WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 Geography Book Solutions Chapter 5A भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 Geography Chapter 5A Question Answer – भारत : स्थिति एवं प्रशासनिक विभाग, भू-प्रकृति, जल संसाधन, जलवायु, मिट्टियाँ एवं प्राकृतिक वनस्पति

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी का नाम क्या है ?
उत्तर :
गोदावरी।

प्रश्न 2.
भारत के किस वन में शेर पाए जाते हैं ?
उत्तर :
गुजरात के गीर वन में।

प्रश्न 3.
झारखण्ड और पश्चिम बंगाल की संयुक्त बहुद्देशीय नदी योजना का नाम लिखिए।
उत्तर :
दामोदर घाटी योजना।

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प्रश्न 4.
भारत का सबसे ऊँचा पर्वत दर्रा कौन है ?
उत्तर :
डुंगरीला या मन्ना-दर्रा।

प्रश्न 5.
संसार का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
सुन्दरवन क्षेत्र या गंगा बह्यपुत्र डेल्टा क्षेत्र

प्रश्न 6.
भारतीय प्रामाणिक मध्याह्नरेखा का मान कितना है ?
उत्तर :
82° 30′ पूरब।

प्रश्न 7.
म्यानमार का प्राचीन नाम क्या है ?
उत्तर :
बर्मा।

प्रश्न 8.
कौन-सी रेखा आठ राज्यों से होकर गुजरती है ?
उत्तर :
कर्क रेखा।

प्रश्न 9.
प्राकृतिक संसाधनों की अधिकता के कारण प्राचीन काल में भारत को क्या कहा गया ?
उत्तर :
सोने की चिड़िया।

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प्रश्न 10.
कौन-देश भारत की मत्रार की खाड़ी तथा पाक जल सन्धि से अलग होता है ?
उत्तर :
श्रीलंका।

प्रश्न 11.
किस शहर को भारत का बॉलीवुड कहा गया है ?
उत्तर :
मुम्बई।

प्रश्न 12.
भारत का दिल (Heart of India) किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
नई दिल्ली।

प्रश्न 13.
किन राज्यों को सात बहनो की पहाड़ी (Seven Sister of Hills) कहा जाता है ?
उत्तर :
भारत के पूर्वोतर राज्यों को।

प्रश्न 14.
भारत का सबसे लम्बा हिमनद क्या है ?
उत्तर :
सियाचीन हिमनद।

प्रश्न 15.
हिमालय के प्रसिद्ध हिमनद क्या हैं ?
उत्तर :
गंगोत्री एवं जमुनोत्री।

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प्रश्न 16.
नैनीताल किस हिमालय श्रेणी में स्थित है ?
उत्तर :
लघु या मध्य हिमालय श्रेणी में।

प्रश्न 17.
भौगोलिक दृष्टिकोण से भारत को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
उपमहाद्वीप।

प्रश्न 18.
भारत को कब संप्रभुतासम्पन्न गणराज्य घोषित किया गया था ?
उत्तर :
26 जनवरी, 1950 ई० में।

प्रश्न 19.
संविधान के अनुसार भारत के राज्यों को कितने श्रेणियों में रखा गया है ?
उत्तर :
चार।

प्रश्न 20.
सबसे छोटा केन्द्रशासित राज्य है।
उत्तर :
लक्षद्वीप।

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प्रश्न 21.
दक्कन ट्रेप का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
सीढ़ीनुमा भूमि।

प्रश्न 22.
थार मरूस्थल में ऊँचे कठोर चट्टान के टीले को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
द्वीपगिरी (Insellberge)।

प्रश्न 23.
किस पठार को भारत के खनिजों का भण्डार कहा जाता है ?
उत्तर :
छोटानागपुर का पठार।

प्रश्न 24.
चिल्का झील किस समुद्री तट पर स्थित है ?
उत्तर :
उड़िसा राज्य के उत्तरी सरकार तट पर।

प्रश्न 25.
पश्चिम बंगाल की एक बहुउद्देशीय नदी का नाम लिखिए।
उत्तर :
दामोदर नदी।

प्रश्न 26.
हीराकुण्ड परियोजना कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
उड़िसा के महानदी पर।

प्रश्न 27.
नीरू-भीरू कार्यक्रम कहाँ चलाया गया।
उत्तर :
आन्ध्रदेश में।

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प्रश्न 28.
मानसून शब्द की उत्पत्ति किस भाषा से हुई है ?
उत्तर :
अरबी भाषा से।

प्रश्न 29.
उत्तरी भारत के एक स्थानीय गर्म एवं शुष्क वायु का नाम लिखिए।
उत्तर :
‘लू’ (LOO)।

प्रश्न 30.
काली मिट्टी का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
रेगूर मिट्टी।

प्रश्न 31.
एक वृक्ष एक पुत्र के समान कहने का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
अधिक पेड़ लगाओ एवं रक्षा करो।

प्रश्न 32.
CAZRI का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Central Arid Zone Research Institute. (सेन्ट्रल एरीड जोन रिर्सच इन्सीचिऊ)।

प्रश्न 33.
विश्व के सबसे बड़ा डेल्टा का नाम क्या है ?
उत्तर :
गंगा-बह्मपुत्र नदियों का डेल्टा ‘सुन्दरवन’।

प्रश्न 34.
भारत में लगभग कितना प्रतिशत वर्षा मानसून के समय होती है ?
उत्तर :
लगभग 75 प्रतिशत।

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प्रश्न 35.
किस वन क्षेत्र को शीलास के नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
आर्द्र उपोष्ण पहाड़ी वन क्षेत्र।

प्रश्न 36.
कयाल क्या है ?
उत्तर :
मालाबार तट के सहारे स्थित लैगूनों को कयाल कहते हैं।

प्रश्न 37.
नर्मदा नदी की प्रसिद्ध जलप्रपात का नाम बताओ।
उत्तर :
नर्मदा नदी पर जबलपुर के निकट प्रसिद्ध जलप्रपात ‘धुआंधार’ है।

प्रश्न 38.
भारत की जलवाय को कौन-सी वायु मुख्यतः नियंत्रित करती है ?
उत्तर :
मानसूनी वायु।

प्रश्न 39.
भारत के एक गिरिश्रृंग का उदाहरण दो।
उत्तर :
हिमालय की नीलकण्ठ चोटी।

प्रश्न 40.
SAARC का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
SAARC का पूरा नाम है दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Co-operation)।

प्रश्न 41.
रोही क्या है ?
उत्तर :
अरावली के पर्वतपदीय क्षेत्र में स्थित जलोढ़ मैदान को रोही कहते हैं।

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प्रश्न 42.
भारत का सबसे ऊँचा जलप्रताप कौन है ?
उत्तर :
शरावती नदी पर स्थित जोग जलप्रताप।

प्रश्न 43.
भारत एवं चीन के मध्य की सीमा रेखा का क्या नाम है।
उत्तर :
मैकमोहन लाइन।

प्रश्न 44.
आप्रवर्षा कहाँ होती है ?
उत्तर :
दक्षिण भारत में।

प्रश्न 45.
भारत के किस राज्य में वनाच्छादित भूमि सबसे अधिक है ?
उत्तर :
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 46.
भारत की प्रामाणिक मध्यांह्न रेखा कौन है ?
उत्तर :
821/2° E

प्रश्न 47.
भारत का वन अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है ?
उत्तर :
देहरादून में।

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प्रश्न 48.
प्रतिवर्ग कि॰मी० की दृष्टि से भारत का औसत जनघनत्व कितना है ?
उत्तर :
382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि॰मी०।

प्रश्न 49.
Malnad क्या है ?
उत्तर :
मालनद : ‘मालनद’ शब्द कन्नड़ भाषा से लिया गया है, कर्नाटक के समतल भूमि को मालनद कहा जाता है।

प्रश्न 50.
भारत के उत्तर में स्थित किन्हीं दो देशों का नाम लिखिए।
उत्तर :
नेपाल और चीन

प्रश्न 51.
लघु या मध्य हिमालय की चौड़ाई कितनी है ?
उत्तर :
80 से 100 कि०मी०।

प्रश्न 52.
गंगा के मैदान का विस्तार किन राज्य में है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल राज्य में है।

प्रश्न 53.
दक्कन के पठार के पश्चिमी एवं पूर्वी भाग में कौन सा पर्वत है ?
उत्तर :
पश्चिमी में सह्याद्रि पर्वत एवं पूर्वी भाग में मलयाद्रि पर्वत है।

प्रश्न 54.
कपास की काली मिट्टी का प्रदेश किस प्रदेश को कहते हैं ?
उत्तर :
प्रायद्वीपीय या मुख्य दक्कन का पठार प्रदेश को।

प्रश्न 55.
कर्नाटक तथा केरल तटों को संयुक्त रूप से क्या कहते है ?
उत्तर :
मालाबार तट।

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प्रश्न 56.
ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित किन्हीं दो शहरों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गौहाटी और डिबूगढ़।

प्रश्न 57.
भारत की कितनी कृषियोग्य भूमि सिंचित है ?
उत्तर :
53 % भूमि सिंचित है।

प्रश्न 58.
भारत में सबसे अधिक नलकूप किस राज्य में है ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश में है।

प्रश्न 59.
भारत में कर्क रेखा के दक्षिणी भाग की जलवायु कैसी है ?
उत्तर :
उष्ण जलवायु है।

प्रश्न 60.
किस पर्वत की स्थिति के कारण पश्चिमी तटीय मैदान में प्रचुर वर्षा होती है ?
उत्तर :
हिमालय पर्वत

प्रश्न 61.
हमारे देश के कितने प्रतिशत भाग पर वन हैं ?
उत्तर :
19.27 %

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प्रश्न 62.
हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में कितनी ऊँचाई पर नुकीली पत्ती वाले सदाबहार वन पाये जाते है ?
उत्तर :
1525 से 3500 मीटर की ऊँचाई।

प्रश्न 63.
नदियों के डेल्टाई क्षेत्र में किस प्रकार के वन पाए जाते हैं ?
उत्तर :
ज्वारीय वन

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
कर्नाटक पठार के दो भूप्राकृतिक विभागों का नाम लिखिए।
उत्तर :
मालावार तट के गोवा से मंगलोर तक के तट को कर्नाटक तथा मंगलोर से कुमारी अंतरीप तक के तट को केरल त्ट कहते हैं।
अथवा
वर्षा जल संग्रहण के दो उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर :
(i) वर्षा के जल के संग्रहण द्वारा जल की कमी की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
(ii) वर्षा जल संग्रहण प्रत्यक्ष रूप से भूजल पुनर्भरण के लिए होता है।

प्रश्न 2.
सीढ़ीनुमा जुताई का क्या महत्व है ?
उत्तर :
पहाड़ी ढालों को सीढ़ीदार क्यारियों (Terraced-beds) के रूप में बदल देना चाहिए। इससे उपजाऊ मिट्टी का कटाव नहीं होता है।

प्रश्न 3.
मानसून विस्फोट की परिभाषा दीजिए।
उत्तर :
दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवायें उत्तरी-पश्चिमी भारत की ओर तीव्र गति से चलती है । इन हवाओं से भारत के पश्चिमी तट पर भारी वर्षा होती हैं। इसलिए इसे मानसून का फट पड़ना या मानसून विस्फोट(Burst of Monsoon) कहते है।

प्रश्न 4.
सामाजिक वानिकी के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
(i) वनों का विकास एवं संरक्षण करके अतिरिक्त वनोत्पादों से इंधन, चारा, लकड़ी, फल आदि प्राप्त करके स्थानीय लोगों को लाभ पहुँचाना।
(ii) अनुपयोगी भूमि का समुचित एवं लाभकारी उपयोग करना।

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प्रश्न 5.
खादर एवं बागर में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

खादर बागर
1. नये जलोढ़ मैदान को खादर कहा जाता है। 1. पुराने जलोढ़ मैदान को बागर कहता जाता है।
2. इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष बाढ़ का पानी पहुँचता है। 2. इस क्षेत्र में बाढ़ का पानी नहीं पहुँच पाता है।
3. इसमें चिका मिट्टी की अधिकता होती है। 3. इसमें कैल्सियम की अधिकता होती है।

प्रश्न 6.
सुरक्षित वन से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
सुरक्षित वन : इन वनों में लकड़ी काटना या पशु चराना बिल्कुल मना है। ये सरकारी सम्पत्ति होते हैं और बाढ़ के रोक-थाम, भूमि-कटाव से बचाव तथा मरूस्थल के प्रसार को रोकने के लिए इस वन का महत्व अधिक है। ऐसे वनों का विस्तार लगभग 383 लाख हेक्टर भूमि में है।

प्रश्न 7.
संरक्षित वन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
संरक्षित वन : ये वन भी सरकारी ही है, किन्तु इनमें सरकार की ओर से लाइसेंस देकर वनों को काटने की मंजूरी दी जाती है। इन वनों में पशु भी चराया जा सकता है। लेकिन वन विभाग द्वारा इस पर पूरा निगरानी रखा जाता है।

प्रश्न 8.
वर्षा के आधार पर भारत को कितने वर्गों में बांटा गया है ?
उत्तर :
भारत में लगभग 75 % वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। वर्षा के स्रोतों के आधार पर भारत को चार वर्गो में रखा गया है।

  1. अधिक वर्षा वाले क्षेत्र :- 200 से०मी॰ से अधिक।
  2. सामान्य वर्षा वाले क्षेत्र :- 100 से॰मी० से अधिक।
  3. अल्प वर्षा वाले क्षेत्र :- 50 से॰मी॰ से 100 से॰मी॰ तक।
  4. अत्यल्प वर्षा वाले क्षेत्र :- 50 से०मी० से कम।

प्रश्न 9.
मानसून विभंगता क्या है ?
उत्तर :
मानसूनी वर्षा लगातार नहीं होती बल्कि कुछ दिनों के अन्तर से रूक-रूक कर हुआ करती है। कभी-कभी एक बार वर्षा होने के बाद दूसरी वर्षा एक माह बाद तक होती है। इस घटना को ही मानसून विभंगता कहा जाता है।

प्रश्न 10.
रबी फसल क्या है ?
उत्तर :
रबी फसल :- इस फसल को शीतकालीन फसल भी कहा जाता है। भारत में यह फसल नवम्बर-दिसम्बर में रोपी जाती है तथा मार्च-अप्रैल तक काट ली जाती है तो इसे रबी फसल कहा जाता है। जैसे – गेहूँ, चना इत्यादि।

प्रश्न 11.
खरीफ फसल से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
खरीफ फसल : इस फसल को वर्षाकालीन फसल भी कहा जाता है। वे फसले जो मध्य जून-जुलाई में रोपी जाती है तथा अक्टूबर-नवम्बर तक काट ली जाती है तो इसे खरीफ फसल कहा जाता है। जैसे – धान, जूट इत्यादि।

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प्रश्न 12.
मिट्टी की समस्याओं का उल्लेख करें।
उत्तर :
मिट्टी की समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

  1. मिट्टी का अपरदन अधिक होना
  2. जल जमाव
  3. अम्लीय, लवणीयता एवं क्षारीयता
  4. वन भूमि की समस्या
  5. मरूस्थलीकरण
  6. मानव भूमि द्वारा भूमि का अत्यधिक शोषण।

प्रश्न 13.
परत अपरदन क्या है ?
उत्तर :
परत अपरदन (Sheet Erosion) :- जब जल, वायु, मिट्टी की ऊपरी परत को बहा कर या उड़ा कर ले जाते हैं तो इसे परत अपरदन कहा जाता है।

प्रश्न 14.
अवनलिका अपरदन क्या है ?
उत्तर :
अवनलिका अपरदन (Gully Erosion) :- जब तेज गति से बहता हुआ जल मिट्टी को काट कर गहरी नालियों, खड्डों का निर्माण कर देता है तो इसे अवनलिका अपरदन कहते हैं।

प्रश्न 15.
वन जीवन कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
वन जीवन कार्यक्रम का उद्देश्य –

  1. जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा।
  2. सुरक्षित क्षेत्रों में जीवों का उचित रख-रखाव।
  3. पौधों एवं प्राणियों के लिए जैवमण्डल संरक्षणशालाओं की स्थापना।

प्रश्न 16.
भारत में यातायात कितने प्रकार का है ?
उत्तर :
भारत में यातायात के लिए चार प्रमुख साधन है –

  1. स्थल परिवहन (सड़कें एवं रेलमार्ग)
  2. जल परिवहन (समुद्री तथा आंत्रिक नदियाँ)
  3. वायु परिवहन
  4. पाइप लाइन।

प्रश्न 17.
जिला सड़कें क्या हैं ?
उत्तर :
ये सड़कें गाँवों एवं कस्बों को एक दूसरे से तथा जिला मुख्यालय से जोड़ती है। इनके निर्माण एवं रख रखाव की जिम्मेदारी जिला परिषदों की होती है।

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प्रश्न 18.
वर्तमान समय में भारत में कितने राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश हैं ?
उत्तर :
वर्तमान समय में भारत में 29 राज्य तथा 6 केन्द्रशासित राज्य है।

प्रश्न 19.
भारत में सबसे लम्बी नदी का नाम लिखो।
उत्तर :
गंगा भारतीय सीमा में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है। इसकी लम्बाई 2530 कि०मी० है।

प्रश्न 20.
लाल मिट्टी का निर्माण किस शैल से हुआ है ?
उत्तर :
यह मिट्टी ग्रेनाइट नीस आदि चट्टानों की दूट-फूट से बनती है।

प्रश्न 21.
निछालन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा मिट्टी में विद्यमान घुलनशील संघटक पानी में घुल जाते है और रिसते हुए पानी के साथ मिट्टी में से होकर नीचे के स्तरों में पहुँच जाते है।

प्रश्न 22.
समुद्रवर्ती वन की एक वनस्पति का नाम लिखो।
उत्तर :
समुद्रवर्ती वन में पाए जाने वाले वनस्पति मैंग्रोव वनस्पति है।

प्रश्न 23.
तमिलनाडू में जल संचयन क्यों महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर :
नीरू- भीरू कार्यक्रम आन्धप्रदेश में चालू की गई है। इसके अर्त्तगत लोगों के सहयोग से विभिन्न जल संग्रहण संरचनाएं जैसे अन्त : स्रण तालाब तल की खुदाई की गई है और रोक बाँध बनाए गए है। तामिलनाडू में घरों में जल संग्रह संरचना को बनाना आवश्यक कर दिया गया है।

प्रश्न 24.
हिमालय के तीन तीर्थ स्थलों, हिमनदों, घाटियों एवं सर्वोच्च चोटियों का नाम लिखिए।
उत्तर :
हिमालय के तीर्थ स्थलों में अमरनाथ, केदारनाथ तथा बद्रीनाथ है। प्रमुख हिमनद गंगोत्री जमुनोत्री एवं सियाचिन, प्रमुख घाटी कश्मीर, कुलू एवं कुमायूँ, तथा माउण्ट एवरेस्ट, नन्दादेवी, नंगा पर्वत प्रमुख चोटियाँ है।

प्रश्न 25.
भारत के सबसे बड़े डेल्टा एवं सबसे बड़े नदी द्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर :
भारत के सबसे बड़ा डेल्टा गंगा-ब्मापुत्र का डेल्टा एवं सबसे बड़ी नदी द्वीप ब्रह्मपुत्र नदी की माजुली द्वीप है।

प्रश्न 26.
पश्चिमी घाट की पूर्व वाहिनी नदियों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गोदावरी और कृष्णा नदी।

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प्रश्न 27.
भारत में वर्षा या सूखा क्यों आते रहते हैं ?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर से होकर जब एल-निनो हिन्द महासागर में पहुँचती है तो हिन्द महासागर का तापमान अचानक बढ़ जाता है जिससे यहाँ से उत्पन्न होनेवाली ग्रीष्मकालीन (दक्षिणी-पश्चिमी) मानसूनी हवाएँ कमजोर पड़ जाती है जिससे भारतीय उपमहादेश में वर्षा या सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 28.
आर्द्र सदाबहार वनों के चार वृक्षों के नाम बताइये।
उत्तर :
इन वनों के प्रमुख वृक्ष महोगनी, रबर, लौह-काष्ठ, गुर्जन आदि है।

प्रश्न 29.
भारत के किन भागों में आर्द्र सदाबहार वन पाये जाते हैं ?
उत्तर :
ये वन बंगाल व उड़ीसा के मैदानी भागों, असम नागालैण्ड मैघालय, आदि क्षेत्रों में पाऐ जाते है।

प्रश्न 30.
गंगा-ब्रह्मपुत्र डल्टाई क्षेत्र को सुन्दरवन क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
गंगा-ब्मयुत्र डेल्टाई क्षेत्र में सुन्दरी नाम के वृक्ष अधिक पाए जाते है। इसलिए इसे सुन्दरवन कहते है।

प्रश्न 31.
भारतवर्ष के किस क्षेत्र में नमकीन मिट्टी पायी जाती है ?
उत्तर :
तट के समीप के निम्न मैदान एवं डेल्टाई भागों में जहाँ ज्वार का खारा जल पहुँचता रहता है। वहाँ खारी या नमकीन मिट्टी मिलती है।

प्रश्न 32.
भारत के किस क्षेत्र में सदावाहिनी नहरों से अधिक सिंचाई होती है ?
उत्तर :
उत्तरी भारत में सतलज गंगा के मैदानी क्षेत्र में नहरों से अधिक सिंचाई होती है।

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प्रश्न 33.
दामोदर घाटी के तीन जलविद्युत शक्ति केन्द्रों का नाम लिखिए।
उत्तर :
मैथान, पंचेत तथा दुर्गापुर दामोदर घाटी के जलविद्युत शक्ति के केन्द्र है।

प्रश्न 34.
हिमालय के प्रमुख दर्रों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गोमल, मकरान, खैबर तथा बोलन हिमालय के प्रमुख दर्रे है।

प्रश्न 35.
पश्चिमी तटीय मैदान दलदली एवं बालुकामय क्यों है ?
उत्तर :
इस मैदान के निर्माण में नदियों की अपेक्षा समुद्र का हाथ अधिक है। समुद्री कटाव के कारण तटीय भाग में छोटीछोटी लैगून झीलें बन गई है। ज्वार का पानी पहुँच जाने के कारण पश्चिमी तटीय भाग दलदली एवं बालुकामय है।

प्रश्न 36.
दक्षिण भारत की नदियाँ सदावाहिनी क्यों नहीं है ?
उत्तर :
दक्षिणी भारत की नदियाँ, उत्तर भारत की निदियों की तरह हिमाच्छादित शिखरों से नहीं निकलती है जिससे इन्हें वर्ष भर हिम का पिघला जल नहीं मिलता है। दूसरे, इस भाग में वर्षा भी कम होती है अत: ये नदियाँ सदावाहिनी, नहीं है।

प्रश्न 37.
दक्षिण भारत की नदियों का अपरदन कार्य नगण्य क्यों है ?
उत्तर :
दक्षिण भारत की नदियाँ कटाव के आधार-तल को प्राप्त कर चुकी है। अत: अब इसका अपरदन कार्य नगण्य है।

प्रश्न 38.
भारत के उत्तर के मैदान में अधिक नहरें क्यों है ?
उत्तर :
यहाँ नहरों का जाल बिछा हुआ है क्योंकि यहाँ भूमि समतल, उपजाऊ एवं मुलायम है तथा नदियाँ सदावाहिनी है।

प्रश्न 39.
एल-निनो तथा ला-निनो किस प्रकार भारत के जलवायु को प्रभावित करती है ?
उत्तर :
एल-निनो का प्रभाव – प्रशान्त महासागर से होकर जब यह हिन्द महासागर में पहुँचती है तो हिन्द महासागर का तापमान अचानक बढ़ जाता है जिससे यहां से उत्पन्न होनेवाली ग्रीष्मकालीन (दक्षिणी-पश्चिमी) मानसूनी हवाएँ कमजोर पड़ जाती है जिससे भारतीय उपमहादेश में वर्षा कम होती है एवं सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ला-निनो का प्रभाव-हिन्द महासागर में ला-निनो के आगमन से उच्च वायुदबाव का गठन होता है, जिससे भारतीय उपमहादेश की ओर आनेवाली ग्रीष्मकालीन मानसुनी हवाएँ प्रबल हो जाती है तथा पर्याप्त वर्षा करती है।

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प्रश्न 40.
तामिलनाडू तट पर शीत ऋतु में भी वर्षा क्यों होती है ?
उत्तर :
भारत में शीतकाल में हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती है। इसी से इन हवाओं को उत्तरी-पूर्वी मानसून या शीतकाल का मानसून कहते है। स्थल से आने के कारण ये हवायें आमतौर पर शुष्क होती है और इनसे वर्षा नहीं होती। परन्तु यही हवायें जब बंगाल की खाड़ी को पार करती है तो इनमें जलवाष्प आ जाता है। अत: ये हवाएँ पूर्वी घाट की पहाड़ियों से टकराकर तामिलनाडु में जाड़े में भी वर्षा करती है।

प्रश्न 41.
लैटेराइट मिट्टी अनुपजाऊ क्यों होती है ?
उत्तर :
इस मिट्टी में लोहे के ऑक्साइड एवं अल्युमिनियम का अंश तो अधिक परन्तु नाइट्रोजन, चूना, फॉंस्फोरस एवं जीवांश की मात्रा कम होती है। यह मिट्टी छिद्रदार एवं अनुपजाऊ होती है अतः यह कृषि के योग्य नहीं है।

प्रश्न 42.
ज्वारीय वन के वृक्षों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
इन वनों की कुछ विशेषताएँ इस प्रकार है –
(i) नमकीन मिट्टी में पेड़ों की जड़ों को साँस लेने में कठिनाई होती है। अत: वृक्षों की कुछ जड़े पानी के ऊपर निकल आती है। इन्हें श्वसन मूल कहते है।
(ii) दलदली भाग में पेड़ को गिरने से बचाने के लिए उनमें तिरछी जड़े पाई जाती है,

प्रश्न 43.
भारत में उगाई जानेवाली फसलों का उपयोग के आधार पर वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
उपयोग के आधार पर भारत की फसलों को मोटे तौर पर चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है :

  1. खाद्यात्र : चावल, गेहूँ, ज्वार-बाजरा, मक्का, चना आदि।
  2. पेय पदार्थ : चाय और कहवा
  3. व्यावसायिक एवं मुद्रादायिनी फसलें : कपास, जूट, चाय, कहवा, गन्ना, तिलहन आदि।
  4. रेशेदार फसलें : कपास और जूट आदि।.

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प्रश्न 44.
भारतवर्ष के विस्तार का वर्णन करो।
उत्तर :
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्य का सातवाँ बड़ा देश है इसका क्षेत्रफल लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है। यह उत्तर से दक्षिण 3214 कि॰मी॰लम्बा तथा पूर्व से पश्चिम 2933 कि॰मी० चौड़ा है। इसकी स्थलीय सीमा 15 , 200 कि०मी॰ तथा समुद्र सीमा 7516.6 कि०मी०।

प्रश्न 45.
भारत के भौतिक विभाजन का वर्णन करो।
उत्तर :
भौतिक दृष्टि से भारत को निम्नलिखित छ: प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है :

  1. उत्तर का पर्वतीय भाग
  2. सतलज-गंगा-ब्रहुपुत्र का मैदान
  3. दक्षिण का पठारी भाग
  4. समुद्रतटीय मैदान
  5. थार का मरूस्थल
  6. द्वीपसमूह

प्रश्न 46.
नहरों द्वारा सिंचाई से क्या लाभ है ?
उत्तर :
(i) नहरों द्वारा सिंचाई करने से भूमि की उर्वरा-शक्ति बढ़ जाती है। अच्छे किस्म के अन्न पैदा होने लगते है।
(ii) नहरों द्वारा सिंचाई करने से बंजर व अनउपजाऊ भूमि में भी खेती होने लगती है और वे हरे-भरे हो जाते है।

प्रश्न 47.
मृदा संरक्षण क्या है ?
उत्तर :
विभिन्न उपायों से मिट्टी की समस्याओं को दूर करके उसे लम्बे समय तक उपजाऊ एवं कृषि के योग्य बनाए रखने को मिट्टी का संरक्षण कहते है।

प्रश्न 48.
हरियाणा मे कृषि क्यों उन्नत है ?
उत्तर :
हरियाणा में प्रति एकड़ उत्पादकता देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। राज्य की ओर से कृषि साख एवं विपणन की उचित व्यवस्था ने यहाँ कृषि को और अधिक प्रोत्साहित किया है जिससे यह राज्य कृषि के क्षेत्र में भारत का सर्वाधिक समृद्ध राज्य है।

प्रश्न 49.
संरचनात्मक उद्योग का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं से प्राप्त उत्पादों का कच्चे माल के रूप में उपयोग करके उनके रूप एवं गुणों में परिवर्तन करके उन्हें अधिक उपयोगी एवं मूल्यवान बनाने की प्रक्रिया को वस्तु निर्माण उद्योग कहते है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि जिन प्रक्रियाओं द्वारा प्राथमिक उत्पादनों को अधिक उपयोगी रूपो में परिवर्तित किया जाता है, उन्हें वस्तु निर्माण उद्योग कहा जाता है।

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प्रश्न 50.
उत्तर भारत की नदियों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :

  1. उत्तर भारत की सभी नदियाँ हिमनद से निकलती है।
  2. ये नदियाँ सदावाहिनी है।
  3. ये नदियाँ नाव चलाने योग्य है।
  4. इनसे नहरें निकाल कर वर्ष भर सिंचाई की जा सकती है।

प्रश्न 51.
हिमालय क्षेत्र में बड़े उद्योगों का विकास क्यों नहीं हुआ है ?
उत्तर :
किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए कुछ मौलिक कारको की आवश्यकता होती है जैसे कच्चे माल की सुविधा, परिवहन की सुविधा आदि। हिमालय की धरातल बनावट असमान है। वहाँ खनिजों का अभाव है। जिसके कारण हिमालय क्षेत्र में किसी भी बड़े उद्योगों का विकास नहीं हुआ है।

प्रश्न 52.
हिमालय की पर्वतीय श्रृंखला में भूकम्प क्यों आते हैं ?
उत्तर :
हिमालय पर्वत श्रेणियाँ नवीन मोड़दार पर्वत है। इस क्षेत्र में भूपटल में मोड़ पड़ने और ऊपर उठने की प्रक्रिया जारी है जिसके कारण इस क्षेत्र का भू-संतुलन बिगड़ता रहता है। इसलिए हिमालय के समीपवर्ती क्षेत्रों में भूकम्प आता रहता है।

प्रश्न 53.
दक्षिण भारत की नदियाँ तीव्र प्रवाह से क्यों बहती हैं ?
उत्तर :
दक्षिण भारत की अधिकांश नदियों का प्रवाह अनुगामी है, अर्थात इनका अपवाह धरातल के स्वाभाविक ढाल के अनुरूप ही हुआ है। इसलिए यहाँ को नदियाँ तीव्र प्रवाह से बहती है।

प्रश्न 54.
पहाड़ी मिट्टी चाय की कृषि के उपयुक्त क्यों होती है ?
उत्तर :
चाय की जड़ो में पानी का रूकना हानिकारक होता है। अत: चाय की कृषिग्यहाड़ी ढालो पर की जाती है ताकि जड़ों में पानी न रूक सके।

प्रश्न 55.
मरुस्थली मिट्टी शुष्क क्यों होती है ?
उत्तर :
वर्षा के अभाव एवं उच्च दैनिक तापान्तर के कारण चट्टानों के विखण्डन से इस मिट्टी की रचना हुई है। हवा द्वारा महीन कणों के उड़ जाने के कारण इस मिट्टी में बालू के मोटे कण मिलते है।अत: इसमें जल धारण करने की क्षमता नहीं है। इस इसलिए यह मिट्टी शुष्क होती है।

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प्रश्न 56.
नीलगिरि की पहाड़ियों पर कॉफी की कृषि क्यों होती है ?
उत्तर :
कॉफी के पौधे के लिए ढालुआ भूमि का होना आवश्यक है क्योंकि इसकी जड़ो में पानी का रूकना हानिकारक है। 750 से 1500 मीटर के ढलान पर अरविका कॉफी की उत्तम कृषि होती है। अत: नीलगिरि की पहाड़ियों की ढ़ाल इसके लिए सर्वोत्तम है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
भारत के वन संरक्षण के तीन प्रमुख उपाय संक्षेप में बताइए।
उत्तर :
वन संरक्षण एवं वन विकास :

  1. वानिकी शिक्षा बढ़ाई जाए। वन-अनुसंधान केन्द्र खोले जाएँ। वन-विभाग का मुख्य अनुसंधान केन्द्र हिमालय-स्थित देहरादून में स्थापित किया गया है। राँची, पालमपुर, बंगलूर, कोयम्बटूर और अकोला में भी वानिकी शिक्षा आरंभ की गई है।
  2. वनों के प्रति नया दृष्टिकोण अपनाया जाए और प्राचीनकाल की वन्य संस्कृति को पुनर्जीवित किया जाए।
  3. प्रतिवर्ष नए वन लगाए जाएँ। 1981 ई० के बाद से अबतक मध्यप्रदेश और पंजाब में ही वनक्षेत्र बढ़ाए जा सके हैं। पिछले कुछ वर्षो से केरल, कर्नाटक और मेघालय इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।
  4. वनसंरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ चालू की जाएँ, जैसे – बाघ परियोजना, हाथी परियोजना, अभयारण्यों की स्थापना। 1952 ई० से भारत वनमहोत्सव मनाकर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सचेष्ट है। देश में 17 वनविकास निगम स्थापित किए जा चुके हैं।

वनों के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं, यद्यपि मानव-जनसंख्या और पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि से यह संरक्षण कठिन हो गया है।

प्रश्न 2.
भारतीय द्वीपसमूह का संक्षेप में विवरण दे।
उत्तर :
भारतीय द्वीपसमूह : भारत की मुख्य भूमि से हटकर दो द्वीपसमूह ‘अंडमान निकोबार’ और ‘लक्षद्वीप’ भारत के ही अंग हैं। अंडमान-निकोबार के अंतर्गत प्रमुख 223 द्वीपें हैं जो सागरमग्न पर्वतश्रेणी पर स्थित हैं। इनमें कुछ ज्वालामुखी के उद्गार से बने हैं। भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी इन्हीं द्वीपों पर स्थित है। लक्षद्वीप के अंतर्गत 27 द्वीपें हैं जिनमें आबाद 10 हैं।

ये द्वीप समुद्री जीव मूँगे (प्रवाल, Coral) के निक्षेप से बने हैं। इनमें कुछ द्वीपों की आकृति घोड़े की नाल जैसी हैं जिन्हें प्रवाल द्वीपवलय (atoli) कहते हैं। स्पष्ट है कि दोनों द्वीपसमूह की रचना दो भिन्न तरीकों से हुई है । ये द्वीप भारत की प्राकृतिक छटा ही नहीं बढ़ाते बल्कि काष्ठ-उद्योग,मत्स्योधम, पर्यटन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नौसैनिक अड्डे की स्थापना को भी बढ़ावा देते हैं। एक द्वीप (पेम्बन) भारत और श्रीलंका के बीच मन्नार की खाड़ी में स्थित है।

प्रश्न 3.
सिन्धु नदी की प्रवाह तंत्र की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रवाह तंत्र : सतलज, व्यास, चेनाव और झेलम प्रमुख नदियाँ है जो दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हैं और सिंधु से मिलकर अरबसागर में गिर जाती हैं। सिंधु का उद्गम स्थल हिमालय के पार मानसरोवर झील है। पश्चिम की ओर बहती हुए यह नदी गिलगिट के निकट दक्षिण की ओर मुड़ जाती है। आज कल यह पाकिस्तान की सर्वप्रमुख नदी है। इसकी सहायक नदियों में केवल व्यास ही पूर्ण रूप से भारतीय सीमा में बहती है, शेष नदियों की सिर्फ ऊपरी धाराएँ ही भारत में हैं और निचली धाराएँ पाकिस्तान में।

सतलज नदी तिब्बत की साढ़े चार मीटर ऊँचाई से चलकर शिपकी दर्रे हिमाचल प्रदेश में पार करती हुई पंजाब के मैदान में उतरती है। सतलज नदी पर ही भाखड़ा-नंगल बाँध का निर्माण किया गया है। प्राचीन भारत में सतलज को शताद्रु, व्यास को विपाशा, रावी को इरावती और चेनाब को चंद्रभागा कहते थे। झेलम का नाम विताशा था। इन सबका उद्गम हिमालय का हिमाच्छादित प्रदेश है।

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प्रश्न 4.
गंगा नदी के अपवाह तंत्र की व्याख्या कीजिए।
अथवा
गंगा को आदर्श नदी क्यों कहा जाता है ?
अथवा
गंगा नदी के गतिपथ का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
गंगा नदी : गंगा की सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, गोमती, शारदा, सरयू, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोशी और महानंदा उत्तर के पर्वतीय भाग से तथा चंबल, बेतवा, केन, सोन और पुनपुन दक्षिणी पठार से निकलनेवाली नदियाँ हैं। ये नदियाँ गंगा में मिलकर अपना जल पूरब की ओर ले जाती हैं और अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरा देती हैं। भारत के पूरे क्षेत्रफल का एकतिहाई भाग गंगा-व्यवस्था के अंतर्गत है। भारत की सभी नदियों में जितना जल बहता है उसका 30 प्रतिशत गंगा और उसकी सहायक नदियों में बहता है।

गंगा हिमालय के गंगोत्री हिमनद से निकलती है। यह भारत की सर्वप्रमुख नदी है। भागीरथी और अलकनंदा इसी के नाम हैं (पहाड़ी अंचल में)। हरिद्वार के पास यह पहाड़ से नीचे उतरती है और अपने नाम से मैदान में (उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल में) बहती है। हुगली इसी की एक शाखा है जिसके किनारे कलकत्ता बसा है। गंगा की कुल लंबाई 2,510 किलोमीटर है। आर्थिक दृष्टिकोण से इस नदी का महत्व सबसे अधिक है। इस नदी मार्ग के द्वारा जलमार्ग के साथ ही जलविद्युत का भी निर्माण किया है। सिंचाई की सुविधा भी इस नदी द्वारा किया गया है।

प्रश्न 5.
ब्रह्मपुत्र नदी व्यवस्था का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
ब्रह्मपुत्र-व्यवस्था की नदियाँ : बह्मपुत्र सर्वप्रधान नदी है। यह मानसरोवर झील के समीप से निकलकर उत्तर-पूर्व से भारत में प्रवेश करता है। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में साँपो (साङ्यो) नाम से जाना जाता है। नमचा बरुआ शिखर के निकट यह अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश कर असम घाटी में उतरता है। पश्चिम में बहता हुआ ग्वालपाड़ा के निकट दक्षिण मुड़कर गंगा की धारा (मेघना) में मिल जाता है। इसकी कुल लंबाई 2,703 किलोमीटर है। इसकी सहायक नदियों में तिस्ता, सुवनसिरी (स्वर्णश्री) और लुहित प्रमुख हैं। ब्रह्मपुत्र-व्यवस्था दक्षिण-पश्चिम की ओर प्रवाहित है। इसकी नदियाँ गंगा से मिलकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती हैं।

प्रश्न 6.
भारत सरकार द्वारा भारतीय वनों को कितने भागों में बांटा गया है ? संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वन हमारी राष्ट्रीय संपत्ति है। देश के पर्यावरण से भी इसका घनिष्ठ संबंध है। भारत सरकार का वन-विभाग भारतीय वनों की देखरेख करता है। व्यवस्था, नियंत्रण एवं सुरक्षा की दृष्टि से भारतीय वनों को तीन भागों में बाँटा गया है –
i. सुरक्षित वन (Reserved forest) : इन वनों में लकड़ी काटना या पशु चराना वर्जित है। ये सरकारी संपत्ति हैं और बाढ़ की रोकथाम, भूमि-कटाव से बचाव तथा मरुस्थल के प्रसार को रोकने की दृष्टि से बड़े महत्त्व के हैं। ऐसे वनों का विस्तार 383 लाख हेक्टर भूमि में है।

ii. संरक्षित वन (Protected forests) : ये वन भी सरकारी ही है, मगर इनमें सरकार की ओर से लाइसेंस प्राप्त लोग लकड़ी काट सकते हैं या पशु चरा सकते हैं। ऐसे वनों पर भी सरकार की कड़ी निगरानी रहती है। इनका क्षेत्रफल 282 लाख हेक्टर है।

iii. अवर्गीकृत या स्वतंत्र वन (Unclassified forests) : इन वनों में लकड़ी काटने तथा पशु चराने में सरकार की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं है, पर उपयोग करनेवाले को टैक्स देना पड़ता है। लकड़ी काटने के लिए ये वन प्रायः ठेके पर दिये जाते हैं। ये वन 82 लाख हेक्टर भूमि में विस्तृत हैं।

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प्रश्न 7.
लैटेराइट मिट्टी की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
लैटेराइट मिट्टी की विशेषताएँ :

  1. इस मिट्टी में चूना, फॉसफोरस और पोटाश की मात्रा कम पाई जाती है।
  2. शुष्क मौसम में यह मिट्टी सूखकर ईंट की भाँति सख्त हो जाती है तथा गीली होने पर चिपचिपी हो जाती है।
  3. इस मिट्टी में लोहा, सिलिका, एल्यमिनियम की मात्रा अधिक पाई जाती है।
  4. यह मिट्टी ऊँचे प्रदेशों में कँकरीली तथा पारगम्य होती है, इस कारण यह पानी को शीघ्र सोख लेती है। अतः इन भागों में यह मिट्टी कृषि योग्य नहीं होती, परंतु निचले भागों में चिकनी मिट्टी मिल जाने से इसमें नमी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है और कृषि योग्य बन जाती है।

वितरण : यह मिट्टी विशेषकर मध्य प्रदेश, पूर्वी और पश्चिमी घाटों के समीप, कर्नाटक, दक्षिणी महराष्ट्र, केरल, राजमहल की पहाड़ियाँ, उड़ीसा तथा असम के कुछ भागों में पाई जाती है।

प्रश्न 8.
‘भारत की पश्चिम वाहिनी नदियों के मुहाने पर डेल्टा का निर्माण क्यों नहीं होता है?
उत्तर :
नदी के मुहाने के पास नदियों का प्रवाह मन्द होना चाहिए तथा सागरीय लहरों का वेग कम होना चाहिए जिससे अवसादों का निक्षेपण आसानी से हो सके। जिन नदियों के मुहानों पर ये दशाएँ उपस्थित नहीं रहती हैं, वहाँ डेल्टा का निर्माण सम्भव नहीं होता। चूंकि भारत की पृश्चिम बाहिनी नदियाँ तीव्र गति से प्रवाहित होते हुए अरब सागर में गिरती हैं, मुहाने पर प्रवाह गति तीव्र होने के कारण इनके द्वारा बहाकर लाए गए अवसाद समुद्र में दूर तक फैल जाते हैं, जिससे ये डेल्टा का निर्माण नहीं कर पातीं।

प्रश्न 9.
पश्चिमी हिमालय की भू-प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पश्चिमी हिमालय की भू-प्रकृति :- पश्चिमी हिमालय सिंधु एवं सतुलज नदी के बीच फैला हुआ है। यह भाग कश्मीर एवं हिमालय प्रदेश में स्थित है, हिमालय की सर्वाधिक चौड़ाई इसी भग्र में मिलती है इसकी लम्बाई 560 कि॰मी० है। लद्दाख, जास्कर, पीर पाजल एवं चौलाधर श्रेणियाँ उसी भाग में स्थित हैं। इस भाग में कुछ महत्वपूर्ण दर्रे पाये गए हैं जिनमें बुर्जिल एवं गोजीला, शिष्कीला, थागा-ला, लीपू-लेख-ला आदि हैं।

इस हिमालय क्षेत्र की प्रमुख चोटियाँ नंगा पर्वत (8126 मी०), नंदादेवी (7817 मी०), है। यहाँ नदी अपहरण के लक्षण की दृष्टि गोचर होती है यहाँ अनेक नदी घाटियाँ और हिम-घाटियाँ मिलती है। इसी क्षेत्र की कश्मीर घाटी को ‘पृथ्वी का स्वर्ग’ कहा गया. है। अलेम नदी भी इसी घाटी से होकर बहती हैं। डल और वुलर झोलDal and Water Lake मीठे जल को दो प्रसिद्ध झीलें हैं।

प्रश्न 10.
गोदावरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा क्यों कहते हैं।
उत्तर :
यह दक्षिण के पठार की सबसे बड़ी नदी है। यह महाराष्ट्र राज्य में नासिक के समीप पश्चिमी घाट पर्वत से निकलती है। यह दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हुई पूर्वी घाट पर्वत को पार करके डेल्टा बनाती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। प्रभारा, मुला, मंजीरा, वर्धा पेनगंगा और इन्द्राबती इसकी सहायक नदियां है। यह नदी 1465 किलोमीटर लम्बी है। इसे दक्षिण भारत की गंगा कहते हैं।

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प्रश्न 11.
पूर्वी तटीय और पश्चिमी तटीय मैदान की तुलना करो।
उत्तर :

पूर्वी तटीय मैदान पशिचमी तटीय मैदान
i. यहु तटीय मैदान अधिक चौड़ा है। i. यह तटीय मैदान कम चौड़ा है।
ii. इस क्षेत्र की भूमि की ऊँचाई कम है। ii. इस क्षेत्र की भूमि की ऊँचाई अधिक है।
iii. भूमि अधिक उपजाऊ है अत: कृषि का विकास अधिक हुआ है। iii. भूमि कम उपजाऊ होने के कारण कृषि का का विकास कम हुआ है।
iv. इस क्षेत्र की नदियाँ मंद गति से बहती है। iv. इस क्षेत्र की नदियाँ तीव्रगति से बहती है।
v. इस क्षेत्र की नदियाँ मुहानों पर डेल्टा बनाती है। v. इस क्षेत्र की नदियाँ मुहानों पर डेल्टा नहीं बनाती है।

प्रश्न 12.
हिमालय पर विभिन्न प्रकार के वन क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर :
हिमालय पर्वत पर ऊँचाई के अनुसार वर्षा तापक्रम में भिन्नता दृष्टिगोचर होती है। अतः यहाँ विभिन्न प्रकार के वन मिल्ले हैं। पूर्वी हिमालय अंचल में पश्चिमी हिमालय अंचल की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है। अतः पूर्वी हिमालय में तराई अंचल से लेकर 1525 मी० की ऊँचाई तक आर्द्र सम शीतोष्ण सदाबहार के वन मिलते हैं। यहाँ कहीं-कहीं साल जैसे पतझड़ के वृक्ष लतायें एवं लम्बी घासें मिलती हैं। यहाँ के मुख्य वृक्ष साल शीशम एवं बाँस है। पश्चिमी हिमालय में इस तक छोटे छोटे वृक्ष एव झाड़याँ मिलती हैं।

यहाँ के मुख्य वृक्ष साल, शीशम ढाँक तथा आँवला आदि है। यहाँ 1525 मी॰ से 2500 मी० तक ऊँचाई वाले भागों में शीतोष्ण कटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले पतझड़ के वन मिलते हैं। यहाँ के मुख्य वृक्ष ओक. बंच, चीड़, बर्च और मैपिल आदि है। यहाँ 2500 से 4500 मी॰ की ऊँचाई पर नुकीली पत्ती वाले कोणधारी वन मिलते हैं। इन वनों के मुख्य वृक्ष पाइन, फर, लारेल और देवदार आदि हैं। यहाँ 4500 मी० से अधिक ऊँचाई पर छोटीछोटी घासे एवं सुन्दर फूलों वाले बन मिलते है।

प्रश्न 13.
मैग्रोव जाति के वृक्ष केवल खारी भूमि में क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर :
मैग्रोव जाति के वृक्ष केवल खारी भूमि में पाये जाते है क्योंकि यह वृक्ष खारे जल में अपना अस्तीत्व बनाये रखने के लिए अपना अनुकूलन करता है।
(i) नमकीन मिट्टी में पेड़ों की जड़ों को सांस लेने में कठिनाई होती है अत: मैग्रोव वृक्षों की जड़े पानी के ऊपर निकल जाती है इन्हें श्वसन मूल कहते है।
(ii) भूमि दलदली होने के कारण पेड़ों के गिरने का भय रहृता है अतः उनकी जडे तिरछी होती है।

प्रश्न 14.
उत्तर से दक्षिण हिमालय का वर्गीकरण कीजिए तथा संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्तर से दक्षिण हिमालय में तीन समानान्तर श्रेणियाँ मिलती है :
महान या आन्तरिक हिमालय : यह हिमालय की सबसे उत्तरी एवं सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है। इसकी औसत ऊँचई 6000 मीटर तथा चौड़ाई 40 कि०मी० है। इसकी 100 से भी अधिक शिखरे वर्ष भर हिमाच्छादित रहती है। इसी से इसे हिमाद्रि कहते है। संसार के सर्वोच्च पर्वत-शिखर इसी भाग में स्थित है। माउण्ट एवरेस्ट (8848 मीटर) विश्च की सबसे ऊँची चोटी है। अन्य महत्वपूर्ण चोटियाँ नन्दादेवी ( 7818 मी०), नंगा पर्वत (8126 मी०), गोसाईथान (8013 मी०) कंचनजंघा (8598 मी०) मैकालू (8481 मी०), धौलागिरि (8172 मी०), आदि शिखर है। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कोसी, सिन्धु आदि नदियाँ इसी भाग से निकलती है।

लघु या मध्य हिमालय : यह श्रेणी महान हिमालय के दक्षिण तथा उसके समानान्तर स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई 3000 से 5000 मीटर तथा चौड़ाई 80 से 100 कि॰मी० है। यहाँ नीस तथा ग्रेनाइट चट्टानों की अधिकता है। यहाँ केवल जाड़े की ऋतु में हिमपात होता है। गर्मी की ऋतु सुहावनी होती है। श्रीनगर, दर्त्रिलिंग, शिमला, नैनीताल, मसूरी आदि स्वास्थ्यवर्दक स्थान तथा अमरनाथ, केदारनाथ तथा वद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थान इसी भाग में स्थित है।

शिवालिक या वाह्य हिमालय : इसे उप-हिमालय भी कहते है। यह हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है। इसकी ऊँचाई सबसे कम ( 600 से 1500 मी०) है। यह 8 से 48 कि॰मी० चौड़ी है। इसका विस्तार पश्चिम में पोटवार बेसिन से पूर्व में बहपपुत्र नदी तक है। यह हिमालय का सबसे नवीन भाग है। गंगा के मैदान की भाँति यह श्रेणी भी चिकनी मिट्टी बालू और कंकड़ से निर्मित है।

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प्रश्न 15.
सतलज-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान की भू-प्रकृति का संक्षेप वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भू-प्रकृति के अनुसार उत्तर-भारत के मैदान को तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है :
सतलज का मैदान : दिल्ली के निकट आरावली की उच्च भूमि जल विभाजक का कार्य करती है। इसके पश्चिमी भाग को सतलज नदी का मैदान कहते है। इस मैदान का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है । यह मैदान समुद्र तल से 200 से 240 मी॰ ऊँचा है। इस मैदान की प्रमुख नदियाँ सतलज, रावी, चिनाव झेलम और व्यास है।

गंगा का मैदान : यह मैदान पश्चिम में यमुना नदी के पूर्वी तट से लेकर पूर्व में बंग्लादेश तक फैला हुआ है। यह पश्चिम में चौड़ा तथा पूर्व में क्रमशः सकरा होता चला गया है। यह पश्चिम में समुद्र तल से 200 मी॰ ऊँचा तथा पूर्व में 50 मी० ऊँचा है। इसका ढाल पूर्व की ओर है। इस मैदान की प्रमुख नदी गंगा है। इसके अन्तर्गत उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्य आते है।

ब्रह्मपुत्र का मैदान : इस मैदान की औसत ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 160 मी० है। यह उत्तर में अरूणाचल प्रदेश और दक्षिण में मेघालय के बीच स्थित है। इस मैदान का निर्माण ब्रह्मपुत्र नदी द्वारा हुआ है। अतः इसे ब्रह्मपुत्र घाटी भी कहते है। इस मैदान का ढाल पूर्व से पश्चिम की ओर है। यह मैदान 600 कि॰मी० लम्बा तथा 160 कि०मी० चौड़ा है। तिस्ता, लोहित आदि ब्रहमुत्र की सहायक नदियाँ है। ब्रह्मपुत्र नदी के जल में बहुत अधिक अवसाद रहते है। मैदानी भाग में आते ही इसकी गति मन्द हो जाती है। यह नदी गंगानदी से मिलकर अपने मुहाने पर विश का सबसे बड़ा डेल्टा बनाती है। इसे सुन्दरवन का डेल्टा कहते है।

