WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 Life Science Book Solutions Chapter 4A क्रम विकास offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 Life Science Chapter 4A Question Answer – क्रम विकास

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
सबसे पहला जीवन क्या है ?
उत्तर :
संभवतः वाइरस।

प्रश्न 2.
क्रम विकास के जनक कौन हैं ?
उत्तर :
लेमार्क।

प्रश्न 3.
मनुष्य का वैज्ञानिक नाम बताओ।
उत्तर :
Homo sapiens

प्रश्न 4.
एक जीवित जीवाश्म का नाम बताओ।
उत्तर :
लेटेमारिया मछली।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 5.
“उपार्जित लक्षणों की वंशगति” सिद्धान्त को किसने प्रतिपादित किया ?
उत्तर :
लेमार्क ने

प्रश्न 6.
आधुनिक घोड़ा का नाम बताओ।
उत्तर :
इक्वस।

प्रश्न 7.
म्यूटेशन के सिद्धान्त के प्रतिपादक कौन थे ?
उत्तर :
Hugo-Devries

प्रश्न 8.
‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ?
उत्तर :
डार्विन।

प्रश्न 9.
अंडा देने वाले स्तनधारी का नाम बताओ।
उत्तर :
इकिडिना (Echidina)

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 10.
लेमार्क के पुस्तक का नाम क्या है ?
उत्तर :
Philosophic Zoologique

प्रश्न 11.
एक विलुप्त कड़ी का नाम बताओ।
उत्तर :
आर्कियोप्टेरिक्स

प्रश्न 12.
म्यूटेशन का सिद्धान्त किस वर्ष प्रकाशित हुआ ?
उत्तर :
1901 ई० में

प्रश्न 13.
प्राकृतिक चुनाववाद किसने प्रतिपादित किया ?
उत्तर :
चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन ने

प्रश्न 14.
किस वर्ष डार्विन ने अपनी पुस्तक प्रकाशित किया ?
उत्तर :
सन् 1859 ई० में

प्रश्न 15.
क्रम विकास का आधुनिक सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर :
Synthetic theory

प्रश्न 16.
सर्वप्रथम जीवन की उत्पत्ति कहाँ हुई ?
उत्तर :
समुद्री जल में

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 17.
जीवाश्म विज्ञान (Palaentology) क्या है ?
उत्तर :
जिस विज्ञान के द्वारा जीवाश्म का अध्ययन किया जाता है उसे जीवाश्म विज्ञान कहते हैं।

प्रश्न 18.
क्रम विकास के प्रमाण के रूप में जीवाश्म को किसने सर्वप्रथम माना ?
उत्तर :
Leonard Davinsi

प्रश्न 19.
घोड़ा का प्राचीनतम जीवाश्म क्या है ?
उत्तर :
इयोहिण्पस

प्रश्न 20.
मनुष्य के आँत में एक अवशेषी अंग का नाम बताओ।
उत्तर :
वर्मीफार्म अपेंडिक्स

प्रश्न 21.
जर्म-प्लाज्म सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ?
उत्तर :
August Weismann

प्रश्न 22.
आधुनिक घोड़े का नाम क्या है ?
उत्तर :
इक्वस

प्रश्न 23.
प्राकृतिक वरण सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया ?
उत्तर :
प्राकृतिक वरण सिद्धान्त का प्रतिपादन चार्ल्स डार्विन ने किया।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 24.
किस युग (काल) में मनुष्य की उत्पत्ति हुई।
उत्तर :
सिनोजोइक युग के क्वाटर्नरी काल में मनुष्य की उत्पत्ति हुई।

प्रश्न 25.
‘उपार्जित लक्षणों की वंशागति’ किसका सिद्धान्त है ?
उत्तर :
बैपटिस्ट डि मोनेट लैमार्क (Jean Baptiste de monet Lamarck)।

प्रश्न 26.
जीवित जीवाश्म का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर :
आर्थोपोडा संघ का लिमुलस प्राणी एक जीवित जीवाश्म है।

प्रश्न 27.
इयोहिप्पस की इक्वस में ऊँचाई के अनुसार अन्तर बताएँ।
उत्तर :
इयोहिप्पस की ऊँचाई लगभग 11 ईंच या 30 सें० मी० थी। इक्वस की ऊँचाई लगभग 60 ईंच या 1 मी॰ 60 सें० मी० होती है।

प्रश्न 28.
प्रकृति क्या चुनती है ?
उत्तर :
योग्यतम प्राणियों की लाभदायक विभिन्नताओं को ही प्रकृति चुनती है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 29.
जीवाश्म की खोज किस वैज्ञानिक ने किया ?
उत्तर :
जीवाशम की खोज ग्रीस के वैज्ञानिक जेनोफेन ने किया था।

प्रश्न 30.
कितने वर्ष पहले घोड़े के पूर्वजों की उत्पत्ति पृथ्वी पर हुई ?
उत्तर :
लगभग 50 लाख वर्ष पहले इओसीन (Eocin) काल में।

प्रश्न 31.
घोड़े के किस अंग में तथा पक्षियों के डैनों में समानता दिखाई पड़ती है ?
उत्तर :
घोड़े के अग्रबाहु की रचना तथा पक्षियों के डैनों की रचना में समानता दिखाई पड़ती है।

प्रश्न 32.
Merychippus क्या है ?
उत्तर :
यह लगभग 2 करोड़ वर्ष पूर्व मायोसिन युग के घोड़े का जीवाश्म है।

प्रश्न 33.
कबूतर के किस अंग का रूपान्तरण डैने में होता है ?
उत्तर :
कबूतर मे उड़ने के लिए इनके अग्रबाहुओं (Fore limbs) का रूपान्तरण डैने में होता है।

प्रश्न 34.
लेमार्क ने कब तथा किस पुस्तक में क्रम-विकास के सिद्धान्त का वर्णन किया था ?
उत्तर :
लेमार्क ने सन् 1809 में Philosophic Zoolique नामक पुस्तक प्रकाशित कर क्रम विकास के सिद्धांत का वर्णन किया था।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 35.
योग्यतम की उत्तरजीविता से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जीवन संघर्ष की विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल होने वाले जीव को योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the fittest) कहा जाता है।

प्रश्न 36.
लेमार्क क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
लेमार्क ने सर्वपथम 1809 में क्रम विकास की क्रिया के सम्बन्ध में एक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था।

प्रश्न 37.
जन्तुओं के एक समवृत्ति अंग का उदाहरण दो।
उत्तर :
तितली के पंख तथा कबूतर के पंख समवृत्ति अंग है। इनके कार्य समान हैं परन्तु रचना भिन्न होती है।

प्रश्न 38.
डार्विन ने कब तथा किस पुस्तक में क्रम-विकास के सिद्धान्त का वर्णन किया था ?
उत्तर :
डार्विन ने सन् 1859 ई० में Origin of new species नामक ग्रन्थ में क्रम विकास के सिद्धान्त का वर्णन किया।

प्रश्न 39.
लेमार्क का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर :
लेमार्क का पूरा नाम Jean Baptiste De Monet Lamarck है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 40.
चार्ल्स डार्विन कब तथा कहाँ पैदा हुए ?
उत्तर :
चार्ल्ल डार्विन का जन्म इंग्लैण्ड के श्रीउसबरी (Shrewsbury) शहर में 1809 ई० में हुआ था।

प्रश्न 41.
आर्कियोप्टेरिक्स को किस वर्ग के जन्तुओं के बीच का Missing link माना गया है?
उत्तर :
Arehaeopteryx सरीसृप और पक्षी बर्ग के जन्तुओं के बीच का Missing link है।.

