WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 5B भारत : कृषि, उद्योग, जनसंख्या, परिवहन एवं संचार पद्धति

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WBBSE Class 10 Geography Chapter 5B Question Answer – भारत : कृषि, उद्योग, जनसंख्या, परिवहन एवं संचार पद्धति

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
कौन मिट्टी चावल की कृषि के लिए सर्वोत्तम है ?
उत्तर :f
चिकनी, कछारी तथा दोमट मिट्टी।

प्रश्न 2.
भारत की कौन-सी मिट्टी कपास की खेती के लिए उत्तम है ?
उत्तर :
सामान्य ढालुआ भूमि।

प्रश्न 3.
दिल्ली, बम्बई, चेत्रई और कलकत्ता किस सड़क मार्ग से जुड़े हैं ?
उत्तर :
स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral)।

प्रश्न 4.
भारत के किस राज्य में गेहूँ की प्रति हेक्टेयर पैदावर सबसे अधिक है ?
उत्तर :
पंजाब।

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प्रश्न 5.
दक्षिण भारत के किस राज्य में चाय का उत्पादन सबसे अधिक होता है ?
उत्तर :
तमिलनाडु।

प्रश्न 6.
गन्ने के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
दूसरा।.

प्रश्न 7.
किस गन्ना उत्पादन क्षेत्र को भारत का ‘जावा’ कहते हैं ?
उत्तर :
तराई क्षेत्र या गोरखपुर-देवरिया क्षेत्र।

प्रश्न 8.
भारत का कौन राज्य ज्वार का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है ?
उत्तर :
महाराष्ट्र।

प्रश्न 9.
भारत की सबसे प्रमुख कृषि फसलें कौन हैं ?
उत्तर :
चावल और गेहूँ।

प्रश्न 10.
भारत का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य कौन है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल।

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प्रश्न 11.
भारत में लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या है ?
उत्तर :
कृषिं।

प्रश्न 12.
भारत में चाय के सबसे बड़े उत्पादक राज्य का नाम बताओ।
उत्तर :
असम।

प्रश्न 13.
महाराष्ट्र की प्रमुख नगदी फसल कौन सी है ?
उत्तर :
कपास।

प्रश्न 14.
नीलगिरि पर कौन सी फसल उत्पन्न की जाती है ?
उत्तर :
कहवा।

प्रश्न 15.
जूट के उत्पादन में भारतवर्ष का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
पहला।

प्रश्न 16.
भारत के किस राज्य का जूट के उत्पादन में पहला स्थान है ?
उत्तर :
पश्चि बंगाल।

प्रश्न 17.
दक्षिण भारत के एक प्रमुख कहवा उत्पादक क्षेत्र का नाम लिखिए।
उत्तर :
कर्नाटक।

प्रश्न 18.
किस फसल को सुनहला रेशा कहते हैं ?
उत्तर :
जूट।

प्रश्न 19.
प्रति एकड़ गेहूँ का उत्पादन किस राज्य में सबसे अधिक है ?
उत्तर :
पंजाब।

प्रश्न 20.
भारत के केन्द्रीय गेहूँ अनुसंधानशाला कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
पूसा (नई दिल्ली) में।

प्रश्न 21.
चाय के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान हैं ?
उत्तर :
पहला।

प्रश्न 22.
भारत की अधिकांश चाय किस बन्दरगाह से निर्यात की जाती है ?
उत्तर :
कोलकाता बन्दरगाह से।

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प्रश्न 23.
भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी योजना का नाम क्या है ?
उत्तर :
भाखरा नांगल।

प्रश्न 24.
गेहूँ किस प्रकार की फसल है।
उत्तर :
रबि फसल।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल में चाय की कृषि किन जिलों में होती है ?
उत्तर :
जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग तथा कूचबिहार।

प्रश्न 26.
भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादन राज्य कौन है ?
उत्तर :
असम।

प्रश्न 27.
भारत का सबसे बड़ा काफी उत्पादक राज्य कौन है ?
उत्तर :
कर्नाटक।

प्रश्न 28.
कपास की कृषि के लिए कौन सी मिट्टी सर्वोत्तम होती है ?
उत्तर :
काली मिट्टी।

प्रश्न 29.
जूट की कृषि के लिए कौन सी मिट्टी सर्वोत्तम होती है ?
उत्तर :
नयी जलोढ़ मिट्टी।

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प्रश्न 30.
प्रति हेक्टेयर गत्रा का उत्पादन किस राज्य में सर्वाधिक है ?
उत्तर :
तमिलनडु।

प्रश्न 31.
भारत में केन्द्रीय धान अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
कटक (उड़िसा में)।

प्रश्न 32.
भारत में केन्द्रीय जूट अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
बैरकपुर (पश्चिम बंगाल) में।

प्रश्न 33.
वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति उपलब्ध भूमि कितनी है ?
उत्तर :
0.08 हेक्टेयर है।

प्रश्न 34.
कम तापमान एवं कम वर्षा वाली फसलें कौन सी हैं ?
उत्तर :
गेहूँ, जो, चना, मटर, सरसों आदि।

प्रश्न 35.
उष्षाद्र जलवायु वाली फसलों के नाम बताएँ।
उतर :
धान, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि।

3प्रश्न 6.
भारत के कुल क्षेत्रफल का कितना हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है ?
उत्तर :
19.5 करोड़ हेक्टेयर।

प्रश्न 37.
भारत में उगाए जाने वाले प्रमुख पेय फसले क्या हैं ?
उत्तर :
चाय और कहवा।

प्रश्न 38.
भारत की मुद्रादायिनी फसलों के नाम लिखें।
उत्तर :
कपास, जूट, चाय, कहवा, गन्ना आदि।

प्रश्न 39.
खरबूज, ककड़ी, मेथी किस प्रकार की फसलें हैं ?
उत्तर :
जायद (Jayed)।

प्रश्न 40.
चावल के उत्पादन में भारत को विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
दूसरा।

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प्रश्न 41.
चावल की कृषि के लिए कौन सी मिट्टी सर्वोत्तम होती है ?
उत्तर :
चिकनी, कछारी, दोमट अथवा डेल्टाई मिट्टी।

प्रश्न 42.
आजकल भारत में किस विधि से चावल की कृषि की जा रही है ?
उत्तर :
जापानी विधि से।

प्रश्न 43.
चावल की कुछ उत्तम किस्म की बीजों के नाम लिखो।
उत्तर :
रत्ना, विजया, IR-20 एवं मंसूरी।

प्रश्न 44.
पश्चिम बंगाल में चावल की कितनी फसलें बोई जाती है ?
उत्तर :
तीन फसले (अमन, औस तथा बोरो)।

प्रश्न 45.
कहाँ का बासमती चावल अपने स्वाद व सुगन्ध के लिए विख्यात है ?
उत्तर :
देहरादून।

प्रश्न 46.
भारत के किस राज्य में प्रति एकड़ चावल उत्पादन सबसे अधिक है ?
उत्तर :
पंजाब।

प्रश्न 47.
गेहूँ के उत्पादन में कौन सा राज्य अग्रगण्य है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 48.
ज्वार उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है ?
उत्तर :
महाराष्ट्र।

प्रश्न 49.
ज्वार के नये बीज कौन है ?
उत्तर :
CSH-5 एवं CSH-6

प्रश्न 50.
भारत में सबसे अधिक किस राज्य में बाजरा का उत्पादन होता है ?
उत्तर :
राजस्थान।

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प्रश्न 51.
बाजरा के उत्तम बीजों का नाम लिखो।
उत्तर :
BH-104 तथा BK-650

प्रश्न 52.
सबसे अधिक सूखा सहन करने वाला अनाज कौन है ?
उत्तर :
रागी।

प्रश्न 53.
रागी के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है ?
उत्तर :
कर्नाटक।

प्रश्न 54.
चाय के निर्यात में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
तीसरा!

प्रश्न 55.
वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा चाय का ग्राहक कौन सा देश है ?
उत्तर :
रूस।

प्रश्न 56.
चाय के निर्यात में किस देश का प्रथम स्थान है ?
प्तर :
श्रोलंका ।

प्रश्न 57.
भारत में कहवा की कौन सी किस्में उगाई जाती है ?
उत्तर :
कॉफी अरेबिका तथा कॉफी रोबस्टा।

प्रश्न 58.
भारतीय कहवा को क्या कहा जाता है ?
उतर :
मधुर कहवा (Mild Coffee)!

प्रश्न 59.
भारतीय कहवे का मुख्य ग्राहक कौन देश हैं ?
उत्तर :
रूस, इटली एवं जर्मनी।

प्रश्न 60.
भारत में किस बन्दरगाह से कहवे का निर्यात सबसे अधिक होती है ?
इत्तर :
मंगलौर बन्दरगाह।

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प्रश्न 61.
कपास के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
बौथा।

प्रश्न 62.
कपास किस प्रकार का पौधा है ?
उतर :
उष्णा एवं उपोष्ण पौधा।

प्रश्न 63.
कपास का शत्रु कौन है ?
उतर :
पाला।

प्रश्न 64.
कपास की कृषि के लिए कितने दिन पाला-रहित होना आवश्यक है ?
उतर :
200 दिन।

प्रश्न 65.
कपास के पौधों पर किस प्रकार के कीड़े का प्रकोप होता है ।
उत्तर :
बाल-वीविल (Ball-Weevil)।

प्रश्न 65.
कपास का व्यापार किस बन्दरगाह से होता है ?
उत्तर :
मुम्बई।

प्रश्न 67.
कपास का मुख्य ग्राहक कौन देश है ?
उत्तर :
जापान।

प्रश्न 68.
भारत में कपास का केन्द्रीय अनुसंधान केन्द्र कहाँ है ?
उत्तर :
नागपुर (महाराष्ट्र में)।

प्रश्न 69.
गत्रे के उत्पादन में विश्व में पहला स्थान किसका है ?
उतर :
बाजील।

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प्रश्न 70.
भारत में कितने भू-भाग पर कृषि कार्य होता है ?
उत्तर :
17.11 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर।

प्रश्न 71.
गत्ना किस प्रकार का पौधा है ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्ध का पौधा है।

प्रश्न 72.
गन्ने के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 73.
भारत का जावा किसे कहते है ?
उत्तर :
तराई क्षेत्र या गोरखपुर-देवरिया क्षेत्र को।

प्रश्न 74.
भारत में गत्ना शोध संस्थान कहाँ है ?
उत्तर :
कोयम्बटूर (तमिलनाडु) में।

प्रश्न 75.
भारत में सबसे अधिक कपास का उत्पादन किस राज्य में होता है ?
उत्तर :
गुजरात।

प्रश्न 76.
तृतीय व्यवसाय का एक उदाहरण दें।
उतर :
संचार।

प्रश्न 77.
मोटे आनाज जैसे ज्वार-बाजरा, रागी आदि फसलों के अनुसंधानशाला केन्द्र कहाँ स्थापित हैं ?
उत्तर :
योधपुर, राजस्थान में।

प्रश्न 78.
स्थानान्तरणशील कृषि को वियतनाम में क्या कहते हैं ?
उत्तर :
रे (Ray)

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प्रश्न 79.
किस कृषि पद्धति में फसल चक्र का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर :
स्थानबद्ध कृषि (Sedentary Agriculture) में।

प्रश्न 80.
मिश्रित कृषि का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन।

प्रश्न 81.
नित्यवाही नहर का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
सालों भर नहर में पानी।

प्रश्न 82.
तुंगभद्रा परियोजना किस नदी पर स्थित है ?
उत्तर :
तुंगभद्रा नदी पर।

प्रश्न 83.
नहर द्वारा सिंचाई सबसे अधिक किस राज्य में होती है ?
उत्तर :
जम्मु-कश्मीर में।

प्रश्न 84.
भारत में किस राज्य का स्थान जूट उत्पादन में प्रथम है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 85.
भारत की अधिकांश चाय किस बन्दरगाह से निर्यात होती है ?
उत्तर :
कोलकाता बन्दरगाह।

प्रश्न 86.
चाय के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
प्रथम।

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प्रश्न 87.
हरित क्रांति (Green Revolution) का शुरुआत किस वर्ष किया गया ?
उत्तर :
1960 ई० में।

प्रश्न 88.
M.R.V.P. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजना (Multi River Valley Project)।

प्रश्न 89.
सेरीकल्चर किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सिल्क का उत्पादन और सिल्क के कीटों का पालन सेरीकल्चर कहलाता है।

प्रश्न 90.
हर्टीकल्चर क्या है ?
उत्तर :
हरी सब्जियों, फलों और फूलों की कृषि को हर्टीकल्चर कहा जाता है।

प्रश्न 91.
सिंचाई के प्रमुख साधन क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
सिंचाई के प्रमुख साधनों में – कुआँ, तालाब, नहर तथा नलकूप आदि हैं।

प्रश्न 92.
भारत में प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्यों का उल्लेख करो।
उत्तर :
प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्य : उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश हैं।

प्रश्न 93.
लौह-इस्पात उद्योग में प्रमुख कच्चा माल किस प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
अशुद्ध कच्चे माल होते है।

प्रश्न 94.
टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी की स्थापना किन नदियों के संगम स्थल पर हुई है ?
उत्तर :
स्वर्णरिा तथा खरकोई नदियों के संगम पर।

प्रश्न 95.
भारत का सबसे बड़ा इस्पात कारखाना कौन है ?
उत्तर :
बोकारो।

प्रश्न 96.
हिन्दुस्तान मशीन टुल्स लिमिटेड कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
बंगलौर में।

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प्रश्न 97.
भारत के एक मोटरगाड़ी निर्माण केन्द्र का नाम लिखिए।
उत्तर :
महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा लिमिटेड (मुम्बई)।

प्रश्न 98.
कौन तीन शहर मिलकर सिलिकन त्रिभुज का निर्माण करते हैं ?
उत्तर :
बंगलौर, पुणे एवं हैदराबाद।

प्रश्न 99.
देश का सबसे बड़ा पेट्रोरसायन समूह कौन है ?
उत्तर :
रिलायंस पेट्रोकेमिकल (जामनगर) है।

प्रश्न 100.
भारत की सूचना प्रौद्योगिकी की राजधानी तथा सिलिकन वेली किसे कहते हैं ?
उत्तर :
बंगलौर को।

प्रश्न 101.
भारत में पहला पेट्रोरसायन कारखाना कब और कहाँ स्थापित हुआ ?
उत्तर :
सन् 1966 ई० में ट्राम्बे में।

प्रश्न 102.
भारतवर्ष का भारी इंजीनियरिंग समूह कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
राँची।

प्रश्न 103.
दक्षिण भारत के सबसे विकसित उद्योग का नाम लिखो।
उत्तर :
मशीनी-औजार निर्माण उद्योग।

प्रश्न 104.
पश्चिम बंगाल का मोटर कार निर्माण केन्द्र कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
कोलकाता के निकट उत्तरपाड़ा में हिन्दुस्तान मोटर्स लिमिटेड है ।

प्रश्न 105.
त्रिवेणी स्ट्रक्चरल कम्पनी कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
इलाहाबाद के निकट नैनी में।

प्रश्न 106.
एम० ए० एम० सी० कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
दुर्गापुर में।

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प्रश्न 107.
भारतवर्ष में सूतीवस्त्र उद्योग का अग्रणी स्थान कौन है ?
उत्तर :
‘अहमदाबाद (गुजरात)।

प्रश्न 108.
भारत का सबसे बड़ा लौह-इस्पात कारखाना कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
बोकारो में।

प्रश्न 109.
किस शहर को उत्तरी भारत का मांचेस्टर कहते हैं ?
उत्तर :
अहमदाबाद को।

प्रश्न 110.
किस शहर को भारत का मांचेस्टर कहते हैं ?
उत्तर :
कानपुर को।

प्रश्न 111.
भारत का डीजल इंजन निर्माण कारखाना कहाँ स्थित हैं ?
उत्तर :
वाराणसी।

प्रश्न 112.
निर्माण प्रक्रिया में अपना वजन खोने वाले कच्चे माल को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अशुद्ध कच्चा माल कहते हैं।

प्रश्न 113.
दो कृषि आधारित उद्योगों का नाम लिखे।
उत्तर :
सूती वस्त्र उद्योग, जूट उद्योग आदि।

प्रश्न 114.
दो पशु आधारित उद्योगों का नाम लिखे।
उत्तर :
डेयरी उद्योग और जूता निर्माण उद्योग।

प्रश्न 115.
दो वन आधारित उद्योगों का नाम लिखो।
उत्तर :
कागज उद्योग और लाख उद्योग।

प्रश्न 116.
दो खनिज आधारित उद्योगों का नाम लिखे।
उत्तर :
लौह-इस्पात उद्योग और एल्यूमीनियम उद्योग।

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प्रश्न 117.
किस उद्योग को आधारभूत या बुनियादी उद्योग कहते है ?
उत्तर :
लौह-इस्पात उद्योग को।

प्रश्न 118.
कच्चा लोहा या ढलुआ लोहा (Pig-iron) किस खनीज के सहयोग से बनता है ?
उत्तर :
लौह-अयस्क, कोकिंग कोयला और चूना पत्थर।

प्रश्न 119.
भारत में सबसे पहला लौह इस्पात कारखाना कब और कहाँ स्थापित हुई ?
उत्तर :
सन् 1907 ई० में टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी जमशेदपुर में।

प्रश्न 120.
भारत में दूसरा लौह इस्पात कारखाना कब और कहाँ स्थापित हुआ ?
उत्तर :
इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, वर्नपुर (1918 ई०)।

प्रश्न 121.
भारत में तीसरा लौह इस्पात कारखाना कब और कहाँ स्थापित हुआ ?
उत्तर :
कर्नाटक में मैसूर आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, भद्रावती (1921 ई०)।

प्रश्न 122.
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद किस संस्था की सहायता से लौह-ड़स्पात उहोग स्थापित किक्रु गएल,
उत्तर :
हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड।

प्रश्न 123.
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में कौन से कारखाने स्थापित किए गए ?
उत्तर :
राउरकेला, भिलाई, दुर्गापुर तथा बोकारो।

प्रश्न 124.
वर्तमान समय में देश में कुल कितने लघु कारखाने Mini Steel Plants है।
उत्तर :
169 है।

प्रश्न 125.
टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी की स्थापना कब और किसके द्वारा हुई ?
उत्तर :
सन् 1907 ई० में जमशेद जी टाटा द्वारा।

प्रश्न 126.
इणिड्डसन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी ने अपने कारखाने कहाँ स्थापित किए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान जिले में।

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प्रश्न 127.
कुल्टी कारखाना किस नदी के किनारे स्थित है ?
उत्तर :
बराकर नदी।

प्रश्न 128.
विश्वेसरैया आयरण एण्ड स्टील लिमिटेड को पहले किस नाम से जाना जाता था ?
उत्तर :
मैसूर आयरन एण्ड स्टील कम्पनी।

प्रश्न 129.
राउरकेला इस्पात कारखाना किसके अन्तर्गत आता है ?
उत्तर :
हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड के अन्तर्गत।

प्रश्न 130.
राउरकेला कहाँ के विशेषज्रों की सहायता से बनाया गया है ?
उत्तर :
जर्मनी के विशेषज्ञों की सहायता से।

प्रश्न 131.
राउरकेला किस नदी के संगम पर स्थित है ?
उत्तर :
सांख्य एवं कोयल नदियों के संगम पर।

प्रश्न 132.
भिलाई कारखाना किसके सहयोग से बनाया गया है ?
उत्तर :
रूसी विशषज्ञो के सहयोग से।

प्रश्न 133.
भारत का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात कारखाना कहाँ है ?
उत्तर :
भिलाई कारखाना।

प्रश्न 134.
दुर्गापुर कारखाना किसके सहयोग से बनाया गया है ?
उक्षर :
ब्रिटेन के सहयोग से।

प्रश्न 135.
विशाखापट्दनम् इस्पात कारखाना कोकिंक कोयला कहाँ से आयात करता है ?
उत्तर :
आस्ट्रेलिया से।

प्रश्न 136.
भारत में प्रथम सूती वस्त्र उद्योग कब और कहाँ स्थापित हुआ ?
उत्तर :
सन् 1818 ई० में कोलकाता के निकट घुसुड़ी में हुआ।

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प्रश्न 137.
पूर्वी भारत में पेट्रोरसायन उद्योग कहाँ पर स्थापित हुआ है ?
उत्तर :
हृल्दिया में।

प्रश्न 138.
सूती वस्त्र के उत्पादन में भारत में किसका स्थान प्रथम है ?
उत्तर :
महाराष्ट्र का।

प्रश्न 139.
सूती वस्त्र की राजधानी किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
महाराए्ट का।

प्रश्न 140.
सूत व सूती वस्त्र के निर्यात में भारत का कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
दूसरा।

प्रश्न 141.
रेलवे इंजिन, जलयान, वायुयान आदि किस उद्योग के अन्तर्गत आते हैं ?
उत्तर :
भारी इंजीनियरिंग उद्योग।

प्रश्न 142.
साइकिल, सिलाई की मशीनें, घड़ियाँ आदि किस उद्योग के अन्तर्गत आते हैं ?
उत्तर :
हल्के इंजीनियरिंग उद्योग।

प्रश्न 143.
हिन्दुस्तान मशीन दूलस लिमिटेड कारखाने की स्थापना किसकी सहायता से हुई है ?
उत्तर :
स्विस सरकार की सहायता से।

प्रश्न 144.
हिन्दुस्तान मशीन टूल्स लिमिटेड की स्थापना कहाँ हुई ?
उत्तर :
बंगलौर में।

प्रश्न 145.
H.M.T. घड़ियों का निर्माण किसकी सहायता से किया जा रहा है ?
उत्तर :
जापानी कम्पनी की सहायता से।

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प्रश्न 146.
भारत में भारी इंजीनियरिंग निगम की स्थापना किसके सहयोग से हुआ है ?
उत्तर :
सोवियत संघ एवं चेकोस्लोवाकिया के सहयोग से।

प्रश्न 147.
भारत में भारी इंजीनियरिंग उद्योग की स्थापना कब और कहाँ हुई ?
उत्तर :
सन् 1958 ई० में राँची के निकट हटिया में।

प्रश्न 148.
टेलिफोन-निर्माण उद्योग की स्थापना कहाँ हुई है ?
उत्तर :
बंगलौर।

प्रश्न 149.
हिन्दुस्तान केबुल्स लिमिटेड की स्थापना कहाँ हुई है ?
उत्तर :
रूपनारायरणपुर (पश्चिम बंगाल)।

प्रश्न 150.
सूचना प्रोद्योगिकी उद्योग किस पर आधारित उद्योग है ?
उत्तर :
ज्ञान आधारित उद्योग है।

प्रश्न 151.
भारत का सर्वप्रथम साफ्टेवेयर एवं हार्डवेयर केन्द्र कहाँ है ?
उत्तर :
बंगलौर में।

प्रश्न 152.
किस शहर को भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है ?
उत्तर :
अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर कहते हैं।

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प्रश्न 153.
किस शहर को भारत का रूर कहा जाता है ?
उत्तर :
दुर्गापुर को भारत का रूर कहते हैं।

प्रश्न 154.
भारत के दो प्रधान एयरक्राफ्ट सेण्टर कहाँ हैं ?
उत्तर :
हवाई जहाज के कारखाने कानपुर तथा बंगलोर में हैं।

प्रश्न 155.
किस स्टील प्लाण्ट का उत्पादन सबसे अधिक है ?
उत्तर :
बोकारो स्टील प्लाण्ट का।

प्रश्न 156.
भारत का सबसे बड़ा सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र कौन है ?
उत्तर :
मुम्बई भारत का वर्तमान में सबसे बड़ा सूती वस्त्र उद्योग का केन्द्र है।

प्रश्न 157.
पश्चिमी तट के जलयान निर्माण केन्द्र के नाम लिखो।
उत्तर :
कोचीन और मुम्बई पश्चिमी तट के जलयान निर्माण केन्द्र हैं।

प्रश्न 158.
भारत के वायुयान निर्माण केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
हिन्दुस्तान एकरोनाटिक्स लिमिटेड, बैंगलोर वायुयान निर्माण का केन्द्र है।

प्रश्न 159.
भारत में सबसे बड़ा जलपोत निर्माण केन्द्र कौन है एवं कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
विशाखापट्टनम जो आंधप्रदेश में स्थित है भारत का सबसे बड़ा जलपोत निर्माण केन्द्र है।

प्रश्न 160.
भारत के किस औद्योगिक क्षेत्र को भारत का रूर कहा जाता हैं ?
उत्तर :
दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र को भारत का रूर कहा जाता है।

प्रश्न 161.
किस स्टील प्लाण्ट का निर्माण U.S.S.R की सहायता से किया गया है ?
उत्तर :
भिलाई स्टील प्लाण्ट (छत्तीसगढ़) की स्थापना U.S.S.R की सहायता से किया गया है।

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प्रश्न 162.
कृषि पर अधारित दो उद्योगों के नाम लिखो।
उत्तर :
कृषि पर आधारित दो उद्योग – (i) जूट उद्योग एवं (ii) सूती वस्त्र उद्योग।

प्रश्न 163.
दो पेट्रो रसायन उद्योग केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
पेट्रो रसायन उद्योग के दो केन्द्र – मुम्बई और बड़ौदरा हैं।

प्रश्न 164.
भारत का भारी इन्जिनीयरिंग निगम कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
राँची के पास हटिया में भारी इंजीनियरिंग कारपोरेशन स्थित है।

प्रश्न 165.
त्रिवेनी स्ट्रकचरल कम्पनी कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
इलाहाबाद के पास नैनी में त्रिवेनी स्ट्रकचरल कम्पनी स्थित है।

प्रश्न 166.
सूती वस्त्र उद्योग का कच्चा माल क्या है ?
उत्तर :
इस उद्योग का प्रमुख कच्चा माल कपास या रूई है।

प्रश्न 167.
भारत में किस प्रकार के कपास का उत्पादन होता है।
उत्तर :
भारत में छोटे या मध्यम रेशे वाली कपास का उत्पादन होता है।

प्रश्न 168.
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
दूसरा।

प्रश्न 169.
विश्व में किस देश की जनसंख्या सबसे अधिक है ?
उत्तर :
चीन की।

प्रश्न 170.
2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की कितनी जनसंख्या है ?
उत्तर :
9,13,47,736 (लगभग)।

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प्रश्न 171.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या का घनत्व कितना है ?
उत्तर :
382 व्यक्तित्रिति वर्ग कि॰मी०।

प्रश्न 172.
भारत के स शहर की जनसंख्या सबसे अधिक है ?
उत्तर :
मुम्बई (1,24,78,447) (लगभग)।

प्रश्न 173.
भारत के किस राज्य की जनसंख्या का घनत्व सबसे अधिक है ?
उत्तर :
बिहार (1102)।

प्रश्न 174.
भारत के किस राज्य में जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है ?
उत्तर :
अरूणाचल प्रदेश ( 17 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०)।

प्रश्न 175.
भारत के किस केन्द्रशासित राज्य में जनसंख्या का घनत्व सबसे अधिक है ?
उत्तर :
दिल्ली।

प्रश्न 176.
भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में रहती है ?
उत्तर :
68.84% ।

प्रश्न 177.
भारत की जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग शहरों में निवास करती हैं ?
उत्तर :
31.16 % ।

प्रश्न 178.
भारत के किस राज्य की जनसंख्या सबसे अधिक है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश की।

प्रश्न 179.
भारत की कार्यरत जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग कृषि में लगी हुई है ?
उत्तर :
49% ।

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प्रश्न 180.
भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या बाल आयु वर्ग के अन्तर्गत आती है ?
उत्तर :
13.12 प्रतिशत।

प्रश्न 181.
2011 में भारत में नगरों की कुल संख्या कितनी है ?
उत्तर :
4041 नगर है।

प्रश्न 182.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी का कितना प्रतिशत जनसंख्या नगरों में निवास करती है ?
उत्तर :
31.16 प्रतिशत आबादी।

प्रश्न 183.
भारत का औसत जन घनत्व कितना है ?
उत्तर :
382 व्यक्ति प्रति वर्ग मी०।

प्रश्न 184.
भारत का क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत है ?
उत्तर :
2.4 प्रतिशत है।

प्रश्न 185.
भारत में विश्व की कितनी प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है ?
उत्तर :
17 प्रतिशत।

प्रश्न 186.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी है ?
उत्तर :
121.02 करोड़।

प्रश्न 187.
1901 में भारत में नगरों की संख्या कितनी थी ?
उत्तर :
1834 नगर थे।

प्रश्न 188.
भारत में 2001 से 2011 में दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर कितनी है ?
उत्तर :
17.64 प्रतिशत।

प्रश्न 189.
भारत में पहली जनगणना कब हुई ?
उत्तर :
1872 ई० में।

प्रश्न 190.
भारत में पहली जनगणना किसके कार्यकाल में हुई ?
उत्तर :
लार्ड लिटन।

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प्रश्न 191.
भारत में क्रमवार सम्पूर्ण जनगणना कब और किसके समय में हुई ?
उत्तर :
सन् 1881 ई० में लार्ड रिपन के समय।

प्रश्न 192.
भारत की अंतरिम जनगणना के आकड़े कब जारी किए गए ?
उत्तर :
31 मार्च सन् 2011 को।

प्रश्न 193.
भारत का लिंग अनुपात कितना है ?
उत्तर :
940 प्रति हजार है। (2011 के अनुसार)

प्रश्न 194.
भारत के किस राज्य का लिंग अनुपात सबसे अधिक है ?
उत्तर :
केरल।

प्रश्न 195.
केरल का लिंग अनुपात कितना है ?
उत्तर :
1084 प्रति हजार।

प्रश्न 196.
भारत के किस राज्य का लिंग अनुपात सबसे कम है ?
उत्तर :
हरियाणा।

प्रश्न 197.
हरियाणा का लिंग अनुपात कितना है ?
उत्तर :
861 प्रति हजार।

प्रश्न 198.
केन्द्रशासित राज्यों में सबसे कम लिंग अनुपात किसका है ?
उत्तर :
दमन एवं द्वीप।

प्रश्न 199.
भारत में 40-59 आयु वर्ग वाले व्यक्ति को किस वर्ग में रखा गया है ?
उतर :
प्रौढ़ आयु वर्ग।

प्रश्न 200.
जनगणना 2011 के आँकड़ों के अनुसार भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या साक्षर हैं ?
उत्तर :
74.04 प्रतिशत।

प्रश्न 201.
भारत में कितने प्रतिशत पुरुष साक्षर हैं ?
उत्तर :
282.2 प्रतिशत।

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प्रश्न 202.
भारत में कितने प्रतिशत महिलाएँ साक्षर हैं ?
उत्तर :
65.46 प्रतिशत।

प्रश्न 203.
भारत में सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य कौन है ?
उत्तर :
केरल (99%) ।

प्रश्न 204.
भारत में सबसे कम साक्षरता वाला राज्य कौन है ?
उत्तर :
बिहार (63.82 %) ।

प्रश्न 205.
सबसे अधिक साक्षरता वाला केन्द्रशासित प्रदेश कौन है ?
उत्तर :
लक्षद्वीप (92.28 %) ।

प्रश्न 206.
सबसे कम साक्षरता वाला केन्द्रशासित प्रदेश कौन है ?
उत्तर :
दादर एवं नगर हवेली (77.65 %) ।

प्रश्न 207.
भारत में सबसे अधिक बेरोजगार किस राज्य में है ?
उत्तर :
सिक्किम में।

प्रश्न 208.
भारत में सबसे कम बेरोजगार किस राज्य में है ?
उत्तर :
छत्तीसगढ़ में।

प्रश्न 209.
पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी की दर कितनी है ?
उत्तर :
4.5 % है।

प्रश्न 210.
नवीनतम् आँकड़े के अनुसार सम्पूर्ण विश्व की औसत जीवन प्रत्याशा कितना है ?
उत्तर :
67.88 वर्ष है।

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प्रश्न 211.
विकसित देशों की औसत जीवन प्रत्याशा कितना है ?
उत्तर :
78 वर्ष है।

प्रश्न 212.
विकाशशील देशों में औसत जीवन प्रत्याशा कितना है ?
उत्तर :
65 वर्ष है।

प्रश्न 213.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में औसत जीवन प्रत्याशा कितना है ?
उत्तर :
65.48 वर्ष है।

प्रश्न 214.
विश्व में सबसे अधिक जीवन प्रत्याशा किस देश के लोगों का है ?
उत्तर :
जापान (83 वर्ष०) और स्वीटजरलैण्ड का।

प्रश्न 215.
विश्व में सबसे कम जीवन प्रत्याशा किस देश के लोगों का है ?
उत्तर :
सियरा नियोन (47 वर्ष)।

प्रश्न 216.
भारत में सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर वाला राज्य कौन है ?
उत्तर :
मध्य प्रदेश (प्रति हजार पर 67)।

प्रश्न 217.
भारत में सबसे कम शिशु मृत्यु दर वाला राज्य कौन है ?
उत्तर :
केरल (प्रति हजार 28 पर)।

प्रश्न 218.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल कार्यशील जनसंख्या का कितना प्रतिशत प्राथमिक व्यवसाय में है ?
उत्तर :
49 %

प्रश्न 219.
जनघनत्व की दृष्टि से पश्चिम बंगाल का कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
दूसरा (1029 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०)।

प्रश्न 220.
केन्द्रशासित राज्यों में जनघनत्व का प्रथम स्थान किसका है ?
उत्तर :
दिल्ली (11,297 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी०)।

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प्रश्न 221.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कितना प्रतिशत नगरीकरण है ?
उत्तर :
13.16 प्रतिशत।

प्रश्न 222.
आधुनिक युग में किसी भी देश के विकास का मुख्य आधार क्या है ?
उत्तर :
परिवहन एवं संचार।

प्रश्न 223.
परिवहन का सबसे धीमा तथा सस्ता साधन कौन-सा है ?
उत्तर :
जल परिवहन।

प्रश्न 224.
परिवहन का सबसे तीव्र तथा महँगा साधन कौन-सा है ?
उत्तर :
वायु परिवहन।

प्रश्न 225.
पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए किस साधन का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर :
पाइप लाइन परिवहन।

प्रश्न 226.
स्थल परिवहन के कौन-कौन से साधन हैं ?
उत्तर :
सड़क एवं रेलमार्ग।

प्रश्न 227.
जल परिवहन के कौन-कौन से साधन है ?
उत्तर :
समुद्र, आंतरिक नदी तथा नहर।

प्रश्न 228.
भारत में रेलवे का आरम्भ कब हुआ था ?
उत्तर :
1853 ई० में।

प्रश्न 229.
भारत में पहली रेल किन स्थानों के बीच चली ?
उत्तर :
मुम्बई से ठाने।

प्रश्न 230.
भारतीय रेल में कितने लोगों को रोजगार प्राप्त है ?
उत्तर :
15.5 लाख लोग।

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प्रश्न 231.
भारत में प्रतिदिन कितनी रेलगाड़ियाँ चलती हैं ?
उत्तर :
लगभग 1200 रेलगाड़याँ।

प्रश्न 232.
भारत में कुल कितने रेलवे स्टेशन हैं ?
उत्तर :
7023 रेलवे स्टेशन हैं।

प्रश्न 233.
भारतीय रेलमार्ग को कितने खण्डों में विभाजित किया गया है ?
उत्तर :
16 खण्डों में।

प्रश्न 234.
आन्तरिक जल परिवहन में देश के कुल परिवहन का कितना प्रतिशत योगदान है ?
उत्तर :
मात्र 0.15 प्रतिशत योगदान है।

प्रश्न 235.
भारत में सड़कों की कुल लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
41 लाख कि०मी०।

प्रश्न 236.
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग की देखभाल की जिम्मेदारी किस पर है ?
उत्तर :
केन्द्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग पर।

प्रश्न 237.
वर्तमान समय में देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल संख्या कितनी है ?
उत्तर :
221

प्रश्न 238.
राष्ट्रीय राजमार्गो की कुल लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
66,631 कि०मी०।

प्रश्न 239.
देश का सबसे लम्बा राजमार्ग कौन है ?
उत्तर :
NH. 7 (2369 कि॰मी०)

प्रश्न 240.
NH-7 भारत के किन दो स्थानों को जोड़ता है ?
उत्तर :
वाराणसी को कन्याकुमारी से जोड़ता है।

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प्रश्न 241.
स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग की कुल लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
5846 कि०मी०।

प्रश्न 242.
स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग कितने लेन में निर्मित है ?
उत्तर :
6 लेन में निर्मित है।

प्रश्न 243.
स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग की सबसे अधिक लम्बाई किन महानगरों के बीच है ?
उत्तर :
मुम्बई-कोलकत्ता के बीच।

प्रश्न 244.
स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग की सबसे कम लम्बाई किन महानगरों के बीच है ?
उत्तर :
मुम्बई-चेन्नई के बीच।

प्रश्न 245.
उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा की कुल लम्बाई कितनी है ?
इत्तर :
7300 कि०मी०।

प्रश्न 246.
भारत की आंतरिक जल परिवहन व्यवस्था की कुल लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
14500 कि०मी०।

प्रश्न 347.
आंतरिक जल परिवहन में देश के कुल परिवहन का कितना प्रतिशत योगदान है ?
उत्तर :
मात्र 0.15 प्रतिशत।

प्रश्न 248.
NW-1 आंतरिक जलमार्ग के लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
1620 कि०मी०।

प्रश्न 249.
NW- 1 आंतरिक जल मार्ग किन स्थानों को जोड़ती है ?
उत्तर :
इलाहाबाद को हल्दिया से।

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प्रश्न 250.
ब्रहापुत्र नदी राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या- 2 की लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
891 कि॰मी०।

प्रश्न 251.
बिहार में किस नहर द्वारा जल परिवहन का कार्य होता है ?
उत्तर :
सोन की नहरें।

प्रश्न 252.
पंजाब का प्रमुख जल परिवहन नहर कौन-सा है ?
तत्तर :
सरहिन्द नहर।

प्रश्न 253.
कारोमण्डल तट पर कौन-सा नहर स्थित है ?
उत्तर :
बकिंघम नहर तथा कृष्ण नहर।

प्रश्न 254.
केरल में कौन-सा नहर है ?
उत्तर :
बैकवाटर्स नहर।

प्रश्न 255.
देश का कितना प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग द्वारा होता है ?
उत्तर :
लगभग 99 %

प्रश्न 256.
भारत के समुद्र तट की कुल लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
7516 कि॰मी॰।

प्रश्न 257.
भारत में कुल कितने बन्दरगाह हैं ?
उत्तर :
12 बड़े एवं 187 छोटे एवं मझोले बन्दरगाह हैं।

प्रश्न 258.
भारत के किस बन्दरगाह पर कम्प्युटर नियंत्रित तकनीक का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर :
न्हावाशेवा या न्यू मुम्बई बन्दरगाह।

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प्रश्न 259.
कराँची बन्दरगाह के पाकिस्तान चले जाने के कारण किस बन्दरगाह का विकास किया गया है ?
उत्तर :
काण्डला बन्दरगाह।

प्रश्न 260.
किस बन्दरगाह से आयात की तुलना में निर्यात अधिक होता है ?
उत्तर :
मर्मुगाओ।

प्रश्न 261.
किस बन्दरगाह से लौह-अयस्क का आयात-निर्यात अधिक होता है ?
उत्तर :
न्यू मैंगलोर बन्दरगाह।

प्रश्न 262.
भारत की नदी बंदरगाह का नाम लिखो।
उत्तर :
कोलकाता बंदरगाह।

प्रश्न 263.
भारत का सबसे गहरा बंदरगाह कौन-सा है ?
उत्तर :
विशाखापत्तनम।

प्रश्न 264.
भारत में पहली वायु उड़ान कहाँ हुई थी ?
उत्तर :
इलाहाबाद से नैनी तक।

प्रश्न 265.
भारत में वायुयान द्वारा सबसे पहले कौन सा कार्य हुआ ?
उत्तर :
डाक सेवा शुरू की गयी।

प्रश्न 266.
वर्तमान समय में एयर इण्डिया के कितने बड़े विमान है ?
उत्तर :
26 विमान हैं।

प्रश्न 267.
भारत में कुल कितने अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं ?
उत्तर :
16 हवाई अड्डे हैं।

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प्रश्न 268.
छत्रपति शिवाजी अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा कहाँ है ?
उत्तर :
मुम्बई में।

प्रश्न 269.
पेट्रोरसायन उद्योग के विकेन्द्रीकरण में कौन-सा परिवहन सहायक सिद्धि होता है ?
उत्तर :
पाइप लाइन परिवहन।

प्रश्न 270.
दो परम्परागत दूर संचार का उदाहरण दें।
उत्तर :
डाक सेवा तथा रेडियो प्रसारण।

प्रश्न 271.
वर्तमान समय में व्यक्तिगत दूरसंचार के साधन क्या हैं ?
उत्तर :
सेलफोन तथा इंटरनेट।

प्रश्न 272.
स्वतंत्रता के समय भारत में कितनी टेलिफोन एक्सचेंज थी ?
उत्तर :
300 टेलिफोन एक्सचेंज थे।

प्रश्न 273.
ई-मेल (E-mail) का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर :
इलेक्ट्रॉनिक मेल।

प्रश्न 274.
व्यापारिक जहाजरानी बेड़े की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर :
17 वाँ स्थान है।

प्रश्न 275.
भारत के वृहद पेट्रो-रसायन केन्द्र का नाम बताओ।
उत्तर :
कोयली, गुजरात।

प्रश्न 276.
पश्चिम बंगाल में प्रमुख सूचना-प्राद्यौगिक औद्योगिक पार्क कहाँ स्थापित है ?
उत्तर :
साल्टलेक में।

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प्रश्न 277.
भारत के एक कर-मुक्त बन्दरगाह का नाम बताओ।
उत्तर :
कांडला बंदरगाह।

प्रश्न 278.
भारत के सबसे बड़ा समाचार संगठन का नाम लिखिए।
उत्तर :
Press Trust of India (P.T.I.), जो नई दिल्ली में स्थित है।

प्रश्न 279.
किस परिवहन व्यवस्था में स्वर्णिम चतुर्भुज शब्द का उपयोग होता है ?
उत्तर :
सड़क परिवहन।

प्रश्न 280.
भारत में किस प्रकार की सिंचाई व्यवस्था सर्वाधिक प्रचलित है ?
उत्तर :
नहरों द्वारा सिंचाई।

प्रश्न 281.
ज्वार, बाजरा, रागी को किस फसल के नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
ज्वार, बाजरा, रागी को मिलेट (Millet) या मोटे फसल के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 282.
भारत में उत्पन्न होने वाले एक नगदी फसल का नाम लिखिए।
उत्तर :
चाय और जूट नगदी फसलें हैं जो भारत में उत्पादित होते हैं।

प्रश्न 283.
बुलविल सामान्यत: किस फसल में लगते हैं ?
उत्तर :
कपास में ।

प्रश्न 284.
किस उद्योग को सभी उद्योगों की रीढ़ कहते हैं ?
उत्तर :
लौह-इस्पात उद्योग को 1

प्रश्न 285.
भारत में सबसे कम जनसंख्या किस राज्य की है ?
उत्तर :
सिक्किम।

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प्रश्न 286.
भारत के एक भारी उद्योग का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
लौह-इस्पात उद्योग।

प्रश्न 287.
TISCO की स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
1907 ई० में।

प्रश्न 288.
VISL को लौह अयस्क कहाँ से मिलता है ?
उत्तर :
केमानगुण्डी की खानों से लौह-अयस्क प्राप्त हो जाता है।

प्रश्न 289.
भारी इंजीनियरिंग उद्योग का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
औद्योगिक मशीनरी, रेलवे इंजिन आदि।

प्रश्न 290.
पेट्रोरसायन का एक कच्चा माल लिखो।
उत्तर :
नेष्था, बेजीन, विटुमिन आदि।

प्रश्न 291.
मल्टीमीडिया क्या है ?
उत्तर :
किसी बात या सूचना को शब्द, ध्वनि, ग्राफिक तथा एनीमेशन, एनीमेशन के मध्यम से एक साथ सम्पादित करना मल्टीमीडिया कहलाता है।

प्रश्न 292.
भारत में कुल पुरुषों संख्या कितनी है ?
उत्तर :
62.37 करोड़ है।

प्रश्न 293.
भारत में कुल जनघनत्व क्या है ?
उत्तर :
382

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प्रश्न 294.
कृषि क्षेत्र में भारत की जनसंख्या का प्रतिशत कितना है ?
उत्तर :
49 %

प्रश्न 295.
भारत में उद्योग क्षेत्र जनसंख्या का प्रतिशत कितना है ?
उत्तर :
24 %

प्रश्न 296.
यातायात और व्यापार के क्षेत्र में भारत की जनसंख्या का प्रतिशत कितना है ?
उत्तर :
23 %

प्रश्न 297.
देश की कितनी प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है ?
उत्तर :
65 %

प्रश्न 298.
कुल कृषिगत क्षेत्र पर कितने भाग में खाद्यान्न फसलें उगायी जाती है ?
उत्तर :
66 %

प्रश्न 399.
धान की कृषि के लिए कितनी वर्षा चाहिये ?
उत्तर :
100 से 200 से०मी० तक वार्षिक वर्षा।

प्रश्न 300.
रागी का सबसे अधिक उत्पादन कहाँ किया जाता है ?
उत्तर :
तमिलनाडु, आन्द्र प्रदेश और कर्नाटक थे।

प्रश्न 301.
कपास के उत्पादन के लिए कैसी मिट्टी चाहिए ?
उत्तर :
काली मिट्टी।

प्रश्न 302.
चाय के उत्पादन के लिए कैसी मिट्टी चाहिए ?
उत्तर :
लौहयुक्त उपजाऊ मिट्टी।

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प्रश्न 303.
कच्चे माल के प्रकृति पर उद्योगों को कितने भाग में बाँटा गया है ?
उत्तर :
दो भागों में बाँटा गया है।

प्रश्न 304.
भारी इंजीनियरिंग उद्योग का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
औद्योगिक मशीनरी, रेलवे इंजिन उद्योग आदि।

प्रश्न 305.
हल्का इंजीनिग्ररिंग उद्योग का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
साइकिल, सिलाई की मशीने, धड़ियाँ आदि।

प्रश्न 306.
संरचनात्मक इंजीनियरिंग उद्योग का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
मशीनरी यन्त्रों तथा मशीनरी का निर्माण उद्योग।

प्रश्न 307.
भारत की दो पेय फसलों का नाम बताइये जिनका निर्यात होता है।
उत्तर :
चाय एवं कहवा।

प्रश्न 308.
वन आधारित एक उद्योग का नाम बताइये।
उत्तर :
कागज उद्योग।

प्रश्न 309.
भारत के किस भाग में पेट्रो-रसायन उद्योग का सबसे अधिक विकास हुआ है ?
उत्तर :
पश्चिमी क्षेत्र में।

प्रश्न 310.
सेल फोन से क्या समझथे हैं ?
उत्तर :
यह एक लम्बी दूरी का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसे विशेष बेस स्टेशनो के नेटवर्क के आधार पर मोबाइल आवाज या डेटा संचार के लिए उपयोग करते है। इन्हें सेल सारटों के रूप में जाता है।

प्रश्न 311.
भारत के पश्चिमी भाग में लौह-इस्पात उद्योग का विकास न होने का एक कारण बताइये।
उत्तर :
खनिजों के अभाव के कारण।

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प्रश्न 312.
भारत के किस राज्य में गेहूँ की प्रति हेक्टेयर पैदावार सबस अधिक है ?
उत्तर :
पंजाब (4,696 कि० ग्रा० प्रति हेक्टेयर)

प्रश्न 313.
किस गत्रा उत्पाद क्षेत्र को ‘भारत का जावा’ कहते हैं।
उत्तर :
उत्तरी भारत को।

प्रश्न 314.
भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या बाल आयु वर्ग के अन्तर्गत आती है ?
उत्तर :
31.2 %

प्रश्न 315.
व्यापारिक जहाजरानी बेड़े की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
उत्तर :
17 वाँ स्थान है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
संधारणीय विकास (Sustainable development) से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संसाधनों के संरक्षण के साथ विकास को ही रक्षणीय विकास या संधारणीय विकास (Sustainable development) कहते है।

प्रश्न 2.
जीवन निर्वहन कृषि से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
भारतीय कृषि जीवन निर्वहन प्रकृति की है। रोजगार के अवसरों की कमी के कारण यहाँ अधिकांश लोग कृषि कार्य में लगे हुए है तथा कृषक अधिकांश उत्पादन का उपयोग स्वयं कर लेते है। वास्तव में कृषक कृषि इसी उद्देश्य से करता है कि कृषि उत्पादन से उसके परिवार की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी हो सकें।

प्रश्न 3.
कृषि क्या है ?
उत्तर :
Agriculture शब्द की उत्पत्ति लैटिन के दो शब्द ‘agar’ और ‘cultura’ से हुई है। ‘Agar’ का मतलब भूमि और ‘Cultura’ का मतलब कृषि होता है। अत: Agriculture का तात्पर्य फसलों के उत्पादन के लिए भूमि की कृषि है।

प्रश्न 4.
गहन कृषि की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
गहन कृषि की विशेषता –
(i) गहन कृषि छोटी जोतों पर की जाती है।
(ii) उत्तम बीज, खाद एवं रासायिनक उर्वरक तथा सिंचाई की सुविधा का प्रयोग करके प्रति हेक्टेयर ऊपज बढ़ाना।

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प्रश्न 5.
जीविका कृषि से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
जीविका कृषि में कृषक अपनी तथा अपने परिवार के सदस्यों की उदारपूर्ति के लिए फसले उगाता है। चावल सबसे महत्तपूर्ण फसल है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में गेहूँ, जो, मक्का, ज्वार-वाजरा, सौयाबीन, दाल, तिलहन भी बोये जाते हैं। इस कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव के कारण भूमि का गहनतापूर्वक उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 6.
भारत में किन तिलहनों का उत्पादन किया जाता है ?
उत्तर :
भारत में मूँगफली, रेपसीड, तिल, अलसी, सरसों, राई, कपास का बीज, सोयाबीन, नारियल, रेंडी उगाया जाता है।

प्रश्न 7.
अनित्यवाही नहर क्या है ?
उत्तर :
अनित्यवाही नहरों में जल वर्षा के समयकाल में ही रहता है। ऐसी नहरों की लम्बाई बहुत कम होती है, जैसे कृष्णा एवं कावेरी डेल्टा।

प्रश्न 8.
फजेण्डा क्या है ?
उत्तर :
ब्राजील कहवा का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यहाँ कहवा की कृषि बड़े-बड़े बगानों में की जाती है जिन्हें फजेण्डा के नाम से पुकारा जाता है।

प्रश्न 9.
जायद फसल क्या है ?
उत्तर :
जायद फसलें वे हैं जो ग्रीष्म या वसन्त ॠतु के शुरू में रोपी जाती है और ग्रीष्म ऋतु अन्त में ही वर्षा ऋतु के पहले काट ली जातीहै । जैसे – खरबूज-तरबूज, ककड़ी आदि।

प्रश्न 10.
पेय फसल से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
पेय फसल के अन्तर्गत कहवा और चाय आता है। अर्थात् वे फसलें जो पीने के रूप में प्रयोग किया जाता है उन्हें पेय फसल कहा जाता है।

प्रश्न 11.
ट्रक फार्मिंग क्या है ?
उत्तर :
यह एक विशेष प्रकार की कृषि है । बाजार से कृषि क्षेत्र की दूरी को तय करने में जो समय लगता है उसे ट्रक फार्मिंग कहा जाता है। इसके अन्तर्गत उद्यान कृषि को रखा जाता है जिसमें फल, फूल तथा सब्जियों की खेती की जाती है।

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प्रश्न 12.
भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में कितने किस्म की चावल पैदा की जाती है ?
उत्तर :
भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में तीन किस्म की चावल पैदा की जाती है जिनमें अमन, औस और वोरो का नाम आता है। चावल उत्पादन में पश्चिम बंगाल का स्थान प्रथम है।

प्रश्न 13.
रेशेदार फसल से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
वे फसलें जिनसे रेशा प्राप्त किया जाता है उन्हें रेशेदार फसल कहा जाता है। जैसे – कपास एवं जूट। कपास को श्वेत-रेशादार तथा जूट को सुनहले रेशेदार फसल कहा जाता है।

प्रश्न 14.
बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना का दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना का अर्थ होता है बहुत सा उद्देश्य –

  • सिंचाई की समुचित व्यवस्था करना।
  • जलविद्युत उत्पन्न करना।
  • मछली पालन करना।
  • नौका बिहार के साथ मनोरंजन करना।

प्रश्न 15.
उत्तर-पूर्वी भारत एवं दक्षिणी भारत के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर :
उत्तर-पूर्वी भारत के चाय उत्पादक राज्यों में पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग, असम, त्रिपुरा तथा दक्षिण भारत के तामिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश एवं केरल हैं।

प्रश्न 16.
झुमिंग कृषि क्या है ?
उत्तर :
स्थानांतरी कृषि को उत्तर-पूर्वी भारत में झुमिंग कृषि कहा जाता है। यह कृषि क्षेत्र दो-तीन वर्षों के बाद बदलता रहता है। इस प्रकार की कृषि में कृषकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानातरण होना पड़ता है असम, मिजोराम, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैण्ड एवं मेघालय में इस प्रकार की कृषि की जाती है।

प्रश्न 17.
कपास की प्रमुख प्रजातियाँ कितनी है ?
उत्तर :
कपास की प्रमुख तीन प्रजातियाँ है :-

  • लम्बे रेशेवाली
  • मध्यम रेशे वाली तथा
  • छोटे रेशेवाली।

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प्रश्न 18.
रवि फसलों से क्या समझते हो ?
उत्तर :
रवि फसल (Rabi Crops) : जो फसलें जाड़े के प्रारम्भ में बोई जाती है एवं मार्च-अप्रेल में काटी जाती है, रवि फसलें कही जाती है। जैसे गेहूँ, चना, सरसों, मसूर, मटर आदि।

प्रश्न 19.
खरीफ फसलों से क्या समझते हो ?
उत्तर :
खरीफ फसल (Kharif Crops) : वे फसलें जो बरसात से पहले अप्रेल-मई में बोई जाती है तथा नवम्बर दिसम्बर में काट ली जाती है, खरीफ फसलें कहलाती है। जैसे – ज्वार, बाजरा, धान आदि।

प्रश्न 20.
नकदी फसलों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
नकदी फसल (Cash Crops) : नकदी फसलों से आशय उन फसलों से है जिनका उत्पादन उपयोग के लिए न होकर विक्रय के लिए होता है। जैसे काफी, जूट, गन्ना आदि।

प्रश्न 21.
बागानी फसलें क्या है ?
उत्तर :
बागानी फसल (Plantation Crops) : बागानी कृषि से तात्पर्य उस कृषि से है जिसमें बड़े पैमाने पर एक फसली कृषि एक कुशल व्यवस्था एवं पर्याप्त पूंजी के अन्तर्गत होती है। इसमें फसलें प्रति वर्ष नहीं रोपी जाती है, जैसे – चाय एवं काफी की फसलें।

प्रश्न 22.
बहुफसलीय कृषि क्या है ?
उत्तर :
जहाँ पर वर्षा और सिंचाई की सुविधा है वहाँ पर एक ही खेत में वर्ष में दो फसलें या दो से अधिक फसलें उगायी जाती है, इसे बहुफसलीय कृषि कहते हैं। बहुफसलीय कृषि से फसल-चक्र में सहायता मिलती है जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है।

प्रश्न 23.
भारत में गहन कपास कैसे उगाया जाता है ?
उत्तर :
भारत में कपास का उत्पादन केरल और पश्चिम बंगाल को छोड़कर शेष सभी राज्यों में किया जाता है। कपास का उत्पादन समुद्र तल से 1000 मी॰ की ऊँचाई तक तथा 50 से॰मी॰ 25 से॰मी॰ वर्षा वाले क्षेत्रों में किया जाता है। कपास गुजरात और महाराष्ट्र में विशेष तौर पर उगाया जाता है।

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प्रश्न 24.
भारत की दो सिंचाई नहरों का नाम लिखो।
उत्तर :
ऊपरी गंगा नहर, नांगल बांध की नहरें, राजस्थान नहर, सोन नहर।

प्रश्न 25.
दामोदर घाटी के तीन जलविद्युत शक्ति केन्द्रों के नाम लिखिए।
उत्तर :
दामोदर घाटी के तीन जलविद्युत केन्द्रों के नाम पंचेत, तिलैया एवं मैथन है।

प्रश्न 26.
चाय की खेती के लिए ढालू भूमि की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
उत्तर :
चाय की जड़ों में पानी का रूकना हानिकारक होता है। अत: चाय की कृषि पहाड़ी ढालों पर की जाती है ताकि जड़ों में पानी न रूक सके।

प्रश्न 27.
चाय की खेती के लिए कौन सा खाद उपयोगी होती है ?
उत्तर :
चाय के लिए अमोनियम सल्फेट, हड्डी की खाद तथा हरी खाद उपयोगी होती है।

प्रश्न 28.
असम के कौन से जिले चाय के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
असम राज्य के शिव सागर, उत्तरी सागर, उत्तरी दराग, लखीमपुर, करीमगंज एवं कछार जिले चाय के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 29.
दार्जिलिंग की चाय अपने विशेष स्वाद के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। क्यों ?
उत्तर :
दार्जिलिंग की मिट्टी में पोटास तथा फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है जिससे यहाँ की चाय अपने विशेष स्वाद के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।

प्रश्न 30.
भारतीय चाय के प्रमुख ग्राहक विश्व के कौन-कौन से देश है ?
उत्तर :
भारतीय चाय के प्रमुख ग्राहक ग्रेट ब्रिटेन, रूस, नीदरलैण्ड, ईरान, इराक, जापान, जर्मनी, अफगनिस्तान, संयुक्त अरब, गणराज्य एवं संयुक्त राज्य अमेरिका है।

प्रश्न 31.
भारत में सर्वप्रथम कहवा की कृषि कब, कहाँ और किसके द्वारा किया गया ?
उत्तर :
भारत में सर्वप्रथम सत्रहवीं शताब्दी में कहवा की कृषि का प्रारम्भ तब हुआ जब बाबाबूदन साहब ने सौदी अरब से कहवा के बीज लाकर उन्हें कर्नाटक राज्य के बाबा बूदन की पहाड़ी पर उगाया।

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प्रश्न 32.
कहवा के लिए कौन सी मिट्टी उत्तम होती है ?
उत्तर :
कहवा के लिए लोहा, चूना, पोटाश, नाइट्रोजन एवं ह्यूमस युक्त उपजाऊ दोमट मिट्टी उत्तम होती है।

प्रश्न 33.
गन्ने की कृषि उसके खपत क्षेत्र के समीप होना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर :
गन्ने को काटने के एक दिन के भीतर ही उसे पेर कर उसका रस निकाल लिया जाता है। देर करने से गत्ना सूख जाता है और उससे कम रस निकलता है। अतः इसके लिए पर्याप्त बाजार का नजदीक में मिलना आवश्यक होता है।

प्रश्न 34.
दक्षिणी भारत में उपयुक्त भौगोलिक दशाओं के बावजुद भी गन्ने का उत्पादन उत्तर भारत की अपेक्षा कम होता है। क्यों ?
उत्तर :
यद्यपि गन्ने की कृषि के लिए उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिणी भारत भौगोलिक सुविधाओं की दृष्टि से अधिक अनुकूल है फिर भी देश का लगभग 80 प्रतिशत गत्ना उत्तरी भारत में ही उत्पन्न होता है। इसका कारण यह है कि दक्षिणी भारत में गत्रा को कपास एवं मूँगफली जैसी नगदी फसलों से प्रतियोगिता लेनी पड़ती है।

प्रश्न 35.
भारत में गन्ने की उपज को बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है ?
उत्तर :
भारत में गन्ने की उपज को बढ़ाने के लिए इण्डोनेशिया से अधिक रस एवं चीनी देने वाले गन्ने के बीजों का आयात किया जा रहा है।

प्रश्न 36.
हरित क्रान्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर :
हरित क्रान्ति (Green Revolution) : देश को खाद्यानों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सन् 1966-67 ई० से सरकार द्वारा काफी प्रयास किया गया। सिंचाई, अधिक उत्पादन देने वाले बीजों के प्रयोग, स्वाद, कृषि के आधुनिक यंत्रों, वैज्ञानिक विधियों तथा कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। कृषि के उत्पादन में हुई इस अचानक वृद्धि को ही हरित क्रान्ति कहते है।

प्रश्न 37.
भारत द्वारा प्रमुख आयातित एवं निर्यातित फसलें क्या हैं ?
उत्तर :
प्रमुख कृषि निर्यात : चाय, जूट के सामान, कहवा, तम्बाकू, गन्ना, मसालें, लाख आदि हैं। प्रमुख कृषि आयात :- कच्चा ऊन, कच्चा जूट, कच्चा कपास आदि है।

प्रश्न 38.
बागानी कृषि क्या है ?
उत्तर :
जब लम्बे कृषि क्षेत्रफल पर आधुनिक विज्ञान और मशीनरी का प्रयोग कर एवं उन्नतशील बीज, खाद, दवाओं तथा अत्यधिक पूंजी लगाकर वर्ष में निश्चित कृषि भाग से एक फसल बड़े पैमाने पर उगायी जाती है तो उसे बागानी कृषि कहते हैं। जैसे – चाय, कहवा और रबर की कृषि।

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प्रश्न 39.
शुष्क कृषि क्या है ?
उत्तर :
ऐसे भूभाग जहाँ अल्प वर्षा होती है अथवा सिंचाई की सुविधा नहीं है वहाँ पर असिंचित कृषि की जाती है। ऐसे क्षेत्रों में विशेषकर ज्वार, बाजरा, तीसी, रेंडी, अरहर, जौ, जई, आदि फसलें उगाई जाती है। ऐसे क्षेत्रों की खूब जुताई करके मिट्टी को बारीक बना दिया जाता है जिससे अनावश्यक पौधों से जलशोषण एवं वाष्पीकरण न हो।

प्रश्न 40.
सीमित कृषि क्या है ?
उत्तर :
सीमित कृषि उसे कहते हैं जिसमें उत्पादन की मात्रा उत्पादकों की आवश्यकता पूर्ति तक सीमित रहती है। इस कृषि में उत्पादित फसलें केवल खाद्यान्न ही हैं। कांगो बेसिन, मध्य एशिया एवं भारत के पहाड़ी क्षेत्रें में इसी तरह की कृषि होती है।

प्रश्न 41.
सफेद क्रान्ति या बाढ़ योजना क्या है ?
उत्तर :
दुग्ध के क्षेत्रों में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपनाये गये कार्यक्रमों को सफेद क्रांति या बाढ़ योजना कहते हैं।

प्रश्न 42.
पशुपालन क्या है ?
उत्तर :
यह एक ऐसी कृषिकार्य है जिसमें पशुओं का लालन-पालन दुग्ध व्यवसाय के लिए, मांस, चमड़ा और ऊन की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

प्रश्न 43.
मिश्रित कृषि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्राय: सर्वत्र कृषि के साथ-साथ पशुपालन किया जाता है। ऐसी कृषि को मिश्रित कृषि कहते हैं। अधिक उत्पादन के लिए एवं उत्पादन में विशिष्टता लाने के लिए इनकी अलग खेती भी की जाती है।

प्रश्न 44.
भारत के एक अल्वाय स्टील प्लाण्ट एवं कृषि यंत्र निर्माण केन्द्र का नाम लिखो।
उत्तर :
एक अल्वाय स्टील प्लाण्ट दुर्गापुर है और कृषि यंत्रों का निर्माण केन्द्र हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (H.M.T.) पिंजोर (हरियाणा) में स्थित है।

प्रश्न 45.
किसी एक इलेक्ट्रिकल संयत्र नाम बताएँ।
उत्तर :
BHEL जिसकी शाखाएँ भोपाल, मध्यप्रदेश, हरिद्वार (उत्तरांचल) तिरूचिरार्षल्ली (तमिलनाडू) में स्थित है।

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प्रश्न 46.
सहायक उद्योग क्या है ?
उत्तर :
वे उद्योग जो वृहद् उद्योगों के आस-पास पूरक उद्योग के रूप में या वृहद उद्योगों पर अधारित होते हैं, उसे सहायक उद्योग कहते हैं। जैसे – मोटर गाड़ी उद्योग, साइकिल उद्योग आदि।

प्रश्न 47.
भारत का सबसे बड़ा आयरन एण्ड स्टील प्लाण्ट कौन सा है ?
उत्तर :
बोकारो आयरन एण्ड स्टील प्लाण्ट वर्तमान समय में सबसे बड़ा उत्पादन देने वाला स्टील प्लाण्ट है।

प्रश्न 48.
जलयान, रेलवे इंजन और एयर क्राफ्ट बनाने वाले केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
विशाखापत्तनम में जलयान निर्माण, चित्तरंज़न में रेल इंजन एवं बंगलोर में हवाई जहाज निर्माण केन्द्र है।

प्रश्न 49.
भारत में जलयान उत्पादन करने वाले केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
जलयान निर्माण केन्द्र – विशाखापत्तनम, गार्डेनरीच, मर्मुगांव, कोचीन।

प्रश्न 50.
पूर्वी भारत के चार लौह-इस्पात उद्योग के केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
हीरापुर, कुल्टी एवं उड़ीसा में राउरकेला।

प्रश्न 51.
भारत में कितने प्रकार के सूती वस्त्र उद्योग है ?
उत्तर :
भारत में सूती वस्व उद्योग दो प्रकार का है –
(i) हस्त चालित तांत उद्योग
(ii) सूती कपड़ों की मिलें।

प्रश्न 52.
सूती वस्त्र उद्योग में कितने प्रकार की मिले होती है ?
उत्तर :
सूती कपड़े की मिलें तीन प्रकार की है –

  • स्पीनिंग मिल
  • वीमिंग (बुनने की) मिल
  • सूता बुनाई की मिल।

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प्रश्न 53.
भारत में प्रथम सूती वस्त्र मिल कब और कहाँ स्थापित हुई ?
उत्तर :
भारत में सूती वस्त्र का प्रथम मिल पश्चिम बंगाल में कोलकाता के पास फोर्ट ग्लास्टर में सन्र 1812 ई० में स्थापित हुई।

प्रश्न 54.
इंजीनिररिंग उद्योग क्या है ?
उत्तर :
इस्पात तथा अन्य धातुओं को कच्चा माल के रूप में व्यवहार कर मशीन, औजार आदि के निर्माण को इंजीनियेरिंग उद्योग कहते है।

प्रश्न 55.
लोकोमोटिव उद्योग से क्या समझते हो ?
उत्तर :
लोकोमोटिव उद्योग उस उद्योग को कहते हैं जहाँ पर रेल के इंजनों का निर्माण होता है।

प्रश्न 56.
लौह इस्पात उद्योग में कौन से कच्चे माल लगते हैं ?
उत्तर :
लौह अयस्क, कोक कोयला, चूना पत्थर या डोलोमाइट, मैंगनीज, लौह मिश्र धातु, पानी और हवा इस्पात उद्योग के प्रमुख कच्चे माल है।

प्रश्न 57.
एक टन इस्पात बनाने में कितने हवा की आवश्यकता होती है ?
उत्तर :
एक टन इस्पात बनाने में 4 टन हवा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 58.
भारत का कौन सा शहर भारत का ग्लासगो कहा जाता है और क्यों ?
उत्तर :
ग्रेट ब्रिटेन में क्लाइड नदी के मुहाने पर स्थित ग्लासगो जलयान निर्माण का विश्व प्रसिद्ध केन्द्र है। भारत का विशाखापत्तनम भी जलयान निर्माण का केन्द्र है, अत: इसे भारत का ग्लासगो कहा जाता है।

प्रश्न 59.
लौह-इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे मालों का उल्लेख करो।
उत्तर :
लौह-इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे मालों में लौह अयस्क, डोलामाइट, चूना-पत्थर, मैंगनीज एवं कोकिंग कोयला आदि उल्लेखनीय हैं।

प्रश्न 60.
मुम्बई सूती वस्त्र उद्योग के लिए क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
महाराष्ट्र में सूती वस्त्र उद्योग में सबसे आगे है। यहाँ पर पूरे भारत का 38 % कपड़ा तथा 30 % सूत तैयार किया जाता है। यहाँ कुल 122 कपड़ा के मिले हैं जिसमें 63 मिलें अकेले मुम्बई में हैं।

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प्रश्न 61.
माइल्ड स्टील क्या है ?
उत्तर :
वह स्टील जिसमें कार्बन की मात्रा 0.25 % से कम रहती है और बिना किसी विशिष्ट धातु एलाब के मिश्रण से तैयार किया जाता है उसे माइल्ड स्टील कहते हैं। यह अपेक्षाकृत नरम होता है।

प्रश्न 62.
भारत के मशीन दूल्स निर्माण केन्द्रों को लिखो।
उत्तर :
बैंगलोर (HMT), दुर्गापुर, ॠषिकेश, नैनी (इलाहाबाद), हैदराबाद, नासिक, कानपुर, पंजाब, पश्चिम बंगाल आदि।

प्रश्न 63.
कौन सी जूट मिल प्रथम एवं कौन सी सबसे बड़ी है ?
उत्तर :
बाऊरिया प्रथम जूट मिल है एवं हुकुमचन्द जूट मिल (नैहट्टी) सबसे बड़ी जूट मिल है।

प्रश्न 64.
भारत का सबसे बड़ा लौह इस्पात कारखाना कौन है ?
उत्तर :
भिलाई भारत का सबसे बड़ा लौह-इंस्पात कारखाना है। इसकी उत्पादन क्षमता 4.2 मिलियन टन है।

प्रश्न 65.
एक निजी क्षेत्र के लौह-इस्पात कारखाना का नाम लिखो।
उत्तर :
निजी क्षेत्र का एक लौह-इस्पात कारखाना TISCO – टाटा आयरन एण्ड कम्पनी, जमशेदपुर है।

प्रश्न 66.
सेल क्या है ?
उत्तर :
स्टील अथारिटी आफ इणिडया लिमिटेड (SAIL) एक संख्था (Organisation) है जो भारत में लौह-इस्पात के उत्पादन का देखभाल करती है।

प्रश्न 67.
कास्ट आयरन क्या है ?
उत्तर :
कास्ट आयरन का निर्माण पिग आयरन के इस्पात के साथ फिर से गरम करके किया जाता है। इसमें बालू या कुछ दूसरे प्रकार के धातु भी मिलाये जाते हैं। इसमें अशुद्धता होती है, अतः यह कुड़कुड़ा हाता है या सहजही टूट जाता है।

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प्रश्न 68.
मिश्र धातु क्या है ?
उत्तर :
मिश्र धातु (alloy) : मिश्र धातु एक धात्विक पदार्थ है जिसका निर्माण दो या दो से अधिक धातुओं के मिश्रण से किया जाता है। जैसे – स्टील (लौह + कार्बन) एवं बांज (तांबा + जिंक)।

प्रश्न 69.
फेरो-अल्वाय क्या है ?
उत्तर :
जब खनिजो को अल्प अनुपात में लौह-इस्पात के साथ मिलाकर इसे काफी मजबूती प्रदान की जाती है तो इसे फेरो-अल्वाय कहा जाता है। जैसे – मैंगनीज, टंगस्टन, निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम आदि।

प्रश्न 70.
रेटिंग क्या है ?
उत्तर :
रेटिंग एक विधा है जिसे अपनाकर फसल को हल्का सा सड़ाकर (Partial decay) रेशों (Fibers) को डंठल से अलग किया जाता है। उदाहरण – नारियल का खुज्जा, जूट आदि।

प्रश्न 71.
स्टील क्या है ?
उत्तर :
स्टील का निर्माण करने के लिए पिग लौह को पिघलाकर उसमें से अशुद्धता को दूर किया जाता है और 0.3 % से 2.2 % कार्बन और फेरो-अल्वाय मिलाया जाता है।

प्रश्न 72.
स्वतंत्रता के बाद स्थापित लौह-इस्पात कारखानों के नाम लिखो।
उत्तर :
स्वतंत्रता के बाद के स्टील प्लाण्ट का निर्माण एवं विकास – भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, बोकारो, सलेम, विशाखापट्टनम, द्वैतारी।

प्रश्न 73.
स्वतंत्रता पूर्व स्थापित लौह-इस्पात कारखानों के नाम लिखो।
उत्तर :
स्वतंत्रतापूर्व विकसित स्टील कारखाना – TISCO (जमशेदपुर), IISCO (बर्नपुर), भद्रावती, विश्वैसरैया आयरन एण्ड स्टील लिमिटेड (VISL)।

प्रश्न 74.
भारत के दो छोटे स्टील प्लाण्टों के नाम लिखो।
उत्तर :
छोटे स्टील प्लाण्ट – (i) सलेम, तमिलनाडू । (ii) बालाचेराबू, आधभ्रदेश।

प्रश्न 75.
भारत का पहला सार्वजनिक क्षेत्र में एल्वाय स्टील प्लण्ट कहाँ और कब स्थापित हुआ ?
उत्तर :
भारत का प्रथम एल्वाय और स्टील प्लाण्ट सार्वजनिक क्षेत्र में दुर्गापुर में23 जनवरी 1956 ई० को स्थापित किया गया था।

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प्रश्न 76.
जलपोत, रेलवे इंजन, वायुयान निर्माण केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
जलपोत निर्माण केन्द्र – विशाखापट्टनम।
रेलवे इंजिन निर्माण केन्द्र – चित्तरंजन।
वायुयान निर्माण केन्द्र – बैंगलोर, कानपुर।

प्रश्न 77.
लौह-इस्पात उद्योग में मैंगनीज का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर :
लौह इस्पात उद्योग में मैंगनीज का प्रयोग लोहे को जंगरोधी एवं कड़ा करने के लिए किया जाता है।
मैंगनीज उत्पादक केन्द्र – बालघाट, छिंदवारा, क्योंझर, कोरापुर, कालाहांडी, नागपुर, भण्डार, रत्लगिरि, नोवामुण्डी आदि हैं।

प्रश्न 78.
जनगणना (Census) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
आबादी सम्बन्धी आँकड़ों के संप्रह करने की कार्य प्रणाली को जनगणना (Census) कहते हैं।

प्रश्न 79.
भारत में पहली जनगणना कब और किसके कार्यकाल में हुई ?
उत्तर :
भारत में पहली जनगणना 1872 ई० में लार्ड लिटन के कार्यकाल में हुई थी।

प्रश्न 80.
भारत में क्रमवार सम्पूर्ण जनगणना कब और किसके शासन काल में हुई ?
उत्तर :
भारत में क्रमवार सम्पूर्ण जनगणना सन् 1881 ई० में लार्ड रिपन के समय हुई।

प्रश्न 81.
सन् 2011 की जनगणना से क्या ज्ञात होता है ?
उत्तर :
जनगणना (Census) 2011 : भारत में 31 मार्च सन् 2011 को राष्ट्रीय जनगणना 2011 के अंतरिम आकड़े जारी किए गए। उसके अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 1,21,01,93,422 थी, जो 2001 में देश की जनसंख्या की तुलना में 18.14 करोड़ अधिक थी।

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प्रश्न 82.
लिंग अनुपात (Sex Ratio) क्या है ?
उत्तर :
प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या को लिंग अनुपात कहते हैं। भारत का लिंग अनुपात 940 प्रति हजार है।

प्रश्न 83.
जनसंख्या की वृद्धि दर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जनसंख्या की वृद्धि दर (Population Growth Rate) : प्रति हजार जनसंख्या पर जन्म दर एवं मृत्यु दर के अन्तर को ‘जनसंख्या की वृद्धि दर’ कहते हैं।

प्रश्न 84.
बेरोजागरी जनसंख्या से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
बेरोजगारी जनसंख्या (Unemployed Population) : सक्रिय जनसंख्या के उस अंश को बेरोजगार की संज्ञा दी जाती है जो आर्थिक कार्य करने में सक्षम तथा कार्य करने को इच्छुक होता है, परन्तु काम के अभाव के कारण कार्यरत नहीं होता है तथा काम की खोज में रहता है।

प्रश्न 85.
जीवन प्रत्याशा (Life expectancy) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जीवन प्रत्याशा जन्म के समय व्यक्ति के लिए प्रत्याशित औसत आयु को प्रदर्शित करती है। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि किसी क्षेत्र विशेष में एक व्यक्ति के जीवन की संभावित आयु क्या होगी?

प्रश्न 86.
जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना (Occupational structure of population) : जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से तात्पर्य कुल कार्यशील जनसंख्या का विभिन्न व्यवसायों में वितरण से है।

प्रश्न 87.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना कैसा है ?
उत्तर :
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल कार्यशील जनसंख्या का 49 % प्राथमिक व्यवसाय में, 24 % द्वितीयक व्यवसाय में तथा 27 % तृतीयक व्यवसाय में लगी हुई है। यह पहली बार हुआ है जब प्राथमिक व्यवसाय में लगी जनसंख्या का प्रतिशत 50 से कम है।

प्रश्न 88.
जनसंख्या का घनत्व (Density of Population) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जनसंख्या का घनत्व (Density of Population) : किसी प्रदेश के इकाई क्षेत्रफल (जैसे प्रति वर्ग किलोमीटर या प्रति वर्ग मील) में रहने वाले मनुष्यों की औसत संख्या को वहाँ की जनसंख्या का घनत्व कहते हैं।

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प्रश्न 89.
सबसे पहले किस देश में जनगणना के होने के संकेत मिलते हैं ?
उत्तर :
बेवीलोन, मिस्त्र तथा चीन के विभिन्न भागों में 3000 ईसा पूर्व जनगणना किए जाने के संकेत मिलते हैं।

प्रश्न 90.
आधुनिक पद्धिति से सबसे पहले जनगणना कब और कहाँ हुई है ?
उत्तर :
आधुनिक पद्धिति से पहलीबार जनगणना 1749 ई० में स्वीडेन में की गयी।

प्रश्न 91.
दशकीय जनगणना की शुरूआत कब और कहाँ हुई ?
उत्तर :
दशकीय जनगणनाओं की शुरूआत 1790 ई० में संयुक्त राज्य अमेरिका एवं 1801 ई० में ब्रिटेन में प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 92.
नगरीकरण (Urbanisation) क्या है ?
उत्तर :
नगरीकरण एवं नगरों का विकास एक ऐसी शास्वत प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति गाँवों से प्रास्थान कर नगरों में निवास करने लगता है। इस प्रकार ग्रामों से नगरों की ओर जनसंख्या की अभिमुखता ही नगरीकरण है, इसमें व्यक्तियों द्वारा कृषि के स्थान पर गैर-कृषि कायों को म्रहण करने की प्रकृति होती है।

प्रश्न 93.
नगरीकरण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
पर्यावरणीय प्रदूषण में वृद्धि : घनी जनसंख्या, औद्योगिक विकास, उचित निकास व्यवस्था का अभाव, मोटर-वाहनों का अधिकाधिक प्रयोग, आवास के लिए पेड़ों की कटाई, अपशिष्टों के उचित प्रबन्धन का अभाव आदि के कारण पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 94.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी है ?
उत्तर :
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ 1 लाख 93 हजार 422 है।

प्रश्न 95.
मानव-भूमि अनुपात क्या है ?
उत्तर :
मनुष्य-भूमि अनुपात गुणवत्ता से सम्बन्धित है जिसके अन्तर्गत मनुष्य की योग्यता तथा संसाधन की उपलब्धता दोनों सम्मिलित हैं।

प्रश्न 96.
जनसंख्या के घनत्व की एक विशेषता लिखें।
उत्तर :
जनसंख्या का घनत्व संख्यात्मक माप है। इसमें भूमि की गुणवत्ता का आकलन नहीं होता है।

प्रश्न 97.
जमीन जनसंख्या घनत्व और जनसंख्या के घनत्व में एक अन्तर लिखें।
उत्तर :
मनुष्य भूमि अनुपात को कुल जनसंख्या और भूमि क्षेत्र की कुल उत्पादकता के अनुपात में व्यक्त किया जाता है, जबकि जनसंख्या के घनत्व को कुल जनसंख्या और कुल भूमि के अनुपात में व्यक्त किया जाता है।

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प्रश्न 98.
जनाधिक्य क्या है ?
उत्तर :
संसाधन के अनुपात में यदि जनसंख्या अधिक होती है तो उसे जनाधिक्य कहते हैं।

प्रश्न 99.
भारत में जनाधिक्य क्यों है ?
उत्तर :
भारत में संसाधनों की कमी एवं रोजगार के अभाव के कारण जनाध्रिक्य है।

प्रश्न 100.
कम जनसंख्या से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संसाधन के अनुपात में जनसंख्या के कम होने पर उसे जनसंख्या की न्यूनता कहते हैं।

प्रश्न 101.
आदर्श जनसंख्या किसे कहते हैं ?
उत्तर :
आदर्श जनसंख्या जनाधिक्य और जन न्यूनता के बीच की स्थिति है जहाँ जनसंख्या एवं संसाधनों की समानता होती है। आदर्श जनसंख्या एक काल्पनिक अवधारणा है।

प्रश्न 102.
जनसंख्या वृद्धि के निर्धारक तत्व क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंख्या वृद्धि के निर्धारक तत्व हैं – प्रजनन, मरणशीलता की दर, प्रवसन या स्थान परिवर्तन।

प्रश्न 103.
जनसंख्या के असमान वितरण के दो भौतिक कारक क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंख्या के असमान वितरण के दो भौतिक कारक हैं – (i) भू-प्रकृति एवं (ii) जलवायु ।

प्रश्न 104.
जनसंख्या के असमान वितरण के दो सामाजिक कारक क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंख्या के असमान वितरण के कारक से तात्पर्य गैर-प्राकृतिक कारकों से है, जैसे – राजनैतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ, शहरीकरण।

प्रश्न 105.
उच्च घनत्व के दो कारण क्या हैं ?
उत्तर :
उच्च घनत्व के कारण –
(i) कृषि की उन्नत अवस्था
(ii) उद्योगों का विकास ।

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प्रश्न 106.
अति न्यूनतम जन घनत्व के दो कारण क्या हैं ?
उत्तर :
(i) क्षेत्र की अतिशीलता या गर्म होना
(ii) लगातार वर्षा होना।

प्रश्न 107.
जन्म दर क्या है ?
उत्तर :
जन्म दर : एक हजार व्यक्तियों में एक वर्ष में पैदा हुए जीवित बच्चों की संख्या को जन्मदर कहते हैं।

प्रश्न 108.
मृत्यु दर क्या है ?
उत्तर :
एक हजार व्यक्तियों में एक वर्ष में कुल मृत्यु को मृत्यु दर कहते हैं।

प्रश्न 109.
आन्तरिक जलमार्ग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
किसी देश के आन्तरिक भाग में स्थित विभिन्न जल सोतों अर्थात् नदियों, झीलों या नहरों के माध्यम से विभिन्न साधनों (नाव, स्टीमर आदि) द्वारा सामानों का परिवहन किया जाना आन्तरिक जल मार्ग कहलाता है।

प्रश्न 110.
सड़क यातायात के दो लाभ लिखें।
उत्तर :
(i) सड़क यातायात सर्व सुलभ एवं सुविधाजनक साधन है।
(ii) कम दूरी के लिये यह उपयोगी साधन है।

प्रश्न 111.
रेल यातायात के दो लाभ लिखें।
उत्तर :
(i) लम्बी दूरी की यात्रा के लिए यह सुविधाजनक साधन है।
(ii) इसके द्वारा अधिक यात्री एवं माल की ढुलाई होती है।

प्रश्न 112.
जल परिवहन के दो लाभ लिखें।
उत्तर :
(i) यहु परिवहन का सबसे सस्ता साधन है।
(ii) इसके द्वारा बड़े पैमाने पर माल ढोया जाता है।

प्रश्न 113.
वायु परिवहन की दो कमियों को लिखें।
उत्तर :
(i) वायु यातायात से यात्रा करना बहुत खर्चीला होता है।
(ii) मौसम की गड़बड़ी होने पर वायु यातायात के संचालन में कठिनाई होती है।

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प्रश्न 114.
भारत में कितने प्रकार की सड़कें पाई जाती हैं ?
उत्तर :
भारत में निम्नांकित चार प्रकार के सड़क मार्ग है :-

  • स्थानीय सड़के
  • जिले की सड़के
  • राजकीय सड़कें
  • राष्ट्रीय सड़कें।

प्रश्न 115.
यातायात के किस साधन को आर्थिक विकास का जीवन रेखा कहा जाता है और क्यों ?
उत्तर :
जल परिवहन को आर्थिक उन्नति की जीवन रेखा कहा जाता है। यह यातायात का सबसे सस्ता एवं सुगम साधन हैं। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में क्रांति लाने में इसका सर्वाधिक योगदान है।

प्रश्न 116.
जहाजी कम्पनी (Shipping line) का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
जहाजों या जलयानों का निर्माण करने वाली कम्पनियों को जहाजी कम्पनी कहा जाता है। यहां मालवाही एवं यान्त्रिक जलयानों का निर्माण होता है।

प्रश्न 117.
जहाजी मार्ग (Shipping lane) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :
जहाजी मार्ग का अभिप्राय जलयान मार्ग से है। ये मार्ग गहरें सागरों में होते हैं। समुद्री संकटों से बचने के लिए सागरो में कुछ निश्चित मार्गो का निर्धरण किया गया है ताकि जलयानों को कोई खतरा न हो।

प्रश्न 118.
संचार तंत्र से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
एक स्थान से सूचना या सन्देश को दूसरे स्थान तक पहुँचाने की व्यवस्था की संचार तंत्र कहते हैं। यह सूचना या संन्देश का आदान-प्रदान करने का माध्यम है।

प्रश्न 119.
संचार तंत्र के साधन क्या हैं ?
उत्तर :
समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, टेलीप्राफ, इण्टरनेट, ई-मेल, फैक्स, सिनेमा, मोबाइल फोन आदि संचार तंत्र के साधन हैं।

प्रश्न 120.
व्यक्तिगत संचार तंत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जिस संचार व्यवस्था द्वारा व्यक्तिगत सूचनाएं या संदेश प्राप्त किए जाते है, उन्हें व्यक्तिगत संचार तंत्र कहा जाता है। इसके अन्तर्गत डाक सेवा, कम्प्यूटर, टेलीफोन, मोबाइल फोन, ई-मेल, फैक्स आदि आते हैं।

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प्रश्न 121.
जन संचार माध्यम किसे कहते हैं ?
उत्तर :
संचार के वे माध्यम जिनका उपयोग व्यक्तिगत न होकर सार्वजनिक रूप में होता है, उन्हे जन संचार माध्यम कहते हैं। इनके अन्तर्गत समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा आदि साधन आते हैं।

प्रश्न 122.
संचार तंत्र के दो लाभों को लिखें।
उत्तर :
(i) संचार तंत्र के माध्यम से सूचना या संदेश भेजने या पाने में समय कम लगता है।
(ii) इसमें खर्च कम लगता है।

प्रश्न 123.
परिवहन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वस्तुओं और मनुष्यों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवागमन को परिवहन कहते हैं।

प्रश्न 124.
संचार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सूचनाओं को उनके उद्गम स्थल से गतव्य स्थान तक किसी चैनल के माध्यम से पहुँचाने की प्रक्रिया को संचार कहते हैं।

प्रश्न 125.
स्वर्णिम-चतुर्भुज किन महानगरों को जोड़ता है ?
उत्तर :
यह महामार्ग चार महानगरों दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई तथा कोलकता को जोड़ता है।

प्रश्न 126.
उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा देश के किन-किन क्षेत्रों को जोड़ता है ?
उत्तर :
यह महामार्ग उत्तर से दक्षिण श्रीनगर को कन्याकुमारी से तथा पूरब से पश्चिम सिलघर को पोरबदर से जोड़ता है।

प्रश्न 127.
देश में प्रांतीय राजमार्ग की भूमिका क्या है ?
उत्तर :
राज्य के भीतर व्यापारिक एवं सवारी यातायात का मुख्य आधार प्रांतीय राज्यमार्ग है। ये राज्य के सभी कस्बों को राज्य की राजधानी, सभी जिला मुख्यालयों, राज्य के महत्वपूर्ण स्थलों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों से संलग्न क्षेत्रों के साथ जोड़ते हैं। इनके निर्माण एवं देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है।

प्रश्न 128.
जिला की सड़कें जिला के किन हिस्सों को जोड़ते हैं ?
उत्तर :
ये सड़के गाँवों एवं कस्बों को एक-दूसरे से तथा उन्हें जिला मुख्यालय से जोड़ते हैं।

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प्रश्न 129.
सीमा सड़कों का उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर :
इसका उद्देश्य जंगली, पर्वतीय एवं मरूस्थलीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति देने तथा देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए सीमावर्ती इलाकों तथा दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण एवं देखरेख है।

प्रश्न 130.
भारत की प्रमुख जहाजी इकाई कौन-सी है तथा इसके पास कुल कितने जलपोतों का बेड़ा है ?
उत्तर :
भारतीय जहाजरानी निगम देश की सबसे महत्वपूर्ण जहाजी इकाई है जिसके पास लगभग 79 जलपोतों का बेड़ा है।

प्रश्न 131.
भारत में वायु परिवहन सर्वप्रथम कब और कहाँ प्रारम्भ हुआ ?
उत्तर :
भारत में वायु परिवहन के विकास का इतिहास 1911 ई० से प्रारम्भ होता है जब इलाहाबाद से नैनी तक वायुयान द्वारा डाक सेवा शुरु की गयी।

प्रश्न 132.
भारत में पहली आंतरिक वायु सेवा कब और कहाँ आरम्भ की गयी ?
उत्तर :
भारत में पहली आंतरिक वायु सेवा 1922 ई० में करांची-मुम्बई-चेन्नई के बीच आरम्भ की गयी।

प्रश्न 133.
इण्डियन एयर लाइन्स भारत में किस प्रकार की वायु सेवा उपलब्ध करा रही है ?
उत्तर :
यह देश की प्रमुख घरेलू हवाई सेवा है। घरेलू सेवा के अतिरिक्त यह पड़ोसी देशों जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों एवं मध्य-पूर्व के लिए भी अपनी सेवाएं प्रदान करती है।

प्रश्न 134.
पाइन लाइनों का प्रयोग किसके परिवहन के लिए किया जाता है ?
उत्तर :
पाइप लाइनों द्वारा पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों तथा गैस की भारी मात्रा में लम्बी दूरी तक पहुँचाने में आसानी होती है।

प्रश्न 135.
रोप वे का प्रयोग, किस कार्य के लिए होता है ?
उत्तर :
दुगर्म पर्वतीय अंचलों में अल्पदूरी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए रोप वे का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 136.
भू-गर्भ रेल का विकास किस उद्देश्य से किया गया ?
उत्तर :
घने बसे महानगरों में परिवहन की समस्या को हल करने के लिए भू-गर्भ रेल के परिचालन की व्यवस्था भी कि गयी है।

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प्रश्न 137.
सर्वप्रथम भू-गर्भ रेल सेवा कब और कहाँ शुरू हुआ था ?
उत्तर :
सर्वपथम भू-गर्भ रेल सेवा की शुरुआत कोलकाता महानगर में हुई जो एस्लानेड से लेकर भवानीपुर तक 24 अक्टूबर 1984 ई० में शुरू हुआ था।

प्रश्न 138.
संचार व्यवस्था के अंतगर्त किन सेवाओं को सम्मिलित किया गया है ?
उत्तर :
संचार व्यवस्था के अंतगर्त डाक, दूर संचार, रेडियो प्रसारण, टेलिविजन, टेलीफोन, सेल फोन, फैक्स तथा इंटरनेट सेवाओं को सम्मिलित किया जा सकता है।

प्रश्न 139.
भरत में पहली टेलीग्राफ तथा टेलिफोन सेवा कब और कहां आरम्भ हुई ?
उत्तर :
पहली टोल T के सा 1851 ई० में तथा टेलिफोन सेवा 1881 ई० में कोलकाता में आरम्भ हुई।

प्रश्न 140.
वर्तमान सम० “इंटरनेट की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
अब इंटरनेट के रा शिक्षा का प्रसार किया जा रहा है। इसके माध्यम से यात्रा टिकटों की बुकिंग, सरकारी एवं गैर सरकारी बिलों का भुः तान उपभोक्ता सामानों की आपूर्ति घर बैठे ही की जा सकती है।

प्रश्न 141.
आनुषांगिक (सहायक) उद्योग से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
सहायक उद्योग (Ancilliary Industry) : किसी बड़े उद्योग के उत्पादों के निर्माण के लिए विभिन्न प्रकार के कल-पुर्जे या उसमें लगने वाली अन्य छोटी वस्तुओं का निर्माण और पूर्ति करने वाले उद्योग सहायक उद्योग कहलाते हैं। ये उद्योग बड़े उद्योगों के सहायक उद्योग के रूप में काम करते हैं। जैसे किसी मोटरगाड़ी उद्योग के पास विभिन्न प्रकार के कल-पूर्जों, सीटों आदि के उद्योग।

प्रश्न 142.
‘इन्ट्रीपोर्ट’ क्या है ?
उत्तर :
राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापर के लिए जिस बन्दरगाह को नि:शुल्क गोदाम बनाकर रखा जाता है उसे पुनर्निर्यात बन्दरगाह कहा जाता है।

प्रश्न 143.
पूर्वी भारत के लौह-इस्पात उद्योग के केन्द्रों का नाम लिखिए।
उत्तर :
इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी (IISCO) विशेशरैया आयरन एण्ड़ स्टील लिमिटेड भिलाई, दर्गापुर, बोकारो, पूर्वी भारत के केन्द्र है।

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प्रश्न 144.
इन्जिनीयरिंग उद्योग का क्या अर्थ है?
उत्तर :
वे उद्योग, जो लोहा-इस्पात को कच्चे माल के रूप में व्यवहार करके उससे विभिन्न प्रकार के औजार, मशीने एवं इस्पात के अन्य सामानों का निर्माण करते है, इंजीनियरिंग उद्योग कहे जाते है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
‘आधुनिक संचार व्यवस्था’ से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
आज दुनिया बहुत तेजी से बढ़ रही है। दुनिया की इस तेजी में आधुनिक संचर्चर व्यवस्था का सबसे बड़ा योगदान है। इण्टरनेट, ई-मेल, सेल फोन आदि आधुनिक संचार व्यवस्था की सबसे बड़ी देन है। इसे पूरे संसार को एक आफिस में समेट लिया है।

प्रश्न 2.
पंजाब एवं हरियाणा में कृषि विकास के तीन मुख्य कारणों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर : पंजाब और हरियाणा में कृषि की उन्नति के निम्नलिखित कारण है :-
(i) हरित क्रान्ति : हरित क्रान्ति का सबसे अधिक प्रभाव गेहुँ उत्पादन पर पड़ा। सन् 1964-65 ई० में पंजाब तथा हरियाणा मिलकर भारत का 7.5 % खाद्यान्न पैदा करते थे जो 1983-84 ई० में बढ़कर 14.3 % हो गया। 1983-84 ई० में इन दो राज्यों ने भारत का 30.8 % गेहूँ पैदा किया।
(ii) जलवायु : अंतर्देशिय उपोष्ण कटिबंधीय अवस्थिति के कारण पंजाब तथा हरियाणा की जलवायु अर्द्धशुष्क से अर्द्धनम के बीच है, जो खाद्यात्र कृषि के अनुकूल भौगोलिक दशाएँ हैं।
(iii) सिंचाई : पंजाब तथा हरियाणा में कृषि उन्नति का सबसे प्रमुख कारण यहाँ की सिंचाई व्यवस्था है। अकेले पंजाब में ही सिंचाई के लिए कुल 1134 सरकारी नहरें है। यहाँ सिंचाई के तीनों साधन से नहरें, नलकूप, कुआँ से सिंचाई की जाती है । यहाँ नहरों का जाल बिछा हुआ है। सरहिन्द नहर, नांगल नहर, रणजीत सिंह बांध आदि प्रमुख परियोजनाएँ हैं विश्व बैंक की सहायता से यहाँ सिंचाई एवं जल परियोजना का दूसरा चरण पूरा हो गया है।

प्रश्न 3.
भारत में नगरीकरण की तीन मुख्य समस्याओं का विवरण दीजिए।
उत्तर :
असंतुलित नगरीकरण की प्रवृत्ति के कारण अधिवासीय (Settlement) परिवर्तन से अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुई है। कुछ महत्वपूर्ण समस्याएँ निम्नलिखित है –
अनियोजित नगरीकरण (Unplanned Urbanisation) : यद्यपि यह प्रवृत्ति स्वतन्त्रता के पूर्व से ही है, लेकिन स्वतन्त्रता के बाद नगरों के नियोजन का प्रयास किया गया। किन्तु इन प्रयासों के बावजूद भी अनियोजित अकारिकी में लगातार वृद्धि हुई है। अत: गैर कानूनी निर्माण कार्य, निम्न स्तरीय निर्माण कार्य, गलत नियोजन आदि के कारण अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

शहरों में बसने की लोगो की प्रकृति (People Tendency to settle in cities) : लोगों की यह प्रवृत्ति हो गई है कि उन्हें शहरों में बेहतर जीवन सुविधाएँ तथा रोजगार के अवसर प्राप्त होते है। जिसके कारण गाँव का एक बहुत बड़ा हिस्सा शहरों में आकर बसने लगा है, जिससे लगातार शहरों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।

बुनियादी सुविधाओं की कमी (Lack of Infrastructure) : बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण आज कल शहरों में रहना मुश्किल हो गया है। कुछ निम्नलिखित बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे – आवासीय, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, मजलन प्रणाली है।

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प्रश्न 4.
सामाजिक वानिकी का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
सामाजिक वानिकी के उद्देश्य निम्नलिखित हैं –

  1. वनों का विकास एवं संरक्षण करके अतिरिक्त वनोत्पादों से ईंधन, चारा, लकड़ी फल आदि प्राप्त करके स्थानीय लोगों को लाभ पहुँचाना :
  2. रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर परिवार की आय को बढ़ाना।
  3. प्राकृतिक संसाधनों के प्रबन्धन में ग्रामीणों को सक्षम बनाना।
  4. अनुपयोगी भूमि का समुंचित एवं लाभकारी उपयोग करना।
  5. पर्यावरणीय संतुलन को कायम रखना तथा मृदा एवं जल का संरक्षण करना।

प्रश्न 5.
नगदी फसलें, बागानी फसलें और वाणिज्यिक फसलें क्या हैं ?
उत्तर :
नगदी फसलें (Cash Crops) : वे फसलें जो बाजार में बेचकर पैसा कमाने के उद्देश्य से उगायी जाती है, उन्हें मुद्रादायिनी (नगदी) फसल कहते हैं। जैसे – जूट, चाय, कहवा, गत्ना आदि।
बागानी फसलें (Plantation Crops) : उष्णार्द्र प्रदेशों में जब लम्बे पैमाने पर वर्ष भर (लम्बे क्षेत्रफल वाले भूभाग पर) वर्ष में एक या दो मुद्रादायिनी फसलें उगायी जाती है तो इसे बागानी कृषि कहते हैं। इसके अन्तर्गत विशेषकर चाय, काफी और रबर की कृषि आती है। भारत में चाय की कृषि बागानी कृषि का उत्तम उदाहरण है।
व्यापारिक फसलें (Commercial Crops) : ऐसी फसलें जिनका व्यवहार प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता है बल्कि इनके विभिन्न उत्पादों एवं उप-उत्पादों का प्रयोग किया जाता है, व्यापारिक फसलें कहलाती हैं। जैसे – कपास, जूट, तोसी, रेड़ी, चाय, कॉफी और रबर आदि।

प्रश्न 6.
रबी और खरीफ की फसलें क्या हैं ?
उत्तर :
रबी की फसलें (Rabi crops): वे फसलें जिनको नवम्बर में बोया जाता है और अप्रैल-मई तक काट लिया जाता है, उन्हें रबी की फसल कहते हैं। जैसे – गेहूँ, चना , जी आदि।
खरीफ की फसलें : वे फसलें जिनको जून-जुलाई में बोया जाता है तथा सितम्बर-अक्टूबर तक काट लिया जाता है, उन्हें खरीफ की फसल कहते हैं। जैसे – धान, जूट, कपास, गत्ना, मक्का और ज्वार-बाजरा आदि।

प्रश्न 7.
फसल प्रणाली क्या है ? भारत में अपनायी जानेवाली फसल प्रणाली का वर्णन करो।
उत्तर :
फसल प्रणाली : फसल प्रणाली वह विधा है जिसके अन्तर्गत फसलें किसी भूभाग पर निश्चित समयावधि में उगायी जाती है। भारत में तीन प्रकार की फसल प्रणाली अपनायी जाती है –

  • एकल फसल प्रणाली (Monoculture)
  • मिश्रित कृषि (Mixed cropping)
  • बहु फसल प्रणाली (Multiple cropping)

प्रश्न 8.
एक फसली प्रणाली से क्या समझते हो ? इसका एक उदाहरण दो।
उत्तर :
एकल प्रणाली के अन्तर्गत एक ही फसल प्रत्येक वर्ष एक ही भूमि पर उगायी जाती है। धान की फसल व्यापक तौर पर एक फसल प्रणाली में उगायी जाती है। भारत में कृषि खेतों का आकार छोटा होने से यह मुख्य रूप से प्रत्येक वर्ष उगायी जाती है। खेत इतनी ही हैं कि किसानों के पास मुख्य खाद्यान्र उगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। धान उगाये जाने वाले क्षेत्र निम्न भू-भाग है जहाँ वर्षा का जल इकट्ठा होता है, अत: जमीन अन्य फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल नहीं रहती है।

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प्रश्न 9.
भारत में अपनायी जानेवाली कृषि की कौन-कौन सी पद्धतियाँ है ?
उत्तर :
फसलों के उत्पादन और उपयोग के आधार पर भारतीय कृषि को कुल पाँच प्रमुख प्रकारों में बांटा गया है

  1. स्थानान्तरणशील कृषि (Shifting Agriculture)
  2. प्रारम्भिक निर्वाहक कृषि (Sedentary Peasant Agriculture)
  3. खाद्यान्न फसलें अथवा सिंचित कृषि (Food Crops or Irrigated)
  4. नकदी फसलों अथवा शुष्क या सिंचित कृषि (Cash Crops, Dry or Irrigated)
  5. वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming)।

प्रश्न 10.
जूट केवल पश्चिम बंगाल में उगाया जाता है – क्यों ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु जूट की फसल के उत्पादन के अनुकूल है। जूट की कृषि के लिए 26° C तापमान, 100 से॰मी॰ वर्षा और सिंचाई की सुविधा चाहिए। जलोढ़ मिट्टी और समतल जमीन जूट उत्पादन में सहायक है। जुताई, बोने के लिए, काटने के लिए तथा जूट को पानी में ड्बोकर रेशे को अलग करने के लिए यहाँ पर प्रचुर मात्रा में मजदूर उपलब्ध है। साथ ही पश्चिम बंगाल में जूट मिलों में कच्चे माल के रूप में जूट की काफी माँग है। इस प्रकार पश्चिम बंगाल में जूट का उत्पादन किया जाता है। उपर्युक्त सभी सुविधाएँ पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि के लिए उबलब्ध हैं।

प्रश्न 11.
गुजरात में सबसे अधिक कपास उगाया जाता है – क्यों ?
उत्तर :
गुजरात में कपास उत्पादन के लिए आर्दश दशाएँ पायी जाती हैं। कपास के उत्पादन के लिए चूना तथा पोटाश मिश्रित काली मिट्टी, मिट्टी में नाइट्रोजन वाले तत्वों की कमी, नमी धारण करने की क्षमता, 50 से॰मी॰ वर्षा, 26° C तापमान आदि अनुकूल भौगोलिक दशाएँ हैं। गुजरात में उपर्युक्त सभी दशाएँ पायी जाती है। अत: गुजरात कपास का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

प्रश्न 12.
स्थानान्तरित कृषि की परिभाषा दो और व्याख्या करो।
उत्तर :
स्थानान्तरण कृषि को आसाम में झूम, केरल में पूनम, आंधपदेश और उड़ीसा में पोडू, मध्यप्रदेश में बेवार, माशन, पेंडा और बेरा नामो से पुकारा जाता है। यह कृषि जनजातीय लोगों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक वर्ष लगभग 20 लाख हेक्टेयर जंगलों को काटकर और जलाकर साफ किया जाता है। इस खाली जगलीय भू-भाग पर 2-3 वर्षों तक कृषि की जाती है। जब जमीन अनुउपजाऊ हो जाती है तो इसे खाली (परती) छोड़ दिया जाता है। यहाँ पर धान, गेहूँ, ज्वार, बाजरा, तम्बाकू आदि फसलें उगायी जाती हैं। झूम कृषि के लिए विशेषत: शुष्क पतझड़ के वनों का इस्तेमाल किया जाता है। यह कृषि बहुत अल्प जनसंख्या का भरण-पोषण करती है।

प्रश्न 13.
भारत में कौन-कौन सी तिलहन फसलें उगायी जाती हैं तथा इनका क्या उपयोग है ?
उत्तर :
भारत विश्व में सबसे अधिक तिलहन उत्पादक देश है। भारत में मुंगफली, रेंडी, तीसी, तिल, सरसों, नारियल आदि तिलहन फसलें उगायी जाती हैं। तिलहन देश की प्रमुख नकदी फसल है। तिहलन का उपयोग तेल निकालने, सलाद, विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ, वार्निश, मोमबत्ती, साबुन आदि में होता है। भारत में खाद्य एवं अखाद्य दो प्रकार के तिहलन है। खाद्य तिलहन (edible oilseeds) में मूँगफली, रेपसीड, तिल, अलसी, सरसों, राई, कपास का बीज और सोयाबीन आदि हैं। अखाद्य तिलहन (Non-edible) में प्रमुख रेंडी है।

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प्रश्न 14.
धान, गेहूँ, जूट और कपास के अधिक उत्पादन देने वाले बीजों का नाम लिखों।
उत्तर :
धान के उन्नतशील बीज – I.R. – 8, TN-1, I.R. – 20, रत्मा, विजया, मसूरी, सोना।
गेहूँ के उन्नतशील बीज – लश्मा राजो, सोनारा – 63 , सोनारा – 64 , सोना – 227, कल्याण सोना, सोनालिका – 30
जूट के उन्नतशील बीज – जे॰ आर० सी० – 212, जे॰ आर० सी० – 321, जे॰ आर० सी० – 7447, JRD – 632, JRO – 7835 , JRO – 620 ।
कपास के उन्नतशील बीज – सुजाता, वारा, लक्ष्मी, एम. सी. यू – 5 , एम. सी. यू – 4 , हाई विक्र – 4।

प्रश्न 15.
धान, जूट, कपास एवं गन्ना के केन्द्रीय शोध संस्थान कहाँ है ?
उत्तर :
धान – केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (The Central Rice Research Institute) की स्थापना कटक में, Indian Council of Research नई दिल्ली के अन्तर्गत हुई है।
जूट – जूट के उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए The Jute Agricultural Institute की स्थापना पश्चिम बंगाल में बैरकपुर में हुई है।
कपास – भारत में कपास की मात्रा एवं उसकी गुणवत्ता में विकास के लिए महाराष्ट्र में नागपुर में The Central Institute for Cotton Research की स्थापना हुई है।
गन्ना – उत्तर प्रदेश में लखनऊ में Central Sugarcane Research Institure एवं कोयम्बटूर में Sugarcane Research Institure की स्थापना की गयी है।

प्रश्न 16.
भारत में प्रमुख फसलों का औसत उत्पादन क्या है ?
उत्तर :
भारत में प्रति एकड़ फसलों का उत्पादन निम्न है। भारत में चावल का उत्पादन जापान की तुलना में 1 / 5 है। गेहूँ का प्रति एकड़ बल्जियम और हालैण्ड की तुलना में 1 / 3 है। गत्रा का प्रति एकड़ उत्पादन क्यूबा और हवाई की तुलना में 1 / 4 है। भारत में प्रमुख फसलों का प्रति हेक्टेयर औसत उपज चावल – 1070 कि०ग्रा०, गेहूँ – 100 कि०ग्रा०, ज्वार 220 कि०ग्रा०, बाजरा – 150 कि०ग्रा० और जूट 250 कि०ग्रा० है। मुंगफली का उत्पादन -870 कि०ग्रा० तथा कपास का प्रति हेक्टेयर उत्पादन – 120 कि०ग्रा० है।

प्रश्न 17.
विश्व के सन्दर्भ में भारत का प्रमुख फसलों के उत्पादन में कौन सा स्थान है ? उस फसल में अन्य प्रथम स्थान वाले देशों को दर्शाओ।
उत्तर :

फसल (Crops) रैंकिग (Ranking)
चाय प्रथम
चावल द्वितीय (चीन प्रथम)
जूट चतुर्थ (U.S.A. प्रथम)
कपास प्रथम
तम्बाकू प्रथम
गन्ना प्रथम
गेहूँ चतुर्थ (C.I.A. प्रथम)

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प्रश्न 18.
रेशेदार फसल क्या है ? तीन विभिन्न रेशेदार फसले कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
रेशेदार फसलें : वे फसलें जिनसे रेशे प्राप्त किये जाते हैं और इन रेशों का प्रयोग सूता निर्माण में किया जाता है जिसे बुनकर विभिन्न प्रकार के कपड़े बनाये जाते हैं, उन्हें रेशेदार फसले कहते है । तीन विभिन्न Fibres –

  • जूट और काटन है।
  • सिल्क और ऊन पशुओं से प्राप्त रेशे हैं एवं
  • नाइलन और रेयान कृषि रूप से तैयार किये जाते हैं जिसे सिन्थेटिक धागा कहते हैं।

प्रश्न 19.
भारत में चावल उत्पादन के कौन-कौन सी ऋतुएँ हैं ?
उत्तर :
केरल और पश्चिम बंगाल में चावल पूरे वर्ष भर उगाया जाता है। चावल की निम्न फसलें हैं –

  1. आऊस – मई-जून में बोया जाता है तथा सितम्बर-अक्टूबर में काटा जाता है।
  2. अमन – जून-जुलाई में बोया जाता है तथा नवम्बर-दिसम्बर में काटा जाता है।
  3. बोरो – नवम्बर दिसम्बर में बोया जाता है तथा मार्च-अप्रिल में काटा जाता है।

प्रश्न 20.
रबी और खरीफ की फसलो में अन्तर करो।
उत्तर :
रबी की फसलें – रबी की फसलें जोड़े में बोई जाती है और बसन्त ऋतु मे काटी जाती है – गेहूँ, सरसों और तीसी रबी की फसलें हैं।
खरीफ की फसलें – वे फसलें जो ग्रीष्म ऋतु में बोयी जाती है और शरद ऋतु में काटी जाती है जैसे – चावल, ज्वारबाजरा, कपास आदि।

प्रश्न 21.
भारत के किस क्षेत्र में चाय, बाजरा और सरसों उगाया जाती है ?
उत्तर :
चाय का उत्पादन : उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों – आसम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दक्षिण में नीलगिरि पर्वत के ढालों पर किया जाता है।
बाजरा का उत्पादन : राजस्थान, महाराष्ट्र, आधंप्रदेश, तमिलनाडू में किया जात है।
सरसों का उत्पादन : उत्तर प्रदेश सरसों के उत्पादन में प्रथम स्थान पर एवं अन्य क्षेत्रों में राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब एवं हरियाणा है।

प्रश्न 22.
उद्यानी कृषि क्या है ?
उत्तर :
उद्यानी कृषि (Horticulture) : इसके अन्तर्गत फल-फूल और साग-सब्जियों की खेती की जाती है। इस कृषि के विकास में आवागमन के साधनों का विशेष महत्व है। इसे Market Gardening भी कहते हैं। अधिक उत्पादन के लिए सिंचाई एवं अधिक खाद का प्रयोग किया जाता है। उत्पादित वस्तुँओं के आधार पर इसे दो भागों में बाँटा गाया है –
(i) साग-सब्जियों की कृषि (Truck farming)
(ii) फलों की कृषि (Fruit farming)।

प्रश्न 23.
फसल चक्र से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
फसल चक्र (अदल-बदल की कृषि) : मिट्टी में विभिन्न प्रकार के तत्व पाये जाते हैं। खास प्रकार के फसलें कुछ खास खनिजों का शोषण करती है। पर फसलों की हेरा-फेरी करके जमीन की उपजाऊ शक्ति को बचाये रखा जा सकता है। इस नई कृषि पद्धति के अन्तर्गत जब वर्ष में अनेक फसलें बोई जाती है तो फसलों को अदल-बलद कर बोया जाता है। एक फसली कृषि में जिस भूमि पर एक वर्ष गेहूँ की कृषि होता है, उस पर दूसरे वर्ष दलहन की खेती है।

प्रश्न 24.
गत्रा, गेहूँ, चावल, जूट और चाय के अनुसंधानशाला केन्द्र का नाम लिखो।
उत्तर :

  • गन्ना – कोयम्बदूर, दक्षिणभारत, दिलखुशनगर, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)।
  • जूट – बैरकपुर।
  • चाय – जोरहाट एवं यूनाइटेड प्लाण्टर्स एसोसियेशन।
  • गेहूँ – पूसा (नई दिल्ली)।
  • धान – कटक (उड़िसा)।

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प्रश्न 25.
गंगा की डेल्टा में जूट की कृषि होने के क्या कारण है ?
उत्तर :
गंगा डेल्टा में जूट की कृषि अधिक होने के कारण –

  1. जलवायु – जूट की कृषि उष्ण एवं आर्द्र जलवायु में होती है । यहाँ की जलवायु उष्णार्द्र है । तापमान 25° C से 30° C के बीच रहता है।
  2. वर्षा – यहाँ पर जूट की कृषि के लिए 150 से॰मी॰ से 250 से॰मी॰ तक आवश्यक वर्षा होती है।
  3. मिट्टी – गंगा डेल्टा में नदियों द्वारा लाई गई नवीन दोमट मिट्टी पायी जाती है जो जूट के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
  4. श्रम – यहाँ जूट को काटने, उसे पानी में गाड़ने, रेशे को डंठल से अलग करने के लिए पर्याप्त मानव श्रम उपलब्ध है।

अत: पश्चिम बंगाल के गंगा डेल्टा के वर्दवान, 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नदिया, मालदा, हुगली में जूट की खेती की जाती है।

प्रश्न 26.
कृषि वानिकी (Agro-forestry) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
कृषि वनिकी, सामाजिक वानिकी का ही एक संशेधित रूप है। इसके अन्तर्गत एक ही समय में किसी भूमि को कृषि, वानिकी एवं पशुपालन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा कृषि-वन विकास, कृषि-चारागाहवन विकास पद्धतियों को कृषि वानिकी में सहकारी व्यवस्था के अन्तर्गत उपलब्ध भूमि पर वृक्ष या झाड़ियाँ उगाकर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ईधन के लिए लकड़ी, पशुओं के लिए चारा, लघु इमारती लकड़ी आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास किया जाता है।

प्रश्न 27.
भारत में उगाई जानेवाली फसलों का उपयोग के आधार पर वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
फसलों का वर्गीकरण – उपयोग के आधार पर भारत की कृषि-उपजों (फसलों) को मोटे तौर पर चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. खाद्यान्र (Food-grains or Cereals) – चावल, गेहूँ, ज्वार-बाजरा, मक्का, चना आदि।
  2. पेय पदार्थ (Beverage Crops) – चाय और कहवा आदि।
  3. व्यावसायिक एवं मुद्रादायिनी फसलें (Commercial and Cash Crops) – कपास, जूट, चाय, कहवा, गन्ना, तिलहन आदि। इनका उत्पादन औद्योगिक कार्यों के लिए किया जाता है। औद्योगिक कच्चे माल के रूप में इनका क्रय- विक्रय होता है।
  4. रेशेदार फसलें (Fibre Crops) – कपास और जूट आदि।

प्रश्न 28.
भारत में उगाई जानेवाली फसलें को बोने एवं काटने के समय के आधार पर कितने भागों में बाँटा जा सकता है।
उत्तर :
फसलों के बोने एवं काटने के समय के आधार पर भारत की फसलों को तीन प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है – (i) खरीफ (ii) रबिं (iii) जायद।
(i) खरीफ – ये फसलें वर्षा ॠतु के आरम्भ में बोई जाती हैं और वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद काट ली जाती है। जैसे -धान, मक्का, ज्वार-बाजरा तथा जूट आदि।
(ii) रबी – ये फसलें जाड़े में बोई जाती हैं तथा गर्मी के आरम्भ होते ही (मार्च – अप्रैल) में काट ली जाती है, जैसे गेहूँ, जौ, चना, मटर आदि।
(iii) जायद (Zaid) – ये फसले ग्रीष्म ऋतु या वसन्त ऋतु के आरम्भ में बोयी जाती है तथा ग्रीष्म ऋतु के अन्त में या वर्षा ऋतु के प्रारम्भ होने के पहले काट ली जाती हैं। खरबूज-तरबूज; सब्जियाँ, ककड़ी, मूँग, उड़द, मेथी आदि जायद की फसलें हैं, जो हल्की सिंचाई के द्वारा उगाई जाती है।

प्रश्न 29.
हरित क्रांति से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
हरित क्रांति (Green Revolution) : देश के स्वाधीन होंने के समय हमारे देश में कृषि की अवस्था दयनीय थी। हमें प्रतिवर्ष विदेशों से बहुत अधिक मात्रा में खाद्यात्र का आयात करना पड़ता था। अत: देश को खाद्यान्रों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सन् 1966-67 ई० से सरकार द्वारा काफी प्रयास किया गया। सिंचाई, अधिक उत्पादन देने वाले बीजों के प्रयोग, खाद, कृषि के आधुनिक यंत्रों, वैज्ञानिक विधियों तथा कीटनाशक द्वाओं के प्रयोग से कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। मुख्यतः गेहूँ के प्रति एकड़ उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई । पंजाब व हरियाणा राज्यों में इसका प्रभाव विशेष रूप से दिखाई पड़ा। फलस्वरूप हम खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर हुए हैं। कृषि के उत्पादन में हुई इस अचानक वृद्धि को ही हरित क्रांति कहते हैं।

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प्रश्न 30.
भारत के उन स्थानों के नाम बताओ जहाँ योजना काल में लौह-इस्पात उद्योगों की स्थापना हुई है।
उत्तर :
पंचवर्षीय योजना काल में भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला तथा बोकारो में इस्पात कारखानें स्थापित किये गये। तृतीय योजना काल में सलेम (तमिलनाडु), विजय नगर (कर्नाटक) तथा विशाखापत्तनम (आन्ध्र प्रदेश) में लौह-इस्पात उद्योग स्थापना की योजना बनी।

प्रश्न 31.
इंजिनीयरिंग उद्योग का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
इस्पात एवं अन्य धातुओं को कच्चा माल के रूप में व्यवहार कर मशीन एवं औजार आदि के निर्माण को इंजिनीयरिंग उद्योग कहते हैं। इंजीनियरिंग उद्योग दो प्रकार के होते हैं –
भारी इंजीनियरिंग उद्योग :
(a) भारी मशीनरी उद्योग
(b) मशीनी औजार उद्योग
(c) औद्योगिक मशीनरी उद्योग
(d) रेल उद्योग
(e) जलयान उद्योग
(f) जलपोत उद्योग।

हल्के इंजीनियरिंग उद्योग :
(a) साइकिल निर्माण उद्योग
(b) टाइपराइटर निर्माण उद्योग
(c) सिलाई मशीन निर्माण उद्योग
(d) घड़ी निर्माण उद्योग
(e) रेडियो, टेलीफोन आदि के निर्माण उद्योग।

प्रश्न 32.
पेट्रो रसायन औद्योगिक कम्प्लेक्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
पेट्रो रसायनों एवं उनके उत्पाद की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने बड़े-बड़े पेट्रो केमिकल औद्योगिक कम्पलेक्स की स्थापना की है। इस क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए 56000 लाख रुपये निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों द्वारा लगाये गये हैं। नई सरकारी नीति के अंतर्गत पेट्रो रसायन उद्योगों का विकेन्द्रीकरण किया गया है। तेल शोधनागारों के पास कोयली, बरौनी, हल्दिया और चेत्रई में पेट्रोरसायन उद्योगों की स्थापना की गई है। असम के बोंगाई गांव और पश्चिम बंगाल के हल्दिया में भी पेट्रो रसायन औद्योगिक कम्लेक्स की स्थापना की गई है।

प्रश्न 33.
पेट्रो रसायन उद्योग क्या है ?
उत्तर :
पेट्रोलियम के शोधन के बाद उससे अनेक प्रकार के उपजात पदार्थ प्राप्त होते हैं, जैसे – नेष्था, बेंजीन, ईंथेन, बिटुमिन, प्रोटेन, इथालेन, प्रोपालिन आदि। इन उपजात पदार्थों को कच्चे माल के रूप में उपयोग कर जिन उद्योगों का विकास किया जाता है, उन्हें पेट्रो रसायन उद्योग कहते हैं। इन उद्योगों के प्रमुख उत्पाद हैं पालीमर, सन्थेटिक रेशा, रबर, सिन्थेटिक डिटरजेन्ट।

प्रश्न 34.
पेट्रोलियम शोधशालओं के निकट ही पेट्रो रसायन उद्योग की स्थार्पना क्यों होती है ?
उत्तर :
पेट्रो शोधन कारखानों के पास पेट्रो रसायन उद्योगों की स्थापना का प्रधान कारण यह है कि पेट्रोलियम को साफ करते समय इससे नेष्था, बेंजीन, ईंथेन, विटुमिन, प्रोपेन आदि उपजात पदार्थ प्राप्त होते हैं और इन्हीं का उपयोग पेट्रो रसायन उद्योग में कच्चे माल के रूप में होता है।

प्रश्न 35.
दुर्गापुर को भारत का रूर क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
दुर्गापुर को भारत का रूर क्षेत्र इसलिए कहा जाता है कि रूर क्षेत्र पश्चिमी जर्मनी का लौह उद्योग का प्रमुख क्षेत्र है जो कोयला क्षेत्र में स्थित है। रूर क्षेत्र के समान ही दुर्गापुर क्षेत्र भी कोयला क्षेत्र के पास है।

  1. रूर क्षेत्र लौह इस्पात का विश्व का प्रमुख केन्द्र है। इसी प्रकार दुर्गापुर भारत का प्रमुख केन्द्र है।
  2. दोनों क्षेत्रों के पास खनिज लोहे का अभाव है अतः लौह अयस्क आयात करते हैं। रूर फ्रांस के लारेन तथा स्वीडेन की खानों से लोहा आयात करता है। दुर्गापुर के लिए लौह अयस्क उड़ीसा की मयूरभंज की खानों से मंगाया जाता है।
  3. दोनों क्षेत्रों में उद्योग की स्थापना का श्रेय कोयले की प्राप्ति को है। रूर को वेस्फेलिया की खान से तथा दुर्गापुर को झरिया की खानों से कोयला मिलता है।
  4. रूर क्षेत्र के समान ही दुर्गापुर में भी नहरें, रेल यातायात तथा सड़क यातायात की सुविधा है। इसलिए दुर्गापुर को भारत का रूर कहते हैं।

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प्रश्न 36.
अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
मैनचेस्टर ग्रेट बिटेन का सूती वस्त्र उद्योग का केन्द्र है। वहाँ पर सूती वस्त्र उद्योग का विकास कच्चे माल की सुविधा के कारण हुआ है। वहाँ की जलवायु नम है तथा कुशल श्रमिक उपलब्ध है और ये सभी सुविधायें अहमदाबाद को भी प्राप्त है, अतः यहां भी सूती वस्त्र उद्योग का विकास हुआ है। यही कारण है कि अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

प्रश्न 37.
अधीनस्थ सहायक उद्योग क्या है ?
उत्तर :
किसी बड़े उद्योग के उत्पादों के निर्माण के लिए विभिन्न प्रकार के कल-पुर्जे या उसमें लगने वाली अन्य छोटी वस्तुओं का निर्माण और पूर्ति करने वाले उद्योग सहायक उद्योग कहलाते हैं। ये उद्योग बड़े उद्योगों के सहायक उद्योग के रूप में काम करते हैं। जैसे किसी मोटरगाड़ी उद्योग के पास विभिन्न प्रकार के कल-पूर्जों, सीटों आदि के उद्योग।

प्रश्न 38.
शुद्ध एवं अशुद्ध कच्चा माल से आप क्या समझते है।
उत्तर :
शुद्ध एवं अशुद्ध कच्चा माल : कच्चे माल की उपलब्धता एवं प्रकृति उद्योगों की स्थिति पर गहरा प्रभाव डालती है। जो उद्योग उन कच्चे मालों पर आधारित होते हैं, जो भारी एवं स्थूल होते हैं तथा वस्तु निर्माण प्रक्रिया में अपना भार खोते हैं ऐसे उद्योग कच्चे मालों के स्रोतों के निकट ही स्थापित होने की प्रवृत्ति रखते हैं। इन उद्योगों में प्रयुक्त कच्चे माल जो निर्माण प्रक्रिया में अपना वजन खोते हैं अशुद्ध कच्चा माल कहलाते हैं। लौह-इस्पात उद्योग, चीनी उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, लुग्दी निर्माण उद्योग आदि में प्रयुक्त कच्चे माल अशुद्ध कच्चे माल होते हैं।

जिन कच्चे मालों का भार उत्पादन प्रक्रिया में कम नहीं होता ऐसे कच्चे माल शुद्ध कच्चा माल कहलाती है। शुद्ध कच्चा माल प्रयुक्त करने वाले उद्योगों में कच्चे माल तथा तैयार माल के वजन में कोई विशेष कमी नहीं होती है, जैसे वस्त्र उद्योग। ऐसे उद्योगों की स्थापना पर परिवहन लागत, श्रम लागत एवं बाजार आदि कारकों का अधिक महत्तपूर्ण स्थान होता है।

प्रश्न 39.
खनिज पदार्थों की प्रकृति के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
खनिज पदार्थों की प्रकृति के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण – कच्चे माल की प्रकृति के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –
i. कृषि पर आधारित उद्योग (Agro-based Industries) : कृषि क्षेत्र से कच्चा माल प्राप्त करने वाले उद्योगों को कृषि पर आधारित उद्योग कहते हैं। सूती वस्त्र उद्योग, जूट उद्योग, रेश्मी वस्त्र उद्योग, शक्कर उद्योग तथा वनस्पति तेल उद्योग आदि इसी श्रेणी में आते हैं।

ii. पशु आधारित उद्योग (Animal based Industries) : कच्चे माल की प्राप्ति के लिए पशुओं पर निर्भर उद्योग पशु आधारित उद्योग कहलाते हैं। डेयरी उद्योग, चमड़ा उद्योग, जूता निर्माण उद्योग तथा पशुओं की हड्डुयों से निर्मित वस्तुओं का निर्माण करने वाले उद्योग इसी श्रेणी में आते हैं।

iii. वन आधारित उद्योग (Forest based Industries) : वन क्षेत्र से कच्चा माल प्राप्त करने वाले उद्योग वन आधारित उद्योंग कहलाते हैं। कागज, लाख, काष्ठ, टोकरी निर्माण आदि उद्योग वनों से ही अपना कच्चा माल प्राप्त करते हैं।

iv. खनिज आधारित उद्योग (Mineral based Industries) : विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थो का उपयोग कच्चे माल के रूप में करने वाले उद्योग खनिज आधारित उद्योग के अन्तर्गत आते हैं। लौह-इस्पात उद्योग, एल्युमिनियम उद्योग, सीमेन्ट निर्माण उद्योग आदि खनिज आधारित उद्योग हैं।

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प्रश्न 40.
पेट्रोरसायन उत्पादों की लोकप्रियता के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
वर्तमान समय में पेट्रोरसायन उद्योग एवं उत्पाद काफी लोकप्रिय हैं तथा इनका प्रचलन काफी बढ़ गया है। इनकी लोकप्रियता के निम्नलिखित कारण है –

  1. ये सस्ते एवं टिकाऊ होते हैं।
  2. राष्ट्रिय आय में इनका योगदान रहता है।
  3. ये लगभग तीन मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
  4. पेट्रो रसायन उद्योग कृषि से प्राप्त कच्चे मालों के ऊपर नहीं है, अतः जलवायु कारकों के कारण इनका उत्पादन प्रभावित नहीं होता है।

प्रश्न 41.
सूती वस्त्र उत्पादन क्षेत्रों को उत्पदान केन्दों के साथ लिखो।
उत्तर :
औद्योगिक केन्द्र एवं उत्पादन – भारत में सूती वस्त्र का उत्पादन पूरे देश में किया जाता है। फिर भी पूरे देश में 5 प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित है –

  1. पश्चिमी क्षेत्र – महाराष्ट्र एवं गुजरात।
  2. पूर्वी क्षेत्र – पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम।
  3. दक्षिणी क्षेत्र – तमिलनाडु, आंध प्रदेश, केरल, कर्नाटक, गोवा।
  4. उत्तरी क्षेत्र – पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर-प्रदेश एवं दिल्ली।
  5. मध्य क्षेत्र – मध्य प्रदेश।

वर्तमान समय में पूरे देश में कुल 1842 कारखाने हैं। इनमें से 1561 सूत काटने के तथा 281 कताई और बुनाई की मिलें हैं।

प्रश्न 42.
भद्रावती स्टील प्लाण्ट के बारे में लिखो।
उत्तर :
विश्वेसरैया लौह-इस्पात केन्द्र (Visvesaraya Iron and Steel Ltd.) : इसकी स्थापना 1923 ई० में तत्कालीन मैसूर स्टेट द्वारा कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिले में भद्रावती नदी के किनारे पर भद्रावती नामक स्थान पर की गई थी। 1962 से यह कर्नाटक सरकार तथा केन्द्रीय सरकार के संयुक्त अधिकार में है। इस कारखाने को निम्नलिखित सुविधायें प्राप्त हैं।
(i) भद्रावती नदी की घाटी 13 कि०मी० चौड़ी है जिस कारण इस कारखाने के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।
(ii) लौह-अयस्क बाबाबूदन पहाड़ी में केमनगुड़ी (चित्रदुर्ग) की खानों से प्राप्त होता है। यह खान भद्रावती से केवल 40 कि॰मी० की दूरी पर है जहाँ कारखाना सन् 1966 में यूनियन कार्बाइड इण्डिया लिमिटेड (Union Carbide India Ltd) द्वारा मुम्बई के निकट ट्रोम्बे (Trombay) में खोला गया। सन् 1969 में कोयली (Koyali) तेल परिष्करणाशाला पर भी एक कारखाना खोला गया।

प्रश्न 43.
भारत के प्रमुख अद्योगिक क्षेत्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र –

  1. कोलकाता के चारों तरफ हुगली औद्योगिक क्षेत्र।
  2. बाम्बे-अहमदाबाद औद्योगिक क्षेत्र।
  3. अहमदाबाद औद्योगिक क्षेत्र।
  4. दामोदर घाटी – छोटानागपुर एवं जमशेदपुर क्षेत्र।
  5. नीलगिरि औद्योगिक क्षेत्र।
  6. कानपुर औद्योगिक क्षेत्र।

प्रश्न 44.
भारतीय जूट उद्योग की समस्यायें क्या हैं ?
उत्तर :
भारतीय जूट की समस्यायें –

  1. पुरानी मशीनों को बदल कर नयी मशीनें लगायी गयी हैं।
  2. मूल्य निर्धारण के लिए भारतीय जूट निगम की स्थापना।
  3. भारतीय जूट उत्पादों के विभिन्न साधनों द्वारा प्रचार।
  4. दामोदर घाटी में कच्चे जूट के उत्पादन द्वारा कच्चे माल की कमी दूर और
  5. जूट उद्योग का संरक्षण।

प्रश्न 45.
सूती वस्त्र उद्योग की समस्या को दूर करने के लिए अपनाये गये उपाय का वर्णन करो।
उत्तर :
सूती वस्त्र उद्योग की समस्याओं को दूर करने के उपाय –

  1. मिलों में विशिष्ट बुनाई मशीनों को बैठाना।
  2. किसानों को लम्बे रेशे के कपास उत्पादन करने को बढ़ावा।
  3. लेबर-कमीशन द्वारा मजदूरों की समस्या का निराकरण।
  4. विदेशी बाजार की प्रतियोगिता के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों को बढ़ावा।

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प्रश्न 46.
भारतीय लौह-इस्पात उद्योग के केन्द्रों को लिखो।
उत्तर :

  1. TISCO – जमशेदपुर।
  2. बोकारो – कुल्टी एवं बर्नपुर।
  3. दुर्गापुर – पश्चिम बंगाल
  4. राउरकेला – उड़ीसा
  5. भिलाई – मध्य प्रदेश
  6. VISL – भद्रावती (कर्नाटक)
  7. विजयनगर स्टील प्लाण्ट – कर्नाटक
  8. सलेम स्टील प्लाण्ट – तमिलनाडू
  9. विशाखापट्टनम – आंधप्रदेश

प्रश्न 47.
भारत में ओटोमोबाइल केन्द्रों के नाम लिखो । कौन सबसे बड़ा है ?
उत्तर :
ओटोमोबाइल केन्द्र –

  1. हिन्दुस्तान मोटर (हिन्द मोटर), कलकत्ता
  2. दि प्रीमियर ओटोमोबाइल लिमिटेड (बाम्बे)
  3. महिन्द्रा एवं महिन्द्रा लिमिटेड (बाम्बे एवं कोलकाता)
  4. स्टैण्डर्ड मोटर प्रोडक्टस आफ इण्डिया लिमिटेड (मद्रास)
  5. अशोक लिलैण्ड लिमिटेड (मद्रास)
  6. बजाज टैम्पो लिमिटेड (पुने एवं लखनऊ)
  7. टाटा इंजीनियरिंग एण्ड लोकोमोटिव कम्पनी लिमिटेड (बाम्बे एवं जमशेदपुर)
  8. मारूती उद्योग (गुड़गाँव)
  9. शक्तिमान ट्रक (नासिक)
  10. निसान जीप्स (जबलपुर)
  11. इनसम ओटो लिमिटेड (उ०प्र०)
  12. DCM टायोटा (कोलकाता एवं दिल्ली)

हिन्दुस्तान मोटर, कोलकाता सबसे बड़ी अटोमोबाइल केन्द्र है।

प्रश्न 48.
वायुयान निर्माण केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
वायुयान निर्माण केन्द्र –

  1. हिन्दुस्तान ‘एअरोनाटिक्स लिमिटेड – बैंगलोर।
  2. नासिक – महाराष्ट्र
  3. कारापुट – उड़ीसा
  4. कानपुर – हवाई जहाज
  5. हैदराबाद- इंजिन एवं इलेक्ट्रानिक्स

बैंगोर भारत का सबसे बड़ा वायुयान निर्माण केन्द्र है।
Hindustan Aircraft LTD (Banglore)
Hindustan Antibiotic LTD (Pimpri)

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प्रश्न 49.
भारत के लोकोमोटिव केन्द्रों के नाम लिखो ? कौन सबसे बड़ा है ?
उत्तर :
लोकोमोटिव उत्पादक केन्द्र –

  • चित्तरंजन लोकोमोटिव फैक्टरी – डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन निर्माण केन्द्र, चित्तरंजन
  • डीजल लोकोमोटिव वर्क्स – वाराणसी
  • टाटा लोकोमोटिव वर्क्स – नैरोगेज इंजिन का निर्माण केन्द्र
  • डीजल कम्पोनेन्टस् वर्क्स – पटियाला

चित्तरंजन भारत का सबसे बड़ा लोकोमोटिव उत्पादक केन्द्र है।

प्रश्न 50.
जलयान निर्माण केन्द्रों के नाम लिखो। कौन सबसे बड़ा है ?
उत्तर :
जलयान-निर्माण केन्द्र –

  • हिन्दुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड – विशाखापट्टनम
  • हिन्दुस्तान शिपयार्ड – कोचीन
  • गार्डेन रीच वर्कशॉप – कोलकाता
  • दि मजगाँव डक – मुम्बई

विशाखापट्टनम भारत का सबसे बड़ा शिपयार्ड है।

प्रश्न 51.
विशाखापट्टनम में शिपयार्ड का विकास क्यों हुआ है ?
उत्तर :
विशाखापट्टनम में शिपयार्ड के विकास की सुविधाएँ –

  1. विशाखापट्टम एक गहरा और प्रकृतिक बन्दरगाह है जिससे यहाँ पर लहरों और प्राकृतिक तूफानों से सुरक्षा है।
  2. यह एक ऐसा बन्दरगाह है जो सड़कों एवं रेलवे से जुड़ा हुआ है।
  3. इसे कोयला और खनिज तेल की आपूर्ति आसानी से सम्भव है।
  4. भिलाई स्टील प्लाण्ट से इसे लौह इस्पात की आपूर्ति की सुविधा है।
  5. नजदीक के जंगलो सें इसे लकड़ी की आपूर्ति होती है।
  6. कुशल मजदूरों की यहाँ पर उपलब्धता है।
  7. बन्दरगाह से आवश्यक मशीनों को विदेशों से मंगाया जाता है।
  8. कुशल इंजीनियर और डिजाइन यहाँ पर उपलब्ध है।
  9. शुष्क डक और आर्द्र डक की सुविधा प्राप्त है।
  10. काफी खुला मैदान शिपयार्ड के लिए उपलब्ध है।
  11. राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यहाँ से निर्मित जहाजों की माँग है।

प्रश्न 52.
रेलवे कोच निर्माण केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
रेलवे कोच निर्माण केन्द्र –

  1. ) रेलवे कोच फैक्टरी – पेरम्बूर
  2. रेलवे कोच फैक्टरी – कपूरथला
  3. रेल एण्ड स्लीपर्स बार्स – जमशेदपुर, दुर्गापुर, राउरकेला
  4. भारत अर्थ मूवर्स – बैंगलोर
  5. रेलवे बैगन्स – बर्न स्टैण्डर , ब्रेथलेट एवं कम्पनी – कोलकाता

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प्रश्न 53.
भारी और हल्का उद्योग क्या है ?
उत्तर :
भारी उद्योग (Heavy Industry) : वे उद्योग जिनमें वजनी कच्चे मालों का प्रयोग किया जाता है और बड़े उत्पादों का निर्माण होता है उन्हें भारी उद्योग कहते हैं, जैसे – लौह इस्पात उद्योग।
हल्के उद्योग (Light Industry) : वे उद्योग जिनमें भारी कच्चे मालों का उपयोग नहीं होता है और हल्के सामानों का उत्पादन किया जाता है। इसमें महिला-मजदूरों के श्रमों का भी उपयोग किया जाता है जैसे – साइकिल उद्योग।

प्रश्न 54.
मिट्टी की उर्वरकता एवं सिंचाई की सुविधा जनसंख्या वितरण को कैसे प्रभावित करते हैं ?
उत्तर :
जमीन की उर्वरा शक्ति एवं सिंचाई की सुविधा जहाँ होगी, जनसंख्या वहाँ अधिक होगी। मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं सिंचाई के कारण ही विश्व की प्राचीन सभ्यताओं का जन्म एवं पोषण नदियों की घाटियों में हुआ है। यही कारण है कि गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र तथा सिन्धु घाटी के मैदानों में जनसंख्या घनत्व अधिक है। खाद्य की आपूर्ति के लिए अनाज एवं फल तथा उद्योगों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। अत: जनसंख्या घनी होती है।

प्रश्न 55.
जनसंख्या घनत्व से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जनसंख्या घनत्व से तात्पर्य है प्रति वर्ग कि०मी॰ में रहने वाली जनसंख्या है। जैसे उत्तर प्रदेश की जनसंख्या का घनत्व प्रति वर्ग कि॰मी॰ 471 व्यक्ति का निवास है। यह सम्पूर्ण क्षेत्र के लिए घनत्व का औसत होता है, वास्तविक घनत्व नहीं होता।

प्रश्न 56.
पश्चिम बंगाल घना आबाद क्यों है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में मिट्टी उपजाऊ है, वर्षा अधिक होती है तथा धान एवं जूट की कृषि होती है । यहाँ अनेक उद्योगों का विकास हुआ है। यहाँ जलवायु भी सम है। यहाँ अनेक खनिज पदार्थ पाये जाते हैं। यातायात की सुविधा, कलकत्ता बन्दरगाह की स्थिति के कारण उद्योगों के साथ व्यापार का भी विकास हुआ है। बंगलादेश से आये घुसपैठियों एवं शरणार्थियों ने भी यहाँ की जनसंख्या बढ़ा दी है। 2001 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल भारत का सबसे घनी जनसंख्या वाला राज्य है। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 904 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी॰ है।

प्रश्न 57.
पंजाब एवं हरियाणा में कम वर्षा होती है, फिर भी इनकी जनसंख्या सघन क्यों है ?
उत्तर :
पंजाब तथा हरियाणा में वर्षा कम होती है। अत: वहाँ कृषि उपजों के अभाव के कारण जनसंख्या का घनत्व कम होना चाहिए पर ऐसी बात नहीं है। पंजाब में 482 तथा हरियाणा में जनसंख्या का घनत्व 477 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है, जो विरल न होकर घनी जनसंख्या है। पंजाब एवं हरियाणा में वर्षा के अभाव की पूर्ति सिंचाई के साधनों से होती है। पंजाब, हरियाणा में नहरों का जाल बिछा हुआ है। यही कारण है कि ये दोनों प्रान्त गेहूँ, कपास, गत्ना आदि का उत्पादन करते हैं। यहाँ प्रति एकड़ उत्पादन भी अधिक है। पंजाब एवं हरियाणा में सरकारी सहयोग से अनेक कुटीर उद्योग भी स्थापित हुए हैं। अत: कृषि की सुविधा, यातायात तथा उद्योगों के विकास के कारण जनसंख्या घनी है।