प्रश्न 16.
महाबालेश्वर में पूना से अधिक वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
अरब सागर की मानसूनी पवनें सर्वप्रथम पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से टकराकर पश्चिमी तटीय मैदान में 300- 500 सेमी॰ वर्षा करती है। ये मानसूनी पवने महाबालेश्वर में 625 सेमी॰ तक वर्षा कर देती है। पश्चिमीघाट पर्वत का पूर्वी भाग इन पवनों के वृष्टिछाया प्रदेश में पड़ता है। अत: यहाँ वर्षा कम होती है। इसके फलस्वरूप पून्त में 50 सेमी० से भी कम वर्षा होती है।

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प्रश्न 17.
तामिलनाडु में दो वर्षा ऋतुएँ क्यों पायी जाती हैं।
उत्तर :
ग्रीष्म काल में तामिलनाडु में दक्षिण पश्चिम मानसून से वर्ष होती है। लेकिन शीत ऋतु में बंगाल की खाड़ी के ऊपर से होकर जाने वाली उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवायें खाड़ी से आर्द्रता ग्रहण करके तामिलनाडु में पूर्वीघाट की पहाड़ियों से टकराकर पूर्वी तटीय मैदान में कुछ वर्षा करती है अत: तामिलनाडु में शीत काल में भी (वर्ष में दो बार) वर्षा होती है।

प्रश्न 18.
उत्तरी भारत में पूर्व से पश्चिम कम वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
गर्मी के दिनों में उत्तरी भारत व्यापारिक हवाओं के प्रभाव में रहते है। इन हवाओं से पूर्वी भाग में तो वर्षा होती है, पर पश्चिमी भाग में आते आते शुष्क हो जाती है, अतः महाद्वीपो के पश्चिम भाग आते-आते वर्षा कम हो जाती है।

प्रश्न 19.
भारत में जाड़े में नाममात्र की वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
जब सूर्य मकर रेखा पर चमकता है तो उत्तरी गोलार्द्ध में शीत ऋतु होती है। इस समय स्थल भाग समुद्र को अपेक्षा अधिक ठंडा हो जाता है जिससे मध्य एशिया में अधिक सर्दी पड़ने के कारण उच्च दाब का केन्द्र बन जाता है। इस समय हवायें स्थल भाग से समुद्र की ओर चलती है। इन्हें जाड़े की मानसूनी हवाएं कहते है। भारत में इनकी दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है। अतः इन्हें उत्तरी-पूर्वी मानसून कहते है। स्थल से आने के कारण शुष्क होती है। अतः इनसे वर्षा नहीं होती।

प्रश्न 20.
थार के मरुस्थल में गर्मी एवं जाड़े के तापमान में बहुत अन्तर क्यों पाया जाता है।
उत्तर :
थार के मरूस्थल में गर्मी एवं जाड़े के तापमान में अन्तर होने के निम्न कारण है :

  1. थार का मरूस्थल राजस्थान के विल्कुल पश्चिम में स्थित है। विल्कुल शुष्क क्षेत्र में पड़ता है।
  2. यह मरुस्थल समुद्र से अधिक दूर स्थित है। इसलिए इस पर समुद्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  3. इस मरुस्थल का अधिकांश भाग बालू एवं पत्थर से निर्मित जो बहुत जल्द ग़र्म भी होते है और ठण्ड भी हो जाते है। जिससे दिन में भीषण गर्मी पड़ती है तथा रात में काफी ठण्ड पड़ती है।
  4. इस क्षेत्र में कोई भी ऊँची पहाड़ी नहीं है। जिसके कारण मानसून हवा सीधे निकल जाती है और वहाँ वर्षा नहीं होती है। अतः इन्हीं सब कारणों से थार के मरुस्थल में गर्मी एवं जाड़े में तापमान में बहुत अन्तर पाया जाता है।

प्रश्न 21.
मेघालय के पठार में सर्वाधिक वर्षा क्यों होती है।
उत्तर :
दक्षिणी-पश्चिमी मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा मेघालय में सबसे अधिक शक्तिशाली हो जाती है। यहाँ पश्चिम से पूर्व अर्द्धचन्द्राकार रूप में स्थित गारो, खासी एवं जयन्तियाँ पहाड़ियों से एक कीप के आकार का क्षेत्र बनता है। मानसून हवाएँ 1520 मीटर ऊँची खासी पहाड़ी से टकराकर अचानक लगभग 1300 मीटर ऊँची उढ जाती है। जिससे खासी पहाड़ी के दक्षिण पवनविमुख ढाल पर स्थित चैरापूँजी से 16 कि॰मी॰ पश्चिम स्थित मौसिनराम गांव में विश्व में सबसे अधिक वर्षा 1392 से॰मी॰ होती है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
उष्णकटिबन्धीय मौसमी जलवायु क्षेत्र की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
उष्णकटिबन्धीय मौसमी जलवायु क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ :
वितरण : उष्ण कटिबन्धीय मानसूनी जलवायु उन क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ पवनों की दिशा में पूर्णरूप से मौसम परिवर्तन हे जाता है। इस जलवायु में ग्रीष्मकाल में उष्ण महासागरो में स्थल की ओर चलनेवाली हवाओ से भारी वर्षा होती है, जबकि शीत ऋतु में स्थल से महासागरों की ओर चलनेवाली हवाएं मौसम को शुष्क बना देती है।

जलवायुविक विशेषता : मानसूनी जलवायु प्रदेशों में जलवायु उष्ण एवं आर्द्र होती है। इन प्रदेशों में वार्षिक तापान्तर अधिक मिलता है। ग्रीष्म ॠतु में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जबकि औसत तापमान 30° C से 38°C रहता है। भारत में उत्तरी-पश्चिमी भाग में तापमान 49°C तक हो जाता है। उत्तर भारत में मई-जून में लू (गर्म लहर) चलती है। ग्रीष्म ऋतु गरम एवं नम होती है। शीत ऋतु नवम्बर से फरवरी माह तक रहती है। शीत ऋतु का औसत तापमान 15° से 18° तक रहता है। भारत के उत्तरी भाग में न्यूनतम तापमान 5°C से भी नीचे गिर जाता है। यहाँ तापान्तर 20° से 25° तक रहता है। किन्तु समुद्र तं पर 10°C से भी कम रहता है। शीत ऋतु शीतल एवं शुष्क रहती है।

प्राकृतिक वनस्पत -विशेषता : मानसूनी प्रदेशों की वनस्पति मुख्यतः वर्षा को मात्रा पर निर्भर करता है। 200 से॰मी॰ से अधिक वर्षा वंल भागों में सदाबहार वनों में महोगनी, रबर, सिनकोना आदि तथा 100 से 200 से॰मी॰ वार्षिक वर्षा वाले भागों में साल, सा गौन, शीशम, आम आदि वृक्ष पाये जाते है। 50 से 100 से॰मी॰ वार्षिक वर्षा वाले भागों में खैर, कीकर, बबूल, इमली आदि के शुष्क वन तथा घास के मैदान पाए जाते है। 50 से०मी० से कम वर्षिक वर्षा वाले भागों में शुष्क व कँंटीली झाड़ीदार वनस्पति पाई जाती है।

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प्रश्न 2.
भारत के पश्चिमी हिमालय के भूप्रकृति का संक्षिप्त वर्णन दीजिए।
उत्तर :
पश्चिमी हिमालय (Western Himalaya) : पश्चिमी हिमालय कश्मीर से लेकर नेपाल की सीमा तक विस्तृत है। पूर्व से पश्चिम इनके निम्नलिखित उपविभाग है –
कश्मीर हिमालय (Kashmir Himalaya) : विभिन्न पर्वतों की कई शृंखलाएँ कश्मीर राज्य में अवस्थित है, जो एक ही पर्वत निर्माणकारी काल में बने है। उत्तर से दक्षिण इन पर्वतो का क्रम है – सबसे उत्तर में काराकोरम श्रृंखला है, इसके दक्षिण में लद्दाख, पुन: जास्कर, पीर पंजाल एवं शिवालिक श्रेणी की स्थानीय श्वृंखला जम्मू एवं पंच पहाड़ियाँ। पीरपंजाल एवं जास्कर पर्वत श्रेणियों के बीच विश्व प्रसिद्ध कश्मीर घाटी अवस्थित है, जो सरोवरीय निक्षेप से निर्मित है। इन्हें स्थानीय रूप से करेवा कहा जाता है। काराकोरम श्रेणी में ही गॉड़िन ऑस्टीन (K2) अवस्थित है, जो भारत की सर्वोच्च चोटी है, यद्यपि यह पाक अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है ।

हिमांचल हिमालय (Himachal Himalaya) : यह श्वृंखला हिमाचल प्रदेश में स्थित है। उत्तर में महान हिमालय की श्रेणियां है। इसके दक्षिण में मध्यवर्ती हिमालय की चार श्रेणियाँ धौलाधर, पीरपंजाल, नाग तीवा एवं मुसौरी अवस्थित है। सबसे दक्षिण में शिवालिक पर्वत श्रेणी अवस्थित है। इस भाग में पर्यटन की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण स्थलों का विकास हुआ है। यहाँ की अर्थव्यवस्था फलों की कृषि एवं पर्यटन पर आधारित है।

कुमायूँ या उत्तरांचल हिमालय (Kumaon or Uttaranchal Himalaya) : उत्तरांचल राज्य के उत्तरी भागों में इसका विस्तार है। इस भाग में शिवालिक एवं मध्यवर्ती हिमालय की श्रेणियां विस्तारित है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, कामेत प्रमुख पर्वत चोटियाँ इसी भाग में है। गंगोत्री एवं यमुनोत्री हिमनद इसी भाग में अवस्थित है जिनसे, क्रमशः गंगा एवं यमुना नदियाँ निकलती है। इन भाग में कई अनुप्रस्थ घाटियाँ पायी जाती है, जिसे दून एवं दुआर कहते हैं।

प्रश्न 3.
पश्चिमी तटीय मैदान एवं पूर्व तटीय मैदान की व्यख्या कीजिए।
उत्तर :
पश्चिम तटीय मैदान (West Coastal Plain) : यह पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच में स्थित है। इसका फैलाव उत्तर में खंभात की खाड़ी से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी अंतरीप तक है (लगभग 1,600 किलोमीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा)। यह पहले समुद्र से घिरा द्वीप था, जो अब आसपास की नदियो द्वारा लाई मिट्टी आदि से जुड़कर प्रायद्वीप गन गया है। उत्तरी खारी मिट्टीवाली दलदल भूमि बड़ा रन (Great Rann) और उसके निकट की भूमि छोटा रन (Little Rann) के नाम से प्रसिद्ध है।

काठियावाड़ के मैदानी क्षेत्र में गिरनार पहाड़ी (1,117 मीटर) मिलती है । पश्चिमतीीय मैदान का सबसे चौड़ा भाग गुजरात का मैदान कहलाता है। गोवा तक यह तटीय मैदान ‘कोंकण तट’ (Konkan Coast) कहलाता है, गोवा से मंगलोर तक के तटीय मैदान को कर्नाटक तट और मंगलोर से कुमारी अंतरीप तक को केरल तट कहते हैं। कर्नाटक तट और केरल तट का संयुक्त नाम ‘मालाबार तट’ (Malabar Coast) हैं।

पश्चिमतटीय मैदान में नर्मदा और ताप्ती दो बड़ी नदियों के मुहाने मिलते हैं, किंतु वहाँ डेल्टा नहीं बनता (जलोढ़ की कमी और ज्वारभाटे के प्रभाव के कारण)। साबरमती, मांडवी, जुआरी, कालिंदी, सरस्वती, नेत्रवती, पेरियर आदि प्रमुख नदियाँ है जो बहुत छोटी हैं। इस तट पर कांडला, बंबई, मर्मागोवा, मंगलोर और कोचीन उत्तम प्राकृतिक पत्तन हैं। दक्षिण में खारे पानी की छोटी-छोटी झीलों (लैगुन या कपाल) की अधिकता है जिसमें कोचीन की निकटवर्ती वेम्बानद (Lake Vembanad) उल्लेखनीय है। मालाबार तट पर बालू के ढेर मिला करते हैं।

पूर्व तटीय मैदान (East Coastal Plain) : यह पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच में स्थित है। इसका फैलाव उत्तर में महानदी घाटी से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक लगभग 1,500 किलोमीटर है। इसकी चौड़ाई 100 किलोमीटर से अधिक है, खास कर महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टाओं में (क्रमशः उड़ीसा, आध्रप्रदेश और तमिलनाहु राज्यों के अंतर्गत)। इस तटीय मैदान का आधा उत्तरी भाग ‘गोलकुंड़ा तट’ या ‘उत्तरी और दक्षिणी सरकार तट’ और आधा दक्षिणी भाग (नेलोर से कन्याकुमारी तक) ‘कोरोमंडल तट’ (Coromandal Coast) कहलाता है।

पूर्वतटीय मैदान से महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी चार बड़ी नदियाँ गुजरती हैं। इस तट पर लैगूनों का विकास भी पाया जाता है। चिल्का और पुलिकट दो प्रमुख झीलें हैं जिनका जल खारा है। भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील चिल्का ही है जिसका क्षेत्रफल 780 वर्गकलोमीटर और 1,144 वर्गकिलोमीटर के बीच घटता-बढ़ता रहता है। गोदावरी-कृष्णा डेल्टाओं के बीच कोलेरू झील मिलती है जो मीठे पानी की है । इस तट पर पारादीप, विशाखापत्तनम और मद्रास प्रमुख पत्तन हैं जिनमें मद्रास का पोताश्रय कृत्रिम है। दक्षिण में तूतीकोरिन पत्तन भी कृत्रिम पोताश्रय पर विकसित है।

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तटीय मैदान ने विदेशी व्यापार में अपार मदद पहुँचाई है। कलकत्ता को छोड़कर सभी छोटे-बड़े पत्तन समुद्री तट पर भी स्थित हैं जो व्यापार के केन्द्र बन गए हैं। देश के भीतरी भागों से वे रेलमार्ग या सड़क द्वारा जुड़े हुए हैं। समुद्र की समीपता ने इस प्रदेश के लोगों को साहसी नाविक बनने को प्रेरित किया है। यहाँ समुद्री मछुआरे भी बहुत मिलते हैं जो मछली पकड़ने जैसे आर्थिक क्रियाशीलन में लगे हुए हैं। नारियल, गर्म मसाले, धान आदि की खेती के लिए ये महत्वपूर्ण स्थल हैं।

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प्रश्न 4.
भारत के भू-प्रकृति को कितने भागों में बाँटा गया है ? किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत की भू-प्रकृति : भारत को भूगर्भीय संरचना के आधार पर तीन भागों में बाँटा जाता है – प्रायद्वीपीय भारत का विस्तृत पठार, उत्तरी पर्वतमाला और विशाल उत्तरी मैदान। प्राकृतिक रूप और भू-आकृतियों को देखते हुए इसके निम्नलिखित विभाग किए जा सकते हैं –

  1. उत्तर और उत्तर-पूर्व के पर्वतीय भाग
  2. उत्तरी विशाल मैदान
  3. प्रायद्वीपीय पठार या दक्षिणी पठार
  4. समुद्रतटीय मैदान,
  5. भारतीय द्वीपसमूह।

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उत्तर और उत्तर-पूर्व के पर्वतीय भाग : भारत के उत्तरी भाग में विस्तृत मोड़दार पर्वत मुख्य रूप से ‘हिमालय’ के नाम से विख्यात है जिसकी लंबाई लगभग 2,5000 किलोमीटर है और चौड़ाई 100 से 400 किलोमीटर है। विश्व की सर्वोच्च चोटी इसी में मिलती है (नेपाल-स्थित ‘एवरेस्ट’ ; ऊँचाई 8848 मीटर)। इस पर्वतीय भाग की औसत ऊँचाई 6000 मीटर है।

हिमालय के उत्तर में (भारत की सीमा में) तीन और समांतर पर्वतश्रेणियाँ मिलती हैं, जो ‘जस्कर श्रेणी’, ‘लद्दाख श्रेणी’ और ‘काराकोरम श्रेणी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। जस्कर और लद्दाख श्रेणियों के बीच सिंधु नद का पश्चिमोत्तर प्रवाह-मार्ग है। काराकोरम श्रेणी में विश्व की द्वितीय सर्वोच्च चोटी ‘गाडविन आस्टिन’ K2, ऊँचाई 8,611 मीटर) मिलती है। इसी श्रेणी को (पूर्व बढ़ने पर तिब्बत में) ‘कैलाश पर्वत’ के नाम से पुकारा जाता है। पहले भारतभूमि का विस्तार उत्तर में कैलाश पर्वत श्रेणी तक था लद्दाख श्रेणी से सटा ‘लद्दाख पठार’ मिलता है जो भारत का सबसे ऊँचा पठार है (ऊँचाई 4 किलोमीटर)। इस पठार पर नदियों का आंतरिक प्रवाह पाया जाता है। उपर्युक्त तीनों हिमालय-पार की पर्वतश्रेणियाँ (Trans-Himalayan Ranges) हैं।

हिमालय का विस्तार पूर्वी भारत की सीमा पर भी देखा जा सकता है। एकाएक मुड़कर यह उत्तर-दक्षिण दिशा में फैल जाता है। वहाँ इसके अलग-अलग कई नाम हैं – पटकाई बुम, नागा पर्वतश्रेणी और लुशाई पर्वतश्रेणी। ये हिमालय की मुख्य श्रेणियाँ भले ही न हों, पर इन्हें हिमालय का विस्तार माना जाएगा। हिमालय और इन पूर्वी पर्वतश्रेणियाँ के बीच बह्मपुत्र नद का पश्चिमी प्रवाह देखा जा सकता है। हिमालय के पूर्वी छोर पर (बह्मपुत्र से पूरब) दक्षिण की ओर मुड़नेवाली उसकी एक शाखा ‘पूर्वाचल’ (Eastern mountains) है। यह भारत और म्यानमार (बर्मा) के बीच सीमा बनाती है। उत्तर-पूर्वी पर्वतश्रेणी मध्य में पश्चिम की ओर बढ़कर मेघालय तक आ गई है जहाँ इसे खासी, जयंतिया और गारो पहाड़यों के नाम से पुकारा जाता है।

उत्तर और उत्तर-पूर्व की पर्वतश्रेणियों से सटे पड़ोसी देशों में अनेक पर्वतश्रेणियाँ मिलतों हैं; जैसे – क्युनुलन, अराकान। उत्तर-पश्चिम में भी हिमालय दक्षिण की ओर मुड़ा हुआ है।

हिमालय का निर्माण टेथिस सागर में जमा हुए अवसादों (तलछटों) से हुआ। भारतीय भूखंड (प्लेट) जब उत्तर की ओर सरककर चीनी भूखंड (प्लेट) से टकराया तो दोनों भूखडों के बीच की तलछटी चट्टाने मुड़कर ऊपर उठ गई जिनसे हिमालय का निर्माण हुआ। इसके निर्माण में लाखों-करोड़ों वर्ष लगे।
मुख हिमालय सिंधु और ब्रापुत्र की सँकरी गहरी घाटियों (Gorges) के बीच स्थित है। यह तीन समांतर श्रेणियों में हिमाद्रि, हिमालय और शिवालिक में विस्तृत है।

हिमाद्रि सर्वोच्च श्रेणी है। सबसे उत्तरी श्रेणी भी यही है। भारतीय सीमा में इसकी प्रमुख चोटियाँ हैं – नंगा पर्वत ( 8,126 मीटर, कश्मीर में), नंदादेवी ( 7,817 मीटर, उत्तर प्रदेश में), कामेत ( 7,756 मीटर, उत्तर प्रदेश में), कंचनजंघा ( 8,598 मीटर, सिक्किम-नेपाल सीमा पर)। सिंधु, सतलज, गंगा, यमुना, कोसी और बहलपुत्र नदियों का उद्गम हिमाद्रि (वृहल हिमालय) ही है। सिया-ला, मारणो-ला, ससेर ला, उमासी ला, बुर्जील, जोंजिला माना ला, शिपकी ला, जलेप ला, नाथू-ला, ऋषि-ला, बोमाडि-ला, से-ला आदि हिमालय के कुछ प्रसिद्ध दर्रे (Gaps) हैं। हिमाद्रि में 6,000 मीटर से अधिक ऊँची चोटियाँ सौ से अधिक हैं और ये सभी हिमाच्छादित हैं।

हिमाचल वास्तव में मध्य हिमालय है जिसमे नदी-घाटियाँ और हिम-घाटियाँ मिलती हैं। यहाँ नदी-अपहरण के लक्षण भी दृष्टिगोचर होते हैं। कश्मीर और काठमांडू की चित्ताकर्षक घाटियाँ इसी भाग में हैं। कश्मीर-घाटी को ‘पृध्वी का स्वर्ग’ कहा गया है। झेलम नदी इसी घाटी से होकर बहती है। इसमे डल और वुलर (Dal and Wular lakes) मीठे जल की दो प्रसिद्ध झीलें अवस्थित हैं। वुलर मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है (भारत में)। डल के किनारे श्रीनगर बसा है जहाँ पहुँचने के लिए पीरपंजाल श्रेणी के बनिहाल दरें से होकर जाना पड़ता है। वहाँ ढाई किलोमीटर लंबा जबाहर सुरंग (Jawahar Tunnel) बनाया जा चुका है। कश्मीर में हिमचाल का पीरपंजाल कहकर पुकारते हैं। कुलू और काँगड़ा की प्रसिद्ध घाटयाँ भी हिमाचल में ही मिलती हैं। शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदि प्रसिद्ध पर्वतीय नगर तथा केदारनाथ, बदरीनाथ और अमरनाथ जैसे पावन तीर्थस्थल हिमालय के इसी भाग में बसे हैं। इसकी औसत ऊँचाई 4,000 मीटर है। हिमाचल को ‘लघु हिमालय’ भी कहा गया है।

शिवालिक हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है जिसकी ऊचाई 900 से 1500 मीटर के बीच है। यहु हिमालय की नवीनतम रचना है। इसमें कंकड और मिट्टी से बने कई ऊँचे मैदान मिलते हैं जिन्हे ‘दून’ या ‘द्वार’ कहते हैं(उदाहरणार्थदेहरादून, हरिद्वार) । इन ऊँचे मैदानों की स्थिति हिमाचल और शिवालिक के बीच में है। इस भाग में अनेक झ़ीले मिलती है जो ‘ताल’ कहलाती है (उदाहरणार्थ-नैनीताल, भीमताल)। शिवालिक और इसकी तराई में घने वन मिलते हैं।

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हिमालय भारत का प्रहरी ही नहीं, जलवायविक दशाओं का नियंत्रक भी है। मानसून पवनों के मार्ग में खड़ा होकर यह उनसे वर्षा कराता है। हिमालय न होता तो उत्तरी विशाल मैदान अस्तित्व में न आ पाता। इसंकी तलहटी में प्राकृतिक गैस और खनिज तेल के भंडार है। पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए हिमालय को इन नामों से भी पुकारा जाता है –

  1. कश्मीर हिमालय
  2. पंजाब हिमालय
  3. कुमायूँ हिमालय (काली और तिस्ता नदियो के बीच का हिमालय)
  4. नेपाल हिमतालय
  5. असम हिमालय (तिस्ता और ब्रह्नपुत्र के बीच का हिमालय)।

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प्रश्न 5.
उत्तर भारत के विशाल मैदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्तरी भारत के विशाल मैदान : यह मैदान हिमालय के दक्षिण करीबन 2,400 किलोमीटर में (पूर्वपश्चिम) फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई 240 से 300 किलोमीटर (उत्तर-दक्षिण) है। यह समतल है और इसमे कोई पर्वत नहीं है। सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों के जलोढ़-निक्षेपों (Alluvial deposits) से बना यह विशाल मैदान 300 मीटर से भी कम ऊँचा है और अत्यंत उपजाऊ है। इसका निर्माण हिमालय के निर्माण के बाद टेथिस सागर के बचे तलछटों से हुआ है। इस मैदान में जलोढ़-निक्षेपों की मोटाई 2 हजार मीटर से भी अधिक है।

यह विशाल मैदान एक इकाई होते हुए भी चार उपविभागों में बंटा हुआ. है – i. पंजाब का मैदान, ii. राजस्थान का मैदान, iii. गंगा का मैदान, (iv) बह्मपुत्र का मैदान।

i. पंजाब का मैदान : उत्तरी विशाल मैदान का यह सबसे पश्चिमी भाग है जिसकी ऊँचाई 200 से 250 मीटर (समुद्रतल से) है। इसके उत्तर में हिमालय और दक्षिण में राजस्थान का मरुस्थल है। इसकी ढाल दक्षिण-पश्चिम की ओर है। सतलज इस मैदान की प्रमुख नदी है। सतलज के नाम से इसे ‘सतलज का मैदान’ भी कहा जाता है। दिल्ली पहाड़ी या सरहिंद जलविभाजक (300 मीटर ऊँचा) द्वारा यह गंगा के मैदान से अलग होता है। मैदान का विस्तार पश्चिम में सिंधु नदी के पार तक है जो अब पाकिस्तान में है। यहाँ नहरों का जाल बिछा हुआ है।

ii. राजस्थन का मैदान : यह अरावली के पश्चिम में विस्तृत है, किन्तु जलवायु-परिवर्तन के कारण यह मैदान रेतीला बन गया है। यहाँ बालू के टीलों की प्रधानता है। लूनी इस मैदान की एकमात्र नदी है। खारे जल की झीलें अनेक हैं जिसमें साँभर सर्वप्रमुख है।

iii. गंगा का मैदान : यह मुख्यतः पश्चिम में यमुना और पूर्व में ब्रह्मपुत्र के बीच का समतल भाग है जिसकी ढाल दक्षिण-पूर्व की ओर है। ढाल इतना मंद है कि साधारणतया पता ही नहीं चलता। इसकी लंबाई 1,400 किलोमीटर और चोड़ाई 140 से 500 किलोमीटर है। गंगा सर्वप्रमुख नदी है जिसके नाम पर इसे गंगा का मैदान कहा गया है। गंगा अनेक सहायक नदियों का जल, कीचड़ और बालू लेकर आगे बढ़ती है, अतः यहाँ हर साल बाढ़ के समय नई मिट्टी बिछ जाती है। इस मैदान में पुरानी तलछट (Older alluvium) नई तलछट (Newer alluvium) दोनों की परते पाई जाती हैं जिन्हे क्रमश: ‘बाँगर’ और ‘खादर’ कहा गया है। बाँगर उच्च भाग है और बाढ़ से बच जाता है। खादर निम्न भाग होने के कारण बाढ़ के समय जलमग्न हो जाता है।

‘चौर’ भी निम्न भाग है। बह्मपुत्र के साथ मिलकर गांगा अपने मुहाने पर ‘डेल्टा’ बनाती है जो संसार में सबसे बड़ा है। गंगा के डेल्टा में दलदल भूमि मिलती है जो ज्वारभाटा या वर्षाजल से भरकर ‘बील’ की संज्ञा पाती है। यहाँ मछलियाँ खूब पकड़ी जाती है। डेल्टा का अधिकतर भाग बँगलादेश में पड़ गया है। यह ‘सुंदरवन’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। डेल्टा के अग्र भाग में कई द्वीप मिलते हैं ;

जैसे – सागर द्वीप। हाल में बने द्वीप का नाम पुनर्वासा रखा गया है। गंगा की पश्चिमी शाखा भागीरथी के नाम से प्रसिद्ध है जो आगे बढ़कर हुगली कहलाती है। हुगली में ज्वार के प्रवेश करने पर ही बड़े-बड़े समुद्री जहाज उसके साथ कलकत्ता पहुँच पाते हैं। गंगा के मैदान के तीन भाग किए जाते हैं –

  • ऊपरी गंगा का मैदान (प्रयाग तक),
  • मध्य गंगा का मैदान (प्रयाग से राजमहल तक) और
  • निम्न गंगा का मैदान (पश्चिम बंगाल में)। निम्नभाग में गंगा डेल्टा बनाती है।

ब्रह्मपुत्र का मैदान : उत्तरी विशाल मैदान का सबसे पूर्वी भाग बहापुत्र का मैदान है जिसकी ढ़ाल पूर्व से पश्चिमी की और है। गह मैदान लगभग 600 किलोमीटर लंबा और 100 किलोमीटर चौड़ा है। इसकी सामान्य ऊँचाई 150 मीटर है। यह रेंप घाटी (Ramp valley) है जो ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों द्वारा जमा की गई मिट्टी, बालू और कंकड़ों के निक्षेप से वर्तमान रूप में आई है। इस मैदान में भीषण बाढ़ आती है और उससे भारी क्षति पहुँचती है। इस मैदान को पार कर ब्रह्मपुत्र नदी दक्षिण की ओर मुड़ती है और गंगा से मिलकर डेल्टा बनाती है। गंगा और ब्रह्मपुत्र की संयुक्त धारा ‘मेघना’ कहलाती है। तिस्ता, सुवनसिरी और लोहित ब्रह्मपुत्र की कुछ सहायक नदियाँ हैं।

बहापुत्र के मैदान की दो दिशेषताएँ ध्यान देने योग्य हैं – i. तेजपुर से धुबरी के बीच नदी के दोनों ओर एकाकी घर्षित पहाड़ियाँ (Monadnocks) बहुत अधिक है, ii. भूमि की मंद ढाल के कारण नदी गुंफित (Braided) हो गई है जिससे इसकी पेटी में असंख्य द्वीप (River Islands) बन गए हैं। एक ऐसा द्वीप ‘मजुली’ (क्षेत्रफल 929 वर्गकिलोमीटर) है जो विश्व का सबसे बड़ा नदी-द्वीप है।

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प्रश्न 6.
प्रायद्वीपीय पठार को कितने में बांटा गया है? किन्हीं एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रायद्वीपीय पठार : दक्षिणी भारत प्रायद्वीप है और सबसे पुराना पठार भी। यह ग्राचीन गोंडवानाभूमि का एक खंड है और मुख्य रूप से कड़ी रवादार चट्टानों (Hard crystalline rocks) से बना हुआ है। इसकी ऊँचाई मुख्यत: 400 से 900 मीटर तक है। यह उत्तर की और चौड़ा और दक्षिण की ओर पतला होता गया है। इसके तीनों ओर पहाड़ियाँ मिलती हैं – उत्तर में अरावली, विध्याचल और सतपुरा; पश्चिम में पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) और पूर्व में पूर्वी घाट। विंध्याचल और सतपुरा के बीच नर्मदा की भंश-घाटी (Rift valley) है जो प्रायद्वीपीय पठार को दो स्पष्ट भागों में बाँट देती है – उत्तर-स्थित उच्चभूमि (Highlands) और दक्षिण-स्थित डेक्कन या दक्कन का पठार (Deccan Plateau)।

उत्तरी उच्चभूमि – दक्षिण भारत के पश्चि्चोत्तर (राजस्थान) में अरावली श्रेणी मिलती है। यह अवशिष्ट पर्वत है जिसकी एक शाखा दिल्ली की ओर चली गई है (Delhi Ridge)। अरावली की अधिकतम ऊँचाई अब 1,722 मीटर रह गई है (आबू-स्थित गुरु शिखर)। यह हिमालय से भी पुराना पहाड़ है। इसे विश्व का सबसे पुराना वलित पर्वत माना जाता है। इससे सटे पूर्व में पूर्वी राजस्थान की उच्चभूमि है जो 500 मीटर तक ऊँची है।

इससे पूर्व की ओर बढ़ने पर क्रमश: ‘बुंदेलखण्ड पठार’, ‘बघेलखंड पठार’ और ‘छोटानागपुर पठार’ मिलते हैं। चंबल, बेतवा और सोन इस भाग की प्रमुख नदियाँ हैं जो उत्तर की ओर (गंगा के मैदान की ओर) बहती हैं। बुंदेलखण्ड पठार को यमुना-पार का मैदान भी कहा जाता है, कितु यह ग्रेनाइटी चट्टान की उच्चभूमि है जिसकी ऊँचाई 350 मीटर तक है। इसमें कई सुंदर जलप्रपात मिलते हैं। यहाँ चंबल, बेतवा और सोन नदियों ने ग्रेनाइटी सतह पर मिट्टी का निक्षेप कर रखा है।

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अरावली के दक्षिण से पूर्व की ओर बढ़ने पर ‘मालवा पठार’ मिलता है जो लावानिर्मित है। इससे पूर्व बढ़ने पर सीढीनुमा उच्चभूमि मिलती है। यह क्षेत्र ‘विंध्याचल की पाटभूमि’ है जिसमें बालूपत्थरों की प्रधानता है। विध्य पर्वत मध्यप्रदेश के आरपार चला गया है। इसमें कोई शिखर नहीं मिलता। इसके दक्षिण में उससे सटे नर्मदा-घाटी है जिसके बाद सतपुरा की श्रेणी मिलती है। सतपुरा के पूर्व में महादेव पहाड़ी (1,117 मीटर) है जिससे पूरब बढ़ने पर मैकाल की पहाड़ियाँ मिलती हैं (सर्वोच्च चोटी अमरकंटक, 1,0136 मीटर)।

महादेव पहाड़ी पर ही पंचमढ़ी नगर (1,062 मीटर) स्थित है। मैकाल से पूरब बढ़ने पर ‘छोटानागपुर पठार, आ जाता है। यह पठार रिहंद नदी से लेकर राजमहल की पहाड़ियों तक विस्तृत है। राजमहल पर जुरैसिक काल के लावा निक्षेप मिलते हैं। छोटानागुर पठार के अंतर्गत राँची, हजारीबाग और कोडरमा के उप-पठार सम्मिलित है जहाँ ग्रेनाइट-नाइप चट्टानें मिलती हैं। सबस ऊँचे राँची पठार की ऊँचाई 600 मीटर है। छोटानागपुर पठार की प्रमुख नदियाँ सोन, कोयल, दामोदर, बराकर, स्वर्ण रेखा और शंख हैं।

दामोदर की भ्रंशा घाटी इसी में है जहाँ गोंडवाना काल का कोयला-भंडार उपलब्ध है। कोडरमा की रूपांतरित चट्टानों में अभक भंडार है। छोटानागपुर पठार कितने ही खनिजों से भरा है और ‘भारतीय खनिजों का भंडारघर’ (Storehoue of Indian Minerals) कहलाता है। सुदूर पूर्व में ‘मेघालय पठार’ है जो कट-छँटकर गारो, खासी और जयतिया पहाड़ियाँ कहलाता है। खासी पहाड़ी का आंतरिक भाग ‘शिलंग पठार’ के नाम से प्रसिद्ध है। मेघालय की उत्तरी सीमा पर बह्मपुत्र नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है।

उत्तरी उच्चभूमि से सटे अरावली के पश्चिम में दूर तक मरुभूमि मिलती है जो ‘थार मरुस्थल’ (The-Desert) के नाम से प्रसिद्ध है। यह प्रायद्वीपीय भारत का पश्चिमोत्तर भाग है, जो कभी हराभरा प्रदेश था। यह प्राचीन सभ्यता का केंद्र रह चुका है। सभ्यता के अत्यधिक विकास से इस क्षेत्र का वन-वैभव समाप्त हो गया, फलतः यह वर्षाविहीन हो गया। वनों की अंधाधुंध कटाई ने इसे वीरान ही नहीं बनाया, यहाँ की नंगी पहाड़ियों को बाह्य प्राकृतिक शक्तियों के आगे घुटने टेकने को मजबूर भी कर दिया।

यह क्षेत्र सिकताकणों में बदल गया। वह बालूमय प्रदेश पौराणिक सरस्वती नदी को पाताल ले गया। आज दक्षिणी भाग में एकमात्र लूनी नदी मिलती है। इस प्रदेश की पुरानी नदियों में कुछ ने मार्ग-परिवर्तन कर लिया (जैसे सतलज ने) और कुछ लुप्त हो गई (जैसे सरस्वती)। ताप की अधिकता और वर्षा के अभाव में चट्टानों का टूटना जारी है। अपरदित छत्रकशिलाएँ और बालुकास्तूप यहाँ की सामान्य स्थलाकृतियाँ हैं। थार मरुस्थल का विस्तार ढाई लाख वर्गकिलोमीटर पहुँच चुका है।

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प्रश्न 7.
दक्कन के पठार का सक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रायद्वीपीय या दक्कन के पठार की भू-प्रकृति लिखिए।
उत्तर :
दक्कन का पठार : दक्षिण भारत का यह भाग उत्तरी उच्चभूमि की अपेक्षा अधिक ऊँचा और अधिक विस्तृत है। यह अत्यंत पुरानी, कड़ी और रवादार परिवर्तित चट्टानों से बना है। उत्तर – पश्चिमी भाग लावा-प्रदेश (Lava Region or Deccan Trap) है जहाँ अनक चपटे पहाड़ मिलते हैं; जैसे – सतपुरा, अजंता। सतपुरा से ही दक्कन पठार आरंभ होता है। सतपुरा का सबसे ऊँचा भाग धुपगढ़ चोटी (1,350 मीटर) है। अजंता पहाड़ ताप्ती के दक्षिण में है। बैसाल्ट चट्टानों से बने लावाप्रदेश में रेगुड़ या काली मिट्टी (Regur or black soil) मिलती है जो कपास की उपज के लिए बहुत प्रसिद्ध है। अजंता पहाड़ ताप्ती नदी के भंश-क्षेत्र में है जिसके दक्षिण में बालाघाट है। इन दोनों के बीच गोदावरी-घाटी है। बालाघाट के दक्षिण में भीमाघाटी है जिसके दक्षिण कृष्णा का उद्गम क्षेत्र है।

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ताप्ती को छोड़कर सभी नदियाँ दक्षिण-पूर्व की ओर बहती है। दक्कन के पठार का पश्चिमी किनारा भंशन (Faulting) के कारण सीधी और खड़ी दालवाला है जो पश्चिमी घाट बनाता है। पश्चिमी घाट के कई नाम हैं (विभिन्न क्षेत्रों में); यथा- सह्याद्रि पर्बत, नीलगिरि और कार्डेमम। पश्चिमी घाट का विस्तार ताप्ती नदी से लेकर कन्याकुमारी तक है। दक्षिण की ओर इसकी ऊँचाई बढ़ती जाती है। सबसे अधिक ऊँचाई अनयमुदी चोटी की है (2,695 मीटर) और यह अनयमलव पहाड़ी में है (केरल राज्यांतर्गत)।

अनयमुदी ही दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है। नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी दोदाबेटा की ऊँचाई अपेक्षाकृत कम है (2,680 मीटर)। दक्षिण भारत का सबसे सुंदर पर्वतीय नगर ‘ऊटी’ (ऊटकमंड) यहीं स्थित है। पश्चिमी घाट की शिखरेखा के लिए स्थानीय नाम ‘घाटमाथा’ है। पश्चिमी घाट में तीन महत्वपूर्ण दर्रे (Gaps) मिलते हैं – थालघाट, भोरघाट और पालघाट। इनमें प्रथम दो महाराष्ट्र राज्य में पड़ते हैं और अंतिम केरल को तमिलनाडु से मिलाता है।

दक्कन के पठार का दक्षिण-पूर्वी भाग मुख्य दक्कन प्रदेश (Main Deccan Region) कहलाता है जहाँ पूर्वी घाट की पहाड़ियाँ मिलती हैं। पश्चिमी घाट की तरह पूर्वी घाट श्रृंखलाबद्ध या अविच्छित्र नहीं है और इसकी ऊँचाई भी उतनी अधिक नहीं है। उड़ीसा का महेंद्रगिरि, आंधप्रदेश के नलामलय, पालकोंडा, वेलीकोंडा, तथा तमिलनाडु के पचामलय और शिवराय पूर्वी घाट के ही अंग है। सर्वोच्च भाग वह है जहाँ पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट आपस में मिलते हैं।

यही भाग ‘नीलगिरि’ कहलाता है जिसकी सबसे ऊँची चोटी दोदाबेटा है। प्राचीन नाइस और ग्रेनाइट चट्टानों से बने इस पठार में लाल मिट्टी (Red soil) मिलती है जो अधिक उपजाऊ नहीं होती। भूमि की ढाल पूर्व की ओर है जो महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के मार्गों से ज्ञात होता है। दक्षिणी पठार के इस भाग, तेलंगाना और कर्नाटक या मैसूर पठार’ के नाम से भी जाना जाता है। बाबाबूदन पहाड़ी (Iron Hill) यहीं है जो 1,925 मीटर ऊँची है।

प्रायद्वीपीय पठार रत्मगर्भा है। यहाँ लोहा, कोयला, ताँबा, मैंगनीज, अभ्रक, चूनापत्थर, सोना, हीरा इत्यादि खनिज द्रव्य प्राप्त हैं। पहाड़ी भूमि होने के कारण यहाँ वनवैभव भी मिलता है, कितु वनों का विस्तार सीमित क्षेत्र में है। अधिकतर भाग वनविहीन है। भूमि भी अनुर्वर है। हाँ, जलविद्युत उत्पादन में यह आगे है। पहाड़ी नदियों से और अधिक जलशक्ति का विकास किया जा सकता है। लावा के विखंडन से प्राप्त काली मिट्टी के क्षेत्र कपास-उत्पादन के लिए अत्युत्तम सिद्ध हुए हैं। पूर्व और पश्चिम में तटीय मैदान है। सुदूर दक्षिणी छोर कन्याकुमारी अंतरीप बनाता है।

प्रश्न 8.
आर्थिक दृष्टिकोण से नदियों के महत्व का उल्लेख करें।
उत्तर :
भारतीय अर्थव्यवस्था में नदियों के निम्नांकित महत्व हैं –

  1. ये सिंचाई के महत्त्वपूर्ण साधन हैं। भारत की आधी सिंचित भूमि नदियों से निकली नहरों द्वारा सींची जाती है।
  2. ये बाढ़ के समय नई मिट्टियाँ बिछाकर मैदानी भाग में उर्वरा-शक्ति बढ़ाती हैं। सारा मैदानी भाग नदियों की मिट्टी से ही बना होने के कारण उपजाऊ है।
  3. ये यातायात का साधन रही हैं । प्राचीन और मध्ययुग में नदियों से ही अधिक व्यापार होता था। आज भी ब्रह्यपुत्र, गंगा और यमुना में दूर-दूर तक स्टीमर चलते हैं।
  4. ये जलविद्युत उत्पन्न कर रही हैं और जलशक्ति का संभावित भंडार हैं।
  5. भारत में अधिकतर मछलियाँ नदियों में ही पकड़ी जाती हैं।
  6. ये उद्योग-केन्द्रों और नगरों की स्थापना और विकास में मदद पहुँचाती हैं ; जैसे – स्वणरिखा के किनारे जमशेद्युर की स्थिति।

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प्रश्न 9.
बहुउद्देशीय नदी घाटी योजना से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
बहुउद्देश्यीय नदी घाटी योजना (Multipurpose River Valley Project) : वहुउद्देशीय नदी घाटी योजना के अन्तर्गत नदियाँ हमारे आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका उपयोग केवल सिंचाई और यातायात के लिए ही नहीं बल्कि विभिन्न कार्यों के लिए किया जा रहा है । ऐसी नदी घाटी योजनाएँ तैयार की गई है जिनमें निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा गया है।

  1. सिंचाई की समुचित व्यवस्था करना
  2. जल विद्युत उत्पादन पर बल देना
  3. नदियों में बाढ़ जैसे प्रकोप की रोकथाम करना
  4. मिट्टी का कटाव रोका जाय तथा मिट्टी का रक्षा करना
  5. जल एकत्र करने के लिए झीलें बनाई जाती हैं ताकि उनमें मत्स्य पालन किया जा सके
  6. नौका विहार के द्वारा मनोरंजन का साधन
  7. पीने योग्य पानी की सुविधा उपलब्ध करना
  8. मलेरिया जैसे खरतनाक बिमारी पर रोकथाम लगाना
  9. वनों के क्षेत्र का विस्तार करना, तथा
  10. स्वास्थवर्द्धक स्थान बनाया जाना आदि।

भारत में निम्नलिखित नदी घाटी योजनाएँ हैं : –

  1. दामोदर घाटी योजना – पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड राज्य
  2. महनदी योजना – उड़िसा
  3. मयूराक्षी योजना – पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड
  4. कंसावती योजना – पश्चिम बंगाल
  5. कोसी योजना – बिहार तथा नेपाल
  6. रिहण्ड बांध योजना – उत्तर प्रदेश
  7. भाखड़ा नांगल योजना – पंजाब
  8. नागार्जुन सागर योजना – आन्ध्र प्रदेश
  9. फरक्का योजना – पश्चिम बंगाल

प्रश्न 10.
भारत की जलवायु का आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत की जलवायु का आर्थिक जीवन पर प्रभाव :

  1. गर्मी में उच्च तापमान और ग्रीष्मकालीन वर्षा के कारण भारतीय जलवायु में कुछ विशिष्ट फसलों की खेती होती है; जैसे – धान, जूट और चाय । ये फसलें मानसूनी जलवायु की ही उपज हैं।
  2. धान की खेती से अधिकाधिक लोगों का भरण-पोषण संभव है, अत: ऐसे क्षेत्र घने आबाद होते हैं।
  3. अधिक गर्मी पड़ने के कारण लोग सुस्त हुआ करते हैं जो आर्थिक विकास के लिए बाधक है।
  4. वर्षभर वर्षा न होने के कारण लोगों को शुष्क ऋतु में बेकार रहना पड़ता है। कृषिकार्य मुख्य रूप से वर्षा शूरू होने पर ही आरंभ होता है।
  5. वर्षा के असमान वितरण के कारण सिंचाई-व्यवस्था करनी पड़ती है।
  6. कहा गया है – मनसून वह धुरी है जिसपर भारत का समस्त जीवनचक्र घूमता है। तात्पर्य यह है कि इसी पर भारत की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। भारतीय कृषि को मानसून के साथ जुआ खेलना कहा गया है।
  7. पश्चिमोत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा के कारण गेहूँ, जौ आदि की अच्छी उपज होती है।
  8. चक्रवाती या तूफानी वर्षा से फसलों, पशुओं और गरीब लोगों को बहुत नुकसान पहुँचता है। ओलों से खड़ी फसलें मारी जाती हैं।
  9. अधिक वर्षा से कुछ क्षेत्रों में भीषण बाढ़ आती है।
  10. मूसलधार वर्षा से मिट्टी का कटाव होने लगता है।
  11. अत्यल्प वर्षा के क्षेत्र मरूस्थलों में परिणत होने लगते हैं।

प्रश्न 11.
प्रायद्वीपीय भारत या दक्षिणी पठारी भाग से निकलने वाली नदियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रायद्वीपीय भारत या दक्षिणी पठार से निकलनेवाली नदियाँ :- प्रारद्वीपीय पठार से निकलनेवाली नदियाँ अनुगामी या अनुवर्ती नदी-प्रणाली के अंतर्गत आती हैं। हिमालय की नदियों के विपरीत इनके विकास में धरातलीय स्वरूप का प्रभाव प्रमुख है । ये हिमालय की नदियों से अधिक पुरानी भी हैं। नर्मदा और ताप्ती तथा बगाल की खाड़ी में गिरनेवाली कितनी ही नदियों ने कटाव के चरम स्तर या आधारतल को प्राप्त कर लिया है। इन नदियों का अपरदन-कार्य नगण्य रह गया है। ये नदियाँ अंतिम अवस्था में अपेक्षाकृत चौड़ी और छिछली घाटियाँ बनाती हैं। इनमें पुराने होने के अर्थात् वृद्धावस्था के सभी लक्षण विद्यमान हैं।

पठार की नदियों में कुछ ऐसी हैं जो भंश-घाटियों में बहती हैं। नर्मदा और ताप्ती ऐसी ही नदियों के उदाहरण हैं। पूर्वी भाग में दामोदर भी भंशघाटी में बहनेवाली नदी है। नर्मदा की लंबाई 1,312 किलोमीटर, ताप्ती की 724 किलोमीटर और दामोदर की 541 किलोमीटर है। नर्मदा की घाटी में संगमरमर और दामोदर की घाटी में कोयला प्राप्य हैं।

पश्चिमोत्तर भाग में एकमात्र नदी लूनी समुद्र तक पहुँच पाती है, शेष थार मरुभूमि में अपना अस्तित्व खो बैठती हैं। मरुस्थलीय भाग आतंरिक अपवाह क्षेत्र है।

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प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ उत्तर की नदियों से सर्वथा भिन्न हैं । ये बरसाती हैं और जल के लिए मानसून पर पूरी तरह आश्रित हैं। बहाव की दिशा को देखते हुए इन्हें भी तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. नर्मदा और ताप्ती जो पश्चिम की ओर बहती है
  2. महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और वैगाई जो पूर्व की ओर बहती है तथा
  3. चंबल, बेतवा, सोन इत्यादि नदियाँ जो उत्तर की ओर बहती हैं।

दक्षिण की नदियों में सबसे बड़ी गोदावरी है, जिसकी लंबाई 1,465 किलोमीटर है । गंगा के बाद भारत में सबसे बड़ा नदी-प्रदेश इसी का है – देश के समस्त क्षेत्र का दशांश। गोदावरी पश्चिमी घाट से (नासिक के निकट) निकलकर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और आंधप्रदेश राज्यों से होकर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है । अपने मुहाने पर यह डेल्टा-निर्माण करती है । पेनगंगा, वर्धा और इंद्रवती इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।

महानदी गोदावरी से उत्तर है जो मध्यप्रदेश और उड़ीसा राज्यों में बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जा गिरती है। यह भी अपने मुहाने पर डेल्टा-निर्माण करती है। चिल्का झील की स्थिति इसके मुहाने के निकट है। महानदी पर भी हीराकुंड बाँध बनाया गया है। यह लगभग 900 किलोमीटर लंबी है।

कृष्णा गोदावरी से दक्षिण है जो महाबालेश्वर के निकट पश्चिमी घाट से निकलकर महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंधप्रदेश राज्यों से होकर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है (लंबाई 1,290 किलोमीटर)। दक्षिण भारत की यह दूसरी बड़ी नदी है। भीमा, तुंगभद्रा और मूसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। अमरावती, विजयवाड़ा, कृष्णा नदी के ही तट पर स्थित हैं।

कावेरी नदी पश्चिमी घाट के बहागिरि से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है (लम्बाई 760 मिलोमीटर)। कृष्णराज सागर बाँध इसी पर है। इसका डेल्टा बड़ा ही उपजाऊ है। पवित्रता के कारण कावेरी ‘दक्षिण की गंगा’ कहलाती है।

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प्रश्न 12.
भारतीय वनस्पतियों का वर्गीकरण कर किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में विशाल वृक्षों से लेकर झाड़ियों और घास तक, अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। उष्णक्षेत्रीय, शीतोष्णक्षेत्रीय और उच्च पर्वतीय सभी प्रकार की वनस्पतियाँ यहाँउगती हैं। वनस्पति की विविधता देखते ही बनती है। वर्षा की मात्रो, धरातल के स्वरूप तथा वृक्षों की जाति के आधार पर भारतीय वनों की निम्नलिखित पाँच पेटियाँ हैं –

  1. चिरहरित वन की पेटियाँ
  2. पर्णपाती वन या पतझड़ मानसून वन की पेटियाँ
  3. शुष्क और कँटीले वन की पेटी
  4. पर्वतीय वन की पेटी
  5. ज्वारीय वन की पेटियाँ।

चिरहरित वन की पेटियाँ : ये पेटियाँ उण्ण एवं अधिक वर्षावाले (200 से॰मी॰ या इससे अधिक) क्षेत्रों में हैं। पश्चिमी घाट, अंडमान द्वीप, हिमालय की तराई, पूर्वी हिमालय के उप-प्रदेश तथा असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोराम, त्रिपुरा ऐसे ही क्षेत्र हैं। पश्चिमी घाट में चिरहरित वन के क्षेत्र 450 से 1,350 मीटर की ऊँचाई के बीच और असम में 1,000 मीटर की ऊँचाई तक मिलते हैं। वैसे क्षेत्रों में जहाँ 250 से०मी॰ से अधिक वर्षा होती है, ये वन विशेष रूप से सघन हैं। जहाँ अकेक्षाकृत कम वर्षा है, ये वन चिरहरित से अर्द्ध-चिरहरित में बदल जाते हैं।

