WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

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राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
‘लीग ऑफ सोसाइटी’ की स्थापना हुई थी –
(a) न्यूयार्क में
(b) इंग्लैण्ड में
(c) फ्रांस में
(d) जर्मनी में
उत्तर :
(b) इंग्लैण्ड में

प्रश्न 2.
14 सूत्री सिद्धान्तों को किसने दिया था ?
(a) चर्चिल
(b) वाशिंगटन
(c) रूजवेल्ट
(d) विल्सन
उत्तर :
(d) विल्सन

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प्रश्न 3.
राष्ट्रसंघ का सदस्य कभी नहीं था –
(a) इटली
(b) जर्मनी
(c) जापान
(d) अमेरिका
उत्तर :
(d) अमेरिका

प्रश्न 4.
‘लीग ऑफ नेशन्स’ की स्थापना हुई थी –
(a) सन् 1900 ई० में
(b) सन् 1910 ई० में
(c) सन् 1920 ई० में
(d) सन् 1930 ई० में
उत्तर :
(c) सन् 1920 ई० में

प्रश्न 5.
राष्ट्रीयसंघ के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायलय में कितने न्यायाधीश थे ?
(a) 10
(b) 15
(c) 20
(d) 25
उत्तर :
(b) 15

प्रश्न 6.
‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का मुख्यालय है –
(a) लन्दन में
(b) न्यूयार्क में
(c) पेरिस में
(d) मास्कों में
उत्तर :
(b) न्यूयार्क में

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प्रश्न 7.
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्यों की संख्या है –
(a) 193
(b) 199
(c) 190
(d) 180
उत्तर :
(a) 193

प्रश्न 8.
राष्ट्रसंघ की स्थापना हुइ थी।
(a) 1815 ई०
(b) 1820 ई०
(c) 1920 ई०
(d) 1945 ई०
उत्तर :
(b) 1820 ई०

प्रश्न 9.
24 अक्टूबर, 1945 प्रसिद्ध है –
(a) राष्ट्र संघ की स्थापना के लिए
(b) संयुक्त राष्ट्र दिवस के लिए
(c) संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लिए
(d) संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए
उत्तर :
(b) संयुक्त राष्ट्र दिवस के लिए

प्रश्न 10.
राष्ट्रसंघ की स्थापना किस उद्देश्य से की गई ?
(a) भविष्य में विश्धयुद्ध को रोकने के लिए
(b) विभिन्न राष्ट्रों में प्रतिद्वंद्विता बढ़ाने के लिए
(c) हथियारों की होड़ बढ़ाने के लिए
(d) द्वितीय विश्च युद्ध की तैयारी के लिए
उत्तर :
(a) भविष्य में विश्चयुद्ध को रोकने के लिए

प्रश्न 11.
मास्को सम्मेलन कब आयोजित हुआ था ?
(a) 1941 ई०
(b) 1942 ई०
(c) 1943 ई०
(d) 1944 ई०
उत्तर :
(c) 1943 ई०

प्रश्न 12.
सेन फ्रांसिस्को सम्मेलन कब आयोजित हुआ था ?
(a) 1945 ई०
(b) 1950 ई०
(c) 1955 ई०
(d) 1960 ईo
उत्तर :
(a) 1945 ई०

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प्रश्न 13.
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई –
(a) 24 अक्टूबर, 1945 ई०
(b) 25 अप्रैल, 1945 ई०
(c) 26 जून, 1945 ई०
(d) 9 अक्टूबर 1945 ई०
उत्तर :
(a) 24 अक्टूबर, 1945 ई०

प्रश्न 14.
‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ की पहली बैठक हुई थी –
(a) लन्दन में
(b) न्यूयार्क में
(c) पेरिस में
(d) मास्को में
उत्तर :
(a) लन्दन में

प्रश्न 15.
राष्ट्रपति विल्मन के चौदह-सूत्री कार्यक्रम का अन्तिम सूत्र से सम्बन्धित था-
(a) राष्ट्र संघ
(b) संयुक्त संघ
(c) शान्ति सम्मेलन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) राष्ट्र संघ

प्रश्न 16.
के प्रयासों से ही राष्ट संघ की स्थापना हो सकी।
(a) लार्ड बाइस
(b) विल्सन
(c) टूमैन
(d) स्टालिन
उत्तर :
(b) विल्सन

प्रश्न 17.
‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर’ का आयोजन में हुआ था।
(a) न्यूयार्क
(b) याल्टा
(c) पेरिस
(d) लन्दन
उत्तर :
(a) न्यूयार्क

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प्रश्न 18.
संयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य हैं –
(a) 2
(b) 4
(c) 5
(d) 10
उत्तर :
(c) 5

प्रश्न 19.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कितनी धाराएँ हैं ?
(a) 109
(b) 110
(c) 111
(d) 112
उत्तर :
(c) 111

प्रश्न 20.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर कितने राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए ?
(a) 50
(b) 51
(c) 52
(d) 53
उत्तर :
(a) 50

प्रश्न 21.
राष्ट्र संघ के सचिवालय का प्रधान कार्यालय कहाँ स्थित हैं?
(a) पेरिस
(b) जेनेवा
(c) बर्लिन
(d) न्यूयार्क
उत्तर :
(b) जेनेवा

प्रश्न 22.
राष्ट्रसंघ का बजट पास होता था –
(a) आम सभा में
(b) परिषद् में
(c) सचिवालय में
(d) अन्तर्राट्ट्रीय श्रम संघ में
उत्तर :
(c) सचिवालय में

प्रश्न 23.
जर्मनी की मुद्रा का नाम था –
(a) लीरा
(b) पाउण्ड
(c) मार्क
(d) डॉलर
उत्तर :
(a) लीरा

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प्रश्न 24.
संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य कितने अंग हैं –
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छ:
उत्तर :
(d) छ:

प्रश्न 25.
पलाऊ सम्मेलन के बाद किसका कार्यभार समाप्त हो गया ?
(a) सचिवालय
(b) संरक्षण परिषद्
(c) सुरक्षा परिषद्
(d) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
उत्तर :
(d) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय

प्रश्न 26.
चौदह सूत्री शर्तों की घोषणा की –
(a) चर्चिल ने
(b) वुड्रो विल्सन ने
(c) रुजवेल्ट ने
(d) स्टालिन ने
उत्तर :
(b) वुड्रो विल्सन ने

प्रश्न 27.
राष्ट्रसंघ की स्थापना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी –
(a) लेनिन की
(b) चर्चिल की
(c) रुजवेल्ट की
(d) वुड्रो विल्सन की
उत्तर :
(d) वुड्रो विल्सन का

प्रश्न 28.
लीग कामेनेण्ट में धारा/अनुच्छेद हैं –
(a) 26
(b) 27
(c) 28
(d) 29
उत्तर :
(a) 26

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प्रश्न 29.
राप्ट्रसंघ के प्रथम अधिवेशन में सदस्य संख्या थी –
(a) 30
(b) 33
(c) 35
(d) 40
उत्तर :
(d) 40

प्रश्न 30.
द्वितीय विश्वयुद्ध के ठीक पहले (1939 ई०) राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या थी –
(a) 42
(b) 46
(c) 50
(d) 51
उत्तर :
(b) 46

प्रश्न 31.
राष्ट्रसंघ का सर्वाधिक शक्तिशाली विभाग था –
(a) लीग परिषद
(b) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
(c) महासभा
(d) सचिवालय
उत्तर :
(c) महासभा

प्रश्न 32.
राष्ट्रसंघ की महासभा के सदस्य वोट दे सकते थे –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
उत्तर :
(a) 1

प्रश्न 33.
राश्टसंघ का अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय अवस्थित था –
(a) बर्लिन में
(b) लंद्न में
(c) पेरिस में
(d) हेग में
उत्तर :
(d) हेग में

प्रश्न 34.
19वीं सदी की प्रमुख प्रवृत्ति थी –
(a) राष्ट्रीयता
(b) राजतंत्र
(c) साम्यवाद
(d) बंधुत्व
उत्तर :
(a) राट्ट्रीयता

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प्रश्न 35.
राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई –
(a) 1929 ई० में
(b) 1919 ई० में
(c) 1949 ई० में
(d) 1909 ई० में
उत्तर :
(b) 1919 ई० में

प्रश्न 36.
राघ्ट्रसंघ वैधानिक रूप से अस्तित्व में आया –
(a) 10 अप्रैल 1919 ई० से
(b) 5 अफैल 1920 ई० से
(c) 10 जनवरी 1920 ई० से
(d) 16 अमैल 1919 ई० से
उत्तर :
(c) 10 जनवरी 1920 ई० से

प्रश्न 37.
राष्ट्रसंघ के प्रारंभिक सदस्य थे –
(a) 19
(b) 33
(c) 43
(d) 65
उत्तर :
(c) 43

प्रश्न 38.
राष्ट्रसघ के प्रमुख अंग थे –
(a) तीन
(b) दो
(c) पाँच
(d) कई
उत्तर :
(a) तीन

प्रश्न 39.
राष्ट्रसंघ की अंतिम बैठक हुई –
(a) 1929 ई० में
(b) 1919 ई० में
(c) 1949 ई० में
(d) 1909 ई० में
उत्तर :
(c) 1949 ई० में

प्रश्न 40.
राष्ट्रसंघ की साधारण सभा की समितियाँ थीं –
(a) 6
(b) 2
(c) 5
(d) कई
उत्तर :
(a) 6

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प्रश्न 41.
राष्ट्रसंघ का स्थायी कार्यालय था –
(a) वर्साय में
(b) लंदन में
(c) रोम में
(d) जेनेवा में
उत्तर :
(d) जेनेवा में

प्रश्न 42.
अन्तर्राप्र्रीय न्यायालय की स्थापना हुई –
(a) 1929 ई० में
(b) 1921 ई० में
(c) 1933 ई० में
(d) 1920 ई० में
उत्तर :
(b) 1921 ई० में

प्रश्न 43.
राष्ट्रसंघ लगभग मृतप्राय हो चुका था –
(a) 1929 ई० में
(b) 1921 ई० में
(c) 1933 ई० में
(d) 1938 ई० में
उत्तर :
(d) 1938 ई० में

प्रश्न 44.
अटलांटिक चार्टर का संयुक्त घोषणापत्र तैयार किया था –
(a) रूजवेल्ट-स्टालिन ने
(b) रूजवेल्ट-चर्चिल ने
(c) स्टालिन-चर्चिल ने
(d) टूमैन-स्टालिन ने
उत्तर :
(b) रूजवेल्ट-चर्चल ने

प्रश्न 45.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के अंग बनाये गये हैं –
(a) दो प्रकार के
(b) चार प्रकार के
(c) पाँच प्रकार के
(d) छह प्रकार के
उत्तर :
(d) छह प्रकार के

प्रश्न 46.
संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा की बैठक प्रति वर्ष होती है –
(a) अगस्त में
(b) नवम्बर में
(c) दिसम्बर में
(d) सितम्बर में
उत्तर :
(d) सितम्बर में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. वुडरो विल्सन __________के राष्ट्रपति थे।
उत्तर : अमेरिका।

2. राष्ट्रसंघ की स्थापना __________में हुई थी।
उत्तर : 1920 ई०।

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3. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना__________ नगर में की गई।
उत्तर : हेग।

4. संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में __________स्थायी सदस्य हैं।
उत्तर : पाँच।

5. सुरक्षा परिषद में वीटों का अधिकार सिर्फ __________सदस्यों को है।
उत्तर : स्थायी।

6. __________ शांति सम्मेलन में राष्ट्रसंघ का गठन हुआ।
उत्तर : पेरिस

7. राष्ट्रसंघ के __________उद्देश्य थे।
उत्तर : तीन

8. राष्ट्रसंघ का कार्यालय __________में धा।
उत्तर : जेनेवा

9. राजनीतिक विषयों पर निर्णय __________लेती थी।
उत्तर : साधारण सभा

10. किसी भी राष्ट्र को राष्ट्रसंघ का सदस्य बनाने के लिये __________मत आवश्यक था।
उत्तर : 2/3

11. राष्ट्रसंघ केवल __________वर्षों तक ही कायम रह सका।
उत्तर : 20

12. __________ने राष्ट्रसंघ की उपेक्षा की थी।
उत्तर : अमेरिका।

13. फरवरी, 1945 ई० में__________ में रुजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन के बीच सम्मेलन हुआ।
उत्तर : याल्टा।

14. संयुक्त राष्ट्रसंघ के गठन का अंतिम कदम __________के सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन में उठाया गया।
उत्तर : अमेरिका

15. अटलांटिक चार्टर के मुख्य__________उद्देश्य थे ।
उत्तर : 8

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. राष्ट्रसंघ का प्रधान कार्यालय हेग में था।
उत्तर : False

2. संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना 1945 ई० में हुआ था।
उत्तर : True

3. अटलांटिक चार्टर घटना 1914 ई० में हुई थी।
उत्तर : True

4. वाशिंगटन सम्मेलन 1942 ई० में हुआ था।
उत्तर : True

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5. विटो पावर उपयोग करने वाले आठ राष्ट्र हैं।
उत्तर : False

6. संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रथम महासचिव ट्रीगवीली थे।
उत्तर : False

7. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालयों में जजों की संख्या 15 है ।
उत्तर : True

8. सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों की संख्या 10 है ।
उत्तर : True

9. सुरक्षा परिषद में सदस्यों की संख्या 10 है।
उत्तर : False

10. महत्वपूर्ण विषयों पर 2/3 बहुमत आवश्यक है ।
उत्तर : True

11. यू०एन०ओ० की स्थापना 1941 ई० में हुई।
उत्तर : False

12. राष्ट्रसंघ के पास स्वयं की सेना थी ।
उत्तर : False

13. निरस्त्रीकरण का पहला सम्मेलन 1932 ई० में हुआ।
उत्तर : True

14. राष्ट्रसंघ ने बड़े देशों की समस्या का निवारण आसानी से किया ।
उत्तर : False

15. राष्ट्रसंघ की सभा की बैठक वर्ष में दो बार होती थी।
उत्तर : False

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16. राष्ट्रसंघ की स्थापना जून 1919 ई० में हुई थी।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. राष्ट्रसंघ की स्थापना 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना
B. राश्ट्रसंघ का कार्यालय 2. 6 समितियाँ
C. साधारण सभा 3. जून 1919 ई०
D. सन् 1921 ई० 4. जेनेवा में

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. राष्ट्रसंघ की स्थापना 3. जून 1919 ई०
B. राश्ट्रसंघ का कार्यालय 4. जेनेवा में
C. साधारण सभा 2. 6 समितियाँ
D. सन् 1921 ई० 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. अमेरिका के राश्ट्रपति 1. चर्चिल
B. बिटेन के प्रधानमत्री 2. रूजवेल्ट
C. रूस के राष्ट्रपति 3. स्टालिन
D. अमेरिका में 4. सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. अमेरिका के राश्ट्रपति 2. रूजवेल्ट
B. बिटेन के प्रधानमत्री 1. चर्चिल
C. रूस के राष्ट्रपति 3. स्टालिन
D. अमेरिका में 4. सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन

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प्रश्न 3.

स्सम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
A. जेनेवा में 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
B. नीदरलैंण्ड के दि हेग में 2. UNO सचिवालय
C. फरवरी 1945 ई० 3. सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य
D. पाँच 4. याल्टा सम्मेलन

उत्तर :

स्सम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
A. जेनेवा में 2. UNO सचिवालय
B. नीदरलैंण्ड के दि हेग में 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
C. फरवरी 1945 ई० 4. याल्टा सम्मेलन
D. पाँच 3. सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य

प्रश्न 4.

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1919 ई० 1. राष्ट्रसंघ का प्रथम अधिवेशन
B. 1920 ई० 2. केलग-व्रियाँ समझौता
C. 1925 ई० 3. राष्ट्रसंघ की स्थापना
D. 1928 ई० 4. लोकार्नो समझौता

उत्तर :

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1919 ई० 3. राष्ट्रसंघ की स्थापना
B. 1920 ई० 1. राष्ट्रसंघ का प्रथम अधिवेशन
C. 1925 ई० 4. लोकार्नो समझौता
D. 1928 ई० 2. केलग-व्रियाँ समझौता

प्रश्न 5.

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मंचुरिया 1. राष्ट्रसंघ का घोषणापत्र
B. अबिसीनिया ‘क’ 2. अटलांटिक चार्टर
C. प्रिन्स ऑफ वेल्स 3. लिटन कमीशन
D. वाशिंगटन सम्मेलन 4. इटली का आक्रमण

उत्तर :

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मंचुरिया 3. लिटन कमीशन
B. अबिसीनिया ‘क’ 4. इटली का आक्रमण
C. प्रिन्स ऑफ वेल्स 2. अटलांटिक चार्टर
D. वाशिंगटन सम्मेलन 1. राष्ट्रसंघ का घोषणापत्र

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
1. विल्सन (a) राष्ट्र संघ की स्थापना हुई।
2. 10 जनवरी 1920 में (b) राष्ट्र संघ का प्रधान कार्यालय है।
3. जेनेवा (c) राष्ट्र संघ का पहला अधिवेशन हुआ था।
4. 15 नवम्बर 1920 ई० (d) राष्ट्र संघ की स्थापना के ‘दिमाग की उपज’ थी।
5. 18 अप्रल 1946 ई० (e) राष्ट्र संघ का अन्तिम अधिवेशन हुआ था।

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
1. विल्सन (d) राष्ट्र संघ की स्थापना के ‘दिमाग की उपज’ थी।
2. 10 जनवरी 1920 में (a) राष्ट्र संघ की स्थापना हुई।
3. जेनेवा (b) राष्ट्र संघ का प्रधान कार्यालय है।
4. 15 नवम्बर 1920 ई० (c) राष्ट्र संघ का पहला अधिवेशन हुआ था।
5. 18 अप्रल 1946 ई० (e) राष्ट्र संघ का अन्तिम अधिवेशन हुआ था।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद can serve as a valuable review tool before exams.

द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
द्वितीय विश्व युद्ध कब आरम्भ हुआ था ?
(a) 1 सितम्बर 1939 ई०
(b) 2 अक्टूबर 1940 ई०
(c) 15 अगस्त 1945 ई०
(d) 1 जून 1940 ई०
उत्तर :
(b) 2 अक्टूबर 1940 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 2.
रूस को राष्ट्रसंघ से कब निकाल दिया गया ?
(a) 29 सितम्बर 1938 ई०
(b) 15 अप्रैल 1939 ई०
(c) 23 अगस्त 1939 ई
(d) 26 जनवरी 1950 ई०
उत्तर :
(c) 23 अगस्त 1939 ई०

प्रश्न 3.
फांसीवादी की स्थापना किसने की थी –
(a) मुसोलिनी
(b) हिटलर
(c) मेजिनी
(d) लेनिन
उत्तर :
(a) मुसोलिनी

प्रश्न 4.
द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हो गया था –
(a) सन् 1919 ई० में
(b) सन् 1929 ई० में
(c) सन् 1939 ई० में
(d) सन् 1949 ई० में
उत्तर :
(c) सन् 1939 ई० में

प्रश्न 5.
27 अगस्त 1928 ई० को कौन सी संधि हुई ?
(a) पेरिस शांति समझौता
(b) वर्साय की संधि
(c) केलॉग-ब्रियाँ समझौता
(d) सेब्रे की संधि
उत्तर :
(c) केलॉग-ब्रियाँ समझौता

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 6.
नाजीवाद की स्थापना किसने की थी?
(a) मुसोलिनी
(b) हिटलर
(c) मेजिनी
(d) लेनिन
उत्तर :
(b) हिटलर

प्रश्न 7.
इटली में फासिस्ट दल की सहायता से सत्ता प्राप्त की थी –
(a) हिटलर ने
(b) मुसोलिनी ने
(c) लेनिन ने
(d) इनमें से किसी ने नहीं
उत्तर :
(b) मुसोलिनी ने

प्रश्न 8.
‘एशिया एशियाइयों के लिए’ का नारा किसने दिया ?
(a) चीन
(b) जापान
(c) भारत
(d) अमेरिका
उत्तर :
(b) जापान

प्रश्न 9.
ध्रुवी शक्ति में कितने देश थे ?
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5
उत्तर :
(b) 3

प्रश्न 10.
‘दो दुनिया के बीच होने वाले संघर्ष में समझौता नहीं हो सकता, दोनों में से केवल एक जीवित रहेगा। ” यह किसका कथन है –
(a) लेनिन का
(b) हिटलर का
(c) मुसोलिनी का
(d) मार्क्स का
उत्तर :
(c) मुसोलिनी का

प्रश्न 11.
नाटो की स्थापना कब हुई थी ?
(a) 1945 ई०
(b) 1948 ई०
(c) 1949 ई०
(d) 1954 ई०
उत्तर :
(c) 1949 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 12.
1940 में नार्वे और डेनमार्क पर कब्जा हुआ था –
(a) फ्रांस का
(b) जर्मनी का
(c) इटली का
(d) ब्रिटेन का
उत्तर :
(b) जर्मनी का

प्रश्न 13.
हालैण्ड और बेल्जियम पर मई 1940 ई० में अधिकार कर लिया था –
(a) मुसोलिनी ने
(b) हिटलर ने
(c) जनरल पिटेन ने
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) हिटलर ने

प्रश्न 14.
द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत हुआ –
(a) 6 अग्रस्त 1943 ई. को
(b) 28 अमैल 1945 ई. को
(c) 7 मई 1945 ई. को
(d) 14 अगस्त 1945 ई. को
उत्तर :
(d) 14 अगस्त 1945 ई को

प्रश्न 15.
6 और 9 अगस्त 1945 को क्रमशः हिरोशिमा और नागासाकी पर अणु बम गिराया गया –
(a) फ्रांस द्वारा
(b) बिटेन द्वारा
(c) रूस द्वारा
(d) अमेरिका द्वारा
उत्तर :
(d) अमेरिका द्वारा

प्रश्न 16.
तुष्टीकरण की नीति किन देशों ने अपनाई थी ?
(a) अमेरिका और रूस
(b) फ्रांस और अमेरिका
(c) अमेरिका और बिटेन
(d) फ्रांस और बिंटेन
उत्तर :
(d) फांस और ब्रिटेन

प्रश्न 17.
रूजवेल्ट अमेरिका के राष्ट्रपति कब हुए ?
(a) 1933
(b) 1939
(c) 1940
(d) 1941
उत्तर :
(a) 1933

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 18.
द्वितीय विश्व युद्ध में इटली कब पराजित हुआ ?
(a) 1941
(b) 1942
(c) 1943
(d) 1944
उत्तर :
(c) 1943

प्रश्न 19.
विश्व स्तर पर शान्ति स्थापना कायम करने के लिए 1945 में स्थापना की गई थी –
(a) राष्ट्र संघ की
(b) संयुक्त राष्ट्र संघ की
(c) संयुक्त राष्ट्र चार्ट की
(d) लीग ऑफ सोसाइटी की
उत्तर :
(b) संयुक्त राष्ट्र संघ की

प्रश्न 20.
1929 की आर्थिक महामंदी का केन्द्र स्थल था –
(a) ब्रिटेन
(b) फ्रांस
(c) रूस
(d) अमेरिका
उत्तर :
(b) फ्रांस

प्रश्न 21.
याल्टा सम्मेलन में ‘लीग ऑफ नेशन्स’ की जगह जिस दूसरे संगठन को बनाने का फैसला किया गया उसका नाम था –
(a) राष्ट्र संघ
(b) संयुक्त राष्ट्र चार्टर
(c) संयुक्त राष्ट्र संघ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) संयुक्त राष्ट्र संघ

प्रश्न 22.
इटली में फासीवाद का जनक कौन था?
(a) हिटलर
(b) मुसोलिनी
(c) मार्शल टीटो
(d) जॉर्ज बुश
उत्तर :
(b) मुसोलिनी

प्रश्न 23.
नाजी दल की स्थापना किसने की?
(a) मैजिनी
(b) हिटलर
(c) मुसोलिनी
(d) तोजो हिडेकी
उत्तर :
(b) हिटलर

प्रश्न 24.
सीटो की स्थापना कब हुई थी?
(a) 1947 ई०
(b) 1950 ई०
(c) 1952 ई。
(d) 1954 ई०
उत्तर :
(d) 1954 ई०

प्रश्न 25.
द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी ने कहाँ आत्मसमर्पण किया ?
(a) स्टालिनग्राड
(b) पर्ल हार्बर
(c) हिरोशिमा
(d) नागासाकी
उत्तर :
(a) स्टालिनग्राड

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प्रश्न 26.
हिटलर ने पोलैण्ड पर कब आक्रमण किया था ?
(a) 1919
(b) 1930
(c) 1939
(d) 1944
उत्तर :
(c) 1939

प्रश्न 27.
जर्मनी ने द्वितीय विश्वयुद्ध में कब रूस पर आक्रमण किया था ?
(a) 1939
(b) 1940
(c) 1941
(d) 1942
उत्तर :
(c) 1941

प्रश्न 28.
जापान ने आत्मसमर्षण किया –
(a) 6 अगस्त 1945 है, को
(b) 28 अपैल 1945 ई को को
(c) 7 गई 1945 है को
(d) 10 अगसल 1945 है को
उत्तर :
(d) 10 भगसत 1945 है को

प्रश्न 29.
पर्ल-हार्बर पर नो एवं विमान आक्रमण हुआ 1941 ई. के
(a) 7 जुलाई को
(b) 7 अक्टूरर को
(c) 7 दिसम्बर को
(d) 17 मई को
उत्तर :
(c) 7 दिसम्बर को

प्रश्न 30.
संयुक्ता राष्ट्रसंथ की सधापना हुई –
(a) 1939 ई में
(b) 1941 ₹ में
(c) 1943 है में
(d) 1945 ई में
उत्तर :
(d) 1945 ई में

प्रश्न 31.
पर्ल हार्बार किस देश का नौ-सौनिक अहुा था ?
(a) जर्मनी
(b) जापान
(c) ईंग्लेण्ड
(d) दू० एस०ए०
उत्तर :
(d) यू॰ एस०ए०

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प्रश्न 32.
द्वितीय विश्व युद्ध का तत्कालिन कारण था –
(a) पोलेण्ड पर भाकमण
(b) रूस पर आक्रमण
(c) जापान चर आक्रमण
(d) पर्ल हार्बर पर आक्रयण
उत्तर :
(a) पोलैण्ड वर आक्रमण

प्रश्न 33.
सूस-जर्मन अनारक्रण समझोता हुआ –
(a) 1936 ई. में
(b) 1937 ई. में
(c) 1938 ई. में
(d) 1939 ई. में
उत्तर :
(d) 1939 ई. में

प्रश्न 34.
किस देश पर आकमण होने के कारण द्वितीय बिश्वयुद्ध आरंध ड्रुआ ?
(a) चेकोस्लोवाकिया
(b) पोलैण्ड
(c) ऑंस्ट्रया
(d) राइनलेग्ड
उत्तर :
(b) पोलेण्ड

प्रश्न 35.
जर्मनी ने 1936 ई. में किस स्थान को दखल किया ?
(a) औंटिया
(b) बैकोस्सोवांकिया
(c) राइनलैण्ड
(d) पोलेण्ड
उत्तर :
(c) राइनलेग्ड

प्रश्न 36.
इटली, जर्मनी एवं जापान का गठबंघन बा –
(a) अक्ष शक्ति
(b) मित्र शक्ति
(c) कमिन्टन संधि
(d) एन्टी-कमिन्टर्न संधि
उत्तर :
(a) अन्ष शक्ति

प्रश्न 37.
एशियाटिक मोनरो नीति की घोषणा की –
(a) अमेरिका
(b) जर्मनौ
(c) चीन
(d) जाचन
उत्तर :
(d) जायान

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प्रश्न 38.
‘तुष्टीकरण नीति’ के उद्भावक बे –
(a) फैको
(b) नेबिल चा्बरसेन
(c) रिवेनट्राप
(d) मझोटोब
उत्तर :
(b) रेवित चम्बललैन

प्रश्न 39.
हिटलर ने बिना युद्ध किये चेकोस्लोवाकिया का कौन-सा अंचल दखल किया –
(a) फिऊम बंदरगाह
(b) सार अंबल
(c) राइन अंचल
(d) सूटेतन अंचल
उत्तर :
(d) सूदेतन अवल

प्रश्न 40.
किस समझाते की गुप्त शर्त में घोलैण्ड के विभाजन का जिक्र है –
(a) टिराना समझ्रोता
(b) रोम समझौता
(c) रुसा-जर्मन अनाक्रमण संधि
(d) म्यूनिख संधि
उत्तर :
(c) रुस-जर्मन अनाक्रमण संथि

प्रश्न 41.
द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रतथक्ष कारण था हिटसर द्वारा –
(a) पोलेण्ड आक्रमण
(b) इंच-फ्रोसिसौ नुष्टीकरण नीति
(c) वर्गांद संत्रि का अविच्धा
(d) राष्ट्रसंख की विक्तता
उत्तर :
(a) पोलैग्ड आक्रमण

प्रश्न 42.
इंग-फ्रॉंसीसी शक्ति ने जर्मनी के विरुद्ध चुद्ध की घोषणा 1939 ई. में किषा –
(a) 1 सितम्बर को
(b) 2 सितम्बर को
(c) 3 सितम्बर को
(d) 4 सितम्बर को
उत्तर :
(c) 3 सितम्बर को

प्रश्न 43.
द्वितीय विश्वयुद्ध में ‘बिल्ट्ज क्रिग’ युद्ध पद्धति व्यवहार किया –
(a) इंगलैण्ड ने
(b) फ्रांस ने
(c) इटली ने
(d) जर्मनी ने
उत्तर :
(d) जर्मनी ने

प्रश्न 44.
फ्रांस के मार्शल पेताँ सरकार की राजधानी थी –
(a) बिची
(b) पेरिस
(c) लिओं
(d) वोर्दों
उत्तर :
(a) बिची

प्रश्न 45.
द्वितीय विश्वयुद्ध में 1940 ई. में जर्मनी के समक्ष फ्रांस ने आत्मसमर्पण किया –
(a) 21 मार्च को
(b) 21 मई को
(c) 21 अगस्त को
(d) 21 नवम्बर को
उत्तर :
(d) 21 नवम्बर को

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प्रश्न 46.
अपनी सैन्य शक्ति वृद्धि की मांग नहीं माने जाने पर राष्ट्रसंघ त्याग किया –
(a) जापान
(b) जर्मनी
(c) इटली
(d) अमेरिका
उत्तर :
(b) जर्मनी

प्रश्न 47.
देखते ही गोली मारने का निर्देश दिया था –
(a) जर्मनी
(b) जापान
(c) अमेरिका
(d) इंगलैण्ड
उत्तर :
(c) अमेरिका

प्रश्न 48.
द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सैनिकों का अड्डा था –
(a) चीन में
(b) इण्डोचीन में
(c) मलय में
(d) सिंगापुर में
उत्तर :
(b) इण्डोचीन में

प्रश्न 49.
द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रथम चरण में प्रशान्त महासागरीय अंचल तथा सुदूर पूर्व में अग्रासन की नीति अपनाई –
(a) अमेरिका
(b) रूस
(c) चीन
(d) जापान
उत्तर :
(d) जापान

प्रश्न 50.
अमेरिकी नौसेना अड्डा अवस्थित था –
(a) पर्ल हार्बर में
(b) सिंगापुर में
(c) इण्डोचीन में
(d) चीन में
उत्तर :
(a) पर्ल हार्बर में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ____________ संधि द्वारा इटली ने अलबानिया पर दखल कर लिया।
उत्तर : टिराना।

2. मुसोलिनी ने युगोस्लाविया से ____________बन्दरगाह दखल किया।
उत्तर : फिऊम।

3. मुसोलिनी ने ____________के साथ बुल्गारिया की संयुक्ति खारिज करने के आन्दोलन को उकसाया।
उत्तर : युगोस्लाविया।

4. अहमद जगू ने ____________में प्रजातंत्र की स्थापना की।
उत्तर : अलबानिया।

5. कामिन्टर्न विरोधी संधि ____________एवं जापान के बीच हुई।
उत्तर : जर्मनी।

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6. जनमत द्वारा जर्मनी के साथ युक्त हुआ____________
उत्तर : सार अंचल।

7. हिटलर ऑस्ट्रिया के नाजी नेता ____________को उस देश के गृहमंत्री पद पर नियुक्ति की मांग की।
उत्तर : सिएस इनकर्ट।

8. ____________की मध्यस्थता से म्यूनिख समझौता (1938 ई.) हुआ।
उत्तर : मुसोलिनी।

9. म्यूनिख समझौता में ____________के प्रति अविचार हुआ।
उत्तर : पोलेण्ड।

10. रूस-जर्मन अनाक्रमण (1939 ई.) समझौता द्वारा तय हुआ कि ____________रूस एवं जर्मनी आपस में बाँट लेंगे।
उत्तर : पोलैण्ड को।

11. इस्पात का समझौता (1939 ई.) जर्मनी एवं____________ के बीच हुआ।
उत्तर : इटली।

12. द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले जर्मनी के प्रति इंगलैण्ड एवं फ्रांस ने ____________नीति ग्रहण की थी।
उत्तर : तुष्टीकरण।.

13. हिटलर ने सम्पूर्ण युगोस्लाविया दखल किया 1939 ई. के____________
उत्तर : 15 मार्च को।

14. जून, 1940 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल हुआ____________
उत्तर : इटली।

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15. हिटलर ने म्यूनिख समझौता में बताया कि ____________अंचल ही यूरोप के पास उसकी अन्तिम मांग है।
उत्तर : सुदेतन।

16. जर्मनी 1 सितम्बर, 1939 ई. को ____________पर आक्रमण किया।
उत्तर : पोलैण्ड।

17. मुक्ति दिवस की घटना ____________के साथ युक्त है।
उत्तर : फ्रांस के पुनरुद्धार।

18. हिटलर ने अपने ____________अभियान का नामकरण किया था समुद्रसिंह अभियान।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

19. लेनिनग्राड का युद्ध रूस एवं ____________के बीच हुआ था।
उत्तर : जर्मनी।

20. ____________युद्ध रूस एवं जर्मनी के बीच हुआ।
उत्तर : स्टालिनग्राड।

21. लालसेना था ____________वाहिनी का नाम।
उत्तर : रूसी।

22. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ____________गणतंत्र के अस्त्रागार में परिणत हुआ।
उत्तर : अमेरिका।

23. ____________के विरुद्ध युद्ध की घोषणां करके इटली द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

24. मित्रवाहिनी ने 4 जून ____________ई. को इटली की राजधानी रोम को दखल किया।
उत्तर : 1944

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25. अमरीकी नौसेना अड्डा को पर्लहार्बर को ____________धंस किया।
उत्तर : जापान ने।

26. 25 अगस्त, 1944 ई. को मित्रवाहिनी ने ____________शहर दखल किया।
उत्तर : पेरिस।

27. इवां ब्राऊन ____________की पत्नी थीं।
उत्तर : हिटलर।

28. हिटलर ने जर्मन ____________जाति को विशुद्ध जाति का वंशज कहकर प्रचार किया था।
उत्तर : आर्यं।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. धुरी राष्ट्र गणतंत्र के समर्थक थे।
उत्तर : False

2. हिंटलर युद्ध में मारा गया था।
उत्तर : False

3. मुसोलिनी ने आत्महत्या की थी।
उत्तर : False

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4. द्वितीय विश्वयुद्ध में सभी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया।
उत्तर : True

5. अमेरिका तथा जर्मनी के बीच शीतयुद्ध चल रहा था।
उत्तर : False

6. अमेरिका ने हिरोशिमा एव नागासाकी पर एटम बम गिराया था।
उत्तर : True

7. जर्मनी ने पर्लहार्बर पर हमला किया था।
उत्तर : False

8. रूस एवं जापान में अनाक्रमण समझौता हुआ था।
उत्तर : False

9. सभी तानाशाहों ने विश्व को युद्ध की आग में झोंक दिया था।
उत्तर : True

10. फ्रांस जर्मनी को समाप्त कर देना चाहता था।
उत्तर : True

11. इटली के कवि डान्नूनत्सिओ की ‘ब्लैक शटर्स’ वाहिनी ने 1919 ई, में युगोस्लाविया से फिऊम बंदरगाह दखल किया।
उत्तर : True

12. युगोस्लाविया के राजा अलेक्जेण्डर के आतंकवादियों के हाथों मारे जाने पर युगोस्लाविया ने फ्रांस को दोषी ठहराया।
उत्तर : False

13. रोम समझौते द्वारा फ्रांस ने इटली के कुछ स्थानों को प्राप्त किया।
उत्तर : True

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14. जर्मन शासक हिटलर ने इटली के आबिसीनिया आक्रमण का विरोध किया था।
उत्तर : False

15. जेनेवा निरस्त्रीकण सम्मेलन ( 1933 ई.) में जर्मनी द्वारा सामरिक शक्ति वृद्धि की मांग की गयी।
उत्तर : True

16. राष्ट्रसंघ द्वारा अपने सदस्य देशों को इटली के साथ आयात-निर्यात बन्द करने का निर्देश दिये जाने पर इंग्लैण्ड एवं फ्रांस ने इस निर्देश को माना।
उत्तर : False

17. जर्मनी ने 1939 ई, में इटली के साथ अनाक्रमण समझौता किया।
उत्तर : False

18. धुरी राष्ट्र के प्रमुख सदस्य इंग्लेण्ड, फ्रांस एवं रूस थे।
उत्तर : False

19. धुरी राष्ट्र के ‘धुरी’ शब्द का प्रथम व्यवहार मुसोलिनी ने किया था।
उत्तर : True

20. मुसोलिनी ने म्यूनिख समझौता के 6 महीने बाद ही सम्पूर्ण बेकोस्लोवाकिया पर दखल कर लिया।
उत्तर : False

21. चेकोस्लोवाकिया के सुदेतन अंचल पर हिटलर के अधिकार को मांग पर म्यूनिख समझौता (1938 ई.) हुआ।
उत्तर : False

22. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में जर्मनी एवं रूस ने पोलैण्ड दखल कर आपस में बाँट लिया।
उत्तर : True

23. अमेरिका द्वारा पर्लहार्बर पर बम बर्षण करने पर जापान द्वितीय विश्वयुंद्ध में शामिल हुआ।
उत्तर : False

24. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में फिनलैंड, एस्टोनिया, लातिविया, लिधुआनिया आदि देशों को रूस ने दखल कर लिया।
उत्तर : True

25. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में डेनमार्क, नार्वे, बेल्जियम, हालैण्ड, लक्सेमवर्ग आदि देशों को जर्मनी ने दखल कर लिया।
उत्तर : True

26. युद्ध में इग्लैण्ड के विफल होंने पर हिटलर ने फ्रांस पर आकमण की योजना बनायी।
उत्तर : False

27. द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा मित्र देशों को मदद करने पर जर्मनी एव जापान उससे नाराज हो गये।
उत्तर : True

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28. खनिज तेल के लिये जापान ने 1941 ई. में इण्डोचीन दखल कर लिया।
उत्तर : True

29. 8 दिसम्बर, 1941 ई. को अमेरिका के विरुद्ध जापान द्वारा युद्ध घोषणा पर पूरब में द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ गया।
उत्तर : False

30. द्वितीय विश्वयुद्ध में उत्तरी अफ्रीका के युद्ध में बिटिश सेनापति आर्चिबाल्ड वैवेन एवं मान्टेगोमरी, जर्मन सेनापति रोमेल एवं अमरीकी सेनापति पैटन थे।
उत्तर : True

31. इटली ने मित्र देशों के सामने 3 सितम्बर, 1943 ई. को आत्मसमर्पण किया।
उत्तर : True

32. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय हांगकांग, सिंगापुर, फिलीपीन्स द्वीपसमूह, मलय, श्याम, बर्मा आदि देशों को फ्रांस ने दख़ कर लिया।
उत्तर : False

33. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय याल्टा सम्मेलन एवं पोट्सडाम सम्मेलन में मित्र राष्ट्र सम्मिलित हुए।
उत्तर : True

34. जर्मन विदेश मंत्री रिवेनट्राप ने ‘मार्शल योजना’ को ‘डॉलर साम्राज्यवाद’ का परिवर्तित रूप कहा।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ख
(A) रोम-बर्लिन-टोक्यो (1) धुरी राष्ट्र
(B) जर्मनी द्वारा पोलैण्ड पर आक्रमण (2) द्वितीय विश्वयुद्ध का आरभ
(C) 1939 ई. (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारम्भ
(D) 10 मई 1940 ई. (4) हिटलर का फ्रास पर आक्रमण

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ख
(A) रोम-बर्लिन-टोक्यो (1) धुरी राष्ट्र
(B) जर्मनी द्वारा पोलैण्ड पर आक्रमण (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारम्भ
(C) 1939 ई. (2) द्वितीय विश्वयुद्ध का आरभ
(D) 10 मई 1940 ई. (4) हिटलर का फ्रास पर आक्रमण

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प्रश्न 2.

स्ता्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 6 अगस्त 1945 ई. (1) नागासाकी पर अणु हमला
(B) 9 अगस्त 1945 ई. (2) हिरोशिमा पर अणु हमला
(C) 7 दिसम्बर 1941 ई. (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत
(D) 14 अमस्त 1945 ई. (4) जापान का पर्ल हार्बर पर आक्रमण

उत्तर :

स्ता्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 6 अगस्त 1945 ई. (2) हिरोशिमा पर अणु हमला
(B) 9 अगस्त 1945 ई. (1) नागासाकी पर अणु हमला
(C) 7 दिसम्बर 1941 ई. (4) जापान का पर्ल हार्बर पर आक्रमण
(D) 14 अमस्त 1945 ई. (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अमेरिकी बमवर्षक वायुयान (1) अमेरिका और रूस के बीच
(B) शीतयुद्ध (2) B29
(C) विश्व में दो गुट (3) गुट से अलग
(D) गुट निरपेक्ष (4) साम्यवादी एवं लोकतांत्रिक

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अमेरिकी बमवर्षक वायुयान (1) अमेरिका और रूस के बीच
(B) शीतयुद्ध (2) B29
(C) विश्व में दो गुट (3) गुट से अलग
(D) गुट निरपेक्ष (4) साम्यवादी एवं लोकतांत्रिक

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना (1) द्वितीय विश्वयुद्ध
(B) राष्ट्संघं निष्क्रिय (2) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद
(C) द्वितीय विश्वयुद्ध (3) दक्षिण पूर्वी एशिया संधि संगठन
(D) SEATO (4) वैश्विक युद्ध

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना (2) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद
(B) राष्ट्संघं निष्क्रिय (1) द्वितीय विश्वयुद्ध
(C) द्वितीय विश्वयुद्ध (4) वैश्विक युद्ध
(D) SEATO (3) दक्षिण पूर्वी एशिया संधि संगठन

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प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुसान की संधि (1923 ई.) (1) इटली एवं युगोस्लाविया
(B) नेटिउनो का समझौता (1925 ई.) (2) इटली एवं ग्रीस
(C) टिराना का समझौता (1926 ई.) (3) इटली एवं फ्रांस
(D) रोम का समझौता (1935 ई.) (4) इटली एवं अलबानिया

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुसान की संधि (1923 ई.) (2) इटली एवं ग्रीस
(B) नेटिउनो का समझौता (1925 ई.) (1) इटली एवं युगोस्लाविया
(C) टिराना का समझौता (1926 ई.) (4) इटली एवं अलबानिया
(D) रोम का समझौता (1935 ई.) (3) इटली एवं फ्रांस

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) होर-लावाल समझौता (1935 ई.) (1) इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी एवं इटली
(B) कमिन्टर्न विरोधी समझ्ञोता (1936 ई.) (2) जर्मनी एवं जापान
(C) रोम-बर्लिन-टोक्यो धुरी समझौता (1937 ई. (3) इंग-फ्रांसीसी पक्ष एवं इटली
(D) म्यूनिख समझौता (1938 ई.) (4) इटली, जर्मनी एवं जापान

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) होर-लावाल समझौता (1935 ई.) (3) इंग-फ्रांसीसी पक्ष एवं इटली
(B) कमिन्टर्न विरोधी समझ्ञोता (1936 ई.) (2) जर्मनी एवं जापान
(C) रोम-बर्लिन-टोक्यो धुरी समझौता (1937 ई. (4) इटली, जर्मनी एवं जापान
(D) म्यूनिख समझौता (1938 ई.)  (1) इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी एवं इटली

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अलेक्जेण्डर (1) युगोस्लाविया
(B) फ्रैंको (2) अबिसीनिया
(C) टाइले सेल्सी (3) अलबानिया
(D) अहमद जगू, (4) सेन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अलेक्जेण्डर (1) युगोस्लाविया
(B) फ्रैंको (4) सेन
(C) टाइले सेल्सी (2) अबिसीनिया
(D) अहमद जगू, (3) अलबानिया

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प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) एल आलामीन का युद्ध (1) ऑंस्ट्रिया के चांसलर
(B) स्टालीनग्राड का युद्ध (2) जर्मन चांसलर
(C) ब्रिटेन का युद्ध (3) फ्रांस के प्रधानमंत्री
(D) बेनगाजी का युद्ध (4) बिटिश प्रधानमंत्री

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) एल आलामीन का युद्ध (3) फ्रांस के प्रधानमंत्री
(B) स्टालीनग्राड का युद्ध (1) ऑंस्ट्रिया के चांसलर
(C) ब्रिटेन का युद्ध (4) बिटिश प्रधानमंत्री
(D) बेनगाजी का युद्ध (3) फ्रांस के प्रधानमंत्री

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) चेम्बरलेन (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर
(B) दालादियेर (2) जर्मन चांसलर
(C) हिटलर (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक
(D) डलफासं (4) इटली का शासक

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) चेम्बरलेन (4) इटली का शासक
(B) दालादियेर (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक
(C) हिटलर (2) जर्मन चांसलर
(D) डलफासं (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुसोलिनी (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर
(B) सुशनिप (2) जापान के प्रषानमंत्री
(C) हिदेकी तोजो (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक
(D) फिलिप पेताँ (4) इटली का शासक

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुसोलिनी (4) इटली का शासक
(B) सुशनिप (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर
(C) हिदेकी तोजो (2) जापान के प्रषानमंत्री
(D) फिलिप पेताँ (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मार्शल मुकोव (1) जर्मन सेनापति
(B) आइजनहावर (2) रूसी सेनापति
(C) रोमेल (3) ब्रिटिश सेनापति
(D) मान्टगोमरी (4) अमेरिकी सेनापति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मार्शल मुकोव (2) रूसी सेनापति
(B) आइजनहावर (4) अमेरिकी सेनापति
(C) रोमेल (1) जर्मन सेनापति
(D) मान्टगोमरी (3) ब्रिटिश सेनापति

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मैक आर्थर (1) रूस के विदेश मंत्री
(B) वान पाउलस (2) अमेरिकी सेनापति
(C) गोयबल्स (3) हिटलर का प्रचार मंत्री
(D) मोलेटोव (4) जर्मन सेनापति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मैक आर्थर (2) अमेरिकी सेनापति
(B) वान पाउलस (4) जर्मन सेनापति
(C) गोयबल्स (3) हिटलर का प्रचार मंत्री
(D) मोलेटोव (1) रूस के विदेश मंत्री

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 8 Question Answer – पश्चिम बंगाल

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
पश्चिम बंगाल के रेल इंजन बनाने का कारखाना कहाँ है?
उत्तर :
चित्तरंजन

प्रश्न 2.
भारत का रूढ़ शिल्पांचल किसे कहते हैं?
उत्तर :
दुर्गापुर को।

प्रश्न 3.
लैटराइट मिट्टी पश्चिम बंगाल में कहाँ पाई जाती है?
उत्तर :
पश्चिम मेदिनीपुर, बाकुड़ा,पुरुलिया, बर्द्धमान तथा बीरभूम में।

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प्रश्न 4.
ज्वारीय वन में किस जाति के वृक्ष अधिक पाये जाते हैं?
उत्तर :
मैंग्रोव एवं सुन्दरी।

प्रश्न 5.
1000 m से 2000 m की ऊँचाई पर किस प्रजाति के वृक्ष पाये जाते हैं।
उत्तर :
अलडर, वॉलनट, वर्च इत्यादि जाति के वृक्ष पाए जाते हैं।

प्रश्न 6.
काल वैशाखी से किस ऋतु में वर्षा होती है?
उत्तर :
ग्रीष्म ऋतु. में।

प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल की सभी नदियाँ कहां गिरती है?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी में।

प्रश्न 8.
बंगलादेश और पश्चिम बंगाल में कौन-सा महत्वपूर्ण समझौता है?
उत्तर :
जलबंटन समझौता।

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प्रश्न 9.
कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के किस भाग से होकर गुजरती है?
उत्तर :
दक्षिण भाग से (नदिया जिला के कृष्णनगर शहर से)

प्रश्न 10.
जूट के एक बीज का नाम बताइये।
उत्तर :
सबुज सोना, श्यामली, बैशाखी, चैताली और बासुदेव।

प्रश्न 11.
चाय की कृषि के लिए एक जिले का नाम बताइये।
उत्तर :
दार्जिलिंग।

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा धान उत्पादक जिला कौन-सा है?
उत्तर :
मोदिनीपुर।

प्रश्न 13.
उद्योग की स्थापना के लिये सबसे आवश्यक वस्तु क्या है?
उत्तर :
कच्या माल।

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प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल के एक धार्मिक पर्यटन स्थल का नाम बताइए।
उत्तर :
दक्षिणेश्वर काली मन्दिर।

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल के दो कुटीर उद्योग का नाम बताइये।
उत्तर :
चटाई बनाना और मिट्टी की मूर्तियाँ एवं खिलौना बनाना।

प्रश्न 16.
ताबां का विकास पश्चिम बंगाल में कहाँ हुआ है?
उत्तर :
खड़गपुर, मुर्शिदाबाद में बलरामपुर एवं बांकुड़ा में विष्णुपुर।

प्रश्न 17.
भारत का दूसरा सबसे बड़ा नगर कौन-सा है?
उत्तर :
दिल्ली।

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प्रश्न 18.
कोलकाता के सहायक बन्दगाह का क्या नाम है?
उत्तर :
हल्दिया।

प्रश्न 19.
दो पर्वतीय पर्यटक स्थलों का नाम बताइये।
उत्तर :
दार्जिलिंग एवं कलिंगपांग।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक पड़ोसी राज्य का नाम लिखिए।
उत्तर :
उड़ीसा।

प्रश्न 21.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल का जनघनत्व कितना है?
उत्तर :
1029 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

प्रश्न 22.
भूटान का विदेशी व्यापार किन बन्दरगाहों से होता है?
उत्तर :
कोलकाता और हल्दिया बन्दरगाहों से।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल में कुल कितने जिले हैं?
उत्तर :
वर्त्मान में 20 जिला।

प्रश्न 24.
विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
उत्तर :
घूम रेलवे स्टेशन (2260 मी॰ ऊंचाई पर) है।

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प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल की सबसे ऊँची चोटी का नाम लिखिए?
उत्तर :
गोरगाबुरू (677 मी०)।

प्रश्न 26.
राढ़ अंचल की मिट्टी का रंग कैसा है?
उत्तर :
लाल

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल की भूमि निम्न एवं दलदली होती है?
उत्तर :
सुन्दरवन के डेल्टाई अंचल की भूमि।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल की सबसे महत्वपूर्ण नदी कौन-सी है?
उत्तर :
गंगा।

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल की नदियाँ वर्षा पोषित हैं?
उत्तर :
उत्तरी भाग की नदियाँ।

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प्रश्न 30.
पश्चिम बंगाल में सम्भावित धरातलीय जल की मात्रा कितनी है?
उत्तर :
13.29 मिलियन हेक्टेयर मीटर है।

प्रश्न 31.
पश्चिम बंगाल में कितने अधिक गहराई वाले ट्यूबवेल कार्यरत हैं?
उत्तर :
500 फीट से अधिक गहराई वाले ट्यूबवेल कार्यरत हैं।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल की जलवायु ऊष्ण कटिबंधीय है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल का दक्षिणी भाग।

प्रश्न 33.
ग्रीष्म काल में कोलकाता का औसत तापमान कितना रहता है?
उत्तर :
29°C रहता है।

प्रश्न 34.
मानसूनी हवाओं से किस प्रकार की वर्षा होती है?
उत्तर :
पर्वतीय वर्षा होती है।

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल में शीतकाल में तापमान हिमांक के नीचे चला जाता है?
उत्तर :
उत्तरी पर्वतीय अंचल में।

प्रश्न 36.
पश्चिम बंगाल में चावल के किस किस्म की अधिक खेती है?
उत्तर :
अमन की खेती अधिक होती है।

प्रश्न 37.
जूट किस जलवायु का पौधा है?
उत्तर :
ऊष्ण कटिबन्धक पौधा है।

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प्रश्न 38.
दुर्गापुर इस्पात कारखानें की लौह-अयस्क की प्राप्ति कहाँ से होती है?
उत्तर :
झारखण्ड व उड़ीसा की नोआमुण्डी की खान से।

प्रश्न 39.
पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग का केन्द्रीकरण कहाँ हुआ है?
उत्तर :
हुगली नदी के दोनों किनारों पर उत्तर में बाँसबेड़िया से दक्षिण में बिड़लापुर तक।

प्रश्न 40.
पश्चिम बंगाल के अधिकांश चाय बगान कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
उत्तर के दार्जिलिग एवं जलपाईगुड़ी जिलों में स्थित हैं।

प्रश्न 41.
पश्चिम बंगाल देश के कितने प्रतिशत आलू का उत्पादन करता है?
उत्तर :
30 % प्रतिशत

प्रश्न 42.
बंगाल प्रान्त का विभाजन कब हुआ था?
उत्तर :
1905 ई०।

प्रश्न 43.
पूर्वी पाकिस्तान कब स्वतंत्र होकर बंगलादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया?
उत्तर :
16 दिसम्बर, 1971 ई०।

प्रश्न 44.
पश्चिम बंगाल की राजधनी कहाँ है?
उत्तर :
कोलकाता।

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प्रश्न 45.
क्षेत्रफल के अनुसार पश्चिम बंगाल का भारत मे कौन सा स्थान है।
उत्तर :
तेरहवाँ।

प्रश्न 46.
पश्चिम बंगाल के पूर्वी भाग में कौन सा देश स्थित है ।
उत्तर :
बंगलादेश ।

प्रश्न 47.
पश्चिम बंगाल के उत्तर पश्चिम में कौन सा पड़ोसी देश स्थित है।
उत्तर :
नेपाल।

प्रश्न 48.
पश्चिम बंगाल की जलवायु कैसी है?
उत्तर :
ऊष्ण एवं आर्द्र मानसूनी जलवायु है।

प्रश्न 49.
पश्चिम बंगाल में कुल कितने जिले हैं?
उत्तर :
23

प्रश्न 50.
कोलकाता का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर :
कोलकाता।

प्रश्न 51.
उत्तर 24 परगना का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर :
बरासात।

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प्रश्न 52.
बिहार की राजधानी कहाँ है।
उत्तर :
पटना।

प्रश्न 53.
धरातलीय बनावट के आधार पर पश्चिम बंगाल को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर :
छ: भाग ।

प्रश्न 54.
पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी का नाम बताओ।
उत्तर :
संण्डाकफ़।

प्रश्न 55.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग की सबसे ऊँची चोटी का नाम बताओ।
उत्तर :
गोरगाबुरू।

प्रश्न 56.
पश्चिम बंगाल की एक ज्वारीय नदी का नाम बताओ।
उत्तर :
मातला, सभ्रनुखी।

प्रश्न 57.
पशिचम बंगाल की एक बर्फपोषित नहीं का नाम बताओ।
उत्तर :
निस्था, तोरसा, जलडाका नदी।

प्रश्न 58.
पशिचम बंगाल में काल बैशाखी कब आती है?
उत्तर :
मार्च-अप्रैल।

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प्रश्न 59.
पश्चिम बंगाल में किस मानसूनी हवा द्वारा वर्षा होती है?
उत्तर :
दक्षिण-पश्चिम मानसूनो हवा द्वारा।

प्रश्न 60.
पशिचम बंगाल में ग्रीष्म काल में कहाँ लोग घूमने के लिए जाते है?
उत्तर :
दर्जिलिंग

प्रश्न 61.
पश्चिम बंगाल में किस भाग में पर्वतीय मिट्टी पायी जाती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उनरी भाग में।

प्रश्न 62.
पश्चिम बंगाल में दक्षिणी भाग में किस प्रकार के वन पाए जाते है?
उत्तर :
सुन्दरी वन या मैनग्रोव।

प्रश्न 63.
समुद्रतटीय अंचल की प्रमुख नदी का क्या नाम है?
उत्तर :
मातला, सप्तमुखी।

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प्रश्न 64.
पश्चिमी पठारी अंचल की सबसे प्रमुख नदी का क्या नाम है?
उत्तर :
दामोदर, अजय।

प्रश्न 65.
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी भाग की भू-प्रकृति कैसी है?
उत्तर :
राढ़ प्रदेश।

प्रश्न 66.
पश्चिम बंगाल के किस भाग में रायल बंगाल टाइगर पाया जाता है?
उत्तर :
सुन्दरवन के डेल्टाई भाग में।

प्रश्न 67.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग की जलवायु फैली है।
उत्तर :
शीतोष्या।

प्रश्न 68.
ताल किसे कहते है?
उत्तर :
जिस स्थान पर बाढ़ का पानी हमेशा भरा रहता है।

प्रश्न 69.
दियरा किसे कहते है?
उत्तर :
नंदी द्वारा निर्मिंद काष मिट्टी को दियरा कहते है :

प्रश्न 70.
मुन्दरवन अंचल में किस प्रकार के वन पाए जाते है?
उत्तर :
सुन्दरोवन, मेंग्रोव।

प्रश्न 71.
पश्चिम बंगाल के किस भाग में सक्रिय डेल्टा पाया जाता है?
उत्तर :
दक्षिणी भाग मे ।

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प्रश्न 72.
पश्चिम बंगाल की सबसे प्रपुख कृषि उपज क्या है?
उत्तर :
धान।

प्रश्न 73.
पशिचम बंगाल की सबसे प्रमुख व्यावसायिक फसल क्या है?
उत्तर :
धाय।

प्रश्न 74.
पश्चिम बंगाल के किस भाग में चाय का उत्पादन होता है?
उत्तर :
दार्जिलिग।

प्रश्न 75.
चाय के उत्पादन में पश्चिम बंगाल का देश में कौन सा स्थान है?
उत्तर :
द्वितीय।

प्रश्न 76.
पश्चिम बंगाल का प्रमुख उद्योग क्या है?
उत्तर :
जूट उद्याग।

प्रश्न 77.
पश्चिम बंगाल में सर्वप्रथम कब लौह इस्पात कारखाने की स्थापना की गयी थी?
उत्तर :
वर्नपुर (liSCO)

प्रश्न 78.
पश्चिम बंगाल के नए बन्दरगाह का क्या नाम है?
उत्तर :
ताजपुर बन्दरगाह।

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प्रश्न 79.
हल्दिया में किस उद्योग का विकास हुआ है?
उत्तर :
पेट्रोरसायन उद्योग।

प्रश्न 80.
पश्चिम बंगाल में कहाँ शिल्क उद्योग का विकास हुआ है?
उत्तर :
मुर्शिदाबाद और विरभूम में।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
पश्चिम बंगाल के विस्तार का वर्णन करो।
अथवा
पश्चिम बंगाल की स्थिति एवं सीमा लिखिए।
अथवा
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी देशों एवं पड़ोसी राज्यों के नाम बताओ।
उत्तर :
स्थिति – इसका विस्तार पूर्व की ओर 89° 50′ पूर्व देशान्तर से पश्चिम मे 85° 50′ पूर्व देशान्तर तथा उत्तर में 27° 10′ उत्तर अक्षाश से दक्षिण में 21° 38′ उत्तर अक्षांश तक है।
सीमा – उत्तर में हिमालय पर्वत में स्थित सिविकम तथा भूटान, पूर्व में बग्लादेश, मेघालय तथा असम राज्य, पश्चिम में नेपाल देश, बिहार, झारखण्ड एवं उड़ीसा तथा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है।

प्रश्न 2.
पश्चिम बंगाल के प्रेसिडेन्सी विभाग में कौन-कौन जिले आते हैं?
उत्तर :
हावड़ा, कोलकाता, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना।

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प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल के समतल मैदानी भाग को कितने भांगों में वाँटा गया है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के समतल मैदानो भाग को निम्न छ: (6) भागों में बाँटा गया है :-

  1. तराई क्षेत्र (Terai Region)
  2. उत्तर की समतल भूमि (Northern Plains)
  3. राढ़ मैदान (Rath Plain)
  4. गगा डेल्टा मैदान (Ganga Delta Plain)
  5. सुन्दरवन का मैदान (Sundarban Plain)
  6. रेतीला नटीय मैदान (Sandy Coastal Plain)

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल को नदी मातृका प्रदेश क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में नदियों का काफी योगदान रहा है। यहाँ असंख्य नदियाँ बहती हैं। इसी से पश्चिम बगाल को नदी मातृका देश कहा जाता है।

प्रश्न 5.
उत्तर बंगाल की प्रमुख नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
महानन्दा, टांगन, तिस्ता, तोरमा और रायढाका उत्तर की प्रमुख नटियाँ हैं। इनमे प्रथम दो का जल गंगा में तथा शेष का जल बह्मपुत्र में गिरता है। तिस्ता इनमें प्रमुख नदी है।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल में किस प्रकार की जलवायु पायी जाती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्णार्द्र मानसूनी है।

प्रश्न 7.
तराई क्षेत्र की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर :
दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का सबसे उत्तरी जिला है। इसका अधिकांश भाग पर्वतोग है। इसका दक्ष्णणी भाग सिलीगुड़ी महकमा एवं जलपाईंगुड़ी तथा कुचबिहार के जिले हिमालय के गिरिपद हैं, इन्हे तराई क्षेत्र के नाम से पुकारते हैं। पश्चिम बंगाल में डुआर्स दुआर (Doors) कहते हैं।

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प्रश्न 8.
सक्रिय डेल्टा किसे कहते हैं?
उत्तर :
दक्षिणी तट पर सुन्दरवन क्षेत्र में आज भी डेल्टा बनने की प्रक्रिया निरतर जारी है। फलख़्वरूप नये द्वोपों का निर्माण होता है। इनमें गंगासागर तथा पूर्वाशा प्रमुख हैं। इसे सक्रिय डेल्टा भी कहा जाता है।

प्रश्न 9.
राढ़ प्रदेश की स्थिति को लिखें?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी अंचल एवं भागीरथी – हुगली तटीय भाग के बीच स्थित मैदानी भाग को राढ़ कहते है। इसके अन्तर्गत बीरभूम, बर्दमान, बांकुड़ा एवं मिदनापुर का भू-भाग सम्मिलित है।

प्रश्न 10.
कृषि से किस प्रकार जल प्रदूषण होता है?
उत्तर :
बढ़ती आबादी की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण कृषि में सिंचाई, रासायनिक खादों कीटनाशक एव चृणनाराक दवाओं का प्रयोग आँख मूंदकर हो रहा है। इन दवाओं एवं रासायनिक खाद के प्रयोग सं जल प्रदृश्गा और मृदा प्रदूपण होता है।

प्रश्न 11.
उद्योगों से किस प्रकार जल प्रदूषण होता है?
उत्तर :
उद्योगों के कारण मानव की सम्पन्नता और सुविधा इतनी बढ़ गयी है कि इनकी उपलब्धता पलभर के लिए बाधित होने पर वह तिलमिला उठता है। एक तरफ तो सुविधा की बात हुई, दूसरी तरफ उद्योगों ने जल प्रदूषण के काफी प्रभावित किया। कारखानों से निकलने वाले जल नदियों को प्रदूषित कर दिया और नदियों की प्राकृतिक दृश्यावली गन्दे नालों के रूप परिवर्तित हो गयी है?

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल में किस मानसून से वर्षा होती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से वर्षा होती है। ये हवाएँ हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर आती हैं, अतः ये आर्द्र होती हैं। जब ये हवाएँ पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में स्थित हिमालय से टकराती हैं तो प्रदेश में अधिक वर्षा होती है।

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प्रश्न 13.
मौसम किस प्रकार मानव जीवन को प्रभावित करता है?
उत्तर :
मौसम के परिवर्तन का मानव-जीवन पर प्रभाव :- कोलकाता में आम आदमी गर्मी से परेशान रहते है पर गर्मी की छुट्टी में यदि आप अपने माता-पिता के साथ दार्जिलिंग जाते हैं तो वहाँ पर पहनने के लिए ऊनी कपड़ों की व्यवस्था करते है। अपने राज्य पश्चिम बंगाल में मछली भात और पोई का साग खाते हैं। जब आप अपने चाचा के यहाँ चण्ड़ीगढ़ में जाते हैं तो पाते हैं कि वे रोटी और सरसों का साग खाना पसन्द करते है। आप भोजन, पोशाक आदि में जो यह परिवर्तन देखते हैं उसे ही मौसम के परिवर्तन का मानव जीवन पर प्रभाव कहते है।

प्रश्न 14.
उत्तर के पर्वतीय भाग की जलवायु का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय भाग की जलवायु मुख्यत: इस प्रदेश की ऊँचाई से प्रभावित है। समुद्र की सतह से लगभग 2400 मी० ऊँचाई पर स्थित इस भू-भाग की जलवायु शीत-प्रधान है। गर्मी के दिनों में भी ठंडक पड़ती है। मईजून के महीने में यहाँ का औसत तापक्रम 15°-16° सेंटीमेट से अधिक नहीं जाता है। जाड़े की ऋतु का औसत तापमान 6° 7° सेन्टीप्रेंट रहता है, औसत वार्षिक वर्षा 300-400 से॰मी॰ है।

प्रश्न 15.
ज्वारीय वनों से क्या समझते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के डेल्टाई भाग में पाये जाने वाले वन को ज्वारीय वन कहते हैं। जैसे – मैंग्रोव, सुन्दरी वन।

प्रश्न 16.
धान की कृषि के लिए कैसी जलवायु आवश्यक हैं?
उत्तर :
धान एक उष्ण कटिबंध का पौधा है। भारत में धान की कृषि मानसुनी जलवायु के अन्तर्गत किया जाता है। धान का पौधा पानी का प्यासा होता है।

प्रश्न 17.
जल के अधिक प्रयोग से जैव-विविधता की क्षति क्यों होती है?
उत्तर :
जल के अधिक प्रयोग से जैव-विविधता की क्षति होती है क्योंकि जैव-विविधता के अर्न्तगत पाये जाने वाले कुछ जीव तथा पेड़-पौथे जल का अधिक प्रयोग नहीं करते।

प्रश्न 18.
जूट से बनने वाली दो वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
थैला, रस्सी, बोरे।

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प्रश्न 19.
कुटीर उद्योग से क्या समझते हैं?
उत्तर :
कुटीर उद्योग सामूहिक रूप से उन उद्योगों को कहते हैं जिनमें उत्पाद एवं सेवाओं का सुजन अपने घर में ही किया जाता है न कि किसी कारखाने में। कुटीर उद्योगों में कुशल कारीगरों द्वारा कम पूंजी एवं अधिक कुशलता से अपने हाथों के माध्यम से अपने घरों में वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।

प्रश्न 20.
निर्माण विधि के आधार पर गंगा के डेल्टा को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर :
निर्माण विधि के आधार पर गंगा के डेल्टा को निम्न 4 भागों में बाँटा जा सकता है :-

  1. उत्तर का मृतप्राय डेल्टा (Moribund Delta)
  2. मध्य का परिपक्व डेल्टा (Mature Delta)
  3. सुन्दरवन का सक्रिय डेल्टा (Active Delta)
  4. मिदनापुर का बालू तृतिय मैदान (Sandy Coastal plain)

प्रश्न 21.
ज्वरीय नदी से आप क्या समझते हैं? कुछ ज्वारीय नदियाँ के नाम लिखिए।
उत्तर :
सुन्दरवन अंचल में प्रवाहित होनेवाली नदियों को ज्वारीय नदी कहते हैं क्योंकि समुद्र के ज्वार का जल इन नदियों में भीतर तक प्रवेश कर जाता है।
पश्चिम बंगाल की ज्वारीय नदियाँ :- बरतला, सप्तमुखी, जमीरा, मातला, गोसाबा, हरियाभंगा, विद्याधरी, पियाली एवं रायमंगल आदि ज्वारीय नदियाँ हैं।

प्रश्न 22.
काल बैशाखी क्या है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में अभैल एवं मई महीनों में शुष्क एवं आर्द्र हवाओं के मिलने से उत्पन्न विनाशकारी तूफानों को काल बैशाखी कहते हैं।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल के डेल्टाई अंचल में पाए जाने वाले वृक्षों के नाम लिखें।
उत्तर :
यहाँ के मुख्य वृक्ष मैंग्रोव, ताड़, सुन्दरी, गोरान, केवड़ा, होगा, गोलपत्ता एवं नारियल हैं। सुन्दरी वृक्षों की अधिकता के कारण ही इस भाग को सुन्दरवन कहते हैं।

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प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख चावल उत्पादक जिलों के नाम लिखें।
उत्तर :
प्रमुख चावल उत्पादक जिलें :- जलपाईगुड़ी, बाँकुड़ा, मिदनापुर, हुगली, उत्तर 24 परगना, दाक्षण 24 परगना, पुरूलिया, उत्तर दिनाजपुर तथा बर्द्धमान आदि हैं।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि की क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि की निम्न समस्याएँ है :

  1. स्वच्छ जल की कमी
  2. चावल की कृषि की बाध्यता
  3. किसानों को उचित मूल्य न मिलना
  4. प्रति एकड़ उपज की कमी

प्रश्न 26.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल का गठन किस प्रकार की चट्टानों से हुआ है?
उत्तर :
पश्चिम के पठारी भाग मुख्य रूप से राढ़ प्रदेश क्षेत्र में है। जहाँ पथरीली चट्टान पायी जाती है। यह एक प्राचौन चट्टानी मिट्टी का क्षेत्र है जो लाल मिट्टी के जमा होने से बना हुआ है।

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख कृषि उपजों के नाम बताओ।
उत्तर :
धान, जुट, चाय, आलु, गेहूँ, साग-सब्जी, फुल।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योग कौन-कौन है?
उत्तर :
जुट उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग, पेट्रोल-रसायन उद्योग।

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के पांच प्रमुख दर्शनीय स्थानों के नाम बताओ।
उत्तर :
दक्षिणेश्वर, कालीघाट, मायापुर, तारापीठ, तारकेश्वर।

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प्रश्न 30.
पश्चिम बंगाल में प्रमुख छोटी इकाई के उद्योगों के नाम बताओ।
उत्तर :
विड़ी उद्योग, सूत उद्योग, प्लाईडड उद्योग।

प्रश्न 31.
पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख बन्दरगाहों तथा दो प्रमुख शहरों के नाम बताओ।
उत्तर :
प्रमुख बन्दरगाह : कोलकाता, हल्दिया। प्रमुख शहर : आसनसोल, कोलकाता, सिलिगुड़ी।

प्रश्न 31.
बारिन्द्र का मैदान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
गंगा तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बने मैदान को बारिन्द्र का मैदान कहते है। जैसे – पशिचम बंगाल का उत्तरी मैदान।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल में पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
दामोदर, मयूराक्षी, अजय, द्वारकेश्वर, सिलाई एवं कंसावती नदियाँ हैं।

प्रश्न 33.
कौन-सा पर्वत श्रेणी बंगाल एवं नेपाल की सीमा बनाती है?
उत्तर :
सिंगलीला पर्वत श्रेणी पश्चिम बंगाल एवं नेपाल की सीमा बनाती है।

प्रश्न 34.
पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी किस पर्वत श्रेणी पर स्थित है?
उत्तर :
सिंगलीला श्रेणी की संदाकफू चोटी पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी है।

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल में हिमालय की किस श्रेणी का विस्तार है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उत्तरी पर्वतीय अंचल में मध्य एवं लघु हिमालय की पूर्वी श्रेणियों का विस्तार है।

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प्रश्न 36.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल का गठन किन चट्टानों से हुआ है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल का गठन अर्कियन युग की आग्नेय चट्टानों तथा कार्बोनिफेरस युग की क्वार्टजाइट चट्टानों से हुआ है।

प्रश्न 37.
पश्चिम बंगाल के राढ़ अंचल का निर्माण किस प्रकार हुआ है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के राढ़ अंचल का निर्माण छोटानागपुर के पठार से निकलने वाली नदियों के द्वारा बहांकर लायी गयी लाल मिट्टी के निक्षेपण से हुआ है।

प्रश्न 38.
राढ़ अंचल को पश्चिम बंगाल का खलिहान क्यों कहते हैं?
उत्तर :
राढ़ अंचल कृषि की दृष्टि से उन्नत है इसीलिए इसे पश्चिम बंगाल का खलिहान कहते हैं।

प्रश्न 39.
बिल किसे कहते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के सुन्दरवन के डेल्टाई अंचल में स्थित जलमग्न निम्न भूमि को बिल कहते हैं।

प्रश्न 40.
पद्मा की शाखा नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
इच्छामती, भैरव, आदिगंगा, विद्याधरी एवं कालिन्दी।

प्रश्न 41.
हुगली नदी की मुख्य शाखा नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
हुगली नदी को मुख्य शाखा नदियाँ बरतला, सप्तमुखी, जमीरा, मातला, गोसाना, हरियाभंगा, विद्याधरी, पियाली एवं रायमंगल है।

प्रश्न 42.
पश्चिम बंगाल के हिमपोषित नदियों के नाम लिखो।
उत्तर :
महानन्दा, तिस्ता, जलढाका, तोरसा, रायडक, संकोश, अन्नाई, बड़ी रंगित, छोटी रंगित आदि नदियाँ हिमपोषित नदियाँ हैं जो उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई पद्मा या ब्रह्मपुत्र नदी सें मिल जाती है।

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प्रश्न 43.
छोटानागपुर के पठार से निकलने वाली नदियों को वृष्टि जल पोषित नदियाँ क्यों कहते हैं?
उत्तर :
इस भाग की नदियाँ वर्षा जल के सहारे बहती हैं, अत: इन्हें वृष्टि जल पोषित नदिया कहते हैं। वर्षा काल में ये नदियाँ भयकर हो उठती है और उनमें विनाशकारी बाढ़ें आ जाया करती है।

प्रश्न 44.
दामोदर नदी का उदगम और मुहाना का परिचय दीजिए।
उत्तर :
यह नदी झारखण्ड राज्य के पलामू जिले में स्थित खमरपट की चोटी से निकलकर बराकर के समीप पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है तथा फालता के पास हुगली नदी में मिल जाती है।

प्रश्न 45.
सुन्दरवन अंचल की नदियों को ज्वारीय नदी क्यों कहते हैं?
उत्तर :
सुन्दरवन अंचल में प्रवाहित होनेवाली नदियो को ज्वारीय नदी कहते है क्योंकि समुद्र के ज्वार का जल इन नदियों में भीतर तक प्रवेश कर जाता है।

प्रश्न 46.
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को गर्मी का मानसून (Summer Monsoon) क्यों कहते हैं?
उत्तर :
भारत के अन्य भागों की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी गर्मी में दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ समुद्र से समतल की और चलती हैं। अतः इन्हें गर्मी का मानसून (Summer Monsoon) भी कहते हैं।

प्रश्न 47.
पश्चिमी मानसून या गर्मी का मानसून को आर्द्र मानसून क्यों कहते हैं?
उत्तर :
पश्चिमी मानसून हवाएँ हिन्द महासागर एवं बंगाल की खाड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा तय करके आती है, अतः ये वाष्प या आर्द्रता से परिपूर्ण होती है। इसी से इन्हें आर्द्र मानसून (Wett Monsoon) भी कहते हैं।

प्रश्न 48.
उत्तरी-पूर्वी मानसून हवाओं को पश्चिम बंगाल में शुष्क मानसून क्यों कहते हैं?
उत्तर :
समतल भाग से आने के कारण ये हवाएँ शुष्क होती है और इनसे पश्चिम बंगाल में वर्षा नहीं होती है। इसीसे इन्हें शुष्क मानसूनी (Dry Monsoon) भी कहते है।

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प्रश्न 49.
पश्चिम बंगाल के मनोरम जलवायु वाले पर्यटन स्थल का नाम लिखें।
उत्तर :
मनोरम जलवायु वाले पर्यटन केन्द्र दार्जिलिंग, कलिंगपोंग, कर्सियांग, मिरिक, सुकिया पोखरी- घूम बक्सा आदि हैं।

प्रश्न 50.
कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के जलवायु पर क्या प्रभाव डालता है?
उत्तर :
कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के मध्य से होकर गुजरने के कारण इसका उत्तरी भाग समशीतोष्ण कटिबंध तथा दक्षिणी भाग उत्ग कटिबंध में स्थित है।

प्रश्न 51.
पश्चिम बंगाल में वर्षा किस मानसून से होती है।
उत्तर :
पश्चिम बगाल में वर्षा बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होती है।

प्रश्न 52.
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक और सबसे कम वर्षा किस अंचल में होती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक वर्षा उत्तर में पर्वतीय अंचल में तथा सबसे कम वर्षा पश्चिम के पठारी भाग में होती है।

प्रश्न 53.
पश्चिम बंगाल में मानसून प्रत्यावर्तन किस महीने में होता है? उस समय यहाँ कौन-सा ऋतु रहता है?
उत्तर :
अक्टूबर एवं मध्य नवम्बर का समय पश्चिम बंगाल में मानसून प्रत्यावर्तन का समय है। इस समय यहाँ शरद ऋतु रहती है।

प्रश्न 55.
पश्चिम बंगाल में अधिकांश चाय के बगान किस जिले में है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के अधिकाश चाय बगान उत्तर के दो जिलों दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी में स्थित है।

प्रश्न 56.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक क्षेत्र में कितने इस्पात के कारखानें हैं?
उत्तर :
वर्तमान समय में पश्चिम बगाल में सार्वज़निक क्षेत्र के दो विशाल इस्पात के कारखाने स्थित है :-
(i) SAIL (Steel Authority of India Limited)
(ii) DSP (Durgapur Steel Plant)

प्रश्न 57.
भारत में पहला जूट उद्योग कब और कहाँ स्थापित हुआ था?
उत्तर :
भारत में पहला जूट उद्योग सन् 1855 ई० में हुगली नदी के किनारे रिसड़ा में स्थापित हुआ था।

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प्रश्न 58.
पश्चिम बंगाल में जूट की अधिकांश मिलें कहां स्थित हैं?
उत्तर :
यहां की समस्त जूट की मिले कोलकाता के समीप हुगली नदी के दोनों किनारों पर उत्तर में बॉसबेड़िया से दक्षिण में बिड़लापुर तक प्राय: 96 किलोमीटर तथा 4 किलोमीटर चौड़ी पट्टी में स्थित है।

प्रश्न 59.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख जूट उद्योग के फेन्द्रों कहाँ है?
उत्तर :
यहाँ के जूट उद्योग के प्रमुख केन्द्र बाली, आगरपाड़ा, टीटागढ़, रिसड़ा, श्रीरामपुर, श्यामनगर, नैहट्टी, कांकीनाड़ा, उलूबेड़िया, बजबज, कोन्नगर, हावड़ा एवं सलकिया आदि है।

प्रश्न 60.
पश्चिम बंगाल में तेल की मिले किन जिलों में स्थित हैं?
उत्तर :
बीरभूम, बर्द्धमान, हावड़ा, जलपाईगुड़ी, हुगली, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना जिलों में स्थित है।

प्रश्न 61.
काँच की वस्तुओं का निर्माण पश्चिम बंगाल में किन स्थानों पर होता है?
उत्तर :
बेलघरिया, बेलूड़, कोलकाता, रानीगंज एवं आसनसोल में होता है।

प्रश्न 62.
पश्चिम बंगाल में रासायनिक पदार्थों के कारखाने कहाँ स्थापित हैं?
उत्तर :
कोलकाता, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना, हावड़ा तथा हुगली जिलो मे स्थित हैं।

प्रश्न 63.
दार्जिलिंग को पहाड़ी स्थानों की रानी क्यों कहते हैं?
उत्तर :
टाइगर हिल से एवरेस्ट एवं कंचनजंगा की हिमाच्छादित चोटियों का मनोरम दृश्य तथा कचनजंगा पर उगते सूर्य को अलौकिक छटा दिखाई पड़ती है। प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण होने के कारण इसे पहाड़ी स्थानो की रानी कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
गर्मी के मौसम में लोग दार्जिलिंग क्यों जाते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय भाग की जलवायु मुख्यत: इस प्रदेश की ऊँचाई से प्रभावित है। समुद्र की सतह से लगभग 2440 मी० ऊँचाई पर स्थित इस भू-भाग की जलवायु शीत-प्रधान है।
गर्मी के दिनों में भी यहाँ ठंडक पड़ती है। मई-जून के महीने में यहाँ का औसत तापक्रम 15°-16° सेंन्टीग्रेड से अधिक नहीं जाता है। उस समय पश्चिम बंगाल के मैदानी भाग में औसत तापकम 30°-35° सेंटीग्रेड रहता है। तभी तो ग्रीष्म ऋतु की झुलसती धूप एवं गर्मी से राहत पाने एवं मनोरम जलवायु का आनन्द लेने के लिए कोलकाता लोग दार्जिलिंग घूमने के लिए जाने हैं।

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प्रश्न 2.
जाड़े में दार्जिलिंग के स्कूलें बन्द क्यों हो जाते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय भाग को जलवायु मुख्यत: इस प्रदेश की ऊँचाई से प्रभावित है। समुद्र की सतह से लगभग 2440 मी॰ ऊँचाई पर स्थित इस भू-भाग की जलवायु शीत-प्रधान है। गर्मी के दिनों में भी यहाँ उंडक पड़ती है। मई-जून के महोने में यहाँ का औसत तापक्रम 15°-16° सेन्टीग्मेड से अधिक नहीं जाता है। जाड़े की 1 का औसत तापमान 6° 7° सेण्टीग्रेड रहता है। जलवायु की इस कठोरता के कारण ही दार्जिलिंग के स्कूल दिसम्बर-जनवरी के जाडे में बन्द रहते हैं।

प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी पठारी भाग की जलवायु विषम क्यों है?
उत्तर :
यहाँ की जलवायु विषम इसलिए है कि पश्चिम बंगाल का यह भाग समुद्र से दूर है। इसका धरातल भी कड़ी चट्टानों से बना हुआ है। इसलिए यहाँ की जलवायु ना तो उत्तरी भाग की तरह ठण्डी है और ना ही दक्षिणी भाग की तरह सम है। यहाँ जाड़े में अधिक जाड़ा और गर्मी में अधिक गर्मी पड़ती है। इस क्षेत्र में गर्मी का औसत तापक्रम 30° C-40° C एवं जाड़े का 17° C रहता है।
वर्षा इस भाग में दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाओ से होती है। ये हवाएं गंगा के मैदान से होती हुई यहाँ पूरब से आती हैं। यहाँ तक आते-आतें अपनी नमी बहुत खो चुकी रहती हैं, इसलिए यहाँ वर्षा सबसे कम होती है। वर्षा का औसत 100 से०मी० से 125 से०मी० के बीच है।

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग की नदियों में वर्ष भर जल क्यों नहीं रहता है?
उत्तर :
छोटानागपुर के पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर मयूराक्षी, अजय, दामोदर, रूपनारायण, हल्दी, द्वारकेश्वर एवं सुवर्ण रेखा नदियाँ अपनी सहायक नदियों सहित प्रवाहित होती है। इस पठारी भाग का ढाल पश्चिम से पूर्व है, अतः पठारी भाग की नदियाँ पश्चिम से पूर्व को बहती है। सुवर्ण रेखा को छोड़कर सभी नदियाँ हुगली में मिल जाती हैं। नदियों का उद्गम स्थल हिमाच्छादित नहीं है और न तो यहाँ वर्षा ही अधिक होती है। इसलिए इन नदियों में वर्ष भर जल नहीं रहता है।

प्रश्न 5.
सुन्दरवन की नदियों के मुहाने चौड़ा क्यों हैं?
उत्तर :
इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ विद्याधरी, पियाली, राय मंगला, कालिन्दी, मातला, इच्छामती, सप्तमुखी, गोसाबा, हरियाभंगा आदि हैं। इनमें मातला सबसे प्रमुख नदी है। भूमि का ढाल दक्षिण को है। ये नदियाँ ज्वार आने पर जल से भर जाती हैं एवं भाटा आने पर सूख जाती हैं। ये ज्वारीय नदियाँ हैं। ये नदियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। निरन्तर अवसादों के जमाव से इन नदियों का उत्तरी भाग उथला है जबकि ज्वार के कारण दक्षिणी भाग चौड़ा एवं गहरा है। हुगली का मुँहाना 20 कि०मी० और मातला नदी का मुहाना 15 कि०मी० चौड़ा है।.

