फिर भी वह उसकी अपेक्षा नहीं करती है। विवाह के बंधन में बँं जाने के बाद पति ही उसके लिए सब कुछ है – चाहे वह जैसा भी है। बिना किसी हीन भाव के वह अपने पति के साथ मज़े में जिंदगी गुजार रही है। उसके साथ-साथ खाती-पाती है। पति के लिए उसके मन में पूरा-पूरा सम्मान है।

विशेष :

1. नौरंगिया अपने पति की खामियों को न देख उसे ही अपना सब कुछ मानती है।
2. स्वैण प्रकृति का होने के बावजूद वह पति के सुख-दुख में साथ है, उसकी उपेक्षा नहीं करती।
3. निखट्टू, जनखा, जोइला तथा पत्थर कोयले से दी गई उपमा उसके पति के व्यक्तित्व की पोल खोलती है।
4. ‘जनखा, जोइला’ में अनुपास अलंकार है तथा ‘संग-संग’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
5. भाषा सहज, सरल तथा प्रवाहमयी है।

3. गाँव-गली की चर्चा में वह सुर्खी-सी अख़बार की है
नौरंगिया गंगा पार की है।

प्रश्न 1.
कविता तथा कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कविता ‘नौरंगिया’ है तथा इसके कवि कैलाश गौतम हैं।

प्रश्न 2.
‘सुर्खी-सी अखबार की’ का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
जो समाचार प्रमुख होता है उसे बड़े-बड़े अक्षरों में पहले पृष्ठ पर छापा जाता है, उसे ही अखबार की सुखीं कहते हैं। नौरंगिया की चर्चा भी गाँव में इसी प्रकार की है।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
नौरंगिया अपनी सुंदरता तथा कर्मठता के कारण गाँव की गली-गली में चर्चा का विषय बनी हुई है। गाँव में उसकी चर्चा वैसे ही होती है जैसे सुर्खी वाले समाचार की होती है। आखिर ऐसा क्यों न हो, वह गंगा पार की जो है। गंगा पार की युवतियाँ सुघड़, सुंदर और कामकाजी होती हैं।

विशेष :

1. नौरंगिया अपने सौंदर्य, पति- भक्ति तथा कर्मठता के कारण गाँव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
2. ‘गगा पार’ उसकी कर्मठता को दर्शांती है।
3. ‘गाँब-गली’ में अनुप्पास अलंकार है।
4. ‘सुखीं-सी’ में उपमा अलंकार है।
5. भाषा सहज, सरल तथा प्रवाहमयी है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

4. कसी देह औ भरी जवानी, शीशे के साँचे में पानी
सिहरन पहने हुए अमोले, काला भँवरा मुँह पर डोले।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत अंश कहाँ से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश कैलाश गौतम की कविता ‘नौरंगिया’ से लिया गया है।

प्रश्न 2.
पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने नौरंगिया के रूप-सौददर्य का वर्णन किया है। श्रमिक युवती होने के बावजूद उसकी सुंदरता गाँव में चर्चा का विषय है। अभी उसपर पूरी जवानी छाई हुई है, बदन भी कसा-कसा है। उसका शरीर ऐसा लगता ठीक वैसे ही उसके शरर में सौदर्य की लहर-सी उठती है। उसका चेहरा फूल की तरह सुंदर है और उसपर काले-काले लट ऐसे लगते है मानो भौरा फूल पर भंडरा रहा हो।

विशेष :

1. इन पंक्तियों में ‘कसी देह’, ‘शीशे के साँवे में पानी’ ‘सिहरन पहने हुए अमोले’ तथा ‘काला भंबरा मुँह पर डोले’ जैसी उपमाओं से बिहारी की नायिका प्रत्यक्ष हो जाती है।
2. नौरंगया का सौंदर्य जगल के फूल की तरह निष्कलंक है।
3. दोनों ही पंक्तियों में उपमा अलंकार की छटा बिखरी है।
4. भाषा भी नौरंगिया की तरह सौंदर्य से भरपूर है।

5. सौ-सौ पानी रंग धुले हैं, कहने को कुछ होठ खुले हैं
अद्भुत है ईश्वर की रचना, सबसे बड़ी चुनौती बचना।

प्रश्न 1.
कविता तथा कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कविता ‘नौरंगिया’ है तथा इसके कवि केलाश गौतम हैं।

प्रश्न 2.
‘अद्भुत है ईश्वर की रचना’ किसे ईश्वर की अद्भुत रचना कहा गया है ?
उत्तर :
नौरंगिया को ईश्वर की अद्भुत रचना कहा गया है।

प्रश्न 3.
पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
नौरंगिया की सुंदरता आभायुक्त है, वह तरो-ताजा मालूम पड़ती है मानो सौ-सौ बार पानी से छुलकर उसका रंग और भी निखर आया हो। उसके होंठ कुछ इस मुद्रा में खुले हैं मानो वह कुछ कहना चाहती हो। नौरंगिया को देखकर सब यही कहते हैं कि वह ईश्वर की अद्भुत रचना है। लेकिन नौरंगिया का रूप-सौंदर्य ही उसका शत्रु बन गया है, गाँव के प्रभावशाली व्यक्तियों से अपनी इज्जत को बचाना ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

विशेष :

1. अपने सौंदर्य के कारण नौरंगिया ईश्वर की अद्भुत रचना मालूम पड़ती है।
2. उसका सौंदर्य ऐसा निखरा है मानो सौ-सौ बार पानी से धुला हो।
3. ‘सौ-सौ’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
4. भाषा बहते पानी की तरह प्रवाहमयी है।
6. जैसी नीयत लेखपाल की वैसी ठेकेदार की है। नौरंगिया गंगा पार की है।

प्रश्न 1.
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार कैलाश गौतम हैं।

प्रश्न 2.
‘जैसी नीयत’ का क्या अर्थ है?
उत्तर :
जैसी नीयत का अर्थ है – लेखपाल और ठेकेदार दोनों ही नौरंगिया को बुरी नजरों से घूरते हैं। दोनों की नीयत नौरगिया के प्रति बुरी है।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कविता की इन पंक्तियों में कवि ने स्त्रियों के शोषण का जिक्र किया है। आज भी ग्रामीण इलाके में गरीब सुंदर युवतियाँ गाँव के प्रभावशाली व्यक्तियों के यौन-शोषण का शिकार होती हैं। नौरंगिया की भी यही समस्या है। गाँव के ठेकेदार तथा उसके मुंशी की कुदृष्टि भी नौरंगिया पर टिकी है। लेकिन नौरंगिया के सामने उनकी एक नहीं चल पाती क्योंकि गंगा पार की नौरंगिया के चरित्र से वे सब भली-भांति वाकिफ हैं।

विशेष :

1. नौरगिया के सौदर्य के कारण गाँव के प्रभावशाली व्यक्तियों की बुरी नज़र उसपर टिकी है।
2. यहाँ प्रामीण श्रमिक युवतियों के शारीरिक शोषण की और इशारा किया गया है।
3. ‘नौरंगिया’ गंगा पार की है’ – पंक्ति से नौरंगिया की चारित्रिक दृढ़ता प्रकट होती है।
4. भाषा सहज तथा गँवई है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

7. जब देखो तब जाँगर पीटे, हार न माने काम घसीटे
जब तक जागे, तब तक भागे, काम के पीछे, काम के आगे।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश कहाँ से उद्धत है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश ‘नौरंगिया’ कविता से उद्दुत है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
नौरंगिया के लिए कर्म ही जीवन है। जब देखो तब वह किसी न किसी काम में लगी नज़र आती है। वह पके हुए फसल के डंठलों को पीट-पीट कर उनसे अनाज के दाने छुड़ाती है। वह किसी भी काम से हार नहीं मानती। जब देखो तब वह किसी न किसी काम के आगे-पीछे भागते ही रहती है। दिन भर काम में लगे रहने के कारण ही उसके जीवन में पाप का प्रवेश नहीं हो पाया है। विनोबा भावे ने भी कहा था कि ‘शारीरिक श्रम करने वाले के जीवन में पाप का प्रवेश नहीं हो सकता।”

विशेष :

1. इन पंक्तियों में नौरंगिया की कर्मठता का वर्णन किया गया है।
2. शब्दों का चयन कुछ ऐसा है कि संगीत का पूरा-पूरा प्रभाव पैदा हो जाता है।
3. ‘नौरंगिया’ के लिए कर्म ही पूजा है।
4. भाषा में प्रवाहमयता है।

8. बिच्छू, गोंजर, साँप मारती, सुनती रहती विविध-भारती
बिल्कुल है लाठी सी सीधी, भोला चेहरा बोली मीठी।

प्रश्न 1.
रचना और रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नौरंगिया’ तथा रचनाकार कैलाश गौतम हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
नौरंगिया गाँव में एक ऐसे मकान में रहती है जिसकी दीवारें ढ़हती जा रही हैं, छाजन भी पुरानी पड़ चुकी है। ऐसे मकान में जब-तब उसका सामना बिच्छू, गोंजर तथा साँप से हो जाता है। लेकिन वह इनसे डरती नहीं तथा उन्हें भारकर अपनी रक्षा करती है। विविधि-भारती से प्रसारित होने वाले संगीत को सुनकर ही वह अपना मनोरंजन करती है। नौरंगिया बिल्कुल सीधी सादी, वेहरा भोला और उसकी बोली में मानो शहद घुलता है।

विशेष :

1. नौरंगिया आम स्वियों की तरह चूहे या कॉकरोच से डरने वाली नहीं है बल्कि वह बिच्छू, गोंजर और साँप जैसे विषेले जंतुओं से भी अपनी सुरक्षा खुद कर सकती है।
2. ‘विविध-भारती’ सुनना संगीत के प्रति उसके लगाव को दर्शाता है।
3. ‘लाठी सी सीधी’ में उपमा अलंकार है।
4. पंक्तियाँ संगीत का प्रभाव पैदा करती है।
9. आँखों में जीवन के सपने तैयारी त्यौहार की है नौरंगिया गंगा पार की है।

प्रश्न 1.
कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कवि कैलाश गौतम हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर : नौरंगिया दिन भर हाड़-तोड़ परिश्रम करती है ताकि उसका जीवन बेहतर हो सके। आँखों में वह उस भविष्य का सपना संजोये जी रही है जब उसकी जिंदगी का एक-एक दिन त्योहार के समान होगा। उसका सपना एक दिन जरूर पूरा होगा क्योंकि वह गंगा पार की है। गंगा के लोग हारना नहीं जानते। विपरीत परिस्थितियों में भी उनमें जीने की ललक कम नहीं होती।

विशेष :

1. कविता की इन पंक्तियों में नौरंगिया को भविष्य के सपने बुनते दिखाया जाता है।
2. वह चाहती है कि भविष्य में आने वाला प्रत्येक दिन त्योहार की तरह हो।
3. ‘गंगा पार की’ में यह संकेत छिपा है कि एक दिन उसके सपने अवश्य पूरे होंगे।
4. भाषा में सहजता है।

10. ढहती भीत पुरानी छाजन, पकी फ़सल तो खड़े महाजन
गिरवी गहना छुड़ा न पाती, मन मसोस फिर-फिर रह जाती।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
प्रस्तुत प्यांश के रचनाकार कैलाश गौतम है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
नौरंगिया गाँव में जिस घर में रहती है, उसकी दीवारें ढह रही हैं। छाजन भी पुरानी पड़ चुकी है। छाजन पुरानी पड़ जाने से वह वर्षा से उसकी रक्षा नहीं कर सकती। अपनी स्थिति को सुधारने की एकमात्र आशा पकी फसल से लगी होती है। लेकिन फसल के पकते ही महाजन अपने रूपये वसूलने आ धमकता है। उसकी फसल का अधिकांश तो महाजन के पेट में ही चला जाता हे। जो गहने उसने गिरवी रखे थे उन्हे भी छुड़ा नहीं पा रही है। अपनी इस विवशता पर वह मन मसोस कर रह जाती है।

विशेष :

1. कविता की इन पंक्तियों में नौरंगिया की दयनीय आर्थिक अवस्था का वर्णन किया गया है।
2. नौरंगिया की गरीबी का प्रमुख कारण महाजन द्वारा दिया गया कर्ज है जो कभी चुकने में ही नहीं आता।
3. ‘खड़े महाजन’ शब्द का प्रयोग ही यहाँ आतंक का पर्याय बनकर आया है।
4. ‘गिरवी-गहना’ तथा ‘मन-मसोस’ में अनुप्रास अलंकार तथा ‘फिर-फिर’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
5. भाषा में संगीत का-सा प्रभाव है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 6 नौरंगिया

11. कब तक आखिर कितना जूझे, कौन बताए किससे पूछे
जाने क्या-क्या टूटा-फूटा, लेकिन हैसना कभी न छूटा।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश किस रचना से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश ‘नौरंगिया’ कविता से लिया गया है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
नौरंगिया जीवन में कठिन पश्रिम करती है ताकि उसका जीवन स्तर सुधर सके। लेकिन सामाजिक-आर्थिक शोषण करने वालों से वह कबतक लड़ती रहेगी ? ये समस्यायें कैसे दूर होंगी – यह वह किससे पूछे और कौन ऐसा व्यक्ति है जो उसे सही राह दिखला सकता है। उसके जीवन में बहुत कुछ टूटा, बहुत कुछ उसने खोया फिर भी उसने हार नहीं मानी। वह हँस-हँसकर इन सबसे लड़ती जा रही है क्योंकि उसका अटल विश्वास है कि एक न एक दिन उसका भी समय बदलेगा।

विशेष :

1. कविता की इन पंक्तियों में नौरंगिया की उलझन का वर्णन किया गया है।
2. वह इस सवाल में उलझ कर रह जाती है कि अपनी इस स्थिति से उबरने के लिए किससे रास्ता पूछे और बताने वाला कौन है ?
3. नौरंगिया अपने जीवन में बहुत कुछ खो चुकी है फिर भी वह उसे भूल कर हँसती ही रहती है।
4. पंक्ति के ‘क्या-क्या’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
5. भाषा प्रवाहमयी है।

12. पैरों में मंगनी की चष्पल, साड़ी नई उधार की है।
नौरंगिया गंगा पार की है।

प्रश्न 1.
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार कैलाश गौतम हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
नौरंगिया का जीवन संघर्षों से भरा है। दिन भर जी-तोड़ परिश्रम करने के बाद् भी वह अपनी आर्थिक तंगी से ऊबर नहीं पाती है। उसे दूसरों से मांग कर ही अपनी आवश्यकता को पूरी करनी पड़ती है उसने अपने पैरों में जो चषल पहने हैं वह भी उसने किसी से मांगा है। नई साड़ी भी वह पूरी कीमत-चुका कर नहीं, बल्कि उधार में लाई है। इतनी सारी आर्थिक तंगी के बाद भी उसमें उत्साह की कमी नहीं है। उसे विश्वास है कि एक न एक दिन उसके दिन भी अवश्य फिरेंगे। वह जीवन से हार मानने वाली नहीं है क्योंकि वह गंगा पार की है।

विशेष :

1. नौरंगिया जब अपनी आमदनी से अपनी जरूरत पूरी नहीं कर पाती है तो कभी मंगनी और कभी उधार का सहारा भी लेती है।
2. अपने अभाव से वह चिंतित नहीं होती क्योंकि वह गंगा पार की है और गंगा पार वाले जिंदगी को जीना जानते हैं।
3. भाषा सरल तथा प्रवाहमयी है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 5 रामदास

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions Poem 5 रामदास to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – रामदास