उच्च तापमान एवं अधिक वर्षा के कारण ही ये वन अत्यंत घने होते हैं और इनमें पेड़ों की उँचाई 30-40 मीटर तक चली जाती है। पेड़ों के ऊपरी सिरों सर इतनी शाखाएँ होती हैं कि पेड़ छाते का आकार ले लेते हैं। विषुवतीय वनों की तरह ही इनकी लकड़ी कड़ी होती है। प्रमुख पेड़ महोगनी, आबनूस, बेंत, बाँस, जारूल, ताड़ , सिनकोना और रबर हैं। बाँस मुख्यतः नदियों के किनारे और रबर पश्चिमी घाट तथा अंड्रमान में मिलते हैं। इन वनों में प्रवेश कर लकड़ी काटना कठिन कार्य है (एक तो लकड़ी कड़ी और भारी होती है, और दूसरे, एक स्थान पर एक ही किस्म के पेड़ न मिलकर अनेक प्रकार के पेड़ मिला करते है)।

प्रश्न 13.
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित है –
स्थिति एवं अक्षांशीय विस्तार : भारत वर्ष उत्तरी गोलार्द्ध में 8° 4 उत्तरी अर्षांश से लेकर 37° 6 उत्तरी अक्षांश तक विस्तार है। कर्क रेखा देश के मध्य से गुजरती है। कर्क रेखा के उत्तर का भाग शीतोष्ण कटिबन्ध में तथा दक्षिण का भाग उष्ण कटिबन्ध के अन्तर्गत भूमध्यरेखा के निकट स्थित होने के कारण वर्षभर तापमान ऊँचा रहला है तथा दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर कम होने के साथ दक्षिण भारत में सम जलवायु पाई जाती है। जबकि उत्तरी भारत में विषम जलवायु पाई जाती है।

हिमालय का प्रभाव : देश की उत्तरी सीमा पर स्थित हिमालय पर्वत एक प्रभावी जलवायु विभाजक की भूमिका का निर्वाह करता है। हिमालय पर्वत दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं को रोककर भारत में वर्षा करता है। तथा शीतकाल में मध्य एशिया से चलने वाली ठण्डी शीतल हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोककर उत्तर भारत को और शीतल होने से बचाती है।

भू-प्रकृति : भारत की भू-प्रकृति तापमान, वायुदाब पवनो की गति एवं दिशा तथा ढाल की मात्रा और वितरण को प्रभावित करता वर्षा ऋतु में पश्चिमी घाट पर्वत तथा असम के पवनविमुखी ढाल अधिक वर्षा प्राप्त करते है जबकि इसी दौरान पवनाविमुखी स्थिति के कारण दक्षिणी पठार कम वर्षा प्राप्त करता है।

समुद्र से दूरी : भारत के पूर्वी तटीय एवं पश्चिमी तटीय प्रदेशों में समकारी जलवायु पाई जाती है तथा समुद्र से दूर स्थित भागों में महाद्वीपीय जलवायु पायी जाती है। अर्थात तटीय भागों में ग्रीष्मकाल ठण्डा रहता है तथा शीतकाल में गर्म रहता है जबकि आन्तरिक भागों में ग्रीष्मकाल में अधिक गर्मी तथा शीतकाल में अधिक ठण्डक पड़ती है।

मानसूनी हवाएं : भारत की जलवायु पर मानसूनी हवाओ का प्रभाव पड़ता है। भारत की 90 % वर्षा मानसूनी हवाओं द्वारा ही होती है। अधिकांश वर्षा एक ऋतु विशेष में जून से सितम्बर के बीच हो जाती है बाकी आठ महीनो तक प्रायः वर्षा नहीं होती है वर्षा का भी वितरण सर्वत्र एक समान नहीं है।

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प्रश्न 14.
मृदा अपरदन के क्षेत्र का वर्णन करो।
उत्तर :
मृदा अपरदन से प्रभावित क्षेत्र (Affected regions of soil erosion) : भारत में मृदा अपरदन से प्रभावित क्षेत्र निम्नलिखित है :
उत्तरी-पूर्वी भारत : उत्तरी-पूर्वी भारत की भूमि पर्वतीय है। यहाँ वर्षा ऋतु में वर्षा अधिक होती है। वनों की कटाई, पर्वतीय ढालों पर सीढ़ीनुमा खेतों में कृषि तथाझूम-कृषि के कारण यहाँ मिट्टी का कटाव बहुत अधिक होता है। प्रमुख मृदा अपरदन का क्षेत्र होने के कारण इसे रेंगती मिट्टी का क्षेत्र कहते हैं। यहाँ की 60 % भूमि मृदा अपरदन की समस्या से प्रभावित है।

चम्बल एवं यमुना नदी घाटी : चम्बल एवं यमुना नदी घाटियों में लगभग 36 लाख हेक्टेयर भूमि मृदा अपरदन से प्रभावित है। वनस्पतियों के आवरण के अभाव वाला यह क्षेत्र अवनलिका अपरदन से ग्रसित है तथा बीहड़ (Ravine) के रूप में बदल गया है

हिमालय क्षेत्र : पर्वतीय भूमि, वर्षा काल में अधिक वर्षा, भूस्खलन, वनों के कटाव आदि के कारण हिमालय प्रदेश में अधिकांश क्षेत्र मिट्टी के कटाव की समस्या से ग्रसित है।

छोटानागपुर प्रदेश : वनों की कटाई, खनन कार्य, उद्योगों की स्थापना तथा रेल मार्गों एवं सड़कों के निर्माण कार्य के कारण यह प्रदेश मृदा अपरदन की समस्या से जूझ रहा है।

मरूस्थलीय क्षेत्र : पश्चिमी राजस्थान का शुष्क क्षेत्र इसके अन्तर्गत आता है। तीव्र वायु यहाँ मृदा अपरदन का मुख्य कारण है।

प्रश्न 15.
वनो से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वनों से लाभ : वनों से हमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों लाभ मिलते हैं।
प्रत्यक्ष लाभ निम्नलिखित हैं –

  1. ये हमें भवन-निर्माण के लिए टिकाऊ लकड़ियाँ प्रदान करते हैं।
  2. बक्सा-पेटी, दियासलाई, कागज की लुग्दी, फर्नीचर आदि तरह-तरह की वस्तुएँ तैयार करने के लिए उपयोगी लकड़ियाँ प्रदान करते हैं।
  3. ये ईंधन की आपूर्ति करते हैं।
  4. इनसे गौण उत्पाद के रूप में लाह, राल, गोंद, रेजिन, कत्था, जड़ी-बूटियाँ, बीड़ी के पत्ते, फल, मधु, रेशम, चमड़ा रंगने के सामान आदि प्राप्त होते हैं।
  5. इनसे कितने ही लोगों को रोजी-रोटी मिल जाती है।

अप्रत्यक्ष लाभ भी अनेक हैं, जैसे –

  1. ये जलवायु को सम रखते हैं।
  2. वर्षा लाते हैं (बादलों को आकृष्ट करके)।
  3. मिट्टी का कटाव रोकते हैं।
  4. आँधी-तूफान और बाढ़ रोकते हैं।
  5. इनकी पत्तियों से खाद तैयार होती है जिससे भूमि उपजाऊ बनती है।

प्रश्न 16.
सामाजिक वन से तुम क्या समझते हो ? वन संरक्षण एवं वन विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सामाजिक वन : परती जमीन पर जल्द तैयार होनेवाले उपयोगी पेड़ लगाना जिससे फल, काष्ठ, ईंधन आदि की समस्या हल हो तथा वातावरण को संतुलित बनाए रखने की योजना में मदद पहुँचे, ‘सामाजिक वानिकी’ (Social forestry) कहलाता है। सड़क के किनारे भी पेड़ लगाने की योजना है।
वन संरक्षण एवं वन विकास :
1. शिक्षा बढ़ाई जाए। वन-अनुसंधान केन्द्र खोले जाएँ। वन-विभाग का मुख्य अनुसंधान केन्द्र हिमालय-स्थित देहरादून में स्थापित किया गया है। राँची, पालमपुर, बंगलूर, कोयम्बटूर और अकोला में भी वानिकी शिक्षा आरंभ की गई है।
2. वनों के प्रति नया दृष्टिकोण अपनाया जाए और प्राचीनकाल की वन्य संस्कृति को पुनर्जीवित किया जाए।
3. प्रतिवर्ष नए वन लगाए जाएँ। 1981 ई० के बाद से अबतक मध्यप्रदेश और पंजाब में ही वनक्षेत्र बढ़ाए जा सके हैं। पिछले कुछ वर्षो से केरल, कर्नाटक और मेघालय इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।
4. वनसंरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ चालू की जाएँ, जैसे – बाघ परियोजना, हाथी परियोजना, अभयारण्यों की स्थापना। 1952 ई० से भारत वनमहोत्सव मनाकर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सचेष्ट है । देश में 17 वनविकास निगम स्थापित किए जा चुके हैं।

वनों के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं, यद्यपि मानव-जनसंख्या और पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि से यह संरक्षण कठिन हो गया है।

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प्रश्न 17.
भारतीय मिट्टी को कितने भागों में बाटा गया है ? किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारतीय मिट्टी के प्रकार (Types of Indian Soils) : ‘भारतीय कृषि अनुसंधान’ समिति ने भारत में पाई जाने वाली मिट्टियों को आठ वर्गों में विभाजित किया हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
  2. रेगूर या काली मिट्टी (Regur of Black Soii)
  3. लाल मिट्टी (Red Soil)
  4. लेटेराइट मिट्टी (Laterite Soil)
  5. पर्वतीय या वनों वाली मिट्टी (Mountain or Forest Soil)
  6. मरुस्थलीय मिट्टी (Desert Soil)
  7. लवण मिश्रित क्षारयुक्त मिट्टी (Saline and Alkali Soils)
  8. हल्की-काली व दलदली मिट्टी (Saline and Alkali Soils)

जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) : जलोढ़ मिट्टी उपजाऊपन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण होती है। भारत की कृषि के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। इस मिट्टी पर कृषि करना सुविधानजनक है। इसी कारण इस मिट्टी के क्षेत्र सघन जनसंख्या वाले प्रदेश हैं।
संरचना : जलोढ़ मिट्टी का निर्माण नदियों के निक्षेपण से नदी-घाटियों, बाढ़ के मैदानों तथा डेल्टाई प्रदेशों में हुआ है।
क्षेत्रफल : जलोढ़ मिट्टी भारत के कुल क्षेत्रफल के 7.7 लाख वर्ग किलोमीटर अर्थात 4.7 % क्षेत्र पर पाई जाती है।

विशेषताएँ :

  1. उर्वरता की दृष्टि से यह मिट्टी सबसे श्रेष्ठ है।
  2. यह बहुत बारीक कणों से युक्त है, अत्यधिक रंभ्रयुक्त तथा इतनी हल्की है कि इसको आसानी से जोता जा सकता है।
  3. जलोढ़ मिट्टी का निर्माण चट्टानों के विभिन्न प्रकार के पदार्थों के खुरचने से हुआ है जिसके कारण इसमें उच्च कोटि के नमक की विविधिता है।
  4. यह मृदा पोटाश, फॉसफोरस, अम्ल एवं मृत जीवाश्म के दृष्टिकोण से समृद्ध है।
  5. संरचना के दृष्टिकोण से इस मिट्टी में क्षारीय तत्व, बालू एवं चीका के अनुपात तथा उर्वरता में भिन्नता पाई जाती है।
  6. इस मिट्टी में नाइट्टोजन एवं वनस्पति के अंशों की कमी पाई जाती है।
  7. जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र अधिक आबादी वाले हैं और इनको ‘गेहूँ और चावल के कटोरे’ के क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
  8. पुरातन जलोढ़ मिट्टी को बाँगर और नवीन जलोढ़ को खादर कहते हैं। खादर में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी में महीन कण पाए जाते हैं। जबकि बाँगर की जलोढ़ मिट्टी में मिट्टी का अंश अधिक पाया जाता है।
  9. जलोढ़ मिट्टी में सिंचाई की सहायता से गन्ना, कपास, चावल, जूट, गेहूँ, तंबाकू, तिलहन, मक्का, फल एवं सब्जियाँ अधिकता से पैदा की जाती हैं।

वितरण : यह मिट्टी उत्तरी भारत के मैदानों में पंजाब से लेकर असम तक, महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के डेल्टाई भागों में तथा पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तटीय मैदानों तथा नर्मदा और ताप्ती नदिर्यों की घाटियों में पाई जाती है।

प्रश्न 18.
काली मिट्टी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
रेगूर या काली मिट्टी (Regur or Black Soils) : इस मिट्टी का रंग काला होता है तथा यह मिट्टी कपास की कृषि के लिए अधिक उपयुक्त है। इस मिट्टी में कपास का उत्पादन अधिक होने के कारण इसे ‘कपास की मिट्टी’ भी कहा जाता है।
संरचना : इस मिट्टी का निर्माण हजारों साल पहले दक्कन के पठारी भाग में लावा चट्टानों के विखंडन से हुआ है।
क्षेत्रफल : यह मिट्टी भारत के लगभग 5.18 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाती है।

विशेषताएँ :

  1. इसका रंग गहरा-काला तथा कणों की रचना सघन होती है।
  2. इसमें फॉसफोरस, नाइट्रोजन तथा जीवाश्मों का अभाव पाया जाता है।
  3. इस मिट्टी में चूना, पोटाश, मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम तथा लोहांश पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
  4. इस मिट्टी में अपने अंदर अधिक समय तक आर्द्रता को बनाए रखने की क्षमता होती है जिसके कारण यह मिट्टी कपास जैसी फसलों के लिए उत्तम होती है।
  5. पहाड़ी एवं पठारी भागों में यह मिट्टी हल्की, बड़े छेदों वाली तथा कम उर्वर होती है, अत: इसमें केवल ज्वार, बाजरा व दालें पैदा होती हैं। निम्न भागों में यह अधिक गहरी, काली तथा उर्वर होती है, अतः इसमें कपास मूँगफली, तंबाकू, ज्वार, बाजरा आदि फसलें उगाई जाती हैं।
  6. इसमें अधिक समय तक जल ठहर सकता है किन्तु सूख जाने पर इसमें दरारें पड़ जाती है, परंतु वर्षा ऋतु में यह चिपचिपी हो जाती है और इसमें हल चलाना मुश्किल हो जाता है।
  7. यह मिट्टी अपने उपजाऊपन के लिए विख्यात है तथा बिना खाद दिए हुए एवं लगातार कृषि कार्य करने पर भी इसकी उपजाऊ शक्ति नष्ट नहीं होती।

विरतण : यह मिट्टी मुख्य रूप से आंध प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ भागों में पाई जाती है।

प्रश्न 19.
लाल मिट्टी का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
लाल मिट्टी (Red Soils) : इस मिट्टी में लाल रंग की प्रधानता होने के कारण इसको लाल मिट्टी कहते हैं। यह मिट्टी उत्तर, दक्षिण और पूर्व में काली मिट्टी से घिरी हुई है।
संरचना : लाल मिट्टी की उत्पत्ति शुष्क एवं आर्द्र मौसम के क्रमशः अपर्वतन होने पर प्राचीन रवेदार शैलों के विखंडित होने से होती है। लोहे की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है।
क्षेत्रफल : यहो मिट्टी भारत के लगभग 90,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैली हुई हैं।

विशेषताएँ :

  1. अनेक प्रकार की चट्टानों से बनी होने के कारण यह गहराई और उर्वरा शक्ति में विभिन्नता लिए हुए होती है।
  2. यह अत्यंत रंध्रयुक्त होती है।
  3. इस मिट्टी में लोहा, एल्यूमिनियम एवं चूना अधिक मात्रा में पाया जाता हैं किंतु नाइट्रोजन, फॉसफोरस और ब्यूमस की मात्रा कम पाई जाती है।
  4. ऊँचे शुष्क मैदानों में पाई जाने वाली मिट्टी उपजाऊ नहीं होती। यहाँ यह हलके रंग की, पथरीली और कम गहरी होती है। इसमें बालू के समान मोटे कण पाए जाते हैं किंतु निचले मैदानी भागों में यह गहरे लाल रंग की, अधिक गहरी और उपजाऊ होती है।
  5. यह मिट्टी चावल, गेहूँ, कपास, आलू दालें, तंबाकू, ज्वार, बाजरा आदि फसलों की कृषि के लिए अधिक उत्तम है।

वितरण :
यह मिट्टी तमिलनाडु, कर्नटटक, आंभ्र प्रदेश, दक्षिणी महाराष्ट्र, पूर्वी मध्य प्रदेश, उड़ीसा, और छोटा नागपुर पठार के कुछ भागों में पाई जाती है।

प्रश्न 20.
पर्वतीय मिट्टी एवं मरूस्थलीय मिट्टी का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
हिमालय पर्वत पर पाई जाने वाली मिट्टियाँ नई और अवयस्क हैं। अधिकांशत: ये मिट्टियाँ कम गहरी, दलदली और छिद्रमय होती हैं। नदियों की घाटियों और पहाड़ी ढालों पर ये अधिक गहरी पाई जाती हैं।
क्षेत्रफल : यह मिट्टी देश के पहाड़ी क्षेत्रों पर लगभग 2.85 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है।

विशेषताएँ :

  1. इसमें ह्यूमस की मात्रा अधिक पाई जाती है।
  2. इस मिट्टी में चूना, पोटाश एवं फॉसंफोरस की कमी पाई जाती है।
  3. इस मिट्टी से अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए अधिक खाद की आवश्यकता होती है।
  4. उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अपरिपक्व, पतली तथा छिद्रमय मिट्टियाँ मिलती हैं। निचले ढ़ालों व घाटियों में कहीं-कहीं गहरी तथा उर्वर मिट्टियाँ उपलब्ध होती हैं।
  5. यह मिट्टी चाय, काँफी, मसाले और फलों के उत्पादन के लिए उत्तम हैं।

मरुस्थलीय मिट्टी (Desert Soils) : इस प्रकार की मिट्टी का निर्माण शुष्क एवं अर्ध-शुष्क दशाओं में देश के उत्तरी-पश्चिमी भागों में होता है।
क्षेत्रफल : यह मिट्टी लगभग 1.42 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।

विशेषताएँ :

  1. इस मिट्टी में खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं किंतु यह जल में शीघ्र घुल जाते हैं।
  2. मिट्टी प्रधानत: बालू हैं जिसमें छोटे कण पाए जाते हैं।
  3. इस मिट्टी में फॉसफोरस की अधिकता किंतु नाइट्रोजन की कमी पाई जाती है।
  4. इस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा कम पाई जाती है।
  5. इस मिट्टी में नमी की कमी रहती है।
  6. जल मिल जाने पर यह मिट्टी उपजाऊ हो जाती है। सिंचाई की सहायता से गेहूँ, गब्ना, कपास, ज्वार, बाजरा, सब्जियाँ आदि पैदा की जाती हैं, जहाँ सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं वहाँ भूमि बंजर पड़ी रहती है।

वितरण : इस प्रकार की मिट्टी अरावली और सिंधु घाटी के मध्यवर्ती क्षेत्रों में विशेषतः पश्चिमी राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के दक्षिणी जिले तथा गुजरात में कच्छ के रन में पाई जाती है।

प्रश्न 21.
लवण मिट्टी से तुम क्या समझते हो ? दलदली मिट्टी क्या है ?
उत्तर :
लवण मिश्रित एवं क्षारयुक्त मिट्टी (Saline and Alkali Soils) : क्षारयुक्त मिट्टी में चूना एवं सोडियम के तत्वों का सम्मिश्रण रहता है जबकि लवणयुक्त (Saline) मिट्टी में हाइड्रोजन के तत्व सम्मिलित रहते है जो कैल्सियम एवं सोडियम का स्थानांतरण करते हैं। लवणयुक्त एवं क्षार मिश्रित मिट्टी मुख्य रूप से भारत के सभी जलवायु क्षेत्रों में पाई जाती हैं। उत्तरी भारत के शुष्क भागों में विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान में इस प्रकार की मिट्टी से कई हेक्टेयर भूमि में कृषि को नुकसान पहँचता है।

दलदली मिद्टी : हल्की-काली व द्लदली मिट्टी उड़ीसा के तटीय भागों, सुंदरवन तथा पश्चिम बंगाल के सीमित भागों, उत्तरी बिहार तथा तमिलनाडु के दक्षिणी पूर्वी तट पर फैली है।

प्रश्न 22.
मिट्टी अपरदन के कारण का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मिट्टी अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion) : मृदा अपरदन के निम्नलिखित कारण हैं

  1. वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व मरुस्थलीय क्षेत्रों में गरम आंधियाँ चलती हैं जो भूमि की ऊपरी परत की ढीली मिट्टी को उड़ा ले जाती हैं। इस क्रिया द्वारा मिट्टी की ऊपरी परत नष्ट होती रहती है और कालान्तर में ये क्षेत्र अनुपजाऊ बन जाते हैं।
  2. कृषि के अवैज्ञानिक ढंग अपनाकर किसान स्वय मृदा अपरदन को बढ़ाता है। ढालू क्षेत्र में समोच्च रेखाओं से, समानांतर जुताई न करने से, दोषयुक्त फसल चक्र अपनाने से मृदा का अपरदन बढ़ता है।
  3. जब मूसलाधार वर्षा होती है तो वर्षा का जल धरातल पर बहता है और वह मृदा का अपरदन करता है।
  4. जिन क्षेत्रों में वनस्पति को नष्ट कर दिया गया है वहाँ मिट्टी का अपरदन अधिक होता है, क्योंकि वनस्पति की जड़ें मिट्टी को जकड़े रखती हैं, इसलिए जहाँ वनस्पति अधिक पाई जाति है, मृदा अपरदन कम होता है।
  5. आवश्यकता से अधिक पशुचारण से भी मिट्टी का अपरदन होता है, क्योंकि पशु चरते समय अपने खुरों से मिट्टी को उखाड़कर ढीला कर देते हैं जिससे मिट्टी वर्षा तथा वायु के प्रभाव से अपरदित हो जाती है।
  6. भारत के कुछ भागों में स्थानांतरी कृषि की जाती है। यह विधि मृदा अपरदन में सहायक होती है।

प्रश्न 23.
पूर्वी तटीय मैदान एवं पश्चिमी तटीय मैदान की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय मैदान की तलना :

पूर्वी तटीय मैदान पश्चिमी तटीय मैदान
1. विस्तार : पूर्वी तटीय मैदान उत्तर में सुवर्ण रेखा नदी से दक्षिण में कुमारी अंतरीप विस्तृत है। 1. विस्तार : पश्चिमी तटीय मैदान प्रायद्वीप के पश्चिमी भाग में खंभात की खाड़ी से कुमारी अंतरीप एक विस्तृत है।
2. लंबाई और चौड़ाई : पूर्वी तटीय मैदान 1,100 किलोमीटर लंबाई और 120 किलोमीटर चौड़ाई में विस्तृत है। 2. लंबाई और चौड़ाई : पश्चिमी तटीय मैदान 1,500 किलोमीटर लंबे तथा 64 किलोमीटर चौड़े हैं।
3. विभाग : पूर्वी तटीय मैदान को उत्कल का मैदान, आंध्र का मैदान तथा तमिलनाडु का मैदान विभागों में बाँटा गया है। 3. विभाग : पश्चिमी तटीय मैदान को गुजरात का मैदान, कोंकण का तटीय मैदान, मालावर का तटीय मैदान, केरल का तटीय मैदान आदि भागों में बाँटा गया है।
4. धरातल : महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी जैसी बड़ी-बड़ी नदियों ने बड़े-बड़े डेल्टा बनाए हैं। इसकी सीधी तटीय रेखा है। विशाखपट्टनम तथा चेन्नई यहाँ के बड़े बंदरगाह है। 4. धरातल : इस मैदान में कई छोटी व तीव्रगामी नदियाँ बहती हैं जो डेल्टा बनाने में असमर्थ हैं। इसकी तटीय रेखा ऊबड़-खाबड़ है। पश्चिमी तट पर मुंबई, कांडला, मंगलौर तथा कोचीन आदि प्रसद्धि बंदरगाह हैं।
5. जलवायु : उष्ण कटिबंधीय जलवायु, उच्च आर्द्रता तथा सामान्य वर्षा। 5. जलवायु : सम जलवायु पूरे वर्ष, उच्च तापमान, अधिक वर्षा।

प्रश्न 24.
मिट्टी अपरदन को कितने भागों में बाटा गया है ?संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मृदा अपरदन के प्रकार (Types of Soil Eriosion) : मृदा अपरदन दो प्रकार के होते हैं –
i. परतदार अपरदन (Sheet Erosion)
ii. नालीदार अपरदन (Gulley Erosion)

i. परतदार अपरदन (Sheet Erosion) : जब अत्यधिक वर्षा के कारण निर्जन पहाड़ियों की मिट्टी जल में घुलकर बह जाती है या वायु मिट्टी की ऊपरी परत को अपने साथ उड़ा ले जाती है तो उसे परतदार अपरदन कहते हैं। इस प्रकार का अपरदन ढ़ालू खेत, खाली पड़ी भूमि में तथा अत्यधिक चराई, वनों के नाश तथा बदलती खेती के फलस्वरूप होता है। परतदार अपरदन राजस्थान, पंजाब, दक्षिणी-पश्चिमी हरियाणा के क्षेत्र तथा हिमालय क्षेत्र में होता है। परतदार अपरदन की क्रिया बहुत हीं धीमी गति से होती है जिसका आभास नहीं होता, परंतु इस प्रक्रिया के द्वारा एक विस्तृत क्षेत्र की मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।

ii. नालीदार अपरदन (Gulley Erosion) : तीव्र ढाल तथा अधिक वर्षा वाले भागों में बहता हुआ जल मिट्टी को कुछ गहराई तक काट देता है जिससे धरातल में कई फुट गहरे गड्दु बन जाते हैं। चंबल नदी की घाटी में इस प्रकार का अपरदन देखने को मिलता है।
मरुस्थलीय भागों में वायु द्वारा भी मृदा का अपरदन होता रहता है। इसके द्वारा मृदा को काटकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर बिनाया जाता है। इसे वायु द्वारा अपरदन कहते हैं।

प्रश्न 25.
लक्षद्वीप एवं अंडमान निकोबार द्वीप समूह में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लक्षद्वीप एवं अंडमान निकोबार द्वीप समूह में अन्तर :

लक्षद्वीप अंडमान निकोबार द्वीप समूह
1. स्थिति : ये द्वीप समूह 8° से 12° उत्तर और 71° 40′ से 74° पूर्वी देशान्तर के बीच फैले हैं। 1. स्थिति : ये द्वीप समूह 4° से 10° 20′ उत्तरी अक्षांश और 92° 20′ से 94° पूर्वी देशांतरों के बीच फैले हैं।
2. क्षेत्रफल : ये 108.78 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं। 2. क्षेत्रफल : ये 8326.85 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं।
3. उत्पत्ति : इनकी उत्पत्ति प्रवाल से हुई है। जिनका विकास ज्वालामुखी चोटियों के आस-पास हुआ है। 3. उत्पत्ति : ये नवीन बलित पर्वत हैं और इनमें से कुछ की उत्पत्ति ज्वालामुखी क्रियाओं से हुई है।
4. विभाग : उत्तरी भाग अमन द्वीप; शेष भाग लक्षद्वीप और सुदूर दक्षिणी भाग को मिनीकोय कहते हैं। 4. विभाग : इसके अंडमान और निकोबार के रूप में दो भाग हैं। अंडमान में उत्तरी, मध्य और दक्षिणी भाग सम्मिलित हैं। दक्षिणी भाग जिसे महान निकोबार कहते हैं सबसे बड़ा द्वीप समूह है।
5. द्वीपों की संख्या : लक्ष द्वीप समूह में 43 द्वीप हैं। 5. द्वीपों की संख्या : अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 204 द्वीप हैं।

प्रश्न 26.
भारत में सिंचाई के विभिन्न पद्धति का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में स्थलाकृति एवं जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पायी जाती है। इस विविधता के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग सिंचाई साधनों का प्रयोग किया जाता है।
भारत में सिंचाई के ग्रमुख साधन है :

  1. नहरें (Canals)
  2. कुए एवं नलकूप (Well and Tubewell)
  3. तालाब (Tank)

नहरें (Canais) :- नहरें भारत में सिंचाई का एक महत्वपूर्ण साधन है। भारत में विश्व का सर्वाधिक नहर सिंचित क्षेत्र है। नहर मुख्यत: दो प्रकार के हैं। कुल 35 % नहर के द्वारा सिंचाई किया जाता है।
(क) अनित्यवाही नहरें (Imperenial Canals)
(ख) नित्यवाही नहेरें (Perenial Canals)

कुएँ एवं नलकूप (Well and Tubewell) :- वर्तमान समय में कुएँ एवं नलकूपों का योगदान 57 % है, इनमें नलकूप सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता क्योंकि यह एक प्रकार का आधुनिक सिंचाई का साधन है, जबकि कुएँ सबसे प्राचीन सिंचाई के साधन हैं। नलकूप के द्वारा 30 % पूरे भारत में सिंचाई किया जाता है।

नलकूपों द्वारा सिंचाई मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर-प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं गुजरात में की जाती है। इन क्षेत्रों की चट्टाने मूलायम हैं एवं 15 से 90 मीटर की गहराई के बीच भूमिगत जल का भंडार काफी अधिक मात्रा में मौजुद है। नलकूपों की सर्वाधिक संख्या 50 % से अधिक उतर प्रदेश में है, पुन: भारत के तीन चौथाई-नलकूपा हरियाणा, पंजाब एवं उतर प्रदेश में हैं।

तालाब (Tank) :- भारत में तालाब द्वारा सिचित क्षेत्र का लगभग 17.2 % भाग सींचा जाता था जो वर्तमान में घटकर मात्र 7 % हो चुका है। तालाबों द्वारा सिंचाई मुख्य रूप से मध्य एवं दक्षिणी भारत में होती है। इन क्षेत्रों में तालाब सिंचाई के महत्वपूर्ण साधन होने का निम्नलिखित कारण है :

  1. इन क्षेत्रो में अधिकांश नदियाँ बरसाती है। अत: सदावाहनी नहरें नहीं निकाली जा सकती है।
  2. कठोर संरचना एवं भूमिगत जल स्तर काफी नीचा होने के कारण कुएँ एवं नलकूपों का निर्माण कठिन है
  3. ऊबड़-खाबड़ भूमि के कारण प्रायद्वीपीय भारत में अनेक प्राकृतिक तालाब पाये जाते हैं।

प्रश्न 27.
हिमालय पर्वत और प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियों में अन्तर स्पष्ट करें। अथवा, उत्तर भारत अथवा दक्षिण भारत की नदियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

हिमालय पर्वत की निदयाँ अथवा, उत्तर भारत की नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की नदियाँ अथवा, दक्षिण भारत की नदियाँ
1. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वलित पर्वतों से निकलती हैं जिसके कारण अपने पर्वतीय खंड में उनकी धारा बहुत तेज होती है। ये अभी अपने मार्ग की शैलों को काटने का कार्य कर रही हैं। 1. प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियाँ अधिक प्राचीन हैं। उनकी घाटियाँ चौड़ी एवं छिछली हैं तथा प्रपातों को छोड़कर इनका ढाल साधारण है।
2. हिमालय की नदियाँ हिमाच्छदित प्रदेशों से निकलती हैं जिसके कारण पूरे साल पानी से भरी रहती हैं। 2. प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा पर निर्भर रहती हैं, जिसके कारण ये नदियाँ ग्रीष्म ऋतु में सूर जाती हैं।
3. हिमालय की नदियाँ बहुत कम प्रपात बनाती हैं। 3. प्रायद्वीपीय पठार से निकलन वाली नदियाँ प्रायः पठार से उतरते समय मार्ग में झरने बनाती हैं।
4. हिमालय की नदियाँ मैदानी भाग में विसर्प बनाती हुई बहती हैं। 4. प्रायद्वीपीय नदियाँ उथली घांटियों में बहती हैं।
5. हिमालय की नदियाँ विशाल गार्ज बनाती हैं। 5. प्रायद्वीपीय नदियाँ गार्ज नहीं बनाती हैं।
6. हिमालय की नदियाँ पूर्ववर्ती नदियाँ हैं। 6. प्रायद्वीपीय नदियाँ अनुवर्ती नदियाँ हैं।
7. हिमालय की नदियों का बेसिन काफी बड़ा है तथा उनका जलग्रहण क्षेत्र हजारों वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 7. प्रायद्वीपीय नदियों का बेसिन तथा जल ग्रहण क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा है।
8. हिमालय की नदियों की अपरदन-शक्ति बहुत अधिक है। वे अपने साथ अधिक मात्रा में तलछट बहाकर ले जाती हैं। 8. प्रायद्वीपीय नदियों की अपरदन शक्ति बहुत ही कम है क्योंकि वे प्रौढ़वस्था में पहुँच गई हैं।

प्रश्न 28.
भारत के किन्हीं दो प्राकृतिक वनस्पति क्षेत्रों के वितरण एवं विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर :
चिरहरित वन की पेटियाँ (उष्ण कटिबंधीय वर्षा पवन) – ये पेटियाँ उष्ण एवं अधिक वर्षावाले (200 सेंटीमीटर या इससे अधिक) क्षेत्रों में हैं। पश्चिमी घाट, अंडमान द्वीप, हिमालय की तराई, पूर्वी हिमालय के उपप्रदेश तथा असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा आदि ऐसे ही क्षेत्र हैं। पश्चिमी घाट में चिरहरित वन के क्षेत्र 450 से 1,350 मीटर की ऊँचाई के बीच और असम में 1,000 मीटर की ऊँचाई तक मिलते हैं। वैसे क्षेत्रों में जहाँ 250 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है, ये वन विशेष रूप से सघन हैं।

जहाँ अपेक्षाकृत कम वर्षा है, ये वन चिरहरित (सदाबहार) से अर्द्धचिरहरित में बद़ल जाते हैं। उच्य तापमान एवं अधिक वर्षा के कारण ही ये वन अत्यंत घने होते हैं और इनमें पेड़ों की ऊँचाई 60 मीटर तक चली जाती है। पेड़ों के ऊपरी सिरों पर इतनी शाखाएँ होती हैं कि पेड़ छाते का आकार ले लेते हैं। विषुवतीय वनों की तरह ही इनकी लकड़ी कड़ी होती है। इन वनों में विविध प्रकार के पेड़ मिले होते हैं। प्रमुख पेड़ों में महोगनी, आबनूस, रोजवुड, बेत, जारूल, ताड़, सिनकोना और रबड़ हैं। बाँस मुख्यतः नदियों के किनारे और रबड़ पश्चिमी घाट तथा अंडमान में मिलते हैं।

इन वनों में प्रवेश कर लकड़ी काटना कठिन कार्य है (एक तो लकड़ी कड़ी और भारी होती है और दूसरे, एक स्थान पर एक ही किस्म के पेड़ न मिलकर अनेक प्रकार के पेड़ मिला करते है)। इन वनों में बंदर, लंगूर और तरह-तरह के पक्षी बहुतायत से मिलते हैं। एक सींगवाला गैंडा इसी वन का जंगली पशु है जो मुख्य रूप से असम क्षेत्र में पाया जाता है। विशाल जंगली पशु हाथी भी यहाँ पाये जाते हैं।

शुष्क और कँटीले वन की पेटियाँ – इसमें वे क्षेत्र आते है जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेंटीमीटर से 70 सेंटीमीटर तक होती है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग तथा मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात इत्यादि शुष्क वन की पेटी में पड़ते हैं। यहाँ के अधिकांश वन साफ किए जा चुके हैं, अतः कहीं भी विस्तृत वन नहीं मिलते। वर्षा की कमी और जलवायु की विषमता के कारण यहाँ ऊँचे पेड़ो का अभाव है। प्रायः छोटे पेड़ तथा झाड़ियाँ उगती हैं। इनकी जड़ें लंबी और पत्तियाँ छोटी होती हैं; छाल कड़ी, कंटीली और मोटी हुआ करती है।

इनमें कीकर, बबूल, खैर, खजूर, झाऊ, नागफनी इत्यादि के पेड़ प्रमुख हैं। जहाँ-तहाँ शीशम, आँवला आदि के भी पेड़ उगे हुए देखे जाते हैं। विविध उपयोग में आने के कारण बबूल का आर्थिक महत्व उल्लेखनीय है। 50 सेटीमीटर से कम वर्षावाले क्षेत्रों में नाममात्र की वनस्पति उगती है। जहाँ-तहाँ सवाना की भाँति घास उगती है। मरुस्थलीय प्रदेश की वनस्पति में कंटीली झाड़ियाँ ही प्रमुख हैं। शुष्क वन क्षेत्रों में जंगली गधे, ऊँट आदि पशु मिलते हैं।

प्रश्न 29.
दामोदर घाटी योजना (D.V.C) का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
दामोदर घाटी योजना : दामोदर नदी छोटानागपुर की पहाड़ी से निकलकर झारखंण्ड और पश्चिम बंगाल के हजारीबाग, मानभूमि, वर्द्धमान, बाकुड़ा, हुगली और हावड़ा जिलों में बहती हुई कोलकत्ता से 50 कि०मी० दक्षिण हुगली नदी में मिल जाती है। अब तक इस नदी में प्रत्येक तीसरे वर्ष बाढ़ आती रहती थी। इसी कारण इसे पश्चिम बंगाल की शोक नदी भी कहा जाता है। दामोदर के ऊपरी उपत्यका में उर्वरा मिट्टी, जल, वन और खनिज सभी उपयोगी वस्तुएँ हैं। नदी के दोनों तरफ रानीगंज, झरिया, बोकरो, रामगढ़ और कर्णपुरा के कोयला क्षेत्र हैं।

अमेरिका की टेनसी घाटी योजना के आधार पर सन् 1945 ई० में दामोदर घाटी योजना तैयार की गई। 1948 ई० में दामोदर घाटी कार पोरेशन की स्थापना हुई। इसकी देखभाल के लिये तिलैया, कोनार मेभन और पंचेत पहाड़ी के बाँध बने। बोकोर में कोयला द्वारा गालित विद्युत घर बनाया गया जो एशिया का सबसे संचालित विद्युत घर है। दुर्गापुर में सिंचाई के लिए 672 मीटर लम्बा और 11.50 मीटर ऊँचा बाँघ बनाया गया है। इससे नहरें निकालकर वर्द्धमान और बाकुड़ा में सिंचाई होती है।

दामोदर घाटी योजनाएँ निम्नलिखित बातों को ध्यान में रख कर बनाया गया है :

  1. सिंचाई की समुचित व्यक्स्था कराना।
  2. जल विद्युत उत्पादन पर बल देना।
  3. नदियों में बाढ़ जैसे प्रकोप की रोकथाम करना।
  4. मिट्टी का कटाव रोका जाय तथा मिट्टी की रक्षा करना।
  5. पीने योग्य पानी की सुविधा उपलब्ध कराना।
  6. नौका बिहार द्वारा मनोरंजन का साधन।
  7. वनों के क्षेत्र का विस्तार करना।
  8. स्वास्थवर्द्वक स्थान बनाया जाना।
  9. जल एकत्रित कर तालाब में मत्सय पालन करना।
  10. मलेरिया जैसे खतरनाक बिमारी पर रोकथाम करना।

प्रश्न 30.
वन संरक्षण पर इतना अधिक जोर क्यों दिया गया है?
उत्तर :
वन संरक्षण की आवश्यकता : निम्नलिखि कारणों से वनों का संरक्षण आवश्यक है :
विभिन्न प्रकार की उपजों की प्राप्ति : वनों से न केवल बहुमुल्य लकड़ियाँ ही प्राप्त होती है बल्कि इनसे कई प्रकार के अन्य पदार्थ भी प्राप्त होते है लकड़ियाँ जलावन, फर्नीचर एवं भवन निर्माण के काम आती है। इनसे कागज तथा दियासलाई जैसे उद्योगो के लिए कच्चे माल प्राप्त होते है। इनसे फल, गोंद, लाख, रेशम, मधु आदि भी प्राप्त होते है अत: इन पदार्थों को प्राप्त करने के लिए वनों का संरक्षण आवश्यक है।

वायु प्रदूषण को कम करना : मनुष्य एवं अन्य जीव श्वसन की क्रिया में ऑक्सीजन लेते है और कार्बन-डाईआक्साइड गैसे छोड़ते है। अगर यह वायु शुद्ध न हो तो वायुमण्डल में कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाएगी जिससे जीवधारियो को श्वांस लेने में कठिनाई होगी और वे मर जाएंगे परन्तु पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में इस दूषित वायु को ग्रहण करते है जिसमें से वे कार्बन को ले लेते है तथा शुद्ध ऑक्सीजन वायु छोड़ते है। इस प्रकार पौधे वायु को शुद्ध करके वायुमण्डल को प्रदूषण से रक्षा करते है।

मिट्टी के कटाव की रोकथाम : वन वायु एवं पानी की गति को कम करते है। साथ ही पौधों की जड़े भूमि को जकड़ लेती है। इस प्रकार वन मिट्टी के कटाव को रोककर मानव का काफी उपकार करते है।

वर्षा में सहायक : वन भाप भरी हवाओ को रोक कर वर्षा कराने में सहायक होते है।

बाढ़ की रोकथाम : वन पानी के बहाव की गति धीमी कर देती है जिससे बाढ़ का प्रकोप कम हो जाता है।

मरुस्थलो के विस्तार को रोकना : वन बालू को आगे बढ़ने से रोकते है। इस प्रकार बनों से मरुस्थलो के प्रसार पर नियंत्रण होता है।

प्राकृतिक सौदर्य के भण्डार : वन सुन्दर एवं मोहक दृश्य उपस्थित करते है और वे देश के प्राकृतिक सौंदर्य की वृद्धि करते है। इस प्रकार वन पर्यटन व मनोरंजन के केन्द्र होते है।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

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WBBSE Class 10 Geography Chapter 4 Question Answer – अपशिष्ट प्रबंधन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
एक रेडियोधर्मी अपशिष्ट का नाम लिखिये।
उत्तर :
आणविक ऊर्जा संयंत्र।

प्रश्न 2.
प्लास्टिक किस प्रकार का अपशिष्ट पदार्थ है ?
उत्तर :
पुनर्चक्रीय अपशिष्ट।

प्रश्न 3.
ठोस अपशिष्ट का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
प्लास्टिक।

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प्रश्न 4.
बैटरी किस प्रकार का वर्ज्य पदार्थ हैं ?
उत्तर :
बैटरी जहरीला या विनाशक अपशिष्ट हैं, जिसमें रेडियेसम और टाक्सिन रहता हैं।

प्रश्न 5.
दो कृषि अपशिष्ट का नाम बतायें।
उत्तर :
(i) लकड़ी के कचरे
(ii) फसलों के डंठल।

प्रश्न 6.
CNG का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Compressed Natural Gas.

प्रश्न 7.
फ्लाई ऐश से किस इमारती वस्तु का निर्माण किया जा सकता है ?
उत्तर :
फ्लाइ ऐश इंट।

प्रश्न 8.
D.D.T. का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर :
D.D.T. का पूरा नाम Dichloro diphenyle Tri-chlorethane है। संयुक्त राज्य अमेरिका में यह सन् 1972 से ही प्रतिबंधित है। मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को समाप्त करने में इसका उपयोग होता है।

प्रश्न 9.
एक जैवरूप से विघटित होने वाले अपशिष्ट का नाम लिखिए।
उत्तर :
फलों एवं सब्जियों के छिलके।

प्रश्न 10.
W.H.O का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation).

प्रश्न 11.
D.D.T किस प्रकार का उर्वरक है ?
उत्तर :
D.D.T. एक रासायनिक उर्वरक है।

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प्रश्न 12.
उस यन्त्र का क्या नाम है जो स्वचालित वाहनों से निकलने वाले धुएँ से विषैले पदार्थों को अलग करता है ?
उत्तर :
सीनसिनेटर।

प्रश्न 13.
हानिकारक अपशिष्टों के जमाव का विशिष्ट नाम क्या है ?
उत्तर :
आपदा अपशिष्ट (Hazard waste) या विषैला अपशिष्ट (Toxic waste)

प्रश्न 14.
विषैले अपशिष्टों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जली बैटरियाँ, कीटनाशक, कल कारखानों से निकलने वाले हानिकारक खाद्य आदि।

प्रश्न 15.
एक ठोस वर्ज्य पदार्थ का नाम लिखे।
उत्तर :
कागज तथा प्लास्टिक।

प्रश्न 16.
तरल वर्ज्य पदार्थ के नाम बताए।
उत्तर :
मल-मूत्र।

प्रश्न 17.
गैसीय वर्ज्य-पदार्थ के नाम लिखे।
उत्तर :
कार्बन डाई अक्साइड।

प्रश्न 18.
विषैले वर्ज्य पदार्थ का नाम लिखे।
उत्तर :
कीटनाशक द्वाइयाँ।

प्रश्न 19.
किस क्षरण के कारण ठोस वर्ज्य पदार्थ मिट्टी में नीचे दब जाता है।
उत्तर :
भूक्षरण।

प्रश्न 20.
कीटनाशक रसायन से होने एक रोग का नाम लिखें।
उत्तर :
कैसर।

प्रश्न 21.
NO2 के कारण क्या होता है ?
उत्तर :
पलमानरी हेमरेज विमारी।

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प्रश्न 22.
वायु प्रदूषण के कारण क्या होता है ?
उत्तर :
श्वांस लेने में कठिनाई अथवा श्वांस से सम्बन्धित बिमारी।

प्रश्न 23.
पृथ्वी पर कुल जल का कितना प्रतिशत शुद्ध जल है।
उत्तर :
लगभग 2.5 प्रतिशत।

प्रश्न 24.
हरित ग्रह प्रभाव गैस का नाम बताएँ।
उत्तर :
CO2

प्रश्न 25.
रेडियोधर्मी वर्ज्य पदार्थ को कितने भागों में बांटा गया है।
उत्तर :
तीन।

प्रश्न 26.
किसके कारण मिट्टी में अम्लीय बढ़ जाता है।
उत्तर :
वज्य पदार्थों से।

प्रश्न 27.
शहरों में जल क्यों जम जाता है।
उत्तर :
ठोस वर्ज्य पदार्थ के कारण।

प्रश्न 28.
विश्व प्रदूषण दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर :
5 जून।

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प्रश्न 29.
फेंफरा का कैंसर किस प्रदूषण के कारण होता है ?
उत्तर :
हाइड्रोकार्बन के कारण।

प्रश्न 30.
हुगली नदी में बढ़ रहे एक जीवाणु का नाम लिखो।
उत्तर :
कोलीफार्म जीवाणु (Coliform bacteria)।

प्रश्न 31.
विज्ञान के प्रसार ने मनुष्य को सबसे खतरनाक कौन-सा अपशिष्ट दिया है ?
उत्तर :
रेडियोधर्मी।

प्रश्न 32.
जलीय जीव किस अपशिष्ट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं ?
उत्तर :
तरल अपशिष्ट से।

प्रश्न 33.
गैसीय वर्ज्य पदार्थ कौन-कौन है ?
उत्तर :
(i) विषैले वर्ज्य पदार्थ।
(ii) विषरहित वर्ज्य पदार्थ।

प्रश्न 34.
कौन पदार्थ सदैव विखण्डन की प्रक्रिया से गुजरते हैं ?
उत्तर :
ठोस पदार्थ सदैव विखण्डन की प्रक्रिया से गुजरते है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
अपशिष्टों का पृथक्कीकरण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर :
अपशिष्टों का पृथक्कीकरण : ठोस अपशिष्टों का विभिन्न वर्गो में पृथक्कीकरण अपशिष्ट प्रबन्धन का एक महत्वपूर्ण तरीका है। वर्गानुसार उसके निपटारे एवं पुनर्चक्रीकरण की विधियाँ अपनाई जा सकती है। उदाहरणस्वरूप प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाले अपशिष्ट जैसे भोजन के अंश फलो एवं सब्जियों के छिलके आदि का उर्वरक निर्माण एवं प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होने वाले अपशिष्टों जैसे धातु, काँच, प्लास्टिक आदि का पुनर्चक्रण किया जा सकता है। अपशिष्टों के सोत अर्थात् जहाँ ये उत्पन्न होते है वहीं इनके पृथक्कीकरण में आसानी रहती है। सूखे एवं गीले अपशिष्टों को अलग-अलग डस्टविन में रखना चाहिए।
अथवा
अपशिष्टों का पुन: चक्रण (Recycling) से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
खतरनाक अपशिष्टों का पुन:संसाधन में बदलना ही अपशिष्टों का पुन: चक्रण (Recycling) कहलाता है।

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प्रश्न 2.
अपशिष्ट प्रबन्धन में भूमि का भराव से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
भूमि भराव (Land Fill) : अपशिष्टों के प्रबन्धन एवं निस्तारण के लिए यह आवश्यक है कि जिन पदार्थों का दोबारा उपयोग किसी भी रूप में नहीं किया जा सकता है उन्हें नीचे तल की भूमि भरने(Land Fill) के काम में ले आवे ।

प्रश्न 3.
अपशिष्ट के नवीनीकरण से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
इस्तेमाल किए गए पदार्थों का पुन: चक्रण द्वारा उपयोग की जाने वाले वस्तुओं के रूप में बदलना नवीनीकरण कहलाता है। 4. तरल वर्ज्य पदार्थ से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
तरल रूप में पाये जानेवाले अवशिष्ट पदार्थों, जैसे घरेलू कूड़ा-कर्कट, वाहित मल, औद्योगिक बहि:साव एवं कृषि बहि:साव आदि को तरल वर्ज्य पदार्थ कहा जाता है। जैसे – विभिन्न प्रकार के रंग, तेल, घी, दवाइयाँ आदि।

प्रश्न 5.
वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन क्या है ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ प्रबंघन : वर्तमान समय में अनियंत्रित उत्पादन तथा उपभोग के द्वारा अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थों का उत्सर्जन हो रहा है, अतः उसे रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता है। वर्ज्य पदार्थ के प्रभावी व्यवस्थापन में समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों, पौर प्रतिष्ठान एवं सम्बन्धित सरकारी विभागों में आपसी समन्वय की अत्यन्त आवश्यकता है।

प्रश्न 6.
तरल वर्ज्य पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
तरल पदार्थ : तरल रूप में पाये जाने वाले अवशिष्ट पदार्थों, जैसे – घरेलू कूड़ा, वाहित मल, औद्योगिक बहि:स्ताव एवं कृषि:स्वाव आदि को तरल वर्ज्य पदार्थ कहते हैं।

प्रश्न 7.
अपशिष्ट प्रबन्ध क्या हैं ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ प्रबन्धन : वर्तमान समय में अनियंत्रित अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थ का उत्सर्जन हो रहा है, अतः उसे रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता हैं।

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प्रश्न 8.
रेडियोधर्मी अपशष्टि क्या हैं ?
उत्तर :
रेडियाधर्मी अपशिष्ट : ये अपशिष्ट परमाणु रियेक्टर से उत्पन्न होते हैं और जलीय-जीवन तथा पास में रहनेवाले जीव-जन्तुओं तथा मनुष्य को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 9.
घरेलू वर्ज्य पदार्थ से क्या समझा जाता है ?
उत्तर :
घरेलू वर्ज्य पदार्थ : घरों से उत्सर्जित कचरे, प्लास्टिक, मल-मुत्र, सीसा, टूटे-फूटे बर्तन, कागज, फर्नीचर वर्ज्य पदार्थ हैं।

प्रश्न 10.
स्कैब्बर क्या हैं ?
उत्तर :
स्कैब्बर (Scruber) : घर में जिस वस्तु का प्रयोग कर वर्ज्य पदार्थ को नष्ट किया जाता है उसे स्कैब्बर कहते हैं।

प्रश्न 11.
दो वर्ज्य पदार्थ के दुष्परणिम लिखिए ?
उत्तर :
(i) वर्ज्य पदार्थ की गंदगी से क्रमशः रिसाव के कारण भूतल पर जल प्रदूषण होता हैं।
(ii) वर्ज्य पदार्थों की ढ़ेर से मिट्टी की अम्लीय क्षमता बढ़ जाती हैं।

प्रश्न 12.
अम्ल वर्षा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
अम्ल वर्षा (Acid Rainfall) : अम्ल वर्षा की समस्या औद्योगिक देशों में अधिक गंभीर है । अम्ल वर्षा का मुख्य कारण सल्फर-डाई-अक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड आदि है, इन गैसों का मुख्य सोत जीवाश्म ईधन का मनामाने जगह पर जलाया जाना और औद्योगिक प्रक्रियाएँ है ।
CO2 के बाद सल्फर-डाई-ऑक्साइड वायु को प्रदूषित करने वाला दूसरा महत्वपूर्ण गैस है । NO2, SO2, CH4 जैसे गैसे जब वर्षा जल में घुलकर पृथ्वी पर गिरने लगा है तो अम्ल वर्षा होती है । अम्ल वर्षा के प्रभाव फसल, पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं पर अधिक पड़ता है, कुछ चर्म रोग भी इसी कारण देखने को मिलते है।