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल को जल की समस्या का सामना क्यों करना पड़ता है?
उत्तर :
बंगाल की 8 नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और बड़ी मात्रा में जलराशि लाती हैं। अधिकतर नदियों का जल का स्रोत मानसूनी वर्षा है जो मात्र तीन महीने होती है। जल का संरक्षण या भंडारण एक समस्या है क्योंकि अधिकतर नदियों के स्रोत पश्चिम बंगाल से बाहर सिक्किम या भूटान में है। पारिस्थितिकी और आर्थिक दृष्टिकोण से भी हिमालय के पर्वतीय भाग में जल का भंडार सम्भव नहीं है, अत: इन नदियों का पानी बिना किसी प्रतिरोध के बंगलादेश में चला जाता है। वर्षाजल-संग्मण द्वारा जल का संरक्षण किया जा सकता है, पर सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं अपनायो गयी है। इसलिए पश्चिम बंगाल को जल समस्या का सामना करना पड़ता है।

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प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल के उत्तर पर्वतीय भाग एवं पश्चिम के पठारी भाग की तुलना कीजिए।
उत्तर :

पर्वतीय भाग पठारी भाग
i. उत्तर का पर्वतीय भाग समुद्रतल से सामान्य ऊँचाई 3048 मी० पर है। i. पश्रिम का पठारी भाग समुद्रतल से सामान्य ऊँचाई 600 मी० पर है।
ii. यहाँ से बर्फ पोषित नदियाँ निकलती हैं। ii. यहाँ से वर्षा पोषित नदियाँ निकलती हैं।
iii. पर्वत की ऊँचाई पश्चिम से पूर्व की ओर घटने लगती है। iii. पठारी भाग की ऊँचाई पूर्व से पश्चिम की ओर है।
iv. पर्वतीय भाग में मूल्यवान वनस्पतियाँ पायी जाती हैं। iv. पठारी भाग प्राय: वनस्पतिविहीन है।
v. पर्वतीय भाग खनिजविहीन क्षेत्र हैं। v. यहाँ पर विभिन्न प्रकार के खनिज पाये जाते हैं।
vi. इसका महत्व चाय की कृषि के लिए है। vi. इसका महत्व कृषि के लिए नहीं है।

प्रश्न 8.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग एवं मैदानी भाग की तुलना कीजिए।
उत्तर :

पठारी भाग मैदानी भाग
i. इसकी सामान्य ऊँचाई समुद्र सतह से 600 मी० है। i. इस भू-भाग का धरातल समुद्र की सतह से 60 से 150 मी० ऊँचाई है।
ii. इसका सामान्य ढाल पश्चिम से पूरब की ओर है। ii. यह क्षेत्र उत्तर से दक्षिण क्रमशः ढालुआ है।
iii. इस भाग का धरातल ऊँचा-नीचा, ऊबड़-खाबड़ है। iii. नदियों की घटियों को छोड़कर शेष भाग समतल हैं।
iv. पठारी भाग की नदियाँ पश्चिम से पूर्व को बहती हैं। iv. इस भाग की नदियाँ दक्षिण-पूर्व को बहती है।

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प्रश्न 9.
दक्षिण-पश्चिमी मानसून एवं उत्तरी-पूर्वी मानसून की तुलना कीजिए।
उत्तर :

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून उत्तरी-पूर्वी मानसून
i. दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ गर्मी की दिनों में प्रवाहित होती हैं। i. उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएं जाड़े की दिनों में प्रवाहित होती हैं।
ii. ये मानसुनी हवाएं समुद्र से समतल की ओर चलती हैं। ii. ये मानसूनी हवाएं समतल से समुद्र की ओर चलती हैं।
iii. ये आर्द्र होती हैं। iii. ये शुष्क होते हैं
iv. ये हवाएं गर्मी तो कम कर देती है, पर वायु आर्द्रता के कारण उमस बढ़ा देती है। iv. ये हवाएँ जाड़े में शीत का प्रकोप बढ़ा देती है।

प्रश्न 10.
पशि चम बंगाल में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से वर्षा होती है। कारण स्पष्ट करो।
उत्तर :
देश के अन्य भागों की तरह गर्मी की मानसूनी हवाएं समुद्र से समतल की ओर चलती है। इन्हें दक्षिण-पश्चिमी मानसून या गर्मी का मानसून कहते हैं। पश्चिम बंगाल में जो मानसूनी हवाएं चलती हैं वे बंगाल की खाड़ी से निकलती हैं। यह हवा पश्चिम बंगाल में 15 जून को आती है और सितम्बर के अन्त तक रहती है। ये हवाएं हिन्द महासागर और बंगाल की खा ड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके आती हैं, अत: ये आर्द्र होती हैं, इसीलिए इन्हें आर्द्र मानसून भी कहा ज जाता है।

जब ये हवाएं पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में स्थित हिमालय से टकराती हैं तो प्रदेश में खूब वर्षा करती हैं। उत्तर. से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम जाने पर वर्षा की मात्रा घट जाती है। इन हवाओं से पर्वतीय भाग एवं तराई भाग में सर रधिक 300 से॰ मी॰ तथा दक्षिणी भाग में स्थित कोलकाता में 165 से॰मी॰ वर्षा होती है तथा पश्चिम के पठारी भाग में 100 से॰मी॰ वर्षा होती है।

प्रश्न 11.
पश्चिम बंगाल के पर्वतीय और तटीय क्षेत्रों के जलवायु का तुलनात्मक वर्णन करें।
उत्तर :

पर्वतीय जलवायु (Mountain Climate) तटीय जलवायु (Coastal Climate)
i. यहाँ औसत तापमान कम रहता है। i. इस भाग का औसत तापमान सामान्य रहता है।
ii. पर्वतीय भाग में जाड़े में हिमपात होता है। ii. तटीय प्रदेश में कभी भी हिमपात नहीं होता है।
iii. पर्वतीय भाग में ग्रीष्म काल में मौसम काफी सुहावना रहता है। iii. तटीय प्रदेश ग्रीष्म काल में काफी गर्मी पड़ती है।
iv. पर्वतीय भाग में जाड़े में अत्यधिक शीत तथा ग्रीष्म काल में सामान्य गर्मी पड़ती है, अतः यहाँ की जलवायु विषम है। iv. समुद्र तटीय प्रदेशों में न अधिक गर्मी और न अधिक ठंडी पड़ती है, अतः यहाँ की जलवायु सम है।
v. सबसे अधिक (500 cm) पर्वतीय भाग में वर्षा होती है v. तटीय प्रदेशों में सामान्य वर्षा (200 cm) होती है।

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प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल के डेल्टा क्षेत्र में खारी मिट्टी क्यों पाई जाती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के डेल्टा प्रदेश की नदियों में ज्वार के समय समुद्र का जल भर जाता है। समुद्र का जल नदियों के तटों के चारों ओर फैल जाता है। इसलिए डेल्टा प्रदेश की मिट्टी सदा गीली रहती है, और मिट्टी में खारेपन का अंश अधिक रहता है।

प्रश्न 13.
पश्चिम बंगाल के तीनों क्षेत्रों से प्रवाहित होनेवाली नदियों के नाम लिखें?
उत्तर :
उत्तर के पर्वतीय भाग की नदियाँ :- गंगा, भागीरथी, महानन्दा, बालसन, मेची, तिस्ता, तोरसा, जलढाका, रायढाका। पश्चिमी पठारी भाग की नदियाँ :- दामोदर, मयूराक्षी, ब्रह्याणी, अजय, द्वारकेश्वर, सिलाई, रूपनारायण, कंसाई एवं सुवर्ण रेखा।
दक्षिणी भाग की नदियाँ :- मातला, बरतला, सप्तमुखी, गोसाबा एवं हुगली।

प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल की बर्फ पोषित, वर्षा पोषित एवं ज्वार पोषित नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :

  1. बर्फ पोषित नदियाँ :- गंगा, भागीरथी, महानन्दा, बालसन, मेची, तिस्ता, तोरसा, जलढाका, रायगढ़ आदि हैं।
  2. वर्षा पोषित नदियाँ :- दामोदर, मयूराक्षी, ब्रह्माणी, अजय, द्वारकेश्वर, सिलाई, रूपनारायण, कसाई, सुकर्ण रेखा आदि हैं।
  3. ज्वार पोषित नदियाँ :- मातला, बरतला, सप्तमुखी, गोसाबा एवं हुगली आदि हैं।

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल के पूर्व की ओर बहनेवाली नदियों का नाम लिखें एवंवं उनका वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की पूर्ववाहिनी नदियाँ :- इस अंचल की प्रमुख नदियाँ हैं – दामोदर, द्वारकेशवर, सिलाई, कसावती, मयूराक्षी, अजय। ये सभी नदियाँ ढाल के अनुसार पश्चिम से पूरब की ओर बहती हैं। मयूराक्षी और अजय भागीरथी में जा मिलती हैं। द्वारकेश्वर और शिलाइ नदियाँ मिलकर रूपनारायण नदी कहलाती हैं। राढ़ मैदान का निर्माण इन्हीं नदियों के जलोढ़ से हुआ है। दामोदर इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है।

प्रश्न 16.
पश्चिम बंगाल के तराई क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर :
तराई प्रदेश की भू-प्रकृति (Topography of Terai Region) :- पश्चिम बंगाल के पर्वतीय भाग के दक्षिण में तराई प्रदेश एक पतली पट्टी के रूप में पश्चिम से पूर्व की ओर है। इसके अन्तर्गत दार्जिलिंग एवं जलपाइगुड़ी जिलों के दक्षिणी भाग तथा कूचबिहार का उत्तरी भाग सम्मिलित है। यह हिमालय का पर्वतपदीय क्षेत्र है। इस प्रदेश का ढाल उत्तर से दक्षिण की ओर इै। इस प्रदेश का ढाल अत्यन्त मंद है। अत: हिमालय से निकलने वाली नदियों का प्रवाह मन्द है और ये नदियाँ अपने साथ बहाकर लाये कंकड़ों, पत्थरों का जमाव यहाँ की है। इस प्रकार इस भू- भाग का निर्माण व ५कड़ों, पत्थर और बालू के कणों के जमाव से हुआ था। धरातल सामान्यतः ऊँचा – नीचा है। भूटान के प्रवेश मार्गों में पांच मा गर तराई क्षेत्र में पड़ते हैं अत: यह भू-भाग दुआर (Duar) कहा जाता है। इस प्रदेश को समुद्र तल से ऊँचाई 50 m से 150, n तक है।

प्रश्न 17.
पश्चिम-बंगाल के जलवायु की विशेषता का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के जलवायु की विशेषताएँ :-

  1. पश्चिम बंगाल की जलवायु ऊष्णार्द्र है।
  2. पश्चिम बंगाल में ग्रीष्म, वर्षा, शरद, एवं शीत ऋतुएँ क्रमागत आती है।
  3. मीष्म काल लम्बा एवं शीतकाल छोटा होता है।
  4. वर्षा दक्षिणी-पश्चिम मानसूनी हवाओ द्वारा ग्रीष्म काल में होती है।
  5. शीत ॠतु शुष्क होती है। इस समय उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएं चलती हैं।
  6. पूरब से पश्चिम की ओर तापमान बढ़ता जाता है जबकि दक्षिण से उत्तर की ओर तापमान घटता जाता है।
  7. समुद्र तटीय भाग में सम जलवायु तथा समुद्र से सुदूर पश्चिम पठारी भाग में विषम जलवायु पायी जाती है।
  8. पश्चिम बगाल में अपैल – मई महीनों में काल वेशाखी (Narwester) चलता है जिससे वर्षा होती है तथा मैदानी भागों में गर्मी से थोड़ा राहत मिलती है।
  9. पश्चिम बगाल के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु शीतल एवं नम है।

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प्रश्न 18.
पश्चिम बंगाल के पर्यटन केन्द्रों के नाम लिखें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पर्यटन केन्द्र (Tourist Sites) :- घुमक्कड़ी जिज्ञासा पश्चिम बंगाल पर ही चरितार्थ होती है। पर्यटन केन्द्र पश्चिम बंगाल के आकर्षक रहे हैं। संक्षेप में यहाँ के प्रमुख पर्यटन केन्द्र निम्न है :-

सुन्दरवन, सेटपाल चर्च, विक्टोरिया मेमोरियल, द्वितीय हुगली सेतु, दक्षिणेश्वर काली मंदिर, बी० बी० डी० बाग, बोटानिकल गार्डन, विष्युपर, शान्ति निकेतन, नेशनल लाइब्रेरी, चिड़ियाघर, साईन्स सिटी, नेशनल म्यूजियम, अदीना मंदिर, हजार दुआरी महल, बिड़ला मंदिर, निकोपार्क एवं हावड़ा ब्रिज आदि।

प्रश्न 19.
कोलकाता बंदरगाह के पोताश्रय का वर्णन करो।
उत्तर :
कलकत्ता एक कृत्रिम बन्दरगाह है, यहाँ डायमण्ड एवं खिदिरपुर में पोताश्रय बनाये गये हैं। यह एक नदी बन्दरगाह है, केवल ऊँच ज्वार के समय ही जलयान बन्दरगाह तक आते हैं। यहाँ दमदम में तेल का गोदाम बनाया गया है। इसके भार को कम करने के लिए हल्दिया को इसका सहायक बन्दरगाह के रूप में विकसित किया गया है। सुरक्षित पोताश्रय के कारण इस बन्दरगाह पर विशाल जलयान तुफानों से सुरक्षित खड़े रहते हैं। यहाँ अनेक डॉक्स तथा गोदाम भी बनाये गये हैं। हल्दिया में तेलशोधन कारखाना भो लगाया गया है।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल के हैण्डलूम एवं सिल्क टैक्सटाइल का वर्णन करें।
उत्तर :
स्थानीय मांग, सस्ते श्रमिक, रानीगंज एवं झरिया से कोयला, उन्नत यातायात व्यवस्था, कोलकाता बंदरगाह जिससे टेक्सटाइल मशीनें, रंग एवं रासायनिक पदार्थ लाया जाता है।
उपर्रुक्त सुविधाओं के कारण सूत्री वख्ख उद्योग श्रोरामपुर, गार्डेनरिच, रिसड़ा, कोन्नगर, फुलेश्वर, उलूबड़िया, सोदपुर, बेलघरिया, हावड़ा और लिलुआ आदि स्थानों पर विकसित हुआ है। ये सभी क्षेत्र हुगली नदी के तट पर स्थित हैं। 200304 में पश्चिम बंगाल में कुल उत्पादित यार्न 514.34 लाख किलोग्राम, मिल में बने कपड़े 721.43 लाख वर्ग मीटर और हैण्डलूम कपड़ा का उत्पादन 4,634 लाख वर्ग मीटर था।

प्रश्न 21.
पश्चिम बंगाल के सात आश्चर्य क्या हैं?
उत्तर :
पश्चिम बगाल के सात आश्चर्य निम्न हैं :-

  1. सुन्दरवन
  2. विक्टोरिया मेमोरियल
  3. दार्जिलिग (टवायट्रेन) एवं दार्शनिक दृष्य,
  4. विष्गुपुर टेरा-कोटा मंदिर
  5. बोटानिकल गार्डन
  6. हावड़ा बिज और
  7. बी० बी० डी० बाग।

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प्रश्न 22.
पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग के व्यापार का वर्णन करें।
उत्तर :
व्यापार (Trade) : चाय को कोलकाता चाय बाजार में निलाम (Auctioned) किया जाता है। यही से व्यापारी इसे खरीद कर पूरे देश मे व्यापार करते हैं। यहां पर निलामी बाजार पर भारतीय चाय बोर्ड (India Tea Board) का नियत्रण है। यहा से चाय कोलकाता बंदरगाह द्वारा बिटेन, अमेरिका, रूस, जर्मनो, यूकेन और पश्चिमी देशों को निर्यात की जाती है। भारत सरकार सन् 2005 में चाय के निर्यात से कुल 1133 करोड़ रुपये की कमाई की।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास के कारक क्या हैं ?
उत्तर :
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास के लिए आवश्यक कारक :-

  1. कच्चा खाद्य पदार्थ
  2. शक्तिसाधन
  3. स्वच्छ जल
  4. कुशल श्रमिक तथा इंजीनियरिंग
  5. यातायात के साधन
  6. पैकिंग तथा पैकेजिंग के उत्तम साथन
  7. उत्तम खुले मैदान
  8. नयी तकनीक तथा मशीन
  9. पूंजी, बाजार, घनी जनसंख्या, सामाजिक-सांस्कृतिक साथन।

प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल के सूती वस्त्र उद्योग की क्या समस्याएं हैं?
उत्तर :
समस्याएं (Problems ) :- पश्चिम बंगाल के सूती मिलों की निम्न समस्याएं हैं :-

  1. कच्चे माल की कमीयहां पर कपास उत्यादन लगभग बन्द हो गया है
  2. सिन्थेटिक कपड़ों से प्रतियोगिता
  3. प्रतिस्पधां-अन्तर्राष्ट्रीय बाजार जहाँ पर यहां के तैयार सूती कपड़ों की मांग नहीं है।
  4. कच्चे कपास की अत्यधिक वढ़ी कीमत एवं
  5. बिजली की कमी, श्रमिक आन्दोलन, पुरानी मशीनें आदि यहां पर सूती वस्रोद्योग से रूगण कर दिया है।

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प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग की समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग की समस्याएं :-

  1. कच्चे माल की कमी : सन् 1947 में देश विभाजन के परिणामस्वरूप अधिकांश जूट मिले भारत में रह गई परन्तु 70 प्रतिशत जूट उत्यादक क्षेत्र पाकिस्तान (बंगला देश) में चले गये। अतः कच्चे माल की कमी हो गई
  2. विदेशी प्रतिस्पर्धा : जूट उद्योग की वर्तमान समस्या में मलेशिया, फिलीपींस, बाजील, मिख्त आदि देशों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा है। यह देश बोरों के लिए कृत्रिम रेशे का उत्पादन कर रहे हैं।
  3. पुरानी मशीनें : हमारी समस्या पुरानी मशीनें हैं जिनका उत्पादन क्षमता कम है। अतः उत्पादन खर्च बढ़ जाता है।
  4. कारखानों का बन्द होना : पुरानी मशीनों और श्रमिक समस्या के कारण जूट उद्योग के लाभजनक न रहने के कारण अधिक मात्रा में जूट मिलें बन्द हैं अथवा बंद होने के कगार पर हैं।

प्रश्न 26.
पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग के विकास के लिए किये गये प्रयासों का वर्णन करें।
उत्तर :
जूट उद्योग की समस्याओं का समाधान

  1. पुरानो मशीनों को बदल कर नयी मशीने लगायी गयी हैं।
  2. मूल्य निर्धारण के लिए भारतीय जूट निगम की स्थापना
  3. भारतीय जूट उत्पादनों के विभिन्न साधनों द्वारा प्रचार।
  4. दामोदरघाटी में कच्चे माल जूट के उत्पादन द्वारा कच्चे माल की कमी दूर
  5. जूट उद्योग को संरक्षण।

प्रश्न 27.
धान के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें।
उत्तर :
धान के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions) वर्षा (Rain fall) :- धान के उत्पादन के लिए अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। वर्षा 150 cm-200 cm तक आश्यक है। इसकी रोपाई और विकास के समय भारी वर्षा चाहिए।
तापमन (Temperature) :- इसके उत्पादन के लिए तापमान 16° C-27° C के बीच आवश्यक है। औसत तापमान 22° C होना चाहिए।
मिट्टी (Soil) :- धान मुख्यत: जलोढ़ मिट्टी में उगाया जाता है। नदी घाटी की जलोढ़ मिट्टी और डेल्टाई प्रदेश धान उत्पादन के लिए उत्तम है।
भू-प्रकृति (Nature of Land) :- उपजाऊ समतल भूमि धान के उत्पादन के लिए आदर्श है। इससे जमीन पर पानी जमा रहता है और धान की फसल अच्छी होती है।
श्रमिक (Supply of Labours) :- धान की कृषि के लिए प्रचूर मात्रा में सस्ते श्रमिको की आवश्यकता पड़ती है। पूँजी की आवश्यकता (Supply of Capitals) :- धान एक रोपण कृषि है। वर्तमान समय में यह मुद्रा आधारित फसल हो गयी है।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं के प्रभाव का वर्णन करें।
उत्तर :
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी जलवायु का प्रभाव (Impact of South West Monsoon) : इन मानसूनी हवाओं द्वारा ग्रीष्म ऋतु में वर्षा होती है। दार्जिलिंग हिमालय की जलवायु अत्यन्त आरामदायक हो जाती है। यहां औसत तापमान 14° C-17° C तक रहता है। पर्वतीय भाग में वर्षा 300-400 से॰मी॰ तक होती है, जिससे कभी-कभी पहाड़ के घिसकने से मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं।

मैदानी भाग में 200-250 सेमी॰ तक वर्षा होती है। अत: इस समय बोरो धान की फसल वृहद पैमाने पर ऊगाई जाती है। पर्वतीय ढलानों में चाय का उत्पादन भी किया जाता है। यह समय जूट की कृषि के लिए पर्याप्त होती है अतः जूट की कृषि भी दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने पर ही किया जाता है।

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प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के भौगोलिक स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर :
स्थिति : पश्चिम बंगाल भारतवर्ष के पूर्वी भाग तथा एक अन्य स्वतंत्र राष्ट्र बंगलादेश के पश्चिमी सीमान्त पर स्थित है। इसका विस्तार पूर्व की ओर 89° C-50° C पूर्व देशान्तर से पश्चिम 85°-50° पूर्व देशान्तर तथा उत्तर में 27° 10 उत्तर अक्षांश से दक्षिण में 21°-38° उत्तर अक्षांश तक है। पश्चिम बंगाल के नदिया जिला के सदर शहर कृष्णनगर के ऊपर से पूर्व से पश्चिम की ओर कर्क रेखा गुजरती है।

प्रश्न 30.
पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम-बंगाल का प्रशासनिक विभाग (Administrative Division of West Bengal : पश्चिम बंगाल को बेहतर प्रशासन देने के लिए राज्य सरकार ने 19 जिलों को इसके कुल तीन प्रशासनिक विभागों में बांटा है – जलपाईगुड़ी प्रशासनिक विभाग, बर्द्धमान प्रशासनिक विभाग, प्रेसिडेन्सी प्रशासनिक विभाग।
प्रत्येक प्रशासनिक विभाग का एक विभागीय कमिश्नर (Divisional Commissions) अन्दर आने वाले जिले निम्न है।

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प्रश्न 31.
पश्चिम बंगाल के जल-संसाधन के उपयोग और अति उपयोग का वर्णन करें।
उत्तर :
दुनिया से स्वच्छ जल का तीव्र गति से खात्मा या कमी हो रहा है। आने वाले 25 वर्षों में विश्व का 2 / 3 जनसंख्या स्वच्छ पानी की कमी से जूझेगी।
पश्चिमी बंगाल में पूरे भारत वर्ष की 8 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती हैं पपश्चिम बंगाल में पूरे भारत का 7.5 प्रतिशत जल संसाधन है। अतः जनसंख्या में अनियमित वृद्धि के कारण यहाँ जल की समस्या बढ़ रही है। इसके लिए बढ़ती संचाई की मांग भी जिम्मेदार है। बंगाल डेल्टा जिसे अतिरिक्त जल का क्षेत्र माना जाता था वह पानी की कमी से प्रभावित होता है। इस प्रकार वर्षा की कमी एवं अधिकता से पश्चिम बंगाल सूखे और बाढ़ जैसे स्थिति से प्रभावित है। कोलकाता बंदरगाह सिल्ट के जमाव की समस्या से प्रभावित है। पश्चिम बंगाल की कई नदियां पिछले दो शताब्दियों से अपने मार्ग को बदल ली एवं उनमें से कई नदियां बिलुप्त भी हो गयी हैं।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल में जल के अत्यधिक उपयोग का वर्णन करो।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन के अपवत्य (अत्यधिक) उपयोग की विशेषता :-
पश्चिम बंगाल में उपलब्ध जल संसाधन असमान है। पश्चिम बंगाल में नहरों (Canals) का जाल विछा हुआ है। नहरों द्वारा पानी कृषि गत भूमि तक पहुँचाता है। पश्चिम बंगाल में सिंचाई प्रणाली सबसे ज्यादा जल का उपायेग करती हैं। यहां पर जल के उपयोग को निम्न तालिका द्वारा समझा जा सकता है।
पश्चिम बंगाल में जल की उपयोगिता :-

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प्रश्न 33.
पश्चिम बंगाल के तराई क्षेत्र की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
दार्जिलिंग के दक्षिण में हिमालय पर्वत ढालुआ होकर समतल भाग से मिल गया है। पर्वतीय भाग के नीचे की भूमि को तराई क्षेत्र कहा जाता है। यह पश्चिम से पूरब एक पतली पट्टी के रूप में विस्तृत है। इसके अन्तर्गत दार्लिलिंग और जलपाईगुड़ी के दक्षिणी भाग तथा कूचबिहार जिले का ऊपरी भाग आता है। यह हिमालय का पर्वत-पठारीय क्षेत्र (Foot hill) क्षेत्र है। यह क्षेत्र उत्तर से दक्षिण को ढालुआ है। भूमि का ढाल मन्द होने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियों का वेग इस क्षेत्र में मन्द पड़ जाता है।

अतः अपने द्वारा लाये गये कंकड़-पत्थर का ढेर वे यहाँ लगा देती है। अत: इस क्षेत्र का निर्माण हिमालय से निकलने वाली नदियों जैसे महानन्दा, तिस्ता, जलढाका, तोरसा, रायडक आदि ने किया है। सामान्य भूमि उबर-खाबड़ है। इस भाग को पार कर पहाड़ी नदियाँ मैदानी भाग में प्रवेश करती है। भूटान में प्रवेश के 5 मार्ग इसी क्षेत्र में है। इसी भाग को दुआर (Doors) भी कहा जाता है।

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प्रश्न 34.
सुन्दरवन के नदियों की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
दार्जिलिंग के दक्षिण में हिमालय पर्वत ढालुआ होकर समतल भाग से मिल गया है। पर्वतीय भाग के नीचे की भूमि को तराई क्षेत्र कहते हैं।

  1. सुन्दरवन की नदियाँ सक्रिय है, अत: वर्ष भर इनमें प्रवाह रहता है।
  2. ये पर्याप्त मात्रा में अवसाद जमा कर डेल्टा निर्माण करती हैं।
  3. इन नदियों का मुहाना चौड़ा है।
  4. ये नदियाँ ज्वारीय हैं। ज्वार के समय नदी का जल विपरीत धारा में बहने लगता है अत: इन नदियों में ज्वारीय भित्ति बनते हैं।
  5. इन नदियों का ऊपरी भाग उथला है, तथा दक्षिणी या निचला भाग ज्वार के पानी के बहाव के कारण गहरा है।
  6. इन नदियों का पानी समुद्री प्रभाव से खारा होता है

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र में अधिक वर्षा क्यों होती है?
उत्तर :
पश्चिम के पहाड़ी भागों में वर्षा समान नहीं है। कर्सियांग में वर्ष का औसत 400 से 425 सेमी० तथा कलिपोंग में 225 सेमी है, इस प्रकार से पर्वतीय, अंचल में अधिक वर्षा होती है। यहाँ वर्षा दक्षिणी – पश्चिमी मानसून से होती है। मानसूनी हवाए बंगाल की खाड़ी से आती है। अत: वाष्प पूर्ण होती है। ये पर्वतों से टकराकर अधिक वर्षा करती हैं।

प्रश्न 36.
पर्वतीय क्षेत्र की नदियाँ उत्तर से दक्षिण को बहती है क्यों ?
उत्तर :
पर्वतीय भाग का ढाल उत्तर से दक्षिण है। पानी अपने स्वभावानुसार ऊँचे स्थान से नीचे को बहती है। बंगाल का सबसे ऊँचा भाग हिमालय पर्वत है और भूमि का ढाल उत्तर से दक्षिण की ओर है। यही कारण है कि ढाल का अनुशरण करते हुए नदियाँ उत्तर से दक्षिण को बहती है।

प्रश्न 37.
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी पठारी भाग में कम वर्षा होती हैं क्यों?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग में वर्षा दक्षिण-पश्चिम के मानसूनी वायु से होती है। ये हवाएं गंगा के मैदान को पार कर पूरब की ओर से आती हैं। अत: यहाँ आते-आते इनमें भी नमी हो जाती है, इसलिए इस अंचल में वर्षा कम होती है। वर्षा का औसत इस क्षेत्र में 100 से 125 सेमी॰ है। यहाँ कोई ऊँचा पर्वत नहीं है जो भाप भरी हवाओ को रोककर वर्षा करा सके।

प्रश्न 38.
पश्चिम बंगाल के डेल्टा भाग में अधिक वर्षा होती है क्यों ?
उत्तर :
डेल्टा अंचल में वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है, अतः वर्षा दक्षिण में अधिक है तथा उत्तर में क्रमशः कम होती है। वार्षिक वर्षा 160 सेमी० है। जबकि उत्तर भाग में स्थित मुर्शिदाबाद में 118 सेमी॰ है। यही नहीं, औसत वर्षा कोलकाता में 71 दिन होती है, जबकि मुर्शिदाबाद में वर्षा 48 दिन होती है। समुद्र के समीपीय के कारण यह क्षेत्र प्राय: समुद्री तुफानों की तेज हवा और वृष्टि से प्रभावित रहता है।

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प्रश्न 39.
सुन्दरवन में जल का बहाव ठीक नहीं है, क्यों?
उत्तर :
गंगा मुलायम मिट्टी की अपार शीशा लाकर यहाँ जमा करती है। जमा करने की इस क्रिया में पेंदा उथला हो जाता है जिससे जल एक सोत में आसानी से नहीं बह पाती है, अत: नदी कई शाखाओं में विभक्त होकर समुद्र में गिरती है। मिट्टी के इस जमाव एवं नदियों के विभाजन से दक्षिणी भाग में कई छोटे-छोटे द्वीपों की रचना हो गयी है। सागर सबसे प्रमुख द्वीप है। इसकी मिट्टी में खारापन रहता है।

प्रश्न 40.
पर्यटक गर्मी में दार्जिलिंग आते हैं, क्यों?
उत्तर :
दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के हिमालय पर्वत पर बसा एक शहर है। यह 2600 मी० की ऊँचाई पर स्थित है। अत: गर्मी में यहां तापक्रम 15° C से अधिक नहीं हो पाता। गर्मी में मौसम सुहाना रहता है। जलवायु भी स्वास्थप्रद है। दार्जिलिंग के टाईगर हिल से सूर्योदय का मनोरम दृश्य दिखायी देता है। अतः गर्मी में मैदानो भाग की भोषण गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग दार्जिलिंग जाते हैं। यहाँ पर पर्यप्त उद्योग का विकास किया गया है। यह पश्चिम बंगाल की गर्मी की राजधानी है।

प्रश्न 41.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख नदियों का नाम लिखो एवं दामोदर नदी के अपवाह क्षेत्र का वर्णन करों।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की प्रमुख नदियाँ :- भागीरथी, हुगली, तिस्ता, महानन्दा, जलढाका, दामोदर, मयूराक्षी, अजय, रूपानारायण, सुवर्णरा, कंसावती, मातला, बरतला, सप्तमुखी एवं गोपसाबा है।
दामोदर नदी का प्रवाह क्षेत्र :- पश्चिम बंगाल यह एक प्रमुख नदी है। यह नदी झारखण्ड के पलामू जिले के रूपसट से निकलती है और बराकर के पस पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। इस नदी का प्रवाह अत्यन्त तेज है। वर्षा काल में ये यह उफान पर आ जाती है। दामोदर नदी उफान से प्रषाहत होने के कारण आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ लाती है इससे काफी धन जन की क्षति होती थो। इसीलिए इसे पशिचम बंगाल का शोक कहा जाता है। परन्तु दामोदर नदी परियोजना द्वारा इस नदी पर बांध बनाया गया। यह नदी 289 km का प्रवाह क्षेत्र तय करके पश्चिम बगाल में प्रवेश करती हैं। यह फलता के पास हुगली नदी में मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदी बराकर है।

प्रश्न 42.
पश्चिम बंगाल का नम मानसून और शुष्क मानसून में क्या अन्तर में।
उत्तर :

नम मानसून शुष्क मानसून
1. यह मानसून ग्रीष्म काल में समुद्र से चलता है। 1. यह मानसून शीतकाल में स्थल से चलता है।
2. यह हवा सामान्यत दक्षिण से उत्तर की ओर चलती है। 2. यह हवा उत्तर से दक्षिण को चलती है।
3. इस हवा से वर्षा होती है। 3. इस हवा से वर्षा नहीं होती है।

प्रश्न 43.
दार्जिलिंग में कोलकाता से अधिक वर्षा होती है, क्यों?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में वर्षा प्रीष्म काल में खाड़ी के दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से होती है। ये हवाएं सीधे उत्तर की ओर जाती है और हिमालय के पर्वतीय भाग से टकराकर ऊपर अधिक उठती है जिससे दार्जिलिंग में अधिक वर्षा होती है। कोलकाता के समीप पर्वत नहीं है। अत: मानसूनी हवाओं से कोलकाता में वर्षा कम होती है।

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प्रश्न 44.
पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु और तटीय क्षेत्र की जलवायु में अन्तर बताइए।
उत्तर :

पहाड़ी भाग की जलवायु तटीय भाग की जलवायु
1. यहाँ पर ऊँचाई के कारण तापमान कम रहता है। 1. यहाँ समुद्र की समीपता के कारण तापक्रम समान्य रहता है।
2. यहाँ जाड़े में हिमपात होता है। 2. समुद्र के प्रभाव से ठंडक पड़ती है।
3. यहाँ की जलवायु विषम जलवायु है। 3. यहां की जलवायु सम है।
4. पर्वतों से मानसूनी हवायें टकराकर अधिक वर्षा करती है। 4. पर्वतों के अभाव में अपेक्षाकृत कम की वर्षा होती है।

प्रश्न 45.
डेल्टा और एस्चुअरी में क्या अन्तर है ?
उत्तर :

डेल्टा एस्चुअरी
1. समुद्र में मिलते समय जब नदी कई उपनदियों में बँट जाती है और निक्षेपण क्षेत्र त्रिभुज के आकार का बन जाता है, तो उसे डेल्टा कहते हैं। 1. समुद्र में मिलते समय जब नदी एक धारा के रूप में बहती है और वित्तोरकाएँ नहीं बनाती तो उसे एस्चुअरी कहते हैं।
2. डेल्टा निम्न ज्वार वाले क्षेत्र तथा मैदानी (समुद्रतटीय) क्षेत्रों में बनते हैं। 2. एस्चुअरी उच्च ज्वार वाले क्षेत्रों और घाटी वाले क्षेत्रों में बनती है।
3. डेल्टा वाले क्षेत्र कृत्रिम जलपत्तन वाले होते हैं, परन्तु कृषि के लिए उपयुक्त होते हैं। 3. एस्चुअरी वाले क्षेत्र प्राकृतिक जलपत्तन के लिए उपर्युक्त क्षेत्र होते हैं।

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प्रश्न 46.
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर हिमालय पर्वत के प्रभाव का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर हिमालय पर्वत का प्रभाव :-

  1. आर्द्र ग्रीष्म ऋतु :- हिमालय पर्वत पश्चिम बंगाल के उत्तरी सीमा पर स्थित है। अतः हिन्द महासागर से आनेवाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को रोककर पूरे पश्चिम बंगाल में वर्षा कराती है।
  2. शुष्क शीत ऋतु :- हिमालय पर्वत की प्रभाव की एक अनोखी विशेषता यह है कि पूरा पश्चिम बंगाल शीत ॠतु में शुष्क रहता है क्योंकि जाड़े में पर्वतीय भाग उच्य वायु भार का क्षेत्र होता है। अतः हवाए उत्तर से दक्षण चलती है और पर्वतीय भाग में वर्षा नहीं होती है।
  3. अत्यधिक शीत से सुरक्षा :- उत्तरी साइबेरिया से आने वाली हवाएं अत्यधिक शीतल हाती है। हिमालय पर्वत उन शीतल हवाओं को रोककर पश्चिम बंगाल को अत्यधिक शीत से सुरक्षा करता है।
  4. वर्षा का प्रभाव :- मानसूनी हवाओं से पर्वतीय भाग में 300 cm-400 cm, मैदानी भाग में 200 cm एवं पश्चिम पठारी भाग में 150 cm तक वर्षा होती है। इस प्रकार वर्षा उत्तर से दक्षिण की ओर और पूर्व से पश्चिम की ओर कम होती जाती है।

प्रश्न 47.
तराई अंचल के पूर्वी भाग को दुआर क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
इस भाग का निर्माण हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों द्वारा लाए गए कंकड़ – पत्थर एवं बालू के कणों से हुआ है। सामान्यत: भूमि असमतल एवं उबड़-खाबड़ है। इसी प्रदेश को पार करके लगभग बारह नदिया दक्षिण के मैदानी भाग में प्रवेश करती हैं। भूटान के प्रवेश मारों में से पाँच मार्ग इसी भाग में स्थित हैं। इसी से इस भाग को दुआर कहते हैं।

प्रश्न 48.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल की प्रमुख नदियों के नाम लिखिए।
उत्तर :
पठार का ढाल पश्चिम से पूर्व की और है। अत: इस भाग में बहने वाली मयूराक्षी, अजय, दामोदर, द्वारकेश्वर एवं कंसाई (कंसावती) नदियाँ पश्चिम से पूरब की ओर बहती हैं। इनमें दामोदर सबसे बड़ी नदी है। वर्षा काल में इनमें भयकर बाढ़ आती है परन्तु गर्मी में ये सूख जाती हैं।

प्रश्न 49.
पठारी अंचल की नदियों को वर्षा पोषित नदी क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी पठारी भाग से निकलकर दामोदर, मयूराक्षी, अजय, रूपनारायण, हल्दी. स्वर्ण रेखा और द्वारकेश्वर आदि नदियाँ पश्चिम से पूर्व की और बहती हुई राढ़ प्रदेश को पार करके हुगली नदी से मिल जाती है। पाश्चिम भाग में ये नदियाँ अत्यन्त मंद गति से बहती हैं, परन्तु राढ़ प्रदेश के कारण ये धीमी गति से बहती है। इस भाग की नदियाँ वर्षा जल के सहारे बहती हैं। अत: इन्हे वर्षा जल पोषित नटियाँ कहने हैं। वर्षाकाल मे ये नदियाँ भयकर हो उठती है और उनमें विनाशकारी बाढ़े आ जाया करती हैं। गर्मी में ये सूख जाती है।

प्रश्न 50.
उत्तरी बंगाल की नदियाँ सदावाहिनी क्यों हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की उत्तरी भाग की नदियाँ हिमालय के हिमाच्छादित शिखरों में निकल कर उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई गंगा अथवा ब्रहमुत्र नदी से मिल जाती हैं। इन्हें वर्ष भर हिमालय पर्वत के वर्फ का पिघला हुआ जल मिलता रहता है। अत: ये नदियाँ सदावाहिनी हैं। इस प्रकार ये हिमपोषित नदिया हैं। इन नदियों में महानन्दा, तिस्ता, जलढ़ाका, तोरसा, रायडक, बड़ी रेगित, छोटी रंगित आदि मुख्य हैं। ये नदियाँ तीव्रवाहिनी हैं तथा गहरी घाटियाँ बनाती हैं।

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प्रश्न 51.
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन की उपलब्यता का विवरण दीजिए?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन की उपलब्धता :- पश्चिम बगाल के सिंचाई एवं जल-यातायात विभाग ने सन् 1987 ई० में यहाँ उपलब्ब जल ससाधन का मूल्यांकन किया। इस विभाग की विशेषज समिति ने 26 नदी घाटी का व्यापक खोज के बाद यह बतलाया कि राज्य में संभावित धरातलीय जल 13.29 मिलियन हेक्टेयर मीटर है जिसके केवल 40 प्रतिशत भाग का ही उपयोग किया जाता है। दूसरी तरफ उपलब्ध भौम जल 1.46 मिलियन हेक्टेयर मीटर है जो सम्पूर्ण रूप से उपयोग के योग्य है। केन्द्रीय भौम जल परिषद ने यहाँ उपलब्व भौम जल का अनुमान 1.76 मिलियन हेक्टेयर मीटर लगाया है जबकि भारत सरकार के सिंचाई आयोग का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में 2.38 मिलियन हेक्टेयर मीटर भौम जल की मात्रा है।

प्रश्न 52.
पश्चिम बंगाल के जलवायु की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के जलवायु की विशेषता

  1. पश्चिम बंगाल में उष्ण एवं आर्द्र मानसून जलवायु पायी जाती है।
  2. इस राज्य में मीष्म काल, वर्षा काल एवं शीतकाल – ये तीनों कतुएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है।
  3. इस राज्य में म्रीष्म ऋतु लम्बी होती है। जबकि शीत काल अपेक्षाकृत कम अवधि का होता है।
  4. अधिकांश वर्षा ग्रीष्मकाल में मानसून हवाओं से होती है। शीतकाल प्राय:शुष्क रहता है
  5. पश्चिम बंगाल में दक्षिण से उत्तर जाने पर तापक्रम तो घटता जाता है परन्तु वर्षा की मात्रा बढ़ती जाती है।
  6. पूर्व से पश्चिम जाने पर तापक्रम तो बढ़ता जाता है, परन्तु वर्षा की मात्रा कमश: घटती जाती है।
  7. ग्रीष्मकाल में चक्रवातोय वर्षा होने पर भीषण गर्मी में कमी आ जाती है।
  8. समुद्र की समीपता के कारण दक्षिण के तटीय भाग की जलवायु सम है। यहाँ गर्मी में साधारण गर्मी तथा जाड़े में साधारण जाड़ा पड़ता है।

प्रश्न 53.
दक्षिण-पक्षिम मानसूनी हवाओं को आर्द्र मानसून क्यों कहते हैं?
उत्तर :
भारत के अन्य भागों की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी गर्मी में दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती है। इन्हें गर्मी का मानसून भी कहते हैं। पशिचम बंगाल में गर्मी का मानसून का बंगल की खाड़ी की शाखा से पत्राहित होती है। यह हवा यहाँ 15 जून के लगभग प्रवेश करती है और सितम्बर माह तक रहती है। ये हवाएँ हिन्द महासागर एवं बंगाल की खाड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा तय करके आती है अत: ये वाष्प या आर्द्रता में परिपूर्ण होती है। इसी से इन्हें आर्द्र मानसून भी कहते हैं।

प्रश्न 54.
पश्चिम बंगाल में शीतकाल शुष्क क्यों रहती है?
उत्तर :
भारत के अधिकांश भागों की तरह पश्चिम बंगाल में भी जाड़े में उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएँ समतल से समुद्र की ओर चलती है। इन्हें उत्तरी पूर्वी मानसून कहते हैं। समतल भाग से आने के कारण ये हवाए शुष्क होती हैं और इनसे पश्चिम वंगाल में वर्षा नहीं होती है। इसी से इन्हें शुष्क मानसून भी कहते हैं। ये हवाएँ हिमालय के ठण्डे भाग से आती है। अतः इनसे गश्चिम बंगाल का तापक्रम काफी कम हो जाता है।

प्रश्न 55.
तराई अंचल में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन क्यों पाये जाते हैं?
उत्तर :
तराई प्रदेश में अधिक वर्षा होती है तथा कम ऊँचाई होने से अपेक्षाकृत उच्च तापकम रहता है, जिससे वहॉॉ ऊष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन पाये जाते हैं। इन वनों की पत्तियाँ चौड़ी होती है। इस भाग के प्रधान वृक्ष साल, सागौन एवं बाँस है। 2000 से 30000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं।

प्रश्न 56.
दुर्गापुर में इस्पात संयंत्र की स्थापना के क्या कारण हैं?
उत्तर :
यह बिटेन के सहयोग से पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान जिले में दुर्गापुर नामक स्थान पर बनाया गया है। यह स्थान दामोदर नदी के किनारे ग्रैण्ड ट्रक रोड पर कोलकाता से 176 किलोमीटर दूर स्थित है। इस कारखाने को झारखण्ड व उड़ीसा की नोआमुण्डी की खान से लौह-अयस्क मिल जाता है। रानीगंज से राऊरकेला इस्पात के कारखाने के लिए कोयला ले जाने वाले रेलवे के बैगन लौटते समय यहाँ के लिए खनिज लोहा ले आता है। रानीगंज तथा झरिया की खानों से कोयला प्राप्त होता है। इसका अपना कोयला होने का कारखाना है। हाथीबाड़ी तथा वीरमित्रपुर से चूना पत्थर, बीरोमित्रपुर (संबलपुर) से डोलोमाइट, उड़ीसा की बनाई क्षेत्र से मैंगनीज मिल जातां है। दामोदर नदी के दुर्गापुर बैरेज से आवश्यक जल प्राप्त होता है। यहाँ रेलवे के पहिये, धरियाँ, रेल की पटरियाँ ब्लैड आदि तैयार होते हैं। यहाँ प्रति वर्ष 7.76 लाख मीट्रिक टन इस्पात पिण्ड एवं 6.41 लाख मीट्रिक टन विक्रय योग्य इस्पात का उत्पादन किया जाता है।

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प्रश्न 57.
पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग को किन समस्याओं का समान करना पड़ रहा है?
उत्तर :
समस्याएँ :- पश्चिम बंगाल में सूती वरु उद्योग को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है :-
(i) कच्चे माल की कमी :- पूर्वी भारत में कपास का उत्पादन नहीं होने से पश्चिम बंगाल की सूती मिलों को स्थानीय रूप से कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ता है। आयतित कच्चे माल पर निर्भरता यहाँ की वस्त मिलों की प्रमुख समस्या है।
(ii) पुरानी मशीनें :- यहाँ स्थापित अधिकांश वस्र मिलों की मशीनें पुरानी एवं घिसी हुई हैं, जिनकी प्रति इकाई उत्पादन लागत अधिक तथा उत्पादन क्षमता कम है। अत: प्रतियोगिता बाजार में इन्हे कड़ीप्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रश्न 58.
पश्चिम बंगाल की अर्थ व्यवस्था में चाय उद्योग की क्या भूमिका है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की अर्थ व्यवस्था में चाय उद्योग की भूमिका :- पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था में चाय उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो निम्नलिखित हैं :-

  1. लाखों लोगों को रोजगार की प्राप्ति :- चाय के उत्पादन, रूपान्तरण तथ्था वितरण के क्षेत्र में चाय उद्योग में लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त है। उत्तर बंगाल के चाय बागानों में औसतन दैनिक मजदूरी 260 रुपये हैं।
  2. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति :- चाय पश्चिम बंगाल का प्रमुख निर्यातक पदार्थ है जिससे विदेशी मुत्रा की प्राप्ति होती है।
  3. कोलकाता बन्दरगाह भारत का सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन्दरगाह है। अत: चाय निर्यात से सम्बन्चित अनेक आर्थिक गतिविधियाँ, जैसे :- चाय का भंडारण एवं विपणन आदि विकसित है।
  4. बाजार की प्राप्ति :- कोलकाता भारत का सबसे बड़ा चाय बाजार है, अतः चाय सम्बन्धित व्यापारिक क्रियाकलापों का विकास हुआ है।
  5. अन्य उद्योगों का विकास :- चाय उद्योग के कारण इससे सम्बन्धित अन्य उद्योगों जैसे चाय पैकेजिंग के लकड़ी एवं गत्ते में बक्सों का निर्माण, चाय परिवहन ट्रैकिंग कम्पनियों आदि का विकास हुआ है।

प्रश्न 59.
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की समस्याएँ :-

  1. यहाँ प्रसंस्कारित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का स्तर ऊँचा नहीं है, अतः गुणवत्ता के सुधार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
  2. मध्यस्थों एवं दलालों की उपस्थिति के कारण कच्चे माल की कीमत एवं पूर्ति दोनो प्रभावित होती है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ता है।
  3. अधिकांश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कच्चे माल कृषि उपजों से प्राप्त होते हैं। कृषि उपजों के मौसमी होने के कारण वर्ष भर इनके उपलब्धता की निरन्तरता नहीं है।
  4. बाढ़, सूखा तथा फसलों में रोग लगने आदि कारणों से कृषि उत्पादन प्रभावित होते रहते हैं जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  5. इस उद्योग के क्षेत्र में अनुसंधान एव प्रशिक्षण का अभाव है।

प्रश्न 60.
सूचना प्रॉद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल के क्या लक्ष्य हैं?
उत्तर :
बंगाल का लक्ष्य :-

  1. IT, ITES तथा ESDM (Electronic System Design and Manufacturing) के क्षेत्र में सन् 2020 तक तीन अग्मणी राज्यों में अपना स्थान रखना।
  2. सन् 2020 तक भारत में कुल इलेक्ट्रानिक वस्तुओं के 15 प्रतिशत का उत्पादन करना।
  3. IT एवं TIES कम्पनियों द्वारा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करना जिससे इनकी सेवाओं का लाभ ग्रामीण लोगों को भी समान रूप से मिल सके।
  4. ESDM क्षेत्र में अतिदल एवं कुशल लोगों की संख्या का विस्तार करना। विभिन्न शिक्षण संस्थाओं द्वारा इस क्षेत्र में सन् 2020 तक प्रतिवर्ष 400 Ph.D शिक्षा प्राप्त छात्रों को उपलब्ध कराने के लक्ष्य हैं।
  5. ग्रामीण लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण योजनाएँ चलाना जिससे IT एवं TIES के क्षेत्र में उनको रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।

प्रश्न 61.
पश्चिम बंगाल के लघु एवं कूटीर उद्योगों का वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के लधु एवं कुटीर उद्योग :- स्थानीय रूप से कच्चे माल की उपलब्धता, घनी जनसंख्या माँग तथा सरकार की प्रोत्साहन ‘नीतियों’ के कारण पश्चिम बंगाल में विभिन्न प्रकार के लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास हुआ है। लाख निर्माण, मिट्टी के वर्त्तन एवं खिलौना का निर्माण, मूर्त्तियों का निर्माण, ताँबे एवं पीतल के बर्त्तनों का निर्माण, लकड़ियों पर खुदाई का काम, काँच की वस्तुओं का निर्माण, हथकरघा उद्योग, तेल पेरने की मिलें धान साफ करने की मिलों, लकड़ी चीरने का काम आदि पश्चिम बंगाल में विकसित लघु एवं कुटीर उद्योग हैं। यहाँ इन उद्योगों के प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित हैं :-

  1. तेल की मिलें :- बीरभूम, बर्द्धमान, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना जिलों में स्थित हैं।
  2. धान साफ करने की मिलें :- बर्द्धमान, बीरभूम, बाकुँड़ा, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना में पायी जाती है।
  3. काँच की वस्तुओं का निर्माण :- बेलघरिया, बेलूड़, कोलकाता, रानीगंज एवं आसनसोल में होता है।
  4. रसायनिक पदार्थ के कारखाने :- कोलकाता, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना, हावड़ा तथा हुगली में स्थित हैं।
  5. हथकरधा उद्योग के प्रमुख केन्द्र :- शान्तिपुर, शन्तिनिकेतन तथा धनियाखाली हैं।
  6. रेशमी कपड़ों, साड़ियों एवं चादरों का निर्माण :- मालदह मुर्शिदाबाद एवं बीरभूम जिलों में होता है।
  7. लाख उद्योग का विकास :- मालदह तथा बलरामपुर में हुआ है।

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विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी राज्यों का संक्षिप्त विवरण दिजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी राज्य :-
बिहार (Bihar) :- बिहार राज्य पश्चिम बंगाल के पश्चिम में स्थित है। प्रैण्ड ट्रंक रोड जैसी राष्ट्रीय सड़कों एवं पूर्व दक्षिण पूर्व रेल मार्गो द्वारा बिहार एवं पश्चिम बंगाल आपस में जुड़े हुए हैं। बिहार की राजधानी पटना वायुमार्ग द्वारा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से जुड़ी हुई है। बिहार के बहुत से लोग पश्चिम बंगाल में रहकर जीविकोपार्जन करते हैं।

झारखण्ड (Jharkhand) :- (या बनांचल) राज्य का गठन 15 नवम्बर सन् 2000 को भारत के 28 वें राज्य के रूप में हुआ। यह भारत का संबसे नया राजय है। यह राज्य पश्चिम बंगाल राज्य के पश्चिम में है। ग्रैण्ड ट्रैंक रोड जैसी राष्ट्रीय सड़कों से दक्षिण-पूर्व रेल मार्गों द्वारा झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल राज्य आपस में जुड़े हुए हैं। झारखण्ड की राजधानी तथा मुख्य नगर राँची वायुमार्ग द्वारा पशिचम बंगाल की राजधानी कोलकाता से जुड़ी हुई है।

उड़ीसा (Orissa) :- उड़ीसा राज्य पश्चिम बंगाल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। बम्बई रोड इस राज्य को पश्चिम बंगाल से जोड़ती है। इस राज्य की राजधानी भुनेश्वर का कोलकाता से वायुमार्ग द्वारा संबंध है। उड़ीसा का खनिज प्रदेश पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है। अतः पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्रों को यहाँ के खनिज पदार्थ प्राप्त होते हैं।

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असम (Assam) :- असम राज्य पश्चिम बंगाल के उत्तरी-पूर्वी भाग में स्थित है। 31 नं० राजमार्ग उत्तर-पूर्व रेलवे तथा बह्मपुत्र नदी द्वारा असम एबं पशिचम बंगाल राज्यों के बीच यातायात होता है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता एवं असम के गौहांटी के बीच हंवाई मार्ग द्वारा सम्बन्ध स्थापित है। असम राज्य का सम्पूर्ण व्यापार पश्चिम बंगाल राज्य से ही होकर होता है। दिसपुर असम राज्य की राजधानी है।

सिक्किम (Sikkim) :- सिक्किम राज्य पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित है। यह पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले की उत्तरी सीमा पर स्थित एक पर्वतीय राज्य है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 A द्वारा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से सिक्किम की राजधानी गंगटोंक तक जाया जा सकता है। विदेशों से किसी भी वस्तु को मँगाने के लिए सिक्किम को उसे कोलकाता बन्दरगाह से ही मँगाना पड़ता है। सिक्किम में तैयार की गयी वस्तुओं का सबसे बड़ा ग्राहक कोलकाता में है।

त्रिपुरा (Tripura) :- पशिचम बंगाल के पूर्व में स्थित बंगलादेश के भी पूर्व में त्रिपुरा राज्य स्थित है। पश्चिम बंगाल की सीमाओं से काफी दूर होने पर भी यह अनेक बातों में पश्चिम बंगाल से मिलता-जुलता है। दोनों राज्यों की मुख्य भाषा बंगला है। दोनों राज्यों की शिक्षा व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम एक समान है। इस राज्य में एक भी विश्वविद्यालय नहीं है। यहाँ के कॉलेज कोलकता विश्वविद्यालय से सम्बन्धित हैं। अगरतल्ला त्रिपुरा की राजधानी एवं प्रमुख व्यापार केन्द्र है।

प्रश्न 2.
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी देश कौन-कौन हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी देश :
नेपाल (Nepal) :- पश्चिम बंगाल की उत्तरी सीमा से सटे हिमालय की गोद में स्थित नेपाल एक स्वतंत्र देश है। नेपाल एक पर्वतीय देश है। हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी महान हिमालय इसकी उत्तरी सीमा बनाती है। नेपाल की प्राकृतिक दशाएँ उत्तर बंगाल के दार्जिलिग एवं जलपाईगुड़ी जिलों के ही समान हैं। नेपाल चारों ओर से स्थल से घिरा हुआ है, अतः इसका सम्पूर्ण विदेशी व्यापार पश्चिम बगाल के कोलकाता एवं हल्दिया बन्दरगाहों से ही होता है। नेपाल व पश्चिम बंगाल के बीच सड़क मार्ग द्वारा व्यापार होता है। कोलकाता एवं काठमाण्डु के बीच वायु यातायात की भी सुविधा है। काठमाण्डु नेपाल की राजधानी, प्रमुख व्यापारिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र है।

भूटान (Bhutan) :- भूटान भारत का मित्र राष्ट्र है, जो पश्चिम बगाल के उत्तर-पूर्व में हिमालय के पर्वतोय भाग में स्थित है। भूटान की भौगोलिक दशाएँ पश्चिम बगाल के दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी जिलों की भौतिक दशाओ से मिती है। नेपाल की ही तरह भूटान भी चारों ओर समतल से घिरा हुआ है, अत: भूटान का अधिकांश विदेशी व्यापार पश्चिम बंगाल के कोलकाता एवं हल्दिया बन्दरगाहों द्वारा किया जाता है। भूटान की सुरक्षा का सम्पूर्ण भार भारत पर है है। इस प्रकार भूटान भारत द्वारा संरक्षित राज्य है। थिम्कू भूटान की राजधानी व प्रमुख नगर है।

बंगलादेश (Bangladesh) :- भारत तथा पश्चिम बगाल के पूर्व में स्थित बंगलादेश भारत का निकटतम पड़ोसी देश है। पहले यह भारत का अभिन्न अंग था। 15 अगस्त 1947 में भारत-पाक विभाजन के समय यह पाकिस्तान में चला गया। फलस्वरूप यह पूर्वी पाकिस्तान का अंग बना। परन्तु एक लम्बे समय तक चले युद्ध के बाद 16 दिसम्बर 1971 को यह बंगलादेश के नाम से एक स्वाधीन प्रभुसत्ता सम्पन्न राष्ट्र बन गया।

बंगलादेश व पश्चिम बंगाल की भौगोलिक दशा, भाषा व संस्कृति समान है। दोनों देशों के निवासियों की भागा बंगला है। दोनों देशों के बीच नदी, समुद्र तथा वायु मार्ग से व्यापार होता है। ढाका बंगलादेश की प्रमुख नगर, राजधानी, च्यपारिक केन्द्र एवं राजनीतिक नगर है।

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प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी पर्वतीय अंचल एवं पश्चिम पठारी अंचल की भौतिक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
उत्तर में हिमालय का पर्वतीय भाग :- यह भाग राज्य के ठीक उत्तरी भाग में दर्जिलिग तथा जल लाइगुड़ी जिलों के उत्तरी भाग में फैला हुआ है। यहाँ मध्य या लघु हिमलाय की पूर्वी श्रेणियाँ फैली है। इस भाग की प्रमुख नदी तिस्ता है, जो गहरी घाटी (Gorge) बनाती हुई उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। यह नदी इस पर्वनीय भाग को दो भागों में विभक्त करती है। तिस्ता के पश्चिमी भाग में तिब्बत और नेपाल की सीमा पर सिंगलोला पर्वत है, जिसकी प्रमुख शिखरें फालदू (3,595 मीटर) एवं टांगलू (3,610 मीटर) हैं। संदाकफू (3,543 मीटर) पश्चिम बंगाल की संखे ऊँची चोटी है। पूर्व की ओर पर्वत की ऊँचाई घटती जाती है और वह पहाड़ियों (Hills) का रूप धारण कर लेती है।

इनमें किलगपंग की पहाड़ियाँ 1,000 से 1,500 मीटर ऊँची है। सिंगलीला एव कालिंगपोंग के बीच दार्जिलिंग शहर के दक्षिण 2,567 मीटर ऊँची टाइगर हिल (Tiger Hills) नामक पहाड़ी है। इसी पर दार्जिलिंग नगर स्थित है। दार्जीलग नगर से टाइगार हिल का प्रात: काल या सूर्योदय का दृश्य बड़ा ही मनोहर दिखाई पड़ता है। दक्षिण में घूम (Ghoom) तथा कर्सियांग की पहाड़यों हैं। यहीं पर विश्व की सबसे ऊँचाई पर स्थित घूम रेलवे स्टेशन (ऊँचाई 2,260 मीटर) है। इस क्षेत्र मे खड़े ढाल, नुकीले कगार तथा सँकरी गहरी घाटियाँ मिलती हैं। तिस्ता के पूर्व में काला श्रेणी हैं। जिसकी सबसे ऊँचो चोटी श्वृगलिला (3,140 मीटर) है। दक्षिण भाग में शिवालिक हिमालय या उपहिमालय की पर्वत श्रेणियाँ हैं।

पश्चिम का पठारी भाग :- पश्चिम बगाल का पश्चिमी भाग पठारी है जो झारखण्ड के कोटानागपुर के पठार का पूर्वी अग्रभाग है। इस भाग में पुरुलिया जिले का सम्पूर्ण भाग तथा वीरभूम, बर्द्धमान, बाँकुड़ा तथा पश्चनी मिदनापुर जिलों के पश्चिमी भाग पड़ते हैं। यह पठार पुरानी तथा कठोर चट्टानों से बना है जिसकी औसत ऊँचाई 600 मीटर है। विखण्डन (Weathering) तथा अपक्षरण (Erosion) के कारण यह पठार काफी नीचा तथा उबड़-खाबड़ हो गया है। सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर एवं बीच-बीच में कम ऊँची पहाड़ियाँ मिलती है। सबसे ऊँचा भाग गुरुलिया जिले के दक्षिणपश्चिम में कंसावती एव सुवर्णरिखा नदियों के बीच स्थित पहाड़ी (Agodhya Hill) है, जिसकी सबसे ऊँची चोटी गोरगाबृरू (677) मीटर है।

इसी भाग में बाघमुण्डी एवं बानस की पहाड़ियाँ हैं। पुरुलिया जिले के उत्तरी भाग में पचेत (643 मीटर) एवं मैशन पहाड़ियाँ हैं। पूर्व की ओर का भाग समतल मैदान से मिल गया है। नदियों के मध्यवर्ती भूखण्ड कुछ्छ ऊँचे है और पहाड़ी की तरह दिखाई पड़ते हैं। इनमें बाँकुड़ा का शिशुनिया (440 मीटर), वीरभूम की माथुरखाली, मिदनापुर की बेल पहाड़ी तथा उकुरान की पहाड़ियाँ मुख्य हैं। भूमि में लोहे का अंश अधिक होने के कारण यहाँ लाल रंग की लेटराइद्द मिट्टी मिलती है

पठार का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। अत: इस भाग में बहने वाली मयूराक्षी, अजय, दामोदर, द्वारकेश्वर एवं कसाई (कंसावती) नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। इनमें दामोदर सबसे बड़ी है। वर्षा काल में इनमें भयकर वाढ़े आती है परन्तु गर्मी में सुख जाती है।

प्रश्न 4.
पंश्चिम बंगाल के समतल मैदान को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है? प्रत्येक भागों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गंगा-भागीरथी की समतल भूमि:- उत्तर में हिमालय के पर्वतीय भाग के दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक तथा पश्चिम में पश्चिमी पठारी भाग से लेकर पूर्व में बंगलादेश तक फैले हुए भाग में पश्चिम बंगाल का मैदानी भाग विस्तृत है। यह भाग नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बना है। भूमि का ढाल अत्यत मन्द है। इस समतल मैदान को पाँच भागों में विभक्त किया जा सकता है –

  • तराई प्रदेश
  • उत्तरी मैदान
  • राढ़ अचल
  • गगा का डेल्टा
  • सन्दरवन की नीची भूमि
  • मिदनापुर का बालू तटीय मैदान।

तराई प्रदेश :- हिमालय के पर्वतीय भाग के दक्षिण तराई प्रदेश पश्चिम से पूर्व तक पतली पट्टी के रूप में स्थित है। इसमें दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी जिलों के दक्षिणी भाग तथा कूचबिहार जिले का उत्तरी भाग सम्मिलित है। यह हिमालय का पर्वतपदीप (Foot Hill) क्षेत्र है। यह प्रदेश उत्तर से दक्षिण की ओर कमश: ढाल होता गया है। भूमि का ढाल अचानक मन्द हो जाने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियों का वेग इस भाग में अचानक मंद हो जाता है।

अत: इस प्रदेश की नदियाँ अपने साथ लाए हुए कंकड़-पत्थर को जमा कर देती है। इस प्रकार इस भाग का निर्माण हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों द्वारा लाए गए कंकड़-पत्थर एवं बालू के कणों से हुआ है। सामान्यत: भूमि असमतल एवं उबड़खाबड़ है। इसी प्रदेश को पार करके लगभग बारह नदियाँ दक्षिण के मैदानी भाग में प्रवेश करती हैं। भूटान के प्रवेश भागों में से पाँच मार्ग इसी भाग में स्थित है। इसी से इस भाग को दुआर (Door) भी कहते हैं।

उत्तरी मैदान : यह मैदान पश्चिम बंगाल के उत्तर में तराई प्रदेश से दक्षिण में गंगा नदी तक फैला है। इस मैदान के अंतर्गत कूचबिहार जिले का दक्षिणी भाग, पश्चिमी दिनाजपुर एवं मालदह जिले आते हैं। इस मैदान का निर्माण हिमालय पर्वत से निकलने वाली महानन्दा, तिस्ता, जलढाका तोरसा एवं पुनर्भवा आदि नदियों द्वारा लाई गयी मिट्टी से हुआ है। ऊपरी भाग की मिट्टी कंकड़ोली-पथरीली है, जबकि दक्षिणी भाग मुलायम मिट्टी से बना हुआ समतल व निम्न मैदान है।

पूर्वी भाग में गंगा-यमुना (बह्यपुत्र) के बीच पश्चिमी दिनाजपुर के दक्षिणी भाग तथा मालदह जिले में पुरानी जलोढ़ (Old Alluvium) से बना हुआ मैदान है। इसे बारिन्द्र का मैदान (Barindra Plain) कहते हैं।
मालदह जिले में कालिन्दी नदी के बाढ़ का जल फैल जाने के कारण स्थान-स्थान पर पानी से भरे गड्दु बन गये हैं जिन्हें ताल (Tal) कहते हैं। इस भाग को ताल प्रदेश भी कहते हैं।

राढ़ प्रदेश :- गंगा नदी के दक्षिण- पश्चिम के पठारी भाग तथा पूर्व में डेल्टाई भाग के बीच राढ़ प्रदेश प्रायः उत्तर से दक्षिण में स्थित है। इस प्रदेश में मुख्य रूप से बीरभूम, बर्द्धमान एवं बाँकुड़ा जिलों के पूर्वी भग एवं मेदिनीपुर जिले का पश्चिमी भाग सम्मिलित है। यह एक प्राचीन जलोढ़ मैदान है, जिसका निर्माण छोटानागपुर के पठार से निकलने वाली नदियों द्वारा पठार से बहाकर लगाई गयी लाल मिट्टी के जमा होने से हुआ है। यहाँ की भू-प्रकृति में पश्चिम के पठारी भाग तथा पूर्व के डेल्टाई भाग के बीच की अवस्था मिलती हैं। इसकी ऊँचाई सागर-तल से 30 से 50 मीटर तक है।

इस प्रदेश का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। राढ़ प्रदेश के पश्चिमी भाग में कुछ टीले पाये जाते हैं। परन्तु पूर्वी भाग समतल है। ‘राढ़’ शब्द संथाली भाषा के ‘राढ़’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है ‘पथरीली भूमि’। दामोदर नदी इस प्रदेश के मध्य से बहती है। मयूराक्षी (मोर), अजय, द्वारकेश्वर, सिलाइ एवं कंसावती पशिचम से पूर्व की ओर बहने वाली अन्य नदियाँ हैं। यहाँ की लाल मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता है। अत: यह भाग धान की कृषि के लिए काफी उपर्युक्त है।

गंगा का डेल्टा :- गंगा नदी के दक्षिण-पश्चिम में राढ़ प्रदेश से पूर्व में बंगलादेश तक विस्तृत त्रिभुजाकार क्षेत्रों को गंगा का डेल्टा कहते हैं। यह भाग गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई नवीन जलोढ़ से बना समतल एवं निम्न मैदान है। भूमि का ढाल अत्यंत मन्द होने के कारण यहाँ नदी अत्यंत धीमी गति से बहती है। अत: नदी अपने साथ लाई गई मिट्टी को अपने मुहाने पर जमा कर देती है, जिससे डेल्टा का आकार बढ़ता जाता है और नदी कई धाराओं एवं उपधाराओं में बँटकर बहने लगती है।

भागीरथी या हुगली मुख्य नदी है। गंगा की प्रमुख शाखा नदियाँ जालंगी, इच्छामती, भैरवा, विद्याधरी और कालिन्दी हैं। नदी के तटवर्ती भागों में वर्षा ॠतु के बाढ़ के जल से मग्न निम्न भूमि को बिल (Bill) कहते हैं। नदियों के वक्र गति से बहने के कारण दक्षिणी भाग में कई धनुषाकार की बन गयी है। ढाल उत्तर से दक्षिण है, अत: अधिकांश नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हैं।

सुन्दरवन की नीची भूमि :- यह गंगा के डेल्टा का ही सुदुर दक्षिणी भाग हैं परन्तु इस भाग में समुद्र के ज्वार का खारा पानी पहुँच जाता है। इस प्रकार यह एक निम्न, नमकीन एवं दलदली भाग है। इस भाग में प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा नवीन मिट्टी जमा होती रहती है। यह भाग मैंग्रोव जाति के वनों से भरा पड़ा है। सुन्दरी नामक वृक्षों की अधिकता के कारण इस भाग को सुन्दरवन कहते हैं।

मिदनापुर का बालू तटीय मैदान :- यह भाग हल्दी नदी के मुहाने से उड़ीसा के सुवर्ण रेखा नदी के मुहाने तक विस्तृत है। सामान्यत: इसकी चौड़ाई 15 किलोमीटर है। यह भाग सुन्दरवन क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम भाग में मिदनापुर जिलों के तटीय भाग में स्थित है। नदियो द्वारा जमा की गई रेत एवं समुद्री वायु द्वारा बालू के असंख्य टीले बन गये हैं। इन टीलों की ऊँचाई 10 मीटर तक है। ये बालू के टीले समुद्र तल के समानान्तर तट से लगभग 10 किलोमीटर तक की दूरी में स्थित है। यहाँ की मिट्टी रेतीली एवं अनुपजाऊ है। दीघा के निकट समुद्री कटाव देखा जाता है, परन्तु अन्यत्र वहाँ की भूमि समुद्र की ओर बढ़ रही है।

निर्माण के ढंग के आधार पर गंगा के डेल्टा को निम्नलिखित 4 भागों में बाँटा जा सकता है।

  1. उत्तर का मृतप्राय डेल्टा (Moribund Delta)
  2. मध्य का परिपक्व डेल्टा (Mature Delta)
  3. सुन्दरवन का सक्रिय डेल्टा (Active Delta) और
  4. मिदनापुर का बालू तटीय मैदान (Sandy Coastal Plain)

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प्रश्न 5.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग की नदियों का संक्षिप्त विवरण दिजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग की नदियाँ हिमालय के हिमाच्छादित शिखरों से निकलकर उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई पद्या अथवा ब्रह्मपुत्र नदी से मिल जाती है। इन्हे वर्ष भर हिमालय पर्वत के बर्फ का पिघला हुआ जल मिलता रहता है। अत: ये नदियाँ सदावाहिनीं हैं। इस प्रकार ये हिमपोषित नदियाँ (Snow-Fed Rivers) हैं। इन नदियों में महानन्दा तिस्ता, जलढाका, तोस्ता, रायडक, संकोष, अन्नाई, रंगित छोटी एवं रंगित बड़ी आदि मुख्य हैं। ये नदियाँ तीव्रवाहिनी है तथा गहरी घाटियाँ बनाती हैं।

महानन्दा नदी :- दार्जिलिंग जिले की घूम श्रेणी की महालघिराम शिखर से निकलकर पहले यह नदी दार्जिलिंग जिले में बहती है। पुन: कुछ दूर बिहार राज्य में बहने के बाद मालदह जिले से पुन: इस राज्य में आती है। लालगोला के पास यह पद्या से मिल जाती है। नागर एवं पुनर्भवा इसकी सहायक नदियाँ हैं।

तिस्ता नदी :- यह उत्तरी बंगाल की सबसे बड़ी नदी है। यह सिक्किम के जेमू हिमनद से निकलकर पश्चिम बगाल क दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी तथा कूचबिहार जिलों में बहती हुई बंगलादेश में बह्यपुत्र (यमुना) नदी से मिल जाती है। इस नदी में प्रायः प्रतिवर्ष वर्षाकाल में बाढ़ आती है। इस नदी पर तिस्ता बैरेज योजना कार्यन्वित की गई है जिसका उद्देश्य बाढ़ नियत्रफ। करना, सिंचाई करना एवं जलविद्युत का उत्पादन करना है। रंगित नदी तिस्ता की प्रमुख सहायक नदी है।

जलढाका नदी :- यह नदी सिक्किम एवं भूटान की सीमा पर स्थित विदंग झील से निकलकर जलपाईगुड़ी एवं कूचबिहार जिलों में बहती हुई बंगलादेश में प्रवेश करती है। यह हिमालय की तराई से निकलकर कुछ दूर दार्जिलिंग एवं दक्षिण दिनाजपुर जिलों में बहती हुई बंगलादेश में बह्यपुत्र नदी से मिल जाती है।

इनके अतिरिक्त तोरसा एवं रायडक नदियाँ हिमालय की तराई से निकलकर कुछ दूर तक पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में बहती है। पुन: बंगलादेश में प्रवेश करके बह्मपुत्र नदी में मिल जाती है।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल में जलभंडारण एवं संरक्षण की समस्या के बारे में लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जल भंडारण एवं संरक्षण की समस्या (Problem of water reserve and conseration in West Bengal) :- पश्चिम बंगाल तीन प्रमुख भौगोलिक इकाईयों में विभाजित है। उत्तर बंगाल, भागीरथी-हुगली के पश्चिम में स्थित राढ़ प्रदेश तथा भागीरथी-हुगली के पूर्व का मैदान। यहाँ के सम्पूर्ण जलसंसाधन का 63 प्रतिशत उत्तर बंगाल की बाढ़नदी घाटियों में, 22 प्रतिशत राढ़पदेश में तथा 15 प्रतिशत पूर्वी मैदान में वितरित है।

उत्तर बंगाल की नदियाँ हिमालय से निकलती हैं तथा इनमें से अधिकांश दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए बंगलादेश में चली जाती है। वैसे तो ये नदियाँ सदावाहिनी हैं परन्तु मानसून काल में पर्वतीय अंचल में अत्यधिक वर्षा के कारण इनमें जल की मात्रा काफी अधिक हो जती है। इन नदियों के जल सरक्षण एवं भंडारण की उचित व्यवस्था करके पश्चिम बंगाल में जल की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है, परन्तु इनमे से अधिकांश नदियों के उद्गम स्थल भारत की राजनैतिक सीमा से बाहर सिक्किम एवं भूटान में है, अत: इनके जल के भंडारण में अन्तर्राष्ट्रीय समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है।

दूसरी तरफ इनमें तीव्र प्रवाह एवं जल में अवसादों की अधिक मात्रा के कारण इन पर बाँघों के निर्माण से परिस्थितिकोय एवं आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यहाँ वर्षा के जल के एकत्रीकरण एवं प्रबन्धन की भी कोई उचित व्यवस्था नही है, जिससे इन नदियों में अक्सर बाढ़ आती रहती है। बाढ़ के नियंत्रण के लिए उत्तर बंगाल नदी प्रबन्धन परिषद् (North Bengal River Management Board) की स्थापना की गयी है। दक्षिण बंगाल में जल संग्रह के उद्देश्य से बनाए गए जलाशय राज्य के पश्चिमी सीमा के पास स्थित हैं या निकटवर्ती झारखण्ड राज्य की सीमा में स्थित हैं। दामोदर घाटी निगम के बाँघ, मैसेंजोर और कंसावती आदि जलाशयों की अवसादी के लगातार जमाव के कारण जल संग्रह की क्षमता कम हो गयी है। ये जलाशय कृषि क्षेत्र में जल के कुल माँग का केवल 2.44 प्रतिशत ही उपलब्ष कर सकते हैं।

हरित क्रान्ति के बाद कृषि में उन्नत बीजों एवं खादों के प्रयोग से कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए जल की आवश्यकता बढ़ गयी, अत: 1970 के बाद पश्चिम बंगाल में भौम जल का दोहन बहुत अधिक होने लगा है। वर्तमान समय में यहाँ कृषि में सिंचाई के लिए 80.60 मिलियन कम गहराई वाले तथा 5000 अधिक गहराई वाले ट्यूबवेल कार्यरत हैं। पश्चिम बंगाल में भौम जल की उपलब्ध मात्रा के अनुपात में इसकी माँग निरंतर बढ़ती जा रही है, जिससे यहाँ भौम जल की मात्रा निरन्तर कम होती जा रही है।

कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में कुल आवश्यकता की तुलना में व्यवहार योग्य जल की उपलब्धता कम है, अत: राज्य को जल संकट की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ आवश्यक जल की कमी को निम्नलिखित तालिका से समझा जा सकता है :-

प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल में जल के अति उपयोग के दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। यहाँ जल संकट की समस्या को कम करने के क्या उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर :
जल के अति उपयोग की हानियाँ (Demerits of over use of Water) :- पृथ्वी पर लगभग 97 प्रतिशत जल खारा है। स्वच्छ एवं मीठे जल की उपलब्धता बहुत कम है,। जनसंख्या वृद्धि, सिचाई तथा औद्योगिक विकास के कारण जल संसाधन के अत्यधिक दोहन से इसका अति उपयोग हो रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में जल के अति उपयोग से पश्चिम बंगाल में भी जल संकट की समस्या उत्पन्न हो गयी है। इसके अतिरिक्त जल के अति उपयोग से अन्य दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहा है, जैसे :-

अति सिंचाई से मिट्टी की उर्वरता समाप्त हो रही है। इसमें क्षारियता एवं लवणता का परिणाम बढ़ रहा है।

उद्योगों में जल के अधिक दोहन से जलचक्र बाधित हो रहा है। चमड़ा, वरू, कागज तथा रसायन उद्योग जल प्रदूषण के लिए संबसे अधिक उत्तरदायी है।

भौम जल के अधिक दोहन से जलचक्र बाधित हो रहा है, जिससे पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। यही नहीं, भौम जल के अधिक दोहन से जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ गयी है। पश्चिम बंगाल के निम्न गंगा घाटी के आठ जिलों के 75 प्रशासनिक खण्डों में भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन से जल मे आर्सेंनिक की मात्रा बढ़ गयी है। अकेले कोलकाता में 26 मिलियन लोग आर्सेनिक की समस्या से जूझ रहे हैं। अत्यधिक जल निकासी से बोरभूम जिले के नलहाटी एवं रामपुरहाट विकास खण्ड के जल में फ्लोराइट मिल रहा है।

अत्यधिक जल के उपयोग से उत्पन्न जल संकट के कारण आपसी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो रही है। निकटवर्ती राज्य एवं देश जल के बँटवारे को लेकर आपस में उलझ रहे हैं। गंगा के जल के बँटवारे को लेकर पश्चिम बंगाल एवं बंगलादेश के बीच समस्या बनी हुई है। इसी प्रकार कावेरी नदी के जल के बँटवारे को लेकर तमिलनाडु एवं कर्नाटक राज्यों के बीच अक्सर विवाद उत्पन्न होते रहते है।

जल संकट की समस्या को कम करने के उपाय :- उचित जल प्रबन्धन द्वारा जल की माँग एवं पूर्ति में सामंजस्य स्थापित करके जल संकट की समस्या को कम किया जा सकता है ! इसके लिए निमन उपाय अपेक्षित हैं :-

  1. जल-संरक्षण तरीकों एवं प्रणालियों का पुनर्चक्रण, वाष्पीकरण नियत्रण, अलवीकरण, रिसाव चिन्हिकरण आदि के माध्यम से कुल माँग के 1 / 5 भाग की पूर्ति की जा सकती है।
  2. उद्योगों में स्वच्छ जल के प्रयोग को न्यूनतम किया जाय तथा पुनर्चक्रित जल के खपत को बढ़ाया जाय।
  3. सिंचाई में जल की अपव्यय को रोकने की व्यवस्था की जाए।
  4. बाढ़ प्रबन्धन के लिए अच्छी नीति बनायी जाए, जिससे अतिरिक्त जल का एक्कीतरण एवं संचय किया जा सके।
  5. शुष्क क्षेत्रों में अधिक जल वाली फसलों की कृषि न की जाए, जिससे इन क्षेत्रों को क्षारियता एव जलाभाव से बचाया जा सके।

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प्रश्न 8.
पश्चिम बंगाल के जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्ण एवं आर्द्र है। यहाँ की जलवायु पर निम्नलिखित बातों का प्रभाव पड़ता है :-
भूमध्य रेखा से दूरी :- भूमध्य रेखा से दूरी के साथ दक्षिण से उत्तर जाने पर पश्चिम बंगाल का तापक्रम कम हो जाता है।

कर्क रेखा का राज्य के मध्य भाग से गुजरना :- कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के प्राय: मध्य भाग से होकर गुजरती है। अत: यहाँ का दक्षिणी भाग ऊष्ण कटिबंध में तथा उत्तरी भाग समशीतोष्ण कटिबंध में पड़ता है।

समुद्र तल से ऊँचाई :- ज्यों-ज्यों हम सागर तल से ऊपर की ओर जाते हैं प्रत्येक 164 मीटर की ऊंचाई पर 1° C की दर से तापमान कम हो जाता है। पश्चिम बंगाल के उत्तर में पर्वतीय भाग है। यहाँ ऊँचाई के साथ तापक्रम घटता जाता है। यही कारण है कि हिमालय के उच्च शिखर वर्ष भर हिमाच्छादित रहते हैं।

समुद्र तट से दूरी :- पश्चिम बंगाल का अधिकांश दक्षिणी भाग समुद्र तट पर बंगाल की खाड़ी के समीप है, अत: यहाँ की जलवायु सम है। अत: यहाँ पर गर्मी में कम गर्मी तथा जाड़े में कम जाड़ा पड़ता है। परन्तु समुद्र तट से दूर स्थित पश्चिम के पठारी भाग की जलवायु विषम है।

हिमालय पर्वत का प्रभाव :- पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय का ऊँचा पर्वत पश्चिम से पूर्व दिशा में फैला हुआ है। गर्मी में यह पर्वतीय बाधा बंगाल की खाड़ी से जाने वाली भाप हवाओं को रोककर राज्य में काफो वर्षा कराते हैं। साथ ही यह पर्वत जाड़े में उत्तर में साइबेरिया की ओर से आने वाली बर्फीली हवाओं को रोककर राज्य को शीतकाल में ठण्डा होने से बचाता है।