प्रश्न 42.
एक पादप जीवाश्म का नाम बताओ।
उत्तर :
कोयला (Coal) एक पादप जीवाश्म है।

प्रश्न 43.
अवशेषी अंग किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जीवों के शरीर में उपस्थित निष्किय तथा अनुपयोगी अंगों को अवशेषी अंग कहते हैं।

प्रश्न 44.
Mutogen क्या है ?
उत्तर :
वे कारक जिनके प्रभाव से म्यूटेशन की क्रिया होती है उसे mutogen कहते हैं।

प्रश्न 45.
Ontogeny क्या है ?
उत्तर :
किसी जीव के व्यक्तिगत विकास के इतिहास को Ontogeny कहते हैं।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 46.
किस वैज्ञानिक ने लेमार्कवाद का विरोध क्या था ?
उत्तर :
सर्वप्रथम विजमैन (Weismann) नामक वैज्ञानिक ने लेमार्कवाद का विरोध किया था।

प्रश्न 47.
ह्युगोडी-त्रीज का प्रायौगिक पौधा क्या था ?
उत्तर :
ह्युगोडी-वीज का प्रायौगिक पौधा- ओएनोथेरा लैमार्कियाना (Oenothera Lamarckiana) था।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
मनुष्य के रीढ़रजज्जु तथा खाद्यनली में उपस्थित एक-एक अवशेषी अंग के नाम लिखो।
उत्तर :
(i) मनुष्य के रीढ़रजज्जु में उपस्थित अवशेषी अंग – कॉकिक्स (Coccyx) है।
(ii) खाद्य नली में उपस्थित अवशेषी अंग वर्मीफार्म अपेंडिक्स है।

प्रश्न 2.
घोड़े के क्रमविकास में चार मुख्य जीवाश्म पूर्वजों के क्रमविकास के क्रमानुसार नाम लिखो।
उत्तर :
घोड़े के क्रम विकास में चार मुख्य जीवाश्म पूर्वजों के नाम क्रमानुसार निम्नलिखित है – इयोहिप्पस, मेसोहिप्पस, मेरीचिप्पस और प्लीयोहिष्पस है।

प्रश्न 3.
जीवन की रासायनिक उत्पत्ति के क्षेत्र में मिलर और उरे के प्रयोग में प्रयुक्त क्रियाकारकों का नाम एंव उत्पत्न एक कार्बनिक यौगिक का नाम लिखिए।
उत्तर :
क्रियाकारकों के नाम – मिथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और ज़ल।
उत्पन्न एक कार्बनिक यौगिक – अमीनो अम्ल (एलानीन,ग्लाइसिन)।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 4.
घोड़े के क्रम विकास में परिवर्तित होने वाली चार मुख्य विशेषताएं लिखिए।
उत्तर :

  1. ऊँचाई 30 से॰मी॰ से बढ़कर 1.60 मी० हो गयी।
  2. 4 अंगुलियाँ घटकर 1 अंगुली हो गयी।
  3. सिर की लम्बाई अधिक हो गयी।
  4. गर्दन की लम्बाई में भी वृद्धि हुई।

प्रश्न 5.
अवशेषी अंग से तुम क्या समझते हो ? मानव शरीर में उपस्थित एक अवशेषी अंग का नाम बताओ।
उत्तर :
(i) अवशेषी अंग (Vestigeal organs) :- ‘जीवधारियों में पाए जाने वाले वे निक्किय एवं अनुपयोगी अंग जो किसी अन्य सम्बद्ध जीवधारियों में पूर्ण विकसित एवं क्रियाशील होते हैं, उन्हें अवशेषी अंग(Vestigeal organs) कहते हैं।
(ii) वर्मीफॉर्म अपेन्डिक्स (Vermiform appendix)

प्रश्न 6.
क्रम विकास क्या है ?
उत्तर :
वातावरण में परिवर्तन के फलस्वरूप सजीवों के अंगों की रचना में सम्परिवर्तन के कारण नयी जातियों के उत्पन्न होने की मन्द तथा गतिशील प्रक्रिया को क्रम विकास कहते हैं।

प्रश्न 7.
जीवाश्म क्या है ?
उत्तर :
जीवाश्म (Fossils) : किसी समय जीवित रहने वाले अति प्राचीन सजीवों के अवशेष जो पृथ्वी की सतहों या चट्टानों की परतों में सुरक्षित पाये जाते हैं, जीवाश्म कहलाते हैं।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 8.
जीवित जीवाश्म क्या है ?
उत्तर :
वे सजीव जो आज से लाखों वर्ष पहले इस पृथ्वी पर उत्पन्न होकर किसी प्रकार प्राकृतिक परिवर्तनों से अभभावित होकर आज भी पृथ्वी पर पाये जाते हैं, उन्हें जीवित जीवाश्म कहते हैं। जैसे- सिलाकान्थ नामक मछली, प्लेटीपस नामक स्तनपायी आदि।

प्रश्न 9.
साँचा जीवाश्म (Mould fossils) क्या है ?
उत्तर :
इसमें मूल जीव का शरीर नहीं बदलता है, केवल इनकी आकृति के साँचे होते हैं। मिट्टी में दबे जीव के चारों ओर कीचड़ आदि कड़ा होकर इसकी आकृति का एक साँचा बना लेते हैं। इस प्रकार के जीवाश्म में केवल जन्तु की बाह्य आकृति का अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रश्न 10.
“अस्तित्व के लिए संघर्ष” से आप क्या समझते हैं ? इसका प्रतिपाद्य किसने किया ?
उत्तर :
(a) आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सजीव को प्राकृतिक घटनाओं (जैसे बाढ़, भूकंप, सूखा आदि) में अपनी जाति के अन्य सदस्यों से और दूसरी जाति के सदस्यों से किये गये संघर्ष को अस्तित्व के लिए संघर्ष (Struggle for Existence) कहते हैं।
(b) इसका प्रतिपादन चार्ल्स डार्विन ने किया।

प्रश्न 11.
जीवाश्म के दो उदाहरण लिखो।
उत्तर :
(i) आर्कियोप्टेरिक्स (Archaeopteryx)
(ii) थेरियोडोण्ट (Theriodont)

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 12.
होमोलोगी (Homology) क्या है ?
उत्तर :
होमोलोगी (Homology) : समजात अंगों में उनकी मूल रचना तथा उत्पत्ति में समानताएँ होती हैं परन्तु कार्य भिन्न होते हैं। इस समजात अंगों की समानता को होमोलोगी कहते हैं।

प्रश्न 13.
पादप और जन्तु जीवित जीवाश्म का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
पादप जीवाश्म – कोयला (coal) एक पादप जीवाश्म है।
जन्तु जीवाश्म – लिमुलस।

प्रश्न 14.
उपार्जित लक्षणों की वंशागति से क्या समझते हो ? इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ?
उत्तर :
जन्म के पश्चात् सर्जावों द्वारा प्राप्त गुणों या लक्षणों को उपार्जित लक्षण कहते हैं। ये लक्षण उस प्राणी में स्थिर हो जाते हैं और अगली पीढ़ी में प्रजनन द्वारा स्वतः चले जाते हैं। इसी के फलस्वरूप नयी जातियों की उत्पत्ति होती है।
जे. बी. लेमार्क ने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था।