प्रश्न 13.
दो रेडियोधर्मी अपशिष्टों का नाम लिखें।
उत्तर :
(i) यूरेनियम
(ii) इंजेक्सन की सूई।

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प्रश्न 14.
वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन क्या हैं ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन : वर्तमान समय में अनियंत्रित उत्पादन तथा उपभोग के द्वारा अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थों का उत्सर्जन हो रहा है, अतः उसे रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य पदार्थ प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता है। वर्ज्य पदार्थ के प्रभावी व्यवस्थापन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों, पौर प्रतिष्ठान एवं सम्बन्धित सरकारी विभागों में आपसी समन्वय की अत्यन्त आवश्यकता है।

प्रश्न 15.
Scruber क्या हैं ?
उत्तर :
घर में जिस वस्तु का प्रयोग कर वर्ज्य पदार्थ को नष्ट किया जाता है उसे Scruber कहा जाता है।

प्रश्न 16.
गंगा कार्य योजना क्या है ?
उत्तर :
गंगा कार्य योजना :- गंगा नदी के प्रवाह मार्ग में अनेक कचड़ो का ढेर बढ़ते जा रहा है, उस योजना के अन्तर्गत 1985 ई० से गंगा नदी में प्रदूर्षण को रोक-थाम के लिए जिस योजना का प्रयोग किया गया है, उसे ही गंगा कार्य योजना कहा जा सकता है।

प्रश्न 17.
3 r क्या है ?
उत्तर :
3 r का अर्थ Reduce (परिणाम घटाना), Reuse (पुन: प्रयोग) और Recycle (पुन: चक्रीय) है।

प्रश्न 18.
दो वर्ज्य पदार्थ के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर :
(i) वर्ज्य पदार्थों की गंदगी के क्रमश: रिसाव से भूतल पर जल प्रदूषण होता है।
(ii) वर्ज्य पदार्थों की ढेर से मिट्टी में अम्लीय क्षमता बढ़ जाती है।

प्रश्न 19.
कम्पोस्टिंग या जैविक खाद (Composting) क्या है ?
उत्तर :
जैविक खाद निर्माण : प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाले अपशिष्ट पदार्थ, फलों एवं सब्जियों के छिलके एवं पत्तियाँ, बचा हुआ भोजन, कागज आदि का उपयोग जैविक खाद निर्माण में किया जा सकता है। इन सभी को एक गड्दे में डालकर ढँक दिया जाता है तथा कुछ महीनों तक छोड़ दिया जाता है। बैक्टीरिया इन पदार्थों को विघटित करके खाद में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 20.
विनाशक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
हानिकारक अपशिष्टों का मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को हानि बिना पुनः उपयोग में लाए जाने योग्य बनाना ही इनका पुर्चकण है। जैसे ज्वलनशील हानिकारक अपशिष्टों को जलाकर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। या इनका उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नवीन वस्तुओं का उत्पादन किया जा सकता है।

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प्रश्न 21.
वर्ज्य पदार्थों का वर्गीकरण करे।
उतर :
वर्ज्य पदार्थों को तीन भागों में रखा गया है –

  • ठोस
  • तरल
  • गैस।

प्रश्न 22.
तैरती राख क्या है ?
उत्तर :
कल-कारखानो की चिमनी से निकलने वाले कणो को तैरती राख कहा जाता है।

प्रश्न 23.
जैव मेडिकल वर्ज्य पदार्थ अथवा जैव उपचार कचरा क्या है ?
उत्तर :

  • पैथोलाजिकल
  • रेडियोधर्मी पदार्थ
  • खराब औरधिया।

प्रश्न 24.
दो बर्ज्य पदार्थ के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर :
(i) वर्ज्य पदार्थों की गंदगी के क्रमश: रिसाव से भूतल पर जल प्रदूषण होता है।
(ii) वर्ज्य पदार्थों की ढेर से मिट्टी में अम्लीय क्षमता बढ़ जाती है।

प्रश्न 25.
अन्तिम शोधन से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
माध्यमिक स्तर पर शोधित जल को एक विशाल खुले जल भण्डार में लाया जाता है। आवश्यकता अनुसार वायु संचालन की भी व्यवस्था रहती है। यहाँ जल धारण की संचय सीमा अधिक होती है उस शोधन में कुछ नाइट्रोजन एवं फास्फोरस जनित यौगिकों को दूर कर लिया जाता है।

प्रश्न 26.
वर्ज्य पदार्थ के प्रमुख स्रोत क्या है ?
उत्तर :
वर्ज्य पदार्थ के प्रमुख स्रोत – कचरा या वर्ज्य की उत्पत्ति धरो, कारखानो, कृषि क्षेत्र, अस्पताल, आणविक संयत्र तथा नागरपालिका द्वारा होती है।

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प्रश्न 27.
रेडियो धर्मी वर्ज्य पदार्थ का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
रेडियोधर्मी वर्ज्य पदार्थ का वर्गीकरण –

  • निम्न स्तर वर्ज्य
  • मध्यम स्तर वर्ज्य
  • उच्च स्तर वर्ज्य।

प्रश्न 28.
इलेक्ट्रॉनिक (विद्युत्) वर्ज्य पदार्थ से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
इलेक्ट्रानिक धातुएँ जैसे फ्रिज, टेलिवजन, वाशिंग मशीन, कम्प्यूटर आदि जब उपयोग योग्य नहीं रह जाते है तो ये कचरा हो जाते है। अतः उन्हें पुरर्चक्रण की कोई विधि नहीं होने के कारण ये स्क्रैप के रूप में बेच दिया जाता है।

प्रश्न 29.
कृषि वर्ज्य पदार्थ क्या है ?
अथवा
किन अपशिष्टों की उत्पत्ति कृषि कार्य से होती है ?
उत्तर :
जो वर्ज्य पदार्थ गहन कृषि एवं बड़े पैमाने पर फसलो के उत्पादन के बाद प्राप्त होते है तो उसे कृषिवर्ज्य पदार्थ कहा जाता है। इसके अन्तर्गत लकड़ी के कचरे, फसलो के डंठल मवेशियो द्वारा उत्पन्न कचरा मवेशिया के शव आदि वर्ज्य पदार्थ है।

प्रश्न 30.
गीले ब्रंश क्या है ?
उत्तर :
गीले बंश वायु को जल से गीला करके साफ रखता है उद्योगो की निष्कासित होने वाली गैसे एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती है। जिसमें पानी का छिड़काव होता रहता है। गैसों में मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते है तथा नीचे बैठे जाते है और मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती है। उसके अलावे जल में घुलनशील हानिकारक जैसे अमोनिया, सल्फर, डाईआक्साइड आदि भी वायु से अलग हो जाते है।

प्रश्न 31.
अम्ल वर्षा से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
अम्ल वर्षा (Acid Rainfall) : अम्ल वर्षा की समस्या औद्योगिक देशो में अधिक गंभीर है। अम्ल वर्षा का मुख्य कारण सल्फर-डाई-अक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्र ऑक्साइड आदि है, इन गैसो का मुख्य सोत जीवाश्म ईंधन का मनामाने जगह से जलाया जाना और औद्योगिक प्रक्रियाए है। CO2 के बाद सल्फर-डाई-ऑक्साइड वायु को प्रदूषित करने वाला दूसरा महत्वपूर्ण गैस है । NO2, SO2, CH4 जैसे गैसे जब वर्षा जल में घुलकर पृथ्वी पर गिरने लगता है तो अम्ल वर्षा होती है। अम्ल वर्षा के प्रभाव से फसल, पेड़-पौधो एवं जीव-ज़्तुओं पर अधिक पड़ता है, कुछ चर्म रोग भी इसी कारण देखने को मिलता है।

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प्रश्न 32.
क्षेत्रीय अपशिष्ट का दो उदाहरण दो।
उत्तर :
नालो का गन्दा पानी एवं कचरा प्लास्टिक क्षेत्रीय अपशिष्ट है।

प्रश्न 33.
लीचिंग क्या है ?
उत्तर :
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा मिट्टी में विद्यमान घुलनशील संघटक पानी में घुल जाते है और रिसतेहुए पानी के साथ मिट्टी से होकर नीचे के स्तरो में पहुँच जाते है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
गैसीय अपशिष्ट नियन्त्रण के क्या उपाय हैं ?
उत्तर :
गैसीय अपशिष्टों का उपचार (Treatment of Gaseous Waste) : विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों के बहि: साव से वायु प्रदूषित होती है। वायु को इन हानिकारक अपशिष्टों से मुक्त करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में निम्नलिखित दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator): उद्योगों के चिमनियों से निकलने वाले धुएँ में मिश्रित धूलकण या अन्य ठोस कणों को निकालने का यह सर्वोत्तम यन्त्र है। इसमे ॠणात्मक चार्ज इलेक्ट्रोड होते हैं। धनात्मक चार्ज धूल कण जब चिमनी से निष्कासित होने वाले धुओं के साथ मिश्रित होकर निकलते हैं तो ॠणात्मक इलेक्ट्रोड उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं जिससे ये नीचे बैठ जाते हैं। इस प्रकार चिमनी से हानिकारक धूल कणों से मुक्त गैस बाहर निकलती है।

गीले ब्रश (Wet Scrubbers): गीले बश या वेट स्कबर वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते हैं। उद्योगों से निष्कासित होने वाली गैसें एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती है जिसमें जल का छिड़काव होता रहता है। गैसों से मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते हैं तथा नीचे बैठने लगते हैं तथा इनसे मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती हैं। इसके अतिरिक्त जल में घुलनशील हानिकारक गैंसे ; जैसे – सल्फर डाईऑंक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, हाड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया आदि वायु प्रदूषक गैसें भी इस प्रक्रिया द्वारा वायु से मुक्त हो जाती है।

प्रश्न 2.
अपशिष्टों की मात्रा में कमी लाना किस प्रकार सम्भव है ?
उत्तर :
उत्पादन में कमी लाना : इस विधि को अपनाकर अपशिष्टों के उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे जहाँ तक सम्भव हो पैकेट वाली वस्तुओं को नहीं खरीदना। बाजार में खरीदारी करते समय प्लास्टिक के थैलों में वस्तुओं को न लेकर घर से लाए गए झोलों में लेना। ऐसी वस्तुओं को खरीदना जिनका पुन : उपयोग किया जा सके। लम्बे समय तक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं को खरीदना आदि।

पुन: उपयोग : उपयोग में लाए गए अपशिष्टों का बिना किसी परिवर्तन के पुन: उपयोग किया जाना ही इनका पुन: उपयोग है। इससे समय, रुपया, ऊर्जा एवं संसाधन सभी की बचत होती है। जैसे उपयोग में लाए गए रैपरों को पुन: उपयोग के लिए रखना। टूटे-फूटे सामानों जैसे फर्नीचर, खिलौने आदि की मरम्मत करके पुनः उपयोग में लाना आदि।

पुनर्चक्रीकरण : इसके अन्तर्गत कुछ अपशिष्टों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नयी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। जैसे लोहे एव शीशे के अपशिष्टों को गलाकर पुनः उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

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प्रश्न 3.
विघटित एवं अविघटित होने वाले अपशिष्टों में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर :

विघटित अपशिष्ट अविघटित अपशिष्ट
i. विघटित अपशिष्ट का प्रभाव पर्यावरण पर थोड़े समय तक पड़ता है। i. अविघटित अपशिष्ट पर्यावरण को लम्बे समय तक प्रभावित करता है।
ii. विघटित अपशिष्ट कुछ हद तक लाभ भी पहुँचाता है। ii. अविघटित अपशिष्ट सिर्फ नुकसानदायक होता है।
iii. फल-सब्जी के छिलके बचा हुआ खाना आदि विघटित अपशिष्ट हैं। iii. प्लास्टिक, ठोस पदार्थ, सीसा, आदि अविघटित अपशिष्ट होते हैं।

प्रश्न 4.
जैव खाद निर्माण में अपशिष्टों से क्या लाभ हैं ?
उत्तर :
प्राकृतिक रूप से विर्धटित होने वाले अपशिष्ट पदार्थ फलों एवं सब्जियों के छिलके एवं पत्तियाँ, बचा हुआ भोजन, कागज आदि का उपयोग जैविक खाद निर्माण में किया जा सकता है। इसके लिए उपरोक्त अपशिष्टों को एक गड्दु में डालकर ढँक दिया जाता है तथा कुछ महीनों तक छोड़ दिया जाता है। वैक्टिरिया इन पदार्थो को विघटित करके खाद में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रकार खाद बानाने के माध्यम से अपशिष्ट प्रबन्धन एक उपयोगी तरीका है।

प्रश्न 5.
गैसीय अपशिष्टों के नियंत्रण के लिए प्रभावकारी उपाय क्या अपनाये गये हैं ? (Board Sample Paper)
उत्तर :
गैसीय अपशिष्टों का उपचार (Treatment of Gaseous Waste) : विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों के बहि : साव से वायु प्रदूषित होती है। वायु को इन हानिकारक अपशिष्टों से मुक्त करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में निम्नलिखित दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator) : उद्योगों के चिमनियों से निकलने वाले धुएँ में मिश्रित धूलकण या अन्य ठोस कणों को निकालने का यह सर्वोत्तम यन्त्र है। इसमें ऋणात्मक चार्ज इलेक्ट्रोड होते हैं। धनात्मक चार्ज धूल कण जब चिमनी से निष्कासित होने वाले धुओं के साथ मिश्रित होकर निकलते हैं तो ॠणात्मक इलेक्ट्रोड उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं जिससे ये नीचे बैठ जाते हैं। इस प्रकार चिमनी से हानिकारक धूल कणों से मुक्त गैस बाहर निकलती है।

गीले ब्रश (Wet Scrubbers) : गीले बश या वेट स्कबर वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते हैं। उद्योगों से निष्कासित होने वाली गैसें एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती हैं जिसमें जल का छिड़काव होता रहता है। गैसों से मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते हैं तथा नीचे बैठने लगते हैं तथा इनसे मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती हैं। इसके अतिरिक्त जल में घुलनशील हानिकारक गैंसे ; जैसे – सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, हाड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया आदि वायु प्रदूषक गैसें भी इस प्रक्रिया द्वारा वायु से मुक्त हो जाती है।

प्रश्न 6.
अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका का वर्णन करो।
उत्तर :
अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका (Role of students in Waste Management) : छात्र भविष्य के होने वाले सजक नागरिक होंगे। अतः यदि शुरू से ही शिक्षा और व्यवहार द्वारा छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में सचेत किया जाय तो निश्चित रूप से छात्र इसमें सहायक हो सकते हैं। यदि छात्र अपशिष्ट पदार्थ क्या है जान जाय तो अपशिष्ट निर्माण की प्रक्रिया को ही रोक सकते हैं।

उदाहरणस्वरूप यदि छात्रों को शिक्षा द्वारा समझा दिया जाय कि जिस प्लास्टिक के सामानों का उपयोग वे करते हैं उसको सड़कर समाप्त होने में दस लाख वर्ष लगते हैं या उसको जलाने से जहरीली गैसे निकलती हैं या खुले स्थानों पर फेंक देने पर जल जमाव होता है या पशु उसको खा लेते हैं तो कुछ दिनों बाद पशु मर भी जाते हैं तो छात्र प्लास्टिक के थैलों का उपयोग न करने का निश्चित कर सकते हैं।

समाज का सबसे बड़ा वर्ग विद्यार्थी वर्ग है। अत: किसी चीज के प्रचार-प्रसार में विद्यार्थी वर्ग की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि विद्यार्थी जान जाये कि प्लास्टिक देश और विश्व की सबसे बड़ी समस्या है तो इससे निपटने में विद्यार्थी वर्ग सबसे बड़ी भूमिका ले सकते है।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

प्रश्न 7.
अपशिष्ट प्रबन्धन के निपटान की भूमि भराव विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भूमि भराव (Land Fill) : अपशिष्टों के प्रबन्धन एवं निस्तारण के लिए यह आवश्यक है कि जिन पदार्थों का दोबारा उपयोग किसी भी रूप में नहीं किया जा सकता है उन्हें नीचे तल की भूमि भरने(Land Fill) के काम में ले आवे।

प्रश्न 8.
भागीरथी-हुगली नदी के जल को प्रदूषण से रोकने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?
उत्तर :

  1. बोर्ड को जल प्रदूषित करने वाले व्यक्ति के बारे में सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी को दें और यह सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई हो। आप प्रेस में भी इस बारे में लिख सकते हैं।
  2. घर की नाली या उद्योग की नाली में ऐसा कोई कचरा न डालें जो नदी-नाले, तालाब, झील या समुद्र जैसे किसी जलसोत में सीधे जा सकती हो।
  3. बेकार की चीजें बहाने के लिए फ्लश का उपयोग न करें। ये आपके घर से चली जाएगी पर किसी और स्थान पर समाने आएगी और जल को प्रदूषित करेगी।
  4. बागों में रासायनिक खादों के स्थान पर कंपोस्ट का इस्तेमाल करें।

प्रश्न 9.
अपशिष्ट प्रबन्धन में छात्रों की क्या भूमिका हो सकती हैं ?
उत्तर :
अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका (Role of students in Waste Management) : छात्र भविष्य के होने वाले सजग नागरिक होंगे। अत: यदि शुरू से ही शिक्षा और व्यवहार द्वारा छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में सचेत किया जाय तो निश्चित रूप से छात्र इसमें सहायक हो सकते हैं। यदि छात्र अपशिष्ट पदार्थ क्या है जान जाये तो अपशिष्ट निर्माण की प्रक्रिया को ही रोक सकते हैं। उदाहरणस्वरूप यदि छात्रों को शिक्षा द्वारा समझा दिया जाय कि जिस प्लास्टिक के सामानों का उपयोग वे करते हैं उसको सड़कर समाप्त होने में दस ल्भख वर्ष लगते हैं या उसको जलाने से जहरीली गैसे निकलती हैं या खुले स्थानों पर फेंक देने पर जल जमाव होता है या पशु उसको खा लेते हैं तो कुछ दिनो बाद पशु मर भी जाते हैं तो छात्र प्लास्टिक के थैलों का उपयोग न करने का निश्चय कर सकते हैं।

समाज का सबसे बडा वर्ग विद्यार्थी वर्ग है। अत: किसी चीज के प्रचार-प्रसार में विद्यार्थी वर्ग की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि विद्यार्थी जान जाये कि प्लास्टिक देश और विश्व की सबसे बड़ी समस्या है तो इससे निपटने में विद्यार्थी वर्ग सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते है।

प्रश्न 10.
औद्योगिक अपशिष्ट अधिक हानिकारक होते हैं क्यों ?
उत्तर :
उद्योगों से उत्सर्जि पदार्थ पानी के साथ घुलकर रासायनिक किया करता है और पानी को अशुद्ध तथा प्रदूषित कर देता है। सूती मिलों, चीनी मिलों और अन्य अद्योगों कचरे नदियों में गिराये जाते हैं। रासायनिक कारखानों में उत्सर्जि कचरे नदियों और तालाबों के पानी में विभिन्न प्रकार के नुकसानदेह उत्पाद घोल देते हैं जो पौधों और पशुओं के लिये खतरनाक बन जाता है। ये जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत के रूप में हैं।

प्रश्न 11.
भागीरथी-हुगली नदी के जल को प्रदूषण रोकने के लिए हम क्या कर सकते हैं ?
उत्तर :
बोर्ड को जल प्रदूषित करने वाले व्यक्ति के बारे में सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारों को दें और यह सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई हो। आप प्रेस में भी इस बारे में लिख सकते हैं।

  1. बोर्ड को जल प्रदूषित करने वाले व्यक्ति के बारे में सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी को दें और यह सुनिश्चित करें कि उचित कार्रवाई हो। आप प्रेस में भी इस बारे में लिख सकते हैं।
  2. घर की नाली या उद्योग की नाली में ऐसा कोई कचरा न डालें जो नदी-नाले, तालाब, झील या समुद्र जैसे किसी जलस्रोत में सीधे जा सकती हो।
  3. बेकार की चीजें बहाने के लिए फ्लश का उपयोग न करें। ये आपके घर से चली जाएगी पर किसी और स्थान पर समाने आएगी और जल को प्रदूषित करेगी।
  4. बागों में रासायनिक खादों के स्थान पर कंपोस्ट का इस्तेमाल करें।

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प्रश्न 12.
जहरीले अपशिष्ट (Toxic Waste) या विनाशक अपशिष्ट (Hazardous Waste) से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
विभिन्न प्रकार के औद्योगिक कारखानों और वाहनो से उत्सर्जित जहरीले गैस वातावरण के लिये भयावह खतरे के रूप में उपलब्ध हैं। यह असामयिक मृत्यु और जन्म से अपगता के भी कारक हैं। इनको विनाशक अपशिष्ट भी कहते हैं। ये विषैले होते हैं। ये निर्माण, कृषि, संरचना, आटोमोबाइल-गैरेज, लैबोरेटरी, हास्पीटल और अन्य उद्योगों के उप-उत्पाद हैं।

प्रश्न 13.
जल प्रदूषण में अपशिष्टों की भूमिका का वर्णन क्या है ?
उत्तर :
जल में घरेलू अपशिष्टों, औद्योगिक बहि:साव के रसायन, रेडियोधर्मी पदार्थों तथा तेल के रिसाव आदि के मिश्रण से जलीय जीवों को हानि पहुँचती है तथा उनका विनाश होता है। अनेक पशुओं, पक्षियों एवं कीटों की मौत का कारण विषाक्त अपशिष्ट हैं।

प्रश्न 14.
गैसीय अपशिष्ट में मनुष्य की क्या भूमिका है ?
उत्तर :

  1. बड़ी मात्रा में जैव ईंधनों जैसे- कोयला, पेट्रोल डीजल के दहन से CO2 कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और सल्फर-डाइ आक्साइड की मात्रा लगातार वायुमण्डल में बढ़ रही है।
  2. मोटर-गाड़ी से गैसीय अपशिष्ट का 60 % भाग वायुमण्डल में जहरीले गैस के रूप में इकट्ठा हो रहा है।
  3. औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कोयले का दहन बड़ी मात्रा में धुँआ एवं धूलकण वायु में एकत्रित कर रहा है।
  4. एटामिक पावर प्लाण्ट से यूरेनियम के उपयोग से वायुमण्डल में गैस का उत्सजन एवं उष्मा की वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 15.
जहरीले अपशिष्ट की व्याख्या करो।
उत्तर :
जहरीले अपशिष्ट (Toxic waste) : विभिन्न प्रकार के औद्योगिक कारखानो और वाहनो से उत्सर्जित जहरीले गैस वातावरण के लिये भयावह खतरे के रूप में उपलब्ध है। यह असामयिक मृत्यु और जन्म से अपंगता के भी कारक है। इनको विनाशक अपशिष्ट (Hozardous Waste) भी कहते है। ये विषैले होते है। ये निर्माण, कृषि, संरचना, आटोमोबाइल-गैरेज, लैबोरेटरी, हास्पीटल और अन्य उद्योगो के उप-उत्पाद (by-products) है। ये ठोस और तरल होते है जिसमें रासायनिक भारी मेटल रेडियेसन और टाक्सिन रहता है। जैसे-बैटरी, उपयोग किया हुआ कम्यूटर समान, पेण्ट और कीटनाशक आदि होते है।

प्रश्न 16.
म्यूनिसिपल अपशिष्ट से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
शहरी क्षेत्रो में स्थित होटलो, रेस्टोरेण्टो, बाजारो, गलियों, दुकानों, अस्पतालो, बैकों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानो पर विविध क्रियाकलापो द्वारा उत्पन्न कूड़ा-कचरा शहरी या नगरपालिका अपशिष्ट के अन्तर्गत आते है। म्युनिसिपल कारपोरेशन इन कचरो को इकठ्ठा करके विभिन्न मालवाहक वाहनो द्वारा एक जगह इकठ्ठा कर रहा है जिसे चारो ओर भूमि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैल रहा है।

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प्रश्न 17.
कम्पोस्ट कैसे तैयार करते हैं ?
उत्तर :
अपसिष्टों जैसे घरेलू कचरे, पशुओं का चारा, पशुओं का मल-मूत्र एवं अन्य्र कचरों को खाली जमीन में गड्दा खोदकर परत दर परत जमा कर दिया जाता है। धीरे-धीरे यह जैव-रासायनिक क्रिया द्वारा सड़कर मूल्यवान उर्वरक (Mahure) में बद्ल जाता है। इसका उपयोग भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिये किया जाता है।

प्रश्न 18.
ठोस कचरों को एकत्रित करने के लिए किसका इस्तेमाल करना चाहिए।
उत्तर :
शहरो में स्थान-स्थान पर कूड़ो को रखने के लिए डस्टबिन या कंटेनर रखा जाना चाहिए ताकि लोग कचरों को गलियों एवं सड़को पर न फेंककर इनमें डाल दे।

प्रश्न 19.
कृषि कार्य में हानिकारक पदार्थों के प्रयोग से प्रदूषन उत्पन्न होते हैं।
उत्तर :
कृषि कार्य में अधिक फसल उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरको जैसे-नाइट्रोजन, फास्फेट्स, यूरिया आदि का प्रयोग अधिक क्रिया जाने लगा है। ये उर्वरक वर्षा के जल के साथ बहकर नदियो, झीलों, जलशयों आदि में पहुंचकर जल को प्रदूषित करते है।

प्रश्न 20.
किन अपशिष्टों के उचित प्रबन्धन से संचित संसाधनों को संरक्षण प्राप्त हो सकता है ?
उत्तर :
पुनर्चक्रण के अन्तर्गत अपशिष्टों को संसाधनो के रूप में परिवर्तित किया जाता है। अतः अपशिष्ट की कैलोरी सामग्री बिजली में परिवर्तित की जा सकती है। इसके दो प्रकार है –
(a) भौतिक पुन: परिष्करण इसके अन्तर्गत अपशिष्ट पदार्थो को संग्रहित कर उनका पुन: प्रयोग किया जाता है।
(b) जैविक पुन: परिष्करण : इसके अन्तर्गत पौधो की सामग्री, बचा हुआ भोजन, कागज उत्पाद आदजि को जैविक खाद और पाचन प्रक्रियाओ का उपयोग कर अषयव संबंधित पदार्थ विघटित करके पुनर्नवीनीकरण किया जाता है।

प्रश्न 21.
शहरी या नगरपालिका अपशिष्ट के अन्तर्गत किन अपशिष्टों को सम्मिलित किया जा सकता है ?
उत्तर :
इसके अन्तर्गत निम्नलिखित अपशिष्टों को सम्मिलित किया जा सकता है :

  1. प्राकृतिक रूप से स्वत: नष्ट होने वाले अपशिष्ट जैसे-हरे अपशिष्ट, व्याज्य खाद्य पदार्थ एवं रसोई का कचरा।
  2. पुनर्चक्रीय अपशिष्ट, जैसे-बोतले, शीशा, प्लास्टिक, कागज आदि।
  3. हानिकारक घरेलू अपशिष्ट जैसे, पेण्ट, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, रसायन, कीटनाशक, ट्यूब, बल्व, बैटरी आदि।

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प्रश्न 22.
अपशिष्टों के एकत्रीकरण के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
आज म्युनिसिपल कारपोरेशन शहरों के कचरों को इकठ्ठा करके विभिन्न मालवाहक वाहनों द्वारा एक जगह इकठ्ठा कर रहा है जिससे चारो ओर भूमि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैल रहा है। म्यूनिसिपेलिटी शहर के गन्दे पानी और मल-मूत्र को सीवर के माध्यम से नदियों में सीधे गिरा रहा है जिससे जल प्रदूषण फैल रहा है।

प्रश्न 23.
जैविक पुन: परिष्करण क्या है ?
उत्तर :
जैविक पुन: परिष्करण : ये प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थ हं जिनका पुन: चक्रण किया जाता है। पौधों की सामग्री, बचा भोजन, पशुओं का मल, कागज उत्पाद आदि को विघटित करके पुनर्न वीनीकरण किया जाता है। कार्बनिक पदार्थ का पुनः चक्रण-करके उनसे खाद तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में गैस का उत्सर्जन होता है, उससे बिजली तैयार किया जाता है। अपशिष्ट प्रबंधन में जैविक प्रसस्करण का उद्देश्य कार्बनिक पदार्थो के अपघटन के प्रक्रिया की गति को बढ़ाना और नियंत्रित करना होता है। जैविक पुन: परिष्करण में जैविक एरोबिक-विघटन एवं अनबोरिक विघटन सम्मिलित है।

प्रश्न 24.
वर्तमान युग में विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के बड़ी मात्रा में उत्पन्न होने के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
वर्तमान समय में औद्योगिकरण और विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों के परिणामस्वरूप धरातल पर और वायुमण्डल में लगातार खतरनाक कचरों का जमाव और उत्सर्जन ही अपशिष्ट है। यह अपशिष्ट विभिन्न प्रकार के सोतों से उत्सर्जित होता है। ऐसे पदार्थ जो सामान्यतया मनुष्यों द्वारा फेंक दिए जाते है। या जो अनुपयोगी और अनावश्यक होते है, उन्हें अपशिष्ट पदार्थों के वर्ग में रखा जाता है। इसमें हम जीव-जंतु और पेड़ पौधो के मृत और सड़े अंश, जीव-जंतु और पेड़-पौधो की उपापचयी क्रिया के उपजात इत्यादि को सम्मिलित करते है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
अपशिष्ट के विभिन्न स्रोतों का वर्णन कीजिए। अथवा, अपशिष्ट कितने प्रकार के होते हैं ?
अथवा
अपशिष्ट का वर्गीकरण करो।
उत्तर :
अपशिष्ट के प्रकार (Type of waste) :- अपशिष्टों को निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जा सकता है:-

  1. ठोस अपशिष्ट (Solid Waste) :- ये अपशिष्ट कुछ हद तक परिवर्तन के साथ उसी प्रकार पड़े रहते हैं, जैसे – धातु, सीसा आदि के अपशिष्ट।
  2. तरल अपशिष्ट (Liquid Waste) :- इस प्रकार के अपशिष्ट तरल रूप में मिलते हैं, जैसे – प्रदूषित जल, तेल एवं मोबिल आदि।
  3. गैसीय अपशिष्ट (Gasseous Waste) :- ये अपशिष्ट गैस के रूप में होते है जो वायु को प्रदूषित करते हैं।
  4. विषैली वस्तुएँ (Toxic Substance) :- इसके अंतर्गत वे वस्तुएँ आती हैं जो वायुमण्डल को विषाक्त कर सकती है, या स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचती है, जैसे – रेडियो सक्रिय पदार्थ, विषैले रसायन, भारी धातु (आर्सेनिक शीशा, पारा आदि)।
  5. गैर विषैली वस्तुएँ (Non-Toxic Substance) :- कृषिजात अपशिष्ट, फलों के छिलके, रद्दी कागज आदि।

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प्रश्न 2.
अपशिष्ट प्रबन्धन की संकल्पना पर अपना विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
प्रबन्धन की संकल्पना : वे सभी ठोस, तरल या गैसीय पदार्थ जो उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों के ही उपयोगयोग्य नहीं रह जाते, अर्थात् जो किसी की आवश्यकता की पूर्ति योग्य नहीं समझे जाते, उन्हें अपशिष्ट की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान समय में विभिन्न सोतों से उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण के लिए एक गम्भीर संकट बन गए हैं, अतः उनका उचित प्रबंधन अति आवश्यक हो गया है। अपशिष्टों के उत्पादन में कमी लाने के साथ-साथ वे सभी विधियाँ जैसे अपशिष्टों का पुन: उपयोग, पुनर्चक्रीकरण, उपचार तथा इनका सुरक्षित निस्तारण अपशिष्ट प्रबंधन के अन्तर्गत आती है।

उत्पादन में कमी लाना : इस विधि को अपनाकर अपशिष्टों के उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे जहाँ तक सम्भव हो पैकेट वाली वस्तुओं को नहीं खरीदना। बाजार में खरीददारी करते समय प्लास्टिक के बैलों में वस्तुओं को न लेकर घर से लाए गए झोलों में लेना। ऐसी वस्तुओं को खरीदना जिनका पुन : उपयोग किया जा सके। लम्बे समय तक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं को खरीदना आदि।

पुन: उपयोग : उपयोग में लाए गए अपशिष्टों का बिना किसी परिवर्तन के पुनः उपयोग किया जाना ही इनका पुन: उपयोग है। इससे समय, रुपया, ऊर्जा एवं संसाधन सभी की बचत होती है। जैसे उपयोग में लाए गए रैपरों को पुन: उपयोग के लिए रखना। टूटे-फूटे सामानों जैसे फर्नीचर, खिलौने आदि की मरम्मत करके पुन: उपयोग में लाना आदि।

पुनर्चक्रीकरण : इसके अन्तर्गत कुछ अपशिष्टों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नयी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। जैसे लोहे एवं शीशे के अपशिष्टों को गलाकर पुन: उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

प्रश्न 3.
गैसीय अपशिष्टों के नियंत्रण के लिए कौन-सी प्रभावी विधियाँ अपनाई जाती हैं ?
अथवा
गैसीय अपशिष्ट का निस्तारण कैसे होता है?
अथवा
औद्योगिक क्षेत्रों में निःस्तृत गैसीय अपशिष्टों का उपचार किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर :
गैसीय अपशिष्टों का नियंत्रण (Control of Gaseous Waste) :- विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली गैसों के बहि: म्राव से वायु प्रदूषित होती है क्योंकि इन गैसों में धूलकण, कार्बन के कण, धुआँ आदि मिले होते हैं। वायु को इन हानिकारक अपशिष्टों से मुक्त करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में निम्नलिखित दो उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator) :- कल-कारखानों एवं अन्य उद्योगों में दहन प्रक्रिया के दौरान चिमनियों से निकलने वाले धुएँ में मिश्रित धूलकण या अन्य ठोस कणों को निकालने का यह सर्वोत्तम यन्त्र है। इसमें ऋणात्मक चार्ज इलेक्ट्रोड होते हैं। धनात्मक चार्ज धूल कण जब चिमनी से निष्कासित होने वाले धुओं के साथ मिश्रित होकर निकलते हैं तो ऋणात्मक इलेक्ट्रोड उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं जिससे ये नीचे बैठ जाते हैं, इस प्रकार चिमनी से हानिपरक धूल कणों से मुक्त गैस बाहर निकलती है जिससे धुएँ में से राख को मुक्त किया जाता है। विद्युत गृहों में ये यन्त्र चिमनियों में लगे हुए होते हैं।

गीले ब्रश (Wet Scrubbers) :- गीले ब्रश या वेट स्कबर वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते हैं। उद्योगों से निष्कासित होने वाली गैसें एक बड़े चैम्बर से होकर गुजरती हैं जिसमें जल का छिड़काव होता रहता है। गैसों में मिश्रित ठोस कण गीले होकर भारी हो जाते हैं तथा नीचे बैठने लगते हैं तथा इनसे मुक्त स्वच्छ वायु बाहर निकल जाती है। इसके अतिरिक्त जल में घुलनशील हानिकारक गैसें, जैसे – सल्फर डाई-ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई-ऑक्साइड, अमोनिया आदि वायु प्रदूषक गैसे भी इस प्रक्रिया द्वारा वायु से मुक्त हो जाती है।

अत: पर्यावरण को स्वच्छ रखना, मानव स्वास्थ्य की रक्षा किया जाना, जैव विविधता को बरकरार रखा जाना तथा इनके पुर्नचक्रीकरण एवं पुर्नव्यवहार द्वारा संसाधनों को संरक्षण प्रदान किये जाने जैसी विधियाँ अपशिष्ट प्रबंधन द्वारा अपनायी जाती है।

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प्रश्न 4.
भागीरथी-हुगली नदी में अपशिष्टों के निस्तारण के प्रभाव का वर्णन्न कीजिए।
उत्तर :
अपशिष्टों के निस्तारण के प्रभाव :- भागीरथी-हुगली पश्चिम बंगाल की जीवनदायिनी नदी है। वर्तमान समय में भारत की अन्य प्रमुख नदियों की तरह यह भी ठोस एवं द्रव अपशिष्टों के निस्तारण के कारण प्रदूषण की समस्या से ग्रसित है। इसके जल में ठोस अपशिष्टों की मात्रा इसके वहन क्षमता से काफी अधिक हो गई है। इसके किनारे स्थित कागज, जूट, रसायन, चमड़ा आदि उद्योगों के बहिः साव बड़ी मात्रा में अपशिष्टों को इस नदी में ले आते हैं। बर्नपुर एवं दुर्गापुर इस्पात सयंत्रों के बहि:स्राव को लेकर आने वाली दामोदार नदी इसमें ठोस एवं द्रव अपशिष्टों की मात्रा में और अधिक वृद्धि कर रही है।

हुगली के किनारे बसे बस्तियों, नगरों एवं कोलकाता महानगर के घरेलू बहिः साव एवं मल-जल भी इसमें अपशिष्टों की मात्रा में वृद्धि कर रहे हैं इस नदी के बेसिन में होने वाली कृषि कार्य में प्रतिवर्ष हजारों टन रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों का व्यवहार होता है ये रसायन वर्षा के जल के साथ घुलकर सहायक नदियों एवं नालों के माध्यम से हुगली के जल में आकर मिलते रहते है तथा इसमें तरल अपशिष्टों की मात्रा में वृद्धि कर रहे हैं।

वर्णित तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अपशिष्टों के निस्तारण से हुगली का जल अत्यन्त दूषित हो चुका है तथा दिन-प्रतिदिन यह समस्या विकट रूप लेती जा रही है। अतः इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्टों के उचित प्रबन्धन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रश्न 5.
अपशिष्ट प्रबन्धन की संकल्पना पर अपना विचार प्रस्तुत कीजिए। अथवा, अपशिष्ट प्रबन्धन किन रूपों में किया जा सकता है ?
उत्तर :
प्रबन्धन की संकल्पना : वे सभी ठोस, तरल या गैसीय पदार्थ जो उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों के ही उपयोगयोग्य नहीं रह जाते, अर्थात् जो किसी की आवश्यकता की पूर्ति योग्य नहीं समझे जाते, उन्हें अपशिष्ट की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान समय में विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण के लिए एक गम्भीर संकट बन गए हैं, अतः उनका उचित प्रबंधन अति आवश्यक हो गया है। अपशिष्टों के उत्पादन में कमी लाने के साथ-साथ वे सभी विधियाँ जैसे अपशिष्टों का पुनः उपयोग, पुनर्चक्रीकरण, उपचार तथा इनका सुरक्षित निस्तारण अपशिष्ट प्रबंधन के अन्तर्गत आती है

उत्पादन में कमी लाना : इस विधि को अपनाकर अपशिष्टों के उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे जहाँ तक सम्भव हो पैकेट वाली वस्तुओं को नहीं खरीदना। बाजार में खरीददारी करते समय प्लास्टिक के थैलों में वस्तुओं को न लेकर घर से लाए गए झोलों में लेना। ऐसी वस्तुओं को खरीदना जिनका पुन : उपयोग किया जा सके। लम्बे समय तक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं को खरीदना आदि।

पुनः उपयोग : उपयोग में लाए गए अपशिष्टों का बिना किसी परिवर्तन के पुन: उपयोग किया जाना ही इनका पुन: उपयोग है। इससे समय, रुपया, ऊर्जा एवं संसाधन सभी की बचत होती है। जैसे उपयोग में लाए गए रैपरों को पुन: उपयोग के लिए रखना। टूटे-फूटे सामानों जैसे फर्नीचर, खिलौने आदि की मरम्मत करके पुन: उपयोग में लाना आदि।

पुनर्चक्रीकरण : इसके अन्तर्गत कुछ अपशिष्टों का उपयोग कच्चे माल के रूप में करके नयी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। जैसे लोहे एवं शीशे के अपशिष्टों को गलाकर पुन: उपयोग में आने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

प्रश्न 6.
वर्ज्य पदार्थों की आवश्यकता तथा प्रभाव व्यवस्थापन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वर्तमान समय में अनियत्रित उत्पादन तथा उपभोग के द्वारा अप्रत्याशित गति से वर्ज्य पदार्थो का उत्सर्जन हो रहा है। वर्ज्य पदार्थों के मात्रा में लगातार घृद्धि को रोकने के लिए प्रभावी वर्ज्य पदार्थ की अत्यन्त आवश्यकता है।

वर्ज्य प्रबंधन तथा योजना को दो प्राकर से कियान्वित यिका जा सकता है। वर्ज्य पदार्थ का उचित रूप में हटाना तथा वर्ज्य का संस्करण। इन दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य बर्ज्य के दुष्परिणामों को दूर करने से है।

वर्ज्य पदार्थ के प्रभावी व्यवस्थापन में समाज के विभित्र वर्गों के लोगो पौर प्रतिष्ठान एवं सम्बन्धित सरकारी विभागों मे अपनी समन्वय की अत्यन्त आवश्यकता है। घर के वर्ज्य पदार्थ को अपने घर के भीतर रखना एवं समय से उसे नियमित स्थान पर रखा जाता है। वर्ज्य पदार्थ को हमेशा घर में ढक कर रखना चाहिए। वर्ज्य पदार्थ संग्रह केन्द्र विभिन्न स्थानो पर होते है। वर्ज्य पदार्थ को कहीं पर इकट्टा कर उसे मूल संग्रह केन्द्र तक पहुँचाना नगर के वर्ज्य विभाग का कार्तव्य होता है। कचड़े को रूपान्तरित करना या अन्य प्रक्रियाकरण द्वारा वर्ज्य पदार्थ को समाप्त करनेकी कोशिश की जाती है।

नालों में केवल तरल वर्ज्य पदार्थों को ही फेंकना चाहिए। लेकिन ऐसा देखा जाता है कि हमलोग ठोस वर्ज्य पदार्थ को भी नालों में फेंक देते है। उससे नाला भर जाता है तथा उसका प्रवाह रूक जाता था। अब रूके हुए पानी में मच्छर अपना आश्रय क्या कर हजारों की संख्या में अण्डे दे देते है। जो विमारी का प्रमुख कारण बन जाता है। इसी प्रकार औद्योगिक केन्द्रों से विभिन्न प्रकार के रसायनयुक्त जल भी नालो को गंदा कर देते है । नवीन प्रा्योगिक केन्द्र को उपयोग में लाकर इन निगर्त गैसे के प्रदूषण की मात्रा को कम किया जाता है।

अधिकांश कल कारखाने प्रदूषण नियंत्रण यंत्र को सरकारी दबाव में लगा कर उनका उपयोग नहीं करते। अत: आवश्यकता इस बात की है कि सरकार इस सम्बन्ध में कठोर निर्णय ले और जो प्रदूषण नियंत्रण तंत्र का उपयोग नहीं करते उन्हें दण्डित किया जाना चाहिए। वर्ज्य पदार्थों के निष्कासन एवं प्रक्रियाकरण के लिए जिस चीज की आवश्यकता पड़ती है उसके निर्माण के लिए सम्बन्धित सरकारी विभागों की सहायता करती चाहिए।

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प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण के स्रोत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
वायु प्रदुषण के स्रोत :

  1. हरित क्रान्ति गृह जैसे – CO2, NO2, SO2, CH4 इत्यादि के उत्सजर्न से ओजोन के तत्वो जैसे CPC, HCFC इत्यादि में कमी हो जाती है जिसके फलस्वरूप पानी प्रदूषित हो जाता है तथा अम्लवृष्टि (Acid Rainfall) होती है ।
  2. कृषि क्षेत्र में रासायनिक खाद, कीटनाशक, दवाएँ तथा अन्य प्रकार के वर्ज्य से जल मिट्टी का प्रदूषण होता है। इससे खाद्य उत्पादन में पारिस्थितिकी व्यवधान उत्पन्न होता है।
  3. नदियों के तट पर स्थित महानगरों जैसे कानपुर, इलाहाबाद, कोलकाता नगरो महानगरो के भारी मात्रा में वर्ज्य पदार्थ से नदी का जल प्रदूषित हो जाता है।
  4. रसाव अथवा दुर्घटना तथा विषाक्त वर्ज्य के तिरोहित होने के कारण समुद्र जल के प्रदूषण से समुद्री जीव-जन्तु पर खतरे की घण्टी बजने लगती है।
  5. मनुष्य घरेलु पूजा-पाठ के वर्ज्य पदार्थ को भी नदियों में फेंक कर नदी के जल को प्रदूषित कर देते है।

प्रश्न 8.
भस्कीव गण अपशिष्ट प्रबंधन क्या है ?
उत्तर :
दहन या भंगीकरण (Incineration) भस्मीकरण के अन्तर्गत अपशिष्ट पदार्थो के दहन या जलाने की प्रक्रिया के शामिल किया जात है। भस्मीकरण छोटे-पैमाने पर व्यक्तियों द्वारा एव बड़े पैमाने पर पद्योगों द्वारा किया जाता है। खतरनाक कचरा जैसे-चिकित्सकीय अपशिष्टों को निबटाने के लिए इसे एक व्यावहारिक पद्धति के रूप में मान्यता प्राप्त है। दहन के कारण वायुमण्डल को प्रदूषित करने वाली गैसों-का उत्सर्जन होता है अतः यह एक विवादास्पद पद्धति है। अत: दहन से पहले सभी प्रकार के प्लास्टिक के अपशिष्टों को अलग कर लेना चाहिए क्योंकि इनके दहन से बिजली गैसों का उत्सर्जन होता है। अपशिष्टों के दहन निम्नलिखित लाभ है।

  1. दहन से अपशिष्ट पदार्थो के आयतन में 20 से 30 प्रतिशत की कमी हो जाती है।
  2. यह विधि उन जगहो पर अधिक उपयोगी है जहाँ अपशिष्टों को भरने के लिए भूमि की कमी है।
  3. चिकित्सकीय अपशिष्टों में निबटारे के लिए दहन की विधि सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सक्रामक रोगों को फैलाने वाले जीवाणु नष्ट हो जाते है।
  4. दहन प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली उष्मा से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
भौतिक पुन: परिष्करण क्या है ?
उत्तर :
भौतिक पुन: परिष्करण : आजकल विकसित देशों में अपशिष्टों का व्यापक सग्रह किया जाता है। सग्रहित अपसिष्टों को पुन: प्रयोग के लायक बना दिया जाता है खाली पेय पदार्थो के डिब्बो एवं वोतलों को इकठ्ठा करके पुन: प्रक्रम द्वारा उन्हें तैयार किया जाता है। उनके प्रक्रम की प्रक्रिया समान श्रेणियों में की जार्ती है ताकि कच्चा माल जिससे ये वस्तुयें बनी है, उन्हें उसी प्रकार नयी वस्तु में बदला जा सके। पुनर्न वीनी-करण के लिये आम उपभोक्ता उत्पादो में अल्युमिनियम पेय के डिब्बे, इस्पात भोजन और एयरोसोल डिब्बे, HDPE और PET बोतलें, काँच की बोतलें, गत्ते के डिब्बे, अखबार, पत्रिकायें, गत्ता आदि शामिल है। प्लास्टिक के उत्पाद PVC, LDPE, PP, PS आदि भी पुनर्चक्रित किये जाते है। जो वस्तुये सामान्य किसी एक तरीके के धातु से बनी रहती है उन्हें आसानी से पुनः चक्रित करके नयी वस्तु बनायी जाती है।

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प्रश्न 10.
औद्योगिक अपशिष्ट के विभिन्न स्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
औद्योगिक अपशिष्ट : उद्योगो से बहुत अधिक ठोस, द्रव एवं गैसीय अपशिष्ट उत्पन्न होता है, ऊर्जा उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईधनों के प्रयोग से वायु प्रदूषित होती है। वायुमण्डल में हरित गृह गैसो की मात्रा बढ़ने से भूमण्डलीय तापमान में वृद्धि हो रही है। विभिन्न उद्योगों से निकलने वाले कूड़े एवं राख आदि निकटवर्ती स्थानों में इकठ्ठा होते रहने से समस्या बन गए है। उत्पादन प्रक्रिया में प्रयुक्त जल जब बहि :स्ताव के रूप में निकलता है तो इसमें अनेक कार्बनिक एवं अकार्बनिक तत्व मीले हुए होते है। उद्योगों का यह कचरायुक्त जल नदियों में बहा दिया जाता है या झीलों विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट उत्पन्न होते है। रसायन, सूतीवस्त, कागज, ओषधि, चमड़ा, चीनी, खाद्य प्रक्रम, उर्वरक आदि उद्योगो बड़ी मात्रा में कचरायुक्त जल का बहि: स्ताव करते है।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

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अपशिष्ट प्रबंधन Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वर्ज्य पदार्थ जैव अनिम्नकरणीय स्वरूप के होते हैं :
(a) प्लास्टिक वर्ज्य पदार्थ
(b) कृतिम रबर वर्ज्य पदार्थ
(c) एल्यूमिनियम चादर
(d) सभी उपयुक्त हैं
उत्तर :
(d) सभी उपयुक्त हैं।

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प्रश्न 2.
वर्ज्य पदार्थ प्रबन्धन की विधि है :
(a) वर्ज्य पदार्थ का पु:उययेग
(b) वर्ज्य का पुन:नवीकरण
(c) वर्ज्य की कमी
(d) सभी
उत्तर :
(घ) सभी।

प्रश्न 3.
जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट पदार्थ का उदाहरण है :
(a) फलों एवं सब्जियों के छिलके
(b) उपयोग में लाई गई सुईयाँ
(c) खाद्य डिब्बा
(d) वर्ज्य साबुन पानी
उत्तर :
(b) उपयोग में लाई गई सुईयाँ।

प्रश्न 4.
पुनर्चक्रण से तात्पर्य हैं –
(a) अपशिष्टों को संसाधन में बदलना
(b) अपशिष्टों का विनाश
(c) अपशिष्ट संरक्षण
(d) अपशिष्ट का परिहार
उत्तर :
(a) अपशिष्टों को संसाधन में बदलना।

प्रश्न 5.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल की कौन-सी नदी वर्ज्य पदार्श से प्रदूषित हो रही है –
(a) दामोदर
(b) अजय
(c) हुगली
(d) शिलाई
उत्तर :
(c) हुगली।

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प्रश्न 6.
प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को हानि पहुँचाने वाला वर्ज्य पदार्थ हैं –
(a) संखीएवं फलों के छिलके
(b) ज्वलनशील पदार्थ
(c) भारी धातु
(d) सिंथेटिक धागा
उत्तर :
(b) ज्वलनशील पदार्थ।

प्रश्न 7.
इनमें से कौन जैविक अपशिष्ट हैं ?
(a) प्लास्टिक
(b) शीशा
(c) पुआल
(d) कम्प्यूटर
उत्तर :
(c) पुआल।

प्रश्न 8.
निम्न में कौन-सा घरेलू अपशिष्ट नहीं हैं ?
(a) पॉलिथीन बैग
(b) टूटे खिलौने
(c) रक्त
(d) रसोई घर के कचरे
उत्तर :
(c) रक्त।

प्रश्न 9.
Three-R में कौन-सा शब्द प्रयुक्त नहीं होता है –
(a) Reduce
(b) Re-use
(c) Re-Production
(d) Recycling
उत्तर :
(c) Re-Production

प्रश्न 10.
स्कैब्बर विधि का उपयोग होता हैं –
(a) कृषि क्षेत्र
(b) खनन क्षेत्र
(c) शिल्प क्षेत्र
(d) सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र
उत्तर :
(c) शिल्प क्षेत्र।

प्रश्न 11.
तरल वर्ज्य पदार्थ को हटाने की विधि को कहा जाता है –
(a) भरटकरण
(b) निष्कासन
(c) स्कैब्बर
(d) कम्पोस्टिंग
उत्तर :
(b) निष्कासन।

प्रश्न 12.
सबसे कम समय में कौन-सा अपशिष्ट सड़कर समाप्त हो जाता है –
(a) कागज
(b) लोहा
(c) अल्यूमीनियम
(d) प्लास्टिक
उत्तर :
(a) कागज।

प्रश्न 13.
रेडियोधर्मी अपशिष्टों की उत्पत्ति होती है :
(a) घरेलू कार्यों से
(b) कृषि क्षेत्रों से
(c) ताप ऊर्जा सयंत्रों से
(d) नाभिकीय ऊर्जा केन्द्रों से
उत्तर :
(d) नाभिकीय ऊर्जा केन्द्रों से।

