WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

Well structured WBBSE 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता can serve as a valuable review tool before exams.

जीवन एवं उसकी विविधता Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
कार्बनिक अणुओं एवं समुद्री जल के घोल को किस वैज्ञानिक ने कार्बनिक रस (Organic soup) कहा था ?
(a) जे.बी.एस. हाल्डेन
(b) ए. आई. ओपैरीन
(c) स्टैनली मिलर
(d) सिडनी डब्ल्यू० फॉक्स
उत्तर :
(a) जे.बी.एस. हाल्डेन

प्रश्न 2.
जीव द्रव्य पाया जाता है :
(a) सजीवों में
(b) निर्जीवों में
(c) दोनों में
(d) इनमें से किसी में भी नहीं
उत्तर :
(a) सजीवों में।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 3.
जीवों को पाँच जगतों में विभक्त किया –
(a) ह्रिटेकर ने
(b) अरस्तू ने
(c) कार्ल बोस ने
(d) लिने ने
उत्तर :
(a) ह्निटेकर ने

प्रश्न 4.
किसने जीव विज्ञान शब्द की रचना की ?
(a) लेमार्क
(b) डार्विन
(c) ओपैरिन
(d) कुवियर
उत्तर :
(a) लेमार्क।

प्रश्न 5.
सजीवों की रचनात्मक क्रियाएँ हैं :
(a) उपापचय
(b) उद्दीपन
(c) उत्सर्जन
(d) प्रचलन
उत्तर :
(b) उद्दीपन।

प्रश्न 6.
वर्गीकरण की मूलभूत इकाई है :
(a) जगत
(b) प्रजाति
(c) परिवार
(d) ऑर्डर
उत्तर :
(b) प्रजाति।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 7.
प्राणी विज्ञान के जनक कौन हैं ?
(a) हाल्डेन
(b) लेमार्क
(c) कुवियर
(d) डार्विन
उत्तर :
(c) कुवियर।

प्रश्न 8.
प्राणी वायुमण्डल से ग्रहण करते हैं-
(a) कार्बन डाई ऑक्साइड
(b) ऑक्सीजन
(c) नाइट्रोजन
(d) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर :
(b) ऑक्सीजन

प्रश्न 9.
द्विनाम पद्धति के प्रस्तावक कौन हैं :
(a) डार्विन
(b) लेमार्क
(c) लिनियस
(d) ओपैरिन
उत्तर :
(c) लिनियस।

प्रश्न 10.
“फाइलम” शब्द की रचना किसने की ?
(a) लैमार्क
(b) हाल्डेन
(c) लिनियस
(d) कुवियर
उत्तर :
(d) कुवियर

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 11.
‘द ओरीजन ऑफ लाइफ” पुस्तक है –
(a) अरस्तू की
(b) प्लेटो की
(c) ए०आई०ओपैरिन की
(d) थेल्स की
उत्तर :
(c) ए०आई०ओपैरिन की

प्रश्न 12.
यूग्लीना है –
(a) मोनेरा जगत का
(b) प्लांटी का
(c) एनिमेलिया का
(d) प्रोटिस्टा का
उत्तर :
(d) मोटिस्टा का

प्रश्न 13.
किस जन्तु के हद्य में 3 \(\frac{1}{2}\) प्रकोष्ठ होता है?
(a) ब्लेल
(b) रोहू.
(c) मेढ़क
(d) मगरमच्छ
उत्तर :
(d) मगरमच्छ

प्रश्न 14.
पृथ्वी की उत्पत्ति हुई थी –
(a) 3.5 से 4 अरब वर्ष पूर्व
(b) 4.5 से 5 अरब वर्ष पूर्व
(c) 2.5 से 3 अरब वर्ष पूर्व
(d) 5.5 से 6 अरब वर्ष पूर्व
उत्तर :
(b) 4.5 से 5 अरब वर्ष पूर्व

प्रश्न 15.
कवक में नहीं मिलता है –
(a) कवक जाल
(b) तन्तु
(c) क्लोरोफिल
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर :
(d) उपरोक्त सभी

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 16.
‘फिलॉस्फिया बोटैनिका” शब्द की रचना किसने की ?
(a) ओपैरिन
(b) हाल्डेन
(c) कुवियर
(d) लिनियंस
उत्तर :
(d) लिनियस

प्रश्न 17.
कोएसरवेद्स का नामकरण किसने किया –
(a) सिडनी फॉंक्स ने
(b) रिचटर ने
(c) प्रेयर ने
(d) ओपैरिन ने
उत्तर :
(d) ओपैरिन ने

प्रश्न 18.
मशरूम है –
(a) ब्रायोफाइटा
(b) कवक
(c) प्रोटिस्टा
(d) शैवाल
उत्तर :
(d) शैवाल

प्रश्न 19.
किस फाइलम के जन्तुओं का अंग नाल पाद है ?
(a) एनिलिडा का
(b) अर्थोपोडा का
(c) मोलस्का का
(d) इकाइनोडर्मेटा का
उत्तर :
(d) इकाइनोडर्मेटा का।

प्रश्न 20.
माइक्रोस्फीयर का आविष्कार किसने किया –
(a) रिचटर ने
(b) ओपैरिन ने
(c) प्रेयर ने
(d) सिडनी फॉंक्स ने
उत्तर :
(c) प्रेयर ने

प्रश्न 21.
बहुकोशिकीय जीव है –
(a) पैरामेशियम
(b) यूग्लीना
(c) अमीबा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 22.
संधियुक्त भुजाएँ किस फाइलम के प्राणियों में होती हैं ?
(a) मोलस्का
(b) एनिलिडा
(c) सरीसृप
(d) अर्थोपोडा
उत्तर :
(a) अर्थोपोडा।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 23.
प्रारम्भिक जीवों की उत्पत्ति हुई थी –
(a) लगभग 2.7 अरब वर्ष पूर्व
(b) लगभग 4.7 अरब वर्ष पूर्व
(c) लगभग 3.7 अरब वर्ष पूर्व
(d) लगभग 1.7 अरब वर्ष पूर्व
उत्तर :
(d) लगभग 1.7 अरब वर्ष पूर्व

प्रश्न 24.
स्वपोषी तथा परपोषी दोनों प्रकार के पोषण वाला जीव है –
(a) जीवाणु
(b) कवक
(c) शैवाल
(d) गेहूँ
उत्तर :
(a) जीवाणु

प्रश्न 25.
इकोसिस्टम (परितंत्र) शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द ‘ओकिओसिस’ से हुआ, जिसका अर्थ है :
(a) आवास
(b) भोजन
(c) आकार
(d) देहभार
उत्तर :
(a) आवास।

प्रश्न 26.
सजीवों की दर्शरूप विभित्रताओं को सर्वप्रथम किसने ‘उपार्जित लक्षण’ कहा था –
(a) अरस्तू ने
(b) ओपैरिन ने
(c) लैमार्क ने
(d) सिडनी फॉक्स ने
उत्तर :
(c) लैमार्क ने

प्रश्न 27.
पादप जगत का उभयचर कहलाता है :
(a) बैक्टेरिया
(b) टेरिडोफाइटा
(c) कवक
(d) बायोफाइटा
उत्तर :
(d) ब्रायोफाइटा।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से कौन विशेष समूह का सटीक उदाहरण है ?
(a) ह्वेल, चमगादड़, कबूतर-मेरुदण्डी
(b) तारा मछ्छली रोह, कतला-मत्स्य
(c) मशरूम, यीस्ट फर्न-फंगी
(d) स्पंज, युग्लिना, पैरामिशियम-मोटिस्टा
उत्तर :
(a) हेल, चमगादड़, कबूतर-मेरुदण्डी

प्रश्न 29.
‘जीव विज्ञान’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किन वैज्ञानिकों ने किया था –
(a) लैमार्क और ट्रेविरेनस ने
(b) ओपैरिन और फॉक्स ने
(c) रिचटर और प्रेयर ने
(d) इनमें से किसी ने नहीं
उत्तर :
(a) लैमार्क और ट्रेविरेनस ने

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 30.
शीत रक्त वाला प्राणी है :
(a) बिल्ली
(b) कबूतर
(c) बाघ
(d) मेढक
उत्तर :
(d) मेढक

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में कौन द्विपक्षीय वैज्ञानिक नाम का उदाहरण है?
(a) हरा शैवाल
(b) चायना-रोज
(c) राना टिग्रीना
(d) स्नो लेपर्ड
उत्तर :
(c) राना टिमीना

प्रश्न 32.
‘आधुनिक वर्गीकरण का जनक’ कहा जाता है –
(a) ओपैरिन को
(b) लैमार्क को
(c) सिडनी फॉक्स को
(d) लिनियस को
उत्तर :
(d) लिनियस को

प्रश्न 33.
पार्श्वरिखा उपस्थित है –
(a) मछली में
(b) मेढक में
(c) कबूतर में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) मछली में

प्रश्न 34.
किस समूह में ‘नग्नबीजी” पौधों को रखा गया है ?
(a) जिम्नोस्पर्म समूह
(b) बायोफाइटा समूह
(c) टेरिडोफाइटा समूह
उत्तर :
(a) जिम्नोस्पर्म समूह।

प्रश्न 35.
टेक्सोनॉमिक शब्द किस भाषा से लिया गया है –
(a) लैटिन
(b) ग्रीक
(c) अंग्रेजी
(d) जर्मन
उत्तर :
(b) ग्रीक

प्रश्न 36.
स्पंजी अस्थियों वाला प्राणी है –
(a) अजगर
(b) कहुआ
(c) गिरगिट
(d) कबूतर
उत्तर :
(d) कबूतर

प्रश्न 37.
किस समूह के पौधों का बीज फल में के अन्दर स्थित होता है?
(a) ऐन्जिओस्पर्म
(b) हेटरोस्पोरस
(c) गैमिटोफाइट
(d) स्पोरोफाइट
उत्तर :
(a) ऐन्जिओस्पर्म

प्रश्न 38.
पर्णहरिम की उपस्थिति रहती है –
(a) पादप कोशिका
(b) जन्तु कोशिका
(c) जलीय जन्तु
(d) स्थलीय जन्तु
उत्तर :
(a) पादप कोशिका

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 39.
शिरा-हृदय उपस्थित रहता है :
(a) चमगादड़ में
(b) केंचुआ में
(c) मछली में
(d) मेढक में
उत्तर :
(c) मछली में।

प्रश्न 40.
दोनों प्रकार के स्पोर निर्मित करने वाले पौधों को कहा जाता है :
(a) गैमिटोफाइट
(b) स्पोरोफाइट
(c) हेटरोस्पोरस
(d) होमोस्पोरस
उत्तर :
(a) गैमिटोफाइट

प्रश्न 41.
मनुष्य को होमो (HOMO) किस भाषा में कहते हैं ?
(a) लैटिन
(b) ग्रीक
(c) अंग्रेजी
(d) यूनानी
उत्तर :
(a) लैटिन

प्रश्न 42.
हदय में तीन कक्ष हैं –
(a) मनुष्य के
(b) मछली के
(c) मेढक के
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) मेढक के

प्रश्न 43.
किस वर्ग के प्राप्मियों के हुदय में चार प्रकोष्ठ होते हैं ?
(a) मत्स्य वर्ग
(b) उभयचर वर्ग
(c) पक्षी वर्ग
(d) सरीसृप वर्ग
उत्तर :
(c) पक्षी वर्ग।

प्रश्न 44.
संघ आर्थोपोडा की स्थापना किसने की थी –
(a) वान सीवोल्ड
(b) जान विलियम
(c) ग्रोबन
(d) लैमार्क
उत्तर :
(a) वान सीवोल्ड

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 45.
होमोसेपिएन्स वैज्ञानिक नाम है –
(a) चूहे का
(b) चीते का
(c) बिल्ली का
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 46.
किस वर्ग के प्राणियों का अन्तः कंकाल कार्टिलेज का बना होता है ?
(a) पक्षी वर्ग
(b) उभयचर वर्ग
(c) कॉण्ड्रिक्वायथस
(d) आंस्ट्रिक्थाइस
उत्तर :
(c) कोण्ड्रिक्षायथस।

प्रश्न 47.
किस वर्ग के प्राणियों की पूँछ आवास निर्माण, पोषण एवं प्रचलन में सहायक होती है ?
(a) सरीस्ष
(b) थैलिएसी
(c) लार्वेसी
(d) उभयचर
उत्तर :
(c) लार्वेसी।

प्रश्न 48.
बिना जबड़ा वाले प्राणियों को किस उत्तम वर्ग में रखा गया है ?
(a) टिनोफोरा वर्ग में
(b) सोलेन्ट्रेटा वर्ग में
(c) इकाइनोर्डेटा वर्ग में
(d) एग्नैथा वर्ग में
उत्तर :
(d) एगैैा वर्ग में।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 49.
जीव विज्ञान की किस शाखा द्वारा सजीवों का वर्गीकरण और नामकरण का अध्ययन किया जाता है ?
(a) प्राणी विज्ञान
(b) शूण विज्ञान
(c) आकारिकी
(d) वार्गिकी
उत्तर :
(d) वार्गिकी।

प्रश्न 50.
फर्न किस वर्ग में आता है ?
(a) टेरिडोफाइटा वर्ग में
(b) जिम्नोस्पर्म वर्ग में
(c) थैलोफाइटा वर्ग में
(d) ब्रायोफाइटा वर्ग में
उत्तर :
(a) टेरिडोफाइटा वर्ग में।

प्रश्न 51.
मछलियों का श्वसन अंग कौन सा है :
(a) ट्रेकिया
(b) गिल्स
(c) फेफड़ा
(d) बुक लंग
उत्तर :
(b) गिल्स।

प्रश्न 52.
किस संघ में समुद्री खीरा पाया जाता है ?
(a) प्रोटोजोआ
(b) इकाइनोडर्मेटा
(c) अर्थोपोडा
(d) एनिलिडा
उत्तर :
(c) इकाइनोडर्मेटा।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 53.
निम्नलिखित में कौन द्विपक्षीय वैज्ञानिक नाम का उदाहरण है ?
(a) मैग्नीफेरा इन्डिका
(b) बकोमेलानोस्टिक्टस
(c) रानाटिग्रीना
(d) पेरिप्लानेटा अमेरिकाना
उत्तर :
(a) रानाटिग्रीना।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. पृथ्वी की रचना के लगभग __________वर्ष बाद जीवन की उत्पति हुई थी।
उत्तर : एक बिलियन

2. जीवद्रव्य की परिवर्तनशील दशा को __________कहते हैं।
उत्तर : जीवन

3. टैक्सोनॉमी शब्द का प्रयोग __________ने किया।
उत्तर : कान्डॉल (Candoli)

4. ‘माइक्रोस्फियर मॉडल”‘ का प्रतिपादन__________ ने किया था।
उत्तर : सिडनी डब्लू-फॉक्स (Sydney w. fox)

5. सभी __________एक निश्चित जीवन चक्र का अनुसरण करते हैं।
उत्तर : सजीव।

6. मगरमच्छ जन्तु है __________वर्ग का।
उत्तर : सरीसृप।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

7. किसी जीवधारी में उपस्थित कुल जीनों की संख्या को __________कहते हैं।
उत्तर : जीन पूल।

8. पादप वायुमण्डल से __________लेते हैं।
उत्तर : कार्बन डाई-ऑक्साइड।

9. लाइकेन__________ का उदाहरण है।
उत्तर : कवक और शैवाल।

10. “हिस्टोरिया एनिमैलियम” नामक पुस्तक वैज्ञानिक __________की रचना है।
उत्तर : अरस्तू (Aristotle)

11. श्वसन क्रिया एक__________ क्रिया है।
उत्तर : अपचयी।

12. मनुष्य के हदय में कक्षों की संख्या __________है।
उत्तर : चार।

13. रीढ़ की अस्थि वाले प्राणियों को __________समूह में रखा गया है।
उत्तर : मेरुद्डी।

14. जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1802 ई० में लैमार्क तथा __________नामक वैज्ञानिकों ने किया था।
उत्तर : ट्रेविरेनस।

15. __________को जीवित जीवाश्म माना जाता है।
उत्तर : सिलकान्थ मछली।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

16. __________प्राणी में मुँह नहीं होता किन्तु जल प्रवेश करने के लिए अनेक छिद्र होते हैं।
उत्तर : स्संज (Sponge)

17. पृथ्वी पर लगभग __________प्रजातियाँ हैं।
उत्तर : 30 मिलियन।

18. मूंगा का निर्माण __________संघ के जन्तुओं द्वारा होता है।
उत्तर : निर्णय।

19. __________फाइलम के प्राणियों का शरीर अखण्डित तथा कैल्शियम के बने कवच के अन्दर स्थिर रहता है।
उत्तर : मोलस्का (Mollusca)

20. कोएसरवेद्स की खोज __________ने की धी।
उत्तर : ओपेरिन।

21. तारामछली __________संघ का जन्तु है।
उत्तर : इकाइनोडमेटा।

22. छोटे, चपटे एवं अखण्डित शरीर वाले प्राणियों को फाइलम __________में रखा गया है।
उत्तर : ऐस्केल्मिन्थिस (Aschelminthes)

23. पृथ्वी पर प्रारंभिक जीवों की उत्पत्ति __________वर्ष पूर्व हुई थी।
उत्तर : 3.7 अरब।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

24. मछलियों में त्वचा __________से बँकी होती है।
उत्तर : शल्क।

25. मछलियों के हुदय में __________प्रकोष्ठ होते हैं।
उत्तर : दो (Two)

26. जीव विज्ञान की जिस शाखा में जीवों के नामकरण एवं वर्गीकरण का अध्ययन करते हैं उसे __________कहते हैं।
उत्तर : टेक्सोनॉमी।

27. __________अण्डे देने वाले स्तनघारी हैं।
उत्तर : एकिडना, बत्तख, चोचा।

28. भुजा रहित सरीसुप का उदाहरण __________है।
उत्तर : साँप (Snake)

29. द्विपद नाम पद्धति का उपयोग सर्वप्रथम __________ने किया था।
उत्तर : लिनियस।

30. एजोटोबैक्टर __________जगत का जीव है।
उत्तर : मोनेरा।

31. आ्रायोफाइटा का उदाहरण __________है।
उत्तर : मॉस।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

32. साइकन __________ संघ का जीव है।
उत्तर : पोरिफेरा।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. सजीव तथा निरींव दोनों के अन्दर प्रजनन की क्षमता होती है।
उत्तर : False

2. उपापचय की क्रिया द्वारा सजीव ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

3. उद्दीपन निर्जीवों का पमुख लक्षण होता है।
उत्तर : False

4. पदार्थषाद के सिद्धान्त पर लिखी गई ‘द ओरीजीन आप लाइफ’ ओपैरिन की रचना है।
उत्तर : True

5. जीवों के शरीर में होनेवाली जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन जीव-भौतिकी के अन्दर किया जाता है ?
उत्तर : False

6. आणविक स्तर पर जीवों के रसायनों का अध्ययन अन्तरिक्ष जीवविज़ान में किया जाता है।
उत्तर : False

7. जन्तुओं में पोषण होलोजोइक होता है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

8. लाइकोपोडियम टेरिडोफाइटा वर्ग का पादप है।
उत्तर : True

9. आनुवांशिकता और वातावरण विभिनता के मुख्य कारक हैं।
उत्तर : True

10. गेहूँ एंजियोस्पर्म वर्ग का पादप है।
उत्तर : True

11. यूप्लेक्टैला सीलेन्ट्रेटा संघ का जन्तु है।
उत्तर : False

12. ऐस्केरिस एनीलिडा संष का जन्तु है।
उत्तर : False

13. झींगा मछली मोलस्का वर्ग का जन्तु है।
उत्तर : False

14. कछुआ सरीसृप वर्ग का जन्तु है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

15. ह्लेल स्तनपायी वर्ग का जन्तु है।
उत्तर : True

16. टोड सरीसृप वर्ग का प्राणी है।
उत्तर : False

17. मगर स्तनधारी वर्ग का प्राणी है।
उत्तर : False

18. दो युग्मकों के मिलने की विधि को लैंगिक प्रजनन कहते हैं।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

19. जीवित कोशिकाओं के अंदर होने वाली समस्त रासायनिक क्रियाओं को उपचय कहते हैं।
उत्तर : False

20. किसी उद्दीपन के प्रति सचेष्ट होने की क्षमता को उत्तेजनशीलता कहते हैं।
उत्तर : True

21. भोजन को अपने मुख में रखने की विधि को पोषण कहते हैं।
उत्तर : False

22. सभी इन्जाइम्स रासायनिक रूप में वसा हैं।
उत्तर : False

23. वृद्धि एक उत्क्रमणीय परिवर्तन है।
उत्तर : False

24. निर्जीव का एक निश्चित जीवन-चक्र है।
उत्तर : False

25. जीवन द्रव्य का निर्माण प्रयोगशाला में किया जा सकता है।
उत्तर : False

26. सभी सजीवों के शरीर का निर्माण कोशिंका से होता है।
उत्तर : True

27. श्वसन क्रिया के समय भोज्य-पदार्थ का अवकरण होता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

28. यूरिया एक उत्सर्जी पदार्थ है।
उत्तर : True

29. प्रथम सजीव की उत्पत्ति लगभग 3.7 बिलियन वर्ष पहले हुई।
उत्तर : True

30. प्रथम सजीव के उत्पन्न होने का स्थान समुद्र का जल है।.
उत्तर : True

31. वसा के अणुओं का निर्माण जीवन के उद्भव की एक विशिष्ट एवं महत्त्वपूर्ण घटना थी।
उत्तर : False

32. प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्लों के संयोग से जटिल न्यूक्लियो प्रोटीन यौगिक बने।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

33. प्रोटीन के अणुओं पर विद्युत आवेश होता है।
उत्तर : True

34. ‘कोएसरवेट’ नाम का प्रतिपादन ओपैरिन ने किया।
उत्तर : True

35. कोएसरवेट जल में विलेय होते हैं।
उत्तर : False

36. प्रथम आद्य कोशिकाओं का उद्भव 3.9 खरब वर्ष से 2.5 खरब वर्ष पूर्व माना जाता है।
उत्तर : True

37. वर्तमान समय में सजीवों की 30 मिलियन जातियाँ हैं।.
उत्तर : True

38. जीव विज्ञान में पौधों का अध्ययन होता है।
उत्तर : True

स्तम्भ (क) के शब्दों से स्तम्भ (ख) में दिये गये उपयुक्त शब्दों से मिलाइये तथा सही जोड़ा दोनों स्तम्भों की क्रमसंख्या के साथ लिखिए : (1 MARK)

प्रश्न 1.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(a) मोलस्का (i) प्रारम्भिक स्तनपायी
(b) उभयचर (ii) पंखना
(c) प्रोटोथेरिया (iii) तीन कक्षीय हृदय
(d) मोनेरा (iv) मैटल
(e) मछली (v) प्रोकैरियोटिक कोशिकायें

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(a) मोलस्का (iv) मैटल
(b) उभयचर (iii) तीन कक्षीय हृदय
(c) प्रोटोथेरिया (i) प्रारम्भिक स्तनपायी
(d) मोनेरा (iv) मैटल
(e) मछली (ii) पंखना

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions Chapter 1 जीवन एवं उसकी विविधता

प्रश्न 2.

स्तष्भ (क) स्तम्भ (ख)
(a) एनिलिडा (i) टोड
(b) पोरिफेरा (ii) छिपकली
(c) मोलस्का (iii) केंचुआ
(d) सरीसृप (iv) स्पंज
(e) उभयचर (v) पाइला

उत्तर :

स्तष्भ (क) स्तम्भ (ख)
(a) एनिलिडा (iii) केंचुआ
(b) पोरिफेरा (iv) स्पंज
(c) मोलस्का (v) पाइला
(d) सरीसृप (ii) छिपकली
(e) उभयचर (i) टोड

प्रश्न 3.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(a) पोरीफेरा संघ का प्राणी है। (i) उत्तेजनशीलता
(b) आर्थोपोडा संघ का प्राणी है। (ii) साइकन
(c) वातावरण के प्रभाव को प्रदर्शित करना (iii) सरीसृप वर्ग का
(d) मगर एक प्राणी है (iv) प्रजनन
(e) जीवन का एक लक्षण है (v) केकड़ा

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(a) पोरीफेरा संघ का प्राणी है। (ii) साइकन
(b) आर्थोपोडा संघ का प्राणी है। (v) केकड़ा
(c) वातावरण के प्रभाव को प्रदर्शित करना (i) उत्तेजनशीलता
(d) मगर एक प्राणी है (iv) प्रजनन
(e) जीवन का एक लक्षण है (iii) सरीसृप वर्ग का

 

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 History Book Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 History Chapter 2 Question Answer – क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
आस्ट्रिया ने नेपोलियन के साथ कैम्पोफोर्मिया की संधि कब की ?
उत्तर :
1797 ई० में।

प्रश्न 2.
नेपोलियन कोड किस वर्ष सम्पूर्ण फ्रांस में लागू कर दिया गया ?
उत्तर :
1804 ई० में।

प्रश्न 3.
कौम्पो कॉर्निया की सन्धि क्या है ?
उत्तर :
लोम्बार्डी पर फ्रांस का अधिकार एवं आस्ट्रिया द्वारा फ्रांस को बेल्जियम प्रदान करना।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 4.
अमीन्स की संधि किसके-किसके बीच हुई थी ?
उत्तर :
अमीन्स की संधि फ्रांस और इंग्लैण्ड के बीच 1802 ई० में हुई।

प्रश्न 5.
नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म स्थल कहाँ था?
उत्तर :
नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म स्थल फ्रांस में स्थित कोर्सिका द्वीप के अजाचियो है ।

प्रश्न 6.
शुरुआती दौर में नेपोलियन फ्रांस के किस दल का सदस्य था?
उत्तर :
जैकोबिन दल का ।

प्रश्न 7.
‘सिविल मैरेज” का नियम क्या था ?
उत्तर :
“सिविल मैरेज” के नियम का तात्पर्य फ्रांस में शादी के समय वर-वधू द्वारा नेपोलियन की संहिता की धाराओं के अनुसार शपथ लेनी होती है।

प्रश्न 8.
नेपोलियन ने प्रशा को किस वर्ष पराजित किया ?
उत्तर :
1806 ई० में।

प्रश्न 9.
नेपोलियन किस द्वीप पर जन्मा था?
उत्तर :
फ्रांस में स्थित कोर्सिका द्वीप में।

प्रश्न 10.
नेपोलियन ने किससे पहले विवाह किया था?
उत्तर :
जोसेफिन से।

प्रश्न 11.
नेपोलियन कब फ्रांस के कॉन्सल के पद पर आजीवन के लिए चुना गया?
उत्तर :
1802 ई० में ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 12.
फ्रांस राज्य क्रांति के बाद किसने फ्रांस के लिए विधि-संहिता का निर्माण किया?
उत्तर :
नेयोलियन ने ।

प्रश्न 13.
‘बर्लिन आदेश’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
नेपोलियन द्वारा ब्रिटिश द्वीप समूह तथा अंग्रेजी उपनिवेशों की घेराबन्दी को नवम्बर 1806 ई० की बर्लिन आदेश के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 14.
नेपोलियन फ्रांस की सेना में सब-लेफ्टिनेंट के पद पर कब नियुक्त हुए और उस समय उनकी उप्र क्या थी?
उत्तर :
1789 ई० में। उस समय उनकी उम्र 19 वर्ष थी।

प्रश्न 15.
‘मैं ही क्रान्ति हूँ” इस कथन की व्याख्या स्पष्ट करें?
उत्तर :
नेपोलियन के इस कथन का अभिप्राय है कि मैं ही क्रान्ति का प्रतिक हूँ ।

प्रश्न 16.
पवित्र संघ की स्थापना किसने की थी?
उत्तर :
पवित्र संघ की स्थापना रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशा के राजाओं ने मिलकर की थी।

प्रश्न 17.
कानून संहिता का निर्माण किसने किया था ?
उत्तर :
नेपोलियन ने किया था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 18.
ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशा ने मिलकर एक संधि की उसका नाम क्या था ?
उत्तर :
शोमेण्ट की संधि!

प्रश्न 19.
‘आर्डर-इन-कौसिल’ क्या था?
उत्तर :
इग्लैण्ड द्वारा फ्रांस से व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त करने का आदेश पत्र था ।

प्रश्न 20.
कब और किस युद्ध में नेपोलियन बुरी तरह पराजित हुआ ?
उत्तर :
1815 ई० के 18 जून को वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन बुरी तरह पराजित हुआ।

प्रश्न 21.
नेपोलियन कब और कहाँ पैदा हुआ था ?
उत्तर :
15 अगस्त 1769 ई० में भूमध्यसागर के कार्सिका द्वीप में नेपोलियन का जन्म हुआ था।

प्रश्न 22.
ट्राफलगर का युद्ध कब और किनके बीच हुआ था ?
उत्तर :
ट्राफलगर का युद्ध 1805 ई० (21 अक्टूबर) में फ्रांस एवं इंग्लेण्ड के बीच हुआ था।

प्रश्न 23.
टिलसिट की सन्धि कब और किसके बीच हुई थी ?
उत्तर :
1807 ई० में फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन एवं रूस के जार प्रथम अलेक्जेण्डर के बीच टिलंसिट की सन्धि हुई थी।

प्रश्न 24.
फ्रांस में किसे “द्वितीय जस्टीनियन”‘ की उपाधि मिली थी?
उत्तर :
नेपोलियन।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 25.
फ्रांस का कौन शासन अपने को क्रान्ति का पुत्र कहता था?
उत्तर :
नेपोलियन।

प्रश्न 26.
नेपोलियन कब फ्रांस का सम्राट बना था?
उत्तर :
मार्च 1804 ई० में नेपोलियन फ्रांस का सम्माट बना।

प्रश्न 27.
नेपोलियन ने स्पेन जीत कर किसको राजा बनाया था?
उत्तर :
नेपोलियन ने अपने भाई जोजफ को स्पेन का राजा बनाया था।

प्रश्न 28.
नेपोलियन ने हालैण्ड जीत कर किसको राजा बनाया था ?
उत्तर :
अपने छोटे भाई लुई बोनापार्ट को।

प्रश्न 29.
1795 ई० में नेपोलियन ने किस प्रान्त को फ्रांस में मिला लिया था?
उत्तर :
रनिश प्रान्त को।

प्रश्न 30.
एस्टेट किसे कहा जाता था ?
उत्तर :
फ्रांस के सामाजिक, वर्ग विभाजन को एस्टेट कहा जाता था।

प्रश्न 31.
फ्रांस की कान्ति में मानवाधिकार की घोषणा कब की गई थी ?
उत्तर :
26 अगस्त, 1789 ई०

प्रश्न 32.
“मैं ही राज्य हूँ और मेरे शब्द ही कानून है ।” – यह किसकी उक्ति है ?
उत्तर :
लुई 16 वाँ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 33.
किसने ‘लिजियन ऑफ ऑनर’ पुरस्कार देने की प्रथा चालू की थी ?
उत्तर :
नेपोलियन बोनापार्ट ने ‘लिजियन ऑफ ऑनर’ पुरस्कार प्रदान करने की प्रथा चालू की।

प्रश्न 34.
‘मैं ही क्रांति हूँ और मैने ही क्रांति को ध्वंस किया है।’ – यह कथन किसका है ?
उत्तर :
यह कथन नेपोलियन बोनापार्ट का है।

प्रश्न 35.
कब और किन्हें लेकर फ्रांस-विरोधी द्वितीय गुट तैयार हुआ था ?
उत्तर :
1799 ई० के 12 मार्च को इंग्लैण्ड, रूस, ऑस्ट्रिया, नेपल्स, पुर्तगाल एवं तुर्की को लेकर फ्रांस-विरोधी द्वितीय गुट बना था।

प्रश्न 36.
मारेंग्पा का युद्ध कब और किनके बीच हुआ था ?
उत्तर :
1800 ई० में मारेंग्पा का युद्ध फ्रांस और ऑस्ट्रिया के बीच हुआ था।

प्रश्न 37.
होहेनलिण्डेन का युद्ध कब और किनके बीच हुआ था ?
उत्तर :
1800 ई० में फ्रांस और ऑस्ट्रिया के बीच होहेनलिण्डेन का युद्ध हुआ था।

प्रश्न 38.
कब और किनके बीच लुनविल की सन्धि हुई थी ?
उत्तर :
1801 ई० में फ्रांस एवं ऑस्ट्रिया के बीच लुनविल की सन्धि हुई थी।

प्रश्न 39.
किसने कब और कहाँ नेपोलियन का अभिषेक संपन्न कराया ?
उत्तर :
पोप सप्तम पायस ने 1804 ई० के 2 दिसम्बर को नतोरदम गिरजाघर में नेपोलियन का अभिषेक सम्पन्न किया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 40.
नेपोलियन का श्रेष्ठ सेनापति कौन था ?
उत्तर :
नेपोलियन का श्रेष्ठ सेनापति मेसेना था।

प्रश्न 41.
किसने और कब ‘कोड नेपोलियन’ का प्रवर्तन किया?
उत्तर :
फ्रांस के सम्माट नेपोलियन ने, 1804 ई० में ‘कोड नेपोलियन’ का प्रवर्तन किया।

प्रश्न 42.
किस पुस्तक को ‘फ्रांसीसी समाज का बाईबिल’ कहा जाता है ?
उत्तर :
नेपोलियन के आचार-संहिता को ‘फ्रांसीसी समाज का बाईबिल’ कहा जाता है।

प्रश्न 43.
किसे और क्यों ‘द्वितीय जस्टिनियन’ कहा जाता है ?
उत्तर :
फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन के ‘कोड नेपोलियन’ के नाम से आचार-संहिता की रचना के लिये उसे द्वितीय जस्टिनियन कहा जाता है।

प्रश्न 44.
कब और किनके द्वारा फ्रांस विरोधी तृतीय गुट बना ?
उत्तर :
1805 ई० में इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रिया, रूस एवं स्वीडेन के सहयोग से फ्रांस-विरोधी तृतीय गुट तैयार हुआ।

प्रश्न 45.
ऊल्म की लड़ाई कब और किनके बीच हुई थी ?
उत्तर :
1805 ई० में फ्रांस एवं ऑस्ट्रिया के बीच ऊल्म का युद्ध हुआ था।

प्रश्न 46.
लाइपजिंग की लड़ाई कब और किनके बीच हुई थी ?
उत्तर :
1813 ई० में फ्रांस एवं चतुर्थ गुट के बीच लिपजिंग की लड़ाई हुई थी।

प्रश्न 47.
कब और किनके बीच अस्टरलित्से का युद्ध हुआ था ?
उत्तर :
1805 ई० में फ्रांस एवं ऑस्ट्रो-रूस संयुक्त वाहिनी के बीच अस्टरलित्से का युद्ध हुआ था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 48.
कौन और कब प्रेसवा की सन्धि के लिये बाध्य हुआ ?
उत्तर :
अस्टरलित्से के युद्ध में अस्ट्रो-रूस वाहिनी फ्रांस से पराजित होकर, आस्ट्रिया में फ्रांस के साथ सन्धि करने के लिये (प्रेसवा) बाध्य हुआ।

प्रश्न 49.
कौन और कब स्कलब्रान की सन्धि करने के लिये बाध्य हुआ था ?
उत्तर :
जेना एवं वारस्टेट के युद्ध में फ्रांस से पराजित होकर प्रशिया 1806 ई० में स्कलब्रान की सन्धि के लिए बाध्य हुआ था।

प्रश्न 50.
नेपोलियन यूरोप के किन दो देशों के पुनर्गठन के लिये महत्वपूर्ण भूमिका का पालन किया ?
उत्तर :
जर्मनी एवं इटली – इन दो देशों के पुनर्गठन में नेपोलियन की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
नील नदी का युद्ध किसके बीच और कब हुआ ? उसमें कौन पराजित हुआ ?
उत्तर :
नील नदी का युद्ध अंग्रेजी सेनापति नेल्सन और नेपोलियन बोनापार्ट के बीच हुआ था। इस युद्ध में नेपोलियन पराजित हुआ।

प्रश्न 2.
नेपोलयन की पादरियों पर से पोप के नियंत्रण को समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख व्यवस्थाएँ क्या थीं ?
उत्तर :
समझौते के अनुसार निर्णय लिए गये –

  1. पोप ने चर्च की जब्त की गयी सम्पत्ति तथा भूमि पर से अपना अधिकार त्याग दिया।
  2. शिक्षा संस्थाओं पर राज्य का नियन्त्रण स्वीकार किया गया।
  3. राज्य की आज़ा के बिना कोई पादरी देश से बाहर आ-ज़ा नहीं सकता था।

प्रश्न 3.
नेपोलियन के रूसी अभियान का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर :
14 अक्टूबर, 1806 ई० को प्रशिया को पराजित करने के पश्चात् नेपोलियन ने रूस पर आक्रमण कर दिया। ईलों के युद्ध में दोनों पक्षों के बीच घमासान युद्ध हुआ परन्तु युद्ध परिणामहीन रहा। इसके बाद फ्रीडलैण्ड के युद्ध में रूस पराजित हुआ। टिलसिट की संधि में नेपोलियन ने रूस को अपना मित्र बना लिया।

प्रश्न 4.
विधि संहिता में बुर्जुआ वर्ग के अधिकार की चर्चा करें।
उत्तर :
नेपोलियन की विधि संहिता ने बुर्जुआ वर्ग के हितों की रक्षा पर ज्यादा जोर दिया। भूमि-सम्बन्धी अधिकारों को और मजबूत बनाया गया और व्यक्तिगत सम्पत्ति की रक्षा के लिए भी कई कानून बनाए गए। ट्रेड यूनियन बनाना कानूनी अपराध माना गया। मुकदमे की स्थिति में मजदूरी की दलीलों के बदले मालिकों की बातों को न्यायालयों को मानने को कहा गया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 5.
प्रथम कन्सुल के रूप में नेपोलियन की क्या क्षमता थी ?
उत्तर :
प्रथम कन्सुल के रूप में नेपोलियन के पास पर्याप्त क्षमता थी। उनके नियंत्रण में सैन्यवाहिनी एवं प्रशासन के कर्मचारी, मंत्री, राष्ट्रदूत सबकी नियुक्ति, कानून बनाना, युद्ध की घोषणा, शान्ति स्थापना आदि था।

प्रश्न 6.
एल्बाद्वीप क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
उत्नीस मील लम्बा और छः मील चौड़ा एल्बा द्वीप टस्कनी तट पर स्थित है। इसी टापू पर 21 मई, 1814 ई० से तकरीबन 10 महीने तक मार्च 1815 ई० तक नेपोलियन ने अपना निर्वासित जीवन व्यतीत किया था। लिपजिंग की रणभूमि में नेपोलियन को मित्रराष्ट्रों की सेनाओं से भयकर भार मिला और उसे फॉउण्टेनब्लू की संधि करनी पड़ी उसी संधि के अनुसार ढाई करोड़ फ्रैंक की पेंशन तथा सम्राट के पद के साथ एल्बा नामक टापू दे दिया गया था।

प्रश्न 7.
फोन्टेनबल्यू की संधि किन देशों के बीच हुई थी?
उत्तर :
फोन्टेनबल्यू की संधि 1814 ई० में नेपोलियन एवं मित्र देशों के बीच हुई थी ।

प्रश्न 8.
स्वतन्त्रता के सिद्धान्त और नेपोलियन के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
लोकतंत्रवाद का स्वाभाविक परिणाम यह हुआ कि फांस में पहली बार नागरिक स्वतंत्रता का उदय हुआ। इस स्वतंत्रता का तात्पर्य था – सम्पत्ति का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, शरीर की स्वतंत्रता तथा वाणी एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे। क्रांति युग में फ्रांस में जो शासन विधान व कानून बना उनमें नागरिक स्वतंत्रता को प्रमुख स्थान दिया गया।

प्रश्न 9.
समानतावाद के सिद्धान्त को क्या नेपोलियन ने अपने शासन में निभाया था ?
उत्तर :
‘नेपोलियन-संहिता’ (Code of Napoleon) में नेपोलियन ने अपनी क्रान्ति के श्रेष्ठ सिद्धान्त और कानून संग्रहीत किये। उसने समानता के सिद्धान्त को मानकर अपने सेवक तथा सेनापति, सबको सामाजिक स्थिति के आधार पर नहीं, वरन् योग्यता के आधार पर चुना। उसने फ्रांसीसी क्रान्ति के प्रभाव को अमरत्व प्रदान किया।

प्रश्न 10.
कोड नेपोलियन क्या है ?
उत्तर :
फ्रांस का शासक नेपोलियन देश के विभिन्न प्रान्तों में प्रचलित कानूनों के अन्तर को दूर कर परस्पर-विरोधी कानूनों में सामंजस्य रखकर 1804 ई० में देश में एक नयी कानून व्यवस्था लागू की। इसे कोड नेपोलियन कहा जाता है।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 11.
पवित्र संघ की विचारधारा क्या थी ?
उत्तर :
यूरोप में शान्ति-व्यवस्था बनाये रखने के लिए सर्वपथम रूस के जार अलेक्जेंडर प्रथम ने यूरोप के महान राष्ट्रों के सामने पवित्र संघ की योजना रखी। यह योजना उसकी धार्मिक प्रवृत्ति से अत्यधिक प्रभावित थी। एक घोषणा द्वारा यूरोप के समस्त राजाओं को बाइबिल में प्रतिपादित भ्रातृत्व की भावनाओं के अनुसार शासन धर्म, न्याय एवं शान्ति की स्थापना तथा आचरण करने के लिए कहा गया। 26 सितम्बर 1815 ई० को इस घोषणा-पत्र पर इंग्लैंड के राजा, तुर्की के सुल्तान और रोम के पोप के अतिरिक्त अन्य यूरोप के सभी आमंत्रित राजाओं ने हस्ताक्षर कर दिये और वे पवित्र संघ के सदस्य हो गये।

प्रश्न 12.
फ्रांस में नेपोलियन के विरुद्ध प्रतिक्रिया के क्या कारण थे ?
उत्तर :
जनता ने 1812 ई० के पश्चात् नेपोलियन पर विश्वास रखना छोड़ दिया था। इसका प्रमुख कारण – नेपोलियन का क्रांति के आदर्शों के विपरीत नीति, वैदेशिक नीति, नेपोलियन की लिपजिंग में पराजय और 1813 ई० की गैर फ्रांसीसी सैनिकों की भर्ती थी। जनता शांति चाहती थी इसलिए जब मित्र राष्ट्रों ने नेपोलियन के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया तब उन्होंने उनके आक्रमणों का विरोध नहीं किया।

प्रश्न 13.
आईबेरियाई जनता नेपोलियन के विरुद्ध क्यों थी ?
उत्तर :
आइबेरिया पुर्तगाल का अंग था तथा यह बिटेन का सबसे पुराना व्यापारिक मित्र था। जब नेपोलियन ने अपने महाद्वीपीय व्यवस्था के माध्यम से इस प्रदेश में अंग्रेजी व्यापार एवं वाणिज्य को रोकने का प्रयास किया तो पुर्तगाली सरकार ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया। इस द्वीप समूंह के लोगों ने नेपोलियन का विरोध किया।

प्रश्न 14.
किसे और क्यों ‘द्वितीय जस्टिनियन’ कहा जाता है ?
उत्तर :
फ्रांसिसी शासक नेपोलियन ने 1804 ई० में कोड नेपोलियन नामक नयी आचार-संहिता की रचना की। तत्कालीन समय में यह कानून व्यवस्था नेपोलियन का श्रेष्ठ सुधार कार्य एवं कीर्ति माना जाता था। इसी कारण उन्हें द्वितीय जस्टिनियन कहा जाता है।

प्रश्न 15.
शामों की संधि की बाते क्या थीं ?
उत्तर :
इंग्लैण्ड, रूस, प्रशा और आस्ट्रिया ने परस्पर सन्धि करके यह निश्चय किया कि नेपोलियन के साथ कोई देश पृथक रूप से संधि नहीं करेगा। सभी मित्र-राष्ट्रों ने नेपोलियन की पराजय को अपना सामूहिक लक्ष्य घोषित किया। प्रत्येक राष्ट्र ने 1.50 लाख सैनिक और इंग्लैण्ड ने 50 लाख पौण्ड युद्ध खर्च देना तय किया।

प्रश्न 16.
अर्डार्स-इन-कौंसिल क्या है ?
उत्तर :
फ्रांस के सम्राट नेपोलियन ने बर्लिन डिकी (1806 ई०) के द्वारा इंग्लैण्ड के विरुद्ध महादेशीय अवरोधों की घोषणा करने पर इंग्लैण्ड भी 1807 ई० में फ्रांस एवं उसके मित्र देशों के विरुद्ध जबावी घोषणा की जिसे ‘अर्डार्स-इन-कौन्सिल के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 17.
स्पेन का आघात क्या है ?
उत्तर :
फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन द्वारा स्पेन का दखल किये जाने पर वहाँ के लोग नेपोलियन के खिलाफ तीव्र मुक्ति संग्राम में कूद पड़े। स्पेन के युद्ध में नेपोलियन की सेना के बुरी तरह हारने के बाद जोसेफ बोनापार्ट को स्पेन छोड़ फ्रांस लौटने को बाध्य होना पड़ा। स्पेन में नेपोलियन के इस पराजय को स्पेनीय आघात के नाम से जाना जाता है।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 18.
महाद्विपीय व्यवस्था किसे कहते हैं?
उत्तर :
महाद्वीपीय व्यवस्था नेपोलियन की एक रणनीति थी। इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य था कि बिटेन और फ्रांस के साथ वाले सभी राज्यों के बीच व्यापार पर प्रतिबंध लगाकर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया ज़ाए, जो काफी हद तक असफल साबित हुआ और नेपोलियन के गिरावट का कारण बना।

प्रश्न 19.
नेपोलियन कब और किसके शासन काल में फ्रांस का महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गया?
उत्तर :
1775 ई० में डॉयरेक्टरी के शासन काल में नेपोलियन फ्रांस का महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गया ।

प्रश्न 20.
नेपोलियन ने यूरोप के सभी देशों के साथ युद्ध लड़ा और विजयी हुआ लेकिन का कौन सा देश था जिसमे उसने लड़ाई नहीं की और क्यों?
उत्तर :
स्वीजरलेण्ड से नेपोलियन कभी लड़ाई नहीं की क्योंकी वह तटस्थ देश था ।

प्रश्न 21.
नेपोलियन की विधि संहिता में किस वर्ग के हितों की रक्षा की गई थी?
उत्तर :
बुर्जुआ वर्ग के हितों की रक्षा की गई थी ।

प्रश्न 22.
किन लड़ाइयों के कारण फ्रांसीसी सेना को नेपोलियन के समय स्पेन छोड़ना पड़ा?
उत्तर :
रूस और जर्मनी दोनों देशों से लड़ाई लड़ने के कारण नेपोलियन की सेना को स्पेन छोड़ना पड़ा ।

प्रश्न 23.
लिपजिंग युद्ध में कौन देश पराजित हुआ और कब ?
उत्तर :
1814 ई० में लिपजिंग युद्ध में फ्रांस पराजित हुआ ।

प्रश्न 24.
विमीयरो के युद्ध में कौन देश पराजित हुआ और कब?
उत्तर :
1806 ई० में फ्रांस देश द्वारा पुर्तगाल पराजित हुआ ।

प्रश्न 25.
टिलसिट संधि कब और किसके-किसके बीच हुई थी?
उत्तर :
टिलसिट की संधि 8 जुलाई 1807 इे० में फ्रिडलैंड के टिलिटिट शहर में फ्रांस के सम्राट नेपोलियन और रूस के सम्राट अलेक्जेंडर के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 26.
मास्को आक्रमण किसने और कब किया ?
उत्तर :
मास्को आक्रमण नेपोलियन ने जून, 1812 ई० में किया ।

प्रश्न 27.
कन्मुलेट शासन क्या है ?
उत्तर :
फ्रांसीसी सेनापति नेपोलियन 1799 ई० ने डाइरक्टरी शासन का अन्त कर 9 नवम्बर 1799 ई० को फ्रांस में एक नयी व्यवस्था चालू की। इसमें नेपोलियन सहित कुल 3 कन्सुल के हाथ में फ्रांस का शासन भार सौंप दिया गया। यही कन्सुलेट शासन के नाम से परिचित है।

प्रश्न 28.
कन्सुलेट शासनकाल में फ्रांस के तीनों कन्सुल के नाम लिखो।
उत्तर :
कन्सुलेट शांसनकाल में फ्रांस के प्रथम कन्सुल नेपोलियन थे जो फ्रांस की सर्वोच्च क्षमता के अधिकारी थे। अन्य दो कन्सुल आवेसियस एवं रोजर डुकोस थे।

प्रश्न 29.
नेपोलियन ने किस प्रकार प्रादेशिक प्रशासन को विभाजित किया था ?
उत्तर :
नेपोलियन ने पूरे फ्रांस को 83 विभाग या प्रदेशों में एवं प्रदेशों को 547 कैंटन या जिलों में बाँट दिया था। प्रदेश एवं जिला के शासक को ‘प्रिफेक्ट’ एवं सब-प्रिफेक्ट’ कहा जाता था।

प्रश्न 30.
नेपोलियन प्रथम कौंसुल कैसे बना ?
उत्तर :
1799 में नेपोलियन कुछ सैनिक अधिकारियों के साथ मिलकर डायरेक्टरी-शासन का तख्ता पलट दिया और फ्रांस की व्यवस्थापिका सभा ने एक प्रस्ताव पास करके उसे प्रथम कॉन्सुल के पद पर नियुक्त कर दिया।

प्रश्न 31.
राष्ट्रवाद कैसे नेपोलियन के पतन का कारण बना ?
उत्तर :
नेपोलियन ने राष्ट्रीयता की लहर यूरोपीय देशें में फैलाई। वास्तव में जहाँ-जहाँ नेपोलियन की सेना गई, वहाँ-वहाँ राश्ट्रवाद का उदय हुआ। विजित देशें ने जब देखा कि नेपोलियन स्वयं शासन करने लगा है और अपने रिश्तेदारों को अपने प्रतिनिधि के रूप में विभिन्न जगहों पर आसीन करने लगा है, तो वे फ्रांसीसी सेना के विरुद्ध उठ खड़े हुए। इस संगठित आंदोलन को चलाने में उनमें राष्ट्रीयता की भावना का संचार हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 32.
भँदेभिया की घटना क्या है अथवा अक्टूबर की घटना क्या है ?
उत्तर :
फ्रांसीसी कांति (1789 ई०) के बाद राजतंत्र के समर्थक उत्तेजित जनता द्वारा 1795 ई० के 5 अक्टूबर को फ्रांस की राष्ट्रीय सभा पर आक्रमण करने पर फ्रांस के ब्रिगेडियर जेनरल नेपोलियनने बहुत ही मामूली संख्या में सेना को लेकर जनता को तितर-बितर किया एवं राष्ट्रीय सभा को नष्ट होने से बचाया। इसी घटना को भंदेभिया या अक्टूबर घटना कहते हैं।

प्रश्न 33.
18 लुमेया की घटना क्या है ?
उत्तर :
नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस के क्रांतिकारी कैलेण्डर के अनुसार बुमेया महीने के 18 तारीख को डाइरक्टरी शासन का अन्त करके फ्रांस की शासन व्यवस्था पर दखल किया। इस घटना को 18 बुमेया की घटना कहते हैं।

प्रश्न 34.
सिजालपाईन प्रजातंत्र क्या है ?
उत्तर :
नेपोलियन द्वारा इटली के लम्बार्डी को दखल करके वहाँ जिस गणतंत्र की प्रतिष्ठा की गई उसे सिजालपाईन प्रजातंत्र कहते हैं।

प्रश्न 35.
डाइरेक्टरी के शासनकाल के दौरान इटली में नेपोलियन की सफलता का उल्लेख करो।
उत्तर :
डाइरक्टरी के शासनकाल (1795-99 ई०) में नेपोलियन ने इटली के सार्डिनिया को पराजित करके स्यामय एवं निस दखल किया। इटली के पार्मा, मडेना एवं नेपल्स के शासक ने नेपोलियन के समक्ष आत्मसमर्षण कर दिया तथा नेपोलियन ऑस्ट्रिया को पराजित करके लम्म्बार्ड, वेनिस एवं मिलान दखल कर लिया।

प्रश्न 36.
किसने, कहाँ ‘वटाविया’ गणतंत्र की प्रतिष्ठा की ?
उत्तर :
फ्रांसीसी सेनापति पेशेग्रु ने हालैण्ड दखल करके वहाँ पर फ्रांस के अधीन में एक तॉवेदार गणतंत्र की स्थापना की। यह वटाविया गणतंत्र के नाम से परिचित है।

प्रश्न 37.
नेपोलियन द्वारा नियुक्त कुछ उच्च पदाधिकारियों के नाम लिखो।
उत्तर :
नेपोलियन द्वारा नियुक्त उच्च पदाधिकारियों में विदेश विभाग के तालिराँ, आर्थिक मामलों के गोदिन एवं पुलिस विभाग के फूचे आदि थे।

प्रश्न 38.
कोड नेपोलियन की कुछ प्रमुख त्रुटियों का उल्लेख करो।
उत्तर :
कोड नेपोलियन की प्रमुख त्रुटियाँ तीन थीं –

  • समाज में महिलाओं की मर्यादा में कंमी
  • पत्नी के ऊपर पति का आधिपत्य
  • श्रमिकों की कोई अहमियत नहीं।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 39.
कोड नेपोलियन का महत्व क्या था?
उत्तर :
कोड नेपोलियन के कई महत्व थे जैसे –
(i) आचार-संहिता की मौलिक नीतियों को तत्कालीन समय में आधुनिक माना जाता था।
(ii) ये कानून बाद में यूरोप के कई देशों के कानून व्यवस्था में शामिल किये गये।.

प्रश्न 40.
लिजियन ऑफ आनर क्या है ?
उत्तर :
फ्रांसिसी सम्राट नेपोलियन ने अपने राज्य कर्मचारियों को उत्साहित करने के लिये एक विशेष राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने की व्यवस्था की थी जिसे ‘लिजियन ऑफ आनर’ कहा जाता है।

प्रश्न 41.
फ्रांस के विरुद्ध कुल कितने शक्तिगुट बने थे तथा कौन-कौन ?
उत्तर :
फ्रांस के विरुद्ध कुल चार शक्तिगुट बने थे –

  1. प्रथम शक्तिगुट (1793 ई०)
  2. द्वितीय शक्तिगुट (1799 ई०)
  3. तृतीय शक्तिगुट (1804-05 ई०) एवं
  4. चतुर्थ शक्तिगुट (1813 ई०)

प्रश्न 42.
नेपोलियन ने जर्मनी के पुनर्गठन के लिये क्या किया ?
उत्तर :
नेपोलियन ने जर्मनी के 300 राज्यों को तोड़कर 39 राज्यों में बाँट दियां। इनको लेकर तीन राज्य मंडली बनाया –

  1. कन्फेडरेशन ऑफ द राइन
  2. किंगडम ऑफ वेस्टफिलिया
  3. ग्रैंड डैची ऑफ वार्स।

प्रश्न 43.
कम्फेडरशन ऑफ द राइन क्या. है ? इसके प्रतिष्ठाता कौन थे ?
उत्तर :
फ्रांस के सम्माट नेपोलियन जर्मनी के डटेमवर्ग, बेडेन, हेसवर्ग आदि छोटे-छोटे राज्यों को हड़प कर और इन्हें मिलाकर कन्फेडेरेशन या राष्ट्र-समन्वय गठन किया। यही कन्फेडेरेशन ऑफ द राइन के नाम से परिचित है। इसके प्रतिष्ठाता फ्रांस के सम्राट नेपोलियन थे।

प्रश्न 44.
किंगडम ऑफ वेस्टफेलिया क्या है ?
उत्तर :
नेपोलियन ने एल्बा नदी के पश्चिम हैनोवर, साक्सनी आदि जर्मन राज्यों को दखल करके एक समन्वय ‘किंगडम ऑफ वेस्टफिलिया’ बनाकर अपने छोटे भाई जेरोम बोनापार्ट को वहाँ का राजा बनाया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 45.
ग्रैंड डाची ऑफ वार्स क्या है ?
उत्तर :
नेपोलियन ने पर्सिया के अधीन पोलैण्ड एवं रूस के कुछ अंश को लेकर एक राष्ट्र-समन्वय बनाया जो ग्रैंड डाची ऑफ वार्स के नाम से परिचित है। सैक्सनी के राजा ने वहाँ के शासन का भार लिया।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
टिलसिट संधि की क्या शर्ते थीं ?
उत्तर :
14 जून, 1807 ई० को फ्रीडलैंड के युद्ध में पराजित रूस को फ्रांस के साथ संधि करनी पड़ी। 8 जुलाई 1807 ई० को रूसी सम्राट अलेक्जेण्डर प्रथम और फ्रांसीसी समाट नेपोलियन के बीच टिलसिट की संधि हुई। इस संधि में यूरोप दो भागों में खण्डित हो गया। पूर्वी यूरोप पर रूस का तथा पश्चिमी यूरोप पर फ्रांस के अधिकार को स्वीकार कर लिया गया। प्रशिया को कायम रख़ते हुए उसके पश्चिमी भाग को अलग ‘वारसा’” का राज्य बनाया गया। राइन राज्यसंघ में कुछ राज्य जोड़ दिये गये। इस तरह इस संधि ने नेपोलियन को यूरोप महादेश का स्वामी बना दिया।

प्रश्न 2.
महाद्वीपीय व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
1906 ई० में नेपोलियन ने बर्लिन से घोषणा की – ‘ इंग्लैण्ड तथा उसके उपनिवेशों के साथ सारे संबंध तोड़ लिये जाएँ और उसके जहाजों को यूरोप के किसी भी बन्दरगाह पर न आने दिया जाए। अगर फ्रांस एवं संरक्षित राज्यों में कोई अंग्रेज पाया जाए तो उसे कैद कर लिया जाए।’ इसके प्रतिरोध में इंग्लैंड ने ‘ ‘आर्डर्स इन कौंसल’ द्वारा फ्रेंच साम्माज्य और उसके साथी राष्ट्रों के सभी बन्दरगाहों को प्रतिरुद्ध घोषित कर दिया। अन्य राष्ट्रों को उसने अपने साथ व्यापार की अनुपति दे दी। इंग्लैण्ड की घोषणा से क्षुब्ध होकर नेपोलियन ने 1807 ई० में इटली के मिलान नगर से दूसरी घोषणा की कि जो यूरोपीय देश इंग्लैण्ड के साथ व्यापारिक संबंध रखेगा उसका जहाज लूट लिया जायेगा।

प्रश्न 3.
स्पेन के युद्ध में नेपोलियन की पराजय के क्या कारण थे ?
अथवा
स्पेन के युद्ध में फ्रांस की व्यर्थता के क्या कारण थे ?
उत्तर :
स्पेन का वातावरण : पहाड़ों-पर्वतों एवं जलीय-भूमि से परिपूर्ण स्पेन के भौगोलिक वातावरण के कारण युद्ध में फ्रांस की सेनावाहिनी को असुविधाएँ हुई। दरिद्र सेन में खाद्य की कमी एवं यातायात का अभाव भी फ्रांस की सेना को भारी मुश्किलों में डाल दिया।
विभिन्न संकट : नेपोलियन के विभिन्न संकटों में लगातार घिरे रहने के कारण स्पेन के युद्ध में अधिक महत्व देने में वह व्यर्थ हुआ। 1809 ई० के बाद वह सेन में फिर जा नहीं सका।
स्पेनवासियों का देशप्रेम : फ्रांसीसी आक्रमण के विरुद्ध स्पेन वासियों का देशप्रेम एवं राष्ट्रवाद की भावना ने स्पेन के आम लोगों को एकजुट बनाकर रखा।
गुरिल्ला युद्ध : सेन की गुरिल्ला युद्धवाहिनी फ्रांसीसी सैनिकों को अचानक आक्रमण से आतंकित करके रखता था। गोरिल्ला युद्ध के सैनिकों ने फ्रांसीसी सेनावाहिनी के खाद्य एवं सम्पर्क सूत्र को नष्ट करके उन्हे नाकों चने चबवा दिया।
इंग्लैण्ड की सहायता : इंग्लैण्ड ने अर्थ, शस्त्र एवं सैन्य सहायता के साथ ही अपने ब्रिटिश सेनापति आर्थर वेलेजली को स्पेन के युद्ध में भेजक्र फ्रांसीसी वाहिनी के मनोबल को पूरी तरह से भंग कर दिया।
जोसेफ की अयोग्यता : नेपोलियन द्वारा अपने भाई जोसेफ को स्पेन के सिंहासन पर बैठाने से भी वह स्पेन की कठिन परिस्थिति को सम्भालने में अक्षम था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 4.
नेपोलियन की विधि संहिता पर संक्षिप्त निबन्ध लिखो।
अथवा
नेपोलियन विधान-संहिता क्या थी? उसकी मुख्य विशेषताएं बताएँ ?
उत्तर :
नेपोलियन का सबसे स्थायी कार्य नेपोलियन कोड (नागरिक कानूनो) का संकलन था। क्रान्ति से पूर्व फ्रांस में अनेक कानून थे और उसमें परस्पर असंगतियाँ थीं। नेपोलियन ने कानूनों की एक संहिता तैयार करवायी, जिसे ‘नेपोलियन की कानून संहिता’ कहा जाता है। इस विधि संहिता के निर्माण में नेपोलियन ने व्यक्तिगत रुचि का प्रदर्शन किया था और उसकी इच्छानुसार ही इसका निर्माण हुआ। इस संहिता में कोई नयी बात न थी तथापि जिस रूप में इसको प्रस्तुत किया था उससे फ्रांस के कानूनों को एक नया रूप मिला था। फ्रांस में क्रान्ति से पहले तथा क्रान्तिकाल में बने असंख्य कानूनों को समाप्त कर दिया गया। इन कानूनों को बनाने में पुरातन एवं नवीन कानूनों का समन्वय किया गया था, जिसमें एक ओर पुराने कानूनों के दोषों को दूर किया गया, दूसरी ओर क्रान्तिकारी समय के नवीन और उपयोगी कानूनों को सही तरीके से रखा गया।

प्रश्न 5.
नेपोलियन के शुरुआती समय का परिचय दें।
उत्तर :
नेपोलियन का जन्म 15 अगस्त 1769 ई० को कार्सिका में हुआ था। कार्सिका फ्रांस के अधीन था। नेपोलियन के पिता चार्ल्स बोनापार्ट एक वकील थे और उसकी माता लितिज्या रोमोलिनो रूपवती, शाही तथा स्वाभिमानी महिला थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। नेपोलियन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा फ्रांस के बिने नामक स्थान में नि:शुल्क शिक्षा के रूप में प्राप्त की। प्रतिभाशाली होने के कारण उसे सैनिक विद्यालय में अध्ययन का सुयोग मिल गया। विद्यार्थी नेपोलियन गंभीर, धैर्यवान, सहनशील और कर्तव्य परायण था। 20 वर्ष की आयु में नेपोलियन स्थल सेना के तोपखाने में द्वितीय लेफ्टीनेन्ट के पद पर नियुक्त हुआ।

छुट्टियों के कारण उसे सेना से निकाल दिया गया। शीघ्र ही उसे सेना में पुनः ले लिया गया। 1793 ई० में उसने तूलों बंदरगाह की लड़ाई में तोपों से भीषण गोलीबारी करके अंग्रेजी सेना को भगा दिया। उसे ब्रिगेडियर जनरल बना दिया गया। डाइरेक्टरी की आज्ञा से नेपोलियन ने मिस्न पर आक्रमण किया किन्तु नील की लड़ाई में ब्रिटिश नौ सेना ने उसे हरा दिया। नेपोलियन फ्रांस लौट आया एवं लोगों ने उसका अभूतपूर्व स्वागत किया। तत्पश्चात् ही उसने शासन में भाग लिया, डाइरेक्टरी भंग की और कान्सुलेट का शासन स्थापित किया।

प्रश्न 6.
कोड नेपोलियन के बारे में क्या जानते हो ?
अथवा
नेपोलियन कोड क्या है?
उत्तर :
कोड नेपोलियन :
कानून की रचना : नेपोलियन की देख-रेख में गठित कमीशन ने 1804 ई० में फ्रांस के लिये नये कानूनों की रचना किया। यह ‘कोड नेपोलियन’ (Code Napoleon) के नाम से जाना जाता है।

कानूनों का वर्गीकरण : कोड नेपोलियन में कुल 2287 कानून थे। इन्हें तीन भागों में बाँटा गया था। (1) दीवानी, (2) फौजदारी और (3) व्यापारिक।

विशेषता : कोड नेपोलियन द्वारा –

  1. कानून की नजर में सभी बराबर हैं,
  2. सामन्तवादी असमानता को दूर किया गया,
  3. योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी,
  4. व्यक्तिगत स्वाधीनता की स्वीकृति
  5. सम्पत्ति के अधिकार को मान्यता,
  6. धार्मिक सहनशीलता एवं
  7. अपराध के दण्ड के रूप में जुर्माना, जेल, सम्पत्ति-जब्त, मृत्युदण्ड आदि की व्यवस्था की गयी।

त्रुटियाँ : कोड नेपोलियन में कुछ त्रुटियाँ थी। जैसे –

  1. इससे समाज में महिलाओं की मर्यादा में कमी आयी
  2. पत्नी के ऊपर पति का वर्चस्व
  3. पारिवारिक सम्पत्ति के अधिकार से महिलाओं को वंचित किया गया एवं
  4. श्रमिक श्रेणी को कोई अधिकार नहीं दिया गया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 7.
पवित्र संघ क्या है बतायें ?
उत्तर :
यूरोप में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिये सर्वप्रथम रूस के जार अलेक्जेंडर प्रथम ने यूरोप के महान राष्ट्रों के सामने पवित्र संघ की योजना रखी। यह योज़ना उसकी धार्मिक प्रवृत्ति से अत्यधिक प्रभावित थी। 26 सितम्बर, 1815 ई० को इस घोषणा-पत्र पर सबने हस्ताक्षर किये। यह पवित्र संघ 1825 ई० तक कायम रहा तथा जार की मृत्यु के साथ ही संघ का अन्त हो गया।

प्रश्न 8.
जर्मनी का एकीकरण में पहला कार्य नेपोलियन ने किया था, फिर भी नेपोलियन की विरोधिता क्यों ?
उत्तर :
19 वीं सदी के पूर्वार्द्ध में जर्मनी विभक्त और दुर्बल था। वह एक भौगोलिक अभिव्यक्त मात्र था। वे नाम मात्र के पवित्र रोमन साम्राज्य के सदस्य थे। साम्राज्य का संगठन शिथिल था। भिन्न-भित्र राज्यों के बीच दुश्मनी थी। आस्ट्रिया तथा प्रशा प्रधान राज्य थे और जर्मनी में दोनों अपनी प्रधानता स्थापित करना चाहते थे। फ्रांसीसी क्रांति का विशेषकर नेपोलियन प्रथम का बड़ा भारी प्रभाव जर्मनी पर पड़ा। जर्मनवासियों ने फ्रांसीसी क्रांति के स्वतंत्रता, समानता, भातृत्व सिद्धान्तों का हार्दिक स्वागत किया।

1803 ई० में जर्मनी के 300 राज्यों की संख्या घटाकर 39 कर दी गई, एवं दो वर्ष के बाद बवेरिया एवं वर्टेम्बर्ग के प्रदेशों का विस्तार किया गया। नेपोलियन ने 1805 ई० में आस्ट्रिया तथा 1806 ई० में प्रशा को पराजित कर दिया एवं इसके पश्चात जर्मनी के पुनर्निर्माण की ओर ध्यान दिया। 1806 ई० में पवित्र रोमन साम्माज्य को तोड़ दिया गया एवं फ्रांस के संरक्षण मे जर्मन राज्यों के लिए एक संघ बनाया गया जिसे राइन संघ(Confederation of the Rhine) कहते हैं।

नेपोलियन के विरोध में जर्मनी में राष्ट्रीय आन्दोलन : रसिया में नेपोलियन की पराजय से उत्साहित होकर जर्मनी में राष्ट्रीय आन्दोलन शुरू हुआ। इसके कारण थे –
(i) जागृति : रूस में नेपोलियन की शोचनीय पराजय के बाद जर्मनी के लोगों की आँख खुली और वहाँ पर तीव्र राष्ट्रीय आन्दोलन शुरू हो गया।
(ii) लिज्जिंग का युद्ध : इसी बीच चतुर्थ शक्ति गठजोड़ के देशों प्रशा, रसिया, आस्ट्रिया, स्वीडेन ने फ्रांस पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया। इस युद्ध में नेपोलियन की पराजय हुई और जर्मनी नेपोलियन के शासन से स्वतंत्र हो गया।

प्रश्न 9.
नेपोलियन ने रूस पर आक्रमण क्यों किया था ?
अथवा
नेपोलियन द्वारा रूस पर आक्रमण के क्या कारण थे ?
उत्तर :

  1. टिलसिट की सन्धि में त्रुटि : टिलसिट की सन्धि (1807 ई०) में नेपोलियन द्वारा तुरस्क एवं स्वीडेन के विरुद्ध युद्ध में रूस को सहायता का वादा करने पर भी उसने उसे मदद नही किया। इससे रूस नाराज हो गया।
  2. ओल्डेनवर्ग दखल : महादेशीय अवरोध व्यवस्था मानने से इन्कार करने पर नेपोलियन ने रूस के जार के बहनोई ओल्डेनवर्ग के ड्यूक वर्ग के राज्य को दखल कर लिया। इससे रूस का जार बहुत क्षुब्ध हुआ।
  3. फ्रांस एवं ऑस्ट्रिया की घनिष्ठता : नेपोलियन द्वारा ऑस्ट्रिया के हैप्सवर्ग वंश की राजकन्या मेरी लुयसा से विवाह करने से रूस का जार यह-सोच कर आतंकित हुआ कि फ्रांस एवं ऑस्ट्रिया मिलकर रूस की क्षति करेंगे।
  4. महादेशीय अवरोध व्यवस्था : रूस ने नेपोलियन की महादेशीय व्यवस्था को मानने पर भी 1810 ई० में इसे मानने से इन्कार कर दिया। फलस्वरूप नेपोलियन रूस से नाराज हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 10.
नेपोलियन के सौ दिन के शासन का वर्णन करें तथा उसका परिणाम भी लिखें।
उत्तर :
फोंटेनब्लू की संधि के अनुसार नेपोलियन ने फ्रांस पर अपने सारे अधिकार त्याग दिये । उसके बदले उसे एल्बा द्वीप का राजा बना दिया गया। एल्बा में नेपोलियन का मन नहीं लगता था। वहाँ वह दस महीने तक रहा एवं हमेशा चिन्तनशील रहा। जब उसको पता चला कि फ्रांस में लुई अठारहवे का शासन अलोकप्रिय है तो वह एक दिन (26 फरवरी, 1815 ई०) चुपके से एल्बा से चल पड़ा और 1 मार्च 1815 ई० को पुन: फ्रांस लौट आया। उसके एल्बा से फांस लौटने के दिन से वाटरलू की पराजय के उपरांत आत्म-समर्पण तक का समय सौ दिन या शत दिवस के नाम से प्रसिद्ध है।

प्रश्न 11.
नेपोलियन के साप्राज्य के विरुद्ध राष्ट्रवादी प्रतिक्रिया क्या थी ?
उत्तर :
नेपोलियन राष्ट्रीयता का विरोधी : यूरोप में राष्ट्रीयता के नये विचार पनपने लगे थे। राष्ट्रीयता का अर्थ यह है कि एक वंश परम्परा, समान धर्म और समान संस्कृति मानने वाले का अपना एक राष्ट्र होना चाहिए। नेपोलियन एक साम्राज्यवादी था। उसका एकमात्र यह उद्देश्य था कि पूरे विश्व पर उसका साम्राज्य स्थापित हो जाय। नेपोलियन का साम्राज्य राष्ट्रीयता पर आधारित नहीं था। अतः राष्ट्रीयता की नवीन भावना उसके साम्राज्य के विरोधी हो रही थी।

1808 के बाद स्पेन, इंटी, जर्मनी तथा अन्य यूरोपियन देशों की जनता यह भलीभाँति अनुभव करने लग गयी थी कि हमलोग सेनिश हैं, इटालियन हैं और वह जर्मन है। हमें किसी अन्य देश के अधीन नहीं रहना चाहिए। हमारा अपना पृथक् व स्वतंत्र राज्य होना चाहिए। संसार के इतिहास में यह एक नयी भावना थी। इसके पूर्व लोग ऐसा नहीं समझते थे। इस भावना के कारण विविध राष्ट्रों में जो अपूर्व शक्ति उत्पन्न हुई उसने नेपोलियन के साम्माज्य का जबरदस्त विरोध करना शुरू किया ह)

प्रश्न 12.
नेपोलियन द्वारा यूरोप के पुनर्गठन के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
नेपोलियन द्वारा यूरोप का पुनर्गठन :
पुनर्गठन की नीति : अधिकृत भूखण्डों को लेकर नेपोलियन ने फ्रांस के चारों ओर नये राज्यों की स्थापना की। आरंभ में इन सब जगहों पर जैसे, सिजलपाईन, वाटाविया आदि में गणतंत्र स्थापित होने पर भी 1804 ई० में ‘सम्राट’ होने पर वहाँ राजतंत्र प्रतिष्ठित हुआ एवं इन सभी स्थानों पर उसने अपने भाई, पुत्र एवं निकट सम्बन्धियों को गद्दी पर बैठा दिया।

इटली का पुनर्गठन : नेपोलियन द्वारा इटली से ऑस्ट्रिया को विभक्त कर इटली के मानचित्र में बहुत कुछ परिवर्तन किया गया। उसने इटली में सिजलपाईन एवं वाटाविया राज्य की स्थापना करके पहले गणतंत्र एवं बाद में राजतंत्र की प्रतिष्ठा की। इटली, जेनेवा, टासकनी एवं पार्मा आदि को फ्रांस में शामिल किया गया एवं रोम के पोप का राज्य फ्रांस के एक प्रदेश में बद्ल दिया गया। दक्षिण इटली में नेपल्स राज्य की स्थापना करके नेपोलियन ने वहाँ के सिंहासन पर अपने भाई जोसेफ को बैठाया।

जर्मनी का पुनर्गठन : जर्मनी के प्राय: 300 राज्यों को तोड़कर 39 राज्य बनाए गए। इनको लेकर –

  1. कनफेडरेशन ऑफ द राईन
  2. किंगडम ऑफ वेस्टफैलिया एवं
  3. म्रैंड डची ऑफ वार्स नामक तीन राज्यमंडलों का गठन किया गया।

प्रश्न 13.
नेपोलियन द्वारा फ्रांस की क्रांति के किन-किन आदर्शों की प्रतिष्ठा की गई ?
उत्तर :
नेपोलियन द्वारा क्रांतिकारी आदर्शों की प्रतिष्ठा :

  1. ईश्वरीय सिद्धांत की समाप्ति : नेपोलियन द्वारा सत्ता प्राप्ति के बाद फ्रांसीसी राजतंत्र की ईश्वरीय सिद्धांत का उन्मूलन करके सभी वयस्क नागरिको को मताधिकार प्रदान कर प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा की गयी।
  2. समानता : नेपोलियन ने अपने आचार-संहिता द्वारा सांमाजिक असमानता को समाप्त किया एवं घोषणा की कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं।
  3. सामन्तवाद की समाप्ति : फ्रांस में सामन्तवादी रीति-नीति एवं टैक्स क्रांति के समय ही खत्म हो गया था। नेपोलियन ने इन्हें नहीं लौटाया।
  4. योग्यता को स्वीकृति : नेपोलियन द्वारा वंशगत परम्परा को समाप्त कर योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी को मान्यता दी गई।
  5. धर्म निरपेक्षता : नेपोलियन ने देश में धर्म निरपेक्षता के सिद्धांत को प्रतिष्ठित करने के लिये विभिन्न कदम उठाया।
  6. क्रांतिकारी आदर्श : नेपोलियन द्वारा फ्रांस के बाहर विभिन्न देशों में क्रांतिकारी आदर्श का प्रचार-प्रसार किया गया। उसकी सैन्य-वाहिनी ने विभित्र जगहों पर अभियान चलाकर पुरातनतंत्र को ध्वस्त कर दी।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 14.
“नेपोलियन, क्रान्ति का पुत्र और विनाशक दोनों था” – स्पष्ट करें।
उत्तर :
नेपोलियन अपने को क्रान्ति का पुत्र कहता था और यह भी सत्य है कि फ्रांस की क्रान्ति ने ही ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न की थी जिनके कारण वह प्रथम कौन्सुल बना और उसके बाद क्रान्ति का पुत्र नेपोलियन फ्रांस का सम्राट बन गया। वह स्वभाव से निरंकुश था। उसने फ्रांस की क्रान्ति को देखा था।

संविधान का निर्माण करने के बाद नेपोलियन ने एक कानून बनवा लिया जिससे स्थानीय प्रशासन पर उसका पूरा अधिकार स्थापित हो गया। प्रत्येक विभाग (जिला) का एक अधिकारी होता था जो प्रीफेक्ट होता, उपविभाग का अधिकारी उपप्रीफेक्ट और प्रत्येक नगर या कम्यून का प्रमुख मेयर कहलाता था। इस प्रकार नागरिकों को अपने स्थानीय मामलों का प्रबंध करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया और स्वशासन का जो अनुभव होता था उसका अन्त हो गया।

एक अवसर पर नेपोलियन ने कहा था, ‘मैं क्रान्ति हूँ।” दूसरे अवसर पर उसने कहा कि ‘ ‘मैने क्रान्ति को नष्ट कर दिया है।” इन दोनों कथनों में कुछ झूठ और कुछ सत्य था। कौन्सुल-व्यवस्था तथा उसके बाद नेपोलियन की साम्राज्यीय व्यवस्था, दोनों के अन्तर्गत क्रान्ति का बहुत कुछ कार्य अक्षुण्ण बना रहा, किन्तु नये शासक नेपोलियन के विचारों और उसके निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अनेक चीजें नष्ट कर दी गयीं। नेपोलियन के क्रान्ति तथा फ्रांसीसी जनता और अपनी महत्वाकांक्षा के सम्बन्ध में निश्चित विचार थे। 1799 के बाद फ्रांस के जीवन में उसके इन विचारों का सबसे गहरा प्रभाव पड़ा। नेपोलियन क्रान्ति के एक आदर्श समता से सहानुभूति रखता था या यों कहिए कि उसे कम से कम सहन करने को तैयार था किन्तु दूसरे आदर्श अर्थात् स्वतंत्रता से घृणा करता था।

अत: नेपोलियन को क्रान्ति का पुत्र स्वीकार करना कठिन है। इस विषय में ग्रांट एण्ड टेम्परले का कथन उल्लेखनीय है। उन्होंने लिखा है, ‘नेपोलियन क्रान्ति का पुत्र था, किन्तु उसने उन सिद्धान्तों व उद्देश्यों को उलट दिया, जिनसे उसका आविर्भाव हुआ था।”

प्रश्न 15.
नेपोलियन के उत्थान एवं शासक बनने का वर्णन करो।
उत्तर :
नेपोलियन का उत्थान एवं शांसक बनना :-
उत्थान : नेपोलियन मात्र 17 वर्ष की उम्म में फ्रांस की सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त हुआ था। उस समय अंग्रेज सेनावाहिनी के अवरोध से फ्रांस के तुलों बन्दरगाह को आजाद (1793 ई०) करके सैनिक सफलता प्रदर्शित कर ब्रिगेडियर जेनरल के पद पर नियुक्त हुआ। उसने कोधित जनता के आक्रमण से राष्ट्रीय सभा की रक्षा (1795 ई०) की। फलस्वरूप उसे मेजर जेनरल बना दिय गया।

सैनिक सफलता : डाइरक्टरी के शासनकाल (1795-99 ई०) में नेपोलियन ने इटली की सार्डिनिया, पार्मा, मडेना एवं नेपल्स को परास्त किया। ऑस्ट्रिया को परास्त कर मिलान दखल किया एवं बाद में ऑस्ट्रिया को कैम्पो-फर्मियों की सन्धि (1797 ई०) के लिये बाध्य किया। पोप के राज्य पर आक्रमण करके टलेन्टिना की संधि के लिये बाध्य किया। इंग्लैण्ड़ के विरुद्ध पिरामिड के युद्ध ( 1798 ई०) में विजय प्राप्त करके भी नील नदी के युद्ध (1798 ई०) में पराजित हुआ।

क्षमता दखल : डाइरक्टरी के शासनकाल की व्यवस्था में चरम भष्टाचारिता एवं स्व्च्छाचारिता के फलस्वरूप नेपोलियन ने सेनावाहिनी के सहयोग से डाइरेक्टरी के शासकों को शासन से हटाकर (1799 ई०) फ्रांस में कन्सुलेट शासनतंत्र की स्थापना की। वह पहले 10 वर्ष के लिये एवं बाद में संविधान संशोधन करके आजीवन कन्सोल बना रहा। 1804 ई० में सम्राट की उपाधि ग्रहण के माध्यम से नेपोलियन ने फ्रांस में वंशगत राजतंत्र की प्रतिष्ठा की।