मानसूनी हवाओं का प्रभाव :- पश्चिम बंगाल ग्रीष्मकाल में बंगाल की खाड़ी से होकर जाने वाली दक्षिणीपश्चिमी मानसूनी हवाओं के प्रभाव में पड़ता है। ये हवाएँ भाप से भारी होती है, जिससे पश्चिम बंगाल के विभिन्न भागों में प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है।

प्रश्न 10.
पश्चिम बंगाल के मानव जीवन पर मौसम परिवर्तन के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के मानव जीवन पर मौसम परिवर्तन का प्रभाव (Impact of Change of Seaons on Human Life of West Bengal) :- पश्चिम बंगाल को जलवायु ऊष्णार्द्र मानसूनी है। यहाँ ग्रीष्म, वर्षा एवं शीत तीन ऋतुएँ क्रम से आती हैं। परन्तु प्रीष्म ऋतु की अवधि लम्बो होती है। वर्षा प्रीष्म ऋतु के मध्य एव अंत में दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं द्वारा होती है। शीत ॠतु में नापमान अपेक्षाकृत कम रहता है तथा सामान्यतः वर्षा नहीं होने के कारण शुष्कता की स्थिति बनी रहती है। इस प्रकार पश्चिम बंगाल में ऋतु परितर्वन के कारण उत्पन्न जलवायुगत विविधताएँ यहाँ रहने वाले लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन पर अपना प्रभाव डालती है। ये निम्नलिखित रूपों में देखने को मिलते है :-

(a) आर्थिक प्रभाव :-

  1. यहाँ प्रीष्मकाल के प्रारम्भ होते ही तापमान अचानक बढ़ जाता है, अत: रबी की फसलें शीघ्र पक जाती है, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  2. पश्चिम बंगाल में शीतकाल प्राय: शुष्क रहता है, अत: इस ऋतु में यहाँ फसलों को उगाने के लिए सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ता है।
  3. ग्रीष्मकाल में बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात पश्चिम बंगाल के दक्षिणी क्षेत्र में अक्सर तबाही मचाया करते हैं।
  4. पश्चिम बगाल में वर्ष भर तापमान कृषि के अनुकूल रहता है। शीत ऋतु में भी उत्तर में ऊँचे पर्वतीय अंचल को छोड़कर सम्पूर्ण पश्चिम बंगाल में पर्याप्त तापमान रहता है। अत: यहाँ वर्ष भर विभिन्न ॠतुओं में उगनेवाली फसलों की खेती की जाती है।

(b) सामाजिक जीवन पर प्रभाव :-

  1. पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्णार्द्र है। शीत ऋतु का आगमन यहाँ अल्प समय के लिए होता है, उष्णार्द्र जलवायु स्वास्थ्य के प्रतिकूल है, अत: यहाँ के लोगों की कार्यक्षमता एवं जीवन प्रत्याशा दोनों ही कम होती है।
  2. उष्यार्द्र जलवायु के कारण पश्चिम बंगाल में घरों में धूप या रोशनी की तुलना में स्वच्छ वायु की अधिक आवश्यकता पड़ती है, इसंलिए यहाँ घरों में खिक़ियों की अधिकता होती है तथा छते ऊँची रखी जाती है, जिससे दूषित वायु का रोशनदारों से निकास हो सके।
  3. भीषण गर्मी के उपरान्त वर्षा के आगमन से यहाँ अनेक व्याधियाँ एवं रोग उत्पन्न हो जाते हैं। कई क्षेत्रों में मलेरिया एवं आंत्रशोध जैसे रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे जन-जीवन काफी प्रभावित होता है।

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प्रश्न 9.
पश्चिम बंगाल की विभिन्न ऋतुओं की जलवायुगत दशाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की ऋतुएँ (Seasons of West Bengal) :- इस राज्य मे गर्मी की ॠतु लम्बी होती है। ग्रोण्म ऋतु मार्च से मई तक (काल बेशाखी की ऋतु)। जून से आधे सितम्बर तक वर्षा होती है। आधे सितम्बर से आधे अवटूबर तक लौटते मानसून की ॠतु होती है। नवम्बर से फरवरी तक शीत ऋतु होती है। इस राज्य की जलवायु को मुख्यत 4 ॠतुओं में विभक्त किया जा सकता है :- म्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु एवं शीत ॠतु।

ग्रीष्म ऋतु (Summer Seasons) :- मार्च से मई तक का काल ग्रीष्म ॠतु कहा जाता है। यह राज्य की सबसे ऊष्णा ॠतु होती है जब औसत तापक्रम 27° C से अधिक हो जाता है। मैदानी भाग में अप्रैल और पर्वतीय भाग में जून सबसे गर्म महीने होते हैं। प्रथानत: यह ऋतु शुष्क बितती है। इस ऋतु में दिन बड़ा होता है। हवा ऊष्ण और हल्की होकर ऊपर उठना शुरू होती है जिससे निम्न वायु भार (Low Pressure) के क्षेत्र की सृष्टि होना शुरू हो जाता है। इससे संध्या के समय उत्तर-पश्चिम से आकाश बादलों से घिर जाता है और आँधी, तूफान का वातावरण बन जाता है।

वर्षा ऋतु (Rainy Season) :- जून से सितम्बर तक का काल राज्य में वर्षा ऋतु कहलाता है। इसमें दिन बड़ा होता है और गर्मी सर्वाधिक होती है। प्राय: सम्पूर्ण वर्षा इसी ऋतु में होती है। मध्य भाग में निम्न वायुभार का क्षेत्र बन जाने से बंगाल की खाड़ी और हिन्द महासागर से वाष्पयुक्त द० पू॰ मानसूनी हवाएं चलना शुरू हो जाती है। वायुमण्डल में आर्द्रता आ जाती है और उत्तर के पर्वतीय भाग में वर्षा सर्वाधिक, पश्चिम के पठार में न्यूनतम और मैदानी भाग में समान्य होती है। इन हवाओं से पर्वतीय भाग में सर्वाधिक 500 cm, तराई क्षेत्र में 300 cm, मैदानी भाग में 150 cm-300 cm तक वर्षा होती है।

शरद ऋतु (Autumn Season) :- अक्टूबर से नवम्बर तक के काल को शरद ऋतु के नाम से जाना जाता है। अत: तापक्रम कम होना शुरू हो जाता है। तापक्रम 10° C से 19° C तक रहता है। इस ऋतु में शुष्क हवा स्थल से समुद्र की ओर बहना शुरू हो जाती है। इस समय हिन्द महासागर की हवा ऊष्ण होती है। अतः यहाँ निम्न वायुभार का क्षेत्र बन जाता है।
भू-पृष्ठ की ठण्डी और भारी हवायें समुद्र की ओर चलने लगती हैं। इस काल में मानसूनी हवाएं लौटने लगती हैं। इस मानसून का प्रत्यावर्तन काल.(ReturringMonsoon Season) कहा जाता है।

शीत ऋतु (Winter Seasons) :- यहाँ पर शीत ऋतु दिसम्बर से फरवरी तक रहती है। इस समय पं० बंगाल का तापमान कम रहता है। औसत तापमान 20° C ही रहता है। पर्वतीय भागों में कठोर सर्दी पड़ती है। हिमपात के कारण तापमान -5° C तक गिर जाता है। इस समय पश्चिम बंगाल में उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएँ चलती है, अतः यह शुष्क ऋतु होती है। चक्रवात से कभी-कभी कुछ वर्षा होती है।

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प्रश्न 10.
पश्चिम बंगाल में पाये जाने वाली प्राकृतिक वनस्पतियों का संक्षेप में वर्णन किजिए।
उत्तर :
धरातल पर स्वतः उगने वाले पेड़-पौधों को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं। पश्चिम बंगाल के कुल क्षेत्रफल के 13.4 प्रतिशत भाग पर वन फैले हैं। जलवायु की भिन्नता के कारण पश्चिम बंगाल में निम्नलिखित तीन प्रकार की वनस्पतियाँ मिलती हैं :- i) पर्वतीय वन, ii) पतझड़ वन और iii) ज्वारीय या तटीय वन।

पर्वतीय वन (Mountaineus Forest) :- पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय के पर्वतीय भाग की वनस्पति पर ऊँचाई का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। तराई प्रदेश में अधिक वर्षा होती है तथा कम ऊँचाई होने से अपेक्षाकृत उच्च तापक्रम रहता है, जिससे वहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पाये जाते हैं, इन वनों की पत्तियाँ चौड़ी होती है। इस भाग के प्रधान वृक्ष साल, सागौन एव बाँस हैं। 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार (Oak) के वृक्ष पाए जाते हैं। 3000 मीटर से अधिक ऊँचे भागों में हिमपात होता है। अत: यहाँ के वृक्षों की पत्तियाँ नुकिली या सूच्चाकार होती है। इस भाग के प्रमुख वृक्ष देवदार, हेमलाक, फर, पाइन आदि हैं।

पतझड़ के वन (Decidous Forest) :- पश्चिम बंगाल के अधिकांश मैदानी तथा पठारी भागों में, जहाँ वार्षिक वर्षा की मात्रा 100 से 200 सेण्टीमीटर है, पतझड़ के वन पाए जाते हैं। इन वनों के मुख्य वृक्ष साल, सागौन, शीशम, बाँस, महुआ, आम, जामुन, सिरीस, सेमल, पलास, गमार, अर्जुन एवं जारूल हैं।

ज्वारीय वन या तटीय वन (Tidal or Lithoral Forest) :- पश्चिम बंगाल के दक्षिण के डेल्टाई भाग में ये वन पाए जाते हैं। ज्वार के समय समुद्र का खारा पानी यहाँ पहुँच जाता है। अतः यहाँ ऐसे वृक्ष पाएँ जाते है जो दलदल एवं समुद्र के खारे पानी से अपनी रक्षा कर सके। यहाँ के मुख्य वृक्ष मैंग्रोव ताड़, सुन्दरी, गोरान, केवड़ा, गेऊआँ, होगला, गोलपत्ता, पुसुर एवं नारियल हैं। सुन्दरी वृक्षों की अधिकता के कारण ही इस भाग को सुन्दरवन कहते हैं।

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प्रश्न 11.
पश्चिम बंगाल में चावल की कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में चावल की कृषि के लिए निम्नलिखित अनुकूल दशाएँ विद्यमान है :-
(i) उच्च तापक्रम :- चावल ऊष्ण कटिबंध का पौधा है। इसके लिए 16° C-27° C तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल का अधिकांश भाग कर्क रेखा के समीप पड़ता हैं। अत: यहाँ का तापमान ऊँचा रहता है।
(ii) अधिक वर्षा :- चावल का पौधा जल का प्रेमी है। अत: चावल के खोतों में कई दिनों तक जल का जमा होना आवश्यक है। इसकी कृषि के लिए 100-200 cm तक वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाओं से काफी वर्षा होती है।
(iii) उपर्युक्त मिट्टी :- चावल की कृषि के लिए ऐसी मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें आर्द्रता ग्रहण करने की शक्ति हो। पश्चिम बंगाल गंगा के निचले मैदान में पड़ता है। इसके अधिकांश भाग का निर्माण गंगा व उसकी सहायक नदियों द्वारा लायी गयी चिकनी मिट्टी से हुआ है। अत: यह भाग समतल व उपजाऊ है।
(iv) सिंचाई की सुविधा :- यहाँ दामोदर घाटी योजना एवं अन्य नहरों से सिंचाई की सुविधा प्राप्त है।
(v) सस्ता श्रम :- चावल की कृषि में मशीनों का प्रयोग बहुत कम होता है। इसकी कृषि का अधिकांश भाग हाथ से ही होता है। पश्चिम बंगाल सघन जनसंख्या वाला राज्य है। अत: यहाँ चावल की कृषि के लिए सस्ते श्रमिक आसानी से उपलब्व हो जाते हैं।

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प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा यहाँ के प्रमुख जूट उत्पादक जिलों का नाम लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि के लिए निम्नलिखित अनुकूल दशाएँ विद्यमान हैं :-
(i) उच्च तापक्रम :- जूट ऊष्ण कटिबन्ध का पौधा है। इसकी कृषि के लिए 25° C-30° C तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल कर्क रेखा के समीप है, अत: यहाँ गर्मी में तापक्रम ऊँचा रहता है।
(ii) अधिक वर्षा :- जूट का पौधा जल के प्रति बड़ा सहिष्मु है। जूट की कृषि के लिए 150-200 cm तक वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पश्चिम बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाओं से यह खूब वर्षा होती है।
(iii) डेल्टाई मिट्टी :- जूट की कृषि के लिए दोमट एव जलोढ़ मिट्दी सर्वोत्तम होती है। जूट का पौधा भूमि की उर्वरा शक्ति को नष्ट कर देता है। खाद देकर जूट उगाने में विशेष लाभ नहीं होता है। अत: इसकी कृषि डेल्टाई क्षेत्रों में अधिक होती है।
(iv) स्वच्छ जल :- जूट के पौधे से रेशा प्राप्त करने के लिए उसे कई दिनों तक सड़ाना पड़ता है। फिर उसे जल में पटक-पटककर धोया जाता है। अत: इसके लिए पर्याप्त स्वच्छ एवं मीठे जल की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल में नदियों, तालाबों एवं नहरों से जूट को सड़ाने व साफ करने के लिए पर्याप्त स्वच्छ जल मिल जाता है।
(v) सस्ता श्रम :- जूट की फसल उगाने, काटने, सड़ाने, धोने तथा डण्ठल से रेशा अलग करने के लिए पर्याप्त एवं सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल की आबादी घनी है। उत्तर प्रदेश, बिहार एवं उड़िसा से भी यहाँ सस्ते श्रमिक मिल जाते हैं।
प्रमुख जूट उत्पादक जिले :- पश्चिम बंगाल के जूट के क्षेत्र हुगली नदी के दोनों ओर गंगा के डेल्टाई क्षेत्र में स्थित है। प्रमुख जूट उत्पादक जिले बर्द्धमान, उत्तर चोबीस, परगना, मुर्शिदाबाद, नदिया, पश्चिमी दिनाजपुर, मालदा, पूर्व एवं पश्चिमी मिदनापुर, हुगली, कूचबिहार तथा जलपाईगुड़ी हैं।

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प्रश्न 13.
पश्चिम बंगाल में चाय उत्पादन के लिए कौन सी अनुकूल दशाएँ विद्यमान हैं ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग के विकास के निम्नलिखित कारण हैं :-
1. अनुकूल दशाएँ :- उत्पादक अंचलों में चाय उत्पादन के लिए अनुकूल दशाएँ, जैसे -उच्च तापमान (20° C.25° C), पर्याप्त वर्षा (200-250 cm), लौह, चूना, पोटाश एवं जीवांश युक्त उपजाऊ मिट्टी, ढालू भूमि तथा सस्ते श्रमिकों की उपलब्धता आदि सभी विद्यमान हैं।
2. चाय उत्पादक क्षेत्रों में अन्य कृषि फसलों का नहीं उगाया जाना:- पश्चिम बंगाल के चाय उत्पादक पर्वतीय अंचल अन्य कृषि फसलों के उत्पादन के अनुकूल नहीं हैं। अत: इन अंचलों में चाय बागानों के विस्तार को प्रोत्साहन मिला है।
3. रेल एवं सड़क यातायात का पर्याप्त विकास :- पश्चिम बंगाल में सड़क एवं रेल यातायात का पर्याप्त विकास हुआ है। अत: चाय बागानों से चाय को कोलकाता के बाजार में भेजने की सुविधा प्राप्त है।
4. बाजार की सुविधा :- सबसे बड़ा चाय बाजार एव कोलकाता बन्दरगाह विश्व का सबसे बड़ा चाय निर्यातक बंदरगाह है। अत: पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को विस्तृत बाजार एवं निर्यात दोनों की ही स्थानीय सुविधा प्राप्त है।

प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना एवं विकास के क्या कारण हैं? यहाँ इस उद्योग की समस्या एवं सम्भावनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना एवं विकास के निम्नलिखित कारण है :-
1. बंदरगाह की सुविधा :- यहाँ कोलकाता बन्दरगाह की स्थिति के कारण वस्र मिलों को मशीनों एवं कच्चे कपास के आयात की सुविधा प्राप्त है।
2. कोयले की प्राप्ति:- निकटवर्ती रानीगंज एवं झारिया की खानों से शक्ति के रूप में कोयले की प्राप्ति आसानी से हो जाती है।
3. उत्तम यातायात व्यवस्था :- विकसित रेल, सड़क एवं जल परिवहन के कारण उत्पादित वस्रों को निकटवर्ती एवं सुदूर स्थित बाजारों में भेजने की सुविधा प्राप्त है।
4. सस्ते श्रमिकों की आपूर्ति :- निकटवर्ती बसे क्षेत्रों से मिलों में काम करने के लिए सस्ते श्रमिकों की आपूर्ति आसानी से हो जाती है।
5. अनुकूल जलवायु :- पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्णार्द्र है जो धागों की कताई एवं वर्ष भर सूती वस्र धारण करने के अनुकूल है।
समस्याएँ (Problems) :- पश्चिम बंगाल में सूती वस्त उद्योग को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
(i) कच्चे माल की कमी :- पूर्वी भारत में कपास का उत्पादन नहीं होने से पश्चिम बंगाल की सूती मिलों को स्थानीय रूप से कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ता है। आयातित कच्चे माल पर निर्भरता यहाँ की वस्र मिलों की प्रमुख समस्या है।

(ii) पुरानी मशीनें :- यहाँ स्थापित अधिकांश वस्व मिलों की मशीनें पुरानी एवं घिसी हुई हैं, जिनकी प्रति इकाई उत्पादन लागत अंिक एवं उत्पादन क्षमता कम है। अत: प्रतियोगी बाजार में इन्हें कड़ी प्रतिस्पर्ध का सामना करना पड़ रहा है।
सूती वस्त्र उद्योग की सम्भावनाएँ :- पश्चिम बंगाल में वस्त्र मिलों का आधुनिकीकरण करके, माँग के अनुसार उच्च श्रेणी के वख्यों के निर्माण को बढ़ावा देकर, सूती वस्त की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुचार लाने के लिए प्रौद्योगिकी मिशन शुरू करके वस्त उद्योग की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग की समस्याओं एवं संभावनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
चाय उद्योग की समस्याएँ (Problems of Tea Industry) :- पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है :-

  1. चाय बागानों में चाय की झाड़ियों के पुराने हो जाने से उत्पादन कम हो रहा है।
  2. चाय बागानों के मालिक चाय उत्पादन से प्राप्त लाभ का विनियोग चाय बागानों के विकास में नहीं कर रहे हैं।
  3. चाय के पौधों के रोपण तथा उचित प्रबन्ध पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  4. चाय के अधिकांश बागान उत्तर के पर्वतीय अंचल में स्थित हैं। यहाँ राजनैतिक अशांति के कारण भी यह उद्योग प्रभावित हो रहा है।

चाय उद्योग की सम्भावनाएँ (Possiblities of Tea Industry) :- उपरोक्त समस्याओं के बावजूद भविष्य में पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग की अच्छी सम्भावनाएँ है, क्योंकि :

  1. घरेलू एवं विदेशी बाजारों में चाय की ऊँची माँग है।
  2. कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग तथा जलपाईगुड़ी जिलों में छोटे-छोटे नए चाय बागानों की स्थापना की जा रही है तथा पुराने चाय बगानों का विस्तार किया जा रहा है।
  3. नए क्षेत्रों में चाय उगाने का प्रयास किया जा रहा है।
  4. पायलट प्रोजेक्ट के अन्तर्गत पुरुलिया के अयोष्या पहाड़ी की ढालों पर चाय की झाड़ियों का सफल रोपण हुआ है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 16.
पश्चिम बंगाल के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
तीव्र आर्थिक विकास, नगरीकरण की प्रवृत्ति तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के कारण भारत के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास तीव्र गति से हुआ है। वर्तमान समय में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल भारत के तीन अग्रणी राज्यों में से एक है। यहाँ निम्नलिखित खाद्य पदार्थो का प्रसंस्करण किया जाता है :-

खाद्यान्न प्रसंस्करण उद्योग (Grain Processing Industry) :- पश्चिम बंगाल एक कृषि प्रधान राज्य है। खाद्यान्नों के उत्पादन में इसका भारतवर्ष में प्रमुख स्थान है। खाद्यान्नों की उपलब्धता के कारण इनके प्रसंस्करण का उद्योग यहाँ विभिन्न क्षेत्रों में विकसित है।

दुग्ध प्रसंस्करण उद्योग (Dairy Processing Industry) :- दुग्ध प्रसंस्करण उद्योग के अंतर्गत विभिन्न दुग्व पदार्थ जैसे घी, दही, मक्खन, छेना, आइसक्रीम, सूखा दुध आदि तैयार किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल में इस उद्योग का विकास कोलकाता (हरिनघाटा, बेलगछिया), दुर्गापुर, सिलीगुड़ी, बर्द्धमान तथा कृष्णनगर में हुआ है।

मत्स्य प्रसंस्करण उद्योग (Fish Processing Industry) :- मछली पश्चिम बंगाल के लोगों के भोजन का सर्वप्रिय हिस्सा है। अतः मछली प्राप्ति पर आधारित मत्स्य प्रसंस्करण उद्योग भी यहाँ उन्नतिशील है। यहाँ प्रान, तापसी, चाँदी, मेटकी, रिबन, फिश, मोल, मैकरेल, एकेट आदि समुद्री मछलियाँ तथा रोहु, कतला, फाशा कैटफिश, भ्रिंगाल, मैकरेल, हिल्सा आदि ताजे जल की मछलियाँ बड़े पैमाने पर पकड़ी जाती हैं। ताजे जल की मछलियों के उत्पादन की दृष्टि से इस राज्य का भारत में पहला स्थान है। यहाँ लगभग 4.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ताज़े जल की मछलियाँ पकड़ी जाती है। ये मछलियाँ नदियों के मुहानों एवं तालाबों से पकड़ी जाती है।

फल एवं सब्जी प्रसंस्करण उद्योग (Fruits and Vegetables Processing Industry) :- पश्चिम बंगाल में विभिन्न प्रकार के फलों तथा सब्जियों की खेती की जाती है। आम, केला, अनानस, पपीता, कटहल, अमरूद आदि फल तथा आलू, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, बैगन, कुम्हड़ा, लौकी आदि सब्जियाँ यहाँ उगायी जाती है। भारत के कुल आलू उत्पादन का 30 प्रतिशत, केला उत्पादन का 12 प्रतिशत तथा अनानास उत्पादन का 27 प्रतिशत उत्पादन पश्चिम बंगाल में होता है। प्रचुर मात्रा में फलों एवं सब्जियों के उगाए जाने के कारण पश्चिम बंगाल में इनको प्रसंस्कृत करके विविध प्रकार के उत्पादों जैसे स्क्वेश, अचार, चटनी, मुरब्बा, जैम, जेली जूस आदि का उत्पादन यहाँ विभिन्न संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों में किया जाता है।

शीतल पेय प्रसंस्करण उद्योग (Aerated Soft Drinks Processing Industry) :- पश्चिम बंगाल की जलवायु ऊष्ण कटिबंधीय एवं जनसंख्या घनी है, अतः यहाँ शीतल पेय पदार्थों के अधिक खपत की संभावना को देखते हुए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा व्रिविध प्रकार के शीतल पेय बाजार में लाये जा रहे हैं। यहाँ स्थानीय स्तर पर अनेक शीतल पेय उत्पादन केन्द्र हैं, जो बाजारों में अपने उत्पादों को आकर्षक विज्ञापनों की सहायता से परोसने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ प्राकृतिक जल उत्पादन के कारखानों को भी सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जो बोतल बंद पेय जल बाजार में प्रस्तुत कर रहे हैं।

प्रश्न 17.
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की समस्याओं एवं सम्भावनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की समस्याएँ (Problems of Food Processing Industry in West Bengal) :-
(i) यहाँ प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का स्तर ऊँचा नहीं है, अत: गुणवत्ता के सुधार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
(ii) मध्यस्थों एवं दलालों की उपस्थिति के कारण कच्चे माल की कीमत एवं पूर्ति दोनों प्रभावित होती है, जिसका असर उत्पादन पर होता है।
(iii) अधिकांश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कच्चे माल कृषि उपजों से प्राप्त होते हैं। कृषि उपजों के मौसमी होने के कारण वर्ष भर इनकी उपलब्धता की निरन्तरता नहीं रहती है।
(iv) बाढ़, सूखा फसलों तथा को रोग लगने के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होते रहे हैं जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
(v) इस उद्योग के क्षेत्र में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण का अभाव है। पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की संभावनाएँ (Possiblities of Food Processing Industry in West Bengal) :-
(i) राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों की गुणवत्ता में वृद्धि के उद्देश्य से प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
(ii) शीघ नष्ट होने वाले कच्चे पदार्थ, जैसे :- माँस, फलों एवं सब्जियों के संरक्षण तथा पूर्ति में निरन्तरता के लिए शीत संम्रहागारों की संख्या बढ़ायी जा रही है।
(iii) सुपर बाजारों जैसे बिग बाजार, रिलायंस फ्रेश आदि की स्थापना से इस उद्योग का बाजार विस्तृत हो रहा है।
(iv) प्रसंस्कारित वस्तुओं के निर्यात को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

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प्रश्न 18.
पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग के विकास का कारण लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग का विकास (Development of Tourism Industry in West Bengal) :- रोजगारजनक तथा आय का प्रमुख साधन होने के कारण सन् 1996 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया। वर्तमान समय में यह राज्य देशी एवं विदेशी दोनों ही तरह के पर्यटकों में आर्कषण का केन्द्र बना हुआ है। यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है, जिससे यह उद्योग काफी प्रोत्साहित हो रहा है। पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग के विकास के निम्नलिखित कारण हैं :-
प्राकृतिक सौंदर्य :- पश्चिम बंगाल में प्राकृतिक सौन्दर्य के सभी आकर्षण, जैसे दार्जिलिंग, हिमालय के पर्वतीय दृश्य, दुआर क्षेत्र के चाय बागानों के नयनाभिराम दृश्य, सुन्दरवन अंचल के मैंग्रोव वन एवं जीव जगत, दक्षिण के आकर्षक सागर तटीय क्षेत्र आदि विद्यमान हैं जो वर्ष भर पर्यटकों को आकर्षित करते रहते हैं। दुआर के वन जीवन से समुद्र वनांचल भी यहाँ पर्यटकों के आकर्षण के प्रमुख केन्द्र हैं।

धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के क्षेत्र :- पश्चिम बंगाल में अनेक धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत के स्थल कोलकाता, बर्द्धमान, विष्णुपुर, गौड़, पाण्डुआ, लालबागान, चन्दननगर, श्रीरामपुर, चुंचुड़ा, बण्डेल, नवद्वीप, बैर कपुर तथा कूचबिहार में स्थित हैं। इन स्थलों पर समय-समय पर बड़ी संख्या में पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। पश्चिम बंगाल के पर्यटन विभाग द्वारा इन स्थलों पर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के प्राचीन इमारतों के रख-रखाव व्यवस्था की जाती है।

मेला एवं त्यौहार :- पश्चिम बंगाल मेलों और त्यौहारों का राज्य है। शरद काल में यहाँ मानाया जाने वाला दुर्गापूजा का त्यौहार प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। मकर संकान्ति के अवसर पर सागरद्वीप में लगने वाले गंगासागर मेला में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग यहा आते हैं। इसके अतिरिक्त शन्तिनिकेतन का पौष मेला, फुरफुरा शरीफ का उर्स मेला, कोलकाता फिल्मोत्सव आदि बंगाल में पर्यटकों को आमंत्रित करते रहते हैं।

उत्तम यातायात व्यवस्था :- पश्चिम बंगाल में सड़क, रेल तथा जल परिवहन की उत्तम व्यवस्था है। यहाँ हावड़ा, सियालदह तथा उत्तर बंगाल में जलपाईगुड़ी प्रमुख रेल स्टेशन है, जहाँ से प्रमुख स्थल के लिए रेलगाड़ियों की सुविधा है। पूरे राज्य में सड़कों का जाल बिख्छा हुआ है। अत: आन्तरिक क्षेत्रों में तथा ऊँचे पर्वतीय स्थलों पर सड़क मार्ग द्वारा पहुँचने की उत्तम व्यवस्था है। सुन्दरवन अंचल में पर्यटको के लिए स्टीमर की सुविधा प्रदान की जाती है। कोलकाता में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहां से देश विदेश के लिए उड़ानों की सुविधा है।

पर्यटन स्थलों पर होटलों की उत्तम व्यवस्था :- पश्चिम बंगाल के पर्यटन स्यलों पर पर्यटकों के ठहरने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा होटलों एव लॉजों की उत्तम व्यवस्था की गयी है। इन होटलों एव लॉजों में ऑनलाइन अप्रिम बुकिंग की व्यवस्था है।

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प्रश्न 19.
पश्चिम बंगाल में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) :- सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की शुरुआत थोड़ी देर से हुई परन्तु वर्तमान समय में यह राज्य सूचना प्रौद्योंगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। कोलकाता मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में IT (Information Technology) तथा ITES (Information Technology Enables Services) द्वारा लगभग एक लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। देश की प्रमुख IT एवं ITES कम्पनियाँ पश्चिम बंगाल में कार्यरत हैं, जो राज्य के कुल राजस्व प्राप्ति में 70 प्रतिशत का योगदान कर रही है।

पश्चिम बंगाल देश का दूसरा सबसे घना बसा राज्य है। यहाँ के भूमि संसाधन पर जनसंख्या का दबाव बहुत अधिक है। IT तथा ITES कम्पनियों की रोजगारजनक क्षमता अधिक होती है एव इनकी स्थापना के लिए कम भूमि की आवश्यकता पड़ती है। अत: राज्य में इनके विकास को प्रोत्साहित करने का हर संभव प्रयास आवश्यक है। इसके लिए नियोजित एवं प्रभावकारी नीति बनाने की आवश्यकता है, जिससे बड़ी। कम्पनियाँ राज्य के विभिन्न हिस्सों में निवेश कर सकें।

राज्य में सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर के विकास के लिए पश्चिम बंगाल सरकर द्वारा 2011 में दो सलाहकार समितियों का गठन किया गया है जो सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रही हैं। इन सलाहकार समितियों की देख-रेख में विभिन्न क्षेत्रों में विशेषझों के साथ कार्यकारी समूहों की स्थापना की गई है।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग के विकास के कारणों का वर्णन कीजिए। वर्तमान समय में यह उद्योग किन समस्याओं का सामना कर रहा है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग के विकास के कारण :- इस क्षेत्र में जूट उद्योग के केन्द्रित होने के निम्नलिखित कारण हैं :-

  1. कच्चे माल की समीपता :- जूट का प्रधान उत्पादन क्षेत्र गंगा-बह्मपुत्र डेल्टाई भाग हैं। पश्चिम बंगाल भारत में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य.हैं। कुछ जूट बंगला देश से भी आयात किया जाता हैं।
  2. शक्ति के साधन :- रानीगंज तथा झारिया से कोयला मिल जाता है। दामोदर घाटी तथा मयूराक्षी योजनाओं से सस्ती जलविद्युत मिल जाती है।
  3. यातायात की सुविधा :- हुगली नदी द्वारा सस्ते जल यातायात की सुविधा प्राप्त होती है। रेल, सड़क तथा जलमार्ग द्वारा यह भाग देश के भीतरी भागो से जुड़ा है।
  4. सस्ते श्रमिक :- अधिक आबादी होने से बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल से सस्ते श्रमिक मिल जाते हैं।
  5. कोलकाता बन्दरगाह की समीपता :- कोलकाता बन्दरगाह द्वारा मशीनरी एवं आवश्यक उपकरण मँगाने तथा तैयार माल निर्यात करने की सुविधा हैं।
  6. पूँजी की सुविधा :- यहाँ पूँजीपति रहते हैं। बेकों तथा पूँजीपतियों द्वारा भी पूँजी प्राप्त करने की सुविधा हैं।
  7. स्वच्छ जल की सुविधा :- जूट घोने व रँगने के लिए हुगली नदी द्वारा स्वच्छ जल प्राप्त होता है।
  8. पूर्वारम्भ की सुविधा :- ब्रिटिश काल में यहाँ सबसे पहले जूट के मिलों की स्थापना हुई थी। अतः यहाँ पूर्वारम्य की सुविधा है।

जूट उद्योग की समस्याएँ :-
कच्चे माल की कमी – 1947 ई० में देश के विभाजन के कारण अधिकांश जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान में चले गये परन्तु अधिकांश जूट के कारखाने पश्चिम बंगाल में ही रह गये। इससे कच्चे माल की कमी हो जाती है।

विदेशी प्रतिस्पर्धा :- अब बंगलादेश, चीन, थाइलैण्ड तथा इण्डोनेशिया में भी जूट के कारखाने खुल गये हैं। अत: पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग को प्रबल प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है।

जूट के बोरों की माँग में कमी :- विश्व में जूट के कई स्थापनापन्न भी हो गए हैं। कहीं-कहीं कागज के थैलों और कहीं-कहीं अन्य रेशों के थैलों का प्रयोग होता हैं। कनाडा में तो बिना बोरों में भरे ही गेहूँ को जहाजों में भर कर निर्यात कर दिया जाता हैं। इस प्रकार विश्व बाजार में जूट के बोरों की माँग घट रही है।

पुरानी मशीनें :- पश्चिम बंगाल के जूट के कारखानों में ब्रिटिश काल की पुरानी मशीनें हैं। वे घिस- पिट गई हैं और आधुनिक समय के लिए अनुकूल नहीं है। इससे उत्पादन खर्च अधिक पड़ता है और माँग के अनुसार वस्तुएँ नहीं बन पाती हैं।

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प्रश्न 21.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख नगरों का विवरण दीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के प्रमुख नगर निम्न है :-
आसनसोल :- बर्द्धमान जिले में ग्रेंड ट्रंक रोड पर स्थित इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध नगर, प्रसिद्ध औधौगिक केन्द्र तथा प्रसिद्ध रेलवे जक्शन है। यहाँ रेल, साइकिल बनाने का कारखाना है।
दुर्गापुर :- बर्द्धमान जिले में दामोदर नदी के किनारे स्थित दुर्गापुर कोलकाता के बाद पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर है। यहाँ इस्पात के दो कारखाने हैं।
रानीगंज :- बर्द्धमान जिले में दामोदर नदी के किनारे स्थित रानीगंज प्रसिद्ध कोयला क्षेत्र एवं व्यावसायिक शहर है। यहाँ कागज का एक कारखाना है।
चित्तरंजन :- बर्दमान जिले में झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित चित्तरंजन एक औद्योगिक केन्द्र है। यहाँ भारत सरकार द्वारा संचालित रेल इंजन का आधुनिक कारखाना है।
सिलीगुड़ी :- महानन्दा नदी के तट पर स्थित सिलींगुड़ी उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा व्यापारिक एवं शैक्षणिक केन्द्र है। यह चाय एवं लकड़ी का एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र है। यह कई सड़कों एवं रेलमार्गों का जंक्शन है।
बागडोरा :- यहाँ हवाई अड्डा है। यहीं पर उत्तर बंग विश्वविद्यालय है।
जलपाईगुड़ी :- तिस्ता नदी के दाएँ किनारे पर स्थित जलाईगुड़ी जिले का मुख्यालय तथा चाय उद्योग का प्रसिद्ध केन्द्र है। यहीं पर उत्तर बंग इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित है।
अलीपुर दुआर :- जलपाईगुड़ी जिले में स्थित अलीपुर दुआर तराई प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र तथा रेलवे जंवशन है।
इंगिलश बाजार :- महानन्दा नदी के किनारे स्थित इंग्लिश बाजार मालदह जिले का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यावसायिक केन्द्र है। यह रेशम उद्योग के लिए विख्यात है।
बालूरघाट :- अन्नाई नदी के तट पर स्थित बालूरघाट दक्षिण दिनाजपुर जिले का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र है। रायगंज :- उत्तर दिनाजपुर का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र है।
मालदह :- महानन्दा नदी के तट पर स्थित मालदह एक प्राचीन शहर एवं रेशम उद्योग का केन्द्र है।
कूचबिहार :- तोरसा नदी के तट पर स्थित कूचबिहार जिले का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र है।
बर्द्धमान :- इस क्षेत्र का सबसे प्रमुख नगर, प्रशासनिक शहर तथा औद्योगिक केन्द्र है।
बोलपुर :- यह वीरभूम जिले का महत्वपूर्ण शहर और व्यापारिक केन्द्र है। इसके निकट रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय है।
खड़गपुर :- पश्चिम मिदनापुर जिले में स्थित खड़गपुर दक्षिण-पूर्व रेलवे का प्रसिद्ध जंवशन एवं व्यापारिक केन्द्र है। यहाँ पर प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज (आई. आई. टी) है। यहाँ स्कूटर बनाने का एक कारखाना है।
कंचन नगर :- बर्द्धमान जिले में स्थित यह नगर छुरी-केंची बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
कोलकाता :- भारत का बम्बई के बाद दूसरा सबसे बड़ा नगर तथा दूसरा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। यह बंगाल की खाड़ी के शीर्ष पर हुगली नदी के बाएँ किनारे पर स्थित है। यह पश्चिम बंगाल की राजधानी तथा पूर्वी भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक एवं शिक्षा का केन्द्र है।
हावड़ा :- यह पश्चिम बंगाल का दूसरा बड़ा नगर तथा औद्योगिक केन्द्र है।
कैनिंग :- यह मछली उद्योग का सबसे बड़ा केन्द्र है। यहाँ नोना मिट्टी को कृषि योग्य बनाने के लिए एक अनुसंधान केन्द्र खोला गया है।

प्रश्न 22.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थल कौन-कौन से हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थल निम्नलिखित हैं :-
दार्जिलिंग :- लेवंग पर्वत पर 2,133 मीटर की ऊँचाई पर स्थित दार्जिलिंग नगर दार्जिलिंग जिले का मुख्यालय, प्रसिद्ध पहाड़ी नगर तथा पर्यटन केन्द्र है। निकटवर्ती टाइगर हिल से एवरेस्ट एवं कंचनजंघा की हिमाच्छादित चोटियों का मनोरम दृश्य तथा कंचनजंघा पर उगते सूर्य की अलौकिक छटा दिखाई पड़ती है। प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण होने के कारण इसे ‘पहाड़ी स्थानों की रानी’ कहते हैं। यहाँ के बाँटेनिकल गार्डन और चिड़ियाखाना दर्शनीय स्थान हैं। यहाँ भारत का प्रथम पर्वतारोहण केन्द्र स्थापित किया गया है। इस नगर के आस-पास कई चाय के बगान हैं।

कलिपोंग :- दार्जिलिग के दक्षिण 1,198 मीटर की ऊँचाई पर स्थित कलिपोंग एक सुन्दर शहर तथा पहाड़ी स्थान है।
मिरिक :- दार्जिलिंग से 45 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में 1,800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित मिरिक को हाल ही में पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है।
विष्णुपुर :- यह बाँकुड़ा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है।
कर्सियांग :- डाऊहिल पहाड़ी पर 1,482 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कार्सियांग शहर एक स्वास्थ्य प्रद स्थान तथा व्यापारिक केन्द्र है।
काकद्वीप :- यह दक्षिण 24 परगना जिले का प्रसिद्ध शहर एवं व्यापार का केन्द्र है। इस शहर के निकट सागरद्वीप पर कपिलमुनि के आश्रम के आस-पास प्रतिवर्ष मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगासागर का बहुत बड़ा मेला लगता है।
बकखाली एवं फ्रेजरगंज :- यह प्राकृतिक सौन्दर्य के स्थान एवं पर्यटन केन्द्र है।
नामखाना :- व्यापार का केन्द्र है।
दीघा :- समुद्र तट पर स्थित दीघा पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध पर्यटन केन्द्र है। पश्चिम बंगाल सरकार ने यहाँ एक मनोरम स्वास्थ केन्द्र का निर्मोण करवाया है।
कांथी :- पूर्व मिदनापुर जिले के कांथी महकमें का एक शहर है। यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर, व्यापार एवं पर्यटन केन्द्र है।

प्रश्न 23.
कोलकाता बंदरगाह की उन्नति का कारण लिखिए।
उत्तर :
कोलकाता बंदरगाह भारत का पाँचवां सबसे बड़ा तथा भारत के पूर्वी तट का सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इस बन्दरगाह की उन्नति के कारण निम्नलिखित हैं :-
उत्तम स्थिति :- कोलकाता बन्दरगाह हुगली नदी के बाएं किनारे पर बंगाल की खाड़ी से 128 कि॰मी॰ उत्तर की ओर स्थित है। अपनी उत्तम.स्थिति के कारण ही इसे पूर्वी भारत का प्रवेश द्वारा कहा जाता हैं।
सुरक्षित पोपाश्रय :- यद्यपि कोलकाता बन्दरगाह का पोताश्रय कृत्रिम है फिर भी यहाँ डायमण्ड हार्बर (नेताजी सुभाष) एवं खिदिरपुर पोताश्रय बनाये गये हैं। कोलकाता बन्दरगाह एक नदी बन्दरगाह है, जहाँ ऊँचे ज्वार के समय बडेबड़े जहाज तट तक आ सकते हैं।
कोलकाता बन्दगाह के भार को कम करने के लिए हल्दिया को इसके सहायक बन्दरगाह के रूप में विकसित किया गया है।
धनी एवं विस्तृत पृष्ठ प्रदेश :- कोलकाता बन्दरगाह का पृष्ठ प्रदेश बहुत ही धनी एवं विस्तृत है। इसका पृष्ठ प्रदेश पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, नेपाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैण्ड, अरूणाचल प्रदेश तथा मेघालय तक फैला हुआ है। इसका पृष्ठ प्रदेश विस्तृत, घना आबाद, कृषि, खनिज पदार्थ तथा उद्योग-धन्धों में धनी है।
अन्तर्राष्ट्रीय भागों का केन्द्र :- कोलकाता अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर पड़ता है। उत्तरी अमेरिका एवं यूरोप से एशिया एवं आस्ट्रेलिया को जाने वाले अधिकांश जहाज यहीं से होकर जाते हैं।
परिवहन की सुविधा :- हुगली नदी एक आन्तरिक जलमार्ग का कार्य करती है। कोलकाता बन्दरगाह रेलमार्गो तथा सड़कों द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है। यह उत्तरी, पूर्वी तथा उत्तरी-पूर्वी रेलमार्गों का बहुत बड़ा जंक्शन है।
आयात के पदार्थ :- कोलकाता बन्दरगाह से मशीनें, मोटर, रासायनिक पदार्थ, खनिज तेल, कागज, रबड़, सूती, ऊनी एवं रेशमी वस्र का आयात किया जात है।
निर्यात के पदार्थ :- कोलकाता बन्दरगाह से जूट के सामान, चाय, चीनी, तिलहन, लाख, चमड़ा, अभ्रक, मैंगनीज, कोयला, लोहा-इस्पात एवं इंजिनियरिंग के सामानों का निर्यात किया जाता है।

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प्रश्न 24.
पश्चिम बांगल के उत्तरी पर्वतीय भाग के भू-प्रकृति का वर्णन करें?
उत्तर :
उत्तर का पर्वतीय भाग (The Northern Mountains) :- पश्चिम बंगाल के कुल क्षेत्रफल का मात्र 1 प्रतिशत पर्वतीय है। यह राज्य के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है। करोड़ो वर्ष पहले यहाँ टेथिस नामक एक समुद्र हुआ करता था।

भू-प्रकृति (Physlography) :- युगों-युगों तक जलोढ़ के जमाव तथा-भू-आन्दोलन के फलस्वरूप इस श्रृंखला का निर्माण हुआ। इसका विस्तार पश्चिम बगाल में नेपाल की सीमा से लेकर पूर्व में भूटान की सीमा तक लगभग 100 कि०मी० में है। उत्तर दक्षिण की चौड़ाई 25 से 50 किलोमीटर है। उत्तर बंगाल की प्रमुख नदी, तिस्ता इसके मष्य से प्रवाहित होती है। इस नदी द्वारा यह पर्वत पूर्व एवं पश्चिम दो भागों में विभक्त है। इस क्षेत्र में हिमालय की ऊँचाई 1800 से 3600 मीटर तक है। तिस्ता नदी के पश्चिम की ओर सिंगलीला तथा दार्जिलिंग श्रेणी उत्तर से दक्षिण की ओर विस्तृत है।

दार्जिलिंग के निकट घूम अंचल से घूम श्रेणी, ताकदा-पेशाक श्रेणी, एवं बागोरा डाउहिल श्रेणी विस्तृत हैं। इस अंचल में एक महत्तपूर्ण पर्वत शिखर सिंघल है जिसकी ऊँचाई 2,615 मीटर है। तिस्ता नदी के पूर्वी तरफ ताकदा पेशाक श्रेणी कलियोंग श्रेणी से मिलती है। कलिंपोंग श्रेणी के सर्वोच्च शिखर का नाम ऋषिला है जिसकी ऊँचाई 3,121 मीटर है तथा दूसरे सर्वोच्च शिखर का नाम दूर बिंदारा है जिसकी ऊँचाई 1,800 मीटर है।

दार्जिलिंग और कर्सियांग के मध्य में स्थित है टाइगर हिल इसकी ऊँचाई 2600 मीटर है। यहाँ से अगर आसमान साफ हो तो हिमाच्छादित कंचनजधा को देखा जा सकता है। दार्जिलिंग पर्वतीय अंचल की तुलना में जलपाईगुड़ी अंचल के पर्वतों की ऊँचाई कुछ कम है। इस अंचल में रेनिगंगा (1,855 मीटर) तथा छोटा सिंचुला 1,726 मीटर) नामक दो पर्वत शिखर हैं एवं बक्सा नामक एक गिरिपथ है।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल के जल प्रभाव प्रणाली का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की नदी प्रणाली को तीन भागों में बाँटा जा सकता है :-
गंगा प्रणाली (The Ganga System) :- गंगा पश्चिम बंगाल की प्रमुख नदी है। यह हिमालय के गंगोत्री नामक स्थान से निकलकर उत्तर प्रदेश, बिहार में प्रवाहित होती हुई झारखण्ड के राजमहल पहाड़ के पास से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। मुर्शिदाबाद जिले के घुलियान के पास दो शाखाओं में बँट जाती है। एक शाखा भागीरथी नाम पाती है, जब यह कोलकाता और चौबीस परगना जिलों से आगे बढ़ती है तो हुगली कहलाती है। भागीरथी हुगली दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। दूसरी शाखा पद्या जो दक्षिण पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुई बंगालदेश में प्रवेश करती हैं। भागीरथी हुगली से पूरब गंगा की शाखाओं – प्रशाखाओं का जल मिलता है जिसमें भैरव, जलंगी, चुरनी, इच्छामती, माथा भांगा, विद्याधरी, उल्लेखनीय आदि हैं।

पश्चिम पठार की नदियाँ (Rivers of the Western Plateau) :- इस अंचल की प्रमुख नदियाँ हैं :दामोदर, द्वारकेश्वर, शिलाई, कंसावती, मयूराक्षी, अजय। ये सभी नदियाँ ढाल के अनुसार पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। मयूराक्षी और अजय भागीरथी में जा मिलती है। द्वारकेश्वर और शिलाई नदियाँ मिलकर रूपनारायण नदी कहलाती है। राढ़ मैदान का निर्माण इन्हीं नादियों के जलोढ़ से हुआ है। दामोदर इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है।

उत्तर की नदियाँ (Rivers of the North) :- राज्य के उत्तर भाग हिमालय से निकलने वाली, नदियाँ उत्तर की नदियाँ कहलाती हैं। चूकि इन नदियों का उद्नम हिमालय के बर्फीले क्षेत्र हैं अत: वर्ष भर इनमें जलापूर्ति रहता है। महानन्दा, टांगन, तिस्ता, तोरसा और रायढाका उत्तर की प्रमुख नदियाँ हैं। इनमें प्रथम दो का जल गंगा में तथा शेष का जल ब्रह्मपुत्र में गिरता है। तिस्ता इनमें प्रमुख नद्री है।

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प्रश्न 26.
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर मानसूनी हवाओं के प्रभाव का वर्णन करो?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर मानसूनी हवाओं का प्रभाव (Impact of Morisoon on Climate of West Bengal) :-

ग्रीष्म ऋतु का मानसून (South West Monsoon) :- पश्चिम बंगाल में मार्च से मई तक लगातार तेजगति से तापमान बढ़ता है। इस समय सूर्य कर्क रेखा की ओर गतिशील रहता है, अत: पूरे बंगाल में तापमान तेजी से बढ़ता है। पश्चिम पठारी भाग में तापमान 32.7° C तक पहुंच जाता है। इसी समय-काल बैशाखी चलता है। चूँकि तापमान लगातार बढ़ता जाता है। अत: वायुमण्डलीय दाब लगातार घटने लगता है। अत: बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिणी पश्चिमी हवाएँ चलने लगती हैं जिनकी दिशा म्यांमार तट की ओर होती है।

ग्रीष्मकाल में पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी से आनेवाली मानसूनी हवाएं सक्रिय रहती हैं। ये हवाएँ समुद्र से समतल की ओर आती हैं। अतः वाष्प से भरपूर रहती हैं और पूरे पश्चिम बंगाल में वर्षा प्रदान करती है। ये मानसूनी हवाएँ 15 जून से लेकर सितम्बर तक सक्रिय रहती हैं। ये हवाएं हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र से टकराकर खूब वर्षा करती हैं। वर्षा की मात्रा उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में 300 cm-500 cm तक वर्षा होती है। मैदानी भागों में 250 cm तक वर्षा होती है तथा पशचमी पठारी क्षेत्रों में 100 cm-150 cm तक वर्षा होती है। ग्रीष्ममानसून से पश्चिम बंगाल में धान तथा जूट की कृषि होती है।

उत्तरी पूर्वी शुष्क मानसून का प्रभाव (Effect of North East Manson Wind) :- नवम्बर के महीने से पश्चिम बंगाल में शरद ऋतु का आगमन हो जाता है। आकाश स्वच्छ हो जाता है। इस समय आर्द्रता कम तथा शीतल ॠतु का प्रभाव रहता है। तापमान 17° C-21° C के बीच रहता है। इस प्रकार मध्य एशिया पर उच्च वायुदाब बन जाता है और पश्चिम बंगाल में उत्तर पूर्वी शुष्क हवाएं चलने लगती हैं।

इस ऋतु में पश्चिम बंगाल में वर्षा नहीं होती। यह शुष्क ॠतु होती है। किन्तु कभी-कभी बंगाल की खाड़ी में चक्रवातीय तुफानों का सृजन होता है, उससे वर्षा भी होती है और मौसम खराब हो जाता है।

प्रश्न 27.
पश्चिष बंगाल के धान की कृषि का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिय बंगाल में धान की कृषि (Paddy Agriculture in West Bengal) :- पश्चिम बंगाल के कुल कृषिगत्त भूमि के 53 मंतिशत भाग पर धान की कृषि की जाती है। यहाँ पर धान की कृषि का क्षेत्रफल दिनों दिन बढ़ रहा है। गहाँ पर अमन, आउस और दोरो तीन प्रकार के धान की कृषि की जाती है। आउस एवं अमन का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है : 2007.08 में आडस, अमन और वोरो का उत्पादन कमश : 0.566 मिलियान, 9.228 मिलियन टन एवं 4926 मिलियन टन रहा।
धान की कृषि राज्य के कुल उत्पादन (GDP) का 20.69 % प्रतिशत है।

कृषि क्षेत्र (Rice Agricultural Areal) :- पश्चिम बंगाल के कुल धान उत्पादन क्षेत्र का 47 प्रतिशत भाग वर्षा पर आधारित है। यहां के धान उत्पादक क्षेत्र को निम्न भागों में बांटा जा सकता है –

  1. उत्तरी पहाड़ी और तिस्ता तराई क्षेत्र
  2. विभ्जन जलोढ़ क्षेत्र
  3. गंगा का जलोढ़ क्षेत्र,
  4. तटीय नमकीन क्षेत्र एवं
  5. लाल-लैटराइट क्षेत्र। इस प्रकार ये पूरे क्षेत्र 6-10 लाख हेंट्टेयर भूमिका है।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल में जूट उत्पादन (कृषि) का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि (Jute Agriculture in West Bengal) :- जूट एक रेशेदार फसल है। गह्ह पूर्वी भारत (पशिचम बगाल) का महत्वपूर्ण, मुद्रादायिनी फसल (Cash Crop) है। इसे सुनहरे रेशे (Golden Fibre) की फसल कहते हैं। जूट का रेशे इसके तने से प्राप्त होता है। इसका रेशे मुलायम और लम्बे-लम्बे धागे बूने जा सकते हैं। इससे गनी बेंग (Gunny Bags) बनाये जाते है जो पैकेटिंग में प्रयोग किये जाते है। इन बैगों में चावल, गेहूँ, सीमेन्ट, चीनी, रासायनिक खाद आदि को भरा जाता है।
उत्पादन क्षेत्र (Areas of Production) :- पश्चिम बंगाल भारत के कुल जूट उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पन्न करता है। यह जूट उत्पादन का अभणी राज्य है। मुख्य जूट उत्पादक जिले मुर्शीदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, बर्द्धमान, मालदह और उत्तर 24 परगना है।

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग के प्रगति का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल चाय उद्योग (Tae industry of West Bengal) :
महत्व (Importance) :- पश्चिम बगाल में चाय उद्योग एक उन्नत स्थिति में है। इसका भारतीय अर्थव्यवस्था में मुख्य स्थःन है। झाग के निर्यात से, भारत को प्रचुर मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। पश्चिम बंगाल चाय उद्योग में दूसरे स्थान पर है। चाग उद्धोग ने लगगग 6 लाख मज़ूरों को रोजगार प्रदान किया है। चाय उद्योग ने यातायत और संचार के साधनों का विकास उत्तरी बंग्गल में किया है। इस प्रकार चाय उद्योग उद्योग पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था मे महत्तपूर्ण भूमिका निभा रहीं है।

स्थिति (Location) :- सन् 1870 और 1875 के बीच चाय बागानों की स्थापना जलपाईगुड़ी के डुआर्स क्षेत्र में की गयी। इस प्रकार बीरे- धीरे चाय उद्योग दार्जिलग, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी जिलों में फैला गया। वर्तमान समय में पश्चिम तालाल में कुल 297 चाय बागान हैं।

चाय उद्योग की स्थापना के भौगोलिक कारण (Geographical Reasons) :- चाय के बागान पर्वतीय ढलानों पर विक्रसित किये गये है। चाय के लिए ढाल जमीन, 200 cm-250 cm वर्षा, प्रचुर मात्रा में श्रमिक लौह और नाइट्रोजन युक्त भिट्टी चाहिए : ये सभी भौगोलिक दशाएं दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार के पर्वतीय भागों में उपलब्ये है जहाँ पर चाय उद्योग का विकास हुआ है।

उत्पादन (Production) :- पश्चिम बगाल में i) काली, ii) उलांग चाय और iii) हरी चाय का उत्पादन किया जाता है इन सब में कालो चाय काफी प्रसिद्ध है और प्रचुर मात्रा में पैदा की जाती है। 2004 में पश्चिम बंगाल में कुल 2 लाख 11 हुजार मीट्रिक टन चाय का उत्पादन किया गया।

व्यापार (Trade) :- चाय को कोलकाता चाय बाजार में निलाम (Auctioned) किया जाता है। यही से व्यापारी इसे खरीद कर पूरे देश में व्यापार करते हैं। यहां पर निलामी बाजार पर भारतीय चाय बोर्ड (Indian Tea Board) का नियंत्रण है। यहां से चाय कोलकाता बंदरगाह द्वारा बिटेन, अमेरिका, रूस, जर्मनो, यूक्रेन और पश्चिमी देशों को निर्यात की जाती है। भारत सरकार 2005 में चाय के निर्यात से कुल 1133 करोड़ रुपये की कमाई की।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

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20वीं सदी में यूरोप Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
1917 ई० की रूसी क्रान्ति के समय रूस का शासक कौन था –
(a) जार अलेक्जेण्डर द्वितीय
(b) जार निकोलस द्वितीय
(c) जार निकालोस प्रथम
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(c) जार निकालोस प्रथम

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प्रश्न 2.
जार निकोलस द्वितीय की पत्नी का क्या नाम था –
(a) मेरी अन्तायनेत
(b) जारीना एलेक्जैन्ड्रा
(c) एलिक्स
(d) जोजेफाइन
उत्तर :
(b) जारीना एलेक्जैन्ड्रा

प्रश्न 3.
क्रान्ति के समय रूस का जार था –
(a) जार अलेक्जेंडर द्वितीय
(b) जार निकोलस द्वितीय
(c) अलेक्जेंडर प्रथम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) जार निकोलस द्वितीय

प्रश्न 4.
‘वार एण्ड पीस’ नामक पुस्तक किसने लिखी ?
(a) मैक्सिस गोर्की
(b) वाल्टेयर
(c) टॉल्सटॉय
(d) रूसो
उत्तर :
(c) टाल्सटॉय

प्रश्न 5.
फ्रांस की क्रान्ति कब हुई थी?
(a) 1776
(b) 1789
(c) 1830
(d) 1848
उत्तर :
(b) 1789

प्रश्न 6.
रूस में जारशाही का अन्त कब हुआ था?
(a) 1917
(b) 1918
(c) 1939
(d) 1940
उत्तर :
(a) 1917

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प्रश्न 7.
रूस का कान्तिकारी केरेन्सकी किस दल से सम्बन्धित था ?
(a) गणतंत्रवादी
(b) साम्यवादी
(c) राजतंत्रवादी
(d) समाजवादी
उत्तर :
(d) समाजवादी

प्रश्न 8.
मार्च 1917 की क्रान्ति किस शहर में प्रारम्भ हुई थी –
(a) मास्को
(b) लेनिनग्राद
(c) अल्माटी
(d) पेद्रोग्राड
उत्तर :
(d) पंद्रोग्राड

प्रश्न 9.
पोटर्समाउथ की संधि कब हुई थी ?
(a) 5 सितम्बर 1905 ई०
(b) 10 दिसम्बर 1906 ई०
(c) 11 नवम्बर 1907 ई०
(d) 10 जुलाई 1908 ई०
उत्तर :
(a) 5 सितम्बर 1905 ई०

प्रश्न 10.
22 जनवरी 1905 ई० को रूस के इतिहास में किस नाम से जाना जाता है ?
(a) काली मृत्यु
(b) खूनी रविवार
(c) आतंक का राज्य
(d) थर्मीडोर प्रतिक्रिया
उत्तर :
(b) खूनी रविवार

प्रश्न 11.
वियना कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
(a) 1815 ई०
(b) 1920 ई०
(c) 1945 ई०
(d) 1941 ई०
उत्तर :
(a) 1815 ई०

प्रश्न 12.
राष्ट्र संघ की स्थापना किस समय हुई थी?
(a) 1815 ई०
(b) 1918 ई०
(c) 1920 ई०
(d) 1945 ई०
उत्तर :
(c) 1920 ई०

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प्रश्न 13.
क्रान्ति के समय रूस की राजधानी था –
(a) मास्को
(b) लेनिनग्राद
(c) अल्माटी
(d) पेद्रोग्राड
उत्तर :
(d) पेद्रोग्राड

प्रश्न 14.
लेनिन रूस का प्रधानमंत्री कब बना ?
(a) 1917 ई。
(b) 1918 ई०
(c) 1919 ई०
(d) सभी तिथियाँ गलत हैं
उत्तर :
(d) सभी तिथियाँ गलत हैं

प्रश्न 15.
जारीना एलेक्जेंड्रा पर किसका प्रभाव अधिक था ?
(a) रासपुटिन
(b) जार निकोलस द्वितीय
(c) रूसो
(d) मार्टिन लूथर
उत्तर :
(a) रासपुटिन

प्रश्न 16.
जापान ने रूस को कब पराजित किया ?
(a) 1902 ई0
(b) 1903 ई0
(c) 1905 ई०
(d) 1910 ई०
उत्तर :
(c) 1905 ई०

प्रश्न 17.
हिटलर ने किस पारी की स्थापना की थी?
(a) नाजी पार्टी
(b) फासी पार्टी
(c) बोल्शोविक पार्टी
(d) एंग इटली पार्टीं
उत्तर :
(a) नाजी पार्टी

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प्रश्न 18.
रूस में बोल्शोविक क्रांति सफल हुई –
(a) मार्च में (1917)
(b) जुलाई में (1917)
(c) सितम्बर में (1917)
(d) नवम्बर में (1917)
उत्तर :
(d) नवम्बर में (1917)

प्रश्न 19.
अखिल रूसी सम्मेलन 1917 में किस माह में हुआ –
(a) मई
(b) जून
(c) अगस्त
(d) अक्टूबर
उत्तर :
(b) जून

प्रश्न 20.
लेनिन की मृत्यु हई –
(a) 1923 ई. में
(b) 1924 ई. में
(c) 1925 ई, में
(d) 1922 ई. में
उत्तर :
(b) 1924 ई. में

प्रश्न 21.
लेनिन कौन था ?
(a) फ्रांसीसी राज्य क्रान्ति का नेता
(b) बोल्शेविक क्रान्ति का नेता
(c) इग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति का नेता
(d) अमेरिका का प्रथम राष्षपति
उत्तर :
(b) बोल्शेविक क्रान्ति का नेता

प्रश्न 22.
अन्तर्राष्रीय श्रम संस्था की स्थापना कब हुई ?
(a) 10 जनवरी 1920 ई०
(b) 10 फरवरी, 1920 ई०
(c) 10 मार्च 1920 ई०
(d) 10 अप्रैल 1920 ई०
उत्तर :
(a) 10 जनवरी 1920 ई०

प्रश्न 23.
ब्रेस्ट लिटवोस्क की संधि किसके बीच हुई थी ?
(a) जर्मनी और रूस
(b) जर्मनी और फ्रांस
(c) जर्मनी और जापान
(d) जर्मनी और बिटेन
उत्तर :
(a) जर्मनी और रूस

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प्रश्न 24.
‘खूनी रविवार’ ‘की घटना किस देश में हुई थी ?
(a) चीन
(b) जापान
(c) फ्रांस
(d) रूस
उत्तर :
(d) रूस

प्रश्न 25.
लेनिन, स्टालिन और ट्रास्की किस दल के नेता थे ?
(a) एंग इटली
(b) नाजी पार्टी
(c) फासी पार्टीं
(d) बोल्शेविक पार्टी
उत्तर :
(d) बोल्शेविक पार्टी

प्रश्न 26.
राष्ट्र संघ की स्थापना किस स्थान पर हुई थी ?
(a) वेनिस
(b) पेरिस
(c) जेनेवा
(d) वाशिंगटन
उत्तर :
(c) जेनेवा

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प्रश्न 27.
1939 ई० मे कौन सी लड़ाई यूरोप में हुई थी?
(a) बोल्श्रेविक
(b) फ्रांस की कान्ति
(c) रक्तहोन कान्ति
(d) सेन का गृह युद्ध
उत्तर :
(d) स्मेन का गृह युद्ध

प्रश्न 28.
कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (कोमिन्टर्न) को कब समाप्त कर दिया गया –
(a) 1943
(b) 1940
(c) 1944
(d) 1950
उत्तर :
(a) 1943

प्रश्न 29.
जर्मन की सेनाओं ने प्रथम विश्ष युद्ध में प्रवेश कब किया –
(a) 5 अगस्त 1914
(b) 2 फरवरी 1914
(c) 3 मार्च 1914
(d) 15 जून 1914
उत्तर :
(a) 5 अगस्त 1914

प्रश्न 30.
ब्रिटिश सेना का आगमन युद्ध में कब हुआ ?
(a) 22 अगस्त 1914
(b) 22 मार्च 1914
(c) 22 अैैल 1914
(d) 22 फरवरी 1914
उत्तर :
(a) 22 अगस्त 1914

प्रश्न 31.
जर्मनी ने फ्रांस के वर्डेन दुर्ग पर आक्रमण कब किया ?
(a) 1916 ई०
(b) 1915 ई०
(c) 1914 ई०
(d) 1917 ई०
उत्तर :
(a) 1916 ई०

प्रश्न 32.
1917 ई० में जर्मनी ने ‘यू बोट अभियान’ अर्थात् पनडुब्बियों का व्यापार आक्रमण किस देश पर किया ?
(a) इग्लेण्ड
(b) रूस
(c) जापान
(d) इटली
उत्तर :
(a) इग्लैण्ड

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प्रश्न 33.
वार्साय की संधि हुई-
(a) 8 जनवरी 1919 ई. को
(b) 5 मार्य 1919 ई को
(c) 28 जुन 1919 ई को
(d) 11 जुलाई 1919 ई. को
उत्तर :
(c) 28 जून 1919 ईं को

प्रश्न 34.
वुड्रो विल्सन किस देश का राप्रपति था ?
(a) अनेरिका
(b) इग्लेण्ड
(c) जर्मनी
(d) इटली
उत्तर :
(a) अमेरिका

प्रश्न 35.
जर्मनी ने आत्मसमर्पण कब किया था ?
(a) 10 नवम्बर 1918
(d) 7 दिसम्बर 1920
(c) 15 फरवरी 1919
(d) 13 जून 1917
उत्तर :
(a) 10 नवम्बर 1918

प्रश्न 36.
मुसोलिनी ने इटली में फासिस्ट पार्टी की स्थापना की –
(a) अप्रैल 1919 ई. में
(b) फरवरी 1919 ई. में
(c) मई 1919 ई. में
(d) मार्च 1919 ई. में
उत्तर :
(d) मार्च 1919 ई. में

प्रश्न 37.
मुसोलिनी रोम का प्रधानमंत्री कब बना ?
(a) 30 अक्टृबर 1922
(b) 28 जनवरी 1923
(c) 23 फरवरी 1924
(b) 3 मार्च 1922
उत्तर :
(a) 30 अवट्बर 1922

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प्रश्न 38.
‘मेरा संघर्ष’ नामक पुस्तक के लेखक कौन है ?
(a) एड्डोल्फ हिटलर
(b) मुसोलिनी
(c) लेनिन
(d) स्टालिन
उत्तर :
(a) एडोल्क हिंटलर

प्रश्न 39.
मुसोलिनी ने रोम पर चढ़ाई कब की ?
(a) 28 अक्टूबर 1922
(b) 28 फरबरी 1921
(c) 28 जनवरी 1923
(d) 28 मार्च 1920
उत्तर :
(a) 2 म अक्टबर 1922

प्रश्न 40.
रूस में बोल्शोविक क्राति हुई –
(a) 1915 ई, में
(b) 1916 ई. में
(c) 1917 ई. में
(d) 1918 ई. में
उत्तर :
(c) 1917 है में

प्रश्न 41.
मुसोलिनी का जन्म हुआ –
(a) 1980 ई. में
(b) 1983 ई में
(c) 1985 ईं. में
(d) 1990 ई. में
उत्तर :
(b) 1983 ई. में

प्रश्न 42.
हिटलर का जन्म हुआ-
(a) 20 अप्रैल 1889 ई, को
(b) 5 मार्च 1919 ई को
(c) 28 जून 1919 ई. को
(d) 11 जुलाई 1919 ई को
उत्तर :
(c) 28 जून 1919 ई. को

प्रश्न 43.
नवम्बर 1917 की रूस की बोल्शेविक क्रान्ति के पश्चात रूस के शासन की बागडोर किसके हाथों में आयी थी-
(a) स्टालिन
(b) लेनिन
(c) केरेन्सकी
(d) ट्राटस्की
उत्तर :
(b) लेनिन

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प्रश्न 44.
वाल स्ट्रीट संकट कब प्रारम्भ हुआ?
(a) 1929 ई०
(b) 1930 ई०
(c) 1940 ई०
(d) 1950 ई०
उत्तर :
(a) 1929 ई०

प्रश्न 45.
खूनी रविवार की घटना 1905 ई. किस तिथि को घटी थी –
(a) 3 जनवरी को
(b) 6 जनवरी को
(c) 9 जनवरी को
(d) 23 जनवरी को
उत्तर :
(c) 9 जनवरी को

प्रश्न 46.
रूसी पार्लियामेंट ड्यूमा का प्रथम सत्र हुआ –
(a) 1905 ई. में
(b) 1906 ई. में
(c) 1907 ई. में
(d) 1908 ई. में
उत्तर :
(b) 1906 ई. में

प्रश्न 47.
रूसी क्रांति के कितने चरण (Stages) हैं –
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 6
उत्तर :
(a) 3

प्रश्न 48.
रूस में समाजवादी क्रांति हुई थी –
(a) 1905 ई. में
(b) 1911 ई. में
(c) 1917 ई. (मार्च) में
(d) 1917 ई. (नवम्बर) में
उत्तर :
(d) 1917 ई. (नवम्बर) में

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प्रश्न 49.
जरीना अलेक्जेण्डर के ऊपर अधिक प्रभाव था –
(a) लेनिन का
(b) द्वितीय निकोलम का
(c) रासपुटिन का
(d) फादर गोपन का
उत्तर :
(c) रासपुटिन का

प्रश्न 50.
किसके नेतृत्व में रूस में ‘काला आतंक का राज’ आरंभ हुआ था ?
(a) रासपुटिन
(b) स्टालिन
(c) काउण्ट विटी
(d) फादर गैपन
उत्तर :
(b) स्टालिन

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. करेन्सकी मंत्री मण्डल ___________ को जारी रखने के पक्ष में था।
उत्तर : जारशाही शासन

2. 1914 ई० में जर्मन सेना ने ___________पर आक्रमण कर दिया।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

3. वुड्रो विल्सन ___________के राष्ट्रपति थे।
उत्तर : अमेरिका।

4. राष्ट्रसंघ के भीतर मजदूरों की दशा सुधारने के लिए ___________की स्थापना की गयी।
उत्तर : अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन।

5. प्रथम विश्व युद्ध के बाद का महत्त्व घटा और ___________के प्रभाव में वृद्धि हुई।
उत्तर : जर्मनी, इंग्लैण्ड तथा फ्रांस।

6. ___________और ___________ने स्पेन में गृह-युद्ध का रूप ले लिया।
उत्तर : ब्रिटेन, फ्रांस के द्वारा शोषण की नई नीति।

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7. स्पेन के प्रथम गणतंत्र का अध्यक्ष ___________को बनाया गया।
उत्तर : जमोरा।

8. स्पेन के गृह-युद्ध से द___________ेशों का मनोबल बढ़ा।
उत्तर : जर्मनी और इटली।

9. रूस में प्रथम ‘जार’ उपाषि ग्रहण की ___________
उत्तर : चतुर्थ आइवान।

10. रूस की विधानसभा का नाम ___________था।
उत्तर : ड्यूमा।

11. ___________ई. में रूस में भूमिदास प्रथा का अन्त हुआ।
उत्तर : 1861

12. 1857 ई. में ___________के भूमिदासों को मुक्ति मिली।
उत्तर : लिधुआनिया।

13. ___________को ‘मुक्तिदाता जार’ कहा जाता है।
उत्तर : द्वितीय अलेक्जेण्डर।

14. जमींदार एवं मुक्त भूमिदासों के बीच जमीन के बंटवारे की जिम्मेदारी ___________के हाथों में दी गयी थी।
उत्तर : लैंड मजिस्ट्रेट।

15. रूस में मुक्त भूमिदासों की जमीज का स्वामित्व ___________के हायों में था।
उत्तर : मिर।

16. रूसी जार ___________की मृत्यु बम लगने से हुई।
उत्तर : द्वितीय अलेक्जेण्डर।

17. रूस की ‘प्रथम क्रांति’___________की क्रांति के नाम से परिचित है।
उत्तर : 1905 ई.।

18. रूस में 1905 ई. की क्राति___________के शासनकाल में हुई थी।
उत्तर : निकोलस द्वितीय

19. रूस में 1917 ई. की क्रांति___________के शासनकाल में हुई थी।
उत्तर : निकोलस द्वितीय।

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20. ___________आन्दोलन का लष्य आतंकवाद के जरिये रूस में जारशाही को खत्म करना था।
उत्तर : नरोदनिक।

21. पोर्ट्समाऊय की संधि ___________युद्ध के बाद हुई।
Ans: रूस-जांपान।

22. 3 जनवरी 1905 ई. में ___________ जार के विरुद्ध प्रथम श्रमिकवर्ग का विद्रोह आरंभ हुआ।
उत्तर : सेंट पिट्सबर्ग में।

23. ‘खूनी रविवार’ की घटना ___________में हुई।
उत्तर : सेंट पिद्सबर्ग।

24. विद्रोहियों के हाधों निकोलस द्वितीय के __________ग्रैण्ड ड्यूक सरगास की मृत्यु हुई।
उत्तर : दादाजी।

25. __________ई: की क्रांति 1917 ई. की क्रांति का ड्रेंस रिहर्सल था।
उत्तर : 1905 ई.।

26. केरेन्क्की द्वारा _________गया। दल की मदद से कार्मिलाब के सैनिक विद्रोह को व्यर्थ किया
उत्तर : बोल्रोविक।

27. लेनिन ने अपनी अप्रैल धिसिस में मांग की कि देश की समस्त शक्तियाँ _________के हाय में सौंप देनी चाहिये।
उत्तर : सोवियत सरकार।

28. बोस्निया एवं हर्जगोबिना नामक दो स्थान _________के साथ युक्त होना चाहते थे।
उत्तर : सर्बिया।

29. 1878 ई. में बर्लिन समझौता के द्वारा बोस्निया एवं हर्जगोबिना नामक दोनों स्थानों में _________का शासन प्रतिष्ठित हुआ।
उत्तर : अंस्ट्रिया।

30. वर्साय संधि द्वारा मेमेल बन्दरगाह _________को दिया गया ।
उत्तर : लिथु आनिया।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

31. वर्साय संधि द्वारा के अनजिप बन्दरगाह _________को ‘मुक्त बन्दरगांह’ के रूप में घोषित किया गया।
उत्तर : जर्मनी।

32. सेराजेवो हत्याकाण्ड की पृष्ठभूमि में _________ने सर्बिया पर आक्रमण किया।
उत्तर : ऑस्ट्रिया।

33. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 ई. में शान्ति सम्मेलन_________ शहर में आयोजित हुआ।
उत्तर : पेरिस।

34. राष्ट्रसंघ की बात कही गयी है वुड्रो विल्सन के चौदह सूत्री शर्त की _________शर्त में।
उत्तर : 14 वीं।

35. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद् मित्रशक्ति एवं जर्मनी के बीच _________की संधि हुई।
उत्तर : वर्साय।

36._________ संधि को विवशतामूलक संधि कहा जाता है।
उत्तर : वर्साय।

37. 1929 ई. में आर्थिक महामंदी सर्वप्रथम में _________आरंभ हुई।
उत्तर : अमेरिका।

38. महामंदी के कारण यूरोपीय देशों में सबसे अधिक हानि_________ को हुई।
उत्तर : जर्मनी।

39. ‘काला वृहस्पतिवार’ के रूप में चिह्नित है 1929 ई. का _________
उत्तर : 24 अक्टूबर।

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40. 1929 ई. की मंदी के कारण _________केंडिट आन स्टाल्ट नामक बैंक दिवालिया घोषित हुआ।
उत्तर : ऑस्ट्रिया का।

41. हिटलर ने 1936 ई. में _________दखल किया।
उत्तर : राइनलैण्ड।

42. फासिस्ट के सदस्य _________नाम से जाने जाते थे।
उत्तर : काली कुर्ती के

43. 1922 ई. में _________इटली की शासन क्षमता दखल किया।
उत्तर : मुसोलिर्नी।

44. मुसोलिनी ने 1923 ई. में _________करफु द्वीप द्वल किया।
उत्तर : ग्रीस का।

45. मुसोलिनी अविसीनिया और युथोपिया दखल किया _________ई.में।
उत्तर : 1936

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. 17 वीं सदी में रूस की कुल जनसंख्या का प्राय: 95% कृषक थे।
उत्तर : True

2. रूस का कृषक सम्पदाय मूलत: दो भागों में विभक्त था- स्वाधीन कृषक एवं धनी कृषक।
उत्तर : False

3. जार के शासनकाल में रूस में मध्यम श्रेणी का अस्तित्व था।
उत्तर : False

4. मुक्ति पाने वाले भूमिदास अपनी प्राप्त जमीन को दान, बंधक या बिक्री कर सकते थे।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

5. रूस में जो भूमिदास कृषि से नहीं जुड़े थे, उन्हें मुक्ति के बाद जमीन नहीं मिली
उत्तर : True

6. रूस के नारोदनिक आन्दोलन की नीति थी। लोगों के पास जाकर क्रांतिकारी चिन्ताधारा के बारे में सचेतन करना
उत्तर : True

7. जार द्वितीय अलेक्जेण्डर का आदर्श था, ‘एक जार, एक चर्च, एक रूस।’
उत्तर : False

8. रूस के निहिलिष्ट आन्दोलनकारी बाद में नारोदनिक या जनतावादी आन्दोलन के साथ मिल गये।
उत्तर : True

9. बोल्शेंिक दल का लक्ष्य क्रांति द्वारा रूस में समाज व्यवस्था का परिवर्तन करना था जबकि मेनशेविक दल का लक्ष्य संसदीय व्यवस्था के माध्यम से समाज व्यवस्था का परिवर्तन करना था।
उत्तर : True

10. मार्च, 1917 में रूस में समाजतांत्रिक क्रांति सफल हुई।
उत्तर : False

11. रूस त्रिशक्ति गुट के पक्ष में प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ था।
उत्तर : True

12. मार्च, 1917 में रूस में केरेन्की के नेतृत्व में अस्थायी प्रजातान्त्रिक सरकार की स्थापना हुई।
उत्तर : True

13. नवम्बर, 1917 में रूस की विधानसभा (ड्यूमा) में बुर्जुआ नेताओं ने प्रिंस जार्ज लुवव् के नेतृत्व में रूस की शासन क्षमता दखल की। यह घटना नवम्बर क्रांति के नाम से परिचित है।
उत्तर : False

14. लेनिन ने कृषक, श्रमिक, सैनिक एवं आम लोगों के सहयोग से ‘सर्वहारा एकनायकत्व’ प्रतिष्ठा की बात कही थी।
उत्तर : True

15. मेनशेविक पार्टी ने अस्थायी प्रजातंत्र को समाप्त कर सोवियत सरकार की स्थापाना की।
उत्तर : False

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16. प्रथम विश्वयुद्ध के पहले जर्मनी एंग्लो सैवशन जाति एवं इंगलैण्ड टियूटानिक जाति के श्रेष्ठत्व का प्रचार करता था।
उत्तर : False

17. दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश उपनिवेश में इंगलैण्ड एवं बूयोर लोगों के बीच युद्ध के समय जर्मनी ने बूयोर प्रेसिडेन्ट क्लूपर को मदद करने का प्रस्ताव दिया था।
उत्तर : True

18. सेराजेवो हत्याकाण्ड को लेकर सर्बिया स्लाव जाति को आततायी कहकर सम्बोधित किया गया था।
उत्तर : False

19. जर्मनी से ब्रेस्टलिटवोस्क की संधि ( 1918 ई.) करके रूस प्रथम विश्व युद्ध से हट गया।
उत्तर : True

20. अमेरिका को आर्धिक संकट से मुक्त करने के लिये अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने ‘न्यू डील’ की घोषणां की थी।
उत्तर : False

21. जर्मन शासक द्वितीय विलियम ‘हेरेनवक तत्व’ के उग्र समर्थक थे।
उत्तर : False

22. हिटलर द्वारा 1938 ई. में ऑस्ट्रिया एवं चेकोस्लोवाकिया दखल किया गया।
उत्तर : True

23. मुसोलिनी के फासिस्ट दल के सदस्य काला पोशाक पहनते थे, इसी से उन्हें ‘काला कुर्ता वाला’ कहा जाता था।
उत्तर : True

24. हिटलर ने जर्मनी में कम्युनिस्ट एवं दूसरी पार्टियों के प्रति जो आक्रमणात्मक दमनकारी नीति अपनायी थी वह ‘एक्याड्रिज्म’ नाम से परिचित थी।
उत्तर : False

25. मुसोलिनी की ‘अवन्टी’ पत्रिका ‘नाजी पार्टी के बाइबिल’ नाम से परिचित थी।
उत्तर : False

26. नाजी पार्टी का प्रमुख अखबार ‘पीपुल्स आब्जर्वर’ था।
उत्तर : True

27. हिटलेर की जीवनी का लेखक प्रमुख इतिहासकार एलन बुल्क था।
उत्तर : True

28. स्पेन की पापुलर फ्रण्ट सरकार ने केसारे कुई रोपा को कैनारी द्वीप समूह में निर्वासन दिया।
उत्तर : False

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29. हिटलर के यहूदी निधन विभाग के प्रमुख गोएबल्स थे।
उत्तर : False

30. हिटलर ने 1 जुलाई 1939 ई. को पोलैण्ड पर आक्रमण किया।
उत्तर : True

31. स्पेन का गृहयुद्ध आंतरिक युद्ध था।
उत्तर : False

32. 1917 ई. में बोल्शेविक क्रांति के समय निकोलस द्वितीय रूस’का जार था।
उत्तर : True

33. जर्मनी में संसद को रिचस्टांग कहा जाता था।
उत्तर : True

34. 1917 ई. में बोल्शेविक क्रांति के समय लेनिन रूस से बाहर थे।
उत्तर : True

35. युद्ध में वीरता दिखाने के कारण हिटलर को आयरन क्रॉस पदक दिया गया था।
उत्तर : True

36. स्टालिन लाल सेना के नायक थे।
उत्तर : False

37. जार रोमानोव वंश के शासक थे।
उत्तर : True

38. पेरिस सम्मेलन ने इटली को खुश कर दिया था।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तस्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जारतंत्र (1) पिटर द ग्रेट
(B) आधुनिक रूस के जनक (2) मिखाइल रोमानोव
(C) डिसमविस्ट विद्रोह (3) द्वितीय अलेक्जेण्डर
(D) भूमिदास प्रथा की समाप्ति (4) प्रथम निकोलस

उत्तर :

स्तस्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जारतंत्र (2) मिखाइल रोमानोव
(B) आधुनिक रूस के जनक (1) पिटर द ग्रेट
(C) डिसमविस्ट विद्रोह (4) प्रथम निकोलस
(D) भूमिदास प्रथा की समाप्ति (3) द्वितीय अलेक्जेण्डर

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुक्तिदाता जार (1) रासपुतिन
(B) 1905 ई. की क्रान्ति (2) लेनिन
(C) बोल्शेविक क्रांति (3) द्वितीय निकोलस
(D) अलेक्जेण्डर (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुक्तिदाता जार (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर
(B) 1905 ई. की क्रान्ति (3) द्वितीय निकोलस
(C) बोल्शेविक क्रांति (2) लेनिन
(D) अलेक्जेण्डर (1) रासपुतिन

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1801-25 ई. (1) प्रथम निकोलस
(B) 1825-55 ई. (2) द्वितीय निकोलस
(C) 1855-81 ई (3) प्रथम अलेक्जेण्डर
(D) 1894-1917 ई. (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1801-25 ई. (3) प्रथम अलेक्जेण्डर
(B) 1825-55 ई. (1) प्रथम निकोलस
(C) 1855-81 ई (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर
(D) 1894-1917 ई. (2) द्वितीय निकोलस

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1825 ई. (1) द्वितीय निकोलस को राजगदी
(B) 1861 ई. (2) भूमिदासों की मुक्ति
(C) 1881 ई. (3) डिसमव्रिस्ट विद्रोह
(D) 1894 ई. (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर की मृत्यु

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1825 ई. (3) डिसमव्रिस्ट विद्रोह
(B) 1861 ई. (2) भूमिदासों की मुक्ति
(C) 1881 ई. (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर की मृत्यु
(D) 1894 ई. (1) द्वितीय निकोलस को राजगदी

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प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जर्मन कैसर (1) द्वितीय निकोलस
(B) बोल्शेविक क्रांति (2) स्टोलिपिन
(C) काले आतंक का राज (3) लेनिन
(D) अप्रैल थिसिस (4) द्वितीय विलियम

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जर्मन कैसर (4) द्वितीय विलियम
(B) बोल्शेविक क्रांति (1) द्वितीय निकोलस
(C) काले आतंक का राज (2) स्टोलिपिन
(D) अप्रैल थिसिस (3) लेनिन

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) वाइमर प्रजातंत्र (1) फादर गैवन
(B) स्टार्म टुपर्स (2) ट्रॉटस्की
(C) खूनी रविवार (3) फ्रेड़िक इबर्ट
(D) सोवियत रूस के विदेशमंत्री (4) एरनेस्ट रौमे

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) वाइमर प्रजातंत्र (3) फ्रेड़िक इबर्ट
(B) स्टार्म टुपर्स (4) एरनेस्ट रौमे
(C) खूनी रविवार (1) फादर गैवन
(D) सोवियत रूस के विदेशमंत्री (2) ट्रॉटस्की

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इटली के प्रथानमंत्री (1) काऊण्ट उटी
(B) द्वितीय निकोलस के मंत्री (2) पिटर स्टोलिपिन
(C) जार के प्रधानमंत्री (3) प्रिंस जार्ज लुवव्
(D) अस्थायी प्रजातान्त्रिक सरकार (4) लुइजी फैक्टा

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इटली के प्रथानमंत्री (4) लुइजी फैक्टा
(B) द्वितीय निकोलस के मंत्री (1) काऊण्ट उटी
(C) जार के प्रधानमंत्री (2) पिटर स्टोलिपिन
(D) अस्थायी प्रजातान्त्रिक सरकार (3) प्रिंस जार्ज लुवव्

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प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) रूस के सेनापति (1) हिटलर
(B) फादर्स एण्ड सन्स (2) लेनिन
(C) साम्राज्यवाद पूंजीवाद का सर्वोच्च स्तर (3) तुर्गनव
(D) मीन काम्फ (4) कार्निलव

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) रूस के सेनापति (4) कार्निलव
(B) फादर्स एण्ड सन्स (3) तुर्गनव
(C) साम्राज्यवाद पूंजीवाद का सर्वोच्च स्तर (2) लेनिन
(D) मीन काम्फ (1) हिटलर

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) सेराजेवो हत्याकाण्ड (1) व्लार्क हुवर
(B) श्योर प्रसिडेन्ट (2) हिटलर
(C) अमेरिका के राष्ट्रपति (3) नैवेरिलो भिन्सेप
(D) हेरेनबक तत्व (4) क्लुगर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) सेराजेवो हत्याकाण्ड (3) नैवेरिलो भिन्सेप
(B) श्योर प्रसिडेन्ट (4) क्लुगर
(C) अमेरिका के राष्ट्रपति (2) हिटलर
(D) हेरेनबक तत्व (1) व्लार्क हुवर

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1898 ई. (1) प्रथम विश्युुद्ध
(B) 1903 ई. (2) पोदर्समाउथ की संधि
(C) 1905 ई. (3) सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी
(D) 1914 ई. (4) बोल्शेविक पार्टी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1898 ई. (3) सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी
(B) 1903 ई. (4) बोल्शेविक पार्टी
(C) 1905 ई. (2) पोदर्समाउथ की संधि
(D) 1914 ई. (1) प्रथम विश्युुद्ध

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1917 ई. (1) नयी आर्थिक नीति
(B) 1919 ई. (2) महामंदी
(C) 1921 ई (3) पेरिस का शांति सम्मेलन
(D) 1929 ई. (4) जारशाही की समाप्ति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1917 ई. (4) जारशाही की समाप्ति
(B) 1919 ई. (3) पेरिस का शांति सम्मेलन
(C) 1921 ई (1) नयी आर्थिक नीति
(D) 1929 ई. (2) महामंदी

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प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) फुहरर (1) मुसोलिनी
(B) इल-डुचे (2) जेनरल फ्रैंको
(C) गेस्टापो (3) हिमलर
(D) स्पेन का गृहयुद्ध (4) हिटलर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) फुहरर (4) हिटलर
(B) इल-डुचे (1) मुसोलिनी
(C) गेस्टापो (3) हिमलर
(D) स्पेन का गृहयुद्ध (2) जेनरल फ्रैंको

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 7 Question Answer – भारत के संसाधन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
किन्हीं दो सामान्य सुलभ संसाधनों का नाम लिखिए?
उत्तर :
वनस्पति, कृषि योग्य मिट्टी आदि।

प्रश्न 2.
कोरबा कोयला उत्पादक केन्द्र कहां स्थित है?
उत्तर :
कोरबा कोयला उत्पादक केन्द्र छत्तीसगढ़ में स्थित है ।

प्रश्न 3.
धातुएं किस प्रकार का संसाधन हैं?
उत्तर :
अजैव संसाधन।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 4.
एक पारम्परिक ऊर्जा स्रोत का नाम बताओ।
उत्तर :
कोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न 5.
पश्चिम बंगाल का तेल शोधक कारखाना कहां स्थित है?
उत्तर :
हल्दिया में।

प्रश्न 6.
एक नवीकरण संसाधन का नाम बताइए।
उत्तर :
वन।

प्रश्न 7.
एक गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत का नाम बताओ।
उत्तर :
सूर्यताप, पवन।

प्रश्न 8.
जल विद्युत किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर :
ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)

प्रश्न 9.
पश्चिम भारत के महत्वपूर्ण परमाणु केन्द्र का नाम लिखो।
उत्तर :
मुंबई के निकट तारा पुर में ‘भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर’ (Bhabha Atomic Research Center), राजस्थान में स्थित कोटा ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 10.
वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण हो चुका है और जिनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, क्या कहा जाता है?
उत्तर :
विकसित संसाधन।

प्रश्न 11.
लौह अयस्क के जमाव की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन सा स्थ्रान है?
उत्तर :
पहला स्थान है।

प्रश्न 12.
भारत में पहला परमाणु विद्युत केन्द्र कहाँ स्थापित किया गया था?
उत्तर :
तारापुर महाराष्ट्र में।

प्रश्न 13.
भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक खनिज तेलशोधक कारखाने का नाम लिखो।
उत्तर :
हल्दिया तेलशोधक केन्द्र।

प्रश्न 14.
भारत में किस राज्य का लगभग सम्पूर्ण लौह अयस्क निर्यात कर दिया जाता है?
उत्तर :
गोवा का।.