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. रघुवीर सहाय की कविता ‘रामदास’ का सारांश लिखें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘रामदास’ कविता का मूल भाव लिखें।
अथवा
प्रश्न 3. ‘रामदास’ कविता में व्यक्त कवि के विचारों को लिखें।
अथवा
प्रश्न 4. ‘रामदास’ कविता में निहित उह्देश्य को लिखें।
अथवा
प्रश्न 5. ‘रामदास’ कविता के संदेश को अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 6. रघुवीर सहाय की कविता ‘रामदास’ के आधार पर लिखें कि इस कविता में सामाजिकराजनैतिक परिवेश में संशय और आशंका का स्वर प्रमुखता से उभरकर सामने आया है।
अथवा
प्रश्न 7. ‘रामदास’ कविता सत्ता और राजनीति के गंदे खेल से जनता को सावधान करती है विवेचना करें।
अथवा
प्रश्न 8. ‘रामदास’ किसका प्रतीक है ? उसकी हत्या की आशंका क्यों थी ?
अथवा
प्रश्न 9. ‘रामदास’ कविता के माध्यम से कवि ने किस सचचाई की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करना चाहा है ?
उत्तर :
रघुवीर सहाय ‘रामदास’ कविता के कवि हैं। इनकी कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह जीवन के हर कोने से अपने विषय की तलाश कर लेती है। सत्ता और राजनीति से भी उनकी कविता परहेज नहीं करती है। सत्ता तथा राजनीति में एक ईमानदार व्यक्ति किस प्रकार इसका शिकार होता है – इससे भी रघुवीर सहाय आम जनता को सावधान करते हैं। प्रस्तुत कविता ‘रामदास’ में एक ऐसे ही व्यक्ति का वर्णन है जो गंदी राजनीति का शिकार होता है। उसे अपनी ईमानदारी तथा अन्याय के विरूद्ध आवाज उठाने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 5 रामदास

रामदास एक आम आदमी है। अत्याधार तथा अनाचार का विरोध करने के कारण राजनीतिक गुंडे उसे ये धमकी दे चुके हैं कि उसे मौत के घाट उतार दिया जाएगा। अपनी हत्या की आशंका से भयभीत वह बाहर निकला। दिन का समय था तथा घने बादल छाए हुए थे। वह मन ही मन भयभीत था कि हो न हो हत्यारे उसकी ताक में होंगे। उसे लगा कि उसका अंत समय आ गया है क्योंकि उसे पहले से ही धमकी मिल चुकी थी कि संड़क पर नज़र आते ही उसकी हत्या कर दी जाएगी।

रामदास अपनी हत्या की आशंका से डरा हुआ सड़क पर धीरे-धीरे चल रहा था। एक बार उसने सोचा कि सुरक्षा के लिए किसी को साथ ले ले। फिर वह सोचकर रह गया क्योंकि निहत्था आदमी ऐसी परिस्थिति में भला उसकी सुरक्षा क्या कर पाएगा।

उसने दोनों हाथ पेट पर सुरक्षा की दृष्टि से रखे हुए था तथा एक-एक कदम सावधानीपूर्वक रखता वह आगे बढ़ रहा था। लोग मौन होकर रामदास पर आँखें गड़ाए हुए थे क्योंकि यह तय था कि जिसने उसे हत्या की धमकी दी है – वह आज उसकी हत्या करके रहेगा।

रामदास सड़क पर आरंकित भाव से खड़ा था कि किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा। रामदास पर उसने अपने सधेसधाये हाथों से चाकू का वार किया। चाकू का वार होते ही रामदास के शरीर से खून का फव्वारा-सा निकल पड़ा।

रामदास को चाकू मारने वाला हत्यारा भीड़ की परवाह किए बिना वहाँ से चला गया। किसी ने उसे रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। अब रामदास सड़क पर मरा पड़ा है। लोग उसकी परवाह करने की बजाय वहाँ खड़े थे। वे उन लोगों को बुलाने लगे जिन्हें यह संशय था कि रामदास की हत्या होकर रहेगी।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 5 रामदास

इस प्रकार हम पाते हैं कि आज के गुंडातंत्र में आम आदमी को गलत का विरोध करना कितना महँगा पड़ता है। भीड़ भी देखती रह जाती है और हत्यारा चहल-कदमी करते निकल जाता है। यह घटना व्यापक अर्थ को अपने आप में उकेरती है। रघुवीर सहाय की कविता में वास्तविकता का दबाव अधिक है। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि जब कहने को बहुत कुछ हो तो मौन को स्वीकार करना प्रतिरोध का प्रतीक है। व्यक्ति के अकेले प्रतिरोध से समाज नहीं बदलता है। समाज की संगठित शक्ति से ही राजनैतिक स्थिति को बदला जा सकता है – यही बताना इस कविता का उद्देश्य है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रामदास की हत्या किस प्रकार की गई?
उत्तर :
हत्यारे ने दिन में ही बीच सड़क पर चाकू मारकर रामदास की हत्या कर दी।

प्रश्न 2.
‘रामदास’ कविता के कवि का क्या नाम है ?
उत्तर :
‘रामदास’ कविता के कवि रघुवीर सहाय जी हैं।

प्रश्न 3.
रामदास की हत्या हो जाने के बाद लोग किसे बुलाने लगे ?
उत्तर :
रामदास की हत्या हो जाने के बाद लोग उसे बुलाने लगे जिन्हें संशय था कि रामदास की हत्या होगी।

प्रश्न 4.
रामदास ने अपनी सहायता के लिए किसी को अपने साथ क्यों नहीं लिया ?
उत्तर :
रामदास ने यह सोचकर किसी को अपने साथ नही लिया कि कोई निहत्था उसकी क्या सुरक्षा कर पाएगा।

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प्रश्न 5.
‘रामदास’ कविता में किसके प्रति चिंता व्यक्त की गई है ?
उत्तर :
‘रामदास’ कविता में वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की गई है।

प्रश्न 6.
‘रामदास’ कविता में कौन-सा स्वर प्रमुखता से उभरकर सामने आया है?
उत्तर :
‘रामदास’ कविता में नैतिक मूल्यों में गिरावट, सामाजिक परिवेश में रोज बढ़ते संशय और आशंका का स्वर प्रमुखता से उभरकर सामने आया है।

प्रश्न 7.
रामदास किसका प्रतीक है ?
उत्तर :
रामदास अत्याचार तथा अनाचार का विरोध करने वाले आम आदमी का प्रतीक है।

प्रश्न 8.
रामदास घर से कब निकला ?
उत्तर :
रामदास घने बादल छाये दिन में घर से निकला।

प्रश्न 9.
रामदास उदास क्यों था ?
उत्तर :
रामदास को यह आभास हो गया था कि हत्या की धमकी देने वाला उसकी हत्या जरूर कर देगा। इसी आशंका के कारण रामदास उस दिन उदास था।

प्रश्न 10.
रामदास को क्या बता दिया गया था ?
उत्तर :
रामदास को यह बता दिया गया था कि घर से बाहर निकलने पर उसकी हत्या कर दी जाएगी।

प्रश्न 11.
रामदास कहाँ पर दोनों हाथ सुरक्षा के लिए अपने पेट पर रखकर खड़ा था।
उत्तर :
रामदास सड़क पर दोनों हाथ सुरक्षा के लिए अपने पेट पर रखकर खड़ा था।

प्रश्न 12.
कौन भीड़ को ठेल कर लौट गया ?
उत्तर :
रामदास का हत्यारा भौड़ को ठेल कर लौट गया।

प्रश्न 13.
लोग आँखें गड़ा कर किसे और क्यों देखने लगे ?
उत्तर :
लोग रामदास को आँखें गड़ाकर देखने लगे क्योंकि सबको यह पता था कि उसकी हत्या कर दी जाएगी।

प्रश्न 14.
सभी रामदास के बारे में क्या जानते थे ?
उत्तर :
रामदास के बारे में सभी यह जानते थे कि उसकी हत्या होगी।

प्रश्न 15.
‘रामदास’ कविता का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
‘रामदास’ कविता का उद्देश्य आज के गुंडातंत्र से लोगों को सावधान करना तथा एकता का संदेश देना है।

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प्रश्न 16.
सड़क पर सभी मौन तथा निहत्थे क्यों थे ?
उत्तर :
गुंडातंत्र के विरोध का साहस न होने के कारण सड़क पर सभी मौन तथा निहत्थे थे।

प्रश्न 17.
‘घनी बदली’ किसका प्रतीक है ?
उत्तर :
‘घनी बदली’ देश में छाये राजनीतिक कुव्यवस्था तथा आतंक के साये का प्रतीक है।

प्रश्न 18.
‘आया उसने नाम पुकारा’ – कौन आया और उसने किसका नाम पुकारा ?
उत्तर :
हत्यारा आया और उसने रामदास का नाम पुकारा।

प्रश्न 19.
‘अंत समय आ गया पास था’ — किसका अंत समय पास आ गया था ?
उत्तर :
रामदास का अंत समय पास आ गया था।

प्रश्न 20.
लोग निडर होकर किस जगह खड़े थे और क्यों ?
उत्तर :
लोग निडर होकर रामदास की लाश के पास खड़े थे क्योंकि उन्होंने हत्यारे का कोई विरोध नहीं किया था और उन्हें उनसे डर न था।

प्रश्न 17.
‘घनी बदली’ किसका प्रतीक है ?
उत्तर :
‘घनी बदली’ देश में छाये राजनीतिक कुव्यवस्था तथा आतंक के साये का प्रतीक है।

प्रश्न 18.
‘आया उसने नाम पुकारा’ – कौन आया और उसने किसका नाम पुकारा ?
उत्तर :
हत्यारा आया और उसने रामदास का नाम पुकारा।

प्रश्न 19.
‘अंत समय आ गया पास था’ – किसका अंत समय पास आ गया था ?
उत्तर :
रामदास का अंत समय पास आ गया था।

प्रश्न 20.
लोग निडर होकर किस जगह खड़े थे और क्यों ?
उत्तर :
लोग निडर होकर रामदास की लाश के पास खड़े थे क्योंकि उन्होंने हत्यारे का कोई विरोध नहीं किया था और उन्हे उनसे डर न था।

प्रश्न 21.
रामदास किस दिन उदास था ?
उत्तर :
रामदास अपनी हत्या वाले दिन उदास था।

प्रश्न 22.
रामदास ने सड़क पर अकेले चलते समय क्या सोचा ?
उत्तर :
रामदास ने अकेले चलते समय यह सोचा कि वह अपने साथ किसी व्यक्ति को ले ले।

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प्रश्न 23.
रामदास को किसने पुकारा ?
उत्तर :
हत्यारे ने रामदास को पुकारा।

प्रश्न 24.
रामदास की हत्या कब हुई ?
उत्तर :
रामदास की हत्या दिन के समय हुई ।

प्रश्न 25.
रामदास की हत्या किस व्यवस्था की ओर इंगित/संकेत करती है ?
उत्तर :
रामदास की हत्या गुंडातंत्र की अराजक व्यवस्था की ओर संकेत करती है।

प्रश्न 26.
रामदास के धीरे चलने का मूल कारण क्या था ?
उत्तर :
रामदास के धीरे चलने का मूल कारण यह था कि वह चिंतित और अपनी हत्या के बारे में आशंकित था।

प्रश्न 27.
रामदास धनी बदली वाले दिन उदास क्यों था ?
उत्तर :
रामदास धनी बदली वाले दिन घर से बाहर निकला तथा उसे पता था कि घर से बाहर निकलने पर उसकी हत्या हो सकती है इसलिए वह उदास था।

प्रश्न 28.
किसे बता दिया गया था कि उसकी हत्या होगी ?
उत्तर :
रामदास को बता दिया गया था कि उसकी हत्या होगी।

प्रश्न 29.
रामदास किसका प्रतीक है ?
उत्तर :
रामदास वैसे आम आदमी का प्रतीक है जो गलत का विरोध करता है।

प्रश्न 30.
लोग आँखें गड़ा कर किसे और क्यों देखने लगे ?
उत्तर :
लोग आँखे गड़ा कर रामदास को देखने लगे क्योंकि यह तय था कि रामदास की हत्या होगी।

प्रश्न 31.
आपके विचार से रामदास का वास्तविक हत्यारा कौन था ?
उत्तर :
मेरे विचार से रामदास का वास्तविक हत्यारा वह व्यक्ति है जिसके इशारे पर उसकी हत्या की गई।

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प्रश्न 32.
रामदास ने अपनी हत्या का विरोध क्यों नहीं किया ?
उत्तर :
रामदास कमजोर, अकेला तथा निहत्था था इसलिए यह अपनी हत्या का विरोध नहीं कर पाया।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘रामदास’ कविता के कवि कौन है?
(क) विमल सहाय
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) कन्हैया लाल नन्दन
(घ) राजेश जोशी
उत्तर :
(ख) रघुवीर सहाय

प्रश्न 2.
रामदास की हत्या के समय –
(क) सड़क सूनी थी
(ख) सड़क पर भीड़ थी
(ग) सड़क पर इक्के दुक्के लोग थे
(घ) सड़क पर सो रहे थे
उत्तर :
(ख) सड़क पर भीड़ थी

प्रश्न 3.
रामदास कहाँ खड़ा था ?
(क) चौड़ी सड़क पर
(ख) पतली गली में
(ग) गली के किनारे में
(घ) बीच सड़क पर
उत्तर :
(घ) बीच सड़क पर।

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प्रश्न 4.
रघुवीर सहाय का जन्म कब हुआ था ?
(क) 5 जनवरी 1929 ई०
(ख) 10 नवंबर 1929 ई०
(ग) 6 मार्च 1929 ई०
(घ) 9 दिसंबर 1929 ई०
उत्तर :
(घ) 9 दिसम्बर 1929 ई०।

प्रश्न 5.
रघुवीर सहाय का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) उत्तर प्रदेश के लखनऊ में
(ख) बिहार के पटना में
(ग) मध्य प्रदेश के उज्जैन में
(घ) इनमें से कहीं नहीं
उत्तर :
(क) उत्तर प्रदेश के लखनऊ में।

प्रश्न 6.
रघुवीर सहाय के पिता का नाम क्या था ?
(क) श्री नरदेव सहाय
(ख) श्री हरदेव सहाय
(ग) श्री हरि सहाय
(घ) श्री हरगौरी सहाय
उत्तर :
(ख) श्री हरदेव सहाय।

प्रश्न 7.
रघुवीर सहाय की माता का क्या नाम था ?
(क) श्रीमती तारा देवी
(ख) श्रीमती शारदा देवी
(ग) श्रीमती नीलम देवी
(घ) श्रीमती सुधा देवी
उत्तर :
(क) श्रीमती तारा देवी।

प्रश्न 8.
रघुवीर सहाय किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्ति काल
(ग) रोतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(घ) आधुनिक काल।

प्रश्न 9.
रघुवीर सहाय ने निम्न में से किस पत्रिका में संपादन का कार्य किया ?
(क) दिनमान
(ख) माधुरी
(ग) मतवाला
(घ) चाँद
उत्तर :
(क) दिनमान।

प्रश्न 10.
रघुवीर सहाय में निम्न में से किस पत्र में संपादक का कार्य किया ?
(क) माधुरी
(ख) साप्ताहिक हिन्दुस्तान
(ग) नवभारत टाईम्स
(घ) सारिका
उत्तर :
(ग) नवभारत टाईम्स।

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प्रश्न 11.
हिन्दी साहित्य-जगत में रघुवीर सहाय की पहचान किस रूप में अधिक है ?
(क) कवि
(ख) कहानीकार
(ग) उपन्यासकार
(घ) नाटककार
उत्तर :
(क) कवि।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से कौन-सा काव्य-संग्रह रघुवीर सहाय का है ?
(क) खुले हुए आसमान के नीचे
(ख) सीढ़ियों पर धूप में
(ग) गलत पते की चिट्ठी
(घ) आदिम राग
उत्तर :
(ख) सीढ़ियों पर धूप में।