प्रश्न 58.
वर्षा की मात्रा जनसंख्या वितरण को क्यों निश्चित करती है ?
उत्तर :
वर्षा जनसंख्या को प्रभावित करने वाला कारक है। पर्याप्त वर्षा, कृषि के साथ-साथ जल यातायात, मत्स्यपालन, सिंचाई तथा बिजली उत्पादन में सहायक होती है। जहाँ खाद्य पदार्थ नहीं पाये जाते है वहाँ जनसंख्या विरल होती है जैसे राजस्थान। उत्तर के विशाल मैदान में वर्षा पूरब से पश्चिम को जैसे कम होती है, वैसे-वैसे जनसंख्या का घनत्व कम होता जाता है । इस तथ्य की सत्यता निम्नलिखित आंकड़े से होती है –

राज्य वर्षा की मात्रा इंच में जनसंख्या का घनत्व प्रतिवर्ग किमी
पश्चिम बंगाल 63 766
बिहार 51 497
उत्तर प्रदेश 39 471
पंजाब 24 401

प्रश्न 59.
दक्षिण के पठार की जनसंख्या औसत क्यों है ?
उत्तर :
दक्षिण के पठारी भाग में जनसंख्या औसत है क्योंकि दक्षिण के पठारी भागों में कृषि योग्य भूमि का अभाव है। यहाँ पर जमीन ऊँची-नीची, उबड़-खाबड़ है तथा वर्षा की कमी है। जमीन समतल नहीं है। वर्षा की अनुपस्थिति में सिंचाई का भी विकास कम हुआ है। मिट्टी में उर्वरक तत्वों की कमी है। यातायात के साधनों का विकास भी नहीं हो पाया है। इन कारणों से अधिकतर स्थानों पर जनसंख्या औसत है पर कुछ स्थानों पर सघन जनसंख्या पायी जाती है, जैसे छोटानागपुर का पठार। इस भाग में खनिज पदार्थ की बहुलता है, जलशक्ति का विकास हुआ है। यातायात विकसित है, नये-नये उद्योगधन्धे खुल रहे हैं। अतः जनसंख्या का घनत्व अपेक्षाकृत अधिक है। लावा का पठार भी घनी जनसंख्या वाला क्षेत्र है।

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प्रश्न 60.
पर्वतीय क्षेत्रों की अपेक्षा मैदानी भागों में घनी जनसंख्या क्यों पाई जाती है ?
उत्तर :
जीवन में सुविधाएं जहाँ सुलभ होती हैं वहाँ जनसंख्या सघन होती है, पर जहाँ जीवन कठिन होता है वहाँ जनसंख्या विरल होती है। मैदानी भागों में मिट्टी उपजाऊ होती है, उद्योग विकसित होते हैं, यातायात के विभिन्न साधन विकसित होते हैं तथा व्यापार-व्यवसाय विकसित होते है। इसके विपरीत पहाड़ी भागों में कृषि फसलों का अभाव होता है उद्योग-धन्धों की कमी होती है। जीवन कृ्टकर होता है। अतः जनसंख्या कम होती है। इन्हीं सब कारणों से मैदानी भागों को जनसंख्या सघन तथा पहाड़ी भागों की जनसंख्या विरल होती है।

प्रश्न 61.
दिल्ली में जनाधिक्य क्यों है ??
उत्तर :
दिल्ली भारत की राजधानी है। यह यमुना नदी के बायें किनारे पर स्थित भारत का अति प्राचीन नगर है। इसका इतिहास करीब 4000 वर्ष पुराना है। वर्तमान में यह स्थल एवं वायुमर्गा से देश एवं विदेश से जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक केन्द्र होने के साथ ही यह व्यापारिक, औद्योगिक एवं शैक्षणिक केन्द्र के रूप में भी विकसित हुआ है। ऐतिहासिक महत्व तो अति प्राचीन काल से है ही। यह नगर पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब के पास है। अतः इन सभी प्रदेशों से यह प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। इस प्रकार उत्तम भौगोलिक स्थिति, विकसित उद्योग एवं व्यापार, यातायात एवं परिवहन व्यवस्था, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सुविधा के कारण दिल्ली की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ी है और यहाँ जनाधिक्य की समस्या उपस्थित हो गयी है।

प्रश्न 62.
सक्षिप्त टिप्पणी लिखें –
(i) लिंग अनुपात (Sex Ratio)
(ii) जनगणना (Census)
(iii) उत्पादक जनसंख्या (Productive Population)
(iv) आश्रित जनसंख्या (Dependent Population)
(v) जनसांख्यिकी (Demography)
उत्तर :
(i) लिंग अनुपात : प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या को लिंग अनुपात कहते हैं। भारत में लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 933 स्त्रियाँ हैं।
(ii) जनगणना : सन् 1881 ई० से प्रति 10 वर्ष पर जनगणना तथा आबादी से सम्बंधित तथ्यों का संग्रह जिस प्रणाली के द्वारा किया जाता है, उसे जनगणना कहते हैं।
(iii) उत्पादक जनसंख्या : कुल जनसंख्या का वह भाग जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न रहता है तथा उत्पादन कार्य कर करता है, अर्जक या उत्पादक जनसंख्या कहलाते हैं।
(iv) आश्रित जनसंख्या : कुल जनसंख्या का वह भाग जो स्वयं आर्थिक क्रिया नहीं करता बल्कि अर्जक या उत्पादन जनसंख्या पर निर्भर करता है, आश्रित जनसंख्या कहलाते हैं।
(v) जनसांख्यिकी : जिस विज्ञान के द्वारा जनसंख्या के विविध आँकड़ों एवं जनसंख्या में परिवर्तन जैसी अनेक बातों का अध्ययन किया जाता है, उसे जनसांख्यिकी कहते हैं।

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प्रश्न 63.
जनघनत्व से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जनसंख्या घनत्व (Population density) : जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र की सम्पूर्ण जनसंख्या और सम्मूर्ण घनत्व क्षेत्रफल का अनुपात है। जनसंख्या घनत्व को निकालने के लिए किसी क्षेत्र की सम्पूर्ण जनसंख्या को वहाँ के पूरे क्षेत्रफल से भाग दे देते हैं। परिणाम जनसंख्या घनत्व कहलाता है।

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जैसे 1991 में भारत का प्रति किलोमीटर जनसंख्या का घनत्व =267 व्यक्ति/वर्ग किलो मी०

प्रश्न 64.
2011 की जनगणना के अनुसार प्रथम तीन राज्यों का नाम लिखो।
उत्तर :
2011 की जनगणना द्वारा जनघनत्व के आधार पर भारत के प्रथम तीन राज्य –

  1. बिहार – 1106 व्यक्ति/वर्ग कि॰मी०
  2. पश्चिम बंगाल – 1028 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
  3. केरल – 860 व्यक्ति/वर्ग कि॰मी०

प्रश्न 65.
जनघनत्व के आधार पर भारत का सम्भावित विभाजन प्रस्तुत करो।
उत्तर :
जनसंख्या घनत्व के आधार पर भारत को पाँच भागों में बांटा गया है –

  1. बहुत कम घनत्व वाले क्षेत्र – 50 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
  2. कम घनत्व के क्षेत्र – 51-100 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी०
  3. मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र – 101-200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी॰
  4. उच्च घनत्व के क्षेत्र – 201 से 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी०
  5. अत्यधिक उच्च घनत्व के क्षेत्र – 400 से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

प्रश्न 66.
हिमाचल प्रदेश में विरल जनसंख्या क्यों है ?
उत्तर :
हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या का घनत्व 109 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि॰मी० है। हिमाचल प्रदेश में विरल जनसंख्या पाये जाने के निम्न कारण है –

  1. कृषि योग्य भूमि का अभाव – यहाँ की जमीन पथरीली है। यह असमतल एवं अनुपजाऊ है, अतः कृषि के लिए अयोग्य है।
  2. अनुपयुक्त जलवायु – उच्च पर्वतीय भाग होने से यहाँ पूरे वर्ष कठोर शीत पड़ती है जो मानव निवास के प्रतिकूल है।
  3. यातायात के साधनों का अभाव – आसमतल और पथरीला धरातल होने के कारण यहाँ सड़कों और रेलवाहनों का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है।
  4. उद्योगों का अभाव – यहाँ पर बड़े उद्योग-धंधों का विकास नहीं हुआ है। उपर्युक्त कारणों से हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या विरल है।

प्रश्न 67.
राजस्थान में विरल जनसंख्या क्यों पाई जाती है ?
उत्तर :
राजस्थान विरल बासा भारतीय राज्य है। यहाँ पर घनत्व 165 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी० है। राजस्थान में कम जन घनत्व के निम्न कारण है –

  1. कम उपजाऊ मिट्टी – राजस्थान की मिट्टी कम उपजाऊ है अत: यह कृषि योग्य नहीं है।
  2. कठोर जलवायु – राजस्थान की जलवायु विषम है। यहाँ अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी पड़ती है। गर्मियों में कठोर ‘लू’ चलती है। अत: यह मानव निवास योग्य नहीं है।
  3. अल्प वर्षा – अरावली की स्थिति मानसूनी हवाओं के समानान्तर होने के कारण यहाँ अल्प वर्षा होती है जिससे पर्याप्त मात्रा में कृषि नहीं होती है।
  4. अविक्रसित यातायात – यहाँ पर विषम धरातल होने के कारण सड़क और रेल यातायात का विकास कम हुआ है।
  5. उद्योग धंघों की कमी – यातायात, खनिज एवं विद्युत आपूर्ति के अभाव में यहाँ पर उद्योगों का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है। इस पर उपर्युक्त आसुविधाओं के चलते राजस्थान में जनघनत्व कम है।

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प्रश्न 68.
केरल घना आबाद है – क्यों ?
उत्तर :
वर्तमान समय में केरल भारत का तीसरा जनघनत्व वाला राज्य है। यहाँ की जनसंख्या का घनत्व 819 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी॰ है। अत्यधिक जनघनत्व के निम्न कारण हैं –
1. वर्षा (Rainfall) : अरब सागर से आनेवाली मानसूनी हवाओं से यहाँ खूब वर्षा होती है जो कृषि कार्य में सहायक है।
2. चावल की गहन कृषि : केरल में अधिक वर्षा चावल की गहन कृषि में सहायक है जिससे अधिक लोगों का भरण-पोषण आसानी से हो रहा है।
3. उपजाऊ भूमि : केरल का तटीय प्रदेश नदियों द्वारा लाये गये जलोढ़ मिट्टी से निर्मित है, अतः उपजाऊ मिट्टी के कारण यहाँ कृषि काफी विकसित दशा में है।
4. नकदी एवं व्यापारिक फसलों का उत्पादन : केरल की लैटराइट मिट्टी में कहवा, चाय एवं रबड़ की बागानी कृषि, मूंगफली एवं गन्ने की खेती होती है। केरल के दक्षिणी भाग में काली मिर्च, लवंग, इलायची एवं नारियल तथा सुपारी की कृषि होती है। इस प्रकार यहाँ व्यावसायिक एवं नकदी फसलों की कृषि जनघनत्व को काफी बढ़वा दिया है।
5. मत्स्य व्यापार : तटीय प्रदेश होने के कारण यहाँ मत्स्य व्यापार खूब विकसित है। मछली द्वारा लोगों का भरणपोषण एवं व्यापार दोनों की भरपाई हो रही है।
6. बन्दरगाह : कटे-फटे होने के कारण केरल में उत्तम प्राकृतिक बन्दरगाहों का विकास हुआ है।
उपर्युक्त सुविधाओं के कारण केरल अत्यधिक घना बसा प्रदेश है।

प्रश्न 69.
पंजाब और हरियाणा में कम वर्षा होती है फिर भी घना बसा है – क्यों ?
उत्तर :
पंजाब और हरियाणा में वर्षा कम होती है। इस प्रकार राजस्थान की तरह यहाँ जनघनत्व कम होना चाहिए किन्तु ये दोनों राज्य अत्यधिक घने बसे हैं। यहाँ का जनघनत्व क्रमशः 482 एवं 477 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। घनी जनसंख्या के निम्न कारण हैं –

  1. उपजाऊ भूमि – इन राज्यों के मैदानी भाग का निर्माण सिन्धु-गंगा द्वारा लायी गई नदियों के जमाव से हुआ है। अत: भूमि अत्यधिक उपजाऊ है और गेहूँ की कृषि बड़े पैमाने पर की जाती है। यहाँ कपास, गत्रा, आलू और धान की फसलें भी उगाई जाती है।
  2. सिंचाई की सुविधा – हिमालय पर्वत से निकलने वाली सततवाही नदियों से सिंचाई की उत्तम व्यवस्था है। सिंचाई की सुविधा पूरे वर्ष उपलब्ध है जो कृषि में सहायक है।
  3. यातायात की सुविधा – समतल भू-भाग होने के कारण यहाँ पर यातायात की सुविधाएँ उन्नत स्थिति में हैं। उत्तम यातायात ने बड़े उद्योगों के विकास में सहायता प्रदान किया है।

इस प्रकार उपजाऊ भूमि, सिंचाई की सुविधा, उन्नत यातायात एवं विकसित उद्योग-धन्धों के कारण पंजाब-हरियाणा का जन घनत्व अधिक है जबकि इन दोनों राज्यों में अल्प वर्षा होती है।

प्रश्न 70.
अरुणाचल प्रदेश में विरल आबादी पायी जाती है – क्यों ?
उत्तर :
अरुणाचल प्रदेश भारत का सबसे कम जन घनत्व वाला राज्य है। यहाँ का जन घनत्व मात्र 13 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। इस प्रदेश में कम जनघनत्व पाये जाने के निम्न कारण है –

  1. पर्वतीय एवं अनुपजाऊ भूमि – अरुणाचल हिमालय पर्वत की पूर्वी श्रेणियों की गोद में स्थित है। यहाँ की भूमि असमतल, पथरीली तथा अनुपजाऊ है जो मानव निवास के प्रतिकूल है।
  2. कठोर जलवायु – पर्वतीय क्षेत्र तथा समुद्रतल से ऊँचाई पर होने के कारण यहाँ वर्ष के अधिकांश भाग में कठोर शीत पड़ती है जो मानव निवास के योग्य नहीं है।
  3. अविकसित यातायात – पथरीली और उबड़-खाबड़ धरातल होने से यहाँ यातायात के साधनों का विकास नहीं हुआ है।
  4. हिंसक पशु – पर्वतीय और जंगली भाग होने के कारण यहाँ पर अनेक हिंसक पशु पाये जाते है जो मानव के दुश्मन हैं। उर्प्युक्त प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अरुणाचल प्रदेश की जनसंख्या बहुत कम है।

प्रश्न 71.
लिंग अनुपात क्या है ?
उत्तर :
जनसंख्या में स्त्री-पुरुष अनुपात के साम्य को जनसंख्या की लिंग संरचना कहते हैं। 1991 की जनगणना के अनुरूप भारत में 1000 पुरुषों के पीछे 929 स्त्रियाँ थीं। यह अनुपात जापान में 1000 पुरुषों के पीछे 1069 स्त्रियाँ हैं। भारत में स्त्रियों की संख्या पुरूषों की अपेक्षा निरन्तर घट रही है। लिंग संरचना के अध्ययन के म्राध्यम से राष्ट्र की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का बोध हो जाता है।

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प्रश्न 72.
जनगणना से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जनगणना सरकार द्वारा करायी जाने वाली जनसंख्या का आंकड़ा है। यह प्रत्येक 10 वर्षों के अन्तराल पर करायी जाती है। इसके अन्तर्गत किसी देशी पूरी जनसंख्या, स्त्री-पुरुष अनुपात, सक्षरता, लोगों के आय-व्यय, जनघनत्व व्यक्तियों के विभिन्न वर्गों का जीवन स्तर आदि आँकड़े सम्मिलित रहते हैं।

प्रश्न 73.
भारत में भोजन की समस्या का वर्णन करें।
उत्तर :
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा घना देश है, अत: यहाँ पर भोजन की बहुत बड़ी मांग है। किन्तु देश की उत्पादित कुल अनाज लोगों के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही है उस दर से भोजन का उत्पादन नहीं बढ़ रहा है।
भारत की कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है। किन्तु वर्षा या तो कृषि के लिए पर्याप्त नहीं होती या तो फिर बाढ़ आ जाया करती है। इस प्रकार सूखा और बाढ़ से कृषि असफल हो जाती है।
किन्तु पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि पर काफी ध्यान दिया गया तथा हरित क्रान्ति (Green Revolution) से भारत वर्तमान समय में अनाज के उत्पादन में आत्म निर्भर हो चुका है।

प्रश्न 74.
भारत में जनाधिक्य से उत्पत्न समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर :
अत्यधिक जनसंख्या से निम्न समस्यायें बढ़ती हैं –

  1. भोजन, कपड़ा, मकान की समस्या।
  2. अशिक्षा को बढ़ावा।
  3. बेरोजगारी में वृद्धि।
  4. खनिजों की कमी (संसाधनों में जनसंख्या के अनुपात में कमी)।
  5. लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट।
  6. प्रति व्यक्ति आय में कमी।
  7. लोगों के जीवन स्तर में गिरावट।

प्रश्न 75.
लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों जाते हैं ?
उत्तर :
लोग एक जगह से दूसरी जगह निम्न कारणों से पलायित होते है –

  1. अच्छे रोजगार और जीवन स्तर में वृद्धि के लिए।
  2. धार्मिक संरक्षण के लिए।
  3. राजनैतिक सुरक्षा के लिए।
  4. प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए।

प्रश्न 76.
डैमोग्रैफी क्या है ?
उत्तर :
डैमोग्रैफी : जन्म-दर और मृत्यु-दर के अन्तर को डैमोग्रैफी गैप कहते हैं। जब जन्मदर, मृत्युदर से अधिक है तो डैमोग्रैफी गैप धनात्मक होती है। जब मृत्युदर, जन्मदर से अधिक होता है तो डैमोग्रैफी गैप ऋणात्मक होती है। इस प्रकार डेमोग्रैफी जनसंख्या के आकार, संरचना, वितरण एवं बदलाव की सांख्यिकी अध्ययन है।

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प्रश्न 77.
ग्रांड ट्रंक रोड का विवरण दीजिए ?
उत्तर :
ग्रांड ट्रंक राष्ट्रीय राजमार्ग (Grand Trank National Highway) : यह भारत की सबसे अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है। इसे G.T. Road तथा राष्ट्रीय राजमार्ग नम्बर 2(NH<sub>2</sub>) कहते हैं। यह एक ऐतिहासिक सड़क है, इसका निर्माण शेरशाह सूरी ने कराया था। यह सड़क कलकत्ता से पेशावर तक जाती थी। भारत में इसकी लम्बाई 1490 km. है। यह राजमार्ग कोलकाता से दुर्गापुर, आनसोल, धनबाद, हजारीबाग, गया, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, दिल्ली, अम्बाला, लुधियाना, जालन्धर, अमृतसर होते हुए पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती है। यह राजमार्ग भारत की घनी आबादी एवं कृषि सम्पन्न क्षेत्रों से होकर गुजरती है। अत: यह भारत की सबसे अधिक व्यस्त राजमार्ग है।

प्रश्न 78.
स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग क्या है ?
उत्तर :
स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग (Golden Qudrlatoral Highways) : भारत सरकार ने दिल्ली-कोलकता, चेन्नई-मुंबई व दिल्ली को जोड़ने वाली 6 लेन वाली महा राजमार्गो की सड़क परियोजना प्रारम्भ की है। इस परियोजना के तहत दो गलियारे प्रस्तावित हैं। पहला उत्तर-दक्षिण जो श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ता है तथा दूसरा पूर्व-पश्चिमी गलियारा जो सिलचर (असम) तथा पोरबंदर (गुजरात) को जोड़ता है। इस महा राजमार्ग का मुख्य उद्देश्य भारत के मेगासिटी (Mega cities) के मध्य की दूरी व परिवहन समय को न्यूनतम करना है। यह राजमार्ग परियोजना भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAl) के अधिकार क्षेत्र में है।

प्रश्न 79.
आधुनिक युग में परिवहन एवं संचार के महत्व को समझाइए।
उत्तर :
परिवहन एवं संचार का महत्व (Importance of transport and communication) : आधुनिक युग में किसी भी देश के विकास का मुख्य आधार परिवहन एवं संचार ही है। धातुओं एवं सेवाओं को उनके उत्पादन क्षेत्रों से उपयोग क्षेत्रों के मध्य सम्बन्ध स्थापित करके परिवहन सेवाएँ माँग एवं पूर्ति में संतुलन बनाए रखती है। परिवहन एवं संचार तंत्र के बन्द हो जाने की स्थिति में सम्पूर्ण आर्थिक तंत्र एवं विकास परियोजनाएँ रूक जाएगी। अत: देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में परिवहन एवं संचार का वही महत्व है जो मानव शरीर में धमनियों एवं शिराओं का है।

प्रश्न 80.
परिवहन सेवाओं को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
परिवहन सेवाओं को प्रभावित करने वाले कारक : परिवहन को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक हैं।
मार्ग : परिवहन सुनिश्चित मार्गों पर होता है। कस्बों, गाँवों, औद्योगिक केन्द्रों, कच्चे माल, उनके बीच जमीन की बनावट, मार्ग की लम्बाई पर आने वाले व्यवधानों को दूर करने के लिए उपलब्ध विधियों पर मार्ग निर्भर करते हैं।
मांग : परिवहन के लिए माँग जनसंख्या के आकार पर निर्भर करता है। जनसंख्या का आकार जितना बड़ा होगा परिवहन की माँग उतनी अधिक होगी।

प्रश्न 81.
राष्ट्रीय राजमार्गों के उद्देश्य बताइये।
उत्तर :
हमारे देश के विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ राष्ट्रीय राजमार्ग देश के विभिन्न दूर-दराज के इलाको को जोड़ने का कार्य करता है। यह प्राथमिक सड़क तंत्र है। इसके निर्माण एवं रख-रखाव का भार केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा किया जाता है। अनेक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम दिशाओं में फैले हुए हैं। दिल्ली व अमृतसर के मध्य ऐतिहासिक शेरशाह सूरी मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 1 के नाम से जाना जाता हैं।

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प्रश्न 82.
भारत की प्रमुख वायु सेवाएँ कौन-कौन सी है? इनका संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
वायु सेवाएँ –
एयर इण्डियाँ : यह विदेशों के लिए वायु सेवाएँ प्रदान करता है। वर्तमान समय में इसके बेड़े में 26 विमान हैं।

इण्डियन एयर लाइन्स : यह देश की प्रमुख घरेलू हवाई सेवा है। घरेलू सेवा के अतिरिक्त यह पड़ोसी देशों जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों एवं मध्य-पूर्व के लिए भी अपनी सेवाएँ प्रदान करती है। वर्तमान समय में यह 14 पड़ोसी राष्ट्रों के लिए अपनी सेवाएँ उपलब्ध करा रही है। वायुदूत लिमिटेड का इण्डियन एयरलाइन्स में विलय हो चुका है।

पवन हंस लिमिटेड : यह तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम, आयल इण्डिया लिमिटेड तथा चेन्नई की हार्डी एक्सप्लोरेशन कंपनी को हेलिकॉप्टर की सहायता से सेवा उपलब्ध करा रहा है। इसके अतिरिक्त अरूणाचल प्रदेश सहित कई राज्य सरकारों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को भी यह अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराता है।

प्रश्न 83.
भारत में भू-गर्भ रेल के विकास का वर्णन प्रस्तुत करें।
उत्तर :
भू-गर्भ रेल : भारत के बड़े-बड़े नगरों में परिवहन व्यवस्था काफी जटिल हो गई है। सड़क पर भार बढ़ता जा रहा है, ट्रॉफिक एक समस्या हो गई है। लोगों को घण्टों जाम में खड़ा रहना पड़ता हैं। उससे छुटकारा पाने के लिए शहरों में भू-गर्भ रेलों का निर्माण किया जा रहा है। इस दिशा में सबसे पहला प्रयास किया गया। भारत में सबसे पहली भू-गर्भ रेल कोलकाता में बनाई गई जिसके विस्तार का कार्य आज भी जारी है। इसके अलावा दिल्ली, बंगलेरू आदि शहरों में भी भूग र्भ रेल का निमार्ण हो गया है जिससे लाखों लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं।

प्रश्न 84.
भारत में रोप-वे परिवहन के विकास एवं वितरण का वर्णन करें।
उत्तर :
भारत में रोप-वे का अधिक उपयोग हिमालय के उच्च भागों में चाय उद्योग एवं कोयला खानों में होता है। भारत में करीब 100 रोपवे हैं। विश्व के सबसे लम्बे (30 कि०मी०) रोपवे का निर्माण बिहार के झरिया में 1966 में हुआ। इस रज्जुपथ से दामोदर नदी में होकर कोयला खान क्षेत्र में 1350 टन बालू ढोया जाता है। 1968 में दार्जिलिंग में एक साथ ही यात्री और माल ढोने के लिए 9 कि॰मी॰ लम्बे एक रोपवे का निर्माण किया गया है।
अन्य रोप-वे मार्ग दार्जिलिंग, विजनवाती, कालिम्पोंग हैं। चेरापूँजी और मेघालय के दुर्गम क्षेत्रों में एवं दक्षिण अन्नामलाई पहाड़ पर रोप-वे का निर्माण किया गया है। राजगीर एवं मंसूरी में भी पर्यटकों के लिए रोप-वे का निर्माण किया गया है।

प्रश्न 85.
आधुनिक संचार व्यवस्था में इंटरनेट की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
सूचनाओं के एकीकरण से अब दूर संचार धीरे-धीरे कम्प्यूटर का अंग बनता चला जा रहा है। इसकी इंटरनेट के माध्यम से एक समन्वित तंत्र का निर्माण हुआ है। इंटरनेट मेजबान कम्यूटरों की आपस में जुड़ी हुई एक प्रणाली है, जिसमें विभिन्न प्रकार की सूचनाए एवं आँकड़े उपलब्ध रहते हैं। ये मेजबान कम्प्यूटर आवश्यकत्मानुसार सूचनाओं का आदान-प्रदान करते रहते हैं। अब इंटरनेट के द्वारा शिक्षा का प्रसार किया जा रहा हैं। इसके माध्यम से यात्रा टिकटों की बुकिंग, सरकारी एवं गैर-सरकारी बिलों का भुगतान, उपभोक्ता समानों की आपूर्ति घर बैठे ही की जा सकती हैं। प्रतिवर्ष लाखों नए ग्राहक इंटरनेट से जुड़ रहे हैं, अतः सूचना संचार के क्षेत्र में इसका महत्व दिनों-दिन बढ़ता चला जा रहा हैं।

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प्रश्न 86.
संचार सेवा का क्या महत्व है ?
उत्तर :
संचार सेवाएँ (Communication Service) : संचार राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में भागीदारी करने में सहायता करता है। संचार सेवाओं में शब्दों, संदेशो, तथ्यों और विचारों का आदान-प्रदान सम्मिलित है। जैसे ही लेखन का आविष्कार हुआ, संदेशों को सुरक्षित किया जाने लगा तथा इन्हें भेजा जाने लगा। इन्हें भेजने के लिए पहले तो परिवहन के साधनों पर ही पूर्णत: निर्भर रहना पड़ता था, किन्तु अब वैज्ञानिक खोजों तथा विभिन्न माध्यमों, यथा-दूरभाष, इन्टरनेट तथा उपग्रह ने संचार सेवाओं के लिए परिवहन की निर्भरता कम कर दी है।

प्रश्न 87.
दूरसंचार के बारे में संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
दूरसंचार (Tele Communication) : दूर संचार ने कांति उत्पन्न की है। इसके माध्यम से बहुत कम समय में सूचनाएँ भैजी जाती है। अब मोबाइल फोन ने तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिया है।
तीव सामाजिक और आर्थिक विकास में दूरसंचार क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पूरे विश्व में स्वीकार की गई है। दूरसंचार क्षेत्र के विकास में निजी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। निजी क्षेत्र द्वारा दिये गये वायरलेस, टेलीफोन आदि शहरी क्षेत्रों में ग्राहकों की पंसद हैं।

टेलीग्राफ और टेलीफोन के आविष्कार के तुरन्त बाद ही भारत में दूरसंचार सेवाओं की शुरूआत हो गयी थी। दूरसंचार विभाग की सेवाएँ उपलब्ध कराने सम्बन्धी कार्य को अलग करने तथा सरकारी सेवा प्रदाता सहित सभी सेवा प्रदाताओं को समान अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है।

प्रश्न 88.
तृतीयक आर्थिक क्रियाकलाप से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
तृतीयक आर्थिक क्रियाकलाप के अन्तर्गत वे सेवाएँ आती हैं जो प्रत्यक्ष रूप से उत्पादन में योगदान नहीं देते हैं, किन्तु अप्रत्यक्ष रूप में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है । इसके अन्तर्गत यातायात एवं परिवहन सम्बन्धी सेवाएँ, संचार एवं संचार वाहन, वितरण, विनिमय, व्यापार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएं आती हैं।

प्रश्न 89.
सड़क परिवहन कैसे औद्योगिक विकास में सहायक होते हैं ?
उत्तर :
देश के अन्दर होने वाले औद्योगिक विकास में सड़क यातायात सर्वाधिक महत्वर्पूण साधन है। सड़क मार्ग द्वारा देश के समस्त भाग एक-दूसरे के साथ जुड़े होते हैं। अतः औद्योगिक केन्द्रों तक कच्चे मालों को पहुचाने तथा तैयार माल को उपभोक्ता क्षेत्र तक पहुँचाने की सुविधा होती है। पहाड़ी क्षेत्रों के दुर्गम स्थानों तक सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

प्रश्न 90.
वेदिकानुमा कृषि एवं स्ट्रिप फार्मिंग में अन्तर बताओ।
उत्तर :
वेदिकानुमा कृषि (Terrace farming) : पहाड़ी ढालों पर सीढ़ी बनाकर जल की धारा को दूसरी तरफ मोड़ दिया जाता है, जिससे मिट्टी को सुरक्षा मिलती है। ढलानों पर मिट्टी की मेड़ भी बनाई जा सकती है और इस तरह उस स्थान पर वेदिकानुमा कृषि की जाती है।
धारीदए कृषि (Spripe farming) : इसके अन्तर्गत पौधों को कतार में रोपा जाता है जिससे वे जल बहाव को रोकते हैं और स्ट्रिप फार्मिंग का कार्य किया जाता है।

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प्रश्न 91.
भारत में जनाधिक्य से उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर :
अत्यधिक जनसंख्या से निम्न समस्यायें बढ़ती है –

  1. भोजन, कपड़ा, मकान की समस्या।
  2. अशिक्षा को बढ़ावा।
  3. बेरोजगारी में वृद्धि।
  4. खनिजों की कमी (संसाधनों में जनसंख्या के अनुपात में कमी)।
  5. लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट।
  6. प्रति व्यक्ति आय में कमी।
  7. लोगों के जीवन स्तर में गिरावट।

प्रश्न 92.
लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों जाते हैं ?
उत्तर :
लोग एक जगह से दूसरी जगह निम्न कारणों से पलायित होते है –

  1. अच्छे रोजगार और जीवन स्तर में वृद्धि के लिए।
  2. धार्मिक संरक्षण के लिए।
  3. राजनैतिक सुरक्षा के लिए।
  4. प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए।

प्रश्न 93.
दूरसंचार के बारे में संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
दूरसंचार (Tele Communication) : दूर संचार ने क्रांति उत्पन्न की है। इसके माध्यम से बहुत कम समय में सूचनाएँ भेजी जाती है। अब मोबाइल फोन ने तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी कांतिकारी परिवर्तन कर दिया है।
तीव सामाजिक और आर्थिक विकास में दूरसंचार क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पूरे विश्व में स्वीकार की गई है। दूरसंचार क्षेत्र के विकास में निजी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। निजी क्षेत्र द्वारा दिये गये वायरलेस, टेलीफोन आदि शहरी क्षेत्रों में ग्राहको की पंसद हैं।
टेलीग्राफ और टेलीफोन के आविष्कार के तुरन्त बाद ही भारत में दूरसंचार सेवाओं की शुरूआत हो गयी थी। दूरसंचार विभाग की सेवाएँ उपलब्ध कराने सम्बन्धी कार्य को अलग करने तथा सरकारी सेवा प्रदाता सहित सभी सेवा प्रदाताओं को समान अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है।

प्रश्न 94.
भारत में जनसंख्या की व्यावासायिक संरचना कैसी है ?
उत्तर :
जन्संख्या की व्यावसायिक संरचना (Occupational structure of population) जनसंख्या की व्यावसायिका संरचना से तात्पर्य कुल कार्यशील जनसंख्या की विभिन्न व्यवसायों में वितरण हैं। सम्पूर्ण व्यवसायों (आर्थिक क्रियाओं) को प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक वर्ग में विभक्त किया जाता हैं। प्रकृति से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित व्यवसाय जैसे शिकार करना, पशुपालन, खनन तथा कृषि आदि प्राथमिक व्यवसाय हैं। प्राथमिक उत्पादनों पर आधारित क्रियाएँ जैसे विनिर्माण उद्योग, सड़क निर्माण आदि द्वितीयक व्यवसाय हैं तथा प्रत्यक्ष रूप से कोई उत्पादक नहीं करनेवाली परन्तु उत्पादन में सहायक क्रियाएँ जैसे परिवहन, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा तथा अन्य सेवाएँ आदि तृतीयक क्रियाएँ हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल कार्यशील जनसंख्या का 49 % प्राथमिक व्यवसाय में, 24 % द्वितीयक व्यवसाय में तथा 27 % तृतीयक व्यवसाय में लगी हुई हैं। यह पहली बार हुआ है जब प्राथमिक व्यवसाय में लगी जनसंख्या की प्रतिरात 50 से कम हैं।

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प्रश्न 95.
जनसंख्या वृद्धि एवं संपोषणीय विकास पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
जनसंख्या वृद्धि एवं रक्षणीय विकास की अवधारण : 18 वीं सदी तक जनसंख्या कोई समस्या नही थी, क्योंकि प्रकृति के पास वह सब कुछ या जिससे मनुष्य का जीवन आराम से व्यतीत हो जाता था। जनसंख्या और संसाधनो के बीच का अन्तग 18 वीं सदी के बाद तेजी से बढ़ा है। विगत 300 वर्षों में विश्व के संसाधनों में थोड़ी बहुत वृद्धि हुई है जबकि मानव जनसंख्या में और उसकी आवश्यकता में बहुत वृद्धि हुई है। विकास ने केवल विश्च के सीमित संसाधनो के बहुविध प्रयोगों को बढ़ाने में योगदान ध्या है जबकि इन संसाधनों की मांग में अतिशय वृद्धि हुई है। अत: आज की सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या और संसाधनों के बीच समता बनाये रखना है। भारत में जनसंख्या बड़ी तीव्रगति से बढ़ रही है।

भारत में जनसंख्या की वृद्धि संसाधनो की तुलना में अधिक होने के कारण भारत को जनादिक्य वाला देश (over populated) माना जाता है। विकास सामान्य रूप से और मानव विकास विशेष रूप से सामाजिक विज्ञानों में प्रयुक्त होने वाली एक जटिल संकल्पना है। यह जटिल है क्योंकि युगो से यही सोचा जा रहा है कि विकास एक मूलभूत संकल्पना है और यदि एक बार विकास को प्राप्त कर लिया जाय तो यह समाज की सभी सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय समस्याओ का निदान हो जायेगा।

यद्यपि विकास मानव जीवन की गुणवत्ता में अनेक प्रकार के सुधार किया है, पर इसने एक भीषण समस्या को जन्म भी दे दिया है। विकास के कारण प्राकृतिक संसाधानो का दोहन इतनी तीव्रगति से हुआ है कि मनुष्य के सामने दो विकट समस्याओ ने जन्म ले लिया है। पहली समस्या यह है कि विकास ने जन्म ले लिया है। पहली समस्या यह है कि विकास ने प्राकृतिक पर्यावरण को इतना क्षतिग्रस्त कर दिया है कि मनुष्य एवं जीव जगत के सम्मुख अस्तित्व का खतरा उपस्थित हो गया है।

दूसरी समस्या यह है कि कुछ संसाधनों को प्राकृति ने लाखो करोड़ो वर्षो में तेयार किया है, एक बार समाप्त होने के बाद उनकी पुन: आपूर्ति सम्भव नहीं है, जबकि इनकी जरूरत सदा बनी रहेगी। अत: आवश्यकता यह है कि विकास भी हो और संसाधनो का संरक्षण भी हो। संसाधनों के संरक्षण के साथ विकास को ही संपोषीय विकांस कहा जाता है।

प्रश्न 96.
चाय की खेती के लिए ढालू भूमि की आवश्यकात क्यों पड़ती है ?
उत्तर :
पर्वतीय क्षेत्रों में चाय की कृषि उत्तम होती है, चाय के वृक्षों की जड़ों में जल लगने से चाय का नुकसान होता है। यही कारण है कि पहाड़ी पर चाय की कृषि उत्तम होती हैं।

प्रश्न 97.
खनिज पदार्थों की प्रकृति के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
खनिज पदार्थों की प्रकृति के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of industries on the basis of nature of raul matarials) : कच्चे माल की प्रकृति के आधार पर उद्योगों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –
कृषि पर आधारित उद्योग (Agro-based Industries) : कृषि क्षेत्र से कच्चा माल प्राप्त करने वाले उद्योगों को कृषि पर आधारित उद्योग कहते है। भूमि वस्त्र उद्योग, जूट उद्योग, रेशमी वस्त्र उद्योग, शक्कर उद्यांग तथा वनस्पति तेल उद्योग आदि उद्योग इस श्रेणी में आते है।

पशु आधारित उद्योग (Animal based Industires) : कच्चे माल की प्राप्ति के लिए पशुओं पर निर्भर उद्योग पशु आधारित उद्योग कहलाते है। डेयरी उद्योग, चमड़ा, उद्योग, जूता निर्माण उद्योग तथा पशुओं की हड्डियों से निर्मित वस्तुओं का निर्माण करने वाले उद्योंग इसी श्रेणी में आते है।

वन आधारित उद्योंग (Forest -besed Industries) : वन क्षेत्र से कच्चा माल प्राप्त करने वाले उद्योग वन आधारित उद्योग कहलाते है। कागज, लाख, काष्ठ टोकरी, निर्माण आदि उद्योंग वनों से ही अपना वाच्चा माल प्राप्त करते हैं।

खनिज आधारित उद्योग (Mineral – based Industries) : विभिन्न प्रकार के खनिज आधारित उद्योग कच्चे माल के रूप में करने वाले उद्योग खनिज आधारित उद्योग के अन्तर्गत आते है। लौहु इस्पात उद्योग एल्यूमीनियम उद्योग, सीमेन्ट निर्माण उद्योग आदि खनिज आधारित होता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
भारत में नगरीकरण के क्या कारण है ?
उत्तर :
भारत में नगरीकरण के कारण – नगरीकरण के अन्तर्गत नए नगरों का निर्माण, पुराने नगरों का विस्तार तथा ग्रामीण जनसख्खा का नगरों की ओर पलायन आदि बाते आती हैं। सन् 1921 के बाद भारत में नगरीकरण में वृद्धि तेजी से हुई है। इसके निम्नलिखित कारण हैं –
i. औद्योगिक विकास – देश में उद्योग-धन्धों का विकास तेजी से हो रहा है। नौकरी पाने के लिए लोग गाँव छोड़कर कारखानों में आते हैं। कारखानों के पास जनसंख्या के बढ़ जाने से नए नगर बस जाते हैं।
ii. शिक्षा का प्रसार – भारत में शिक्षा का प्रसार तेजी से हो रहा है। पड़े-लिखे लोग गाँवों में रहकर खेती करना पसन्द नहीं करते हैं । वे नगरों की ओर बढ़ते हैं जिससे नगरीय जनसंख्या की वृद्धि होती है। साथ ही शिक्षा के केन्द्रों के पास भी नए नगर बस जाते हैं।
iii. यातायात के साधनों का विकास – भारत में रेलों, सड़कों व वायुमार्गों का विकास तेजी से हो रहा है। विभिन्न भागों के संगम स्थानों तथा बन्दरगाहों, स्टेशनों एवं हवाई अड्डों के समीप नये नगर बस गए हैं तथा पहले से बने नगरों का तेजी से विकास हो रहा है।
iv. व्यापार का विकास – उद्योग-धन्धों के विकास के साथ ही आन्तरिक एवं विदेशी व्यापार की भी वृद्धि तेजी से हुई है। फलतः व्यापार कार्य के लिए भी नगरों का विकास हुआ है।

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प्रश्न 2.
कपास की खेती के लिए आवश्यक भौतिक दशाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कपास (Cotton) : कपास का जन्म स्थान भारत माना जाता है। ॠग्वेद तथा मनुस्मृति में कपास के धागों का उल्लेख मिलता है। आज भी यह भारत की प्रमुख उपज है। कपास के उत्पादन में भारत का चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका व रूस के बाद विश्व में चौथा स्थान है। यहाँ विश्व के कपास क्षेत्रों के 23 प्रतिशत भाग पर कपास की खेती होती है परन्तु प्रति हेक्टेयर उपज अत्यन्त कम होने से यहाँ विश्व का केवल 8.6 प्रतिशत कपास ही उत्पत्न होता है।
भौगोलिक दशाएँ :
i. उच्च तापक्रम : कपास उष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्ध का पौधा है। इसके लिए 20° C से 25° C तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है। पाला इसका शत्रु है। कम से कम 200 दिन पाला-रहित होना आवश्यक होता है।
ii. कम वर्षा : कपास के लिए 50 से 100 से॰मी॰ वर्षा उपयुक्त है। कम वर्षा के क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। सिंचित कपास उच्चकोटि का होता है। चुनाई के समय चमकीली धूप एवं उच्च तापक्रम का होना आवश्यक है। पकते समय वर्षा होने से उसकी बोड़ियाँ ठीक से नहीं खिलती हैं जिससे चमकीली कपास नहीं प्राप्त होती है।
iii. समुद्री हवा : समुद्री हवा कपास की कृषि के लिए अत्यन्त लाभदायक होती है। इसी से तटीय व द्वीपीय भाग कपास की कृषि के लिए अत्यन्त उपर्युक्त होते हैं।
iv. मिट्टी : कपास के लिए नमी धारण करने की क्षमता रखने वाली उपजाऊ चूनायुक्त मिट्टी उत्तम होती है। काली एवं दोमट मिट्टियाँ इसके लिए सर्वोत्तम होतो हैं।
v. सस्ता श्रम : कपास की कृषि में बोने, निराने एवं बोड़ियों को चुनने के लिए सस्ते, कुशल एवं पर्याप्त मजदूरों की आवश्यकता पडती है।
vi. कीटाणुनाशक दवा की प्राप्ति : कपास के पौधों पर बाल वीविल (Ball-weevil) नामक कीड़े का प्रकोप होता है। इन कीटों को मारने के लिए पौधो पर कीटाणुनाशक दवाओं का प्रयोग आवश्यक है।

प्रश्न 3.
भारत के पूर्वी भाग में इस्पात उद्योग की स्थापना के क्या कारण हैं ?
अथवा
पूर्व और मध्य भारत में लौह-इस्पात उद्योगों के विकास के प्रमुख कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
भारत के पूर्वी भाग में इस्पात उद्योग की स्थापना के कारण : भारत के पूर्वी भाग में पश्चिम बंगाल में दुर्गापुर एवं कुल्टी, बर्नपुर तथा झारखण्ड के बोकारो तथा उड़ीसा के राउरकेला में लौह-इस्पात उद्योग की स्थापना के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
i. लौह अयस्क की सुविधा – लौह अयस्क झारखण्ड के सिंहभूम जिले तथा उड़ीसा के मयूरभंग एवं क्योंझर की खानों से प्राप्त होता है।
ii. कोयला की सुविधा – कोयला, रांनीगंज, झरिया तथा बोकारो की खानों से प्राप्त होता है। जो गाड़ियां, झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल से कोयला राऊरकेला को ले जाती है, वही वहाँ से लौह अयस्क दुर्गापुर तथा कुल्टी-बर्नपुर के लिए लाती है। दुर्गापुर जमशेदपुर तथा बोकारो कोयला क्षेत्र में ही पड़ते हैं। अत: इन कारखानों को कोयला प्राप्ति की सुविधा है।

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iii. अन्य कच्चे मालों की सुविधा – कोयला और लौह अयस्क के अतिरिक्त चूना पत्थर, गंगपुर, वीरमित्रपुर तथा हाथी बाड़ी से मैंगनीज, डोलोमाइट, उड़ीसा के वीरमित्रापुर क्षेत्रों से तथा पास के क्षेत्रों से ताप प्रतिरोधक इंटे मिलती है। इस प्रकार अन्य खनिज इस क्षेत्र में ही मिलते हैं।
iv. जल की प्राप्ति – पूर्वी भाग में अनेक छोटी-छोटी नदियाँ हैं। अत: दुर्गापुर कारखाने को जल दुर्गापुर बैरेंज से, राउरकेला को ब्राह्मणी नदी से, बोकारो को दामोदर नदी से जल मिल जाता है।
v. सस्ते श्रमिक – घनी जनसंख्या के कारण इस क्षेत्र में मजदूर आसानी से मिल जाते हैं।
vi. पठारी भाग – भारत के पूर्वी भाग में छोटा नागपुर के इस क्षेत्र की भूमि पठारी है जो कृषि के अनुपयुक्त है, अत: उद्योगों की स्थापना के लिए पर्याप्त अनुपजाऊ भूमि उपलब्ध है।
vii. कलकत्ता बंदरगाह की सुविधा – इस क्षेत्र में कलकत्ता बंदरगाह है जहाँ से मशीनों को मंगाने एवं माल को विदेशों में भेजने में सुविधा होती है।
viii. विस्तृत बाजार – यह क्षेत्र घनी जनसंख्या का क्षेत्र है, अत: लौह इस्पात का विस्तृत बाजार क्षेत्र है।

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प्रश्न 4.
भारत में जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले किन्हीं पांच कारकों की व्याख्या कीजिए। अथवा, भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के लिए पाँच कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में जनसंख्या के क्षेत्रीय वितरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
i. उच्चावच (Relief) : धरातल की बनावट जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करती है। ऊबड़-खाबड़ तथा मरूस्थलीय क्षेत्रों में मैदानों की अपेक्षा कम घनी जनसंख्या होती है। उदाहरण जम्मू-कश्मीर के उत्तरी-पूर्वी भाग तथा मरूस्थलीय प्रदेश में जनसंख्या का घनत्व कम है, जबकि गंगा की घाटी में घनत्व काफी अधिक है।
ii. जलवायु (Climate) : उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों जैसे उत्तरी मैदानों में घनी जनसंख्या पाई जाती है। इसके विपरीत अति शीत जम्मू-कश्मीर, अति गर्म जैसे रेगिस्तानी भागों में कम जनसंख्या पाई जाती है।
iii. मृदा (Soil) : मृदा की उर्वरता भी जनसंख्या वितरण को प्रभावित करती है। जिन क्षेत्रों में मृदा अधिक उपजाऊ है अधिक जनसंख्या निवास करती है। जैसे पंजाब तथा उत्तर प्रदेश।
iv. उद्योग-धंधे (Industries) : जहाँ पर उद्योग-धंधे अधिक विकसित हैं वहाँ लोगों को रोजगार के अवसर अधिक मिलते हैं, अत: वहाँ घनी जनसंख्या पाया जाता है। जैसे – उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र आदि।
v. कृषि (Agriculture) : अधिक कृषि उत्पादन वाले क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या निवास करती है, जैसे उत्तरी मैदान।
vi. यातायात (Transport) : यातायात के साधन तथा खनिज पदार्थ वाले क्षेत्र में भी अधिक जनसंख्या निवास करती है। जिन क्षेत्रों में रेलमार्ग तथा सड़क मार्ग अधिक विकसित है, वहाँ जनसंख्या अधिक पाई जाती है जैसे उत्तरी मैदान। जहाँ ये साधन कम हैं जनसंख्या का घनत्व भी कम है। जैसे राजस्थान तथा गुजरात आदि।

प्रश्न 5.
पेट्रोरसायन उद्योग की स्थिति किन कारकों से प्रभावित होती है ?
अथवा
पश्चिमी भारत में पेट्रोकेमिकल उद्योग क्यों अधिक विकसित हैं ?
उत्तर :
पेट्रोरसायन उद्योगों की स्थिति निम्नलिखित दो कारकों से प्रभावित होती है – i. तेल शोधन शालाओं की उपस्थिति ii. बाजार एवं बंदरगाह की सुविधा।
i. तेल शोधनशालाओं की उपस्थिति – पेट्रोरसायन उद्योग के कच्चा माल पेट्रोलियम शोधन से प्राप्त उपपदार्थ हैं। अत: कच्चे माल की प्राप्ति को ध्यान में रखकर इन उद्योगों की स्थापना उन्हीं स्थानों पर हुई है, जहाँ तेलशोधन शालाएँ मौजूद हैं। कोयली, जामनगर, हल्दिया, मंगलोर, चेन्नई, मुम्बई आदि स्थानों पर पेट्रो-रसायन उद्योग की स्थापना का मुख्य कारण यहाँ तेल शोधन शालाओं का स्थित होना है।
ii. बाजार एवं बंदरगाह की सुविधा – भारत के तटीय क्षेत्रों में स्थित तेल शोधनशालाओं के निकट स्थापित पेट्रोरसायन प्लाण्टों को बंदरगाह की सुविधा प्राप्त है। तट के पास स्थित होने के कारण ये सस्ते जलमार्ग द्वारा कच्चा माल आसानी से मंगा लेते है। बंदरगाहों की सुविधा के कारण उत्पादित धातुओं के निर्यात में भी सुविधा के कारण अंतराष्ट्रीय व्यापार का लाभ मिलता है।

प्रश्न 6.
भारत में गत्ने की खेती के लिए आवश्यक भौतिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गत्रा (Sugarcance) : गत्ना भारत की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं व्यापारिक उपज है। यह चीनी का मुख्य स्रोत है। इससे गुड़ एवं शक्कर भी बनाया जाता है। गन्ने के पेड़ का ऊपरी भाग पशुओं को खिलाया जाता है। गन्ने की खोई इंधन के काम में आती है। खोई से कागज व दफ्ती भी बनाई जाती है।

गन्ने का जन्म-स्थान भारत माना जाता है। आज भी विश्व के गत्रा-उत्पादक देशों में क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का प्रथम स्थान है। परन्तु देश में गन्ने का प्रति हेक्टेयर उत्पादन हवाई द्वीप तथा क्यूबा देशों से बहुत कम है। गन्ने के उत्पादन में इस समय भारत का विश्व में ब्राजील के बाद दूसरा स्थान है।
भौगोलिक अवस्थाएँ :-
i. तापक्रम : गन्ना उष्ण कटिबन्धीय पौधा है। इसकी कृषि के लिए 21° C से 28° C तापक्रम उत्तम होता है। पाला एवं कुहरा गत्रे के लिए हानिकार होते हैं। समुद्री वायु गन्ना के पौधे के विकास के लिए विशेष अनुकूल होती है।
ii. वर्षा : गन्ने की कृषि के लिए 150 से॰मी॰ वर्षा आवश्यक है। 100 से॰मी० से कम वर्षा के क्षेत्रों में सिंचाई आवश्यक है। पकने के समय वर्षा का होना हानिकारक है। क्योंकि इससे गन्ने का रस पतला पड़ जाता है।
iii. समुद्री वायु (Sea Breeze) : समुद्री वायु गन्ने की कृषि के लिए काफी उपयुक्त होती है। इसी से समुद्र तटीय भागों एवं द्वीपों पर गन्ने की अच्छी खेती होती है।
iv. मिट्टी : गन्ने की कृषि के लिए गहरी दोमट, चिकनी, जलोढ़ अथवा काली मिट्टियाँ, जिनमें चूना एवं नमक की मात्रा अधिक हो, उत्तम होती है।
v. खाद : गन्ना की उपज बढ़ाने के लिए प्राकृतिक एवं रासायनिक खादों का प्रयोग आवश्यक होता है।
vi. सस्ता श्रम : गन्ने की बुवाई, निराई, कटाई करने तथा खेत में सिंचाई करने के लिए पर्याप्त एवं सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
vii. बाजार या खपत क्षेत्र की समीपता : गन्ने को काटने के एक दिन के भीतर ही उसे पेर कर उसका रस निकाल लिया जाता है। देर करने से गन्ना सूख जाता है और उससे कम रस निकलता है। अतः इसके लिए पर्याप्त बाजार का नजदीक में मिलना आवश्यक होता है।
viii. यातायात की सुविधा : गन्ने को चीनी मिल तक शीघ्र पहुँचने के लिए यातायात के तेज एवं सस्ते साधनों का होना आवश्यक है।

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प्रश्न 7.
धान की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
चावल की खेती के लिए आवश्यक भौतिक दशाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
चावल (Rice) : छिलकारहित चावल को धान (Paddy) कहते हैं। चावल भारत का सबसे प्रमुख खाद्यान्न है। देश को खाद्यान्नों की कुल उपज का 43 % भाग चावल से ही प्राप्त होता है। भारत को समस्त बोई गयी भूमि के 25 प्रतिशत भाग पर चावल उत्पन्न किया जाता है। चावल के उत्पादन में भारत का चीन के बाद में दूसरा स्थान है। विश्व के कुल उत्पादन का 21.6 प्रतिशत चावल भारत में उत्पन्न होता है। चावल की कृषि को खुरपे की कृषि भी कहा जाता है। भौगोलिक अवस्थाएँ :-
i. उच्च तापक्रम : चावल उष्ण कटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 16° C से 27° C तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है।
ii. अधिक वर्षा : चावल का पौधा जल का प्रेमी है, अत: चावल के खेतों में कई दिनों तक जल का जमा होना आवश्यक है। इसकी कृषि के लिए 100 से 200 से० मी० तक वार्षिक वर्षा आवश्यक है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई आवश्यक है।
iii. मिट्टी : चावल की कृषि लिए ऐसी मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है जिसमें आर्द्रता ग्रहण करने की शक्ति हो। इसके लिए चिकनी, कछारी, दोमट अथवा डेल्टाई मिट्टी उत्तम होती है।
iv. धरातल : धरातल समतल हो ताकि उसमें जल एकत्र किया जा सके। पहाड़ी भागों में सीढ़ीदार खेत बनाकर चावल की कृषि की जाती है।
v. सस्ता श्रम : चावल की कृषि में मशीनों का प्रयोग बहुत कम होता है। इसकी कृषि का अधिकांश काम हाथ से ही होता है। अतः चावल की कृषि के लिए सस्ते, कुशल तथा अधिक श्रमिको का मिलना आवश्यक है।
vi. खाद : चावल का पौधा भूमि की उर्वराशक्ति को नष्ट कर देता है।अतः इसकी खेती के लिए हरी तथा रासायनिक खादों का प्रयोग आवश्यक है। चावल के लिए फॉस्फोरस की अधिक आवश्यकता है, जो सुपरफॉस्फेट खाद से प्राप्त होती हैं। बोआई विधियाँ : भारत में चावल तीन प्रकार से बोया जाता है :- (1) छिटक कर, (2) हल चलकार और (3) रोप कर। भारत में आजकल जापानी विधि से चावल की कृषि की जा रही है। यह रोपण का ही विकसित रूप है।
प्रति एकड़ उपज बढ़ाने के लिए अधिक उत्पादन क्षमता वाले (High Yielding Variety or HYV) बीजो जैसे IR8, TN-1, IR-20, रत्ना, ताईचुंग, जया, विजया, पद्या, हंसा, सोना, पंकज, गोविन्दा, आदित्य, मंसूरी का प्रयोग किया जा रहा है। इनमें रत्ना, विजया, IR-20 एवं मंसूरी उत्तम किस्म के महीन चावल हैं।

प्रश्न 9.
भारत में गेहूँ के उत्पादन क्षेत्र का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
उत्पादन क्षेत्र : विश्व में गेहूँ के उत्पादन में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। गेहूँ मुख्यतः उत्तरी एवं मध्य भारत की उपज है। प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश हैं।
i. उत्तर प्रदेश : गेहूँ के उत्पादन में उत्तर प्रदेश राज्य भारत में प्रथम स्थान रखता है। यहाँ देश का लगभग 34.4 प्रतिशत गेहूँ उत्पन्न होता है। गंगा-यमूना तथा गंगा-घाघरा द्वाब गेहूँ की उपज के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रमुख गेहूँ उत्पादक जिसे मेरठ, मुजफ्फरनगर, इटावा, गोरखपुर, देहरादून तथा सहारनपुर हैं।
ii. पंजाब : गेहूँ के उत्पादन में पंजाब राज्य दूसरे स्थान पर है, जो देश का लगभग 2.11 प्रतिशत गेहूँ उत्पन्न करता है। यहाँ नहरों द्वारा सिंचाई की सुविधा है। साथ ही अच्छे बीजों का प्रयोग खूब होता है । अत: यहाँ की प्रति हेक्टेयर पैदावार (4,696 कि० ग्रा०) भारत में सबसे अधिक है।
iii. हरियाणा : यहाँ मुख्यतः दक्षिणी-पूर्वी जिलों में भाखरा-नांगल योजना की नहरो द्वारा सिंचाई की सहायता से गेहूँ उत्पन्न किया जाता है। गेहूँ के उत्पादन में इस राज्य का भारत मेंतीसरा स्थान है। यहाँ देश का लगभग 12.8 % गेहूँ उत्पन्न होता है।
iv. मध्य प्रदेश : गेहूँ के उत्पादन में मध्य प्रदेश राज्य का चतुर्थ स्थान है। यहाँ मुख्यतः सागर, होशंगाबाद, जबलपुर, ग्वालियर, निमाड, देवास, उज्जैन आदि जिलों में गेहूँ की कृषि की जाती है। यहाँ से देश का लगभग 11.2 प्रतिशत गेहूँ उत्पन्न किया जाता है।
v. राजस्थान : गेहूँ के उत्पादन में भारत में राजस्थान राज्य का अब पाँचवा स्थान है जहाँ देश का लगभग 9 प्रतिशत गेहूँ उत्पन्न किया जाता है। मुख्य गेहूँ उत्पादक जिले गंगानगर, भरतपुर, कोटा, अलवर आदि हैं।
इनके अतिरिक्त बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात एवं पश्चिम बंगाल राज्यों में भी गेहूँ की कृषि की जा रही है।
भारत का केन्द्रीय गेहूँ अनुसंधानशाला पुसा (नई दिल्ली) में है।

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प्रश्न 8.
भारत के प्रमुख चावल उत्पादक राज्य का संक्षिप्त में वर्णन करें।
उत्तर :
चावल उत्पादक : भारत में प्रमुख चावल उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश व उड़ीसा हैं।

प्रश्न 10.
गेहूँ की खेती के आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गेहूँ (Wheat) : चावल के बाद गेहूँ भारत का दूसरा प्रमुख खाद्यान्न है। भारत के कुल खाद्यानों की उपज का 36.2 % भाग गेहूं से प्राप्त होता है। गेहूं के उत्पादक देशों में क्षेत्रफल तथा उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। भारत की कृषि भूमि के 14 प्रतिशत भग पर गेहूँ की कृषि की जाती है। भारत में विश्व का 12.9 प्रतिशत भाग गेहूँ उत्पन्न किया जाता है।

भौगोलिक अवस्थाएँ : भारत में गेहूँ रबी की फसल है। भारत में यह अक्टूबर-नवम्बर के महीनों में बोई जाती है तथा मार्च में काटी जाती है। इसकी कृषि के लिए निम्नलिखित दशाएँ आवश्यक हैं :
i. तापक्रम : गेहूँ शीतोष्ण कटिबन्धीय फसल है। इसके लिए बोते समय 10° C, बढ़ते समय 15° C तथा पकते समय 21° C तापक्रम उपयुक्त है। इसके लिए पाला हानिकारक होता है।
ii. साधारण वर्षा : इसके लिए 50 से 75 से० मी॰ वर्षा लाभदायक है। पकते समय वर्षा का होना हानिकारक है। बोने के 15 दिन बाद तथा पकने के 15 दिन पहले वर्षा बहुत लाभदायक होती है। कम वर्षा के क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
iii. मिट्टी : गेहूँ की कृषि के लिए दोमट मिट्टी उत्तम होती है। चिकनी तथा काली मिट्टियों में भी इसकी उपज अच्छी होती है।
iv. धरातल : धरातल समतल परन्तु हल्का ढालू हो ताकि खेतों में जल एकत्र न होने पाये।
v. सस्ता श्रम : गेहूँ की कृषि में मशीनों का प्रयोग आसान होता है। जहाँ मशीनों का प्रयोग संभव नहीं है वहाँ सस्ते व कुशल श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
vi. खाद : गेहूँ की कृषि के लिए प्राकृतिक तथा रासायनिक खादों की आवश्यकता पड़ती है। शोरा तथा अमोनिया सल्फेट की खाद लाभदायक होती है।

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उपज बढ़ाने के लिए अधिक उत्पादन क्षमता वाले (HYV) बीज जैसे – लर्मा राजो 644, सफेद लर्मा, सोनरा – 63 , सोनरा – 64 , सोना – 227, कल्यान सोना, सोनालिका – 308 , छोटी लर्मा एवं शर्बती सोनरा आदि बीजों का आदि बीजों का प्रयोग किया जा रहा है।

प्रश्न 11.
चाय की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
चाय (Tea) : चाय भारत की प्रमुख बागानी फसल (Plantation crop) है। यह भारत का प्रमुख पेय पदार्थ है, जो एक झाड़ीदार पौधे की पत्तियों को सुखाने से प्राप्त होता है।
भौगोलिक अवस्थाएँ :
i. उच्च तापक्रम : चाय उपोष्ण कटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 20° C से 30° C तापक्रम उत्तम होता है। इसका पौधा हल्क्की छाया में तीव्र गति से बढ़ता है।
ii. अधिक वर्षा : चाय के लिए 150 से 250 से॰मी॰ वर्षा उपयुक्त होती है। वर्षा लगातार होनी चाहिए। शुष्क मौसम में पत्तियाँ कम निकलती हैं।
iii. ढालू भूमि : चाय की जड़ों में पानी का रुकना हानिकारक होता है। अतः चाय की कृषि पहाड़ी ढालों पर की जाती है ताकि जड़ों में पानी न रुक सके।
iv. मिट्टी : चाय के लिए लौहयुक्त उपजाऊ मिट्टी जिसमें पोटाश, मैगनीज, फॉस्फोरस तथा ह्यूमस की मात्रा अधिक हो, उत्तम होती है।
v. खाद : चाय के लिए अमोनियम सल्फेट, हड्डी की खाद तथा हरी खाद उपयोगी होती है।
vi. सस्ता श्रम : चाय की पत्तियों को चुनने, सुखाने और डिब्बों में भरने के लिए अधिक और सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। चाय की पत्तियों को बार-बार तोड़ना पड़ता है। स्त्रियाँ अपनी कोमल अँगुलियों से पत्तियाँ सावधानी से तोड़ती हैं।

प्रश्न 12.
भारत में कहवा की खेती के लिए आवश्यक भौतिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कहवा (Coffee) : चाय के बाद कहवा भारत का दूसरा प्रमुख पेय पदार्थ हैं। कहवा भी चाय की तरह एक बागानी फसल है। यह एक प्रकार के पेड़ के फलों के बीजों को सुखा कर पीसने पर प्राप्त होता है। भारत में सर्वप्रथम सत्रहवं शताब्दी में कहवा की कृषि का प्रारम्भ तब हुआ जब सौदी अरब से कहवा के बीज लाकर उन्हें कर्नाटक राज्य की बाबा बूदन की पहाड़ी पर उगाया गया। परन्तु व्यापारिक दृष्टि से इसकी कृषि सन् 1826 ई० में कर्नाटक राज्य में चिकमलूर के पास शुरू हुई। भारत में कहवा की दोनों किस्मों – कॉफी अरेबिका तथा कॉफी रोबस्टा का समान मात्रा में उत्पादन होता है। भारतीय कहवा को मधुर कहवा (Mild Coffee) कहा जाता है।
भौगोलिक परिस्थितियों : कहवा की कृषि के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ आवश्यक हैं :-
i. उच्च तापक्रम : कहवा उष्ण कटिबन्धीय पौधा है। इसकी कृषि के लिए 15° C से 30° C तापक्रम उत्तम होता है। पाला इसका शत्रु है।
ii. धूप से रक्षा : कहवा का पौधा अधिक धूप एवं आँधी को नहीं सह सकता। अतः इनके बीच में केला, रबर, नारंगी एवं सिलवर ओक आदि के छायादार वृक्ष लगाये जाते हैं।
iii. अधिक वर्षा : कहावा के लिए 150 से 275 से॰मी॰ वर्षा आवश्यक है। वर्षा वर्ष भर होनी चाहिए। अधिक सूखा पड़ने से इसका उत्पादन घट जाता है।
iv. ढालू भूमि : कहवा की जड़ों में पानी का रुकना हानिकारक है, अत: इसकी कृषि के लिए ढालू भूमि आवश्यक है। साधारणत: यह 900 से 1800 मीटर की ऊँचाई तक उगाया जाता है।
v. मिट्टी : कहवा के लिए लोहा, चूना, पोटाश, नाइट्रोजन एवं ह्यूमस युक्त उपजाऊ दोमट मिट्टी उत्तम होती है। लाल एवं लेटराइट मिट्टियाँ विशेष रूप से उपयुक्त हैं। वनों के साफ की गई भूमि एवं ज्वालामुखी के उद्नार से निकली हुई लावा मिट्टी भी इसकी कृषि के लिए उत्तम होती है।

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प्रश्न 13.
भारत में चाय के उत्पादन क्षेत्र का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
उत्पादक क्षेत्र : भारत में चाय-उत्पादन के तीन प्रमुख क्षेत्र निम्नोक्त है :-
उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र : इस क्षेत्र से भारत का 75 % चाय प्राप्त होता है। इसके अन्तर्गत मुख्यतः असम तथा पश्चिम बंगाल के चाय उत्पादक क्षेत्र आते हैं। चाय उत्पादन में असम राज्य का पहला स्थान है, जो अकेले ही देश का लगभग 50 % चाय उत्पन्न करता है। यहाँ ब्रह्मपुत्र तथा सूरमा नदियों की घाटियों में चाय के बगान मिलते हैं। असम राज्य के शिव सागर, उत्तरी दरांग, लखीमपुर, करीमगज एवं कछार जिले चाय के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। असम की चाय अपनी सुगध के लिए प्रसिद्ध है। पश्चिम बंगाल राज्य का दूसरा स्थान है जहाँ देश का 22 % चाय उत्पन्न किया जाता है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी तथा कूचबिहार प्रमुख चाय उत्पादक जिले हैं। दार्जिलिंग की मिट्टी में पोटास तथा फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है जिससे यहाँ की चाय अपने विशेष स्वाद के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। इनके अतिरिक्त मेघालय एवं त्रिपुरा के पर्वतीय ढालों पर भी चाय की कृषि होती है।

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दक्षिणी क्षेत्र : दक्षिणी भारत देश का 25 % चाय उत्पन्न करता है। यहाँ नीलगिरि, अन्नामलाई, पलानी व इलाचयी की पहाड़ियों पर चाय के बगान हैं। तमिलनाडु, केरल तथा कर्नाटक मुख्य चाय उत्पादक राज्य हैं। चाय के उत्पादन में भारत में तमिलनाडु का तीसरा तथा केरल राज्य का चौथा स्थान है। तमिलनाडु देश का लगभग 15 % तथा केरल देश का लगभग 9 % चाय उत्पन्न करते हैं। तमिलनाडु के मदुराई, तिरुनवेली, नीलगिरि एवं कोयम्बटूर जिलों में, केरल के पालघाट तथा क्यूलोन जिलों में तथा कर्नाटक के चिकमलूर, कुर्ग, हसन, शिमागा एव कादूर जिलों में चाय के बगान हैं।

हिमालय प्रदेश : यहाँ उत्तर प्रदेश के देहरादून, हिमाचल प्रदेश की कांगड़ाघाटी तथा कश्मीर की घाटी में देश का लगभग 5 % चाय उत्पन्न होता है। इनके अतिरिक्त झारखण्ड के राँची एवं हजारीबाग जिलों में भी चाय की खेती होती है। चाय के उत्पादन में भारत का विश्व में पहला स्थान है। यहाँ विश्व की लगभग 27.2 % चाय उत्पन्न होती है। भारत में चाय की प्रति हेक्टेयर उपज 1875 कि० ग्रा० है।

व्यापार : कई वर्षों से चाय के उत्पादन व निर्यात में भारत का विश्व में पहला स्थान रहा है परन्तु अब हमारे देश का चाय के निर्यात में श्रीलंका एवं केनिया के बाद तीसरा स्थान हो गया है। चाय भारत की प्रमुख मुद्रादायिनी फसल है। भारत अपनी कुल उपज का 24 % भाग चाय निर्यात करता है। भारतीय चाय के प्रमुख ग्राहक ग्रेट ब्रिटेन, रूस, नीदरलैण्ड, ईरान, इराक, जापान, जर्मनी, अफगानिस्तान, संयुक्त अरब गणराज्य एवं संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। अब भारत की चाय का सबसे बड़ा ग्राहक रूस है। चाय का निर्यात मुख्यतः कोलकता, चेन्नई, कोचीन, बंगलौर तथा मुम्बई बन्दरगाहों से होता है। चाय के निर्यात में भारत को श्रीलंका आदि देशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रश्न 14.
भारत में कहवा के उत्पादन क्षेत्र का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर:
उपज के क्षेत्र : भारत में कहवा का उत्पादन मुख्यतः दक्षिण भारत में कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु राज्यों में होता है।
कर्नाटक : कहवा उत्पादन में भारत में कर्नाटक राज्य अग्रगण्य है। इस राज्य में देश का 57 प्रतिशत कहवा का क्षेत्र

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प्रश्न 15.
भारत की प्रमुख बागानी फसलें क्या हैं ? ये फसलें कहाँ उगायी जाती हैं ?
उत्तर :
भारत की प्रमुख बागानी फसल (Plantation crops) :- चाय, कहवा और रबर भारत की प्रमुख बागानी फसलें है :
चाय (Tea) :- भारत में चाय के बगान करीब 420 हजार हेक्टेयर जमीन में फैले हुए हैं। चाय के कुल उत्पादन का 80 % चाय उत्तर-पूर्व भारत एवं पूर्व से तथा 20 % चाय दक्षिण भारत से प्राप्त होता है।
उत्तर भारत :- इस क्षेत्र के अन्तर्गत असम, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और त्रिपुरा हैं।
असम :- यहाँ कुल चाय का 53 % भाग उत्पन्न किया जाता है। असम के शिवसागर, लखीमपुर, डिबुगढ़, कछार में चाय की कृषि होती है।
पश्चिम बंगाल :- पश्चिम बंगाल में कुल चाय का 23 % उत्पादन किया जाता है । यहाँ दार्जिलिंग, डुअर्स, तराई क्षेत्रों में कूचबिहार तथा जलपाइगुड़ी में चाय उगायी जाती है।
दक्षिण भारत :- तमिलनाडु (नीलगिरि, कोयम्बटूर), केरल (कुइलन, पालघाट), कर्नाटक (चिकमगलूर) में चाय का उत्पादन किया जाता है। दक्षिण भारत की 98 % चाय की कृषि केरल और तमिलनाडु में होती है।
कहवा (Coffee) :- भारत में 1,28,785 हेक्टेयर भूमि पर कॉफी की कृषि की जाती है।
कर्नाटक :- यहाँ पूरे उत्पादन का 50 % अकेले पैदा किया जाता है कुर्ग, चिकमगलूर, हसन, विलिगिरिज एवं सिमोगा प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।
केरल :- केरल में पालाघाट, कोट्टायम, आलोधि, कुइलन और अर्नाकुलम में कहवा के बगान पाये जाते है।
तमिलनाडु :- तमिलनाडु में नीलगिरि के पर्वतीय क्षेत्रों में कहवा उगाया जाता है।
रबर (Rubber) :- भारत में सर्वप्रथम 1895 ई० में रबर की कृषि प्रारम्भ हुई। भारत विश्व का चौथा बड़ा रबर उत्पादक देश है।
केरल :- सम्पूर्ण रबर का 86.1 भाग केवल केरल से अकेले पैदा किया जाता है। यहाँ रबर का उत्पादन कोचीन, कोजीकोड, क्वोलोन एवं ट्रावनकोर में किया जाता है।
तमिलनाडु :- तमिलनाडु में रबर का उत्पादन कर्नाटक तथा अण्डमान निकोबार द्वीप समूहों में किया जाता है। थोड़ी मात्रा में रबर का उत्पादन त्रिपुरा एवं उत्तरी-पूर्वी राज्यों में भी होता है।

प्रश्न 16.
भारत में कपास के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्पादन क्षेत्र : भारत की दो-तिहाई कपास दक्षिणी भारत की काली मिट्टी के क्षेत्र से प्राप्त होती है। महाराट्र, गुजरात एवं आन्ध प्रदेश मिलकर देश का लगभग 58.4 प्रतिशत कपास उत्पन्न करते हैं।
i. महाराष्ट्र : कपास उत्पादन में महाराष्ट्र राज्य का भारत में पहला स्थान है। देश के लगभग 37 % कपास क्षेत्र इसी राज्य में है, परन्तु प्रति एकड़ उपज कम (162 कि० ग्रा०) होने के कारण यहाँ देश का केवल 26.6 प्रतिशत कपास उत्पन्न होता है। यहाँ भी काली मिट्टी के क्षेत्र में उत्तम श्रेणी की कपास उत्पन्न होती है। यहाँ शोलापुर, नासिक, वर्धा, नागपुर, औरंगाबाद, अकोला, अमरावती आदि जिलों में कपास की कृषि की जाती है।

ii. गुजरात : कपास के उत्पादन में भारत में गुजरात राज्य का दूसरा स्थान है। यहाँ देश का लगभग 18 प्रतिशत कपास उत्पन्न होता है। भडौंच, अहमदाबाद तथा सूरत मुख्य कपास उत्पादक जिले हैं। यहाँ काली मिट्टी के क्षेत्र में उच्चकोटि की लम्बे रेशे की कपास उत्पन्न होती है।

iii. आन्द्र प्रदेश : कपास के उत्पादन में इस राज्य का भारत में तीसरा स्थान है, जहाँ से देश का लगभग 13.8 प्रतिशत कपास प्राप्त होता है। मुख्य कपास उत्पादक जिले आदिलाबाद, कर्नूल एवं अनन्तपुर हैं।

iv. हरियाणा : कपास के उत्पादन में हरियाणा राज्य का भारत में चौथा स्थान है, जहाँ से भारत के कुल कपास के क्षेत्र के 63 % भाग पर कपास की कृषि की जाती है परन्तु प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक होने से यहाँ से देश का 11.3 % कपास उत्पादन किया जाता है। यहाँ मुख्य कपास उत्पादक जिले अम्बाला, हिसार, रोहतक एवं सिरसा हैं।

v. राजस्थान : राजस्थान भारत का पाँचवाँ सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य है। राज्य का लगभग आधा कपास गंगा नगर जिले से प्राप्त होता है। अन्य कपास उत्पादक जिले भीलवाड़ा, चित्तौरगढ़ कोटा, उदयपुर एवं अजमेर हैं। अधिकांश कपास की कृषि सिंचाई की सहायता से की जाती है।

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vi. पंजाब : कपास उत्पादन में पंजाब राज्य का भारत में अब छठा स्थान हो गया है। यहाँ का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 347 कि०ग्रा० है, जो भौरत में सबसे अधिक हे। यहाँ कृषि की आधुनिक प्रणाली द्वारा कपास की कृषि की जाती है। पटियाला, भटिंडा, गुरुदासपुर, होशियारपुर, फिरोजपुर इत्यादि जिलों में सिंचाई की सहायता से प्रचुर मात्रा में कपास की कृषि की जाती है। यहाँ देश का लगभग 25 प्रतिशत कपास उत्पन्न किया जाता है।
इनके अतिरिक्त कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश राज्यों में भी कपास की कृषि की जाती है

प्रश्न 17.
भारत में मौसमी फसलें क्या हैं ? उनका संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर :
भारत में कृषि के लिए मुख्य रूप से दो मौसम है – i. रवि की फसलें और ii. खरीफ की फसलें।
खरीफ की फसलें (Kharif crops) : खरीफ की फसलों को मानसून की फसल भी कहते हैं। इनका उत्पादन जूनजुलाई में किया जाता है जब भारत में मानसूनी वर्षा शुरू हो जाती है। मुख्य रूप से ये फसले जून में बोई जाती है तथा सितम्बर तक काट ली जाती है । धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास और जूट प्रमुख फसलों का उत्पादन खरीफ में किया जाता है।
रबी की फसलें (Rabi crops) :- रबी की फसले अक्ट्बर से दिसम्बर में बोई जाती है तथा अप्रैल से मई तक काट ली जाती है। इस ऋतु में उगायी जाने वाली प्रमुख फसलें गेहूँ, चना, जो, मटर, सरसों, तीसी और बोरो धान हैं।
दक्षिणी भारत में जहाँ तापमान उच्च है तथा शीत-ऋतु में वर्षा होती है वहाँ पर धार, ज्वार और कपास लगातार पूरे वर्ष भर उगाये जाते हैं।
गन्ना की फसल 10-18 महीनों में तैयार होती है अतः यह न तो रबी की फसल है और न ही खरीफ की फसल है। सिंचाई की सुविधा द्वारा हरी सब्जियाँ पूरे वर्ष उगाई जाती है।

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प्रश्न 18.
भारत में मोटे अनाज के प्रमुख फसलों का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मोटे अनाज (Millets) : मोटे अनाजों में ज्वार-बाजरा तथा रागी (मडुवा) मुख्य हैं। सामान्यत: यह गरीबों का मुख्य भोजन है। इसकी कृषि के लिए उच्च तापक्रम तथा कम वर्षा की आवश्यकता पड़ती है। इसकी कृषि अनुपजाऊ तथा शुष्क भागों में भी की जा सकती है। प्राय: जो भूमि गेहूँ या चावल की कृषि के अनुपयुक्त होती है, वहाँ मोटे अनाजों की खेती होती हैं।
मोटे अनाज उत्पन्न करने वाले देशो में भारत विश्व में प्रथम स्थान रखता है, जहाँ विश्व के आधे से भी अधिक मोटे अनाज उत्पन्न किये जाते हैं।

ज्वार (Jowar) : ज्वार के लिए उच्च तापक्रम (26° C t. से 32° C), सामान्य वर्षा (40 से 50 से॰मी॰), चिकनी तथा काली मिट्टी उपयुक्त होती है। पठारी प्रदेश के लाल व काली मिट्टियों में भी ज्वार उगाया जाता है। देश का 3 / 4 भाग ज्वार दक्षिणी भारत के पठारी भाग में उत्पन्न किया जाता है। प्रमुख ज्वार उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात तथा राजस्थान हैं। महाराष्ट्र राज्य का भारत में पहला स्थान है, जो अकेले ही देश का लगभग एकतिहाई ज्वार उत्पन्न करता है। उत्तरी भारत में उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान मुख्य ज्वार-उत्पादक राज्य हैं।

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बाजरा (Bajra): बाजरा के लिए 25° C से 35° C तापक्रम तथा 43 से 50 से॰मी॰ वर्षा उत्तम होती है। कम उपजाऊ तथा बलुई भूमि में भी बिना खाद डाले बाजरा उत्पन्न किया जा सकता है। बाजरा उत्पादन में भारत में राजस्थान राज्य का प्रथम स्थान है।

इनके अतिरिक्त गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, कर्नाटक तथा उत्तर प्रदेश राज्यों में भी बाजरा की कृषि की जाती है।
रागी (Ragi) : यह सबसे अधिक सूखा सहन करने वाला अनाज है, जो शुष्क कृषि की प्रणाली द्वारा उत्पत्र किया जाता है। मुख्य रागी उत्पादक राज्य तमिलनाडु, आन्ध प्रदेश और कर्नाटक हैं। इनके अतिरिक्त बिहार, महाराष्ट्र, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में भी रागी उत्पन्न किया जाता है। रागी के उत्पादन में भारत में कर्नाटक राज्य का पहला स्थान है।

प्रश्न 19.
भारत के प्रमुख गत्रा उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्पादन क्षेत्र : भारत में गन्ना के प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्, तमिलनाडु, आन्ध प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, बिहार तथा पंजाब है। यद्यपि गन्ने की कृषि के लिए उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिणी भारत भौगोलिक सुविधाओं की दृष्टि से अधिक अनुकूल है फिर भी देश का लगभग 80 प्रतिशत गन्ना उत्तरी भारत में ही उत्पन्न होता है। इसका कारण यह है कि दक्षिणी भारत में गन्ना को कपास एवं मूँगफली जैसी नगदी फसलों से प्रतियोगिता करनी पड़ती है।

उत्तर प्रदेश : गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश राज्य का स्थान भारत मेंप्रथम है। यहाँ भारत के कुल गन्ना के क्षेत्रफल का 53 प्रतिशत भाग पड़ता है परन्तु प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम होने से यहाँ भारत की केवल 38.6 प्रतिशत उपज प्राप्त होती है। यहाँ गत्रा उत्पादन की दो पेटियाँ हैं – (1) तराई क्षेत्र या गोरखपुर-देवरिया क्षेत्र- इसे ‘भारत का जावा’ कहते हैं। (2) गंगायमुना दोआब की पेटी, जो मेरठ से इलाहाबाद तक फैली हुई है। मुख्य गन्ना उत्पादक जिले मेरठ, मुजफ्फरनगर, शाहजहाँपुर, सहारनपुर, बरेली, फैजाबाद, बुलन्दशहर, देवरिया, गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया आदि हैं।

महाराष्ट्र : गन्ना उत्पादन में महाराष्ट्र राज्य का भारत में दूसरा स्थान है। मुख्य गन्ना उत्पादक जिले अहमदनगर, नासिक, पूना तथा शोलापुर हैं। महाराष्ट्र में देश के केवल 9 % भाग पर गन्ना की खेती होती है परन्तु गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज अधिक होने के कारण यहाँ देश का लगभग 17.8 % गन्ना उत्पन्न होता है।

तमिलनाडु : यह भारत का तीसरा प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य है। यहाँ कोयम्बटूर, दक्षिणीं अरकाट तथा मदुराई जिलों में गन्ने की खेती होती है। कायेम्बट्र में गत्ना शोध संस्थान (Sugarcane Research institute) है जहाँ इसकी उत्तम किस्मों का विकास किया जा रहा है। यहाँ देश का लगभग 10 % गत्ना उत्पन्न होता है। यहाँ का प्रति हेक्टेयर उपज भारत में सबसे अधिक (106 टन) है।

इनके अतिरिक्त कर्नाटक के मंड्या, शिमोगा तथा बेलगाँव जिलों, आन्य्र प्रदेश के गोदावरी तथा कृष्णा नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों तथा बिहार के सारण, चम्पारण, सीवान, मुजफ्फरपुर, भोजपुर तथा दरभंगा जिलों में भी गन्ने की खेती होती है।

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व्यापार : गन्ना एक भारी पदार्थ है। इसका रस सूखने लगता है। अत: गन्ने का निर्यात नहीं किया जाता है। पहले कुछ मात्रा में गन्ने की चीनी का निर्यात किया जाता था, परन्तु अब अधिक जनसंख्या के कारण हमारे देश में ही चीनी की खपत अधिक हो गया है। अत: भारत से चीनी का निर्यात नगण्य है। हमे कभी-कभी चीनी का आयात भी करना पड़ता है।

प्रश्न 20.
भारतीय कृषि की समस्याएँ तथा उनके समाधान की विवेचना कीजिए।
उत्तर :
भारतीय कृषि की समस्याएँ एवं समाधान (Problems of Indian agriculture and solutions) :- भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहाँ की अधिकांश जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है। कृषि-क्षेत्र देश में सबसे अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है तथा कुल राष्ट्रीय आय में उसका योगदान भी महत्वपूर्ण है। देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाली भारतीय कृषि व्यवस्था अनेक समस्याओं से जूझ रही है तथा विकसित देशों की तुलना में काफी पिछड़ी हुई है। अग्रलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत हग़ देखेंगे कि भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं तथा उनका समाधान कैसे किया जा सकता है –
सिंचाई की सुविधा का अभाव :- भारत के कुल कृषि योग्य भूमि के 41 प्रतिशत भाग पर ही सिंचाई की सुविधा है। शेष कृषि योग्य भूमि पर फसलों का उत्पादन मानसूनी वर्षा के सहारे होता है। मानसूनी वर्षा की मात्रा एवं समय में अर्निश्चिता के कारण इन क्षेत्रों में फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है। सिंचाई की सुविधा के अभाव में कृषि में उन्नत बीजों एवं खादों का प्रयोग भी समुचित ढंग से नहीं हो पाता है। अत: कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषियोग्य भूमि के विस्तार एवं गहन कृषि की आवश्यकता है, तभी बढ़ती जनसंख्या का भरण-पोषण किया जा सकता है। अतः इसके लिए सिंचाई के साधनों का विकास करना होगा।

किसानों की प्रवृत्ति :- भारतीय किसानों की प्रवृत्ति भाग्यवादी का है। कृषि फसलों को प्राकृतिक प्रकोषों एवं रोगों से रक्षा करने की जगह वह उन्हें भाग्य के भरोसे छोड़ देता है। जिससे समय-समय पर कृषि उत्पादन में काफी गिरावट आ जाती है। किसानों की भाग्यवादी प्रवृत्ति में परिवर्तन लाने के लिए उन्हें शिक्षित करने की आवश्यकता है, जिससे वे प्राकृतिक संकटों एवं रोगों से फसलों को बचाने के लिए वैज्ञानिक साधनों का उपयोग कर सकें।

भूमि की उर्वरता : जनबहुल देश होने के कारण भारत में खाद्यान्नों एवं अन्य कृषि उपजों की माँग काफी अधिक है। कृषि उपजों की ऊँची माँग के कारण यहाँ एक ही भूमि पर साल में दो या तीन फसलें उगाई जाती हैं, जिससे भूमि या मिट्टी की उर्वरता का निरन्तर ह्रास हो रहा है। अत: मिट्टी की उर्वरता को पुनः प्राप्त करने के लिए कृषि में जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ाना होगा तथा समय-समय पर भूमि को परती भी छोड़ना होगा।

मिट्टी का कटावः तीव्र मानसूनी वर्षा, अनियंत्रित पशुचारण, वृक्षों की अनियंत्रित कटाई, खेतो की दोषपूर्ण जुताई आदि के कारण भारत में पर्वतीय क्षेत्रों में अवर्नलका अपरदन एवं मैदानी क्षेत्रों में परत अपरदन के कारण कृषि क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव से भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही है। अतः उचित प्रवाह व्यवस्था, ढालों के आर-पार जुताई, पशुचारा पर रोक तथा वृक्षोरोपण आदि के द्वारा मिट्टी के कटाव को रोककर भूमि की उर्वरता को बचाने का प्रयास किया जा सकता है।

कृषि साख संस्थाओं की कमी : कृषि में निवेश के लिए भारतीय किसानों के लिए सस्ते दर पर ऋण प्राप्ति का पर्याप्त बैकिंग एवं वित्तीय सुविधाओं का अभाव है। कुछ वर्ष पहले तक वह ॠण प्राप्ति के लिए महाजनों, साहूकारों आदि के ऊपर आश्रित था जो किसानों का भरपूर शोष्षण करते थे। परन्तु अब नियोजन के अन्तर्गत कृषि एक प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र बन गया है। अत: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की अधिकाधिक शाखाओं को खोलने का प्रयास होना चाहिए जिससे किसान कृषि में आधुनिक यंत्रों, उन्नत बीजों एवं रासायनिक खादों में प्रयोग के लिए सस्ते दर पर ऋण प्राप्त कर सके।

दोषपूर्ण बाजार व्यवस्था : कृषि उपजों की बिक्री के लिए उचित सरकारी व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान अपनी उपजों को स्थानीय व्यापारियों को सस्ते दर पर बेच देते हैं, जिससे उन्हें उपज का उचित मूल्य प्राप्त नहीं होता है। अतः कृषि उपजों की बिक्री के लिए उचित सरकारी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे किसानों को उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

प्राकृतिक प्रकोप : भारत में वर्षा के समय एवं मात्रा में अनिश्चितता के कारण अक्सर बाढ़ एवं सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे फसलों को काफी नुकसान पहुँचता है। समय-समय पर फसलों में लगने वाले विभिन्न प्रकार के रोग भी कृषि उत्पादन को काफी प्रभावित करते हैं। इन प्रकोपों के कारण कृषकों को काफी हानि पहुँचती है जिससे वे कृषि कार्य के प्रति हतोत्साहित होने लगते हैं। फसलों की बीमा द्वारा किसानों के नुकसान की भरपाई करके उन्हें प्राकृतिक प्रकोपों से होने वाली क्षति से बचाने का प्रयास किया जा सकता है।

भारतीय कृषि में उपरोक्त समस्याओं के अतिरिक्त भूमि का दोषपूर्ण वितरण, खेतों का छोटा आकार, कृषि में उन्नत बीजों के प्रयोग की कमी, कृषकों का अशिक्षित होना, मिट्टी परीक्षण केन्द्रों का अभाव, कृषि अनुसंधान की जानकारी का अभाव आदि अन्य अनेक समस्याएँ हैं, जिन्हें उचित कदम उठाकर दूर करने का प्रयास करना होगा।

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प्रश्न 21.
हरित क्रांति के दौरान पंजाब एवं हरियाणा में कृषि की समृद्धि का कारण क्या था ?
उत्तर :
पंजाब एवं हरियाणा में कृषि की समृति के कारण (Causes of agricultural prosperity in Punjab and Haryana) : पंजाब एवं हरियाणा उत्तरी भारत में गंगापार प्रदेश (Trans-Ganga Plain Region) के अन्तर्गत आते हैं। हरित कांति के उद्गम क्षेत्र होने के कारण यहाँ कृषि का सर्वाधिक आधुनिकीकरण और नशीनीकरण हुआ है। ये दोनों ही राज्य कृषि की दृष्टिकोण से भारत के सर्वाधिक समृद्ध राज्य हैं। इन राज्यों में कृषि के विकास के निम्नलिखित कारण हैं –
समतल भूमि : पंजाब एवं हरियाणा दोनो ही मैदानी राज्य हैं। इन राज्यों की भूमि समतल है जिसका निर्माण नदियों के द्वारा लायी गयी जलोढ़ मिट्टी के निक्षेपण से हुआ है। यह समतल भूमि कृषि कार्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

उपजाऊ मिट्टी : दोनों ही प्रान्तों में उपजाऊ दोमट मिट्टी पायी जाती है जो कृषि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

नहरों का जाल : पंजाब एवं हरियाणा दोनों ही सिंचाई सघन राज्य है, अर्थात् यहाँ कुल कृषि योग्य भूमि के 70 % से भी अधिक भाग सिंचित हैं। नहरें एवं नलकूप यहाँ सिंचाई के प्रमुख साधन हैं। भाखड़ा-नागल परियाजना से नहरें निकाल कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है, जिसका पंजाब एवं हरियाणा के कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

रासायनिक खादों का प्रयोग : सम्पूर्ण कृषि के विकास का 70 प्रतिशत रासायनिक खादों के प्रयोग पर निर्भर करता है । प्रति एक टन खाद के प्रयोग से 8 से 10 टन खाद्यात्र उत्पादन की वृद्धि होती है। समुचित सिंचाई व्यवस्था के कारण पंजाब ( 221 कि०ग्राम/हे०) तथा हरियाणा (202 कि०ग्राम/हे०) भारत के सर्वाधिक उर्वरक उपभोग करने वाले राज्य हैं, अत: यहाँ कृषि के विकास में आशातीत सफलता मिली है।

बीजों का प्रयोग : हरित क्रांति अपनाए जाने के बाद से भारत में उन्नत बीजों के विकास एवं उन्हें लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है । उन्नत सिंचाई व्यवस्था तथा कृषि में आधुनिक यंत्रों एवं रासायनिक खादों का पर्याप्त प्रयोग किए जाने के कारण पंजाब एवं हरियाणा में फसलों के उत्पादन के लिए उत्नत बोजों का प्रचलन सर्वाधिक है। बीजों के उच्च उत्पादक किस्मों के प्रयोग से ही इन राज्यों में गेहूँ, चावल, गत्रा तथा कपास के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है।

प्रश्न 22.
भारतीय कृषि की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ :- कृषि भारतीयों का प्राचीन, परम्परागत एवं मौलिक व्यवसाय है। यह भारतीयों की जीवन पद्धति के साथ जुड़ा होने के कारण अपनी कुछ मूलभुत विशेषताएँ बनाये हुए है। इन विशेषताओं के कारण भारत का कृषि व्यवसाय अन्य देशों के कृषि व्यवसाय से पृथक हो जाता है। भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं –
सालों भर कृषि उत्पादन :- भारतीय जलवायु कृषि कार्य के लिए साल भर अनुकूल बनी रहती है। यहाँ साल भर फसलों का उत्पादन होता रहता है। अन्य शीत-प्रधान देशों की तरह भारत में हिमावरण या अत्यधिक उष्णता के कारण कृषि को स्थगित नहीं किया जाता। गन्ना और अरहर ऐसी फसलें हैं जो तैयार होने में8 माह तक का समय ले लेती है।

उत्पादन में विभिन्नता :- भारत में जलवायु दशाओं के परिवर्तन, मिट्टी तथा वर्षा के वितरण में भिन्नता होने के कारण विविध प्रकार की फसलें उगायी जाती है। उदाहरण के लिए पंजाब में गहूँ, उत्तर प्रदेश में गन्ना, बंगाल में जूट, असम में चाय, उड़ीसा में चावल, महाराष्ट्र में कपास तथा केरल में रबड़ का उत्पादन इसके पत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय कृषि में 80 % खाद्यान्र, 12 % व्यापारिक फसले तथा 8 % अन्य फसले उगायी जाती है।

कृषि की अव्यावसायिक प्रकृति :- भारतीय कृषक अपने गुजारे के लिए कृषि व्यवसाय को अपनाये हुए हैं। अत: कृषि यहाँ लाभ का व्यवसाय न होकर अलाभकारी व्यवसाय बनकर रह गया है । यहाँ कृषि में प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम है, अतः इससे कृषको को बहुत कम आय होती है । भातीय कृषि को व्यवसाय रूप नहीं दिया गया है।

प्रति व्यक्ति कृषि योग्य भूमि का कम क्षेत्रफल :- भारत में मात्र 1,556 करोड़ हैक्टेर भूमि कृषि कार्य से जुड़ा हुआ है जहाँ जनसंख्या के आकार की दृष्टि से प्रति व्यक्ति कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल घटता जा रहा है।

खेतो की जोतों का आकार छोटा होना :- भारत में कृषि जोतों का आकार बहुत छोटा है । यहाँ उत्तराधिकार नियम के कारण भूमि छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटती जा रही है। भारत में कृषि जोतो का औसत आकार 2 हेक्टेयर ही रह गया है। छोटे-छोटे खेतों में कृषि कार्य सुगमतापूर्वक नहीं हो पाता है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।

कृषि की प्राचीन प्रणालियाँ :- भारतीय कृषक परम्परागत ढंग से तथा प्राचीन प्रणालियों से कृषि कार्य करता है। यहाँ का कृषक आज भी हल-फावड़े से खेती करने में लगा हुआ है। पुराने बीज, कुड़े-कर्कट की खाद तथा पुराना हल खेती को विकास की ओर जाने से रोके हुए है। नवीन विधियों तथा तकनीक के अभाव में भारतीय कृषि पिछड़ी हुई दशा में है।

मिश्रित कृषि :- भारतीय कृषक मिश्रित खेती करता है। वह एक साथ कई अनाज बोकर फसल प्राप्त करता है। मिश्रित कृषि के कारण उपजों की विविधता बनी रहती है।

बाढ़ एवं सूखे से ग्रस्त :- भारतीय कृषि बाढ़ एवं सूखे से ग्रस्त है। भारत में लगभग 4 करोड़ हैक्टेयर भूमि बाढ़ से तथा 7 करोड़ हैक्टेयर भूमि सूखे से प्रभावित होती है। बाढ़ एवं सूखा फसलों को चौपट कर देते हैं।

सिंचाई सुविधाओं का अभाव :- भारत में सिंचाई की सुविधाओं का विस्तार आवश्यकता से कम हुआ है। देश की 30 % कृषि योग्य मूमि को ही सिंचाई की सुविधा प्राप्त है। देश की अधिकांश कृषि आज भी मानसूनी वर्षा पर ही निर्भर है। आज भी भारत की कृषि ‘मानसून का जुआ’ बनी हुई है।

दोषपूर्ण संगठन एवं बेकारी :- भारतीय कृषि का संगठन दोषपूर्ण रहा है जिसके कारण यहाँ का कृषक ॠणग्रस्त रहा है। भारत में कृषि भूमि पर जनसंख्या का अधिक दबाव होने के कारण छिपी बेरोजगारी पायी जाती है।

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प्रश्न 23.
भारत में कृषि के महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व :- कृषि व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि प्रमुख भूमिका निभाता है। कृषि का भारत की अर्थव्यवस्था में महत्व निम्न प्रकार है –
i. कृषि भारत की 70 % जनसंख्या को आजीविका का साधन उपलब्ध कराती है। रोजगार के अवसर जुटाने की दृष्टि से कृषि का भारत में महत्व्वूर्ण स्थान है।
ii. कृषि राष्ट्रीय आय का 50 % जुटाती है। यह भारत की राष्ट्रीय आय का प्रमुख सोत बन गयी है
iii. कृषि से चीनी, सूती वस्त्र, रबड़, चाय, वनस्पति घी तथा अन्य उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है। अतः यह देश के औद्योगीकरण का आधार बनी हुई है।
iv. भारतीय कृषि देश के 87 करोड़ लोगों के लिए खाद्यान्न, वस्त्र, साक-सब्जी तथा अन्य पदार्थ जुटाती है।
v. कृषि से पशुआ को भूसा, हरा चारा तथा खली आदि प्राप्त होते हैं। पशु भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख अंग है जो पूर्णतः कृषि पर ही आधारित है।
vi. कृषि में अनेक ऐसे पदार्थ उगाये जाते हैं जिनका निर्यात किया जाता है। इस प्रकार कृषि विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का प्रमुख स्रोत बन गयी है। भारत के निर्यात मदों में 55 % योग कृषि का ही रहता है।
vii. कृषि से उत्पादकों को भरपूर आय होती है जिससे वे बचत करते हैं। पूँजी बचत का ही परिणाम है। पूँजी संचय से राष्ट्र का औद्योगिक ढांचा प्रभावित होता है। पूँजी आर्थिक विकास को तीव्र गति प्रदान करती है।
viii. कृषि उपजों को लाने तथा ले जाने के लिए परिवहन के साधनों का विकास होता है। परिवहन व्यवस्था आर्थिक विकास को गति प्रदान करती है। परिवहन के साधनों के फलस्वरूप व्यापार तथा वाणिज्य भी विकसित होता है।
ix. केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों की आय का मुख्य स्रोत कृषि ही है। इससे सरकार को लगान, उत्पादन कर, निर्यात कर, सिंचाई शुल्क तथा कृषि आयकर आदि उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं।
x. भारत चाय, गन्ना, मूंगफली आदि के उत्पादन क्षेत्र में संसार में प्रथम स्थान रखता है। भारत चावल, जूट, तिल, अखण्डी तथा खांडसारी के उत्पादन में एशिया में दूसरा स्थान बनाये हुए है। इस प्रकार कृषि व्यवसाय से भारत को अंतराष्ट्रीय महत्व प्राप्त होता है।
xi. कृषि के कारण ही भारत अब खाद्यान्रों में आत्मनिर्भर बन गया है। वह कुछ खाद्यां का निर्यात भी करने लगा है।
xii. भारत कृषि उपजों का निर्यात करके विदेशों से अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ प्राप्त कर सकता है। ये वस्तुएँ आर्थिक विकास के साथ-साथ नागरिकों के लिए भी बहुत आवश्यक है जैसे खनिज ते इसका उदाहरण है।
इस प्रकार यदि देखा जाय तो जहाँ कृषि भारतीय की जीवन पद्धति बनी हुई है वहीं यह भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण एवं अभिन्न अंग भी है। भारतीय कृषि ने राष्ट्र की सम्पन्नता एवं विकास के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभायी है।

प्रश्न 24.
भारतीय कृषि में सिंचाई आवश्यकता है क्यों ?
उत्तर :
सिंचाई की आवश्यकता : भारत जैसे कृषि ग्रधान एवं वर्षा की अनिश्चिता एवं अनियमितता वाले देश में सिंचाई की आवश्यकता के निम्नलिखित कारण हैं :
वर्षा की अनिश्चतता : मानसूनी वर्षा काफी अनिश्चित होती है। कभी सामान्य से अधिक वर्षा हो जाती है, तो कभी वर्षा की मात्रा सामान्य से काफी कम होती है। सामान्यत: औसतन तीन से चार वर्ष में एक बार सूखा पड़ जाता है। वर्षा की विभिन्नता उन क्षेत्रों में अधिक होती है जहाँ वर्षा की मात्रा कम होती है।अत: उन क्षेत्रों में सिंचाई अनवार्य हो जाता है।

वर्षा की अनियमितता : कभी मानूसन देर से आता है तो कभी काफी पहले ही बला जाता है। ऐसा पाया गया है कि 10 वर्षों में केवल 2 वर्ष ही मानूसन समय पर आता है एवं समय पर चला भी जाता है। शेष 8 वर्षों में उसके आने व जाने का समय अनिश्चित होता है।

वर्षा का असमान वितरण : भारत में औसत वर्षा की मात्रा 109 से॰ मी॰ है। परतु वर्षा का वितरण अत्यंत ही असंतुलित है। एक ओर जहाँ पश्चिमी तटीय प्रदेश एवं उत्तर-पूर्वी भारत में 250 से॰ मी॰ से अधिक वर्षा होती है, वहीं दूसरी ओर विशाल मैदान के पश्चिमी भाग एवं पश्चिमी घाट पर्वत के वृष्टि-छाया प्रदेश में वर्षा की मात्रा 7.5 से॰ मी॰ से भी कम होती है। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई के साधनों का विकास अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

मानसून की विभंगता : कभी-कभी वर्षा काल के बीच में लगातार कुछ सप्ताह तक वर्षा अत्यल्य या बिल्कुल ही नहीं होती है, जिससे फसले सूखने लगती हैं। ऐसे समय में सिंचाई की आवश्यकता होती है।

वर्षा का सीमित होना : भारत में 80 % से भी अधिक वर्षा जून एवं सितंबर के महीनों में होती है। इन चार महीना में भी वास्तविक वर्षा के दिन कम ही होते हैं। अतः वर्ष के शेष भाग में उगायी जाने वाली फसलों (विशेषकर रबी फसल) के लिए सिंचाई सुविधाओं का विकास अनिवार्य हो जाता है।

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प्रश्न 25.
उद्योगों के स्थानीयकरण के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
उद्योगों के स्थानीयकरण के कारण : किसी स्थान पर उद्योग-धंधों के विकास या केन्द्रीकरण पर निम्नलिखित बातों का प्रभाव पड़ता है – (a) भौगोलिक दशाएँ, (b) आर्थिक दशाएँ।
(a) भौगोलिक दशाएँ :
कच्चे माल की प्राप्ति – प्राय: कोई भी उद्योग वहीं स्थापित किया जाता है, जहाँ उसके लिए आवश्यक कच्चा माल आसानी से प्राप्त हो जाता है। उदाहरण के लिये पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग, महाराष्ट्र में सूती वस्त्र उद्योग तथा उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग की उन्नति का प्रमुख कारण वहाँ कच्चे माल की सुलभ प्राप्ति ही है। ऐसे उद्योग जिनके कच्चे माल की अपेक्षा निर्मित माल का भार व आकार काफी घट जाता है, उन उद्योगों की स्थापना कच्चे माल की प्राप्ति के स्थानों पर ही होती है अन्यथा दुलाई का खर्च अधिक पड़ता है।

शक्ति के साधनों की सुविधा – औद्योगिक मशिनें शक्ति के साधनों जैसे कोयला-पेट्रोलियम या जलशक्ति आदि से ही चलती हैं। अतः उद्योगों की स्थापना वहीं होती है जहाँ शक्ति के साधन आसानी से मिल जाते हैं। हमारे देश के प्रायः सभी उद्योग कोयला क्षेत्रों अथवा जलविद्यत केन्द्रों के आस-पास ही केन्द्रीत हैं।

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अनुकूल जलवायु – अधिक गर्म या अधिक ठण्डे भागों में मजदूरों की कार्यक्षमता घट जाती है। अत: उद्योगों की स्थापना मुख्यतः वही हाती है जहाँ की जलवायु सम-शीतोष्ण होती है। साथ ही विशेष उद्योगों के लिए विशेष प्रकार की जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में सूती वस्त्र उद्योग के विकसित होने का एक कारण वहाँ की जलवायु का नम होना है जिससे सूत के धागे टूटते नहीं हैं।

(B) आर्थिक दशाएँ –

i. यातायात की सुविधा – कच्चे माल एवं आवश्यक पदार्थों के मंगाने एवं निर्मित माल को खपत केन्द्रों तक भेजने के लिए यातायात के साधनों का विकसित होना आवश्यक है।
ii. बाजार की सुविधा – निर्मित माल को बेचने के लिए बाजार का निकट होना आवश्यक है। बाजार जितना निकट होगा, यातायात व्यय उतना ही कम होगा। कानपुर में सूती वस्त्र उद्योग के विकसित होने का एक प्रमुख कारण उसके आसपास सघन जनसंख्या का होना है क्योंकि इससे वहाँ का तैयार माल आसानी से वहीं खप जाता है।
iii. सस्ते एवं कुशल श्रमिकों का होना – कारखानों में काम करने के लिए भारी संख्या में मजदूरों की आवश्यकता पड़ती है। श्रमिक जितने ही सस्ते एवं कुशल होंगे उत्पादन उतना ही सस्ता एवं उत्तम होगा। अत: उद्योग वहीं केन्द्रित होते है जहाँ सस्ते एवं कुशल श्रमिक पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं।
iv. पर्याप्त पूंजी – बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना में कारखाने बनाने, मशीन तथा कच्चा माल खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता पड़ती है।
v. बैंक की सुविधाएँ – बैंक न केवल उद्योगों के लिए ऋण की सुविधा प्रदान करते हैं बल्कि माल के क्रय-विक्रय के लिए भुगतान में भी सहायक होते हैं।

अन्य दशाएँ –
i. पूर्वारम्भ की सुविधा – जब किसी स्थान पर कोई उद्योग सबसे पहले प्रारम्भ हो जाता है तो वह स्थान उस उद्योग के लिए प्रसिद्ध हो जाता है। इससे नये उद्योगपति वहाँ उस उद्योग की स्थापना में लग जाते हैं।
ii. सरकारी नीति – जिस उद्योग को सरकार संरक्षण प्रदान करके आर्थिक सुविधा प्रदान करती है उस उद्योग का विकास अधिक होता है। इसके विपरीत सरकार जिन उद्योगों पर भारी कर लगा देती है, उन उद्योगों का विकास रुक जाता है।

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प्रश्न 26.
भारत में मशीनी औजार निर्माण उद्योग का संक्षिप्त वितरण दीजिए।
उत्तर :
मशीनी-औजार निर्माण उद्योग – मशीनी औजार एक प्रकार का शक्ति चालित यंत्र होता है, जो धातु को काटकर एक विशिष्ट रूप देने के काम में प्रयुक्त होता है। यह एक आधारभूत उद्योग है। देश के औद्योगिक विकास में इस उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है। मशीनी औजार निर्माण उद्योग के प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित हैं –

हिन्दुस्तान मशीन टुल्स लिमिटेड – भारत सरकार ने स्विस सरकार की सहायता से बंगलौर के निकट जेलहली में सन् 1956 ई० में इस कारखाने को स्थापित किया। इसकी एक दूसरी इकाई भी बंगलोर में स्थापित की गई है। यह कारखाना सूक्ष्म मशीन तथा मशीनी उपकरण तैयार कर रहा है। जापानी कम्पनी की सहायता से यहीं H.M.T. घड़ियों का निर्माण किया जा रहा है। इसका तीसरा कारखाना हरियाणा में चण्डीगढ़ के पास पिंजौर में है। यहाँ कृषि यंत्र (मुख्यतः ट्रेक्टर) बनते हैं। चौथा कारखाना केरल में एर्नाकुलम के पास कालामासमारी में छपाई की मशीनें तैयार करता है। पांचवा कारखाना आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में धातु निर्मित विविध यंत्र तैयार कर रहा है। इसी कम्पनी द्वारा कश्मीर के जैनकोट में घड़ी का निर्माण किया जा रहा है।
इनके अतिरिक्त अजमेर, मुम्बई के समीप अम्बरनाथ तथा हैदराबाद के उत्तर सिकंदराबाद में भी मशीनी औज़ार के कारखाने हैं।

भारी इंजीनियरिंग निगम रांची – इस संस्था की स्थापना सन् 1958 ई० में सोवियत संघ एवं चेकोस्लोवांकिया के सहयोग से भारी मशीनों के निर्माण के लिए रांची के निकट हटिया में हुई। यह धातु के यंत्र बनाने का सबसे बड़ा कारखाना है। यह विदेशों को भी मशीनों का निर्यात करता है। इससे देश के विभिन्न भागों में कारखानों के स्थापित करने में काफी सहायता मिली है।

त्रिवेणी स्ट्रकचरल कम्पनी – इसकी स्थापना जुलाई सन् 1965 ई० में इलाहाखाद के निकट नैनी में हुई । यह सरकारी कारखाना विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के ढांचे और क्रेन का निर्माण करता है।
कर्नाटक राज्य के तुंगभद्रा स्थान पर निर्मित कारखाने में विभिन्न प्रकार की मशीन तथा वस्तु-निर्माण के ढांचे बनते हैं। इनके अतिरिक्त भारत हैवी प्लेट्स एण्ड वेसल्स लिमिटेड, विशाखापट्टनम, जेसप एण्ड कम्पनी लिमिटेड, कोलकाता में भारी मशीनें बनती है । माइनिंग एण्ड एलाएड मशीनरी कॉरपोरेशन (M.A.M.C.) दुर्गापुर में खान की मशीनें बनती है।

प्रश्न 27.
भारत में मोटरगाड़ी निर्माण उद्योग (Automobile industry) के विकास का विवरण दीजिए।
उत्तर :
मोटर गाड़ी उद्योग : स्वंत्रता प्राप्ति से पूर्व देश में मोटर वाहन उद्योग नहीं के बराबर था। केवल आयातित कल-पूरों को जोड़कर वाहन बनाए जाते थे। सन् 1928 में ‘जलरल मोटर्स’ मुम्बई में ट्रकों तथा कारों का समायोजन शुरू किया था। फोर्ड मोटर कम्पनी (इण्डिया) लि० ने चेन्नई में 1930 में तथा मुम्बई में 1931 में कारों तथा ट्रको का संयोजन शुरू किया था। भारत में इस उद्योग का वास्तविक विकास प्रीमियर ऑंटोमोबाइल लि०, कुर्ला (मुंबई) की स्थापना 1941 में तथा हिन्दुस्तान मोटर्स लि० उत्तर पाड़ा कोलकाता की स्थापना 1948 में होने से शुरु हुआ। पिछले 3-4 दशको में इस उद्योग ने देश में काफी प्रगति की है। 1991 ई० की औद्योगिक उदारीकरण की नीति से इस उद्योग को काफी लाभ मिला और आज यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बन गया है।

इस समय हमारे देश में 15 कम्पनियाँ सवारी कारें बहुउद्देश्यीय वाहन व कम्पनियाँ व्यवासायिक वाहन, 14 कम्पनियाँ, 2 / 3 पहिया वाहन, 14 कम्पनियाँ ट्रेक्टर तथा 5 कम्पनियाँ इंजन बनाने में लगी हुई है। हैदराबाद, मुम्बई, चेन्नई, जमशेदपुर, जबलपुर, कोलकाता, गुड़गांव, रूपनगर, पुणे, कानपुर आदि मोटर वाहन बनाने के प्रमुख केन्द्र हैं।

सरकारी गाड़ी बनाने वाली प्रमुख कम्पनियों में मारूति, महिन्द्रा, फोर्ड, हुंडई, जनरल मोटर्स आदि हैं। दो पहिया वाहनो में बजाज आटो, हीरो तथा होण्डा प्रमुख है। भारी वाहनों के निर्माण में टाटा, अशोक लेलैण्ड आदि प्रमुख हैं।

भारतीय मोटर वाहन उद्योग ने उत्पादन की दृष्टि से बहुत अधिक उन्नति की है और साथ में गुणवत्ता का भी ख्याल रखा है। इन्हीं कारणों से भारत अब मोटर वाहनों का निर्यात करने लगा है।

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प्रश्न 28.
भारत में पेट्रोरसायन उद्योग के विकास का विवरण दीजिए।
उत्तर :
पेट्रोलियम से प्राप्त किये गये रसायनों को पेट्रो-रसायन कहते हैं। इस उद्योग में खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है। इससे विभिन्न प्रकार के चिकने पदार्थ प्राप्त होते हैं। इन पदार्थों का विभिन्न उद्योगों में प्रयोग होता है। इस उद्योग में खनिज तेल का प्रयोग होने से इसका महत्व बढ़ गया है। भारत में यह उद्योग अभी नया है। इस उद्योग का प्रथम कारखाना 1966 ई० में यूनियन कार्बाइड इण्डिया लिमिटेड, मुम्बई के निकट ट्राम्बे में स्थापित किया गया है।

भारत में इस उद्योग का दूसरा कारखाना कोयली तेल परिष्करणशाला पर भी एक कारखाना खोला गया है। इसके पश्चात् जवाहर नगर में एक कारखाना स्थापित हुआ है। हल्दिया और बरौनी में भी पेट्रो-रसायन के कारखाने निर्माणाधीन हैं। पेट्रो-रसायन उद्योग ने भारत के औद्योगिक स्वरूप में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। हमारे देश में भवन निर्माण में परम्परागत पदार्थों, जैसे – लकड़ी, शीशा और धातुओं का प्रयोग किया जाता था। परंतु आज इनके स्थान पर पेट्रो-रसायन उद्योग द्वारा निर्मित वस्तुओं का प्रयोग होने लगा है। इस उद्योग में प्लास्टिक, संश्लेषित रेंशे, रबड़ और अन्य अनेक प्रकार के पदार्थ बनते हैं।

प्रश्न 29.
भारत में बंगलौर में सूचना प्रोद्योगिकी उद्योगों का विकास क्यों हुआ है ?
उत्तर :
बंगलौर में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के विकास के निम्नलिखित कारण हैं –

  1. विश्वस्तरीय सूचना प्रौद्योगिकी अवसंचरनाओं की उपलब्धता
  2. सुहावनी तथा आरामदायक जलवायु
  3. सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियों का केन्द्रीकरण तथा उच्च स्तरीय अनुसंधान एवं विकास संस्थाओं का पाया जान
  4. अनुकूल सरकारी नीतियाँ
  5. अंतर्राष्ट्रीय कांक्र्रेस एवं वर्कशाप का केन्द्र।

साफ्टवेयर के निर्यात में वर्ष प्रति वर्ष लगातार हो रही वृद्धि से भारत की साख विदेशो में जम गयी है। यहाँ की साफ्टवेयर कम्पनियाँ उत्कृष्ट कोटि का उत्पादन करने में विशेष रूप से दक्ष है, इसीलिए इनमें से कुछ को अंर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण पत्र भी मिले हैं। पंरतु हार्डवेयर के क्षेत्र में भारत की प्रगति चीन, दक्षिण कोरिया, ताइवान आदि की तुलना में बहुत कम है 1997-98 की तुलना में 19992000 में यहाँ हार्डवेयर का निर्यात घटा था, परंतु इसके बाद से इसके निर्यात में उतरोत्तर वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 30.
भारत में सूचना प्रोद्योगिकी उद्योग (Information Technology Industry) के विकास का विवरण दीजिए।
उत्तर :
यह एक ऐसा उद्योग है जिसके लिए किसी कच्चे माल की आवश्यकता नहीं पड़ती है और न ही अन्य उद्योगों के समान अन्य परिस्थितियों की भी आवश्यकता पड़ती है। भारतीय अर्थव्यवस्था में यह सबसे अधिक विकसित होने वाला उद्योग है जिसमें लाखों युवकों को रोजगार मिला हुआ है। प्रत्येक वर्ष सबसे ज्यादा रोजगार भारतवर्ष में किसी औद्यागिक क्षेत्र में उपलब्ध हो रहा है तो वह सूचना तकनीकी उद्योग है। इसमें लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है जिसमें महिलाओं की संख्य 30 % से भी अधिक है।

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वर्तमान समय में भारत में सॉफ्ट प्रोद्योगिकी पार्क 20 केन्द्रों पर विकसित है । बंगलुरू इलेक्ट्रानिक उद्योग की राजधानी के रूप में विकसित है। बंगलुरू का इलेक्ट्रानिक शहर काफी प्रसिद्ध है। वहाँ 200 से भी अधिक कम्पनियाँ हैं जो इस कार्य में लगी हुई है। बंगौर के अलावा पूरे, हैदराबाद, मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, गुड़गांव, नोयडा आदि अन्य महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। यह उद्योग वर्तमान समय में विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण सोत बन गया है। हमारे देश में हाईडवेयर और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में लगातार तेजी से हो रहे विकास की वहज से सूचना तकनीकी उद्योग सफल हो सका है।

इस उद्योग के आउटसोसिंग में भारत को चुनौती देने वाला विश्व का कोई देश नहीं है। इस उद्योग में लगभग आधे भाग पर भारत का अधिकार है। सन् 2008 में सूचना सेवा उद्योग से भारत ने 31 अरब डॉलर का लाभ कमाया था जिसमें लगभग आधा भाग BPO क्षेत्र का रहा। सूचना तकनीकी उद्योग ने अलग से 64 अरब डॉलर की कमाई की। इस उद्योग में 20 लाख से भी अधिक युवकों को रोजगार मिला हुआ है।

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प्रश्न 31.
दुर्गापुर को भारत का रूर क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
दुर्गापुर को भारत का रूर क्षेत्र कहा जाता है। रूर क्षेत्र पश्चिमी जर्मनी का प्रमुख उद्योग क्षेत्र है। रूर क्षेत्र के समान ही दुर्गापुर क्षेत्र को उद्योगों की स्थापना की निम्न सुविधायें हैं –
i. जर्मनी की रूर क्षेत्र लौह इस्पात का विश्व प्रमुख केन्द्र है। इसी प्रकार दुर्गापुर भारत का प्रमुख लौह-इस्पात केन्द्र है।
ii. दोनों क्षेत्रों के पास खनिज लोहे का अभाव है अतः लौह अयस्क आयात करते हैं। रूर फ्रांस के लारेन तथा स्वीडेन की खानों से लौह-अयस्क आयात करता है। दुर्गापुर की लौह अयस्क उड़ीसा की मयूरभंज की खानों से एवं झारखण्ड से मांगया जाता है।
iii. दोनों क्षेत्रों में उद्योग की स्थापना का श्रेय कोयले की प्राप्ति की है । रूर को वेस्टफेलिया की खान से तथा दुर्गापुर को झरिया की खानों से कोयला मिलता है।
iv. रूर क्षेत्र के समान ही दुर्गापुर में भी नहर, रेल यातयात तथा सड़क यातायात की सुविधा है। इसलिए दुर्गापुर को भारत का रूर कहते हैं।

प्रश्न 32.
लौह-इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक दशाओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
लौह-इसात उद्योग की स्थापना के लिए उपयुक्त आवश्यक कारण – भारत में लौह-इसात उद्योग के विकसित होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :
i. कच्चे मालों की सुविधा – लौह-इस्पात उद्योग में लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, चूना पत्थर आदि कच्चे मालों की भारी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। जहाँ ये कच्चे माल आसानी से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं, वहीं इस उद्योग का विकास होता है। पूर्वी भारत में इस उद्योग को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है। यही कारण है कि पूर्वी भारत में खास कर पश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं झारखण्ड राज्य में इस उद्योग का अधिक विकास हुआ है।
ii. शक्ति के साधनों की सुविधा – लौह इस्सात उद्योग में प्रचुर मात्रा में कोयले की आवश्यकता पड़ती है जो शक्ति के साधन के साथ-साथ कच्चे माल के रूप में भी प्रयुक्त होता है। यही कारण है कि लौह उद्योग कोयला उत्पादक क्षेत्रों के निकट स्थापित किये जाते हैं।
iii. स्वच्छ जल की सुविधा – लौह इस्पात उद्योग को अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। इसलिए लौह इस्पात के कारखाने नदियों के किनारे स्थापित किए जाते हैं।
iv. उच्च परिवहन व्यवस्था – कच्चे मालों को कारखानों तक पहुँचाने तथा निर्मित मालों को खपत केन्द्रों तक पहुँचाने के लिए सस्ते एवं सुलभ परिवहन, खासकर सड़क परिवहन, रेल परिवहन एवं जल परिवहन की पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए।
v. मांग – लौह इस्पात उद्योग इस बात पर भी निर्भर करता है कि उत्पादित वस्तु की मांग निरंतर बनी रहे।
vi. सस्ते एवं कुशल श्रमिक – लौह इस्पात उद्योग में पर्याप्त मात्रा में सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है।
vii. इसके अलावा पर्याप्त पूंजी एवं बैंकिग की सुविधा तथा वैज्ञानिक विकास आदि का भी प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 33.
किसी उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले पांच कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
उद्योगों के स्थापना को प्रभावित करने वाले कारक – किसी भी स्थान पर उद्योगों के स्थापित होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
(क) भौगोलिक कारक : उद्योगों के लिए एक स्थान के चयन को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारकों का विवरण नीचे दिया गया है –
कच्चे माल की निकटता – कच्चे माल के रूप में भारी भरकम पदार्थों का उपयोग करने वाले उद्योग कच्चे माल के स्तोत के निकट ही लगाए जाते है। झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में लौह-इस्पात के कारखाने, हुगली नदी के किनारे में जूट के कारखाने और महाराष्ट्र में चीनी बनाने के कारखाने कच्चे माल के स्रातों के आस-पास ही लगाए गए है। प्राकृतिक गैस या खनिज तेल पेट्रो-रसायन उद्योग के लिए कच्चा माल है। गुजरात में पेट्रो-रसायन उद्योगों के संकेन्द्रण का मुख्य कारक यही है।

जल की आवश्यकता – भारी उद्योगों को काफी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। लोहा और इस्पात उद्योग, वस्त्र उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, कागज और जूट उद्योग, रसायन उद्योग या परमाणु बिजली घर जल के सोतों के निकट ही लगाए गए हैं। मिनरल वाटर और शीतल पेयों का तो कच्चा माल ही प्रमुख रूप से जल है।

विद्युत की सुविधा – आधुनिक उद्योगों के लिए शक्ति के साधन जैसे कोयला, बिजली, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा आदि में से कोई न कोई अनिवार्य है। लोहा और इस्पात उद्योग सामान्यत: कोयले के बिना नहीं चल सकता। अतः इस उद्योग को कोयले की खानों के निकट लगाया जाता है। कुछ धातु उद्योगों और रसायन उद्योगों को बिजली अवश्य चाहिए। अतः ऐसे उद्योग बिजली के स्रोतों के निकट स्थापित किए जाते है।

परिवहन की सुविधा – उद्योगों के लिए कच्चा माल लाने और तैयार माल के वितरण के लिए परिवहन के अच्छे साधनों का होना जरूरी है। कोलकाता, मुम्बई और चेन्नई बंदरगाह अपने पृष्ठ प्रदेशों से रेल मार्गों और सड़कों से जुड़े थे। अत: वहाँ तरह-तरह के उद्योग विकसित हो गये और आज भी क्रम जारी है। श्रमिकों के अपने घरों से उद्योग केन्द्रों तक आने-जाने के लिए भी सुव्यवस्थित परिवहन प्रणाली अनिवार्य है।

कुशल एवं सस्ते श्रमिक – उद्योगों को चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में श्रमिक जरूरी है। अब तो अनेक उद्योगों के लिए कुशल और प्रशिक्षित श्रमिक अनिवार्य हो गए हैं। वैसे श्रमिक बहुत गतिशील है, लेकिन ये नगरों में आसानी से मिलते हैं। कुछ उद्योग श्रम प्रधान हैं। इन्हें विशेष दक्षता वाले श्रमिकों की जरूरत होती है।

बाजार की निकटता – उद्योगों में वस्तुए उपभोक्ताओं के लिए बनाई जाती है। अतः उद्योगों में तैयार माल के लिए उपभोक्ताओं का होना जरूरी है। आजकल तो प्रचार और संचार के माध्यमों से पूरा देश ही क्या, सारा संसार ही औद्योगिक उत्पादों का बाजार बन गया है। पंरतु भारी वस्तुओं को बेचने के लिए बाजार की निकटता आज भी प्रभावी कारक है।

पूंजी की सुविधा – भारी उद्योगों को स्थापित करने के लिए काफी मात्रा में पंजी की आवश्यकता होती है इसके लिए पूंजीपतियों के साथ-साथ वित्तीय संस्थाओं की भी भागेदारी आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 34.
सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना के लिए आवश्यक दशाओं का वर्णन करो ?
उत्तर :
भारत में सूती वस्त्र उद्योग को विकसित होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
i. उत्तम जलवायु – सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना पर, नम जलवायु का काफी प्रभाव पड़ता है क्योंकि इस जलवायु में धागा के टूटने का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि अधिकांश सूती वस्त्र की मिलें समुद्रों एवं नदियों के किनारे, जहाँ नम जलवायु पाई जाती है, स्थापित है।

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कच्चे माल की सुविधा – सूती वस्त्र का प्रमुख कच्चा माल कपास है, अतः यहाँ कपास आसानी से उपलब्ध हो सकता है। इस उद्योग का विकास अधिक हुआ है। भारत में पश्चिमी भारत में कपास की दृष्टि अधिक होती है। इसीलिए पश्चिमी भारत में कपास की उपलब्धता के कारण इस उद्योग का विकास अधिक होता है।

स्वच्छ जल की सुविधा – सूती वस्त्र उद्योग में अधिक मात्रा में स्वच्छ जल की आवश्यकता पड़ती है, यही कारण है कि यह उद्योग नदियों के किनारे स्थापित किया गया है।

विद्युत की सुविधा – सूती वस्त्र उद्योग में अधिक शक्ति के साधन के रूप में विद्युत उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि यहाँ सस्ती विद्युत की सुविधा उपलब्ध है इस उद्योग की स्थापना में सहायता मिलती है। पश्चिमी भारत में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना में जल विद्युत की सुविधा का विशेष योगदान है।

सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की सुविधा – सूती वस्त्र उद्योग काफी मात्रा में सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। यही कारण है कि घने आबाद क्षेत्र जहाँ से काफी मात्रा में सस्ते एव कुशल श्रमिक उपलब्ध हो जाते है। इस उद्योग के विकास के उपयुक्त माने जाते है।

माँग – सूती वस्त्र उद्योग की उन्नति, सूती वस्त्र की माँग पर भी निर्भर करती है। चुंकि भारत एक गर्म जलवायु वाला देश है जहाँ सूती वस्त्र की काफी माँग है जिससे इस उद्योग को काफी प्रोत्साहन मिला है।

इसके अलावा परिवहन की सुविधा, पूंजी तथा बैंकिग की सुविधा का भी प्रभाव पड़ता है।
भारत के सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र : सूरत, अहमदाबाद, राजकोट, बाराणसी, कानपुर, दिल्ली, शोलापुर, भिवाण्डी, पूना, मैसूर, कोलकाता, कोचीन आदि।

प्रश्न 35.
भारत में सूती वस्त्र की क्या समस्याएँ और संभावनाएँ हैं ?
उत्तर :
सूती वस्त्र उद्योग की समस्यायें – सूती वस्त्र उद्योग की प्रमुख समस्यायें व सम्भावनायें निम्न हैं –
नवीनीकरण का अभाव – भारत की अधिकतर मशीनें करीब 100 वर्ष पुरानी है। पूँजी के अभाव तथा नवीन मशीनों की देश में अनुपलब्धता के कारण पुरानी मशीनें बदली नहीं जा रही है अतः पुरानी मशीनों के कारण उत्पादन लागत अधिक आती है।

कच्चे माल एवं अन्य वस्तुओं का अभाव – कपास का उत्पादन एवं आपूर्ति घटती-बढ़ती रहती है। यहाँ जो कपास पैदा होती है उसकी किस्म निम्न श्रेणी की है। लम्बे रेशेवाली कपास का आयात मिस्र, सुडान आदि से किया जाता है। सूती कपड़ों की कुल लागत में कपास का हिस्सा 40 % से 50 % होता है। अन्य कच्चे मालों, जैसे – डाइज, रसायन का मूल्य प्रतिवर्ष बढ़ रहे हैं। बिजली की कटौती एवं कोयले की समय से आपूर्ति न होने के कारण भी उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

सूती कपड़ों की कम माँग – सिन्थेटिक कपड़े सस्ते एवं टिकाऊ होते है, अत: सूती कपड़ों की माँग दिनप्रतिदिन कम होती जा रही है। सिन्थेटिक कपड़े की रख-रखाव लागत भी कम आती है।

सूती मिलों का बीमार होना – क्षमता के अनुरूप, उत्पादन न होना, ऊँची लागत, मजदूरी की बढ़ती माँग, कच्चे माल, शक्ति के साधन कोयला, यातायात आदि की अविश्वसनीय आपूर्ति, तकनीकी ज्ञान का अभाव, वित्त एवं बाजार आदि की असुविधाओं के कारण अधिकतर सूती मिलें सिक मिलें हो गयी हैं।

सम्भावनायें :

  1. बढ़ती जनसंख्या – बढ़ती जनसंख्या एवं जीवन स्तर ऊँचा होने के कारण सूती वस्त्र उद्योग का भविष्य उज्ज्वलहै।
  2. निर्यात की संभावनायें – निर्यात की सम्भावना भी उज्ज्वल है क्योंकि प्रसिद्ध सूती वस्त्रोद्योग के केन्द्रों मैनचेस्टर, ओसाका ने अपनी सूती वस्त्र मिलों को सिन्थेटिक मिलों में बदल दिया है, अत: भारत को विदेशी बाजार मिलेगा।
  3. कच्चे माल की आपूर्ति में सुधार – पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात में लम्बे रेशों वाली कपास का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, अतः लम्बे रेशे वाली कपास का अभाव कम हो जाएगा।
  4. नवीनीकरण – सूती वस्त्र की मिलों के नवीनीकरण के लिए नवीनीकरण फण्ड की स्थापना की गई हैं।
  5. बीमार इकाइयों में सुधार के लिए नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन (NTC) की स्थापना की गयी है।
  6. सरकार द्वारा बीमार इकाइयों की पहचान – अब तक 122 इकाइयों को जो बीमार इकाई घोषित की जा चुकी थी, उनका अधिग्रहण (NTC) द्वारा किया जा चुका हैं।
  7. अनेक मिले जो सूती वस्त्र के माँग की कमी के कारण नहीं चल पा रही थी, उन्होंने अपने उत्पादन क्षेत्र में परिवर्तन कर लिया है।

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प्रश्न 36.
कच्चे माल के स्रोत के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
कच्चे मालों के स्वभाव के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण –
i. कृषि पर आधारित उद्योग धंधे – वे उद्योग धंधे जिनमें कच्चे माल के रूप में कृषि उपज से प्राप्त उत्पादों का उपयोग किया जाता है उन्हें इसके अन्तर्गत रखा जाता है, जैसे – जूट उद्योग, सूती वस्त्र उद्योग, रेशम उद्योग, चीनी उद्योग, चाय उद्योग आदि।
ii. पशुओं पर आधारित उद्योग – इसके अन्तर्गत वे उद्योग धंधे आते हैं जिनके कच्चे माल मात्र पशुओं से प्राप्त पदारों पर निर्भर करते है। जैसे – दुग्ध उद्योग केन्द्र।
iii. वनों पर आधारित उद्योग – वे उद्योग धंधे जिनमें वनों से प्राप्त लड़कियों का कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है उन्हें इसके अंतर्गत रखा जाता है। जैसे – माचिस उद्योग, लकड़ी कटाई-चिराई उद्योग, कागज एवं लुगदी उद्योग आदि।
iv. खनिजों पर आधारित उद्योग – वे उद्योग धन्धे खनिज पदार्थों का कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है उन्हें इसके अंतर्गत रखा जाता है। जैसे – लौह इस्पात उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, पेट्रोरसायन उद्योग आदि।

प्रश्न 37.
भारत में रेलवे वैगन, कोच एवं रेल इंजन उद्योग का संक्षिप्त विररण प्रस्तुत करें।
उत्तर :
रेलवे वैगन, कोच एवं रेल इंजन उद्योग-एशिया महादेश में भारत में रेलों का विस्तार सबसे अधिक है। भारत रेलवे के सभी उपकरणों के बारे में सिर्फ आत्म निर्भर ही नहीं हैं अपितु निर्यातक भी हैं। रेलवे उद्योग के प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित है –
i. इण्टीग्रल कोच विल्डिंग फैक्टरी (ICF) – इसकी स्थापना 1955 में तमिलनाडु राज्य में पेरम्थुर में हुई। इस कारखाने में पैसेन्जर डब्बे बनते है।ICF के कारखाने के सहायक दो और कारखाने हैं। i. भारत अर्थ मूवर्स, बंगगोर, कर्नाटक ii. जेशप एण्ड कम्पनी, दमदम, पश्चिम बंगाल। दी ह्वील एण्ड एक्सल कारखाना ये लाहैं का(Yelahanka) बंगलोर में रेल के पहिए एवं एक्सल का निर्माण करता है। दि सेन्ट्रल कोच फैक्टरी पंजाब में कपूरथला के पास हुसैनपुर में हैं।
ii. जेसप कम्पनी दमदम (कोलकाता) – पश्चिम बंगाल इन्जिनियरिंग क० लि० एवं भारत वैगन, भरतपुर, राजस्थान में रेलवे के बैगनों का निर्माण होता है।
iii. चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) – चित्तरंजन (पश्चिम बंगाल) में डीजल बिजली के रेल के इंजन बनते हैं।
iv. डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (DLW) – मडुआडीह, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में रेल के डीजल इंजन बनते हैं।
v. डीजल कम्पोनेंट वर्क्स (DCW) – पटियाला में डीजल इंजन के पुर्जे बनते हैं।
vi. रेलवे मशीन पाद्र्स बनाने की इकाई – रेललाइन एवं स्लीपर की छड़ का उत्पादन भिलाई एवं जमशेदपुर में होता हैं। रेलगाड़ियों के पहियों, टायर एवं एक्सल का निर्माण लौह इस्पात कारखानों में होता हैं।
vii. रेलवे रिपेयर वर्कसाप – रेलवे की मरम्मत का काम आंधप्रदेश के तिरुपति पश्चिम बंगाल के कचड़ापाड़ा, आगरपाड़ा एवं खड़कपुर में होता है।

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प्रश्न 38.
भारत में जलपोत निर्माण उद्योग का संक्षिप्त वितरण प्रस्तुत करें।
उत्तर :
जलपोत निर्माण उद्योग – भारत में जलपोत निर्माण के चार कारखाने हैं जिनका वर्णन निम्नलिखित हैं –
i. हिन्दुस्तान शिपयार्ड लि० – यह कारखाना आंधप्रदेश में विशाखापट्टनम में स्थित है। इसकी उत्पादन क्षमता 21,500 DWT वाले छ: जहाजों की वार्षिक है। सन् 1941-52 तक इसका स्वामित्व सिंधिया स्टीम नेविगेशन के पास था।
ii. कोच्ची शिपयार्ड – यह केरल राज्य के कोची में जापान के सहयोग से बना है। इसमें 85,000 DWT क्षमता वाले जहाज और 8600 DWT क्षमतावाले टेंकर बनते हैं। यह 1 लाख DWT क्षमतावाले जलपोतों की मरम्मत का कारखाना भी हैं।
iii. गार्डनरिचशिप विल्डर्स एण्ड इन्जिनियर्स लि० – यह कारखाना कोलकाता में स्थित हैं। यहाँ पर टग (जहाज को खींचने वाली नाव) बड़ी नाव तथा तटीय भाग में चलनेवाली नावो या जहाजों का निर्माण होता हैं। वर्तमान में यह सुरक्षा विभाग के अंतर्गत हैं।
iv. मंज गांव डक, मुम्बई महाराष्ट्र – यह सुरक्षा की इकाई है। इसमें भारतीय नौ सेना के लिए लड़ाई वाले जहाज, लंच तथा टग का निर्माण होता है। यहाँ पर 2700 DWT क्षमता वाले व्यापारिक जलपोत भी बनते हैं। इसकी उत्पादक ईकाइया गोवा, मुम्बई और मंगलौर में हैं।

प्रश्न 39.
हुगली औद्योगिक क्षेत्र के जूट उद्योग की प्रधान समस्याओं का वर्णन करो।

उत्तर : भारतीय जूट-उद्योग की समस्याएं : विगत पचास वर्षो में विश्व के जूट उद्योर्ग में भारत का एकाधिपत्य रहा हैं, किन्तु भविष्य में अपनी स्थिति बनाए रखेगा, यह संदिग्ध ही लगता है। आज भारत के जूट उद्योग के सम्मुख निम्नलिखित समस्याएं हैं –
i. कच्चे माल की कमी – भारत के बंटवारे के पश्चात् अपनी मिलों के लिए कच्चे जूट की कमी होने लगी। नये क्षेत्रों में जूट की कृषि को प्रोत्साहन दिया गया, फिर भी हमें अपनी आवश्यकता के लिए बंगलादेश पर निर्भर रहना पड़ता है। बंगलादेश के साथ बढ़ते हुए कटु संबंध की स्थिति में यह स्थिति हितकर नहीं लगती।

बंगलादेश एवं अन्य उपभोक्ता देशों की प्रतियोगिता – अभी हाल तक भारत जूट उद्योग में अकेला था, किन्तु अब मिस्र, इराक, म्यानमार, चीन तथा फिलिपाइस जो भारत के जूट के वोरों के प्रमुख ग्राहक थे अब स्वयं उत्पादक बन गए हैं। यही नहीं, बंगलादेश नई मशीनों के साथ इस उद्योग में उतर गया। सस्ते कच्चे माल, नवीन मशीनों एवं सस्ते सामान लेकर विश्व के बाजार में भारत का प्रबल प्रतिद्वन्द्वी बंगलादेश है। बाजील भी अपनी आवश्यकता भर जूट के समान स्वयं निर्मित कर रहा है। निकट भविष्य में यह भी भारत का प्रतिदन्द्वी बन सकता है।

जूट के बदले अन्य वस्तुओं से वने पदार्थों की वृद्धि – द्वितीय विश्व युद्ध के समय विदेशों में जूट से बने सामानों की पर्याप्त पूर्ति नहीं हो सकी ; इसलिए पैंकिग के लिए तथा सामान रखने के लिए सिसलहेम्प, कागज एवं कपड़ा से बने बोरों का तथा सिन्थेटिक थैलों का प्रयोग किया जाने लगा। इस प्रकार भारत के इस उद्योग को विश्व के बाजार में इन वस्तुओं की प्रतिद्वन्द्विता में भी खड़ा होना पड़ता है। यद्धपि सस्तेपन एवं टिकाऊपन के कारण जूट को इससे विशेष खतरा नहीं है किन्तु जिन देशों में उपर्युक्त वस्तुएं सस्ती हैं वहाँ से जूट के सामान की मांग कम है। इस स्थिति में भारत को बहुत सतर्क रहना है।

भारतीय जूट की वस्तुओं की अधिक कीमत – कच्चे माल की कमी एवं उसकी खराबी एवं पुरानी मशीनों के प्रयोग के कारण भारत में जूट से बनी वस्तुएं बंगलादेश की अपेक्षा बहुत मँहगी पड़ती है। इस प्रकार विदेशी बाजार में इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती।

आंतरिक बाजार में कम खपत – भारतीय जृट उद्योग में निर्मित वस्तुओं की आंतरिक बाजार में खपत बहुत कम है। खपत का बड़ा भाग विदेशी बाजार के लिए ही है, अत: इसकी स्थिति बदलते हुए विदेशी बाजार पर निर्भर करती हैं।

एक ही प्रकार की वस्तुओं का निर्माण – भारत में जूट की एक ही प्रकार की वस्तुएँ बनती है जबकि यूरोप में इससे कई प्रकार की वस्तुओं का निर्माण होता है। ऐसी अवस्था में अन्य देशों से मुकाबला करना मुश्किल हैं।

मालिक मजदूरों के बीच असंतोष एवं शक्ति के साधनों का अभाव – पश्चिम बंगाल में मालिक मजदूरों के बीच असंतोष एवं शक्ति साधनों की कमी इस उद्योग की सबसे बड़ी समस्या है।

इस प्रकार प्रमुख विदेशी मुद्रा अर्जन करने वाली यह उद्योग विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है, अतः आवश्यकता इस बात की है कि देश में जूट से बने सामानों की खपत बढ़ाई जाय और मिलों में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाय जिससे कम दामों में अधिक वस्तुएं बनायी जा सके।