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प्रश्न 14.
कीटनाशक एक प्रकार का :
(a) घरेलू अपशिष्ट है
(b) जैविक अपशिष्ट है
(c) कृषिजात अपशिष्ट है
(d) चिकित्सकीय अपशिष्ट है
उत्तर :
(c) कृषिजात अपशिष्ट है।

प्रश्न 15.
पुन: उपयोग में लाया जाने वाला एक अर्पशिष्ट है :
(a) उवर्रक
(b) इंजेक्शन सिरिंज
(c) कागज
(d) बैटरो
उत्तर :
(c) कागज।

प्रश्न 16.
विश्व का सर्वाधिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाला देश है :
(a) चीन
(b) रूस
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका
(d) जापान
उत्तर :
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 17.
वायु प्रदूषण से उत्पत्र होता है :
(a) कुहांसा
(b) बादल
(c) धुआँ
(d) ओस
उत्तर :
(c) धुआँ।

प्रश्न 18.
वायु में विद्यमान विघटनकर्ताओं द्वारा कार्बनिक अपशिष्टों के विघटन की विधि है :
(a) कम्पोस्टिंग
(b) यौगिकीकरण
(c) भूमि भराब
(d) अति भराव
उत्तर :
(a) कम्पोस्टिंग।

प्रश्न 19.
एक रेडियो सक्रिय अपशिष्ट है :
(a) कागज
(b) रंग
(c) प्लास्टिक
(d) दूरेनियम आवारित अपशिष्ट
उत्तर :
(d) यूरेनियम आधारित अपशिष्ट।

प्रश्न 20.
अपशिष्ट प्रबन्धन का सर्वाधिक स्वीकारणीय चरण है :
(a) पुनर्चक्रीयकरण
(b) भूमि भराव
(c) अशिष्टों का अल्ग उत्पादन
(d) कम्पोस्टिंग
उत्तर :
(c) अपशिष्टों का अल्प उत्पादन।

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प्रश्न 21.
जैविक नहीं तत्व है –
(a) वनस्पति
(b) मनुष्य
(c) जानवर
(d) वायु
उत्तर :
(d) वायु।

प्रश्न 22.
सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरण को कहते है –
(a) पराबैगनी
(b) भाप
(c) प्रकाश
(d) सूर्यताप
उत्तर :
(a) पराबैगनी।

प्रश्न 23.
भौतिक परिवेश के तत्व नहीं है –
(a) जल
(b) जीवाणु
(c) मिट्टी
(d) प्रकाश
उत्तर :
(b) जीवाणु।

प्रश्न 24.
जल से होने वाली विमारी का नाम है –
(a) हैजा
(b) केंसर
(c) क्षय रोग
(d) मन्द वुद्धि
उत्तर :
(a) हैजा।

प्रश्न 25.
निम्नलिखित में से वर्ज्य पदार्थ नहीं है –
(a) कपड़ों के दूकड़े
(b) टूटे टेलेफोन
(c) प्लास्टिक वैग
(d) फसलो के डठल
उत्तर :
(d) फसलो के डठल।

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प्रश्न 26.
प्राकृति रूप से विघटित नहीं होने वाला वर्ज्य पदार्थ है –
(a) काँच एवं प्लास्टिक
(b) फसलों के डठंल
(c) रसोई का कचड़ा
(d) फलो के छिल्के
उत्तर :
(a) काँच एवं प्लास्टिक।

प्रश्न 27.
सबसे अधिक मात्रा में द्रव वर्ज्य पदार्थ के उत्सर्जन के स्रोत है –
(a) अस्पताल
(b) रसोई के कचड़े
(c) अद्योगिक वाह्य स्राव
(d) व्यवसायिक केन्द्र
उत्तर :
(c) अद्योगिक वाह्वा स्राव।

प्रश्न 28.
पेट्रोरसायन उद्योग के वर्ज्य पदार्थ है –
(a) धूल एवं राख
(b) तेल एवं ग्रीस
(c) निम्न स्तरीय रेडियो सक्रिय वर्ज्य पदार्थ
(d) उब्ब स्तरीय रेडियो सक्रिय वर्ज्य पदार्थ
उत्तर :
(b) तेल एवं ग्रीस।

प्रश्न 29.
कृषि कार्य में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला खाद है –
(a) यूरिया
(b) जल
(c) कचरा
(d) राख
उत्तर :
(a) दूरिया।

प्रश्न 30.
स्वयं विध त होने वाले वर्ज्य पदार्थ है –
(a) भोजन वे तंश
(b) काँच
(c) धातु
(d) प्लास्टिक
उत्तर :
(a) भोजन के अंश।

प्रश्न 31.
कचरों के खुले रहने से क्या फैल जाता है –
(a) तापमान
(b) जीवाणु
(c) वायु
(d) जल
उत्तर :
(b) जीवाणु।

प्रश्न 32.
CO2 का वायुमण्डलीय वाष्प में घुलकर वर्षा के रूप में गिरने को कहा जाता है –
(a) खूनी वर्षा
(b) आम्र वर्षा
(c) अम्ल वर्षा
(d) ओला वृष्टि
उत्तर :
(c) अम्ल वर्षा।

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प्रश्न 33.
प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को हानि पहुँचाने वाला वर्ज्य पदार्थ है –
(a) संखिये एवं फले के छिले
(b) ज्वलनशील पदार्थ
(c) भारी धातु
(d) सिथेटिक धागे
उत्तर :
(b) ज्वलनशील पदार्थ।

प्रश्न 34.
रही कागज एक वर्ज्य पदार्थ है –
(a) पुन:चक्रीय
(b) घरेलू
(c) जैविक
(d) अजैविक
उत्तर :
(a) पुन:घक्रीय।

प्रश्न 35.
दहन से वर्ज्य पदार्थ के आयतन में कमी आ जाती है –
(a) 50 % – 60 %
(b) 10% – 20 %
(c) 20% – 30 %
(d) 40% – 50 %
उत्तर :
(c) 20% – 30%

प्रश्न 36.
घरेलू हानिकारक वर्ज्य पदार्थ है –
(a) फसलो के डठल
(b) कीटनाशक
(c) नाइट्रोजन
(d) मुत्र के नमुने
उत्तर :
(d) मुत्र के नमुने।

प्रश्न 37.
चिकित्सकीय वर्ज्य पदार्श के उदाहरण है –
(a) खून के नमुने
(b) बल्व
(c) बैटरी
(d) रही कागज
उत्तर :
(a) खून के नमुने।

प्रश्न 38.
वर्ज्य पदार्थ के बढ़ने का प्रमुख कारण क्या है ?
(a) जल की वृद्धि
(b) भूमि की कमी
(c) जनसंख्या की वृद्धि
(d) चिकित्सा की कमी
उत्तर :
(c) जनसंख्या की वृद्धि।

प्रश्न 39.
कोयला, घूल एवं राख आदि के कण उत्पन्न होते है –
(a) पेट्रोरसायन उद्योगों द्वारा
(b) वस्व निर्माण उद्योगो द्वारा
(c) खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों द्वारा
(d) ताप उर्जा संयत्रों द्वारा
उत्तर :
(d) ताप उर्जा संयत्रों द्वारा।

प्रश्न 40.
निम्नलिखित में से कौन वर्ज्य पदार्थ जैविक रूप से विघटित होता है –
(a) मवेशियो का गोबर तथा फसलो का अवशेष
(b) उपयोग में लाई गई सुइयाँ
(c) टूटे-फूटे काँच
(d) रेडियो सक्रिया वर्ज्य पदार्थ
उत्तर :
(a) मवेशियो का गोबर तथा फसलो का अवशेष।

प्रश्न 41.
तीब्र दहनशील पदार्थ है –
(a) पेट्रोलियम
(b) कीटनाशक
(c) प्लास्टिक
(d) रंग
उत्तर :
(a) पेट्रोलियम।

प्रश्न 42.
किस क्रांति के बाद जनसंख्या वृद्धि में अनियंत्रित होने लगा –
(a) कृषि
(b) सैनिक
(c) दुगध
(d) यातायात
उत्तर :
(a) कृषि।

प्रश्न 43.
वर्ज्य पदार्थ को कितने भागों में बांटा गया है ?
(a) चार
(b) तीन
(c) पाँच
(d) दो
उत्तर :
(c) पाँच।

प्रश्न 44.
घरातल पर वर्ज्य पदार्थ तरल रूप में पाये जाते है –
(a) प्रदूषित जल
(b) कड़ा करकट
(c) लकड़ी के डठंल
(d) राख
उत्तर :
(a) प्रदूषित जल।

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प्रश्न 45.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल की कौन नदी अधिक वर्ज्य पदार्थ से प्रदूशित हो रही है –
(a) दामोदर
(b) अजय
(c) हुगली
(d) रूपनारायण
उत्तर :
(c) हुगली।

प्रश्न 46.
अपशिष्ट से तात्पर्य है –
(a) खतरनाक कचरा
(b) बचे हुए पदार्थ
(c) हानिकारक पदार्थ
(d) बने हुए खनिज तेल का पदार्थ
उत्तर :
(b) बचे हुए पदार्थ

प्रश्न 47.
शहरों एवं गाँवों से उत्सर्जित हानिकारक ठोस पदार्थ कहलाते हैं –
(a) गैसीय अपशिष्ट
(b) ठोस अपशिष्ट
(c) निराविषी अपशिष्ट
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) ठोस अपशिष्ट

प्रश्न 48.
पुनर्चक्रण से तात्पर्य है –
(a) अपशिष्टों को संसाधन में बदलना
(b) अपशिष्टों का विनाश
(c) अपशिष्ट संरक्षण
(d) अपशिष्ट का परिहार
उत्तर :
(a) अपशिशें को संसाधन में बदलना

प्रश्न 49.
स्कबर क्या है ?
(a) एक प्रकार का कड़ा बश
(b) एक प्रकार का जैव पदार्थ
(c) एक पदार्थ का रसायन जो सल्फर का विनाश एवं अम्लीय वर्षा रोकता है
(d) स्क्रबर कठोरतम उत्सर्जित पदार्थ है
उत्तर :
(c) एक पदार्थ का रसायन जो सल्फर का विनाश एवं अम्लीय वर्षा रोकता है

प्रश्न 50.
वे अपशिष्ट जो थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ प्रकृति में पड़े रहते हैं, इन्हें क्या कहते हैं ?
(a) ठोस अपशिष्ट
(b) तरल अपशिष्ट
(c) गैसीय अपशिष्ट
(d) विषैले पदार्थ
उत्तर :
(a) ठोस अपशिष्ट

प्रश्न 51.
निम्नलिखित में कौन पदार्थ गैर विघटित होने वाला पदार्थ है ?
(a) खाद्य के अवशेष
(b) सूती वस्व
(c) लकड़ी के समान
(d) बोतल
उत्तर :
(d) बोतल

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प्रश्न 52.
दूषित गैसों के निपटान की विधि क्या है ?
(a) अपशिष्ट का अलगाव
(b) भूमि भराव
(c) जैव खाद निर्माण
(d) स्क्रवर विधि
उत्तर :
(d) स्क्रवर विधि

प्रश्न 53.
किसी भी प्रकार के विकास के लिए आवश्यक बुराई है –
(a) उद्योग
(b) कृषि
(c) व्यापार
(d) अपशिष्ट
उत्तर :
(d) अपशिष्ट

प्रश्न 54.
निम्नलिखित में से कौन घरेलू अपशिष्ट नहीं है –
(a) फटे कपड़ों के टुकड़े
(b) दूटे खिलौने
(c) पॉलिथीन बैग
(d) फसलों के डंठल
उत्तर :
(d) फसलों के डंठल

प्रश्न 55.
निम्नलिखित में से कौन हानिकारक घरेलू अपशिष्ट है –
(a) रसोई का कचरा
(b) खाली बोतलें
(c) फटे-पुराने कपड़े
(d) जली बैटरियाँ
उत्तर :
(a) रसोई का कचरा

प्रश्न 56.
उच्च स्तरीय रेडियोधर्मी अपशिष्टों का उत्सर्जन होता है –
(a) आवासीय क्षेत्रों से
(b) कृषि क्षेत्रों से
(c) अस्पतालों से
(d) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से
उत्तर :
(d) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से

प्रश्न 57.
अधिक मात्रा में द्रव अपशिष्टों के उत्सर्जन के स्रोत हैं –
(a) अस्पताल
(b) रसोई के कचरे
(c) औद्योगिक बहि :स्राव
(d) व्यावसायिक केन्द्र
उत्तर :
(c) औद्योगिक बहि :साव

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. जो वर्ज्य पदार्थ विघटित होकर पानी, मिट्टी और वायु में समाहित हो जाता है उसे ………… कहा जाता है।
उत्तर : जैविक अपशिष्ट ।

2. ‘फ्लाई-ऐश’ का उपयोग …………उद्योग में होता है।
उत्तर : अपशिष्ट।

3. कपड़ों के विघटन से हानिकारक …………गैस है।
उत्तर : CH4

4. सबसे खतरनाक …………वर्ज्य पदार्थ हैं।
उत्तर : रेडियो सक्रिय।

5. जैव पदार्थों द्वारा कृत्रिम कम्पोस्टिंग को …………कहते हैं।
उत्तर : जैव खाद निर्माण।

6. …………को जलाने से ‘फ्लाई ऐश’ प्राप्त होती है।
उत्तर : कोयला।

7. जैव पदार्थों द्वारा कृत्रिम कम्पोस्टिंग को …………कहते हैं।
उत्तर : जैव खाद निर्माण।

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8. उपग्रह जो निश्चित कक्ष में ध्रुवों के सहारे स्थापित होते हैं ………..कहलाते हैं।
उत्तर : मौसम उपग्रह।

9. इलेक्ट्रानिक अपशिष्ट को संक्षेप में …………कहते हैं।
उत्तर : ‘E ‘ – waste

10. आधुनिक पर्यावरण कानून …………के अनुसार के प्लास्टिक बैग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं।
उत्तर : 25 मायक्रोंस या 025 एम. एम

11. औद्योगिक अपशिष्ट का एक उदाहरण …………है।
उत्तर : फ्लाई ऐश।

12. आवश्यकताओं को पूर्ति करने वाली वस्तुओं को …………के रूप में रखा गया है।
उत्तर : संसाधन।

13. …………..वर्ज्य पदार्थ के पुनर्चक्रण की कोई विधि नहीं है।
उत्तर : इलेक्ट्रॉनिक।

14. …………..में जल निकासी की उचित व्यवस्था से भूस्खलन रोका जा सकता है।
उत्तर : पहाड़ी भाग।

15. प्रर्दुघण को रोकने के लिए प्लास्टिक के स्थान पर …………..का प्रयोग करना चाहिए।
उत्तर : जूट बैग।

16. प्राकृतिक रूप से विघटित होनेवाले वर्ज्य पदार्थ …………..है।
उत्तर : फलों एवं सब्जियों के छिलके।

17. …………… उपचार विधि के अन्तर्गत जल में मिले ठोस वर्ज्य पदार्थ को निकाला जाता है।
उत्तर : प्राथमिक।

18. …………..वायु को जल से गीला करके स्वच्छ करते है।
उत्तर : गीले ब्रश।

19. हुगली नदी में …………..से ठोस एवं द्रव वर्ज्य पदार्थों, अधिक प्राप्त है।
उत्तर : जूट मिलो।

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20. …………..प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाली उष्मा से विद्युत उत्पादन किया जा सकता है।
उत्तर : दहन।

21. …………..विधि के अन्तर्गत जल को शुद्ध करके पुनर्व्यवहार योगय बनाया जाता है।
उत्तर : तृतीय उपथार।

22. विभिन्न उद्योगो से निकलने वाले वर्ज्य पदार्थ को …………..कहते है।
उत्तर : वायु प्रदूषण।

23. …………..द्वारा पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सकता है।
उत्तर : अपशिष्ट प्रबन्धन।

24. जीवाश्म ईंथन के रूप में …………..प्रयोग किया जाता है।
उत्तर : कोयला।

25. लोहे के चादर को …………..वर्ष के वाद सड़ गल कर समाप्त होता है।
उत्तर : 50 से 100

26. सबसे कम समय में वर्ज्य पदार्थ …………..है।
उत्तर : खाद्य।

27. कपड़ो के विघटन से हानिकारक ……………गैस है।
उत्तर : CH4 (मिथेन) ।

28. घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में वर्ज्य पदार्थ के भरने से ……………की कमी हो जाती है।
उत्तर : भूमि।

29. पर्वतीय क्षेत्रों में ……………से वर्ज्य पदार्थ की उत्पत्ति होती है।
उत्तर : भूस्खलन।

30. अस्पताल के प्रयोगशाला उत्सर्जी पदार्थों को ……………वर्ज्य पदार्थ में रखा गया है।
उत्तर : चिकित्सकीय।

31. सबसे खतरनाक ……………वर्ज्य पदार्थ है।
उत्तर : रेडियो सक्रिय (Radio Active)।

32. औषधीय अपशिष्ट के दो उदाहरण हैं (क)…………… (ख)……………
उत्तर : (क) सिरिज (ख) सूइयाँ।

33. आणविक अपशिष्ट अधिकतर ……………रूप में होता है।
उत्तर : गैसीय

34. अपशिश्टों के पुनर्चक्रण या उनको पुन: उपयोग योगय बनाने को ……………कहते हैं।
उत्तर : परिहार

35. …………..होने वाले पदार्थों से जैविक खाद का निर्माण किया जा सकता है।
उत्तर : विघटित।

36. आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करने वाली वस्तुओं को …………..की क्षेणी में रखा जाता है। (संसाधन/कचरा)
उत्तर : कचरा।

37. जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग से………….. होता है। (वायु प्रदूषण/जल प्रदूषण)
उत्तर : वायु प्रदूषण।

38. …………..कचरा हानिकारक घरेलू अपशिष्ट है। (प्लास्टिक / इलेक्ट्रॉनिक)
उत्तर : प्लास्टिक।

39. अपशिष्टों के हानिकारक प्रभावों को …………..द्वारा कम किया जाता है। (प्रक्रम/एकत्रीकरण)
उत्तर : एकत्रीकरण।

40. अपशिष्टों के…………..द्वारा संचित संसाधनों को संरक्षण प्राप्त हो सकता है। (निस्तारण/पुनर्व्यवहार)
उत्तर : निस्तारण।

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41. ……..का उपयोग जैविक खाद के निर्माण में किया जा सकता है। (फलों एवं सब्जियों के छिलकों/प्लास्टिक)
उत्तर : फलों एवं सब्जियों के छिलकों।

42. भूमि का भराव …………..अपशिष्ट प्रबन्धन का आम तरीका है। (तरल/ठोस)
उत्तर : ठोस।

43. जल के द्वितीयक उपचार में ………….. अपशिष्टों को निकाला जाता है। (प्रथामिक/द्वितीय)
उत्तर : प्रथामिक।

सही कथन के आगे ‘True’ एवं गलत कथन के आगे ‘False’ लिखिए : (1 Mark)

1. जैव विघटित अपशिष्टों का संश्लेषण बैक्टीरिया के द्वारा नहीं किया जा सकता है।
उत्तर : False

2. भूमि पर वर्ज्य पदार्थ के अपघटन होने से ह्यूम (Humus) का निर्माण होता है।
उत्तर : True

3. सभी प्रकार के वर्ज्य पदार्थ हानिकारक होते हैं।
उत्तर : False

4. रेडियो धर्मी अपशिष्ट का पुन: प्रयोग हो सकता है।
उत्तर : False

5. भरटकरण वर्ज्य पदार्थों को हटाने की एक प्रक्रिया है।
उत्तर : True

6. भूमि पर वर्ज्य पदार्थ के अपघटन होने से ह्यूमस का निर्माण होता है।
उत्तर : True

7. ठोस, द्रव्य तथा गैस वर्ज्य पदार्थो से होता है।
उत्तर : False

8. रेडियो तरंगे आयनमण्डल से होकर लौटती हैं।
उत्तर : True

9. पर्वती मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा कम होती है।
उत्तर : True

10. विघटित होने वाले अपशिष्ट जो जल, वायु एवं मिट्टी में मिल जाते हैं ‘जैवविघटित अपशिष्ट’ कहलाते हैं।
उत्तर : True

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11. नगरीय क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक अपशिष्टों का उत्सर्जन होता है।
उत्तर : False

12. प्लास्टिक एक जैवरूप से विधटित होने वाला अपशिष्ट नहीं है।
उत्तर : True

13. मध्याह्नकालीन भोजन परियोजना में कम अपशिष्टों का उत्पादन होता है।
उत्तर : False

14. सभी प्रकार के अपशिष्ट पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं।
उत्तर : True

15. औद्योगिकीकरण एवं आधुनिकीकरण से ही वर्ज्य पदार्थ की उत्पत्ति हुई है।
उत्तर : True

16. रेडियो धर्मी वर्ज्य पदार्थ लाभदायक होता है।
उत्तर : False

17. ठोस कचरो के इक्कठा होने से संक्रामक रोग नहीं होते है।
उत्तर : False

18. प्लास्टिक पुनर्चक्रीय वर्ज्य पदार्थ है।
उत्तर : True

19. विद्युत कचरा हानिकारक होते है।
उत्तर : False

20. दहन से वर्ज्य पदार्थो के आयत में 50%-60% की कमी हो जाती है।
उत्तर : False

21. दामोदर नदी में ठोस एवं द्रव वर्ज्य पदार्थ की मात्रा में वृद्धि हो रही है।
उत्तर : True

22. गैसो में मिश्रित ठोस कण गीले होते है।
उत्तर : True

23. जैविक वर्ज्य पदार्थ को एक गढ्दे में डालकर ढक देना चाहिए।
उत्तर : True

24. ठोस, द्रव एवं गैस वर्ज्य पदार्थों से हैजा होता है।
उत्तर : False

25. विद्युत उपकरण वर्ज्य पदार्थ पुनर्चक्रण की कोई विधि नहीं है।
उत्तर : True

26. प्रदूषित वायु से फेपड़ो में केंसर आदि विभिन्न रोग हो सकते है।
उत्तर : True

27. अपशिष्ट प्रबन्धन वातावरण को नष्ट करने की विधि है।
उत्तर : True

28. अपशिष्ट प्रबंधन में छात्रों की भूमिका सबसे अधिक है।
उत्तर : True

29. हुगली नदी में कीलीफार्म जीवाणु का स्तर बढ़ रहा है।
उत्तर : True

30. घरेलू भोजन, कचरा, प्लास्टिक के सामान, काटन आदि निराविषी अपशिष्ट हैं।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

31. CO2 कार्बन मोनोआक्साइड. शल्फर डाइ आक्साइड आदि गैसीय अपशिष्ट हैं।
उत्तर : True

32. पेस्टीसाइड के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
उत्तर : False

33. Landfil अपशिष्ट प्रबंधन नहीं है।
उत्तर : False

34. घरेलू अपशिष्ट हमेशा ठोस होता है।
उत्तर : False

35. लोहा के अपशिष्ट से लौह निर्माण को पुनर्चक्रण करना कहा जाता है।
उत्तर : False

36. भूमि भराव में ठोस पदार्थों का उपयोग नहीं होता है।
उत्तर : False

37. अपशिष्ट की मात्रा तीव्र गति से बढ़ रही है, अत: अपशिष्ट प्रबंधन आवश्यक हो गया है।
उत्तर : True

38. अपसिष्टों के हानिकारक प्रभाव भूमि, जल तथा वायु तीनों पर ही दिखाई दे रहे हैं।
उत्तर : True

39. औद्योगिक बहिं :स्राव से गैसीय अपशिष्ट उत्पन्न होते हैं।
उत्तर : True

40. इलेक्ट्रॉनिक कचरा हानिकारक घरेलू अपशिष्ट है।
उत्तर : False

41. कीटनाशक जल, एवं मिट्टी तीनों को ही प्रदूषित करते हैं।
उत्तर : True

42. रेडियोधर्मी अपशिष्ट हानिकारक होते हैं।
उत्तर : False

43. ठोस कचरों के एकत्रित होकर सड़ने से संक्रामक रोग फैलाने वाले कीटाणुओं का विकास होता है।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) फ्रिज (i) तरल वर्ज्य पदार्थ
(b) टम्यूमर (ii) ठोस, द्रव तथा गैस
(c) मोबिल (iii) कृषिजात वर्ज्य पदार्थ
(d) औद्योगिक वर्ज्य पदार्थ (iv) चिकित्सकीय वर्ज्य पदार्थ
(e) गैर विषैली (v) इलेक्ट्रॉनिक वर्ज्य पदार्थ

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) फ्रिज (v) इलेक्ट्रॉनिक वर्ज्य पदार्थ
(b) टम्यूमर (iv) चिकित्सकीय वर्ज्य पदार्थ
(c) मोबिल (i) तरल वर्ज्य पदार्थ
(d) औद्योगिक वर्ज्य पदार्थ (ii) ठोस, द्रव तथा गैस
(e) गैर विषैली (iii) कृषिजात वर्ज्य पदार्थ

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 4 अपशिष्ट प्रबंधन

प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) घरेलू अपशिष्ट (i) औद्योगिक बहि:स्राव
(b) तरल अपशिष्ट (ii) रेडियोधर्मी अपशिष्ट
(c) अति हानिकारक अपशिष्ट (iii) जानवरों का मल-मूत्र
(d) कृष्जितात अपशिष्ट (iv) आर्सेनिक
(e) पुनर्चक्रीय अपशिष्ट (v) रद्दी कागज

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
(a) घरेलू अपशिष्ट (v) रद्दी कागज
(b) तरल अपशिष्ट (i) औद्योगिक बहि:स्राव
(c) अति हानिकारक अपशिष्ट (ii) रेडियोधर्मी अपशिष्ट
(d) कृष्जितात अपशिष्ट (iii) जानवरों का मल-मूत्र
(e) पुनर्चक्रीय अपशिष्ट (iv) आर्सेनिक

 

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 Geography Book Solutions Chapter 3 जलमण्डल offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 Geography Chapter 3 Question Answer – जलमण्डल

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
सामुद्रिक मछलियों का प्रमुख खाद्य क्या है ?
उत्तर :
प्लैंकटन नामक सूक्ष्म जीवाणु।

प्रश्न 2.
कान्तीय समुद्र में किस प्रकार की धारायें उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर :
गर्म धाराएं।
प्रश्न 3.
अंध महासागर के एक धारा का नाम बताओ।
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम, फाकलैंड धारा।

प्रश्न 4.
भूमण्डलीय तापन में किस हरित गृह गैस की भूमिका सर्वोच्च रहती है ?
उत्तर :
कार्बन डाई आक्साइ।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 5.
विभिन्न महासागरीय धराओं के अनुवर्ती प्रवाह के कारण उत्पन्न-जल के चक्रीय गति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
धारा चक्र।

प्रश्न 6.
जब उष्ण एवं शीतल सागरीय धाराएँ आपस में मिलती हैं तो किस प्रकार की मौसमी दशा विद्यमान रहती है।
उत्तर :
कुहरा छाया रहता है।

प्रश्न 7.
सागरीय लहरों की उत्पत्ति में सागर की उनमुक्तता क्या है ?
उत्तर :
बाह्य कारणों जैसे अत्यधिक वर्षा, वाष्षीकरण, हिम के पिघलने, विशाल नदियों के सागर में मिलने वाली वृद्धि या कमी आदि के कारण सागर के जल तल में उत्पन्न असमानता के कारण सागरीय लहरों की उत्पत्ति को सागर की उन्मुक्तता के कारण लहरों की उत्पत्ति कहते हैं।

प्रश्न 8.
प्राथमिक ज्वार उत्पन्न होने का मुख्य कारण क्या है ?
उत्तर :
चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल।

प्रश्न 9.
दो उच्च ज्वारों के बीच समय का अन्तर कितना रहता है ?
उत्तर :
24 घंटे 52 मिनट।

प्रश्न 10.
एल-निनो का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
क्रिसमस के बच्चे की धारा।

प्रश्न 11.
किस महासागर में बेंगुला धारा पायी जाती है ?
उत्तर :
अटलाण्टिक महासागर में।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 12.
ज्वार-भाटा का मुख्य कारक क्या है ?
उत्तर :
चन्द्रमा का गुरूत्वाकर्षण बल।

प्रश्न 13.
चन्द्रकला के किस चरण में लघु ज्वार उत्पन्न होता है ?
उत्तर :
दोनों पक्षों के अष्टमी के दिन।

प्रश्न 14.
किसी स्थान पर एक दिन में कितने बार ज्वार-भाटा आते हैं ?
उत्तर :
दो बार।

प्रश्न 15.
हुगली नदी के मुहाने पर उत्पन्न होनेवाली ज्वारीय भित्ति का क्या नाम है ?
उत्तर :
बान।

प्रश्न 16.
लहरों से महासागरीय जल में किस प्रकार गति होती है ?
उत्तर :
दोलनात्मक गति (Oscillodory movement)।

प्रश्न 17.
किस गति के कारण सागरीय जल में आवर्ती चढ़ाव तथा उतार होता है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा (Tides)।

प्रश्न 18.
किन हवाओं के प्रभाव से क्यूरोशियो की धारा पूर्व दिशा की ओर मुड़ जाती है ?
उत्तर :
पछुआ हवाओं।

प्रश्न 19.
उत्तरी गोलार्द्ध में महासागरीय धाराएं किस दिशा में चक्र बनाती है ?
उत्तर :
घड़ीवत (Clock-wise)।

प्रश्न 20.
तेज गति से चलनेवाली धाराओं को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
स्रोत या स्ट्रीम (Stream)।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 21.
किस धारा के प्रभाव से कनाडा के पश्चिमी तट पर वर्षा होती है ?
उत्तर :
क्यूरोशियो की शाखा उत्तरी प्रशांत प्रवाह के प्रभाव से।

प्रश्न 22.
किन धाराओं के ऊपर से गुजड़नेवाली हवाएं शुष्क होती हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धाराओं के ऊपर से गुजरनेवाली हवाएं।

प्रश्न 23.
न्यूफाउण्डलैण्ड के समीप किन धाराओं के मिलने के कारण कुहरा उत्पत्न होता है ?
उत्तर :
गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलने से।

प्रश्न 24.
किस धारा के प्रभाव से ब्रिटिश द्वीप समूह के बंदरगाह साल भर खुले रहते हैं ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा के प्रभाव से।

प्रश्न 25.
कम ऊँचे ज्वार की उत्पत्ति किन सागरो में होती है ?
उत्तर :
खुले तथा गहरे सागरों में।

प्रश्न 26.
पृथ्वी के किस भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है ?
उत्तर :
जल भाग पर।

प्रश्न 27.
वियुति की स्थिति किस दिन होती है ?
उत्तर :
पूर्णमासी के दिन।

प्रश्न 28.
युति की स्थिति किस दिन रहती है ?
उत्तर :
अमावस्या के दिन।

प्रश्न 29.
किस दिन सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण की स्थिति में होते हैं ?
उत्तर :
शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन।

प्रश्न 30.
किस दिन चन्द्रमा का ज्वारोत्पादक बल सबसे कम रहता है ?
उत्तर :
अपभू (Apogeam) की स्थिति या शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन ।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 31.
महासागर से सम्बन्धित विज्ञान की एक शाखा को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
समुद्री विज्ञान (Oceanograph)।

प्रश्न 32.
पृथ्वी पर जलमण्डल का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
36.1 करोड़ वर्ग कि॰मी० पर जलमण्डल है।

प्रश्न 33.
घरातल के कितने प्रतिशत भाग पर जल का विस्तार है ?
उत्तर :
70.78 % भाग पर।

प्रश्न 34.
पृथ्वी के किस गोलार्द्ध में जलमण्डल का विस्तार अधिक है ?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध में (60 %)।

प्रश्न 35.
प्रशान्त महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
16.55 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 36.
अटलांटिक महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
8.21 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 37.
हिन्द महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
7.36 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 38.
आर्कटिक महासागर का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
1.40 करोड़ वर्ग किमी०।

प्रश्न 39.
पृथ्वी पर सबसे बड़ा महासागर कौन है ?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर।

प्रश्न 40.
धरातल पर स्थित सबसे छोटा महासागर कौन है ?
उत्तर :
आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean)।

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प्रश्न 41.
प्रशान्त महासागर में कितने सागर हैं ?
उत्तर :
90 सागर है।

प्रश्न 42.
भारत या हिन्द महासागर में कितने सागर हैं ?
उत्तर :
पाँच सागर है।

प्रश्न 43.
सात सागर किन महासागरो में जाकर मिलते हैं ?
उत्तर :
अटलांटिक तथा आर्कटिक महासागर में।

प्रश्न 44.
विश्व का सबसे गहरा गर्त कौन सा है ?
उत्तर :
मैरियाना खडु (Mariana’s Trench) (11033 मी॰)।

प्रश्न 45.
विश्व का दूसरा सबसे गहरा गर्त कौन सा है ?
उत्तर :
मिंडानाओ गर्भ (Mindano Deep) (10400 मी॰)।

प्रश्न 46.
सागरीय सतह के क्रमिक उतार-चढ़ाव को क्या कहते है ?
उत्तर :
लहर (Waves)।

प्रश्न 47.
किस नियम के अनुसार महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बायीं ओर बहती है ?
उत्तर :
फेरल के नियमानुसार।

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प्रश्न 48.
महासागरों में मन्द गति से चलने वाली धाराओं को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्रवाह (Drift) कहते हैं।

प्रश्न 49.
चन्द्रमा तथा पृथ्वी के निकटतम स्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अपभू स्थिति (Perigee)।

प्रश्न 50.
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर कौन सी धाराएँ बहती हैं ?
उत्तर :
गर्म धाराएँ (Warm currents)।

प्रश्न 51.
विपरीत भू-मध्य रेखीय धारा की उत्पत्ति किस कारण होती है ?
उत्तर :
भू-परिभ्रमण के कारण।

प्रश्न 52.
किस धारा को हम्बोल्ट धारा कहते है ?
उत्तर :
पीरू की धारा को।

प्रश्न 53.
शीतल दीवार (Cold Wall) किस महासागर में पायी जाती है ?
उत्तर :
अंध महासागर में।

प्रश्न 54.
सारगैसो सागर की स्थिति कहाँ है ?
उत्तर :
सारगैसो सागर की स्थिति 10° N से 45° N के मध्य है।

प्रश्न 55.
किस धारा को पछुआँ प्रवाह (West Wind Drift) कहते हैं ?
उत्तर :
उत्तरी अटलांटिक प्रवाह।

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प्रश्न 56.
बेंगुला धारा किस मरूस्थल को कठोरता प्रदान करती है ?
उत्तर :
कालाहारी मरूस्थल को।

प्रश्न 57.
अफ्रीका के सहारा मरूस्थल पर किस धारा का प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
कनारी की ठण्डी धारा।

प्रश्न 58.
कालाहारी का मरूस्थल किस धारा के समीप स्थित है ?
उत्तर :
बेंगुला की ठण्डी धारा के समीप।

प्रश्न 59.
पीरू की ठण्डी धारा किस मरूस्थल को प्रभावित करता है ?
उत्तर :
अटकामा का मरूस्थल को।

प्रश्न 60.
किन जल धाराओं के मिलने से जापान के समीप कुहरा उत्पन्न होता है ?
उत्तर :
क्यूरेशियों की गर्म तथा क्यूराईल की ठण्डी धारा के कारण।

प्रश्न 61.
औसत प्रति 1000 कि०ग्रा० समुद्र जल में लवण की मात्रा कितनी पाई जाती है ?
उत्तर :
35 कि०ग्रा०।

प्रश्न 62.
किन प्रदेशो में सागरीय जल में लवणता अधिक पाए जाते हैं ?
उत्तर :
उष्ण प्रदेशो में।

प्रश्न 63.
प्रत्यक्ष ज्वार पर किस शक्ति का प्रभाव अधिक पड़ता है ?
उत्तर :
गुरुत्वाकर्षण शक्ति का।

प्रश्न 64.
अप्रत्यक्ष ज्वार किस बल द्वारा अधिक प्रभावित होता है ?
उत्तर :
केन्द्रापसारी ढाल द्वारा।

प्रश्न 65.
चन्द्रमा कितने दिनों में पृथ्वी की परिक्रमा पूरा करता है ?
उत्तर :
28 दिन में।

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प्रश्न 66.
किसी स्थान पर प्रथम ज्वार के कितनी देर बाद दूसरा ज्वार आता है ?
उत्तर :
12 घण्टे 26 मिनट बाद।

प्रश्न 67.
भारत के किस नदी में ज्वारीय भित्ति बनता है ?
उत्तर :
हुगली नदी में।

प्रश्न 68.
विश्व की सबसे बड़ी मीठी जल की झील कौन सा है ?
उत्तर :
सुपीरियर झील (U.S.A.)।

प्रश्न 69.
भारत के मीठी पानी झील का उदाहरण दें।
उत्तर :
उलर और डल आदि।

प्रश्न 70.
मृत सागर और कैस्पियन सागर कैसा झील है ?
उत्तर :
खारे जल वाली झील।

प्रश्न 71.
भारत के खारे पानी की झील कौन सा है ?
उत्तर :
सांभर झील।

प्रश्न 72.
भारत का एक ज्वारीय नदी कौन सी है ?
उत्तर :
हुगली नदी।

प्रश्न 73.
कौन सी गर्म धारा जापान के तटीय भाग को गर्म रखता है ?
उत्तर :
क्यूरेशियो की गर्म धारा।

प्रश्न 74.
लहरों में जल की गति कैसी होती है ?
उत्तर :
लहरो में जल केवल ऊपर-नीचे गिरता है।

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प्रश्न 75.
चन्द्रमा तथा पृथ्वी के बीच अधिकतम दूरी की स्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अपभू स्थिति (Apogem)।

प्रश्न 76.
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर कौन सी धाराएँ प्रवाहित होती है ?
उत्तर :
गर्म धाराएँ (Warm Current)।

प्रश्न 77.
महासागरों में स्रोत धारा किस कारण से उत्पत्र होते है ?
उत्तर :
तापक्रम एवं घनत्व के कारण।

प्रश्न 78.
प्रवाह की उत्पत्ति के क्या कारण है ?
उत्तर :
प्रचलित पवन द्वारा इसकी उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 79.
मानसूनी हवाओं का प्रभाव किस महासागर की धाराओं पर पड़ता है ?
उत्तर :
उत्तरी हिन्द महासागर की धारा पर।

प्रश्न 80.
संसार की अधिकांश धाराएँ किस पवन का अनुसरण करती है ?
उत्तर :
स्थायी पवनों की दिशा का।

प्रश्न 81.
ध्रुवीय प्रदेशों में उत्पत्र होने वाली धाराओं के नाम लिखो।
उत्तर :
लैब्रोडोर तथा क्यूराइली की ठण्डी धारा।

प्रश्न 82.
ध्रुवों के समीप जल का घनत्व कम होने का क्या कारण है ?
उत्तर :
हिम का पिघलना।

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प्रश्न 83.
संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे कौन सी धारा बहती है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम की धारा।

प्रश्न 84.
चीन तट के सहारे कौन सी धारा बहती है ?
उत्तर :
क्यूरोशियो की धारा।

प्रश्न 85.
प्राचीन काल में यूरोप से अमेरिका आने वाले जहाज किस धारा का अनुसरण करते थे ?
उत्तर :
उत्तरी भू-मध्यरेखीय धारा।

प्रश्न 86.
ब्रिटिश द्वीप-समूह एवं नार्वे के बन्दरगाह किस धारा के प्रभाव से वर्ष भर व्यापार के लिए खुले रहते है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा के प्रभाव से।

प्रश्न 87.
पूर्वी कनाडा के बन्दरगाह किस धारा के प्रभाव से बन्द रहते हैं ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की ठण्डी धारा।

प्रश्न 88.
जब किसी खाड़ी में ज्वार-भाटा के फलस्वरूप क्षैतिज धाराएँ उत्पन्न हो जाती है तब इन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर :
ज्वारीय धाराएँ (Tidal Current)।

प्रश्न 89.
ज्वार भाटा के लिए चन्द्रमा की कौन सी शक्तियाँ कार्य करती है ?
उत्तर :
गुरुत्वाकर्षण तथा केन्द्रापसारी शक्ति।

प्रश्न 90.
चन्द्रमा के दूरस्थ भाग में कौन सी शक्ति प्रभावशाली होती है ?
उत्तर :
केन्द्रापसारी शक्ति।

प्रश्न 91.
प्रत्येक स्थान पर दो बार ज्वार एवं दो बार भाटा किस कारण से आता है ?
उत्तर :
पृथ्वी के आवर्तन के कारण।

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प्रश्न 92.
ज्वार के आने के कितनी देर बाद भाटा आता है ?
उत्तर :
6 घण्टे 13 मिनट के बाद।

प्रश्न 93.
सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी के एक सीधी रेखा में स्थित होने की स्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
युति-वियुति या सिजिगी (Syzygy)!

प्रश्न 94.
सिजिगी का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
एक ही रेखा में स्थित तीन पिण्ड।

प्रश्न 95.
युति की स्थिति में चन्द्रमा की क्या स्थिति होती है ?
उत्तर :
सूर्य और पृथ्वी के बीच में रहता है।

प्रश्न 96.
युति की स्थिति किस दिन होती है ?
उत्तर :
अमावस्या के दिन।

प्रश्न 97.
खुले तथा गहरे सागरों में ज्वार की ऊँचाई कितनी होती है ?
उत्तर :
60° से 90 सेण्टीमीटर।

प्रश्न 98.
उथले तथा सँकरे समुद्रों में ज्वार की ऊँचाई कितनी होती है ?
उत्तर :
3 से 5 मीटर तक होती है।

प्रश्न 99.
पृथ्वी के परिभ्रमण का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
वार्षिक गति!

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प्रश्न 100.
ध्रुवीय भागों में वाष्पीकरण कम होता है या अधिक ?
उत्तर :
कम होता है।

प्रश्न 101.
मछली का प्रधान भोजन क्या है ?
उत्तर :
प्लैंकटन।

प्रश्न 102.
महासागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्रवाह।

प्रश्न 103.
पहले दिन की अपेक्षा दूसरे दिन ज्वार-भाटा कितने देर बाद आता है ?
उत्तर :
24 घ० 52 मिनट।

प्रश्न 104.
तापमान में भिन्नता से समुद्री जल-तल पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
महासागरीय धारएँ उत्पन्न होती है।

प्रश्न 105.
जल का खारापन समुद्री जल कैसे प्रभावित करता है ?
उत्तर :
सागरीय लवणता से सागरीय जल का घनत्व प्रभावित होता है। अधिक लवणता वाले भाग में जल का घनत्व अधिक हो जायेगा जिस कारम जल नीचे बैठता है, जबकि कम लवणता वाले भाग में जल का घनत्व अपेक्षाकृत कम होगा जिस कारण कम खारे भाग से जल अधिक खारे भाग की ओर गतिशील होता है।

प्रश्न 106.
अपोजी की स्थिति में चन्द्रमा और पृथ्वी के बीच क्या सम्बन्ध रहता है ?
उत्तर :
अपोजी (Apogee) उपभू स्थिति में चन्द्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है।

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प्रश्न 107.
ज्वार-भाटा का मानव जीवन पर दो प्रभावों का नाम लिखो।
उत्तर :
(i) ज्वारीय लहर के साथ मछुए गहरे सागर में मछली पकड़ने चले जाते है और लहर के साथ वापस आ जाते है।
(ii) ज्वारीय लहरों की चपेट में आकर कभी कभी जलयान डूब जाते है, जिससे धन जन का नुकसान होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
अपभू स्थिति क्या है ?
उत्तर :
अपभू स्थिति : चन्द्रमा अपनी अण्डाकार कक्ष के सहारे पृथ्वी की परिक्रमा करता है। अतः पृथ्वी व चन्द्रमा के बीच की दूरी सदा समान नहीं रहती है। जब चन्द्रमा पृथ्वी के निकटतम होता है, तो उसे चन्द्रमा कीअपभू स्थिति कहते हैं।

प्रश्न 2.
मत्स्य तट (Fishing Bank) क्या है ?
उत्तर :
मत्स्य तट (Fishing Bank) : स्वच्छ जल एवं प्लेंकटन की उपस्थिति के कारण जिस भाग से मछली पकड़ी जाती है, उस क्षेत्र को मत्स्म तट या क्षेत्र कहा जाता है। जैसे – डोगर बैंक, ग्रैण्ड बैंक।

प्रश्न 3.
कयाल क्या है ?
उत्तर :
क्याल शब्द मल्यालम भाषा से लिया गया है। भारत के पश्चिमी तट पर स्थित लैगून झील को कयाल कहा जाता है।

प्रश्न 4.
गाइर क्या है ?
उत्तर :
महासागरीय धाराओं के वृहद चक्रीय प्रवाह को गाइर कहते हैं। इसकी उत्पत्ति भूमण्डलीय पवन प्रतिरूप तथा कोरियोलिस बल के कारण होती है। इनकी दिशा उत्तरीय गोलार्द्ध में घड़ीवत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अघड़ीवत होती है।

प्रश्न 5.
ग्रैण्ड बैंक (Grand Bank) क्या है ?
उत्तर :
ग्रैण्ड बैंक : गर्म और ठण्डी जलधारा के मिलने से ग्रैण्ड बैंक पर प्लैंकटन पायी जाती है। यहां उत्तम बन्दरगाह विकसित है। जंगलों से मत्स्य व्यापार को सहायता मिलती है। साथ ही ठण्डी जलवायु में मछलियाँ लम्बे समय तक संरक्षित रहती हैं। यही कारण है कि प्रैण्ड बैंक मछलियों को पकड़ने के लिए काफी मशहूर है। इस प्रकार समशीतोष्ण जलवायु, उथला समुद्र एवं प्लैंकटन की उपलब्धता से ग्रैण्ड बैंक मुख्य मत्स्यागार है।

प्रश्न 6.
भूमि स्खलन (Land fall) क्या है ?
उत्तर :
भूमि स्खलन (Land Fall) :- चट्टानों के चूर्ण के सामूहिक स्थान्तरण की विधियो में भूमि स्खलन सबसे महत्वपूर्ण विधि है।

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प्रश्न 7.
महासागरीय धारा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
समुद्री धारायें (Ocean Currents) : सागरीय जल के एक तल नियमित रूप से निश्चित दिशा में प्रवाहित होने वाली गति को महासागरीय धारा कहते हैं।

प्रश्न 8.
सागरीय लहरों से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
लहरें या तंरगें (Waves) : सागरीय जल के क्रमिक उत्थान और पतन के लहर कहते हैं। अथवा महासागरीय सतह की दौलायमान गति को तरंग कहते है।

प्रश्न 9.
भूमध्यरेखीय भाग में सागरीय जल की सतह ध्रुवीय भाग की सतह की अपेक्षा ऊँची क्यों रहती है ?
उत्तर :
भूमध्यरेखीय भाग में अधिक गर्मी पड़ने से वहाँ का जल गर्म होकर फैलता रहता है तथा हल्का होकर ऊपर उठता रहता है। इसके विपरीत धुवीय भाग में अधिक ठण्डक पड़ने के कारण वहाँ का जल ठण्डा होकर सिकुड़ता है तथा भारी होकर नीचे बैठता रहता है। इस प्रकार भूमध्यरेखीय भाग के जल की सतह ध्रुवीय भाग के जल की सतह की अपेक्षा ऊँची हो जाती है।

प्रश्न 10.
स्रोत (Stream) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
स्रोत (Stream) : तेज गति से चलने वाली धाराओं को स्रोत या स्ट्रीम कहते हैं। ये मुख्यतः तापक्रम व घनत्व के अन्तर के कारण उत्पन्न होती है तथा कम चौड़ी होती है। जैसे गल्फस्ट्रीम तथा क्यूरोशियो की गर्म धाराएँ।

प्रश्न 11.
ठण्डी-धाराओं के समीप महादेशीय भाग में मरूस्थल क्यों पाए जाते हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धाराओं के ऊपर से जाने वाली वायु ठण्डी हो जाती है जिससे उनमें जलवाष्प ग्रहण करने की शक्ति घट जाती है । इन शुष्क हावाओं के प्रभाव से तटीय भागों में वर्षा नहीं होती और उनके समीप मरूस्थल पाये जाते हैं।

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प्रश्न 12.
ज्वार-भाटा से आप क्या समझते है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा (Tide-Ebb) : सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण है । भू-पतल ठोस रहने के कारण आकर्षिक नहीं होता परन्तु समुद्र का जल तरल होने के कारण ऊपर उठ जाता है। समुद्र में जल के ऊपर उठने को ज्वार (Tide) तथा नीचे गिरने को भाटा (Ebb) कहते हैं।

प्रश्न 13.
कोरियोलिस बल क्या है ?
उत्तर :
कोरियोलिस बल (Cariolis force) : पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कोरियोलिस फोर्स उत्पन्न होता है। इसके कारण पवनें व समुद्री धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बाँयी ओर मुड़ जाती हैं।

प्रश्न 14.
डोगर बैंक क्या है ?
उत्तर :
डोगर बैंक : यह उत्तरी सागर में स्थित हैं जो मछली पकड़ने का प्रमुख क्षेत्र है। स्वच्छ जल होने के कारण अत्यधिक मछलियाँ पकड़ी जाती है।

प्रश्न 15.
भाटा से क्या समझते हो ?
उत्तर :
भाटा (Ebb) : ज्वार का जब कोई स्थान चन्द्रमा के सामने से हट जाता है तब समुद्र का जल उतरता है। इसे भाटा (Ebb) कहते हैं।

प्रश्न 16.
लघुज्वार कब होता है ?
उत्तर :
प्रत्येक महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष के सप्तमी या अष्टमी को लघुज्वार (Neap Tide) आता है।

प्रश्न 17.
दीर्घ ज्वार कब होता हैं ?
उत्तर :
प्रत्येक महीना में पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन सूर्य व चन्द्रमा की सम्मिलित शक्ति पृथ्वी पर कार्य करती हैं जिससे ज्वार सामान्य ज्वार से ऊँचा होता है।

प्रश्न 18.
ज्वारीय अंतर क्या हैं ?
उत्तर :
ज्वारीय अंतर (Tidal range) : महासागरों में उच्च ज्वार तथा लघु ज्वार के ऊँचाई के ज्वारीय अन्तर को ज्वारीय अंतर कहते हैं।

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प्रश्न 19.
पेरीजियन ज्वार से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जब चन्द्रमा भमण पथ पर पृथ्वी से सबसे नजदीक (Perigee) विन्दु पर आ जाता है तो उसकी ज्वार उत्पादक शक्ति वढ़ जाती है। इसके प्रभाव से High Tide से भी 20 % बड़ा ज्वार आता है। इसे ही Perigeon Tides कहते हैं।

प्रश्न 20.
दो मुख्य या दो गौण ज्वारों में कितने समय का अन्तर होता है ?
उत्तर :
दो प्रधान और गौण ज्वारों के बीच 24 घंटे 52 मिनट समय का अन्तर होता है।

प्रश्न 21.
ज्वारीय ऊर्जा क्या है ?
उत्तर :
ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy) : जो ऊर्जा ज्वार-भाटे के कारण जल स्तर के ऊपर उठने तथा नीचे गिरने से उत्पन्न की जाती है उसको ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं। ज्वारीय ऊर्जा के केन्द्र फ्रांस, जापान एवं रूस में स्थापित किये गये हैं।

प्रश्न 22.
ज्वारीय धारा क्या है ?
उत्तर :
जब किसी खाड़ी में ज्वार-भाटा के फलस्वरूप क्षैतिज धाराएँ उत्पन्न हो जाती है तब इन्हें ज्वारीय धाराएँ (Tidal currents) कहते हैं।

प्रश्न 23.
मुख्य ज्वार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
मुख्य ज्वार (Primary tide) : पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अतः इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार (Direct tide) या प्रारम्भिक या मुख्य ज्वार (Primary tide) कहते हैं।

प्रश्न 24.
गौण ज्वार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
गौण ज्वार (Indirect Tide) : पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हट कर ऊपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार या गौण ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 25.
दीर्घ या वृहद् ज्वार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दीर्घ या वृहद् ज्वार (Spring Tide) : जब सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो सूर्य और चन्द्रमा की सम्मिलित शक्ति से समुद्री जल अर्थात ज्वार ऊँचा उठ जाता है। इसे दीर्घ ज्वार कहते है। यह स्थिति महिने में दो बार पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