प्रश्न 13.
‘कुछ पते और कुछ चिद्यियाँ’ के कवि कौन हैं ?
(क) राजेश जोशी
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) ऋतुराज
(घ) यतीन्द्र मिश्र
उत्तर :
(ख) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 14.
‘रास्ता इथर से है’ (कहानी-संग्रह) किसकी रचना है ?
(क) रघुवीर सहाय
(ख) राजेश जोशी
(ग) ॠतुराज
(घ) अनामिका
उत्तर :
(क) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 15.
‘जो आदमी हम बना रहे है’ (कहानी-संग्रह) के लेखक कौन हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) कृष्णा सोबती
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) संजीव
उत्तर :
(ग) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 16.
‘लिखने का कारण’ के निबंधकार कौन हैं ?
(क) संजीव
(ख) सत्यजित राय
(ग) कृष्णा सोबती
(घ) रघुवीर सहाय
उत्तर :
(घ) रयुवीर सहाय।

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प्रश्न 17.
‘ऊबे हुए सुखी’ के निबंधकार कौन हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) शैल रस्तोगी
(घ) प्रेमघंद
उत्तर :
(ख) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 18.
‘वे और नहीं होंगे जो मारे जाएंगे’ (निबंध-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) राम कुमार वर्मा
(ख) रघुवीर सहाय
(ग) शैल रस्तोगी
(घ) प्रेमचंद
उत्तर :
(ख) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 19.
‘भँवर लहरें और तरंग’ (निबंध-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रघुवीर सहाय
(ख) शिवमूर्ति
(ग) राम कुमार वर्मा
(घ) शैल रस्तोगी
उत्तर :
(क) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 20.
‘शब्द-शक्ति’ (निबंध-संग्रह) के लेखक कौन हैं ?
(क) संजीव
(ख) कृष्णा सोबती
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) शिवमूर्ति
उत्तर :
(ग) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 21.
‘यथार्थ यथास्थिति नहीं’ (निबंध-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रघुवीर सहाय
(ख) गुणाकर मुले
(ग) यतीन्द्र मिश्र
(घ) डॉ० रामदरश मिश्र
उत्तर :
(क) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 22.
रघुवीर सहाय का निधन कब हुआ ?
(क) 25 दिसम्बर 1990
(ख) 1 जनवरी 1990
(ग) 28 दिसम्बर 1990
(घ) 30 दिसंबर 1990
उत्तर :
(घ) 30 दिसंबर 1990

प्रश्न 23.
निम्नलिखित में से कौन-सा काव्य-संग्रह रघुवीर सहाय का है ?
(क) पल्लव
(ख) आदिम राग
(ग) आत्महत्या के विरूद्ध
(घ) गलत पते की चिट्ठी
उत्तर :
(ग) आत्महत्या के विरूद्ध।

प्रश्न 24.
‘रामदास’ कविता में कौन उदास था ?
(क) रामदास
(ख) कवि
(ग) लोग
(घ) हत्यारा
उत्तर :
(क) रामदास।

प्रश्न 25.
किसका अंत समय पास आ गया था ?
(क) लोगों का
(ख) कवि का
(ग) हत्यारा का
(घ) रामदास का
उत्तर :
(घ) रामदास का।

प्रश्न 26.
सोचा साथ किसी को ले लें – कौन सोचता है ?
(क) रामदास
(ख) कवि
(ग) हत्य्यारा
(घ) लोग
उत्तर :
(क) रामदास।

प्रश्न 27.
सभी जानते थे – सभी क्या जानते थे ?
(क) रामदास की हत्या न होगी
(ख) रामदास की हत्या होगी
(ग) रामदास नहीं मरेगा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) रामदास की हत्या होगी।

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प्रश्न 28.
‘लोग भूल गए हैं’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) यतीन्द्र मिश्र
(ख) गुणाकर मुले
(ग) रामदरश मिश्र
(घ) रघुवीर सहाय
उत्तर :
(घ) रघुवीर सहाय।

प्रश्न 29.
लोग आँखें गड़ा कर किसे देखने लगे ?
(क) रामदास को
(ख) हत्यारे को
(ग) कवि को
(घ) इनमें से किसी को नहीं
उत्तर :
(क) रामदास को।

प्रश्न 30.
रामदास का हत्यारा कहाँ से निकला ?
(क) सड़क से
(ख) गली से
(ग) कार से
(घ) दुकान से
उत्तर :
(ख) गली से।

प्रश्न 31.
रामदास का नाम किसने पुकारा ?
(क) हत्यारे ने
(ख) कवि ने
(ग) लोगों ने
(घ) उसके मित्र ने
उत्तर :
(क) हत्यारे ने।

प्रश्न 32.
भीड़ ठेल कर कौन लौट गया ?
(क) कवि
(ख) हत्यारा
(ग) रामदास
(घ) लोग
उत्तर :
(ख) हत्यारा।

प्रश्न 33.
सड़क पर कौन मरा पड़ा था ?
(क) लोग
(ख) कवि
(ग) कुत्ता
(घ) रामदास
उत्तर :
(घ) रामदास।

प्रश्न 34.
रामदास की हत्या के बाद लोग किसे बुलाने लगे ?
(क) जिन्हें संशय था कि हत्या होगी
(ख) पुलिस को
(ग) घरवालों को
(घ) अस्पतालवालों को
उत्तर :
(क) जिन्हें संशय था कि हत्या होगी।

प्रश्न 35.
‘लगे देखने उसको’ – उसको से कौन संकेतित है ?
(क) हत्यारे को
(ख) रामदास को
(ग) कवि को
(घ) इनमें से किसी को नहीं
उत्तर :
(ख) रामदास को।

प्रश्न 36.
‘उसे यह बता दिया गया था’ – ‘उसे’ से कौन संकेतित है ?
(क) रामदास
(ख) हत्यारा
(ग) लोग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रामदास।

प्रश्न37.
रामदास की हत्या के बाद लोग कैसे खड़े थे ?
(क) भयभीत
(ख) निडर
(ग) खुश
(घ) चिंतित
उत्तर :
(ख) निडर।

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प्रश्न 38.
रघुवीर सहाय आकाशवाणी के किस केन्द्र में कार्यरत् थे ?
(क) दिल्ली
(ख) कोलकाता
(ग) नागपुर
(घ) पटना
उत्तर :
(क) दिल्ली।

प्रश्न 39.
रामदास की हत्या किस समय हुई ?
(क) दिन में
(ख) रात में
(ग) सुबह में
(घ) शाम में
उत्तर :
(क) दिन में।

प्रश्न 40.
हत्यारे ने किससे रामदास की हत्या की ?
(क) तलवार से
(ख) पिस्तौल से
(ग) चाकू से
(घ) गला दबाकर
उत्तर :
(ग) चाकू से।

प्रश्न 41.
रघुवीर सहाय ने किस विषय से एम० ए० किया था ?
(क) हिन्दी
(ख) अंगेजी
(ग) इतिहास
(घ) अर्थशास्त्र
उत्तर :
(ख) अंग्रेजी।

प्रश्न 42.
रामदास की हत्या कहाँ हुई ?
(क) घर में
(ख) खेत में
(ग) बाजार में
(घ) सड़क पर
उत्तर :
(घ) सड़क पर ।

प्रश्न 43.
रामदास को क्या बता दिया गया था?
(क) उसे बंदी बनाया जाएगा
(ख) उसे नौकरी दी जाएगी
(ग) उसे पुरस्कार दिया जाएगा
(घ) उसकी हत्या कर दी जाएगी
उत्तर :
(घ) उसकी हत्या कर दी जाएगी।

प्रश्न 44.
निम्नलिखित में से कौन-सा काव्य-संग्रह रघुवीर सहाय का है ?
(क) हँसो हँसो जल्दी हँसो
(ख) सारिका
(ग) मतवाला
(घ) पल्लव
उत्तर :
(क) हँसो हँसो जल्दी हँसो।

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प्रश्न 45.
रामदास की हत्या कहाँ हुई थी ?
(क) दुकान में
(ख) सड़क पर
(ग) घर में
(घ) अस्पताल में
उत्तर :
(ख) सड़क पर।

प्रश्न 46.
रामदास था ?
(क) अपराधी
(ख) आतंकवादी
(ग) आम आदमी
(घ) खूनी
उत्तर :
(ग) आम आदमी।

प्रश्न 47.
रामदास किसका प्रतीक है ?
(क) आम आदमी का
(ख) नेता का
(ग) अपराधी का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) आम आदमी का।

WBBSE Class 10 Hindi रामदास Summary

कवि परिचय 

रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसंबर 1929 ई० को लखनऊ के मॉडल हाउस मुहल्ले में एक शिक्षित परिवार मे हुआ था। इनके पिता श्री हरदेव सहाय लखनऊ के ‘ब्याय एंग्लों बंगाली स्कूल’ में साहित्य के अध्यापक थे। जन्म के दो वर्ष के बाद ही माता श्रीमती तारा देवी चल बसी। बालक रघुवीर की शिक्षादीक्षा लखनऊ में ही हुई थी। लखनऊ विश्वविद्यालय से इन्होंने 1951 ई० में अंपेजी साहित्य में एम० ए० की उपाधि प्राप्त की।
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इटरमीडिएट (हायर सेकेण्डरी) में अध्ययन के दौरान ही इनकी रूचि कविता-लेखन में हो गई। 1946 ई० से लेकर 1948 ई० तक इनकी कविताएँ ‘आजकल’, ‘प्रतीक’ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं। 1957 ई० में विमलेश्वरी देवी से विवाह के बाद आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) से त्यागपत्र देकर मुक्त लेखन को अपने जीवन-यापन का आधार बनाया। आगे चलकर ‘नवभारत टाइम्स’ तथा ‘दिनमान’ में भी संपादक का कार्य किया। 30 दिसंबर, 1990 ई० को इनका निधन हो गया।

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रघुवीर सहाय को उनके काव्य-संग्रह ‘लोग भूल गए’ के लिए सन् 1984 में ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। रहुवीर सहाय की रचनाओं में तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं तथा विसंगतियों पर गहरी चिंता प्रकट की गई है। ये हिन्दी साहित्य जगत में उस पीढ़ी के सदस्य थे, जो स्वाधीनता आंदोलन की समाप्ति पर रचनाशील हुई थी।
रघुवीर सहाय की रचना-संसार का परिचय इस प्रकार है –

कविता-संग्रह :- ‘सीढ़ियों पर धूप में’, आत्महत्या के विरूद्ध’, ‘हँसो-हँसो जल्दी हँसो’, ‘लोग भूल गए हैं, ‘कुछ पते और कुछ चिट्यियाँ’।
कहानी-संप्रह :- रास्ता इधर से हैं और ‘जो आदमी हम बना रहे हैं।
निबंध-संग्रह :- ‘लिखने का कारण’, ‘ऊबे हुए सुखी’, ‘वे और नहीं होगे जो मारे जाएंगे”, ‘भँवर लहरें और तरंग’, ‘शब्द-शक्ति’ तथा ‘यथार्थ यथा-स्थिति नहीं।

अनुवाद :- मैकबेथ और ट्रेवेल्थ नाइट (शेक्सपियर का नाटक), 12 हंगरी कहानियों का अनुवाद, 30 हंगरी कविताओं का अनुवाद, तीन हंगरी नाटको का अनुवाद, लोक्का के ‘हाउस ऑफ बर्नाडा’ का गद्य में अनुवाद।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर 

1. चौड़ी सड़क गली पतली थी
दिन का समय घनी बदली शी
रामदास उस दिन उदास था
अंत समय आ गया पास था
उसे बता यह दिया गया था उसकी हत्या होगी।

शब्दार्थ :

  • घनी बदली = घने बादलों का घिरा होना।

प्रश्न 1.
कविता तथा कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कविता का नाम ‘रामदास’ है तथा इसके कवि रघुवीर सहाय हैं।

प्रश्न 2.
रामदास कौन है ?
उत्तर :
रामदास एक आम आदमी है जो अत्याचार तथा अनाचार का विरोध अकेले ही करता है।

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प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
इस पद्यांश में रामदास नामक व्यक्ति के बारे में कहा गया है। रामदास एक आम आदमी है। अत्याचार तथा अनाचार का विरोध करने के कारण राजनीतिक गुंडे उसे ये धमकी दे चुके हैं कि उसे मौत के घाट उतार दिया जाएगा। अपनी हत्या की आशंका से भयभीत वह बाहर निकला। दिन का समय था तथा घने बादल छाए हुए थे। वह मन ही मन भयभौत था कि हो न हो हत्यारे उसकी ताक में होंगे। उसे लगा कि उसका अंत समय आ गया है क्योंकि उसे पहले से ही धमकी मिल चुकी थी कि सड़क पर नज़र आते ही उसकी हत्या कर दी जाएगी।

काव्यगत सौंदर्य :

1. अन्याय तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला रामदास जैसे आम आदमी का यही हश्र (परिणाम) होता है।
2. कविता की पंक्तियाँ पाठको में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश जगाती हैं।
3. परिणाम को जानते हुए भी कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ना आम आदमी की संयर्षशीलता का प्रमाण है ।
4. सौदर्य और कला की जगह सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत करना कवि का लक्ष्य है।
5. कविता की भाषा सपाट होते हुए भी विराट अर्थ देती है।

2. धीरे धीरे चला अकेले
सोचा साथ किसी को ले ले
फिर रह गया, सड़क पर सब थे
सभी मौन शे सभी निहतथे
सभी जानते थे यह उस दिन उसकी हल्या होगी।

शब्दार्थ :

  • निहत्थे = खाली हाथ।

प्रश्न 1.
यह अंश किस कविता से लिया गया है ?
उत्तर :
यह अंश ‘रामदास’ नामक कविता से लिया गया है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
रामदास अपनी हत्या की आशंका से डरा हुआ सड़क पर धीरे-धीरे चल रहा था। एक बार उसने सोचा कि सुरक्षा के लिए किसी को साथ ले ले। फिर वह सोचकर रह गया क्योंकि निहत्था आदमी ऐसी परिस्थिति में भला उसकी सुरक्षा क्या कर पाएगा? रामदास को सड़क पर देखने वाले लोग भी मौन थे। उन्हें यह पता था कि हो न हो आज रामदास की हत्या कर दी जाएगी।

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काव्यगत सौंदर्य :

1. अन्याय तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला रामदास जैसे आम आदमी का यही हश्र (अंजाम) होता है।
2. कविता की पंक्तियाँ पाठकों में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आकोश जगाती हैं।
3. परिणाम को जानते हुए भी कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ना आम आदमी की संघर्षशीलता का प्रमाण है।
4. सौदर्य और कला की जगह सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत करना कवि का लक्ष्य है।
5. कविता की भाषा सपाट होते हुए भी विराट अर्थ देती है।

3. खड़ा हआ वह बीच सडुक पर दोनों हाथ पेट्पर रख कर
सथे कदम रख कर के आए
लोग सिमद कर आँख यड़ाए
लगे देखने उसको जिसकी तय था हत्या होर्गी।

शब्दार्थ :

  • सधे = सावधानीपूर्वक।

प्रश्न 1.
पद्यांश के कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
पद्यांश के कवि रघुवीर सहाय है।

प्रश्न 2.
लोग किस पर आँखें गड़ाए हुए थे?
उत्तर :
लोग रामदास पर आँखें गड़ाए हुए थे।