प्रश्न 15.
क्रम-विकास के सम्बन्ध में हेकल का नियम लिखिए।
उत्तर :
क्रम-विकास के सम्बन्ध में हेकल का नियम : किसी जीव का व्यक्तिगत विकास सम्पूर्ण जाति के विकास के इतिहास को दुहराता है। “Ontogeny repeats phylogeny”

प्रश्न 16.
अन्तःजातीय संघर्ष क्या है ?
उत्तर :
ऐसा संघर्ष जो एक ही जाति के प्राणियों के बीच होते हैं, अन्तःजातीय संघर्ष कहलाता है। जैसे- मछालयों के आपसी संघर्ष। बड़ी मछलियाँ छोटी मछलियों को खा जाती हैं।

प्रश्न 17.
मेरुदण्डी प्राणियों के हुदय के आन्तरिक रचना का अध्ययन कैसे हमारे क्रम विकास (organic evolution) को आगे बढ़ाता है ?
उत्तर :
विभिन्न वर्ग के मेरुदंडीय प्राणियों के हृद्य की संरचना क्रम विकास के लिए एक आकारिकी प्रमाण के रूप में : मेरुदंडीय समुदाय के विभिन्न जंतुओं (मछली, टोड, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी) के हृदय की बनावट की जब हम तुलना करते हैं तो फाते हैं कि सभी का हृदय एक ही आधार को ध्यान में रखकर बना है। टोड के हृदय में तीन कक्ष (दो आलिंद और एक निलय) होता है क्योंकि यह एक उभयचर प्राणी है। पक्षी (उदाहरण : कबूतर) और स्तनधारी (उदाहरण : आदमी) के हृदय में चार कक्ष पाये जाते हैं। इसलिए इनके हृदय में शुद्ध एवं अशुद्ध रक्त मिलने नहीं पाता है। सभी मेरुदण्डियों के हुय में आलिन्द और निलय की उपस्थिति क्रम विकास के पक्ष में प्रमाण हैं।

प्रश्न 18.
मनुष्य के अपेंडिक्स को अवशेषी अंग क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
मनुष्य के लिए यह निष्किय अंग है। जिस कारण इसे अवशेषी अंग कहा पाता है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 19.
समजात अंग क्या है ? इसका एक उदाहरण दो।
उत्तर :
सजीवों के विभिन्न वर्गों में उपस्थित उन अंगों की जिनकी उत्पत्ति और रचना तो समान होती है परन्तु कार्य भिन्न होते हैं, उन्हें समजात अंग कहते हैं। उदाहरण -मनुष्य का हाथ और पक्षी का डैना (wings)

प्रश्न 20.
समवृत्ति अंग क्या है ? इसका एक उदाहरण दो।
उत्तर :
सजीवों के विभिन्न वर्गों में उपस्थित उन अंगों को जिनकी उत्पत्ति और रचना तो भिन्न होती हैं परन्तु कार्य समान होते हैं, उन्हें समवृत्ति अंग कहते हैं। उदाहरण – पक्षी का डैना और तिलचट्टा का डैना

प्रश्न 21.
मध्यवर्ती जीव (Intermediate Organism) से क्या समझते हो ?
उत्तर :
ऐसा सजीव जो दो वर्गों के जीवों के लक्षण को धारण करता है उसे उस़ वर्ग के बीच का मध्यवर्ती जीव कहते हैं। संयोजक कड़ी ही मध्यवर्ती जीव कहलाता है।

प्रश्न 20.
विलुप्त कड़ी (Missing link) से क्या समझते हो ? एक उदाहरण दो।
उत्तर :
ऐसा संयोजक कड़ी जो जीवाश्म के रूप में मिलती है तथा अत्यन्त दुर्लभ होती है, विलुप्त कड़ी कहलाती है। जैसे- आर्केयोप्टेरिक्स सरीसृप तथा पक्षियों के बीच की विलुप्त कड़ी है।

प्रश्न 21.
आर्केयोप्टेरिक्स क्या है ?
उत्तर :
यह एक जन्तु जीवाश्म है। इसमें पक्षी तथा सरीसृप वर्ग के लक्षण पाये जाते हैं। वर्तमान समय में यह एक विलुप्त कड़ी है। यह जीवित अवस्था में नहीं मिलता है।

प्रश्न 22.
म्यूटेशन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जीन्स की रचना में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरूप सजीवों के गुण में होने वाले अचानक परिवर्तन को म्यूटेशन (Mutation) कहते हैं।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 23.
मध्यवर्ती कड़ी पौधा का नाम बताओ।
उत्तर :
मध्यवर्ती कड़ी पौधे (Intermediate linked plants) :- फर्न (Fern)- टेरीडोफाइडा तथा जिमनोस्पर्म के बीच की कड़ी, राइनिया (Rynae) – ब्रायोफाइटा तथा टेरीडोफाइटा के बीच की कड़ी, तथा नीटम (Gnetum) जिम्नोसर्म तथा एनजिओस्पर्म के बीच की कड़ी।

प्रश्न 24.
Analogy क्या है ?
उत्तर :
Analogy : समवृत्ति अंगों में उनके कार्य समान होते हैं परन्तु उनकी रचना तथा उत्पत्ति भिन्न होती है। समवृत्ति अंगों के कार्य में समानता को Analogy कहते हैं।

प्रश्न 25.
Convergent evolution क्या है ?
उत्तर :
जब विभिन्न समुदाय के प्राणी एक ही वातावरण में रहने के लिए उपयोजित होते हैं तो इस प्रकार के क्रम विकास को Convergent evolution कहते हैं। जैसे- चमगादड़ स्तनधारी वर्ग का जन्तु होते हुए भी पक्षियों के साथ उड़ता है।

प्रश्न 26.
Divergent evolution क्या है ?
उत्तर :
जब एक समुदाय के प्राणी विभिन्न वातावरण में रहने के लिए उपयोजित हो जाते हैं तो इस प्रकार के क्रम विकास कोivergent evolution कहते हैं। जैसे- मनुष्य, हिरण, चमगादड़ तथा ह्लेल आदि सभी स्तनधारी वर्ग के होते हुए भी विभिन्न वातावरण में रहते हैं।

प्रश्न 27.
Unaltered fossil क्या है ?
उत्तर :
इसमें जीवाश्म का पूरा शरीर बर्फ में पूर्णतः सुरक्षित रहता है तथा पूर्ण जीवाश्म बनाता है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
जैव विकास के विभिन्न प्रमाणों का उल्लेख करो।
उत्तर :
जैव विकास के निम्नलिखित प्रमाण है –