प्रश्न 16.
फ्रांस की क्षमता दखल में नेपोलियन की सफलता के क्या कारण थे ?
उत्तर :
फ्रांस की क्षमता दखल में नेपोलियन की सफलता के कारण :
नेपोलियन की गुणावली : नेपोलियन की व्यक्तिगत गुणावली, आकर्षक व्यक्तित्व, वाक्पटुता, उसके द्वारा तुँलो बन्दरगाह का पुनरुद्वार, इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रिया एवं इटली युद्ध में लगातार विजय इत्यादि ने उसकी लोकप्रियता बहुत बढ़ा दी। इतिहासकार काल्टन हेज का कहना हैं कि उस समय फ्रांस में सबसे अधिक चर्चा नेपोलियन को लेकर ही होती थी।

क्रांति को लेकर निराशा : क्रांति के आतंकराज में मनुष्य के जीवन एवं सम्पत्ति की सुरक्षा सम्पूर्ण नष्ट होने से फ्रांस की जनता क्रांति को लेकर निराश हो गयी थी। इस परिस्थिति में जनता को यही उम्मीद थी कि नेपोलियन जैसा शक्तिशाली सेनापति देश में कानून की प्रतिष्ठा करेगा एवं मनुष्य के जीवन एवं सम्पत्ति की सुरक्षा करेगा।

डायरेक्टरी का कुशासन : प्रष्ट, बेईमान एवं अकुशल डायरेक्टरों के शासनकाल (1795-1799 ई०) में महँगाई वृद्धि एवं खाद्याभाव ने देश को गंभीर संकट में डाल दिया था। इतिहासकार डेविड का कहना है कि क्रांति की तेज गति शेष होने पर सांगठनिक एवं सामरिक प्रतिभाशाली सैनिक की क्षमता प्राप्ति का रास्ता साफ हो जाता है।

सुविधावाद : अत्यन्त मौकापरस्त एवं सुविधावादी नेपोलियन एक बार जैकोबिन दल के सदस्य के रूप में उस दल के समर्थन में प्रचार पत्र लिखते थे। बाद में उसने मौका का फायदा उठाया जब रोब्सपियर के पतन के बाद उसका रास्ता साफ हो गया।

क्रांतिकारी आदर्श : आदर्श के प्रति नेपोलियन की श्रद्धा, विभिन्न क्रांतिकारी सुधार, जनहितकारी कार्यक्रम, विरोधी दलों के प्रति उदार मनोभाव आदि ने जनता को बहुत ही आकर्षित किया। वह क्रांति के प्रतीक रूप में परिणत हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 17.
नेपोलियन के नेतृत्व में कन्सुलेट के शासन (1799-1804 ई०) का वर्णन करो।
उत्तर :
कन्सुलेट का शासन :
कन्मुल : संविधान विशारद आवेसियस ने कन्सुलेट के संविधान की रचना की। इसके द्वारा –

  1. तीन सदस्यों को लेकर गठित एक परिषद के हाथों में फ्रांस का शासन भार सौंप दिया गया।
  2. प्रथम कन्सुल के रूप में नेपोलियन देश के सर्वोच्च क्षमता का अधिकारी बना एवं उसके नियंत्रण में संविधान बनाना, मंत्री, राष्ट्रदूत, सामरिक एवं असामरिक कर्मचारी नियोग, युद्ध की घोषणा तथा शान्ति प्रतिष्ठा आदि क्षमता थी।
  3. अन्य दो सदस्य आवेसियस एवं रोजर डुकास को प्रथम कन्सुल का सहायक अधिकारी बनाया गया।

विधायिका : फ्रांसीसी विधायिका को चार भागों में बाँटा गया –

  1. कौन्सिल ऑफ स्टेद्स : विधायिका का यह कक्ष विधान का प्रस्ताव उपस्थित करता था।
  2. ट्राईबुनेट : यह कक्ष प्रस्तावित विधान के बारे में चर्चा करता था।
  3. व्यवस्थापक सभा : यह कक्ष प्रस्तावित विधान को मतदान के माध्यम से पारित करता था।

सिनेट : उक्त विधान की प्रासंगिकता को विचार कर उसे स्वीकार या अस्वीकार करता था।

तानाशाह की प्रतिष्ठा : कन्सुलेट के संविधान के अनुसार नेपोलियन 10 साल के लिये कन्सोल बने थे लेकिन 1802 ई० में संविधान संशोधन करके वे आजीवन कन्सोल के पद पर नियुक्त हुए । इस तरह फ्रांस में क्रमशः प्रजातंत्र नष्ट होकर तानाशाह-तंत्र प्रतिष्ठित हुआ।

प्रश्न 18.
काँनकाँरडेट या धर्म-निर्णय समझौता के ऊपर टिप्पणी लिखो।
उत्तर :
काँनकाँरडेट या धर्म-निर्णय समझौता :
समझौता : फ्रांस की कांति की समय शासनतंत्र के साथ पोप का जो विरोध हुआ बाद में उसे नेपोलियने दूर करने का निर्णय किया। फ्रांस की शासन क्षमता पाने के बाद उसने पोप सप्तम पायेस के साथ 1801 ई० में कॉनकॉरॉड़ेट या धर्मनिर्णय समझौता किया।

समझौते की शर्ते : इसके द्वारा

  1. पोप ने फ्रांस के गिरजा एवं गिरजा की सम्पत्ति का राष्ट्रीयकरण मान लिया।
  2. फ्रांस में रोमन कैथोलिक धर्म एवं गिरजा को स्वीकृति दी गई।
  3. यह निर्णय लिया गया कि सरकार पादरियों को नियुक्त करेगी एवं पोप उन्हें स्वीकृति देगा।
  4. सरकार पादरियों को वेतन देगी एवं
  5. पादरियों के ऊपर बिशप का वर्चस्व रहेगा।

महत्व : धर्म-निर्णय समझौता के फलस्वरूप कैथोलिक गिरजा बहुत कुछ सरकार के ऊपर निर्भरशील हो गई। फ्रांस में धर्म सहिष्णुता का सिद्धांत ग्रहण किये जाने पर दूसरे धर्म के लोगो को स्वाधीन रूप से धर्म चर्चा का अवसर मिला। देश के साथ पोप का सम्बन्ध फिर से स्वाभाविक हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 19.
ट्राफलार युद्ध (1805 ई०) के कारण क्या थे ?
उत्तर :
कारण :

  1. अमीन्स की सन्धि : अमीन्स की संधि (1802 ई०) की शर्त में इंग्लैण्ड को माल्टा द्वीप छोड़ने को कहा गया था किन्तु इंग्लैण्ड ने उसे नहीं छोड़ा।
  2. निगरानी : इंग्लैण्ड द्वारा माल्टा द्वीप को नहीं छोड़े जाने पर नेपोलियन ने भी जर्मनी में ब्रिटिश-राज्य की सम्पत्ति पर सेना की निगरानी बैठा दी।
  3. फ्रांसीसी जहाज पर आक्रमण : इंग्लैण्ड की नौवाहिनी बार-बार फ्रांस के व्यापारिक – जहाजों पर आक्रमण करने लगी। इसका बदला लेने के लिये नेपोलियन ने फ्रांस में 1000 अंग्रेज पर्यटकों को बन्दी बना लिया।
  4. अफवाह : इंग्लैण्ड के अखबारों में नेपोलियन के विरुद्ध लगातार असत्य प्रचार किया गया एवं अफवाह फैलाया गया। फलस्वरूप नेपोलियन के कोधित होने पर दोनों देशों में विरोध आरंभ हो गया।
  5. फ्रांस की नौवाहिनी शक्ति में वृद्धि : सामुद्रिक वाणिज्य एवं नौयुद्ध में इंग्लैण्ड के प्रभाव को नष्ट करने के लिये फ्रांस अपनी नौशक्ति बढ़ाने में लग गया। इससे इग्लेण्ड आतंकित हो उठा।

प्रश्न 20.
ट्राफल्गार युद्ध (1805) ई० के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
ट्राफलार युद्ध (1805 ई०)
नेपोलियन की युद्ध तैयारी : इंग्लैण्ड एवं फ्रांस के बीच एमिएन की संधि ( 1802 ई०) दूट जाने के बाद, साथ ही कई घटनाओं के कारण नेपोलियन इग्लैण्ड के ऊपर क्षुब्ध हो गया। वह सीधे इंग्लिस चैनेल पार करके इंगलैण्ड के ऊंपर आक्रमण करने के लिये इंगिलस चैनेल एवं उत्तरी सागर के किनारे 2 लाख से अधिक सैनिकों को इकट्ठा किया।

तृतीय शक्तिगुट : इस परिस्थिति का सामना करने के लिये इंग्लैण्ड के नेतृत्व में ऑंस्ट्रिया, रूस एवं स्वीडेन को लेकर 1805 ई० में फ्रांस-विरोधी तृतीय शक्तिगुट तैयार किया गया। इस शक्तिगुट को तोड़ने के लिये नेपोलियन ने अति शीघता से आंस्ट्रिया पर आक्रमण करके उल्म के युद्ध (1805 ई०) में उसे परास्त किया।

ट्राफल्गर का नौसेना-युद्ध : नेपोलियन के इंग्लैण्ड आक्रमण की योजना के सच हीने के पहले ही अंग्रेज नौसेनापति नेल्सन ने फ्रांसीसी सेनापति विल्लेऊम को ट्राफल्गर युद्ध (21 अक्टूबर, 1805 ई०) में बुरी तरह पराजित किया। इस युद्ध में फ्रांसीसी नौसेना के जहाजे पूरी तरह नष्ट हो गए।

प्रश्न 21.
नेपोलियन द्वारा फ्रांस की क्रांति के किन-किन सिद्धांतों को नष्ट किया गया ?
उत्तर :

  1. राजतंत्र की प्रतिष्ठा : फ्रांसीसी क्रांति द्वारा राजतंत्र के ध्वंस होने पर भी नेपोलियन ने स्वयं को सम्माट के रूप में घोषणा (1804 ई०) करके देश में पुन: उम्र अधिकारवादी वंशगत राजतंत्र की प्रतिष्ठा किया।
  2. स्वाधीनता की समाप्ति : नेपोलियन द्वारा प्रादेशिक विधायिकाओं की क्षमता, जनता की वाक्स्वाधीनता एवं समाचारपत्रों की स्वाधीनता आदि खत्म कर तथा नागरिकों के ऊपर कठोर अनुशासन लागू करके लोगों की आजादी छीन ली गयी।
  3. शिक्षा के क्षेत्र में हस्तक्षेप : नेपोलियन द्वारा इतिहास एवं राजनीति शास्त्र पाठ्यक्रम में परिवर्तन करके देश में एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू हुई जिससे विद्यार्थी, सम्राट एवं राष्ट्र के प्रति आकर्षित हो। उसने क्रांतिकारी जैकोबिनों के सार्वजनिक प्राथमिक शिक्षा को समाप्त कर दिया।
  4. क्रांति को नष्ट करने वाला : इतिहासकार टामसन एवं गाराट का कहना है कि नेपोलियन ने कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी आदर्श को त्याग दिया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 22.
महादेशीय अवरोध व्यवस्था से क्या समझते हो ?
उत्तर :
महादेशीय अवरोध व्यवस्था :
इंग्लैण्ड की वीरता : नौशक्ति की दुर्बलता के कारण 1805 ई० में नेपोलियन ट्राफल्गर के युद्ध में जब इंग्लैण्ड से हार गया तब उसने महसूस किया कि यूरोप की सभी शक्तियाँ उससे पराजित होकर उनसे मित्रता करने को बाध्य होने पर भी एकमात्र समुद्र की रानी इंग्लैण्ड उसके द्वीप में बैठकर अपनी बहादुरी दिखा रही है।

अर्थनैतिक अवरोध : इंग्लैण्ड को युद्ध में पराजित नहीं कर सकने के कारण नेपोलियन ने इंगलैण्ड की आर्थिक शक्ति नष्ट करने की चेष्टा की। इसी कारण उसने इंगलैण्ड के विरुद्ध अर्थनैतिक अवरोध की घोषणा की।

घोषणा : नेपोलियन द्वारा बर्लिन डिकी, मिलान डिकी, वार्स डिक्री, फॅतेनब्लू डिक्री आदि के जरिये घोषणा की गयी कि कोई भी बिटिश जहाज यूरोप के किसी भी देश के बन्दरगाह में प्रवेश नहीं कर सकता है एवं कोई भी यूरोपीय देश किसी भी ब्रिटिश द्रव्य-सामग्री की खरीद नहीं कर सकता है। नेपोलियन द्वारा घोषित इस अवरोध को महादेशीय अवरोध व्यवस्था (Continental System) कहा जाता है।

प्रश्न 23.
नेपोलियन ने किस उद्देश्य से महादेशीय अवरोध की घोषणा की थी ?
उत्तर :
उद्देश्य :
उद्योग-धन्धों को नष्ट करना : नेपोलियन ने सोचा था कि यूरोपीय देशों में इंग्लैण्ड की द्रव्य-सामग्री की बिक्री बन्द करने से उसके उद्योग-धन्धे नष्ट हो जायेंगे।
आर्थिक दुर्दशा : अवरोध के माध्यम से इंग्लैण्ड के उद्योग-धंधे नष्ट हो जायेंगे, कल-कारखाने बन्द हो जायेंगे एवं लाखों लोग बेरोजगार होने से इंग्लैण्ड में आर्थिक महामारी फैल जायेगी।
फ्रांस में उद्योगों का विकास : यूरोप के देशों में इंग्लैण्ड की द्रव्य-सामग्री नहीं पहुँचने से वहाँ फ्रांस की द्रव्यसामग्री की माँग बढ़ जायेगी एवं फ्रांस में उद्योगों का विकास होगा।
मर्यादा में वृद्धि : इतिहासकार कोवान का मानना है कि फ्रांस में उद्योगों के विकास से वहाँ के सामानों की विश्वबाजार में माँग से उसकी मर्यादा में वृद्धि होगी। ऐसा ही सपना नेपोलियन ने देखा था।
राजनीतिक लक्ष्य : इंगलैण्ड को नीचा दिखाने के लिये फ्रांस के उद्योगों का तेजी से विकास होने से उसके शासन की लोकप्रियता बढ़ेगी, यही उसका राजनीतिक लक्ष्य था।

प्रश्न 24.
नेपोलियन ने किन डिक्रियों के माध्यम से महादेशीय अवरोध की घोषणा की ?
उत्तर :
महादेशीय अवरोध की घोषणा :
बर्लिन डिक्री : नेपोलियन ने बर्लिन डिकी (1806 ई०) जारी करके कहा कि इंग्लैण्ड या उसके उपनिवेशों के किसी जहाज को फ्रांस या फ्रांस के मित्र या निरपेक्ष किसी देश में प्रवेश करने नहीं दिया जायेगा। इन सब देशों के किसी जहाज में ब्रिटिश द्रव्य-सामग्री पाये जाने से उसे जब्त कर लिया जायेगा।
मिलान डिक्री : नेपोलियन ने मिलान डिक्री ( 1807 ई०) जारी करके कहा कि कोई मित्र देश या निरपेक्ष देश द्वारा अवरुद्ध देशों में जहाज भेजने पर उसे जब्त कर लिया जायेगा। किसी निरपेक्ष देश का जहाज इंग्लैण्ड में प्रवेश करने पर उसे शत्रु देश समझा जायेगा।

प्रश्न 25.
नेपोलियन के महादेशीय अवरोध के विरुद्ध इंग्लैण्ड ने क्या व्यवस्था ग्रहण की थी ?
उत्तर :
इंग्लैण्ड की व्यवस्था – अर्डार्स-इन-कौन्सिल
जहाज प्रवेश पर निषेधा ज्ञा : फ्रांस एवं उसके मित्र देश के बन्दरगाहों पर अन्य किसी देश का जहाज प्रवेश नहीं कर सकता था। किसी भी देश द्वारा उस आदेश का उल्लंघन करने पर इंग्लैण्ड उस जहाज को जब्त कर लेगा।
अनुमति : किसी निरपेक्ष देश के जहाज को फ्रांस एवं उसके मित्र के किसी बन्दरगाह पर जरूरी होने से उसे पहले इंग्लेण्ड के किसी बन्दरगाह पर आना होगा एवं सटीक फीस एवं लाइसेंस या अग्रिम अनुमति लेनी होगी, तभी वह फ्रांस में जा सकेगा।
डेनमार्क का जहाज ध्वस्त : ब्रिटिश विदेश मंत्री कैनिंग ने अनुभव किया था कि डेनमार्क के शक्तिशाली जहाज को फ्रांस दखल करके अपनी नौ-शक्ति बढ़ाकर इंग्लैण्ड का अवरोध तोड़ देगा। अत: डेनमार्क के उस जहाज को इंगलण्ड ने पहले ही ध्वस्त कर दिया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 26.
नेपोलियन द्वारा महादेशीय अवरोध व्यवस्था लागू करने के लिये किन व्यवस्थाओं को ग्रहण किया गया था ?
उत्तर :
नेपोलियन की व्यवस्था :
प्रशिया, रूस एवं ऑस्ट्रिया पर दखल : नेपोलियन से परास्त होकर प्रशिया (1806 ई०), रूस (1807 ई०) एवं ऑष्ट्रिया (1809 ई०) ने उसके महादेशीय अवरोध व्यवस्था को मान लिया।
स्वीडेन पर आक्रमण : स्वीडेन द्वारा महादेशीय अवरोध व्यवस्था को नहीं मानने पर नेपोलिय्रन के मित्र देश रूस ने स्वीडेन पर आक्रमण कर उसे मानने को मजबूर कर दिया।
पुर्तगाल पर दखल : इंग्लैण्ड का मित्र पुर्तगाल द्वारा महादेशीय अवरोध मानने से इन्कार करने पर नेपोलियन ने पुर्तगाल पर 1807 ई० में दखल कर लिया।
स्पेन पर दखल : पुर्तगाल से वापसी में नेपोलियन ने स्पेन को दखल कर अवरोध व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया (1807 ई०)।
पोप को बन्दी बनाना : रोम के शासक पोप द्वारा नेपोलियन के महादेशीय अवरोध व्यवस्था नहीं मानने पर नेपोलियन ने 1809 ई० में उसे बन्दी बना लिया।
जर्मनी के समुद्री तट का दखल : हेलिगोलैण्ड में ब्रिटिश की चोरी के धन्धे को बन्द करने के लिये नेपोलियन ने जर्मनी के विशाल समुद्री तटों का दखल 1810 ई० में कर लिया।

प्रश्न 27.
इंग्लैण्ड में नेपोलियन के महादेशीय अवरोध व्यवस्था का क्या प्रभाव पड़ा था ?
उत्तर :
आरंभ में इंग्लैण्ड को हानि : नेपोलियन के महादेशीय अवरोध व्यवस्था से आरंभ में इंग्लैण्ड को बहुत बड़ी हानि हुई। यूरोप में ब्रिटिश सामानों की बिक्री बन्द होने से कारखानें बन्द होने लगे, बेरोजगारी में वृद्धि हुई तथा खाद्याभाव आदि घटनाओं ने इंग्लैण्ड को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया।

नये बाजारों पर दखल : इंग्लैण्ड कुछ दिनों के भीतर ही अपने शुरुआती संकट को झेलकर नये बाजार ब्राजील, अर्जेन्टीना, तुरस्क, अटलांटिक एवं बाल्टिक के समुद्री द्वीपों को दखल कर अपनी द्रव्य-सामग्रियों की बिक्री आरंभ कर दी।

फ्रांस में नौशक्ति का अभाव : नेपोलियन द्वारा महादेशीय अवरोध के होते हुए भी ब्रिटेन चोरी-छिपे विभिन्न देशों में अपने सामानों की बिकी करने में सक्षम हुआ। पर्याप्त नौशक्ति के अभाव में नेपोलियन इस मामले में अक्षम था।

अर्डार्स-इन-कौंसिल : महादेशीय अवरोध के जबाव में इंग्लेण्ड ने ‘अर्डार्स-इन-कौंसिल के जरिये घोषणा की और इसके माध्यम से निरपेक्ष देशों को अबाध व्यापार के लिये लाइसेन्स की बिकी करके प्रचूर मुनाफा कमाया।

प्रश्न 28.
नेपोलियन द्वारा पुर्तगाल अभियान का वर्णन करो।
उत्तर :
इंग्लैण्ड – पुर्तगाल सम्बन्ध : इंग्लैण्ड का मित्र देश पुर्तगाल ने नेपोलियन के अवरोध व्यवस्था को मानने से इन्कार किया क्योंकि पुर्तगाल ब्रिटिश वाणिज्य का महत्वपूर्ण केन्द्र था एवं दोनों देशों में दीर्घकालीन व्यापारिक सम्बन्ध था।
बर्लिन डिक्री : नेपोलियन द्वारा बर्लिन डिक्री (1806 ई०) जारी करके पुर्तगाल को इंग्लैण्ड के साथ व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त करके बिटिश द्रव्य-सामग्री जब्त करने का निर्देश दिया गया, किन्तु पुर्तगाल द्वारा इस निर्देश को मानने से इन्कार किया गया।
फँतेनब्लू डिक्री : नेपोलियन ने स्पेन के साथ फेंतेनब्लू डिक्री के माध्यम से यह निर्णय लिया कि फ्रांस एवं स्पेन की संयुक्त वाहिनी पुर्तगाल पर आकमण कर उसे दखल करेगी एवं उसके उपनिवेशों को आपस में बाँट लेगी।
पुर्तगाल दखल : फ्रांस एवं स्पेन की संयुक्तवाहिनी 1807 ई॰ में सेनापति मार्शल जूनों के नेतृत्व में स्पेन के रास्ते पुर्तगाल पर आक्रमण कर उसे दखल करके महादेशीय अवरोध व्यवस्था चालू की।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 29.
नेपोलियन के स्पेन अभियान के कारण क्या थे ?
उत्तर :
मुक्तिदाता नेपोलियन : स्पेन दखल करने के बाद वहाँ पर फ्रांस की तरह उदारनैतिक शासन एवं क्रांतिकारी सुधारों को लागू करने से सेनवासी खुश होंगे एवं उसे मुक्तिदाता के रूप में सम्मान देंगे-ऐसा नेपोलियन ने सोचा था।
स्पेन द्वारा आक्रमण की संभावना : नेपोलियन को गुप्त सूत्रों से सूचना मिली थी कि सेन के शक्तिशाली मंत्री गोदय के सहयोग से स्पेन एवं पर्सिया संयुक्त रूप से फ्रांस पर आक्रमण की योजना बना रहे हैं। इसे तोड़ने के लिये नेपोलियन ने उसके पहले ही स्पेन पर आक्रमण कर दिया।
स्पेन की नौवाहिनी : ब्रिटिश नौवाहिनी के साथ युद्ध के लिये नेपोलियन अपनी नौशक्ति की वृद्धि करने को सोच रहा था। ट्राफल्गर नौयुद्ध ( 1805 ई०) के समय वह स्पेन की नौवाहिनी की शक्ति एवं दक्षता से मुग्ध हुआ था। इसीलिये उसने स्पेन की नौवाहिनी का दखल कर फ्रांसीसी नौशक्ति की वृद्धि का निर्णय लिया।
स्पेनवासियों का विद्रोह : स्पेन की अनुमति के बिना ही नेपालियन द्वारा पुर्तगाल पर आक्रमण किया गया था। इससे स्पेनवासियों ने नेपोलियन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।

प्रश्न 30.
नेपोलियन के विरुद्ध ऑस्ट्रिया के विद्रोह का परिचय दो।
उत्तर :
तैयारी : नेपोलियन के विरुद्ध भविष्य में युद्ध की तैयारी के लिये आंस्ट्रिया के युवराज आर्कड्यूक चार्ल्स एवं मंत्री स्टाडियन देश की सेनावाहिनी को फिर से सजाने एवं ऑष्ट्रिया की सैनिक शक्ति को बढ़ाने में लग गये।
फ्रांस में संकट : नेपोलियन के वेलने के युद्ध (1808 ई०) में स्पेन से परास्त होने से आँस्ट्रिया का साहस बढ़ गया। उस समय फ्रांस में ओंस्ट्रिया के राष्ट्रदूत मेटरनिखं ने ओंस्ट्रिया की सरकार को कहा था कि नेपोलियन के हाथ से ऑस्ट्रिया की खोई हुई शक्ति को हासिल करने का यही सही वक्त है।
वाग्राम का युद्ध : ऑंस्ट्रिया द्वारा 1809 ई० में नेपोलियन के विरुद्ध विद्रोह घोषणा करने से नेपोलियन भारी संकट में पड़ गया। वह पूरे जोश से विद्रोह को कुचलने में लम गया। वाग्राम के युद्ध (1809 ई०) में ऑस्ट्रिया बुरी तरह से पराजित होकर नेपोलियन की अधीनता मानने को विवश हुआ।
परिणाम : युद्ध में परास्त होकर ऑस्ट्रिया ईलिरिया छोड़ने के लिए बाध्य हुआ। नेपोलियन ने ऑस्ट्रिया की युवा रानी मेरी लुइसा से विवाह किया।

प्रश्न 31.
रूस के युद्ध में नेपोलियन की पराजय के कारण क्या थे ?
अथवा
रूस के युद्ध में फ्रांस की व्यर्थता के कारण क्या थे ?
उत्तर :
रूस की विशालता : रूस का आयतन विशाल होने के कारण रूसी सेनावाहिनी ‘गाँव जलाओ’ नीति अपनाकर पीछे हटने लगी तथा फ्रांसीसी सेनावाहिनी देश के भीतर आगे बढ़ने लगी। रास्ते में उन्हें खाद्याभाव, पीने के पानी का संकट एवं रूस की गोरिल्ला वाहिनी का आक्रमण झेलने की विपत्ति में फँसा दिया।
नेपोलियन का घमण्ड : नेपोलियन के घमण्ड ने उसे असलियत से दूर कर दिया। इंग्लैण्ड एवं समुद्रतटीय युद्ध को समाप्त नहीं करके वह अपने को रूस के युद्ध में शामिल कर लिया तथा अनुशासनहीन विभिन्न जातियों के विशाल सेनावाहिनी का गठन कर बड़ी भूल की।
प्राकृतिक प्रकोप : रूस के भीतरी भाग एवं स्वदेश वापसी के रास्ते में शीत, बर्फबारी, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक प्रकोप से फ्रांस की सेनावाहिनी के असंख्य लोग मारे गये।
महामारी का प्रकोप : रूस के युद्ध में फ्रांस की सेनावाहिनी में ‘टाइफस’ नामक खतरनाक महामारी का रोग फैलने से हजारों फ्रांसीसी सैनिकों की अकाल मृत्यु हो गयी।
रूसवासियों का जबाव : प्रसिद्ध उपन्यासकार लिओ टालस्टाय ने अपने उपन्यास ‘वार एण्ड पीस’ में रूस में नेपोलियन की हार का प्रमुख कारण रूसवासियों की संग्रामी मानसिकता को बताया है।

प्रश्न 32.
नेषोलियन ने किस प्रकार जर्मनी में फ्रांसीसी शासन की स्थापना की? नेषोलियन के विरुद्ध जर्मनी में राष्ट्रवादी आन्दोलन की आलोचना करो।
उत्तर :
जर्मनी में फ्रांसीसी साग्राज्य की स्थापना : फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन जर्मनी में ऑंस्ट्रिया के शासन को समाप्त कर छोटे-छोटे प्राय: 300 जर्मन-राज्यों को मिलाकर तीन राष्ट्र-को-आपरेटिव तैयार किया।

  1. कनफेडरेशन ऑफ द राईन : इस समिति के प्रोटेक्टर के रूप में नेपोलियन ने खुद को प्रतिष्ठित किया।
  2. किंगडम ऑफ वेस्टफेलिया: इस समिति के सिंहासन पर नेपोलियन ने अपने भाई जेरोम को बेठाया।
  3. ग्रैंड डाची ऑफ वार्स : सेक्सनी को इस समिति के संचालन का दायित्व देकर यहाँ अपना नियंत्रण रखा।

नेपोलियन के विरुद्ध जर्मनी में राष्ट्रवादी आन्दोलन : रूस में नेपोलियन की पराजय के बाद् उसके विरुद्ध जर्मनी में तीव्र राष्ट्रवादी आन्दोलन आरंभ हुआ।
(i) जागरण : रूस के युद्ध में नेपोलियन की भारी पराजय से जर्मनी के प्रदेशों में नेपोलियन के खिलाफ उग्र राष्ट्रवादी आन्दोलन आरंभ हो गया i इस आन्दोलन के नेतृत्व में प्रशिया आगे आया।
(ii) लाइपजिग का युद्ध : इसी बीच तैयार चतुर्थ शक्तिगुट के सदस्य पर्सिया, रूस, ऑंस्ट्रिया, स्वीडेन, इंग्लैण्ड आदि देशों ने फ्रांस पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया। जर्मनी के लाइपजिग युद्ध (1813 ई०) में नेपोलियन की बुरी तरह से हार हुई एवं जर्मनी मेपोलियन के शासन से मुक्त हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 33.
लिपजिंग युद्ध (1813 ई०) के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
रूस अभियान (1812 ई०) में फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन की बुरी तरह से पराजय के बाद रूस, पर्शिया, इंग्लैण्ड, तुरस्क, स्वीड़ेन, आदि देशों ने नेपोलियन के विरुद्ध 1813 ई० में चतुर्थ शक्ति गुट बनाये।

लिपजिंग का युद्ध :
जर्मनी का मुक्ति आन्दोलन : 1812 ई० में नेपोलियन के विरुद्ध जर्मनी में राष्ट्रवादी आन्दोलन आरंभ हुआ। इसका नेतृत्व जर्मन राज्य पर्शिया के लोगों ने किया। पर्शिया का यह फ्रांस-विरोधी जागरण पूरे जर्मनी में फैल गया।
शक्तिगुट द्वारा चौतरफा फ्रांस पर आक्रमण : इसी दशा में चतुर्थ शक्ति गुट के सदस्य रूस, पर्शिया, स्वीडेन, ऑंस्ट्रिया आदि देशों ने चारों तरफ से फ्रांस पर आक्रमण कर दिया। नेपोलियन ने ड्रेसडेन के युद्ध (1813 ईं) में आंस्ट्रिया को पराजित किया।
लिपजिंग में दुर्दशा : मित्रशक्ति ने शीघ्य ही फ्रांस को चारों तरफ से घेरकर आक्रमण किया। जर्मनी के लिपजिंग में लगातार तीन दिनों तक चले युद्ध में नेपोलियन की वाहिनी बुरी तरह से दूट कर पीछे हटने लगी। फलस्वरूप जर्मनी नेपोलियन के शासन से मुक्त हुआ।
फ्रांसीसी साप्राज्य का पतन : लिपजिंग के युद्ध में पराजय के बाद नेपोलियन का विशाल साम्राज्य बिखरने लगा। फ्रांस से वेस्टफैलिया, मेक्लेनवर्ग, कनफेडरेशन ऑफ द राईन आदि देश अलग हो गये। हालैण्ड स्वार्धीन हो गया एवं ऑस्ट्रिया अपने खोये हुए साम्माज्य को वापस पा गया।

प्रश्न 34.
लिपजिंग युद्ध के बाद नेपोलियन के विरुद्ध विभित्र देशों के मुक्तियुद्ध का परिचयेय दो।
उत्तर :
नेपोलियन के लिपजिंग युद्ध (1813 ई०) में चतुर्थ शक्तिगुट द्वारा बुरी तरह हार के बाद भपोलियन के विरुद्ध यूरोप के विभिन्न देशों में मुक्ति संग्राम एवं आन्दोलन का जागरण शुरू हो गया।
नेपोलियन के विरुद्ध मुक्ति आन्दोलन :
फ्रैंकफर्ट प्रस्ताव : नेपोलियन के विरुद्ध लिपजिंग युद्ध में विजयी मित्र देश फ्रैंकफर्ट का प्रस्ताव (नवम्बर, 1813 ई०) द्वारा – (i) नेपोलियन को फ्रांस के राजा के रूप में स्वीकार कर लिया गया, एवं (ii) फ्रांस को अपने प्राकृतिक राज्य सीमा बरकरार रखने की अनुमति दी गयी किन्तु नेपोलियन ने इस प्रस्ताव को नहीं माना।

फ्रांस पर आक्रमण : नेपोलियन के फ्रैंकफर्ट प्रस्ताव नहीं मानने से मित्र देशों ने फ्रांस को चारों तरफ से घेर लिया एवं मार्च 1814 ई० में आक्रमण करके पेरिस को दखल कर लिया।

फाँडण्टेनब्लू की संधि : पराजित सम्राट नेपोलियन विजयी मित्र देशों के साथ फाँउण्टेनब्लू संधि (6 अप्रैल, 1814 ई०) द्वारा फ्रांसीसी सिंहासन छोड़ने के लिये बाध्य हुआ। उसे भूमध्यसागर के एल्बा द्वीप में निर्वासित किया गया।

पेरिस की संधि : विजयी मित्रदेश पेरिस की प्रथम सन्धि (मई, 1814 ई०) द्वारा – (i) बुर्वो वंश के रांजा लुई अठारहवें को फ्रांस की राजंगद्दी पर बैठाया गया एवं (ii) फ्रांस को कांति के पहले वाली सीमा में वापस लौटा दिया गया।

प्रश्न 35.
वाटरलू युद्ध के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
वाटरलू का युद्ध :
आक्रमण की तैयारी : नेपोलियन विरोधी मित्र शक्ति नेपोलियन को ‘कानून के बाहर व्यक्ति’ की घोषणा करके एकजुट होकर फ्रांस पर आक्रमण की तैयारी करने लगी।
आक्रमण : इंग्लैण्ड, पर्शिया, रूस तथा ऑस्ट्रिया के सैन्यदल चारों ओर से फ्रांस पर आक्रमण करने लगे। तीव्र आक्रमण के बावजूद नेपोलियन की सेनावाहिनी शुरुआत में लिंजी एवं क्वाटरब्बास के युद्ध (1815 ई०) में विजयी हुई।
वाटरलू के युद्ध में पराजय : नेपोलियन की शुरुआती सफलता के बाद ब्रिटिश सेनापति आर्थर वेलेसली ने (डियूक ऑफ वेलिंगटन) के साथ वाटरलू के युंद्ध (18 जून, 1815 ई०) में नेपोलियन को बुरी तरह से परास्त किया। 15 जुलाई को नेपोलियनने बिटिश नौवाहिनी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
निर्वासन : वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन के पराजित होने पर विजयी मित्र शक्ति ने उसे भूमध्य सागर के सेण्ट हेलेना द्वीप में निर्वासित कर दिया। वहाँ पर बड़े ही अनादर एवं अपमान के साथ इस वीर योद्धा का देहांत 5 मई, 1821 ई० को हो गया।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
नेपोलियन द्वारा किये गये विभिन्न सुधारों का वर्णन करो।
अथवा
प्रथम कान्सल के रूप में नेपोलियन द्वारा किये गये सुधारों का वर्णन करें।
उत्तर :
फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन ने सिर्फ एक कुशल योद्धा का ही नहीं बल्कि सुदक्ष सुधारक का भी परिचय दिया है। इतिहासकार फिशर का कहना है कि नेपोलियन का साम्राज्य अल्पायु होते हुए भी फ्रांस में उनकी सामाजिक सुधार प्रेनाईट पत्थर की शक्तिशाली नींव पर निर्मित हुआ था।
नेपोलियन का सुधार : नेपोलियन द्वारा किये गये सामाजिक सुधार निम्नलिखित हैं :
शासनतांत्रिक सुधार : नेपोलियन ने फ्रांस में कानून का शासन, आम लोगों के जीवन एवं सम्पत्ति की सुरक्षा की व्यवस्था की। पूरे फ्रांस के 83 विभागों को प्रदेशों में विभक्त कर वहाँ पर ‘प्रिफेक्ट’ नामक शासक को नियुक्त किया। प्रदेशों को विभिन्न जिलों में विभक्त कर ‘सब-प्रिफेक्ट’ नाम से शासकों को नियुक्त किया।

अर्थनैतिक सुधार : देश की अर्थनैतिक संकट को दूर करने के लिये उसने बहुत सारे कदम उठाये। जैसे-

  1. सरकारी लाभ-हानि एवं ऑंडिं प्रथा लागू करना,
  2. सबको आयकर देने के लिये बाध्य करना,
  3. नया कर नहीं लगाकर, पुराने कर-अदायगी पर जोर देना,
  4. बैंक ऑफ फ्रांस की स्थापना करना,
  5. व्यापार संवर्द्धन के लिये व्यापारी संघ का पुनर्गठन करना आदि।

शिक्षा सुधार : शिक्षा सुधार की दिशा में नेपोलियन द्वारा –

  1. फ्रांस में बहुत-से माध्यमिक, चिकित्सा, कारीगरी, कानून, आदि के पठन-पाठन के लिये स्कूल, कॉलेजों की स्थापना हुई।
  2. 29 लाईसी या आवासिक (Residential) स्कूलों की स्थापना,
  3. फ्रांस विश्वविद्यालय की स्थापना (1808 ई०) भी उसने की।

धार्मिक सुधार : नेपोलियन द्वारा पोप सप्तम पायस के सथथ कन्कर्डटी या धर्म-निर्णय समझौता (1801 ई०) करके पोप के साथ चल रहे विरोध को मिटा दिया गया। इस समझौते के द्वारा –

  1. पोप ने फ्रांस के गिरजा एवं गिरजा की सम्पत्ति का राष्ट्रीयकरण मान लिया।
  2. फ्रांस की सरकार रोमन कैथोलिक धर्ममत एवं गिरजा को स्वीकृति दी।
  3. यह तय किया गया कि सरकार पादरियों की नियुक्ति करेगी एवं पोप उन्हें स्वीकार करेगा।

कानूनी सुधार : नेपोलियन ने विभिन्न प्रदेशों में प्रचलित अलग-अलग कानूनों में सुधार लाकर सन् 1804 ई० में 2287 कानून आधारित ‘कोड नेपोलियन’ नामक एक आचार-संहिता का प्रवर्तन किया। इसके प्रधान विषय में

  1. सामन्तवाद की समाप्ति
  2. व्यक्ति स्वाधीनता एवं सम्पत्ति के अधिकार की स्वीकृति
  3. कानून की नजर में सभी बुराबर हैं
  4. धार्मिक सहिष्णुता
  5. सरकारी नौकरियों में योग्यता के आधार पर नियुक्ति आदि सम्मिलित थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 2.
नेपोलियन के पतन में महादेशीय अवरोध की भूमिका क्या थी?
अथवा
नेपोलियन के पतन के क्या कारण थे उसका संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
नेपोलियन द्वारा महादेशीय अवरोध व्यवस्था को बल-प्रयोग द्वारा लागू किये जाने से वह विभिन्न संकटों से घिर गया जो उसके पतन का कारण बना।
फ्रांस की अर्थनैतिक क्षति : नेपोलियन की महादेशीय अवरोध व्यवस्था परोक्ष रूप से फ्रांस की अर्थनैतिक क्षति का कारण बना। इंग्लैण्ड का ‘आर्डर-इन-कौसिल’ नामक समुद्री प्रतिरोध के फलस्वरूप फ्रांस का समुद्री व्यवसाय पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। इसके कारण फ्रांस में मजदूरों की छँटनी, बेरोजगारी, कल-कारखाने बन्द आदि अनेक समस्याओं ने विकराल रूप धारण कर लिया।

समुद्री तट दखल : नेपोलियन ने जबरदस्ती महादेशीय अवरोध व्यवस्था लागू करने के लिये यूरोप के प्राय: दो हजार मील समुद्री तटों को दखल कर लिया। इसके अलावे बहुत से निरपेक्ष एवं शान्तित्रिय देशों को भी दखल करने के कारण उन देशों में इसके विरोध में विद्रोह आरंभ हो गया।

अतिरिक्त खर्च : महादेशीय अवरोध व्यवस्था लागू करने के लिये नेपोलियन ने जिन विशाल भूखण्डों को दखल किया उसकी देख-रेख के लिये उसे सैन्य दलों एवं शासकों का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा।

रोम तथा हालैण्ड में विद्रोह : रोम एवं हालैण्ड द्वारा महादेशीय अवरोध व्यवस्था मानने से इन्कार किये जाने पर नेपोलियन द्वारा रोम के पोप को गद्दी से हटाकर बन्दी बनाने पर क्रिश्चियन कैथोलिक समुदाय के लोग नेपोलियन से क्षुब्ध हो गये। हालैण्ड के शासक लुई (नेपोलियन का भाई) को गद्दी से हटाकर हालैण्ड को दखल कर लिया।

उपद्वीप के युद्ध में असंतोष : पुर्तगाल द्वारा महादेशीय अवरोध व्यवस्था नहीं मानने पर नेपोलियन ने स्पेन की अनुमति से स्पेन होकर पुर्तगाल पर आक्रमण किया एवं उसे महादेशीय अवरोध व्यवस्था मानने को बाध्य किया। पुर्तगाल से वापसी पर उसने स्पेन को भी दखल कर अपने भाई जोसेफ को गद्दी पर बैठाया। इसके कारण स्पेन एवं पुर्तगाल में नेपोलियन के विरुद्ध तीव्र लड़ाई शुरू हो गयी। यह युद्ध उपद्वीपीय युद्ध (1808 – 1814 ई०) के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में स्पेन के साथ ब्रिटेन के सहयोग से फ्रांस की पराजय हुई।

रूस में पराजय : रूस के महादेशीय अवरोध व्यवस्था नहीं मानने पर नेपोलियन ने रूस पर आक्रमण (1812 ई०) कर दिया किन्तु रूस में नेपोलियन की ग्रैंड आर्मी बुरी तरह परास्त हुई एवं अधिकांश सैनिक भूख, महामारी एवं भयकर शीत से मारे गये।

प्रश्न 3.
नेपोलियन फ्रांसीसी क्रांति की किन धारणाओं को प्रतिष्ठित किया ?
उत्तर :
फ्रांस की कांति से संबंधित महत्वपूर्ण तीन आदर्श थे – समानता, दोस्ती एवं स्वाधीनता। नेपोलियन सन् 1799 ई० में फ्रांस का शासक बना एवं 1814 ई० तक फ्रांस पर शासन किया।
क्रांतिकारी आदर्श की प्रतिष्ठा : नेपोलियन अपने शासनकाल में कांति की समानता एवं मैत्री के आदर्शों की प्रतिष्ठा किया। जैसे –
ईश्वरीय अधिकार तत्व की समांप्ति : फ्रांस में क्रांति से पहले वुर्वो राजाओं द्वारा खुद को भगवान का प्रतिनिधि मानकर शासन चलाया-जाता था। नेपोलियन ने सिंहासन पर बैठने के बाद ईश्वर के अधिकार तत्व को समाप्त कर सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार प्रदान किया एवं प्रजातंत्र की स्थापना की।

समानता की प्रतिष्ठा : फ्रांस में क्रांति से पहले असमान श्रेणियों में फ्रांस की जनता बँटी हुई थी। नेपोलियन ने फ्रांस में समानता की प्रतिष्ठा करके उन्हें कानूनी दायरे में लाने के लिये आचार-संहिता की रचना कर, उसे चालू किया।

सामन्तवाद की समाप्ति : फ्रांस में क्रांति से पहले वुर्वो राजतंत्र ने जिन सामन्तशाही शासन व्यवस्था का प्रचलन किया था, उन्हें खत्म कर नेपोलियन ने खुद को ‘सम्राट’ घोषित किया और उन रीतियों का सफाया कर दिया।

योग्यता को स्वीकृति : नेपोलियन ने वंश-क्रम अधिकार को समाप्त करके योग्यता को स्वीकृति दी। योग्यता के आधार पर लोगों को सरकारी नौकरियों में वरीयता मिली।

धर्म निरपेक्षता : नेपोलियन द्वारा धर्मनिरपेक्षता को आदर्श के रूप में प्रहण किया गया। 1791 ई० में ‘सिविल कन्स्टीट्यूशन ऑफ़ द क्लर्जी’ को समाप्त करने से पोप नाराज हुए। नेपोलियन ने पोप सप्तम पायस के साथ कन्कर्डटी या धर्म निर्णय समझौता (1801 ई०) करके इस गतिरोध को दूर किया।

क्रांतिकारी आदर्श का प्रसार : नेपोलियन द्वारा फ्रांस के बाहर विभिन्न देशों में कांति के आदर्शों का प्रसार किया गया। नेपोलियन की सैन्यवाहिनी ने जर्मनी तथा इटली के साथ ही अन्य देशों में भी प्रचार चलाकर पुरातनपंथी शासनव्यवस्था को समाप्त कर प्रजातंत्र की स्थापना की।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 4.
नेपोलियन द्वारा फ्रांस की क्रांति के किन आदर्शों को अस्वीकार किया गया ?
उत्तर :
1799 ई० में फ्रांस का शासन भार संभालने के बाद क्रांति की समानता तथा मैत्री के आदर्श प्रतिष्ठा को मान्यता देते हुए नेषोलियन ने स्वाधीनता एवं अन्य क्रांतिकारी आदर्शों की अवहेलना की।
राजतंत्र की प्रतिष्ठा : फ्रांस के क्रांतिकारियों ने वंशक्रम राजतंत्र को समाप्त करके प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा की थी किन्तु नेपोलियन के शासक बनने के बाद 1804 ई॰ में वह स्वयं को सम्माट घोषित करके पुन: तानाशाही राजतंत्र की स्थापना की। इससे क्रांति का मूल उद्देश्य ही नष्ट हो गया।

स्वाधीनता के आदर्श की अवहेलना : नेपोलियन द्वारा फ्रांस के नागरिकों की आजादी छीन ली गई। उसने –

  1. प्रादेशिक कानून सभाओं की क्षमता समाप्त कर दी
  2. लोगों के बोलने के अधिकार एवं समाचारपत्रों की आजादी छीन ली
  3. बगैर विचार के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का आदेश पुन: चालू किया
  4. नाटक एवं धियेटरों पर पुलिस बैठा दी
  5. सर्व वयस्क मताधिकार की घोषणा के बावजूद आम लोगों के प्रत्यक्ष मतदान का अधिकार स्वीकार नहीं किया
  6. बुर्जुआ श्रेणी को ज्यादा सुयोग-सुविधा दी गयी।

शिक्षा के क्षेत्र में हस्तक्षेप : नेपोलियन ने कांतिकारी जैकोबिनों द्वारा घोषित प्राथमिक शिक्षा के आदर्श को समाप्त करके ऐसी शिक्षा प्रणाली लागू की जो विद्यार्थियों को सम्राट, सरकार एवं देश के प्रति अनुरागी बनाये जिससे छात्र सम्राट तथा सरकार के विरुद्ध आवाज नहीं उठाये इसीलिये राजनीति एवं इतिहास के पाठ्यक्रम में परिवर्तन किया।

क्रांतिकारी सन्तान नहीं : फ्रांस के क्रांतिकारी आदर्शों को नष्ट करनेवाला नेपोलियन के बारे में इतिहासकार जार्ज रूडे का कहना है कि वह क्रांतिकारी सन्तान नहीं था। नेपोलियन स्वयं अपनी आत्मजीवनी में स्वीकार किया है कि वह क्रांतिकारी सन्तान नहीं बल्कि क्रांति को नष्ट करनेवाला था।

प्रश्न 5.
नेपोलियन के सामरिक अभियान एवं साम्राज्य विस्तार के बारे में वर्णन करो।
उत्तर :
नेपोलियन बोनापार्ट ने शुरुआत में फ्रांस के सेनापति एवं बाद में फ्रांस के कन्सोल के रूप में एवं फिर सम्राट के रूप में यूरोप के विशाल इलाके को दखल करके फ्रांसीसी सांग्राज्य का विस्तार किया।
प्रथम शक्तिगुट के विरुद्ध युद्ध : नेपोलियन डाइरेक्टरी के शासनकाल (1795-99 ई०) में फ्रांस विरोधी प्रथम शक्तिगुट (1792-97 ई०) के विरुद्ध युद्ध की शुरुआत की।
इटली : नेपोलियन ने इटली के युद्ध में सर्डिनिया को पराजित करके सेवाय एवं निस पर दखल किया। इटली का पार्मा, मडेना, नेपल्स के शासक भी उससे मित्रता करने को बाध्य हुए। वह उत्तरी इटली के युद्ध में ऑस्ट्रिया को हराकर वेनिस, मिलान एवं लम्बार्डी को दखल किया। रोम के शासक पोप को हराकर उसे टलेन्टिनों की सन्धि के लिये बाध्य किया।

ऑस्ट्रिया : ऑस्ट्रिया में सैनिक अभियान चलाकर वह ऑष्ट्रिया को कैम्पोफार्मिओ की संधि (1797 ई०) के लिये बाध्य किया।(3) इंग्लैण्ड : नेपोलियन ने इंग्लैण्ड के विरुद्ध मिस्र के पिरामिड युद्ध (1798 ई०) में विजयी होकर भी नील नदी के युद्ध (1798 ई०) में पराजित हुआ।

द्वितीय शक्तिगुट के विरुद्ध युद्ध : फ्रांस के विरुद्ध ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया एवं रूस द्वितीय शक्तिगुट की कूटनीति ने इस गुट से रूस को अलग किया एवं ऑस्ट्रिया को मेरेनो के युद्ध (1800 ई०) में पराजित करके इटली में फ्रांस के खोये हुए स्थानों को पुन: दखल किया। इसके बाद ऑंस्ट्रिया को उसने होहेनलिण्डेन के युद्ध (1800 ई०) में परास्त कर लूनविल की संधि के लिये बाध्य किया। इंग्लैण्ड ने अमीन्स की संधि द्वारा फ्रांस को विभिन्न उपनिवेश लौटा दिया।.

तृतीय शक्तिगुट के विरुद्ध युद्ध : फ्रांस के विरुद्ध इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रिया, रूस एवं स्वीडेन द्वारा तृतीय शक्तिगुट (1805-06 ई०) बनाया गया । इस गुट के सदस्य ऑस्ट्रिया पर अचानक नेपोलियन ने आक्रमण कर उसे उल्म के युद्ध (1805 ई०) में पराजित कर दिया। नेपोलियन ब्रिटिश सेनापति नेलसन के साथ ट्राफलगर के युद्ध (1805 ई०) में परास्त होने पर भी ऑंस्ट्रिया फ्रांस के साथ प्रेसवर्न की संधि (1805 ई०) के लिये बाध्य हुआ।

अन्य युद्ध : नेपालियन ने पर्शिया को जेना एवं अराष्टाडाट के युद्ध (1806 ई०) में पराजित किया एवं स्कालबान की संधि द्वारा पर्शिया का बहुत बड़ा हिस्सा दखल कर लिया। उसने फ्रिडलैण्ड के युद्ध (1807 ई०) में रूस को हरकर टिलसिट की संधि (1807 ई०) के लिये उसे बाध्य किया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 History Book Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 History Chapter 1 Question Answer – फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
प्रोटेस्टेंटों को कैसी यातनाएूं दी जाती थीं?
उत्तर :
कठोर यातनाएं।

प्रश्न 2.
फ्रांस में बिना अभियोग की गिरफ्तारी का एक वारंट पत्र किसके पास होता था।
उत्तर :
राजा के सामंतों के पास होता था।

प्रश्न 3.
फ्रांस में राज्य क्रांति कब हुई थी ?
उत्तर :
1789 ई० में।

प्रश्न 4.
टेनिस कोर्ट का शपथ ग्रहण कब हुआ था?
उत्तर :
टेनिस कोर्ट का शपथ ग्रहण 20 जून 1789 ई० को हुआ था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 5.
फ्रांस की राज्य क्रान्ति में दार्शनिक का योगदान था, उनमें से दो लोगों के नाम बतायें।
उत्तर :
वाल्टेयर, मांटेस्क्यू।

प्रश्न 6.
फ्रांस की क्रान्ति के समय लुई XVI की पत्नी का क्या नाम था ?
उत्तर :
मेरी एंत्वायनेत।

प्रश्न 7.
फ्रांस की राजधानी कहाँ थी ?
उत्तर :
फ्रांस की राजधानी पेरिस में थी।

प्रश्न 8.
फ्रांस के राजा कहाँ रहते थे ?
उत्तर :
वार्साय में।

प्रश्न 9.
दाँते कौन था ?
उत्तर :
दाँते जैकोबिन दल का प्रमुख सदस्य था।

प्रश्न 10.
ला फायते कौन था ?
उत्तर :
ला फायते फ्रांसीसी सेना का सेनापति था।

प्रश्न 11.
फ्रांस के राजा लुई XVI को कब फांसी दी गई ?
उत्तर :
21 जनवरी, 1793 ई०।

प्रश्न 12.
प्रथम एस्टेट में फ्रांस के कौन लोग आते थे ?
उत्तर :
पादरी वर्ग के लोग।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 13.
तृतीय एस्टेट में फ्रांस के कौन लोग आते थे ?
उत्तर :
साधारण लोग एवं बुर्जुआ वर्ग के लोग।

प्रश्न 14.
वार्साय का महल किसने बनवाया था ?
उत्तर :
लुई चतुर्दश ने वार्साय का महल बनवाया था।

प्रश्न 15.
फ्रांस में दो प्रकार के कर के नाम बताएं।
उत्तर :
गैबेल तथा कार्वी।

प्रश्न 16.
बैस्टील दुर्ग का पतन क्यों हुआ ?
उत्तर :
बैस्टील दुर्ग को निरकुशता का प्रतीक माने जाने के कारण उसका जनता द्वारा पतन हुआ।

प्रश्न 17.
‘मैं ही राष्ट्र हूँ।’ – किसका कथन है ?
उत्तर :
यह फ्रांस के समाट लुई चौदहवें का कथन है।

प्रश्न 18.
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस का राजा कौन था ?
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस का राज़ा वुर्वो वंशीय लुई सोलहवां था।

प्रश्न 19.
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस की रानी कौन थी ?
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस की रानी वुर्वो वंशीय मेरी एंत्वायनेत थी।

प्रश्न 20.
फ्रांस में सात वर्ष से बड़े व्यक्ति को साल में कितना नमक खरीदना आवश्यक था।
उत्तर :
सात पौण्ड।

प्रश्न 21.
फ्रांस की क्रान्ति के समय अर्द्धदासों की संख्या कितनी थी ?
उत्तर :
तकरीबन 5 लाख।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 22.
बैस्टिल दुर्ग का पतन कब हुआ?
उत्तर :
14 जुलाई 1789 ई०

प्रश्न 23.
डेनिस दिदेरो कौन था ?
उत्तर :
डेनिस दिदेरो एक विचारक, दार्शनिक तथा फ्रांसीसी क्रान्ति का प्रेरक था।

प्रश्न 24.
फ्रांस पर जैकोबिन दल का प्रभुत्व कब स्थापित हुआ?
उत्तर :
1792 ई० को।

प्रश्न 25.
किसने और कब ‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ की घोषणा की ?
उत्तर :
फ्रांसीसी संविधान सभा ने 26 अगस्त 1789 ई० को ‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ की घोषणा की।

प्रश्न 26.
फ्रांस के क्रान्ति के बाद आतंक राज्य किस दल ने कायम किया था?
उत्तर :
जैकोविन दल ने।

प्रश्न 27.
फ्रांस में सामंतों का अन्त कब हुआ?
उत्तर :
4 अगस्त, 1789 ई० को राष्ट्रीय सभा की प्रथम बैठक में हुआ।

प्रश्न 28.
आंतक का राज्य फ्रांस में कब से कब तक था?
उत्तर :
जून 1793 से जुलाई 1794 तक।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 29.
द्वितीय स्टेट के अन्तर्गत आने वाले वर्ग कौन-कौन थे ?
उत्तर :
कुलीन एवं सामन्त।

प्रश्न 30.
जैकोबिन दल के प्रमुख नेता के नाम बताएं।
उत्तर :
सुमारियाज।

प्रश्न 31.
जैकोबिन दल फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना कैसे करना चाहता था ?
उत्तर :
आतंक का राज्य स्थापित करके।

प्रश्न 32.
दक्षिणमार्गी दल के किसी एक नेता का नाम लिखें।
उत्तर :
रोब्सपियर।

प्रश्न 33.
वाममार्गी दल के किसी एक नेता का नाम लिखें।
उत्तर :
कार्ल मार्क्स।

प्रश्न 34.
“सौ चूहों की अपेक्षा एक सिंह का शासन उत्तम है ।” फ्रांसीसी क्रान्ति से सम्बन्धित यह कथन किसका है ?
उत्तर :
वाल्टेयर का।

प्रश्न 35.
‘मैं जो चाहूँ, वही कानून है।’ – यह कथन किसका है ?
उत्तर :
यह कथन फ्रांस के सम्राट लुई सोलहवें का है।

प्रश्न 36.
फ्रांस में वंशानुक्रमिक कुलीन किस नाम से परिचित थे ?
उत्तर :
फ्रांस में वंशानुक्रमिक कुलीन ‘नोबिलिटी ऑंफ द सोर्ड’ के नाम से परिचित थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 37.
कब और किस वंश के शासनकाल में फ्रांसीसी क्रान्ति हुई थी ?
उत्तर :
1789 ई० में वुर्वो राजवंश के शासनकाल में फ्रांसीसी क्रांति हुई थी।

प्रश्न 38.
‘क्रांति’ का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
क्रांति का अर्थ प्रचलित व्यवस्था में तेज एवं कार्यकर परिवर्तन सें है।

प्रश्न 39.
‘मैं ही राष्ट्र हूँ।’ – किसका कथन है ?
उत्तर :
यह फ्रांस के समाट लुई चौदहवें का कथन है।

प्रश्न 40.
‘मेरे बाद ही महाप्रलय आयेगा।’ – किसने कहा था ?
उत्तर :
यह फ्रांस के सम्राट लुई पन्द्रहवें ने कहा था।

प्रश्न 41.
फ्रांस में प्राक्-क्रांति समय को किसने – ‘राजनीतिक कारागार’ कहकर संबोधित किया था ?
उत्तर :
दार्शनिक वाल्टेयर ने फ्रांस के प्राक्-क्रांति समय को – ‘राजनीतिक कारागार’ कहकर संबोधित किया था।

प्रश्न 42.
प्राक्-क्रांति काल के फ्रांस को किसने ‘भ्रामक अर्थनीति का जादूघर’ कहकर संबोधित किया था ?
उत्तर :
ब्रिटिश अर्थशास्ती एडम स्मिथ ने प्राक्-क्रांतिकाल के फ्रांस को ‘भ्रामक अर्थनीति का जादूघर’ कहकर संबोधित किया था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 43.
फ्रांसीसी पादरियों द्वारा लिये जाने वाले कुछ करों के नाम लिखो।
उत्तर :
फ्रांसीसी पादरियों द्वारा लिये जाने वाले करों के नाम हैं- टाइद या धर्म कर, मृत्यु कर, विवाह कर इत्यादि।

प्रश्न 44.
फ्रांसीसी पादरी कितने श्रेणियों में बँटे थे ?
उत्तर :
फ्रांसीसी पादरी मुख्यतः उच्च एवं निम्न-इन दो श्रेणियों में बंटे थे।

प्रश्न 45.
फ्रांस के किन सम्र्रदायों को सरकार द्वारा लागू बाध्यतामूलक करों से छूट मिली थी ?
उत्तर :
पादरी एवं कुलीन वर्ग को सरकार द्वारा लागू बाध्यतामूलक करों से छूट मिली थी।

प्रश्न 46.
फ्रांसीसी क्रांति की तीन नीतियाँ क्या थीं ?
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति की तीन नीतियाँ थीं – समानता, मैत्री एवं आजादी।

प्रश्न 47.
किसने सबसे पहले ‘समानता, मैत्री एवं आजादी’ – आदर्श की बात कही ?
उत्तर :
रूसो ने सबसे पहले ‘समानता, मैत्री एवं आजादी’ – आदर्श की बात कही।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
‘फ्रांस राजतंत्र के अधीन राजनीतिक बन्दी का राष्ट्र बन गया’ – इस कथन कीं व्याख्या करो।
उत्तर :
यहाँ वैयक्तिक स्वतंत्रता भी अंतिम साँस ले रही थी। राजा किसी भी समय किसी को कैद कर सकता था और बिना मुकदमा चलाए उसे अपराधी ठहरा सकता था। ऐसी स्थिति में जनता की वैयक्तिक स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई थी। वाल्टेयर और मिराबो को इसी प्रकार बन्दी बनाकर वर्षों बन्दीगृह में रखा गया था।

प्रश्न 2.
फ्रांस के नये संविधान ने क्रान्ति की रक्षा कैसे की ?
उत्तर :
किसी भी क्रान्ति के पश्चात्, क्रान्ति से हुए परिवर्तनों को बनाए रखना अत्यन्त कठिन होता है क्योंकि क्रान्ति विरोधी तत्व पुन: पूर्व स्थिति लाने का प्रयास करते हैं। इन परिस्थितियों में ‘आतंक के शासन’ की स्थापना की गयी। आतंक के शासन का उद्देश्य फ्रांस में शान्ति एवं सुव्यवस्था स्थापित करने साथ ही विदेशी आक्रमणों से फ्रांस की रक्षा करना था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 3.
फ्रांसीसी सम्रदाय कितने भागों में विभक्त था और कौन-कौन ?
उत्तर :
फ्रांस में क्रांति से पहले सम्रदाय तीन श्रेणियों में विभक्त था। जैसे –

  1. धनी व्यवर्सायी, पूंजीपति, बैंकर्स, आदि को लेकर उच्च वर्ग,
  2. एड़ोकेट, न्यायाधीश, चिकित्सक, शिक्षक आदि को लेकर मध्य वर्ग एवं
  3. दुकानदार, कारीगर, कृषक, श्रमिक, सर्वहारा आदि को लेकर निम्न वर्ग।

प्रश्न 4.
क्रांति से पहले फ्रांसीसी समाज में कितने एवं कौन-कौन सामाजिक स्तर थे ?
उत्तर :
क्रांति से पहले फ्रांसीसी समाज के तीन सामाजिक स्तर थे। जैसे –

  • प्रथम श्रेणी : पादरी सम्पदाय
  • द्वितीय श्रेणी : कुलीन सम्र्रदाय
  • तृतीय श्रेणी : मध्यवित्त (बुर्जुआ), व्यवसायी, कृषक, श्रमिक, सर्वहारा आदि।

प्रश्न 5.
पुरातन व्यवस्था जो फ्रांस क्रान्ति से पहले थी उस पर दो वाक्यों में अपना मत दें।
उत्तर :
फांस में क्रांति के पहले की राजतंत्र व्यवस्था को पुरातन व्यवस्था के नाम से जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता राजतंत्र की निरकुशता थी।

प्रश्न 6.
फ्रांस में क्रान्ति के पहले सामन्तों की स्थिति कैसी थी ?
उत्तर :
फ़ांस में क्रान्ति के पूर्व फ्रांस की कुल भूमि का चौथाई भाग सामन्तों के अधीन था, जिसकी आय से ये लोग विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते थे। सामन्तों में भी दो वर्ग थे – सैनिक सामन्त तथा न्यायाधीश।

प्रश्न 7.
क्रान्ति पूर्व फ्रांस में राजा के अधिकार को बताएं।
उत्तर :
राजा ही कानून बनाता, वही कर लगाता, खर्च भी अपनी इच्छानुसार करता, युद्ध की घोषणा तथा अपनी स्वेच्छा से ही अन्य राष्ट्रों के साथ संधि करता था। राजा किसी भी व्यक्ति को बिना अभियोग लगाए बन्दी बना सकता था।

प्रश्न 8.
क्रान्ति पूर्व फ्रांस में बेगारी-प्रथा क्या थी ?
उत्तर :
बेगारी-प्रथा : समाज में अर्द्धदासों का एक वर्ग या जो गुलाम से कुछ बेहतर होते थे। उन्हें अपने सामन्तों, पादरियों और बड़े किसानों के यहाँ सप्ताह में तीन दिन बेगारी करनी पड़ती थी। बेगारी का तात्पर्य ऐसे श्रम से है जिसमें उत्पादन तो हीता है किन्तु प्रारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया जाता है।

प्रश्न 9.
फ्रांस की बुर्जुआ श्रेणी के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
फ्रांस के वैषम्यमूलक समाज व्यवस्था के तृतीय श्रेणी का अन्यतम अंश था मध्यवित्त या बुर्जुआ श्रेणी। यह श्रेणी ही क्रांति की अम्यूत थी। यह श्रेणी तीन भागों में विभक्त थी –

  • धनी व्यवसायी, बैंक मालिक, पूँजीपति आदि थे उच्च वर्ग के लोग
  • शिक्षक, चिकित्सक, वकील आदि मध्य वर्ग एवं
  • साधारण व्यवसायी, दुकानदार, कृषक, श्रमिट कारीगर आदि निम्न वर्ग़।

प्रश्न 10.
‘कार्वि’ क्या है ?
उत्तर :
क्रांति के पहले फ्रांस के किसान मालिकों के विभिन्न कामों के लिए बिना मजदूरी के बेगार खटने को बाध्य थे। इसी को श्रमकर या. कार्वि कर कहा जाता था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 11.
क्रांति पूर्व फ्रांस में द्वितीय स्टेट की स्थिति को बताए।
उत्तर :
क्रान्ति से पहले द्वितीय स्टेट अर्थात् कुलीन वर्ग की स्थिति सम्पन्न एवं प्रभावशाली थी।

प्रश्न 12.
रूसो कौन थे ? उनके प्रसिद्ध ग्रन्थ का नाम क्या है ?
उत्तर :
रूसो (1712-1778 ई०) 18 वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध दार्शनिक थे। उनके द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्य है – ‘सोशल काण्ट्रैक्ट’ या ‘सामाजिक समझौता’। यह पुस्तक क्रांति की बाइबिल नाम से परिचित है।

प्रश्न 13.
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस के राजा एवं रानी कौन थे? वे लोग किस राजवंश के थे ?
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस के राजा एवं रानी क्रमशः लुई सोलहवे एवं मेरी एंत्वायनेत थे। ये दोनों बुर्वों राजवंश के थे।

प्रश्न 14.
फ्रांस क्रान्ति के समय पादरी और निम्न पादरियों में क्या अन्तर था ?
उत्तर :
बड़े पादरियों के पास काफी धन और आलीशान महल था लेकिन निम्न पादरियों की आय बहुत ही सीमित थी। बड़े पादरियों द्वारा इन्हें बड़ी हीन दृष्टि से देखा जाता था। इनका समाज में कोई विशेष आदर नहीं था। इनकी अवस्था अत्यन्त दयनीय हो चुकी थी। यह अधिकतर छोटे-छोटे शहरों तथा देहातों में रहते थे।

प्रश्न 15.
बैस्टील दुर्ग का पतन कैसे हुआ ?
उत्तर :
राष्ट्रीय सभा के बुर्जुआ प्रतिनिधियों के दबाव से फ्रांस के राजा द्वारा तीनों सम्रदाय के प्रतिनिधियों को एक साथ सभा में बैठने एवं प्रत्येक प्रतिनिधि को मताधिकार प्रयोग करने का प्रस्ताव मान लेने पर पेरिस की जनता अत्यंत खुश हुई इसके बाद 14 जुलाई 1789 ई० को उत्तेजित जनता ने बैस्टील दुर्ग के कारारक्षियों की हत्या करके बैस्टील दुर्ग पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 16.
बास्टील दुर्ग पर आक्रमण कब हुआ ? और आक्रमण किसने किया?
उत्तर :
14 जुलाई 1789 ई० को फ्रांस के उत्तेजित जनता ने बैस्टील दुर्ग पर आक्रमण किया।

प्रश्न 17.
नवीन संविधान के निर्माण के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
फ्रांस के नवीन संविधान राजतन्त्र का अन्त कर दिया तथा आतंक के राज्य के स्थापना में सदद की।

प्रश्न 18.
माण्टेस्क्यू द्वारा रचित दो ग्रन्थों के नाम लिखो।
उत्तर :
माण्टेस्क्यू द्वारा रचित दो महत्वपूर्ण प्रन्थ हैं – (i) द स्पिरिट ऑफ लॉ एवं (ii) द पर्सियन लेटर्स।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 19.
फ्रांस में जनता से कौन-कौन सा कर लिया जाता था?
उत्तर :
फ्रांस में प्रचलित कुछ करों के नाम :

  1. टाइले या भूमिकर
  2. कैपिटेशन या उत्पादन कर
  3. भिंटिंयेमे या आयकर
  4. गैबेला या नमक कर
  5. टाइद या धर्मकर
  6. कार्वि या श्रमकर (मालिक के यहाँ बाध्यतामूलक बेगारी करना) इत्यादि।

प्रश्न 20.
फ्रांस की दो राजनीतिक दलों के नाम बताइए।
उत्तर :

  1. दक्षिणपंथी शासनतांत्रिक दल,
  2. वामपन्थी जिरन्दिस्त दल,
  3. उग्र वामपन्थी जैकोबिन दल एवं
  4. मध्यपन्थी निरपेक्ष दल।

प्रश्न 21.
पार्लेमा के निम्नलिखित मुद्दे क्या थे ?
उत्तर :
पेरिस की पार्लेमा (Parlement) के निम्नलिखित मुद्दे :

  1. राजा को न्यायाधीशों को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
  2. प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति की सुनवाई उचित न्यायालय में होनी चाहिए।
  3. प्रान्तीय पार्लेमा के अधिकार अक्षुण्ण हैं।

प्रश्न 22.
‘टेनिस कोर्ट की शपथ’ क्या है ?
उत्तर :
फ्रांस की राष्ट्रीय सभा के तृतीय सम्रदाय के सदस्यगण 20 जून 1789 ई० को संसद भवन में प्रवेश करने पर देखा कि सभाकक्ष बन्द है। इसके बाद क्षुब्ध सदस्यगण मिराबो एवं आवेसिएसेस के नेतृत्व में निकटवर्ती टेनिस कोर्ट मे एकत्रित होकर शपथ ली कि फ्रांस के लिये एक नये संविधान की रचना नहीं होने तक वे लोग एक साथ मिलकर कार्य करते रहेंगे। इस घटना को ‘टेनिस कोर्ट की शपथ’ कहते हैं।

प्रश्न 23.
इस्टेट जेनरल की बैठक कब और कहाँ हुई थी ?
उत्तर :
इस्टेट जेनरल की बैठक 5 मई, 1789 ई० को सभा भवन में हुई।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 24.
फ्रांस क्रान्ति में लाफायते कौन थे ?
उत्तर :
फ्रांस क्रान्ति में लाफायते फ्रांस का सेनापति था।

प्रश्न 25.
फ्रांस क्रान्ति के समय मध्य वर्ग में कौन-कौन से लोग आते थे?
उत्तर :
बुद्धिजीवी, व्यवसायी और सरकारी कर्मचारी आते थे।

प्रश्न 26.
फ्रांस क्रान्ति के समय राजा को किस दल ने फाँसी दिया और कब?
उत्तर :
लुई 16 वाँ को 21 जनवरी, 1793 को फाँसी दिया गया।

प्रश्न 27.
राष्ट्रीय संवैधानिक सभा के कार्य बताएं।
उत्तर :
राष्ट्रीय संवैधानिक सभा के कार्य :

  1. सामन्तवादिता का अन्त
  2. मानव अधिकारों की घोषणा
  3. चर्च की जागीरों एवं मठो का अन्त
  4. नवीन संविधान का निर्माण
  5. आर्थिक दशा सुधारने हेतु किए गए कार्य।

प्रश्न 28.
सॉ कूलोट किसे कहा जाता था ?
उत्तर :
सॉ कूलोट : फ्रांस के शहरों में रहने वाले मजदूर वर्ग के लोगों को सॉ कूलोट कहा जाता है। ऐसा उन्हें इसलिए कहा जाता था क्योंकि वे लोग उच्च श्रेणी की लोगों की तरह Silk के परिधान को धारण नहीं कर सकते थे।

प्रश्न 29.
‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ में क्या कहा गया है ?
उत्तर :
‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ में कहा गया है –

  1. स्वाधीनता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है।
  2. कानून की दृष्टि में सभी समान हैं।
  3. जनता ही सार्वभौम शक्ति की जनक है।
  4. वाक्स्वाधीनता, धार्मिक स्वाधीनता, सम्पत्ति भोग एबं अधिकार आदि मनुष्य के मौलिक अधिकार हैं।

प्रश्न 30.
‘व्यक्ति एवं नार्गरिक के अधिकार’ की घोषणा का क्या महत्व है ?
उत्तर :
‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ की घोषणा में महत्वपूर्ण तथ्य थे –
(i) इस घोषणापत्र के जरिये पुरातनतंत्र को नष्ट करने की चेष्टा हुई।
(ii) उदारवाद, राष्ट्रीयतावाद एवं मानवधिकार की रक्षा के लिये लोग जागरूक हुए।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 31.
किस दल के नेतृत्व में कितने समय तक फ्रांस में आतंक-राज कायम रहा ?
उत्तर :
उग्र वामप्थी जैकोबिन दल के नेतृत्व में 2 जून 1793 ई० से 27 जुलाई 1794 तक फ्रांस में आतंक-राज कायम था।

प्रश्न 32.
फ्रांसीसी क्रान्ति के तीन आदर्श क्या थे ?
उत्तर :
स्वतंत्रता, समानता एवं बन्धुत्व फ्रांसीसी क्रान्ति के तीन आदर्श थे।

प्रश्न 33.
पुरातन व्यवस्था से क्या समझते है ? इसका प्रतिष्ठाता कौन था ?
उत्तर :
फ्रांस में क्रांति के पहले की व्यवस्था को स्थापित करने को पुरातन व्यवस्था कहा जाता है। उसका प्रतिष्ठाता लुई 14वाँ था।

प्रश्न 34.
‘सस्पेन्सिव विटो’ क्या है ?
उत्तर :
फ्रांसीसी संविधान सभा के निर्णय के आधार पर संसद द्वारा प्रवर्तित किसी कानून को राजा सम्पूर्ण रद्द न करने पर भी कुछ समय के लिए उसे स्थगित रख सकते थे। राजा की इस शक्ति को ‘सस्पेन्सिव विटो’ कहा जाता था।

प्रश्न 35.
‘पादुआ की घोषणा’ क्या है ?
उत्तर :
ऑस्ट्रिया के सम्राट लिओपोल्ड पादुआ नामक स्थान से 6 जुलाई 1791 ई० को एक घोषणा की। इसमें उन्होंने फ्रांसीसी राजतन्त्र के पक्ष में यूरोपीय राजा वर्ग को सशस्त्र हस्तक्षेप करने का आवेदन किया। इस घोषणा को पादुआ की घोषणा’ नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 36.
‘पिलनिज की घोषणा’ क्या है ?
उत्तर :
ऑस्ट्रिया के राजा लिओपोल्ड एवं पर्सिया के राजा फ्रेडरिक द्वितीय विलियम 27 अगस्त 1791 ई० को पिलनिज नामक स्थान से संयुक्त रूप से एक घोषणा पत्र के द्वारा फ्रांसीसी राजतंत्र के पक्ष में यूरोप के राजवर्ग को फ्रांस में सशस्त्र हस्तक्षेप का आवेदन किया। यह घोषणा ‘पिलनिज की घोषणा’ नाम से परिचित है।

प्रश्न 37.
‘ब्रांसविक घोषणा’ क्या है ?
उत्तर :
1792 ई० के अगस्त महीने में पर्सिया के सेनापति बांसविक ने एक घोषणा के माध्यम से फ्रांसीसीयों को सतर्क कर दिया कि फ्रांस के राज-परिवार को कोई नुकसान होने पर, वे पेरिस शहर को नष्ट कर देंगे। यह घोषणा ‘ब्रांसविक घोषणा’ के नाम से परिचित है।

प्रश्न 38.
‘टाइद’ क्या है ?
उत्तर :
‘टाइद’ धर्मकर था। फ्रांसीसी गिरजा देश के तृतीय श्रेणी के लोगों से 10 % की दर से यह टैक्स वसूल करता था। गिरजा के पादरी लोग इस टैक्स से विलासिता का जीवन व्यतीत करते थे।

प्रश्न 39.
मांटेस्क्यू कौन थे ?
उत्तर :
मांटेस्क्यू (1689-1755 ई०) फ्रांसीसी क्रांति के प्राक्-काल के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे। वे नियमतान्त्रिक राजतंत्र के समर्थक एवं राजा के तथाकथित ऐश्वरिक शक्ति-धारण के विरोधी थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 40.
वाल्टेयर कौन थे ? उनके द्वारा रचित ग्रंन्थ का नाम क्या है ?
उत्तर :
वाल्टेयर (1694-1778 ई०) फ्रांस की क्रांति के प्राक्-काल के एक विख्यात दार्शनिक थे। उनका वास्तविक नाम था फ्रांसोया मारी आरूए। उनके द्वारा रचित उल्लेखनीय पुस्तक का नाम- कॉंदिद एवं ‘दार्शनिक शब्दकोश’ है।

प्रश्न 41.
गिलोटिन क्या है ?
उत्तर :
गिलोटिन एक तरह का यंत्र है। इसका आविष्कार करने वाले फ्रांसीसी डॉ॰ गिलोटिन थे। इस यंत्र की सहायता से फ्रांस के आतंक राज में हजारों लोगों की हत्या की गयी।

प्रश्न 42.
बैस्टील दुर्ग के पतन का महत्व क्या है ?
उत्तर :
बैस्टील दुर्ग के पतन के महत्व हैं –

  1. इस दुर्ग से निर्दोष बन्दी मुक्त हुए
  2. राजा की निरंकुशता नष्ट हुई
  3. वास्तिल दुर्ग के पतन के जरिये क्रांति की सूचना हुई।

प्रश्न 43.
पेरी कम्यून क्या है ?
उत्तर :
बैस्टील दुर्ग के पतन (14 जुलाई 1789 ई०) के बाद कांतिकारी जनता ने पेरिस शहर की नगरपालिका के संचालन के लिये एक कमेटी का गठन किया। यह पेरी कम्यून के नाम से परिचित है।

प्रश्न 44.
‘सन्देह का कानून’ क्या है ?
उत्तर :
फ्रांस में आतक के शासनकाल में एक विशेष कानून के द्वारा –
(i) क्रांति विरोधी सन्देह में किसी को गिरफ्तार किया जा सकता था एवं
(ii) क्रांतिकारी अदालत में उसका विचार होता था। यह विशेष कानून ‘सन्देह के कानून’ नाम से परिचित है।

प्रश्न 45.
‘इस्टेट’ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
क्रांति से पहले फ्रांस की सामाजिक व्यवस्था में तीन पृथक सम्पदाय का अस्तित्व था। प्रत्येक को ‘इस्टेट’ कहा जाता था।

प्रश्न 46.
‘पैट्रियाटिक पार्टी’ का गठन किनके द्वारा किया गया ?
उत्तर :
मिराबो, लाफायेत, ओवेसियस प्रमुख आदि कुलीन लोगों ने तृतीय सम्रदाय के सहायोग से पैट्रियाटिक पार्टी का गठन किये।

प्रश्न 47.
राब्सपियर कौन थे ?
उत्तर :
राब्सपियर फ्रांस के उप्र वामपंथी जैकोबिन दल के एक प्रमुख नेता एवं आतंक-राज के प्रधान संचालक थे। उनके नेतृत्व में हजारों लोगों की बलि चढ़ाई गयी.। वे अपने घनिष्ठ मित्र हिवर्ट एवं दाँते को भी आतंक द्वारा हत्या की। अन्त में उदारपंथी लोगों के द्वारा उनकी हत्या कर देने पर आतंक के शासन का अन्त हुआ।

प्रश्न 48.
क्रांति के पहले के कुछ उल्लेखनीय दार्शनिकों के नाम लिखो।
उत्तर :
क्रांति के पहले के कुछ उल्लेखनीय दार्शनिक थे

  • मांटेस्क्यू (1689-1755 ई०)
  • वाल्टेयर (1694-1778 ई०)
  • ज्यों जैक रूसो (1712-1778 ई०) आदि।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 49.
जैकोबिन कौन थे ? इस दल के कुछ नेताओं के नाम लिखो।
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस में जिस उग्र वामपंथी दल का उदय हुआ था एवं फ्रांस के संकटकाल में जिन लोगों ने आतंक का शासन लागू किया था वे जैकोबिन के नाम से परिचित थे।
उसके प्रमुख नेता थे – राब्सपियर, हिवर्ट, दाँते आदि।