प्रश्न 15.
संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर :
भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए।

प्रश्न 16.
कर्नाटक की एक लौह-अयस्क खान का नाम लिखिए?
उत्तर :
केमनगण्ड़ी की खान (कर्नाटक)

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प्रश्न 17.
भारत में पहला जल विद्युत केन्द्र कहाँ स्थापित किया गया था?
उत्तर :
दार्जिलिग

प्रश्न 18.
कौन-सा लौह अयस्क सर्वोत्तम कोटि का होता है?
उत्तर :
मैग्नेटाइट।

प्रश्न 19.
भारत में किस जाति का लौह अयस्क पाया जाता है?
उत्तर :
हेमेटाइट और मैग्नेटाइट।

प्रश्न 20.
नेवेली लिग्नाइट परियोज़ना का विकास भारत के किस राज्य में हुआ है?
उत्तर :
तमिलानाडु

प्रश्न 21.
भारत में उत्पादित कुल कोयला के कितने प्रतिशत का उपयोग ताप विद्युत उत्पादन में किया जाता है?
उत्तर :
73 %

प्रश्न 22.
कोयला के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
उत्तर :
तीसरा स्थान है।

प्रश्न 23.
भारत में कुल आवश्यकता के कितने प्रतिशत खनिज तेल का खनन होता है?
उत्तर :
30 %

प्रश्न 24.
भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र कौन सा है?
उत्तर :
असम का तेल कृटिन्ध।

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प्रश्न 25.
भारत के किसी एक जलविद्युत उत्पादन केन्द्र का नाम लिखिए।
उत्तर :
महाराष्ट्र, खणोली, भिवपुरो, भीरा, कोयना।

प्रश्न 26.
विश्न का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया?
उत्तर :
आबनिंस्क रूस में।

प्रश्न 27.
तीन प्रमुख लौह-अयस्क उत्पादक केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
घाली-राझरा (छत्तीसगढ़), गुरूमाहिसानी (उड़िसा), एवं केमानगुण्डी (कर्नाटक)

प्रश्न 28.
भारत में कौन दो कोयला क्षेत्र पाये जाते है?
उत्तर :
गोण्डवाना क्षेत्र और टर्शियरी क्षेत्र।

प्रश्न 29.
भारत के सबसे पुराने खनिज तेल शोघक कारखाने का नाम लिखो।
उत्तर :
डिगबोई।

प्रश्न 30.
भारत के सबसे बड़े तेल शोधक कारखाने का नाम लिखो।
उत्तर :
कोयलो, गुजरात में।

प्रश्न 31.
कोयला किस प्रकार का खनिज है?
उत्तर :
अवसादी शैलो में पाये जानेवाला अधात्विक खनिज है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 32.
खनिज तेल के दो प्रमुख खनन केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
असम में डिगब्रोई तथा गुजरात में अंकलेश्वर।

प्रश्न 33.
भारत के लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक कौन-सा देश हैं?
उत्तर :
जापान।

प्रश्न 34.
तमिलाडु में किस प्रकार का कोयला पाया जाता है?
उत्तर :
लिग्नाइट।

प्रश्न 35.
भारत किस देश में कोकिंग कोयला आयात करता है?
उत्तर :
आस्ट्रेलिया।

प्रश्न 36.
अंकलेश्वर क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
अकलेश्वर गुजरात तेल क्षेत्र सबसे बड़ा भंडार है।

प्रश्न 37.
सागर सप्राट क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर :
सागर में खनिज तेल निकालने के लिए।

प्रश्न 38.
एक असमाप्य ऊर्जा स्रोत का नाम बताइए।
उत्तर :
ताप उर्जा।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 39.
पश्चिम बंगाल के एक ताप विद्युत केन्द्र का नाम बताइये।
उत्तर :
दुर्गापुर, बेण्डेल।

प्रश्न 40.
भारत में कहाँ पवन ऊर्जा उत्पादन की सम्भावना सबसे अधिक है।
उत्तर :
तमिलनाडु।

प्रश्न 41.
एक सौर ऊर्जा से संचालित उपकरण का नाम बताओ।
उत्तर :
सोलर कुकर, सोलर इन्वर्टर।

प्रश्न 42.
भारत में ज्वारीय शक्ति का उत्पादन कहाँ अधिक सम्भव है?
उत्तर :
गुजरात, तमिलनाडु।

प्रश्न 43.
पश्चिम बंगाल के एक जल विद्युत उत्पादन केन्द्र का नाम बताओ।
उत्तर :
मयुराक्षी, जलढाका।

प्रश्न 44.
सफेद कोयला (White Coal) किसे कहते हैं?
उत्तर :
जल विद्युत को।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 45.
पश्चिम बंगाल के एक ताप विद्युत केन्द्र का नाम बताइए।
उत्तर :
दुर्गापुर

प्रश्न 46.
भारत के लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक कौन-सा देश है ?
उत्तर :
जापान।

प्रश्न 47.
तमिलनाडु में किस प्रकार का कोयला पाया जाता है?
उत्तर :
लिमोनाइट।

प्रश्न 48.
भारत किस देश से कोकिंग कोयला आयात करता है?
उत्तर :
आस्ट्रेलिया।

प्रश्न 49.
अंकलेश्वर क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
अंकलेश्वर गुजरात तेल क्षेत्र सबसे बड़ा भंडार है।

प्रश्न 50.
सागर सग्राट क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
सागर मे खनिज तेल निकालने के लिए।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के संसाधन होने के लिए किन-किन बातों का होना आवश्यक है?
उत्तर :
किसी वस्तु के संसाधन होने के लिए तीन-बातों प्रकृति, मनुष्य और प्राद्योगिकी का होना जरूरी है?

प्रश्न 2.
अजैविक संसाधन से आप क्या समझते है?
उत्तर :
अजैविक संसाधन (Abiotic Resources) : अजीवित वस्तुओं से प्राप्त होनेवाले पदार्थो को अजेविक संसाधन कहा जाता है। ऐसे संसाधन खानो या चट्टानों से खनिज रूप मे उपलब्ब होते हैं जैसे-लोहा, सोना, चाँदी, ताँबा, कोयला, पेट्रोलियम आदि।

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प्रश्न 3.
भारत के चार प्रमुख परमाणु विद्युत केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
मुंबई के निकट तारापुर, राजस्थान में कोटा, उत्तर प्रदेश में नरोरा, तलिमनाडु में कलपक्कम

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल के दो ताप विद्युत केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
बैन्डेल, वकेश्वर, कोलाघाट।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन से क्या समझते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
वे संसाधन जो किसी देश की सीमा से दूर खुले महासागर द्वारा प्राप्त हो उसे अन्तरांष्ट्रीय संसाधन कहते हैं। इन संसाधनों को अंतराष्ट्रीय सहमति के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता। जैसे तट रेखा से 200 कि०मी० की दूरी में स्थित महासागर।

प्रश्न 6.
तमिनाडु के दो परमाणु विद्युत केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
ईडुक्की, कलपक्कम।

प्रश्न 7.
जल विद्युत के क्या लाभ है?
उत्तर :
प्रदुषण मुक्त, कम खर्चीला, शक्ति का सस्ता साधन।

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प्रश्न 8.
जल विद्युत उत्पादन के क्यो दोष है?
उत्तर :
असदावाहिनी नदी, दूर खपत क्षेत्र तक पहुँचाने में असुविधा।

प्रश्न 9.
विद्युत कितने प्रकार की होती है?
उत्तर :
विद्युत मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है –

  • ताप विद्युत
  • जल विद्युत
  • परमाणु विद्युत।

प्रश्न 10.
कोयले के उप पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर :
कोलतार, बेंजोल, नेष्थलिन।

प्रश्न 11.
पेट्रोलियम से प्राप्त होने वाले उप-पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर :
चिकनाई तेल, गैस, सौन्दर्य के सामान।

प्रश्न 12.
भारत किन देशों से खनिज तेल का आयात करता है?
उत्तर :
रासिया, इरान, सऊदी अरब।

प्रश्न 13.
खनिज लोहा से क्या बनाया जाता है?
उत्तर :
खनिज लोहा से ढलवाँ लोहा (Pig Iron) तथा इस्पात (Steel) बनाया जाता है।

प्रश्न 14.
चक्रीय संसांधन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
चक्रीय संसाधन (Recyclable Resources) :- जिन संसाधनों का उपयोग बार-बार किया जाये, वे चक्रीय संसाधन कहलाते हैं। जैसे-लोहा, चाँदी, सोना आदि।

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प्रश्न 15.
आज के युग को लौह युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
आज लोहा विश्व में सबसे उपयोगी धातु है। मानव के उपयोग में आने वाली सूई जैसी छोटी चीज से लेकर विशाल यंत्रों, वायुयानों एवं जलयानों तक का निर्माण लोहे से ही होता है। इसी से आज के युग को लौह युग कहा जाता है।

प्रश्न 16.
भारत किन देशों को कोयले का नियति करता है?
उत्तर :
भारत कोयले का निर्यात मुख्य रूप से श्रीलंका, पाकिस्तान, बंगलादेश, सिंगापुर, हांकांग, म्यामार, मारीशस आदि देशों को करता है।

प्रश्न 17.
भारत किन देशों से कोकिंग कोयला आयात करता है?
उत्तर :
भारत कोकिंग कोयले का आयात ऑस्ट्रेलिया, कनाडा तथा पोलैण्ड से करता है।

प्रश्न 18.
भारत किन देशों से खनिज तेल का आयात करता है?
उत्तर :
भारत ईरान, कुबैत, इराक, सउदी अरब, बहरीन, बेनेजुएला, म्यांमार तथा इण्डोनेशिया आदि देशों से खनिज तेज का आयात करता है।

प्रश्न 19.
विकसित संसाधन से क्या समझते हैं?
उत्तर :
वे संसाधन जिनका सर्वोक्षण किया जा चुका है और उनके उपयोग की गुणवता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, विकसित संसाधन कहलाते हैं।

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प्रश्न 20.
कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला का वर्गीकरण कीजिए।’
उत्तर :
कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला पाँच प्रकार का होता है

  1. एन्थासाइट
  2. विटुमिनस
  3. लिग्नाइट
  4. पीट
  5. कैनेल।

प्रश्न 21.
भू-तापीय ऊर्जा से क्या समझते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के आंतरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 22.
जैविक संसाधन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जैविक संसाधन (Biotic Resources) :- जिन संसाधनों को जीवों या जीवित वस्तुओं से प्राप्त किया जाता है वे जैवीय संसाधन कहलाते हैं। प्राणियों और वनस्पतियों से प्राप्त या सुलभ संसाधन जैवीय संसाधन हैं जैसे-जंगली जीवजन्तु, पालतु पश-पक्षी, मछ्छलियाँ, कृषि से प्राप्त फसलें आदि।

प्रश्न 23.
प्राकृतिक वनस्पतियों को नवीकरणीय संसाधन क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
प्राकृतिक वनस्पतियाँ हमारे लिए प्रकृति के द्वारा दिया गया एक बहुमूल्य संसाधन है। जंगलों को काटकर या उनसे उत्पादित वस्तु को प्राप्त कर हम अपनी जरूरतों की पूर्ति कर सकते हैं। जंगलों को काटकर पुन: वृक्षारोपण द्वारा उनकी क्षतिपूर्ति की जा सकती है। इसलिए इसे नवीकरणीय संसाधन कहते हैं?

प्रश्न 24.
परम्परागत शक्ति के साधन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
वे संसाधन जिनका व्यवहार या प्रयोग सदियों से किया जा रहा है, उसे परम्परागत संसाधन कहते है। जैसेकोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न 25.
गैर-परम्परागत शक्ति के साधन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
वे संसाधन जिनका व्यवहार आधुनिक तकनीक का प्रयोग द्वारा किया जा रहा है, उसे गैर-परम्परागत शक्ति के साधन कहते हैं। जैसे पवन उर्जा, सौर उर्जा आदि।

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प्रश्न 26.
सागर सग्राट क्या है?
उत्तर :
सागर सम्माट लोह से निर्मित एक विशाल जहाज (Rig) है जो बाम्बे हाई में तेल उत्पादन के कार्य में उपयोग हो रहा है।

प्रश्न 27.
प्राकृतिक समाग्री किसे कहते हैं?
उत्तर :
कुछ वस्तुएँ न उपयोगी है न हानिकारक हैं उन्हें Natural Stuffs कहते हैं। उदाहरण के रूप में कोयला, सोया हुआ आदमी, ये मानक के लिए न तो उपयोगी है न बेकार हैं।

प्रश्न 28.
मनुष्य की द्वैध भूमिका क्या है?
उत्तर :
मनुष्य संसावन का निर्माण करता है, किन्तु वह स्वयं भी एक संसाधन अर्थात् उत्पादन करता है। मनुष्य संसाधन का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। इसी को मनुष्य की दोहरी भूमिका (Dual role) कहा जाता है।

प्रश्न 29.
मैंगनीज का क्या उपयोग है?
उत्तर :
मैगनीज का उपयोग लौह – इस्पात उद्योग, शीशा उद्योग और ब्लीचिंग बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 30.
बाक्साइड की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
बॉक्साइड से अल्यूमिनियम प्राप्त किया जाता है। किरोसिन तेल को साफ किया जाता है और रासायनिक वस्तुओं की तैयारी की जाती है।

प्रश्न 31.
लौह-इस्पात उद्योग में मैंगनीज की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
मैंगनीज का उपयोग इस्पात को कठोर एवं जंगरोषी बनाने तथा लोहे में से गैस को हटाने के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 32.
तीन प्रमुख लौह – अयस्क उत्पादक केन्द्रों के नाम लिखो?
उत्तर :
तीन प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक केन्द्र :

  1. घाली-राक्षरा-छत्तीसगढ़
  2. गुरुमहिसानी- उड़ीसा एवं
  3. बाबा बूदन पहाड़ियों का केमानगुण्डी – कर्नाटक

प्रश्न 33.
भारत में किस प्रकार का कोयला पाया जाता है?
उत्तर :
भारत में गोण्डवाना और टर्शियरी दो प्रकार के कोयला क्षेत्र पाये जाते हैं।

प्रश्न 34.
भारतीय कोयले की क्या कमिय हैं?
उत्तर :
(i) भारतीय कोयले की किस्म निम्न है एवं यह अत्यधिक घुआँ उत्पन्न करता है।
(ii) उष्मा प्रदान करने के सन्दर्भ में भारतीय कोयला निम्न है।

प्रश्न 35.
भारतीय लौह अयस्क की क्या विशेषता है?
उत्तर :
भारतीय लौह अयस्क उत्तम कोटि का है तथा इसमें गंधक की मात्रा काफी कम (0.6 % से भी कम) होती है।

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प्रश्न 36.
मानव भी संसाधन है, कैसे?
उत्तर :
वस्तु या पदार्थ संसाधन नहीं बल्कि उसमें उपस्थित कार्यकारिता या उपयोगिता जो मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और जिन्हें मानव सुजित करता है, इसलिए मानव भी एक संसाधन हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
क्या संसाधन प्राकृतिक उपहार है? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर :
संसाधन प्राकृतिक उपहार नहीं है, संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम है। मानव स्वयं भी संसाधनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह पर्यावरण में पाये जाने वाले पदार्थो को संसाधन में परिवर्तित करता है और उनका प्रयोग करता है।

प्रश्न 2.
गैर-परम्परागत शक्ति संसाधनों से प्रदूषण क्यों नहीं होता है?
उत्तर :
सौर उर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा आदि गैर-परम्परागत ऊर्जा के सोत्र हैं। इनकी उत्पत्ति नयी तकनीकी खोज द्वारा हुई है । ये गैस, दुर्गन्ध और मलवा नहीं छोड़ते हैं। अत: इन संसाधनों का उपयोग कर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है, जो आज की सबसे बड़ी पर्यावरण की समस्या है।

प्रश्न 3.
लौह अयस्क के उपयोग एवं महत्व को लिखो।
उत्तर :
अथर्ववेद के अनुसार लोहा समृद्धि का अमोघ यन्त्र है। लोहे का उपयोग मानव विकास के उत्तर-पाषाण युग से पश्चात् वर्तमान युग तक निरन्तर बढ़ता ही जा रहा है। आधुनिक युग के औद्योगिक विकास एवं सभी प्रकार की प्रगति, देशों की श़्ति और आर्थिक समृद्धि का आधार भी लोहा एवं लोहे से निर्मित वस्तुएँ एवं मशीनें ही है। इसलिए इस युग को ‘लोह-इस्पात का युग?

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प्रश्न 4.
खनिज तेल के व्यापार का वर्णन करो।
उत्तर :
खनिज तेल को यातायात की रीढ़ कहते हैं लेकिन यह सभी देशों में नहीं पाया जाता है। खनिज तेल का प्रयोग संसार के सभी देशों यातायात, उद्योग-धंधे, कृषि में अनिवार्यत: किया ही जाता है। इस प्रकार खनिज तेल का आयात तथा निर्यात आवश्यक है। खनिज तेल निर्यातक देशीय संगठन (Organisation of Petroleum Exporting Countries = OPEC) द्वारा संसार के सभी देशें को खनिज तेल की आपूर्ति की जाती है। खनिज तेल प्रमुख निर्यातक देश, खाड़ी के देश वेनुजुएला, लीबिया, ट्यूनीशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूसीय संघ आदि हैं। इसके आयातक संसार के प्रात: सभी देश है।

प्रश्न 5.
लौह अयस्क के व्यापार का वर्णन करो।
उत्तर :
लौह अयस्क भारी व सस्ता खनिज है। कुछ विकसित, कई विकासशील व पूर्वी यूरोप के समाजवादी देश लौह अयस्क का आयात करते हैं। लौह अयस्क के अपरिमित भण्डार रूसीय परि-संघ, बाजोल, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देशों में पाये जाते है। मुख्य आयातक देश जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोपीय देश, चीन एवं अन्य विकासशील देश है। मुख्य निर्यातक देश ब्राजील, आस्ट्रेलिया, भारत, रुसीय परिसंघ युकेन, स्वीडेन, दक्षिण अफ्रिका, कनाडा, अल्जीरिया, वेनेजुएला, लाइबेरिया एवं सेन हैं।

प्रश्न 6.
कोयले के उपयोग एवं महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
कोयल के उपयोग एवं महत्व :-कोयले का मुख्य उपयोग शक्ति के साधनों के रूप में किया जाता है। किसी देश का औद्यौगिक विकास मुख्यत: कोयले पर ही निर्भर है। कोयले का प्रयोग तापीय विद्युत शाक्ति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। आजकल इसका प्रयोग रसायन तथा पेट्रो-रसायन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है। कोयल से सिन्थेटिक कपड़े, कृत्रिम तेल तथा गोला-बारूद आदि भी बनाये जा रहे हैं। कोयल का प्रयोग घरेलू ईधन के रूप में किया जाता है। इससे बाष्प पैदा करके मशीनों तथा जलयान चलाने में किया जाता है। लगभग 80 % कोयला का प्रयोग लोहा और इस्पात उद्योग तथा विद्युत शक्ति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 7.
कोयले के व्यापार की व्याख्या करो।
उत्तर :
कोयला एक भारी तथा ज्चलनशील खनिज है तथा इसका विश्व वितरण असमान होता है। यह संसार के लगभाग सभी देशों में कम या अधिक पाया जाता है। संसार के देशों से कोयल के सह-उत्पादक का आयात तथा निर्यात किया जाता है। कोयला के प्रमुख व्यापारकता देश स्वीडेन, फ्रांस, कनाडा, पाकिस्तान, बंगलादेश, दक्षिणी अफ्रीका, इटली और खाड़ी के देश है।

प्रश्न 8.
उर्जा के परम्परागत साधनों के लाभ एवं हानि को लिखो।
उत्तर :
लाभ (Advantage) :

  1. इनको जलाकर वर्तमान समय में आवश्यक 60 % उर्जा की आपूर्ति की जा रही है।
  2. ये परम्परागत साधन है जिनका उपयोग बहुत प्राचीन समय से हो रहा है।

हानि (Disadvantage) :

  1. ये अनवीकरणीय संसाधन हैं।
  2. इनका भण्डार सीमित है जो भविष्य में समाप्त हो सकता है।
  3. उर्जा के परम्परागत स्रोत प्रदूषणकारी हैं।
  4. जीवाश्म ईंधनों का विनाश तेजी से हो रहा है।

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प्रश्न 9.
भारत में उत्पादन किये जाने वाले ताप विद्युत की व्याख्या करो।
उत्तर :
देश में निरन्तर विद्युत की मांग कई गुणा बढ़ने से जब जल विद्युत एवं अणुविद्युत की परियोजनाओं द्वारा उसे पूरा कर पाना सम्भव नहीं हो पाया तो कोयले एवं खनिज तेल से ताप विद्युत गृहों की स्थापना प्रारम्भ में कोयला खन्न क्षत्रों के आस-पास की गई। ऐसे ताप विद्युत गृहों के विकास में भारत को लम्बे समय तक रूसी सहयोग-प्रोजेक्ट रिर्पोट तैयार करना, स्थान निर्धारण, मशीनरी का आयात एवं स्वदेश में ही ताप विद्युत गृह का निर्माण एवं उसका संरचनात्मक विकास एवं संचालन का पूरा प्रशिक्षण, शक्ति गृहों से उपभोक्ता केन्द्रों तक उसके लिए संचारण व्यवस्था आदि की सम्पूर्ण जानकारी रूस एवं चेक गणराज्य से प्राप्त हुई।

अब भारत में ही 500 मेगावाट तक की जेनरेटर सेट की इकाईयों का निर्माण सम्भव होने से सुपर ताप विद्युत गृह की क्षमता को बढ़ाकर 2000 से 2500 मेगावाट तक किया जा चुका है।

प्रश्न 10.
भारत में पवन ऊर्जा के विकास पर प्रकाश डालो।
उत्तर :
पवन ऊर्जा (Wind Energy) : अनुमान है कि भारत मे कुछ 45,000 मेगावाट सम्भाव्य पवन ऊर्जा है और 13,000 मेगावाट पवन ऊर्जा प्राप्त करने को प्रौद्योगिकी का विकास किया जा चुका है। अब तक 1,340 पवन ऊर्जा प्राप्त की जा चुकी है। इससे भारत स्पेन जर्मनी, सयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क तथा स्पने के बाद पवन ऊर्जा विकसित करने वाला विश्व का पांचवाँ बड़ा देश बन गया है। पवन ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अब तक 208 स्थानों को अंकित किया गया है। गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आघ प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक में पवन ऊर्जा के दोहन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पायी गई हैं। लगभग 8.8 खरब यूनिट बिजली विभिन्न राज्यों के ग्रिडी को प्रदान की गई है। उर्जा जेनेरेटर, प्रवन मिल तथा बैट्री चार्जिग सिस्टम को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। दस मेगावाट वाला एशिया का सबसे बड़ा पवन फार्म गुजरात के खम्भात में स्थापित किया गया है।

प्रश्न 11.
भारत में भूतापीय ऊर्जा के विकास की व्याख्या करो?
उत्तर :
भूतापीय ऊर्जा :- भूतापीय उर्जा वह ऊष्मा (Heat) है जो पृथ्वी के धरातल के नीचे, भूगर्भ में होनेवाले प्राकृतिक प्रकमों से पैदा होती है। भूपटल (Crust) के लगभग 50 किलोमीटर नीचे मैन्टिल (Mantle) परत विस्तृत है जो अर्द्ध द्रवित (Semi-molten) दशा में है। मैन्टल परत के नीचे लोहे तथा निकिल, युक्त द्रवित शैलों तथा रेडियोधर्मी पदार्थो के विघटन से उत्पन्न तीव्र दबाव के कारण पृथ्वी का भीतरी भाग भी गर्म हो जाता है। समान्यतः ऊष्मा का यह स्रोत पृथ्वी के बहुत नीचे स्थित होता है किन्तु कुछ क्षेत्रों में जहाँ द्रवित शैले भूपटल की दरारों से होकर पृथ्वी के धरातल के निकट आ जाती हैं, वहां वाष्प (Steam) तथा उष्ण जल के भूमिगत स्रोत उत्पन्न हो जाते हैं।

इन निक्षेपों में वेधन (Drilling) करके उनकी ऊर्जा के स्थानों एवं जल को गर्म करने, औद्योगिक कार्यों को संचालित करने तथा विद्युत उत्पादन के लिये प्रयुक्त किया जा सकता है। भूतापीय संसाधनों में शुष्क वाष्प (Dry Steam) सबसे बिरल, लेकिन वरीयता प्राप्त संसाधन है। भारत ने इस उर्जा दोहन के लिए पर्याप्त उन्नति की है। भूगर्भिक सर्वेक्षणों द्वारा 340 गर्म जल के झरनों की खोज की गयी हैं। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के तत्तापानी में 300 किलोवाट का भूपातीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की मंजूरी दी है। भारत में संभाव्य 2000 मेगावाट भूतापीय ऊर्जा विद्यमान है।

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प्रश्न 12.
लोहे के उपयोग पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
किसी भी देश की औद्योगिक उन्नति एवं सामरिक महत्व लौह इस्पात उद्योग पर निर्भर है। लौह अयस्क से कच्चा लोहा का निर्माण होता है। इससे रेलवे लाइन, गाड़याँ, हवाई-जहाज, कृषि के सामान, उत्पादन की मशीनें, सामरिक आवश्यकता के सामान, जलपोत, पनडुबब्वी बनती है। भारत खनिज लौह के बारे में आत्म निर्भर ही नहींडसका निर्यात भी करता है।

प्रश्न 13.
लौह अयस्क की विभिन्न किस्मों का विवरण दीजिए।
उत्तर :
शुद्ध धातु की मात्रा के आधार पर लौह अयस्क की प्रमुख चार किस्में हैं :-

  1. हैमेटाइट (Haematite) :- इसका रंग लाल व काला होता है। इसमें लौहांश 70 % प्रतिशत होता है। संसार में अधिकतर इसी जाति का लोहा मिलता है।
  2. मैग्नेटाइड (Magnetite) :- यह सर्वश्रेष्ठ लौह-अयस्क है। जिसमें लौहांश 72.4 प्रतिशत होता है। इसमें नमी सबसे कम होती है। इसका रंग काला होता है। इसमें चुम्बकीय गुण होता है। इसी से इसका नाम मैग्नेटाइड पड़ा।
  3. लिमोनाइट (Limonite) :- इसमें लौहांश 60 % होता है। इसका रंग पीला व भूरा होता है।
  4. सिडेराइट (Siderite) :- यह निम्नकोटि का लोहा है, जिसमें लोहाश 48 प्रतिशत रहता है। इसका रंग पीला होता है।

प्रश्न 14.
भारत में लोहे के व्यापार पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा लौह-अयस्क निर्यातक देश है। यहाँ कुल उत्पादन का लगभग 50 % से अधिक लौह-अयस्क का निर्यात कर दिया जाता है। गोवा में उत्पादित होने वाला सम्पूर्ण लौह-अयस्क निर्यात कर दिया जाता है। जापान सबसे बड़ा ग्राहक है, जो हमारे देश के कुल लौह अयस्क निर्यात के तीन-चौथाई भाग का खरीददार है। जापान के अतिरिक्त यूरोपीय देश मुख्यत: चेको स्लोवाकिया गणराज्य, जर्मनी, रूमानिया, इटली, सर्विया, पोलैण्ड, बेल्जियम, हंगरी आदि प्रमुख आयातक देश हैं।

भारत को जापानी बाजार में ऑस्ट्रेलिया एवं मलेशिया तथा यूरोपीय बाजार में लैटिन अमेरिकी एवं अफ्रीका की देशों के साथ कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है। मर्मुगाँव, मंगलौर, विशाखापत्तनम, पारादीप तथा हल्दियाँ यहाँ के प्रमुख लौह-अयस्क निर्यातक बन्दरगाह है। लौह-अयस्क के समस्त विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा 9.9 प्रतिशत है।

प्रश्न 15.
कोयले के उपयोग लिखिए।
उत्तर :
कोयले का प्रमुख उद्योग निम्न है :-

  1. स्टीम शक्ति
  2. विद्युत शक्ति
  3. घरेलु शक्ति
  4. खनिज कोक के रूप में एवं
  5. रासायनिक उद्योग में कच्चे माल के रूप में।

इसकी विविध उपयोगिता को देखकर इसे Black Diamond कहा जाता है।

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प्रश्न 16.
पेट्रोलियम को तरल सोना क्यों कहते हैं?
उत्तर :
पेट्रोलियम से कई उप-पदार्थ (By Products) प्राप्त होते हैं। इससे मशीनों के घर्षण को कम करने के लिए चिकनाई के तेल (Lubricant-oil) बनाये जाते हैं। आज के युग में इसे तरल सोना (Liquid Gold) कहा जाता है। पेट्रोलियम से ही पेट्रोल, डीजल एवं मोबिल बनते हैं जिनका उपयोग तीव्र गति वाले यानों जैसे-मोटर, रेल एवं वायुयान में होता हैं। आज के युद्ध पेट्रोलियम से ही जीते जाते हैं।

प्रश्न 17.
भारत में खनिज तेल की सम्भावना वाले प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से है?
उत्तर :
भारत में खनिज तेल की सम्भावना वाले प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:-

  1. गंगा बेसिन
  2. पश्चिम बंगाल का सुन्दर वन डेल्टाई क्षेत्र एवं उड़ीसा का तटीय भाग
  3. पश्चिम हिमालय क्षेत्र
  4. राजस्थान-सौराष्ट्र कच्छ क्षेत्र
  5. तमिलनाडु एवं आन्ध्र प्रदेश का तटीय क्षेत्र
  6. केरल का तटीय क्षेत्र
  7. अण्डमान-निकोबार का तटीय क्षेत्र
  8. असम-मेघालय-त्रिपुरामिजोरम क्षेत्र
  9. उत्तरी गुजरात
  10. दक्षिणी गुजरात एवं नर्मदा घाटी।

प्रश्न 18.
जलविद्युत के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
जलशक्ति का महत्व : भारत में जलविद्युत का महत्व निम्नलिखित है :-

  1. शक्ति का अक्षय साधन :- कोयला एवं पेट्रोलियम समाप्त हो सकते हैं परन्तु जलविद्युत शक्ति का अक्षय साधन है। एक बार विद्युत गृह स्थापित करके सदैव जलविद्युत प्राप्त किया जा सकता है।
  2. शक्ति का सस्ता साधन :- कोयला एवं पेट्रोलियम की अपेक्षा जलविद्युत का उत्पादन काफी सस्ता पड़ता है।
  3. प्रदूषण रहित :- जलविद्युत के उत्पादन एवं प्रयोग में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलता है।
  4. शक्ति के अन्य साधनों की बचत :- जलशक्ति के प्रयोग से कोयला एवं पेट्रोलियम को भविष्य के लिए बचाया जा सकता है।
  5. परिवहन की सुविधा :- कोयला एवं पेट्रोलियम के परिवहन में काफी खर्च पड़ता है। परन्तु केवल खम्भों एवं तारों की सहायता से जलविद्युत को आसानी एवं शीघ्रता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।

प्रश्न 19.
परमाणु ऊर्जा के लाभ क्या है?
उत्तर :
परमाणु ऊर्जा के लाभ निम्नलिखित है :-
(i) परमाणु शक्ति का उपयोग उद्योग के लिए तथा बहुमूल्य कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
(ii) यद्यपि परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिये आरम्भ में भट्ठी (Nuclear Reactor) और शक्ति गृह के निर्माण में बहुत अधिक लागत व्यय होती है, परन्तु विद्युत उत्पादन का व्यय कोयले की अपेक्षा कम होता है।

प्रश्न 20.
सौर ऊर्जा से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
सौर ऊर्जा (Solar Energy) : सौर तालाब (Solar Pond) सौर ऊर्जा प्राप्त करने की नई विधि है। भारत का पहला सोलर पौण्ड गुजरात के कच्छ में बनाया गया है। इसे भुज सोलर पौण्ड परियोजना का नाम दिया गया है। यह परियोजना गुजरात डेयरी विकास निगम, गुजरात ऊर्जा विकास एजेन्सी तथा टाटा ऊर्जा अनुसंधान संस्थान की संयुक्त परियोजना है।

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प्रश्न 21.
पवन ऊर्जा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
पवन ऊर्जा (Wind Energy) : प्रवाहित वायु की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) ही पवन ऊर्जा (Wind Energey) है। पृथ्वी के धरातल द्वारा सौर उष्मा के असमान अवशोषण से तापमान, वायु घनत्व तथा वायु दाब में अन्तर होता है। जिसमें वायु-प्रवाह उत्पन्न हो जाता है।

प्रश्न 22.
गैर-परम्परागत शक्ति संसाधनों के लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गैर-परम्परागत शक्ति के संसाधनों के लाभ (Advantage of Non-conventional sources of energy) :
(i) संचित शक्ति संसाधनों का संरक्षण (Conservation of fund energy resources) :- गैरपरम्परागत शक्ति संसाधनों का उपयोग होने से संचित संसाधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम, आदि की बचत भविष्य के लिए होगी।
(ii) वायु-प्रदूषण में कमी (Reduction of air pollution) :- गैर-परम्परागत शक्ति संसाधन वायु प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं। ये गैस, दुर्गन्ध और मलवा नहीं छोड़ते हैं, अत: इन संसाधनों का उपयोग कर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है, जो आज की सबसे बड़ी पर्यावरण की समस्या है।
(iii) असामान्य शक्ति का प्रवाह (Endless energy flow) :- सूर्य, वायु, लहरें और ज्वार कभी न समाप्त होने वाले हैं। यदि उनको व्यापारिक स्तर पर प्राप्त कर लिया जाय तो उनसे बड़ी मात्रा में शक्ति प्राप्त हो सकती है।
(iv) आवर्तक लागत नहीं (No recurring expenditure) :- पावर प्लाप्ट की स्थापना के बाद कच्चा माल प्राप्त करने के लिए कोई खर्च नहीं करना पड़ता। अत: आवर्तक लागत नहीं लगती।

प्रश्न 23.
नवीकरण एवं अनवीकरण संसाधन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

नवीकरण अनवीकरण
i. इस संसाधन को पुन: उत्पादित किया जा सकता है। i. इस संसाधन का एक बार दोहन करने के बाद पुन: पूर्ति सम्भव नहीं हो सकता है।
ii. यह सीमित मात्रा में नहीं होती है। ii. इसकी मात्रा सीमित होती है।
iii. इस संसाधन का प्रयोग आधुनिक युग से शुरू हुआ है। iii. इसका संसाधन का प्रयोग सदियों से किया जा रहा है।

प्रश्न 24.
परम्परागत ऊर्जा और गैर-परम्परागत ऊर्जा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

परम्परागत ऊर्जा गैर-परम्परागत ऊर्जा
i. ये वे संसाधन हैं जिनका उपयोग पहले से होता आ रहा है। i. ये वे संसाधन हैं, जिनका उपयोग हाल में शुरू हुआ है।
ii. ये संसाधन समाप्य ऊर्जा के संसाधन हैं। ii. ये संसाधन असमाप्य ऊर्जा के संसाधन हैं।
iii. कोयला, पेट्रोलियम आदि इसके उदाहरण हैं। iii. सौर उर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा आदि इसके उदाहरण हैं।

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विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
संसाधन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर :
विभिन्न विद्वानों द्वारा संसाधन की अनेक परिभाषाएँ दी गयी हैं, जिसमें कुछ मुख्य निम्नलिखित है:-
समाज विज्ञान विश्कोष के अनुसार – संसाधन मानवीय पर्यावरण के वे पक्ष हैं, जिसके द्वारा मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति में सुविधा होती है तथा सामाजिक लक्ष्यों की पूर्ति सम्भव होती है।

इ० डब्लू० जिमनमैन (E.W.Zimmerman) के अनुसार – “संसाधन पर्यावरण की वे विशेषताएँ है जो मनुष्य की आवश्यकाताओं की पूर्ति में सक्षम मानी जाती है ‘उन्हें मनुष्य की आवश्यकताओं तथा क्षमताओं द्वारा उपयोगिता प्रदान की जाती है।” (Resource are those aspects of man’s enviroment which render possible or facilitated the satisfaction of human wants and the attainment of social objectives)

जिम्मरमैन ने संसाधन का अर्थ स्ष्ट करते हुए तीन तत्वों को महत्वपूर्ण स्थान दिया है-
(i) मनुष्य जिस पर आश्रित व निर्भर हो। (ii) जिसमें मनुष्य की इच्छा पूर्ति हो सके, (iii) मानव की शारीरिक व बौद्धिक क्षमता। जेम्स फिश्यार (Fisher J.S.) के अनुसार :- ‘”संसाधन वह कोई भी वस्तु है जो मानवीय आवश्यकाताओं व इच्छाओं की पूर्ति करता है।”‘ (Resource are anything that can be used to satisfy a nead or desire of man)
मैकनाल के अनुसार :- ‘प्राकृतिक संसाधन वे संसाधन हैं, जो प्रकृति द्वारा प्रदान किये जाते हैं तथा मानव के लिये उपयोगी होते हैं। (Natural resources may be defined as those resources which are provided by nature and which are useful to man)
स्मिथ एवं फिलिप्स के अनुसार :- “भौतिक रूप से संसाधन वातावरण के वे प्रतिक्रियाएँ हैं, जो मानव के उपयोग में आती है।” (Fundamentaly resources are merely environment functioning in the service of man.)

प्रश्न 2.
समाप्यता के आधार पर संसाधन का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
(a) नवीकरण योग्य संसाधन :- वे संसाधन जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न किया जा सकता है, इन्हें नवीकरण योग्य अथवा पुन: पूर्ति योग्य संसाधन कहा जाता है, जैसे :- सौर तथा पवन ऊर्जा, जल, वन व वन्य जीवन। इन संसाधनों को सतत् अथवा प्रवाह संसाधनों में विभाजित किया गया है।

(b) अनवीकरण योग्य संसाधन :- इन संसाधनों का विकास एक लम्बे भू-वैज्ञानिक अन्तराल में होता है। खनिज और जीवाश्म ईधन इस प्रकार के संसाधनों के उदाहरण हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लग जाते हैं। इनमें से कुछ संसाधन, चक्रिय हैं जैसे -लोहा, ताँबा। कुछ संसाधन, जैसे-जीवाश्म ईधन अचकीय है और एक बार उपयोग के साथ ही समाप्त हो जाता है, जैसे – कोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न 3.
स्वामित्व के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
स्वामित्व के आधार पर :
(a) व्यक्तिगत संसाधन :- संसाधन निजी व्यक्तियों के स्वामित्व में भी होते हैं। किसानों की अपनी स्वामित्व वाली भूमि, लोगों का अपना मकान, बाग, चारागाह, तालाब आदि निजी स्वामित्व के संसाधन हैं।

(b) सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधन :- जिन संसाधनों पर पूरे समुद्राय का स्वामित्व होता है, वे सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधन कहे जाते हैं। गाँवों के सामुदायिक तालाब, चारण भूमि, श्मशान भूमि और शहरों के पार्क, पिकनिक स्थान, खेल के मैदान आदि सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधन हैं।

(c) राष्ट्रीय संसाधन :- तकनीकी तौर पर देश में पाये जाने वाले संसाधन राष्ट्रीय संसाधन हैं। देश की सरकार सामुदायिक कल्याण के लिए व्यक्तिगत संपत्ति को भी अपने अधिकार में ले सकती है। देश के सारे खनिज पदार्थ, जल संसाधन, वन संसाधन, वन्य जीव, राजनीतिक सीमा के अन्तर्गत समस्त भूमि एवं सागरीय क्षेत्र में सीमा से सदा 19.2 कि॰मी॰ तक का क्षेत्र तथा इसमें पाये जाने वाले पदार्थ राष्ट्रीय संसाधन के अन्तर्गत आते हैं।

(d) अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन :- कुछ अन्तराष्ट्रीय संस्थाएँ संसाधनो को नियंत्रित करतो हैं। तट रेखा से 200 कि॰मी० तक की दूरी (आवश्यक आर्थिक क्षेत्र) से पूरे खुले महासागरीय संसाधनों पर किसी देश का अधिकार नहीं है। इन संसाधनो को अंतराष्ट्रीय सहमति के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता।

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प्रश्न 4.
विकास के आधार पर संसाधनो का वर्गीकरण किजीए?
उत्तर :
विकास के आधार पर :
(a) संभावी संसाधन :- ये वे संसाधन हैं जो किसी प्रदेश में विद्यमान रहते हैं, परन्तु उनका उपयोग नहीं किया जात है, उदाहरण के तौर पर भारत के पश्चिमी भाग विशेषकर राजस्थान और गुजरात में पवन और सौर ऊर्जा की अपार संभावना है, परन्तु इनका सही ढंग से विकास नहीं हुआ है।

(b) विकसित संसाधन :- वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण किया जा चुका हैं और उनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, विकसित संसाधन कहलाते हैं। संसाधनो का विकास प्रोद्योगिकी और उसकी सभ्यता पर निर्भ करती है।

(c) भंडार :- पर्यावरण में उपलब्ध वे पदार्थ जो मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते है परन्तु उपर्युक्त प्रौधोगिकी के अभाव में उसकी पहुँच के बाहर हैं, भंडार में शामिल है। उदाहरण के लिए जल दो ज्वलनशील गैसो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है तथा यह ऊर्जा का प्रमुख सोत्र बन सकता है। परन्तु इस उद्देश्य से इसका प्रयोग करने के लिए हमारे पास तकनीकी ज्ञान नहीं है।

(d) संचित कोष :- यह संसाधन भंडार का ही हिस्सा है, जिन्हें उपलब्ध तकनीकी ज़ान की सहायता से प्रयोग में लाया जा सकता है, परन्तु इनका उपयोग अभी आरंभ नहीं हुआ है। इनका उपयोग भविष्य में आवश्यकता की पूर्ति के लिए किया जा सकता है। नदियों के जल को विद्युत पैदा करने में प्रयुक्त किया जा सकता है। परन्तु वर्तमान समय में इसका उपयोग सीमित पैमाने पर ही हो रहा है।

प्रश्न 5.
उत्पत्ति के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
विभिन्न संसाधन विभिन्न अवस्थाओं में उत्पन्न होते हैं, अत: उत्पत्ति के आधार पर इसे निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है :-
(i) अजैविक संसाधन (Abiotic Resources) :- ये प्रकृति प्रदत्त होते हैं तथा इनमें जीवन क्रिया नहीं होती है तथा इनका नवीनीकरण सम्भव नहीं है। इनका उपयोग व विनाश हो जाने पर ये सदा के लिये समाप्त हो जाते हैं। उदाहरणस्वरूप खनिजों के उपयोग के बाद इसका प्रत्यारोपण नहीं हो सकता। अजैविक संसाधनों का प्रयोग मनुष्य की संस्कृति एवं तकनीकी विकांस से जुड़ा हुआ है।

(ii) जैविक संसाधन (Biotic Resources) :- इसके अंतर्गत उन प्रकृति प्रदत्त तत्वों को सम्मिलित किया जाता है, जो जीवन युक्त होते हैं। वन, वन्य प्राणी, पशु-पक्षी, वनस्पति तथ सूक्ष्म जीव इत्यादि जैविक संसाधनों के उदाहरण हैं। जैविक संसाधनों में पुन: विकास की क्षमता होती है, जैसे-प्राकृतिक वनस्पति नष्ट होने के बाद स्वतः उत्पन्न होती हैं, मछलियाँ सतत् बढ़ती रहती है। जैविक संसाधनों की मात्रा में वृद्धि भी मनुष्य कर सकता है। वह वृक्षारोपण द्वारा ऊर्जा भूमि पर वन लगा सकता है तथा काटे गये वन का पुन: रोपण कर सकता है।

प्रश्न 6.
प्राप्यता त्रथा वितरण के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए?
उत्तर :
प्राप्यता तथा वितरण के आधार पर वर्गीकरण (Classification based on accessbility and Distribution) :- भूमण्डल पर संसाधनो की मात्रा, उनकी विविधता तथा प्राप्ति स्थल में बहुत ही असमान वितरण पाया जाता है। इस दृष्टि से प्राकृतिक संसाधनों को चार वर्गो में विभाजित किया गया है।

  1. सर्वसुलभ संसाधन (Ubiquities) :- जो इस भूमण्डल पर सर्वत्र न्यूनाधिक मात्रा में उपलब्ध है, सर्वसुलभ संसाधन कहलाता है। जैसे :- वायुमण्डल में व्याप्त ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।
  2. सामान्य सुलभ संसाधन (Commonelities) :- जो संसाधन अधिकांश क्षेत्र या कम क्षेत्रों में पाये जाते है, सामान्य सुलभ संसाधन कहलाते हैं। जैसे :- वनस्पति, कृषि योग्य मिट्टी, कोयला, तेल, गैस आदि।
  3. दुर्लभ संसाधन (Rarities) :- जो संसाधन कहीं-कहीं ही मिलते हैं, उन्हें दुर्लभ संसाधन कहते है, जैसे :अभ्रक, ताँबा, क्वार्ट्स आदि।
  4. अद्वितीय संसाधन (Uniquities) :- ऐसे संसाधन एकाघ स्थानों पर ही मिलते हैं जैसे :- हीरा, यूरेनियम, क्रोमोलाइट इत्यादि।

प्रश्न 7.
उपयोग के सततता पर आधारित संस्थानों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
उपयोग के सततता पर आधारित वर्गीकरण (Classification based on Utillity) :- भूमण्डल पर पाये जाने वाले संसाधनों के उपयोग की एक अवधि होती है, अतः उपयोग की अवधि के अनुसार संसाधनों को तीन वर्गो में विभक्त किया जा सकता है :-
नवीनीकरण संसाधन (Renewable Resources) :- जिन संसाधनो को पुनः उत्पादित किया जा सकता है या उनके गुणों में वृद्धि की जा सकती है नवीनीकरण संसाधन कहे जाते हैं। जैसे: वनों को काटकर पुन: वृक्षारोपण द्वारा उनकी पूर्ति की जा सकती है। इसी प्रकार कृषि पद्धिति अपनाकर कृषि भूमि को अधिक समय तक उपजाऊ बनाये रखा जा सकता है।

अनवीनीकरण संसाधन (Non-Renewable Resources) :- जिन संसाधनों का एक बार दोहन करने के पश्चात् पुन: पूर्ति (Restoration) सम्भव नहीं हो सकता है अनवीनीकरण संसाधन कहलाते हैं। ऐसे संसाधनों के निर्माण की अवषि लम्बो होती है तथा इनकी मात्रा सीमित होती है। इन संसाथनों का दोहन तीव्र गति से करने पर ये समाप्त हो जाते हैं। जैसे कोयले का दोहुन एक बार ही किया जा सकता है जबकि इनके निर्माण में करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। इसी प्रकार पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, ताँबा, थोरियम, मैगिनज, बावसाइड इत्यादि। ये संसाधन अनवीनीकरण संसाधनों की श्रेणी में आते है।

चक्रीय संसाथन (Recyclable Resources) :- जिन संसाधनों का उपयोग बार-बार किया जाये, वे चकीय संसाधन कहलाते हैं। जैसे :- लोहा, चाँदी, सोना, सीसा इत्यादि खनिजों का उपयोग बार-बार किया जा सकता है।

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प्रश्न 8.
उद्देश्य के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए ?
उत्तर :
संसाधनों का उपयोगिता या उद्देश्य के आधार पर वर्गीकरण किया गया है :-
(i) ऊर्जा संसाधन (Energy Resources) :- किसी देश के विकास का मानक ऊर्जा संसाधन को माना गया है। नवीनीकरण संस्थानों की श्रेणी में वन, जल विद्युत, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा तथा कोयला, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस आदि हैं।

(ii) कच्चा माल (Raw Material) :- कच्चे माल औद्योगिक व आर्थिक विकास के प्रमुख आधार हैं, जो तीन तरह के संसाधनों से प्राप्त होता है :-
(a) खनिज पदार्थ (Materials) :- भूगर्भ से निकाले गये पदार्थो को इस श्रेणी में रखते हैं। जैसे :- लोहा, अलौह धातुएँ, गंधक, नमक, चूना-पत्थर, बालू व अन्य मिश्रित धातुएँ।
(b) वनस्पति (Vegetation) :- इसके अंतर्गत प्राकृतिक वनस्पति से प्राप्त पदार्थों को सम्मिलित करते हैं। जैसे : लकड़ी, फल, गोंद, रबर, तेल-बीज, शैवाल व अन्य कृषि उत्पाद।
(c) पशु :- पशुओं से प्राप्त-उत्पाद को इसमें सम्मिलित करते हैं। जैसे :-सींग, तेल, चर्बी, बाल, ऊन, रेशम, हड्डियाँ इत्यादि।

(iii) खाद्य पदार्थ (Food Stuff) :- खाद्य पदार्थ भी तीन तरह के संसाधनों से प्राप्त है जो निम्नलिखित है :-
(a) खनिज :- जल तथा चट्टानो से प्राप्त नमक।
(b) वनस्पति :- फल, कन्दमूल, पत्तियाँ एवं मशरूम (Mushroom) आदि।
(c) पशु एवं जीव-जन्तु :- मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन व्यवसाय आदि।

प्रश्न 9.
संसाधन संरक्षण से आप क्या समझते हैं ? संसाधनों के संरक्षण में किन बातों पर ध्यान देना आवश्यक है?
उत्तर :
संसाधनों का संरक्षण (Conservation) :- का अर्थ संरक्षण होता है। डा० मैग्नाल के अनुसार अच्छे संरक्षण का आशय किसी संसाधन या ऐसा उपयोग है जिसमें मनुष्य जाति की आवश्यकता पूर्ति सर्वोत्तम रूप से हो सके। संसाधनों से तात्पर्य मात्र संसाधनों के उपयोग में कमी नहीं है।
संसाघनों के संरक्षण में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है :-

  1. किसी देश में उपलब्व कुल संसाधनों का पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है, जिससें आवश्यकतानुसार उनका व्यवहारिक उपयोग किया जा सकें।
  2. संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण तथा सुव्यवस्थित ढंग से किया जाना चाहिए।
  3. उन्नत तकनीक की सहायता से संसाषनों की उपयोगिता में वृद्धि करने का प्रयास करना चाहिए।
  4. सीमित संसाधनों का उपयोग अति आवश्यक कार्यो के लिए ही किया जाए।
  5. विरल संसाधनो की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए उनके विकल्प को विकसित करना।

प्रश्न 10.
भारत में लौह-अयस्क के वितरण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
लोहे के संचित भण्डार की दृष्टि से भारत का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ विश्व का लगभग एक-चौथाई खनिज लोहा ( 1,757 करोड़ मीट्रिक टन) संचित है। यहाँ का 80 % लोहा उच्चकोटि के हैमेटाइट जाति का है, जिसमें 60 % से 70 % तक लौहांश है। उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में चीन, ब्राजील, आस्ट्रेलिया एवं रूस के बाद पाँचवाँ स्थान है। यहाँ विश्व का लगभग 6.7 लौह-अयस्क उत्पन्न किया जाता है। प्रमुख लौह उत्पादक राज्य क्रमश: छत्तीसगढ़, गोआ, कर्नाटक, झारखण्ड, उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं आन्ध प्रदेश हैं।

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प्रश्न 11.
भारत में राज्यानुसार कोयले के उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में राज्यानुसार कोयले का उत्पादन :- भारत में प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य निम्नलिखित है: (i) झारखण्ड :- यह भारत का सर्वाधिक कोयला उत्पादक राज्य है। झरिया, बोकारो, कर्णपुरा, गिरीडीह, रामगढ़, डाल्टनगंज, राजमहल, औरंगाबाद, हुतार तथा लालमटिया यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। इनमें झरिया एवं लालमटिया की खानों से सम्पूर्ण राज्य का 50 % का कोयला प्राप्त होता है। उत्तम कोटि के बिदुमिनस कोयले के खनन के लिए यह राज्य प्रसिद्ध है।
मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ :- कोयले के उंत्पादन में मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य का संयुक्त रूप से भारत में दूसरा स्थान है। सोहागपुर, उमरिया, झिलमीली, रामकोला, मोहयानी सिंगररौली आदि मध्यप्रदेश के तथा कोरबा पेंचघाटी, तातापानी, बिलासपुर, लखनपुर, सोनद्ध चिरमिरी, झगड़खण्ड आदि छत्तीसगढ़ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं।

पश्चिम बंगाल :- कोयला उत्पादन की दृष्टि से पश्चिम बंगाल राज्य का भारत में तीसरा स्थान है। यहाँ कोयल के विशाल निक्षेप पाए जाते हैं। वर्द्धवान, पुरूलिया तथा बाँकुड़ा यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक खिले हैं। वर्दवान जिले में स्थित रानीगंज कोयला खान भारत की सबसे बड़ी कोयले की खान हैं। भारत में सर्वपथम कोयला निकालने का प्रयास सन् 1774 ई० में रानींगज में ही किया गया था।

उड़ीसा :- उड़ीसा भारत का प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य है। यहाँ महानदी घाटी में स्थित तालचल तथा सम्भलपुर प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। रामगढ़- हिंगरि यहाँ का अन्य कोयला उत्पादक क्षेत्र है। जहाँ से निम्नकोटि का कोयला प्राप्त होता है।

तमिलनाडु, जम्म-कश्मीर, राजस्थान तथा गुजरात राज्यों में लिग्नाइट कोयला का खनन होता है। लिग्नाइट एवं पीट कोयला के उत्पादन में तमिलनाडु राज्य का प्रथम स्थान है। इसलिए यहाँ नेवेली लिग्नाइट परियोजना का विकास हुआ है।

प्रश्न 12.
भारत के प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दीजिए?
उत्तर :
भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
असम का तेल कटिबन्ध :- यह भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र है। यहाँ 1,200 कि॰मी॰ लम्बी तेल की पेटी है, जो पूर्वी भाग में ब्रह्मपुत्र एवं सूरमा नदियों की घाटियों में फैली हुई है। यहाँ का सबसे प्रमुख तेल क्षेत्र बह्मपुत्र नदी की घाटी में स्थित बह्मपुत्र-माकू क्षेत्र है, जो लखीमपुर जिले में स्थित है। यहाँ मुख्यत: डिब्रूगढ़ जिले में डिगबोई, बप्पापुंग, हस्सापुंग में तेल-कूप बनाये गये हैं। डिगबोई में भारत का सबसे प्राचीन (1889) तेल क्षेत्र है तथा यहाँ भारत का प्रथम तेल-शोधक कारखाना है। सूरमा घाटी में पथरिया बदरपुर एवं मासिमपूर तेल-कूपों से खनिज-तेल प्राप्त होता है। यहाँ का तेल निम्न कोटि का होता है, और इसमें मोम की मात्रा अधिक होती है । यहाँ के अन्य तेल क्षेत्र नहरकटिया, मोरान एवं रूंद्र सागर है। खनिज तेल के उत्पादन में अब असम राज्य का तीसरा स्थान हो गया है। यहाँ से देश का लगभग 16 प्रतिशत खनिज-तेल प्राप्त होता है।

गुजरात के तेल क्षेत्र :- गुजरात भारत का प्रमुख तेल उत्पादक राज्य है। यहाँ उत्तर की ओर खम्भात तथा दक्षिण की ओर अंकलेश्वर तथा कोशम्बा प्रधान तेल क्षेत्र हैं। खम्भात के उत्तर में स्थित लुनेज तथा बड़ौदरा से पश्चिम में स्थित बाँडसर से खनिज-तेल प्राप्त होता है। लुनेज में रूस तथा रूमानिया के विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। भड़ौच जिले के अंकलेश्वर में खनिज-तेल का भारी भण्डार मिला है। केवल इसी क्षेत्र में 30 लाख मैटिक टन से अधिक खनिज-तेल उत्पन्न होता है। अंकलेश्वर इस क्षेत्र का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है। अन्य छोटे क्षेत्र महूबेज, नवगाँव, वावेल, सानन्द, कलोल आदि हैं। इस राज्य से देश का लगभग 17.9 % खनिज तेल प्राप्त होता है।

महाराष्ट्र :- हाल में ही मुम्बई के समीप भारत का सबसे धनी तेल क्षेत्र का पता चला है जिसे, मुम्बई हाई (Mumbai High) कहते हैं। यहाँ तट से 115 कि० मी० पश्चिम अरब सागर में सागर समाट तथा सागर विकास नामक जहाजों द्वारा तेल निकाला जा रहा है। खनिज-तेल के उत्पादन में भारत में अब इस राज्य का पहला स्थान हो गया है। यहाँ से देश का लगभग 64.55 प्रतिशत खनिज-तेल प्राप्त होता है। हाल ही में मुम्बई तट के समीप स्थित नीलम एवं दक्षिण हीरा क्षेत्रों में भी उत्पादन शुरु हो गया है।

तमिलनाडु :- हाल में तमिलनाडु राज्य के कावेरी बेसिन में देश के एक प्रमुख तेल क्षेत्र की खोज हुई है। यहाँ नारियानम एवं कोविलापाल खानों से तेल निकाला जाता है। यहाँ से देश का लगभग 1.4 प्रतिशत खनिज तेल प्राप्त होता है।

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प्रश्न 13.
जल विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए?
उत्तर :
जलविद्युत के विकास के लिए निम्नलिखित परिस्थितियों का होना आवश्यक है।
(a) भौगोलिक परिस्थितियाँ :-

  1. सदावाहिनी नदियाँ : नदियाँ सदावाहिनी हो ताकि उनसे वर्षभर जलविद्युत प्राप्त किया जा सके।
  2. प्राकृतिक जल प्रपात :- जहाँ जलप्रतात द्वारा नदी का पानी तीव वेग के साथ ऊपर से नीचे गिरता है, वहाँ अधिक मात्रा में जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकता है।
  3. ऊँची-नीची भूमि :- जहाँ भूमि ऊँची-नीची होती है वहाँ नदियों का वेग अधिक होता है जिससे अंधिक विद्युत प्राप्त की जा सकती है।
  4. स्वच्छ जल :- पानी में मिट्टी या बालू का अभाव हो जिससे मशीनों के खराब होने का भय ना रहे।

(b) आर्थिक परिस्थितियाँ :-

  1. खपत क्षेत्रों का पास में होना :- खपत क्षेत्र दूर होने पर विद्युत पहुँचाने के लिए अधिक तार व खम्भों की आवश्यकता पड़ती है।
  2. मशीनों की सुविधा :- जल विद्युत गृह बनाने में भारी मशीनों, टर्बाइन, डायनेमो, तार एवं खम्भों की आवश्यकता पड़ती है।
  3. पूँजी की सुविथा :- जलविद्युत शक्ति गृह बैठाने में शुरू में काफी खर्च पड़ता है अतः पर्याप्त पूँजी की आवश्यकता पड़ती है।
  4. तकनीकी ज्ञान :- जलविद्युत केन्द्र को चलाने एवं आवश्यक उपकरणों की मरम्मत के लिए तकनीकी ज्ञान का भी होना आवश्यक है।

प्रश्न 14.
भारत में जलविद्युत विकास का विवरण लिखो।
उत्तर :
भारत में जल विद्युत का विकास 19वीं सदी के अन्तिम दशक में शुरू हुआ। सन् 1897 में दार्जिलंग नगर को बिजली आपूर्ति के लिए राज्य जल विद्युत उत्पाद संयंत्र स्थापित किया गया था। कर्नाटक में कावेरी पर स्थित शिवं समुद्रम में 1902 में दूसरा जलविद्युत उत्पादन संयंत्र लगाया गया था। बाद में मुम्बई की मांग पूरी करने के लिए पश्चिमी घाट में भी जल विद्युत उत्पादन के लिए कुछ संयंत्र लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु एवं कर्नाटक में 1903 में जल विद्युत केन्द्र स्थापित किए गए। 1947 में कुल उत्पादन क्षमता 508 मेगावाट तक पहुँच गई। 2000-01 के अन्त में जल विद्युत केन्द्र की स्थापित क्षमता बढ़कर 25,219,55 मेगावाट हो गई है, जो बिजली की कुल स्थापित क्षमता का लगभग एक चौथाई मात्र है।

प्रश्न 15.
भारत में सौर ऊर्जा के महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
यह भारत के उत्तरी पर्वतीय भाग को छोड़कर देश के अन्य सभी भागों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। भारत में औसतन पचास हजार खरब किलोवाट हावर (Kwh) प्रतिवर्ष सौर विकिरण प्राप्त होता है। देश के अधिकांश भागों में वर्ष में लगभग 300 दिन आकाश मेघ रहित होता है और सूर्य ऊर्जा के साथ चमकता है। अनुमान है कि भारत में 20 मेगावाट प्रति वर्ग कि॰मी० सौर ऊर्जा पैदा की जा सकती है। आजकल इसका उपयोग खाना पकाने तथा जल एवं घर को गर्म करने के लिए किया जाता है। 2000-01 में उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार भारत में 4,90,000 सौर कुकर प्रयोग किए गए थे। लगभग 14,594 सूर्य प्रकाश वोल्टीय प्रकाश, 800 सूर्य प्रकाश वोल्टीय जल पम्प तंत्र तथा 1433 घरेलु रोशनी तंत्रो की स्थापना की गई।

प्रश्न 16.
शक्ति संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर :
शक्ति के संसाधन दो प्रकार के होते हैं :-
(a) परम्परागत ऊर्जा के स्रात (Conventional Sources of Energy) :- लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा परमाणु शक्ति ऊर्जा के पारम्परिक स्रोत है किन्तु जीवाश्म ईंधन तथा परमाणु खानिज क्षयशील तथा अनवीकरणीय है। निरन्तर प्रयोग से एक दिन ये सभी समाप्त हो जाएँगे। जीवाश्म ईधनो का विनाश विशेष रूप से तेजी से हो रहा है। ऊर्जा के ये परम्परागत स्रात प्रदूषणकारी भी हैं।

(b) गैर-परम्परागत ऊर्जा के स्रोत (Non-Conventional Sources of Energy) :- ऊर्जा के परम्परागत सोतों के तेजी से विनाश के कारण विश्व के सभी देश ऊर्जा के नवीकरणीय संसाधनों को विकसित करने की दिशा में प्रयासरत हैं, सौर ऊर्जा, सागरीय (लहर) ऊर्जा तथा जोवभार ऊर्जा (Bioness Energy) ऊर्जा के वैकल्पिक नवीकरणीय तथा प्रदूषण मुक्त संसाधन है। भविष्य में इनके विकास की अपार सभावनायें हैं।

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प्रश्न 20.
संसाधनों के उत्पादक कारक क्या हैं? उदाहरण देकर संसाधन के उत्पादन में मनुष्य की भूमिका का वर्णन करों।
उत्तर :
संसाधन के कारक तत्व :- संसाधन के निर्माणकारी तत्व हैं :- (i) मानव (ii) प्रकृति (iii) संस्कृति।
मानव (Man) :- मनुष्य ही संसाधन निर्माण का केन्द्र बिन्दु है। साधारणतया हम मानव संसाधन या मानव श्रम की बातें करते हैं। मानव श्रम शारीरिक या बौद्धिक रूप से प्रयत्नशील होकर प्राकृतिक तत्वों को संसाधन का रूप प्रदान करता है। इस प्रकार मनुष्य संसाधन को पैदा करने वाला तथा उसका उपभोक्ता दोनो है। (Man is as well as creater and consumer of resources)

प्रकृति (Nature) :- प्रकृति से तात्पर्य प्राकृतिक तत्वों के योग से है, जैसे :- पहाड़, नदी, मिट्टी, जलवायु, भौगोलिक स्थिति आदि। मूल रूप से भिन्न प्रकार के संसाधन कोयला, तेल, पानी, वायु मिट्टी, वनस्पति सब कुछ प्रकृति की देन है।

संस्कृति (Culture) :- संस्कृति मनुष्य और प्रकृति का संयुक्त उत्पाद है। मिट्टी, ज़लवायु प्रकृति के उपादान हैं। जब तक सांस्कृतिक विकास के उचित अवसर नहीं मिलेंगे कोई वस्तु संसाधन नहीं हो सकती।

प्रश्न 21.
भारत में लौह अयस्क का भौगोलिक वितरण प्रस्तुत करो।
उत्तर :
भारत में लौह अयस्क का उत्पादन (Production of Iron ore in India) :- इस समय भारत का लगभग 95 % लोहे का उत्पादन छत्तीसगढ़; गोवा, झारखण्ड, उड़ीसा तथा कर्नाटक में होता है।

छत्तीसगढ़ लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। देश के कुल उत्पादन में इसकी 23.4 % की भागीदारी है। इसके बाद क्रमशः गोवा (22%), कर्नाटक (20%), झारखण्ड (17%), उड़ीसा (14%), महाराष्ट्र (2.47 %), तथा अन्य उत्पादक राज्य (1.2 %) है। छत्तीसगढ़ की प्रमुख खानें है-डल्ली, राजहरा (दुर्ग), बैलाडिला (दाँतेवाड़ी)।

गोवा की प्रमुख खाने हैं :- साहक्वालिम, संग्यूम, वयूपेम, सतारी, पौंडा और बियोलिम। कर्नाटक की प्रमुख खाने हैं बेल्लारी, हस्पेट, चिकमगलूर जिले में बाबाबूदन पहाड़ी, कलाहाड़ी के मानगुड़ी तथा कुद्रेमुख, चित्रदुर्ग, शिमोगा, धारवाड़ तथा तुमकूर में।
झारखण्ड की प्रमुख खाने स्थित हैं नोओमुंडी और गुआ एवं पूर्व व पश्चिम सिंहभूम में।
उड़ीसा की प्रमुख खाने स्थित हैं – गुरूमहिसानी, सुलईपत, बादाम पहाड़ (मयूरभंज), किरीबुरू , मेधाहत बुरू (केन्दुसार), बोनाई (सुन्दरगढ़) में। महाराष्ट्र की प्रमुख खाने स्थित हैं :- चन्द्रपुर, रत्नागिरी और भडारा में।

आन्द्र्रदेश की प्रमुख खाने स्थित हैं :- वरीमनगर, बारंगल, कुर्नूल, कड़प्पा और अनंतपुर में दक्षिण में थोड़ा सा आगे तमिलनाडु की तीर्थमल्लाई पहाड़ियों (सलेम), यादपल्ली और किल्ली मल्लई क्षेत्र (नीलगिरी) में लौह अयस्क के भंडार है।

भारत में लौंह अयस्क का उत्पादन 2002-03

राज्य उत्पादन % में
कर्नाटक 24 %
उड़ीसा 22 %
छत्तीसगढ़ 19 %
गोवा 18 %
झारखण्ड 15.6 %

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प्रश्न 22.
खनिज तेल का क्या उपयोग है?
उत्तर :
भारत में खनिज तेल का उपयोग (Uses of Petroleum in India) :- पेट्रोलियम की महत्ता को देखते हुए इसे तरल सोना (Liquid Gold) कहा जाता है। इसके उपयोग निम्नलिखित हैं :-
यातायात ईथन :- पेट्रोलियम गैसोलिन तथा डीजल, एल०पी०जी० आदि पेट्रोलियम के उत्पाद है, जिनका उपयोग गाड़ी, रेलागाड़ी, हवाई जहाज, जलयान, कार, मोटर साइकिल आदि चलाने में होता है।
घरेलू ईंधन :- किरासन का उपयोग खाना बनाने तथा प्रकाश आदि के लिए होता है। (LPG-Liquid Petroleum Gas) का उपयोग खाना बनाने में होता है।
पेट्रो केमिकल उद्योग :- आज पेट्रोलियम का उपयोग पेट्रोकेमिकल उद्योग में रोज बढ़ रहा है। तेलशोधन में नेष्था, इसिलिन, बेंजिन आदि के उत्पाद प्राप्त होता है।
बिजली उत्पादन :- वैसे तो कोयले से ताप विद्युत का उत्पादन होता है पर’ कुछ स्थानो पर पेट्रोलियम से भी ताप विद्युत का उत्पादन हो रहा है।
अन्य उपयोग :- पेट्रोलियम से चिकन का तेल, गैस, मोम आदि प्राप्त होता है। खनिज तेल का शोधन कर उससे डीजल, थारी डीजल, पेट्रोल, गैसोलिन, किरासिन, पी०भी०सी॰, एसिटिक एसिड बनाया जाता है। पेट्रोलियम प्रमुख औद्योगिक तेल, शक्ति का स्रोत एवं विभिन्न प्रकार के उप-पदार्थो का उत्पादन का स्रोत है।

प्रश्न 23.
खनिज तेल के मुख्य ग्रेड और उनके गुण क्या हैं?
उत्तर :
खंनिज तेल उच्च ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन तरह का है। कच्चे तेल का रंग आकाशीं हरा लेकर हल्का काला तक होता है। कार्य वर्ग का तेल हल्का हरा होता है क्योंकि इसमें उच्च हाइड्रोजन और अल्प कार्बन होता है। अत्यधिक कार्य का तेल लगभग काला होता है। क्योंकि इसमें अल्प हाइड्रोजन किन्तु अत्यधिक कार्बन होता है।

वर्तमान समय में खनिज तेल के तीन वर्ग (Grade) है :-

  1. पैराफिन आधारित तेल (Paraffin-based oil) :- यह हल्का होता है और इसका व्यावसायिक मूल्य अधिक होता है जैसे :- पेट्रोल, पैराफिन इत्यादि।
  2. ऐस्फाल्ट आधारित तेल (Asphalt-based oil) :- यह भारी होता है और इसमें डीजल तथा ऐस्फाल्ट या बिंुमेन की अधिकता होती है। इसकी व्यावसायिक कीमत कम होती है।
  3. मिश्रित तेल (Mixed oil) :- मिश्रित तेल पैराफिन और ऐसफाल्ट के बीच का है।.

प्रश्न 24.
खनिज शक्ति की अपेक्षा शक्ति के अन्य प्राकृतिक साधनों के लाभ का उल्लेख करो।
उत्तर :
खनिज शक्ति की अपेक्षा शक्ति के अन्य साधनों के लाभ की तुलना :- ऊर्जा के परम्परागत साधन कोयला और खनिज तेल हैं। अन्य प्राकृतिक ऊर्जा के साघन सूर्य ताप, जल विद्युत, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि हैं। उर्जा के दोनों साधनों की तुलना निम्न है :-

  1. शक्ति के स्थायी स्रोत (Flow Resources) :- ऊर्जा के परम्परागत स्रोत कोयला और खनिज तेल भविष्य में समाप्त हो जाएँगे किन्तु शक्ति के अन्य साधन चिरन्तन एवं स्थायी है।
  2. सस्ते साथन (Easy Transport) :- कोयला और पेट्रोल की तुलना में जल विद्युत तथा सौर ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान को पहुँचाना काफी सुगम एवं सस्ता है।
  3. प्रदूषण से मुक्ति (Free Pollution) :- जल विद्युत, सौर ऊर्जा, ज्वारिय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा के प्रयोग में स्वच्छता रहती है तथा इनमें प्रदूषण नहीं होता है।

प्रश्न 25.
विभिन्न प्रकार का कोयला कौन-कौन सा है ?
उत्तर :
कोयले की प्रमुख किस्मे (Type of Coal):- कार्बन की उपस्थिति के अनुसार कोयला की पाँच श्रेणियाँ होती है :-
(i) एन्श्रासाइट (Anthracite) :- यह सर्वोच कोटि का कोयल़ा है जिसमें कार्बन की मात्रा 90 % से ज्यादा होती है। जलने पर यह जरा भी धुआँ नहीं देता। यह बहुत कड़ा और देर तक ताप देनेवाला होता है। इसे कोकिंग कोयला भी कहा जाता है। धातु गलाने में यह काम आता है।
(ii) बिटुमिनस (Bituminous) :- इसमें कार्बन की मात्रा 70 % से 90 % तक होती है। इसे.परिष्कृत कर कोकिंग कोयला बनाया जाता है, किन्तु सभी बिटुमिनस कोयले का उपयोग कोक बनाने में नहीं किया जा सकता। भारत का अधिकतर कोयला इसी कोटि का है, जिसका उपयोग घरेलू ईधन तथा वाष्पशक्ति उत्पन्न करने में होता है।
(iii) लिग्नाइट (Lignite) :- यह निम्न कोटि का कोयला माना जाता है। इसमें कार्बन की मात्रा 30 % से 70 % तक होती है। आर्द्रता होने के कारण यह धुआँ देता है। इसकी तापीय शक्ति कम होती है।
(iv) पीट (Peat) :- इसमे कार्बन की मात्रा 30 % से 35 % तक होती है। यह सबसे निम्न कोटि का कोयला है। यह मुलायम होता है तथा इससे बहुत अधिक धुआँ निकलता है।
(v) कैनेल – यह सबसे निन्म किस्म का कोयला होता है जो लकड़ी के जलने से प्राप्त होता है ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 26.
भारत में कोयला का उपयोग कैसे किया जाता है?
उत्तर :
भारत में कोयले का प्रमुख उपयोग निम्न है :-
(i) स्टीम शक्ति (Steam Energy) :- जब शक्ति के अन्य साधनों की खोज नहीं हुई थी कोयले के स्टीम से ही कारखाने तथा यातायात के साधन चलते थे।
(ii) विद्युत शक्ति (Electric Energy) :- ताप-विद्युत का उत्पादन कोयले कें उपयोग से ही किया जाता है।
(iii) घरेलू शक्ति (Domestic Energy) :- पहले कोयला का उपयोग घरेलू खाना आदि बनाने में होता था पर गैस की खोज के कारण उसका प्रयोग कम हो गया।
(iv) खनिज कोक के रूप में (Metallurgical Coke) :- भारत में लौह-इस्पात उद्योगों में कोकिंग कोयला आज भी एक आवश्यक कच्चा-माल है।
(v) रासायनिक कच्च माल (Chemical raw materials) :- भारत में कोयले के उप-उत्पाद कोयला गैस, कोलतार, बेजोल, अमोनिया सल्फेट के आधार पर रासायनिक उद्योग चलते हैं। इन उप-उत्पादों से प्रत्येक रासायनिक, पदार्थ बनते हैं। इन उप-पदार्थो से क्रीजोट (Creozote) नेष्थालिन, एन्थासीन, उर्वरक, विस्फोटक सामान, एण्टीसेप्टिक दवाइयाँ आदि बनती हैं।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद can serve as a valuable review tool before exams.

औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
इंग्लैण्ड में औद्योगिक क्रान्ति के चिह्न कब दिखाई देने लगे थे ?
(a) 1750-1870 ई० में
(b) 1830-1870 ई०
(c) 1870-1890 ई० में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) 1750-1870 ई० में

प्रश्न 2.
“दास कैपिटल” पुस्तक का प्रकाशन कब हुआ –
(a) 1867
(b) 1860
(c) 1890
(d) 1850
उत्तर :
(a) 1867

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प्रश्न 3.
औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम किस देश में हुई ?
(a) बिंटन
(b) फ्रांस
(c) अमेरिका
(d) आस्ट्रिया
उत्तर :
(a) बिंटेन

प्रश्न 4.
किस देश को ‘विश्व की उद्योगशाला” कहा जाता है?
(a) फ्रांस
(b) इंग्लैण्ड
(c) इटली
(d) जर्मनी
उत्तर :
(b) इंग्लैण्ड

प्रश्न 5.
औद्योगिक क्रान्ति शब्द का उपयोग किस अंग्रेजी इतिहासकार ने पहले किया?
(a) दांते
(b) अर्नाल्ड टॉयनबी
(c) हेगल
(d) मार्क्स
उत्तर :
(b) अर्नाल्ड टॉयनबी

प्रश्न 6.
मार्क्स की पुस्तक ‘दास कैपिटल’ कब प्रकाशित हुई थी?
(a) 1804 ई०
(b) 1815 ई०
(c) 1848 ई०
(d) 1867 ई०
उत्तर :
(d) 1867 ई०

प्रश्न 7.
बेल्जियम में रेल निर्माण का कार्य कब प्रारम्भ हुआ ?
(a) 1834
(b) 1830
(c) 1820
(d) 1815
उत्तर :
(a) 1834

प्रश्न 8.
समस्त बेल्जियम में रेल लाइन कब स्थापित हो गई –
(a) 1844
(b) 1820
(c) 1822
(c) 1819
उत्तर :
(a) 1844

प्रश्न 9.
इंग्लैण्ड के औद्योगिक क्रान्ति को कितने भागों में विभाजित किया जाता है ?
(a) दो भागों में
(b) तीन भागों में
(c) चार भागों में
(d) पाँच भागों में
उत्तर :
(a) दो भागों में

प्रश्न 10.
घेराबन्दी प्रथा किस महादेश में हुई थी ?
(a) एशिया
(b) ऑस्ट्रिया
(c) उत्तरी अमेरिका
(d) यूरोप
उत्तर :
(d) यूरोप

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प्रश्न 11.
बेल्जियम कब यूरोफ्ट का प्रमुख औद्योगिक देश बन गया।
(a) 1870
(b) 1860
(c) 1855
(d) 1865
उत्तर :
(a) 1870

प्रश्न 12.
सर्वप्रथम राष्ट्रीय बैंक की स्थापना कहां हुई ?
(a) बेल्जियम में
(b) फ्रांस में
(c) इंग्लैण्ड में
(d) जर्मनी में
उत्तर :
(b) फ़ांस में

प्रश्न 13.
बुनाई मशीन का आविष्कार किसने किया ?
(a) जेनी
(b) जेम्स हारग्रीब्ज
(c) आर्कराइट
(d) हिटने
उत्तर :
(b) जेम्स हारग्रीब्ज

प्रश्न 14.
औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम संगठित हुई –
(a) फ्रांस में
(b) इंगलैण्ड में
(c) जर्मनी में
(d) रूस में
उत्तर :
(b) इंगलैण्ड में

प्रश्न 15.
बुर्जुआ वर्ग ज्यादा कहाँ रहते हैं ?
(a) ग्राम में
(b) जंगल में
(c) शहरों में
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(c) शहरों में

प्रश्न 16.
मार्क्सवाद के जन्मदाता कौन थे ?
(a) एंजिल्स और मार्क्स
(b) हेगेल
(c) टॉयनबी
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर :
(a) एंजिल्स और मार्क्स

प्रश्न 17.
पावरलूम मशीन का आविष्कार किसने किया था ?
(a) जॉन के
(b) जेम्स हार ग्रीब्स
(c) सैम्युअल
(d) एडमंड कार्टराइट
उत्तर :
(d) एडमंड कार्टराइट

प्रश्न 18.
इंग्लैण्ड में औद्योगिक कान्ति किसके समय हुई थी ?
(a) जार्ज तृतीय
(b) एलिजाबेथ
(c) टियून एलिजाबेथ
(d) मेरी
उत्तर :
(a) जार्ज तृतीय

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प्रश्न 19.
रेलगाड़ी का पहला इंजन कब बना ?
(a) 1789 A.D
(b) 1809 A.D
(c) 1814 A.D
(d) 1830 A.D
उत्तर :
(c) 1814 A.D

प्रश्न 20.
त्रिटेन में पहली रेलगाड़ी कब चली थी?
(a) 1789 A.D
(b) 1809 A.D
(c) 1815 A.D
(d) 1830 A.D
उत्तर :
(d) 1830 A.D

प्रश्न 21.
कार्ल मार्क्स ने किस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था ?
(a) उदारवाद
(b) समाजवाद
(c) मार्क्सवाद
(d) फासिज्मवाद
उत्तर :
(c) मार्क्सवाद

प्रश्न 22.
स्वेज नहर का निर्माण किसने किया ?
(a) फर्डिनेण्ड लेस्सैप
(b) रॉबर्ट कुल्टन
(c) सिरिअस
(d) इयूक ऑफ बिजवादर
उत्तर :
(d) ड्यक ऑफ ब्रिजवाटर

प्रश्न 23.
विद्युतीय टेलीग्राफ यंत्र का आविष्कार कब हुआ था ?
(a) 1800 A.D
(b) 1804 A.D
(c) 1815 A.D
(d) 1837 A.D
उत्तर :
(d) 1837 A.D

प्रश्न 24.
“दास कैपिटल” नामक ग्रन्य के लेखक कौन थे –
(a) मावर्स
(b) रूसो
(c) लुई ब्ला
(d) सेण्ट साइमन
उत्तर :
(a) मार्क्स

प्रश्न 25.
1870 ई० में किन देशों को छोड़कर सारा यूरोप कृषि प्रधान हो गया था –
(a) इग्लैण्ड
(b) फ्रांस
(c) जर्मनो
(d) सभी तीनों
उत्तर :
(a) इंग्लैण्ड

प्रश्न 26.
जॉर्ज स्टीफेन्सन ने अपने प्रसिद्ध भाप इंजन रॉकेट का आविष्कार कब किया –
(a) 1830
(b) 1835
(c) 1833
(d) 1836
उत्तर :
(a) 1830

प्रश्न 27.
पुरानी, धीमी, महैंगी और अविश्वस्त डाक व्यवस्था को किसने बद्ल डाला-
(a) रोलेंड हिल
(b) जॉर्ज स्टीफेन्सन
(c) टलफोर्ड
(d) मैंक स्डम
उत्तर :
(a) रोलैंड हिल

प्रश्न 28.
रूसी कान्ति कब हुई थी ?
(a) 1815 ई०
(b) 1830 ई。
(c) 1840 ई。
(d) 1917 ई०
उत्तर :
(d) 1917 ई०

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प्रश्न 29.
भारत में पहली ट्रेन कब चली थी ?
(a) 1853 ई०
(b) 1867 ई०
(c) 1894 ई。
(d) 1917 ई०
उत्तर :
(a) 1853 ई०

प्रश्न 30.
यातायात में जलमार्ग और रेलमार्ग का विकास किस देश में सबसे पहले हुआ-
(a) इंग्लैण्ड
(b) अमेरिका
(c) जापान
(d) जर्मनी
उत्तर :
(a) इंग्लैण्ड

प्रश्न 31.
अंतर्राष्ट्रीय डाक संघ की स्थापना कब हुई –
(a) 1874
(b) 1880
(c) 1890
(d) 1900
उत्तर :
(a) 1874

प्रश्न 32.
सड़क निर्माण प्रणाली का आविष्कार किसने किया ?
(a) मैकडम
(b) टेलफ़ेड एवं मैकाइड
(c) विण्डले
(d) स्टीफेन्सन
उत्तर :
(b) टेलफेड एव मैकाइड

प्रश्न 33.
पहला वाष्प इंजन किसने बनाया –
(a) टॉमस न्युकॉम ने
(b) जॉन के ने
(c) माइटले ने
(d) जेम्सवाद ने
उत्तर :
(d) जेम्सबाट ने

प्रश्न 34.
जर्मनी और आस्टिया-हंगली के मध्य एक गुप्त संधि कब हुई ?
(a) 1879
(b) 1870
(c) 1890
(d) 1900
उत्तर :
(a) 1879

प्रश्न 35.
डाक टिकट का प्रयोग कब प्रारम्भ हुआ?
(a) 1840
(b) 1860
(c) 1850
(d) 1855
उत्तर :
(a) 1840

प्रश्न 36.
1830 ई० के सुधारवादी आंदोलन में किस वर्ग ने भाग लिया –
(a) पूँजीपतियों ने
(b) मजदूरों ने
(c) विचारकों ने
(d) सैनिकों ने
उत्तर :
(b) मजदूरों ने

प्रश्न 37.
‘आर्गोनाइ़र ऑफ लेबर’ नामक पुस्तक की रचना किसने की?
(a) लुई ब्ला
(b) मार्क्स
(c) सेण्ट साइमन
(d) रूसो
उत्तर :
(a) लुई ब्ला

प्रश्न 38.
औद्योगिक क्रांति कब हुई थी –
(a) 16 वीं सदी में
(b) 17 वीं सदी में
(c) 18 वौं सदी में
(d) 19 वी सदी में
उत्तर :
(c) 18 वौं सदी में

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प्रश्न 39.
वाष्प इंजन का आविष्कार हुआ –
(a) 1684 ई. में
(b) 1685 ई. में
(c) 1886 ईं में
(d) 1888 ई. में
उत्तर :
(d) 1888 ई. में

प्रश्न 40.
लौह गलाने की भड्डी का आविष्कार हुआ
(a) 1760 ई. मे
(b) 1762 ई, में
(c) 1765 ई, में
(d) 1770 ई, में
उत्तर :
(a) 1760 ई. में

प्रश्न 41.
विद्युत शक्ति का आविष्कार किया –
(a) आर्कराइट ने
(b) आइजक न्यूटन ने
(c) माइकेल फैराडे ने
(d) जेम्सवाट ने
उत्तर :
(c) माइकेल फैराडे ने

प्रश्न 42.
जर्मनी में औद्योगिक क्रांति का विकास हुआ-
(a) 1840 ई के बाद
(b) 1855 ई, के बाद
(c) 1865 ई. के बाद
(d) 1870 ई. के बाद
उत्तर :
(d) 1870 ई. के बाद

प्रश्न 43.
फ्रांस में औद्योगिक क्रांति से प्रगति हुई –
(a) 1818 ई. के बाद
(b) 1820 ई. के बाद
(c) 1845 ई. के बाद
(d) 1848 ई. के बाद
उत्तर :
(d) 1848 ई. के बाद

प्रश्न 44.
औय्योगिक क्रांति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ा –
(a) एशिया में
(b) अफ्रोका में
(c) यूरोप में
(d) आस्ट्रेलिया में
उत्तर :
(c) यूरोप में

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प्रश्न 45.
कार्ल मार्क्स एक सुप्रसिद्ध दार्शानिक थे –
(a) रूस के
(b) अमेरिका के
(c) ब्रिटेन के
(d) जर्मनी के
उत्तर :
(d) जर्मनी के

प्रश्न 46.
एशिया में सबसे पहले उपनिवेश बनाया –
(a) पुर्तगाल ने
(b) फ्रांस ने
(c) ब्रिटेन ने
(d) रूस ने
उत्तर :
(a) पुर्तगाल ने

प्रश्न 47.
प्रथम विश्वयुद्ध का प्रमुख कारण था –
(a) धर्म
(b) आजादी
(c) गुलामी
(d) साम्माज्यवाद
उत्तर :
(d) साम्राज्यवाद

प्रश्न 48.
फ्रेडरिक एंगेल्स का जन्म हुआ –
(a) 1812 ई. में
(b) 1815 ई, में
(c) 1818 ई. में
(d) 1820 ई. में
उत्तर :
(d) 1820 ई. में

प्रश्न 49.
कार्ल मार्क्स तथा फ्रेडरिक एंगेल्स मिले थे –
(a) 1844 ई, में
(b) 1843 ई. में
(c) 1845 ई. में
(d) 1846 ई. में
उत्तर :
(b) 1843 ई. में

प्रश्न 50.
औद्योगिक क्रांति के कारणों से समाज कितनी श्रेणियों में बँट गया –
(a) 4
(b) 3
(c) 2
(d) 5
उत्तर :
(c) 2

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प्रश्न 51.
कार्ल मार्क्स द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ बनाया गया –
(a) 1860 ई. में
(b) 1862 ई. में
(c) 1864 ई. में
(d) 1865 ई. में
उत्तर :
(c) 1864 ई. में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. क्रान्ति का अर्थ _________ से है।
उत्तर : अकस्मात् परिवर्तन।

2. औद्योगिक क्रान्ति का सम्बन्ध _________से था।
उत्तर : मानव शिल्प ज्ञान।

3. _________ने वस्त्र उद्योग में क्रान्ति ला दिया।
उत्तर : उद्योगों।

4. _________में लोहे का पहला पुल और_________ में लोहे का पहला जहाज बना।
उत्तर : हडसन नदी, 1838 ई०।

5. जर्मनी में _________के बाद _________तीव्रता आई।
उत्तर : 1870 ई० के एकीकरण, औद्योगिक क्षेत्र में।

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6. मार्क्स का सिद्धान्त _________पर आधारित है।
उत्तर : वैज्ञानिक समाजवाद।

7. _________और _________के बीच प्रथम विश्वयुद्ध लड़ा गया।
उत्तर : सर्विया, आस्ट्रिया, हंगरी।

8. _________ने ‘औद्योगिक क्रांति’ शब्द को लोकप्रिय बनाया।
उत्तर : अर्नाल्ड टोयनबी।

9. इंगलैण्ड का _________मौसम कपड़ा उद्योग का सहायक था।
उत्तर : नम।

10. हरग्रीब्स ने _________का आविष्कार किया।
उत्तर : स्पिनिंग जेनी।

11. कोयला एवं चूना-पत्थर जलाकर लोहा गलाने की पद्धति का आविष्कार ने _________किया।
उत्तर : अबाहम उर्बि।

12. डेविड सेफ्टीलैम्प का व्यवहार _________में होता था।
उत्तर : खनन-उद्योग।

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13. _________के शासन में फ्रांस में वास्तविक औद्योगिक क्रांति की सूचना हुई।
उत्तर : लुई फिलीप।

14. 1870 ई. के बाद आल्सास-लोरेन अंचल की खनिज सम्पदा _________औद्योगिक विकास में सहायता करती है।
उत्तर : जर्मनी के।

15. रूस के औद्योगिक विकास में के शासनकाल में_________ तेजी आई।
उत्तर : अलेक्जेण्डर द्वितीय।

16. औद्योगिक विकास से निर्मित सभ्यता_________ सभ्यता के नाम से परिचित है।
उत्तर : उद्योग-आधरित।

17. _________के उद्भव के कारण औद्योगिक क्षेत्र में श्रम विभाजन नीति लागू हुई।
उत्तर : फैक्ट्री प्रथा।

18. _________में पूँजी विनियोग के माध्यम से पूंजीपति वर्ग मुनाफा पहाड़ बनाता है।
उत्तर : उद्योगों।

19. _________की मांगें ‘जनगण का सनद’ नाम से परिचित है।
उत्तर : चार्टिस्ट आन्दोलन।

20. ‘क्रिटिक ऑफ पॉलिटिकल इकोनोमी’ पुस्तक की रचना _________ने की।
उत्तर : कार्ल मार्क्स।

21._________ ने ‘साम्राज्यवाद : एक समीक्षा’ ग्रन्य की रचना की।
उत्तर : हब्सन।

22. इंगलैण्ड का श्रेष्ठ उपनिवेश_________ था।
उत्तर : भारत।

23. _________ने अफ्रीका के ट्यूनिसिया में उपनिवेश स्थापित (1881 ई.) किया।
उत्तर : फ्रांस।

24. _________ई. के बाद उपनिवेश दखल को लेकर नव्य साम्राज्यवाद शुरु हुआ।
उत्तर : 1870

25. नानकिंग संधि ( 1842 ई) के पहले विदेशी व्यापारी चीन के एकमात्र बन्दरगाह _________से व्यापार कर सकते थे।
उत्तर : कैण्टन।

26. नानकिंग समझौते द्वारा चीन_________ बन्दरगाह खोल देने को बाध्य हुआ।
उत्तर : 5

27. तियेनसिन समझौते द्वारा चीन और भी _________ बन्दरगाह खोलने के लिये बाध्य हुआ।
उत्तर : 11

28. _________ को अन्धेरा महादेश कहा जाता था।
उत्तर : अफ्रीका।

29. अल्जीरिया _________ का उपनिवेश था।
उत्तर : फ्रांस।

30. अफ्रीका का _________ बेल्जियम का उपनिवेश था।
उत्तर : कांगो।

31. पुर्तगाल ने_________ दखल करके इसका नाम ‘पोर्तुगीज पश्चिम अफ्रीका’ रखा।
उत्तर : अंगोला।

32. पुर्तगाल _________ दखल करके इसका नाम ‘पोर्तुगीज़ पूर्व अफ्रीका’ रखा।
उत्तर : मोजम्बिक।

33. पलासी के युद्ध में अंग्रेज सेनापति _________ था।
उत्तर : रॉबर्ट क्लाइव।

34. अंग्रेज कम्पनी ने बंगाल, _________ बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त की।
उत्तर : 1765 ई. में।

35. द्विशक्ति समझौता (1879 ई.) जर्मनी एवं _________ के बीच हुआ।
उत्तर : ऑस्ट्रिया।

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36. 1894 में _________ एवं रूस के बीच मैत्री समझौता हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

37. 1904 ई._________ एवं इंगलैण्ड के बीच मैत्री समझौता हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

38. प्रथम विश्वयुद्ध का प्रत्यक्ष कारण _________ था।
उत्तर : सेराजेवो हत्याकाण्ड।

39. पहली रेललाइन 1830 ई. में मैनचेस्टर से _________ तक बैठायी गयी थी।
उत्तर : लिबरपुल।

40. जेम्सवाट ने _________ में वाष्प-इंजन का आविष्कार किया था।
उत्तर : 1769 ई.।

41. _________ मानवता के इतिहास में एक अकल्पनीय घटना है।
उत्तर : औद्योगिक क्रांति।

42. प्रथम लोकोमोटिव कारखाना 1823 ई. में _________ में स्थापित हुआ।
उत्तर : न्यूकैसल।

43. हरंग्रिब्स ने 1767 ई. में _________ नामक यंत्र का आविष्कार किया।
उत्तर : स्पिनिंग जेनी।

44. टेलफोर्ड एवं _________ ने पक्की सड़क बनाने की विधि का आविष्कार किया था।
उत्तर : मैकाइड।

45. _________ ने फ्लाइंग शटल नामक मशीन का आविष्कार किया।
उत्तर : जॉन के.।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. इतिहासकार हेज, हैजेन आदि ने ‘औद्योगिक क्रांति’ शब्द के बदले शब्द के ‘औद्योगिक विवर्तन’ व्यवहार के पक्षपाती थे।
उत्तर : True

2. इंगलैण्ड के टूटे समुद्रतट पर बन्दरगाह निर्मित नहीं हुआ था, इसी से समुद्री पथ से परिवहन में समस्या पैदा हुई।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

3. मैथ्यू बोल्टेन नामक एक व्यक्ति जार्ज स्टीफेन्सन के वाष्प रेल इंजन का निर्माण करके बिक्री किया करता था।
उत्तर : False

4. बैंक ओं फ्रांस का पुनर्गठन फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन तृतीय ने किया।
उत्तर : True

5. 1834 ई. में सर्वप्रथम 18 जर्मन राज्यों को लेकर ‘कनफेडरेशन ऑफ राइन’ की स्थापना हुई।
उत्तर : False

6. बिस्मार्क कार्टेल ट्रस्ट कम्बाइन आदि संगठन की मदद से जर्मनी में वृहत उद्योगों का प्रसार हुआ।
उत्तर : True

7. औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप पूंजीपति श्रेणी एवं श्रमिक श्रेणी के बीच अर्थनैतिक संतुलन स्थापित हुआ।
उत्तर : False

8. औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप यूरोप का व्यापार-मूलधन उद्योग-मूलधन में बदल गया।
उत्तर : True

9. इंगलैण्ड में श्रमिक आन्दोलन के पक्ष में हयूग दल था।
उत्तर : False

10. चार्टिस्ट आंदोलन में अर्थनैतिक संतुलन की मांग की गयी।
उत्तर : False

11. 1875 ई. में जर्मन सोशल डमोक्रैटिक पार्टी की स्थापना हुई।
उत्तर : True

12. न्यू लैनार्क शहर में एक आदर्श समाजतांत्रिक औद्योगिक कारखाने की स्थापना शार्ल फूरियर ने की।
उत्तर : False

13. आधुनिक समाजतंत्र की प्रथम वैज्ञानिक व्याख्या कार्ल मार्क्स एवं फ्रेडरिक एगेल्स रचित कम्युनिस्ट मेनीफेस्टो में मिलती है।
उत्तर : True

14. कार्ल मार्क्स ‘कम्युनिज्म’. या साम्यवाद शब्द के बदले ‘सोशलिज्म’ या समाजतंत्र शब्द व्यवहार करते थे।
उत्तर : False

15. कार्ल मार्क्स ने श्रेणीहीन समाज प्रतिष्ठा की बात कही है जहाँ व्यक्तिगत सम्पत्ति या आर्थिक विषमता जैसा कुछ नहीं रहेगा।
उत्तर : True

16. हब्सन एवं लेनिन ने आधुनिक साम्राज्यवाद या उपनिवेशवाद की सामाजिक व्याख्या दी है।
उत्तर : False

17. लेनिन की राय में पूंजीवादी अर्थनीति की अन्तिम परिणति युद्ध है।
उत्तर : True

18. डेनियल हेडरिक ने कहा है कि अन्तिम चरण में स्वेज नहर के खनन, टेलीग्राफ एवं रेलपथ के म्रसार ने उपनिवेश स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
उत्तर : True

19. 1895 ई. में अफ्रीका का एकमात्र स्वाधीन देश यूथोपिया एवं लाइबेरिया था।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

20. 19 वी सदी के प्रथम चरण में ही यूरोप के विभिन्न देश अफ्रीका महादेश के साथ परिचित हो गये थे।
उत्तर : False

21. बेल्जियम के राजा द्वितीय लिओपोल्ड ने अफ्रीका के बारे में परिचित कराने में उल्लेखनीय भूमिका निभई।
उत्तर : True

22. स्वेज नहर अंचल में 1876 ई. में इंग-फ्रांसिसी युग्म कन्डोभिनियन गठित हुआ।
उत्तर : True

23. फ्रांस दक्षिण अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों को एक करके 1910 ई. में ‘यूनियन ऑफ साउथ अफ्रीका’ गठित किया।
उत्तर : False

24. प्राय: 1985 ई. में अफ्रीका के आबिसिनिया, लिबिया एवं ट्रान्सवाल प्रजातंत्र स्वाधीन थे, शेष अफ्रीका यूरोपीय देशों के दखल में था।
उत्तर : True

25. भारत में उद्योग-धंधे नष्ट होने पर भारत निर्यातक देश से आयातक देश में बदल गया।
उत्तर : True

26. इंगलैण्ड, रूस एवं जर्मनी में त्रिशक्ति गुट बना था।
उत्तर : False

27. सेराजेवो हत्याकाण्ड की घटना को लेकर ऑस्ट्रिया ने सर्विया की राजधानी बेलग्रेड पर आक्रमण (28 जुलाई, 1914 ई.) किया।
उत्तर : True

28. कारखाने के मालिक औरतों और बच्चों को काम पर नहीं रखते थे।
उत्तर : False

29. औद्योगिक क्रांति के कारण पुराने उद्योग का स्थान नये उद्योगों ने ले लिया।
उत्तर : True

30. औद्योगिक क्रांति के अन्तर्गत मशीनों के क्षेत्र में बहुत से आविष्कार हुए।
उत्तर : True

31. मशीनों के आ जाने से उद्योगों में मंदी छा गयी।
उत्तर : False

32. दैनिक जीवनोपयोगी आविष्कारों से इंगलेण्ड ने औद्योगिक क्रांति को गौरवान्वित किया।
उत्तर : True

33. इंगलैण्ड 1850 ई. तक विश्व के कारखाने, भट्ठियाँ, बैंक तथा मालवाही गढ़ मान लिया गया था।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

34. औद्योगिक क्रांति के द्वितीयार्द्ध में दैनिक जीवन के उपयोगी सामानों के उद्योग निर्मित होने लगे थे।
उत्तर : True

35. अन्य यूरोपीय देशों में एक साथ औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई।
उत्तर : False

36. यूरोप में औद्योगिक कांति ने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक जीवनचर्या में अभूतपूर्व बदलाव लाया।
उत्तर : True

37. कपड़ा उद्योग से लेकर विभिन्न कल-कारखाने ब्रिटेन में निर्मित हुए।
उत्तर : True

38. सबसे पहले फ्रांस में औद्योगिक क्रांति हुई।
उत्तर : False

39. वाष्प इंजन का आविष्कार जेम्स वाट ने किया था।
उत्तर : False

40. औद्योगिक क्रांति के पश्चात् का इतिहास साम्नाज्यवाद एवं समाजवाद के विकास का इतिहास है।
उत्तर : True

41. उपनिवेश बनाने की होड़ में सभी यूरोपीय देश एक साथ थे।
उत्तर : True

42. विभिन्न देशों के आपसी संघर्ष के कारण ही प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ था।
उत्तर : True

43. उपनिवेशों का निर्माण दोस्ती की वजह से हुई थी।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

44. अंग्रेज सबसे पहले भारत में आये।
उत्तर : False

45. एशिया, अमेरिका एवं अफ्रीका में उपनिवेश बने।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) औद्योगिक क्रांति की सूचना (1) फ्रांस
(B) पेरियर ब्रदर्स (2) इंगलैण्ड
(C) जोल्वेरिन (3) रूस
(D) भूमिदास प्रथा (4) जर्मनी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) औद्योगिक क्रांति की सूचना (2) इंगलैण्ड
(B) पेरियर ब्रदर्स (3) रूस
(C) जोल्वेरिन (4) जर्मनी
(D) भूमिदास प्रथा (1) फ्रांस

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जॉन के (1) मिऊल
(B) हरग्रीब्स (2) वाटर फ्रेम
(C) आर्कराइट (3) स्पिनिंग जेनी
(D) क्रम्पटन (4) फ्लाइंग शटल

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जॉन के (4) फ्लाइंग शटल
(B) हरग्रीब्स (3) स्पिनिंग जेनी
(C) आर्कराइट (2) वाटर फ्रेम
(D) क्रम्पटन (1) मिऊल

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) कार्टराइट (1) ब्लास्ट फर्नेस
(B) जेम्स वाट (2) वाष्प शक्ति
(C) जार्ज स्टीफेन्सन (3) पावर लूम
(D) जॉन स्मिटन (4) वाष्पचालित रेलइंजन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) कार्टराइट (3) पावर लूम
(B) जेम्स वाट (2) वाष्प शक्ति
(C) जार्ज स्टीफेन्सन (4) वाष्पचालित रेलइंजन
(D) जॉन स्मिटन (1) ब्लास्ट फर्नेस

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) हम्फ्रेडेवि (1) पीच का रास्ता
(B) टेलफोर्ड एवं मैकाउम (2) जिन कपड़ा बनाने की कारीगरी
(C) फुल्टन (3) सेफ्टी लैंप
(D) ली व्हीटन (4) वाष्प जहाज

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) हम्फ्रेडेवि (3) सेफ्टी लैंप
(B) टेलफोर्ड एवं मैकाउम (1) पीच का रास्ता
(C) फुल्टन (4) वाष्प जहाज
(D) ली व्हीटन (2) जिन कपड़ा बनाने की कारीगरी

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) क्लेदि मोबिलिए (1) चीन
(B) चार्टिस्ट आन्दोलन (2) रूस
(C) इक्कीस सूत्री मांगें (3) फ्रांस
(D) भूमिदासों की मुक्ति (4) इंगलैण्ड

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) क्लेदि मोबिलिए (3) फ्रांस
(B) चार्टिस्ट आन्दोलन (4) इंगलैण्ड
(C) इक्कीस सूत्री मांगें (1) चीन
(D) भूमिदासों की मुक्ति (2) रूस

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प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुडाइट दंगा (1) इंगलैण्ड
(B) राष्ट्रीय कर्मशाला (2) अमेरिका
(C) मुक्तद्वार नीति (3) फ्रांस
(D) कांगों फ्री स्टेट (4) बेल्जियम

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुडाइट दंगा (1) इंगलैण्ड
(B) राष्ट्रीय कर्मशाला (3) फ्रांस
(C) मुक्तद्वार नीति (2) अमेरिका
(D) कांगों फ्री स्टेट (4) बेल्जियम

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) पिटरलू हत्याकाण्ड (1) फ्रांस
(B) खूनी मई सप्ताह (2) ऑस्ट्रया
(C) सेराजेवो हत्याकाण्ड (3) भारत
(D) दीवानी प्राप्त (4) इंगलेण्ड

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) पिटरलू हत्याकाण्ड (4) इंगलेण्ड
(B) खूनी मई सप्ताह (1) फ्रांस
(C) सेराजेवो हत्याकाण्ड (2) ऑस्ट्रया
(D) दीवानी प्राप्त (3) भारत

प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इंगलैण्ड के श्रमिक नेता (1) फर्डिनान्ड लैसेल
(B) जर्मनी के श्रमिक नेता (2) ओ ब्लायेन
(C) चार्टिस्ट आन्दोलन के नेता (3) नेड लूड
(D) अमेरिकी विदेश सचिव (4) सर जॉन हे

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इंगलैण्ड के श्रमिक नेता (3) नेड लूड
(B) जर्मनी के श्रमिक नेता (1) फर्डिनान्ड लैसेल
(C) चार्टिस्ट आन्दोलन के नेता (2) ओ ब्लायेन
(D) अमेरिकी विदेश सचिव (4) सर जॉन हे

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तष्भ ‘ख’
(A) कांगो की खोज (1) रबार्ट बेन
(B) सेराजेवो हत्याकाण्ड (2) कार्ल मर्क्स
(C) वैज्ञानिक समाजविद् (3) नेवेरिलो प्रिन्सेष
(D) आदि समाजविद् (4) र्टेनली

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तष्भ ‘ख’
(A) कांगो की खोज (4) र्टेनली
(B) सेराजेवो हत्याकाण्ड (3) नेवेरिलो प्रिन्सेष
(C) वैज्ञानिक समाजविद् (2) कार्ल मर्क्स
(D) आदि समाजविद् (1) रबार्ट बेन

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प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1757 ई. (1) बवसर का युद्ध
(B) 1764 ई. (2) बंगाल के 76 का मतांतर
(C) 1765 ई. (3) पलासी का युद्ध
(D) 1770 ई. (4) बंगाल की दीवानी प्राप्ति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1757 ई. (3) पलासी का युद्ध
(B) 1764 ई. (1) बवसर का युद्ध
(C) 1765 ई. (4) बंगाल की दीवानी प्राप्ति
(D) 1770 ई. (2) बंगाल के 76 का मतांतर

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्ता्भ ‘ख’
(A) 1832 ई (1) प्यूर लों
(B) 1833 ई (2) प्रथम फैक्ट्री कानून
(C) 1834 ई (3) इंगलैण्ड का सुधार कानून
(D) 1838 ई (4) जनगण का सनद प्रचार

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्ता्भ ‘ख’
(A) 1832 ई (3) इंगलैण्ड का सुधार कानून
(B) 1833 ई (2) प्रथम फैक्ट्री कानून
(C) 1834 ई (1) प्यूर लों
(D) 1838 ई (4) जनगण का सनद प्रचार

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प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1839 ई. (1) द्वितीय इंग-चीन युद्ध
(B) 1842 ई. (2) इंगलैण्ड में मताधिकार कानून
(C) 1856 ई. (3) प्रथम इंग-धीन युद्ध
(D) 1867 ई. (4) इंगलेण्ड में खनिज कानून

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1839 ई. (3) प्रथम इंग-धीन युद्ध
(B) 1842 ई. (4) इंगलेण्ड में खनिज कानून
(C) 1856 ई. (1) द्वितीय इंग-चीन युद्ध
(D) 1867 ई. (2) इंगलैण्ड में मताधिकार कानून

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 6 Question Answer – प्राकृतिक आपदायें और संकट

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
प्राकृतिक संकट और प्राकृतिक आपदा में कौन अति तीव्रता से घटती है?
उत्तर :
प्राकृतिक आपदा।

प्रश्न 2.
किसी एक अन्तर्जात आपदा का नाम लिखिए।
उत्तर :
भूकम्प

प्रश्न 3.
बाढ़ किस प्रकार की आपदा है?
उत्तर :
प्राकृतिक।

प्रश्न 4.
दुर्घटनाओं का प्रभाव यदि स्थायी हो जाय तो उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
प्राकृतिक संकट।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 5.
सूखा का सबसे प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर :
कम वर्षा।

प्रश्न 6.
सर्वाधिक खतरनाक प्राकृतिक आपदा किसे माना जाता है?
उत्तर :
समुद्री तूफान या चक्रवात को

प्रश्न 7.
भारत का पूर्वी तट किस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित रहता है।
उत्तर :
तूफान से

प्रश्न 8.
महासागर की तली में होने वाले भूकम्प को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर :
सुनामी

प्रश्न 9.
भारत के तटीय क्षेत्रों में सुनामी का प्रकोप कब हुआ था?
उत्तर :
26 दिसम्बर 2004 ई० में।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 10.
26 दिसम्बर 2004 को भारत का पूर्वी तट किस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुआ था।
उत्तर :
सुनामी अर्थात् भूकम्य के कारण उत्पन्न समुद्री तरंगे।

प्रश्न 11.
सागरीय तूफानों की उत्पत्ति के लिए सागरों के सतह का तापमान कितना होना चाहिए?
उत्तर :
26° C

प्रश्न 12.
कुछ विनाशकारी उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के नाम लिखिए।
उत्तर :
हरिकेन, टाईफून, टारनेडो आदि।

प्रश्न 13.
बाढ़ से बचने का कोई एक उपाय बताओ।
उत्तर :
प्रबन्धक प्रयास तटस्थ होना चाहिए ।

प्रश्न 14.
भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम कब लागू हुआ?
उत्तर :
2005 ई० में ।

प्रश्न 15.
बाढ़ का क्या कारण है?
उत्तर :
अंतिवृष्टि।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 16.
उड़ीसा में बाढ़ किस नदी और अन्य किस कारण से आती है?
उत्तर :
उड़ीसा में महानदी एवं बंगाल की खाड़ी के चक्रवात के कारण बाढ़ आती है।

प्रश्न 17.
बाढ़ से होने वाला एक लाभ बताइये।
उत्तर :
बाढ़ के कारण कई स्थानों पर उपजाऊ मिट्टी की परत पड़ जाती है।

प्रश्न 18.
भारत में सबसे अधिक सूखा किस प्रदेश में पड़ता है?
उत्तर :
राजस्थान में अरावली क्षेत्र एवं गुजरात में कच्छ का क्षेत्र

प्रश्न 19.
भारत में कौन सा चक्रवात विपदा का कारण होता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबंद्यीय चक्रवात

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल में चक्रवात किस महीने में आता है?
उत्तर :
मई एवं जून महीने में।

प्रश्न 21.
कोलकाता में सबसे भयंकर भूकम्प कब आया था?
उत्तर :
1737 ई० में।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 22.
भारत में सबसे अधिक भू-स्खलन की घटनाएँ कहाँ घटित होती है?
उत्तर :
उत्तरी एवं उत्तरी-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल का कौन-सा क्षेत्र भूकम्प की दृष्टि से संवेदनशील है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के मैदानी एवं पठारी क्षेत्र।

प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल को किन प्राकृतिक आपदाओं को प्रायः प्रतिवर्ष सहन करना पड़ता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, बाढ़ एवं सूखा।

प्रश्न 25.
भारत के किस तट पर सुनामी का प्रभाव अधिक होता है।
उत्तर :
पूर्वी. तट पर।

प्रश्न 26.
सुनामी से बचाव का कोई एक उपाय बताओ।
उत्तर :
समुद्र तटीय क्षेत्र में घने आबादी को जल्द खाली कराना।

प्रश्न 27.
बाढ़ से होने वाली एक हानि बताओ?
उत्तर :
कृषि का नष्ट होना।

प्रश्न 28.
अन्त: केन्द्र (Hypocentre) धरातल से कितनी गहराई पर स्थित होता है?
उत्तर :
16 कि० मी० की गहराई पर।

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प्रश्न 29.
भू-पटल के जिस स्थान पर भूकम्प की तरंगें सबसे पहले पहुँचती है उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
वाद्य केन्द्र (Epi-centre)

प्रश्न 30.
भूकम्प की लहरों की तीब्रता, दिशा एवं अवधि का अंकन वाले यन्त्र को क्या कहते है?
उत्तर :
भूकम्प लेखक यन्त्र (Seismongraph)

प्रश्न 31.
किसी खास भूकम्प के तरंगों की तीव्रता मापने वाले यंत्र या पैमाना को क्या कहते हैं?
उत्तर :
रिक्टर स्केल कहते (Richter scale) हैं।

प्रश्न 32.
रिक्टर स्केल का आविष्कार किसने किया था?
उत्तर :
C. F. Richter

प्रश्न 33.
C. F. Richter कौन थे?
उत्तर :
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे।

प्रश्न 34.
भूकम्प के लहरों की समान तीव्रता के स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखा को क्या कहते हैं?
उत्तर :
सम भूकम्प-तीवता रेखा (Isoseismal line)

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प्रश्न 35.
जापान में भूकम्प किस प्रकार से आते हैं?
उत्तर :
ज्वालामुखी के उद्गार से।

प्रश्न 36.
विवर्तनिक भूकम्प (Tectonic Earthquake) भारत में कहाँ-कहाँ आए थे?
उत्तर :
महाराष्ट्र के लातूर तथा कोयना में।

प्रश्न 37.
हिमालय प्रदेश में किस प्रकार के भूकम्प आते हैं?
उत्तर :
भू-सन्तुलन भूकम्प (Isostatic Earthquake)

प्रश्न 38.
26 जनवरी 2001 को भातर में कहाँ भूकम्प आए थे?
उत्तर :
गुर्जरात के कच्छ क्षेत्र में।

प्रश्न 39.
तटवर्ती क्षेत्रों में किस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव अधिक विनाशक होता है?
उत्तर :
समुद्री तूफान या चक्रवात का।

प्रश्न 40.
समुद्री तूफान किन प्रदेशों में सामान्य रूप से आता रहता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में।

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प्रश्न 41.
समुद्री तूफान या चक्रवात को प्रभावित करने वाले कारक कौन हैं?
उत्तर :
उच्च तापमान एवं आर्द्रता।

प्रश्न 42.
समुद्री तूफान या चक्रवात की उत्पत्ति के लिए कितने तापमान की आवश्यकता होती है?
उत्तर :
26° C से अधिक तापमान आवश्यक होती है।

प्रश्न 43.
समुद्री तूफान या चक्रवात का व्यास कितना होता है?
उत्तर :
इसका व्यास 100 कि० मी० से 150 कि० मी॰ तक हो सकता है।

प्रश्न 44.
अटलांटिक महासागर में समुद्री तूफान को क्या कहते हैं?
उत्तर :
हरिकेन (Hurricane)

प्रश्न 45.
कैरीबियन और उत्तरी पूर्वी प्रशान्त महासागर में समुद्री चक्रवात को क्या कहते हैं?
उत्तर :
टाईफून (Typhoons)

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
संसार के प्रमुख चक्रवातों के नाम लिखो ?
उत्तर :
हरिकेन, टाईफून, टारनेडो, विली-विली आदि प्रमुख विश्व की चक्रवाते हैं।

प्रश्न 2.
क्या आग एक प्राकृतिक विपदा है ?
उत्तर :
आग के लिए प्राकृतिक तथा मानवीय दोनों ही कारक उत्तरदायी होते हैं। यह विपदा मानवीय भूलों तथा गलतियों के कारण घटित होती है। लेकिन वनो में आग लगना प्रकृतिक आपदा भी हो सकती है, जैसे बिजली गिरने से सूखे पतों में आग लग जाती है।

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प्रश्न 3.
प्राकृतिक आपदा का क्या अर्थ है?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रकोप या कारणों से उत्पन्न आपदाओं को प्राकृतिक आपदा कहा जाता है।

प्रश्न 4.
बहिर्जात आपदाओं को वायुमण्डलीय आपदा क्यों कहते हैं?
उत्तर :
बहिर्जात आपदाओं को वायुमण्डलीय आपदाएँ भी कहते है क्योंकि इनका सम्बन्ध वायुमण्डलीय घटनाओं से होता है।

प्रश्न 5.
प्राकृतिक आपदा किसे कहते हैं?
उत्तर :
प्राकृतिक रूप से घटित वे सभी घटनाएँ जो प्रलयकारी रूप धारण कर मानव सहित सम्पूर्ण जैव जगत के लिए विनाशकारी स्थिति उत्पन्न कर देती है, प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती है।

प्रश्न 6.
हिमघाव (Avalanche) क्या है?
उत्तर :
फ्रांसीसी भाषा के शब्द ‘ऐवलांश’ (Avalanche) ढोले हिम, मिट्टी व बर्फ के ढेर के एकाकार और तीव्र गति से पर्वतों से फिसलकर नीचे आ गिरने को कहते हैं।

प्रश्न 7.
आपदा प्रबंधन के सिद्धांत का वर्णन करो।
उत्तर :
आपदा प्रबंध का सिद्धान्त:- इसके तहत आपदा निवारक और संरक्षणी उपाय, तथा मनुष्यों पर आपदा के प्रभाव को कम करने के लिये राहत कार्यो की व्यवस्था की जाती है। आपदा प्रबंधन की सम्पूर्ण किया तीन चरणों में चलती है।

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प्रश्न 8.
बाढ़ से बचने के दो उपाय बताओ।
उत्तर :
बाढ़ नियत्रण के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। ये निम्न है :-

  • बाँधों का निर्माण।
  • कृत्रिम सतहों या किनारों का विकास।
  • बड़े-बड़े जलाशयों का निर्माण।

प्रश्न 9.
बाढ़ के दो प्रभाव बताइये?
उत्तर :
(i) धन-जन की अपार क्षति।
(ii) पशुचारे का अभाव।

प्रश्न 10.
मौसम विज्ञान के अनुसार सूखा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
गौसम विज्ञान के अनुसार, लम्बे समय तक अपर्याप्त वर्षा और इसका सामयिक तथा स्थानीय वितरण असंतुलित होने को सूख कहते हैं।

प्रश्न 11.
जंगलों में आग लगने के दो प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर :
(i) तीव्र हावा चलने पर वृक्षों की आपसी घर्षण के कारण
(ii) आकाशी बिजली गिरने तथा ज्वलामुखी क्रिया उत्पत्न होने से।

प्रश्न 12.
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 क्या है?
उत्तर :
इस अधिनियम को वर्ष 2005 में भारत सरकार द्वारा आपदाओं के कुशल प्रबंधन और इससे जुड़े अन्य मामलों के लिये पारित किया गया था।

प्रश्न 13.
सुनामी का क्या अर्थ है?
उत्तर :
सुनामी (स्यू-ना- मी) जापानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘ तट पर आती लहरें। ‘भू-कम्प के कारण समुद्र में उठने वाले लहर को ही सुनामी कहते है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 14.
ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाली कुछ हानिकारक गैसों के नाम लिखिए।
उत्तर :
ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाली कुछ हानिकारक गैसों के नाम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) सल्फर-डाई-ऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड्स (NOX) इत्यादि हैं।.

प्रश्न 15.
बाढ़ क्या है?
उत्तर :
नदियाँ अपनी क्षमता के अनुसार ही जल का वहन कर सकती हैं। अतिवृष्टि अथवा बर्फ के पिघलने से नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो जाती है, जो किनारों को तोड़कर आस-पास के क्षेत्रों में भर जाता है। इस स्थिति को ही बाढ़ कहा जाता है।

प्रश्न 16.
सूखा से बचने के लिए दो दीर्घकालीन उपाय क्या हैं?
उत्तर :
(i) वृक्षारोपण को प्रोत्साहन।
(ii) नदियों को जोड़ने की योजना शुरू की जानी चाहिए।

प्रश्न 17.
ज्वालामुखी क्रिया में क्या होता है?
उत्तर :
ज्वालामुखी विस्फोट से धन-जन की अपार क्षति होती है।

प्रश्न 18.
प्राकृतिक आपदाओं की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
विश्व जलवायु संगठन के अनुसार “प्राकृतिक घटनाओं का प्रलयंकारी परिणाम या ऐसी घटनाओं का सम्मेलन जिससे चोट, जीवन हानियाँ या मानव कार्यकलापों का बड़े पैमाने पर उच्छेदन हो, प्राकृतिक आपदा है।”

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प्रश्न 19.
विपत्ति से क्या समझते हो ?
उत्तर :
आपदा का अर्थ है विपत्ति। अचानक होने वाली ऐसी घटना जिससे व्यापक स्तर पर जैविक एवं भौतिक क्षति होती है, आपदा कहते हैं।

प्रश्न 20.
प्राकृतिक विपत्ति कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर :
मुख्य रूप से प्राकृतिक विपत्तियाँ निम्न हैं :-
(a) मौसमी संकट (Climatic Hazards) :- चक्रवात (Cyclone), बाढ़ (Flood), सूखा (Drought) जंगल की आग (Forest Fire)
(b) स्थलावृतिक संकट (Geomorphic Hazards) :- भूस्खलन (Landstide), हिमधाव (Avalanche), वर्फ की आँधी (Blizzard)
(c) विवर्तनिक संकट : भूकम्प (Earthquake), सुनामी ज्वालामुखी (Volcanism)

प्रश्न 21.
प्रमुख प्राकृतिक विपत्तियों के नाम लिखों।
उत्तर :
प्रमुख प्राकृतिक विपत्तियों के नाम भूकम्प (Earthquake), सुनामी (Tsunami), भू-स्खलन (Landslide), बाढ (Flood), ज्वार (Tidal Surge), सूखा (Drought), भारी वर्षा (Heavy Rainfall) आदि है।

प्रश्न 22.
भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
विश्व में भूकम्प का प्रकोप तीन क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है-प्रशान्त महासागर की अमेरिकी व एशियाई तट, आल्पस से लेकर हिमालय तक फैली मध्य महाद्विपीय पेटी तथा पश्चिमी द्वीप समूह के निकट मध्य अटलाण्टिक पेटी।

प्रश्न 23.
भू-स्खलन क्या एक प्राकृतिक आपदा है?
उत्तर :
भूस्खलन भी एक प्राकृतिक आपदा है जिसमें अपार धन-जन की हानि होती है। भू-स्खलन वह क्रिया है जिसमें चट्टानों तथा मिट्टी आदि गुरूत्वाकर्षण के कारण ढाल से नीचे की ओर सरकती हैं।

प्रश्न 24.
सूखा को प्राकृतिक आपदा क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
सूखा (Drought) एक प्राकृतिक आपदा है। मौसम विभाग के अनुसार जब किसी क्षेत्र में वर्षा सामान्य से 25 \% से 50 \% कम होती है तो सामान्य कहते हैं तथा इससे भी कम वर्षा होने पर भयकर सूखा या अकाल (Famine) कहते हैं।

प्रश्न 25.
भारत का एक सूखा प्रभावित क्षेत्र का नाम लिखो।
उत्तर :
भारत में राजस्थान राज्य अकाल व सूखे से सर्वाधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र है।

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प्रश्न 26.
भारत के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
असम, पश्चिम बंगाल, बिहार व उत्तर प्रदेश राज्यों में गंगा-ब्रह्यपुत्र नदी तन्त्रों मे प्रतिवर्ष बाढ़ आती है।

प्रश्न 27.
आपदा प्रबंधन के उद्देश्य क्या है?
उत्तर :
आपदा प्रबंधन का उद्देश्य :-
(i) प्रबंधन तथा बहुमुखी आपदा और संकटों को समझना
(ii) आपदाओं को जिवारण के लिए क्षमता का विकास करना।

प्रश्न 28.
उत्तराखण्ड का जून 2013 का बादल-फटना क्या प्राकृतिक आपदा है?
उत्तर :
उत्तराखण्ड़ का जून 2013 का बादल-फटना प्राकृतिक आपदा है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में इसी प्रकार की आपदा देखने को मिलता है । इससे अनेकों जन-धन की नुकसान होती है।

प्रश्न 29.
रासायनिक आपदा क्या है ?
उत्तर :
रासायनिक आपदा तथा इससे उत्पन्न संकट की कोई परिभाषा नहीं दी जा सकती है। सामान्यतः यह दुर्घटना मानवीय चूक के कारण हो सकता है। यह देखा गया है कि इस प्रकार की आपदा कभी-कभी रिसाव छलकने, विकिरण, विस्फोट, आग लगने, या गलत विधि से परिवहन के कारण हो सकता है।

प्रश्न 30.
क्या उत्तराखण्ड का 16 जून का भू-स्खलन और अतिवृष्टि प्राकृतिक आपदा थी?
उत्तर :
उत्तराखण्ड का 16 जून का भू-स्खलन और अतिवृष्टि प्राकृतिक आपदा है क्योंकि इससे अनेकों जन-धन की नकसान होती है तथा यातायात मार्ग में अनेक बाधाएँ भी उत्पन्न हुई थी ।

प्रश्न 31.
भारत के प्रचण्ड सूखाप्रस्त क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
भारत में राजस्थान का मरूस्थलीय एवं अर्द्ध मरूस्थलीय क्षेत्र गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश तथा उत्तर-प्रदेश का दक्षिणी भाग प्रचण्ड सूखाप्रस्त क्षेत्र है।

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प्रश्न 32.
भू-स्खलन क्या है?
उत्तर :
गुरूत्वाकर्षण के कारण पहाड़ों पर चट्टानों एवं मिट्टी के नीचे की ओर खिसकने की प्राकृतिक प्रक्रिया को भूस्खलन (Landslide) कहा जाता है।

प्रश्न 33.
भूकम्प से होने वाले दो प्रभावों का उल्लेख करो।
उत्तर :
हानि :

  • जन-धन की क्षति।
  • नदियों में बढ़ आना।
  • परिवहन में बाधा।

लाभ :

  • उपजाऊ भूमि का निर्माण।
  • खनिज़ पदार्थो की प्राप्ति की सुविधा।
  • नये जलसोतों का निर्माण।

प्रश्न 34.
भूकम्प आने पर दो आकस्मिक प्रबंधन क्या करना चाहिए?
उत्तर :
(i) जन-सामान्य को तत्काल खुले मैदान में आ जाना चाहिए।
(ii) भवनों को भूकम्परोधी बनाना अधिक हितकारी होता है।

प्रश्न 35.
ब्लिजार्ड का घर किसे कहते है ?
उत्तर :
अण्टार्कटिका में स्थित एडिलीलैण्ड को ब्लिजार्ड का घर कहते हैं।

प्रश्न 36.
भारत में बाढ़ संवेदनशील क्षेत्र कितना है ?
उत्तर :
भारत में कुल 40 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ संवदेनशील क्षेत्र हैं।

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प्रश्न 37.
सूखा क्या है ?
उत्तर :
कृषि, पशुपालन, उद्योग अथवा मानवीय जनसंख्या की आवश्यकताओं से कम जल उपलब्ध होने को सूखा कहते हैं।

प्रश्न 38.
भारत में भू-स्खलन की क्रिया प्राय: कहाँ घटित होती है ?
उत्तर :
भारत में भू-स्खलन की क्रिया प्रायः उत्तरी एवं उत्तरी-पूर्वीं पर्वतीय क्षेत्र में होती रहती है।

प्रश्न 39.
पश्चिम बंगाल में प्रतिवर्ष कौन सी प्राकृतिक आपदाएँ आते रहते हैं ?
उत्तर :
बाढ़ एवं चक्रवाती तूफाने पश्चिम बगाल में प्राय: प्रतिवर्ष ही आते रहते हैं।

प्रश्न 40.
अन्तर्जात आपदा किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी की आन्तरिक प्रक्रियाओं या शक्तियों के कारण उत्पन्न आपदाओं को अन्तर्जात आपदा कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदा तथा संकट में क्या अन्तर है?
उत्तर :

प्राकृतिक आपदा प्राकृतिक संकट
i. इसकी गति तीव्र होती है। i. इसकी गति धीमी होती है।
ii. इसका प्रभाव तात्कालिक होता है। ii. इसका प्रभाव स्थायी होता है।
iii. प्रकृति के वे क्रियाकलाप जिनसे धन-जन की व्यापक हानि होती है, सामाजिक तंत्र एवं जीवन दूषित होता है और जिन पर नियंत्रण नहीं हो रहा है। जैसे :- युद्ध, वनों का कटाव, वायुमंडल का प्रदूषण, पारिस्थितकी तंत्र के साथ छेड़छाड़। iii. पर्यावरण के वे अवयव जिनसे धन-जन की व्यापक हानि की संभावना हो वे प्राकृतिक संकट कहलाते हैं, जैसे :- महासागरीय धाराएँ, अस्थिर संरचना, रेगिस्तान या बफीले प्रदेश की विषम जलवायु।

प्रश्न 2.
हिम इंझावत (Blizard) क्या है?
उत्तर :
ब्लिजार्ड या हिम झंझावत (Blizard) :- ब्लिजार्ड या हिम झंझावत धुवीय हवाएं होती है, जो कि बर्फ के कणों से युक्त होती है। हिम कणों से युक्त होने के कारण दृश्यता नष्ट हो जाती है। इनकी गति 80 से 96 कि०मी० प्रति घंटा होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पश्चिम-पूर्व धरातलीय अवरोध की ये हवाएँ समस्त मैदानी भाग को प्रभावित करते हुए दक्षिणी भागों तक पहुँच जाती हैं। साइबेरिया, मंगोलिया और मंचूरिया में इन झंझावतों को बुरा कहते हैं। इनकी तुलना मध्य और दक्षिण संयुक्त राज्य अमेरिका के नादर्न से की जा सकती है। साइबेरिया में इसे बुरान कहते हैं।

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प्रश्न 3.
सूखे के दुष्परिणाम क्या हो सकते हैं?
उत्तर :
सूखे के दुष्परिणाम :-

  1. फसलों का उत्पादन कम होने से देश में खाद्यान्न की समस्या आती है और मंहगाई बढ़ जाती है।
  2. मेवेशियों के लिए चारा और पीने के जल का अभाव हो जाता है।
  3. सूखा से भू-जलस्तर नीचे चला जाता है। प्राकृतिक जलाशय सूख जाते हैं, जल का अकाल हो जाता है।
  4. सूखा प्रभावित क्षेत्र में मानव प्रवास, पशुपालन और पशुओं की मृत्यु सामान्य घटना है।
  5. जल के अभाव में लोग दूषित जल का प्रयोग करते हैं, अत: पशु और मनुष्य रीग्रस्त हो जाते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
भारत में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र :-

  1. पंजाब-हरियाणा में सतलुज, व्यास और यमुना नदी तथा हिमालय क्षेत्र में बर्फ पिघलने से बाढ़ आती है।
  2. उत्तर-प्रदेश, बिहार में यमुना, गंगा, घाघरा, गंडक नदियों में बाढ़ आती है।
  3. असम और समीपवर्ती क्षेत्र में बह्मपुत्र नदी प्रतिवर्ष बाढ़ की विनाश लीला उपस्थित करती है।
  4. पश्चिम बंगाल में उत्तरी बंगाल की नदियों एवं हुगली में बाढ़ आती है।
  5. उड़ीसा में महानदी एवं बंगाल की खाड़ी में चकवात के कारण बाढ़ आती है।
  6. आघ के पूर्वोतर और तमिलनाडु के उत्तरी तट पर गोदावरी, कृष्णा, तुगभद्रा एवं समुद्री तूफान से बाढ़ आती हैं।
  7. गुजरात में साबरमती, नर्मदा और ताप्ती नदियों के कारण बाढ़ आती है तथा मुहाने का क्षेत्र समुद्री तूफान से प्रभावित होता है।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी के उदगार से होने वाले विनाश को कैसे कम किया जा सकता है ?
उत्तर :
ज्वालामुखी के फटने से मानव जीवन की क्षति को कम करने के लिए निम्न बातो पर ध्यान देने की विशेष आवश्यकता है :-
a) भूमि का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए।
b) ज्वालामुखी उद्गार के समय तथा स्थान की बेहतर भविष्यवाणी एवं संभावित विनाश के बारे में समय से पहले सूचना देनी चाहिए।
c) प्रभावी परित्यक्तता योजना (Effective evacuation plans) लागू करना चाहिए, जिससे विशेष परिस्थितियों में आबादी को अन्यत्र हटाया जा सके ताकि जानमाल की कम क्षति हो सकें।

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प्रश्न 6.
भू-स्खलन के हानिकारक प्रभावों को कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर :
भू-सखलन एक प्राकृतिक घटना है, जिसमे मानव क्रिया-कलाप एक उत्रेरक (Catalyst) का कार्य करता है। अत: निम्नलिखित उपायों द्वारा इसका नियत्रण तथा इनके दर को कम किया जा सकता है।

  1. सतही एवं भूमिगत जल की उचित निकासी को व्यवस्था करना।
  2. तार एवं पत्थरों द्वारा अपरदन और स्खलन कम करना।
  3. पर्वतीय क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए उचित आवासीय निर्माण नियमों का पालन करना।
  4. ढलानों (Slopes) पर भवन निर्माण न करना।
  5. पहाड़ी ढलानों पर कक्रोट के खंड बनाकर स्खलन रोकना।
  6. ढलानों एवं घाटी में वृक्षरोपण करना।

प्रश्न 7.
आपदा और संकट की परिभाषा दीजिए?
उत्तर :
आपदा : आपदा का अर्थ है विपत्ति। अचानक होने वाली ऐसी घटना जिससे व्यापक स्तर पर जैविक एवं भौतिक क्षति होती है, आपदा कहते हैं।
आपदा (Disaster) को परिभाषित करते हुए फ्रेडरिक क्रिमगोल्ड ने कहा है कि ” आपदा एक ऐसा संकट है जो समाज की क्षमता (सहनशीलता) के परे हो जाता है, जिससे वह उसे उस समय संभाल नहीं पाता या उसकां सामना नहीं कर पाता है।”

संकट : प्राकृतिक आपदाओं को संकट कहा जाता है। फ्रैंच भाषा में Des का तात्पर्य बुरा तथा (Aster) का तात्पर्य सितारे से है। प्राचीन काल में आने वाले संकटों से तात्पर्य प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ माना जाता है। अतः प्राकृतिक आपदाओं को प्रकृति द्वारा दण्ड माना जाता था। विश्व बैंक ने संकट के बारे में कहा है- संकट अल्पावधि की एक साधारण घटना है, जो देश की अर्थ व्यवस्था को गंभीर रूप से बिगाड़ देती है।

प्रश्न 8.
बाढ़ से होने वाली क्षति का वर्णन करो।
उत्तर :
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा का संबंध अतिवृष्टि से है। जब अत्यधिक वर्षा के कारण जल अपने प्रवाह मार्ग जैसे नदी, नालों आदि में नहीं बहकर तटबन्धों को तोड़ता हुआ विस्तृत भू-भाग को जलमग्न कर देता है, तो उसे बाढ़ कहते है। नदियों के मार्ग परिवर्तन के कारण भी यह स्थिति उत्पन्न होती है। नदी घाटियों में सघन जनसंख्या व कृषि क्षेत्र होने के कारण बाढ़ो से अत्यधिक हानि होती है। विश्व का 4 % भू-भाग बाढ़ग्रस्त क्षेत्र है जहाँ 19.5 % जनसंख्या निवास करती है या बाढ़ से प्रभावित है।

बाढ़ से पर्यावरण को क्षति पहुँचती है। मिट्टी का अपरदन अधिक होता हैं। जल प्लावित क्षेत्रों में वनस्पति व प्राणियों को हान होती है। उदाहरणार्थ वर्ष 1998 में बाढ़ के कारण काजीरंगा नेशनल पार्क का अधिकांश भाग जलमग्न हो गया तथा अनेक गेंडो व दुलभभ जीव-जन्तुओं की मृत्यु हो गई। प्रतिवर्ष बाढ़ों से अधिवासों, सड़कों रेलमार्गो, पुलों व फसलों को हानि होती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रो में महामारियाँ तेजी से फैलती है।

प्रश्न 9.
सूखे से उबरने के लिए आपदा प्रबंधन का वर्णन करो।
उत्तर :
सूखा का सामना करने के लिए निम्नांकित उपाय काम में लायें जा सकते है :-

  1. सूखा क्षेत्रो में शुष्क कृषि प्रणाली द्वारा माटे अनाज पैदा किये जाते हैं। इन प्रणाली के अन्तर्गत गहरी जुताई की जाती है।
  2. ऐसे बोजों का प्रबधन किया जाय जो सूखा सहन कर सके।
  3. वर्ष के जल का व्यवस्थित रूप से अधंकतम उपयोग छोटे बाँघ, हौज, तालाब, एनीकट, कुएँ तथा मिट्टी के अवरोंध बाँध बनाकर किया जाना चाहिए।
  4. सिंचाई के लिए नहरों को पक्का बनाना जिससे भूमि में कम से कम जल रिस सके।
  5. जिन क्षेत्रों में नमकीन मिट्टी पायी जाती है, उनमें ड्रिप सिंचाई की प्रणाली अपनाकर पुन रूद्धार की गई मिट्टी में फसलें. पैदा की जाय।

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प्रश्न 10.
बाढ़ से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन को लिखो?
उत्तर :
बढ़ से बचाव के लिए निम्न उपायों को किया जाना चाहिए :-

  1. बाढ़ नियत्रण केन्द्रों की स्थापना कर मौसम की भविष्यवाणी करनी चाहिए।
  2. बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से लोगों को निकालकर शीध सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना चाहिए।
  3. राहत साग्रगी की व्यवस्था अतिशीघ करनी चाहिए।
  4. नदियों के जलग्मण क्षेत्रों में वनों की कटाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।
  5. नदियों के प्रवाह मार्ग में बाढ़ को नियंत्रित करने हेतु भण्डारण जलाशयों अर्थात बाँधो का निर्माण करना चाहिए।

प्रश्न 11.
सुनामी से बचाव के लिए आपदा प्रबन्धन को लिखो।
उत्तर :
सुनामी लहरों के प्रतिरोधस्वरूप निम्नांकित कार्य किया जाना चाहिए :-

  1. तटीय भागों पर बने मकानों से दूर रहें।
  2. तटीय भागों पर बने मकानों की ऊँचाई बढ़ाइए।
  3. मकान भूकम्परोधी बनाइए जिसके लिए किसी इन्जीनियर की सहायता लेनी चाहिए।
  4. स्थानीय अधिकारियों द्वारा किये गये निर्देशों का पालन करना चाहिए।

प्रश्न 12.
मानव निर्मित विपत्तियाँ क्या है?
उत्तर :
ऐसी आपदाएं जिसमें भनुष्य की ही भमिका होती है, जैसे सम्र्रदायिक दंगे या जातिगत दंगे आदि। लिंग भेद, जातिभेद, धर्म, प्रादेशिकवाद एवं आर्थिक वर्ग में भिन्नता के कारण कभी-कभी ऐसी दशाएं उत्पन्न हो जाती है कि लोग अपना संतुलन खो बैठते हैं तथा उन्मादित हो जाते हैं। यह कभी-कभो इतना उग्र रूप धारण कर लंता है कि इसके चपेट में बड़ी संख्या में लोग आ जाते हैं और बहुतों को अपनी जान भी गवानी पड़ जाती है।

प्रश्न 13.
अन्तर्जात प्रक्रम किस प्रकार अन्तर्जात आपदाओं की सृष्टि करते हैं?
उत्तर :
भूकम्प और ज्वालामुखी दो ऐसे आपदा हैं जिसकी उत्पत्ति अन्तर्जात प्रक्रम के कारण होती है। पृथ्वी के भौतर कई प्रकार से अन्तर्जात प्रक्रम कार्य करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भू-गर्म से गैसों का निकलना, भू-सन्तुलन का बिगड़ना, भंशीकरण तथा ज्वालामुखी का उद्गार की सृष्टि होते हैं।

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प्रश्न 14.
वायुमण्डलीय आपदाओं की उत्पत्ति के क्या कारण हैं?
उत्तर :
बाढ़, सूखा, चक्रवात आदि वायुमण्डलीय आपदाएँ हैं। यह सभी आपदा मौसम की अनिश्चितना तथा अनियमितता के कारण आती है। इसमें बाढ और सूखा वर्षा पर निर्भर करता है, लेकिन चक्रवात वायुमण्डलीय दबाव क्रे द्वारा उत्यन्न होती है।

प्रश्न 15.
जैविक विपत्तियाँ या महामारी क्या है?
उत्तर :
सूक्ष्म जीवों द्वारा जो विपत्तियाँ उत्पन्न होती हैं उसे जैविक विपत्तियाँकहते हैं। इन जैविक सक्ष्म जीवों से महामारी फैलती है। महामारी भी एक प्रकार की आयदा है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। प्लेग, फ्लू, हैजा, चेचक आदि प्रसिद्ध महामारियाँ हैं। आजकल भाव इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यदि इसकी रोकथाम नही की गई तो यह एक भयंकर आपदा का रूप धारण कर लेगी।

प्रश्न 16.
रासायनिक आपदा क्या है?
उत्तर :
रासायनिक आपदा (Chemical Hazards) :- विभिन्न कार्यो के लिए संसार के सभी देशो को रसायन की आवश्यकता पड़ती है, अतः उनके उत्पादन के लिए रासायनिक उद्योग लगाए जाते है, विश्व में रासायरनक रेकर्ड के अनुंसार करीब 4-5 मिलियन प्रकार के रसायन रजिस्टर है तथा प्रत्येक वर्ष हजारों नए रसगन का उत्पादन किया जाता है। इन रसायनों के उत्पादन, परिवहन, भडारण, उपयोग तथा उनके अवशिष्ट पदार्थो को निस्यादित करने के कांम मे अनेक प्रकार के जोखिम की संभावना रहती है। जिस तरह रसायनो की संख्या तथा उपयोग बढ़ता जा रहा है, इससे पैदा होने वाले जोखिम भी दिन-प्रति दिन बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 17.
बांध दूटने से जो बाढ़ आती है वह अधिक भयावह क्यों होती है?
उत्तर :
बाँध का टूटना भी एक प्रमुख आपदा है। बांधों के पीछे जलाशय व जल के दबाव के कारण पुल और बांध टूट जाते हैं। जलीय दबाव के कारण कभी-कभी नदियों के तटबध भी दूट जाते हैं जिससे पानी बड़े क्षेत्र में फैल जाता है तथा बाढ़ से भी भीषण तबाही मच जाती है। चूंकि ऐसी घटनाएँ आकस्मिक होती है, अतः लोगों को संभलने का अवसर नहीं मिलता और भारी तबाही होती है। बांधां के टूटने से होने वाली क्षति की अपेक्षा कई गुणा अधिक होती है।

प्रश्न 18.
सुनामी और भूकम्प में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

सुनामी भूकम्प
(i) सुनामी पृथ्वी के जलीय भाग में उत्पन्न कम्पन है। (i) भूक्यम पृथ्वी के धरातल पर उत्पन्न कम्पन है।
(ii) सुनामी लहरों की उत्पत्ति भूकम्प के कारण होती है। (ii) भृकम्प की उत्पति किसी भ्रंश (Fauit) के सहार

प्रश्न 19.
चक्रवात क्यों आते हैं?
उत्तर :
विषुवत रेखा के दोनों ओर लगभग 30° अक्षांश का क्षेत्र उष्ण कटिबंध कहा जाता है। चक्रवात उण्ण कटिबंधीय प्रदेशो में सामान्य रूप से आता है। ये उच्च तापमान एवं आर्द्रता के कारण उत्पन्न होते हैं। इसके लिए समुद्री सतह का तापमान 26° से अधिक होना आवश्यक है।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल में चक्रवात से कौन-सा क्षेत्र किस प्रकार प्रभावित होता है?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी में सुन्दरवन के डेल्टा से उतरी हवाएं और पूर्वी घाट की नदियों सुवर्ण रेखा, महानदी आदि के साथ पश्चिमी हवाएं परस्पर लम्बवत् मिलती है। इससे गर्म आर्द्र वायु तेजी से ऊपर उठती है और कम दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। आर्द्रवायु का प्रवाह लगभग 15 कि० मी० ऊपर तक हो सकता है। हवा का बहाव भंवर की तरह चक्कर करते हुए ऊपर की ओर होता है।

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प्रश्न 21.
सुनामी का क्या प्रभाव है?
उत्तर :
सुनामी भूकम्प की भांति ही एक विघ्वसकारी आपदा है। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मानव, मवेशी एवं पशु-पक्षी काल के ग्रास बन जाते हैं। गहरे समुद्र में तो सुनामी का उतना प्रभाव नहीं दिखता पर तटीय भाग में यह विनाशलीला उत्पन्न कर देता है। इसका कारण यह है कि छिछले समुद्रों में लहरों की गति धीमी पड़ने लगती है तथा पीछे से तेज गति से आने वाली लहरें उस पर चढ़ जाती हैं तथा दीवार के रूप में आगे बढ़ती है तथा उसके दबाव से मकान, पुल, सड़क, रेललाइन आदि ध्वस्त हो जाती है। नौकाए तथा जहाज डूब जाती है।

प्रश्न 22.
हिमवाह या हिमघाव किन क्षेत्रों में प्रभावी होता है?
उत्तर :
हिमवाह या हिमघाव की घटना प्राय: पर्वतीय क्षेत्रों के उन भागों में घटित होती है जो जन-जीवन वाले क्षेत्रो से काफी दूर हैं। यहाँ की छोटी-छोटी बस्तियाँ तथा कस्बे जब इनके चपेट में आ जाते हैं तो उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुँचने में काफी वक्त लग जाता है। आवागमन के साधन के अभाव में लोगों को वहाँ पहुँचने में कठिनाइयों होती है जिसके कारण यह एक प्रमुख आपदा का रूप धारण कर लेती है।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
सूखा किसे कहते है? भारत में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
नामिया (1989) के अनुसार : सूखा वह स्थिति है जो वर्षा के अभाव में उत्पन्न होती है तथा कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। इससे जल आपूर्ति बाधित होती है तथा जल से जुड़े कार्यकलाप बुरी तरह प्रभावित होते हैं। भारत के सूखाप्रस्त क्षेत्रो को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है :-

उच्च या प्रचण्ड सूखाग्रस्त क्षेत्र :- भारत में राजस्थान का मरूस्थलीय एवं अर्द्धमरूस्थलीय क्षेत्र, गुजरात, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश का दक्षिणी भाग प्रचण्ड सूखाप्रस्त क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र का विस्तार लगभग 6 लाख वर्ग कि० मी० में है। प्रचण्ड सूखे का यह क्षेत्र त्रिभुजाकार रूप में पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम के कच्छ तक फैला हुआ है। इस प्रदेश में वर्षा का वार्षिक औसत 35 से 70 से० मी० तक रहता है। हरियाणा और पंजाब में सूखे से विशेष हानि नहीं होती क्योकि इन प्रदेशों में नहर एवं नलकूप पर्याप्त मात्रा में हैं, किन्तु अन्य भागों में सूखा से पर्याप्त क्षति होती है। इस प्रदेश को दो या तीन वर्ष में एक बार अवश्य ही प्रचण्ड सूखे का सामना करना पड़ता है।

मध्य सूखाग्रस्त क्षेत्र :- इस क्षेत्र में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश तथा तमिलनाडु राज्य का पश्चिमी भाग सम्मिलित है। यह क्षेत्र लगभग 300 कि० मी० की चौड़ाई में पश्चिमी घाट के पूर्व में चतुर्भूजाकार रूप में फैला है। यहाँ वार्षिक वर्षा का औसत 75 से॰मी॰से कम रहता है। इस प्रदेश को तीन से 5 वर्ष के मध्य एक बार सूखा-संकट का सामना करना पड़ता है।

न्यूनतम सूखाप्रस्त क्षेत्र :- भारत में न्यून या निम्न सूखाग्रस्त क्षेत्र बिखरे हुए प्रारूप में विस्तृत हैं। इस क्षेत्र में बिहार प्रान्त का पलामू क्षेत्र, पश्चिम बंगाल का पुरूलिया जनपद, उड़ीसा का कालाहाँड़ी क्षेत्र मुख्य रूप से उल्लेखनीय है।

प्रश्न 2.
भूकम्प क्या है? भारत में भूकम्प के खतरे वाले क्षेत्रों को कितने जोन में बाँटा गया है?
उत्तर :
‘भूकम्प’ दो शब्दों से मिलकर बना है : भू (Earth) अर्थात पृथ्वी और और कम्प (Quake) अर्थात कम्पन। अत: ‘भूकम्प’ का साधारण अर्थ है ‘पृथ्वी का हिलना’। किसी ज्ञात या अज्ञात, बाह्य या आन्तरिक कारण से धरातल के अचानक कॉप उठने की क्रिया को ‘भूकम्प’ कहते हैं।

भारत में भूकम्प के खतरे वाले क्षेत्र :-
जोन – 1. पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा उड़ीसा इस जोन के अन्तर्गत आते हैं। यहाँ भूकम्प का खतरा सबसे कम रहता है।
जोन – 2. इस जोन में तमिलनाडु, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल के मैदानी एवं पठारी अंचल तथा हरियाणा को शामिल किया गया है। यहाँ भूकम्प की सम्भावना रहती है।
जोन – 3. इस जोन के अन्तर्गत केरल, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से आते हैं। यहाँ भूकम्प के झटके आते रहते हैं।
जोन – 4. इस जोन में मुम्बई तंथा दिल्ली महानगर, जम्मू-कश्मीर, हिमांचल प्रदेश, पश्चिमी गुजरात तथा बिहार-नेपाल के सीमा क्षेत्र. शामिल हैं। यहाँ लगातार भूकम्प का खतरा बना रहता है तथा रूक-रूक कर भूकम्प आते रहते है।
जोन – 5. भूकम्प की दृष्टि से यह सबसे खतरनाक जोन है। इसमें गुजरात का कच्छ, उत्तरांचल तथा पूर्वोत्तर के अधिकतम राज्य आते है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 3.
वनाग्नि क्या है? वनाग्नि को रोकने के क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर :
वनाग्नि (Forest fire) :- वनाग्नि एक बड़ी आपदा (Hazard है। यह तीव्र गति से विस्तृत क्षेत्रों में फैल जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 1955 ई० से 1964 ई० की अवधि के दौरान लगभग 10 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को वनाग्नि से क्षति पहुँची थी। हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में वनों में लगने वाली आग एक बड़ी समस्या बन गयी है।
वनाग्नि को रोकने के उपाय :- वनाग्नि से वनों का विनाश होता ही है, इसके साथ-साथ वर्षा, पोषक तत्वों के चक्र, मिट्टी की उर्वरता, मिट्टी के द्यूमस तत्व आदि पर भी इसका दुष्रभाव पड़ता है तथा जीव-जन्तुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं। अत: हमें वनों को अग्नि से रक्षा करनी चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं :-

  1. वनों में कैम्प फायर का आयोजन नहीं करना चाहिए। यदि वहाँ कैम्प फायर आयोजित किए जाते हैं तो इसके लिए स्थान चुनने के बाद भूमि को साफ करके उसके चारों तरफ पत्थरों का घेरा बना देना चाहिए।
  2. वनो में वाच टावर (Watch Tower) बनाए जाने चाहिए, जिससे इनकी निगरानी की जा सके।
  3. वन क्षेत्रों में बीच-बीच में खुले क्षेत्र खाली छोड़ देने चाहिए। ये खुले क्षेत्र अग्नि रोधक का कार्य करते हैं तथा विस्तृत क्षेत्र में आग के फैलाव को रोकते हैं।
  4. वनों में या इनके निकट रहने वाले लोगों को अग्नि रक्षा के नियमों से परिचित तथा प्रशिक्षित कराया जाए।

प्रश्न 4.
बाढ़ क्या है? नदियों में बाढ़ को रोकने के क्या उपाय किए जा सकते हैं ?
उत्तर :
नदियाँ अपनी क्षमता के अनुसार ही जल का वहन कर सकती है। अतिवृष्टि अथवा बर्फ के पिघलने से नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो जाती है जो किनारों को तोड़कर आस-पास के क्षेत्रों में भर जाता है। इस स्थिति को ही बाढ़ कहा जाता है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। प्रत्येक उपाय के कुछ लाभ एवं कुछ हानियों को इसमें सम्मिलित किया गया है। ये निम्न है :-

  1. बाँधों का निर्माण।
  2. कृत्रिम सतहों या किनारों का विकास।
  3. बड़े-बड़े जलाशयों का निर्माण।
  4. नदियों की खुदाई एवं साफ-सफाई।
  5. छोटे नालों एवं नहरों को सुचारू करना एवं उनका विकास करना।
  6. नदियों को जोड़ना।
  7. वनों के काटने पर प्रतिबंध ।

प्रश्न 5.
पश्चिम बंगाल में घटित होने वाली प्राकृतिक आपदाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में घटित होने वाली प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ निम्नलिखित है, जो समय-समय पर घटटित होकर यहाँ के जन-जीवन को प्रभावित करती रहती है :-
उष्ण कटिबंधीय चक्रवात :- पश्चिम बंगाल, बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित राज्य है। बंगाल की खाड़ी इस राज्य के दक्षिण में स्थित है। इस खाड़ी में ग्रोष्म ऋतु तथा शरद ऋतु में उष्ण कटिबधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती रहती है । तीव्र दाब प्रवणता के कारण इन चक्रवातों में वायु तीव्र गति से आगे बढ़ती है तथा तट पर पहुँचकर विनाशलीला प्रारम्भ कर देती है। पश्चिम बंगाल के दक्षिणी तटवर्ती क्षेत्रों में इन चकवातों के कारण अनेको लोग मरे जाते हैं, बिजली के खम्भे तथा वृक्ष उखड़ जाते हैं, तथा भवनों को भारी क्षति पहुँचती है। समुद्र में ऊँची लहरें उठने लगती हैं जिससे मछुवारों एवं नाविकों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।

सूखा :- पश्चिम बंगाल में सूखे का प्रभाव कम देखने को मिलता है। वर्षा यहाँ द्रक्षिणीं-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होती है। जब कभी ये मानसूनी हवाएँ कमजोर पड़ जाती हैं, तो वर्षा सामान्य से कम होती है, जिससे राज्य के पश्चिमी भाग में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सूखे का सर्वाधिक प्रभाव पुरूलिया जिले में पड़ता है।

भूकम्प :- भूपटल पर होने वाले कम्पन को भूकम्प कहते हैं। पश्चिम बंगाल के उत्तर में पर्वतीय श्रेणियाँ हैं। इस अंचल में भूरर्भिक प्रक्रियाओं के घटित होते रहने के कारण अक्सर भूकस्प के झटके महसूस होते रहते हैं तथा कभी-कभी तीव्र झटकों के कारण विनाशकारी परिणाम देखने को मिलते हैं। पश्चिम बंगाल के मैदानी एवं पठारी अंचल भूकम्प की दृष्टि से अधिक संवेदनशील नहीं है। इन अचलों में कभी-कभी हल्के झटके महसूस किये जाते हैं।

भू-स्खलन :- पर्वतीय अंचलों में गुरूत्वाकर्षण के कारण चट्टानों एवं मिट्टी का बहुत बड़ा ढेर नीचे आकर तबाही मचा देता है। पश्चिम बंगाल के सूदूर उत्तरी भाग की भू-प्रकृति पर्वतीय है। यहाँ मानसून काल में प्रचूर वर्षा होती है जिससे ढीली चट्टानें गीली होकर ढाल के सहारे स्खलित होती है। जब स्खलन बड़े पैमाने पर होता है तो धन-जन की हानि होती है तथा मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं।

बाढ़ :- पश्चिम बंगाल में प्रतिवर्ष किसी न किसी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उंत्पन्न होकर जनजीवन को तबाह करती रहती है। वर्षा ऋतु में पर्वतीय अंचल में अति वृष्टि के कारण उत्तरी बंगाल में प्रवाहित होने वाली नदियों में जलातिरेक हो जाता है, जिससे इन नदियों की घाटियों में अक्सर भयकर एवं विनाशकारी बाढ़ आया करती है। नदियों पर बाँध बनाकर इनके बाढ़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। परन्तु आज भी पश्चिम बंगाल भारत के सर्वाधिक बाढ़ वाले राज्यों में से एक है। बाढ़ के कारण प्रतिवर्ष यहाँ अनेकों लोग मारे जाते हैं तथा हजारों एकड़ फसल वर्बाद हो जाती है।

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प्रश्न 6.
आपदाओं का न्यूनीकरण एवं प्रबन्धन कैसे किया जा सकता है?
उत्तर :
आपदाओं के न्यूनीकरण एवं प्रबन्षन के अन्तर्गत निम्नलिखित तीन स्थितियों पर योजना बनाने की आवश्यकता है :

  • आपदा के पूर्व प्रबन्धन योजना
  • आपदा के मध्य प्रबन्धन योजना
  • आपदा के पश्चात् प्रबन्धन योजना।

आपदा के पूर्व प्रबन्धन योजना :- आपदा के पूर्व प्रबन्धन का अर्थ किसी आपदा या विपत्ति से होने वाले जोखिम को न्यूनतम करने का पूर्व प्रयास है। इसके अंतर्गत विपत्ति का सामना करने की घूर्ण तैयारी, जनजागरूकता और आपदा न्यूनीकरण के उपायों हेतु योजना बनाई जाती है। पूर्ण तैयारी में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान एवं जोखिम का मूल्यांकन और प्रभाव का पुर्वानुमान लगया जाता है, फिर इसके आधार पर अन्य तैयारी की रूप रेखा बनाई जाती है। इसके पूर्व सूचना प्रणाली को विकसित करना, संसाधन प्रबन्धन पर ध्यान देते रहना और सत्यता के लिए अभ्यास (रिहर्सल) करते रहना आवश्यक है।

इस प्रकार की पूर्ण तैयारियों के लिए सामुदायिक सहयोग और पहल की आवश्यकता होती है, जिसे मानव समुदाय में जागरूकता के द्वारा पूरा किया जा सकता है। जागरूकता के अन्तर्गत पयार्वरण की सुरक्षा और जोखिम प्रबम्बन रण कौशलों का व्यापक प्रचार एवं वित्तीय योगदान तथा बीमा अर्थात् जोखिम का स्थानान्तरण आदि पक्षों पर ध्यान दिया जाता है। इस प्रकार आपदा पूर्व प्रबन्धन योजना में समुदाय एवं सम्बन्धित संस्थाएँ परस्पर समन्वय स्थापित कर जनसमुदाय के सदस्यों कों आपदा का सामना करने के योग्य बनाने का प्रयास करती है।

आपदा के मध्य प्रबन्धन योजना :- आपदा के मध्य प्रबन्धन से यह अभिप्राय है कि, आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर बचाव कार्यो को तत्काल शुरू किया जाय और प्रभावित मानव समुदाय की विभिन्न प्रकार से सहायता की जाय। इस अवधि में मुख्य ध्यान खोज और बचाव तथा राहत सामग्री के उंचित रूप से प्रबन्ध एवं वितरण पर दिया जाना आवश्यक है। खोज व बचाव के लिए प्रशिक्षित सुरक्षादल जो आपदा पूर्व प्रबन्धन के समय किए गए थे, इस समय महत्वपूर्ण मूमिका निभाते हैं। इसके साथ-साथ चिकित्सक समूहों के प्रबन्धन, अस्थायी आवास व्यवस्था, सूचना केन्द्र और खाद्यसाम्मगी का वितरण सुनिश्चत करने की पूर्व निर्धारित रणनीतियों को भी इसी समय क्रियान्वित किया जाता है।

आपदा के पश्चात् प्रबन्धन योजना :- आपदा के पश्चात् पुनर्वास, और विकास कार्यो से संबंधित कार्यो पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। इस समय नीति निर्धारको की अहम भूमिका होती है। उन्हे वर्तमान में हुई आपदा से क्षतिपूर्ति को पूरा करने के लिए उचित वितरण प्रणाली के साथ-साथ मानक तकनीकों के अनुसार ही विकास कार्यो को पूरा करना चाहिए। इसी अवसर पर आपदा पूर्व प्रबन्धक के अन्तर्गत स्थापित वित्तीय आपात कोष तथा जोखिम स्थानान्तरण संस्था और (बीमा कम्पनी) के कार्यों का पूरा उपयोग करते हुए, राहत एवं पुनर्वास कार्यो में सहयोग प्रदान करता है।

इस अवसर पर रोजगार, आवास तथा मूलभूत सुविधाओं को स्थापित करके प्रभावित क्षेत्र की विकास प्राथमिकाओं को पूरा करना अत्यन्त आवेश्यक है, अन्यथा प्रभावित जनसमुदाय क्षेत्र से पलायन करने लगता है तथा क्षेत्र के स्थानीय संसाधनो का अनुपयोग प्रारंभ हो जाता है-। इस अवधि में आपदा प्रबन्ध विकास को नई सतत विकास संकल्पना के साथ समन्वित करके पुर्नवास और विकास कार्यो को पूरा करने की योजना सर्वाधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होती है।

अत: आपदा निवारण हेतु आपदा न्यूनीकरण प्रबन्धन को न केवल जीवन के अंग के रूप में बल्कि आवश्यक जीवन रक्षा कौशल के रूप में अपनाकर अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहना और जनसमान्य तैयार करना ही सर्वोत्तम उपाय है।