  • जीवाश्म प्रमाण
  • तुलनात्मक शरीर रचना के प्रमाण
  • भूण-विज्ञान से प्राप्त प्रमाण
  • वर्गीकरण से प्राप्त प्रमाण
  • भौगोलिक वितरण के प्रमाण
  • जेनेटिक्स से प्राप्त प्रमाण
  • Connecting link के प्रमाण तथा
  • अवशेषी अंग के प्रमाण।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 2.
प्राकृतिक चुनाववाद की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
जीवन संघर्ष में लाभदायक विभिन्नता रखने वाले प्राणी सफल हो जाते हैं। इन सफल प्राणियों को ही प्रकृति केवल अगली पीढ़ी उत्पन्न करने की क्षमता प्रदान करती है। इसे ही प्राकृतिक चुनाववाद (Natural selection theory) कहते हैं। अन्य जीव जिनमें प्रकृति के अनुरूप विभिन्नताएँ नहीं हैं, वे जीवन संघर्ष में सफल नहीं होते और नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
अवशेषी अंग क्या है? क्रम विकास में इसकी भूमिका क्या है ?
उत्तर :
अवशेषी अंग : सजीवों के शरीर में उपस्थित निष्क्रिय तथा अनुपयोगी अंगों को अवशेषी अंग कहा जाता है। जैसे- मनुष्य का अपेन्डिक्स।
क्रम विकास में अवशेषी अंग की भूमिका : अवशेषी अंग कुछ सजीवों में सक्रिय अवस्था में पाया जाता है और कुछ में निष्क्रिय । इससे यह प्रमाणित होता है कि अवशेषी अंग वाले सजीवों का विकास उन्हीं सजीवों से हुआ है जिनमें ये सक्रिय होते हैं।

प्रश्न 4.
जैव विकास के प्रमाण के रूप में जीवाश्म के तीन महत्व बताओ।
उत्तर :
जैव विकास के प्रमाण के रूप में जीवाश्म –

  1. प्राचीनकाल में ऐसे ही जीव थे, जो अब विलुप्त हो चुके हैं।
  2. प्राचीनकाल में जीवों की संरचना आधुनिक युग के जीवों से सरल थे।
  3. लुप्त कड़ी के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि किस वर्ग के जीव की उत्पत्ति पहले किस वर्ग के जीव से हुई है।
  4. जीवाश्म से किसी सजीव की वशावली का क्रमवार अध्ययन किया जाता है।
  5. उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर जीवाश्म को जैव विकास का सीधा एवं प्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है।

प्रश्न 5.
घोड़े का जीवाश्म किस प्रकार जैव विकास के प्रमाण के रूप में काम करता है ?
उत्तर :
अब तक प्राप्त सभी जीवाश्मों में घोड़े का जीवाश्म क्रमबद्ध तथा पूर्ण है। आधुनिक घोड़े इक्वस (Equus) का विकास पूर्ण इओसन युग के घोड़े इओहिप्पस से हुई है।
आधुनिक घोड़ों के पूर्वजों के विभिन्न जीवाश्मों के अध्ययन से इनके क्रम विकास की निम्न पाँच अवस्थायें मिलती है-

  1. इओहिप्पस (Eohippus)
  2. मिजोहिण्पस (Mesohippus)
  3. मेरीचिष्पस (Merichippus)
  4. पिलोहिप्पस (Pilohippus)
  5. इक्कवस (Equus)।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 6.
उपार्जित लक्षणों की वंशागति से क्या समझते हो ? इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ?
उत्तर :
जन्म के पश्चात् सजीवों द्वारा प्राप्त गुणों या लक्षणों को उपार्जित लक्षण कहते हैं। ये लक्षण उस प्राणी में स्थिर हो जाते हैं और अगली पीढ़ी में प्रजनन द्वारा स्वतः चले जाते हैं। इसी के फलस्वरूप नयी जातियों की उत्पत्ति होती है।
जे. बी. लेमार्क ने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था।

प्रश्न 7.
कुछ जन्तुओं में अवशेषी अंग क्यों होते हैं ?
उत्तर :
कुछ जन्तुओं के शरीर में उपस्थित अवशेषी अंग यह प्रमाणित करते हैं कि किसी समय ये इनके पूर्वजों में क्रियाशील एवं आवश्यक अंगों के रूप में थे परन्तु बदली हुई परिस्थिति में विकसित हुए नये जंतुओं में ये अनावश्यक एवं निफ्क्रिय होते गये। चूँकि ये बिल्कुल नष्ट नहीं हुए इसलिए ये निफ्क्रिय अंग पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानान्तरित होते रहे, जो आज भी इनमें अवशेषी अंग के रूप में मौजूद थे।

प्रश्न 8.
नव लेमार्कवाद से क्या समझते हो ?
उत्तर :
नव लेमार्कवाद (Neo Lamarckism) : सेन्सर (Spencer), कोप (Cope) आदि वैज्ञानिकों ने लेमार्क के सिद्धान्तों की व्याख्या अपने प्रयोगों से प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर किया जिसे नव लेमार्कवाद कहा जाता है। इसके अनुसार जीवों के अंगों की कार्यक्षमता तथा वातावरण के साथ इस अंगों का सम्बन्ध ही क्रम विकास का मुख्य कारण है। वातावरण में लगातार परिवर्तन के फलस्वरूप जीवों में कुछ विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। धीरे-धीरे ये भिन्नताएँ वशानुगति होकर नयी जाति के उत्पत्ति का कारण बन जाते हैं।

प्रश्न 9.
क्रम विकास के लिए म्यूटेशन किस प्रकार आवश्यक है ? वर्णन करो।
उत्तर :
सजीवों में नये लक्षण की उत्पत्ति म्यूटेशन के कारण ही होती है। इनमें से कुछ लक्षण उपयोगी तथा कुछ अनुपयोगी होते हैं। अनुपयोगी लक्षण का धीरे-धीरे क्षय होता है तथा अन्त में नष्ट हो जाता है। उपयोगी लक्षण वाले सजीव अपने को वातावरण के साथ व्यवस्थित कर विकसित होते हैं तथा वंशवृद्धि में सक्षम होते हैं। इस प्रकार उत्पन्न संतानों में नये लक्षण या गुण होते हैं। इस प्रकार म्यूटेशन का क्रम विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रश्न 10.
समय के सामंजस्य से जीवों में कैसे परिवर्तन होता रहता है ?
उत्तर :
प्रकृति की दशा में सदा बदलाव होता रहता है। प्रकृति की बदलती हुई दशाओं से जीवधारियों में अनुकूलन होता रहता है। अनुकूलता के कारण जीवधारियों की संरचना में परिवर्तन होते रहते हैं जिसके फलस्वरूप नये-नये जीवधारी बनते हैं। क्रमिक परिवर्तन के फलस्वरूप सरल रचना वाले जीवो का जटिल रचना वाले जीवधारियों में विकास हुआ। आधुनिक जीवधारी करोड़ों वर्षो के विकास का परिणाम है। जीवों में परिवर्तन आदिकाल से होता आ रहा है और भविष्य में भी होता रहेगा। अत: जैविक विकास एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रश्न 11.
डार्विनवाद की आलोचना पर प्रकाश डालो।
उत्तर :
ड़ार्विनवाद की आलोचना –

  1. डार्विन विभिन्नताओं की उत्पत्ति के कारणों को स्पष्ट नहीं कर सके।
  2. डार्विन भिन्नताओं की वशागति को नष्ट नहीं कर पाये।
  3. डार्विन उत्परिवर्तन (Mutation) को स्पष्ट नहीं किया।
  4. डार्विन ने अविच्छित्र भिन्नताओं को जैव विकास का अधिकार माना।
  5. अर्धविकसित अवस्था में अंगों की उपयोगिता को डार्विन स्पष्ट नहीं कर सके।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 12.
पर्यावरणीय संघर्ष से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पर्यावरणीय संघर्ष पर्यावरण तथा उसमें रहने वाले प्राणियों के बीच चलता रहता है। जैसे- वर्षा, तूफान, बाढ़, भूकम्प आदि से अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए प्राणियों को संघर्ष करना पड़ता है। जिन प्राणियों में प्रतिकूल वातावरण से संघर्ष करने की क्षमता नहीं होती है, वे इस संघर्ष में नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
समवृति अंगों के तीन उदाहरण दो।
उत्तर :
समवृति अंगों के तीन उदाहरण-