प्रश्न 40.
बर्नपुर के लौह इस्पात कारखाने की स्थापना की क्या सुविधायें हैं ?
उत्तर :
इण्डियन अयरन एण्ड स्टील कम्पनी (IISCO) बर्नपुर : भारत में लौह एवं इस्पात के उद्योग की स्थापना में इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी बर्नपुर का दूसरा स्थान है। इसका उत्पादन केन्द्र आसनसोल के समीप बर्नपुर में और कार्यालय कोलकाता में हैं। इसकी स्थापना 1918 ई० में हुई। 1937 में बंगाल आयरन कम्पनी भी इसी में मिल गई। यह केन्द्र कलकत्ता से 227 कि०मी० दूर है और बराकर नदी पर स्थित है। इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी को निम्नलिखित सुविधायें प्राप्त हैं –
i. कच्चा लोहा – इस कारखाने को कच्चा लोहा गुवा, जमदा एवं मनोहरपुर (बिहार) 279 कि०मी॰ से प्राप्त होता है।)
ii. कोयले की सुविधा – इसे कोक कोल की प्राप्ति रामनगर तथा झरिया ( 136 कि०मी०) से प्राप्त होती है । इस दृष्टिकोण से बर्नपुर की स्थिति जमशेदपुर की अपेक्षा अधिक सुविधापूर्ण है।
iii. चूना-पत्यर तथा डोलोमाइट की प्राप्ति – चूना-पत्थर सिंहभूम क्षेत्र ( 157 कि०मी० है तथा मैंगनीज बीरमित्रापुर ( 317 कि०मी०) उड़ीसा से आता है।
iv. जल की प्राप्ति – इस इस्पात के कारखाने को दामोदर नदी से पर्याप्त जल मिलता है।
v. यातायात के साधन की सुविधा – यह कारखाना आसनसोल से केवल 6.5 कि०मी० की दूरी पर स्थित है और आसनसोल से रेलमार्ग द्वारा मिला हुआ है। असनसोल पूर्वी रेलवे का प्रधान केन्द्र है, अतः इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी को यातायात की अच्छी सुविधा प्राप्त है।
vi. सस्ते मजदूर एवं विस्तृत बाजार की सुविधा – बर्नपुर का यह कारखाना बिहार तथा उत्तर-प्रदेश के घनी आबादी के क्षेत्रों के समीप है। अतः सस्ते मजदूरों की प्राप्ति तथा विस्तृत बाजार दोनों की सुविधाये इस कारखाने को मिलीहै । लोहा तथा इस्पात की खपत का प्रमुख कारखाना चित्तरंजन लोकोमोटिव इससे 32 कि०मी० से कम ही दूरी पर स्थित है।

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प्रश्न 41.
भारत में लौह-इस्पात उद्योग की क्या समस्याएँ हैं ?
उत्तर :
भारत में उत्पादित इस्पात अपने गुण एवं मात्रा दोनों के विचार से अवनत हैं। इसका प्रमुख कारण निम्नलिखित है-
कोक कोयले का अभाव – इस्पात उद्योग में जो कोकिंग कोयला लगता है उसमें राख की मात्रा 17 % से अधिक नहीं होनी चाहिए। भारत के कोयले में राख की मात्रा 19 % से अधिक होती है। इसकी कमी आयातित कोक से पूरी की जाती हैं जो खर्चीला पड़ता है।

उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग न होना – उचित देख-रेख का अभाव, पुराने पूर्जों को बदलने में देरी एवं व्यवस्था संबधो दोष, प्रबन्धकों एवं मजदूरों के बीच आपसी सहयोग का अभाव कोकिंग कोयले की कमी, शक्ति की आपूर्ति की कमी, परिवहन असुविधा आदि के कारण इन कारखानों मे उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।

अपर्याप्त नियोजन एवं अत्यधिक नियंत्रण – टाटा स्टील को छोड़कर अन्य कारखानों का प्रबन्ध सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा होता है। सरकारी नियंत्रण के कारण नियोजन उचित नहीं होता, आपसी सहयोग का अभाव होता है, जिससे कारखानों में उत्पादन ठीक से नहीं होता, अतः लागत अधिक आती है।

बीमार छोटी इकाइयाँ – इस्पात उद्योग की छोटी इकाइयों को कच्चे माल जैसे स्क्रेप तथा शक्ति संसाधन की आपूर्ति समय से नहीं होती, अतः उनका उत्पादन ठीक से नहीं होता।

मिश्रित एवं विशेष प्रकार के इस्पात का कम उत्पादन – भारत का 90 % इस्पात रेल, शीट, प्लेट, छड़ आदि के रूप में होता हैं, यहाँ पर मिश्रित एवं विशिष्ट इस्पात का उत्पादन नाम मात्र का होता है।

प्रश्न 42.
इन्जिनीयरिंग उद्योग क्या है ? भारत के कुछ इन्जिनीयरिंग उद्योगों के नाम बताओ । इस उद्योग के विकास के कुछ कारणों का वर्णन करो।
उत्तर :
इस्पात तथा अन्य धातुओं को कच्चा माल के रूप में व्यवहार कर मशीन, औजार आदि के निर्माण को इंजीनियरिंग उद्योग कहते हैं।
इंजीनियरिंग उद्योग निम्नलिखित हैं –
i. भारी इंजीनियरिंग उद्योग :
(a) भारी मशीनरी उद्योग
(b) मशीनी औजार उद्योग
(c) औद्योगिक मशीनरी उद्योग
(d) रेल उद्योग
(e) जलयान उद्योग
(f) जलपोत उद्योग

ii. हल्के इंजीनियरिंग उद्योग :
(a) साइकिल निर्माण उद्योग
(b) टाइपराइटर निर्माण उद्योग
(c) सिलाई मशीन निर्माण उद्योग
(d) घड़ी निर्माण उद्योग
(e) रेडियो, टेलीफोन आदि के निर्माण के उद्योग।

इंजीनियरिंग उद्योग के विकास की निम्नलिखित शर्ते हैं –
i. कच्चे माल की उपलब्धता – इंजीनियरिंग उद्योग का प्रमुख कच्चा माल इस्पात है जो भारी होता है, अत: इंजीनियरिंग उद्योग के पास इस्पात उद्योग होना चाहिए।
ii. शक्ति के साधनों की उपलब्धता – इंजीनियरिंग उद्योग में शक्ति के साधनों का अधिक उपयोग होता है, अतः कोयला एवं जल-विद्युत की सुविधा होनी चाहिए।
iii. यातायात की सुविधा – इंजीनियरिंग उद्योग में कच्चे माल की आपूर्ति एवं तैयार माल की निकासी के लिए यातायात के साधनों का विकास आवश्यक है।

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iv. मशीनों की सुविधा – इंजीनियरिंग उद्योग में बड़ी-बड़ी कीमती मशीनों की आवश्यकता होती है ।
v. पूँजी एवं तकनीकी सुविधा – इंजिनियरिंग उद्योग के लिए पूँजी एवं तकनीकी ज्ञान की सुविधा आवश्यक है।

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प्रश्न 43.
लोकोमोटिव उद्योग से क्या समझते हो ? चित्तरंजन में रेल इंजन उद्योग की स्थापना के कारण क्या हैं ? अन्य केन्द्रों का भी वर्णन करो।
उत्तर :
लोकोमोटिव उद्योग उस उद्योग को कहते हैं जहाँ पर रेल के इंजनों का निर्माण होता है।
(a) चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स – भारत सरकार द्वारा स्थापित भारत का रेलवे इन्जिन बनाने का यह कारखाना देशबन्धु चित्तरंजन दास के नाम पर स्थापित किया गया। इस कारखाने में बने प्रथम इन्जिन का नाम भी देशबन्धु ही रखा गया। इस कारखाने में रेलवे इन्जिन बनाने का कार्य सन् 1950 में आरम्भ हुआ। पहले इन्जिन संबंधी सभी पुर्जे विदेश से आते थे किन्तु सन् 1958 के बाद सभी पुर्जे इस कारखाने में ही बनने लगे।
यह कारखाना विभिन्न प्रकार के इंजनों का निर्माण कर रहा है। यहाँ प्रतिवर्ष 500 इंजन तैयार होता है।

चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स की चित्तरंजन में स्थापना के लिए निम्नलिखित सुविधायें हैं –
शक्ति के साधनों की प्राप्ति – रेलवे इन्जिन बनाने के लिए शक्ति के साधन के रूप में कोयला तथा बिजली दोनों ही उपलब्ध हैं। कोयला झरिया की खानों से प्राप्त होता है। ये खाने यहाँ से दस-पन्द्रह मील ही दूर हैं। जल-विद्युत की प्राप्ति दामोदर-घाटी योजना से होती है। यह केन्द्र चित्तरंजन के कारखाने से केवल 5 कि०मी० दूर हैं। जल-विद्युत की प्राप्ति दामोदर घाटी-योजना के मैथन बांध केन्द्र से होती हैं।

यातायात की सुविधा – प्रारम्भ में इस कारखाने के लिए पूर्जे आयात करने पड़ते थे, अत: रेल-मार्ग की सुविधा आवश्यक थी। कलकत्ता बन्दरगाह से पूर्जे आयात किये जाते थे और रेल-मार्ग द्वारा पहुँचाये जाते थे । पुन: रेलवे इंजन को विभिन्न भागों में भेजने में कोई असुविधा नहीं थी। इस केन्द्र को रेल-मार्ग की सुविधा प्राप्त है, क्योंकि यह पूर्वी रेलवे का प्रधान स्टेशन है।

लोहे एवं इस्पात की प्राप्ति – इस कारखाने को लौह एवं इस्पात की आवश्यकताओं की पूर्ति टाटा कम्पनी से होती है। टाटा नगर से यह रेल-मार्ग द्वारा मिला हुआ है।

सस्ते श्रमिकों की प्राप्ति – इस केन्द्र को सस्ते मजदूर अधिक संख्या में बिहार एवं उत्तर-प्रदेश से प्राप्त होते हैं। यह स्थान स्वास्थ्य के अनुकूल पड़ता है और देश के प्रत्येक भाग से आने की सुविधा है, अत: यहाँ मजदूर आसानी से आ सकते हैं।

(b) टाटा इन्जिनियरिंग एण्ड लोकोमोटिव कम्पनी (TELCO) जमशेदपुर – भारत का दूसरा रेलवे इंजिन बनाने का कारखाना भारत के इस्पात नगर टाटानगर में स्थित हैं। इसका संचालन टाटा कम्पनी के हाथ में हैं। इस कारखाने में प्रति वर्ष 68 इंजन तैयार किये जाते हैं।
टाटा नगर में इसकी स्थिति के कारण इसे कोयले की, लोहे की एवं रेलमार्ग की सुविधायें अनायास ही मिली हुई हैं। इस स्थान पर पहले से यह उद्योग था भी।

(c) डीजल लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी – बनारस के पास मडुआडीह में रेल इंजन का कारखाना 1964 में स्थापित हुआ। इसकी उत्पादन क्षमता 150 इंजन प्रतिवर्ष है। चतुर्थ पंचवर्षीय योजना में 652 इन्जन तैयार हुआ जिसमें 369 डीजल तथा 283 बिजली से चलने वाले हैं।

प्रश्न 44.
अहमदाबाद को भारत का मैनचैस्टर क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
अहमदाबाद को भारत का मैनचैस्टर इसलिए कहा जाता है क्योंकि अहमादाबाद में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना एवं उसके विकास के लिए निम्नलिखित सुविधायें प्राप्त हैं –
कच्चे माल की प्राप्ति – अहमदाबाद की सबसे बड़ी सुविधा उत्तम कपास की प्राप्ति की है। यह काली मिट्टी के कपास उत्पादक क्षेत्र के मध्य ही स्थित है; अत: मुम्बई की अपेक्षा कपास की सुविधा अहमदाबाद को अधिक है।

सस्ते एवं कुशल श्रमिक – अहमदाबाद के लिए मजदूरों की प्राप्ति गुजरात प्रदेश से ही हो जाती हैं। कुछ श्रमिक राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से भी मिल जाते हैं। यही नहीं, अहमादाबाद के समीपवर्ती क्षेत्रों में गृह-उद्योग के रूप में इस उद्योग का विकास बहुत पहले हुआ था, इसलिए अहमदाबाद की मिलों के लिए कुशल श्रमिकों की सुविधा अधिक है। मुम्बई की तुलना में यहाँ श्रमिकों की मजदूरी कम है क्योंकि यहाँ रहन-सहन का स्तर मुम्बई की तरह ऊँचा नहीं है।

मजदूरों के लिए निवास की सुविधा – अहमदाबाद में मुम्बई की तरह न तो मिलों की स्थापना के लिए और न मजदूरों के निवास के लिये ही स्थान की कमी है, अतः जब मजदूरों के सामने इन दोनों केन्द्रों में से चुनाव का प्रश्न आता है, तो वे प्रधानता अहमदाबाद को ही देते हैं।

कर में कमी – अहमदाबाद में स्थानीय करों की कमी है। अतः यहाँ बने वस्त्रों की लागत कम पड़ती है।

मुम्बई एवं कांडला के बन्दरगाहों की सुविधा – विदेशों से मशीनों के आयात के लिये अहमदाबाद को मुम्बई एवं कांडला दोनों बन्दरगाहों की सुविधायें प्राप्त हैं।

बाजार की सुविधा – अहमदाबाद के वने वस्त्रों के लिये पंजाब, पश्चिमी उत्तर-प्रदेश एवं राजस्थान का विस्तृत बाजार मुम्बई की अपेक्षा निकट हैं। साथ ही इन क्षेत्रों में कपड़ा आसानी से पहुँचाया भी जा सकता है। यहाँ मुम्बई की तरह रेलवे के डिब्बों के मिलने में असुविधा नहीं होती।

अच्छे वस्त्रों के निर्माण में एकाधिकार – अहमदाबाद में बने वस्त्र भारत में अपनी उत्तमता के लिए प्रसिद्ध है इसलिए यहाँ की बनी वस्तुओं के बाजार में कोई प्रतिद्वन्द्वी नहीं है।

अहमदाबाद में प्राप्त सुविधाओं से सूती वस्त्र के लिए इसे भारत के मैनचेस्टर की संज्ञा दी गई है। यही नहीं, इसे पूरब का वोस्टन भी कहते हैं। भारत में इस उद्योग का सर्व प्रथम केन्द्र मुम्बई है।

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प्रश्न 45.
हुगली औद्योगिक क्षेत्र में जूट उद्योग के केन्द्रीकरण के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
हुगली नदी की निचली घाटी में जूट-उद्योग के केन्द्रीकरण के निम्नलिखित कारण हैं –
विदेशी पूँजी एवं संगठन की सुविधा – भारत का यह उद्योग विदेशी पूँजी द्वारा स्थापित हुआ था। उस समय भारत में कोलकाता ही ब्रिटिश साम्राज्य का केन्द्र था। अतः इस उद्योग के लिए आवश्यक पूँजी और उत्तम प्रबंध की सुविधा जितनी इस क्षेत्र में थी उतनी भारत के किसी भाग में नहीं थी।

कच्चे माल की सुविधा – हुगली क्षेत्र को कच्चे माल की प्राप्ति की सुविधा बहुत अधिक है। यहाँ निकटवर्ती क्षेत्र से हुगली नदी द्वारा जूट आसानी से मिल जाता है। कोलकाता बहुत पहले से जूट का केन्द्र रहा है। संपूर्ण बंगाल का पहले जूट का निर्यात कोलकाता बंदरगाह से ही होता था, इसीलिए कोलकाता को अनायास ही जूट की प्राप्ति हो जाती थी।

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कोलकाता बन्दरगाह की सुविधा – जूट उद्योग के लिए मशीनों के आयात तथा जूट से बनी ( 80 % से अधिक) वस्तुओं के निर्यात के लिए कोलकाता बन्दरगाह से सुविधा मिलती है। कोलकाता के इस निकटतम पृष्ठ-प्रदेश में हुगली ही यातायात का एकमात्र साधन है अथवा अधिक उचित शब्दों में हुगली कोलकाता बन्दरगाह का एक अंग हैं।

कोयले की प्राप्ति – जूट की मिलों को चलाने के लिए यहाँ कोयले की प्राप्ति की अच्छी सुविधा है। भारत का सबसे प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र रानीगंज और झरिया की खाने कोलकाता से 208 कि॰मी० के अंदर ही पड़ती है। कोयला लाने के लिए नदी मार्ग, रेलमार्ग तथा सड़कों की पर्याप्त सुविधाएं हैं।

उपयुक्त जलवायु – जूट उद्योग के लिए नम जलवायु आवश्यक है। अधिक वर्षा के कारण पश्चिम बंगाल के इस क्षेत्र की जलवायु आवश्यकतानुसार नम हैं।

श्रमिकों की प्राप्ति – कोलकाता एक प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है अत: यहाँ बंगाल, बिहार, उड़ीसा एवं उत्तरप्रदेश से अधिक संख्या में सस्ते श्रमिक मिल जाते हैं।

विशेषज्ञों एवं कारीगरों की सुविधा – कोलकाता एवं उसके समीप का संपूर्ण क्षेत्र उद्योग-धन्धों में विकसित है, अतः इस उद्योग में आवश्यक विशेषज्ञों की प्राप्ति सुलभ है। अन्य क्षेत्रों में ऐसी सुविधा नहीं मिल सकती।

पूर्व प्रारम्भ की सुविधा – भारत का यह उद्योग सबसे पहले कोलकाता के समीप ही स्थापित हुआ। अतः इस क्षेत्र को पूर्व प्रारम्भ की सुविधा प्राप्त थी।

प्रश्न 46.
भारत में बढ़ते नगरीकरण के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का संक्षिप्त विवरण दो।
उत्तर :
भारत में नगरीकरण की समस्या : अन्य देशों के समान भारत में भी तीव्र गति से नगरीकरण में वृद्धि एवं विस्तार होता जा रहा है और सरकार भी नगरों को बढ़ावा देने के लिए ही कार्य कर रही है। एक ओर जहाँ नगरीकरण में वृद्धि हो रही है, वहीं आज नगरीकरण के कारण कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही है, जो निम्नलिखित हैं –
i. अनियोजित नगरीकरण – भारत में कई ऐसे नगर हैं जो अनियोजित ढंग से बसाए गए हैं। इसलिए वहाँ कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो गई है जिनमें जल अभाव, रास्ता जाम, आवास की कमी आदि प्रमुख हैं।
ii. शहरों में ही बसने की लोगों की प्रवृत्ति – आज गांवों में कोई भी पढ़ा-लिखा युवक नहीं रहना चाहता है, हर नौजवान की यही इच्छा होती है कि वह शहर में ही रहे। क्योंकि उसकी यही धारणा होती है कि जो सुविधा शहरों में उपलब्ध है वह गांवों में नहीं है। इसलिए शहरों की संख्या में निरतंर वृद्धि होती जा रही है।
iii. अधिवास की समस्या – नगरों की संख्या एवं विस्तार के बावजूद भी आज लाखों लोगों को रहने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसलिए शहरों में आज आवास एक प्रमुख समस्या है।
iv. परिवहन की समस्या – आज बड़े-बड़े महानगरों में जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है, परिवहन एक प्रमुख समस्या है। लोगों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
v. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी – जिस अनुपात में शहरीकरण हो रहा है तथा शहरों की आबादी बढ़ रही है, उस अनुपात में ख्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सरकारी अस्पतालों का अभाव है तथा उन अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
vi. विद्युतीकरण – जनसंख्या वृद्धि के कारण विद्युत की मांग में काफी वृद्धि हो रही है। मांग की तुलना में उत्पादन कम होने के कारण आज विद्युत एक प्रमुख समस्या हो गई है। बड़े-बड़े शहरों में आए दिन 5-6 घण्टे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है।
vii. जल निकाशी की समस्या – बड़े-बड़े शहरों में जल निकाशी आज एक प्रमुख समस्या है। बढ़ती हुई आबादी के कारण आज आए दिन शहरों में सड़कों पर थोड़ा सा भी बारिश हो जाने के कारण पानी भर जाया करता है। दिल्ली, मुम्बई एवं कोलकाता में यह समस्या आम बात है।

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प्रश्न 47.
भारत में जनसंख्या वृद्धि का विवरण दीजिए।
उत्तर :
किसी भी स्थान की जनसंख्या परविर्तनशील होती है। अनुकूल परिस्थितियों में जनसंख्या वृद्धि होती है तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में जनसंख्या घट जाती है। दो समय बिन्दुओं के बीच जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहा जाता है। जनसंख्या वृद्धि निम्नलिखित दो प्रकार की होती है।
i. धनात्मक वृद्धि : दो समय बिन्दुओं के बीच जनसंख्या में होने वाली वृद्धि को धनात्मक वृद्धि कहा जाता है। जब जन्मदर मृत्युदर से अधिक हो जाती है तो उसे धनात्मक वृद्धि कहा जाता है।
ii. ऋणात्मक वृद्धि : दो समय बिन्दुओं के बीच जनसंख्या के घटने को ऋणात्मक वृद्धि कहा जाता है। जब जन्म दर मृत्युदर से कम हो जाती है तो उसे ॠणात्मक वृद्धि कहा जाता है।
सन् 1901 में भारत की जनसंख्या जहाँ 23.84 करोड़ थी वह 2011 में बढ़कर 121 करोड़ से भी अधिक हो गई। सन् 2001-2011 के दशक में भारत में जनसंख्या की औसत वृद्धि दर 17.64 थी । जनसंख्या की वृद्धि दर में क्षेत्रीय भिन्नताएं भी मिलती है। दक्षिणी राज्यों में वृद्धि दर काफी कम है। छोटे राज्यों में वृद्धि दर काफी अधिक हैं।

भारत में जनसंख्या का आकार एवं वृद्धि दर 1901-2011

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प्रश्न 48.
भारत में पाए जाने वाले प्रमुख नगरों का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
प्रमुख या विशिष्ट प्रकार्यों के आधार पर भारत में नगरों और कस्बों को निम्न रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है i. प्रशासनिक कस्बे और नगर – प्रमुख प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में विकसित नगरों को प्रशासनिक नगर कहा जाता है। जैसे चंडीगढ़, नई दिल्ली, भोपाल, शिलांग आदि ऐसे नगरों के उदाहरण हैं।
ii. औद्योगिक नगर – उद्योग ही ऐसे नगरों की प्रेरक शक्ति होते हैं जैसे मुम्बई, सलेम, कोयंबटूर, मोदीननगर, जमशेदपुर, हुगली, भिलाई आदि
iii. परिवहन नगर – ये नगर मुख्य रूप से आयात और निर्यात की गतिविधियों में लिप्त पत्तन हो सकते हैं। जैसेकांडला, कोच्चि, कालीकट, विशाखापट्टनम आदि। कुछ आंतरिक परिवहन के केन्द्र हो सकते हैं। जैसे – आगरा, धुलिया, मुगलसराय, इटारसी, कटनी आदि।
iv. व्यापार नगर – व्यापार में विशिष्टता प्राप्त करने वाले कस्बे और नगर इसी वर्ग में शामिल किए जाते हैं। जैसे कोलकाता, सहारनपुर, सतना आदि।
v. खनन नगर – रानीगंज, झारिया, डिगबोई, अंकलेश्वर, सिंगरौली आदि।
vi. छावनी नगर – अंबाला, जालंधर, मऊ, बबीना, मेरठ कैंट आदि।
vii. शैक्षिक नगर – रूड़की, वाराणसी, अलीगढ़, पिलानी आदि।
viii. धार्मिक और सांस्कृतिक नगर – वाराणसी, मथुरा, अमृतसर, मदुरई, तिरूपति आदि।
ix. पर्यटन नगर – नैनीताल, मसूरी, शिमला, पंचमढी, ऊटी, माउन्ट आबू आदि विशिष्ट नगर भी महानगरों के रूप में विकसित होने के बाद वहुप्रकार्यात्मक बन जाते है। तब इनमें उद्योग, व्यापार, प्रशासन और परिवहन आदि कार्य प्रमुख हो जाते है।

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प्रश्न 49.
भारत में जनसंख्या के शहरीकरण को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
भारतीय जनसंख्या का शहरीकरण – भारत में जनसंख्या का नगरीकरण हो रहा है अर्थांत् गांवों से जनसंख्या शहरों की तरफ भाग कर आ रही हैं। भारत में 1981 से 2001 के बीच महानगरों की संख्या 12 से बढ़कर 27 हो गयी है। शहरों की जनसंख्या रोज़ बढ़ रही है। इस बढ़ती जनसंख्या के कारण हैं :
शहर में जीवनदायक वस्तुओं की आपूर्ति – नागरिको की जागरूकता के कारण जीबन के लिए आवश्यक आवश्यकताओं जैसे आवास, भोजन आदि की आपूर्ति आसानी से हो पाती है। गांवों की अपेक्षा शहरों में सरकारी शासन प्रणाली की उत्तम व्यवस्था होती है, अतः समय पर भोजन आदि की आपूर्ति हो जाती है।

रोजगार की सुविधा – गांवों में कृष् के अलावे रोजगार का अन्य साधन नहीं है, नगरों में अनेक छोटे-बड़े रोजगार होते हैं जिससे लोगों को काम मिल जाता है।

अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति – बिजली, पानी, यातायात आदि की जितनी सुविधा शहरों में है उतनी गांवों में नहीं है, अत: लोग गांव को छोड़ शहरों में आ रहे है।

शांति, सुरक्षा एवं शिक्षा की सुविधा – सामाजिक क्रांति के चलते बिहार के कुछ गांवों में लोगों के समक्ष संपत्ति एवं जीवन की सुरक्षा का प्रश्न उपस्थित हो गया है क्योंकि पुलिस के लिए सबको सुरक्षा देना संभव नहीं है, अतः शांति-सुरक्षा के लिए गांवों के सम्पन्न लोग मात्र बच्चों की शिक्षा के लिए नगरों में रहने लगे हैं।

शरणार्थियों एवं विदेशियों का आगमन – ऐसा अनुमान है कि बंगलादेश, पाकिस्तान से आये करीब दो करोड़ लोग भारत के विभिन्न नगरों में बस गये हैं। ये विदेशी अधिकतर बड़े शहरों में ही जाकर बसते है क्योंकि बड़े शहरों में उन्हें रोजगार मिल जाता है। वे शहरों के लोगों से इस प्रकार मिल जाते हैं कि उन्हें कठिनाई से अलग किया जा सकता है। कश्मीर से आये शरणार्थी भी दिल्ली आदि नगरों में बस गये हैं।

सामाजिक मान्यता – गांव के लोग जिनके पास पर्याप्त मात्रा में भूमि है आरामदायक जीवन एवं समाज में प्रतिष्ठा पाने के लिए नगरों में नौकरी करने आ जाते हैं।
इस प्रकार हम देखते है कि भारत में जनसंख्या का नगरीकरण हो रहा है।

प्रश्न 50.
भारत में जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करे। अथवा, भारत में जनसंख्या के असमान वितरण का क्या कारण है ?
उत्तर :
जनसंख्या के असमान वितरण का कारण निम्नलिखित है –
(A) प्राकृतिक कारण :
i. वर्षा – जनसंख्या की वृद्धि या कमी में खाद्य फसलों का उत्पादन महत्वपूर्ण होता है। जहाँ पर वर्षा अधिक होती है, वहाँ कृषि की उपज अच्छी होती है। अतः जहाँ वर्षा अधिक होती है, वहाँ घनी जनसंख्या पाई जाती है। जहाँ वर्षा कम होती है वहाँ विरल जनसंख्या पायी जाती है। यदि हम गंगा के विशाल मैदान में पूर्व से पश्चिम जायेंगे तो पाते हैं कि पश्चिम बंगाल से बिहार, बिहार से उत्तर प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश से पंजाब में वर्षा की मात्रा घटती जाती है एवं जनसंख्या का घनत्व क्रमशः कम होता जाता है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल तथा केरल में अधिक वर्षा होती है और यहाँ जनसंख्या का घनत्व देश में सर्वधिक है।

ii. तापमान – बहुत ऊँचा और बहुत निम्न तापमान जनसंख्या के घनत्व पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि हिमालय के पर्वतीय भागों एवं थार के मरूस्थल में विरल जनसंख्या पायी जाती है। इसके विपरीत जहाँ तापमान सम रहता है, सघन जनसंख्या पायी जाती है, जैसे – उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में।

iii. आर्द्रता – आर्द्र जलवायु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, अतः भावर क्षेत्र और गंगा के डेल्टा प्रदेश में आर्द्र जलवायु के कारण जनसंख्या विरल है।

iv. धरातल – मैदानी भागों में मिट्टी उपजाऊ होती है, निवास स्थान बनाने में सुविधा होती है। उद्योग-धंधों की स्थापना सुविधाजनक होती है। अतः समतल मैदानों पर सघन जनसंख्या पायी जाती है, इसके विपरीत जहाँ धरातल असमान, पहाड़ी, पठारी होता है, वहाँ कृषि योग्य भूमि का अभाव होता है, यातायात की सुविधा नहीं रहती, घर बनाना कष्षकर होता है, अत: यहाँ विरल जनसंख्या पायी जाती है।

v. कृषि का ढंग – जिन स्थानों पर वर्ष में एक से अधिक फसलों की कृषि की जाती है, वहाँ सघन जनसंख्या मिलती है, क्योंकि लोग खाद्य फसलों की कृषि करके अपना पेट भरते हैं तथा अन्य फसलों की कृषि करके अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार करते हैं। जहाँ धान की कृषि होती है वहाँ पर सघन जनसंख्या पायी जाती है। धान की फसल अन्य खाद्यानों की अपेक्षा अधिक लोगों का पेट भरती है।

vi. खनिज पदार्थों की उपलब्धता – जिन स्थानों पर नये खनिजों का पता लगता है, वहाँ उनकी खुदाई होने तथा उससे सम्बन्धित उद्योगों की स्थापना से जनसंख्या बढ़ जाती है। उड़ीसा, झारखण्ड तथा छत्तीसगढ़ के उन क्षेत्रों में जहाँ नयी खानों का पता लगा, जनसंख्या बढ़ गयी। टाटानगर, बोकारो, भिलाई, दुर्गापुर में भी जनसंख्या वृद्धि का यही कारण है।

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(B) अप्राकृतिक प्रभाव :
i. सांस्कृतिक प्रभाव – विभिन्न सांस्कृतिक स्थानों पर जनसंख्या की वृद्धि होती है, जैसे – बनारस में विश्वविद्यालय की स्थापना, इलाहाबाद में हाईकोर्ट की स्थापना, दिल्ली को राजधानी बनाये जाने आदि के कारण वहाँ जनसंख्या बढ़ गयी, राजस्थान में गंगा नहर के निर्माण के कारण जनसंख्या में वृद्धि हो गयी। अत: शिक्षण संस्थानों की स्थापना, धार्मिक महत्व में वृद्धि, वैज्ञानिक एवं तकनीकि विकास के कारण जनसंख्या बढ़ जाती है।

ii. यातायात व्यवस्था – जिन स्थानों पर यातायात के साधनों सड़क, रेल, जल यातायात और वायु यातायात का विकास होता है वहाँ जनसंख्या बढ़ जाती है। जिन स्थानों पर यातायात का अभाव है, वहाँ जनसंख्या विरल ही रहती है। जैसे उत्तरी पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के राज्य में जनसंख्या विरल है। मैदानी भागों में यातायात के विभिन्न साधनों का विकास होने के कारण सघन जनसंख्या पायी जाती है।

iii. औद्योगिक उन्नति – जिन स्थानों पर नये-नये उद्योगों की स्थापना होती है, वहाँ नये-नये नगर बस जाते है और जनसंख्या बढ़ जाती है, छोटानागपुर के क्षेत्रों में खनिजों की खोज एवं उद्योगों की स्थापना के कारण जनसंख्या में वृद्धि हो गयी।

iv. राजनीतिक प्रभाव – राजनीतिक प्रभाव के कारण भी जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है । जैसे – देश के विभाजन के फलस्वरूप पंजाब एवं पश्चिम बंगाल में शरणार्थियों के आने से जनसंख्या में वृद्धि हो गयी है।

प्रश्न 51.
जनसंख्या के घनत्व के आधार पर भारत का वर्गीकरण करें।
उत्तर :
जनसंख्या के घनत्व के हिसाब से भारत को तीन भागों में बांटा जा सकता है –
प्रति वर्ग० कि० 450 से अधिक व्यक्ति – अधिक घनत्व वाले क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण सिंघु-गंगा के मैदान में बसने वाले राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर-प्रदेश, हरियाणा और पंजाब हैं। यहाँ पर घनी जन संख्या का कारण है उपजाऊ भूमि, नम जलवायु, नहरों का विस्तार, सिंचाई की सुविधा तथा विस्तृत मैदान। यहाँ पर पश्चिम बंगाल के डेल्टाई भाग एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिकरण ने भी जनसंख्या के घनत्व में वृद्धि की है। केरल एवं तमिलनाडु के तटीय भागों में भी जनसंख्या सघन है। यहाँ बागानी कृषि एवं गहन कृषि सघन जनसंख्या के कारण है । इन क्षेत्रों में देश के अन्य भागों की अपेक्षा शहरीकरण तीव्र गति से हुआ है। असम के ब्रहुपुत्र घाटी में भी कुछ स्थानों पर सघन जनसंख्या पाई जाती है।

अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र एवं जनसंख्या का घनत्व – पश्चिम बंगाल (1,028), बिहार (1,106), केरल (860), उत्तर प्रदेश (829), पंजाब (551), तमिलनाडु (555), हरिहाणा (573)

साधारण घनत्व वाले क्षेत्र (200 – 450 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०) – महाराष्ट्र का अधिक भाग, गुजरात, तेलगाना एवं आंध्र प्रदेश का तटीय भाग, तमिलनाडु का कुछ भाग कर्नाटक का दक्षिणी भाग आदि साधारण घनत्व के क्षेत्र है। झारखण्ड के छोटानागुपर के पठार का कुछ भाग, उत्तरी राजस्थान तथा पंजाब, हरियाणा एवं असम के कुछ भागों में भी इस प्रकार की जनसंख्या पायी जाती है। कुछ स्थानों पर पहले विरल जनसंख्या थी पर विकास के कारण घनत्व साधारण हो गया है, जैसे – उत्तरी राजस्थान।

साधारण जनसंख्या वाले क्षेत्र एवं जनसंख्या का घनत्व – गोवा (394), असम (398), झारखण्ड (414), महाराष्ट्र (365), त्रिपुरा (350)।

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विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र (200 से कम व्यक्ति प्रति कि०मी०) – विरल जनसंख्या के क्षेत्र हैं राजस्थान का बड़ा हिस्सा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा। इन क्षेत्रों में विरल जनसंख्या का कारण है पठारी ऊबड़-खाबड़ भूमि, रेगिस्तान, उद्योगों का विकसित न होना, देश का यह क्षेत्र आर्थिक रूप अविकसित क्षेत्र है। विरल जनसंख्या का दूसरा क्षेत्र है कर्नाटक का पूर्वी भाग एवं आंध्र प्रदेश । विरल जनसंख्या का तीसरा क्षेत्र है उत्तरी पूर्वी भारत जिसके अतर्गत आनेवाले राज्य हैं मणिपुर, नागालेण्ड, मेघालय, मिजोराम एवं अरूणाचल प्रदेश। यहाँ पर भू-प्रकृति पर्वतीय है अतः जनसंख्या विरल है।

विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र तथा जनसंख्या का घनत्व – अरुणाचल प्रदेश (17), मिजोरम (52), उत्तरांचल (189), राजस्थान (200), नागालैण्ड (119), मणिपुर (115), मध्य प्रदेश (236), सिक्किम (86), जम्मू कश्मीर (124)।

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प्रश्न 52.
क्या भारत में जनाधिक्य है ?
उत्तर :
भारत में जनाधिक्य है और इसके समर्थन में निम्नलिखित तथ्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं –
i. भारत में बेरोजगारी है – भारत में जनसंख्या वृद्धि रोजगार के अवसरों की तुलना में तीव्र गति से बढ़ रही है।
ii. बेरोजगारी एवं अदृश्य बेरोजगारी – भारत में बेरोजगारी के साथ अदृश्य बेरोजगारी भी है। जैसे किसी खेत पर एक पिता जाम करता था, बड़ा होने पर लड़के के पास कोई काम न होने से वह भी लग जाता है, पर वह कोई अतिरिक्त उत्पादन नहीं करता { }^* ।
iii. गरीबी और जोषण – यहाँ पर इतनी गरीबी है कि कुछ लोगों को भोजन भी नहीं मिलती है तथा कुछ लोगों का केवल पेट भरता है, उनके भोजन में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती है।
iv. जीवन निवार्ह की गहन कृषि – बढ़ती जनसंख्या के पास रोजगार का अवसर न होने से और लोग उसी कृषि में लगते हैं और गहन कृषि करते हैं।
v. अपर्याप्त मूलभूत सुविधायें – जीवन की मूलभूत सुविधायें जैसे रोटी, कपड़ा, मकान तथा शिक्षा सब लोगों को उपलब्थ नहीं है।
अतः हम इस निष्कर्स पर पहुँचते हैं कि प्रतिवर्ष आस्ट्रेलिया के बराबर करीब एक करोड़ जनसंख्या की वृद्धि करने वाला भारत में जनाधिक्य है।

प्रश्न 53.
जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना का क्या अर्थ है ? भारत में पाये जाने वाले व्यावसायिक संरचना के चार प्रमुख वर्गों की उदाहरण सहित व्याख्या करो।
उत्तर :
जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना – जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से तात्पर्य कुल कार्य शील जनसंख्या का विभिन्न व्यवसायों में वितरण है। सम्पूर्ण व्यवसायों को प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक वर्ग में विभक्त किया जाता है। प्रकृति से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित व्यवसाय जैसे शिकार करना, पशुपालन, खनन तथा कृषि आदि प्राथिक व्यवसाय है। प्राथमिक उत्पादनों पर आधरित क्रियाएं जैसे विनिर्माण उद्योग, सड़क निर्माण आदि द्वितीयक व्यवसाय हैं तथा प्रत्यक्ष रूप से कोई उत्पादन नहीं करेनवाली पंरतु उत्पादन में सहायक क्रियाएं जैसे परिवहन, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा तथा अन्य सेवाएँ प्रदान करने वाली तृतीयक व्यवसाय है।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल कार्यशील जनसंख्या का 49 % ग्राथमिक व्यवसाय में, 24 % द्वितीयक व्यवसाय में तथा 27 % तृतीयक व्यवसाय में लगी हुई है। यह पहली बार हुआ है जब प्राथमिक व्यवसाय में लगी जनसंख्या का प्रतिशत 50 से कम है।
उपरोक्त वर्गीकरण को निम्नलिखित चार साधारण वर्गों में व्यक्त किया जाता है –

  1. प्राथमिक व्यवसाय में कृषि, मत्स्यपालन, आखेटन, वानिकी आदि को सम्मिलित किया जाता है
  2. द्वितीयक व्यवसाय में निर्माण उद्योग तथा शक्ति उत्पादन आती है।
  3. तृतीयक व्यवसाय में परिवहन, संचार, व्यापार तथा सेवाएं सम्मिलित की जाती है।
  4. चतुर्थक व्यवसाय बौद्धिकतापूर्ण क्रियाओं से संबधित है। इनका कार्य चितन, शोध तथा विचारों का विकास करना है।

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प्रश्न 54.
भारत में पाई जाने वाली जनसंख्या का आयु के अनुसार वर्गीकरण प्रस्तुत करें।
उत्तर :
भारत में जनसंख्या की आयु संरचना – भारत में जनसंख्या की आयु संरचना के अध्ययन के लिए इसे निम्नलिखित आयु वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है –
i. बाल आयु वर्ग (0 वर्ष – 14 वर्ष) : भारत में 31.2 % जनसंख्या बाल आयु वर्ग के अंतर्गत आती है। इसमें 6 वर्ष से कम आयु के शिशुओं का प्रतिशत 13.12 है। बाल आयु वर्ग भी औसत जनसंख्या के अंतर्गत आता है। अतः बाल आयु वर्ग में जनसंख्या की अधिकता समाज को आर्थिक पिछड़ेपन की ओर ले जाती है।

ii. युवा आयु वर्ग ( 15 वर्ष – 39 वर्ष) : भारत की जनसंख्या का लगभग 41.4 % युवा आयु वर्ग के अंतर्गत है। यह सक्रिय जनसंख्या का प्रमुख अंग है, जिस पर देश की उत्पादकता और सुरक्षा का दायित्व होता है।

iii. प्रौढ़ आयु वर्ग ( 40 वर्ष – 59 वर्ष) : भारत में 40 – 59 आयु वर्ग को प्रौढ़ आयु वर्ग माना जाता है। इस आयु वर्ग में भारत की लगभग 16.8 % जनसंख्या पायी जाती है। भारत में पौढ़ आयु वर्ग की संख्या युवा आयु वर्ग की संख्या के आधे से भी कम है जिसका मुख्य कारण जीवन प्रत्यशा का कम होना है। यह सक्रिय जनसंख्या है तथा कुल क्रियाशील जनसंख्या का 30 % इसके अंतर्गत आता है।

iv. वृद्ध आयु वर्ग ( 60 वर्ष – एवं इससे अधिक) : भारत में जीवन प्रत्याशा विकसित देशों की तुलना में कम होने के कारण 60+ को वृद्ध आयु वर्ग माना जाता है। 1999 ई० में भारत की 7 % जनसंख्या इसी वर्ग के अंतर्गत थी। मृत्यु दर में कमी तथा जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के कारण इस आयु वर्ग में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

प्रश्न 55.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण क्या हैं ?
उत्तर :
भारत में जनसंख्या वृद्धि की इस तीव्र गति के निम्नलिखित कारण हैं –
i. जन्मदर में वृद्धि या स्थिरता के साथ मृत्यु दर में कमी – आधुनिक वैज्ञानिक स्वास्थ्य की सुविधाओं ने महामारियों पर नियन्तण पा लिया है। एक तरफ तो जन्म दर में स्थिरता आयी है और दूसरी तरफ मृत्यु दर में कमी आ गयी हैं। 1911-2000 के बीच जन्मदर प्रति हजार 48.1 % थी, पर मृत्युदर 48.6 % जबकि 1971 – 1980 के दौरान जन्म दर तो प्रति हजार 36.2 % हो गयी पर मृत्यु दर 14.8 % हो गयी और 1981-1990 तक जन्म दर 27.5 % हो गयी और मृत्यु दर कम होकर 9.5 पर आ गयी है। इस प्रकार जनसंख्या बढ़ रही है।

ii. आकाल पर नियंत्रण – बंगाल के भीषण अकाल में लाखों की संख्या में लोग मर गये थे ; पर अन्न की पैदावार बढ़ने तथा यातायात के कारण अकालों पर नियंत्रण पा लिया गया है, अत: मृत्यु दर में कमी आ गयी हैं।

iii. 1914 से 1940 के बीच दो विश्व-युद्ध हुए पर अब लड़ाइयाँ भी कम हो रही है अत: इनसे लोगों की कम मृत्यु होती है।

iv. शरणार्थियों एवं घुसपैटियों का आगमन – देश के बँटवारे के फलस्वरूप पश्चिमी पाकिस्तान तथा पूर्वी पाकिस्तान (अब बंगलादेश) से बहुत से शरणार्थी आये जिनसे भारत की जनसंख्या बढ़ गयी है। गैरसरकारी आकड़ों के अनुसार भारतदर्ष में केवल बंगलादेश से ही आये घुसपैठियों की संख्या 2 करोड़ के लगभग हैं। यही कारण है कि जहाँ 19.81 में जनसंख्या के घनत्व के दृष्टिकोण से पश्चिम बंगाल का स्थान दूसरा था, अब 1991 के जनगणना से प्राप्त आकड़ों के अनुसार इस राज्य का जनसंख्या घनत्व के दृष्टिकोण से स्थान पहला हो गया है।

v. बड़े परिवार – भारत में बहुसंख्यक आबादी कृषकों एवं गरीब लोगों की हैं। अतः उनका जीवन-स्तर निम्न कोटि का है। अंतः लोग यह सोचते हैं की जितने अधिक हाथ होंगे आय के स्रोत उतने ही अधिक होंगे, अत: वे अधिक बच्चे पैदा होने से घबड़ाते नहीं अपितु खुश होते है।

vi. सामाजिक रीति रिवाज – भारत में ऐसी सामाजिक मान्यता हैं कि बिना पुत्र के मोक्ष नहीं मिलता, अतः प्रत्येक व्यक्ति पुत्र की आकांक्षा करता है।

vii. धर्म द्वारा परिवार नियोजन का विरोध – प्रत्येक धर्म परिवार नियोजन का विरोध करता है। भारत के लोग धर्म के प्रति अंधे होते हैं, अतः परिवार नियोजन एक पाप माना जाता है।

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प्रश्न 56.
भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर के स्वरूप का वर्णन करों।
उत्तर :
भारत में परिवर्तित जनसंख्या वृद्धि दर के आधार पर वर्तमान शताब्दी को तीन भागों में विभाजित किया जा संकता हैं – i. सन् 1901 – 1921 ii. 1921 – 1951 iii. 1951 – 2006
i. सन् 1901 – 1921 : इस काल में उच्च मृत्युदर के कारण जनंसख्या वृद्धि दर स्थिर रही। इन वर्षों में जनसंख्या वृद्धि मात्र 130 लाख हुई। सन् 1918-1919 में महामारियों से कुल जनसंख्या का 5 % समाप्त हो गया।
ii. सन् 1921 – 1951 : इन तीस वर्षों में जनसंख्या वृद्धि लगातार होती रही। इन तीस वर्षों में जनसंख्या की वृद्धि 44 % हुई । दसकीय वृद्धि 1921 – 1931 में 11 % थी जो 1931 – 41 में 14.2 % तथा 1941-1951 में 13.3 % थी।
iii. सन् 1951-2001: इस काल को स्वतंत्रता के बाद का प्रारंभिक दौर माना जाता है। इस दौरान जनसंख्या वृद्धि 660 मिलियन हुई जो 1951 के स्तर से 284 % बढ़ी। इस दौरान 1961 – 1971 के बीच दसकीय वृद्धि दर सर्वाधिक 24.8 % रही। इसके बाद दसकीय वृद्धि दर 2001 में 21.3 % हो गयी।

प्रश्न 57.
हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या विरल क्यों है ?
उत्तर :
हिमाचल प्रदेश की विरल ज़नसंख्या के कारण निम्नलिखित हैं –
i. कृषि कार्य के लिए अनुपयुक्त भूमि – हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय प्रदेश है, अतः समतल कृषि योग्य भूमि का आभाव है। यहाँ जीवन यापन के लिए कृषि नहीं हो सकती जो आदर्श जनसंख्या के लिए आवश्यक है।

ii. विषम जलवायु – अत्यधिक ऊँचाई के कारण सम्पूर्ण प्रदेश में कठोर ठण्डक पड़ती है, अतः यहाँ पर कम लोग ही रहते हैं। अनेक स्थान तो निवास के लिए पुर्णत: अनुपयुक्त है।

iii. उद्योग धंधों एवं यातायात का अभाव – धरातल की बनावट, जलवायु के विषम होने के कारण यहाँ यातायात का आभाव है, कच्चे माल की आपूर्ति में असुविधा के कारण यहाँ उद्योग धन्धों का भी विकास नहीं हुआ है।

प्रश्न 58.
पश्चिम बंगाल में जनसंख्या के उच्च घनत्व का कारण बताओ।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल भारत का सबसे अधिक जनघनत्व वाला राज्य है। यहाँ पर प्रति वर्ग कि॰मी० 904 व्यक्ति निवास करते हैं। यहाँ पर घनी जनसंख्या के निम्नलिखित कारण हैं –
i. समतल एवं उपजाऊ भूमि – पश्चिम बंगाल का अधिकांश भाग का निर्माण गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लायी गई मिट्टी से हुआ है, अत: भूमि समतल है और मिट्टी उपजाऊ हैं। यहाँ पर वर्ष में दो -तीन फसलों की कृषि होती है।
ii. पर्याप्त वर्षा एवं सिंचाई की सुविधा – यहाँ पर पर्याप्त वर्षा होती है तथा नहरों द्वारा सिंचाई की व्यवस्था है। वर्षा एवं सिंचाई की सुविधा के कारण यहाँ धान की कृषि अधिक होती है जो अधिक लोगों का पोषण करने में समर्थ है।
iii. उद्योग-धन्धों का विकास – पश्चिम बंगाल में बहुत पहले से उद्योगों का विकास हुआ है, अतः अन्य प्रदेशों से आकर लोग यहाँ बस गये हैं।
iv. यातायात की सुविधा – समतल भूभाग एवं नदियों की अधिकता के कारण यहाँ स्थल एवं जल मार्ग का विकास हुआ है, अत: उद्योगों का विकास हुआ है और यहाँ जनसंख्या अधिक हैं।
v. व्यापार का केन्द्र – कोलकाता एवं आसपास का क्षेत्र व्यापार का केन्द्र है और अत: यहाँ पर लोग व्यापार के लिए आते हैं।
vi. शिक्षा एवं संस्कृति के केन्द्र – पश्चिम बंगाल आदि काल से शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, अतः यहाँ पर शिक्षा ग्रहण करने लोग आते हैं।
vii. शरणार्थियों का आगमन – देश के विभाजन के कारण बहुत से लोग बंगलादेश से यहाँ आकर बस गये। आज भी शरणार्थियों का आगमन जारी है, अत: पश्चिम बंगाल में जनघनत्व अधिक है।

प्रश्न 59.
महत्व की दृष्टि से भारतीय सड़कों को कितने भागों में विभाजित किया गया है ?
उत्तर :
महत्व की दृष्टि से भारत की सड़कों को निम्नलिखित पाँच वर्गों में विभाजित किया गया है –
राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) : ये राजमार्ग देश की चौड़ाई एवं लम्बाई के अनुसार बिछाए गए हैं। ये राज्यों की राजधानियों, बंदरगाहों, औद्योगिक एवं खनन क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय महत्व के शहरों एवं कस्वों को जोड़ते हैं। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी केन्द्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग पर है। वर्तमान समय में देश में राष्ट्रीय राजमार्गो को संख्या 221 हैं तथा इनकी कुल लम्बाई 66,631 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग 7 (2369 कि॰मी॰) देश का सबसे लम्बा राजमार्ग है जो वाराणसी को कन्याकुमारी से जोड़ता है।

प्रांतीय राजमार्ग (State Highways) : राज्य के भीतर व्यापारिक एवं सदारी यातायात का मुख्य आधार प्रांतीय राज्यमार्ग हैं। ये राज्य के सभी कस्वों को राज्य की राजधानी, सभी जिला मुख्यालयों, राज्य के महत्वपूर्ण स्थलों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों से संलग्न क्षेत्रों के साथ जोड़ते हैं। इनके निर्माण एवं देखभाल की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है।

जिला की सड़के (District Roads) : ये सड़कें गाँवों एवं कस्वों को एक-दूसरे से तथा जिला मुख्यालय से जोड़ती हैं। इनके निर्माण एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी जिला परिषदों की होती हैं।

ग्रामीण सड़कें (Village Roads) : विभिन्न गाँवों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ ये जिला सड़को से जोड़ती है। ये प्राय: सँकरी होती है एवं भारी वाहन यातायात के अनुपयुक्त होती हैं।

सीमा सड़कें : इन सड़कों का निर्माण सीमा सड़क संगठन द्वारा किया जाता है। सीमा सड़क संगठन वोर्डों की स्थापना 1960 ई० में की गई थी। इसका उद्देश्य जंगली, पर्वतीय एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गीत देने तथा देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए सीमावर्ती इलाकों तथा दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण एवं देखरेख हैं।

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प्रश्न 60.
भारत में रेल परिवहन के महत्व का वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
रेल परिवहन का महत्व : रेल परिवहन का महत्व एवं योगदान निम्नलिखित है –
i. सवारी एवं माल के महत्वपूर्ण अनुपात का परिवहन – भारतीय रेल सड़क परिवहन के साथ कड़ी प्रतियोगिता का सामना करते हुए भी सवारी एवं सामग्री के एक महत्वपूर्ण अनुपात का परिवहन करती है।
ii. उपयोगयी वस्तुओं के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका – भारतीय रेल द्वारा कोयला, लौह-इसात, खनिज तेल, खाद्यान्न, सीमेन्ट, उर्वरक, इमारती पत्थर, धातु अयस्क आदि उपयोगी वस्तुओं के यातायात का लगभग 80 % पूरा किया जाता है।
iii. कृषि एवं उद्योग के विस्तार एवं विकास में सहायक – रेल परिवहन द्वारा कृषि एवं उद्योग के विस्तार एवं विकास में काफी सहायता मिलती है। रेलवे कच्चे माल, मशीनरी, तैयार माल, श्रमिक एवं ईंधन का परिवहन सम्बंधित स्थानों पर करके बाजार के एकीकरण में सहायता करती है, जिससे कृषि एवं उद्योग के विकास एवं विस्तार तथा व्यापारिक गतिविधियों में तीव्रता हुई है।
iv. आबादीग्रस्त क्षेत्रों में अनिवार्य वस्तुओं की तीव्रगति से पूर्ति – रेलवे सूखा तथा अन्य आपदाओं से ग्रस्त क्षेत्रों में अनिवार्य वस्तुओं की तीव्रगति से आपूर्ति करके इनके नियंत्रण में सहायक होती है।

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v. राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना – रेलवे देश के विभिन्न भागों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है। इस प्रकार यह राष्ट्रीय एकीकरण की प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करने का काम करती है।

प्रश्न 61.
सड़क परिवहन के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
सड़क परिवहन का महत्व : हमारे देश में सड़क परिवहन के महत्व को निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता है –
i. महत्वपूर्ण स्थल परिवहन – सड़क परिवहन स्थल परिवहन का मुख्य साधन है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहाँ सवारी यातायात का लगभग 83 % तथा माल यातायात का लगभग 60 % सड़क परिवहन के द्वारा ही सम्पन्न होता है।
ii. छोटी एवं मध्यम दूरी का महत्वपूर्ण साधन – यह छोटी एवं मध्यम दूरी तय करने का महत्वपूर्ण साधन है। यह विश्वसनीय एवं लचीला साधन है जो घर-घर जाकर सेवाएँ उपलब्ध कर सकता है। शीघ्र नष्ट होने वाले खाद्य पदार्थों को शीघ्र बाजार तक पहुँचाने में सड़क परिवहन सबसे महत्वपूर्ण है।
iii. सुदूरवर्ती क्षेत्रों को देश की मुख्य धारा से जोड़ना – सड़क परिवहन सुदूरवर्ती पर्वतीय, मरुस्थलीय तथा पिछड़े क्षेत्रों को देश की मुख्य धारा से जोड़ता है। इसके साथ ही साथ यह गाँवों को बाजारों, कस्वों, प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक केन्द्रों से जोड़ कर सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक गतिशीलता में वृद्धि करता है।
iv. देश की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा में सहायक – सशस्त्र सैन्य एवं पुलिस बल को समय पर यथास्थान पहुँचाने में सड़क मार्ग की ही सहायता ली जाती है। इस प्रकार यह देश की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा में सहायक हैं।
v. औद्योगिक विकास में सहायक – कच्चे माल को औद्योगिक केन्द्रों तक पहुँचाने तथा तैयार माल को बाजार तक भेजने में सड़के मुख्य भूमिका निभाकर औद्योगिक विकास में सहायक सिद्ध होती है।
vi. बेरोजगारी के निवारण में सहायक – श्रम की गतिशीलता में बृद्धि करके सड़के बेरोजगारी के निवारण में सहायक सिद्ध होती हैं । सड़क मार्ग से श्रमिक रोजगार के अवसर वाले स्थानों पर शीघ्र पहुँचकर रोजगार प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी बेरोजगारी की समस्या हल होती है।

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प्रश्न 62.
भारत की आंतरिक जल परिवहन एवं समुद्री जल परिवहन का विवरण दीजिए।
उत्तर :
आन्तरिक जल परिवहन : भारत की आतरिक जल परिवहन अवस्था 14500 कि॰मी॰ लम्बी है। यहाँ मुख्य नदियों की 3700 कि॰मी॰ लम्बाई में यांत्रिक जलयानों का संचालन हो सकता है। परन्तु 2000 कि॰मी॰ का ही प्रयोग होता है। भारत की कुल नहर लम्बाई ( 4500 कि॰मी०) का 900 कि॰मी॰ ही नौका संचालन के योग्य है, परन्तु मात्र 300 कि०मी० का ही उपयोग होता है । इस प्रकार आंतरिक जल परिवहन का देश के कुल परिवहन में मात्र 0: 15 प्रतिशत का योगदान है। भारत में आंतरिक जल परिवहन के विकास के लिए केन्द्रीय अन्तःदेशीय जल परिवहन बोर्ड की स्थापना नई दिल्ली में की गई है।
प्रमुख आंतरिक जलमार्ग –
i. एन डब्लु – 1 : इलाहाबाद से हल्दिया तक 1620 कि॰मी० लम्बी गंगा नदी प्रणाली राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या – 1 ।
ii. एन डब्लु – 2 : सदियों से धुबरी तक 891 कि॰मी० लम्बी बहमपतुत्र नदी राष्ट्रीय जल्मार्ग संख्या – 2
iii. एन डब्लु – 3 : पश्चिम तट पर केरल में (नहरों से होकर) इसकी कुल लम्बाई 168 कि०मी०। इसे जलमार्ग संख्या 3 घोषित किया गया है।

समुद्री जल परिवहन : समुद्री जल मार्य की दृष्टि से भारत की स्थिति अनुकूल है। देश का लगभग 99 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग से होता है। विकासशील देशों में भारत के पास व्यापारिक जहाजों का सबसे बड़ा बेड़ा है तथा व्यापारिक जहाजरानी बेड़े की दृष्टि से विश्व में 17 वाँ स्थान है। भारतीय जलयान विश्व के सभी समुद्री मार्गों पर चलते है। देश में लगभग 140 जहाजरानी कम्पनियाँ हैं जिनमें से दो सार्वजनिक क्षेत्र में है। भारतीय जहाज रानी निगम देश की सबसे महत्वपूर्ण जहाजी इकाई है जिसके पास लगभग 79 जलपोतों का बेड़ा है। भारत के 7516 कि०मी० लम्बे समुद्र तट पर 12 बड़े एवं 187 छोटे व मझोले बन्दरगाह हैं। बड़े बन्दरगाहों के प्रबन्ध एवं विकास की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है। जबकि अन्य बन्दरगाहों का प्रबन्धन संबद्ध राज्य सरकार करती है।

प्रश्न 63.
भारत में प्रचलित संचार व्यवस्था का विवरण दीजिए।
उत्तर :
संचार द्वारा संदेश तथा विचार एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाए जाते हैं। आधुनिक विश्व में संचार तकनीक के विकास के बिना अपेक्षित आर्थिक विकास को प्राप्त करना असम्भव है। संचार व्यवस्था के अन्तर्गत डाक, दूर संचार, रेडियो प्रसारण, टेलीफोन, टेलीविजन, सेल फोन, फैक्स तथा इंटरनेट सेवाओं को सम्मिलित किया जा सकता है। संचार तकनीक के विकास से समय और स्थान की सभी बाधाएँ दूर हो गयी हो तथा पूरा संसार एक वैश्विक ग्राम में बदल गया है।

वर्तमान समय में भारत विश्व के बड़े दूर संचार तंत्रों का संचालन करने वाले देशों में से एक है। परम्परागत दूर संचार के माध्यमों जैसे डाक सेवा, कुरियर सेवा, रेडियो प्रसारण, टेलीफोन का महत्व तो सार्वजनिक दूर संचार के लिए ही है परन्तु व्यक्तिगत दूर संचार के माध्यम के रूप में सेलफोन तथा इंटरनेट का प्रयोग बहुत अधिक बढ़ गया है। ऐसा नहीं है कि इनका प्रयोग सार्वाधिक दूर संचार के लिए नहीं किया जाता है।

भारत में टेलीग्राम और टेलीफोन आविष्कार के तुरन्त बाद दूर संचार आरम्भ हो गई थी। पहली टेलीग्राफ 1851 ई० में तथा टेलीफोन सेवा 1881 ई० में कोलकाता में आरम्भ हुई। स्वतन्त्रता के समय भारत में टेलीफोन एक्सचेंज की संख्या 300 थी जिनकी संख्या सन् 2006 तक 37903 हो गयी। 31 मार्च 2006 तक भारत में दूर संचार नेटवर्क के अन्तर्गत 14.20 करोड़ टेलीफोन कनेक्शन तथा 23.40 लाख सार्वजनिक टेलिफोन थे। उस समय तक देश में सेलफोन उपभोक्ताओं की संख्या 6.92 करोड़ थी जिसमें निस्तर वृद्धि होती ही जा रही है।

प्रश्न 64.
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बन्दरगाह का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बन्दरगाह :
i. मुम्बई बंदरगाह – सालसट द्वीप पर स्थित मुम्बई बन्दरगाह भारत का सबसे बड़ा बन्दरगाह है। भारत में सभी बन्दरगाहों से होने वाले कुल व्यापार का 20 % से भी अधिक व्यापार इसी बन्दरगाह से होता है। इसका पोताश्रय प्राकृतिक है।
ii. न्हावाशेवा या न्यू मुम्बई बन्दरगाह – मुम्बई के निकट ही न्हावाशेवा बन्दरगाह की स्थापना की गयी है। इसे जवाहरलाल नेहरू पत्तन के नाम से जाना जाता है। यह भारत का आधुनिक बन्दरगाह है, यहाँ कम्यूटर नियंत्रित तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
iii. काण्डला बन्दरगाह – देश विभाजन के बाद करांची बन्दरगाह के पाकिस्तान में चले जाने के कारण इस बंदरगाह का विकास किया गया है। यह एक ज्वारी बन्दरगाह है तथा इसका पोताश्रय प्राकृतिक है। यह एक नि:शुल्क बन्दरगा है।
iv. मर्मुगांव – ग्रीष्म तट पर स्थित यह पश्चिमी तट का प्रमुख बंदरगाह है। इसका पोताश्रय प्राकृतिक है। इस बंदरगाह से आयात की तुलना में निर्यात अधिक होता है।
v. न्यू मैंगलोर – पश्चिमी तट पर स्थित यह कर्नाटक का प्रमुख बंदरगाह है। इस बंदरगाह से लौह-अयस्क के निर्यात की सुविधा विशेष रूप से उपलब्ध कराई गयी है।
vi. कोचीन – यह केरल तट का मुख्य प्राकृतिक बंदरगाह है । पालघाट दर्रे से होकर बनाए गए रेलमार्ग द्वारा यह दक्षिण भारत के भितरी भागों से जुड़ा हुआ है।

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प्रश्न 65.
भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बन्दरगाह का संक्षिप्त वर्णन करें ।
उत्तर :
पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह –
कोलकाता – हुगली नदी के बाएं तट मुहाने से 129 कि०मी० दूर पर स्थित यह एक नदी बंदरगाह है। यह भारत का ही नहीं बल्कि एशिया का प्रमुख बंदरगाह रहा है। हुगली नदी में अवसादों के जमाव के कारण 64 कि॰मी॰ दूर खुली खाड़ी में डायमण्ड पोताश्रय का निर्माण किया गया है। यहाँ से विविध वस्तुओं का आयात-निर्यात होता है।
हल्दिया – इसका निर्माण हुगली नदी के ठीक मुहाने पर कोलकाता बंदरगाह के सहायक बंदरगाह के रूप में किया गया है। बड़े जलयान जो कोलकाता तक नहीं पहुँच पाते, वे यहीं आते हैं।
चेत्रई – यह पूर्वी तट का सबसे पुराना एवं कृत्रिम बंदरगाह है।
विशाखापत्तनम – यह देश का सबसे गहरा बंदरगाह है। इसका पोताश्रय प्राकृतिक है। डालफिननोज नामक पहाड़ी भाग के उभार के फलस्वरूप इसका पोताश्रय एक सुरक्षित पोताश्रय है।
पाराद्वीप – उड़ीसा तट पर स्थित यह एक कृत्रिम बंदरगाह है।
तूतीकोरिन – यह मन्नार की खाड़ी में स्थित है। जल की गहराई अधिक होने से यहाँ बड़े जलयान सरलता से आवागमन करते हैं।

प्रश्न 66.
परिवहन व्यवस्था में सड़क मार्गों के लाभ लिखिए।
अथवा
सड़क परिवहनों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
सड़क-मार्गों के लाभ – सड़क से हमें निम्नलिखित लाभ होते हैं-

  1. सड़को द्वारा कृषि उत्पादों की बिक्री के स्थाई बाजार उपलब्ध होने लगे और वस्तुओं की कीमते बड़े-बड़े क्षेत्रों में एकसमान होने लगी।
  2. सड़कों के विकास से औद्योगिक विकास को बड़ी सहायता मिलती है क्योंकि सड़कों द्वारा उद्योगों के लिए कच्चे तथा निर्मित माल का परिवहन सुगम हो जाता है।
  3. सामान तथा यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सड़कों द्वारा आसानी से पहुँचाया जा सकता है।
  4. छोटी दूरी के लिए सड़क यातायात अत्यन्त सुविधाजनक है।
  5. सड़क यातायात में समान को बार-बार उतारना तथा चढ़ाना नहीं पड़ता।
  6. सड़क यातायात द्वारा सामान को उत्पादक के द्वार से उपभोक्ता के द्वार तक प्रहँचाया जा सकता है, जो रेलों द्वारा सम्भव नहीं है।
  7. सड़क दुर्गम पहाड़ी तथा बृहद् क्षेत्रों में भी बनाई जा सकती है। ऐसे क्षेत्रों में रेलों और जलमार्गों का पहुँचाना लगभग असम्भव होता है।

प्रश्न 67.
वायु परिवहन की क्या विशेषता है ?
अथवा
वायु परिवहन के क्या लाभ हैं ?
उत्तर :
वायु परिवहन की विशेषताएँ –

  1. यह परिवहन का सबसे तीव्र तथा सबसे महँगा साधन है।
  2. इसमें भारी तथा सस्ती वस्तुएँ नहीं ढोयी जा सकती।
  3. यह हल्की, कीमती तथा जल्दी खराब होने वाली वस्तुयों को ढोने का सबसे अच्छा साधन है।
  4. प्राकृतिक विपदाओं में फँसे हुए लोगों को दवाइयाँ, भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाने के लिए वायुयानों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है।
  5. युद्ध में वायु परिवहन किसी भी देश की सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है।
  6. पहाड़ी इलाकों में यह परिवहन बहुल लाभकारी है क्योंकि वहाँ पर रेल व सड़कें नहीं बनाई जा सकती।

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प्रश्न 68.
वायु परिवहन के क्या दोष हैं ?
उत्तर :
वायु परिवहन के दोष –

  1. यह परिवहन का सबसे महँगा साधन है। अत: इसका लाभ केवल धनी लोग ही उठा पाते हैं।
  2. वायु परिवहन में सुरक्षा सम्बंधी कई समस्याएँ सामने आती है।
  3. खराब मौसम में वायु-सेवा उपलब्ध नहीं होती।
  4. विभिन्न प्रकार की बिमारियों एवं मच्छर व कीड़े-मकोड़े अनजाने में ही वायुयानो द्वारा एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुँच जाते हैं।
  5. वायुयानी की दुर्घटनाएं एवं अपहरण जैसी समस्याएँ कई बार भयकर रूप धारण कर लेती है।

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प्रश्न 69.
पाइप लाइन परिवहन के चार गुण और चार अवगुण लिखिए।
उत्तर :
पाइप लाइन परिवहन के गुण –

  1. पाइपलाइनों को कठिन, ऊबड़-खाबड़ भू-भागों तथा पानी के नीचे भी विछाया जा सकता है।
  2. प्रारम्भ में इसके बिछाने में अधिक धन खर्च होता है, परन्तु बाद में इन्हें चालू रखने तथा इनके रख-रखाव में कम खर्चा होता है।
  3. पाइपलाइनें पदार्थों की निरंतर आपूर्ति निश्चित करती है।
  4. इनके द्वारा परिवहन में न तो समय नष्ट होता है और न ही किसी प्रकार की बर्बादी होती है।
  5. इसमें बहुत कम ऊर्जा खर्च होती है।
  6. यह परिवहन का तीव्र, सस्ता, सक्षम तथा पर्यावरण हितैषी है।

पाइप लाइन परिवहन के दोष –

  1. पाइपलाइनों में कई कोच नहीं होती।
  2. एक बार बनाने के बाद इसकी क्षमता को न तो घटाया जा सकता और न ही बढ़ाया जा सकता है।
  3. कुछ इलकों में इनकी सुरक्षा की व्यवस्था करना कठिन है।
  4. पाइपलाइनों में रिसाव का पता लगाना भी एक बड़ी समस्या है।
  5. कहीं पर पाइपलाइनों के फट जाने से उसकी मरम्मत करना कठिन है।

प्रश्न 70.
पाइप लाइन तरल पदार्थों एवं गैसों के परिवहन का सर्वोत्तम साधन है – व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
पाइप लाइन : भारत के परिवहन मानचित्र पर पाइपलाइन एक नया परिवहन का साधन है। पहले शहरों व उद्योगों में पानी पहुँचाने के लिए पाइपलाइन का इस्तेमाल होता था। आज इसका इस्तेमाल कच्चा तेल, पेट्रोल उत्पाद तथा तेल से प्राप्त प्राकृतिक तथा गैस क्षेत्र से उपलब्ध गैस शोधनशालाओं, उर्वकर कारखानों व बड़े ताप विद्युत गृहों तक पहुँचाने में किया जाता है। गैस पदार्थों को तरल अवस्था में परिवर्तित कर पाइपलाइनों द्वारा ले जाया जाता है। सुदूर आंतरिक भागों में स्थित शोधनशालाएं जैसे बरौनी, मधुरा, पानीपत तथा गैस पर आधारित उवर्रक कारखानों की स्थापना पाइपलाइनों के जाल की वजह से ही संभव हो गई है। परिवहन के लिए पाइपलाइनों को बिछाने में समय यद्यपि अधिक मात्रा में धन को खर्च करना पड़ता है तथापि उसके पश्चात इसके रख-रखाव में बहुत कम लागत वहन करना पड़ता है।

प्रश्न 71.
सड़क परिवहन, परिवहन का एक सर्वोत्तम साधन है – व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
स्थलीय यातायात के साधनों में सड़क-मार्ग सबसे पुराना तथा सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला साधन है। प्राचीन काल में पगडण्डिया एवं कच्ची सड़कों का प्रयोग किया जाता था। इन मार्गों पर मनुष्य तथा पशुओं द्वारा भार ढोया जाता था। पहिए के आविष्कार के बाद इन मार्गों पर बैलगाड़ी, ऊँटगाड़ी तथा घोड़ागाड़ी आदि चलने लगी। 19 वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में मोटरगाड़ी के बनने से सड़कों के निर्माण में एक नया युग शुरू हुआ। आज विश्व के सभी भागों में सड़कों का निर्माण तथा प्रयोग किया जा रहा है।

प्रश्न 72.
भारत के आर्थिक विकास में सड़कों की भूमिका का वर्णन किजिए। अथवा, परिवहन का महत्व समझाइए।
उत्तर :
आधुनिक युग के आर्थिक विकास में परिवहन में साधनों की भूमिका का विवरण निम्नांकित है –
स्थान उपयोगिता का सृजन (Creation of place validity) : वस्तुओं को उत्पादन स्थल से उपभोक्ता क्षेत्र तक पहुँचाने का काम यातायात के साधनों द्वारा किया जाता है। उत्पन्न मालों को ग्राहकों तक पहुँचाना, उत्पादन व्यवस्था का मुख्य कार्य है। पहले एक स्थान की उत्पादित वस्तु अधिक दूरी तक नहीं पहुँच पाती थी, किन्तु इस समय यातायात एवं परिवहन के तीवगामी साधनों के विकास के कारण एक जगह की उत्पादित वस्तु बहुत दूर-दूर तक बड़ी आसानी से पहुँच जाती है।

विशिष्टीकरण में सहायक (Helpful in specialization) : परिवहन के साधनों के विकास के साथ-साथ श्रम एवं पूँजी के उपभोग में भी वृद्धि हुई है। पहले एक स्थान की वस्तुएं दूसरे स्थान तक बहुत कम मात्रा में पहुँच पाती थी। आजकल एक स्थान की उत्पादित वस्तुएं सर्व सुलभ होती है। जिनका उत्पादन सरलतापूर्वक और बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। अरिरिक्त वस्तुओं को उन भागों में भेज दिया जाता है जहाँ इसका उत्पादन कम होता है।

बड़े पैमाने पर उत्पादन (Large production) : यातायात के साधनों का विकास बड़े पैमानें पर उत्पादन के लिए उत्तरदायी है। आज विश्व के विभिन्न भागों में उत्पादित कच्चे मालों का औद्योगिक संस्थानों द्वारा सदुपयोग हो रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में क्रान्तिकारी विकास का मूल कारण यातायात का विकास है और इसके परिणामस्वरूप आर्थिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्पादन को बल मिला है।

प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग (Utilisation of Natural Resources) : प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए यातायात के साधनों का विकास जरूरी होता है। ये संसाधन सर्वत्र समान रूप से नहीं पाए जाते हैं। जैसे चाय और रबड़ का उत्पादन कुछ विशिष्ट प्रदेशों में ही होता है किन्तु इसका व्यापार पूरे विश्व में हो रहा है । यातायात के साधनों के विकास के अभाव में इस प्राकृतिक सम्पदा का उपयोग नहीं हो पाता है।

मूल्यों में समानता और स्थिरीकरण (Stabilisation and Equalisation of Price) : आज यातायात के साधनों के विकास के कारण लम्बी दूरियों को कम से कम समय में पूरा किया जा सकता है। अधिकांश वस्तुएँ आज अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में सुगमतापूर्वक पहुँच रही हैं। इस क्षेत्र में जहाँ एक प्रतियोगिता की प्रवृत्ति पनप रही है, वहीं दूसरी ओर मूल्य में स्थिरता और समानता बनाए रखने में सफलता मिली है।

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प्रश्न 73.
पूर्वी भारत में लौह इस्पात उद्योग की स्थापना क्यों हुई है ?
उत्तर :
भारत के पूर्वी भाग में इस्पात उद्योग की स्थापना के कारण – भारत के पूर्वी भाग में पश्चिम बंगाल में दुर्गापुर एवं कुल्टी-वर्नकर तथा झारखण्ड के बोकारों तथा उड़ीसा के राउकेला में लौह स्पात उद्योग की स्थापना के प्रमुख कारण कारण है।
1. लौह अयस्क की सुविधा – लौह अयस्क झारखण्ड के सिंहभूम जिलें तथा उड़ीसा के मयूरभंज एवं क्योझार की खानों से प्राप्त होता है।
2. कोयला की सुविधा कोयला रानीगंज, झरिया तथा बोकारो की खानों से प्राप्त होता है, जो गाड़ियाँ झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल से कोयला राउरकेला को ले जाती है। वही लौह अयस्क दुर्गापुर तथा कुल्टी वर्नपुर के लिए लाती है। दुर्गापुर, जमशेदपुर तथा बोकारो कोयला क्षेत्र में ही पड़ते है। अतः इन कारखानों को कोयला प्राप्ति की सुविधा है।
3. अन्य कच्चे मालो की सुविधा – कोयला और लौह अयस्क के अतिरिक्त चूना पत्थर गंगापुर, वीरमित्रापुर तथा हाथी बाड़ी से , मैगनीज, डोलोमाइट उड़ीसा के वीरमित्रापुर क्षेत्रों से तथा पास के क्षेत्रों से ताप प्रतिरोधक इटे मिलती हैं। इस प्रकार अन्य खनिज इस क्षेत्र में ही मिलते हैं।
4. जल की प्राप्ति – पूर्वी भाग में अनेक छोटी-छोटी नदियाँ है। अत : दुर्गापुर कारखाने को जल दुर्गापुर बैरेंज से, राउरकेला को बहाणी नदी में जल मिल जाता है।
5. सस्ते श्रमिक – घनी जनसंख्या के कारण इस क्षेत्र में मजदूर आसानी से मिल जाते हैं।
6. पठारी भाग – भारत के पूर्वी भाग में छोटा नागपुर के इस क्षेत्र की भूमि पठारी है, जो कृषि के अनुपयुक्त है। अंतः उद्योगों की स्थापना के लिए पर्याप्त अनुपजाऊ भूमि है।
7. कलकत्ता बन्दरगाह की सुविधा – इस क्षेत्र में कलकत्ता बन्दरगाह है। जहाँ से मशीनों को मगाने एवं माल को विदेशों में भेजने में सुविधा होती है।
8. विस्तृत बाजार – यह क्षेत्र घनी जनसंख्या का क्षेत्र हैं, अतः लौह इसात का विस्तृत क्षेत्र है।

प्रश्न 74.
पश्चिमी भारत में सूती वस्त्रोद्योग की स्थापना क्यों हुई हैं?
उत्तर :
पश्चिमी भारत में सूती वस्त्रोद्योग की स्थापना के निम्नलिखित कारण है –
(a) कच्चे माला की सुविधा (Facility of raw Material) : सूती वस्त के लिए अर्द्ध जलवायु चाहिए जिससे धागे जल्दी-जल्दी न दूटें और महीन तथा अधिक लम्बे रहों समुद्र के किनारें और द्र० पथ्विमी समुद्री हवाओं के प्रवाह क्षेत्र में स्थित के कारण यहाँ वर्ष भर वायुमण्डल में नमी रहती है। यहाँ की मिट्टी काली है जिसमें कपास की कृषि होती है।
(b) शक्ति के साधन की सुविधा (Power) इस उद्योग की स्थापना के प्रारम्भिक काल में शक्ति के साधनों के अभाव जरूर रहा, किन्तु कोयले की प्राप्ति (सन् 1915 से पहले) इसें द- अफ्रिका से सुविधापूर्वक हो जाती थी। अब तो यहाँ की मिलो के लिए पश्चिमी के पर्वतीय क्षेत्र से जल विद्युत की प्राप्ति होती है।
(c) सस्ते मजदूर (Cheap Labour) बम्बई के निकटवर्ती क्षेत्रों से मजदूर कोकण, सतारा तथा शोलापुर के जिलों से आते है। मध्यपदेश से भी मजदूर यहाँ काम के लिये आते हैं। किन्तु यहाँ जीवत स्तर ऊँचा होने के कारण पाश्चिमिक अधिक पड़ता हैं।
(d) बन्दरगाह की सुविधा (Port Facility) सूती वस्त्र – उद्योग की मशीनों का निर्माण विदेशों में ही होता था, अतः उन्हे आयात करने के लिए भारत का सबसे उत्तम बन्दरगाह इस उद्योग को मिला। बम्बई यूरोप से भारत आनेवाले जहाजों के लिए सबसे पहला बन्दरगाह था।
(e) विस्तृत बाजार एवं यातायात के साधनों की सुविधा (Market) : बम्बई के इस उद्योग के लिए भारत को विशाल बाजार की सुविधा। प्राप्त थी। देश के सम्पूर्ण भागों से रेलमार्ग एवं सड़क मार्ग द्वारा सम्बन्धित होने के कारण यह निर्मित माल के पूर्ण विस्तार भी सक्षम था। आज की बम्बई की मिलों में बने कपड़े भारत के प्रत्येक्र भाग में प्रयूक्त होते हैं।

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प्रश्न 75.
भारत के चाय उत्पादन में विभित्र राज्यों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
चाय उत्पादन के प्रमुख दो क्षेत्र में – (a) उत्तरी पूर्वी और पूर्वी भारत (b) दक्षिणी भारत।
(a) उत्तरी पूर्वी एवं पूर्वी भारत : इस क्षेत्र के अंतर्गत असम, पश्चिम बंगाल, सिक्किम एवं त्रिपुरा आते है। असम एवं पश्चिम बंगाल कुल चाय उत्पाद का 3 / 4 भाग चाय उत्पन्न करते हैं। असम-असम चाय का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है जो देश की कुल चाय उत्पादन की आधी चाय अकेले उत्पन्न करता है। असम में चाय उत्पादन को दो प्रमुख क्षेत्र है – (क) असम घाटी (ख) कछार असम घाटी तथा त्रह्मपुत्र घाटी असम की कुल चाय की 90 % चाय उत्पन्न करते हैं। प्रमुख चाय उत्पादन क्षेत्र में ऊपरी बह्मपुत्र घाटी के जिले लखीमपुर, शिवसागर और दरंग। निचली ब्रह्मपुत्र घाटी के चाय उत्पादक जिले में, बवगंव, कामरूप और ग्वाल पाढ़ा। कछार में सूरमा घाटी प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ चाय उत्पादन की प्रमुख सुविधायें हैं – अधिक वर्षा, उच्च तापक्रम एवं उपयुक्त मिट्टी। असम में चाय उत्पादन वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति तथा रोजगार का आधार हैं।

पश्चिम बंगाल – यह चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक प्रान्त है जो कुल चाय का 1 / g भाग चाय उत्पन्न करता है। पश्चिम बंगाल के चाय उत्पादक जिले हैं जलपाईगुडी, कूचबिहार एवं दार्जिलिंग। जलवाईगुड़ी एवं कूचबिहार में चाय का प्रति एकड़ उत्पादन अधिक है, पर गुणवत्ता के दृष्टिकोण से यहाँ की चाय उच्चकोटि की हैं। दार्जिलिंग की चाय अपने स्वाद के कारण विश्च विख्यात हैं।

(b) दक्षिण भारत – दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक देश के कुल उत्पादन की / 4 भाग चाय उत्पादन करते हैं। तमिलनाडु -यह भारत का तीसरा बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ पर नीलगिरी और अनयमलायी के पहाड़ी ढालों पर चाय की कृषि होती है।
केरल – यहाँ पर मध्य त्रावनकोर एवं कानन देवान्स से चाय की खेती होती है।
कर्नाटक – यहाँ पर मैसूर एवं कोडागू जिलों में चाय की खेती होती है।

(c) अन्य – उपर्युक्त राज्यों के अतिरिक्त हिमांचल प्रदेश के कांगडा और मंडी, उत्तरांचल के देहरादून, झारखण्ड के राँची, सिक्किम एवं त्रिपुरा में चाय की कृषि होती है।

प्रश्न 76.
भारत के पूर्वी तथा मध्य भाग में लौह इस्पात उद्योग के केन्द्रीकरण के कौन से कारक उत्तरदायी हैं?
उत्तर :
भारत के पूर्वी भाग में इस्पात उद्योग की स्थापना के कारम – भारत के पूर्वी भाग में पश्चिम बंगाल में दुर्गापुर एवं कुल्टी-वर्नपुर तथा झारखण्ड के बोकारों तथा उड़ीसा के राउकेला में लौह स्पात उद्योग की स्थापना के प्रमुख कारण है।
i. लौह अयस्क की सुविधा -लौह अयस्क झारखण्ड के सिंहभूम जिलें तथा उड़ीसा के मयूरभंज एवं क्योझार की खानों से प्राप्त होता है।
ii. कोयला की सुविधा – कोयला रानीगंज, झरिया तथा बोकारो की खानों से प्राप्त होता हैं, जो गाड़ियाँ झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल से कोयला राउरकेला को लें जाती है। वही लौह अयस्क टुर्गापुर तथा कुल्टी वर्नपुर के लिए लाती है, दुर्गापुर, जनशेंदपुर तथा बोकारो कोयला क्षेत्र में ही पड़ते हैं। अंत इन कारखानों को कोयला प्राप्ति की सुविधा है,
iii. अन्य कच्चे मालों की सुविधा – कोयला और लौह अयस्क के अतिरिक्त चूना पत्थर गंगापुर, वीरमित्रापुर तथा हाथी बाड़ी से, मैगनीज, डोलोमाइट उड़ीसा के वीरमित्रापुर क्षेत्रों से तथा पास के क्षेत्रों से तापप्रतिरोधक इटे मिलती हैं। इस प्रकार अन्य खनिज इस क्षेत्र में ही मिलते हैं।
iv. जल की प्राप्ती – पूर्वी भाग में अनेक छोटी-छोटी नदियाँ हैं। अंत: दुर्गापुर कारखाने को जल दुर्गापुर बैरेंज सें, राउरकेंला को बाहाणी नदी में जल मिल जाता है।
v. सस्तें श्रमिक – घनी जनसंख्या के कारण इस क्षेत्र में मजदूर आसानी से मिल जाते हैं।
vi. पठारी भाग – भारत के पूर्वी भाग में छोटा नागपुर के इस क्षेत्र की भूमि पठारी है, जो कृषि के अनुपयुक्त है। अत: उद्योगो की स्थापना के लिए पर्याप्त अनुपजाऊ भूमि है।
vii. कलकत्ता बन्दरगाह की सुविधा – इस क्षेत्र में कलकत्ता बन्दरगाह है, जहाँ से मशीनों को मंगाने एवं माल को विदेशों में भेजने में सुविधा होती है।
viii. विस्तृत बाजार – यह क्षेत्र घणी जनसंख्या का क्षेत्र हैं, अतः लौह इस्पात का विस्तृत क्षेत्र है।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 5B भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

Well structured WBBSE 10 Geography MCQ Questions Chapter 5B भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति can serve as a valuable review tool before exams.

भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
गेहूँ एक ……….. है।
(a) रबी फसल
(b) खरीफ फसल
(c) जायद फसल
(d) पेय फसल
उत्तर :
(a) रबी फसल

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प्रश्न 2.
उत्तर में स्थित श्रीनगर से दक्षिण में स्थित कन्याकुमारी को सबसे तेज रफ्तार से जोड़ने वाली प्रस्तावित सड़क मार्ग को कहा जाता है –
(a) पूरब-पश्चिम कोरिडोर
(b) स्वर्णिम चतुर्भुज
(c) उत्तर-दक्षिण कोरिडोर
(d) उत्तर-मध्य कोरिडोर
उत्तर :
(c) उत्तर-दक्षिण कोरिडोर

प्रश्न 3.
गेहूँ एक प्रकार का फसल है –
(a) रबी
(b) जायद
(c) खरीफ
उत्तर :
(a) रबी।

प्रश्न 4.
एक विधि जिससे भारत में भूमि संरक्षण होता है –
(क) सिंचाई
(ख) झूम खेती
(ग) फसल चक्र
(d) क्रांति
उत्तर :
(ग) फसल चक्र

प्रश्न 5.
भारत में ज्वार उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम राज्य है –
(क) महाराष्ट्र
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) बिहार
(घ) पश्चिम बंगाल
उत्तर :
(क) महाराप्ट्र

प्रश्न 6.
भारत की ‘सिलिकन वैली’ कहा जाता है –
(क) चेन्नई
(ख) बंगलौर
(ग) कोलकाता
उत्तर :
(ख) बंगलौर

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प्रश्न 7.
भारत की सबसे लंबी राष्ट्रीय सड़क है –
(क) 1 ने. राष्ट्रीय सड़क
(ख) 2 न. राष्ट्रीय सड़क
(ग) 6 नं. राष्ट्रीय सड़क
(घ) चरागाह
उत्तर :
(घ) 7 न. राष्ट्रीय सड़क

प्रश्न 8.
भारत में कुल कृषियोग्य भूमि का प्रतिशत है –
(a) 60.6%
(b) 70.5%
(c) 90.6%
(d) 50.6%
उत्तर :
(a) 60.6%

प्रश्न 9.
भारत की लगभग कितना प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है ?
(a) 75%
(b) 52%
(c) 65%
(d) 80%
उत्तर :
(b) 52%

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प्रश्न 10.
रोपने और काटने के आधार पर फसल को कितने भागों में बाँटा गया है ?
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
उत्तर :
(c) तीन।

प्रश्न 11.
सबसे प्राचीन सिंचाई का साधन है –
(a) नलकूप
(b) तालाब
(c) नहर
(d) कुआँ
उत्तर :
(d) कुओं।

प्रश्न 12.
दक्षिण भारत के कर्नाटक में मौसम के आधार पर चावल का एक प्रकार है –
(a) अमन
(b) औस
(c) हैं
(d) बोरों
उत्तर :
(c) हैं।

प्रश्न 13.
जूट एक रेशेदार फसल है –
(a) सफेद
(b) सुनहले
(c) काली
(d) पीली
उत्तर :
(b) सुनहले।

प्रश्न 14.
भारतीय कहवा को कहा जाता है –
(a) कड़वा
(b) मधुर
(c) काली
(d) रेशेंदार
उत्तर :
(b) मधुर।

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प्रश्न 15.
एशिया की मानसूनी जलवायु वाले क्षेत्रों में किस प्रकार की कृषि की जाती है ?
(a) वाणिज्यिक कृषि
(b) जीवन निर्वाह कृषि
(c) रोपन कृषि
(d) मिश्रित कृषि
उत्तर :
(b) जीवन निर्वाह कृषि।

प्रश्न 16.
स्थानान्तरणशील कृषि को भारत में किस नाम से पुकारा जाता है ?
(a) चेऩा
(b) रोका
(c) मिल्पा
(d) झूम
उत्तर :
(d) झूम।

प्रश्न 17.
चाय एक प्रकार का फसल है –
(a) खाद्यान
(b) खरीफ
(c) पेय
(d) रबी
उत्तर :
(c) पेय।

प्रश्न 18.
प्रत्यक्ष रूप से भारत का नगदी फसल है –
(a) कपास
(b) जूट
(c) चाय
(d) गना
उत्तर :
(d) ग़न्ना।

प्रश्न 19.
डेबरी फार्मिग किससे सम्बन्थित है ?
(a) उद्यान कृषि
(b) दुग्ध से
(c) शुष्क कृषि
(d) सोवखोज
उत्तर :
(b) दुग्ध से।

प्रश्न 20.
चावल के उत्पादन से भारत का कौन राज्य प्रथम स्थान रखता है ?
(a) उत्तर प्रदेश
(b) पंजाब
(c) पश्चिम बंगाल
(d) बिहार
उत्तर :
(c) पश्चिम बगाल।

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प्रश्न 21.
भारत के किस अंचल को धान की डलिया कहा जाता है ?
(a) छत्तिसगढ़
(b) वर्द्धमान
(c) पंजाब
(d) मुंगेर
उत्तर :
(a) छत्तिसगढ़।

प्रश्न 22.
भारत का चावल अनुसंधानशाला केन्द्र कहाँ स्थापित है ?
(a) कोयम्बदूर में
(b) पूसा में
(c) कटक में
(d) बैकरपुर में
उत्तर :
(c) कटक।

प्रश्न 23.
रागी को किस अनाज के अन्तर्गत शामिल किया गया है ?
(a) मोटे
(b) पतले
(c) सुनहले
(d) श्वेत
उत्तर :
(a) मोटे।

प्रश्न 24.
भारत में पैदा होने वाले प्रमुख कपास के प्रकार हैं –
(a) चार
(b) दो
(c) तीन
(d) पाँच
उत्तर :
(c) तीन।

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प्रश्न 25.
7 वीं योजना की मध्यावधि समीक्षा के दौरान हरितक्रांति का दूसरा चरण कब शुरू किया गया था ?
(a) 1970 ई० में
(b) 1980 ई० में
(c) 1977 ई० में
(d) 1987 ई० में
उत्तर :
(d) 1987 ई० में।

प्रश्न 26.
हरित क्रान्ति के अन्तर्गत किस फसल को महत्व दिया गया ?
(a) चाकल एवं मोटे अनाज
(b) गेहूँ एवं कपास
(c) गत्रा एवं चाय
(d) कहवा एवं जूट
उत्तर :
(a) चावल एवं मोटे अनाज।

प्रश्न 27.
प्राथमिक व्यवसाय का अच्छा उदाहरण है –
(a) यातायात
(b) सलाहकार
(c) कृषिकार्य
(d) लौह-इस्पात उद्योग
उत्तर :
(c) कृषिकार्य।

प्रश्न 28.
विस्तृत कृषि को आस्ट्रेलिया में पुकारा जाता है –
(a) पम्पास
(b) डाऊन्स
(c) म्रेयरीज
(d) स्टेपीज
उत्तर :
(b) डाऊन्स।

प्रश्न 29.
किस फसल को ‘खूरपे की कृषि’ कहा जाता है ?
(a) गेहूँ
(b) चाय
(c) बावल
(d) कहवा
उत्तर :
(c) चावल।

प्रश्न 30.
कहवा में पाये जाने वाले एक नशीला पेय पदार्थ है –
(a) थीन
(b) निकोटीन
(c) रेशा
(d) कैफींन
उत्तर :
(d) कैफीन।

प्रश्न 31.
भारत में गत्ना एक पौधा है –
(a) उष्ण कटिबन्धीय
(b) शोतोष्ण कटिबन्धीय
(c) शंत कटिबन्धोय
(d) मानसूनी
उत्तर :
(a) उष्ण कटिबन्धीय।

प्रश्न 32.
लम्बे रेशे वाली कपास की लम्बाई होती है –
(a) 5 मीटर से कम
(b) 5 मीटर से अधिक
(c) 3.5 मीटर से 5 मीटर तक
(d) 3.5 मीटर तक
उत्तर :
(b) 5 मीटर से अधिक।

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प्रश्न 33.
किस फसल को पालरहित (Frost Free) कहा जाता जाता है ?
(a) कपास
(b) चावल
(c) चाय
(d) गमा
उत्तर :
(a) कपास।

प्रश्न 34.
खरीफ फसल को कहा जाता है –
(a) शौतकालीन
(b) वर्षाकालीन
(c) ग्रीष्म कालौन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) वर्षाकालीन।

प्रश्न 35.
भारत में केन्द्रीय गेहूँ अनुसंधानशाला केन्द्र स्थापित है –
(a) कटक में
(b) देहरादून में
(c) झूसा, प्तनगर (नई दिल्ली) में
(d) कोयम्बदूर में
उत्तर :
(c) पूसा, पंतनगर (नई दिल्लौ)।

प्रश्न 36.
भारत में गन्ना अनुशंधानशाला केन्द्र स्थापित है –
(a) असम में
(b) साहागढ़ में
(c) लखनऊ, दिलखुश यार में
(d) कटक में
उत्तर :
(c) लखनक, दिलखुश नगर में।

प्रश्न 37.
सिंचाई का नवीनतम साधन है –
(a) कुआँ
(b) नलकूप
(c) नहर
(d) तालाब
उत्तर :
(b) नलकृष।

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प्रश्न 38.
भारत की सबसे बड़ी नहर बहुछेश्यीय परियोजना है –
(a) भाखड़ा नांगल
(b) हीराकुण्ड
(c) तुंगभद्रा
(d) फरक्का
उत्तर :
(a) भाखड़ा नांगल।

प्रश्न 39.
भारत में सिंचाई की आवश्यक भौतिक दशाएँ निम्नलिखित में से नहीं है –
(a) अनिश्चित वर्षा
(b) वर्षा का असमान वितरण
(c) मिट्टी का स्वरूप
(d) मानवोय श्रम
उत्तर :
(d) मानवीय श्रम।

प्रश्न 40.
राजस्थान में नहर स्थित है –
(a) इन्दिरा नहर
(b) भाखड़ा नागंल
(c) फरक्का नहर
(d) दमोदर नहर
उत्तर :
(a) इन्दिरा नहर।

प्रश्न 41.
तालाब सिंचाई में जल का प्रमुख आधार है –
(a) नदी
(b) वर्षा
(c) नलकूप का पानी
(d) नहर का पानी
उत्तर :
(b) वर्षा।

प्रश्न 42.
एडम नहर का मुख्य स्रोत नदी कौन है ?
(a) कोसी
(b) गण्डक
(c) दामोदर
(d) मयूराक्षी
उत्तर :
(c) दामोदर

प्रश्न 43.
कोयम्बदूर अनुसंधानशाला केन्द्र किस फसल के लिए प्रसिद्ध है ?
(a) कहवा
(b) चाय
(c) गन्ना
(d) कपास
उत्तर :
(a) कहवा।

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प्रश्न 44.
निम्नलिखित में से कौन फसल जायद फसल नहीं है ?
(a) खरबूज-तरबूज
(b) साग-सब्जी
(c) मूंग-मेथी
(d) बाय-कहवा
उत्तर :
(d) चाय-कहवा।

प्रश्न 45.
प्रति एकड़ उत्पादन के दृष्टिकोण से चावल उत्पादन में किस राज्य का स्थान प्रथम है –
(a) हरियाणा
(b) पशिचम बंगाल
(c) उत्तर प्रदेश
(d) पंजाब
उत्तर :
(d) पंजाब।

प्रश्न 46.
ब्राजील में कहवा के बगान को कहा जाता है –
(a) लैडान
(b) फजेंडा
(c) रे
(d) मिल्का
उत्तर :
(b) फजेंडा।

प्रश्न 47.
भारत में केन्द्रीय गेहूँ अनुसंधानशाला स्थित है –
(a) देहरादून में
(b) कटक में
(c) हैदराबाद में
(d) पूसा (नई दिल्ली में)
उत्तर :
(d) पूसा (नई दिल्ली में)।

प्रश्न 48.
भारत का सर्वाधिक कहवा उत्पादक राज्य है –
(a) असम
(b) कर्नाटक
(c) केरल
(d) तमिलनाडु
उत्तर :
(b) कर्नाटक।

प्रश्न 49.
कपास की कृषि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है –
(a) काली मिट्टी
(b) जलोढ़ मिट्टी
(c) बलुई मिट्टी
(d) लाल मिट्टी
उत्तर :
(a) काली मिट्टी।

प्रश्न 50.
निम्नलिखित में से कौन खाद्य-फसल नहीं है –
(a) जूट
(b) चावल
(c) गेहूँ
(d) ज्वार
उत्तर :
(a) जूट।

प्रश्न 51.
निम्नलिखित में से कौन रेशेदार फसल नहीं है ?
(a) जूट
(b) मक्का
(c) कपास
(d) सन
उत्तर :
(b) मक्का।

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प्रश्न 52.
भारत का प्रमुख खाद्य फसल है –
(a) गेहूँ
(b) ज्वार
(c) मक्का
(d) चाय
उत्तर :
(a) गेहूँ।

प्रश्न 53.
इनमें से कौन खरीफ की फसल है –
(a) गेहूँ
(b) चावल
(c) जूट
(d) मक्का
उत्तर :
(b) चावल।

प्रश्न 54.
भारत का सबसे अधिक गेहूँ उत्पादक राज्य है –
(a) उत्तर प्रदेश
(b) आन्त्र प्रदेश
(c) बिहार
(d) मध्य प्रदेश
उत्तर :
(a) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 55.
इनमें से कौन सबसे अधिक चावल उत्पादक राज्य है ?
(a) पश्चिम बंगाल
(b) असम
(c) तमिलनाडु
(d) आन्ध प्रदेश
उत्तर :
(a) पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 56.
आजादी के बाद भारत में कृषि योग्य भूमि में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है ?
(a) 10%
(b) 20%
(c) 25%
(d) 30%
उत्तर :
(b) 20%

प्रश्न 57.
भारत में कुल कृषि योग्य भूमि के कितने प्रतिशत भाग पर खाद्यात्र का उत्पादन किया जाता है ?
(a) 50%
(b) 60%
(c) 65%
(d) 70%
उत्तर :
(c) 65%

प्रश्न 58.
देश की कितने प्रतिशत जनसंख्या का मुख्य उद्दम कृषि है ?
(a) 50%
(b) 60%
(c) 65%
(d) 70%
उत्तर :
(c) 65%

प्रश्न 59.
भारत के कुल क्षेत्रफल का कितना भूमि कृषि योग्य है ?
(a) 19.5 करोड़ हेक्टेयर
(b) 20 करोड़ हेक्टेयर
(c) 20.5 करोड़ हेक्टेयर
(d) 21 करोड़ हेक्टेयर
उत्तर :
(a) 19.5 करोड़ हेक्टेयर।

प्रश्न 60.
निम्न में से कौन जायद फसल है ?
(a) चाय
(b) मूँग
(c) चावल
(d) गेहूँ
उत्तर :
(b) मूँग।

प्रश्न 61.
देश की खाद्यानों के कुल उपज का कितना प्रतिशत चावल से ही प्राप्त होता है ?
(a) 43 %
(b) 44 %
(c) 45 %
(d) 46 %
उत्तर :
(a) 43 %

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प्रश्न 62.
इनमें से कौन उत्तम किस्म का बीज है ?
(a) IR – 8
(b) TN – 1
(c) IR – 20
(d) रत्ला
उत्तर :
(d) रत्मा ।

प्रश्न 63.
चावल उत्पादन में बिहार राज्य का कौन सा स्थान है ?
(a) पहला
(b) दूसरा
(c) चौथा
(d) पाँचवा
उत्तर :
(d) पाँचवा।

प्रश्न 64.
चावल के प्रति एकड़ उत्पादन किस राज्य में सबसे अधिक है ?
(a) पश्चिम बंगाल
(b) उत्तर प्रदेश
(c) पंजाब
(d) हरियाणा
उत्तर :
(c) पंजाब।

प्रश्न 65.
इनमें से किस देश को भारत गेहूँ निर्यात करता है ?
(a) बंगलादेश
(b) कनाडा
(c) आस्ट्रेलिया
(d) अजैन्टाइना
उत्तर :
(a) बंगलादेश।

प्रश्न 66.
सबसे अधिक सूखा सहन करने वाला अनाज कौन है ?
(a) ज्वार
(b) बाजरा
(c) रागी
(d) मक्का
उत्तर :
(c) रागी।

प्रश्न 67.
चाब के निर्यात में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
(a) पहला
(b) दूसरा
(c) तीसरा
(d) चौथा
उत्तर :
(c) तीसरा।

प्रश्न 68.
कहवा के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है ?
(a) चौथा
(b) तीसरा
(c) सातवाँ
(d) दूसरा
उत्तर :
(c) सातवाँ।

प्रश्न 69.
भारत विश्व का कितना प्रतिशत कहवा का उत्पादन करता है ?
(a) 2 %
(b) 4 %
(c) 3 %
(d) 5 %
उत्तर :
(b) 4 %

प्रश्न 70.
कपास का जन्म स्थान किस देश को माना जाता है ?
(a) भारत
(b) रूस
(c) बिटेन
(d) ब्राजील
उत्तर :
(a) भारत।

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प्रश्न 71.
दुर्गापुर इस्पात संयन्त्र की स्थापना हुई है –
(a) बिंटेन के सहयोग से
(b) रूस के सहयोग से
(c) जर्मनी के सहयोग से
(d) कनाडा के सहयोग से
उत्तर :
(a) ब्रिटेन के सहयोग से।

प्रश्न 72.
भारत का सबसे बड़ा इस्पात कारखाना है –
(a) बोकारो स्टील प्लाण्ट
(b) दुर्गापुर स्टील प्लाण्ट
(c) इण्डियन आयरन एण्ड स्टील क०
(d) जमशेदपुर स्टील प्लाण्ट
उत्तर :
(a) बोकारो स्टील प्लाण्ट।

प्रश्न 73.
भारत में विद्युत चालित रेल इंजन निर्माण का कारखाना है –
(a) जमशेदपुर में
(b) वारणसी में
(c) वित्तरंजन में
(d) आसनसोल में
उत्तर :
(c) चित्तरंजन में।

प्रश्न 74.
भारत का मानचेस्टर कहते हैं –
(a) अहमदाबाद को
(b) मुम्बई को
(c) कानपुर को
(d) चेन्नई को
उत्तर :
(a) अहमदाबाद को।

प्रश्न 75.
भारत की सूचना प्रौद्योगिकी राजधानी कहते हैं –
(a) मुम्बई को
(b) हैदराबाद को
(c) बंगलौर को
(d) जयपुर को
उत्तर :
(c) बंगलौर को

प्रश्न 76.
भारत में पहला पेट्रो-रसायन कारखाना खोला गया –
(a) मंगलोर में
(b) कोचीन मे
(c) हल्दिया में
(d) ट्राम्बे में
उत्तर :
(d) ट्राम्बे में।

प्रश्न 77.
निम्नलिखित में से कौन औद्योगिक अवस्थापना का एक धारण नहीं है ?
(a) बाजार
(b) जनसंख्या घनत्व
(c) पूंजी
(d) ऊर्जी
उत्तर :
(b) जनसंख्या घनत्व।

प्रश्न 78.
निम्नलिखित में से कौन सा उद्योग कृषि पर आधारित नहीं है ?
(a) सौमेन्ट
(b) सूती वस्त्र
(c) चीनी
(d) जूट
उत्तर :
(a) सीमेन्ट।

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प्रश्न 79.
निम्नलिखित में से कौन सा सूती वस्त्र उद्योग का सबसे बड़ा उत्पादक है ?
(a) कपास
(b) अभ्रक
(c) जूट
(d) मैंगनीज
उत्तर :
(a) कपास।

प्रश्न 80.
उद्योग होते हैं –
(a) मथम आर्थिक क्रिया
(b) द्वितीयक आर्थिक क्रिया
(c) तृतीय आर्थिक क्रिया
(d) चतुर्थ आर्थिक क्रिया
उत्तर :
(b) द्वितीयक आर्थिक क्रिया।

प्रश्न 81.
कागज उद्योग इनमें से किस पर आधारित है –
(a) वन आधारित
(b) कृषि आधारित
(c) खनिज आधारित
(d) पशु आधारित
उत्तर :
(a) वन आधारित।

प्रश्न 82.
पश्चिम बंगाल में पेट्रोरसायन के लिए इनमें से कौन प्रसिद्ध है ?
(a) रानीगज
(b) दुर्गापुर
(c) हल्दिया
(d) दार्जीलिंग
उत्तर :
(c) हल्दिया।

प्रश्न 83.
भारत का पहला पेट्रोरसायन उद्योग की स्थापना कहाँ हुआ था ?
(a) तारापुर में
(b) हल्दीया में
(c) ट्रम्बे में
(d) मथुरा में
उत्तर :
(c) ट्रम्बे में।

प्रश्न 84.
स्टेण्डर्ड मोटर प्रोडक्ट्स ऑफ इण्डिया लि० कहाँ स्थापित है ?
(a) चेन्नई में
(b) मुम्बई में
(c) पुणे में
(d) बंगलोर में
उत्तर :
(a) चेन्नई में।

प्रश्न 85.
कोयली प्रसिद्ध है –
(a) प्ट्रोरसाखन उद्योग के लिए
(b) सूती वस्व उद्योग के लिए
(c) लौह-इसात उद्वेग के लिए
(d) कागज उद्योग के लिए
उत्तर :
(a) पेट्रोरसायन उद्योग के लिए।

प्रश्न 86.
भारत के किस राज्य का कागज उद्योग में प्रथम स्थान है ?
(a) महाराष्ट्र
(b) मध्य प्रदेश
(c) पश्चिम बंगाल
(d) उत्तर प्रदेश
उत्तर :
(a) महाराष्ट्र।

प्रश्न 87.
कानपुर को मानचेस्टर कहा जाता है –
(a) पूर्वी भारत का
(b) पश्चिम भारत का
(c) दक्षिण भारत का
(d) उत्तर भारत का
उत्तर :
(d) उत्तर भारत का।

प्रश्न 88.
प्रोपलिन (Proplin) किस उद्योग का कच्चा माल है ?
(a) कागज उद्योग
(b) सूती वस्त्र उद्योग
(c) लौह-इस्पात उद्योग
(d) पेट्रोरसायन उद्योग
उत्तर :
(d) पेट्रोरसायन उद्योग।

प्रश्न 89.
विसाखापट्टनम प्रसिद्ध हैं –
(a) कागज उद्होग के लिए
(b) सूती वस्व उद्योग के लिए
(c) जहाज निर्माण उछ्योग के लिए
(d) ष्ट्रोरसायन उद्योग के लिए
उत्तर :
(c) जहाज निर्माण उद्योग के लिए।

प्रश्न 90.
भारत के किस राज्य में सबसे अधिक सूती वस्त्र मीलें हैं –
(a) महाराष्ट्र
(b) गुजरात
(c) उत्तर पदेश
(d) तमिलनाडु
उत्तर :
(b) गुजरात।

प्रश्न 91.
किसी उद्योग के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है –
(a) कोयला
(b) पेट्रोलियम
(c) जल शक्ति
(d) आणुविक शक्ति
उत्तर :
(a) कोयला।

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प्रश्न 92.
किसी उद्योग के विकास के लिए निम्न में कोई एक परिवहन व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है –
(a) वायु परिवहन
(b) जल परिवहन
(c) पाईप लाईन परिवहन
(d) लेमलबो परिवहन
उत्तर :
(b) जल परिवहन ।

प्रश्न 93.
कपास, जूट तथा चाब उद्योग के विकास के लिए आवश्यक है –
(a) आर्द्र जलवायु
(b) शुष्क जलवायु
(c) धुविय जलवायु
(d) उष्ण जलवायु
उत्तर :
(a) आर्द्र जलवायु।

प्रश्न 94.
पुणे, नागपुर, मुम्बई औद्योगिक क्षेत्र स्थित है –
(a) आन्भ प्रदेश में
(b) तमिलनाडु में
(c) महाराष्ट्र में
(d) उत्तर प्रदेश में
उत्तर :
(c) महाराष्ट्र में।

प्रश्न 95.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता का प्रतिशत है –
(a) 74.04
(b) 82.2
(c) 65.46
(d) 70.5
उत्तर :
(a) 74.04

प्रश्न 96.
भारत में सर्वाधिक जनघनत्व वाला राज्य है –
(a) बिहार
(b) पश्चिम बंगाल
(c) केरल
(d) उत्तर पदेश
उत्तर :
(a) बिहार।

प्रश्न 97.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में नगरीकरण का प्रतिशत है –
(a) 27.81
(b) 31.16
(c) 30
(d) 25.5
उत्तर :
(b) 31.16

प्रश्न 98.
भारत का प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या घनत्व है –
(a) 267
(b) 325
(c) 330
(d) 382
उत्तर :
(d) 382

प्रश्न 99.
2011 की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है –
(a) पश्चिम बंगाल
(b) केरल
(c) गुजरात
(d) बिहार
उत्तर :
(d) बिहार।

प्रश्न 100.
निम्नलिखित राज्यों में से किसमें जनसंख्या सर्वाधिक है ?
(a) पश्चिम बंगाल
(b) उत्तर प्रदेश
(c) केरल
(d) पंजाब
उत्तर :
(b) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 101.
निम्नलिखित में से भारत के किस राज्य में जनसंख्या घनत्व निम्नतम है ?
(a) मध्य प्रदेश
(b) अरुणाचल प्रदेश
(c) असम
(d) बिहार
उत्तर :
(b) अरुणाचल प्रदेश।

प्रश्न 102.
2011 की जनगणना के अंनुसार भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किसमें साक्षरता दर निम्नतम है ?
(a) उत्तर प्रदेश
(b) बिहार
(c) जम्मू एवं कश्मीर
(d) अरुणाचल प्रदेश
उत्तर :
(b) बिहार।

प्रश्न 103.
जनसंख्या का घनत्व सामान्यतः अधिक होती है –
(a) तटिय मैदानों में
(b) पहाड़ों पर
(c) पठारों पर
(d) मरुस्थल में
उत्तर :
(a) तटिय मैदानों में।

प्रश्न 104.
जनसंख्या का घनत्व किस पर निर्भर है –
(a) संसाधन
(b) जलवायु
(c) वायुमण्डल
(d) सामाजिक पर्यावरण
उत्तर :
(b) जलवायु।

प्रश्न 105.
इनमें से कौन पूर्वी तट पर स्थित प्राकृतिक पोताश्रय है –
(a) कोलकाता
(b) विशाखापत्तनम
(c) चेनई
(d) पाराद्विप
उत्तर :
(b) विशाखापत्तनम।

प्रश्न 106.
महाद्वीप में जनसंख्या का सर्वाधिक आकार –
(a) अफिका
(b) एशिया
(c) अन्टार्टिका
(d) उत्तरी अमेरिका
उत्तर :
(b) एशिया।

प्रश्न 107.
भारत में गंगा मैदान की जनसंख्या का अनुपात है –
(a) बहुत कम
(b) अत्यधिक सघन
(c) मंद
(d) बिखरी हुई
उत्तर :-
(b) अत्यधिक सघन।

प्रश्न 108.
भारत विश्व का बड़ा आबाद देश है –
(a) प्रथम
(b) दूसरा
(c) तीसरा
(d) चौथा
उत्तर :
(b) दूसरा।

प्रश्न 109.
जनसंख्या का घनत्व गणितीय गणना है –
(a) कुल जनसंख्या और कुल क्षेत्रफल का अनुपात
(b) जनसंख्या और प्रभावित क्षेत्र का अनुपात
(c) कुल जनसंख्या और अभरावित क्षेत्र का अनुपात
(d) मनुष्य और कुल धरातल का अनुपात
उत्तर :
(a) कुल जनसंख्या और कुल क्षेत्रफल का अनुपात ।

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प्रश्न 110.
जन्मदर में वृद्धि तथा संसाधन का नियमित विकास कहे जा सकते हैं –
(a) जनसंख्या का घनत्व
(b) जमीन मनुष्य अनुपात
(c) आदर्श जनसंख्या
(d) देश की जनसंख्या
उत्तर :
(c) आदर्श जनसंख्या।

प्रश्न 111.
सठीक अधिक जनसंख्या तथा सम्बन्धित जनसंख्या आते हैं –
(a) अधिक जनसंख्या में वृद्धि
(b) Process of under population
(c) आदर्श जनसंख्या
(d) कुल जनसंख्या
उत्तर :
(c) आदर्श जनसंख्या।

प्रश्न 112.
भारत का बेसिन किसे कहा जाता है –
(a) कोचीन को
(b) चेन्नई को
(c) कांडला को
(d) विशाखापत्तनम को
उत्तर :
(a) कोचीन को।

प्रश्न 113.
पाराद्वीप बन्दरगाह है –
(a) बंगाल में
(b) तमिलनाडु में
(c) उड़िसा में
(d) महाराष्ट्र में
उत्तर :
(c) उड़िसा में।

प्रश्न 114.
निम्नलिखित में से कौन सा एक नगर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 3 से नहीं जुड़ा हुआ है ?
(a) भोपाल
(b) आगरा
(c) धूले
(d) ग्वालियर
उत्तर :
(a) भोपाल।

प्रश्न 115.
नीचे भारत से निर्यात होने वाले कुछ कृषिगत उत्पाद दिए गए हैं –
(a) चाय
(b) मसाले
(c) काजू
(d) समुद्री उत्पाद
उत्तर :
(d) समुद्री उत्पाद।

प्रश्न 116.
एन्नोर बंदरगाह का विकास किस बंदरगाह पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए किया गया है –
(a) कोच्चि
(b) काण्डला
(c) चेन्नई
(d) विशाखापत्तनम
उत्तर :
(c) घेन्नई।

प्रश्न 117.
किस बंदरगाह पर कोयले के लादन हेतु बन्त्रीकृत सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही है –
(a) विशाखापत्तनम
(b) मारमागोआ
(c) पाराद्वीप
(d) एन्नोर
उत्तर :
(a) विशाखापत्तनम।

प्रश्न 118.
भारतीय रेल की कुल मार्ग ल० का कितना प्रतिशत भाग विद्युतीकृत है -०
(a) 50
(b) 40
(c) 26
(d) 16
उत्तर :
(b) 40

प्रश्न 119.
भारतीय रेलों द्वारा सबसे अधिक माल परिवहन होता है –
(a) कोयले का
(b) सीमेन्ट का
(c) लौह-अयस्क का
(d) तेल का
उत्तर :
(a) कोयले का।

प्रश्न 120.
राष्ट्रीय राजमार्ग 7 के प्रारम्भिक एवं अंतिम स्टेशन हैं –
(a) पठानकोट-तूतीकोरिन
(b) दिल्ली-अमृतसर
(c) वाराणसी-कन्याकुमारी
(d) दिल्ली-मुम्बई
उत्तर :
(c) वाराणसी-कन्याकुमारी।

प्रश्न 121.
देश में ल० की दृष्टि से सबसे छोटे राष्ट्रीय राजमार्ग की संख्या है –
(a) 45 A
(b) 47 A
(c) 52 A
(d) 7 A
उत्तर :
(b) 47 A

प्रश्न 122.
देश में ल० की दृष्टि से राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या का सही अवरोही क्रम है –
(a) 7,6,15,2
(b) 7,15,6,2
(c) 7,2,6,15
(d) 7,6,2,15
उत्तर :
(a) 7,6,15,2

प्रश्न 123.
निम्नांकित में से कौन-सा नगर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 पर स्थित नहीं है –
(a) वाराणसी
(b) कन्याकुमारी
(c) कानपुर
(d) कोयम्बटूर
उत्तर :
(d) कोयम्बटूर।

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प्रश्न 124.
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 निम्नांकित में से किस राज्य से होकर नहीं गुजरता है –
(a) मष्य प्रदेश
(b) महाराष्ट्र
(c) कर्नाटक
(d) केरल
उत्तर :
(d) केरल।

प्रश्न 125.
निम्नलिखित में से जो राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरते हैं, वे हैं 7A, 1A, 1B, 41
(a) 2,3,4
(b) 2, 3
(c) 1, 3,4
(d) 1,3
उत्तर :
(b) 2,3

प्रश्न 126.
देश में सभी प्रकार के सड़क मार्गों की कुछ ल० की दृष्टि से प्रथम राज्य है –
(a) महाराष्ट्र
(b) उत्तर प्रदेश
(c) आंग्र प्रदेश
(d) मध्य प्रदेश
उत्तर :
(b) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 127.
रेलमार्ग की कुछ ल० की दृष्टि से सबसे बड़ा रेलवे क्षेत्र है –
(a) उत्तरी क्षेत्र
(b) पश्चिमी क्षेत्र
(c) पूर्वी क्षेत्र
(d) मध्य क्षेत्र
उत्तर :
(a) उत्तरी क्षेत्र।

प्रश्न 128.
निम्नांकित में से कौन-सा कथन असत्य है –
(a) लम्बाई की दृष्टि से सबसे छोटा रेल-क्षेत्र उत्तर-पूर्वी सीमांत है
(b) सर्वाधिक राज्यों में फैला रेलवे क्षेत्र उत्तर क्षेत्र है
(c) सबसे कम राज्यों में फैला रेलवे क्षेत्र उत्तर-पूर्वी है
(d) मध्य प्रदेश एवं उत्तर पदेश राज्य 6 रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत जाते है
उत्तर :
(d) मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश राज्य 6 रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत जाते हैं।

प्रश्न 129.
रेल परिवहन के विकास हेतु अनुकूल कारक है –
(a) समतल मैदानी भाग
(b) उच्च जनसंख्या घनत्व
(c) नगरीय केन्द्रों की अधिकता
(d) कृषि खनन और उद्योग की उन्नत दशा
उत्तर :
(a) समतल मैदानी भाग।

प्रश्न 130.
भारत में रेलमार्गों का सबसे बड़ा जाल निम्न में से किस प्रदेश में पाया जाता है –
(a) पश्चिम बंगाल
(b) महाराष्ट्र
(c) आधं प्रदेश
(d) उत्तर प्रदेश
उत्तर :
(b) महाराष्ट्र।

प्रश्न 131.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक कृत्रिम पोताश्रय है –
(a) कोच्चि
(b) कांदला
(c) कोलकाता
(d) चेन्नई
उत्तर :
(d) बेन्नई।

प्रश्न 132.
बेलाडीला से प्राप्त होने वाला लौह-अयस्क किस बंदरगाह से निर्यात किया जाता है –
(a) पाराद्वीप
(b) कोलकाता
(c) विशाखापत्तनम
(d) चेनई
उत्तर :
(a) पाराद्वीप।

प्रश्न 133.
निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है –
(a) मुम्बई देश का सबसे बड़ा बंदरगाह है
(b) कांदला एक ज्वारीय बंदरगाह है
(c) मर्मुगोआ देश का सबसे बड़ा बंदरगाह है
(d) चेन्नई देश का सबसे प्राचीन बंदरगाह है
उत्तर :
(c) मर्मुगोआ देश का सबसे बड़ा बंदरगाह है।

प्रश्न 134.
निम्न में से सबसे बड़ा कौन-सा बंदरगाह है –
(a) विशाखापत्तनम
(b) मुम्बई
(c) तूतीकोरिन
(d) कांडला
उत्तर :
(b) मुम्बई।

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प्रश्न 135.
भारतीय रेल को कितने क्षेत्रों में विभक्त किया गया है –
(a) 4
(b) 16
(c) 6
(d) 10
उत्तर :
(b) 16

प्रश्न 136.
जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह कहाँ स्थित है –
(a) मुम्बई में
(b) कोलकाता में
(c) चेन्नई में
(d) कांदला में
उत्तर :
(a) मुम्बई में।

प्रश्न 137.
कोंकण रेलवे मार्ग निम्नांकित में से किस पर्वत श्रृंखला से होकर गुज़ता है –
(a) हिमाद्रि
(b) पश्चिमी घाट
(c) पूर्वी घाट
(d) नीलगिरी पहाड़ियाँ
उत्तर :
(b) पश्चिमी घाट।

प्रश्न 138.
भारत में सूती वस्त्र एवं मशीनरी का सर्वाधिक निर्यात निम्न में से किस बंदरगाह से होता है –
(a) मुम्बई
(b) कोलकाता
(c) कांदला
(d) चेनई
उत्तर :
(a) मुम्बई।

प्रश्न 139.
पाराद्वीप बंदरगाह का विकास जिन बंदरगाहों के भार को कम करने के लिए किया गया या वे हैं –
(a) कोलकाता-विशाखापत्तनम
(b) कोलकाता-मुम्बई
(c) विशाखापत्तनम-मुम्बई
(d) चेनई-विशाखापत्तनम
उत्तर :
(a) कोलकाता-विशाखापत्तनम।

प्रश्न 140.
राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 1 – A का समाप्ति स्थल है –
(a) लेह
(b) श्रीनगर
(c) जम्मू
(d) पठानकोट
उत्तर :
(c) जम्मू।

प्रश्न 141.
निम्नांकित में से किस राज्य में राष्ट्रीय महामार्गों का सबसे बड़ा तंत्र विद्यमान है –
(a) आंध पदेश
(b) मध्य प्रदेश
(c) महाराष्ट्र
(d) उत्तर प्रदेश
उत्तर :
(d) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 142.
कोच्चि बंदरगाह स्थित है –
(a) कोंकण तट पर
(b) उत्तरी सरकार तट पर
(c) मालाबार तट पर
(d) कोरोमण्डल तट पर
उत्तर :
(c) मालाबार तट पर ।

प्रश्न 143.
मुम्बई बंदरगाह के विकास का सर्वाधिक लाभ जिन उद्योगों को मिला है, वे हैं –
(a) सूती वस्व उद्योग
(b) कागज उद्योग
(c) पेट्रोलियम शोषन उद्योग
(d) जूट उद्योग
उत्तर :
(c) पेट्रोलियम शोधन उद्योग।

प्रश्न 144.
देश का सबसे गहरा बंदरगाह निम्नाकित में से है –
(a) कांडला
(b) कोच्चि
(c) कोलकाता
(d) विशाखापत्तनम
उत्तर :
(d) विशाखापत्तनम।

प्रश्न 145.
निम्नांकित में से कौन-सा बंदरगाह रसायनों के निपटान अथवा मांग-आपूर्ति हेतु स्थापित किया गया है –
(a) दाहेज
(b) पाराद्वीप
(c) एन्नोर
(d) कांडला
उत्तर :
(c) एन्रोर।

प्रश्न 146.
भारत में निजी क्षेत्र में पहला हवाई अड्डा निर्माणाथीन है –
(a) चंन्नई
(b) कोच्चि
(c) जयपुर
(d) अमृतसर
उत्तर :
(b) कोण्यि।

प्रश्न 147.
कोझीकोड बंदरगाह स्थित है –
(a) उड़ीसा
(b) केरल
(c) आंध प्रदेश
(d) तमिलनाडु
उत्तर :
(b) केरल।

प्रश्न 148.
यदि कोई यात्री कांडला, तूतीकोरिन, विशाखापट्टनम और पाराद्वीप जाना चाहता है उसे निम्न राज्यों में से किस राज्य में नहीं जाना है –
(a) गुजरात
(b) आंध्र प्रदेश
(c) केरल
(d) उड़ीसा
उत्तर :
(c) केरल।

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प्रश्न 149.
निम्नलिखित में से कौन एक सशक्त माध्यम है जिसमें कम्प्यूटर पर सूचनाएँ एकत्रित की जाती है?
(a) फैक्स
(b) उपग्रह संचार
(c) दूर संवेदन
(d) इंरनेट
उत्तर :
(b) उपग्रह संचार।

प्रश्न 150.
किस शिपयार्ड में नाविक जहाज, माल ढोने वाली नावें, छोटे जहाज, ड्रेजरर्स इत्यादि निर्मित होते हैं –
(a) गार्डेनरीच शिपयार्ड
(b) भझगगांव शिपयार्ड
(c) कोंच्चि शिपयाई
(d) हिन्दुस्तान शिपयार्ड
उत्तर :
(d) हिन्दुस्तान शिपयार्ड।

प्रश्न 151.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है –
(a) मुम्बई प्राकृतिक गोदी वाला पत्तन है
(b) काण्डला खम्भात की खाड़ी में उपस्थित है
(c) कोलकाता हुगली नदी पर अंतर्देशीय पत्तन है
(d) चेन्नई की कृत्रिम गोदी है
उत्तर :
(d) चेग्रई की कृत्रिम गोदी है।

प्रश्न 152.
निम्नलिखित बंदरगाहों में से कौन-सा एक मुक्त व्यापार क्षेत्र है –
(a) कोच्चि
(b) तूतीकोरिन
(c) काण्डला
(d) पाराद्वीप
उत्तर :
(c) काण्डला।

प्रश्न 153.
निम्नलिखित में से कौन-सी एक नौगम्य नदी नहीं है –
(a) नर्मदा
(b) बह्मपुत्र
(c) गोदावरी
(d) चिनाव
उत्तर :
(b) अह्मपुत्र।

प्रश्न 154.
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या – 5 जोड़ता है –
(a) दिल्ली को मुम्बई से
(b) वाराणासी को बंगलौर से
(c) कोलकाता को मुम्बई से
(d) चेन्नई को कोलकाता से
उत्तर :
(d) चेग्रई को कोलकाता से।

प्रश्न 155.
भारत में विश्व की सर्वोच्च सड़क है –
(a) लेह एवं श्रीनगर
(b) लेह एवं मनाली
(c) श्रीनगर एवं जम्मू,
(d) जम्मू एवं शिमला
उत्तर :
(b) लेह एव मनाली

प्रश्न 156.
निम्नलिखित में से कौन सा शहर ग्राण्ड ट्रंक रोड पर स्थित नहीं है ?
(a) इलाहाबाद
(b) कोलकाता
(c) दिल्ली
(d) लखनक
उत्तर :
(d) लखनऊ।

प्रश्न 157.
भारत में विश्व की सर्वोच्च सड़क कहाँ है ?
(a) लेह एवं श्रीनगर
(b) लेह एवं मनाली
(c) श्रीनगर एवं जम्मू
(d) जम्मू एवं शिमला
उत्तर :
(c) श्रीनगर एवं जम्मू।

प्रश्न 158.
भारत में किस स्थान पर भूमिगत रेलमार्ग है –
(a) हैदराबाद
(b) अहमदाबाद
(c) मुम्बई
(d) कोलकाता
उत्तर :
(d) कोलकाता।

प्रश्न 173.
भारत में सबसे पहले मेट्रो रेल प्रारम्भ हुई :
(a) दिल्ली में
(b) मुम्बई में
(c) कोलकाता में
(d) चेन्नई में
उत्तर :
(c) कोलकाता में।

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प्रश्न 174.
महाराष्ट्र के तटीय अंचल को कहते हैं :
(a) मालबार
(b) कोंकण
(c) कोरोमण्डल
(d) उत्तरी सरकार
उत्तर :
(b) कोंकण।

प्रश्न 175.
वृहत्तम तेल शोधनशाला है –
(a) ट्राम्बे
(b) जामनगर
(c) बोगाई गाँव
(d) कोयली
उत्तर :
(b) जामनगर।

प्रश्न 176.
भारत का सर्वोच्च साक्षरता वाला राज्य है :
(a) सिक्किम
(b) केरल
(c) पश्चिम बंगाल
(d) गुजरात
उत्तर :
(b) केरल।

प्रश्न 177.
चाय उत्पादन में भारत का कौन-सा राज्य प्रथम स्थान रखता है ?
(a) असम
(b) पश्चिम बंगाल
(c) केरल
(d) तमिलनाण्डु
उत्तर :
(a) असम।

प्रश्न 178.
कहवा अनुसंधानशाला केन्द्र स्थापित है।
(a) पुना में
(b) पूसा में
(c) चिकमंगलूर में
(d) कुदेरमुख में
उत्तर :
(c) चिकमंगलूर में।

प्रश्न 179.
प्रति एकड़ उत्पादन के दृष्टिकोण से चावल उत्पादन में किस राज्य का स्थान प्रथम है –
(a) हरियाणा
(b) पश्चिम बंगाल
(c) उत्तर प्रदेश
(d) पंजाब
उत्तर :
(d) पंजाब।

प्रश्न 180.
मिलेट का उदाहरण है-
(a) चाय
(b) कपास
(c) कहवा
(d) ज्वार, बाजरा
उत्तर :
(d) ज्वार, बाजरा

प्रश्न 181.
भारत में पुरुषों की जीवन अवधि है-
(a) 70 वर्ष
(b) 67.46 वर्ष
(c) 50 वर्ष
(d) 60 वर्ष
उत्तर :
(b) 67.46 वर्ष

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता दर ________ प्रतिशत है।
उत्तर : 74.04

2. भागीरथी और ________नदी देवप्रयाग में मिलकर गंगा नदी बनाती हैं।
उत्तर : अलकनंदा ।

3. ________शहर को ‘दक्षिण भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता है।
उत्तर : कोयंबटूर।

4. भारतीय अर्थव्यवस्था में का ________स्थान महत्वपूर्ण है।
उत्तर : कृषि।

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5. ब्राजील में स्थानान्तरी कृषि को ________कहते हैं।
उत्तर : रोका।

6. प्राथमिक व्यवसाय को________ व्यवसाय कहा जाता है।
उत्तर : लाल कुर्ताधारी।

7. विस्तृत कृषि क्षेत्र को संयुक्त राज्य अमेरिका में ________कहा जाता है।
उत्तर : प्रेयरीज।

8. जीविका कृषि जोत का आकार बहुत ________होता है।
उत्तर : छोटा।

9. संयुक्त राज्य अमेरिका में गेहूँ की कृषि के लिए बाहर से आये कृषक को ________कहा जाता है।
उत्तर : सूटकेस कृषक।

10. भारत में केन्द्रीय चाय अनुसंधानशाला केन्द्र ________स्थापित है।
उत्तर : टोकलाई जोरहाट, असम में।

11. गेहूँ उत्पादन में प्रथम स्थान वाला राज्य का नाम ________ है ।
उत्तर : उत्तर प्रदेश।

12. कपास को ________रेशेदार फसल कहा जाता है ।
उत्तर : श्वेत (White)

13. बाजरा के उत्पादन में राजस्थान का स्थान ________है।
उत्तर : प्रथम।

14. फलों, फूलों एवं सब्जियों की कृषि को कृषि ________कहा जाता है।
उत्तर : उद्यान।

15. भारत में नागपुर केन्द्रीय अनुसंधानशाला केन्द्र ________के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : कपास।

16. ज्वार को ________का फसल कहा जाता है।
उत्तर : मोटे अनाज।

17. मौसम के आधार पर कर्नाटक एवं तमिलनाडु में चावल के एक प्रकार को ________कहते हैं।
उत्तर : कार।

18. चाय में पाया जाने वाला नशीला पदार्थ का नाम ________है ।
उत्तर : थीन।

19. योजना आयोग द्वारा भारत का ________में विभाजित किया गया है।
उत्तर : कृषि जलवायु प्रदेशों।

20. भारत का ________प्रतिशत भाग अभी भी कृषि के लिए वर्षा पर आधारित है ।
उत्तर : लगभग 70

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21. वर्षा काल के बीच में लगातार कुछ सप्ताह वर्षा बिल्कुल नहीं होने को________ कहते हैं।
उ तर : मानसून की विभंगता।

22. चाय के बाद भारत का दूसरा प्रमुख पेय पदार्थ है।
उत्तर : कहबा।

23. गुणवत्ता के लिए का चाय विश्वभर में प्रसिद्ध है।
उत्तर : दार्जिलिंग।

24. तालाबों द्वारा सर्वाधिक मात्रा में सिंचाई में होती है।
उत्तर : तामिलनाडु।

25. कहवा का मूल स्थान उत्तरी-पूर्वी अफ्रिका में ________पठार माना जाता है।
‘उत्तर : इंथोपिया (अवीसीनिया)

26. नील नदी की घाटी में पैदा होने वाली मध्यम रेशे कपास को ________भी कहते हैं।
उत्तर : मिर्री कपास।

27. गत्रा का वर्धनकाल काफी ________होता है।
उत्तर : लम्बा।

28. हरितक्रांति का लाभ विशेषकर ________राज्यों को अधिक मिला।
उत्तर : पंजाब एवं हरियाणा।

29. कपास की कृषि के लिए ________सर्वोत्तम मानी जाती है।
उत्तर : काली मिट्टी।

30. दक्षिण भारत का एक प्रमुख चाय उत्पादक राज्य का नाम________ है।
उत्तर : तमिलनाडु।

31. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR) के अनुसार भारत की ________प्रतिशत भूमि मिद्धी क्षरण की समस्या से ग्रसित है।
उत्तर : 60

32. कपास के पौधे पर ________नामक कीड़े का प्रकोप होता है।
उत्तर : बाल वीविल।

33. रागी एक प्रकार का ________की प्रणाली है।
उत्तर : शुष्क कृषि।

34. नीलगिरि और ________चाय की कृषि के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : अन्नामलाई।

35. भारत में ज्वार की सबसे अधिक कृषि में ________की जाती है।
उत्तर : महाराष्ट्र।

36. गत्रे की खेती ________भारत में अधिक होती है।
उत्तर : दक्षिण।

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37. ________में प्रति एकड़ गेहूँ का उत्पादन सबसे अधिक होता है।
उत्तर : पंजाब।

38. चावल की कृषि के लिए ________जल की आवश्यकता पड़ती है।
उत्तर : अधिक।

39. भारतीय कृषि________ प्रकृति की है।
उत्तर : जीवन निर्वहन।

40. गेहूँ ________कटिबन्य की उपज है।
उत्तर : शोतोष्ग।

41. चाय के उत्पादन में पश्चिम बंगाल राज्य का भारत में ________स्थान है।
उत्तर : दूसरा।

42. कहवा ________कटिबन्ध का पौधा है।
उत्तर : उष्णा।

43. गन्ने के उत्पादन में भारत का विश्व में ________स्थान है।
उत्तर : दूसरा।

44. जिन कच्चे मालों का भार उत्पादन प्रक्रिया में कम नहीं होते उन्हें ________कच्चा माल कहते हैं।
उत्तर : शुद्ध।

45. ________को भारत की बागानी फसल कहा जाता है।
उत्तर : काफी।

46. केन्द्रीय जूट अनुसंधान केन्द्र ________में स्थित है।
उत्तर : बैरकपुर, पश्चिम बगाल।

47. ________को सुनहला रेशा कहा जाता है।
उत्तर : जूट।

48. प्रति हेक्टेयर गत्रा का उत्पादन ________में सर्वाधिक है।
उत्तर : तमिलनाडु।

49.________ मिट्टी जूट की कृषि के लिए सर्वोत्तम है।
उत्तर : नवीन जलोढ़।

50. ________भारत का सबसे बड़ा काफी उत्पादक राज्य है।
उत्तर : कनांटक।

51. ________भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है।
उत्तर : असम।

52. पश्चिम बंगाल में चाय की कृषि ________जिले में होती है।
उत्तर : दार्जिलिंग एवं जलपाईगगुड़ी।

53. ________में प्रति एकड़ गेहूँ का उत्पादन सर्वाधिक है।
उत्तर : पंजाब।

54. गेहूँ ________फसल है।
उत्तर : रबि।

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55. जूट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य ________है।
उत्तर : पश्चिम बंगाल।

56. मूंगफली का सबसे अधिक उत्पादन ________में होता है।
उत्तर : गुजरात।

57. प्रति हेक्टेबर धान का उत्पादन सबसे अधिक________ में होता है।
उत्तर : पश्चिम बंगाल।

58. धान की केन्द्रिय गवेषणा केन्द्र________ में स्थित है।
उत्तर : कटक।

59. मूंगफली का केन्द्रीय गवेषणात्मक केन्द्र ________में स्थित है।,
उत्तर : जूनागढ़।

60. कोलापुर ________के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : वस्त्र उद्योग।

61. कपूरथला ________के लिए जाना जाता है।
उत्तर : रेल कोच।

62. टिस्को ________के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : लौह इस्पात उद्योग।

63. टिस्को कारखाना ________के अन्तर्गत है ।
उत्तर : निजी क्षेत्र।

64. ________को वृहद् इंजीनियरिंग उद्योग के लिए जाना जाता है।
उत्तर : राँची।

65. हुगली नदी के दोनों तटों पर ________की मिलें हैं।
उत्तर : जूट।

66. ________को भारत का मैनचेस्टर कहते हैं।
उत्तर : अहमदाबाद।

67. HMT की स्थापना ________में हुई है।
उत्तर : बैंगलोर।

68. वाराणसी में________ का निर्माण होता है।
उत्तर : रेलवे डीजल इंजन।

69. विशाखापद्धनम में ________निर्माण होता है।
उत्तर : शिपयार्ड।

70. गुड़गाँव में ________कारखाना है।
उत्तर : आटोमोबाइल।

71. बेलघरिया, सोदपुर एवं श्रीरामपुर में ________स्थापित है।
उत्तर : सूती वस्त उद्योग।

72. विश्वेश्वरैया लौह इस्पात लिमिटेड में ________स्थित है।
उत्तर : भद्रावती।

73. भारत का प्रथम धातु मिश्रित इस्पात कारखाना की स्थापना ________में हुआ है।
उत्तर : दुर्गापुर।

74. भारत का सबसे बड़ा खनिज तेल शोधनशाला ________हैं।
उत्तर : कोयली।

75. ________का प्रयोग लौह इस्पात उद्योग में लोहे को कठोर और जंगरोधी बनाने के लिए किया जाता है।
उत्तर : मैंगनीज।

76. हिन्दुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ________में स्थापित हैं।
उत्तर : कोचीन।

77. भारत का सबसे बड़ा नेभल वेस का निर्माण कर्नाटक के ________में हुआ हैं।
उत्तर : कारवार।

78. सबसे बड़ी रेलवे कोच कारखाना ________हैं।
उत्तर : कपूरथला (पंजाब)।

79. भारत के पूर्वी क्षेत्र का प्रमुख पेट्रोरसायन केन्द्र ________है।
उत्तर : हल्दिया।

80. DLW (डीजल लोकोमोटिव वर्क्स) की स्थापना ________में हुई है।
उत्तर : वाराणसी।

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81. हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड ________में स्थापित है।
उत्तर : बैंगलोर।

82. सबसे बड़ा आटोमोबाइल सेणटर ________है।
उत्तर : हिन्दुस्तान मोटर, कोलकाता।

82. भारत का प्रथम सूती मिल ________में स्थापित हुआ।
उत्तर : पश्चिम बंगाल।

83. पेट्रो-रसायन उद्योग की स्थापना ________में हुई है।
उत्तर : ट्राम्बे।

84. भारत का प्रथम परमाणु विद्युत केन्द्र ________है।
उत्तर : ट्राम्बे में।

85. पेट्रोकेमिकल उद्योग का विकास में ________हुआ है।
उत्तर : ट्राम्बे।

86. सूती वस्त्र उद्योग का विकास देश के ________भाग में हुआ है।
उत्तर : पशिचमी।

87. हुगली नदी के तट पर ________जूट मिलें हैं।
उत्तर : 57

88. पश्चिम बंगाल में इस्पात प्लाण्ट स्थित है ________में।
उत्तर : दुर्गापुर एवं बर्नपुर।

89. ________में रेल इंजन का कारखाना है।
उत्तर : चित्तरंजन।

90. मारुति उद्योग लिमिटेड________ का उत्पादन करता है।
उत्तर : कार।

91. लौह इस्पात के अधिकतर उद्योग भारत के पूर्वी भाग में ________संसाधन पर्याप्त बंदरगाहों कारण केन्द्रित है।
उत्तर : पर्याप्त खनिज संसाधन।

92. सिन्द्री ________के लिए जाना जाता है।
उत्तर : रासायनिक खाद।

93. विश्वेसरैया आयरन एण्ड स्टील कं० को लौह-अयस्क ________की खानों से प्राप्त होता है
उत्तर : रामानन्द दुर्ग।

94. भारत हैवी इलेक्ट्रिकस (BHEL) की स्थापना ________में हुई थी।
उत्तर : 1964

95. सूती वस्त्र उत्पादन की दृष्टि से राज्य का भारत में पहला स्थान हैं।
उत्तर : महाराष्ट्र।

96. ________ को भारत की सिलिकन वैली कहते हैं।
उत्तर : बंगलोर।

97. भारत में ________राज्य का लिंग अनुपात सबसे कम है ?
उत्तर : हरियाणा।

98. नवीनतम जनगणना के अनुसार भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है ________
उत्तर : उत्तर प्रदेश।

99. भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर है ________
उत्तर : मुम्बई।

100. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या का घनत्व व्यक्ति ________प्रति कि०मी० है।
उत्तर : 324

101. भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य ________है।
उत्तर : अरुणाचल प्रदेश।

102. भारत में जनगणना प्रति ________में होती है।
उत्तर : 10 वर्ष।

103. भारत विश्व के________ देशों में से एक है।
उत्तर : जनबहुल।

104. भारत में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की संख्या ________है।
उत्तर : कम।

105. विकसित देशों की औसत जीवन प्रत्याशा ________वर्ष है।
उत्तर : 78

106. 2011 के अनुसार भारत की जीवन प्रत्याशा ________वर्ष है।
उत्तर : 65.48

107. 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे अधिक जनघनत्व वाला राज्य ________है।
उत्तर : बिहार।