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प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल में आपदा प्रबंधन नीति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में आपदा प्रबंधन नीतियाँ (Disaster Management Strategies in West Bengal) :- पश्चिम बंगाल को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं जैसे :-बाढ़, सूखा, चक्रवात, भू-स्खलन, तथा भूकम्प आदि के कष्टों को सहन करना पड़ता है । बाढ़ और चक्रवाती तूफान तो पश्चिम बंगाल में लगभग प्रति वर्ष ही आते रहते हैं तथा इनसे यहाँ के विभिन्न भागों में बड़े पैमाने पर धन-जन की हानि होती है, जिससे राज्य का आर्थिक विकास प्रभावित होता है। प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से बचने के लिए या इनसे होने वाले धन-जन की हानि को न्यूनतम करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ‘पश्चिम बंग राज्य आपदा प्रबन्धन नीति’ (West Bengal State Disaster Management Policy) तैयार की गयी है। इस नीति के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं :-
i) आपदा से निपटने की तैयारी तथा आपदा बचाव सभी विकास नीतियों का अभिन्न अंग होना चाहिए। राज्य के आपदा प्रभावित जिलों में लम्बी अवधि की विकास योजनाओं को तैयार करते समय आपदा प्रबन्व को ध्यान में रखना होगा।
ii) आपदाओं से निपटने के लिए दृढ़ आपदा प्रबन्ध नीति होनी चाहिए जो सभी प्रकार की आपदाओं के लिए योजना एवं तैयारी प्रस्तुत कर सके।
iii) पश्चिम बंगाल सरकार को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपदा प्रबन्ध के सभी स्तरों जैसे :- जोखिम, राहत, साम्रगी वितरण, पुर्नवास एवं विकास कार्य आदि के लिए वर्तमान प्रशासनिक तन्त्र का पूरा उपयोग किया जा सकता है। सभी सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों तथा समितियों को उपलब्ध संसाधनों के अंतर्गत आपदा प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
iv) सफल आपदा प्रबन्धन के लिए गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), व्यक्तिगत क्षेत्रों एवं सभी सरकारी विभागों जैसे अग्नि निरोषक दस्तों, आपातकालीन सेवाओं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आदि की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
v) प्रबन्धक प्रयास तटस्थ होना चाहिए अर्थात आपदा से प्रभावित सभी लोग बचाव एवं राहत सेवाओं से समान रूप से लाभन्वित हों।

प्रश्न 8.
भूस्खलन के लिए आपदा प्रबन्धन का वर्णन करो।
उत्तर :
आपदा प्रबन्धन (Disater Management) :- पर्वतीय क्षेत्रों में वनों की कटाई, बड़े निर्माण कार्य, खनन, कृषि इत्यादि मानवीय गतिविधियों को सीमित करके भू-स्खलन की घटनाओं को कम किया जा सकता हैं। पर्वतों के नग्न ढालों पर वनस्पति लगाने से मृदा एवं चट्टानों का स्थिरीकरण होगा।

प्राक-आपदा (Pre-Disater) :- भू-स्खलन की घटनाएँ सामान्यत: वर्षा काल में अधिक होती है। अत: भारी वर्षा के समय आपदा की आशंका वाले क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी के साथ ही बचाव कार्यो के लिए त्वरित कार्यबल तैयार रखें। भूस्खलन के कारण मार्ग अवरूद्ध हो जाना स्वभाविक है। अत: मार्गो को तुरन्त खोलने के लिए विभिन्न यन्त्रों की पर्याप्त व्यवस्था रखनी चाहिए।

आपदा पश्चात् (Post-Disater) :- नदियों में पहले चट्टाने गिरनेसे अल्पकालिक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अतः स्थल मार्गो के समान ही नदी मार्ग के अवरोध को भी शीघ हटायें। आबादी क्षेत्र में भू-स्खलन हो जाने पर दबे हुए लोगों को शीघ्र निकालकर उनकी चिकित्सा, भोजन व शरण आदि की तुरन्त उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। भू-स्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में पर्वतीय ढालों पर अधिवासों के प्रचार को रोकने के साथ हीं नवीन वस्तियां स्थापित न हो इसके लिए कारगर उपाय किये जाने चाहिए।

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प्रश्न 9.
भूकम्प से उबरने के लिए आपदा प्रबन्धन का वर्णन करो।
उत्तर :
भूकम्प से उबरने के लिए आपदा प्रबंघ (Distater Management of earthquacke) : – भूकम्प जैसी आपदा को रोकना मानव के वश में नहीं है। किन्तु दीर्घकालीन उपायों से इससे होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है। भूकम्प प्रबन्धन हेतु निम्नांकित उपाय किये जाने चाहिए :-
(a) आपदा के पहले (Pre-Disaster) :

  1. भूकम्प की आशंका वाले क्षेत्रों में भूकम्प मापी यन्त्र (Richter Scale) की सहायता से किसी भी असामान्य भू-पृष्ठीय हलचल पर निगरानी रखना तथा प्रारम्भिक झटटकों को अंकित करते ही सूचना को त्वरित प्रसारण करना चाहिए।
  2. जनसामान्य को तत्काल खुले मैदान में आ जाना चाहिए।
  3. भवनों को थूकम्परोधी बनाना अधिक हितकारी होता है।

(b) आपदा के बाद (Post-Disaster) :

  1. भूकम्प आ जाने पर घटना से प्रभावित अधिक घने बसे क्षेत्र में राहत कार्य पर अधिक जोर देना चाहिए।
  2. घायलों के लिए उपचार व राहत सामग्री शीघ पहुँचाई जानी चाहिए।
  3. भूकम्प के तुरन्त बाद वहँँ फँसे लोगों को निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए।

प्रश्न 10.
आपदा प्रबन्धन में छात्रों की भूमिका का वर्णन करो?
उत्तर :
आपदा प्रबन्थन में छात्रों की मूलभूत भूमिका जागरूकता (AWAENESS) होती है कि आपदा के समय और बाद में क्या करना चाहिए। छात्रों को ऐसी शिक्षा प्रदान करनी चाहिए जिससे आपदा के समय मृतको की संख्या कम की जा सके और प्रभावित लोगों को प्राथमिक-इलाज (First-Aid) करने में छात्र सक्षम हो। यदि छात्र प्रशिक्षित होंगे तो वे आपदा के समय स्वयं की रक्षा करेंगे और प्रभावितों की भी सहायता कर सकेंगे। छात्र निम्न प्रकार से मदद कर सकते हैं :-
(i) छात्र प्रभावित व्यक्तियों के पुर्नवास में मदद कर सकते हैं।
(ii) छात्र आपदा समय में स्वय सेवी के रूप में बुलाये जा सकते हैं।
(iii) छात्र प्रभावित लोगों को मूल राहत पहुँचा सकते हैं।
इस प्रकार छात्र आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे लोगों में आपदा से निपटने का गुण भी सिखा सकते हैं।

प्रश्न 11.
आपदा प्रबंधन पर पश्चिम-बंगाल सरकार के कार्य का वर्णन करो।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की सरकार ने आपदा प्रबंधन पर काफी प्राथमिकता दी है। अतः आग, आकस्मिक सेवा और नागरिक सुरक्षा को एक मंत्रालय के अंतर्गत ला दिया है जिसमें आपदा प्रबंधन को त्वरित किया ज़ा सके। वर्तमान समय में यह आदरणीय मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी और आपदा प्रबंधन मंत्री जावेद अहमद खान के कुशल नेतृत्व में है।

पश्चिम बंगाल आपदा प्रबंधन द्वारा कार्य :- उड़ीसा में फेलिन (Phailin) तुफान के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 75000 Pcs तिरपाल, 40,000 Pakts बिस्कुट, 1000 किवंटल चुड़ा, 26.03 .2014 को सप्लाई किया गया।

हुगली जिला में 30.11 .2012 को 48 व्यक्तियों को सरकारी नौकरी और 91 परिवारों को तीन-तीन लाख की सहायता दी गयी। 30.11 .2012 के सरकारी आपदा प्रबंधन घोषणा के अनुसार 107 बहुक्षेत्रीय तूफान शरण (Multipurpose Cyclone Shelter) बनाये गये हैं।

09.05.2012 के सरकारी घोषणा के अनुसार आपदा पीड़ित 2 लाख 79 हजार परिवारों को पुन: घर निर्माण के लिए 211 करोड़ 12 लाख रूपये की घनराशि विभिन्न जिलों के लिए दी गयी है।

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प्रश्न 12.
प्राकृतिक आपदा एवं प्राकृतिक संकट का वर्णन सोदाहरण कीजिए?
उत्तर :
प्राकृतिक संकट और आपदाओं की धारणा (Concept of Hazards and Disasters) :प्राकृतिक आपदाओं तथा संकट का एक दूसरे के साथ निकट का संबंध है। अधिकतर ये एक दूसरे के पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किए जाते हैं, फिर भी इन दोनों में मूल अंतर को स्षष्ट करना आवश्यक है। प्राकृतिक, संकट, प्राकृतिक पर्यावरण में हाल के वे तत्व हैं जिनसे धन-जन या दोनों के नुकसान पहुँचाने की संभाव्यता होती है।

प्राकृतिक संकट की तुलना में प्राकृतिक आपदाएँ अपेक्षाकृत तीव्रता से घटती हैं तथा बड़े पैमान पर घन-जन की हानि तथा सामाजिक तंत्र एवं जीवन को छिन्न-भिन्न कर देता है और इनपर लोंगों को बहुत कम या कुछ भी नियंत्रण नहीं होता है। आपदा एक आशंका है तो संकट एक घटना। संकट दुखद घटना, त्रासदी या आपदा का परिणाम है।

दूसरे शब्दों में ऐसी दुर्घटनाएँ जो अचानक घटित हो और जिनसे अल्पकाल में ही किसी क्षेत्र के जन-जीवन और संपत्ति की व्यापक क्षति हो उसे प्राकृतिक आपदा कहते हैं। यदि यदि प्रभाव स्थायी हो जायें तो उसे प्राकृतिक संकट कहते हैं। प्रकृति में होने वाले विभिन्न परिवर्तन प्राकृतिक संकट और आपदा को आमंत्रित करते हैं और इनके सूचक भी हैं।

प्रश्न 13.
भरत के चार भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए? भूकम्प आते ही आप क्या करेंगे?
उत्तर :
भारत के चार भूकम्प प्रभावित क्षेत्र निम्नलिखित है :-

  1. जम्मू और काश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और पश्चिम-बगाल के तराई क्षेत्र एवं सम्पूर्ण उत्तरी पूर्वी भारत भूकम्प का सबसे बड़ा संभावित क्षेत्र है।
  2.  गुजरात का पूर्वोतर भाग, हिमालय की तराई, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, बिहार, महाराष्ट्र का पश्चिमी भाग और उड़ीसा का उत्तरी-पूर्वी कोना अति संवेदनशील क्षेत्र है।
  3. मध्य संवदेनशील क्षेत्र सतपुड़ा विघ्याचल के साथ लगी मध्यं पट्टी, मैदानी भाग का मध्य।
  4. निम्न संवेदनशील क्षेत्र :- संवेदनशील क्षेत्र से सटा भाग।

बचाव के उपाय :- भूकंप अन्य आपदाओं में सबसे भयकर और विनाशकारी होता है तथा यह एकाएक आता है। अत: इसके पूर्वानुमान एवं उसकी पूर्व सूचना संभव नहीं है। भूकम्प से सब कुछ तहस-नहस हो जाता है। बचाव का कार्य भी कठिन हो जाता है। भूकम्प आते ही लोगों को घर से निकल कर खाली स्थान पर आ जाना चाहिए। यदि घर से निकलना संभव न हो तो टेबुल, पलंग आदि के नीचे छिप जाना चाहिए।

प्रश्न 14.
पर्वतीय भागों में आनेवाली दो आपदाओं के नाम बताइये तथा किसी एक का वर्णन किजिए?
उत्तर :
पर्वतीय भागों में दो आपदाएं निम्नलिखित हैं :-
i) भू-स्खलन (Land Slide) ii) हिमघाव (Avalanche)
भू-स्खलन (Land Slide) :- अन्य आपदाओं की तुलना में भू-स्खलन एक छोटी आपदा है, पर इससे भी धन-जन की क्षति होती है। गुरूत्वाकर्षण के प्रभाव से चट्टाने तथा मिट्टी के अचानक ढलान के नीचे की ओर खिसकने की क्रिया को भू-स्खलन कहते हैं।
कारण :- यह भूकम्प तथा वर्षा के कारण चट्टानों के ढीला हो जाने से होता है। मनुष्य द्वारा रेलों, सड़कों, सुरंगों भवनों के निर्माण के लिए चट्टानों को तोड़ने और खाने खोदने से भूस्खलन होता है।
परिणाम :- भूस्खलन का प्रभाव स्थानीय और सीमित लोगों पर होता है। भूस्खलन से मार्ग अवरूद्ध हो जाता है। अत: दूरदूर के यातायात करने वाले लोग इससे प्रभावित होते हैं। इससे बस्तियों को क्षति पहुँचती है, नदियों का मार्ग बदल जाता है।
बचाव :- अधिक स्खलन के क्षेत्रों में सड़क, बाँध-निर्माण आदि के कार्य पर प्रतिबंध होना चाहिए। वनारोपण कार्य से भू-स्खलन की संभावना कम होती है।

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प्रश्न 15.
ब्लिजर्ड किन स्थानों पर आता है? इसका क्या प्रभाव होता है?
उत्तर :
ये हवाएँ उत्तरी तथा दक्षिणी धुवीय क्षेत्र, कनाडा, साइबेरिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में चलती हैं। अण्टार्कटिका के एडीलीलैण्ड में ये पवनें अधिक सक्रिय होती हैं, अत: इसे ‘ब्लिजाई घर’ कहते हैं।
प्रभाव (Effect) :- इन हवाओं के आगमन से तापमान अचानक हिमांक से नीचे गिर जाता है और सतह पर बर्फ की परत बिछ्छ जाती है और शीत लहरें चलने लगती हैं। इन पवनों से धन-जन की अपार क्षति होती है। सड़क मार्ग पर बर्फ की परत बिछ जाती है, अत: यातायात रूक जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 5 Question Answer – अपक्षय या विखण्डन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
किस प्रकार की जलवायु में रासयनिक अपक्षय अधिक होता है।
उत्तर :
आर्द जलवायु प्रदेश में।

प्रश्न 2.
रैगोलिया क्या है?
उत्तर :
मूल चट्टान के ऊपर बिछी हुई चट्टानी चूर्ण को रैगोलिया कहते है।

प्रश्न 3.
तालुस क्या है?
उत्तर :
भौतिक अपक्षय के कारण दानेदार विच्छेदन द्वारा उत्पत्र चूर्ण को तालुस कहा जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 4.
धरालत पर भू-समतल स्थापना का कार्य किन शक्तियों के द्वारा होता है ?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation) एवं अधिवृद्धिकरण (Aggradation)।

प्रश्न 5.
अनाच्छादन के अन्तर्गत कौन-कौन सी क्रियाएँ सम्मिलित हैं?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering) एवं अपरदन (Erosion)।

प्रश्न 6.
अनाच्छादन की किस क्रिया में चट्टान चूर्ण का परिवहन नहीं होता है ?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering)।

प्रश्न 7.
अनावृत्तिकरण की कौन-सी क्रिया स्थैतिक क्रिया है?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering) I

प्रश्न 8.
अपक्षय को प्रभावित करने वाले किसी एक कारक का नाम बताइये।
उत्तर :
सूर्यताप।

प्रश्न 9.
ऊँचे पर्वतीय भागों में अपक्षय का सबसे बड़ा साधन क्या है?
उत्तर :
पाला।

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प्रश्न 10.
ऑक्सीकरण की क्रिया में किस गैस का योगदान होता है?
उत्तर :
आक्सीजन।

प्रश्न 11.
विखणिडत शैल राशि शंकु का निर्माण कहाँ होता है ?
उत्तर :
पर्वतीय ढालों एवं गॉर्ज की सीधी ढ़ालों पर।

प्रश्न 12.
भू-स्खलन कहाँ अधिक होती है?
उत्तर :
पर्वतीय प्रदेशों में।

प्रश्न 13.
यांत्रिक अपक्षय किन क्षेत्रों में प्रभावकारी होता है ?
उत्तर :
शुष्क एवं मरुस्थल प्रदेशों में।

प्रश्न 14.
ताप बढ़ने पर आग्नेय शैल पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
आग्नेय शैल फैलते हैं।

प्रश्न 15.
किस प्रकार के चट्टान में जंग लगता है?
उत्तर :
लौहयुक्त। :

प्रश्न 16.
उष्णार्द्र प्रदेशों में किस प्रकार का अपक्षय अधिक प्रभावी होता है।
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 17.
ताप घटने पर आग्नेय शैल पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
आग्नेय शैल संकुचित होते हैं।

प्रश्न 18.
जिस क्रिया में चट्टानों की ऊपरी परतें प्याज के छिलके की तरह चट्टानों से अलग हो जाती है, उसे क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
अपशल्कन या अपपत्रण (Exfoliation)।

प्रश्न 19.
किस प्रकार के विघटन में सूर्यास्त के आधे घंटे के अंदर बन्दुक चलंने जैसी आवाज सुनाई पड़ती है?
उत्तर :
कणिमय विघटन (Granular Disintegration)।

प्रश्न 20.
उष्ण मरुस्थलों में किस प्रकार का अपक्षय देखने को मिलता है ?
उत्तर :
भौतिक या यांत्रिक अपक्षय!

प्रश्न 21.
किन चट्टानों में दानेदार विघटन होता है ?
उत्तर :
जो चट्टान विभिन्न खनिज एवं रंग वाले होते हैं।

प्रश्न 22.
लौहयुक्त चट्टानों में रासायनिक अपक्षय की कौन-सी विधि सक्रिय रहती है ?
उत्तर :
आक्सीकरण (Oxidation) 1

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प्रश्न 23.
चूना पत्थर वाले क्षेत्रों में रासायनिक अपक्षय की कौन-सी विधि प्रभावी रहती है?
उत्तर :
कार्बनीकरण (Carbonation)।

प्रश्न 24.
किस जलवायु प्रदेश में भौतिक अपक्षय प्राय: नगण्य रहती है?
उत्तर :
शीत जलवायु प्रदेशों में।

प्रश्न 25.
शुष्क प्रदेशों में किस प्रकार का अपक्षय होता है?
उत्तर :
यात्रिंक या भौतिक अपक्षय।

प्रश्न 26.
शीतोष्ण प्रदेशों में अपक्षय का सबसे बड़ा साधन क्या है?
उत्तर :
सूर्यताप, पाला।

प्रश्न 27.
जीव-जन्तुओं द्वारा किस प्रकार का अपक्षय होता है?
उत्तर :
जैविक।

प्रश्न 28.
चूने के चट्टानों वाले प्रदेशों में किस प्रकार का अपक्षय होता है।
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय।

प्रश्न 29.
भौतिक विखण्डन के प्रमुख कारक कौन हैं?
उत्तर :
तापक्रम परिवर्तन, तुषार या पाला एवं वर्षा।

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प्रश्न 30.
चट्टानों के बड़े-बड़े टुकड़ों में टूटने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
पिंड विन्छेदन (Block Disintegration)।

प्रश्न 31.
दानेदार विघटन (Granular Disintegration) किस भाग में अधिक होता है?
उत्तर :
मरुस्थल भाग से।

प्रश्न 32.
प्याज के छिलके की तरह चट्टानों के विखण्डन की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अपदलन (Exfoliation)।

प्रश्न 33.
उच्च अक्षांशों अथवा उच्च पर्वत-शिखरों पर चट्टानों के विखण्डन के प्रमुख कारक क्या है ?
उत्तर :
तुषार या पाला (Frost)।

प्रश्न 34.
रासायनिक अपक्षय की विभिन्न क्रियाओं के लिए कौन-सी भौतिक परिस्थिति आवश्यक है?
उत्तर :
उच्च तापव्रम एवं पर्याप्त नमी।

प्रश्न 35.
लोहें में जंग लगना रासायनिक विखण्डन की किस विधि द्वारा होती है?
उत्तर :
ऑक्सीकरण (Oxidation)।

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प्रश्न 36.
कार्बनीकरण (Carbonation) की क्रिया किस प्रदेश में अधिक प्रभावी होती है ?
उत्तर :
कार्स्ट प्रदेश में।

प्रश्न 37.
रासायनिक विधि द्वारा जल के चट्टानों के खंनिजों में अवशोषित हो जाने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
जलयोजन (Hydration)।

प्रश्न 38.
फेलस्पार (Felspar) धातु का काओलीन (Kaolion) में बदलना किस विधि द्वारा होता है ?
उत्तर :
जलयोजन (Hydration)।

प्रश्न 39.
कौन-सा खनिज पदार्थ पानी में घुलकर घोल के रूप में बह जाते हैं?
उत्तर :
नमक तथा जिप्सम।

प्रश्न 40.
सीलिका का जल में घुलकर अलग हो जाने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
डिसिलिकेशन (Desilication)।

प्रश्न 41.
जीव-जन्तुओं द्वारा होने वाले विखण्डन को क्या कहते हैं?
उत्तर :
जैविक विखण्डन (Biological Weathering)।

प्रश्न 42.
रासायनिक विखण्डन किस चट्टान में अधिक होता है ?
उत्तर :
आग्नेय चट्टान में।

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प्रश्न 43.
उष्ण एवं शुष्क मरुस्थलों में किसके द्वारा चट्टानों का विखण्डन अधिक होता है ?
उत्तर :
यांत्रिक विखण्डन (Mechanical Weathering)।

प्रश्न 44.
शीत प्रदेश में किस कारक द्वारा यांत्रिक विखण्डन प्रभावित होता है?
उत्तर :
पाला (Forst) द्वारा।

प्रश्न 45.
रासायनिक विखण्डन किस जलवायु प्रदेश में अंधिक होता है।
उत्तर :
उष्ण एवं नम जलवायु प्रदेश में।

प्रश्न 46.
वह बाह्य शक्तियाँ जो उच्च भागों को काट-छांटकर समतल या चौरस बनाती है क्या कहलाते हैं?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation)।

प्रश्न 47.
कटे-छटे पदार्थों के निम्न भागों में निक्षेपण से धरातल का समतल होने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अभिवृद्धिकरण (Aggradation)।

प्रश्न 48.
चट्टानों का विघटन (Disintegration) तथा अपघटन (Decomposition) किस क्रिया द्वारा होता है ?
उत्तर :
अपक्षय क्रिया द्वारा।

प्रश्न 49.
किन प्रदेशों में सूर्यास्त के आधे घंटे के अन्दर बन्दूक के चलने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं ?
उत्तर :
शुष्क मरुस्थलीय प्रदेशों में।

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प्रश्न 50.
9 घन सेंटीमीटर जल जब जमकर बर्फ बनता है तो वह कितना स्थान घेरता है?
उत्तर :
10 घन सेंटीमीटर।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
अपक्षय क्या है ?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering) : प्राकृतिक कारकों द्वारा अपने ही स्थान पर चट्टानों का भौतिक एवं रासायनिक विधि से जो विघटन और अपघटन होता है, उसे अपक्षय कहते हैं।

प्रश्न 2.
अपरदन क्या है ?
उत्तर :
अपरदन (Erosion) : अपरदन एक गतिक (Dynamic) प्रक्रिया है, जिसमें विघटित तथा विनियोजित चट्टानों का स्थानान्तरण होता है। अपरदन की क्रिया जिन कारको द्वारा सम्पन्न होती है, उसे अपरदन कर्ता कहते हैं। नदी, हिमनदी, पवन, सागरीय तरंगे, भूमिगत जल अदि प्रमुख अपरदन कर्ता हैं।

प्रश्न 3.
धरातल पर समतल स्थापना का कार्य किन रूपों में होता है ?
उत्तर :
बाह्य शक्तियाँ धरातल पर समतल स्थापना का कार्य करती हैं। इनके द्वारा समतल स्थापना का यह कार्य निम्नलिखित दो रूपों में होता है –
(a) निम्नीकरण (Degradation)
(b) अधिवृद्धिकरण (Aggradation)

प्रश्न 4.
वृहत् संचलन (Mass Wasting) क्या है ?
उत्तर :
विखण्डित चट्टान चूर्ण का ढाल के सहारे सामूहिक रूप से नीचे की ओर स्थानान्तरण वृहत् संचलन (Mass Wasting) कहलाता है।

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प्रश्न 5.
पिण्ड विघटन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
पिण्ड विघटन (Block Disintegration) : कभी-कभी पर्वतीय क्षेत्रों में दबाव एवं तापमान सम्बन्धी विभिन्नताओं के फलस्वरूप उत्पत्न दाब के कारण शैलें बड़े-बड़े टुकड़ों में विभक्त हो जाती हैं तो इसे पिण्ड विघटन (Block Disintegration) कहते हैं। इस प्रकार के आकार नाइजीरिया तथा मोजाम्बिक में द्वीपाभगिरि (Inselbergs) की भाँति गुम्बदाकार होते हैं, जो मूल शैल से क्रमश: निकलते हैं।

प्रश्न 6.
जैविक अपक्षय किसे कहते हैं?
उत्तर :
अपक्षय मुख्य रूप से वनस्पति, जीव-जन्तुओं तथा मानव द्वारा भी होता है। इसलिए इसे जैविक अपक्षय कहते हैं।

प्रश्न 7.
अनाच्छादन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अनाच्छादन (Denudation) : जब अपक्षय और अपरदन की क्रियायें एक साथ होती है तो उसे अनाच्छादन कहते हैं। अपक्षय द्वारा चट्टाने असंगठित हो जाती है एवं बाह्य बल उसे उस स्थान से स्थानान्तरित कर देते हैं। इस प्रकार धरातल का आवरण हट जाता है, इसे अनाच्छादन याद अनावृत्तिकरण (Denudation) कहा जाता है।

प्रश्न 8.
रासायनिक अपक्षय क्या है?
उत्तर :
जब चट्टानों में विखण्डन की क्रिया रासायनिक प्रतिक्रियाओं के द्वारा होती है तब उसे रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) कहते हैं।

प्रश्न 9.
भौतिक अपक्षय क्या है ?
उत्तर :
ताप, वर्षा, पाला आदि विभिन्न मौसमी तत्वों द्वारा यांत्रिक रूप से (स्वाभाविक रूप से) भू-पृष्ठ के टूटने-फूटने को यांत्रिक या भौतिक अपक्षय कहा जाता है।

प्रश्न 10.
आक्सीकरण (Oxidation) क्या है ?
उत्तर :
लौहयुक्त खनिज पदार्थो के साथ आक्सीजन के संयोग होने की रासायनिक क्रिया आक्सीकरण कहलाती है। जब आक्सीजन गैस से युक्त वर्षा का जल लौह-युक्त चट्टानों पर पहुँचता है तो वह चट्टानों के लोहा को आक्साइड में बदल देता है जिससे लोहे में जंग लग जाता है और चट्टाने जल कर नष्ट हो ज़ाती है।

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प्रश्न 11.
कार्बनीकरण (Carbonation) क्या है?
उत्तर :
चट्टानों में स्थित विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ वायुमण्डल के कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) से संयोग कर चट्टानों को तोड़ते हैं एवं नये खनिज का निर्माण करते हैं। इस क्रिया को कार्बनीकरण (Carbonation) कहते हैं। जैसे वर्षा का जल वायुमण्डल के कार्बन-डाई-आक्सइड से संयोग कर कार्बनिक अम्ल (Carbonic acid) H2 CO3 बनाता है। चूनायुक्त प्रदेशों में यह अम्ल चूना पत्थर को घुला देता है।

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प्रश्न 12.
भौतिक अपक्षय के कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
तापमान, वर्षा, तुषार या पाला, आर्द्रता, ओस, कुहरा आदि भौतिक या यांत्रिक अपक्षय के प्रमुख कारक हैं।

प्रश्न 13.
अपरदन के कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
बहता हुआ जल, नदी, पवन, हिमनद, भूमिगत जल तथा समुत्री लहरें आदि अपरदन के मुख्य कारक हैं।

प्रश्न 14.
रासायनिक अपक्षय के कारक कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
कार्बनीकरण, आवसीजन, जलयोजन, घोल, डी-सिलिकेशन आदि विरोध विधि द्वारा रासायनिक अपक्षय होता है।

प्रश्न 15.
जलयोजन क्रिया का वर्णन करो।
उत्तर :
जलयोजन (Hydration): जल चट्टान के खनिज पदार्थों में रासायनिक क्रिया करके उनके आयतन को बढ़ा देता है, जिससे खनिज पदार्थ विच्छेदित हो जाते हैं। इस क्रिया को जलयोजन (Hydration) कहते हैं।

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प्रश्न 16.
चट्टानों में दानेदार विघटन का क्या कारण है ?
उत्तर :
मरूस्थलों में जहाँ चट्टाने विभिन्न खनिजों एवं रंगों वाली होती हैं वहाँ एक ही चट्टान के विभिन्न भागों में फैलाव व संकुचन विभिन्न दरों से होता है, जिससे चट्टान महीन कणों में टूट जाती है। इसे दानेदार विघटन (Granular Disintegration) कहते हैं।

प्रश्न 17.
पेड़-पौधे किस प्रकार चट्टानों के विखण्डन के लिए उत्तरदायी हैं?
उत्तर :
पेड़-पौधे की जड़ें चट्टानों के सेंधों एवं दरारों में प्रवेश कर जाती है। वृक्षों के बढ़ने के साथ उनकी जड़ें भी मोटी हो जाती हैं और वे चट्टानों की दरारों पर दबाव डालकर उन्हें और चोड़ी कर देती है। इस प्रकार जड़ें चट्टानों को निर्बल बना देती है।

प्रश्न 18.
मिट्टी संरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
विभित्र उपायों से मिट्टी की समस्याओं को दूर करके उसे लम्बे समय तक उपजाऊ एवं कृषि के योग्य बनाये रखने को मिट्टी कां संरक्षण (Soil conservation) कहते हैं।

प्रश्न 19.
अपक्षय के कौन-कौन से प्रकार हैं?
उत्तर :
अपक्षय के प्रकार (Types of Weathering) : अपक्षय तीन प्रकार के होते हैं –

  • भौतिक या यांत्रिक अपक्षय (Physical or Mechanical Weathering)
  • रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering)
  • जैविक अपक्षय (Biological Weathering)

प्रश्न 20.
अपदलन या अपपत्रण या पल्लवीकरण या अपश्लकन की क्रिया किस प्रकार होती है?
उत्तर :
मरुस्थलों एवं अर्द्ध मरुस्थलों में, जहाँ चट्टानों की तापीय चालकता कम होती है, वहाँ चट्टानों की ऊपरी परतें अधिक गर्म होकर अधिक फैलती है। वहाँ चट्टानों का ऊपरी आवरण निचली परत से उसी प्रकार अलग हो जाता है जिस प्रकार प्याज से छिलका उतारा जाता है। इस क्रिया को अपदलन या अपपत्रण या पल्लवीकरण या अपश्लकन (Exfoliation) कहते हैं।

प्रश्न 21.
कणिकामय विघटन (Granular disintegration) किस प्रकार होता है?
उत्तर :
उष्ण मरूस्थलों में दैनिक तापान्तरों की अधिकता होती है। बड़े कणों वाली बौले, जो विभिन्न खनिजों तथा रंगो वाली होती हैं, तापान्तरों से अधिक प्रभावित होती हैं। एक ही शैल के भीतर संरचना की भिन्नता के कारण ताप प्राप्ति में अन्तर पैदा होता है। परिणामत: उनमें प्रकार एवं संकुचन की भिन्नता होती है। परिणामस्वरूप ये चट्टाने छोटे-छोटे कणों के रूप में विघटित हो जाती हैं जिसे कणिकामय विघटन कहते हैं।

प्रश्न 22.
रासायनिक अपक्षय किन प्रदेशों में अधिक सक्रिय रहता है तथा क्यों ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्धीय आर्द्रद्रदों में उच्च तापमान एवं अधिक आर्द्रता के कारण रासायनिक अपक्षय अधिक सक्रिय रहता है।

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प्रश्न 23.
भौतिक या यांत्रिक अपक्षय किन प्रदेशों में अधिक सक्रिय रहता है तथा क्यों ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्धीय मरूस्थलीय जलवायु प्रदेशों में उच्च दैनिक तापान्तर के कारण भौतिक अपक्षय सक्रिय रहता है।

प्रश्न 24.
मानसूनी प्रदेशों में किस ऋतु में रासायनिक अपक्षय और किस ऋतु में यांत्रिक अपक्षय प्रभावी रहता है?
उत्तर :
मानसूनी प्रदेशों में वर्षा ॠतु में उच्च तापमान एवं नमी के कारण रासायनिक अपक्षय अधिक सक्रिय रहता है तथा शुष्क ग्रीष्म ॠतु में यांत्रिक अपक्षय प्रभावी रहता है।

प्रश्न 25.
शीत जलवायु प्रदेशों में भौतिक अपक्षय प्रायः नगण्य रहता है ; परन्तु रासायनिक अपक्षय प्रभावी रहता है। क्यों ?
उत्तर :
शीत जलवायु प्रदेशों में भौतिक अपक्षय प्राय: नगण्य रहता है परन्तु यहाँ रासायनिक अपक्षय अधिक प्रभावी रहता है क्योंकि कम तापमान पर कार्बन-डाई-आक्साइड के अधिक घुलनशील होने के कारण यहाँ हिम के पिघलने से प्राप्त जल में कार्बोनिक अम्ल की अधिकता रहती है।

प्रश्न 26.
गोलाय अपक्षय (Spheroidal Weathering) क्या है ?
उत्तर :
कभी-कभी जलयोजन (Hydration) के कारण चट्टानों की ऊपरी परत फूलकर निचली परत से अलग हो जाती है। चट्टानों में इस तरह के विखण्डन को गोलाय अपक्षय (Spheroidal Weathering) कहते हैं।

प्रश्न 27.
अपक्षय और अपरदन में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
अपक्षय और अपरदन दोनों अलग-अलगप्रक्रियाएँ हैं। बिना अपक्षय के भी अपरदन हो सकता है। अपक्षय के पश्चात् अपरदन हो, यह आवश्यक नहीं है। अपरदन की प्रक्रिया में अपक्षय सहायक होता है, परन्तु यह अपरदन का अंग नहीं है।

प्रश्न 28.
भारत सरकार द्वारा मिट्टी के संरक्षण के लिए कहाँ पर भूमि संरक्षण अनुसंधान केन्द्र स्थापित की गई है।
उत्तर :
मिट्टी के संरक्षण के लिए भारत सरकार ने देहरादून, कोटा, आगरा तथा दूसरी ओर मरूस्थलीय भाग में जोधपुर, जयपुर एवं जैसलमेर में भूमि संरक्षण अनुसंधान केन्द्र स्थापित किये हैं।

प्रश्न 29.
भूमि सर्पण (Solifluction) एवं शैल राशि शंकु (Talus) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उच्च पर्वतीय भागों में भौतिक अपक्षय द्वारा होने वाले अपक्षय से प्राप्त चट्टान चूर्ण गुरूत्वाशक्ति के कारण जब निचले ढाल की ओर सरकने लगते हैं तो इसे भूमि सर्पण (Solifluction) कहते हैं तथा यही पदार्थ जब पर्वतों के निचले भाग में टीले के रूप में संचित हो जाते हैं तो उसे विखण्डित शैल राशि शंकु (Talus) कहते हैं।

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प्रश्न 30.
अपक्षय को स्थैतिक क्रिया क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
चट्टानों का अपने स्थान पर टूटना-फूटना या सड़ना-गलना अपक्षय कहा जाता है। चूंकि यह क्रिया अपने स्थान पर होती है, अत: इसे स्थैतिक क्रिया कहते हैं। इसमें टूटे-फूटे शिलाखण्ड अपने स्थान पर पड़े रहते हैं।

प्रश्न 31.
निक्षेपण (Deposition) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
भू-पृष्ठ पर क्रियाशील विभिन्न प्रकमों जैसे – बहते हुए जल, हवा, हिमनद, तथा समुद्री ज्वार द्वारा परिवहित किये गये पदार्थों को किसी विशेष स्थान पर जमा करने की क्रिया निक्षेपण (Deposition) कहलाती है।

प्रश्न 32.
जलगति क्रिया (Hydraulic action) क्या है ?
उत्तर :
बिना किसी अन्य पदार्थ की सहायता से मात्र जल द्वारा की जाने वाली अपरदन की क्रिया जलगति क्रिया (Hydraulic action) कहलाती है।

प्रश्न 33.
अपक्षय के कौन-कौन से रूप हैं ?
उत्तर :
चट्टानों का अपक्षय मुख्यत: दो रूपों में होता है :-
(i) विघटन (Disintegration)
(ii) अपघटन (Decomposition)

प्रश्न 34.
निम्नीकरण (Degradation) किसे कहते हैं?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation) : जब बाद्य शक्तियाँ धरातलीय उच्च भागों को काट-छाँट कर समतल बनाने का कार्य करती हैं तो इसे निम्नीकरण (Degradation) की क्रिया कहते हैं।

प्रश्न 35.
अधिवृद्धिकरण (Aggradation) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अधिवृद्धिकरण (Aggradation) : जब बाह्य शक्तियाँ कटे-छंटे पदार्थों का निक्षेपण निम्न भागों में करके समतल स्थापना का कार्य करती हैं तो यह क्रिया अधिवृद्धिकरण कहलाती है।

प्रश्न 36.
तलसंतुलन (Gradation) क्या है ?
उत्तर :
अपरदन एवं निक्षेपण के माध्यम से धरातल पर उच्चावच्च के मध्य अन्तर का कम होना तलसंतुलन (Gradation) कहलाता है।

प्रश्न 37.
अनाच्छादन की क्रिया किन विधियों द्वारा होता है ?
उत्तर :
अनाच्छादन के अन्तर्गत निम्नलिखित तीन क्रियाएँ सम्मिलित हैं –
(a) अपक्षय (Weathering)
(b) वृहद् संचलन (Mass Movement)
(c) अपरदन (Erosion)

प्रश्न 38.
वृहत्क्षरण से क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शिलाखण्डों का सरकना या वृहतक्षरण वह किय़ा है, जिससे गुरूत्व के सीधे प्रवाह से टूटी-फूटी चट्टानें नीचे की ओर खिसकती है या गिरती है।

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प्रश्न 39.
अनावृत्तिकरण के अन्तर्गत क्या क्रियाएँ होती हैं ?
उत्तर :
भू-पटल पर समतल स्थापन की सभी प्रकार की क्रियाएँ (निम्नीकरण और अभिवृद्धिकरण) इसके अन्तर्गत होती है।

प्रश्न 40.
अभिवृद्धिकरण के अन्तर्गत क्या कार्य होता है ?
उत्तर :
कटे-छटे पदार्थो के निम्न भागों में निक्षेपण से धरातल का समतल या चौरस करने का कार्य इसके अन्तर्गत होता है।

प्रश्न 41.
अपक्षय में कौन-कौन सी क्रियाएँ सम्पिलित है ?
उत्तर :
अपक्षय क्रियाओं में चट्टानों का विघटन (Disintegration) तथा अपघटन (Decomposition) की क्रियाएँ सम्मिलित हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
चट्टानों का क्षय कैसे होता है ?
उत्तर :
अपक्ष्य के विभिन्न साधनो द्वारा चट्टाने असंगठित हो जाती हैं एवं ढीली पड़ जाती हैं। अपक्ष्य के द्वारा चट्टाने अपने ही स्थान पर टूट-दूट कर अपखण्डित होती रहती हैं। इसके दूसरी ओर गतिशील शक्तियों (नदी, पवन, हिमानी, समुद्री लहरों) के घर्षण, अपघर्षण, भौतिक एवं रासायनिक कटाव जैसी शक्तियों का चट्टानों पर सामूहिक प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार संक्षेप में अनाच्छादन (अपक्ष्य + अपरदन) द्वारा चट्टानों का क्षय होता रहता है।

प्रश्न 2.
मरूस्थलीय भागों में सूर्यास्त के बाद पिस्तौल के छूटने की आवाज आती है क्यों ?
उत्तर :
मरूस्थलीय भागों में दिन में ऊँचे तापमान के कारण चट्टानें तेजी से फैलती हैं एवं रात के पिछले पहर में तापमान गिरने से यही चट्टानें पुन: तेजी से सिकुड़ने लगती हैं। इस प्रकार बार-बार फैलने और सिकुड़ने से चट्टाने अपने संधि के सहारे टूटने लगती हैं। ये चट्टानें कठोर होती हैं तथा जब अपने संधियों के सहारे टूटती हैं तो जोर की आवाज होती है। अत: मरूस्थल में सूर्यास्त के कुछ समय बाद चट्टानों के टूटने से उत्पन्न आवाजें बन्दूक छूटने जैसी लगती है।

प्रश्न 3.
रासायनिक अपक्षय के लिए गर्मी और आर्द्रता दोनों की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय में चट्टानों के खनिजों की संरचना पर जल में धुली विभिन्न गैसों का विशेष प्रभाव पड़ता है। इससे चट्टानों के आपस में जुड़ना ढीले पड़ जाते हैं। सामान्यतः उष्मा के प्रभाव से आर्द्रता पाने वाले चट्टानों के संरचना ढीलों पड़ जाते है, चट्टानें अपघटित हो जाती हैं। यही कारण है कि रासायनिक अपक्षय के लिए गर्मी और आर्द्रता दोनो की आवश्यकता पड़ती है।

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प्रश्न 4.
शुष्क जलवायु में अपक्षय की गति धीमी क्यों होती है ?
उत्तर :
शुष्क जलवायु में सबसे अधिक यांत्रिक अपक्षय के मूकारक तापान्तर, वर्षा, जल व वायु हैं। इन कारकों के सम्मिलित प्रभाव से सर्वप्रथम चट्टानें अपने संन्धियों के सहारे टृटती हैं। ये चट्टानें अत्यधिक कठोर होते हैं तथा चट्टान संधि पर कमजोर होने में लम्बा समय लगता है। अत: कठोर चट्टानों के विखण्डन में काफी समय लगता है। अतः शुष्क प्रदेशों में अपक्षय अपेक्षाकृत मंद गति से होता है।

प्रश्न 6.
उष्णार्द्र प्रदेशों में रासायनिक अपक्षय क्यों अधिक सक्रिय रहता है ?
उत्तर :
रासायनिक विखण्डन मुख्यतः नम प्रदेशों में होता है, इसका प्रधान कारण निम्नलिखित है :वायुमण्डल में बहुत से तत्व मिले हुए हैं। ऑक्सीजन एवं कार्बन-डाईऑक्साइड आदि गैसें वायुमण्डलं के निचले स्तर में पाये जाती हैं। विखण्डन की दृष्टि ये गैसें तब तक निष्किय रहती हैं जब तक ये शुष्क रहती हैं। चट्टानों का जल से सम्पर्क होते ही ये गैसे सक्रिय हो जाती हैं। ये घोलक के साधन बन जाते हैं और चट्टानों में रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। अत: विखण्डन आसान हो जाता है। इसी कारण रासायनिक विखण्डन नम प्रदेशों में अधिक होता है।

प्रश्न 7.
वृहद संचलन से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
वृहत् संचलन या वृहदक्षरण (Mass Wasting) :- जब भौतिक और रासायनिक अपक्षय द्वारा चट्टानें विघटन एवं वियोजन की क्रिया से असंगठित हो जाती हैं तब ये असंगठित चट्टाने गुरूत्व बल या जल के स्नेहन द्वारा नीचे की ओर आती हैं अथवा अपने स्थान से स्थानन्तरित होती हैं। जब यह क्रिया वृहद पैमाने पर होती है तो इसे सामूहिक क्षय (Mass Wasting) कहते हैं। इसके अंतर्गत भूमिसर्पण, भूमि स्थलन, पंकवाह, मलवा स्खलन आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं।

प्रश्न 8.
शीत जलवायु प्रदेशो में किस प्रकार का अपक्षय अधिक प्रभावी रहता है तथा क्यों? अथवा-शीत क्षेत्रों में भौतिक अपक्षय किस प्रकार होता है ?
उत्तर :
शीत जलवायु प्रदेशों में भौतिक या यांत्रिक अपक्षय अधिक प्रभावी रहता है, क्योंकि ऐसे भाग में रात में तापक्रम हिमांक से नीचे गिर जाता है। अतः दिन में चट्टानों की दरारों में भरा पानी रात में ठण्डक पाकर पाले (वर्फ) के रूप में जम जाता है। वर्फ के रूप में जमने पर पानी का आयत्न बढ़ जाता है जिससे वह फैलकर चट्टानों की दरारों पर दबाव डालता है जिससे दरारें चौड़ी हो जाती हैं। दिन के तापक्रम बढ़ने पर वर्फ पिघल जाता है और उसका आयतन घटने से दरारों में और पानी आ जाता है तथा रात्रि में पुन: जल जम जाता है। बार-बार यही क्रिया होने पर चट्टाने खण्ड-खण्ड होकर चूर्ण हो जाती हैं।

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प्रश्न 9.
तुषार क्रिया से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
ऊँचे अक्षांशों तथा हिमालय जैसे उच्य पर्वतीय प्रदेशों में पाला चट्टानों को तोड़ता-फोड़ता रहता है। दिन के समय चट्टानों की दरारों में जल भर जाता है और रात्रि को तापमान हिमांक से कम होने के कारण जल जम जाता है। जमने से उसका आयतन बढ़ जाता है। 1 घन सेंटीमीटर जल जब ज़ कर बर्फ में परिवर्तित होता है तब वह 10 घन सेंटीमीटर स्थान घेरता है। इससे चट्टानो पर लगभग 10 किलोग्राम प्रतिवर्ग सेंटीमीटर प्रतिबल पड़ता है। इन प्रचण्ड प्रतिबल के प्रभावाधीन चट्टानें टूट-फूट जाती हैं और दरारों का आकार बड़ा हो जाता है। अगले दिन अधिक जल इन दरारों में प्रवेश करता है और चट्टाने अधिक मात्रा में टूटती हैं। इस क्रिया को जमना-पिघलना (Freeze-Thaw) भी कहते हैं।

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प्रश्न 10.
अपरदन को गतिशील क्रिया क्यो कहते है ?
उत्तर :
अपरदन वह क्रिया है, जिसमें गतिशील बाह्म कारकों (नदी, हिमनद, पवन, भूमिगत जल तथा सागरीय लहर) द्वारा भौतिक एवं रासायनिक विधि से धरातल की चट्टाने खण्डित एवं गलित होकर स्थानान्तरित होती रहती हैं। इस प्रकार अपक्षय के विपरीत अपरदन एक गतिशील क्रिया है।

प्रश्न 11.
उष्ण क्षेत्रों में भौतिक अपक्षय क्यों होता है?
उत्तर :
उष्ण क्षेत्रों में ताप परिवर्तन के कारण चट्टानो का भौतिक अपक्षय अधिक होता है। इसका कारण यह है कि इन प्रदेशों में दिन के समय तापमान अधिक हो जाता है और रात्रि के समय नीचे गिर जाता है। अत: दिन में अधिक तापमान के कारण चट्टाने फैलती हैं और रात्रि के समय तापमान में कमी आ जाने से चट्टाने सिकुड़ जाती हैं। चट्टानों को इस प्रकार फैलने और सिकुड़ने से उनमें तनाव उत्पन्न होता है तथा दरारें पड़ जाती है। इस प्रकार चट्टानें बड़े-बड़े टुकड़ों में विभाजित हो जाती हैं।

प्रश्न 12.
कणिकामय विघटन (Granular disintegration) किस प्रकार होता है?
उत्तर :
उष्ण मरूस्थलों में दैनिक तापान्तरों की अधिकता होती है। बड़े कणों वाली बौले, जो विभिन्न खनिजों तथा रंगो वाली होती हैं, तापान्तरों से अधिक प्रभावित होती हैं। एक ही शैल के भीतर संरचना की भिन्नता के कारण ताप प्राप्ति में अन्तर पैदा होता है। परिणामत: उनमें प्रकार एवं संकुचन की भिन्नता होती है। परिणामस्वरूप ये चट्टानें छोटे-छोटे कणों के रूप में विघटित हो जाती हैं जिसे कणिकामय विघटन कहते हैं।

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प्रश्न 13.
जल अपघटन (Hydrolysis) क्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जल अपघटन (Hydrolysis) :- वर्षा का जल शैल पदार्थो से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, अनेक अम्लो तथा कार्बनिक पदार्थों को घोल लेता है तथा उस घोल से नये रासायनिक मिश्रण उत्पन्न करता है। जल की यह रासायनिक अभिक्रिया जल अपघटन (Hydrolysis) कहलाती है। इससे न केवल शैलों के खनिज भिगोकर तर किए जाते हैं अपितु उनमें रासायनिक परिवर्तन भी होता है। फलत: वह खनिज पदार्थ नये यौगिक तथा नये खनिज में बदल जाता है। इस प्रकार निर्मित नये खनिज दीर्घकाल तक स्थायी रहते हैं।

प्रश्न 14.
मनुष्य किस प्रकार अपक्षय में सहायक होता है?
उत्तर :
आज मनुष्य की आर्थिक क्रियाएं बहुत बढ़ गयी है। मनुष्य अपनी विभिन्न आर्थिक कियाओ द्वारा शैलो के अपक्षय में योग देता है। वनों के शोषण से वह वनस्पतिक अपक्षय में योग देता है। सुरंगें, खान आदि खोदकर शैलो के अपक्षय में योग देता है। इसके अतिरिक्त वह अपने आवास के लिए, गमनागमन के लिए मार्ग बनाने, खनिज संपत्ति प्राप्त करने के लिए तथा जंगलों को काटकर कृषि योग्य नई भूमि प्राप्त करने के लिए चट्टानों को तोड़ता-हटाता है।

प्रश्न 15.
पौधे किस प्रकार अपक्षय में सहायक होते हैं ? अथवा पेड़-पौधे अपक्षय के कारक होते हैं, कैसे?
उत्तर :
पौधे, घास तथा वृक्षों की जड़े भूमि में गहराई तक प्रविष्ट होती रहती हैं, नीचे की ओर फैलती जड़ें शैलों की दरारो को विस्तृत करती है जिससे शैलो में तनाव तथा विघटन होता है।

प्रश्न 16.
जीव-जन्तु अपक्षय में किस प्रकार सहायक होते है ?
उत्तर :
सभी प्रकार के जीव-जन्तु अपक्षय में सहायक होते हैं। अधिकांश जीव जैसे लोमड़ी, गीदड़, बिच्छु, केंचुए, चूहे, दीमक आदि अपनी सुरक्षा के लिए गुफाएँ तथा बिल बनाते है। जिससे भूमि का असंगठित मलवा बाहर निकाल दिया जाता और उसका परिवहन हो जाता है। होम्स के मुताबिक प्रति एकड़ भूमि में डेढ लाख केचुएँ एक वर्ष में 10-15 टन चट्टानों को उर्वर रूप में तैयार कर उपरी परत पर लाते हैं।

प्रश्न 17.
किलेटन (Chelatan) क्या है ?
उत्तर :
वनस्पतियो की जड़ों में जीवाणु पाये जाते है जो शैल खनिजों को वियोजित करके शैलो को कमजोर बनाते हैं। वनस्पतियों और जीवों के अवशेष जब सड़-गल जाते हैं तो उनके भीतर से कार्बन-डाई-ऑक्साइड तथा जैविक अम्ल पृथक हो जाते हैं। जल के साथ मिलकर ये सक्रिय घोलक का कार्य करते हैं तथा खनिज शैलों को वियोजित करते हैं। इस क्रिया को किलेटन (Chelatan) कहते हैं।

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प्रश्न 18.
वेदिकाओं (Terrace) और सोपानों (Steps) का निर्माण किस प्रकार होता है ?
उत्तर :
हिमानी पंक प्रवाह शीत जलवायु वाले प्रदेशों में सामान्य रूप से घटित होता है। यहाँ स्थायी तुषार भूमि के क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु के आरम्भ होने पर ऊपर का हिम पिघलने लगता है परन्तु नीचे की भूमि हिमाच्छादित अवस्था में ही रहती है जिससे जल अधिक गहराई तक नहीं पहुँच पाता है। ऊपरी संतृप्त मिट्टी ढाल के सहारे अति मंद गति से संचालित होती रहती है। इस प्रकार के प्रवाहों द्वारा किए गए निक्षेपो से वेदिकाओं (Terrace) और सोपनों (Steps) का निर्माण होता है।

प्रश्न 19.
आन्तरिक शक्ति और बाहम शक्ति में कभी अन्तर है ?
उत्तर :

आन्तरिक शक्ति बाह्य शक्ति
i. ये शक्तियाँ भू-गर्भ में नि:शुद्ध परिवर्तन करने में लगी रहती है। i. ये शक्तियाँ धरातल के ऊपरी आवरण को परावर्तित करने का कार्य करती है।
ii. धरातल को असमतल बनाना इनका कार्य है। ii. ये शक्तियाँ मन्द गति से काम करती है।
iii. ये शक्तियाँ बहुत तेज गति से काम करती है। iii. धरातल को समतल बनाना इनका कार्य है।
iv. ये शक्तियाँ निर्माणकारी हैं। इनसे सील, द्वीप, एवं पर्वतों का निर्माण होता है। iv. ये शक्तियाँ विनाशकारी हैं। ये बनी हुई आकृति का विनाश कर देती है।
v. इन शक्तियों में ज्वालामुखी एवं भूकम्प मुख्य हैं v. इन शक्तियों में हिमनद, वायु, नदी आदि प्रमुख हैं।

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विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
यांत्रिक अपक्षय या भौतिक अपक्षय क्या है ? इसके विभिन्न प्रक्रियायों का वर्णन करो।
उत्तर :
भौतिक या यांत्रिक अपक्षय :- सूर्यताप, तुषार तथा वायु द्वारा चट्टानो में विघटन होने की क्रिया को यान्त्रिक अपक्षय या भौतिक अपक्षय कहा जाता है। यांत्रिक अपक्षय में यद्यपि ताप का परिवर्तन सर्वाधिक प्रभावशाली कारक है फिर भी इसमें अर्न्तगत दाब मूक्ति, जल का जमना-पिघलना तथा गुरुत्व का भी सहयोग रहता है। शुष्क, अर्द्धशुष्क, तीतोष्ण तथा शीत कटिबन्धीय भागों में एवं उच्च पर्वतों के ऊपरी भाग पर यांत्रिक अपक्षय की क्रिया सक्रिय होती है। इस प्रक्रिया में विघटन द्वारा चट्टाने टुकड़ेटुकड़े हो जाती हैं। परन्तु इनमें कोई रासायनिक परिवर्तन नहीं होता है। इसके निम्नलिखित प्रकार होते हैं :-

तापमान के प्रभाव से विघटन :- दिन में अधिक गर्मी पड़ती है अत: चट्टाने गर्म होकर आयतन में फैलती हैं। रात में अधिक ठण्ड पड़ने के कारण चट्टाने सिकुड़ने लगती हैं। इस प्रकार तापमान के दैनिक परिवर्तन एवं तापान्तर के कारण चट्टानों में हमेशा तनाव एवं संकुचन की क्रिया होती रहती है जिससे उनमें दरारें पड़ जाती हैं। ये दरारें क्रमश: बढ़ती हैं और अन्त में चट्टानें विखण्डित होकर टूट जाती हैं। ऐसा मरुस्थलों में अधिक होता हैं क्योंकि इन प्रदेशों में रात-दिन के तापमान में बहुत अन्तर पाया जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में दाब एवं तापमान सम्बन्धी विभिन्नताओं के फलस्वरूप उत्पन्न दाब के कारण चट्टाने बड़े-बड़े टुकड़ों में विभक्त हो जाती हैं तो जिसे पिण्ड विघटन (Block disintegration) कहते हैं।

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इस प्रकार के आकार नाइजीरिया तथा मोजाम्बिक में द्वीपाभगिरि (Inselberg) की तरह गुम्बदाकार होते हैं जो मूल चट्टान से क्रमश: निकलते हैं। इस विधि को अपपत्रण (Exfoliation) भी कहते हैं। अधिक समय तक फैलने एवं सिकुड़ने की क्रिया से चट्टानों के खनिज अलग-अलग विभक्त हो जाते हैं, जिसे कणदार विघटन (Granular Disintegration) कहते हैं। यह क्रिया स्वच्छ आकाश, उच्च तापमान तथा अधिक तापान्तर वाले प्रदेशों में अधिक होती है। कहीं-कही चट्टानें ट्टकर तीक्ष्ण एवं कोणदार टुकड़ों में विघटित हो जाती हैं। इस क्रिया को भंजन या विखण्डन (Shattering) कहते हैं। टूटी-फूटी चट्टानों का ढेर गुरुत्वाकर्षण के कारण पहाड़ी पादों के निकट एकत्र हो जाता है। इसे शैल-मलबा (Scree या Talus) कहा जाता है। राजस्थान के मरुस्थल में यह क्रिया दिखाई देती है।

पाला या तुषार द्वारा विघटन :- रात के समय अधिक ठण्ड पड़ने के कारण चट्टानों में मौजूद जल जम जाता है और इसका आयतन बढ़ जाता है। इससे चट्टानों पर दबाव पड़ने लगता है और चट्टाने चौड़ी होती जाती है। अन्त में चट्टाने टट जाती हैं। यह क्रिया ऊँचे प्रदेशों एवं पर्वतीय भागों में अधिक तेजी से होती है। पर्वतीय ढालों के नीचे भागों में टूटी हुई शैलों का ढेर संपात के रूप में इकट्ठा हो जाता है और उसका कुछ अंश नदियों या हिमनदियों द्वारा प्रवाहित हो जाता है। इस विधि द्वारा चट्टानें बड़े-बड़े टुकड़ों मे विभक्त हो जाती हैं। जब इन खनिज शैल-पिण्डों से विस्तृत भू-भाग आच्छादित हो जाता है तो इसको खण्डाश्मपुश (Belsenmer) कहते हैं।

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पौधों एवं प्राणियों द्वारा यान्त्रिक एवं रासायनिक क्रिया :- शैलों के सूक्ष्म छिद्रों एवं दरारों में पेड़-पौधे उग आते हैं। जब इनकी जड़ें मोटी हो जाती हैं तो दरारें फैलकर चौड़ी हो जाती हैं। फलतः शैलों के टुकड़े अलग हो जाते हैं। बहुत से पेड़ों की जड़ों से निकले रस से शैलों के खनिजो पर रासायनिक प्रभाव पड़ता है और इससे इनके विघटन में सहायता मिलती है।

दीमक एवं केंचुए बिल बनाकर या कुतरकर शैल को नरम बना देते हैं। मिट्टी में मिले हुए छोटे जीवों एवं वनस्पतियों के अवशेष कीटाणुओं द्वारा नष्ट किये जाते हैं, जिससे अवशेष कार्बन-डाइ-ऑक्साइड तथा विभिन्न प्रकार के अम्लों का निर्माण होता है। इनसे जल की घोलन शक्ति में वृद्धि होती है।

दबाव में कमी के कारण विघटन :- आग्नेय या कायान्तरित चट्टानें अन्य चट्टानों के नीचे दबी रहती हैं। इनके ऊपर की चट्टानों का अपक्षय हो जाने से दबाव कम हो जाता है। इससे उनमें दरारें पड़ जाती हैं और उनका विघटन शुरू हो जाता है। इस प्रकार का विघटन कैलीफोर्निया में येसोमाइट की घाटी में होता है।

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प्रश्न 2.
रासायनिक अपक्षय क्या है ? इसकी प्रक्रियायों का वर्णन करो।
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) :- रसायनिक क्रियाओं के द्वारा जब चट्टानों में विखण्डन की क्रिया होती है तो उसे रसायनिक अपक्षय कहते हैं। वायुमडल में निचले स्तर की लगभग सभी गैसे जैसे कार्बन-डाईआक्साइड (CO2), आक्सीजन (O2), जल-वाष्प (Water Vapour), नाइट्रोजन (N2) आदि वर्षा जल से क्रिया करके रसायनिक अपक्षय को बढ़ावा देते हैं। रसायनिक अपक्षय का कार्य पृथ्वी सतह के ऊपर तथा नीचे, दोनों क्षेत्रों में होता रहता है। चूना पत्थर पर रसायनिक अपक्षय अधिक होता है। उष्ण एवं आर्द्र प्रदेशों में यह क्रिया सर्वाधिक

होती है। रासायनिक क्रिया की पाँच विधियाँ होती हैं :-
ऑक्सीकरण (Oxidation) :- इस क्रिया में वायु, जल में मिश्रित ऑक्सीजन शैलों के खनिजों के साथ मिल जाती है और इनको ढीला कर देती है। ऑक्सीकरण का स्पष्ट प्रभाव लौहमय शैलों पर दिखाई पड़ता है। लोहा फैरिक अवस्था में लाल-भूरे रंग का दिखाई पड़ता है। वर्षा ऋतु में लोहे पर लगा जंग या मोरचा (Iron Oxide) लोहे और ऑक्सीजन के मिलने से बनता है। यह क्रिया आर्द्र प्रदेशों में व्यापक रूप में होती है।

4 FeO + 3 H2O + O2 = 2 Fe2O3 + 3 H2O.

कार्बनीकरण (Carbonation) :- वर्षा तथा बहते हुए जल में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड मिलकर कार्बोनिक अम्ल का निर्माण करती है। जिसके द्वारा शैलों के कुछ खानिज कार्बनेट में बदल जाते है। इस क्रिया को कार्बनीकरण कहते है। घुलनशील होने के कारण कार्बोनेट जल में घुल जाते हैं। यह क्रिया आर्द्र जलवायु में विशेष रूप से सक्रिय होती है।

H2O + CO2 = H2CO3
CaCO3 + H2O + CO2 = Ca (HCO3)2

कार्बोनिक अम्ल चूना मिश्रित शैलों को बड़ी सुविधा से घुला डालता है। वर्षा के जल से चूने का पत्थर नहीं घुलता है। अत: भवनों के निर्माण में इसका उपयोग अधिक होता है। भूमिगत जल मे कार्बोनिक अम्ल मिला रहता है। अतः चूने के पत्थरों में अधिक परिवर्तन ला देता है। इस क्रिया से ग्रेनाइट तथा फेल्सपार की शिलायें मृत्तिका (Clay) तथा बालू के रूप में बदल जाती हैं।

जल-योजन (Hydration) :- जब भू-पृष्ठ की शैलों के खनिजों द्वारा पानी सोख लिया जाता है तो खनिजों का आयतन बढ़ जाता है और शैलों के अन्तर्गत दाब-वृद्धि होने से विघटन की क्रिया निष्पादित होने लगती है। शैलों की परतें उभर जाती हैं। जल-योजन का प्रभाव फेल्सपार खनिज पर सर्वाधिक पड़ता है।

ग्रेनाइट शैलों में अपपत्रण या अपशल्कन (Exfoliation) का कारण यह है कि जल-योजन से ग्रेनाइट में मिश्रित फेल्सपार धातु फैल जाती है और घुलित तहें यान्त्रिक विधि से अलग हो जाती हैं। जल-योजन से फेल्सपार धातु केओलिन (Kaoline) मिट्टी में परिवर्तित हो जाती है। जबलपुर की पहाड़ियों में केओलिन भी फेल्सपार के निबन्धन सेनिर्मित होता है। जल एवं कैल्सियम सल्फेट के मिश्रण से जिप्सम की रचना होती है।

घोलन (Solution) :- साधारण जल में बहुत कम शैले घुलती है। घुलनशील शैलों में शैल लवण तथा जिप्सम मुख्य हैं। पानी घुलित कार्बन-डाइ-ऑक्साइड गैस से कार्बोनिक अम्ल बनता है, जिससे चूने का पत्थर धीरे-धीरे घुलता रहता है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप अवशैल तथा उच्छेल का निर्माण होता है। यह कार्य पाकिस्तान स्थित नमक की पहाड़ियों पर देखा जाता है।

डिसिलिकेशन (Desilication) :- ग्रेनाइट आदि चट्टानों में सिलिका अधिक मात्रा में पायी जाती है। रासायनिक बिधि द्वारा शैलों से सिलिका का जल में घुलकर अलग हो जाने को ही डिसिलिकेशन कहा जाता है। इससे चट्टानें ढीली पड़ जाती हैं और उनका विघटन आसान हो जाता है।

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प्रश्न 3.
जैविक अपक्षय क्या है ? यह कैसे होता है ?
उत्तर :
जैविक अपक्षय (Biological Weathering) :- धरातल पर जैविक अपक्षय वनस्पति, जीव-जन्तुओं तथा मानव द्वारा निष्पादित होता है। किन्तु ये सभी कारक जहाँ अपक्षय क्रिया सम्पन्न करते हैं, वहीं इनके द्वारा रचनात्मक कार्य भी होता है।

वानस्पतिक अपक्षय (Weathering due to Vegetation) :- वनस्पति द्वारा अपक्षय भौतिक तथा रासायनिक दोनों प्रकार से किया जाता है। सामान्यतः चट्टानों की दरारें या संधियों में जब वनस्पतियों की जड़ें प्रवेश करती हैं तथा वहाँ मोटी होने लगती हैं तो संधियाँ या दरारें बढ़ने लगती हैं और चट्टानें ढीली पड़कर विघटित होने लगती हैं। कुछ वनस्पतियों की जड़ें चट्टानो से विशेष प्रकार के तत्त्वों को सोखती रहती हैं जिससे रासायनिक अपक्षय होता है।

बैक्टीरिया युक्त जल भी चट्टानों के खनिजों तथा मिट्टी पर तीव्र क्रिया कर जीव (Organisms) तथा जीवाणु (Bacteria) इत्यादि नष्ट करते हैं। इन्हीं के द्वारा कुछ अम्लों की उत्पत्ति होती है, जैसे जैविक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल तथा अमोनिया इत्यादि। वनस्पति के द्वारा मिट्टी में हुई क्रियायें ह्यूमस (Humus) की उत्पत्ति करती है। वनस्पतियाँ अपक्षय के अलावा धरातलीय मिट्टी को अपनी जड़ों द्वारा बाँधे रखती हैं, जिससे अपक्षय के कारक अधिक प्रभावी नहीं हो पाते।

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जीव-जन्तु कृत अपक्षय (Animals Weathering) :- सभी पकार के जीव-जन्तु अपक्षय में सहायक होते हैं। अधिकांश जीव जैसे लोमड़ी, गीदड़, बिच्छू, केंचुए, चूहे, दीमक आदि अपनी सुरक्षा के लिये गुफाएँ तथा बिल बनाते हैं। जिससे भूमि का बहुत-सा असंगठित मलवा बाहर निकाल दिया जाता है और उसका परिवहन हो जाता है। होम्स के मुताबिक प्रति एकड़ भूमि में डेढ़ लाख केंचुए एक वर्ष में 10-15 टन चट्टानों को ऊर्वर रूप में तैयार कर ऊपरी परत पर लाते हैं।

मानव कृत अपक्षय (Human Weathering) :- मानव अपने प्रारंभिक समय से ही अपक्षय का कारक रहा है। वर्तमान काल में यह अपक्षय का एक बड़ा कारक बन गया है। आज यह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पहाड़ों को मैदान बना रहा है। सड़कें, रेलमार्ग और विशाल भवनों का निर्माण करता है, खनिजों का शोषण करता है, चट्टानो को तोड़ता, खोदता और उसे ध्वस करता है। इससे चट्टानों का भौतिक अपक्षय के साथ रासायनिक अपक्षय भी होता है।

प्रश्न 4.
अपरदन क्या है ? इसके विभिन्न कारकों एवं क्रियाओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
अपरदन (Erosion) :- जब अपक्षय द्वारा प्राप्त प्रवाह शैल गतिशील शक्तियों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान को ले जाई जाती है तो इस क्रिया को अपरदन या परिवहन कहते हैं। परिवहन किये जाते समय प्रवाह शैल भू-पृष्ठ को खरोंचता एवं घिसता है। इस क्रिया को अपरदन कहते हैं। अपरदन के निम्नलिखित कार्य होते हैं :-

  1. प्रवाह शैल का उठाना (Picking)
  2. प्रवाह शैल का अपनयन (Transportation)
  3. प्रवाह शैल द्वारा भू-पृष्ठ का खरोंचना (Corrasion)
  4. प्रवाह शैल का अन्यत्र निक्षेपण (Deposition)।

मुख्य कारक :- पवन, प्रवाहित जल (नदियाँ), भूमिगत जल, हिमानी (Glacier) तथा सागरीय लहरे अपरदन के मुख्य कारक हैं जो भिन्न-भिन्न प्रकार तथा विधियों से अपरदन कार्य निष्पादन करते हैं। इनमें प्रवाहित जल का कार्य अन्य कारकों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होता है। अपरदन के कारकों का प्रभाव उनके आयतन (Volume), वेग (Velocity), तथा उनके प्रवाह शैलों के भार (Load), पर निर्भर करता है। नदी में उसकी अवस्थानुसार आयतन भित्नभिन्न होता है। पर्वतीय मार्ग में उसका वेग अधिक होता है। अतः अपरदन की क्षमता भी अधिक होती है।

अपरदन के विभिन्न साधनो द्वारा परिवहन का कार्य भी निम्नलिखित तीन क्रमों में पूरा किया जाता है:-

1. प्रवाह शैल को घुलाकर (In Solution), जैसे जल अपने में नमक एवं चूने को घुलाकर प्रवाहित होता है।
2. भू-पृष्ठ पर एकत्रित शैल के मलबे को अपने साथ तैराते हुए (In Suspension) जैसे – नदी एवं वायु धरातल से बारीक कणों को अपने साथ उठाकर अन्यत्र ले जाते हैं।
3. अपेक्षाकृत बड़े आकार के शिलाखण्डों को जो न घुल सकते हैं और न उड़कर या तैरकर जा सकते है, उन्हें धरातल पर घसीट कर (Intraction) ले जाया जाता है। इस क्रिया से धरातल पर अत्यधिक अपरदन होता है। पर्वतीय नदियों तथा हिमनदियों में शिलाखण्डों की घर्षण शक्ति बहुत अधिक होती है।

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प्रश्न 5.
संक्षेप में अपरदन के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करो।
उत्तर :
अपरदन के प्रकार (Types of Erosion) :- कार्य के स्वभाव की दृष्टि से अपरदन निम्न प्रकार के होते हैं :-
अपघर्षण (Abrasion or Corrasion) :- अपरदन के कारकों द्वारा प्रवाह शैल उठाकर ले जाते समय धरातल को सैण्डपेपर की तरह घर्षित किया जाता है। अतः यह यंत्र की तरह काम करता है। इसी प्रक्रिया को अपघर्षण कहते हैं।
सत्रिघर्षण (Attrition) :- धरातल के असंगठित पदार्थ, जो अपरदन के विभिन्न कारकों से परिवहित होते है, वे आपस में टरकाकर चूर-चूर होते रहते हैं। बड़े-बड़े शिलाखण्ड छोटी-छोटी गिट्टियों में तथा बाद में रेत के कणो में बदल जाते हैं। यह प्रक्रिया सत्रिघर्षण कहलाती है।
संक्षारण (Corrasion) :- यह जल की एक रासायनिक क्रिया है, जिससे शैलों के खनिज घुलाकर बहा दिये जाते हैं।
अपवाहन (Deflation) :- यह क्रिया पवनों द्वारा शुष्क एवं मरुस्थलीय भागों में सम्पन्न की जाती है जिसमें भौतिक अपक्षय द्वारा विखण्डित पदार्थों को वायु अपने साथ उड़ाती रहती है।
निक्षेपण (Deposition) :- अपरदन के साधनों की परिवहन क्षमता हमेशा एक सी नहीं रहती है। परिवहन शक्ति के क्षीण होने पर साथ ढोकर लाये गये प्रवाह शैल को घरातल पर यत्र-तत्र छोड़ने को निक्षेपण कहते हैं। निक्षेपण द्वारा भू-पृष्ठ पर विभिन्न प्रकार की नवीन भू-आकृतियों का निर्माण होता है।

प्रश्न 6.
अपक्षय के क्या प्रभाव हैं ?
उत्तर :
अपक्षय अथवा विखण्डन के प्रभाव निम्नलिखित हैं :-
लाभदायक प्रभाव (Beneficial or Useful effect) :-
खनिज-पदार्थों की प्राप्ति :- अपक्षय के कारण चट्टानों से भिन्न-भिन्न तरह के खनिज-पदार्थ एक ही स्थान पर इकट्ठा हो जाते हैं। अत: उनको प्राप्त करने में आसानी हो जाती है। जिप्सम, खड़िया, चूना आदि इसी विधि द्वारा प्राप्त होते हैं।
इीलों का निर्माण :- पहाड़ी भागों में अपक्षय के कारण दूटे हुए बड़े-बड़े चट्टान फिसलकर नदियों के मार्ग में आ जाते हैं जो नदियों के प्रवाह को रोक कर झीलों का निर्माण करते हैं।
समतल भूमि का निर्माण :- हिमनदी, नदियाँ एवं हवायें अपक्षय द्वारा चूर्ण किये गये पदार्थों कोनिम्न भागों मेंनिक्षेपित करती हैं। इससे समतल भूमि की रचना होती है।
मिट्टी की रचना :- अपक्षय के करण चट्टानों में टूट-फूट होती है और मिट्टी का निर्माण होता है, जिसमे कृषि की जाती है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effect) :-

  1. हिम पिणडों का फिसलना :- उंडे प्रदेशों में चट्टानों का विघटन होता है। इसके साथ ही बड़े-बड़े हिम पिण्ड फिसलकर समुद्र में चले जाते हैं। इससे बड़े-बड़े जहाजों के चलने में बाधा होती है।
  2. मरुभूमि का निर्माण :- अपक्षय के कारण बड़ी-बड़ी चट्टानें टूट-फूट कर बालू के कण बन जाती हैं। ये बालू के कण चारों ओर फैल कर मरुभूमि का निर्माण करते हैं।
  3. मिट्टी के कटाव का होना :- अपक्षय के कारण मिट्टी ढोली पड़ जाती है। नदी, वायु आदि इसे आसानी से काटते हैं। अतः भूमि अनुपजाऊ हो जाती है।
  4. मानव-बस्तियों पर प्रकोप :- अपक्षय के कारण पर्वतीय भागों में विशाल शैलो के टुकड़े लुढ़कते हुए चले आते हैं और मानव-बस्ती तथा निवासियों को क्षतिग्रस्त करते है।

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प्रश्न 7.
मिट्टी के निर्माण के बारे में तुम क्या जानते हो ? मिट्टी निर्माण के विभिन्न प्रक्रियाओं का वर्णन करो।
उत्तर :
मिट्टीका निर्माण एक जटिल पक्रिया है जिसमें प्राकृतिक वातावरण का प्रत्येक तत्व अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। अपक्षय एवं अपरदन, भू-पृष्ठ की चट्टानों को चूर्ण बना देते हैं। इस चूर्ण में लम्बे समय तक वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं के सड़े-गले अवशेष मिश्रित होकर चट्टान-चूर्ण को उप्जाऊ मिट्टी का रूप ग्रदान करते हैं। यही तत्व पेड़-पौधों को जीवन प्रदान करते हैं।
मिट्टी का निर्माण (Formation of Soil) :- चट्टानों के अपक्षय (weathering) से मिट्टी बनती है। चट्टानों का अपक्षय भौतिक (physical), रासायनिक (chemical) तथा जैविक (biological) शक्तियों (forces) द्वारा होता है।

भौतिक शक्तियाँ (Physical forces) :- ये निम्नलिखित हैं –

  • पानी
  • बर्फ
  • हिमनद
  • वायु
  • तापमान।

पानी (Water) :- वर्षा का पानी अपनी शक्ति के अनुसार चट्टानों को तोड़ता है। पहाड़ी ढालो पर बहते समय वर्षा का पानी अपनें साथ अनेक छोटे-छोटे ककड़-पत्थर, रेत, सिल्ट इत्यादि लिए चलता है। ये रगड़ खाकर सूक्ष्म कणों में टूट-दूटकर मिट्टी में बदलते रहते हैं। सिंधु-गंगा का मैदान इसी प्रकार बना है।

बर्फ (lce) :- दो चट्टानों के बीच उपस्थित वर्षा तथा सोतों का जल शीतकाल में जमकर बर्फ बन जाता है। बर्फ का आयतन (volume) जल के आयतन से अधिक होने के कारण बहुत दबाव (pressure) उत्पन्न होता है, जिससे चट्टानें छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं।

हिमनद (Glacier) :- पहाड़ों पर बहते समय हिमनद में उपस्थित चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े दबाव तथा घर्षण से सूक्ष्म कणों में बदलते रहते हैं। ये चूर-चूर होकर मिट्टी का निर्माण करते हैं।

वायु (Wind) :- वायु के वेग से पत्थर के टुकड़े आपस में रगड़ खाकर मिट्टी के कणों में परिवर्तित हो जाते हैं।

तापमान (Temperature) :- चट्टानों में उपस्थित विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थों के कारण चट्टाने ताप तथा उंडक में असमान रूप से फैलती तथा सिकुड़ती है, जिससे चट्टानें टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाती हैं और फिर मिट्टी का निर्माप करती हैं।

रासायनिक शक्तियाँ (Chemical forces) :- ये निम्नलिखित हैं –

  • ऑक्सीकरण
  • कार्बनीकरण
  • जलयोजन।

ऑक्सीकरण (Oxidation) एवं लघुकरण (Reduction) :- चट्टानों में उपस्थित लोहा तथा अन्य खनिज पदार्थों के साथ ऑक्सीजन (O2) एवं जल (H2O) की रासायनिक क्रिया होती है। आयरन सल्फाइड पर O2 तथा H2O की रासायनिक क्रिया से आयरन ऑक्साइड तथा गधक का अम्ल (H2SO4) बनता है। इस अम्ल के प्रभाव से चट्टाने कमजोर होकर टूट जाती हैं। इसके अलावा, जब किसी रासायनिक पदार्थ से ऑक्सीजन बाहर निकल जाता है तब चट्टाने कमजोर होकर दूट जाती हैं।

कार्बनीकरण (Carbonation) :- कार्बन-डाइ-ऑक्साइड द्वारा उत्पन्न कार्बनिक अम्ल पानी के साथ मिलकर पानी की घुलनशीलता बढ़ा देता है जिसके ग्रभाव से चट्टानों में उपस्थित घुलनशील पदार्थ घुल जाते हैं एवं चट्टाने टूट जाती हैं।

जलयोजन (Hydration) :- कभी-कभी पानी चट्टानों में उपस्थित दूसरे पदार्थों के साथ मिलकर एक मिश्रण बनाता है, जिसके प्रभाव से चट्टान ढीली तथा कमजोर हो जाती है एव टूटकर मिट्टी में बदल जाती हैं।

जैविक शक्तियाँ (Biological forces) :- जब चट्टानों पर स्थित बड़े-बड़े वृक्ष की विशाल जड़ें भोजन की खोज में बढ़ने लगती हैं तो इससे चट्टानें टूटने-फूटने लगती हैं। इस क्रिया से चट्टानों के छोटे टुकड़े और भी छोटे टुकड़ों में बदल जाते हैं। किसी-किसी पौधे की जड़ो से अम्ल निकलता है, जो छोटी चट्टानों को तोड़ता है। इसके अलावा, विभिन्न प्रकार के प्राणी भी चट्टानों के टूटने में मदद करते हैं तथा मिट्टी के बड़े कणों को पीसकर बारीक कणों में बदल देते हैं।

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प्रश्न 8.
मिट्टी अपरदन के प्रमुख कारण क्या हैं और इसके नियंत्रण का उपाय क्या है ?
उत्तर :
मिट्टी अपरदन के कारण (Causes of soil erosion) :-
1. तेज गति से वर्षा का होना :- तेज वर्षा के कारण भूमि की ऊपरी परत कटकर जल में मिलकर बह जाती है। अत: मिट्टी का कटान तेज वर्षा के कारण होता है।
2. वनों का विनाश :- आजकल वनों का विनाश तेजी से हो रहा है। वनों के नष्ट होने के कारण मिट्टी का कटाव तेजी से होने लगता है।
3. भूमि का अधिक ढालू होना :- मिट्टी का कटाव ढालू जमीन पर अधिक होता है। यर्वतीय भागो में जमीन के ढालू होने से मिट्टी का कटाव अति तीव्व गति से होता है।
4. पशु चराई :- अधिक पशुचारण के कारण मिट्टी के कण बिखर जाते हैं। पशुओं के खुर से मिट्टी के कण ढीले पड़ जाते हैं। इस तरह मिट्टी का कटाव अधिक होता है।
5. कृषि का स्थानान्तरण होना :- इस प्रकार की कृषि से वनो का विनाश तेज गति से होता है। अतः मिट्टी का कटाव भी बहुस तेजी से होने लगता है।
6. भूमि के ढाल के अनुरूप खेतों की जुताई :- खेतों की जुताई अनियन्त्रित रूप से होती है। जमीन की ढ़ाल के अनुरूप जुताई होने के कारण मिट्टी के कटाव में वृद्धि हो जाती है।
7. बाढ़ आना :- भयकर वर्षा के कारण नदियों में बाढ़ आ ज़ाती है। पानी तेज गति से बहता है। उपज़ाऊ मिट्टी कटने लगती है, मिट्टी का अधिक कटाव बढ़ के कारण होता है।
8. आँधी के कारण :- हवा में अपार शक्ति होती है। आँधी के कारण धरती के ऊपर की मुलायम मिट्टी उड़ जाती है। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भू-कटाव का कारण वायु ही है।
9. खेतों को खाली छोड़ना :- वर्षा के समय किसान खेत जोतकर खाली,छोड़ देते हैं। अत: हवा एवं वर्षा का जल मिट्टी के कणों को बहा ले जाते हैं। अतः मिट्टी का कटान तेजी से होता है।
10. खेतों की मेढ़ों को तोड़ डालना :- किसान खेतों की मेढ़ो को व्यर्थ समझकर तोड़ डालते है। मेढ़ों से पानी की गति रुकती है तथा भूमि का कटाव नहीं हो पाता है। किसान मेढों को तोड़ कर अनाज बो देते हैं। मेढ़ न होने से पानी की गति रुकती नहीं और भूमि का कटाव होता रहता है।