प्रश्न 50.
किसने और कब फ्रांस में प्रथम प्रजातन्त्र की प्रतिष्ठा की ?
उत्तर :
फ्रांस की राष्ट्रीय महासभा या नेशनल कन्वेंशन ने 22 सितम्बर 1792 ई० को फ्रांस के राजतंत्र को समाप्त कर प्रथम प्रज़ातन्त्र की स्थापना किया।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
फ्रांसीसी क्रान्ति का आरम्भ कब और कैसे हुआ ?
उत्तर :
1789 ई० की फ्रांसीसी राज्य क्रांति के मूल में जनसाधारण की आर्थिक दुरवस्था एक महत्त्वपूर्ण कारण थी। राजकीय विलासिता एवं राजनीतिक अव्यवस्था के कारण राजकोष खाली हो गया था। प्रजा पर मनमाने कर (Tax) लगाये जा रहे थे और उस धन का अधिकांश भाग सामंतों, जागीरदारों तथा राजकर्मचारियों द्वारा हड़प लिया जाता था। राजकोष में बहुत ही कम अंश पहुँच पाता था। कुलीन वर्ग कर मुक्त था, उनपर नाम मात्र का कर लगाया जाता था जो वे देते भी नहीं थे। दूसरी ओर किसानों के परिश्रम का बहुत बड़ा अंश कर चुकाने में चला जाता था, जिससे उनके परिवार को भर पेट भोजन भी नहीं मिल पाता था। कर नहीं चुका पाने पर उन्हें तरह-तरह के अत्याचार और दंड भोगने पड़ते थे।

इसी तरह फ्रांस के दोर्शनिको दिदरो, क्वेसने, हैवलाक आदि ने फ्रांस की जनता के हुय में निरंकुश राजतंत्र के प्रति घृणा तथा जनतंत्र के प्रति जनता के हुदय में भीषण क्रांति की ज्वाला भड़का दी।

20 जून 1789 ई० को स्टेट्स जनरल ने सम्राट की इच्छा के विरुद्ध स्वयं को राष्ट्रीय सत्ता घोषित कर सत्ता अपने हाथों में ले ली। राष्ट्रीय सभा की माँग स्वीकार कर लेने पर भी सम्राट कुलीनों और पुरोहितों के प्रभाव में आकर सत्ता के कार्यों में बाधा पहुँचाता रहा। 11 जुलाई 1789 ई० को उसने अपने अति लोकप्रिय प्रधान मंत्री नेकर को हटा दिया। राजा के कार्यों से जनता भड़क उठी और 14 जुलाई को हजारों पेरिसवासी लाठी, भाले, बन्दूक, तोप आदि लेकर बैस्टील के दुर्ग की ओर चल पड़ी। भीड़ ने बैस्टील दुर्ग में घुसकर भीषण लूटपाट और तोड़फोड़ की। उसने बंदियों को मुक्त कर दिया और दुर्ग को ध्वस्त कर दिया। इस घटना के कारण 14 जुलाई को फ्रांस ने राष्ट्रीय पर्व का दिन घोषित कर दिया।

इसके पश्चात् पेरिस राज-नियंत्रण के बाहर चला गया और पेरिस का शासन पेरिस नगर समिति के हाथों में चला गया। बैस्टील के पतन की सूचना पाकर प्रांतों में भी लोगों ने नगरपालिकाएँ तथा रक्षक दल बना लिये, जमींदारों तथा जागीरदारों के गढ़ों और चर्च के मठों को लूट लिया गया तथा उनमें आग लगा दी।

प्रश्न 2.
स्टेट्स जनरल के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
स्टेट्स जनरल (Estates General) : फ्रांस में स्टेट्स जनरल की स्थापना 1320 ई० में हुई थी तथा वर्ष में एक बार अथवा जरूरत होने पर अनेक बार इसका अधिवेशन बुलाया जा सकता था। स्टेट्स जनरल का मुख्य कार्य परामर्श देना था। प्रत्येक प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं व उनके निदान को भी इस सभा में प्रस्तुत करता था। कालान्तर में, निरकुशवादी तत्वों के बढ़ने से स्टेट्स जनरल का महत्व शनै: शनै: कम होने लगा। इसका अन्तिम अधिवेशन 1617 ई० में हुआ। अब लगभग 175 वर्षों के उपरान्त पुन: इसका अधिवेशन बुलाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी थी क्योंकि फ्रांस की जनता व पारलमाँ का विचार था कि फ्रांस की शोचनीय आर्थिक स्थिति का सामना करने के लिए इसका अधिवेशन बुलाना आवश्यक था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 3.
बैस्टील दुर्ग के पतन का क्या महत्व है ?
उत्तर :
फ्रांस के राजा लुई सोलहवें बुर्जुआ के दबाव से सहमत होने पर भी पुरातनतंत्र की वापसी के लिये लोकप्रिय ‘अर्थमंत्री नेकार को बर्खास्त कर पेरिस एवं वर्साई में सेना नियुक्त किये। इससे आक्रोशित होकर पेरिस की जनता 14 जुलाई ‘ 1789 ई० को वास्तिल दुर्ग पर आक्रमण कर उसे दखल कर लिया। बैस्टील दुर्ग के पतन का महत्व :
राजा की स्वीकृति : बैस्टील दुर्ग के पतन से आतंकित राजा पेरिस आकर तिरंगा (लाल-नील-सादा) झंडा को फ्रांस का झंडा मानना स्वीकार कर लिये। क्रांतिकारी वेइली को पेरिस नगरपालिका के मेयर पद पर बैठाया गया। राष्ट्रीय सुरक्षावाहिनी को संगठित करके क्रांतिकारी लाफायेत को इसका प्रधान सेनापति बनाया गया।

निरंकुश राजतंत्र पर आघात : कुख्यात बैस्टील दुर्ग निरंकुश राजतंत्र एवं मध्ययुगीन एकनायकत्व तथा सामन्तवाद का प्रतीक था। यहाँ बिना विचार किये निर्दोष प्रजा को बन्दी बनाकर रखा जाता था। इसीलिये इसके पतन से राजतंत्र पर गहरा असर पड़ा और राजतंत्र के प्रतिरोध करने की क्षमता कमजोर हो गयी।

जनता की शक्ति वृद्धि : बैस्टील दुर्ग का पतन फ्रांस के आम लोगों में शक्ति संचार का माध्यम बना। प्रचंड प्रतापशाली राजतंत्र के विरुद्ध युद्ध में आम जनता की विजय हो सकती है, बैस्टील दुर्ग के पतन ने इसे प्रमाणित कर दिया।

कुलीन का देशत्याग : बैस्टील दुर्ग की घटना से आतंकित अधिकांश कुलीन लोग डर कर विदेश भाग गये। उनका विश्वास था कि विदेशी शक्ति की सहायता के बिना उन्हें विशेष अधिकार वापस मिलना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 4.
फ्रांसीसी राजा लुई सोलहवें को मृत्युदण्ड कैसे हुई ?
उत्तर :
फ्रांसीसी राजा लुई सोलहवें के ऊपर क्षुब्ध होकर जिरन्दिष्ट दल के नेतृत्व में प्रायः 8 हजार सशस्त्र लोगों के एक बड़े जुलूस ने ट्यूलारिज राजमहल पर आक्रमण (20 जून, 1792 ई०) किया। इस समय पर्सिया के सेनापति डयूक ऑफ ब्रान्सविक एक घोषणा के माध्यम से फ्रांस के लोगों को सतर्क किया कि फ्रांस के राज-परिवार की कोई क्षति होने से वे कठोर सजा देंगे।
मृत्युदण्ड :
राजतंत्र-समाप्ति की माँग : ब्रांसविक की घोषणा से फ्रांस के क्रांतिकारियों ने सन्देह किया कि राजपरिवार विदेशियों के साथ षड्यन्त्र करके फ्रांस में क्रांतिकारी वर्ग को खत्म करना चाहता है। फलस्वरूप उत्तेजित जनता 10 अगस्त 1792 ई० को दूसरी बार राजमहल पर आक्रमण करके प्राय: 800 अंगरक्षकों की हत्या कर दी। आतंकित राजपरिवार निकटवर्ती विधानसभा में शरण ली। आक्रोश से भरी जनता विधानसभा पहुँच कर राजतंत्र की समाप्ति की माँग करने लगी।

राजा का न्याय : उत्तेजित जनता के दबाव में विधानसभा द्वारा राजा को बर्खास्त करके, उसे न्याय के लिये टेम्पल दुर्ग में बन्दी बना लिया गया। राजा के न्याय को केन्द्र करके जिरन्दिष्ट एवं जैकोबिन दलों में तीव्र विरोध आरंभ हुआ। जिरन्दिष्ट दल राजा को मृत्युदण्ड के बदले जनमत के जरिये कोई दूसरी सजा देने के पक्ष में थी। लेकिन उग्र वामपन्थी जैकोबिन दल इसके लिये सहमत नहीं था।

मृत्युदण्ड : अन्त में राष्ट्रीय सभा में कुछ मतों के अन्तर से राजा के प्रति मृत्युदण्ड का निर्णय लिया गया। 21 जनवरी 1793 ई० को फ्रांस के राजा लुई सोलहवें को गिलोटिन द्वारा मृत्युदण्ड दिया गया। इससे पूरा यूरोप स्तम्भित रह गया। इतिहासकार हैजेन का कहना है कि ‘सिहासन की तुलना में फांसी के मंच पर राजा अधिक महान लग रहे थे।”

प्रश्न 5.
फ्रांस की क्रान्ति में कृषकों की भूमिका क्या थी ?
उत्तर :
फ्रांस में किसानों की संख्या अधिक थी। ये फ्रांस की संख्या के 80 % थे। किसानों में दो भाग था, स्वतंत्र किसान, दूसरा अर्द्धदास किसान। गरशॉय का मत है कि ‘ किसान इतने दुःखी हो चुके थे कि वे स्वयं ही एक क्रान्तिकारी तत्व के रूप में परिणत हो गए। उन्हें क्रान्ति करने के लिए मात्र एक संकेत की आवश्यकता थी तथा उन्हीं की प्रमुख भूमिका ने 1789 ई० की क्रान्ति को सफल बनाया था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 6.
व्यवस्थापिका सभा पर निबन्ध लिखें।
उत्तर :
व्यवस्थापिका सभा (Legislative Assembly) : राष्ट्रीय सभा का मुख्य उद्देश्य फ्रांस के लिए संविधान का निर्माण करना था। अपने उद्देश्य को पूरा करने के पश्चात् राष्ट्रीय सभा भंग हो गयी। नवीन संविधान के अनुसार व्यवस्थापिका सभा के लिए निर्वाचन हुए व 1 अक्टूबर, 1791 ई० को व्यवस्थापिका सभां की पहली बैठक हुई। व्यावस्थापिका सभा के प्रथम अधिवेशन के समय सम्पूर्ण फ्रांस में खुशियां मनायी गयी क्योंकि राजा द्वारा नवीन संविधान को स्वीकार कर लिया गया था। फ्रांस की जनता का विचार था कि क्रान्ति समाप्त हो गयी है व सुखमय भविष्य के चिह्न उन्हें दृष्टिगत हो रहे थे, किन्तु वास्तव में ऐसा नहीं हुआ। व्यवस्थापिका सभा में सदस्यों की कुल संख्या 745 थी। व्यवस्थापिका सभा के अधिकांश सदस्य मध्यम वर्ग के थे, अतः क्रान्तिकारी विचारों से प्रभावित थे।

प्रश्न 7.
राष्ट्रीय सभा का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
राष्ट्रीय सभा : टेनिस कोर्ट की शपथ से डरकर राजा ने 23 जून 1789 ई० को तीन सदनों की एक बैठक बुलाई। राजा ने सुधार की योजना को सदन के सामने पेश किया और भाषण के बाद सदन से बाहर आ गया। सभी इस्टेट को अलग-अलग बैठने का अदेश भी दिया। प्रथम और द्वितीय इस्टेट के लोग राजा के पीछे चले गये जबकि तृतीय इस्टेट के प्रतिनिधियों ने यह घोषणा कि वे जनता की राय से वहाँ आये है और केवल तलवार के दम पर ही इन्हें हटाया जा सकता है। बाध्य होकर 27 जून 1789 को राजा ने तीनों सदनों को एक साथ बैठने का आदेश दिया। इस प्रकार राष्ट्रीय सभा को वैधानिक दर्जा प्राप्त हो गया। संविधान बनाने का कार्य करने के लिए संविधान-सभा बनाया गया।

प्रश्न 8.
1789 ई० के पहले फ्रांस की सामाजिक अवस्था कैसी थी ?
अथवा
फ्रांस की क्रान्ति से पूर्व फ्रांस के सामाजिक ढाँचे का वर्णन करें।
उत्तर :
फ्रांस की क्रांति (1789 ई०) के पहले फ्रांस की सामाजिक अवस्था मध्ययुगीन, सामन्ततान्त्रिक एवं अत्यन्त वैषम्यमूलक थी। समाज में लोग मुख्यतः तीन सम्रदाय या ‘इस्टेट’ में विभक्त थे-

  1. पादरी लोगों को लेकर गठित प्रथम सम्रदाय,
  2. कुलीन लोगों को लेकर गठित द्वितीय सम्र्रदाय एवं
  3. बुर्जुआ, मध्यवित्त, व्यापारी, दरिद्र कृषक-श्रमिक एवं सर्वहारा लोगों को लेकर तृतीय सम्र्रदाय।

1789 ई० के पहले फ्रांस की सामाजिक अवस्था :

प्रथम सम्प्रदाय : पादरी सम्र्रदाय समाज का सबसे अधिक सुविधाभोगी सम्र्रदाय था। उनकी कुल जनसंख्या 01 % से कम होने पर भी देश की 1 / 5 भाग कृषि जमीन उनके कब्जे में थी। इसके लिये वे लोग राजा को कोई कर भी नहीं देते थे। गिरजा की आय एवं वसूला गया धर्म कर, मृत्यु कर, विवाह कर आदि से अत्यंत विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते थे।

द्वितीय सम्र्रदाय : कुलीन वर्ग भी अत्यंत सुविधावादी सम्रादाय था। इनकी कुल जनसंख्या केवल 1.5 % होने पर भी देश की 1 / 3 भाग कृषि जमीन इनके पास थी जिसके लिये ये लोग राजा को कोई कर नहीं देते थे। ये लोग प्रजा से विभिन्न प्रकार का सामन्तकर अदाय करते थे तथा प्रशासन एवं न्यायविभाग के ऊँचे पदों पर ये ही आसीन थे।

तुतीय सम्रदाय : बुर्जुआ, धनी व्यापारी, पूंजीपति, बैंकर्स, शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, सर्वहारा आदि तुतीय सम्रदाय में आते थे। देश की लगभग 98% आबादी होने के बाद भी इन्हें कोई सुयोग-सुविधा एवं अधिकार नहीं था। यद्यपि इन्हें सब तरह के कर देने पड़ते थे।

प्रश्न 9.
फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भागीदारी का विवरण दो।
उत्तर :
1789 ई० के मध्य भाग में राजा लुई सोलहवें द्वारा स्टेट्स जनरल का अधिवेशन बुलाकर, बुर्जुआ सम्रदाय की माँगें अर्थात सभी सम्र्रदाय को एक साथ सभा में बैठने एवं प्रत्येक सदस्य को मताधिकार को बाध्य होकर मान लेने पर भी महंगाई, खाद्याभाव आदि की घटना को सामने रखकर तृतीय श्रेणी के लोग कांति में कूद पड़े।
फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं का अंशग्रहण :
खाद्याभाव : 1789 ई० के द्वितीय भाग में फ्रांस के ग्रामांचल में खाद्याभाव ने अपने चरम संकट का रूपं धारण कर लिया था। खाद्य की माँग को लेकर पेरिस में हंगामा शुरू हो गया। इस दशा में प्राय: 6 हजार महिलाओं ने 5 अक्टूबर को भारी बारिश की उपेक्षा करके जुलूस बनाकर वर्साई में राजमहल को घेर लिया। लाफाएत के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षावाहिनी के 20 हजार सदस्य इस जुलूस का अनुसरण करते रहे।

राजतंत्र की शवयात्रा : आन्दोलनकारी महिलाओं 6 अक्टूबर को राजमहल के सुरक्षा-कर्मियों की हत्या की एवं सभी राज-परिवार को बन्दी बनाकर पेरिस आने के लिये बाध्य कर दिया। इतिहासकार राईकर ने इस घटना को ‘राजतंत्र की शवयात्रा’ कहा है।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 10.
फ्रांस की राज्य कान्ति में शहरों और गाँवों की गरीब जनता की भागीदारी का वर्णन करें।
उत्तर :
ग्रामीण और शहरी गरीबों की क्रान्ति में हिस्सेदारी (Participation of urban and rural poor in the Revolution) : फ्रांस की क्रान्ति में शहरी और ग्रामीण गरीब वर्ग के लोगों ने समान रूप से भाग लिया। फ्रांस में जो व्यवस्था थी उनमें गरीब लोगों का शोषण सबसे अधिक होता था। फ्रांस में जनता पर जो अप्रत्यक्ष कर लगाये जाते थे, वे अत्यन्त कष्टप्रद्ध थे। इस प्रकार का एक कर नमक कर था। इसके अन्तर्गत सात वर्ष से बड़े प्रत्येक व्यक्ति का वर्ष में कम से कम सात पौण्ड नमक खरीदना आवश्यक था।

जिन लोगों के पास खाने को रोटी न थी वे नमक कहाँ से खरीदते? नमक न खरीदने की स्थिति में उन्हें कठोर दण्ड दिया जाता था। इसी प्रकार की दूषित प्रणाली शराब के लिए भी थी। शराब फ्रांस का प्रसिद्ध उद्योग था। उस पर इतने कर लगा दिए गये कि यह उद्योग ठप्प हो गया। यह कर भी सम्पूर्ण देश में समान नहीं थे। कितने आश्चर्य की बात है कि जो वर्ग कर देने में सक्षम था, उसे कर नहीं देना पड़ता था और जो भूखे पेट थे, उनसे शरीर की हड्डियाँ भी मांगी जाती थीं। यही कारण है कि फ्रांस में कहा जाता था, ‘सामन्त युद्ध करते हैं, पादरी पूजा करते हैं तथा गरीब जनता कर देती है।”

प्रश्न 11.
फ्रांस की समाज व्यवस्था में पादरी सम्रदाय का परिचय दो।
उत्तर :
फ्रांस की क्रांति (1789 ई०) के पहले फ्रांसीीसी समाज में तीन प्रमुख सम्पदाय थे जिनमें से एक था पादरियों को लेकर गठित प्रथम सम्र्रदाय।
पादरी सम्रदाय : फ्रांसीसी समाज में पादरी सम्प्रदाय की कुछ विशेषताएँ थीं जो निम्न हैं :
जनसंख्या : 1789 ई० में फ्रांस में याजकों की कुल संख्या थी एक लाख 20 हजार, अर्थात देश की आबादी का मात्र 0.5 %। इतनी कम जनसंख्या होने पर भी समाज एवं देश में इसका ही बोलबाला था।

जमीन से आय : फ्रांस की कुल कृषि भूमि का 1 / 5 भाग गिरजा के अधीन था जिसके लिये ये लोग सरकार को कोई कर भी नहीं देते थे। ये लोग ‘कांट्रेक्ट ऑफ पोइसी’ नामक समझौते के अनुसार सरकार को स्वेच्छा कर देते थे। गिरजा की इस भूमि से सालाना 13 लाख आय होती थी।

कर-वसूली : ये लोग जनता से विभिन्न तरह से कर जैसे : टाइद या धर्म कर, मृत्यु कर, विवाह कर आदि वसूल करते थे।

याजकों का विभाग : पादरी मूलत: दो श्रेणियों में विभक्त थे। जैसे – विशप एवं मठाधीश आदि को लेकर गठित उच्च याजक एवं गाँव के साधारण दरिद्र पादरियों को लेकर गठित निम्न पादरी। उच्च पादरी-वर्ग गिरजा के आय का अधिकांश अति विलासितापूर्ण ढंग से खर्च करता था एवं इसके लिये निम्न पादरी-वर्ग इनसे ईर्ष्या तथा घृणा करता था।

प्रश्न 12.
फ्रांस में दैवीय राजतंत्र की धारणा तथा निरंकुशतावाद की समालोचना करें।
उत्तर :
फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र था। राजा अपने को ईश्वर का प्रतिनिधि समझता था। उसकी इच्छाएँ की कानून थीं। उन कानूनों का उल्लंघन दैव आदेश की अवमानना जैसा पाप माना जाता था। जनता को किसी प्रकार की राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं थी। राजा की आज्ञा का उल्लंघन करने पर प्राणदंड दिया जाता था।

प्रश्न 13.
संविधान सभा का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
राष्ट्रीय सभा ने एक संविधान समिति की स्थापना की और खुद संविधान परिषद का रूप धारण किया। इस परिषद के सभी सदस्य अनुभवहीन थे। यह परिषद एक साधारण सभा में बदल गयी। 6 अक्टूबर 1789 को सभा पर पेरिस की आम जनता का अधिकार हो गया।

प्रश्न 14.
फ्रांस की क्रान्ति के समय सितम्बर 1792 की हत्याकाण्ड की क्या घटना थी ?
उत्तर :
फ्रांसीसी सम्राट लुई सोलहवें को फ्रांस की विधानसभा ने दाँते की अध्यक्षता में राजपद से च्युत कर दिया था तथा उसने दाँते को सेना के पुनर्गठन का दायित्व सौंपा। दाँते ने पेरिस कम्यून की सहमति से लगभग 3000 लोगों को देशद्रोह के संदेह में गिरफ्तार कर दिया। कम्यून ने बंदियों की हत्या करने का निर्णय लिया क्योंकि उन दिनों फ्रांस विदेशियों से युद्ध कर रहा था और सैनिक उन बंदियों को जिंदा छोड़कर युद्ध में जाने से हिचकिचा रहे थे। उन्हें भय था कि उनकी अनुपस्थिति में बंदी जेल से भागकर परिवारवालों को मार डालेंगे। फलत: 2 सितम्बर से 4 सितम्बर 1793 ई० तक अकेले पेरिस में 1400 लोग मारे गये। यही सितम्बर हत्याकाण्ड कहलाया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 15.
फ्रांस राज्य क्रान्ति के समय राजतंत्र के प्रति अभिजातों का विरोध हो रहा था, इसका संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
आर्थिक संकट को दूर करने के लिए लुई XVI ने सन् 1788 में देश की सभी प्रादेशिक पार्लियामेण्ट को समाप्त करं दिया और सभी वर्गों से कर लेने का प्रयास किया। इसंसे क्षुब्ध होकर सुविधावादी वर्ग ने राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस घटना को इतिहासकार मातिए और जार्ज रूने ने अभिजात विद्रोह कहा है।

प्रश्न 16.
टेनिस कोर्ट की शपथ के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
1789 ई० के.नव-निर्वाचित राष्ट्रीय सभा के प्रथम अधिवेशन में तृतीय सम्पदाय के प्रतिनिधिगण एक ही कक्ष में बैठने तथा प्रत्येक सदस्य के लिए मताधिकार की माँग करने लगे।
टेनिस कोर्ट की शपथ :
बुर्जुआ श्रेणी का क्षोभ : तृतीय श्रेणी के प्रतिनिधियों की माँगें नहीं माने जाने से क्षुख्ध प्रतिनिधिगण ने 17 जून को आयोजित अपनी सभा को वास्तविक राष्ट्रीय सभा घोषित की एवं माँग की कि कर निश्चित करने का अधिकार केवल उनलोगों को ही है। इतिहासकार ग्रांट एवं टेम्परली इस घटना को ‘फ्रांसीसी क्रांति का छोटा प्रतींक’ कहा है।

शपथ ग्रहण : तृतीय सम्र्रदाय के प्रतिनिधिगण ने सभाकक्ष में जाकर देखा कि वहां तालाबन्द है। इससे क्षुब्ध होकर वे लोग मिराबो एवं आवेसियस के नेतृत्व में निकटवर्ती टेनिस खेल के मैदान में एकत्रित हुए। वहाँ पर उन्होंने शपथ ली कि जबतक वे लोग फ्रांस के लिये एक नयी संविधान की रचना नहीं कर लेते, तब तक एकजुट होकर काम करते रहेंगे। इस घटना को ‘टेनिस कोर्ट की शपथ’ कहते हैं।

राजा की भूमिका : उक्त घटना के तीन दिन बाद तीनों सम्पदाय के एकत्रित अधिवेशन में राजा ने प्रथम दो सम्रदाय का पक्ष लेकर तृतीय सम्रदाय की सभी माँगों को अवैध करार दिया। इसके बाद राजा के सभाकक्ष छोड़ने पर भी तृतीय सम्र्रदाय के प्रतिनिधिगण सैनिक धमकी की उपेक्षा कर सभाकक्ष में धरना देते रहे।

परिणाम : आखिरकार दबाव में आकर राजा ने तृतीय सम्रदाय की समस्त शर्तो को मान लिया। इस तरह बुर्जुआ क्रांति का प्रथम चरण सफलता के साथ संपन्न हुआ।

प्रश्न 17.
क्रान्ति के बाद उत्पन्न आन्तरिक संकट और विदेशी आक्रमण से जैकोबिन शासन ने क्रांस को कैसे बचाया ?
उत्तर :
फ्रांस में आतंक राज्य (Reigme of Terror) : राष्ट्रीय सम्मेलन ने जिस समय शासन आरम्भ किया, उस समय फ्रांस चारों ओर से संकटों से घिरा हुआ था। फ्रांस में गृह-युद्ध के आसार नजर आ रहे थे तथा सीमा पर आस्ट्रिया एवं पर्सिया की सेनायें दस्तक दे रहीं थीं। इसी समय जैकोबिनों ने राष्ट्रीय सम्मेलन पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। इस प्रकार फ्रांस में जैकोबिनों का शासन प्रारम्भ हुआ। दांतों, रॉब्सपीयर, सेंट जस्ट और कानों आदि इस दल के नेता थे। इन नेताओं का विचार था कि फ्रांस में व्याप्त अशान्ति, दुराचार व अव्यवस्था को समाप्त करने के लिए एक शक्तिशाली सरकार की स्थापना की जाय।

अत: सरकार को शक्तिशाली बनाने के लिए लोग सुरक्षा समिति, सामान्य सुरक्षा समिति एवं क्रान्तिकारी न्यायालय का गठन किया गया। लोक सुरक्षा समिति को कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के असीमित अधिकार सौपे गये। सामान्य सुरक्षा समिति को भी असीमित अधिकार दिए गये। क्रान्ति व क्रान्ति के सिद्धान्तों का विरोध करने वालों पर मुकदमा चलाने व दण्डित करने के लिए पेरिस में क्रान्तिकारी न्यायालय की स्थापना की गयी। शीघ्र ही सम्पूर्ण फ्रांस में ऐसे यायालयों की स्थापना हो गयी। इस प्रकार विभिन्न अधिकारों से अपने को शक्तिशाली बनाने के पश्चात् जैकोबिन दल ने आतंक राज्य की स्थापना की। जैकोबिन दल ने आदेश दिया कि जो लोग क्रान्ति का विरोध करेंगे उन्हें मृत्युद्ण्ड दिया जायेगा।

प्रश्न 18.
फ्रांस में क्रान्ति के समय अऱाजकता की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर :
अराजकता की स्थिति (Condition of anarchy) : 10 अगस्त 1792 ई० को राजा को हटाये जाने पर 20 सितम्बर, 1792 ई० को राष्ट्रीय कन्वेशन का अधिवेशन प्रारंभ होने के समय तक समस्त फ्रांस में अराजकता की स्थिति थी। फ्रांसीसी सेनापति लाफायते ने पेरिस के विरुद्ध विरोध के कारण आस्ट्रिया की सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आस्ट्रिया तथा प्रशा की सेना फ्रांस पर हावी होती चली गयी। 2 सितम्बर 1792 को फ्रांस की जनता को समाचार मिला कि आस्ट्रिया और पर्सिया की संयुक्त सेनाओं ने ‘बर्दून’ तथा ‘लांगवे’ के दुर्गो पर अपना अधिकार कर लिया है।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 19.
फ्रांस के ‘ऑसियॉ रेजिम’ या पुरातनतंत्र से क्या समझते हो ?
अथवा
क्रांति पूर्ववर्ती फ्रांस की सामाजिक संरचना तथा दैव सत्तात्मक राजतंत्र की अवधारणा का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति (1789.ई०) के पहले मध्ययुगीन पादरीतंत्र, कुलीन, निरककुश दैव राजतंत्र, सामाजिक वैषम्य आदि विषय फ्रांस के सामाजिक, अर्थनैतिक एवं राजनैतिक व्यवस्था को दृढ़ता से दबा कर रखा था। फ्रांस के इस मध्ययुगीन व्यवस्था को साधारणतः पुरातनतंत्र या ऑसिया रेजिम (Old Regime) कहा जाता है।

ऑंसिया रेजिम या पुरातनतंत्र के विभिन्न पहलू थे – जैसे –
स्वेच्छाचारी दैव राजतंत्र : फ्रांस के वुर्बो राजवंश के अधीन तीव्र स्वेच्छाचारी दैव राजतंत्र प्रतिष्ठित हुआ था। राजा खुद को ईश्वर का प्रतिनिधि मानते थे। इसके लिये वे अपने कर्मों को प्रजा के प्रति उत्तरदायी नहीं मानते थे। पुरातनतंत्र के धारक एवं वाहक वुर्बो राजवंश के राजाओं में प्रमुख थे लुई तेरहवें, लुई चौदहवें, लुई पन्द्रहवें एवं लुई सोलहवें आदि।

सामाजिक श्रेणी भेद : समाज में श्रेणी भेद एवं सामाजिक वैषम्य तीव्र आकार धारण किये हुए था। समाज मूलत: तीन श्रेणियों में बँटा हुआ था- पादरी वर्ग, कुलीन वर्ग एवं बुर्जुआ, मध्यवित्त, दरिद्र, साँकुलोत आदि को लेकर तृतीय श्रेणी। पादरी एवं कुलीन वर्ग विशेष सुविधाभोगी श्रेणी में आते थे एवं अन्य तृतीय श्रेणी में आते थे।

पादरी एवं कुलीन वर्ग का आधिपत्य : पादरी एवं कुलीन वर्ग पर्याप्त सम्पत्ति के मालिक होते हुए भी ये सरकार को किसी तरह का कर नहीं देते थे। तृतीय सम्रदाय से पादरी वर्ग टाइद या धर्मकर, कुलीन वर्ग कार्वि या श्रमकर सहित विभिन्न सामन्तकर अदाय करते थे।

प्रश्न 20.
फ्रांसीसी समाज व्यवस्था में कुलीन सम्रदाय का परिचय दो।
उत्तर :
फ्रांस की क्रांति (1789 ई०) के पहले जो तीन सम्रदाय थे उनमें से एक कुलीन वर्ग को लेकर गठित द्वितीय सम्र्रदाय था। फ्रांसीसी समाज में कुलीन सम्रदाय की कुछ विशेषताएँ थी जो निम्न हैं :
जनसंख्या : फ्रांस में क्रांति से पहले इनकी कुल संख्या 3 लाख 50 हजार थी जो देश की कुल आबादी का मात्र 1.5 % था। इसके बावजूद यह सम्प्रदाय फ्रांसीसी समाज एवं राष्ट्र में पर्याप्त क्षमता का अधिकारी था।

आय : आबादी अत्यंत कम होने पर भी फ्रांस की कुल कृषि-भूमि का 1 / 3 भाग इन्हीं लोगों के पास था। इसके बावजूद ये लोग सरकार को कोई भूमि कर नहीं देते थे। यही नहीं ये लोग विटिंयेमे या कैपिटेशन कर भी नहीं देते थे बल्कि प्रजा से विभिन्न प्रकार का जुर्माना, वानालिते, कर्वि सहित अनेक तरह के सामन्ती कर वसूल करते थे।

वर्चस्व : फ्रांसीसी समाज में कुलीन वर्ग का हर क्षेत्र में वर्चस्व था। ये लोग राजदरबार से लेकर विभिन्न भत्ते, पुरस्कार एवं अन्य सुयोग-सुविधाएँ उपभोग करते थे। विचार-विभाग, प्रशासनिक एवं अन्य सरकारी विभागों में ये ही उच्च पदों पर आसीन थे।

प्रश्न 21.
फ्रांसीसी समाज व्यवस्था में तृतीय सम्प्रदाय का परिचय दो।
उत्तर :
फ्रांस की कांति (1789 ई०) से पहले समाज में विद्यमान तीन सम्रदाय में से एक था – बुर्जुआ, कृषक, श्रमिक एवं सर्वहारा वर्ग जिसे तृतीय सम्रदाय कहा जाता था।
फ्रांसीसी समाज व्यवस्था में तृतीय सम्रदाय : फ्रांसीसी समाज व्यवस्था के तृतीय सम्रदाय की विशेषताएँ निम्न हैं –
जनसंख्या : 1789 ई० में तुतीय सम्पदाय की कुल आबादी 98 % थी। इस अधिकतम आबादी के बावजूद भी यह सम्र्रदाय सभी अधिकारों व सुख-सुविधाओं से वंचित था।

श्रेणी विभाग : यह मूलत: तीन श्रेणियों में विभक्त था –

  • धनी व्यापारी, पूँजीपति, बैंकर्स थे उच्च वर्ग
  • वकील, बैरिस्टर, डॉक्टर, शिक्षक आदि थे मध्य वर्ग एवं
  • कारीगर, किसान, श्रमिक, छोटे व्यापारी आदि थे निम्न वर्ग।

सामाजिक अवस्था : बुर्जुआ श्रेणी का धनी वर्ग विद्या-बुद्धि या धन दौलत में कुलीन वर्ग से आगे था किन्तु उनकी तरह वंशागत नहीं होने से समाज एवं राष्ट्र में विभिन्न अन्याय-अविचार का शिकार था। ये लोग कुलीन वर्ग के लिये घृणा के पात्र थे।

करों का बोझ : तृतीय सम्रदाय से आयकर का 96 % वसूला जाता था। राष्ट्र, गिरजा, सामन्त उननसे भूमि कर, उत्पादन कर, आय कर, नमक कर तथा धर्म कर आदि विभिन्न करों की वसूली करते थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 22.
क्रांति के पहले फ्रांस का राज्यकोष खाली होने के प्रमुख कारण क्या थे ?
उत्तर :
क्रांति (1789 ई०) से पहले फ्रांस की अर्थनीति गंभीर संकट के सम्मुखीन हुई एवं राजकोष एकदम खाली हो गया। प्रमुख कारण :
त्रुटिपूर्ण राजस्व प्रणाली : पादरी एवं कुलीन सम्रदाय फ्रांस की कुल आबादी का 2-3 % होने पर भी देश की कृषि भूमि के वृहद अंश के मालिक थे फिर भी इसके लिये उन्हें किसी प्रकार का बाध्यतामूलक कर नहीं देना पड़ता था। देश का 96 % कर बोझ तृतीय सम्पदाय ही वहन करता था।

युद्ध नीति : फ्रांस के राजा विभिन्न युद्धों में शामिल होकर पर्याप्त मात्रा में अर्थ व्यय कर दिये। लुई चौदहवें एवं लुई पन्द्रहवें ने कई युद्धों में सहयोग देकर राजकोष का अर्थ नष्ट किया। लुई सोलहवें के समय में भी यह चलता रहा। उन्होंने अमेरिका की स्वाधीनता के लड़ाई में शामिल होकर बिना सोचे-समझे राजकोष की भारी राशि खर्च कर दी।

फिजुलखर्ची : राजपरिवार की सीमाहीन विलासिता एवं फिजुलखर्ची भी राजकोष को खाली करने की जिम्मेवार है। गुडविन ने कहा है कि वर्साई राज्यसभा में कर्मचारियों की संख्या 18 हजार थी। रानी के व्यक्तिगत नौकर-नौकरानी ही 500 थे।

कर्ज का बोझ : सरकार ने बहुत भारी मात्रा में कर्ज लेकर देश के आर्थिक संकट को और बढ़ा दिया। कर्ज चुकाने में भी राजकोष से बहुत सारा धन निकल गया।

प्रश्न 23.
फ्रांस में क्रांति के पहले वैषम्यमूलक कर-प्रणाली का परिचय दो।
उत्तर :
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने क्रांति के पूर्ववर्ती फ्रांस को ‘भामक अर्थनीति का जादूघर’ कहा है। इस भामक अर्थनीति का अन्यतम पहलू था देश की असमान एवं विश्रांतिकर कर-प्रणाली क्योंकि कर व्यवस्था में अधिकार प्राप्त पादरी एवं कुलीन सम्पदाय तथा अधिकार से वंचित तृतीय सम्रदाय के असहाय, दरिद्र, श्रमिक-कृषको के लिये अलग-अलग व्यवस्थाएँ थीं।
असमान कर-प्रणाली :
अधिकारभोगी श्रेणी : ‘अधिकारभोगी’ पादरी एवं कुलीन वर्ग के पास फ्रांस की 50 % से ज्यादा कृषि भूमि थी। फिर भी इसके लिये वे लोग कर देने के लिये विवश नहीं थे। वे लोग समाज एवं राष्ट्र से जिन सुविधाओं का भोग करते थे, उसके लिये भी उन्हें कोई कर नहीं देना पड़ता था।

अधिकारहीन श्रेणी : अधिकार भोगी सम्रदायों को कर से छूट के कारण समस्त करों का बोझ दरिद्र कृषक सम्रदाय को ढोना पड़ता था। इतिहासकार लाबुज का कहना है – ‘अठारहवी’ सदी के फ्रांस में सबसे अधिक शोषित श्रेणी किसानों की थी।’ देश के कुल राजस्व का 96 % कर तृतीय सम्रदाय को देना पड़ता था।

विभिन्न कर : राष्ट्र, सामन्तप्रभु एवं गिरजा तृतीय सम्र्रदाय से विभिन्न तरह के कर वसूल करते थे। इनमें (1) टाइले या भूमिकर, (2) कैपिटेशन या उत्पादन कर, (3) विटिंयेमे या आयकर, (4) गैबेला या नमक कर, (5) टाइद या धर्म कर (6) कर्वि या बाध्यतामूलक बेगार श्रमदान आदि। इस तरह के करों को देने के बाद उनकी आय का सिर्फ 1 / 5 अंश ही बचता था जिससे उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करना पड़ता था।

प्रश्न 24.
फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि रचना में दार्शनिक माण्टेस्क्यू एवं वाल्टेयर की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
किसी भी क्रांति के पहले मनुष्य के भाव जगत में क्रांति की चेतना का विकास होना जरूरी है। फ्रांसीसी क्रांति (1789 ई०) के क्षेत्र में भी देश के साधारण लोगों में क्रांतिकारी चेतना जागृत की थी फ्रांस के विभिन्न दार्शनिकों ने। इनमें से प्रमुख थे – दार्शनिक माण्टेस्क्यू एवं दार्शनिक रूसो।
माण्टेस्क्यू : फ्रांसीसी दार्शनिक माण्टेस्क्यू (1689-1755 ई०) देश के शोषित, दरिद्र, वंचित श्रेणी के प्रांणपुरुष थे। उन्होंने अपने ग्रंथ ‘द स्पिरिट ऑफ लॉ’ या ‘कानून की आत्मा’ में राजा के स्वेच्छाचारी शासन एवं स्वर्गीय अधिकारतत्व की तीव्र समालोचना की हैं। ‘द पर्सियन लेटर्स’ या ‘पर्सिया की पत्रावली’ नामक एक और पुस्तक में नियमतान्त्रिक राजतंत्र के समर्थक माण्टेस्क्यू ने फ्रांस के पुरातनतंत्र, कुलीन एवं स्वेच्छाचारी राजतंत्र की तीव्र समालोचना किये हैं। क्षमता स्वतंत्रीकरण नीति के समर्थक माण्टेस्क्यू ने मानव की व्यक्ति स्वाधीनता की रक्षा के उद्देश्य से देश के कानून-विभाग, शासन विभाग एवं विचार विभाग को अलग करने की माँग की।

रूसो : 18 वीं सदी में फ्रांस के सबसे उल्लेखनीय एवं जनग्रिय दार्शनिक थे त्याँ जैक रूसो (1712-1778 ई०)। उन्होंने अपने सबसे लोकप्रिय ग्रन्थ ‘सामाजिक समझौता’ (Social contract) में राजा की ऐश्वरिक क्षमता को युक्ति-तर्क के साथ खण्डन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सार्वभौम क्षमता का स्रोत है जनता, क्योंकि जनता की इच्छा (General will) के अनुसार ही एक समझौते के माध्यम से राजा को शासन की क्षमता प्राप्त हुई। अत: राजा को किसी भी समय क्षमता से हटाना जनता के अधिकार में है। उन्होंने अपने ‘विषमता का सूत्रपात’ (Origin of Inequality) पुस्तक में कहा है कि मनुष्य स्वाधीन एवं समान अधिकार लेकर पैदा होता है किन्तु वैषम्यमूलक समाज व्यवस्था उसे दरिद्र एवं पराधीन बना देती है।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 25.
देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिये राज़ा लुई सोलहवें द्वारा नियुक्त वित्त मंत्रियों द्वारा क्या कदम उठाये गये ?
उत्तर :
राजपरिवार द्वारा असीमित फिजूलखर्ची, त्रुटिपूर्ण राजस्व-व्यवस्था, युद्ध में बेतहाशा खर्च, कर्ज के ऊपर सूद आदि के कारण फ्रांस का राजकोष एकदम शून्य हो गया था। इसको दूर करने के लिये राजा लुई सोलहवें ने विभिन्न अर्थ मंत्रियों की नियुक्ति की।
विभित्र वित्तमंत्रियों द्वारा उठाय गये कदम :
तुर्गो का सुधार : वित्तमंत्री तुर्गो ने राजपरिवार की फिजूलखर्ची, सरकारी व्यय, युद्ध सम्बन्धी खर्च को कम करने के लिये कहा एवं पादरी एवं कुलीन वर्ग के ऊपर भूमिकर लगाने का प्रस्ताव दिया जिसके कारण रानी एंत्वायनेत एवं कुलीन वर्ग के दबाव से उनका पतन (1776 ई०) हुआ।

नेकर का सुधार : वित्तमंत्री नेकर (1778-81 ई०) राजपरिवार को व्यय-संकोचन एवं धनी नागरिकों के ऊपर कर लगाने का प्रस्ताव दिया। फलत: रानी एवं कुलीन वर्ग के दबाव में उन्हें पदत्याग करना पड़ा।

कैलोन का सुधार : वित्तमंत्री कैलोन ने (1783-87 ई०), समस्त सम्प्रदाय के ऊपर भूमिकर, नमक-कर, अबाध वाणिज्य नीति का प्रवर्तन, कार्वि का लोप, अन्तः शुल्क लोप आदि का प्रस्ताव दिया। नेतृत्वकारी कुलीन वर्ग को लेकर ‘गणमान्य परिषद’ कैलोन के प्रस्तावों का विरोध किया एवं उन्हें भी पदत्याग करना पड़ा।

ब्रियाँ का सुधार : वित्तमंत्री (1787-88 ई०) द्वारा स्टाम्प टैक्स एवं भूमि सुधार का प्रस्ताव करने पर पेरिस की पार्लियामेण्ट ने इसका विरोध किया। उनकी माँग थी कि करारोपण का अधिकार सिर्फ स्टेट्स जनरल को है, उनकी अनुमति के बिना करारोपण नहीं हो सकता। इसी बीच पार्लियामेण्ट एवं राजा के बीच विरोध आरंभ हो गया एवं राजा के विरुद्ध कुलीन वर्ग ने विद्रोह आरंभ कर दिया।

प्रश्न 26.
कुलीन विद्रोह के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
फ्रांसीसी राजा लुई सोलहवें के वित्तमंत्री ब्रियाँ के अन्य सम्रदायों के साथ कुलीन वर्ग पर भी करारोपण का प्रस्ताव देने पर कुलीन सम्प्रदाय क्षुब्ध हो उठा। राजा के साथ उनका सम्पर्क बिगड़ गया।
कुलीन विद्रोह :
स्टेट्स जनरल का अधिकार : कुलीन सम्पदाय द्वारा ब्रियाँ के कुछ प्रस्ताव मान लेने पर भी स्टाम्प कर एवं भूमिकर का प्रस्ताव नहीं माना गया। उन्होंने माँग की कि एकमात्र स्टेट्स जनरल को करारोपण का अधिकार है।

सदस्य को निर्वासन : लुई सोलहवें ने पार्लियामेण्ट के कुछ सदस्यों के आचरण से क्षुब्ध होकर अपने भाई ड्यूक ऑफ आर्लियेन्स सहित तीन सदस्यों को निर्वासित कर दिया। इससे पार्लियामेण्ट नाराज हो गयी एवं राजा के खिलाफ कुछ कानून पारित कर नागरिकों को गिरफ्तार, विचारकों को हटाना आदि राजा के अधिकार को छीन लिया।

पार्लियामेण्ट स्थगित : पार्लियामेण्ट के कानून से क्षुब्ध होकर समाट ने देश के सभी प्रदेशों की पार्लियामेण्ट को स्थगित कर दिया एवं 57 नये न्यायालयों की स्थापना करके अपने द्वारा प्रस्तावित सुधारों को कानून में रूपांतरित किया।

विद्रोह की सूचना : राजा के द्वारा पार्लियामेण्ट स्थगित करने से क्षुब्ध होकर कुलीन वर्ग ने उनके खिलाफ विद्रोह आरंभ कर दिया। तुलों, दाफिने, दूजों आदि स्थानों पर व्यापक विद्रोह फैल गया।

महत्व : कुलीन वर्ग द्वारा राजा के विरुद्ध विद्रोह आरंभ होने से अनजाने में वे लोग फ्रांस के स्वेच्छाचारी दैव राजतंत्र एवं पुरातनतंत्र पर ही कुठाराघात किये।

प्रश्न 27.
कुलीन विद्रोह की विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
फ्रांस के राजा लुई सोलहवें द्वारा 1788 ई० में देश के सभी प्रादेशिक पार्लियामेण्ट को स्थगित करके, देश के सभी नागरिकों पर करारोपण और उसकी वसूली की व्यवस्था ग्रहण की गयी जिससे क्षुब्ध होकर सुविधाभोगी कुलीन श्रेणी ने राजा के खिलाफ विद्रोह आरंभ कर दिया।.
कुलीन विद्रोह की विशेषताएँ :
फ्रांसीसी क्रांति का सूत्रपात : कुलीन विद्रोह से ही 1789 ई० में फ्रांसीसी क्रांति हुई। विद्रोह के प्रथम चरण में कुलीन वर्ग के सहयोगी बुर्जुआ थे। द्वितीय चरण में बुर्जुआ एवं अन्तिम चरण में कृषक-वर्ग ने विद्रोह का नेतृत्व किया।
जनविद्रोह का क्रम : राजा के खिलाफ कुलीन विद्रोह में शीघ्र ही पादरी वर्ग एवं बुर्जुआ शामिल हो गये। फलस्वरूप इस विद्रोह ने शीघ्र ही जनविद्रोह का रूप ले लिया।
राजतंत्र की मर्यादा पर आघात : कुलीन विद्रोह के दबाव में राजा स्टेट्स जेनेरल का अधिवेशन बुलाने को बाध्य हो गये। इसके फलस्वरूप स्वेच्छाचारी राजतंत्र की मर्यादा पर आघात लगा। राजा की ऐश्वरिक क्षमता एवं राजतंत्र कमजोर पड़ गया।
पुरातनतंत्र पर चोट : राजा फ्रांस के राजतंत्र एवं कुलीन वर्ग के विशेष अधिकारों के रक्षक थे। अब कुलीन वर्ग ने राजतंत्र को दुर्बल बनाने में पुरातनतंत्र को ही दुर्बल कर दिया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 28.
बुर्जुआ क्रांति के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
कुलीन विद्रोह के दबाव से फ्रांस के राजा लुई सोलहवें ने बध्य होकर 5 मई (1789 ई०) को स्टेटस जेनेरुल या राष्ट्रीय सभा का अधिवेशन बुलाया। इस सभा में बुर्जुआ श्रेणी के प्रतिनिधिगण ने राजतंत्र के विरुद्ध विद्रोह आरंभ कर दिया। बुर्जुआ क्रांति :
बुर्जुआ प्रतिनिधि : राष्ट्रीय सभा में कुल 1218 निर्वाचित प्रतिनिधियों में पादरी वर्ग 308, कुलीन वर्ग 285 एवं तृतीय सम्प्रदाय के 621 सदस्य थे। इससे पहले प्रतिनिधि सम्रदाय के आधार पर अलग-अलग कक्ष में बैठते थे।

मतदान पद्धति : राष्ट्रीय सभा में सदस्यों को सम्प्रदाय के अनुसार मत देना पड़ता था अर्थात पादरी, कुलीन एवं तृतीय सम्रदाय के एक-एक मत थे। पादरी एवं कुलीन का स्वार्थ एक होने के कारण वे सर्वदा एक पक्ष में वोट देते थे। इससे कोई निर्णय लेने में वे अपने दो मतों से तृतीय सम्रदाय को पराजित कर देते थे।

विद्रोह की शुरुआत : सभा का अधिवेशन आरंभ होते ही तृतीय सम्प्रदाय के सभी सदस्य एक साथ एक कक्ष में बैठने एवं प्रत्येक सदस्य के लिए मताधिकार की माँग करने लगे। प्रथम दो सम्रदाय एवं राजा के विरोध करने पर बुर्जुआ ने विद्रोह आरंभ कर दिया।

विद्रोह की तीव्रता : भिरोवा, लाफायेत, आवेसियस आदि उदारपन्थी सदस्य तृतीय सम्रदाय के साथ मिल जाने से बुर्जुआ विद्रोह तीव्र हो उठा। तृतीय श्रेणी के प्रतिनिधि ने एक सभा में सम्मिलित होकर अपनी सभा को ही ‘राष्ट्रीय सभा’ घोषित की। इतिहासकार ग्रांट एवं टेम्परली ने इस घटना को ‘फ्रांसीसी क्रांति का क्षुद्र प्रतीक’ कहा है।

प्रश्न 29.
बुर्जुआ क्रांति के महत्व का उल्लेख करो।
उत्तर : दीर्घ 175 वर्षो के बाद 5 मई 1789 ई० को वर्साई नगर में स्टेट्स जनरल या राष्ट्रीय सभा का अधिवेशन आरंभ हुआ। इस अधिवेशन में तृतीय सम्रदाय के सदस्यों द्वारा एक ही कक्ष में बैठने एवं प्रत्येक सदस्य को मताधिकार देने की माँग करने से बुर्जुआ विद्रोह आरंभ हो गया।
बुर्जुआ क्रांति का महत्व :
तृतीय सम्र्रदाय की विजय : बुर्जुआ श्रेणी के विद्रोह के दबाव से आतंकित राजा ने तीनों सम्रदाय का एकत्रित अधिवेशन एवं प्रत्येक सदस्य के मताधिकार की माँग को मान लिया। इससे बुर्जुआ श्रेणी की बड़ी विजय हुई।
फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत : बुर्जुआ कांति की सफलता के साथ ही फ्रांसीसी क्रांति का सूत्रपात हुआ। बुर्जुआ क्रांति के कुछ दिनों के भीतर ही तृतीय श्रेणी के दरिद्र कृषक एवं श्रमिक इसमें शामिल हो गये।
प्रतिक्रियाशील शक्तियाँ : बुर्जुआ कांति के साथ ही प्रतिक्रियाशील शक्तियाँ भी सक्रिय हो उठीं क्योंकि बुर्जुआ लोगों की सफलता को राजा मन से नहीं माने थे। कुलीन वर्ग भी बुर्जुआ श्रेणी के साथ समझौता करने के लिये राजी नहीं थे। फलस्वरूप राजा द्वारा नये सिरे से सैन्य वाहिनी संगठित करने पर मुश्किलें और बढ़ गयी।
जन विद्रोह : बुर्जुआ क्रांति में तृतीय सम्रदाय के दरिद्र कृषक एवं श्रमिकों के मिल जाने से फ्रांसीसी क्रांति ने जन विद्रोह का रूप ले लिया। शहर से लेकर गाँव तक क्रांति की लहर फैल गयी। पेरिस की उत्तेजित जनता ने 14 जुलाई को कुख्यात बैस्टील दुर्ग पर कब्जा कर लिया।

प्रश्न 30.
बैस्टील दुर्ग के पतन के बारे में क्या जानते हो ?
अथवा
पेरिस की आम जनता के प्रयास से क्रांति के प्रसार की आलीचना करो।
उत्तर :
फ्रांसीसी राजा लुई सोलहवें ने बुर्जुआ श्रेणी के प्रचण्ड दबाव के कारण तीनों सम्पदाय को एक साथ सभा में बैठने एवं प्रत्येक को मत देने का अधिकार मान लिया। इस घटना से फ्रांस के आम लोगों पर बहुत प्रभाव पड़ा।
बैस्टील दुर्ग का पतन :
राजा का पदक्षेप : प्रचण्ड दबाव के कारण राजा द्वारा बुर्जुआ श्रेणी की माँगे मान लेने पर भी वे मानसिक रूप से इसे नहीं मानते थे। वे पेरिस एवं वर्साई नगर में प्रायः 30 हजार सेना संगठित की। इसके बाद लुई सोलहवें द्वारा लोकप्रिय अर्थमंत्री नेकार को पद से हटाने (22 जून) पर पेरिस की जनता आक्रोश से उत्तेजित एवं हिंसक हो उठी। बैरिकेड तोड़ दिया गया। जनता अस्त्रों की दुकान एवं गिर्जाघरों को लूटने लगी।

पेरिस की परिस्थिति : इसी समय खाद्य-सामग्री की माँगों को लेकर गाँव की हजारों जनता पेरिस की उत्तेजित जनता के साथ मिलकर सरकारी दफ्तरो में घुसकर दस्तावेजों को जला दिया। इसके बाद प्राय: 7-8 हजार लोग 14 जुलाई 1789 ई० को कुख्यात् बैस्टिल दुर्ग के सुरक्षा-कर्मियों की हत्या कर दुर्ग को दखल किया एवं बन्दियों को मुक्त कर दिया।

महत्व : बैस्टील दुर्ग एकनायकत्व का प्रतीक था। बिना विचार किये बहुत सारे निर्दोष लोगों को यहाँ पर बन्दी बनाकर रखा जाता था। बैस्टिल दुर्ग के पतन से राजतंत्र एवं कुलीनों के ऊपर बहुत चोट पहुँची। पेरिस की शासन क्षमता बुर्जुआ श्रेणी के हाथों में आ गयी। पेरी कम्यून बनाकर वे लोग रास्ते पर ही पेरिस का शासन चलाने लगे। इतिहासकार गुड़विन के मतानुसार, “बैस्टिल दुर्ग के पतन की घटना समग्र विश्व में स्वाधीनता के प्राक् काल के रूप में चिह्हित है।”

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 31.
ग्रामांचल में फ्रांसीसी क्रांति के प्रसार के संबंध में आलोचना करो।
उत्तर :
कई वर्षो तक चला तीव्र आर्थिक संकट, अकाल, खाद्याभाव आदि के कारण फ्रांस के ग्रामांचल में निराशा फैल गयी थी और इस स्थिति में ग्राम के दरिद्र लोगों में उत्तेजना.थी।
ग्रामांचल में फ्रांसीसी क्रांति का विस्तार :
जागीरदारों के खिलाफ विद्रोह : ग्रमांचल में कृषक कार्वि या श्रमकर, टाइद या धर्मकर, टाइले या भूमिकर सहित विभिन्न तरह के जागीरदारी कर देने को बाध्य थे। 14 जुलाई 1789 ई० को बैस्टील दुर्ग के पतन होने पर जागीरदारों के विरुद्ध ग्रामांचल के साधारण लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।

महाआतंक : बैस्टील दुर्ग के पतन के बाद ग्रामांचल में अफवाह फैल गयी कि कुलीनों के भाड़े के गुण्डे एवं राजा की सैन्यवाहिनी गाँव के किसानों को दण्ड देने के लिये आ रही हैं। इस अफवाह को महाआतंक के नाम से जाना जाता है। महाआतंक के दौरान गांवों की विद्रोही जनता जागीरदारों और उनके नौकरों को खदेड़ने, उनके मकान एवं गिरजा घरों को नष्ट करने, कर्ज के कागजों को आग में जलाने लगी तथा चारागाहों एवं अनाज के गोदामों पर दखल कर लिया।

जागीरदारी पर चोट : विद्रोह के दबाव से बहुत से जमींदारों ने भी अपनी जागरीदारी अधिकारों का त्याग कर दिये। 4 अगस्त से 11 अगस्त के बीच कानून के माध्यम से अधिकांश सामन्त कर, भूमिदास प्रथा, सामाजिक विभाजन आदि का अन्त किया गया। लगभग 20 हजार कुलीन एवं पादरी देश छोड़ने को बाध्य हुए।

पुरातनतंत्र का अवसान : ग्रामांचल में भयंकर विद्रोह के कारण ही सामन्तवाद के साथ मध्ययुगीन परम्परा का भी अन्त हुआ।

प्रश्न 32.
जागीरदारी उन्मूलन के लिये फ्रांस की संविधान सभा (1789 ई०) का पदक्षेप क्या था ?
उत्तर :
संविधान संभा का गठन : फ्रांस के लिये संविधान की रचना के उद्देश्य से संविधान सभा (1789 ई०) गठित हुई। इस संविधान सभा ने मूल संविधान की रचना के पूर्व जो दो महत्वपूर्ण कार्य किये उनमें एक था सामन्तवाद का अन्त। तृतीय श्रेणी के दबाव से कुलीन एवं पादरी वर्ग ने 4 अगस्त 1789 ई० की एक घोषणा के जरिये अपनी जागीरदारी अधिकारों को त्याग दिया।
जागीरदारी कर का अन्तः राष्ट्रीय सभा ने 11 अगस्त को एक घोषणा के माध्यम से कहा कि ‘एतद्-द्वारा जागरीदारी प्रथा का अन्त हुआ।” सामन्त प्रभु जो विभिन्न तरह के कर लेते थे उन सबको भी इस सभा द्वारा समाप्त किया गया।
सामन्तों के अधिकार का अन्त : सामंत एवं कुलीन वर्ग के विशेष अधिकारों का अन्त हुआ। भूमिदास प्रथा, सामन्तप्रभु के वंशगत अधिकार, पदवी, जमींदारी, स्वत्व, निरकुश सरकारी नौकरी का अधिकार आदि समाप्त हुआ। राजा की खास जमीन एवं गिरजा की जमीनें जब्त हुई।
महत्व : संविधान सभा द्वारा तत्काल सामन्तवाद के सम्पूर्ण उन्मूलन में व्यर्थ होने पर भी सामंतवाद की मृत्यु अवधारित थी।

प्रश्न 33.
टिप्पणी लिखो : व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार अथवा नागरिक के लोकतान्रिक अधिकार।
उत्तर :
फ्रांसीसी संविधान सभा ने मूल संविधान की रचना के पूर्व ‘व्यक्ति एवं नागरिक अधिकार की घोषणा’ नामक एक दस्तावेज प्रकाशित किया। (Declaration of Rights of Man and Citizen) 26 अगस्त, 1789 ई०।

व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकारों की घोषणा :
घोषणापत्र का आधार : फ्रांसीसी संविधान संघर्ष सभा द्वारा प्रकाशित ‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार के घोषणापत्र’ की रचना में ‘अमेरिका के स्वाधीनता का घोषणापत्र.’ एवं इंगलैण्ड का ‘मैगना कार्टा’ तथा ‘बिल ऑफ राइट्स’ साथ ही लक, रूसो, माण्टेस्क्यू आदि दार्शनिको के मतादर्श विशेष रूप से लक्षित होता है।

मनुष्य के अधिकार की घोषणा : व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार के घोषणा पत्र में कहा गया है कि –

  1. मनुष्य जन्म से ही मुक्त एवं स्वाधीन है
  2. मनुष्य के जन्मगत अधिकार पवित्र एवं अलंघनीय हैं
  3. कानून की नजर में सभी मनुष्य समान हैं।
  4. राष्ट्र की सार्वभौम क्षमता का वास्तविक अधिकारी जनता है।
  5. योग्यतानुसार सरकारी नौकरी पाने का अधिकार
  6. वाक् स्वाधीनता, समाचारपत्रों की स्वाधीनता, धार्मिक स्वाधीनता, सम्पत्ति का अधिकार आदि मनुष्यों के सार्वजनिक अधिकार हैं।

सीमाबद्धता : व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार के घोषणापत्र की कुछ सीमाबद्धताएँ थी। जैसे –

  1. घोषणा पत्र में सामाजिक समानता स्पष्ट नहीं थी।
  2. इसमें मनुष्य के अर्थनैतिक अधिकार को स्वीकृति नहीं दी गयी।
  3. इसमें शिक्षा के अधिकार के बारे में कुछ नहीं कहा गया।
  4. मनुष्य द्वारा संग्ठित आन्दोलन करने के अधिकार के सम्पर्क में भी घोषणापत्र नीरव है,
  5. नागरिक के अधिकार की बात करने पर भी दायित्व एवं कर्त्त्य के बारे में भी इसमें कुछ नहीं कहा गया।

महत्व : कुछ सीमाबद्धताएँ होते हुए भी व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार के घोषणापत्र के महत्व को अस्वीकार नहीं किया जा सक़ता। इतिहासकार ऊलार का कहना है कि इस घोषणा पत्र के माध्यम से ‘विशेष अधिकार एवं असमानता के विरोध में मनुष्य के अधिकार एवं समानता की नीति प्रतिष्ठित हुई है। उन्होंने इस ऐतिहासिक घोषणापत्र को ‘पुरातनतंत्र की मौत का फरमान’ के नाम से संबोधित किया है।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 34.
फ्रांस की नई विधानसभा (1791 ई०) के विषय में क्या जानते हो ?
उत्तर :
फ्रांस की नई विधानसभा के विभिन्न उल्लेखनीय बिन्दु थे :-
विषयः नई विधानसभा फ्रांस के मौलिक सार्वभौम क्षमता का अधिकारी थी। पूरे देश के लिये कानून बनाना, विदेशनीति का संचालन, अर्थ उपलब्धि इत्यादि इसके महत्वपूर्ण विषय थे।

राजा की भूमिका : विधान सभा द्वारा पारित किसी कानून को रहद करना या विधानसभा भंग कर देना राजा की क्षमता में नहीं था। लेकिन वे विटो के प्रयोग के जरिये इसे कुछ समय के लिये स्थगित कर सकते थे। विधानसभा द्वारा लगातार तीन बार पास हो जाने से वह राजा की सम्मति के बिना ही कानून में रूपांतरित हो जाता था।
कठिनाइयाँ : 1 अक्टूबर 1791 ई० को विधानसभा का प्रथम अधिवेशन हुआ। आरंभ से ही यह विधानसभा कई समस्याओं के सम्मुखीन हुई।

  1. इस सभा के सभी सदस्य ही नये एवं अनभिज्ञ थे।
  2. राजतंत्र के स्थान पर प्रजातत्र की प्रतिष्ठा की माँग होने पर भी नई विधानसभा को प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा में कोई दिलचस्पी नहीं थी
  3. नये संविधान द्वारा विधानसभा के साथसाथ राजतंत्र के अस्तित्व को जारी रखने पर भी राजा इस क्रांतिकारी संविधान को मानने के लिये सहमत नहीं थे।

प्रश्न 35.
स्टेट्स जनरल या राष्ट्रीय सभा के अधिवेशन से संबंधित राजा के साथ जिरन्दिष्ट एवं जैकोबिनों के विरोध के बारे में लिखो।
उत्तर :
फ्रांसीसी राजा लुई सोलहवें के द्वारा गुप्त रूप से बुर्जुआ के विरुद्ध सेना संगठठित करने से परिस्थिति गंभीर हो उठी। इस पृष्ठभूमि में राजा के साथ जिरन्दिष्ट एवं जैकोबिनों के समर्थकों में विरोधिता आरंभ हो गयी।
विरोघ :
नया कानून : 1791 ई० में फ्रांस की नई विधानसभा में जिरन्दिष्ट एवं जैकोबिन दल के सदस्यों ने राजा विरोधी दो कानून पास किये। इस कानून में कहा गया है कि –
1. पादरियों को नये सिरे से ‘धर्म याजक के संविधान’ के प्रति शपथ लेनी होगी।
2. एमिम्री अर्थात देशत्यागी कुलीनों के दो माह के भीतर देश न लौटने पर उनकी सम्पत्ति जब्त कर ली जायेगी एवं देशद्रोहिता के आरोप में उन्हें मृत्युदण्ड दिया जायेगा।

द्वितीय फ्रांसीसी क्रांति : राजा लुई सोलहवें ने उक्त दोनों कानून को विटो का प्रयोग करके स्थगित कर दिया। फलस्वरूप जैकोबिन दल के नेतृत्व में उत्तेजित जनता ने राजमहल पर आक्रमण (10 अगस्त, 1792 ई०) करके राजा के अंगरक्षको की हत्या कर दी। अन्त में विधानसभा द्वारा राजा को क्षमताच्युत कर उन्हें टेम्पल दुर्ग में बन्दी बना लिया गया। इतिहासकार लेफेयर ने इस घटना को ‘द्वितीय फ्रांसीसी कांति’ का नाम दिया है।

सितम्बर हत्याकाण्ड : राजा के पदच्युत होने के बाद दोनों दलों के बहुत से लोगों को राजा का समर्थक समझकर बन्दी बना लिया गया एवं जेल में घुसकर चार दिन तक (2-5 सितम्बर, 1792 ई०) हजारो-बन्दियों की हत्या की गयी। इस घटना को ‘सितम्बर हत्याकाण्ड’ के नाम से जाना जाता है।

प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा : राजतंत्र के समाप्त होने के बाद दोनों दलों ने फ्रांस में प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा की और यही फ्रांस का प्रथम प्रजातंत्र था। कुछ दिनों के भीतर ही जैकोबिन दल ने न्याय का नाटक कर राजा लुई सोलहवें को मृत्युद्ध्ड (21 जनवरी 1793 ई०) को दे दिया।

प्रश्न 36.
फ्रांस की नई विधानसभा में विभित्र राजनैतिक दलों के परिचय का उल्लेख करो।
उत्तर :
1791 ई० में प्रवर्तित संविधान के आधार पर फ्रांस में सक्रिय नागरिकों के वोट के आधार पर नई विधानसभा गठित हुई। 1 अक्टूबर 1791 ई० को 745 सदस्य एक कक्ष में इसके अधिवेशन में बैठे।
विभिन्न राजनैतिक दल
दक्षिणपंथी शासनतांत्रिक दल : फिउलैण्ट नामक यह दक्षिणपंथी दल विधानसभा में स्पीकर की दाहिनी तरफ बेठता था। इसकी संख्या 264 थी। राजतंत्र, कुलीन सम्रदाय एवं पादरियों के प्रति सहानुभूतिशील एवं क्रांति विरोधी यह दल देशत्यागी कुलीन वर्ग को वापस लाने एवं पादरी वर्ग के अधिकार को लौटाने का समर्थन करता था।

जिरन्दिष्ट दल : व्रिसो के नेतृत्व में वापमन्यी जिरन्दिष्ट दल स्पीकर की बायीं तरफ बैठता था। सुमारियाज, कूँत, कन्दरसे आदि इस दल के प्रमुख नेता थे। ग्रामांचल में इस दल का व्यापक प्रभाव था।

जैकोबिन दल : उग्र वामपन्थी जैकोविन दल राजतंत्र का विरोधी एवं प्रजातंत्र का समर्थक था। इस दल के संदस्य स्पीकर की बायीं ओर बैठते थे। इस दल में 136 सदस्य थे। इसके प्रमुख नेता रोब्सपियर, दाँते, माराट आदि थे। कारीगर, छोटे व्यापारी, निम्न वर्ग इस दल के मुख्य समर्थक थे।

मध्यपंथी दल : यह दल निरपेक्ष था। इस दल के समर्थक किसी खास दल या मत के समर्थक नहीं थे। इस दल के सदस्य विधानसभा के बीच में बैठते थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 37.
जैकोबिन शासन के बारे में लिखो।
उत्तर :
क्रांति के समय फ्रांस में उग्र वामपंथी राजनैतिक दल जैकोबिन था। इस दल के प्रमुख नेता रोब्सपियर, दाँते, माराट आदि थे।
जैकोबिन शासन :
आदर्श : जैकोबिन दल फ्रांस में सम्पत्ति के आधार पर मतदान का सख्त विरोधी था। राजतंत्र को समाप्त करके प्रजातंत्र को प्रतिष्ठित करना इस दल का मुख्य लक्ष्य था। यह दल रूसो के समाजवादी आदर्श में विश्वास रखता था। दरिद्र और गरीब श्रेणी के लोग इसके कट्टर समर्थक थे।

जिरन्दिष्ट दल के शत्रु : जैकोबिन दल ने फ्रांस के सर्वहारा वर्ग के सहयोग से जिरन्दिष्ट दल को भगाकर विधानसभा तथा शासन-व्यवस्था में एकक्षत्र अधिकार द्वारा राजतंत्र को समाप्त किया।

आतंक : देश के संकटकाल में जैकोबिन दल के नेतृत्व में फ्रांस में आतंक-शासन की शुरुआत हुई। ये लोग फ्रांस की रक्षा के नाम पर बिना सोचे-समझे हजारों निर्दोष लोगों की हत्याएँ की। राजपरिवार के सभी लोगों को गिलोटिन के द्वारा फाँसी पर लटका दिया गया। जैकोबिन नेता हिवर्ट का कहना था कि, ‘सुरक्षा के लिए सबकी हत्या करनी होगी’। जैकोबिन दल ने अपनी तीनों संस्थाओं की मदद से फ्रांस में निरंकुश शासन की प्रतिष्ठा की – जैकोबिन क्लब, क्रांतिकारी कम्युन एवं कन्वेशन कमिटी।

जनकल्याण : अपने आतक के शासनकाल में जैकोबिन दल ने बहुत से जनकल्याणकारी कार्य किये :

  • मजदूरी वृद्धि करने के उद्देश्य से विभिन्न ठोस कदम।
  • दैनिक आवश्यक सामग्री की उच्च मूल्य दर एवं निम्नतम मजदूरी दर
  • दास प्रथा का खात्मा,
  • कुलीन वर्ग की जमीनों को जब्त करके गरीब किसानों में बाँटना
  • अवैतनिक सर्व शिक्षा की शुरुआत एवं
  • क्रिश्चियन कैलेण्डर के स्थान पर प्रजातांत्रिक कैलेण्डर की शुरुआत आदि।

प्रश्न 38.
मैसूर के राजा टीपू सुल्तान के साथ जैकोबिन क्लब के सम्बन्ध के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
भारतवर्ष में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान दक्षिण के मैसूर में हैदर अली ने एक स्वाधीन राज्य का निर्माण किया। बाद में उनके बेटे टीपू सुल्तान ने (1782-1799 ई०) इसकी स्वाधीनता की रक्षा के लिये ब्रिटिश शक्ति के विरुद्ध लड़ाई करते रहे। जैकोबिन क्लब एवं टीपू सुल्तान
फ्रांस से मदद की प्रार्थना : अंग्रेजों के हाथ से मैसूर राज्य को बचाने के लिये टीपू सुल्तान ने बहुत से कदम उठाये। अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिये उन्होंने फ्रांस के क्रांतिकारी प्रजातांत्रिक सरकार से मदद की अपील की किन्तु उनका यह प्रयास सफल नहीं हुआ।

स्वाधीनता का वृक्षारोपण : टीपू सुल्तान स्वयं स्वेच्छाचारी शासक होते हुए भी फ्रांस के क्रांतिकारी जैकोबिन सरकार के प्रति अनुरक्त हुए। फ्रांसीसी क्रांति एवं फ़ांस में प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा को समर्थन दिखाने के उद्देश्य से अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में ‘स्वाधीनता का वृक्षारोपण’ किया।

जैकोबिन क्लब के सदस्य : टीपू सुल्तान फ्रांस के उम्र वामपन्थी जैकोबिन क्लब के आदर्श के प्रति श्रद्धाशील थे। वे खुद जैकोबिन क्लब की सदस्यता ग्रहण की एवं उन्हें अपनी राजधानी में आने के लिये आमन्त्रित किया।

अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण : सुदूर फ्रांस की क्रांति एवं क्रांतिकारी आदर्श के प्रति श्रद्धा एवं समर्थन टीपू सुल्तान के अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टिकाण को दर्शाता है।

प्रश्न 39.
थर्मीडोरीय प्रतिक्रिया क्या है ?
उत्तर :
2 जून 1793 से 27 जुलाई 1794 ई० तक फ्रांस में एक आपातकालीन शासन व्यवस्था चालू थी जिसे आतंकराज के नाम से जाना जाता है। इस शासन के प्रमुख संचालक क्रांतिकारी नेता राब्सपियर थे।
थर्मीडोरीय प्रतिक्रिया
लाल आतंक : राब्सपियर के नेतृत्व में दीर्घ 13 महीने में फ्रांस में प्राय: 50 हजार निर्दोष लोगों को गिलोटिन से हत्या की गयी प्राय: तीन लाख लोगों को बन्दी बनाया गया। कितने लोग हमेशा के लिये लापता हो गये। मेरी एंत्वायनेत, मैडम रोलाँ, बिसो, बेइली, हिवर्ट, दाँते जैसे प्रसिद्ध लोग भी इसके शिकार हुए। आतंक की इस दौड़ को फ्रांस के क्रांतिकारी इतिहास में लाल आतंक के नाम से जाना जाता है।

राब्सपियर की मृत्यु : आतंक के इस भयंकर लीला से आतंकित होकर जिरन्दिष्ट, जैकोबिन एवं अन्य दलों के सदस्य रोबसपियर एवं उसके अनुयायियों को बन्दी (27 जुलाई 1794 ई०) बनाकर, दूसरे दिन रोबसपियर एवं उसके 24 अनुयायियों को गिलोटिन से हत्या कर दी। यह घटना इतिहास में ‘थर्मीडोरीय प्रतिक्रिया’ के नाम से परिचित है। रोबसपियर के क्षमता से हटने के बाद अक्टूबर, 1794 से नेशनल कन्वेशन के शासनकाल को थर्मीडोरीय प्रतिक्रिया के शासनकाल के नाम से जाना जाता है।

प्रतिक्रिया : थर्मीडोरीय प्रतिक्रिया से –

  • जैकोबिन दल के बद्ले जिरन्दिष्ट एवं मध्यपन्थी दल का समर्थन बढ़ गया,
  • जैकोबिन क्लब एवं क्रांतिकारी संगठन बन्द कर दिये गये।
  • सभी गिरफ्तारी फरमान रद्द हुए
  • 40 हजार बन्दियों की रिहाई हुई।
  • पेरिस कम्युन पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया तथा 90 कांतिकारियों को मृत्युदण्ड दिया गया।
  • देशत्यागियों को स्वदेश लौौने की अनुमति दी गयी एवं
  • धार्मिक आजादी को स्वीकृति मिली।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 40.
फ्रांस के नये संविधान (1795 ई०) के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
राब्सपियर के मृत्युदण्ड के बाद जैकोबिनों का पतन हो गया एवं जिरन्दिष्ट तथा मध्यपंथी दल शासन में आये। फलस्वरूप फ्रांस में बुर्जुआ एवं मध्यमवर्ग को प्रधानता मिली।
फ्रांस का नया संविधान :
प्रतिक्रांति : जिरन्दिष्ट दल के शासनकाल में प्रतिक्रांति का रूप विस्तृत हो गया। मृत राजा लुई सोलहवें का भाई लुई अठारहवां वेरानों से एक घोषणा पत्र के जरिये फ्रांस में पूर्व का राजतंत्र एवं पुरातनतंत्र लौटाने की घोषणा की।

संविधान की रचना : फ्रांस में राजतंत्र की वापसी की सम्भावना को दूर करने के लिये राष्ट्रीय अधिवेशन (1795 ई०) में अतिशीघ्र एक संविधान रचना का कार्य आरंभ किया गया। बुर्जुआ श्रेणी के प्रवक्ता वयोसि द एंग्लास द्वारा इस संविधान की रचना की गई।

संवैधानिक पदक्षेप : 1795 ई० के संविधान द्वारा – (i) नागरिकों के अधिकार के साथ-साथ उनके कर्त्त्यों की घोषणा (ii) सर्वसाधारण के मताधिकार के बदले सम्पत्ति के आधार पर मताध्किर (iii) द्विकक्षीय विधानसभा का गठन (iv) शासन-कार्य के संचालन हेतु पाँच साल की अवधि के लिये एक पाँच सदस्यीय डाइरेक्टरी की प्रतिष्ठा इत्यादि नये संविधान द्वारा लागू की गयी।

विद्रोह का विरोध : राष्ट्रीय कन्वेंशन द्वारा प्रवर्तित 1795 ई० का संविधान कुलीन, राजतंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा-वाहिनी, पेरिस की जनता – किसी को भी खुश नहीं कर सका। उनलोगों के द्वारा अधिवेशन का विरोध जताने से सेनापति नेपोलियन ने उसका दमन किया। फलस्वरूप फ्रांस में मध्यमवर्ग बुर्जुआ श्रेणी फिर से क्षमता में आ गयी।

प्रश्न 41.
फ्रांस में डाइरेक्टरी के शासनकाल (1795-99) के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
आतंक-शासन के बाद फ्रांस में जैकोबिनों का राज्य खत्म हो गया। मध्यपंथी बुर्जुआ श्रेणी फ्रांस में पुन: प्रतिष्ठित हुई। इस समय फ्रांस में डाइरेक्टरी शासन (1795-99 ई०) नामक एक नये प्रकार का शासन शुरू हुआ।
डाइरेक्टरी शासन :
डाइरक्टरी शासन का सूत्रपात : 1795 ई० के संविधान के अनुसार 5 विशिष्ट सदस्यों वाली ‘डाईरेक्टरी’ के हाथ में देश का शासन सौंप दिया गया। इसमें कहा गया कि – (i) डाइरक्टरी के सदस्यों की उम्र कम-से-कम 40 साल होगी। (ii) वे लोग विधानसभा द्वारा नियुक्त होंगे। (iii) उनके कार्यकाल की अवधि 5 साल की होगी (iv) प्रत्येक साल एक सदस्य पदत्याग करेंगे, उसकी जगह पर नया सदस्य नियुक्त होगा।

वासकुल नीति : सर्वप्रथम डाइरक्टरी के जो पाँच सदस्य नियुक्त हुए – वे हैं – वारास, ला रावेनिलये, लार्तूनायेव, रिउवेल एवं कारनो। इनमें से अधिकांश अयोग्य शासक थे। इन्हे शुरू से ही वामपंथी जैकोविन एवं दक्षिणपंथी राजतंत्री दल के विरोध का सामना करना पड़ा। फलस्वरूप उन्होंने दोनों दलों को मानकर चलने की नीति अपनायी। इसे वासकुल नीति के नाम से जाना जाता है।

शक्ति : राष्ट्रीय शासन, स्थानीय शासन, सेनावाहिनी, विदेश नीति निर्धरणण आदि विषयों में डाइरक्टरी के शासकों के पास निरंकुश शक्ति थी किन्तु वे लोग जनप्रतिनिधि की तरह आचरण नहीं करके राजतंत्री शासको जैसा आचरण करते थे। कानून की रचना या कानून विषयक प्रस्ताव लेने की शक्ति डाइरक्टरी के पास नहीं थी।

पतन : डाइरक्टरी शासनकाल फ़ांस की क्रांति के इतिहास में सबसे निकम्मी, भष्टाचारी एवं प्रतिक्रियावादी शासनकाल था। इस शासनकाल में देश के भीतर अत्याचार, महँगाई आदि ने भयकर रूप धारण कर लिया था।। फलस्वरूप देश में चारों तरफ विद्रोह होने लगा। इस मौके का फायदा उठाकर फ्रांस के सेनापति नेपोलियन बोनापार्ट 1799 ई० ने फ्रांस में ‘कन्सुलेट’ शासन की स्थापना की।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
फ्रांस की क्रांति में दार्शनिकों की भूमिका/योगदान के बारे में संक्षेप में आलोचना करो।
अथवा
फ्रांसीसी राजतंत्रीय निरंकुशवाद और आर्थिक नीति के विषय में दर्शजिकों के विचारों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इतिहासकार टेइन, रूस्तान, सेतोव्वियो, मादेला, जोरेस, भातिएं आदि का मत है कि 1789 ई० की फ्रांस की क्रांति में दार्शनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। वे अपनी लेखनी द्वारा देश की व्यवस्था की त्रुटियों को देश की जनता के सामने रखते थे। इससे फ्रांस की जनता धीरे-धीरे व्यवस्था के विरोध की मानसिकता से भर उठी।
दार्शनिकों की भूमिका :
माण्टेस्क्यू : फ्रांसीसी दार्शनिक माण्टेस्क्यू (1689-1755 ई०) देश के वंचित, दरिद्र, गरीब जनता के प्राण पुरुष थे। माण्टेस्क्यू ने अपनी पुस्तक ‘द स्पिरिट ऑफ लॉ’ या ‘कानून की आत्मा’ में सम्राट के स्वेच्छाचारी शासन एवं ईश्वरीय अधिकार तत्व की तीव्र समालोचना की हैं। ‘द पर्सियन लेटर्स’ या ‘पार्सिया की पत्रावली’ नामक एक अन्य ग्रन्थ में नियमतांत्रिक राजतंत्र के समर्थक माण्टेस्क्यू फ्रांस के पुरातनतंत्र, कुलीनवाद एवं स्वेच्छाचारी राजतंत्र की कठोर समालोचना की हैं। क्षमता की स्वाधीन नीति के समर्थक माण्टेस्क्यू ने व्यक्ति स्वाधीनता की रक्षा के उद्देश्य से देश की विधानसभा, शासन विभाग एवं न्यायालय को अलग करने की माँग की।