प्रश्न 3.
पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
रामदास अपनी हत्या की आशंका से भयभीत बीच सड़क पर खड़ा था। उसने दोनो हाथ पेट पर सुरक्षा की दृष्टि से रखे हुए था तथा एक-एक कदम सावधानीपूर्वक वह रखता
हुआ आगे बढ़ रहा था। लोग मौन होकर रामदास पर आँखें गड़ाए हुए थे क्योंक यह तय था कि जिसने उसे हत्या की धमकी दी है – वह आज उसकी हत्या करके रहेगा।

काव्यगत सौंदर्य :

1. अन्याय तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला रामदास जैसे आम आदमी का यही हश्र (अंत) होता है।
2. कविता की पंक्तियाँ पाठकों में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश जगाती है।
3. परिणाम को जानते हुए भी कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ना आम आदमी की संघर्षशीलता का प्रमाण है।
4. सौदर्य और कला की जगह सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत करना कवि का लक्ष्य है।
5. कविता की भाषा सपाट होते हुए भी विराट अर्थ देती है।

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4. निकल गली से तब हत्यारा आया उसने नाम पुकारा
हाथ तौल कर चाकू मारा
छूटा लोह का फव्वारा
कहा नहीं धा उसने आखिर उसकी हत्या होगी।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश किस कविता से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश ‘रामदास’ नामक कविता से लिया गया है।

प्रश्न 2.
पद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रामदास सड़क पर आशंकित भाव से खड़ा ही था कि किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा। रामदास पर उसने अपने सधे-सधाये हाथों से चाकू का वार किया। चाकू का वार होते ही रामदास के शरीर से खून का फव्वारा-सा निकल पड़ा। आखिरकार लोगों की आशंका सच में बदल गई। हत्यारे ने अपनी कहानी को करनी में बदल ही डाला। उसने रामदास की हत्या कर ही दी।

काव्यगत सौंदर्य :

1. अन्याय तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला रामदास जैसे आम आदमी का यही हश्र (अंत) होता है।
2. कविता की पंक्तियाँ पाठकों में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश जगाती है।
3. परिणाम को जानते हुए भी कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ना आम आदमी की संघर्षशीलता का प्रमाण है।
4. सौंदर्य और कला की जगह सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत करना कवि का लक्ष्य है।
5. कविता की भाषा सपाट होते हुए भी विराट अर्थ देती है।

5. भीड़ वेल कर लौद गया वह मरा पड़ा है रामदास यह
देखो-देखो बार बार कह
लोगनिडर उस जमह खड़े
लगे बुलाने उन्हें जिनें संशय धा हत्या होगी।

प्रश्न 1.
कवि और कविता का नाम लिखें।
उत्तर :
कवि रघुवीर सहाय हैं तथा कविता का नाम ‘रामदास’ है।

प्रश्न 2.
भीड़ ठेल कर कौन लौट गया ?
उत्तर :
रामदास का हत्यारा भीड़ ठेल कर लौट गया।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
रामदास को चाकू मारने वाला हत्यारा भीड़ की परवाह किए बिना वहाँ से चला गया। किसी ने उसे रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। अब रामदास सड़क पर मरा पड़ा है। लोग उसकी परवाह करने की बजाय वहाँ खड़े थे। वे उन लोगों को बुलाने लगे जिन्हें यह संशय था कि रामदास की हत्या होकर रहेगी।

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काव्यगत सौंदर्य :

1. अन्याय तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला रामदास जैसे आम आदमी का यही हश्र (अंत) होता है।
2. कविता की पंक्तियाँ पाठकों में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आकोश जगाती है।
3. परिणाम को जानते हुए भी कुव्यवस्था के खिलाफ लड़ना आम आदमी की संघर्षशीलता का प्रमाण है।
4. सौंदर्य और कला की जगह सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत करना कवि का लक्ष्य है।
5. कविता की भाषा सपाट होते हुए भी विराट अर्थ देती है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 4 मनुष्य और सर्प

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions Poem 4 मनुष्य और सर्प to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – मनुष्य और सर्प

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘मनुप्य और सर्प’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता का सारांश लिखें।
अधवा
प्रश्न 3. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता के आधार पर कर्ण और अश्वसेन का संवाद अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 4. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता में निहित संदेश तथा उदेश्य को लिखें।
अथवा
प्रश्न 5. ‘मनुष्य और सर्ष’ कविता के आधार पर बताएँ कि अश्वसेन ने कर्ण से क्या निवेदन किया? कर्ण ने उसके निवेदन को अस्वीकार क्यों कर दिया ?
अथ्रवा
प्रश्न 6. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता के उद्देश्य को लिखें।
अथवा
प्रश्न 7. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता के आधार पर कवि की भावनाओं को स्पष्ट करें।
अथवा
प्रश्न 8. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या संदेश देना चाहा है ?
अथवा
प्रश्न 9. ‘मनुष्य और सर्प’ कविता के आधार पर कर्ण और अश्वसेन का संवाद अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
महाभारत-युद्ध में कर्ण का चरित्र सामरिक (युद्ध) महत्व से अधिक सामाजिक शक्ति, निष्ठा तथा मानवतावाद की ओर संकेत करता है। कर्ण महाभारत-युद्ध में दुर्योधन की ओर से लड़ा लेकिन उसने युद्ध में कभी भी अनीति का सहारा नहीं लिया। अगर वह चाहता तो अर्जुन का नाश करने के लिए अश्वसेन सर्प का उपयोग कर लेता। कर्ण मानव जाति का प्रतीक था इसलिए साँपों से मिलकर लड़ने को वह नीचता समझता था। कर्ण के इसी मानवतावादी चरित्र को दिनकर ने ‘मनुष्य और सर्प’ कविता में उभारा है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 4 मनुष्य और सर्प

कुरूक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा जा रहा है। चारों ओर की जन-धन की अपार हानि देखकर ऐसा लगता है मानो धरती का सुहाग जल रहा हो। यह मनुष्य के अंदर की वह कुटिलता रूपी आग ही है जो कुरूक्षेत्र में खुलकर अपना खेल खेल रही है। इस आग की लपट से कोई नहीं बच पाया।

महाभारत-युद्ध की भयंकरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घोड़े तथा हाथियों के माँस के लोथड़े पर सैनिकों के अंग कट-कट कर गिर रहे हैं। युद्ध में भाग लेनेवाले घोड़े-हाधियों के खून में तथा सैनिकों के खून में कोई अंतर नहीं रह गया है। दोनों के रक्त मिलकर एक हो गए हैं।

तेज गति से, पर्वत के समान सुधड़ लेकिन रवत-रंजित शरीर लेकर युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन के साथ कर्ण युद्ध कर रहे हैं। क्षण-क्षण भर बाद उनके गरजने का गंभीर स्वर सुनाई पड़ता है।

कौरव और पाण्डव दोनो ही युद्ध की कला में पारंगत हैं। दोनों के बल समान हैं। दोनों ही हर प्रकार से समर्थ हैं। दोनों के ही निशाने अचूक हैं लेकिन बाण की वर्षा व्यर्थ ही सिद्ध हो रही है।

कर्ण ने बाण के लिए अपना तरकस ज्योंह देखा उसकी तरकस में एक भयंकर विषधर साँप फुँफकार रहा था। यह देखकर वह आश्र्यचकित रह गया।

तरकस में छिपे सर्ष ने अपना परिवय देते हुए कर्ण से कहा कि वह सर्णों का राजा है। वह जन्म से ही अर्जुन का परम शानु है लेकिन कर्ण का हर प्रकार से हित चाहने चाला है।

पाडवों द्वारा खाण्डव वन में आग लगा दिए जाने पर अश्वसेन की सर्पमाता उसमें जल मरी थी। अश्वसेन उसी का बदला लेना चाहता था। इसलिए वह कर्ण से कहता है कि वह एक बार कृपा करे। उसे अपने बाण पर वढ़ा अपने लब्य्य तक पहुँचने दे। जब वह अपने शन्नु तक पहुँन जाएगा तो अपने विष से उसे मृत्युरूपी रथ पर सबार कर देगा।
वह अपने जीवन भर का संचित विष उसके शरीर में उतार देगा। इस प्रकार उसका प्रतिरोध पूरा हो जाएगा।
अश्वसेन कर्ण के द्वारा बाण के माध्यम से अपने शजु तक पहुँचाने की बात पर कर्ण कहता है कि वह उसकी कुटिलता है। भला ऐसी बात कहने योग्द है? मनुष्य की विजय का साषन तो उसके अपने बाहुबल पर है।

कर्ण अश्वसेन का अनुरोध सुनकर कहता है कि यह संभव नही है कि वह गनुण होकर मनुज्ज से युद्ध करने के लिए किसी सर्प का सहारा ले। उसने जौवन भर मानव-धर्म के प्रति निषा पाल रखा है। ऐसा करना उसके आचरण के विरूद्ध होगा।

कर्ण अश्वसेन को नम्रतापुर्वक मना करते हुए कहता है कि वह सही है कि तुम्हारी सहायता से युद्ध में अनायास ही मुके सफलता मिल खाएगी । लेंकिन यह भी सोवो कि आने वाली मानवता को भला में वरा नुँह दिवलाऊँगा ?

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युद्ध में तुम्बारी सहायता से विजय म्राप्त करने पर सारौ दुनिया यही कहेगी कि कर्ण ने अपने सारेकुकर्मों जर राख द्ञात दिगा । उस पापौ ने अएवे शत्रु से बदला लेने के लिए एक सर्प की सहागता ली।

तुम्हारे कई वंशब भी मनुष्व के रूप में हैं। छे ऊपर से भसे है मनुष्य दिखते हैं लेकन वे साँप की तरह जहरीले है। साँप केबल जंगलों मे ही नहीं राते, वे नगर, गाँव और धरों में भी बसते है।

ने मनुण्यरूपी सर्ग मानवता के रास्तें में खाधा दैदा करते हैं। वे अपने शब्र से बदला लेने के लिए किसी भी नीवता पर उतर सकते है।
कर्ण कहता है कि मे ऐेसा नहीं चाहृता कि मेरा नाम भी मनुप्यक्ष्पी सॉपों में गिना जाय।
अर्जुंन से नेरी शबुता है लेकिन नह मनूख्न है, सर्ष गहीं। और यह संघर्ष, यह शत्रूता भी जन्म-जम्वातर सक नही, क्वल इसीी गा्म यर कलने वाला है । फिर मे यह पाप कैसे कर सकता है ?

जब अर्दुन के साप मेरी यह शतुता केवल इसी जन्म में चलनी है तो ह्राप में काकर मैं अपना अगला जौबन भी क्यों विगाड़ हूँ । साँणों की शरण मे नाकर, राप बनकर मेंकिसी मनुण्ध को बयाँ मारूँ?

कर्ण ने अरवेसन से कहा कि तुम तो मानब तथा मानका कें शडु सो। तुम्हारे साथ मेरी मित्रता करी नही हो सकती। मैं तुम्हारी सहा्रायता लेकर अधने माषे पर कलंक का टौका चहीं सगा सकता चाहे जो भी हो।

दस प्रकार हम पाते है कि कर्ण जाति-समाज से अपेधित होकर, समस्याओं ये धिरे होने घर भी मानवता को नहीं छोड़ता। पुरूप्षार्थ, संयम तथा कतंब्यानेष्डा से अपना गभान अर्जित करने के लिए कह जिस प्रकार आगे रछ़ता जाता है, बह किसी भी समान के लिए अनुकरणीच है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कर्ण ने जीवन भर किस निष्ठा का पालन किया?
उत्तर :
कर्ण ने जीवन-भर मानवता की निष्ठा को पाला।

प्रश्न 2.
‘कर्ण’ ने अश्वसेन की सहायता क्यों नहीं ली ?
उत्तर :
कर्ण ने अश्वेसन की सहायता नहीं ली क्योंकि वह मानवता का पुजारी था। अगर वह अश्वसेन की सहायता लेता तो आने वाली पीढ़ी को वह अपना मुंह नहीं दिखला पाता।

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प्रश्न 3.
चतुष्पद से किस ओर संकेत हो रहा है ?
उत्तर :
चतुष्षद से हाथी, घोड़ा आदि चार पैरों वाले जानवरों की ओर संकेत हो रहा है।

प्रश्न 4.
प्रतिक्षण किसका गंभीर गर्जन कुरुक्षेत्र में गूँज रहा था ?
उत्तर :
कुरकक्षेत्र में प्रतिक्षण कर्ण तथा अर्जुन का गंभीर गर्जन गूंज रहा था।

प्रश्न 5.
कर्ण की सहायता कौन करना चाहता था और क्यों ?
उत्तर :
अश्वसेन कर्ण की सहायता करना चाहता था क्योंकि वह अपना पुराना बदला अर्जुन से ले सके।

प्रश्न 6.
अश्वसेन कौन था?
उत्तर :
अश्वसेन सर्पराज तक्षक का पुत्र था।

प्रश्न 7.
अश्वसेन किस समय कर्ण के पास आया ?
उत्तर :
कर्ण जब अर्जुन के साथ युद्ध कर रहा था तभी अश्वसेन उसके पास आया।

प्रश्न 8.
अश्वसेन ने कर्ण के सामने क्या प्रस्ताव रखा ?
उत्तर :
अवश्सेन ने कर्ण के सामने अर्जुन के वध में सहायता करने का प्रस्ताव रखा।

प्रश्न 9.
कर्ण ने अश्वसेन के प्रस्ताव का क्या किया ?
उत्तर :
कर्ण ने अश्वसेन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

प्रश्न 10.
कर्ण ने अश्वसेन को किसका शत्रु कहा ?
उत्तर :
कर्ण ने अश्वसेन को मानवता का शत्रु कहा।

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प्रश्न 11.
कर्ण के माध्यम से दिनकर ने हमें क्या संदेश देना चाहा है ?
उत्तर :
कर्ण के माध्यम से दिनकर ने हमें यह संदेश देना चाहा है कि विषम से विषम परिस्थिति में भी हमें मानवता नहीं छोड़नी चाहिए।

प्रश्न 12.
सर्ष को किसका शत्रु कहा गया है?
उत्तर :
सर्प को मानवता का शत्रु कहा गया है।

प्रश्न 13.
धरित्री का सुहाग कब जल रहा था?
उत्तर :
महाभारत युद्ध के समय धरित्री का सुहाग जल रहा था।

प्रश्न 14.
कुरूक्षेत्र में कौन-सी आग खेल रही थी?
उत्तर :
कुरूक्षेत्र में मानव के भीतर की कुटिल आग खेल रही थी।

प्रश्न 15.
कुरूक्षेत्र में किसका रक्त एक साथ मिल रहा था?
उत्तर :
कुरूक्षेत्र में पशुओं तथा सैनिकों का रक्त एक साथ मिल रहा था।

प्रश्न 16.
कर्ण किसके साथ युद्ध कर रहा था?
उत्तर :
कर्ण अर्जुन के साथ युद्ध कर रहा था।

प्रश्न 17.
अश्वसेन पांडवों से बदला क्यों लेना चाहता था?
उत्तर :
उसका आधा शरीर पांडवों द्वारा खांडव वन में आग लगाने के कारण जल गया था। मूसलाधार वर्षा करके इंद्र ने इसके प्राण तो बचा लिए किंतुइसकी माता चल बसी। इसी का बदला लेने के लिए वह महाभारत-युद्ध में कर्ण के तरकश में जा बैठा। कर्ण ने उसकी सहायता करने से अस्वीकार कर दिया। बाद में वह अर्जुन के हाथों मारा गया।