मिट्टी का कटाव रोकने के उपाय :-

1. चारागाहों का प्रबन्ध :- पशुओं को चरने के लिये अलग से चारागाहों की व्यवस्था जखूरी है। ग्राम की खाली भूमि को चारागाहों मे बदला जा सकता है। उसमें उन्नत किस्म की घास बोयी जा सकती. है।
2. चराई पर प्रतिबन्ध :- पशुओं की अनियमित चराई पर प्रतिबन्ध लगाना जरूरी है। नहरों के किनारों पर पशुओं के चरने पर प्रतिबन्ध होना चाहिए। पशुओं के खुरों से उखड़नेवाली मिट्टी का तेजी से अपरदन हो जाता है। अतः इस पर ध्यान देना जरूरी है।
3. वनों के कटान पर प्रतिबन्ध :- मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिर्य वनों का कटान अंधाधुन्ध करता जा रहा है। वनों के कटाव से मिट्टी ढीली हो जाती है। वर्षा से बढ़ें आती हैं। भू-स्खुलन होता है। अतः वनों के कटाव पर रोक होनी चाहिए।
4. वृक्षारोपण :- खाली स्थानों पर वृक्ष लगाना चाहिए। इसीलिये प्रतिवर्ष वन-महोत्सव मनाया जाता है। वनों को काटने के पहले नए वनों को लगाना चाहिए जिससे मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे।
5. बालू के बन्धकों को उगाना :- पौधों की जड़ों में मिट्टी को जकड़े रहने की क्षमता होती है। सैकरम मुंजा, सैकरम स्पाण्टेनियम, साइनोडम डैक्टाइलोन, इण्डिगोफेरा, कार्डिफोलिया आदि ऐसे पौधे हैं जिनमें मिट्टी को जकड़े रहने की क्षमता होती है। ऐसे वृक्षों को नहरों के किनारे पर लगाना चाहिए।
6. बाँध का निर्माण :- नदियों पर बाँध बनाकर बाढ़ के प्रकोप को रोका जा सकता है। बाद़ रुकने पर मिट्टी का कटाव भी रुक जाता है।
7. खेतों में हरे चारे वाली फसल उगाना :- वर्षा-कतु में खेतों को खुला छोड़ने की अपेक्षा सनई, ढेंचा, मूंग आदि हरी खाद वाली फसले बो देने से भूमि का कटाव रुक जायेगा।
8. नाली एवं गड्ठों को समतल बनाना :- अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल बहने से गहरी नालियाँ तथा गड्दे बन जाते हैं। उन्हें मिट्टी से भरकर सपाट कर देने से मिट्टी का कटाव नहीं होगा ऐऐसे क्षेत्रों में शीघ्र घने होने वाले वृक्षों को लगाना श्रेखस्कर होता है।
9. जल के निकास की उचित व्यवस्था :- खेतों में समोच्च बाँघ होना चाहिए। जल के निकास के लिये पक्की नाली बनाना चाहिए। ढालू भूमि पर सीढ़ीदार खेत बनाना ठीक होता है।
10. ढाल के विपरीत जुताई :- भूमि में जुताई ढाल के विपरीत करने से मिट्टी का कटाव रुक जाता है।
11. स्थानान्तरित खेती को रोकना एवं स्थायी कृषि का विकास करना।
12. भूमि की उपजाऊ शक्ति सदैव एक-सी बनाये रखने के लिये खाद का प्रयोग करना।
13. मरुभूमियों एवं अन्य भूमियों पर कतारों में वृक्षारोपण करना।
14. फसल-चक्र अपनाना, हर समय भूमि पर कोई न कोई फसल खड़ी करना।
15. काटने योग्य वृक्षों को समूल नष्ट न करना।
16. परती भूमि पर कृषि करना और भूमि को परती न छोड़ना।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 9.
मृदा संरक्षण क्या है ? स्वाधीनता के पश्चात मृदा संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये गये कदम क्या हैं ?
उत्तर :
मृदा संरक्षण वह क्रिया है जिसके अन्तर्गत विविध प्रकार से मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने का प्रयास किया जाता है। मिट्टी को अपने स्थान पर स्थिर रखना, उर्वरता में अभिवृद्धि करना, उर्वर तत्वों की अपेक्षित मात्रा तथा अनुपात को बनाये रखना और दीर्घकाल तक उत्पादन प्राप्त करते रहने के लिये इसकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना आदि मृदा संरक्षण के प्रमुख उद्देश्य होते हैं।
विभिन्न उपायों से मिट्टी की समस्याओं को दूर करके उसे लम्बे समय तक उपजाऊ एवं कृषि के योग्य बनाये रखने को मिट्टी का संरक्षण कहते हैं।

मिट्टी के संरक्षण के लिये सरकार द्वारा निम्नलिखित कार्य किये गये हैं :-
खाद के कारखानों की स्थापना :- मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिये भारत में सिन्दरी, गोरखपुर आदि स्थानों में खाद के कारखाने खोले गये हैं।
प्रदर्शन योजनाओं को चालू करना :- अनेक स्थानों पर प्रदर्शन योजनाएँ चालू की गई है जिससे लोगों को मिट्टी संरक्षण की विधियों की जानकारी हो सके।
नये-नये वृक्षों को लगाना :- बाढ़ के नियन्त्रण के लिये तथा मिट्टी के कटान पर रोक लगाने के लिये वृक्षारोपण किया जा रहा है। इससे मरुस्थल के प्रसार पर भी रोक लगेगी।
कर्मचारियों को प्रशिक्षण :- मिट्टी के कटान को रोकने के लिये कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकारी कर्मचारी देहरादून में प्रशिक्षण पा रहे हैं।
अनेक अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना :- मिट्टी के कटान की जाँच के लिये अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना की गई है। काली मिद्टी के लिये बेलारी, शुष्क मिट्टी के लिये जोधपुर, क्षारीय मिट्टी के लिये कोटा तथा पहाड़ी भूमि के लिये ऊटकमण्ड, चण्डीगढ़ तथा देहरादून में अनुसंधान केन्द्र स्थापित किये गये हैं।

योजनाओं के अन्तर्गत किये गये भूमि संरक्षण कार्य :- हमारे देश में विभित्र पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भूमि संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। प्रथम योजना में भूमि संरक्षण कार्य के लिये 1.6 करोड़ रु० व्यय किये गये, 10 क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र खोले गये। राजस्थान में सन् 1952 ई० में जोधपुर में एक मरुस्थल वृक्षारोपण तथा अनुसंधान केन्द्र खोला गया। लगभग 6 हजार हेक्टेयर भूमि पर सर्वोच्च बाँध बाँधे गये। 4000 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोफण किया गया तथा 1.89 लाख हेक्टेयर भूमि के संरक्षण के कार्यक्रम लागू किये गये।

द्वितीय योजना काल में इस कार्यक्रम पर 18 करोड़ रु० खर्च किये गये। महाराष्ट्र में लगभग 50 हजार हेंक्टेयर भूमि पर मेड़बन्दी की गई, 300 लाख हेक्टेयर भूमि का संरक्षण की दृष्टि से सर्वेक्षण किया गया। राजस्थान में जोधपुर के निकट ही चारागाहों के विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत 500 हेक्टयर भूमि में 55 बाड़े स्थापित करने का कार्य आरम्भ किया गया, जो सभी तैयार हो गये।

तृतीय योजना काल में 77 करोड़ रु० खर्च किया गया जिसमें 300 लाख हेक्टेयर भूमि पर मेड़बन्दी, 5.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर शुष्क खेती, नदी घाटियों में बने बाँधों को अधिक स्थायी बनाने, बाढ़ों को रोकने, भूमि कटाव पर नियन्त्रण, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने, औद्योगिक लकड़ी की माँग पूरा करने, भाखड़ा-नांगल, दामोदर, हीराकुण्ड तथा अन्य नदी-घाटी योजनाओं के कार्य, नमकीन ऊसर भूमि का पुनरुद्धार, मरुस्थलीय क्षेत्रों में चारागाह निर्माण एवं वृक्षारोपण क्रिया आदि कार्य किये गये।

सन् 1966 – 1969 ई० की तीन एकवर्षीय योजनाओं में भूमि संरक्षण कार्यक्रम पर 87 करोड़ रु० व्यय किये गये। चतुर्थ योजना में 161 करोड़ की लागत से 71 हेक्टेयर भूमि का सुधार किया गया।

पंचम योजना काल में 215 करोड़ रुपयों का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें बाढ़ क्षेत्रों से जल निकास, मध्यम वर्षा क्षेत्रों मे जल संचय, मरुस्थल विस्तार रोकने, नदी-घाटी क्षेत्रों के संग्रहण क्षेत्रों में भूमि संरक्षण आदि कार्य किये गये छठी योजना में इस मद पर 450 करोड़ रुपये रखे गये जिसमें भूमि के कटाव वाले क्षेत्रों में नालियों को भरने, कंटूरबंध बनाने, मेड़बन्दी करने, बाढ़ों को रोकने और भूमि क्षरण कार्यो में लगे कर्मियों को प्रशिक्षण देने के कार्य किए गए। अब तक (1984 – 1985 तक) 29.4 मि० हेक्टेयर भूमि का सुधार किया गया।

सातवीं योजना में 740.39 करोड़ रुपये व्यय किये गये, जिसके अन्तर्गत अतिरिक्त भूमि के कटाव को रोकने मिट्टी की उत्पादकता में वृद्धि करने के कार्यक्रम कार्यान्वित किये गये।

आठवीं योजना में 1600 करोड़ रुपये भूमि संरक्षण कार्यक्रम में खर्च करने का लक्ष्य रखा गया जिसके अन्तर्गत पश्चिमी भारत एवं दक्षिणी पठार के शुष्क एवं अर्द्धशुष्क प्रदेशों में भूमि संरक्षण हेतु क्षेत्रवार वनों की पट्टियाँ लगाने, सामाजिक वानिकी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने, समोच्च बन्द तथा मेड़बन्दी, वन क्षेत्र विस्तार, मरुभूमि, विकास कार्यक्रम एवं शुष्क क्षेत्र विकास एवं बाढ़ संरक्षण जैसे कार्य किये गये।

नवीं योजना में भी भूमि संरक्षण के कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। तीव्र गति से वनों का प्रतिशत बढ़ाना, नदी-घाटी क्षेत्रो का विकास सामाजिक वानिकी को आगे बढ़ाना जैसे अनेकानेक कार्य किये जा रहे हैं।

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प्रश्न 10.
मिट्टी अपरदन से क्या समझते हो ? विभिन्न प्रकार के मिट्टी अपरदन का उल्लेख करो।
उत्तर :
भूमि को ऊपरी परत या आवरण के नष्ट होने को ही भूमि अपरदन कहते हैं।
प्राकृतिक शक्तियाँ जब किसी प्रदेश की भूमि के ऊपरी आवरण को नष्ट कर देती हैं तो उसे भूमि का कटाव भूमि अपरदन या भूमि अवक्रमण कहा जाता है। भूमि की ऊपरी उपजाऊ परत के नष्ट हो जाने से उस पर किसी भी प्रकार की वनस्पतियों का उगना दुष्कर हो जाता है, जिससे पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों का जीवन संकट में पड़ जाता है।

Types of soil erosion :- भूमि अपरदन निम्नलिखित प्रकार से होता है :-

परत अपरदन :- मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत जब वायु या जल द्वारा बहाकर या उड़ाकर ले जाई जाती है, तब इसके नीचे की अनुपजाऊ परत ऊपर निकल आती है। इस मिट्टी में फसले नहीं उग पाती हैं। जल के द्वारा अपरदन दो रूपों में होता है :-
(a) नालियों के रूप में (Gully erosion)
(b) स्तर के रूप में।

भारत में जल के द्वारा अपरदन हिमालय की तलहटी के सभी क्षेत्रों, असम, बंगाल, बिहार, झारखण्ड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हो रहा है। ढालों पर जल वर्षा से क्षरण होता है तथा तटीय भागों में लहरों के द्वारा भूमि क्षरण होता है, जैसे – केरल में। किसान इस मिट्टी को बंजर भूमि के रूप में प्राय: छोड़ देते हैं।

अवनालिका अपरदन :- जब जल नग्न भूमि पर तेजी से बहता है तो उसकी विभिन्न धारायें मिट्टी को कुछ गहराई तक काट डालती हैं जिससे जमीन पर छोटी-छोटी नालियाँ-सी बन जाती है और चारों ओर नालियों एवं धाराओं के हो जाने से एक जालीदार संरचना निर्मित हो जाती हैं, इसे ही अवनालिका अपरदन कहते हैं। यह ढालदार भूमि पर अधिक प्रभावी होता है। चम्बल क्षेत्र के बीहड़ अवनालिका अपरदन के उदाहरण हैं।

पवन द्वारा भूमि अपरदन :- रेगिस्तानी भागों में पवन द्वारा मिट्टी को उड़ा लिया ज्ञाता है जिससे उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो जाती है। पवन द्वारा अपरदन मुख्य रूप से राजस्थान में होता है।

हिम द्वारा भूमि अपरदन :- हिमानी क्षेत्रों में हिम-घर्षण से हिमानियाँ मलबा बहाकर घाटियों में जमा कर देती है जिससे भूमि क्षरण होता है। यह क्रिया हिमालय क्षेत्रों में ही मुख्यत: होती है।

रिल अपरदन :- जब परत अपरदन अधिक समय तक निर्बाध रूप से चलता रहता है, तो कटाव के फलस्वरूप भूमि की सतह पर अंगुलियों के समान, पतली-पतली नालियाँ-सी बन जाती हैं, जिनमें जल बहता रहता है। इस प्रकार के अपरदन को रिल अपरदन कहते हैं।

तटवर्ती अपरदन :- तीव गति से बहते जल का बहाव अपनी सतह की ऊँचाई तक नदी के किनारे की मिट्टी को काटता रहता है, जिससे ऊपर की मिट्टी ढहती है। तीव्र गति से बहने वाली नदियों के किनारे कगारों की मिट्टी ढहती रहती है। इस प्रकार के अपरदन को तटवर्ती अपरदन कहते हैं।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 3 19वीं सदी का यूरोप राजतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी विचारधारा में संघर्ष

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19वीं सदी का यूरोप राजतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी विचारधारा में संघर्ष Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
मैटरनिख किस देश का निवासी था –
(a) अस्ट्रिया
(b) आस्ट्रेलिया
(c) फ्रांस
(d) इंग्लैण्ड
उत्तर :
(a) अस्ट्रिया

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प्रश्न 2.
बिस्मार्क का जन्म कब हुआ था –
(a) 1815 ई०
(b) 1820 ईं
(c) 1810 ई०
(d) 1825 ई०
उत्तर :
(a) 1815 ई०

प्रश्न 3.
वियना सम्मेलन का आयोजन कब किया गया था?
(a) 1815 ई०
(b) 1817 ई०
(c) 1830 ई०
(d) 1848 ई०
उत्तर :
(a) 1815 ई०

प्रश्न 4.
वियना सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी?
(a) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लॉयड जार्ज
(b) ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख
(c) फ्रांसीसी राजनीतिज्ञ तिलेराँ
(d) इटली के प्रधानमंत्री और लैण्डो
उत्तर :
(b) ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख

प्रश्न 5.
वियना सम्मेलन आयोजित हुआ था –
(a) 1789 ई० में
(b) 1804 ई० में
(c) 1812 ई० में
(d) 1815 ई० में
उत्तर :
(d) 1815 ई० में।

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प्रश्न 6.
मेटरनिख किस व्यवस्था को मानता था ?
(a) राष्ट्रवादी
(b) उदारवाद
(c) राजतंत्रवाद
(d) पुरातनवाद
उत्तर :
(d) पुरातनवाद

प्रश्न 7.
जौल्वरिन संघ की स्थापना कब हुई –
(a) 1834 ई०
(b) 1830 ई०
(c) 1840 ई०
(d) 1832 ई०
उत्तर :
(a) 1834 ई०

प्रश्न 8.
चार्ल्स दशम् राजगद्दी पर कब बैठा –
(a) 1824
(b) 1860
(c) 1850
(d) 1840
उत्तर :
(a) 1824

प्रश्न 9.
मेटरनिख का युग कहा जाता है –
(a) 1815-1820
(b) 1815-1830
(c) 1815-1848
(d) 1815-1870
उत्तर :
(c) 1815-1848

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प्रश्न 10.
लुई फिलिप गद्दी पर कब बैठा?
(a) 1815 ई०
(b) 1830 ई०
(c) 1848 ई०
(d) 1890 ई०
उत्तर :
(b) 1830 ई०

प्रश्न 11.
सेडोवा का युद्ध कब हुआ था?
(a) 1848 ई०
(b) 1864 ई०
(c) 1866 ई०
(d) 1870 ई०
उत्तर :
(c) 1866 ई०

प्रश्न 12.
यूरोपीय कन्सर्ट किसने बुलाया था ?
(a) रूस
(b) फ्रांस
(c) बिंटेन
(d) प्रशा
उत्तर :
(d) प्रशा

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प्रश्न 13.
जुलाई कान्ति किस देश में पहले हुई।
(a) रूस
(b) ब्रिटेन
(c) फ्रांस
(d) इटली
उत्तर :
(c) फ्रांस

प्रश्न 14.
विएना कांग्रेस द्वारा हालैण्ड में किस देश को मिलाया गया –
(a) फ्रांस
(b) बेल्जियम
(c) इंग्लैण्ड
(d) प्रशा
उत्तर :
(b) बेल्जियम

प्रश्न 15.
विएना कांग्रेस में इंग्लैण्ड का प्रतिनिधि था –
(a) कैसलर
(b) कैनिंग
(c) डिजरेली
(d) ग्लैडस्टन
उत्तर :
(a) कैसलर

प्रश्न 16.
सेडान का युद्ध किसके बीच हुआ था?
(a) ऑंस्ट्रिया-हगरी
(b) फ्रांस-प्रशिया
(c) जर्मनी-इटली
(d) फ्रांस-डेनमार्क
उत्तर :
(b) फ्रांस-प्रशिया

प्रश्न 17.
क्रीमिया के युद्ध का अंत किस संधि के बाद हुआ था ?
(a) वियना की संधि
(b) पेरिस की संधि
(c) वेस्टफेलिया की संधि
(d) वार्साय की संधि
उत्तर :
(b) पेरिस की संधि

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प्रश्न 18.
लिपजिंग का युद्ध कब हुआ था ?
(a) 1805 ई०
(b) 18107 ई०
(c) 1813 ई०
(d) 1815 ई०
उत्तर :
(c) 1813 ई०

प्रश्न 19.
इंग्लैण्ड में दास प्रथा का अंत कब हुआ ?
(a) 1805 ई०
(b) 1807 ई०
(c) 1810 ई०
(d) 1814 ई०
उत्तर :
(b) 1807 ई०

प्रश्न 20.
वियना सम्मेलन में फ्रांस के प्रतिनिधि थे –
(a) नेपोलियन
(b) लुई अठारहवाँ
(c) तालिरँ
(d) चार्ल्स दशम
उत्तर :
(c) तालिरँ।

प्रश्न 21.
मेटरनिख का जन्म हुआ था –
(a) 15 मई 1773 ई०
(b) 16 मार्च 1770
(c) 15 फरवरी 1772 ई०
(d) 14 जुलाई 1750 ई०
उत्तर :
(a) 15 मई 17733 ई०

प्रश्न 22.
मैटरनिख को आस्ट्रिया का प्रथानमंत्री (चांसलर) कब नियुक्त किया गया –
(a) 1809 ई०
(b) 1810 ई०
(c) 1815 ई०
(d) 1816 ई०
उत्तर :
(a) 1809 ई०

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प्रश्न 23.
चार्ल्स दशम् ने सेण्ट क्लाउड का अध्यादेश कब जारी किया –
(a) 1830 ई०
(b) 1835 ई०
(c) 1833 ई०
(d) 1840 ई०
उत्तर :
(a) 1830 ई०

प्रश्न 24.
चार्ल्स दशम की मृत्यु कब हुई –
(a) 1836 ई०
(b) 1843 ई0
(c) 1846 ई。
(d) 1845 ई०
उत्तर :
(a) 1836 ई०

प्रश्न 25.
विस्मार्क के समय फ्रांस का सम्राट कौन था ?
(a) लुई XVI
(b) लुई XVIII
(c) नेपोलियन
(d) नेपोलियन III
उत्तर :
(d) नेपोलियन III

प्रश्न 26.
रूस की क्रान्ति कब हुई थी?
(a) 1815 ई०
(b) 1830 ई०
(c) 1848 ई०
(d) 1917 ई。
उत्तर :
(d) 1917 ई०

प्रश्न 27.
मेटरनिक कहाँ का चांसलर था?
(a) जर्मनी
(b) इटली
(c) ऑंस्ट्रिया
(d) फ्रांस
उत्तर :
(c) ऑस्ट्रियां

प्रश्न 28.
नेपिल्स के राजा का क्या नाम था –
(a) फडिनेन्ड
(b) मेजिनी
(c) रूसो
(d) वाल्टेयर
उत्तर :
(a) फर्डिनेन्ड

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प्रश्न 29.
परमा, मोडेना और पोर के राज्य में विद्रोह कब हुए –
(a) 1830 ई०
(b) 1835 ई०
(c) 1833 ई०
(d) 1840 ई0
उत्तर :
(a) 1830 ई०

प्रश्न 30.
मेटरनिख व्यवस्था का पतन किस क्रांति के द्वारा हुआ ?
(a) 1815 ई०की क्रान्ति
(b) 1830 ई० की क्रांति
(c) 1848 ई० की क्रान्ति
(d) 1789 ई० की क्रान्ति
उत्तर :
(c) 1848 ई० की क्रान्ति

प्रश्न 31.
किसने ‘रक्त एवं लौह नीति’ ग्रहण की थी ?
(a) मेजिनी
(b) विस्मार्क
(c) कैमूर
(d) गैरीबाल्डी
उत्तर :
(b) विस्मार्क।

प्रश्न 32.
यंग इटली की स्थापना कब हुई –
(a) 1831 ई०
(b) 1840 ई०
(c) 1829 ई०
(d) 1836 ई०
उत्तर :
(a) 1831 ई०

प्रश्न 33.
यंग इटली का संस्थापक कौन था ?
(a) काबूर
(b) गैरीवाल्डी
(c) मेजिनी.
(d) विक्टर इमानुएल
उत्तर :
(c) मेजिनी

प्रश्न 34.
विलियम प्रथम प्रशा की गद्दी पर कब बैठा –
(a) 1861 ई०
(b) 1864 ई०
(c) 1863 ई०
(c) 1865 ई。
उत्तर :
(a) 1861 ई०

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प्रश्न 35.
तुर्की साप्राज्य की स्थापना किसने की –
(a) सलजुक तुर्को ने
(b) बिस्मार्क ने
(c) मेजिनी ने
(d) नेपोलियन ने
उत्तर :
(a) सलजुक तुर्को ने

प्रश्न 36.
मेटरनिक ने कब ऑस्ट्रिया छोड़ दिया?
(a) 1815 ई०
(b) 1830 ई०
(c) 1848 ई०
(d) 1871 ई०
उत्तर :
(b) 1830 ई०

प्रश्न 37.
‘यंग इटली’ संस्था की स्थापना किसने की?
(a) मेजिनी
(b) गैरीबाल्डी
(c) कैबूर
(d) विक्टर एमेनुअल
उत्तर :
(a) मेजिनी

प्रश्न 38.
यदि राजा भाग गया है, तो कोई बात नहीं। फ्रेंच राष्ट्र तो विद्यमान है। किस देश के नागरिक ने यह बात कही थी?
(a) फ्रांस
(b) जर्मनी
(c) इटली
(d) रूस
उत्तर :
(a) फ्रांस

प्रश्न 39.
जुलाई 1830 कान्ति के बाद फ्रांस की गद्दी पर कौन राजा बैठा?
(a) लुई IXV
(b) लुई X V
(c) लुई XVI
(d) लुई XVIII
उत्तर :
(d) लुई XVIII

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प्रश्न 40.
गौरवपूर्ण क्रान्ति कहाँ हुई थी?
(a) फ्रांस
(b) बिटेन
(c) जर्मनी
(d) रूस
उत्तर :
(b) बिंटेन

प्रश्न 41.
शक्ति-संगठन के कुल कितने अधिवेशन हुए थे –
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5
उत्तर :
(d) 5

प्रश्न 42.
कार्ल्सवाड डिक्री घोषित हुआ था –
(a) 1815 ई० में
(b) 1819 ई० में
(c) 1824 ई० में
(d) 1830 ई० में
उत्तर :
(b) 1819 ई० में।

प्रश्न 43.
ट्रेपो की बैठक हुई थी –
(a) 1809 ई० में
(b) 1815 ई० में
(c) 1820 ई० में
(d) 1830 ई० में
उत्तर :
(c) 1820 ई० में।

प्रश्न 44.
जुलाई आर्डिनेन्स में दमनमूलक नीतियों की संख्या थी –
(a) 4
(b) 5
(c) 6
(d) 7
उत्तर :
(a) 4

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प्रश्न 45.
कौन-सी क्रांति ‘तीन गौरवमय दिन की क्रांति’ नाम से जानी जाती है ?
(a) फ्रांसीसी क्रांति
(b) जुलाई क्रांति
(c) फरवरी क्रांति
(d) नवम्बर क्रान्ति
उत्तर :
(b) जुलाई क्रांति।

प्रश्न 46.
जुलाई क्रांति के समय फ्रांस का राजा था –
(a) चार्ल्स दशम
(b) लुई अठारहवाँ
(c) लुई फिलिप
(d) लुई नेपोलियन
उत्तर :
(a) चार्ल्स दशम।

प्रश्न 47.
फ्रांस का अन्तिम वुर्वो राजा था –
(a) लुई सोलहवाँ
(b) लुई अठारहवाँ
(c) चार्ल्स दशम
(d) लुई फिलिप
उत्तर :
(b) लुई अठारहवाँ।

प्रश्न 48.
जुलाई राजतन्त्र की समाप्ति हुई –
(a) 1824 ई० में
(b) 1830 ई० में
(c) 1848 ई० में
(d) 1852 ई० में
उत्तर :
(c) 1848 ई० में।

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प्रश्न 49.
फरवरी क्रांति के समय फ्रांस का राजा था –
(a) नेपोलियन तृतीय
(b) लुई फिलिप
(c) चार्ल्स दशम
(d) लुई नेपोलियन
उत्तर :
(b) लुई फिलिप

प्रश्न 50.
लुई फिलीप ने सिंहासन कब छोड़ा –
(a) 21 फरवरी को
(b) 22 फरवरी को
(c) 23 फरवरी को
(d) 24 फरवरी को
उत्तर :
(d) 24 फरवरी को।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. यूरोप में राष्ट्रवादी विचारों का सबसे अधिक प्रसार _________प्रभाव से हुआ।
उत्तर : फ्रांसीसी क्रांति के।

2. राष्ट्रवाद से प्रभावित होकर यूरोप की छोटी जातियों ने _________की मांग की।
उत्तर : आत्मनियंत्रण।

3. _________वियना सम्मेलन के सबसे लोकप्रिय व्यक्ति थे।
उत्तर : मेटरनिख।

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4. न्याय अधिकार नीति द्वारा _________वंश हालैण्ड के सिंहासन पर बैठा।
उत्तर : ऊरेंज।

5. क्षर्तिपूर्ण नीति द्वारा पार्मा, मडेना एवं टास्कनी में वंश _________का शासन प्रतिष्ठित हुआ।
उत्तर : हैप्सवर्ग।

6. वियना सम्मेलन में फ्रांस के ऊपर _________फ्रैंक की क्षतिपूर्ति का जुर्माना लगाया गया।
उत्तर : 70 करोड़।

7. शक्तिसाम्ब नीति द्वारा _________को हालैण्ड के साथ युक्त किया गया।
उत्तर : बेल्जियम।

8. _________जर्मनबुंडया राष्ट्र-समिति का सभापति था।
उत्तर : ऑंस्ट्रिया।

9. मेटरनिख द्वारा आक्रामक नीति संचालन के लिये _________शहर में प्रधान कार्यालय खोला गया।
उत्तर : मेन्ज! यूरोप के प्रधानमंत्री के नाम से परिचित था।

10. _________यूरोप के प्रधानमंत्री के नाम से परिचित था।
उत्तर : मेटरनिख।

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11. वुरसेनसाफटेन जर्मनी का एक_________था।
उत्तर : छात्र-संगठन।

12. चार्ल्स दशम _________का भाई था।
उत्तर : लुई अठारहवाँ।

13. चार्ल्स दशम ने_________ के परामर्श से विधान परिषद को भंग कर दिया।
उत्तर : पोलिग्नेक।

14. जुलाई आर्डिनेन्स_________द्वारा लागू किया गया।
उत्तर : चार्ल्स दशम।

15. लुई फिलिप का पतन _________क्रांति के कारण हुआ।
उत्तर : फरवरी।

16. ‘आर्गनाईजेशन ऑफ लेबर’ पुस्तक की रचना_________ ने की।
उत्तर : लुई ब्लाँ।

17. _________क्रांति वर्ष के नाम से परिचित है।
उत्तर : 1848 ई०।

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18. फरवरी क्रांति के दबाव से मेटरनिख _________भाग गया।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

19. फरवरी क्रांति के बाद फ्रांस में_________गठित हुआ।
उत्तर : राष्ट्रीय कर्मशाला।

20. एकीकरण होने के पहले दक्षिण इटली के नेपल्स एवं सिसिली में_________ वंश का शासन कायम था।
उत्तर : वुर्वों।

21. मेटरनिख ने कहा था, इटली है ‘एक _________संज्ञामात्र’।
उत्तर : भौगोलिक।

22. इटली की एकीकरण आन्दोलन में सबसे प्रसिद्ध गुप्त समिति थी _________
उत्तर : कार्वोनारी।

23. जनरल पेष_________ के विद्रोही आन्दोलन का नेता था।
उत्तर : नेपल्स।

24. ‘रिसर्जीमेण्टो’ पत्रिका का सम्पादक _________था।
उत्तर : काबूर।

25. मेजिनी का लक्ष्य इटली को एक करके _________की प्रतिष्ठा करना था।
उत्तर : प्रजातन्त्र।

26. 1848 ई० में _________के नेतृत्व में रोम एवं टास्कनी में प्रजातन्त्र प्रतिष्ठित हुआं।
उत्तर : मेजिनी।

27. काबूर ऐक्यबद्ध इटली में _________की प्रतिष्ठा करना चाहता था।
उत्तर : नियमतान्रिक राजतन्न।

28. पिडमेण्ट के साथ लम्बार्डी युक्त हुआ_________सन्धि के द्वारा।
उत्तर : ज्यूरिख।

29. इटली ने _________संधि के द्वारा सेवाय एवं निस प्राप्त किया।
उत्तर : ज्यूरिख।

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30. _________ने मध्य इटली के संयुक्त होने के बदले इटली से सेवाय एवं निस प्राप्त किया।
उत्तर : फ्रांस।

31. 1861 ई० में _________ राष्ट्रीय संसद का प्रथम अधिवेशन हुआ।
उत्तर : इटली की।

32. इटली का एकीकरण सम्पूर्ण _________संयुक्ति के माध्यम से हुआ।
उत्तर : रोम।

33. फ्रांसीसी क्रांति के समय जर्मनी प्राय: _________राज्यों में विभक्त था।
उत्तर : 300

34. ‘कन्फेडरेशन ऑफ द राईन’ का गठन _________ने किया था।
उत्तर : नेपोलियन।

35. वियना संधि के माध्यम से जर्मनबुंड का सभापति _________हुआ।
उत्तर : औंस्ट्रिया।

36. जर्मनी के एकीकरण आन्दोलन का नेतृत्व_________ ने किया था।
उत्तर : पर्शिया।

37. वुरसेनसाफ्टेन एक जर्मन _________थी।
उत्तर : गुप्त समिति।

38. जोलवेरिन की प्रतिष्ठा में _________ने नेतुत्व दिया था।
उत्तर : पर्शिया।

39. जर्मनी को एक करने के लिये विस्मार्क का प्रथम युद्ध _________के विरुद्ध था।
उत्तर : डेनमार्क।

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40. जर्मनी के एकीकरण के लिये विस्मार्क का अन्तिम युद्ध _________के विरुद्ध था।
उत्तर : फ्रांस।

41. प्रथम लिओपोल्ड _________का राजा था।
उत्तर : वेल्जियम।

42. पर्शिया से पराजित होकर डेनमार्क समझौते द्वारा श्लेसवीन एवं हलस्टिन के ऊपर अपनी माँग को त्याग दिया।
उत्तर : वियना।

43. सेडोवा युद्ध के बाद _________के नेतृत्व में उत्तर जर्मन राष्ट्रसंघ गठित हुआ।
उत्तर : पर्शिया।

44. _________का युद्ध ‘सात हप्तों का युद्ध’ के नाम से परिचित है।
उत्तर : सेडोवा।

45. इटली _________को दिये जाने की शर्त पर पर्शिया को फैंको-प्रासीय युद्ध में इटली से मद्द मिली।
उत्तर : रोम।

46. _________संधि के द्वारा सेडान का युद्ध समाप्त हुआ।
उत्तर : फ्रैंकफर्ट।

47. सेडान के युद्ध के बाद._________ का पतन हुआ।
उत्तर : तृतीय नेपोलियन।

48. फ्रांस में स्थायी रूप से प्रजातन्त्र की प्रतिष्ठा _________ में हुई।
उत्तर : 1871 ई०।

49. तुरस्क की अधीनता त्याग कर 1829 ई० में _________ने स्वाधीनता प्राप्त की।
उत्तर : ग्रीस।

50. तुरस्क की अथीनता त्याग कर 1842 ई० में _________ने स्वाधीनता प्राप्त की।
उत्तर : मिस।

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51. तुरस्क 1821 ई० में मिग्र के शासक _________की सहायता से ग्रीकवासियों के विद्रोह का दमन किया।
उत्तर : मुहम्मद अली।

52. ग्रोटो के गिरजा पर एकाधिपत्य का अधिकार ही _________के युद्ध का प्रत्यक्ष कारण था।
उत्तर : क्रीमिया।

53. पेरिस-संधि द्वारा_________युद्ध की समाप्ति हुई।
उत्तर : क्रीमिया।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवादी प्रसार में बाधा पैदा की।
उत्तर : False

2. 19 वीं सदी के यूरोष में स्वेच्छाचारी राजतन्त्र एवं उदीयमान राष्ट्रवाद के बीच संघर्ष दिखाई दिया।
उत्तर : True

3. निरकुश राजतन्त्र एवं राष्ट्रीयतावाद की चरम लड़ाई में गणतन्त्र विजयी हुआ।
उत्तर : True

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4. डेविड टमसन ने 1815 से 1849 ई० के बीच के समय को ‘शान्ति युग’ कहा है।
उत्तर : False

5. क्षतिपूर्ति नीति द्वारा पर्शिया ने लम्बर्डी, विनिशा, पोलैण्ड के कुछ हिस्से, टारइल, इलिरिया आदि प्राप्त किया।
उत्तर : False

6. न्याय अधिकार नीति द्वारा मध्य इटली में ऑस्ट्रिया का शासन लागू हुआ।
उत्तर : False

7. वियना सम्मेलन के नेतागण गणतन्त एवं राष्ट्रीयतावाद के समर्थक थे।
उत्तर : False

8. 1815 से 1848 ई० तक का समय मेटरनिख युग कहा जाता है।
उत्तर : True

9. पुरातनतन्त्र को बहाल रखने के लिये मेटरनिख के प्रयास से यूरोपीय शक्ति-समिति गठित हुई।
उत्तर : True

10. यूरोपीय शक्ति-समिति के ट्रपो के घोषणापत्र में कहा गया है कि प्रजा को सरकार परिवर्तन करने का कोई अधिकार नहीं है। किसी भी देश में क्रांति होने से शक्ति-समिति हस्तक्षेप करेगी।
उत्तर : True

11. लुई सोलहवें की मृत्यु के बाद उग्र राजतन्त्री दल के नेता काउण्ट ऑफ आर्टेस चार्ल्स दशम नाम से फ्रांस के सिंहासन पर बैठा।
उत्तर : False

12. जुलाई क्रांति के बाद क्रांतिकारी अलिर्यन्स वशीय लुई फिलिप को फांस का राजा बनाया गया।
उत्तर : True

13. जुलाई क्रांति के फलस्वरूप प्रतिष्ठित राजतन्त्र ‘जुलाई राजतंत्र’ के नाम से परिचित है।
उत्तर : True

14. प्रधानमंत्री पोलिग्नेक के निवास-भवन के सामने अंगरक्षकों की गोली से 23 लोग मारे गये।
उत्तर : False

15. लुई नेपोलियन ने 1852 ई० में द्वितीय गणतन्त्र को समाप्त कर फ्रांस में द्वितीय साम्राज्य की स्थापना की।
उत्तर : True

16. लुई फिलीप तृतीय नेपोलियन के नाम से (1852 ई०) अपने को ‘फ्रांसीसीयों का सम्राट’ कहकर घोषणा की।
उत्तर : False

17. वियना संधि के द्वारा इटली को 8 राज्यों में विभक्त किया गया।
उत्तर : True

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18. कार्वोनारी समिति का उद्देश्य था शान्तिपूर्ण तरीके से विदेशियों की गुलामी से इटली को मुक्त करके वहाँ पर प्रजातन्त्र की स्थापना।
उत्तर : False

19. मेजिनी का आदर्श था विदेशी सहायता के बिना युवकों को आत्मत्याग के बल पर इटली को एक करना।
उत्तर : True

20. यंग इटली दल के झंडे में एक ओर ‘गणतन्र, समानता एवं असमानता’ तथा दूसरी ओर ‘स्वाधीनता एवं एकता’ लिखा हुआ था।
उत्तर : True

21. 1859 ई० में ऑस्ट्रिया एवं पिडमेण्ट-सार्डिनिया के बीच ज्यूरिख की सन्धि हुई।
उत्तर : True

22. काबूर फांसीसी सम्माट लुई नेपोलियन के संग प्लेमवियर्स ने समझौता किया।
उत्तर : True

23. विक्टर इमानुयल द्वारा नेपल्स एवं सिसिली की माँग करने पर गैरीबाल्ड़ी उनके विरुद्ध युद्ध करने को आगे बढ़े।
उत्तर : False

24. इटली के एकीकरण आन्दोलन के आरंभ में सर्व-जर्मनवाद एवं जोलवेरिन की महत्वपूर्ण भूमिका थी
उत्तर : False

25. विस्मार्क पर्शिया के राजतन्त्र के नेतृत्व में जर्मनी के एकीकरण की परिकल्पना (Planning) की।
उत्तर : True

26. 1864 ई० के पहले श्लेषविग एवं हलस्टाइन नामक दो स्थान डेनमार्क के अधीन थे।
उत्तर : False

27. लंदन प्रोटोकॉल ( 1852 ई०) द्वारा निश्चय हुआ कि श्लेषविग एवं हलस्टाइन दोनों डेनमार्क के अधीन रहेगा लेकिन वे स्वायत्तशासित होंगे।
उत्तर : True

28. वियारित्स के गुप्त समझौता द्वारा निश्चय हुआ कि होनेवाली आस्ट्रिया-पर्शिया युद्ध में फ्रांस निरपेक्ष रहेगा और उसके बदले वह जर्मनी का कुछ भूखण्ड पायेगा।
उत्तर : True

29. पर्शिया के राजवंश का कोई स्पेन के सिंहासन पर नहीं बैठे इसलिये इस विषय पर चर्चा करने के उद्देश्य से फ़्रांसीसी सम्माट तृतीय नेपोलियन ने एमस नामक जगह पर पर्शिया के राजा के साथ मुलाकात की।
उत्तर : False

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30. सेडान के युद्ध के बाद फ्रांस के द्वितीय साम्माज्य का पतन हो गया एवं तृतीय प्रजातन्त्र की स्थापना हुई।
उत्तर : True

31. तुर्की भाषा में ‘बाल्कन’ शब्द का अर्थ नदी होता है।
उत्तर : False

32. ‘कुचुक काइनराजी की सन्धि’ एवं जारिस समझौता रूस एवं पर्शिया के बीच हुई।
उत्तर : False

33. रूस द्वारा ग्रीस के स्वाधीनता युद्ध में मदद करने की इच्छा रहते हुए भी मेटरनिख के दबाव से वह नहीं कर सका।
उत्तर : True

34. विस्मार्क के सभापतित्व में बर्लिन समझौता ( 1878 ई०) द्वारा बाल्कन समस्या के समाधान की चेष्टा हुई।
उत्तर : True

35. रूस के मुक्त भूमिदास बिना क्षतिपूर्ति के अपने मालिकों की जमीन का अर्द्धाश प्राप्त किया।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. प्रथम फ्रांसिस 1. पिडमेंट का राजा
B. प्रथम अलेक्जेण्डर 2. प्रश्शिया का राजा
C. प्रथम विलियम 3. रूस का जार
D. विक्टर इमानुएल 4. ओस्ट्रिया का राजा

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. प्रथम फ्रांसिस 1. पिडमेंट का राजा
B. प्रथम अलेक्जेण्डर 2. प्रश्शिया का राजा
C. प्रथम विलियम 3. रूस का जार
D. विक्टर इमानुएल 4. ओस्ट्रिया का राजा

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मेटरनिख 1. पिडमेंट का प्रधानमंत्री
B. काबूर 2. आस्ट्रिया का प्रधानमंत्री
C. बिस्मार्क 3. प्रश्शिया का प्रधानमंत्री
D. कैसलर 4. इंग्लैण्ड का विदेशमंत्री

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मेटरनिख 2. आस्ट्रिया का प्रधानमंत्री
B. काबूर 1. पिडमेंट का प्रधानमंत्री
C. बिस्मार्क 3. प्रश्शिया का प्रधानमंत्री
D. कैसलर 4. इंग्लैण्ड का विदेशमंत्री

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. वुर्वो 1. हालैण्ड
B. ऑरेझ 2. पिडमांट
C. सेवाय 3. फ्रांस
D. हैप्सवर्ग 4. आंस्ट्रया

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. वुर्वो 3. फ्रांस
B. ऑरेझ 1. हालैण्ड
C. सेवाय 2. पिडमांट
D. हैप्सवर्ग 4. आंस्ट्रया

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1815 ई० 1. वियना सम्मेलन
B. 1819 ई० 2. ग्रीस का स्वाधीनता युद्ध
C. 1820 ई० 3. कार्ल्सबड डिक्री
D. 1821-1832 ई० 4. ट्रपो का घोषणापत्र

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1815 ई० 1. वियना सम्मेलन
B. 1819 ई० 3. कार्ल्सबड डिक्री
C. 1820 ई० 4. ट्रपो का घोषणापत्र
D. 1821-1832 ई० 2. ग्रीस का स्वाधीनता युद्ध

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प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1830 ई० 1. मध्य इटली का एकीकरण
B. 1861 ई० 2. रूस के भूमिदासों की मुक्ति
C. 1848 ई० 3. जुलाई क्रांति
D. 1860 ई० 4. फरवरी क्रांति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1830 ई० 3. जुलाई क्रांति
B. 1861 ई० 2. रूस के भूमिदासों की मुक्ति
C. 1848 ई० 4. फरवरी क्रांति
D. 1860 ई० 1. मध्य इटली का एकीकरण

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1848 ई० 1. लंडन प्रोटोकॉल
B. 1852 ई० 2. प्लोमवियर्स का समझौता
C. 1858 ई० 3. गैस्टिन का समझौता
D. 1865 ई० 4. जुलाई राजतन्त्र की समाप्ति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1848 ई० 4. जुलाई राजतन्त्र की समाप्ति
B. 1852 ई० 1. लंडन प्रोटोकॉल
C. 1858 ई० 2. प्लोमवियर्स का समझौता
D. 1865 ई० 3. गैस्टिन का समझौता

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1830 ई० 1. फ्रांस में द्वितीय प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा
B. 1848 ई० 2. रोम का संयुक्तीकरण
C. 1866 ई० 3. जुलाई राजतन्त्र की प्रतिष्ठा
D. 1870 ई० 4. विनिशा का संयुंक्तीकरण

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1830 ई० 3. जुलाई राजतन्त्र की प्रतिष्ठा
B. 1848 ई० 1. फ्रांस में द्वितीय प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा
C. 1866 ई० 4. विनिशा का संयुंक्तीकरण
D. 1870 ई० 2. रोम का संयुक्तीकरण

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प्रश्न 8.

 स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1848 ई० 1. सेडोवा का युद्ध
B. 1854 ई० 2. सेडान का युद्ध
C. 1866 ई० 3. क्रीमिया का युद्ध
D. 1870 ई० 4. क्रांति का वर्ष

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1848 ई० 4. क्रांति का वर्ष
B. 1854 ई० 3. क्रीमिया का युद्ध
C. 1866 ई० 1. सेडोवा का युद्ध
D. 1870 ई० 2. सेडान का युद्ध

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. गैस्टिन समझौता 1. पर्शिया एवं ऑस्ट्रिया
B. प्लोमवियर्स समझौता 2. इटली एवं पर्शिया
C. विल्ला फ्रान्का समझौता 3. ऑस्ट्रिया एवं फ्रांस
D. प्राग समझौता 4. इटली एवं फ्रांस

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. गैस्टिन समझौता 1. पर्शिया एवं ऑस्ट्रिया
B. प्लोमवियर्स समझौता 4. इटली एवं फ्रांस
C. विल्ला फ्रान्का समझौता 3. ऑस्ट्रिया एवं फ्रांस
D. प्राग समझौता 2. इटली एवं पर्शिया

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. पोलिग्नेक 1. चार्ल्स दशम का प्रधानमंत्री
B. काबूर 2. लुई फिलिप का प्रधानमंत्री
C. गिजो 3. पिडमेंट-सार्डिनिया का प्रधानमंत्री
D. विस्मार्क 4. पर्शिया का प्रधानमंत्री

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. पोलिग्नेक 1. चार्ल्स दशम का प्रधानमंत्री
B. काबूर 3. पिडमेंट-सार्डिनिया का प्रधानमंत्री
C. गिजो 2. लुई फिलिप का प्रधानमंत्री
D. विस्मार्क 4. पर्शिया का प्रधानमंत्री

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प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. चार्ल्स दशम 1. सोसाइटी ऑफ फैमिलीज
B. अगस्त बलंकी 2. तृतीय नेपोलियन
C. लुई बलाँ 3. लुई अठाहरवें के अग्रज
D. लुई नेपोलियन 4. आर्गनाइजेशन ऑफ लेबर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. चार्ल्स दशम 3. लुई अठाहरवें के अग्रज
B. अगस्त बलंकी 1. सोसाइटी ऑफ फैमिलीज
C. लुई बलाँ 4. आर्गनाइजेशन ऑफ लेबर
D. लुई नेपोलियन 2. तृतीय नेपोलियन

प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. विक्टर इमानुयल 1. फ्रांस का राजा
B. चतुर्थ फ्रेडरिक विलियम 2. पर्शिया का राजा
C. तृतीय नेपोलियन 3. इटली का राजा
D. नवम क्रिश्चियन 4. डेनमार्क का राजा

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. विक्टर इमानुयल 3. इटली का राजा
B. चतुर्थ फ्रेडरिक विलियम 2. पर्शिया का राजा
C. तृतीय नेपोलियन 1. फ्रांस का राजा
D. नवम क्रिश्चियन 4. डेनमार्क का राजा

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प्रश्न 13.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मेजिनी 1. जोलवेरिन
B. काबूर 2. यंग इटली
C. गैरीबाल्डी 3. लाल कुर्ता
D. मैजेन 4. एसोसिएसन आग्रारिया

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मेजिनी 2. यंग इटली
B. काबूर 4. एसोसिएसन आग्रारिया
C. गैरीबाल्डी 3. लाल कुर्ता
D. मैजेन 1. जोलवेरिन

प्रश्न 14.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. विस्मार्क 1. मुक्तिदाता
B. लुई कसूथ 2. हेटाइरिया फिलिके
C. द्वितीय अंलेक्जेण्डर 3. रक्त एवं लौह नीति
D. स्कूफास 4. हंगरी का नेता

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. विस्मार्क 3. रक्त एवं लौह नीति
B. लुई कसूथ 4. हंगरी का नेता
C. द्वितीय अंलेक्जेण्डर 1. मुक्तिदाता
D. स्कूफास 2. हेटाइरिया फिलिके

प्रश्न 15.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. रिसर्जीवेण्टो 1. राष्ट्र-समिति
B. कन्फेडरेशन ऑफ राईन 2. शुल्क संघ
C. जोलवेरि॰इन 3. पुनर्जागरण
D. कार्वोनारी 4. गुप्त समिति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. रिसर्जीवेण्टो 3. पुनर्जागरण
B. कन्फेडरेशन ऑफ राईन 1. राष्ट्र-समिति
C. जोलवेरि॰इन 2. शुल्क संघ
D. कार्वोनारी 4. गुप्त समिति

प्रश्न 16.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. कार्वोनारी 1. ग्रीस
B. जोलवेरिन 2. इंटली
C. यूरोप के मरीज 3. जर्मनी
D. हेटाइरिया फिलिके 4. तुरस्क

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. कार्वोनारी 2. इंटली
B. जोलवेरिन 3. जर्मनी
C. यूरोप के मरीज 4. तुरस्क
D. हेटाइरिया फिलिके 1. ग्रीस

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 4 भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

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WBBSE Class 9 Geography Chapter 4 Question Answer – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
वहिर्जात प्रक्रियाओं के दो कारण क्या हैं?
उत्तर :
गतिमान जल, हवा, हिमानी आदि।

प्रश्न 2.
अंतर्जात प्रक्रियाओं के एक कारक का नाम बताइए?
उत्तर :
पृथ्वी की आन्तरिक उष्मा।

प्रश्न 3.
किस प्रक्रिया के अन्तर्गत उच्च भाग वाह्य शक्ति से कट-छाटकर चौरस या समतल बनते हैं।
उत्तर :
निम्नीकरण (Digradation)

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प्रश्न 4.
पर्वतों के सबसे ऊँचे भाग को क्या कहते हैं?
उत्तर :
चोटी या शिखर (Peak) कहते हैं।

प्रश्न 5.
भारत के एक प्राचीन मोड़दार पर्वत का नाम लिखिए।
उत्तर :
अरावली

प्रश्न 6.
मोड़दार पर्वतों में नीचे की ओर घँसे हुए मोड़ों को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अभिनति (Syncline)

प्रश्न 7.
भारत के प्राचीन मोड़दार पर्वतों के नाम बताओ।
उत्तर :
अरावली एवं विन्ध्याचल।

प्रश्न 8.
विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी का क्या नाम है?
उत्तर :
माउन्ट एवरेस्ट।

प्रश्न 9.
हिमालय किस प्रकार के पर्वत का उदाहरण है?
उत्तर :
मोड़दार (वलित)।

प्रश्न 10.
अनावृत्ति के अन्तर्गत आनेवाली क्रिया का नाम बताइये।
उत्तर :
अनावृत्तिकरण (Denudation)

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प्रश्न 11.
प्रथम क्रम की एक धराकृति का नाम बताइए।
उत्तर :
महासागर और महाद्वीप

प्रश्न 12.
पहाड़, पठार, मैदान किस क्रम की स्थलाकृतियाँ है ?
उत्तर :
द्वितोय क्रम

प्रश्न 13.
जर्मनी का ब्लैक फररेस्ट किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
ब्लॉक पर्वत या गुटका पर्वत का अंशोत्य पर्वत।

प्रश्न 14.
भारत में स्थित एक भ्रंश घाटी का नाम लिखिए।
उत्तर :
नर्मदा घाटी।

प्रश्न 15.
ज्वालामुखी पर्वतों का आकार कैसा होता है?
उत्तर :
शंकुनुमा (Cone Shaped)

प्रश्न 16.
भूतल के कितने प्रतिशत भाग पर पठारों का विस्तार है?
उत्तर :
33 प्रतिशत

प्रश्न 17.
टेथिस क्या था?
उत्तर :
सागर।

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प्रश्न 18.
एक अन्तरापर्वतीय पठार का उदाहरण बताओ।
उत्तर :
तिब्बत का पठार ।

प्रश्न 19.
किसे विश्व की छत कहा जाता है?
उत्तर :
पामीर।

प्रश्न 20.
एण्डिज किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
नवीन मोड़दार पर्वत।

प्रश्न 21.
डेल्टा किस क्रम की स्थलाकृति है?
उत्तर :
तृतीय क्रम

प्रश्न 22.
जब कई पर्वत श्रेणियाँ क्रम से स्थित हो और सभी एक ही युग की बनी हो तो इसे क्या कहते है?
उत्तर :
पर्वत श्रेणी (Mountain range) या पर्वत प्रणाली

प्रश्न 23.
पर्वत प्रणाली का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हिमालय, हिन्दूकुश, आल्पस आदि।

प्रश्न 24.
किस भू-द्रोणी की कोख में हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ था?
उत्तर :
टेथिस सागर (Tythys Sea)

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प्रश्न 25.
तिब्बत का पठार किन पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ है?
उत्तर :
हिमालय एवं क्यूनलुन पर्वत से घिरा हुआ है।

प्रश्न 26.
भारत का प्रायद्वीपीय पठार किस प्रकार का पठार है?
उत्तर :
लावा निर्मित पठार।

प्रश्न 27.
लावा पठारों का निर्माण किन चट्टानों से हुआ है?
उत्तर :
बैसाल्ट चट्टानों से।

प्रश्न 28.
गंगा-सिंधु का मैदान किस प्रकार का मैदान है?
उत्तर :
जलोढ़ या नदी निर्मित मैदान।

प्रश्न 29.
हंगरी का मैदान किस प्रकार का मैदान है?
उत्तर :
झीलकृत मैदान (Lacustrine plain)

प्रश्न 30.
विश्व के सबसे प्राचीन मोड़दार पर्वत का नाम बताइए ।
उत्तर :
भारत का अरावली पर्वत।

प्रश्न 31.
ज्वालामुखी पर्वत का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
कोटापैक्सी (5897 मी०)

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प्रश्न 32.
ब्लैक फरिस्ट किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
अ्रंशोत्थ पर्वत या खंड पर्वत या संवर्ग पर्वत।

प्रश्न 33.
संसार का छत किस पठार को कहा जाता है?
उत्तर :
पामीर का पठार

प्रश्न 34.
अन्तःपर्वतीय पठार का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
तिब्बत का पठार

प्रश्न 35.
ब्लैक फारेस्ट किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
गुटका पर्वत या भरोत्थ पर्वत।

प्रश्न 36.
दक्षिण भारत का पठार किस प्रकार के पठार का उदाहरण हैं?
उत्तर :
लावा निर्मित पठार ।

प्रश्न 37.
भारत के एक श्रंशोत्य पर्वत का नाम बताओ।
उत्तर :
सतपुरा।

प्रश्न 38.
महाद्वीप, पर्वत, पठार आदि भू आकृति का निर्माण किस संचलन द्वारा होता हैं?
उत्तर :
पटल विरूपणी संचलन या दीर्घकालिक संचलन।

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प्रश्न 39.
पटल विरूपण के अन्तर्गत कौन सी घटनाएं सम्पिलित की जाती है?
उत्तर :
दीर्घकालिक घटनाएं।

प्रश्न 40.
धरातल पर उत्क्षेप (Uplift) एवं अवतलन (Subsidenes) किस गति द्वारा होता है?
उत्तर :
उर्ष्वाधर गति द्वारा

प्रश्न 41.
तनाव (Tension) एवं संपीडन (Compression) की क्रियाएँ किस गति से होती है?
उत्तर :
क्षैतिज गति (Horizontal movement) द्वारा

प्रश्न 42.
तनाव के कारण कौन-सी भू आकृति का निर्माण होता है?
उत्तर :
भूपटल भंग या अंश (Crustal Fracture) होता है।

प्रश्न 43.
संपीडन के कारण कौन-सी भू-आकृति का निर्माण होता है?
उत्तर :
वलन (Foids) पड़ते हैं ।

प्रश्न 44.
भूतल पर उत्पन्न विषमताओं को दूर कौन-सा बल करता है?
उत्तर :
बहिर्जात बल।

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प्रश्न 45.
बहिर्जात बलों का प्रमुख कार्य क्या है?
उत्तर :
अनाच्छादन (Denudation) ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
मोनेडनॉक (Monadnok) क्या है?
उत्तर :
नदियाँ अपने अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था में उच्च स्थलखंडों (पर्वतों, पठारों आदि) को काटकर मंद ढाल वाले समप्राय मैदानों का निर्माण करती हैं। ये मैदान पूर्ण रूप से समतल नहीं होते हैं, इनके यत्र-तत्र प्रतिरोधी चट्टानों के टीले या पहाड़ियाँ दिखायी देती हैं, जिन्हें मोनेडांक (Monadnok) कहते हैं।

प्रश्न 2.
पेडीमेण्ट प्लेन क्या है?
उत्तर :
कई पेडीमेण्ट के आपस में मिलने से निर्मित मैदान को पेडीमेण्ट प्लेन कहते हैं।

प्रश्न 3.
पर्वत किसे कहते हैं?
उत्तर :
स्थल का वह भाग जो अपने आस-पास के क्षेत्र से 1000 मीटर से भी अधिक ऊँचा हो जिसका आधार विस्तृत तथा शिखर संकीर्ण हो, पर्वत कहलाता है।

प्रश्न 4.
पर्वत श्रेणी एवं पर्वत शृंखला से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
पर्वत माला या श्रेणी या श्रृंखला (Mountain Chain) : जब विभिन्न प्रकार के लम्बे तथा सँकरे पर्वतों का विस्तार समानान्तर रूप में चला जाता है तो उसे पर्वत माला या पर्वत श्रेणी या पर्वत श्रृखला कहते हैं।

प्रश्न 5.
अनावृत्तिकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
बाह्य शक्तियों द्वारा घरातल की ऊँचाई-निचाई समाप्त कर उसे समतल बनाने का प्रयास में लगी समस्त प्रक्रियाओं को अनावृत्ति करण (Denudation) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
अपरदन की परिवहन क्रिया से क्या समझते हो?
उत्तर :
अपरदन के अन्तर्गत गतिशील, अभिकरण (Agents or erosion) जैसे नदी, हवा, हिमनदी, समुद्री तरंगे शिलाखण्डों का स्थानान्तरण करते हैं। अपक्षयित पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की क्रिया को परिवहन कहते हैं।

प्रश्न 7.
कार्डिलेरा या पर्वत समूह क्या है?
उत्तर :
कार्डिलेरा या पर्वत समूह (Mauntain System) : दो या दो से अधिक पर्वत श्रेणियों द्वारा एक ही युग में बने क्रम को पर्वत समूह कहते हैं।

प्रश्न 8.
भ्रंश घाटी क्या है?
उत्तर :
दीवार के समान किनारों वाली लम्बी और गहरी घाटियाँ जो भू-पटल में बड़ी-बड़ी दरारों के पड़ने से जिन घाटियों का निर्माण होता है उसे भंश घाटी (Rift Valley) कहते हैं।

प्रश्न 9.
पठारों को ‘खनिजों का भर्डार’ क्यों कहते हैं?
उत्तर :
प्राचीन चट्टानों से निर्मित होने के कारण पठार खनिज पदार्थो से सम्पन्न होते हैं। दक्षिणी भारत के पठारी भाग में लोहा, कोयला, मैगनीज, अभक, सोना आदि खनिज पदार्थो की अधिकता है। अतः पठारों को ‘खनिज का भण्डार’ कहते हैं।

प्रश्न 10.
अपरदनात्मक मैदानों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
भू-पटल पर उत्पन्न विषमताओं को समतल स्थापक शक्तियाँ (नदी, हिमनद, पवन, सागरीय लहरें) दूर करने का प्रयास करती है। जिससे उत्थित स्थलखण्ड एक सपाट एवं आकृतिविहित मैदान का आकार ग्रहण कर लेते हैं। जिन्हें अपरदनात्मक मैदान (Erosional Plain) कहते हैं।

प्रश्न 11.
अवशिष्ट पर्वत के दो उदाहरण दो ।
उत्तर :
भारत का अरावली पर्वत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का मोनेडनाक पर्वत अवशिष्ट पर्वतें है।

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प्रश्न 12.
विछिन्न पठार के दो उदाहरण दें।
उत्तर :
भारत के छोटानागपुर का पठार एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलोरेडो का पठार विछ्धिन्न पठार के उदाहरण हैं।

प्रश्न 13.
पेनीप्लेन क्या है?
उत्तर :
नदियों के अपरदन द्वारा निर्मित मैदानों में सर्वप्रमुख पेनीप्लेन या समपदाय मैदान है। नदियाँ अपने अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था में उच्च स्थल खण्ड (पहाड़, पठार आदि) को काटकर अपने आधार-तल को प्राप्त कर लेती है। इस तरह से निर्मित मैदान को पेनीप्लेन या समप्राय मैदान कहते हैं।

प्रश्न 14.
द्वितीय क्रम की स्थलाकृतियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
महाद्वीपों पर उच्यावच के विचार से तीन म्रधान स्थल रूप देखने को मिलते हैं। वे हैं – पहाड़, पठार और मैदान। निर्माण के विचार से ये तीनों भिन्न स्थलाकृतियाँ उपस्थित करते है। ये द्वितीय क्रम की स्थलाकृतियाँ हैं।

प्रश्न 15.
पर्वत प्रणाली से क्या समझते हो?
उत्तर :
जब कई पर्वत श्रेणियाँ क्रम में स्थित हों और सभी एक ही युग की बनी हो उनसे पर्वत प्रणाली (Mountain Range) का निर्माण होता है।

प्रश्न 16.
नवीन मोड़दार पर्वत की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर :
नये या नवीन मोड़दार पर्वत (Young Fold Mountain) पर्वत निर्माण की नवीनतम प्रक्रिया में निर्मित पहाड़ों को नये मोड़दार पर्वत कहते हैं। इनका निर्माण अल्पाइन संचलन अवधि में हुआ है। हिमालय, आल्पस, रॉकी एवं एण्डीज नये मोड़दार पर्वत है।

प्रश्न 17.
अपरदित पठार की उत्पत्ति सोदाहरण लिखिए।
उत्तर :
जब उच्च पर्वतीय भाग बाह्य शक्तियों द्वारा लगातार घर्षित होकर निम्न भूमि में परिवर्तित हो जाता है और पठार का रूप धारण कर लेता है तो इस प्रकार के पठार को अपरदित या विच्छेदित या घर्षित पठार (Dissected Plateaus) कहा जाता है। कभी-कभी पठारी भाग में अधिक अपरदन होने से वहाँ अन्तर्भेदी आग्नेय चट्टानें (जैसे ग्रेनाइट) उभर आती है। दक्षिण भारत के मैसूर और राँची क्षेत्रों में इसी प्रकार के पठारों का निर्माण हुआ है।

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प्रश्न 18.
हिमानी घर्षित मैदान किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हिमानी घर्षित मैदान (Glacial Plain) : हिमनद और हिमावरण से ढँके क्षेत्रों में जब हिमानी की घर्षित क्रिया से भूमि चौरंस होकर मैदान का रूप ले लेती है तो उसे हिमानी घर्षित मैदान कहते हैं। जैसे-फीनलैण्ड, स्वीडेन और कनाडा में।

प्रश्न 19.
दो लावा पठारों के नाम लिखों?
उत्तर :
भारत के दक्कन के पठार एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया पठार लावा निर्मित पठार के उदाहरण है।

प्रश्न 20.
संरचनात्मक मैदानों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
संरचनात्मक मैदानों (Structural Plain) का निर्माण महादेशीय संचलन (Epeirogenetic movement) के कारण भूपटल में उत्थान (Uplift) तथा अवतलन (Subsidenece) अथवा सागर तल के निर्गमन (Emergence) या निमज्जन (Submergence) के फलस्वरूप होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के महान मैदान तथा रूसी प्लेटफार्म का निर्माण महादेशीय संचलन के अन्तर्गत उत्थान के कारण ही हुआ है।

प्रश्न 21.
निक्षेपात्मक मैदान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
अपरदन के कारकों द्वारा धरातल के किसी भाग से अपरदित पदार्थों को परिवहित कर के अन्यत्र निक्षेपित करते रहो से निक्षेपात्मक मैदानों (Deposional Plain) का निर्माण होता है।

प्रश्न 22.
लोयस मैदान एवं लावा मैदानों का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर :
लोयस मैदान – लोयस मैदानों का निर्माण मरूस्थलीय प्रदेशों से बहुत दूर पवन द्वारा उड़ा कर लायी गयी मिट्टी के महीन कणों के निक्षेपण से होता है।
लावा मैदान – ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाला लावा जब निचले भागों में पतले चादर के रूप में निक्षेपित होता है तो लावा मैदानों का निर्माण होता है। लावा पठारों के अपरदन से प्राप्त अवसादों का निक्षेपण नदियों द्वारा अन्यत्र स्थानों पर किए जाने से भी लावा मैदानों का निर्माण होता है।

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प्रश्न 23.
जलोढ़ पंख से क्या समझते हो?
उत्तर :
जहाँ पर नदी पहाड़ी भाग से उतरकर निचले भाग में प्रवेश करती है, वहाँ पर ढाल में अचानक कमी आ जाने के कारण नदी अपने साथ लाए गए बड़े-बड़े टुकड़ों वाला मलवा आगे नहीं ले जा पाती है। फलस्वरूप पर्वतों या पहाड़ियों के पाद के पास उसका निक्षेप होने लगता है, जिससे जलोढ़ पंख (Alluvial Fan) का निर्माण होता है।

प्रश्न 24.
मेसा क्या है?
उत्तर :
प्राचीन कठोर शैलों वाले पठारों पर अपरदन की अधिकता के कारण मेज के आकार की सपाट संरचनाएँ दृष्टिगोचर होती है, जिन्हें मेसा कहते हैं।

प्रश्न 25.
टेथिस सागर कहाँ पर स्थित था?
उत्तर :
आज से लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले हिमालय के स्थान पर टेथिज सागर था।

प्रश्न 26.
अवशिष्ट पर्वत के धरातलीय स्वरूपों का उदाहरण दें।
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत (Residual or Relict Mountain) : भारत में अरावली, यूरोप में यूराल, स्काटलैण्ड की पहाड़ियाँ और नेनाइन श्रेणी, संयुक्त राज्य अमेरिका के मोनॉडनक अवशिष्ट पर्वत के उदाहरण है।

प्रश्न 27.
विभाजित पठार के धरातलीय स्वरूपों का उदाहरण दें।
उत्तर :
विभाजित पठार (Dissected Plateau) : वेल्स, स्कॉटलैण्ड, छोटानागपुर, कर्नाटक के मालनद तथा मेघालय के पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलोरेडो तथा कनाडा का लारेशियन पठार विभाजित पठार है।

प्रश्न 28.
बजाडा क्या है?
उत्तर :
बजाडा पेडीमेण्ट के नीचे का भाग है। यहाँ पर बहकर आये पदार्थ व रेत जमा होते रहते हैं। यह वायु एवं पानी के कटाव एवं जमाव क्रिया द्वारा निर्मित होता है। इनका ढाल धीमा किन्तु लहरदार होता है। इनका निर्माण मोटे व महीन कणों के मिश्रण की अलग-अलग मोटाई की परतों के जमा होने से होता है। यहाँ कृषि कार्य एवं पशुपालन किया जाता है।

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प्रश्न 29.
ओरोगेनी से क्या समझते हो?
उत्तर :
ओरोगेनी ग्रीक भाषा के दो शब्दों के मेल से बना है जिसमें ओरो का अर्थ पर्वत तथा गेनी का अर्थ निर्माण होता है। अर्थात पर्वत निर्माण । ओरोगेनी वह प्राथमिक क्रियाविधि है जिसके द्वारा पर्वतों का निर्माण किया जाता है।

प्रश्न 30.
प्राकृतिक तटबंध से क्या समझते हो ?
उत्तर :
प्राकृतिक तट बाँध (Natural Levee) : बाढ़ के समय मैदानी भाग में मिट्टी का जमाव अधिक होता है। यह कालान्तर में आस-पास की भूमि से अधिक ऊँचा हो जाता है। ये बाँध के समान होते हैं। इन्हें तट बाँध कहते हैं। चूँकि ये बाँध प्रकृति द्वारा बनाये जाते हैं तथा इनसे बाढ़ के समय सुरक्षा होती है, अतः इस तट बाँध को प्राकृतिक तट बाँध (Natural Levee) कहते हैं।

प्रश्न 31.
भू-आकृतिक देहली (Geomorphic Threshold) से क्या समझते हो?
उत्तर :
भू आकृति विज्ञान में वह स्थल या बिन्दु जहाँ बाह्य प्रभावी कारकों में परिवर्तन के अभाव में अथवा बाह्य प्रभावी कारकों में प्रगामी परिवर्तनों द्वारा स्थलरूपों में एकाएक परिवर्तन होता है, उसे भू-आकृतिक देहली (Geomorphic Threshold) कहते हैं।

प्रश्न 32.
भ्रंश या दरार क्या है?
उत्तर :
भ्रंश या दरार (Fault) : पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण जब किसी मैदान या पठार की चट्टानों पर दो विपरीत दिशाओं से दबाव या तनाव पड़ता है, तो कभी-कभी चट्टाने मुड़ने के बजाय टूट जाती हैं और उनमें दरारे पड़ जाती है, इन्हीं दरारों को भ्रंश कहते है।

प्रश्न 33.
पैंजिया क्या है?
उत्तर :
पैंजिया (Pangea) : प्राचीनकाल से सभी महाद्वीप एक साथ जुड़े हुए थे। इसे पैंजिया कहते हैं। भू-हलचल की प्रक्रिया द्वारा इन महाद्वीपों का प्रवाह हुआ और ये ट्ट कर अलग होते चले गए और वर्तमान क्रम में स्थापित हुए।

प्रश्न 34.
अंगारालैण्ड और गोण्डवाना लैण्ड क्या है?
उत्तर :
अंगारालैण्ड और गोण्डवाना लैण्ड (Angera and Gondwana Land) : टेथिस सागर के उत्तर स्थित भू-भाग को अंगारालैण्ड एवं टेथिस सागर के दक्षिण स्थित भू-भाग को गोण्डवाना लैण्ड कहा जाता है जो वर्तमान में प्रायद्वीपीय भारत में है।

प्रश्न 35.
अपनति एवं अभिनति क्या है?
उत्तर :
अपनति (Anticline) : भू-पटल के आन्तरिक बल व क्षैतिज संचलन द्वारा चट्टानों में बलन (Folds) पड़ जाते हैं। वलन के ऊपर उठे भाग को अपनति कहते हैं।
अभिनति (Syncline) : सम्पीडन के कारण जब चट्टानो के भाग नीचे की ओर मुड़ जाते हैं तो इसे अभिनति बलन कहते हैं।

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प्रश्न 36.
सममित और असममिति वलन क्या है?
उत्तर :
सममति वलन (Symmetrical folds) – जब किसी वलन की दोनों भुजाओं का घ्युकाव या कोण बराबर हो तो उसे सममति वलन कहते हैं।
असममति वलन (Asymmetrical folds) – जब वलन की दोनों भुजाओं की लम्बाई या झुकाव का कोण बराबर हो तो उसे सममति वलन कहते हैं।

प्रश्न 37.
पहाड़ी (Hill) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पहाड़ी (Hiil) स्थल का वह भाग जो अपने आस-पास के क्षेत्र से 300 मीटर से अधिक परन्तु 1000 मीटर से कम ऊँचा हो, पहाड़ी कहलाती है। जैसे बिहारीनाथ ( 450 मी०) शिशुनिय ( 440 मी०) बाघमुण्डी ( 677 मी॰) आदि।

प्रश्न 38.
भूद्रोणी (Geo Synclines) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के उन अधिक लम्बे किन्तु कम चौड़े और उथले सागरों को भूद्रोणी (Geo Synclines) कहते हैं। टेथिस सागर (Tethys Sea) इसका एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न 39.
प्लेटों की गति का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर :
प्लेटों की गति का मुख्य कारण रेडियो सक्रिय तत्वों से निकली ताप के फलस्वरूप उत्पन्न संवाहनिक धाराएँ हैं।

प्रश्न 40.
रचनात्मक प्लेट किनारा क्या है ?
उत्तर :
जब दो प्लेटें एक दूसरे से विपरीत दिशा में गतिशील होती है तो उनके किनारे अपसारी या रचनात्मक प्लेट किनारा (Constructive Plate Margines) कहलाता है।

प्रश्न 41.
अभिसारी या विनाशात्मक प्लेट किनारा (Destructive Plate Margines) किसे कहते हैं?
उत्तर :
जब दो प्लेट एक दूसरे के निकट आकर आपस में टकराते हैं तो उनके किनारों को विनाशात्मक प्लेट किनारा (Destructive Plate Margines) कहते हैं।

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प्रश्न 42.
संरक्षी प्लेट किनारा (Conservative Plate Margines) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जहाँ दो प्लेट एक दूसरे के अलग-बगल सरक जाते हैं तो वहाँ रूपान्तर भंश का निर्माण होता है। ऐसे प्लेट को संरक्षी प्लेट किनारा कहते हैं।

प्रश्न 43.
पर्वत कटक (Mountain Ridge) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पर्वत कटक (Mountain Ridge) : लम्बे, सँकरे एवं ऊँचे पर्वतों के क्रमबद्ध स्वरूप को पर्वत कटक (Mountain Ridge) कहते हैं।

प्रश्न 44.
पर्वत श्रेणी (Mountain Range) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पर्वत श्रेणी (Mountain Range) : एक ही काल एवं एक ही प्रक्रिया द्वारा बने पर्वतों एवं पहाड़ियो का ऐसा क्रम जिसमें कई शिखर, कटक, घाटियाँ आदि सम्मिलित हों, पर्वत श्रेणी कहलाते हैं। ये एक सीध में सँकरी पट्टी के रूप में फैले होते हैं, जैसे-हिमालय पर्वत श्रेणी।

प्रश्न 45.
पर्वत श्रृंखला (Mountain Chain) किसे कहते हैं?
उत्तर :
विभिन्न युगों में निर्मित लम्बे एवं सँकरे पर्वतों का समानान्तर विस्तार पर्वत शृंखला या पर्वतमाला कहलाता है। जैसे-अप्लेशियन पर्वतमाला।

प्रश्न 46.
पर्वत तन्र (Mountain System) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पर्वत तन्त्र (Mountain System) : एक ही युग में निर्मित विभिन्न पर्वत श्रेणियों के समूह को पर्वत प्रणाली या पर्वत तन्न (Mountain System) कहते हैं।

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प्रश्न 47.
कार्डिलेरा या पर्वत समूह (Cordillera) किसे कहते हैं?
उत्तर :
कार्डिलेरा या पर्वत समूह (Cordillera) : जब विभिन्न युगों में निर्मित पर्वत श्रेणियाँ, पर्वत शृंखलाएँ तथा पर्वत तंत्र एक ही साथ बिना किसी क्रम के विस्तृत होते हैं तो इन्हें कार्डिलेरा कहा जाता है, जैसे- उत्तरी अमेरिका का प्रशान्त कार्डिलेरा।

प्रश्न 48.
बुट्टी (Butte) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पठारों पर स्थित सपाट शिखर वाली लघु पहाड़ियाँ जो प्रतिरोधी शैल स्तरों से ढॅकी रहती है, बुट्टी (Butte) कहलाती है।

प्रश्न 49.
हमादा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
मरूस्थलीय प्रदेशो में पवन के अपघर्षण से नग्नीकृत चद्टानों के सपाट भाग जो अधिक विस्तृत होते है, हमादा कहलाते हैं।

प्रश्न 50.
पेडीमेण्ड (Pediment) किसे कहते हैं?
उत्तर :
मरूस्थलीय प्रदेशों में पर्वतों या पठारों के अग्रढाल पर जल के अपरदन से निर्मित अवतल ढाल वाले स्थलरूप को पेडीमेण्ट (Pediment) कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
प्राचीन मोड़दार पर्वत एवं नवीन मोड़दार पर्वत के बीच अंतर लिखिए।
उत्तर :
प्राचीन मोड़दार पर्वत :

  1. बहुत समय पहले इन पर्वतों का निर्माण हुआ है।
  2. अपक्षरण एवं विखण्डन की क्रियाओं का अधिक प्रभाव इन पर पड़ा है।
  3. इन पर्वतों पर कठोर चट्टाने मिलती हैं क्योंकि कोमल चट्टाने तो कट कर हट गयी है।
  4. ये कम ऊँचे होते हैं।
  5. इनके शिखर कुछ गोल होते हैं।

नवीन मोड़दार पर्वत :

  1. नवीन मोड़दार पर्वतों का निर्माण अपेक्षाकृत बाद में हुआ है।
  2. इन पर अपक्षरण एवं विखण्डन की क्रियाओं का कम प्रभाव पड़ा है।
  3. इन पर्वतों पर कोमल चट्टाने मिलती हैं।
  4. ये अधिक ऊँचे होते हैं।
  5. इनके शिखर नुकिले होते हैं।

प्रश्न 2.
ज्वालामुखी पर्वत एवं अवशिष्ट पर्वत में अंतर लिखो।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत :

  1. इनका निर्माण भू-गर्भ से निकलने वाले मैग्मा के ठण्डा तथा जमकर ठोस होने से होता है।
  2. इसमें शिखर की आकृति शक्वाकार होती है, जिसे क्रेटर कहा जाता है।
  3. ये अधिक ऊँचे होते हैं।
  4. ये पृथ्वी के आन्तरिक क्रिया के फलस्वरूप बनते हैं।
  5. ये विनाशकारी क्रियाओं से बने हैं।

अवशिष्ट पर्वत :

  1. इनका निर्माण किसी ऊँचे पर्वत के कटने, छँटने, घिसने तथा टूटने से होता है।
  2. इसका ऊपरी हिस्सा समतल या उबड़-खाबड़ होता है।
  3. ये कम ऊँचे होते हैं।
  4. इनका निर्माण बाहरी अपरदनकारी शक्तियों के वर्षा, ताप, पाला आदि से क्रिया होता है।
  5. ये निर्माणकारी क्रियाओं से बने हैं।

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प्रश्न 3.
ज्वालामुखी पर्वत के भेद को उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत के तीन भेद है –

  1. सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcanoes)
  2. प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dorment Volcanoes)
  3. शान्त ज्वालामुखी (Extinct Volcanoes)।

प्रसुत ज्वालामुखी पर्वत उसे कहते हैं जिसके मुख से आग, राख धुँआ आदि निकला करता है । जैसे – इटली का एटना।
प्रसुप्त ज्वालामुखी पहाड़ उसे कहते हैं जो बहुत दिन तक शान्त रहने के बाद अचानक किसी समय भड़क उठता है, जैसे जापान का फ्यूजीयामा।
मृत या शान्त ज्वालामुखी पहाड़ वे है जो हमेशा के लिए शान्त हो गये हैं। उसमें कभी भी उद्गार की आशा नहीं रह गई है। जैसे- म्यॉमार का पोपा।

प्रश्न 4.
अवशिष्ट पर्वत में ऊँची चोटियाँ क्यों नहीं पाई जाती है?
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत का निर्माण विखण्डन एवं अपक्षरण की क्रियाओं द्वारा होता है। इनके द्वारा प्राचीन पठारों एवं ऊँचेऊँचे पर्वत भी घिसकर-कटकर छोटे हो जाते हैं। कालान्तर में ये पर्वत घिस कर पठार बन जाते हैं। इस तरह इसकी ऊँचाई घटती जाती है और इनमें चोटियाँ नहीं पायी जाती है।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी पर्वत को संग्रहीत पर्वत भी कहते हैं, क्यों?
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत संचयन या निक्षेपण से बने पर्वत हैं। इनका निर्माण ज्वालामुखी उद्गार से निकले पदार्थों, शिल खण्डों एवं लावा के लगातार जमाव और पर्वत रूप लेने से होता है। ज्वालामुखी नली या द्वार के सहारे पिघली चट्टान (लावा) बाहर निकल कर धरातल पर फैल जाती है और शंकु की तरह जमा होकर कोणाकार पर्वत बनाती है। यदि शिला खण्डों की अधिकता हुई तो, ऐसे पर्वत का ढाल तीव्व होगा और यदि लावा की अधिकता हुई तो ढाल क्रमिक होगा ज्वालामुखी की क्रिया से निकलने वाले पदार्थों के संग्रह से निर्मित होने के कारण ज्वालामुखी पर्वत को संग्रहीत पर्वत भी कहा जाता है।

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प्रश्न 6.
मोड़दार पर्वत में क्यों जीवाश्म पाये जाते हैं?
उत्तर :
मोड़दार पर्वत में समुद्री जीव-जन्तुओं के अवशेष पाये जाते है। इन पर्वतों का निर्माण उथले समुद्रों से हुआ है। इनकी चट्टानों में छिछले सागर में रहने वाले जीवों के जीवाश्म पाये जाते हैं। नदियाँ समुद्रों में तरह-तरह के जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों के सड़े-गले अवशेषों को मलबे के साथ समुद्रों में तह के ऊपर तह के रूप में जमा करती हैं। यही कारण है कि मोड़दार पर्वतों में जीवाश्म पाये जाते हैं।

प्रश्न 7.
गुम्बदाकार पर्वत को वर्षा का द्वीप क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
गुम्बदाकार पर्वत पृथ्वी के धरातल पर फोड़े की तरह पैदा होते हैं तथा जो मैग्मा के नीचे से ऊपर उठने के कारण बन जाते हैं। कभी-कभी मेग्मा धरातल पर न आकर मैदानों के अन्दर परतदार चट्टानों में ही जमा हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में वहाँ की चट्टाने गुम्बदाकार हो उठती हैं। ये गुम्बद के केन्द्र से बाहर की ओर समान रूप से ढालू बने रहते हैं जिनमें वर्षा के बादल टकराकर पर्याप्त मात्रा में वर्षा करते हैं । इन गुम्बदों पर अधिक वर्षा होती है। अतः इन्हे वर्षा के द्वीप (Island of precipitation) कहा जाता है।

प्रश्न 8.
पहाड़ी भागों पर जनसंख्या का घनत्व कम क्यों होता है?
उत्तर :
पर्वतीय भागों में जनसंख्या का घनत्व कम है, इसका मुख्य कारण निम्नलिखित है –

  1. पर्वतों की बनावट अनिश्चित होती है।
  2. इनकी घाटियाँ संकरी होती है।
  3. मिट्टी की पतली तह कृषि कार्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है।
  4. यातायात के साधनों का सर्वथा अभाव रहता है।
  5. कृषि उद्योग का स्थान नगण्य है।
  6. जलवायु की विषमता के कारण आबादी घनी नहीं है।
  7. समतल भूमि की कमी है। इन्हीं सब कारणों से इन प्रदेशों में आबादी बहुत कम रहती है।

प्रश्न 9.
मोड़दार या वलित पर्वत की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
वलित पर्वत की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. ये भू-तल के नवीनतम पर्वत है, जिनमें विश्व की उच्चतम चोटियाँ पाई जाती है।
  2. इनका निर्माण अवसादी चट्टानों में दबाब पड़ने से मोड़ पड़ने के कारण हुआ है।
  3. इन पर्वतों की चट्टाने जलज हैं अर्थात् इनका निक्षेप जलीय भागों में हुआ था। इनमें सागरीय जीवों के अवशेष पाये जाते हैं।
  4. वलित पर्वतों में तल-छट का जमाव अत्यधिक गहरे सागर के साथ ही उथले सागर में भी हुआ है।
  5. वलित पर्वतों का विस्तार लम्बाई में अधिक परन्तु चौड़ाई में बहुत कम होता है। हिमालय का विस्तार पश्चिम से पूरब दिशा में 1,500 मील की लम्बाई तथा उत्तर से दक्षिण 250 मील की चौड़ाई में पाया जाता है।
  6. वलित पर्वत चाप के आकार में पाये जाते हैं, जिनका एक ढाल अवतल तथा दूसरा ढाल उत्तल होता है, जिधर से दबाव की शक्ति का आगमन होता है।

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प्रश्न 10.
गुटका पर्वत और भ्रंशघाटी का निर्माण आपस में संबंधित है, स्पष्ट कीजिए?
उत्तर :
अवरोधी या ब्लॉक पर्वत का निर्माण तनाव या खिंचाव की शक्तियों की क्रियाशीलता के कारण होता है । खिचाव के कारण भू-पटल पर दरारें या भंश पड़ जाती हैं, जिसके कारण धरातल का कुछ भाग ऊपर उठ जाता है तथा कुछ भाग नीचे घंस जाता है। ऊपर उठे भाग के अवरोधी या ब्लोंक पर्वत कहते हैं तथा नीचे धंसे भाग जो प्रंश दरार या भ्रंश के कारण होता है, अतः इसे प्रंशोत्थ पर्वत भी कहते हैं। ये प्राय: दो समानान्तर भागों दूसरों के बीच स्थित होते हैं। इस प्रकार ब्लॉक पर्वत का निर्माण धरातलीय भागों में प्रंश पड़ने के कारण होता है। अत: ब्लॉक पर्वत्तें एवं भ्रंश घाटियों का आपस में अन्तर्सम्बन्य है।