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108. ________सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है।
उत्तर : सिक्किम।

109. दिल्ली का जनघनत्व ________व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी॰ है।
उत्तर : 11,297

110. आकार के अनुसार ________का जनसंख्या भारत में दूसरे स्थान पर है।
उत्तर : महाराष्ट्र।

111. केन्द्रशासित प्रदेशों में ________की जनसंख्या सबसे कम है ?
उत्तर : लक्षद्वीप।

112. जनघनत्व की दृष्टि से ________का भारत के राज्यों में पहला स्थान है।
उत्तर : बिहार।

113. भारत में विश्व की ________प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
उत्तर : 17.5

114. जनसंख्या की दृष्टि से भारत ________के बाद विश्व में दूसरा स्थान है।
उत्तर : चीन।

115. भारत की ________विश्व की तीसरी विशाल सड़क परिवहन प्रणाली है।
उत्तर : सड़क परिवहन।

116. भारत ________का देश है।
उत्तर : गाँव।

117. सड़कों के विकास से ________में वृद्धि हुई।
उत्तर : आर्थिक क्षेत्र।

118. भारत की अधिकांश सड़कें ________हैं।
उत्तर : कच्ची।

119. भारतीय रेल प्रणाली विश्व की ________सबसे बड़ी रेल प्रणाली है।
उत्तर : दूसरी।

120. ________बंदरगाह को पूर्व का वेनिस कहा जाता है।
उत्तर : अलापुज्जा।

121. ________बंदरगाह को नवा सेभा बंदरगाह के नाम से जाना जाता था।
उत्तर : जवाहरलाल नेहरू।

122. ________को भारत का हरित शहर कहा जाता है।
उत्तर : चेन्नई।

123. ________को झीलों का शहर कहा जाता है।
उत्तर : हैदराबाद।

124. ________को भारत के बगीचों का शहर कहा जाता है।
उत्तर : बैंगलोर।

125. ________बंदरगाह को अरेबियन सागर का रानी कहा जाता है।
उत्तर : कोची।

126. ________भारत का करमुक्त बंदरगाह है।
उत्तर : काण्डला।

127. ________भारत का सबसे बड़ा बंद्रगाह है।
उत्तर : मुम्बई।

128. गुजरात का ________बंदरगाह करांची बंदरगाह के विकल्प के रूप में जाना जाता है।
उत्तर : कांडला।

129. ________बंदरगाह से सबसे अधिक चाय का निर्यात किया जाता है।
उत्तर : कोलकाता।

130. ________को भारत का वेनिस कहा जाता है।
उत्तर : कोचीन।

131. ________उड़ीसा का बंदरगाह है।
उत्तर : पराद्वीप।

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132. ________बंदरगाह भारत का अत्यधिक उन्नत बंदरगाह है।
उत्तर : जवाहरलाल नेहरू।

133. ________आंध्र प्रदेश का मुख्य बंदरगाह है।
उत्तर : विशाखापत्तनम।

134. ________केरल का प्रमुख बंदरगाह है।
उत्तर : कोचीन।

135. ________पश्चिमी तट का मुख्य बंदरगाह है।
उत्तर : मुम्बई।

136. पूर्वी तट पर स्थित ________बंदरगाह के पास प्राकृतिक पोताश्रय है।
उत्तर : विशाखापत्तनम।

137. भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर ________है।
उत्तर : मुम्बई।

138. गेहूँ के उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान वाला राज्य ________है।
उत्तर : उत्तरा प्रदेश

139. ________उद्योग उदीयमान उद्योग कहलाता है।
उत्तर : पेट्रोरसायन।

140. अंडमान-निकोबार द्वीप की सबसे ऊँची चोटी का नाम ________है।
उत्तर : सैंडल चोट्टी (Sandle Peak)।

141. भारत की एक पश्चिम वहिनी नदी ________है।
उत्तर : नर्मदा।

142. ________पश्चिम बंगाल का एक रेल इंजन निर्माण कारखाना है।
उत्तर : चितरंजन।

सही कथन के आगे ‘True’ एवं गलत कथन के आगे ‘False’ लिखिए : (1 Mark)

1. पेट्रो रसायन उद्योग को ‘आधुनिक औद्योगिक विशाल’ (Modern Industrial Giant) कहा गया है।
उत्तर : True

2. भारत में अधिकांश धान शीत काल में रबी की फसल के रूप में पैदा होता है।
उत्तर : False

3. भारत का सबसे अधिक घनी आबादी वाला राज्य पश्चिम बंगाल है।
उत्तर : False

4. कपास एक व्यापारिक फसल है।
उत्तर : True

5. बैरकपुर में केन्द्रीय जूट अनुसंधानशाला केन्द्र स्थापित है।
उत्तर : True

6. भारत में अधिकतर कृषि कार्य पर्वतीय क्षेत्र में विकसित हुआ है।
उत्तर : False

7. स्थान्तरणशील कृषि को ‘बुश फेलो कृषि’ भी कहा जाता है।
उत्तर : True

8. गहन जीवन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistance Agriculture) में अधिक जनसंख्या के भोजन की आपूर्ति हेतु भूमि का अधिकतम उपयोग किया जाता है।
उत्तर : True

9. इजरायल में की जाने वाली सामूहिक कृषि को कोलखोज कहा जाता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 5B भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

10. हरितक्रांति का जनक एम० एस० स्वामीनाथन को कहा जाता है।
उत्तर : True

11. गत्ने का सबसे अधिक उत्पादन पंजाब में होता है।
उत्तर : False

12. भारत के कुल चाय उत्पादन का लगभग 75% उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र से प्राप्त होता है।
उत्तर : True

13. साधारण रोटी का गेहूं मुख्यतः दक्षिणी भारत के पठारी भागो में उपजाया जाता है।
उत्तर : False

14. पश्चिम बंगाल में चावल की तीन फसले अमस, औस और बोरो हैं।
उत्तर : True

15. मक्का की फसल मुख्य रूप से रेशेदार फसल के रूप में जानी जाती है।
उत्तर : False

16. मयूराक्षी परियोजना, पश्चिम बंगाल की एक सिंचाई परियोजना भी है।
उत्तर : True

17. बलुई टोमट तथा बलुई मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता कम होती है।
उत्तर : True

18. भारत विश्व का सर्वाधिक नहर सिंचित क्षेत्र है।
उत्तर : True

19. भारत का सबसे छोटा नहर इन्दिरा नहर है।
उत्तर : False

20. द्वितीय व्यवसाय में कार्यरत लोगों को नीला कुर्ताधारी लोग कहा जाता है।
उत्तर : True

21. पश्चिम बंगाल में स्थित वर्द्धमान जिला को चावल की टोकड़ी जिला कहा जाता है।
उत्तर : True

22. ऊबर-खाबड़ भूमि के कारण प्रायद्वीपीय भारत में अनेक नहरें पाये जाते हैं।
उत्तर : False

23. मंसूरी चावल की एक उच्च किस्म का महीन चावल है।
उत्तर : True

24. मोती गेहूँ की एक उत्च उत्पादन क्षमतावालौ किस्म है।
उत्तर : True

25. अरेबिका एक विशिष्ट स्वादवाली कहवा है।
उत्तर : True

26. गन्ना एक हल्का तथा रेशेदार फसल है।
उत्तर : False

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27. भारत में छोटे रेशा वालो कपास पायी जाती है।
उत्तर : True

28. जो फसल पैसा कमाने के लिए बोई जाति है, उसे नकदी फसल कहते हैं।
उत्तर : True

29. कपास को सुनहले रेशे की फसल कहते हैं।
उत्तर : False

30. कर्नाटक में रबर की खेती सबसे अधिक होती है।
उत्तर : False

31. आसाम भारत का सबसे अधिक वाय उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

32. पश्चिम बंगार चावल का म्रमुख उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

33. जूट, चाय, कपास, कहवा और गत्रा नकदी फसलें हैं।
उत्तर : True

34. कर्नाटक भारत का सबसे अधिक कह्वता उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

35. उड़ीसा सबसे अधिक जूट उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

36. वें फसलें जिन्हें नवम्बर में वोया जाता है और अप्रैल तक काटा जाता है, उन्हें रबी की फसल कहते हैं।
उत्तर : True

37. वें फसले जो मई-जून में बोई जाती हैं और सितम्बर-अक्टूबर तक काटी जाती है, उन्हें खरीफ की फसल कहते हैं।
उत्तर : True

38. कलकत्ता बन्दरगाह से सबसे अधिक मात्रा में कपास का निर्यांत किया जाता है।
उत्तर : False

39. उत्तर-प्रदेश भारत का सबसे बड़ा गत्ना उत्पाद्क राज्य है।
उत्तर : True

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40. पजाब भारत का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

41. कपास का सबसे अधिक उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है।
उत्तर : True

42. झारखण्ड प्रमुख जूट उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

43. मूंगफली का सबसे अधिक उत्पादन पंजाब में होता है।
उत्तर : False

44. गन्ने की प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक उत्पादन उड़ीसा में होता है।
उत्तर : False

45. मुम्बई बन्दरगाह से सबसे अधिक मात्रा में बाय का निर्यात होता है।
उत्तर : False

46. मत्स्यपालन को सेरीकल्चर कहा जाता है।
उत्तर : False

47. सबसे प्रमुख चाय उत्पादक राज्य उत्तरप्रदेश है।
उत्तर : False

48. सबसे अधिक कहवा उत्पादक राज्य गोवा है।
उत्तर : False

49. मैथन बांध बराकर नदी से सम्बन्धित है।
उत्तर : True

50. जूट और कपास भारत की रेशेदार फसलें है।
उत्तर : True

51. कपास पशिचम बंगाल की प्रमुख नकदी फसल है।
उत्तर : False

52. उत्तरपदेश भारत का सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

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53. पश्चिम बंगाल भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

54. दार्जिलिंग सर्वोत्तम कोटि की चाय उत्पन्न करता है।
उत्तर : True

55. पश्चिम बंगाल भारत का सबसे बड़ा जूट उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

56. सदावाहिनी नहरों द्वारा पंजाब, हरियाणा, उत्तरमदेश और राजस्थान में अधिक सिंचाई होती है।
उत्तर : True

57. मैसेंजर बांध मयूराक्षी योजना से सम्बन्धित है।
उत्तर : True

58. दामोदर घाटी योजना भारत की प्रथम नदी घाटी योजना है।
उत्तर : True

59. भाखरा योजना सिन्ध नदी पर है।
उत्तर : False

60. उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

61. कपास व्यावसायिक फसल है।
उत्तर : True

62. भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।
उत्तर : True

63. मंगलौर भारत का प्रमुख कहवा निर्यातक बंदरगाह है।
उत्तर : True

64. गन्ने का सबसे अधिक उत्पादन पंजाब में होता है।
उत्तर : False

65. ताइचुंग चावल की एक उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म है।
उत्तर : False

66. सुजाता कपास की एक उच्च उत्पादन क्षमता वाली किस्म है।
उत्तर : True

67. वासुदेव जूट की एक उच्च उत्पादन क्षमता किस्म है।
उत्तर : False

68. चाय और कहवा भारत के प्रिय गर्म पेय हैं।
उत्तर : True

69. बिहार भारत का सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

70. गेहूँ के उत्पादन में पंजाब का महत्वपूर्ण स्थान है।
उत्तर : True

71. चाय का उत्पादन बंगाल में सर्वत्र होता है।
उत्तर : False

72. दार्जिलिंग की चाय अपनी सुगन्ध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

73. दक्षिण भारत में नीलगिरि में चाय की कृषि की जाती है।
उत्तर : True

74. कहवा उत्तरी भारत की प्रमुख कृषि फसल है।
उत्तर : False

75. कहवा के उत्पादन में केरल का महत्वपूर्ण स्थान है।
उत्तर : True

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76. कोयली इंजीनियरिंग उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : False

77. दुर्गापुर को भारत का रूर कहते हैं।
उत्तर : True

78. हल्दिया खनिज तेल शोधनशाला के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

79. अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर कहते हैं।
उत्तर : True

80. सलेम स्टील प्लाण्ट आधधभरेश में है।
उत्तर : False

81. कटनी में सबसे बड़ी सीमेंट का कारखाना है।
उत्तर : True

82. डालमियापुरम में पहली सीमेण्ट का कारखाना खुला।
उत्तर : True

83. डालमियापुरम में प्रथम पेपर का कारखाना खुला।
उत्तर : False

84. मऊभण्डार तांबे को पिघलाने तथा तांबे से तार बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

85. टीटागढ़ में लौह इस्पात उद्योग स्थापित है।
उत्तर : False

86. सी० ई० एस० सी० और दामोदर घाटी परियोजना द्वारा जूट मिलों को विद्युत की आपूति की जाती है।
उत्तर : True

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87. पश्चिम बंगाल में कुल 57 जूट मिलें हैं।
उत्तर : True

88. केरल में पेरूमानेर के पास ‘कोची शिपयार्ड’ की स्थापना जापान की सहायता से किया गया है।
उत्तर : True

89. गार्डेनरीच शिप बिल्डर्स मुम्बई में स्थित है।
उत्तर : False

90. हिन्दुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड आंघग्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित है।
उत्तर : True

91. चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स बर्धमान के चित्तरंजन में स्थित है।
उत्तर : True

92. इण्टीग्रल कोच-बिल्डिंग कारखाना पेरम्बूर में स्थापित हैं।
उत्तर : True

93. हिन्दुस्तान मशीन दुल्स लिमिटेड हैदराबाद में स्थापित हैं।
उत्तर : False

94. इंजीनियरिग उद्योग के लिए कच्चा माल, कुशल श्रमिक एवं विकसित बाजार आवश्यक है।
उत्तर : True

95. IISCO पश्चिम बंगाल के बर्नपुर में स्थापित है।
उत्तर : True

96. वर्तमान समय में ॥SCO स्टील एथोरिटी आफ इण्डिया लिमिटेड द्वारा संचालित हो रहा है।
उत्तर : True

97. स्टील एथारिटी आफ इण्डिया लिमिटेड को सेल (SAIL) के रूप में जाना जाता है।
उत्तर : True

98. टिस्को की स्थापना 1907 ई० में झारखण्ड के जमशेदपुर में हुई।
उत्तर : True

99. अहमदाबाद अपने सूती वस्व उद्योग के लिए भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।
उत्तर : True

100. कोकिंग कोयला लौह इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक कच्या माल है।
उत्तर : True

101. अपनी उत्पादन क्षमता के आधार पर बोकारो इस्पात प्लाण्ट भारत में सबसे बड़ा इस्पात प्लाण्ट है।
उत्तर : True

102. पश्चिम बंगाल के आसनसोल में मोटरगाड़ी उद्योग है।
उत्तर : False

103. पश्चिम बंगाल का पेट्रोरसायन उद्योग हल्दिया में स्थित है।
उत्तर : True

104. मडुआडीह (वाराणसी) डीजल इंजन निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

105. राउरकेला इस्पात कारखाने की स्थापना जर्मनी के सहयोग से हुई है।
उत्तर : True

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106. वर्तमान में भारतवर्ष औद्योगिक दृष्टि से विकसित विश्व का आठवाँ देश हैं।
उत्तर : True

107. अहमदाबाद सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

108. सूती वस्त्र उद्योग गुजरात का एक ममुख उद्योग है।
उत्तर : True

109. मुम्बई को भारत के सूती वस्व की राजधानी कहा जाता है।
उत्तर : True

110. पेट्रो रसायन उद्योगों को स्थापना तेल शोधशालाओं के पास होती है।
उत्तर : True

111. भारत की कुल कार्यशील जनसंख्या का 70 प्रतिशत प्राथमिक व्यवसाय में लगी हुई है।
उत्तर : False

112. चित्तरंजन रेलइंजन निर्माण उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

113. सिन्दरी उर्वरक उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

114. हालीिया नगर में पहली कागज मिल स्थापित हुई।
उत्तर : False

115. विशाखापट्टग्य जलयान निर्माण उद्योग के लिए जाना जाता है।
उत्तर : True

116. पैराम्बूर (चेन्न टीग्रल कोच निर्माण कारखाने के लिए जाना जाता है।
उत्तर : True

117. हैदराबाद इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

118. नैहाटी जूट मिए के लिए जाना जाता है।
उत्तर : True

119. भारत में साक्षरता का मतिशत 65.38% है।
उत्तर : True

120. 1991 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या की वृद्धि दर 2.14 % वार्षिक है।
उत्तर : True

121. भारत की करीब 40% जनसंख्या शहरों में निवास करती है।
उत्तर : False

122. भारत के केन्द्र शासित क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में सर्वाधिक है।
उत्तर : False

123. भारत जनाधिक वाला देश है।
उत्तर : True

124. सिक्किम सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है।
उत्तर : True

125. जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद विश्व में भारत का दूसरा स्थान है।
उत्तर : True

126. जनसंख्या के आकार के अनुसार महाराष्ट्र की जनसंख्या भारत में दूसरे स्थान पर है।
उत्तर : True

127. जनघनत्व की दृष्टि से पश्चिम बंगाल का भारत के राज्यों में पहला स्थान है।
उत्तर : True

128. भारत में विश्व की 16.87% जनसंख्या निवास करती है।
उत्तर : True

129. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल 35 मेट्रोपोलिटन शहर हैं।
उत्तर : True

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130. भारतीय राज्यों में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या सबसे अधिक है।
उत्तर : True

131. भारत में विश्व की 17.5% जनसंख्या निवास करती है।
उत्तर : True

132. जनसंख्या के अनुसार मुम्बई भारत का सबसे बड़ा शहर है।
उत्तर : True

133. अरुणाचल प्रदेश का जनघनत्व सबसे कम है।
उत्तर : True

134. पूरे विश्व में पाकिस्तान जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है।
उत्तर : False

135. भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ 1 लाख 93 हजार 422 व्यक्ति है।
उत्तर : True

136. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनघनत्व 324 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी॰ है।
उत्तर : True

137. दिल्ली की जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है।
उत्तर : True

138. भारत की कुल कार्यशील जनसंख्या का 70 प्रतिशत प्राथमिक व्यवसाय में लगी हुई है।
उत्तर : False

139. भारत में सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य केरल है।
उत्तर : True

140. भारत का लिंग अनुपात 940 प्रति हजार है।
उत्तर : True

141. हरियाणा राज्य का लिंग अनुपात सबसे अधिक है।
उत्तर : False

142. प्रत्येक पाँच वर्ष के अंतराल पर जनगणना की जाती है।
उत्तर : False

143. भारत में 31.2 प्रतिशत जनसंख्या बाल आयु वर्ग की अन्तर्गत आती है।
उत्तर : True

144. जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में पहला स्थान है।
उत्तर : False

145. 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे अधिक जनघनत्व वाला राज्य केरल है।
उत्तर : False

146. सिविकम सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है।
उत्तर : True

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147. दिल्ली का जनघनत्व 11,297 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।
उत्तर : True

148. केन्द्रशासित प्रदेश में लक्षदीप की जनसंख्या सबसे कम है।
उत्तर : True

149. जनघनत्व की दृष्टि से बिहार का भारत के राज़्य में पहला स्थान है।
उत्तर : True

150. जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
उत्तर : True

151. सड़को के विकास ने देश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया है।
उत्तर : True

152. भारत की सबसे प्रमुख सड़क ग्राण्ड ट्रंक रोड है।
उत्तर : True

153. एक्सप्रेस मार्ग बनने से यातायात कठिन हो गया।
उत्तर : False

154. सडक परिवहन का कर ऊँचा होता है।
उत्तर : False

155. मैदानी भागों में महानगरें विशाल उत्पादक एवं उपभोक्ता केन्द्र हैं।
उत्तर : True

156. भारत में रेल प्रवाह प्रणाली का संचालन राज्य सरकार के अधीन है।
उत्तर : False

157. देश में औद्योगिक तथा व्यापारिक केन्द्र एक-दूसरे के समीप हैं।
उत्तर : False

158. प्राधिकरण का बनारस में एक नागरिक विमान प्रशिक्षण कोलेज है।
उत्तर : True

159. अहमदाबाद को भारत का ‘प्रवेश द्वार’ कहा जाता है।
उत्तर : False

160. चेनई पूर्वी भारत का सबसे महत्वपूर्ण बन्दरगाह है।
उत्तर : False

161. पूर्वीतट पर स्थित चेनई बन्दरगाह के पास प्राकृतिक पोताश्रय है।
उत्तर : False

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162. मड्रास बन्दरगाह तामिलनाडु में स्थित है।
उत्तर : True

163. लखनऊ गंगा नदी के तट पर स्थित है।
उत्तर : False

164. अलापुज्जा बन्दरगाह को पूर्व का वेनिस कहा जाता है।
उत्तर : True

165. जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह को नेभा शेभा बन्दरगाह के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : True

166. चेन्नई को भारत का हरित शहर कहा जाता है।
उत्तर : True

167. हैदराबाद को झीलो का शहर कहा जाता है।
उत्तर : True

168. बेंगलोर को भारत के बगीचों का शहर कहा जाता है।
उत्तर : True

169. मदुरई को दक्षिण भारत का काशी कहा जाता है।
उत्तर : True

170. कोबी शहर/बन्दरगाह को अरेबियन सागर का रानी कहा जाता है।
उत्तर : True

171. काण्डला भारत का कर मुक्त बन्दरगाह है।
उत्तर : True

172. गुजरात का कांडला बन्दरगाह करांची बन्दरगाह के विकल्य के रूप में जाना जाता है।
उत्तर : True

173. मार्मागोवा, महाराए में स्थित एक बन्दरगाह है।
उत्तर : False

174. मैंगलोर केरल में स्थित बन्दरगाह है।
उत्तर : False

175. अहमदाबाद साबरमती तट पर स्थित एक बन्दरगाह है।
उत्तर : True

176. कोलकाता बन्दरगाह से सबसे अधिक चाय का निर्यात होता है।
उत्तर : True

177. कोचीन केरल का प्रमुख बन्दरगाह है।
उत्तर : True

178. भारत में बसंतकालीन गेहूँ का उत्पादन परम्परागत रूप से होता है।
उत्तर : True

179. केरल में पुरुष-स्त्री जनसंख्या का अनुपात ऊँचा है।
उत्तर : True

180. भारत का गेहूं अनुसंधान संस्थान पूसा में स्थित है।
उत्तर : True

181. किसी उद्योग की स्थिति के लिए परिवहन लागत एक महत्त्वपूर्ण कारक है।
उत्तर : True

182. दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग का एक अन्य नाम NH-1 है।
उत्तर : True

183. भारत विश्व का सर्वाधिक नहर सिंचित क्षेत्र है।
उत्तर : True

184. नैहाटी जूट मिल के लिए जाना जाता है।
उत्तर : True

185. केन्द्रशासित प्रदेश में लक्षदीप की जनसंख्या सबसे कम है।
उत्तर : True

186. जूट, चाय भारत की नकदी फसले हैं।
उत्तर : True

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187. अहमदाबाद अपने सूती वस्व उद्योग के लिए भारत का मेनचेस्टर कहा जाता है।
उत्तर : True

188. कोकिंग कोयला लौह इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक कच्चा माल है।
उत्तर : False

189. अपनी उत्पादन क्षमता के आधार पर बोकारो इस्पात प्लाण्ट बारत में सबसे बड़ा इस्पात प्लाण्ट है।
उत्तर : True

190. मेट्रो रेल की शुरूआत मुम्बई में हुई।
उत्तर : False

191. कपास व्यावसायिक फसल है।
उत्तर : True

192. मंगलौर भारत का प्रमुख कहवा निर्यातक बंदरगाह है।
उत्तर : True

193. राउरकेला इस्पात कारखाने की स्थापना जर्मनी के सहयोग से हुई है।
उत्तर : True

194. मुम्बई को भारत के सूती वस्त की राजधानी कहा जाता है।
उत्तर : True

195. भारत की कुल कार्यशील जनसंख्या का 70 प्रतिशत प्राथमिक व्यवसाय में लगी हुई है।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. ISRO 1. केरल
2. वेम्बानद 2. भारत का शुल्कमुक्त बन्दरगाह
3. आंधी 3. भारतीय राकेट अनुसंधान संस्था
4. कान्डला 4. राजस्थान

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. ISRO 3. भारतीय राकेट अनुसंधान संस्था
2. वेम्बानद 1. केरल
3. आंधी 4. राजस्थान
4. कान्डला 2. भारत का शुल्कमुक्त बन्दरगाह

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प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. ताल 1. कहवा अन्वेषण केन्द्र
2. झूम खेती 2. डीजल रेल इंजन
3. चिक्मगलूर 3. पश्चिम हिमालय की झील
4. वाराणसी 4. मिट्टी अपरदन

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. ताल 3. पश्चिम हिमालय की झील
2. झूम खेती 4. मिट्टी अपरदन
3. चिक्मगलूर 1. कहवा अन्वेषण केन्द्र
4. वाराणसी 2. डीजल रेल इंजन

प्रश्न 3.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) D.V.C. (i) उद्यान कृषि
(b) लाइबेरिया (ii) चावल के किस्म
(c) पीली क्रांति (iii) स्टेप्स
(d) ट्रक फार्मिंग (iv) पम्पास
(e) रूस तथा यूक्रेन के कृषि क्षेत्र (v) जूट के किस्म
(f) आर्जेन्टीना (vi) कहवा के किस्म
(g) गहन कृषि (vii) तिलहन उत्पादन
(h) HS7910 (viii) महानदी
(i) जापानिका (ix) पश्चिम बंगाल एवं झारखण्ड
(j) हीराकुण्ड परियोजना (x) भारत में

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) D.V.C. (ix) पश्चिम बंगाल एवं झारखण्ड
(b) लाइबेरिया (vi) कहवा के किस्म
(c) पीली क्रांति (vii) तिलहन उत्पादन
(d) ट्रक फार्मिंग (i) उद्यान कृषि
(e) रूस तथा यूक्रेन के कृषि क्षेत्र (iii) स्टेप्स
(f) आर्जेन्टीना (iv) पम्पास
(g) गहन कृषि (x) भारत में
(h) HS7910 (v) जूट के किस्म
(i) जापानिका (ii) चावल के किस्म
(j) हीराकुण्ड परियोजना (viii) महानदी

 

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WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

Well structured WBBSE 10 Geography MCQ Questions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति can serve as a valuable review tool before exams.

भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
तेलंगाना राज्य का गठन इस राज्य से अलग होने से हुआ :
(a) मध्यप्रदेश
(b) आन्ध्रप्रदेश
(c) बिहार
(d) उत्तरप्रदेश
उत्तर :
(b) आन्ध्रप्रदेश

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प्रश्न 2.
भारत में एक खारे पानी की झील का उदाहरण है :
(a) पैंगाँग झील
(b) भीमताल
(c) डल झील
(d) लोकटक झील
उत्तर :
(a) पैंगाँग झील

प्रश्न 3.
लैटेराइट मिट्टी इस क्षेत्र में पाई जाती है :
(a) गंगा का मैदान
(b) पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल
(c) सुन्दर वन
(d) मरुस्थलीय क्षेत्र
उत्तर :
(b) पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल

प्रश्न 4.
भारत का सबसे नया गठित राज्य है –
(क) उत्तराखण्ड
(ख) तेलंगाना
(ग) छत्तीसगढ़
(घ) गोवा
उत्तर :
(ख) तेलंगाना

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 5.
उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीष्म काल में धूल-आंधी को कहते हैं –
(क) कालवैशाखी
(ख) आंधी
(ग) पश्चिमी झंझावात
(घ) लू
उत्तर :
(ख) आंधी

प्रश्न 6.
भारत का कुल क्षेत्र कितना वर्ग कि॰मी० है ?
(a) 3287255 वर्गकि०मी०
(b) 3287263 वर्ग कि०मी०
(c) 3087522 वर्ग कि०मी०
(d) 3257263 वर्ग कि०मी०
उत्तर :
(b) 3287263 वर्ग कि०मी०

प्रश्न 7.
भारत में कुल राज्यों की संख्या कितनी है ?
(a) 25
(b) 28
(c) 29
(d) 24
उत्तर :
(c) 29

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प्रश्न 8.
केन्द्र शासित राज्यों की संख्या है –
(a) 7
(b) 6
(c) 5
(d) 9
उत्तर :
(a) 7

प्रश्न 10.
भारत के सबसे बड़ा राज्य है।
(a) राजस्थान
(b) मध्य प्रदेश
(c) उत्तर प्रदेश
(d) बिहार
उत्तर :
(a) राजस्थान।

प्रश्न 11.
भारत के दक्षिण में स्थित पड़ोस देश का नाम है –
(a) म्यानमार
(b) श्रीलंका
(c) बंग्लादेश
(d) भूटान
उत्तर :
(b) श्रीलंका।

प्रश्न 12.
भारत एवं चीन के बीच अन्तर्राष्ट्रीय सीमा रेखा को कहते हैं –
(a) मैक मोहन रेखा
(b) हुरण्ड रेखा
(c) जीरो मोहन
(d) रेड क्लिफ
उत्तर :
(a) मैक मोहन रेखा।

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प्रश्न 13.
भारत के दक्षिण में स्थित सबसे अन्तिम स्थान है –
(a) इन्दिरा घ्वांइट
(b) कन्याकुमारी
(c) तूतीकोरीन
(d) पोर्टब्लेयर
उत्तर :
(a) इन्दिरा ष्वांइट।

प्रश्न 14.
भारत में कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुजरता है ?
(a) गुजरात
(b) राजस्थान
(c) त्रिपुरा
(d) बिहार
उत्तर :
(d) बिहार ।

प्रश्न 15.
भारत की प्रामाणित मध्यान्ह रेखा का मान कितना है ?
(a) 82° 30’ पूरब
(b) 88° 30’ पूरब
(c) 80° 30’ पूरब
(d) 85° 30’ पूरब
उत्तर :
(a) 82° 30’ पूरब।

प्रश्न 16.
संविधान के अनुसार भारत के राज्यों को कितने श्रेणियों में रखा गया है ?
(a) चार
(b) तीन
(c) दो
(d) पाँच
उत्तर :
(a) चार।

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प्रश्न 17.
‘D’ श्रेणी के अन्तर्गत राज्य का नाम है –
(a) पश्चिम बंगाल
(b) हरियाणा
(c) सिक्किम
(d) भोपाल
उत्तर :
(c) सिक्किम।

प्रश्न 18.
लक्षद्वीप की राजधानी है –
(a) पोर्टब्लेयर
(b) कावरति
(c) दमन
(d) सिलवासा
उत्तर :
(b) कावरति।

प्रश्न 19.
हैदराबाद किन दो राज्यों की राजधानी है ?
(a) पंजाब-हरियाणा
(b) अण्डमान-निकोबार
(c) आन्ध प्रदेश- तेलगाना
(c) दादर-नगर
उत्तर :
(c) आन्ध प्रदेश- तेंलगाना।

प्रश्न 20.
भारत का गुलाबी शहर (Pink city of India) है –
(a) मुम्बई
(b) कोलकाता ,
(c) चेन्नई
(d) जयपुर
उत्तर :
(d) जयपुर।

प्रश्न 21.
विश्व के सर्वोच्च पर्वत-शिखर का नाम है –
(a) गॉडविन आस्टीन
(b) माउण्ट एवरेस्ट
(c) नन्दा देवी
(d) नामचाबड़वा
उत्तर :
(b) माउण्ट एवरेस्ट।

प्रश्न 22.
के Krightकिस पर्वत श्रेणी पर स्थित है ?
(a) काराकोरम श्रेणी
(b) जास्कर श्रेणी
(c) पिरपांजल श्रेणी
(d) लद्दाख श्रेणी
उत्तर :
(a) काराकोरम श्रेणी।

प्रश्न 23.
चीन एवं नेपाल की सीमा पर स्थित पर्वत है –
(a) नन्दा देवी
(b) धौलगिरि
(c) माउण्ट एवरेस्ट
(d) मेकालू
उत्तर :
(c) माउण्ट एवरेस्ट।

प्रश्न 24.
किस दर्रे द्वारा दार्जिलिंग और चुम्बी घाटी होकर तिब्बत को जाते हैं ?
(a) खैबर
(b) बोलन
(c) गोमल
(d) नाधूला
उत्तर :
(d) नाथूला।

प्रश्न 25.
कठियावाड़ प्रायद्वीप किस राज्य में स्थित है ?
(a) राजस्थान
(b) गुजरात
(c) महाराष्ट्र
(d) केरल
उत्तर :
(b) गुजरात ।

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प्रश्न 26.
आज जहाँ हिमालय स्थित है वहाँ एक सागर था –
(a) बंगाल की खाड़ी
(b) मज्ञार की खाड़ी
(c) कच्छ की खाड़ी
(d) टेथिस (Tethys)
उत्तर :
(d) टेथिस (Tethys)।

प्रश्न 27.
विश्व का सबसे ऊँचा पर्वतीय सड़क मार्ग है –
(a) काशमीरा लेह
(b) कराताध दर्रे
(c) सफेद् कोह
(d) लेह सतलज
उत्तर :
(a) काश्मीर-लेह।

प्रश्न 28.
भारत के पूरब में स्थित पड़ोसी देश है –
(a) श्रीलंका
(b) बंगलादेश
(c) म्यानमार
(d) भूटान
उत्तर :
(b) बंगलादेश।

प्रश्न 29.
अन्नमलाई के सबसे ऊँची पर्वत चोटी का नाम है –
(a) दोदा बेटा
(b) अनाईमुहुी
(c) महेन्द्रगिरि
(d) मैकार
उत्तर :
(b) अनाईमुड्दी।

प्रश्न 30.
किस पर्वत को इलाचयी पर्वत कहा जाता है ?
(a) अन्नमलाई
(b) पालनी
(c) अमरकंटक
(d) महादेव
उत्तर :
(a) अन्नमलाई।

प्रश्न 31.
राजस्थान में माउण्ट आयू की सबसे ऊँची चोटी है –
(a) गुरु शिखर
(b) अरावली
(c) दोदा बेटा
(d) अन्नामलाई
उत्तर :
(a) गुरु शिखर।

प्रश्न 32.
विश्व का सबसे पुराना मोड़दार पर्वत है –
(a) दक्कन
(b) सतपुरा
(c) अरावली
(d) राजमहल
उत्तर :
(c) अरावली।

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प्रश्न 33.
लक्षद्वीप का निर्माण हुआ है –
(a) जलोढ़ से
(b) ज्वालामुखी से
(c) भंश से
(d) प्रवाल से
उत्तर :
(d) प्रवाल से।

प्रश्न 34.
कर्नाटक एवं केरल तट का संयुक्त नाम है –
(a) कोकण तट
(b) मालावार तट
(c) गोलकुण्डा तट
(d) समुद्री तट
उत्तर :
(b) मालावार तट।

प्रश्न 35.
भारत में स्थित सबसे ऊँची पर्वत चोटी का नाम है –
(a) गॉडबिन आस्टीन
(b) मकालू
(c) नन्दादेवी
(d) कंचनजघा
उत्तर :
(d) कंचनजंघा।

प्रश्न 36.
विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप का नाम है –
(a) डेल्टा
(b) मंजुली
(c) मोनॉडनोक
(c) बागर
उत्तर :
(b) मंजुली।

प्रश्न 37.
गंगा एवं ब्रह्मपुत्र की संयुक्त धारा का नाम है –
(a) मेघना
(b) यमुना
(c) द्वारकेश्वर
(d) स्वर्ण रेखा
उत्तर :
(a) मेंघना।

प्रश्न 38.
सिन्धु एक नदी है।
(a) अनुवर्ती
(b) वृक्षादार
(c) गुफित
(d) पूर्ववर्ती
उत्तर :
(d) पूर्ववर्ती।

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प्रश्न 39.
ब्रह्यपुत्र नदी तिब्बत में किस नाम से जाना जाता है ?
(a) साँग्पो
(b) मेघना
(c) तिस्ता
(d) गंगा
उत्तर :
(a) सॉंग्पो।

प्रश्न 40.
दक्षिण की गंगा नदी कहा जाता है –
(a) कृष्णा को
(b) कावेरी को
(c) गोदावरी को
(d) पेरियार को
उत्तर :
(b) कावेरी को।

प्रश्न 41.
गरसोपा या जोग जल प्रपात किस नदी पर स्थित है ?
(a) शरावती
(b) नर्मदा
(c) माही
(d) ताप्ती
उत्तर :
(a) शरावती।

प्रश्न 42.
निम्नलिखित में कौन-सी नदी अरब सागर में गिरती है ?
(a) गोदावरी
(b) नर्मदा
(c) कृष्णा
(d) कावेरी
उत्तर :
(b) नर्मदा।

प्रश्न 43.
भारत की अर्न्तर्देशीय नदी का नाम है –
(a) गंगा
(b) महानदी
(c) लूनी
(d) यमुना
उत्तर :
(c) लूनी।

प्रश्न 44.
भारत की सबसे लम्बी नदी का नाम है –
(a) गंगा
(b) सिन्धु
(c) बहापुत्र
(d) गोदावरी
उत्तर :
(a) गंगा।

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प्रश्न 45.
किस नदी को पहाड़ी क्षेत्र में कोणियाली कहा जाता है ?
(a) यमुना नदी
(b) चिनाव नदी
(c) प्यास नदी
(d) घाघरा नदी
उत्तर :
(d) घाघरा नदी।

प्रश्न 46.
चिनाव नदी को हिमाचल प्रदेश में क्या कहा जाता है ?
(a) चन्द्रभागा
(b) कोणियाली
(c) राक्षसताल
(d) मंजुली
उत्तर :
(a) चन्द्रभागा।

प्रश्न 47.
‘बिहार का शोक’ किस नदी को कहा जाता है ?
(a) दामोदर को
(b) घाघरा को
(c) कोसी को
(d) सोन को
उत्तर :
(c) कोसी को।

प्रश्न 48.
ताप्ती की एक मुख्य सहायक नदी है –
(a) माही
(b) पूरणा
(c) कुदाली
(d) दिहाग
उत्तर :
(b) पूरणा।

प्रश्न 49.
अरूणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी को किस नाम से पुकारा जाता है ?
(a) सांग्पो
(b) मंजूली
(c) कुदाली
(d) दिहांग
उत्तर :
(d) दिहांग।

प्रश्न 50.
माही नदी का उद्गम स्थल का नाम है –
(a) साभर झील
(b) मेहद झील
(c) मानसरोवर झील
(d) डल झील
उत्तर :
(b) मेहद झील।

प्रश्न 51.
भारत की जलवायु है –
(a) भूमध्यसागरीय
(b) भूमध्य रेखीय
(c) मानसूनी
(d) शीत
उत्तर :
(c) मानसूनी।

प्रश्न 52.
भारत का सबसे गर्म स्थान का नाम है –
(a) श्रींगानगर
(b) द्रांस
(c) मेदनीपुर
(d) बांकुडा
उत्तर :
(d) श्रीगंगानगर।

प्रश्न 53.
भारत में सबसे अधिक वर्षा होती है।
(a) चेरापूँजी में
(b) मौसीनराम में
(c) कोरोमण्डल में
(d) केरल में
उत्तर :
(b) मौसीनराम में।

प्रश्न 54.
भारत में स्थित एक वृष्टिछाया स्थान का नाम है –
(a) त्रिपुरा
(b) असम
(c) शिलांग
(d) नैनीताल
उत्तर :
(c) शिलांग।

प्रश्न 55.
किस तट पर साल में दो बार वर्षा होती है ?
(a) केरल तट
(b) मालावार तट
(c) कोंकण तट
(d) कोरोमण्डल तट
उत्तर :
(d) कोरोमण्डल तट।

प्रश्न 56.
पश्चिम बंगाल में चलने वाली स्थानीय हवा का नाम है –
(a) लू
(b) काल वैशाखी
(c) आँधी
(d) टाइफून
उत्तर :
(b) काल वैशाखी।

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प्रश्न 57.
एल-निनो की उत्पत्ति होती है –
(a) हिन्द महासागर में
(b) अन्ध महासागर में
(c) प्रशान्त महासागर में
(d) आर्कटिक महासागर में
उत्तर :
(c) प्रशान्त महासागर में।

प्रश्न 58.
पश्चिमी पवनों की एक धारा है –
(a) जेट स्ट्रीम
(b) ला-नीनो
(c) अल-नीनो
(c) मानूसन
उत्तर :
(a) जेट स्ट्रीम।

प्रश्न 59.
भारत में अधिकांश वर्षा होती है –
(a) चक्रवाती
(b) पर्वतीय
(c) संवहनीय
(d) मानसूनी
उत्तर :
(b) पर्वतीय।

प्रश्न 60.
ग्रीष्प ऋतु में होने वाली वर्षा को दक्षिण भारत में कहा जाता है –
(a) नार्वेस्टर
(b) खूनी वर्षा
(c) आम्म वर्षा
(d) शुष्क वर्षा
उत्तर :
(c) आम्र वर्षा।

प्रश्न 61.
जेट स्ट्रीम का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था ?
(a) ए०जी० टान्सले
(b) एम०टी॰ यौन
(c) सी०जी० रोंसबी
(d) टी० पी० नन
उत्तर :
(c) सी०जी० रॉसबी।

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प्रश्न 62.
मानसून वर्षा के अचानक आने को कहते हैं –
(a) क्रम भंगता
(b) मानसून विस्फोट
(c) पश्चात् मानसून
(d) पूर्व मानसून
उत्तर :
(b) मानसून विस्फोट।

प्रश्न 63.
उत्तर-पश्चिम भारत में निम्न दाब के क्षेत्र को कहते हैं –
(a) मानसून शीर्ष
(b) मानसून दोलन
(c) मानूसन गर्त
(d) मानसून फरबा
उत्तर :
(c) मानूसन गर्त।

प्रश्न 64.
दक्षिण-पश्चिम मानसून हिन्द महासागर की ओर से अत्यन्त तीव्र गर्जन एवं बिजली की चमक को कहा जाता है।
(a) पश्चिमी जेट
(b) आम्म वर्षा
(c) मानसून क्रम भंगता
(d) मानसून का फटना
उत्तर :
(d) मानसून का फटना।

प्रश्न 65.
उत्तर भारत में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली स्थानीय पवन को कहा जाता है –
(a) लू
(b) काल वैशाखी
(c) वीली-वीली
(d) हुडहुड
उत्तर :
(a) लू।

प्रश्न 66.
काली मिट्टी को कहा जाता है –
(a) रेंगूर
(b) खादर
(c) बागर
(d) घूसर
उत्तर :
(a) रेंगूर।

प्रश्न 67.
नवीन जलोढ़ मिट्टी है –
(a) बागर
(b) लाल
(c) खादर
(d) काली
उत्तर :
(c) खादर।

प्रश्न 68.
खादर मिट्टी को पंजाब में कहते हैं –
(a) टाल
(b) जल्ला
(c) कारी
(d) बेट
उत्तर :
(d) बेट।

प्रश्न 69.
बागर के प्रदेश में कंकड़ीली मिट्टी को कहते हैं –
(a) जल्ला
(b) भूड़
(c) ताल
(d) बेट
उत्तर :
(b) भूड़।

प्रश्न 70.
जलोढ़ मैदानों के बीच पाये जाने वाले गर्त को मोकामा में कहा जाता है –
(a) टाल
(b) जल्ला
(c) भूड़
(d) बागर
उत्तर :
(a) टाल।

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प्रश्न 71.
भारत में मिद्टी अनुसंधानशाला केन्द्र स्थापित है।
(a) पंश्चिम बंगाल में
(b) बिहार में
(c) नागपुर में
(d) देहरादून में
उत्तर :
(d) देहरादून में।

प्रश्न 72.
समुद्री जल के प्रदेश से खारी मिद्टी को केरल के तट पर कहा जाता है –
(a) भूड़
(b) घूसर
(c) कारी
(d) बेट
उत्तर :
(c) कारी।

प्रश्न 73.
उपजाऊ मिट्टी से अधिक पाया जाता है।
(a) बजंरी
(b) हूम्यूस
(c) बालू
(d) नमक
उत्तर :
(b) हूम्यूस।

प्रश्न 74.
लेटेराइट शब्द लैटिन भाषा के लेटेर से बना है जिसका अर्थ होता है –
(a) पत्वर
(b) बालू
(c) ईंट
(d) रेगूर
उत्तर :
(c) ईट।

प्रश्न 75.
पेड़ोकल मिद्टी में मात्रा अधिक होती है –
(a) बालू
(b) लोहा
(c) बूना
(d) ककड़
उत्तर :
(c) बूना।

प्रश्न 76.
किस वर्ष मिट्टी सर्वेक्षण विभाग ने मिट्टी का वर्गीकरण वैज्ञानिक रूप से किया ?
(a) 1965
(b) 1985
(c) 1995
(d) 1975
उत्तर :
(d) 1975

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प्रश्न 77.
किस मिट्टी में अपक्षालन की क्रिया सबसे अधिक होती है ?
(a) काली
(b) जलोढ़
(c) लेटेराइट
(d) पर्वतीय
उत्तर :
(c) लेटेराइट।

प्रश्न 78.
किस मिट्टी में लोहे की मात्रा अधिक होती है ?
(a) लाल
(b) काली
(c) लेटेराइट
(d) बलुई
उत्तर :
(a) लाल।

प्रश्न 79.
मूँगफली की खेती के लिए सबसे उपर्युक्त मिट्टी होती है –
(a) बलुई
(b) काली
(c) जलोढ़
(d) पर्वतीय
उत्तर :
(a) बलुई।

प्रश्न 80.
किस मिद्धी को कपास का मित्र कहा जाता है ?
(a) लाल
(b) जलोढ़
(c) काली
(d) लेटेराइट
उत्तर :
(c) काली।

प्रश्न 81.
चंबल नदी घाटी में किस प्रकार की मिट्टी अपरदन देखने को मिलता है ?
(a) नालीदार
(b) परतदार
(c) वायु
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) नालीदार अपरदन।

प्रश्न 82.
किस क्षेत्र में भू-स्खलन अधिक देखने को मिलता है ?
(a) मरूस्थलीय
(b) पर्वतीय
(c) डेल्टाई
(d) मैदानी
उत्तर :
(b) पर्वतीय।

प्रश्न 83.
भारत में भौगोलिक क्षेत्रफल के आथार पर वन का विस्तार है –
(a) 24.1
(b) 19.27
(c) 25.5
(d) 33.3
उत्तर :
(a) 24.1

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प्रश्न 84.
भारत में केन्दीय वन अनुसंधानशाला केन्द्र स्थापित है –
(a) शिमला में
(b) ईंटानगर में
(c) देहरादून में
(d) सुन्दरबन में
उत्तर :
(c) देहरादून में।

प्रश्न 85.
सुन्दरी नामक वृक्ष की अधिकता है –
(a) केरल में
(b) पश्चिम बंगाल में
(c) महाराष्ट्र में
(d) गुजरात में
उत्तर :
(b) पश्चिम बंगाल में।

प्रश्न 86.
गिर वन अवस्थित है –
(a) हिमाबल प्रदेश में
(b) पश्चिम बंगाल में
(c) गुजरात में
(d) असम में
उत्तर :
(c) गुजरात में।

प्रश्न 87.
भारत सरकार ने वन-महोत्सव मनाना आरंभ किया –
(a) 1952 ई० से
(b) 1972 ई० से
(c) 1962 ई० से
(d) 1982 ई० से
उत्तर :
(a) 1952 ई० से।

प्रश्न 88.
शुष्क और कँटीले बन निम्न में से कौन-सी नहीं है ?
(a) बबूल
(b) खैर
(c) खजूर
(d) ओक
उत्तर :
(d) ओंक।

प्रश्न 89.
कश्मीर में अल्पाइन वनस्पति चरागाह की झाँकी को कहते है।
(a) गर्ग
(b) मर्ग
(c) जर्ज
(d) अर्ग
उत्तर :
(b) मर्ग।

प्रश्न 90.
महोगनी एक प्रकार का वृक्ष है –
(a) चिरहरित
(b) पर्णपाती
(c) कँटीली
(d) ज्वारीय
उत्तर :
(a) चिरहरित।

प्रश्न 91.
मैनग्रोव एक प्रकार का वन है।
(a) पर्वतीय
(b) पतझड़ मानसून
(b) ज्वारीय
(d) चरहरित
उत्तर :
(c) ज्वारीय।

प्रश्न 92.
सुरक्षा की दृष्टिकोण से भारतीय वनों को बाँटा गया है।
(a) चार भाग में
(b) दो भाग में
(c) पाँच भाग में
(d) तीन भाग में
उत्तर :
(d) तीन भाग में।

प्रश्न 93.
भारत में राष्ट्रीय उद्यान (National Park) की संख्या है –
(a) 105
(b) 202
(c) 120
(d) 210
उत्तर :
(a) 105

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प्रश्न 94.
भारत में सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान (National Park) है –
(a) काजीरंगा
(b) गिर
(c) जलदापाड़ा
(d) जीम कोर्बेट
उत्तर :
(d) जीम कोर्बेट।

प्रश्न 95.
भारत में राष्ट्रीय अभयारण्य की संख्या है –
(a) 505
(b) 515
(c) 620
(d) 105
उत्तर :
(b) 515

प्रश्न 96.
भारत में बाघ परियोजना चालू की गई –
(a) 1 दिसम्बर 1973 से
(b) 8 अगस्त 1973 से
(c) 1 अप्रैल 1973 सें
(d) 15 अगस्त
उत्तर :
(c) 1 अप्रैल 1973 से

प्रश्न 97.
भारत के किस राज्य के वन परियोजना में एशियाई सिंह पाया जाता है ?
(a) पश्चिम बंगाल के सुन्दरवन
(b) उत्तरांचल के फूलों की घाटी
(c) अरूणाचल के नामदाफा
(d) गुजरात के गिर :
उत्तर :
(d) गुजरात के गिर।

प्रश्न 98.
पश्चिम बंगाल का सुन्दरवन किस जंगली जानवर के लिए प्रसिद्ध है ?
(a) हरिण
(b) रॉयल बंगाल टाइगर
(c) गेंडे
(d) हाथी
उत्तर :
(b) रॉयल बंगाल टाइगर।

प्रश्न 99.
राष्ट्रीय पश्षी होने का गौरव प्राप्त है –
(a) कोयल को
(b) मोर को
(c) बत्तख को
(d) गौरैया को
उत्तर :
(b) मोर को।

प्रश्न 100.
विश्व वन दिवस (World Forest Day) कब मनाया जाता है ?
(a) 21 मार्च
(b) 22 मार्च
(c) 25 मार्च
(d) 16 मार्च
उत्तर :
21 मार्च।

प्रश्न 101.
भारत का सबसे छोटा राज्य है :
(a) सिक्किम
(b) त्रिपुरा
(c) गोवा
(d) मिजोरोम
उत्तर :
(c) गोवा।

प्रश्न 102.
भारत में सबसे अधिक प्रचलित सिंचाई का साधन है :
(a) कुआँ एवं नलकूप
(b) तालाब
(c) नहर
(d) झरना या फब्बारा
उत्तर :
(c) नहर

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प्रश्न 103.
चन्दन लकड़ी के वृक्ष पनपते हैं :
(a) सदाबहार वन में
(b) कोणधारी वन में
(c) पतझार वन में
(d) मैंग्रोव वन में
उत्तर :
(a) सदाबहार वन में।

प्रश्न 104.
भारत की नदी घाटियों में पायी जानेवाली नवीन जलोढ़ मिद्टी को कहते हैं :
(a) भावर
(b) बांगर
(c) खादर
(d) धनकर
उत्तर :
(c) खादर।

प्रश्न 105.
डेल्टाई नमकीन मिट्टी में उगनेवाली वनस्पति है :
(a) झाड़ियाँ
(b) पतझड
(c) कोणधारी
(d) मैंग्रोव
उत्तर :
(d) मैंग्रोव।

प्रश्न 106.
कच्छ के रन में समाप्त होनेवाली नदी है :
(a) कृष्णा
(b) साबरमती
(c) लूनी
(d) माही
उत्तर :
(c) लूनी।

प्रश्न 107.
शुष्क क्षेत्र की कंटीली झाड़ियों को कहते हैं :
(a) जीरोफाइट
(b) हेलोफाइट
(c) होलोफाइट
(d) मेसोफाइट
उत्तर :
(a) जीरोफाइट।

प्रश्न 108.
शुष्क क्षेत्र की सूखी मिट्टी को कहते हैं :
(a) चेरनोजेम
(b) पॉडजोल
(c) सेरोजेम
(d) रेगुर
उत्तर :
(c) सेरोजेम।

प्रश्न 109.
पश्चिमी विक्षोभ किस मौसम में उत्पन्न होते हैं ?
(a) ग्रीष्म कतु में
(b) मानसून आगमन के समय
(c) शरद ज्ञतु में
(d) शीत ऋतु में
उत्तर :
(d) शीत कतु में।

प्रश्न 110.
अरावली की सबसे ऊँची चोटी है :
(a) माउण्ट आबू
(b) रुपगढ़
(c) गुरू शिखर
(d) माउण्ट अवरेस्ट
उत्तर :
(c) गुरू शिखर।

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प्रश्न 111.
घुआँधार जल प्रपात स्थित है :
(a) नर्मदा नदी पर
(b) ताप्ती पदी पर
(c) कावेरी नदी पर
(d) कृष्णा नदी पर
उत्तर :
(a) नर्मदा नदी पर।

प्रश्न 112.
भारत में स्थित एक मीठे पानी की झील है :
(a) सांभर
(b) रूपकुण्ड
(c) पुष्कर
(d) चिल्का
उत्तर :
(b) रूपकुण्ड।

प्रश्न 113.
भारत के अधिकतम क्षेत्र में विस्तारित मिद्टी हैं :
(a) जलोढ़ मिट्टी
(b) काली मिट्टी
(c) लाल मिट्टी
(d) मरुस्थली मिट्टी
उत्तर :
(a) जलोढ़ मिट्टी।

प्रश्न 114.
प्रायद्वीपीय भारत की सर्वोच्च चोटी है :
(a) दोदाबेटा
(b) अनाईमुडी
(c) महेन्द्रगिरि
(d) कोडरमा
उत्तर :
(b) अनाईमुडी।

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प्रश्न 115.
भारत का सबसे बड़ा लैगून है :
(a) चिल्का
(b) पुलीकेट
(c) कोलेरु
(d) बेम्बनाद
उत्तर :
(a) चिल्का।

प्रश्न 116.
उत्तरी भारत में ग्रीष्म ऋतु में दोपहर के समय प्रवाहित होनेवाली स्थानीय वायु को कहते हैं :
(a) लू
(b) आँधी
(c) नारवेस्टर
(d) आम्मवर्षा
उत्तर :
(a) लू।

प्रश्न 117.
नदी जिसका मुहाना कच्छ की खाड़ी है :
(a) कावेरी
(b) साबरमती
(c) कृष्गा
(d) लूनी
उत्तर :
(b) साबरमती।

प्रश्न 118.
भारत का एक सदाबहार वृक्ष है :
(a) साल
(b) पाइन
(c) चेस्टनट
(d) जूनिपर
उत्तर :
(b) पाइन।

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प्रश्न 119.
अक्षांश रेखा जो भारत के मध्य से गुजरती है :
(a) कर्क रेखा
(b) भूमध्य रेखा
(c) मकर रेखा
(d) उत्तरी धव
उत्तर :
(a) कर्क रेखा।

प्रश्न 120.
आम्र वर्षा (Mango shower) पाई जाती है :
(a) उत्तरी भारत में
(b) पूर्वी भारत में
(c) दक्षिणी भारत में
(d) पश्चिमी भारत में
उत्तर :
(c) दक्षिणी भारत में।

प्रश्न 121.
भारत एवं पाकिस्तान की सीमारेखा का नाम है :
(a) रेडक्लिफ लाइन
(b) मैकमोह्हन लाइन
(c) राजस्थान लाइन
(d) लाइन ऑठ सेट्रेल इन कश्मीर
उत्तर :
(a) रेडक्लिफ लाइन।

प्रश्न 122.
उत्तरी भारत में नहरों द्वारा सिंचाई के विकास का मुख्य कारण है :
(a) पूरे वर्ष लगातार वर्षा होना
(b) शाखा नदियों की अधिकता
(c) विस्तृत समतल मैदान की उपस्थिति
(d) कठोर चट्टानों की संरचना
उत्तर :
(c) विस्तृत समतल मैदान की उपस्थिति।

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प्रश्न 123.
वर्षा व्रतु में यदि वर्षा 10 दिनों से अधिक समय के लिए स्थगित हो जाती है तो इसे कहते हैं :
(a) मानसून प्रत्यावर्तन
(b) मानसून का स्थगन
(c) मानसून का विस्फोट
(d) मानसून विक्षोभ
उत्तर :
(b) मानसून का स्थगन।

प्रश्न 124.
श्वसनमूल पाया जाता है :
(a) शीशम में
(b) साल के वृक्ष में
(c) चिरहरित झाड़ियों में
(d) गोरान वृक्ष्ष में
उत्तर :
(d) गोरान वृक्ष में।

प्रश्न 125.
भारत में मानसून का प्रवेश सर्वप्रथम होता है :
(a) केरल में
(b) मेघालय में
(c) अण्डमान और मिकोलार द्विम में
(d) तमिलनाहु में
उत्तर :
(c) अण्डमान और निकोबार द्वीप में।

प्रश्न 126.
स्वर्णिम चतुर्भुज के अन्तर्गत सम्मिलित है :
(a) राष्ट्रीय राजमार्ग
(b) राजकीय राजमार्ग
(c) जलमार्ग
(d) रेलमार्ग
उत्तर :
(a) राष्ट्रीय राजमार्ग।

प्रश्न 127.
भाबर से तात्पर्य है –
(a) पुरानी जलोढ़ मिट्टी
(b) नवीन जलोढ़ मिट्टी
(c) दोमट मिट्टी
(d) शिवालिक की तलहटी में कंकड, रेत, बजरी, पत्यर से निर्मित भूमि
उत्तर :
(d) शिर्वालिक की तलहटी में कंकड़, रेत, बजरी, पत्थर से निर्मित भूमि

प्रश्न 128.
खादर क्या है ?
(a) नवीन जलोढ़ मिट्री का क्षेत्
(b) तराई क्षेत्र
(c) कंकरीली जमीन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) नवीन जलोढ़ मिट्टी का क्षेत्र

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प्रश्न 129.
जेट स्ट्रीम एक प्रकार की वायु है-
(a) जो दक्ष्णिणी धुव पर वलती है
(b) जो भूमध्य रेखा पर प्रवाहित होती है
(c) जो 6000 से 12000 मी० की ऊँचाई पर दोनों गोलार्धो में चलती है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) जो 6000 से 12000 मी० की ऊँचाई पर दोनों गोलार्षों में चलती है

प्रश्न 130.
किस घाटी को पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाता है ?
(a) गंगा घाटी
(b) कशमीर घाटी
(c) अह्मापुत्र घाटी
(d) किसी को नहीं
उत्तर :
(b) कश्मीर घाटी

प्रश्न 131.
दक्षिण भारत की गंगा –
(a) नर्मदा
(b) तापी
(c) कृष्षणा
(d) गोदावरी
उत्तर :
(d) गोदावरी

प्रश्न 132.
वर्षा जल संरक्षण पर किस प्रदेश ने सबसे अधिक ध्यान दिया है ?
(a) उत्तर-प्रदेश
(b) बंगाल
(c) महाराष्ट्र
(d) तमिलनाडु
उत्तर :
(d) तमिलनाडु

प्रश्न 133.
भारत में सबसे अधिक गर्मी कहाँ रेकाई्ड की गयी है ?
(a) कोलकाता
(b) गंगानगर
(c) चेरापूँजी
(d) इलाहाबाद
उत्तर :
(b) गंगानगर

प्रश्न 134.
काली मिट्टी किस राज्य में पाई जाती है ?
(a) बिहार-उत्तर प्रदेश
(b) बंगाल-उड़ीसा
(c) महाराष्ट्र-गुजरात
(d) तमिलनाहु-केरल
उत्तर :
(c) महाराष्ट-गुजरात

प्रश्न 135.
ज्वारीय वन किस भू-भाग में पाया जाता है ?
(a) पर्वतीय भाग
(b) पठारी भाग
(c) मैदानी भाग
(d) समुद्र तटीय भाग
उत्तर :
(d) समुद्र तटीय भाग

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प्रश्न 136.
राज्यों के पुनर्गठन का मुख्य आधार है –
(a) भाषा
(b) धर्म
(c) भू-प्रकृति
(d) प्राकृतिक सीमाएँ
उत्तर :
(a) भाषा

प्रश्न 137.
हिमालय का सबसे नवीन भाग है –
(a) शिवालिक या वाह्ह हिमालय
(b) लघु हिमालय
(c) ट्रान्स हिमालय
(d) महान हिमालय
उत्तर :
(a) शिवालिक या वाह्म हिमालय

प्रश्न 138.
ब्रहमपुत्र नदी को तिब्बत में कहते हैं –
(a) सॉपू
(b) दिहांग
(c) लोहित
(d) धिनश्री
उत्तर :
(a) संपू

प्रश्न 139.
शिवसमुद्रम जल प्रपात स्थित है –
(a) कावेरी नदी पर
(b) ताप्ती नदी पर
(c) कृष्णा नदी पर
(d) सारबरमती नदी पर
उत्तर :
(a) कावेरी नदी पर

प्रश्न 140.
भारत में पश्चिमी विक्षोभ के लिए उत्तरदायी हैं –
(a) पदुआ जेट धाराएँ
(b) पूर्वी जेट धाराएँ
(c) सन्मार्गी हवाएँ
(d) मानसूनी हवाएँ
उत्तर :
(a) पछुआ जेट धाराएँ

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प्रश्न 141.
ग्रीष्म ऋतु में पश्चिम बंगाल में होने वाली तूफानी वर्षा को कहते हैं –
(a) आम वर्षा
(b) फूलों वाली वर्षा
(c) कहवा की वर्षा
(d) काल बैशाखी
उत्तर :
(d) काल बैशाखी

प्रश्न 142.
भारत के उत्तरी मैदान में पाई जाने वाली मिट्टी है –
(a) लैटेराइट मिट्टी
(b) काली मिट्टी
(c) जलोढ़ मिट्टी
(d) लाल मिट्टी
उत्तर :
(c) जलोढ़ मिट्टी

प्रश्न 143.
बैसाल्ट के विखण्डन से निर्माण हुआ है-
(a) काली मिट्टी का
(b) लेटराइट मिट्टी का
(c) लाल मिट्टी का
(d) बलुई मिट्टी का
उत्तर :
(a) काली मिट्टी का

प्रश्न 144.
भारत में 200 से०मी० से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं-
(a) शुष्क पतझड़ के वन
(b) मरुस्थलीय वन
(c) ज्वारीय वन
(d) उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
उत्तर :
(d) उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन

प्रश्न 145.
कपास का उत्पादन होता है :
(a) लाल मिट्टी में
(b) जलोढ़ मिट्टी में
(c) काली मिट्टी में
(d) लैटेराइट मिट्टी में
उत्तर :
(c) काली मिट्टी में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ………………… मेघालय पठार का सर्वोच्च भाग है।
उत्तर : शिलांग।

2. भारत के राज्यों को …………………के आधार पर बांटा गया है।
उत्तर : भाषा एवं संस्कृति।

3. भारत की आकृति पूर्णतः त्रिभुजाकार न होकर …………………है।
उत्तर : चतुष्कोणीय।

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4. भारत की दक्षिणी सीमा …………………द्वारा निर्धारित होती है।
उत्तर : कन्याकुमारी।

5. अरब सागर में स्थित द्वीप …………………है।
उत्तर : लक्षद्वीप।

6. भरत का स्वर्ग …………………है।
उत्तर : काश्मीर।

7. भारत एवं पकिस्तान के बीच अन्तर्राष्ट्रीय सीमा रेखा को …………………कहते हैं।
उत्तर : रेडक्लिफ।

8. भारत, क्षेत्रफल की दृष्टि से बंगलादेश से …………………बड़ा है।
उत्तर : 23 गुना।

9. भारत का उन्नतीसवें राज्य का नाम …………………है।
उत्तर : तेंलगना।

10. भारत का सबसे बड़ा केन्द्रशासित राज्य ………………..है।
उत्तर : अण्डमान-निकोबार।

11. भारत का सबसे छोटा राज्य ………………..है।
उत्तर : गोवा।

12. अक्षांश की दृष्टिकोण से भारत ………………..के बीच स्थित है।
उत्तर : 8° 4’ से 37° 6‘

13. उत्तर भारत में हिमालय का विस्तार काराकोरम से ………………..पर्वत तक है।
उत्तर : हिंदकुश।

14. विश्व का सबसे ऊँचा सड़क मार्ग कश्मीर लेह ………………..को पार करके बनाया गया है।
उत्तर : काराकोरम दर्रें।

15. टेथिस सागर के उत्तर में स्थित स्थल भाग ………………..था।
उत्तर : अंगारालैंड।

16. गॉडविन आस्टिन की ऊँचाई ………………..है।
उत्तर : 8611 मीटर।

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17. विश्व की दूसरी ऊँची चोटी का नाम ………………..है।
उत्तर : K2 अथवा गाँडविन आस्टीन।

18. उत्तरी सरकार तट का दूसरा नाम ………………..है।
उत्तर : गोलकुण्डा तट।

19. भारत एवं श्रीलंका के बीच मन्नार की खाड़ी में ………………..पाया जाता है।
उत्तर : पामवन द्वीप।

20. छोटा अंडमान और कार निकोबार को अलग करने वाली ………………..है।
उत्तर : 10° चैनल।

21. निकोबार द्वीप समूह की सर्वोच्च चोटी ………………..है।
उत्तर : घुलियार।

22. पुलीकट एक वलयाकार ………………..है।
उत्तर : प्रवाल झील (Atoll Lake)।

23. नीलगिरी पर्वत की सर्वोच्च चोटी का नाम ………………..है।
उत्तर : दोदा बेटा।

24. प्रायद्वीपीय भाग की अधिकांश नदियाँ ………………..हैं।
उत्तर : अनुगामी (Conesquents)!

25. तिब्मत में ब्रह्मपुत्र नदी को ………………..कहते हैं।
उत्तर : सांग्रो।

26. नर्मदा नदी भड़ोच के पास ………………..में गिरती है।
उत्तर : खम्भात की खाड़ी।

27. नवीन जलोढ़ मैदान के बीच पाये जाने वाले गर्त को पटना के निकट ………………..कहते हैं।
उत्तर : जल्ला।

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28. दो नदियों के बीच की भूमि को ………………..कहते हैं।
उत्तर : दोआब।

29. राजस्थान के मैदानी भाग में स्थित सबसे बड़ा नमकीन झील ………………..है।
उत्तर : सांभर।

30. भारत का प्रसुप्त ज्वालामुखी ………………..है।
उत्तर : बैरेन द्वीप।

31. भाखड़ा नंगल बांध ………………..नदी पर बना है।
उत्तर : सतलज।

32. गंगा नदी बंगलादेश में …………..के नाम से बहती है।
उत्तर : पद्मा।

33. भारत का सबसे बड़ी झील …………..है।
उत्तर : चिल्का।

34. ग्रीष्म ॠतु में तीव्र आर्द हवाओं को कर्नाटक में …………..कहा जाता है।
उत्तर : चेरी बलास्म।

35. भारत में न्यूनतम वर्षा …………..होती है।
उत्तर : जैसलमेर में।

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36. पश्चिमी घाट में स्थित वृष्टिछाया प्रदेश का नाम …………..है।
उत्तर : पूना।

37. वर्षा की अनिश्चितता के कारण भारतीय मानूसन को कहते …………..हैं।
उत्तर : मानसून का जुआ (Gamble in Monsoon)।

38. जून से सितम्बर के बीच वर्षा के …………..कारण होती है।
उत्तर : दक्षिण-पश्चिम मानसून।

39. अल-निनो के विपरीत चलने वाली समुद्री थारा को …………..कहते हैं।
उत्तर : ला-निनो।

40. ग्रीष्म ऋतु में जेट स्ट्रीम का प्रवाह …………..की ओर होता है।
उत्तर : पश्चिम से पूरब।

41. …………..के समीपवर्ती क्षेत्रों में मई में होने वाली वर्षा को फूलों वाली बौछार के नाम से पुकारा जाता है।
उत्तर : कर्नाटक।

42. कापासी मिट्टी …………..मिट्टी को कहा जाता है।
उत्तर : काली।

43. झूम कृषि …………..में की जाती है।
उत्तर : पर्वतीय मिट्टी।

44. लैटेराइट मिट्टी में …………..की क्रिया अधिक होती है।
उत्तर : अपक्षलन (Leaching)।

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45. पीट या जैविक मिट्टी को …………..भी कहा जाता है।
उत्तर : कारी।

46. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् …………..में स्थापित है।
उत्तर : कृषि भवन, नई दिल्ली।

47. नारियल एवं तेल ताड़ की खेती ………….. भूमि में की जाती है।
उत्तर : नमकीन एवं क्षारीय।

48. अधिकतर परत अपरदन (Sheet Erosion) …………..में देखने को मिलता है।
उत्तर : पश्चिम भारत।

49. केन्द्रीय भूमि संरक्षण बोर्ड की स्थापना …………..में की गई,
उत्तर : 1953 ई०।

50. बागर मिट्टी की सतह के नीचे …………..पायी जाती है।
उत्तर : चुने की गांठें (Nodulus)

51. पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिला में …………..मिट्टी पायी जाती है।
उत्तर : लैटेराइट।

52. भारत के पश्चिमी घाट में …………..वन पाये जाते हैं।
उत्तर : चिरहरित।

53. नागफनी एक………….. है।
उत्तर : शुष्क एक कँटीला वन।

54. ज्वारीय वन की पेटियों में ………….नामक पेड़ अधिक मिलते हैं।
उत्तर : सुन्दरी।

55. मणिपुर के लोकटक झील के दक्षिणी-पूर्वी भाग ………….में वामिग मृग पाया जाता है।
उत्तर : केबुल लमजाओ।

56. पश्चिम बंगाल की नदियों एवं नालों में ………….के अत्यधिक विस्तार के कारण बंगाल का आतंक कहते हैं।
उत्तर : जलकुंभी।

57. वनों की कटाई पर रोक लगाने के लिए चलाया गया अभियान को ………….कहा गया है।
उत्तर : चिपको आंदोलन।

58. भारतीय वन बोर्ड का गठन ………….किया गया।
उत्तर : 1985 ई० में

59. असम में ………….को संरक्षण के लिए 1988 में योजना स्थापित की गई।
उत्तर : हाशियों।

60. ………….घाटी जास्कर और पीरपंजाल श्रेणियों के मध्य स्थित है।
उत्तर : कश्मीर।

61. भारत का दक्षिणतम बिन्दु ………….है।
उत्तर : इन्दिरा वाइंट।

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62. भारत का डेट्रायट ………….को कहा जाता है।
उत्तर : चेन्नई।

63. भारत के पश्चिमी तट पर स्थित लैगून झीलों को कहा ………….जाता है।
उत्तर : कयाल (Kayal).

64. तुँगभद्रा ………….नदी की सहायक नदी है।
उत्तर : कृष्णा।

65. ………….को नारंगी का शहर कहा जाता है।
उत्तर : नागपुर।

66. ‘चिनूक’ वायु पर्वत पर पायी जाती है।
उत्तर : राकी।

67. जहाँ आज हिमालय पर्वत स्थित है वहाँ पहले ………….सागर था।
उत्तर : टेथिस।

68. ………….मिद्धी कपास की कृषि के लिए सर्वोच्च है।
उत्तर : काली।

69. पश्चिमी तटीय मैदान में दमन से गोवा तक के भाग को ………….कहते हैं।
उत्तर : कोंकन तट।

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70. ………….सूचना प्रौद्योगिकी का प्रधान केन्द्र है।
उत्तर : बेंगलोर।

71………….. को दक्षिण भारत की गंगा कहते हैं।
उत्तर : गोदावरी।

72. ………….राजस्थान की खारे पानी की झील है।
उत्तर : साँभर।

73. भारत में शीत ऋतु ………….महीनों में होती है।
उत्तर : मध्य दिसम्बर से फरवरी।

74. श्रूसन मूल के ………….वृक्षों में मिलते हैं।
उत्तर : मेंग्रोव।

75. दक्कन के पठार के ………….भाग को दक्कन ट्रैप कहते हैं।
उत्तर : उत्तरी-पश्चिमी।

76. अण्डमान द्वीप समूह की सबसे ऊँची चोटी ………….है।
उत्तर : माउण्ट थुलियर।

77. भारत में कुल भूतल जल संसाधन लगभग ………….है।
उत्तर : 16.7 करोड़ हे०मी०।

78. तिस्ता तथा सुवर्णश्री ………….की सहायक नदियाँ हैं।
उत्तर : ब्रह्मपुत्र।

79. भारत में ………….राज्य में जल संग्रह रचना को बनाना आवश्यक कर दिया गया है।
उत्तर : तामिलनाडू।

80. हिन्द महासागर में ………….के आगमन से ग्रीष्म कालीन मानसून हवाएँ कमजोर पड़ जाती है।
उत्तर : एलनिनो।

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81. लौटती हुई मानसूनी हवाओं से ………….तट पर वर्षा होती है।
उत्तर : कोरोमण्डल।

82. ………….मिट्टी का स्थानीय नाम रेगु है।
उत्तर : काली।

83. जिन कच्चे मालों का भार उत्पादन प्रक्रिया में कम नहीं होते उन्हें ………….कच्चा माल कहते हैं।
उत्तर : शुद्ध।

84. भारत में सड़कों की कुल लम्बाई ………….कि०मी० है।
उत्तर : 41 लाख।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. बिहार और छत्तीसगढ़ में उष्णकटिबन्धीय सदाबहार वन पाए जाते हैं।
False

1. म्यानमार भारत के दक्षिण में स्थित है।
उत्तर : False

2. भारत एवं अफगानिस्तान के बीच डुरण्ड रेखा है।
उत्तर : False

3. भारत के सबसे उत्तरी विन्दु इन्दिरा काल जम्मू-काश्मीर में है।
उत्तर : True

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4. कर्क रेखा भारत के गुंजरात राज्य से होकर गुजरती है।
उत्तर : True

5. 8° चैनेल मालदीव एवं लक्षदीप के बीच है।
उत्तर : False

6. केन्द्रशासित प्रदेश का सबसे बड़ा बन्दरगाह पोर्ट-ब्लयेर है।
उत्तर : True

7. नारकोंडम भारत का सक्रिय ज्वालामुखी है।
उत्तर : False

8. टेथिस सागर के दक्षिण में गोडवानालैंड नामक स्थलीय भाग स्थित था।
उत्तर : True

9. वृहद हिमालय को हिमाद्री भी कहा जाता है।
उत्तर : True

10. लघु हिमालय में काराकोरम दर्रा है।
उत्तर : False

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11. अण्डमान द्वीप की सर्वोच्च चोटी सैडल चोटी है।
उत्तर : True

12. सिन्धु-ब्रह्मपुत्र डेल्टा का पुराना भाग है।
उत्तर : False

13. राजस्थान की प्रमुख नदी नर्मदा है।
उत्तर : False

14. चंबल एक अनुवर्ती अपवाह प्रणाली है।
उत्तर : True

15. अरब सागर में गिरनेवाली नदियाँ डेल्टा का निर्माण करती है।
उत्तर : False

16. दक्षिण भारत की अधिकांश नदियाँ वृक्षनुमा अपवाह का निर्माण करती है।
उत्तर : True

17. कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम नामक प्रसिद्ध जल प्रपात बनाती है।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

18. बाल घाट जम्मु काश्मीर राज्य की प्रमुख दर्रा है।
उत्तर : False

19. विंध्याचल एक नवीन मोड़दार पर्वत है।
उत्तर : False

20. भारत का नवीनतम राज्य झारखण्ड है।
उत्तर : False

21. भावर प्रदेश को शिवालिक का जलोढ़ कहा जाता है।
उत्तर : True

22. विशाखापत्तनम बन्दरगाह डॉल्फिन नामक चट्टान के पीछे सुरक्षित है।
उत्तर : True

23. कुआँ सिंचाई का सबसे नवीन साधन है।
उत्तर : False

24. दामोदर नदी घाटी परियोजना पश्चिम बंगाल में स्थित है।
उत्तर : False

25. दामोदर नदी को पश्चिम बंगाल का दु:ख की नदी कहा जाता है।
उत्तर : True

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26. अरावली के पश्चिम की ओर थार मरूभूमि में बरखान टीले पाये जाते हैं।
उत्तर : True

27. पश्चिमी तटीय मैदान में गोआ से मंगलौर तक के भाग को कोंकण तट कहते हैं।
उत्तर : False

28. लक्षद्वीप को सैलानियो का स्वर्ग कहा जाता है।
उत्तर : True

29. माही नदी विंध्याचल पर्वत के अमझरा में मेहद झील से निकलती है।
उत्तर : True

30. भारत में सबसे ठण्डे स्थान का नमा द्रास है।
उत्तर : True

31. बंगाल की खाड़ी का मानसून अरब सागर के मानसून की अपेक्षा कुछ देर से आता है।
उत्तर : True

32. चेरापुँजी में वर्षा 25 से॰मी॰ से कम होती है।
उत्तर : False

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33. उत्तर-पूर्वी भारत में शीत ऋतु में नार्वेस्टर चलती है।
उत्तर : False

34. जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र में गेहूँ एवं चावल के कटोरे का क्षेत्र कहा जाता है।
उत्तर : True

35. जेट स्ट्रीम क्षोमभण्डल में प्रवाह होती है।
उत्तर : False

36. लैटेराइट मिट्टी में चाय की खेती की जाती है।
उत्तर : True

37. रबर एवं कहवा की खेती के लिए पर्वतीय मिट्टी उपयुक्त होती है।
उत्तर : False

38. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार भारात की 60 प्रतिशत भूमि क्षरण की समस्या से प्रभावित है।
उत्तर : True

39. सुन्दर लाल बहुगुणा बंग-भंग आन्दोलन चलाये थे।
उत्तर : False

40. वन संरक्षण कानून 1980 ई० में पास किया गया।
उत्तर : True

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41. पश्चिम बंगाल में गैड़ा संरक्षण परियोजना है।
उत्तर : False

42. चेरनोजेम मिट्टी को ही काली मिट्टी कहा जाता है।
उत्तर : True

43. पेडाल्फर क्षेत्रीय मिट्टी का अच्छा उदाहरण है।
उत्तर : True

45. मिट्टी को मात्र भौतिक गुण के आधार पर रखा गया है।
उत्तर : True

46. देवदार एक झाड़ीनुमा वृक्ष है।
उत्तर : False

47. अरुणाचल प्रदेश सबसे अधिक घना वन का क्षेत्र है।
उत्तर : False

48. गारो पहाड़ियों में तुरा सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।
उत्तर : True

49. गारो, खांसी जयंतिया शिवालिक श्रेणी की पहाड़ियां हैं।
उत्तर : False

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50 वनों के विनाश से मिद्री का कटाव होता है।
उत्तर : True

51. भारत में सबसे अधिक सिंचाई नहरों द्वारा होती है।
उत्तर : True

52. भारत में तालाबों द्वारा सबसे अधिक सिंचाई उत्तर-प्रदेश में की जाती है।
उत्तर : False

53. लौटती हुई मानसूनी हवाओं से कोंकण तट पर सबसे अधिक वर्षा होती है।
उत्तर : True

54. भारत मात्र एक पाक जलमरूमध्य द्वारा श्रीलंका से अलग है।
उत्तर : False

55. अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह बंगोपसागर में स्थित है।
उत्तर : True

56. महा नदी के डेल्टाई भाग में चिल्का झील स्थित है।
उत्तर : True

57. बेम्वानद झील भारत के पूर्वी तट पर स्थित है।
उत्तर : False

58. राजस्थान के पूर्वी भाग में वनों का विस्तार बढ़ रहा है।
उत्तर : True

59. मिट्टी के कटाव में पशुचारण को बढ़ावा देना चाहिए।
उत्तर : False

60. अवनलिका अपरदन (Gully Erosion) से सम्पूर्ण क्षेत्र उत्तात स्थल रूप में बदल जाता है।
उत्तर : True

61. भारत का नवीनतम् राज्य तेलंगना है।
उत्तर : True

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62. कोलकाता भारत के पूर्वी तट का एक समुद्री बंदरगाह है।
उत्तर : False

63. हिमालय की नीलकंठ चोटी गिरिश्रृंग का उदाहरण है।
उत्तर : True

64. भारतीय सर्वेक्षण विभाग का मुख्यालय देहरादून में स्थित है।
उत्तर : True

65. उष्ण मरुस्थल ध्रुवीय हवाओं के मार्ग में स्थित होते हैं।
उत्तर : False

66. लेटराइट मिट्टी मुख्य रूप से पर्वतीय अंचलों में पायी जाती है।
उत्तर : False

67. भारत में नगरीकरण की दर 60% है।
उत्तर : False

68. नारकोंडम भारत का सक्रिय ज्वालामुखी है।
उत्तर : False

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69. वनों के विनाश से मिट्टी का कटाव होता है।
उत्तर : True

70. कंचनजंघा भारत की सबसे ऊँची चोटी है।
उत्तर : True

71. ‘बाबला’ एक मैंग्रोव वृक्ष का नाम है।
उत्तर : False

72. भारत का लगभग 64% क्षेत्रफल जलोढ़ मिट्टी द्वारा आव्छादित है।
उत्तर : False

73. भारत वर्ष में कुल कृषि मजदूर पूरी जनसंख्या का 31.71 हैं।
उत्तर : False

74. विश्च गाँव के निर्माण में इण्टरनेट ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है।
उत्तर : False

75. पुरानी जलोढ़ मिट्टी के मैदान को बांगर कहते हैं।
उत्तर : True

76. पूर्वी तट की प्रमुख लैगून झील चिल्का है।
उत्तर : True

77. सिन्ध मान सरोवर से निकलती है।
उत्तर : False

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78. ब्रह्मपुत्र अरब सागर में गिरता है।
उत्तर : False

79. मिनिकाय द्वीप लक्ष द्वीप में पड़ता है।
उत्तर : False

80. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली ब्रह्मपुत्र नदी में निर्मित है।
उत्तर : True

81. सांभर और पुष्कर राजस्थान की खारे पानी की झीलें हैं।
उत्तर : True

82. मानसूनी हवाएँ नियमित और निश्चित होती हैं।
उत्तर : False

83. कश्मीर और हिमांचल प्रदेश में लवणीय मिट्टी पायी जाती है।
उत्तर : False

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84. भारत पाक जलडमरुमध्य द्वारा श्रीलंका से अलग है।
उत्तर : True

85. भारत का सबसे छोटा राज्य गोवा है।
उत्तर : True

86. लद्दाख का पठार भारत का सबसे ऊँचा पठार है।
उत्तर : True

87. लघु हिमालय की औसत ऊँचाई 6000 मीटर है।
उत्तर : False

88. दक्षिण के पठार भाग की औसत ऊँचाई 1500 मीटर है।
उत्तर : False

89. विन्ध्यांचल एवं अरावली पर्वतों के मध्य मालवा का पठार स्थित है।
उत्तर : True

90. पश्चिमी तटीय मैदान की चौड़ाई 50-60 कि०मी० है।
उत्तर : True

91. थार के मरुस्थल की एक मात्र नदी लूनी है।
उत्तर : True

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92. सतलज नदी राक्षस ताल झील से निकलती है।
उत्तर : True

93. माजुली नदी द्वीप ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित है।
उत्तर : True

95. ‘हरियाली’ केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल संभर विकास परियोजना है।
उत्तर : True

96. 15 अक्टूबर के बाद पश्चिम बंगाल में मानसूनी हवाओं का प्रत्यावर्तन होने लगता है।
उत्तर : True

97. लेटराइट मिट्टी में लौह ऑक्साइड की अधिकता होती है।
उत्तर : True

98. वनों के विनाश से मिट्टी का कटाव होता है।
उत्तर :True

99. पूर्वी राजस्थान में आर्द्र पतझड़ के वन पाए जाते हैं।
उत्तर : False

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100. उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिमी गलियारे की लम्बाई 7300 कि॰मी० है।
उत्तर :  True

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) केन्द्रशासित छोटा राज्य (i) जमुना
(b) तुगभद्रा नदी का उद्गम (ii) नवीन जलोढ़ मिट्टी
(c) पाल घाट (iii) जोधपुर
(d) गोवा से मंगलौर तक (iv) छत्तीसगढ़
(e) अंडमान निकोबार में द्वीप की संख्या (v) देहरादून
(f) खादर (vi) स्वर्ण रेखा
(g) ब्रह्मपुत्र नदी को बांग्लादेश (vii) आम्र वृष्टि
(h) अमरकंटक पहाड़ से (viii) 572
(i) भारत का छब्बीसवाँ राज्य (ix) लक्षद्वीप
(j) नारंगी का शहर (x) कनारा तट
(k) अध्यारोपित अपवाह (xi) गंगा मूल
(l) दक्षिण भारत में वर्षा (xii) लक्षद्वीप एवं मिनीकाय के बीच
(m) केन्द्रीय शुष्क अनुसंधानशाला (xiii) पश्चिमी घाट
(n) 9° चैनेल (xiv) नागपुर
(o) भारतीय वन्य प्राणी संस्थान (xv) नर्मदा

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) केन्द्रशासित छोटा राज्य (ix) लक्षद्वीप
(b) तुगभद्रा नदी का उद्गम (xi) गंगा मूल
(c) पाल घाट (xiii) पश्चिमी घाट
(d) गोवा से मंगलौर तक (x) कनारा तट
(e) अंडमान निकोबार में द्वीप की संख्या (viii) 572
(f) खादर (ii) नवीन जलोढ़ मिट्टी
(g) ब्रह्मपुत्र नदी को बांग्लादेश (i) जमुना
(h) अमरकंटक पहाड़ से (xv) नर्मदा
(i) भारत का छब्बीसवाँ राज्य (iv) छत्तीसगढ़
(j) नारंगी का शहर (xiv) नागपुर
(k) अध्यारोपित अपवाह (vi) स्वर्ण रेखा
(l) दक्षिण भारत में वर्षा (vii) आम्र वृष्टि
(m) केन्द्रीय शुष्क अनुसंधानशाला (iii) जोधपुर
(n) 9° चैनेल (xii) लक्षद्वीप एवं मिनीकाय के बीच
(o) भारतीय वन्य प्राणी संस्थान (v) देहरादून

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प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. भारत का अक्षांशीय विस्तार है (a) भारतीय मानसून की उत्पत्ति
2. I.T.C. का प्रभाव (b) बंजर एवं खाली जमीन में वक्षांश के बीच
3. एलनीनो (El-Nino) का प्रभाव (c) 8° 4’ से 37° 6’ N अक्षांश के बीच
4. कृषि वनारोपण है (d) प्रशान्त महासागर के जल का तापमान ऊँचा होना
5. स्थानान्तरणशील कृषि का दूसरा नाम है (e) जूट और कपास
6. नकदी फसलें हैं (f) मिलेट
7. धान, मक्का, मूँगफली, मूंग की फसल है (g) झूमिंग कृषि
8. रेशेदार फसल है (h) कुल्टी, बर्नपुर, हीरापुर के स्टील प्लाण्ट
9. IISCO के अन्तर्गत है (i) जायद की फसल
10. रागी है (j) चाय, गत्ना, कपास, जूट आदि

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. भारत का अक्षांशीय विस्तार है (c) 8° 4’ से 37° 6’ N अक्षांश के बीच
2. I.T.C. का प्रभाव (a) भारतीय मानसून की उत्पत्ति
3. एलनीनो (El-Nino) का प्रभाव (d) प्रशान्त महासागर के जल का तापमान ऊँचा होना
4. कृषि वनारोपण है (b) बंजर एवं खाली जमीन में वक्षांश के बीच
5. स्थानान्तरणशील कृषि का दूसरा नाम है (g) झूमिंग कृषि
6. नकदी फसलें हैं (j) चाय, गत्ना, कपास, जूट आदि
7. धान, मक्का, मूँगफली, मूंग की फसल है (i) जायद की फसल
8. रेशेदार फसल है (e) जूट और कपास
9. IISCO के अन्तर्गत है (h) कुल्टी, बर्नपुर, हीरापुर के स्टील प्लाण्ट
10. रागी है (f) मिलेट

प्रश्न 3.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. राज्यों का पुनर्गठन की स्थापना (a) तेलंगाना
2. भारत का सबसे नया राज्य (b) इम्फाल
3. नागालैण्ड की राजधानी (c) 1953
4. मणिपुर की राजधानी (d) कोहिमा

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. राज्यों का पुनर्गठन की स्थापना (c) 1953
2. भारत का सबसे नया राज्य (a) तेलंगाना
3. नागालैण्ड की राजधानी (d) कोहिमा
4. मणिपुर की राजधानी (b) इम्फाल

प्रश्न 4.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. हिमालय की सर्वोच्च चोटी (a) पश्चिमी हिमालय
2. भारत स्थित हिमालय की सर्वोच्च चोटी (b) गंगा
3. कश्मीर हिमालय की स्थिति (c) माउण्ट एवेरेस्ट
4. उत्तर के मैदानी भाग की प्रधान नदी (d) गाडविन आस्टिन

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. हिमालय की सर्वोच्च चोटी (c) माउण्ट एवेरेस्ट
2. भारत स्थित हिमालय की सर्वोच्च चोटी (d) गाडविन आस्टिन
3. कश्मीर हिमालय की स्थिति (a) पश्चिमी हिमालय
4. उत्तर के मैदानी भाग की प्रधान नदी (b) गंगा

प्रश्न 5.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. गंगोत्री हिमनद (a) तामिलनाडु
2. अमर कंटक पर्वत (b) भाखरा नांगल
3. तालाबों से सिंचाई का क्षेत्र (c) गंगा नदी
4. नदी घाटी योजना (d) महानदी

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. गंगोत्री हिमनद (c) गंगा नदी
2. अमर कंटक पर्वत (d) महानदी
3. तालाबों से सिंचाई का क्षेत्र (a) तामिलनाडु
4. नदी घाटी योजना (b) भाखरा नांगल

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प्रश्न 6.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. आम्र वृष्टि (a) शिलांग
2. मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में वर्षा (b) मौसिनराम
3. वृष्टि छाया प्रदेश (c) अप्रैल-मई
4. सबसे अधिक वर्षा का क्षेत्र (d) काल बैशाखी

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. आम्र वृष्टि (c) अप्रैल-मई
2. मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में वर्षा (d) काल बैशाखी
3. वृष्टि छाया प्रदेश (a) शिलांग
4. सबसे अधिक वर्षा का क्षेत्र (b) मौसिनराम

प्रश्न 7.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. भूमि क्षरण का कारण (a) मध्य प्रदेश में चम्बल घाटी
2. भूमि क्षरण रोकने के उपाय (b) प्राकृतिक वनस्पति
3. भूमि क्षरण का क्षेत्र (c) अवैज्ञानिक खनन
4. स्वत: उगने वाली वनस्पति (d) वृक्ष लगान

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. भूमि क्षरण का कारण (c) अवैज्ञानिक खनन
2. भूमि क्षरण रोकने के उपाय (d) वृक्ष लगान
3. भूमि क्षरण का क्षेत्र (a) मध्य प्रदेश में चम्बल घाटी
4. स्वत: उगने वाली वनस्पति (b) प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 8.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. वन सुरक्षा का जैविक उपाय (a) जोत का छोटा होना
2. भारत की कृषि की समस्या (b) ज्वार, बाजरा
3. मिलेट फसल (c) वनों में पक्षियों की अधिकता
4. नकदी फसल (d) चाय-कॉफी

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. वन सुरक्षा का जैविक उपाय (c) वनों में पक्षियों की अधिकता
2. भारत की कृषि की समस्या (a) जोत का छोटा होना
3. मिलेट फसल (d) चाय-कॉफी
4. नकदी फसल (b) ज्वार, बाजरा

प्रश्न 9.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. लौह इस्पात संस्था (a) हल्दिया
2. मेट्रो रेल की शुरूआत (b) अहमदाबाद
3. सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र (c) सेल
4. पेट्रो-रसायन उद्योग (d) कोलकता

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. लौह इस्पात संस्था (c) सेल
2. मेट्रो रेल की शुरूआत (d) कोलकता
3. सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र (b) अहमदाबाद
4. पेट्रो-रसायन उद्योग (a) हल्दिया

प्रश्न 10.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. भारत का सबसे छोटा केन्द्र शासित प्रदेश (a) झारखण्ड
2. भारत का छब्वीसवाँ राज्य (b) धूपगढ़
3. भारत का ठण्डा मरुस्थल (c) पंचभद्रा
4. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप (d) त्यंबक
5. तामिलनाडू की ग्रीष्म कालीन राजधानी (e) लक्षद्वीप
6. सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी (f) माजुली
7. गोदावरी नदी का उद्गम स्थल (g) लद्दाख पठार
8. खारे पानी की झील (h) उटकमण्ड

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. भारत का सबसे छोटा केन्द्र शासित प्रदेश (e) लक्षद्वीप
2. भारत का छब्वीसवाँ राज्य (a) झारखण्ड
3. भारत का ठण्डा मरुस्थल (g) लद्दाख पठार
4. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप (f) माजुली
5. तामिलनाडू की ग्रीष्म कालीन राजधानी (h) उटकमण्ड
6. सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी (b) धूपगढ़
7. गोदावरी नदी का उद्गम स्थल (d) त्यंबक
8. खारे पानी की झील (c) पंचभद्रा

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प्रश्न 11.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. आन्ध्र प्रदेश एवं कर्नाटक की संयुक्त नदी घाटी परियोजना (a) कर्नाटक
2. महानदी पर निर्मित नदी घाटी परियोजना (b) मोटरगाड़ी निर्माण कारखाना
3. दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन वर्षा (c) तुंगभद्रा परियोजना
4. महाराष्ट्र में क्षारीय बंजर भूमि (d) कोयेम्बदूर
5. भारत का सबसे बड़ा कहवा उत्पादक राज्य (e) अरुणाचल प्रदेश
6. भारत का गन्ना शोध संस्थान (f) फूलों की वर्षा
7. महेन्द्रा एण्ड महेन्द्रा (g) हीराकुण्ड परियोजना
8. भारत का न्यून्तम जनघनत्व वाला राज्य (h) चोपन

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. आन्ध्र प्रदेश एवं कर्नाटक की संयुक्त नदी घाटी परियोजना (c) तुंगभद्रा परियोजना
2. महानदी पर निर्मित नदी घाटी परियोजना (g) हीराकुण्ड परियोजना
3. दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन वर्षा (f) फूलों की वर्षा
4. महाराष्ट्र में क्षारीय बंजर भूमि (h) चोपन
5. भारत का सबसे बड़ा कहवा उत्पादक राज्य (a) कर्नाटक
6. भारत का गन्ना शोध संस्थान (d) कोयेम्बदूर
7. महेन्द्रा एण्ड महेन्द्रा (b) मोटरगाड़ी निर्माण कारखाना
8. भारत का न्यून्तम जनघनत्व वाला राज्य (e) अरुणाचल प्रदेश

प्रश्न 12.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. प्लाया 1. देहरादून
2. नामचाबड़वा 2. माउण्ट आबू
3. TISCO 3. नमकीन झील
4. गुरुशिखर 4. अरुणाचल प्रदेश
5. शिवालिक 5. जमशेदपुर

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. प्लाया 3. नमकीन झील
2. नामचाबड़वा 4. अरुणाचल प्रदेश
3. TISCO 5. जमशेदपुर
4. गुरुशिखर 2. माउण्ट आबू
5. शिवालिक 1. देहरादून

प्रश्न 13.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. मरूद्यान 1. काली मिट्टी
2. केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्था 2. जलीय जीवों की मृत्यु
3. यूट्रोफिकेशन 3. पूसा
4. महाराष्ट्र 4. मरूस्थलीय आवास क्षेत्र
5. मैदानी भूमि में नदी मार्ग 5. टारनॉडो
6. उष्ण चक्रवात 6. बाढ़ का मेदान

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. मरूद्यान 4. मरूस्थलीय आवास क्षेत्र
2. केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्था 3. पूसा
3. यूट्रोफिकेशन 2. जलीय जीवों की मृत्यु
4. महाराष्ट्र 1. काली मिट्टी
5. मैदानी भूमि में नदी मार्ग 6. बाढ़ का मेदान
6. उष्ण चक्रवात 5. टारनॉडो

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प्रश्न 14.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. सीढ़ीनुमा 1. हिमानीकृत झील
2. आर्यभट्ट 2. बालुकामय मरूस्थल
3. टार्न 3. उपग्रह
4. अर्ग 4. अहमदाबाद
5. भारत का मानचेस्टर 5. मृदा संरक्षण

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. सीढ़ीनुमा 5. मृदा संरक्षण
2. आर्यभट्ट 3. उपग्रह
3. टार्न 1. हिमानीकृत झील
4. अर्ग 2. बालुकामय मरूस्थल
5. भारत का मानचेस्टर 4. अहमदाबाद

 

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Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 Geography Book Solutions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 Geography Chapter 5A Question Answer – भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी का नाम क्या है ?
उत्तर :
गोदावरी।

प्रश्न 2.
भारत के किस वन में शेर पाए जाते हैं ?
उत्तर :
गुजरात के गीर वन में।

प्रश्न 3.
झारखण्ड और पश्चिम बंगाल की संयुक्त बहुद्देशीय नदी योजना का नाम लिखिए।
उत्तर :
दामोदर घाटी योजना।

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प्रश्न 4.
भारत का सबसे ऊँचा पर्वत दर्रा कौन है ?
उत्तर :
डुंगरीला या मन्ना-दर्रा।

प्रश्न 5.
संसार का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
सुन्दरवन क्षेत्र या गंगा बह्यपुत्र डेल्टा क्षेत्र

प्रश्न 6.
भारतीय प्रामाणिक मध्याह्नरेखा का मान कितना है ?
उत्तर :
82° 30′ पूरब।

प्रश्न 7.
म्यानमार का प्राचीन नाम क्या है ?
उत्तर :
बर्मा।

प्रश्न 8.
कौन-सी रेखा आठ राज्यों से होकर गुजरती है ?
उत्तर :
कर्क रेखा।

प्रश्न 9.
प्राकृतिक संसाधनों की अधिकता के कारण प्राचीन काल में भारत को क्या कहा गया ?
उत्तर :
सोने की चिड़िया।

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प्रश्न 10.
कौन-देश भारत की मत्रार की खाड़ी तथा पाक जल सन्धि से अलग होता है ?
उत्तर :
श्रीलंका।

प्रश्न 11.
किस शहर को भारत का बॉलीवुड कहा गया है ?
उत्तर :
मुम्बई।

प्रश्न 12.
भारत का दिल (Heart of India) किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
नई दिल्ली।

प्रश्न 13.
किन राज्यों को सात बहनो की पहाड़ी (Seven Sister of Hills) कहा जाता है ?
उत्तर :
भारत के पूर्वोतर राज्यों को।

प्रश्न 14.
भारत का सबसे लम्बा हिमनद क्या है ?
उत्तर :
सियाचीन हिमनद।

प्रश्न 15.
हिमालय के प्रसिद्ध हिमनद क्या हैं ?
उत्तर :
गंगोत्री एवं जमुनोत्री।

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प्रश्न 16.
नैनीताल किस हिमालय श्रेणी में स्थित है ?
उत्तर :
लघु या मध्य हिमालय श्रेणी में।

प्रश्न 17.
भौगोलिक दृष्टिकोण से भारत को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
उपमहाद्वीप।

प्रश्न 18.
भारत को कब संप्रभुतासम्पन्न गणराज्य घोषित किया गया था ?
उत्तर :
26 जनवरी, 1950 ई० में।

प्रश्न 19.
संविधान के अनुसार भारत के राज्यों को कितने श्रेणियों में रखा गया है ?
उत्तर :
चार।

प्रश्न 20.
सबसे छोटा केन्द्रशासित राज्य है।
उत्तर :
लक्षद्वीप।

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प्रश्न 21.
दक्कन ट्रेप का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
सीढ़ीनुमा भूमि।

प्रश्न 22.
थार मरूस्थल में ऊँचे कठोर चट्टान के टीले को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
द्वीपगिरी (Insellberge)।

प्रश्न 23.
किस पठार को भारत के खनिजों का भण्डार कहा जाता है ?
उत्तर :
छोटानागपुर का पठार।

प्रश्न 24.
चिल्का झील किस समुद्री तट पर स्थित है ?
उत्तर :
उड़िसा राज्य के उत्तरी सरकार तट पर।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल की एक बहुउद्देशीय नदी का नाम लिखिए।
उत्तर :
दामोदर नदी।

प्रश्न 26.
हीराकुण्ड परियोजना कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
उड़िसा के महानदी पर।

प्रश्न 27.
नीरू-भीरू कार्यक्रम कहाँ चलाया गया।
उत्तर :
आन्ध्रदेश में।

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प्रश्न 28.
मानसून शब्द की उत्पत्ति किस भाषा से हुई है ?
उत्तर :
अरबी भाषा से।

प्रश्न 29.
उत्तरी भारत के एक स्थानीय गर्म एवं शुष्क वायु का नाम लिखिए।
उत्तर :
‘लू’ (LOO)।

प्रश्न 30.
काली मिट्टी का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
रेगूर मिट्टी।

प्रश्न 31.
एक वृक्ष एक पुत्र के समान कहने का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
अधिक पेड़ लगाओ एवं रक्षा करो।

प्रश्न 32.
CAZRI का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Central Arid Zone Research Institute. (सेन्ट्रल एरीड जोन रिर्सच इन्सीचिऊ)।

प्रश्न 33.
विश्व के सबसे बड़ा डेल्टा का नाम क्या है ?
उत्तर :
गंगा-बह्मपुत्र नदियों का डेल्टा ‘सुन्दरवन’।

प्रश्न 34.
भारत में लगभग कितना प्रतिशत वर्षा मानसून के समय होती है ?
उत्तर :
लगभग 75 प्रतिशत।

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प्रश्न 35.
किस वन क्षेत्र को शीलास के नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
आर्द्र उपोष्ण पहाड़ी वन क्षेत्र।

प्रश्न 36.
कयाल क्या है ?
उत्तर :
मालाबार तट के सहारे स्थित लैगूनों को कयाल कहते हैं।

प्रश्न 37.
नर्मदा नदी की प्रसिद्ध जलप्रपात का नाम बताओ।
उत्तर :
नर्मदा नदी पर जबलपुर के निकट प्रसिद्ध जलप्रपात ‘धुआंधार’ है।

प्रश्न 38.
भारत की जलवाय को कौन-सी वायु मुख्यतः नियंत्रित करती है ?
उत्तर :
मानसूनी वायु।

प्रश्न 39.
भारत के एक गिरिश्रृंग का उदाहरण दो।
उत्तर :
हिमालय की नीलकण्ठ चोटी।

प्रश्न 40.
SAARC का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
SAARC का पूरा नाम है दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Co-operation)।

प्रश्न 41.
रोही क्या है ?
उत्तर :
अरावली के पर्वतपदीय क्षेत्र में स्थित जलोढ़ मैदान को रोही कहते हैं।

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प्रश्न 42.
भारत का सबसे ऊँचा जलप्रताप कौन है ?
उत्तर :
शरावती नदी पर स्थित जोग जलप्रताप।

प्रश्न 43.
भारत एवं चीन के मध्य की सीमा रेखा का क्या नाम है।
उत्तर :
मैकमोहन लाइन।

प्रश्न 44.
आप्रवर्षा कहाँ होती है ?
उत्तर :
दक्षिण भारत में।

प्रश्न 45.
भारत के किस राज्य में वनाच्छादित भूमि सबसे अधिक है ?
उत्तर :
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 46.
भारत की प्रामाणिक मध्यांह्न रेखा कौन है ?
उत्तर :
821/2° E

प्रश्न 47.
भारत का वन अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
देहरादून में।

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प्रश्न 48.
प्रतिवर्ग कि॰मी० की दृष्टि से भारत का औसत जनघनत्व कितना है ?
उत्तर :
382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी०।

प्रश्न 49.
Malnad क्या है ?
उत्तर :
मालनद : ‘मालनद’ शब्द कन्नड़ भाषा से लिया गया है, कर्नाटक के समतल भूमि को मालनद कहा जाता है।

प्रश्न 50.
भारत के उत्तर में स्थित किन्हीं दो देशों का नाम लिखिए।
उत्तर :
नेपाल और चीन

प्रश्न 51.
लघु या मध्य हिमालय की चौड़ाई कितनी है ?
उत्तर :
80 से 100 कि०मी०।

प्रश्न 52.
गंगा के मैदान का विस्तार किन राज्य में है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल राज्य में है।

प्रश्न 53.
दक्कन के पठार के पश्चिमी एवं पूर्वी भाग में कौन सा पर्वत है ?
उत्तर :
पश्चिमी में सह्याद्रि पर्वत एवं पूर्वी भाग में मलयाद्रि पर्वत है।

प्रश्न 54.
कपास की काली मिट्टी का प्रदेश किस प्रदेश को कहते हैं ?
उत्तर :
प्रायद्वीपीय या मुख्य दक्कन का पठार प्रदेश को।

प्रश्न 55.
कर्नाटक तथा केरल तटों को संयुक्त रूप से क्या कहते है ?
उत्तर :
मालाबार तट।

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प्रश्न 56.
ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित किन्हीं दो शहरों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गौहाटी और डिबूगढ़।

प्रश्न 57.
भारत की कितनी कृषियोग्य भूमि सिंचित है ?
उत्तर :
53 % भूमि सिंचित है।

प्रश्न 58.
भारत में सबसे अधिक नलकूप किस राज्य में है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश में है।

प्रश्न 59.
भारत में कर्क रेखा के दक्षिणी भाग की जलवायु कैसी है ?
उत्तर :
उष्ण जलवायु है।

प्रश्न 60.
किस पर्वत की स्थिति के कारण पश्चिमी तटीय मैदान में प्रचुर वर्षा होती है ?
उत्तर :
हिमालय पर्वत

प्रश्न 61.
हमारे देश के कितने प्रतिशत भाग पर वन हैं ?
उत्तर :
19.27 %

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प्रश्न 62.
हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में कितनी ऊँचाई पर नुकीली पत्ती वाले सदाबहार वन पाये जाते है ?
उत्तर :
1525 से 3500 मीटर की ऊँचाई।

प्रश्न 63.
नदियों के डेल्टाई क्षेत्र में किस प्रकार के वन पाए जाते हैं ?
उत्तर :
ज्वारीय वन

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
कर्नाटक पठार के दो भूप्राकृतिक विभागों का नाम लिखिए।
उत्तर :
मालावार तट के गोवा से मंगलोर तक के तट को कर्नाटक तथा मंगलोर से कुमारी अंतरीप तक के तट को केरल त्ट कहते हैं।
अथवा
वर्षा जल संग्रहण के दो उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर :
(i) वर्षा के जल के संग्रहण द्वारा जल की कमी की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
(ii) वर्षा जल संग्रहण प्रत्यक्ष रूप से भूजल पुनर्भरण के लिए होता है।

प्रश्न 2.
सीढ़ीनुमा जुताई का क्या महत्व है ?
उत्तर :
पहाड़ी ढालों को सीढ़ीदार क्यारियों (Terraced-beds) के रूप में बदल देना चाहिए। इससे उपजाऊ मिट्टी का कटाव नहीं होता है।

प्रश्न 3.
मानसून विस्फोट की परिभाषा दीजिए।
उत्तर :
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवायें उत्तरी-पश्चिमी भारत की ओर तीव्र गति से चलती है । इन हवाओं से भारत के पश्चिमी तट पर भारी वर्षा होती हैं। इसलिए इसे मानसून का फट पड़ना या मानसून विस्फोट(Burst of Monsoon) कहते है।

प्रश्न 4.
सामाजिक वानिकी के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
(i) वनों का विकास एवं संरक्षण करके अतिरिक्त वनोत्पादों से इंधन, चारा, लकड़ी, फल आदि प्राप्त करके स्थानीय लोगों को लाभ पहुँचाना।
(ii) अनुपयोगी भूमि का समुचित एवं लाभकारी उपयोग करना।

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प्रश्न 5.
खादर एवं बागर में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

खादर बागर
1. नये जलोढ़ मैदान को खादर कहा जाता है। 1. पुराने जलोढ़ मैदान को बागर कहता जाता है।
2. इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी पहुँचता है। 2. इस क्षेत्र में बाढ़ का पानी नहीं पहुँच पाता है।
3. इसमें चिका मिट्टी की अधिकता होती है। 3. इसमें कैल्सियम की अधिकता होती है।

प्रश्न 6.
सुरक्षित वन से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
सुरक्षित वन : इन वनों में लकड़ी काटना या पशु चराना बिल्कुल मना है। ये सरकारी सम्पत्ति होते हैं और बाढ़ के रोक-थाम, भूमि-कटाव से बचाव तथा मरूस्थल के प्रसार को रोकने के लिए इस वन का महत्व अधिक है। ऐसे वनों का विस्तार लगभग 383 लाख हेक्टर भूमि में है।

प्रश्न 7.
संरक्षित वन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
संरक्षित वन : ये वन भी सरकारी ही है, किन्तु इनमें सरकार की ओर से लाइसेंस देकर वनों को काटने की मंजूरी दी जाती है। इन वनों में पशु भी चराया जा सकता है। लेकिन वन विभाग द्वारा इस पर पूरा निगरानी रखा जाता है।

प्रश्न 8.
वर्षा के आधार पर भारत को कितने वर्गों में बांटा गया है ?
उत्तर :
भारत में लगभग 75 % वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। वर्षा के स्रोतों के आधार पर भारत को चार वर्गो में रखा गया है।

  1. अधिक वर्षा वाले क्षेत्र :- 200 से०मी॰ से अधिक।
  2. सामान्य वर्षा वाले क्षेत्र :- 100 से॰मी० से अधिक।
  3. अल्प वर्षा वाले क्षेत्र :- 50 से॰मी॰ से 100 से॰मी॰ तक।
  4. अत्यल्प वर्षा वाले क्षेत्र :- 50 से०मी० से कम।

प्रश्न 9.
मानसून विभंगता क्या है ?
उत्तर :
मानसूनी वर्षा लगातार नहीं होती बल्कि कुछ दिनों के अन्तर से रूक-रूक कर हुआ करती है। कभी-कभी एक बार वर्षा होने के बाद दूसरी वर्षा एक माह बाद तक होती है। इस घटना को ही मानसून विभंगता कहा जाता है।

प्रश्न 10.
रबी फसल क्या है ?
उत्तर :
रबी फसल :- इस फसल को शीतकालीन फसल भी कहा जाता है। भारत में यह फसल नवम्बर-दिसम्बर में रोपी जाती है तथा मार्च-अप्रैल तक काट ली जाती है तो इसे रबी फसल कहा जाता है। जैसे – गेहूँ, चना इत्यादि।

प्रश्न 11.
खरीफ फसल से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
खरीफ फसल : इस फसल को वर्षाकालीन फसल भी कहा जाता है। वे फसले जो मध्य जून-जुलाई में रोपी जाती है तथा अक्टूबर-नवम्बर तक काट ली जाती है तो इसे खरीफ फसल कहा जाता है। जैसे – धान, जूट इत्यादि।

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प्रश्न 12.
मिट्टी की समस्याओं का उल्लेख करें।
उत्तर :
मिट्टी की समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

  1. मिट्टी का अपरदन अधिक होना
  2. जल जमाव
  3. अम्लीय, लवणीयता एवं क्षारीयता
  4. वन भूमि की समस्या
  5. मरूस्थलीकरण
  6. मानव भूमि द्वारा भूमि का अत्यधिक शोषण।

प्रश्न 13.
परत अपरदन क्या है ?
उत्तर :
परत अपरदन (Sheet Erosion) :- जब जल, वायु, मिट्टी की ऊपरी परत को बहा कर या उड़ा कर ले जाते हैं तो इसे परत अपरदन कहा जाता है।

प्रश्न 14.
अवनलिका अपरदन क्या है ?
उत्तर :
अवनलिका अपरदन (Gully Erosion) :- जब तेज गति से बहता हुआ जल मिट्टी को काट कर गहरी नालियों, खड्डों का निर्माण कर देता है तो इसे अवनलिका अपरदन कहते हैं।

प्रश्न 15.
वन जीवन कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
वन जीवन कार्यक्रम का उद्देश्य –

  1. जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा।
  2. सुरक्षित क्षेत्रों में जीवों का उचित रख-रखाव।
  3. पौधों एवं प्राणियों के लिए जैवमण्डल संरक्षणशालाओं की स्थापना।

प्रश्न 16.
भारत में यातायात कितने प्रकार का है ?
उत्तर :
भारत में यातायात के लिए चार प्रमुख साधन है –

  1. स्थल परिवहन (सड़कें एवं रेलमार्ग)
  2. जल परिवहन (समुद्री तथा आंत्रिक नदियाँ)
  3. वायु परिवहन
  4. पाइप लाइन।

प्रश्न 17.
जिला सड़कें क्या हैं ?
उत्तर :
ये सड़कें गाँवों एवं कस्बों को एक दूसरे से तथा जिला मुख्यालय से जोड़ती है। इनके निर्माण एवं रख रखाव की जिम्मेदारी जिला परिषदों की होती है।

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प्रश्न 18.
वर्तमान समय में भारत में कितने राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश हैं ?
उत्तर :
वर्तमान समय में भारत में 29 राज्य तथा 6 केन्द्रशासित राज्य है।

प्रश्न 19.
भारत में सबसे लम्बी नदी का नाम लिखो।
उत्तर :
गंगा भारतीय सीमा में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है। इसकी लम्बाई 2530 कि०मी० है।

प्रश्न 20.
लाल मिट्टी का निर्माण किस शैल से हुआ है ?
उत्तर :
यह मिट्टी ग्रेनाइट नीस आदि चट्टानों की दूट-फूट से बनती है।

प्रश्न 21.
निछालन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा मिट्टी में विद्यमान घुलनशील संघटक पानी में घुल जाते है और रिसते हुए पानी के साथ मिट्टी में से होकर नीचे के स्तरों में पहुँच जाते है।

प्रश्न 22.
समुद्रवर्ती वन की एक वनस्पति का नाम लिखो।
उत्तर :
समुद्रवर्ती वन में पाए जाने वाले वनस्पति मैंग्रोव वनस्पति है।

प्रश्न 23.
तमिलनाडू में जल संचयन क्यों महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर :
नीरू- भीरू कार्यक्रम आन्धप्रदेश में चालू की गई है। इसके अर्त्तगत लोगों के सहयोग से विभिन्न जल संग्रहण संरचनाएं जैसे अन्त : स्रण तालाब तल की खुदाई की गई है और रोक बाँध बनाए गए है। तामिलनाडू में घरों में जल संग्रह संरचना को बनाना आवश्यक कर दिया गया है।

प्रश्न 24.
हिमालय के तीन तीर्थ स्थलों, हिमनदों, घाटियों एवं सर्वोच्च चोटियों का नाम लिखिए।
उत्तर :
हिमालय के तीर्थ स्थलों में अमरनाथ, केदारनाथ तथा बद्रीनाथ है। प्रमुख हिमनद गंगोत्री जमुनोत्री एवं सियाचिन, प्रमुख घाटी कश्मीर, कुलू एवं कुमायूँ, तथा माउण्ट एवरेस्ट, नन्दादेवी, नंगा पर्वत प्रमुख चोटियाँ है।

प्रश्न 25.
भारत के सबसे बड़े डेल्टा एवं सबसे बड़े नदी द्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत के सबसे बड़ा डेल्टा गंगा-ब्मापुत्र का डेल्टा एवं सबसे बड़ी नदी द्वीप ब्रह्मपुत्र नदी की माजुली द्वीप है।

प्रश्न 26.
पश्चिमी घाट की पूर्व वाहिनी नदियों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गोदावरी और कृष्णा नदी।

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प्रश्न 27.
भारत में वर्षा या सूखा क्यों आते रहते हैं ?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर से होकर जब एल-निनो हिन्द महासागर में पहुँचती है तो हिन्द महासागर का तापमान अचानक बढ़ जाता है जिससे यहाँ से उत्पन्न होनेवाली ग्रीष्मकालीन (दक्षिणी-पश्चिमी) मानसूनी हवाएँ कमजोर पड़ जाती है जिससे भारतीय उपमहादेश में वर्षा या सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 28.
आर्द्र सदाबहार वनों के चार वृक्षों के नाम बताइये।
उत्तर :
इन वनों के प्रमुख वृक्ष महोगनी, रबर, लौह-काष्ठ, गुर्जन आदि है।

प्रश्न 29.
भारत के किन भागों में आर्द्र सदाबहार वन पाये जाते हैं ?
उत्तर :
ये वन बंगाल व उड़ीसा के मैदानी भागों, असम नागालैण्ड मैघालय, आदि क्षेत्रों में पाऐ जाते है।

प्रश्न 30.
गंगा-ब्रह्मपुत्र डल्टाई क्षेत्र को सुन्दरवन क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
गंगा-ब्मयुत्र डेल्टाई क्षेत्र में सुन्दरी नाम के वृक्ष अधिक पाए जाते है। इसलिए इसे सुन्दरवन कहते है।

प्रश्न 31.
भारतवर्ष के किस क्षेत्र में नमकीन मिट्टी पायी जाती है ?
उत्तर :
तट के समीप के निम्न मैदान एवं डेल्टाई भागों में जहाँ ज्वार का खारा जल पहुँचता रहता है। वहाँ खारी या नमकीन मिट्टी मिलती है।

प्रश्न 32.
भारत के किस क्षेत्र में सदावाहिनी नहरों से अधिक सिंचाई होती है ?
उत्तर :
उत्तरी भारत में सतलज गंगा के मैदानी क्षेत्र में नहरों से अधिक सिंचाई होती है।

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प्रश्न 33.
दामोदर घाटी के तीन जलविद्युत शक्ति केन्द्रों का नाम लिखिए।
उत्तर :
मैथान, पंचेत तथा दुर्गापुर दामोदर घाटी के जलविद्युत शक्ति के केन्द्र है।

प्रश्न 34.
हिमालय के प्रमुख दर्रों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गोमल, मकरान, खैबर तथा बोलन हिमालय के प्रमुख दर्रे है।

प्रश्न 35.
पश्चिमी तटीय मैदान दलदली एवं बालुकामय क्यों है ?
उत्तर :
इस मैदान के निर्माण में नदियों की अपेक्षा समुद्र का हाथ अधिक है। समुद्री कटाव के कारण तटीय भाग में छोटीछोटी लैगून झीलें बन गई है। ज्वार का पानी पहुँच जाने के कारण पश्चिमी तटीय भाग दलदली एवं बालुकामय है।

प्रश्न 36.
दक्षिण भारत की नदियाँ सदावाहिनी क्यों नहीं है ?
उत्तर :
दक्षिणी भारत की नदियाँ, उत्तर भारत की निदियों की तरह हिमाच्छादित शिखरों से नहीं निकलती है जिससे इन्हें वर्ष भर हिम का पिघला जल नहीं मिलता है। दूसरे, इस भाग में वर्षा भी कम होती है अत: ये नदियाँ सदावाहिनी, नहीं है।

प्रश्न 37.
दक्षिण भारत की नदियों का अपरदन कार्य नगण्य क्यों है ?
उत्तर :
दक्षिण भारत की नदियाँ कटाव के आधार-तल को प्राप्त कर चुकी है। अत: अब इसका अपरदन कार्य नगण्य है।

प्रश्न 38.
भारत के उत्तर के मैदान में अधिक नहरें क्यों है ?
उत्तर :
यहाँ नहरों का जाल बिछा हुआ है क्योंकि यहाँ भूमि समतल, उपजाऊ एवं मुलायम है तथा नदियाँ सदावाहिनी है।

प्रश्न 39.
एल-निनो तथा ला-निनो किस प्रकार भारत के जलवायु को प्रभावित करती है ?
उत्तर :
एल-निनो का प्रभाव – प्रशान्त महासागर से होकर जब यह हिन्द महासागर में पहुँचती है तो हिन्द महासागर का तापमान अचानक बढ़ जाता है जिससे यहां से उत्पन्न होनेवाली ग्रीष्मकालीन (दक्षिणी-पश्चिमी) मानसूनी हवाएँ कमजोर पड़ जाती है जिससे भारतीय उपमहादेश में वर्षा कम होती है एवं सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ला-निनो का प्रभाव-हिन्द महासागर में ला-निनो के आगमन से उच्च वायुदबाव का गठन होता है, जिससे भारतीय उपमहादेश की ओर आनेवाली ग्रीष्मकालीन मानसुनी हवाएँ प्रबल हो जाती है तथा पर्याप्त वर्षा करती है।

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प्रश्न 40.
तामिलनाडू तट पर शीत ऋतु में भी वर्षा क्यों होती है ?
उत्तर :
भारत में शीतकाल में हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती है। इसी से इन हवाओं को उत्तरी-पूर्वी मानसून या शीतकाल का मानसून कहते है। स्थल से आने के कारण ये हवायें आमतौर पर शुष्क होती है और इनसे वर्षा नहीं होती। परन्तु यही हवायें जब बंगाल की खाड़ी को पार करती है तो इनमें जलवाष्प आ जाता है। अत: ये हवाएँ पूर्वी घाट की पहाड़ियों से टकराकर तामिलनाडु में जाड़े में भी वर्षा करती है।

प्रश्न 41.
लैटेराइट मिट्टी अनुपजाऊ क्यों होती है ?
उत्तर :
इस मिट्टी में लोहे के ऑक्साइड एवं अल्युमिनियम का अंश तो अधिक परन्तु नाइट्रोजन, चूना, फॉंस्फोरस एवं जीवांश की मात्रा कम होती है। यह मिट्टी छिद्रदार एवं अनुपजाऊ होती है अतः यह कृषि के योग्य नहीं है।

प्रश्न 42.
ज्वारीय वन के वृक्षों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
इन वनों की कुछ विशेषताएँ इस प्रकार है –
(i) नमकीन मिट्टी में पेड़ों की जड़ों को साँस लेने में कठिनाई होती है। अत: वृक्षों की कुछ जड़े पानी के ऊपर निकल आती है। इन्हें श्वसन मूल कहते है।
(ii) दलदली भाग में पेड़ को गिरने से बचाने के लिए उनमें तिरछी जड़े पाई जाती है,

प्रश्न 43.
भारत में उगाई जानेवाली फसलों का उपयोग के आधार पर वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
उपयोग के आधार पर भारत की फसलों को मोटे तौर पर चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है :

  1. खाद्यात्र : चावल, गेहूँ, ज्वार-बाजरा, मक्का, चना आदि।
  2. पेय पदार्थ : चाय और कहवा
  3. व्यावसायिक एवं मुद्रादायिनी फसलें : कपास, जूट, चाय, कहवा, गन्ना, तिलहन आदि।
  4. रेशेदार फसलें : कपास और जूट आदि।.