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प्रश्न 18.
‘दोनों रण-कुशल’ में दोनों से किसकी ओर संकेत किया गया है?
उत्तर :
‘दोनों’ से कर्ण तथा अर्जुन की ओर संकेत किया गया है।

प्रश्न 19.
किसके बाणों की वर्षा व्यर्थ हो रही थी?
उत्तर :
कर्ण तथा अर्जुन के बाणों की वर्षा व्यर्थ हो रही थी।

प्रश्न 20.
अश्वसेन कहाँ छिपा हुआ था?
उत्तर :
अश्वसेन कर्ण के तरकस में छिपा हुआ था।

प्रश्न 21.
अश्वसेन ने अपने-आप को किसका स्वामी कहा ?
उत्तर :
अश्वसेन ने अपने-आपको सर्पों का स्वामी कहा।

प्रश्न 22.
‘मनुष्य और सर्प’ कविता में जन्म से ही कौन किसका शत्रु है?
उत्तर :
‘मनुष्य और सर्प’ कविता में अश्वसेन जन्म से ही अर्जुन का शत्रु है।

प्रश्न 23.
कुरूक्षेत्र में किसने अपने को हर प्रकार से कर्ण का हितैषी कहा?
उत्तर :
अश्वसेन नामक सर्प ने कुरूक्षेत्र में अपने-आप को हर प्रकार से कर्ण का हितैषी कहा।

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प्रश्न 24.
अश्वसेन ने प्रतिशोध कैसे लेने की बात कही?
उत्तर :
अश्वसेन ने कहा कि वह जीवन-भर का संचित विष अर्जुन के शरीर में उतार कर अपना प्रतिशोध लेगा।

प्रश्न 25.
‘राधेय’ किसे कहा गया है और क्यों ?
उत्तर :
अधिरथ की पत्ली राधा के द्वारा पाले जाने के कारण कर्ण को राधेय कहा गया है।

प्रश्न 26.
कर्ण ने किसे कुटिल कहा ?
उत्तर :
कर्ण ने अश्वसेन को कुटिल कहा।

प्रश्न 27.
कर्ण के अनुसार मनुष्य की विजय का साधन कहाँ रहता है ?
उत्तर :
कर्ण के अनुसार मनुष्य की विजय का साधन उसके बाहुबल में रहता है।

प्रश्न 28.
कर्ण क्या कहकर अश्वसेन से सहायता लेने को अस्वीकार कर देता है?
उत्तर :
कर्ण यह कहकर कि मनुष्य के साथ युद्ध में सर्प की सहायता लेकर आनेवाली मानवता को वया मुँह दिखाएगा अश्वसेन से सहायता लेने को अस्वीकार कर देता है।

प्रश्न 29.
कर्ण ने अश्वसेन के वंशज के कहाँ छिपे होने की बात कही ?
उत्तर :
कर्ण ने मानवों में अश्वसेन के वंशज के छिपे होने की बात कही।

प्रश्न 30.
कर्ण के अनुसार नररूपी सर्प कहाँ बसते हैं?
उत्तर :
कर्ण के अनुसार नररूपी सर्ष नगरों, गाँवों तथा यहाँ तक कि घरों में भी बसते हैं।

प्रश्न 31.
नररूपी सर्प किसका पथ कठिन कर देते हैं ?
उत्तर :
नररूपी सर्प मानवता का पथ कठिन कर देते हैं।

प्रश्न 32.
कर्ण ने किसे भाग जाने को कहा ?
उत्तर :
कर्ण ने अश्वसेन को भाग जाने को कहा।

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प्रश्न 33.
कर्ण ने कौन-सा कलंक अपने सिर पर न लेने की बात कही ?
उत्तर :
कर्ण ने शत्रु के वध के लिए साँप की सहायता लेने का कलंक अपने सिर पर न लेने की बात कही।

प्रश्न 34.
कर्ण ने शत्रु को पराजित करने के लिए किसकी शरण में जाने से अस्वीकार कर दिया ?
उत्तर :
कर्ण ने शत्रु को पराजित करने के लिए सर्प की शरण में जाने से अस्वीकार कर दिया।

प्रश्न 35.
प्रतिभर के वध के लिए – में ‘प्रतिभर’ शब्द का व्यवहार किसके लिए किया गया है?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश में ‘प्रतिभर’ शब्द का व्यवहार अर्जुन के लिए किया गया है।

प्रश्न 36.
कर्ण कौन था? कर्ण को ‘राधेय’ क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
कर्ण कुती का पुत्र था। उसे कुमारी अवस्था में सूर्य से कर्ण पैदा हुआ। कुंती ने लोक-लाजवश नवजात शिशु कर्ण को नदी में बहा दिया। अधिरथ नामक सूत को यह शिशु मिला। सूत के द्वारा पाले जाने के कारण कर्ण को ‘सूतपुत्र’ भी कहा जाता है। अधिरथ की पत्नी का नाम राधा था इसलिए कर्ण को ‘राधेय’ भी कहते हैं।

प्रश्न 37.
कर्ण का मानवतावादी दृष्टिकोण क्या है?
उत्तर :
कर्ण का मानवतावादी दृष्टिकोण यह है कि वह मनुष्य से युद्ध जीतने के लिए सर्प की सहायता नहीं लेना चाहता।

प्रश्न 38.
‘दोनों सम बल’ में दोनों से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
‘दानो’ से कर्ण और अर्जुन संकेतित हैं।

प्रश्न 39.
‘मनुष्य और सर्प’ में कौन, किसे अपना महाशन्रु कहता है?
उत्तर :
‘मनुष्य और सर्प’ में अश्वसेन अर्जुन को अपना महाशत्रु कहता है।

प्रश्न 40.
‘जन्म से पार्थ का शत्रु परम’ में ‘पार्थ’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
‘पार्थ’ अर्जुन को कहा गया है।

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प्रश्न 41.
‘तेरा बहुविधि हितकामी हूँ’ – मे ‘तेरा’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
‘तेरा’ कर्ण को कहा गया है।

प्रश्न 42.
‘तू मुझे सहारा दे’ – कौन, किसे सहारा देने की बात कह रहा है ?
उत्तर :
अश्वसेन कर्ण को सहारा देने की बात कह रहा है।

प्रश्न 43.
‘रे कुटिल’ से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
‘रे कुटिल’ से अश्वसेन संकेतित है।

प्रश्न 44.
‘मैं मनुज, मनुज से युद्ध करूँ’ – पहले और दूसरे मनुज का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
पहले मनुज का आशय कर्ण से तथा दूसरे मनुज का आशय अर्नुन से है।

प्रश्न 45.
‘अर्जुन है मेरा शत्रु’ – वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता कर्ण है।

प्रश्न 46.
‘सर्प का पापी ने साहाय्य लिया’ – में पापी कौन है?
उत्तर :
कर्ण।

प्रश्न 47.
‘मनुज का सहज शत्रु’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
मनुज का सहज शत्रु अश्वसेन को कहा गया है।

प्रश्न 48.
महाभारत का युद्ध किस-किसके बीच हुआ था ?
उत्तर :
महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था।

प्रश्न 49.
‘मनुष्य और सर्प’ कविता की पृष्ठभूमि क्या है ?
उत्तर :
‘मनुष्य और सर्प’ कविता की पृष्ठभूमि महाधारत युद्ध है।

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प्रश्न 50.
जन्म से पार्थ का परम शत्रु कौन था ?
उत्तर :
अश्वसेन नामक सर्प।

प्रश्न 51.
महाभारत युद्ध में कर्ण किसकी ओर से लड़ा था ?
उत्तर :
महाभारत युद्ध में कर्ण कौरवों की ओर से लड़ा था।

प्रश्न 52.
‘मनुष्य और सर्प’ पाठ में आए अर्जुन के दो पर्याय शब्दों को लिखें।
उत्तर :
पार्थ, कौतैय।

प्रश्न 53.
‘तेरा बहुविधि हितकामी हूँ’ – में ‘तेरा’ किसे कहा गया है ?
उत्तर :
कर्ण को कहा गया है।

प्रश्न 54.
महाभारत का युद्ध किस स्थान पर लड़ा गया था ?
उत्तर :
कुरूक्षेत्र में।

प्रश्न 55.
कर्ण सर्प की सहायता से अर्जुन का वध क्यों नहीं करना चाहता था ?
उत्तर :
सर्प की सहायता से अर्जुन का वध करने पर मानवता कलंकित होती।

प्रश्न 56.
‘मनुष्य और सर्प’ के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर :
हमारा कोई भी काम ऐसा न हो जिससे मानवता कलंकित हो।

प्रश्न 57.
‘मनुज का सहज शत्रु’ किसे कहा गया है ?
उत्तर :
अश्वसेन को।

प्रश्न 58.
राधेय किसे कहा गया है और क्यों ?
उत्तर :
कुंती द्वारा त्याग दिए जाने पर राधा नामक स्वी ने कर्ण का लालन-पालन किया था इसलिए कर्ण को राबेय भी कहा जाता है।

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प्रश्न 59.
कर्ण का मानवतावादी दृष्टिकोण क्या है ?
उत्तर :
कर्ण का मानवतावादी दृष्टिकोण यह है कि वह शत्रु के साथ युद्ध करते हुए भी मानवता को नहीं छोड़ता, अश्वसेन की सहायता नहीं लेता है।

प्रश्न 60.
अश्वसेन कर्ण से क्या चाहता था ?
उत्तर :
अश्वसेन बाहता था कि कर्ण उसे तीर पर चढ़ाकर अर्जुन पर छोड़ दे ताकि उसे डंस कर मौत की नींद सुलाकर अपना बदला पूरा कर सके।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कर्ण को किस सर्ष ने सहायता देने का प्रस्ताव दिया?
(क) वासुकी
(ख) तक्षक
(ग) अश्वसेन
(घ) शेषनाग
उत्तर :
(ग) अश्वसेन

प्रश्न 2.
‘राथेय’ कौन था ?
(क) अश्वसेन
(ख) कर्ण
(ग) अर्जुन
(घ) कृष्ण का पुत्र
उत्तर :
(ख) कर्ण

प्रश्न 3.
दिनकर को भारत सरकार की ओर से कौन-सा पुरस्कार मिला ?
(क) कबीर सम्मान
(ख) पय्मभूषण
(ग) साहित्य-रल
(घ) भारत-रल्न
उत्तर :
(ख) पद्मभूषण।

प्रश्न 4.
दिनकर का जन्म कब हुआ था ?
(क) 29 सितम्बर 1907 ई०
(ख) 30 सितम्बर 1908 ई०
(ग) 31 सितम्बर 1909 ई०
(घ) 28 सितम्बर 1910 ई०
उत्तर :
(ख) 30 सितम्बर 1908 ई०।

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प्रश्न 5.
दिनकर का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) बिहार के भागलपुर में
(ख) बिहार के समस्तीपुर में
(ग) बिहार के जमुई में
(घ) बिहार के मुंगेर जिले में
उत्तर :
(घ) बिहार के मुंगेर जिले में।

प्रश्न 6.
दिनकर के पिता का नाम था :
(क) राज सिंह
(ख) शाशि सिंह
(ग) राम सिंह
(घ) रवि सिंह
उत्तर :
(घ) रवि सिंह।

प्रश्न 7.
दिनकर की माता का नाम था ?
(क) मनरूप देवो
(ख) रूप देवी
(ग) रूपा देवी
(घ) शारदा देवी
उत्तर :
(क) मनरूप देवी।

प्रश्न 8.
दिनकर ने मैट्रिक की परीक्षा में हिंदी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके कौन-सा पदक जीता था ?
(क) भूदेव रजत पदक
(ख) भूदेव कांस्य पदक
(ग) महादेव स्वर्ण पदक
(घ) भूदेव स्वर्ण पदक
उत्तर :
(घ) भूदेव स्वर्ण पदक।

प्रश्न 9.
दिनकर सीतामढ़ी में किस पद पर थे ?
(क) सब रजिस्ट्रार
(ख) शिक्षक
(ग) सब रजिस्ट्रृर
(घ) व्याख्याता
उत्तर :
(ग) सब रजिस्ट्रार।

प्रश्न 10.
दिनकर जी किस सभा के सदस्य थे ?
(क) राज्य सभा
(ख) साहित्य सभा
(ग) लोक सभा
(घ) साहित्य और कला सभा
उत्तर :
(क) राज्य सभा।

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प्रश्न 11.
दिनकर जी किस विश्वविद्यालय के कुलपति रहे ?
(क) यादवपुर विश्वविद्यालय
(ख) भागलपुर विश्वविद्यालय
(ग) बर्द्रमान विश्वविद्यालय
(घ) सिद्धू-कानू विशविद्यालय
उत्तर :
(ख) भागलपुर विशविविद्यालय।

प्रश्न 12.
दिनकर ने किस विशवविद्यालय से बी० ए० ऑनर्स किया ?
(क) पटना विशवविद्यालय
(ख) भागलपुर विश्वविद्यालय
(ग) सिद्धू-कानू विश्वविद्यालय
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) पटना विश्वविद्यालय।

प्रश्न 13.
दिनकर की प्रारंभिक रचनाएँ किस उपनाम से छपीं ?
(क) अजिताभ
(ख) अज्ञेय
(ग) अमिताभ
(घ) आसू
उत्तर :
(ग) अमिताभ।

प्रश्न 14.
दिनकर का स्वर्गवास कब हुआ ?
(क) 22 अप्पैल 1975 ई०
(ख) 24 अप्रैल 1974 ई०
(ग) 28 फरवरी 1970 ई०
(घ) 25 अप्रैल 1975 ई०
उत्तर :
(ख) 24 अप्रैल 1974 ई०।

प्रश्न 15.
दिनकर की कविता का उद्भव किस युग में हुआ ?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) नकेनवाद
उत्तर :
(क) छायावाद।

प्रश्न 16.
दिनकर की किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला ?
(क) रसवंती
(ख) उर्वशी
(ग) हुंकार
(घ) परशुराम की प्रतीक्षा
उत्तर :
(ख) उर्वशी।

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प्रश्न 17.
‘रसवंती’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रघुवीर सहाय
(ख) प्रसाद
(ग) महादेवी शार्मा
(घ) दिनकर
उत्तर :
(घ) दिनकर।

प्रश्न 18.
‘कुरूक्षेत्र’ के कवि कौन हैं ?
(क) कीर्ति चौधरी
(ख) दिनकर
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) कैलाश गौतम
उत्तर :
(ख) दिनकर।

प्रश्न 19.
‘नीलकुसुम’ के रचयिता का नाम क्या है ?
(क) दिनकर
(ख) कैलाश गौतम
(ग) राजेश जोशी
(घ) कीर्ति चौधरी
उत्तर :
(क) दिनकर।

प्रश्न 20.
‘रश्मिरथी’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) निराला
(ख) दिनकर
(ग) गुप्त जी
(घ) राजेश जोशी
उत्तर :
(ख) दिनकर।

प्रश्न 21.
‘द्वंद्वगीत’ किसकी रचना है ?
(क) बच्चन
(ख) पंत
(ग) प्रसाद
(घ) दिनकर
उत्तर :
(घ) दिनकर।

प्रश्न 22.
‘सीपी और शंख’ के कवि कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) बच्चन
(ग) प्रसाद
(घ) पंत
उत्तर :
(क) दिनकर।

प्रश्न 23.
‘परशुराम की प्रतीक्षा’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) निराला
(ग) पंत
(घ) रामनरेश त्रिपाठी
उत्तर :
(क) दिनकर।

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प्रश्न 24.
‘चक्रवात’ किसकी रचना है ?
(क) प्रसाद
(ख) निराला
(ग) पंत
(घ) दिनकर
उत्तर :
(घ) दिनकर।