वाल्टेयर : वाल्टेयर (1694-1778 ई०) फ्रांस के अन्यतम दार्शनिक, साहित्यिक एवं चिन्तक थे। वे फ्रांस के स्वेच्छाचारी राजतंत्र के तीव्र निन्दक थे। उन्होंने अपनी व्यंग्यात्मक शैली में फ्रांस के गिरजा घरों के भ्रष्टाचार, कुसंस्कार, अन्धविश्वास के ऊपर आकमण किये। उन्होंने कैथोलिक गिरजा को ‘विशेष अधिकार प्राप्त उत्पात’ कहा है। उनकी उल्लेखनीय दो पुस्तके हैं ‘कैनदिद’ (Candide) एवं ‘दार्शनिक का कोष’ (Philosophical Dictionary)।

रूसो : अठारहवीं सदी के फ्रांस के सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं लोकप्रिय दार्शनिक जाँ जैक रूसो (1712-1778 ई०) थे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सामाजिक समझौता’ (Social contract) में राजा की ईश्वरीय क्षमता का युक्ति के साथं खण्डन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सार्वभौम शक्ति का स्रोत जनता है क्योकि ‘जनता की इच्छा’ (General will) के आधार पर ही एकदिन समझौते के द्वारा राजा को क्षमता मिली थी। अत: राजा को किसी भी समय क्षमता से हटाना जनता का अधिकार है। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘असमानता का सूत्रपात’ में कहा है कि मनुष्य स्वाधीन होकर एवं अधिकार लेकर पैदा होता है किन्तु विषमतामूलक समाज व्यवस्था उसे दरिद्र एवं पराधीन बना देती है।

डेनिस दिदेरो एवं डि’एलेमवर्ट : डेनिस दिदेरो एवं डि’एलेमवर्ट एक प्रमुख दार्शनिक थे जिन्होंने राष्ट्र एवं गिरजा के अन्याय-आचरण की तीव्र समालोचना की। उन लोगों ने कठिन परिश्रम से सत्रह खण्डों में विश्वकोश की रचना की। इनमें विभिन्न दार्शनिकों की रचना के साथ राजनैतिक, सामाजिक, अर्थनैतिक, ऐतिहासिक विषयों के आलेख-आदि हैं।

फिजिओक्रैट वर्गः अठारहवीं सदी के फ्रांस में फिजिओक्रैट नामक एक अर्थनीतिविद वर्ग ने फ्रांस के वाणिज्य में शुल्क-नीति एवं नियंत्रण प्रथा की तीव्र समालोचना करके एवं अबाध वाणिज्य नीति एवं गैर-सरकारी उद्योग स्थापना की माँग की। इस मतवाद के अन्यतम समर्थक केने थे।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 2.
फ्रांसीसी संविधान सभा (1789 ई०) की कार्यावली के बारे में आलोचना करो।
अथवा
राष्ट्रीय संवैधानिक सभा के कार्य बताएं।
उत्तर :
9 जुलाई 1789 ई० को फ्रांसीसी राष्ट्रीय सभा का संविधान सभा में रूपांतरण हुआ। इस सभा के अधिकतर सदस्य बुर्जुआ या मध्यवित्त वर्ग के थे।
संविधान सभा की कार्यावली (1789 ई०) :
सामन्तवाद का अन्त : फ्रांसीसी राष्ट्रीय सभा ने 4 अगस्त, 1789 ई० से 11 अगस्त के बीच फ्रांस की सामन्तवादी व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की। इस घोषणा के द्वारा – सामन्त प्रथा, भूमिदास प्रथा, विभिन्न सामन्ती कर, कर्वि या बेगारी, टाइद या धर्म-कर की समाप्ति हुई, साथ ही सामन्त श्रेणी एवं पादरीवर्ग के विशेष अधिकार को भी खत्म किया गया।

व्यक्ति एवं नागरिक का अधिकार पत्र : संविधान सभा का दूसरा उल्लेखनीय कदम 26 अगस्त, 1789 ई० को घोषित ‘व्यक्ति एवं नागरिक का अधिकारपत्र’ था। इसके माध्यम से कहा गया कि –

  1. स्वाधीनता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है
  2. कानून की नजर में सभी समान हैं।
  3. जनता ही देश की सार्वभौम क्षमता का अधिकारी है।
  4. बिना विचार के किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
  5. व्यक्ति स्वाधीनता, सम्पत्ति का क्रय-विक्रय एवं उपभोग का अधिकार, वाक्स्वाधीनता, धार्मिक स्वाधीनता आद् प्रत्येक मनुष्य का मौलिक अधिकार है।
  6. सभी के लिये उचित तरीके से करारोपण तय होना चाहिये।

संविधान द्वारा अन्यान्य कार्य :

शासनतंत्र में सुधार : संविधान के जरिये विभिन्न शासनतंत्रों में सुधार हुआ।

  1.  प्रशासन, विधायिका एवं न्यायपालिका विभाग को सम्पूर्ण रूप से अलग किया गया।
  2. राजा की शक्ति को खत्म करके फ्रांस में नियमतंत्र राजतंत्र की प्रतिष्ठा की गयी।
  3. कानून बनाना, राजकोष से खर्च आदि अधिकारों से राजा को वंचित किया गया।
  4. राजा के दैवीय अधिकार को खत्म करके उन्हें ‘फ्रांस का राजा’ के नाम से घोषित किया गया।
  5. राजा के द्वारा विधायिका की विधाओं को खत्म करना या विधानसभा को भंग करनें के अधिकार को समाप्त कर दिया गया।
  6. सम्पत्ति की मात्रा के आधार पर जनता को सक्रिय एवं निष्किय दो भागों में बांटकर वोट का अधिकार दिया गया।
  7. समस्त देश को 83 डिपार्टमेण्ट या प्रदेश में एवं प्रत्येक प्रदेश को जिलों में बाँट दिया गया।

आर्थिक सुधार : देश के तीव्र आर्थिक संकट को दूर करने के उद्देश्य से –

  1. सभी तरह के अप्रत्यक्ष करों को हटा दिया गया
  2. जमीन एवं अचल सम्पत्ति के ऊपर करारोपण किया गया
  3. गिरजा घरों की सभी सम्पत्तियाँ जब्त कर ली गई।
  4. इस जब्त सम्पत्ति को अमानत के रूप में रखकर ‘आसाईनेट’ नामक कागजी नोट चालू किया गया।
  5. श्रमिकों की हड़ताल एवं ट्रेड यूनियन करने के अधिकार को खत्म कर दिया गया।

न्यायपालिका में सुधार :

  1. सामन्तों के कोर्ट को खत्म कर दिया गया।
  2. जनता के द्वारा निर्वाचित सदस्य को न्यायाधीश बनाया गया।
  3. फौजदारी मामलों में जूरी प्रथा आरंभ की गई।
  4. बिना विचार के किसी को बन्दी बनाने पर रोक लगा दी गई।
  5. निम्न अदालत की राय के विरुद्ध उच्च अदालत में अपील करने के अधिकार को मंजूरी दी गयी।

गिरजा घरों की व्यवस्था में सुधार : संविधान सभा ने गिरजाघरों की व्यवस्था में सुधार के लिये

  1. गिरजा घरों की सभी सम्पत्ति को जब्त करके उसे अमानत के तौर पर रखा गया एवं घोषणापत्र ‘आसाईनेट’ नामक कागजी नोट चालू किया गया।
  2. ‘सिविल कान्सटीट्यूशन ऑफ द क्लर्जी’ या ‘पादरी का संविधान’ द्वारा गिरजा घरों के ऊपर पोप के सभी अधिकारों को समाप्त किया गया। गिरजा घर एक राष्ट्रीय कार्यालय के रूप में काम करने लगा।
  3. जनता द्वारा पादरियों का निर्वाचन एवं सरकार से वेतन का नियम चालू हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 3.
फ्रांस में आतंक का शासन चालू होने के कारण क्या थे ?
उत्तर :
फ्रांस के राजा लुई सोलहवें के मृत्युदण्ड (21 जनवरी 1793 ई०) के बाद क्रांतिकारी, फ्रांस के भीतरी एवं विदेशी दोनों तरफ से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे थे। इस परिस्थिति में उन्होंने आपातकालीन शासन चालू किया। इस आपातकालीन शासन को आतंक राज के नाम से जाना जाता है।2 जून 1793 ई० से 27 जूलाई, 1794 ई० तक फ्रांस में आतंक-राज कायम रहा।
आतंक राज का कारण :
आतंकी संगठन : आतंक राज के संगठन में – (1) जन-सुरक्षा समिति, (2) सामान्य सुरक्षा समिति, (3) सन्देह का कानून, (4) क्रांतिकारी न्यायालय आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। जन-सुरक्षा समिति आतंक परिचालन की नीति निर्धीरित करती थी, सामान्य सुरक्षा समिति सन्देह होने वाले लोगों की लिस्ट बनाती थी। सन्देह के कानून द्वारा सन्देहम्यस्त लोगों को गिरफ्तार किया जाता था, क्रांतिकारी न्यायालय द्वारा उनका विचार करके मृत्युदण्ड दिया जाता था एवं गिलोटिन द्वारा उनकी हत्या की जाती थी।

जैकोबिन एवं जिरन्दिष्टों का विरोध : आतंक के प्रथम चरण में जैकोबिन एवं जिरन्दिष्ट दल संयुक्त रूप से शासन का संचालन किया। किन्तु कुछ ही दिनों में उनमें विरोध शुरू हो गया एवं आतंक द्वारा जैकोबिन दल जिरन्दिष्टों पर काबू पा लिया। रोबसपियर, हिवर्ट, दाँते, कार्नो आदि ने आतंक शासन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

लाल आतंक : कुछ ही दिनों के भीतर हिवर्ट, दाँते आदि के आतंक का विरोध करने पर रोब्सपियर ने अपने मित्र हिवर्ट एवं दाँते को भी मृत्युदण्ड दे दिया। रोब्सपियर अप्रैल 1794 ई० में आतंक शासन के सर्वेसर्वा बन गये। उनके नेतृत्व में बाद का 3 माह आतंक का विकराल एवं डरावना रूप लोगों के सामने आया। इस दौरान के शासनकाल को लाल आतंक कहा जाता है।

आतंक की भयावहता : आतंक द्वारा फ्रांस में लगभग 50 हजार निर्दोष लोगों की हत्या की गयी तथा बहुत से लोग हमेशा के लिये लापता हो गये। प्राय: 3 लाख लोगों को सन्देह के तहत गिरफ्तार किया गया। आतंक के माध्यम से रानी मेरी एंत्वायनेत, मैडम रोलाँ, ब्रियों, वारनाम वेली, लावएसिए आदि’को मृत्युदण्ड दिया गया।

आतंक का अन्त : आतंक के इस विकराल रूप से यूरोप के लोग स्तंभित हो गये। इससे आतंकित होकर जैकोबिन, जिरन्दिष्ट एवं मध्यमपंथी दल के नेता रोब्सपियर एवं उनके अनुयायियों को बन्दी बनाकर (27 जुलाई, 1794 ई०) 28 जुलाई को राष्ट्रीय सभा के निर्देश पर रोब्सपियर एवं उनके 24 अनुयायियों को गिलोटिन द्वारा मृत्युदण्ड दिये जाने के बाद फ्रांस में आतंक राज का अन्त हुआ।

प्रश्न 4.
आतंकी शासन के परिणाम के बारे में आलोचना करो।
उत्तर :
फ्रांस की कांति के माध्यम से फ्रांस में राजतंत्र का पतन एवं राजा के मृत्युदण्ड के बाद देश में एक संकटजनक परिस्थिति पैदा हो गयी थी। इस परिस्थिति में फ्रांस के कांतिकारी नेताओं ने आपातकालीन शासन लागू कर नया शासन चलाया जिसे आतंक का शासन कहा जाता है।
परिणाम : फ्रांस में दीर्घ 13 माह व्यापी (जून 1793 ई० से जुलाई 1794 ई० तक) आतंकी शासन के परिणाम की विशेषता थी –
क्रांति की रक्षा : आतंकी शासन द्वारा फ्रांस में प्रति-क्रांति अर्थात् देश के भीतर विद्रोह, गृहयुद्ध, अराजकता आदि बन्द हुआ। विदेशी आक्रमण के हाथ से कांतिकारी फ्रांस की रक्षा हुई।

हत्याकाण्ड : प्रतिक्रांति को कुचलने के नाम पर फ्रांस में बिना विचार के हजारों निर्दोष लोगों की हत्याएँ की गई ‘एवं लाखों लोगों को बन्दी बनाया गया। लाखों लोग तो हमेशा के लिये लापता भी हो गये। रानी एंत्वायनेत, मैडम रोलाँ, त्रिसों, वारनाम, वेइली, दाँतो आदि प्रसिद्ध व्यक्तियों को मृत्युदण्ड दिया गया।

प्रगतिशील सुधार : आतंकी शासन में फ्रांस में कई प्रगतिशील सुधार किये गये। जैसे –

  1. फ्रांस के समाज में पुरातनतंत्र एवं सामाजिक विषमता दूर करके समानता की प्रतिष्ठा के लिये विभिन्न कदम उठाये गये।
  2. देशत्यागी कुलीनों की सम्पत्ति जब्त करके उसे दरिद्र जनता में बाँट दिया गया।
  3. राष्ट्रीय सेनावाहिनी में शामिल होना बाध्यतामूलक कर दिया गया।
  4. खाद्य-सामग्री का सर्वोच्च मूल्य निश्चित कर दिया गया।
  5. पिता की सम्पत्ति में सबका समान अधिकार सुनिश्चित किया गया।
  6. शिशु, वृद्ध, असहाय तथा विधवाओं के लिये सरकारी अनुदान सुनिश्चित कियां गया।

आतंकी शासन की स्वीकृति का विचार :
आतंक के विपक्ष में तर्क : इतिहासकार तेइन ने आतंक के शासन की समालोचना की है। उनके मत के विपक्ष में निम्नोक्त तर्क प्रस्तुत किया गया है –

  1. क्रांतिकारियों का बलिदान : बहुत सारे सच्चे क्रांतिकारी इसके बलि हुए।
  2. अति सक्रियता : देश के शासन काल में आतंक का कुछ प्रयोजन था पर इतना नहीं।
  3. साधारण लोगों की मृत्यु : सर्वहारा वर्ग के बहुत से गरीब साधारण लोग बिना विचारे मारे गये।
  4. उश्रृंखलता : आतक शासन के सुयोग का लाभ उठाकर कुछ लोग उश्रृंखल होकर सरकारी कानून अपने हाथ में ले लिया था।
  5. गणतंत्र का विनाश : आतंक के शासन ने फ्रांस में गणतंत्र का विनाश किया।

आतंक के पक्ष में तर्क : ओलर’ मातिये, लेफेवर आदि इतिहासकार आतंक राज के पक्ष में विभिन्न तर्क प्रस्तुत किये हैं –

  1. आपातकालीन कदम : फ्रांस के अन्दर तथा विदेशी संकट के विरुद्ध आतंक के सिवा और कोई रास्ता नहीं था।
  2. क्रांति की रक्षा : आतंकी शासन के कारण फ्रांस में फैली अराजकता दूर हुई एवं कानून-व्यवस्था कायम हुई। विदेशी आक्रमण की संभावना भी टल गई। इस तरह फ्रांस की क्रांति सफल हुई।
  3. जनकल्याण: आतंकी राज में महैंगाई पर नियन्त्रण, न्यूनतम मजदूरी, भूमिहीनों में जमीन वितरण आदि जनकल्याणमूलक कानून पास किये गये।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 5.
फ्रांसीसी क्रांति के आर्थिक कारणों की आलोचना करो।
उत्तर :
फ्रांसीसी क्रांति (1789 ई०) आधुनिक विश्व के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। इतिहासकार कोवान ने फ्रांस की क्रांति को एक बड़ी नदी के छोटे-छोटे सोत में बिखरकर बाढ़ के भयानक रूप के साथ तुलना की है।
आर्थिक कारण : फ्रांस की कांति के लिये विभिन्न आर्थिक कारण जिम्मेवार थे, जैसे –
सरकारी फिजुल खर्ची : फ्रांसीसी राजपरिवार ने बिना सोचे-समझे फिजुल खर्च करके राष्ट्र की अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक शक्ति को कमजोर बना दिया था। लुई वौदहवें (1643-1715 ई०), लुई पन्द्रहवें (1715-1774 ई०) एवं लुई सोलहवें (1774-1793 ई०) के शासनकाल में सम्राट एवं राजपरिवार की अनियमितता एवं विलासिता अपने चरम शिखर पर पहुँच गया था। फलस्वरूप फ्रांस का राजकोष खाली हो गया।

खर्चीला युद्ध : राजा लुई चौदहवें एवं पन्द्रहवें ने कई युद्धों में भाग लेकर पर्याप्त धन-राशि खर्च की। सोलहवें लुई ने अमेरिका की स्वाधीनता संघर्ष में शामिल-होकर बहुत सारा धन लुटाया। इस तरह देश में आर्थिक संकट गहराता गया।

अधिकार भोगियों की आय : फ्रांस की लगभग आधी कृषि-जमीन पादरी एवं कुलीन वर्ग के पास थी। इस जमीन से आय होने पर भी वे लोग सरकार को टाइले या भूमिकर, कैपिटेशन या उत्पादन कर, विटिंयेमे या आयकर आदि नहीं देते थे। इसके विपरीत सरकार द्वारा प्रद्त्त सभी सुयोग-सुविधाओं का भोग किया करते थे।

तृतीय श्रेणी पर करों का बोझ : राष्ट्र, गिरजा एवं सामन्त जमीनदार वर्ग तृतीय श्रेणी से विभिन्न तरह के कर वसूलते थे। टाइले, कैपिटेशन, विटिंयेमे जैसे प्रत्यक्ष कर के अलावा गैबेला या नमक-कर, खाद्य-वस्तुओं पर कर, पादरियों द्वारा टाइद या धर्मकर, एइद या शराब, तम्बाकू आदि पर कर, कर्वि या मालिक की जमीन पर बेगारी करना, सामन्त प्रभुओं के रास्ता घाट व्यवहार कर फसलों की कटाई कर, सेवा कर यानी प्रत्येक वस्तु पर कर आदि देने पर बेचारे किसान के पास मात्र 20 % पैसा बचता था।

मध्यमवर्ग की दुखद स्थिति :अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने क्रांति के पहले फ्रांस की आर्धिक दशा के बारे में कहा था अभंत अर्थनीति का जादूघर’। दोषपूर्ण अर्थनीति के कारण देश में महँगाई की लगातार वृद्धि से गरीबों का जीना मुश्किल हो गया था। दूसरी तरफ धनी बुर्जुआ, व्यापारी, पूँजीपति आदि स्वतंत्र व्यापार के लिये टैक्स एवं नियंत्रण को खत्म करने की माँग करने लगे।

प्रश्न 6.
फ्रांसीसी क्रांति के राजनैतिक कारणों की आलोचना करो।
अथवा
फ्रांसीसी क्रांति की उत्पत्ति में राजतंत्र कितना जिम्मेदार था ?
उत्तर :
अठारहवीं सदी में फ्रांस में वुर्वों वंश के नेतृत्व में स्वेच्छाचारी राजतंत्र प्रतिष्ठित हुआ था। ईश्वरीय क्षमता में विश्वांसी इस राजतंत्र के राजा देश के सर्वोच्च शासक, कानून निर्माता एवं प्रधान विचारक थे। शासन व्यवस्था में आम जनता के विचारों का कोई मूल्य नहीं था।

फ्रांसीसी क्रांति का राजनैतिक कारण :
राजाओं की कमजोरी : फ्रांसीसी राजा लुई चौदहवें (1643-1715 ई०) निरकुश स्वेच्छाचारी थे। उनका कहना था कि, “मैं ही राष्ट्र हूँ।” आलसी एवं विलासी राजा लुई 15 वें (1715-74 ई०) अपनी छोटी पत्नी मादाम द पम्पादूर द्वारा प्रभावित होकर शासन चलाने से प्रशासन में भष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद का चारों ओर बोलबाला था। इसके बाद :अयोग्य राजा लुई सोलहवें ने (1774-1793 ई०) राजतंत्र के पतन को और करीब ला दिया।

कुलीन वर्ग का वर्चस्व : प्रशासन के हर विभाग में कुलीन वर्ग के वर्चस्व ने शासन-व्यवस्था में अनुशासनहीनता पैदा किया। प्रशासन पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुका था। इन्टेंडेण्ट नामक भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी बहुत शक्तिशाली हो गये थे। कुलीन राजपुरुष वर्ग ‘लेत्र द कैचे’ नामक एक राजकीय फरमान द्वारा किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करके बिना विचार किये बन्दी बनाकर रखने का अधिकार पा गये थे।

त्रुटिपूर्ण कानून : अठारहवीं सदी में फ्रांसीसी कानून अत्यंत त्रुटिपूर्ण, जटिल एवं कठिन था। देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न प्रकार के कानून प्रचलित थे। ये बड़े कठोर एवं निष्ठुर थे। सामान्य अपराध के लिये भी कई बार मृत्युदण्ड भी दिया जाता था।

न्यायपालिका में त्रुटियाँ : फ्रांसीसी न्यायपालिका अत्यन्त जटिल, खर्चीली एवं भ्रष्ट थी। अधिकांश न्यायाधीश बेईमान, झूठे एवं भ्रष्ट थे। अपराधियों से घूस लेना, जुर्माना वसूलना आदि के द्वारा भ्रष्ट न्यायाधीश पर्याप्त धन कमाते थे।

फिजूलखर्ची : फ्रांसीसी राजपरिवार बहुत ही खर्चीला था। राजपरिवार के सेवाकार्य के लिये 18 हजार कर्मचारी नियुक्त थे। रानी मेरी एंत्वायनेत के ही 500 कर्मचारी थे। राजपरिवार की इस बेतहाशा खर्च करने की आदत ने देश के आर्थिक संकट को और गंभीर बना दिया।

त्रुटिपूर्ण राजव्यवस्था : देश की 95 % सम्पदा पादरी वर्ग एवं कुलीनवर्ग के पास होने पर भी उन्हें सरकार को किसी प्रकार का बाध्यतामूलक कर नहीं देना होता था। फलस्वरूप समस्त करों का बोझ तृतीय सम्रदाय के ऊपर लाद दिया गया था। इसके अलावा पादरी एवं कुलीन सामन्तों को अनेक तरह के कर-संग्रह करने का अधिकार तृतीय सम्पदाय से था।

लुई सोलहवें की भूमिका : देश की आर्थिक परिस्थिति अत्यन्त खराब हो जाने पर राजा लुई सोलहवें के लिए उचित था कि वह पादरीएवं कुलीन वर्ग के विशेष अधिकार को खत्म करके और उनके ऊपर कर लगाकर देश की आर्थिक संकट को दूर करने के ऊपर ध्यान दें, किन्तु राजा द्वारा कोई उचित कदम नहीं उठाये जाने से जनता का आक्रोश और बढ़ गया।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 7.
फ्रांस में क्रांति से पहले विभिन्न सामाजिक श्रेणी एवं सामाजिक विषमता का रूप कैसा था ?
अथवा
फ्रांस में सामाजिक विषमता तथा धन के असमान वितरण के विरुद्ध जनमत का विकास कैसे हुआ ?
उत्तर :
कांति के पहले फ्रांसीसी समाज मध्ययुगीन एवं सामन्तवादी था। फ्रांस की इस समाजव्यवस्था को दार्शनिक वाल्टेयर ने ‘राजनैतिक कारागार’ कहा है। समाज में चारों ओर असमानता का बोल-बाला था।
समाज में श्रेणी एवं असमानता : इस समय फ्रांस में मूलतः तीन वर्ग था –

(i) पादरी वर्ग या प्रथम श्रेणी
(ii) कुलीन वर्ग या द्वितीय श्रेणी एवं
(iii) बुर्जुआ एवं कृषक सम्रदाय या तृतीय श्रेणी। इन तीनों श्रेणियों में पादरी एवं कुलीन सम्रदाय को विशेष अधिकार प्राप्त था एवं तृतीय श्रेणी अधिकारहीन श्रेणी थी।

पादरी सम्रदाय या प्रथम श्रेणी : फ्रांसीसी समाज व्यवस्था में प्रथम सम्रदाय या श्रेणी पादरियों की थी। इसकी जनसंख्या एक लाख बीस हजार थी यानी फ्रांस की कुल आबादी के 0.5 % थी। ये संख्या में अति अल्प होते हुए भी फ्रांस की कुल कृषि जमीन का 1 / 5 भाग इनके अर्थात गिरजा के कब्जे में था। इसके लिये पादरीवर्ग कोई नियमित कर नहीं देते थे। ‘कांट्रैक्ट ऑफ पोइसी’ नामक एक समझौते के अनुसार ये लोग राजा को स्वेच्छाकर देते थे। गिरजा की अथाह सम्पत्ति एवं आय का पादरी वर्ग भोग करता था। इसके अलावे भी ये जनता से टाईद या धर्मकर, मृत्युकर, विवाहकर आदि वसूल करते थे।

कुलीन सम्रदाय या द्वितीय श्रेणी : कुलीन सम्र्रदाय फ्रांस का द्वितीय वर्ग था। इनकी संख्या कांति के पहले 3 लाख 50 हजार अर्थात देश की कुल आबादी का केवल 1.5% थी। इनकी आबादी कम होने पर भी फ्रांस की कुल कृषि जमीन का 1 / 2 भाग इनके दखल में था। इसके लिये उन्हें सरकार को कोई भूमिकर नहीं देना पड़ता था। कुलीन वर्ग अपने वंशमर्यादा के प्रभाव से कई तरह का सुयोग-सुविधा (Privilege) भोग करते थे एवं कई प्रकार के सामन्ती कर की वसूली भी करते थे। प्रशासनिक, न्यायालय एवं सरकारी नौकरियों में उच्च पदों पर इनका आधिपत्य था।

बुर्जुआ एवं कृषक सम्रदाय या तृतीय श्रेणी : फ्रांसीसी समाज व्यवस्था में एक तरफ बुर्जुआ या मध्यमवर्ग, व्यवसायी, बुद्धिजीवी आदि धनी वर्ग एवं दूसरी तरफ गरीब, सर्वहारा, कृषक, मजदूर, दरिद्र वर्ग तृतीय श्रेणी के अन्तर्गत थे। धनी बुर्जुआ श्रेणी व्यवसाय-व्यापार के जरिये पर्याप्त धन-दौलत के मालिक होते हुए भी वे लोग कभी भी कुलीन वर्ग की तरह सामाजिक मर्यादा एवं अधिकार नहीं पाते थे। तृतीय श्रेणी का बड़ा अंश दरिद्र कृषक, श्रमिक, कारीगर, दुकानदार, दिन-मजदूर आदि का था। अनाहार, अर्द्धाहार, अत्याचार एवं शोषण से तंग यह श्रेणी फ्रांस की प्रचलित समाज व्यवस्था से विक्षुब्ध थी।

प्रश्न 8.
फ्रांसीसी क्रांति में दार्शनिकों की भूमिका का मूल्यांकन करो।
अथवा
फ्रांसीसी क्रांति में दार्शनिकों की भूमिका के पक्ष एवं विपक्ष में तर्क दो।
उत्तर :
इतिहासकारों के एक वर्ग की यह सोच है कि क्रांति के पहले फ्रांस में माण्टेस्क्यू, वाल्टेयर, रूसो, वेनिस दिदेरो, डि’ एलेमवर्ट सहित कई दार्शनिक अपनी रचनाओं के माध्यम से फ्रांस की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक भूल-तुटियों को साधारण लोगों के सामने रखकर उनकी आँखें खोल देने से फ्रांस में क्रांति हुई थी, किन्तु इतिहासकारों का एक दूसरा वर्ग फ्रांस में क्रांति के प्रति दार्शनिकों की भूमिका को उतना महत्व नहीं देते हैं।

मूल्यांकन :
दार्शनिकों की भूमिका के पक्ष में तर्क :इतिहासकार टेइन, रूस्तान, राईकर, सेतोवियाँ, मादेला, जोरेसा, मातिए, लाबुज, मर्ने आदि प्रमुख इतिहासकारों का कहना है कि फ्रांस की क्रांति के पीछे दार्शनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इनका तर्क है –
जनता की जागरुकता : किसी समाज एवं राष्ट्रव्यवस्था में असमानता रहने से ही किसी देश में क्रांति नहीं हो जाती है। इन भूल-नुटियों के खिलाफ राष्ट्र की जनता जागरुक हो जाने पर इस व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाने लगती हैं। फ्रांस के दार्शनिकों जनता को जागरूक करने का ही काम किया था।

दार्शनिकों की लोकप्रियता : अठारहवीं सदी में फ्रांस में कई दार्शनिकों के विचार बहुत ही लोकप्रिय थे। पेरिस की चाय-दुकानों एव क्लबों में भी दार्शनिकों के कथन आदि की चर्चाएँ होती थीं और इन सब जगहों से उनके विचार देश की जनता में फैल जाते थे।

दार्शनिकों की मौलिक चिन्ता : फ्रांस के तत्कालीन दार्शनिक मौलिक चिन्तनधारा के प्रतीक एवं आदर्शवादी थे, अतः उनके विचारों में अन्तर होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद सामाजिक एवं राष्ट्रीय अन्याय-अविचार के बारे में सभी दार्शनिक एकमत थे।

दार्शनिकों की भूमिका के विपक्ष में तर्क : लेफेवयर, मनियार, मार्स स्टीफेंस, मैले-द-पान आदि इतिहासकार फ्रांस की क्रांति में दार्शनिकों की भूमिका को नहीं मानते हैं। उनका तर्क हैं :
प्रत्यक्ष सम्पर्क का अभाव : फ्रांस के दार्शनिक फ्रांस के पुरातनतंत्र एवं समाज व्यवस्था की भूल-त्रुटियों का उल्लेख करने पर भी वे लोग खुद क्रांति के नेता या क्रांतिकारी नहीं थे।
पुरातनतंत्र : फ्रांस की सामाजिक, आर्थिक एवं राष्ट्रीय व्यवस्था में जो असंख्य दोष थे, उससे ही फ्रांस में क्रांति हुई। इसमें दार्शनिकों की भूमिका नगण्य थी। मर्स स्टिफेंस ने कहा है, ‘ ‘फ्रांस में क्रांति का मूल कारण अर्थनैतिक एवं राजनैतिक था, दार्शनिक एवं सामाजिक नहीं।”
दार्शनिकों में मतांतर : तत्कालीन फ्रांस के कई अग्रणी दार्शनिकों के मतों में अन्तर था। माण्टेस्क्यू नियमतांत्रिक राजतंत्र के समर्थक थे जबकि दूसरी ओर रूसो प्रजातंत्र के समर्थक थे।
निरक्षरता : फ्रांस में क्रांति के पहले साधारण लोगों की आबादी प्राय: निरक्षर ही थी। वे लोग दार्शनिकों की रचनाएँ नहीं पढ़ सकते थे। अतः दार्शनिकों के मतवाद फ्रांस के साधारण लोगों के बीच कैसे फैल सकता था।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 9.
फ्रांस की नयी संविधान सभा (1791-1792 ई०) का परिचय दो।
उत्तर :
फ्रांस की कांति के समय तृतीय सम्पदाय के प्रतिनिधि 17 जून 1789 को अपनी सभा को राष्ट्रीय सभा के रूप में घोषित किया।
फ्रांस की नयी संविधान सभा :
नयी संविधान सभा : 20 जून, 1789 ई० को टेनिस कोर्ट के शपथ ग्रहंण के बाद फ्रांसीसी संविधान सभा ने फ्रांस के लिये एक नया संविधान रचने का कार्य आरंभ किया। फ्रांस के नये संविधान के अनुसार सक्रिय नागरिकों के वोट से नई संविधान सभा गठित हुई। इनकी सदस्य संख्या 745 थी।

विधायिका की समस्या : फ्रांस की नयी विधायिका आरंभ से ही विभिन्न समस्याओं के सम्मुखीन हुई। जैसे

  1. संविधान सभा के किसी सदस्य को नई विधायिका में जगह नहीं दी गयी। फलस्वरूप विधायिका में योग्य एवं दक्ष लोगों की कमी थी।
  2. विधायिका के नये सदस्यों के साथ राजा का विरोध लगा रहता था।
  3. देश की जनता प्रजातांत्रिक शासन चाहती थी, किन्तु विधायिका के सदस्य प्रजातंत्र के इच्छुक नहीं थे।

विभिन्न दल : 745 सदस्यों वाली विधायिका में प्रमुख चार दल थे।

  1. दक्षिणीपंथी दल : नियमतान्त्रिक राजतंत्र के समर्थक इस दल की सदस्य संख्या 264 थी।
  2. जैकोबिन दल : उग्र वामपंथी जैकोबिन दल राजतंत्र विरोधी एवं प्रजातंत्र का समर्थक था। इस दल की सदस्य संख्या 136 थी।
  3. जिरन्दिष्ट दल एवं
  4. मध्यपंथी दल : व्रिसो के नेतृत्व में वामपंथी जिरन्दिष्ट एवं निरपेक्ष मध्यपंथी दल की सदस्य संख्या 345 थी।

राजा के साथ विरोध : नई विधायिका के प्रथम अधिवेशन में ही विधायकों के साथ शींघ्र ही राजा का विरोध शुरू हो गया। इस समय विधायिका ने दो कानून पास किये।
1. पादरियों को नये सिरे से ‘पादरियों का संविधान’ के प्रति शपथ लेनी होगी।
2. एमिग्री अर्थात देशत्यागी कुलीनों के दो महीने के भीतर वापस नहीं लौटने पर उनकी सम्पत्ति जब्त कर ली जायेगी साथ ही देशद्दोह का अभियोग एवं मृत्युदण्ड भी हो सकता है। राजा ने दोनों कानून पर ‘विटो’ लगाकर उसे स्थगित कर दिया।

युद्ध को लेकर मतभेद : फिउलैण्ट का मानना था कि विदेशी युद्धों को जीतने पर ही फ्रांस के भीतर के संकट को दूर करना सम्भव है। इसी से यह दोनों दल विदेशी शक्तियों के साथ युद्ध करने के पक्षपाती थे। दूसरी तरफ जैकोबिन दल का मानना था कि युद्ध कांति को पीछे कर देगा। इसीलिये वे लोग युद्ध के विरोधी थे।

राजमहल पर आक्रमण : फिउलैण्ट मंत्रिमंडल के बाद जिरन्दिष्ट मंत्रिमंडल गठित (1792 ई० मार्च) होने पर राजा लुई सोलहवें ने इस मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों के आचरण से विक्षुब्ध होकर उन्हें बर्खास्त कर दिया (13 जून 1792 ई०)। इससे उत्तेजित होकर जैकोबिन दल के नेतृत्व में राजमहल पर आक्रमण (10 अगस्त 1792 ई०) हुआ।

WBBSE Class 9 History Solutions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 10.
फ्रांसीसी क्रांति के परिणाम के बारे में चर्चा करो।
उत्तर :
1789 ई० में फ्रांस में क्रांति के द्वारा पुरातनतंत्र को ध्वंस करके आधुनिक चिन्ता-चेतना सम्पन्न एक नये युग का आरंभ हुआ। इतिहासकार डेविड टामसन का कहना है कि प्रथम विश्वयुद्ध के पहले फ्रांस की क्रांति ही आधुनिक यूरोप के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना है।
सामन्ततंत्र का अन्त : क्रांति के फलस्वरूप फ्रांस में मध्ययुगीन सामन्ततंत्र का अन्त हुआ। पादरी एवं कुलीन सम्पद्राय के विशेष अधिकार, सामाजिक असमानता इत्यादि खत्म हुए। सभी सामन्ततान्त्रिक कर समाप्त कर दिये गये। व्यक्ति स्वाधीनता, कानून की दृष्टि में सभी समान, सरकारी नौकरियों में योग्यता का आधार बनाया गया।

प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा : 26 अगस्त, 1789 ई० को ‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ घोषणापत्र द्वारा राजतंत्र के बहुत से अधिकार खत्म किये गये। 1791 ई० में नियमतांत्रिक राजतंत्र प्रतिष्ठित हुई एवं 1792 ई० में राजतंत्र का अन्त एवं प्रजातंत्र की प्रतिष्ठा हुई।

गिरजा घरों के आधिपत्य का अंत : फ्रांसीसी क्रांति के फलस्वरूप सीमाहीन भ्रष्ट गिरजा व्यवस्था एवं पादरीतंत्र की शक्ति समाप्त हुई। गिरजा की सम्पत्ति को जब्त करके, जनता द्वारा पादरियों का निर्वाचन एवं सरकार द्वारा उनके वेतन भत्ते की व्यवस्था हुई।

जनता का हक : क्रांति के फलस्वरूप स्वेच्छांचारी राजतंत्र के बदले में सार्वभौम प्रजातंत्र की स्थापना हुई। फ्रांसीसी राष्ट्रीय सभा 1789 ई० में ‘व्यक्ति एवं नागरिक के अधिकार’ घोषणापत्र के माध्यम से प्रजातंत्र की घोषणा करके व्यक्ति स्वाधीनता, समाचार पत्र की स्वाधीनता, अभिमत व्यक्त करमे की स्वाधीनंता, सभा-समिति गठन करने का अधिकार तथा मताधिकार आदि स्वीकृत हुआ।

सुशासन प्रतिष्ठा : फ्रांसीसी क्रांति के कारण फ्रांस में सुशासन की प्रतिष्ठा हुई। फ्रांस में सर्वत्र एक ही तरह की मुद्रा एवं कानून लागू हुआ। प्रशासनिक नियोग में योग्यता को आधार के रूप में स्वीकृति मिली।

राष्ट्रीयता का प्रचार-प्रसार : राजतंत्र के बदले देश एवं राष्ट्र के प्रति फ्रांसीसियों में भावना व्याप्त हुई। राजतंत्र के विरोध में फ्रांसीसी जनता एकजुट होकर आन्दोलन आरंभ किया। इस तरह फ्रांस में देशप्रेम एवं राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ।

समानता, मित्रता एवं स्वाधीनता का आदर्श : फ्रांसीसी क्रांति के द्वारा फ्रांस में समानता, भाईचारा एवं आजादी का आदर्श लोकप्रिय हुआ। कांति ने पादरी एवं कुलीन वर्ग के विशेष अधिकार, सामाजिक असमानता आदि को दूर कर सामाजिक समानता की प्रतिष्ठा की।

शिक्षा, संस्कृति की अग्रगति : फ्रांसीसी क्रांति ने शिक्षा व्यवस्था को गिरजा से मुक्त करके देश के नियन्त्रण में लाया। जैकोविन ने प्रधानत: प्राथमिक शिक्षा एवं थर्मीडोरीय उच्च शिक्ष के ऊपर महत्व देकर फ्रांस की शिक्षा-व्यवस्था में अग्रगति एवं साहित्य, विज्ञान, शिल्पकला आदि के प्रचार-प्रसार में भी विकास किया।

पूंजीवादी अर्थनीति का विकास : फ्रांस में पहले मध्यवित्त श्रेणी के नेतृत्व में क्रांति तेज हुई। बाद में बुर्जुआ श्रेणी ने ही क्रांति का सफल भोग किया। संविधान सभा में बुर्जुआ श्रेणी ने देश में पूंजीवादी अर्थ व्यवस्था को विकसित किया।

साम्यवाद का आदर्श : इंतिहासविद क्रपोटकिन के मत से, आधुनिककाल के साम्यवाद एवं समाजवाद की धारणा का सोत फ्रांसीसी कांति है। वेवीउफु ने क्रांति के समय फ्रांस में ऐसी धारणा का प्रचार किया।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ can serve as a valuable review tool before exams.

राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
‘लीग ऑफ सोसाइटी’ की स्थापना हुई थी –
(a) न्यूयार्क में
(b) इंग्लैण्ड में
(c) फ्रांस में
(d) जर्मनी में
उत्तर :
(b) इंग्लैण्ड में

प्रश्न 2.
14 सूत्री सिद्धान्तों को किसने दिया था ?
(a) चर्चिल
(b) वाशिंगटन
(c) रूजवेल्ट
(d) विल्सन
उत्तर :
(d) विल्सन

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 3.
राष्ट्रसंघ का सदस्य कभी नहीं था –
(a) इटली
(b) जर्मनी
(c) जापान
(d) अमेरिका
उत्तर :
(d) अमेरिका

प्रश्न 4.
‘लीग ऑफ नेशन्स’ की स्थापना हुई थी –
(a) सन् 1900 ई० में
(b) सन् 1910 ई० में
(c) सन् 1920 ई० में
(d) सन् 1930 ई० में
उत्तर :
(c) सन् 1920 ई० में

प्रश्न 5.
राष्ट्रीयसंघ के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायलय में कितने न्यायाधीश थे ?
(a) 10
(b) 15
(c) 20
(d) 25
उत्तर :
(b) 15

प्रश्न 6.
‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का मुख्यालय है –
(a) लन्दन में
(b) न्यूयार्क में
(c) पेरिस में
(d) मास्कों में
उत्तर :
(b) न्यूयार्क में

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 7.
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्यों की संख्या है –
(a) 193
(b) 199
(c) 190
(d) 180
उत्तर :
(a) 193

प्रश्न 8.
राष्ट्रसंघ की स्थापना हुइ थी।
(a) 1815 ई०
(b) 1820 ई०
(c) 1920 ई०
(d) 1945 ई०
उत्तर :
(b) 1820 ई०

प्रश्न 9.
24 अक्टूबर, 1945 प्रसिद्ध है –
(a) राष्ट्र संघ की स्थापना के लिए
(b) संयुक्त राष्ट्र दिवस के लिए
(c) संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लिए
(d) संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए
उत्तर :
(b) संयुक्त राष्ट्र दिवस के लिए

प्रश्न 10.
राष्ट्रसंघ की स्थापना किस उद्देश्य से की गई ?
(a) भविष्य में विश्धयुद्ध को रोकने के लिए
(b) विभिन्न राष्ट्रों में प्रतिद्वंद्विता बढ़ाने के लिए
(c) हथियारों की होड़ बढ़ाने के लिए
(d) द्वितीय विश्च युद्ध की तैयारी के लिए
उत्तर :
(a) भविष्य में विश्चयुद्ध को रोकने के लिए

प्रश्न 11.
मास्को सम्मेलन कब आयोजित हुआ था ?
(a) 1941 ई०
(b) 1942 ई०
(c) 1943 ई०
(d) 1944 ई०
उत्तर :
(c) 1943 ई०

प्रश्न 12.
सेन फ्रांसिस्को सम्मेलन कब आयोजित हुआ था ?
(a) 1945 ई०
(b) 1950 ई०
(c) 1955 ई०
(d) 1960 ईo
उत्तर :
(a) 1945 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 13.
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई –
(a) 24 अक्टूबर, 1945 ई०
(b) 25 अप्रैल, 1945 ई०
(c) 26 जून, 1945 ई०
(d) 9 अक्टूबर 1945 ई०
उत्तर :
(a) 24 अक्टूबर, 1945 ई०

प्रश्न 14.
‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ की पहली बैठक हुई थी –
(a) लन्दन में
(b) न्यूयार्क में
(c) पेरिस में
(d) मास्को में
उत्तर :
(a) लन्दन में

प्रश्न 15.
राष्ट्रपति विल्मन के चौदह-सूत्री कार्यक्रम का अन्तिम सूत्र से सम्बन्धित था-
(a) राष्ट्र संघ
(b) संयुक्त संघ
(c) शान्ति सम्मेलन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) राष्ट्र संघ

प्रश्न 16.
के प्रयासों से ही राष्ट संघ की स्थापना हो सकी।
(a) लार्ड बाइस
(b) विल्सन
(c) टूमैन
(d) स्टालिन
उत्तर :
(b) विल्सन

प्रश्न 17.
‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर’ का आयोजन में हुआ था।
(a) न्यूयार्क
(b) याल्टा
(c) पेरिस
(d) लन्दन
उत्तर :
(a) न्यूयार्क

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 18.
संयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य हैं –
(a) 2
(b) 4
(c) 5
(d) 10
उत्तर :
(c) 5

प्रश्न 19.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में कितनी धाराएँ हैं ?
(a) 109
(b) 110
(c) 111
(d) 112
उत्तर :
(c) 111

प्रश्न 20.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर कितने राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए ?
(a) 50
(b) 51
(c) 52
(d) 53
उत्तर :
(a) 50

प्रश्न 21.
राष्ट्र संघ के सचिवालय का प्रधान कार्यालय कहाँ स्थित हैं?
(a) पेरिस
(b) जेनेवा
(c) बर्लिन
(d) न्यूयार्क
उत्तर :
(b) जेनेवा

प्रश्न 22.
राष्ट्रसंघ का बजट पास होता था –
(a) आम सभा में
(b) परिषद् में
(c) सचिवालय में
(d) अन्तर्राट्ट्रीय श्रम संघ में
उत्तर :
(c) सचिवालय में

प्रश्न 23.
जर्मनी की मुद्रा का नाम था –
(a) लीरा
(b) पाउण्ड
(c) मार्क
(d) डॉलर
उत्तर :
(a) लीरा

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 24.
संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य कितने अंग हैं –
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छ:
उत्तर :
(d) छ:

प्रश्न 25.
पलाऊ सम्मेलन के बाद किसका कार्यभार समाप्त हो गया ?
(a) सचिवालय
(b) संरक्षण परिषद्
(c) सुरक्षा परिषद्
(d) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
उत्तर :
(d) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय

प्रश्न 26.
चौदह सूत्री शर्तों की घोषणा की –
(a) चर्चिल ने
(b) वुड्रो विल्सन ने
(c) रुजवेल्ट ने
(d) स्टालिन ने
उत्तर :
(b) वुड्रो विल्सन ने

प्रश्न 27.
राष्ट्रसंघ की स्थापना में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी –
(a) लेनिन की
(b) चर्चिल की
(c) रुजवेल्ट की
(d) वुड्रो विल्सन की
उत्तर :
(d) वुड्रो विल्सन का

प्रश्न 28.
लीग कामेनेण्ट में धारा/अनुच्छेद हैं –
(a) 26
(b) 27
(c) 28
(d) 29
उत्तर :
(a) 26

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 29.
राप्ट्रसंघ के प्रथम अधिवेशन में सदस्य संख्या थी –
(a) 30
(b) 33
(c) 35
(d) 40
उत्तर :
(d) 40

प्रश्न 30.
द्वितीय विश्वयुद्ध के ठीक पहले (1939 ई०) राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या थी –
(a) 42
(b) 46
(c) 50
(d) 51
उत्तर :
(b) 46

प्रश्न 31.
राष्ट्रसंघ का सर्वाधिक शक्तिशाली विभाग था –
(a) लीग परिषद
(b) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
(c) महासभा
(d) सचिवालय
उत्तर :
(c) महासभा

प्रश्न 32.
राष्ट्रसंघ की महासभा के सदस्य वोट दे सकते थे –
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
उत्तर :
(a) 1

प्रश्न 33.
राश्टसंघ का अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय अवस्थित था –
(a) बर्लिन में
(b) लंद्न में
(c) पेरिस में
(d) हेग में
उत्तर :
(d) हेग में

प्रश्न 34.
19वीं सदी की प्रमुख प्रवृत्ति थी –
(a) राष्ट्रीयता
(b) राजतंत्र
(c) साम्यवाद
(d) बंधुत्व
उत्तर :
(a) राट्ट्रीयता

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 35.
राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई –
(a) 1929 ई० में
(b) 1919 ई० में
(c) 1949 ई० में
(d) 1909 ई० में
उत्तर :
(b) 1919 ई० में

प्रश्न 36.
राघ्ट्रसंघ वैधानिक रूप से अस्तित्व में आया –
(a) 10 अप्रैल 1919 ई० से
(b) 5 अफैल 1920 ई० से
(c) 10 जनवरी 1920 ई० से
(d) 16 अमैल 1919 ई० से
उत्तर :
(c) 10 जनवरी 1920 ई० से

प्रश्न 37.
राष्ट्रसंघ के प्रारंभिक सदस्य थे –
(a) 19
(b) 33
(c) 43
(d) 65
उत्तर :
(c) 43

प्रश्न 38.
राष्ट्रसघ के प्रमुख अंग थे –
(a) तीन
(b) दो
(c) पाँच
(d) कई
उत्तर :
(a) तीन

प्रश्न 39.
राष्ट्रसंघ की अंतिम बैठक हुई –
(a) 1929 ई० में
(b) 1919 ई० में
(c) 1949 ई० में
(d) 1909 ई० में
उत्तर :
(c) 1949 ई० में

प्रश्न 40.
राष्ट्रसंघ की साधारण सभा की समितियाँ थीं –
(a) 6
(b) 2
(c) 5
(d) कई
उत्तर :
(a) 6

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 41.
राष्ट्रसंघ का स्थायी कार्यालय था –
(a) वर्साय में
(b) लंदन में
(c) रोम में
(d) जेनेवा में
उत्तर :
(d) जेनेवा में

प्रश्न 42.
अन्तर्राप्र्रीय न्यायालय की स्थापना हुई –
(a) 1929 ई० में
(b) 1921 ई० में
(c) 1933 ई० में
(d) 1920 ई० में
उत्तर :
(b) 1921 ई० में

प्रश्न 43.
राष्ट्रसंघ लगभग मृतप्राय हो चुका था –
(a) 1929 ई० में
(b) 1921 ई० में
(c) 1933 ई० में
(d) 1938 ई० में
उत्तर :
(d) 1938 ई० में

प्रश्न 44.
अटलांटिक चार्टर का संयुक्त घोषणापत्र तैयार किया था –
(a) रूजवेल्ट-स्टालिन ने
(b) रूजवेल्ट-चर्चिल ने
(c) स्टालिन-चर्चिल ने
(d) टूमैन-स्टालिन ने
उत्तर :
(b) रूजवेल्ट-चर्चल ने

प्रश्न 45.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के अंग बनाये गये हैं –
(a) दो प्रकार के
(b) चार प्रकार के
(c) पाँच प्रकार के
(d) छह प्रकार के
उत्तर :
(d) छह प्रकार के

प्रश्न 46.
संयुक्त राष्ट्रसंघ की साधारण सभा की बैठक प्रति वर्ष होती है –
(a) अगस्त में
(b) नवम्बर में
(c) दिसम्बर में
(d) सितम्बर में
उत्तर :
(d) सितम्बर में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. वुडरो विल्सन __________के राष्ट्रपति थे।
उत्तर : अमेरिका।

2. राष्ट्रसंघ की स्थापना __________में हुई थी।
उत्तर : 1920 ई०।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

3. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना__________ नगर में की गई।
उत्तर : हेग।

4. संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में __________स्थायी सदस्य हैं।
उत्तर : पाँच।

5. सुरक्षा परिषद में वीटों का अधिकार सिर्फ __________सदस्यों को है।
उत्तर : स्थायी।

6. __________ शांति सम्मेलन में राष्ट्रसंघ का गठन हुआ।
उत्तर : पेरिस

7. राष्ट्रसंघ के __________उद्देश्य थे।
उत्तर : तीन

8. राष्ट्रसंघ का कार्यालय __________में धा।
उत्तर : जेनेवा

9. राजनीतिक विषयों पर निर्णय __________लेती थी।
उत्तर : साधारण सभा

10. किसी भी राष्ट्र को राष्ट्रसंघ का सदस्य बनाने के लिये __________मत आवश्यक था।
उत्तर : 2/3

11. राष्ट्रसंघ केवल __________वर्षों तक ही कायम रह सका।
उत्तर : 20

12. __________ने राष्ट्रसंघ की उपेक्षा की थी।
उत्तर : अमेरिका।

13. फरवरी, 1945 ई० में__________ में रुजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन के बीच सम्मेलन हुआ।
उत्तर : याल्टा।

14. संयुक्त राष्ट्रसंघ के गठन का अंतिम कदम __________के सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन में उठाया गया।
उत्तर : अमेरिका

15. अटलांटिक चार्टर के मुख्य__________उद्देश्य थे ।
उत्तर : 8

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. राष्ट्रसंघ का प्रधान कार्यालय हेग में था।
उत्तर : False

2. संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना 1945 ई० में हुआ था।
उत्तर : True

3. अटलांटिक चार्टर घटना 1914 ई० में हुई थी।
उत्तर : True

4. वाशिंगटन सम्मेलन 1942 ई० में हुआ था।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

5. विटो पावर उपयोग करने वाले आठ राष्ट्र हैं।
उत्तर : False

6. संयुक्त राष्ट्रसंघ के प्रथम महासचिव ट्रीगवीली थे।
उत्तर : False

7. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालयों में जजों की संख्या 15 है ।
उत्तर : True

8. सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों की संख्या 10 है ।
उत्तर : True

9. सुरक्षा परिषद में सदस्यों की संख्या 10 है।
उत्तर : False

10. महत्वपूर्ण विषयों पर 2/3 बहुमत आवश्यक है ।
उत्तर : True

11. यू०एन०ओ० की स्थापना 1941 ई० में हुई।
उत्तर : False

12. राष्ट्रसंघ के पास स्वयं की सेना थी ।
उत्तर : False

13. निरस्त्रीकरण का पहला सम्मेलन 1932 ई० में हुआ।
उत्तर : True

14. राष्ट्रसंघ ने बड़े देशों की समस्या का निवारण आसानी से किया ।
उत्तर : False

15. राष्ट्रसंघ की सभा की बैठक वर्ष में दो बार होती थी।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

16. राष्ट्रसंघ की स्थापना जून 1919 ई० में हुई थी।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. राष्ट्रसंघ की स्थापना 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना
B. राश्ट्रसंघ का कार्यालय 2. 6 समितियाँ
C. साधारण सभा 3. जून 1919 ई०
D. सन् 1921 ई० 4. जेनेवा में

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. राष्ट्रसंघ की स्थापना 3. जून 1919 ई०
B. राश्ट्रसंघ का कार्यालय 4. जेनेवा में
C. साधारण सभा 2. 6 समितियाँ
D. सन् 1921 ई० 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. अमेरिका के राश्ट्रपति 1. चर्चिल
B. बिटेन के प्रधानमत्री 2. रूजवेल्ट
C. रूस के राष्ट्रपति 3. स्टालिन
D. अमेरिका में 4. सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. अमेरिका के राश्ट्रपति 2. रूजवेल्ट
B. बिटेन के प्रधानमत्री 1. चर्चिल
C. रूस के राष्ट्रपति 3. स्टालिन
D. अमेरिका में 4. सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 3.

स्सम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
A. जेनेवा में 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
B. नीदरलैंण्ड के दि हेग में 2. UNO सचिवालय
C. फरवरी 1945 ई० 3. सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य
D. पाँच 4. याल्टा सम्मेलन

उत्तर :

स्सम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
A. जेनेवा में 2. UNO सचिवालय
B. नीदरलैंण्ड के दि हेग में 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
C. फरवरी 1945 ई० 4. याल्टा सम्मेलन
D. पाँच 3. सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य

प्रश्न 4.

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1919 ई० 1. राष्ट्रसंघ का प्रथम अधिवेशन
B. 1920 ई० 2. केलग-व्रियाँ समझौता
C. 1925 ई० 3. राष्ट्रसंघ की स्थापना
D. 1928 ई० 4. लोकार्नो समझौता

उत्तर :

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1919 ई० 3. राष्ट्रसंघ की स्थापना
B. 1920 ई० 1. राष्ट्रसंघ का प्रथम अधिवेशन
C. 1925 ई० 4. लोकार्नो समझौता
D. 1928 ई० 2. केलग-व्रियाँ समझौता

प्रश्न 5.

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मंचुरिया 1. राष्ट्रसंघ का घोषणापत्र
B. अबिसीनिया ‘क’ 2. अटलांटिक चार्टर
C. प्रिन्स ऑफ वेल्स 3. लिटन कमीशन
D. वाशिंगटन सम्मेलन 4. इटली का आक्रमण

उत्तर :

स्सम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. मंचुरिया 3. लिटन कमीशन
B. अबिसीनिया ‘क’ 4. इटली का आक्रमण
C. प्रिन्स ऑफ वेल्स 2. अटलांटिक चार्टर
D. वाशिंगटन सम्मेलन 1. राष्ट्रसंघ का घोषणापत्र

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 7 राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
1. विल्सन (a) राष्ट्र संघ की स्थापना हुई।
2. 10 जनवरी 1920 में (b) राष्ट्र संघ का प्रधान कार्यालय है।
3. जेनेवा (c) राष्ट्र संघ का पहला अधिवेशन हुआ था।
4. 15 नवम्बर 1920 ई० (d) राष्ट्र संघ की स्थापना के ‘दिमाग की उपज’ थी।
5. 18 अप्रल 1946 ई० (e) राष्ट्र संघ का अन्तिम अधिवेशन हुआ था।

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
1. विल्सन (d) राष्ट्र संघ की स्थापना के ‘दिमाग की उपज’ थी।
2. 10 जनवरी 1920 में (a) राष्ट्र संघ की स्थापना हुई।
3. जेनेवा (b) राष्ट्र संघ का प्रधान कार्यालय है।
4. 15 नवम्बर 1920 ई० (c) राष्ट्र संघ का पहला अधिवेशन हुआ था।
5. 18 अप्रल 1946 ई० (e) राष्ट्र संघ का अन्तिम अधिवेशन हुआ था।

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions with Answers West Bengal Board

West Bengal Board Class 9 Life Science MCQ Questions with Answers WBBSE

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions in English Medium

  1. Life and its Diversity Class 9 WBBSE MCQ
  2. Levels of Organisation of Life Class 9 WBBSE MCQ
  3. Physiological Processes of Life Class 9 WBBSE MCQ
  4. Biology and Human Welfare Class 9 WBBSE MCQ
  5. Environment and its Resources Class 9 WBBSE MCQ

WBBSE Class 9 Life Science MCQ Questions in Bengali Medium

  1. जीवन एवं उसकी विविधता Class 9 WBBSE MCQ
  2. जीवन गठन के स्तर Class 9 WBBSE MCQ
  3. जीवन की शारीरिक क्रियाएँ Class 9 WBBSE MCQ
  4. जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण Class 9 WBBSE MCQ
  5. वातावरण तथा उसके संसाधन Class 9 WBBSE MCQ

WBBSE Class 9 Solutions

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद can serve as a valuable review tool before exams.

द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
द्वितीय विश्व युद्ध कब आरम्भ हुआ था ?
(a) 1 सितम्बर 1939 ई०
(b) 2 अक्टूबर 1940 ई०
(c) 15 अगस्त 1945 ई०
(d) 1 जून 1940 ई०
उत्तर :
(b) 2 अक्टूबर 1940 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 2.
रूस को राष्ट्रसंघ से कब निकाल दिया गया ?
(a) 29 सितम्बर 1938 ई०
(b) 15 अप्रैल 1939 ई०
(c) 23 अगस्त 1939 ई
(d) 26 जनवरी 1950 ई०
उत्तर :
(c) 23 अगस्त 1939 ई०

प्रश्न 3.
फांसीवादी की स्थापना किसने की थी –
(a) मुसोलिनी
(b) हिटलर
(c) मेजिनी
(d) लेनिन
उत्तर :
(a) मुसोलिनी

प्रश्न 4.
द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हो गया था –
(a) सन् 1919 ई० में
(b) सन् 1929 ई० में
(c) सन् 1939 ई० में
(d) सन् 1949 ई० में
उत्तर :
(c) सन् 1939 ई० में

प्रश्न 5.
27 अगस्त 1928 ई० को कौन सी संधि हुई ?
(a) पेरिस शांति समझौता
(b) वर्साय की संधि
(c) केलॉग-ब्रियाँ समझौता
(d) सेब्रे की संधि
उत्तर :
(c) केलॉग-ब्रियाँ समझौता

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 6.
नाजीवाद की स्थापना किसने की थी?
(a) मुसोलिनी
(b) हिटलर
(c) मेजिनी
(d) लेनिन
उत्तर :
(b) हिटलर

प्रश्न 7.
इटली में फासिस्ट दल की सहायता से सत्ता प्राप्त की थी –
(a) हिटलर ने
(b) मुसोलिनी ने
(c) लेनिन ने
(d) इनमें से किसी ने नहीं
उत्तर :
(b) मुसोलिनी ने

प्रश्न 8.
‘एशिया एशियाइयों के लिए’ का नारा किसने दिया ?
(a) चीन
(b) जापान
(c) भारत
(d) अमेरिका
उत्तर :
(b) जापान

प्रश्न 9.
ध्रुवी शक्ति में कितने देश थे ?
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5
उत्तर :
(b) 3

प्रश्न 10.
‘दो दुनिया के बीच होने वाले संघर्ष में समझौता नहीं हो सकता, दोनों में से केवल एक जीवित रहेगा। ” यह किसका कथन है –
(a) लेनिन का
(b) हिटलर का
(c) मुसोलिनी का
(d) मार्क्स का
उत्तर :
(c) मुसोलिनी का

प्रश्न 11.
नाटो की स्थापना कब हुई थी ?
(a) 1945 ई०
(b) 1948 ई०
(c) 1949 ई०
(d) 1954 ई०
उत्तर :
(c) 1949 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 12.
1940 में नार्वे और डेनमार्क पर कब्जा हुआ था –
(a) फ्रांस का
(b) जर्मनी का
(c) इटली का
(d) ब्रिटेन का
उत्तर :
(b) जर्मनी का

प्रश्न 13.
हालैण्ड और बेल्जियम पर मई 1940 ई० में अधिकार कर लिया था –
(a) मुसोलिनी ने
(b) हिटलर ने
(c) जनरल पिटेन ने
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) हिटलर ने

प्रश्न 14.
द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत हुआ –
(a) 6 अग्रस्त 1943 ई. को
(b) 28 अमैल 1945 ई. को
(c) 7 मई 1945 ई. को
(d) 14 अगस्त 1945 ई. को
उत्तर :
(d) 14 अगस्त 1945 ई को

प्रश्न 15.
6 और 9 अगस्त 1945 को क्रमशः हिरोशिमा और नागासाकी पर अणु बम गिराया गया –
(a) फ्रांस द्वारा
(b) बिटेन द्वारा
(c) रूस द्वारा
(d) अमेरिका द्वारा
उत्तर :
(d) अमेरिका द्वारा

प्रश्न 16.
तुष्टीकरण की नीति किन देशों ने अपनाई थी ?
(a) अमेरिका और रूस
(b) फ्रांस और अमेरिका
(c) अमेरिका और बिटेन
(d) फ्रांस और बिंटेन
उत्तर :
(d) फांस और ब्रिटेन

प्रश्न 17.
रूजवेल्ट अमेरिका के राष्ट्रपति कब हुए ?
(a) 1933
(b) 1939
(c) 1940
(d) 1941
उत्तर :
(a) 1933

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 18.
द्वितीय विश्व युद्ध में इटली कब पराजित हुआ ?
(a) 1941
(b) 1942
(c) 1943
(d) 1944
उत्तर :
(c) 1943

प्रश्न 19.
विश्व स्तर पर शान्ति स्थापना कायम करने के लिए 1945 में स्थापना की गई थी –
(a) राष्ट्र संघ की
(b) संयुक्त राष्ट्र संघ की
(c) संयुक्त राष्ट्र चार्ट की
(d) लीग ऑफ सोसाइटी की
उत्तर :
(b) संयुक्त राष्ट्र संघ की

प्रश्न 20.
1929 की आर्थिक महामंदी का केन्द्र स्थल था –
(a) ब्रिटेन
(b) फ्रांस
(c) रूस
(d) अमेरिका
उत्तर :
(b) फ्रांस

प्रश्न 21.
याल्टा सम्मेलन में ‘लीग ऑफ नेशन्स’ की जगह जिस दूसरे संगठन को बनाने का फैसला किया गया उसका नाम था –
(a) राष्ट्र संघ
(b) संयुक्त राष्ट्र चार्टर
(c) संयुक्त राष्ट्र संघ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) संयुक्त राष्ट्र संघ

प्रश्न 22.
इटली में फासीवाद का जनक कौन था?
(a) हिटलर
(b) मुसोलिनी
(c) मार्शल टीटो
(d) जॉर्ज बुश
उत्तर :
(b) मुसोलिनी

प्रश्न 23.
नाजी दल की स्थापना किसने की?
(a) मैजिनी
(b) हिटलर
(c) मुसोलिनी
(d) तोजो हिडेकी
उत्तर :
(b) हिटलर

प्रश्न 24.
सीटो की स्थापना कब हुई थी?
(a) 1947 ई०
(b) 1950 ई०
(c) 1952 ई。
(d) 1954 ई०
उत्तर :
(d) 1954 ई०

प्रश्न 25.
द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी ने कहाँ आत्मसमर्पण किया ?
(a) स्टालिनग्राड
(b) पर्ल हार्बर
(c) हिरोशिमा
(d) नागासाकी
उत्तर :
(a) स्टालिनग्राड

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 26.
हिटलर ने पोलैण्ड पर कब आक्रमण किया था ?
(a) 1919
(b) 1930
(c) 1939
(d) 1944
उत्तर :
(c) 1939

प्रश्न 27.
जर्मनी ने द्वितीय विश्वयुद्ध में कब रूस पर आक्रमण किया था ?
(a) 1939
(b) 1940
(c) 1941
(d) 1942
उत्तर :
(c) 1941

प्रश्न 28.
जापान ने आत्मसमर्षण किया –
(a) 6 अगस्त 1945 है, को
(b) 28 अपैल 1945 ई को को
(c) 7 गई 1945 है को
(d) 10 अगसल 1945 है को
उत्तर :
(d) 10 भगसत 1945 है को

प्रश्न 29.
पर्ल-हार्बर पर नो एवं विमान आक्रमण हुआ 1941 ई. के
(a) 7 जुलाई को
(b) 7 अक्टूरर को
(c) 7 दिसम्बर को
(d) 17 मई को
उत्तर :
(c) 7 दिसम्बर को

प्रश्न 30.
संयुक्ता राष्ट्रसंथ की सधापना हुई –
(a) 1939 ई में
(b) 1941 ₹ में
(c) 1943 है में
(d) 1945 ई में
उत्तर :
(d) 1945 ई में

प्रश्न 31.
पर्ल हार्बार किस देश का नौ-सौनिक अहुा था ?
(a) जर्मनी
(b) जापान
(c) ईंग्लेण्ड
(d) दू० एस०ए०
उत्तर :
(d) यू॰ एस०ए०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 32.
द्वितीय विश्व युद्ध का तत्कालिन कारण था –
(a) पोलेण्ड पर भाकमण
(b) रूस पर आक्रमण
(c) जापान चर आक्रमण
(d) पर्ल हार्बर पर आक्रयण
उत्तर :
(a) पोलैण्ड वर आक्रमण

प्रश्न 33.
सूस-जर्मन अनारक्रण समझोता हुआ –
(a) 1936 ई. में
(b) 1937 ई. में
(c) 1938 ई. में
(d) 1939 ई. में
उत्तर :
(d) 1939 ई. में

प्रश्न 34.
किस देश पर आकमण होने के कारण द्वितीय बिश्वयुद्ध आरंध ड्रुआ ?
(a) चेकोस्लोवाकिया
(b) पोलैण्ड
(c) ऑंस्ट्रया
(d) राइनलेग्ड
उत्तर :
(b) पोलेण्ड

प्रश्न 35.
जर्मनी ने 1936 ई. में किस स्थान को दखल किया ?
(a) औंटिया
(b) बैकोस्सोवांकिया
(c) राइनलैण्ड
(d) पोलेण्ड
उत्तर :
(c) राइनलेग्ड

प्रश्न 36.
इटली, जर्मनी एवं जापान का गठबंघन बा –
(a) अक्ष शक्ति
(b) मित्र शक्ति
(c) कमिन्टन संधि
(d) एन्टी-कमिन्टर्न संधि
उत्तर :
(a) अन्ष शक्ति

प्रश्न 37.
एशियाटिक मोनरो नीति की घोषणा की –
(a) अमेरिका
(b) जर्मनौ
(c) चीन
(d) जाचन
उत्तर :
(d) जायान

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 38.
‘तुष्टीकरण नीति’ के उद्भावक बे –
(a) फैको
(b) नेबिल चा्बरसेन
(c) रिवेनट्राप
(d) मझोटोब
उत्तर :
(b) रेवित चम्बललैन

प्रश्न 39.
हिटलर ने बिना युद्ध किये चेकोस्लोवाकिया का कौन-सा अंचल दखल किया –
(a) फिऊम बंदरगाह
(b) सार अंबल
(c) राइन अंचल
(d) सूटेतन अंचल
उत्तर :
(d) सूदेतन अवल

प्रश्न 40.
किस समझाते की गुप्त शर्त में घोलैण्ड के विभाजन का जिक्र है –
(a) टिराना समझ्रोता
(b) रोम समझौता
(c) रुसा-जर्मन अनाक्रमण संधि
(d) म्यूनिख संधि
उत्तर :
(c) रुस-जर्मन अनाक्रमण संथि

प्रश्न 41.
द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रतथक्ष कारण था हिटसर द्वारा –
(a) पोलेण्ड आक्रमण
(b) इंच-फ्रोसिसौ नुष्टीकरण नीति
(c) वर्गांद संत्रि का अविच्धा
(d) राष्ट्रसंख की विक्तता
उत्तर :
(a) पोलैग्ड आक्रमण

प्रश्न 42.
इंग-फ्रॉंसीसी शक्ति ने जर्मनी के विरुद्ध चुद्ध की घोषणा 1939 ई. में किषा –
(a) 1 सितम्बर को
(b) 2 सितम्बर को
(c) 3 सितम्बर को
(d) 4 सितम्बर को
उत्तर :
(c) 3 सितम्बर को

प्रश्न 43.
द्वितीय विश्वयुद्ध में ‘बिल्ट्ज क्रिग’ युद्ध पद्धति व्यवहार किया –
(a) इंगलैण्ड ने
(b) फ्रांस ने
(c) इटली ने
(d) जर्मनी ने
उत्तर :
(d) जर्मनी ने

प्रश्न 44.
फ्रांस के मार्शल पेताँ सरकार की राजधानी थी –
(a) बिची
(b) पेरिस
(c) लिओं
(d) वोर्दों
उत्तर :
(a) बिची

प्रश्न 45.
द्वितीय विश्वयुद्ध में 1940 ई. में जर्मनी के समक्ष फ्रांस ने आत्मसमर्पण किया –
(a) 21 मार्च को
(b) 21 मई को
(c) 21 अगस्त को
(d) 21 नवम्बर को
उत्तर :
(d) 21 नवम्बर को

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 46.
अपनी सैन्य शक्ति वृद्धि की मांग नहीं माने जाने पर राष्ट्रसंघ त्याग किया –
(a) जापान
(b) जर्मनी
(c) इटली
(d) अमेरिका
उत्तर :
(b) जर्मनी

प्रश्न 47.
देखते ही गोली मारने का निर्देश दिया था –
(a) जर्मनी
(b) जापान
(c) अमेरिका
(d) इंगलैण्ड
उत्तर :
(c) अमेरिका

प्रश्न 48.
द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सैनिकों का अड्डा था –
(a) चीन में
(b) इण्डोचीन में
(c) मलय में
(d) सिंगापुर में
उत्तर :
(b) इण्डोचीन में

प्रश्न 49.
द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रथम चरण में प्रशान्त महासागरीय अंचल तथा सुदूर पूर्व में अग्रासन की नीति अपनाई –
(a) अमेरिका
(b) रूस
(c) चीन
(d) जापान
उत्तर :
(d) जापान

प्रश्न 50.
अमेरिकी नौसेना अड्डा अवस्थित था –
(a) पर्ल हार्बर में
(b) सिंगापुर में
(c) इण्डोचीन में
(d) चीन में
उत्तर :
(a) पर्ल हार्बर में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ____________ संधि द्वारा इटली ने अलबानिया पर दखल कर लिया।
उत्तर : टिराना।

2. मुसोलिनी ने युगोस्लाविया से ____________बन्दरगाह दखल किया।
उत्तर : फिऊम।

3. मुसोलिनी ने ____________के साथ बुल्गारिया की संयुक्ति खारिज करने के आन्दोलन को उकसाया।
उत्तर : युगोस्लाविया।

4. अहमद जगू ने ____________में प्रजातंत्र की स्थापना की।
उत्तर : अलबानिया।

5. कामिन्टर्न विरोधी संधि ____________एवं जापान के बीच हुई।
उत्तर : जर्मनी।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

6. जनमत द्वारा जर्मनी के साथ युक्त हुआ____________
उत्तर : सार अंचल।

7. हिटलर ऑस्ट्रिया के नाजी नेता ____________को उस देश के गृहमंत्री पद पर नियुक्ति की मांग की।
उत्तर : सिएस इनकर्ट।

8. ____________की मध्यस्थता से म्यूनिख समझौता (1938 ई.) हुआ।
उत्तर : मुसोलिनी।

9. म्यूनिख समझौता में ____________के प्रति अविचार हुआ।
उत्तर : पोलेण्ड।

10. रूस-जर्मन अनाक्रमण (1939 ई.) समझौता द्वारा तय हुआ कि ____________रूस एवं जर्मनी आपस में बाँट लेंगे।
उत्तर : पोलैण्ड को।

11. इस्पात का समझौता (1939 ई.) जर्मनी एवं____________ के बीच हुआ।
उत्तर : इटली।

12. द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले जर्मनी के प्रति इंगलैण्ड एवं फ्रांस ने ____________नीति ग्रहण की थी।
उत्तर : तुष्टीकरण।.

13. हिटलर ने सम्पूर्ण युगोस्लाविया दखल किया 1939 ई. के____________
उत्तर : 15 मार्च को।

14. जून, 1940 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल हुआ____________
उत्तर : इटली।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

15. हिटलर ने म्यूनिख समझौता में बताया कि ____________अंचल ही यूरोप के पास उसकी अन्तिम मांग है।
उत्तर : सुदेतन।

16. जर्मनी 1 सितम्बर, 1939 ई. को ____________पर आक्रमण किया।
उत्तर : पोलैण्ड।

17. मुक्ति दिवस की घटना ____________के साथ युक्त है।
उत्तर : फ्रांस के पुनरुद्धार।

18. हिटलर ने अपने ____________अभियान का नामकरण किया था समुद्रसिंह अभियान।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

19. लेनिनग्राड का युद्ध रूस एवं ____________के बीच हुआ था।
उत्तर : जर्मनी।

20. ____________युद्ध रूस एवं जर्मनी के बीच हुआ।
उत्तर : स्टालिनग्राड।

21. लालसेना था ____________वाहिनी का नाम।
उत्तर : रूसी।

22. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ____________गणतंत्र के अस्त्रागार में परिणत हुआ।
उत्तर : अमेरिका।

23. ____________के विरुद्ध युद्ध की घोषणां करके इटली द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

24. मित्रवाहिनी ने 4 जून ____________ई. को इटली की राजधानी रोम को दखल किया।
उत्तर : 1944

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

25. अमरीकी नौसेना अड्डा को पर्लहार्बर को ____________धंस किया।
उत्तर : जापान ने।

26. 25 अगस्त, 1944 ई. को मित्रवाहिनी ने ____________शहर दखल किया।
उत्तर : पेरिस।

27. इवां ब्राऊन ____________की पत्नी थीं।
उत्तर : हिटलर।

28. हिटलर ने जर्मन ____________जाति को विशुद्ध जाति का वंशज कहकर प्रचार किया था।
उत्तर : आर्यं।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. धुरी राष्ट्र गणतंत्र के समर्थक थे।
उत्तर : False

2. हिंटलर युद्ध में मारा गया था।
उत्तर : False

3. मुसोलिनी ने आत्महत्या की थी।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

4. द्वितीय विश्वयुद्ध में सभी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया।
उत्तर : True

5. अमेरिका तथा जर्मनी के बीच शीतयुद्ध चल रहा था।
उत्तर : False

6. अमेरिका ने हिरोशिमा एव नागासाकी पर एटम बम गिराया था।
उत्तर : True

7. जर्मनी ने पर्लहार्बर पर हमला किया था।
उत्तर : False

8. रूस एवं जापान में अनाक्रमण समझौता हुआ था।
उत्तर : False

9. सभी तानाशाहों ने विश्व को युद्ध की आग में झोंक दिया था।
उत्तर : True

10. फ्रांस जर्मनी को समाप्त कर देना चाहता था।
उत्तर : True

11. इटली के कवि डान्नूनत्सिओ की ‘ब्लैक शटर्स’ वाहिनी ने 1919 ई, में युगोस्लाविया से फिऊम बंदरगाह दखल किया।
उत्तर : True

12. युगोस्लाविया के राजा अलेक्जेण्डर के आतंकवादियों के हाथों मारे जाने पर युगोस्लाविया ने फ्रांस को दोषी ठहराया।
उत्तर : False

13. रोम समझौते द्वारा फ्रांस ने इटली के कुछ स्थानों को प्राप्त किया।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

14. जर्मन शासक हिटलर ने इटली के आबिसीनिया आक्रमण का विरोध किया था।
उत्तर : False

15. जेनेवा निरस्त्रीकण सम्मेलन ( 1933 ई.) में जर्मनी द्वारा सामरिक शक्ति वृद्धि की मांग की गयी।
उत्तर : True

16. राष्ट्रसंघ द्वारा अपने सदस्य देशों को इटली के साथ आयात-निर्यात बन्द करने का निर्देश दिये जाने पर इंग्लैण्ड एवं फ्रांस ने इस निर्देश को माना।
उत्तर : False

17. जर्मनी ने 1939 ई, में इटली के साथ अनाक्रमण समझौता किया।
उत्तर : False

18. धुरी राष्ट्र के प्रमुख सदस्य इंग्लेण्ड, फ्रांस एवं रूस थे।
उत्तर : False

19. धुरी राष्ट्र के ‘धुरी’ शब्द का प्रथम व्यवहार मुसोलिनी ने किया था।
उत्तर : True

20. मुसोलिनी ने म्यूनिख समझौता के 6 महीने बाद ही सम्पूर्ण बेकोस्लोवाकिया पर दखल कर लिया।
उत्तर : False

21. चेकोस्लोवाकिया के सुदेतन अंचल पर हिटलर के अधिकार को मांग पर म्यूनिख समझौता (1938 ई.) हुआ।
उत्तर : False

22. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में जर्मनी एवं रूस ने पोलैण्ड दखल कर आपस में बाँट लिया।
उत्तर : True

23. अमेरिका द्वारा पर्लहार्बर पर बम बर्षण करने पर जापान द्वितीय विश्वयुंद्ध में शामिल हुआ।
उत्तर : False

24. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में फिनलैंड, एस्टोनिया, लातिविया, लिधुआनिया आदि देशों को रूस ने दखल कर लिया।
उत्तर : True

25. द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत में डेनमार्क, नार्वे, बेल्जियम, हालैण्ड, लक्सेमवर्ग आदि देशों को जर्मनी ने दखल कर लिया।
उत्तर : True

26. युद्ध में इग्लैण्ड के विफल होंने पर हिटलर ने फ्रांस पर आकमण की योजना बनायी।
उत्तर : False

27. द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा मित्र देशों को मदद करने पर जर्मनी एव जापान उससे नाराज हो गये।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

28. खनिज तेल के लिये जापान ने 1941 ई. में इण्डोचीन दखल कर लिया।
उत्तर : True

29. 8 दिसम्बर, 1941 ई. को अमेरिका के विरुद्ध जापान द्वारा युद्ध घोषणा पर पूरब में द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ गया।
उत्तर : False

30. द्वितीय विश्वयुद्ध में उत्तरी अफ्रीका के युद्ध में बिटिश सेनापति आर्चिबाल्ड वैवेन एवं मान्टेगोमरी, जर्मन सेनापति रोमेल एवं अमरीकी सेनापति पैटन थे।
उत्तर : True

31. इटली ने मित्र देशों के सामने 3 सितम्बर, 1943 ई. को आत्मसमर्पण किया।
उत्तर : True

32. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय हांगकांग, सिंगापुर, फिलीपीन्स द्वीपसमूह, मलय, श्याम, बर्मा आदि देशों को फ्रांस ने दख़ कर लिया।
उत्तर : False

33. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय याल्टा सम्मेलन एवं पोट्सडाम सम्मेलन में मित्र राष्ट्र सम्मिलित हुए।
उत्तर : True

34. जर्मन विदेश मंत्री रिवेनट्राप ने ‘मार्शल योजना’ को ‘डॉलर साम्राज्यवाद’ का परिवर्तित रूप कहा।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ख
(A) रोम-बर्लिन-टोक्यो (1) धुरी राष्ट्र
(B) जर्मनी द्वारा पोलैण्ड पर आक्रमण (2) द्वितीय विश्वयुद्ध का आरभ
(C) 1939 ई. (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारम्भ
(D) 10 मई 1940 ई. (4) हिटलर का फ्रास पर आक्रमण

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ख
(A) रोम-बर्लिन-टोक्यो (1) धुरी राष्ट्र
(B) जर्मनी द्वारा पोलैण्ड पर आक्रमण (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारम्भ
(C) 1939 ई. (2) द्वितीय विश्वयुद्ध का आरभ
(D) 10 मई 1940 ई. (4) हिटलर का फ्रास पर आक्रमण

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 2.