प्रश्न 26.
लघु ज्वार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
लघु ज्वार (Neap Tide) : शुक्ल अथवा कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन चन्द्रमा और सूर्य पृथ्वी के साथ परस्पर समकोण की स्थिति में होते हैं। अतः उनकी ज्वार-उत्पादक शक्तियाँ एक-दूसरे की विपरीत दिशा में कार्य करती हैं जिनसे ज्वार सामान्य ज्वार से कम ऊँचा तथा भाटा सामान्य भाटा से कम नीचा रहते हैं। इसे लघु ज्वार (Neap Tide) कहते हैं।

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प्रश्न 27.
पृथ्वी का सबसे गहरा स्थान कौन है ?
उत्तर :
मारियाना खड्ड विश्व का सबसे गहरा बिन्दु है। इसकी गहराई लगभग 28,018.55 मीटर है। यह प्रशान्त महासागर में स्थित है।

प्रश्न 28.
मृत सागर में डूबना सम्भव क्यों नहीं है ?
उत्तर :
मृतसागर में पानी की लवणता अत्यधिक है। इसकी लवणता लगभग 238 % है। अत: अत्यधिक लवणता के कारण मृतसागर का घनत्व बहुत ज्यादा है। अत: इसमें डूबना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 29.
सबसे बड़े एवं सबसे छोटे महाद्विपीय मग्न तट कौन है ?
उत्तर :
दक्षिण पूर्वी एशिया का इण्डोनेशिया और द० चीन का सम्मिलित महाद्वीपीय मग्न तट विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीपीय मग्न तट है। इसे सुण्डा मग्न तट कहते हैं। अफ्रीका महाद्वीप में महाद्वीपीय मग्न तटों का सबसे कम विकास हुआ है।

प्रश्न 30.
सह-ज्वारीय रेखा क्या है ?
उत्तर :
सह-ज्वारीय रेखा (Co-tidal line) : जिन स्थानो पर एक ही समय ज्वार-भाटा आता है उनको मिलाने वाले रेखा को सम ज्वारीय रेखा कहते है।

प्रश्न 31.
संसार का सबसे ऊँचा ज्वार कहाँ आता है ?
उत्तर :
उत्तरी अमेरिका के नोवास्कोशिया के निकट फण्डी की खाड़ी में ज्वार की ऊँचाई संसार से सबसे अधिक (21 मीटर) तक ऊँची होती है।

प्रश्न 32.
एगार क्या है ?
उत्तर :
एगर (Agar) : ज्वार का जल जब नदियों के मुहाने में प्रवेश करता है तो ज्वारीय जल की दीवार बन जाती है। इसे ज्वारीय भित्ति या एगर कहते हैं।

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प्रश्न 33.
ज्वारीय अन्तर क्या है ?
उत्तर :
ज्वारीय अन्तर (Tidal Range) : समुद्र में आने वाले ऊच्च ज्वार तथा निम्न ज्वार के ऊँचाई के अन्तर को ज्वारीय अन्तर (Tidal Range) कहते हैं।

प्रश्न 34.
फैदम क्या है ?
उत्तर :
फैदम (Fadam) : यह समुद्री जल की गहराई नापने का स्केल है। एक फैदम फीट के बराबार होता है।

प्रश्न 35.
जलमण्डल (Hydrosphere) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी पर विस्तृत सभी प्राकृतिक जलाशयों जैसे – महासागर, सागर, नदियाँ इत्यादि को सम्मिलित रूप से जलमण्डल (Hydrosphere) कहते हैं।

प्रश्न 36.
सागर (Sea) किसे कहते है ?
उत्तर :
महासागरों का वह सीमावर्ती क्षेत्र जो मुख्य महासागरीय क्षेत्र से पृथक हो, परन्तु जिसका किसी दिशा में महासागर के जल से सम्पर्क हो सागर (Sea) कहलाता है।

प्रश्न 37.
महासागरीय गर्त एवं खड्ड में क्या अन्तर है ?
उत्तर :
महासागरीय गर्त अधिक विस्तृत किन्तु कम गहरे होते हैं जबकि खड्ड कम विस्तृत किन्तु अधिक संकरे एवं गहरे होते हैं।

प्रश्न 38.
खाड़ी (Bay) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
समुद्र का वह भाग जो स्थल में त्रिभुज के आकार में प्रवेश किया है और समुद्र की ओर चौड़ा मुख रहता है उसे खाड़ी (Bay) कहते हैं।

प्रश्न 39.
दीर्घ ज्वार कब आता है ?
उत्तर :
यह स्थिति महिने में दो बार, पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

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प्रश्न 40.
लघु ज्वार कब आता है ?
उत्तर :
यह ज्वार प्रत्येक महीने में दो बार, शुक्ल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी के दिन आता है।

प्रश्न 41.
सम ज्वारीय रेखा (Co-tidal line) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सम ज्वारीय रेखा (Co-tidal line) : जिन स्थानो पर एक ही समय ज्वार-भाटा आता है उनको मिलाने वाले रेखा को सम ज्वारीय रेखा कहते हैं। इन रेखाओं से ज्वार की लहरों की प्रगति ज्ञात होती है।

प्रश्न 42.
झील (Lake) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
झील (Lake) : स्थल खण्ड से घिरे हुए वृहद प्राकृतिक जलाशय को झील कहते है।

प्रश्न 43.
भारत का एक कृत्रिम झील का उदाहरण दें।
उत्तर :
भारत में भाखरा बाँध का जलाशय गोविन्द सागर एक कृत्रिम झील है।

प्रश्न 44.
लहरों की उत्पत्ति का क्या कारण है ?
उत्तर :
लहरों की उत्पत्ति सागरीय पृष्ठ पर प्रवाहित होने वाले पवन के दबाव तथा घर्षण से होती है।

प्रश्न 45.
धाराओं की उत्पत्ति में किन प्राकृतिक तत्वों का योगदान होता है ?
उत्तर :
धाराओं की उत्पत्ति में तापमान, लवणता, पृथ्वी की घूर्णन तथा प्रचलित पवन आदि विभिन्न कारको का योगदान रहता है।

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प्रश्न 46.
गर्म धारा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
भूमध्यरेखा से धुवों की ओर बहने वाली धाराओं का जल अपने आस-पास के समुद्रों के जल की अपेक्षा गर्म होता है, अतः इन्हें गर्म धाराएँ (Warm Currents) कहते हैं।

प्रश्न 47.
ठण्डी धाराएँ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
धुवों से भूमध्यरेखा की ओर चलने वाली धाराओं को ठण्डी धाराएँ (Cold currents) कहते हैं।

प्रश्न 48.
कोरियोलिस बल का समुद्री धारा पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
पृथ्वी की परिक्रमण गति के कारण उत्पत्न कोरियोलिस बल के कारण धाराओं की दिशा में झुकाव हो जाता है। यह झुकाव उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिने हाथ की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाएँ हाथ की ओर होता है।

प्रश्न 49.
निम्न अक्षांशों में गर्म एवं शीतल धाराएँ किस ओर चलती है ?
उत्तर :
निम्न अक्षांशों में गर्म धाराएँ पूर्वी तट एवं शीतल धाराएँ पश्चिमी तट की ओर चलती है।

प्रश्न 50.
पूर्वी ग्रीनलैण्ड धारा की उत्पत्ति का क्या कारण है ?
उत्तर :
पूर्वी ग्रीनलैण्ड धारा की उत्पत्ति का कारण हिम के पिघलने से प्राप्त जल के कारण जलस्तर का ऊँचा उठना ही है।

प्रश्न 51.
उत्तरी हिन्द महासागर में चलनेवाली धाराओं पर किसका प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
मानसूनी हवाओं के दिशा परिवर्तन का प्रभाव।

प्रश्न 52.
युति की स्थिति में क्या होता है ?
उत्तर :
युति की स्थिति में सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा स्थित होता है।

प्रश्न 53.
वियुति की स्थिति में क्या होता है ?
उत्तर :
वियुति की स्थिति में सूर्य और चन्द्रमा के बीच में पृथ्वी स्थित रहती है।

प्रश्न 54.
यदि चन्द्रमा स्थिर होता तो क्या होता ?
उत्तर :
यदि चन्द्रमा स्थिर होता तो सागर तल पर प्रत्येक 24 घण्टे में दो बार ज्वार तथा दो बार भाटा आते तथा प्रतिदिन एक निश्चित समय पर ही ज्वार-भाटा आते।

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प्रश्न 55.
प्रवाह क्या है ?
उत्तर :
जब पवन वेग से प्रभावित होकर सागर के सतह का जल आगे की ओर अग्रसर होता है तो उसे प्रवाह कहते है।

प्रश्न 56.
विशालधारा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जब सागर का विशाल जलराशी तीव्र गति से निध्चित दिशा में प्रभावित होती है। तो इसे विशाल धारा कहते है।

प्रश्न 57.
ओपोजी किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जब चन्द्रमा पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर रहता है । तो ज्वार उत्पन्न करने की शक्ति कम होती है। इस स्थिति में ज्वार की ऊँचाई सामान्य ज्वार से कम होती है। इसे (Apogee) कहते है।

प्रश्न 58.
एक दीन में कितनी बार पृथ्वी के किसी स्थान पर उच्च और निम्न ज्वार-भाटा दिखाई पड़ता है ?
उत्तर :
एक दीन में दो बार उच्च और दो बार निम्न ज्वार दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 59.
उत्तरी गोलार्द्ध में महासागरीय धाराएँ किस दिशा में चक्र बनाती हैं ?
उत्तर :
उत्तरी गोलार्द्ध में महासागरीय धराएँ दाहिने हाथ की ओर चक्र बनाती है।

प्रश्न 60.
किन धाराओं के ऊपर से गुजरनेवाली हवाएँ शुष्क होती हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धारओं के ऊपर से गुजरनेवाली हवाएँ शुष्क होती है।

प्रश्न 61.
न्यूफाउण्डसैण्ड के समीप किन धाराओं के मिलने के कारण कुहरा उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
न्यूफाउण्डसैण्ड के पास गल्फसट्रीम की गर्म जलधारा तथा लैब्रोडोर की ठण्डी जलधारा मिलती है. जिसके कारण कुहरा उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 62.
किस धारा के प्रभाव से ब्रिटिश द्वीप समूह के बन्दरगाह साल बर खुले रहते हैं ?
उत्तर :
गलफ्लस्ट्रीम की गर्मधारा के प्रभाव से ब्रिटिश द्वीप समुह का बन्दरगाह साल भर खुले रहते है।

प्रश्न 63.
कम ऊँचे ज्वार की उत्पत्ति कन सागरों में होती है ?
उत्तर :
खुले सागरो मे कम ऊँचे ज्वार उत्पन्न होते है।

प्रश्न 64.
पृथ्वी के किस भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है ?
उत्तर :
पृथ्वी के जल भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है।

प्रश्न 65.
युति की स्थिति किस दिन रहती है ?
उत्तर :
यह स्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

प्रश्न 66.
किस दिन सूर्य चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण की स्थिति में होते हैं ?
उत्तर :
यह स्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, शुकल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी को होती है।

प्रश्न 67.
किस दिन चन्द्रमा का ज्वारोत्पादक बल सबसे कम रहता है ?
उत्तर :
यह सिस्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, शुकल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी को होती है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार की सागरीय धाराएँ क्या हैं ?
उत्तर :
सागरीय धाराएँ : गति, विस्तार एवं सीमा के आधार पर महासागरीय धाराओं को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है।
(i) ड्रिफ्ट (Drift) : जल की ऊपरी सतह पर मन्द गति से बहनेवाली जलधाराएँ ड्रिफ्ट कहलाती हैं। इनकी गति तथा प्रभाव क्षेत्र निश्चित नहीं होता। उत्तरी अन्ध महासागरीय ड्रिफ्ट इसका उदाहरण है।
(ii) धारा (Current) : इसकी प्रवाह गति तीव्र तथा निश्चित होती है। ये उष्ण तथा शीतल, दोनों प्रकार की होती है। क्यूरोसियो इसका उदाहरण है।
(iii) प्रवाह (Stream) : निश्चित दिशा में तीव्र गति से बहनेवाली जलधाराएँ स्ट्रीम कहलाती हैं। इनकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। गल्फस्ट्रीम उष्ण जलधारा इसका उदाहरण है।

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प्रश्न 2.
ज्वार-भाटा से क्या हानियाँ है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा हित के साथ अनेक प्रकार से अनहित भी करता है। ज्वार-भाटा से निम्नलिखित हानियाँ हाती हैं
(i) ज्वार-भाटा कभी-कभी सागर में बेगवान तरंगों को जन्म देता है जिसे जलयान नष्ट हो जाते हैं जिनसे उन्हें भारी क्षति उठानी पड़ती है।
(ii) ज्वार-भाटा अनेक तटों पर मिट्टी, बालू तथा कूड़ा-कर्कट आदि लाकर एकत्र कर देता है जिससे बन्दरगाहों के विकास में बाधा पड़ती है। सागर तटो को जलयानों के आगमन के लिए स्वच्छ बनाने के लिए भारी व्यय करना पड़ता है।
(iii) ऊँची-ऊँची ज्वारीय तरंगें तथा ज्वार भित्तियाँ नौकओं को पलट कर डुबो देने में सक्षम होती हैं जिसके कारण अपार धन-जन की हानि होती है।

प्रश्न 3.
सारगासो समुद्र का निर्माण कैसे हुआ ?
उत्तर :
सारगैसो सागर की उत्पत्ति : उत्तरी अटलांटिक महासागर के मध्य में धाराओं का एक गोलाकार क्रम उत्पव्न होता जाता है। इसके मध्य में शांत एवं स्थिर जल पाया जाता है। शांत एवं स्थिर जल वाला यह क्षेत्र ‘सारगैसो सागर’ कहलाती है। इस क्षेत्र में कूड़ा-कर्कट तथा घास भी एकत्र हो जाती है। इस क्षेत्र में उच्च तापमान के कारण घास स्वत: ही उग जाती है। पृथ्वी पर अन्यत्र ऐसा विचित्र सागर कही नहीं पाया जाता है।

प्रश्न 4.
महाद्वीपीय मग्न तट क्या है ?
उत्तर :
महाद्वीपीय मग्न तट : महाद्वीपों के सागर तट पर जल में डुबे हुए भाग महाद्वीपीय मग्न तट कहलाते हैं। ये महाद्वीपों के तट पर स्थित उथले जलमग्न मैदान होते हैं। महाद्वीपों के तटों पर जल में डूबी हुई भूमि मग्नतट बन जाती है। महाद्वीपीय मग्न तट सागर के छिछले मैदान होते हैं। जिनकी गहराई 180 मीटर तक होती है। परंतु कहीं-कहीं ये 2,000 मी॰ तक गहरे होते हैं। महाद्वीपीय मग्न तटों की औसत चौड़ाई 50 किमी० होती है। इनका ढाल 3° से अधिक नहीं होती है। विद्वान इनकी उत्पत्ति के सम्बंध में एकमत नहीं है।

प्रश्न 5.
महाद्वीपीय मग्न ढाल क्या है ?
उत्तर :
महाद्वीपीय मग्न ढाल (Continental Slope) : महाद्वीपीय मग्न तट सागरीय नितल का जो ढालू भाग आता है, उसे महाद्वीपीय मग्नढाल कहते हैं। महाद्वीपीय मग्नढाल के प्रारम्भ होते ही समुद्र की गहराई बढ़ जाती है। इनकी गहराई 180 मीटर से 3,600 मीटर तक होती है। महाद्वीपों के बाह्य जलमग्न छोर ही मर्नढाल कहलाते हैं। इनका ढाल 3.5 से 20° तक होता है। महाद्वीपीय मग्नढालों की रचना में भंश क्रियाओं ने विशेष भूमिका निभायी है। मग्नढालों में अनेक गर्त, बीजाकार घाटियाँ, कन्दराएँ तथा खडु पाये जाते हैं। इन पर तलछटों का जमाव देखने को भी नहीं मिलता।

प्रश्न 6.
न्यूफाउण्डलैण्ड तट के पास मत्स्य पालन क्षेत्र क्यों पाये जाते हैं ?
अथवा
जापान एवं न्यूफाउण्डलैण्ड मछली पकड़ने के लिए विश्व प्रसिद्ध क्यों है ?
उत्तर :
न्यूफाउण्डलैण्ड के पास गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा तथा लैब्रोडोर की ठण्डी जलधारा एक साथ मिलती हैं। अत: गर्म और ठण्डी धाराओं के मिलने से यहाँ पर मछलियों के खाद्य पदार्थ प्लैंकटन नामक काई उत्पन्न होती है।
इसके अलावा तटों पर घने जंगल हैं जो Fish Catch के लिए आवश्यक सामान उपलब्ध कराते हैं। तट के कटे-फटे होने के कारण यहाँ पर उत्तम बन्दरगाहों का विकास हुआ है। उच्च अक्षांशों में स्थित होने के कारण यहाँ की जलवायु ठंडी है जो मछलियों को लम्बे समय तक संरक्षित रखने में मददगार हैं।

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प्रश्न 7.
न्यूफाउण्डलैंण्ड तट के पास सदैव कुहासा क्यों छाया रहता है ?
उत्तर :
न्यफाउण्डलैण्ड तट के पास गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा तथा लैब्रोडोर की ठण्डी जलधारा मिलती है । लैब्रोडोर की धारा अपने साथ विशाल हिम शिलाओं को बहाकर लाती है। इस प्रकार गर्म और ठण्डी जलधाराओं के मिलन स्थल होने के कारण यहां पूरे वर्ष भर घना कुहरा छाया रहता है।

प्रश्न 8.
शीतल दिवाल क्या है ?
उत्तर :
संयुक्त राजय अमेरिका के पूर्वी तट पर शीतल पछुवा हवाओं के प्रभाव से केप हेटरास के पास गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा पूर्व की ओर मुड़कर तट से दूर चली जाती है। गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा उच्च तापमान की जलराशि उत्तर की ओर लाती है। उत्तरी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी तट पर न्यूफाउलण्डलेण्ड के पास की ठण्डी जलधारा का जल रहता है जिसका तापमान 8° \mathrm{C} से 11° \mathrm{C} रहता है। दो विभिन्न तापक्रम एवं खारेपन की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है, अतः शीतल दीवाल का निर्माण करती है।

प्रश्न 9.
किस समुद्र में ‘शीतल दिवाल’ पायी जाती है ?
उत्तर :
शीतल-दिवाल उत्तरी अंध महासागर में पायी जाती है। उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट पर लैबोडोर की ठण्डी जलधारा एवं गल्मस्ट्रीम की गर्म जलधाराएँ आपस में मिलती हैं। दो विभिन्न तापक्कम एवं खारेपन की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है और शीतल-दिवाल का निर्माण करती है। गर्म एवं ठण्डी धाराओं के प्रभाव से उत्तरी अमेरिका के उत्तरी पूर्वी तट पर पूरे वर्ष कुहरे की पतली घनीपर्त बन जाते हैं। इसी लैब्बोडोर की ठण्डी जलधारा को न्यूयार्क के पास शीतल-दिवाल कहते हैं।

प्रश्न 10.
जापान तट को कौन धारा गर्म रखती है ?
उत्तर :
क्यूरोशियो धारा जापान के पूर्वी तट को गर्म रखती है। उत्तरी तथा दक्षिणी भूमध्यरेखीय धाराओं का जल मिलने के बाद चीन सागर में एक नई जलधारा उत्पन्न होती है जो चीन सागर से होते हुए जापान के शिकाको द्वीप तक पहुँचती है। यह चीन और जापान की तटीय जलवायु को गर्म रखती है।

प्रश्न 11.
अगुलहास की गर्म धारा कैसे पैदा होती है ?
उत्तर :
अगुलहास की गर्म धारा : अफ्रीका के दक्षिण में अगुलहास अन्तरीप से पछुआ पवनों के प्रवाह द्वारा पूर्व की ओर एक धारा चलने लगती है। इसी धारा को अगुलहास की गर्म जल धारा कहते हैं।

प्रश्न 12.
खाड़ी की धारा क्यों पैदा होती है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम 8- मैक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होने के कारण इसे खाड़ी की धारा कहा गया है। मैक्सिको की खाड़ी में मिसिसिपि – मिसौरी नदियाँ अपार जलराशि छोड़ती है। यह जल राशि उत्तरी भूमध्यरेखा की धारा के साथ उत्तर की ओर अग्रसर होती है किन्तु पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कनाडा के टैलीफैक्स बन्दरगाह के दक्षिण में पूर्व की ओर मुड़ जाती है जिसे पछुआ हवाएँ बहाकर अपने साथ ले जाती है। इसकी उत्पत्ति में पहुआ पवनों का अधिक योगदान है।

प्रश्न 13.
लैब्रोडोर धारा क्यों पैदा होती है ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की धारा : आर्कटिक महासागर का जल वेफिन की खाड़ी से उत्तरी-पूर्वी धुवीय पवनों के प्रभाव से लैब्रोडोर तट के सहारे दक्षिण की ओर अप्रसर होता है, इसे लैब्रोडोर की धारा कहते हैं। यह न्यूफाउण्डलैण्ड के पास खाड़ी की गर्मधारा से मिलकर घना कुहरा उत्पन्न करती है।

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प्रश्न 14.
खाड़ी की धारा का प्रभाव क्या है ?
उत्तर :
खाड़ी (गल्फस्ट्रीम) की धारा का प्रभाव :

  1. ब्रिटिश द्वीप समूह, नार्वे, U.S.A. के मध्य-पूर्वी तट का तापमान ऊँचा रखती है।
  2. अमेरिका के पूर्वी तट पर वर्षा होती है।
  3. न्यूफाउण्डलैण्ड के पास लैब्रोडोर की ठण्डी धारा से मिलकर कुहासा उत्पन्न करती है।
  4. पश्चिमी यूरोप के तट पर स्थित बन्दरगाह वर्ष भर व्यापार के लिए खुले रहते हैं।
  5. जलयान संयुक्त राज्य अमेरिका से इस धारा की सहायता से आसानी से यूरोप पहुँच जाते हैं।
  6. यह लैब्रोडोर की ठण्डी धारा से मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड तट पर अपार मात्रा में प्लैंकटन उत्पन्न करती है जिससे यहाँ स्थित प्रैण्ड बैंक विश्व प्रसिद्ध मछली पकड़ने का केन्द्र है।

प्रश्न 15.
लैब्रोडोर की धारा का प्रभाव क्या है ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की धारा का प्रभाव :

  1. इस धारा के कारण कनाडा के पूर्वी तट का तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है।
  2. यह धारा गल्फस्ट्रीम के साथ मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड के पास घना कुहरा उत्पन्न करती है।
  3. इस ठण्डी धारा के प्रभाव से कनाडा से पूर्वी तट के बन्दरगाह शीतकाल में जम जाते हैं।
  4. इस धारा के विशाल आइसबर्ग बहकर आते हैं जिससे टकराकर कभी-कभी जलयान क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
  5. यह धारा खाड़ी की गर्म धारा से मिलकर मछलियों का खाद्य प्लैंकटन उत्पन्न करती है जिससे न्यूफाउण्डलैण्ड मछली पकड़ने का विश्व का प्रमुख केन्द्र है।

प्रश्न 16.
मूंगे की महान दिवार क्या है ?
उत्तर :
मूंगे की महान दिवार : यह लम्बी और मोटी मूंगी के कीड़ों की अस्थियों द्वारा निर्मित दिवार है जो आस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित है । यह आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के सहारे उत्तर-दक्षिण तक विस्तृत है। यह निरन्तर समुद्र की ओर विस्तृत हो रही है।

प्रश्न 17.
मृत सागर में डुबना सम्भव क्यों नहीं है ?
उत्तर :
मृतसागर के पानी की लवणता अत्यधिक है। इसकी लवणता लगभग 238 \% है। अत्यधिक लवणता के कारण मृत सागर का घनत्व बहुत ज्यादा है। अत: इसमें डूबना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 18.
महाद्वीपीय मग्न तट के महत्व का वर्णन करो।
उत्तर :
महाद्वीपीय मग्न तट का महत्व :

  1. यहाँ पर मत्स्य आखेट उन्नत अवस्था में पाया जाता है।
  2. महाद्वीपीय मग्न तटों पर पहुँच कर ज्वारीय लहरें ऊँची हो जाती हैं जिससे बड़े जलयान आसानी से बन्दरगाहों तक पहुँच जाते हैं।
  3. दुनिया के अधिकांश तेल क्षेत्र मग्न तटों पर पाये जाते हैं।
  4. विश्व प्रसिद्ध मछली पकड़ने के केन्द्र ग्रैण्ड बैंक जलमग्न तटों पर स्थित हैं।
  5. जलमग्न तटों पर शंख, सीप, मोती तथा अन्य उपयोगी पदार्थ मिलते हैं। अत: ये आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 19.
गभ्भीर सागरीय मैदान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
गम्भीर सागरीय मैदान : महाद्वीपीय मग्नढाल के पश्चात सागर नितल में जो समतल क्षेत्र पाये जाते हैं, उन्हें ग्भोर सागरीय मैदान कहा जाता है। गम्भीर सागरीय मैदान सागर नितल के 76 % भाग पर फैले हुए हैं। ये मैदान ऊँचेनीचे तथा क्रमिक ढाल वाले होते हैं। ये मैदानी क्षेत्र जीव-जन्तुओं के अवशेषों, वनस्पति पदार्थों तथा कॉप मिट्टी से भरे हुए हांते हैं। संसार का सबसे बड़ा तथा चौड़ा सागरीय मैदान कनाडा बेसिन है।

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प्रश्न 20.
महासागरीय गर्त किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सागर नितल में यत्र-तत्र पायी जाने वाली सागर द्रोणियाँ महासागरीय गर्त कहलाती हैं। ये गर्त ढालू तथा संकरे होते हैं। महासागरीय गर्त उन सागर तटों के निकट पाये जाते हैं जहाँ भूचालों का प्रकोप अधिक रहता है। इनकी गहराई 19 किलोमीटर तक होती है। संसार का सबसे गहरा महासागरीय गर्त फिलीपाइन के निकट स्क्वायर गर्त है जो 35,400 फुट गहरा है।

प्रश्न 21.
विभिन्न प्रकार की सागरीय धाराएँ क्या हैं ?
उत्तर :
सागरीय धाराएँ : गति, विस्तार एव सीमा के आधार पर महासागरीय धाराओं को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है।

  1. ड्रिफ्ट (Drift): जल की ऊपरी सतह पर मन्द गति से बहनेवाली जलधाराएँ ड्रिफ्ट कहलाती हैं। इनकी गति तथा प्रभाव क्षेत्र निश्चित नहीं होता। उत्तरी अन्ध महासागरीय ड़िफ्ट इसका उदाहरण है।
  2. धारा (Current) : इनकी प्रवाह गति तीव तथा निश्चित होती है। ये उष्ण तथा शीतल, दोनों प्रकार की होती है। वयूरोसियो इसका उदाहरण है।
  3. प्रवाह (Stream) : निश्चित दिशा में तीव्र गति से बहनेवाली जलधाराएँ स्ट्रीम कहलाती हैं। इनकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। गल्फस्ट्रीम उष्ण जलधारा इसका उदाहरण है।

प्रश्न 22.
ज्वार-भाटा क्या है?
उत्तर :
ज्वार-भाटा (Tides) : समुद्र का जल-स्तर सदा एक-सा नहीं रहता। यह नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठता है तथा नीचे उतरता है। समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार या उच्च ज्वार (High Tide or Flow Tide) तथा नीचे उतरने को भाटा या निम्न ज्वार (Low Tide or Ebb Tide) कहते हैं। समुद्री जल में यह उतार-चढ़ाव सूर्य तथा चन्द्रमा के आकर्षण के कारण होता है।

प्रश्न 23.
युति-वियुति क्या है ?
उत्तर :
युति-वियुति (Syzygy) : पूर्णिमा और अमावस्या को सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी तीनों एक सरल रेखा में होते है, अतः सम्मिलित गुरूत्वाकषर्ण से उच्चतम ज्वार का निर्माण होता है। इन दोनो दिनों ज्वार की ऊँचाई सामान्य दिनों की ऊँचाई से 20 % अधिक होती है। इस स्थिति को सिजियी कहते हैं।

प्रश्न 24.
ज्वारीय-उर्जा की संक्षेप में व्याख्या करो।
उत्तर :
ज्वारीय उर्जा (Tidal Energy) : वर्तमान समय में फ्रांस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिक ज्वारभाटे की शक्ति से जल विद्युत के उत्पादन में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। आने वाले समय में जल विद्युत के उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्रांति उत्पन्न हो जायेगी। भारतीय वैज्ञानिक भी इस दिशा में चमत्कारिक सफलता प्राप्त करने में प्रयासरत है।

प्रश्न 25.
लन्दन, न्यूयार्क से गर्म है, क्यों ?
उत्तर :
लन्दन के तटीय भाग से गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा प्रवाहित होती है, जबकि न्यूयार्क के समीप से लैबोडोर की ठण्डी जलधारा प्रवाहित होती है। यही कारण है लन्दन शहर न्यूयार्क की अपेक्षा भूमध्यरेखा से दूर होने पर भी गर्म है।

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प्रश्न 26.
ग्रैण्ड बैंक मत्स्य उद्योग के लिए अनुकूल क्यों है ?
उत्तर :
ग्रैण्ड बैंक और मत्स्य उद्योग : गर्म और ठण्डी जलधारा के मिलने से ग्रैण्ड बैंक पर प्लैंकटन पायी जाती है। यहां उत्तम बन्दरगाह विकसित है। जंगलों से मत्स्य व्यापार को सहायता मिलती है। साथ ही ठण्डी जलवायु में मछलियाँ लम्बे समय तक संरक्षित रहती हैं। यही कारण है कि ग्रैण्ड बैंक मछलियों को पकड़ने के लिए काफी मशहर है। इस प्रकार समशीतोष्ण जलवायु, उथला समुद्र एवं प्लैंकटन की उपलब्धता से ग्रैण्ड बैंक मुख्य मत्स्यागार है।

प्रश्न 27.
क्यूरोशियों को जापान की काली धारा क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
क्यूरोशियो की धारा दक्षिणी-पूर्वी एशिया के सहारे दक्षिण से उत्तर बहते हुए जापान तट पर पहुँचती है। यहाँ यह पछुआ पवनों के प्रभाव से पूर्व की ओर मुड़ जाती है। इसका रंग गहरा नीला होने के कारण इसे जापान की काली धारा कहते हैं।

प्रश्न 28.
कनारी की धारा का जल ठण्डा रहता है क्यों ?
उत्तर :
आर्कटिक ड्रिफ्ट सेन के पास दो भागों में विभक्त हो जाता है। इसके दक्षिणी भाग को कनारी की धारा कहते हैं। यह धारा धुवीय प्रदेश से आती है। अत: इसके आस-पास के समुद्रों का जल ठण्डा होता है। यही कारण है कि कनारी की धारा का जल ठण्डा होता है।

प्रश्न 29.
समुद्री धाराओं पर कोरिआलिस बल के प्रभाव को दर्शाओ।
उत्तर :
समुद्री धाराओं पर कोरिआलिस बल का प्रभाव : पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कोरियालिस बल उत्पन्न होता है जिसके प्रभाव से समुद्री धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में अपने मार्ग से दायें तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपने मार्ग से बायें मुड़ जाती हैं।

प्रश्न 30.
खाड़ी क्या है ?
उत्तर :
खाड़ी (Bay): समुद्र का वह भाग जो स्थलीय भाग में त्रिभुज के आकार में प्रवेश किया है और समुद्र की ओर चौड़ा मुख रहता है, उसे खाड़ी कहते हैं।

प्रश्न 31.
समुद्र की लवणता से क्या समझते हो ?
उत्तर :
समुद्र की लवणता (Salinity of Ocean) : नदियों का पानी स्थलीय भाग से होकर समुद्र में जाता रहता है जिससे समुद्र में नमक की मात्रा नदियों द्वारा पहुँचता रहता है। इसी कारण समुद्र की पानी खारा होता है। समुद्र में औसत 1000 gm जल में 35 gm नमक की मात्रा मिलती है। यही समुद्र जल में 35 % खारापन या लवणता है। समुद्र में लवणता का वितरण असमान पाया जाता है।

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प्रश्न 32.
डोगर बैंक से क्या समझते हो ?
उत्तर :
डोगर बैंक : यह उत्तरी सागर में स्थित है। यह मछली पकड़ने का मुख्य क्षेत्र है। यहाँ प्लैंकटन की उपलब्धता तथा जल की स्वच्छता के कारण अत्यधिक मछलियाँ पकड़ी जाती है।

प्रश्न 33.
अर्द्ध दैनिक ज्वार क्या है ?
उत्तर :
अर्द्ध दैनिक ज्वार : यह ज्वार साढ़े बारह घण्टे बाद उत्पन्न होता है। अंध महासागए में बिटिश द्वीप समूह के तटीय भागों में यह ज्वार प्रतिदिन दो बार आता है, अत: इसे अर्द्ध-दैनिक ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 34.
दैनिक ज्वार क्या है ?
उत्तर :
दैनिक ज्वार (Daily Tide) : इस प्रकार के ज्वार की उत्पत्ति चन्द्रमा की आर्कषण शक्ति के कारण होती है। यह पौने पच्चीस घण्टे के बाद आते हैं। इस प्रकार के ज्वार मैक्सको की खाड़ी और फिलीपाइन द्वीप समूह के आसपास दिन में केवल एक बार आते हैं, अतः इन्हें दैनिक ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 35.
मिश्रित ज्वार क्या है ?
उत्तर :
मिश्रित ज्वार : यह ज्वार अर्द्ध-दैनिक और दैनिक ज्वार का मिश्रित रूप होता है। यह दिन में दो बार ऊँचा उठता है और दो बार नीचे गिरता है। दोनों ज्वारों का मिला-जुला रूप होने के कारण यह मिश्रित ज्वार कहलाता है।

प्रश्न 36.
प्रधान एवं गौण ज्वार क्या है ?
अथवा
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष ज्वार क्या है ?
उत्तर :
मुख्य या प्रत्यक्ष ज्वार : चन्द्रमा के समाने धरातल पर अपकेन्द्रीय बल की अपेक्षा चन्द्रमा का आकर्षण अधिक होता है। अत: ज्वार उत्पन्न होता है। पृथ्वी का जो भाग चन्द्रमा या सूर्य के समाने होता है वहाँ जो ज्वार उत्पन्न होता है उसे मुख्य या प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।
गौण ज्वार या अप्रत्यक्ष ज्वार : धरातल का जो भाग चन्द्रमा के विपरीत दिशा में होता है वहां चन्द्रमा का अपकेन्द्रीय बल अधिक होता है। फलस्वरूप ज्वार की उत्पत्ति होती है। पृथ्वी के जिस भाग में मुख्य ज्वार होता है, उसके ठीक विपरीत वाले भाग में आने वाले ज्वार को गौण अथवा अपत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 37.
ज्वार-भाटा कैसे आते हैं ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा आने के कारण :
(i) पृथ्वी की दैनिक गति : पृथ्वी की दैनिक गति से केन्द्रपसारी बल उत्पन्न होता है जिससे समुद्रों का जल केन्द्र से दूर जाने की ओर अग्रसर होता है। परिणामस्वरूप ज्वार आता है।
(ii) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा आकर्षण : न्यूटन के नियस के अनुसार बह्माण्ड की सभी वस्तुएँ एक-दूसरे को अपनी ओर खींचती है। अत: चन्द्रमा का आकर्षण बल पृथ्वी पर अत्यधिक पड़ता है। जिसके परिणामस्वरूप ज्वार-भाटा आता है।

प्रश्न 38.
ज्वारीय भित्ति क्या है ?
उत्तर :
ज्वारीय भित्ति : जब समुद्री ज्वार का जल नदी के खुले व चौड़े मुहाने से इसकी संकरी घाटी में तीव्र गति से प्रवेश करता है, इसी के साथ नदी का जल समुद्र की ओर प्रवाहित होता रहता है। दोनों जल आपस में टकराकर एक ऊँची दीवार की तरह ऊँचाई ले लेते हैं। इसे ज्वारीय भित्ति कहते हैं।

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प्रश्न 39.
प्रधान ज्वार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रधान ज्वार : पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीध में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर चन्द्रमा तथा सूर्य के सम्मिलित गुरूत्वाकर्षण का प्रभाव पड़ता है। फलस्वरूप इन दोनों दिनों में उच्चतम ज्वार का निर्माण होता है जिसे उच्च ज्वार कहते हैं। इन दिनों वृहत् ज्वार की ऊँचाई सामान्य दिवसों की ऊँचाई से 20 प्रतिशत अधिक होती है। इस स्थिति को ‘सिजिभी’ कहते हैं।

प्रश्न 40.
दीर्घ ज्वार और लघु ज्वार में अंतर स्थापित करें ।
उत्तर :
दीर्घ ज्वार और लघु ज्वार में अंतर :

दीर्घ ज्वार (Spring Tide) लघु ज्वार (Neap Tide)
1. यह पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन आता है। 1. यह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में अष्टमी को आता है।
2. इसमें ज्वार अत्यधिक ऊँचा तथा भाटा अत्यधिक नीचा होता है। 2. इसमें ज्वार की ऊँचाई समान्य तथा भाटा की नीचाई भी सामान्य होती है।
3. इसमें सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी तीनों एक रेखा में होते हैं। 3. इसमें सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी तीनों समकोण में होते हैं।
4. इसमें सूर्य और चन्द्रमा के सम्मिलित आकर्षण बल से ज्वार आता है। 4. इसमें सूर्य और चन्द्रमा एक दूसरे के विपरीत आकर्षण बल डालते हैं।

प्रश्न 41.
मानव जीवन ज्वार से कैसे प्रभावित होता है ?
उत्तर :
ज्वार का मानव जीवन पर प्रभाव :

  1. ज्वार से छछ ट्ले बंदरगाहों के जल की ऊँचाई बढ़ जाती है।
  2. भाटा के द्वारा निदयों के मुहाने की सफाई हो जाती है।
  3. ज्वार द्वारा जल ग्युद्युत का उत्पादन किया जा रहा है।
  4. ज्वार से शीतोष्ण प्रदेशों में बंदरगाहों के निकट समुद्री जल जमने नहीं पाता।

प्रश्न 42.
हुगली नदी में ज्वारीय भित्ति की उत्पत्ति क्यों होती है ?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी के ज्वार की लहरे हुगली नदी के मुहाने में प्रवेश कर जाती है जबकि दूसरी ओर से नदी की धारा खाड़ी की ओर आती है। इस प्रकार खाड़ी की ज्वारीय लहरों और नदी की धारा के टकराने के कारण ज्वारीय भित्ति की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 43.
पश्चिमी यूरोप के बन्दरगाह वर्ष भर व्यापार के लिए खुले रहते हैं। क्यों ?
उत्तर :
पश्चिमी यूरोपीय समुद्र तट उच्च अक्षांशों में स्थित है परन्तु समीप से गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा बहती है। इस धारा के प्रभाव के कारण समुद्र का तापमान ऊँचा हो जाता है । यही कारण है कि पश्चिमी यूरोप के समुद्री बन्दरगाह वर्ष भर खुले रहते हैं जिससे इस क्षेत्र के बन्दरगाहों में वर्ष भर जहाज आते रहते हैं।

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प्रश्न 44.
सुयंक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी तट पश्चिमी तट की अपेक्षा गर्म रहता है क्यों ?
उत्तर :
संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा बहती है जो पूर्वी तट को गर्म कर देती है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट के किनारे से कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा बहती है, अतः पश्चिमी भाग ठण्डा रहता है।

प्रश्न 45.
कनारी की धारा का जल ठण्डा होता है क्यों ?
उत्तर :
उत्तरी महासागर का प्रवाह स्पेन के पास दो भागों में विभक्त हो जाता है। इसके दक्षिणी भाग को कनारी की धारा कहते हैं। यह धारा उत्तरी धुव से भूमध्य रेखा की ओर आती है। ध्रुवीय प्रदेशों के ठण्डे भाग से आने के कारणइसके आसपास के समुद्रों का जल अपेक्षाकृत ठण्डा होता है। यही कारण है कि कनारी की धारा का जल ठण्डा होता है।

प्रश्न 46.
पूर्वी कनाडा के बन्दरगाह व्यापार के उपयुक्त नहीं है क्यों ?
उत्तर :
पूर्वी कनाडा के पास से लैबोडोर की ठण्डी धारा बहती है। इस ठण्डी धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तटीय भाग का तापक्रम एकदम कम हो जाता है और बन्दरगाह वर्ष के अधिकांश भाग में बर्फ से, जमे रहते हैं, अतः ये व्यापार के योग्य नहीं रहते। लैब्रोडोर की ठण्डी धारा के साथ हिमपण्ड भी आते हैं जिनसे टकराने का भय जहाजों को सदा बना रहता है।

प्रश्न 47.
कोरिओलिस फोर्स से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी की दैनिक गति के कारण कोरिओलिस फोर्स उत्पन्न होता है, इसके कारण पवनें व समुद्री धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बाँयी ओर मुड़ जाती है।

प्रश्न 48.
सारगैसो सागर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
उत्तरी अटलांटिक महासागर में उत्तरी भू-मध्यरेखीय गल्फस्ट्रीम, उत्तरी अटलांटिक प्रवाह एवं कनारी धाराओं के चक्राकार प्रवाह से घिरा हुआ यह ऐसा समुद्री क्षेत्र है जिसकी दिशा घड़ीवत (Clock wise) है, जहाँ जल शान्त रहता है। यहाँ एक प्रकार की काई जिसे सारगैसो कहते हैं, तैरती रहती है। इसी से इसे सारगैसो सागर (Sargaso sea) कहते हैं। सारगैसो सागर की स्थिति 10° N से 45° N के मध्य है।

प्रश्न 49.
शीतल दिवाल क्या है ?
उत्तर :
संयुक्त राजय अमेरिका के पूर्वी तट पर शीतल पछुवा हवाओं के प्रभाव से केप हेटरास के पास गल्फ स्ट्रीम की गर्म धारा पूर्व की ओर मुड़कर तट से दूर चली जाती है। गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा उच्च तापमान की जलराशि उत्तर की ओर लाती है। उत्तरी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी तट पर न्यूफाउलण्डलैण्ड के पास की ठण्डी जलधारा का जल रहता है जिसका तापमान 8° C से 11° C रहता है। दो विभिन्न तापक्रम एवं खारेपन की धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित होती है, अत: शीतल दीवाल का निर्माण करती है। गर्म एवं ठण्डी धाराओं के प्रभाव से उत्तरी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी सीमा पर कुहरे की पतली घनी पर्त बन जाती है। इसी लेब्रोडोर की ठण्डी धारा को न्यूयार्क के पास शीतल दीवार कहते हैं।

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प्रश्न 50.
महासागरीय जल में कितने प्रकार की गतियाँ होती हैं? उनका संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
महासागरीय जल में तीन प्रमुख गतियाँ होती हैं :- (i) लहरें (ii) ज्वार-भाटा (iii) धाराएँ ।
i. लहरें (Waves) : लहरों की उत्पत्ति सागरीय पृष्ठ पर प्रवाहित होने वाले पवन के दबाव तथा घर्षण से होती है। लहरों में जल का क्षैतिज स्थानान्तरण नहीं होता है बल्कि जल में केवल ऊपर-नीचे उठने एवं गिरने की गति होती है। प्रत्येक लहर में जल ऊपर उठकर पुन: अपने मूल स्थान पर लौट आता है। इस प्रकार लहरों से महासागरीय जल में दोलनात्मक गति होती है।

ii. ज्वार- भाटा (Tides) : ज्वार- भाटा में सागरीय जल में आवर्ती चढ़ाव तथा उतार होता है। यह ऐसी गति है जिसमें महासागर का सम्पूर्ण जल ऊपर से नीचे तक प्रभावित होता है।

iii. धाराएँ (Currents) : सागरीय जल में उत्पन्न होने वाली उपरोक्त दोनों गतियों के विपरीत धाराएँ भूतल पर प्रवाहित होने वाली नदियों के समान एक निश्चित वेग से प्रवाहित होती है। इस प्रकार धाराओं में सागरीय जल का संचालन एक निश्चित दिशा में होता है।

प्रश्न 51.
उपभू तथा अपभू ज्वार से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
उपभू तथा अपभू ज्वार : चन्द्रमा अपनी अण्डाकार कक्ष के सहारे पृथ्वी की परिकमा करता है। अतः पृथ्वी व चन्द्रमा के बीच की दूरो सदा समान नहीं रहती है। जब चन्द्रमा पृथ्वी के निकटतम होता है, तो उसे चन्द्रमा की उपभू स्थिति कहते हैं। इस स्थिति में चन्द्रमा की ज्वारोत्पादक शक्ति सबसे अधिक होती है जिससे सामान्य ज्वार से 20 \% तक ऊँचा ज्वार आता है। इसे उपभू-ज्वार कहते हैं। जब कभी दीर्घ ज्वार एवं उपभू ज्वार एक साथ आते हैं, तो ज्वार की ऊँचाई असामान्य हो जाती है। इसके विपरीत जब चन्द्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है तो उसे अपभू ज्वार कहते हैं। जब कभी लघु ज्वार एवं उपभू ज्वार एक साथ आते हैं, तो ज्वार की ऊँचाई अत्यंत कम हो जाती है।

प्रश्न 52.
समुद्री धाराओं की क्या विशेषता होती हैं ?
उत्तर :
समुद्री धाराओं की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बायी ओर बहती है।
  2. गर्म धाराएँ ठण्डे सागरों की ओर एवं ठण्डी धाराएँ गर्म महासागरों की ओर बढ़ती है।
  3. समद्री धाराएँ तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती है।
  4. समुद्री धाराएँ जल मार्गों के निर्धारण में सहायक होती है।
  5. ठण्डी धाराएँ अपने साथ प्लैंकटन लाती है जिससे मछलियों के खाद्य पदार्थ की पूर्ति होती है।

प्रश्न 53.
दीर्घ ज्वार की तुलना में लघु ज्वार में जल के उठने और गिरने का स्तर कम क्यों होता है?
उत्तर :
लघु ज्वार में चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी परस्पर समकोण की स्थिति में रहते हैं। अत: उनकी ज्वार उत्पादकता शक्तियाँ एक दूसरे की विपरीत दिशा में काम करती है। अत: ज्वार सामान्य या दीर्घ ज्वार से कम ऊँचा तथा भाटा सामान्य भाटा से कम नीचा होता है।

प्रश्न 54.
प्रत्यक्ष ज्वार एवं अप्रत्यक्ष में तुलना कीजिए।
उत्तर :
प्रत्यक्ष ज्वार और अप्रत्यक्ष ज्वार में तुलना :

प्रत्यक्ष ज्वार (Direct Tide) अप्रत्यक्ष ज्वार (Indirect Tide)
1. यह पृथ्वी के उस भाग पर आता है जो पृथ्वी के ठीक सामने होता है। 1. यह पृथ्वी के उस भाग पर आता है जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत भागों में होता है।
2. यह चन्द्रमा की केन्द्रापसारी शक्ति की अपेक्षा गुरूत्वाकर्षण शक्ति की अधिकता के कारण उत्पन्न होता है। 2. यह चन्द्रमा की गुरूत्वाकर्षण शक्ति की अधिकता के कारण उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 55.
ज्वार-भाटा बन्दरगाहों के निर्माण में कैसे सहायक है ?
उत्तर :
बन्दरगाहो के निर्माण में सहायक : ज्वार भाटा उत्तम बन्दरगाहों को जन्म देता है। जिन तटो या मुहानों पर ज्वारभाटा आता है वहाँ उत्तम बन्दरगाह स्थापित होते है। ज्वार-भाटा के कारण सागर तटों पर जल का स्तर बढ़ जाता है। अत: जलयान बन्दरगाहों पर आकर ठहर जाते है।

प्रश्न 56.
ज्वारा-भाटा किस प्रकार समुद्री-जल को जमने से रोकता हैं ?
उत्तर :
जल को जमने से रोकना : ज्वार-भाटा के जल में हलचल पैदा करता रहता है जिसे मीठा और खारा जल आपस में मिलता रहता है और इससे जल जम नहीं पाता। जल न जम पाने के कारण ही सागरीय जल-जन्तु जीवित रहते है तथा सागर में अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ उगती है तथा विकसित होती है।

प्रश्न 57.
पश्चिम यूरोप के बन्दरगाह वर्ष भर व्यापार के लिए क्यों खुले रहते हैं ?
उत्तर :
पश्चिमी यूरोपीय समुद्र तट उच्च अक्षांशो में स्थित है परन्तु समीप से गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा बहती है। इस धारा के प्रभाव के कारण समुद्र का तापमान ऊँचा हो जाता है जिससे समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रो में बर्फ नहीं जमती है। यही कारण समुद्र का तापमान ऊँचा हो जाता है पश्चिमी यूरोप के समुद्री बन्दरगाह वर्ष भर खुले रहते है जिससे इस क्षेत्र के बन्दरगाहो में वर्ष भर जहाज आते रहते है।

प्रश्न 58.
ठण्डी धाराओं के समीप महादेशीय भाग में मरूस्थल क्यों पाए जाते हैं ?
उत्तर :
ठण्डी धाराओ के ऊपर से जाने वाली वायु ठण्डी हो जाती है जिससे उनमें जलवाष्प ग्रहण करने की शक्ति घट जाती है। इन शुष्क हवाओ के प्रभाव से तटीय भागों में वर्षा नहीं होती और उनके समीप मरुस्थल पाये जाते है। उदाहरण के लिए कनारी की ठण्डी धारा के समीप उत्तरी अफ्रीका का सहारा मरुस्थल, बेगुला की ठण्डी धारा के समीप कालाहारी का मरुस्थल, पीरू की ठण्डी धारा के समीप अठकामा का मरुस्थल, कैलीफोर्निया की ठण्डी धारा के समीप कोलोरेडो एवं अरीजोना के मरुस्थल तथा पश्चिमी आस्ट्रेलिया की ठण्डी धारा के समीप पश्चिमी आस्ट्रेलिया का महान मरुस्थल स्थित है।

प्रश्न 59.
ग्रैण्ड बैंक क्या है और इसका निर्माण क्यों हुआ है ?
उत्तर :
ग्रैंण्ड बैंक : यह न्यूफाउण्डलैण्ड (उत्तरी अमेरिका का पूर्वी तट) तट पर स्थित है। यह मत्स्य उद्योग का प्रमुख क्षेत्र है। यहाँ लैबोडोर की ठण्डी जलधारा एवं गल्फस्ट्रीम की गर्म जलधारा के मिलने से मछलियों का भोजन प्लैंकटन ख़ब मिलता है। साथ ही यहां मछलियाँ अण्डे भी खूब देती हैं। ठण्डी जलवायु लम्बे समय तक मछालयों के संरक्षण में सहायक है। अतः प्रेण्ड बैक विश्व के मछली पकड़ने का एक प्रसिद्ध क्षेत्र है। शीतोष्ण जलवायु के कारण वहां की मछलिया काफी स्वादिष्ट होती है।

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प्रश्न 60.
उच्च ज्वार और निम्न ज्वार के बीच समय के अन्तर के कारण की व्याख्या करो।
उत्तर :
उच्च ज्वार और निम्न ज्वार के बीच समय का अन्तर : पृथ्वी अपनी धुरी पर 24 घण्टे में एक बार पूरी तरह घूम जाती है। अत: इस अवधि में प्रत्येक देशान्तर पर दो बार ज्वार उत्पन्न होना चाहिए। एक बार चन्द्रमा के सामने आने पर और दूसरी बार इसके विपरीत दिशा में चले जाने पर, किन्तु जिस समय पृथ्वी अपनी धूरी पर पूरा चक्कर लगाती है।