प्रश्न 25.
‘हारे को हरिनाम’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) राम कुमार वर्मा
(ग) यतीन्द्र मिश्र
(घ) गुणाकर मुले
उत्तर :
(क) दिनकर।

प्रश्न 26.
‘मिट्टी की ओर’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) मतुराज
(ख) दिनकर
(ग) अनामिका
(घ) नागार्जुन
उत्तर :
(ख) दिनकर।

प्रश्न 27.
‘अर्द्धनारीश्वर’ किसकी रचना है ?
(क) प्रसाद
(ख) दिनकर
(ग) अनामिका
(घ) संजीव
उत्तर :
(ख) दिनकर।

प्रश्न28.
‘रेती के फूल’ के लेखक कौन हैं?
(क) दिनकर
(ख) कृष्णा सोबती
(ग) शिवमूर्ति
(घ) संजीव
उत्तर :
(क) दिनकर।

प्रश्न 29.
‘भारतीय संस्कृति के चार अध्याय’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) मैथिली शरण गुप्त
(ख) संजीव
(ग) दिनकर
(घ) बच्चन
उत्तर :
(ग) दिनकर।

प्रश्न 30.
दिनकर किस युग के प्रतिनिधि कवि थे ?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद्व
(ग) प्रयोगवाद
(घ) अपने युग के
उत्तर :
(ख) प्रगतिवाद।

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प्रश्न 31.
‘मनुष्य और सर्प’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) संजीव
(ग) मतुराज
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) दिनकर।

प्रश्न 32.
‘मनुष्य और सर्प’कविता की पृष्ठ भूमि क्या है ?
(क) पलासी युद्ध
(ख) महाभारत युद्ध
(ग) बवसर युद्ध
(घ) पानीपत युद्ध
उत्तर :
(ख) महाभारत युद्ध।

प्रश्न 33.
महाभारत में कर्ण किसकी ओर से लड़ा था?
(क) पांडव
(ख) कृष्ण
(ग) इनमें से कोई नहीं
(घ) कौरव
उत्तर :
(घ) कौरव।

प्रश्न 34.
कर्ण ने अश्वसेन के प्रस्ताव का क्या किया ?
(क) अस्वीकार किया
(ख) स्वीकार किया
(ग) सोचने का समय मांगा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) अस्वीकार किया।

प्रश्न 35.
कर्ण ने अश्वसेन को किसका शत्रु कहा ?
(क) अर्जुन का
(ख) मानवता का
(ग) कौरव का
(घ) पाण्डव का
उत्तर :
(ख) मानवता का।

प्रश्न 36.
सर्प को किसका शत्रु कहा गया है ?
(क) दानवता का
(ख) ईमानदारी का
(ग) मानव का
(घ) मानवता का
उत्तर :
(घ) मानवता का।

प्रश्न 37.
किसका सुहाग जल रहा था ?
(क) धरित्री का
(ख) सैनिकों की स्तियों क
(ग) कुंती का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) धरित्री का।

प्रश्न 38.
कर्ण किसके साथ युद्ध कर रहा था ?
(क) कौरव के साथ
(ख) अर्जुन के साथ
(ग) सैनिकों के साथ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) अर्जुन के साथ।

प्रश्न 39.
प्रतिक्षण किसका गंभीर गर्जन कुरूक्षेत्र में गूंज रहा था ?
(क) कर्ण और अर्जुन का
(ख) सैनिकों का
(ग) घोड़ों का
(घ) हाथियों का
उत्तर :
(क) कर्ण और अर्जुन का।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 4 मनुष्य और सर्प

प्रश्न 40.
किसके बाणों की वर्षा हो रही थी ?
(क) अश्वसेन के
(ख) कर्ण और कृष्ण के
(ग) कर्ण के
(घ) कर्ण और अर्जुन के
उत्तर :
(घ) कर्ण और अर्जुन का।

प्रश्न 41.
अश्वसेन कहाँ छिपा हुआ था ?
(क) कर्ण के तरकस में
(ख) अर्जुन के तरकश में
(ग) अर्जुन के रथ में
(घ) झाड़ी में
उत्तर :
(क) कर्ण के तरकश में।

प्रश्न 42.
अश्वसेन जन्म से ही किसका शत्रु है ?
(क) स्वयं का
(ख) अर्जुन का
(ग) पिता का
(घ) मनुष्यों का
उत्तर :
(ख) अर्जुन का।

प्रश्न 43.
कुरूक्षेत्र में किसने अपने को कर्ण का हितैषी कहा ?
(क) अर्जुन ने
(ख) भीम ने
(ग) कृष्ण ने
(घ) अश्वसेन ने
उत्तर :
(घ) अश्वसेन ने।

प्रश्न 44.
कर्ण के अनुसार मनुष्य की विजय का साधन कहाँ रहता है ?
(क) अपने बाहुबल में
(ख) दूसरों की सहायता में
(ग) कुटिलता में
(घ) बेईमानी में
उत्तर :
(क) अपने बाहुबल में।

प्रश्न 45.
कर्ण के अनुसार नररूपी सर्प कहाँ बसते हैं ?
(क) युद्ध क्षेत्र में
(ख) नगरों, ग्रामों, घरों में
(ग) तरकस में
(घ) इनमें से कहीं नहीं
उत्तर :
(ख) नगरों, ग्रामों, घरों में।

प्रश्न 46.
नररूपी सर्प किसका पथ कठिन कर देते हैं ?
(क) मानवता का
(ख) दानवता का
(ग) प्रेम का
(घ) दान का
उत्तर :
(क) मानवता का।

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प्रश्न 47.
कर्ण ने जीवन-भर किस निष्ठा को पाला ?
(क) दानवता
(ख) मानवता
(ग) कर्मठता
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मानवता।

प्रश्न 48.
‘दोनों समबल’ में दोनों कौन हैं ?
(क) कर्ण और अर्जुन
(ख) कर्ण और अश्वसेन
(ग) अश्वसेन और अर्जुन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ण और अर्जुन।

प्रश्न 49.
‘पार्थ’ किसे कहा गया है ?
(क) कर्ण को
(ख) अश्वसेन को
(ग) भीम को
(घ) अर्जुन को
उत्तर :
(घ) अर्जुन को।

प्रश्न 50.
‘तू मुझे सहारा दे’ – तू कौन है ?
(क) अर्जुन
(ख) कर्ण
(ग) अश्वसेन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर : (ख) कर्ण।

प्रश्न 51.
‘रे कुटिल’ से कौन संकेतित है ?
(क) अश्वसेन
(ख) कर्ण
(ग) अर्जुन
(घ) युधिष्ठिर
उत्तर :
(क) अश्वसेन।

प्रश्न 52.
‘अर्जुन है मेरा शत्रु’ – वक्ता कौन है ?
(क) अश्वसेन
(ख) कर्ण
(ग) कुंती
(घ) कृष्ण
उत्तर :
(ख) कर्ण।

प्रश्न53.
‘सर्प का पापी ने साहाय्य लिया’ – में पापी कौन हैं ?
(क) अर्जुन
(ख) कृष्ण
(ग) कर्ण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) कर्ण।

प्रश्न 54.
‘मनुज का सहज शत्रु’ कौन है ?
(क) अश्वसेन
(ख) अर्जुन
(ग) कृष्ण
(घ) कर्ण
उत्तर :
(क) अश्वसेन।

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प्रश्न 55.
‘चतुष्पद और द्विपद’ से कौन संकेतित है ?
(क) पशु और मनुष्य
(ख) कर्ण और अर्जुन
(ग) अर्जुन और अश्वसेन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) पशु और मनुष्य।

प्रश्न 56.
‘दोनों रण कुशल’ में दोनों कौन हैं ?
(क) अश्वसेन और अर्जुन
(ख) कर्ण और अर्जुन
(ग) घोड़े और हाथी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्ण और अर्जुन।

प्रश्न 57.
‘कोई प्रचंड विघधर भुजंग’ में कोई से कौन संकेतित है ?
(क) हाथी
(ख) घोड़ा
(ग) सैनिक
(घ) अश्वसेन
उत्तर :
(घ) अश्वसेन।

प्रश्न 58.
‘भुजंगो’ का अर्थ है :
(क) भुजा वाला
(ख) सर्पों
(ग) मानव
(घ) दानव
उत्तर :
(ख) सर्पे।

प्रश्न 59.
अश्वसेन ने महाशत्रु किसे कहा :
(क) अर्जुन को
(ख) कर्ण को
(ग) कौरवों को
(घ) इनमें से किसी को नहीं
उत्तर :
(क) अर्जुन को।

प्रश्न 60.
‘गरल’ का अर्थ है :
(क) गड़ा हुआ
(ख) विष
(ग) सड़ा हुआ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) विष।

प्रश्न 61.
‘रेणुका’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कतुराज
(ख) राजेश जोशी
(ग) दिनकर
(घ) अनामिका
उत्तर :
(ग) दिनकर।

प्रश्न 62.
‘रे कुटिल’ से किसे संबोधित किया गया है ?
(क) कर्ण को
(ख) अर्जुन को
(ग) कवि को
(घ) अश्वसेन को
उत्तर :
(घ) अश्वसेन को।

प्रश्न 63.
‘क्षार’ का अर्थ है :
(क) राख
(ख) क्षयी
(ग) नमकीन
(घ) लवण
उत्तर :
(क) राख।

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प्रश्न 64.
‘प्रतिभर’ का अर्थ है :
(क) शब्नु
(ख) मित्र
(ग) हितेषी
(घ) सर्प
उत्तर :
(क) शत्रु।

प्रश्न 65.
‘नर-भुजंग’ का अर्थ है :
(क) नर और भुजंग
(ख) नर की भुजा
(ग) नररूपी सर्प
(घ) नर का सर्प
उत्तर :
(ग) नररूपी सर्प।

प्रश्न 66.
‘वह सर्प नहीं’ – वह से कौन संकेतित है ?
(क) कर्ण
(ख) अश्वसेन
(ग) अर्जुन
(घ) भीम
उत्तर :
(ग) अर्जुन।

प्रश्न 67.
‘मनुज का सहज शत्रु’ किसे कहा गया है ?
(क) अश्वसेन को
(ख) कर्ण को
(ग) अजुन को
(घ) युधिष्ठिर को
उत्तर :
(क) अवशसेन को।

प्रश्न 68.
‘कौतेय’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है ?
(क) कुती के लिए
(ख) अर्जुन के लिए
(ग) कर्ण के लिए
(घ) इनमें से किसी के लिए नहीं
उत्तर :
(ख) अर्जुन के लिए।

प्रश्न 69.
‘कौतेय’ का शाष्दिक अर्थ है :
(क) कुंती से जन्मा
(ख) कुंती
(ग) कर्ण के लिए
(घ) कांतिवाला
उत्तर :
(क) कुंती से जन्मा।

प्रश्न 70.
‘मैं अभी पार्थ को मारूँगा’ -मै’ कौन है ?
(क) कर्ण
(ख) अश्वसेन
(ग) कौरव
(घ) पांडव
उत्तर :
(ख) अश्वसेन।

प्रश्न 71.
कर्ण अर्जुन के साथ युद्ध में किसकी सहायता नहीं लेना चाहता था ?
(क) अश्वसेन की
(ख) सैनिकों की
(ग) कृष्ण की
(घ) अर्जुन की
उत्तर :
(क) अश्वसेन की।

प्रश्न 72.
कर्ण किसका पुत्र था ?
(क) कुंती का
(ख) माद्री का
(ग) राधा का
(घ) इनमें से किसी का नहीं
उत्तर :
(क) कुंती का।

प्रश्न 73.
‘जा भाग’ किसके लिए कहा गया है ?
(क) कर्ण के लिए
(ख) अश्वसेन के लिए
(ग) अर्जुन के लिए
(घ) इनमें से किसी के लिए नहीं
उत्तर :
(ख) अश्वसेन के लिए।

प्रश्न 74.
‘लिए रक्त-रंजित शरीर’ – रक्त-रंजित शारीर किसका है ?
(क) सैनिकों का
(ख) अश्वसेन का
(ग) कर्ण और अर्जुन का
(घ) इनमें से किसी का नहीं
उत्तर :
(ग) कर्ण और अर्जुन का।

प्रश्न 75.
‘मनुर्घ्य और सर्प’ में कर्ण का कौन-सा दृष्टिकोण व्यक्त हुआ है?
(क) स्वार्थी
(ख) पर पार्थी
(ग) व्यक्तिवादी
(घ) मानवतावादी
उत्तर :
(घ) मानवतावादी।

प्रश्न 76.
‘वाजियों’ का अर्थ है ?
(क) घोड़ो
(ख) हाथी
(ग) कोरवों
(घ) पांडवों
उत्तर :
(क) घोड़ों।

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प्रश्न 77.
‘चतुष्पद्’ का अर्थ है ?
(क) चौपाई
(ख) पशु
(ग) नर
(घ) नारायण
उत्तर :
(ख) पशु।

प्रश्न 78.
‘द्विपद’ का अर्थ है ?
(क) दोहा
(ख) मनुष्य
(ग) कर्ण
(घ) घरती
उत्तर :
(ख) मनुष्य।

प्रश्न 79.
‘दोनों समर्थ’ का तात्पर्य है ?
(क) कौरव और पाण्डव
(ख) घोड़े और हाथी
(ग) भक्त और भगवान
(घ) अज्जुंन और कर्ण
उत्तर :
(घ) अर्जुन और कर्ण।

प्रश्न 80.
‘विशिख वृष्टि’ का अर्थ है ?
(क) अतिवृष्टि
(ख) अनावृष्टि
(ग) बाणों की वर्षा
(घ) मूसलाधार वर्षा
उत्तर :
(ग) बाणों की वर्षा।

प्रश्न 81.
‘दानों रण-कुशल’ किसे कहा गया है ?
(क) अर्जुन और कर्ण को
(ख) राम और रावण को
(ग) हाथी और घोड़े को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) अर्जुन और कर्ण को।

प्रश्न 82.
किसने अपने-आप को ‘बहुविधि हितकामी’ कहा ?
(क) कर्ण
(ख) अर्जुन
(ग) कवि
(घ) अश्वसेन
उत्तर :
(घ) अश्वसेन।

प्रश्न 83.
‘शख्य’ का अर्थ है ?
(क) सौ
(ख) सखा
(ग) लक्ष्य
(घ) संखिया
उत्तर :
(ग) लष्ष्य।

प्रश्न 84.
‘नर-भुजंग’ का अर्थ है ?
(क) मनुष्य और साँप
(ख) भुजाओं वाला नर
(ग) मनुष्य के रूप में सर्प
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) मनुष्य के रूप में सर्प।

प्रश्न 85.
‘हुंकार’ किसकी रचना है ?
(क) दिनकर
(ख) प्रसाद
(ग) पंत
(घ) निराला
उत्तर :
(क) दिनकर।

प्रश्न  86.
‘मनुष्य और सर्प’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की किस मूल रचना का अंश है ?
(क) कुरूक्षेत्र
(ख) उर्वशी
(ग) हुंकार
(घ) रश्मिरथी
उत्तर :
(क) कुरूक्षेत्र।

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प्रश्न 87.
महाभारत-युद्ध के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी थे ?
(क) दुर्योधन और भीम
(ख) अर्जुन और कर्ण
(ग) कर्ण और भीम
(घ) अर्जुन और दुर्योधन
उत्तर :
(ख) अर्जुन और कर्ण।

प्रश्न 88.
अर्जुन और कर्ण का युद्ध कहाँ पर हो रहा था ?
(क) हल्दीघाटी
(ख) रणक्षेत्र
(ग) पहाड़ पर
(घ) कुरूक्षेत्र
उत्तर :
(घ) कुरूक्षेत्र।