  1. तितलियों और पक्षियों के पंख
  2. मटर तथा हरजोरा का टेन्ड्रिल
  3. नागफनी का फाइलोक्लेड तथा मटर की स्टीप्यूलेट पत्तियाँ।

प्रश्न 14.
क्रम विकास के प्रमाण के रूप में पाद की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
जन्तुओं में कुछ अंग होते हैं जो रचना तथा उत्पत्ति में समान होते हैं परन्तु कार्य में भिन्न होते हैं तथा उन अंगों को समजात अंग कहते हैं। जैसे- घोड़ा, पक्षी, टोड तथा मनुष्य के अग्रपाद समजात अंग है। इनकी मूल रचना एक समान है। सभी में एक ही प्रकार की हड्डियाँ Humerus, Radius ulna, Carpels, Metacarpels तथा Phalanges पायी जाती है। सभी में humerus का सिर Radius ulna की Glenoid Cavity में फिट रहता है। इन हड्डियों में जो भिन्नताएँ पायी जाती हैं वे जन्तुओं के वातावरण तथा आवश्यकताओं के कारण होती है। जैसे- घोड़े के दौड़ने में, पक्षी के उड़ने में, टोड के कूदने में तथा मनुष्य के पकड़ने में काम आता है। अंगों में समानता से यह प्रमाण मिलता है कि इन सभी जन्तुओं की उत्पत्ति एक ही परिवार के पूर्वजों से हुई है। जिससे यह पता चलता है कि क्रम विकास हुआ है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
उदाहरण सहित व्याख्या करो कि डार्विन के सिद्धांतानुसार नये जीवों की उत्पत्ति किस प्रकार होती है ? 2 + 3
अथवा
डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत का वर्णन करें।
अथवा
उपयुक्त उदाहरण द्वारा डार्विन के प्राकृतिक चयन प्रक्रिया को समझाओ।
अथवा
“प्राकृतिक चुनाव” सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ? सर्वोत्तम की उत्तरजीविता और प्राकृतिक चुनाव के आधार पर नए जीवों की उत्पत्ति संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
प्राकृतिक चुनाव का सिद्धान्त चार्ल्स डार्विन ने 1859 ई० में क्रम विकास के सम्बन्ध में प्रकाशित किया था। प्राकृतिक चुनाव : जैव विकास के संबंध में डार्विन द्वारा प्रतिपादित प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के अनुसार इस प्रकृति में कोई भी दो जीव बिल्कुल एक समान नहीं होते। इनमें कुछ-न-कुछ असमानताएँ अवश्य होती हैं, जिसे विभिन्नता कहते हैं। जीवों में इन विभिन्नताओं की अधिकता के फलस्वरूप इनके बीच जीवन के लिए संघर्ष शुरू हो जाता है।

इस संघर्ष में जो योग्यतम होते हैं, वही जीतते हैं और अयोग्य गुणवाले जीव नष्ट हो जाते हैं। अर्थात, प्रकृति योग्यतम तथा अनुकूल विभिन्नता वाले जीवों का चयन कर लेती है। प्रकृति द्वारा चयन किए गए इन जीवों की उपयोगी विभिन्नताएँ फिर दूसरी पीढ़ी में, उनके संतानों में वशागत होती है और इस तरह विभिन्नताओं की पीढ़ी-दर-पीढ़ी वशागत होते रहने के कारण एक नई प्रजाति का विकास होता है। यही डार्विन के प्रकृति चयन का सिद्धांत है। अनुकूलन के फलस्वरूप उत्पन्न भिन्नताएँ पीढ़ीदर-पीढ़ी एकत्र होती रहती है और इससें नयी जाति उत्पन्न हो जाती है।

योग्यतम की अतिजीविता (Survival of the fittest) : सजीवों में कुछ उपयोगी तथा अनुपयोगी विभिन्नताएँ पायी जाती हैं। जीवन संघर्ष में केवल वही प्राणी जीवित रहता है, जो अपने ही वातावरण के अन्य सहनिवासियों की तुलना में अनुकूल विभिन्नता उत्पन्न करने में समर्थ होता है, जिसे योग्यतम की अतिजीविता (Survival of the fittest) कहते हैं। उपयोगी विभिन्नताओं वाले जीवों का प्रकृति चुनाव कर लेती है।

प्रकृति द्वारा चुने गये प्राणियों से केवल अच्छे लक्षण ही इनकी अगली पीढ़ी में स्थानान्तरित होते हैं। इस स्थानान्तरण के कारण प्रत्येक पीढ़ी का जीव अपने जनकों से कुछ अच्छे गुण रखने वाला होता है। अन्य सजीव जिनमें प्रकृति के अनुरूप भिन्नता नहीं होती, वे धीर-धीरे नष्ट हो जाते हैं।

(Origin of new species) : डार्विन के मत के अनुसार अस्तित्व के लिए संघर्ष एवं प्राकृतिक चयन के फलस्वरूप ऐसे ही जीवधारी जीवित रहते हैं जो अपने आपको वातावरण के अनुकूल बना लेते हैं। इन चुने गये जीवों में उपस्थित लाभदायक या अनुकूल विभित्नताओं की वंशागति होती है। अनुकूलन के फलस्वरूप उत्पन्न भिन्नताएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी एकत्र होती रहती है और इससे नयी जाति उत्पन्न हो जाती है और इस प्रकार विकास का क्रम चलता रहता है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 2.
एक फ्लोचार्ट की सहायता से मुख्य क्रमिक विकास घटनाओं को दिखाइये। 5
उत्तर :
मुख्य क्रमिक विकास की घटनाँए –

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास 1

प्रश्न 3.
जिन दो अन्तर्गठित संरचना के अधार पर ‘हेल का फ्लिपर’ एंव ‘पक्षी का डैना’ को समजात अंग माना जाता है उसे उल्लेख कीजिए।
अस्तित्व के लिए संघर्ष का वर्णन करें।
उत्तर :
समजात अंग मानने का कारण – 2 + 3
(i) हेल का फ्लीपर जल में तैरेने का कार्य करता है जबकि पक्षी का डैना हवा में उड़ने का कार्य करता है।
(ii) दोनों अंगो में हयूमरस, रेडियस अल्ना, कारपल्स, मेटा कारपल्स और फैलेन्जेज एक तरह की पायी जाती है।