उस समय चन्द्रमा भी पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए कुछ आगे बढ़ जाता है। चन्द्रमा के सामने पृथ्वी के दुबारा आने मे 24 घण्टे का तीसवाँ भाग ( 52 मिनट) अधिक समय लग जाता है, अर्थात् 24 घण्टे 52 मिनट के बाद वह भाग चन्द्रमा के सामने आयेगा और तभी वहा ज्वार उत्पन्न होगा। अतः प्रत्येक देशान्तर पर ज्वार 12 घण्टे 26 मिनट बाद उत्पन्न हुआ करता है। ऐसी अवस्था सूर्य के साथ नहीं उपस्थित होती और उसके द्वारा ठीक 12 घण्टे बाद ज्वार उत्पन्न होता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
महासागरीय धाराओं की उत्तपत्ति के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
धाराओं की उत्पत्ति के कारण : समुद्री धाराओं की उत्पत्ति के निम्नलिखित कारण हैं –
तापमान में विभिन्नता :- भू-मध्य रेखीय प्रदेशों में सूर्य की किरणें सदैव लम्बवत चमकती है जिससे इन प्रदेशों में तापमान सदैव अधिक रहता है। जैसे-जैसे ध्रुवों की तरफ बढ़ते हैं, तापमान में कमी आने लगती है। अतः अधिक तापमान के कारण भूमध्य रेखीय सागरों के जल की ऊपरी सतह गर्म हो जाती है। इसलिए गर्म हल्का जल ध्रुवों की ओर बहने लगता है। इसके विपरीत ध्रुवीय प्रदेशों का ठण्डा भारी समुद्री जल नीचे बैठता है तथा भू-मध्य रेखा की ओर बहता है। इस प्रकार तापमान की भिन्नता के कारण सनयन धाराएं उत्पन्न हो जाती है।

खारेपन की भिन्नता :- समुद्र का जल खारा होता है, परंतु कई कारणों से (वाष्भीकरण, वर्षा, नदियां आदि) खारापन का वितरण असमान है। अतः अधिक खारेपन वाला समुद्री जल अधिक घनत्व के कारण नीचे बैठ जाता है और निकटवर्ती समुद्रों का कम खारा जल उसका स्थान भरने के लिए प्रवाहित होने लगता है। इससे भी धाराओं का जन्म होता है।

प्रचलित पवन :- धरातल पर निरंतर एक ही दिशा में स्थायी पवन के चलने से धाराओं की उत्पत्ति होती है। अटलांटिक महासागरों में उत्तरी और दक्षिणी भू-मध्यरेखीय धाराएं व्यापारिक हवाओं के प्रभाव से गल्फस्ट्रीम तथा उत्तरी अटलांटिक प्रवाह की उत्पत्ति पछुआ हवाओं के प्रभाव से होती है। भारत महासागर में मानसून ड्रिफ्ट की दिशा मानसून की दिशा के साथ बदलती रहती है।

तटों की आकृति :- धाराओं की दिशा पर महाद्वीपीय तटों की आकृति का प्रभाव पड़ता है। अटलांटिक महासागर में उत्तरी और दक्षिणी भूमध्य रेखीय धाराएं ब्ञाजील के सेनरॉक अंतरीप से टकराकर उत्तर तथा दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है। उत्तरी धारा को गल्फस्ट्रीम तथा दक्षिणी धारा को बाजोल धारा कहते हैं।

पृथ्वी की दैनिक गति :- पृथ्वी अपनी कीली पर पश्चिम से पूरब जो घूर्णन करती है उसके प्रभाव के कारण भी धाराओं की गति का निर्धारण होता है। अटलांटिक महासागर में विपरीत भू-मध्य रेखीय धारा की उत्पत्ति पर पृथ्वी की दैनिक गति का ही प्रभाव है। फेरल के नियमानुसार धाराएं उत्तरी गोलार्द्ध में दायी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बांयी ओर मुड़ जाती है।

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प्रश्न 2.
महासागरीय धाराओं के जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
ज्वार भाटा से जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अथवा
समुद्री धाराओं के धरातल पर प्रभाव का वर्णन करो।
उत्तर :
जलवायु का प्रभाव :
तापमान पर प्रभाव :- गर्म धाराएं जिन तटों से गुजरती है, वहाँ का तापमान ऊँचा कर देती है, इसके विपरीत ठण्डी धाराएं समीपवर्ती भागों का तापक्रम कम कर देती है। ऊँचे अंक्षाशों वाले तटीय भागों में गर्म धाराएं तापमान को हिमांक से नीचे नहीं आने देता उदाहरणार्थ संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी तट गल्फ स्ट्रीम की धारा के कारण गर्म रहता है जबकि पश्चिमी तट कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा के प्रभाव से ठण्डा रहता है।

वर्षा पर प्रभाव :- गर्म धाराओं के ऊपर बहने वाली वायु गर्म हो जाने के कारण महासागरों के जल से पर्याप्त मात्रा में जलवाष्प ग्रहण करती है। ये वाघपूर्ण हवाएं निकटतम भागो में जाकर पर्वतों से टकराकर पर्याप्त वर्षा करती है। उदाहरणार्थ गल्फस्ट्रीम की शाखा उत्तरी अटलांटिक डिपट के प्रभाव से पश्चिमी तट पर अधिक वर्षा होती है। इसके विपरीत ठण्डी धारओं के ऊपर से बहने वाले पवनों में जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है। अतः तटीय भागों में वर्षा नहीं होती। उदाहरणार्थ कनारी की ठण्डी धारा के समीप उत्तरी अफ्रीका का सहारा का मरूस्थल, बेंगुला की ठण्डी धारा के समीप कालाहरी का मरूस्थल, पीरू की ठण्डी धारा के समीप आटाकामा का मरूस्थल, कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा के समीप कोलोरेडो एवं अरीजोना का मरूस्थल स्थित है।

कुहरा की उत्पत्ति :- जहाँ ठण्डी एवं गर्म धारायें मिलती है वहाँ घना कुहरा मिलता है । न्यू फाउण्डलेण्ड के समीय गल्फस्ट्रीम की गर्म एवं लैबोडोर की ठण्डी धारा मिलने के कारण तथा जापान के समीप क्यूरेशियो की गर्म तथा क्यूराईल की ठण्डी धारा मिलने से कुहरा उत्पन्न होता है।

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प्रश्न 3.
महासागरीय धाराओं का मानव जीवन पर या व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
व्यापार पर प्रभाव :
जलयानो की गति पर प्रभाव :- धाराओं के अनुकूल जहाजों को यात्रा करने में सुविधा होती है तथा विपरीत दिशा में जाने पर असुविधा होती है। यही कारण है कि प्राचीनकाल में यूरोप से अमेरिका जाने वाले जहाज उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा के अनुरूप चलते थे तथा गल्फस्ट्रीम एवं उत्तरी अटलंटिक प्रवाह के साथ यूरोप लौट आते थे।

बंदरगाहो का खुला रहना :- गर्म धाराओं के प्रभाव से उच्च अक्षांशों पर स्थित बंद्रगाह बर्फ न जमने के कारण वर्ष भर खुले रहते हैं, इसके विपरीत धुवों से आने वाली ठण्डी धाराओं के समीप के बंदरगाहों पर बर्फ जम जाती है। अत: वर्ष के अधिकांश समय ये बेकार हो जाते है। गल्फस्ट्रीम की गर्मधारा के प्रभाव से बिटिश द्वीप समूह एवं नार्वे के बंदरगाहों से वर्ष भर व्यापार होता है जबकि लैबोडोर की ठण्डी धारा के प्रभाव से पूर्वी कनाडा के बंदरगाह अधिकाश समय बंद्रहते हैं।

हिमपिण्डों का प्रभाव :- ठण्डी धाराओं के साथ विशाल हिमपिण्ड बनते है जिनका \(\frac{1010}{10}\) भाग जल के अंदर रहता है जो जहाज चालकों को कभी-कभी कुहरे के कारण दिखाई नहीं पड़ता। अत: दुर्घटना हो जाती है।

प्रश्न 4.
मुख्य ज्वार एवं गौण ज्वार के उत्पति के कारण क्या है ?
उत्तर :
मुख्य ज्वार (Primary tide) : पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते है जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अतः इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार (Direct tide) या प्रारम्भिक या मुख्य ज्वार (Primary tide) कहते हैं।

गौण ज्वार (Indirect Tide) : पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हृट कर उपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार या गौण ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 5.
ओजन परत की सृष्टि कैसे होती है ? ओजोन परत क्षरण के प्रमुख गैस की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ओजोन छिद्र का पता सर्वप्रथम 1985 में अंटार्कटिका के ऊपर फारमान द्वारा लगाया गया, उसके बाद ओजोन छिद्र का पता आकर्टिक एवं उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में भी लगाया गया।

समताप मंडल में 20 से 35 कि॰मी॰ के बीच ओजोन गैस की परत पाई जाती है। ओजोन की यह परत सूर्य की किरणों से विकरित पाराबैगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। जब विभिन्न स्रोतों से उत्सर्जित क्लोरिन गैस ऊपर उठती है तो वह (ओजन) से प्रतिक्रिया करके क्लोरीन मोनो आक्साइड एवं आक्सीजन का निर्माण होता है। क्लोरीन का एक अणु ओजोन के अनेक अणुओं का विनाश करने में सक्षम होता है, चूकि ध्रुवों के निकट ओजोन मण्डल की उुचाई कम होती है। अत: यहाँ ओजोन क्षरण की समस्या सर्वाधिक गम्भीर है।

ओजोन क्षरण का मुख्य कारण (CFCs) है । उस गैस का प्रयोग प्रशीतक, प्रणोदक, इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की सफाई तथा आग वाली प्लास्टिक के निर्माण आदि कार्यो में होता है। इसके अलावा काबर्न-डाई-आक्साइड मिथेन आदि गैस है। ये गैसे पृथ्वी के चारों ओर प्रवाहित होकर एक घना आवरण बन देती है। जिससे पृथ्वी पर सौर विकिरण तो आ जाता है परन्तु ये गैस इन्हें वापस आंतरिक्ष में नहीं जाने देती है। उसके फलस्वरूप किरण के तापमान में वृद्धि हो जाती है।

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प्रश्न 6.
महासागरीय धारा किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
समुद्री धाराएं : सागरीय जल के एक भाग से दूसरे भाग तक नियमित रूप से निश्चित दिशा में धारा के रूप में प्रवाहित होने वाली गति को महासागरीय धारा कहते हैं। धाराएँ विशाल जल राशि को एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पहुँचाती है।

धाराएं दो प्रकार की होती हैं –

गर्म धाराएं :- भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बहने वाली धाराओं को गर्म धारा कहते हैं क्योंकि ये धाराएं गर्म भाग से ठण्डे भाग की ओर बहती है। इन धाराओं का जल अपने आस-पास के समूह के जल से गर्म होता है। गल्फस्ट्रीम, क्यूरोशियों, ब्राजील आदि गर्म धाराएं हैं।
ठण्डी धाराएं :- ठण्डी समुद्रों से गर्म समुद्रों की ओर चलने वाली धारा को ठण्डी धारा कहते हैं। ये धाराएं धुवीय प्रदेश से भुमध्य रेखीय भाग की ओर चलती हैं। जैसे लैब्रोडोर, क्यूराएल तथा कनारी आदि ठण्डी धाराएं हैं।

समुद्री धाराओं की निम्नलिखित विशेषताएं हैं –

  1. महासागरीय धाराएं, उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बांयी ओर बहती है। ऐसा फेरल के नियमानुसार होता है।
  2. गर्म धाराएं, ठण्डे सागरों की ओर तथा ठण्डी धाराएं गर्म महासागरों की ओर बहती है।
  3. समुद्री धाराएं तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती है।
  4. समुद्री धाराएं जल मार्गो के निर्धारण में सहायक होती है।
  5. ठण्डी धाराएं अपने साथ प्लैकटन लाती है जिससे मछलियों के खाद्य पदार्थ की पूर्ति होती है।

प्रश्न 7.
गर्मधाराओं और ठण्डी धाराओं की तुलना किजिए।
उत्तर :
गर्मधाराओं और ठण्डी धाराओं की तुलना :

गम्म धाराएं ठण्डी धाराएं
i. गर्म धाराओं का जल सैदव गर्म होता है। i. इन धाराओं का जल सदैव ठण्डा रहता है।
ii. ये धाराएं भू-मध्य रेखीय प्रदेशों से ध्रुवीय प्रदेशों की ओर चलती है, जैसे – गल्फस्ट्रीम की धारा गर्म धारा है। ii. प्राय: ये धाराएं ध्रुवीय प्रदेशों से भू-मध्य रेखीय प्रदेशों की ओर चलती है। जैसे लैब्रोडोर की ठण्डी धारा।
iii. ये तटवर्ती क्षेत्रों के तापमान को बढ़ा देती है, जैसे गल्फस्ट्रीम की धारा नार्वे के तटवर्ती भाग में तापमान बढ़ा देती है। iii. ये धाराएं तटवर्ती क्षेत्रों के तापमान को गिरा देती है। जैसे कनारी की ठण्डी धारा।
iv. इन धाराओं की सहायता से समीपस्थ भाग में वर्षा होती है। iv. इन धाराओं से समीपस्थ भाग में वर्षा नहीं होती है।
v. ये धाराएं भू-मध्य रेखा के इर्द-गिर्द या सामानान्तर बहती हैं। v. कुछ धाराएं धुव प्रदेशों के इर्द-गिर्द बहती हैं।

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प्रश्न 8.
लहरें एवं धाराओं में क्या अन्तर है ?
उत्तर :
लहरें एवं धाराओं में अन्तर :

लहरें धाराएं
i. सागरीय सतह के क्रमिक उतार-चढ़ाव को लहर कहते हैं। i. इसमें सागरीय सतह क्रमिक उतार-चढ़ाव नहीं करता।
ii. लहरों का जल अपना स्थान छोड़कर आगे नहीं बढ़ता। ii. इनमें जल निरंतर आगे बढ़ता रहता है।
iii. लहरें अस्थाई है तथा बनती बिगड़ती है। iii. धाराएं स्थाई होती हैं।
iv. लहरें प्राय: संचार से प्रभावित होकर उत्पन्न होती है। iv. धाराओं के उत्पन्न करने में पवन, तापमान, खारापन तथा आकृति का हाथ रहता है।
v. लहरों की गहराई बहुत कम होती है। v. धाराएं काफी गहराई तक चला करती है। सतह पर चलने वाली धाराओं के नीचे विपरीत धाराये भी चलती है।

प्रश्न 9.
महासागरीय धाराएं किस प्रकार मत्स्य उद्योग को प्रभावित करती है ?
उत्तर :
मत्स्य उद्योग पर प्रभाव :
(i) ठण्डी धाराओं के साथ ठण्डे क्षेत्र की उत्तम मछ्छलयां बहकर गर्म प्रदेशों में पहुँच जाती है। जैसे लैब्रोडर की ठण्डी धारा के साथ आने वाली मछलियों को न्यूफाउण्डलैण्ड के पास कनाडा में पकड़ लिया जाता है।
(ii) मछलियों का सर्वप्रथम भोजन प्लैंक्टन नाम सूक्ष्म जीवाणु एवं वनस्पतियां हैं, जहाँ ठण्डी एवं गर्म धाराएं मिलती है वहां प्लैंक्टन की उत्पत्ति होती है। ऐसे स्थान पर मछालयां अण्डे भी अधिक देती है, अतः ठण्डी तथा गर्म धाराओं का मिलन स्थल मछली उत्पादन की आदर्श परिस्थियां उत्पत्र करता है।

प्रश्न 10.
सागरीय जल में ज्वार-भाटा उत्पत्र होने के क्या कारण है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा उत्पत्र होने के कारण ज्वार भाटा उत्पन्न होने में चन्द्रमा की दो शक्तियां पृथ्वी पर एक साथ काम करती है :
गुरूत्वाकर्षण शक्ति :- न्यूटन के अनुसार बह्माण्ड का प्रत्येक पिण्ड एक दूसरे को आकर्षित करता है। इस आकर्षित करने की शक्ति का नाम गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। दोनों प्रतिरोधी पिण्डों का आकार जितना ही बड़ा होगा गुरुत्वाकर्षण उतना ही अधिक होगा। साथ ही दोनों पिण्डों के मध्य दूरी जितनी ही अधिक होगी गुरुत्वाकर्षण उतना ही कम होगा, अर्थात् दूरी जितनी कम होगी गुरुत्वाकर्षण उतना ही अधिक होगा। चन्द्रमा से पृथ्वी के सभी स्थानों की दूरी में अंतर होने के कारण गरुत्वाकर्षण भी असमान होता है। भू पटल ठोस होने के कारण आकर्षित नहीं होता पर जल तरल है, अतः गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव जल पर अधिक पड़ता है।

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केन्द्रपसारी बल :- गुरुत्वाकर्षण शक्ति की प्रतिक्रिया उसी के बराबर केन्द्रपसारी बल कार्य करता है जो पृथ्वी को बन्द्रमा से दूर ले जाता है। यह बल पृथ्वी के सभी भागों पर समान होता है।

इस प्रकार पृथ्वी के केन्द्र पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण तथा केन्द्रपसारी दोनों शक्तियां समान होती है। पृथ्वी के चन्द्रमा के समीस्थ भाग पर चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति अपसारी शक्ति की अपेक्षा अधिक होती है, अत: वहाँ का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर उधर उठ जाता है, इसे प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।
इस प्रकार एक ही समय पृथ्वी के दो व्यासीय विपरीत स्थानों पर ज्वार उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 11.
ज्वार-भाटा के समय में अंतर क्यों रहता है ?
उत्तर :
ज्वार-भाटा के समय में अंतर :- ज्वार-भाटा प्रतिदिन एक निश्चित समय पर नहीं आता है। यदि चन्द्रमा स्थिर होता तो पृथ्वी की परिभ्रमण के कारण प्रत्येक स्थान पर 24 घण्टे में निश्चित समय पर ही ज्वार-भाटा आता। परन्तु पृथ्वी और चन्द्रमा की सापेक्षिक स्थिति तथा चन्द्रमा के पृथ्वी की परिक्रमा करने के कारण ऐसा नहीं होता। प्रतिदिन ज़्वार भाटा का समय आगे बढ़ता जाता है। चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर उसी दिशा से परिक्रमा कर रहा है, जिस दिशा में पृथ्वी परिभ्भमण कर रही है। चन्द्रमा पृथ्वी की 28 दिन में परिक्रमा पूरा करता है। अत: 24 घंटे में पृथ्वी का कोई स्थान जब अपनी पहली अवस्था में आता है तब चन्द्रमा अपनी परिक्रमण गति के कारण अपने परिक्रमा मार्ग से 1 / 28 भाग बढ़ जाता है।

इसलिए पृथ्वी के उस स्थान को चन्द्रमा के ठीक सामने आने के लिए अपनी कीली पर 1 / 28 पर आगे घूमना होगा। इस दूरी को तय करके चन्द्रमा के ठीक सामने करने के लिए पृथ्वी को 52 मिनट अधिक समय लगेगा। इसलिए हर स्थान पर 24 घण्टे पश्चात् आने वाला ज्वार भाटा 24 घण्टे 52 मिनट पश्चात आता है। अतः प्रत्येक स्थान पर पहले ज्वार के ठीक 12 घण्टे 26 मिनट पश्चात् दूसरा ज्वार आता है। यही कारण है कि प्रतिदिन एक ही समय पर ज्वार-भाटा नहीं आता है बल्कि पहले दिन की अपेक्षा 52 मिनट देर से ज्वार भाटा दूसरे दिन आता है

प्रश्न 12.
ज्वार-भाटा के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
ज्वार-भाटा का मानव जीवन पर प्रभावों का वर्णन करो।
उत्तर :
ज्वार-भाटे का प्रभाव :
लाभ :

  1. ज्वार-भाटा आने से बंदरगाह पर पड़ा हुआ कूड़ा बहकर चला जाता है। अत: सफाई में व्यय कम हो जाता है तथा समय की बचत होती है।
  2. ज्वार जब आता है जल की गहराई बढ़ जाती है। अत: बड़े-बड़े जलयान बंदरगाह तक आ जाते हैं और भाटे के साथ वापस चले जाते हैं। इस प्रकार व्यापार में मदद मिलती है।
  3. ज्यारीय लहर के साथ गहरे सागर से मछलियां तट तक आ जाती हैं।
  4. ज्वारीय लहर के साथ मछुए गहरे सागर में मछली पकड़ने चले जाते हैं और लहर के साथ वापस आ जाते हैं।
  5. ज्वार-भाटा के कारण समुद्री जल में खलबली मची रहती है, जिसमें बंदरगाह के पास समुद्र नहीं जमते और जहाजों का आना-जाना बना रहता है।
  6. ज्वारीय लहर में अधिक शक्ति होती है। अत: इससे जल विद्युत उत्पादन की सम्भांवना होती है।
  7. ज्वार-भाटा के आने से तट पर बनी क्यारियों में जल भर जाता है जिसको सुखाकार नमक प्राप्त किया जाता है।
  8. समुद्र तट के समीप मोती, सीपी, घोंघे आदि अधिक मात्रा में पाये हो जाते हैं, जिनको निकाल कर कुछ लोग अपनी जीविका कमाते है।

हानियां :

  1. ज्वार-भाटे के आने से नदियों में जल ऊपर उठता है जिसे बोरे कहते हैं। इससे नौकाओं के डूबने की आशंका रहती है.।
  2. ज्वारीय लहरों की चपेट में आकार कभी-कभी जलयान डूब जाते हैं, जिससे धन-जन का नुकसान होता है।
  3. ज्वार भाटे कभी-कभी बंदरगाह पर तथा नदियों के मुहाने पर रेत, मिट्टी आदि जमा कर देती है जिसको साफ करने में अत्यधिक व्यय होता है।
  4. ये सफाई के स्थान पर कभी-कभी अधिक मात्रा में गंदगी छोड़ जाते हैं।

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प्रश्न 13.
ज्वार भाटा के प्रकारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें।
अथवा
ज्वारभाटा की उत्पत्ति का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ज्वार-भाटा के प्रकार :
दीर्घ ज्वार :- जब सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो सूर्य और चन्द्रमा की सम्मिलित शक्ति से समुद्री जल अर्थात् ज्वार ऊँचा उठ जाता है जो सामान्य ज्वार से 20% ऊँचा होता है। यह स्थिति महीने में दो बार, पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आती है।

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लघु ज्वार :- जब सूर्य और चन्द्रमा पृथ्वी से समकोण की स्थिति में होते हैं तो इनके ज्वार उत्पादन शक्तियां एक दूसरे के विपरीत दिशा में कार्य करती है। यह ज्वार सामान्य ज्वार से कम ऊँचा तथा भाटा सामान्य भाटा से कम नीचा रहता है। यह स्थिति प्रत्येक महीने में दो बार, शुक्ल व कृष्ण पक्ष के अष्टमी को होती है।

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पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण एवं केन्द्रापसारी शक्तियों की प्रतिक्रिया से पृथ्वी के दो व्यासीय विपरीत स्थानों पर एक साथ ही दो ज्वार उत्पन्न होते हैं। एक को प्रत्यक्ष ज्वार तथा दूसरे को अप्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

प्रत्यक्ष ज्वार :- पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते है जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अतः इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

अप्रत्यक्ष ज्वार :- पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हट कर ऊपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं।

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प्रश्न 14.
महासागर नितल से आप क्या समझते हैं ? महासागर के नितल को कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर :
महासागरीय तली का स्वरूप :- स्थल की तरह सागर और महासागरों के भी तल पाये जाते हैं जिन्हें सागर और महासागर का नितल कहते हैं। सागर और महासागर का नितल भी सब जगह समान नहीं है। इनमें कहीं ऊँचे चबुतरे, कहीं टीले और कहीं गहरी खाई या गर्त भी मिलते हैं। महासागरों की औसत गहराई महाद्वीपों की औसत ऊँचाई से अधिक है। आकार व गहराई के अनुसार महासागरीय नितल को भी प्रमुख चार भागों में बाटा जा सकता है-

महाद्वीपीय निम्न तट :- स्थल और समुद्र के मिलन स्थल से लेकर लगभग 70 कि०मी० – 100 कि०मी० की चौड़ाई में जलमग्न धरातल को महाद्वीपीय निमग्न तट कहते हैं। यह महाद्वीपीय ढाल तथा स्थल के मध्य का भाग है। नदियों तथा हिमानियों के द्वारा लाया गया अवसाद एवं हिमोढ़ के समुद्र तल में जमा होने से इसका निर्माण होता है। इसके निचले तल तक सूर्य की रोशनी प्रवेश कर जाती है । अतएव इस भाग में वनस्पति एवं समुद्री जीव-जन्तु भी मिलतेहैं। विश्व के प्रमुख मछलीगाह इसी भाग में मिलते हैं। समस्त महासागर का 5 \% भाग महाद्वीपीय निमग्न तट के अंतर्गत पड़ता है।

महाद्वीपीय ढाल :- महाद्वीपीय निमग्न तट भूमि के ठीक बाद ढाल का विस्तार शुरू होता है। इस ढालू भूमि को ही महाद्वीपीय ढाल कहते हैं। यहाँ समुद्र की गहराई 200 कि०मी० – 400 कि०मी० तक होती है। यहाँ तक नदियों द्वारा लाये गये अत्यंत सूक्ष्म कण ही पहुँच पाते हैं। इस भाग के बाद वास्तविक महासागर शूरू होता है। इस भाग में अनेक कैनियन अच्छी तरह विकसित हैं।

महासागरीय मैदान :- जब महाद्वीपीय ढाल समाप्त हो जाता है तत्पश्चात समुद्र के अंदर समतल भूमि मिलती है। इस भाग को महासागरीय मैदान कहत हैं। इसकी औसत गहराई 3000 मी० -6000 मी० तक होती है। इसका ढाल मंद होता है। समुद्र तट से दूर होने के कारण यहाँ तक नदियो द्वारा लाया गया अवसाद नहीं पहुँच पाता है। ये मैदान निक्षेप, सूक्ष्म पंक और सागर तल पर रहने वाले और मरे हुए जीव-जन्तुओं के अस्थियों से बने होते हैं। इस भाग में लाल मिट्टी पाई जाती है जो सम्भवतः ज्वालामुखी उदगार के कारण है।

महासागरीय गर्त :- गहरे समुद्री मैदानों में यत्र-तत्र गठ्ठे पाये जाते है जो लम्बे और गहरे होते हैं। परंतु चौड़े नहीं होते । ये अधिकतर उन समुद्रों में पाये जाते हैं, जहाँ पर्वत श्रेणियों का विस्तार हो अथवा ज्वालामुखी क्रिया हुई हो। ये सागरों के मध्य नहीं पाये जाते हैं बल्कि स्थल खण्डों के समीप मिलते हैं। प्रशांत महासागर में ऐस 56 गर्त हैं जिसमें मिंड़ानाओ गर्त विश्व का सबसे गहरा गर्त है जिसकी गहराई 10400 मी० है। नवीन खोजों के अनुसार मैरियाना खड्ड सबसे गहरा खड्ड है जिसकी गहराई 11033 मी॰ बताई जाती है।

प्रश्न 15.
अंघमहासागर की जलधाराओं का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर :
अंधमहासागर की धाराएँ :- अंध महासागर में अधिकतर तीव्र धाराएं चलती हैं। कुछ मंद धराएं भी हैं जो निम्न हैं –
उत्तरी भू-मध्य रेखीय धारा :- यह भूमध्य रेखा के उत्तर-पुरब से पश्चिम बहती है। यह गर्मधारा है जो दक्षिणी अमेरिका के उत्तरी-पूर्वी तट के सहारे बहती है। इस धारा की उत्पत्ति में पूर्वी व्यापारिक पवनों का प्रभाव होता है।

दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धारा :- यह भू-मध्य रेखा के दक्षिण में बहने वाली गर्म धारा है। यह पश्चिमी अफ्रीका से बाजील के सेनराक अंतरीप की ओर बहती है। इसकी उत्पत्ति में दक्षिणी पूर्वी व्यापारिक पवनो की भूमिका होती है।

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विपरीत भू-मध्य रेखीय धारा :- उत्तरी व दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धाराओं का जल बहकर पश्चिम से पूरब भूमध्य रेखा की ओर बहने लगता है। इसका प्रवाह भूमध्य रेखीय धाराओं के विपरीत होता है। इसकी उत्पत्ति व दिशा पर भू-परिभ्रमण का प्रभाव होता है।

गल्फस्ट्रीम :- उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा का जल जब दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी तट से टकराता है तो इसका कुछ भाग मैविसको की खाड़ी से होकर उत्तर की ओर बहने लगता है। इसे गल्फस्ट्रीम कहते हैं। यह एक गर्म धारा है जिसकी उत्पत्ति में पछुआ हवाओं का योगदान होता है।

लैब्रोड़ोर की ठण्डी धारा :- यह एक ठण्डी धारा है जो उत्तरी कनाडा के तटवर्ती भागो पर उत्तर से दक्षिण को बहती है। यह लेबोडोर तट के सहारे बहती हुई न्यूफाउण्डलैण्ड तक पहुँचती है। अत में यह गल्फस्ट्रीम से मिल जाती है। इन धाराओं के संगम पर सदैव कुहरा छाया रहता है जो मछलियों के खाद्य प्लैंक्टन की उत्पत्ति में सहायक होता है।

कनारी की ठण्डी धारा :- यह पुर्तगाल तट के समीप से दक्षिण की ओर अफ्रीका के कनारी द्वीपों तक बहने वाली एक ठण्डी धारा है। यह सहारा की जलवायु को शुष्कता और कठोरता प्रदान करने में सहायक है। इसकी उत्पत्ति तथा दिशा में उत्तरा-पूर्वी व्यापारिक पवनों का प्रभाव होता है।

ब्राजील धारा :- दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धारा का जल बाजिल के सेनराक अंतरीप से टकराकर ब्राजील तट से बहने लगता है। यह गर्म धारा है।

उत्तरी आंटलटिक प्रवाह :- गल्फस्ट्रीम तथा लैब्रोडोर की धाराओं का जल टकराने के पश्चात उत्तर-पूर्व की ओर बहता हुआ उत्तरी यूरोप तक पहुँचता है। इस पर पछुआ पवनों का प्रभाव रहता है। इसे पछुआ प्रवाह भी कहते हैं। यह एक गर्म धारा है। अत: उत्तरा-पश्चिमी यूरोपीय देशों को उष्मता प्रदान करता है।

फाकलैण्ड धारा :- यह एक ठण्डी धारा है जो दक्षिण अमेरिका के सुदूर दक्षिणी भाग में फाकलैण्ड द्वीप के सहारे दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है।

बेंगुला धारा :- यह ठण्डी धारा है जो पश्चिमी अफ्रीका तट के सहारे दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है। यह कालाहारी मरूस्थल की जलवायु को कठोरता प्रदान करती है।

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प्रश्न 16.
प्रशांत महासागर की मुख्य जलधाराओं का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रशांत महासागर की धाराएं :- प्रशान्त महासागर में प्रवाहित होने वाली धाराएँ निम्नलिखित हैं –
उत्तरी भू-मध्यरेखीय धाराएँ :- यह गर्म धारा दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनों से प्रभावित होती है जो भू-मध्य रेखा के दक्षिण में अमेरिका के पश्चिमी तट से टकराकर आगे जाकर यह आस्ट्रेलिया के उत्तरी-पूर्वी भाग तक पहुँचती है।

विपरीत भू-मध्यरेखीय धारा :- यह एक गर्म धारा है जो उत्तरी और दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धाराओं के विपरीत दिशा में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। इस धारा की उत्पत्ति का कारण भू-परिभमण है।

क्यूरेशियो धारा :- यह गर्म धारा है। उत्तरी तथा दक्षिणी भू-मध्य रेखोय धाराओं के जल मिलने से चीन सागर में एक नई धारा उत्पन्न होती है जो चीन सागर से होते हुए जापान के शिशोक द्वीप तक पहुँचती है जहाँ इसकी दो शाखाएँ हो जाती है । भीतरी शाखा जापान सागर में प्रवेश करती है तथा बाहरी शाखा जापान के प्रशान्त तट से बहती हुई मध्य होन्शू तक बहती है, चीन और जापान को जलवायु का यह धारा उष्णता तथा वर्षा प्रदान करती है।

क्यूराइल धारा :- यह ठण्डी धारा है। यह उत्तरी धुव के समीप से चलकर बैरिंग जलडमरू मध्य होती हुई साइबेरिया तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है। क्यूराइल द्वीपों के समीप बहने के कारण इसे क्यूराइल की धारा कहते हैं। अंत में जापान के समीप क्यूरोसियो की गर्म धारा से मिल जाती है।

अलास्का धारा :- उत्तरी महासागर के आर-पार प्रवाहित होने वाली पश्चिमी धारा उत्तरी अमेरिका के प्रशांत महासागर तट पर पहुंच कर बैकुवर टापू के समीप टकराकर अलास्का तट की ओर बहने लगती है। यह एक गर्म धारा है जो अलास्का तट की जलवायु को उष्णता प्रदान करती है।

कैलिफोर्निया धारा :- यह कैलिफोर्निया तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली एक ठण्डी धारा है जो समीपवर्ती प्रदेश की जलवायु को कठोर तथा शुष्क बना देती है।

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पीरू या हम्बोल्ट धारा :- यह ठण्डी धारा दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित पीरू के समीप बहती है। अंत में यह दक्षिणी भू-भाग रेखीय धारा में मिल जाती है। इस धारा की खोज सर्वप्रथम हमबोल्ट ने किया। अत: यह Humbolt Currents भी कहलाती है। यह पीरूभूम की उष्णता को कम कर देती है।

अण्टांक्कटिक धारा :- यह ठण्डी धारा है, जो दक्षिणी प्रशांत महासागर में पूरब से पश्चिम की ओर बहती है। अण्टार्कटिक महाद्वीप के समीप मंद गति से बहती है। इस धारा की उत्पत्ति भू-परिभ्रमण के कारण होती है।

आस्ट्रेलिया धारा :- यह आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली एक गर्म धारा है। दक्षिणी भूमध्य सागरीय धारा जब न्यूगिनी तट से टकराती है, तब पहुआ पवनों के सहारे इसका जल आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट से होकर बहने लगता है। यह धारा अपनी समीपवर्ती प्रदेशों की जलवायु को उष्ण व नम बनाती है।

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प्रश्न 17.
हिन्द महासागर की मुख्य जलधाराओं का वर्णन करो।
उत्तर :
हिन्द महासागर की धाराएँ :- हिन्द महासागर उत्तर में भारत, पश्चिम में अफ़ीका तथा पूर्व में आस्ट्रेलिया से घिरा हुआ है। हिन्द महासागर की धाराओं की अपनी एक विशेषता है। विषुकत् रेखा के उत्तर में इस महासागर का विस्तार कम तथा दक्षिण में अधिक है। अतः उत्तरी भाग में सामयिक पवनों का प्रभाव मिलता है। इस भाग में सामयिक धाराएँ चलती रहती है ये धाराएँ मानासून के प्रभाव से समय-समय पर अपनी दिशाएं बदलती रहती है, अत: ये मानसून ड्रीफ्ट भी कहलाती है। भूमध्य रेखा के दक्षिणी भाग में स्थायी धाराएँ वर्ष भर सामान रूप से चलती है। इस महासागर की प्रमुख धाराएँ निम्न हैं –

ग्रीष्म मानसून ड्रीफ्ट :- यह एक गर्म धारा है जो उत्तरी हिन्द महासागर में ग्रीष्म मानसून से प्रभावित होकर अफ्रीका के पूर्वी तट के सहारे बहती हुई अरब सागर में प्रवेश करती है। यह अरब सागर के तट तथा भारत के पश्चिमी तट के सहारे बहती हुई बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करती है तथा दक्षिण में पूर्वी एशिया के सुमात्रा तट तक चलती जाती है। यह मई से अक्टुबर तक बहती है। यह एक मंद समुद्री धारा है।

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शिशिर मानसूनी धारा :- शिशिर ऋतु आते ही मानसून पवनों के क्रम में परिवर्तन हो जाता है तथा उत्तरी-पूर्वी पवने चलने लगती है। अतः नवम्बर से अपैल तक यह धारा सुमाता तट से बंगाल की खाड़ी, अरब सागर होते हुए पूर्वी तट तक बहती है।

दिक्षणी भूमध्य रेखीय धारा :- यह एक गर्म धारा है। यह विषुवत् रेखा के दक्षिण में दक्षिणा-पूर्वी व्यापारिक पवनों से प्रभावित होकर पूर्व-पश्चिम की ओर बहती है।

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मोजम्बिक धारा :- अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी तट पर मुख्य स्थल मागागासी द्वीप के बीच एक संकरा समुद्री भाग है, जिसे मोजाम्बिक चैनल (Mozamblique Channel) कहते हैं। यहाँ एक गर्म समुद्री जल धारा उत्पन्न होती है जो दक्षिणी भू-मध्य रेखीय धारा का ग्रहण करके दक्षिण की ओर बहती है। यही मोजाम्बिक धारा कहलाती है।

पश्चिमी आस्ट्रेलिया धारा :- यह आस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट के सहारे दक्षिण से पश्चिमी की ओर बहती है तथा दक्षिण भूमध्य रेखीय धाराओं में मिल जाती है। यह ठण्डी धारा आस्ट्रेलिया की मरुस्थलीय जलवायु को शुष्क तथा कठोर बना देती हैं।

अगुलहास की धारा :- यह दक्षिणी हिन्द महासागर पर बहने वाली एक गर्म धारा है जो अफ़ीका के दक्षिण में अगुलहास के निकट पछुआ पवनों से प्रेरित होकर पश्चिम से पूरब की ओर चलने लगती है

अण्टार्कटिक डिफ्ट :- हिन्द महासागर के दक्षिण भाग में पछुआ पवनों के प्रभाव से पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली ठण्डी धारा को अण्टार्कटिक ड्रिफ्ट कहते हैं।

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प्रश्न 18.
ग्रैण्ड बैंक मत्स्य उद्योग के लिए अनुकूल क्यों है ?
उत्तर :
ग्रैण्ड बैंक :- अटलांटिक महासागर में न्यूफाउण्डलैण्ड के दक्षिण पूर्व में महाद्वीपीय चबूतरा है। इसका विस्तार 37000 वर्ग मील है। यही समुद्री क्षेत्र मछली पकड़ने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ मत्स्य उद्योग की उन्नति के कारण हैं –
(i) समशीतोष्ण जलवायु :- समशीतोष्ण जलवायु के कारण यहाँ मछलियों का भोजन प्लैकटन अधिक मिलता है, अत: यहाँ मछलियाँ अधिक पायी जाती है।
(ii) उथला समुद्र :- यह एक जलमग्न द्वीप है, अतः उथला है जिसमें सूर्य की किरणें आसानी से प्रवेश कर पाती है। प्लैंकटन की उपज के लिए सूर्य की किरणें आवश्यक हैं, अतः इस प्लैंकटन के कारण यहाँ अधिक मछलिया मिलती है।
(iii) गर्म एवं ठण्डी धाराओं का मिलन स्थल :- यहाँ पर गल्फ स्ट्रीम की गर्म एवं लेब्रोडोर की ठण्डी धाराये मिलती है। गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन स्थल पर मछालियों का भोजन जल्दी तैयार होता है तथा मछलियाँ भी ठीक से बढ़ती है। मछलियां विपरीत धाराओं में तेजी से बढ़ती है।

प्रश्न 19.
उत्पत्ति के आधार पर धरातल पर पाए जाने वाले झीलों का वर्गीकरण किजिए।
उत्तर :
उत्पत्ति के आधार पर झीलों को निम्नलिखित भागों में बाँटा जा सकता है –
(A) विवर्तनिक झीलें (Tectonic Lakes) :- पृथ्वी के गर्भ में आन्तरिक हलचलें होती है। धरातल के स्वरूप में परिवर्तन होता रहता है। इन हलचलों से मुख्य रूप से दो प्रकार की झीले बनती है।
भ्रंश झीलें (Fault Lakes) :- वितर्तनिक हलचलों के कारण धरातल पर भृंश के एक ओर का भाग नीचे धँस जाता है तो धंसा भाग जल से भरकर झील का रूप धारण करता है। इसे भ्रश झोल कहते हैं। U.S.A. की सात एण्डीज झील भंश झीले ही है।

विभ्रंश झीले (Rift Valley Lakes) :- विवर्तनिक हलचलों के कारण धरातल पर समानान्तर दरारें पड़ जाती है। जब इन दरारें के बीच का भाग धंस जाता है तो इसे दरार घाटी कहते हैं। वर्षा आदि का जल भर जाने से झील का निर्माण होता है, जैसे साइबेरिया की बैकाल झील, अफ्रीका में तागानिका की न्यासा, अलबर्ट्र इत्यादि झील।

(B) ज्वालामुखी झीलें :
क्रेटर झील (Crater Lakes) :- जिस दरार से होकर लावा बाहर निकलता है उसे ज्वालामुखी का मुख(Crater) कहते हैं। जब ज्वालामुखी का उदगार बन्द हो जाता है और मृतप्राय हो जाता है तब यह वर्षा आदि का जल भर जाने से झील के रूप में बदल जाता है IU.S.A. के क्रेटर झील तथा अफ्रीका की विक्टोरिया झील इस प्रकार की झीले हैं।

लावा बाँध से बनी झीलें (Lavadom Lakes) :- ज्वालामुखी के मुख से निकलने वाला लावा कभी-कभी नदी के प्रवाह को रोक देते हैं और इस प्रकार की झील का निर्माण हो जाता है। कैलिफोर्निया की ताहो झील (Tahoe Lakes) तथा अबीसीनिया को ताना झील (Tana Lakes) इसी प्रकार की झीलें है।

लावा क्षेत्र की झीले (Lava Region Lakes) :- ज्वालामुखी के लावा का निक्षेपन समान नहीं होता है। कहीं तुषार तथा कहीं नियान बन जाते हैं। नियान के क्षेत्र में जल भरने से झील का निर्माण हो जाता है।

(C) निक्षेपण मूलक झीले (Deposional Lakes) :-
पर्वतीय झीलें (Mountain Lakes) :- पर्वतीय भाग को पार कर नदी जब मैदानी भागों में प्रवेश करती है तो ढाल की कमी के कारण नदी की धारा का वेग कम हो जाता है। इसके द्वारा बहाकर लाये गये मलवा, बजरे, रोड़े आदि का एकाएक निक्षेप होने लगता है। इससे धीरे-धीरे नदी का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है। कालान्तर में इस प्रकार एक झोल बन जाती है। पर्वत के पाद प्रदेश में स्थित होने के कारण इन झीलों को गिरिपद झीलें (Piedmont Lakes) कहते हैं। कैलिफोर्निया की तुलारे झील इसी प्रकार की झील है।

बाढ़ मैदानी की झीलें (Flood Plain Lakes) :- वर्षा काल में जल भर जाने के कारण बाढ़ के मैदानों में जमाव का कार्य होता है। परन्तु यह जमाव अनियमित होता है। अतः कहीं-कहीं पर गड्ड़ रह जाते हैं जो झीलों का रूप धारण कर लेते हैं। बह्मपुत्र की घाटी तथा अफ्रीका की श्वेत नील के मार्ग में ऐसी झीलें मिलती है।

डेल्टाई झील (Delta Lakes) :- नदी के डेल्टा प्रदेश में शाखाओं के बीच रेत के अनियमित जमाव से बने हुए गड्दे पानी से भर कर झील का रूप धारण कर लेते हैं। गंगा के डेल्टा में इस प्रकार की झीलें बील कहलाती है।

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(D) हिमनद के जमाव से बनी झीलें :- स्थिति के विचार से इस प्रकार की झीलों के निम्न उपविभाग हैं –
हिम बांध झीलें :- जब हिमनद किसी नदी की घाटी के आर-पार बहती है तो नदी के प्रवाह का जल रुक जाता है। स्वीटरलेण्ड में स्थित ‘आरजेलिन सी’ नामक झील प्रकार की है।

हिमोढ़ द्वारा बनी झीलें :- जब महाद्विपीय हिमनद पिघलने लगता है तो उसके द्वारा छोड़े गये हिमोढ़ विषम रूप से एकत्र होते हैं और मध्य में एकत्र हुए बर्फ के दुकड़े पिघल जाते हैं तथा वे झिल का रूप धारण कर लेते हैं।

(E) वायु निक्षेपण से बनी झीलें :- मरुस्थलीय प्रदेशों में पवन के द्वारा उड़ाकर ले जाने वाले रेत कणों के अनियमित जमाव से यत्र-तत्र गड्दे बन जाते हैं जिनमें जल भर जाता है और झील की रचना होती है।

(F) अपरदन मूलक झीलें :- नदी, हिमनद तथा वायु के अपरदन द्वारा अनेक झीलें बनती हैं जो निम्न हैं –
गोखुर या झाड़न झील :- मैदानी भाग में नदी की गति मंद होने से मोड़ बन जाते हैं। बाढ़ के समय नदी अपना मोड़दार मार्ग छोड़ कर सीधा बहने लगती हैं। इस प्रकार मोड़ में जल भर जाता है। मोड़ धनुष के आकार का होने के कारण इसे धनुषाकार झील भी कहते हैं। मिसीसिपी तथा गंगा के मैदानी भाग में ऐसी झीलें मिलती हैं।

गर्त झील :- चूना प्रदेश में जल निर्मित गर्तो का आकार बड़ा हो जाने से छत से गिर जाता है। वहाँ एक झील की रचना होती है। जैसे नैनीताल की झीलें इसी प्रकार की है।

टार्न झील :- हिमनद अपने रास्ते में कोमल चट्टानों का अधिक कटाव करता हुआ चलता है जिससे मार्ग में अनेक गढ़ु बन जाते हैं, जिनमें जल भर जाने से झील की रचना होती है। ऐसी झीले टार्न झील कहलाती है, जैसे – U.S.A. की Boss Lakes इसी प्रकार की झील है।

लैगून झील :- समुद्री लहरों तथा धाराओं के कंकड़, बालू और मिट्टी का लगातार जमाव होता रहता है। यह मलवा खाड़ी के मुहाने को अवरुद्ध कर देता है और झील की रचना होती है, जैसे भारत की चिल्का झील इसी प्रकार की झील है।

(G) मानवकृत झीले :- मानव जगत का सबसे विकासित प्राणी है। उसने बुद्धि बल से बड़े आश्चर्यक कार्य किये हैं। नदियों और पहाड़ी नदीं पर बाँध बनाकर उसने कृत्रिम झीलों का निर्माण किया है। इसमें जल-विद्युत का विकास किया जाता है और सिंचाई के लिये नहरें निकाली जाती है। इस प्रकार की झील को कृत्रिम झील कहते हैं। जैसे गोविन्द सागर एक कृत्रिम झील है।

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प्रश्न 20.
महाद्वीपीय मग्नतट और महाद्वीपीय ढाल में क्या अंतर है ?
उत्तर :

महाद्वीपीय मग्नतट महाद्वीपीय ढाल
i. यह समुद्र तट और महाद्वीपीय ढाल के मध्य स्थित होता है। i. यह महाद्वीपीय मग्न तथा महासागरीय नितल के मध्य स्थित होता है।
ii. इसका ढाल बहुत मंद होता है। ii. इसका ढाल तीव्र होता है।
iii. इस पर केनियन और गर्त बहुत कम पाये जाते हैं। iii. इस पर कैनियन गर्त अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।
iv. यह छिछला सागरीय प्रदेश है। इसकी गहरा 150 मी० -200 मी० तक होती है। iv. इसकी गहराई में विषमता पायी जाती है। यह 200 मी० – 2000 मी० तक गहरा पाया जाता है।
v. इस पर बजरी, बालू आदि अवसाद का निक्षेप मिलता है v. इस पर अवसाद निक्षेप बहुत ही कम मिलता है।

प्रश्न 21.
लैब्लोडोर धारा की उत्पत्ति का क्या कारण है ? इस धारा के क्या प्रभाव हैं ?
उत्तर :
लैब्रोडोर की धारा की उत्पत्ति :- उत्तरी धुव के समीप बर्फ के पिघलने से स्वच्छ जल की पूर्ति होती है। इस स्वच्छ जल से जल का खारापन तथा घनत्व कम हो जाता है। जल हल्का होकर ऊपर उठता है जिससे जल स्तर ऊँचा हो जाता है। अत: कनाडा एवं ग्रीन लैण्ड में स्थित बेफिन की खाड़ी से एक जल धारा निकलकर लेब्रोडोर के पठार के सहारे उत्तर से दक्षिण बहती हुई न्यूफाउण्डलेण्ड के पास गल्फस्ट्रीम की धारा से मिल जाती है।
प्रभाव (A)
(i) तापमान पर प्रभाव :- इस धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तट का तापक्रम हिमांक से नीचे चला जाता है।
(ii) वर्षा पर प्रभाव :- इस धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तट पर कम वर्षा होती है।
(iii) कुहरा का प्रभाव :- लैबोडोर की ठण्डी धारा गल्फस्ट्रीम की गर्म धारा से मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड के पास कुहरा उत्पन्न करती है।

(B) वर्षा का प्रभाव :- इस धारा के साथ विशाल हिम पिण्ड बहकर आते हैं। हिमपिण्डों का 9 / 10 भाग जल के भीतर रहता है। 1 / 10 भाग ही ऊपर रहता है जो कुहरे के कारण कभी-कभी दिखायी नहीं देता ; अत: जहाज इन हिमपिण्डों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्थ हो जाते हैं।

(C) मत्स्य उद्योग पर प्रभाव :-
(i) इस धारा की उत्पत्ति उत्तरी ध्रुव के पास वर्फ के पिघलने से होती है। अत: धारा के साथ धुव प्रदेश की मछलियाँ बहकर न्यूफाउण्डलेण्ड तक पहुँच जाती है; अत: कनाडा में मछली पकड़ने का काम उन्नति पर है।
(ii) न्यूफाउण्डलैण्ड के समीप यह ठण्डी-धारा गल्फस्ट्रीम की गर्मधारा से मिलती है ; अत: मछलियों का भोजन प्लैंकटन पैदा होता है ; अतः यहाँ मत्स्य व्यवसाय उन्नति पर है।

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प्रश्न 22.
गल्फस्ट्रीम की धारा की उत्पत्ति का क्या कारण है ? इस धारा का क्या प्रभाव है ?
उत्तर :
गल्फस्ट्रीम धारा की उत्पत्ति : यह अटलांटिक महासागर के मैक्सको की खाड़ी से पैदा होती है । भूमध्यरेखीय क्षेत्र में वर्ष भर तापमान ऊँचा रहता है जिसे अत्यधिक तापमान के कारण जल गर्म होकर फैलता है तथा हल्का होकर ऊपर उठता है। अत: भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अटलांटिक महासागरीय जलस्तर उठ जाता है। साथ ही दोनों भूमध्य रेखीय धाराओं का जल मिलकर कैरेबियन सागर से होता हुआ मैक्सिको की खाड़ी में जाता है। अत: खाड़ी का जल स्तर उठ जाता है।

यह गर्म जलधारा फ्लोरिडा जल डमरू मध्य होते हुए U.S.A. के पूर्वी तट के सहारे बहती हुई गल्फस्ट्रीम की धारा कहलाती हैं। न्यूफाउण्डलेण्ड के पास यह तीन शाखाओं में बँट जाती है। इसकी एक शाखा पहुवा पवनों के सम्पर्क में आकर पूरब की ओर बहने लगती है एवं ग्रेट-बिटेन और नार्वे के पश्चिमी तट पर बहती है। इसे उत्तरी अटलांटिक ड्प्ट्ट कहते है। दूसरी शाखा विस्के की खाड़ी से प्रवाहित होती है। तीसरी शाख़ा सारगैसो सागर में बहती है जिसे वेस्ट विण्ड ड्रिपट कहते हैं। नार्वे के तटवर्ती भागों ने इसे नार्वे की धारा कहते हैं।

A. जलवायु पर प्रभाव :
1. तापक्रम पर प्रभाव :- गल्फस्ट्रीम की धारा संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वीनटट पर ब्रिटिश द्वीप समूह, नार्वे आदि देशो के ताप को बढ़ा देती है। इसी अंक्षांश पर स्थित कनाडा के पूर्वी तट पर ठण्डक पड़ती है।
2. कुहरा पर प्रभाव :- गल्फस्ट्रीम को गर्मधारा लैब्बोडोर की ठण्डी धारा से मिलकर न्यूफाउण्डलैण्ड के समीय कुहरा उत्पन्न करती है।

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B. व्यापार पर प्रभाव :-
1. बन्दरगाहों का खुला रहना :- इस गर्मधारा के प्रभाव से पश्चिमी युरोप के तट पर वर्फ नहीं जमता जिससे बन्दरगाह वर्ष भर खुले रहते हैं।
2. जलयानों के वेग पर प्रभाव :- इस धारा के प्रभाव से अमेरिका के जहाजों को यूरोप पहुँचने में आसानी होती है।
3. मत्स्य व्यवसाय पर प्रभाव :- यह न्यूफाउण्डलैणड के समीप लैब्रोडोर की ठण्डी धारा से मिलती है जिससे मत्स्य उद्योग के लिए अनुकुल दशाएँ मिलती हैं। इस क्षेत्र में प्लैकटन नामक समुद्री घास की अधिकता मिलती है। यही कारण है कि न्यूफाउण्डलैण्ड में मछलियां पर्याप्त मात्रा में पकड़ी जाती है।