स्ता्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 6 अगस्त 1945 ई. (1) नागासाकी पर अणु हमला
(B) 9 अगस्त 1945 ई. (2) हिरोशिमा पर अणु हमला
(C) 7 दिसम्बर 1941 ई. (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत
(D) 14 अमस्त 1945 ई. (4) जापान का पर्ल हार्बर पर आक्रमण

उत्तर :

स्ता्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 6 अगस्त 1945 ई. (2) हिरोशिमा पर अणु हमला
(B) 9 अगस्त 1945 ई. (1) नागासाकी पर अणु हमला
(C) 7 दिसम्बर 1941 ई. (4) जापान का पर्ल हार्बर पर आक्रमण
(D) 14 अमस्त 1945 ई. (3) द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अमेरिकी बमवर्षक वायुयान (1) अमेरिका और रूस के बीच
(B) शीतयुद्ध (2) B29
(C) विश्व में दो गुट (3) गुट से अलग
(D) गुट निरपेक्ष (4) साम्यवादी एवं लोकतांत्रिक

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अमेरिकी बमवर्षक वायुयान (1) अमेरिका और रूस के बीच
(B) शीतयुद्ध (2) B29
(C) विश्व में दो गुट (3) गुट से अलग
(D) गुट निरपेक्ष (4) साम्यवादी एवं लोकतांत्रिक

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना (1) द्वितीय विश्वयुद्ध
(B) राष्ट्संघं निष्क्रिय (2) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद
(C) द्वितीय विश्वयुद्ध (3) दक्षिण पूर्वी एशिया संधि संगठन
(D) SEATO (4) वैश्विक युद्ध

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना (2) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद
(B) राष्ट्संघं निष्क्रिय (1) द्वितीय विश्वयुद्ध
(C) द्वितीय विश्वयुद्ध (4) वैश्विक युद्ध
(D) SEATO (3) दक्षिण पूर्वी एशिया संधि संगठन

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुसान की संधि (1923 ई.) (1) इटली एवं युगोस्लाविया
(B) नेटिउनो का समझौता (1925 ई.) (2) इटली एवं ग्रीस
(C) टिराना का समझौता (1926 ई.) (3) इटली एवं फ्रांस
(D) रोम का समझौता (1935 ई.) (4) इटली एवं अलबानिया

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुसान की संधि (1923 ई.) (2) इटली एवं ग्रीस
(B) नेटिउनो का समझौता (1925 ई.) (1) इटली एवं युगोस्लाविया
(C) टिराना का समझौता (1926 ई.) (4) इटली एवं अलबानिया
(D) रोम का समझौता (1935 ई.) (3) इटली एवं फ्रांस

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) होर-लावाल समझौता (1935 ई.) (1) इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी एवं इटली
(B) कमिन्टर्न विरोधी समझ्ञोता (1936 ई.) (2) जर्मनी एवं जापान
(C) रोम-बर्लिन-टोक्यो धुरी समझौता (1937 ई. (3) इंग-फ्रांसीसी पक्ष एवं इटली
(D) म्यूनिख समझौता (1938 ई.) (4) इटली, जर्मनी एवं जापान

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) होर-लावाल समझौता (1935 ई.) (3) इंग-फ्रांसीसी पक्ष एवं इटली
(B) कमिन्टर्न विरोधी समझ्ञोता (1936 ई.) (2) जर्मनी एवं जापान
(C) रोम-बर्लिन-टोक्यो धुरी समझौता (1937 ई. (4) इटली, जर्मनी एवं जापान
(D) म्यूनिख समझौता (1938 ई.)  (1) इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी एवं इटली

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अलेक्जेण्डर (1) युगोस्लाविया
(B) फ्रैंको (2) अबिसीनिया
(C) टाइले सेल्सी (3) अलबानिया
(D) अहमद जगू, (4) सेन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) अलेक्जेण्डर (1) युगोस्लाविया
(B) फ्रैंको (4) सेन
(C) टाइले सेल्सी (2) अबिसीनिया
(D) अहमद जगू, (3) अलबानिया

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) एल आलामीन का युद्ध (1) ऑंस्ट्रिया के चांसलर
(B) स्टालीनग्राड का युद्ध (2) जर्मन चांसलर
(C) ब्रिटेन का युद्ध (3) फ्रांस के प्रधानमंत्री
(D) बेनगाजी का युद्ध (4) बिटिश प्रधानमंत्री

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) एल आलामीन का युद्ध (3) फ्रांस के प्रधानमंत्री
(B) स्टालीनग्राड का युद्ध (1) ऑंस्ट्रिया के चांसलर
(C) ब्रिटेन का युद्ध (4) बिटिश प्रधानमंत्री
(D) बेनगाजी का युद्ध (3) फ्रांस के प्रधानमंत्री

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) चेम्बरलेन (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर
(B) दालादियेर (2) जर्मन चांसलर
(C) हिटलर (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक
(D) डलफासं (4) इटली का शासक

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) चेम्बरलेन (4) इटली का शासक
(B) दालादियेर (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक
(C) हिटलर (2) जर्मन चांसलर
(D) डलफासं (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुसोलिनी (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर
(B) सुशनिप (2) जापान के प्रषानमंत्री
(C) हिदेकी तोजो (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक
(D) फिलिप पेताँ (4) इटली का शासक

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुसोलिनी (4) इटली का शासक
(B) सुशनिप (1) ऑंस्ट्रया के चांसलर
(C) हिदेकी तोजो (2) जापान के प्रषानमंत्री
(D) फिलिप पेताँ (3) फ्रांस के क्रीड़ानक शासक

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मार्शल मुकोव (1) जर्मन सेनापति
(B) आइजनहावर (2) रूसी सेनापति
(C) रोमेल (3) ब्रिटिश सेनापति
(D) मान्टगोमरी (4) अमेरिकी सेनापति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मार्शल मुकोव (2) रूसी सेनापति
(B) आइजनहावर (4) अमेरिकी सेनापति
(C) रोमेल (1) जर्मन सेनापति
(D) मान्टगोमरी (3) ब्रिटिश सेनापति

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 6 द्वितीय विश्वयुद्ध एवं उसके बाद

प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मैक आर्थर (1) रूस के विदेश मंत्री
(B) वान पाउलस (2) अमेरिकी सेनापति
(C) गोयबल्स (3) हिटलर का प्रचार मंत्री
(D) मोलेटोव (4) जर्मन सेनापति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मैक आर्थर (2) अमेरिकी सेनापति
(B) वान पाउलस (4) जर्मन सेनापति
(C) गोयबल्स (3) हिटलर का प्रचार मंत्री
(D) मोलेटोव (1) रूस के विदेश मंत्री

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 8 Question Answer – पश्चिम बंगाल

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
पश्चिम बंगाल के रेल इंजन बनाने का कारखाना कहाँ है?
उत्तर :
चित्तरंजन

प्रश्न 2.
भारत का रूढ़ शिल्पांचल किसे कहते हैं?
उत्तर :
दुर्गापुर को।

प्रश्न 3.
लैटराइट मिट्टी पश्चिम बंगाल में कहाँ पाई जाती है?
उत्तर :
पश्चिम मेदिनीपुर, बाकुड़ा,पुरुलिया, बर्द्धमान तथा बीरभूम में।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 4.
ज्वारीय वन में किस जाति के वृक्ष अधिक पाये जाते हैं?
उत्तर :
मैंग्रोव एवं सुन्दरी।

प्रश्न 5.
1000 m से 2000 m की ऊँचाई पर किस प्रजाति के वृक्ष पाये जाते हैं।
उत्तर :
अलडर, वॉलनट, वर्च इत्यादि जाति के वृक्ष पाए जाते हैं।

प्रश्न 6.
काल वैशाखी से किस ऋतु में वर्षा होती है?
उत्तर :
ग्रीष्म ऋतु. में।

प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल की सभी नदियाँ कहां गिरती है?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी में।

प्रश्न 8.
बंगलादेश और पश्चिम बंगाल में कौन-सा महत्वपूर्ण समझौता है?
उत्तर :
जलबंटन समझौता।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 9.
कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के किस भाग से होकर गुजरती है?
उत्तर :
दक्षिण भाग से (नदिया जिला के कृष्णनगर शहर से)

प्रश्न 10.
जूट के एक बीज का नाम बताइये।
उत्तर :
सबुज सोना, श्यामली, बैशाखी, चैताली और बासुदेव।

प्रश्न 11.
चाय की कृषि के लिए एक जिले का नाम बताइये।
उत्तर :
दार्जिलिंग।

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा धान उत्पादक जिला कौन-सा है?
उत्तर :
मोदिनीपुर।

प्रश्न 13.
उद्योग की स्थापना के लिये सबसे आवश्यक वस्तु क्या है?
उत्तर :
कच्या माल।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल के एक धार्मिक पर्यटन स्थल का नाम बताइए।
उत्तर :
दक्षिणेश्वर काली मन्दिर।

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल के दो कुटीर उद्योग का नाम बताइये।
उत्तर :
चटाई बनाना और मिट्टी की मूर्तियाँ एवं खिलौना बनाना।

प्रश्न 16.
ताबां का विकास पश्चिम बंगाल में कहाँ हुआ है?
उत्तर :
खड़गपुर, मुर्शिदाबाद में बलरामपुर एवं बांकुड़ा में विष्णुपुर।

प्रश्न 17.
भारत का दूसरा सबसे बड़ा नगर कौन-सा है?
उत्तर :
दिल्ली।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 18.
कोलकाता के सहायक बन्दगाह का क्या नाम है?
उत्तर :
हल्दिया।

प्रश्न 19.
दो पर्वतीय पर्यटक स्थलों का नाम बताइये।
उत्तर :
दार्जिलिंग एवं कलिंगपांग।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक पड़ोसी राज्य का नाम लिखिए।
उत्तर :
उड़ीसा।

प्रश्न 21.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल का जनघनत्व कितना है?
उत्तर :
1029 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

प्रश्न 22.
भूटान का विदेशी व्यापार किन बन्दरगाहों से होता है?
उत्तर :
कोलकाता और हल्दिया बन्दरगाहों से।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल में कुल कितने जिले हैं?
उत्तर :
वर्त्मान में 20 जिला।

प्रश्न 24.
विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
उत्तर :
घूम रेलवे स्टेशन (2260 मी॰ ऊंचाई पर) है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल की सबसे ऊँची चोटी का नाम लिखिए?
उत्तर :
गोरगाबुरू (677 मी०)।

प्रश्न 26.
राढ़ अंचल की मिट्टी का रंग कैसा है?
उत्तर :
लाल

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल की भूमि निम्न एवं दलदली होती है?
उत्तर :
सुन्दरवन के डेल्टाई अंचल की भूमि।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल की सबसे महत्वपूर्ण नदी कौन-सी है?
उत्तर :
गंगा।

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल की नदियाँ वर्षा पोषित हैं?
उत्तर :
उत्तरी भाग की नदियाँ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 30.
पश्चिम बंगाल में सम्भावित धरातलीय जल की मात्रा कितनी है?
उत्तर :
13.29 मिलियन हेक्टेयर मीटर है।

प्रश्न 31.
पश्चिम बंगाल में कितने अधिक गहराई वाले ट्यूबवेल कार्यरत हैं?
उत्तर :
500 फीट से अधिक गहराई वाले ट्यूबवेल कार्यरत हैं।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल की जलवायु ऊष्ण कटिबंधीय है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल का दक्षिणी भाग।

प्रश्न 33.
ग्रीष्म काल में कोलकाता का औसत तापमान कितना रहता है?
उत्तर :
29°C रहता है।

प्रश्न 34.
मानसूनी हवाओं से किस प्रकार की वर्षा होती है?
उत्तर :
पर्वतीय वर्षा होती है।

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल के किस अंचल में शीतकाल में तापमान हिमांक के नीचे चला जाता है?
उत्तर :
उत्तरी पर्वतीय अंचल में।

प्रश्न 36.
पश्चिम बंगाल में चावल के किस किस्म की अधिक खेती है?
उत्तर :
अमन की खेती अधिक होती है।

प्रश्न 37.
जूट किस जलवायु का पौधा है?
उत्तर :
ऊष्ण कटिबन्धक पौधा है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 38.
दुर्गापुर इस्पात कारखानें की लौह-अयस्क की प्राप्ति कहाँ से होती है?
उत्तर :
झारखण्ड व उड़ीसा की नोआमुण्डी की खान से।

प्रश्न 39.
पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग का केन्द्रीकरण कहाँ हुआ है?
उत्तर :
हुगली नदी के दोनों किनारों पर उत्तर में बाँसबेड़िया से दक्षिण में बिड़लापुर तक।

प्रश्न 40.
पश्चिम बंगाल के अधिकांश चाय बगान कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
उत्तर के दार्जिलिग एवं जलपाईगुड़ी जिलों में स्थित हैं।

प्रश्न 41.
पश्चिम बंगाल देश के कितने प्रतिशत आलू का उत्पादन करता है?
उत्तर :
30 % प्रतिशत

प्रश्न 42.
बंगाल प्रान्त का विभाजन कब हुआ था?
उत्तर :
1905 ई०।

प्रश्न 43.
पूर्वी पाकिस्तान कब स्वतंत्र होकर बंगलादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया?
उत्तर :
16 दिसम्बर, 1971 ई०।

प्रश्न 44.
पश्चिम बंगाल की राजधनी कहाँ है?
उत्तर :
कोलकाता।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 45.
क्षेत्रफल के अनुसार पश्चिम बंगाल का भारत मे कौन सा स्थान है।
उत्तर :
तेरहवाँ।

प्रश्न 46.
पश्चिम बंगाल के पूर्वी भाग में कौन सा देश स्थित है ।
उत्तर :
बंगलादेश ।

प्रश्न 47.
पश्चिम बंगाल के उत्तर पश्चिम में कौन सा पड़ोसी देश स्थित है।
उत्तर :
नेपाल।

प्रश्न 48.
पश्चिम बंगाल की जलवायु कैसी है?
उत्तर :
ऊष्ण एवं आर्द्र मानसूनी जलवायु है।

प्रश्न 49.
पश्चिम बंगाल में कुल कितने जिले हैं?
उत्तर :
23

प्रश्न 50.
कोलकाता का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर :
कोलकाता।

प्रश्न 51.
उत्तर 24 परगना का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर :
बरासात।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 52.
बिहार की राजधानी कहाँ है।
उत्तर :
पटना।

प्रश्न 53.
धरातलीय बनावट के आधार पर पश्चिम बंगाल को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर :
छ: भाग ।

प्रश्न 54.
पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी का नाम बताओ।
उत्तर :
संण्डाकफ़।

प्रश्न 55.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग की सबसे ऊँची चोटी का नाम बताओ।
उत्तर :
गोरगाबुरू।

प्रश्न 56.
पश्चिम बंगाल की एक ज्वारीय नदी का नाम बताओ।
उत्तर :
मातला, सभ्रनुखी।

प्रश्न 57.
पशिचम बंगाल की एक बर्फपोषित नहीं का नाम बताओ।
उत्तर :
निस्था, तोरसा, जलडाका नदी।

प्रश्न 58.
पशिचम बंगाल में काल बैशाखी कब आती है?
उत्तर :
मार्च-अप्रैल।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 59.
पश्चिम बंगाल में किस मानसूनी हवा द्वारा वर्षा होती है?
उत्तर :
दक्षिण-पश्चिम मानसूनो हवा द्वारा।

प्रश्न 60.
पशिचम बंगाल में ग्रीष्म काल में कहाँ लोग घूमने के लिए जाते है?
उत्तर :
दर्जिलिंग

प्रश्न 61.
पश्चिम बंगाल में किस भाग में पर्वतीय मिट्टी पायी जाती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उनरी भाग में।

प्रश्न 62.
पश्चिम बंगाल में दक्षिणी भाग में किस प्रकार के वन पाए जाते है?
उत्तर :
सुन्दरी वन या मैनग्रोव।

प्रश्न 63.
समुद्रतटीय अंचल की प्रमुख नदी का क्या नाम है?
उत्तर :
मातला, सप्तमुखी।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 64.
पश्चिमी पठारी अंचल की सबसे प्रमुख नदी का क्या नाम है?
उत्तर :
दामोदर, अजय।

प्रश्न 65.
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी भाग की भू-प्रकृति कैसी है?
उत्तर :
राढ़ प्रदेश।

प्रश्न 66.
पश्चिम बंगाल के किस भाग में रायल बंगाल टाइगर पाया जाता है?
उत्तर :
सुन्दरवन के डेल्टाई भाग में।

प्रश्न 67.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग की जलवायु फैली है।
उत्तर :
शीतोष्या।

प्रश्न 68.
ताल किसे कहते है?
उत्तर :
जिस स्थान पर बाढ़ का पानी हमेशा भरा रहता है।

प्रश्न 69.
दियरा किसे कहते है?
उत्तर :
नंदी द्वारा निर्मिंद काष मिट्टी को दियरा कहते है :

प्रश्न 70.
मुन्दरवन अंचल में किस प्रकार के वन पाए जाते है?
उत्तर :
सुन्दरोवन, मेंग्रोव।

प्रश्न 71.
पश्चिम बंगाल के किस भाग में सक्रिय डेल्टा पाया जाता है?
उत्तर :
दक्षिणी भाग मे ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 72.
पश्चिम बंगाल की सबसे प्रपुख कृषि उपज क्या है?
उत्तर :
धान।

प्रश्न 73.
पशिचम बंगाल की सबसे प्रमुख व्यावसायिक फसल क्या है?
उत्तर :
धाय।

प्रश्न 74.
पश्चिम बंगाल के किस भाग में चाय का उत्पादन होता है?
उत्तर :
दार्जिलिग।

प्रश्न 75.
चाय के उत्पादन में पश्चिम बंगाल का देश में कौन सा स्थान है?
उत्तर :
द्वितीय।

प्रश्न 76.
पश्चिम बंगाल का प्रमुख उद्योग क्या है?
उत्तर :
जूट उद्याग।

प्रश्न 77.
पश्चिम बंगाल में सर्वप्रथम कब लौह इस्पात कारखाने की स्थापना की गयी थी?
उत्तर :
वर्नपुर (liSCO)

प्रश्न 78.
पश्चिम बंगाल के नए बन्दरगाह का क्या नाम है?
उत्तर :
ताजपुर बन्दरगाह।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 79.
हल्दिया में किस उद्योग का विकास हुआ है?
उत्तर :
पेट्रोरसायन उद्योग।

प्रश्न 80.
पश्चिम बंगाल में कहाँ शिल्क उद्योग का विकास हुआ है?
उत्तर :
मुर्शिदाबाद और विरभूम में।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
पश्चिम बंगाल के विस्तार का वर्णन करो।
अथवा
पश्चिम बंगाल की स्थिति एवं सीमा लिखिए।
अथवा
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी देशों एवं पड़ोसी राज्यों के नाम बताओ।
उत्तर :
स्थिति – इसका विस्तार पूर्व की ओर 89° 50′ पूर्व देशान्तर से पश्चिम मे 85° 50′ पूर्व देशान्तर तथा उत्तर में 27° 10′ उत्तर अक्षाश से दक्षिण में 21° 38′ उत्तर अक्षांश तक है।
सीमा – उत्तर में हिमालय पर्वत में स्थित सिविकम तथा भूटान, पूर्व में बग्लादेश, मेघालय तथा असम राज्य, पश्चिम में नेपाल देश, बिहार, झारखण्ड एवं उड़ीसा तथा दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है।

प्रश्न 2.
पश्चिम बंगाल के प्रेसिडेन्सी विभाग में कौन-कौन जिले आते हैं?
उत्तर :
हावड़ा, कोलकाता, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल के समतल मैदानी भाग को कितने भांगों में वाँटा गया है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के समतल मैदानो भाग को निम्न छ: (6) भागों में बाँटा गया है :-

  1. तराई क्षेत्र (Terai Region)
  2. उत्तर की समतल भूमि (Northern Plains)
  3. राढ़ मैदान (Rath Plain)
  4. गगा डेल्टा मैदान (Ganga Delta Plain)
  5. सुन्दरवन का मैदान (Sundarban Plain)
  6. रेतीला नटीय मैदान (Sandy Coastal Plain)

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल को नदी मातृका प्रदेश क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में नदियों का काफी योगदान रहा है। यहाँ असंख्य नदियाँ बहती हैं। इसी से पश्चिम बगाल को नदी मातृका देश कहा जाता है।

प्रश्न 5.
उत्तर बंगाल की प्रमुख नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
महानन्दा, टांगन, तिस्ता, तोरमा और रायढाका उत्तर की प्रमुख नटियाँ हैं। इनमे प्रथम दो का जल गंगा में तथा शेष का जल बह्मपुत्र में गिरता है। तिस्ता इनमें प्रमुख नदी है।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल में किस प्रकार की जलवायु पायी जाती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्णार्द्र मानसूनी है।

प्रश्न 7.
तराई क्षेत्र की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर :
दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का सबसे उत्तरी जिला है। इसका अधिकांश भाग पर्वतोग है। इसका दक्ष्णणी भाग सिलीगुड़ी महकमा एवं जलपाईंगुड़ी तथा कुचबिहार के जिले हिमालय के गिरिपद हैं, इन्हे तराई क्षेत्र के नाम से पुकारते हैं। पश्चिम बंगाल में डुआर्स दुआर (Doors) कहते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 8.
सक्रिय डेल्टा किसे कहते हैं?
उत्तर :
दक्षिणी तट पर सुन्दरवन क्षेत्र में आज भी डेल्टा बनने की प्रक्रिया निरतर जारी है। फलख़्वरूप नये द्वोपों का निर्माण होता है। इनमें गंगासागर तथा पूर्वाशा प्रमुख हैं। इसे सक्रिय डेल्टा भी कहा जाता है।

प्रश्न 9.
राढ़ प्रदेश की स्थिति को लिखें?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी अंचल एवं भागीरथी – हुगली तटीय भाग के बीच स्थित मैदानी भाग को राढ़ कहते है। इसके अन्तर्गत बीरभूम, बर्दमान, बांकुड़ा एवं मिदनापुर का भू-भाग सम्मिलित है।

प्रश्न 10.
कृषि से किस प्रकार जल प्रदूषण होता है?
उत्तर :
बढ़ती आबादी की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण कृषि में सिंचाई, रासायनिक खादों कीटनाशक एव चृणनाराक दवाओं का प्रयोग आँख मूंदकर हो रहा है। इन दवाओं एवं रासायनिक खाद के प्रयोग सं जल प्रदृश्गा और मृदा प्रदूपण होता है।

प्रश्न 11.
उद्योगों से किस प्रकार जल प्रदूषण होता है?
उत्तर :
उद्योगों के कारण मानव की सम्पन्नता और सुविधा इतनी बढ़ गयी है कि इनकी उपलब्धता पलभर के लिए बाधित होने पर वह तिलमिला उठता है। एक तरफ तो सुविधा की बात हुई, दूसरी तरफ उद्योगों ने जल प्रदूषण के काफी प्रभावित किया। कारखानों से निकलने वाले जल नदियों को प्रदूषित कर दिया और नदियों की प्राकृतिक दृश्यावली गन्दे नालों के रूप परिवर्तित हो गयी है?

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल में किस मानसून से वर्षा होती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से वर्षा होती है। ये हवाएँ हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर आती हैं, अतः ये आर्द्र होती हैं। जब ये हवाएँ पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में स्थित हिमालय से टकराती हैं तो प्रदेश में अधिक वर्षा होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 13.
मौसम किस प्रकार मानव जीवन को प्रभावित करता है?
उत्तर :
मौसम के परिवर्तन का मानव-जीवन पर प्रभाव :- कोलकाता में आम आदमी गर्मी से परेशान रहते है पर गर्मी की छुट्टी में यदि आप अपने माता-पिता के साथ दार्जिलिंग जाते हैं तो वहाँ पर पहनने के लिए ऊनी कपड़ों की व्यवस्था करते है। अपने राज्य पश्चिम बंगाल में मछली भात और पोई का साग खाते हैं। जब आप अपने चाचा के यहाँ चण्ड़ीगढ़ में जाते हैं तो पाते हैं कि वे रोटी और सरसों का साग खाना पसन्द करते है। आप भोजन, पोशाक आदि में जो यह परिवर्तन देखते हैं उसे ही मौसम के परिवर्तन का मानव जीवन पर प्रभाव कहते है।

प्रश्न 14.
उत्तर के पर्वतीय भाग की जलवायु का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय भाग की जलवायु मुख्यत: इस प्रदेश की ऊँचाई से प्रभावित है। समुद्र की सतह से लगभग 2400 मी० ऊँचाई पर स्थित इस भू-भाग की जलवायु शीत-प्रधान है। गर्मी के दिनों में भी ठंडक पड़ती है। मईजून के महीने में यहाँ का औसत तापक्रम 15°-16° सेंटीमेट से अधिक नहीं जाता है। जाड़े की ऋतु का औसत तापमान 6° 7° सेन्टीप्रेंट रहता है, औसत वार्षिक वर्षा 300-400 से॰मी॰ है।

प्रश्न 15.
ज्वारीय वनों से क्या समझते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के डेल्टाई भाग में पाये जाने वाले वन को ज्वारीय वन कहते हैं। जैसे – मैंग्रोव, सुन्दरी वन।

प्रश्न 16.
धान की कृषि के लिए कैसी जलवायु आवश्यक हैं?
उत्तर :
धान एक उष्ण कटिबंध का पौधा है। भारत में धान की कृषि मानसुनी जलवायु के अन्तर्गत किया जाता है। धान का पौधा पानी का प्यासा होता है।

प्रश्न 17.
जल के अधिक प्रयोग से जैव-विविधता की क्षति क्यों होती है?
उत्तर :
जल के अधिक प्रयोग से जैव-विविधता की क्षति होती है क्योंकि जैव-विविधता के अर्न्तगत पाये जाने वाले कुछ जीव तथा पेड़-पौथे जल का अधिक प्रयोग नहीं करते।

प्रश्न 18.
जूट से बनने वाली दो वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
थैला, रस्सी, बोरे।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 19.
कुटीर उद्योग से क्या समझते हैं?
उत्तर :
कुटीर उद्योग सामूहिक रूप से उन उद्योगों को कहते हैं जिनमें उत्पाद एवं सेवाओं का सुजन अपने घर में ही किया जाता है न कि किसी कारखाने में। कुटीर उद्योगों में कुशल कारीगरों द्वारा कम पूंजी एवं अधिक कुशलता से अपने हाथों के माध्यम से अपने घरों में वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।

प्रश्न 20.
निर्माण विधि के आधार पर गंगा के डेल्टा को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर :
निर्माण विधि के आधार पर गंगा के डेल्टा को निम्न 4 भागों में बाँटा जा सकता है :-

  1. उत्तर का मृतप्राय डेल्टा (Moribund Delta)
  2. मध्य का परिपक्व डेल्टा (Mature Delta)
  3. सुन्दरवन का सक्रिय डेल्टा (Active Delta)
  4. मिदनापुर का बालू तृतिय मैदान (Sandy Coastal plain)

प्रश्न 21.
ज्वरीय नदी से आप क्या समझते हैं? कुछ ज्वारीय नदियाँ के नाम लिखिए।
उत्तर :
सुन्दरवन अंचल में प्रवाहित होनेवाली नदियों को ज्वारीय नदी कहते हैं क्योंकि समुद्र के ज्वार का जल इन नदियों में भीतर तक प्रवेश कर जाता है।
पश्चिम बंगाल की ज्वारीय नदियाँ :- बरतला, सप्तमुखी, जमीरा, मातला, गोसाबा, हरियाभंगा, विद्याधरी, पियाली एवं रायमंगल आदि ज्वारीय नदियाँ हैं।

प्रश्न 22.
काल बैशाखी क्या है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में अभैल एवं मई महीनों में शुष्क एवं आर्द्र हवाओं के मिलने से उत्पन्न विनाशकारी तूफानों को काल बैशाखी कहते हैं।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल के डेल्टाई अंचल में पाए जाने वाले वृक्षों के नाम लिखें।
उत्तर :
यहाँ के मुख्य वृक्ष मैंग्रोव, ताड़, सुन्दरी, गोरान, केवड़ा, होगा, गोलपत्ता एवं नारियल हैं। सुन्दरी वृक्षों की अधिकता के कारण ही इस भाग को सुन्दरवन कहते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख चावल उत्पादक जिलों के नाम लिखें।
उत्तर :
प्रमुख चावल उत्पादक जिलें :- जलपाईगुड़ी, बाँकुड़ा, मिदनापुर, हुगली, उत्तर 24 परगना, दाक्षण 24 परगना, पुरूलिया, उत्तर दिनाजपुर तथा बर्द्धमान आदि हैं।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि की क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि की निम्न समस्याएँ है :

  1. स्वच्छ जल की कमी
  2. चावल की कृषि की बाध्यता
  3. किसानों को उचित मूल्य न मिलना
  4. प्रति एकड़ उपज की कमी

प्रश्न 26.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल का गठन किस प्रकार की चट्टानों से हुआ है?
उत्तर :
पश्चिम के पठारी भाग मुख्य रूप से राढ़ प्रदेश क्षेत्र में है। जहाँ पथरीली चट्टान पायी जाती है। यह एक प्राचौन चट्टानी मिट्टी का क्षेत्र है जो लाल मिट्टी के जमा होने से बना हुआ है।

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख कृषि उपजों के नाम बताओ।
उत्तर :
धान, जुट, चाय, आलु, गेहूँ, साग-सब्जी, फुल।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योग कौन-कौन है?
उत्तर :
जुट उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग, पेट्रोल-रसायन उद्योग।

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के पांच प्रमुख दर्शनीय स्थानों के नाम बताओ।
उत्तर :
दक्षिणेश्वर, कालीघाट, मायापुर, तारापीठ, तारकेश्वर।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 30.
पश्चिम बंगाल में प्रमुख छोटी इकाई के उद्योगों के नाम बताओ।
उत्तर :
विड़ी उद्योग, सूत उद्योग, प्लाईडड उद्योग।

प्रश्न 31.
पश्चिम बंगाल के दो प्रमुख बन्दरगाहों तथा दो प्रमुख शहरों के नाम बताओ।
उत्तर :
प्रमुख बन्दरगाह : कोलकाता, हल्दिया। प्रमुख शहर : आसनसोल, कोलकाता, सिलिगुड़ी।

प्रश्न 31.
बारिन्द्र का मैदान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
गंगा तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बने मैदान को बारिन्द्र का मैदान कहते है। जैसे – पशिचम बंगाल का उत्तरी मैदान।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल में पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
दामोदर, मयूराक्षी, अजय, द्वारकेश्वर, सिलाई एवं कंसावती नदियाँ हैं।

प्रश्न 33.
कौन-सा पर्वत श्रेणी बंगाल एवं नेपाल की सीमा बनाती है?
उत्तर :
सिंगलीला पर्वत श्रेणी पश्चिम बंगाल एवं नेपाल की सीमा बनाती है।

प्रश्न 34.
पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी किस पर्वत श्रेणी पर स्थित है?
उत्तर :
सिंगलीला श्रेणी की संदाकफू चोटी पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी है।

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल में हिमालय की किस श्रेणी का विस्तार है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उत्तरी पर्वतीय अंचल में मध्य एवं लघु हिमालय की पूर्वी श्रेणियों का विस्तार है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 36.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल का गठन किन चट्टानों से हुआ है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल का गठन अर्कियन युग की आग्नेय चट्टानों तथा कार्बोनिफेरस युग की क्वार्टजाइट चट्टानों से हुआ है।

प्रश्न 37.
पश्चिम बंगाल के राढ़ अंचल का निर्माण किस प्रकार हुआ है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के राढ़ अंचल का निर्माण छोटानागपुर के पठार से निकलने वाली नदियों के द्वारा बहांकर लायी गयी लाल मिट्टी के निक्षेपण से हुआ है।

प्रश्न 38.
राढ़ अंचल को पश्चिम बंगाल का खलिहान क्यों कहते हैं?
उत्तर :
राढ़ अंचल कृषि की दृष्टि से उन्नत है इसीलिए इसे पश्चिम बंगाल का खलिहान कहते हैं।

प्रश्न 39.
बिल किसे कहते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के सुन्दरवन के डेल्टाई अंचल में स्थित जलमग्न निम्न भूमि को बिल कहते हैं।

प्रश्न 40.
पद्मा की शाखा नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
इच्छामती, भैरव, आदिगंगा, विद्याधरी एवं कालिन्दी।

प्रश्न 41.
हुगली नदी की मुख्य शाखा नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :
हुगली नदी को मुख्य शाखा नदियाँ बरतला, सप्तमुखी, जमीरा, मातला, गोसाना, हरियाभंगा, विद्याधरी, पियाली एवं रायमंगल है।

प्रश्न 42.
पश्चिम बंगाल के हिमपोषित नदियों के नाम लिखो।
उत्तर :
महानन्दा, तिस्ता, जलढाका, तोरसा, रायडक, संकोश, अन्नाई, बड़ी रंगित, छोटी रंगित आदि नदियाँ हिमपोषित नदियाँ हैं जो उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई पद्मा या ब्रह्मपुत्र नदी सें मिल जाती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 43.
छोटानागपुर के पठार से निकलने वाली नदियों को वृष्टि जल पोषित नदियाँ क्यों कहते हैं?
उत्तर :
इस भाग की नदियाँ वर्षा जल के सहारे बहती हैं, अत: इन्हें वृष्टि जल पोषित नदिया कहते हैं। वर्षा काल में ये नदियाँ भयकर हो उठती है और उनमें विनाशकारी बाढ़ें आ जाया करती है।

प्रश्न 44.
दामोदर नदी का उदगम और मुहाना का परिचय दीजिए।
उत्तर :
यह नदी झारखण्ड राज्य के पलामू जिले में स्थित खमरपट की चोटी से निकलकर बराकर के समीप पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है तथा फालता के पास हुगली नदी में मिल जाती है।

प्रश्न 45.
सुन्दरवन अंचल की नदियों को ज्वारीय नदी क्यों कहते हैं?
उत्तर :
सुन्दरवन अंचल में प्रवाहित होनेवाली नदियो को ज्वारीय नदी कहते है क्योंकि समुद्र के ज्वार का जल इन नदियों में भीतर तक प्रवेश कर जाता है।

प्रश्न 46.
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को गर्मी का मानसून (Summer Monsoon) क्यों कहते हैं?
उत्तर :
भारत के अन्य भागों की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी गर्मी में दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ समुद्र से समतल की और चलती हैं। अतः इन्हें गर्मी का मानसून (Summer Monsoon) भी कहते हैं।

प्रश्न 47.
पश्चिमी मानसून या गर्मी का मानसून को आर्द्र मानसून क्यों कहते हैं?
उत्तर :
पश्चिमी मानसून हवाएँ हिन्द महासागर एवं बंगाल की खाड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा तय करके आती है, अतः ये वाष्प या आर्द्रता से परिपूर्ण होती है। इसी से इन्हें आर्द्र मानसून (Wett Monsoon) भी कहते हैं।

प्रश्न 48.
उत्तरी-पूर्वी मानसून हवाओं को पश्चिम बंगाल में शुष्क मानसून क्यों कहते हैं?
उत्तर :
समतल भाग से आने के कारण ये हवाएँ शुष्क होती है और इनसे पश्चिम बंगाल में वर्षा नहीं होती है। इसीसे इन्हें शुष्क मानसूनी (Dry Monsoon) भी कहते है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 49.
पश्चिम बंगाल के मनोरम जलवायु वाले पर्यटन स्थल का नाम लिखें।
उत्तर :
मनोरम जलवायु वाले पर्यटन केन्द्र दार्जिलिंग, कलिंगपोंग, कर्सियांग, मिरिक, सुकिया पोखरी- घूम बक्सा आदि हैं।

प्रश्न 50.
कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के जलवायु पर क्या प्रभाव डालता है?
उत्तर :
कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के मध्य से होकर गुजरने के कारण इसका उत्तरी भाग समशीतोष्ण कटिबंध तथा दक्षिणी भाग उत्ग कटिबंध में स्थित है।

प्रश्न 51.
पश्चिम बंगाल में वर्षा किस मानसून से होती है।
उत्तर :
पश्चिम बगाल में वर्षा बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होती है।

प्रश्न 52.
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक और सबसे कम वर्षा किस अंचल में होती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक वर्षा उत्तर में पर्वतीय अंचल में तथा सबसे कम वर्षा पश्चिम के पठारी भाग में होती है।

प्रश्न 53.
पश्चिम बंगाल में मानसून प्रत्यावर्तन किस महीने में होता है? उस समय यहाँ कौन-सा ऋतु रहता है?
उत्तर :
अक्टूबर एवं मध्य नवम्बर का समय पश्चिम बंगाल में मानसून प्रत्यावर्तन का समय है। इस समय यहाँ शरद ऋतु रहती है।

प्रश्न 55.
पश्चिम बंगाल में अधिकांश चाय के बगान किस जिले में है ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के अधिकाश चाय बगान उत्तर के दो जिलों दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी में स्थित है।

प्रश्न 56.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक क्षेत्र में कितने इस्पात के कारखानें हैं?
उत्तर :
वर्तमान समय में पश्चिम बगाल में सार्वज़निक क्षेत्र के दो विशाल इस्पात के कारखाने स्थित है :-
(i) SAIL (Steel Authority of India Limited)
(ii) DSP (Durgapur Steel Plant)

प्रश्न 57.
भारत में पहला जूट उद्योग कब और कहाँ स्थापित हुआ था?
उत्तर :
भारत में पहला जूट उद्योग सन् 1855 ई० में हुगली नदी के किनारे रिसड़ा में स्थापित हुआ था।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 58.
पश्चिम बंगाल में जूट की अधिकांश मिलें कहां स्थित हैं?
उत्तर :
यहां की समस्त जूट की मिले कोलकाता के समीप हुगली नदी के दोनों किनारों पर उत्तर में बॉसबेड़िया से दक्षिण में बिड़लापुर तक प्राय: 96 किलोमीटर तथा 4 किलोमीटर चौड़ी पट्टी में स्थित है।

प्रश्न 59.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख जूट उद्योग के फेन्द्रों कहाँ है?
उत्तर :
यहाँ के जूट उद्योग के प्रमुख केन्द्र बाली, आगरपाड़ा, टीटागढ़, रिसड़ा, श्रीरामपुर, श्यामनगर, नैहट्टी, कांकीनाड़ा, उलूबेड़िया, बजबज, कोन्नगर, हावड़ा एवं सलकिया आदि है।

प्रश्न 60.
पश्चिम बंगाल में तेल की मिले किन जिलों में स्थित हैं?
उत्तर :
बीरभूम, बर्द्धमान, हावड़ा, जलपाईगुड़ी, हुगली, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना जिलों में स्थित है।

प्रश्न 61.
काँच की वस्तुओं का निर्माण पश्चिम बंगाल में किन स्थानों पर होता है?
उत्तर :
बेलघरिया, बेलूड़, कोलकाता, रानीगंज एवं आसनसोल में होता है।

प्रश्न 62.
पश्चिम बंगाल में रासायनिक पदार्थों के कारखाने कहाँ स्थापित हैं?
उत्तर :
कोलकाता, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना, हावड़ा तथा हुगली जिलो मे स्थित हैं।

प्रश्न 63.
दार्जिलिंग को पहाड़ी स्थानों की रानी क्यों कहते हैं?
उत्तर :
टाइगर हिल से एवरेस्ट एवं कंचनजंगा की हिमाच्छादित चोटियों का मनोरम दृश्य तथा कचनजंगा पर उगते सूर्य को अलौकिक छटा दिखाई पड़ती है। प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण होने के कारण इसे पहाड़ी स्थानो की रानी कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
गर्मी के मौसम में लोग दार्जिलिंग क्यों जाते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय भाग की जलवायु मुख्यत: इस प्रदेश की ऊँचाई से प्रभावित है। समुद्र की सतह से लगभग 2440 मी० ऊँचाई पर स्थित इस भू-भाग की जलवायु शीत-प्रधान है।
गर्मी के दिनों में भी यहाँ ठंडक पड़ती है। मई-जून के महीने में यहाँ का औसत तापक्रम 15°-16° सेंन्टीग्रेड से अधिक नहीं जाता है। उस समय पश्चिम बंगाल के मैदानी भाग में औसत तापकम 30°-35° सेंटीग्रेड रहता है। तभी तो ग्रीष्म ऋतु की झुलसती धूप एवं गर्मी से राहत पाने एवं मनोरम जलवायु का आनन्द लेने के लिए कोलकाता लोग दार्जिलिंग घूमने के लिए जाने हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 2.
जाड़े में दार्जिलिंग के स्कूलें बन्द क्यों हो जाते हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के इस पर्वतीय भाग को जलवायु मुख्यत: इस प्रदेश की ऊँचाई से प्रभावित है। समुद्र की सतह से लगभग 2440 मी॰ ऊँचाई पर स्थित इस भू-भाग की जलवायु शीत-प्रधान है। गर्मी के दिनों में भी यहाँ उंडक पड़ती है। मई-जून के महोने में यहाँ का औसत तापक्रम 15°-16° सेन्टीग्मेड से अधिक नहीं जाता है। जाड़े की 1 का औसत तापमान 6° 7° सेण्टीग्रेड रहता है। जलवायु की इस कठोरता के कारण ही दार्जिलिंग के स्कूल दिसम्बर-जनवरी के जाडे में बन्द रहते हैं।

प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी पठारी भाग की जलवायु विषम क्यों है?
उत्तर :
यहाँ की जलवायु विषम इसलिए है कि पश्चिम बंगाल का यह भाग समुद्र से दूर है। इसका धरातल भी कड़ी चट्टानों से बना हुआ है। इसलिए यहाँ की जलवायु ना तो उत्तरी भाग की तरह ठण्डी है और ना ही दक्षिणी भाग की तरह सम है। यहाँ जाड़े में अधिक जाड़ा और गर्मी में अधिक गर्मी पड़ती है। इस क्षेत्र में गर्मी का औसत तापक्रम 30° C-40° C एवं जाड़े का 17° C रहता है।
वर्षा इस भाग में दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाओ से होती है। ये हवाएं गंगा के मैदान से होती हुई यहाँ पूरब से आती हैं। यहाँ तक आते-आतें अपनी नमी बहुत खो चुकी रहती हैं, इसलिए यहाँ वर्षा सबसे कम होती है। वर्षा का औसत 100 से०मी० से 125 से०मी० के बीच है।

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग की नदियों में वर्ष भर जल क्यों नहीं रहता है?
उत्तर :
छोटानागपुर के पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर मयूराक्षी, अजय, दामोदर, रूपनारायण, हल्दी, द्वारकेश्वर एवं सुवर्ण रेखा नदियाँ अपनी सहायक नदियों सहित प्रवाहित होती है। इस पठारी भाग का ढाल पश्चिम से पूर्व है, अतः पठारी भाग की नदियाँ पश्चिम से पूर्व को बहती है। सुवर्ण रेखा को छोड़कर सभी नदियाँ हुगली में मिल जाती हैं। नदियों का उद्गम स्थल हिमाच्छादित नहीं है और न तो यहाँ वर्षा ही अधिक होती है। इसलिए इन नदियों में वर्ष भर जल नहीं रहता है।

प्रश्न 5.
सुन्दरवन की नदियों के मुहाने चौड़ा क्यों हैं?
उत्तर :
इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ विद्याधरी, पियाली, राय मंगला, कालिन्दी, मातला, इच्छामती, सप्तमुखी, गोसाबा, हरियाभंगा आदि हैं। इनमें मातला सबसे प्रमुख नदी है। भूमि का ढाल दक्षिण को है। ये नदियाँ ज्वार आने पर जल से भर जाती हैं एवं भाटा आने पर सूख जाती हैं। ये ज्वारीय नदियाँ हैं। ये नदियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। निरन्तर अवसादों के जमाव से इन नदियों का उत्तरी भाग उथला है जबकि ज्वार के कारण दक्षिणी भाग चौड़ा एवं गहरा है। हुगली का मुँहाना 20 कि०मी० और मातला नदी का मुहाना 15 कि०मी० चौड़ा है।.

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल को जल की समस्या का सामना क्यों करना पड़ता है?
उत्तर :
बंगाल की 8 नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और बड़ी मात्रा में जलराशि लाती हैं। अधिकतर नदियों का जल का स्रोत मानसूनी वर्षा है जो मात्र तीन महीने होती है। जल का संरक्षण या भंडारण एक समस्या है क्योंकि अधिकतर नदियों के स्रोत पश्चिम बंगाल से बाहर सिक्किम या भूटान में है। पारिस्थितिकी और आर्थिक दृष्टिकोण से भी हिमालय के पर्वतीय भाग में जल का भंडार सम्भव नहीं है, अत: इन नदियों का पानी बिना किसी प्रतिरोध के बंगलादेश में चला जाता है। वर्षाजल-संग्मण द्वारा जल का संरक्षण किया जा सकता है, पर सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं अपनायो गयी है। इसलिए पश्चिम बंगाल को जल समस्या का सामना करना पड़ता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल के उत्तर पर्वतीय भाग एवं पश्चिम के पठारी भाग की तुलना कीजिए।
उत्तर :

पर्वतीय भाग पठारी भाग
i. उत्तर का पर्वतीय भाग समुद्रतल से सामान्य ऊँचाई 3048 मी० पर है। i. पश्रिम का पठारी भाग समुद्रतल से सामान्य ऊँचाई 600 मी० पर है।
ii. यहाँ से बर्फ पोषित नदियाँ निकलती हैं। ii. यहाँ से वर्षा पोषित नदियाँ निकलती हैं।
iii. पर्वत की ऊँचाई पश्चिम से पूर्व की ओर घटने लगती है। iii. पठारी भाग की ऊँचाई पूर्व से पश्चिम की ओर है।
iv. पर्वतीय भाग में मूल्यवान वनस्पतियाँ पायी जाती हैं। iv. पठारी भाग प्राय: वनस्पतिविहीन है।
v. पर्वतीय भाग खनिजविहीन क्षेत्र हैं। v. यहाँ पर विभिन्न प्रकार के खनिज पाये जाते हैं।
vi. इसका महत्व चाय की कृषि के लिए है। vi. इसका महत्व कृषि के लिए नहीं है।

प्रश्न 8.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग एवं मैदानी भाग की तुलना कीजिए।
उत्तर :

पठारी भाग मैदानी भाग
i. इसकी सामान्य ऊँचाई समुद्र सतह से 600 मी० है। i. इस भू-भाग का धरातल समुद्र की सतह से 60 से 150 मी० ऊँचाई है।
ii. इसका सामान्य ढाल पश्चिम से पूरब की ओर है। ii. यह क्षेत्र उत्तर से दक्षिण क्रमशः ढालुआ है।
iii. इस भाग का धरातल ऊँचा-नीचा, ऊबड़-खाबड़ है। iii. नदियों की घटियों को छोड़कर शेष भाग समतल हैं।
iv. पठारी भाग की नदियाँ पश्चिम से पूर्व को बहती हैं। iv. इस भाग की नदियाँ दक्षिण-पूर्व को बहती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 9.
दक्षिण-पश्चिमी मानसून एवं उत्तरी-पूर्वी मानसून की तुलना कीजिए।
उत्तर :

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून उत्तरी-पूर्वी मानसून
i. दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ गर्मी की दिनों में प्रवाहित होती हैं। i. उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएं जाड़े की दिनों में प्रवाहित होती हैं।
ii. ये मानसुनी हवाएं समुद्र से समतल की ओर चलती हैं। ii. ये मानसूनी हवाएं समतल से समुद्र की ओर चलती हैं।
iii. ये आर्द्र होती हैं। iii. ये शुष्क होते हैं
iv. ये हवाएं गर्मी तो कम कर देती है, पर वायु आर्द्रता के कारण उमस बढ़ा देती है। iv. ये हवाएँ जाड़े में शीत का प्रकोप बढ़ा देती है।

प्रश्न 10.
पशि चम बंगाल में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से वर्षा होती है। कारण स्पष्ट करो।
उत्तर :
देश के अन्य भागों की तरह गर्मी की मानसूनी हवाएं समुद्र से समतल की ओर चलती है। इन्हें दक्षिण-पश्चिमी मानसून या गर्मी का मानसून कहते हैं। पश्चिम बंगाल में जो मानसूनी हवाएं चलती हैं वे बंगाल की खाड़ी से निकलती हैं। यह हवा पश्चिम बंगाल में 15 जून को आती है और सितम्बर के अन्त तक रहती है। ये हवाएं हिन्द महासागर और बंगाल की खा ड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके आती हैं, अत: ये आर्द्र होती हैं, इसीलिए इन्हें आर्द्र मानसून भी कहा ज जाता है।

जब ये हवाएं पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में स्थित हिमालय से टकराती हैं तो प्रदेश में खूब वर्षा करती हैं। उत्तर. से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम जाने पर वर्षा की मात्रा घट जाती है। इन हवाओं से पर्वतीय भाग एवं तराई भाग में सर रधिक 300 से॰ मी॰ तथा दक्षिणी भाग में स्थित कोलकाता में 165 से॰मी॰ वर्षा होती है तथा पश्चिम के पठारी भाग में 100 से॰मी॰ वर्षा होती है।

प्रश्न 11.
पश्चिम बंगाल के पर्वतीय और तटीय क्षेत्रों के जलवायु का तुलनात्मक वर्णन करें।
उत्तर :

पर्वतीय जलवायु (Mountain Climate) तटीय जलवायु (Coastal Climate)
i. यहाँ औसत तापमान कम रहता है। i. इस भाग का औसत तापमान सामान्य रहता है।
ii. पर्वतीय भाग में जाड़े में हिमपात होता है। ii. तटीय प्रदेश में कभी भी हिमपात नहीं होता है।
iii. पर्वतीय भाग में ग्रीष्म काल में मौसम काफी सुहावना रहता है। iii. तटीय प्रदेश ग्रीष्म काल में काफी गर्मी पड़ती है।
iv. पर्वतीय भाग में जाड़े में अत्यधिक शीत तथा ग्रीष्म काल में सामान्य गर्मी पड़ती है, अतः यहाँ की जलवायु विषम है। iv. समुद्र तटीय प्रदेशों में न अधिक गर्मी और न अधिक ठंडी पड़ती है, अतः यहाँ की जलवायु सम है।
v. सबसे अधिक (500 cm) पर्वतीय भाग में वर्षा होती है v. तटीय प्रदेशों में सामान्य वर्षा (200 cm) होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल के डेल्टा क्षेत्र में खारी मिट्टी क्यों पाई जाती है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के डेल्टा प्रदेश की नदियों में ज्वार के समय समुद्र का जल भर जाता है। समुद्र का जल नदियों के तटों के चारों ओर फैल जाता है। इसलिए डेल्टा प्रदेश की मिट्टी सदा गीली रहती है, और मिट्टी में खारेपन का अंश अधिक रहता है।

प्रश्न 13.
पश्चिम बंगाल के तीनों क्षेत्रों से प्रवाहित होनेवाली नदियों के नाम लिखें?
उत्तर :
उत्तर के पर्वतीय भाग की नदियाँ :- गंगा, भागीरथी, महानन्दा, बालसन, मेची, तिस्ता, तोरसा, जलढाका, रायढाका। पश्चिमी पठारी भाग की नदियाँ :- दामोदर, मयूराक्षी, ब्रह्याणी, अजय, द्वारकेश्वर, सिलाई, रूपनारायण, कंसाई एवं सुवर्ण रेखा।
दक्षिणी भाग की नदियाँ :- मातला, बरतला, सप्तमुखी, गोसाबा एवं हुगली।

प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल की बर्फ पोषित, वर्षा पोषित एवं ज्वार पोषित नदियों के नाम लिखें।
उत्तर :

  1. बर्फ पोषित नदियाँ :- गंगा, भागीरथी, महानन्दा, बालसन, मेची, तिस्ता, तोरसा, जलढाका, रायगढ़ आदि हैं।
  2. वर्षा पोषित नदियाँ :- दामोदर, मयूराक्षी, ब्रह्माणी, अजय, द्वारकेश्वर, सिलाई, रूपनारायण, कसाई, सुकर्ण रेखा आदि हैं।
  3. ज्वार पोषित नदियाँ :- मातला, बरतला, सप्तमुखी, गोसाबा एवं हुगली आदि हैं।

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल के पूर्व की ओर बहनेवाली नदियों का नाम लिखें एवंवं उनका वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की पूर्ववाहिनी नदियाँ :- इस अंचल की प्रमुख नदियाँ हैं – दामोदर, द्वारकेशवर, सिलाई, कसावती, मयूराक्षी, अजय। ये सभी नदियाँ ढाल के अनुसार पश्चिम से पूरब की ओर बहती हैं। मयूराक्षी और अजय भागीरथी में जा मिलती हैं। द्वारकेश्वर और शिलाइ नदियाँ मिलकर रूपनारायण नदी कहलाती हैं। राढ़ मैदान का निर्माण इन्हीं नदियों के जलोढ़ से हुआ है। दामोदर इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है।

प्रश्न 16.
पश्चिम बंगाल के तराई क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर :
तराई प्रदेश की भू-प्रकृति (Topography of Terai Region) :- पश्चिम बंगाल के पर्वतीय भाग के दक्षिण में तराई प्रदेश एक पतली पट्टी के रूप में पश्चिम से पूर्व की ओर है। इसके अन्तर्गत दार्जिलिंग एवं जलपाइगुड़ी जिलों के दक्षिणी भाग तथा कूचबिहार का उत्तरी भाग सम्मिलित है। यह हिमालय का पर्वतपदीय क्षेत्र है। इस प्रदेश का ढाल उत्तर से दक्षिण की ओर इै। इस प्रदेश का ढाल अत्यन्त मंद है। अत: हिमालय से निकलने वाली नदियों का प्रवाह मन्द है और ये नदियाँ अपने साथ बहाकर लाये कंकड़ों, पत्थरों का जमाव यहाँ की है। इस प्रकार इस भू- भाग का निर्माण व ५कड़ों, पत्थर और बालू के कणों के जमाव से हुआ था। धरातल सामान्यतः ऊँचा – नीचा है। भूटान के प्रवेश मार्गों में पांच मा गर तराई क्षेत्र में पड़ते हैं अत: यह भू-भाग दुआर (Duar) कहा जाता है। इस प्रदेश को समुद्र तल से ऊँचाई 50 m से 150, n तक है।

प्रश्न 17.
पश्चिम-बंगाल के जलवायु की विशेषता का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के जलवायु की विशेषताएँ :-

  1. पश्चिम बंगाल की जलवायु ऊष्णार्द्र है।
  2. पश्चिम बंगाल में ग्रीष्म, वर्षा, शरद, एवं शीत ऋतुएँ क्रमागत आती है।
  3. मीष्म काल लम्बा एवं शीतकाल छोटा होता है।
  4. वर्षा दक्षिणी-पश्चिम मानसूनी हवाओ द्वारा ग्रीष्म काल में होती है।
  5. शीत ॠतु शुष्क होती है। इस समय उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएं चलती हैं।
  6. पूरब से पश्चिम की ओर तापमान बढ़ता जाता है जबकि दक्षिण से उत्तर की ओर तापमान घटता जाता है।
  7. समुद्र तटीय भाग में सम जलवायु तथा समुद्र से सुदूर पश्चिम पठारी भाग में विषम जलवायु पायी जाती है।
  8. पश्चिम बगाल में अपैल – मई महीनों में काल वेशाखी (Narwester) चलता है जिससे वर्षा होती है तथा मैदानी भागों में गर्मी से थोड़ा राहत मिलती है।
  9. पश्चिम बगाल के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु शीतल एवं नम है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 18.
पश्चिम बंगाल के पर्यटन केन्द्रों के नाम लिखें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पर्यटन केन्द्र (Tourist Sites) :- घुमक्कड़ी जिज्ञासा पश्चिम बंगाल पर ही चरितार्थ होती है। पर्यटन केन्द्र पश्चिम बंगाल के आकर्षक रहे हैं। संक्षेप में यहाँ के प्रमुख पर्यटन केन्द्र निम्न है :-

सुन्दरवन, सेटपाल चर्च, विक्टोरिया मेमोरियल, द्वितीय हुगली सेतु, दक्षिणेश्वर काली मंदिर, बी० बी० डी० बाग, बोटानिकल गार्डन, विष्युपर, शान्ति निकेतन, नेशनल लाइब्रेरी, चिड़ियाघर, साईन्स सिटी, नेशनल म्यूजियम, अदीना मंदिर, हजार दुआरी महल, बिड़ला मंदिर, निकोपार्क एवं हावड़ा ब्रिज आदि।

प्रश्न 19.
कोलकाता बंदरगाह के पोताश्रय का वर्णन करो।
उत्तर :
कलकत्ता एक कृत्रिम बन्दरगाह है, यहाँ डायमण्ड एवं खिदिरपुर में पोताश्रय बनाये गये हैं। यह एक नदी बन्दरगाह है, केवल ऊँच ज्वार के समय ही जलयान बन्दरगाह तक आते हैं। यहाँ दमदम में तेल का गोदाम बनाया गया है। इसके भार को कम करने के लिए हल्दिया को इसका सहायक बन्दरगाह के रूप में विकसित किया गया है। सुरक्षित पोताश्रय के कारण इस बन्दरगाह पर विशाल जलयान तुफानों से सुरक्षित खड़े रहते हैं। यहाँ अनेक डॉक्स तथा गोदाम भी बनाये गये हैं। हल्दिया में तेलशोधन कारखाना भो लगाया गया है।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल के हैण्डलूम एवं सिल्क टैक्सटाइल का वर्णन करें।
उत्तर :
स्थानीय मांग, सस्ते श्रमिक, रानीगंज एवं झरिया से कोयला, उन्नत यातायात व्यवस्था, कोलकाता बंदरगाह जिससे टेक्सटाइल मशीनें, रंग एवं रासायनिक पदार्थ लाया जाता है।
उपर्रुक्त सुविधाओं के कारण सूत्री वख्ख उद्योग श्रोरामपुर, गार्डेनरिच, रिसड़ा, कोन्नगर, फुलेश्वर, उलूबड़िया, सोदपुर, बेलघरिया, हावड़ा और लिलुआ आदि स्थानों पर विकसित हुआ है। ये सभी क्षेत्र हुगली नदी के तट पर स्थित हैं। 200304 में पश्चिम बंगाल में कुल उत्पादित यार्न 514.34 लाख किलोग्राम, मिल में बने कपड़े 721.43 लाख वर्ग मीटर और हैण्डलूम कपड़ा का उत्पादन 4,634 लाख वर्ग मीटर था।

प्रश्न 21.
पश्चिम बंगाल के सात आश्चर्य क्या हैं?
उत्तर :
पश्चिम बगाल के सात आश्चर्य निम्न हैं :-

  1. सुन्दरवन
  2. विक्टोरिया मेमोरियल
  3. दार्जिलिग (टवायट्रेन) एवं दार्शनिक दृष्य,
  4. विष्गुपुर टेरा-कोटा मंदिर
  5. बोटानिकल गार्डन
  6. हावड़ा बिज और
  7. बी० बी० डी० बाग।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 22.
पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग के व्यापार का वर्णन करें।
उत्तर :
व्यापार (Trade) : चाय को कोलकाता चाय बाजार में निलाम (Auctioned) किया जाता है। यही से व्यापारी इसे खरीद कर पूरे देश मे व्यापार करते हैं। यहां पर निलामी बाजार पर भारतीय चाय बोर्ड (India Tea Board) का नियत्रण है। यहा से चाय कोलकाता बंदरगाह द्वारा बिटेन, अमेरिका, रूस, जर्मनो, यूकेन और पश्चिमी देशों को निर्यात की जाती है। भारत सरकार सन् 2005 में चाय के निर्यात से कुल 1133 करोड़ रुपये की कमाई की।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास के कारक क्या हैं ?
उत्तर :
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास के लिए आवश्यक कारक :-

  1. कच्चा खाद्य पदार्थ
  2. शक्तिसाधन
  3. स्वच्छ जल
  4. कुशल श्रमिक तथा इंजीनियरिंग
  5. यातायात के साधन
  6. पैकिंग तथा पैकेजिंग के उत्तम साथन
  7. उत्तम खुले मैदान
  8. नयी तकनीक तथा मशीन
  9. पूंजी, बाजार, घनी जनसंख्या, सामाजिक-सांस्कृतिक साथन।

प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल के सूती वस्त्र उद्योग की क्या समस्याएं हैं?
उत्तर :
समस्याएं (Problems ) :- पश्चिम बंगाल के सूती मिलों की निम्न समस्याएं हैं :-

  1. कच्चे माल की कमीयहां पर कपास उत्यादन लगभग बन्द हो गया है
  2. सिन्थेटिक कपड़ों से प्रतियोगिता
  3. प्रतिस्पधां-अन्तर्राष्ट्रीय बाजार जहाँ पर यहां के तैयार सूती कपड़ों की मांग नहीं है।
  4. कच्चे कपास की अत्यधिक वढ़ी कीमत एवं
  5. बिजली की कमी, श्रमिक आन्दोलन, पुरानी मशीनें आदि यहां पर सूती वस्रोद्योग से रूगण कर दिया है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग की समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग की समस्याएं :-

  1. कच्चे माल की कमी : सन् 1947 में देश विभाजन के परिणामस्वरूप अधिकांश जूट मिले भारत में रह गई परन्तु 70 प्रतिशत जूट उत्यादक क्षेत्र पाकिस्तान (बंगला देश) में चले गये। अतः कच्चे माल की कमी हो गई
  2. विदेशी प्रतिस्पर्धा : जूट उद्योग की वर्तमान समस्या में मलेशिया, फिलीपींस, बाजील, मिख्त आदि देशों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा है। यह देश बोरों के लिए कृत्रिम रेशे का उत्पादन कर रहे हैं।
  3. पुरानी मशीनें : हमारी समस्या पुरानी मशीनें हैं जिनका उत्पादन क्षमता कम है। अतः उत्पादन खर्च बढ़ जाता है।
  4. कारखानों का बन्द होना : पुरानी मशीनों और श्रमिक समस्या के कारण जूट उद्योग के लाभजनक न रहने के कारण अधिक मात्रा में जूट मिलें बन्द हैं अथवा बंद होने के कगार पर हैं।

प्रश्न 26.
पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग के विकास के लिए किये गये प्रयासों का वर्णन करें।
उत्तर :
जूट उद्योग की समस्याओं का समाधान

  1. पुरानो मशीनों को बदल कर नयी मशीने लगायी गयी हैं।
  2. मूल्य निर्धारण के लिए भारतीय जूट निगम की स्थापना
  3. भारतीय जूट उत्पादनों के विभिन्न साधनों द्वारा प्रचार।
  4. दामोदरघाटी में कच्चे माल जूट के उत्पादन द्वारा कच्चे माल की कमी दूर
  5. जूट उद्योग को संरक्षण।

प्रश्न 27.
धान के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें।
उत्तर :
धान के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions) वर्षा (Rain fall) :- धान के उत्पादन के लिए अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। वर्षा 150 cm-200 cm तक आश्यक है। इसकी रोपाई और विकास के समय भारी वर्षा चाहिए।
तापमन (Temperature) :- इसके उत्पादन के लिए तापमान 16° C-27° C के बीच आवश्यक है। औसत तापमान 22° C होना चाहिए।
मिट्टी (Soil) :- धान मुख्यत: जलोढ़ मिट्टी में उगाया जाता है। नदी घाटी की जलोढ़ मिट्टी और डेल्टाई प्रदेश धान उत्पादन के लिए उत्तम है।
भू-प्रकृति (Nature of Land) :- उपजाऊ समतल भूमि धान के उत्पादन के लिए आदर्श है। इससे जमीन पर पानी जमा रहता है और धान की फसल अच्छी होती है।
श्रमिक (Supply of Labours) :- धान की कृषि के लिए प्रचूर मात्रा में सस्ते श्रमिको की आवश्यकता पड़ती है। पूँजी की आवश्यकता (Supply of Capitals) :- धान एक रोपण कृषि है। वर्तमान समय में यह मुद्रा आधारित फसल हो गयी है।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं के प्रभाव का वर्णन करें।
उत्तर :
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी जलवायु का प्रभाव (Impact of South West Monsoon) : इन मानसूनी हवाओं द्वारा ग्रीष्म ऋतु में वर्षा होती है। दार्जिलिंग हिमालय की जलवायु अत्यन्त आरामदायक हो जाती है। यहां औसत तापमान 14° C-17° C तक रहता है। पर्वतीय भाग में वर्षा 300-400 से॰मी॰ तक होती है, जिससे कभी-कभी पहाड़ के घिसकने से मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं।

मैदानी भाग में 200-250 सेमी॰ तक वर्षा होती है। अत: इस समय बोरो धान की फसल वृहद पैमाने पर ऊगाई जाती है। पर्वतीय ढलानों में चाय का उत्पादन भी किया जाता है। यह समय जूट की कृषि के लिए पर्याप्त होती है अतः जूट की कृषि भी दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने पर ही किया जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के भौगोलिक स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर :
स्थिति : पश्चिम बंगाल भारतवर्ष के पूर्वी भाग तथा एक अन्य स्वतंत्र राष्ट्र बंगलादेश के पश्चिमी सीमान्त पर स्थित है। इसका विस्तार पूर्व की ओर 89° C-50° C पूर्व देशान्तर से पश्चिम 85°-50° पूर्व देशान्तर तथा उत्तर में 27° 10 उत्तर अक्षांश से दक्षिण में 21°-38° उत्तर अक्षांश तक है। पश्चिम बंगाल के नदिया जिला के सदर शहर कृष्णनगर के ऊपर से पूर्व से पश्चिम की ओर कर्क रेखा गुजरती है।

प्रश्न 30.
पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम-बंगाल का प्रशासनिक विभाग (Administrative Division of West Bengal : पश्चिम बंगाल को बेहतर प्रशासन देने के लिए राज्य सरकार ने 19 जिलों को इसके कुल तीन प्रशासनिक विभागों में बांटा है – जलपाईगुड़ी प्रशासनिक विभाग, बर्द्धमान प्रशासनिक विभाग, प्रेसिडेन्सी प्रशासनिक विभाग।
प्रत्येक प्रशासनिक विभाग का एक विभागीय कमिश्नर (Divisional Commissions) अन्दर आने वाले जिले निम्न है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल 1

प्रश्न 31.
पश्चिम बंगाल के जल-संसाधन के उपयोग और अति उपयोग का वर्णन करें।
उत्तर :
दुनिया से स्वच्छ जल का तीव्र गति से खात्मा या कमी हो रहा है। आने वाले 25 वर्षों में विश्व का 2 / 3 जनसंख्या स्वच्छ पानी की कमी से जूझेगी।
पश्चिमी बंगाल में पूरे भारत वर्ष की 8 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती हैं पपश्चिम बंगाल में पूरे भारत का 7.5 प्रतिशत जल संसाधन है। अतः जनसंख्या में अनियमित वृद्धि के कारण यहाँ जल की समस्या बढ़ रही है। इसके लिए बढ़ती संचाई की मांग भी जिम्मेदार है। बंगाल डेल्टा जिसे अतिरिक्त जल का क्षेत्र माना जाता था वह पानी की कमी से प्रभावित होता है। इस प्रकार वर्षा की कमी एवं अधिकता से पश्चिम बंगाल सूखे और बाढ़ जैसे स्थिति से प्रभावित है। कोलकाता बंदरगाह सिल्ट के जमाव की समस्या से प्रभावित है। पश्चिम बंगाल की कई नदियां पिछले दो शताब्दियों से अपने मार्ग को बदल ली एवं उनमें से कई नदियां बिलुप्त भी हो गयी हैं।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल में जल के अत्यधिक उपयोग का वर्णन करो।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन के अपवत्य (अत्यधिक) उपयोग की विशेषता :-
पश्चिम बंगाल में उपलब्ध जल संसाधन असमान है। पश्चिम बंगाल में नहरों (Canals) का जाल विछा हुआ है। नहरों द्वारा पानी कृषि गत भूमि तक पहुँचाता है। पश्चिम बंगाल में सिंचाई प्रणाली सबसे ज्यादा जल का उपायेग करती हैं। यहां पर जल के उपयोग को निम्न तालिका द्वारा समझा जा सकता है।
पश्चिम बंगाल में जल की उपयोगिता :-

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल 3

प्रश्न 33.
पश्चिम बंगाल के तराई क्षेत्र की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
दार्जिलिंग के दक्षिण में हिमालय पर्वत ढालुआ होकर समतल भाग से मिल गया है। पर्वतीय भाग के नीचे की भूमि को तराई क्षेत्र कहा जाता है। यह पश्चिम से पूरब एक पतली पट्टी के रूप में विस्तृत है। इसके अन्तर्गत दार्लिलिंग और जलपाईगुड़ी के दक्षिणी भाग तथा कूचबिहार जिले का ऊपरी भाग आता है। यह हिमालय का पर्वत-पठारीय क्षेत्र (Foot hill) क्षेत्र है। यह क्षेत्र उत्तर से दक्षिण को ढालुआ है। भूमि का ढाल मन्द होने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियों का वेग इस क्षेत्र में मन्द पड़ जाता है।

अतः अपने द्वारा लाये गये कंकड़-पत्थर का ढेर वे यहाँ लगा देती है। अत: इस क्षेत्र का निर्माण हिमालय से निकलने वाली नदियों जैसे महानन्दा, तिस्ता, जलढाका, तोरसा, रायडक आदि ने किया है। सामान्य भूमि उबर-खाबड़ है। इस भाग को पार कर पहाड़ी नदियाँ मैदानी भाग में प्रवेश करती है। भूटान में प्रवेश के 5 मार्ग इसी क्षेत्र में है। इसी भाग को दुआर (Doors) भी कहा जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 34.
सुन्दरवन के नदियों की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
दार्जिलिंग के दक्षिण में हिमालय पर्वत ढालुआ होकर समतल भाग से मिल गया है। पर्वतीय भाग के नीचे की भूमि को तराई क्षेत्र कहते हैं।

  1. सुन्दरवन की नदियाँ सक्रिय है, अत: वर्ष भर इनमें प्रवाह रहता है।
  2. ये पर्याप्त मात्रा में अवसाद जमा कर डेल्टा निर्माण करती हैं।
  3. इन नदियों का मुहाना चौड़ा है।
  4. ये नदियाँ ज्वारीय हैं। ज्वार के समय नदी का जल विपरीत धारा में बहने लगता है अत: इन नदियों में ज्वारीय भित्ति बनते हैं।
  5. इन नदियों का ऊपरी भाग उथला है, तथा दक्षिणी या निचला भाग ज्वार के पानी के बहाव के कारण गहरा है।
  6. इन नदियों का पानी समुद्री प्रभाव से खारा होता है

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र में अधिक वर्षा क्यों होती है?
उत्तर :
पश्चिम के पहाड़ी भागों में वर्षा समान नहीं है। कर्सियांग में वर्ष का औसत 400 से 425 सेमी० तथा कलिपोंग में 225 सेमी है, इस प्रकार से पर्वतीय, अंचल में अधिक वर्षा होती है। यहाँ वर्षा दक्षिणी – पश्चिमी मानसून से होती है। मानसूनी हवाए बंगाल की खाड़ी से आती है। अत: वाष्प पूर्ण होती है। ये पर्वतों से टकराकर अधिक वर्षा करती हैं।

प्रश्न 36.
पर्वतीय क्षेत्र की नदियाँ उत्तर से दक्षिण को बहती है क्यों ?
उत्तर :
पर्वतीय भाग का ढाल उत्तर से दक्षिण है। पानी अपने स्वभावानुसार ऊँचे स्थान से नीचे को बहती है। बंगाल का सबसे ऊँचा भाग हिमालय पर्वत है और भूमि का ढाल उत्तर से दक्षिण की ओर है। यही कारण है कि ढाल का अनुशरण करते हुए नदियाँ उत्तर से दक्षिण को बहती है।

प्रश्न 37.
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी पठारी भाग में कम वर्षा होती हैं क्यों?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग में वर्षा दक्षिण-पश्चिम के मानसूनी वायु से होती है। ये हवाएं गंगा के मैदान को पार कर पूरब की ओर से आती हैं। अत: यहाँ आते-आते इनमें भी नमी हो जाती है, इसलिए इस अंचल में वर्षा कम होती है। वर्षा का औसत इस क्षेत्र में 100 से 125 सेमी॰ है। यहाँ कोई ऊँचा पर्वत नहीं है जो भाप भरी हवाओ को रोककर वर्षा करा सके।

प्रश्न 38.
पश्चिम बंगाल के डेल्टा भाग में अधिक वर्षा होती है क्यों ?
उत्तर :
डेल्टा अंचल में वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है, अतः वर्षा दक्षिण में अधिक है तथा उत्तर में क्रमशः कम होती है। वार्षिक वर्षा 160 सेमी० है। जबकि उत्तर भाग में स्थित मुर्शिदाबाद में 118 सेमी॰ है। यही नहीं, औसत वर्षा कोलकाता में 71 दिन होती है, जबकि मुर्शिदाबाद में वर्षा 48 दिन होती है। समुद्र के समीपीय के कारण यह क्षेत्र प्राय: समुद्री तुफानों की तेज हवा और वृष्टि से प्रभावित रहता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 39.
सुन्दरवन में जल का बहाव ठीक नहीं है, क्यों?
उत्तर :
गंगा मुलायम मिट्टी की अपार शीशा लाकर यहाँ जमा करती है। जमा करने की इस क्रिया में पेंदा उथला हो जाता है जिससे जल एक सोत में आसानी से नहीं बह पाती है, अत: नदी कई शाखाओं में विभक्त होकर समुद्र में गिरती है। मिट्टी के इस जमाव एवं नदियों के विभाजन से दक्षिणी भाग में कई छोटे-छोटे द्वीपों की रचना हो गयी है। सागर सबसे प्रमुख द्वीप है। इसकी मिट्टी में खारापन रहता है।

प्रश्न 40.
पर्यटक गर्मी में दार्जिलिंग आते हैं, क्यों?
उत्तर :
दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के हिमालय पर्वत पर बसा एक शहर है। यह 2600 मी० की ऊँचाई पर स्थित है। अत: गर्मी में यहां तापक्रम 15° C से अधिक नहीं हो पाता। गर्मी में मौसम सुहाना रहता है। जलवायु भी स्वास्थप्रद है। दार्जिलिंग के टाईगर हिल से सूर्योदय का मनोरम दृश्य दिखायी देता है। अतः गर्मी में मैदानो भाग की भोषण गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग दार्जिलिंग जाते हैं। यहाँ पर पर्यप्त उद्योग का विकास किया गया है। यह पश्चिम बंगाल की गर्मी की राजधानी है।

प्रश्न 41.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख नदियों का नाम लिखो एवं दामोदर नदी के अपवाह क्षेत्र का वर्णन करों।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की प्रमुख नदियाँ :- भागीरथी, हुगली, तिस्ता, महानन्दा, जलढाका, दामोदर, मयूराक्षी, अजय, रूपानारायण, सुवर्णरा, कंसावती, मातला, बरतला, सप्तमुखी एवं गोपसाबा है।
दामोदर नदी का प्रवाह क्षेत्र :- पश्चिम बंगाल यह एक प्रमुख नदी है। यह नदी झारखण्ड के पलामू जिले के रूपसट से निकलती है और बराकर के पस पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। इस नदी का प्रवाह अत्यन्त तेज है। वर्षा काल में ये यह उफान पर आ जाती है। दामोदर नदी उफान से प्रषाहत होने के कारण आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ लाती है इससे काफी धन जन की क्षति होती थो। इसीलिए इसे पशिचम बंगाल का शोक कहा जाता है। परन्तु दामोदर नदी परियोजना द्वारा इस नदी पर बांध बनाया गया। यह नदी 289 km का प्रवाह क्षेत्र तय करके पश्चिम बगाल में प्रवेश करती हैं। यह फलता के पास हुगली नदी में मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदी बराकर है।

प्रश्न 42.
पश्चिम बंगाल का नम मानसून और शुष्क मानसून में क्या अन्तर में।
उत्तर :

नम मानसून शुष्क मानसून
1. यह मानसून ग्रीष्म काल में समुद्र से चलता है। 1. यह मानसून शीतकाल में स्थल से चलता है।
2. यह हवा सामान्यत दक्षिण से उत्तर की ओर चलती है। 2. यह हवा उत्तर से दक्षिण को चलती है।
3. इस हवा से वर्षा होती है। 3. इस हवा से वर्षा नहीं होती है।

प्रश्न 43.
दार्जिलिंग में कोलकाता से अधिक वर्षा होती है, क्यों?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में वर्षा प्रीष्म काल में खाड़ी के दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से होती है। ये हवाएं सीधे उत्तर की ओर जाती है और हिमालय के पर्वतीय भाग से टकराकर ऊपर अधिक उठती है जिससे दार्जिलिंग में अधिक वर्षा होती है। कोलकाता के समीप पर्वत नहीं है। अत: मानसूनी हवाओं से कोलकाता में वर्षा कम होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 44.
पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु और तटीय क्षेत्र की जलवायु में अन्तर बताइए।
उत्तर :

पहाड़ी भाग की जलवायु तटीय भाग की जलवायु
1. यहाँ पर ऊँचाई के कारण तापमान कम रहता है। 1. यहाँ समुद्र की समीपता के कारण तापक्रम समान्य रहता है।
2. यहाँ जाड़े में हिमपात होता है। 2. समुद्र के प्रभाव से ठंडक पड़ती है।
3. यहाँ की जलवायु विषम जलवायु है। 3. यहां की जलवायु सम है।
4. पर्वतों से मानसूनी हवायें टकराकर अधिक वर्षा करती है। 4. पर्वतों के अभाव में अपेक्षाकृत कम की वर्षा होती है।

प्रश्न 45.
डेल्टा और एस्चुअरी में क्या अन्तर है ?
उत्तर :

डेल्टा एस्चुअरी
1. समुद्र में मिलते समय जब नदी कई उपनदियों में बँट जाती है और निक्षेपण क्षेत्र त्रिभुज के आकार का बन जाता है, तो उसे डेल्टा कहते हैं। 1. समुद्र में मिलते समय जब नदी एक धारा के रूप में बहती है और वित्तोरकाएँ नहीं बनाती तो उसे एस्चुअरी कहते हैं।
2. डेल्टा निम्न ज्वार वाले क्षेत्र तथा मैदानी (समुद्रतटीय) क्षेत्रों में बनते हैं। 2. एस्चुअरी उच्च ज्वार वाले क्षेत्रों और घाटी वाले क्षेत्रों में बनती है।
3. डेल्टा वाले क्षेत्र कृत्रिम जलपत्तन वाले होते हैं, परन्तु कृषि के लिए उपयुक्त होते हैं। 3. एस्चुअरी वाले क्षेत्र प्राकृतिक जलपत्तन के लिए उपर्युक्त क्षेत्र होते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 46.
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर हिमालय पर्वत के प्रभाव का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर हिमालय पर्वत का प्रभाव :-

  1. आर्द्र ग्रीष्म ऋतु :- हिमालय पर्वत पश्चिम बंगाल के उत्तरी सीमा पर स्थित है। अतः हिन्द महासागर से आनेवाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को रोककर पूरे पश्चिम बंगाल में वर्षा कराती है।
  2. शुष्क शीत ऋतु :- हिमालय पर्वत की प्रभाव की एक अनोखी विशेषता यह है कि पूरा पश्चिम बंगाल शीत ॠतु में शुष्क रहता है क्योंकि जाड़े में पर्वतीय भाग उच्य वायु भार का क्षेत्र होता है। अतः हवाए उत्तर से दक्षण चलती है और पर्वतीय भाग में वर्षा नहीं होती है।
  3. अत्यधिक शीत से सुरक्षा :- उत्तरी साइबेरिया से आने वाली हवाएं अत्यधिक शीतल हाती है। हिमालय पर्वत उन शीतल हवाओं को रोककर पश्चिम बंगाल को अत्यधिक शीत से सुरक्षा करता है।
  4. वर्षा का प्रभाव :- मानसूनी हवाओं से पर्वतीय भाग में 300 cm-400 cm, मैदानी भाग में 200 cm एवं पश्चिम पठारी भाग में 150 cm तक वर्षा होती है। इस प्रकार वर्षा उत्तर से दक्षिण की ओर और पूर्व से पश्चिम की ओर कम होती जाती है।