अस्तित्व के लिए संघर्ष/जीवन संघर्ष (Struggle of existence) : जीवों में वंशवृद्ध की दर काफी तेज होती है, जिसके फलस्वरूप उनकी संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है, लेकिन प्रकृति में भोजन, ऑक्सीजन आवास आदि की सुविधायें सीमित हैं। इसलिए जीवधारियों को अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए दूसरे जीवों से संघर्ष करना पड़ता है। जीवन संघर्ष जीवनभर चलता रहता है। जीवित संघर्ष में सफल जीवधारी जीवित रहते हैं और शेष नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 4.
क्रम विकास में लेमार्क के सिद्धान्त का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
क्रम विकास से आप क्या समझते हैं ? लेमार्क के क्रम विकास के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
अथवा
क्रम विकास क्या है ? लेमार्क के कार्बनिक क्रम विकास के सिद्धांत को संक्षेप में बताइए।
अथवा
लैमार्क के अंगों का उपयोग एवं अनुपयोग सिद्धान्त कार्बनिक क्रम-विकास को समर्थन करता है, कैसे ?
अथवा
क्रम विकास की अवधारणा का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
क्रम विकास : वातावरण में परिवर्तन के फलस्वरूप सजीवों के अंगों की रचना में सम्परिवर्तन के कारण नयी जातियों के उत्पन्न होने की मन्द तथा गतिशील प्रक्रिया को क्रम विकास कहते हैं।
कार्बनिक क्रम विकास : वातावरण के परिवर्तन के फलस्वरूप सजीवों के अंगों की संरचना में परिवर्तन के कारण नई जातियों के उत्पन्न होने की क्रिया विधि को कार्बनिक क्रम विकास (Organic Evolution) कहते हैं।
लेमार्क का सिद्धांत : नई जातियों (species) के उत्पन्न होने की वह विधि जिसे जे०बी० लेमार्क ने व्यक्त किया है, उसे लेमार्क का सिद्धांत या लेमार्कवाद कहते हैं।
आकार में वृद्धि की प्रवृत्ति (Tendency to increase in size) : जीवधारियों में वृद्धि की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है।

वातावरण के परिवर्तन का प्रत्यक्ष प्रभाव (Direct effect of change of environment) : प्राकृतिक घटनाओं के कारण वातावरण में परिवर्तन होता है। वातावरण के परिवर्तन का प्रभाव सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। परिवर्तित वातावरण में सहज ढंग से अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सजीवों के अंगों में संपरिवर्तन (Modification) होता है।

अंगों का उपयोग तथा अनुपयोग (Use and disuse of organs) : वातावरण के प्रभाव के फलस्वरूप अधिक उपयोग में आने वाले अंग अधिक विकसित हो जाते हैं। अंगों का कम उपयोग होने के कारण ह्वस होने लगता है। अवशेषी अंगों (Vestigeal organ) की उपस्थिति इसे प्रमाणित करती है। यह कार्बनिक क्रम-विकास को समर्थन करता है।
लैमार्क अपने सिद्धान्त की पृष्टि के लिए निम्न उदाहरण प्रस्तुत किये हैं : जैसे – जलीय पक्षी, सर्प, जिराफ।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास 2

जिराफ : इनके अनुसार जिराफ के पूर्वजों के पाँव एवं गर्दन इतनी लंबी नहीं थी, क्योंकि उस समय यह प्रदेश रेगिस्तानी नहीं था और इसमें घास-फूस बहुतायत मिलती थी। वृक्ष भी ऊँचे नहीं थे। जलवायु में परिवर्तन के फलस्वरूप वनस्पतियाँ समाप्त हो गई। वृक्षों से भोजन प्राप्त करने के प्रयास में इनकी अगली टाँगें तथा गर्दन लम्बी होती गयी। यह लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशागत होकर आधनिक जिराफ का स्थायी लक्षण बन गया।

उपार्जित लक्षणों की वंशागति (Inheritance of acquired characters) : उपरोक्त कारणों से उत्पन्न भिन्नतायें वशागत होती हैं। इन्हें उपार्जित लक्षण (acquired characters) कहते हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन लक्षणों के एकत्र होते रहने से नयी जाति (species) बन जाती हैं।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 5.
समजात या समरूप एवं असमजात अंग के अध्ययन से जैव विकास में क्या मद्व मिलती है ?
उत्तर :
विभिन्न जुतुओं के कुछ अंग ऐसे होते हैं जो संरचना और उत्पत्ति के दृष्टिकोण से तो एकसमान होते हैं, परंतु अपने वातावरण के अनुसार वे भिन्न-भिन्न कार्यो का संपादन करते हैं। ऐसे अंग समजात अंग कहलाते हैं। जैसे – मेढक, पक्षी, बिल्ली तथा मनुष्य के अग्रपादों में पाए जानेवाले अस्थियों के अवयव प्राय: समान होते हैं, परंतु इन कशेरूक प्राणियों के अग्रपाद विभिन्न प्रकार के कार्यों का संपादन करते हैं।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास 3

समजात अंगों का पाया जाना यह प्रमाणित करता है कि इन जंतुओं का विकास एक ही पूर्वज से हुआ है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास 4

समजात अंगों के विपरीत जंतुओं के कुछ अंग ऐसे होते हैं, जो रचना और उत्पत्ति या उद्भव के दृष्टिकोण से एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, परंतु वे एक ही प्रकार का कार्य करते हैं। ऐसे अंग समबृति अंग (Analogous organs) कहलाते हैं। जैसे तितली तथा पक्षी के पंख (Wings) उड़ाने का कार्य करते हैं, परंतु इनकी मूल सरंचना और उत्पत्ति अलग-अलग प्रकार की होती हैं। पक्षी के पंख में अस्थियाँ, त्वचा तथा पंख (Feathers) होते हैं जबकि तितली या अन्य कीटों के पंख क्यूटिकल के परत से ढँके होते हैं तथा इनमें कुछ तंत्रिकीय पेशियाँ होती हैं।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 6.
डार्विनवाद का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
अथवा
प्राकृतिक चुनाव में विभिन्नता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
डार्विनवाद : चार्ल्स डार्विन विभिन्न प्रकार के प्राणियों का संग्रह करके इन्होंने क्रम विकास के संबंध में काफी अध्ययन किया तथा क्रम विकास पर अपना मत प्रकाशित किया। इस मत को डार्विनवाद या प्राकृतिक चुनाववाद कहते हैं। सन् 1859 में इन्होंने अपना पुस्तक प्रकाशित किया। इनका सिद्धान्त निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित है।
प्रजनन की पर्याप्त क्षमता (Enormous fertility of production) : इस मत के अनुसार सजीवों में वंश वृद्धि की दर ज्यामिति अनुपात में होती है। उदाहरण के लिए एक मछली एक बार में लगभग 3 करोड़ अण्डा देती है। यदि सभी अण्डे जीवित रहें तथा मछली का रूप धारण करें तो एक ही मछली से सारा तालाब भर जायेगा। परन्तु ऐसा होता नहीं है।

अस्तित्व के लिए संघर्ष (Struggle for Existance) : पृथ्वी पर ज्यामिति अनुपात में जीवों की उत्पत्ति होती है, परन्तु वास स्थान तथा भोजन सीमित होता है। भोजन तथा वास स्थान सीमित होने के कारण इनमें अस्तित्व संघर्ष होता है। यह संघर्ष तीन प्रकार का होता है।

  • अन्त: जातीय संघर्ष
  • अन्तर जातीय संघर्ष एवं
  • वातावरणीय संघर्ष।

विभित्रताएँ (Variations) : डार्विन के सिद्धान्त के अनुसार इस पृथ्वी पर उपस्थित एक ही समुदाय के प्राणियों में विभिन्नताएँ पायी जाती हैं। ये विभिनताएँ आकार, परिमाण, संरचना, कायिकी आदि अनेक प्रकार के लक्षणोंसे सम्बन्धित होती है। इस प्रकार छोटी-छोटी विभिम्नताएँ पीढी-दर-पीढ़ी बढ़ती रहती है तथा अन्त में एक ही जाति की उत्पत्ति होते हैं। उपयोगी विभिम्नता वाले प्राणी जीवन संघर्ष में सफल होते हैं परन्तु अनुपयोगी विभिन्नता वाले प्राणी नष्ट हो जाते हैं।

योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the fittest) : लाभदायक विभिन्नताओं वाले प्राणी जीवन संघर्ष में सफल होते हैं। लाभदायक लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी एकत्र होते रहते हैं। जिन प्राणियों में अनुकूलन की क्षमता होती है वे जीवित रह पाते हैं तथा जिनमें अनुकूलन की क्षमता नहीं होते वे या तो नष्ट हो जाते है या लुप्त हो जाते हैं।

प्राकृतिक चुनाव (Natural selection) : डार्विन के अनुसार प्रकृति केवल उन्हीं जीवों का चयन करती है जिनमें अनुकूल विभिन्नतायें होती हैं। जीवन संघर्ष में जो प्राणी सफल होते हैं, प्रकृति उन्हें सुविधा तथा सुयोग प्रदान करके उन्हें विजयी बना देती है। प्रतिकूल विभिन्नता वाले प्राणियों को प्रकृति अलग कर देती है।

नयी जाति की उत्पत्ति (Origin of new species) : डार्विन के मत के अनुसार अस्तित्व के लिए संघर्ष एवं प्राकृतिक चयन के फलस्वरूप ऐसे ही जीवधारी जीवित रहते हैं जो अपने आपको वातावरण के अनुकूल बना लेते हैं। इन चुने गये जीवों में उपस्थित लाभदायक या अनुकूल विभिन्नताओं की वंशागति होती है। अनुकूलन के फलस्वरूप उत्पन्न भिन्नताएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी एकत्र होती रहती है और इससें नयी जाति उत्पन्न हो जाती है और इस प्रकार विकास का क्रम चलता रहता है।

प्रश्न 7.
जीवाश्म क्या है ? जीवाश्म के क्या-क्या उपयोग हैं ? 2 + 3
उत्तर :
जीवाश्म (Fossils) : किसी समय जीवित रहने वाले अति प्राचीन सजीवों के अवशेष जो पृथ्वी की सतहों या चट्टानों की परतों में सुरक्षित पाये जाते हैं, जीवाश्म कहलाते हैं।
जीवाश्मों का उपयोग : जीवाश्मों के निम्नलिखित उपयोग हैं –

  1. जीवाश्मों से प्राचीन काल के पौधों तथा जन्तुओं के वंश-परपरागत इतिहास के विश्लेषण में सहायता मिलती है।
  2. जीवाश्मों से प्राचीन काल के विभिन्न युगों के वातावरण, जलवायु तथा भौगोलिक परिवेश का ज्ञान होता है।
  3. जीवाश्मों का उपयोग धरती के विभिन्न सतहों में दबे जीवधारियों के क्रम काल के अनुसार विकास क्रम को जानने के लिए किया जाता है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 8.
जैविक विकास से क्या समझते हो ? शारीरिक रचना से प्राप्त प्रमाण के रूप में विभिन्न वर्ग के रीढ़धारी समुदाय के विभिन्न जंतुओं के हुदय की रचना का वर्णन करो।
उत्तर :
जैविक विकास (Organic evolution) : सृष्टि के प्रारम्भ से अब तक वातावरण तथा परिस्थिति के अनुरूप अनुकूलन के फलस्वरूप होने वाले परिवर्तन के परिणामस्वरूप सरल रचना वाले जीवधारियों से जटिल रचना वाले जीवधारियों के क्रमिक विकास को जैविक विकास (Organic evolution) कहते हैं।

विभिन्न वर्ग के रीढ़धारियों के विभिन्न जन्तुओं (जैसे-मछली, टोड, सरीसृप, पक्षी तथा स्तनधारी) के हदय की बनावट का तुलनात्मक अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि इन सभी के हृद्य एक ही आधारभूत संरचना के आधार पर निर्मित हुए हैं। विभिन्न वातावरण में रहने तथा अनुकूलन के कारण इनकी संरचना में भिन्नताएँ पायी जाती हैं।

मछली (Fish) के हुय में दो चैम्बर होते हैं- एक अलिन्द तथा एक निलय। मछलियों में गलफड़ (Gills) द्वारा श्वसन क्रिया सम्पन्न की जाती है। अतः इनके शरीर में गिल्स में शुद्ध रक्त बहता है जबकि इनके हृदय से अशुद्ध रक्त प्रावाहित होता है। अत: मछलियों के हुदय को अशुद्ध हुदय (venous heart) कहते है। मछलियों का हुय एक अति सरल रचनायुक्त तथा जल में रहने के लिए उपयोगी है।

उभयचर वर्ग (Amphibians) के जन्तुओं जैसे- मेढक, टोड आदि का हृदय तीन प्रकोष्ठयुक्त होता है, जिसमें दो अलिन्द तथा एक निलय होता है। इसके हृदय में दोनों अलिन्दों के बीच उपस्थित दीवाल शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त को मिलने से रोकता है परन्तु निलय में दोनों प्रकार के रक्त आपस में मिश्रित हो जाते हैं। अतः इस वर्ग के जन्तुओं का हृय मछलियों से कुछ अधिक विकसित होता है।

सरीसृप वर्ग (Reptiles) के जन्तुओं जैसे छिपकली आदि के हृदय में 3 \% अर्थात चार अपूर्ण प्रकोष्ठ होते हैं, जिसमें दो पूर्ण अलिन्द तथा असम्पूर्ण रूप से विभाजित दो निलय होते हैं। अतः इनके हृदय में शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त को अलग-अलग करने का अनुकूलन उत्पन्न होता है। सरीसृप वर्ग के प्राणी धरती पर पाये जाते हैं। पक्षियों तथा स्तनधारियों के हृदय में सम्पूर्ण चार प्रकोष्ठ होते हैं। दो अलिन्द तथा दो निलय। इनके हृदय में शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त का परिवहन अलग-अलग होता है। अतः इनका हृदय अन्य जन्तुओं की अपेक्षा अधिक विकसित हुआ।

अत: इन विभिन्न प्राणियों के हृदय की संरचना का अध्ययन करने पर पता चलता है कि सरल जीवों से जटिल जीवों की उत्पत्ति हुई है तथा यही जैविक विकास का प्रमाण है।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 9.
प्राकृतिक चुनाववाद का प्रतिपादन किसने किया? इसके सिद्धान्त के अनुसार अस्तित्व संघर्ष का वर्णन करो।
उत्तर :
प्राकृतिक चुनाववाद का प्रतिपादन चार्ल्स डार्विन ने किया था। चार्ल्स डार्विन के अनुसार जीवों में प्रजनन की प्रचूर क्षमता होती है, जिसके कारण जीवों की संख्या रेखा गणित के नियम से बढ़ती है। परन्तु इस बढ़ी हुई संख्या के लिए आवश्यक अधिक से अधिक अनाज, निवास स्थान तथा जीवन की अन्य सुविधाएँ अंक गणित के नियम से बढ़ती हैं। इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आपस में संघर्ष होता रहता है जो अस्तित्व संघर्ष कहलाता है। यह संघर्ष तीन प्रकार का होता है –
(क) अन्तःजातीय संघर्ष (Intra specific struggle) : अपनी रक्षा के लिए जब संघर्ष एक ही जाति के जीवों के बीच होता है, तो इसे अन्तःजातीय संघर्ष कहते हैं। जैसे- मनुष्य तथा मनुष्य के बीच संघर्ष ।