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प्रश्न 44.
भारतवर्ष के विस्तार का वर्णन करो।
उत्तर :
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्य का सातवाँ बड़ा देश है इसका क्षेत्रफल लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है। यह उत्तर से दक्षिण 3214 कि॰मी॰लम्बा तथा पूर्व से पश्चिम 2933 कि॰मी० चौड़ा है। इसकी स्थलीय सीमा 15 , 200 कि०मी॰ तथा समुद्र सीमा 7516.6 कि०मी०।

प्रश्न 45.
भारत के भौतिक विभाजन का वर्णन करो।
उत्तर :
भौतिक दृष्टि से भारत को निम्नलिखित छ: प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है :

  1. उत्तर का पर्वतीय भाग
  2. सतलज-गंगा-ब्रहुपुत्र का मैदान
  3. दक्षिण का पठारी भाग
  4. समुद्रतटीय मैदान
  5. थार का मरूस्थल
  6. द्वीपसमूह

प्रश्न 46.
नहरों द्वारा सिंचाई से क्या लाभ है ?
उत्तर :
(i) नहरों द्वारा सिंचाई करने से भूमि की उर्वरा-शक्ति बढ़ जाती है। अच्छे किस्म के अन्न पैदा होने लगते है।
(ii) नहरों द्वारा सिंचाई करने से बंजर व अनउपजाऊ भूमि में भी खेती होने लगती है और वे हरे-भरे हो जाते है।

प्रश्न 47.
मृदा संरक्षण क्या है ?
उत्तर :
विभिन्न उपायों से मिट्टी की समस्याओं को दूर करके उसे लम्बे समय तक उपजाऊ एवं कृषि के योग्य बनाए रखने को मिट्टी का संरक्षण कहते है।

प्रश्न 48.
हरियाणा मे कृषि क्यों उन्नत है ?
उत्तर :
हरियाणा में प्रति एकड़ उत्पादकता देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। राज्य की ओर से कृषि साख एवं विपणन की उचित व्यवस्था ने यहाँ कृषि को और अधिक प्रोत्साहित किया है जिससे यह राज्य कृषि के क्षेत्र में भारत का सर्वाधिक समृद्ध राज्य है।

प्रश्न 49.
संरचनात्मक उद्योग का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं से प्राप्त उत्पादों का कच्चे माल के रूप में उपयोग करके उनके रूप एवं गुणों में परिवर्तन करके उन्हें अधिक उपयोगी एवं मूल्यवान बनाने की प्रक्रिया को वस्तु निर्माण उद्योग कहते है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि जिन प्रक्रियाओं द्वारा प्राथमिक उत्पादनों को अधिक उपयोगी रूपो में परिवर्तित किया जाता है, उन्हें वस्तु निर्माण उद्योग कहा जाता है।

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प्रश्न 50.
उत्तर भारत की नदियों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :

  1. उत्तर भारत की सभी नदियाँ हिमनद से निकलती है।
  2. ये नदियाँ सदावाहिनी है।
  3. ये नदियाँ नाव चलाने योग्य है।
  4. इनसे नहरें निकाल कर वर्ष भर सिंचाई की जा सकती है।

प्रश्न 51.
हिमालय क्षेत्र में बड़े उद्योगों का विकास क्यों नहीं हुआ है ?
उत्तर :
किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए कुछ मौलिक कारको की आवश्यकता होती है जैसे कच्चे माल की सुविधा, परिवहन की सुविधा आदि। हिमालय की धरातल बनावट असमान है। वहाँ खनिजों का अभाव है। जिसके कारण हिमालय क्षेत्र में किसी भी बड़े उद्योगों का विकास नहीं हुआ है।

प्रश्न 52.
हिमालय की पर्वतीय श्रृंखला में भूकम्प क्यों आते हैं ?
उत्तर :
हिमालय पर्वत श्रेणियाँ नवीन मोड़दार पर्वत है। इस क्षेत्र में भूपटल में मोड़ पड़ने और ऊपर उठने की प्रक्रिया जारी है जिसके कारण इस क्षेत्र का भू-संतुलन बिगड़ता रहता है। इसलिए हिमालय के समीपवर्ती क्षेत्रों में भूकम्प आता रहता है।

प्रश्न 53.
दक्षिण भारत की नदियाँ तीव्र प्रवाह से क्यों बहती हैं ?
उत्तर :
दक्षिण भारत की अधिकांश नदियों का प्रवाह अनुगामी है, अर्थात इनका अपवाह धरातल के स्वाभाविक ढाल के अनुरूप ही हुआ है। इसलिए यहाँ को नदियाँ तीव्र प्रवाह से बहती है।

प्रश्न 54.
पहाड़ी मिट्टी चाय की कृषि के उपयुक्त क्यों होती है ?
उत्तर :
चाय की जड़ो में पानी का रूकना हानिकारक होता है। अत: चाय की कृषिग्यहाड़ी ढालो पर की जाती है ताकि जड़ों में पानी न रूक सके।

प्रश्न 55.
मरुस्थली मिट्टी शुष्क क्यों होती है ?
उत्तर :
वर्षा के अभाव एवं उच्च दैनिक तापान्तर के कारण चट्टानों के विखण्डन से इस मिट्टी की रचना हुई है। हवा द्वारा महीन कणों के उड़ जाने के कारण इस मिट्टी में बालू के मोटे कण मिलते है।अत: इसमें जल धारण करने की क्षमता नहीं है। इस इसलिए यह मिट्टी शुष्क होती है।

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प्रश्न 56.
नीलगिरि की पहाड़ियों पर कॉफी की कृषि क्यों होती है ?
उत्तर :
कॉफी के पौधे के लिए ढालुआ भूमि का होना आवश्यक है क्योंकि इसकी जड़ो में पानी का रूकना हानिकारक है। 750 से 1500 मीटर के ढलान पर अरविका कॉफी की उत्तम कृषि होती है। अत: नीलगिरि की पहाड़ियों की ढ़ाल इसके लिए सर्वोत्तम है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
भारत के वन संरक्षण के तीन प्रमुख उपाय संक्षेप में बताइए।
उत्तर :
वन संरक्षण एवं वन विकास :

  1. वानिकी शिक्षा बढ़ाई जाए। वन-अनुसंधान केन्द्र खोले जाएँ। वन-विभाग का मुख्य अनुसंधान केन्द्र हिमालय-स्थित देहरादून में स्थापित किया गया है। राँची, पालमपुर, बंगलूर, कोयम्बटूर और अकोला में भी वानिकी शिक्षा आरंभ की गई है।
  2. वनों के प्रति नया दृष्टिकोण अपनाया जाए और प्राचीनकाल की वन्य संस्कृति को पुनर्जीवित किया जाए।
  3. प्रतिवर्ष नए वन लगाए जाएँ। 1981 ई० के बाद से अबतक मध्यप्रदेश और पंजाब में ही वनक्षेत्र बढ़ाए जा सके हैं। पिछले कुछ वर्षो से केरल, कर्नाटक और मेघालय इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।
  4. वनसंरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ चालू की जाएँ, जैसे – बाघ परियोजना, हाथी परियोजना, अभयारण्यों की स्थापना। 1952 ई० से भारत वनमहोत्सव मनाकर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सचेष्ट है। देश में 17 वनविकास निगम स्थापित किए जा चुके हैं।

वनों के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं, यद्यपि मानव-जनसंख्या और पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि से यह संरक्षण कठिन हो गया है।

प्रश्न 2.
भारतीय द्वीपसमूह का संक्षेप में विवरण दे।
उत्तर :
भारतीय द्वीपसमूह : भारत की मुख्य भूमि से हटकर दो द्वीपसमूह ‘अंडमान निकोबार’ और ‘लक्षद्वीप’ भारत के ही अंग हैं। अंडमान-निकोबार के अंतर्गत प्रमुख 223 द्वीपें हैं जो सागरमग्न पर्वतश्रेणी पर स्थित हैं। इनमें कुछ ज्वालामुखी के उद्गार से बने हैं। भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी इन्हीं द्वीपों पर स्थित है। लक्षद्वीप के अंतर्गत 27 द्वीपें हैं जिनमें आबाद 10 हैं।

ये द्वीप समुद्री जीव मूँगे (प्रवाल, Coral) के निक्षेप से बने हैं। इनमें कुछ द्वीपों की आकृति घोड़े की नाल जैसी हैं जिन्हें प्रवाल द्वीपवलय (atoli) कहते हैं। स्पष्ट है कि दोनों द्वीपसमूह की रचना दो भिन्न तरीकों से हुई है । ये द्वीप भारत की प्राकृतिक छटा ही नहीं बढ़ाते बल्कि काष्ठ-उद्योग,मत्स्योधम, पर्यटन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नौसैनिक अड्डे की स्थापना को भी बढ़ावा देते हैं। एक द्वीप (पेम्बन) भारत और श्रीलंका के बीच मन्नार की खाड़ी में स्थित है।

प्रश्न 3.
सिन्धु नदी की प्रवाह तंत्र की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रवाह तंत्र : सतलज, व्यास, चेनाव और झेलम प्रमुख नदियाँ है जो दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हैं और सिंधु से मिलकर अरबसागर में गिर जाती हैं। सिंधु का उद्गम स्थल हिमालय के पार मानसरोवर झील है। पश्चिम की ओर बहती हुए यह नदी गिलगिट के निकट दक्षिण की ओर मुड़ जाती है। आज कल यह पाकिस्तान की सर्वप्रमुख नदी है। इसकी सहायक नदियों में केवल व्यास ही पूर्ण रूप से भारतीय सीमा में बहती है, शेष नदियों की सिर्फ ऊपरी धाराएँ ही भारत में हैं और निचली धाराएँ पाकिस्तान में।

सतलज नदी तिब्बत की साढ़े चार मीटर ऊँचाई से चलकर शिपकी दर्रे हिमाचल प्रदेश में पार करती हुई पंजाब के मैदान में उतरती है। सतलज नदी पर ही भाखड़ा-नंगल बाँध का निर्माण किया गया है। प्राचीन भारत में सतलज को शताद्रु, व्यास को विपाशा, रावी को इरावती और चेनाब को चंद्रभागा कहते थे। झेलम का नाम विताशा था। इन सबका उद्गम हिमालय का हिमाच्छादित प्रदेश है।

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प्रश्न 4.
गंगा नदी के अपवाह तंत्र की व्याख्या कीजिए।
अथवा
गंगा को आदर्श नदी क्यों कहा जाता है ?
अथवा
गंगा नदी के गतिपथ का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गंगा नदी : गंगा की सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, गोमती, शारदा, सरयू, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोशी और महानंदा उत्तर के पर्वतीय भाग से तथा चंबल, बेतवा, केन, सोन और पुनपुन दक्षिणी पठार से निकलनेवाली नदियाँ हैं। ये नदियाँ गंगा में मिलकर अपना जल पूरब की ओर ले जाती हैं और अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरा देती हैं। भारत के पूरे क्षेत्रफल का एकतिहाई भाग गंगा-व्यवस्था के अंतर्गत है। भारत की सभी नदियों में जितना जल बहता है उसका 30 प्रतिशत गंगा और उसकी सहायक नदियों में बहता है।

गंगा हिमालय के गंगोत्री हिमनद से निकलती है। यह भारत की सर्वप्रमुख नदी है। भागीरथी और अलकनंदा इसी के नाम हैं (पहाड़ी अंचल में)। हरिद्वार के पास यह पहाड़ से नीचे उतरती है और अपने नाम से मैदान में (उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल में) बहती है। हुगली इसी की एक शाखा है जिसके किनारे कलकत्ता बसा है। गंगा की कुल लंबाई 2,510 किलोमीटर है। आर्थिक दृष्टिकोण से इस नदी का महत्व सबसे अधिक है। इस नदी मार्ग के द्वारा जलमार्ग के साथ ही जलविद्युत का भी निर्माण किया है। सिंचाई की सुविधा भी इस नदी द्वारा किया गया है।

प्रश्न 5.
ब्रह्मपुत्र नदी व्यवस्था का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
ब्रह्मपुत्र-व्यवस्था की नदियाँ : बह्मपुत्र सर्वप्रधान नदी है। यह मानसरोवर झील के समीप से निकलकर उत्तर-पूर्व से भारत में प्रवेश करता है। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में साँपो (साङ्यो) नाम से जाना जाता है। नमचा बरुआ शिखर के निकट यह अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश कर असम घाटी में उतरता है। पश्चिम में बहता हुआ ग्वालपाड़ा के निकट दक्षिण मुड़कर गंगा की धारा (मेघना) में मिल जाता है। इसकी कुल लंबाई 2,703 किलोमीटर है। इसकी सहायक नदियों में तिस्ता, सुवनसिरी (स्वर्णश्री) और लुहित प्रमुख हैं। ब्रह्मपुत्र-व्यवस्था दक्षिण-पश्चिम की ओर प्रवाहित है। इसकी नदियाँ गंगा से मिलकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती हैं।

प्रश्न 6.
भारत सरकार द्वारा भारतीय वनों को कितने भागों में बांटा गया है ? संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वन हमारी राष्ट्रीय संपत्ति है। देश के पर्यावरण से भी इसका घनिष्ठ संबंध है। भारत सरकार का वन-विभाग भारतीय वनों की देखरेख करता है। व्यवस्था, नियंत्रण एवं सुरक्षा की दृष्टि से भारतीय वनों को तीन भागों में बाँटा गया है –
i. सुरक्षित वन (Reserved forest) : इन वनों में लकड़ी काटना या पशु चराना वर्जित है। ये सरकारी संपत्ति हैं और बाढ़ की रोकथाम, भूमि-कटाव से बचाव तथा मरुस्थल के प्रसार को रोकने की दृष्टि से बड़े महत्त्व के हैं। ऐसे वनों का विस्तार 383 लाख हेक्टर भूमि में है।

ii. संरक्षित वन (Protected forests) : ये वन भी सरकारी ही है, मगर इनमें सरकार की ओर से लाइसेंस प्राप्त लोग लकड़ी काट सकते हैं या पशु चरा सकते हैं। ऐसे वनों पर भी सरकार की कड़ी निगरानी रहती है। इनका क्षेत्रफल 282 लाख हेक्टर है।

iii. अवर्गीकृत या स्वतंत्र वन (Unclassified forests) : इन वनों में लकड़ी काटने तथा पशु चराने में सरकार की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं है, पर उपयोग करनेवाले को टैक्स देना पड़ता है। लकड़ी काटने के लिए ये वन प्रायः ठेके पर दिये जाते हैं। ये वन 82 लाख हेक्टर भूमि में विस्तृत हैं।

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प्रश्न 7.
लैटेराइट मिट्टी की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
लैटेराइट मिट्टी की विशेषताएँ :

  1. इस मिट्टी में चूना, फॉसफोरस और पोटाश की मात्रा कम पाई जाती है।
  2. शुष्क मौसम में यह मिट्टी सूखकर ईंट की भाँति सख्त हो जाती है तथा गीली होने पर चिपचिपी हो जाती है।
  3. इस मिट्टी में लोहा, सिलिका, एल्यमिनियम की मात्रा अधिक पाई जाती है।
  4. यह मिट्टी ऊँचे प्रदेशों में कँकरीली तथा पारगम्य होती है, इस कारण यह पानी को शीघ्र सोख लेती है। अतः इन भागों में यह मिट्टी कृषि योग्य नहीं होती, परंतु निचले भागों में चिकनी मिट्टी मिल जाने से इसमें नमी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है और कृषि योग्य बन जाती है।

वितरण : यह मिट्टी विशेषकर मध्य प्रदेश, पूर्वी और पश्चिमी घाटों के समीप, कर्नाटक, दक्षिणी महराष्ट्र, केरल, राजमहल की पहाड़ियाँ, उड़ीसा तथा असम के कुछ भागों में पाई जाती है।

प्रश्न 8.
‘भारत की पश्चिम वाहिनी नदियों के मुहाने पर डेल्टा का निर्माण क्यों नहीं होता है?
उत्तर :
नदी के मुहाने के पास नदियों का प्रवाह मन्द होना चाहिए तथा सागरीय लहरों का वेग कम होना चाहिए जिससे अवसादों का निक्षेपण आसानी से हो सके। जिन नदियों के मुहानों पर ये दशाएँ उपस्थित नहीं रहती हैं, वहाँ डेल्टा का निर्माण सम्भव नहीं होता। चूंकि भारत की पृश्चिम बाहिनी नदियाँ तीव्र गति से प्रवाहित होते हुए अरब सागर में गिरती हैं, मुहाने पर प्रवाह गति तीव्र होने के कारण इनके द्वारा बहाकर लाए गए अवसाद समुद्र में दूर तक फैल जाते हैं, जिससे ये डेल्टा का निर्माण नहीं कर पातीं।

प्रश्न 9.
पश्चिमी हिमालय की भू-प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिमी हिमालय की भू-प्रकृति :- पश्चिमी हिमालय सिंधु एवं सतुलज नदी के बीच फैला हुआ है। यह भाग कश्मीर एवं हिमालय प्रदेश में स्थित है, हिमालय की सर्वाधिक चौड़ाई इसी भग्र में मिलती है इसकी लम्बाई 560 कि॰मी० है। लद्दाख, जास्कर, पीर पाजल एवं चौलाधर श्रेणियाँ उसी भाग में स्थित हैं। इस भाग में कुछ महत्वपूर्ण दर्रे पाये गए हैं जिनमें बुर्जिल एवं गोजीला, शिष्कीला, थागा-ला, लीपू-लेख-ला आदि हैं।

इस हिमालय क्षेत्र की प्रमुख चोटियाँ नंगा पर्वत (8126 मी०), नंदादेवी (7817 मी०), है। यहाँ नदी अपहरण के लक्षण की दृष्टि गोचर होती है यहाँ अनेक नदी घाटियाँ और हिम-घाटियाँ मिलती है। इसी क्षेत्र की कश्मीर घाटी को ‘पृथ्वी का स्वर्ग’ कहा गया. है। अलेम नदी भी इसी घाटी से होकर बहती हैं। डल और वुलर झोलDal and Water Lake मीठे जल को दो प्रसिद्ध झीलें हैं।

प्रश्न 10.
गोदावरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा क्यों कहते हैं।
उत्तर :
यह दक्षिण के पठार की सबसे बड़ी नदी है। यह महाराष्ट्र राज्य में नासिक के समीप पश्चिमी घाट पर्वत से निकलती है। यह दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हुई पूर्वी घाट पर्वत को पार करके डेल्टा बनाती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। प्रभारा, मुला, मंजीरा, वर्धा पेनगंगा और इन्द्राबती इसकी सहायक नदियां है। यह नदी 1465 किलोमीटर लम्बी है। इसे दक्षिण भारत की गंगा कहते हैं।

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प्रश्न 11.
पूर्वी तटीय और पश्चिमी तटीय मैदान की तुलना करो।
उत्तर :

पूर्वी तटीय मैदान पशिचमी तटीय मैदान
i. यहु तटीय मैदान अधिक चौड़ा है। i. यह तटीय मैदान कम चौड़ा है।
ii. इस क्षेत्र की भूमि की ऊँचाई कम है। ii. इस क्षेत्र की भूमि की ऊँचाई अधिक है।
iii. भूमि अधिक उपजाऊ है अत: कृषि का विकास अधिक हुआ है। iii. भूमि कम उपजाऊ होने के कारण कृषि का का विकास कम हुआ है।
iv. इस क्षेत्र की नदियाँ मंद गति से बहती है। iv. इस क्षेत्र की नदियाँ तीव्रगति से बहती है।
v. इस क्षेत्र की नदियाँ मुहानों पर डेल्टा बनाती है। v. इस क्षेत्र की नदियाँ मुहानों पर डेल्टा नहीं बनाती है।

प्रश्न 12.
हिमालय पर विभिन्न प्रकार के वन क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर :
हिमालय पर्वत पर ऊँचाई के अनुसार वर्षा तापक्रम में भिन्नता दृष्टिगोचर होती है। अतः यहाँ विभिन्न प्रकार के वन मिल्ले हैं। पूर्वी हिमालय अंचल में पश्चिमी हिमालय अंचल की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। अतः पूर्वी हिमालय में तराई अंचल से लेकर 1525 मी० की ऊँचाई तक आर्द्र सम शीतोष्ण सदाबहार के वन मिलते हैं। यहाँ कहीं-कहीं साल जैसे पतझड़ के वृक्ष लतायें एवं लम्बी घासें मिलती हैं। यहाँ के मुख्य वृक्ष साल शीशम एवं बाँस है। पश्चिमी हिमालय में इस तक छोटे छोटे वृक्ष एव झाड़याँ मिलती हैं।

यहाँ के मुख्य वृक्ष साल, शीशम ढाँक तथा आँवला आदि है। यहाँ 1525 मी॰ से 2500 मी० तक ऊँचाई वाले भागों में शीतोष्ण कटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले पतझड़ के वन मिलते हैं। यहाँ के मुख्य वृक्ष ओक. बंच, चीड़, बर्च और मैपिल आदि है। यहाँ 2500 से 4500 मी॰ की ऊँचाई पर नुकीली पत्ती वाले कोणधारी वन मिलते हैं। इन वनों के मुख्य वृक्ष पाइन, फर, लारेल और देवदार आदि हैं। यहाँ 4500 मी० से अधिक ऊँचाई पर छोटीछोटी घासे एवं सुन्दर फूलों वाले बन मिलते है।

प्रश्न 13.
मैग्रोव जाति के वृक्ष केवल खारी भूमि में क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर :
मैग्रोव जाति के वृक्ष केवल खारी भूमि में पाये जाते है क्योंकि यह वृक्ष खारे जल में अपना अस्तीत्व बनाये रखने के लिए अपना अनुकूलन करता है।
(i) नमकीन मिट्टी में पेड़ों की जड़ों को सांस लेने में कठिनाई होती है अत: मैग्रोव वृक्षों की जड़े पानी के ऊपर निकल जाती है इन्हें श्वसन मूल कहते है।
(ii) भूमि दलदली होने के कारण पेड़ों के गिरने का भय रहृता है अतः उनकी जडे तिरछी होती है।

प्रश्न 14.
उत्तर से दक्षिण हिमालय का वर्गीकरण कीजिए तथा संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्तर से दक्षिण हिमालय में तीन समानान्तर श्रेणियाँ मिलती है :
महान या आन्तरिक हिमालय : यह हिमालय की सबसे उत्तरी एवं सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है। इसकी औसत ऊँचई 6000 मीटर तथा चौड़ाई 40 कि०मी० है। इसकी 100 से भी अधिक शिखरे वर्ष भर हिमाच्छादित रहती है। इसी से इसे हिमाद्रि कहते है। संसार के सर्वोच्च पर्वत-शिखर इसी भाग में स्थित है। माउण्ट एवरेस्ट (8848 मीटर) विश्च की सबसे ऊँची चोटी है। अन्य महत्वपूर्ण चोटियाँ नन्दादेवी ( 7818 मी०), नंगा पर्वत (8126 मी०), गोसाईथान (8013 मी०) कंचनजंघा (8598 मी०) मैकालू (8481 मी०), धौलागिरि (8172 मी०), आदि शिखर है। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कोसी, सिन्धु आदि नदियाँ इसी भाग से निकलती है।

लघु या मध्य हिमालय : यह श्रेणी महान हिमालय के दक्षिण तथा उसके समानान्तर स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई 3000 से 5000 मीटर तथा चौड़ाई 80 से 100 कि॰मी० है। यहाँ नीस तथा ग्रेनाइट चट्टानों की अधिकता है। यहाँ केवल जाड़े की ऋतु में हिमपात होता है। गर्मी की ऋतु सुहावनी होती है। श्रीनगर, दर्त्रिलिंग, शिमला, नैनीताल, मसूरी आदि स्वास्थ्यवर्दक स्थान तथा अमरनाथ, केदारनाथ तथा वद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थान इसी भाग में स्थित है।

शिवालिक या वाह्य हिमालय : इसे उप-हिमालय भी कहते है। यह हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है। इसकी ऊँचाई सबसे कम ( 600 से 1500 मी०) है। यह 8 से 48 कि॰मी० चौड़ी है। इसका विस्तार पश्चिम में पोटवार बेसिन से पूर्व में बहपपुत्र नदी तक है। यह हिमालय का सबसे नवीन भाग है। गंगा के मैदान की भाँति यह श्रेणी भी चिकनी मिट्टी बालू और कंकड़ से निर्मित है।

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प्रश्न 15.
सतलज-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान की भू-प्रकृति का संक्षेप वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भू-प्रकृति के अनुसार उत्तर-भारत के मैदान को तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है :
सतलज का मैदान : दिल्ली के निकट आरावली की उच्च भूमि जल विभाजक का कार्य करती है। इसके पश्चिमी भाग को सतलज नदी का मैदान कहते है। इस मैदान का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है । यह मैदान समुद्र तल से 200 से 240 मी॰ ऊँचा है। इस मैदान की प्रमुख नदियाँ सतलज, रावी, चिनाव झेलम और व्यास है।

गंगा का मैदान : यह मैदान पश्चिम में यमुना नदी के पूर्वी तट से लेकर पूर्व में बंग्लादेश तक फैला हुआ है। यह पश्चिम में चौड़ा तथा पूर्व में क्रमशः सकरा होता चला गया है। यह पश्चिम में समुद्र तल से 200 मी॰ ऊँचा तथा पूर्व में 50 मी० ऊँचा है। इसका ढाल पूर्व की ओर है। इस मैदान की प्रमुख नदी गंगा है। इसके अन्तर्गत उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्य आते है।

ब्रह्मपुत्र का मैदान : इस मैदान की औसत ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 160 मी० है। यह उत्तर में अरूणाचल प्रदेश और दक्षिण में मेघालय के बीच स्थित है। इस मैदान का निर्माण ब्रह्मपुत्र नदी द्वारा हुआ है। अतः इसे ब्रह्मपुत्र घाटी भी कहते है। इस मैदान का ढाल पूर्व से पश्चिम की ओर है। यह मैदान 600 कि॰मी० लम्बा तथा 160 कि०मी० चौड़ा है। तिस्ता, लोहित आदि ब्रहमुत्र की सहायक नदियाँ है। ब्रह्मपुत्र नदी के जल में बहुत अधिक अवसाद रहते है। मैदानी भाग में आते ही इसकी गति मन्द हो जाती है। यह नदी गंगानदी से मिलकर अपने मुहाने पर विश का सबसे बड़ा डेल्टा बनाती है। इसे सुन्दरवन का डेल्टा कहते है।

प्रश्न 16.
महाबालेश्वर में पूना से अधिक वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
अरब सागर की मानसूनी पवनें सर्वप्रथम पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से टकराकर पश्चिमी तटीय मैदान में 300- 500 सेमी॰ वर्षा करती है। ये मानसूनी पवने महाबालेश्वर में 625 सेमी॰ तक वर्षा कर देती है। पश्चिमीघाट पर्वत का पूर्वी भाग इन पवनों के वृष्टिछाया प्रदेश में पड़ता है। अत: यहाँ वर्षा कम होती है। इसके फलस्वरूप पून्त में 50 सेमी० से भी कम वर्षा होती है।

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प्रश्न 17.
तामिलनाडु में दो वर्षा ऋतुएँ क्यों पायी जाती हैं।
उत्तर :
ग्रीष्म काल में तामिलनाडु में दक्षिण पश्चिम मानसून से वर्ष होती है। लेकिन शीत ऋतु में बंगाल की खाड़ी के ऊपर से होकर जाने वाली उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवायें खाड़ी से आर्द्रता ग्रहण करके तामिलनाडु में पूर्वीघाट की पहाड़ियों से टकराकर पूर्वी तटीय मैदान में कुछ वर्षा करती है अत: तामिलनाडु में शीत काल में भी (वर्ष में दो बार) वर्षा होती है।

प्रश्न 18.
उत्तरी भारत में पूर्व से पश्चिम कम वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
गर्मी के दिनों में उत्तरी भारत व्यापारिक हवाओं के प्रभाव में रहते है। इन हवाओं से पूर्वी भाग में तो वर्षा होती है, पर पश्चिमी भाग में आते आते शुष्क हो जाती है, अतः महाद्वीपो के पश्चिम भाग आते-आते वर्षा कम हो जाती है।

प्रश्न 19.
भारत में जाड़े में नाममात्र की वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
जब सूर्य मकर रेखा पर चमकता है तो उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु होती है। इस समय स्थल भाग समुद्र को अपेक्षा अधिक ठंडा हो जाता है जिससे मध्य एशिया में अधिक सर्दी पड़ने के कारण उच्च दाब का केन्द्र बन जाता है। इस समय हवायें स्थल भाग से समुद्र की ओर चलती है। इन्हें जाड़े की मानसूनी हवाएं कहते है। भारत में इनकी दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है। अतः इन्हें उत्तरी-पूर्वी मानसून कहते है। स्थल से आने के कारण शुष्क होती है। अतः इनसे वर्षा नहीं होती।

प्रश्न 20.
थार के मरुस्थल में गर्मी एवं जाड़े के तापमान में बहुत अन्तर क्यों पाया जाता है।
उत्तर :
थार के मरूस्थल में गर्मी एवं जाड़े के तापमान में अन्तर होने के निम्न कारण है :

  1. थार का मरूस्थल राजस्थान के विल्कुल पश्चिम में स्थित है। विल्कुल शुष्क क्षेत्र में पड़ता है।
  2. यह मरुस्थल समुद्र से अधिक दूर स्थित है। इसलिए इस पर समुद्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  3. इस मरुस्थल का अधिकांश भाग बालू एवं पत्थर से निर्मित जो बहुत जल्द ग़र्म भी होते है और ठण्ड भी हो जाते है। जिससे दिन में भीषण गर्मी पड़ती है तथा रात में काफी ठण्ड पड़ती है।
  4. इस क्षेत्र में कोई भी ऊँची पहाड़ी नहीं है। जिसके कारण मानसून हवा सीधे निकल जाती है और वहाँ वर्षा नहीं होती है। अतः इन्हीं सब कारणों से थार के मरुस्थल में गर्मी एवं जाड़े में तापमान में बहुत अन्तर पाया जाता है।

प्रश्न 21.
मेघालय के पठार में सर्वाधिक वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा मेघालय में सबसे अधिक शक्तिशाली हो जाती है। यहाँ पश्चिम से पूर्व अर्द्धचन्द्राकार रूप में स्थित गारो, खासी एवं जयन्तियाँ पहाड़ियों से एक कीप के आकार का क्षेत्र बनता है। मानसून हवाएँ 1520 मीटर ऊँची खासी पहाड़ी से टकराकर अचानक लगभग 1300 मीटर ऊँची उढ जाती है। जिससे खासी पहाड़ी के दक्षिण पवनविमुख ढाल पर स्थित चैरापूँजी से 16 कि॰मी॰ पश्चिम स्थित मौसिनराम गांव में विश्व में सबसे अधिक वर्षा 1392 से॰मी॰ होती है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
उष्णकटिबन्धीय मौसमी जलवायु क्षेत्र की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
उष्णकटिबन्धीय मौसमी जलवायु क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ :
वितरण : उष्ण कटिबन्धीय मानसूनी जलवायु उन क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ पवनों की दिशा में पूर्णरूप से मौसम परिवर्तन हे जाता है। इस जलवायु में ग्रीष्मकाल में उष्ण महासागरो में स्थल की ओर चलनेवाली हवाओ से भारी वर्षा होती है, जबकि शीत ऋतु में स्थल से महासागरों की ओर चलनेवाली हवाएं मौसम को शुष्क बना देती है।

जलवायुविक विशेषता : मानसूनी जलवायु प्रदेशों में जलवायु उष्ण एवं आर्द्र होती है। इन प्रदेशों में वार्षिक तापान्तर अधिक मिलता है। ग्रीष्म ॠतु में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जबकि औसत तापमान 30° C से 38°C रहता है। भारत में उत्तरी-पश्चिमी भाग में तापमान 49°C तक हो जाता है। उत्तर भारत में मई-जून में लू (गर्म लहर) चलती है। ग्रीष्म ऋतु गरम एवं नम होती है। शीत ऋतु नवम्बर से फरवरी माह तक रहती है। शीत ऋतु का औसत तापमान 15° से 18° तक रहता है। भारत के उत्तरी भाग में न्यूनतम तापमान 5°C से भी नीचे गिर जाता है। यहाँ तापान्तर 20° से 25° तक रहता है। किन्तु समुद्र तं पर 10°C से भी कम रहता है। शीत ऋतु शीतल एवं शुष्क रहती है।

प्राकृतिक वनस्पत -विशेषता : मानसूनी प्रदेशों की वनस्पति मुख्यतः वर्षा को मात्रा पर निर्भर करता है। 200 से॰मी॰ से अधिक वर्षा वंल भागों में सदाबहार वनों में महोगनी, रबर, सिनकोना आदि तथा 100 से 200 से॰मी॰ वार्षिक वर्षा वाले भागों में साल, सा गौन, शीशम, आम आदि वृक्ष पाये जाते है। 50 से 100 से॰मी॰ वार्षिक वर्षा वाले भागों में खैर, कीकर, बबूल, इमली आदि के शुष्क वन तथा घास के मैदान पाए जाते है। 50 से०मी० से कम वर्षिक वर्षा वाले भागों में शुष्क व कँंटीली झाड़ीदार वनस्पति पाई जाती है।

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प्रश्न 2.
भारत के पश्चिमी हिमालय के भूप्रकृति का संक्षिप्त वर्णन दीजिए।
उत्तर :
पश्चिमी हिमालय (Western Himalaya) : पश्चिमी हिमालय कश्मीर से लेकर नेपाल की सीमा तक विस्तृत है। पूर्व से पश्चिम इनके निम्नलिखित उपविभाग है –
कश्मीर हिमालय (Kashmir Himalaya) : विभिन्न पर्वतों की कई शृंखलाएँ कश्मीर राज्य में अवस्थित है, जो एक ही पर्वत निर्माणकारी काल में बने है। उत्तर से दक्षिण इन पर्वतो का क्रम है – सबसे उत्तर में काराकोरम श्रृंखला है, इसके दक्षिण में लद्दाख, पुन: जास्कर, पीर पंजाल एवं शिवालिक श्रेणी की स्थानीय श्वृंखला जम्मू एवं पंच पहाड़ियाँ। पीरपंजाल एवं जास्कर पर्वत श्रेणियों के बीच विश्व प्रसिद्ध कश्मीर घाटी अवस्थित है, जो सरोवरीय निक्षेप से निर्मित है। इन्हें स्थानीय रूप से करेवा कहा जाता है। काराकोरम श्रेणी में ही गॉड़िन ऑस्टीन (K2) अवस्थित है, जो भारत की सर्वोच्च चोटी है, यद्यपि यह पाक अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है ।

हिमांचल हिमालय (Himachal Himalaya) : यह श्वृंखला हिमाचल प्रदेश में स्थित है। उत्तर में महान हिमालय की श्रेणियां है। इसके दक्षिण में मध्यवर्ती हिमालय की चार श्रेणियाँ धौलाधर, पीरपंजाल, नाग तीवा एवं मुसौरी अवस्थित है। सबसे दक्षिण में शिवालिक पर्वत श्रेणी अवस्थित है। इस भाग में पर्यटन की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण स्थलों का विकास हुआ है। यहाँ की अर्थव्यवस्था फलों की कृषि एवं पर्यटन पर आधारित है।

कुमायूँ या उत्तरांचल हिमालय (Kumaon or Uttaranchal Himalaya) : उत्तरांचल राज्य के उत्तरी भागों में इसका विस्तार है। इस भाग में शिवालिक एवं मध्यवर्ती हिमालय की श्रेणियां विस्तारित है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, कामेत प्रमुख पर्वत चोटियाँ इसी भाग में है। गंगोत्री एवं यमुनोत्री हिमनद इसी भाग में अवस्थित है जिनसे, क्रमशः गंगा एवं यमुना नदियाँ निकलती है। इन भाग में कई अनुप्रस्थ घाटियाँ पायी जाती है, जिसे दून एवं दुआर कहते हैं।

प्रश्न 3.
पश्चिमी तटीय मैदान एवं पूर्व तटीय मैदान की व्यख्या कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम तटीय मैदान (West Coastal Plain) : यह पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच में स्थित है। इसका फैलाव उत्तर में खंभात की खाड़ी से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी अंतरीप तक है (लगभग 1,600 किलोमीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा)। यह पहले समुद्र से घिरा द्वीप था, जो अब आसपास की नदियो द्वारा लाई मिट्टी आदि से जुड़कर प्रायद्वीप गन गया है। उत्तरी खारी मिट्टीवाली दलदल भूमि बड़ा रन (Great Rann) और उसके निकट की भूमि छोटा रन (Little Rann) के नाम से प्रसिद्ध है।

काठियावाड़ के मैदानी क्षेत्र में गिरनार पहाड़ी (1,117 मीटर) मिलती है । पश्चिमतीीय मैदान का सबसे चौड़ा भाग गुजरात का मैदान कहलाता है। गोवा तक यह तटीय मैदान ‘कोंकण तट’ (Konkan Coast) कहलाता है, गोवा से मंगलोर तक के तटीय मैदान को कर्नाटक तट और मंगलोर से कुमारी अंतरीप तक को केरल तट कहते हैं। कर्नाटक तट और केरल तट का संयुक्त नाम ‘मालाबार तट’ (Malabar Coast) हैं।

पश्चिमतटीय मैदान में नर्मदा और ताप्ती दो बड़ी नदियों के मुहाने मिलते हैं, किंतु वहाँ डेल्टा नहीं बनता (जलोढ़ की कमी और ज्वारभाटे के प्रभाव के कारण)। साबरमती, मांडवी, जुआरी, कालिंदी, सरस्वती, नेत्रवती, पेरियर आदि प्रमुख नदियाँ है जो बहुत छोटी हैं। इस तट पर कांडला, बंबई, मर्मागोवा, मंगलोर और कोचीन उत्तम प्राकृतिक पत्तन हैं। दक्षिण में खारे पानी की छोटी-छोटी झीलों (लैगुन या कपाल) की अधिकता है जिसमें कोचीन की निकटवर्ती वेम्बानद (Lake Vembanad) उल्लेखनीय है। मालाबार तट पर बालू के ढेर मिला करते हैं।

पूर्व तटीय मैदान (East Coastal Plain) : यह पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच में स्थित है। इसका फैलाव उत्तर में महानदी घाटी से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक लगभग 1,500 किलोमीटर है। इसकी चौड़ाई 100 किलोमीटर से अधिक है, खास कर महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टाओं में (क्रमशः उड़ीसा, आध्रप्रदेश और तमिलनाहु राज्यों के अंतर्गत)। इस तटीय मैदान का आधा उत्तरी भाग ‘गोलकुंड़ा तट’ या ‘उत्तरी और दक्षिणी सरकार तट’ और आधा दक्षिणी भाग (नेलोर से कन्याकुमारी तक) ‘कोरोमंडल तट’ (Coromandal Coast) कहलाता है।

पूर्वतटीय मैदान से महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी चार बड़ी नदियाँ गुजरती हैं। इस तट पर लैगूनों का विकास भी पाया जाता है। चिल्का और पुलिकट दो प्रमुख झीलें हैं जिनका जल खारा है। भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील चिल्का ही है जिसका क्षेत्रफल 780 वर्गकलोमीटर और 1,144 वर्गकिलोमीटर के बीच घटता-बढ़ता रहता है। गोदावरी-कृष्णा डेल्टाओं के बीच कोलेरू झील मिलती है जो मीठे पानी की है । इस तट पर पारादीप, विशाखापत्तनम और मद्रास प्रमुख पत्तन हैं जिनमें मद्रास का पोताश्रय कृत्रिम है। दक्षिण में तूतीकोरिन पत्तन भी कृत्रिम पोताश्रय पर विकसित है।

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तटीय मैदान ने विदेशी व्यापार में अपार मदद पहुँचाई है। कलकत्ता को छोड़कर सभी छोटे-बड़े पत्तन समुद्री तट पर भी स्थित हैं जो व्यापार के केन्द्र बन गए हैं। देश के भीतरी भागों से वे रेलमार्ग या सड़क द्वारा जुड़े हुए हैं। समुद्र की समीपता ने इस प्रदेश के लोगों को साहसी नाविक बनने को प्रेरित किया है। यहाँ समुद्री मछुआरे भी बहुत मिलते हैं जो मछली पकड़ने जैसे आर्थिक क्रियाशीलन में लगे हुए हैं। नारियल, गर्म मसाले, धान आदि की खेती के लिए ये महत्वपूर्ण स्थल हैं।

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प्रश्न 4.
भारत के भू-प्रकृति को कितने भागों में बाँटा गया है ? किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत की भू-प्रकृति : भारत को भूगर्भीय संरचना के आधार पर तीन भागों में बाँटा जाता है – प्रायद्वीपीय भारत का विस्तृत पठार, उत्तरी पर्वतमाला और विशाल उत्तरी मैदान। प्राकृतिक रूप और भू-आकृतियों को देखते हुए इसके निम्नलिखित विभाग किए जा सकते हैं –

  1. उत्तर और उत्तर-पूर्व के पर्वतीय भाग
  2. उत्तरी विशाल मैदान
  3. प्रायद्वीपीय पठार या दक्षिणी पठार
  4. समुद्रतटीय मैदान,
  5. भारतीय द्वीपसमूह।

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उत्तर और उत्तर-पूर्व के पर्वतीय भाग : भारत के उत्तरी भाग में विस्तृत मोड़दार पर्वत मुख्य रूप से ‘हिमालय’ के नाम से विख्यात है जिसकी लंबाई लगभग 2,5000 किलोमीटर है और चौड़ाई 100 से 400 किलोमीटर है। विश्व की सर्वोच्च चोटी इसी में मिलती है (नेपाल-स्थित ‘एवरेस्ट’ ; ऊँचाई 8848 मीटर)। इस पर्वतीय भाग की औसत ऊँचाई 6000 मीटर है।

हिमालय के उत्तर में (भारत की सीमा में) तीन और समांतर पर्वतश्रेणियाँ मिलती हैं, जो ‘जस्कर श्रेणी’, ‘लद्दाख श्रेणी’ और ‘काराकोरम श्रेणी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। जस्कर और लद्दाख श्रेणियों के बीच सिंधु नद का पश्चिमोत्तर प्रवाह-मार्ग है। काराकोरम श्रेणी में विश्व की द्वितीय सर्वोच्च चोटी ‘गाडविन आस्टिन’ K2, ऊँचाई 8,611 मीटर) मिलती है। इसी श्रेणी को (पूर्व बढ़ने पर तिब्बत में) ‘कैलाश पर्वत’ के नाम से पुकारा जाता है। पहले भारतभूमि का विस्तार उत्तर में कैलाश पर्वत श्रेणी तक था लद्दाख श्रेणी से सटा ‘लद्दाख पठार’ मिलता है जो भारत का सबसे ऊँचा पठार है (ऊँचाई 4 किलोमीटर)। इस पठार पर नदियों का आंतरिक प्रवाह पाया जाता है। उपर्युक्त तीनों हिमालय-पार की पर्वतश्रेणियाँ (Trans-Himalayan Ranges) हैं।

हिमालय का विस्तार पूर्वी भारत की सीमा पर भी देखा जा सकता है। एकाएक मुड़कर यह उत्तर-दक्षिण दिशा में फैल जाता है। वहाँ इसके अलग-अलग कई नाम हैं – पटकाई बुम, नागा पर्वतश्रेणी और लुशाई पर्वतश्रेणी। ये हिमालय की मुख्य श्रेणियाँ भले ही न हों, पर इन्हें हिमालय का विस्तार माना जाएगा। हिमालय और इन पूर्वी पर्वतश्रेणियाँ के बीच बह्मपुत्र नद का पश्चिमी प्रवाह देखा जा सकता है। हिमालय के पूर्वी छोर पर (बह्मपुत्र से पूरब) दक्षिण की ओर मुड़नेवाली उसकी एक शाखा ‘पूर्वाचल’ (Eastern mountains) है। यह भारत और म्यानमार (बर्मा) के बीच सीमा बनाती है। उत्तर-पूर्वी पर्वतश्रेणी मध्य में पश्चिम की ओर बढ़कर मेघालय तक आ गई है जहाँ इसे खासी, जयंतिया और गारो पहाड़यों के नाम से पुकारा जाता है।

उत्तर और उत्तर-पूर्व की पर्वतश्रेणियों से सटे पड़ोसी देशों में अनेक पर्वतश्रेणियाँ मिलतों हैं; जैसे – क्युनुलन, अराकान। उत्तर-पश्चिम में भी हिमालय दक्षिण की ओर मुड़ा हुआ है।

हिमालय का निर्माण टेथिस सागर में जमा हुए अवसादों (तलछटों) से हुआ। भारतीय भूखंड (प्लेट) जब उत्तर की ओर सरककर चीनी भूखंड (प्लेट) से टकराया तो दोनों भूखडों के बीच की तलछटी चट्टाने मुड़कर ऊपर उठ गई जिनसे हिमालय का निर्माण हुआ। इसके निर्माण में लाखों-करोड़ों वर्ष लगे।
मुख हिमालय सिंधु और ब्रापुत्र की सँकरी गहरी घाटियों (Gorges) के बीच स्थित है। यह तीन समांतर श्रेणियों में हिमाद्रि, हिमालय और शिवालिक में विस्तृत है।

हिमाद्रि सर्वोच्च श्रेणी है। सबसे उत्तरी श्रेणी भी यही है। भारतीय सीमा में इसकी प्रमुख चोटियाँ हैं – नंगा पर्वत ( 8,126 मीटर, कश्मीर में), नंदादेवी ( 7,817 मीटर, उत्तर प्रदेश में), कामेत ( 7,756 मीटर, उत्तर प्रदेश में), कंचनजंघा ( 8,598 मीटर, सिक्किम-नेपाल सीमा पर)। सिंधु, सतलज, गंगा, यमुना, कोसी और बहलपुत्र नदियों का उद्गम हिमाद्रि (वृहल हिमालय) ही है। सिया-ला, मारणो-ला, ससेर ला, उमासी ला, बुर्जील, जोंजिला माना ला, शिपकी ला, जलेप ला, नाथू-ला, ऋषि-ला, बोमाडि-ला, से-ला आदि हिमालय के कुछ प्रसिद्ध दर्रे (Gaps) हैं। हिमाद्रि में 6,000 मीटर से अधिक ऊँची चोटियाँ सौ से अधिक हैं और ये सभी हिमाच्छादित हैं।

हिमाचल वास्तव में मध्य हिमालय है जिसमे नदी-घाटियाँ और हिम-घाटियाँ मिलती हैं। यहाँ नदी-अपहरण के लक्षण भी दृष्टिगोचर होते हैं। कश्मीर और काठमांडू की चित्ताकर्षक घाटियाँ इसी भाग में हैं। कश्मीर-घाटी को ‘पृध्वी का स्वर्ग’ कहा गया है। झेलम नदी इसी घाटी से होकर बहती है। इसमे डल और वुलर (Dal and Wular lakes) मीठे जल की दो प्रसिद्ध झीलें अवस्थित हैं। वुलर मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है (भारत में)। डल के किनारे श्रीनगर बसा है जहाँ पहुँचने के लिए पीरपंजाल श्रेणी के बनिहाल दरें से होकर जाना पड़ता है। वहाँ ढाई किलोमीटर लंबा जबाहर सुरंग (Jawahar Tunnel) बनाया जा चुका है। कश्मीर में हिमचाल का पीरपंजाल कहकर पुकारते हैं। कुलू और काँगड़ा की प्रसिद्ध घाटयाँ भी हिमाचल में ही मिलती हैं। शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदि प्रसिद्ध पर्वतीय नगर तथा केदारनाथ, बदरीनाथ और अमरनाथ जैसे पावन तीर्थस्थल हिमालय के इसी भाग में बसे हैं। इसकी औसत ऊँचाई 4,000 मीटर है। हिमाचल को ‘लघु हिमालय’ भी कहा गया है।

शिवालिक हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है जिसकी ऊचाई 900 से 1500 मीटर के बीच है। यहु हिमालय की नवीनतम रचना है। इसमें कंकड और मिट्टी से बने कई ऊँचे मैदान मिलते हैं जिन्हे ‘दून’ या ‘द्वार’ कहते हैं(उदाहरणार्थदेहरादून, हरिद्वार) । इन ऊँचे मैदानों की स्थिति हिमाचल और शिवालिक के बीच में है। इस भाग में अनेक झ़ीले मिलती है जो ‘ताल’ कहलाती है (उदाहरणार्थ-नैनीताल, भीमताल)। शिवालिक और इसकी तराई में घने वन मिलते हैं।

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हिमालय भारत का प्रहरी ही नहीं, जलवायविक दशाओं का नियंत्रक भी है। मानसून पवनों के मार्ग में खड़ा होकर यह उनसे वर्षा कराता है। हिमालय न होता तो उत्तरी विशाल मैदान अस्तित्व में न आ पाता। इसंकी तलहटी में प्राकृतिक गैस और खनिज तेल के भंडार है। पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए हिमालय को इन नामों से भी पुकारा जाता है –

  1. कश्मीर हिमालय
  2. पंजाब हिमालय
  3. कुमायूँ हिमालय (काली और तिस्ता नदियो के बीच का हिमालय)
  4. नेपाल हिमतालय
  5. असम हिमालय (तिस्ता और ब्रह्नपुत्र के बीच का हिमालय)।

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प्रश्न 5.
उत्तर भारत के विशाल मैदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्तरी भारत के विशाल मैदान : यह मैदान हिमालय के दक्षिण करीबन 2,400 किलोमीटर में (पूर्वपश्चिम) फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई 240 से 300 किलोमीटर (उत्तर-दक्षिण) है। यह समतल है और इसमे कोई पर्वत नहीं है। सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों के जलोढ़-निक्षेपों (Alluvial deposits) से बना यह विशाल मैदान 300 मीटर से भी कम ऊँचा है और अत्यंत उपजाऊ है। इसका निर्माण हिमालय के निर्माण के बाद टेथिस सागर के बचे तलछटों से हुआ है। इस मैदान में जलोढ़-निक्षेपों की मोटाई 2 हजार मीटर से भी अधिक है।

यह विशाल मैदान एक इकाई होते हुए भी चार उपविभागों में बंटा हुआ. है – i. पंजाब का मैदान, ii. राजस्थान का मैदान, iii. गंगा का मैदान, (iv) बह्मपुत्र का मैदान।

i. पंजाब का मैदान : उत्तरी विशाल मैदान का यह सबसे पश्चिमी भाग है जिसकी ऊँचाई 200 से 250 मीटर (समुद्रतल से) है। इसके उत्तर में हिमालय और दक्षिण में राजस्थान का मरुस्थल है। इसकी ढाल दक्षिण-पश्चिम की ओर है। सतलज इस मैदान की प्रमुख नदी है। सतलज के नाम से इसे ‘सतलज का मैदान’ भी कहा जाता है। दिल्ली पहाड़ी या सरहिंद जलविभाजक (300 मीटर ऊँचा) द्वारा यह गंगा के मैदान से अलग होता है। मैदान का विस्तार पश्चिम में सिंधु नदी के पार तक है जो अब पाकिस्तान में है। यहाँ नहरों का जाल बिछा हुआ है।

ii. राजस्थन का मैदान : यह अरावली के पश्चिम में विस्तृत है, किन्तु जलवायु-परिवर्तन के कारण यह मैदान रेतीला बन गया है। यहाँ बालू के टीलों की प्रधानता है। लूनी इस मैदान की एकमात्र नदी है। खारे जल की झीलें अनेक हैं जिसमें साँभर सर्वप्रमुख है।

iii. गंगा का मैदान : यह मुख्यतः पश्चिम में यमुना और पूर्व में ब्रह्मपुत्र के बीच का समतल भाग है जिसकी ढाल दक्षिण-पूर्व की ओर है। ढाल इतना मंद है कि साधारणतया पता ही नहीं चलता। इसकी लंबाई 1,400 किलोमीटर और चोड़ाई 140 से 500 किलोमीटर है। गंगा सर्वप्रमुख नदी है जिसके नाम पर इसे गंगा का मैदान कहा गया है। गंगा अनेक सहायक नदियों का जल, कीचड़ और बालू लेकर आगे बढ़ती है, अतः यहाँ हर साल बाढ़ के समय नई मिट्टी बिछ जाती है। इस मैदान में पुरानी तलछट (Older alluvium) नई तलछट (Newer alluvium) दोनों की परते पाई जाती हैं जिन्हे क्रमश: ‘बाँगर’ और ‘खादर’ कहा गया है। बाँगर उच्च भाग है और बाढ़ से बच जाता है। खादर निम्न भाग होने के कारण बाढ़ के समय जलमग्न हो जाता है।

‘चौर’ भी निम्न भाग है। बह्मपुत्र के साथ मिलकर गांगा अपने मुहाने पर ‘डेल्टा’ बनाती है जो संसार में सबसे बड़ा है। गंगा के डेल्टा में दलदल भूमि मिलती है जो ज्वारभाटा या वर्षाजल से भरकर ‘बील’ की संज्ञा पाती है। यहाँ मछलियाँ खूब पकड़ी जाती है। डेल्टा का अधिकतर भाग बँगलादेश में पड़ गया है। यह ‘सुंदरवन’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। डेल्टा के अग्र भाग में कई द्वीप मिलते हैं ;

जैसे – सागर द्वीप। हाल में बने द्वीप का नाम पुनर्वासा रखा गया है। गंगा की पश्चिमी शाखा भागीरथी के नाम से प्रसिद्ध है जो आगे बढ़कर हुगली कहलाती है। हुगली में ज्वार के प्रवेश करने पर ही बड़े-बड़े समुद्री जहाज उसके साथ कलकत्ता पहुँच पाते हैं। गंगा के मैदान के तीन भाग किए जाते हैं –

  • ऊपरी गंगा का मैदान (प्रयाग तक),
  • मध्य गंगा का मैदान (प्रयाग से राजमहल तक) और
  • निम्न गंगा का मैदान (पश्चिम बंगाल में)। निम्नभाग में गंगा डेल्टा बनाती है।

ब्रह्मपुत्र का मैदान : उत्तरी विशाल मैदान का सबसे पूर्वी भाग बहापुत्र का मैदान है जिसकी ढ़ाल पूर्व से पश्चिमी की और है। गह मैदान लगभग 600 किलोमीटर लंबा और 100 किलोमीटर चौड़ा है। इसकी सामान्य ऊँचाई 150 मीटर है। यह रेंप घाटी (Ramp valley) है जो ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों द्वारा जमा की गई मिट्टी, बालू और कंकड़ों के निक्षेप से वर्तमान रूप में आई है। इस मैदान में भीषण बाढ़ आती है और उससे भारी क्षति पहुँचती है। इस मैदान को पार कर ब्रह्मपुत्र नदी दक्षिण की ओर मुड़ती है और गंगा से मिलकर डेल्टा बनाती है। गंगा और ब्रह्मपुत्र की संयुक्त धारा ‘मेघना’ कहलाती है। तिस्ता, सुवनसिरी और लोहित ब्रह्मपुत्र की कुछ सहायक नदियाँ हैं।

बहापुत्र के मैदान की दो दिशेषताएँ ध्यान देने योग्य हैं – i. तेजपुर से धुबरी के बीच नदी के दोनों ओर एकाकी घर्षित पहाड़ियाँ (Monadnocks) बहुत अधिक है, ii. भूमि की मंद ढाल के कारण नदी गुंफित (Braided) हो गई है जिससे इसकी पेटी में असंख्य द्वीप (River Islands) बन गए हैं। एक ऐसा द्वीप ‘मजुली’ (क्षेत्रफल 929 वर्गकिलोमीटर) है जो विश्व का सबसे बड़ा नदी-द्वीप है।

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प्रश्न 6.
प्रायद्वीपीय पठार को कितने में बांटा गया है? किन्हीं एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रायद्वीपीय पठार : दक्षिणी भारत प्रायद्वीप है और सबसे पुराना पठार भी। यह ग्राचीन गोंडवानाभूमि का एक खंड है और मुख्य रूप से कड़ी रवादार चट्टानों (Hard crystalline rocks) से बना हुआ है। इसकी ऊँचाई मुख्यत: 400 से 900 मीटर तक है। यह उत्तर की और चौड़ा और दक्षिण की ओर पतला होता गया है। इसके तीनों ओर पहाड़ियाँ मिलती हैं – उत्तर में अरावली, विध्याचल और सतपुरा; पश्चिम में पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) और पूर्व में पूर्वी घाट। विंध्याचल और सतपुरा के बीच नर्मदा की भंश-घाटी (Rift valley) है जो प्रायद्वीपीय पठार को दो स्पष्ट भागों में बाँट देती है – उत्तर-स्थित उच्चभूमि (Highlands) और दक्षिण-स्थित डेक्कन या दक्कन का पठार (Deccan Plateau)।

उत्तरी उच्चभूमि – दक्षिण भारत के पश्चि्चोत्तर (राजस्थान) में अरावली श्रेणी मिलती है। यह अवशिष्ट पर्वत है जिसकी एक शाखा दिल्ली की ओर चली गई है (Delhi Ridge)। अरावली की अधिकतम ऊँचाई अब 1,722 मीटर रह गई है (आबू-स्थित गुरु शिखर)। यह हिमालय से भी पुराना पहाड़ है। इसे विश्व का सबसे पुराना वलित पर्वत माना जाता है। इससे सटे पूर्व में पूर्वी राजस्थान की उच्चभूमि है जो 500 मीटर तक ऊँची है।

इससे पूर्व की ओर बढ़ने पर क्रमश: ‘बुंदेलखण्ड पठार’, ‘बघेलखंड पठार’ और ‘छोटानागपुर पठार’ मिलते हैं। चंबल, बेतवा और सोन इस भाग की प्रमुख नदियाँ हैं जो उत्तर की ओर (गंगा के मैदान की ओर) बहती हैं। बुंदेलखण्ड पठार को यमुना-पार का मैदान भी कहा जाता है, कितु यह ग्रेनाइटी चट्टान की उच्चभूमि है जिसकी ऊँचाई 350 मीटर तक है। इसमें कई सुंदर जलप्रपात मिलते हैं। यहाँ चंबल, बेतवा और सोन नदियों ने ग्रेनाइटी सतह पर मिट्टी का निक्षेप कर रखा है।

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अरावली के दक्षिण से पूर्व की ओर बढ़ने पर ‘मालवा पठार’ मिलता है जो लावानिर्मित है। इससे पूर्व बढ़ने पर सीढीनुमा उच्चभूमि मिलती है। यह क्षेत्र ‘विंध्याचल की पाटभूमि’ है जिसमें बालूपत्थरों की प्रधानता है। विध्य पर्वत मध्यप्रदेश के आरपार चला गया है। इसमें कोई शिखर नहीं मिलता। इसके दक्षिण में उससे सटे नर्मदा-घाटी है जिसके बाद सतपुरा की श्रेणी मिलती है। सतपुरा के पूर्व में महादेव पहाड़ी (1,117 मीटर) है जिससे पूरब बढ़ने पर मैकाल की पहाड़ियाँ मिलती हैं (सर्वोच्च चोटी अमरकंटक, 1,0136 मीटर)।

महादेव पहाड़ी पर ही पंचमढ़ी नगर (1,062 मीटर) स्थित है। मैकाल से पूरब बढ़ने पर ‘छोटानागपुर पठार, आ जाता है। यह पठार रिहंद नदी से लेकर राजमहल की पहाड़ियों तक विस्तृत है। राजमहल पर जुरैसिक काल के लावा निक्षेप मिलते हैं। छोटानागुर पठार के अंतर्गत राँची, हजारीबाग और कोडरमा के उप-पठार सम्मिलित है जहाँ ग्रेनाइट-नाइप चट्टानें मिलती हैं। सबस ऊँचे राँची पठार की ऊँचाई 600 मीटर है। छोटानागपुर पठार की प्रमुख नदियाँ सोन, कोयल, दामोदर, बराकर, स्वर्ण रेखा और शंख हैं।

दामोदर की भ्रंशा घाटी इसी में है जहाँ गोंडवाना काल का कोयला-भंडार उपलब्ध है। कोडरमा की रूपांतरित चट्टानों में अभक भंडार है। छोटानागपुर पठार कितने ही खनिजों से भरा है और ‘भारतीय खनिजों का भंडारघर’ (Storehoue of Indian Minerals) कहलाता है। सुदूर पूर्व में ‘मेघालय पठार’ है जो कट-छँटकर गारो, खासी और जयतिया पहाड़ियाँ कहलाता है। खासी पहाड़ी का आंतरिक भाग ‘शिलंग पठार’ के नाम से प्रसिद्ध है। मेघालय की उत्तरी सीमा पर बह्मपुत्र नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है।

उत्तरी उच्चभूमि से सटे अरावली के पश्चिम में दूर तक मरुभूमि मिलती है जो ‘थार मरुस्थल’ (The-Desert) के नाम से प्रसिद्ध है। यह प्रायद्वीपीय भारत का पश्चिमोत्तर भाग है, जो कभी हराभरा प्रदेश था। यह प्राचीन सभ्यता का केंद्र रह चुका है। सभ्यता के अत्यधिक विकास से इस क्षेत्र का वन-वैभव समाप्त हो गया, फलतः यह वर्षाविहीन हो गया। वनों की अंधाधुंध कटाई ने इसे वीरान ही नहीं बनाया, यहाँ की नंगी पहाड़ियों को बाह्य प्राकृतिक शक्तियों के आगे घुटने टेकने को मजबूर भी कर दिया।

यह क्षेत्र सिकताकणों में बदल गया। वह बालूमय प्रदेश पौराणिक सरस्वती नदी को पाताल ले गया। आज दक्षिणी भाग में एकमात्र लूनी नदी मिलती है। इस प्रदेश की पुरानी नदियों में कुछ ने मार्ग-परिवर्तन कर लिया (जैसे सतलज ने) और कुछ लुप्त हो गई (जैसे सरस्वती)। ताप की अधिकता और वर्षा के अभाव में चट्टानों का टूटना जारी है। अपरदित छत्रकशिलाएँ और बालुकास्तूप यहाँ की सामान्य स्थलाकृतियाँ हैं। थार मरुस्थल का विस्तार ढाई लाख वर्गकिलोमीटर पहुँच चुका है।

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प्रश्न 7.
दक्कन के पठार का सक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रायद्वीपीय या दक्कन के पठार की भू-प्रकृति लिखिए।
उत्तर :
दक्कन का पठार : दक्षिण भारत का यह भाग उत्तरी उच्चभूमि की अपेक्षा अधिक ऊँचा और अधिक विस्तृत है। यह अत्यंत पुरानी, कड़ी और रवादार परिवर्तित चट्टानों से बना है। उत्तर – पश्चिमी भाग लावा-प्रदेश (Lava Region or Deccan Trap) है जहाँ अनक चपटे पहाड़ मिलते हैं; जैसे – सतपुरा, अजंता। सतपुरा से ही दक्कन पठार आरंभ होता है। सतपुरा का सबसे ऊँचा भाग धुपगढ़ चोटी (1,350 मीटर) है। अजंता पहाड़ ताप्ती के दक्षिण में है। बैसाल्ट चट्टानों से बने लावाप्रदेश में रेगुड़ या काली मिट्टी (Regur or black soil) मिलती है जो कपास की उपज के लिए बहुत प्रसिद्ध है। अजंता पहाड़ ताप्ती नदी के भंश-क्षेत्र में है जिसके दक्षिण में बालाघाट है। इन दोनों के बीच गोदावरी-घाटी है। बालाघाट के दक्षिण में भीमाघाटी है जिसके दक्षिण कृष्णा का उद्गम क्षेत्र है।

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ताप्ती को छोड़कर सभी नदियाँ दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है। दक्कन के पठार का पश्चिमी किनारा भंशन (Faulting) के कारण सीधी और खड़ी दालवाला है जो पश्चिमी घाट बनाता है। पश्चिमी घाट के कई नाम हैं (विभिन्न क्षेत्रों में); यथा- सह्याद्रि पर्बत, नीलगिरि और कार्डेमम। पश्चिमी घाट का विस्तार ताप्ती नदी से लेकर कन्याकुमारी तक है। दक्षिण की ओर इसकी ऊँचाई बढ़ती जाती है। सबसे अधिक ऊँचाई अनयमुदी चोटी की है (2,695 मीटर) और यह अनयमलव पहाड़ी में है (केरल राज्यांतर्गत)।

अनयमुदी ही दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है। नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी दोदाबेटा की ऊँचाई अपेक्षाकृत कम है (2,680 मीटर)। दक्षिण भारत का सबसे सुंदर पर्वतीय नगर ‘ऊटी’ (ऊटकमंड) यहीं स्थित है। पश्चिमी घाट की शिखरेखा के लिए स्थानीय नाम ‘घाटमाथा’ है। पश्चिमी घाट में तीन महत्वपूर्ण दर्रे (Gaps) मिलते हैं – थालघाट, भोरघाट और पालघाट। इनमें प्रथम दो महाराष्ट्र राज्य में पड़ते हैं और अंतिम केरल को तमिलनाडु से मिलाता है।

दक्कन के पठार का दक्षिण-पूर्वी भाग मुख्य दक्कन प्रदेश (Main Deccan Region) कहलाता है जहाँ पूर्वी घाट की पहाड़ियाँ मिलती हैं। पश्चिमी घाट की तरह पूर्वी घाट श्रृंखलाबद्ध या अविच्छित्र नहीं है और इसकी ऊँचाई भी उतनी अधिक नहीं है। उड़ीसा का महेंद्रगिरि, आंधप्रदेश के नलामलय, पालकोंडा, वेलीकोंडा, तथा तमिलनाडु के पचामलय और शिवराय पूर्वी घाट के ही अंग है। सर्वोच्च भाग वह है जहाँ पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट आपस में मिलते हैं।

यही भाग ‘नीलगिरि’ कहलाता है जिसकी सबसे ऊँची चोटी दोदाबेटा है। प्राचीन नाइस और ग्रेनाइट चट्टानों से बने इस पठार में लाल मिट्टी (Red soil) मिलती है जो अधिक उपजाऊ नहीं होती। भूमि की ढाल पूर्व की ओर है जो महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के मार्गों से ज्ञात होता है। दक्षिणी पठार के इस भाग, तेलंगाना और कर्नाटक या मैसूर पठार’ के नाम से भी जाना जाता है। बाबाबूदन पहाड़ी (Iron Hill) यहीं है जो 1,925 मीटर ऊँची है।

प्रायद्वीपीय पठार रत्मगर्भा है। यहाँ लोहा, कोयला, ताँबा, मैंगनीज, अभ्रक, चूनापत्थर, सोना, हीरा इत्यादि खनिज द्रव्य प्राप्त हैं। पहाड़ी भूमि होने के कारण यहाँ वनवैभव भी मिलता है, कितु वनों का विस्तार सीमित क्षेत्र में है। अधिकतर भाग वनविहीन है। भूमि भी अनुर्वर है। हाँ, जलविद्युत उत्पादन में यह आगे है। पहाड़ी नदियों से और अधिक जलशक्ति का विकास किया जा सकता है। लावा के विखंडन से प्राप्त काली मिट्टी के क्षेत्र कपास-उत्पादन के लिए अत्युत्तम सिद्ध हुए हैं। पूर्व और पश्चिम में तटीय मैदान है। सुदूर दक्षिणी छोर कन्याकुमारी अंतरीप बनाता है।

प्रश्न 8.
आर्थिक दृष्टिकोण से नदियों के महत्व का उल्लेख करें।
उत्तर :
भारतीय अर्थव्यवस्था में नदियों के निम्नांकित महत्व हैं –

  1. ये सिंचाई के महत्त्वपूर्ण साधन हैं। भारत की आधी सिंचित भूमि नदियों से निकली नहरों द्वारा सींची जाती है।
  2. ये बाढ़ के समय नई मिट्टियाँ बिछाकर मैदानी भाग में उर्वरा-शक्ति बढ़ाती हैं। सारा मैदानी भाग नदियों की मिट्टी से ही बना होने के कारण उपजाऊ है।
  3. ये यातायात का साधन रही हैं । प्राचीन और मध्ययुग में नदियों से ही अधिक व्यापार होता था। आज भी ब्रह्यपुत्र, गंगा और यमुना में दूर-दूर तक स्टीमर चलते हैं।
  4. ये जलविद्युत उत्पन्न कर रही हैं और जलशक्ति का संभावित भंडार हैं।
  5. भारत में अधिकतर मछलियाँ नदियों में ही पकड़ी जाती हैं।
  6. ये उद्योग-केन्द्रों और नगरों की स्थापना और विकास में मदद पहुँचाती हैं ; जैसे – स्वणरिखा के किनारे जमशेद्युर की स्थिति।

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प्रश्न 9.
बहुउद्देशीय नदी घाटी योजना से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
बहुउद्देश्यीय नदी घाटी योजना (Multipurpose River Valley Project) : वहुउद्देशीय नदी घाटी योजना के अन्तर्गत नदियाँ हमारे आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका उपयोग केवल सिंचाई और यातायात के लिए ही नहीं बल्कि विभिन्न कार्यों के लिए किया जा रहा है । ऐसी नदी घाटी योजनाएँ तैयार की गई है जिनमें निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा गया है।

  1. सिंचाई की समुचित व्यवस्था करना
  2. जल विद्युत उत्पादन पर बल देना
  3. नदियों में बाढ़ जैसे प्रकोप की रोकथाम करना
  4. मिट्टी का कटाव रोका जाय तथा मिट्टी का रक्षा करना
  5. जल एकत्र करने के लिए झीलें बनाई जाती हैं ताकि उनमें मत्स्य पालन किया जा सके
  6. नौका विहार के द्वारा मनोरंजन का साधन
  7. पीने योग्य पानी की सुविधा उपलब्ध करना
  8. मलेरिया जैसे खरतनाक बिमारी पर रोकथाम लगाना
  9. वनों के क्षेत्र का विस्तार करना, तथा
  10. स्वास्थवर्द्धक स्थान बनाया जाना आदि।

भारत में निम्नलिखित नदी घाटी योजनाएँ हैं : –

  1. दामोदर घाटी योजना – पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड राज्य
  2. महनदी योजना – उड़िसा
  3. मयूराक्षी योजना – पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड
  4. कंसावती योजना – पश्चिम बंगाल
  5. कोसी योजना – बिहार तथा नेपाल
  6. रिहण्ड बांध योजना – उत्तर प्रदेश
  7. भाखड़ा नांगल योजना – पंजाब
  8. नागार्जुन सागर योजना – आन्ध्र प्रदेश
  9. फरक्का योजना – पश्चिम बंगाल

प्रश्न 10.
भारत की जलवायु का आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत की जलवायु का आर्थिक जीवन पर प्रभाव :

  1. गर्मी में उच्च तापमान और ग्रीष्मकालीन वर्षा के कारण भारतीय जलवायु में कुछ विशिष्ट फसलों की खेती होती है; जैसे – धान, जूट और चाय । ये फसलें मानसूनी जलवायु की ही उपज हैं।
  2. धान की खेती से अधिकाधिक लोगों का भरण-पोषण संभव है, अत: ऐसे क्षेत्र घने आबाद होते हैं।
  3. अधिक गर्मी पड़ने के कारण लोग सुस्त हुआ करते हैं जो आर्थिक विकास के लिए बाधक है।
  4. वर्षभर वर्षा न होने के कारण लोगों को शुष्क ऋतु में बेकार रहना पड़ता है। कृषिकार्य मुख्य रूप से वर्षा शूरू होने पर ही आरंभ होता है।
  5. वर्षा के असमान वितरण के कारण सिंचाई-व्यवस्था करनी पड़ती है।
  6. कहा गया है – मनसून वह धुरी है जिसपर भारत का समस्त जीवनचक्र घूमता है। तात्पर्य यह है कि इसी पर भारत की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। भारतीय कृषि को मानसून के साथ जुआ खेलना कहा गया है।
  7. पश्चिमोत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा के कारण गेहूँ, जौ आदि की अच्छी उपज होती है।
  8. चक्रवाती या तूफानी वर्षा से फसलों, पशुओं और गरीब लोगों को बहुत नुकसान पहुँचता है। ओलों से खड़ी फसलें मारी जाती हैं।
  9. अधिक वर्षा से कुछ क्षेत्रों में भीषण बाढ़ आती है।
  10. मूसलधार वर्षा से मिट्टी का कटाव होने लगता है।
  11. अत्यल्प वर्षा के क्षेत्र मरूस्थलों में परिणत होने लगते हैं।

प्रश्न 11.
प्रायद्वीपीय भारत या दक्षिणी पठारी भाग से निकलने वाली नदियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रायद्वीपीय भारत या दक्षिणी पठार से निकलनेवाली नदियाँ :- प्रारद्वीपीय पठार से निकलनेवाली नदियाँ अनुगामी या अनुवर्ती नदी-प्रणाली के अंतर्गत आती हैं। हिमालय की नदियों के विपरीत इनके विकास में धरातलीय स्वरूप का प्रभाव प्रमुख है । ये हिमालय की नदियों से अधिक पुरानी भी हैं। नर्मदा और ताप्ती तथा बगाल की खाड़ी में गिरनेवाली कितनी ही नदियों ने कटाव के चरम स्तर या आधारतल को प्राप्त कर लिया है। इन नदियों का अपरदन-कार्य नगण्य रह गया है। ये नदियाँ अंतिम अवस्था में अपेक्षाकृत चौड़ी और छिछली घाटियाँ बनाती हैं। इनमें पुराने होने के अर्थात् वृद्धावस्था के सभी लक्षण विद्यमान हैं।

पठार की नदियों में कुछ ऐसी हैं जो भंश-घाटियों में बहती हैं। नर्मदा और ताप्ती ऐसी ही नदियों के उदाहरण हैं। पूर्वी भाग में दामोदर भी भंशघाटी में बहनेवाली नदी है। नर्मदा की लंबाई 1,312 किलोमीटर, ताप्ती की 724 किलोमीटर और दामोदर की 541 किलोमीटर है। नर्मदा की घाटी में संगमरमर और दामोदर की घाटी में कोयला प्राप्य हैं।

पश्चिमोत्तर भाग में एकमात्र नदी लूनी समुद्र तक पहुँच पाती है, शेष थार मरुभूमि में अपना अस्तित्व खो बैठती हैं। मरुस्थलीय भाग आतंरिक अपवाह क्षेत्र है।

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प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ उत्तर की नदियों से सर्वथा भिन्न हैं । ये बरसाती हैं और जल के लिए मानसून पर पूरी तरह आश्रित हैं। बहाव की दिशा को देखते हुए इन्हें भी तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. नर्मदा और ताप्ती जो पश्चिम की ओर बहती है
  2. महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और वैगाई जो पूर्व की ओर बहती है तथा
  3. चंबल, बेतवा, सोन इत्यादि नदियाँ जो उत्तर की ओर बहती हैं।

दक्षिण की नदियों में सबसे बड़ी गोदावरी है, जिसकी लंबाई 1,465 किलोमीटर है । गंगा के बाद भारत में सबसे बड़ा नदी-प्रदेश इसी का है – देश के समस्त क्षेत्र का दशांश। गोदावरी पश्चिमी घाट से (नासिक के निकट) निकलकर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और आंधप्रदेश राज्यों से होकर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है । अपने मुहाने पर यह डेल्टा-निर्माण करती है । पेनगंगा, वर्धा और इंद्रवती इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।

महानदी गोदावरी से उत्तर है जो मध्यप्रदेश और उड़ीसा राज्यों में बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जा गिरती है। यह भी अपने मुहाने पर डेल्टा-निर्माण करती है। चिल्का झील की स्थिति इसके मुहाने के निकट है। महानदी पर भी हीराकुंड बाँध बनाया गया है। यह लगभग 900 किलोमीटर लंबी है।

कृष्णा गोदावरी से दक्षिण है जो महाबालेश्वर के निकट पश्चिमी घाट से निकलकर महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंधप्रदेश राज्यों से होकर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है (लंबाई 1,290 किलोमीटर)। दक्षिण भारत की यह दूसरी बड़ी नदी है। भीमा, तुंगभद्रा और मूसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। अमरावती, विजयवाड़ा, कृष्णा नदी के ही तट पर स्थित हैं।

कावेरी नदी पश्चिमी घाट के बहागिरि से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है (लम्बाई 760 मिलोमीटर)। कृष्णराज सागर बाँध इसी पर है। इसका डेल्टा बड़ा ही उपजाऊ है। पवित्रता के कारण कावेरी ‘दक्षिण की गंगा’ कहलाती है।

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प्रश्न 12.
भारतीय वनस्पतियों का वर्गीकरण कर किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में विशाल वृक्षों से लेकर झाड़ियों और घास तक, अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। उष्णक्षेत्रीय, शीतोष्णक्षेत्रीय और उच्च पर्वतीय सभी प्रकार की वनस्पतियाँ यहाँउगती हैं। वनस्पति की विविधता देखते ही बनती है। वर्षा की मात्रो, धरातल के स्वरूप तथा वृक्षों की जाति के आधार पर भारतीय वनों की निम्नलिखित पाँच पेटियाँ हैं –

  1. चिरहरित वन की पेटियाँ
  2. पर्णपाती वन या पतझड़ मानसून वन की पेटियाँ
  3. शुष्क और कँटीले वन की पेटी
  4. पर्वतीय वन की पेटी
  5. ज्वारीय वन की पेटियाँ।

चिरहरित वन की पेटियाँ : ये पेटियाँ उण्ण एवं अधिक वर्षावाले (200 से॰मी॰ या इससे अधिक) क्षेत्रों में हैं। पश्चिमी घाट, अंडमान द्वीप, हिमालय की तराई, पूर्वी हिमालय के उप-प्रदेश तथा असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोराम, त्रिपुरा ऐसे ही क्षेत्र हैं। पश्चिमी घाट में चिरहरित वन के क्षेत्र 450 से 1,350 मीटर की ऊँचाई के बीच और असम में 1,000 मीटर की ऊँचाई तक मिलते हैं। वैसे क्षेत्रों में जहाँ 250 से०मी॰ से अधिक वर्षा होती है, ये वन विशेष रूप से सघन हैं। जहाँ अकेक्षाकृत कम वर्षा है, ये वन चिरहरित से अर्द्ध-चिरहरित में बदल जाते हैं।

उच्च तापमान एवं अधिक वर्षा के कारण ही ये वन अत्यंत घने होते हैं और इनमें पेड़ों की उँचाई 30-40 मीटर तक चली जाती है। पेड़ों के ऊपरी सिरों सर इतनी शाखाएँ होती हैं कि पेड़ छाते का आकार ले लेते हैं। विषुवतीय वनों की तरह ही इनकी लकड़ी कड़ी होती है। प्रमुख पेड़ महोगनी, आबनूस, बेंत, बाँस, जारूल, ताड़ , सिनकोना और रबर हैं। बाँस मुख्यतः नदियों के किनारे और रबर पश्चिमी घाट तथा अंड्रमान में मिलते हैं। इन वनों में प्रवेश कर लकड़ी काटना कठिन कार्य है (एक तो लकड़ी कड़ी और भारी होती है, और दूसरे, एक स्थान पर एक ही किस्म के पेड़ न मिलकर अनेक प्रकार के पेड़ मिला करते है)।

प्रश्न 13.
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित है –
स्थिति एवं अक्षांशीय विस्तार : भारत वर्ष उत्तरी गोलार्द्ध में 8° 4 उत्तरी अर्षांश से लेकर 37° 6 उत्तरी अक्षांश तक विस्तार है। कर्क रेखा देश के मध्य से गुजरती है। कर्क रेखा के उत्तर का भाग शीतोष्ण कटिबन्ध में तथा दक्षिण का भाग उष्ण कटिबन्ध के अन्तर्गत भूमध्यरेखा के निकट स्थित होने के कारण वर्षभर तापमान ऊँचा रहला है तथा दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर कम होने के साथ दक्षिण भारत में सम जलवायु पाई जाती है। जबकि उत्तरी भारत में विषम जलवायु पाई जाती है।

हिमालय का प्रभाव : देश की उत्तरी सीमा पर स्थित हिमालय पर्वत एक प्रभावी जलवायु विभाजक की भूमिका का निर्वाह करता है। हिमालय पर्वत दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं को रोककर भारत में वर्षा करता है। तथा शीतकाल में मध्य एशिया से चलने वाली ठण्डी शीतल हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोककर उत्तर भारत को और शीतल होने से बचाती है।

भू-प्रकृति : भारत की भू-प्रकृति तापमान, वायुदाब पवनो की गति एवं दिशा तथा ढाल की मात्रा और वितरण को प्रभावित करता वर्षा ऋतु में पश्चिमी घाट पर्वत तथा असम के पवनविमुखी ढाल अधिक वर्षा प्राप्त करते है जबकि इसी दौरान पवनाविमुखी स्थिति के कारण दक्षिणी पठार कम वर्षा प्राप्त करता है।

समुद्र से दूरी : भारत के पूर्वी तटीय एवं पश्चिमी तटीय प्रदेशों में समकारी जलवायु पाई जाती है तथा समुद्र से दूर स्थित भागों में महाद्वीपीय जलवायु पायी जाती है। अर्थात तटीय भागों में ग्रीष्मकाल ठण्डा रहता है तथा शीतकाल में गर्म रहता है जबकि आन्तरिक भागों में ग्रीष्मकाल में अधिक गर्मी तथा शीतकाल में अधिक ठण्डक पड़ती है।

मानसूनी हवाएं : भारत की जलवायु पर मानसूनी हवाओ का प्रभाव पड़ता है। भारत की 90 % वर्षा मानसूनी हवाओं द्वारा ही होती है। अधिकांश वर्षा एक ऋतु विशेष में जून से सितम्बर के बीच हो जाती है बाकी आठ महीनो तक प्रायः वर्षा नहीं होती है वर्षा का भी वितरण सर्वत्र एक समान नहीं है।

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प्रश्न 14.
मृदा अपरदन के क्षेत्र का वर्णन करो।
उत्तर :
मृदा अपरदन से प्रभावित क्षेत्र (Affected regions of soil erosion) : भारत में मृदा अपरदन से प्रभावित क्षेत्र निम्नलिखित है :
उत्तरी-पूर्वी भारत : उत्तरी-पूर्वी भारत की भूमि पर्वतीय है। यहाँ वर्षा ऋतु में वर्षा अधिक होती है। वनों की कटाई, पर्वतीय ढालों पर सीढ़ीनुमा खेतों में कृषि तथाझूम-कृषि के कारण यहाँ मिट्टी का कटाव बहुत अधिक होता है। प्रमुख मृदा अपरदन का क्षेत्र होने के कारण इसे रेंगती मिट्टी का क्षेत्र कहते हैं। यहाँ की 60 % भूमि मृदा अपरदन की समस्या से प्रभावित है।

चम्बल एवं यमुना नदी घाटी : चम्बल एवं यमुना नदी घाटियों में लगभग 36 लाख हेक्टेयर भूमि मृदा अपरदन से प्रभावित है। वनस्पतियों के आवरण के अभाव वाला यह क्षेत्र अवनलिका अपरदन से ग्रसित है तथा बीहड़ (Ravine) के रूप में बदल गया है

हिमालय क्षेत्र : पर्वतीय भूमि, वर्षा काल में अधिक वर्षा, भूस्खलन, वनों के कटाव आदि के कारण हिमालय प्रदेश में अधिकांश क्षेत्र मिट्टी के कटाव की समस्या से ग्रसित है।

छोटानागपुर प्रदेश : वनों की कटाई, खनन कार्य, उद्योगों की स्थापना तथा रेल मार्गों एवं सड़कों के निर्माण कार्य के कारण यह प्रदेश मृदा अपरदन की समस्या से जूझ रहा है।

मरूस्थलीय क्षेत्र : पश्चिमी राजस्थान का शुष्क क्षेत्र इसके अन्तर्गत आता है। तीव्र वायु यहाँ मृदा अपरदन का मुख्य कारण है।

प्रश्न 15.
वनो से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वनों से लाभ : वनों से हमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों लाभ मिलते हैं।
प्रत्यक्ष लाभ निम्नलिखित हैं –

  1. ये हमें भवन-निर्माण के लिए टिकाऊ लकड़ियाँ प्रदान करते हैं।
  2. बक्सा-पेटी, दियासलाई, कागज की लुग्दी, फर्नीचर आदि तरह-तरह की वस्तुएँ तैयार करने के लिए उपयोगी लकड़ियाँ प्रदान करते हैं।
  3. ये ईंधन की आपूर्ति करते हैं।
  4. इनसे गौण उत्पाद के रूप में लाह, राल, गोंद, रेजिन, कत्था, जड़ी-बूटियाँ, बीड़ी के पत्ते, फल, मधु, रेशम, चमड़ा रंगने के सामान आदि प्राप्त होते हैं।
  5. इनसे कितने ही लोगों को रोजी-रोटी मिल जाती है।

अप्रत्यक्ष लाभ भी अनेक हैं, जैसे –

  1. ये जलवायु को सम रखते हैं।
  2. वर्षा लाते हैं (बादलों को आकृष्ट करके)।
  3. मिट्टी का कटाव रोकते हैं।
  4. आँधी-तूफान और बाढ़ रोकते हैं।
  5. इनकी पत्तियों से खाद तैयार होती है जिससे भूमि उपजाऊ बनती है।

प्रश्न 16.
सामाजिक वन से तुम क्या समझते हो ? वन संरक्षण एवं वन विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सामाजिक वन : परती जमीन पर जल्द तैयार होनेवाले उपयोगी पेड़ लगाना जिससे फल, काष्ठ, ईंधन आदि की समस्या हल हो तथा वातावरण को संतुलित बनाए रखने की योजना में मदद पहुँचे, ‘सामाजिक वानिकी’ (Social forestry) कहलाता है। सड़क के किनारे भी पेड़ लगाने की योजना है।
वन संरक्षण एवं वन विकास :
1. शिक्षा बढ़ाई जाए। वन-अनुसंधान केन्द्र खोले जाएँ। वन-विभाग का मुख्य अनुसंधान केन्द्र हिमालय-स्थित देहरादून में स्थापित किया गया है। राँची, पालमपुर, बंगलूर, कोयम्बटूर और अकोला में भी वानिकी शिक्षा आरंभ की गई है।
2. वनों के प्रति नया दृष्टिकोण अपनाया जाए और प्राचीनकाल की वन्य संस्कृति को पुनर्जीवित किया जाए।
3. प्रतिवर्ष नए वन लगाए जाएँ। 1981 ई० के बाद से अबतक मध्यप्रदेश और पंजाब में ही वनक्षेत्र बढ़ाए जा सके हैं। पिछले कुछ वर्षो से केरल, कर्नाटक और मेघालय इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।
4. वनसंरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ चालू की जाएँ, जैसे – बाघ परियोजना, हाथी परियोजना, अभयारण्यों की स्थापना। 1952 ई० से भारत वनमहोत्सव मनाकर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सचेष्ट है । देश में 17 वनविकास निगम स्थापित किए जा चुके हैं।

वनों के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं, यद्यपि मानव-जनसंख्या और पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि से यह संरक्षण कठिन हो गया है।

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प्रश्न 17.
भारतीय मिट्टी को कितने भागों में बाटा गया है ? किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारतीय मिट्टी के प्रकार (Types of Indian Soils) : ‘भारतीय कृषि अनुसंधान’ समिति ने भारत में पाई जाने वाली मिट्टियों को आठ वर्गों में विभाजित किया हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
  2. रेगूर या काली मिट्टी (Regur of Black Soii)
  3. लाल मिट्टी (Red Soil)
  4. लेटेराइट मिट्टी (Laterite Soil)
  5. पर्वतीय या वनों वाली मिट्टी (Mountain or Forest Soil)
  6. मरुस्थलीय मिट्टी (Desert Soil)
  7. लवण मिश्रित क्षारयुक्त मिट्टी (Saline and Alkali Soils)
  8. हल्की-काली व दलदली मिट्टी (Saline and Alkali Soils)

जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) : जलोढ़ मिट्टी उपजाऊपन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण होती है। भारत की कृषि के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। इस मिट्टी पर कृषि करना सुविधानजनक है। इसी कारण इस मिट्टी के क्षेत्र सघन जनसंख्या वाले प्रदेश हैं।
संरचना : जलोढ़ मिट्टी का निर्माण नदियों के निक्षेपण से नदी-घाटियों, बाढ़ के मैदानों तथा डेल्टाई प्रदेशों में हुआ है।
क्षेत्रफल : जलोढ़ मिट्टी भारत के कुल क्षेत्रफल के 7.7 लाख वर्ग किलोमीटर अर्थात 4.7 % क्षेत्र पर पाई जाती है।

विशेषताएँ :

  1. उर्वरता की दृष्टि से यह मिट्टी सबसे श्रेष्ठ है।
  2. यह बहुत बारीक कणों से युक्त है, अत्यधिक रंभ्रयुक्त तथा इतनी हल्की है कि इसको आसानी से जोता जा सकता है।
  3. जलोढ़ मिट्टी का निर्माण चट्टानों के विभिन्न प्रकार के पदार्थों के खुरचने से हुआ है जिसके कारण इसमें उच्च कोटि के नमक की विविधिता है।
  4. यह मृदा पोटाश, फॉसफोरस, अम्ल एवं मृत जीवाश्म के दृष्टिकोण से समृद्ध है।
  5. संरचना के दृष्टिकोण से इस मिट्टी में क्षारीय तत्व, बालू एवं चीका के अनुपात तथा उर्वरता में भिन्नता पाई जाती है।
  6. इस मिट्टी में नाइट्टोजन एवं वनस्पति के अंशों की कमी पाई जाती है।
  7. जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र अधिक आबादी वाले हैं और इनको ‘गेहूँ और चावल के कटोरे’ के क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
  8. पुरातन जलोढ़ मिट्टी को बाँगर और नवीन जलोढ़ को खादर कहते हैं। खादर में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी में महीन कण पाए जाते हैं। जबकि बाँगर की जलोढ़ मिट्टी में मिट्टी का अंश अधिक पाया जाता है।
  9. जलोढ़ मिट्टी में सिंचाई की सहायता से गन्ना, कपास, चावल, जूट, गेहूँ, तंबाकू, तिलहन, मक्का, फल एवं सब्जियाँ अधिकता से पैदा की जाती हैं।

वितरण : यह मिट्टी उत्तरी भारत के मैदानों में पंजाब से लेकर असम तक, महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के डेल्टाई भागों में तथा पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तटीय मैदानों तथा नर्मदा और ताप्ती नदिर्यों की घाटियों में पाई जाती है।

प्रश्न 18.
काली मिट्टी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
रेगूर या काली मिट्टी (Regur or Black Soils) : इस मिट्टी का रंग काला होता है तथा यह मिट्टी कपास की कृषि के लिए अधिक उपयुक्त है। इस मिट्टी में कपास का उत्पादन अधिक होने के कारण इसे ‘कपास की मिट्टी’ भी कहा जाता है।
संरचना : इस मिट्टी का निर्माण हजारों साल पहले दक्कन के पठारी भाग में लावा चट्टानों के विखंडन से हुआ है।
क्षेत्रफल : यह मिट्टी भारत के लगभग 5.18 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाती है।

विशेषताएँ :

  1. इसका रंग गहरा-काला तथा कणों की रचना सघन होती है।
  2. इसमें फॉसफोरस, नाइट्रोजन तथा जीवाश्मों का अभाव पाया जाता है।
  3. इस मिट्टी में चूना, पोटाश, मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम तथा लोहांश पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
  4. इस मिट्टी में अपने अंदर अधिक समय तक आर्द्रता को बनाए रखने की क्षमता होती है जिसके कारण यह मिट्टी कपास जैसी फसलों के लिए उत्तम होती है।
  5. पहाड़ी एवं पठारी भागों में यह मिट्टी हल्की, बड़े छेदों वाली तथा कम उर्वर होती है, अत: इसमें केवल ज्वार, बाजरा व दालें पैदा होती हैं। निम्न भागों में यह अधिक गहरी, काली तथा उर्वर होती है, अतः इसमें कपास मूँगफली, तंबाकू, ज्वार, बाजरा आदि फसलें उगाई जाती हैं।
  6. इसमें अधिक समय तक जल ठहर सकता है किन्तु सूख जाने पर इसमें दरारें पड़ जाती है, परंतु वर्षा ऋतु में यह चिपचिपी हो जाती है और इसमें हल चलाना मुश्किल हो जाता है।
  7. यह मिट्टी अपने उपजाऊपन के लिए विख्यात है तथा बिना खाद दिए हुए एवं लगातार कृषि कार्य करने पर भी इसकी उपजाऊ शक्ति नष्ट नहीं होती।

विरतण : यह मिट्टी मुख्य रूप से आंध प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ भागों में पाई जाती है।

प्रश्न 19.
लाल मिट्टी का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
लाल मिट्टी (Red Soils) : इस मिट्टी में लाल रंग की प्रधानता होने के कारण इसको लाल मिट्टी कहते हैं। यह मिट्टी उत्तर, दक्षिण और पूर्व में काली मिट्टी से घिरी हुई है।
संरचना : लाल मिट्टी की उत्पत्ति शुष्क एवं आर्द्र मौसम के क्रमशः अपर्वतन होने पर प्राचीन रवेदार शैलों के विखंडित होने से होती है। लोहे की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है।
क्षेत्रफल : यहो मिट्टी भारत के लगभग 90,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैली हुई हैं।

विशेषताएँ :

  1. अनेक प्रकार की चट्टानों से बनी होने के कारण यह गहराई और उर्वरा शक्ति में विभिन्नता लिए हुए होती है।
  2. यह अत्यंत रंध्रयुक्त होती है।
  3. इस मिट्टी में लोहा, एल्यूमिनियम एवं चूना अधिक मात्रा में पाया जाता हैं किंतु नाइट्रोजन, फॉसफोरस और ब्यूमस की मात्रा कम पाई जाती है।
  4. ऊँचे शुष्क मैदानों में पाई जाने वाली मिट्टी उपजाऊ नहीं होती। यहाँ यह हलके रंग की, पथरीली और कम गहरी होती है। इसमें बालू के समान मोटे कण पाए जाते हैं किंतु निचले मैदानी भागों में यह गहरे लाल रंग की, अधिक गहरी और उपजाऊ होती है।
  5. यह मिट्टी चावल, गेहूँ, कपास, आलू दालें, तंबाकू, ज्वार, बाजरा आदि फसलों की कृषि के लिए अधिक उत्तम है।

वितरण :
यह मिट्टी तमिलनाडु, कर्नटटक, आंभ्र प्रदेश, दक्षिणी महाराष्ट्र, पूर्वी मध्य प्रदेश, उड़ीसा, और छोटा नागपुर पठार के कुछ भागों में पाई जाती है।

प्रश्न 20.
पर्वतीय मिट्टी एवं मरूस्थलीय मिट्टी का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
हिमालय पर्वत पर पाई जाने वाली मिट्टियाँ नई और अवयस्क हैं। अधिकांशत: ये मिट्टियाँ कम गहरी, दलदली और छिद्रमय होती हैं। नदियों की घाटियों और पहाड़ी ढालों पर ये अधिक गहरी पाई जाती हैं।
क्षेत्रफल : यह मिट्टी देश के पहाड़ी क्षेत्रों पर लगभग 2.85 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है।

विशेषताएँ :

  1. इसमें ह्यूमस की मात्रा अधिक पाई जाती है।
  2. इस मिट्टी में चूना, पोटाश एवं फॉसंफोरस की कमी पाई जाती है।
  3. इस मिट्टी से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए अधिक खाद की आवश्यकता होती है।
  4. उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अपरिपक्व, पतली तथा छिद्रमय मिट्टियाँ मिलती हैं। निचले ढ़ालों व घाटियों में कहीं-कहीं गहरी तथा उर्वर मिट्टियाँ उपलब्ध होती हैं।
  5. यह मिट्टी चाय, काँफी, मसाले और फलों के उत्पादन के लिए उत्तम हैं।

मरुस्थलीय मिट्टी (Desert Soils) : इस प्रकार की मिट्टी का निर्माण शुष्क एवं अर्ध-शुष्क दशाओं में देश के उत्तरी-पश्चिमी भागों में होता है।
क्षेत्रफल : यह मिट्टी लगभग 1.42 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।

विशेषताएँ :

  1. इस मिट्टी में खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं किंतु यह जल में शीघ्र घुल जाते हैं।
  2. मिट्टी प्रधानत: बालू हैं जिसमें छोटे कण पाए जाते हैं।
  3. इस मिट्टी में फॉसफोरस की अधिकता किंतु नाइट्रोजन की कमी पाई जाती है।
  4. इस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा कम पाई जाती है।
  5. इस मिट्टी में नमी की कमी रहती है।
  6. जल मिल जाने पर यह मिट्टी उपजाऊ हो जाती है। सिंचाई की सहायता से गेहूँ, गब्ना, कपास, ज्वार, बाजरा, सब्जियाँ आदि पैदा की जाती हैं, जहाँ सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं वहाँ भूमि बंजर पड़ी रहती है।

वितरण : इस प्रकार की मिट्टी अरावली और सिंधु घाटी के मध्यवर्ती क्षेत्रों में विशेषतः पश्चिमी राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के दक्षिणी जिले तथा गुजरात में कच्छ के रन में पाई जाती है।

प्रश्न 21.
लवण मिट्टी से तुम क्या समझते हो ? दलदली मिट्टी क्या है ?
उत्तर :
लवण मिश्रित एवं क्षारयुक्त मिट्टी (Saline and Alkali Soils) : क्षारयुक्त मिट्टी में चूना एवं सोडियम के तत्वों का सम्मिश्रण रहता है जबकि लवणयुक्त (Saline) मिट्टी में हाइड्रोजन के तत्व सम्मिलित रहते है जो कैल्सियम एवं सोडियम का स्थानांतरण करते हैं। लवणयुक्त एवं क्षार मिश्रित मिट्टी मुख्य रूप से भारत के सभी जलवायु क्षेत्रों में पाई जाती हैं। उत्तरी भारत के शुष्क भागों में विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान में इस प्रकार की मिट्टी से कई हेक्टेयर भूमि में कृषि को नुकसान पहँचता है।

दलदली मिद्टी : हल्की-काली व द्लदली मिट्टी उड़ीसा के तटीय भागों, सुंदरवन तथा पश्चिम बंगाल के सीमित भागों, उत्तरी बिहार तथा तमिलनाडु के दक्षिणी पूर्वी तट पर फैली है।

प्रश्न 22.
मिट्टी अपरदन के कारण का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मिट्टी अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion) : मृदा अपरदन के निम्नलिखित कारण हैं

  1. वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व मरुस्थलीय क्षेत्रों में गरम आंधियाँ चलती हैं जो भूमि की ऊपरी परत की ढीली मिट्टी को उड़ा ले जाती हैं। इस क्रिया द्वारा मिट्टी की ऊपरी परत नष्ट होती रहती है और कालान्तर में ये क्षेत्र अनुपजाऊ बन जाते हैं।
  2. कृषि के अवैज्ञानिक ढंग अपनाकर किसान स्वय मृदा अपरदन को बढ़ाता है। ढालू क्षेत्र में समोच्च रेखाओं से, समानांतर जुताई न करने से, दोषयुक्त फसल चक्र अपनाने से मृदा का अपरदन बढ़ता है।
  3. जब मूसलाधार वर्षा होती है तो वर्षा का जल धरातल पर बहता है और वह मृदा का अपरदन करता है।
  4. जिन क्षेत्रों में वनस्पति को नष्ट कर दिया गया है वहाँ मिट्टी का अपरदन अधिक होता है, क्योंकि वनस्पति की जड़ें मिट्टी को जकड़े रखती हैं, इसलिए जहाँ वनस्पति अधिक पाई जाति है, मृदा अपरदन कम होता है।
  5. आवश्यकता से अधिक पशुचारण से भी मिट्टी का अपरदन होता है, क्योंकि पशु चरते समय अपने खुरों से मिट्टी को उखाड़कर ढीला कर देते हैं जिससे मिट्टी वर्षा तथा वायु के प्रभाव से अपरदित हो जाती है।
  6. भारत के कुछ भागों में स्थानांतरी कृषि की जाती है। यह विधि मृदा अपरदन में सहायक होती है।

प्रश्न 23.
पूर्वी तटीय मैदान एवं पश्चिमी तटीय मैदान की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय मैदान की तलना :

पूर्वी तटीय मैदान पश्चिमी तटीय मैदान
1. विस्तार : पूर्वी तटीय मैदान उत्तर में सुवर्ण रेखा नदी से दक्षिण में कुमारी अंतरीप विस्तृत है। 1. विस्तार : पश्चिमी तटीय मैदान प्रायद्वीप के पश्चिमी भाग में खंभात की खाड़ी से कुमारी अंतरीप एक विस्तृत है।
2. लंबाई और चौड़ाई : पूर्वी तटीय मैदान 1,100 किलोमीटर लंबाई और 120 किलोमीटर चौड़ाई में विस्तृत है। 2. लंबाई और चौड़ाई : पश्चिमी तटीय मैदान 1,500 किलोमीटर लंबे तथा 64 किलोमीटर चौड़े हैं।
3. विभाग : पूर्वी तटीय मैदान को उत्कल का मैदान, आंध्र का मैदान तथा तमिलनाडु का मैदान विभागों में बाँटा गया है। 3. विभाग : पश्चिमी तटीय मैदान को गुजरात का मैदान, कोंकण का तटीय मैदान, मालावर का तटीय मैदान, केरल का तटीय मैदान आदि भागों में बाँटा गया है।
4. धरातल : महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी जैसी बड़ी-बड़ी नदियों ने बड़े-बड़े डेल्टा बनाए हैं। इसकी सीधी तटीय रेखा है। विशाखपट्टनम तथा चेन्नई यहाँ के बड़े बंदरगाह है। 4. धरातल : इस मैदान में कई छोटी व तीव्रगामी नदियाँ बहती हैं जो डेल्टा बनाने में असमर्थ हैं। इसकी तटीय रेखा ऊबड़-खाबड़ है। पश्चिमी तट पर मुंबई, कांडला, मंगलौर तथा कोचीन आदि प्रसद्धि बंदरगाह हैं।
5. जलवायु : उष्ण कटिबंधीय जलवायु, उच्च आर्द्रता तथा सामान्य वर्षा। 5. जलवायु : सम जलवायु पूरे वर्ष, उच्च तापमान, अधिक वर्षा।

प्रश्न 24.
मिट्टी अपरदन को कितने भागों में बाटा गया है ?संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मृदा अपरदन के प्रकार (Types of Soil Eriosion) : मृदा अपरदन दो प्रकार के होते हैं –
i. परतदार अपरदन (Sheet Erosion)
ii. नालीदार अपरदन (Gulley Erosion)

i. परतदार अपरदन (Sheet Erosion) : जब अत्यधिक वर्षा के कारण निर्जन पहाड़ियों की मिट्टी जल में घुलकर बह जाती है या वायु मिट्टी की ऊपरी परत को अपने साथ उड़ा ले जाती है तो उसे परतदार अपरदन कहते हैं। इस प्रकार का अपरदन ढ़ालू खेत, खाली पड़ी भूमि में तथा अत्यधिक चराई, वनों के नाश तथा बदलती खेती के फलस्वरूप होता है। परतदार अपरदन राजस्थान, पंजाब, दक्षिणी-पश्चिमी हरियाणा के क्षेत्र तथा हिमालय क्षेत्र में होता है। परतदार अपरदन की क्रिया बहुत हीं धीमी गति से होती है जिसका आभास नहीं होता, परंतु इस प्रक्रिया के द्वारा एक विस्तृत क्षेत्र की मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।

ii. नालीदार अपरदन (Gulley Erosion) : तीव्र ढाल तथा अधिक वर्षा वाले भागों में बहता हुआ जल मिट्टी को कुछ गहराई तक काट देता है जिससे धरातल में कई फुट गहरे गड्दु बन जाते हैं। चंबल नदी की घाटी में इस प्रकार का अपरदन देखने को मिलता है।
मरुस्थलीय भागों में वायु द्वारा भी मृदा का अपरदन होता रहता है। इसके द्वारा मृदा को काटकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर बिनाया जाता है। इसे वायु द्वारा अपरदन कहते हैं।

प्रश्न 25.
लक्षद्वीप एवं अंडमान निकोबार द्वीप समूह में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लक्षद्वीप एवं अंडमान निकोबार द्वीप समूह में अन्तर :

लक्षद्वीप अंडमान निकोबार द्वीप समूह
1. स्थिति : ये द्वीप समूह 8° से 12° उत्तर और 71° 40′ से 74° पूर्वी देशान्तर के बीच फैले हैं। 1. स्थिति : ये द्वीप समूह 4° से 10° 20′ उत्तरी अक्षांश और 92° 20′ से 94° पूर्वी देशांतरों के बीच फैले हैं।
2. क्षेत्रफल : ये 108.78 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं। 2. क्षेत्रफल : ये 8326.85 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं।
3. उत्पत्ति : इनकी उत्पत्ति प्रवाल से हुई है। जिनका विकास ज्वालामुखी चोटियों के आस-पास हुआ है। 3. उत्पत्ति : ये नवीन बलित पर्वत हैं और इनमें से कुछ की उत्पत्ति ज्वालामुखी क्रियाओं से हुई है।
4. विभाग : उत्तरी भाग अमन द्वीप; शेष भाग लक्षद्वीप और सुदूर दक्षिणी भाग को मिनीकोय कहते हैं। 4. विभाग : इसके अंडमान और निकोबार के रूप में दो भाग हैं। अंडमान में उत्तरी, मध्य और दक्षिणी भाग सम्मिलित हैं। दक्षिणी भाग जिसे महान निकोबार कहते हैं सबसे बड़ा द्वीप समूह है।
5. द्वीपों की संख्या : लक्ष द्वीप समूह में 43 द्वीप हैं। 5. द्वीपों की संख्या : अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 204 द्वीप हैं।

प्रश्न 26.
भारत में सिंचाई के विभिन्न पद्धति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में स्थलाकृति एवं जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पायी जाती है। इस विविधता के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग सिंचाई साधनों का प्रयोग किया जाता है।
भारत में सिंचाई के ग्रमुख साधन है :

  1. नहरें (Canals)
  2. कुए एवं नलकूप (Well and Tubewell)
  3. तालाब (Tank)

नहरें (Canais) :- नहरें भारत में सिंचाई का एक महत्वपूर्ण साधन है। भारत में विश्व का सर्वाधिक नहर सिंचित क्षेत्र है। नहर मुख्यत: दो प्रकार के हैं। कुल 35 % नहर के द्वारा सिंचाई किया जाता है।
(क) अनित्यवाही नहरें (Imperenial Canals)
(ख) नित्यवाही नहेरें (Perenial Canals)

कुएँ एवं नलकूप (Well and Tubewell) :- वर्तमान समय में कुएँ एवं नलकूपों का योगदान 57 % है, इनमें नलकूप सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता क्योंकि यह एक प्रकार का आधुनिक सिंचाई का साधन है, जबकि कुएँ सबसे प्राचीन सिंचाई के साधन हैं। नलकूप के द्वारा 30 % पूरे भारत में सिंचाई किया जाता है।

नलकूपों द्वारा सिंचाई मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर-प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं गुजरात में की जाती है। इन क्षेत्रों की चट्टाने मूलायम हैं एवं 15 से 90 मीटर की गहराई के बीच भूमिगत जल का भंडार काफी अधिक मात्रा में मौजुद है। नलकूपों की सर्वाधिक संख्या 50 % से अधिक उतर प्रदेश में है, पुन: भारत के तीन चौथाई-नलकूपा हरियाणा, पंजाब एवं उतर प्रदेश में हैं।

तालाब (Tank) :- भारत में तालाब द्वारा सिचित क्षेत्र का लगभग 17.2 % भाग सींचा जाता था जो वर्तमान में घटकर मात्र 7 % हो चुका है। तालाबों द्वारा सिंचाई मुख्य रूप से मध्य एवं दक्षिणी भारत में होती है। इन क्षेत्रों में तालाब सिंचाई के महत्वपूर्ण साधन होने का निम्नलिखित कारण है :

  1. इन क्षेत्रो में अधिकांश नदियाँ बरसाती है। अत: सदावाहनी नहरें नहीं निकाली जा सकती है।
  2. कठोर संरचना एवं भूमिगत जल स्तर काफी नीचा होने के कारण कुएँ एवं नलकूपों का निर्माण कठिन है
  3. ऊबड़-खाबड़ भूमि के कारण प्रायद्वीपीय भारत में अनेक प्राकृतिक तालाब पाये जाते हैं।

प्रश्न 27.
हिमालय पर्वत और प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियों में अन्तर स्पष्ट करें। अथवा, उत्तर भारत अथवा दक्षिण भारत की नदियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

हिमालय पर्वत की निदयाँ अथवा, उत्तर भारत की नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की नदियाँ अथवा, दक्षिण भारत की नदियाँ
1. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वलित पर्वतों से निकलती हैं जिसके कारण अपने पर्वतीय खंड में उनकी धारा बहुत तेज होती है। ये अभी अपने मार्ग की शैलों को काटने का कार्य कर रही हैं। 1. प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियाँ अधिक प्राचीन हैं। उनकी घाटियाँ चौड़ी एवं छिछली हैं तथा प्रपातों को छोड़कर इनका ढाल साधारण है।
2. हिमालय की नदियाँ हिमाच्छदित प्रदेशों से निकलती हैं जिसके कारण पूरे साल पानी से भरी रहती हैं। 2. प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा पर निर्भर रहती हैं, जिसके कारण ये नदियाँ ग्रीष्म ऋतु में सूर जाती हैं।
3. हिमालय की नदियाँ बहुत कम प्रपात बनाती हैं। 3. प्रायद्वीपीय पठार से निकलन वाली नदियाँ प्रायः पठार से उतरते समय मार्ग में झरने बनाती हैं।
4. हिमालय की नदियाँ मैदानी भाग में विसर्प बनाती हुई बहती हैं। 4. प्रायद्वीपीय नदियाँ उथली घांटियों में बहती हैं।
5. हिमालय की नदियाँ विशाल गार्ज बनाती हैं। 5. प्रायद्वीपीय नदियाँ गार्ज नहीं बनाती हैं।
6. हिमालय की नदियाँ पूर्ववर्ती नदियाँ हैं। 6. प्रायद्वीपीय नदियाँ अनुवर्ती नदियाँ हैं।
7. हिमालय की नदियों का बेसिन काफी बड़ा है तथा उनका जलग्रहण क्षेत्र हजारों वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 7. प्रायद्वीपीय नदियों का बेसिन तथा जल ग्रहण क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा है।
8. हिमालय की नदियों की अपरदन-शक्ति बहुत अधिक है। वे अपने साथ अधिक मात्रा में तलछट बहाकर ले जाती हैं। 8. प्रायद्वीपीय नदियों की अपरदन शक्ति बहुत ही कम है क्योंकि वे प्रौढ़वस्था में पहुँच गई हैं।

प्रश्न 28.
भारत के किन्हीं दो प्राकृतिक वनस्पति क्षेत्रों के वितरण एवं विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर :
चिरहरित वन की पेटियाँ (उष्ण कटिबंधीय वर्षा पवन) – ये पेटियाँ उष्ण एवं अधिक वर्षावाले (200 सेंटीमीटर या इससे अधिक) क्षेत्रों में हैं। पश्चिमी घाट, अंडमान द्वीप, हिमालय की तराई, पूर्वी हिमालय के उपप्रदेश तथा असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा आदि ऐसे ही क्षेत्र हैं। पश्चिमी घाट में चिरहरित वन के क्षेत्र 450 से 1,350 मीटर की ऊँचाई के बीच और असम में 1,000 मीटर की ऊँचाई तक मिलते हैं। वैसे क्षेत्रों में जहाँ 250 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है, ये वन विशेष रूप से सघन हैं।

जहाँ अपेक्षाकृत कम वर्षा है, ये वन चिरहरित (सदाबहार) से अर्द्धचिरहरित में बद़ल जाते हैं। उच्य तापमान एवं अधिक वर्षा के कारण ही ये वन अत्यंत घने होते हैं और इनमें पेड़ों की ऊँचाई 60 मीटर तक चली जाती है। पेड़ों के ऊपरी सिरों पर इतनी शाखाएँ होती हैं कि पेड़ छाते का आकार ले लेते हैं। विषुवतीय वनों की तरह ही इनकी लकड़ी कड़ी होती है। इन वनों में विविध प्रकार के पेड़ मिले होते हैं। प्रमुख पेड़ों में महोगनी, आबनूस, रोजवुड, बेत, जारूल, ताड़, सिनकोना और रबड़ हैं। बाँस मुख्यतः नदियों के किनारे और रबड़ पश्चिमी घाट तथा अंडमान में मिलते हैं।

इन वनों में प्रवेश कर लकड़ी काटना कठिन कार्य है (एक तो लकड़ी कड़ी और भारी होती है और दूसरे, एक स्थान पर एक ही किस्म के पेड़ न मिलकर अनेक प्रकार के पेड़ मिला करते है)। इन वनों में बंदर, लंगूर और तरह-तरह के पक्षी बहुतायत से मिलते हैं। एक सींगवाला गैंडा इसी वन का जंगली पशु है जो मुख्य रूप से असम क्षेत्र में पाया जाता है। विशाल जंगली पशु हाथी भी यहाँ पाये जाते हैं।

शुष्क और कँटीले वन की पेटियाँ – इसमें वे क्षेत्र आते है जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेंटीमीटर से 70 सेंटीमीटर तक होती है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग तथा मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात इत्यादि शुष्क वन की पेटी में पड़ते हैं। यहाँ के अधिकांश वन साफ किए जा चुके हैं, अतः कहीं भी विस्तृत वन नहीं मिलते। वर्षा की कमी और जलवायु की विषमता के कारण यहाँ ऊँचे पेड़ो का अभाव है। प्रायः छोटे पेड़ तथा झाड़ियाँ उगती हैं। इनकी जड़ें लंबी और पत्तियाँ छोटी होती हैं; छाल कड़ी, कंटीली और मोटी हुआ करती है।

इनमें कीकर, बबूल, खैर, खजूर, झाऊ, नागफनी इत्यादि के पेड़ प्रमुख हैं। जहाँ-तहाँ शीशम, आँवला आदि के भी पेड़ उगे हुए देखे जाते हैं। विविध उपयोग में आने के कारण बबूल का आर्थिक महत्व उल्लेखनीय है। 50 सेटीमीटर से कम वर्षावाले क्षेत्रों में नाममात्र की वनस्पति उगती है। जहाँ-तहाँ सवाना की भाँति घास उगती है। मरुस्थलीय प्रदेश की वनस्पति में कंटीली झाड़ियाँ ही प्रमुख हैं। शुष्क वन क्षेत्रों में जंगली गधे, ऊँट आदि पशु मिलते हैं।

प्रश्न 29.
दामोदर घाटी योजना (D.V.C) का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
दामोदर घाटी योजना : दामोदर नदी छोटानागपुर की पहाड़ी से निकलकर झारखंण्ड और पश्चिम बंगाल के हजारीबाग, मानभूमि, वर्द्धमान, बाकुड़ा, हुगली और हावड़ा जिलों में बहती हुई कोलकत्ता से 50 कि०मी० दक्षिण हुगली नदी में मिल जाती है। अब तक इस नदी में प्रत्येक तीसरे वर्ष बाढ़ आती रहती थी। इसी कारण इसे पश्चिम बंगाल की शोक नदी भी कहा जाता है। दामोदर के ऊपरी उपत्यका में उर्वरा मिट्टी, जल, वन और खनिज सभी उपयोगी वस्तुएँ हैं। नदी के दोनों तरफ रानीगंज, झरिया, बोकरो, रामगढ़ और कर्णपुरा के कोयला क्षेत्र हैं।

अमेरिका की टेनसी घाटी योजना के आधार पर सन् 1945 ई० में दामोदर घाटी योजना तैयार की गई। 1948 ई० में दामोदर घाटी कार पोरेशन की स्थापना हुई। इसकी देखभाल के लिये तिलैया, कोनार मेभन और पंचेत पहाड़ी के बाँध बने। बोकोर में कोयला द्वारा गालित विद्युत घर बनाया गया जो एशिया का सबसे संचालित विद्युत घर है। दुर्गापुर में सिंचाई के लिए 672 मीटर लम्बा और 11.50 मीटर ऊँचा बाँघ बनाया गया है। इससे नहरें निकालकर वर्द्धमान और बाकुड़ा में सिंचाई होती है।

दामोदर घाटी योजनाएँ निम्नलिखित बातों को ध्यान में रख कर बनाया गया है :

  1. सिंचाई की समुचित व्यक्स्था कराना।
  2. जल विद्युत उत्पादन पर बल देना।
  3. नदियों में बाढ़ जैसे प्रकोप की रोकथाम करना।
  4. मिट्टी का कटाव रोका जाय तथा मिट्टी की रक्षा करना।
  5. पीने योग्य पानी की सुविधा उपलब्ध कराना।
  6. नौका बिहार द्वारा मनोरंजन का साधन।
  7. वनों के क्षेत्र का विस्तार करना।
  8. स्वास्थवर्द्वक स्थान बनाया जाना।
  9. जल एकत्रित कर तालाब में मत्सय पालन करना।
  10. मलेरिया जैसे खतरनाक बिमारी पर रोकथाम करना।

प्रश्न 30.
वन संरक्षण पर इतना अधिक जोर क्यों दिया गया है?
उत्तर :
वन संरक्षण की आवश्यकता : निम्नलिखि कारणों से वनों का संरक्षण आवश्यक है :
विभिन्न प्रकार की उपजों की प्राप्ति : वनों से न केवल बहुमुल्य लकड़ियाँ ही प्राप्त होती है बल्कि इनसे कई प्रकार के अन्य पदार्थ भी प्राप्त होते है लकड़ियाँ जलावन, फर्नीचर एवं भवन निर्माण के काम आती है। इनसे कागज तथा दियासलाई जैसे उद्योगो के लिए कच्चे माल प्राप्त होते है। इनसे फल, गोंद, लाख, रेशम, मधु आदि भी प्राप्त होते है अत: इन पदार्थों को प्राप्त करने के लिए वनों का संरक्षण आवश्यक है।

वायु प्रदूषण को कम करना : मनुष्य एवं अन्य जीव श्वसन की क्रिया में ऑक्सीजन लेते है और कार्बन-डाईआक्साइड गैसे छोड़ते है। अगर यह वायु शुद्ध न हो तो वायुमण्डल में कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाएगी जिससे जीवधारियो को श्वांस लेने में कठिनाई होगी और वे मर जाएंगे परन्तु पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में इस दूषित वायु को ग्रहण करते है जिसमें से वे कार्बन को ले लेते है तथा शुद्ध ऑक्सीजन वायु छोड़ते है। इस प्रकार पौधे वायु को शुद्ध करके वायुमण्डल को प्रदूषण से रक्षा करते है।

मिट्टी के कटाव की रोकथाम : वन वायु एवं पानी की गति को कम करते है। साथ ही पौधों की जड़े भूमि को जकड़ लेती है। इस प्रकार वन मिट्टी के कटाव को रोककर मानव का काफी उपकार करते है।

वर्षा में सहायक : वन भाप भरी हवाओ को रोक कर वर्षा कराने में सहायक होते है।

बाढ़ की रोकथाम : वन पानी के बहाव की गति धीमी कर देती है जिससे बाढ़ का प्रकोप कम हो जाता है।

मरुस्थलो के विस्तार को रोकना : वन बालू को आगे बढ़ने से रोकते है। इस प्रकार बनों से मरुस्थलो के प्रसार पर नियंत्रण होता है।

प्राकृतिक सौदर्य के भण्डार : वन सुन्दर एवं मोहक दृश्य उपस्थित करते है और वे देश के प्राकृतिक सौंदर्य की वृद्धि करते है। इस प्रकार वन पर्यटन व मनोरंजन के केन्द्र होते है।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

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WBBSE Class 10 Geography Chapter 4 Question Answer – अपशिष्ट प्रबंधन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
एक रेडियोधर्मी अपशिष्ट का नाम लिखिये।
उत्तर :
आणविक ऊर्जा संयंत्र।

प्रश्न 2.
प्लास्टिक किस प्रकार का अपशिष्ट पदार्थ है ?
उत्तर :
पुनर्चक्रीय अपशिष्ट।

प्रश्न 3.
ठोस अपशिष्ट का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
प्लास्टिक।

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प्रश्न 4.
बैटरी किस प्रकार का वर्ज्य पदार्थ हैं ?
उत्तर :
बैटरी जहरीला या विनाशक अपशिष्ट हैं, जिसमें रेडियेसम और टाक्सिन रहता हैं।

प्रश्न 5.
दो कृषि अपशिष्ट का नाम बतायें।
उत्तर :
(i) लकड़ी के कचरे
(ii) फसलों के डंठल।

प्रश्न 6.
CNG का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Compressed Natural Gas.

प्रश्न 7.
फ्लाई ऐश से किस इमारती वस्तु का निर्माण किया जा सकता है ?
उत्तर :
फ्लाइ ऐश इंट।

प्रश्न 8.
D.D.T. का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर :
D.D.T. का पूरा नाम Dichloro diphenyle Tri-chlorethane है। संयुक्त राज्य अमेरिका में यह सन् 1972 से ही प्रतिबंधित है। मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को समाप्त करने में इसका उपयोग होता है।

प्रश्न 9.
एक जैवरूप से विघटित होने वाले अपशिष्ट का नाम लिखिए।
उत्तर :
फलों एवं सब्जियों के छिलके।

प्रश्न 10.
W.H.O का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation).

प्रश्न 11.
D.D.T किस प्रकार का उर्वरक है ?
उत्तर :
D.D.T. एक रासायनिक उर्वरक है।

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प्रश्न 12.
उस यन्त्र का क्या नाम है जो स्वचालित वाहनों से निकलने वाले धुएँ से विषैले पदार्थों को अलग करता है ?
उत्तर :
सीनसिनेटर।

प्रश्न 13.
हानिकारक अपशिष्टों के जमाव का विशिष्ट नाम क्या है ?
उत्तर :
आपदा अपशिष्ट (Hazard waste) या विषैला अपशिष्ट (Toxic waste)

प्रश्न 14.
विषैले अपशिष्टों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जली बैटरियाँ, कीटनाशक, कल कारखानों से निकलने वाले हानिकारक खाद्य आदि।

प्रश्न 15.
एक ठोस वर्ज्य पदार्थ का नाम लिखे।
उत्तर :
कागज तथा प्लास्टिक।

प्रश्न 16.
तरल वर्ज्य पदार्थ के नाम बताए।
उत्तर :
मल-मूत्र।

प्रश्न 17.
गैसीय वर्ज्य-पदार्थ के नाम लिखे।
उत्तर :
कार्बन डाई अक्साइड।

प्रश्न 18.
विषैले वर्ज्य पदार्थ का नाम लिखे।
उत्तर :
कीटनाशक द्वाइयाँ।

प्रश्न 19.
किस क्षरण के कारण ठोस वर्ज्य पदार्थ मिट्टी में नीचे दब जाता है।
उत्तर :
भूक्षरण।

प्रश्न 20.
कीटनाशक रसायन से होने एक रोग का नाम लिखें।
उत्तर :
कैसर।

प्रश्न 21.
NO2 के कारण क्या होता है ?
उत्तर :
पलमानरी हेमरेज विमारी।

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प्रश्न 22.
वायु प्रदूषण के कारण क्या होता है ?
उत्तर :
श्वांस लेने में कठिनाई अथवा श्वांस से सम्बन्धित बिमारी।

प्रश्न 23.
पृथ्वी पर कुल जल का कितना प्रतिशत शुद्ध जल है।
उत्तर :
लगभग 2.5 प्रतिशत।

प्रश्न 24.
हरित ग्रह प्रभाव गैस का नाम बताएँ।
उत्तर :
CO2

प्रश्न 25.
रेडियोधर्मी वर्ज्य पदार्थ को कितने भागों में बांटा गया है।
उत्तर :
तीन।

प्रश्न 26.
किसके कारण मिट्टी में अम्लीय बढ़ जाता है।
उत्तर :
वज्य पदार्थों से।

प्रश्न 27.
शहरों में जल क्यों जम जाता है।
उत्तर :
ठोस वर्ज्य पदार्थ के कारण।

प्रश्न 28.
विश्व प्रदूषण दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर :
5 जून।

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प्रश्न 29.
फेंफरा का कैंसर किस प्रदूषण के कारण होता है ?
उत्तर :
हाइड्रोकार्बन के कारण।

प्रश्न 30.
हुगली नदी में बढ़ रहे एक जीवाणु का नाम लिखो।
उत्तर :
कोलीफार्म जीवाणु (Coliform bacteria)।

प्रश्न 31.
विज्ञान के प्रसार ने मनुष्य को सबसे खतरनाक कौन-सा अपशिष्ट दिया है ?
उत्तर :
रेडियोधर्मी।

प्रश्न 32.
जलीय जीव किस अपशिष्ट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं ?
उत्तर :
तरल अपशिष्ट से।

प्रश्न 33.
गैसीय वर्ज्य पदार्थ कौन-कौन है ?
उत्तर :
(i) विषैले वर्ज्य पदार्थ।
(ii) विषरहित वर्ज्य पदार्थ।

प्रश्न 34.
कौन पदार्थ सदैव विखण्डन की प्रक्रिया से गुजरते हैं ?
उत्तर :
ठोस पदार्थ सदैव विखण्डन की प्रक्रिया से गुजरते है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
अपशिष्टों का पृथक्कीकरण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर :
अपशिष्टों का पृथक्कीकरण : ठोस अपशिष्टों का विभिन्न वर्गो में पृथक्कीकरण अपशिष्ट प्रबन्धन का एक महत्वपूर्ण तरीका है। वर्गानुसार उसके निपटारे एवं पुनर्चक्रीकरण की विधियाँ अपनाई जा सकती है। उदाहरणस्वरूप प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाले अपशिष्ट जैसे भोजन के अंश फलो एवं सब्जियों के छिलके आदि का उर्वरक निर्माण एवं प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होने वाले अपशिष्टों जैसे धातु, काँच, प्लास्टिक आदि का पुनर्चक्रण किया जा सकता है। अपशिष्टों के सोत अर्थात् जहाँ ये उत्पन्न होते है वहीं इनके पृथक्कीकरण में आसानी रहती है। सूखे एवं गीले अपशिष्टों को अलग-अलग डस्टविन में रखना चाहिए।
अथवा
अपशिष्टों का पुन: चक्रण (Recycling) से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
खतरनाक अपशिष्टों का पुन:संसाधन में बदलना ही अपशिष्टों का पुन: चक्रण (Recycling) कहलाता है।

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प्रश्न 2.
अपशिष्ट प्रबन्धन में भूमि का भराव से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
भूमि भराव (Land Fill) : अपशिष्टों के प्रबन्धन एवं निस्तारण के लिए यह आवश्यक है कि जिन पदार्थों का दोबारा उपयोग किसी भी रूप में नहीं किया जा सकता है उन्हें नीचे तल की भूमि भरने(Land Fill) के काम में ले आवे ।

प्रश्न 3.
अपशिष्ट के नवीनीकरण से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
इस्तेमाल किए गए पदार्थों का पुन: चक्रण द्वारा उपयोग की जाने वाले वस्तुओं के रूप में बदलना नवीनीकरण कहलाता है। 4. तरल वर्ज्य पदार्थ से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
तरल रूप में पाये जानेवाले अवशिष्ट पदार्थों, जैसे घरेलू कूड़ा-कर्कट, वाहित मल, औद्योगिक बहि:साव एवं कृषि बहि:साव आदि को तरल वर्ज्य पदार्थ कहा जाता है। जैसे – विभिन्न प्रकार के रंग, तेल, घी, दवाइयाँ आदि।

प्रश्न 5.
वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन क्या है ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ प्रबंघन : वर्तमान समय में अनियंत्रित उत्पादन तथा उपभोग के द्वारा अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थों का उत्सर्जन हो रहा है, अतः उसे रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता है। वर्ज्य पदार्थ के प्रभावी व्यवस्थापन में समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों, पौर प्रतिष्ठान एवं सम्बन्धित सरकारी विभागों में आपसी समन्वय की अत्यन्त आवश्यकता है।

प्रश्न 6.
तरल वर्ज्य पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
तरल पदार्थ : तरल रूप में पाये जाने वाले अवशिष्ट पदार्थों, जैसे – घरेलू कूड़ा, वाहित मल, औद्योगिक बहि:स्ताव एवं कृषि:स्वाव आदि को तरल वर्ज्य पदार्थ कहते हैं।

प्रश्न 7.
अपशिष्ट प्रबन्ध क्या हैं ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ प्रबन्धन : वर्तमान समय में अनियंत्रित अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थ का उत्सर्जन हो रहा है, अतः उसे रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता हैं।

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प्रश्न 8.
रेडियोधर्मी अपशष्टि क्या हैं ?
उत्तर :
रेडियाधर्मी अपशिष्ट : ये अपशिष्ट परमाणु रियेक्टर से उत्पन्न होते हैं और जलीय-जीवन तथा पास में रहनेवाले जीव-जन्तुओं तथा मनुष्य को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 9.
घरेलू वर्ज्य पदार्थ से क्या समझा जाता है ?
उत्तर :
घरेलू वर्ज्य पदार्थ : घरों से उत्सर्जित कचरे, प्लास्टिक, मल-मुत्र, सीसा, टूटे-फूटे बर्तन, कागज, फर्नीचर वर्ज्य पदार्थ हैं।

प्रश्न 10.
स्कैब्बर क्या हैं ?
उत्तर :
स्कैब्बर (Scruber) : घर में जिस वस्तु का प्रयोग कर वर्ज्य पदार्थ को नष्ट किया जाता है उसे स्कैब्बर कहते हैं।

प्रश्न 11.
दो वर्ज्य पदार्थ के दुष्परणिम लिखिए ?
उत्तर :
(i) वर्ज्य पदार्थ की गंदगी से क्रमशः रिसाव के कारण भूतल पर जल प्रदूषण होता हैं।
(ii) वर्ज्य पदार्थों की ढ़ेर से मिट्टी की अम्लीय क्षमता बढ़ जाती हैं।

प्रश्न 12.
अम्ल वर्षा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
अम्ल वर्षा (Acid Rainfall) : अम्ल वर्षा की समस्या औद्योगिक देशों में अधिक गंभीर है । अम्ल वर्षा का मुख्य कारण सल्फर-डाई-अक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड आदि है, इन गैसों का मुख्य सोत जीवाश्म ईधन का मनामाने जगह पर जलाया जाना और औद्योगिक प्रक्रियाएँ है ।
CO2 के बाद सल्फर-डाई-ऑक्साइड वायु को प्रदूषित करने वाला दूसरा महत्वपूर्ण गैस है । NO2, SO2, CH4 जैसे गैसे जब वर्षा जल में घुलकर पृथ्वी पर गिरने लगा है तो अम्ल वर्षा होती है । अम्ल वर्षा के प्रभाव फसल, पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं पर अधिक पड़ता है, कुछ चर्म रोग भी इसी कारण देखने को मिलते है।

प्रश्न 13.
दो रेडियोधर्मी अपशिष्टों का नाम लिखें।
उत्तर :
(i) यूरेनियम
(ii) इंजेक्सन की सूई।

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प्रश्न 14.
वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन क्या हैं ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन : वर्तमान समय में अनियंत्रित उत्पादन तथा उपभोग के द्वारा अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थों का उत्सर्जन हो रहा है, अतः उसे रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता है। वर्ज्य पदार्थ के प्रभावी व्यवस्थापन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों, पौर प्रतिष्ठान एवं सम्बन्धित सरकारी विभागों में आपसी समन्वय की अत्यन्त आवश्यकता है।

प्रश्न 15.
Scruber क्या हैं ?
उत्तर :
घर में जिस वस्तु का प्रयोग कर वर्ज्य पदार्थ को नष्ट किया जाता है उसे Scruber कहा जाता है।

प्रश्न 16.
गंगा कार्य योजना क्या है ?
उत्तर :
गंगा कार्य योजना :- गंगा नदी के प्रवाह मार्ग में अनेक कचड़ो का ढेर बढ़ते जा रहा है, उस योजना के अन्तर्गत 1985 ई० से गंगा नदी में प्रदूर्षण को रोक-थाम के लिए जिस योजना का प्रयोग किया गया है, उसे ही गंगा कार्य योजना कहा जा सकता है।

प्रश्न 17.
3 r क्या है ?
उत्तर :
3 r का अर्थ Reduce (परिणाम घटाना), Reuse (पुन: प्रयोग) और Recycle (पुन: चक्रीय) है।

प्रश्न 18.
दो वर्ज्य पदार्थ के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर :
(i) वर्ज्य पदार्थों की गंदगी के क्रमश: रिसाव से भूतल पर जल प्रदूषण होता है।
(ii) वर्ज्य पदार्थों की ढेर से मिट्टी में अम्लीय क्षमता बढ़ जाती है।

प्रश्न 19.
कम्पोस्टिंग या जैविक खाद (Composting) क्या है ?
उत्तर :
जैविक खाद निर्माण : प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाले अपशिष्ट पदार्थ, फलों एवं सब्जियों के छिलके एवं पत्तियाँ, बचा हुआ भोजन, कागज आदि का उपयोग जैविक खाद निर्माण में किया जा सकता है। इन सभी को एक गड्दे में डालकर ढँक दिया जाता है तथा कुछ महीनों तक छोड़ दिया जाता है। बैक्टीरिया इन पदार्थों को विघटित करके खाद में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 20.
विनाशक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
हानिकारक अपशिष्टों का मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को हानि बिना पुनः उपयोग में लाए जाने योग्य बनाना ही इनका पुर्चकण है। जैसे ज्वलनशील हानिकारक अपशिष्टों को जलाकर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। या इनका उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नवीन वस्तुओं का उत्पादन किया जा सकता है।

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प्रश्न 21.
वर्ज्य पदार्थों का वर्गीकरण करे।
उतर :
वर्ज्य पदार्थों को तीन भागों में रखा गया है –

  • ठोस
  • तरल
  • गैस।

प्रश्न 22.
तैरती राख क्या है ?
उत्तर :
कल-कारखानो की चिमनी से निकलने वाले कणो को तैरती राख कहा जाता है।

प्रश्न 23.
जैव मेडिकल वर्ज्य पदार्थ अथवा जैव उपचार कचरा क्या है ?
उत्तर :

  • पैथोलाजिकल
  • रेडियोधर्मी पदार्थ
  • खराब औरधिया।

प्रश्न 24.
दो बर्ज्य पदार्थ के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर :
(i) वर्ज्य पदार्थों की गंदगी के क्रमश: रिसाव से भूतल पर जल प्रदूषण होता है।
(ii) वर्ज्य पदार्थों की ढेर से मिट्टी में अम्लीय क्षमता बढ़ जाती है।

प्रश्न 25.
अन्तिम शोधन से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
माध्यमिक स्तर पर शोधित जल को एक विशाल खुले जल भण्डार में लाया जाता है। आवश्यकता अनुसार वायु संचालन की भी व्यवस्था रहती है। यहाँ जल धारण की संचय सीमा अधिक होती है उस शोधन में कुछ नाइट्रोजन एवं फास्फोरस जनित यौगिकों को दूर कर लिया जाता है।

प्रश्न 26.
वर्ज्य पदार्थ के प्रमुख स्रोत क्या है ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ के प्रमुख स्रोत – कचरा या वर्ज्य की उत्पत्ति धरो, कारखानो, कृषि क्षेत्र, अस्पताल, आणविक संयत्र तथा नागरपालिका द्वारा होती है।

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प्रश्न 27.
रेडियो धर्मी वर्ज्य पदार्थ का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
रेडियोधर्मी वर्ज्य पदार्थ का वर्गीकरण –

  • निम्न स्तर वर्ज्य
  • मध्यम स्तर वर्ज्य
  • उच्च स्तर वर्ज्य।

प्रश्न 28.
इलेक्ट्रॉनिक (विद्युत्) वर्ज्य पदार्थ से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
इलेक्ट्रानिक धातुएँ जैसे फ्रिज, टेलिवजन, वाशिंग मशीन, कम्प्यूटर आदि जब उपयोग योग्य नहीं रह जाते है तो ये कचरा हो जाते है। अतः उन्हें पुरर्चक्रण की कोई विधि नहीं होने के कारण ये स्क्रैप के रूप में बेच दिया जाता है।

प्रश्न 29.
कृषि वर्ज्य पदार्थ क्या है ?
अथवा
किन अपशिष्टों की उत्पत्ति कृषि कार्य से होती है ?
उत्तर :
जो वर्ज्य पदार्थ गहन कृषि एवं बड़े पैमाने पर फसलो के उत्पादन के बाद प्राप्त होते है तो उसे कृषिवर्ज्य पदार्थ कहा जाता है। इसके अन्तर्गत लकड़ी के कचरे, फसलो के डंठल मवेशियो द्वारा उत्पन्न कचरा मवेशिया के शव आदि वर्ज्य पदार्थ है।

प्रश्न 30.
गीले ब्रंश क्या है ?
उत्तर :
गीले बंश वायु को जल से गीला करके साफ रखता है उद्योगो की निष्कासित होने वाली गैसे एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती है। जिसमें पानी का छिड़काव होता रहता है। गैसों में मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते है तथा नीचे बैठे जाते है और मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती है। उसके अलावे जल में घुलनशील हानिकारक जैसे अमोनिया, सल्फर, डाईआक्साइड आदि भी वायु से अलग हो जाते है।

प्रश्न 31.
अम्ल वर्षा से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
अम्ल वर्षा (Acid Rainfall) : अम्ल वर्षा की समस्या औद्योगिक देशो में अधिक गंभीर है। अम्ल वर्षा का मुख्य कारण सल्फर-डाई-अक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्र ऑक्साइड आदि है, इन गैसो का मुख्य सोत जीवाश्म ईंधन का मनामाने जगह से जलाया जाना और औद्योगिक प्रक्रियाए है। CO2 के बाद सल्फर-डाई-ऑक्साइड वायु को प्रदूषित करने वाला दूसरा महत्वपूर्ण गैस है । NO2, SO2, CH4 जैसे गैसे जब वर्षा जल में घुलकर पृथ्वी पर गिरने लगता है तो अम्ल वर्षा होती है। अम्ल वर्षा के प्रभाव से फसल, पेड़-पौधो एवं जीव-ज़्तुओं पर अधिक पड़ता है, कुछ चर्म रोग भी इसी कारण देखने को मिलता है।

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प्रश्न 32.
क्षेत्रीय अपशिष्ट का दो उदाहरण दो।
उत्तर :
नालो का गन्दा पानी एवं कचरा प्लास्टिक क्षेत्रीय अपशिष्ट है।

प्रश्न 33.
लीचिंग क्या है ?
उत्तर :
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा मिट्टी में विद्यमान घुलनशील संघटक पानी में घुल जाते है और रिसतेहुए पानी के साथ मिट्टी से होकर नीचे के स्तरो में पहुँच जाते है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
गैसीय अपशिष्ट नियन्त्रण के क्या उपाय हैं ?
उत्तर :
गैसीय अपशिष्टों का उपचार (Treatment of Gaseous Waste) : विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों के बहि: साव से वायु प्रदूषित होती है। वायु को इन हानिकारक अपशिष्टों से मुक्त करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में निम्नलिखित दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator): उद्योगों के चिमनियों से निकलने वाले धुएँ में मिश्रित धूलकण या अन्य ठोस कणों को निकालने का यह सर्वोत्तम यन्त्र है। इसमे ॠणात्मक चार्ज इलेक्ट्रोड होते हैं। धनात्मक चार्ज धूल कण जब चिमनी से निष्कासित होने वाले धुओं के साथ मिश्रित होकर निकलते हैं तो ॠणात्मक इलेक्ट्रोड उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं जिससे ये नीचे बैठ जाते हैं। इस प्रकार चिमनी से हानिकारक धूल कणों से मुक्त गैस बाहर निकलती है।

गीले ब्रश (Wet Scrubbers): गीले बश या वेट स्कबर वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते हैं। उद्योगों से निष्कासित होने वाली गैसें एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती है जिसमें जल का छिड़काव होता रहता है। गैसों से मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते हैं तथा नीचे बैठने लगते हैं तथा इनसे मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती हैं। इसके अतिरिक्त जल में घुलनशील हानिकारक गैंसे ; जैसे – सल्फर डाईऑंक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, हाड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया आदि वायु प्रदूषक गैसें भी इस प्रक्रिया द्वारा वायु से मुक्त हो जाती है।

प्रश्न 2.
अपशिष्टों की मात्रा में कमी लाना किस प्रकार सम्भव है ?
उत्तर :
उत्पादन में कमी लाना : इस विधि को अपनाकर अपशिष्टों के उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे जहाँ तक सम्भव हो पैकेट वाली वस्तुओं को नहीं खरीदना। बाजार में खरीदारी करते समय प्लास्टिक के थैलों में वस्तुओं को न लेकर घर से लाए गए झोलों में लेना। ऐसी वस्तुओं को खरीदना जिनका पुन : उपयोग किया जा सके। लम्बे समय तक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं को खरीदना आदि।

पुन: उपयोग : उपयोग में लाए गए अपशिष्टों का बिना किसी परिवर्तन के पुन: उपयोग किया जाना ही इनका पुन: उपयोग है। इससे समय, रुपया, ऊर्जा एवं संसाधन सभी की बचत होती है। जैसे उपयोग में लाए गए रैपरों को पुन: उपयोग के लिए रखना। टूटे-फूटे सामानों जैसे फर्नीचर, खिलौने आदि की मरम्मत करके पुनः उपयोग में लाना आदि।

पुनर्चक्रीकरण : इसके अन्तर्गत कुछ अपशिष्टों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नयी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। जैसे लोहे एव शीशे के अपशिष्टों को गलाकर पुनः उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

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प्रश्न 3.
विघटित एवं अविघटित होने वाले अपशिष्टों में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर :

विघटित अपशिष्ट अविघटित अपशिष्ट
i. विघटित अपशिष्ट का प्रभाव पर्यावरण पर थोड़े समय तक पड़ता है। i. अविघटित अपशिष्ट पर्यावरण को लम्बे समय तक प्रभावित करता है।
ii. विघटित अपशिष्ट कुछ हद तक लाभ भी पहुँचाता है। ii. अविघटित अपशिष्ट सिर्फ नुकसानदायक होता है।
iii. फल-सब्जी के छिलके बचा हुआ खाना आदि विघटित अपशिष्ट हैं। iii. प्लास्टिक, ठोस पदार्थ, सीसा, आदि अविघटित अपशिष्ट होते हैं।

प्रश्न 4.
जैव खाद निर्माण में अपशिष्टों से क्या लाभ हैं ?
उत्तर :
प्राकृतिक रूप से विर्धटित होने वाले अपशिष्ट पदार्थ फलों एवं सब्जियों के छिलके एवं पत्तियाँ, बचा हुआ भोजन, कागज आदि का उपयोग जैविक खाद निर्माण में किया जा सकता है। इसके लिए उपरोक्त अपशिष्टों को एक गड्दु में डालकर ढँक दिया जाता है तथा कुछ महीनों तक छोड़ दिया जाता है। वैक्टिरिया इन पदार्थो को विघटित करके खाद में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रकार खाद बानाने के माध्यम से अपशिष्ट प्रबन्धन एक उपयोगी तरीका है।

प्रश्न 5.
गैसीय अपशिष्टों के नियंत्रण के लिए प्रभावकारी उपाय क्या अपनाये गये हैं ? (Board Sample Paper)
उत्तर :
गैसीय अपशिष्टों का उपचार (Treatment of Gaseous Waste) : विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों के बहि : साव से वायु प्रदूषित होती है। वायु को इन हानिकारक अपशिष्टों से मुक्त करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में निम्नलिखित दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator) : उद्योगों के चिमनियों से निकलने वाले धुएँ में मिश्रित धूलकण या अन्य ठोस कणों को निकालने का यह सर्वोत्तम यन्त्र है। इसमें ऋणात्मक चार्ज इलेक्ट्रोड होते हैं। धनात्मक चार्ज धूल कण जब चिमनी से निष्कासित होने वाले धुओं के साथ मिश्रित होकर निकलते हैं तो ॠणात्मक इलेक्ट्रोड उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं जिससे ये नीचे बैठ जाते हैं। इस प्रकार चिमनी से हानिकारक धूल कणों से मुक्त गैस बाहर निकलती है।

गीले ब्रश (Wet Scrubbers) : गीले बश या वेट स्कबर वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते हैं। उद्योगों से निष्कासित होने वाली गैसें एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती हैं जिसमें जल का छिड़काव होता रहता है। गैसों से मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते हैं तथा नीचे बैठने लगते हैं तथा इनसे मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती हैं। इसके अतिरिक्त जल में घुलनशील हानिकारक गैंसे ; जैसे – सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, हाड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया आदि वायु प्रदूषक गैसें भी इस प्रक्रिया द्वारा वायु से मुक्त हो जाती है।

प्रश्न 6.
अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका का वर्णन करो।
उत्तर :
अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका (Role of students in Waste Management) : छात्र भविष्य के होने वाले सजक नागरिक होंगे। अतः यदि शुरू से ही शिक्षा और व्यवहार द्वारा छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में सचेत किया जाय तो निश्चित रूप से छात्र इसमें सहायक हो सकते हैं। यदि छात्र अपशिष्ट पदार्थ क्या है जान जाय तो अपशिष्ट निर्माण की प्रक्रिया को ही रोक सकते हैं।

उदाहरणस्वरूप यदि छात्रों को शिक्षा द्वारा समझा दिया जाय कि जिस प्लास्टिक के सामानों का उपयोग वे करते हैं उसको सड़कर समाप्त होने में दस लाख वर्ष लगते हैं या उसको जलाने से जहरीली गैसे निकलती हैं या खुले स्थानों पर फेंक देने पर जल जमाव होता है या पशु उसको खा लेते हैं तो कुछ दिनों बाद पशु मर भी जाते हैं तो छात्र प्लास्टिक के थैलों का उपयोग न करने का निश्चित कर सकते हैं।

समाज का सबसे बड़ा वर्ग विद्यार्थी वर्ग है। अत: किसी चीज के प्रचार-प्रसार में विद्यार्थी वर्ग की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि विद्यार्थी जान जाये कि प्लास्टिक देश और विश्व की सबसे बड़ी समस्या है तो इससे निपटने में विद्यार्थी वर्ग सबसे बड़ी भूमिका ले सकते है।

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प्रश्न 7.
अपशिष्ट प्रबन्धन के निपटान की भूमि भराव विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भूमि भराव (Land Fill) : अपशिष्टों के प्रबन्धन एवं निस्तारण के लिए यह आवश्यक है कि जिन पदार्थों का दोबारा उपयोग किसी भी रूप में नहीं किया जा सकता है उन्हें नीचे तल की भूमि भरने(Land Fill) के काम में ले आवे।

प्रश्न 8.
भागीरथी-हुगली नदी के जल को प्रदूषण से रोकने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?
उत्तर :

  1. बोर्ड को जल प्रदूषित करने वाले व्यक्ति के बारे में सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी को दें और यह सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई हो। आप प्रेस में भी इस बारे में लिख सकते हैं।
  2. घर की नाली या उद्योग की नाली में ऐसा कोई कचरा न डालें जो नदी-नाले, तालाब, झील या समुद्र जैसे किसी जलसोत में सीधे जा सकती हो।
  3. बेकार की चीजें बहाने के लिए फ्लश का उपयोग न करें। ये आपके घर से चली जाएगी पर किसी और स्थान पर समाने आएगी और जल को प्रदूषित करेगी।
  4. बागों में रासायनिक खादों के स्थान पर कंपोस्ट का इस्तेमाल करें।

प्रश्न 9.
अपशिष्ट प्रबन्धन में छात्रों की क्या भूमिका हो सकती हैं ?
उत्तर :
अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका (Role of students in Waste Management) : छात्र भविष्य के होने वाले सजग नागरिक होंगे। अत: यदि शुरू से ही शिक्षा और व्यवहार द्वारा छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में सचेत किया जाय तो निश्चित रूप से छात्र इसमें सहायक हो सकते हैं। यदि छात्र अपशिष्ट पदार्थ क्या है जान जाये तो अपशिष्ट निर्माण की प्रक्रिया को ही रोक सकते हैं। उदाहरणस्वरूप यदि छात्रों को शिक्षा द्वारा समझा दिया जाय कि जिस प्लास्टिक के सामानों का उपयोग वे करते हैं उसको सड़कर समाप्त होने में दस ल्भख वर्ष लगते हैं या उसको जलाने से जहरीली गैसे निकलती हैं या खुले स्थानों पर फेंक देने पर जल जमाव होता है या पशु उसको खा लेते हैं तो कुछ दिनो बाद पशु मर भी जाते हैं तो छात्र प्लास्टिक के थैलों का उपयोग न करने का निश्चय कर सकते हैं।

समाज का सबसे बडा वर्ग विद्यार्थी वर्ग है। अत: किसी चीज के प्रचार-प्रसार में विद्यार्थी वर्ग की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि विद्यार्थी जान जाये कि प्लास्टिक देश और विश्व की सबसे बड़ी समस्या है तो इससे निपटने में विद्यार्थी वर्ग सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते है।

प्रश्न 10.
औद्योगिक अपशिष्ट अधिक हानिकारक होते हैं क्यों ?
उत्तर :
उद्योगों से उत्सर्जि पदार्थ पानी के साथ घुलकर रासायनिक किया करता है और पानी को अशुद्ध तथा प्रदूषित कर देता है। सूती मिलों, चीनी मिलों और अन्य अद्योगों कचरे नदियों में गिराये जाते हैं। रासायनिक कारखानों में उत्सर्जि कचरे नदियों और तालाबों के पानी में विभिन्न प्रकार के नुकसानदेह उत्पाद घोल देते हैं जो पौधों और पशुओं के लिये खतरनाक बन जाता है। ये जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत के रूप में हैं।

प्रश्न 11.
भागीरथी-हुगली नदी के जल को प्रदूषण रोकने के लिए हम क्या कर सकते हैं ?
उत्तर :
बोर्ड को जल प्रदूषित करने वाले व्यक्ति के बारे में सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारों को दें और यह सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई हो। आप प्रेस में भी इस बारे में लिख सकते हैं।

  1. बोर्ड को जल प्रदूषित करने वाले व्यक्ति के बारे में सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी को दें और यह सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई हो। आप प्रेस में भी इस बारे में लिख सकते हैं।
  2. घर की नाली या उद्योग की नाली में ऐसा कोई कचरा न डालें जो नदी-नाले, तालाब, झील या समुद्र जैसे किसी जलस्रोत में सीधे जा सकती हो।
  3. बेकार की चीजें बहाने के लिए फ्लश का उपयोग न करें। ये आपके घर से चली जाएगी पर किसी और स्थान पर समाने आएगी और जल को प्रदूषित करेगी।
  4. बागों में रासायनिक खादों के स्थान पर कंपोस्ट का इस्तेमाल करें।

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प्रश्न 12.
जहरीले अपशिष्ट (Toxic Waste) या विनाशक अपशिष्ट (Hazardous Waste) से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
विभिन्न प्रकार के औद्योगिक कारखानों और वाहनो से उत्सर्जित जहरीले गैस वातावरण के लिये भयावह खतरे के रूप में उपलब्ध हैं। यह असामयिक मृत्यु और जन्म से अपगता के भी कारक हैं। इनको विनाशक अपशिष्ट भी कहते हैं। ये विषैले होते हैं। ये निर्माण, कृषि, संरचना, आटोमोबाइल-गैरेज, लैबोरेटरी, हास्पीटल और अन्य उद्योगों के उप-उत्पाद हैं।

प्रश्न 13.
जल प्रदूषण में अपशिष्टों की भूमिका का वर्णन क्या है ?
उत्तर :
जल में घरेलू अपशिष्टों, औद्योगिक बहि:साव के रसायन, रेडियोधर्मी पदार्थों तथा तेल के रिसाव आदि के मिश्रण से जलीय जीवों को हानि पहुँचती है तथा उनका विनाश होता है। अनेक पशुओं, पक्षियों एवं कीटों की मौत का कारण विषाक्त अपशिष्ट हैं।

प्रश्न 14.
गैसीय अपशिष्ट में मनुष्य की क्या भूमिका है ?
उत्तर :

  1. बड़ी मात्रा में जैव ईंधनों जैसे- कोयला, पेट्रोल डीजल के दहन से CO2 कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और सल्फर-डाइ आक्साइड की मात्रा लगातार वायुमण्डल में बढ़ रही है।
  2. मोटर-गाड़ी से गैसीय अपशिष्ट का 60 % भाग वायुमण्डल में जहरीले गैस के रूप में इकट्ठा हो रहा है।
  3. औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कोयले का दहन बड़ी मात्रा में धुँआ एवं धूलकण वायु में एकत्रित कर रहा है।
  4. एटामिक पावर प्लाण्ट से यूरेनियम के उपयोग से वायुमण्डल में गैस का उत्सजन एवं उष्मा की वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 15.
जहरीले अपशिष्ट की व्याख्या करो।
उत्तर :
जहरीले अपशिष्ट (Toxic waste) : विभिन्न प्रकार के औद्योगिक कारखानो और वाहनो से उत्सर्जित जहरीले गैस वातावरण के लिये भयावह खतरे के रूप में उपलब्ध है। यह असामयिक मृत्यु और जन्म से अपंगता के भी कारक है। इनको विनाशक अपशिष्ट (Hozardous Waste) भी कहते है। ये विषैले होते है। ये निर्माण, कृषि, संरचना, आटोमोबाइल-गैरेज, लैबोरेटरी, हास्पीटल और अन्य उद्योगो के उप-उत्पाद (by-products) है। ये ठोस और तरल होते है जिसमें रासायनिक भारी मेटल रेडियेसन और टाक्सिन रहता है। जैसे-बैटरी, उपयोग किया हुआ कम्यूटर समान, पेण्ट और कीटनाशक आदि होते है।

प्रश्न 16.
म्यूनिसिपल अपशिष्ट से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
शहरी क्षेत्रो में स्थित होटलो, रेस्टोरेण्टो, बाजारो, गलियों, दुकानों, अस्पतालो, बैकों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानो पर विविध क्रियाकलापो द्वारा उत्पन्न कूड़ा-कचरा शहरी या नगरपालिका अपशिष्ट के अन्तर्गत आते है। म्युनिसिपल कारपोरेशन इन कचरो को इकठ्ठा करके विभिन्न मालवाहक वाहनो द्वारा एक जगह इकठ्ठा कर रहा है जिसे चारो ओर भूमि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैल रहा है।

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प्रश्न 17.
कम्पोस्ट कैसे तैयार करते हैं ?
उत्तर :
अपसिष्टों जैसे घरेलू कचरे, पशुओं का चारा, पशुओं का मल-मूत्र एवं अन्य्र कचरों को खाली जमीन में गड्दा खोदकर परत दर परत जमा कर दिया जाता है। धीरे-धीरे यह जैव-रासायनिक क्रिया द्वारा सड़कर मूल्यवान उर्वरक (Mahure) में बद्ल जाता है। इसका उपयोग भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिये किया जाता है।

प्रश्न 18.
ठोस कचरों को एकत्रित करने के लिए किसका इस्तेमाल करना चाहिए।
उत्तर :
शहरो में स्थान-स्थान पर कूड़ो को रखने के लिए डस्टबिन या कंटेनर रखा जाना चाहिए ताकि लोग कचरों को गलियों एवं सड़को पर न फेंककर इनमें डाल दे।

प्रश्न 19.
कृषि कार्य में हानिकारक पदार्थों के प्रयोग से प्रदूषन उत्पन्न होते हैं।
उत्तर :
कृषि कार्य में अधिक फसल उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरको जैसे-नाइट्रोजन, फास्फेट्स, यूरिया आदि का प्रयोग अधिक क्रिया जाने लगा है। ये उर्वरक वर्षा के जल के साथ बहकर नदियो, झीलों, जलशयों आदि में पहुंचकर जल को प्रदूषित करते है।

प्रश्न 20.
किन अपशिष्टों के उचित प्रबन्धन से संचित संसाधनों को संरक्षण प्राप्त हो सकता है ?
उत्तर :
पुनर्चक्रण के अन्तर्गत अपशिष्टों को संसाधनो के रूप में परिवर्तित किया जाता है। अतः अपशिष्ट की कैलोरी सामग्री बिजली में परिवर्तित की जा सकती है। इसके दो प्रकार है –
(a) भौतिक पुन: परिष्करण इसके अन्तर्गत अपशिष्ट पदार्थो को संग्रहित कर उनका पुन: प्रयोग किया जाता है।
(b) जैविक पुन: परिष्करण : इसके अन्तर्गत पौधो की सामग्री, बचा हुआ भोजन, कागज उत्पाद आदजि को जैविक खाद और पाचन प्रक्रियाओ का उपयोग कर अषयव संबंधित पदार्थ विघटित करके पुनर्नवीनीकरण किया जाता है।

प्रश्न 21.
शहरी या नगरपालिका अपशिष्ट के अन्तर्गत किन अपशिष्टों को सम्मिलित किया जा सकता है ?
उत्तर :
इसके अन्तर्गत निम्नलिखित अपशिष्टों को सम्मिलित किया जा सकता है :

  1. प्राकृतिक रूप से स्वत: नष्ट होने वाले अपशिष्ट जैसे-हरे अपशिष्ट, व्याज्य खाद्य पदार्थ एवं रसोई का कचरा।
  2. पुनर्चक्रीय अपशिष्ट, जैसे-बोतले, शीशा, प्लास्टिक, कागज आदि।
  3. हानिकारक घरेलू अपशिष्ट जैसे, पेण्ट, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, रसायन, कीटनाशक, ट्यूब, बल्व, बैटरी आदि।

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प्रश्न 22.
अपशिष्टों के एकत्रीकरण के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
आज म्युनिसिपल कारपोरेशन शहरों के कचरों को इकठ्ठा करके विभिन्न मालवाहक वाहनों द्वारा एक जगह इकठ्ठा कर रहा है जिससे चारो ओर भूमि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैल रहा है। म्यूनिसिपेलिटी शहर के गन्दे पानी और मल-मूत्र को सीवर के माध्यम से नदियों में सीधे गिरा रहा है जिससे जल प्रदूषण फैल रहा है।

प्रश्न 23.
जैविक पुन: परिष्करण क्या है ?
उत्तर :
जैविक पुन: परिष्करण : ये प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थ हं जिनका पुन: चक्रण किया जाता है। पौधों की सामग्री, बचा भोजन, पशुओं का मल, कागज उत्पाद आदि को विघटित करके पुनर्न वीनीकरण किया जाता है। कार्बनिक पदार्थ का पुनः चक्रण-करके उनसे खाद तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में गैस का उत्सर्जन होता है, उससे बिजली तैयार किया जाता है। अपशिष्ट प्रबंधन में जैविक प्रसस्करण का उद्देश्य कार्बनिक पदार्थो के अपघटन के प्रक्रिया की गति को बढ़ाना और नियंत्रित करना होता है। जैविक पुन: परिष्करण में जैविक एरोबिक-विघटन एवं अनबोरिक विघटन सम्मिलित है।

प्रश्न 24.
वर्तमान युग में विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के बड़ी मात्रा में उत्पन्न होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
वर्तमान समय में औद्योगिकरण और विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों के परिणामस्वरूप धरातल पर और वायुमण्डल में लगातार खतरनाक कचरों का जमाव और उत्सर्जन ही अपशिष्ट है। यह अपशिष्ट विभिन्न प्रकार के सोतों से उत्सर्जित होता है। ऐसे पदार्थ जो सामान्यतया मनुष्यों द्वारा फेंक दिए जाते है। या जो अनुपयोगी और अनावश्यक होते है, उन्हें अपशिष्ट पदार्थों के वर्ग में रखा जाता है। इसमें हम जीव-जंतु और पेड़ पौधो के मृत और सड़े अंश, जीव-जंतु और पेड़-पौधो की उपापचयी क्रिया के उपजात इत्यादि को सम्मिलित करते है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
अपशिष्ट के विभिन्न स्रोतों का वर्णन कीजिए। अथवा, अपशिष्ट कितने प्रकार के होते हैं ?
अथवा
अपशिष्ट का वर्गीकरण करो।
उत्तर :
अपशिष्ट के प्रकार (Type of waste) :- अपशिष्टों को निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जा सकता है:-