प्रश्न 47.
तराई अंचल के पूर्वी भाग को दुआर क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
इस भाग का निर्माण हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों द्वारा लाए गए कंकड़ – पत्थर एवं बालू के कणों से हुआ है। सामान्यत: भूमि असमतल एवं उबड़-खाबड़ है। इसी प्रदेश को पार करके लगभग बारह नदिया दक्षिण के मैदानी भाग में प्रवेश करती हैं। भूटान के प्रवेश मारों में से पाँच मार्ग इसी भाग में स्थित हैं। इसी से इस भाग को दुआर कहते हैं।

प्रश्न 48.
पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल की प्रमुख नदियों के नाम लिखिए।
उत्तर :
पठार का ढाल पश्चिम से पूर्व की और है। अत: इस भाग में बहने वाली मयूराक्षी, अजय, दामोदर, द्वारकेश्वर एवं कंसाई (कंसावती) नदियाँ पश्चिम से पूरब की ओर बहती हैं। इनमें दामोदर सबसे बड़ी नदी है। वर्षा काल में इनमें भयकर बाढ़ आती है परन्तु गर्मी में ये सूख जाती हैं।

प्रश्न 49.
पठारी अंचल की नदियों को वर्षा पोषित नदी क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी पठारी भाग से निकलकर दामोदर, मयूराक्षी, अजय, रूपनारायण, हल्दी. स्वर्ण रेखा और द्वारकेश्वर आदि नदियाँ पश्चिम से पूर्व की और बहती हुई राढ़ प्रदेश को पार करके हुगली नदी से मिल जाती है। पाश्चिम भाग में ये नदियाँ अत्यन्त मंद गति से बहती हैं, परन्तु राढ़ प्रदेश के कारण ये धीमी गति से बहती है। इस भाग की नदियाँ वर्षा जल के सहारे बहती हैं। अत: इन्हे वर्षा जल पोषित नटियाँ कहने हैं। वर्षाकाल मे ये नदियाँ भयकर हो उठती है और उनमें विनाशकारी बाढ़े आ जाया करती हैं। गर्मी में ये सूख जाती है।

प्रश्न 50.
उत्तरी बंगाल की नदियाँ सदावाहिनी क्यों हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की उत्तरी भाग की नदियाँ हिमालय के हिमाच्छादित शिखरों में निकल कर उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई गंगा अथवा ब्रहमुत्र नदी से मिल जाती हैं। इन्हें वर्ष भर हिमालय पर्वत के वर्फ का पिघला हुआ जल मिलता रहता है। अत: ये नदियाँ सदावाहिनी हैं। इस प्रकार ये हिमपोषित नदिया हैं। इन नदियों में महानन्दा, तिस्ता, जलढ़ाका, तोरसा, रायडक, बड़ी रेगित, छोटी रंगित आदि मुख्य हैं। ये नदियाँ तीव्रवाहिनी हैं तथा गहरी घाटियाँ बनाती हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 51.
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन की उपलब्यता का विवरण दीजिए?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन की उपलब्धता :- पश्चिम बगाल के सिंचाई एवं जल-यातायात विभाग ने सन् 1987 ई० में यहाँ उपलब्ब जल ससाधन का मूल्यांकन किया। इस विभाग की विशेषज समिति ने 26 नदी घाटी का व्यापक खोज के बाद यह बतलाया कि राज्य में संभावित धरातलीय जल 13.29 मिलियन हेक्टेयर मीटर है जिसके केवल 40 प्रतिशत भाग का ही उपयोग किया जाता है। दूसरी तरफ उपलब्ध भौम जल 1.46 मिलियन हेक्टेयर मीटर है जो सम्पूर्ण रूप से उपयोग के योग्य है। केन्द्रीय भौम जल परिषद ने यहाँ उपलब्व भौम जल का अनुमान 1.76 मिलियन हेक्टेयर मीटर लगाया है जबकि भारत सरकार के सिंचाई आयोग का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में 2.38 मिलियन हेक्टेयर मीटर भौम जल की मात्रा है।

प्रश्न 52.
पश्चिम बंगाल के जलवायु की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के जलवायु की विशेषता

  1. पश्चिम बंगाल में उष्ण एवं आर्द्र मानसून जलवायु पायी जाती है।
  2. इस राज्य में मीष्म काल, वर्षा काल एवं शीतकाल – ये तीनों कतुएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है।
  3. इस राज्य में म्रीष्म ऋतु लम्बी होती है। जबकि शीत काल अपेक्षाकृत कम अवधि का होता है।
  4. अधिकांश वर्षा ग्रीष्मकाल में मानसून हवाओं से होती है। शीतकाल प्राय:शुष्क रहता है
  5. पश्चिम बंगाल में दक्षिण से उत्तर जाने पर तापक्रम तो घटता जाता है परन्तु वर्षा की मात्रा बढ़ती जाती है।
  6. पूर्व से पश्चिम जाने पर तापक्रम तो बढ़ता जाता है, परन्तु वर्षा की मात्रा कमश: घटती जाती है।
  7. ग्रीष्मकाल में चक्रवातोय वर्षा होने पर भीषण गर्मी में कमी आ जाती है।
  8. समुद्र की समीपता के कारण दक्षिण के तटीय भाग की जलवायु सम है। यहाँ गर्मी में साधारण गर्मी तथा जाड़े में साधारण जाड़ा पड़ता है।

प्रश्न 53.
दक्षिण-पक्षिम मानसूनी हवाओं को आर्द्र मानसून क्यों कहते हैं?
उत्तर :
भारत के अन्य भागों की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी गर्मी में दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती है। इन्हें गर्मी का मानसून भी कहते हैं। पशिचम बंगाल में गर्मी का मानसून का बंगल की खाड़ी की शाखा से पत्राहित होती है। यह हवा यहाँ 15 जून के लगभग प्रवेश करती है और सितम्बर माह तक रहती है। ये हवाएँ हिन्द महासागर एवं बंगाल की खाड़ी के ऊपर से हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा तय करके आती है अत: ये वाष्प या आर्द्रता में परिपूर्ण होती है। इसी से इन्हें आर्द्र मानसून भी कहते हैं।

प्रश्न 54.
पश्चिम बंगाल में शीतकाल शुष्क क्यों रहती है?
उत्तर :
भारत के अधिकांश भागों की तरह पश्चिम बंगाल में भी जाड़े में उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएँ समतल से समुद्र की ओर चलती है। इन्हें उत्तरी पूर्वी मानसून कहते हैं। समतल भाग से आने के कारण ये हवाए शुष्क होती हैं और इनसे पश्चिम वंगाल में वर्षा नहीं होती है। इसी से इन्हें शुष्क मानसून भी कहते हैं। ये हवाएँ हिमालय के ठण्डे भाग से आती है। अतः इनसे गश्चिम बंगाल का तापक्रम काफी कम हो जाता है।

प्रश्न 55.
तराई अंचल में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन क्यों पाये जाते हैं?
उत्तर :
तराई प्रदेश में अधिक वर्षा होती है तथा कम ऊँचाई होने से अपेक्षाकृत उच्च तापकम रहता है, जिससे वहॉॉ ऊष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन पाये जाते हैं। इन वनों की पत्तियाँ चौड़ी होती है। इस भाग के प्रधान वृक्ष साल, सागौन एवं बाँस है। 2000 से 30000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं।

प्रश्न 56.
दुर्गापुर में इस्पात संयंत्र की स्थापना के क्या कारण हैं?
उत्तर :
यह बिटेन के सहयोग से पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान जिले में दुर्गापुर नामक स्थान पर बनाया गया है। यह स्थान दामोदर नदी के किनारे ग्रैण्ड ट्रक रोड पर कोलकाता से 176 किलोमीटर दूर स्थित है। इस कारखाने को झारखण्ड व उड़ीसा की नोआमुण्डी की खान से लौह-अयस्क मिल जाता है। रानीगंज से राऊरकेला इस्पात के कारखाने के लिए कोयला ले जाने वाले रेलवे के बैगन लौटते समय यहाँ के लिए खनिज लोहा ले आता है। रानीगंज तथा झरिया की खानों से कोयला प्राप्त होता है। इसका अपना कोयला होने का कारखाना है। हाथीबाड़ी तथा वीरमित्रपुर से चूना पत्थर, बीरोमित्रपुर (संबलपुर) से डोलोमाइट, उड़ीसा की बनाई क्षेत्र से मैंगनीज मिल जातां है। दामोदर नदी के दुर्गापुर बैरेज से आवश्यक जल प्राप्त होता है। यहाँ रेलवे के पहिये, धरियाँ, रेल की पटरियाँ ब्लैड आदि तैयार होते हैं। यहाँ प्रति वर्ष 7.76 लाख मीट्रिक टन इस्पात पिण्ड एवं 6.41 लाख मीट्रिक टन विक्रय योग्य इस्पात का उत्पादन किया जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 57.
पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग को किन समस्याओं का समान करना पड़ रहा है?
उत्तर :
समस्याएँ :- पश्चिम बंगाल में सूती वरु उद्योग को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है :-
(i) कच्चे माल की कमी :- पूर्वी भारत में कपास का उत्पादन नहीं होने से पश्चिम बंगाल की सूती मिलों को स्थानीय रूप से कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ता है। आयतित कच्चे माल पर निर्भरता यहाँ की वस्त मिलों की प्रमुख समस्या है।
(ii) पुरानी मशीनें :- यहाँ स्थापित अधिकांश वस्र मिलों की मशीनें पुरानी एवं घिसी हुई हैं, जिनकी प्रति इकाई उत्पादन लागत अधिक तथा उत्पादन क्षमता कम है। अत: प्रतियोगिता बाजार में इन्हे कड़ीप्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रश्न 58.
पश्चिम बंगाल की अर्थ व्यवस्था में चाय उद्योग की क्या भूमिका है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की अर्थ व्यवस्था में चाय उद्योग की भूमिका :- पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था में चाय उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो निम्नलिखित हैं :-

  1. लाखों लोगों को रोजगार की प्राप्ति :- चाय के उत्पादन, रूपान्तरण तथ्था वितरण के क्षेत्र में चाय उद्योग में लाखों लोगों को रोजगार प्राप्त है। उत्तर बंगाल के चाय बागानों में औसतन दैनिक मजदूरी 260 रुपये हैं।
  2. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति :- चाय पश्चिम बंगाल का प्रमुख निर्यातक पदार्थ है जिससे विदेशी मुत्रा की प्राप्ति होती है।
  3. कोलकाता बन्दरगाह भारत का सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन्दरगाह है। अत: चाय निर्यात से सम्बन्चित अनेक आर्थिक गतिविधियाँ, जैसे :- चाय का भंडारण एवं विपणन आदि विकसित है।
  4. बाजार की प्राप्ति :- कोलकाता भारत का सबसे बड़ा चाय बाजार है, अतः चाय सम्बन्धित व्यापारिक क्रियाकलापों का विकास हुआ है।
  5. अन्य उद्योगों का विकास :- चाय उद्योग के कारण इससे सम्बन्धित अन्य उद्योगों जैसे चाय पैकेजिंग के लकड़ी एवं गत्ते में बक्सों का निर्माण, चाय परिवहन ट्रैकिंग कम्पनियों आदि का विकास हुआ है।

प्रश्न 59.
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की समस्याएँ :-

  1. यहाँ प्रसंस्कारित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का स्तर ऊँचा नहीं है, अतः गुणवत्ता के सुधार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
  2. मध्यस्थों एवं दलालों की उपस्थिति के कारण कच्चे माल की कीमत एवं पूर्ति दोनो प्रभावित होती है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ता है।
  3. अधिकांश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कच्चे माल कृषि उपजों से प्राप्त होते हैं। कृषि उपजों के मौसमी होने के कारण वर्ष भर इनके उपलब्धता की निरन्तरता नहीं है।
  4. बाढ़, सूखा तथा फसलों में रोग लगने आदि कारणों से कृषि उत्पादन प्रभावित होते रहते हैं जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  5. इस उद्योग के क्षेत्र में अनुसंधान एव प्रशिक्षण का अभाव है।

प्रश्न 60.
सूचना प्रॉद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल के क्या लक्ष्य हैं?
उत्तर :
बंगाल का लक्ष्य :-

  1. IT, ITES तथा ESDM (Electronic System Design and Manufacturing) के क्षेत्र में सन् 2020 तक तीन अग्मणी राज्यों में अपना स्थान रखना।
  2. सन् 2020 तक भारत में कुल इलेक्ट्रानिक वस्तुओं के 15 प्रतिशत का उत्पादन करना।
  3. IT एवं TIES कम्पनियों द्वारा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करना जिससे इनकी सेवाओं का लाभ ग्रामीण लोगों को भी समान रूप से मिल सके।
  4. ESDM क्षेत्र में अतिदल एवं कुशल लोगों की संख्या का विस्तार करना। विभिन्न शिक्षण संस्थाओं द्वारा इस क्षेत्र में सन् 2020 तक प्रतिवर्ष 400 Ph.D शिक्षा प्राप्त छात्रों को उपलब्ध कराने के लक्ष्य हैं।
  5. ग्रामीण लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण योजनाएँ चलाना जिससे IT एवं TIES के क्षेत्र में उनको रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।

प्रश्न 61.
पश्चिम बंगाल के लघु एवं कूटीर उद्योगों का वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के लधु एवं कुटीर उद्योग :- स्थानीय रूप से कच्चे माल की उपलब्धता, घनी जनसंख्या माँग तथा सरकार की प्रोत्साहन ‘नीतियों’ के कारण पश्चिम बंगाल में विभिन्न प्रकार के लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास हुआ है। लाख निर्माण, मिट्टी के वर्त्तन एवं खिलौना का निर्माण, मूर्त्तियों का निर्माण, ताँबे एवं पीतल के बर्त्तनों का निर्माण, लकड़ियों पर खुदाई का काम, काँच की वस्तुओं का निर्माण, हथकरघा उद्योग, तेल पेरने की मिलें धान साफ करने की मिलों, लकड़ी चीरने का काम आदि पश्चिम बंगाल में विकसित लघु एवं कुटीर उद्योग हैं। यहाँ इन उद्योगों के प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित हैं :-

  1. तेल की मिलें :- बीरभूम, बर्द्धमान, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना जिलों में स्थित हैं।
  2. धान साफ करने की मिलें :- बर्द्धमान, बीरभूम, बाकुँड़ा, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना में पायी जाती है।
  3. काँच की वस्तुओं का निर्माण :- बेलघरिया, बेलूड़, कोलकाता, रानीगंज एवं आसनसोल में होता है।
  4. रसायनिक पदार्थ के कारखाने :- कोलकाता, उत्तर एवं दक्षिण चौबीस परगना, हावड़ा तथा हुगली में स्थित हैं।
  5. हथकरधा उद्योग के प्रमुख केन्द्र :- शान्तिपुर, शन्तिनिकेतन तथा धनियाखाली हैं।
  6. रेशमी कपड़ों, साड़ियों एवं चादरों का निर्माण :- मालदह मुर्शिदाबाद एवं बीरभूम जिलों में होता है।
  7. लाख उद्योग का विकास :- मालदह तथा बलरामपुर में हुआ है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी राज्यों का संक्षिप्त विवरण दिजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी राज्य :-
बिहार (Bihar) :- बिहार राज्य पश्चिम बंगाल के पश्चिम में स्थित है। प्रैण्ड ट्रंक रोड जैसी राष्ट्रीय सड़कों एवं पूर्व दक्षिण पूर्व रेल मार्गो द्वारा बिहार एवं पश्चिम बंगाल आपस में जुड़े हुए हैं। बिहार की राजधानी पटना वायुमार्ग द्वारा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से जुड़ी हुई है। बिहार के बहुत से लोग पश्चिम बंगाल में रहकर जीविकोपार्जन करते हैं।

झारखण्ड (Jharkhand) :- (या बनांचल) राज्य का गठन 15 नवम्बर सन् 2000 को भारत के 28 वें राज्य के रूप में हुआ। यह भारत का संबसे नया राजय है। यह राज्य पश्चिम बंगाल राज्य के पश्चिम में है। ग्रैण्ड ट्रैंक रोड जैसी राष्ट्रीय सड़कों से दक्षिण-पूर्व रेल मार्गों द्वारा झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल राज्य आपस में जुड़े हुए हैं। झारखण्ड की राजधानी तथा मुख्य नगर राँची वायुमार्ग द्वारा पशिचम बंगाल की राजधानी कोलकाता से जुड़ी हुई है।

उड़ीसा (Orissa) :- उड़ीसा राज्य पश्चिम बंगाल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। बम्बई रोड इस राज्य को पश्चिम बंगाल से जोड़ती है। इस राज्य की राजधानी भुनेश्वर का कोलकाता से वायुमार्ग द्वारा संबंध है। उड़ीसा का खनिज प्रदेश पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है। अतः पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्रों को यहाँ के खनिज पदार्थ प्राप्त होते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल 4

असम (Assam) :- असम राज्य पश्चिम बंगाल के उत्तरी-पूर्वी भाग में स्थित है। 31 नं० राजमार्ग उत्तर-पूर्व रेलवे तथा बह्मपुत्र नदी द्वारा असम एबं पशिचम बंगाल राज्यों के बीच यातायात होता है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता एवं असम के गौहांटी के बीच हंवाई मार्ग द्वारा सम्बन्ध स्थापित है। असम राज्य का सम्पूर्ण व्यापार पश्चिम बंगाल राज्य से ही होकर होता है। दिसपुर असम राज्य की राजधानी है।

सिक्किम (Sikkim) :- सिक्किम राज्य पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित है। यह पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले की उत्तरी सीमा पर स्थित एक पर्वतीय राज्य है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 A द्वारा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से सिक्किम की राजधानी गंगटोंक तक जाया जा सकता है। विदेशों से किसी भी वस्तु को मँगाने के लिए सिक्किम को उसे कोलकाता बन्दरगाह से ही मँगाना पड़ता है। सिक्किम में तैयार की गयी वस्तुओं का सबसे बड़ा ग्राहक कोलकाता में है।

त्रिपुरा (Tripura) :- पशिचम बंगाल के पूर्व में स्थित बंगलादेश के भी पूर्व में त्रिपुरा राज्य स्थित है। पश्चिम बंगाल की सीमाओं से काफी दूर होने पर भी यह अनेक बातों में पश्चिम बंगाल से मिलता-जुलता है। दोनों राज्यों की मुख्य भाषा बंगला है। दोनों राज्यों की शिक्षा व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम एक समान है। इस राज्य में एक भी विश्वविद्यालय नहीं है। यहाँ के कॉलेज कोलकता विश्वविद्यालय से सम्बन्धित हैं। अगरतल्ला त्रिपुरा की राजधानी एवं प्रमुख व्यापार केन्द्र है।

प्रश्न 2.
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी देश कौन-कौन हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के पड़ोसी देश :
नेपाल (Nepal) :- पश्चिम बंगाल की उत्तरी सीमा से सटे हिमालय की गोद में स्थित नेपाल एक स्वतंत्र देश है। नेपाल एक पर्वतीय देश है। हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी महान हिमालय इसकी उत्तरी सीमा बनाती है। नेपाल की प्राकृतिक दशाएँ उत्तर बंगाल के दार्जिलिग एवं जलपाईगुड़ी जिलों के ही समान हैं। नेपाल चारों ओर से स्थल से घिरा हुआ है, अतः इसका सम्पूर्ण विदेशी व्यापार पश्चिम बगाल के कोलकाता एवं हल्दिया बन्दरगाहों से ही होता है। नेपाल व पश्चिम बंगाल के बीच सड़क मार्ग द्वारा व्यापार होता है। कोलकाता एवं काठमाण्डु के बीच वायु यातायात की भी सुविधा है। काठमाण्डु नेपाल की राजधानी, प्रमुख व्यापारिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र है।

भूटान (Bhutan) :- भूटान भारत का मित्र राष्ट्र है, जो पश्चिम बगाल के उत्तर-पूर्व में हिमालय के पर्वतोय भाग में स्थित है। भूटान की भौगोलिक दशाएँ पश्चिम बगाल के दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी जिलों की भौतिक दशाओ से मिती है। नेपाल की ही तरह भूटान भी चारों ओर समतल से घिरा हुआ है, अत: भूटान का अधिकांश विदेशी व्यापार पश्चिम बंगाल के कोलकाता एवं हल्दिया बन्दरगाहों द्वारा किया जाता है। भूटान की सुरक्षा का सम्पूर्ण भार भारत पर है है। इस प्रकार भूटान भारत द्वारा संरक्षित राज्य है। थिम्कू भूटान की राजधानी व प्रमुख नगर है।

बंगलादेश (Bangladesh) :- भारत तथा पश्चिम बगाल के पूर्व में स्थित बंगलादेश भारत का निकटतम पड़ोसी देश है। पहले यह भारत का अभिन्न अंग था। 15 अगस्त 1947 में भारत-पाक विभाजन के समय यह पाकिस्तान में चला गया। फलस्वरूप यह पूर्वी पाकिस्तान का अंग बना। परन्तु एक लम्बे समय तक चले युद्ध के बाद 16 दिसम्बर 1971 को यह बंगलादेश के नाम से एक स्वाधीन प्रभुसत्ता सम्पन्न राष्ट्र बन गया।

बंगलादेश व पश्चिम बंगाल की भौगोलिक दशा, भाषा व संस्कृति समान है। दोनों देशों के निवासियों की भागा बंगला है। दोनों देशों के बीच नदी, समुद्र तथा वायु मार्ग से व्यापार होता है। ढाका बंगलादेश की प्रमुख नगर, राजधानी, च्यपारिक केन्द्र एवं राजनीतिक नगर है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी पर्वतीय अंचल एवं पश्चिम पठारी अंचल की भौतिक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
उत्तर में हिमालय का पर्वतीय भाग :- यह भाग राज्य के ठीक उत्तरी भाग में दर्जिलिग तथा जल लाइगुड़ी जिलों के उत्तरी भाग में फैला हुआ है। यहाँ मध्य या लघु हिमलाय की पूर्वी श्रेणियाँ फैली है। इस भाग की प्रमुख नदी तिस्ता है, जो गहरी घाटी (Gorge) बनाती हुई उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। यह नदी इस पर्वनीय भाग को दो भागों में विभक्त करती है। तिस्ता के पश्चिमी भाग में तिब्बत और नेपाल की सीमा पर सिंगलोला पर्वत है, जिसकी प्रमुख शिखरें फालदू (3,595 मीटर) एवं टांगलू (3,610 मीटर) हैं। संदाकफू (3,543 मीटर) पश्चिम बंगाल की संखे ऊँची चोटी है। पूर्व की ओर पर्वत की ऊँचाई घटती जाती है और वह पहाड़ियों (Hills) का रूप धारण कर लेती है।

इनमें किलगपंग की पहाड़ियाँ 1,000 से 1,500 मीटर ऊँची है। सिंगलीला एव कालिंगपोंग के बीच दार्जिलिंग शहर के दक्षिण 2,567 मीटर ऊँची टाइगर हिल (Tiger Hills) नामक पहाड़ी है। इसी पर दार्जिलिंग नगर स्थित है। दार्जीलग नगर से टाइगार हिल का प्रात: काल या सूर्योदय का दृश्य बड़ा ही मनोहर दिखाई पड़ता है। दक्षिण में घूम (Ghoom) तथा कर्सियांग की पहाड़यों हैं। यहीं पर विश्व की सबसे ऊँचाई पर स्थित घूम रेलवे स्टेशन (ऊँचाई 2,260 मीटर) है। इस क्षेत्र मे खड़े ढाल, नुकीले कगार तथा सँकरी गहरी घाटियाँ मिलती हैं। तिस्ता के पूर्व में काला श्रेणी हैं। जिसकी सबसे ऊँचो चोटी श्वृगलिला (3,140 मीटर) है। दक्षिण भाग में शिवालिक हिमालय या उपहिमालय की पर्वत श्रेणियाँ हैं।

पश्चिम का पठारी भाग :- पश्चिम बगाल का पश्चिमी भाग पठारी है जो झारखण्ड के कोटानागपुर के पठार का पूर्वी अग्रभाग है। इस भाग में पुरुलिया जिले का सम्पूर्ण भाग तथा वीरभूम, बर्द्धमान, बाँकुड़ा तथा पश्चनी मिदनापुर जिलों के पश्चिमी भाग पड़ते हैं। यह पठार पुरानी तथा कठोर चट्टानों से बना है जिसकी औसत ऊँचाई 600 मीटर है। विखण्डन (Weathering) तथा अपक्षरण (Erosion) के कारण यह पठार काफी नीचा तथा उबड़-खाबड़ हो गया है। सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर एवं बीच-बीच में कम ऊँची पहाड़ियाँ मिलती है। सबसे ऊँचा भाग गुरुलिया जिले के दक्षिणपश्चिम में कंसावती एव सुवर्णरिखा नदियों के बीच स्थित पहाड़ी (Agodhya Hill) है, जिसकी सबसे ऊँची चोटी गोरगाबृरू (677) मीटर है।

इसी भाग में बाघमुण्डी एवं बानस की पहाड़ियाँ हैं। पुरुलिया जिले के उत्तरी भाग में पचेत (643 मीटर) एवं मैशन पहाड़ियाँ हैं। पूर्व की ओर का भाग समतल मैदान से मिल गया है। नदियों के मध्यवर्ती भूखण्ड कुछ्छ ऊँचे है और पहाड़ी की तरह दिखाई पड़ते हैं। इनमें बाँकुड़ा का शिशुनिया (440 मीटर), वीरभूम की माथुरखाली, मिदनापुर की बेल पहाड़ी तथा उकुरान की पहाड़ियाँ मुख्य हैं। भूमि में लोहे का अंश अधिक होने के कारण यहाँ लाल रंग की लेटराइद्द मिट्टी मिलती है

पठार का ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। अत: इस भाग में बहने वाली मयूराक्षी, अजय, दामोदर, द्वारकेश्वर एवं कसाई (कंसावती) नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। इनमें दामोदर सबसे बड़ी है। वर्षा काल में इनमें भयकर वाढ़े आती है परन्तु गर्मी में सुख जाती है।

प्रश्न 4.
पंश्चिम बंगाल के समतल मैदान को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है? प्रत्येक भागों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गंगा-भागीरथी की समतल भूमि:- उत्तर में हिमालय के पर्वतीय भाग के दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक तथा पश्चिम में पश्चिमी पठारी भाग से लेकर पूर्व में बंगलादेश तक फैले हुए भाग में पश्चिम बंगाल का मैदानी भाग विस्तृत है। यह भाग नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बना है। भूमि का ढाल अत्यत मन्द है। इस समतल मैदान को पाँच भागों में विभक्त किया जा सकता है –

  • तराई प्रदेश
  • उत्तरी मैदान
  • राढ़ अचल
  • गगा का डेल्टा
  • सन्दरवन की नीची भूमि
  • मिदनापुर का बालू तटीय मैदान।

तराई प्रदेश :- हिमालय के पर्वतीय भाग के दक्षिण तराई प्रदेश पश्चिम से पूर्व तक पतली पट्टी के रूप में स्थित है। इसमें दार्जिलिंग एवं जलपाईगुड़ी जिलों के दक्षिणी भाग तथा कूचबिहार जिले का उत्तरी भाग सम्मिलित है। यह हिमालय का पर्वतपदीप (Foot Hill) क्षेत्र है। यह प्रदेश उत्तर से दक्षिण की ओर कमश: ढाल होता गया है। भूमि का ढाल अचानक मन्द हो जाने के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियों का वेग इस भाग में अचानक मंद हो जाता है।

अत: इस प्रदेश की नदियाँ अपने साथ लाए हुए कंकड़-पत्थर को जमा कर देती है। इस प्रकार इस भाग का निर्माण हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों द्वारा लाए गए कंकड़-पत्थर एवं बालू के कणों से हुआ है। सामान्यत: भूमि असमतल एवं उबड़खाबड़ है। इसी प्रदेश को पार करके लगभग बारह नदियाँ दक्षिण के मैदानी भाग में प्रवेश करती हैं। भूटान के प्रवेश भागों में से पाँच मार्ग इसी भाग में स्थित है। इसी से इस भाग को दुआर (Door) भी कहते हैं।

उत्तरी मैदान : यह मैदान पश्चिम बंगाल के उत्तर में तराई प्रदेश से दक्षिण में गंगा नदी तक फैला है। इस मैदान के अंतर्गत कूचबिहार जिले का दक्षिणी भाग, पश्चिमी दिनाजपुर एवं मालदह जिले आते हैं। इस मैदान का निर्माण हिमालय पर्वत से निकलने वाली महानन्दा, तिस्ता, जलढाका तोरसा एवं पुनर्भवा आदि नदियों द्वारा लाई गयी मिट्टी से हुआ है। ऊपरी भाग की मिट्टी कंकड़ोली-पथरीली है, जबकि दक्षिणी भाग मुलायम मिट्टी से बना हुआ समतल व निम्न मैदान है।

पूर्वी भाग में गंगा-यमुना (बह्यपुत्र) के बीच पश्चिमी दिनाजपुर के दक्षिणी भाग तथा मालदह जिले में पुरानी जलोढ़ (Old Alluvium) से बना हुआ मैदान है। इसे बारिन्द्र का मैदान (Barindra Plain) कहते हैं।
मालदह जिले में कालिन्दी नदी के बाढ़ का जल फैल जाने के कारण स्थान-स्थान पर पानी से भरे गड्दु बन गये हैं जिन्हें ताल (Tal) कहते हैं। इस भाग को ताल प्रदेश भी कहते हैं।

राढ़ प्रदेश :- गंगा नदी के दक्षिण- पश्चिम के पठारी भाग तथा पूर्व में डेल्टाई भाग के बीच राढ़ प्रदेश प्रायः उत्तर से दक्षिण में स्थित है। इस प्रदेश में मुख्य रूप से बीरभूम, बर्द्धमान एवं बाँकुड़ा जिलों के पूर्वी भग एवं मेदिनीपुर जिले का पश्चिमी भाग सम्मिलित है। यह एक प्राचीन जलोढ़ मैदान है, जिसका निर्माण छोटानागपुर के पठार से निकलने वाली नदियों द्वारा पठार से बहाकर लगाई गयी लाल मिट्टी के जमा होने से हुआ है। यहाँ की भू-प्रकृति में पश्चिम के पठारी भाग तथा पूर्व के डेल्टाई भाग के बीच की अवस्था मिलती हैं। इसकी ऊँचाई सागर-तल से 30 से 50 मीटर तक है।

इस प्रदेश का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है। राढ़ प्रदेश के पश्चिमी भाग में कुछ टीले पाये जाते हैं। परन्तु पूर्वी भाग समतल है। ‘राढ़’ शब्द संथाली भाषा के ‘राढ़’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है ‘पथरीली भूमि’। दामोदर नदी इस प्रदेश के मध्य से बहती है। मयूराक्षी (मोर), अजय, द्वारकेश्वर, सिलाइ एवं कंसावती पशिचम से पूर्व की ओर बहने वाली अन्य नदियाँ हैं। यहाँ की लाल मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता है। अत: यह भाग धान की कृषि के लिए काफी उपर्युक्त है।

गंगा का डेल्टा :- गंगा नदी के दक्षिण-पश्चिम में राढ़ प्रदेश से पूर्व में बंगलादेश तक विस्तृत त्रिभुजाकार क्षेत्रों को गंगा का डेल्टा कहते हैं। यह भाग गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई नवीन जलोढ़ से बना समतल एवं निम्न मैदान है। भूमि का ढाल अत्यंत मन्द होने के कारण यहाँ नदी अत्यंत धीमी गति से बहती है। अत: नदी अपने साथ लाई गई मिट्टी को अपने मुहाने पर जमा कर देती है, जिससे डेल्टा का आकार बढ़ता जाता है और नदी कई धाराओं एवं उपधाराओं में बँटकर बहने लगती है।

भागीरथी या हुगली मुख्य नदी है। गंगा की प्रमुख शाखा नदियाँ जालंगी, इच्छामती, भैरवा, विद्याधरी और कालिन्दी हैं। नदी के तटवर्ती भागों में वर्षा ॠतु के बाढ़ के जल से मग्न निम्न भूमि को बिल (Bill) कहते हैं। नदियों के वक्र गति से बहने के कारण दक्षिणी भाग में कई धनुषाकार की बन गयी है। ढाल उत्तर से दक्षिण है, अत: अधिकांश नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हैं।

सुन्दरवन की नीची भूमि :- यह गंगा के डेल्टा का ही सुदुर दक्षिणी भाग हैं परन्तु इस भाग में समुद्र के ज्वार का खारा पानी पहुँच जाता है। इस प्रकार यह एक निम्न, नमकीन एवं दलदली भाग है। इस भाग में प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा नवीन मिट्टी जमा होती रहती है। यह भाग मैंग्रोव जाति के वनों से भरा पड़ा है। सुन्दरी नामक वृक्षों की अधिकता के कारण इस भाग को सुन्दरवन कहते हैं।

मिदनापुर का बालू तटीय मैदान :- यह भाग हल्दी नदी के मुहाने से उड़ीसा के सुवर्ण रेखा नदी के मुहाने तक विस्तृत है। सामान्यत: इसकी चौड़ाई 15 किलोमीटर है। यह भाग सुन्दरवन क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम भाग में मिदनापुर जिलों के तटीय भाग में स्थित है। नदियो द्वारा जमा की गई रेत एवं समुद्री वायु द्वारा बालू के असंख्य टीले बन गये हैं। इन टीलों की ऊँचाई 10 मीटर तक है। ये बालू के टीले समुद्र तल के समानान्तर तट से लगभग 10 किलोमीटर तक की दूरी में स्थित है। यहाँ की मिट्टी रेतीली एवं अनुपजाऊ है। दीघा के निकट समुद्री कटाव देखा जाता है, परन्तु अन्यत्र वहाँ की भूमि समुद्र की ओर बढ़ रही है।

निर्माण के ढंग के आधार पर गंगा के डेल्टा को निम्नलिखित 4 भागों में बाँटा जा सकता है।

  1. उत्तर का मृतप्राय डेल्टा (Moribund Delta)
  2. मध्य का परिपक्व डेल्टा (Mature Delta)
  3. सुन्दरवन का सक्रिय डेल्टा (Active Delta) और
  4. मिदनापुर का बालू तटीय मैदान (Sandy Coastal Plain)

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 5.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग की नदियों का संक्षिप्त विवरण दिजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग की नदियाँ हिमालय के हिमाच्छादित शिखरों से निकलकर उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई पद्या अथवा ब्रह्मपुत्र नदी से मिल जाती है। इन्हे वर्ष भर हिमालय पर्वत के बर्फ का पिघला हुआ जल मिलता रहता है। अत: ये नदियाँ सदावाहिनीं हैं। इस प्रकार ये हिमपोषित नदियाँ (Snow-Fed Rivers) हैं। इन नदियों में महानन्दा तिस्ता, जलढाका, तोस्ता, रायडक, संकोष, अन्नाई, रंगित छोटी एवं रंगित बड़ी आदि मुख्य हैं। ये नदियाँ तीव्रवाहिनी है तथा गहरी घाटियाँ बनाती हैं।

महानन्दा नदी :- दार्जिलिंग जिले की घूम श्रेणी की महालघिराम शिखर से निकलकर पहले यह नदी दार्जिलिंग जिले में बहती है। पुन: कुछ दूर बिहार राज्य में बहने के बाद मालदह जिले से पुन: इस राज्य में आती है। लालगोला के पास यह पद्या से मिल जाती है। नागर एवं पुनर्भवा इसकी सहायक नदियाँ हैं।

तिस्ता नदी :- यह उत्तरी बंगाल की सबसे बड़ी नदी है। यह सिक्किम के जेमू हिमनद से निकलकर पश्चिम बगाल क दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी तथा कूचबिहार जिलों में बहती हुई बंगलादेश में बह्यपुत्र (यमुना) नदी से मिल जाती है। इस नदी में प्रायः प्रतिवर्ष वर्षाकाल में बाढ़ आती है। इस नदी पर तिस्ता बैरेज योजना कार्यन्वित की गई है जिसका उद्देश्य बाढ़ नियत्रफ। करना, सिंचाई करना एवं जलविद्युत का उत्पादन करना है। रंगित नदी तिस्ता की प्रमुख सहायक नदी है।

जलढाका नदी :- यह नदी सिक्किम एवं भूटान की सीमा पर स्थित विदंग झील से निकलकर जलपाईगुड़ी एवं कूचबिहार जिलों में बहती हुई बंगलादेश में प्रवेश करती है। यह हिमालय की तराई से निकलकर कुछ दूर दार्जिलिंग एवं दक्षिण दिनाजपुर जिलों में बहती हुई बंगलादेश में बह्यपुत्र नदी से मिल जाती है।

इनके अतिरिक्त तोरसा एवं रायडक नदियाँ हिमालय की तराई से निकलकर कुछ दूर तक पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में बहती है। पुन: बंगलादेश में प्रवेश करके बह्मपुत्र नदी में मिल जाती है।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल में जलभंडारण एवं संरक्षण की समस्या के बारे में लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जल भंडारण एवं संरक्षण की समस्या (Problem of water reserve and conseration in West Bengal) :- पश्चिम बंगाल तीन प्रमुख भौगोलिक इकाईयों में विभाजित है। उत्तर बंगाल, भागीरथी-हुगली के पश्चिम में स्थित राढ़ प्रदेश तथा भागीरथी-हुगली के पूर्व का मैदान। यहाँ के सम्पूर्ण जलसंसाधन का 63 प्रतिशत उत्तर बंगाल की बाढ़नदी घाटियों में, 22 प्रतिशत राढ़पदेश में तथा 15 प्रतिशत पूर्वी मैदान में वितरित है।

उत्तर बंगाल की नदियाँ हिमालय से निकलती हैं तथा इनमें से अधिकांश दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए बंगलादेश में चली जाती है। वैसे तो ये नदियाँ सदावाहिनी हैं परन्तु मानसून काल में पर्वतीय अंचल में अत्यधिक वर्षा के कारण इनमें जल की मात्रा काफी अधिक हो जती है। इन नदियों के जल सरक्षण एवं भंडारण की उचित व्यवस्था करके पश्चिम बंगाल में जल की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है, परन्तु इनमे से अधिकांश नदियों के उद्गम स्थल भारत की राजनैतिक सीमा से बाहर सिक्किम एवं भूटान में है, अत: इनके जल के भंडारण में अन्तर्राष्ट्रीय समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है।

दूसरी तरफ इनमें तीव्र प्रवाह एवं जल में अवसादों की अधिक मात्रा के कारण इन पर बाँघों के निर्माण से परिस्थितिकोय एवं आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यहाँ वर्षा के जल के एकत्रीकरण एवं प्रबन्धन की भी कोई उचित व्यवस्था नही है, जिससे इन नदियों में अक्सर बाढ़ आती रहती है। बाढ़ के नियंत्रण के लिए उत्तर बंगाल नदी प्रबन्धन परिषद् (North Bengal River Management Board) की स्थापना की गयी है। दक्षिण बंगाल में जल संग्रह के उद्देश्य से बनाए गए जलाशय राज्य के पश्चिमी सीमा के पास स्थित हैं या निकटवर्ती झारखण्ड राज्य की सीमा में स्थित हैं। दामोदर घाटी निगम के बाँघ, मैसेंजोर और कंसावती आदि जलाशयों की अवसादी के लगातार जमाव के कारण जल संग्रह की क्षमता कम हो गयी है। ये जलाशय कृषि क्षेत्र में जल के कुल माँग का केवल 2.44 प्रतिशत ही उपलब्ष कर सकते हैं।

हरित क्रान्ति के बाद कृषि में उन्नत बीजों एवं खादों के प्रयोग से कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए जल की आवश्यकता बढ़ गयी, अत: 1970 के बाद पश्चिम बंगाल में भौम जल का दोहन बहुत अधिक होने लगा है। वर्तमान समय में यहाँ कृषि में सिंचाई के लिए 80.60 मिलियन कम गहराई वाले तथा 5000 अधिक गहराई वाले ट्यूबवेल कार्यरत हैं। पश्चिम बंगाल में भौम जल की उपलब्ध मात्रा के अनुपात में इसकी माँग निरंतर बढ़ती जा रही है, जिससे यहाँ भौम जल की मात्रा निरन्तर कम होती जा रही है।

कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में कुल आवश्यकता की तुलना में व्यवहार योग्य जल की उपलब्धता कम है, अत: राज्य को जल संकट की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ आवश्यक जल की कमी को निम्नलिखित तालिका से समझा जा सकता है :-

प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल में जल के अति उपयोग के दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। यहाँ जल संकट की समस्या को कम करने के क्या उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर :
जल के अति उपयोग की हानियाँ (Demerits of over use of Water) :- पृथ्वी पर लगभग 97 प्रतिशत जल खारा है। स्वच्छ एवं मीठे जल की उपलब्धता बहुत कम है,। जनसंख्या वृद्धि, सिचाई तथा औद्योगिक विकास के कारण जल संसाधन के अत्यधिक दोहन से इसका अति उपयोग हो रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में जल के अति उपयोग से पश्चिम बंगाल में भी जल संकट की समस्या उत्पन्न हो गयी है। इसके अतिरिक्त जल के अति उपयोग से अन्य दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहा है, जैसे :-

अति सिंचाई से मिट्टी की उर्वरता समाप्त हो रही है। इसमें क्षारियता एवं लवणता का परिणाम बढ़ रहा है।

उद्योगों में जल के अधिक दोहन से जलचक्र बाधित हो रहा है। चमड़ा, वरू, कागज तथा रसायन उद्योग जल प्रदूषण के लिए संबसे अधिक उत्तरदायी है।

भौम जल के अधिक दोहन से जलचक्र बाधित हो रहा है, जिससे पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। यही नहीं, भौम जल के अधिक दोहन से जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ गयी है। पश्चिम बंगाल के निम्न गंगा घाटी के आठ जिलों के 75 प्रशासनिक खण्डों में भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन से जल मे आर्सेंनिक की मात्रा बढ़ गयी है। अकेले कोलकाता में 26 मिलियन लोग आर्सेनिक की समस्या से जूझ रहे हैं। अत्यधिक जल निकासी से बोरभूम जिले के नलहाटी एवं रामपुरहाट विकास खण्ड के जल में फ्लोराइट मिल रहा है।

अत्यधिक जल के उपयोग से उत्पन्न जल संकट के कारण आपसी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो रही है। निकटवर्ती राज्य एवं देश जल के बँटवारे को लेकर आपस में उलझ रहे हैं। गंगा के जल के बँटवारे को लेकर पश्चिम बंगाल एवं बंगलादेश के बीच समस्या बनी हुई है। इसी प्रकार कावेरी नदी के जल के बँटवारे को लेकर तमिलनाडु एवं कर्नाटक राज्यों के बीच अक्सर विवाद उत्पन्न होते रहते है।

जल संकट की समस्या को कम करने के उपाय :- उचित जल प्रबन्धन द्वारा जल की माँग एवं पूर्ति में सामंजस्य स्थापित करके जल संकट की समस्या को कम किया जा सकता है ! इसके लिए निमन उपाय अपेक्षित हैं :-

  1. जल-संरक्षण तरीकों एवं प्रणालियों का पुनर्चक्रण, वाष्पीकरण नियत्रण, अलवीकरण, रिसाव चिन्हिकरण आदि के माध्यम से कुल माँग के 1 / 5 भाग की पूर्ति की जा सकती है।
  2. उद्योगों में स्वच्छ जल के प्रयोग को न्यूनतम किया जाय तथा पुनर्चक्रित जल के खपत को बढ़ाया जाय।
  3. सिंचाई में जल की अपव्यय को रोकने की व्यवस्था की जाए।
  4. बाढ़ प्रबन्धन के लिए अच्छी नीति बनायी जाए, जिससे अतिरिक्त जल का एक्कीतरण एवं संचय किया जा सके।
  5. शुष्क क्षेत्रों में अधिक जल वाली फसलों की कृषि न की जाए, जिससे इन क्षेत्रों को क्षारियता एव जलाभाव से बचाया जा सके।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 8.
पश्चिम बंगाल के जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्ण एवं आर्द्र है। यहाँ की जलवायु पर निम्नलिखित बातों का प्रभाव पड़ता है :-
भूमध्य रेखा से दूरी :- भूमध्य रेखा से दूरी के साथ दक्षिण से उत्तर जाने पर पश्चिम बंगाल का तापक्रम कम हो जाता है।

कर्क रेखा का राज्य के मध्य भाग से गुजरना :- कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के प्राय: मध्य भाग से होकर गुजरती है। अत: यहाँ का दक्षिणी भाग ऊष्ण कटिबंध में तथा उत्तरी भाग समशीतोष्ण कटिबंध में पड़ता है।

समुद्र तल से ऊँचाई :- ज्यों-ज्यों हम सागर तल से ऊपर की ओर जाते हैं प्रत्येक 164 मीटर की ऊंचाई पर 1° C की दर से तापमान कम हो जाता है। पश्चिम बंगाल के उत्तर में पर्वतीय भाग है। यहाँ ऊँचाई के साथ तापक्रम घटता जाता है। यही कारण है कि हिमालय के उच्च शिखर वर्ष भर हिमाच्छादित रहते हैं।

समुद्र तट से दूरी :- पश्चिम बंगाल का अधिकांश दक्षिणी भाग समुद्र तट पर बंगाल की खाड़ी के समीप है, अत: यहाँ की जलवायु सम है। अत: यहाँ पर गर्मी में कम गर्मी तथा जाड़े में कम जाड़ा पड़ता है। परन्तु समुद्र तट से दूर स्थित पश्चिम के पठारी भाग की जलवायु विषम है।

हिमालय पर्वत का प्रभाव :- पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय का ऊँचा पर्वत पश्चिम से पूर्व दिशा में फैला हुआ है। गर्मी में यह पर्वतीय बाधा बंगाल की खाड़ी से जाने वाली भाप हवाओं को रोककर राज्य में काफो वर्षा कराते हैं। साथ ही यह पर्वत जाड़े में उत्तर में साइबेरिया की ओर से आने वाली बर्फीली हवाओं को रोककर राज्य को शीतकाल में ठण्डा होने से बचाता है।

मानसूनी हवाओं का प्रभाव :- पश्चिम बंगाल ग्रीष्मकाल में बंगाल की खाड़ी से होकर जाने वाली दक्षिणीपश्चिमी मानसूनी हवाओं के प्रभाव में पड़ता है। ये हवाएँ भाप से भारी होती है, जिससे पश्चिम बंगाल के विभिन्न भागों में प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है।

प्रश्न 10.
पश्चिम बंगाल के मानव जीवन पर मौसम परिवर्तन के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के मानव जीवन पर मौसम परिवर्तन का प्रभाव (Impact of Change of Seaons on Human Life of West Bengal) :- पश्चिम बंगाल को जलवायु ऊष्णार्द्र मानसूनी है। यहाँ ग्रीष्म, वर्षा एवं शीत तीन ऋतुएँ क्रम से आती हैं। परन्तु प्रीष्म ऋतु की अवधि लम्बो होती है। वर्षा प्रीष्म ऋतु के मध्य एव अंत में दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं द्वारा होती है। शीत ॠतु में नापमान अपेक्षाकृत कम रहता है तथा सामान्यतः वर्षा नहीं होने के कारण शुष्कता की स्थिति बनी रहती है। इस प्रकार पश्चिम बंगाल में ऋतु परितर्वन के कारण उत्पन्न जलवायुगत विविधताएँ यहाँ रहने वाले लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन पर अपना प्रभाव डालती है। ये निम्नलिखित रूपों में देखने को मिलते है :-

(a) आर्थिक प्रभाव :-

  1. यहाँ प्रीष्मकाल के प्रारम्भ होते ही तापमान अचानक बढ़ जाता है, अत: रबी की फसलें शीघ्र पक जाती है, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  2. पश्चिम बंगाल में शीतकाल प्राय: शुष्क रहता है, अत: इस ऋतु में यहाँ फसलों को उगाने के लिए सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ता है।
  3. ग्रीष्मकाल में बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात पश्चिम बंगाल के दक्षिणी क्षेत्र में अक्सर तबाही मचाया करते हैं।
  4. पश्चिम बगाल में वर्ष भर तापमान कृषि के अनुकूल रहता है। शीत ऋतु में भी उत्तर में ऊँचे पर्वतीय अंचल को छोड़कर सम्पूर्ण पश्चिम बंगाल में पर्याप्त तापमान रहता है। अत: यहाँ वर्ष भर विभिन्न ॠतुओं में उगनेवाली फसलों की खेती की जाती है।

(b) सामाजिक जीवन पर प्रभाव :-

  1. पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्णार्द्र है। शीत ऋतु का आगमन यहाँ अल्प समय के लिए होता है, उष्णार्द्र जलवायु स्वास्थ्य के प्रतिकूल है, अत: यहाँ के लोगों की कार्यक्षमता एवं जीवन प्रत्याशा दोनों ही कम होती है।
  2. उष्यार्द्र जलवायु के कारण पश्चिम बंगाल में घरों में धूप या रोशनी की तुलना में स्वच्छ वायु की अधिक आवश्यकता पड़ती है, इसंलिए यहाँ घरों में खिक़ियों की अधिकता होती है तथा छते ऊँची रखी जाती है, जिससे दूषित वायु का रोशनदारों से निकास हो सके।
  3. भीषण गर्मी के उपरान्त वर्षा के आगमन से यहाँ अनेक व्याधियाँ एवं रोग उत्पन्न हो जाते हैं। कई क्षेत्रों में मलेरिया एवं आंत्रशोध जैसे रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे जन-जीवन काफी प्रभावित होता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 9.
पश्चिम बंगाल की विभिन्न ऋतुओं की जलवायुगत दशाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की ऋतुएँ (Seasons of West Bengal) :- इस राज्य मे गर्मी की ॠतु लम्बी होती है। ग्रोण्म ऋतु मार्च से मई तक (काल बेशाखी की ऋतु)। जून से आधे सितम्बर तक वर्षा होती है। आधे सितम्बर से आधे अवटूबर तक लौटते मानसून की ॠतु होती है। नवम्बर से फरवरी तक शीत ऋतु होती है। इस राज्य की जलवायु को मुख्यत 4 ॠतुओं में विभक्त किया जा सकता है :- म्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु एवं शीत ॠतु।

ग्रीष्म ऋतु (Summer Seasons) :- मार्च से मई तक का काल ग्रीष्म ॠतु कहा जाता है। यह राज्य की सबसे ऊष्णा ॠतु होती है जब औसत तापक्रम 27° C से अधिक हो जाता है। मैदानी भाग में अप्रैल और पर्वतीय भाग में जून सबसे गर्म महीने होते हैं। प्रथानत: यह ऋतु शुष्क बितती है। इस ऋतु में दिन बड़ा होता है। हवा ऊष्ण और हल्की होकर ऊपर उठना शुरू होती है जिससे निम्न वायु भार (Low Pressure) के क्षेत्र की सृष्टि होना शुरू हो जाता है। इससे संध्या के समय उत्तर-पश्चिम से आकाश बादलों से घिर जाता है और आँधी, तूफान का वातावरण बन जाता है।

वर्षा ऋतु (Rainy Season) :- जून से सितम्बर तक का काल राज्य में वर्षा ऋतु कहलाता है। इसमें दिन बड़ा होता है और गर्मी सर्वाधिक होती है। प्राय: सम्पूर्ण वर्षा इसी ऋतु में होती है। मध्य भाग में निम्न वायुभार का क्षेत्र बन जाने से बंगाल की खाड़ी और हिन्द महासागर से वाष्पयुक्त द० पू॰ मानसूनी हवाएं चलना शुरू हो जाती है। वायुमण्डल में आर्द्रता आ जाती है और उत्तर के पर्वतीय भाग में वर्षा सर्वाधिक, पश्चिम के पठार में न्यूनतम और मैदानी भाग में समान्य होती है। इन हवाओं से पर्वतीय भाग में सर्वाधिक 500 cm, तराई क्षेत्र में 300 cm, मैदानी भाग में 150 cm-300 cm तक वर्षा होती है।

शरद ऋतु (Autumn Season) :- अक्टूबर से नवम्बर तक के काल को शरद ऋतु के नाम से जाना जाता है। अत: तापक्रम कम होना शुरू हो जाता है। तापक्रम 10° C से 19° C तक रहता है। इस ऋतु में शुष्क हवा स्थल से समुद्र की ओर बहना शुरू हो जाती है। इस समय हिन्द महासागर की हवा ऊष्ण होती है। अतः यहाँ निम्न वायुभार का क्षेत्र बन जाता है।
भू-पृष्ठ की ठण्डी और भारी हवायें समुद्र की ओर चलने लगती हैं। इस काल में मानसूनी हवाएं लौटने लगती हैं। इस मानसून का प्रत्यावर्तन काल.(ReturringMonsoon Season) कहा जाता है।

शीत ऋतु (Winter Seasons) :- यहाँ पर शीत ऋतु दिसम्बर से फरवरी तक रहती है। इस समय पं० बंगाल का तापमान कम रहता है। औसत तापमान 20° C ही रहता है। पर्वतीय भागों में कठोर सर्दी पड़ती है। हिमपात के कारण तापमान -5° C तक गिर जाता है। इस समय पश्चिम बंगाल में उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाएँ चलती है, अतः यह शुष्क ऋतु होती है। चक्रवात से कभी-कभी कुछ वर्षा होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल 6

प्रश्न 10.
पश्चिम बंगाल में पाये जाने वाली प्राकृतिक वनस्पतियों का संक्षेप में वर्णन किजिए।
उत्तर :
धरातल पर स्वतः उगने वाले पेड़-पौधों को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं। पश्चिम बंगाल के कुल क्षेत्रफल के 13.4 प्रतिशत भाग पर वन फैले हैं। जलवायु की भिन्नता के कारण पश्चिम बंगाल में निम्नलिखित तीन प्रकार की वनस्पतियाँ मिलती हैं :- i) पर्वतीय वन, ii) पतझड़ वन और iii) ज्वारीय या तटीय वन।

पर्वतीय वन (Mountaineus Forest) :- पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय के पर्वतीय भाग की वनस्पति पर ऊँचाई का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। तराई प्रदेश में अधिक वर्षा होती है तथा कम ऊँचाई होने से अपेक्षाकृत उच्च तापक्रम रहता है, जिससे वहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पाये जाते हैं, इन वनों की पत्तियाँ चौड़ी होती है। इस भाग के प्रधान वृक्ष साल, सागौन एव बाँस हैं। 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार (Oak) के वृक्ष पाए जाते हैं। 3000 मीटर से अधिक ऊँचे भागों में हिमपात होता है। अत: यहाँ के वृक्षों की पत्तियाँ नुकिली या सूच्चाकार होती है। इस भाग के प्रमुख वृक्ष देवदार, हेमलाक, फर, पाइन आदि हैं।

पतझड़ के वन (Decidous Forest) :- पश्चिम बंगाल के अधिकांश मैदानी तथा पठारी भागों में, जहाँ वार्षिक वर्षा की मात्रा 100 से 200 सेण्टीमीटर है, पतझड़ के वन पाए जाते हैं। इन वनों के मुख्य वृक्ष साल, सागौन, शीशम, बाँस, महुआ, आम, जामुन, सिरीस, सेमल, पलास, गमार, अर्जुन एवं जारूल हैं।

ज्वारीय वन या तटीय वन (Tidal or Lithoral Forest) :- पश्चिम बंगाल के दक्षिण के डेल्टाई भाग में ये वन पाए जाते हैं। ज्वार के समय समुद्र का खारा पानी यहाँ पहुँच जाता है। अतः यहाँ ऐसे वृक्ष पाएँ जाते है जो दलदल एवं समुद्र के खारे पानी से अपनी रक्षा कर सके। यहाँ के मुख्य वृक्ष मैंग्रोव ताड़, सुन्दरी, गोरान, केवड़ा, गेऊआँ, होगला, गोलपत्ता, पुसुर एवं नारियल हैं। सुन्दरी वृक्षों की अधिकता के कारण ही इस भाग को सुन्दरवन कहते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल 7

प्रश्न 11.
पश्चिम बंगाल में चावल की कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में चावल की कृषि के लिए निम्नलिखित अनुकूल दशाएँ विद्यमान है :-
(i) उच्च तापक्रम :- चावल ऊष्ण कटिबंध का पौधा है। इसके लिए 16° C-27° C तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल का अधिकांश भाग कर्क रेखा के समीप पड़ता हैं। अत: यहाँ का तापमान ऊँचा रहता है।
(ii) अधिक वर्षा :- चावल का पौधा जल का प्रेमी है। अत: चावल के खोतों में कई दिनों तक जल का जमा होना आवश्यक है। इसकी कृषि के लिए 100-200 cm तक वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाओं से काफी वर्षा होती है।
(iii) उपर्युक्त मिट्टी :- चावल की कृषि के लिए ऐसी मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें आर्द्रता ग्रहण करने की शक्ति हो। पश्चिम बंगाल गंगा के निचले मैदान में पड़ता है। इसके अधिकांश भाग का निर्माण गंगा व उसकी सहायक नदियों द्वारा लायी गयी चिकनी मिट्टी से हुआ है। अत: यह भाग समतल व उपजाऊ है।
(iv) सिंचाई की सुविधा :- यहाँ दामोदर घाटी योजना एवं अन्य नहरों से सिंचाई की सुविधा प्राप्त है।
(v) सस्ता श्रम :- चावल की कृषि में मशीनों का प्रयोग बहुत कम होता है। इसकी कृषि का अधिकांश भाग हाथ से ही होता है। पश्चिम बंगाल सघन जनसंख्या वाला राज्य है। अत: यहाँ चावल की कृषि के लिए सस्ते श्रमिक आसानी से उपलब्व हो जाते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल 8

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा यहाँ के प्रमुख जूट उत्पादक जिलों का नाम लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि के लिए निम्नलिखित अनुकूल दशाएँ विद्यमान हैं :-
(i) उच्च तापक्रम :- जूट ऊष्ण कटिबन्ध का पौधा है। इसकी कृषि के लिए 25° C-30° C तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल कर्क रेखा के समीप है, अत: यहाँ गर्मी में तापक्रम ऊँचा रहता है।
(ii) अधिक वर्षा :- जूट का पौधा जल के प्रति बड़ा सहिष्मु है। जूट की कृषि के लिए 150-200 cm तक वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पश्चिम बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाओं से यह खूब वर्षा होती है।
(iii) डेल्टाई मिट्टी :- जूट की कृषि के लिए दोमट एव जलोढ़ मिट्दी सर्वोत्तम होती है। जूट का पौधा भूमि की उर्वरा शक्ति को नष्ट कर देता है। खाद देकर जूट उगाने में विशेष लाभ नहीं होता है। अत: इसकी कृषि डेल्टाई क्षेत्रों में अधिक होती है।
(iv) स्वच्छ जल :- जूट के पौधे से रेशा प्राप्त करने के लिए उसे कई दिनों तक सड़ाना पड़ता है। फिर उसे जल में पटक-पटककर धोया जाता है। अत: इसके लिए पर्याप्त स्वच्छ एवं मीठे जल की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल में नदियों, तालाबों एवं नहरों से जूट को सड़ाने व साफ करने के लिए पर्याप्त स्वच्छ जल मिल जाता है।
(v) सस्ता श्रम :- जूट की फसल उगाने, काटने, सड़ाने, धोने तथा डण्ठल से रेशा अलग करने के लिए पर्याप्त एवं सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। पश्चिम बंगाल की आबादी घनी है। उत्तर प्रदेश, बिहार एवं उड़िसा से भी यहाँ सस्ते श्रमिक मिल जाते हैं।
प्रमुख जूट उत्पादक जिले :- पश्चिम बंगाल के जूट के क्षेत्र हुगली नदी के दोनों ओर गंगा के डेल्टाई क्षेत्र में स्थित है। प्रमुख जूट उत्पादक जिले बर्द्धमान, उत्तर चोबीस, परगना, मुर्शिदाबाद, नदिया, पश्चिमी दिनाजपुर, मालदा, पूर्व एवं पश्चिमी मिदनापुर, हुगली, कूचबिहार तथा जलपाईगुड़ी हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 13.
पश्चिम बंगाल में चाय उत्पादन के लिए कौन सी अनुकूल दशाएँ विद्यमान हैं ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग के विकास के निम्नलिखित कारण हैं :-
1. अनुकूल दशाएँ :- उत्पादक अंचलों में चाय उत्पादन के लिए अनुकूल दशाएँ, जैसे -उच्च तापमान (20° C.25° C), पर्याप्त वर्षा (200-250 cm), लौह, चूना, पोटाश एवं जीवांश युक्त उपजाऊ मिट्टी, ढालू भूमि तथा सस्ते श्रमिकों की उपलब्धता आदि सभी विद्यमान हैं।
2. चाय उत्पादक क्षेत्रों में अन्य कृषि फसलों का नहीं उगाया जाना:- पश्चिम बंगाल के चाय उत्पादक पर्वतीय अंचल अन्य कृषि फसलों के उत्पादन के अनुकूल नहीं हैं। अत: इन अंचलों में चाय बागानों के विस्तार को प्रोत्साहन मिला है।
3. रेल एवं सड़क यातायात का पर्याप्त विकास :- पश्चिम बंगाल में सड़क एवं रेल यातायात का पर्याप्त विकास हुआ है। अत: चाय बागानों से चाय को कोलकाता के बाजार में भेजने की सुविधा प्राप्त है।
4. बाजार की सुविधा :- सबसे बड़ा चाय बाजार एव कोलकाता बन्दरगाह विश्व का सबसे बड़ा चाय निर्यातक बंदरगाह है। अत: पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को विस्तृत बाजार एवं निर्यात दोनों की ही स्थानीय सुविधा प्राप्त है।

प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना एवं विकास के क्या कारण हैं? यहाँ इस उद्योग की समस्या एवं सम्भावनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना एवं विकास के निम्नलिखित कारण है :-
1. बंदरगाह की सुविधा :- यहाँ कोलकाता बन्दरगाह की स्थिति के कारण वस्र मिलों को मशीनों एवं कच्चे कपास के आयात की सुविधा प्राप्त है।
2. कोयले की प्राप्ति:- निकटवर्ती रानीगंज एवं झारिया की खानों से शक्ति के रूप में कोयले की प्राप्ति आसानी से हो जाती है।
3. उत्तम यातायात व्यवस्था :- विकसित रेल, सड़क एवं जल परिवहन के कारण उत्पादित वस्रों को निकटवर्ती एवं सुदूर स्थित बाजारों में भेजने की सुविधा प्राप्त है।
4. सस्ते श्रमिकों की आपूर्ति :- निकटवर्ती बसे क्षेत्रों से मिलों में काम करने के लिए सस्ते श्रमिकों की आपूर्ति आसानी से हो जाती है।
5. अनुकूल जलवायु :- पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्णार्द्र है जो धागों की कताई एवं वर्ष भर सूती वस्र धारण करने के अनुकूल है।
समस्याएँ (Problems) :- पश्चिम बंगाल में सूती वस्त उद्योग को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
(i) कच्चे माल की कमी :- पूर्वी भारत में कपास का उत्पादन नहीं होने से पश्चिम बंगाल की सूती मिलों को स्थानीय रूप से कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ता है। आयातित कच्चे माल पर निर्भरता यहाँ की वस्र मिलों की प्रमुख समस्या है।

(ii) पुरानी मशीनें :- यहाँ स्थापित अधिकांश वस्व मिलों की मशीनें पुरानी एवं घिसी हुई हैं, जिनकी प्रति इकाई उत्पादन लागत अंिक एवं उत्पादन क्षमता कम है। अत: प्रतियोगी बाजार में इन्हें कड़ी प्रतिस्पर्ध का सामना करना पड़ रहा है।
सूती वस्त्र उद्योग की सम्भावनाएँ :- पश्चिम बंगाल में वस्त्र मिलों का आधुनिकीकरण करके, माँग के अनुसार उच्च श्रेणी के वख्यों के निर्माण को बढ़ावा देकर, सूती वस्त की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुचार लाने के लिए प्रौद्योगिकी मिशन शुरू करके वस्त उद्योग की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग की समस्याओं एवं संभावनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
चाय उद्योग की समस्याएँ (Problems of Tea Industry) :- पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है :-

  1. चाय बागानों में चाय की झाड़ियों के पुराने हो जाने से उत्पादन कम हो रहा है।
  2. चाय बागानों के मालिक चाय उत्पादन से प्राप्त लाभ का विनियोग चाय बागानों के विकास में नहीं कर रहे हैं।
  3. चाय के पौधों के रोपण तथा उचित प्रबन्ध पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  4. चाय के अधिकांश बागान उत्तर के पर्वतीय अंचल में स्थित हैं। यहाँ राजनैतिक अशांति के कारण भी यह उद्योग प्रभावित हो रहा है।

चाय उद्योग की सम्भावनाएँ (Possiblities of Tea Industry) :- उपरोक्त समस्याओं के बावजूद भविष्य में पश्चिम बंगाल में चाय उद्योग की अच्छी सम्भावनाएँ है, क्योंकि :

  1. घरेलू एवं विदेशी बाजारों में चाय की ऊँची माँग है।
  2. कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग तथा जलपाईगुड़ी जिलों में छोटे-छोटे नए चाय बागानों की स्थापना की जा रही है तथा पुराने चाय बगानों का विस्तार किया जा रहा है।
  3. नए क्षेत्रों में चाय उगाने का प्रयास किया जा रहा है।
  4. पायलट प्रोजेक्ट के अन्तर्गत पुरुलिया के अयोष्या पहाड़ी की ढालों पर चाय की झाड़ियों का सफल रोपण हुआ है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 16.
पश्चिम बंगाल के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
तीव्र आर्थिक विकास, नगरीकरण की प्रवृत्ति तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के कारण भारत के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास तीव्र गति से हुआ है। वर्तमान समय में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल भारत के तीन अग्रणी राज्यों में से एक है। यहाँ निम्नलिखित खाद्य पदार्थो का प्रसंस्करण किया जाता है :-

खाद्यान्न प्रसंस्करण उद्योग (Grain Processing Industry) :- पश्चिम बंगाल एक कृषि प्रधान राज्य है। खाद्यान्नों के उत्पादन में इसका भारतवर्ष में प्रमुख स्थान है। खाद्यान्नों की उपलब्धता के कारण इनके प्रसंस्करण का उद्योग यहाँ विभिन्न क्षेत्रों में विकसित है।

दुग्ध प्रसंस्करण उद्योग (Dairy Processing Industry) :- दुग्ध प्रसंस्करण उद्योग के अंतर्गत विभिन्न दुग्व पदार्थ जैसे घी, दही, मक्खन, छेना, आइसक्रीम, सूखा दुध आदि तैयार किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल में इस उद्योग का विकास कोलकाता (हरिनघाटा, बेलगछिया), दुर्गापुर, सिलीगुड़ी, बर्द्धमान तथा कृष्णनगर में हुआ है।

मत्स्य प्रसंस्करण उद्योग (Fish Processing Industry) :- मछली पश्चिम बंगाल के लोगों के भोजन का सर्वप्रिय हिस्सा है। अतः मछली प्राप्ति पर आधारित मत्स्य प्रसंस्करण उद्योग भी यहाँ उन्नतिशील है। यहाँ प्रान, तापसी, चाँदी, मेटकी, रिबन, फिश, मोल, मैकरेल, एकेट आदि समुद्री मछलियाँ तथा रोहु, कतला, फाशा कैटफिश, भ्रिंगाल, मैकरेल, हिल्सा आदि ताजे जल की मछलियाँ बड़े पैमाने पर पकड़ी जाती हैं। ताजे जल की मछलियों के उत्पादन की दृष्टि से इस राज्य का भारत में पहला स्थान है। यहाँ लगभग 4.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ताज़े जल की मछलियाँ पकड़ी जाती है। ये मछलियाँ नदियों के मुहानों एवं तालाबों से पकड़ी जाती है।

फल एवं सब्जी प्रसंस्करण उद्योग (Fruits and Vegetables Processing Industry) :- पश्चिम बंगाल में विभिन्न प्रकार के फलों तथा सब्जियों की खेती की जाती है। आम, केला, अनानस, पपीता, कटहल, अमरूद आदि फल तथा आलू, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, बैगन, कुम्हड़ा, लौकी आदि सब्जियाँ यहाँ उगायी जाती है। भारत के कुल आलू उत्पादन का 30 प्रतिशत, केला उत्पादन का 12 प्रतिशत तथा अनानास उत्पादन का 27 प्रतिशत उत्पादन पश्चिम बंगाल में होता है। प्रचुर मात्रा में फलों एवं सब्जियों के उगाए जाने के कारण पश्चिम बंगाल में इनको प्रसंस्कृत करके विविध प्रकार के उत्पादों जैसे स्क्वेश, अचार, चटनी, मुरब्बा, जैम, जेली जूस आदि का उत्पादन यहाँ विभिन्न संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों में किया जाता है।

शीतल पेय प्रसंस्करण उद्योग (Aerated Soft Drinks Processing Industry) :- पश्चिम बंगाल की जलवायु ऊष्ण कटिबंधीय एवं जनसंख्या घनी है, अतः यहाँ शीतल पेय पदार्थों के अधिक खपत की संभावना को देखते हुए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा व्रिविध प्रकार के शीतल पेय बाजार में लाये जा रहे हैं। यहाँ स्थानीय स्तर पर अनेक शीतल पेय उत्पादन केन्द्र हैं, जो बाजारों में अपने उत्पादों को आकर्षक विज्ञापनों की सहायता से परोसने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ प्राकृतिक जल उत्पादन के कारखानों को भी सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जो बोतल बंद पेय जल बाजार में प्रस्तुत कर रहे हैं।

प्रश्न 17.
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की समस्याओं एवं सम्भावनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की समस्याएँ (Problems of Food Processing Industry in West Bengal) :-
(i) यहाँ प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का स्तर ऊँचा नहीं है, अत: गुणवत्ता के सुधार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
(ii) मध्यस्थों एवं दलालों की उपस्थिति के कारण कच्चे माल की कीमत एवं पूर्ति दोनों प्रभावित होती है, जिसका असर उत्पादन पर होता है।
(iii) अधिकांश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कच्चे माल कृषि उपजों से प्राप्त होते हैं। कृषि उपजों के मौसमी होने के कारण वर्ष भर इनकी उपलब्धता की निरन्तरता नहीं रहती है।
(iv) बाढ़, सूखा फसलों तथा को रोग लगने के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होते रहे हैं जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
(v) इस उद्योग के क्षेत्र में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण का अभाव है। पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की संभावनाएँ (Possiblities of Food Processing Industry in West Bengal) :-
(i) राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों की गुणवत्ता में वृद्धि के उद्देश्य से प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
(ii) शीघ नष्ट होने वाले कच्चे पदार्थ, जैसे :- माँस, फलों एवं सब्जियों के संरक्षण तथा पूर्ति में निरन्तरता के लिए शीत संम्रहागारों की संख्या बढ़ायी जा रही है।
(iii) सुपर बाजारों जैसे बिग बाजार, रिलायंस फ्रेश आदि की स्थापना से इस उद्योग का बाजार विस्तृत हो रहा है।
(iv) प्रसंस्कारित वस्तुओं के निर्यात को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 18.
पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग के विकास का कारण लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग का विकास (Development of Tourism Industry in West Bengal) :- रोजगारजनक तथा आय का प्रमुख साधन होने के कारण सन् 1996 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया। वर्तमान समय में यह राज्य देशी एवं विदेशी दोनों ही तरह के पर्यटकों में आर्कषण का केन्द्र बना हुआ है। यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है, जिससे यह उद्योग काफी प्रोत्साहित हो रहा है। पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग के विकास के निम्नलिखित कारण हैं :-
प्राकृतिक सौंदर्य :- पश्चिम बंगाल में प्राकृतिक सौन्दर्य के सभी आकर्षण, जैसे दार्जिलिंग, हिमालय के पर्वतीय दृश्य, दुआर क्षेत्र के चाय बागानों के नयनाभिराम दृश्य, सुन्दरवन अंचल के मैंग्रोव वन एवं जीव जगत, दक्षिण के आकर्षक सागर तटीय क्षेत्र आदि विद्यमान हैं जो वर्ष भर पर्यटकों को आकर्षित करते रहते हैं। दुआर के वन जीवन से समुद्र वनांचल भी यहाँ पर्यटकों के आकर्षण के प्रमुख केन्द्र हैं।

धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के क्षेत्र :- पश्चिम बंगाल में अनेक धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत के स्थल कोलकाता, बर्द्धमान, विष्णुपुर, गौड़, पाण्डुआ, लालबागान, चन्दननगर, श्रीरामपुर, चुंचुड़ा, बण्डेल, नवद्वीप, बैर कपुर तथा कूचबिहार में स्थित हैं। इन स्थलों पर समय-समय पर बड़ी संख्या में पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। पश्चिम बंगाल के पर्यटन विभाग द्वारा इन स्थलों पर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के प्राचीन इमारतों के रख-रखाव व्यवस्था की जाती है।

मेला एवं त्यौहार :- पश्चिम बंगाल मेलों और त्यौहारों का राज्य है। शरद काल में यहाँ मानाया जाने वाला दुर्गापूजा का त्यौहार प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। मकर संकान्ति के अवसर पर सागरद्वीप में लगने वाले गंगासागर मेला में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग यहा आते हैं। इसके अतिरिक्त शन्तिनिकेतन का पौष मेला, फुरफुरा शरीफ का उर्स मेला, कोलकाता फिल्मोत्सव आदि बंगाल में पर्यटकों को आमंत्रित करते रहते हैं।

उत्तम यातायात व्यवस्था :- पश्चिम बंगाल में सड़क, रेल तथा जल परिवहन की उत्तम व्यवस्था है। यहाँ हावड़ा, सियालदह तथा उत्तर बंगाल में जलपाईगुड़ी प्रमुख रेल स्टेशन है, जहाँ से प्रमुख स्थल के लिए रेलगाड़ियों की सुविधा है। पूरे राज्य में सड़कों का जाल बिख्छा हुआ है। अत: आन्तरिक क्षेत्रों में तथा ऊँचे पर्वतीय स्थलों पर सड़क मार्ग द्वारा पहुँचने की उत्तम व्यवस्था है। सुन्दरवन अंचल में पर्यटको के लिए स्टीमर की सुविधा प्रदान की जाती है। कोलकाता में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जहां से देश विदेश के लिए उड़ानों की सुविधा है।

पर्यटन स्थलों पर होटलों की उत्तम व्यवस्था :- पश्चिम बंगाल के पर्यटन स्यलों पर पर्यटकों के ठहरने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा होटलों एव लॉजों की उत्तम व्यवस्था की गयी है। इन होटलों एव लॉजों में ऑनलाइन अप्रिम बुकिंग की व्यवस्था है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 19.
पश्चिम बंगाल में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) :- सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की शुरुआत थोड़ी देर से हुई परन्तु वर्तमान समय में यह राज्य सूचना प्रौद्योंगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। कोलकाता मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में IT (Information Technology) तथा ITES (Information Technology Enables Services) द्वारा लगभग एक लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। देश की प्रमुख IT एवं ITES कम्पनियाँ पश्चिम बंगाल में कार्यरत हैं, जो राज्य के कुल राजस्व प्राप्ति में 70 प्रतिशत का योगदान कर रही है।

पश्चिम बंगाल देश का दूसरा सबसे घना बसा राज्य है। यहाँ के भूमि संसाधन पर जनसंख्या का दबाव बहुत अधिक है। IT तथा ITES कम्पनियों की रोजगारजनक क्षमता अधिक होती है एव इनकी स्थापना के लिए कम भूमि की आवश्यकता पड़ती है। अत: राज्य में इनके विकास को प्रोत्साहित करने का हर संभव प्रयास आवश्यक है। इसके लिए नियोजित एवं प्रभावकारी नीति बनाने की आवश्यकता है, जिससे बड़ी। कम्पनियाँ राज्य के विभिन्न हिस्सों में निवेश कर सकें।

राज्य में सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर के विकास के लिए पश्चिम बंगाल सरकर द्वारा 2011 में दो सलाहकार समितियों का गठन किया गया है जो सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रही हैं। इन सलाहकार समितियों की देख-रेख में विभिन्न क्षेत्रों में विशेषझों के साथ कार्यकारी समूहों की स्थापना की गई है।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग के विकास के कारणों का वर्णन कीजिए। वर्तमान समय में यह उद्योग किन समस्याओं का सामना कर रहा है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग के विकास के कारण :- इस क्षेत्र में जूट उद्योग के केन्द्रित होने के निम्नलिखित कारण हैं :-

  1. कच्चे माल की समीपता :- जूट का प्रधान उत्पादन क्षेत्र गंगा-बह्मपुत्र डेल्टाई भाग हैं। पश्चिम बंगाल भारत में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य.हैं। कुछ जूट बंगला देश से भी आयात किया जाता हैं।
  2. शक्ति के साधन :- रानीगंज तथा झारिया से कोयला मिल जाता है। दामोदर घाटी तथा मयूराक्षी योजनाओं से सस्ती जलविद्युत मिल जाती है।
  3. यातायात की सुविधा :- हुगली नदी द्वारा सस्ते जल यातायात की सुविधा प्राप्त होती है। रेल, सड़क तथा जलमार्ग द्वारा यह भाग देश के भीतरी भागो से जुड़ा है।
  4. सस्ते श्रमिक :- अधिक आबादी होने से बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल से सस्ते श्रमिक मिल जाते हैं।
  5. कोलकाता बन्दरगाह की समीपता :- कोलकाता बन्दरगाह द्वारा मशीनरी एवं आवश्यक उपकरण मँगाने तथा तैयार माल निर्यात करने की सुविधा हैं।
  6. पूँजी की सुविधा :- यहाँ पूँजीपति रहते हैं। बेकों तथा पूँजीपतियों द्वारा भी पूँजी प्राप्त करने की सुविधा हैं।
  7. स्वच्छ जल की सुविधा :- जूट घोने व रँगने के लिए हुगली नदी द्वारा स्वच्छ जल प्राप्त होता है।
  8. पूर्वारम्भ की सुविधा :- ब्रिटिश काल में यहाँ सबसे पहले जूट के मिलों की स्थापना हुई थी। अतः यहाँ पूर्वारम्य की सुविधा है।

जूट उद्योग की समस्याएँ :-
कच्चे माल की कमी – 1947 ई० में देश के विभाजन के कारण अधिकांश जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान में चले गये परन्तु अधिकांश जूट के कारखाने पश्चिम बंगाल में ही रह गये। इससे कच्चे माल की कमी हो जाती है।

विदेशी प्रतिस्पर्धा :- अब बंगलादेश, चीन, थाइलैण्ड तथा इण्डोनेशिया में भी जूट के कारखाने खुल गये हैं। अत: पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग को प्रबल प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है।

जूट के बोरों की माँग में कमी :- विश्व में जूट के कई स्थापनापन्न भी हो गए हैं। कहीं-कहीं कागज के थैलों और कहीं-कहीं अन्य रेशों के थैलों का प्रयोग होता हैं। कनाडा में तो बिना बोरों में भरे ही गेहूँ को जहाजों में भर कर निर्यात कर दिया जाता हैं। इस प्रकार विश्व बाजार में जूट के बोरों की माँग घट रही है।