(ख) अन्तरजातीय संघर्ष (Inter specific struggle) : जब दो विभिन्न जातियों के बीच अपनी रक्षा के लिए संघर्ष होता है, तो इसे अन्तरजातीय संघर्ष कहते हैं। जैसे- कुत्ता तथा बिल्ली के बीच का संघर्ष।

(ग) वातावरण संघर्ष (Environmental struggle) : प्राकृतिक कारक जैसे- बाढ़, भूकम्प, सूखा, तूफान, हिमपात, अनावृष्टि, अतिवृष्टि आदि प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए प्राणियों को संघर्ष करना पड़ता है। यह संघर्ष वातावरणीय संघर्ष कहलाता है।

प्रश्न 10.
जन्तु समुदाय के क्रम-विकास के संबंध में एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करो।
उत्तर :
क्रम विकास के प्रथम चरण में एक कोशिकीय प्राणी अमीबा (मोटोजोआ) का विकास हुआ। इस एक कोशिकीय प्राणी से सरल बहु-कोशिकीय प्राणी पोरिफेरा संघ अर्थात स्यंज का गठन हुआ। फिर पोरिफेरा संघ से सोलेन्ट्रो संघ अर्थात हाइड्रा का गठन हुआ। इनका शरीर ऊत्तक तन्त्रयुक्त द्विस्तरीय तथा एक नलीयुक्त होता है।

द्विस्तरीय प्राणियों से तीन स्तरीय प्राणियों का विकास हुआ। तीन स्तरीय प्राणी दो समुदाय में विभक्त हुए। इनमें एक समुदाय सीलियाविहीन तथा दूसरा सीलिया युक्त हुआ। सीलिया युक्त प्राणियों से पहले एनिलिडा संघ अर्थात केंचुआ, जोंक आदि का गठन हुआ। एनिलिडा प्राणियों से क्रमश: अर्थोपोडा संघ जैसे- तिलचट्टा, चिंगड़ी, कीट आदि का गठन हुआ।

अर्थोपोडा संघ से मौलुस्का संघ जैसे- घोंघा, सीप आदि का विकास हुआ। मौलुस्का संघ के बाद एकिनोडरमाटा संघ जैसेतारामछली की उत्पत्ति हुई। ये सभी अमेरुदण्डी प्राणी हैं। इसके बाद मेरुदण्डीय प्राणियों का विकास हुआ। मेरुदण्डी प्राणी से प्रथम मत्स्य श्रेणी के प्राणी उत्पन्न हुए। मत्स्य श्रेणी से उभयचर वर्ग के प्राणियों जैसे- मेढक, टोड आदि की उत्पत्ति हुई। उभयचर वर्ग से सरीसृप वर्ग जैसे- साँप, गिरगिट, छिपकली, घड़ियाल आदि का विकास हुआ। सरीसृप वर्ग से पक्षियाँ जैसे कबूतर, तोता तथा स्तनधारी जैसे- बन्दर, मनुष्य तथा अन्य चौपाया जन्तुओं का विकास हुआ।

WBBSE Class 10 Life Science Solutions Chapter 4A क्रम विकास

प्रश्न 11.
डार्विन सिद्धान्त की त्रुटियों (Demerits) का उल्लेख करो।
उत्तर :
डार्विनवाद के प्रति उठायी गयी आपत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
i. यह वाद विभिन्नताओं के बारे में बताता तो है परन्तु ये विभिन्नतायें किस प्रकार उत्पन्न होती है इसका स्पष्टीकरण नहीं कर पाता है।

ii. इस वाद के अनुसार प्राकृतिक चुनाव सूक्ष्म विभिन्नताओं पर ही आधारित है परन्तु इन सूक्ष्म विभिन्नताओं का जीवन संघर्ष में सहायक होना एक संदिग्ध बात है।

iii. इस वाद के अनुसार सूक्ष्म विभिन्नताएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी विकसित होती रहती है परन्तु इस प्रकार किन्हीं संतानों में आवश्यकता से अधिक विशिष्टता आ जाने से उनका लोप हो सकता है।
उदाहरण – आयरलेंड के बारसिंहों में उपस्थित सींग पीढ़ी-दर-पीढ़ी विकसित होकर पूरी जाति के विनाश का कारण बन गयी, क्योंकि शत्रुओं के भय से जंगल में भागते समय ये विशाल सिंगे झाड़ियों में उलझ कर उन्हें जमीन पर गिरा देती थी और वे धीरे-धीरे मारे जाते रहे।

iv. यह वाद सोमैटिक तथा जर्मिनल विभिन्नताओं के स्पष्टीकरण विषय पर मौन है। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता कि प्राकृतिकवरण ही क्रम विकास का एकमात्र साधन नहीं है।

प्रश्न 12.
लेमार्कवाद की आलोचना तथा अनुमोदन के बारे में लिखो।
उत्तर :
आलोचना (Criticism) : वैज्ञानिकों ने कई तरों द्वारा लेमार्कवाद पर बहुत ही आपत्ति उठाई। इसका कहना था कि यदि उपार्जित लक्षणों की वंशागति होती है तो एक डाक्टर का लड़का डाक्टर, एक विद्वान लड़का प्रोफेसर का प्रोफेसर, एक पहलवान का लड़का पहलवान होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता है। जर्मन वैज्ञानिक विजमैन ने 80 पीढ़ियों तक चूहों की पूँछ काटी फिर भी कटी पूँछ वाले चूहे की सन्तानों में पूँछ एक आवश्यक लक्षण के रूप में प्रकट होती गयी। इससे स्पष्ट है कि वातावरण के प्रभाव से उत्पन्न हुए उपार्जित लक्षण सन्तानों में नहीं पहुँच सकते, अर्थात उपार्जित लक्षण वशागत नहीं होते। विजमैन के अनुसार जीवों की दैहिक कोशिकाओं में उपार्जित लक्षण की वंशागति नहीं होती। केवल वे ही लक्षण अगली पीढ़ी तक पहुँच सकते हैं जो जीव के जनन द्रव्य में होते हैं। इसी पर आधारित जनन द्रव्य की निरन्तरता का सिद्धान्त प्रतिपादन किया।

परन्तु कुछ वैज्ञानिकों जैसे मूलर (Mullar) तथा दूसरे वैज्ञानिकों ने अपने महत्वपूर्ण प्रयोगों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि X-rays, कास्मिक रेज आदि भौतिक एवं रासायनिक शक्तियाँ जीन्स (genes) में परिवर्तन ला सकती है। फलस्वरूप सन्तान में असाधारण लक्षण उत्पत्न हो सकते हैं। अर्थात् वातावरण में परिवर्तन का प्रभाव युग्मक कोशिकाओं (gametes) के क्रोमोसोम्स ही अगली पीढ़ी की सन्तानों में स्थानान्तरित हो सकते हैं।

इस प्रकार लेमार्कवाद को वर्तमान वैज्ञानिक परिप्रेक्य में उनके मूल सिद्धान्त में जो सुधार होना चाहिए उसे करके नये रूप में प्रतिपादित किया गया, उसे नव लेमार्कवाद (Neo-Lamarckism) कहते हैं।

Leave a Comment