  1. ठोस अपशिष्ट (Solid Waste) :- ये अपशिष्ट कुछ हद तक परिवर्तन के साथ उसी प्रकार पड़े रहते हैं, जैसे – धातु, सीसा आदि के अपशिष्ट।
  2. तरल अपशिष्ट (Liquid Waste) :- इस प्रकार के अपशिष्ट तरल रूप में मिलते हैं, जैसे – प्रदूषित जल, तेल एवं मोबिल आदि।
  3. गैसीय अपशिष्ट (Gasseous Waste) :- ये अपशिष्ट गैस के रूप में होते है जो वायु को प्रदूषित करते हैं।
  4. विषैली वस्तुएँ (Toxic Substance) :- इसके अंतर्गत वे वस्तुएँ आती हैं जो वायुमण्डल को विषाक्त कर सकती है, या स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचती है, जैसे – रेडियो सक्रिय पदार्थ, विषैले रसायन, भारी धातु (आर्सेनिक शीशा, पारा आदि)।
  5. गैर विषैली वस्तुएँ (Non-Toxic Substance) :- कृषिजात अपशिष्ट, फलों के छिलके, रद्दी कागज आदि।

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प्रश्न 2.
अपशिष्ट प्रबन्धन की संकल्पना पर अपना विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
प्रबन्धन की संकल्पना : वे सभी ठोस, तरल या गैसीय पदार्थ जो उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों के ही उपयोगयोग्य नहीं रह जाते, अर्थात् जो किसी की आवश्यकता की पूर्ति योग्य नहीं समझे जाते, उन्हें अपशिष्ट की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान समय में विभिन्न सोतों से उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण के लिए एक गम्भीर संकट बन गए हैं, अतः उनका उचित प्रबंधन अति आवश्यक हो गया है। अपशिष्टों के उत्पादन में कमी लाने के साथ-साथ वे सभी विधियाँ जैसे अपशिष्टों का पुन: उपयोग, पुनर्चक्रीकरण, उपचार तथा इनका सुरक्षित निस्तारण अपशिष्ट प्रबंधन के अन्तर्गत आती है।

उत्पादन में कमी लाना : इस विधि को अपनाकर अपशिष्टों के उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे जहाँ तक सम्भव हो पैकेट वाली वस्तुओं को नहीं खरीदना। बाजार में खरीददारी करते समय प्लास्टिक के बैलों में वस्तुओं को न लेकर घर से लाए गए झोलों में लेना। ऐसी वस्तुओं को खरीदना जिनका पुन : उपयोग किया जा सके। लम्बे समय तक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं को खरीदना आदि।

पुन: उपयोग : उपयोग में लाए गए अपशिष्टों का बिना किसी परिवर्तन के पुनः उपयोग किया जाना ही इनका पुन: उपयोग है। इससे समय, रुपया, ऊर्जा एवं संसाधन सभी की बचत होती है। जैसे उपयोग में लाए गए रैपरों को पुन: उपयोग के लिए रखना। टूटे-फूटे सामानों जैसे फर्नीचर, खिलौने आदि की मरम्मत करके पुन: उपयोग में लाना आदि।

पुनर्चक्रीकरण : इसके अन्तर्गत कुछ अपशिष्टों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नयी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। जैसे लोहे एवं शीशे के अपशिष्टों को गलाकर पुन: उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

प्रश्न 3.
गैसीय अपशिष्टों के नियंत्रण के लिए कौन-सी प्रभावी विधियाँ अपनाई जाती हैं ?
अथवा
गैसीय अपशिष्ट का निस्तारण कैसे होता है?
अथवा
औद्योगिक क्षेत्रों में निःस्तृत गैसीय अपशिष्टों का उपचार किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर :
गैसीय अपशिष्टों का नियंत्रण (Control of Gaseous Waste) :- विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों के बहि: म्राव से वायु प्रदूषित होती है क्योंकि इन गैसों में धूलकण, कार्बन के कण, धुआँ आदि मिले होते हैं। वायु को इन हानिकारक अपशिष्टों से मुक्त करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में निम्नलिखित दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator) :- कल-कारखानों एवं अन्य उद्योगों में दहन प्रक्रिया के दौरान चिमनियों से निकलने वाले धुएँ में मिश्रित धूलकण या अन्य ठोस कणों को निकालने का यह सर्वोत्तम यन्त्र है। इसमें ऋणात्मक चार्ज इलेक्ट्रोड होते हैं। धनात्मक चार्ज धूल कण जब चिमनी से निष्कासित होने वाले धुओं के साथ मिश्रित होकर निकलते हैं तो ऋणात्मक इलेक्ट्रोड उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं जिससे ये नीचे बैठ जाते हैं, इस प्रकार चिमनी से हानिपरक धूल कणों से मुक्त गैस बाहर निकलती है जिससे धुएँ में से राख को मुक्त किया जाता है। विद्युत गृहों में ये यन्त्र चिमनियों में लगे हुए होते हैं।

गीले ब्रश (Wet Scrubbers) :- गीले ब्रश या वेट स्कबर वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते हैं। उद्योगों से निष्कासित होने वाली गैसें एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती हैं जिसमें जल का छिड़काव होता रहता है। गैसों में मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते हैं तथा नीचे बैठने लगते हैं तथा इनसे मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती है। इसके अतिरिक्त जल में घुलनशील हानिकारक गैसें, जैसे – सल्फर डाई-ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई-ऑक्साइड, अमोनिया आदि वायु प्रदूषक गैसे भी इस प्रक्रिया द्वारा वायु से मुक्त हो जाती है।

अत: पर्यावरण को स्वच्छ रखना, मानव स्वास्थ्य की रक्षा किया जाना, जैव विविधता को बरकरार रखा जाना तथा इनके पुर्नचक्रीकरण एवं पुर्नव्यवहार द्वारा संसाधनों को संरक्षण प्रदान किये जाने जैसी विधियाँ अपशिष्ट प्रबंधन द्वारा अपनायी जाती है।

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प्रश्न 4.
भागीरथी-हुगली नदी में अपशिष्टों के निस्तारण के प्रभाव का वर्णन्न कीजिए।
उत्तर :
अपशिष्टों के निस्तारण के प्रभाव :- भागीरथी-हुगली पश्चिम बंगाल की जीवनदायिनी नदी है। वर्तमान समय में भारत की अन्य प्रमुख नदियों की तरह यह भी ठोस एवं द्रव अपशिष्टों के निस्तारण के कारण प्रदूषण की समस्या से ग्रसित है। इसके जल में ठोस अपशिष्टों की मात्रा इसके वहन क्षमता से काफी अधिक हो गई है। इसके किनारे स्थित कागज, जूट, रसायन, चमड़ा आदि उद्योगों के बहिः साव बड़ी मात्रा में अपशिष्टों को इस नदी में ले आते हैं। बर्नपुर एवं दुर्गापुर इस्पात सयंत्रों के बहि:स्राव को लेकर आने वाली दामोदार नदी इसमें ठोस एवं द्रव अपशिष्टों की मात्रा में और अधिक वृद्धि कर रही है।

हुगली के किनारे बसे बस्तियों, नगरों एवं कोलकाता महानगर के घरेलू बहिः साव एवं मल-जल भी इसमें अपशिष्टों की मात्रा में वृद्धि कर रहे हैं इस नदी के बेसिन में होने वाली कृषि कार्य में प्रतिवर्ष हजारों टन रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों का व्यवहार होता है ये रसायन वर्षा के जल के साथ घुलकर सहायक नदियों एवं नालों के माध्यम से हुगली के जल में आकर मिलते रहते है तथा इसमें तरल अपशिष्टों की मात्रा में वृद्धि कर रहे हैं।

वर्णित तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अपशिष्टों के निस्तारण से हुगली का जल अत्यन्त दूषित हो चुका है तथा दिन-प्रतिदिन यह समस्या विकट रूप लेती जा रही है। अतः इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्टों के उचित प्रबन्धन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रश्न 5.
अपशिष्ट प्रबन्धन की संकल्पना पर अपना विचार प्रस्तुत कीजिए। अथवा, अपशिष्ट प्रबन्धन किन रूपों में किया जा सकता है ?
उत्तर :
प्रबन्धन की संकल्पना : वे सभी ठोस, तरल या गैसीय पदार्थ जो उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों के ही उपयोगयोग्य नहीं रह जाते, अर्थात् जो किसी की आवश्यकता की पूर्ति योग्य नहीं समझे जाते, उन्हें अपशिष्ट की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान समय में विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण के लिए एक गम्भीर संकट बन गए हैं, अतः उनका उचित प्रबंधन अति आवश्यक हो गया है। अपशिष्टों के उत्पादन में कमी लाने के साथ-साथ वे सभी विधियाँ जैसे अपशिष्टों का पुनः उपयोग, पुनर्चक्रीकरण, उपचार तथा इनका सुरक्षित निस्तारण अपशिष्ट प्रबंधन के अन्तर्गत आती है

उत्पादन में कमी लाना : इस विधि को अपनाकर अपशिष्टों के उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे जहाँ तक सम्भव हो पैकेट वाली वस्तुओं को नहीं खरीदना। बाजार में खरीददारी करते समय प्लास्टिक के थैलों में वस्तुओं को न लेकर घर से लाए गए झोलों में लेना। ऐसी वस्तुओं को खरीदना जिनका पुन : उपयोग किया जा सके। लम्बे समय तक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं को खरीदना आदि।

पुनः उपयोग : उपयोग में लाए गए अपशिष्टों का बिना किसी परिवर्तन के पुन: उपयोग किया जाना ही इनका पुन: उपयोग है। इससे समय, रुपया, ऊर्जा एवं संसाधन सभी की बचत होती है। जैसे उपयोग में लाए गए रैपरों को पुन: उपयोग के लिए रखना। टूटे-फूटे सामानों जैसे फर्नीचर, खिलौने आदि की मरम्मत करके पुन: उपयोग में लाना आदि।

पुनर्चक्रीकरण : इसके अन्तर्गत कुछ अपशिष्टों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नयी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। जैसे लोहे एवं शीशे के अपशिष्टों को गलाकर पुन: उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

प्रश्न 6.
वर्ज्य पदार्थों की आवश्यकता तथा प्रभाव व्यवस्थापन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वर्तमान समय में अनियत्रित उत्पादन तथा उपभोग के द्वारा अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थो का उत्सर्जन हो रहा है। वर्ज्य पदार्थों के मात्रा में लगातार घृद्धि को रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य पदार्थ की अत्यन्त आवश्यकता है।

वर्ज्य प्रबंधन तथा योजना को दो प्राकर से कियान्वित यिका जा सकता है। वर्ज्य पदार्थ का उचित रूप में हटाना तथा वर्ज्य का संस्करण। इन दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य बर्ज्य के दुष्परिणामों को दूर करने से है।

वर्ज्य पदार्थ के प्रभावी व्यवस्थापन में समाज के विभित्र वर्गों के लोगो पौर प्रतिष्ठान एवं सम्बन्धित सरकारी विभागों मे अपनी समन्वय की अत्यन्त आवश्यकता है। घर के वर्ज्य पदार्थ को अपने घर के भीतर रखना एवं समय से उसे नियमित स्थान पर रखा जाता है। वर्ज्य पदार्थ को हमेशा घर में ढक कर रखना चाहिए। वर्ज्य पदार्थ संग्रह केन्द्र विभिन्न स्थानो पर होते है। वर्ज्य पदार्थ को कहीं पर इकट्टा कर उसे मूल संग्रह केन्द्र तक पहुँचाना नगर के वर्ज्य विभाग का कार्तव्य होता है। कचड़े को रूपान्तरित करना या अन्य प्रक्रियाकरण द्वारा वर्ज्य पदार्थ को समाप्त करनेकी कोशिश की जाती है।

नालों में केवल तरल वर्ज्य पदार्थों को ही फेंकना चाहिए। लेकिन ऐसा देखा जाता है कि हमलोग ठोस वर्ज्य पदार्थ को भी नालों में फेंक देते है। उससे नाला भर जाता है तथा उसका प्रवाह रूक जाता था। अब रूके हुए पानी में मच्छर अपना आश्रय क्या कर हजारों की संख्या में अण्डे दे देते है। जो विमारी का प्रमुख कारण बन जाता है। इसी प्रकार औद्योगिक केन्द्रों से विभिन्न प्रकार के रसायनयुक्त जल भी नालो को गंदा कर देते है । नवीन प्रा्योगिक केन्द्र को उपयोग में लाकर इन निगर्त गैसे के प्रदूषण की मात्रा को कम किया जाता है।

अधिकांश कल कारखाने प्रदूषण नियंत्रण यंत्र को सरकारी दबाव में लगा कर उनका उपयोग नहीं करते। अत: आवश्यकता इस बात की है कि सरकार इस सम्बन्ध में कठोर निर्णय ले और जो प्रदूषण नियंत्रण तंत्र का उपयोग नहीं करते उन्हें दण्डित किया जाना चाहिए। वर्ज्य पदार्थों के निष्कासन एवं प्रक्रियाकरण के लिए जिस चीज की आवश्यकता पड़ती है उसके निर्माण के लिए सम्बन्धित सरकारी विभागों की सहायता करती चाहिए।

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प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण के स्रोत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वायु प्रदुषण के स्रोत :

  1. हरित क्रान्ति गृह जैसे – CO2, NO2, SO2, CH4 इत्यादि के उत्सजर्न से ओजोन के तत्वो जैसे CPC, HCFC इत्यादि में कमी हो जाती है जिसके फलस्वरूप पानी प्रदूषित हो जाता है तथा अम्लवृष्टि (Acid Rainfall) होती है ।
  2. कृषि क्षेत्र में रासायनिक खाद, कीटनाशक, दवाएँ तथा अन्य प्रकार के वर्ज्य से जल मिट्टी का प्रदूषण होता है। इससे खाद्य उत्पादन में पारिस्थितिकी व्यवधान उत्पन्न होता है।
  3. नदियों के तट पर स्थित महानगरों जैसे कानपुर, इलाहाबाद, कोलकाता नगरो महानगरो के भारी मात्रा में वर्ज्य पदार्थ से नदी का जल प्रदूषित हो जाता है।
  4. रसाव अथवा दुर्घटना तथा विषाक्त वर्ज्य के तिरोहित होने के कारण समुद्र जल के प्रदूषण से समुद्री जीव-जन्तु पर खतरे की घण्टी बजने लगती है।
  5. मनुष्य घरेलु पूजा-पाठ के वर्ज्य पदार्थ को भी नदियों में फेंक कर नदी के जल को प्रदूषित कर देते है।

प्रश्न 8.
भस्कीव गण अपशिष्ट प्रबंधन क्या है ?
उत्तर :
दहन या भंगीकरण (Incineration) भस्मीकरण के अन्तर्गत अपशिष्ट पदार्थो के दहन या जलाने की प्रक्रिया के शामिल किया जात है। भस्मीकरण छोटे-पैमाने पर व्यक्तियों द्वारा एव बड़े पैमाने पर पद्योगों द्वारा किया जाता है। खतरनाक कचरा जैसे-चिकित्सकीय अपशिष्टों को निबटाने के लिए इसे एक व्यावहारिक पद्धति के रूप में मान्यता प्राप्त है। दहन के कारण वायुमण्डल को प्रदूषित करने वाली गैसों-का उत्सर्जन होता है अतः यह एक विवादास्पद पद्धति है। अत: दहन से पहले सभी प्रकार के प्लास्टिक के अपशिष्टों को अलग कर लेना चाहिए क्योंकि इनके दहन से बिजली गैसों का उत्सर्जन होता है। अपशिष्टों के दहन निम्नलिखित लाभ है।

  1. दहन से अपशिष्ट पदार्थो के आयतन में 20 से 30 प्रतिशत की कमी हो जाती है।
  2. यह विधि उन जगहो पर अधिक उपयोगी है जहाँ अपशिष्टों को भरने के लिए भूमि की कमी है।
  3. चिकित्सकीय अपशिष्टों में निबटारे के लिए दहन की विधि सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सक्रामक रोगों को फैलाने वाले जीवाणु नष्ट हो जाते है।
  4. दहन प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली उष्मा से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
भौतिक पुन: परिष्करण क्या है ?
उत्तर :
भौतिक पुन: परिष्करण : आजकल विकसित देशों में अपशिष्टों का व्यापक सग्रह किया जाता है। सग्रहित अपसिष्टों को पुन: प्रयोग के लायक बना दिया जाता है खाली पेय पदार्थो के डिब्बो एवं वोतलों को इकठ्ठा करके पुन: प्रक्रम द्वारा उन्हें तैयार किया जाता है। उनके प्रक्रम की प्रक्रिया समान श्रेणियों में की जार्ती है ताकि कच्चा माल जिससे ये वस्तुयें बनी है, उन्हें उसी प्रकार नयी वस्तु में बदला जा सके। पुनर्न वीनी-करण के लिये आम उपभोक्ता उत्पादो में अल्युमिनियम पेय के डिब्बे, इस्पात भोजन और एयरोसोल डिब्बे, HDPE और PET बोतलें, काँच की बोतलें, गत्ते के डिब्बे, अखबार, पत्रिकायें, गत्ता आदि शामिल है। प्लास्टिक के उत्पाद PVC, LDPE, PP, PS आदि भी पुनर्चक्रित किये जाते है। जो वस्तुये सामान्य किसी एक तरीके के धातु से बनी रहती है उन्हें आसानी से पुनः चक्रित करके नयी वस्तु बनायी जाती है।

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प्रश्न 10.
औद्योगिक अपशिष्ट के विभिन्न स्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
औद्योगिक अपशिष्ट : उद्योगो से बहुत अधिक ठोस, द्रव एवं गैसीय अपशिष्ट उत्पन्न होता है, ऊर्जा उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईधनों के प्रयोग से वायु प्रदूषित होती है। वायुमण्डल में हरित गृह गैसो की मात्रा बढ़ने से भूमण्डलीय तापमान में वृद्धि हो रही है। विभिन्न उद्योगों से निकलने वाले कूड़े एवं राख आदि निकटवर्ती स्थानों में इकठ्ठा होते रहने से समस्या बन गए है। उत्पादन प्रक्रिया में प्रयुक्त जल जब बहि :स्ताव के रूप में निकलता है तो इसमें अनेक कार्बनिक एवं अकार्बनिक तत्व मीले हुए होते है। उद्योगों का यह कचरायुक्त जल नदियों में बहा दिया जाता है या झीलों विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट उत्पन्न होते है। रसायन, सूतीवस्त, कागज, ओषधि, चमड़ा, चीनी, खाद्य प्रक्रम, उर्वरक आदि उद्योगो बड़ी मात्रा में कचरायुक्त जल का बहि: स्ताव करते है।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

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अपशिष्ट प्रबंधन Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वर्ज्य पदार्थ जैव अनिम्नकरणीय स्वरूप के होते हैं :
(a) प्लास्टिक वर्ज्य पदार्थ
(b) कृतिम रबर वर्ज्य पदार्थ
(c) एल्यूमिनियम चादर
(d) सभी उपयुक्त हैं
उत्तर :
(d) सभी उपयुक्त हैं।

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प्रश्न 2.
वर्ज्य पदार्थ प्रबन्धन की विधि है :
(a) वर्ज्य पदार्थ का पु:उययेग
(b) वर्ज्य का पुन:नवीकरण
(c) वर्ज्य की कमी
(d) सभी
उत्तर :
(घ) सभी।

प्रश्न 3.
जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट पदार्थ का उदाहरण है :
(a) फलों एवं सब्जियों के छिलके
(b) उपयोग में लाई गई सुईयाँ
(c) खाद्य डिब्बा
(d) वर्ज्य साबुन पानी
उत्तर :
(b) उपयोग में लाई गई सुईयाँ।

प्रश्न 4.
पुनर्चक्रण से तात्पर्य हैं –
(a) अपशिष्टों को संसाधन में बदलना
(b) अपशिष्टों का विनाश
(c) अपशिष्ट संरक्षण
(d) अपशिष्ट का परिहार
उत्तर :
(a) अपशिष्टों को संसाधन में बदलना।

प्रश्न 5.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल की कौन-सी नदी वर्ज्य पदार्श से प्रदूषित हो रही है –
(a) दामोदर
(b) अजय
(c) हुगली
(d) शिलाई
उत्तर :
(c) हुगली।

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प्रश्न 6.
प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को हानि पहुँचाने वाला वर्ज्य पदार्थ हैं –
(a) संखीएवं फलों के छिलके
(b) ज्वलनशील पदार्थ
(c) भारी धातु
(d) सिंथेटिक धागा
उत्तर :
(b) ज्वलनशील पदार्थ।

प्रश्न 7.
इनमें से कौन जैविक अपशिष्ट हैं ?
(a) प्लास्टिक
(b) शीशा
(c) पुआल
(d) कम्प्यूटर
उत्तर :
(c) पुआल।

प्रश्न 8.
निम्न में कौन-सा घरेलू अपशिष्ट नहीं हैं ?
(a) पॉलिथीन बैग
(b) टूटे खिलौने
(c) रक्त
(d) रसोई घर के कचरे
उत्तर :
(c) रक्त।

प्रश्न 9.
Three-R में कौन-सा शब्द प्रयुक्त नहीं होता है –
(a) Reduce
(b) Re-use
(c) Re-Production
(d) Recycling
उत्तर :
(c) Re-Production

प्रश्न 10.
स्कैब्बर विधि का उपयोग होता हैं –
(a) कृषि क्षेत्र
(b) खनन क्षेत्र
(c) शिल्प क्षेत्र
(d) सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र
उत्तर :
(c) शिल्प क्षेत्र।

प्रश्न 11.
तरल वर्ज्य पदार्थ को हटाने की विधि को कहा जाता है –
(a) भरटकरण
(b) निष्कासन
(c) स्कैब्बर
(d) कम्पोस्टिंग
उत्तर :
(b) निष्कासन।

प्रश्न 12.
सबसे कम समय में कौन-सा अपशिष्ट सड़कर समाप्त हो जाता है –
(a) कागज
(b) लोहा
(c) अल्यूमीनियम
(d) प्लास्टिक
उत्तर :
(a) कागज।

प्रश्न 13.
रेडियोधर्मी अपशिष्टों की उत्पत्ति होती है :
(a) घरेलू कार्यों से
(b) कृषि क्षेत्रों से
(c) ताप ऊर्जा सयंत्रों से
(d) नाभिकीय ऊर्जा केन्द्रों से
उत्तर :
(d) नाभिकीय ऊर्जा केन्द्रों से।

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प्रश्न 14.
कीटनाशक एक प्रकार का :
(a) घरेलू अपशिष्ट है
(b) जैविक अपशिष्ट है
(c) कृषिजात अपशिष्ट है
(d) चिकित्सकीय अपशिष्ट है
उत्तर :
(c) कृषिजात अपशिष्ट है।

प्रश्न 15.
पुन: उपयोग में लाया जाने वाला एक अर्पशिष्ट है :
(a) उवर्रक
(b) इंजेक्शन सिरिंज
(c) कागज
(d) बैटरो
उत्तर :
(c) कागज।

प्रश्न 16.
विश्व का सर्वाधिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाला देश है :
(a) चीन
(b) रूस
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका
(d) जापान
उत्तर :
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 17.
वायु प्रदूषण से उत्पत्र होता है :
(a) कुहांसा
(b) बादल
(c) धुआँ
(d) ओस
उत्तर :
(c) धुआँ।

प्रश्न 18.
वायु में विद्यमान विघटनकर्ताओं द्वारा कार्बनिक अपशिष्टों के विघटन की विधि है :
(a) कम्पोस्टिंग
(b) यौगिकीकरण
(c) भूमि भराब
(d) अति भराव
उत्तर :
(a) कम्पोस्टिंग।

प्रश्न 19.
एक रेडियो सक्रिय अपशिष्ट है :
(a) कागज
(b) रंग
(c) प्लास्टिक
(d) दूरेनियम आवारित अपशिष्ट
उत्तर :
(d) यूरेनियम आधारित अपशिष्ट।

प्रश्न 20.
अपशिष्ट प्रबन्धन का सर्वाधिक स्वीकारणीय चरण है :
(a) पुनर्चक्रीयकरण
(b) भूमि भराव
(c) अशिष्टों का अल्ग उत्पादन
(d) कम्पोस्टिंग
उत्तर :
(c) अपशिष्टों का अल्प उत्पादन।

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प्रश्न 21.
जैविक नहीं तत्व है –
(a) वनस्पति
(b) मनुष्य
(c) जानवर
(d) वायु
उत्तर :
(d) वायु।

प्रश्न 22.
सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरण को कहते है –
(a) पराबैगनी
(b) भाप
(c) प्रकाश
(d) सूर्यताप
उत्तर :
(a) पराबैगनी।

प्रश्न 23.
भौतिक परिवेश के तत्व नहीं है –
(a) जल
(b) जीवाणु
(c) मिट्टी
(d) प्रकाश
उत्तर :
(b) जीवाणु।

प्रश्न 24.
जल से होने वाली विमारी का नाम है –
(a) हैजा
(b) केंसर
(c) क्षय रोग
(d) मन्द वुद्धि
उत्तर :
(a) हैजा।

प्रश्न 25.
निम्नलिखित में से वर्ज्य पदार्थ नहीं है –
(a) कपड़ों के दूकड़े
(b) टूटे टेलेफोन
(c) प्लास्टिक वैग
(d) फसलो के डठल
उत्तर :
(d) फसलो के डठल।

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प्रश्न 26.
प्राकृति रूप से विघटित नहीं होने वाला वर्ज्य पदार्थ है –
(a) काँच एवं प्लास्टिक
(b) फसलों के डठंल
(c) रसोई का कचड़ा
(d) फलो के छिल्के
उत्तर :
(a) काँच एवं प्लास्टिक।

प्रश्न 27.
सबसे अधिक मात्रा में द्रव वर्ज्य पदार्थ के उत्सर्जन के स्रोत है –
(a) अस्पताल
(b) रसोई के कचड़े
(c) अद्योगिक वाह्य स्राव
(d) व्यवसायिक केन्द्र
उत्तर :
(c) अद्योगिक वाह्वा स्राव।

प्रश्न 28.
पेट्रोरसायन उद्योग के वर्ज्य पदार्थ है –
(a) धूल एवं राख
(b) तेल एवं ग्रीस
(c) निम्न स्तरीय रेडियो सक्रिय वर्ज्य पदार्थ
(d) उब्ब स्तरीय रेडियो सक्रिय वर्ज्य पदार्थ
उत्तर :
(b) तेल एवं ग्रीस।

प्रश्न 29.
कृषि कार्य में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला खाद है –
(a) यूरिया
(b) जल
(c) कचरा
(d) राख
उत्तर :
(a) दूरिया।

प्रश्न 30.
स्वयं विध त होने वाले वर्ज्य पदार्थ है –
(a) भोजन वे तंश
(b) काँच
(c) धातु
(d) प्लास्टिक
उत्तर :
(a) भोजन के अंश।

प्रश्न 31.
कचरों के खुले रहने से क्या फैल जाता है –
(a) तापमान
(b) जीवाणु
(c) वायु
(d) जल
उत्तर :
(b) जीवाणु।

प्रश्न 32.
CO2 का वायुमण्डलीय वाष्प में घुलकर वर्षा के रूप में गिरने को कहा जाता है –
(a) खूनी वर्षा
(b) आम्र वर्षा
(c) अम्ल वर्षा
(d) ओला वृष्टि
उत्तर :
(c) अम्ल वर्षा।

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प्रश्न 33.
प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को हानि पहुँचाने वाला वर्ज्य पदार्थ है –
(a) संखिये एवं फले के छिले
(b) ज्वलनशील पदार्थ
(c) भारी धातु
(d) सिथेटिक धागे
उत्तर :
(b) ज्वलनशील पदार्थ।

प्रश्न 34.
रही कागज एक वर्ज्य पदार्थ है –
(a) पुन:चक्रीय
(b) घरेलू
(c) जैविक
(d) अजैविक
उत्तर :
(a) पुन:घक्रीय।

प्रश्न 35.
दहन से वर्ज्य पदार्थ के आयतन में कमी आ जाती है –
(a) 50 % – 60 %
(b) 10% – 20 %
(c) 20% – 30 %
(d) 40% – 50 %
उत्तर :
(c) 20% – 30%

प्रश्न 36.
घरेलू हानिकारक वर्ज्य पदार्थ है –
(a) फसलो के डठल
(b) कीटनाशक
(c) नाइट्रोजन
(d) मुत्र के नमुने
उत्तर :
(d) मुत्र के नमुने।

प्रश्न 37.
चिकित्सकीय वर्ज्य पदार्श के उदाहरण है –
(a) खून के नमुने
(b) बल्व
(c) बैटरी
(d) रही कागज
उत्तर :
(a) खून के नमुने।

प्रश्न 38.
वर्ज्य पदार्थ के बढ़ने का प्रमुख कारण क्या है ?
(a) जल की वृद्धि
(b) भूमि की कमी
(c) जनसंख्या की वृद्धि
(d) चिकित्सा की कमी
उत्तर :
(c) जनसंख्या की वृद्धि।

प्रश्न 39.
कोयला, घूल एवं राख आदि के कण उत्पन्न होते है –
(a) पेट्रोरसायन उद्योगों द्वारा
(b) वस्व निर्माण उद्योगो द्वारा
(c) खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों द्वारा
(d) ताप उर्जा संयत्रों द्वारा
उत्तर :
(d) ताप उर्जा संयत्रों द्वारा।

प्रश्न 40.
निम्नलिखित में से कौन वर्ज्य पदार्थ जैविक रूप से विघटित होता है –
(a) मवेशियो का गोबर तथा फसलो का अवशेष
(b) उपयोग में लाई गई सुइयाँ
(c) टूटे-फूटे काँच
(d) रेडियो सक्रिया वर्ज्य पदार्थ
उत्तर :
(a) मवेशियो का गोबर तथा फसलो का अवशेष।

प्रश्न 41.
तीब्र दहनशील पदार्थ है –
(a) पेट्रोलियम
(b) कीटनाशक
(c) प्लास्टिक
(d) रंग
उत्तर :
(a) पेट्रोलियम।

प्रश्न 42.
किस क्रांति के बाद जनसंख्या वृद्धि में अनियंत्रित होने लगा –
(a) कृषि
(b) सैनिक
(c) दुगध
(d) यातायात
उत्तर :
(a) कृषि।

प्रश्न 43.
वर्ज्य पदार्थ को कितने भागों में बांटा गया है ?
(a) चार
(b) तीन
(c) पाँच
(d) दो
उत्तर :
(c) पाँच।

प्रश्न 44.
घरातल पर वर्ज्य पदार्थ तरल रूप में पाये जाते है –
(a) प्रदूषित जल
(b) कड़ा करकट
(c) लकड़ी के डठंल
(d) राख
उत्तर :
(a) प्रदूषित जल।

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प्रश्न 45.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल की कौन नदी अधिक वर्ज्य पदार्थ से प्रदूशित हो रही है –
(a) दामोदर
(b) अजय
(c) हुगली
(d) रूपनारायण
उत्तर :
(c) हुगली।

प्रश्न 46.
अपशिष्ट से तात्पर्य है –
(a) खतरनाक कचरा
(b) बचे हुए पदार्थ
(c) हानिकारक पदार्थ
(d) बने हुए खनिज तेल का पदार्थ
उत्तर :
(b) बचे हुए पदार्थ

प्रश्न 47.
शहरों एवं गाँवों से उत्सर्जित हानिकारक ठोस पदार्थ कहलाते हैं –
(a) गैसीय अपशिष्ट
(b) ठोस अपशिष्ट
(c) निराविषी अपशिष्ट
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) ठोस अपशिष्ट

प्रश्न 48.
पुनर्चक्रण से तात्पर्य है –
(a) अपशिष्टों को संसाधन में बदलना
(b) अपशिष्टों का विनाश
(c) अपशिष्ट संरक्षण
(d) अपशिष्ट का परिहार
उत्तर :
(a) अपशिशें को संसाधन में बदलना

प्रश्न 49.
स्कबर क्या है ?
(a) एक प्रकार का कड़ा बश
(b) एक प्रकार का जैव पदार्थ
(c) एक पदार्थ का रसायन जो सल्फर का विनाश एवं अम्लीय वर्षा रोकता है
(d) स्क्रबर कठोरतम उत्सर्जित पदार्थ है
उत्तर :
(c) एक पदार्थ का रसायन जो सल्फर का विनाश एवं अम्लीय वर्षा रोकता है

प्रश्न 50.
वे अपशिष्ट जो थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ प्रकृति में पड़े रहते हैं, इन्हें क्या कहते हैं ?
(a) ठोस अपशिष्ट
(b) तरल अपशिष्ट
(c) गैसीय अपशिष्ट
(d) विषैले पदार्थ
उत्तर :
(a) ठोस अपशिष्ट

प्रश्न 51.
निम्नलिखित में कौन पदार्थ गैर विघटित होने वाला पदार्थ है ?
(a) खाद्य के अवशेष
(b) सूती वस्व
(c) लकड़ी के समान
(d) बोतल
उत्तर :
(d) बोतल

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प्रश्न 52.
दूषित गैसों के निपटान की विधि क्या है ?
(a) अपशिष्ट का अलगाव
(b) भूमि भराव
(c) जैव खाद निर्माण
(d) स्क्रवर विधि
उत्तर :
(d) स्क्रवर विधि

प्रश्न 53.
किसी भी प्रकार के विकास के लिए आवश्यक बुराई है –
(a) उद्योग
(b) कृषि
(c) व्यापार
(d) अपशिष्ट
उत्तर :
(d) अपशिष्ट

प्रश्न 54.
निम्नलिखित में से कौन घरेलू अपशिष्ट नहीं है –
(a) फटे कपड़ों के टुकड़े
(b) दूटे खिलौने
(c) पॉलिथीन बैग
(d) फसलों के डंठल
उत्तर :
(d) फसलों के डंठल

प्रश्न 55.
निम्नलिखित में से कौन हानिकारक घरेलू अपशिष्ट है –
(a) रसोई का कचरा
(b) खाली बोतलें
(c) फटे-पुराने कपड़े
(d) जली बैटरियाँ
उत्तर :
(a) रसोई का कचरा

प्रश्न 56.
उच्च स्तरीय रेडियोधर्मी अपशिष्टों का उत्सर्जन होता है –
(a) आवासीय क्षेत्रों से
(b) कृषि क्षेत्रों से
(c) अस्पतालों से
(d) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से
उत्तर :
(d) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से

प्रश्न 57.
अधिक मात्रा में द्रव अपशिष्टों के उत्सर्जन के स्रोत हैं –
(a) अस्पताल
(b) रसोई के कचरे
(c) औद्योगिक बहि :स्राव
(d) व्यावसायिक केन्द्र
उत्तर :
(c) औद्योगिक बहि :साव

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. जो वर्ज्य पदार्थ विघटित होकर पानी, मिट्टी और वायु में समाहित हो जाता है उसे ………… कहा जाता है।
उत्तर : जैविक अपशिष्ट ।

2. ‘फ्लाई-ऐश’ का उपयोग …………उद्योग में होता है।
उत्तर : अपशिष्ट।

3. कपड़ों के विघटन से हानिकारक …………गैस है।
उत्तर : CH4

4. सबसे खतरनाक …………वर्ज्य पदार्थ हैं।
उत्तर : रेडियो सक्रिय।

5. जैव पदार्थों द्वारा कृत्रिम कम्पोस्टिंग को …………कहते हैं।
उत्तर : जैव खाद निर्माण।

6. …………को जलाने से ‘फ्लाई ऐश’ प्राप्त होती है।
उत्तर : कोयला।

7. जैव पदार्थों द्वारा कृत्रिम कम्पोस्टिंग को …………कहते हैं।
उत्तर : जैव खाद निर्माण।

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8. उपग्रह जो निश्चित कक्ष में ध्रुवों के सहारे स्थापित होते हैं ………..कहलाते हैं।
उत्तर : मौसम उपग्रह।

9. इलेक्ट्रानिक अपशिष्ट को संक्षेप में …………कहते हैं।
उत्तर : ‘E ‘ – waste

10. आधुनिक पर्यावरण कानून …………के अनुसार के प्लास्टिक बैग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं।
उत्तर : 25 मायक्रोंस या 025 एम. एम

11. औद्योगिक अपशिष्ट का एक उदाहरण …………है।
उत्तर : फ्लाई ऐश।

12. आवश्यकताओं को पूर्ति करने वाली वस्तुओं को …………के रूप में रखा गया है।
उत्तर : संसाधन।

13. …………..वर्ज्य पदार्थ के पुनर्चक्रण की कोई विधि नहीं है।
उत्तर : इलेक्ट्रॉनिक।

14. …………..में जल निकासी की उचित व्यवस्था से भूस्खलन रोका जा सकता है।
उत्तर : पहाड़ी भाग।

15. प्रर्दुघण को रोकने के लिए प्लास्टिक के स्थान पर …………..का प्रयोग करना चाहिए।
उत्तर : जूट बैग।

16. प्राकृतिक रूप से विघटित होनेवाले वर्ज्य पदार्थ …………..है।
उत्तर : फलों एवं सब्जियों के छिलके।

17. …………… उपचार विधि के अन्तर्गत जल में मिले ठोस वर्ज्य पदार्थ को निकाला जाता है।
उत्तर : प्राथमिक।

18. …………..वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते है।
उत्तर : गीले ब्रश।

19. हुगली नदी में …………..से ठोस एवं द्रव वर्ज्य पदार्थों, अधिक प्राप्त है।
उत्तर : जूट मिलो।

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20. …………..प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली उष्मा से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है।
उत्तर : दहन।

21. …………..विधि के अन्तर्गत जल को शुद्ध करके पुनर्व्यवहार योगय बनाया जाता है।
उत्तर : तृतीय उपथार।

22. विभिन्न उद्योगो से निकलने वाले वर्ज्य पदार्थ को …………..कहते है।
उत्तर : वायु प्रदूषण।

23. …………..द्वारा पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।
उत्तर : अपशिष्ट प्रबन्धन।

24. जीवाश्म ईंथन के रूप में …………..प्रयोग किया जाता है।
उत्तर : कोयला।

25. लोहे के चादर को …………..वर्ष के वाद सड़ गल कर समाप्त होता है।
उत्तर : 50 से 100

26. सबसे कम समय में वर्ज्य पदार्थ …………..है।
उत्तर : खाद्य।

27. कपड़ो के विघटन से हानिकारक ……………गैस है।
उत्तर : CH4 (मिथेन) ।

28. घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में वर्ज्य पदार्थ के भरने से ……………की कमी हो जाती है।
उत्तर : भूमि।

29. पर्वतीय क्षेत्रों में ……………से वर्ज्य पदार्थ की उत्पत्ति होती है।
उत्तर : भूस्खलन।

30. अस्पताल के प्रयोगशाला उत्सर्जी पदार्थों को ……………वर्ज्य पदार्थ में रखा गया है।
उत्तर : चिकित्सकीय।

31. सबसे खतरनाक ……………वर्ज्य पदार्थ है।
उत्तर : रेडियो सक्रिय (Radio Active)।

32. औषधीय अपशिष्ट के दो उदाहरण हैं (क)…………… (ख)……………
उत्तर : (क) सिरिज (ख) सूइयाँ।

33. आणविक अपशिष्ट अधिकतर ……………रूप में होता है।
उत्तर : गैसीय

34. अपशिश्टों के पुनर्चक्रण या उनको पुन: उपयोग योगय बनाने को ……………कहते हैं।
उत्तर : परिहार

35. …………..होने वाले पदार्थों से जैविक खाद का निर्माण किया जा सकता है।
उत्तर : विघटित।

36. आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करने वाली वस्तुओं को …………..की क्षेणी में रखा जाता है। (संसाधन/कचरा)
उत्तर : कचरा।

37. जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग से………….. होता है। (वायु प्रदूषण/जल प्रदूषण)
उत्तर : वायु प्रदूषण।

38. …………..कचरा हानिकारक घरेलू अपशिष्ट है। (प्लास्टिक / इलेक्ट्रॉनिक)
उत्तर : प्लास्टिक।

39. अपशिष्टों के हानिकारक प्रभावों को …………..द्वारा कम किया जाता है। (प्रक्रम/एकत्रीकरण)
उत्तर : एकत्रीकरण।

40. अपशिष्टों के…………..द्वारा संचित संसाधनों को संरक्षण प्राप्त हो सकता है। (निस्तारण/पुनर्व्यवहार)
उत्तर : निस्तारण।

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41. ……..का उपयोग जैविक खाद के निर्माण में किया जा सकता है। (फलों एवं सब्जियों के छिलकों/प्लास्टिक)
उत्तर : फलों एवं सब्जियों के छिलकों।

42. भूमि का भराव …………..अपशिष्ट प्रबन्धन का आम तरीका है। (तरल/ठोस)
उत्तर : ठोस।

43. जल के द्वितीयक उपचार में ………….. अपशिष्टों को निकाला जाता है। (प्रथामिक/द्वितीय)
उत्तर : प्रथामिक।

सही कथन के आगे ‘True’ एवं गलत कथन के आगे ‘False’ लिखिए : (1 Mark)

1. जैव विघटित अपशिष्टों का संश्लेषण बैक्टीरिया के द्वारा नहीं किया जा सकता है।
उत्तर : False

2. भूमि पर वर्ज्य पदार्थ के अपघटन होने से ह्यूम (Humus) का निर्माण होता है।
उत्तर : True

3. सभी प्रकार के वर्ज्य पदार्थ हानिकारक होते हैं।
उत्तर : False

4. रेडियो धर्मी अपशिष्ट का पुन: प्रयोग हो सकता है।
उत्तर : False

5. भरटकरण वर्ज्य पदार्थों को हटाने की एक प्रक्रिया है।
उत्तर : True

6. भूमि पर वर्ज्य पदार्थ के अपघटन होने से ह्यूमस का निर्माण होता है।
उत्तर : True

7. ठोस, द्रव्य तथा गैस वर्ज्य पदार्थो से होता है।
उत्तर : False

8. रेडियो तरंगे आयनमण्डल से होकर लौटती हैं।
उत्तर : True

9. पर्वती मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा कम होती है।
उत्तर : True

10. विघटित होने वाले अपशिष्ट जो जल, वायु एवं मिट्टी में मिल जाते हैं ‘जैवविघटित अपशिष्ट’ कहलाते हैं।
उत्तर : True

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11. नगरीय क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक अपशिष्टों का उत्सर्जन होता है।
उत्तर : False

12. प्लास्टिक एक जैवरूप से विधटित होने वाला अपशिष्ट नहीं है।
उत्तर : True

13. मध्याह्नकालीन भोजन परियोजना में कम अपशिष्टों का उत्पादन होता है।
उत्तर : False

14. सभी प्रकार के अपशिष्ट पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं।
उत्तर : True

15. औद्योगिकीकरण एवं आधुनिकीकरण से ही वर्ज्य पदार्थ की उत्पत्ति हुई है।
उत्तर : True

16. रेडियो धर्मी वर्ज्य पदार्थ लाभदायक होता है।
उत्तर : False

17. ठोस कचरो के इक्कठा होने से संक्रामक रोग नहीं होते है।
उत्तर : False

18. प्लास्टिक पुनर्चक्रीय वर्ज्य पदार्थ है।
उत्तर : True

19. विद्युत कचरा हानिकारक होते है।
उत्तर : False

20. दहन से वर्ज्य पदार्थो के आयत में 50%-60% की कमी हो जाती है।
उत्तर : False

21. दामोदर नदी में ठोस एवं द्रव वर्ज्य पदार्थ की मात्रा में वृद्धि हो रही है।
उत्तर : True

22. गैसो में मिश्रित ठोस कण गीले होते है।
उत्तर : True

23. जैविक वर्ज्य पदार्थ को एक गढ्दे में डालकर ढक देना चाहिए।
उत्तर : True

24. ठोस, द्रव एवं गैस वर्ज्य पदार्थों से हैजा होता है।
उत्तर : False

25. विद्युत उपकरण वर्ज्य पदार्थ पुनर्चक्रण की कोई विधि नहीं है।
उत्तर : True

26. प्रदूषित वायु से फेपड़ो में केंसर आदि विभिन्न रोग हो सकते है।
उत्तर : True

27. अपशिष्ट प्रबन्धन वातावरण को नष्ट करने की विधि है।
उत्तर : True

28. अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका सबसे अधिक है।
उत्तर : True

29. हुगली नदी में कीलीफार्म जीवाणु का स्तर बढ़ रहा है।
उत्तर : True

30. घरेलू भोजन, कचरा, प्लास्टिक के सामान, काटन आदि निराविषी अपशिष्ट हैं।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

31. CO2 कार्बन मोनोआक्साइड. शल्फर डाइ आक्साइड आदि गैसीय अपशिष्ट हैं।
उत्तर : True

32. पेस्टीसाइड के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
उत्तर : False

33. Landfil अपशिष्ट प्रबंधन नहीं है।
उत्तर : False

34. घरेलू अपशिष्ट हमेशा ठोस होता है।
उत्तर : False

35. लोहा के अपशिष्ट से लौह निर्माण को पुनर्चक्रण करना कहा जाता है।
उत्तर : False

36. भूमि भराव में ठोस पदार्थों का उपयोग नहीं होता है।
उत्तर : False

37. अपशिष्ट की मात्रा तीव्र गति से बढ़ रही है, अत: अपशिष्ट प्रबंधन आवश्यक हो गया है।
उत्तर : True

38. अपसिष्टों के हानिकारक प्रभाव भूमि, जल तथा वायु तीनों पर ही दिखाई दे रहे हैं।
उत्तर : True

39. औद्योगिक बहिं :स्राव से गैसीय अपशिष्ट उत्पन्न होते हैं।
उत्तर : True

40. इलेक्ट्रॉनिक कचरा हानिकारक घरेलू अपशिष्ट है।
उत्तर : False

41. कीटनाशक जल, एवं मिट्टी तीनों को ही प्रदूषित करते हैं।
उत्तर : True

42. रेडियोधर्मी अपशिष्ट हानिकारक होते हैं।
उत्तर : False

43. ठोस कचरों के एकत्रित होकर सड़ने से संक्रामक रोग फैलाने वाले कीटाणुओं का विकास होता है।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) फ्रिज (i) तरल वर्ज्य पदार्थ
(b) टम्यूमर (ii) ठोस, द्रव तथा गैस
(c) मोबिल (iii) कृषिजात वर्ज्य पदार्थ
(d) औद्योगिक वर्ज्य पदार्थ (iv) चिकित्सकीय वर्ज्य पदार्थ
(e) गैर विषैली (v) इलेक्ट्रॉनिक वर्ज्य पदार्थ

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) फ्रिज (v) इलेक्ट्रॉनिक वर्ज्य पदार्थ
(b) टम्यूमर (iv) चिकित्सकीय वर्ज्य पदार्थ
(c) मोबिल (i) तरल वर्ज्य पदार्थ
(d) औद्योगिक वर्ज्य पदार्थ (ii) ठोस, द्रव तथा गैस
(e) गैर विषैली (iii) कृषिजात वर्ज्य पदार्थ

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) घरेलू अपशिष्ट (i) औद्योगिक बहि:स्राव
(b) तरल अपशिष्ट (ii) रेडियोधर्मी अपशिष्ट
(c) अति हानिकारक अपशिष्ट (iii) जानवरों का मल-मूत्र
(d) कृष्जितात अपशिष्ट (iv) आर्सेनिक
(e) पुनर्चक्रीय अपशिष्ट (v) रद्दी कागज

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) घरेलू अपशिष्ट (v) रद्दी कागज
(b) तरल अपशिष्ट (i) औद्योगिक बहि:स्राव
(c) अति हानिकारक अपशिष्ट (ii) रेडियोधर्मी अपशिष्ट
(d) कृष्जितात अपशिष्ट (iii) जानवरों का मल-मूत्र
(e) पुनर्चक्रीय अपशिष्ट (iv) आर्सेनिक

 

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 Geography Book Solutions Chapter 3 जलमण्डल offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 Geography Chapter 3 Question Answer – जलमण्डल

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
सामुद्रिक मछलियों का प्रमुख खाद्य क्या है ?
उत्तर :
प्लैंकटन नामक सूक्ष्म जीवाणु।

प्रश्न 2.
कान्तीय समुद्र में किस प्रकार की धारायें उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर :
गर्म धाराएं।
प्रश्न 3.
अंध महासागर के एक धारा का नाम बताओ।
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम, फाकलैंड धारा।

प्रश्न 4.
भूमण्डलीय तापन में किस हरित गृह गैस की भूमिका सर्वोच्च रहती है ?
उत्तर :
कार्बन डाई आक्साइ।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 5.
विभिन्न महासागरीय धराओं के अनुवर्ती प्रवाह के कारण उत्पन्न-जल के चक्रीय गति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
धारा चक्र।

प्रश्न 6.
जब उष्ण एवं शीतल सागरीय धाराएँ आपस में मिलती हैं तो किस प्रकार की मौसमी दशा विद्यमान रहती है।
उत्तर :
कुहरा छाया रहता है।

प्रश्न 7.
सागरीय लहरों की उत्पत्ति में सागर की उनमुक्तता क्या है ?
उत्तर :
बाह्य कारणों जैसे अत्यधिक वर्षा, वाष्षीकरण, हिम के पिघलने, विशाल नदियों के सागर में मिलने वाली वृद्धि या कमी आदि के कारण सागर के जल तल में उत्पन्न असमानता के कारण सागरीय लहरों की उत्पत्ति को सागर की उन्मुक्तता के कारण लहरों की उत्पत्ति कहते हैं।

प्रश्न 8.
प्राथमिक ज्वार उत्पन्न होने का मुख्य कारण क्या है ?
उत्तर :
चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल।

प्रश्न 9.
दो उच्च ज्वारों के बीच समय का अन्तर कितना रहता है ?
उत्तर :
24 घंटे 52 मिनट।

प्रश्न 10.
एल-निनो का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
क्रिसमस के बच्चे की धारा।

प्रश्न 11.
किस महासागर में बेंगुला धारा पायी जाती है ?
उत्तर :
अटलाण्टिक महासागर में।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 12.
ज्वार-भाटा का मुख्य कारक क्या है ?
उत्तर :
चन्द्रमा का गुरूत्वाकर्षण बल।

प्रश्न 13.
चन्द्रकला के किस चरण में लघु ज्वार उत्पन्न होता है ?
उत्तर :
दोनों पक्षों के अष्टमी के दिन।

प्रश्न 14.
किसी स्थान पर एक दिन में कितने बार ज्वार-भाटा आते हैं ?
उत्तर :
दो बार।

प्रश्न 15.
हुगली नदी के मुहाने पर उत्पन्न होनेवाली ज्वारीय भित्ति का क्या नाम है ?
उत्तर :
बान।

प्रश्न 16.
लहरों से महासागरीय जल में किस प्रकार गति होती है ?
उत्तर :
दोलनात्मक गति (Oscillodory movement)।

प्रश्न 17.
किस गति के कारण सागरीय जल में आवर्ती चढ़ाव तथा उतार होता है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा (Tides)।

प्रश्न 18.
किन हवाओं के प्रभाव से क्यूरोशियो की धारा पूर्व दिशा की ओर मुड़ जाती है ?
उत्तर :
पछुआ हवाओं।

प्रश्न 19.
उत्तरी गोलार्द्ध में महासागरीय धाराएं किस दिशा में चक्र बनाती है ?
उत्तर :
घड़ीवत (Clock-wise)।

प्रश्न 20.
तेज गति से चलनेवाली धाराओं को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
स्रोत या स्ट्रीम (Stream)।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 21.
किस धारा के प्रभाव से कनाडा के पश्चिमी तट पर वर्षा होती है ?
उत्तर :
क्यूरोशियो की शाखा उत्तरी प्रशांत प्रवाह के प्रभाव से।

प्रश्न 22.
किन धाराओं के ऊपर से गुजड़नेवाली हवाएं शुष्क होती हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धाराओं के ऊपर से गुजरनेवाली हवाएं।

प्रश्न 23.
न्यूफाउण्डलैण्ड के समीप किन धाराओं के मिलने के कारण कुहरा उत्पत्न होता है ?
उत्तर :
गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलने से।

प्रश्न 24.
किस धारा के प्रभाव से ब्रिटिश द्वीप समूह के बंदरगाह साल भर खुले रहते हैं ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा के प्रभाव से।

प्रश्न 25.
कम ऊँचे ज्वार की उत्पत्ति किन सागरो में होती है ?
उत्तर :
खुले तथा गहरे सागरों में।

प्रश्न 26.
पृथ्वी के किस भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है ?
उत्तर :
जल भाग पर।

प्रश्न 27.
वियुति की स्थिति किस दिन होती है ?
उत्तर :
पूर्णमासी के दिन।

प्रश्न 28.
युति की स्थिति किस दिन रहती है ?
उत्तर :
अमावस्या के दिन।

प्रश्न 29.
किस दिन सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण की स्थिति में होते हैं ?
उत्तर :
शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन।

प्रश्न 30.
किस दिन चन्द्रमा का ज्वारोत्पादक बल सबसे कम रहता है ?
उत्तर :
अपभू (Apogeam) की स्थिति या शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन ।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 31.
महासागर से सम्बन्धित विज्ञान की एक शाखा को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
समुद्री विज्ञान (Oceanograph)।

प्रश्न 32.
पृथ्वी पर जलमण्डल का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
36.1 करोड़ वर्ग कि॰मी० पर जलमण्डल है।

प्रश्न 33.
घरातल के कितने प्रतिशत भाग पर जल का विस्तार है ?
उत्तर :
70.78 % भाग पर।

प्रश्न 34.
पृथ्वी के किस गोलार्द्ध में जलमण्डल का विस्तार अधिक है ?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध में (60 %)।

प्रश्न 35.
प्रशान्त महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
16.55 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 36.
अटलांटिक महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
8.21 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 37.
हिन्द महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
7.36 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 38.
आर्कटिक महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
1.40 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 39.
पृथ्वी पर सबसे बड़ा महासागर कौन है ?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर।

प्रश्न 40.
धरातल पर स्थित सबसे छोटा महासागर कौन है ?
उत्तर :
आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean)।

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प्रश्न 41.
प्रशान्त महासागर में कितने सागर हैं ?
उत्तर :
90 सागर है।

प्रश्न 42.
भारत या हिन्द महासागर में कितने सागर हैं ?
उत्तर :
पाँच सागर है।

प्रश्न 43.
सात सागर किन महासागरो में जाकर मिलते हैं ?
उत्तर :
अटलांटिक तथा आर्कटिक महासागर में।

प्रश्न 44.
विश्व का सबसे गहरा गर्त कौन सा है ?
उत्तर :
मैरियाना खडु (Mariana’s Trench) (11033 मी॰)।

प्रश्न 45.
विश्व का दूसरा सबसे गहरा गर्त कौन सा है ?
उत्तर :
मिंडानाओ गर्भ (Mindano Deep) (10400 मी॰)।

प्रश्न 46.
सागरीय सतह के क्रमिक उतार-चढ़ाव को क्या कहते है ?
उत्तर :
लहर (Waves)।

प्रश्न 47.
किस नियम के अनुसार महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बायीं ओर बहती है ?
उत्तर :
फेरल के नियमानुसार।

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प्रश्न 48.
महासागरों में मन्द गति से चलने वाली धाराओं को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्रवाह (Drift) कहते हैं।

प्रश्न 49.
चन्द्रमा तथा पृथ्वी के निकटतम स्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अपभू स्थिति (Perigee)।

प्रश्न 50.
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर कौन सी धाराएँ बहती हैं ?
उत्तर :
गर्म धाराएँ (Warm currents)।

प्रश्न 51.
विपरीत भू-मध्य रेखीय धारा की उत्पत्ति किस कारण होती है ?
उत्तर :
भू-परिभ्रमण के कारण।

प्रश्न 52.
किस धारा को हम्बोल्ट धारा कहते है ?
उत्तर :
पीरू की धारा को।

प्रश्न 53.
शीतल दीवार (Cold Wall) किस महासागर में पायी जाती है ?
उत्तर :
अंध महासागर में।

प्रश्न 54.
सारगैसो सागर की स्थिति कहाँ है ?
उत्तर :
सारगैसो सागर की स्थिति 10° N से 45° N के मध्य है।

प्रश्न 55.
किस धारा को पछुआँ प्रवाह (West Wind Drift) कहते हैं ?
उत्तर :
उत्तरी अटलांटिक प्रवाह।

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प्रश्न 56.
बेंगुला धारा किस मरूस्थल को कठोरता प्रदान करती है ?
उत्तर :
कालाहारी मरूस्थल को।

प्रश्न 57.
अफ्रीका के सहारा मरूस्थल पर किस धारा का प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
कनारी की ठण्डी धारा।

प्रश्न 58.
कालाहारी का मरूस्थल किस धारा के समीप स्थित है ?
उत्तर :
बेंगुला की ठण्डी धारा के समीप।

प्रश्न 59.
पीरू की ठण्डी धारा किस मरूस्थल को प्रभावित करता है ?
उत्तर :
अटकामा का मरूस्थल को।

प्रश्न 60.
किन जल धाराओं के मिलने से जापान के समीप कुहरा उत्पन्न होता है ?
उत्तर :
क्यूरेशियों की गर्म तथा क्यूराईल की ठण्डी धारा के कारण।

प्रश्न 61.
औसत प्रति 1000 कि०ग्रा० समुद्र जल में लवण की मात्रा कितनी पाई जाती है ?
उत्तर :
35 कि०ग्रा०।

प्रश्न 62.
किन प्रदेशो में सागरीय जल में लवणता अधिक पाए जाते हैं ?
उत्तर :
उष्ण प्रदेशो में।

प्रश्न 63.
प्रत्यक्ष ज्वार पर किस शक्ति का प्रभाव अधिक पड़ता है ?
उत्तर :
गुरुत्वाकर्षण शक्ति का।

प्रश्न 64.
अप्रत्यक्ष ज्वार किस बल द्वारा अधिक प्रभावित होता है ?
उत्तर :
केन्द्रापसारी ढाल द्वारा।

प्रश्न 65.
चन्द्रमा कितने दिनों में पृथ्वी की परिक्रमा पूरा करता है ?
उत्तर :
28 दिन में।

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प्रश्न 66.
किसी स्थान पर प्रथम ज्वार के कितनी देर बाद दूसरा ज्वार आता है ?
उत्तर :
12 घण्टे 26 मिनट बाद।

प्रश्न 67.
भारत के किस नदी में ज्वारीय भित्ति बनता है ?
उत्तर :
हुगली नदी में।

प्रश्न 68.
विश्व की सबसे बड़ी मीठी जल की झील कौन सा है ?
उत्तर :
सुपीरियर झील (U.S.A.)।

प्रश्न 69.
भारत के मीठी पानी झील का उदाहरण दें।
उत्तर :
उलर और डल आदि।

प्रश्न 70.
मृत सागर और कैस्पियन सागर कैसा झील है ?
उत्तर :
खारे जल वाली झील।

प्रश्न 71.
भारत के खारे पानी की झील कौन सा है ?
उत्तर :
सांभर झील।

प्रश्न 72.
भारत का एक ज्वारीय नदी कौन सी है ?
उत्तर :
हुगली नदी।

प्रश्न 73.
कौन सी गर्म धारा जापान के तटीय भाग को गर्म रखता है ?
उत्तर :
क्यूरेशियो की गर्म धारा।

प्रश्न 74.
लहरों में जल की गति कैसी होती है ?
उत्तर :
लहरो में जल केवल ऊपर-नीचे गिरता है।

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प्रश्न 75.
चन्द्रमा तथा पृथ्वी के बीच अधिकतम दूरी की स्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अपभू स्थिति (Apogem)।

प्रश्न 76.
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर कौन सी धाराएँ प्रवाहित होती है ?
उत्तर :
गर्म धाराएँ (Warm Current)।

प्रश्न 77.
महासागरों में स्रोत धारा किस कारण से उत्पत्र होते है ?
उत्तर :
तापक्रम एवं घनत्व के कारण।

प्रश्न 78.
प्रवाह की उत्पत्ति के क्या कारण है ?
उत्तर :
प्रचलित पवन द्वारा इसकी उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 79.
मानसूनी हवाओं का प्रभाव किस महासागर की धाराओं पर पड़ता है ?
उत्तर :
उत्तरी हिन्द महासागर की धारा पर।

प्रश्न 80.
संसार की अधिकांश धाराएँ किस पवन का अनुसरण करती है ?
उत्तर :
स्थायी पवनों की दिशा का।

प्रश्न 81.
ध्रुवीय प्रदेशों में उत्पत्र होने वाली धाराओं के नाम लिखो।
उत्तर :
लैब्रोडोर तथा क्यूराइली की ठण्डी धारा।

प्रश्न 82.
ध्रुवों के समीप जल का घनत्व कम होने का क्या कारण है ?
उत्तर :
हिम का पिघलना।

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प्रश्न 83.
संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे कौन सी धारा बहती है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम की धारा।

प्रश्न 84.
चीन तट के सहारे कौन सी धारा बहती है ?
उत्तर :
क्यूरोशियो की धारा।

प्रश्न 85.
प्राचीन काल में यूरोप से अमेरिका आने वाले जहाज किस धारा का अनुसरण करते थे ?
उत्तर :
उत्तरी भू-मध्यरेखीय धारा।

प्रश्न 86.
ब्रिटिश द्वीप-समूह एवं नार्वे के बन्दरगाह किस धारा के प्रभाव से वर्ष भर व्यापार के लिए खुले रहते है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा के प्रभाव से।

प्रश्न 87.
पूर्वी कनाडा के बन्दरगाह किस धारा के प्रभाव से बन्द रहते हैं ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की ठण्डी धारा।

प्रश्न 88.
जब किसी खाड़ी में ज्वार-भाटा के फलस्वरूप क्षैतिज धाराएँ उत्पन्न हो जाती है तब इन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर :
ज्वारीय धाराएँ (Tidal Current)।

प्रश्न 89.
ज्वार भाटा के लिए चन्द्रमा की कौन सी शक्तियाँ कार्य करती है ?
उत्तर :
गुरुत्वाकर्षण तथा केन्द्रापसारी शक्ति।

प्रश्न 90.
चन्द्रमा के दूरस्थ भाग में कौन सी शक्ति प्रभावशाली होती है ?
उत्तर :
केन्द्रापसारी शक्ति।

प्रश्न 91.
प्रत्येक स्थान पर दो बार ज्वार एवं दो बार भाटा किस कारण से आता है ?
उत्तर :
पृथ्वी के आवर्तन के कारण।

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प्रश्न 92.
ज्वार के आने के कितनी देर बाद भाटा आता है ?
उत्तर :
6 घण्टे 13 मिनट के बाद।

प्रश्न 93.
सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी के एक सीधी रेखा में स्थित होने की स्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
युति-वियुति या सिजिगी (Syzygy)!

प्रश्न 94.
सिजिगी का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
एक ही रेखा में स्थित तीन पिण्ड।

प्रश्न 95.
युति की स्थिति में चन्द्रमा की क्या स्थिति होती है ?
उत्तर :
सूर्य और पृथ्वी के बीच में रहता है।

प्रश्न 96.
युति की स्थिति किस दिन होती है ?
उत्तर :
अमावस्या के दिन।

प्रश्न 97.
खुले तथा गहरे सागरों में ज्वार की ऊँचाई कितनी होती है ?
उत्तर :
60° से 90 सेण्टीमीटर।

प्रश्न 98.
उथले तथा सँकरे समुद्रों में ज्वार की ऊँचाई कितनी होती है ?
उत्तर :
3 से 5 मीटर तक होती है।

प्रश्न 99.
पृथ्वी के परिभ्रमण का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
वार्षिक गति!

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प्रश्न 100.
ध्रुवीय भागों में वाष्पीकरण कम होता है या अधिक ?
उत्तर :
कम होता है।

प्रश्न 101.
मछली का प्रधान भोजन क्या है ?
उत्तर :
प्लैंकटन।

प्रश्न 102.
महासागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्रवाह।

प्रश्न 103.
पहले दिन की अपेक्षा दूसरे दिन ज्वार-भाटा कितने देर बाद आता है ?
उत्तर :
24 घ० 52 मिनट।

प्रश्न 104.
तापमान में भिन्नता से समुद्री जल-तल पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
महासागरीय धारएँ उत्पन्न होती है।

प्रश्न 105.
जल का खारापन समुद्री जल कैसे प्रभावित करता है ?
उत्तर :
सागरीय लवणता से सागरीय जल का घनत्व प्रभावित होता है। अधिक लवणता वाले भाग में जल का घनत्व अधिक हो जायेगा जिस कारम जल नीचे बैठता है, जबकि कम लवणता वाले भाग में जल का घनत्व अपेक्षाकृत कम होगा जिस कारण कम खारे भाग से जल अधिक खारे भाग की ओर गतिशील होता है।

प्रश्न 106.
अपोजी की स्थिति में चन्द्रमा और पृथ्वी के बीच क्या सम्बन्ध रहता है ?
उत्तर :
अपोजी (Apogee) उपभू स्थिति में चन्द्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है।

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प्रश्न 107.
ज्वार-भाटा का मानव जीवन पर दो प्रभावों का नाम लिखो।
उत्तर :
(i) ज्वारीय लहर के साथ मछुए गहरे सागर में मछली पकड़ने चले जाते है और लहर के साथ वापस आ जाते है।
(ii) ज्वारीय लहरों की चपेट में आकर कभी कभी जलयान डूब जाते है, जिससे धन जन का नुकसान होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
अपभू स्थिति क्या है ?
उत्तर :
अपभू स्थिति : चन्द्रमा अपनी अण्डाकार कक्ष के सहारे पृथ्वी की परिक्रमा करता है। अतः पृथ्वी व चन्द्रमा के बीच की दूरी सदा समान नहीं रहती है। जब चन्द्रमा पृथ्वी के निकटतम होता है, तो उसे चन्द्रमा कीअपभू स्थिति कहते हैं।

प्रश्न 2.
मत्स्य तट (Fishing Bank) क्या है ?
उत्तर :
मत्स्य तट (Fishing Bank) : स्वच्छ जल एवं प्लेंकटन की उपस्थिति के कारण जिस भाग से मछली पकड़ी जाती है, उस क्षेत्र को मत्स्म तट या क्षेत्र कहा जाता है। जैसे – डोगर बैंक, ग्रैण्ड बैंक।

प्रश्न 3.
कयाल क्या है ?
उत्तर :
क्याल शब्द मल्यालम भाषा से लिया गया है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित लैगून झील को कयाल कहा जाता है।

प्रश्न 4.
गाइर क्या है ?
उत्तर :
महासागरीय धाराओं के वृहद चक्रीय प्रवाह को गाइर कहते हैं। इसकी उत्पत्ति भूमण्डलीय पवन प्रतिरूप तथा कोरियोलिस बल के कारण होती है। इनकी दिशा उत्तरीय गोलार्द्ध में घड़ीवत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अघड़ीवत होती है।

प्रश्न 5.
ग्रैण्ड बैंक (Grand Bank) क्या है ?
उत्तर :
ग्रैण्ड बैंक : गर्म और ठण्डी जलधारा के मिलने से ग्रैण्ड बैंक पर प्लैंकटन पायी जाती है। यहां उत्तम बन्दरगाह विकसित है। जंगलों से मत्स्य व्यापार को सहायता मिलती है। साथ ही ठण्डी जलवायु में मछलियाँ लम्बे समय तक संरक्षित रहती हैं। यही कारण है कि प्रैण्ड बैंक मछलियों को पकड़ने के लिए काफी मशहूर है। इस प्रकार समशीतोष्ण जलवायु, उथला समुद्र एवं प्लैंकटन की उपलब्धता से ग्रैण्ड बैंक मुख्य मत्स्यागार है।

प्रश्न 6.
भूमि स्खलन (Land fall) क्या है ?
उत्तर :
भूमि स्खलन (Land Fall) :- चट्टानों के चूर्ण के सामूहिक स्थान्तरण की विधियो में भूमि स्खलन सबसे महत्वपूर्ण विधि है।

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प्रश्न 7.
महासागरीय धारा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
समुद्री धारायें (Ocean Currents) : सागरीय जल के एक तल नियमित रूप से निश्चित दिशा में प्रवाहित होने वाली गति को महासागरीय धारा कहते हैं।

प्रश्न 8.
सागरीय लहरों से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
लहरें या तंरगें (Waves) : सागरीय जल के क्रमिक उत्थान और पतन के लहर कहते हैं। अथवा महासागरीय सतह की दौलायमान गति को तरंग कहते है।

प्रश्न 9.
भूमध्यरेखीय भाग में सागरीय जल की सतह ध्रुवीय भाग की सतह की अपेक्षा ऊँची क्यों रहती है ?
उत्तर :
भूमध्यरेखीय भाग में अधिक गर्मी पड़ने से वहाँ का जल गर्म होकर फैलता रहता है तथा हल्का होकर ऊपर उठता रहता है। इसके विपरीत धुवीय भाग में अधिक ठण्डक पड़ने के कारण वहाँ का जल ठण्डा होकर सिकुड़ता है तथा भारी होकर नीचे बैठता रहता है। इस प्रकार भूमध्यरेखीय भाग के जल की सतह ध्रुवीय भाग के जल की सतह की अपेक्षा ऊँची हो जाती है।

प्रश्न 10.
स्रोत (Stream) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
स्रोत (Stream) : तेज गति से चलने वाली धाराओं को स्रोत या स्ट्रीम कहते हैं। ये मुख्यतः तापक्रम व घनत्व के अन्तर के कारण उत्पन्न होती है तथा कम चौड़ी होती है। जैसे गल्फस्ट्रीम तथा क्यूरोशियो की गर्म धाराएँ।

प्रश्न 11.
ठण्डी-धाराओं के समीप महादेशीय भाग में मरूस्थल क्यों पाए जाते हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धाराओं के ऊपर से जाने वाली वायु ठण्डी हो जाती है जिससे उनमें जलवाष्प ग्रहण करने की शक्ति घट जाती है । इन शुष्क हावाओं के प्रभाव से तटीय भागों में वर्षा नहीं होती और उनके समीप मरूस्थल पाये जाते हैं।

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प्रश्न 12.
ज्वार-भाटा से आप क्या समझते है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा (Tide-Ebb) : सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण है । भू-पतल ठोस रहने के कारण आकर्षिक नहीं होता परन्तु समुद्र का जल तरल होने के कारण ऊपर उठ जाता है। समुद्र में जल के ऊपर उठने को ज्वार (Tide) तथा नीचे गिरने को भाटा (Ebb) कहते हैं।

प्रश्न 13.
कोरियोलिस बल क्या है ?
उत्तर :
कोरियोलिस बल (Cariolis force) : पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कोरियोलिस फोर्स उत्पन्न होता है। इसके कारण पवनें व समुद्री धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बाँयी ओर मुड़ जाती हैं।

प्रश्न 14.
डोगर बैंक क्या है ?
उत्तर :
डोगर बैंक : यह उत्तरी सागर में स्थित हैं जो मछली पकड़ने का प्रमुख क्षेत्र है। स्वच्छ जल होने के कारण अत्यधिक मछलियाँ पकड़ी जाती है।

प्रश्न 15.
भाटा से क्या समझते हो ?
उत्तर :
भाटा (Ebb) : ज्वार का जब कोई स्थान चन्द्रमा के सामने से हट जाता है तब समुद्र का जल उतरता है। इसे भाटा (Ebb) कहते हैं।

प्रश्न 16.
लघुज्वार कब होता है ?
उत्तर :
प्रत्येक महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष के सप्तमी या अष्टमी को लघुज्वार (Neap Tide) आता है।

प्रश्न 17.
दीर्घ ज्वार कब होता हैं ?
उत्तर :
प्रत्येक महीना में पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन सूर्य व चन्द्रमा की सम्मिलित शक्ति पृथ्वी पर कार्य करती हैं जिससे ज्वार सामान्य ज्वार से ऊँचा होता है।

प्रश्न 18.
ज्वारीय अंतर क्या हैं ?
उत्तर :
ज्वारीय अंतर (Tidal range) : महासागरों में उच्च ज्वार तथा लघु ज्वार के ऊँचाई के ज्वारीय अन्तर को ज्वारीय अंतर कहते हैं।

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प्रश्न 19.
पेरीजियन ज्वार से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जब चन्द्रमा भमण पथ पर पृथ्वी से सबसे नजदीक (Perigee) विन्दु पर आ जाता है तो उसकी ज्वार उत्पादक शक्ति वढ़ जाती है। इसके प्रभाव से High Tide से भी 20 % बड़ा ज्वार आता है। इसे ही Perigeon Tides कहते हैं।

प्रश्न 20.
दो मुख्य या दो गौण ज्वारों में कितने समय का अन्तर होता है ?
उत्तर :
दो प्रधान और गौण ज्वारों के बीच 24 घंटे 52 मिनट समय का अन्तर होता है।

प्रश्न 21.
ज्वारीय ऊर्जा क्या है ?
उत्तर :
ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy) : जो ऊर्जा ज्वार-भाटे के कारण जल स्तर के ऊपर उठने तथा नीचे गिरने से उत्पन्न की जाती है उसको ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं। ज्वारीय ऊर्जा के केन्द्र फ्रांस, जापान एवं रूस में स्थापित किये गये हैं।

प्रश्न 22.
ज्वारीय धारा क्या है ?
उत्तर :
जब किसी खाड़ी में ज्वार-भाटा के फलस्वरूप क्षैतिज धाराएँ उत्पन्न हो जाती है तब इन्हें ज्वारीय धाराएँ (Tidal currents) कहते हैं।

प्रश्न 23.
मुख्य ज्वार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
मुख्य ज्वार (Primary tide) : पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अतः इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार (Direct tide) या प्रारम्भिक या मुख्य ज्वार (Primary tide) कहते हैं।

प्रश्न 24.
गौण ज्वार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
गौण ज्वार (Indirect Tide) : पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हट कर ऊपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार या गौण ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 25.
दीर्घ या वृहद् ज्वार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दीर्घ या वृहद् ज्वार (Spring Tide) : जब सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो सूर्य और चन्द्रमा की सम्मिलित शक्ति से समुद्री जल अर्थात ज्वार ऊँचा उठ जाता है। इसे दीर्घ ज्वार कहते है। यह स्थिति महिने में दो बार पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

प्रश्न 26.
लघु ज्वार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
लघु ज्वार (Neap Tide) : शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन चन्द्रमा और सूर्य पृथ्वी के साथ परस्पर समकोण की स्थिति में होते हैं। अतः उनकी ज्वार-उत्पादक शक्तियाँ एक-दूसरे की विपरीत दिशा में कार्य करती हैं जिनसे ज्वार सामान्य ज्वार से कम ऊँचा तथा भाटा सामान्य भाटा से कम नीचा रहते हैं। इसे लघु ज्वार (Neap Tide) कहते हैं।

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प्रश्न 27.
पृथ्वी का सबसे गहरा स्थान कौन है ?
उत्तर :
मारियाना खड्ड विश्व का सबसे गहरा बिन्दु है। इसकी गहराई लगभग 28,018.55 मीटर है। यह प्रशान्त महासागर में स्थित है।

प्रश्न 28.
मृत सागर में डूबना सम्भव क्यों नहीं है ?
उत्तर :
मृतसागर में पानी की लवणता अत्यधिक है। इसकी लवणता लगभग 238 % है। अत: अत्यधिक लवणता के कारण मृतसागर का घनत्व बहुत ज्यादा है। अत: इसमें डूबना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 29.
सबसे बड़े एवं सबसे छोटे महाद्विपीय मग्न तट कौन है ?
उत्तर :
दक्षिण पूर्वी एशिया का इण्डोनेशिया और द० चीन का सम्मिलित महाद्वीपीय मग्न तट विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीपीय मग्न तट है। इसे सुण्डा मग्न तट कहते हैं। अफ्रीका महाद्वीप में महाद्वीपीय मग्न तटों का सबसे कम विकास हुआ है।

प्रश्न 30.
सह-ज्वारीय रेखा क्या है ?
उत्तर :
सह-ज्वारीय रेखा (Co-tidal line) : जिन स्थानो पर एक ही समय ज्वार-भाटा आता है उनको मिलाने वाले रेखा को सम ज्वारीय रेखा कहते है।

प्रश्न 31.
संसार का सबसे ऊँचा ज्वार कहाँ आता है ?
उत्तर :
उत्तरी अमेरिका के नोवास्कोशिया के निकट फण्डी की खाड़ी में ज्वार की ऊँचाई संसार से सबसे अधिक (21 मीटर) तक ऊँची होती है।

प्रश्न 32.
एगार क्या है ?
उत्तर :
एगर (Agar) : ज्वार का जल जब नदियों के मुहाने में प्रवेश करता है तो ज्वारीय जल की दीवार बन जाती है। इसे ज्वारीय भित्ति या एगर कहते हैं।

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प्रश्न 33.
ज्वारीय अन्तर क्या है ?
उत्तर :
ज्वारीय अन्तर (Tidal Range) : समुद्र में आने वाले ऊच्च ज्वार तथा निम्न ज्वार के ऊँचाई के अन्तर को ज्वारीय अन्तर (Tidal Range) कहते हैं।

प्रश्न 34.
फैदम क्या है ?
उत्तर :
फैदम (Fadam) : यह समुद्री जल की गहराई नापने का स्केल है। एक फैदम फीट के बराबार होता है।

प्रश्न 35.
जलमण्डल (Hydrosphere) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी पर विस्तृत सभी प्राकृतिक जलाशयों जैसे – महासागर, सागर, नदियाँ इत्यादि को सम्मिलित रूप से जलमण्डल (Hydrosphere) कहते हैं।

प्रश्न 36.
सागर (Sea) किसे कहते है ?
उत्तर :
महासागरों का वह सीमावर्ती क्षेत्र जो मुख्य महासागरीय क्षेत्र से पृथक हो, परन्तु जिसका किसी दिशा में महासागर के जल से सम्पर्क हो सागर (Sea) कहलाता है।

प्रश्न 37.
महासागरीय गर्त एवं खड्ड में क्या अन्तर है ?
उत्तर :
महासागरीय गर्त अधिक विस्तृत किन्तु कम गहरे होते हैं जबकि खड्ड कम विस्तृत किन्तु अधिक संकरे एवं गहरे होते हैं।

प्रश्न 38.
खाड़ी (Bay) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
समुद्र का वह भाग जो स्थल में त्रिभुज के आकार में प्रवेश किया है और समुद्र की ओर चौड़ा मुख रहता है उसे खाड़ी (Bay) कहते हैं।

प्रश्न 39.
दीर्घ ज्वार कब आता है ?
उत्तर :
यह स्थिति महिने में दो बार, पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

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प्रश्न 40.
लघु ज्वार कब आता है ?
उत्तर :
यह ज्वार प्रत्येक महीने में दो बार, शुक्ल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी के दिन आता है।

प्रश्न 41.
सम ज्वारीय रेखा (Co-tidal line) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सम ज्वारीय रेखा (Co-tidal line) : जिन स्थानो पर एक ही समय ज्वार-भाटा आता है उनको मिलाने वाले रेखा को सम ज्वारीय रेखा कहते हैं। इन रेखाओं से ज्वार की लहरों की प्रगति ज्ञात होती है।

प्रश्न 42.
झील (Lake) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
झील (Lake) : स्थल खण्ड से घिरे हुए वृहद प्राकृतिक जलाशय को झील कहते है।

प्रश्न 43.
भारत का एक कृत्रिम झील का उदाहरण दें।
उत्तर :
भारत में भाखरा बाँध का जलाशय गोविन्द सागर एक कृत्रिम झील है।

प्रश्न 44.
लहरों की उत्पत्ति का क्या कारण है ?
उत्तर :
लहरों की उत्पत्ति सागरीय पृष्ठ पर प्रवाहित होने वाले पवन के दबाव तथा घर्षण से होती है।

प्रश्न 45.
धाराओं की उत्पत्ति में किन प्राकृतिक तत्वों का योगदान होता है ?
उत्तर :
धाराओं की उत्पत्ति में तापमान, लवणता, पृथ्वी की घूर्णन तथा प्रचलित पवन आदि विभिन्न कारको का योगदान रहता है।

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प्रश्न 46.
गर्म धारा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
भूमध्यरेखा से धुवों की ओर बहने वाली धाराओं का जल अपने आस-पास के समुद्रों के जल की अपेक्षा गर्म होता है, अतः इन्हें गर्म धाराएँ (Warm Currents) कहते हैं।

प्रश्न 47.
ठण्डी धाराएँ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
धुवों से भूमध्यरेखा की ओर चलने वाली धाराओं को ठण्डी धाराएँ (Cold currents) कहते हैं।

प्रश्न 48.
कोरियोलिस बल का समुद्री धारा पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
पृथ्वी की परिक्रमण गति के कारण उत्पत्न कोरियोलिस बल के कारण धाराओं की दिशा में झुकाव हो जाता है। यह झुकाव उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिने हाथ की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाएँ हाथ की ओर होता है।

प्रश्न 49.
निम्न अक्षांशों में गर्म एवं शीतल धाराएँ किस ओर चलती है ?
उत्तर :
निम्न अक्षांशों में गर्म धाराएँ पूर्वी तट एवं शीतल धाराएँ पश्चिमी तट की ओर चलती है।

प्रश्न 50.
पूर्वी ग्रीनलैण्ड धारा की उत्पत्ति का क्या कारण है ?
उत्तर :
पूर्वी ग्रीनलैण्ड धारा की उत्पत्ति का कारण हिम के पिघलने से प्राप्त जल के कारण जलस्तर का ऊँचा उठना ही है।

प्रश्न 51.
उत्तरी हिन्द महासागर में चलनेवाली धाराओं पर किसका प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
मानसूनी हवाओं के दिशा परिवर्तन का प्रभाव।

प्रश्न 52.
युति की स्थिति में क्या होता है ?
उत्तर :
युति की स्थिति में सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा स्थित होता है।

प्रश्न 53.
वियुति की स्थिति में क्या होता है ?
उत्तर :
वियुति की स्थिति में सूर्य और चन्द्रमा के बीच में पृथ्वी स्थित रहती है।

प्रश्न 54.
यदि चन्द्रमा स्थिर होता तो क्या होता ?
उत्तर :
यदि चन्द्रमा स्थिर होता तो सागर तल पर प्रत्येक 24 घण्टे में दो बार ज्वार तथा दो बार भाटा आते तथा प्रतिदिन एक निश्चित समय पर ही ज्वार-भाटा आते।

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प्रश्न 55.
प्रवाह क्या है ?
उत्तर :
जब पवन वेग से प्रभावित होकर सागर के सतह का जल आगे की ओर अग्रसर होता है तो उसे प्रवाह कहते है।

प्रश्न 56.
विशालधारा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जब सागर का विशाल जलराशी तीव्र गति से निध्चित दिशा में प्रभावित होती है। तो इसे विशाल धारा कहते है।

प्रश्न 57.
ओपोजी किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जब चन्द्रमा पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर रहता है । तो ज्वार उत्पन्न करने की शक्ति कम होती है। इस स्थिति में ज्वार की ऊँचाई सामान्य ज्वार से कम होती है। इसे (Apogee) कहते है।

प्रश्न 58.
एक दीन में कितनी बार पृथ्वी के किसी स्थान पर उच्च और निम्न ज्वार-भाटा दिखाई पड़ता है ?
उत्तर :
एक दीन में दो बार उच्च और दो बार निम्न ज्वार दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 59.
उत्तरी गोलार्द्ध में महासागरीय धाराएँ किस दिशा में चक्र बनाती हैं ?
उत्तर :
उत्तरी गोलार्द्ध में महासागरीय धराएँ दाहिने हाथ की ओर चक्र बनाती है।

प्रश्न 60.
किन धाराओं के ऊपर से गुजरनेवाली हवाएँ शुष्क होती हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धारओं के ऊपर से गुजरनेवाली हवाएँ शुष्क होती है।

प्रश्न 61.
न्यूफाउण्डसैण्ड के समीप किन धाराओं के मिलने के कारण कुहरा उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
न्यूफाउण्डसैण्ड के पास गल्फसट्रीम की गर्म जलधारा तथा लैब्रोडोर की ठण्डी जलधारा मिलती है. जिसके कारण कुहरा उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 62.
किस धारा के प्रभाव से ब्रिटिश द्वीप समूह के बन्दरगाह साल बर खुले रहते हैं ?
उत्तर :
गलफ्लस्ट्रीम की गर्मधारा के प्रभाव से ब्रिटिश द्वीप समुह का बन्दरगाह साल भर खुले रहते है।

प्रश्न 63.
कम ऊँचे ज्वार की उत्पत्ति कन सागरों में होती है ?
उत्तर :
खुले सागरो मे कम ऊँचे ज्वार उत्पन्न होते है।

प्रश्न 64.
पृथ्वी के किस भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है ?
उत्तर :
पृथ्वी के जल भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है।

प्रश्न 65.
युति की स्थिति किस दिन रहती है ?
उत्तर :
यह स्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

प्रश्न 66.
किस दिन सूर्य चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण की स्थिति में होते हैं ?
उत्तर :
यह स्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, शुकल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी को होती है।

प्रश्न 67.
किस दिन चन्द्रमा का ज्वारोत्पादक बल सबसे कम रहता है ?
उत्तर :
यह सिस्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, शुकल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी को होती है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार की सागरीय धाराएँ क्या हैं ?
उत्तर :
सागरीय धाराएँ : गति, विस्तार एवं सीमा के आधार पर महासागरीय धाराओं को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है।
(i) ड्रिफ्ट (Drift) : जल की ऊपरी सतह पर मन्द गति से बहनेवाली जलधाराएँ ड्रिफ्ट कहलाती हैं। इनकी गति तथा प्रभाव क्षेत्र निश्चित नहीं होता। उत्तरी अन्ध महासागरीय ड्रिफ्ट इसका उदाहरण है।
(ii) धारा (Current) : इसकी प्रवाह गति तीव्र तथा निश्चित होती है। ये उष्ण तथा शीतल, दोनों प्रकार की होती है। क्यूरोसियो इसका उदाहरण है।
(iii) प्रवाह (Stream) : निश्चित दिशा में तीव्र गति से बहनेवाली जलधाराएँ स्ट्रीम कहलाती हैं। इनकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। गल्फस्ट्रीम उष्ण जलधारा इसका उदाहरण है।

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प्रश्न 2.
ज्वार-भाटा से क्या हानियाँ है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा हित के साथ अनेक प्रकार से अनहित भी करता है। ज्वार-भाटा से निम्नलिखित हानियाँ हाती हैं
(i) ज्वार-भाटा कभी-कभी सागर में बेगवान तरंगों को जन्म देता है जिसे जलयान नष्ट हो जाते हैं जिनसे उन्हें भारी क्षति उठानी पड़ती है।
(ii) ज्वार-भाटा अनेक तटों पर मिट्टी, बालू तथा कूड़ा-कर्कट आदि लाकर एकत्र कर देता है जिससे बन्दरगाहों के विकास में बाधा पड़ती है। सागर तटो को जलयानों के आगमन के लिए स्वच्छ बनाने के लिए भारी व्यय करना पड़ता है।
(iii) ऊँची-ऊँची ज्वारीय तरंगें तथा ज्वार भित्तियाँ नौकओं को पलट कर डुबो देने में सक्षम होती हैं जिसके कारण अपार धन-जन की हानि होती है।

प्रश्न 3.
सारगासो समुद्र का निर्माण कैसे हुआ ?
उत्तर :
सारगैसो सागर की उत्पत्ति : उत्तरी अटलांटिक महासागर के मध्य में धाराओं का एक गोलाकार क्रम उत्पव्न होता जाता है। इसके मध्य में शांत एवं स्थिर जल पाया जाता है। शांत एवं स्थिर जल वाला यह क्षेत्र ‘सारगैसो सागर’ कहलाती है। इस क्षेत्र में कूड़ा-कर्कट तथा घास भी एकत्र हो जाती है। इस क्षेत्र में उच्च तापमान के कारण घास स्वत: ही उग जाती है। पृथ्वी पर अन्यत्र ऐसा विचित्र सागर कही नहीं पाया जाता है।

प्रश्न 4.
महाद्वीपीय मग्न तट क्या है ?
उत्तर :
महाद्वीपीय मग्न तट : महाद्वीपों के सागर तट पर जल में डुबे हुए भाग महाद्वीपीय मग्न तट कहलाते हैं। ये महाद्वीपों के तट पर स्थित उथले जलमग्न मैदान होते हैं। महाद्वीपों के तटों पर जल में डूबी हुई भूमि मग्नतट बन जाती है। महाद्वीपीय मग्न तट सागर के छिछले मैदान होते हैं। जिनकी गहराई 180 मीटर तक होती है। परंतु कहीं-कहीं ये 2,000 मी॰ तक गहरे होते हैं। महाद्वीपीय मग्न तटों की औसत चौड़ाई 50 किमी० होती है। इनका ढाल 3° से अधिक नहीं होती है। विद्वान इनकी उत्पत्ति के सम्बंध में एकमत नहीं है।

प्रश्न 5.
महाद्वीपीय मग्न ढाल क्या है ?
उत्तर :
महाद्वीपीय मग्न ढाल (Continental Slope) : महाद्वीपीय मग्न तट सागरीय नितल का जो ढालू भाग आता है, उसे महाद्वीपीय मग्नढाल कहते हैं। महाद्वीपीय मग्नढाल के प्रारम्भ होते ही समुद्र की गहराई बढ़ जाती है। इनकी गहराई 180 मीटर से 3,600 मीटर तक होती है। महाद्वीपों के बाह्य जलमग्न छोर ही मर्नढाल कहलाते हैं। इनका ढाल 3.5 से 20° तक होता है। महाद्वीपीय मग्नढालों की रचना में भंश क्रियाओं ने विशेष भूमिका निभायी है। मग्नढालों में अनेक गर्त, बीजाकार घाटियाँ, कन्दराएँ तथा खडु पाये जाते हैं। इन पर तलछटों का जमाव देखने को भी नहीं मिलता।

प्रश्न 6.
न्यूफाउण्डलैण्ड तट के पास मत्स्य पालन क्षेत्र क्यों पाये जाते हैं ?
अथवा
जापान एवं न्यूफाउण्डलैण्ड मछली पकड़ने के लिए विश्व प्रसिद्ध क्यों है ?
उत्तर :
न्यूफाउण्डलैण्ड के पास गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा तथा लैब्रोडोर की ठण्डी जलधारा एक साथ मिलती हैं। अत: गर्म और ठण्डी धाराओं के मिलने से यहाँ पर मछलियों के खाद्य पदार्थ प्लैंकटन नामक काई उत्पन्न होती है।
इसके अलावा तटों पर घने जंगल हैं जो Fish Catch के लिए आवश्यक सामान उपलब्ध कराते हैं। तट के कटे-फटे होने के कारण यहाँ पर उत्तम बन्दरगाहों का विकास हुआ है। उच्च अक्षांशों में स्थित होने के कारण यहाँ की जलवायु ठंडी है जो मछलियों को लम्बे समय तक संरक्षित रखने में मददगार हैं।

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प्रश्न 7.
न्यूफाउण्डलैंण्ड तट के पास सदैव कुहासा क्यों छाया रहता है ?
उत्तर :
न्यफाउण्डलैण्ड तट के पास गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा तथा लैब्रोडोर की ठण्डी जलधारा मिलती है । लैब्रोडोर की धारा अपने साथ विशाल हिम शिलाओं को बहाकर लाती है। इस प्रकार गर्म और ठण्डी जलधाराओं के मिलन स्थल होने के कारण यहां पूरे वर्ष भर घना कुहरा छाया रहता है।

प्रश्न 8.
शीतल दिवाल क्या है ?
उत्तर :
संयुक्त राजय अमेरिका के पूर्वी तट पर शीतल पछुवा हवाओं के प्रभाव से केप हेटरास के पास गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा पूर्व की ओर मुड़कर तट से दूर चली जाती है। गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा उच्च तापमान की जलराशि उत्तर की ओर लाती है। उत्तरी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी तट पर न्यूफाउलण्डलेण्ड के पास की ठण्डी जलधारा का जल रहता है जिसका तापमान 8° \mathrm{C} से 11° \mathrm{C} रहता है। दो विभिन्न तापक्रम एवं खारेपन की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है, अतः शीतल दीवाल का निर्माण करती है।

प्रश्न 9.
किस समुद्र में ‘शीतल दिवाल’ पायी जाती है ?
उत्तर :
शीतल-दिवाल उत्तरी अंध महासागर में पायी जाती है। उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट पर लैबोडोर की ठण्डी जलधारा एवं गल्मस्ट्रीम की गर्म जलधाराएँ आपस में मिलती हैं। दो विभिन्न तापक्कम एवं खारेपन की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है और शीतल-दिवाल का निर्माण करती है। गर्म एवं ठण्डी धाराओं के प्रभाव से उत्तरी अमेरिका के उत्तरी पूर्वी तट पर पूरे वर्ष कुहरे की पतली घनीपर्त बन जाते हैं। इसी लैब्बोडोर की ठण्डी जलधारा को न्यूयार्क के पास शीतल-दिवाल कहते हैं।

प्रश्न 10.
जापान तट को कौन धारा गर्म रखती है ?
उत्तर :
क्यूरोशियो धारा जापान के पूर्वी तट को गर्म रखती है। उत्तरी तथा दक्षिणी भूमध्यरेखीय धाराओं का जल मिलने के बाद चीन सागर में एक नई जलधारा उत्पन्न होती है जो चीन सागर से होते हुए जापान के शिकाको द्वीप तक पहुँचती है। यह चीन और जापान की तटीय जलवायु को गर्म रखती है।

प्रश्न 11.
अगुलहास की गर्म धारा कैसे पैदा होती है ?
उत्तर :
अगुलहास की गर्म धारा : अफ्रीका के दक्षिण में अगुलहास अन्तरीप से पछुआ पवनों के प्रवाह द्वारा पूर्व की ओर एक धारा चलने लगती है। इसी धारा को अगुलहास की गर्म जल धारा कहते हैं।

प्रश्न 12.
खाड़ी की धारा क्यों पैदा होती है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम 8- मैक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होने के कारण इसे खाड़ी की धारा कहा गया है। मैक्सिको की खाड़ी में मिसिसिपि – मिसौरी नदियाँ अपार जलराशि छोड़ती है। यह जल राशि उत्तरी भूमध्यरेखा की धारा के साथ उत्तर की ओर अग्रसर होती है किन्तु पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कनाडा के टैलीफैक्स बन्दरगाह के दक्षिण में पूर्व की ओर मुड़ जाती है जिसे पछुआ हवाएँ बहाकर अपने साथ ले जाती है। इसकी उत्पत्ति में पहुआ पवनों का अधिक योगदान है।

प्रश्न 13.
लैब्रोडोर धारा क्यों पैदा होती है ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की धारा : आर्कटिक महासागर का जल वेफिन की खाड़ी से उत्तरी-पूर्वी धुवीय पवनों के प्रभाव से लैब्रोडोर तट के सहारे दक्षिण की ओर अप्रसर होता है, इसे लैब्रोडोर की धारा कहते हैं। यह न्यूफाउण्डलैण्ड के पास खाड़ी की गर्मधारा से मिलकर घना कुहरा उत्पन्न करती है।

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प्रश्न 14.
खाड़ी की धारा का प्रभाव क्या है ?
उत्तर :
खाड़ी (गल्फस्ट्रीम) की धारा का प्रभाव :

  1. ब्रिटिश द्वीप समूह, नार्वे, U.S.A. के मध्य-पूर्वी तट का तापमान ऊँचा रखती है।
  2. अमेरिका के पूर्वी तट पर वर्षा होती है।
  3. न्यूफाउण्डलैण्ड के पास लैब्रोडोर की ठण्डी धारा से मिलकर कुहासा उत्पन्न करती है।
  4. पश्चिमी यूरोप के तट पर स्थित बन्दरगाह वर्ष भर व्यापार के लिए खुले रहते हैं।
  5. जलयान संयुक्त राज्य अमेरिका से इस धारा की सहायता से आसानी से यूरोप पहुँच जाते हैं।
  6. यह लैब्रोडोर की ठण्डी धारा से मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड तट पर अपार मात्रा में प्लैंकटन उत्पन्न करती है जिससे यहाँ स्थित प्रैण्ड बैंक विश्व प्रसिद्ध मछली पकड़ने का केन्द्र है।

प्रश्न 15.
लैब्रोडोर की धारा का प्रभाव क्या है ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की धारा का प्रभाव :

  1. इस धारा के कारण कनाडा के पूर्वी तट का तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है।
  2. यह धारा गल्फस्ट्रीम के साथ मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड के पास घना कुहरा उत्पन्न करती है।
  3. इस ठण्डी धारा के प्रभाव से कनाडा से पूर्वी तट के बन्दरगाह शीतकाल में जम जाते हैं।
  4. इस धारा के विशाल आइसबर्ग बहकर आते हैं जिससे टकराकर कभी-कभी जलयान क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
  5. यह धारा खाड़ी की गर्म धारा से मिलकर मछलियों का खाद्य प्लैंकटन उत्पन्न करती है जिससे न्यूफाउण्डलैण्ड मछली पकड़ने का विश्व का प्रमुख केन्द्र है।

प्रश्न 16.
मूंगे की महान दिवार क्या है ?
उत्तर :
मूंगे की महान दिवार : यह लम्बी और मोटी मूंगी के कीड़ों की अस्थियों द्वारा निर्मित दिवार है जो आस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित है । यह आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के सहारे उत्तर-दक्षिण तक विस्तृत है। यह निरन्तर समुद्र की ओर विस्तृत हो रही है।

प्रश्न 17.
मृत सागर में डुबना सम्भव क्यों नहीं है ?
उत्तर :
मृतसागर के पानी की लवणता अत्यधिक है। इसकी लवणता लगभग 238 \% है। अत्यधिक लवणता के कारण मृत सागर का घनत्व बहुत ज्यादा है। अत: इसमें डूबना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 18.
महाद्वीपीय मग्न तट के महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
महाद्वीपीय मग्न तट का महत्व :

  1. यहाँ पर मत्स्य आखेट उन्नत अवस्था में पाया जाता है।
  2. महाद्वीपीय मग्न तटों पर पहुँच कर ज्वारीय लहरें ऊँची हो जाती हैं जिससे बड़े जलयान आसानी से बन्दरगाहों तक पहुँच जाते हैं।
  3. दुनिया के अधिकांश तेल क्षेत्र मग्न तटों पर पाये जाते हैं।
  4. विश्व प्रसिद्ध मछली पकड़ने के केन्द्र ग्रैण्ड बैंक जलमग्न तटों पर स्थित हैं।
  5. जलमग्न तटों पर शंख, सीप, मोती तथा अन्य उपयोगी पदार्थ मिलते हैं। अत: ये आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 19.
गभ्भीर सागरीय मैदान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
गम्भीर सागरीय मैदान : महाद्वीपीय मग्नढाल के पश्चात सागर नितल में जो समतल क्षेत्र पाये जाते हैं, उन्हें ग्भोर सागरीय मैदान कहा जाता है। गम्भीर सागरीय मैदान सागर नितल के 76 % भाग पर फैले हुए हैं। ये मैदान ऊँचेनीचे तथा क्रमिक ढाल वाले होते हैं। ये मैदानी क्षेत्र जीव-जन्तुओं के अवशेषों, वनस्पति पदार्थों तथा कॉप मिट्टी से भरे हुए हांते हैं। संसार का सबसे बड़ा तथा चौड़ा सागरीय मैदान कनाडा बेसिन है।

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प्रश्न 20.
महासागरीय गर्त किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सागर नितल में यत्र-तत्र पायी जाने वाली सागर द्रोणियाँ महासागरीय गर्त कहलाती हैं। ये गर्त ढालू तथा संकरे होते हैं। महासागरीय गर्त उन सागर तटों के निकट पाये जाते हैं जहाँ भूचालों का प्रकोप अधिक रहता है। इनकी गहराई 19 किलोमीटर तक होती है। संसार का सबसे गहरा महासागरीय गर्त फिलीपाइन के निकट स्क्वायर गर्त है जो 35,400 फुट गहरा है।

प्रश्न 21.
विभिन्न प्रकार की सागरीय धाराएँ क्या हैं ?
उत्तर :
सागरीय धाराएँ : गति, विस्तार एव सीमा के आधार पर महासागरीय धाराओं को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है।

  1. ड्रिफ्ट (Drift): जल की ऊपरी सतह पर मन्द गति से बहनेवाली जलधाराएँ ड्रिफ्ट कहलाती हैं। इनकी गति तथा प्रभाव क्षेत्र निश्चित नहीं होता। उत्तरी अन्ध महासागरीय ड़िफ्ट इसका उदाहरण है।
  2. धारा (Current) : इनकी प्रवाह गति तीव तथा निश्चित होती है। ये उष्ण तथा शीतल, दोनों प्रकार की होती है। वयूरोसियो इसका उदाहरण है।
  3. प्रवाह (Stream) : निश्चित दिशा में तीव्र गति से बहनेवाली जलधाराएँ स्ट्रीम कहलाती हैं। इनकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। गल्फस्ट्रीम उष्ण जलधारा इसका उदाहरण है।

प्रश्न 22.
ज्वार-भाटा क्या है?
उत्तर :
ज्वार-भाटा (Tides) : समुद्र का जल-स्तर सदा एक-सा नहीं रहता। यह नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठता है तथा नीचे उतरता है। समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार या उच्च ज्वार (High Tide or Flow Tide) तथा नीचे उतरने को भाटा या निम्न ज्वार (Low Tide or Ebb Tide) कहते हैं। समुद्री जल में यह उतार-चढ़ाव सूर्य तथा चन्द्रमा के आकर्षण के कारण होता है।

प्रश्न 23.
युति-वियुति क्या है ?
उत्तर :
युति-वियुति (Syzygy) : पूर्णिमा और अमावस्या को सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी तीनों एक सरल रेखा में होते है, अतः सम्मिलित गुरूत्वाकषर्ण से उच्चतम ज्वार का निर्माण होता है। इन दोनो दिनों ज्वार की ऊँचाई सामान्य दिनों की ऊँचाई से 20 % अधिक होती है। इस स्थिति को सिजियी कहते हैं।

प्रश्न 24.
ज्वारीय-उर्जा की संक्षेप में व्याख्या करो।
उत्तर :
ज्वारीय उर्जा (Tidal Energy) : वर्तमान समय में फ्रांस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिक ज्वारभाटे की शक्ति से जल विद्युत के उत्पादन में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। आने वाले समय में जल विद्युत के उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्रांति उत्पन्न हो जायेगी। भारतीय वैज्ञानिक भी इस दिशा में चमत्कारिक सफलता प्राप्त करने में प्रयासरत है।

प्रश्न 25.
लन्दन, न्यूयार्क से गर्म है, क्यों ?
उत्तर :
लन्दन के तटीय भाग से गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा प्रवाहित होती है, जबकि न्यूयार्क के समीप से लैबोडोर की ठण्डी जलधारा प्रवाहित होती है। यही कारण है लन्दन शहर न्यूयार्क की अपेक्षा भूमध्यरेखा से दूर होने पर भी गर्म है।

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प्रश्न 26.
ग्रैण्ड बैंक मत्स्य उद्योग के लिए अनुकूल क्यों है ?
उत्तर :
ग्रैण्ड बैंक और मत्स्य उद्योग : गर्म और ठण्डी जलधारा के मिलने से ग्रैण्ड बैंक पर प्लैंकटन पायी जाती है। यहां उत्तम बन्दरगाह विकसित है। जंगलों से मत्स्य व्यापार को सहायता मिलती है। साथ ही ठण्डी जलवायु में मछलियाँ लम्बे समय तक संरक्षित रहती हैं। यही कारण है कि ग्रैण्ड बैंक मछलियों को पकड़ने के लिए काफी मशहर है। इस प्रकार समशीतोष्ण जलवायु, उथला समुद्र एवं प्लैंकटन की उपलब्धता से ग्रैण्ड बैंक मुख्य मत्स्यागार है।

प्रश्न 27.
क्यूरोशियों को जापान की काली धारा क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
क्यूरोशियो की धारा दक्षिणी-पूर्वी एशिया के सहारे दक्षिण से उत्तर बहते हुए जापान तट पर पहुँचती है। यहाँ यह पछुआ पवनों के प्रभाव से पूर्व की ओर मुड़ जाती है। इसका रंग गहरा नीला होने के कारण इसे जापान की काली धारा कहते हैं।

प्रश्न 28.
कनारी की धारा का जल ठण्डा रहता है क्यों ?
उत्तर :
आर्कटिक ड्रिफ्ट सेन के पास दो भागों में विभक्त हो जाता है। इसके दक्षिणी भाग को कनारी की धारा कहते हैं। यह धारा धुवीय प्रदेश से आती है। अत: इसके आस-पास के समुद्रों का जल ठण्डा होता है। यही कारण है कि कनारी की धारा का जल ठण्डा होता है।

प्रश्न 29.
समुद्री धाराओं पर कोरिआलिस बल के प्रभाव को दर्शाओ।
उत्तर :
समुद्री धाराओं पर कोरिआलिस बल का प्रभाव : पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कोरियालिस बल उत्पन्न होता है जिसके प्रभाव से समुद्री धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में अपने मार्ग से दायें तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपने मार्ग से बायें मुड़ जाती हैं।

प्रश्न 30.
खाड़ी क्या है ?
उत्तर :
खाड़ी (Bay): समुद्र का वह भाग जो स्थलीय भाग में त्रिभुज के आकार में प्रवेश किया है और समुद्र की ओर चौड़ा मुख रहता है, उसे खाड़ी कहते हैं।

प्रश्न 31.
समुद्र की लवणता से क्या समझते हो ?
उत्तर :
समुद्र की लवणता (Salinity of Ocean) : नदियों का पानी स्थलीय भाग से होकर समुद्र में जाता रहता है जिससे समुद्र में नमक की मात्रा नदियों द्वारा पहुँचता रहता है। इसी कारण समुद्र की पानी खारा होता है। समुद्र में औसत 1000 gm जल में 35 gm नमक की मात्रा मिलती है। यही समुद्र जल में 35 % खारापन या लवणता है। समुद्र में लवणता का वितरण असमान पाया जाता है।

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प्रश्न 32.
डोगर बैंक से क्या समझते हो ?
उत्तर :
डोगर बैंक : यह उत्तरी सागर में स्थित है। यह मछली पकड़ने का मुख्य क्षेत्र है। यहाँ प्लैंकटन की उपलब्धता तथा जल की स्वच्छता के कारण अत्यधिक मछलियाँ पकड़ी जाती है।

प्रश्न 33.
अर्द्ध दैनिक ज्वार क्या है ?
उत्तर :
अर्द्ध दैनिक ज्वार : यह ज्वार साढ़े बारह घण्टे बाद उत्पन्न होता है। अंध महासागए में बिटिश द्वीप समूह के तटीय भागों में यह ज्वार प्रतिदिन दो बार आता है, अत: इसे अर्द्ध-दैनिक ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 34.
दैनिक ज्वार क्या है ?
उत्तर :
दैनिक ज्वार (Daily Tide) : इस प्रकार के ज्वार की उत्पत्ति चन्द्रमा की आर्कषण शक्ति के कारण होती है। यह पौने पच्चीस घण्टे के बाद आते हैं। इस प्रकार के ज्वार मैक्सको की खाड़ी और फिलीपाइन द्वीप समूह के आसपास दिन में केवल एक बार आते हैं, अतः इन्हें दैनिक ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 35.
मिश्रित ज्वार क्या है ?
उत्तर :
मिश्रित ज्वार : यह ज्वार अर्द्ध-दैनिक और दैनिक ज्वार का मिश्रित रूप होता है। यह दिन में दो बार ऊँचा उठता है और दो बार नीचे गिरता है। दोनों ज्वारों का मिला-जुला रूप होने के कारण यह मिश्रित ज्वार कहलाता है।

प्रश्न 36.
प्रधान एवं गौण ज्वार क्या है ?
अथवा
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष ज्वार क्या है ?
उत्तर :
मुख्य या प्रत्यक्ष ज्वार : चन्द्रमा के समाने धरातल पर अपकेन्द्रीय बल की अपेक्षा चन्द्रमा का आकर्षण अधिक होता है। अत: ज्वार उत्पन्न होता है। पृथ्वी का जो भाग चन्द्रमा या सूर्य के समाने होता है वहाँ जो ज्वार उत्पन्न होता है उसे मुख्य या प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।
गौण ज्वार या अप्रत्यक्ष ज्वार : धरातल का जो भाग चन्द्रमा के विपरीत दिशा में होता है वहां चन्द्रमा का अपकेन्द्रीय बल अधिक होता है। फलस्वरूप ज्वार की उत्पत्ति होती है। पृथ्वी के जिस भाग में मुख्य ज्वार होता है, उसके ठीक विपरीत वाले भाग में आने वाले ज्वार को गौण अथवा अपत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 37.
ज्वार-भाटा कैसे आते हैं ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा आने के कारण :
(i) पृथ्वी की दैनिक गति : पृथ्वी की दैनिक गति से केन्द्रपसारी बल उत्पन्न होता है जिससे समुद्रों का जल केन्द्र से दूर जाने की ओर अग्रसर होता है। परिणामस्वरूप ज्वार आता है।
(ii) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा आकर्षण : न्यूटन के नियस के अनुसार बह्माण्ड की सभी वस्तुएँ एक-दूसरे को अपनी ओर खींचती है। अत: चन्द्रमा का आकर्षण बल पृथ्वी पर अत्यधिक पड़ता है। जिसके परिणामस्वरूप ज्वार-भाटा आता है।

प्रश्न 38.
ज्वारीय भित्ति क्या है ?
उत्तर :
ज्वारीय भित्ति : जब समुद्री ज्वार का जल नदी के खुले व चौड़े मुहाने से इसकी संकरी घाटी में तीव्र गति से प्रवेश करता है, इसी के साथ नदी का जल समुद्र की ओर प्रवाहित होता रहता है। दोनों जल आपस में टकराकर एक ऊँची दीवार की तरह ऊँचाई ले लेते हैं। इसे ज्वारीय भित्ति कहते हैं।

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प्रश्न 39.
प्रधान ज्वार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रधान ज्वार : पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीध में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर चन्द्रमा तथा सूर्य के सम्मिलित गुरूत्वाकर्षण का प्रभाव पड़ता है। फलस्वरूप इन दोनों दिनों में उच्चतम ज्वार का निर्माण होता है जिसे उच्च ज्वार कहते हैं। इन दिनों वृहत् ज्वार की ऊँचाई सामान्य दिवसों की ऊँचाई से 20 प्रतिशत अधिक होती है। इस स्थिति को ‘सिजिभी’ कहते हैं।

प्रश्न 40.
दीर्घ ज्वार और लघु ज्वार में अंतर स्थापित करें ।
उत्तर :
दीर्घ ज्वार और लघु ज्वार में अंतर :

दीर्घ ज्वार (Spring Tide) लघु ज्वार (Neap Tide)
1. यह पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन आता है। 1. यह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में अष्टमी को आता है।
2. इसमें ज्वार अत्यधिक ऊँचा तथा भाटा अत्यधिक नीचा होता है। 2. इसमें ज्वार की ऊँचाई समान्य तथा भाटा की नीचाई भी सामान्य होती है।
3. इसमें सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी तीनों एक रेखा में होते हैं। 3. इसमें सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी तीनों समकोण में होते हैं।
4. इसमें सूर्य और चन्द्रमा के सम्मिलित आकर्षण बल से ज्वार आता है। 4. इसमें सूर्य और चन्द्रमा एक दूसरे के विपरीत आकर्षण बल डालते हैं।

प्रश्न 41.
मानव जीवन ज्वार से कैसे प्रभावित होता है ?
उत्तर :
ज्वार का मानव जीवन पर प्रभाव :

  1. ज्वार से छछ ट्ले बंदरगाहों के जल की ऊँचाई बढ़ जाती है।
  2. भाटा के द्वारा निदयों के मुहाने की सफाई हो जाती है।
  3. ज्वार द्वारा जल ग्युद्युत का उत्पादन किया जा रहा है।
  4. ज्वार से शीतोष्ण प्रदेशों में बंदरगाहों के निकट समुद्री जल जमने नहीं पाता।

प्रश्न 42.
हुगली नदी में ज्वारीय भित्ति की उत्पत्ति क्यों होती है ?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी के ज्वार की लहरे हुगली नदी के मुहाने में प्रवेश कर जाती है जबकि दूसरी ओर से नदी की धारा खाड़ी की ओर आती है। इस प्रकार खाड़ी की ज्वारीय लहरों और नदी की धारा के टकराने के कारण ज्वारीय भित्ति की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 43.
पश्चिमी यूरोप के बन्दरगाह वर्ष भर व्यापार के लिए खुले रहते हैं। क्यों ?
उत्तर :
पश्चिमी यूरोपीय समुद्र तट उच्च अक्षांशों में स्थित है परन्तु समीप से गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा बहती है। इस धारा के प्रभाव के कारण समुद्र का तापमान ऊँचा हो जाता है । यही कारण है कि पश्चिमी यूरोप के समुद्री बन्दरगाह वर्ष भर खुले रहते हैं जिससे इस क्षेत्र के बन्दरगाहों में वर्ष भर जहाज आते रहते हैं।

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प्रश्न 44.
सुयंक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी तट पश्चिमी तट की अपेक्षा गर्म रहता है क्यों ?
उत्तर :
संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा बहती है जो पूर्वी तट को गर्म कर देती है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट के किनारे से कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा बहती है, अतः पश्चिमी भाग ठण्डा रहता है।

प्रश्न 45.
कनारी की धारा का जल ठण्डा होता है क्यों ?
उत्तर :
उत्तरी महासागर का प्रवाह स्पेन के पास दो भागों में विभक्त हो जाता है। इसके दक्षिणी भाग को कनारी की धारा कहते हैं। यह धारा उत्तरी धुव से भूमध्य रेखा की ओर आती है। ध्रुवीय प्रदेशों के ठण्डे भाग से आने के कारणइसके आसपास के समुद्रों का जल अपेक्षाकृत ठण्डा होता है। यही कारण है कि कनारी की धारा का जल ठण्डा होता है।

प्रश्न 46.
पूर्वी कनाडा के बन्दरगाह व्यापार के उपयुक्त नहीं है क्यों ?
उत्तर :
पूर्वी कनाडा के पास से लैबोडोर की ठण्डी धारा बहती है। इस ठण्डी धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तटीय भाग का तापक्रम एकदम कम हो जाता है और बन्दरगाह वर्ष के अधिकांश भाग में बर्फ से, जमे रहते हैं, अतः ये व्यापार के योग्य नहीं रहते। लैब्रोडोर की ठण्डी धारा के साथ हिमपण्ड भी आते हैं जिनसे टकराने का भय जहाजों को सदा बना रहता है।

प्रश्न 47.
कोरिओलिस फोर्स से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कोरिओलिस फोर्स उत्पन्न होता है, इसके कारण पवनें व समुद्री धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बाँयी ओर मुड़ जाती है।

प्रश्न 48.
सारगैसो सागर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
उत्तरी अटलांटिक महासागर में उत्तरी भू-मध्यरेखीय गल्फस्ट्रीम, उत्तरी अटलांटिक प्रवाह एवं कनारी धाराओं के चक्राकार प्रवाह से घिरा हुआ यह ऐसा समुद्री क्षेत्र है जिसकी दिशा घड़ीवत (Clock wise) है, जहाँ जल शान्त रहता है। यहाँ एक प्रकार की काई जिसे सारगैसो कहते हैं, तैरती रहती है। इसी से इसे सारगैसो सागर (Sargaso sea) कहते हैं। सारगैसो सागर की स्थिति 10° N से 45° N के मध्य है।

प्रश्न 49.
शीतल दिवाल क्या है ?
उत्तर :
संयुक्त राजय अमेरिका के पूर्वी तट पर शीतल पछुवा हवाओं के प्रभाव से केप हेटरास के पास गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा पूर्व की ओर मुड़कर तट से दूर चली जाती है। गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा उच्च तापमान की जलराशि उत्तर की ओर लाती है। उत्तरी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी तट पर न्यूफाउलण्डलैण्ड के पास की ठण्डी जलधारा का जल रहता है जिसका तापमान 8° C से 11° C रहता है। दो विभिन्न तापक्रम एवं खारेपन की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है, अत: शीतल दीवाल का निर्माण करती है। गर्म एवं ठण्डी धाराओं के प्रभाव से उत्तरी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी सीमा पर कुहरे की पतली घनी पर्त बन जाती है। इसी लेब्रोडोर की ठण्डी धारा को न्यूयार्क के पास शीतल दीवार कहते हैं।

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प्रश्न 50.
महासागरीय जल में कितने प्रकार की गतियाँ होती हैं? उनका संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
महासागरीय जल में तीन प्रमुख गतियाँ होती हैं :- (i) लहरें (ii) ज्वार-भाटा (iii) धाराएँ ।
i. लहरें (Waves) : लहरों की उत्पत्ति सागरीय पृष्ठ पर प्रवाहित होने वाले पवन के दबाव तथा घर्षण से होती है। लहरों में जल का क्षैतिज स्थानान्तरण नहीं होता है बल्कि जल में केवल ऊपर-नीचे उठने एवं गिरने की गति होती है। प्रत्येक लहर में जल ऊपर उठकर पुन: अपने मूल स्थान पर लौट आता है। इस प्रकार लहरों से महासागरीय जल में दोलनात्मक गति होती है।

ii. ज्वार- भाटा (Tides) : ज्वार- भाटा में सागरीय जल में आवर्ती चढ़ाव तथा उतार होता है। यह ऐसी गति है जिसमें महासागर का सम्पूर्ण जल ऊपर से नीचे तक प्रभावित होता है।

iii. धाराएँ (Currents) : सागरीय जल में उत्पन्न होने वाली उपरोक्त दोनों गतियों के विपरीत धाराएँ भूतल पर प्रवाहित होने वाली नदियों के समान एक निश्चित वेग से प्रवाहित होती है। इस प्रकार धाराओं में सागरीय जल का संचालन एक निश्चित दिशा में होता है।

प्रश्न 51.
उपभू तथा अपभू ज्वार से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
उपभू तथा अपभू ज्वार : चन्द्रमा अपनी अण्डाकार कक्ष के सहारे पृथ्वी की परिकमा करता है। अतः पृथ्वी व चन्द्रमा के बीच की दूरो सदा समान नहीं रहती है। जब चन्द्रमा पृथ्वी के निकटतम होता है, तो उसे चन्द्रमा की उपभू स्थिति कहते हैं। इस स्थिति में चन्द्रमा की ज्वारोत्पादक शक्ति सबसे अधिक होती है जिससे सामान्य ज्वार से 20 \% तक ऊँचा ज्वार आता है। इसे उपभू-ज्वार कहते हैं। जब कभी दीर्घ ज्वार एवं उपभू ज्वार एक साथ आते हैं, तो ज्वार की ऊँचाई असामान्य हो जाती है। इसके विपरीत जब चन्द्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है तो उसे अपभू ज्वार कहते हैं। जब कभी लघु ज्वार एवं उपभू ज्वार एक साथ आते हैं, तो ज्वार की ऊँचाई अत्यंत कम हो जाती है।

प्रश्न 52.
समुद्री धाराओं की क्या विशेषता होती हैं ?
उत्तर :
समुद्री धाराओं की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बायी ओर बहती है।
  2. गर्म धाराएँ ठण्डे सागरों की ओर एवं ठण्डी धाराएँ गर्म महासागरों की ओर बढ़ती है।
  3. समद्री धाराएँ तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती है।
  4. समुद्री धाराएँ जल मार्गों के निर्धारण में सहायक होती है।
  5. ठण्डी धाराएँ अपने साथ प्लैंकटन लाती है जिससे मछलियों के खाद्य पदार्थ की पूर्ति होती है।

प्रश्न 53.
दीर्घ ज्वार की तुलना में लघु ज्वार में जल के उठने और गिरने का स्तर कम क्यों होता है?
उत्तर :
लघु ज्वार में चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी परस्पर समकोण की स्थिति में रहते हैं। अत: उनकी ज्वार उत्पादकता शक्तियाँ एक दूसरे की विपरीत दिशा में काम करती है। अत: ज्वार सामान्य या दीर्घ ज्वार से कम ऊँचा तथा भाटा सामान्य भाटा से कम नीचा होता है।

प्रश्न 54.
प्रत्यक्ष ज्वार एवं अप्रत्यक्ष में तुलना कीजिए।
उत्तर :
प्रत्यक्ष ज्वार और अप्रत्यक्ष ज्वार में तुलना :

प्रत्यक्ष ज्वार (Direct Tide) अप्रत्यक्ष ज्वार (Indirect Tide)
1. यह पृथ्वी के उस भाग पर आता है जो पृथ्वी के ठीक सामने होता है। 1. यह पृथ्वी के उस भाग पर आता है जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत भागों में होता है।
2. यह चन्द्रमा की केन्द्रापसारी शक्ति की अपेक्षा गुरूत्वाकर्षण शक्ति की अधिकता के कारण उत्पन्न होता है। 2. यह चन्द्रमा की गुरूत्वाकर्षण शक्ति की अधिकता के कारण उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 55.
ज्वार-भाटा बन्दरगाहों के निर्माण में कैसे सहायक है ?
उत्तर :
बन्दरगाहो के निर्माण में सहायक : ज्वार भाटा उत्तम बन्दरगाहों को जन्म देता है। जिन तटो या मुहानों पर ज्वारभाटा आता है वहाँ उत्तम बन्दरगाह स्थापित होते है। ज्वार-भाटा के कारण सागर तटों पर जल का स्तर बढ़ जाता है। अत: जलयान बन्दरगाहों पर आकर ठहर जाते है।

प्रश्न 56.
ज्वारा-भाटा किस प्रकार समुद्री-जल को जमने से रोकता हैं ?
उत्तर :
जल को जमने से रोकना : ज्वार-भाटा के जल में हलचल पैदा करता रहता है जिसे मीठा और खारा जल आपस में मिलता रहता है और इससे जल जम नहीं पाता। जल न जम पाने के कारण ही सागरीय जल-जन्तु जीवित रहते है तथा सागर में अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ उगती है तथा विकसित होती है।

प्रश्न 57.
पश्चिम यूरोप के बन्दरगाह वर्ष भर व्यापार के लिए क्यों खुले रहते हैं ?
उत्तर :
पश्चिमी यूरोपीय समुद्र तट उच्च अक्षांशो में स्थित है परन्तु समीप से गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा बहती है। इस धारा के प्रभाव के कारण समुद्र का तापमान ऊँचा हो जाता है जिससे समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रो में बर्फ नहीं जमती है। यही कारण समुद्र का तापमान ऊँचा हो जाता है पश्चिमी यूरोप के समुद्री बन्दरगाह वर्ष भर खुले रहते है जिससे इस क्षेत्र के बन्दरगाहो में वर्ष भर जहाज आते रहते है।

प्रश्न 58.
ठण्डी धाराओं के समीप महादेशीय भाग में मरूस्थल क्यों पाए जाते हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धाराओ के ऊपर से जाने वाली वायु ठण्डी हो जाती है जिससे उनमें जलवाष्प ग्रहण करने की शक्ति घट जाती है। इन शुष्क हवाओ के प्रभाव से तटीय भागों में वर्षा नहीं होती और उनके समीप मरुस्थल पाये जाते है। उदाहरण के लिए कनारी की ठण्डी धारा के समीप उत्तरी अफ्रीका का सहारा मरुस्थल, बेगुला की ठण्डी धारा के समीप कालाहारी का मरुस्थल, पीरू की ठण्डी धारा के समीप अठकामा का मरुस्थल, कैलीफोर्निया की ठण्डी धारा के समीप कोलोरेडो एवं अरीजोना के मरुस्थल तथा पश्चिमी आस्ट्रेलिया की ठण्डी धारा के समीप पश्चिमी आस्ट्रेलिया का महान मरुस्थल स्थित है।

प्रश्न 59.
ग्रैण्ड बैंक क्या है और इसका निर्माण क्यों हुआ है ?
उत्तर :
ग्रैंण्ड बैंक : यह न्यूफाउण्डलैण्ड (उत्तरी अमेरिका का पूर्वी तट) तट पर स्थित है। यह मत्स्य उद्योग का प्रमुख क्षेत्र है। यहाँ लैबोडोर की ठण्डी जलधारा एवं गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा के मिलने से मछलियों का भोजन प्लैंकटन ख़ब मिलता है। साथ ही यहां मछलियाँ अण्डे भी खूब देती हैं। ठण्डी जलवायु लम्बे समय तक मछालयों के संरक्षण में सहायक है। अतः प्रेण्ड बैक विश्व के मछली पकड़ने का एक प्रसिद्ध क्षेत्र है। शीतोष्ण जलवायु के कारण वहां की मछलिया काफी स्वादिष्ट होती है।

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प्रश्न 60.
उच्च ज्वार और निम्न ज्वार के बीच समय के अन्तर के कारण की व्याख्या करो।
उत्तर :
उच्च ज्वार और निम्न ज्वार के बीच समय का अन्तर : पृथ्वी अपनी धुरी पर 24 घण्टे में एक बार पूरी तरह घूम जाती है। अत: इस अवधि में प्रत्येक देशान्तर पर दो बार ज्वार उत्पन्न होना चाहिए। एक बार चन्द्रमा के सामने आने पर और दूसरी बार इसके विपरीत दिशा में चले जाने पर, किन्तु जिस समय पृथ्वी अपनी धूरी पर पूरा चक्कर लगाती है।

उस समय चन्द्रमा भी पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए कुछ आगे बढ़ जाता है। चन्द्रमा के सामने पृथ्वी के दुबारा आने मे 24 घण्टे का तीसवाँ भाग ( 52 मिनट) अधिक समय लग जाता है, अर्थात् 24 घण्टे 52 मिनट के बाद वह भाग चन्द्रमा के सामने आयेगा और तभी वहा ज्वार उत्पन्न होगा। अतः प्रत्येक देशान्तर पर ज्वार 12 घण्टे 26 मिनट बाद उत्पन्न हुआ करता है। ऐसी अवस्था सूर्य के साथ नहीं उपस्थित होती और उसके द्वारा ठीक 12 घण्टे बाद ज्वार उत्पन्न होता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
महासागरीय धाराओं की उत्तपत्ति के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
धाराओं की उत्पत्ति के कारण : समुद्री धाराओं की उत्पत्ति के निम्नलिखित कारण हैं –
तापमान में विभिन्नता :- भू-मध्य रेखीय प्रदेशों में सूर्य की किरणें सदैव लम्बवत चमकती है जिससे इन प्रदेशों में तापमान सदैव अधिक रहता है। जैसे-जैसे ध्रुवों की तरफ बढ़ते हैं, तापमान में कमी आने लगती है। अतः अधिक तापमान के कारण भूमध्य रेखीय सागरों के जल की ऊपरी सतह गर्म हो जाती है। इसलिए गर्म हल्का जल ध्रुवों की ओर बहने लगता है। इसके विपरीत ध्रुवीय प्रदेशों का ठण्डा भारी समुद्री जल नीचे बैठता है तथा भू-मध्य रेखा की ओर बहता है। इस प्रकार तापमान की भिन्नता के कारण सनयन धाराएं उत्पन्न हो जाती है।

खारेपन की भिन्नता :- समुद्र का जल खारा होता है, परंतु कई कारणों से (वाष्भीकरण, वर्षा, नदियां आदि) खारापन का वितरण असमान है। अतः अधिक खारेपन वाला समुद्री जल अधिक घनत्व के कारण नीचे बैठ जाता है और निकटवर्ती समुद्रों का कम खारा जल उसका स्थान भरने के लिए प्रवाहित होने लगता है। इससे भी धाराओं का जन्म होता है।

प्रचलित पवन :- धरातल पर निरंतर एक ही दिशा में स्थायी पवन के चलने से धाराओं की उत्पत्ति होती है। अटलांटिक महासागरों में उत्तरी और दक्षिणी भू-मध्यरेखीय धाराएं व्यापारिक हवाओं के प्रभाव से गल्फस्ट्रीम तथा उत्तरी अटलांटिक प्रवाह की उत्पत्ति पछुआ हवाओं के प्रभाव से होती है। भारत महासागर में मानसून ड्रिफ्ट की दिशा मानसून की दिशा के साथ बदलती रहती है।

तटों की आकृति :- धाराओं की दिशा पर महाद्वीपीय तटों की आकृति का प्रभाव पड़ता है। अटलांटिक महासागर में उत्तरी और दक्षिणी भूमध्य रेखीय धाराएं ब्ञाजील के सेनरॉक अंतरीप से टकराकर उत्तर तथा दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है। उत्तरी धारा को गल्फस्ट्रीम तथा दक्षिणी धारा को बाजोल धारा कहते हैं।

पृथ्वी की दैनिक गति :- पृथ्वी अपनी कीली पर पश्चिम से पूरब जो घूर्णन करती है उसके प्रभाव के कारण भी धाराओं की गति का निर्धारण होता है। अटलांटिक महासागर में विपरीत भू-मध्य रेखीय धारा की उत्पत्ति पर पृथ्वी की दैनिक गति का ही प्रभाव है। फेरल के नियमानुसार धाराएं उत्तरी गोलार्द्ध में दायी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बांयी ओर मुड़ जाती है।

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प्रश्न 2.
महासागरीय धाराओं के जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
ज्वार भाटा से जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अथवा
समुद्री धाराओं के धरातल पर प्रभाव का वर्णन करो।
उत्तर :
जलवायु का प्रभाव :
तापमान पर प्रभाव :- गर्म धाराएं जिन तटों से गुजरती है, वहाँ का तापमान ऊँचा कर देती है, इसके विपरीत ठण्डी धाराएं समीपवर्ती भागों का तापक्रम कम कर देती है। ऊँचे अंक्षाशों वाले तटीय भागों में गर्म धाराएं तापमान को हिमांक से नीचे नहीं आने देता उदाहरणार्थ संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी तट गल्फ स्ट्रीम की धारा के कारण गर्म रहता है जबकि पश्चिमी तट कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा के प्रभाव से ठण्डा रहता है।

वर्षा पर प्रभाव :- गर्म धाराओं के ऊपर बहने वाली वायु गर्म हो जाने के कारण महासागरों के जल से पर्याप्त मात्रा में जलवाष्प ग्रहण करती है। ये वाघपूर्ण हवाएं निकटतम भागो में जाकर पर्वतों से टकराकर पर्याप्त वर्षा करती है। उदाहरणार्थ गल्फस्ट्रीम की शाखा उत्तरी अटलांटिक डिपट के प्रभाव से पश्चिमी तट पर अधिक वर्षा होती है। इसके विपरीत ठण्डी धारओं के ऊपर से बहने वाले पवनों में जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है। अतः तटीय भागों में वर्षा नहीं होती। उदाहरणार्थ कनारी की ठण्डी धारा के समीप उत्तरी अफ्रीका का सहारा का मरूस्थल, बेंगुला की ठण्डी धारा के समीप कालाहरी का मरूस्थल, पीरू की ठण्डी धारा के समीप आटाकामा का मरूस्थल, कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा के समीप कोलोरेडो एवं अरीजोना का मरूस्थल स्थित है।

कुहरा की उत्पत्ति :- जहाँ ठण्डी एवं गर्म धारायें मिलती है वहाँ घना कुहरा मिलता है । न्यू फाउण्डलेण्ड के समीय गल्फस्ट्रीम की गर्म एवं लैबोडोर की ठण्डी धारा मिलने के कारण तथा जापान के समीप क्यूरेशियो की गर्म तथा क्यूराईल की ठण्डी धारा मिलने से कुहरा उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 3.
महासागरीय धाराओं का मानव जीवन पर या व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
व्यापार पर प्रभाव :
जलयानो की गति पर प्रभाव :- धाराओं के अनुकूल जहाजों को यात्रा करने में सुविधा होती है तथा विपरीत दिशा में जाने पर असुविधा होती है। यही कारण है कि प्राचीनकाल में यूरोप से अमेरिका जाने वाले जहाज उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा के अनुरूप चलते थे तथा गल्फस्ट्रीम एवं उत्तरी अटलंटिक प्रवाह के साथ यूरोप लौट आते थे।

बंदरगाहो का खुला रहना :- गर्म धाराओं के प्रभाव से उच्च अक्षांशों पर स्थित बंद्रगाह बर्फ न जमने के कारण वर्ष भर खुले रहते हैं, इसके विपरीत धुवों से आने वाली ठण्डी धाराओं के समीप के बंदरगाहों पर बर्फ जम जाती है। अत: वर्ष के अधिकांश समय ये बेकार हो जाते है। गल्फस्ट्रीम की गर्मधारा के प्रभाव से बिटिश द्वीप समूह एवं नार्वे के बंदरगाहों से वर्ष भर व्यापार होता है जबकि लैबोडोर की ठण्डी धारा के प्रभाव से पूर्वी कनाडा के बंदरगाह अधिकाश समय बंद्रहते हैं।

हिमपिण्डों का प्रभाव :- ठण्डी धाराओं के साथ विशाल हिमपिण्ड बनते है जिनका \(\frac{1010}{10}\) भाग जल के अंदर रहता है जो जहाज चालकों को कभी-कभी कुहरे के कारण दिखाई नहीं पड़ता। अत: दुर्घटना हो जाती है।

प्रश्न 4.
मुख्य ज्वार एवं गौण ज्वार के उत्पति के कारण क्या है ?
उत्तर :
मुख्य ज्वार (Primary tide) : पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते है जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अतः इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार (Direct tide) या प्रारम्भिक या मुख्य ज्वार (Primary tide) कहते हैं।

गौण ज्वार (Indirect Tide) : पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हृट कर उपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार या गौण ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 5.
ओजन परत की सृष्टि कैसे होती है ? ओजोन परत क्षरण के प्रमुख गैस की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ओजोन छिद्र का पता सर्वप्रथम 1985 में अंटार्कटिका के ऊपर फारमान द्वारा लगाया गया, उसके बाद ओजोन छिद्र का पता आकर्टिक एवं उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में भी लगाया गया।

समताप मंडल में 20 से 35 कि॰मी॰ के बीच ओजोन गैस की परत पाई जाती है। ओजोन की यह परत सूर्य की किरणों से विकरित पाराबैगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। जब विभिन्न स्रोतों से उत्सर्जित क्लोरिन गैस ऊपर उठती है तो वह (ओजन) से प्रतिक्रिया करके क्लोरीन मोनो आक्साइड एवं आक्सीजन का निर्माण होता है। क्लोरीन का एक अणु ओजोन के अनेक अणुओं का विनाश करने में सक्षम होता है, चूकि ध्रुवों के निकट ओजोन मण्डल की उुचाई कम होती है। अत: यहाँ ओजोन क्षरण की समस्या सर्वाधिक गम्भीर है।

ओजोन क्षरण का मुख्य कारण (CFCs) है । उस गैस का प्रयोग प्रशीतक, प्रणोदक, इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की सफाई तथा आग वाली प्लास्टिक के निर्माण आदि कार्यो में होता है। इसके अलावा काबर्न-डाई-आक्साइड मिथेन आदि गैस है। ये गैसे पृथ्वी के चारों ओर प्रवाहित होकर एक घना आवरण बन देती है। जिससे पृथ्वी पर सौर विकिरण तो आ जाता है परन्तु ये गैस इन्हें वापस आंतरिक्ष में नहीं जाने देती है। उसके फलस्वरूप किरण के तापमान में वृद्धि हो जाती है।

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प्रश्न 6.
महासागरीय धारा किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
समुद्री धाराएं : सागरीय जल के एक भाग से दूसरे भाग तक नियमित रूप से निश्चित दिशा में धारा के रूप में प्रवाहित होने वाली गति को महासागरीय धारा कहते हैं। धाराएँ विशाल जल राशि को एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पहुँचाती है।

धाराएं दो प्रकार की होती हैं –

गर्म धाराएं :- भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बहने वाली धाराओं को गर्म धारा कहते हैं क्योंकि ये धाराएं गर्म भाग से ठण्डे भाग की ओर बहती है। इन धाराओं का जल अपने आस-पास के समूह के जल से गर्म होता है। गल्फस्ट्रीम, क्यूरोशियों, ब्राजील आदि गर्म धाराएं हैं।
ठण्डी धाराएं :- ठण्डी समुद्रों से गर्म समुद्रों की ओर चलने वाली धारा को ठण्डी धारा कहते हैं। ये धाराएं धुवीय प्रदेश से भुमध्य रेखीय भाग की ओर चलती हैं। जैसे लैब्रोडोर, क्यूराएल तथा कनारी आदि ठण्डी धाराएं हैं।

समुद्री धाराओं की निम्नलिखित विशेषताएं हैं –

  1. महासागरीय धाराएं, उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बांयी ओर बहती है। ऐसा फेरल के नियमानुसार होता है।
  2. गर्म धाराएं, ठण्डे सागरों की ओर तथा ठण्डी धाराएं गर्म महासागरों की ओर बहती है।
  3. समुद्री धाराएं तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती है।
  4. समुद्री धाराएं जल मार्गो के निर्धारण में सहायक होती है।
  5. ठण्डी धाराएं अपने साथ प्लैकटन लाती है जिससे मछलियों के खाद्य पदार्थ की पूर्ति होती है।

प्रश्न 7.
गर्मधाराओं और ठण्डी धाराओं की तुलना किजिए।
उत्तर :
गर्मधाराओं और ठण्डी धाराओं की तुलना :

गम्म धाराएं ठण्डी धाराएं
i. गर्म धाराओं का जल सैदव गर्म होता है। i. इन धाराओं का जल सदैव ठण्डा रहता है।
ii. ये धाराएं भू-मध्य रेखीय प्रदेशों से ध्रुवीय प्रदेशों की ओर चलती है, जैसे – गल्फस्ट्रीम की धारा गर्म धारा है। ii. प्राय: ये धाराएं ध्रुवीय प्रदेशों से भू-मध्य रेखीय प्रदेशों की ओर चलती है। जैसे लैब्रोडोर की ठण्डी धारा।
iii. ये तटवर्ती क्षेत्रों के तापमान को बढ़ा देती है, जैसे गल्फस्ट्रीम की धारा नार्वे के तटवर्ती भाग में तापमान बढ़ा देती है। iii. ये धाराएं तटवर्ती क्षेत्रों के तापमान को गिरा देती है। जैसे कनारी की ठण्डी धारा।
iv. इन धाराओं की सहायता से समीपस्थ भाग में वर्षा होती है। iv. इन धाराओं से समीपस्थ भाग में वर्षा नहीं होती है।
v. ये धाराएं भू-मध्य रेखा के इर्द-गिर्द या सामानान्तर बहती हैं। v. कुछ धाराएं धुव प्रदेशों के इर्द-गिर्द बहती हैं।

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प्रश्न 8.
लहरें एवं धाराओं में क्या अन्तर है ?
उत्तर :
लहरें एवं धाराओं में अन्तर :

लहरें धाराएं
i. सागरीय सतह के क्रमिक उतार-चढ़ाव को लहर कहते हैं। i. इसमें सागरीय सतह क्रमिक उतार-चढ़ाव नहीं करता।
ii. लहरों का जल अपना स्थान छोड़कर आगे नहीं बढ़ता। ii. इनमें जल निरंतर आगे बढ़ता रहता है।
iii. लहरें अस्थाई है तथा बनती बिगड़ती है। iii. धाराएं स्थाई होती हैं।
iv. लहरें प्राय: संचार से प्रभावित होकर उत्पन्न होती है। iv. धाराओं के उत्पन्न करने में पवन, तापमान, खारापन तथा आकृति का हाथ रहता है।
v. लहरों की गहराई बहुत कम होती है। v. धाराएं काफी गहराई तक चला करती है। सतह पर चलने वाली धाराओं के नीचे विपरीत धाराये भी चलती है।

प्रश्न 9.
महासागरीय धाराएं किस प्रकार मत्स्य उद्योग को प्रभावित करती है ?
उत्तर :
मत्स्य उद्योग पर प्रभाव :
(i) ठण्डी धाराओं के साथ ठण्डे क्षेत्र की उत्तम मछ्छलयां बहकर गर्म प्रदेशों में पहुँच जाती है। जैसे लैब्रोडर की ठण्डी धारा के साथ आने वाली मछलियों को न्यूफाउण्डलैण्ड के पास कनाडा में पकड़ लिया जाता है।
(ii) मछलियों का सर्वप्रथम भोजन प्लैंक्टन नाम सूक्ष्म जीवाणु एवं वनस्पतियां हैं, जहाँ ठण्डी एवं गर्म धाराएं मिलती है वहां प्लैंक्टन की उत्पत्ति होती है। ऐसे स्थान पर मछालयां अण्डे भी अधिक देती है, अतः ठण्डी तथा गर्म धाराओं का मिलन स्थल मछली उत्पादन की आदर्श परिस्थियां उत्पत्र करता है।

प्रश्न 10.
सागरीय जल में ज्वार-भाटा उत्पत्र होने के क्या कारण है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा उत्पत्र होने के कारण ज्वार भाटा उत्पन्न होने में चन्द्रमा की दो शक्तियां पृथ्वी पर एक साथ काम करती है :
गुरूत्वाकर्षण शक्ति :- न्यूटन के अनुसार बह्माण्ड का प्रत्येक पिण्ड एक दूसरे को आकर्षित करता है। इस आकर्षित करने की शक्ति का नाम गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। दोनों प्रतिरोधी पिण्डों का आकार जितना ही बड़ा होगा गुरुत्वाकर्षण उतना ही अधिक होगा। साथ ही दोनों पिण्डों के मध्य दूरी जितनी ही अधिक होगी गुरुत्वाकर्षण उतना ही कम होगा, अर्थात् दूरी जितनी कम होगी गुरुत्वाकर्षण उतना ही अधिक होगा। चन्द्रमा से पृथ्वी के सभी स्थानों की दूरी में अंतर होने के कारण गरुत्वाकर्षण भी असमान होता है। भू पटल ठोस होने के कारण आकर्षित नहीं होता पर जल तरल है, अतः गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव जल पर अधिक पड़ता है।