प्रश्न 89.
अश्वसेन कर्ण के माध्यम से किससे बदला लेना चाहता था ?
(क) भीम से
(ख) युधिष्ठिर से
(ग) अर्जुन से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) अर्जुन से।

प्रश्न 90.
‘विशिख’ का अर्थ है ?
(क) तलवार
(ख) बाण
(ग) भाला
(घ) तरकश
उत्तर :
(ख) बाण।

प्रश्न 91.
कुरूक्षेत्र में किसने अपने को कर्ण का हितैषी कहा ?
(क) अर्जुन ने
(ख) भीम ने
(ग) कृष्ण ने
(घ) अश्वसेन ने
उत्तर :
(घ) अश्वसेन ने।

प्रश्न 92.
‘भुजंग’ का अर्थ है ?
(क) भयंकर जंग
(ख) सर्प
(ग) कमल
(घ) आसन
उत्तर :
(ख) सर्प।

प्रश्न 93.
‘मनुष्य और सर्प’ कविता की पृष्ठभूमि क्या है ?
(क) महाभारत का युद्ध
(ख) बक्सर का युद्ध
(ग) प्लासी का युद्ध
(घ) पानीपत का युद्ध
उत्तर :
(क) महाभारत का युद्ध।

प्रश्न 94.
अश्वसेन कहाँ छिपा हुआ था ?
(क) कर्ण के तरकश में
(ख) अर्जुन के तरकश में
(ग) अर्जुन के रथ में
(घ) झाड़ी में
उत्तर :
(क) कर्ण के तरकश में।

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प्रश्न 95.
सर्प की सहायता लेने पर आनेवाली मानवता किसे क्षमा नहीं करेगी ?
(क) अर्जुन को
(ख) कर्ण को
(ग) भौम को
(घ) युधिष्ठिर को
उत्तर :
(ख) कर्ण को।

प्रश्न 96.
कर्ण के गुरू कौन थे ?
(क) परशुराम
(ख) कृष्ण
(ग) द्रोणाचार्य
(घ) इनमें सभी
उत्तर :
(ग) द्रोणाचार्य।

WBBSE Class 10 Hindi मनुष्य और सर्प Summary

कवि परिचय 

अपने युग के सच्चे प्रतिनिधि कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म 30 सितम्बर, 1908 ई० को बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया नामक गाँव में हुआ था। पिता श्री रवि सिंह तथा माता श्रीमती मनरूप देवी थीं। प्रारंभिक शिक्षा गाँव के पाठशाला में ही हुई। मैट्रिक की परीक्षा मोकामा घाट के रेलवे हाई-स्कूल से पास की। हिंदी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने से ‘भूदेव स्वर्ण पदक’ से सम्मानित किए गए।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 4 मनुष्य और सर्प 1

 

सन् 1932 में पटना विश्वविद्यालय से बी० ए० आनर्स करने के बाद अध्यापक की नौकरी शुरू की। सन् 1934 में ये सीतामढ़ी में ‘सब रजिस्ट्रार’ बन गए। सन् 1950 में लंगट सिंह कॉलेज के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किए गए। ये राज्य सभा के सदस्य तथा भागलपुर विश्वविद्यालय (तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय) के उपकुलपति भी रहे। इनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए भारत सरकार की और से इन्हें ‘पदमभूषण’ से सम्मानित किया गया। 24 अप्रैल 1974 को इनका देहांत हो गया।

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दिनकर जी की समस्त रचनाएँ निम्नलिखित हैं –
काव्य : ‘रेणुका’, ‘हुंकार’, ‘द्वन्दूगीत’, रसवंती’, ‘सामधेनी’, ‘कुरूक्षेत्र’, ‘बापू’, ‘धूप और धुंआ’, ‘रश्मिरथी’, ‘नील-कुसुम’, ‘नये सुभाषित’, ‘उर्वशी’, ‘परशुराम की प्रतीक्षा’, ‘चक्रवाल’, हारे को हरिनाम’, ‘संचयिता’ तथा रश्मिलोक’ दिनकर जी की प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं।

गद्य रचनाएँ : मिट्टी की ओर, अर्द्धनारीश्वर, ‘भारतीय संस्कृति के चार अध्याय’, ‘शुद्ध कविता की खोज’, ‘रेती के फूल’, ‘उजली आग’, ‘काव्य की भूमिका’, ‘प्रसाद, पत और मैथिली शरण गुप्त’, ‘लोकदेव नेहरू’ तथा ‘हे राम’ इनके गद्य प्रंथ हैं। ‘संस्कृति के चार अध्यायं में दिनकर ने भारतीय संस्कृति का विस्तृत विवेचन किया है।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. चल रहा महाभारत का रण, जल रहा करित्री का सुला,
फट कुक्षेत्र में खेल रही, नर के घीतर की कृटिल आगे

शब्दार्थ :

  • रण = युद्ध, लड़ाईं।
  • षरिज्यी = धरतो।
  • सुहाग = सौभाग्य।
  • नर = मनुष्य।
  • कुदिल आग = ईष््या-देण, कुटिलता, की आग।

प्रश्न 1.
रचना तथा रधनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘मनुष्य और सर्प’ है तथा इसके रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ है।

प्रश्न 2.
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
कबित्ता के प्रस्तुत अंश में दिनकर ने महाभारत के युद्र की विभीषिका का वर्णन किया है। कुरूक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा जा रहा है। चारों ओर की जन-धन की अयार हानि देखकर ऐसा लगता है मानो धरती का सुहाग जल रहा हो। यह मनुष्य के अंदर की वह कुटिलता रूपी आग ही है जो कुरूक्षेत्र में खुलकर अपना खेल खेल रही है। इस आग की लपट से कोई नहीं बच पाया।

काव्यगत सौंदर्य :

1. महाभारत-युद्ध की विभीषिका का वर्णन किया गया है।
2. वह मनुष्य की कुटिलता ही थी जिसने युद्ध को जन्म दिया।
3. धरती का मानवीकरण किया गया है।
4. रस रौद्र है।
5. भाषा वातावरण के अनुकूल प्रभाव पैदा करने में सक्षम है।

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2. वाजियों-गजों की लोथों में, गिर रहे मनुज के छिन्न अंग,
बह रहा चतुष्पद और द्विपद का रूधिर मिश्र हो एक संग।

शब्दार्थ :

  • वाजियों = घोड़ों।
  • गजों = हाथियों।
  • लोथों = माँस के टुकड़े।
  • मनुज = मनुष्य।
  • छिन्न = कटे ।
  • चतुष्पद = चार पैरों वाला, पशु ।
  • द्विपद = दो पैरो वाला, मनुष्य ।
  • रूधिर = खून, लहू ।
  • मिश्र = मिलकर ।
  • संग = साथ।

प्रश्न 1.
पाठ व रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ ‘मनुष्य और सर्प’ है तथा इसके रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
पंक्ति का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
महाभारत-युद्ध की भयंकरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घोड़े तथा हाथियों के माँस के लोथड़े पर सैनिकों के अंग कट-कट कर गिर रहे हैं। युद्ध में भाग लेनेवाले घोड़े-हाथियों के खून में तथा सैनिकों के खून में कोई अंतर नहीं रह गया है। दोनो के रक्त मिलकर एक हो गए हैं। यह पता करना मुश्किल है कि कौन-सा लहू पशुओं का है और कौन-सा मानव का?

काव्यगत सौंदर्य :
1. महाभारत-युद्ध की विभीषिका का वर्णन किया गया है।
2. वह मनुष्य की कुटिलता ही थी जिसने युद्ध को जन्म दिया।
3. धरती का मानवीकरण किया गया है।
4. रस रौद्र है।
5. भाषा वातावरण के अनुकूल प्रभाव पैदा करने में सक्षम हैं।

3. गत्वर, गैरेय, सुधर-भूधर से, लिए रक्त-रंजित शरीर,
ये जूझ रहे कौतेय-कर्ण, क्षण-क्षण करते गर्जन गंभीर।

शब्दार्थ :

  • गत्वर = तेज गति वाला।
  • गैरेय = लाल।
  • सुधर-भूधर = पर्वत के समान सुंदर।
  • रक्त-रंजित = खून से नहाया हुआ।
  • कौंतेय = कुंती के पुत्र – युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन।
  • कर्ण = कुंती का पुत्र ।
  • गर्जन = गरजते।

प्रश्न 1.
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
कविता की इन पंक्तियों में दिनकर ने कुरूक्षेत्र जो महाभारत युद्ध का रणक्षेत्र था – वहाँ के दृश्य का वर्णन किया है। तेज गति से, पर्वत के समान सुधड़ लेकिन रक्त-रंजित शरीर लेकर युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन के साथ कर्ण युद्ध कर रहे हैं। क्षण-क्षण भर बाद उनके गरजने का गंभीर स्वर सुनाई पड़ता है।

काव्यगत सौंदर्य :

1. महाभारत-युद्ध की विभीषिका का वर्णन किया गया है।
2. वह मनुष्य की कुटिलता ही थी जिसने युद्ध को जन्म दिया।
3. धरती का मानवीकरण किया गया है।
4. ‘गत्वर, गैरेय’, ‘रक्त-रंजित’, ‘कौंतेय-कर्ण’ तथा ‘गर्जन-गंभीर’ में अनुप्रास अलंकार है।
5. ‘क्षण-क्षण’ में छेकानुप्रास अंलकार है।
6. रस वीभत्स है।
7. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

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4. दोनों रण-कुशल धनुर्धर नर, दोनों सम बल, दोनों समर्थ,
दोनों पर दोनों की अमोध, थी विशिख वृष्टि हो रही व्यर्थ।

शब्दार्थ :

  • रण-कुशल = युद्ध करने में कुशल, दक्ष।
  • धनुर्धर नर = धनुष को धारण करनेवाले मनुष्य।
  • सम बल = बराबर ताकत वाले।
  • अमोध = नहीं चूकने वाला।
  • विशिख वृष्टि = अग्निरूपी तीरों, बाणों की वर्षा।
  • व्यर्थ = बेकार।

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पद्यांश के पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश ‘मनुष्य और सर्प’ पाठ से लिया गया है।

प्रश्न 2.
पद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश में दिनकर ने कौरव और पांडव दोनों पक्षों के रण-कौशल तथा बल का वर्णन किया है। कौरव और पाण्डव दोनो ही युद्ध की कला में पारंगत हैं। दोनों के बल समान हैं। दोनों ही हर प्रकार से समर्थ हैं। दोनों के ही निशाने अचूक हैं लेकिन बाण की वर्षा व्यर्थ ही सिद्ध हो रही है।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कौरव तथा पांडवों की रण-कुशलता का वर्णन किया गया है।
2. दोनों ही बराबरी वाले हैं किसी का पलड़ा हल्का नहीं दिखाई देता।
3. ‘विशिख वृष्टि’ में अनुमास अलंकार है।
4. रस रौद्र है।
5. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

5. इतने में शर को लिए कर्ण ने, देखा ज्यों अपना निषंग,
तरकस में से फुंकार उठा, कोई प्रचंड विषधर भुज्जंग।

शब्दार्थ :

  • शर = बाण, तीर ।
  • निषंग = तरकस ।
  • तरकस = जिसमें तीर रखा जाता है।
  • प्रचंड = भयंकर ।
  • विषधर = विष को धारण करने वाला, जहरीला।
  • भुजंग = साँप।

प्रश्न 1.
कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कवि रामधारी सिंह ‘ दिनकर’ है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश में दिनकर महाभारत-युद्ध का वर्णन करते हुए कहते हैं कि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर बाणों की वर्षा कर रहे थे। कर्ण ने बाण के लिए अपना तरकस ज्योहि देखा उसकी तरकस में एक भयंकर विषधर साँप फुँफकार रहा था। यह देखकर वह आश्चर्यचकित रह गया।

काव्यगत सौंदर्य :

1. विषधर भुजंग का प्रसंग खांडव वन के अग्नि-प्रसंग के साथ जुड़ता है।
2. विषधर अश्वसेन था जो पांडवों से अपनी माता की मृत्यु का बदला लेना चाहता था।
3. अश्वसेन यह सोचकर कर्ण के पास आया था कि शत्रु का शत्रु मित्र होता है।
4. भाषा प्रवाहमयी एवं प्रसंग के अनुकूल है।
6. कहता कि कर्ण ! मैं अश्वसेन, विश्रुत भुजगों का स्वामी रुँ, जन्म से पार्श का शत्रु परम, वेरा बहुविधि हितकामी हूँ।

शब्दार्थ :

  • विश्रुत = विख्यात।
  • भुजंगों = साँपों।
  • पार्थ = अर्जुन।
  • परम = बड़ा।
  • बहुविधि = अनेक प्रकार से।
  • हितकामी = हित चाहने वाला।

प्रश्न 1.
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘मनुष्य और सर्प’ है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश में कवि दिनकर ने कर्ण तथा अश्वसेन के बीच के संवाद का वर्णन किया है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Poem 4 मनुष्य और सर्प

6. कहता कि कर्ण! मैं अश्वसेन, विश्रुत भुजंगों का स्वामी हैँ
जन्म से पार्थ का शत्रु परम, तेरा बहुविधि हितकामी हूँ।

शब्दार्थ :

  • विश्रुत = विख्यात।
  • भुजांगों = साँपों।
  • पार्थ = अर्जुन।
  • परम = बड़ा।
  • बहुविधि = अनेक प्रकार से।
  • हितकामी = हित चाहने वाला।

प्रश्न 1.
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘मनुष्य और सर्ष’ है।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
प्रस्तुत पद्यांश में कवि दिनकर ने कर्ण तथा अश्वसेन के बीच के संवाद का वर्णन किया है। तरकस में छिपे सर्प ने अपना परिचय देते हुए कर्ण से कहा कि वह सर्पो का राजा है। वह जन्म से ही अर्जुन का परम शत्रु है लेकिन कर्ण का हर प्रकार से हित चाहने वाला है। दरअसल वह जानता था कि कर्ण अर्जुन का शत्रु है इसलिए कर्ण उसकी मित्रता स्वीकार कर उसे अपना बदला लेने में उसकी सहायता करेगा।

काव्यगत सौंदर्य :

1. प्रस्तुत अंश में कवि दिनकर ने महाभारत-युद्ध के अश्वसेन-प्रसंग का वर्णन किया है।
2. अश्वसेन कर्ण को पांडवों का शत्रु जानकर ही उसके पास मदद के लिए आया था।
3. वह पाण्डवों से बदला लेना चाहता था इसलिए वह कर्ण का हितचिंतक था।
4. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

7. बस एक बार कृपा बनुष पर, चढ शाख्य तक जाने दे,
इस महाशतु को अभी तुरत, स्पंदन में पुज्रे सुलाने दे।

शब्दार्थ :

  • शख्य = लक्ष्य।
  • स्पंदन = रथ।

प्रश्न 1.
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘मनुष्य और सर्प’ है तथा इसके रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता अश्वसेन नामक सर्प है।

प्रश्न 3.
पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
प्रस्तुत प्रसंग खाण्डव वन से जुड़ा है। पांडवों द्वारा खाण्डव वन में आग लगा दिए जाने पर अश्वसेन की सर्पमाता उसमें जल मरी थी। अश्वसेन उसी का बदला लेना चाहता था। इसलिए वह कर्ण से कहता है कि वह एक बार कृपा करे। उसे अपने बाण पर चढ़ा अपने लक्ष्य तक पहुँचने दे। जब वह अपने शत्रु तक पहुँच जाएगा तो अपने विष से उसे मृत्युरूपी रथ पर सवार कर देगा।