पुरानी मशीनें :- पश्चिम बंगाल के जूट के कारखानों में ब्रिटिश काल की पुरानी मशीनें हैं। वे घिस- पिट गई हैं और आधुनिक समय के लिए अनुकूल नहीं है। इससे उत्पादन खर्च अधिक पड़ता है और माँग के अनुसार वस्तुएँ नहीं बन पाती हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 21.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख नगरों का विवरण दीजिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के प्रमुख नगर निम्न है :-
आसनसोल :- बर्द्धमान जिले में ग्रेंड ट्रंक रोड पर स्थित इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध नगर, प्रसिद्ध औधौगिक केन्द्र तथा प्रसिद्ध रेलवे जक्शन है। यहाँ रेल, साइकिल बनाने का कारखाना है।
दुर्गापुर :- बर्द्धमान जिले में दामोदर नदी के किनारे स्थित दुर्गापुर कोलकाता के बाद पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर है। यहाँ इस्पात के दो कारखाने हैं।
रानीगंज :- बर्द्धमान जिले में दामोदर नदी के किनारे स्थित रानीगंज प्रसिद्ध कोयला क्षेत्र एवं व्यावसायिक शहर है। यहाँ कागज का एक कारखाना है।
चित्तरंजन :- बर्दमान जिले में झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित चित्तरंजन एक औद्योगिक केन्द्र है। यहाँ भारत सरकार द्वारा संचालित रेल इंजन का आधुनिक कारखाना है।
सिलीगुड़ी :- महानन्दा नदी के तट पर स्थित सिलींगुड़ी उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा व्यापारिक एवं शैक्षणिक केन्द्र है। यह चाय एवं लकड़ी का एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र है। यह कई सड़कों एवं रेलमार्गों का जंक्शन है।
बागडोरा :- यहाँ हवाई अड्डा है। यहीं पर उत्तर बंग विश्वविद्यालय है।
जलपाईगुड़ी :- तिस्ता नदी के दाएँ किनारे पर स्थित जलाईगुड़ी जिले का मुख्यालय तथा चाय उद्योग का प्रसिद्ध केन्द्र है। यहीं पर उत्तर बंग इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित है।
अलीपुर दुआर :- जलपाईगुड़ी जिले में स्थित अलीपुर दुआर तराई प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र तथा रेलवे जंवशन है।
इंगिलश बाजार :- महानन्दा नदी के किनारे स्थित इंग्लिश बाजार मालदह जिले का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यावसायिक केन्द्र है। यह रेशम उद्योग के लिए विख्यात है।
बालूरघाट :- अन्नाई नदी के तट पर स्थित बालूरघाट दक्षिण दिनाजपुर जिले का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र है। रायगंज :- उत्तर दिनाजपुर का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र है।
मालदह :- महानन्दा नदी के तट पर स्थित मालदह एक प्राचीन शहर एवं रेशम उद्योग का केन्द्र है।
कूचबिहार :- तोरसा नदी के तट पर स्थित कूचबिहार जिले का मुख्यालय तथा प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र है।
बर्द्धमान :- इस क्षेत्र का सबसे प्रमुख नगर, प्रशासनिक शहर तथा औद्योगिक केन्द्र है।
बोलपुर :- यह वीरभूम जिले का महत्वपूर्ण शहर और व्यापारिक केन्द्र है। इसके निकट रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय है।
खड़गपुर :- पश्चिम मिदनापुर जिले में स्थित खड़गपुर दक्षिण-पूर्व रेलवे का प्रसिद्ध जंवशन एवं व्यापारिक केन्द्र है। यहाँ पर प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज (आई. आई. टी) है। यहाँ स्कूटर बनाने का एक कारखाना है।
कंचन नगर :- बर्द्धमान जिले में स्थित यह नगर छुरी-केंची बनाने के लिए प्रसिद्ध है।
कोलकाता :- भारत का बम्बई के बाद दूसरा सबसे बड़ा नगर तथा दूसरा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। यह बंगाल की खाड़ी के शीर्ष पर हुगली नदी के बाएँ किनारे पर स्थित है। यह पश्चिम बंगाल की राजधानी तथा पूर्वी भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक एवं शिक्षा का केन्द्र है।
हावड़ा :- यह पश्चिम बंगाल का दूसरा बड़ा नगर तथा औद्योगिक केन्द्र है।
कैनिंग :- यह मछली उद्योग का सबसे बड़ा केन्द्र है। यहाँ नोना मिट्टी को कृषि योग्य बनाने के लिए एक अनुसंधान केन्द्र खोला गया है।

प्रश्न 22.
पश्चिम बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थल कौन-कौन से हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थल निम्नलिखित हैं :-
दार्जिलिंग :- लेवंग पर्वत पर 2,133 मीटर की ऊँचाई पर स्थित दार्जिलिंग नगर दार्जिलिंग जिले का मुख्यालय, प्रसिद्ध पहाड़ी नगर तथा पर्यटन केन्द्र है। निकटवर्ती टाइगर हिल से एवरेस्ट एवं कंचनजंघा की हिमाच्छादित चोटियों का मनोरम दृश्य तथा कंचनजंघा पर उगते सूर्य की अलौकिक छटा दिखाई पड़ती है। प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण होने के कारण इसे ‘पहाड़ी स्थानों की रानी’ कहते हैं। यहाँ के बाँटेनिकल गार्डन और चिड़ियाखाना दर्शनीय स्थान हैं। यहाँ भारत का प्रथम पर्वतारोहण केन्द्र स्थापित किया गया है। इस नगर के आस-पास कई चाय के बगान हैं।

कलिपोंग :- दार्जिलिग के दक्षिण 1,198 मीटर की ऊँचाई पर स्थित कलिपोंग एक सुन्दर शहर तथा पहाड़ी स्थान है।
मिरिक :- दार्जिलिंग से 45 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में 1,800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित मिरिक को हाल ही में पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है।
विष्णुपुर :- यह बाँकुड़ा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है।
कर्सियांग :- डाऊहिल पहाड़ी पर 1,482 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कार्सियांग शहर एक स्वास्थ्य प्रद स्थान तथा व्यापारिक केन्द्र है।
काकद्वीप :- यह दक्षिण 24 परगना जिले का प्रसिद्ध शहर एवं व्यापार का केन्द्र है। इस शहर के निकट सागरद्वीप पर कपिलमुनि के आश्रम के आस-पास प्रतिवर्ष मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगासागर का बहुत बड़ा मेला लगता है।
बकखाली एवं फ्रेजरगंज :- यह प्राकृतिक सौन्दर्य के स्थान एवं पर्यटन केन्द्र है।
नामखाना :- व्यापार का केन्द्र है।
दीघा :- समुद्र तट पर स्थित दीघा पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध पर्यटन केन्द्र है। पश्चिम बंगाल सरकार ने यहाँ एक मनोरम स्वास्थ केन्द्र का निर्मोण करवाया है।
कांथी :- पूर्व मिदनापुर जिले के कांथी महकमें का एक शहर है। यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर, व्यापार एवं पर्यटन केन्द्र है।

प्रश्न 23.
कोलकाता बंदरगाह की उन्नति का कारण लिखिए।
उत्तर :
कोलकाता बंदरगाह भारत का पाँचवां सबसे बड़ा तथा भारत के पूर्वी तट का सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इस बन्दरगाह की उन्नति के कारण निम्नलिखित हैं :-
उत्तम स्थिति :- कोलकाता बन्दरगाह हुगली नदी के बाएं किनारे पर बंगाल की खाड़ी से 128 कि॰मी॰ उत्तर की ओर स्थित है। अपनी उत्तम.स्थिति के कारण ही इसे पूर्वी भारत का प्रवेश द्वारा कहा जाता हैं।
सुरक्षित पोपाश्रय :- यद्यपि कोलकाता बन्दरगाह का पोताश्रय कृत्रिम है फिर भी यहाँ डायमण्ड हार्बर (नेताजी सुभाष) एवं खिदिरपुर पोताश्रय बनाये गये हैं। कोलकाता बन्दरगाह एक नदी बन्दरगाह है, जहाँ ऊँचे ज्वार के समय बडेबड़े जहाज तट तक आ सकते हैं।
कोलकाता बन्दगाह के भार को कम करने के लिए हल्दिया को इसके सहायक बन्दरगाह के रूप में विकसित किया गया है।
धनी एवं विस्तृत पृष्ठ प्रदेश :- कोलकाता बन्दरगाह का पृष्ठ प्रदेश बहुत ही धनी एवं विस्तृत है। इसका पृष्ठ प्रदेश पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, नेपाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैण्ड, अरूणाचल प्रदेश तथा मेघालय तक फैला हुआ है। इसका पृष्ठ प्रदेश विस्तृत, घना आबाद, कृषि, खनिज पदार्थ तथा उद्योग-धन्धों में धनी है।
अन्तर्राष्ट्रीय भागों का केन्द्र :- कोलकाता अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर पड़ता है। उत्तरी अमेरिका एवं यूरोप से एशिया एवं आस्ट्रेलिया को जाने वाले अधिकांश जहाज यहीं से होकर जाते हैं।
परिवहन की सुविधा :- हुगली नदी एक आन्तरिक जलमार्ग का कार्य करती है। कोलकाता बन्दरगाह रेलमार्गो तथा सड़कों द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है। यह उत्तरी, पूर्वी तथा उत्तरी-पूर्वी रेलमार्गों का बहुत बड़ा जंक्शन है।
आयात के पदार्थ :- कोलकाता बन्दरगाह से मशीनें, मोटर, रासायनिक पदार्थ, खनिज तेल, कागज, रबड़, सूती, ऊनी एवं रेशमी वस्र का आयात किया जात है।
निर्यात के पदार्थ :- कोलकाता बन्दरगाह से जूट के सामान, चाय, चीनी, तिलहन, लाख, चमड़ा, अभ्रक, मैंगनीज, कोयला, लोहा-इस्पात एवं इंजिनियरिंग के सामानों का निर्यात किया जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 24.
पश्चिम बांगल के उत्तरी पर्वतीय भाग के भू-प्रकृति का वर्णन करें?
उत्तर :
उत्तर का पर्वतीय भाग (The Northern Mountains) :- पश्चिम बंगाल के कुल क्षेत्रफल का मात्र 1 प्रतिशत पर्वतीय है। यह राज्य के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है। करोड़ो वर्ष पहले यहाँ टेथिस नामक एक समुद्र हुआ करता था।

भू-प्रकृति (Physlography) :- युगों-युगों तक जलोढ़ के जमाव तथा-भू-आन्दोलन के फलस्वरूप इस श्रृंखला का निर्माण हुआ। इसका विस्तार पश्चिम बगाल में नेपाल की सीमा से लेकर पूर्व में भूटान की सीमा तक लगभग 100 कि०मी० में है। उत्तर दक्षिण की चौड़ाई 25 से 50 किलोमीटर है। उत्तर बंगाल की प्रमुख नदी, तिस्ता इसके मष्य से प्रवाहित होती है। इस नदी द्वारा यह पर्वत पूर्व एवं पश्चिम दो भागों में विभक्त है। इस क्षेत्र में हिमालय की ऊँचाई 1800 से 3600 मीटर तक है। तिस्ता नदी के पश्चिम की ओर सिंगलीला तथा दार्जिलिंग श्रेणी उत्तर से दक्षिण की ओर विस्तृत है।

दार्जिलिंग के निकट घूम अंचल से घूम श्रेणी, ताकदा-पेशाक श्रेणी, एवं बागोरा डाउहिल श्रेणी विस्तृत हैं। इस अंचल में एक महत्तपूर्ण पर्वत शिखर सिंघल है जिसकी ऊँचाई 2,615 मीटर है। तिस्ता नदी के पूर्वी तरफ ताकदा पेशाक श्रेणी कलियोंग श्रेणी से मिलती है। कलिंपोंग श्रेणी के सर्वोच्च शिखर का नाम ऋषिला है जिसकी ऊँचाई 3,121 मीटर है तथा दूसरे सर्वोच्च शिखर का नाम दूर बिंदारा है जिसकी ऊँचाई 1,800 मीटर है।

दार्जिलिंग और कर्सियांग के मध्य में स्थित है टाइगर हिल इसकी ऊँचाई 2600 मीटर है। यहाँ से अगर आसमान साफ हो तो हिमाच्छादित कंचनजधा को देखा जा सकता है। दार्जिलिंग पर्वतीय अंचल की तुलना में जलपाईगुड़ी अंचल के पर्वतों की ऊँचाई कुछ कम है। इस अंचल में रेनिगंगा (1,855 मीटर) तथा छोटा सिंचुला 1,726 मीटर) नामक दो पर्वत शिखर हैं एवं बक्सा नामक एक गिरिपथ है।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल के जल प्रभाव प्रणाली का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की नदी प्रणाली को तीन भागों में बाँटा जा सकता है :-
गंगा प्रणाली (The Ganga System) :- गंगा पश्चिम बंगाल की प्रमुख नदी है। यह हिमालय के गंगोत्री नामक स्थान से निकलकर उत्तर प्रदेश, बिहार में प्रवाहित होती हुई झारखण्ड के राजमहल पहाड़ के पास से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। मुर्शिदाबाद जिले के घुलियान के पास दो शाखाओं में बँट जाती है। एक शाखा भागीरथी नाम पाती है, जब यह कोलकाता और चौबीस परगना जिलों से आगे बढ़ती है तो हुगली कहलाती है। भागीरथी हुगली दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। दूसरी शाखा पद्या जो दक्षिण पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुई बंगालदेश में प्रवेश करती हैं। भागीरथी हुगली से पूरब गंगा की शाखाओं – प्रशाखाओं का जल मिलता है जिसमें भैरव, जलंगी, चुरनी, इच्छामती, माथा भांगा, विद्याधरी, उल्लेखनीय आदि हैं।

पश्चिम पठार की नदियाँ (Rivers of the Western Plateau) :- इस अंचल की प्रमुख नदियाँ हैं :दामोदर, द्वारकेश्वर, शिलाई, कंसावती, मयूराक्षी, अजय। ये सभी नदियाँ ढाल के अनुसार पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। मयूराक्षी और अजय भागीरथी में जा मिलती है। द्वारकेश्वर और शिलाई नदियाँ मिलकर रूपनारायण नदी कहलाती है। राढ़ मैदान का निर्माण इन्हीं नादियों के जलोढ़ से हुआ है। दामोदर इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है।

उत्तर की नदियाँ (Rivers of the North) :- राज्य के उत्तर भाग हिमालय से निकलने वाली, नदियाँ उत्तर की नदियाँ कहलाती हैं। चूकि इन नदियों का उद्नम हिमालय के बर्फीले क्षेत्र हैं अत: वर्ष भर इनमें जलापूर्ति रहता है। महानन्दा, टांगन, तिस्ता, तोरसा और रायढाका उत्तर की प्रमुख नदियाँ हैं। इनमें प्रथम दो का जल गंगा में तथा शेष का जल ब्रह्मपुत्र में गिरता है। तिस्ता इनमें प्रमुख नद्री है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 26.
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर मानसूनी हवाओं के प्रभाव का वर्णन करो?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की जलवायु पर मानसूनी हवाओं का प्रभाव (Impact of Morisoon on Climate of West Bengal) :-

ग्रीष्म ऋतु का मानसून (South West Monsoon) :- पश्चिम बंगाल में मार्च से मई तक लगातार तेजगति से तापमान बढ़ता है। इस समय सूर्य कर्क रेखा की ओर गतिशील रहता है, अत: पूरे बंगाल में तापमान तेजी से बढ़ता है। पश्चिम पठारी भाग में तापमान 32.7° C तक पहुंच जाता है। इसी समय-काल बैशाखी चलता है। चूँकि तापमान लगातार बढ़ता जाता है। अत: वायुमण्डलीय दाब लगातार घटने लगता है। अत: बंगाल की खाड़ी से आने वाली दक्षिणी पश्चिमी हवाएँ चलने लगती हैं जिनकी दिशा म्यांमार तट की ओर होती है।

ग्रीष्मकाल में पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी से आनेवाली मानसूनी हवाएं सक्रिय रहती हैं। ये हवाएँ समुद्र से समतल की ओर आती हैं। अतः वाष्प से भरपूर रहती हैं और पूरे पश्चिम बंगाल में वर्षा प्रदान करती है। ये मानसूनी हवाएँ 15 जून से लेकर सितम्बर तक सक्रिय रहती हैं। ये हवाएं हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र से टकराकर खूब वर्षा करती हैं। वर्षा की मात्रा उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में 300 cm-500 cm तक वर्षा होती है। मैदानी भागों में 250 cm तक वर्षा होती है तथा पशचमी पठारी क्षेत्रों में 100 cm-150 cm तक वर्षा होती है। ग्रीष्ममानसून से पश्चिम बंगाल में धान तथा जूट की कृषि होती है।

उत्तरी पूर्वी शुष्क मानसून का प्रभाव (Effect of North East Manson Wind) :- नवम्बर के महीने से पश्चिम बंगाल में शरद ऋतु का आगमन हो जाता है। आकाश स्वच्छ हो जाता है। इस समय आर्द्रता कम तथा शीतल ॠतु का प्रभाव रहता है। तापमान 17° C-21° C के बीच रहता है। इस प्रकार मध्य एशिया पर उच्च वायुदाब बन जाता है और पश्चिम बंगाल में उत्तर पूर्वी शुष्क हवाएं चलने लगती हैं।

इस ऋतु में पश्चिम बंगाल में वर्षा नहीं होती। यह शुष्क ॠतु होती है। किन्तु कभी-कभी बंगाल की खाड़ी में चक्रवातीय तुफानों का सृजन होता है, उससे वर्षा भी होती है और मौसम खराब हो जाता है।

प्रश्न 27.
पश्चिष बंगाल के धान की कृषि का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिय बंगाल में धान की कृषि (Paddy Agriculture in West Bengal) :- पश्चिम बंगाल के कुल कृषिगत्त भूमि के 53 मंतिशत भाग पर धान की कृषि की जाती है। यहाँ पर धान की कृषि का क्षेत्रफल दिनों दिन बढ़ रहा है। गहाँ पर अमन, आउस और दोरो तीन प्रकार के धान की कृषि की जाती है। आउस एवं अमन का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है : 2007.08 में आडस, अमन और वोरो का उत्पादन कमश : 0.566 मिलियान, 9.228 मिलियन टन एवं 4926 मिलियन टन रहा।
धान की कृषि राज्य के कुल उत्पादन (GDP) का 20.69 % प्रतिशत है।

कृषि क्षेत्र (Rice Agricultural Areal) :- पश्चिम बंगाल के कुल धान उत्पादन क्षेत्र का 47 प्रतिशत भाग वर्षा पर आधारित है। यहां के धान उत्पादक क्षेत्र को निम्न भागों में बांटा जा सकता है –

  1. उत्तरी पहाड़ी और तिस्ता तराई क्षेत्र
  2. विभ्जन जलोढ़ क्षेत्र
  3. गंगा का जलोढ़ क्षेत्र,
  4. तटीय नमकीन क्षेत्र एवं
  5. लाल-लैटराइट क्षेत्र। इस प्रकार ये पूरे क्षेत्र 6-10 लाख हेंट्टेयर भूमिका है।

प्रश्न 28.
पश्चिम बंगाल में जूट उत्पादन (कृषि) का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में जूट की कृषि (Jute Agriculture in West Bengal) :- जूट एक रेशेदार फसल है। गह्ह पूर्वी भारत (पशिचम बगाल) का महत्वपूर्ण, मुद्रादायिनी फसल (Cash Crop) है। इसे सुनहरे रेशे (Golden Fibre) की फसल कहते हैं। जूट का रेशे इसके तने से प्राप्त होता है। इसका रेशे मुलायम और लम्बे-लम्बे धागे बूने जा सकते हैं। इससे गनी बेंग (Gunny Bags) बनाये जाते है जो पैकेटिंग में प्रयोग किये जाते है। इन बैगों में चावल, गेहूँ, सीमेन्ट, चीनी, रासायनिक खाद आदि को भरा जाता है।
उत्पादन क्षेत्र (Areas of Production) :- पश्चिम बंगाल भारत के कुल जूट उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पन्न करता है। यह जूट उत्पादन का अभणी राज्य है। मुख्य जूट उत्पादक जिले मुर्शीदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, बर्द्धमान, मालदह और उत्तर 24 परगना है।

प्रश्न 29.
पश्चिम बंगाल के चाय उद्योग के प्रगति का वर्णन करें।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल चाय उद्योग (Tae industry of West Bengal) :
महत्व (Importance) :- पश्चिम बगाल में चाय उद्योग एक उन्नत स्थिति में है। इसका भारतीय अर्थव्यवस्था में मुख्य स्थःन है। झाग के निर्यात से, भारत को प्रचुर मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। पश्चिम बंगाल चाय उद्योग में दूसरे स्थान पर है। चाग उद्धोग ने लगगग 6 लाख मज़ूरों को रोजगार प्रदान किया है। चाय उद्योग ने यातायत और संचार के साधनों का विकास उत्तरी बंग्गल में किया है। इस प्रकार चाय उद्योग उद्योग पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था मे महत्तपूर्ण भूमिका निभा रहीं है।

स्थिति (Location) :- सन् 1870 और 1875 के बीच चाय बागानों की स्थापना जलपाईगुड़ी के डुआर्स क्षेत्र में की गयी। इस प्रकार बीरे- धीरे चाय उद्योग दार्जिलग, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी जिलों में फैला गया। वर्तमान समय में पश्चिम तालाल में कुल 297 चाय बागान हैं।

चाय उद्योग की स्थापना के भौगोलिक कारण (Geographical Reasons) :- चाय के बागान पर्वतीय ढलानों पर विक्रसित किये गये है। चाय के लिए ढाल जमीन, 200 cm-250 cm वर्षा, प्रचुर मात्रा में श्रमिक लौह और नाइट्रोजन युक्त भिट्टी चाहिए : ये सभी भौगोलिक दशाएं दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार के पर्वतीय भागों में उपलब्ये है जहाँ पर चाय उद्योग का विकास हुआ है।

उत्पादन (Production) :- पश्चिम बगाल में i) काली, ii) उलांग चाय और iii) हरी चाय का उत्पादन किया जाता है इन सब में कालो चाय काफी प्रसिद्ध है और प्रचुर मात्रा में पैदा की जाती है। 2004 में पश्चिम बंगाल में कुल 2 लाख 11 हुजार मीट्रिक टन चाय का उत्पादन किया गया।

व्यापार (Trade) :- चाय को कोलकाता चाय बाजार में निलाम (Auctioned) किया जाता है। यही से व्यापारी इसे खरीद कर पूरे देश में व्यापार करते हैं। यहां पर निलामी बाजार पर भारतीय चाय बोर्ड (Indian Tea Board) का नियंत्रण है। यहां से चाय कोलकाता बंदरगाह द्वारा बिटेन, अमेरिका, रूस, जर्मनो, यूक्रेन और पश्चिमी देशों को निर्यात की जाती है। भारत सरकार 2005 में चाय के निर्यात से कुल 1133 करोड़ रुपये की कमाई की।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप can serve as a valuable review tool before exams.

20वीं सदी में यूरोप Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
1917 ई० की रूसी क्रान्ति के समय रूस का शासक कौन था –
(a) जार अलेक्जेण्डर द्वितीय
(b) जार निकोलस द्वितीय
(c) जार निकालोस प्रथम
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(c) जार निकालोस प्रथम

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 2.
जार निकोलस द्वितीय की पत्नी का क्या नाम था –
(a) मेरी अन्तायनेत
(b) जारीना एलेक्जैन्ड्रा
(c) एलिक्स
(d) जोजेफाइन
उत्तर :
(b) जारीना एलेक्जैन्ड्रा

प्रश्न 3.
क्रान्ति के समय रूस का जार था –
(a) जार अलेक्जेंडर द्वितीय
(b) जार निकोलस द्वितीय
(c) अलेक्जेंडर प्रथम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) जार निकोलस द्वितीय

प्रश्न 4.
‘वार एण्ड पीस’ नामक पुस्तक किसने लिखी ?
(a) मैक्सिस गोर्की
(b) वाल्टेयर
(c) टॉल्सटॉय
(d) रूसो
उत्तर :
(c) टाल्सटॉय

प्रश्न 5.
फ्रांस की क्रान्ति कब हुई थी?
(a) 1776
(b) 1789
(c) 1830
(d) 1848
उत्तर :
(b) 1789

प्रश्न 6.
रूस में जारशाही का अन्त कब हुआ था?
(a) 1917
(b) 1918
(c) 1939
(d) 1940
उत्तर :
(a) 1917

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 7.
रूस का कान्तिकारी केरेन्सकी किस दल से सम्बन्धित था ?
(a) गणतंत्रवादी
(b) साम्यवादी
(c) राजतंत्रवादी
(d) समाजवादी
उत्तर :
(d) समाजवादी

प्रश्न 8.
मार्च 1917 की क्रान्ति किस शहर में प्रारम्भ हुई थी –
(a) मास्को
(b) लेनिनग्राद
(c) अल्माटी
(d) पेद्रोग्राड
उत्तर :
(d) पंद्रोग्राड

प्रश्न 9.
पोटर्समाउथ की संधि कब हुई थी ?
(a) 5 सितम्बर 1905 ई०
(b) 10 दिसम्बर 1906 ई०
(c) 11 नवम्बर 1907 ई०
(d) 10 जुलाई 1908 ई०
उत्तर :
(a) 5 सितम्बर 1905 ई०

प्रश्न 10.
22 जनवरी 1905 ई० को रूस के इतिहास में किस नाम से जाना जाता है ?
(a) काली मृत्यु
(b) खूनी रविवार
(c) आतंक का राज्य
(d) थर्मीडोर प्रतिक्रिया
उत्तर :
(b) खूनी रविवार

प्रश्न 11.
वियना कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
(a) 1815 ई०
(b) 1920 ई०
(c) 1945 ई०
(d) 1941 ई०
उत्तर :
(a) 1815 ई०

प्रश्न 12.
राष्ट्र संघ की स्थापना किस समय हुई थी?
(a) 1815 ई०
(b) 1918 ई०
(c) 1920 ई०
(d) 1945 ई०
उत्तर :
(c) 1920 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 13.
क्रान्ति के समय रूस की राजधानी था –
(a) मास्को
(b) लेनिनग्राद
(c) अल्माटी
(d) पेद्रोग्राड
उत्तर :
(d) पेद्रोग्राड

प्रश्न 14.
लेनिन रूस का प्रधानमंत्री कब बना ?
(a) 1917 ई。
(b) 1918 ई०
(c) 1919 ई०
(d) सभी तिथियाँ गलत हैं
उत्तर :
(d) सभी तिथियाँ गलत हैं

प्रश्न 15.
जारीना एलेक्जेंड्रा पर किसका प्रभाव अधिक था ?
(a) रासपुटिन
(b) जार निकोलस द्वितीय
(c) रूसो
(d) मार्टिन लूथर
उत्तर :
(a) रासपुटिन

प्रश्न 16.
जापान ने रूस को कब पराजित किया ?
(a) 1902 ई0
(b) 1903 ई0
(c) 1905 ई०
(d) 1910 ई०
उत्तर :
(c) 1905 ई०

प्रश्न 17.
हिटलर ने किस पारी की स्थापना की थी?
(a) नाजी पार्टी
(b) फासी पार्टी
(c) बोल्शोविक पार्टी
(d) एंग इटली पार्टीं
उत्तर :
(a) नाजी पार्टी

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 18.
रूस में बोल्शोविक क्रांति सफल हुई –
(a) मार्च में (1917)
(b) जुलाई में (1917)
(c) सितम्बर में (1917)
(d) नवम्बर में (1917)
उत्तर :
(d) नवम्बर में (1917)

प्रश्न 19.
अखिल रूसी सम्मेलन 1917 में किस माह में हुआ –
(a) मई
(b) जून
(c) अगस्त
(d) अक्टूबर
उत्तर :
(b) जून

प्रश्न 20.
लेनिन की मृत्यु हई –
(a) 1923 ई. में
(b) 1924 ई. में
(c) 1925 ई, में
(d) 1922 ई. में
उत्तर :
(b) 1924 ई. में

प्रश्न 21.
लेनिन कौन था ?
(a) फ्रांसीसी राज्य क्रान्ति का नेता
(b) बोल्शेविक क्रान्ति का नेता
(c) इग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति का नेता
(d) अमेरिका का प्रथम राष्षपति
उत्तर :
(b) बोल्शेविक क्रान्ति का नेता

प्रश्न 22.
अन्तर्राष्रीय श्रम संस्था की स्थापना कब हुई ?
(a) 10 जनवरी 1920 ई०
(b) 10 फरवरी, 1920 ई०
(c) 10 मार्च 1920 ई०
(d) 10 अप्रैल 1920 ई०
उत्तर :
(a) 10 जनवरी 1920 ई०

प्रश्न 23.
ब्रेस्ट लिटवोस्क की संधि किसके बीच हुई थी ?
(a) जर्मनी और रूस
(b) जर्मनी और फ्रांस
(c) जर्मनी और जापान
(d) जर्मनी और बिटेन
उत्तर :
(a) जर्मनी और रूस

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 24.
‘खूनी रविवार’ ‘की घटना किस देश में हुई थी ?
(a) चीन
(b) जापान
(c) फ्रांस
(d) रूस
उत्तर :
(d) रूस

प्रश्न 25.
लेनिन, स्टालिन और ट्रास्की किस दल के नेता थे ?
(a) एंग इटली
(b) नाजी पार्टी
(c) फासी पार्टीं
(d) बोल्शेविक पार्टी
उत्तर :
(d) बोल्शेविक पार्टी

प्रश्न 26.
राष्ट्र संघ की स्थापना किस स्थान पर हुई थी ?
(a) वेनिस
(b) पेरिस
(c) जेनेवा
(d) वाशिंगटन
उत्तर :
(c) जेनेवा

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 27.
1939 ई० मे कौन सी लड़ाई यूरोप में हुई थी?
(a) बोल्श्रेविक
(b) फ्रांस की कान्ति
(c) रक्तहोन कान्ति
(d) सेन का गृह युद्ध
उत्तर :
(d) स्मेन का गृह युद्ध

प्रश्न 28.
कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (कोमिन्टर्न) को कब समाप्त कर दिया गया –
(a) 1943
(b) 1940
(c) 1944
(d) 1950
उत्तर :
(a) 1943

प्रश्न 29.
जर्मन की सेनाओं ने प्रथम विश्ष युद्ध में प्रवेश कब किया –
(a) 5 अगस्त 1914
(b) 2 फरवरी 1914
(c) 3 मार्च 1914
(d) 15 जून 1914
उत्तर :
(a) 5 अगस्त 1914

प्रश्न 30.
ब्रिटिश सेना का आगमन युद्ध में कब हुआ ?
(a) 22 अगस्त 1914
(b) 22 मार्च 1914
(c) 22 अैैल 1914
(d) 22 फरवरी 1914
उत्तर :
(a) 22 अगस्त 1914

प्रश्न 31.
जर्मनी ने फ्रांस के वर्डेन दुर्ग पर आक्रमण कब किया ?
(a) 1916 ई०
(b) 1915 ई०
(c) 1914 ई०
(d) 1917 ई०
उत्तर :
(a) 1916 ई०

प्रश्न 32.
1917 ई० में जर्मनी ने ‘यू बोट अभियान’ अर्थात् पनडुब्बियों का व्यापार आक्रमण किस देश पर किया ?
(a) इग्लेण्ड
(b) रूस
(c) जापान
(d) इटली
उत्तर :
(a) इग्लैण्ड

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 33.
वार्साय की संधि हुई-
(a) 8 जनवरी 1919 ई. को
(b) 5 मार्य 1919 ई को
(c) 28 जुन 1919 ई को
(d) 11 जुलाई 1919 ई. को
उत्तर :
(c) 28 जून 1919 ईं को

प्रश्न 34.
वुड्रो विल्सन किस देश का राप्रपति था ?
(a) अनेरिका
(b) इग्लेण्ड
(c) जर्मनी
(d) इटली
उत्तर :
(a) अमेरिका

प्रश्न 35.
जर्मनी ने आत्मसमर्पण कब किया था ?
(a) 10 नवम्बर 1918
(d) 7 दिसम्बर 1920
(c) 15 फरवरी 1919
(d) 13 जून 1917
उत्तर :
(a) 10 नवम्बर 1918

प्रश्न 36.
मुसोलिनी ने इटली में फासिस्ट पार्टी की स्थापना की –
(a) अप्रैल 1919 ई. में
(b) फरवरी 1919 ई. में
(c) मई 1919 ई. में
(d) मार्च 1919 ई. में
उत्तर :
(d) मार्च 1919 ई. में

प्रश्न 37.
मुसोलिनी रोम का प्रधानमंत्री कब बना ?
(a) 30 अक्टृबर 1922
(b) 28 जनवरी 1923
(c) 23 फरवरी 1924
(b) 3 मार्च 1922
उत्तर :
(a) 30 अवट्बर 1922

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 38.
‘मेरा संघर्ष’ नामक पुस्तक के लेखक कौन है ?
(a) एड्डोल्फ हिटलर
(b) मुसोलिनी
(c) लेनिन
(d) स्टालिन
उत्तर :
(a) एडोल्क हिंटलर

प्रश्न 39.
मुसोलिनी ने रोम पर चढ़ाई कब की ?
(a) 28 अक्टूबर 1922
(b) 28 फरबरी 1921
(c) 28 जनवरी 1923
(d) 28 मार्च 1920
उत्तर :
(a) 2 म अक्टबर 1922

प्रश्न 40.
रूस में बोल्शोविक क्राति हुई –
(a) 1915 ई, में
(b) 1916 ई. में
(c) 1917 ई. में
(d) 1918 ई. में
उत्तर :
(c) 1917 है में

प्रश्न 41.
मुसोलिनी का जन्म हुआ –
(a) 1980 ई. में
(b) 1983 ई में
(c) 1985 ईं. में
(d) 1990 ई. में
उत्तर :
(b) 1983 ई. में

प्रश्न 42.
हिटलर का जन्म हुआ-
(a) 20 अप्रैल 1889 ई, को
(b) 5 मार्च 1919 ई को
(c) 28 जून 1919 ई. को
(d) 11 जुलाई 1919 ई को
उत्तर :
(c) 28 जून 1919 ई. को

प्रश्न 43.
नवम्बर 1917 की रूस की बोल्शेविक क्रान्ति के पश्चात रूस के शासन की बागडोर किसके हाथों में आयी थी-
(a) स्टालिन
(b) लेनिन
(c) केरेन्सकी
(d) ट्राटस्की
उत्तर :
(b) लेनिन

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 44.
वाल स्ट्रीट संकट कब प्रारम्भ हुआ?
(a) 1929 ई०
(b) 1930 ई०
(c) 1940 ई०
(d) 1950 ई०
उत्तर :
(a) 1929 ई०

प्रश्न 45.
खूनी रविवार की घटना 1905 ई. किस तिथि को घटी थी –
(a) 3 जनवरी को
(b) 6 जनवरी को
(c) 9 जनवरी को
(d) 23 जनवरी को
उत्तर :
(c) 9 जनवरी को

प्रश्न 46.
रूसी पार्लियामेंट ड्यूमा का प्रथम सत्र हुआ –
(a) 1905 ई. में
(b) 1906 ई. में
(c) 1907 ई. में
(d) 1908 ई. में
उत्तर :
(b) 1906 ई. में

प्रश्न 47.
रूसी क्रांति के कितने चरण (Stages) हैं –
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 6
उत्तर :
(a) 3

प्रश्न 48.
रूस में समाजवादी क्रांति हुई थी –
(a) 1905 ई. में
(b) 1911 ई. में
(c) 1917 ई. (मार्च) में
(d) 1917 ई. (नवम्बर) में
उत्तर :
(d) 1917 ई. (नवम्बर) में

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 49.
जरीना अलेक्जेण्डर के ऊपर अधिक प्रभाव था –
(a) लेनिन का
(b) द्वितीय निकोलम का
(c) रासपुटिन का
(d) फादर गोपन का
उत्तर :
(c) रासपुटिन का

प्रश्न 50.
किसके नेतृत्व में रूस में ‘काला आतंक का राज’ आरंभ हुआ था ?
(a) रासपुटिन
(b) स्टालिन
(c) काउण्ट विटी
(d) फादर गैपन
उत्तर :
(b) स्टालिन

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. करेन्सकी मंत्री मण्डल ___________ को जारी रखने के पक्ष में था।
उत्तर : जारशाही शासन

2. 1914 ई० में जर्मन सेना ने ___________पर आक्रमण कर दिया।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

3. वुड्रो विल्सन ___________के राष्ट्रपति थे।
उत्तर : अमेरिका।

4. राष्ट्रसंघ के भीतर मजदूरों की दशा सुधारने के लिए ___________की स्थापना की गयी।
उत्तर : अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन।

5. प्रथम विश्व युद्ध के बाद का महत्त्व घटा और ___________के प्रभाव में वृद्धि हुई।
उत्तर : जर्मनी, इंग्लैण्ड तथा फ्रांस।

6. ___________और ___________ने स्पेन में गृह-युद्ध का रूप ले लिया।
उत्तर : ब्रिटेन, फ्रांस के द्वारा शोषण की नई नीति।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

7. स्पेन के प्रथम गणतंत्र का अध्यक्ष ___________को बनाया गया।
उत्तर : जमोरा।

8. स्पेन के गृह-युद्ध से द___________ेशों का मनोबल बढ़ा।
उत्तर : जर्मनी और इटली।

9. रूस में प्रथम ‘जार’ उपाषि ग्रहण की ___________
उत्तर : चतुर्थ आइवान।

10. रूस की विधानसभा का नाम ___________था।
उत्तर : ड्यूमा।

11. ___________ई. में रूस में भूमिदास प्रथा का अन्त हुआ।
उत्तर : 1861

12. 1857 ई. में ___________के भूमिदासों को मुक्ति मिली।
उत्तर : लिधुआनिया।

13. ___________को ‘मुक्तिदाता जार’ कहा जाता है।
उत्तर : द्वितीय अलेक्जेण्डर।

14. जमींदार एवं मुक्त भूमिदासों के बीच जमीन के बंटवारे की जिम्मेदारी ___________के हाथों में दी गयी थी।
उत्तर : लैंड मजिस्ट्रेट।

15. रूस में मुक्त भूमिदासों की जमीज का स्वामित्व ___________के हायों में था।
उत्तर : मिर।

16. रूसी जार ___________की मृत्यु बम लगने से हुई।
उत्तर : द्वितीय अलेक्जेण्डर।

17. रूस की ‘प्रथम क्रांति’___________की क्रांति के नाम से परिचित है।
उत्तर : 1905 ई.।

18. रूस में 1905 ई. की क्राति___________के शासनकाल में हुई थी।
उत्तर : निकोलस द्वितीय

19. रूस में 1917 ई. की क्रांति___________के शासनकाल में हुई थी।
उत्तर : निकोलस द्वितीय।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

20. ___________आन्दोलन का लष्य आतंकवाद के जरिये रूस में जारशाही को खत्म करना था।
उत्तर : नरोदनिक।

21. पोर्ट्समाऊय की संधि ___________युद्ध के बाद हुई।
Ans: रूस-जांपान।

22. 3 जनवरी 1905 ई. में ___________ जार के विरुद्ध प्रथम श्रमिकवर्ग का विद्रोह आरंभ हुआ।
उत्तर : सेंट पिट्सबर्ग में।

23. ‘खूनी रविवार’ की घटना ___________में हुई।
उत्तर : सेंट पिद्सबर्ग।

24. विद्रोहियों के हाधों निकोलस द्वितीय के __________ग्रैण्ड ड्यूक सरगास की मृत्यु हुई।
उत्तर : दादाजी।

25. __________ई: की क्रांति 1917 ई. की क्रांति का ड्रेंस रिहर्सल था।
उत्तर : 1905 ई.।

26. केरेन्क्की द्वारा _________गया। दल की मदद से कार्मिलाब के सैनिक विद्रोह को व्यर्थ किया
उत्तर : बोल्रोविक।

27. लेनिन ने अपनी अप्रैल धिसिस में मांग की कि देश की समस्त शक्तियाँ _________के हाय में सौंप देनी चाहिये।
उत्तर : सोवियत सरकार।

28. बोस्निया एवं हर्जगोबिना नामक दो स्थान _________के साथ युक्त होना चाहते थे।
उत्तर : सर्बिया।

29. 1878 ई. में बर्लिन समझौता के द्वारा बोस्निया एवं हर्जगोबिना नामक दोनों स्थानों में _________का शासन प्रतिष्ठित हुआ।
उत्तर : अंस्ट्रिया।

30. वर्साय संधि द्वारा मेमेल बन्दरगाह _________को दिया गया ।
उत्तर : लिथु आनिया।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

31. वर्साय संधि द्वारा के अनजिप बन्दरगाह _________को ‘मुक्त बन्दरगांह’ के रूप में घोषित किया गया।
उत्तर : जर्मनी।

32. सेराजेवो हत्याकाण्ड की पृष्ठभूमि में _________ने सर्बिया पर आक्रमण किया।
उत्तर : ऑस्ट्रिया।

33. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 ई. में शान्ति सम्मेलन_________ शहर में आयोजित हुआ।
उत्तर : पेरिस।

34. राष्ट्रसंघ की बात कही गयी है वुड्रो विल्सन के चौदह सूत्री शर्त की _________शर्त में।
उत्तर : 14 वीं।

35. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद् मित्रशक्ति एवं जर्मनी के बीच _________की संधि हुई।
उत्तर : वर्साय।

36._________ संधि को विवशतामूलक संधि कहा जाता है।
उत्तर : वर्साय।

37. 1929 ई. में आर्थिक महामंदी सर्वप्रथम में _________आरंभ हुई।
उत्तर : अमेरिका।

38. महामंदी के कारण यूरोपीय देशों में सबसे अधिक हानि_________ को हुई।
उत्तर : जर्मनी।

39. ‘काला वृहस्पतिवार’ के रूप में चिह्नित है 1929 ई. का _________
उत्तर : 24 अक्टूबर।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

40. 1929 ई. की मंदी के कारण _________केंडिट आन स्टाल्ट नामक बैंक दिवालिया घोषित हुआ।
उत्तर : ऑस्ट्रिया का।

41. हिटलर ने 1936 ई. में _________दखल किया।
उत्तर : राइनलैण्ड।

42. फासिस्ट के सदस्य _________नाम से जाने जाते थे।
उत्तर : काली कुर्ती के

43. 1922 ई. में _________इटली की शासन क्षमता दखल किया।
उत्तर : मुसोलिर्नी।

44. मुसोलिनी ने 1923 ई. में _________करफु द्वीप द्वल किया।
उत्तर : ग्रीस का।

45. मुसोलिनी अविसीनिया और युथोपिया दखल किया _________ई.में।
उत्तर : 1936

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. 17 वीं सदी में रूस की कुल जनसंख्या का प्राय: 95% कृषक थे।
उत्तर : True

2. रूस का कृषक सम्पदाय मूलत: दो भागों में विभक्त था- स्वाधीन कृषक एवं धनी कृषक।
उत्तर : False

3. जार के शासनकाल में रूस में मध्यम श्रेणी का अस्तित्व था।
उत्तर : False

4. मुक्ति पाने वाले भूमिदास अपनी प्राप्त जमीन को दान, बंधक या बिक्री कर सकते थे।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

5. रूस में जो भूमिदास कृषि से नहीं जुड़े थे, उन्हें मुक्ति के बाद जमीन नहीं मिली
उत्तर : True

6. रूस के नारोदनिक आन्दोलन की नीति थी। लोगों के पास जाकर क्रांतिकारी चिन्ताधारा के बारे में सचेतन करना
उत्तर : True

7. जार द्वितीय अलेक्जेण्डर का आदर्श था, ‘एक जार, एक चर्च, एक रूस।’
उत्तर : False

8. रूस के निहिलिष्ट आन्दोलनकारी बाद में नारोदनिक या जनतावादी आन्दोलन के साथ मिल गये।
उत्तर : True

9. बोल्शेंिक दल का लक्ष्य क्रांति द्वारा रूस में समाज व्यवस्था का परिवर्तन करना था जबकि मेनशेविक दल का लक्ष्य संसदीय व्यवस्था के माध्यम से समाज व्यवस्था का परिवर्तन करना था।
उत्तर : True

10. मार्च, 1917 में रूस में समाजतांत्रिक क्रांति सफल हुई।
उत्तर : False

11. रूस त्रिशक्ति गुट के पक्ष में प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ था।
उत्तर : True

12. मार्च, 1917 में रूस में केरेन्की के नेतृत्व में अस्थायी प्रजातान्त्रिक सरकार की स्थापना हुई।
उत्तर : True

13. नवम्बर, 1917 में रूस की विधानसभा (ड्यूमा) में बुर्जुआ नेताओं ने प्रिंस जार्ज लुवव् के नेतृत्व में रूस की शासन क्षमता दखल की। यह घटना नवम्बर क्रांति के नाम से परिचित है।
उत्तर : False

14. लेनिन ने कृषक, श्रमिक, सैनिक एवं आम लोगों के सहयोग से ‘सर्वहारा एकनायकत्व’ प्रतिष्ठा की बात कही थी।
उत्तर : True

15. मेनशेविक पार्टी ने अस्थायी प्रजातंत्र को समाप्त कर सोवियत सरकार की स्थापाना की।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

16. प्रथम विश्वयुद्ध के पहले जर्मनी एंग्लो सैवशन जाति एवं इंगलैण्ड टियूटानिक जाति के श्रेष्ठत्व का प्रचार करता था।
उत्तर : False

17. दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश उपनिवेश में इंगलैण्ड एवं बूयोर लोगों के बीच युद्ध के समय जर्मनी ने बूयोर प्रेसिडेन्ट क्लूपर को मदद करने का प्रस्ताव दिया था।
उत्तर : True

18. सेराजेवो हत्याकाण्ड को लेकर सर्बिया स्लाव जाति को आततायी कहकर सम्बोधित किया गया था।
उत्तर : False

19. जर्मनी से ब्रेस्टलिटवोस्क की संधि ( 1918 ई.) करके रूस प्रथम विश्व युद्ध से हट गया।
उत्तर : True

20. अमेरिका को आर्धिक संकट से मुक्त करने के लिये अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने ‘न्यू डील’ की घोषणां की थी।
उत्तर : False

21. जर्मन शासक द्वितीय विलियम ‘हेरेनवक तत्व’ के उग्र समर्थक थे।
उत्तर : False

22. हिटलर द्वारा 1938 ई. में ऑस्ट्रिया एवं चेकोस्लोवाकिया दखल किया गया।
उत्तर : True

23. मुसोलिनी के फासिस्ट दल के सदस्य काला पोशाक पहनते थे, इसी से उन्हें ‘काला कुर्ता वाला’ कहा जाता था।
उत्तर : True

24. हिटलर ने जर्मनी में कम्युनिस्ट एवं दूसरी पार्टियों के प्रति जो आक्रमणात्मक दमनकारी नीति अपनायी थी वह ‘एक्याड्रिज्म’ नाम से परिचित थी।
उत्तर : False

25. मुसोलिनी की ‘अवन्टी’ पत्रिका ‘नाजी पार्टी के बाइबिल’ नाम से परिचित थी।
उत्तर : False

26. नाजी पार्टी का प्रमुख अखबार ‘पीपुल्स आब्जर्वर’ था।
उत्तर : True

27. हिटलेर की जीवनी का लेखक प्रमुख इतिहासकार एलन बुल्क था।
उत्तर : True

28. स्पेन की पापुलर फ्रण्ट सरकार ने केसारे कुई रोपा को कैनारी द्वीप समूह में निर्वासन दिया।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

29. हिटलर के यहूदी निधन विभाग के प्रमुख गोएबल्स थे।
उत्तर : False

30. हिटलर ने 1 जुलाई 1939 ई. को पोलैण्ड पर आक्रमण किया।
उत्तर : True

31. स्पेन का गृहयुद्ध आंतरिक युद्ध था।
उत्तर : False

32. 1917 ई. में बोल्शेविक क्रांति के समय निकोलस द्वितीय रूस’का जार था।
उत्तर : True

33. जर्मनी में संसद को रिचस्टांग कहा जाता था।
उत्तर : True

34. 1917 ई. में बोल्शेविक क्रांति के समय लेनिन रूस से बाहर थे।
उत्तर : True

35. युद्ध में वीरता दिखाने के कारण हिटलर को आयरन क्रॉस पदक दिया गया था।
उत्तर : True

36. स्टालिन लाल सेना के नायक थे।
उत्तर : False

37. जार रोमानोव वंश के शासक थे।
उत्तर : True

38. पेरिस सम्मेलन ने इटली को खुश कर दिया था।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तस्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जारतंत्र (1) पिटर द ग्रेट
(B) आधुनिक रूस के जनक (2) मिखाइल रोमानोव
(C) डिसमविस्ट विद्रोह (3) द्वितीय अलेक्जेण्डर
(D) भूमिदास प्रथा की समाप्ति (4) प्रथम निकोलस

उत्तर :

स्तस्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जारतंत्र (2) मिखाइल रोमानोव
(B) आधुनिक रूस के जनक (1) पिटर द ग्रेट
(C) डिसमविस्ट विद्रोह (4) प्रथम निकोलस
(D) भूमिदास प्रथा की समाप्ति (3) द्वितीय अलेक्जेण्डर

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुक्तिदाता जार (1) रासपुतिन
(B) 1905 ई. की क्रान्ति (2) लेनिन
(C) बोल्शेविक क्रांति (3) द्वितीय निकोलस
(D) अलेक्जेण्डर (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) मुक्तिदाता जार (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर
(B) 1905 ई. की क्रान्ति (3) द्वितीय निकोलस
(C) बोल्शेविक क्रांति (2) लेनिन
(D) अलेक्जेण्डर (1) रासपुतिन

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1801-25 ई. (1) प्रथम निकोलस
(B) 1825-55 ई. (2) द्वितीय निकोलस
(C) 1855-81 ई (3) प्रथम अलेक्जेण्डर
(D) 1894-1917 ई. (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1801-25 ई. (3) प्रथम अलेक्जेण्डर
(B) 1825-55 ई. (1) प्रथम निकोलस
(C) 1855-81 ई (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर
(D) 1894-1917 ई. (2) द्वितीय निकोलस

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1825 ई. (1) द्वितीय निकोलस को राजगदी
(B) 1861 ई. (2) भूमिदासों की मुक्ति
(C) 1881 ई. (3) डिसमव्रिस्ट विद्रोह
(D) 1894 ई. (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर की मृत्यु

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1825 ई. (3) डिसमव्रिस्ट विद्रोह
(B) 1861 ई. (2) भूमिदासों की मुक्ति
(C) 1881 ई. (4) द्वितीय अलेक्जेण्डर की मृत्यु
(D) 1894 ई. (1) द्वितीय निकोलस को राजगदी

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जर्मन कैसर (1) द्वितीय निकोलस
(B) बोल्शेविक क्रांति (2) स्टोलिपिन
(C) काले आतंक का राज (3) लेनिन
(D) अप्रैल थिसिस (4) द्वितीय विलियम

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जर्मन कैसर (4) द्वितीय विलियम
(B) बोल्शेविक क्रांति (1) द्वितीय निकोलस
(C) काले आतंक का राज (2) स्टोलिपिन
(D) अप्रैल थिसिस (3) लेनिन

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) वाइमर प्रजातंत्र (1) फादर गैवन
(B) स्टार्म टुपर्स (2) ट्रॉटस्की
(C) खूनी रविवार (3) फ्रेड़िक इबर्ट
(D) सोवियत रूस के विदेशमंत्री (4) एरनेस्ट रौमे

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) वाइमर प्रजातंत्र (3) फ्रेड़िक इबर्ट
(B) स्टार्म टुपर्स (4) एरनेस्ट रौमे
(C) खूनी रविवार (1) फादर गैवन
(D) सोवियत रूस के विदेशमंत्री (2) ट्रॉटस्की

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इटली के प्रथानमंत्री (1) काऊण्ट उटी
(B) द्वितीय निकोलस के मंत्री (2) पिटर स्टोलिपिन
(C) जार के प्रधानमंत्री (3) प्रिंस जार्ज लुवव्
(D) अस्थायी प्रजातान्त्रिक सरकार (4) लुइजी फैक्टा

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इटली के प्रथानमंत्री (4) लुइजी फैक्टा
(B) द्वितीय निकोलस के मंत्री (1) काऊण्ट उटी
(C) जार के प्रधानमंत्री (2) पिटर स्टोलिपिन
(D) अस्थायी प्रजातान्त्रिक सरकार (3) प्रिंस जार्ज लुवव्

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) रूस के सेनापति (1) हिटलर
(B) फादर्स एण्ड सन्स (2) लेनिन
(C) साम्राज्यवाद पूंजीवाद का सर्वोच्च स्तर (3) तुर्गनव
(D) मीन काम्फ (4) कार्निलव

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) रूस के सेनापति (4) कार्निलव
(B) फादर्स एण्ड सन्स (3) तुर्गनव
(C) साम्राज्यवाद पूंजीवाद का सर्वोच्च स्तर (2) लेनिन
(D) मीन काम्फ (1) हिटलर

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) सेराजेवो हत्याकाण्ड (1) व्लार्क हुवर
(B) श्योर प्रसिडेन्ट (2) हिटलर
(C) अमेरिका के राष्ट्रपति (3) नैवेरिलो भिन्सेप
(D) हेरेनबक तत्व (4) क्लुगर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) सेराजेवो हत्याकाण्ड (3) नैवेरिलो भिन्सेप
(B) श्योर प्रसिडेन्ट (4) क्लुगर
(C) अमेरिका के राष्ट्रपति (2) हिटलर
(D) हेरेनबक तत्व (1) व्लार्क हुवर

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1898 ई. (1) प्रथम विश्युुद्ध
(B) 1903 ई. (2) पोदर्समाउथ की संधि
(C) 1905 ई. (3) सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी
(D) 1914 ई. (4) बोल्शेविक पार्टी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1898 ई. (3) सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी
(B) 1903 ई. (4) बोल्शेविक पार्टी
(C) 1905 ई. (2) पोदर्समाउथ की संधि
(D) 1914 ई. (1) प्रथम विश्युुद्ध

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1917 ई. (1) नयी आर्थिक नीति
(B) 1919 ई. (2) महामंदी
(C) 1921 ई (3) पेरिस का शांति सम्मेलन
(D) 1929 ई. (4) जारशाही की समाप्ति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1917 ई. (4) जारशाही की समाप्ति
(B) 1919 ई. (3) पेरिस का शांति सम्मेलन
(C) 1921 ई (1) नयी आर्थिक नीति
(D) 1929 ई. (2) महामंदी

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 5 20वीं सदी में यूरोप

प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) फुहरर (1) मुसोलिनी
(B) इल-डुचे (2) जेनरल फ्रैंको
(C) गेस्टापो (3) हिमलर
(D) स्पेन का गृहयुद्ध (4) हिटलर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) फुहरर (4) हिटलर
(B) इल-डुचे (1) मुसोलिनी
(C) गेस्टापो (3) हिमलर
(D) स्पेन का गृहयुद्ध (2) जेनरल फ्रैंको

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 7 Question Answer – भारत के संसाधन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
किन्हीं दो सामान्य सुलभ संसाधनों का नाम लिखिए?
उत्तर :
वनस्पति, कृषि योग्य मिट्टी आदि।

प्रश्न 2.
कोरबा कोयला उत्पादक केन्द्र कहां स्थित है?
उत्तर :
कोरबा कोयला उत्पादक केन्द्र छत्तीसगढ़ में स्थित है ।

प्रश्न 3.
धातुएं किस प्रकार का संसाधन हैं?
उत्तर :
अजैव संसाधन।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 4.
एक पारम्परिक ऊर्जा स्रोत का नाम बताओ।
उत्तर :
कोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न 5.
पश्चिम बंगाल का तेल शोधक कारखाना कहां स्थित है?
उत्तर :
हल्दिया में।

प्रश्न 6.
एक नवीकरण संसाधन का नाम बताइए।
उत्तर :
वन।

प्रश्न 7.
एक गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत का नाम बताओ।
उत्तर :
सूर्यताप, पवन।

प्रश्न 8.
जल विद्युत किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर :
ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)

प्रश्न 9.
पश्चिम भारत के महत्वपूर्ण परमाणु केन्द्र का नाम लिखो।
उत्तर :
मुंबई के निकट तारा पुर में ‘भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर’ (Bhabha Atomic Research Center), राजस्थान में स्थित कोटा ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 10.
वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण हो चुका है और जिनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, क्या कहा जाता है?
उत्तर :
विकसित संसाधन।

प्रश्न 11.
लौह अयस्क के जमाव की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन सा स्थ्रान है?
उत्तर :
पहला स्थान है।

प्रश्न 12.
भारत में पहला परमाणु विद्युत केन्द्र कहाँ स्थापित किया गया था?
उत्तर :
तारापुर महाराष्ट्र में।

प्रश्न 13.
भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक खनिज तेलशोधक कारखाने का नाम लिखो।
उत्तर :
हल्दिया तेलशोधक केन्द्र।

प्रश्न 14.
भारत में किस राज्य का लगभग सम्पूर्ण लौह अयस्क निर्यात कर दिया जाता है?
उत्तर :
गोवा का।.

प्रश्न 15.
संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर :
भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए।

प्रश्न 16.
कर्नाटक की एक लौह-अयस्क खान का नाम लिखिए?
उत्तर :
केमनगण्ड़ी की खान (कर्नाटक)

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 17.
भारत में पहला जल विद्युत केन्द्र कहाँ स्थापित किया गया था?
उत्तर :
दार्जिलिग

प्रश्न 18.
कौन-सा लौह अयस्क सर्वोत्तम कोटि का होता है?
उत्तर :
मैग्नेटाइट।

प्रश्न 19.
भारत में किस जाति का लौह अयस्क पाया जाता है?
उत्तर :
हेमेटाइट और मैग्नेटाइट।

प्रश्न 20.
नेवेली लिग्नाइट परियोज़ना का विकास भारत के किस राज्य में हुआ है?
उत्तर :
तमिलानाडु

प्रश्न 21.
भारत में उत्पादित कुल कोयला के कितने प्रतिशत का उपयोग ताप विद्युत उत्पादन में किया जाता है?
उत्तर :
73 %

प्रश्न 22.
कोयला के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
उत्तर :
तीसरा स्थान है।

प्रश्न 23.
भारत में कुल आवश्यकता के कितने प्रतिशत खनिज तेल का खनन होता है?
उत्तर :
30 %

प्रश्न 24.
भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र कौन सा है?
उत्तर :
असम का तेल कृटिन्ध।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 25.
भारत के किसी एक जलविद्युत उत्पादन केन्द्र का नाम लिखिए।
उत्तर :
महाराष्ट्र, खणोली, भिवपुरो, भीरा, कोयना।

प्रश्न 26.
विश्न का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया?
उत्तर :
आबनिंस्क रूस में।

प्रश्न 27.
तीन प्रमुख लौह-अयस्क उत्पादक केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
घाली-राझरा (छत्तीसगढ़), गुरूमाहिसानी (उड़िसा), एवं केमानगुण्डी (कर्नाटक)

प्रश्न 28.
भारत में कौन दो कोयला क्षेत्र पाये जाते है?
उत्तर :
गोण्डवाना क्षेत्र और टर्शियरी क्षेत्र।

प्रश्न 29.
भारत के सबसे पुराने खनिज तेल शोघक कारखाने का नाम लिखो।
उत्तर :
डिगबोई।

प्रश्न 30.
भारत के सबसे बड़े तेल शोधक कारखाने का नाम लिखो।
उत्तर :
कोयलो, गुजरात में।

प्रश्न 31.
कोयला किस प्रकार का खनिज है?
उत्तर :
अवसादी शैलो में पाये जानेवाला अधात्विक खनिज है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 32.
खनिज तेल के दो प्रमुख खनन केन्द्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
असम में डिगब्रोई तथा गुजरात में अंकलेश्वर।

प्रश्न 33.
भारत के लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक कौन-सा देश हैं?
उत्तर :
जापान।

प्रश्न 34.
तमिलाडु में किस प्रकार का कोयला पाया जाता है?
उत्तर :
लिग्नाइट।

प्रश्न 35.
भारत किस देश में कोकिंग कोयला आयात करता है?
उत्तर :
आस्ट्रेलिया।

प्रश्न 36.
अंकलेश्वर क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
अकलेश्वर गुजरात तेल क्षेत्र सबसे बड़ा भंडार है।

प्रश्न 37.
सागर सप्राट क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर :
सागर में खनिज तेल निकालने के लिए।

प्रश्न 38.
एक असमाप्य ऊर्जा स्रोत का नाम बताइए।
उत्तर :
ताप उर्जा।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 39.
पश्चिम बंगाल के एक ताप विद्युत केन्द्र का नाम बताइये।
उत्तर :
दुर्गापुर, बेण्डेल।

प्रश्न 40.
भारत में कहाँ पवन ऊर्जा उत्पादन की सम्भावना सबसे अधिक है।
उत्तर :
तमिलनाडु।

प्रश्न 41.
एक सौर ऊर्जा से संचालित उपकरण का नाम बताओ।
उत्तर :
सोलर कुकर, सोलर इन्वर्टर।

प्रश्न 42.
भारत में ज्वारीय शक्ति का उत्पादन कहाँ अधिक सम्भव है?
उत्तर :
गुजरात, तमिलनाडु।

प्रश्न 43.
पश्चिम बंगाल के एक जल विद्युत उत्पादन केन्द्र का नाम बताओ।
उत्तर :
मयुराक्षी, जलढाका।

प्रश्न 44.
सफेद कोयला (White Coal) किसे कहते हैं?
उत्तर :
जल विद्युत को।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 45.
पश्चिम बंगाल के एक ताप विद्युत केन्द्र का नाम बताइए।
उत्तर :
दुर्गापुर

प्रश्न 46.
भारत के लौह अयस्क का सबसे बड़ा आयातक कौन-सा देश है ?
उत्तर :
जापान।

प्रश्न 47.
तमिलनाडु में किस प्रकार का कोयला पाया जाता है?
उत्तर :
लिमोनाइट।

प्रश्न 48.
भारत किस देश से कोकिंग कोयला आयात करता है?
उत्तर :
आस्ट्रेलिया।

प्रश्न 49.
अंकलेश्वर क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
अंकलेश्वर गुजरात तेल क्षेत्र सबसे बड़ा भंडार है।

प्रश्न 50.
सागर सग्राट क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर :
सागर मे खनिज तेल निकालने के लिए।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के संसाधन होने के लिए किन-किन बातों का होना आवश्यक है?
उत्तर :
किसी वस्तु के संसाधन होने के लिए तीन-बातों प्रकृति, मनुष्य और प्राद्योगिकी का होना जरूरी है?

प्रश्न 2.
अजैविक संसाधन से आप क्या समझते है?
उत्तर :
अजैविक संसाधन (Abiotic Resources) : अजीवित वस्तुओं से प्राप्त होनेवाले पदार्थो को अजेविक संसाधन कहा जाता है। ऐसे संसाधन खानो या चट्टानों से खनिज रूप मे उपलब्ब होते हैं जैसे-लोहा, सोना, चाँदी, ताँबा, कोयला, पेट्रोलियम आदि।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 3.
भारत के चार प्रमुख परमाणु विद्युत केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
मुंबई के निकट तारापुर, राजस्थान में कोटा, उत्तर प्रदेश में नरोरा, तलिमनाडु में कलपक्कम

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल के दो ताप विद्युत केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
बैन्डेल, वकेश्वर, कोलाघाट।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन से क्या समझते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
वे संसाधन जो किसी देश की सीमा से दूर खुले महासागर द्वारा प्राप्त हो उसे अन्तरांष्ट्रीय संसाधन कहते हैं। इन संसाधनों को अंतराष्ट्रीय सहमति के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता। जैसे तट रेखा से 200 कि०मी० की दूरी में स्थित महासागर।

प्रश्न 6.
तमिनाडु के दो परमाणु विद्युत केन्द्रों के नाम बताओ।
उत्तर :
ईडुक्की, कलपक्कम।

प्रश्न 7.
जल विद्युत के क्या लाभ है?
उत्तर :
प्रदुषण मुक्त, कम खर्चीला, शक्ति का सस्ता साधन।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 8.
जल विद्युत उत्पादन के क्यो दोष है?
उत्तर :
असदावाहिनी नदी, दूर खपत क्षेत्र तक पहुँचाने में असुविधा।

प्रश्न 9.
विद्युत कितने प्रकार की होती है?
उत्तर :
विद्युत मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है –

  • ताप विद्युत
  • जल विद्युत
  • परमाणु विद्युत।

प्रश्न 10.
कोयले के उप पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर :
कोलतार, बेंजोल, नेष्थलिन।

प्रश्न 11.
पेट्रोलियम से प्राप्त होने वाले उप-पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर :
चिकनाई तेल, गैस, सौन्दर्य के सामान।

प्रश्न 12.
भारत किन देशों से खनिज तेल का आयात करता है?
उत्तर :
रासिया, इरान, सऊदी अरब।

प्रश्न 13.
खनिज लोहा से क्या बनाया जाता है?
उत्तर :
खनिज लोहा से ढलवाँ लोहा (Pig Iron) तथा इस्पात (Steel) बनाया जाता है।

प्रश्न 14.
चक्रीय संसांधन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
चक्रीय संसाधन (Recyclable Resources) :- जिन संसाधनों का उपयोग बार-बार किया जाये, वे चक्रीय संसाधन कहलाते हैं। जैसे-लोहा, चाँदी, सोना आदि।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 15.
आज के युग को लौह युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
आज लोहा विश्व में सबसे उपयोगी धातु है। मानव के उपयोग में आने वाली सूई जैसी छोटी चीज से लेकर विशाल यंत्रों, वायुयानों एवं जलयानों तक का निर्माण लोहे से ही होता है। इसी से आज के युग को लौह युग कहा जाता है।

प्रश्न 16.
भारत किन देशों को कोयले का नियति करता है?
उत्तर :
भारत कोयले का निर्यात मुख्य रूप से श्रीलंका, पाकिस्तान, बंगलादेश, सिंगापुर, हांकांग, म्यामार, मारीशस आदि देशों को करता है।

प्रश्न 17.
भारत किन देशों से कोकिंग कोयला आयात करता है?
उत्तर :
भारत कोकिंग कोयले का आयात ऑस्ट्रेलिया, कनाडा तथा पोलैण्ड से करता है।

प्रश्न 18.
भारत किन देशों से खनिज तेल का आयात करता है?
उत्तर :
भारत ईरान, कुबैत, इराक, सउदी अरब, बहरीन, बेनेजुएला, म्यांमार तथा इण्डोनेशिया आदि देशों से खनिज तेज का आयात करता है।

प्रश्न 19.
विकसित संसाधन से क्या समझते हैं?
उत्तर :
वे संसाधन जिनका सर्वोक्षण किया जा चुका है और उनके उपयोग की गुणवता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, विकसित संसाधन कहलाते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 20.
कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला का वर्गीकरण कीजिए।’
उत्तर :
कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला पाँच प्रकार का होता है

  1. एन्थासाइट
  2. विटुमिनस
  3. लिग्नाइट
  4. पीट
  5. कैनेल।

प्रश्न 21.
भू-तापीय ऊर्जा से क्या समझते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के आंतरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 22.
जैविक संसाधन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जैविक संसाधन (Biotic Resources) :- जिन संसाधनों को जीवों या जीवित वस्तुओं से प्राप्त किया जाता है वे जैवीय संसाधन कहलाते हैं। प्राणियों और वनस्पतियों से प्राप्त या सुलभ संसाधन जैवीय संसाधन हैं जैसे-जंगली जीवजन्तु, पालतु पश-पक्षी, मछ्छलियाँ, कृषि से प्राप्त फसलें आदि।

प्रश्न 23.
प्राकृतिक वनस्पतियों को नवीकरणीय संसाधन क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
प्राकृतिक वनस्पतियाँ हमारे लिए प्रकृति के द्वारा दिया गया एक बहुमूल्य संसाधन है। जंगलों को काटकर या उनसे उत्पादित वस्तु को प्राप्त कर हम अपनी जरूरतों की पूर्ति कर सकते हैं। जंगलों को काटकर पुन: वृक्षारोपण द्वारा उनकी क्षतिपूर्ति की जा सकती है। इसलिए इसे नवीकरणीय संसाधन कहते हैं?

प्रश्न 24.
परम्परागत शक्ति के साधन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
वे संसाधन जिनका व्यवहार या प्रयोग सदियों से किया जा रहा है, उसे परम्परागत संसाधन कहते है। जैसेकोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न 25.
गैर-परम्परागत शक्ति के साधन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
वे संसाधन जिनका व्यवहार आधुनिक तकनीक का प्रयोग द्वारा किया जा रहा है, उसे गैर-परम्परागत शक्ति के साधन कहते हैं। जैसे पवन उर्जा, सौर उर्जा आदि।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 26.
सागर सग्राट क्या है?
उत्तर :
सागर सम्माट लोह से निर्मित एक विशाल जहाज (Rig) है जो बाम्बे हाई में तेल उत्पादन के कार्य में उपयोग हो रहा है।

प्रश्न 27.
प्राकृतिक समाग्री किसे कहते हैं?
उत्तर :
कुछ वस्तुएँ न उपयोगी है न हानिकारक हैं उन्हें Natural Stuffs कहते हैं। उदाहरण के रूप में कोयला, सोया हुआ आदमी, ये मानक के लिए न तो उपयोगी है न बेकार हैं।

प्रश्न 28.
मनुष्य की द्वैध भूमिका क्या है?
उत्तर :
मनुष्य संसावन का निर्माण करता है, किन्तु वह स्वयं भी एक संसाधन अर्थात् उत्पादन करता है। मनुष्य संसाधन का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। इसी को मनुष्य की दोहरी भूमिका (Dual role) कहा जाता है।

प्रश्न 29.
मैंगनीज का क्या उपयोग है?
उत्तर :
मैगनीज का उपयोग लौह – इस्पात उद्योग, शीशा उद्योग और ब्लीचिंग बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 30.
बाक्साइड की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
बॉक्साइड से अल्यूमिनियम प्राप्त किया जाता है। किरोसिन तेल को साफ किया जाता है और रासायनिक वस्तुओं की तैयारी की जाती है।

प्रश्न 31.
लौह-इस्पात उद्योग में मैंगनीज की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
मैंगनीज का उपयोग इस्पात को कठोर एवं जंगरोषी बनाने तथा लोहे में से गैस को हटाने के लिए किया जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 32.
तीन प्रमुख लौह – अयस्क उत्पादक केन्द्रों के नाम लिखो?
उत्तर :
तीन प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक केन्द्र :

  1. घाली-राक्षरा-छत्तीसगढ़
  2. गुरुमहिसानी- उड़ीसा एवं
  3. बाबा बूदन पहाड़ियों का केमानगुण्डी – कर्नाटक

प्रश्न 33.
भारत में किस प्रकार का कोयला पाया जाता है?
उत्तर :
भारत में गोण्डवाना और टर्शियरी दो प्रकार के कोयला क्षेत्र पाये जाते हैं।

प्रश्न 34.
भारतीय कोयले की क्या कमिय हैं?
उत्तर :
(i) भारतीय कोयले की किस्म निम्न है एवं यह अत्यधिक घुआँ उत्पन्न करता है।
(ii) उष्मा प्रदान करने के सन्दर्भ में भारतीय कोयला निम्न है।

प्रश्न 35.
भारतीय लौह अयस्क की क्या विशेषता है?
उत्तर :
भारतीय लौह अयस्क उत्तम कोटि का है तथा इसमें गंधक की मात्रा काफी कम (0.6 % से भी कम) होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 36.
मानव भी संसाधन है, कैसे?
उत्तर :
वस्तु या पदार्थ संसाधन नहीं बल्कि उसमें उपस्थित कार्यकारिता या उपयोगिता जो मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और जिन्हें मानव सुजित करता है, इसलिए मानव भी एक संसाधन हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
क्या संसाधन प्राकृतिक उपहार है? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर :
संसाधन प्राकृतिक उपहार नहीं है, संसाधन मानवीय क्रियाओं का परिणाम है। मानव स्वयं भी संसाधनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह पर्यावरण में पाये जाने वाले पदार्थो को संसाधन में परिवर्तित करता है और उनका प्रयोग करता है।

प्रश्न 2.
गैर-परम्परागत शक्ति संसाधनों से प्रदूषण क्यों नहीं होता है?
उत्तर :
सौर उर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा आदि गैर-परम्परागत ऊर्जा के सोत्र हैं। इनकी उत्पत्ति नयी तकनीकी खोज द्वारा हुई है । ये गैस, दुर्गन्ध और मलवा नहीं छोड़ते हैं। अत: इन संसाधनों का उपयोग कर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है, जो आज की सबसे बड़ी पर्यावरण की समस्या है।

प्रश्न 3.
लौह अयस्क के उपयोग एवं महत्व को लिखो।
उत्तर :
अथर्ववेद के अनुसार लोहा समृद्धि का अमोघ यन्त्र है। लोहे का उपयोग मानव विकास के उत्तर-पाषाण युग से पश्चात् वर्तमान युग तक निरन्तर बढ़ता ही जा रहा है। आधुनिक युग के औद्योगिक विकास एवं सभी प्रकार की प्रगति, देशों की श़्ति और आर्थिक समृद्धि का आधार भी लोहा एवं लोहे से निर्मित वस्तुएँ एवं मशीनें ही है। इसलिए इस युग को ‘लोह-इस्पात का युग?