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केन्द्रपसारी बल :- गुरुत्वाकर्षण शक्ति की प्रतिक्रिया उसी के बराबर केन्द्रपसारी बल कार्य करता है जो पृथ्वी को बन्द्रमा से दूर ले जाता है। यह बल पृथ्वी के सभी भागों पर समान होता है।

इस प्रकार पृथ्वी के केन्द्र पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण तथा केन्द्रपसारी दोनों शक्तियां समान होती है। पृथ्वी के चन्द्रमा के समीस्थ भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति अपसारी शक्ति की अपेक्षा अधिक होती है, अत: वहाँ का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर उधर उठ जाता है, इसे प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।
इस प्रकार एक ही समय पृथ्वी के दो व्यासीय विपरीत स्थानों पर ज्वार उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 11.
ज्वार-भाटा के समय में अंतर क्यों रहता है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा के समय में अंतर :- ज्वार-भाटा प्रतिदिन एक निश्चित समय पर नहीं आता है। यदि चन्द्रमा स्थिर होता तो पृथ्वी की परिभ्रमण के कारण प्रत्येक स्थान पर 24 घण्टे में निश्चित समय पर ही ज्वार-भाटा आता। परन्तु पृथ्वी और चन्द्रमा की सापेक्षिक स्थिति तथा चन्द्रमा के पृथ्वी की परिक्रमा करने के कारण ऐसा नहीं होता। प्रतिदिन ज़्वार भाटा का समय आगे बढ़ता जाता है। चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर उसी दिशा से परिक्रमा कर रहा है, जिस दिशा में पृथ्वी परिभ्भमण कर रही है। चन्द्रमा पृथ्वी की 28 दिन में परिक्रमा पूरा करता है। अत: 24 घंटे में पृथ्वी का कोई स्थान जब अपनी पहली अवस्था में आता है तब चन्द्रमा अपनी परिक्रमण गति के कारण अपने परिक्रमा मार्ग से 1 / 28 भाग बढ़ जाता है।

इसलिए पृथ्वी के उस स्थान को चन्द्रमा के ठीक सामने आने के लिए अपनी कीली पर 1 / 28 पर आगे घूमना होगा। इस दूरी को तय करके चन्द्रमा के ठीक सामने करने के लिए पृथ्वी को 52 मिनट अधिक समय लगेगा। इसलिए हर स्थान पर 24 घण्टे पश्चात् आने वाला ज्वार भाटा 24 घण्टे 52 मिनट पश्चात आता है। अतः प्रत्येक स्थान पर पहले ज्वार के ठीक 12 घण्टे 26 मिनट पश्चात् दूसरा ज्वार आता है। यही कारण है कि प्रतिदिन एक ही समय पर ज्वार-भाटा नहीं आता है बल्कि पहले दिन की अपेक्षा 52 मिनट देर से ज्वार भाटा दूसरे दिन आता है

प्रश्न 12.
ज्वार-भाटा के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
ज्वार-भाटा का मानव जीवन पर प्रभावों का वर्णन करो।
उत्तर :
ज्वार-भाटे का प्रभाव :
लाभ :

  1. ज्वार-भाटा आने से बंदरगाह पर पड़ा हुआ कूड़ा बहकर चला जाता है। अत: सफाई में व्यय कम हो जाता है तथा समय की बचत होती है।
  2. ज्वार जब आता है जल की गहराई बढ़ जाती है। अत: बड़े-बड़े जलयान बंदरगाह तक आ जाते हैं और भाटे के साथ वापस चले जाते हैं। इस प्रकार व्यापार में मदद मिलती है।
  3. ज्यारीय लहर के साथ गहरे सागर से मछलियां तट तक आ जाती हैं।
  4. ज्वारीय लहर के साथ मछुए गहरे सागर में मछली पकड़ने चले जाते हैं और लहर के साथ वापस आ जाते हैं।
  5. ज्वार-भाटा के कारण समुद्री जल में खलबली मची रहती है, जिसमें बंदरगाह के पास समुद्र नहीं जमते और जहाजों का आना-जाना बना रहता है।
  6. ज्वारीय लहर में अधिक शक्ति होती है। अत: इससे जल विद्युत उत्पादन की सम्भांवना होती है।
  7. ज्वार-भाटा के आने से तट पर बनी क्यारियों में जल भर जाता है जिसको सुखाकार नमक प्राप्त किया जाता है।
  8. समुद्र तट के समीप मोती, सीपी, घोंघे आदि अधिक मात्रा में पाये हो जाते हैं, जिनको निकाल कर कुछ लोग अपनी जीविका कमाते है।

हानियां :

  1. ज्वार-भाटे के आने से नदियों में जल ऊपर उठता है जिसे बोरे कहते हैं। इससे नौकाओं के डूबने की आशंका रहती है.।
  2. ज्वारीय लहरों की चपेट में आकार कभी-कभी जलयान डूब जाते हैं, जिससे धन-जन का नुकसान होता है।
  3. ज्वार भाटे कभी-कभी बंदरगाह पर तथा नदियों के मुहाने पर रेत, मिट्टी आदि जमा कर देती है जिसको साफ करने में अत्यधिक व्यय होता है।
  4. ये सफाई के स्थान पर कभी-कभी अधिक मात्रा में गंदगी छोड़ जाते हैं।

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प्रश्न 13.
ज्वार भाटा के प्रकारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें।
अथवा
ज्वारभाटा की उत्पत्ति का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ज्वार-भाटा के प्रकार :
दीर्घ ज्वार :- जब सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो सूर्य और चन्द्रमा की सम्मिलित शक्ति से समुद्री जल अर्थात् ज्वार ऊँचा उठ जाता है जो सामान्य ज्वार से 20% ऊँचा होता है। यह स्थिति महीने में दो बार, पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

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लघु ज्वार :- जब सूर्य और चन्द्रमा पृथ्वी से समकोण की स्थिति में होते हैं तो इनके ज्वार उत्पादन शक्तियां एक दूसरे के विपरीत दिशा में कार्य करती है। यह ज्वार सामान्य ज्वार से कम ऊँचा तथा भाटा सामान्य भाटा से कम नीचा रहता है। यह स्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, शुक्ल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी को होती है।

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पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण एवं केन्द्रापसारी शक्तियों की प्रतिक्रिया से पृथ्वी के दो व्यासीय विपरीत स्थानों पर एक साथ ही दो ज्वार उत्पन्न होते हैं। एक को प्रत्यक्ष ज्वार तथा दूसरे को अप्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

प्रत्यक्ष ज्वार :- पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते है जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अतः इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

अप्रत्यक्ष ज्वार :- पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हट कर ऊपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

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प्रश्न 14.
महासागर नितल से आप क्या समझते हैं ? महासागर के नितल को कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर :
महासागरीय तली का स्वरूप :- स्थल की तरह सागर और महासागरों के भी तल पाये जाते हैं जिन्हें सागर और महासागर का नितल कहते हैं। सागर और महासागर का नितल भी सब जगह समान नहीं है। इनमें कहीं ऊँचे चबुतरे, कहीं टीले और कहीं गहरी खाई या गर्त भी मिलते हैं। महासागरों की औसत गहराई महाद्वीपों की औसत ऊँचाई से अधिक है। आकार व गहराई के अनुसार महासागरीय नितल को भी प्रमुख चार भागों में बाटा जा सकता है-

महाद्वीपीय निम्न तट :- स्थल और समुद्र के मिलन स्थल से लेकर लगभग 70 कि०मी० – 100 कि०मी० की चौड़ाई में जलमग्न धरातल को महाद्वीपीय निमग्न तट कहते हैं। यह महाद्वीपीय ढाल तथा स्थल के मध्य का भाग है। नदियों तथा हिमानियों के द्वारा लाया गया अवसाद एवं हिमोढ़ के समुद्र तल में जमा होने से इसका निर्माण होता है। इसके निचले तल तक सूर्य की रोशनी प्रवेश कर जाती है । अतएव इस भाग में वनस्पति एवं समुद्री जीव-जन्तु भी मिलतेहैं। विश्व के प्रमुख मछलीगाह इसी भाग में मिलते हैं। समस्त महासागर का 5 \% भाग महाद्वीपीय निमग्न तट के अंतर्गत पड़ता है।

महाद्वीपीय ढाल :- महाद्वीपीय निमग्न तट भूमि के ठीक बाद ढाल का विस्तार शुरू होता है। इस ढालू भूमि को ही महाद्वीपीय ढाल कहते हैं। यहाँ समुद्र की गहराई 200 कि०मी० – 400 कि०मी० तक होती है। यहाँ तक नदियों द्वारा लाये गये अत्यंत सूक्ष्म कण ही पहुँच पाते हैं। इस भाग के बाद वास्तविक महासागर शूरू होता है। इस भाग में अनेक कैनियन अच्छी तरह विकसित हैं।

महासागरीय मैदान :- जब महाद्वीपीय ढाल समाप्त हो जाता है तत्पश्चात समुद्र के अंदर समतल भूमि मिलती है। इस भाग को महासागरीय मैदान कहत हैं। इसकी औसत गहराई 3000 मी० -6000 मी० तक होती है। इसका ढाल मंद होता है। समुद्र तट से दूर होने के कारण यहाँ तक नदियो द्वारा लाया गया अवसाद नहीं पहुँच पाता है। ये मैदान निक्षेप, सूक्ष्म पंक और सागर तल पर रहने वाले और मरे हुए जीव-जन्तुओं के अस्थियों से बने होते हैं। इस भाग में लाल मिट्टी पाई जाती है जो सम्भवतः ज्वालामुखी उदगार के कारण है।

महासागरीय गर्त :- गहरे समुद्री मैदानों में यत्र-तत्र गठ्ठे पाये जाते है जो लम्बे और गहरे होते हैं। परंतु चौड़े नहीं होते । ये अधिकतर उन समुद्रों में पाये जाते हैं, जहाँ पर्वत श्रेणियों का विस्तार हो अथवा ज्वालामुखी क्रिया हुई हो। ये सागरों के मध्य नहीं पाये जाते हैं बल्कि स्थल खण्डों के समीप मिलते हैं। प्रशांत महासागर में ऐस 56 गर्त हैं जिसमें मिंड़ानाओ गर्त विश्व का सबसे गहरा गर्त है जिसकी गहराई 10400 मी० है। नवीन खोजों के अनुसार मैरियाना खड्ड सबसे गहरा खड्ड है जिसकी गहराई 11033 मी॰ बताई जाती है।

प्रश्न 15.
अंघमहासागर की जलधाराओं का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर :
अंधमहासागर की धाराएँ :- अंध महासागर में अधिकतर तीव्र धाराएं चलती हैं। कुछ मंद धराएं भी हैं जो निम्न हैं –
उत्तरी भू-मध्य रेखीय धारा :- यह भूमध्य रेखा के उत्तर-पुरब से पश्चिम बहती है। यह गर्मधारा है जो दक्षिणी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी तट के सहारे बहती है। इस धारा की उत्पत्ति में पूर्वी व्यापारिक पवनों का प्रभाव होता है।

दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धारा :- यह भू-मध्य रेखा के दक्षिण में बहने वाली गर्म धारा है। यह पश्चिमी अफ्रीका से बाजील के सेनराक अंतरीप की ओर बहती है। इसकी उत्पत्ति में दक्षिणी पूर्वी व्यापारिक पवनो की भूमिका होती है।

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विपरीत भू-मध्य रेखीय धारा :- उत्तरी व दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धाराओं का जल बहकर पश्चिम से पूरब भूमध्य रेखा की ओर बहने लगता है। इसका प्रवाह भूमध्य रेखीय धाराओं के विपरीत होता है। इसकी उत्पत्ति व दिशा पर भू-परिभ्रमण का प्रभाव होता है।

गल्फस्ट्रीम :- उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा का जल जब दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी तट से टकराता है तो इसका कुछ भाग मैविसको की खाड़ी से होकर उत्तर की ओर बहने लगता है। इसे गल्फस्ट्रीम कहते हैं। यह एक गर्म धारा है जिसकी उत्पत्ति में पछुआ हवाओं का योगदान होता है।

लैब्रोड़ोर की ठण्डी धारा :- यह एक ठण्डी धारा है जो उत्तरी कनाडा के तटवर्ती भागो पर उत्तर से दक्षिण को बहती है। यह लेबोडोर तट के सहारे बहती हुई न्यूफाउण्डलैण्ड तक पहुँचती है। अत में यह गल्फस्ट्रीम से मिल जाती है। इन धाराओं के संगम पर सदैव कुहरा छाया रहता है जो मछलियों के खाद्य प्लैंक्टन की उत्पत्ति में सहायक होता है।

कनारी की ठण्डी धारा :- यह पुर्तगाल तट के समीप से दक्षिण की ओर अफ्रीका के कनारी द्वीपों तक बहने वाली एक ठण्डी धारा है। यह सहारा की जलवायु को शुष्कता और कठोरता प्रदान करने में सहायक है। इसकी उत्पत्ति तथा दिशा में उत्तरा-पूर्वी व्यापारिक पवनों का प्रभाव होता है।

ब्राजील धारा :- दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धारा का जल बाजिल के सेनराक अंतरीप से टकराकर ब्राजील तट से बहने लगता है। यह गर्म धारा है।

उत्तरी आंटलटिक प्रवाह :- गल्फस्ट्रीम तथा लैब्रोडोर की धाराओं का जल टकराने के पश्चात उत्तर-पूर्व की ओर बहता हुआ उत्तरी यूरोप तक पहुँचता है। इस पर पछुआ पवनों का प्रभाव रहता है। इसे पछुआ प्रवाह भी कहते हैं। यह एक गर्म धारा है। अत: उत्तरा-पश्चिमी यूरोपीय देशों को उष्मता प्रदान करता है।

फाकलैण्ड धारा :- यह एक ठण्डी धारा है जो दक्षिण अमेरिका के सुदूर दक्षिणी भाग में फाकलैण्ड द्वीप के सहारे दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है।

बेंगुला धारा :- यह ठण्डी धारा है जो पश्चिमी अफ्रीका तट के सहारे दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है। यह कालाहारी मरूस्थल की जलवायु को कठोरता प्रदान करती है।

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प्रश्न 16.
प्रशांत महासागर की मुख्य जलधाराओं का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रशांत महासागर की धाराएं :- प्रशान्त महासागर में प्रवाहित होने वाली धाराएँ निम्नलिखित हैं –
उत्तरी भू-मध्यरेखीय धाराएँ :- यह गर्म धारा दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनों से प्रभावित होती है जो भू-मध्य रेखा के दक्षिण में अमेरिका के पश्चिमी तट से टकराकर आगे जाकर यह आस्ट्रेलिया के उत्तरी-पूर्वी भाग तक पहुँचती है।

विपरीत भू-मध्यरेखीय धारा :- यह एक गर्म धारा है जो उत्तरी और दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धाराओं के विपरीत दिशा में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। इस धारा की उत्पत्ति का कारण भू-परिभमण है।

क्यूरेशियो धारा :- यह गर्म धारा है। उत्तरी तथा दक्षिणी भू-मध्य रेखोय धाराओं के जल मिलने से चीन सागर में एक नई धारा उत्पन्न होती है जो चीन सागर से होते हुए जापान के शिशोक द्वीप तक पहुँचती है जहाँ इसकी दो शाखाएँ हो जाती है । भीतरी शाखा जापान सागर में प्रवेश करती है तथा बाहरी शाखा जापान के प्रशान्त तट से बहती हुई मध्य होन्शू तक बहती है, चीन और जापान को जलवायु का यह धारा उष्णता तथा वर्षा प्रदान करती है।

क्यूराइल धारा :- यह ठण्डी धारा है। यह उत्तरी धुव के समीप से चलकर बैरिंग जलडमरू मध्य होती हुई साइबेरिया तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। क्यूराइल द्वीपों के समीप बहने के कारण इसे क्यूराइल की धारा कहते हैं। अंत में जापान के समीप क्यूरोसियो की गर्म धारा से मिल जाती है।

अलास्का धारा :- उत्तरी महासागर के आर-पार प्रवाहित होने वाली पश्चिमी धारा उत्तरी अमेरिका के प्रशांत महासागर तट पर पहुंच कर बैकुवर टापू के समीप टकराकर अलास्का तट की ओर बहने लगती है। यह एक गर्म धारा है जो अलास्का तट की जलवायु को उष्णता प्रदान करती है।

कैलिफोर्निया धारा :- यह कैलिफोर्निया तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली एक ठण्डी धारा है जो समीपवर्ती प्रदेश की जलवायु को कठोर तथा शुष्क बना देती है।

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पीरू या हम्बोल्ट धारा :- यह ठण्डी धारा दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित पीरू के समीप बहती है। अंत में यह दक्षिणी भू-भाग रेखीय धारा में मिल जाती है। इस धारा की खोज सर्वप्रथम हमबोल्ट ने किया। अत: यह Humbolt Currents भी कहलाती है। यह पीरूभूम की उष्णता को कम कर देती है।

अण्टांक्कटिक धारा :- यह ठण्डी धारा है, जो दक्षिणी प्रशांत महासागर में पूरब से पश्चिम की ओर बहती है। अण्टार्कटिक महाद्वीप के समीप मंद गति से बहती है। इस धारा की उत्पत्ति भू-परिभ्रमण के कारण होती है।

आस्ट्रेलिया धारा :- यह आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली एक गर्म धारा है। दक्षिणी भूमध्य सागरीय धारा जब न्यूगिनी तट से टकराती है, तब पहुआ पवनों के सहारे इसका जल आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट से होकर बहने लगता है। यह धारा अपनी समीपवर्ती प्रदेशों की जलवायु को उष्ण व नम बनाती है।

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प्रश्न 17.
हिन्द महासागर की मुख्य जलधाराओं का वर्णन करो।
उत्तर :
हिन्द महासागर की धाराएँ :- हिन्द महासागर उत्तर में भारत, पश्चिम में अफ़ीका तथा पूर्व में आस्ट्रेलिया से घिरा हुआ है। हिन्द महासागर की धाराओं की अपनी एक विशेषता है। विषुकत् रेखा के उत्तर में इस महासागर का विस्तार कम तथा दक्षिण में अधिक है। अतः उत्तरी भाग में सामयिक पवनों का प्रभाव मिलता है। इस भाग में सामयिक धाराएँ चलती रहती है ये धाराएँ मानासून के प्रभाव से समय-समय पर अपनी दिशाएं बदलती रहती है, अत: ये मानसून ड्रीफ्ट भी कहलाती है। भूमध्य रेखा के दक्षिणी भाग में स्थायी धाराएँ वर्ष भर सामान रूप से चलती है। इस महासागर की प्रमुख धाराएँ निम्न हैं –

ग्रीष्म मानसून ड्रीफ्ट :- यह एक गर्म धारा है जो उत्तरी हिन्द महासागर में ग्रीष्म मानसून से प्रभावित होकर अफ्रीका के पूर्वी तट के सहारे बहती हुई अरब सागर में प्रवेश करती है। यह अरब सागर के तट तथा भारत के पश्चिमी तट के सहारे बहती हुई बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करती है तथा दक्षिण में पूर्वी एशिया के सुमात्रा तट तक चलती जाती है। यह मई से अक्टुबर तक बहती है। यह एक मंद समुद्री धारा है।

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शिशिर मानसूनी धारा :- शिशिर ऋतु आते ही मानसून पवनों के क्रम में परिवर्तन हो जाता है तथा उत्तरी-पूर्वी पवने चलने लगती है। अतः नवम्बर से अपैल तक यह धारा सुमाता तट से बंगाल की खाड़ी, अरब सागर होते हुए पूर्वी तट तक बहती है।

दिक्षणी भूमध्य रेखीय धारा :- यह एक गर्म धारा है। यह विषुवत् रेखा के दक्षिण में दक्षिणा-पूर्वी व्यापारिक पवनों से प्रभावित होकर पूर्व-पश्चिम की ओर बहती है।

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मोजम्बिक धारा :- अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी तट पर मुख्य स्थल मागागासी द्वीप के बीच एक संकरा समुद्री भाग है, जिसे मोजाम्बिक चैनल (Mozamblique Channel) कहते हैं। यहाँ एक गर्म समुद्री जल धारा उत्पन्न होती है जो दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धारा का ग्रहण करके दक्षिण की ओर बहती है। यही मोजाम्बिक धारा कहलाती है।

पश्चिमी आस्ट्रेलिया धारा :- यह आस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट के सहारे दक्षिण से पश्चिमी की ओर बहती है तथा दक्षिण भूमध्य रेखीय धाराओं में मिल जाती है। यह ठण्डी धारा आस्ट्रेलिया की मरुस्थलीय जलवायु को शुष्क तथा कठोर बना देती हैं।

अगुलहास की धारा :- यह दक्षिणी हिन्द महासागर पर बहने वाली एक गर्म धारा है जो अफ़ीका के दक्षिण में अगुलहास के निकट पछुआ पवनों से प्रेरित होकर पश्चिम से पूरब की ओर चलने लगती है

अण्टार्कटिक डिफ्ट :- हिन्द महासागर के दक्षिण भाग में पछुआ पवनों के प्रभाव से पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली ठण्डी धारा को अण्टार्कटिक ड्रिफ्ट कहते हैं।

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प्रश्न 18.
ग्रैण्ड बैंक मत्स्य उद्योग के लिए अनुकूल क्यों है ?
उत्तर :
ग्रैण्ड बैंक :- अटलांटिक महासागर में न्यूफाउण्डलैण्ड के दक्षिण पूर्व में महाद्वीपीय चबूतरा है। इसका विस्तार 37000 वर्ग मील है। यही समुद्री क्षेत्र मछली पकड़ने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ मत्स्य उद्योग की उन्नति के कारण हैं –
(i) समशीतोष्ण जलवायु :- समशीतोष्ण जलवायु के कारण यहाँ मछलियों का भोजन प्लैकटन अधिक मिलता है, अत: यहाँ मछलियाँ अधिक पायी जाती है।
(ii) उथला समुद्र :- यह एक जलमग्न द्वीप है, अतः उथला है जिसमें सूर्य की किरणें आसानी से प्रवेश कर पाती है। प्लैंकटन की उपज के लिए सूर्य की किरणें आवश्यक हैं, अतः इस प्लैंकटन के कारण यहाँ अधिक मछलिया मिलती है।
(iii) गर्म एवं ठण्डी धाराओं का मिलन स्थल :- यहाँ पर गल्फ स्ट्रीम की गर्म एवं लेब्रोडोर की ठण्डी धाराये मिलती है। गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन स्थल पर मछालियों का भोजन जल्दी तैयार होता है तथा मछलियाँ भी ठीक से बढ़ती है। मछलियां विपरीत धाराओं में तेजी से बढ़ती है।

प्रश्न 19.
उत्पत्ति के आधार पर धरातल पर पाए जाने वाले झीलों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
उत्पत्ति के आधार पर झीलों को निम्नलिखित भागों में बाँटा जा सकता है –
(A) विवर्तनिक झीलें (Tectonic Lakes) :- पृथ्वी के गर्भ में आन्तरिक हलचलें होती है। धरातल के स्वरूप में परिवर्तन होता रहता है। इन हलचलों से मुख्य रूप से दो प्रकार की झीले बनती है।
भ्रंश झीलें (Fault Lakes) :- वितर्तनिक हलचलों के कारण धरातल पर भृंश के एक ओर का भाग नीचे धँस जाता है तो धंसा भाग जल से भरकर झील का रूप धारण करता है। इसे भ्रश झोल कहते हैं। U.S.A. की सात एण्डीज झील भंश झीले ही है।

विभ्रंश झीले (Rift Valley Lakes) :- विवर्तनिक हलचलों के कारण धरातल पर समानान्तर दरारें पड़ जाती है। जब इन दरारें के बीच का भाग धंस जाता है तो इसे दरार घाटी कहते हैं। वर्षा आदि का जल भर जाने से झील का निर्माण होता है, जैसे साइबेरिया की बैकाल झील, अफ्रीका में तागानिका की न्यासा, अलबर्ट्र इत्यादि झील।

(B) ज्वालामुखी झीलें :
क्रेटर झील (Crater Lakes) :- जिस दरार से होकर लावा बाहर निकलता है उसे ज्वालामुखी का मुख(Crater) कहते हैं। जब ज्वालामुखी का उदगार बन्द हो जाता है और मृतप्राय हो जाता है तब यह वर्षा आदि का जल भर जाने से झील के रूप में बदल जाता है IU.S.A. के क्रेटर झील तथा अफ्रीका की विक्टोरिया झील इस प्रकार की झीले हैं।

लावा बाँध से बनी झीलें (Lavadom Lakes) :- ज्वालामुखी के मुख से निकलने वाला लावा कभी-कभी नदी के प्रवाह को रोक देते हैं और इस प्रकार की झील का निर्माण हो जाता है। कैलिफोर्निया की ताहो झील (Tahoe Lakes) तथा अबीसीनिया को ताना झील (Tana Lakes) इसी प्रकार की झीलें है।

लावा क्षेत्र की झीले (Lava Region Lakes) :- ज्वालामुखी के लावा का निक्षेपन समान नहीं होता है। कहीं तुषार तथा कहीं नियान बन जाते हैं। नियान के क्षेत्र में जल भरने से झील का निर्माण हो जाता है।

(C) निक्षेपण मूलक झीले (Deposional Lakes) :-
पर्वतीय झीलें (Mountain Lakes) :- पर्वतीय भाग को पार कर नदी जब मैदानी भागों में प्रवेश करती है तो ढाल की कमी के कारण नदी की धारा का वेग कम हो जाता है। इसके द्वारा बहाकर लाये गये मलवा, बजरे, रोड़े आदि का एकाएक निक्षेप होने लगता है। इससे धीरे-धीरे नदी का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है। कालान्तर में इस प्रकार एक झोल बन जाती है। पर्वत के पाद प्रदेश में स्थित होने के कारण इन झीलों को गिरिपद झीलें (Piedmont Lakes) कहते हैं। कैलिफोर्निया की तुलारे झील इसी प्रकार की झील है।

बाढ़ मैदानी की झीलें (Flood Plain Lakes) :- वर्षा काल में जल भर जाने के कारण बाढ़ के मैदानों में जमाव का कार्य होता है। परन्तु यह जमाव अनियमित होता है। अतः कहीं-कहीं पर गड्ड़ रह जाते हैं जो झीलों का रूप धारण कर लेते हैं। बह्मपुत्र की घाटी तथा अफ्रीका की श्वेत नील के मार्ग में ऐसी झीलें मिलती है।

डेल्टाई झील (Delta Lakes) :- नदी के डेल्टा प्रदेश में शाखाओं के बीच रेत के अनियमित जमाव से बने हुए गड्दे पानी से भर कर झील का रूप धारण कर लेते हैं। गंगा के डेल्टा में इस प्रकार की झीलें बील कहलाती है।

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(D) हिमनद के जमाव से बनी झीलें :- स्थिति के विचार से इस प्रकार की झीलों के निम्न उपविभाग हैं –
हिम बांध झीलें :- जब हिमनद किसी नदी की घाटी के आर-पार बहती है तो नदी के प्रवाह का जल रुक जाता है। स्वीटरलेण्ड में स्थित ‘आरजेलिन सी’ नामक झील प्रकार की है।

हिमोढ़ द्वारा बनी झीलें :- जब महाद्विपीय हिमनद पिघलने लगता है तो उसके द्वारा छोड़े गये हिमोढ़ विषम रूप से एकत्र होते हैं और मध्य में एकत्र हुए बर्फ के दुकड़े पिघल जाते हैं तथा वे झिल का रूप धारण कर लेते हैं।

(E) वायु निक्षेपण से बनी झीलें :- मरुस्थलीय प्रदेशों में पवन के द्वारा उड़ाकर ले जाने वाले रेत कणों के अनियमित जमाव से यत्र-तत्र गड्दे बन जाते हैं जिनमें जल भर जाता है और झील की रचना होती है।

(F) अपरदन मूलक झीलें :- नदी, हिमनद तथा वायु के अपरदन द्वारा अनेक झीलें बनती हैं जो निम्न हैं –
गोखुर या झाड़न झील :- मैदानी भाग में नदी की गति मंद होने से मोड़ बन जाते हैं। बाढ़ के समय नदी अपना मोड़दार मार्ग छोड़ कर सीधा बहने लगती हैं। इस प्रकार मोड़ में जल भर जाता है। मोड़ धनुष के आकार का होने के कारण इसे धनुषाकार झील भी कहते हैं। मिसीसिपी तथा गंगा के मैदानी भाग में ऐसी झीलें मिलती हैं।

गर्त झील :- चूना प्रदेश में जल निर्मित गर्तो का आकार बड़ा हो जाने से छत से गिर जाता है। वहाँ एक झील की रचना होती है। जैसे नैनीताल की झीलें इसी प्रकार की है।

टार्न झील :- हिमनद अपने रास्ते में कोमल चट्टानों का अधिक कटाव करता हुआ चलता है जिससे मार्ग में अनेक गढ़ु बन जाते हैं, जिनमें जल भर जाने से झील की रचना होती है। ऐसी झीले टार्न झील कहलाती है, जैसे – U.S.A. की Boss Lakes इसी प्रकार की झील है।

लैगून झील :- समुद्री लहरों तथा धाराओं के कंकड़, बालू और मिट्टी का लगातार जमाव होता रहता है। यह मलवा खाड़ी के मुहाने को अवरुद्ध कर देता है और झील की रचना होती है, जैसे भारत की चिल्का झील इसी प्रकार की झील है।

(G) मानवकृत झीले :- मानव जगत का सबसे विकासित प्राणी है। उसने बुद्धि बल से बड़े आश्चर्यक कार्य किये हैं। नदियों और पहाड़ी नदीं पर बाँध बनाकर उसने कृत्रिम झीलों का निर्माण किया है। इसमें जल-विद्युत का विकास किया जाता है और सिंचाई के लिये नहरें निकाली जाती है। इस प्रकार की झील को कृत्रिम झील कहते हैं। जैसे गोविन्द सागर एक कृत्रिम झील है।

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प्रश्न 20.
महाद्वीपीय मग्नतट और महाद्वीपीय ढाल में क्या अंतर है ?
उत्तर :

महाद्वीपीय मग्नतट महाद्वीपीय ढाल
i. यह समुद्र तट और महाद्वीपीय ढाल के मध्य स्थित होता है। i. यह महाद्वीपीय मग्न तथा महासागरीय नितल के मध्य स्थित होता है।
ii. इसका ढाल बहुत मंद होता है। ii. इसका ढाल तीव्र होता है।
iii. इस पर केनियन और गर्त बहुत कम पाये जाते हैं। iii. इस पर कैनियन गर्त अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।
iv. यह छिछला सागरीय प्रदेश है। इसकी गहरा 150 मी० -200 मी० तक होती है। iv. इसकी गहराई में विषमता पायी जाती है। यह 200 मी० – 2000 मी० तक गहरा पाया जाता है।
v. इस पर बजरी, बालू आदि अवसाद का निक्षेप मिलता है v. इस पर अवसाद निक्षेप बहुत ही कम मिलता है।

प्रश्न 21.
लैब्लोडोर धारा की उत्पत्ति का क्या कारण है ? इस धारा के क्या प्रभाव हैं ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की धारा की उत्पत्ति :- उत्तरी धुव के समीप बर्फ के पिघलने से स्वच्छ जल की पूर्ति होती है। इस स्वच्छ जल से जल का खारापन तथा घनत्व कम हो जाता है। जल हल्का होकर ऊपर उठता है जिससे जल स्तर ऊँचा हो जाता है। अत: कनाडा एवं ग्रीन लैण्ड में स्थित बेफिन की खाड़ी से एक जल धारा निकलकर लेब्रोडोर के पठार के सहारे उत्तर से दक्षिण बहती हुई न्यूफाउण्डलेण्ड के पास गल्फस्ट्रीम की धारा से मिल जाती है।
प्रभाव (A)
(i) तापमान पर प्रभाव :- इस धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तट का तापक्रम हिमांक से नीचे चला जाता है।
(ii) वर्षा पर प्रभाव :- इस धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तट पर कम वर्षा होती है।
(iii) कुहरा का प्रभाव :- लैबोडोर की ठण्डी धारा गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा से मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड के पास कुहरा उत्पन्न करती है।

(B) वर्षा का प्रभाव :- इस धारा के साथ विशाल हिम पिण्ड बहकर आते हैं। हिमपिण्डों का 9 / 10 भाग जल के भीतर रहता है। 1 / 10 भाग ही ऊपर रहता है जो कुहरे के कारण कभी-कभी दिखायी नहीं देता ; अत: जहाज इन हिमपिण्डों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्थ हो जाते हैं।

(C) मत्स्य उद्योग पर प्रभाव :-
(i) इस धारा की उत्पत्ति उत्तरी ध्रुव के पास वर्फ के पिघलने से होती है। अत: धारा के साथ धुव प्रदेश की मछलियाँ बहकर न्यूफाउण्डलेण्ड तक पहुँच जाती है; अत: कनाडा में मछली पकड़ने का काम उन्नति पर है।
(ii) न्यूफाउण्डलैण्ड के समीप यह ठण्डी-धारा गल्फस्ट्रीम की गर्मधारा से मिलती है ; अत: मछलियों का भोजन प्लैंकटन पैदा होता है ; अतः यहाँ मत्स्य व्यवसाय उन्नति पर है।

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प्रश्न 22.
गल्फस्ट्रीम की धारा की उत्पत्ति का क्या कारण है ? इस धारा का क्या प्रभाव है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम धारा की उत्पत्ति : यह अटलांटिक महासागर के मैक्सको की खाड़ी से पैदा होती है । भूमध्यरेखीय क्षेत्र में वर्ष भर तापमान ऊँचा रहता है जिसे अत्यधिक तापमान के कारण जल गर्म होकर फैलता है तथा हल्का होकर ऊपर उठता है। अत: भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अटलांटिक महासागरीय जलस्तर उठ जाता है। साथ ही दोनों भूमध्य रेखीय धाराओं का जल मिलकर कैरेबियन सागर से होता हुआ मैक्सिको की खाड़ी में जाता है। अत: खाड़ी का जल स्तर उठ जाता है।

यह गर्म जलधारा फ्लोरिडा जल डमरू मध्य होते हुए U.S.A. के पूर्वी तट के सहारे बहती हुई गल्फस्ट्रीम की धारा कहलाती हैं। न्यूफाउण्डलेण्ड के पास यह तीन शाखाओं में बँट जाती है। इसकी एक शाखा पहुवा पवनों के सम्पर्क में आकर पूरब की ओर बहने लगती है एवं ग्रेट-बिटेन और नार्वे के पश्चिमी तट पर बहती है। इसे उत्तरी अटलांटिक ड्प्ट्ट कहते है। दूसरी शाखा विस्के की खाड़ी से प्रवाहित होती है। तीसरी शाख़ा सारगैसो सागर में बहती है जिसे वेस्ट विण्ड ड्रिपट कहते हैं। नार्वे के तटवर्ती भागों ने इसे नार्वे की धारा कहते हैं।

A. जलवायु पर प्रभाव :
1. तापक्रम पर प्रभाव :- गल्फस्ट्रीम की धारा संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वीनटट पर ब्रिटिश द्वीप समूह, नार्वे आदि देशो के ताप को बढ़ा देती है। इसी अंक्षांश पर स्थित कनाडा के पूर्वी तट पर ठण्डक पड़ती है।
2. कुहरा पर प्रभाव :- गल्फस्ट्रीम को गर्मधारा लैब्बोडोर की ठण्डी धारा से मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड के समीय कुहरा उत्पन्न करती है।

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B. व्यापार पर प्रभाव :-
1. बन्दरगाहों का खुला रहना :- इस गर्मधारा के प्रभाव से पश्चिमी युरोप के तट पर वर्फ नहीं जमता जिससे बन्दरगाह वर्ष भर खुले रहते हैं।
2. जलयानों के वेग पर प्रभाव :- इस धारा के प्रभाव से अमेरिका के जहाजों को यूरोप पहुँचने में आसानी होती है।
3. मत्स्य व्यवसाय पर प्रभाव :- यह न्यूफाउण्डलैणड के समीप लैब्रोडोर की ठण्डी धारा से मिलती है जिससे मत्स्य उद्योग के लिए अनुकुल दशाएँ मिलती हैं। इस क्षेत्र में प्लैकटन नामक समुद्री घास की अधिकता मिलती है। यही कारण है कि न्यूफाउण्डलैण्ड में मछलियां पर्याप्त मात्रा में पकड़ी जाती है।

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जलमण्डल Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
लैब्रैडोर की ठंडी धारा और उष्ण गल्फ स्ट्रीम की धारा के मिलने पर जो भयंकर कोहरा और झंझावत की उत्पत्ति होती है, उस तटीय क्षेत्र का नाम हैं :
(a) न्यूफाउण्डलेग्ड का तट
(b) गिनि तट
(c) फ्लोरिडा का तट
(d) पेरू का तट
उत्तर :
(a) न्यूफाउण्डलैण्ड का तट

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प्रश्न 2.
लघु ज्वार के समय चन्द्रमा और सूर्य पृथ्वी की अपेक्षा निम्नलिखित कोण पर अवस्थान करती है:
(a) 180°
(b) 360°
(c) 90°
(d) 120°
उत्तर :
(c) 90°

प्रश्न 3.
एल-नीनो का प्रभाव देखा जाता है –
(क) अटलांटिक महासागर
(ख) प्रशान्त महासागर
(ग) हिन्द महासागर
(घ) आर्कटिक महासागर
उत्तर :
(ख) प्रशान्त महासागर

प्रश्न 4.
पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच की दूरी जब सबसे कम हो जाती है, उस समय उत्पन्न ज्वार को कहा जाता है –
(क) दीर्घज्वार
(ख) लघु ज्वार
(ग) पेरिजी ज्वार (उपभू ज्वार)
(घ) अपोजी ज्वार (अपभू ज्वार)
उत्तर :
(क) दीर्घज्वार

प्रश्न 5.
पृथ्वी पर जलीय भाग का कुल प्रतिशत है :
(a) 61 %
(b) 81 %
(c) 71 %
(d) 91 %
उत्तर :
(c) 71 %

प्रश्न 6.
उच्च एवं निम्न ज्वार के बीच अन्तर होता है करीबन :
(a) 2 घण्टे
(b) 6 घण्टे – 13 मिनट
(c) 4 घण्टे
(d) 8 घण्टे
उत्तर :
(b) 6 घण्टे – 13 मिनट

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प्रश्न 7.
पृथ्वी की चद्द्रमा एवं सूर्य के बीच की स्थिति को कहते हैं :
(a) कंजक्शन
(b) पेरीजियन
(c) अपोजीयन
(d) अपोजियन
उत्तर :
(c) अपोजीयन।

प्रश्न 8.
मेडागास्कर के पश्चिमी तट के सहारे प्रवाहित होनेवाली महासागरीय धारा को कहते हैं :
(a) मेडागास्कर धारा
(b).अगुलहास धारा
(c) सोमाली धारा
(d) मोजाम्बिक धारा
उत्तर :
(d) मोजाम्बिक धारा।

प्रश्न 9.
मुख्य और गौण ज्वार के बीच समय का अंतर है :
(a) 12 घं० 26 मि०
(b) 24 घं० 52 मि०
(c) 12 घं०
(d) 24 घं०
उत्तर :
(a) 12 घं० 26 मि०

प्रश्न 10.
दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे प्रवाहित होने वाली ठण्डी धारा है :
(a) ब्राजील धारा
(b) बेंगुला धारा
(c) मेडागास्कर धारा
(d) हम्बोल्ट धारा
उत्तर :
(d) हम्बोल्ट धारा।

प्रश्न 11.
विश्व का सबसे लम्बा निमग्न तट है :
(a) ग्राण्ड बैंक
(b) राकफाल बैंक
(c) डागर बैंक
(d) मिडिल बैंक
उत्तर :
(a) भण्ड बैंक।

प्रश्न 12.
लेब्राडोर धारा पायी जाती है :
(a) अटलण्टिक महासागर में
(b) प्रशान्त महासागर में
(c) हिन्द महासागर में
(d) अण्टाकर्टिक महासागर में
उत्तर :
(a) अटलाण्टिक महासागर में।

प्रश्न 13.
वृहत्तम जलमग्न तट स्थित है :
(a) उत्तरी अटलाण्टिक में
(b) दक्षिणी अटलाण्टिक में
(c) प्रशान्त महासागर में
(d) हिन्द महासागर में
उत्तर :
(a) उत्तरी अटलाण्टिक में।

प्रश्न 14.
सागरीय लहरें हैं :
(a) अनुदैर्घ्य प्रवाह
(b) अनुदेर्घ्य गति
(c) अनुप्रस्थ प्रवाह
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) अनुदैर्घ्य गति।

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प्रश्न 15.
ज्वार-भाटा की उत्पत्ति का कारण है :
(a) सूर्य
(b) चन्द्रमा
(c) पृथ्वी
(d) शुक्क
उत्तर :
(b) चन्द्रमा।

प्रश्न 16.
जब सागर का जल एक निश्चित मार्ग में निश्चित वेग से प्रवाहित होता है तो इसे कहते हैं –
(a) लहरें
(b) ज्वार भाटा
(c) महासागरीय धारा
(d) प्रवाह
उत्तर :
(c) महासागरीय धारा।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति का कारण नहीं है ?
(a) तापमान में भिश्नता
(b) चक्रवातों की दिशा का
(c) सागरीय जल का घनत्व
(d) भू-प्रकृति में भिन्नता
उत्तर :
(d) भू-प्रकृति में भिन्नता।

प्रश्न 18.
संसार की अधिकांश धाराएँ अनुसरण करती है –
(a) स्थायी पवनों की दिशा का
(b) चक्रवातों को दिशा का
(c) स्थानीय पवनों की दिशा का
(d) प्रति चक्रवातों की दिशा का
उत्तर :
(b) चक्रवातों की दिशा का।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से किस धारा की उत्पत्ति धुवीय क्षेत्र से होती है ?
(a) गल्फस्ट्रीम
(b) लेब्रोडोर धारा
(c) उत्तरी अटलांटिक प्रवाह
(d) क्यूरोशियो धारा
उत्तर :
(b) लेबोडोर धारा।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में से किस धारा के प्रभाव से संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी-तट गर्म रहता है ?
(a) लेब्रोडोर धारा
(b) हम्बोल्ट धारा
(c) गल्फस्ट्रीम
(d) ब्राजील की धारा
उत्तर :
(c) गल्फस्ट्रीम।

प्रश्न 21.
गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन स्थल पर देखने को मिलता है –
(a) अत्यधिक वृष्टिपात
(b) घना कुहरा
(c) हिमपात
(d) ओला वृष्टि
उत्तर :
(b) घना कुहरा।

प्रश्न 22.
ठण्डी धाराओं के साथ बहाकर लाए गए विशाल बर्फ के टुकड़ों को कहते हैं –
(a) प्लावी हिम पिण्ड
(b) हिम टोपी
(c) हिम चादर
(d) हिमनद
उत्तर :
(a) प्लावी हिम पिण्ड।

प्रश्न 23.
पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आने वाले ज्वार को कहते हैं –
(a) लघु ज्वार
(b) दौर्घ ज्वार
(c) गौण ज्वार
(d) अप भू ज्वार
उत्तर :
(b) दीर्घ ज्वार।

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प्रश्न 24.
दो क्रमिक ज्वारों के बीच समय का अंतर रहता है –
(a) 12 घण्टे 26 मिनट
(b) 12 घण्टे 50 मिनट
(c) 24 घण्टे 52 मिनट
(d) 24 घण्टे 30 मिनट
उत्तर :
(a) 12 घण्टे 26 मिनट।

प्रश्न 25.
लघु ज्वार आते हैं –
(a) अमावस्या के दिन
(b) पूर्णिमा के दिन
(c) शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन
(d) शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के अष्टमी के दिन
उत्तर :
(d) शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के अश्टमी के दिन।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से किसके कारण महासागरीब जल में दोलनात्मक गति होती है ?
(a) लहरें
(b) ज्वार-भाटा
(c) धारा
(d) प्रवाह
उत्तर :
(a) लहरें।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से किस धारा की उत्पत्ति तापक्रम में भिन्नता के कारण हुई है ?
(a) उत्तरी अटलाणिटक प्रवाह
(b) गल्फस्ट्रीम
(c) उत्तरी भूमध्यरेखीय धारा
(d) लेब्रोडोर की धारा
उत्तर :
(b) गल्फस्ट्रीम।

प्रश्न 28.
विषुवतरेखीय धाराओं की उत्पत्ति होती है –
(a) सागरीय जल के घनत्व में अंतर के कारण
(b) प्रचालित हवाओं के कारण
(c) भू-आर्वतन के कारण
(d) तापक्रम में भिज्नता के कारण
उत्तर :
(d) तापक्रम में भिन्नता के कारण।

प्रश्न 29.
ध्रुवीय क्षेत्रों से ठण्डी धाराओं की उत्पत्ति का मुख्य कारण है –
(a) सारिम ज्ल वे फ्सत्व में अर्तर
(b) वायु दबाव एवं पवन
(c) तापमान में अन्तर
(d) पृथ्वी का परिभ्रमण
उत्तर :
(a) सागरीय जल के घनत्व में अंतर।

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प्रश्न 30.
ध्रुवीय क्षेत्रों में सागरों का जल स्तर ऊँचा होने का कारण है –
(a) उच्च वायुद्राव
(b) हिम का पिघलना
(c) अधिक वर्षा
(d) जल में अधिक लवणता
उत्तर :
(b) हिम का पिघलना।

प्रश्न 31.
दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे स्थित अटकामा मरूस्थल के निर्माण का मुख्य कारण है –
(a) तट के पास पेरू की ठण्डी धारा का प्रवाहित होना
(b) पर्वतीय बाधा का नहीं होना
(c) शुष्क स्थलीय वायु का प्रवाहित होना
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर :
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से कौन ठण्डी धारा कालाहारी मरूस्थल के निर्माण के लिए उत्तरदायी है ?
(a) लेब्रोडोर धारा
(b) फाकलैण्ड
(c) बेजुला धारा
(d) दक्षिणी अटलाण्टिक प्रवाह
उत्तर :
(c) बेजुला धारा।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित किस धारा के प्रभाव से पश्चिमी यूरोप में पर्याप्त वर्षा होती है ?
(a) उत्तरी अटलंटिक प्रवाह
(b) क्यूरोशियो धारा
(c) उत्तरी विषुवतरेखीय धारा
(d) कनारी धारा
उत्तर :
(b) क्यूरोशियो धारा।

प्रश्न 34.
निम्नलिखित में से किस ठण्डी धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तट के बन्दरगाह शीतकाल में बंद हो जाते हैं ?
(a) लैव्रोडोर धारा
(b) कनारी धारा
(c) फाकलैण्ड धारा
(d) बेजुला धारा
उत्तर :
(a) लैवोडोर धारा।

प्रश्न 35.
निम्नलिखित में से किस सागरीय गति में सागर का जल सम्पूर्ण रूप से ऊपर से नीचे तक प्रभावित होता है ?
(a) धारा
(b) ज्वार -धारा
(c) लहर
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर :
(b) ज्वार-धारा।

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प्रश्न 36.
सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को कहते हैं –
(a) सागरीय लहर
(b) ज्वारीय परिसर
(c) उच्च प्रवाह
(d) निम्न ज्वार
उत्तर :
(c) उच्च प्रवाह।

प्रश्न 37.
चन्द्रमा एवं पृथ्वी के बीच की सर्वाधिक दूरी की स्थिति को कहते हैं –
(a) अपभू
(b) उपभू
(c) अपसौर
(d) अनुसूर्य
उत्तर :
(a) अपभू।

प्रश्न 38.
पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक होगा –
(a) चन्द्रमा के विपरीत स्थित भाग पर
(b) चन्द्रमा की ओर स्थित भाग पर
(c) पृथ्वी के केन्द्र पर
(d) सभी भागों पर
उत्तर :
(b) चन्द्रमा की ओर स्थित भाग पर।

प्रश्न 39.
पृथ्वी पर स्थित सागरों एवं महासागरों में 24 घण्टे के अन्दर ज्वार एवं भाटा आते हैं –
(a) तीन बार
(b) एक बार
(c) दो बार
(d) चार बार
उत्तर :
(c) दो बार।

प्रश्न 40.
जब सूर्य तथा चन्द्रमा के बीच पृथ्वी स्थित होती है तो इसे कहते हैं –
(a) वियुति
(b) युति
(c) समकोणिक स्थिति
(d) उपभू
उत्तर :
(a) वियुति।

प्रश्न 41.
वियुति की स्थिति है –
(a) अमावस्या के दिन
(b) पूर्णमासी के दिन
(c) महीने के पक्षों के अष्टमी के दिन
(d) उपरोक्त सभी दिन
उत्तर :
(b) पूर्णमासी के दिन।

प्रश्न 42.
प्रतिदिन 24 घण्टे 52 मिनट के अंतराल पर आने वाले ज्वारों को कहते हैं –
(a) दैनिक ज्वार
(b) अर्द्धदैनिक ज्वार
(c) दीर्घ ज्वार
(d) लघु ज्वार
उत्तर :
(b) अर्द्धदैनिक ज्वार।

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प्रश्न 43.
निम्नलिखित में से किस स्थिति में सूर्य एवं चन्द्रमा के ज्वारोत्पादक बल विपरीत दिशा में काम करते हैं ?
(a) युति की स्थिति में
(b) वियुति की स्थिति में
(c) समकोणिक स्थिति में
(d) उप भू स्थिति
उत्तर :
(d) उप भू स्थिति।

प्रश्न 44.
प्रचलित हवाओं के प्रभाव से उत्पत्र होनेवाली धाराएँ कहलाती हैं –
(a) ज्वार भाटा
(b) प्रवाह या ड्रिफ्ट
(c) सोत
(d) लहर
उत्तर :
(b) म्रवाह या ड्रिफ्ट।

प्रश्न 45.
निम्न में से कौन ध्रुवीय क्षेत्र से उत्पत्र होनेवाली ठण्डी धारा है –
(a) क्यूराइल
(b) गल्फस्ट्रीम
(c) क्यूरोशियो
(d) ब्राजील
उत्तर :
(a) क्यूराइल।

प्रश्न 46.
सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा की स्थिति को कहते हैं –
(a) वियुति
(b) समकोणिक स्थिति
(c) युति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) युति।

प्रश्न 47.
हुगली नदी में आनेवाली ज्वारीय भिति कहलाती है –
(a) आइसबर्ग
(b) बांध
(c) बाढ़
(d) बान
उत्तर :
(d) बान।

प्रश्न 48.
इनमें कौन सी प्रवाह पछुआ हवा के प्रभाव से प्रभावित होता है ?
(a) क्यूराइल
(b) गल्फस्ट्रीम
(c) क्यूरोशियो
(d) उत्तरी प्रशान्त प्रवाह
उत्तर :
(d) उत्तरी पशान्त प्रवाह।

प्रश्न 49.
न्यूफाउण्डलैण्ड किस लिए प्रसिद्ध है ?
(a) पर्यटन के लिए
(b) प्रसिद्ध मत्स्य उत्पादन क्षेत्र
(c) मनोरंजन के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) प्रसिद्ध मत्स्य उत्पादन क्षेत्र।

प्रश्न 50.
गल्फस्ट्रीम किस महासागर की एक गर्म धारा है –
(a) अटलाग्टिक महासागर
(b) हिन्द महासागर
(c) प्रशान्त महासागर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) अटलाण्टिक महासागर।

प्रश्न 51.
पृथ्वी एवं चन्द्रमा के बीच अधिकतम दूरी के समय उत्पन्न ज्वार कहलाता है –
(a) दीर्घ ज्वार
(b) लघु ज्वार
(c) अपभू ज्वार
(d) अर्द्ध दैनिक ज्वार
उत्तर :
(c) अपभू ज्वार।

प्रश्न 52.
12 घण्टे 26 मिनट के अन्तराल पर आने वाले ज्वार को कहते हैं ?
(a) अपभु ज्वार
(b) अर्द्ध दैनिक ज्वार
(c) लघु ज्वार
(d) दीर्घ ज्वार
उत्तर :
(b) अर्द्ध दैनिक ज्वार।

प्रश्न 53.
सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा की समकोणिक स्थिति के समय आने वाले ज्वार को कहते है –
(a) लघु ज्वार
(b) दीर्घ ज्वार
(c) अर्द्ध दैनिक ज्वार
(d) अपभू ज्वार
उत्तर :
(a) लघु ज्वार।

प्रश्न 54.
विघुवत रेखीय धाराएँ किन पवन के प्रभाव से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है ?
(a) स्थलीय पवन द्वारा
(b) सागरीय पवन द्वारा
(c) व्यापारिक पवन द्वारा
(d) पहुआ पवन द्वारा
उत्तर :
(c) व्यापारिक पवन द्वारा।

प्रश्न 55.
दो प्राथमिक ज्वारो के बीच समय का अन्तर होता है –
(a) 12 घं० 26 मिनट
(b) 24 घं० 52 मिनट
(c) 6 घं० 30 मिनट
(d) 24 घं० 30 मिनट
उत्तर :
(b) 24 घं० 52 मिनट।

प्रश्न 56.
दो उच्च ज्वारों की बीच समय को अन्तराल को कहते है –
(a) ज्वारीय अंतराल
(b) ज्वारीय परिसर
(c) ज्वारीय भिति
(d) ज्वारीय नदी
उत्तर :
(b) ज्वारीय परिसर।

प्रश्न 57.
ध्रवों के समीप हिम के पिघलने से महासागरीय जल का घनत्व होता जाता है।
(a) कम
(b) अधिक
(c) बराबर
(d) असमान
उत्तर :
(a) कम।

प्रश्न 58.
उत्तरी हिन्द्र महासागर की धारा प्रभावित होती है –
(a) मानसून पवन द्वारा
(b) तापमान द्वारा
(c) समुद्री पवन द्वारा
(d) इनमें से सभी
उत्तर :
(a) मानसून पवन द्वारा।

प्रश्न 59.
अटकामा मरूस्थल स्थित है –
(a) पेरूतट पर
(b) कैलीफोर्निया तट पर
(c) बेंगुला तट पर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) पेरूतट पर ।

प्रश्न 60.
गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन से उत्पत्ति होती है –
(a) घने कुहरे
(b) पाले
(c) चक्रवात
(d) समुद्री धारा
उत्तर :
(a) घने कुहरे।

प्रश्न 61.
प्रावह क्या है ?
(a) स्थिर सागर जल
(b) तेज गति से आगे बढ़ता जल
(c) पवन वेग से अग्रसर सागर तल का जल
(d) इसमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) पवन वेग से अग्रसर सागर तल का जल

प्रश्न 62.
धारयें कितने प्रकार की होती हैं ?
(a) एक प्रकार की
(b) दो प्रकार की
(c) चार प्रकार की
(d) इनमे से कोई नहीं
उत्तर :
(b) दो प्रकार की

प्रश्न 63.
धारायें अनुगम करती हैं –
(a) दिशाओं का
(b) प्रचलित पवनों का
(c) घनत्व का
(d) वाही जल का
उत्तर :
(a) दिशाओं का

प्रश्न 64.
खरापन (Salinity) प्रभावित करता है –
(a) जल घनत्व को
(b) जल की दिशा को
(c) जल के वेग को
(d) जल की स्थिरता को
उत्तर :
(a) जल घनत्व को

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प्रश्न 65.
गर्म और ठंढी जल धाराओं के मिलन संधि पर –
(a) मौसम स्वच्छ रहता है
(b) बादलों का निर्माग होत्ता है
(c) कुहासा का सिर्माज होता है
(d) जल तल ऊँचा रहता है
उत्तर :
(c) कुहासा का निर्माण होता है

प्रश्न 66.
गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है –
(a) समुद्री धारायें
(b) ग्रैण्ड बैंक
(c) ज्वार-भाटा
(d) समुद्री वनस्पति
उत्तर :
(c) ज्वार-भाटा

प्रश्न 67.
प्लैंकटन एक प्रकार की वनस्पति है –
(a) इसे मछली खाती है
(b) यह चिरहरित है
(c) यह पर्णपाती है
(d) यह एक प्रकार का लाइवेन है
उत्तर :
(a) इसे मछली खाती है

प्रश्न 68.
दो प्रधान ज्वारों के बीच समय का अन्तर होता है –
(a) 12 घंटा
(b) 18 घंटा 26 मिनट
(c) 48 घंटा
(d) 24 घंटा 52 मिनट
उत्तर :
(d) 24 घंटा 52 मिनट

प्रश्न 69.
ग्रैण्ड बैंक है-
(a) व्यवसाय केन्द्र
(b) मत्स्य आखेट केन्द्र
(c) कृषि क्षेत्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) मत्स्य आखेट केन्द्र

प्रश्न 70.
सिजगी (syzygy) में समुद्र जल तल की ऊँचाई होती है –
(a) 50%
(b) 10%
(c) 20%
(d) 5%
उत्तर :
(c) 20%

प्रश्न 71.
बृहद् ज्वार आता है :
(a) पूर्णमा तथा अमावस्या को(b) प्रत्येक मास के मध्य में
(c) वर्ष में एक बार
(d) प्रत्येक 24 घंटे बाद
उत्तर :
(a) पूर्णिमा तथा अमावस्या को

प्रश्न 72.
ज्वारीय भित्ति (Tidal Bore) है :
(a) एक समुद्री तुफान
(b) नदी-समुद्र का संधि स्थल
(c) नदी के मुहारे पर समुद्री जल की अत्यधिक ऊँचाई
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) नदी-समुद्र का संधि स्थल

प्रश्न 73.
महासागरीय जल के क्रमिक उत्थान को क्या कहते हैं ?
(a) धारा
(b) लहरें
(c) तरंग
(d) कुछ नहीं
उत्तर :
(b) लहरें

प्रश्न 74.
महासागर की लवणता के कारण उत्पन्न होती है –
(a) धराएं
(b) लहरें
(c) तरंगें
(d) तीनों
उत्तर :
(a) धराएं

प्रश्न 75.
फाकलैण्ड की धारा कैसी धारा है ?
(a) गर्म धारा
(b) ठण्डी धारा
(c) तरंग धारा
(d) लहर
उत्तर :
(b) ठण्डी धारा

प्रश्न 76.
पृथ्वी का व्यास है –
(a) 1300 किमी०
(b) 1200 किमी०
(c) 12870 किमी०
(d) 1400 किमी०
उत्तर :
(c) 12870 किमी०

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प्रश्न 77.
पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पड़ता है वहाँ कौन शक्ति अधिक प्रबल होती है ?
(a) गुरुत्वाकर्षण शक्ति
(b) केन्द्रपसारी शक्ति
(c) ज्वारीय बल
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(b) केन्द्रपसारी शक्ति

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. दीर्घ ज्वार के समय समुद्र का जल जब तेजी से मुहाने से नदियों में प्रवेश करता है तब उसे…………कहा जाता है।
उत्तर : ज्वारभित्ति।

2. क्यूरोशियो धारा का दूसरा नाम………….है।
उत्तर : जापान धारा।

3. दो या दो से अधिक धाराओं के मिलने से बनने वाला क्षेत्र जहाँ धाराओं का प्रवाह नहीं है उस क्षेत्र को…………सागर कहते हैं।
उत्तर : सारगैसो।

4. …………. मुख्य ज्वार के लिए उत्तरदायी है।
उत्तर : गुरुत्वाकर्षण बल।

5. सागरों में कम लवणता वाला जल के रूप में प्रवाहित होता है।
उत्तर : ठंडी धारा।

6. ग्राण्ड बैंक ……….. के निकट स्थित है।
उत्तर : न्यूफाउण्डलैण्ड।

7. जब चन्द्रमा, पृथ्वी एवं सूर्य एक सीधी रेखा में स्थित होते हैं तो इसे ……………कहते हैं।
उत्तर : वियुति।

8. महासागरों में तैरने वाले विशाल हिमपिण्डों को ………. कहते हैं।
उत्तर : प्लावी हिम।

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9. …………. आकार के नदी मुहाने ऊँची ज्वारीय भित्ति उत्पन्न करते हैं। उत्तर : उथले एवं सँकरे।
उत्तर : उथले एवं संकरे।

10. चन्द्रमा………….आकार के नदी मुहाने ऊँची ज्वारीय भित्ति उत्पन्न करते हैं।
उत्तर : 27 \(\frac{1}{2}\)

11. …………. में सागरीय जल का संचालन एक निश्चित दिशा में होता है।
उत्तर : धाराओं।

12. ………….हवाओं के प्रभाव से गल्फस्ट्रीम धारा उत्तरी अटलांटिक प्रवाह के नाम से पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है ।
उत्तर : पछुआ।

13. महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में………….दिशा में चक्र बनाती है।
उत्तर : घड़िवत।

14. ध्रुवों के समीप हिम के पिघलने से महासागरीय जल का घनत्व………….हो जाता है।
उत्तर : अधिक।

15. उत्तरी हिन्द महासागर में चलने वाली धाराओं की दिशा पर ………… हवाओं का प्रभाव पड़ता है।
उत्तर : मानसूनी।

16. जापान के समीप क्यूरोशियो की गर्म तथा………… की ठण्डी धाराओं के मिलने से कुहरा उत्पन्न होता है।
उत्तर : क्यूराइल।

17. दो उच्च ज्वारों के बीच समय के अंतर को …………कहते हैं।
उत्तर : ज्वारीय परिसर।

18. पृथ्वी के चन्द्रमा के समीपस्थ भाग पर उत्पत्र होनेवाले ज्वार को …………कहते हैं।
उत्तर : प्राथमिक ज्वार।

19. …………स्थिति में चन्द्रमा का ज्वारोत्पादक बल सबसे कम होता है।
उत्तर : अपभू।

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20. दो प्राथमिक ज्वारों के बीच समय का अंतर …………रहता है।
उत्तर : 24 घण्टा 52 मिनट।

21. प्रचलित हवाओं के कारण सागरीय सतह के जल के अग्रगामी गति को …………कहते हैं।
उत्तर : प्रवाह या ड्रिफ्ट।

22. कोरियोलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में चलने वाली धाराओं का झुकाव …………तरफ होता है।
उत्तर : दाहिने।

23. विघुवत रेखीय धाराएँ …………पवन के प्रभाव से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं।
उत्तर : पद्युआ।

24. …………महासागर की धाराओं की दिशा ऋतुवत परिवर्तित होता रहता है।
उत्तर : अटलांटिक।

25. धुवीय प्रदेशों से लेब्रोडोर एवं क्यूराइल की ठण्डी धाराओं की उत्पत्ति का कारण …………है।
उत्तर : हिम का पिघलना ।

26. ब्राजील की धारा ब्राजील के …………तट के सहारे प्रवाहित होती है।
उत्तर : पूर्वी।

27. धुवीय क्षेत्रों में सागरीय जल के घनत्व में कमी का मुख्य कारण………… है।
उत्तर : हिम का पिघलना ।

28. संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के तापमान को …………घारा बढ़ा देती है।
उत्तर : गल्फस्ट्रीम ।

29. …………के प्रभाव से कनाडा के पश्चिम तट पर पर्याप्त वर्षा होती है।
उत्तर : उत्तरी प्रशान्त प्रवाह।

30. गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलने से …………की उत्पत्ति होती है।
उत्तर : घना कुहरा।

31. दो उच्च ज्वारें के बीच समय के अंतराल को …………कहते है।
उत्तर : ज्वारीय अंतराल।

32. पृथ्वी पर चन्द्रमा के समीस्थ भाग पर चन्द्रमा की गुरूत्वाकर्षण शक्ति के कारण आने वाले उच्च ज्वार को …………ज्वार कहते हैं।
उत्तर : प्रत्यक्ष ज्वार।

33. अप्रत्यक्ष ज्वार को ………… ज्वार भी कहते हैं।
उत्तर : गौण।

34. दोनों पक्ष के अष्टमी के दिन …………ज्वार आते हैं।
उत्तर : लघु।

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35. …………के परिभ्रमण कारण प्रतिदिन ज्वार 26 मिनट की देर से आता है।
उत्तर : पृथ्वी।

36. …………. ज्वारों की ऊँचाई सामान्य ज्वारों से 20% अधिक रहती है।
उत्तर : उपभू।

37. हुगली नदी में उत्पन्न ज्वारीय भित्तियों को स्थानीय रूप से कहा ………….जाता है।
उत्तर : बान।

38. उत्तरी हिन्द महासागर की धारा………….पवन द्वारा प्रवाहित होती है।
उत्तर : मानसून।

39. मत्स्यपालन क्षेत्र मुख्य रूप से ………….स्थल पर पैदा होते हैं।
उत्तर : गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन।

40. ग्रैण्ड बैंक एक…………. है।
उत्तर : मत्स्य आखेट केन्द्र।

41. समुद्री प्रवाह मुख्य रूप से…………. द्वारा पैदा होते हैं।
उत्तर : हवाओं।

42. क्यूरोशियो एक ………….जलधारा है।
उत्तर : गर्म।

43. हम्बोल्ट ए, ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

44. कनारी धारा ………….धारा है।
उत्तर : ठण्डी।

45. ठंडी दिवार………….में पायी जाती है।
उत्तर : उत्तरी अंधमहासागर।

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46. ब्राजील की धारा एक ………….धारा है।
उत्तर : गर्म।

47. बेनेजुएला एक ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

48. समुद्री जल का क्रमश: चढ़ाव एवं गिराव ………….कहलाता है।
उत्तर : ज्वार-भाटा।

49. क्यूरिब ………….जलधारा है।
उत्तर : गर्म।

50. अगुलहास…………. एक जलधारा है।
उत्तर : गर्म।

51. अंटार्कटिक प्रवाह ………….के रूप में जानी जाती है।
उत्तर : पहुआ पवन प्रवाह।

52. कैलिफोर्निया की धारा ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

53. पेरू ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

54. आटाकामा मरूस्थल ………….पर स्थित है।
उत्तर : पेरूतट।

55. गुयाना ………….धारा है।
उत्तर : गर्म।

56. लैद्रोडोर की ठंडी जलधारा न्यूफाउण्डलैण्ड द्वीप के पास ………….से मिलती है।
उत्तर : खाड़ी की धारा।

57. लैब्रोडोर ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

58. सारगैसो सागर …………………… महासागर में स्थित है।
उत्तर : अटलांटिक।

59. लैब्रोडोर की ठंडी समुद्री धारा …………………… की ठंडी धारा है।
उत्तर : प्रशान्त महासागर।

60. …………………… धारा जापान की काली धारा कही जाती है।
उत्तर : क्यूरोशियो।

61. कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा …………………… के पश्चिमी तट में बहती है।
उत्तर : संयुक्त राज्य अमेरिका।

62. …………………… का मेरियाना खड्डु विश्व का सबसे गहरा खड्ड है।
उत्तर : प्रशान्त महासागर ।

63. …………………… नदी ज्वारीय भिति के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : हुगली।

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64. सारगासों समुद्र …………………… में पाया जाता है।
उत्तर : अंध महासागर।

65. पृथ्वी के धरातल पर स्थित जल भाग को कहा …………………… जाता है।
उत्तर : जलमण्डल।

66. उत्तम कोटि की मछलियाँ …………………… पानी में पायी जाती हैं।
उत्तर : मीठे।

67. …………………… धाराएं जहाँ से गजरती हैं वहाँ का तापमान नीचा कर देती है।
उत्तर : गर्म।

68. सागरीय जल के नीचे गिरकर पीछे लौटने को …………………… कहते हैं।
उत्तर : भाटा।

69. पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है, …………………… ज्वार आता है।
उत्तर : अप्रत्यक्ष।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में ऋतु परिवर्तन देखा जाता है।
उत्तर : False

2. प्रशान्त महासागर में उत्पन्न एल निनो के प्रभाव से दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट में सूखे की स्थिति बनती है।
उत्तर : False

3. भूमध्यसागरीय क्षेत्र में साधारणतया ग्रीष्म काल में वर्षा होती है।
उत्तर : False

4. सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी के सरल रैखिक अवस्थान को सिजिगी कहते हैं।
उत्तर : True

5. पूर्णमासी के दिन लघु ज्वार आता है।
उत्तर : False

6. नदी का उद्गम हिमरेखा के ऊपर से होता है।
उत्तर : False

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7. ठण्डी महसागरीय धारा को धरातलीय धारा के नाम से भी पुकारा जाता है।
उत्तर : False

8. ला-निना के प्रभाव से प्रशान्त महासागर का पूर्वी तटीय भाग सूखा पड़ जाता है।
उत्तर : True

9. वायुमण्डल में ओजोन में ह्नास का कारण भूमण्डलीय ताप है।
उत्तर : False

10. मग्न तटों पर प्लैंकटन पर्याप्त मात्रा में पायी जाती है।
उत्तर : True

11. लैब्रोडोर की धारा अटलांटिक महासागर में पाया जाता है।
उत्तर : True

12. पूर्णिमा के दिन जब पृथ्वी सूर्य एवं चन्द्रमा के बीच एक सीधी रेखा में स्थित रहती है, को सिजिगी (युति-वियुति) कहते हैं।
उत्तर : False

13. प्राथमिक ज्वार बन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा नियन्त्रित होता है।
उत्तर : True

14. प्राथमिक ज्वार वाले स्थान के प्रतिपाद स्थान पर गोण ज्वार आते हैं।
उत्तर : True

15. सारगैसो सागर प्रशान्त महासागर में पाया जाता है।
उत्तर : False

16. निमग्न तट मत्स्याखे के लिए विपरीत दशाएँ उत्पन्न करते हैं।
उत्तर : False

17. सागरीय जल में आवर्ती उतार एवं चढ़ाव को सागरीय धारा कहते हैं।
उत्तर : False

18. भूमध्यरेखीय भाग में सागरीय जल की सतह ऊँची रहती है।
उत्तर : True

19. अण्टार्कटिक ड्रिप्ट की दिशा पहुआ हवाओ से प्रभावित होती है।
उत्तर : True

20. भू-आवर्तन के कारण सागरीय धाराएँ दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती है।
उत्तर : True

21. ध्रुवीय क्षेत्र में सागरीय जल के घनत्व में कमी का मुख्य कारण अत्यधिक वर्षा है।
उत्तर : False

22. उत्तरी हिन्द महासागर की धाराओं की दिशा कतु परिवर्तन के साथ परिवर्तित हो जाती है।
उत्तर : True

23. उच्च अक्षांशों में गर्म धाराएँ महादेशों के पूर्वी तट के सहारे प्रवाहित होती हैं।
उत्तर : False

24. सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को भाटा कहते हैं।
उत्तर : True

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25. पृथ्वी पर चन्द्रमा के दूरस्थ अर्थात विमुख भाग पर आने वाले ज्वारों को गोण ज्वार कहते है।
उत्तर : True

26. ‘शीतल दिवाल’ हिन्द महासागर में पायी जाती है।
उत्तर : False

27. आइसवर्ग बड़े-बड़े हिमखण्ड हैं जो ध्रुवीय क्षेत्रों से ठंडी समुद्री धाराओं द्वारा लाये जाते है।
उत्तर : True

28. क्यूरोशियो समुद्रीधारा चीन के तट को गर्म रखती है।
उत्तर : False

29. मोजाम्बिक और मेडागास्कर के सम्मिलित प्रवाह को अगुलहास की घारा कहते हैं।
उत्तर : True

30. प्रशांत महासागर में ‘मेरीयाना ट्रेंच’ ( 11,033 मी०) पृथ्वी पर सबसे गहरी खहु है।
उत्तर : True

31. पृथ्वी पर एक स्थान एक दिन में दो उच्च एवं दो निम्न ज्वारों का अनुभव करता है।
उत्तर : True

32. दो प्रधान ज्वारों के बीच 24 घण्टा 52 मिनट का अंतर होता है।
उत्तर : True

33. शुण्डा शेल्फ प्रशांत महासागर में है।
उत्तर : False

34. खाड़ी की धारा एक गर्म धारा है जो लंदन पोर्ट को पूरे वर्ष भर खुला रखती है।
उत्तर : True

35. क्यूरोशियो की धारा बीन और जापान तट से होकर प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

36. हम्बोल्ट की धारा दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट से होकर प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

37. गल्फ़्ट्रीम मैक्सको की खाड़ी से होकर उत्तर-पूर्व की ओर बहती है।
उत्तर : True

38. गुएना की धारा पश्चिमी अफ्रीकी तट की ओर प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

39. सारगैसम समुद्र हिन्द महासागर के मध्य में स्थित है।
उत्तर : False

40. लैब्रोडोर एक ठंडी धारा है जो आर्कटिक समुद्र से चलती है।
उत्तर : True

41. प्रैण्डबैंक, सैण्डबैंक एवं रेड बैंक मछली पकड़ने के केन्द्र हैं।
उत्तर : True

42. वृहद ज्वार पूर्णिमा एवं अमावस्या को आता है।
उत्तर : True

43. लघु ज्वार प्रत्येक पक्ष के अष्टमी को आता है।
उत्तर : True

44. न्यूफाउण्डलैण्ड के पास पूरे वर्ष भर घना कुहरा छाया रहता है।
उत्तर : True

45. क्यूरोशियो एक ठंडी धारा है।
उत्तर : False

46. प्रैंण्ड बैंक वाणिज्यिक मत्यस्यपालन के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

47. ग्रहीय हवाएँ समुद्री धाराओं की उत्पत्ति के लिए सबसे बड़ा कारण है।
उत्तर : True

48. पश्चिमी आस्टेलिया धारा हिन्द महासागर की ठण्डी धारा है।
उत्तर : True

49. लैबोडोर एक गर्म समुद्री धारा है।
उत्तर : False

50. क्यूराइल एक ठण्डी समुद्री धारा है।
उत्तर : True

51. कैस्पियन सागर विश्व की सबसे बड़ी झील है।
उत्तर : True

52. मरूस्थलों में पायी जाने वाली झीलों को प्लाया कहा जाता है।
उत्तर : True

53. सुण्डा खड्ड विश्व का सबसे गहरा खड्ड है।
उत्तर : False

54. मोजाम्बिक, मेडागास्कर और अगुलहास हिन्द महासागर की गर्म धाराएँ हैं।
उत्तर : True

55. समुद्री धाराँए तटों का अनुगमन नहीं करती हैं।
उत्तर : False

56. ज्वार-भाटा की उत्पत्ति के लिये पृथ्वी की वार्षिक गति जिम्मेदार है।
उत्तर : False

57. मरुस्थलों के निर्माण में गर्म धाराओं का प्रभाव है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

58. लघु ज्वार के समय सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी एक रेखा में आ सकते हैं।
उत्तर : False

59. दो प्राथमिक ज्वारों के बीच समय का अन्तर 24 घंटे का रहता है।
True

60. शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी के दिन लघु ज्वार आता है।
उत्तर : True

61. पूर्णिमा या अमावश्या के दिन सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक सीध में आ जाते हैं।
उत्तर : True

बायां स्तम्भ को दायां स्तम्भ से मिलान करें : (1 mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां, स्तम्भ
1. समुद्री धारायें (a) समुद्री धाराओं को जन्म देती है
2. पृथ्वी की दैनिक गति (b) प्रमुख मत्स्याखेट केन्द्र हैं
3. वृहद ज्वार के समय पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा (c) पेरेजी की स्थिति
4. ग्रैण्ड बैंक, सैण्ड बैंक एवं रेड बैंक (d) क्षैतिज उष्मा संतुलन स्थापित करती है
5. जब सर्वोच्च ज्वार आता है तो उसे कहते हैं (e) प्रत्येक पूर्णिमा एवं अमावस्या को आता है
6. चन्द्रमा पृथ्वी का एक परिक्रमा पूरा करता है (f) प्लैंकटन नामक काई उत्पन्न होती है
7. गर्म और ठंढी जलधाराओं के मान संधि पर (g) 28 दिनों में

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां, स्तम्भ
1. समुद्री धारायें (d) क्षैतिज उष्मा संतुलन स्थापित करती है
2. पृथ्वी की दैनिक गति (a) समुद्री धाराओं को जन्म देती है
3. वृहद ज्वार के समय पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा (e) प्रत्येक पूर्णिमा एवं अमावस्या को आता है
4. ग्रैण्ड बैंक, सैण्ड बैंक एवं रेड बैंक (b) प्रमुख मत्स्याखेट केन्द्र हैं
5. जब सर्वोच्च ज्वार आता है तो उसे कहते हैं (c) पेरेजी की स्थिति
6. चन्द्रमा पृथ्वी का एक परिक्रमा पूरा करता है (g) 28 दिनों में
7. गर्म और ठंढी जलधाराओं के मान संधि पर (f) प्लैंकटन नामक काई उत्पन्न होती है

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. चन्द्रमा की पृथ्वी से अधिकतम दूरी (a) शुक्ल पक्ष की सप्तमी
2. सूर्य, चन्द्रमा एवं पृथ्वी का एक सीध में स्थिति (b) पूर्णिमा या अमावश्या
3. लघु ज्वार (c) भूमि उच्च
4. वृहत् ज्वार (d) Syzygy

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. चन्द्रमा की पृथ्वी से अधिकतम दूरी (c) भूमि उच्च
2. सूर्य, चन्द्रमा एवं पृथ्वी का एक सीध में स्थिति (d) Syzygy
3. लघु ज्वार (a) शुक्ल पक्ष की सप्तमी
4. वृहत् ज्वार (b) पूर्णिमा या अमावश्या

प्रश्न 3.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. प्रवाह (a) ठण्डी धारा के साथ बहकर आए हिम पिण्ड
2. क्यूराइल (b) सूर्य और पृथ्वी केबीच में चन्द्रमा की स्थिति
3. युति (c) हुगली नदी में आनेवाली ज्वारीय भित्तियाँ
4. बान (d) प्रचलित हवाओं के प्रभाव से उत्पन्न होनेवाली धाराएँ
5. आइसबर्ग (e) ध्रवीय क्षेत्र से उत्पन्न होनेवाली ठण्डी धारा

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. प्रवाह (d) प्रचलित हवाओं के प्रभाव से उत्पन्न होनेवाली धाराएँ
2. क्यूराइल (e) ध्रवीय क्षेत्र से उत्पन्न होनेवाली ठण्डी धारा
3. युति (b) सूर्य और पृथ्वी केबीच में चन्द्रमा की स्थिति
4. बान (c) हुगली नदी में आनेवाली ज्वारीय भित्तियाँ
5. आइसबर्ग (a) ठण्डी धारा के साथ बहकर आए हिम पिण्ड

 

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

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WBBSE Class 10 Geography Chapter 2 Question Answer – वायुमण्डल

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
वायुमण्डल के किस स्तर से जेट हवाई जहाज आवागमन करते हैं ?
उत्तर :
समतापमण्डल (Stratosphere)

प्रश्न 2.
संतृप्त वायु की आपेक्षिक आर्द्रता कितनी होती है ?
उत्तर :
100 %

प्रश्न 3.
अल्बेडो की मात्रा क्या है ?
उत्तर :
34 %

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 4.
वायु दाब मापक इकाई का नाम बताओ।
उत्तर :
वायुभार को बैरोमीटर यंत्र से मापा जाता है।

प्रश्न 5.
जल वाष का जल बूँदों में बदलने की क्रिया को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
संघनन।

प्रश्न 6.
चीन सागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवात का क्या नाम है ?
उत्तर :
टाइफून।

प्रश्न 7.
एनाबेटिक पवन क्या है ?
उत्तर :
घाटी से पर्वतीय ढालों की ओर चलने वाले घाटी समीर को एनाबेटिक पवन कहते हैं।

प्रश्न 8.
एनिमोमीटर क्या है ?
उत्तर :
वायु की गती मापने वाले यंत्र को एनिमोमीटर कहते हैं।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 9.
वायुमण्डल की सबसे नीचे की परत क्या है ?
उत्तर :
क्षोभमण्डल।

प्रश्न 10.
अयन मण्डल को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
तापमण्डल।

प्रश्न 11.
वायुमण्डल के बाह्य मण्डल का तापमान लगभग कितना है ?
उत्तर :
लगभग 5568°C

प्रश्न 12.
कौन-सी गैस पराबैगनी किरणों से जीवों की रक्षा करती है ?
उत्तर :
ओजोन गैस।

प्रश्न 13.
सूर्य के केन्द्रीय भाग का तापमान लगभग कितना है ?
उत्तर :
लगभग 1.5 से 2 करोड़ डिग्री K

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 14.
सूर्य की ऊपरी सतह से निकलने वाले उर्जा को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
फोटान।

प्रश्न 15.
सूर्य से पृथ्वी पर पहुँचने वाली ऊर्जा किस रूप में पहुँचती है ?
उत्तर :
लघु तरंगों के रूप में (Short waves)

प्रश्न 16.
समुद्र तल से 1 कि० मी० अथवा 1000 मीटर की ऊँचाई पर कितना सेल्सियस तापमान गिर जाता है ?
उत्तर :
6.4°C

प्रश्न 17.
पृथ्वी की सतह से ऊष्मा किस रूप में विकिरित होती है ?
उत्तर :
दीर्घ तरंगों के रूप में (Long Waves)

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 18.
तापमान को नियन्त्रित करने वाले एक कारक को लिखिए।
उत्तर :
भूमध्य रेखा से दूरी अथवा अक्षांश।

प्रश्न 19.
जिस तापमान पर पानी खौलने लगता है, उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर :
उबालांक (Boiling Point)

प्रश्न 20.
तापमान की विलोमता का क्या कारण है ?
उत्तर :
रात्रि का लम्बा होना।

प्रश्न 21.
दिन का अधिकतम और रात्रि का न्यूनतम तापमान मापने के लिए किस प्रकार का थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर :
सिक्स का अधिकतम और न्यूनतम थर्मामीटर (Six Maximum and Minimum Thermometer)

प्रश्न 22.
ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से बचने के लिए कुल कितने देश विश्व व्यापी सम्मेलन में भाग लिये थे ?
उत्तर :
159 देश।

प्रश्न 23.
किसी वस्तु के अधिक गर्म कणों द्वारा अपने सम्पर्क के कम गर्म कणों को ताप देने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
संचालन (Conduction)

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प्रश्न 24.
वायुदाब किस रेखा द्वारा दिखाया जाता है ?
उत्तर :
समदाब रेखा (Isobar)।

प्रश्न 25.
समदाब रेखाओं का वितरण किस रूप में है ?
उत्तर :
क्षैतिज रूप में।

प्रश्न 26.
वायुमण्डल में वायुभार के घटने-बढ़ने की क्रिया को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
वायुदाब उच्चावचन (Barometric Tide)

प्रश्न 27.
समुद्र तल पर औसत वायुदाब कितना इंच होता है ?
उत्तर :
29.92 इंच।

प्रश्न 28.
उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर वायुदाब की पेटियों को कितने भागों में बाँटा गया है ?
उत्तर :
दो।

प्रश्न 29.
30° से 35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
अश्व अक्षांश (Horse Latitude)।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 30.
किस पवन को ग्रहीय पवन भी कहा जाता है ?
उत्तर :
प्रचलित या स्थायी पवन को।

प्रश्न 31.
भूमध्य रेखा के निकट किस पवन के बाद मूसलाधार वर्षा होती है।
उत्तर :
पूर्वी पवन के।

प्रश्न 32.
वायुदाब को प्रभावित करने वाले एक तत्व का नाम लिखिए।
उत्तर :
तापमान।

प्रश्न 33.
भूमध्य रेखीय या विधुवत रेखीय निम्न वायु दाब कटिबन्ध में किस प्रकार की धारा उत्पत्र होती है?
उत्तर :
संवहनीय (Convectional)

प्रश्न 34.
ग्लोब या पृथ्वी कॉरिआलिस बल (Coriolis Force) कहाँ शून्य रहता है ?
उत्तर :
विषुवत रेखा या भूमध्य रेखा पर।

प्रश्न 35.
वायुयान में तथा पर्वतों पर चढ़ते समय किस बैरोमीटर का प्रयोग़ किया जाता है ?
उत्तर :
एनीरायड बैरोमीटर (Aneroid Barometer)।

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प्रश्न 36.
कारिआलिस बल (Coriolis Force) की खोज किस वैज्ञानिक ने किया था ?
उत्तर :
फ्रांसीसी वैज्ञानिक जी० जी० कारिआलिस ने (G. G. Coriolis)।

प्रश्न 37.
विरुद्ध व्यापारिक पवन या पछुवा पवन का प्रभाव किस गोलार्द्ध में नाविकों द्वारा सबसे अधिक अनुभव किया जाता है ?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° से 65° अक्षांशों के बीच।

प्रश्न 38.
भूमध्य रेखीय निम्न दाब की पेटी में वायुमण्डलीय दशा के अत्यधिक शान्त रहने के कारण उसे किस कटिबन्ध के नाम से पुकारा जाता है।
उत्तर :
डोलड्रम या शांत कटिबन्ध (Doldrum or Calm belt)।

प्रश्न 39.
दोनों गोलार्द्धों के उपध्रुवीय क्षेत्र में किस प्रकार की वायु दाब पेटियाँ पायी जाती हैं ?
उत्तर :
निम्न वायुदाब की पेटियाँ (Low Pressure Belts)!

प्रश्न 40.
किस सामयिक पवन (Periodical Winds) को गुरुत्वाकर्षण अथवा उत्रेक्षक पवन (Gravity or Catabatic Wind) भी कहा जाता है?
उत्तर :
पर्वतीय समीर को (Mountain Breeze)।

प्रश्न 41.
स्विद्जरलैण्ड की घाटियों को शीतकाल में क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
जलवायु मरूद्यान (Climatic Oasis)

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प्रश्न 42.
मौसम सुहावना तथा बड़ा ही स्वास्थ्यप्रद समझी जाने वाली हवा कौन है ?
उत्तर :
हरमाट्टन (Harmattan)।

प्रश्न 43.
‘हिम झंझावातों का घर’ (House of the Blizzard) का प्रभाव कहाँ एवं किस गोलार्द्ध में देखने को मिलता है?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध के एडीलेण्ड में।

प्रश्न 44.
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) का सर्वाधिक औसत वेग किस कटिबन्ध के ऊपर होता है ?
उत्तर :
उपोष्ण उच्च वायुभार कटिबन्ध।

प्रश्न 45.
उष्णा कटिबन्ध चक्रवात की उत्पत्ति किस ऋतु में होती है ?
उत्तर :
ग्रीष्म ऋतु में।

प्रश्न 46.
चक्रवात (Cyclone) के केन्द्र में कौन-सा वायुदाब पाया जाता है ?
उत्तर :
निम्न वायुदाब।

प्रश्न 47.
शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में प्राय: समदाब रेखाओं की आकृति कैसी होती है ?
उत्तर :
समदाब रेखाएँ प्राय: V आकार की।

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प्रश्न 48.
ITCZ का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र (Inter-Tropical Covergence Zone)

प्रश्न 49.
आर्द्रता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
आर्द्रता (Humidity) : वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प को आर्द्रता कहते हैं।

प्रश्न 50.
संतृत्प वायु से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
संतृप्त वायु (Saturated Air) : जब किसी वायु में उसकी क्षमता के बाराबर जलवाष्प आ जाय तो उसे संतृप्त वायु कहते है।

प्रश्न 51.
निरपेक्ष आर्द्रता को किस रूप में व्यक्त किया जाता है ?
उत्तर :
निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) को ग्राम प्रतिघनमीटर (gram /m2) के रूप में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 52.
सहिम वृष्टि क्या है ?
उत्तर :
सहिम वृष्टि (Sleet) : जल वृष्टि और हिम वृष्टि के सम्मिलित रूप को सहिम वृष्टि कहा जाता है।

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प्रश्न 53.
किस बादल को मिध्या पक्षांभ (False Cirrrus) कहा जाता है ?
उत्तर :
कपासी-वर्षी मेघ को मिथ्या पक्षाय (False Cirus) कहा जाता है।

प्रश्न 54.
उष्णा कटिबन्ध का विस्तार पृथ्वी पर कहाँ तक फैला हुआ है ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्ध पृथ्वी पर भूमध्य रेखा के दोनों ओर 23 1/2° उत्तर एवं दक्षिण अर्थात् कर्क और मकर रेखा तक फैला हुआ है।

प्रश्न 55.
सवाना (Savana) क्या है ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्ध आर्द्र एवं शुष्क जलवायु वाले प्रदेश को ही सवाना कहा जाता है।

प्रश्न 56.
मध्य तापीय (Mesothermal) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उष्ण आर्द्र शीतोष्ण जलवायु समूह को मध्य तापीय (Mesothermal) जलवायु भी कहा जाता है।

प्रश्न 57.
किस जलवायु प्रदेश को चीन तुल्य जलवायु (China Type of Climate) कहा जाता है ?
उत्तर :
CW जलवायु अर्थांत उष्ण शीतोष्ण आर्द्र जलवायु को चीन तुल्य जलवायु (China Type of Climate) कहा जाता है।

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प्रश्न 58.
किस जलवायु के अन्तगर्त शीत ऋतु में वर्षा होती है।
उत्तर :
भूमध्य सागरीय जलवायु के अन्तर्गत शीत ऋतु में वर्षा होती है।

प्रश्न 59.
ऊँचाई के आधार पर बादल को कितने भागों में बॉटा गया है ?
उत्तर :
ऊँचाई के आधर पर बादलों को चार भागों में रखा गया है।

प्रश्न 60.
पूर्वी भारत में स्थित वृष्टि-छाया प्रदेश का नाम लिखिए।
उत्तर :
पूर्वी भारत में स्थित वृष्टि-छाया प्रदेश (Rain Shadow Area) का नाम शिलांग है।

प्रश्न 61.
इन्द्रधनुष क्या है ?
उत्तर :
इन्द्रधनुष (Rainbow) : मेघयुक्त आकाश पर प्रात: काल अथवा सांध्य समय कभी-कभी सूर्य की किरणें परावर्तित होकर सात रंगों के धनुष के रूप में दिखाई पड़ती है उसे ही इन्द्रधनुष कहा जाता है।

प्रश्न 62.
मौसम के प्रमुख दो तत्व लिखिए।
उत्तर :
तापमान और वायुदाब।

प्रश्न 63.
पाला क्या है ?
अथवा
‘पाला’ शब्द का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
पाला (Frost) : ‘पाला’ शब्द का प्रयोग धरातल पर अथवा घास-पतियों पर भाप के ठोस अवस्था में हल्की चमकदार बर्फ के तह के रूप में जम जाने के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 64.
वायुमण्डल के संगठन में जलवाष्प का प्रतिशत कितना होता है ?
उत्तर :
वायुमण्डल के संगठन में जलवाष्प का प्रतिशत 2 से 5 तक हो सकता है।

प्रश्न 65.
संघनन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
संघनन (Condesation) : जलवाष्प के जलरूप (ठोस-हिम या तरल) में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

प्रश्न 66.
ओला (Hail) क्या है ?
उत्तर :
ओला (Hail) : जब बर्फ की कड़ी एवं बड़ी गोलियों की बौछार होने लगती है तो इसे ओला कहा जाता है।

प्रश्न 67.
ट्रिगर प्रभाव (Trigger Effect) क्या है ?
उत्तर :
ट्रिगर प्रभाव (Trigger Effect) : पर्वतो द्वारा वायु के ऊपर उठने में जो सहायता मिलती है, उसे ट्रिगर प्रभाव कहा जाता है।

प्रश्न 68.
वर्षण क्या है ?
उत्तर :
संघनन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप वायु के जलवाष्प जल बूँद में बदल जाती है।

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प्रश्न 69.
आर्द्रता का मापन कैसे करते हैं ?
उत्तर :
WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल 1

प्रश्न 70.
भूमध्यरेखीय जलवायु प्रदेश किन अक्षांशों के बीच पाया जाता है ?
उत्तर :
यह जलवायु भूमध्य रेखा के दोनो ओर 5° से 10° तक पाई जाती है।

प्रश्न 71.
भूमध्यसागरीय जलवायु के दो प्रदेशों का नाम लिखो।
उत्तर :
(i) भू मध्य सागर के उत्तर पुर्तगाल से टकी तक तथा ईरान के पठारी क्षेत्र।
(ii) भू मध्य सागर के दक्षिणी किनारे मोरक्को, उत्तरी नाइजीरिया, टयूनीशिया तथा बलीनिया में बेंगाजी का उत्तरी क्षेत्र।

प्रश्न 72.
डोलड्रम (Doldrum) क्या है ?
उत्तर :
डोलड्रम (Doldrum) :- विषुवतीय निम्न दाब पेटी में वायुमण्डलीय दशा के अत्यधिक शांत रहने के कारण ही इस कटिबंध को डोलड्रम कहा जाता है, जिसका विस्तार विषुवत से दोनों गोलार्द्ध में 5° अक्षांशों के बीच रहता है।

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प्रश्न 73.
स्टेपी जलवायु के मुख्य दो विशेषताओं को बताओ।
उत्तर :
(i) समुद्र से दूर स्थल के भीतर स्थित होने से यहाँ वर्षा कम होती है।
(ii) अधिकांश वर्षा ग्रीष्म को प्रारम्भ में तथा वसन्त ऋतु में होती है।

प्रश्न 74.
वायुमण्डल में आक्सीजन की मात्रा कितनी है ?
उत्तर :
20.99 %

प्रश्न 75.
वायुमण्डल की सबसे निचली परत कौन-सी है ?
उत्तर :
क्षोभमण्डल (Troposphere)

प्रश्न 76.
आयनमण्डल की एक विशेषता बताइये।
उत्तर :
इस मण्डल की सहायता से बेतार के तार का संचार व्यवस्था संभव होता है।

प्रश्न 77.
प्रत्येक महीने के औसत तापमान के योग में 12 का भाग देने पर जो ताप ज्ञात होता है, उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर :
औसत वार्षिक तापक्रम।

प्रश्न 78.
शीत कटिबंध की स्थिति बताइये।
उत्तर :
यह शीतोष्ण कटिबन्ध से उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव (North pole 90° ) तक तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी धुव (South Pole 90°) तक फैला है।

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प्रश्न 79.
किसी एक ग्रीन हाउस गैस का नाम बताइये।
उत्तर :
कार्बन डाई-आक्साइड (CO2)

प्रश्न 80.
वैश्विक तापन का एक प्रभाव बताइये।
उत्तर :
हिम का पिघलना तथा सागर तल में वृद्धि होना।

प्रश्न 81.
किसी एक ठण्डी स्थानीय हवा का नाम बताइये।
उत्तर :
ब्लिजर्ड (Blizzard) सह ध्रुवीय हवा है।

प्रश्न 82.
किस शक्ति के कारण वायुमण्डल धरातल से टिका हुआ है।
उत्तर :
पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण।

प्रश्न 83.
वायुमण्डल में जलवाष्प की अधिकतम मात्रा कितनी हो सकती है ?
उत्तर :
5% से अधिक कभी भी नहीं होती है।

प्रश्न 84.
वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी ऊँचाई तक पायी जाती है ?
उत्तर :
वायुमण्डल में 120 कि॰मी॰ की ऊँचाई तक आते-आते ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है।

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प्रश्न 85.
वायुमण्डल में विद्यमान गैसों में नाइट्रोजन की मात्रा कितनी है ?
उत्तर :
78.03 %

प्रश्न 86.
वायुमण्डल की किस परत में ऊँचाई के साथ तापमान एवं वायुदबाव में परिवर्तन होता रहता है ?
उत्तर :
अधोमण्डल या क्षोभ मण्डल (Troposphere)

प्रश्न 87.
किस वर्ग के रसायन ओजोन परत के क्षरण के लिए उत्तरदायी हैं ?
उत्तर :
क्लोरो-फ्ल्यूरो कार्बन वर्ग के रसायन।

प्रश्न 88.
सूर्य से प्राप्त ताप की कितनी मात्रा पृथ्वी को प्राप्त होती है ?
उत्तर :
51 % ताप प्राप्त होती है।

प्रश्न 89.
पृथ्वी के किस कटिबंध में दिन-रात की लम्बाई 24 घण्टे से अधिक होती है ?
उत्तर :
शीत कटिबन्ध (Frigid zone) में।

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प्रश्न 90.
मानचित्र पर कौन रेखाएँ समान सागर तलीय तापमान वाले स्थानों को दर्शाती है ?
उत्तर :
समताप रेखायें (Isotherms)

प्रश्न 91.
मौसम के सभी तत्त्व किसके द्वारा नियंत्रित होते हैं ?
उत्तर :
मौसम के सभी तत्व वायुदाब द्वारा नियन्त्रित होते है।

प्रश्न 92.
किन अक्षांशों को अश्व अक्षांश कहते हैं ?
उत्तर :
30°-35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश को अरब अक्षांश कहा जाता है।

प्रश्न 93.
पृथ्वी पर कोरियोलिस बल कहाँ शून्य रहता है ?
उत्तर :
विषुवत वृत पर कोरियोलिस बल शून्य होता है।

प्रश्न 94.
किन हवाओं को दैनिक मानसून कहते हैं ?
उत्तर :
जलीय व स्थलीय हवाओं को दैनिक मानसून कहते है।

प्रश्न 95.
निरपेक्ष आर्द्रता किसमें व्यक्त की जाती है ?
उत्तर :
यह ग्राम प्रति घनमीटर वायु में व्यक्त की जाती है।

प्रश्न 96.
संतृप्त वायु की सापेक्षिक आर्द्रता कितनी रहती है ?
उत्तर :
संतृप्त वायु की सापेक्ष आर्द्रता 100 % होती है।

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प्रश्न 97.
जलीय चक्र की कितनी अवस्थाएँ हैं ?
उत्तर :
जलीय चक्र की तीन अवस्थाएँ होती है –

  • वाष्पीकरण
  • संघनन
  • वर्षन

प्रश्न 98.
जेट धारा की सामान्य गतिकितनी होती है ?
उत्तर :
इसकी सामान्य गति 150 से 200 कि॰मी॰ प्रति घण्टा होती है।

प्रश्न 99.
जब ओसांक हिमांक बिंदु के नीचे होता है तो संघनन किस रूप में होता है ?
उत्तर :
हिमकण के रूप में होता है।

प्रश्न 100.
पर्वतों के पवन विमुख ढाल को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
पवन-विमुख ढाल (Leeward slope) कहते है।

प्रश्न 101.
समुद्री जलवायु के दो प्रदेशों का नाम लिखो।
उत्तर :
रोम और दक्षिणी इटली।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
चिनक क्या है ?
उत्तर :
चिनूक (Chinook) : चिनूक शब्द का अर्थ है – ‘हिम भक्षी’। यह पवन अमेरिका एवं कनाडा में रॉकी पर्वत श्रेणों के पूर्वी ढाल पर नीचे उतरती है। रॉकी के पूरब भाग में स्थित चारागाहों को हिम के प्रभाव से मुक्त रखती है।

प्रश्न 2.
जेट स्त्रोत (धारा) की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
(i) ये अक्षांशीय उष्मा संतुलन को कायम रखने में सहायक होती है।
(ii) ये चक्रवातों के मार्ग को प्रभावित करती है।

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प्रश्न 3.
ज्वारीय-भित्ति क्या है ?
उत्तर :
नदी के खुले व चौड़े मुहाने से ज्वार इसकी तंग एवं सकरी घाटी में तीब गति से प्रवेश करता है। दूसरी तरफ नदी की जल धारा समुद्र की ओर आती है। दोनों के आपस में टकराने से जल एक ऊँची दीवार सदृश्य उठ जाता है। इसे ज्वारीय भित्ति (Tidal Bore) कहते है।

प्रश्न 4.
दक्षिणी गोलार्द्ध के दो उष्ण मरूस्थलों के नाम बताओ।
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध के दो उष्ण मरूस्थलों के नाम कालाहारी एवं अटकामा।

प्रश्न 5.
चेरी क्लासम और आप्र वृष्टि क्या हैं ?
उत्तर :
चेरी ब्लासम : कनटिक में नार्वेस्टर से होने वाली वर्षा को चेरी ब्लासमकहा जाता है, जो कॉफी की कृषि के लिए लाभदायक है।
आप्र वृष्टि : नार्वेस्टर से होने वाला वर्षा से दक्षिण भारत में आम की खेती लाभदायक सिद्ध होती हैं इसलिए आम्र वृष्टि कहते हैं।

प्रश्न 6.
वर्नियर स्थिर (Vernier Constant) क्या है ?
उत्तर :
वर्नियर स्थिर (Vernier Constant) : वायुमण्डलीय काँच की नली के दिखाई देने वाले भाग पर वायुमण्डलीय दाब मिलीबार में अंकित की जाती है। इस मापनी पर एक वर्नियर मापनी लगी रहती है जिसे ही वर्नियर स्थिर कहा जाता है।

प्रश्न 7.
सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) क्या है ?
उत्तर :
सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) :- किसी भी तापमान पर वायु में उपस्थित जलवाष्प तथा उसी तापमान पर उसी वायु की जलवाष्प धारण करने की क्षमता को सापेक्ष आर्द्रता कहते हैं। इसे प्रतिशत मात्रा में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 8.
हिमरेखा (Snow Line) क्या है ?
उत्तर :
हिमरेखा (Snow Line) :- हिम रेखा वह कल्पित रेखा है, जिसके ऊपर पूर्णतया बर्फ कभी नहीं पिघलती है अर्थात जहाँ बर्फ सालों भर जमी रहती है।

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प्रश्न 9.
ओसांक विन्दु तापक्रम (Dew Point Temperature) क्या है ?
उत्तर :
ओसांक विन्दु तापक्रम (Dew Point Temperature) :- बिना भाप के बटाये-बढ़ाये ही जिस तापमान पर वायु संतृप्त हो जाती है, उस तापमान को ओसांक विन्दु तापक्रम कहा जाता है।

प्रश्न 10.
वायु विलय पात्र (Aerosol) क्या है।
उत्तर :
वायु विलय पात्र (Aerosol) :- वायु में विभित्र प्रकार के ठोस एवं तर पदार्थ के मिश्रण को ही वायु विलय पात्र कहा जाता है।

प्रश्न 11.
हिमभक्षि (Snow-eaters) क्या है।
उत्तर :
हिमभक्षि (Snow-eaters) : – सं० रा० अ० में चिनूक हवाओं के कारण बर्फ के पिघलते ही पानी वाष्प बन कर इन हवाओं में मिल जाता है। इन हवाओं को इसीलिए हिमभक्षि (Snow-eaters) कहा जाता है।

प्रश्न 12.
चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic Rain) क्या है ?
उत्तर :
चक्रवातीय अथवा वाताग्री वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall) : चक्रवातों द्वारा होने वाली वर्षा को चक्रवाती या वाताग्री वर्षा कहा जाता है। शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में उष्ण एवं आर्द्र वायु राशि हल्की होने के कारण शीतल एवं शुष्क राशि के ऊपर चढ़ जाती है, इससे गर्म पवन में उपस्थित जलवाष्ष का संघनन हो जाता है और वर्षा होती है। इस प्रकार की वर्षा शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों के क्षेत्रों में होती है। शीत ॠतु में उत्तर-पश्चिम भारत में भी वर्षा चक्रवातो द्वारा ही होती है।’

प्रश्न 13.
उपोष्ण चक्रवात (Trorical Cyclone) क्या है ?
उत्तर :
उपोष्ण चक्रवात (Trorical Cyclone) :- ग्लोब पर दोनों गोलार्द्धों में 8° से 24° अंक्षाशों के बीच उत्पन्न चक्रवातों को उपोष्ण चक्रवात कहा जाता है।

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प्रश्न 14.
बोफर्ट मापक्रम (Bofert Scale) क्या है ?
उत्तर :
बोफर्ट मापक्रम (Bofert Scale) :- यह एक अन्तर्राष्ट्रीय वायु गति मापक यंत्र है जिसमें वायु की न्यू नतम
उत्तर :
बोफटे मापक्रम (Bofert Scale) :- यह एक अन्तरांत्ट्रीय वायु गता अधिकतम गति 12 इकाई दिखाया जाता है।

प्रश्न 15.
समताप मण्डल में ही जेट विमान क्यों उड़ते हैं ?
उत्तर :
क्या कारण है कि जेट विमान समतापमण्डल में ही उडते हैं ? समतापमण्डल परिवर्तनमण्डल के ऊ : 80 कि०मी० की ऊँचाई तक पाया जाता है। ऊँचाई के साथ समतापमण्डल में तापक्रम का परिवर्तन नहीं होता है। तापक्रम लगभग स्थिर रहता है। समतापमण्डल में जलवाष्प एवं धूल-कण बहुत कम पाये जाए हैं। अत: इस मण्डल में आँधी, तूफान हिम-वर्षा एवं धन गर्जन नहीं होते। समान तापमान, बादनलों का अपेक्षाकृत अभाव और हल्की वायु के कारण जेट विमान समतापमण्डल में ही अधिक उड़ना चाहता है।

प्रश्न 16.
विषम मण्डल क्या है ?
उत्तर :
विषम मण्डल (Heterosphere) : यह वायुमण्डल की सबसे ऊपरी परत है, इस मण्डल की ऊँचाई 90 कि०मी० से 10,000 कि०मी० तक है। इस मण्डल में स्थित विभिन्न परतों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों की विषमता के कारण ही इसका नाम विषम मण्डल है।

प्रश्न 17.
वायु विज्ञान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वायु विज्ञान : विसे कहत्तान (Aerology) : वायुमण्डल के सबसे ऊपरी परतो के अध्ययन को ही वायु विज्ञान कहा जाता है।

प्रश्न 18.
ऋतु विज्ञान क्या है?
उत्तर :
ऋतु : वतु विज्ञान (Meteorology) : वायुमण्डल के सबसे नीचली परतों के अध्ययन को ऋतु विज्ञान कहा जाता है।

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प्रश्न 19.
सामान्य ह्रास दर किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सामान्य ह्रास दर (Normal Lapse Rate) : क्षोभमण्डल की परत में ऊँचाई के साथ-साथ तापमान कम होता जाता है। तापमान की गिरावट की दर 1°C प्रति 165 मीटर होती है, इसे ही सामान्य ह्रास दर कहते हैं।

प्रश्न 20.
सम मण्डल से क्या समझते हैं?
उत्तर :
सम मण्डल (Homosphere) : सम मण्डल वायु मण्डल का निचला भाग है। समुद्र तल से इस मण्डल की ऊँचाई 90 कि॰मी॰ मानी गयी है। इस मण्डल की रचना मुख्यत: नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन दोनों गैसों से हुई है। ये दोनों गैसें वायुमण्डल के 99 प्रतिशत भाग को घेरे हुए हैं।

प्रश्न 21.
वायुमण्डल का प्रमुख संघटन क्या है ?
उत्तर :
वायुमण्डल अनेक गैसों का मिश्रण है। गैसों के अलावा वायुमण्डल में जलवाष्प तथा धूलकण भी वायुमण्डल का संघटन है।

प्रश्न 22.
वायुमण्डल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
वायुमण्डल (Atmosphere) : वायुमण्डल दो शब्दों से मिल कर बना है – वायु + मण्डल, अर्थात वायु का विशाल भण्डार जो पृथ्वी को एक खोल अर्थात लीफाफे की भॉति चारों ओर से घेरे हुए है, वायुमण्डल कहलाता है। यह वायुमण्डल अपने आप में अपने को रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन प्रकट करता है।

प्रश्न 23.
उत्तर ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Borealis) और दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Australis) क्या हैं?
उत्तर :
धुवीय प्रकाश पर सूर्य के धब्बों के परिर्वतन का भी काफी प्रभाव पड़ता है, अतः सूर्य के विद्युत विसर्जन से भी यह प्रकाश संबधित है। उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य से प्राप्त रंग-विरंगी प्रकाश पूँज को उत्तर ध्रुवीय प्रकाश तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उसी प्रकाश पूँजों को दक्षिण धुवीय प्रकाश कहा जाता है।

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प्रश्न 24.
क्षोभ सीमा क्या है ?
उत्तर :
क्षोभ सीमा (Tropopause) : क्षोभ मण्डल और समताप मण्डल के बीच स्थित पतली परत को क्षोभ सीमा कहा जाता है। इसकी ऊँचाई 1.5 कि०मी० होती है।

प्रश्न 25.
संवाहन प्रदेश किसे कहते हैं?
उत्तर :
संवाहन प्रदेश (Convectional Zone) : क्षोभ मण्डल में लम्बवत वायु की धाराएँ पायी जाती हैं और ये परते संचालन (Conduction), विकिरण (Radiation), तथा संवाहन (Convection) द्वारा गर्म और ठण्डी होती रहती है। इस भाग में संवाहन का नियम अधिक प्रचलित है, इसी कारण इसको संवाहन प्रदेश भी कहते हैं।

प्रश्न 26.
टिप्पणी लिखिए : (i) घूलकण, (ii) जलवाष्प।
उत्तर :
(i) धूलकण (Dust Particles) : वायुमण्डल में वायु के गति के कारण सुक्ष्म धूल के कण उड़ते रहते हैं। ये धूल के कण विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होते हैं। इनमें सूक्ष्म मिट्टी, धूल, समुद्री नमक, धुएँ की कालिख, राख तथा उल्कापात के कण सम्मिलित हैं। धूलकण प्रायः वायुमण्डल की निचली परत में पायी जाती है। धूलकण अधिकांश आर्द्रताग्माही केन्द्र बन जाते हैं, जिन पर वायुमण्डलीय जल वाष्प का संघनन होता है। इस प्रकार बादल बनते हैं और वर्षा होती है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय आकाश में लाल और नारंगी रंग की छटाओं के लाली को प्रभात (Dawn) तथा गोधूलि बेला (Twilight) कहते हैं।

(ii) जलवाष्प (Water Vapour) : अभी तक हम केवल शुष्क वायु में ही विभिन्न गैसों की मात्रा तथा उनके महत्व के बारे में जानते हैं, लेकिन वायमण्डल में विभिन्न गैसों के अलावा जलवाष्प की उपस्थिति भी होती है। वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा इसके कुल आयतन का 4 से 5 प्रतिशत है। धवुीय क्षेत्रों के शुष्क वायुमण्डल में जलवाष्प 1 % तथा उष्णआर्द्र प्रदेशों में इसकी मात्रा 4 % होती है। इस प्रकार ऊँचाई के वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में कमी आती जाती है। जलवाष्प की मात्रा वायुमण्डल के 8 कि०मी० की ऊँचाई तक सीमित है।

प्रश्न 27.
आकाश का रंग नीला दिखाई देता है क्यों ?
उत्तर :
चाँकि वायुमण्डल में उपस्थित धूलकण पाये जाते हैं, धूलकण सूर्यताप को रोकने तथा उसे परावर्तित करने का कार्य करते हैं। धूलकण प्राय: वायुमण्डल की निचली परत में पायी जाती है। सूर्य से आने वाली किरणों में प्रकीर्णन इन कणों द्वारा होती है, जिस कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।

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प्रश्न 28.
सूर्याताप से क्या समझते हो ?
उत्तर :
सूर्याताप (Insolation) से पृथ्वी तक पहुँचने वाले सौर विकिरण को सूर्याताप कहते हैं।
दूसरे शब्दों में सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण उर्जा को सूर्याताप कहते हैं।

प्रश्न 29.
सौर स्थिरांक अथवा अपरिवर्तनशील शक्ति क्या है ?
उत्तर :
सौर स्थिरांक अथवा अपरिवर्तनशील (Solar Constant) : वायुमण्डल की बाहरी सीमा पर सूर्य से प्रति मिनट प्रति वर्ग सेंटीमीटर पर 1.94 कैलोरी ऊष्मा प्राप्त होती है। ऊष्मा की इस मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए इसे सौर स्थिरांक कहते हैं।

प्रश्न 30.
पृथ्वी का एल्बिडो किसे कहते है ?
उत्तर :
पृथ्वी का एल्बिडो (Albedo of the earth) : वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर प्राप्त होने वाली कुल-ऊष्मा को यदि 100 इकाई मान लिया जाय तो इसमें से 35 इकाईयाँ पृथ्वी के धरातल पर पहुँचने से पहले ही अंतरिक्ष में लौट जाती है सौर विकिरण की इस मात्रा, अर्थात् 35 इकाई को ही पृथ्वी का एल्बिडो कहा जाता है।

प्रश्न 31.
पार्थिव विकिरण अथवा भौमिक विकिरण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पार्थिव विकिरण अथवा भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) : सूर्याताप का 51 % भाग ही पृथ्वी की सतह पर पहुँच कर उसे गर्म करता है। पृथ्वी भी ऊष्मा को दीर्घ तरंगों के रूप में विकिरित करती है, उसे ही पार्थिव विकिरण या भौमिक विकिरण कहा जाता है।

प्रश्न 32.
पृथ्वी का उष्मा बजट क्या है ?
उत्तर :
पृथ्वी का उष्मा बजट (Heat Budget of the Earth) : पृथ्वी पर औसत तापमान एक समान रहता है। यह सूर्याताप एवं भौमिक विकिरण में संतुलन के कारण ही संभव हुआ है। इस संतुलन को ही पृथ्वी का उष्मा बजट कहा जाता है।

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प्रश्न 33.
35° सेण्टीग्रेड तापमान को फारेनहाइट में बदलो।
उत्तर :
फारेनहाइट = 35 × \(\frac{9}{5}\) + 32 = 63 + 32 = 95° फारेनहाइट

प्रश्न 34.
212° फारेनहाइट को सेण्टीग्रेड में बदलो।
उत्तर :
सेण्टीग्रेड = \(\frac{5}{9}\) (212-32) = \(\frac{5}{9}\) × 180 = 100° सेण्टीग्रेड

प्रश्न 35.
सिक्स का अधिकतम एवं न्यूनतम थर्मामीटर क्या है ?
उत्तर :
सिक्स का अधिकतम एवं न्यूनतम थर्मामीटर (Six Maximum and Minimum Thermometer) : दिन का अधिकतम तथा रात्रि का न्यूनतम तापमान मापने के लिए एक विशेष प्रकार का थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है जिसका अविष्कार जे० सिक्स (J. Six) नामक विद्धान ने किया था।

प्रश्न 36.
समताप रेखाओं से क्यासमझते हो ?
उत्तर :
समताप रेखाएँ : समताप रेखा अम्रेंजी के शब्द ‘ISO’ और ‘therm’ दो शब्दों से मिल कर बना है जिनमें ISO का अर्थ ‘सम’ तथा ‘Therm’ का अर्थ ‘ताप’ अर्थात समताप होता है। समताप रेखाएं वे कल्पित रेखाएं है जो मानचित्र पर समान तापमान वाले स्थानों को मिलाती हैं।

प्रश्न 37.
दैनिक तापान्तर अथवा दैनिक ताप परिसर से क्या समझत हो ?
उत्तर :
दैनिक तापान्तर (Daily Range of Temperature): एक दिन के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ही दैनिक तापान्तर कहते हैं।

प्रश्न 38.
वार्षिक तापान्तर कैसे ज्ञात करते हैं ?
उत्तर :
वार्षिक तापान्तर (Annual Range of Temperature) : एक वर्ष में किसी माह का अधिक तापमान से न्यूनतम तापमान को घटा देने पर जो तापमान ज्ञात होता है वार्षिक तापान्तर होता है। जैसे 40°C-12°C=28°C

प्रश्न 39.
मासिक तापान्तर से क्या समझते हो ?
उत्तर :
मासिक तापान्तर (Monthly Range of Temperature) : एक माह के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ही मासिक तापान्तर कहा जाता है।

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प्रश्न 40.
दैनिक औसत तापमान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दैनिक औसत तापमान (Average Daily Temperature) : किसी स्थान के किसी दिन के सबसे अधिकतम तापमान तथा रात के सबसे न्यूनतम तापमान के औसत को ही औसत तापमान कहा जाता है।
जैसे – अधिकतम तापमान -29°C
न्यूनतम तापमान -15°C
अर्थात् अधिकतम और न्यूनतम तापमान को जोड़ कर दो से भाग देने पर प्राप्त तापमान ही दैनिक औसत तापमान होगा।
(29°C + 15°C) ÷ 2
= 44° ÷ 2 = 22°C

प्रश्न 41.
तापान्तर से क्या समझते हो ?
उत्तर :
तापान्तर (Range of Temperature): किसी क्षेत्र के अधिकतम और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ही तापान्तर कहा जाता है।
अत: तापान्तर = अधिकतम तापमान – न्यूनतम तापमान
जैसे :- 55°C – 40°C = 15°C

प्रश्न 42.
हिमांक और उबालांक से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जिस तापमान पर पानी जमने लगता है उसे हिमांक (Freezing Point) और जिस तापमान पर पानी खौलने लगता है उसे उबालांक (Boiling Point) कहते हैं।

प्रश्न 43.
तापीय भूमध्य रेखा क्या है ?
उत्तर :
तापीय भूमध्य रेखा (Thermal Equator) : पृथ्वी के उच्चतम वार्षिक तापमान वाले स्थानों को मिलाते हुए जो समताप रेखा खींची गयी है उसे तापीय भूमध्य रेखा कहते हैं।

प्रश्न 44.
वायुमण्डल को गर्म तथा ठण्डा करने के कौन-कौन सी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
अन्य पदार्थों की भांति वायुमण्डल भी विकिरण (Radiation), संचालन (Conduction), संवहन (Convection) और अभिवहन (Advection) द्वारा गर्म तथा ठण्डा होता है।

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प्रश्न 45.
औसत वार्षिक तापक्रम से क्या समझते हो ?
उत्तर :
औसत वार्षिक तापक्रम (Average Annaul Temperature) : किसी स्थान के वर्ष भर के औसत मासिक तापक्रमों को जोड़कर उसमें 12 से भाग देने से उस स्थान का औसत वार्षिक तापक्रम कहते है।
जैसे :- 12 महीने अर्थात जनवरी से दिसम्बर तक का कुल तापक्रम 306° है तो 306° ÷ 12 = 25.5° वार्षिक औसत तापक्रम होगा।

प्रश्न 46.
औसत मासिक तापक्रम कहने का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
औसत मासिक तापक्रम (Average Month Temperature) : किसी क्षेत्र के महीने भर के औसत दैनिक तापक्रमों को जोड़कर उसमें एक महीने के दिनों से भाग देने पर उस क्षेत्र का औसत मासिक तापक्रम ज्ञात होता है। जैसे :- 600° 30.20°C औसत मासिक तापक्रम होगा।

प्रश्न 47.
रूद्धोष्म अथवा एडियाबेटिक ताप परिवर्तन क्या है ?
उत्तर :
रूद्धोष्म अथवा एडियाबेटिक ताप परिवर्तन (Adiabotic Temperature change) : जब किसी वस्तु में ऐसा परिवतर्न होता है कि वह वस्तु न तो बाहरी माध्यम को उष्मा दे एवं न ही उससे उष्मा ले, परन्तु उसका ताप बदल जाये, तब ऐसे परिवर्तन को ही रूद्धोष्म परिवर्तन कहा जाता है।

प्रश्न 48.
तापमान का व्युत्क्रमण या विलोमता से क्या समझते हो ?
उत्तर :
तापमान का व्युत्क्रमण या विलोमता (Inversion of Temperature) : साधारणत: ऊँचाई के अनुसार तापक्रम घटने लगता है परन्तु, कभी-कभी ऐसा देखा जाता है कि ऊँचाई बढ़ने पर भी तापमान घटने की अपेक्षा बढ़ता जाता है और वायु की तहें सामान्य अवस्था के विपरीत शीलत, उष्ण और अधिक रूप में पायी जाती है। वायु तहों की ऐसी अवस्था को ही तापमान का व्युत्क्रमण या विलोमता कहा जाता है।

प्रश्न 49.
ग्रीनहाउस प्रभाव के प्रमुख गैसों का नाम लिखिए।
उत्तर :
ग्रीन हाउस प्रभाव के प्रमुख गैस कार्बन डाई-आक्साइड (CO2), मिथेन (CH4), नाइट्रस आक्साइड (N2O) हाइड्रोफ्लोरो कार्बन, पर फ्लूरो कार्बन (CFCs), एवं सल्फर हेक्सा क्लोराइड है

प्रश्न 50.
तापक्रम के आधार पर विश्व के कटिबन्धों को कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर :
तापक्रम के आधार पर विश्व के कटिबन्धों को निम्न तीन भागों में बांटा गया है।
1. उष्ण कटिबन्ध (Tropical or Torrid Zone)
2. शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zone)
3. शीत कटिबन्ध (Frigid or Cold Zone)

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प्रश्न 51.
विकिरण खिड़की किसे कहते हैं ?
उत्तर :
विकिरण खिड़की (Radiation Window) : ऊँचाई के साथ-साथ’आने वाला एवं बहिंगामी दोनों ही विकिण बढ़ता रहता है, अतः उच्च पर्वतों को पृथ्वी की विकिरण खिड़की कहा जाता है।

प्रश्न 52.
तापमान को मापने के लिए दो प्रमुख थर्मामीटर का नाम लिखिए।
उत्तर :
दो प्रमुख थर्मामीटर हैं :- (i) सेण्टीग्रेड थर्मामीटर (ii) फारेनहाइट थर्मामीटर

प्रश्न 53.
सूखे और नमीयुक्त बल्ब वाला तापमापी क्या हैं?
उत्तर :
ताप मापने में ताप और आर्द्रता का तुलनात्मक सम्बन्ध जानने के लिए एक और तापमापी यंत्र का प्रयोग किया जाता हैं। इसे ही सूखे एवं नमीयुक्त बल्ब वाला तापमापी (Dry and Wet Bulb Thermometer) कहते हैं।

प्रश्न 54.
वायुदाब से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
वायुदाब : धरातल पर या सागर तल पर प्रति इकाई के क्षेत्रफल पर स्थित वायुमण्डल की समस्त परतों के पड़ने वाले भार को ही वायुदाब या वायुभार कहा जाता है।

प्रश्न 55.
समदाब या समभार रेखा क्या है ?
उत्तर :
समदाब या समभार (Isobars) : समदाब या समभार का अंग्रेजी रूपान्तरण आइसोबार (Isobar) है। Isobar अंग्रेजी के दो शब्दों Iso का अर्थ सम तथा Bar का अर्थ ‘भार’ या ‘दाब’ होता है, अर्थात् समदाब। समदाब वे कल्पित रेखायें हैं जो समुद्र तल से समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाते हुए खींचा जाता है।

प्रश्न 56.
वायुदाब ज्वार क्या है ?
उत्तर :
वायुदाब ज्वार (Barometric Tide) : किसी स्थान पर दिन भर वायु का भार एक समान नहीं होता है। वस्तुतः किसी स्थान पर वायुभार दो बार बढ़ता एवं दो बार घटता है। वायुदाब के इस घटने-बढ़ने की क्रिया को वायुदाब ज्वार कहा जाता है।

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प्रश्न 57.
वायुदाब कटिबन्ध किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
वायुदाब कटिबन्ध (Pressure Belt) : ग्लोब पर दोनों गोलार्द्धी में भूमध्य रेखीय निम्न दाब पेटी के अलावा दो-दो उच्च वायु पेटियाँ तथा एक-एक निम्न वायु दाब की पेटियाँ पायी जाती हैं, अर्थात् कुल सात पेटियाँ या कटिबन्धें पायी जाती हैं जिन्हें वायुदाब कटिबन्ध (Pressure Belt) कहा जाता है।

प्रश्न 58.
कारिऑलिस बल क्या है? अथवा कारिऑलिस का नियम क्या है ?
उत्तर :
कारिऑलिस बल (Coriolis Force) : पवनें सामान्यत: उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती हैं, किन्तु पृथ्वी की दैनिक गति के कारण ये पवनें अपनी मूल दिशा में विक्षेपित (Deflect) हो जाती हैं। फ्रासीसी वैज्ञानिक G.G. Coriolis ने 1835 ई० में इस बल के प्रभाव का खोज किया। इसलिए इसे कारिऑलिस बल या कारिऑलिस का नियम भी कहा जाता है।

प्रश्न 59.
फेरल का नियम से तुम क्या समझते तो? अथवा फेरल का नियम क्या है ?
उत्तर :
फेरल का नियम (Farrel’s Law) : पृथ्वी की दैनिक गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में पवनें अपनी दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बायीं ओर मुड़ जाती हैं। इस विक्षेप को फेरल नामक वैज्ञानिक ने सिद्ध किया था। अत: इसे फेरल का नियम कहा जाता है।

प्रश्न 60.
बाइज-बैलेट का नियम क्या है? बाइज-बैलेट के नियम से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
बाइज-बैलेट का नियम (Bays-Ballot Law) : इस नियम के अनुसार यदि हम उत्तरी गोलार्द्ध में पवन की ओर पीठ करके खड़ा हो जायें तो उच्च वायु दाब हमारी दायीं ओर और निम्न वायु दाब बायीं ओर होगा। दक्षिणी गोलार्द्र में यह स्थिति इसके ठीक विपरीत होगा।

प्रश्न 61.
डोलड्रम या शान्त कटिबन्ध क्या है ?
उत्तर :
डोलडूम या शान्त कटिबन्ध (Doldrum or Calm Belt) : विषुवत रेखीय निम्न दाब कटिबन्ध में धरातलीय क्षैतिज पवनें नहीं चलती बल्कि अधिक तापमान के कारण वायु हल्कि होकर ऊपर को उठती है और संहवनीय धराओं का जन्म होता है। इसलिए इस कटिबन्ध को भूमघ्य रेखीय शांत कटिबन्ध या डोलड्रम कहा जाता है। इसका विस्तार भूमध्य रेखा से 5° उत्तर एवं 5° दक्षिण अक्षांशों के बीच होता है।

प्रश्न 62.
अश्व अक्षांश किसे कहा जाता है ?
अथवा
घोड़े का अक्षांश (Horse Latitude) से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
अश्व अक्षांश (Horse Latitude) : ग्लोब पर दोनों गोलार्द्धों में 30°-50° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश को अश्व अक्षांश कहा जाता है। घोड़े से लदे जहाज को बचाने के लिए इन अक्षाशों के बीच समुद्र में घोड़े को फेंक दिया जाता था। इसलिए इसे घोड़े का अक्षांश भी कहा जाता है।

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प्रश्न 63.
हैडली नियम क्या है ?
उत्तर :
हैडली का नियम (Hadley’s Law) : पृथ्वी की दैनिक गति के कारणअअकेन्द्रीय बल उत्पन्न होती है एवं पवन की दिशा में परिवर्तन आ जाता है, जिसे हैड़ी का नियम कहा जाता है।

प्रश्न 64.
अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र क्या है ?
उत्तर :
अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र (ITCZ) : यह प्रदेश विषुवतरेखीय न्यून वायुदाब की पेटी पर विस्तृत है। यहाँ जब कभी उत्तरी-पूर्वी तथा दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ मिलती हैं तो वाताग्र का निर्माण हो जाता है। इस प्रकार यहाँ व्यापारिक हवाओं के अभिसरण को ही अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र कहा जाता है।

प्रश्न 65.
बहादुर पछुवा पवन से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
बहादुर पछुआ पवन (Brave Westerlies) : उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर बहने वाली पवन पहुआ पवन कहलाती है। जब यह पवन दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल के अभाव के कारण बहुत ही तीव्र गति से प्रवाहित होती है तो इसे बहादुर पछुआ पवन भी कहा जाता है।

प्रश्न 66.
जेट स्ट्रीम क्या है ?
उत्तर :
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) : जेट स्ट्रीम उच्च पवन संचार का अंग है। क्षोभ मण्डल (Troposphere) की ऊपरी मण्डल अर्थात क्षोभसीमा की सीमा पश्चिम से पूरब की ओर अत्यन्त ही तीव गति से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है।

प्रश्न 67.
बैरोमीटर क्या है ?
उत्तर :
बैरोमीटर (Barometer) : वायुमण्डलीय वायु के अन्तर्गत भार होता है तथा वह हमेशा पृथ्वी पर दबाव डालती रहती है। इस वायुभार को मापने वाले यंत्र को बैरोमीटर या वायुदाब मापी (Barometer) कहते हैं।

प्रश्न 68.
चक्रवात का आँख क्या है ?
उत्तर :
चक्रवात का आँख (Eye of Cyclone) उष्ण कटिबन्धीय चकवातों (Tropical cyclone) की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इनके केन्द्र में शांत क्षेत्र पाया जाता है जिसके ऊपर आकाश मेघ रहित होता है इस वृत्ताकार केन्द्र प्रदेश को ही चक्रवात का आँख या चक्षु (Eye of Cyclone) कहा जाता है।

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प्रश्न 69.
फॉन क्या है ?
उत्तर :
फॉन (Fohn) : यह एक प्रकार का स्थानीय गर्म हवा है जो बहुत ही जोरदार झोकेंवाली एवं शुष्क होती है यह हवा दक्षिणी आल्पस पर्वत के सहारे ऊपर उठती उत्तरी ढाल पर नीचे उतरती है। जब यह हवा नीचे उतरती है तो अधिक दाब के कारण गर्म हो जाती है। फ्रांस, इटली देशों में यह हवा प्रवाहित होती है।

प्रश्न 70.
सिराक्को से आप क्या समझते हो? अथवा खूनी वर्षा क्या है?
उत्तर :
सिराक्को (Sirocco) : सहारा मरूस्थल से इटली में प्रवाहित होने वाली यह गर्म हवा है जो बालू के कणों से युक्त रहती है। इटली में जब वर्षा होती है तो इन बालू के कणों के कारण वर्षा की बूंद लाल रंग की हो जाती है। इस प्रकार की वर्षा को इटली में खूनी वर्षा (Blood Rain) कहा जाता है। इस हवा को मिस्र में खामसिन तथा लीविया में गिबली कहा जाता है।

प्रश्न 71.
बोरा क्या है ?
उत्तर :
बोरा (Bora) : मध्य यूरोप के पर्वतीय क्षेत्रों में युगोस्लाविया के ऐड्रयांटिक तट की ओर चलने वाली ठण्डी वायु को बोरा कहा जाता है। यह वायु उत्तर-पूरब से दक्षिण-पश्चिम की ओर चलती है।

प्रश्न 72.
मिस्ट्रल क्या है ?
उत्तर :
मिस्ट्रल (Mistal) : भूमध्य सागर के उत्तरी-दक्षिणी भाग के तटीय प्रदेशों में विशेषकर फ्रांस की राइन नदी के डेल्टा में उत्तर-पश्चिम से आकर चलने वाली ठण्डी वायु को मिस्ट्रल कहा जाता है। इस वायु के आगमन पर तापक्रम हिमांक से नीचे गिर जाता है तथा मौसम सर्द हो जाता है।

प्रश्न 73.
‘लू’ क्या है ?
उत्तर :
‘लू’ (LoO) : उत्तरी भारत में गर्मी के दिनों में उत्तर-पश्चिम तथा पश्चिम से पूरब की दिशा में बहने वाली प्रचण्ड उष्ण तथा शुष्क हवा को ‘लू’ कहते हैं। यह हवा उत्तर भारत तथा पाकिस्तान के मैदानी भागों में मई तथा जून के महीने में बहती है। इस हवा के प्रभाव से तापमान 45°C से 50°C तक पहुँच जाता है।

प्रश्न 74.
ब्लिजार्ड क्या है?
उत्तर :
ब्लिजार्ड (Blizzard) : यह एक प्रकार का ध्रुवीय पवन (Polar wind) है जो अत्यधिक सर्द एवं हिम-कणों से युक्त होती है। यह पवन साइबेरिया एवं उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में प्रवाहित होती है।

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प्रश्न 75.
टेबल क्लॉथर या केप डॉक्टर क्या है ?
उत्तर :
टेबल क्लाथर (Table Clother) या केप डॉक्टर (Cap Doctor) : तीव्र शीतल हवा, जो दक्षिणी अफ्रीका के पठारी क्षेत्र से चलकर दक्षिण तट की ओर प्रवाहित होती है। टेबल क्लाथर कहा जाता है उसे जब यह हवा पठारी क्षेत्रों को ढक कर बादल का निर्माण करत है तो इसे केप डॉक्टर भी कहा जाता है।

प्रश्न 76.
वायुदाब और हवाओं के सम्बन्ध में दो महत्वपूर्ण नियम बताएँ।
उत्तर :
वायुदाब और हवाओं के सम्बन्ध में दो महत्वपूर्ण नियम निम्न है।
(i) पवन प्रवाह सदैव उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर होता है।
(ii) पवन की प्रवाह गति वायुदाब के अन्तर की न्यूनधिकतापर निर्भर करती है।

प्रश्न 77.
‘मानसून’ का अर्थ क्या है तथा इससे आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
मानसून (Monsoon) : ‘मानसून’ शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से बना है जिसका तात्पर्य ‘मौसम’ होता है। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरब सागर पर चलने वाली हवाओं के लिए किया गया था जो छ: माह उत्तर-पूरब दिशा से और छः माह दक्षिण-पश्चिम दिशा से चला करती थी।

प्रश्न 78.
जलीय चक्र (Hydrological Cycle) से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
जलीय चक्र (Hydrological Cycle) : समुद्रों, झीलों, नदियों आदि से जलवाष्पीकरण द्वारा जलवाष्प में, जलवाष्म बादल में और जल बादलों से अपक्षेपण द्वारा पृथ्वी पर द्रव रूप में परिवर्तित से जाता है तथा पृथ्वी से नदियों द्वारा पुनः समुद्र में पहुँच जाता है। जल के इस चक्र को जलीय चक्र कहा जाता है।

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प्रश्न 79.
वर्षा कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक का नाम लिखिए।
उत्तर :
वर्षा मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है।
(i) संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall) (ii) पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) (iii) चक्रवातीय वर्षा (Cylonic Rainfall)

प्रश्न 80.
जलवायु से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
जलवायु में एक विस्तृत क्षेत्र में काफी लम्बे समय को वायुमण्ड की अवस्थाओं का विवरण होता है, अर्थात् वायुमण्डल की स्थायी औसत अवस्थाओं का नाम ही जलवायु है।

प्रश्न 81.
वाष्पीकरण क्या है ?
उत्तर :
वाष्पीकरण (Evaporation) : सम्पूर्ण पृथ्वी पर सागर, नदी, तालाब, झील एवं जलाशय आदि का पानी, सूर्य की तत्प किरणों द्वारा भाप में निरंतर परिवर्तित होता रहता है। अतः वाष्पोकरण वह प्रक्रिया है जिसमे जल द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में बदल जाता है।

प्रश्न 82.
ओस बिन्दु या ओसांक किसे कहते हैं?
उत्तर :
ओस बिन्दु या ओसांक (Dew Point) : वायु का कोई भी नमूना बिना जलवाष्प की मात्रा को बढ़ाये संतृप्त हो सकता है। यदि उसके तापमान में आवश्यक मात्रा में गिरावत हो जाय या हवा का कोई भी नमूना जिस तापमान पर सतृप्त हो जाय, उस तापमान को ही ओस बिन्दु या ओसांक (Dew Point) कहा जाता है।

प्रश्न 83.
ओस (Dew) क्या है ?
उत्तर :
ओस (Dew) : हवा का जलवाष्प जब संघनित होकर छोटी-छोटी बूंदों के रूप में धरातल पर पड़ी वस्तुओं पर जमा हो जाता है तो इसे ओस कहते हैं।

प्रश्न 84.
कोहरा या कुहरा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
कोहरा (Fog) : कोहरा एक प्रकार का बादल है। जब जलवाष्प का संघनन धरातल के बिल्कुल समीप होता है तो कोहरा का निर्माण होता है। कोहरे में कुहासे की तुलना में जल के कण अधिक छोटे एवं सघन होते हैं।

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प्रश्न 85.
बादल का निर्माण कैसे होता है ?
अथवा
बादल या मेघ से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
बादल या मेघ (Cloud) : वायुमण्डल में ऊपर उठती हुई वायु का तापमान जब ओसांक बिन्दु के नीचे गिर जाता है तो शीतलता के कारण जलवायु अत्यंत सूक्ष्म जल सीकरों और हिम सीकरों में बदल जाती है। इनके समूह का विस्तार और गहराई दोनों अधिक होने पर ये घने रूप में दिखाई देते हैं उसे बादल या मेघ कहा जाता है।

प्रश्न 86.
उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु की निम्न दो विशेषता लिखिए।
उत्तर :
उष्म विषुवत रेखीय जलवायु या उष्णा भूमध्य रेखीय जलवायु की विशेषताएँ :-
(i) सालों भर समान उच्च तापक्रम
(ii) सालों भर समान उच्च वर्षा
इस जलवायु के अन्तर्ग अमेजन अमगेन बेसिन, कांगो वेसिन, गिनी तट, पूर्वी द्वीप समूह तथा फिलीपाइस को सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 87.
शुष्क जलवायु प्रदेश को कितने भागों में बाँटा गया है।
उत्तर :
शुष्क जलवायु प्रदेश को निम्न दो उप विभागों में बाँटा गया है :-
(i) शुष्क या मरूस्थलीय जलवायु।
(ii) अर्द्धशुष्क या स्टेपी जलवायु।

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प्रश्न 88.
भूमध्यसागरीय जलवायु प्रदेश के वनस्पतियों और फलों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भूमध्यसारगीय जलवायु प्रदेश के प्रमुख वनस्पतियाँ ओक, वालनट, चेस्टनट, सिडार तथा फलो के रूप में नीबु, संतरा, अंजीर, अंगूर, जैतून आदि का नाम आता है।

प्रश्न 89.
टुण्ड़ा जलवायु प्रदेश की विशेषता क्या है ?
उत्तर :
टुण्ड्रा जलवायु प्रदेश की विशेषताएँ :-

  1. लम्बी एवं ठण्डी जाड़े की ॠतु तथा छोटी एवं शीतल ग्रीष्म ॠतु का होना।
  2. वर्ष में 2 से 4 महीने ऐसे होते हैं जबकि तापमान हिमांक बिन्दु से ऊँचा रहता है।
  3. यहाँ वर्षा बिल्कुल नहीं होती, जो कुछ वर्षा हाती है वह हिम के रूप में।

प्रश्न 90.
पवनाभिमुख ढाल और पवन-विमुख ढाल में क्या अन्तर है ?
उत्तर :
पर्वत के जिस ढाल के सहारे हवा ऊपर बढ़ती है उसे पवनभिमुख ढाल (Wind Ward Slope) कहते हैं तथा जिस ढाल के सहारे हवा विपरीत ढाल पर नीचे उतरती है उसे पवन ढाल (Lee Ward Slope) कहा जाता है।

प्रश्न 91.
कैण्डोलिल द्वारा विश्व के वनस्पति मण्डलों को कितने भागों में बॉटा गया है ?
उत्तर :
कैण्डोलिन द्वारा विश्व को पाँच वनस्पति मण्डलों में बाँटा गया है।

  1. मेगाथर्मल
  2. मेसोथर्मल
  3. माइकोथर्मल
  4. हेकिस्टोथर्मल
  5. जेरोफाइट्स।

प्रश्न 92.
मानचित्र पर सागर की शांत और सपाट लहरो को किस संकेत के रूप में दिखाया जाता है ?
उत्तर :
सागर के शांत लहर को Cm तथा सागर की सपात लहर को Sm के संकेत में दिखाया जाता है।

प्रश्न 93.
वायु मण्डल की कौन-सी परत संचार क्रिया को संभव बनाती है ?
उत्तर :
आयन मण्डल (lonosphere) संचार क्रिया को संभव बनाती है।

प्रश्न 94.
किस परत में मौसम परिवर्तन होता है?
उत्तर :
अधोमण्डल, परिवर्तन मण्डल या क्षोभ मण्डल (Troposphere) में मौसम परिवर्तन होता है।

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प्रश्न 95.
परा बैगनी किरणें पृथ्वी के सतह पर क्यों नहीं पहुँचती हैं ?
उत्तर :
ओजोन मण्डल में स्थित ओजोन गैस सूर्य से निकलने वाली गर्म तथा हानिकारक परा बैगनी किरणो को सोख लेती है।

प्रश्न 96.
भूमध्यरेखीय क्षोभ मण्डल की ऊँचाई कितनी है ?
उत्तर :
इस स्तार की ऊँचाई भूमध्य रेखा के समीप 18 कि० मी॰ है।

प्रश्न 97.
जलवायु एवं मौसम के तत्व कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
तापमान, वायुदाब, आर्द्रता हवाओं एवं वर्षा मौसम तथा जलवायु के तत्व है।

प्रश्न 98.
वायुमण्डल तापमान के विभिन्न स्रोत क्या है ?
उत्तर :
वायुमण्डल के गर्म होने का मुख्य सोत सौर्यिक विकिरण से प्राप्त ऊर्जा द्वारा पृथ्वी से परिचालन संवहन तथा विकिरण है।

प्रश्न 99.
ताप छाया प्रदेश क्या है ?
उत्तर :
पर्वतों के विमुख ढाल वाले क्षेत्र जो सूर्य की लम्बवत् किरणों से वंचित रहते है। ढालो को ताप छाया प्रदेश कहते है।

प्रश्न 100.
मेघाच्छादित रातें मेघरहित रातों की अपेक्षा गर्म होती है।
उत्तर :
जब रात में आकाश में बदल छाये रहते है तो पृथ्वी के भूपट से उसका विसर्जन तीव्र गति से नहीं हो पाता है। यही कारण है कि स्वच्छ रातो की अपेक्षा बादलों से आच्छादित राते गर्म होती है।

प्रश्न 101.
समुद्र तटीय भाग में तापान्तर बहुत कम होता है।
उत्तर :
जल भाग स्थल भाग की अपेक्षा देर से गर्म तथादेर से ठण्डा होता है। इसलिए समुद्र तट के समीप भाग में तापान्तर बहुत कम होता है।

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प्रश्न 102.
वायुमण्डलीय वायुभार, हवा की दिशा, हवा की गति, आर्द्रता एवं वर्षा मापने के यंत्रों का नाम बताइये।
उत्तर :
वायुभार arrow वायु दाब मापी यन्त्र (बैरो) हवा की दिशा arrow एनिमोमीटर (Anemometer) हवा की गति arrow एनिमोमीटर हवा की आर्द्रता एवं वर्षा arrow हाइग्रोमीटर (Hygrometer),