काव्यगत सौंदर्य :

1. प्रस्तुत अंश में कवि दिनकर ने महाभारत-युद्ध के अश्वसेन-प्रसंग का वर्णन किया है।
2. अश्वसेन कर्ण को पांडवों का शत्रु जानकर ही उसके पास मदद के लिए आया था।
3. वह पाण्डवों से बदला लेना चाहता था इसलिए वह कर्ण का हितचिंतक था।
4. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

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8. कर वमन गरल जीवन-भर का, संचित प्रतिशोष, उतासूभा, तू
मुझे सहारा दे, बढ़कर, मै अभी पार्थ को गासेग्य

शब्दार्थ :

  • वमन = उल्टी।
  • गरल = विष, जहर ।
  • संचित = संचय, जमा किया हुआ।
  • प्रतिशोध = बदला।

प्रश्न 1.
कवि का नाम लिखें ।
उत्तर :
कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
वक्ता का नाम है?
उत्तर :
वक्ता अश्वसेन नामक सर्प है।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
अश्वसेन कर्ण से कहता है कि यदि वह अपने बाण पर चढ़ाकर अर्जुन तक पहुँचा दे तो वह अपने जीवनभर का संचित विष उसके शरीर में उतार देगा। इस प्रकार उसका प्रतिरोध पूरा हो जाएगा। अगर कर्ण उसे सहारा दे दे तो वह अभी अर्जुन को मौत के घाट उतार देगा।

काव्यगत सौंदर्य :

1. प्रस्तुत अंश में कवि दिनकर ने महाभारत-युद्ध के अश्वसेन-प्रसंग का वर्णन किया है।
2. अश्वसेन कर्ण को पांडवों का शत्रु जानकर ही उसके पास मदद के लिए आया था।
3. वह पाण्डवों से बदला लेना चाहता था इसलिए वह कर्ण का हितचिंतक था।
4. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

9. रावेय जरा हँसकर बोला, के कुटिल। बात क्या कहता है?
जय का समस्त साथन नर का, अपनी बाँहो में रहता है।

शब्दार्थ :

  • राधेय = कर्ण।
  • जय = विजय, जीत।
  • नर = मनुष्य।

प्रश्न 1.
वक्ता कौन हैं ?
उत्तर :
वक्ता कर्ण है।

प्रश्न 2.
वक्ता का आशय स्पष्ट करें। अथवा, पंक्ति का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
अश्वसेन कर्ण के द्वारा बाण के माध्यम से अपने शत्रु तक पहुँचाने की बात पर कर्ण कहता है कि यह उसकी कुटिलता है। भला ऐसी बात कहने योग्य है? मनुष्य की विजय का साधन तो उसके अपने बाहुबल पर है। कर्ण को अपने बाहुबल पर भरोसा है। ऐसे में भला वह अश्वेसन की मदद क्यों ले?

काव्यगत सौंदर्य :

1. प्रस्तुत अंश में कवि दिनकर ने महाभारत-युद्ध के अश्वसेन-प्रसंग का वर्णन किया है।
2. अश्वसेन कर्ण को पांडवों का शत्रु जानकर ही उसके पास मदद के लिए आया था।
3. वह पाण्डवों से बदला लेना चाहता था इसलिए वह कर्ण का हितचिंतक था।
4. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

10. उस पर भी साँपोंसे मिलकर मैं मनुज, मनुज से युद्ध करूँ ?
जीवन भर जो निष्ठा पाली, उससे आचरण विरूद्ध करूँ ?

शब्दार्थ :

  • मनुज = मनु का पुत्र, मनुष्य।
  • निष्ठा = विश्वास।
  • आचरण-विरूद्ध = व्यवहार के विरूद्ध।

प्रश्न 1.
कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
वक्ता तथा श्रोता का नाम लिखें।
उत्तर :
वक्ता कर्ण है तथा श्रोता अश्वसेन है।

प्रश्न 3.
पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन का अनुरोध सुनकर कहता है कि यह संभव नहीं है कि वह मनुष्य होकर मनुष्य से युद्ध करने के लिए किसी सर्ष का सहारा ले। उसने जीवन भर मानव-धर्म के प्रति निष्ठा पाल रखा है। ऐसा करना उसके आचरण के विरूद्ध होगा।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण युद्ध में भी निष्ठा का पालन करने वाला था।
2. वह नहीं चाहता कि अपनी निष्ठा तथा आचरण के विरूद्ध कार्य करें।
3. ‘मनुज मनुज’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
4. भाषा सरल, प्रवाहमयी तथा प्रसंग के अनुकूल है।

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11. तेरी सहायता से जय तो, में अनायास पा जाऊँगा,
आनेवाली मानवता को, लेकिन क्या मुख दिखलाकैँगा ?

शब्दार्थ :

  • जय = जीत, विजय।
  • अनायास = यूँ ही।

प्रश्न 1.
पाठ का नाम लिखें ।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘मनुष्य और सर्प’ है।

प्रश्न 2.
वक्ता तथा श्रोता का नाम लिखें।
उत्तर :
वक्ता कर्ण है तथा श्रोता अश्वसेन है।

प्रश्न 3.
पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन को नम्रतापूर्वक मना करते हुए कहता है कि यह सही है कि तुम्हारी सहायता से युद्ध में अनायास ही मुझे सफलता मिल जाएगी। लेकिन यह भी सोचो कि आने वाली मानवता को भला मैं क्या मुँह दिखलाऊँगा? मेरे इस कार्य के लिए आने वाली संतति भी मुझे धिवकारेगी।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण युद्ध में भी निष्ठा का पालन करने वाला था।
2. वह नहीं चाहता कि अपनी निष्ठा तथा आघरण के विरूद्ध कार्य करें।
3. कर्ण अपने बाहुबल से ही युद्ध को जीतना चाहता है।
4. भाषा सरल, प्रवाहमयी तथा प्रसंग के अनुकूल है।

12. संसार कहेगा, जीवन का, सब सुकृत्त कर्ण ने क्षार किया,
प्रतिभर के वध के लिए, सर्प का पापी ने साहाय्य लिया।

शब्दार्थ :

  • सुकृत = अच्छे कर्म का यश।
  • क्षार = राख।
  • प्रतिभर = शत्रु, दुश्मन ।
  • वध = संहार, हत्या।
  • सर्प = साँप।
  • साहाय्य = सहायता, मदद।

प्रश्न 1.
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘मनुष्य और सर्प’ है तथा इसके रचनाकार ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
श्रोता कौन है?
उत्तर :
श्रोता अश्वसेन नामक सर्प है।

प्रश्न 3.
पंक्ति की व्याख्या करें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन से कहता है कि युद्ध में तुम्हारी सहायता से विजय प्राप्त करने पर सारी दुनिया यही कहेगी कि कर्ण ने अपने सारे कुकर्मो पर राख डाल दिया। उस पापी ने अपने शत्रु से बदला लेने के लिए एक सर्प की सहायता ली। यह मेरे लिए बहुत ही बुरी बात होगी कि आने वाली संतति भी मेरे इस पाप के लिए मुझे क्षमा नहीं करेगी।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण युद्ध में भी निष्ठा का पालन करने वाला था।
2. वह नहीं घाहता कि अपनी निष्ठा तथा आचरण के विरूद्ध कार्य करें।
3. ‘मनुज मनुज’ में छेकानुप्रास अलंकार है।
4. भाषा सरल, प्रवाहमयी तथा प्रसंग के अनुकूल है।

13. से अश्वसेन ! तेरे अनेक वंशज हैं छिपे नरों में भी,
सीमित वन में ही नही, बहुत बसते पुर, ग्राम-घरों में भी।

शब्दार्थ :

  • वंशज = वंश में जन्म लेनेवाला।
  • नरों = मनुष्यों।
  • सीमित वन = जंगल की सीमा में।
  • बसते = रहते ।
  • पुर = नगर।
  • ग्राम = गाँव।

प्रश्न 1.
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ ‘मनुष्य और सर्प’ है।

प्रश्न 2.
अश्वसेन कौन था?
उत्तर :
अश्वसेन सर्प था। पांडवों के द्वारा खांडव वन में आग लगा दिए जाने पर उसकी माँ जल गई थी। उसी की मौत का बदला वह पाण्डवों से लेना चाहता था।

प्रश्न 3.
पद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन से कहता है कि तुम्हारे कई वंशज मनुष्य के रूप में भी हैं। वे ऊपर से भले ही मनुष्य दिखते हैं लेकिन वे साँप की तरह जहरीले हैं। साँप केवल जंगलों मे नहीं रहते, वे नगर, गाँव और घरों में भी बसते हैं।

काव्यगत सौंदर्य :

1. यहाँ कर्ण ने उन लोगों की और संकेत किया है जो हैं तो मनुष्य लेकिन उनकी प्रकृति साँपों की तरह है।
2. ऐसे लोग कहीं भी, यहाँ तक घरों में भी हो सकते हैं।
3. यहाँ कर्ण का संकेत उन लोगों की ओर भी है जिन्होंने अपनी कुटिलता से महाभारत-युद्ध को जन्म दिया।
4. भाषा सहज, प्रवाहमयी एवं प्रसंग के अनुकूल है।

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14. वे नर-भुजंग मानवता का, पथ कठिन बहुत कर देते हैं?
प्रतिबल के वघ के लिए नीच, साहाय्य सर्प का लेते हैं।

शब्दार्थ :

  • नर-भुजंग = मनुष्य के रूप में साँप।
  • पथ = रास्ता।
  • प्रतिबल = शत्रु, विरोधी।
  • साहाय्य = सहायता।
  • सर्प = साँप।

प्रश्न 1.
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन से कहता है कि ये मनुष्य रूपी सर्प मानवता के रास्ते में बाधा पैदा करते हैं। वे अपने शत्रु से बदला लेने के लिए किसी भी नीचता पर उतर सकते हैं। यहाँ तक कि साँपों की भी सहायता ले सकते हैं।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण का कहना है कि मनुष्य के वेश में जो साँप हैं वे मानवता की राह में बाधा हैं।
2. ऐसे लोग अपने शत्रु से बदला लेने के लिए नीचता की सीमा को भी पार कर जाते हैं।
3. ‘नर-भुजंग’ में रूपक अलंकार है।
4. ‘साहाय्य सर्प’ में अनुप्रास अलंकार है।
5. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

15. ऐसा न हो कि इन साँ में, मेता भी उज्ज्वल नाम चढ़े,
पाकर मेरा आदर्श और कुछे, नरता का यह पाप बढ़े।

शब्दार्थ :

  • आदर्श = उदाहरण।
  • नरता = मनुष्यता।

प्रश्न 1.
कविता तथा कवि का नाम लिखें।
उत्तर :
कविता ‘मनुष्य और सर्प’ है तथा कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन से कहता है कि मैं ऐसा नहीं चाहता कि मेरा नाम भी मनुष्य रूपी साँपों में गिना जाय। लोग मेरा उदाहरण प्रस्तुत करें और मानवता में यह्ह पाप बढ़ता ही चला जाए।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण का कहना है कि मनुष्य के वेश में जो साँप हैं वे मानवता की राह में बाधा हैं।
2. ऐसे लोग अपने शत्रु से बदला लेने के लिए नीचता की सीमा को भी पार कर जाते हैं।
3. कर्ण नही चाहता कि उसका नाम भी साँपों में लिया जाय।
4. वह यह भी नहीं चाहता कि उसको आदर्श मानने वाले लोगों के द्वारा यह पाप बढ़े।

16. अर्जुन है मेरा शत्रु, कितु वह सर्प नहीं, नर ही तो है,
संघर्ष, सनातन नहीं, शत्रुता, इस जीवन-भर ही तो है।

शब्दार्थ :

  • नर = मनुष्य।
  • सनातन = सृष्टि के प्रारंभ से ।
  • शत्रुता = दुश्मनी।

प्रश्न 1.
कविता का नाम लिखें।
उत्तर :
कविता ‘मनुष्य और सर्प’ है।

प्रश्न 2.
वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता कर्ण है।

प्रश्न 3.
इन पंक्तियों की व्याख्या करें।
उत्तर :
कर्ण अश्वसेन से कहता है कि यह ठीक है कि अर्जुन से मेरी शत्रुता है लेकिन वह मनुष्य है, सर्प नहीं। और यह संघर्ष, यह शत्रुता भी जन्म-जन्मांतर तक नहीं केवल इसी जन्म भर चलने वाला है। फिर मैं यह पाप कैसे कर सकता हूँ ?

काव्यगत सौंदर्य :
1. कर्ण अश्वसेन को यह बताना चाहता है कि मनुष्य और सर्प में अंतर है। दोनों एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते।
2. वह इस शत्रुता को जन्म-जन्मांतर का नहीं मानता।
3. ‘संघर्ष सनातन’ में अनुप्रास अलंकार है।
4. यहाँ कर्ण के मानवता के दर्शन होते हैं।
5. भाषा प्रसंग के अनुकूल है।

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17. अगला जीवन किसलिए भला, तब हो द्वेषांध बिगारू में,
साँपों की जाकर शरण, सर्प बन, क्यों मनुष्य को मारूँ में ?

शब्दार्थ :

  • द्वेषांध = द्वेष, शत्रुता में अंधा।
  • शरण = चरणों में जाकर।

प्रश्न 1.
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘मनुष्य और सर्ष’ है तथा रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
कर्ण कहता है कि जब अर्जुन के साथ मेरी यह शत्रुता केवल इसी जन्म में चलनी है तो द्वेष में आकर मैं अपना अगला जीवन भी क्यों बिगाड़ लूँ। साँपों की शरण में जाकर, साँप बनकर मैं किसी मनुष्य को क्यों मारूँ ? कहने का भाव यह है कि मुझे अपने इस बुरे कर्म का भोग अगले जन्म में भी भोगना पड़ेगा।

काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण ने यहाँ पुनर्जन्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की है।
2. शत्रु से बदला लेने के लिए वह मानवता की हत्या नही करना चाहता।
3. कर्ण युद्ध में भी अपनी निष्ठा तथा आचरण को भुलाना नहीं चाहता।
4. भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण तथा प्रसंग के अनुकूल है।

18. जा भाग, मनुज का सहज शत्रु, मिम्रता न मेरी पा सकता,
मैं किसी हेतु भी यह कलंक, अपने पर नहीं लगा सकता।

शब्दार्थ :

  • सहज = स्वभाविक ।
  • मित्रता = दोस्ती।
  • किसी हेतु = किसी भी प्रकार।
  • कलंक = अपयश, बदनामी।

प्रश्न 1.
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘मनुष्य और सर्प’ है तथा रचनाकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

प्रश्न 2.
वक्ता कौन है ? वह किसे भाग जाने को कहता है और क्यों ?
अथवा
प्रश्न 3.
प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
वक्ता कर्ण है। वह अश्वसेन को धिक्कारते हुए कहता है कि तुम तो मानव तथा मानवता के शत्रु हो। तुम्हारे साथ मेरी मिन्रता कभी नहीं हो सकती। मैं तुम्हारी सहायता लेकर अपने माथे पर कलंक का टीका नहीं लगा सकता चाहे जो भी हो।

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काव्यगत सौंदर्य :

1. कर्ण ने यहाँ पुनर्जन्म के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की है।
2. शत्रु से बदला लेने के लिए वह मानवता की हत्या नहीं करना चाहता।
3. कर्ण युद्ध में भी अपनी निष्ठा तथा आचरण को भुलाना नहीं चाहता।
4. भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण तथा प्रसंग के अनुकूल है।