प्रश्न 11.
भूसन्नति सिद्धांत क्या है?
उत्तर :
भूसन्नति सिद्धांत : पर्वत निर्माण संबंधी समस्याओं की व्याख्या हेतु कोबर महोदय ने भूसन्नति सिद्धांत का प्रांतपादन किया। वे एक जर्मन भूगर्भशास्त्री थे जिन्होंने बताया कि पर्वतों की उत्पत्ति भूसन्नति के गर्भ में होती है। उनकी मान्यता थी कि मोड़दार पर्वतों का निर्माण धरातल के संकुचन का परिणाम है। कोबर का सिद्धांत निम्नलिखित तीन मान्यताओं पर आधारित है।
(i) पर्वत की उत्पत्ति एक भूसन्नति या छिछले सागर में होती है।
(ii) इस भूसन्नति में नदियों द्वारा अनवरत मलवा निक्षेपण होता रहा और उनमें धँसान भी हुआ।
(iii) तीसरी मान्यता है कि भूसन्नति में होने वाले अवतलन क्रिया में चट्टानों में संकुचन हुआ और इस संकुचन से भू-सन्नति में निक्षेपित मलवे मुड़कर मोड़दार पर्वत के रूप में परिवर्तित हुए।

वस्तुत: भूसन्नति का मलवा ही मोड़दार पर्वत के रूप में उत्थित होगा। परन्तु सभी मलवों में मोड़ नहीं पड़ता है। भूसन्नति के दोनों किनारे वाले मलवे सबसे पहले मुड़कर पर्वत बनते हैं। बीच में स्थित मलवा बिना मुड़े ऊपर उठ जायेगा। जिसे मध्य पिण्ड (Medium Mass) कहते हैं। तिब्बत, हंगरी का मैदान ऐसे ही मध्य पिण्ड के उदाहरण हैं।

प्रश्न 12.
प्रशान्त महासागर की आग की अंगुठी क्या है?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर की आग की अंगुठी (Pacific Ring of Fire) : विश्व के मानचित्र का अध्ययन करने पर हम यह पाते हैं कि ज्वालामुखी पर्वतों का एक वितरण प्रशान्त महासागर के चारों तरफ गोलाई में फैला हुआ है। इसे प्रशान्त महासागर की आग की अंगुठी (Ring of Fire) कहते हैं।

प्रश्न 13.
खण्ड पर्वत का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
खण्ड पर्वत या गुटका पर्वत या संवर्ग पर्वत (Block or Faulted Mountain) : पृथ्वी के बाह्य और आंतरिक शक्तियों के अचानक तनाव के कारण जब प्रस्तरित चट्टानें (Śtratified Rocks) टूट जाती हैं तो इनमें दरारें यड़ जाती हैं। जिस रेखा के सहारे ये टूटती है उसे Fault Line कहते हैं। इन दरारों के बीच का भूखण्ड कभी उठकर ऊपर चला जाता है तो कभी खिसक कर नीचे चला जाता है। ऐसी हालत में ऊपर उठा भू-भाग पर्वत के रूप में दिखाई पड़ता है, जिसे संवर्ग पर्वत (Block or Faulted Mountain) कहते हैं। संसार में मोड़दार पर्वत की अपेक्षा संवर्ग पर्वत कम है।
उदाहरण – यूरोप में हार्ज पर्वत, वॉसजेज (फ्रांस) ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी) तथा पाकिस्तान का साल्ट रेंज (Salt Pange) इसी प्रकार के पर्वत हैं।

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प्रश्न 14.
वलित पर्वत की विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर :
वलित या मोड़दार पर्वत की विशेषताएँ – (The Characteristics of Fold Mountains)

  1. मोड़दार पर्वत अत्यधिक लम्बाई में पाये जाते हैं। इनकी चौड़ाई लम्बाई की अपेक्षा बहुत कम होती है।
  2. ये प्राय: धनुषाकार या चापतुल्य होते हैं।
  3. इनका निर्माण छिछले सागर या भूसन्नतियों में और तलछटी परतदार चट्टानों से हुआ है।
  4. मोड़दार पर्वत में चट्टानों की परतें मुड़ी हुई तथा भ्रंशित होती है।
  5. इन पर्वतों की चट्टानों में छिछले सागर में रहने वाले जीवों के जीवाश्मा (Fossils) पाए जाते हैं।
  6. विश्व के सर्वोच्च शिखर मोड़दार पर्वत में ही जाए जाते हैं।

प्रश्न 15.
ज्वालामुखी पर्वत क्या है?
उत्तर :
इन पर्वतों का निर्माण ज्वालामुखी (Vent) के उद्गारों के साथ निकले पदार्थों के उसके चारों ओर जमा हो जाने से होता है। ज्वालामुखी उद्गारों में लावा शिलाखण्ड राख, धूल, कीचड़, ज्वालामुखी बम और सिंडर जैसे पदार्थ निकलते हैं। ये पदार्थ परत- दर-परत एक शंकु की आकृति में जमा हो जाते हैं। कालांतर में शंकु एक पर्वत जैसा बन जाता है। ये पर्वत पदार्थों के जमा होने से बनते हैं। अतः इन्हें संचयित पर्वत भी कहते हैं।

प्रश्न 16.
ज्वालामुखी पर्वत के तीन उदाहरण दो।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत के उदाहरण है – जापान का फ्यूजीयामा (Fujiyama), अफ्रीका के केनिया व किलिमांजरों (Kilimanjaro), इटली का विसूवियस (Visuvious) तथा एटना एवं बर्मा का पोपा है।

प्रश्न 17.
संग्रहित पर्वत से क्या समझते हो?
उत्तर :
ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाले लावा, राख शिलाखण्ड चट्टानों के चूर्ण आदि पदार्थ उसके मुँह (Crater) के चारों ओर शंकु (Cone) के आकार में जमा हो जाते हैं जिससे ज्वालामुखी पर्वत बन जाता है। ये त्रिकोणाकृति के होते है तथा इनका ऊपरी भाग कीप (Funnel) के आकार का होता है। ज्वालामुखी के पदार्थों के संग्रह से निर्मित होने के कारण ज्वालामुखी पर्वत को संग्रहित पर्वत (Mountains of Accumulation) कहते हैं।

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प्रश्न 18.
भ्रंशोत्थ पर्वत की विशेषताओं को उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
श्रंशोत्य या खण्ड पर्वत की विशेषताएँ (The Characteristics of Block Mountains):

  1. खण्ड पर्वत मोड़दार पर्वतों की अपेक्षाकृत छोटे होते हैं और इनका विस्तार सीमित क्षेत्रों में होता है।
  2. खण्ड पर्वत आकार में प्राय: सीधे होते है तथा भ्रंशन के कारण उपालंब बनाते हैं।
  3. इन पर्वतों का निर्माण पहाड़ी क्षेत्रों में होता है, चाहे वह मोड़दार पर्वत का क्षेत्र हो या पठारी क्षेत्र हो।
  4. खण्ड पर्वतों के निर्माण में मुख्यत: तनाव बल (Tensional force) काम करता है। यद्यपि कहीं-कहीं पार्शिवक दबाव या संपीडन बल (Compressional force) भी काम करता है।
  5. इनका निर्माण चट्टानों के दरार अथवा भ्रंशन से होता है न कि उनके मुड़ने से।
  6. विश्व में खण्ड पर्वत बहुत कम पाये जाते हैं।

प्रश्न 19.
पर्वत क्या है? पर्वत के निर्माण के लिए तीन कारकों का उल्लेख करें।
उत्तर :
पर्वत (Mountain) : पर्वत धरातल के वे ऊँचे उठे भू-भाग हैं जो अपने आस-पास की भूमि से काफी ऊँचे उठे हुए हैं। इनमें चोटियाँ पायी जाती है। इनके शिखर का क्षेत्रफल आधार के क्षेत्रफल से बहुत कम होता है। इनका निर्माण आन्तरिक हलचलों से होता है तथा इसकी औसत सागर तल से ऊँचाई 2000 मीटर से 3000 मीटर होती है।

पर्वत निर्माण के कारण (Factors) :

  1. मलवे का सागर की तलहटी में जमा होना।
  2. भू हलचल के द्वारा पर्वत निर्माणकारी गति (Orogenic Movement) का सक्रिय होना।
  3. भू-पृष्ठ पर बलन एवं भंश का निर्माण होना।

प्रश्न 20.
पठार किसे कहते हैं ? पठारों के निर्माण के लिए किन्हीं तीन कारकों का उल्लेख करें?
उत्तर :
पठार (Plateau) : पठार धरातल का विस्तृत ऊँचा भू-खण्ड है, जो समुद्रतट से एकदम ऊँचा उठ गया है। पठार का शीर्ष लगभग सपाट होता है। इसके किनारे खड़े ढाल वाले होते हैं । पठारो के शीर्ष का क्षेत्रफल आधार से अधिक होता है। कुछ पठारों का संस्तर कभी-कभी हुका हुआ रहता है।
पठारों के निर्माण के कारक (Factors) :

  1. उच्च-ऊँचाई – साधारणतया एक पठार की ऊँचाई अधिक होती है।
  2. क्षैतिज चट्टान स्तर – पठारों में उँचाई के साथ क्षैतिज चट्टान स्तर होता है।
  3. भू हलचल एवं धरातल का उठना।
  4. ज्वालामुखी क्रिया एवं संग्रहण के कारण पठार का निर्माण आदि।
  5. ऊँचे उठे भू-भाग का अपरदन के कारको द्वारा विखण्डित होना।

प्रश्न 21.
उदाहरण सहित किन्हीं तीन प्रकार के पर्वतों का उल्लेख कीजिए?
उत्तर :

  1. वलित पर्वत (Fold Mountains) : हिमालय, आल्पस, काकेशस, एण्डीज, पेरेनीज आदि।
  2. भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountain) : वास्जेज एवं ब्लैक फारेस्ट, साल्टरेंज आदि।
  3. ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountain) : फ्यूजियामा, एकांकागुआ, कोटोपैक्सी आदि।

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प्रश्न 22.
विभिन्न प्रकार के मैदानों के निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन करो।
उत्तर :

  1. नदियों के द्वारा मलवे का घाटी में जमाव।
  2. समुद्र का शान्त एवं उथला होना जिसमें मुहाने पर डेल्टा का जमाव।
  3. नदी द्वारा उच्च भू-भाग को काटकर समप्राय भू-भाग में बदलना।
  4. भू-हलचल द्वारा तटीय भागों का नीचा होना एवं उठना।
  5. भू-गर्भ जल तथा चूने प्रदेश का घोलीकरण आदि।
  6. मैदानों की उत्पत्ति पूथ्वी की आन्तरिक शक्तियों (भूकम्प, ज्वालामुखी) और बाद्य शक्तियों जैसे अपरदन और निक्षेपण से होता है।

प्रश्न 23.
उत्पत्ति के आधार पर मैदान का वर्णन करें।
उत्तर :
उत्पत्ति के आधार पर मैदनों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. संरचनात्मक मैदान (Structural Plains) महाद्वीप निमग्न से ऊपर उठे मैदान।
  2. अपरदनजनित मैदान (Erosional Plains)
  3. निक्षेपण जनति मैदान (Depositional Plains)

अपरदन जनित मैदान को चार भागों में बाँटा गया है –

  • समपाय मैदान (Pene Plain)
  • कार्स्ट मैदान (Karst Plain)
  • हिमानी अपरदित मैदान (Glacial erosion plain)
  • मरूस्थलीय मैदान (Desert Plain)

निक्षेपण जनित मैदान को पाँच भागों में बाँटा जा सकता है –

  • जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain)
  • अपोढ़ मैदान (Drift Plain)
  • सरोवरी मैदान (Lacustrine Plain)
  • समुद्रतटीय मेदान (Coastal Plain by Deposition)
  • लोयस मैदान (Loess Plain)

प्रश्न 24.
कटाव द्वारा निर्मित तीन पर्वतों का वर्णन करें।
उत्तर :
कटाव की प्रक्रिया द्वारा निर्मित अवशिष्ट पर्वतों को तीन भागों में बाँटा गया है-
(a) बुटी (Buttes) : बुटी का निर्माण मेसा (Mesa) के अपरदन द्वारा होता है। यह मरूभूमि में पाया जाता है, इसका सिरा क्ठोर चट्टानों से निर्मित चौरस होता है।
(b) इन्सेलबर्ग (Inselberg) : इन्सेलबर्ग खड़े ढालों वाली पहाड़ियाँ हैं। इन्सेलबर्ग नदियों के अपरदन से निर्मित उपर उठे विस्तृत क्षेत्र हैं। ये अवशिष्ट पर्वत का ही एक रूप है।
(c) मोनाडॉक (Monadnock) : सममाय मैदान में कठोर चट्टानों से निर्मित छोटे-छोटे गुम्बदाकार टीलों को मोनाडॉक कहते हैं। इनका निर्माण नदियो के अपरदन से होता है।

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प्रश्न 25.
ज्वालामुखी पर्वत एवं अवशिष्ट पर्वत में अंतर लिखों।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत :

  1. ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण जमाव की प्रक्रिया से होता है।
  2. ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाले मलवे राख, धूल, मैग्मा आदि के जमाव से होता है।
  3. ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण कम समय में होता है।

अवशिष्ट पर्वत :

  1. अवशिष्ट पर्वत का निर्माण अपरदन की क्रिया द्वारा होता है।
  2. अवशिष्ट पर्वत का निर्माण अपरदन एवं अपक्षय के कारको द्वारा होता है।
  3. अवशिष्ट पर्वत के निर्माण में लम्बा समय लगता है।

प्रश्न 26.
मैदानों की विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर :
मैदानों की विशेषताएँ (Characteristics of Plains) :- मैदान की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. मैदान में जहाँ-तहाँ टीले पाये जाते है और इनका ढाल क्रमिक होता है।
  2. मैदान का धरातल विस्तृत, समतल एवं लहरदार होता है।
  3. मैदान में प्राय: मुलायम मिट्टी का आवरण मिलता है।
  4. मैदान का जमाव प्राय: एक ही प्रकार की मिट्टी से होता है।
  5. सामान्यत: समुद्र तल से मैदानों की औसत ऊँचाई 150 मीटर होती है।
  6. मैदानों के निर्माण में भिन्नता पायी जाती है।

प्रश्न 27.
ज्वालामुखी पर्वत की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत की विशेषताएँ (Characteristics of Volcanic Mountain) :

  1. ये पर्वत शंक्वाकार (Conical Shaped) होते हैं।
  2. इन पर्वतों का ऊपरी भाग कीप की भाँति होता है जिसे Crater कहते हैं।
  3. ये पर्वत बहुत जल्दी ऊँचे हो जाते हैं।
  4. प्रधानत: प्रशान्त महासागर के तटीय भाग एवं समुद्री शैल शिराओं के ऊपरी भाग में ये पर्वत दिखाई पड़ते हैं।
  5. ऐसे पर्वतों की आकृति प्राय: त्रिभुज की तरह होती है।
  6. भू-गर्भ से निकलने वाले तरल लावा के बाहर आकर जमने के बाद ऐसे पर्वत का निर्माण होता है।

प्रश्न 28.
अवशिष्ट पर्वत की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत की विशेषताएँ (Characteristics of Relict or Residual Mountain :

  1. इन पर्वतों का ऊपरी हिस्सा घर्षण के कारण चपटा होता है।
  2. इस प्रकार के पर्वत पुराने पर्वतों के घर्षण से बने होते हैं।
  3. इन पर्वतों की ऊँचाई और ढाल अधिक नहीं होता है।
  4. इनका ऊपरी हिस्सा समतल या ऊबड़-खाबड़ होता है।
  5. इनका निर्माण बाह्य अपरदनकारी शक्तियों (पवन, वर्षा, ताप, पाला) के क्रिया से होता है।

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प्रश्न 29.
पठारों की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर :
पठारों की निम्नलिखित विशेषताएँ होती है :

  1. सामान्यत: पठारों की सागर-तल से ऊँचाई 300 से 1000 मीटर तक होती है।
  2. पठार सागर-तल या अपने आसपास की भूमि से कम से कम एक ओर से खड़े ढाल द्वारा अलग होते है।
  3. इनकी धरातल मेज की भाँति विस्तृत होता है। इनमें चोटियाँ नहीं होती है।
  4. इनका धरातल मैदानों की भाँति बिल्कुल समतल न होकर कुछ उबड़-खाबड़ होता है।
  5. इनके ऊपरी भाग का क्षेत्रफल आधार की अपेक्षा कुछ कम रहता है।
  6. ये पृथ्वी के अति माचीन भाग हैं ।
  7. इनमें प्राय: कठोर चट्टानें मिलती है।

प्रश्न 30.
पर्वत और पठार में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर :
पर्वत (Mountain) :

  1. ये सागर तल या अपने आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचे उठे होते हैं।
  2. इनका शिखर नुकीला होता है।
  3. इनमें प्राय: नवीन एवं कम कठोर चट्टानें पायी जाती हैं ।
  4. पर्वत पर तापक्रम काफी कम रहता है।
  5. इनके चारों ओर का ढाल तीव्र होता है।
  6. ये अनुपजाऊ एवं कृषि के अयोग्य होते हैं ।

पठार (Plateau) :

  1. ये अपने समीप के घरातल से अपेक्षाकृत कम ऊंचे उठे होते हैं
  2. इनका शिखर चौरस होता है।
  3. इनमें अत्यन्त प्राचीन एवं कठोर चट्टाने पायी जाती हैं।
  4. पठारों पर तापक्रम पर्वतों से अधिक होता है।
  5. इनमे कम से कम एक ओर का ढाल खड़ा होता है।
  6. ये अपेक्षाकृत् उपयुक्त होते हैं।

प्रश्न 31.
पठार और मैदान में अंतर लिखिए ।
उत्तर :
पठार (Plateau) :

  1. ये मैदानों की अपेक्षा कम उपजाऊ होते है।
  2. इन पर जनसंख्या का घनत्व कम पाया जाता है।
  3. इनका शिखर विस्तृत होता है।
  4. इस पर खनिज पदार्थ अधिक मात्रा में पाया जाता है।
  5. पठारों पर तापक्रम कम रहता है।
  6. इनका धरातल उबड़-खाबड़ होता है।

मैदान (Plain) :

  1. ये उपजाऊ तथा कृषि के योग्य होते हैं।
  2. इन पर जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है।
  3. इनका धरातल विस्तृत होता है।
  4. मैदानी भागों में खनिज पदार्थो का प्राय: अभाव रहता है।
  5. मैदानो पर तापक्रम अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
  6. इनका धरातल समतल होता है।

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प्रश्न 32.
मैदानी भागों में घनी जनसंख्या क्यों पायी जाती है ?
उत्तर :
मैदानी भागों में कृषि की सुविधा, उद्योग-धन्धों का विकास, यातायात के साधनों का विकास एवं अन्य जीवनपयोगी वस्तुओं की सुविधा के कारण जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 33.
पर्वत नदियों के उद्गम स्थल होते हैं। कैसे?
उत्तर :
अधिकांश नदियाँ पहाड़ों से निकलती हैं । ऊँचे पहड़ों पर अधिक वर्षा तथा हिम के पिघलने से निरन्तर जल प्राप्त होता रहता है। अत: यहाँ से सदावाहिनी नदियों की उत्पत्ति होती है। ये नदियाँ उपजाऊ मैदानों का निर्माण करती हैं। इनसे सिंचाई भी की जाती है।

प्रश्न 34.
पर्वतीय भागों में होटल व्यवसाय का विकास क्यों हुआ है ?
उत्तर :
ऊँचाई के कारण गर्मी में भी पहाड़ी स्थान ठण्डे बने रहते हैं। अत: गर्मी में मैदानी भाग की गर्मी से बचने तथा स्वास्थ्य लाभ करने के लिए अमीर लोग पहाड़ी स्थानों पर चले जाते हैं। हिमालय पर शिमला, नैनीताल, मंसूरी, दार्जिलिंग आदि स्वास्थ्यवर्द्धक स्थान हैं। पहाड़ का दृश्य मनोरम एवं आकर्षक होता है। अत: ये पर्यटन के केन्द्र होते है, जहाँ होटल व्यवसाय का विकास हो जाता है।

प्रश्न 35.
नवीन मोड़दार पर्वतों के शिखर हिमाच्छादित ही रहते हैं।
उत्तर :
नवीन मोड़दार पर्वत टर्शियरी युगीन अल्पाइन पर्वत वर्ग में आते हैं। रॉकी, एण्डीज, आल्स, हिमालय आदि इसके उदाहरण हैं। इन पर्वतों में पर्वत वर्ग, पर्वत तंत्र, श्रेणियाँ, कटक, शिखरें पायी जाती हैं। अधिक ऊँचाई के कारण ये सदैव हिमाच्छादित रहते हैं।

प्रश्न 36.
पर्वतीय भाग आर्थिक क्रिया में विकसित क्यों नहीं होते ?
उत्तर :
असमतल एवं अनुपजाउ भूमि होने से पर्वतीय भाग कृषि के योग्य नहीं होते, कहीं-कहीं पर्वतीय ढाल पर सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती की जाती है। दूसरी ओर यहाँ कच्चे माल एवं यतायात के साधनों की कमी के कारण आर्थिक विकास नहीं हो पाया है। यही कारण है कि पर्वतीय भाग आर्थिक दृष्टि के विकसित नहीं होते हैं।

प्रश्न 37.
मैदानी भाग आर्धिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों होते हैं ?
उत्तर :
मैदानी भागों कीमिट्टी समतल, कोमल एवं उपजाऊ होता है। यहाँ सिंचाई की पर्याप्त सुविधा होती है। साथ ही साथ कच्चे माल की सुविधा, यातायात के साधन की सुलभता आदि सुविधा के कारण मैदानी भाग आर्थिक रूप से काफी विकसित होते हैं।

प्रश्न 38.
भंश या दरार क्या है?
उत्तर :
भ्रंश या दरार (Fault) : पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण जब किसी मैदान या पठार की चट्टानों पर दो विपरीत दिशाओ से दबाव या तनाव पड़ता है, तो कभी-कभी चट्टाने मुड़ने के बजाय टूट जाती हैं और उनमें दरारें पड़ जाती हैं, इन्ही दरारों को भंश कहते हैं।

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प्रश्न 39.
भू-आकृतिक देहली से क्या समझते हो?
उत्तर :
भू-आकृतिक विज्ञान में वह स्थल या बिन्दु जहाँ बाह्य प्रभावी कारकों में परिवर्तन के अभाव में अथवा बाह्म प्रभावी कारकों में प्रगामी परिवर्तनों द्वारा स्थलरूपों में एकाएक महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है, उसें भू-आकृतिक देहली (Geomorphic Threshold) कहते हैं।

प्रश्न 40.
विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में निवास करती है क्यों?
उत्तर :
निम्नलिखित कारणों से विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में निवास करती हैं –

  1. कृषि क्षेत्र के लिए मैदान सबसे उपयुक्त भू-आकृतिक है। नदियों द्वारा निर्मित मैदान संसार में सबसे अधिक उपजाऊ होते हैं।
  2. मैदानों में वर्ष भर जल की उपलब्थता रहती है। यहाँ भूमित जल का दोहन भी बड़ी सरलता से हो जाता है।
  3. मैदानों में यातायात की सुविधा रहती है। समतल भूमि होने के कारण सड़कों आदि का निर्माण करना आसान होता है।
  4. नहरों का निर्माण मैदानी भागों में ही संभव है।
  5. आवास की दृष्टि से मैदानी भाग सबसे अनुकूल होते हैं।

प्रश्न 41.
बाढ़ के मैदान और डेल्टाई मैदान में क्या अन्तर है?
उत्तर :

बाढ़ के मैदान (Flood Plain) डेल्टाई मैदान (Delta Plain)
i. इसमें मिट्टी के महीन कण मिलते है। i. इनमें मिट्टी के कण बहुत ही महीन होते हैं।
ii. इनमें दलदली भाग नहीं मिलते। ii. इसमें दलदली भाग मिलते हैं।
iii. इस भाग में धान, गेहूँ, दलहन, तिलहन आदि पैदा होते हैं। iii. इस भाग में नारियल एवं जूट की उपज होती है।
iv. ये सागर तल से ऊँचे उठे रहते हैं। iv. ये सागर तल से बहुत कम ऊँचे उठे होते हैं।
v. इनका निर्माण नदी के मध्य भाग में होता है। v. इनका निर्माण नदी के मुहाने के पास होता है।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
भू-पटल पर परिवर्तन लाने वाले शक्तियों के बारे में उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी की सृष्टि के बाद से अब तक धरातल का स्वरूप हमेशा बदलता रहा है। भू-पटल पर जैसे ही कोई भूभाग ऊँचा उठता है वैसे ही परिवर्तन की शक्तियाँ उसे समतल करने में जुट जाती है। भू-गर्भिक अर्थात् आन्तरकि शक्ति (Internal Forces) धरातल पर विभिन्न स्वरूपों की जन्म देती है और बाहरी शक्तियाँ (External Forces) इन स्वरूपों का क्षय करने में लगी रहती है। इस तरह धरातल पर परिवर्तन लाने वाली शक्तियों को दो भागों में बाटाँ जा सकता है –
(i) आन्तरिक शक्तियाँ (Internal forces or Endogenetic Forces or Tectonic Forces)
(ii) बाह्य शक्तियाँ (External Forces or Exogenetic Forces or Grandational Force)

(i) आन्तरिक शक्तियाँ (Internal or Endogenetic Forces) : ये शक्तियाँ भू-गर्भ में हमेशा परिवर्तन करने में लगी रहती है। ये शक्तियाँ तीव्र गीत से कार्य करती है। भू-गर्भ में विभिन्न प्रकार के खनिज तत्व तथा रेडियम का प्रभाव डालने वाले तत्व (Redioactive Elements) के ताप के कारण चट्टानें पिघल जाती हैं। इन पिघले पदार्थो का भूपटल पर ऊपर आने के प्रयास के फलस्वरूप ज्वालमुखी के उद्गार तथा भूकम्प आते हैं। इन भू-पटल निर्माणकारी शक्तियों से पर्वत, पठार, झील एवं सागर आदि का निर्माण होता है। ये शक्तियाँ धरातल को ऊँचा-नीचा बनाने में लगी रहती है। इनमें भू-कम्प एवं ज्वलामुखी प्रधान है।

(ii) बाह्य शक्तियाँ (External or Erogenetic Forces) : ये शक्तियाँ धरातल के ऊपरी आवरण को परिवर्तित करने का कार्य करती है। इनका कार्य भू-गर्भ के हलचलों के फलस्वरूप बने धरातल के विभिन्न स्वरूपों को नष्ट करना है। बाह्म शक्तियाँ मंद गति से कार्य करती हैं। ये निरतर

परिवर्तन के कार्य में लगी रहती है। ये शक्तियाँ दो प्रकार की है –
(a) स्थिर शक्तियाँ (Static Forces) तथा
(b) गतिशील शक्तियाँ (Dynamic or mobile force)

(a) स्थिर शक्तियाँ (Static Forces) : ये शक्तियाँ अपने स्थान पर ही कार्यशील रहती है और चट्टानों को नोड़फोड़ कर अथवा मुलायम या ढीला बनाकर उन्हें हटाये जाने योग्य बना देती है। स्थिर शक्तियों के कृरणों में वर्षा, ताप, हिम आदि हैं। इनके द्वारा चट्टानों में परितर्वन होता है। मगर उनमें गति नहीं होती। चट्टाने खण्ड खण्ड हो जाती है। और प्राय: वही पड़ी रहती हैं। इन शक्तियों को ऋतु अपक्षय कहा जाता है। इस क्रिया में तापान्तर, वर्षा, पाला आदि की भूमिका रहती है।

(b) गतिशील शक्तियाँ (Mobile Force) : ये शक्तियाँ एक ही स्थान पर स्थिर नहीं रहती। ये गतिशील होती है। ये शक्तियाँ स्थिर शक्तियों द्वारा जोड़ी गयी चट्टानों को बहाकर ले जाती है, और उन्हें दूसरे स्थान पर जमा कर देती है। गतिशील शक्तियों में बहता हुआ जल, हवा, हिमनद तथा भू-गर्भित जल प्रमुख है। इस वर्ग की शक्तियों का अपरदन, अपक्षरण अथवा आवरण क्षय कहा जाता है। इन शक्तियों से भू-पटल पर कहीं तोड़-फोड़ और कहीं भू-रचना का कार्य होता रहता है जिससे अनेक नये भू-आकार बन जाते हैं।

बाह्य शक्तियों में अपक्षय तथा अपरदन आते हैं। अपक्षय के अंन्तर्गत स्थिर शक्तियाँ है। ये स्थिर शक्तियाँ सूर्यताप, वर्षा, पाला, पेड़, पौधे, जीव-जन्तु, मनुष्य हैं। Erosion के अन्तर्गत गतिशील शक्तियों (Mobile Forces) में बहता हुआ जल, हवा, हिमनद, समुद्र तथा भूमित जल प्रमुख है।

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प्रश्न 2.
पहाड़ क्या है? पहाड़ के भागों का नाम लिखिए।
उत्तर :
स्थल का वह भू-भाग जो अपने आस-पस के क्षेत्र से कम-से-कम 600 मीटर से अधिक ऊँचा हो और जिसका शीर्ष चोटीनुमा तथा पृष्ठ तीव ढाल युक्त हो, प्रव्वत कहलाता है।
पर्वत के निम्नलिखित भाग होते हैं –
(i) पर्वत कटक (Mountain Ridge) : सँकरे एवं ऊँचे पहाड़ी क्रम को ‘पर्वत कटक’ कहते हैं। ये आकार में लम्बे तथा सँकरे होते हैं। अल्पेशियन का ब्लू रिज पर्वत कटक का उदाहरण है।
(ii) पर्वत-श्रेणी (Mountain Range) : पहाड़ों तथा पहाड़ियों के क्रम के क्रम को ‘पर्वत श्रेणियाँ’ कहते हैं। जिनमें कई कटक, शिखर तथा घाटियाँ होती हैं। हिमालय को पर्वत श्रेणियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
(iii) पर्वत शृंखला (Mountain Chain) : इसे पर्वत माला भी कहते हैं। जब विभिन्न प्रकार से निर्मित लम्बे तथा संकरे पर्वतों का विस्तार समानान्तर रूप में पाया जाता है, तब उसे पर्वत श्रृंखला कहा जाता है। अल्यूशियन पर्वतमाला इसका प्रमुख उदाहरण है।
(iv) पर्वत तंत्र (Mountain System) : एक ही युग में निर्मित विभिन्न पर्वत श्रेणियों के समूह को पर्वत-तंत्र कहते हैं। अल्पेशियन पर्वत, पर्वत समूह का सबसे उत्तम उदाहरण है।
(v) पर्वत वर्ग (Mountain Group) : पर्वत-वर्ग को पर्वत समुदाय भी कहा जाता है। पर्वत-वर्ग में साधारणतया कटक एवं श्रेणियाँ गोलाकार रूप में पायी जाती हैं।
(vi) पर्वत-समूह (Cordillera) : पर्वत वर्ग को पर्वत समूह अथवा पर्वत प्रदेश कहा जाता है। पर्वत प्रदेश में विभिन्न युगों में भिन्न प्रकार से निर्मित पर्वत श्रेणियाँ (Range), पर्वत तंत्र (Systems) तथा श्वृखलाएँ (Chains) पायी जाती हैं । उत्तरी अमेरिका के प्रशान्त तटीय पर्वतीय भाग पर्वत प्रदेश या पर्वत समूह का प्रमुख उदाहरण है। इसे प्रशान्त कार्डिलेरा कहते है।
(vii) पर्वत शिखर (Mountain Peak) : किसी पहाड़ अथवा पहाड़ी चोटी (सर्वोच्च नुकीला भाग) जो पर्वत श्रेणी के अन्य भागों तथा आस-पास के प्रदेश से अधिक ऊँचा होती है उसे पर्वत शिखर कहते हैं। यह सुई की तरह नुकीला तथा सींग (Horn) के तरह होता है।
(viii) एकल पर्वत (Isolated Mountains) : इस प्रकार के पर्वतों की उत्पत्ति ज्वालामुखी के विस्फोट अथवा अत्यधिक विस्तृत अपरदन के कारण होती है। ये अपवादर व रूप पाये जाते हैं जैसे गुजरात की चाँदुआ पहाड़ी।

प्रश्न 3.
उत्पत्ति के आधार पर पर्वतों के भेद उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
उत्पत्ति के आधार पर पर्वतों के भेद निम्नलिखित हैं –
वलित पर्वत (Fold Mountain) : जब चट्टानों में पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों द्वारा मोड़ या वलन पड़ जाते हैं। तो उसे मोड़दार पर्वत कहते हैं। वलित पर्वत विश्व के सबसे ऊँचे तथा सर्वाधिक विस्तृत पर्वते हैं जिनका विस्तार प्राय: हर महाद्वीपों में पाया जाता है। हिमालय, अल्पाइन पर्वत समूह, रॉकीज, एटलस आदि ऐसे ही पर्वत है। इनकी उत्पत्ति प्राचीन काल में महासागर में जमे अवसादों से हुई हैं।

ब्लॉक अथवा भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountain) : इस पर्वत को अवरोधी पर्वत भी कहते हैं। इनका निर्माण तनाव या खिंचाव की शक्तियों द्वारा होता है। खिंचाव के कारण धरातलीय भागों में दरारें या अंश पड़ जाती है जिस कारण धरातल का कुछ भाग ऊपर उठ जाता है तथा कुछ भाग नीचे घँस जाता है। इस प्रकार दरारों के समीप ऊँचे उठे भाग को ब्लॉक पर्वत कहा जाता है। ब्लॉक पर्वत दो समानान्तर दरारों के मध्य में स्थित होते हैं जिनका आकार मेज की तरह होता है। सतपुड़ा, वासजेज तथा ब्लैक फॉरेस्ट इसका उदाहरण है। इसी प्रकार के पर्वत पाकिस्तान में साल्ट रेंज, यू०एस०ए० में सियरा नेवादा, फ्रांस में वासजेस हैं।

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संग्रहित पर्वत (Mountain of Accumulation) : धरातल के ऊपर मिट्टी, मलवा, लावा इत्यादि के निरन्तर जमा होते रहने से निर्मित पर्वतों को संग्रहित पर्वत कहते हैं। ज्वालामुखी के उद्गार से विस्तृत लावा, विखण्डित पदार्थ तथा राखचूर्ण आदि के क्रमबद्ध अथवा असम्बद्ध संग्रह के फलस्वरूप ऐसे पर्वतों का निर्माण होता है। इन्हें ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountain) भी कहा जाता है। ज्वालामुखी के उद्गार के समय जो लावा आदि पदार्थ बाहर निकलता है वह मुख के चारों ओर शंकु के आकार में जमा हो जाता है। धीरे- धीरे ज्वालामुखी शंकु ऊँचा उठकर पर्वत बन जाता है। पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में रास्ता हुड तथा रेनियर, फिलीपाइन्स में मचान तथा जापान में फ्यूजीयामा इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

गुम्बदाकार पर्वत (Donce Shaped Mountain) : जब पुथ्वी के भीतर का लावा बाहर निकलने की चेष्टा करता है तो वह धरातल की परतों में फोड़े की तरह उभार पैदा कर देता है जिससे गुम्बदाकार पर्वत का निर्माण हो जाता है। ये पर्वत केन्द्र से बाहर की ओर समान रूप से ढाल वाले होते हैं। उत्तरी अमेरिका के ऊटा राज्य का हेनरी पर्वत इसका उदाहरण है।

अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain) : अपरदन की शक्तियों द्वारा प्रारभिक पर्वत कटकर नीचे हो जाते हैं तथा उनका अवशिष्ट या शेष अवरोधक भाग दिखाई पड़ने लगता है। इनका निर्माण अन्य प्रकार के पर्ततों पर अत्यधिक अपरदन होने से होता है, अतः इन्हें घर्षित पर्वत (Circum rosional) या अवशिष्ट पर्वत (Residual mountain) भी कहा जाता है। भारत के विन्ध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, महादेव, पश्चिमी घाट तथा पूर्वी घाट पहाड़, पारसनाथ आदि अवशिष्ट पर्वत के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 4.
पर्वत के महत्व को लिखिए।
उत्तर :
पर्वतों का महत्त्व निम्नलिखित है –
(i) जलवायु प्रभाव – पर्वत किसी देश की जलवायु को प्रभावित करता है। पर्वत के सामने वाले भाग में वर्षा होती है। परन्तु विपरीत भाग वृष्टि छाया में पड़ जाता है। इन प्रदेशों का तापमान निम्न रहता है, मनोरम जलवायु लोगों को आकर्षित करती हैं।
(ii) सीमा का निर्धारण – दो देशों के बीच सीमा बनाने में पर्वत सहयोग देते हैं। परिनीज पर्वत फ्रांस के बीच सीमा बनाता है। इसी प्रकार हिमालय पर्वत भी मध्य एशिया के बीच सीमा बनाता है।
(iii) शरण देना – संसार की कई आदिवासी एवं जनजातियाँ पहाड़ी भागों में रहती है।
(iv) यातायात में बाधक – पहाड़ी मार्ग कठिन होते है। यातायात में इनसे बाधा पड़ती हैं।
(v) चट्टानों की प्राप्ति – पर्वतीय भाग में चट्टाने मिलती हैं जिनसे घर बनाये जाते हैं।
(vi) जड़ी-बुटियों की प्राप्ति- पर्वतीय भाग से जड़ी-बूटियाँ मिलती हैं जिनसे लोगों का कल्याण होता है।
(vii) खनिजों की प्राप्ति- पर्वत से अनेक प्रकार के खनिज मिलते हैं। रॉकी पर्वत में पेट्रोल तथा कोयला मिलता है। एण्डीज पर्वत में सोना, चाँदी, ताँबा आदि पाया जाता है।
(viii) स्वाथ्यवर्द्धक स्थान – पर्वतों पर अनेक स्वास्थ्यवर्द्धक केन्द्र स्थापित हैं। वहाँ लोग अपना स्वास्थ्य सुधारने के लिए जाते हैं। स्विटजरलैण्ड, कश्मीर आदि इसके अच्छे उदाहरण हैं।
(ix) चारागाह – पर्वतों पर अच्छे चारागाह पाये जाते हैं। वहाँ पशुपालन होता है। पशुओं से दूध तथा ऊन प्राप्त होता है।
(x) हिमागार की प्राप्ति – पर्वतों पर स्थित हिमागार से निकलने वाली नदियाँ वर्षभर जलपूर्ण रहती हैं। ऐसी नदियों से मैदानी भाग में सिंचाई का काम होता-है। पर्वतों पर झरने एवं जल प्रपात भी पाये जाते हैं जिससे बिजली तैयार होती है जो उद्योग-धंधों में सहायक होती है।
(xi) खेती के योग्य ढाल – पहाड़ी ढालों पर चाय एवं कहवा की खेती होती है।
(x) जंगलों का पाया जाना – पहाड़ी भागों में भिन्न-भिन्न प्रकार के जंगल मिलते हैं। जंगलों से हमें लकड़ियाँ, लाख, गोंद आदि अनेक चीजे मिलती है। जंगलों से लकड़ी उद्योग तथा तत्सम्बन्धी अन्य उद्योग-धन्धों को कच्चा माल प्राप्त होता है।

प्रश्न 5.
बलित पर्वत की परिभाषा लिखिए। वलित पर्वत की उत्पत्ति का वर्णन चित्रानुसार कीजिए।
उत्तर :
वलित पर्वत (Fold Mountain) – जब चट्टानों में पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों द्वारा मोड़ या वलन पड़ जाते हैं, उसे मोड़दार या वलित पर्वत कहते हैं! वलित पर्वत विश्व के सबसे ऊँचे तथा सर्वाधिक विस्तृत पर्वत है जिनका विस्तार प्राय: हर महाद्वीप में पाया जाता है। हिमालय, रॉकीज, एटलस ऐसे ही पर्वत हैं।
मोड़दार पर्वत का निर्माण – मोड़दार पर्वतों का निर्माण पूर्व भू-अभिनति या भू सन्नति (Geasynclins) से हुआ है। भू-सन्नति या अभिनति छिछले एवं संकरे किन्तु लम्बे समुद्र को कहते हैं। जहाँ पर नदियों द्वारा लाया गया तलछट जमा किया जाता है।

भू सन्नतियों के विकास की तीन अवस्थायें होती हैं और ये तीन अवस्थायें ही मोड़दार पर्वतों के विकास की भी अवस्थाये हैशैल जनन अवस्था – भूसन्नति का निर्माण मलना का निर्माण होता है। सर्वप्रथम भूसन्नति के निर्माण के बाद समीपवर्ती उच्च स्थलीय भागों से नदियाँ अवसादों को ला-ला कर इसमें जमा करती जाती हैं। अत: भूसन्नति की तली में घंसाव होने लगता है, परन्तु विशेष बात यह है कि जमाव एवं धंसाव में ऐसा अनुपात होता है कि जल की गहराई अधिक नहीं हो पाती है। फलत: सागर छिछला ही बना रहता है।

पर्वत निर्माण अवस्था – पर्वतों के निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया शुरू होती है। दरअसल लगातार निक्षेपण की वजह से भू संचलन प्रारम्भ हो जाता है। भूसंचलन के कारण पार्श्व भाग पर क्षैतिज दबाव पड़ने लगता है। जिसे परतदार चट्टानों को मोड़ पड़ने लगते हैं। दबाव की शक्ति किनारे पर ज्यादा पड़ती है, अत: दोनों किनारों की चट्टाने मुड़ जाती हैं। परन्तु बीच का भाग अप्रभावित रहता है। इसे मध्य पिण्ड (Median mass) कहा जाता है। हिमालय एवं क्युनलुन के मध्य तिब्बत का पठार ऐसा ही मध्य पिण्ड है।

विकास अवस्था – इसमें पर्वतों का उत्थान जारी रहता है और अत्यधिक ऊच्चाई प्राप्त कर लेता है। इस अवस्था में अपरदनकारी शक्तियाँ भी सक्रिय हो जाती है जिससे धरातलीय विषमताओं के वृद्धि होने लगती है और एक बार पुन: अवस्था उत्पन्न हो जाती है। भूसंतुलन को पुन: व्यवस्थित करने हेतु पर्वत और भी ऊँचे उठ जाते हैं। यह क्रिया लम्बे समय तक चलती रहती है और पर्वतो की ऊँचाई बढ़ती जाती है। ऐसा अनुमान है कि हिमालय में आज भी उत्थान हो रहा है और यह प्रतिवर्ष 5c.m. की दर से ऊँच्म उठ रहा है।

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प्रश्न 6.
प्लेट टेक टोनिक सिद्धांत के आधार पर मोड़दार पर्वत के निर्माण पर निबंध लिखिए।
उत्तर :
‘पर्वत निर्माण भूसन्नति सिद्धांत’ – पर्वत निर्माण सम्बन्धी समस्याओ ने भूसन्नति सिद्धांत का प्रतिपादन किया। वह एक जर्मन भूगर्भ शास्त्री थे, जिन्होंने बताया कि पर्वतो की उत्पत्ति भूसन्निति के गर्भ में होती है। उनकी मान्यता थी कि मोड़दार पर्वत का निर्माण धरातल के संकुचन का परिणाम है। कोबर सिद्धांत निम्नलिखित तीन मान्यताओं पर आधारित है।
1. पर्वतों की उस्पत्ति एक भूसन्नति या छिछली सागर में होती है।
2. इस भूसन्नति से नदियों द्वारा अनवरत मलवा निक्षेपण होता रहा और उसमें धंसान भी हुआ।
3. तीसरी मान्यता है कि भूसन्नति में होने वाले अबतलन से चट्टानों में संकुचन हुआ और इस संकुचन से भूसन्नति में निक्षेपित मलवे मुड़कर मोड़दार पर्वत के रूप में परिवर्तित हुए।

वस्तुत: भूसन्नति का मलवा ही मोड़दार पर्वत के रूप में उत्थित होगा परन्तु सभी मलवों में मोड़ नहीं पड़ता है। भूसन्नति के दोनों किनारे वाले मलवे सबसे पहले मुड़कर पर्वत बनते हैं, बीच में स्थित मलवा बिना मुड़े ऊपर उठ जायेगा जिसे मध्य पिंड कहते हैं। तिब्बत के हंगर का मैदान ऐसे ही मध्य पिंड का उदाहरण है।

कोबर का पर्वत निर्माणकारी सिद्धांत तीन अवस्थाओं में पूर्ण होता है जो वस्तुतः भूसन्नति की ही अवस्था है।

1. भूसन्नति में निक्षेप की अवस्था
2. पर्वत निर्माण की अवस्था
3. विकास की अवस्था

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प्रारम्भिक अवस्था में भूसन्नति के अन्तर्गत मलवे का निक्षेप होता है और निक्षेपित मलवे को दाब से स्थानीय चट्टानों में सिकुड़न आती है। इसी से वास्तविक पर्वत का निर्माण शुरू होता है। सिकुड़न से निक्षेपित परतदार चट्टानों पर दबाव होता है। इससे मोड़ पड़ता है। मोड़ का क्रिया दोनों किनारों पर सर्वाधिक होती है और बीच का भाग क्षैतिज रूप से ऊपर आ जाता है। तीसरी अवस्था में असंतुलन स्थापित हो जाता है और इस क्रिया में कहीं उत्थान और कहीं अवतलन होता है और अन्तत: संतुलन स्थापित हो जाता है।

यह सिद्धांत विश्वव्यापी महत्व रखता है। यह मोड़दार पर्वतों की भौतिक आकृति का सही विश्लेषण करता है। जैसे इस सिद्धांत के अनुसार दो मोड़दार पर्वत के बीच एक पठार होगा। इसी के अनुरूप हिमालय एवं क्युनलुन के मध्य तिब्यत पठार स्थित है।

यद्यपि यह सिद्धान्त हिमालय की उत्पत्ति को तो स्पष्ट करता है पर रॉकी एवं एण्डीज पर्वतों की व्याख्या इससे नहीं हो पाती। वर्तमान में वह सिद्धांत जो सबसे ज्यादा विश्वसनीय एवं तार्किक है, वह है प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत जिससे लगभग सभी कालों के सभी प्रकार के पर्वतों की व्याख्या हो जाती है।

प्रश्न 7.
गुटका पर्वत की परिभाषा लिखिए। गुटका पर्वत के निर्माण को चित्रानुसार समझाइए।
उत्तर :
गुटका पर्वत या अवरोधी पर्वत या भ्रंशोत्थ पर्वत (Block mountain or Horst) ; दो समानान्तर भंशो के बीच के भू-खण्ड के ऊपर उठ जाने से अथवा दो समानान्तर भ्रशों के बाहरी भू-खंडों के नीचे धँस जाने से निर्मित उच्च भूमि या घर्वत को गुटका पर्वत कहते हैं। इसका आकार मेज के समान होता है जिसका ऊपरी भाग सपाट तथा किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं। ऐसे पर्वतों की उत्पत्ति भ्रंशों के कारण होती है। अतः इन्हें भंशोत्थ पर्वत भी कहा जाता है। जर्मन भाषा में इसे होर्स्ट (Horst) कहते हैं। U.S.A. में वासाय रेंज तथा सियरा नेवादा, यूरोप में वासजेज तथा ल्लैक फॉरेस्ट, पाकिस्तान में साल्ट रेंज इनके उदाहरण हैं। भ्रंशोत्थ के विपरीत दो उठे हुए भागों के मध्य धँसा हुआ भाग अ्रंश घाटी (Rift Valley) कहलाता है।

गुटका का पर्वत का निर्माण (Formation of block mountain) : इस पर्वत के उत्पत्ति के संबंध में दो मत प्रचलित है। (i) भ्रंश सिद्धांत (Fault Theory) – किंग, गिलबर्ट, लूडरबैक, डेविस आदि विद्वानों का मत है कि भ्रंशोत्य पर्वत का निर्माण भू-पटल पर बड़े पैमाने में अंश या दरारें पड़ने के कारण ज्ञात होता है। इन दरारों के सहारे स्थल का एक बड़ा भाग ऊपर या नीचे चला जाता है, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका का ग्रेट बेसिन रेंज।

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(ii) विशेषक अपरदन सिद्धांत (Differential Erosion theory) : जे ई. स्पर महोदय के अनुसार भ्रंशोत्थ पर्वतों का निर्माण अंशन द्वारा नहीं हुआ है। बल्कि ये विशेषक अपरदन (Differential Erosion) का परिणाम है। किन्तु यह मत अधिक मान्य नहीं हैं।
भंश या दरार सिद्धांत के मुताबिक ब्लॉक पर्वतों का निर्माण कई रूपों में होता है।

(a) जब दो समान्य दरारों के बीच का भाग ऊपर उठ जाता है तो ल्लॉक पर्वत का निर्माण होता है। इसमें ऊपर उठे हुए स्थल खण्ड को ही ब्लॉक पर्वत कहा जाता है। इस प्रकार से निर्मित ब्लॉक पर्वत का ऊपरी भाग पठार की तरह सपाट होता है, परन्तु इसके किनारे वाले ढाल तीव्र होते हैं।

(b) जब दरार के निर्माण के समय मध्यवर्ती भाग के दोनों ओर के स्थल खण्ड नीचे की ओर खिसक जाते है तथा मध्यवर्ती भाग अपनी जगह पर स्थित रहता है तो ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है। समीपवर्ती भाग के नीचे धँस जाने से मध्यवर्ती भाग उठा हुआ लगता है, जो कि एक होर्स्ट (Horst) का स्वरूप होता है। ऊँचे पठारी भाग या चौड़े गुम्बदों में इस क्रिया के कारण ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है।

(c) जब धरातल के किसी भाग में दो समानान्तर दरारों के बीच का भाग नीचे की ओर खिसक जाता है तो किनारे वाले भाग ऊपर उठे दिखाई पड़ते हैं। धँसा हुआ भाग भू- भ्रंश घाटी (Rift Valley) कहलाता है, परन्तु किनारे वाले उठे भाग ब्लॉक पर्वत की श्रेणी में रखे जाते हैं।

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प्रश्न 8.
ज्वालामुखी पहाड़ की परिभाषा लिखिए। ज्वालामुखी पर्वत निर्माण का वर्णन चित्रानुसार कीजिए?
उत्तर :
ज्वालामुखी विवर (मुख) के चारों ओर विखंडित शैल पदार्थों तथा लावा के जमाव से निर्मित शंक्वाकार पर्वत, ज्वालामुखी पर्वत कहलाता है।
ज्वालामुखी के विस्फोट से समय भू-गर्भ से निकलने वाला कंकड़-पत्थर, मिट्टी या मैग्मा आदि पदार्थ ज्वलामुखी के अलग-बगल इकट्ठे होकर ऊंचे उठ जाते हैं। इस ऊँचे उठे हुए भू-भाग ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। इसे Mountain of Accumulation or Mountain of Deposition भी कहते है। अफ्रीका का केनिया व किलिमंजारो, इटली का विसुवियस तथा एटना, बर्मा का पोपा, सिसली का स्ट्रामबोलियन, दक्षिण अमेरिका का एकांकगुआ, चिम्बोरेजी तथा कोटोफैक्सी जापान का फ्यूजीयामा प्रमुख ज्वालामुखी पर्वतें है। संसार का सबसे ऊँचा एवं जाग्रत ज्वालामुखी पर्वत कोटोपैक्सी है जो एण्डीज पर्वत पर स्थित है।

ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण (Formation of Volcanic Mountain) : ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण ज्वालामुखी उद्गार से निकले पदार्थों के जमाव से पर्वत का रूप लेने से होता है। ज्वालामुखी नली से पिघली हुई चट्टान (लावा) बाहर निकल कर धरातल पर फैल जाती है और शंकु की तरह जमा होकर कोणादार पर्वत बनाती है। यदि शिलाखण्डों की अधिकता हुई तो इन पर्वतों का दाल तीव्र होता है। यदि लावा की अधिकता हुई तो ढाल क्रमिक होगा।

कभी-कभी ज्वालामुखी का निर्माण समुद्र तल पर होता है, जैसे एल्यूशियन द्वीप समूह, कभी-कभी ज्वालामुखी पर्वतों का अविर्भाव भू-संचलन द्वारा निर्मित पर्वत श्रेणियों पर होता है, जैसे दक्षिण अमेरिका की एण्डीज पर्वत माला पर। उत्तरी अमेरिका की कास्केड श्रेणी ज्वालामुखी पहाड़ी से भरी पड़ी है।

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प्रश्न 9.
अवशिष्ट पर्वत क्या है? अवशिष्ट पर्वत निर्माण का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत (Relict mountain or Residuala Mountain) : जब धरातल के ऊँचे भाग की कोमल चट्टानें, हवा, पाला, वर्षा, धूप आदि द्वारा कट जाती है तो केवल चट्टानें ही खड़ी रहती है। इस कठोर कड़ी चट्टानों को अवशिष्ट या अनावृत्त पर्वत (Residual or Relict Mountain) कहते हैं। इन्हें घर्षित पर्वत (Circum Erosional Mountain) भी कहा जाता है।

अवशिष्ट पर्वत का निर्माण (Formation of Residual Mountain) : किसी पूर्ववर्ती क्षेत्र में अपरदन के पश्चात् जो शेष पहाड़ियाँ बचती हैं, उन्हें अवशिष्ट या घर्षित पर्वत (Circum Mountain) कहा जाता है। चूँकि ये पर्वत अपनी प्रारंभिक स्थिति या रूप से परिवर्तित होकर इस स्थिति में आते हैं, अतः इन्हें परवर्ती (Subsequent) पर्वत भी कहा जाता है। अवशिष्ट पर्वतों का आकार-प्रकार अपरदन के साधनों और पर्वत की शैल रचना पर निर्भर करता है। भारत में विन्ध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, सहयाद्रि, पारसनाथ आदि तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में ओजार्क पर्वत वर्तमान में अवशिष्ट पर्वतें हैं।

वर्तमान में सर्वोच्च वलित जो पर्वत है, वे भी कालान्तर में नदी, हिमनद वायु, तुषार आदि के प्रभाव से कटकर तथा घिसकर निम्न पर्वत का रूप धारण करके अवशिष्ट पर्वत हो सके हैं। अत्यधिक अपरदन के कारण ऊँचा उठा पर्वत घिसकर नीचा हो जाता है तथा कुछ भाग ऊपर खड़े रह जाते हैं। जो कि समीपवर्ती भाग से ऊँचे होते हैं। विंध्य पर्वत कभी एक उच्च पर्वत था परन्तु वर्तमान समय में घर्षण के कारण इसकी ऊँचाई 12,000 से 25,000 फीट तक ही रह गयी है।

प्रश्न 10.
पठार क्या है? पठारों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
सपाट या लगभग सपाट भूमिवाला विस्तृत ऊँचा क्षेत्र जिसकी ऊँचाई सागर तल से समान्यत: 300 मीटर से अधिक होती है और किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं और जो अपने समीपवर्ती स्थल से पर्याप्त ऊँचा हो तथा जिसका शिखरीय भाग चौड़ा व सपाट हो उसे पठार कहा जाता हैं।
पठारों का निर्माण (Formation of Plateaus) : पठारों का निर्माण निम्न प्रकार से होता है-

  1. मैदानी भागों में लावा के निक्षेप से पठारों की रचना होती है जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलम्बिया का पाठार।
  2. जब किसी विस्तृत भू-भाग का कुछ भाग उत्संवलन (Up warding) द्वारा अपने समीपस्थ भू-भाग से ऊँचा उठ जाय तो ऊँचा भाग पठार बन जायेगा।
  3. पठार वाला भू-भाग अपने स्थान पर बना रहे किन्तु उसके आस-पास का भू-भाग अवसंलन (Down warding) से नींचा हो जाय तो ऊँचा मध्य भाग पठार बन जायेगा।
  4. पर्वत-निर्माण के समय पर्वतों के समीपस्थ भाग जो अधिक ऊँचे नहीं उठ पाते वे पठार का रूप ले लेते हैं। जैसेसंयुक्त राज्य अमेरिका का पीडमाण्ड पठार।
  5. भू-अभिनतियों में क्षैतिजिक संपीडन से तटीय भाग में वलित श्रेणियाँ बन जाती हैं किन्तु मध्य भाग कुछ ऊँचा किन्तु अप्रभावित रह जाता है। जैसे तिब्बत का पठार।
  6. ऊँच्च पर्वतीय प्रदेश दीर्घकाल तक अनाच्छादन के कारण पठार का रूप ले लेते हैं।
  7. वायु द्वारा उड़ाकर लाई गई मिट्टियों के निक्षेप से पठार का निर्माण होता है। जैसे-चीन में लोयस का पठार।

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प्रश्न 11.
पठारों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पठारों का महत्व (Importance of Plateaus) : पठारों का महत्व निम्नलिखित है :-
पठार तथा खनिज : पठार खनिज भण्डरों से समृद्ध होते हैं। पठारों में अधातु खनिज एवं धातु खनिज पाये जाते हैं। अधातु खनिजों में मृत्तिका, रेत, पत्थर, फॉस्फेट, लवण, जिप्सम, सल्फर, चूने का पत्थर, भवन-निर्माण के लिए आवश्यक पत्थर, कोयला, मिट्टी का तेल, अभ्रक, मैंगनीज आदि प्रमुख हैं। धातु खनिज में लोहा, ताम्र, जिक, काँच, रजत तथा स्वर्ण प्रमुख हैं। कनाडियन शील्ड, छोटानागपुर का पठार तथा हजारीबाग आदि खनिजों के लिय प्रसिद्ध हैं। विश्व के अधिकतम पठार खनिज समृद्ध हैं।

पठार एवं कृषि : कृषि के लिये पठार महत्वपूर्ण नहीं है। चट्टानों से उत्पन्न मिट्टियाँ लेटराइट तथा लाल होती है। ये अनुपजाऊ हैं। लावा-निर्मित पठारों पर काली मिट्टी के कारण कृषि सुलभ होती है। दक्षिण भारत की लावा-निर्मित काली मिट्टी में कपास तथा गेहूँ की खेती होती है। चट्टानी सतह के कारण नहरों तथा कुओं का खोदना कठिन होता है। अत: सिंचाई की असुविधा खेती के लिये बाधक होती है। दक्षिणी भारत में नहरों एवं कुओं का अभाव है।

पठार तथा वनस्पति – पठारों पर वनस्पति का होना वहाँ की जलवायु पर निर्भर है। आर्द्र प्रदेशों वाले पठारों पर वन पाये जाते हैं जिसमें लकड़ी व्यवसाय तथा उससे सम्बन्धित उद्योगों का विकास होता है। छोटानागपुर के पठार में लाख अधिक पाया जाता है। दक्षिण के पठार से कीमती लकड़ियाँ मिलती है। उनसे भवन निर्माण होता है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र के बाँस कागज उद्योग में उपयोगी होते हैं। शुष्क तथा आर्द्र शुष्क जलवायु वाले भागों में पठारों पर छोटी घासें उगती है, अतः पशुचारण व्यवसाय विकसित है।

पठार तथा यातायात – समतल तथा सपाट पठारी भागों में रेलों तथा सड़कों का विकास हो जाता है, क्योकि इनमें निर्माण के लिए समतल भू-भाग तथा पत्थर, चूना आदि आसानी से मिल जाते हैं। उबड़-खाबड़ तथा तंग घाटियों वाले पठार यातायात के साधनों से रहित (कम) होते हैं।

पठार तथा जनसंख्या- खनिज-पदार्थों वाले पठारों पर खानों के पास नगर बस जाने तथा उद्योगों के स्थापना के कारण जनसंख्या अधिक हो जाती है। घने जंगलों वाले, उबड़-खाबड़ तथा पथरीली भूमि वाले पठार बिखरी जनसंख्या वाले होते हैं।

पठार तथा जलवायु – मैदानों की अपेक्षा पठार की जलवायु ठंडी होती है। अत: गरम प्रदेशों में इन पर मानव आवास होता है। परन्तु ठंडी जलवायु वाले पठार मरूस्थल हो जाते हैं। फलस्वरूप यहाँ लोग पशुचारण करने वाले विचरणशील होते हैं।

प्रश्न 12.
संरचना एवं आकृति के अनुसार ज्वालामुखी पर्वतों का वर्गीकरण तथा उनका वर्णन कीजिए। उत्तर : आकृति के आधार पर ज्वालामुखी पर्वतों को चार मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
अंगार अथवा राख शंकु ज्वालामुखी (Cinder or cone Volcanic Mountains) : इस प्रकार के ज्वालामुखी की रचना विस्फोटप्य ज्वालामुखी द्वारा होता है। ये ढीले एवं असंगठित पदार्थों से बनते हैं। इनमें राख (Ash) तथा अंगार (Cinder) की मात्रा अधिक होती है। ये पूर्ण शंकु के आकार के होते हैं। जापान तथा हवाई द्वीप समूह में ऐसे अनेक ज्वालामुखी मिलते हैं।

गुम्बदाकार ज्वालामुखी पर्वत (Dome Shaped Vocanic Mountains) : ज्वालामुखी के धीमे उद्गार के कारण जब ज्वालामुखी मुख के चारो ओर आम्लिक लावा का निक्षेपण होता है तो गुम्बदाकार आग्नेय पर्वत बन जाता है। हवाई द्वीप समूह में ऐसे ज्वालामुखी मिलते हैं।

विस्फोटीय ज्वालामुखी पर्वत (Explosion vent Volcanic Mountain) : ज्वालामुखी के तीव्र विस्फोट के कारण जब क्रेटर का आकार खूब बड़ा हो जाता है तो उसके चारो ओर ज्वालामुखी पर्वत बन जाते हैं। इन्हें विस्फोटीय ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। आइसलेण्ड में ऐसे ज्वालामुखी मिलते हैं।

मिश्रित शंकु ज्वालामुखी (Composite cone Volcanic Mountain) : जब काफी लम्बी अवधि में. ज्वालामुखी के कई उद्गार होते हैं तब ज्वालामुखी पर्वत में एक मुख्य क्रेटर के साथ-साथ कई अन्य क्रेटर भी बन जाते हैं तो ऐसे ज्वालामुखी पर्वतो को मिश्रित शंकु ज्वालामुखी कहते हैं। जापान का फ्यूजीयाम तथा मैक्सिको का पोपोकेटे पेटी मिश्रित शंकु ज्वालामुखी के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 13.
निर्माण विधि के आधार पर पठारों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनका संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
निर्माण के आधार पर पठारों के प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं –
विभाजित पठार (Dissected Plateau) : ऐसे पठार प्राय: ऊँचे होते हैं। परन्तु तीव्रगामी नदियाँ या हिमनद इनमें गहरी व सँकरी घाटियाँ बना देती है जिससे मुख्य पठार कई उप पठारों में विभाजित हो जाता है। कई भागों में विभक्त इन पठारों को विभाजित अथव कटे-फटे पठार कहते हैं। वेल्स, स्कॉटलैण्ड, छोटानागपुर, कर्नाटक के मालनद तथा मेघालय के पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कालोरेडो तथा कनाडा का लारशियमन पठार विभाजित पठार ही हैं।

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अन्तःपर्वतीय पठार (Internmontane Plateau) : चारों ओर से पर्वतमालाओ से घिरे पठारों को अन्त: पर्वतीय पठार कहते हैं। ऐसे पठार काफी ऊँचे होते है परन्तु इनका विस्तार कम होता है। इन पठारों का निर्माण पर्वतों के साथ ही साथ उनके बीच के धरातल के भी उपर उठने से होता है। एण्डीज पर्वतो से घिरे हुए इक्वेडोर व बोलीबिया के पठार तथा हिमालय के क्युनलुन से घिरा तिब्बत का पठार, पूर्वों एवं पश्चिमी सियरा निवादा पर्वतों के बीच में स्थित मैविसको का पठार, एलबुर्ज एवं जेग्रोस पर्वत के बीच स्थित ईराक का पठार, पौष्टिक एवं टौरस पर्वतों के बीच में स्थित टर्की का अनात्तिया का पठार अन्तःपर्वतीय पठार ही है। गोबो, ईरान इत्यादि पठार भी अन्तः पर्वतीय पठार ही हैं।

लावा पठार (Lava Plateau) : ज्वालामुखी के उद्गार से निकलने वाला लावा ज्वालामुखी के मुख से चारों ओर दूर तक फैल जाता है। इस प्रकार यह भाग अपने आस-पास के क्षेत्र से ऊंचा हो जाता है जिससे लावा के पठार बन जाते हैं। इन पठारों का निर्माण काले रंग की बैसाल्ट चट्टानों से हुआ है। अत: इनके विखण्डन में उपजाऊ काली मिट्टी का निर्माण होता है। भारत के दक्कन का पठार के उत्तर पश्चिम में स्थित दक्कन ट्रेप, आयरलैण्ड का राष्ट्रीय पठार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया पाठार लावा निर्मित पठार के उदाहरण हैं।

पर्वतपदीय पठार (Piedmont Plateau) : किसी पर्वत के सहारे स्थित पठार को पीडामाण्ट पठार या गिरिपद पठार कहते है। ये पठार व मैदान अथवा पर्वत व समुद्र के बीच स्थित होते हैं। इन पठारो का निर्माण उन पर्वतों के उत्थान के साथ-साथ होता है जिनसे ये संलग्न होते हैं। उत्तरी अमेरिका की अल्पेशियन एवं अन्ध महासागर के बीच एक ऐसा पठार स्थित है जिसे पीडमाण्ट का पठार कहते हैं। इसी प्रकार दक्षिणी अमेरिका में एण्डीज पर्वत तथा अन्ध महासागर के बीच पैटागोनिया का पठार भी गिरिपद पठार ही हैं।

महाद्वीपीय पठार (Continental Plateau) : पटल विरूपणी बलों द्वारा धरातल के किसी विस्तृत भू-भाग के ऊपर उठ जाने से निर्मित विस्तृत पठारों को महाद्वीपीय पठार कहते हैं। ये पठार सागर तट या मैदानों से घिरे रहते हैं तथा सागर तट या मैदानों एवं इनका उभार स्पष्ट दिखायी देता है। भारत का प्रायद्वीपीय पठार, आस्ट्रेलिया का पठार, अरब का पठार, दक्षिण अफ्रीका का पठार आदि महाद्वीपीय पठार के उदाहरण हैं। अंटाकर्टिका एवं ग्रीनलैण्ड के पठारों को नवीन महाद्वीपीय पठारों के अन्तर्गत रखा जाता है।

प्रश्न 14.
विभिन्न प्रकार के अपरदनात्मक मैदानों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अपरदनात्मक मैदान (Erosionel Plain) : भूपटल पर उत्पन्न विषमताओं को समतल स्थापक शक्तियाँ नदी, हिमनदी, पवन, सागरीय लहरें) दूर करने का प्रयास करती रहती हैं जिससे उत्थित स्थलखण्ड एक सपाट एवं आकृतिविहीन मैदान का आकार ग्रहण कर लेते हैं, जिन्हें अपरदनात्मक मैदान कहते हैं। अपरदनात्मक मैदानों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है।

नदी अपरदान द्वारा निर्मित मैदान या समप्राय मैदान (Peneplain): अपने अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था में नदियाँ उच्च स्थल खण्डों, पवतों-पठारों आदि को काटकर मंद ढाल वाले समप्राय मैदानों का निर्माण करती हैं। ये मैदान पूर्ण रूप से समतल नहीं होते हैं। इनके यत्र-तत्र प्रतिरोधी चट्टानों के टीले या पहाड़ियाँ दिखायी देते हैं जिन्हें मोनेडानॉक कहते हैं। पेरिस बेसिन, आमेजन बेसिन का दक्षिणी भाग, मिसीसिपी बेसिन का ऊपरी भाग, पूर्वी इंग्लैण्ड का मैदान, भारत का अरावली क्षेत्र एवं राँची तथा हजारीबाग के मैदान समप्राय मैदान के उदाहरण हैं।

हिमानी अपरदित मैदान (Plains of Glacial Erosion) : हिमनदों के अपघर्षण से निर्मित सपाट परन्तु ऊच्चावचयुक्त मैदान इस श्रेणी में आते हैं। इन मैदानों में मिट्टी की परत् पतली होती है तथा अवरोधी चट्टानों के टीले एवं झीलें देखने को मिलती हैं। इनमें कहीं-कहीं दलदल भी पाए जाते हैं। इस प्रकार के मैदान उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग तथा उत्तर-पश्चिम यूरेशिया में पाए जाते हैं। भारत में लद्दाख का मैदान हिमानी अपरदित मैदान का उदाहरण है।

पवन अपरदित मैदान (Wind eroded Plains) : शुष्क एवं अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पवन की अपरदन क्रिया के फलस्वरूप इन मैदानों का निर्माण होता है। इन मैदानों को सहारा मरूस्थल में ऐसेरिग तथा हमादा कहते हैं। पवन अपरदित मैदानों में प्रतिरोधी चट्टानों के टीले विद्यमान रहते हैं, जिन्हें इंसेलवर्ग (Inselberg) कहते हैं।

कार्स्ट मैदान (Karst Plain) : चूना पत्थर वाले प्रदेशों में वर्षा के जल तथा भूमित जल की धुलनक्रिया द्वारा सतह के उपर तथा नीचे अपरदन होते रहता है जिससे सम्पूर्ण प्रदेश घिसकर नीचा हो जाता है तथा एक निम्न मैदान का आकार ग्रहण कर लेता है। इस तरह के मैदानों का ऊपरी सतह पूर्णत: समतल नहीं होता है। बल्कि ये उबड़-खाबड़ एवं तरंगित होते हैं तथा यत्रतत्र चट्टानों के अवशेष टीलों या ढेर रूप में विद्यमान रहते हैं। इन टीलों को ह्यूमस (Hums) कहते हैं। यूगोस्लाविया के कार्स्ट प्रदेश, उत्तरी अमेरिका के फ्लोरिडा एवं यूकाटान तथा भारत के चित्रकुट एवं उत्मोड़ा में कार्स्ट मैदान देखने को मिलते हैं।

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प्रश्न 15.
नदी निर्मित मैदान या जलोढ़ मैदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जलोढ़ या नदी निर्मित मैदान (Alluvial Plains) : नदियाँ अपने साथ बहाकर लायी गयी मिट्टी या जलोढ़ को अपने घाटी में यत्र तत्र जमा करती हैं जिससे जलोढ़ मैदानों की रचना हो जाती है। संसार के अधिकांश बड़े मैदान जैसे मिसीसिपी-मिसौरी का मैदान, गंगा-सिन्धु का मैदान, हांगहो-यांगटिसी का मैदान, वोल्गा डेन्यूब, नीले के मैदान तथा इटली की पो नदी का मैदान जलोढ़ मैदान ही हैं। स्थिति के अनुसार नदी निर्मित मैदानों के 30 उपभेद हो सकते हैं।

गिरिपद मैदान (Pledmont Plains) : पर्वतीय भाग में उतरते समय ढाल एकदम कम हो जाने से नदी का वेग अत्यंत कम हो जाता है। अत: वहाँ नदी पर्वतीय भाग से लाए गए अवसादों को जमा कर देती है। इसमें नीचे की तरफ भारी रोड़े उसके ऊपर बजरी और सबसे ऊपर बारीक रेत जमा हो जाते हैं। जिससे वहाँ एक तिकोना मैदान बन जाता है। इसे गिरिपद मैदान कहते हैं। उत्तरी भारत में इन मैदानों को भाबर मैदान कहते हैं।

बाढ़ के मैदान (Flood Plains) – नदी के मध्य भागा में मन्द ढाल के कारण नदी की गति इतनी धीमी हो जाती है कि वहाँ वह केवल सुक्ष्म कणों को ही ले जा सकती है। नदी में बाढ़ आ जाने पर ये सूक्षकण नदी-घाटी के दोनों ओर के बाढ़ क्षेत्रों में जमा हो जाते हैं। जिससे बाढ़ के मैदान बन जाते हैं। इन मैदानों की चौड़ाई उद्गम की ओर कम तथा मुहाने की ओर अधिक होती है। यहाँ नदियाँ प्रतिवर्ष नवीन मिट्टी जमा करती हैं। अतः ये मैदान अत्यन्त उपजाऊ होते हैं।

डेल्टाई मैदान (Deltaic Plains) – नदियों द्वारा लायी गयी अत्यन्त महीने मिट्टी के जमा होने से उनके मुहानों पर त्रिभुजाकार मैदान बन जाते हैं। ऐसे मैदानों को डेल्टाई मैदान कहते हैं। डेल्टाई भाग में नदी कई शाखाओं में विभाजित हो जाती है। गंगा-बह्मपुत्र का डेल्टा या सुन्दरवन का डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है। सिन्यु, नील, पो, हांगहो और मिसीसिपी नदियों ने अपने मुहानों पर बड़े-बड़े डेल्टाई मैदानों का निर्माण किया है। डेल्टाई मैदान प्राय: समतल और सपाट होते हैं। इनमें यत्र-तंत्र दलदल व उथली झीलें भी पायी जाती है।

प्रश्न 16.
मैदानों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
मैदानों के महत्व का वर्णन निम्न शीर्षको के अन्तर्गत किया जा सकता है:-
(i) मानव सभ्यता का विकास – हर प्रकार की सुविधा मिलने के कारण ही मैदान प्राचीनकाल से ही मानव-सभ्यता के केन्द्र रहे हैं। सिन्धु, गंगा, दजला-फरात एवं नील नदियों के मैदान अपनी प्राचीन सभ्यताओं के लिए विख्यात हैं।

(ii) कृषि का विकास – मैदानी भाग की भूमि समतल एवं मिट्टी कोमल व उपजाऊ होती है। यहाँ कुएँ तथा नहर आसानी से बनाये जा सकते हैं। अत: सिंचाई की सुविधा रहती है । यही कारण है कि मैदानों में कृषि का विकास अधिक होता है।

(iii) यातायात की सुविधा – मैदानों का धरातल समतल होता है। अत: वहाँ सड़कों, रेलमार्गों तथा हवाई अड़ों का निर्माण आसानी से हो सकता है। नदियाँ मंद गति से बहने के कारण जल यातायात योग्य होती है। यह्ही कारण है कि मैदानों में यातायात के साधनों का विकास अधिक हुआ है।

(iv) उद्योग-धंधों का विकास – मैदानी भागों में कृषि पर आधारित कच्चे मालों के उत्पादन, यातायात के साधनों के विकास, सस्ते श्रमिकों एवं खपत क्षेत्रों की सुविधा के कारण जनसंख्या का घनत्व अधिक मिलता है एवं उद्योग-धंधों का खूब विकास हुआ है।

(v) नगरों की अधिकता – अधिक जनसंख्या एवं यातायात के साधनों के विकास के कारण विश्व के बड़े-बड़े व्यापारिक एवं औद्योगिक नगरों की स्थापना मैदनों में ही हुई है। कोलकाता, कानपुर, शिकागो, ब्यूनेस आयर्स आदि नगर मैदानों में ही स्थित हैं।

(vi) आक्रमण का भय – मैदानी भाग में प्राकृतिक सीमा के अभाव, यातायात की सुविधा एवं आर्थिक सम्पन्नता के कारण आक्रमणकारी उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इसी से मैदान प्राचीनकाल से युद्ध के क्षेत्र बने रहे हैं।

(vii) सघन जनसंख्या – मैदानी भागों में कृषि की सुविधा, यातायात के साथनों के विकास, उद्योग-धन्धों के विकास तथा अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं की सुविधा के कारण सघन जनसंख्या यहाँ निवास करती है।

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प्रश्न 17.
निर्माण के आधार पर पठारों का वर्गीकरण करते हुए उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :
पठारों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है –

  1. उत्पत्ति के विचार से
  2. स्थिति के विचार से
  3. जलवायु के विचार से
  4. आकृति के विचार से।

उत्पत्ति के अनुसार पठारों का वर्गीकरण (According to Origin):-
(A) सरल पठार (Simple Plateau)
(B) संयुक्त पठार (Composite Plateau)

(A) सरल पठार (Simple Plateau) :- इसकी उत्पत्ति एक ही प्रकार की शैलों से होती है । इसकी रचना किसी एक ही कारक से होती है। कारक के अनुसार सरल पठार निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-

  1. हिम्य पठार (Plateau of Glacial Origin)
  2. जलीय पठार (Plateau of Aqueous Origin
  3. वायोढ़ पठार (Plateau of Aeolian Origin)
  4. निः सृत पठार (Plateau of Effusive Origin)

हिम्य पठार (Glacial Plateau) :- हिम-नदियों के अपरदन तथा हिमोढ़ों के निक्षेप से बने पठार हिम्य पठार कहे जाते हैं। महाद्वीपीय हिम-नदियों ने ग्रीनलेण्ड तथा अण्टार्कटिक को घिस-घिस कर पठार बना दिया है। भारत में गढ़वाल का पठार ऐसा ही एक उदाहरण है।

जलीय पठार (Aqueous Plateau) :- जल द्वारा निक्षेपित अवसादों के शिलारूप ग्रहण करने पर कभीकभी भू-गर्भिक हलचलों के कारण शिलास्तर पठार का रूप धारण कर लेते हैं। बालुका पत्थर से निर्मित विन्ध्य पठार, चेरा पत्थर से निर्मित चेरापूँजी पठार तथा चूने के पत्थर से निर्मित शान पठार (म्यांमार) इसके सर्वोतम उदाहरण हैं। उत्तरी अमेरिका में कोलारेडो पठार भी इसी प्रकार का है। ये पठार जल में डूबे धरातल के ऊपर उठने से बनते हैं।

कायोढ़ पठार (Aeolion Plateau) :- वायु द्वारा निर्मित पठार इस श्रेणी में आते हैं । चीन का विशाल लोयस पठार तथा पाकिस्तान का पोटवारा पठार इसके उदाहरण हैं।

नि:सृत पठार (Effusive Plateau) :- ये पठार धरातल पर लावा-प्रवाह से बनते हैं। दक्षिणी भारत का लावा पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया पठार तथा पूर्वी अफ्रीका के पठार इसी प्रकार के हैं। इसमें बेसाल्ट की प्रधानता है।

(B) संयुक्त पठार (Composite Plateau) :- इन पठारों की उत्पत्ति कई प्रकार की शैलों के मिश्रण से होती है। दक्षिण भारत का पठार इसका उदाहरण है। यह पठार कई बार समुद्री अतिक्रमण के फलस्वरूप जलमग्न हुआ और कालान्तर में फिर बाहर निकल आया । फलतः यह पठार विभिन्न युगों की आग्नेय, अवसादी तथा कायान्तरित शैलों से निर्मित है।

स्थिति के अनुसार पठार (According to location) पठारों का वर्गीकरण :- इस तरह के पठारों के निम्नलिखित भेद है :-

अन्तरा पर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) :- ये पठार जो चारों ओर से पर्वतों द्वारा घिरे होते हैं । इनकी रचना वलित पर्वतों के साथ हुई होती है। ये पठार प्राय: दो अभिर्नियों अथवा सीमा श्रेणी के बीच में विस्तृत मध्य पिण्ड (Median Mass) के रूप में होते हैं। संसार के उच्च पठार इसी श्रेणी में आते है। तिब्बत का पठार हिमालय तथा कुनलुन पर्वतों के बीच स्थित है। बोलीविया, कोलम्बिया तथा तारिम के पठार भी इसी प्रकार के हैं।

पर्वतपदीय पठार (Piedmont Plateau) :- ये पर्वतों के आधार पर बने होते हैं जहाँ एक ओर ऊँचे पर्वत और दूसरी ओर मैदान या समुद्र रहते हैं। इनका विस्तार अत्यन्त सीमित हीता है। ये मैदानों की तरफ कगार बनाते हैं जिनकी ऊँचाई 90 मीटर से 180 मीटर तक होती है। पेण्टागोनिया का पठार इसका उदाहरण है। यह एण्डीज पर्वत तथा अटलाण्टिक महासागर के बीच स्थित है।

महाद्वीपीय पठार (Continental Plateau) :- ये पठार स्थल के विशाल एवं विस्तृत उच्च प्रदेश हैं। मैदान या समुद्र तट से स्पष्टः ऊँचे उठे होते हैं। इनके किनारे पर ऊँची पर्वत श्रेणियाँ कदाचित् ही होती हैं। दक्षिण अफीका का पठार, दक्षिण भारत, अरब तथा स्पेन में इसी वर्ग के पठार हैं। ये पठार बहुत पुराने हैं। किन्तु ग्रीनलैंड तथा अण्टार्कटिका नवीन पठार कहे जाते हैं।

तटीय पठार (Coastal Plateau) :- ये समुद्र तट पर स्थित पठार हैं। इस प्रकार के पठारों का ऊपरी भाग तट के निकट फैला हुआ तथा निचला भाग समुद्र में डूबा हुआ होता है। भारत के कोरोमण्डल का पठार तथा इण्डोचीन के प्रायद्वीपीय पठार ऐसे ही हैं।

जलवायु के अनुसार पठारों के भेद (Plateau according to climate):- जलवायु के आधार पर पठारों के तीन भेद हैं :-

  • मरुस्थली या शुष्क पठार (Arid Plateau)
  • आर्द्र पठार (Humid Plateau)
  • हिमाच्छादित पठार (Ice caped Plateau)

मरुस्थलों में शुष्क पठार मिलते हैं। वहाँ वर्षा का अभाव रहता है। पाकिस्तान का पोटवार पठार इसी श्रेणी का है । अधिक वर्षा वाले प्रदेशों में स्थित पठार आर्द्र पठार कहलाते हैं। जैसे असम का पठार। धुवीय जलवायु के प्रदेशों में हिम आच्छादित पठार पाये जाते हैं । जैसे ग्रीनलैंड का पठार।

आकृति के अनुसार पठारों के भेद (Plateau according to Shape) :- आकृति के अनुसार पठारों के तीन भेद हैं।

  • गुम्बदाकार पठार (Dome-Shaped Plateau);
  • विच्छेदित पठार (Dissected Plateau)
  • सोपानतुल्य पठार (Step-like Plateau)

गुम्बदाकार पठार का बाह्य पृष्ठ गोलाकार होता है। छोटानागपुर का पठार ऐसा ही है। विच्छेदित पठार नदियों द्वारा कटे-छँटे होते हैं। दक्षिण भारत का पठार विच्छेदित पठार है। जिन पठारों की रचना सोपान-तुल्य प्रतीत होती है उनको सोपान-तुल्य पठार कहते हैं । विन्क्य पठार इसका उदाहरण है।

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प्रश्न 18.
पहाड़ और पठार में क्या अन्तर है?
उत्तर :

पहाड़ (Mountain) पठार (Plateau)
i. इनका ऊपरी क्षेत्रफल आवार के क्षेत्रफल से अधिक होता है। i. इनका ऊपरी क्षेत्रफल आधार के क्षेत्रफल से कम होता है।
ii. ये सागर तल या अपने आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचे उठे होते हैं। ii. ये अपने समीप के धरातल से अपेक्षाकृत कम ऊँचे उठे होते हैं।
iii. इनका शिखर नुकीला होता है। iii. इनका शिखर चौरस होता है।
iv. इनमें प्राय: नवीन एवं कम कठोर चट्टाने पायी जाती हैं। iv. इनमें अत्यन्त प्राचीन एवं कठोर चट्टाने पायी जाती हैं।
v. पर्वतों पर तापक्रम बहुत कम रहता है। v. पठारों पर तापक्रम पर्वतों से अधिक रहता है।
vi. इनके चारों ओर का ढाल तीव होता है। vi. इनमें कम से कम एक ओर ढाल खड़ा होता है।
vii. ये अनुपजाऊ एवं कृषि के अयोग्य होते हैं। vii. ये अपेक्षाकृत उपयुक्त होते हैं।
viii. इनमें चोटियाँ होती हैं। viii. इनमें चोटियों का अभाव होता है।