प्रश्न 103.
स्मोग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर :
स्मोग वायुमण्डल में उपस्थित धुआँ (smook) और कुहासा (Fog) से बना है। इसीसे इसका नाम smook + Fog अर्थात् smog बना। वास्तव में smog पानी के कणो धुए में उपस्थित कार्बन के कणो के मिश्रित होने से बनता है। और यह सर्दी के मौसम में अधिक होता है। क्योंकि उस समय कोहरे में पानी के कण हवा में होते है और कार्बन के कण उनमें मिश्रित हो जाते है।

प्रश्न 104.
रासायनिक संगठन के आधार पर वायुमण्डल को कितने भागों में बाँटा गया है ?
उत्तर :
रासायनिक संगठन के आधार पर वायुमण्डल को दो भागों में बाँटा जा सकता है :-
(i) सम मण्डल (Homosphere)
(ii) विषम मण्डल (Heterosphere)

प्रश्न 105.
क्षोभमण्डल क्या है ?
उत्तर :
वायु के सबसे निचले भागों की जिसकी ऊँचाई धरातल से 12 कि०मी० होती है, क्षोभ मण्डल कहा जाता है।

प्रश्न 106.
चुम्बक मण्डल क्या है ?
उत्तर :
आयन के ऊपर वाले वायुमण्डलीय का भाग को चुम्बक मण्डल कहते है इस मण्डल में वान अलेन रैडियेशन बेल्ट की स्थिती होती है। जिसमें पृथ्वी को मैग्नेटिक फील्ड द्वारा पकड़े गये आवेशित कण पाये जाते है। इस मण्डल की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें औरोरा आस्ट्रालिए एवं औरोरा बोरियालिस की होने वाली घटनायें है।

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प्रश्न 107.
शहरीकरण एवं औद्योगीकरण का जलवायु पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर :
शहरीकण एवं औद्योगीकरण की दर में तीब्र गति से वृद्धि होने के कारण वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड (CO2) की मात्रा धरती की सतह से परावर्तित किरणों द्वारा उत्सर्जित होने वाली तापीय ऊर्जा को वायुमण्डल से बाहर जाने से रोकती है। इस प्रकार तापीय ऊर्जा के वायुमण्डल में सान्द्रण से धरती के औसत तापमान में निरन्तर वृद्धि होती हैद्व जिससे जलवायु गर्म होता जा रहा है।

प्रश्न 108.
वैश्विक उष्मन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
वैश्विक उष्मन से ताप्तर्य वायुमण्डली तापमान में होने वाली क्रमिक वृद्धि से है।

प्रश्न 109.
एलनीनो क्या है ?
उत्तर :
एल-निनो पीरू के पश्चिमी तट के पास लगभग 180 कि०मी० दूर दक्षिण की ओर प्रवाहित होने वाली एक गर्म धारा है।

प्रश्न 110.
वायुदाब और ऊँचाई में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
जैसे जैसे हम समुद्र की सतह से ऊँचाई पर जाते है, वायुमण्डल की मोटाई कम होती जाती है और वायुभार कम हांता जाता है। साथ ही वायमुण्डल के निचले भाग में ऊपरी भागो की अपेक्षा भरी गैसे एवं धूल कण अधिक मात्रा में मिलने के कारण वायु अधिक धनी होती है और वायुभार अधिक रहता है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
ट्रोपोस्फीयर में ऊचाई बढ़ने के साथ-साथ उष्णता क्यों घटती है ?
उत्तर :
ट्रोपोस्फीयर या क्षोभमण्डल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बढ़ती ऊँचाई के साथ में प्रति 1000 मीटर पर 6.5°C की दर से तापमान में कमी होती जाती है। ऊँचाई के साथ तापमान में यह कमी ऊँचाई के साथ वायुमण्डलीय गैसों के घनत्व, वायुदाव एवं कणिकीय पदार्थों में कमी के कारण होती है। यह परत वायुमण्डल में परिचालन, संवहन एवं विकिरण विधियों के स्थानान्तरण से गर्म होता है।

प्रश्न 2.
समुद्री पवन एवं स्थलीय पवन में अन्तर स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर :

समुद्री पवन स्थलीय पवन
i. ये हवाएँ प्रातः 10 बजे से शाम 8 बजे तक चला करती है। i. ये हवाएँ सांय काल 10 बजे से प्रात: 8 बजे तक चला करती है।
ii. समुद्र से आने के कारण ये हवाएँ नम होती है। ii. स्थल से आने के कारण ये हवाएँ सूखी होती है।
iii. इन हवाओं को डॉक्टर वायु (Doctor Wind) भी कहते है। iii. इन हवाओं को दैनिक मानसून (Daily Monsoon) भी कहते है।

प्रश्न 3.
मानसूनी वायु पर जेट स्ट्रीम के प्रभाव का वर्णन करो।
या
धरातलीय मौसम पर जेट स्ट्रीम के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) उच्च स्तरीय पवन संचार व्यवस्था का अंग है। क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में क्षोभसीमा के निकट पश्चिम से पूरब की ओर अत्यंत तीव्र गीत से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है।

धरातल पर पाये जाने वाले मौसम एवं जेट स्ट्रीम में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धवुौय वाताग्र, जहाँ शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है तो इसका सम्बन्ध जेट स्ट्रीम से होता है। अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग तक होता है। जब इनका पथ जेट स्ट्रीम के नीचे पड़ता है तो उनकी प्रचण्डता में वृद्धि हो जाती है एवं वर्षा की मात्रा भी अधिक हो जाती है। चक्रवातों तथा प्रतिचक्रवातों के अलावा जेट स्ट्रीम के प्रभाव के कारण कभी बाढ़ भी आ जाती है तो कभी सूखा पड़ जाता है। इन्हीं के कारण मौसम असाधारण रूप में कभी गर्म तो कभी शीतल हो जाता है।

भारतीय मानसून की उत्पत्ति पर उष्षण पूर्वी जेट एवं उपोष्ण जेट का प्रभाव भी पड़ता है। इस प्रकार वर्षा, तूफान, हिमपात एवं शीत लहरिया आदि जेट स्ट्रीम द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।

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प्रश्न 4.
मौसम और जलवायु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

मौसम (Weather) जलवायु (Climate)
1. मौसम किसी स्थान विशेष की वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है। 1. जलवायु किसी विस्तृत क्षेत्र के वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है।
2. इसमें मौसम तत्वों की अल्प अवधि का अध्ययन होता है। 2. इसमें मौसम दशओं का लम्बे समय अर्थात 30-35 वर्षों तक अध्ययन का औसत है।
3. यह जलवायु विज्ञान का एक अंग है। 3. यह अपने आप में पूर्ण विज्ञान है।
4. मौसम अत्यंत ही परिवर्तनशील अर्थात् क्षणिक दशा है। 4. जलवायु मौसम की अपेक्षा स्थायी होता है।

प्रश्न 5.
ओजोत परत क्षरण क्या है ?
उत्तर :
ओजोत परत क्षरण (Depletion of Ozone layer) : ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultra violet rays) को अवशोषित करके पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है लेकिन क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFCs) की मात्रा में वृद्धि से यह परत नष्ट हो रही है। ओजोन परत में कमी आने से पृथ्वी के धरातल पर चर्म कैंसर एवं आँखों की बिमारियों में वृद्धि की सम्भावना बढ़ जायेगी।

प्रश्न 6.
सिराक्को या सिमूम से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
यह एक गर्म, शुष्क एवं रेत से भरी हुई हवा होती है जो कि सहारा रेगिस्तान के उत्तर दिशा में भूमध्य सागर की ओर चलकर इटली, स्पेन आदि देशों में प्रवेश करती है। सिराक्को हवा के साथ लाल रेत की मात्रा अधिक होती है। जब यह हवा भूमध्य सागर के ऊपर से होकर गुजरती है तो जलवाष्प ग्रहण कर लेती है एवं इटली में जब कभी-कभी वर्षा होती है तो रेत नीचे बैठने लगती है जिससे लगता है कि रक्त वृष्टि हो रही है। सहारा के मरुस्थल में चलने वाली इन्हीं गर्म हवाओं को सिमूम कहा जाता है। इटली में इन हवाओं के कारण मौसम काफी कष्टप्रद हो जाता है।

प्रश्न 7.
पछुआ हवा से अधिक वर्षा होती है क्यों ?
उत्तर :
पछुआ हवाएँ गर्म प्रदेशों से ठण्डे भागों की ओर चलती हैं। गर्म होने के कारण इनमें वाष्प ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती हैं। समुद्र से होकर आने के कारण इनमें पर्याप्त जलवाष्प आ जाता है। ठण्डे भागों में जाने के कारण ये भाप भरी हवाएँ क्रमशः ठण्डी हो जाती हैं जिससे पर्वतों से टकराकर महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में खूब वर्षा करती हैं।

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प्रश्न 8.
तापमान प्रतिलोम या विलोमता के उत्पत्न होने के प्रमुख कारण क्या हैं ?
उत्तर :
तापमान प्रतिलोम या विलोमता के उत्पन्न होने के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ होनी आवश्य है।

  • लम्बी रातों का होना
  • स्वच्छ आकाश
  • शुष्क वायु
  • शांत वायु
  • हिमाच्छादित या बर्फ से ढके धरातल का होना।

प्रश्न 9.
वायुमण्डल में धरातल से ऊँचाई पर जाने से तापक्रम घटने लगता है क्यों ?
उत्तर :
ऊँचाई के साथ तापक्रम घटने लगता है क्योंकि वायुमण्डल का निचला भाग पृथ्वी के सम्पर्क में होने से शीघ्र उष्मा प्राप्त कर लेता है तथा स्वयं गरम हो लेने के बाद ही संवहन तरंगों से उष्मा ऊपर की ओर स्थानांतरित करता है। इस प्रकार वायुमण्डल की प्रत्येक ऊपर की परत अपनी निचली परत की अपेक्षा देर से तथा कम मात्रा में उष्मा प्राप्त करती है। इसके अलावा ऊपर स्थित वायु परत में भार अधिक होता है तथा ऊपर जाने पर हवा का घनत्व कम हो जाता है और हवा फैलकर विरल हो जाती है। ऊँचाई के साथ पार्थिव ऊर्जा के घटते अवशोषण के कारण भी तापक्रम घटने लगता है।

प्रश्न 10.
वायुमण्डल सूर्याताप की अपेक्षा भौमिक विकिरण से अधिक गरम होता है क्यों ?
उत्तर :
वायुमण्डल सूर्याताप की अपेक्षा भौमिक विकिरण से अधिक गरम होता है क्योंकि पृथ्वी की धरातल सूर्याताप का एक अच्छा अवशोषक है और उत्सर्जक (Radiator) भी, जो सूर्याताप से प्राप्त उष्मा को पूर्णत: विकरित कर देता है। इसके अलावा वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्म, कार्बन डाई-आक्साइड गैसें लम्बी तरंगों वाली विकिरण को अच्छी तरह अवशोषित करती रहती है। वायुमण्डल सूर्याताप के लिए अधिक पारगम्य है जो सूर्य विकिरण की कुछ लम्बाइयों वाली तरंगों का अवशोषण नहीं करता है जैसे दिखने वाले प्रकाश का होता है।

प्रश्न 11.
अक्षांशीय उष्मा संतुलन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
अक्षांशीय उष्मा संतुलन (Latitudinal Heat Balance) : सम्पूर्ण धरातल पर औसत वार्षिक तापक्रम हमेशा समान रहता है क्योंकि पृथ्वी सूर्याताप और भौमिक विकिरण के बीच एक संतुलन बनाए रखती है। परन्तु पृथ्वी के प्रत्येक अक्षांश पर प्राप्त उष्मा तथा नष्ट उष्मा में समानता नहीं हो पाती है क्योंकि सूर्याताप की मात्रा विषुवत रेखा से धुवों की ओर लगातार घटती जाती है। इसी प्रकार भौमिक विकिरण की मात्रा में भी भिन्नताएँ होती है।

40° से नीचे वाले अक्षांशों पर भौमिक विकिरण द्वारा अंतरिक्ष में खोई गई उष्मा की तुलना में सौर विकिरण द्वारा अंतरिक्ष में खोई गई उष्मा की मात्रा अधिक होती है। इसके विपरीत, उच्च अक्षांशों पर प्राप्त उष्मा की तुलना में खोई जाने वाली उष्मा की मात्रा अधिक होती है। अधिकांश उष्मा का आदान-प्रदान मध्य अक्षांशों अर्थात 30° से 60° अक्षांशों के बीच होता है। इस प्रकार निम्न अक्षांशों से अतिरिक्त उष्मा को उच्च अक्षांशों के कम उष्मा वाले क्षेत्रों में स्थानान्तरण की प्रक्रिया धरातल पर संतुलन बनाए रखती है।

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प्रश्न 12.
विषुवत या भूमध्य रेखा पर सूर्याताप की मात्रा सर्वार्थिक होती है क्यों ?
उत्तर :
विषुवत या भूमध्य रेखा पर सूर्याताप की मात्रा सर्वाधिक होती है क्योंकि यहाँ पर दिन-रात की लम्बाई बराबर होती है तथा सूर्य की किरणें लगभग सालों पर लम्बवत होती हैं। परन्तु सूर्य के दक्षिणायन और उत्तरायण की स्थितियों के कारण अत्यधिक सूर्याताप मण्डल विषुवत रेखा के दोनों ओर खिसकता रहता है। विषुवत रेखा से सुर्याताप धुवों की ओर कम होता जाता है जिसके परिणामस्वरूप तापक्रम भी कम होता जाता है।

प्रश्न 13.
तापमान असंगति धनात्मक और तापमान असंगति ऋणात्मक से क्या समझते हो तथा यह कैसे होता है?
उत्तर :
तापमान असंगति घनात्मक और ऋणात्मक (Temperature Anomaly Positive and Negative) : ग्लोब पर किसी भी स्थान विशेष के औसत तापक्रम और उस स्थान के अक्षांश के औसत तापक्रम के अन्तर को तापमान असंगति (Temperature Anomaly) कहते हैं।
समुद्र तल से ऊँचाई पर जल और स्थल की विषमता, प्रचलित पवने तथा समुद्री धाराओं के प्रभाव के कारण एक ही अक्षांश पर स्थित विभिन्न स्थानों के तापक्रम में अन्तर पाया जाता है।

जैसे, यदि 30° अक्षांश का औसत वार्षिक तापक्रम 35°C है तथा उसी अक्षांश पर स्थित ‘A’ स्थान का औसत वार्षिक तापक्रम 55°C है तो तापीय असंगति 20°C होगा। उत्तरी गोलार्द्ध में स्थल भाग की अधिकता के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध की अपेक्षा तापमान की अधिकता में असंगतियाँ पायी जाती है। जब स्थान का तापक्रम उसके अक्षांश की अपेक्षा अधिक होता है तो तापमान असंगति धनात्मक होती है। इसे ही असंगति धनात्मक तापमान कहा जाता है, इसके विपरीत जब किसी स्थान का तापमान उसके अक्षांश के औसत तापमान से कम हो तो इसे असंगति ऋणात्मक तापमान कहा जाता है।

प्रश्न 14.
पृथ्वी की उष्मा बजट से क्या समझते हो और यह कैसे संतुलित होता है ?
उत्तर :
पृथ्वी की उष्मा बजट (Heat Budget of the Earth) : वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर प्राप्त होने वाली कुल उष्मा को यदि हम 100 इकाई मान लें तो इसमें से 35 इकाईयाँ पृथ्वी के धरातल पर पहुँचने से पहले ही अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाती है। 35 इकाईयों को छोड़कर बाकी 65 इकाईयाँ अवशोषित होती हैं जिसमें से 14 इकाईयाँ वायुमण्डल द्वारा तथा 51 इकाईयाँ पृथ्वी के धरातल द्वारा।

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पृथ्वी द्वारा अवशोषित यह 51 इकाईयाँ पुन: भौमिक विकिरण या पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) के रूप में लौटा दी जाती है। इनमें से 17 इकाईयाँ सीधे अंतरिक्ष में चली जाती है और शेष 34 इकाईयों में से 6 इकाइयाँ विकिरण द्वारा, 9 इकाईयाँ संवहन के द्वारा तथा 19 इकाईयाँ संघनन की गुप्त उष्मा के रूप में वायुमण्डल को प्राप्त होती है। 34 इकाईयों के अलावा वायुमण्डल 14 इकाई ऊर्जा का प्रत्यक्ष रूप से अवशोषण करता है। इस प्रकार वायुमण्डल का कुल 14 + 34 इकाईयाँ अर्थात् 48 इकाईयों का अवशोषण होता है।

वायुमण्डल विकिरण द्वारा इन 48 इकाईयों को भी अंतरिक्ष में वापस लौटा देता है। पृथ्वी के धरातल तथा वायुमण्डल से अंतरिक्ष में लौटने वाली विकिरण की इकाईयाँ क्रमशः 17 एवं 48 हैं जिनका योग 65 होता है। इस प्रकार पृथ्वी तथा इसके वायुमण्डल को प्राप्त हुई उष्मा उनके द्वारा छोड़ी गई उष्मा के बराबर है। अत: पृथ्वी तथा वायुमण्डल द्वारा प्राप्त ताप तथा उनके द्वारा ताप के ह्रास के संतुलन को ही उष्मा बजट अथवा उष्मा संतुलन कहा जाता है।

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प्रश्न 15.
दैनिक तापान्तर कैसे प्रभावित होता है ?
उत्तर :
दैनिक तापान्तर प्रभावित होने के निम्न कारक है :
i. समुद्र तट से दूरी : जो स्थान समुद्र तट से दूर महाद्वीपों के भीतर स्थित होते हैं वहाँ का दैनिक तापान्तर समुद्र के निकट वाले स्थान से अधिक रहता है।

ii. समुद्र तल से ऊँचाई : ऊँची पहाड़ी और पठारी भागों में वायु के हल्के होने के कारण दिन में धरातल जल्द ही गरम हो जाता है और रात्रि में शीघ्र ठण्डा। इसलिए ऊँचे स्थानों पर मैदानी भागों की अपेक्षा दैनिक तापान्तर अधिक पाया जाता है।

iii. धरातलीए विशेषता : जो भू-भाग बर्फ से ढके रहते हैं उन स्थानों का दैनिक तापान्तर अधिक रहता है। इसी प्रकार खुले उष्ण मरुस्थलों में शुष्क वायु तथा स्वच्छ आकाश होने के कारण तापान्तर बहुत अधिक पाया जाता है।

iv. मेघाच्छादन : जब आकाश बादलों से ढका रहता है तो तापान्तर कम हो जाता है, क्योंकि बादल सूर्याभिताप को पृथ्वी तक पहुँचने और पार्थिव ताप को विकिरण द्वारा नष्ट होने में बाधा डालते हैं। इसके विपरीत मेघरहित प्रदेशों में दिन के समय तापमान अधिक बढ़ जाता है तथा रात्रि में पार्थिव विकिरण द्वारा तापमान कम हो जाता है, अत: इन प्रदेशों में तापान्तर बहुत अधिक हो जाता है।

प्रश्न 16.
तापमान प्रतिलोमन का प्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन और उसके आर्थिक विकास पर कैसे प्रभाव पड़ता है ? अथवा, तापमान की विलोमता का महत्व पर संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
तापमान की प्रतिलोमन या विलोमता वायुमण्डल की स्थानीय क्रिया है, इसके कारण कई प्रकार के मौसम तथा जलवायु सम्बन्धी प्रभाव मानव जीवन तथा उसके आर्थिक विकास पर पड़ता है।
i. ऊपर गरम तथा नीचे ठण्डी वायु की परतों के कारण कुहरा (Fog) शुरू हो जाता है। कुहरा द्वारा हानि भी होता है तथा लाभ भी। घने कुहरे के कारण दृश्यता कम हो जाने से जल एवं स्थलीय भागों पर दुर्घटनाएँ होती रहती है।
ii. तापमान में विलोमता के समय यदि ऊपर स्थित गरम वायु में आर्द्रता उपस्थित होती है तो नीचे स्थित ठण्डी वायु का तापक्रम हिमांक बिन्दु से कम हो जाता है तो पाला (Frost) पड़ने लगता है। पाला निश्चित रूप से साग-सब्जियों पर प्रभाव डाल कर आर्थिक दृष्टिकोण से हानिकारक होता है।
iii. तापमान में विलोमता के कारण ही वायुमण्डल में स्थिरता आ जाती है जिस कारण वायु का उपरीमुखी तथा अधोमुखीय संचलन स्थगित हो जाता है जिस कारण वर्षा की सम्भावनाएँ कम हो जाती हैं और मानव जीवन के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी बाधा पहुँचता है।

प्रश्न 17.
धरातल पर तापमान का क्षैतिज वितरण कैसे दिखाया गया है और क्यों ?
उत्तर :
धरातल पर तापमान का वितरण समताप रेखाओं (Isotherms) द्वारा दिखाया गया है। समताप रेखायें वे हैं जो समान औसत तापमान वाले स्थानों को मिलाती है। सामान्य रूप से समताप रेखाएँ पूरब-पश्चिम दिशा में खींची जाती है जो कि प्राय: अक्षांशों के समानान्तर होती है जिससे साफ प्रमाणित होता है कि तापक्रम के क्षैतिज वितरण पर अक्षांशों का सर्वाधिक नियंत्रण होता है। समताप रेखाएँ प्रायः सीधी खींची जाती हैं परन्तु महासागरों तथा महाद्वीपों की मिलन सीमा पर उसमें झुकाव आ जाता है जिसका प्रमुख कारण जल तथा जल के गरम और ठण्डा होने के स्वभाव में अन्तर का होना है।

दक्षिणी गोलार्द्ध में जल की अधिकता के कारण समताप रेखाएँ दूर-दूर तक सीधी रेखाओं के रूप में होती है और जब समताप रेखाएँ पास-पास होती हैं तो उससे तापक्रम में तेजी से परिवर्तन का आभास होता है तथा वे तीव्र ताप-प्रवणता (Steep Temperature Gradient) को दिखाता है। इसके विपरीत उनका दूर-दूर होना क्षीण ताप-प्रवणता (Slow Temperature Gradient) को दिखाता है। सागर से स्थल की ओर जाने पर समताप रेखाओं की स्थिति में अन्तर आ जाता है।

प्रश्न 18.
भूमण्डलीय उष्णता से बचने के लिए उपाय क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
भूमण्डलीय उष्णता से बचने के उपाय (Preventive stepts to avoid Global Warming): भूमण्डलीय उष्णता से बचने के लिए निम्न उपाय अपनाया जाना चाहिए।

  1. जीवाश्म ईधन जैसे कोयला, पेट्रोल का कम प्रयोग किया जाय।
  2. क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFC) के विकल्प का विकास किया जाय।
  3. वृक्षों की मनमाने ढंग से कटाई को कम करके अथवा रोक लगाकर और अधिक मात्रा में वृक्षारोपन के द्वारा भूमण्डलीय उष्णता को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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प्रश्न 19.
हरित गृह प्रभाव से क्या समझते हो ?
उत्तर :
हरित गृह प्रभाव (Green House Effects) : वायुमण्डल के कार्य की तुलना ग्लास हाउस या ग्रीन हाउस के कार्य से की जा सकती है। ठण्ड प्रदेशों में सब्जियों और फूलों के पौधे ‘ग्लास हाउसों’ अर्थात काँच के घरों में उगाए जाते हैं। ‘काँच घर’ का आन्तरिक भाग बाहर की अपेक्षा गरम रहता है, क्योंकि काँच, सूर्याताप को अन्दर तो जाने देता है, लेकिन पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) को तत्काल बाहर नहीं निकलने देता। पृथ्वी को चारों तरफ से घरेने वाला वायुमण्डल ‘ग्रीन हाउस’ की भाँति ही कार्य करता है। यह सूर्याताप को अपने में से गुजरने देता है परन्तु बाहर जाने वाली दीर्घ किरणों का अवशोषण कर लेता है। इसे ही वायुमण्डल का ‘हरित गृह प्रभाव’ कहते हैं।

प्रश्न 20.
सूर्याताप और तापमान में अन्तर लिखिए।
उत्तर :
सूर्याताप और तापमान में अन्तर :

सूर्याताप (Insolation) तापमान (Temperature)
i. सूर्याताप उष्मा है जिससे गर्मी पैदा होती है। i. तापमान उष्मा में पैदा हुई गर्मी का माप है।
ii.  सूर्याताप को कैलोरी में मापा जाता है। ii. तापमान को थर्मामीटर डिग्री $F / C में मापा जाता है।
iii. गर्मी कारण मात्र है। किसी पदार्थ को गर्मी देने पर उसका तापमान बढ़ा है। iii. तापमान गर्मी का प्रभाव है, गर्मी मिलने से तापमान बढता है।

प्रश्न 21.
सौर विकिरण और पार्थिव विकिरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

सौर विकिरण (Solar Radiation) पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation)
i. सौर विकिरण द्वारा निकली उष्मा लघु तरंग के रूप में होती है। i. पार्थिव विकिरण उष्मा दीर्घ तरंग के रूप में होती है।
ii. सौर विकिरण द्वारा उर्जा को एकत्रित किया जा सकता है। ii. पार्थिव विकिरण उर्जा का रूप बदल जाने के कारण एकत्रित नहीं किया जा सकता है।
iii. सौर विकिरण द्वारा में सूर्य से प्राप्त प्रत्यक्ष उर्जा 34 % होता है। iii. पार्थिव विकिरण उर्जा में विपिरीत उर्जा 23 % होता है।

प्रश्न 22.
सूर्याताप को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
सूर्याताप को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक :-

  1. आपतन कोण
  2. सूर्य से प्रकाश की अवधि
  3. सूर्य से पृथ्वी की दूरी में अन्तर
  4. सौर विकिरण की मात्रा में विभिन्नता
  5. वायुमण्डल की पारदर्शकता।

प्रश्न 23.
भूमध्य रेखा तथा ध्रुवों पर निम्न वायुदाब की पेटी पायी जाती है क्यों ?
अथवा
वायुदाब पर पृथ्वी की दैनिक गति का प्रभाव किस प्रकार देखा गया है ?
उत्तर :
वायुदाब पर पृथ्वी की दैनिक गति का भी प्रभाव देखा जाता है। पृथ्वी की दैनिक गति के कारण वायुदाब बदलता रहता है। पृथ्वी की परिभ्रमण गति के कारण आकर्षण शक्ति उत्पन्न होती है जो धरातल की समस्त वस्तुओं को पृथ्वी के केन्द्र की ओर खींचती है और उन्हें पृथ्वी से अलग नहीं होने देती। यही कारण है कि अधिक ताप के कारण भूमध्य रेखा से उठी हुई वायु पुनः मध्य अक्षांशों के निकट नीचे उत्तर जाती है। पृथ्वी की दैनिक गति के कारण भूमध्य रेखा के समीप वायु केन्द्र से दूर हटती है परन्तु ध्रुवों की वायु केन्द्र की ओर खिंचती है। इसलिए वायु का अधिकतर भाग मध्य अक्षांशों में एकत्रित होता जाता है और वहाँ वायु का दबाव वढ़ जाता है, परन्तु भूमध्य रेखा के समीप और धुवों पर वायु का दबाव कम होता है तथा निम्न वायु भार की पेटी पायी जाती है।

प्रश्न 24.
30° से 35° उत्तर-दक्षिण अक्षांशों को अश्व अक्षांश (Horse Latitude) क्यों कहा जाता है ?
अथवा,
25° से 35° उत्तर-दक्षिण अक्षांशों के बीच उपोष्ण उच्च वायुदाब की पेटियाँ क्यों पायी जाती है ?
उत्तर :
ग्लोब पर दोनो गोलार्द्धो में 25° से 35° अक्षांशों के बीच उपोष्ण उच्च वायुदाब की पेटियाँ पायी जाती है। इस भाग में शीतकाल के दो महीनों को छोड़कर सालों भर उच्च तापक्रम रहता है। इस पेटी का उच्च दाब तापक्रम से सम्बन्धित न होकर पृथ्वी की दैनिक गति तथा वायु के अवतलन से सम्बन्धित है। भूमध्य रेखा से उठी वायु तथा उप धुवीय निम्न वायुदाब की वायु इन अक्षांशों में नीचे उतरकर बैठती है, जिस कारण इनका आयतन कम होने से वायदाब अधिक हो जाता है। इस प्रकार यह उच्च वायु गति जन्य (Dynamically Induced) होता है।

इस पेटी को अश्व अक्षांश की कहा जाता है क्योंकि प्राचीन काल में यूरोप के व्यापारियों को घोड़ों से लदे नौकाओं द्वारा इस पेटी में पहुँचने पर वायु शांत रहने के कारण आगे बढ़ने में कठिनाई होती थी। ऐसी अवस्था में वे अपनी नौकाओं का भार हल्का करने के लिए घोड़ों को समुद्रो में फेक देते थे। इसलिए 30°-35° उत्तर-दक्षिण अक्षांशों को अश्व अक्षांश (Horse Latitude) कहा जाता है।

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प्रश्न 25.
चक्रवात तथा प्रतिचक्रवात की विशेषता बताएँ।
अथवा
चक्रवात और प्रतिचक्रवात में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

चक्रवात (Cyclone) प्रति-चक्रवात (Anticyclone)
1. चक्रवात में निम्न वायुदाब केन्द्र में होता है तथा केन्द्र से बाहर की ओर वायुदाब बढ़ता जाता है। 1. प्रति-चक्रवात में उच्च वायुदाब केन्द्र में होता है तथा केन्द्र से बाहर की ओर घटता जाता है।
2. चक्रवात में वायु की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी के सुई के विपरित (Anticlockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध मे वड़ी के सुई के अनुरूप (Clockwise) होती है। 2. प्रति-चक्रवात में वायु की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी के सुई के अनुरूप (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी के सुई के विपरित (Anti Clockwise) होती है।
3. चक्रवात की आकृति प्राय: गोलाकार, अण्डाकार अथवा वी V आकार की होती है। 3. प्रति-चक्रवात में समदाब रेखाए प्रायः गोलाकार हांती है

प्रश्न 26.
ग्लोब पर जनवरी माह और जुलाई माह में वायुदाब की स्थिति क्या है और कैसे ?
उत्तर :
जनवरी माह में समदाब का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिणी गोलार्द्ध के मध्य भाग में होता है क्योंकि उत्तरी गोलार्द्ध में अधिक दाब के अन्य क्षेत्र उस समय 30° उत्तरी अक्षांश के करीब कैलीफोर्निया के पश्चिम में प्रशांत महासागर कोलंबिया का पठार, सहारा मरूस्थल और अन्ध महासागर में पाए जाते हैं और इस समय दक्षिणी गोलार्द्ध में इस ऋतु में उच्च दाब के केन्द्र दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के समीप प्रशांत महासागर, पश्चिमी अफ्रीका के तट के पास अन्ध महासागर और अस्ट्रेलिया के पश्चिम में हिन्द महासागर में पाए जाते हैं।

इसी समय न्यून वायुदाब के क्षेत्र उत्तरी गोलार्द्ध में अन्ध महासागर में आइलेंड और उत्तरी प्रशान्त महासागर में एल्युशियन द्वीपों में फैले रहते हैं तथा यह वायुदाब लगभग 1026 Mb रहता है। 30° दक्षिणी गोलार्द्ध के आस-पास उच्च वायुदाब की पेटी बिना किसी रूकावट के विस्तृत भाग में फैली हुई पायी जाती है। उत्तरी गोलार्द्ध में इस ऋतु में उच्च वायुदाब के क्षेत्र उत्तरी अन्ध महासागर में एजोर्स द्वीप और उत्तरी अमेरिका में पश्चिमी नट के समीप उत्तरी प्रशान्त महासागर में स्थित है। इसके विपरीत न्यून वायुदाब यूरोशियन के मध्य भाग, आइसलैंड और कनाडा के उत्तर में बेफिन की खाड़ी आदि स्थानों में फैले हुए पाए जाते हैं। इस प्रकार इस गोलार्द्ध में समुद्र पर न्यून वायुदाब र्धल खण्डों पर पाया जाता है।

प्रश्न 27.
पर्वतीय समीर एवं घाटी समीर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पर्वतीय समीर (Mountain Breeze or Catabatic Wind or Gravity wind) : पर्वतीय समीर एक सामयिक पवन है, रात्रि के समय पर्वतीय ढालों तथा ऊपरी भागों पर विकिरण द्वारा ताप ह्नास अधिक होता है, जिस करण हवाएँ ठण्डी हो जाती हैं। ये ठंडी तथा भारी हवाएँ पर्वतीय ढालों के सहारे घाटियों में नीचे उतरती हैं। इन्हें ही पर्वतीय समीर या गुरुत्वाकर्षण पवन या कैटाबेटिक पवन कहते हैं।
घाटी समीर (Valley Breeze or Anabatic wind) : घाटी समीर एक सामयिक पवन है जो दिन के समय पर्वतीय घाटियों के निचले भागों में अधिक तापमान के कारण हवाएँ गर्म होकर ऊपर उठती है तथा पर्वतीय ढलानों के सहारे घटी से ऊपर उठती है। इन्हें ही घाटी समीर या एनाबेटिक पवन कहा जाता है।
जब ये हवाएँ पर्वत की चोटी तक पहुँच जाती है तब वहाँ वर्षा पदार्थ करती है। मेघालय में चेरापुँजी तथा मौसिमराम में होंने वाली वर्षा इसी कारण होता है।

प्रश्न 28.
पृथ्वी पर हवा की पेटियों के खिसकाव का संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर हवा की पेटियों का खिसकाव (Shifting of the Wind Belts on the Earth) : पृथ्वी का अपनी कक्ष पर झुकी हुई होने तथा अण्डाकार मार्ग पर सूर्य की परिकमा करने के फलस्वरूप धरातल पर सूर्य की किरणें कभी एक सी नहीं चमकती। सूर्य कभी कर्क रेखा और कभी मकर रेखा पर सीधा चमकता है। सूर्य के इस प्रकार कभी उत्तरायण तो कभी दक्षिणायण होने के कारण वायुदाब और हवाओं की पेटियाँ कुछ उत्तर तथा कुछ दक्षिण की ओर खिसकती रहती है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है जिस कारण सभी वायुदाब की पेटियाँ उत्तर दिशा में खिसक जाती है। भूमध्य-रेखीय दाब 0° तथा 10° अक्षांशों के बीच उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च दाब 30°-40° अक्षांशों के बीच हो जाता है, इस कारण उनसे संबंधित वायुदाब की पेटियां भी अपने निर्दिष्ट स्थान से उत्तर की ओर खिसक जाती हैं।

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21 जून के बाद सूर्य भूमध्य रेखा की ओर अग्रसर होता है तथा 23 सितम्बर को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् चमकता है जिस कारण वायु-पेटियाँ अपनी वैसी ही स्थिति में आ जाती है, उसके बाद सूर्य दक्षिणायण हो जाता है तथा 22 दिसम्बर को मकर रेखा पर लम्बवत् होता है, जिस कारण वायुदाब तथा वायु पेटिया दक्षिण की ओर खिसक जाती है। पुनः सूर्य 21 मार्च को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् होने के कारण ये पेटयाँ वैसी ही स्थिति में आ जाती है। इस तरह ऋतु परिवर्तन के साथ वायु पेटियों में स्थानान्तरण होता रहता है।

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प्रश्न 29.
संघनन की क्रिया के लिए किन-किन दशओं का होना अत्यंत आवश्यक है ?
उत्तर :
संघनन की क्रिया के लिए निम्नलिखित दशाओं का होना अत्यंत आवश्यक है।
(i) शांत वायु का शीतल पदार्थों से सम्पर्क :- रात्रि के समय वायु सामान्यतः शांत होती है उस समय वायु में जो वाष्प होती है वह ठण्डे धरातल के सम्पर्क में आकर बूँदो में बदल जाती है।
(ii) नम तथा ठण्डी वस्तुओं से स्पर्श :- जिस समय नम वायु ठण्डी धाराओं, ठण्डे जल अथवा हिमाच्छादित प्रदेशों से होकर बहती है तो इनके स्पर्श करने से उसकी नमी जल बूँदों में बदल जाती है।
(iii) गरम वायु का ऊपर उठकर फैलना :- ऊँचाई के साथ-साथ तापक्रम कम होता जाता है। इस प्रकार धरातल की वायु ऊपर उठती है तथा फैलती है जिससे उसके तापमान में कमी के कारण उसमें जल, वाष्प धारण करने की शक्ति कम हो जाती है, परिणामत: वह जल बूँढों में बदल जाती है।

प्रश्न 30.
भूमध्य रेखीय अथवा विषुवत रेखीय प्रदेशों में सालों भर वर्षा होती है क्यों ?
उत्तर :
भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सालों पर लम्बवत् चमकता है जिससे दिन में धरातल के असाधारण रूप से गर्म हो जाने पर उससे लगी हुई वायु गर्म होकर फैलती है और हल्की हो जाती है। यह हल्की वायु ऊपर उठने लगती है तथा संवहनीय धराओं का निर्माण होता है। ऊपर उठकर वायु ठण्डी हो जाती है और उसमें उपस्थित जलवाष्प का संघनन शुरु हो जाता है जिसे आकाश गहरे कपासी वर्षा मेघो में घिर जाता है और अंतत: भूमध्यरेखीय प्रदेशों में प्रतिदिन नियमित रूप से वर्षा होती है। यह वर्षा प्रायः दोपहर बाद हुआ करती है इसलिए इसे चार बजे वाली वर्षा (40′ Clock Rain fail) भी कहा जाता है। यहाँ संवहनीय वर्षा होती है।

प्रश्न 31.
आर्द्रता किनते प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त में वर्णन करें।
उत्तर :
आर्द्रता निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है।
(i) निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) : वायु की प्रति इकाई आयत में उपस्थित जलवाष्म की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहा जाता है और इसे ग्राम प्रति घन मीटर में व्यक्त किया जाता है। निरपेक्ष आर्द्रता प्राय: भूमध्य रेखा के निकट सबसे अधिक पाया जाता है जबकि ध्रुवों की ओर बढ़ने पर यह कम होती जाती है।

(ii) विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) : वायु के प्रति इकाई भार में जल/वाष्प के भार को विशिष्ट आर्द्रता कहते हैं, उसे ग्राम प्रति किलोग्राम की इकाई में मापा जाता है।

(iii) सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) : किसी निश्चित तापक्रम पर निश्चित आयतन वाली वायु की अत्यधिक नमी धारण करने की क्षमता तथा उसमें उपस्थित आर्द्रता की वास्तविक आर्द्रता के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहा जाता है, उसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।

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प्रश्न 32.
विकिरण कोहरा और अभिवहन कोहरा से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
विकिरण कोहरा (Radiation Fog) : विकरण कोहरा का निर्माण उस समय होता है जब ठण्डे धरातल के ऊपर गरम और आर्द्र वायु होती है। इस कारण ऊपर स्थित उष्णार्द्र वायु ठण्डी होकर संघनित हो जाती है और जल कण आर्द्रतागाही कणों के चारों ओर एकत्रित होकर जल-सीकरों में बदलकर कुहारे का निर्माण करते हैं। इस प्रकार बने कोहरे को विकिरण कोहरा कहते है।

अभिवहन कोहरा (Advection Fog) : जब उण्डे धरातल पर गर्म तथा आर्द्र वायु का आगमन होता है तो उष्णार्द्र एवं ठण्डी वायु के समिश्रण से उत्पन्न कोहरे को अभिवहन कोहरा कहा जाता है। उस तरह का कोहरा प्राय: स्थलीय भागों पर जाड़े में तथा सागरीय भागों पर गर्मी में होता है क्योंकि शीत ऋतु में स्थलीय भाग सागरीय भाग की अपेक्षा ठण्डे होते हैं।

प्रश्न 33.
वृष्टि किसे कहते हैं? वृष्टि कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वृष्टि (Precipitation) : जब वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प संघनन द्वारा तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होकर धरातल पर गिरते हैं तो इसे वृष्टि कहते हैं।
वृष्टि के प्रकार (Types of Precipitation) : धरातल पर होने वाली वृष्टि मुख्यत चार प्रकार की होती है।
i. हिम वृष्टि (Snow Fall) : जब वायु का तापक्रम हिमांक के नीचे गिर जाता है तो जल के कण जम जाते हैं और वे बर्फ के रूप में धरातल पर गिरने लगते हैं तो इसे हिम वृष्टि कहा जाता है।
ii. ओला वृष्टि (Hail Fall) : वायु मे उपस्थित जलवाष्प तेजी से हिम के मोटे-मोटे कणों में बदल जाते हैं और वे गोलों के रूप,में धरातल पर गिरने लगते हैं तो इसे ओला वृष्टि कहा जाता है।
iii. सहिम वृष्टि (Sleet) : वर्षा की बूंदें अथवा पिघले हिम वृष्टि के जल के पुन: जम जाने से सहिम वृष्टि की रचना होती है।
iv. वर्षा (Rain Fall) : वायु मण्डल में थोड़ी बहुत जलवाष्प हमेशा मिली रहती हैं। वायु में निहित वाष्प प्रवीभूत होने पर जब बूँदों के रूप में धरातल पर गिरने लगते हैं तो उसे वर्षा या जल वृष्टि कहा जाता है।

प्रश्न 34.
पवन विमुख ढाल को वृष्टि छाया प्रदेश कहा जाता है, क्यों ?
उत्तर :
पवन विमुख ढाल को वृष्टि छाया प्रदेश कहा जाता है क्योंकि जब पवनामुखी ढाल के सहारे जलवाष्प भरी हवाएँ ऊपर उठती हैं तथा पवन विमुख ढ़ाल सहारे नीचे उतरती है तो वे केवल शुष्क ही नहीं होती बल्कि अधिक दबाव के कारण गर्म भी हा जाती है जिससे वर्षा करने के स्थान पर उनकी भाप धारण करने की शक्ति बढ़ जाती है। अतः पर्वतों के दूसरे और पवन विमुख ढ़ाल वर्षा से अछूते रह जाते हैं इसलिए उसे वृष्टि छाया प्रदेश (Rain Shadow Area) कहा जाता है।

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प्रश्न 35.
कुहरा और कुहासा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

कुहरा (Fog) कुहासा (Mist)
1. कुहरा एक प्रकार का बादल है। 1. कुहासा एक प्रकार का कुहरा है।
2. इसमें जलवाष्प का संघनन धरातल के बिल्कुल समीप होता है। 2. कुहासा में कुहरे की अपेक्षा दृश्यता (Visibility) दूर तक रहती है।
3. कुहरा में जल के कण अधिक छोटे तथा संघन होते हैं। 3. कुहासा में जल के कण अधिक मोटे तथा संघन होते हैं।

प्रश्न 36.
थार्नथ्वेट तथा कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की तुलना कीजिए।
उत्तर :
थार्नथ्वेट तथा कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की तुलना :

थार्नथ्वेट कोपेन
1. यह वर्गीकरण संख्यात्मक है। 1. यह वर्गीकरण भी संख्यात्मक है।
2. थार्नथ्वेट ने जलवायु की सीमाओं को P/E तथा T/E सूत्र में माना है। 2. कोपेन ने जलवायु की सीमाएँ ताप तथा वर्षा के निश्चित मानदण्डों के अनुसार माना है।
3. इसके वर्गीकरण में संकेतों की कमी है और याद करना सरल है। 3. इसके वर्गीकरण में संकेतों की अधिकता है और याद करना कठिन है।

प्रश्न 37.
थार्नथ्वेट का तापीय दक्षता अनुपात सूत्र क्या है ?
उत्तर :
थार्नथ्वेट ने जलवायु के वर्गीकरण में तापीय दक्षता अनुपात (T/E Ratio) पर भी समान रूप से बल दिया है । उसने तापीय दक्षता अनुपात तथा तापीय दक्षता सूची ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र दिये हैं।
(i) तापीय दक्षता अनुपात ( T / E ratio) = \(\frac{T}-32}{4}\) औसत मासिक वर्षा।
(ii) तापीय दक्षता सूची (T/E Index) = \($\Sigma^{12}\left(\frac{T-32}{4}\right)$\)

प्रश्न 38.
वर्षण प्रभाविता (P/E) क्या है ?
उत्तर :
वर्षण प्रभाविता (P / E ) : थार्नथ्वेट के अनुसार वर्षण प्रभाविता से तात्पर्य कुल वार्षिक वर्षा के केवल उस भाग से है जो वनस्पति के विकास को प्रभावित करता है। इस प्रकार वर्षण प्रभाविता वर्षा की मात्रा और वाष्पीकरण का अनुपात होता है। थार्नथ्वेट ने वर्षा के लिए (P) और प्रभाविता के लिए (E) के अनुपात का परिकलन किया है।

प्रश्न 39.
ग्रहीय हवाओं से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पृथ्वी एक ग्रह है। पृथ्वी के परिभ्रमण एवं सूर्य की सापेक्ष स्थिति के कारण पृथ्वी पद उच्च एपं निम्न वायु-दाब क पंटियाँ पायी जाती है जिससे हवाओं की उत्पति होती है। पवन उच्चवायु दाब से निम्नवायु दाब की ओर चला करते है। पृथ्वी के परिभ्रमण के कारण पवन की दिशा में भी विचलन होता है। हवाओं की उत्पति एवं उनकी दिशा के निर्धारण का कारण पृथ्वी (ग्रह) का सूर्य से सम्बन्ध है अत: इन्हें प्रहीय पवन कहा जाता है। स्थायी रूप से चलने के कारण इन्हें स्थायी पवन भी कहा जाता है।

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प्रश्न 40.
वैश्विक उष्मन क्या है ?
उत्तर :
वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा बढ़ने से वायुमण्डल के तापमान में होने वाली सामान्य वृद्धि को ही भूमण्डलीय उष्णता कहते है।

प्रश्न 41.
वर्षन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
संघनन प्रक्रिया के परिणास्वरूप वायु की जलवाष्म जल – बूँद में बदल जाती है। ये जल बूँद आपस में मिलकर इतने बड़े आकार के हो जाते है कि वायु इन्हें सम्भालने में असमर्थ हो जाती है, तो ये जल-कण धरातल पर गिरना आरम्भ कर देती है। इस प्रकार जल कणो का पृथ्वी पर गिरने की क्रिया को वर्षण (Precipitation) कहते है।

प्रश्न 42.
मानसून से आप क्या समझते हैं? इनकी उत्पत्ति कैसे होती है ?
उत्तर :
मानसूनी पवनें (monsoon) अरब भाषा के Mausimशब्द में लिया गया है जिसंका अर्थ है – मौसम या ॠतु। अतः मानसून हवाओं का तात्पर्य है कि ये पवने मौसम के अनुसार दिशाएँ बदल देती है। ये पवनें 6 महीना स्थल के समुद्र की ओर तथा 6 महीना समुद्र से स्थल की ओर चलती है।

मानसून पवनों की उत्पति : मानसून पवनों की उत्पत्ति का सबसे प्रमुख कारण स्थल और समुद्र के तापमान की भिन्नता है। ग्रीष्म ऋतु में भारत एवं एशिया का स्थलीय भाग अत्यधिक गर्म रहता है जिसके कारण धरातल के समीप की हवाएँ गर्म व हल्की होकर ऊपर उठती है अतः स्थल पर निम्न वायुदाब क्षेत्र का निर्माण हो जाता है। इसके विपरीत समुद्र ठण्डा होता है। अतः समुद्रात की पवने ठण्डी व सिकुड़ जाती है जिससे समूद्र तट उच्च वायु क्षेत्र बन जाता हे। अत: पवन समुद्र में स्थल की ओर चलने लगती है। शीत ऋतु में विपरीत दशा मिलती है। जिससे पवने स्थल से समुद्र की ओर चलती है। इसी सिद्धान्त के आधार पर मानसूनी पवनों की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 43.
विभिन्न प्रकार की मानसूनी पवनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मानसूनी पवनों के प्रकार : ये मौसम के अनुसार दो प्रकार की होती है।
i. ग्रीष्मकालीन मानसून : ग्रीष्म ऋतु में जब सूर्य कर्क रेखा 23 \(\frac{1}{2}\) % उत्तर पर चमकता है तो एशिया का वृद्ध भूखण्ड सूर्य ताप से गर्म हो जाता है। इस भू-खण्ड के समीप की वायु गर्म व हल्की होकर ऊपर उठने लगती है। अत: निम्न वायु क्षेत्र (Low Pressure) बन जाता है। इस समय भूध्मण्डल की अपेक्षा समुद्री क्षेत्र ठण्डा होता है, अतः जलीय क्षेत्रपर पवने ठण्डी होकर सिकुड़ जाती है जिसे समुद्री सतह पर उच्च वायु दाब बनने लगता है। ये समुद्र से चलने के कारण भाप भारी होती है ; अतः ये पवनें एशिया के देशों में वर्षा करती है। इन्हें दक्षिण पश्चिम से चलने के कारण दक्षिणी पश्चिमी मानसून कहते है।

ii. शीतकालीन मानसून पवन : शीत ऋतु में सूर्य मकर रेखा 23 \(\frac{1}{2}\) दक्षिण अक्षांश रेखा पर लम्बवत् चमकता है। अतः हिन्द महासागर के पश्चिमोत्तर सीमा के आस पास निम्न दाब बनने लगता है। इसके विपरीत एशिया भू खण्ड के समीप की वायु ठण्डी होती है। इसीलिए उच्च वायु दाब कम बनता है। अत: स्थलीय भाग से पवनें समुद्र की ओर बहने लगती है। ये पवनें स्थल से आने के कारण शुष्क होती है।अतः इन पवनों से वर्षा नहीं होती है।

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प्रश्न 44.
भूमध्य सागरीय प्रदेशों में जाड़े में वर्षा क्यों होती है ?
उत्तर :
भू-मध्य सागरीय प्रदेश 30° से 45° अक्षांशों के मध्य महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में स्थित है। यह भाग व्यापारिक एवं पहुआ हवाओं की पेटियों के मध्य स्थित है। वायु भार एवं हवा की पेटियों के खिसकने के कारण ये भाग गर्मी में व्यापारिक पवनों के पेटी में आ जाते है जिससे महाद्वीपों के पूर्वी भाग में वर्षा होती है, पश्चिमी भाग तक आते आते ये पवन शुष्क हो जाते हैद्व, जाड़े में ये प्रदेश पहुआ पवनों की पेटी में पड़ते है। पछुआ पवन महासागरो से आने के कारण वाष्पपूर्ण होती है। अतः महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में स्थित भूमध्य सागरीय क्षेत्र में जाड़े में वर्षा होती है।

प्रश्न 45.
अयन रेखाओं के समीप महद्वीपों के पश्चिमी भाग में मरुस्थल क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर :
अयन रेखाओं (कर्क एवं मकर रेखाओ) के समीप महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में मरूस्थल पाये जाने के प्रमुख कारण निम्न है :-

  1. गर्मी में ये प्रदेश व्यापारिक हवाओं के प्रभाव में रहते है। व्यापारिक हवाओं से पूर्वी भाग में तो वर्षा होती है, पर पश्चिमी भाग में आते-आते शुष्क हो जाती है; अतः महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर वर्षा नहीं होती।
  2. जाड़े में प्रदेश उपोष्ण उच्च वायु भार की पेटियो में आ जाते है। यहाँ हवाए ऊपर से नीचे उतरती है। ये हवाये गर्म होती है अतः इनसे वर्षा नहीं होती है।
  3. इन प्रदेशों के समीप ठण्डी धारायें बहती है। इन धाराओं के ऊपर से बहने वाली हवाऐं ठण्डी हो जाती है अतः उनसे भी वर्षा नहीं होती है।

प्रश्न 46.
स्थलीय समीर और समुद्री समीर में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

स्थलीय समीर समुद्री समीर
1. ये हवाऐं स्थल से समुद्र की ओर बहती है। 1. ये हवाऐं समुद्र से स्थल भाग की ओर चलते है।
2. ये समीर सूर्यास्त के 4 बजे से सुबह 8 बजे तक बहती है। 2. ये पवनें दिन में लगभग नौ बजे से सूर्यास्त के करीब आठ बजे तक बहती है।
3. यहा दिन में भूखण्ड गर्म हो जाता है इसलिए निम्न वायु दाब बन जाता है। और समुद्र में उच्च वायु दाब बनता है। 3. यहा रात में भूखण्ड ठण्डा होने के कारण उच्च दाब तथा समुद्र गर्म रहने के कारण निम्न वायु दाब बनता है।

प्रश्न 47.
वाष्पीकरण एवं संघनन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

वाष्पीकरण (Evaporation) संघनन (Condesation)
1. जलकणों का वाष्प के रूप में बदलने की क्रिया को वाष्पीकरण कहते है। 1. जलवाष्प के जल कणों के रूप में बदलने की क्रिया को संघनन कहते है।
2. वायु में उपस्थित सुक्ष्म कणों के पास गर्म होने से वाष्पीकरण होता है। 2. वायु में उपस्थित सूक्ष्म कणों के पास ठण्ड होने से संघनन होता है।
3. वाष्पीकरण प्रक्रिया का मुख्य कारक वायुमण्डल के तापमान में वृद्धि है। 3. संघनन प्रक्रिया के मुख्य कारक तापमान में कमी तथा हवा की सापेक्ष आर्द्रता है।

प्रश्न 48.
निरपेक्ष आद्रता और सापेक्ष आर्द्रता में अन्तर बताइये।
उत्तर :

निरपेक्ष आद्रेता (Absolute Humidity) सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity)
1. किसी निश्चित आयतन की मात्रा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहते है। 1. किसी निश्चित तापक्रम पर वायु में विद्यमान जलवाष्प तथा जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहते है।
2. निरपेक्ष आर्द्रता से वर्षा की सम्भावना का पता नहीं चलता है। 2. सापेक्ष आर्द्रता से वर्षा की सम्भावना का अनुमान लगता है।
3. इसे ग्राम प्रति घनमीटर वायु में व्यक्त किया जा सकता है। 3. इसे प्रतिशत में व्यक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 49.
क्षोभ मण्डल को परिवर्तन मण्डल क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
मौसम सम्बन्धी प्राय: सभी घटनायें कुहरा, बादल, ओला, तुषार, आंधी, तूफान, मेघ, गर्जन आदि क्षोभमण्डल में सम्पादित होते है। इसी मण्डल में ऋतु परिवर्तन भी हुआ करता है इसीलिए इसे मण्डल को परिवर्तन मण्डल कहा जाता है।

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प्रश्न 50.
ओजोन मण्डल को पृथ्वी का रक्षा कवच क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
आजोन मण्डल को पृथ्वी का रक्षा कवच क्योंकि इस आवरण के कारण सूर्य की पराकासमी किरणें समतापमण्डल तथा पृथ्वी सतह तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि ओजोन गैस इन विकिण तरंगों का अवशोषण कर लेती है। यदि किरणें धरातल तक पहुंच पाती तो तापक्रम इतना बढ़ जाता कि किसी भी प्रकार का जीवन जीना भूतल तथा सागर में संभवन नहीं हो पाता।

प्रश्न 51.
शुष्क वायु में विद्यमान चार प्रमुख गैसों का उनकी मात्रा सहित नाम लिखिए।
उत्तर :
शुष्क वायु में उपस्थित गैसे :

गैसे कुल भार का %
i. नाइट्रोजन 78.08
ii. आक्सीजन 20.95
iii. कार्बन-डाई-आक्साइड 0.03
iv. आर्गन 0.9323
v. ओजोन 0.0006

प्रश्न 52.
संघनन एवं वर्षण में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

संघनन वर्षण
1. संघनन प्रक्रिया में जल वाष्प का रूप धारण कर वायुमडल में फैल जाता है। 1. वर्षण प्रक्रिया में वायुमण्डल में संघनीय आद्रता जल के बूंद का समूह रूप में धरातल पर गिरते है।
2. ओस, पाला, कुहरा, धुन्ध आदि संघनन के रूप है। 2. जलदृष्टि, हिम वर्षा, तुषार, ओला आदि वर्षण के रूप है।
3. संघनन असंतृप्त वायुमण्डल में होता है। 3. वायुमण्डल जब बहुत ज्यादा संतृप्त हो जाता है तो वर्षण होता है।

प्रश्न 53.
वायुमण्डल की किस परत को तापमण्डल कहते हैं तथा क्यों ?
उत्तर :
वायुमण्डल के समतापमण्डल के तापमंडल कहते है। क्योंकि इस भाग में सौर्य शक्ति का शोषण और निष्कमण दोनों बराबर होते है। अत: यहाँ तापमान सदैव एक समान रहता है।

प्रश्न 54.
सूर्य की पराकासी किरणें किस प्रकार जैव जगत के लिए हानिकारक होती हैं ?
उत्तर :
प्रकाश की वह तरंग जिसकी लम्बाई बैगनी किरण से कम होती है पराबैगनी किरण भी uV rays कही जाती है। ओजोन मण्डल में छिद्र हो जाने के कारण इसका प्रभाव ज्यादा बढ़ गया है। पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है साथ ही कैंसर जैसे बिमारी भी इसी से फैल रहा है।

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प्रश्न 55.
पृथ्वी के उष्मा संतुलन के बारे में लिखिए।
उत्तर :
पृथ्वी का उष्मा संतुलन (Heat Balance of the eath) सूर्य से प्राप्त ताप का 35 % भाग पुन: अतंरिक्ष (Spac) में लौट जाता है। 14 % भाग जलवाष्प, बादल, धूल-कण तथा गैसों द्वारा सोख ली जाती है। शेष 51 % ताप पृथ्वी को प्राप्त होता है। परन्तु यदि यह ताप प्रतिदिन पथ्वी को मिलता ही रहे और नष्ट न हो तो पृथ्वी का तापक्रम आवश्यकता से काफी अधिक बढ़ जाएगा। परन्तु पृथ्वी इस 51 % ताप को किसी न किसी रूप में वायमण्डल एवं अंतरिक्ष को अंतरिक्ष को लौटा देती है। 13 % भाग धरातल से दीर्घ तरंगों के रूप में परावर्तित हो जाता है।

23 % भाग वाष्पीकरण करने में खर्च हो जाता है। यह गुप्त ताप (Leaent heat) बादल के रूप में ऊपर जाता है। संघनन के बाद वायुमण्डल में मिल जाता है। 16 % भाग वायुमण्डल को गर्म करने में खर्च होता है, 9 % भाग उष्मा विक्षोभ तथा संवहन में खर्च हो जाता है। इस प्रकार पृथ्वी सूर्य से जो 5 ताप-प्राप्त करती है उसे वायुमण्डल एवं अंतरिक्ष में लौटा देती है जिससे पृथ्वी पर उष्मा की मात्रा प्राय समान रहती है। इसे ‘पृथ्वी का उष्मा संतुलन’ कहते है।

प्रश्न 56.
सूर्य की लम्बवत् किरणों से अधिक गर्मी क्यों प्राप्त होती है ?
उत्तर :
लम्बवत् किरणे धरातल के कम क्षेत्र पर पड़ती है, जिस कारण उस स्थान ताप अधिक हो जाता है, और वहाँ अधिक गर्मी प्राप्त होती है।

प्रश्न 57.
समवायु भार या वायुदाब प्रवणता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
किन्ही दो स्थानों के बीच वायु दबाव के अन्तर को वायुभार ढाल या दाब प्रवणता (Pressure gradient) या वायुबमापी ढाल (Barometric) कहते है।

प्रश्न 58.
उपधुवीय क्षेत्रों में निम्न वायुदबाव के गठन के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियाँ (sub-palar low pressure Betles) : ये वायुदाब पेटियाँ क्रमश: 45 % उत्तरी एवं दक्षिणी अंक्षाशों से क्रमश: आर्कटिक एवं अंटार्कटिक वृतों की बीच दोनों गोलाद्धों में स्थित है। सालों पर कम तापमान होने के कारण भी यहाँ निम्न वायुदाब मिलता है स्पष्ट है कि इस कम वायुदाब का तापमान से कोई संबंध नहीं है। वास्तव में पृथ्वी की दैनिक गति के कारण इन अंक्षाशों से वायु फैलकर स्थानांतरित हो जाती है, जिस कारण गति जन्य (Dynamically Induced) वायुदाब का आविर्भाव होता है। यद्यपि इस प्रक्रिया का प्रभाव सबसे अधिक ध्रवों पर होना चाहिए, परन्तु वहाँ पर तापमान इतना न कम हो जाता है कि पृथ्वी की दैनिक गति के कारण वाय के फैलने का कारक कम जोड़ पड़ जाता है, जिसके कारण धुवो पर उच्च दाब हो जाता है ज़बकि उपधुव पर निम्न वायुदाब हो जाता है।

प्रश्न 59.
व्यापारिक हवाएँ महादेशों के पूर्वी भाग में अधिक वर्षा क्यों करती हैं ?
उत्तर :
यह हवा ठण्डे भागों से गर्म भागों की ओर बहती है। अत: ये वातावरण को ठण्डे और आरामदायक बनाती है। महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में मरुस्थलों के पाये जाने के कारण यह भी है कि पूर्व की ओर आने का कारण इनसे महाद्वीपों के पूर्वी भाग में वर्षा होती है : परन्तु पश्चिमी भाग में आते-आते शुष्क हो जाती है।

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प्रश्न 60.
किन हवाओं को गरजती चालीसा कहते हैं तथा क्यों ?
उत्तर :
पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में 40 और 50 डिग्री दक्षिण के अक्षांशों (लैटीट्यूड) के बीच चलने वाली शक्तिशाली पहुआ पवन को गरजती चालीसा कहते हैं।

प्रश्न 61.
जलीय चक्र से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
वाष्पीकरण तथा पेड़ पौधों द्वारा वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रियाओं से जल वाष्प में बदलता है तथा संघनन की क्रिया से वाष्प जल में बदलती है। इस प्रकार धरातल एवं वायुमण्डल के बीच जलवाष्प एवं जल का निरन्तर आदान-प्रदान होता रहता है। जलवाष्प एवं जल के प्राकृतिक रूप से होने वाले इस आदान-प्रदान को ‘जलीय चक्र’ कहा जाता है।

प्रश्न 62.
विषुवत् रेखीय प्रदेश में संवाहनिक वर्षा क्यों होता है ?
उत्तर :
जब किसी स्थान पर अधिक गर्मी पड़ती है, तो गर्म धरातल के सम्पर्क से नीचे की वायु गर्म होकर फैलत है तथा हल्की होकर ऊपर उठती है। इस खाली स्थान को बरने के लिये आस-पास से ठण्डी हवाएँ आती हैं परन्तु वे भी गर्म होकर ऊपर उठती हैं। इस प्रकार वायु में संवहन धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। भूमध्य रेखा पर सूर्य सालो भर लम्बत चमकता हैं जिसके कारण वहाँ संवाहनिय धारा उत्पन्न हो जाती हैं और प्रतिदिन दिन के तीसरे पहर बादलों की गरज तथा बिजली की चमक के साथ मूसलाधार होती है। वर्षा के बाद सांयकाल आकाश साफ हो जाता है।

प्रश्न 63.
वृष्टिछाया प्रदेश से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
ऊँचाई के साथ-साथ वर्षा की मात्रा बढ़ती जाती है। इस प्रकार पर्वत का जो ढाल पवन के सामने होता है वहाँ अधिक वर्षा होती है उसे पवनाभिमुख ढाल (Windward slope) कहते हैं। परन्तु जैसे ही पवन पर्वत की दूसरी ढलाव पर उतरने लगती है वह गर्म और शुष्क होने लगती है और वर्षा कम करती है तो उसे पवनाविमुख ढाल अथवा वृष्टिछाया प्रदेश (Leenward side or Rain shadow Area) कहते हैं।

प्रश्न 64.
तापमान के क्षैतिज वितरण की व्याख्या करो।
उत्तर :
तापमान के क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution) : धरातल को ताप प्राप्ति का मुख्य साधन सौर्यिक उष्मा है लेकिन यह भी प्रत्येक जगह समान नहीं है। भूमध्य रेखा की अपेक्षा धुवो की ओर तापक्रम क्रमशः तीव्र गति से घटता जाता है। तापक्रम के इस घटने की दर को ताप प्रवणता कहा जाता है। कर्क और मकर रेखाओ के मध्य लगभग 450 अक्षांशीय पेटी में तापक्रम अधिक ही होता है।
तापक्रम के क्षैतिज वितरण का प्रदर्शन तथा अध्ययन समताप रेखाओ के द्वारा किया जाता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्रचलित या स्थायी या ग्रहीय पवन के विभित्र प्रकार क्या-क्या है ? उनकी व्याख्या सचित्र कीजिए।
अथवा
ग्लोब पर वायुभार की पेटियों के अनुसार ग्रहीय पवन की चित्र के साथ वर्णन कीजिए।
अथवा
धरातलपर पायी जाने वाली स्थायी वायुदाब पेटियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए। अथवा, पृथ्वी पर ग्रहीय या स्थायी पवनों की उत्पत्ति एवं प्रवाह-पथ चित्रसहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रचलित या स्थायी या ग्रहीय या निश्चित पवनें (Prevailing or Permanent or Planetary or Invariable Winds) : वह पवन जो सालों भर एक ही क्रम में एक निश्चित दिशा की ओर चलती रहती है तो इसे प्रचलित या स्थायी पवनें कहा जाता है चूंकि इनका विस्तार पूरे ग्लोब पर होता है। इसलिए इन्हें ग्लोबल पवनें भी कहा जाता है। प्रचलित पवनों की उत्पत्ति पूरे ग्लोब के तापमान तथा पृथ्वी की दैनिक गति से उत्पन्न उच्च तथा निम्न वायुदाब से सम्बन्धित है। वायुदाब तथा ताप कटिबन्धों के अनुसार इन पवनों को निम्नलिखित तीन वर्गों में सचित्र बाँटा गया है :-
i. व्यापारिक या वाणिज्य या पूर्वी पवन (Trade Wind or Easterlies)
ii. विरुद्ध व्यापारिक या पछुवा पवन (Anti Trade Wind or Westerlies)
iii. ध्रुवीय पवन (Polar Wind)

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i. व्यापारिक या वाणिज्य या पूर्वी पवन (Trade Wind or Easterlies) : उपोष्ण उच्चदाब कटिबन्ध से भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर दोनों गोलार्द्धों में चलने वाली पवन को व्यापारिक पवन कहा जाता है। इसे ‘अंग्रेजी में ट्रेड विंड कहा जाता है। ‘ट्रेड’ एक जर्मन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘ निर्दिष्ट पथ’। अत: ट्रेड पवन निर्दिष्ट पथ पर एक ही दिशा में निरंतर चलने वाली पवन है। फेरल के नियमानुसार ये पवने उत्तरी गोलार्द्ध में दायीं और तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती है। अतः उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी चलने की दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है, इसलिए इन्हें पूर्वी पवन (Easterlies) भी कहा जाता है प्राचीन काल में व्यापारियों को पालायुक्त जलयानों के संचालन में पर्याप्त सुविधा मिलने के कारण इनका नामकरण व्यापारिक पवन किया गया था।

जब यह पवन महाद्वीपों के पूर्वी भागों से चलती हैं तो वर्षा अधिक होती है और पश्चिम की ओर बढ़ती है तो शुष्क हो जाती है। यही कारण है कि व्यापारिक पवन के प्रदेशों में महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में प्रायः मरूस्थल मिलते हैं। हिन्द महासागर में यह पवन मानसून के रूप में परिवर्तित होकर चलता है।

iii. विरुद्ध व्यापारिक या पछुवा पवन (Anti Trade Wind or Westerlies) : यह पवन व्यापारिक पवन के बिल्कुल विपरीत चलता है, इसलिए इसे विरूध व्यापारिक पवन कहा जाता है। उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध से उपधुवीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर चलने वाली पवन को पछुवा पवन कहा जाता है। यह पवन उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूरब की ओर प्रवाहित होती है।

पछुवा पवन का सर्वोत्तम विकास दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल के अभाव के कारण 40° से 65° दक्षिणी अक्षांशों के बीच अधिक हुआ है और यह पवन बहुत ही तीव वेग के साथ चला करता है तो उसे बहादुर के साथ चला करता है तो उसे बहादुर पछुवा पवन (Brave Westerlies) के नाम से जाना जाता है।

पछुवा पवन के प्रचंडता के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° दक्षिणी अक्षांश पर गरजता चालिसा (Roaring Forties), 50° दक्षिणी अक्षांश पर प्रचण्ड पचासा (Furious Fifties) तथा 60° दक्षिणी अक्षांश पर चिखता साठा (Shrieking Sixties) आदि नामों से पुकारा जाता है। ये सभी नामकरण नाविकों के द्वारा दिया गया है।

इस पवन के प्रभाव से महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में वर्षा सालों भर बना रहता है जहाँ से शीतोष्ण कटिबन्धीय निम्नदाब की ओर पवन चलने लगता है। उत्तरी गोलार्द्ध में इस पवन की दिशा उत्तर-पूरब से दक्षिण-पश्चिम की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में इसकी दिशा दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है दोनों गोलाद्धों में पूरब क्षेत्र से आने के कारण इसे धुवीय पूर्वी पवन (Polar Easterlies) भी कहा जाता है।
इस पवन की वायु राशि अल्यंत ठण्डी और भारी होती है। बहुत कम तापमान वाले क्षेत्र से अपेक्षाकृत अधिक तापमान वाले क्षेत्र की ओर बहने के कारण यह पवन शुष्क होती है।

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प्रश्न 2.
‘ग्रीन हाउस’ से क्या अभिप्राय है ? भूमण्डलीय उष्षता या वैश्विक तापन के प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
अथवा
ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव का उल्लेख करें।
अथवा
वैश्विक उष्णता के प्रभाव का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
‘मीन हाउस’ का अभिग्राय है – ऐसा हाउस जिसकी छते एवं दीवारें काँच का पारदर्शी, प्लास्टिक जैसे उष्मारोधी पदार्थो से बनी हो और उसमें कोई पौधा लगाया जाये तो वह हरा-भरा रहे। इस प्रकार के घरों का प्रयोग शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में सब्जियों, फसलों एवं फलदार वृक्षों को उगाने के लिए किया जाता है। शीत ऋतु में ऐसे घरों में प्रीष्म ॠतु में पैदा होने वाली सब्ज़याँ एवं फसलें उगायी जाती हैं। इन कमरों में सूर्य की किरणें ऊष्मारोधी दीवारों को भेदकर कमरे में ताप बढ़ा देती है किन्तु कमरे से बाहर की ओर ऊष्मा का विकिरण नगण्य होता है। इस प्रकार सूर्य की ऊष्मा अन्दर प्रवेश कर वहीं अटक जाती है। फलत: शीत- ॠतु में कमरे का तापमान बाहरी वातावरण की अपेक्षा अधिक रहता है।

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि ‘पृथ्वी की वनस्पतियों तथा प्राणियों के जीवित रहने के लिए तापमान बनाए रखने की प्राकृतिक व्यवस्था को ही हरितगृह प्रभाव (Green House Effect) कहा जाता है।”
भूमण्डलीय उष्णता या ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव (Impact of Global Warming) : भूमण्डलीय उष्णता के अब तक अनेक प्रभाव दृष्टिगत हो चुके हैं जिनका विवरण निम्नलिखित रूप से प्रस्तुत है :
i. ध्रुवीय हिमचादर का पिघलन (Melting of Polar Ice Caps) : वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा में वृद्धि होने से हिमानियाँ पिघलने लगती हैं। यदि 21 वीं सदी के मध्य तक इसकी मात्रा चार से दस गुना वृद्धि हो जाय तो पृथ्वी के तापक्रम में 7°C से 12°C तक वृद्धि होगी। उस दशा में हिम चादर पिघल जाएँगी तथा समुद्र का तटीय, निचले एवं सघन बसे घने द्वीपीय भाग डूब जायेंगे और मछलियाँ नष्ट हो जायेगी।

ii. वर्षण प्रतिरूप में बदलाव (Change the Precipitation Pattern) : भूमण्डलीय उष्णता के कारण वर्षण प्रतिरूप में बदलाव आ जाएगा। कुछ स्थानों पर अधिक एवं कुछ स्थानों पर कम वर्षण होगा, जो फिलहाल ही हमें देखने को मिल रहा है।

iii. मरूस्थलीय क्षेत्र का विस्तार (Expansion of Deserts Area) : वर्तमान कृषि उत्पादन क्षेत्र मरूस्थलीय क्षेत्रों में बदल जायेंगे। इससे विश्वभर में खाद्य संकट उत्पन्न होने का गम्भीर खतरा सामने आ सकता है।

iv. प्रादेशिक जलवायु प्रतिरूप में परिवर्तन (Change in Regional Climate Pattern) : भूमण्डलीय उष्णता के कारण प्रादेशिक जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, कृषि फसल प्रतिरूप एवं जलापूर्ति में परिवर्तन हो सकता है। यह मानव तथा पशुओं के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।

v. ओजोन परत की कमी (Depletion of Ozone layer) : ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबेंगनी किरणों (Ultra violet rays) को अवशोषित करके पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है लेकिन क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFCs) की मात्रा में वृद्धि से यह परत नष्ट हो रही है। ओजोन परत में कमी आने से पृथ्वी के धरातल पर चर्म कैंसर एवं आँखों की बिमारियों में वृद्धि की सम्भावना बढ़ जायेगी।

vi. पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव (Alteration in Ecosystems) : भूमण्डलीय उष्णता के बढ़ने से पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव आ जायेगा। वर्तमान समय में बहुत से पक्षियों और जीव-जन्तुओं का तो नामों निशान मिट चुका है।

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प्रश्न 3.
वायुमण्डलीय तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
किसी स्थान या क्षेत्र के तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख करें।
अथवा
ग्लोब पर तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
वायुमण्डलीय तापमान में भित्रता के क्या कारण हैं?
उत्तर :
तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting the temperature distribution) : किसी भी स्थान या क्षेत्र में तापमान का वितरण निम्नलिखित कारकों द्वारा प्रभावित होता है।
i. अक्षांश (Latitude) या भू-मध्य रेखा से दूरी : भू-मध्य रेखा पर सूर्य की किरण लम्बवत पड़ती है जिसके कारण भूमध्य रेखा पर दिन-रात की समान अवधि के साथ-साथ सर्वाधिक सूर्याताप प्राप्त होता है तथा तापक्रम अधिक पाया जाता है। भू-मध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर बढ़ते अक्षांश के साथ दिन की अवधि अधिक होने पर भी सूर्य की किरणों के अधिक तिरछापन के कारण सूर्याताप घटता जाता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि अक्षांश बढ़ता है तो औसत वार्षिक तापक्रम घटता है।

ii. ऊँचाई (Altitude) : समुद्र तल पर उच्च ताप पाया जाता है। समुद्र तल से ऊँचाई के साथ तापक्रम घटता जाता है। वायुमण्डल अपनी अधिक उष्मा पृथ्वी द्वारा होने वाला विकिरण से प्राप्त लेता है, अत: धरातल के सम्पर्क में आने वाला भाग सबसे अधिक उष्मा प्राप्त करता है। सामान्यत: 165 मीटर की ऊँचाई पर 1°C अथवा 1 कि०मी० की दूरी पर 6.4°C तापक्रम गिर जाता है। यही कारण है कि पर्वतीय भाग मैदानों की अपेक्षा अधिक ठण्डे होते हैं। नई दिल्ली की अपेक्षा शिमला का तापक्रम कम है, क्योंकि शिमला नई दिल्ली की अपेक्षा ऊँचाई पर स्थित है।

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iii. समुद्र तट से दूरी (Distance from the sea coast) : समुद्र के पर्वतीय भागों में तापक्रम का प्रभाव समकारी होता है क्योंकि स्थल की अपेक्षा जल देर से गरम होता है और देर से ही ठण्डा होता है। यही कारण है कि समुद्र के निकटवर्ती भागों में तापान्तर कम होता है तथा उससे दूर जाने पर तापान्तर बढ़ता जाता है। उदाहरण के लिए मुम्बई का तापमान नई दिल्ली के तापक्रम की अपेक्षा अधिक समकारी है क्योंकि मुम्बई समुंद्र तट पर स्थित है जबकि नई दिल्ली समुद्र तट से काफी दूरी पर स्थित है।

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iv. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) : महासागरीय धाराएँ भी तटवर्ती क्षेत्रों के तापक्रम को प्रभावित करती हैं। जिन क्षेत्रों में गरम धारा बहती हैं वहाँ का तापक्रम अधिक होता है, इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में ठण्डी धारा बहती है, उन क्षेत्रों का तापक्रम कम हो जाता है। उदाहरण के रूप में, गल्फस्ट्रीम यूरोप के उत्तरी-पश्चिमी भाग तथा क्यूरोशिया जापान तथा उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर बहने वाली गरम धाराएँ है जो इन क्षेत्रों का तापक्रम ऊँचा बनाए रखती है। इसके विपरीत लेख्याडोर, पीरू तथा कैलीफोर्निया धाराएँ ठण्डी होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में तापक्रम अधिक नीचा कर देते हैं।

v. पवन की दिशा (Direction of Wind) : जिन स्थानों पर गरम पवनें आती हैं वहाँ का तापक्रम अधिक तथा जहाँ पर ठण्डी पवनें आती हैं वहाँ का तापक्रम कम होता है। जैसे – उत्तरी भारत के मैदानी भाग में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली लू से कई बार तापक्रम 45°C तक पहुँच जाता है। इसी प्रकार शीत ऋतु में हिमालय पर्वतीय क्षेत्र से आने वाली ठण्डी वायु अर्थात बर्फीली हवा से तापक्रम काफी नीचे गिर जाती है।

vi. भूमि का ढाल (Slope of the land) : यह कथन सत्य है कि भूमि का जो ढाल सूर्य के समाने आते हैं वे अधिक सूर्याताप प्राप्त करते हैं और वहाँ का तापक्रम भी अधिक होता है। इसके विपरीत, जो ढाल सूर्य से परे होते हैं वहाँ पर सर्याताप कम प्राप्त होता है और वहाँ का तापक्रम भी कम होता है ।
जैसे – हिमालय तथा आल्पस पर्वतों के दक्षिणी ढलानों पर तापक्रम अधिक तथा उत्तरी ढलानों पर तापक्रम कम पाया जाता है।

vii. भू-तल का स्वभाव (Nature of the Surface) : हिम तथा वनस्पति से ढँक हुए भू-तल सूर्य से प्राप्त हुए अधिकांश ताप को परावर्तित कर देते हैं। अतः इन क्षेत्रों में तापक्रम अधिक नहीं हो पाता। इसके विपरीत, बालू तथा काली मिट्टी से ढके हुए क्षेत्र अधिकांश सूर्याताप का अवशोषण कर लेते हैं और वहाँ पर तापक्रम अधिक होता है।

viii. मेघ तथा वर्षा (Cloud and Rainfall) : जिन प्रदेशों में मेघ छाए रहते हैं तथा वर्षा होती है वहाँ का तापक्रम अधिक नहीं होता क्योंकि मेघ सूर्य की किरणों का परावर्तन कर देते हैं। उदाहरणतया, भूमध्य रेखीय खण्ड में सूर्य की किरणों के लम्बवत पड़ने के अलावा भी वहाँ पर इतना अधिक तापक्रम नहीं हो पाता जितना मेघरहित उष्ण मरूस्थलीय भागों में हो जाता है।

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प्रश्न 4.
वायुमण्डल के संकेन्द्री-परतों का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
वायुमंडल के क्षोभमंडल एवं समतापमंडल के स्तरों का संक्षेप में वर्णन करो।
अथवा
वायुमण्डल को कितने भागों में बाँटा गया है प्रत्येक का वर्णन करो।
उत्तर :
पृथ्वी के तल से लेकर अपनी उच्चतम सीमा तक वायुमंडल सकेन्द्री परतों के रूप में विस्तृत है जो अपने घनत्व, तापमान तथा गैसीय संघटन की दृष्टि से एक दूसरे से हमेशा अलग है। वायुमण्डल की पर्त निम्नलिखित हैं जिसे नीचे सचित्र वर्णन किया जा रहा है

क्षोभमण्डल (Troposphere) : यह वायुमण्डल की सबसे निचली एवं सघन परत है, जिसमें वायु के सम्पूर्ण भार का 75 % भाग पाया जाता है। धरातल से इस परत की औसत ऊँचाई 14 कि॰मी० मानी जाती है। यह परत भूमध्य रेखा से धुवों की ओर पतली होती जाती है। भूमध्य रेखा पर संवहन धारा के कारण इसकी ऊँचाई 18 कि०मी० एवं ध्रुवों पर 8 से 10 कि॰मी० होती है। जलवाष्प तथा धूल-कण की उपस्थिति के कारण बादलों का निर्माण, तूफान, चकवात आदि की उत्पत्ति जैसी मौसम सम्बन्धित घटनाएँ इसी मण्डल में होती है। इस मण्डल को संवहन मण्डल भी कहा जाता है क्योंकि संवहन धाराएं इस मण्डल के बाह्य सीमा तक सीमित होती है।

इस परत में ऊँचाई के साथ-साथ तापमान में गिरावट दर 1°C प्रति 165 मी० या 3.6°F 100 मीटर है। इसलिए इसे सामान्य हास दर (Normal Lapse Rate) कहा जाता है। बादल, तूफान आदि के कारण यह मण्डल वायुयानों के उड़ने के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यह मण्डल विकिरण (Radiation), संचालन (Conduction), और संवहन (Convection) द्वारा गर्म एवं ठण्डा होता है। क्षोभमण्डल एवं समतापमण्डल के बीच स्थित संक्रमण स्तर को क्षोभ सीमा (Tropopause) कहा जाता है।

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प्रश्न 5.
अल नीनो (EL-Nino) का प्रभाव ग्लोब पर कैसा है व्याख्या कीजिए।
अथवा
अल नीनो का विश्व पर कैसे प्रभाव पड़ता है वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अल नीनो का वैश्विक प्रभाव (Effect of El-Nino) :- लगभग उसे 8 वर्षो के अंतराल के पश्चात महासागरों एवं विश्व की जलवायु में एक विचित्र परिवर्तन देखने को मिलता है। इसकी शुरूआत पूर्वी प्रशान्त महासागर से होती है एवं लगभग एक वर्ष की अवधि के लिए उसका प्रभाव सम्पूर्ण विश्व में फल जाता है।

अलनीनो की उत्पत्ति के साथ ही तटवर्ती क्षेत्र में सतह के नीचे जल का स्तर उपर आना बंद हो जाता है उसके फलस्वरूप ठण्डे जल का स्थानातंरण पश्चिम से आने वाले गर्म जल द्वारा होने लगता है एवं प्लैस तथा मछलियाँ विलुप्त होने लगती हो इन मछलियों पर निर्भर पक्षी भी मरने लगती है।

अलनीनो के कारण दक्षिणी मध्य प्रशान्त महासागर में भयानक उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है। जब पश्चिमी प्रशान्त महासागर के उच्च दाब क्षेत्र का फैलाव फिलीपीन, श्रीलंका एवं भारत तक हो जाता है, तो उस भाग में सूखा पड़ता है। अलनीनो की घटनाओं के बीच एक विपरीत एवं पूरक घटना देखने को मिलता है जिसे ला-नीनो (La-Nino) कहा जाता है।

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प्रश्न 6.
पृथ्वी पर हवा की पेटियों के खिसकाव का संक्षिप्त व्यख्या कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर हवा की पेटियों का खिसकाव (Shifting of the Wind Belts on the Earth) : पृथ्वी का अपनी कक्ष पर झुकी हुई होने तथा अण्डाकार मार्ग पर सूर्य की परिक्रमा करने के फलस्वरूप धरातल पर सूर्य की किरणें कभी एक सी नहीं चमकती। सूर्य कभी कर्क रेखा और कभी मकर रेखा पर सीधा चमकता है। सूर्य के इस प्रकार कभी उत्तरायण तो कभी दक्षिणायण होने के कारण वायुदाब और हवाओं की पेटियाँ कुछ उत्तर तथा कुछ दक्षिण की ओर खिसकती रहती है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है जिस कारण सभी वायुदाब की पेटियाँ उत्तर दिशा में खिसक जाती है। भूमध्य-रेखीय दाब 0° तथा 10° अक्षांशों के बीच उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च दाब 30°-40° अक्षांशों के बीच हो जाता है, इस कारण उनसे संबंधित वायुदाब की पेटियां भी अपने निर्दिष्ट स्थान से उत्तर की ओर खिसक जाती हैं।

21 जून के बाद सूर्य भूमध्य रेखा की ओर अग्रसर होता है तथा 23 सितम्बर को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् चमकता है जिस कारण वायु-पेटियाँ अपनी वैसी ही स्थिति में आ जाती है, उसके बाद सूर्य दक्षिणायण हो जाता है तथा 22 दिसम्बर को मकर रेखा पर लम्बवत् होता है, जिस कारण वायुदाब तथा वायु पेटियां दक्षिण की ओर खिसक जाती है। पुन: सूर्य 21 मार्च को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् होने के कारण ये पेटयाँ वैसी ही स्थिति में आ जाती हैं। इस तरह ॠतु परिवर्तन के साथ वायु पेटियों में स्थानान्तरण होता रहता है।

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प्रश्न 7.
मुख्य ज्वार एवं गौण ज्वार के उत्पति के कारण क्या है ?
उत्तर :
मुख्य ज्वार (Primary tide) : पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्यार (Direct tide) या प्रारम्भिक या मुख्य ज्वार (Primary tide) कहते हैं।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव (Impact of Climatic Change) : वर्तमान समय में विश्वभर में हो रहे जलबायु परिवर्तन की व्याख्या निम्नलिखित रूप से की जा रही है।

  1. विश्व के बहुत से स्थानों का तापमान बढ़ रहा है। यह संभवतः मानवीय क्रियाकलापों से ग्रीन हाउस गैसों जैसे CO2, CFCs, CH4, N2O के बढ़ने के कारण हुआ है।
  2.  तापमान के बढ़ने से विभिन्न प्रदेशों में आने वाले भयकर तुफानों की संख्या बढ़ी है।
  3. विश्व के बहुत से आर्द्र प्रदेश शुष्क हो गए हैं और उनमें फैलाव की संभावना है।
  4. विश्व के कुछ भागों में भयकर तूफान के आने से बाढ़ें आ सकती हैं।

गौण ज्वार (Indirect Tide) : पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हट कर उपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार या गौण ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 8.
ओजन परत की सृष्टि कैसे होती है ? ओजोन परत क्षरण के प्रमुख गैस की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ओजोन छिद्र का पता सर्वप्रथम 1985 में अंटार्कटिका के ऊपर फारमान द्वारा लगाया गया, उसके बाद ओजोन छिद्र का पता आकर्टिक एवं उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में भी लगाया गया।

समताप मंडल में 20 से 35 कि॰मी० के बीच ओजोन गैस की परत पाई जाती है। ओजोन की यह परत सूर्य की किरणों से विकरित पाराबैगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। जब विभित्र सोतों से उत्सर्जित क्लोरिन गैस ऊपर उठती है तो वह (ओजन) से प्रतिक्रिया करके क्लोरीन मोनो आक्साइड एवं आक्सीजन का निर्माण होता है। क्लोरीन का एक अणु ओजोन के अनेक अणुओं का विनाश करने में सक्षम होता है, चूकि ध्रुवों के निकट ओजोन मण्डल की ऊँचाई कम होती है। अत: यहाँ ओजोन क्षरण की समस्या सर्वाधिक गम्भीर है।

ओजोन क्षरण का मुख्य कारण (CFCs) है। उस गैस का प्रयोग प्रशीतक, प्रणोदक, इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की सफाई तथा आग वाली प्लास्टिक के निर्माण आदि कार्यो में होता है। इसके अलावा काबर्न-डाई-आक्साइड मिथेन आदि गैस है। ये गैसें पृथ्वी के चारों ओर प्रवाहित होकर एक घना आवरण बन देती है। जिससे पृथ्वी पर सौर विकिरण तो आ जाता है परन्तु ये गैस इन्हें वापस आंतरिक्ष में नहीं जाने देती है। उसके फलस्वरूप किरण के तापमान में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 9.
भूमण्डलीय उष्पता के लिए प्रमुख उत्तरदायी कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
वैश्विक तापन या ग्लोबल वार्मिंग से क्या अभिप्राय है ? विश्व के तापमान में वृद्धि के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
भूमण्डलीय उष्णता या वैश्विक तापन या ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) : वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा बढ़ने से वायुमण्डल के तापमान में होने वाली सामान्य वृद्धि को ही भूमण्डलीय उष्णता (Global Warming) कहते हैं।
भूमण्डलीय उष्णता के लिए उत्तरदायी कारक (Factors Responsible for Global Warming) :भूमण्डलीय उष्णता के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं :-
i. जीवाश्म ईंधन का जलना (Burning of Fossil Fuels) : उद्योगों तथा वाहनों के द्वारा जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोल का अधिक मात्रा में प्रयोग करने पर वायुमण्डल में कार्बन-डाइ-आक्साइड (CO2) की मात्रा पिछले सौ वर्षो से 20-25 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

ii. जंगलों का विनाश (Destruction of Forests) : तेजी से बढ़ते हुए औद्योगीकरण के कारण प्राकृतिक वनस्पतियों को मनमाने ढंग से काटा जा रहा है। पेड़-पौधे कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) को अवशोषित करते हैं तथा वायु में आक्सीजन (O2) छोड़ते हैं। वृक्षों की अंधाधुन कटाई के कारण, कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा वायुमण्डल में बढ़ जाने से भूमण्डलीय उष्णता भी अधिक हो गई है।

iii. मिथेन गैस की मात्रा बढ़ना (Increasing amount of the Methane) : पेड़-पौधे एवं जानवरों के अवशेष के सड़ने-गलने से मीथेन (CH4) गैस की उत्पत्ति होती है जो वायुमण्डल के तापक्रम को बढ़ाने में सहायक है।

iv. क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन का बढ़ना (Increasing of Chloro-Fluoro-Carbons) : क्लोरा-फ्लोरोकार्बन (CFCS) गैस का प्रयोग फ्रिज और हवाई छिड़काव के लिए किया जाता है। इस गैस की मात्रा में वृद्धि, पृथ्वी के तापमान की वृद्धि के लिए उत्तरदायी है।

v. ओजोन परत का क्षरण (Depletion of Ozone Layer) : ओजोन परत के क्षय के कारण सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सीधे पहुँचने से धरातल के तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे भूमण्डलीय उण्णता भी अधिक हो गई है।

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प्रश्न 10.
जलवायु परिवर्तन से आप क्या समझते हो? वर्तमान समय में विश्व में हो रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
जलवायु परिवर्तन (Climatic Change ) : जलवायु, दूसरे भौतिक तत्वों के समान नहीं है बल्कि परिवर्तनशील है। कम या अधिक इसमें हमेशा परिवर्तन होता रहता है। आजकल जलवायु परिवर्तन को भविष्य में होने वाली एक विशेष घटना के रूप में देखा जाता है। अन्तरराष्ट्रीय पैनेल में जलवायु परिवर्तन के द्वारा समय-समय पर वायुमण्डल में उपस्थित हरित गृह गैसों की सान्द्रता एवं इसमें वृद्धि का आकलन किया जाता है तथा इसमें हो रहे दुष्भभावों की व्याख्या भी की जाती है।

अभी तक वैश्विक तापन के फलस्वरूप पृथ्वी के तापक्रम में 1°C का बढ़ोतरी पहले से ही चुका है और विकास एवं औद्योगीकरण की दर यदि यही बनी रही तो 21 वीं शताब्दी के अन्त तक पृथ्वी के तापक्रम में 1.5°C से लेकर 5.4°C तक की वृद्धि दर्ज की जा सकेगी। इस प्रकार पृथ्वी के गर्माने से हवाओं के रूख में परिर्वतन हो जायेंगे और वर्षा के क्रम में भी अनेक परिवर्तन उत्पन्न होंगे।

प्रश्न 11.
ग्लोब पर तापमान के प्रादेशिक वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व के तापकटिबन्धों या पेटियों की सचित्र व्याख्या कीजिए।
अथवा
ताप कटिबंधों की व्याख्या करो।
उत्तर :
ग्लोब पर प्रमुख तापकटिबन्धों या पेटियों का विभाजन (Division of Main Temperature Zones on the Globe) : तापमान के आधार पर विश्व को निम्नलिखित तीन कटिबन्धो में विभाजित किया गया है।
i. उष्ण कटिबन्ध (Tropical or Torrid Zones)
ii. शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zones)
iii. शीत कटिबन्ध (Frigid or Cold Zones)

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i. उष्ण कटिबन्ध (Tropical or Torrid Zone) : इसे विषुवत रेखीय कटिबन्ध (Tropical Equatorical Zone) भी कहते हैं। यह भू-मध्य रेखा से दोनों ओर 23 1/2° N/S तक फैला हुआ है। इसकी सीमांतक रेखा को उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा (Tropic of Cancer) और दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा (Tropic of Capricar) कहते हैं। इस कटिबन्ध में सूर्य की सीधी किरणें अन्य स्थानों से अधिक पड़ती है, इसलिए यहाँ तापमान हमेशा उच्च रहता है और यह उष्ण कटिबन्ध कहलाता है।

ii. शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zones) : यह दोनों गोलार्द्धों में 23 1/2° N / S से 66 1/2° N/S अक्षांशों के बीच फैला हुआ है। उत्तर में उत्तरी ध्रुव वृत्त और दक्षिण में दक्षिणी ध्रुव वृत्त (Artic Circle and Antartic Circle) इसकी सीमाएँ बनाती हैं। इस कटिबन्ध में जाड़े और गरमी के तापमान का अन्तर अधिक हो जाता है। पृथ्वी का अधिकांश भाग इस भाग में स्थित है।

iii. शीत कटिबन्ध (Frigid or Cold Zones) : यह शीतोष्ण कटिबन्ध से उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव (North Pole 90°) तक तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव (South Pole 90° ) तक फैला हुआ है। इस कटिबन्ध में बहुत अधिक सरदी पड़ती है। इस कटिबन्ध में सूर्य की किरणें बहुत ही तिरछी पड़ती है जिसके कारण यहाँ तापमान बहुत ही कम होता है, इसलिए इसे शीत कटिबन्ध कहा जाता है।

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प्रश्न 12.
वायुमण्डल का गरम एवं ठण्डा होने के प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
वायुमण्डल किन-किन विधियों द्वारा गरम एवं ठण्डा होता है इनकी व्याख्या प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
वायुमण्डल का गरम एवं ठण्डा होना (Heating and Coolling of the Atmosphere) : वायुमण्डल के गरम एवं ठण्डा होने की क्रियाएँ मुख्य रूप से संचालन, संवहन, विकिरण तथा अभिवाहन की विधियों से प्रस्तुत होती हैं।
i. संचालन (Conduction) : संचालन क्रिया के अंतगर्त एक अणु स्पर्श द्वारा दूसरे अणु को उष्मा प्रदान करता है। यह तभी संभव होता है जब वस्तुओं के तापक्रम में विभिन्नता होती है तथा यह क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि दोनों वस्तुओं का तापक्रम समान न हो जाय। दिन के समय पृथ्वी की धरातल सूर्याताप द्वारा गरम हो जाता है। इस कारण जब वायुमण्डल की शीतल वायु तप्त धरातल के सम्पर्क में आती है तो संचालन के द्वारा वह भी गरम हो जाती है क्योंकि वायु ऊष्मा की कुचालक है। अत: इस प्रक्रिया के द्वारा वायुमण्डल की केवल निचली परते ही गरम होती हैं।

ii. संवहन (Convection) : सौर विकिरण से ऊष्मा प्राप्त करने के बाद धरातल गर्म होने लगता है जिस कारण उसके सम्पर्क में आने वाली वायु गरम होकर ऊपर उठती है तथा फैल कर हल्की हो जाती है। इसके विपरीत ऊपर स्थित वायु अपेक्षाकृत ठण्डी होने के कारण भारी होने से नीचे उतरती है, जिस कारण नीचे उतरने से सिकुड़कर भारी होने तथा धरातलीय तापक्रम से गरम होती है। पुन: हल्की होकर ऊपर उठती है। इस तरह वायुमण्डल में संवहन तरंगों का आविर्भाव होता है जिससे ऊष्मा का स्थानांतरण होने रहने से वायुमण्डल ऊँचाई तक गरम हो जाता है।

iii. विकिरण (Radiation) : किसी पदार्थ के ऊष्मा तरंगों के संचार द्वारा सीधे गरम होने को विकिरण कहते हैं। सूर्याताप को ग्रहण करने और उसे ताप में बदल देने से पृथ्वी का धरातल गरम हो उठता है। फलत: गरम धरातल ताप को पुन: शून्य में प्रसारित करने लगता है। इस प्रकार पृथ्वी से होने वाले विकिरण को भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) कहते हैं। वायुमण्डल के ऊपरी भाग में कई प्रकार की गैसें और धूल कण भी स्वतंत्र रूप से सूर्याताप ग्रहण करते हैं और फिर गरम होकर स्वयं ताप शक्ति को प्रसारित करते हैं।

इनके द्वारा प्रसारित ताप पृथ्वी के धरातल पर पहुँचता है और धरातल को गरम करने में महत्वपूर्ण स्थान लेता है। इस प्रकार यह पृथ्वी से नष्ट होने वाली ताप शक्ति को बनाए रखने में सहयोग देता है। सूर्यताप पृथ्वी के धरातल पर लघु तरंगों (Short Waves) के रूप में पहुँचता है जबकि भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) लम्बी तरंगों (Long Waves) के रूप में होता है। वायुमण्डल सूर्याताप की अपेक्षा भौमिक विकिरण से अधिक गरम होता है।

iv. अभिवहन (Advection) : इस प्रकिया में ऊष्मा का क्षैतिज दिशा में स्थानान्तरण होता है। गरम वायु-राशियाँ जब ठण्डे क्षेत्रों में जाती हैं तो उन्हें गरम कर देती है। इससे ऊष्मा का संचार निम्न अक्षांशीय क्षेत्रों से उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों तक भी होता है। वायु द्वारा संचालित समुद्री धाराएँ भी उष्ण कटिबन्धों से धुवीय क्षेत्रों में ऊष्मा का संचार करती है।

प्रश्न 13.
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
किसी स्थान प्रदेश के वायुदाब को प्रभावित करने वाले तत्वों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या करो।
उत्तर :
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting the Pressure belts) : पृथ्वी पर वायुदाब सर्वन्न समान नहीं है। कहीं अधिक वायुदाब है तो कहीं कम। वायुदाब की इस भिन्नता के कारण निम्नलिखित हैं :-
i. वायु का तापमान (Temperature of the Air) : वायुदाब और तापमान में घनिष्ठ सम्बन्ध है। वायु का तापमान बढ़ जाने पर उसका आयतन बढ़ जाता है और यह फैलकर इधर-उधर चलने लगती है, इससे वायु का दबाव कम हो जाता है, परन्तु जब तापमान घट जाता है तो वायु सिकुड़कर एक जगह एकत्रित होने लगती है, जिससे वायुदाब बढ़ जाता है। इस तरह तापमान में परिवर्तन के साथ-साथ वायुदाब भी घटता-बढ़ता रहता है। अर्थात हम कह सकते हैं कि तापमान अधिक हुआ तो वायुदाब कम होगा और यदि तापमान कम हुआ तो वायुदाब अधिक होगा। यही करण है कि भूमध्य रेखा के आस-पास तापमान अधिक होने पर वायुदाब कम तथा धुवों के पास तापमान कम होने पर वायुदाब अधिक होता है।

ii. वायु का जलवाष्प (Water Vapour) : जलवाष्प हवा से हल्की होती है, अत: अधिक जलवाष्प युक्त वायु हल्की होती है और उसका दाब कम होता है। शुष्क वायु भारी होती है, अत: उसका दाब अधिक होता है। ऋतु के अनुसार जलवाष्प की मात्रा घटती-बढ़ती रहती है। यही कारण है कि वर्षा ॠतु में आर्द्र वायु होने पर वायु दाब कम होता है। शीत ॠतु में शुष्क वायु के कारण वायुदाब अधिक होता है।

iii. पृथ्वी की दैनिक गति (Rotation of the Earth) : पृथ्वी की दैनिक गति से उत्पन्न अपकेन्द्री बल के कारण विषुवत रेखीय भागों मे वायु दूर हटती है, दूसरी ओर उपधुवीय क्षेत्रों के वायु गुरूत्वाकर्षण के कारण निम्न अक्षाशशों की ओर खिचती है। फलस्वरूप 40° तथा 50° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के बीच हवाएँ उतरती है और वहां के वायुभार को बढ़ा देती है।

iv. ऊँचाई का प्रभाव (Effect of Altitude) : वायुदाब वायुमण्डल के वजन के कारण होता है। समुद्र तल पर वायुमण्डल की पूरी ऊँचाई का भार पड़ता है, अत: वहाँ वायुदाब सबसे अधिक होता है वहाँ से जैसे-जैसे हम ऊपर जाते है वैसे-वैसे हमारे ऊपर वायुदाब की मात्रा कम होती जाती है। ऊपर की वायु विरल भी होती है। वैज्ञानिको का मत है कि से 6 कि॰मी॰ की ऊँचाई पर वायुदाब आधा हो जाता है। 11 कि॰मी॰ की ऊँचाई पर तो वजन एक चौथाई रह जाता है।

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प्रश्न 14.
पृथ्वी पर वायुदाब की पेटियों का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
ग्लोब पर वायुमण्डलीय दाब के क्षैतिज वितरण को चित्र के साथ व्याख्या कीजिए।
अथवा
पृथ्वी पर वायुभार की कितनी पेटियाँ हैं। चित्र की सहायता से उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वायुदाब की पेटियाँ (Pressure Belts) : यदि पृथ्वी स्थिर होती, तो विषुवत रेखा के निकट निम्न वायुदाब एवं धुवों के निकट उच्च वायुदाब की उच्च पेटियाँ मिलती। परन्तु पृथ्वी की दैनिक गति के कारण उपरोक्त दोनों पेटियों के अलावा दोनों ही गोलार्द्धों में वायुदाब की और दो-दो पेटियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार वायुदाब की कुल सात पेटियाँ ग्लोब पर देखने को मिलती है जिन्हें दाब कटिबन्ध (Pressure Belt) भी कहा जाता है।
इस प्रकार सम्पूर्ण ग्लोब पर सात वायुमण्डलीय दाब पेटियों को चार समूहों में सचित्र वर्णन किया जा रहा है।

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i. भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब की पेटी (Equatorial Low Pressure Belt) : इस पेटी का विस्तार भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° या 10° अक्षांशों तक हुआ है। भूमध्य रेखा पर सालों पर सूर्य की किरणें लगभग लम्बवत पड़ती है जिंसके कारण सालों पर तापमान ऊँचा रहता है। अधिक तापमान के कारण इस क्षेत्र की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है जिसे निम्न वायु दाब पेटी का निर्माण हाता है। इस कम दाब की पेटी का प्रत्यक्ष सम्बन्ध तापमान से है, अत: इसे तापजन्य न्यूनदाब की पेटी (Thermal Pressure Belt) भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में सामन्यतः धरातलीय क्षैतिज पवन नहीं चलते है व्योंकि इस कटिबन्ध में आने वाली इसकी सीमाओं के समीप पहुँचते ही गर्म होकर ऊपर उठने लगती है। इस प्रकार इस कटिबन्ध में केवल उर्ध्वाधर या संवहनीय वायु धाराएँ पायी जाती है। वायुमण्डलीय दशा के अत्यधिक शांत रहने के कारण ही इस कटिबन्ध को शांत कटिबन्ध (Calm Belt) या डोलडूम (Doldrum) कहा जाता है।

ii. उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च वायु दाब की पेटियाँ (Sub-Tropical High Pressure Belts) : उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्दो में क्रमशः कर्क ओर मकर रेखाओं से 35° अक्षांशों के बीच उच्च वायुदाब की पेटियाँ पायी जाती है। इन पेटियों में उच्चदाब होने के कारण यह तापीय नहीं है बल्कि यह पेटी पृथ्वी की दैनिक गति एवं वायु के अवतलन से सम्बन्धित है, अर्थात यह उच्च वायुदाब गतिजन्य है।

इस पेटी में उच्च वायुदाब की उत्पत्ति का दूसरा कारण कारिआलिस बल है। भूमध्य रेखीय क्षेत्र से वायु ऊपर की ओर उठती है एवं धुवों की ओर चलने लगती है। वायुमण्डल के ऊपरी भाग में घर्षण के अभाव के कारण कारिआलिस बल के प्रभाव से ये हवाएँ उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में क्रमशः दायी एवं बायी और मुड़ने लगती है। इस वायु दाब पेटी को अश्व अक्षांश (Horse Latitude) भी कहा जाता है क्योंकि प्राचीनकाल में घोड़े से भरा पालवाला जलयान जब इस पेटी में पहुँचता या तो वायु के शांत रहने के कारण जलयान को आगे बढ़ने में कठिनाई होती थी। अतः जलयान के भार को कम करने के लिए कुछ घोड़ों को समुद्र में फेंक दिया जाता था। इस भार का सबसे अधिक प्रभाव 30°-35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के बीच पड़ा, इसलिए इसे ही अश्व अक्षांश (Horse Latitude) कहा जाने लगा।

iii. उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियाँ (Sub-Polar Low Pressure Betls) : ये वायुदाब पेटियाँ क्रमशः 45° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों से क्रमशः आर्कटिक एवं अंटार्कटिक वृतों की बीच दोनों गोलार्द्धो में स्थित है। सालों पर कम तापमान होने के कारण भी यहाँ निम्न वायुदाब मिलता है। स्पष्ट है कि इस कम वायुदाब का तापमान से कोई सम्बन्ध नहीं है। वास्तव में पृथ्वी की दैनिक गति के कारण इन अक्षांशों से वायु फैलकर स्थानांतरित हो जाती है, जिस कारण गति जन्य (Dynamically Induced) वायुदाब का आविर्भाव होता है। यद्यपि इस प्रक्रिया का प्रभाव सबसे अधिक धुवों पर होना चाहिए, परन्तु वहाँ पर तापमान इतना न कम हो जाता है कि पृथ्वी की दैनिक गति के कारण वायु के फैलने का कारक कमजोर पड़ जाता है, जिसके कारण धुवो पर उच्च दाब हो जाता है जबकि उपध्रुव पर निम्न वायुदाब हो जाता है।

iv. ध्रुवीय उच्च दाब की पेटियाँ (Polar High Pressure Belts) : 80° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांश से उत्तरी धुव तथा दक्षिणी धुव तक उच्च वायुदाब की पेटियाँ पायी जाती है, जिन्हें धुवीय उच्च वायुदाब की पेटियाँ कहा जाता है। श्रुवों पर तथा समीवर्ती क्षेत्रों में अत्यंत शीत के कारण वायुदाब स्वभावतः उच्च हो जाता है। अत: यह उच्च वायुदाब ताप जन्य (Thermally induced) होता है।

प्रश्न 15.
शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात और उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए। अथवा, शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात और उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
शीतोषण कटिबन्धीय चक्रवात (Temperate Cyclone) :

  1. शीतोष्पा कटिबन्धीय चक्रवात में समदाब रेखाएँ प्राय: ‘V’ आकार की होती है।
  2. इनमें दाब प्रव्वणता (Pressure Gradient) हल्की होती।
  3. इनका विकास जल और स्थल दोनों पर होता है।
  4. इनमें वायु धीमी गीत से पश्चिम से पूरब की ओर चलती है।
  5. शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में वर्षा धीरे-धीरे तथा कई दिनों तक होती रहती है।
  6. ये शीत ॠतु में अधिक उत्पन्न होती है।
  7. शीतोण्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार हजारों वर्ग कि०मी० क्षेत्र में होता है।

उष्मा कटिबन्धीय च्रकवात (Tropical Cyclone) :

  1. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में समदाब रेखाएँ प्राय: गोलाकार होती है।
  2. इनमें दाब प्रवणता (Pressure Gradient) तीव्र होती है।
  3. इनका विकास केवल समुद्री भाग में होता है।
  4. इनमें वायु तीब्र वेग से पूरब से पश्चिम की ओर चलती है।
  5. उष्णा कटिबन्धीय चक्रवात में वर्षा तीब गति के साथ कुछ घण्टों से अधिक नहीं होती है।
  6. ये ग्रीष्म ऋतु में अधिक उत्पन्न होते हैं।
  7. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार 80 से 300 कि॰मी० तक होती है।

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प्रश्न 16.
सामयिक पवन से आप क्या समझते हैं? सामयिक पवन को कितने वर्गों में विभाजित किया गया है ? किसी एक सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
अस्थायी पवन किसे कहते हैं ? तथा इसे कितने वर्गों में रखा गया है ?
अथवा
मानसूवी पवन, स्थलीय समीर तथा सागरीय समीर और पर्वत तथ्था घाटी समीर का अर्थ क्या है?
अथवा
धरातल पर प्रवाहित होनेवाली सामयिक पवनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सामयिक पवन या अस्थायी या ऋतु पवन (Periodical wind or Temporary Wind or Seasional Wind) : धरातल पर कुछ ऐसी पवनें भी चलते हैं जो हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलती बल्कि समय के अनुसार इनकी दिशा बदलती रहती हैं। अत: वे पवनें जिनकी गति तथा दिशा समय के अंतर के अनुसार बदलती रहती है, सामयिक या अस्थायी या ॠतु पवन कहा जाता है।
सामयिक पवनों को निम्नलिखित वर्गों में रखा गया है।
i. मानसूनी पवन (Monsoon Wind)
ii. स्थलीय तथा सागरीय समीर (Land and Sea Breeze)
iii. पर्वत तथा घाटी समीर (Mountain or Catabatic Wind and Valley or Anabatic wind)

i. मानसूनी पवने (Monsoon Winds) : ‘मानसून’ शब्द मूलरूप से अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से बना है जिसका तात्पर्य ‘मौसम’ से होता है। अत: मानसूनी पवनें वे पवनें हैं जिनकी दिशा मौसम के अनुसार बिल्कुल उलट जाती है। ये पवनें ग्रीष्म ॠतु में छ: माह में समुद्र से स्थल की ओर तथा शीत ऋतु में छ: माह में स्थल से समुद्र की और चला करती है।

मानसून शब्द का प्रयोग सबसे पहले अरब सागर पर बहने वाली हवा के लिए किया गया था, जिसकी दिशा में उलट फेर होते रहता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर उत्तरी गोलार्द्ध में उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध एवं तापीय विषुवत रेखा कुछ उत्तर की ओर खिसक जाती है। एशिया में स्थलखण्ड के प्रभाव के कारण यह खिसकाव अधिक होता है, उसके फलस्वरूप विषुवतीय पछुआ पवन भी उत्तर की ओर खिसक जाती है। ये पवन महासागर से स्थल पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के रूप में प्रवाहित होने लगती है। सूर्य के दक्षिणायन होने पर उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध एवं तापीय विषुवत रेखा दक्षिण की ओर वापस लौट आते हैं। पुन: उत्तर-पूरब वाणिज्य पवन चलने लगती है, यही शीतकालीन या उत्तर-पूर्वी मानसून है।

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ये पवनें मुख्य रूप से भारत, बंगलादेश, म्यानमार, श्रीलंका, पाकिस्तान, अरब चीन तथा जापान में चलती है।

ii. स्थलीय तथा सागरीय समीर (Land and Sea Breeze) : स्थलीय तथा सागरीय समीर संसार का एकमात्र स्थल तथा जल का गरम एवं ठंडा होने में परस्पर विरोधी स्वभाव का होना है।
दिन के समय स्थलीय भाग जल की अपेक्षा शीघ्र गरम हो जाता है। जिस कारण सागरवर्ती तटीय भाग पर निम्न दाब तथा सागरीय भाग पर उच्च दाब स्थापित हो जाता है, और सागर से स्थल की ओर हवाएँ चलने लगती हैं जिन्हें सागरीय या जलीय समीर (Sea Breeze) कहा जाता है।

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सूर्यास्त के बाद ही जलीय समीर समाप्त होने लगती है क्योंकि स्थलीय भाग से जल की अपेक्षा तीव्र विकिरण होने से उष्मा का ह्रासं अधिक होने से स्थालीय भाग पर उच्च वायुदाब तथा सागरों पर निम्न वायुदाब बन जाता है परिणामस्वरूप स्थल से जल की ओर हवाएँ चलने लगती हैं जिन्हें स्थलीय समीर (Land Breeze) कहते हैं।

iii. पर्वतीय तथा घाटी समीर (Mountain or Valley Breeze) : रात्रि के समय पर्वतीय ढालों तथा ऊपरी भागों पर विकिरण द्वारा ताप ह्रास अधिक होता है जिस कारण हवाएँ ठण्डी हो जाती हैं ये ठण्डी तथा भारी हवाएँ पर्वतीय ढालों के सहारे घाटियों में बीच में उतरती हैं, इन्हे ही पर्वतीय समीर या कैटाबेटिक पवन (Mountain or Catabatic Wind) कहा जाता है।

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दिन के समय पर्वतीय घाटियों के निचले भागों में अधिक तापमान के कारण पर्वतीय ढ़लानों के सहारे घाटी से ऊपर उठती है। इन्हें ही घाटी समीर या एनाबेटिक पवन (Valley Breeze or Anabatic Wind) कहा जाता है।

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प्रश्न 17.
धरातलीय मौसम पर जेट स्ट्रीम के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) उच्च स्तरीय पवन संचार व्यवस्था का अंग है। क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में क्षोभसीमा के निकट पश्चिम से पूरब की ओर अत्यंक तीव्र गीत से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है।

धरातल पर पाये जाने वाले मौसम एवं जेट स्ट्रीम में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धवुीय वाताग्र, जहाँ शीतोष्ण कटिबन्धीय चकवातों की उत्पत्ति होती है तो इसका सम्बन्ध जेट स्ट्रीम से होता है। अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में शीतोण्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग तक होताहै। जब इनका पथ जेट स्ट्रीम के नीचे पड़ता है तो उनकी प्रचण्डता में वृद्धि हो जाती है एवं वर्षा की मात्रा भी अधिक हो जाती है। चक्रवातों तथा प्रतिचक्रवातों के अलावा जेट स्ट्रोम के प्रभाव के कारण कभी बाढ़ भी आ जाती है तो कभी सूखा पड़ जाती है। इन्हीं के कारण मौसम असाधारण रूप में कभी गर्म तो कभी शीतल हो जाता है।

भारतीय मानसून की उत्पत्ति पर उष्ण पूर्वी जेट एवं उपोष्ण जेट का प्रभाव की पड़ता है। इस प्रकार वर्षा, तूफान, हिमपात शीत लहरिया आदि जेट स्ट्रीम द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।

प्रश्न 18.
फोरटिंस वायुदाब मापी एवं एनीरायड बैरोमीटर से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
फोरटिंस वायुदाब मापी एवं एनीरायड बैरोमीटर का सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
फोरटिंस बैरोमीटर (Fortins Barometer) : यह एक साधारण वायुदाब मापी का ही परिष्कृत रूप है इस यंत्र का अविष्कार फोर्टिन महोदय ने किया था, इसलिए इसका नाम फोटिन का वायुदाबमापी रखा गया है।

यह बैरोमीटर लगभग 100 से॰मी॰ लम्बी काँच की नली के रूप में होता है जो बाहर से एक दूसरे आवरण में बंद रहता है। यह आवरण काँच की नली को दूटने से बचाता है। इस नली में एक पारा (Mercury) भरा रहता है। नली के नीचे की ओर एक हौज होता है जिसमें नली का खुला हुआ निचला सिरा डुबा रहता है। इस हॉंज में चमरे की एक थैली होती है। जिसमें पारा होता है। इस थैली की तली लचीली होती है एवं इसके नीचे समंजन पेंच (Adjustment Screw) होता है जिसकी सहायता से लचीली थैली की तली ऊपर नीचे करके थैली में पारे की सतह को ऊपर नीचे किया जा सकता है। थैली के पारे की सतह के थोड़ा ऊपर हाथी दाँत का बना एक संकेतक (Index) लगा रहता है। इस संकेतक की नोक से शुन्य शुरु होता है।

वायुदाब मापने के लिए पेंच को ऊपर-नीचे करके पारे की सतह को इस प्रकार समायोजित (Adjust) किया जाता है कि वह संकेतक के निम्न भाग को स्पर्श कर सके। वायुभार मापने के लिए बैरोमीटर के ऊपरी भाग में वर्नियर मापक लगा होता है। इसे वर्नियर पेंच की सहायता से ऊपर या नीचे किया जा सकता है। इस वर्नियर का सम्बन्ध काँच की नली के पीछे की ओर स्थिर पीतल की एक प्लेट से होता है। इस प्लेट का निचला सिरा तथा वर्नियर मापनी का शून्य बिन्दु एक क्षैतिज रेखा में होती है। वर्नियर पेंच घुमाने पर यह प्लेट तथा वर्नियर मापनी इकट्ठे ही खिसकते है।

फोरिटिंस बैरोमीटर द्वारा बताया गया वायुभार, सागर तल से होता है, वायुभर इंच, से॰मी॰ तथा मीलीबार किसी भी इकाई में दिखाया जाता है।

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एनीरयड बैरोमीटर (Aneroid Barometer) : यह बैरोमीटर द्रवरहित तथा आकृति में घड़ीनुमा होता है। इसका अविष्कार लुसियन विडाई नामक विद्वान ने किया था। हल्का एवं द्रवरहित होने के कारण हवाई जहाजों में तथा पर्वतों पर चढ़ते समय इसका प्रयोग किया जाता है। इसके डिब्बे के अन्दर से वायु आंशिक रूप में निकाल दी जाती है। इसके अन्दर अत्यंत हल्की, पतली एवं मजबूत तथा लचकदार एक चादर लगी होती है जो वायु के हल्क भार से प्रभावित हो जाती है। इसके ऊपर लीवर तथा स्प्रिंग लगे होते हैं। इस लीवर के साथ एक बारीक धागे से एक सुई लगी होती है जो वास्तविक वायुदाब को प्रकट करती है। इस यंत्र में घड़ी की भाँति डायल बना होता है जिस घर इंच, सी॰मी॰ तथा मिलीवार के निशान बने हाते हैं। जैसे-जैसे वायुदाब में परिवर्तन होते रहता है वैसे-वैसे सुई भी घुमती है। इसके साथ ही डायल पर मौसम भी लिखे रहते हैं, जैसे – तूफानी, वर्षा, परिवर्तन, स्वच्छ तथा अति शुष्क।

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प्रश्न 19.
स्थानीय पवन से आप क्या समझते हैं ? निम्न गर्म स्थानीय तथा ठण्डी स्थानीय हवाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
स्थानीय पवन (Local Wind) : जो पवनें किसी स्थान विशेष पर वहाँ चलने वाली प्रचलित पवन के विपरीत दिशा में चलती है उसे स्थानीय पवन (Local Wind) कहते हैं।
स्थानीय तापमान तथा वायुदाब में अंतर के कारण स्थानीय पवनों की उत्पत्ति होती है। उसका प्रभाव सीमित क्षेत्रों में देखने को मिलता है।
स्थानीय गर्म हवाएँ : निम्न स्थानीय गर्म हवाओं का विवरण नीचे दिया जा रहा है।
i. सिमूम (Simoom) : अरब एवं सहारा के मरूस्थलों में चलने वाली यह एक उष्ण, शुष्क एवं दमघोट हवा है। ये हवाएँ बालुंओं से भरी होती हैं जिसके कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है।
ii. कारा बुरान (Kara-Buran) : यह मध्य एशिया के तारिम बेसिन में चलने वाली गर्म वायु है जो वायु धूल भरी हुई होती है। मध्य एशिया के लोयस के मैदान का निर्माण इसी वायु द्वारा हुआ है।
iii. आयला (Ayala): फ्रांस के सेंट्रल मौसिफ में तीव्र गति से बहने वाली गर्म वायु आयला कहलाती है।

स्थानीय ठण्डी हवाएँ : निम्न स्थानीय ठण्डी हवाओं का नाम इस प्रकार दिया जा रहा है।
i. पैम्पेरो (Pampero) : आर्जेन्टाइना एवं उरून्वे के पम्पास क्षेत्र में दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम से चलने वाली ध्रुवीय पवन है जो बहुत ही शीतल होती है। कभी-कभी ये हवाएँ चक्रवातीय वर्षा भी लाती है।
ii. ट्रामोण्टाना (Tramontana) : पश्चिम भूमध्य सागरीय क्षेत्र में शीलतकाल में प्रवाहित होने वाली शुष्क एवं शीतल हवा को ट्रामोण्टाना कहते हैं।
iii. दक्षिणी बस्टर (Southern Buster) : धुवीय क्षेत्रों में आस्ट्रेलिया में प्रवाहित होने वाली अत्यंत शुष्क एवं शीलत वायु को दक्षिणी बस्टर कहा जाता है।

प्रश्न 20.
अन्तर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान परिषद द्वारा बादलों को कितने वर्गों में रखा गया है? प्रत्येक का संक्षिप्त व्याख्या कीजिए
अथवा
ऊँचाई के आधार पर बादलों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
बादलों का वर्गीकरण (Classification of Clouds) : बादलों को निम्नलिखित वर्गो में रखा गया है।

i. पक्षाभ बादल (Cirrus Clouds) : यह बादल आकाश में सबसे अधिक ऊँचाई अर्थात 7.5 से 10.5 कि०मो० पर पाये जाते हैं। ऐसे बादल कोमल और घने होते हैं। ये सफेद एवं चमकदार रंग के होते हैं। इनके रूप के अनुसार इसका नाम भी घोड़े की पूँछ (Horse’s Tail) रखा गया है। कभी-कभी ये घुंराले बालो की तरह दिखाई दते हैं। इनसे वर्षा नहीं होती है किन्तु ये चक्रवात के आगम के सूचक होते हैं।

ii. स्तरी बादल (Status Clouds) : ये एक प्रकार के निम्न बादल हैं जो धरातल से 2 से 4 कि०मी० की ऊँचाई पर बनते हैं। जैसाकि इनके नाम से प्रकट है इन बादलों में कई परते होती है। इनकी उपस्थिति सभी जगह एक सी रहती है। यह अपने रूप से ऐसे लगते हैं जैसे – कुहरा से भी ऊपर उठ गया हो, परन्तु ये बादल आकाश में पूरी तरह छा जाते हैं। ऐसे बादल शीतोष्ण कटिबन्ध में प्रायः जाड़े की ऋतु में अधिक बनते हैं। ये बादल बहुधा स्थानीय होते हैं और इनके खण्डित होते ही नीला आकाश दिखायी पड़ने लगता है।

iii. कपासी बादल (Cumulus Clouds) : सामान्यतः ये बादल 1 से 3 कि०मी० की ऊँचाई तक पाये जाते है ये लम्ब रूप स्तम्भ की भाँति बने होते हैं। ये बहुत अधिक समतल होते हैं किन्तु शीर्ष हवा की ओर ऊपर उठते हैं। ये फूल गोभी की तरह दिखते हैं। इनका रूप छोटा, श्वेत और रूई की तरह होता है। इनसे कभी-कभी वर्षा होती है।

iv. वर्षी बादल (Numbus Clouds) : ये बादल काले घने पिण्ड के समान होते हैं। ये धरातल से लगभग डेढ़ 1 \(\frac{1}{2}\) कि॰मी० नीचे होते हैं कभी-कभी धरती को छूते नजर आते हैं। इसका कोई विशिष्ट आकार नहीं होता है। ये कुँज रूप में छाये रहते हैं, इनके किनारे आपस में मिले रहते हैं। ये प्राय: इतने सघन होते हैं कि सूर्य की किरणें इनमें प्रवेश कर धरती पर नहीं पहुँच पाती है। इन बादलों से अन्धकार-सा छा जाता है तथा बहुत ही काला होता है। इनसे बहुत ही शीघ तथा मुसलाधार वर्षा होती है।

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प्रश्न 21.
वर्षा कितने प्रकार की होती है ? प्रत्येक का नाम लिखकर सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
संवहनीय वर्षा, पर्वतीय वर्षा एवं चक्रवातीय वर्षा का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वर्षा के प्रकार (Types of Rainfall) : वर्षा मुख्यतः तीन प्रकार का होता है।

  1. संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall)
  2. पर्वतीय वर्षा (Orgraphic or Relief Rainfall)
  3. चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall)

i. संहवनीय वर्षा (Convectional Rainfall) : जब धरातल बहुत गर्म हो जाता है तो उसके साथ लगने वाली वायु भी गर्म हो जाती है। वायु गर्म होकर फैलती और हल्की हो जाती है। यह हल्की वायु ऊपर को उठ लगती है और संवहनीय धाराओं का निर्माण होता है। ऊप जाकर यह वायु ठण्डी हो जाती है और इसमें उपस्थित जलवाष्प का संघनन होने लगता है। संघनन से कपासी बादल बनते हैं जिससे घंनघोर वर्षा होती है। उसे ही संहवनीय वष्ष कहा जाता है।
भूमध्य रेखीय अंचल में यह वर्षा नियमित रूप से प्रतिदिन दोपहर बाद होती है, इसलिए इसे भूमध्यरेखीय अथवा विषुक रेखीय वर्षा (Equational Rainfall) भी कहा जाता है यह वर्षा प्रायः बादलों की गरज तथा बिजली की चमक के साथ मूसलाधार होती है।

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ii. पर्वतीय वर्षा (Orographic or Relief Rainfall) : जब जलवाष्प से लदी हुई गर्म वायु किसी पर्वत या पठार की ढलान के सहारे ऊपर उठती है तो वह वायु ठण्डी हो जाती है। ठण्डी होने से यह घनीभूत हो जाती है और ऊपर चढ़ने से जलवाष्प का संघनन होने लगता है और वर्षा होती है, उसे ही पर्वतीय वर्षा कहा जाता है। यह वर्षा उन क्षेत्रों में बहुत भारी होती है जहाँ पर्वत श्रेणी समुद्र तट के निकट तथा उसके समानान्तर होते हैं।

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ऊँचाई के साथ-साथ वर्षा की मात्रा बढ़ती जाती है। इस प्रकार पर्वत का जो ढाल पवन के सामने होता है वहाँ खूब वर्षा होती है उसे पवनाभिमुख ढाल (Windward Slope) कहते हैं। परन्तु जैसे ही पवन पर्वत की दूसरी ढलान पर उतरने लगती है वह गर्म और शुष्क होने लगती है और वर्षा कम करती है तो उसे पवनाविमुख ढाल अथवा वृष्टि छाया प्रदेश (Leenward Side or Rain Shadow Area) कहते हैं।

महावलेश्वर तथा पूणे एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर स्थित हैं परन्तु महावलेश्वर में 600 से॰मी॰ वार्षिक वर्षा होती है जबकि पूणे में केवल 70 से॰मी० ही वर्षा होती है। उसका कारण यह है कि महावलेश्वर पवनाभुविमुख ढाल पर तथा पूणे पवन विमुख ढाल या वृष्टि छाया प्रदेश में स्थित है।

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iii. चक्रवातीय अथवा वाताग्री वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall) : चक्रवातों द्वारा होने वाली वर्षा को चक्रवाती या वाताग्री वर्षा कहा जाता है। शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में उष्ण एवं आर्द्र वायु राशि हल्की होने के कारण शीतल एवं शुष्क राशि के ऊपर चढ़ जाती है इससे गर्म पवन में उपस्थित जलवाष्प का संघनन हो जाता है और वर्षा होती है। इस प्रकार की वर्षा शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों के क्षेत्रों में होती है। शीत ॠतु में उत्तर-पश्चिम भारत में भी वर्षा चक्रवातों द्वारा ही होती है।

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प्रश्न 22.
मौसम मानचित्र में शुद्ध हवा, धुन्ध, बौछार, ओस, कुहासा, निरन्तर वर्षा, तुषार, रेतीला, तुफान, दानेदार हिम, निरन्तर फुआर को रूढ़ चिन्ह एवं संकेत के रूप में दिखाएँ।
उत्तर :
मौसम मानचित्र में विभिन्न रूढ़ चिन्ह :-

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प्रश्न 23.
मौसम और जलवायु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

मौसम (Weather) जलवायु (Climate)
1. मौसम किसी स्थान विशेष की वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है। 1. जलवायु किसी विस्तृत क्षेत्र के वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है।
2. इसमें मौसम तत्वों की अल्प अवधि का अध्ययन होता है। 2. इसमें मौसम दशओं का लम्बे समय अर्थात 30-35 वर्षों तक अध्ययन का औसत है।
3. यह जलवायु विज्ञान का एक अंग है। 3. यह अपने आप में पूर्ण विज्ञान है।

प्रश्न 24.
ग्लोब पर प्रमुख उष्ण कटिबन्धीय जलवायु समूहों का वर्गीकरण कीजिए अथवा पृथ्वी के उष्ण जलवायु क्षेत्र का सचित्र वर्णन कीजिए। किन्हीं एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर उष्ण कटिबन्धीय जलवायु समूहों का वर्गीकरण एवं वर्णन निम्नलिखित है।
1. उष्ण कटिबन्ध वर्षा वाले जलवायु प्रदेश (Tropical Rainy Climate) : यह जलवायु विषुवत रेखा के समीप पायी जाती है। इस जलवायु प्रदेश की पेटी बहुत कुछ असमान है। यहाँ सालों भर तापक्रम उच्च रहता है और वर्षा सालों पर होती रहती है तथा शीत ॠतु नहीं होती है। उष्ण कटिबन्ध वर्षा वाले जलवायु प्रदेश को निम्न तीन उपविभागों में बाँटा गया है।

i. उष्ण विघुवतरेखीय जलवायु (Tropical Equatorial Climate) : विषुवत रेखा से उत्तर तथा दक्षिण 50° से 10° अक्षांश तक विस्तृत जलवायु वाले भाग को उष्ण विषुवत रेखीय जलवायु प्रदेश कहा जाता है। इसका विस्तार कभी-कभी भूमध्य रेखा के दोनों ओर 150° से 25° अक्षांश तक भी देखने को मिलता है। इस जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत अमेजन बेसिन, कांगो बेसिन, गिनी तट, पूर्वी द्वीप समूह तथा फिलीपिन्स को सम्मिलित किया गया है।

उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु प्रदेश की विशेषता यह है कि उस भाग में सर्वाधिक सूर्याताप प्राप्त होता है जिस कारण सालों भर तापमान उच्च बना रहता है। यहाँ औसत तापक्रम 25°F से 26°C के बीच होता है दैनिक तापान्तर वार्षिक तापान्तर से अधिक होता है। दैनिक तापान्तर 5° से 6° तक रहता है।

उस जलवायु प्रदेश में वर्षा सालों भर होती रहती है, यहाँ शुष्क मौसम का अभाव रहता है । यहाँ होने वाली अधिकांश वर्षा संवहनीय प्रकार की होती है।
यहाँ वर्ष भर उच्च तापक्रम तथा वर्षा होने के कारण उष्ण कटिबन्धीय चौड़ी पत्ती के सदाबहार वन मिलते हैं जिनमें रबर, एबोनी, महोगनी, चंदन, सिनकोना आदि प्रमुख हैं।

ii. उष्ण मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate) : मानसूनी जलवायु का विस्तार भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° से 30° अक्षांशों के बीच पाया जाता है, इस जलवायु के अन्तर्गत भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश, थाइलैंड, काम्बोडिया, लाओस, उत्तरी तथा दक्षिणी वियतनाम, पूर्वी द्वीप समूह, अफ्रिका का पूर्वी तटीय भाग, आस्ट्रेलिया का उत्तरी भाग आदि इसी सम्मिलित किया गया है।

उष्षा मानसूनी जलवायु में तापक्रम सालों भर उच्च रहता है किन्तु सूर्य के उत्तरायण तथा दक्षिणायन की स्थितियों के कारण गर्मी का मौसम तथा ठण्डी का मौसम का आविर्भाव होता है। गर्मी में औसत तापमान 27°-32°C तक रहता है जबकि ठण्डा में औसत तापमान 10°-27°C के बीच पाया जाता है। उत्तरी भारत में गर्मी के महींने में लू चला करती है जबकि शीत ऋतु में शीतलहरी चलती है।

मानसूनी प्रदेशों में वर्षा मुख्यत: चक्रवार्तीय तथा पर्वतीय प्रकार की होती है। परन्तु कुछ भी वर्षा संवहनीय प्रकार की होती है। जून से अक्ट्बर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाओं से वर्षा होती है। भारत के चेरापूंजी एवं मौसिनराम में वार्षिक वर्षा 1000 से॰मी॰ से अधिक होती है जबकि, राजस्थान के थार मरुस्थल में 12 से॰मी॰ से भी कम वर्षा होती है।
मानसूनी प्रदेशों में वर्षा की मात्रा में विषमता के कारण विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पायी जाती हैं जिनमें सागौन, साल, आम, शीशम, महुआ आदि प्रमुख हैं।

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iii. उष्ण सवाना जलवायु (Tropical Savana Climate) : सवाना जलवायु उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु और शुष्क सहारा जलवायु के बीच पाया जाता है। इस जलवायु प्रदेश का अधिकांश विस्तार विषुवत रेखा के दोनों ओर 5° से 15° अक्षांश तक पाया जाता है। यह जलवायु क्षेत्र वेनेजुएला, कोलम्बिया, गुयाना, दक्षिणी-मध्य ब्राजील, अफ्रिका में सुडान, नाजीरिया, घाना, आस्ट्रेलिया के उत्तरी तथा भीतरी भागों में पाया जाता है। इस जलवायु में सालों भर उच्च तापक्रम बना रहता है। ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 18°C रहता है तथा शीत ऋतु में औसत तापमान 12°-16°C तक पाया जाता है।

यहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 40 से॰मी॰ से 60 से॰मी॰ के बीच रहता है। अधिकतर वर्षा ग्रीष्म ऋतु में होती है। जाड़े की ऋतु शुष्क रूप में बीतती है। वनस्पति के रूप में घास पायी जाती है जिसका नाम सवाना है। इसलिए इसे सवाना, जलवायु प्रदेश भी कहा जाता है। यहाँ अधिकतर वृक्ष छोटे-छोटे रूप में पाये जाते हैं। घास का रंग तथा ऊँचाई एवं वृक्षों की ऊँचाई तथा संख्या में अन्तर पाया जाता है । गर्मी के दिनों में घास सूखकर पीली हो जाती है।

प्रश्न 25.
ग्लोब पर पाये जाने वाला प्रमुख जलवायु प्रदेश का नाम लिखिए तथा किन्हीं एक का सचित्र वर्णन कीजिए। अथवा, पृथ्वी पर पाये जाने वाला प्रमुख भूमध्यसागरीय जलवायु प्रदेश का सचित्र व्यख्या कीजिए। उत्तर : ग्लोब पर प्रमुख जलवायु प्रदेश को छ: भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित है –
1. उष्पा कटिबन्ध जलवायु प्रदेश (A) :
(A) उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु (Af)
(B) उष्ण मानसूनी जलवायु (Am)
(C) उष्ण सवाना जलवायु (Aw)

2. शुष्क जलवायु प्रदेश (B)
(a) उष्ण तथा उपोष्ण मरूस्थलीय जलवायु (Bwh)
(b) उष्ण तथा उपोष्ण स्टेपी (Bsh)
(c) मध्य अक्षांशीय मरूस्थलीय जलवायु (Bwk)

3. शीतोष्ण आर्द्र जलवायु प्रदेश (C)
(a) भूमध्यसागरीय जलवायु (Cs)
(b) आर्द्र उपोष्ण जलवायु (Ca)
(c) पश्चिमी यूरोपीय तुल्य जलवायु (Cb)

4. शीतल आर्द्र जलवायु प्रदेश (D)
(a) आर्द्र महाद्वीपीय गरम ग्रीष्मकाल (Da)
(b) आर्द्र महाद्वीपीय शीतल ग्रीष्मकाल (Db)
(c) उपधुवीय जलवायु (Dc, Dd)

5. धुवीय जलवायु प्रदेश (E C)
(a) टुण्ड़ा जलवायु (ET)
(b) ध्रुवीय हिमाच्छादित जलवायु (EF)

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6. उच्च प्रदेश की जलवायु (H) भूमध्यसागरीय जलवायु (Mediterranean Climate – CS) :

स्थिति एवं विस्तार : यह जलवायु महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में 30° से 40° अक्षांशों के बीच पायी जाती है । इस जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत भूमध्यसागर के चारों और फैले फ्रांस की राइन तथा सेओन नदियो की घाटियों, दक्षिणी इटली, यूनान, पश्चिमी टर्की, सीरिया, पश्चिमी इजराइल, उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीका का अल्जीरिया प्रदेश, उत्तरी अमेरिका में कैलीफोर्निया, दक्षिणी अमेरिका में मध्य चिली, दक्षिणी आस्ट्रेलिया के भाग सम्मिलित हैं।

तापक्रम : शीतकाल में औसत तापक्रम 4.4°C से 10°C तक होता है जबकि ग्रीष्मकाल में औसत तापक्रम 21°C से 26°C तक पहुँच जाता है। शीतकाल साधारण होता है। वास्तव में यह जलवायु अपने स्वास्थ्यवर्द्धक तथा आनन्ददायक शीतकाल के लिए ही अधिक सुप्रसिद्ध है।

वर्षा : वार्षिक वर्षा औसत 15 इन्च से 25 इन्च के बीच होता है। अधिकांश वर्षा शीत ॠतु में होता है। ग्रीष्म ऋतु में वर्षा पछुवा हवाओं के साथ आने वाले चक्रवातों के द्वारा होता है।

वनस्पति : भूमध्यसागरीय जलवायु में ओक, वालनट, चेस्टनट, साइप्रस, सिडार, आदि प्रमुख वृक्ष पाये जाते हैं। इसके अलावा यह जलवायु प्रदेश अपने रसीले फलों के लिए विश्व विख्यात है जिसमें नीबु, सतरा, जौतून, अंजीर, खूबानी, अंगूर आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 26.
जल चक्र की व्याख्या करो।
उत्तर :
जलीय चक्र (Hy6drogical cycle) : सूर्यताप के कराण पृथ्वी पर स्थित जलीय भाग के उपर वाष्पीकरण की क्रिया निरन्तर होती रहती है तथा यह आर्द्रता वायु राशियों एवं हवाओं द्वारा सम्युर्ण वायुमण्डल में मिश्रित होती रहती है, आधा से अधिक जलवाष्प वायुमण्डल की निचली परतो में धरातल से 6000 मी० की ऊचाई तक सकेन्द्रित होत है, वाष्पीकरण तथा पेड़-पौधों द्वारा वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रियाओ से जल वाष्प में बदलता है तथा संघनन की क्रिया से वाष्प जल में बदलत है, इस प्रकार धरातल एवं वायुमण्डल के बीच जलवाष्प एवं जल का निरन्तर आदान-प्रदान होत रहता है। जलवाष्प एवं जल के प्राकृतिक रूप से होने वाले इस आदन-प्रदान को ‘जलीय चक्र’ कहते है।

प्रश्न 27.
भूमध्यरेखीय जलवायु का वर्णन करो।
उत्तर :
जलवायु : भूमध्यरेखीय प्रदेशो में वर्ष भर जलवायु समान रहती है। सूर्य लगभग वर्षभर लम्बवत् चमकता है तथा वर्षभर रात व दिन की अवधि में भी बहुत कम अन्तर रहता है। प्रदेशों मे वर्ष भर ऊँचे तापमान रहते है। औसत तापमान 27° एवं वार्षिक तापान्तर केवल 2°C से 3°C मिलता है। यहाँ शीत ॠतु नहीं होती है तथा वर्ष भर संवाहनिक वर्षा होती है। वर्षा प्राय: रोजना सायंकाल 3 बजे से प्रारम्भ होत है जो कि बहुत तेज व मूसलाधार होती है। वर्षा का वार्षिक औसत तटीय एवं पर्वतीय भागों में क्रमश: 200 से 300 से॰मी० है। मध्यवर्ती भागों में वर्षा तड़ित झंझा के साथ होती है। यहाँ मेघाच्छत्रता अधिक रहती है। प्राय: कपासी बादल पाए जाते है। दिन में अधिक तापमान वाले समय मेघाच्छन्नता अधिक रहती है। जबकि रात्रि तथा प्रात: काल के समय आकाश स्वच्छ रहता है।

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प्रश्न 28.
उष्ण कटिबंधी उष्ण मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश का वर्णन करो।
उत्तर :
उष्ण कटिबंधी उष्ण मरुस्थलीय जलवायु : शुष्क एवं विषम है। वर्षा बहुत ही कम किन्तु वाष्भीकरण क्षमता कई-कई गुना अधिक है। तापमान के वितरण के आधार पर यहाँ पर दो मौसम होते हैं-ग्रीष्म काल एवं शीत काल। ग्रीष्मकाल का औसत तापमान 35° से 40° से० रहता है। दोपहर के समय तापमान 48°C से 49°C तक पहुँच जाते है। अधिकतम तापमान अल्जीरिया में 58.4C अंकित किए गए है।

दिन एवं रात्रि का तापमान्तर 15° से 20° तक एवं वार्षिक तापान्तर 20°C से 32°C शीतकाल में भी दिन के समय तापमान 15°C से 25°C तक रहते है। रात्रि के समय तापमान काफी गिर जाते है। रेतीले मरुस्थलों में रात्रि का तापमान 3°C तक पहुँच जाता है। इस प्रकार उष्ण मरुस्थली भागों में वार्षिक तथा दैनिक दोनों ही तापान्तर अधिक होते है। स्वच्छ आकाश, वनस्पति विहीन धरातल, न्यूनतम आर्द्रता, रेतीली मिट्टी आदि कारण इसके लिए उत्तरदायी है। यहाँ की वार्षिक वर्षा इतनी कम तथा परिवर्तनशील है कि औसत का निर्धारण करना भी कठिन है।

वर्षा 2 से 15 सेमी॰ के मध्य होती है। यह औसत इसलिए भी बेमाने है क्योंकि कभी-कभी 3-4 वर्षो तक एक बूँद पानी तक नहीं बरसता, तो कभी-कभी 2-3 वर्ष में एक ही दिन में 10-15 से॰मी० वर्षा हो जाती है। आकाश प्राय: मेघरहित रहता है, जिससे वर्ष भर घूप मिलती रहती है।