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 4.
खनिज तेल के व्यापार का वर्णन करो।
उत्तर :
खनिज तेल को यातायात की रीढ़ कहते हैं लेकिन यह सभी देशों में नहीं पाया जाता है। खनिज तेल का प्रयोग संसार के सभी देशों यातायात, उद्योग-धंधे, कृषि में अनिवार्यत: किया ही जाता है। इस प्रकार खनिज तेल का आयात तथा निर्यात आवश्यक है। खनिज तेल निर्यातक देशीय संगठन (Organisation of Petroleum Exporting Countries = OPEC) द्वारा संसार के सभी देशें को खनिज तेल की आपूर्ति की जाती है। खनिज तेल प्रमुख निर्यातक देश, खाड़ी के देश वेनुजुएला, लीबिया, ट्यूनीशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूसीय संघ आदि हैं। इसके आयातक संसार के प्रात: सभी देश है।

प्रश्न 5.
लौह अयस्क के व्यापार का वर्णन करो।
उत्तर :
लौह अयस्क भारी व सस्ता खनिज है। कुछ विकसित, कई विकासशील व पूर्वी यूरोप के समाजवादी देश लौह अयस्क का आयात करते हैं। लौह अयस्क के अपरिमित भण्डार रूसीय परि-संघ, बाजोल, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देशों में पाये जाते है। मुख्य आयातक देश जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोपीय देश, चीन एवं अन्य विकासशील देश है। मुख्य निर्यातक देश ब्राजील, आस्ट्रेलिया, भारत, रुसीय परिसंघ युकेन, स्वीडेन, दक्षिण अफ्रिका, कनाडा, अल्जीरिया, वेनेजुएला, लाइबेरिया एवं सेन हैं।

प्रश्न 6.
कोयले के उपयोग एवं महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
कोयल के उपयोग एवं महत्व :-कोयले का मुख्य उपयोग शक्ति के साधनों के रूप में किया जाता है। किसी देश का औद्यौगिक विकास मुख्यत: कोयले पर ही निर्भर है। कोयले का प्रयोग तापीय विद्युत शाक्ति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। आजकल इसका प्रयोग रसायन तथा पेट्रो-रसायन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है। कोयल से सिन्थेटिक कपड़े, कृत्रिम तेल तथा गोला-बारूद आदि भी बनाये जा रहे हैं। कोयल का प्रयोग घरेलू ईधन के रूप में किया जाता है। इससे बाष्प पैदा करके मशीनों तथा जलयान चलाने में किया जाता है। लगभग 80 % कोयला का प्रयोग लोहा और इस्पात उद्योग तथा विद्युत शक्ति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 7.
कोयले के व्यापार की व्याख्या करो।
उत्तर :
कोयला एक भारी तथा ज्चलनशील खनिज है तथा इसका विश्व वितरण असमान होता है। यह संसार के लगभाग सभी देशों में कम या अधिक पाया जाता है। संसार के देशों से कोयल के सह-उत्पादक का आयात तथा निर्यात किया जाता है। कोयला के प्रमुख व्यापारकता देश स्वीडेन, फ्रांस, कनाडा, पाकिस्तान, बंगलादेश, दक्षिणी अफ्रीका, इटली और खाड़ी के देश है।

प्रश्न 8.
उर्जा के परम्परागत साधनों के लाभ एवं हानि को लिखो।
उत्तर :
लाभ (Advantage) :

  1. इनको जलाकर वर्तमान समय में आवश्यक 60 % उर्जा की आपूर्ति की जा रही है।
  2. ये परम्परागत साधन है जिनका उपयोग बहुत प्राचीन समय से हो रहा है।

हानि (Disadvantage) :

  1. ये अनवीकरणीय संसाधन हैं।
  2. इनका भण्डार सीमित है जो भविष्य में समाप्त हो सकता है।
  3. उर्जा के परम्परागत स्रोत प्रदूषणकारी हैं।
  4. जीवाश्म ईंधनों का विनाश तेजी से हो रहा है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 9.
भारत में उत्पादन किये जाने वाले ताप विद्युत की व्याख्या करो।
उत्तर :
देश में निरन्तर विद्युत की मांग कई गुणा बढ़ने से जब जल विद्युत एवं अणुविद्युत की परियोजनाओं द्वारा उसे पूरा कर पाना सम्भव नहीं हो पाया तो कोयले एवं खनिज तेल से ताप विद्युत गृहों की स्थापना प्रारम्भ में कोयला खन्न क्षत्रों के आस-पास की गई। ऐसे ताप विद्युत गृहों के विकास में भारत को लम्बे समय तक रूसी सहयोग-प्रोजेक्ट रिर्पोट तैयार करना, स्थान निर्धारण, मशीनरी का आयात एवं स्वदेश में ही ताप विद्युत गृह का निर्माण एवं उसका संरचनात्मक विकास एवं संचालन का पूरा प्रशिक्षण, शक्ति गृहों से उपभोक्ता केन्द्रों तक उसके लिए संचारण व्यवस्था आदि की सम्पूर्ण जानकारी रूस एवं चेक गणराज्य से प्राप्त हुई।

अब भारत में ही 500 मेगावाट तक की जेनरेटर सेट की इकाईयों का निर्माण सम्भव होने से सुपर ताप विद्युत गृह की क्षमता को बढ़ाकर 2000 से 2500 मेगावाट तक किया जा चुका है।

प्रश्न 10.
भारत में पवन ऊर्जा के विकास पर प्रकाश डालो।
उत्तर :
पवन ऊर्जा (Wind Energy) : अनुमान है कि भारत मे कुछ 45,000 मेगावाट सम्भाव्य पवन ऊर्जा है और 13,000 मेगावाट पवन ऊर्जा प्राप्त करने को प्रौद्योगिकी का विकास किया जा चुका है। अब तक 1,340 पवन ऊर्जा प्राप्त की जा चुकी है। इससे भारत स्पेन जर्मनी, सयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क तथा स्पने के बाद पवन ऊर्जा विकसित करने वाला विश्व का पांचवाँ बड़ा देश बन गया है। पवन ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अब तक 208 स्थानों को अंकित किया गया है। गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आघ प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक में पवन ऊर्जा के दोहन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पायी गई हैं। लगभग 8.8 खरब यूनिट बिजली विभिन्न राज्यों के ग्रिडी को प्रदान की गई है। उर्जा जेनेरेटर, प्रवन मिल तथा बैट्री चार्जिग सिस्टम को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। दस मेगावाट वाला एशिया का सबसे बड़ा पवन फार्म गुजरात के खम्भात में स्थापित किया गया है।

प्रश्न 11.
भारत में भूतापीय ऊर्जा के विकास की व्याख्या करो?
उत्तर :
भूतापीय ऊर्जा :- भूतापीय उर्जा वह ऊष्मा (Heat) है जो पृथ्वी के धरातल के नीचे, भूगर्भ में होनेवाले प्राकृतिक प्रकमों से पैदा होती है। भूपटल (Crust) के लगभग 50 किलोमीटर नीचे मैन्टिल (Mantle) परत विस्तृत है जो अर्द्ध द्रवित (Semi-molten) दशा में है। मैन्टल परत के नीचे लोहे तथा निकिल, युक्त द्रवित शैलों तथा रेडियोधर्मी पदार्थो के विघटन से उत्पन्न तीव्र दबाव के कारण पृथ्वी का भीतरी भाग भी गर्म हो जाता है। समान्यतः ऊष्मा का यह स्रोत पृथ्वी के बहुत नीचे स्थित होता है किन्तु कुछ क्षेत्रों में जहाँ द्रवित शैले भूपटल की दरारों से होकर पृथ्वी के धरातल के निकट आ जाती हैं, वहां वाष्प (Steam) तथा उष्ण जल के भूमिगत स्रोत उत्पन्न हो जाते हैं।

इन निक्षेपों में वेधन (Drilling) करके उनकी ऊर्जा के स्थानों एवं जल को गर्म करने, औद्योगिक कार्यों को संचालित करने तथा विद्युत उत्पादन के लिये प्रयुक्त किया जा सकता है। भूतापीय संसाधनों में शुष्क वाष्प (Dry Steam) सबसे बिरल, लेकिन वरीयता प्राप्त संसाधन है। भारत ने इस उर्जा दोहन के लिए पर्याप्त उन्नति की है। भूगर्भिक सर्वेक्षणों द्वारा 340 गर्म जल के झरनों की खोज की गयी हैं। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के तत्तापानी में 300 किलोवाट का भूपातीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की मंजूरी दी है। भारत में संभाव्य 2000 मेगावाट भूतापीय ऊर्जा विद्यमान है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 12.
लोहे के उपयोग पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
किसी भी देश की औद्योगिक उन्नति एवं सामरिक महत्व लौह इस्पात उद्योग पर निर्भर है। लौह अयस्क से कच्चा लोहा का निर्माण होता है। इससे रेलवे लाइन, गाड़याँ, हवाई-जहाज, कृषि के सामान, उत्पादन की मशीनें, सामरिक आवश्यकता के सामान, जलपोत, पनडुबब्वी बनती है। भारत खनिज लौह के बारे में आत्म निर्भर ही नहींडसका निर्यात भी करता है।

प्रश्न 13.
लौह अयस्क की विभिन्न किस्मों का विवरण दीजिए।
उत्तर :
शुद्ध धातु की मात्रा के आधार पर लौह अयस्क की प्रमुख चार किस्में हैं :-

  1. हैमेटाइट (Haematite) :- इसका रंग लाल व काला होता है। इसमें लौहांश 70 % प्रतिशत होता है। संसार में अधिकतर इसी जाति का लोहा मिलता है।
  2. मैग्नेटाइड (Magnetite) :- यह सर्वश्रेष्ठ लौह-अयस्क है। जिसमें लौहांश 72.4 प्रतिशत होता है। इसमें नमी सबसे कम होती है। इसका रंग काला होता है। इसमें चुम्बकीय गुण होता है। इसी से इसका नाम मैग्नेटाइड पड़ा।
  3. लिमोनाइट (Limonite) :- इसमें लौहांश 60 % होता है। इसका रंग पीला व भूरा होता है।
  4. सिडेराइट (Siderite) :- यह निम्नकोटि का लोहा है, जिसमें लोहाश 48 प्रतिशत रहता है। इसका रंग पीला होता है।

प्रश्न 14.
भारत में लोहे के व्यापार पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा लौह-अयस्क निर्यातक देश है। यहाँ कुल उत्पादन का लगभग 50 % से अधिक लौह-अयस्क का निर्यात कर दिया जाता है। गोवा में उत्पादित होने वाला सम्पूर्ण लौह-अयस्क निर्यात कर दिया जाता है। जापान सबसे बड़ा ग्राहक है, जो हमारे देश के कुल लौह अयस्क निर्यात के तीन-चौथाई भाग का खरीददार है। जापान के अतिरिक्त यूरोपीय देश मुख्यत: चेको स्लोवाकिया गणराज्य, जर्मनी, रूमानिया, इटली, सर्विया, पोलैण्ड, बेल्जियम, हंगरी आदि प्रमुख आयातक देश हैं।

भारत को जापानी बाजार में ऑस्ट्रेलिया एवं मलेशिया तथा यूरोपीय बाजार में लैटिन अमेरिकी एवं अफ्रीका की देशों के साथ कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है। मर्मुगाँव, मंगलौर, विशाखापत्तनम, पारादीप तथा हल्दियाँ यहाँ के प्रमुख लौह-अयस्क निर्यातक बन्दरगाह है। लौह-अयस्क के समस्त विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा 9.9 प्रतिशत है।

प्रश्न 15.
कोयले के उपयोग लिखिए।
उत्तर :
कोयले का प्रमुख उद्योग निम्न है :-

  1. स्टीम शक्ति
  2. विद्युत शक्ति
  3. घरेलु शक्ति
  4. खनिज कोक के रूप में एवं
  5. रासायनिक उद्योग में कच्चे माल के रूप में।

इसकी विविध उपयोगिता को देखकर इसे Black Diamond कहा जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 16.
पेट्रोलियम को तरल सोना क्यों कहते हैं?
उत्तर :
पेट्रोलियम से कई उप-पदार्थ (By Products) प्राप्त होते हैं। इससे मशीनों के घर्षण को कम करने के लिए चिकनाई के तेल (Lubricant-oil) बनाये जाते हैं। आज के युग में इसे तरल सोना (Liquid Gold) कहा जाता है। पेट्रोलियम से ही पेट्रोल, डीजल एवं मोबिल बनते हैं जिनका उपयोग तीव्र गति वाले यानों जैसे-मोटर, रेल एवं वायुयान में होता हैं। आज के युद्ध पेट्रोलियम से ही जीते जाते हैं।

प्रश्न 17.
भारत में खनिज तेल की सम्भावना वाले प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से है?
उत्तर :
भारत में खनिज तेल की सम्भावना वाले प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:-

  1. गंगा बेसिन
  2. पश्चिम बंगाल का सुन्दर वन डेल्टाई क्षेत्र एवं उड़ीसा का तटीय भाग
  3. पश्चिम हिमालय क्षेत्र
  4. राजस्थान-सौराष्ट्र कच्छ क्षेत्र
  5. तमिलनाडु एवं आन्ध्र प्रदेश का तटीय क्षेत्र
  6. केरल का तटीय क्षेत्र
  7. अण्डमान-निकोबार का तटीय क्षेत्र
  8. असम-मेघालय-त्रिपुरामिजोरम क्षेत्र
  9. उत्तरी गुजरात
  10. दक्षिणी गुजरात एवं नर्मदा घाटी।

प्रश्न 18.
जलविद्युत के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
जलशक्ति का महत्व : भारत में जलविद्युत का महत्व निम्नलिखित है :-

  1. शक्ति का अक्षय साधन :- कोयला एवं पेट्रोलियम समाप्त हो सकते हैं परन्तु जलविद्युत शक्ति का अक्षय साधन है। एक बार विद्युत गृह स्थापित करके सदैव जलविद्युत प्राप्त किया जा सकता है।
  2. शक्ति का सस्ता साधन :- कोयला एवं पेट्रोलियम की अपेक्षा जलविद्युत का उत्पादन काफी सस्ता पड़ता है।
  3. प्रदूषण रहित :- जलविद्युत के उत्पादन एवं प्रयोग में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलता है।
  4. शक्ति के अन्य साधनों की बचत :- जलशक्ति के प्रयोग से कोयला एवं पेट्रोलियम को भविष्य के लिए बचाया जा सकता है।
  5. परिवहन की सुविधा :- कोयला एवं पेट्रोलियम के परिवहन में काफी खर्च पड़ता है। परन्तु केवल खम्भों एवं तारों की सहायता से जलविद्युत को आसानी एवं शीघ्रता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।

प्रश्न 19.
परमाणु ऊर्जा के लाभ क्या है?
उत्तर :
परमाणु ऊर्जा के लाभ निम्नलिखित है :-
(i) परमाणु शक्ति का उपयोग उद्योग के लिए तथा बहुमूल्य कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
(ii) यद्यपि परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिये आरम्भ में भट्ठी (Nuclear Reactor) और शक्ति गृह के निर्माण में बहुत अधिक लागत व्यय होती है, परन्तु विद्युत उत्पादन का व्यय कोयले की अपेक्षा कम होता है।

प्रश्न 20.
सौर ऊर्जा से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
सौर ऊर्जा (Solar Energy) : सौर तालाब (Solar Pond) सौर ऊर्जा प्राप्त करने की नई विधि है। भारत का पहला सोलर पौण्ड गुजरात के कच्छ में बनाया गया है। इसे भुज सोलर पौण्ड परियोजना का नाम दिया गया है। यह परियोजना गुजरात डेयरी विकास निगम, गुजरात ऊर्जा विकास एजेन्सी तथा टाटा ऊर्जा अनुसंधान संस्थान की संयुक्त परियोजना है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 21.
पवन ऊर्जा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
पवन ऊर्जा (Wind Energy) : प्रवाहित वायु की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) ही पवन ऊर्जा (Wind Energey) है। पृथ्वी के धरातल द्वारा सौर उष्मा के असमान अवशोषण से तापमान, वायु घनत्व तथा वायु दाब में अन्तर होता है। जिसमें वायु-प्रवाह उत्पन्न हो जाता है।

प्रश्न 22.
गैर-परम्परागत शक्ति संसाधनों के लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गैर-परम्परागत शक्ति के संसाधनों के लाभ (Advantage of Non-conventional sources of energy) :
(i) संचित शक्ति संसाधनों का संरक्षण (Conservation of fund energy resources) :- गैरपरम्परागत शक्ति संसाधनों का उपयोग होने से संचित संसाधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम, आदि की बचत भविष्य के लिए होगी।
(ii) वायु-प्रदूषण में कमी (Reduction of air pollution) :- गैर-परम्परागत शक्ति संसाधन वायु प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं। ये गैस, दुर्गन्ध और मलवा नहीं छोड़ते हैं, अत: इन संसाधनों का उपयोग कर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है, जो आज की सबसे बड़ी पर्यावरण की समस्या है।
(iii) असामान्य शक्ति का प्रवाह (Endless energy flow) :- सूर्य, वायु, लहरें और ज्वार कभी न समाप्त होने वाले हैं। यदि उनको व्यापारिक स्तर पर प्राप्त कर लिया जाय तो उनसे बड़ी मात्रा में शक्ति प्राप्त हो सकती है।
(iv) आवर्तक लागत नहीं (No recurring expenditure) :- पावर प्लाप्ट की स्थापना के बाद कच्चा माल प्राप्त करने के लिए कोई खर्च नहीं करना पड़ता। अत: आवर्तक लागत नहीं लगती।

प्रश्न 23.
नवीकरण एवं अनवीकरण संसाधन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

नवीकरण अनवीकरण
i. इस संसाधन को पुन: उत्पादित किया जा सकता है। i. इस संसाधन का एक बार दोहन करने के बाद पुन: पूर्ति सम्भव नहीं हो सकता है।
ii. यह सीमित मात्रा में नहीं होती है। ii. इसकी मात्रा सीमित होती है।
iii. इस संसाधन का प्रयोग आधुनिक युग से शुरू हुआ है। iii. इसका संसाधन का प्रयोग सदियों से किया जा रहा है।

प्रश्न 24.
परम्परागत ऊर्जा और गैर-परम्परागत ऊर्जा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

परम्परागत ऊर्जा गैर-परम्परागत ऊर्जा
i. ये वे संसाधन हैं जिनका उपयोग पहले से होता आ रहा है। i. ये वे संसाधन हैं, जिनका उपयोग हाल में शुरू हुआ है।
ii. ये संसाधन समाप्य ऊर्जा के संसाधन हैं। ii. ये संसाधन असमाप्य ऊर्जा के संसाधन हैं।
iii. कोयला, पेट्रोलियम आदि इसके उदाहरण हैं। iii. सौर उर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा आदि इसके उदाहरण हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
संसाधन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर :
विभिन्न विद्वानों द्वारा संसाधन की अनेक परिभाषाएँ दी गयी हैं, जिसमें कुछ मुख्य निम्नलिखित है:-
समाज विज्ञान विश्कोष के अनुसार – संसाधन मानवीय पर्यावरण के वे पक्ष हैं, जिसके द्वारा मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति में सुविधा होती है तथा सामाजिक लक्ष्यों की पूर्ति सम्भव होती है।

इ० डब्लू० जिमनमैन (E.W.Zimmerman) के अनुसार – “संसाधन पर्यावरण की वे विशेषताएँ है जो मनुष्य की आवश्यकाताओं की पूर्ति में सक्षम मानी जाती है ‘उन्हें मनुष्य की आवश्यकताओं तथा क्षमताओं द्वारा उपयोगिता प्रदान की जाती है।” (Resource are those aspects of man’s enviroment which render possible or facilitated the satisfaction of human wants and the attainment of social objectives)

जिम्मरमैन ने संसाधन का अर्थ स्ष्ट करते हुए तीन तत्वों को महत्वपूर्ण स्थान दिया है-
(i) मनुष्य जिस पर आश्रित व निर्भर हो। (ii) जिसमें मनुष्य की इच्छा पूर्ति हो सके, (iii) मानव की शारीरिक व बौद्धिक क्षमता। जेम्स फिश्यार (Fisher J.S.) के अनुसार :- ‘”संसाधन वह कोई भी वस्तु है जो मानवीय आवश्यकाताओं व इच्छाओं की पूर्ति करता है।”‘ (Resource are anything that can be used to satisfy a nead or desire of man)
मैकनाल के अनुसार :- ‘प्राकृतिक संसाधन वे संसाधन हैं, जो प्रकृति द्वारा प्रदान किये जाते हैं तथा मानव के लिये उपयोगी होते हैं। (Natural resources may be defined as those resources which are provided by nature and which are useful to man)
स्मिथ एवं फिलिप्स के अनुसार :- “भौतिक रूप से संसाधन वातावरण के वे प्रतिक्रियाएँ हैं, जो मानव के उपयोग में आती है।” (Fundamentaly resources are merely environment functioning in the service of man.)

प्रश्न 2.
समाप्यता के आधार पर संसाधन का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
(a) नवीकरण योग्य संसाधन :- वे संसाधन जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न किया जा सकता है, इन्हें नवीकरण योग्य अथवा पुन: पूर्ति योग्य संसाधन कहा जाता है, जैसे :- सौर तथा पवन ऊर्जा, जल, वन व वन्य जीवन। इन संसाधनों को सतत् अथवा प्रवाह संसाधनों में विभाजित किया गया है।

(b) अनवीकरण योग्य संसाधन :- इन संसाधनों का विकास एक लम्बे भू-वैज्ञानिक अन्तराल में होता है। खनिज और जीवाश्म ईधन इस प्रकार के संसाधनों के उदाहरण हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लग जाते हैं। इनमें से कुछ संसाधन, चक्रिय हैं जैसे -लोहा, ताँबा। कुछ संसाधन, जैसे-जीवाश्म ईधन अचकीय है और एक बार उपयोग के साथ ही समाप्त हो जाता है, जैसे – कोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न 3.
स्वामित्व के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
स्वामित्व के आधार पर :
(a) व्यक्तिगत संसाधन :- संसाधन निजी व्यक्तियों के स्वामित्व में भी होते हैं। किसानों की अपनी स्वामित्व वाली भूमि, लोगों का अपना मकान, बाग, चारागाह, तालाब आदि निजी स्वामित्व के संसाधन हैं।

(b) सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधन :- जिन संसाधनों पर पूरे समुद्राय का स्वामित्व होता है, वे सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधन कहे जाते हैं। गाँवों के सामुदायिक तालाब, चारण भूमि, श्मशान भूमि और शहरों के पार्क, पिकनिक स्थान, खेल के मैदान आदि सामुदायिक स्वामित्व वाले संसाधन हैं।

(c) राष्ट्रीय संसाधन :- तकनीकी तौर पर देश में पाये जाने वाले संसाधन राष्ट्रीय संसाधन हैं। देश की सरकार सामुदायिक कल्याण के लिए व्यक्तिगत संपत्ति को भी अपने अधिकार में ले सकती है। देश के सारे खनिज पदार्थ, जल संसाधन, वन संसाधन, वन्य जीव, राजनीतिक सीमा के अन्तर्गत समस्त भूमि एवं सागरीय क्षेत्र में सीमा से सदा 19.2 कि॰मी॰ तक का क्षेत्र तथा इसमें पाये जाने वाले पदार्थ राष्ट्रीय संसाधन के अन्तर्गत आते हैं।

(d) अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन :- कुछ अन्तराष्ट्रीय संस्थाएँ संसाधनो को नियंत्रित करतो हैं। तट रेखा से 200 कि॰मी० तक की दूरी (आवश्यक आर्थिक क्षेत्र) से पूरे खुले महासागरीय संसाधनों पर किसी देश का अधिकार नहीं है। इन संसाधनो को अंतराष्ट्रीय सहमति के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 4.
विकास के आधार पर संसाधनो का वर्गीकरण किजीए?
उत्तर :
विकास के आधार पर :
(a) संभावी संसाधन :- ये वे संसाधन हैं जो किसी प्रदेश में विद्यमान रहते हैं, परन्तु उनका उपयोग नहीं किया जात है, उदाहरण के तौर पर भारत के पश्चिमी भाग विशेषकर राजस्थान और गुजरात में पवन और सौर ऊर्जा की अपार संभावना है, परन्तु इनका सही ढंग से विकास नहीं हुआ है।

(b) विकसित संसाधन :- वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण किया जा चुका हैं और उनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, विकसित संसाधन कहलाते हैं। संसाधनो का विकास प्रोद्योगिकी और उसकी सभ्यता पर निर्भ करती है।

(c) भंडार :- पर्यावरण में उपलब्ध वे पदार्थ जो मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते है परन्तु उपर्युक्त प्रौधोगिकी के अभाव में उसकी पहुँच के बाहर हैं, भंडार में शामिल है। उदाहरण के लिए जल दो ज्वलनशील गैसो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है तथा यह ऊर्जा का प्रमुख सोत्र बन सकता है। परन्तु इस उद्देश्य से इसका प्रयोग करने के लिए हमारे पास तकनीकी ज्ञान नहीं है।

(d) संचित कोष :- यह संसाधन भंडार का ही हिस्सा है, जिन्हें उपलब्ध तकनीकी ज़ान की सहायता से प्रयोग में लाया जा सकता है, परन्तु इनका उपयोग अभी आरंभ नहीं हुआ है। इनका उपयोग भविष्य में आवश्यकता की पूर्ति के लिए किया जा सकता है। नदियों के जल को विद्युत पैदा करने में प्रयुक्त किया जा सकता है। परन्तु वर्तमान समय में इसका उपयोग सीमित पैमाने पर ही हो रहा है।

प्रश्न 5.
उत्पत्ति के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
विभिन्न संसाधन विभिन्न अवस्थाओं में उत्पन्न होते हैं, अत: उत्पत्ति के आधार पर इसे निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है :-
(i) अजैविक संसाधन (Abiotic Resources) :- ये प्रकृति प्रदत्त होते हैं तथा इनमें जीवन क्रिया नहीं होती है तथा इनका नवीनीकरण सम्भव नहीं है। इनका उपयोग व विनाश हो जाने पर ये सदा के लिये समाप्त हो जाते हैं। उदाहरणस्वरूप खनिजों के उपयोग के बाद इसका प्रत्यारोपण नहीं हो सकता। अजैविक संसाधनों का प्रयोग मनुष्य की संस्कृति एवं तकनीकी विकांस से जुड़ा हुआ है।

(ii) जैविक संसाधन (Biotic Resources) :- इसके अंतर्गत उन प्रकृति प्रदत्त तत्वों को सम्मिलित किया जाता है, जो जीवन युक्त होते हैं। वन, वन्य प्राणी, पशु-पक्षी, वनस्पति तथ सूक्ष्म जीव इत्यादि जैविक संसाधनों के उदाहरण हैं। जैविक संसाधनों में पुन: विकास की क्षमता होती है, जैसे-प्राकृतिक वनस्पति नष्ट होने के बाद स्वतः उत्पन्न होती हैं, मछलियाँ सतत् बढ़ती रहती है। जैविक संसाधनों की मात्रा में वृद्धि भी मनुष्य कर सकता है। वह वृक्षारोपण द्वारा ऊर्जा भूमि पर वन लगा सकता है तथा काटे गये वन का पुन: रोपण कर सकता है।

प्रश्न 6.
प्राप्यता त्रथा वितरण के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए?
उत्तर :
प्राप्यता तथा वितरण के आधार पर वर्गीकरण (Classification based on accessbility and Distribution) :- भूमण्डल पर संसाधनो की मात्रा, उनकी विविधता तथा प्राप्ति स्थल में बहुत ही असमान वितरण पाया जाता है। इस दृष्टि से प्राकृतिक संसाधनों को चार वर्गो में विभाजित किया गया है।

  1. सर्वसुलभ संसाधन (Ubiquities) :- जो इस भूमण्डल पर सर्वत्र न्यूनाधिक मात्रा में उपलब्ध है, सर्वसुलभ संसाधन कहलाता है। जैसे :- वायुमण्डल में व्याप्त ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।
  2. सामान्य सुलभ संसाधन (Commonelities) :- जो संसाधन अधिकांश क्षेत्र या कम क्षेत्रों में पाये जाते है, सामान्य सुलभ संसाधन कहलाते हैं। जैसे :- वनस्पति, कृषि योग्य मिट्टी, कोयला, तेल, गैस आदि।
  3. दुर्लभ संसाधन (Rarities) :- जो संसाधन कहीं-कहीं ही मिलते हैं, उन्हें दुर्लभ संसाधन कहते है, जैसे :अभ्रक, ताँबा, क्वार्ट्स आदि।
  4. अद्वितीय संसाधन (Uniquities) :- ऐसे संसाधन एकाघ स्थानों पर ही मिलते हैं जैसे :- हीरा, यूरेनियम, क्रोमोलाइट इत्यादि।

प्रश्न 7.
उपयोग के सततता पर आधारित संस्थानों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
उपयोग के सततता पर आधारित वर्गीकरण (Classification based on Utillity) :- भूमण्डल पर पाये जाने वाले संसाधनों के उपयोग की एक अवधि होती है, अतः उपयोग की अवधि के अनुसार संसाधनों को तीन वर्गो में विभक्त किया जा सकता है :-
नवीनीकरण संसाधन (Renewable Resources) :- जिन संसाधनो को पुनः उत्पादित किया जा सकता है या उनके गुणों में वृद्धि की जा सकती है नवीनीकरण संसाधन कहे जाते हैं। जैसे: वनों को काटकर पुन: वृक्षारोपण द्वारा उनकी पूर्ति की जा सकती है। इसी प्रकार कृषि पद्धिति अपनाकर कृषि भूमि को अधिक समय तक उपजाऊ बनाये रखा जा सकता है।

अनवीनीकरण संसाधन (Non-Renewable Resources) :- जिन संसाधनों का एक बार दोहन करने के पश्चात् पुन: पूर्ति (Restoration) सम्भव नहीं हो सकता है अनवीनीकरण संसाधन कहलाते हैं। ऐसे संसाधनों के निर्माण की अवषि लम्बो होती है तथा इनकी मात्रा सीमित होती है। इन संसाथनों का दोहन तीव्र गति से करने पर ये समाप्त हो जाते हैं। जैसे कोयले का दोहुन एक बार ही किया जा सकता है जबकि इनके निर्माण में करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। इसी प्रकार पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, ताँबा, थोरियम, मैगिनज, बावसाइड इत्यादि। ये संसाधन अनवीनीकरण संसाधनों की श्रेणी में आते है।

चक्रीय संसाथन (Recyclable Resources) :- जिन संसाधनों का उपयोग बार-बार किया जाये, वे चकीय संसाधन कहलाते हैं। जैसे :- लोहा, चाँदी, सोना, सीसा इत्यादि खनिजों का उपयोग बार-बार किया जा सकता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 8.
उद्देश्य के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए ?
उत्तर :
संसाधनों का उपयोगिता या उद्देश्य के आधार पर वर्गीकरण किया गया है :-
(i) ऊर्जा संसाधन (Energy Resources) :- किसी देश के विकास का मानक ऊर्जा संसाधन को माना गया है। नवीनीकरण संस्थानों की श्रेणी में वन, जल विद्युत, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा तथा कोयला, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस आदि हैं।

(ii) कच्चा माल (Raw Material) :- कच्चे माल औद्योगिक व आर्थिक विकास के प्रमुख आधार हैं, जो तीन तरह के संसाधनों से प्राप्त होता है :-
(a) खनिज पदार्थ (Materials) :- भूगर्भ से निकाले गये पदार्थो को इस श्रेणी में रखते हैं। जैसे :- लोहा, अलौह धातुएँ, गंधक, नमक, चूना-पत्थर, बालू व अन्य मिश्रित धातुएँ।
(b) वनस्पति (Vegetation) :- इसके अंतर्गत प्राकृतिक वनस्पति से प्राप्त पदार्थों को सम्मिलित करते हैं। जैसे : लकड़ी, फल, गोंद, रबर, तेल-बीज, शैवाल व अन्य कृषि उत्पाद।
(c) पशु :- पशुओं से प्राप्त-उत्पाद को इसमें सम्मिलित करते हैं। जैसे :-सींग, तेल, चर्बी, बाल, ऊन, रेशम, हड्डियाँ इत्यादि।

(iii) खाद्य पदार्थ (Food Stuff) :- खाद्य पदार्थ भी तीन तरह के संसाधनों से प्राप्त है जो निम्नलिखित है :-
(a) खनिज :- जल तथा चट्टानो से प्राप्त नमक।
(b) वनस्पति :- फल, कन्दमूल, पत्तियाँ एवं मशरूम (Mushroom) आदि।
(c) पशु एवं जीव-जन्तु :- मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन व्यवसाय आदि।

प्रश्न 9.
संसाधन संरक्षण से आप क्या समझते हैं ? संसाधनों के संरक्षण में किन बातों पर ध्यान देना आवश्यक है?
उत्तर :
संसाधनों का संरक्षण (Conservation) :- का अर्थ संरक्षण होता है। डा० मैग्नाल के अनुसार अच्छे संरक्षण का आशय किसी संसाधन या ऐसा उपयोग है जिसमें मनुष्य जाति की आवश्यकता पूर्ति सर्वोत्तम रूप से हो सके। संसाधनों से तात्पर्य मात्र संसाधनों के उपयोग में कमी नहीं है।
संसाघनों के संरक्षण में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है :-

  1. किसी देश में उपलब्व कुल संसाधनों का पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है, जिससें आवश्यकतानुसार उनका व्यवहारिक उपयोग किया जा सकें।
  2. संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण तथा सुव्यवस्थित ढंग से किया जाना चाहिए।
  3. उन्नत तकनीक की सहायता से संसाषनों की उपयोगिता में वृद्धि करने का प्रयास करना चाहिए।
  4. सीमित संसाधनों का उपयोग अति आवश्यक कार्यो के लिए ही किया जाए।
  5. विरल संसाधनो की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए उनके विकल्प को विकसित करना।

प्रश्न 10.
भारत में लौह-अयस्क के वितरण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
लोहे के संचित भण्डार की दृष्टि से भारत का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ विश्व का लगभग एक-चौथाई खनिज लोहा ( 1,757 करोड़ मीट्रिक टन) संचित है। यहाँ का 80 % लोहा उच्चकोटि के हैमेटाइट जाति का है, जिसमें 60 % से 70 % तक लौहांश है। उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में चीन, ब्राजील, आस्ट्रेलिया एवं रूस के बाद पाँचवाँ स्थान है। यहाँ विश्व का लगभग 6.7 लौह-अयस्क उत्पन्न किया जाता है। प्रमुख लौह उत्पादक राज्य क्रमश: छत्तीसगढ़, गोआ, कर्नाटक, झारखण्ड, उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं आन्ध प्रदेश हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 11.
भारत में राज्यानुसार कोयले के उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में राज्यानुसार कोयले का उत्पादन :- भारत में प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य निम्नलिखित है: (i) झारखण्ड :- यह भारत का सर्वाधिक कोयला उत्पादक राज्य है। झरिया, बोकारो, कर्णपुरा, गिरीडीह, रामगढ़, डाल्टनगंज, राजमहल, औरंगाबाद, हुतार तथा लालमटिया यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। इनमें झरिया एवं लालमटिया की खानों से सम्पूर्ण राज्य का 50 % का कोयला प्राप्त होता है। उत्तम कोटि के बिदुमिनस कोयले के खनन के लिए यह राज्य प्रसिद्ध है।
मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ :- कोयले के उंत्पादन में मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य का संयुक्त रूप से भारत में दूसरा स्थान है। सोहागपुर, उमरिया, झिलमीली, रामकोला, मोहयानी सिंगररौली आदि मध्यप्रदेश के तथा कोरबा पेंचघाटी, तातापानी, बिलासपुर, लखनपुर, सोनद्ध चिरमिरी, झगड़खण्ड आदि छत्तीसगढ़ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं।

पश्चिम बंगाल :- कोयला उत्पादन की दृष्टि से पश्चिम बंगाल राज्य का भारत में तीसरा स्थान है। यहाँ कोयल के विशाल निक्षेप पाए जाते हैं। वर्द्धवान, पुरूलिया तथा बाँकुड़ा यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक खिले हैं। वर्दवान जिले में स्थित रानीगंज कोयला खान भारत की सबसे बड़ी कोयले की खान हैं। भारत में सर्वपथम कोयला निकालने का प्रयास सन् 1774 ई० में रानींगज में ही किया गया था।

उड़ीसा :- उड़ीसा भारत का प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य है। यहाँ महानदी घाटी में स्थित तालचल तथा सम्भलपुर प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। रामगढ़- हिंगरि यहाँ का अन्य कोयला उत्पादक क्षेत्र है। जहाँ से निम्नकोटि का कोयला प्राप्त होता है।

तमिलनाडु, जम्म-कश्मीर, राजस्थान तथा गुजरात राज्यों में लिग्नाइट कोयला का खनन होता है। लिग्नाइट एवं पीट कोयला के उत्पादन में तमिलनाडु राज्य का प्रथम स्थान है। इसलिए यहाँ नेवेली लिग्नाइट परियोजना का विकास हुआ है।

प्रश्न 12.
भारत के प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दीजिए?
उत्तर :
भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
असम का तेल कटिबन्ध :- यह भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र है। यहाँ 1,200 कि॰मी॰ लम्बी तेल की पेटी है, जो पूर्वी भाग में ब्रह्मपुत्र एवं सूरमा नदियों की घाटियों में फैली हुई है। यहाँ का सबसे प्रमुख तेल क्षेत्र बह्मपुत्र नदी की घाटी में स्थित बह्मपुत्र-माकू क्षेत्र है, जो लखीमपुर जिले में स्थित है। यहाँ मुख्यत: डिब्रूगढ़ जिले में डिगबोई, बप्पापुंग, हस्सापुंग में तेल-कूप बनाये गये हैं। डिगबोई में भारत का सबसे प्राचीन (1889) तेल क्षेत्र है तथा यहाँ भारत का प्रथम तेल-शोधक कारखाना है। सूरमा घाटी में पथरिया बदरपुर एवं मासिमपूर तेल-कूपों से खनिज-तेल प्राप्त होता है। यहाँ का तेल निम्न कोटि का होता है, और इसमें मोम की मात्रा अधिक होती है । यहाँ के अन्य तेल क्षेत्र नहरकटिया, मोरान एवं रूंद्र सागर है। खनिज तेल के उत्पादन में अब असम राज्य का तीसरा स्थान हो गया है। यहाँ से देश का लगभग 16 प्रतिशत खनिज-तेल प्राप्त होता है।

गुजरात के तेल क्षेत्र :- गुजरात भारत का प्रमुख तेल उत्पादक राज्य है। यहाँ उत्तर की ओर खम्भात तथा दक्षिण की ओर अंकलेश्वर तथा कोशम्बा प्रधान तेल क्षेत्र हैं। खम्भात के उत्तर में स्थित लुनेज तथा बड़ौदरा से पश्चिम में स्थित बाँडसर से खनिज-तेल प्राप्त होता है। लुनेज में रूस तथा रूमानिया के विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। भड़ौच जिले के अंकलेश्वर में खनिज-तेल का भारी भण्डार मिला है। केवल इसी क्षेत्र में 30 लाख मैटिक टन से अधिक खनिज-तेल उत्पन्न होता है। अंकलेश्वर इस क्षेत्र का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है। अन्य छोटे क्षेत्र महूबेज, नवगाँव, वावेल, सानन्द, कलोल आदि हैं। इस राज्य से देश का लगभग 17.9 % खनिज तेल प्राप्त होता है।

महाराष्ट्र :- हाल में ही मुम्बई के समीप भारत का सबसे धनी तेल क्षेत्र का पता चला है जिसे, मुम्बई हाई (Mumbai High) कहते हैं। यहाँ तट से 115 कि० मी० पश्चिम अरब सागर में सागर समाट तथा सागर विकास नामक जहाजों द्वारा तेल निकाला जा रहा है। खनिज-तेल के उत्पादन में भारत में अब इस राज्य का पहला स्थान हो गया है। यहाँ से देश का लगभग 64.55 प्रतिशत खनिज-तेल प्राप्त होता है। हाल ही में मुम्बई तट के समीप स्थित नीलम एवं दक्षिण हीरा क्षेत्रों में भी उत्पादन शुरु हो गया है।

तमिलनाडु :- हाल में तमिलनाडु राज्य के कावेरी बेसिन में देश के एक प्रमुख तेल क्षेत्र की खोज हुई है। यहाँ नारियानम एवं कोविलापाल खानों से तेल निकाला जाता है। यहाँ से देश का लगभग 1.4 प्रतिशत खनिज तेल प्राप्त होता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 13.
जल विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए?
उत्तर :
जलविद्युत के विकास के लिए निम्नलिखित परिस्थितियों का होना आवश्यक है।
(a) भौगोलिक परिस्थितियाँ :-

  1. सदावाहिनी नदियाँ : नदियाँ सदावाहिनी हो ताकि उनसे वर्षभर जलविद्युत प्राप्त किया जा सके।
  2. प्राकृतिक जल प्रपात :- जहाँ जलप्रतात द्वारा नदी का पानी तीव वेग के साथ ऊपर से नीचे गिरता है, वहाँ अधिक मात्रा में जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकता है।
  3. ऊँची-नीची भूमि :- जहाँ भूमि ऊँची-नीची होती है वहाँ नदियों का वेग अधिक होता है जिससे अंधिक विद्युत प्राप्त की जा सकती है।
  4. स्वच्छ जल :- पानी में मिट्टी या बालू का अभाव हो जिससे मशीनों के खराब होने का भय ना रहे।

(b) आर्थिक परिस्थितियाँ :-

  1. खपत क्षेत्रों का पास में होना :- खपत क्षेत्र दूर होने पर विद्युत पहुँचाने के लिए अधिक तार व खम्भों की आवश्यकता पड़ती है।
  2. मशीनों की सुविधा :- जल विद्युत गृह बनाने में भारी मशीनों, टर्बाइन, डायनेमो, तार एवं खम्भों की आवश्यकता पड़ती है।
  3. पूँजी की सुविथा :- जलविद्युत शक्ति गृह बैठाने में शुरू में काफी खर्च पड़ता है अतः पर्याप्त पूँजी की आवश्यकता पड़ती है।
  4. तकनीकी ज्ञान :- जलविद्युत केन्द्र को चलाने एवं आवश्यक उपकरणों की मरम्मत के लिए तकनीकी ज्ञान का भी होना आवश्यक है।

प्रश्न 14.
भारत में जलविद्युत विकास का विवरण लिखो।
उत्तर :
भारत में जल विद्युत का विकास 19वीं सदी के अन्तिम दशक में शुरू हुआ। सन् 1897 में दार्जिलंग नगर को बिजली आपूर्ति के लिए राज्य जल विद्युत उत्पाद संयंत्र स्थापित किया गया था। कर्नाटक में कावेरी पर स्थित शिवं समुद्रम में 1902 में दूसरा जलविद्युत उत्पादन संयंत्र लगाया गया था। बाद में मुम्बई की मांग पूरी करने के लिए पश्चिमी घाट में भी जल विद्युत उत्पादन के लिए कुछ संयंत्र लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु एवं कर्नाटक में 1903 में जल विद्युत केन्द्र स्थापित किए गए। 1947 में कुल उत्पादन क्षमता 508 मेगावाट तक पहुँच गई। 2000-01 के अन्त में जल विद्युत केन्द्र की स्थापित क्षमता बढ़कर 25,219,55 मेगावाट हो गई है, जो बिजली की कुल स्थापित क्षमता का लगभग एक चौथाई मात्र है।

प्रश्न 15.
भारत में सौर ऊर्जा के महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
यह भारत के उत्तरी पर्वतीय भाग को छोड़कर देश के अन्य सभी भागों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। भारत में औसतन पचास हजार खरब किलोवाट हावर (Kwh) प्रतिवर्ष सौर विकिरण प्राप्त होता है। देश के अधिकांश भागों में वर्ष में लगभग 300 दिन आकाश मेघ रहित होता है और सूर्य ऊर्जा के साथ चमकता है। अनुमान है कि भारत में 20 मेगावाट प्रति वर्ग कि॰मी० सौर ऊर्जा पैदा की जा सकती है। आजकल इसका उपयोग खाना पकाने तथा जल एवं घर को गर्म करने के लिए किया जाता है। 2000-01 में उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार भारत में 4,90,000 सौर कुकर प्रयोग किए गए थे। लगभग 14,594 सूर्य प्रकाश वोल्टीय प्रकाश, 800 सूर्य प्रकाश वोल्टीय जल पम्प तंत्र तथा 1433 घरेलु रोशनी तंत्रो की स्थापना की गई।

प्रश्न 16.
शक्ति संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर :
शक्ति के संसाधन दो प्रकार के होते हैं :-
(a) परम्परागत ऊर्जा के स्रात (Conventional Sources of Energy) :- लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा परमाणु शक्ति ऊर्जा के पारम्परिक स्रोत है किन्तु जीवाश्म ईंधन तथा परमाणु खानिज क्षयशील तथा अनवीकरणीय है। निरन्तर प्रयोग से एक दिन ये सभी समाप्त हो जाएँगे। जीवाश्म ईधनो का विनाश विशेष रूप से तेजी से हो रहा है। ऊर्जा के ये परम्परागत स्रात प्रदूषणकारी भी हैं।

(b) गैर-परम्परागत ऊर्जा के स्रोत (Non-Conventional Sources of Energy) :- ऊर्जा के परम्परागत सोतों के तेजी से विनाश के कारण विश्व के सभी देश ऊर्जा के नवीकरणीय संसाधनों को विकसित करने की दिशा में प्रयासरत हैं, सौर ऊर्जा, सागरीय (लहर) ऊर्जा तथा जोवभार ऊर्जा (Bioness Energy) ऊर्जा के वैकल्पिक नवीकरणीय तथा प्रदूषण मुक्त संसाधन है। भविष्य में इनके विकास की अपार सभावनायें हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 20.
संसाधनों के उत्पादक कारक क्या हैं? उदाहरण देकर संसाधन के उत्पादन में मनुष्य की भूमिका का वर्णन करों।
उत्तर :
संसाधन के कारक तत्व :- संसाधन के निर्माणकारी तत्व हैं :- (i) मानव (ii) प्रकृति (iii) संस्कृति।
मानव (Man) :- मनुष्य ही संसाधन निर्माण का केन्द्र बिन्दु है। साधारणतया हम मानव संसाधन या मानव श्रम की बातें करते हैं। मानव श्रम शारीरिक या बौद्धिक रूप से प्रयत्नशील होकर प्राकृतिक तत्वों को संसाधन का रूप प्रदान करता है। इस प्रकार मनुष्य संसाधन को पैदा करने वाला तथा उसका उपभोक्ता दोनो है। (Man is as well as creater and consumer of resources)

प्रकृति (Nature) :- प्रकृति से तात्पर्य प्राकृतिक तत्वों के योग से है, जैसे :- पहाड़, नदी, मिट्टी, जलवायु, भौगोलिक स्थिति आदि। मूल रूप से भिन्न प्रकार के संसाधन कोयला, तेल, पानी, वायु मिट्टी, वनस्पति सब कुछ प्रकृति की देन है।

संस्कृति (Culture) :- संस्कृति मनुष्य और प्रकृति का संयुक्त उत्पाद है। मिट्टी, ज़लवायु प्रकृति के उपादान हैं। जब तक सांस्कृतिक विकास के उचित अवसर नहीं मिलेंगे कोई वस्तु संसाधन नहीं हो सकती।

प्रश्न 21.
भारत में लौह अयस्क का भौगोलिक वितरण प्रस्तुत करो।
उत्तर :
भारत में लौह अयस्क का उत्पादन (Production of Iron ore in India) :- इस समय भारत का लगभग 95 % लोहे का उत्पादन छत्तीसगढ़; गोवा, झारखण्ड, उड़ीसा तथा कर्नाटक में होता है।

छत्तीसगढ़ लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। देश के कुल उत्पादन में इसकी 23.4 % की भागीदारी है। इसके बाद क्रमशः गोवा (22%), कर्नाटक (20%), झारखण्ड (17%), उड़ीसा (14%), महाराष्ट्र (2.47 %), तथा अन्य उत्पादक राज्य (1.2 %) है। छत्तीसगढ़ की प्रमुख खानें है-डल्ली, राजहरा (दुर्ग), बैलाडिला (दाँतेवाड़ी)।

गोवा की प्रमुख खाने हैं :- साहक्वालिम, संग्यूम, वयूपेम, सतारी, पौंडा और बियोलिम। कर्नाटक की प्रमुख खाने हैं बेल्लारी, हस्पेट, चिकमगलूर जिले में बाबाबूदन पहाड़ी, कलाहाड़ी के मानगुड़ी तथा कुद्रेमुख, चित्रदुर्ग, शिमोगा, धारवाड़ तथा तुमकूर में।
झारखण्ड की प्रमुख खाने स्थित हैं नोओमुंडी और गुआ एवं पूर्व व पश्चिम सिंहभूम में।
उड़ीसा की प्रमुख खाने स्थित हैं – गुरूमहिसानी, सुलईपत, बादाम पहाड़ (मयूरभंज), किरीबुरू , मेधाहत बुरू (केन्दुसार), बोनाई (सुन्दरगढ़) में। महाराष्ट्र की प्रमुख खाने स्थित हैं :- चन्द्रपुर, रत्नागिरी और भडारा में।

आन्द्र्रदेश की प्रमुख खाने स्थित हैं :- वरीमनगर, बारंगल, कुर्नूल, कड़प्पा और अनंतपुर में दक्षिण में थोड़ा सा आगे तमिलनाडु की तीर्थमल्लाई पहाड़ियों (सलेम), यादपल्ली और किल्ली मल्लई क्षेत्र (नीलगिरी) में लौह अयस्क के भंडार है।

भारत में लौंह अयस्क का उत्पादन 2002-03

राज्य उत्पादन % में
कर्नाटक 24 %
उड़ीसा 22 %
छत्तीसगढ़ 19 %
गोवा 18 %
झारखण्ड 15.6 %

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 22.
खनिज तेल का क्या उपयोग है?
उत्तर :
भारत में खनिज तेल का उपयोग (Uses of Petroleum in India) :- पेट्रोलियम की महत्ता को देखते हुए इसे तरल सोना (Liquid Gold) कहा जाता है। इसके उपयोग निम्नलिखित हैं :-
यातायात ईथन :- पेट्रोलियम गैसोलिन तथा डीजल, एल०पी०जी० आदि पेट्रोलियम के उत्पाद है, जिनका उपयोग गाड़ी, रेलागाड़ी, हवाई जहाज, जलयान, कार, मोटर साइकिल आदि चलाने में होता है।
घरेलू ईंधन :- किरासन का उपयोग खाना बनाने तथा प्रकाश आदि के लिए होता है। (LPG-Liquid Petroleum Gas) का उपयोग खाना बनाने में होता है।
पेट्रो केमिकल उद्योग :- आज पेट्रोलियम का उपयोग पेट्रोकेमिकल उद्योग में रोज बढ़ रहा है। तेलशोधन में नेष्था, इसिलिन, बेंजिन आदि के उत्पाद प्राप्त होता है।
बिजली उत्पादन :- वैसे तो कोयले से ताप विद्युत का उत्पादन होता है पर’ कुछ स्थानो पर पेट्रोलियम से भी ताप विद्युत का उत्पादन हो रहा है।
अन्य उपयोग :- पेट्रोलियम से चिकन का तेल, गैस, मोम आदि प्राप्त होता है। खनिज तेल का शोधन कर उससे डीजल, थारी डीजल, पेट्रोल, गैसोलिन, किरासिन, पी०भी०सी॰, एसिटिक एसिड बनाया जाता है। पेट्रोलियम प्रमुख औद्योगिक तेल, शक्ति का स्रोत एवं विभिन्न प्रकार के उप-पदार्थो का उत्पादन का स्रोत है।

प्रश्न 23.
खनिज तेल के मुख्य ग्रेड और उनके गुण क्या हैं?
उत्तर :
खंनिज तेल उच्च ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन तरह का है। कच्चे तेल का रंग आकाशीं हरा लेकर हल्का काला तक होता है। कार्य वर्ग का तेल हल्का हरा होता है क्योंकि इसमें उच्च हाइड्रोजन और अल्प कार्बन होता है। अत्यधिक कार्य का तेल लगभग काला होता है। क्योंकि इसमें अल्प हाइड्रोजन किन्तु अत्यधिक कार्बन होता है।

वर्तमान समय में खनिज तेल के तीन वर्ग (Grade) है :-

  1. पैराफिन आधारित तेल (Paraffin-based oil) :- यह हल्का होता है और इसका व्यावसायिक मूल्य अधिक होता है जैसे :- पेट्रोल, पैराफिन इत्यादि।
  2. ऐस्फाल्ट आधारित तेल (Asphalt-based oil) :- यह भारी होता है और इसमें डीजल तथा ऐस्फाल्ट या बिंुमेन की अधिकता होती है। इसकी व्यावसायिक कीमत कम होती है।
  3. मिश्रित तेल (Mixed oil) :- मिश्रित तेल पैराफिन और ऐसफाल्ट के बीच का है।.

प्रश्न 24.
खनिज शक्ति की अपेक्षा शक्ति के अन्य प्राकृतिक साधनों के लाभ का उल्लेख करो।
उत्तर :
खनिज शक्ति की अपेक्षा शक्ति के अन्य साधनों के लाभ की तुलना :- ऊर्जा के परम्परागत साधन कोयला और खनिज तेल हैं। अन्य प्राकृतिक ऊर्जा के साघन सूर्य ताप, जल विद्युत, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि हैं। उर्जा के दोनों साधनों की तुलना निम्न है :-

  1. शक्ति के स्थायी स्रोत (Flow Resources) :- ऊर्जा के परम्परागत स्रोत कोयला और खनिज तेल भविष्य में समाप्त हो जाएँगे किन्तु शक्ति के अन्य साधन चिरन्तन एवं स्थायी है।
  2. सस्ते साथन (Easy Transport) :- कोयला और पेट्रोल की तुलना में जल विद्युत तथा सौर ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान को पहुँचाना काफी सुगम एवं सस्ता है।
  3. प्रदूषण से मुक्ति (Free Pollution) :- जल विद्युत, सौर ऊर्जा, ज्वारिय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा के प्रयोग में स्वच्छता रहती है तथा इनमें प्रदूषण नहीं होता है।

प्रश्न 25.
विभिन्न प्रकार का कोयला कौन-कौन सा है ?
उत्तर :
कोयले की प्रमुख किस्मे (Type of Coal):- कार्बन की उपस्थिति के अनुसार कोयला की पाँच श्रेणियाँ होती है :-
(i) एन्श्रासाइट (Anthracite) :- यह सर्वोच कोटि का कोयल़ा है जिसमें कार्बन की मात्रा 90 % से ज्यादा होती है। जलने पर यह जरा भी धुआँ नहीं देता। यह बहुत कड़ा और देर तक ताप देनेवाला होता है। इसे कोकिंग कोयला भी कहा जाता है। धातु गलाने में यह काम आता है।
(ii) बिटुमिनस (Bituminous) :- इसमें कार्बन की मात्रा 70 % से 90 % तक होती है। इसे.परिष्कृत कर कोकिंग कोयला बनाया जाता है, किन्तु सभी बिटुमिनस कोयले का उपयोग कोक बनाने में नहीं किया जा सकता। भारत का अधिकतर कोयला इसी कोटि का है, जिसका उपयोग घरेलू ईधन तथा वाष्पशक्ति उत्पन्न करने में होता है।
(iii) लिग्नाइट (Lignite) :- यह निम्न कोटि का कोयला माना जाता है। इसमें कार्बन की मात्रा 30 % से 70 % तक होती है। आर्द्रता होने के कारण यह धुआँ देता है। इसकी तापीय शक्ति कम होती है।
(iv) पीट (Peat) :- इसमे कार्बन की मात्रा 30 % से 35 % तक होती है। यह सबसे निम्न कोटि का कोयला है। यह मुलायम होता है तथा इससे बहुत अधिक धुआँ निकलता है।
(v) कैनेल – यह सबसे निन्म किस्म का कोयला होता है जो लकड़ी के जलने से प्राप्त होता है ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 26.
भारत में कोयला का उपयोग कैसे किया जाता है?
उत्तर :
भारत में कोयले का प्रमुख उपयोग निम्न है :-
(i) स्टीम शक्ति (Steam Energy) :- जब शक्ति के अन्य साधनों की खोज नहीं हुई थी कोयले के स्टीम से ही कारखाने तथा यातायात के साधन चलते थे।
(ii) विद्युत शक्ति (Electric Energy) :- ताप-विद्युत का उत्पादन कोयले कें उपयोग से ही किया जाता है।
(iii) घरेलू शक्ति (Domestic Energy) :- पहले कोयला का उपयोग घरेलू खाना आदि बनाने में होता था पर गैस की खोज के कारण उसका प्रयोग कम हो गया।
(iv) खनिज कोक के रूप में (Metallurgical Coke) :- भारत में लौह-इस्पात उद्योगों में कोकिंग कोयला आज भी एक आवश्यक कच्चा-माल है।
(v) रासायनिक कच्च माल (Chemical raw materials) :- भारत में कोयले के उप-उत्पाद कोयला गैस, कोलतार, बेजोल, अमोनिया सल्फेट के आधार पर रासायनिक उद्योग चलते हैं। इन उप-उत्पादों से प्रत्येक रासायनिक, पदार्थ बनते हैं। इन उप-पदार्थो से क्रीजोट (Creozote) नेष्थालिन, एन्थासीन, उर्वरक, विस्फोटक सामान, एण्टीसेप्टिक दवाइयाँ आदि बनती हैं।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद can serve as a valuable review tool before exams.

औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
इंग्लैण्ड में औद्योगिक क्रान्ति के चिह्न कब दिखाई देने लगे थे ?
(a) 1750-1870 ई० में
(b) 1830-1870 ई०
(c) 1870-1890 ई० में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) 1750-1870 ई० में

प्रश्न 2.
“दास कैपिटल” पुस्तक का प्रकाशन कब हुआ –
(a) 1867
(b) 1860
(c) 1890
(d) 1850
उत्तर :
(a) 1867

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 3.
औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम किस देश में हुई ?
(a) बिंटन
(b) फ्रांस
(c) अमेरिका
(d) आस्ट्रिया
उत्तर :
(a) बिंटेन

प्रश्न 4.
किस देश को ‘विश्व की उद्योगशाला” कहा जाता है?
(a) फ्रांस
(b) इंग्लैण्ड
(c) इटली
(d) जर्मनी
उत्तर :
(b) इंग्लैण्ड

प्रश्न 5.
औद्योगिक क्रान्ति शब्द का उपयोग किस अंग्रेजी इतिहासकार ने पहले किया?
(a) दांते
(b) अर्नाल्ड टॉयनबी
(c) हेगल
(d) मार्क्स
उत्तर :
(b) अर्नाल्ड टॉयनबी

प्रश्न 6.
मार्क्स की पुस्तक ‘दास कैपिटल’ कब प्रकाशित हुई थी?
(a) 1804 ई०
(b) 1815 ई०
(c) 1848 ई०
(d) 1867 ई०
उत्तर :
(d) 1867 ई०

प्रश्न 7.
बेल्जियम में रेल निर्माण का कार्य कब प्रारम्भ हुआ ?
(a) 1834
(b) 1830
(c) 1820
(d) 1815
उत्तर :
(a) 1834

प्रश्न 8.
समस्त बेल्जियम में रेल लाइन कब स्थापित हो गई –
(a) 1844
(b) 1820
(c) 1822
(c) 1819
उत्तर :
(a) 1844

प्रश्न 9.
इंग्लैण्ड के औद्योगिक क्रान्ति को कितने भागों में विभाजित किया जाता है ?
(a) दो भागों में
(b) तीन भागों में
(c) चार भागों में
(d) पाँच भागों में
उत्तर :
(a) दो भागों में

प्रश्न 10.
घेराबन्दी प्रथा किस महादेश में हुई थी ?
(a) एशिया
(b) ऑस्ट्रिया
(c) उत्तरी अमेरिका
(d) यूरोप
उत्तर :
(d) यूरोप

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 11.
बेल्जियम कब यूरोफ्ट का प्रमुख औद्योगिक देश बन गया।
(a) 1870
(b) 1860
(c) 1855
(d) 1865
उत्तर :
(a) 1870

प्रश्न 12.
सर्वप्रथम राष्ट्रीय बैंक की स्थापना कहां हुई ?
(a) बेल्जियम में
(b) फ्रांस में
(c) इंग्लैण्ड में
(d) जर्मनी में
उत्तर :
(b) फ़ांस में

प्रश्न 13.
बुनाई मशीन का आविष्कार किसने किया ?
(a) जेनी
(b) जेम्स हारग्रीब्ज
(c) आर्कराइट
(d) हिटने
उत्तर :
(b) जेम्स हारग्रीब्ज

प्रश्न 14.
औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम संगठित हुई –
(a) फ्रांस में
(b) इंगलैण्ड में
(c) जर्मनी में
(d) रूस में
उत्तर :
(b) इंगलैण्ड में

प्रश्न 15.
बुर्जुआ वर्ग ज्यादा कहाँ रहते हैं ?
(a) ग्राम में
(b) जंगल में
(c) शहरों में
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(c) शहरों में

प्रश्न 16.
मार्क्सवाद के जन्मदाता कौन थे ?
(a) एंजिल्स और मार्क्स
(b) हेगेल
(c) टॉयनबी
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर :
(a) एंजिल्स और मार्क्स

प्रश्न 17.
पावरलूम मशीन का आविष्कार किसने किया था ?
(a) जॉन के
(b) जेम्स हार ग्रीब्स
(c) सैम्युअल
(d) एडमंड कार्टराइट
उत्तर :
(d) एडमंड कार्टराइट

प्रश्न 18.
इंग्लैण्ड में औद्योगिक कान्ति किसके समय हुई थी ?
(a) जार्ज तृतीय
(b) एलिजाबेथ
(c) टियून एलिजाबेथ
(d) मेरी
उत्तर :
(a) जार्ज तृतीय

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 19.
रेलगाड़ी का पहला इंजन कब बना ?
(a) 1789 A.D
(b) 1809 A.D
(c) 1814 A.D
(d) 1830 A.D
उत्तर :
(c) 1814 A.D

प्रश्न 20.
त्रिटेन में पहली रेलगाड़ी कब चली थी?
(a) 1789 A.D
(b) 1809 A.D
(c) 1815 A.D
(d) 1830 A.D
उत्तर :
(d) 1830 A.D

प्रश्न 21.
कार्ल मार्क्स ने किस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था ?
(a) उदारवाद
(b) समाजवाद
(c) मार्क्सवाद
(d) फासिज्मवाद
उत्तर :
(c) मार्क्सवाद

प्रश्न 22.
स्वेज नहर का निर्माण किसने किया ?
(a) फर्डिनेण्ड लेस्सैप
(b) रॉबर्ट कुल्टन
(c) सिरिअस
(d) इयूक ऑफ बिजवादर
उत्तर :
(d) ड्यक ऑफ ब्रिजवाटर

प्रश्न 23.
विद्युतीय टेलीग्राफ यंत्र का आविष्कार कब हुआ था ?
(a) 1800 A.D
(b) 1804 A.D
(c) 1815 A.D
(d) 1837 A.D
उत्तर :
(d) 1837 A.D

प्रश्न 24.
“दास कैपिटल” नामक ग्रन्य के लेखक कौन थे –
(a) मावर्स
(b) रूसो
(c) लुई ब्ला
(d) सेण्ट साइमन
उत्तर :
(a) मार्क्स

प्रश्न 25.
1870 ई० में किन देशों को छोड़कर सारा यूरोप कृषि प्रधान हो गया था –
(a) इग्लैण्ड
(b) फ्रांस
(c) जर्मनो
(d) सभी तीनों
उत्तर :
(a) इंग्लैण्ड

प्रश्न 26.
जॉर्ज स्टीफेन्सन ने अपने प्रसिद्ध भाप इंजन रॉकेट का आविष्कार कब किया –
(a) 1830
(b) 1835
(c) 1833
(d) 1836
उत्तर :
(a) 1830

प्रश्न 27.
पुरानी, धीमी, महैंगी और अविश्वस्त डाक व्यवस्था को किसने बद्ल डाला-
(a) रोलेंड हिल
(b) जॉर्ज स्टीफेन्सन
(c) टलफोर्ड
(d) मैंक स्डम
उत्तर :
(a) रोलैंड हिल

प्रश्न 28.
रूसी कान्ति कब हुई थी ?
(a) 1815 ई०
(b) 1830 ई。
(c) 1840 ई。
(d) 1917 ई०
उत्तर :
(d) 1917 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 29.
भारत में पहली ट्रेन कब चली थी ?
(a) 1853 ई०
(b) 1867 ई०
(c) 1894 ई。
(d) 1917 ई०
उत्तर :
(a) 1853 ई०

प्रश्न 30.
यातायात में जलमार्ग और रेलमार्ग का विकास किस देश में सबसे पहले हुआ-
(a) इंग्लैण्ड
(b) अमेरिका
(c) जापान
(d) जर्मनी
उत्तर :
(a) इंग्लैण्ड

प्रश्न 31.
अंतर्राष्ट्रीय डाक संघ की स्थापना कब हुई –
(a) 1874
(b) 1880
(c) 1890
(d) 1900
उत्तर :
(a) 1874

प्रश्न 32.
सड़क निर्माण प्रणाली का आविष्कार किसने किया ?
(a) मैकडम
(b) टेलफ़ेड एवं मैकाइड
(c) विण्डले
(d) स्टीफेन्सन
उत्तर :
(b) टेलफेड एव मैकाइड

प्रश्न 33.
पहला वाष्प इंजन किसने बनाया –
(a) टॉमस न्युकॉम ने
(b) जॉन के ने
(c) माइटले ने
(d) जेम्सवाद ने
उत्तर :
(d) जेम्सबाट ने

प्रश्न 34.
जर्मनी और आस्टिया-हंगली के मध्य एक गुप्त संधि कब हुई ?
(a) 1879
(b) 1870
(c) 1890
(d) 1900
उत्तर :
(a) 1879

प्रश्न 35.
डाक टिकट का प्रयोग कब प्रारम्भ हुआ?
(a) 1840
(b) 1860
(c) 1850
(d) 1855
उत्तर :
(a) 1840

प्रश्न 36.
1830 ई० के सुधारवादी आंदोलन में किस वर्ग ने भाग लिया –
(a) पूँजीपतियों ने
(b) मजदूरों ने
(c) विचारकों ने
(d) सैनिकों ने
उत्तर :
(b) मजदूरों ने

प्रश्न 37.
‘आर्गोनाइ़र ऑफ लेबर’ नामक पुस्तक की रचना किसने की?
(a) लुई ब्ला
(b) मार्क्स
(c) सेण्ट साइमन
(d) रूसो
उत्तर :
(a) लुई ब्ला

प्रश्न 38.
औद्योगिक क्रांति कब हुई थी –
(a) 16 वीं सदी में
(b) 17 वीं सदी में
(c) 18 वौं सदी में
(d) 19 वी सदी में
उत्तर :
(c) 18 वौं सदी में

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 39.
वाष्प इंजन का आविष्कार हुआ –
(a) 1684 ई. में
(b) 1685 ई. में
(c) 1886 ईं में
(d) 1888 ई. में
उत्तर :
(d) 1888 ई. में

प्रश्न 40.
लौह गलाने की भड्डी का आविष्कार हुआ
(a) 1760 ई. मे
(b) 1762 ई, में
(c) 1765 ई, में
(d) 1770 ई, में
उत्तर :
(a) 1760 ई. में

प्रश्न 41.
विद्युत शक्ति का आविष्कार किया –
(a) आर्कराइट ने
(b) आइजक न्यूटन ने
(c) माइकेल फैराडे ने
(d) जेम्सवाट ने
उत्तर :
(c) माइकेल फैराडे ने

प्रश्न 42.
जर्मनी में औद्योगिक क्रांति का विकास हुआ-
(a) 1840 ई के बाद
(b) 1855 ई, के बाद
(c) 1865 ई. के बाद
(d) 1870 ई. के बाद
उत्तर :
(d) 1870 ई. के बाद

प्रश्न 43.
फ्रांस में औद्योगिक क्रांति से प्रगति हुई –
(a) 1818 ई. के बाद
(b) 1820 ई. के बाद
(c) 1845 ई. के बाद
(d) 1848 ई. के बाद
उत्तर :
(d) 1848 ई. के बाद

प्रश्न 44.
औय्योगिक क्रांति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ा –
(a) एशिया में
(b) अफ्रोका में
(c) यूरोप में
(d) आस्ट्रेलिया में
उत्तर :
(c) यूरोप में

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 45.
कार्ल मार्क्स एक सुप्रसिद्ध दार्शानिक थे –
(a) रूस के
(b) अमेरिका के
(c) ब्रिटेन के
(d) जर्मनी के
उत्तर :
(d) जर्मनी के

प्रश्न 46.
एशिया में सबसे पहले उपनिवेश बनाया –
(a) पुर्तगाल ने
(b) फ्रांस ने
(c) ब्रिटेन ने
(d) रूस ने
उत्तर :
(a) पुर्तगाल ने

प्रश्न 47.
प्रथम विश्वयुद्ध का प्रमुख कारण था –
(a) धर्म
(b) आजादी
(c) गुलामी
(d) साम्माज्यवाद
उत्तर :
(d) साम्राज्यवाद

प्रश्न 48.
फ्रेडरिक एंगेल्स का जन्म हुआ –
(a) 1812 ई. में
(b) 1815 ई, में
(c) 1818 ई. में
(d) 1820 ई. में
उत्तर :
(d) 1820 ई. में

प्रश्न 49.
कार्ल मार्क्स तथा फ्रेडरिक एंगेल्स मिले थे –
(a) 1844 ई, में
(b) 1843 ई. में
(c) 1845 ई. में
(d) 1846 ई. में
उत्तर :
(b) 1843 ई. में

प्रश्न 50.
औद्योगिक क्रांति के कारणों से समाज कितनी श्रेणियों में बँट गया –
(a) 4
(b) 3
(c) 2
(d) 5
उत्तर :
(c) 2

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 51.
कार्ल मार्क्स द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ बनाया गया –
(a) 1860 ई. में
(b) 1862 ई. में
(c) 1864 ई. में
(d) 1865 ई. में
उत्तर :
(c) 1864 ई. में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. क्रान्ति का अर्थ _________ से है।
उत्तर : अकस्मात् परिवर्तन।

2. औद्योगिक क्रान्ति का सम्बन्ध _________से था।
उत्तर : मानव शिल्प ज्ञान।

3. _________ने वस्त्र उद्योग में क्रान्ति ला दिया।
उत्तर : उद्योगों।

4. _________में लोहे का पहला पुल और_________ में लोहे का पहला जहाज बना।
उत्तर : हडसन नदी, 1838 ई०।

5. जर्मनी में _________के बाद _________तीव्रता आई।
उत्तर : 1870 ई० के एकीकरण, औद्योगिक क्षेत्र में।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

6. मार्क्स का सिद्धान्त _________पर आधारित है।
उत्तर : वैज्ञानिक समाजवाद।

7. _________और _________के बीच प्रथम विश्वयुद्ध लड़ा गया।
उत्तर : सर्विया, आस्ट्रिया, हंगरी।

8. _________ने ‘औद्योगिक क्रांति’ शब्द को लोकप्रिय बनाया।
उत्तर : अर्नाल्ड टोयनबी।

9. इंगलैण्ड का _________मौसम कपड़ा उद्योग का सहायक था।
उत्तर : नम।

10. हरग्रीब्स ने _________का आविष्कार किया।
उत्तर : स्पिनिंग जेनी।

11. कोयला एवं चूना-पत्थर जलाकर लोहा गलाने की पद्धति का आविष्कार ने _________किया।
उत्तर : अबाहम उर्बि।

12. डेविड सेफ्टीलैम्प का व्यवहार _________में होता था।
उत्तर : खनन-उद्योग।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

13. _________के शासन में फ्रांस में वास्तविक औद्योगिक क्रांति की सूचना हुई।
उत्तर : लुई फिलीप।

14. 1870 ई. के बाद आल्सास-लोरेन अंचल की खनिज सम्पदा _________औद्योगिक विकास में सहायता करती है।
उत्तर : जर्मनी के।

15. रूस के औद्योगिक विकास में के शासनकाल में_________ तेजी आई।
उत्तर : अलेक्जेण्डर द्वितीय।

16. औद्योगिक विकास से निर्मित सभ्यता_________ सभ्यता के नाम से परिचित है।
उत्तर : उद्योग-आधरित।

17. _________के उद्भव के कारण औद्योगिक क्षेत्र में श्रम विभाजन नीति लागू हुई।
उत्तर : फैक्ट्री प्रथा।

18. _________में पूँजी विनियोग के माध्यम से पूंजीपति वर्ग मुनाफा पहाड़ बनाता है।
उत्तर : उद्योगों।

19. _________की मांगें ‘जनगण का सनद’ नाम से परिचित है।
उत्तर : चार्टिस्ट आन्दोलन।

20. ‘क्रिटिक ऑफ पॉलिटिकल इकोनोमी’ पुस्तक की रचना _________ने की।
उत्तर : कार्ल मार्क्स।

21._________ ने ‘साम्राज्यवाद : एक समीक्षा’ ग्रन्य की रचना की।
उत्तर : हब्सन।

22. इंगलैण्ड का श्रेष्ठ उपनिवेश_________ था।
उत्तर : भारत।

23. _________ने अफ्रीका के ट्यूनिसिया में उपनिवेश स्थापित (1881 ई.) किया।
उत्तर : फ्रांस।

24. _________ई. के बाद उपनिवेश दखल को लेकर नव्य साम्राज्यवाद शुरु हुआ।
उत्तर : 1870

25. नानकिंग संधि ( 1842 ई) के पहले विदेशी व्यापारी चीन के एकमात्र बन्दरगाह _________से व्यापार कर सकते थे।
उत्तर : कैण्टन।

26. नानकिंग समझौते द्वारा चीन_________ बन्दरगाह खोल देने को बाध्य हुआ।
उत्तर : 5

27. तियेनसिन समझौते द्वारा चीन और भी _________ बन्दरगाह खोलने के लिये बाध्य हुआ।
उत्तर : 11

28. _________ को अन्धेरा महादेश कहा जाता था।
उत्तर : अफ्रीका।

29. अल्जीरिया _________ का उपनिवेश था।
उत्तर : फ्रांस।

30. अफ्रीका का _________ बेल्जियम का उपनिवेश था।
उत्तर : कांगो।

31. पुर्तगाल ने_________ दखल करके इसका नाम ‘पोर्तुगीज पश्चिम अफ्रीका’ रखा।
उत्तर : अंगोला।

32. पुर्तगाल _________ दखल करके इसका नाम ‘पोर्तुगीज़ पूर्व अफ्रीका’ रखा।
उत्तर : मोजम्बिक।

33. पलासी के युद्ध में अंग्रेज सेनापति _________ था।
उत्तर : रॉबर्ट क्लाइव।

34. अंग्रेज कम्पनी ने बंगाल, _________ बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त की।
उत्तर : 1765 ई. में।

35. द्विशक्ति समझौता (1879 ई.) जर्मनी एवं _________ के बीच हुआ।
उत्तर : ऑस्ट्रिया।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

36. 1894 में _________ एवं रूस के बीच मैत्री समझौता हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

37. 1904 ई._________ एवं इंगलैण्ड के बीच मैत्री समझौता हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

38. प्रथम विश्वयुद्ध का प्रत्यक्ष कारण _________ था।
उत्तर : सेराजेवो हत्याकाण्ड।

39. पहली रेललाइन 1830 ई. में मैनचेस्टर से _________ तक बैठायी गयी थी।
उत्तर : लिबरपुल।

40. जेम्सवाट ने _________ में वाष्प-इंजन का आविष्कार किया था।
उत्तर : 1769 ई.।

41. _________ मानवता के इतिहास में एक अकल्पनीय घटना है।
उत्तर : औद्योगिक क्रांति।

42. प्रथम लोकोमोटिव कारखाना 1823 ई. में _________ में स्थापित हुआ।
उत्तर : न्यूकैसल।

43. हरंग्रिब्स ने 1767 ई. में _________ नामक यंत्र का आविष्कार किया।
उत्तर : स्पिनिंग जेनी।

44. टेलफोर्ड एवं _________ ने पक्की सड़क बनाने की विधि का आविष्कार किया था।
उत्तर : मैकाइड।

45. _________ ने फ्लाइंग शटल नामक मशीन का आविष्कार किया।
उत्तर : जॉन के.।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. इतिहासकार हेज, हैजेन आदि ने ‘औद्योगिक क्रांति’ शब्द के बदले शब्द के ‘औद्योगिक विवर्तन’ व्यवहार के पक्षपाती थे।
उत्तर : True

2. इंगलैण्ड के टूटे समुद्रतट पर बन्दरगाह निर्मित नहीं हुआ था, इसी से समुद्री पथ से परिवहन में समस्या पैदा हुई।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

3. मैथ्यू बोल्टेन नामक एक व्यक्ति जार्ज स्टीफेन्सन के वाष्प रेल इंजन का निर्माण करके बिक्री किया करता था।
उत्तर : False

4. बैंक ओं फ्रांस का पुनर्गठन फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन तृतीय ने किया।
उत्तर : True

5. 1834 ई. में सर्वप्रथम 18 जर्मन राज्यों को लेकर ‘कनफेडरेशन ऑफ राइन’ की स्थापना हुई।
उत्तर : False

6. बिस्मार्क कार्टेल ट्रस्ट कम्बाइन आदि संगठन की मदद से जर्मनी में वृहत उद्योगों का प्रसार हुआ।
उत्तर : True

7. औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप पूंजीपति श्रेणी एवं श्रमिक श्रेणी के बीच अर्थनैतिक संतुलन स्थापित हुआ।
उत्तर : False

8. औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप यूरोप का व्यापार-मूलधन उद्योग-मूलधन में बदल गया।
उत्तर : True

9. इंगलैण्ड में श्रमिक आन्दोलन के पक्ष में हयूग दल था।
उत्तर : False

10. चार्टिस्ट आंदोलन में अर्थनैतिक संतुलन की मांग की गयी।
उत्तर : False

11. 1875 ई. में जर्मन सोशल डमोक्रैटिक पार्टी की स्थापना हुई।
उत्तर : True

12. न्यू लैनार्क शहर में एक आदर्श समाजतांत्रिक औद्योगिक कारखाने की स्थापना शार्ल फूरियर ने की।
उत्तर : False

13. आधुनिक समाजतंत्र की प्रथम वैज्ञानिक व्याख्या कार्ल मार्क्स एवं फ्रेडरिक एगेल्स रचित कम्युनिस्ट मेनीफेस्टो में मिलती है।
उत्तर : True

14. कार्ल मार्क्स ‘कम्युनिज्म’. या साम्यवाद शब्द के बदले ‘सोशलिज्म’ या समाजतंत्र शब्द व्यवहार करते थे।
उत्तर : False

15. कार्ल मार्क्स ने श्रेणीहीन समाज प्रतिष्ठा की बात कही है जहाँ व्यक्तिगत सम्पत्ति या आर्थिक विषमता जैसा कुछ नहीं रहेगा।
उत्तर : True

16. हब्सन एवं लेनिन ने आधुनिक साम्राज्यवाद या उपनिवेशवाद की सामाजिक व्याख्या दी है।
उत्तर : False

17. लेनिन की राय में पूंजीवादी अर्थनीति की अन्तिम परिणति युद्ध है।
उत्तर : True

18. डेनियल हेडरिक ने कहा है कि अन्तिम चरण में स्वेज नहर के खनन, टेलीग्राफ एवं रेलपथ के म्रसार ने उपनिवेश स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
उत्तर : True

19. 1895 ई. में अफ्रीका का एकमात्र स्वाधीन देश यूथोपिया एवं लाइबेरिया था।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

20. 19 वी सदी के प्रथम चरण में ही यूरोप के विभिन्न देश अफ्रीका महादेश के साथ परिचित हो गये थे।
उत्तर : False

21. बेल्जियम के राजा द्वितीय लिओपोल्ड ने अफ्रीका के बारे में परिचित कराने में उल्लेखनीय भूमिका निभई।
उत्तर : True

22. स्वेज नहर अंचल में 1876 ई. में इंग-फ्रांसिसी युग्म कन्डोभिनियन गठित हुआ।
उत्तर : True

23. फ्रांस दक्षिण अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों को एक करके 1910 ई. में ‘यूनियन ऑफ साउथ अफ्रीका’ गठित किया।
उत्तर : False

24. प्राय: 1985 ई. में अफ्रीका के आबिसिनिया, लिबिया एवं ट्रान्सवाल प्रजातंत्र स्वाधीन थे, शेष अफ्रीका यूरोपीय देशों के दखल में था।
उत्तर : True

25. भारत में उद्योग-धंधे नष्ट होने पर भारत निर्यातक देश से आयातक देश में बदल गया।
उत्तर : True

26. इंगलैण्ड, रूस एवं जर्मनी में त्रिशक्ति गुट बना था।
उत्तर : False

27. सेराजेवो हत्याकाण्ड की घटना को लेकर ऑस्ट्रिया ने सर्विया की राजधानी बेलग्रेड पर आक्रमण (28 जुलाई, 1914 ई.) किया।
उत्तर : True

28. कारखाने के मालिक औरतों और बच्चों को काम पर नहीं रखते थे।
उत्तर : False

29. औद्योगिक क्रांति के कारण पुराने उद्योग का स्थान नये उद्योगों ने ले लिया।
उत्तर : True

30. औद्योगिक क्रांति के अन्तर्गत मशीनों के क्षेत्र में बहुत से आविष्कार हुए।
उत्तर : True

31. मशीनों के आ जाने से उद्योगों में मंदी छा गयी।
उत्तर : False

32. दैनिक जीवनोपयोगी आविष्कारों से इंगलेण्ड ने औद्योगिक क्रांति को गौरवान्वित किया।
उत्तर : True

33. इंगलैण्ड 1850 ई. तक विश्व के कारखाने, भट्ठियाँ, बैंक तथा मालवाही गढ़ मान लिया गया था।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

34. औद्योगिक क्रांति के द्वितीयार्द्ध में दैनिक जीवन के उपयोगी सामानों के उद्योग निर्मित होने लगे थे।
उत्तर : True

35. अन्य यूरोपीय देशों में एक साथ औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई।
उत्तर : False

36. यूरोप में औद्योगिक कांति ने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक जीवनचर्या में अभूतपूर्व बदलाव लाया।
उत्तर : True

37. कपड़ा उद्योग से लेकर विभिन्न कल-कारखाने ब्रिटेन में निर्मित हुए।
उत्तर : True

38. सबसे पहले फ्रांस में औद्योगिक क्रांति हुई।
उत्तर : False

39. वाष्प इंजन का आविष्कार जेम्स वाट ने किया था।
उत्तर : False

40. औद्योगिक क्रांति के पश्चात् का इतिहास साम्नाज्यवाद एवं समाजवाद के विकास का इतिहास है।
उत्तर : True

41. उपनिवेश बनाने की होड़ में सभी यूरोपीय देश एक साथ थे।
उत्तर : True

42. विभिन्न देशों के आपसी संघर्ष के कारण ही प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ था।
उत्तर : True

43. उपनिवेशों का निर्माण दोस्ती की वजह से हुई थी।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

44. अंग्रेज सबसे पहले भारत में आये।
उत्तर : False

45. एशिया, अमेरिका एवं अफ्रीका में उपनिवेश बने।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) औद्योगिक क्रांति की सूचना (1) फ्रांस
(B) पेरियर ब्रदर्स (2) इंगलैण्ड
(C) जोल्वेरिन (3) रूस
(D) भूमिदास प्रथा (4) जर्मनी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) औद्योगिक क्रांति की सूचना (2) इंगलैण्ड
(B) पेरियर ब्रदर्स (3) रूस
(C) जोल्वेरिन (4) जर्मनी
(D) भूमिदास प्रथा (1) फ्रांस

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जॉन के (1) मिऊल
(B) हरग्रीब्स (2) वाटर फ्रेम
(C) आर्कराइट (3) स्पिनिंग जेनी
(D) क्रम्पटन (4) फ्लाइंग शटल

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) जॉन के (4) फ्लाइंग शटल
(B) हरग्रीब्स (3) स्पिनिंग जेनी
(C) आर्कराइट (2) वाटर फ्रेम
(D) क्रम्पटन (1) मिऊल

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) कार्टराइट (1) ब्लास्ट फर्नेस
(B) जेम्स वाट (2) वाष्प शक्ति
(C) जार्ज स्टीफेन्सन (3) पावर लूम
(D) जॉन स्मिटन (4) वाष्पचालित रेलइंजन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) कार्टराइट (3) पावर लूम
(B) जेम्स वाट (2) वाष्प शक्ति
(C) जार्ज स्टीफेन्सन (4) वाष्पचालित रेलइंजन
(D) जॉन स्मिटन (1) ब्लास्ट फर्नेस

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) हम्फ्रेडेवि (1) पीच का रास्ता
(B) टेलफोर्ड एवं मैकाउम (2) जिन कपड़ा बनाने की कारीगरी
(C) फुल्टन (3) सेफ्टी लैंप
(D) ली व्हीटन (4) वाष्प जहाज

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) हम्फ्रेडेवि (3) सेफ्टी लैंप
(B) टेलफोर्ड एवं मैकाउम (1) पीच का रास्ता
(C) फुल्टन (4) वाष्प जहाज
(D) ली व्हीटन (2) जिन कपड़ा बनाने की कारीगरी

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) क्लेदि मोबिलिए (1) चीन
(B) चार्टिस्ट आन्दोलन (2) रूस
(C) इक्कीस सूत्री मांगें (3) फ्रांस
(D) भूमिदासों की मुक्ति (4) इंगलैण्ड

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) क्लेदि मोबिलिए (3) फ्रांस
(B) चार्टिस्ट आन्दोलन (4) इंगलैण्ड
(C) इक्कीस सूत्री मांगें (1) चीन
(D) भूमिदासों की मुक्ति (2) रूस

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुडाइट दंगा (1) इंगलैण्ड
(B) राष्ट्रीय कर्मशाला (2) अमेरिका
(C) मुक्तद्वार नीति (3) फ्रांस
(D) कांगों फ्री स्टेट (4) बेल्जियम

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) लुडाइट दंगा (1) इंगलैण्ड
(B) राष्ट्रीय कर्मशाला (3) फ्रांस
(C) मुक्तद्वार नीति (2) अमेरिका
(D) कांगों फ्री स्टेट (4) बेल्जियम

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) पिटरलू हत्याकाण्ड (1) फ्रांस
(B) खूनी मई सप्ताह (2) ऑस्ट्रया
(C) सेराजेवो हत्याकाण्ड (3) भारत
(D) दीवानी प्राप्त (4) इंगलेण्ड

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) पिटरलू हत्याकाण्ड (4) इंगलेण्ड
(B) खूनी मई सप्ताह (1) फ्रांस
(C) सेराजेवो हत्याकाण्ड (2) ऑस्ट्रया
(D) दीवानी प्राप्त (3) भारत

प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इंगलैण्ड के श्रमिक नेता (1) फर्डिनान्ड लैसेल
(B) जर्मनी के श्रमिक नेता (2) ओ ब्लायेन
(C) चार्टिस्ट आन्दोलन के नेता (3) नेड लूड
(D) अमेरिकी विदेश सचिव (4) सर जॉन हे

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) इंगलैण्ड के श्रमिक नेता (3) नेड लूड
(B) जर्मनी के श्रमिक नेता (1) फर्डिनान्ड लैसेल
(C) चार्टिस्ट आन्दोलन के नेता (2) ओ ब्लायेन
(D) अमेरिकी विदेश सचिव (4) सर जॉन हे

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तष्भ ‘ख’
(A) कांगो की खोज (1) रबार्ट बेन
(B) सेराजेवो हत्याकाण्ड (2) कार्ल मर्क्स
(C) वैज्ञानिक समाजविद् (3) नेवेरिलो प्रिन्सेष
(D) आदि समाजविद् (4) र्टेनली

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तष्भ ‘ख’
(A) कांगो की खोज (4) र्टेनली
(B) सेराजेवो हत्याकाण्ड (3) नेवेरिलो प्रिन्सेष
(C) वैज्ञानिक समाजविद् (2) कार्ल मर्क्स
(D) आदि समाजविद् (1) रबार्ट बेन

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1757 ई. (1) बवसर का युद्ध
(B) 1764 ई. (2) बंगाल के 76 का मतांतर
(C) 1765 ई. (3) पलासी का युद्ध
(D) 1770 ई. (4) बंगाल की दीवानी प्राप्ति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1757 ई. (3) पलासी का युद्ध
(B) 1764 ई. (1) बवसर का युद्ध
(C) 1765 ई. (4) बंगाल की दीवानी प्राप्ति
(D) 1770 ई. (2) बंगाल के 76 का मतांतर

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्ता्भ ‘ख’
(A) 1832 ई (1) प्यूर लों
(B) 1833 ई (2) प्रथम फैक्ट्री कानून
(C) 1834 ई (3) इंगलैण्ड का सुधार कानून
(D) 1838 ई (4) जनगण का सनद प्रचार

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्ता्भ ‘ख’
(A) 1832 ई (3) इंगलैण्ड का सुधार कानून
(B) 1833 ई (2) प्रथम फैक्ट्री कानून
(C) 1834 ई (1) प्यूर लों
(D) 1838 ई (4) जनगण का सनद प्रचार

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 4 औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद

प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1839 ई. (1) द्वितीय इंग-चीन युद्ध
(B) 1842 ई. (2) इंगलैण्ड में मताधिकार कानून
(C) 1856 ई. (3) प्रथम इंग-धीन युद्ध
(D) 1867 ई. (4) इंगलेण्ड में खनिज कानून

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(A) 1839 ई. (3) प्रथम इंग-धीन युद्ध
(B) 1842 ई. (4) इंगलेण्ड में खनिज कानून
(C) 1856 ई. (1) द्वितीय इंग-चीन युद्ध
(D) 1867 ई. (2) इंगलैण्ड में मताधिकार कानून