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जलमण्डल Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
लैब्रैडोर की ठंडी धारा और उष्ण गल्फ स्ट्रीम की धारा के मिलने पर जो भयंकर कोहरा और झंझावत की उत्पत्ति होती है, उस तटीय क्षेत्र का नाम हैं :
(a) न्यूफाउण्डलेग्ड का तट
(b) गिनि तट
(c) फ्लोरिडा का तट
(d) पेरू का तट
उत्तर :
(a) न्यूफाउण्डलैण्ड का तट

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प्रश्न 2.
लघु ज्वार के समय चन्द्रमा और सूर्य पृथ्वी की अपेक्षा निम्नलिखित कोण पर अवस्थान करती है:
(a) 180°
(b) 360°
(c) 90°
(d) 120°
उत्तर :
(c) 90°

प्रश्न 3.
एल-नीनो का प्रभाव देखा जाता है –
(क) अटलांटिक महासागर
(ख) प्रशान्त महासागर
(ग) हिन्द महासागर
(घ) आर्कटिक महासागर
उत्तर :
(ख) प्रशान्त महासागर

प्रश्न 4.
पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच की दूरी जब सबसे कम हो जाती है, उस समय उत्पन्न ज्वार को कहा जाता है –
(क) दीर्घज्वार
(ख) लघु ज्वार
(ग) पेरिजी ज्वार (उपभू ज्वार)
(घ) अपोजी ज्वार (अपभू ज्वार)
उत्तर :
(क) दीर्घज्वार

प्रश्न 5.
पृथ्वी पर जलीय भाग का कुल प्रतिशत है :
(a) 61 %
(b) 81 %
(c) 71 %
(d) 91 %
उत्तर :
(c) 71 %

प्रश्न 6.
उच्च एवं निम्न ज्वार के बीच अन्तर होता है करीबन :
(a) 2 घण्टे
(b) 6 घण्टे – 13 मिनट
(c) 4 घण्टे
(d) 8 घण्टे
उत्तर :
(b) 6 घण्टे – 13 मिनट

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प्रश्न 7.
पृथ्वी की चद्द्रमा एवं सूर्य के बीच की स्थिति को कहते हैं :
(a) कंजक्शन
(b) पेरीजियन
(c) अपोजीयन
(d) अपोजियन
उत्तर :
(c) अपोजीयन।

प्रश्न 8.
मेडागास्कर के पश्चिमी तट के सहारे प्रवाहित होनेवाली महासागरीय धारा को कहते हैं :
(a) मेडागास्कर धारा
(b).अगुलहास धारा
(c) सोमाली धारा
(d) मोजाम्बिक धारा
उत्तर :
(d) मोजाम्बिक धारा।

प्रश्न 9.
मुख्य और गौण ज्वार के बीच समय का अंतर है :
(a) 12 घं० 26 मि०
(b) 24 घं० 52 मि०
(c) 12 घं०
(d) 24 घं०
उत्तर :
(a) 12 घं० 26 मि०

प्रश्न 10.
दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे प्रवाहित होने वाली ठण्डी धारा है :
(a) ब्राजील धारा
(b) बेंगुला धारा
(c) मेडागास्कर धारा
(d) हम्बोल्ट धारा
उत्तर :
(d) हम्बोल्ट धारा।

प्रश्न 11.
विश्व का सबसे लम्बा निमग्न तट है :
(a) ग्राण्ड बैंक
(b) राकफाल बैंक
(c) डागर बैंक
(d) मिडिल बैंक
उत्तर :
(a) भण्ड बैंक।

प्रश्न 12.
लेब्राडोर धारा पायी जाती है :
(a) अटलण्टिक महासागर में
(b) प्रशान्त महासागर में
(c) हिन्द महासागर में
(d) अण्टाकर्टिक महासागर में
उत्तर :
(a) अटलाण्टिक महासागर में।

प्रश्न 13.
वृहत्तम जलमग्न तट स्थित है :
(a) उत्तरी अटलाण्टिक में
(b) दक्षिणी अटलाण्टिक में
(c) प्रशान्त महासागर में
(d) हिन्द महासागर में
उत्तर :
(a) उत्तरी अटलाण्टिक में।

प्रश्न 14.
सागरीय लहरें हैं :
(a) अनुदैर्घ्य प्रवाह
(b) अनुदेर्घ्य गति
(c) अनुप्रस्थ प्रवाह
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) अनुदैर्घ्य गति।

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प्रश्न 15.
ज्वार-भाटा की उत्पत्ति का कारण है :
(a) सूर्य
(b) चन्द्रमा
(c) पृथ्वी
(d) शुक्क
उत्तर :
(b) चन्द्रमा।

प्रश्न 16.
जब सागर का जल एक निश्चित मार्ग में निश्चित वेग से प्रवाहित होता है तो इसे कहते हैं –
(a) लहरें
(b) ज्वार भाटा
(c) महासागरीय धारा
(d) प्रवाह
उत्तर :
(c) महासागरीय धारा।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति का कारण नहीं है ?
(a) तापमान में भिश्नता
(b) चक्रवातों की दिशा का
(c) सागरीय जल का घनत्व
(d) भू-प्रकृति में भिन्नता
उत्तर :
(d) भू-प्रकृति में भिन्नता।

प्रश्न 18.
संसार की अधिकांश धाराएँ अनुसरण करती है –
(a) स्थायी पवनों की दिशा का
(b) चक्रवातों को दिशा का
(c) स्थानीय पवनों की दिशा का
(d) प्रति चक्रवातों की दिशा का
उत्तर :
(b) चक्रवातों की दिशा का।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से किस धारा की उत्पत्ति धुवीय क्षेत्र से होती है ?
(a) गल्फस्ट्रीम
(b) लेब्रोडोर धारा
(c) उत्तरी अटलांटिक प्रवाह
(d) क्यूरोशियो धारा
उत्तर :
(b) लेबोडोर धारा।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में से किस धारा के प्रभाव से संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी-तट गर्म रहता है ?
(a) लेब्रोडोर धारा
(b) हम्बोल्ट धारा
(c) गल्फस्ट्रीम
(d) ब्राजील की धारा
उत्तर :
(c) गल्फस्ट्रीम।

प्रश्न 21.
गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन स्थल पर देखने को मिलता है –
(a) अत्यधिक वृष्टिपात
(b) घना कुहरा
(c) हिमपात
(d) ओला वृष्टि
उत्तर :
(b) घना कुहरा।

प्रश्न 22.
ठण्डी धाराओं के साथ बहाकर लाए गए विशाल बर्फ के टुकड़ों को कहते हैं –
(a) प्लावी हिम पिण्ड
(b) हिम टोपी
(c) हिम चादर
(d) हिमनद
उत्तर :
(a) प्लावी हिम पिण्ड।

प्रश्न 23.
पूर्णिमा तथा अमावस्या के दिन आने वाले ज्वार को कहते हैं –
(a) लघु ज्वार
(b) दौर्घ ज्वार
(c) गौण ज्वार
(d) अप भू ज्वार
उत्तर :
(b) दीर्घ ज्वार।

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प्रश्न 24.
दो क्रमिक ज्वारों के बीच समय का अंतर रहता है –
(a) 12 घण्टे 26 मिनट
(b) 12 घण्टे 50 मिनट
(c) 24 घण्टे 52 मिनट
(d) 24 घण्टे 30 मिनट
उत्तर :
(a) 12 घण्टे 26 मिनट।

प्रश्न 25.
लघु ज्वार आते हैं –
(a) अमावस्या के दिन
(b) पूर्णिमा के दिन
(c) शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन
(d) शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के अष्टमी के दिन
उत्तर :
(d) शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के अश्टमी के दिन।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से किसके कारण महासागरीब जल में दोलनात्मक गति होती है ?
(a) लहरें
(b) ज्वार-भाटा
(c) धारा
(d) प्रवाह
उत्तर :
(a) लहरें।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से किस धारा की उत्पत्ति तापक्रम में भिन्नता के कारण हुई है ?
(a) उत्तरी अटलाणिटक प्रवाह
(b) गल्फस्ट्रीम
(c) उत्तरी भूमध्यरेखीय धारा
(d) लेब्रोडोर की धारा
उत्तर :
(b) गल्फस्ट्रीम।

प्रश्न 28.
विषुवतरेखीय धाराओं की उत्पत्ति होती है –
(a) सागरीय जल के घनत्व में अंतर के कारण
(b) प्रचालित हवाओं के कारण
(c) भू-आर्वतन के कारण
(d) तापक्रम में भिज्नता के कारण
उत्तर :
(d) तापक्रम में भिन्नता के कारण।

प्रश्न 29.
ध्रुवीय क्षेत्रों से ठण्डी धाराओं की उत्पत्ति का मुख्य कारण है –
(a) सारिम ज्ल वे फ्सत्व में अर्तर
(b) वायु दबाव एवं पवन
(c) तापमान में अन्तर
(d) पृथ्वी का परिभ्रमण
उत्तर :
(a) सागरीय जल के घनत्व में अंतर।

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प्रश्न 30.
ध्रुवीय क्षेत्रों में सागरों का जल स्तर ऊँचा होने का कारण है –
(a) उच्च वायुद्राव
(b) हिम का पिघलना
(c) अधिक वर्षा
(d) जल में अधिक लवणता
उत्तर :
(b) हिम का पिघलना।

प्रश्न 31.
दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे स्थित अटकामा मरूस्थल के निर्माण का मुख्य कारण है –
(a) तट के पास पेरू की ठण्डी धारा का प्रवाहित होना
(b) पर्वतीय बाधा का नहीं होना
(c) शुष्क स्थलीय वायु का प्रवाहित होना
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर :
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से कौन ठण्डी धारा कालाहारी मरूस्थल के निर्माण के लिए उत्तरदायी है ?
(a) लेब्रोडोर धारा
(b) फाकलैण्ड
(c) बेजुला धारा
(d) दक्षिणी अटलाण्टिक प्रवाह
उत्तर :
(c) बेजुला धारा।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित किस धारा के प्रभाव से पश्चिमी यूरोप में पर्याप्त वर्षा होती है ?
(a) उत्तरी अटलंटिक प्रवाह
(b) क्यूरोशियो धारा
(c) उत्तरी विषुवतरेखीय धारा
(d) कनारी धारा
उत्तर :
(b) क्यूरोशियो धारा।

प्रश्न 34.
निम्नलिखित में से किस ठण्डी धारा के प्रभाव से कनाडा के पूर्वी तट के बन्दरगाह शीतकाल में बंद हो जाते हैं ?
(a) लैव्रोडोर धारा
(b) कनारी धारा
(c) फाकलैण्ड धारा
(d) बेजुला धारा
उत्तर :
(a) लैवोडोर धारा।

प्रश्न 35.
निम्नलिखित में से किस सागरीय गति में सागर का जल सम्पूर्ण रूप से ऊपर से नीचे तक प्रभावित होता है ?
(a) धारा
(b) ज्वार -धारा
(c) लहर
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर :
(b) ज्वार-धारा।

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प्रश्न 36.
सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को कहते हैं –
(a) सागरीय लहर
(b) ज्वारीय परिसर
(c) उच्च प्रवाह
(d) निम्न ज्वार
उत्तर :
(c) उच्च प्रवाह।

प्रश्न 37.
चन्द्रमा एवं पृथ्वी के बीच की सर्वाधिक दूरी की स्थिति को कहते हैं –
(a) अपभू
(b) उपभू
(c) अपसौर
(d) अनुसूर्य
उत्तर :
(a) अपभू।

प्रश्न 38.
पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव सबसे अधिक होगा –
(a) चन्द्रमा के विपरीत स्थित भाग पर
(b) चन्द्रमा की ओर स्थित भाग पर
(c) पृथ्वी के केन्द्र पर
(d) सभी भागों पर
उत्तर :
(b) चन्द्रमा की ओर स्थित भाग पर।

प्रश्न 39.
पृथ्वी पर स्थित सागरों एवं महासागरों में 24 घण्टे के अन्दर ज्वार एवं भाटा आते हैं –
(a) तीन बार
(b) एक बार
(c) दो बार
(d) चार बार
उत्तर :
(c) दो बार।

प्रश्न 40.
जब सूर्य तथा चन्द्रमा के बीच पृथ्वी स्थित होती है तो इसे कहते हैं –
(a) वियुति
(b) युति
(c) समकोणिक स्थिति
(d) उपभू
उत्तर :
(a) वियुति।

प्रश्न 41.
वियुति की स्थिति है –
(a) अमावस्या के दिन
(b) पूर्णमासी के दिन
(c) महीने के पक्षों के अष्टमी के दिन
(d) उपरोक्त सभी दिन
उत्तर :
(b) पूर्णमासी के दिन।

प्रश्न 42.
प्रतिदिन 24 घण्टे 52 मिनट के अंतराल पर आने वाले ज्वारों को कहते हैं –
(a) दैनिक ज्वार
(b) अर्द्धदैनिक ज्वार
(c) दीर्घ ज्वार
(d) लघु ज्वार
उत्तर :
(b) अर्द्धदैनिक ज्वार।

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प्रश्न 43.
निम्नलिखित में से किस स्थिति में सूर्य एवं चन्द्रमा के ज्वारोत्पादक बल विपरीत दिशा में काम करते हैं ?
(a) युति की स्थिति में
(b) वियुति की स्थिति में
(c) समकोणिक स्थिति में
(d) उप भू स्थिति
उत्तर :
(d) उप भू स्थिति।

प्रश्न 44.
प्रचलित हवाओं के प्रभाव से उत्पत्र होनेवाली धाराएँ कहलाती हैं –
(a) ज्वार भाटा
(b) प्रवाह या ड्रिफ्ट
(c) सोत
(d) लहर
उत्तर :
(b) म्रवाह या ड्रिफ्ट।

प्रश्न 45.
निम्न में से कौन ध्रुवीय क्षेत्र से उत्पत्र होनेवाली ठण्डी धारा है –
(a) क्यूराइल
(b) गल्फस्ट्रीम
(c) क्यूरोशियो
(d) ब्राजील
उत्तर :
(a) क्यूराइल।

प्रश्न 46.
सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा की स्थिति को कहते हैं –
(a) वियुति
(b) समकोणिक स्थिति
(c) युति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) युति।

प्रश्न 47.
हुगली नदी में आनेवाली ज्वारीय भिति कहलाती है –
(a) आइसबर्ग
(b) बांध
(c) बाढ़
(d) बान
उत्तर :
(d) बान।

प्रश्न 48.
इनमें कौन सी प्रवाह पछुआ हवा के प्रभाव से प्रभावित होता है ?
(a) क्यूराइल
(b) गल्फस्ट्रीम
(c) क्यूरोशियो
(d) उत्तरी प्रशान्त प्रवाह
उत्तर :
(d) उत्तरी पशान्त प्रवाह।

प्रश्न 49.
न्यूफाउण्डलैण्ड किस लिए प्रसिद्ध है ?
(a) पर्यटन के लिए
(b) प्रसिद्ध मत्स्य उत्पादन क्षेत्र
(c) मनोरंजन के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) प्रसिद्ध मत्स्य उत्पादन क्षेत्र।

प्रश्न 50.
गल्फस्ट्रीम किस महासागर की एक गर्म धारा है –
(a) अटलाग्टिक महासागर
(b) हिन्द महासागर
(c) प्रशान्त महासागर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) अटलाण्टिक महासागर।

प्रश्न 51.
पृथ्वी एवं चन्द्रमा के बीच अधिकतम दूरी के समय उत्पन्न ज्वार कहलाता है –
(a) दीर्घ ज्वार
(b) लघु ज्वार
(c) अपभू ज्वार
(d) अर्द्ध दैनिक ज्वार
उत्तर :
(c) अपभू ज्वार।

प्रश्न 52.
12 घण्टे 26 मिनट के अन्तराल पर आने वाले ज्वार को कहते हैं ?
(a) अपभु ज्वार
(b) अर्द्ध दैनिक ज्वार
(c) लघु ज्वार
(d) दीर्घ ज्वार
उत्तर :
(b) अर्द्ध दैनिक ज्वार।

प्रश्न 53.
सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा की समकोणिक स्थिति के समय आने वाले ज्वार को कहते है –
(a) लघु ज्वार
(b) दीर्घ ज्वार
(c) अर्द्ध दैनिक ज्वार
(d) अपभू ज्वार
उत्तर :
(a) लघु ज्वार।

प्रश्न 54.
विघुवत रेखीय धाराएँ किन पवन के प्रभाव से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है ?
(a) स्थलीय पवन द्वारा
(b) सागरीय पवन द्वारा
(c) व्यापारिक पवन द्वारा
(d) पहुआ पवन द्वारा
उत्तर :
(c) व्यापारिक पवन द्वारा।

प्रश्न 55.
दो प्राथमिक ज्वारो के बीच समय का अन्तर होता है –
(a) 12 घं० 26 मिनट
(b) 24 घं० 52 मिनट
(c) 6 घं० 30 मिनट
(d) 24 घं० 30 मिनट
उत्तर :
(b) 24 घं० 52 मिनट।

प्रश्न 56.
दो उच्च ज्वारों की बीच समय को अन्तराल को कहते है –
(a) ज्वारीय अंतराल
(b) ज्वारीय परिसर
(c) ज्वारीय भिति
(d) ज्वारीय नदी
उत्तर :
(b) ज्वारीय परिसर।

प्रश्न 57.
ध्रवों के समीप हिम के पिघलने से महासागरीय जल का घनत्व होता जाता है।
(a) कम
(b) अधिक
(c) बराबर
(d) असमान
उत्तर :
(a) कम।

प्रश्न 58.
उत्तरी हिन्द्र महासागर की धारा प्रभावित होती है –
(a) मानसून पवन द्वारा
(b) तापमान द्वारा
(c) समुद्री पवन द्वारा
(d) इनमें से सभी
उत्तर :
(a) मानसून पवन द्वारा।

प्रश्न 59.
अटकामा मरूस्थल स्थित है –
(a) पेरूतट पर
(b) कैलीफोर्निया तट पर
(c) बेंगुला तट पर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) पेरूतट पर ।

प्रश्न 60.
गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन से उत्पत्ति होती है –
(a) घने कुहरे
(b) पाले
(c) चक्रवात
(d) समुद्री धारा
उत्तर :
(a) घने कुहरे।

प्रश्न 61.
प्रावह क्या है ?
(a) स्थिर सागर जल
(b) तेज गति से आगे बढ़ता जल
(c) पवन वेग से अग्रसर सागर तल का जल
(d) इसमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) पवन वेग से अग्रसर सागर तल का जल

प्रश्न 62.
धारयें कितने प्रकार की होती हैं ?
(a) एक प्रकार की
(b) दो प्रकार की
(c) चार प्रकार की
(d) इनमे से कोई नहीं
उत्तर :
(b) दो प्रकार की

प्रश्न 63.
धारायें अनुगम करती हैं –
(a) दिशाओं का
(b) प्रचलित पवनों का
(c) घनत्व का
(d) वाही जल का
उत्तर :
(a) दिशाओं का

प्रश्न 64.
खरापन (Salinity) प्रभावित करता है –
(a) जल घनत्व को
(b) जल की दिशा को
(c) जल के वेग को
(d) जल की स्थिरता को
उत्तर :
(a) जल घनत्व को

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प्रश्न 65.
गर्म और ठंढी जल धाराओं के मिलन संधि पर –
(a) मौसम स्वच्छ रहता है
(b) बादलों का निर्माग होत्ता है
(c) कुहासा का सिर्माज होता है
(d) जल तल ऊँचा रहता है
उत्तर :
(c) कुहासा का निर्माण होता है

प्रश्न 66.
गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है –
(a) समुद्री धारायें
(b) ग्रैण्ड बैंक
(c) ज्वार-भाटा
(d) समुद्री वनस्पति
उत्तर :
(c) ज्वार-भाटा

प्रश्न 67.
प्लैंकटन एक प्रकार की वनस्पति है –
(a) इसे मछली खाती है
(b) यह चिरहरित है
(c) यह पर्णपाती है
(d) यह एक प्रकार का लाइवेन है
उत्तर :
(a) इसे मछली खाती है

प्रश्न 68.
दो प्रधान ज्वारों के बीच समय का अन्तर होता है –
(a) 12 घंटा
(b) 18 घंटा 26 मिनट
(c) 48 घंटा
(d) 24 घंटा 52 मिनट
उत्तर :
(d) 24 घंटा 52 मिनट

प्रश्न 69.
ग्रैण्ड बैंक है-
(a) व्यवसाय केन्द्र
(b) मत्स्य आखेट केन्द्र
(c) कृषि क्षेत्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) मत्स्य आखेट केन्द्र

प्रश्न 70.
सिजगी (syzygy) में समुद्र जल तल की ऊँचाई होती है –
(a) 50%
(b) 10%
(c) 20%
(d) 5%
उत्तर :
(c) 20%

प्रश्न 71.
बृहद् ज्वार आता है :
(a) पूर्णमा तथा अमावस्या को(b) प्रत्येक मास के मध्य में
(c) वर्ष में एक बार
(d) प्रत्येक 24 घंटे बाद
उत्तर :
(a) पूर्णिमा तथा अमावस्या को

प्रश्न 72.
ज्वारीय भित्ति (Tidal Bore) है :
(a) एक समुद्री तुफान
(b) नदी-समुद्र का संधि स्थल
(c) नदी के मुहारे पर समुद्री जल की अत्यधिक ऊँचाई
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) नदी-समुद्र का संधि स्थल

प्रश्न 73.
महासागरीय जल के क्रमिक उत्थान को क्या कहते हैं ?
(a) धारा
(b) लहरें
(c) तरंग
(d) कुछ नहीं
उत्तर :
(b) लहरें

प्रश्न 74.
महासागर की लवणता के कारण उत्पन्न होती है –
(a) धराएं
(b) लहरें
(c) तरंगें
(d) तीनों
उत्तर :
(a) धराएं

प्रश्न 75.
फाकलैण्ड की धारा कैसी धारा है ?
(a) गर्म धारा
(b) ठण्डी धारा
(c) तरंग धारा
(d) लहर
उत्तर :
(b) ठण्डी धारा

प्रश्न 76.
पृथ्वी का व्यास है –
(a) 1300 किमी०
(b) 1200 किमी०
(c) 12870 किमी०
(d) 1400 किमी०
उत्तर :
(c) 12870 किमी०

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प्रश्न 77.
पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पड़ता है वहाँ कौन शक्ति अधिक प्रबल होती है ?
(a) गुरुत्वाकर्षण शक्ति
(b) केन्द्रपसारी शक्ति
(c) ज्वारीय बल
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(b) केन्द्रपसारी शक्ति

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. दीर्घ ज्वार के समय समुद्र का जल जब तेजी से मुहाने से नदियों में प्रवेश करता है तब उसे…………कहा जाता है।
उत्तर : ज्वारभित्ति।

2. क्यूरोशियो धारा का दूसरा नाम………….है।
उत्तर : जापान धारा।

3. दो या दो से अधिक धाराओं के मिलने से बनने वाला क्षेत्र जहाँ धाराओं का प्रवाह नहीं है उस क्षेत्र को…………सागर कहते हैं।
उत्तर : सारगैसो।

4. …………. मुख्य ज्वार के लिए उत्तरदायी है।
उत्तर : गुरुत्वाकर्षण बल।

5. सागरों में कम लवणता वाला जल के रूप में प्रवाहित होता है।
उत्तर : ठंडी धारा।

6. ग्राण्ड बैंक ……….. के निकट स्थित है।
उत्तर : न्यूफाउण्डलैण्ड।

7. जब चन्द्रमा, पृथ्वी एवं सूर्य एक सीधी रेखा में स्थित होते हैं तो इसे ……………कहते हैं।
उत्तर : वियुति।

8. महासागरों में तैरने वाले विशाल हिमपिण्डों को ………. कहते हैं।
उत्तर : प्लावी हिम।

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9. …………. आकार के नदी मुहाने ऊँची ज्वारीय भित्ति उत्पन्न करते हैं। उत्तर : उथले एवं सँकरे।
उत्तर : उथले एवं संकरे।

10. चन्द्रमा………….आकार के नदी मुहाने ऊँची ज्वारीय भित्ति उत्पन्न करते हैं।
उत्तर : 27 \(\frac{1}{2}\)

11. …………. में सागरीय जल का संचालन एक निश्चित दिशा में होता है।
उत्तर : धाराओं।

12. ………….हवाओं के प्रभाव से गल्फस्ट्रीम धारा उत्तरी अटलांटिक प्रवाह के नाम से पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है ।
उत्तर : पछुआ।

13. महासागरीय धाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में………….दिशा में चक्र बनाती है।
उत्तर : घड़िवत।

14. ध्रुवों के समीप हिम के पिघलने से महासागरीय जल का घनत्व………….हो जाता है।
उत्तर : अधिक।

15. उत्तरी हिन्द महासागर में चलने वाली धाराओं की दिशा पर ………… हवाओं का प्रभाव पड़ता है।
उत्तर : मानसूनी।

16. जापान के समीप क्यूरोशियो की गर्म तथा………… की ठण्डी धाराओं के मिलने से कुहरा उत्पन्न होता है।
उत्तर : क्यूराइल।

17. दो उच्च ज्वारों के बीच समय के अंतर को …………कहते हैं।
उत्तर : ज्वारीय परिसर।

18. पृथ्वी के चन्द्रमा के समीपस्थ भाग पर उत्पत्र होनेवाले ज्वार को …………कहते हैं।
उत्तर : प्राथमिक ज्वार।

19. …………स्थिति में चन्द्रमा का ज्वारोत्पादक बल सबसे कम होता है।
उत्तर : अपभू।

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20. दो प्राथमिक ज्वारों के बीच समय का अंतर …………रहता है।
उत्तर : 24 घण्टा 52 मिनट।

21. प्रचलित हवाओं के कारण सागरीय सतह के जल के अग्रगामी गति को …………कहते हैं।
उत्तर : प्रवाह या ड्रिफ्ट।

22. कोरियोलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में चलने वाली धाराओं का झुकाव …………तरफ होता है।
उत्तर : दाहिने।

23. विघुवत रेखीय धाराएँ …………पवन के प्रभाव से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं।
उत्तर : पद्युआ।

24. …………महासागर की धाराओं की दिशा ऋतुवत परिवर्तित होता रहता है।
उत्तर : अटलांटिक।

25. धुवीय प्रदेशों से लेब्रोडोर एवं क्यूराइल की ठण्डी धाराओं की उत्पत्ति का कारण …………है।
उत्तर : हिम का पिघलना ।

26. ब्राजील की धारा ब्राजील के …………तट के सहारे प्रवाहित होती है।
उत्तर : पूर्वी।

27. धुवीय क्षेत्रों में सागरीय जल के घनत्व में कमी का मुख्य कारण………… है।
उत्तर : हिम का पिघलना ।

28. संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट के तापमान को …………घारा बढ़ा देती है।
उत्तर : गल्फस्ट्रीम ।

29. …………के प्रभाव से कनाडा के पश्चिम तट पर पर्याप्त वर्षा होती है।
उत्तर : उत्तरी प्रशान्त प्रवाह।

30. गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलने से …………की उत्पत्ति होती है।
उत्तर : घना कुहरा।

31. दो उच्च ज्वारें के बीच समय के अंतराल को …………कहते है।
उत्तर : ज्वारीय अंतराल।

32. पृथ्वी पर चन्द्रमा के समीस्थ भाग पर चन्द्रमा की गुरूत्वाकर्षण शक्ति के कारण आने वाले उच्च ज्वार को …………ज्वार कहते हैं।
उत्तर : प्रत्यक्ष ज्वार।

33. अप्रत्यक्ष ज्वार को ………… ज्वार भी कहते हैं।
उत्तर : गौण।

34. दोनों पक्ष के अष्टमी के दिन …………ज्वार आते हैं।
उत्तर : लघु।

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35. …………के परिभ्रमण कारण प्रतिदिन ज्वार 26 मिनट की देर से आता है।
उत्तर : पृथ्वी।

36. …………. ज्वारों की ऊँचाई सामान्य ज्वारों से 20% अधिक रहती है।
उत्तर : उपभू।

37. हुगली नदी में उत्पन्न ज्वारीय भित्तियों को स्थानीय रूप से कहा ………….जाता है।
उत्तर : बान।

38. उत्तरी हिन्द महासागर की धारा………….पवन द्वारा प्रवाहित होती है।
उत्तर : मानसून।

39. मत्स्यपालन क्षेत्र मुख्य रूप से ………….स्थल पर पैदा होते हैं।
उत्तर : गर्म एवं ठण्डी धाराओं के मिलन।

40. ग्रैण्ड बैंक एक…………. है।
उत्तर : मत्स्य आखेट केन्द्र।

41. समुद्री प्रवाह मुख्य रूप से…………. द्वारा पैदा होते हैं।
उत्तर : हवाओं।

42. क्यूरोशियो एक ………….जलधारा है।
उत्तर : गर्म।

43. हम्बोल्ट ए, ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

44. कनारी धारा ………….धारा है।
उत्तर : ठण्डी।

45. ठंडी दिवार………….में पायी जाती है।
उत्तर : उत्तरी अंधमहासागर।

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46. ब्राजील की धारा एक ………….धारा है।
उत्तर : गर्म।

47. बेनेजुएला एक ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

48. समुद्री जल का क्रमश: चढ़ाव एवं गिराव ………….कहलाता है।
उत्तर : ज्वार-भाटा।

49. क्यूरिब ………….जलधारा है।
उत्तर : गर्म।

50. अगुलहास…………. एक जलधारा है।
उत्तर : गर्म।

51. अंटार्कटिक प्रवाह ………….के रूप में जानी जाती है।
उत्तर : पहुआ पवन प्रवाह।

52. कैलिफोर्निया की धारा ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

53. पेरू ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

54. आटाकामा मरूस्थल ………….पर स्थित है।
उत्तर : पेरूतट।

55. गुयाना ………….धारा है।
उत्तर : गर्म।

56. लैद्रोडोर की ठंडी जलधारा न्यूफाउण्डलैण्ड द्वीप के पास ………….से मिलती है।
उत्तर : खाड़ी की धारा।

57. लैब्रोडोर ………….जलधारा है।
उत्तर : ठंडी।

58. सारगैसो सागर …………………… महासागर में स्थित है।
उत्तर : अटलांटिक।

59. लैब्रोडोर की ठंडी समुद्री धारा …………………… की ठंडी धारा है।
उत्तर : प्रशान्त महासागर।

60. …………………… धारा जापान की काली धारा कही जाती है।
उत्तर : क्यूरोशियो।

61. कैलिफोर्निया की ठण्डी धारा …………………… के पश्चिमी तट में बहती है।
उत्तर : संयुक्त राज्य अमेरिका।

62. …………………… का मेरियाना खड्डु विश्व का सबसे गहरा खड्ड है।
उत्तर : प्रशान्त महासागर ।

63. …………………… नदी ज्वारीय भिति के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : हुगली।

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64. सारगासों समुद्र …………………… में पाया जाता है।
उत्तर : अंध महासागर।

65. पृथ्वी के धरातल पर स्थित जल भाग को कहा …………………… जाता है।
उत्तर : जलमण्डल।

66. उत्तम कोटि की मछलियाँ …………………… पानी में पायी जाती हैं।
उत्तर : मीठे।

67. …………………… धाराएं जहाँ से गजरती हैं वहाँ का तापमान नीचा कर देती है।
उत्तर : गर्म।

68. सागरीय जल के नीचे गिरकर पीछे लौटने को …………………… कहते हैं।
उत्तर : भाटा।

69. पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है, …………………… ज्वार आता है।
उत्तर : अप्रत्यक्ष।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में ऋतु परिवर्तन देखा जाता है।
उत्तर : False

2. प्रशान्त महासागर में उत्पन्न एल निनो के प्रभाव से दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट में सूखे की स्थिति बनती है।
उत्तर : False

3. भूमध्यसागरीय क्षेत्र में साधारणतया ग्रीष्म काल में वर्षा होती है।
उत्तर : False

4. सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी के सरल रैखिक अवस्थान को सिजिगी कहते हैं।
उत्तर : True

5. पूर्णमासी के दिन लघु ज्वार आता है।
उत्तर : False

6. नदी का उद्गम हिमरेखा के ऊपर से होता है।
उत्तर : False

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7. ठण्डी महसागरीय धारा को धरातलीय धारा के नाम से भी पुकारा जाता है।
उत्तर : False

8. ला-निना के प्रभाव से प्रशान्त महासागर का पूर्वी तटीय भाग सूखा पड़ जाता है।
उत्तर : True

9. वायुमण्डल में ओजोन में ह्नास का कारण भूमण्डलीय ताप है।
उत्तर : False

10. मग्न तटों पर प्लैंकटन पर्याप्त मात्रा में पायी जाती है।
उत्तर : True

11. लैब्रोडोर की धारा अटलांटिक महासागर में पाया जाता है।
उत्तर : True

12. पूर्णिमा के दिन जब पृथ्वी सूर्य एवं चन्द्रमा के बीच एक सीधी रेखा में स्थित रहती है, को सिजिगी (युति-वियुति) कहते हैं।
उत्तर : False

13. प्राथमिक ज्वार बन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा नियन्त्रित होता है।
उत्तर : True

14. प्राथमिक ज्वार वाले स्थान के प्रतिपाद स्थान पर गोण ज्वार आते हैं।
उत्तर : True

15. सारगैसो सागर प्रशान्त महासागर में पाया जाता है।
उत्तर : False

16. निमग्न तट मत्स्याखे के लिए विपरीत दशाएँ उत्पन्न करते हैं।
उत्तर : False

17. सागरीय जल में आवर्ती उतार एवं चढ़ाव को सागरीय धारा कहते हैं।
उत्तर : False

18. भूमध्यरेखीय भाग में सागरीय जल की सतह ऊँची रहती है।
उत्तर : True

19. अण्टार्कटिक ड्रिप्ट की दिशा पहुआ हवाओ से प्रभावित होती है।
उत्तर : True

20. भू-आवर्तन के कारण सागरीय धाराएँ दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती है।
उत्तर : True

21. ध्रुवीय क्षेत्र में सागरीय जल के घनत्व में कमी का मुख्य कारण अत्यधिक वर्षा है।
उत्तर : False

22. उत्तरी हिन्द महासागर की धाराओं की दिशा कतु परिवर्तन के साथ परिवर्तित हो जाती है।
उत्तर : True

23. उच्च अक्षांशों में गर्म धाराएँ महादेशों के पूर्वी तट के सहारे प्रवाहित होती हैं।
उत्तर : False

24. सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को भाटा कहते हैं।
उत्तर : True

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25. पृथ्वी पर चन्द्रमा के दूरस्थ अर्थात विमुख भाग पर आने वाले ज्वारों को गोण ज्वार कहते है।
उत्तर : True

26. ‘शीतल दिवाल’ हिन्द महासागर में पायी जाती है।
उत्तर : False

27. आइसवर्ग बड़े-बड़े हिमखण्ड हैं जो ध्रुवीय क्षेत्रों से ठंडी समुद्री धाराओं द्वारा लाये जाते है।
उत्तर : True

28. क्यूरोशियो समुद्रीधारा चीन के तट को गर्म रखती है।
उत्तर : False

29. मोजाम्बिक और मेडागास्कर के सम्मिलित प्रवाह को अगुलहास की घारा कहते हैं।
उत्तर : True

30. प्रशांत महासागर में ‘मेरीयाना ट्रेंच’ ( 11,033 मी०) पृथ्वी पर सबसे गहरी खहु है।
उत्तर : True

31. पृथ्वी पर एक स्थान एक दिन में दो उच्च एवं दो निम्न ज्वारों का अनुभव करता है।
उत्तर : True

32. दो प्रधान ज्वारों के बीच 24 घण्टा 52 मिनट का अंतर होता है।
उत्तर : True

33. शुण्डा शेल्फ प्रशांत महासागर में है।
उत्तर : False

34. खाड़ी की धारा एक गर्म धारा है जो लंदन पोर्ट को पूरे वर्ष भर खुला रखती है।
उत्तर : True

35. क्यूरोशियो की धारा बीन और जापान तट से होकर प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

36. हम्बोल्ट की धारा दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट से होकर प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

37. गल्फ़्ट्रीम मैक्सको की खाड़ी से होकर उत्तर-पूर्व की ओर बहती है।
उत्तर : True

38. गुएना की धारा पश्चिमी अफ्रीकी तट की ओर प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

39. सारगैसम समुद्र हिन्द महासागर के मध्य में स्थित है।
उत्तर : False

40. लैब्रोडोर एक ठंडी धारा है जो आर्कटिक समुद्र से चलती है।
उत्तर : True

41. प्रैण्डबैंक, सैण्डबैंक एवं रेड बैंक मछली पकड़ने के केन्द्र हैं।
उत्तर : True

42. वृहद ज्वार पूर्णिमा एवं अमावस्या को आता है।
उत्तर : True

43. लघु ज्वार प्रत्येक पक्ष के अष्टमी को आता है।
उत्तर : True

44. न्यूफाउण्डलैण्ड के पास पूरे वर्ष भर घना कुहरा छाया रहता है।
उत्तर : True

45. क्यूरोशियो एक ठंडी धारा है।
उत्तर : False

46. प्रैंण्ड बैंक वाणिज्यिक मत्यस्यपालन के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

47. ग्रहीय हवाएँ समुद्री धाराओं की उत्पत्ति के लिए सबसे बड़ा कारण है।
उत्तर : True

48. पश्चिमी आस्टेलिया धारा हिन्द महासागर की ठण्डी धारा है।
उत्तर : True

49. लैबोडोर एक गर्म समुद्री धारा है।
उत्तर : False

50. क्यूराइल एक ठण्डी समुद्री धारा है।
उत्तर : True

51. कैस्पियन सागर विश्व की सबसे बड़ी झील है।
उत्तर : True

52. मरूस्थलों में पायी जाने वाली झीलों को प्लाया कहा जाता है।
उत्तर : True

53. सुण्डा खड्ड विश्व का सबसे गहरा खड्ड है।
उत्तर : False

54. मोजाम्बिक, मेडागास्कर और अगुलहास हिन्द महासागर की गर्म धाराएँ हैं।
उत्तर : True

55. समुद्री धाराँए तटों का अनुगमन नहीं करती हैं।
उत्तर : False

56. ज्वार-भाटा की उत्पत्ति के लिये पृथ्वी की वार्षिक गति जिम्मेदार है।
उत्तर : False

57. मरुस्थलों के निर्माण में गर्म धाराओं का प्रभाव है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

58. लघु ज्वार के समय सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी एक रेखा में आ सकते हैं।
उत्तर : False

59. दो प्राथमिक ज्वारों के बीच समय का अन्तर 24 घंटे का रहता है।
True

60. शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी के दिन लघु ज्वार आता है।
उत्तर : True

61. पूर्णिमा या अमावश्या के दिन सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक सीध में आ जाते हैं।
उत्तर : True

बायां स्तम्भ को दायां स्तम्भ से मिलान करें : (1 mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां, स्तम्भ
1. समुद्री धारायें (a) समुद्री धाराओं को जन्म देती है
2. पृथ्वी की दैनिक गति (b) प्रमुख मत्स्याखेट केन्द्र हैं
3. वृहद ज्वार के समय पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा (c) पेरेजी की स्थिति
4. ग्रैण्ड बैंक, सैण्ड बैंक एवं रेड बैंक (d) क्षैतिज उष्मा संतुलन स्थापित करती है
5. जब सर्वोच्च ज्वार आता है तो उसे कहते हैं (e) प्रत्येक पूर्णिमा एवं अमावस्या को आता है
6. चन्द्रमा पृथ्वी का एक परिक्रमा पूरा करता है (f) प्लैंकटन नामक काई उत्पन्न होती है
7. गर्म और ठंढी जलधाराओं के मान संधि पर (g) 28 दिनों में

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां, स्तम्भ
1. समुद्री धारायें (d) क्षैतिज उष्मा संतुलन स्थापित करती है
2. पृथ्वी की दैनिक गति (a) समुद्री धाराओं को जन्म देती है
3. वृहद ज्वार के समय पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा (e) प्रत्येक पूर्णिमा एवं अमावस्या को आता है
4. ग्रैण्ड बैंक, सैण्ड बैंक एवं रेड बैंक (b) प्रमुख मत्स्याखेट केन्द्र हैं
5. जब सर्वोच्च ज्वार आता है तो उसे कहते हैं (c) पेरेजी की स्थिति
6. चन्द्रमा पृथ्वी का एक परिक्रमा पूरा करता है (g) 28 दिनों में
7. गर्म और ठंढी जलधाराओं के मान संधि पर (f) प्लैंकटन नामक काई उत्पन्न होती है

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 3 जलमण्डल

प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. चन्द्रमा की पृथ्वी से अधिकतम दूरी (a) शुक्ल पक्ष की सप्तमी
2. सूर्य, चन्द्रमा एवं पृथ्वी का एक सीध में स्थिति (b) पूर्णिमा या अमावश्या
3. लघु ज्वार (c) भूमि उच्च
4. वृहत् ज्वार (d) Syzygy

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. चन्द्रमा की पृथ्वी से अधिकतम दूरी (c) भूमि उच्च
2. सूर्य, चन्द्रमा एवं पृथ्वी का एक सीध में स्थिति (d) Syzygy
3. लघु ज्वार (a) शुक्ल पक्ष की सप्तमी
4. वृहत् ज्वार (b) पूर्णिमा या अमावश्या

प्रश्न 3.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. प्रवाह (a) ठण्डी धारा के साथ बहकर आए हिम पिण्ड
2. क्यूराइल (b) सूर्य और पृथ्वी केबीच में चन्द्रमा की स्थिति
3. युति (c) हुगली नदी में आनेवाली ज्वारीय भित्तियाँ
4. बान (d) प्रचलित हवाओं के प्रभाव से उत्पन्न होनेवाली धाराएँ
5. आइसबर्ग (e) ध्रवीय क्षेत्र से उत्पन्न होनेवाली ठण्डी धारा

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. प्रवाह (d) प्रचलित हवाओं के प्रभाव से उत्पन्न होनेवाली धाराएँ
2. क्यूराइल (e) ध्रवीय क्षेत्र से उत्पन्न होनेवाली ठण्डी धारा
3. युति (b) सूर्य और पृथ्वी केबीच में चन्द्रमा की स्थिति
4. बान (c) हुगली नदी में आनेवाली ज्वारीय भित्तियाँ
5. आइसबर्ग (a) ठण्डी धारा के साथ बहकर आए हिम पिण्ड

 

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

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WBBSE Class 10 Geography Chapter 2 Question Answer – वायुमण्डल

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
वायुमण्डल के किस स्तर से जेट हवाई जहाज आवागमन करते हैं ?
उत्तर :
समतापमण्डल (Stratosphere)

प्रश्न 2.
संतृप्त वायु की आपेक्षिक आर्द्रता कितनी होती है ?
उत्तर :
100 %

प्रश्न 3.
अल्बेडो की मात्रा क्या है ?
उत्तर :
34 %

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 4.
वायु दाब मापक इकाई का नाम बताओ।
उत्तर :
वायुभार को बैरोमीटर यंत्र से मापा जाता है।

प्रश्न 5.
जल वाष का जल बूँदों में बदलने की क्रिया को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
संघनन।

प्रश्न 6.
चीन सागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवात का क्या नाम है ?
उत्तर :
टाइफून।

प्रश्न 7.
एनाबेटिक पवन क्या है ?
उत्तर :
घाटी से पर्वतीय ढालों की ओर चलने वाले घाटी समीर को एनाबेटिक पवन कहते हैं।

प्रश्न 8.
एनिमोमीटर क्या है ?
उत्तर :
वायु की गती मापने वाले यंत्र को एनिमोमीटर कहते हैं।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 9.
वायुमण्डल की सबसे नीचे की परत क्या है ?
उत्तर :
क्षोभमण्डल।

प्रश्न 10.
अयन मण्डल को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
तापमण्डल।

प्रश्न 11.
वायुमण्डल के बाह्य मण्डल का तापमान लगभग कितना है ?
उत्तर :
लगभग 5568°C

प्रश्न 12.
कौन-सी गैस पराबैगनी किरणों से जीवों की रक्षा करती है ?
उत्तर :
ओजोन गैस।

प्रश्न 13.
सूर्य के केन्द्रीय भाग का तापमान लगभग कितना है ?
उत्तर :
लगभग 1.5 से 2 करोड़ डिग्री K

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 14.
सूर्य की ऊपरी सतह से निकलने वाले उर्जा को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
फोटान।

प्रश्न 15.
सूर्य से पृथ्वी पर पहुँचने वाली ऊर्जा किस रूप में पहुँचती है ?
उत्तर :
लघु तरंगों के रूप में (Short waves)

प्रश्न 16.
समुद्र तल से 1 कि० मी० अथवा 1000 मीटर की ऊँचाई पर कितना सेल्सियस तापमान गिर जाता है ?
उत्तर :
6.4°C

प्रश्न 17.
पृथ्वी की सतह से ऊष्मा किस रूप में विकिरित होती है ?
उत्तर :
दीर्घ तरंगों के रूप में (Long Waves)

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 18.
तापमान को नियन्त्रित करने वाले एक कारक को लिखिए।
उत्तर :
भूमध्य रेखा से दूरी अथवा अक्षांश।

प्रश्न 19.
जिस तापमान पर पानी खौलने लगता है, उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर :
उबालांक (Boiling Point)

प्रश्न 20.
तापमान की विलोमता का क्या कारण है ?
उत्तर :
रात्रि का लम्बा होना।

प्रश्न 21.
दिन का अधिकतम और रात्रि का न्यूनतम तापमान मापने के लिए किस प्रकार का थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर :
सिक्स का अधिकतम और न्यूनतम थर्मामीटर (Six Maximum and Minimum Thermometer)

प्रश्न 22.
ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से बचने के लिए कुल कितने देश विश्व व्यापी सम्मेलन में भाग लिये थे ?
उत्तर :
159 देश।

प्रश्न 23.
किसी वस्तु के अधिक गर्म कणों द्वारा अपने सम्पर्क के कम गर्म कणों को ताप देने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
संचालन (Conduction)

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प्रश्न 24.
वायुदाब किस रेखा द्वारा दिखाया जाता है ?
उत्तर :
समदाब रेखा (Isobar)।

प्रश्न 25.
समदाब रेखाओं का वितरण किस रूप में है ?
उत्तर :
क्षैतिज रूप में।

प्रश्न 26.
वायुमण्डल में वायुभार के घटने-बढ़ने की क्रिया को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
वायुदाब उच्चावचन (Barometric Tide)

प्रश्न 27.
समुद्र तल पर औसत वायुदाब कितना इंच होता है ?
उत्तर :
29.92 इंच।

प्रश्न 28.
उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर वायुदाब की पेटियों को कितने भागों में बाँटा गया है ?
उत्तर :
दो।

प्रश्न 29.
30° से 35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
अश्व अक्षांश (Horse Latitude)।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 30.
किस पवन को ग्रहीय पवन भी कहा जाता है ?
उत्तर :
प्रचलित या स्थायी पवन को।

प्रश्न 31.
भूमध्य रेखा के निकट किस पवन के बाद मूसलाधार वर्षा होती है।
उत्तर :
पूर्वी पवन के।

प्रश्न 32.
वायुदाब को प्रभावित करने वाले एक तत्व का नाम लिखिए।
उत्तर :
तापमान।

प्रश्न 33.
भूमध्य रेखीय या विधुवत रेखीय निम्न वायु दाब कटिबन्ध में किस प्रकार की धारा उत्पत्र होती है?
उत्तर :
संवहनीय (Convectional)

प्रश्न 34.
ग्लोब या पृथ्वी कॉरिआलिस बल (Coriolis Force) कहाँ शून्य रहता है ?
उत्तर :
विषुवत रेखा या भूमध्य रेखा पर।

प्रश्न 35.
वायुयान में तथा पर्वतों पर चढ़ते समय किस बैरोमीटर का प्रयोग़ किया जाता है ?
उत्तर :
एनीरायड बैरोमीटर (Aneroid Barometer)।

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प्रश्न 36.
कारिआलिस बल (Coriolis Force) की खोज किस वैज्ञानिक ने किया था ?
उत्तर :
फ्रांसीसी वैज्ञानिक जी० जी० कारिआलिस ने (G. G. Coriolis)।

प्रश्न 37.
विरुद्ध व्यापारिक पवन या पछुवा पवन का प्रभाव किस गोलार्द्ध में नाविकों द्वारा सबसे अधिक अनुभव किया जाता है ?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° से 65° अक्षांशों के बीच।

प्रश्न 38.
भूमध्य रेखीय निम्न दाब की पेटी में वायुमण्डलीय दशा के अत्यधिक शान्त रहने के कारण उसे किस कटिबन्ध के नाम से पुकारा जाता है।
उत्तर :
डोलड्रम या शांत कटिबन्ध (Doldrum or Calm belt)।

प्रश्न 39.
दोनों गोलार्द्धों के उपध्रुवीय क्षेत्र में किस प्रकार की वायु दाब पेटियाँ पायी जाती हैं ?
उत्तर :
निम्न वायुदाब की पेटियाँ (Low Pressure Belts)!

प्रश्न 40.
किस सामयिक पवन (Periodical Winds) को गुरुत्वाकर्षण अथवा उत्रेक्षक पवन (Gravity or Catabatic Wind) भी कहा जाता है?
उत्तर :
पर्वतीय समीर को (Mountain Breeze)।

प्रश्न 41.
स्विद्जरलैण्ड की घाटियों को शीतकाल में क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
जलवायु मरूद्यान (Climatic Oasis)

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प्रश्न 42.
मौसम सुहावना तथा बड़ा ही स्वास्थ्यप्रद समझी जाने वाली हवा कौन है ?
उत्तर :
हरमाट्टन (Harmattan)।

प्रश्न 43.
‘हिम झंझावातों का घर’ (House of the Blizzard) का प्रभाव कहाँ एवं किस गोलार्द्ध में देखने को मिलता है?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध के एडीलेण्ड में।

प्रश्न 44.
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) का सर्वाधिक औसत वेग किस कटिबन्ध के ऊपर होता है ?
उत्तर :
उपोष्ण उच्च वायुभार कटिबन्ध।

प्रश्न 45.
उष्णा कटिबन्ध चक्रवात की उत्पत्ति किस ऋतु में होती है ?
उत्तर :
ग्रीष्म ऋतु में।

प्रश्न 46.
चक्रवात (Cyclone) के केन्द्र में कौन-सा वायुदाब पाया जाता है ?
उत्तर :
निम्न वायुदाब।

प्रश्न 47.
शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में प्राय: समदाब रेखाओं की आकृति कैसी होती है ?
उत्तर :
समदाब रेखाएँ प्राय: V आकार की।

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प्रश्न 48.
ITCZ का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र (Inter-Tropical Covergence Zone)

प्रश्न 49.
आर्द्रता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
आर्द्रता (Humidity) : वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प को आर्द्रता कहते हैं।

प्रश्न 50.
संतृत्प वायु से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
संतृप्त वायु (Saturated Air) : जब किसी वायु में उसकी क्षमता के बाराबर जलवाष्प आ जाय तो उसे संतृप्त वायु कहते है।

प्रश्न 51.
निरपेक्ष आर्द्रता को किस रूप में व्यक्त किया जाता है ?
उत्तर :
निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) को ग्राम प्रतिघनमीटर (gram /m2) के रूप में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 52.
सहिम वृष्टि क्या है ?
उत्तर :
सहिम वृष्टि (Sleet) : जल वृष्टि और हिम वृष्टि के सम्मिलित रूप को सहिम वृष्टि कहा जाता है।

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प्रश्न 53.
किस बादल को मिध्या पक्षांभ (False Cirrrus) कहा जाता है ?
उत्तर :
कपासी-वर्षी मेघ को मिथ्या पक्षाय (False Cirus) कहा जाता है।

प्रश्न 54.
उष्णा कटिबन्ध का विस्तार पृथ्वी पर कहाँ तक फैला हुआ है ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्ध पृथ्वी पर भूमध्य रेखा के दोनों ओर 23 1/2° उत्तर एवं दक्षिण अर्थात् कर्क और मकर रेखा तक फैला हुआ है।

प्रश्न 55.
सवाना (Savana) क्या है ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्ध आर्द्र एवं शुष्क जलवायु वाले प्रदेश को ही सवाना कहा जाता है।

प्रश्न 56.
मध्य तापीय (Mesothermal) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उष्ण आर्द्र शीतोष्ण जलवायु समूह को मध्य तापीय (Mesothermal) जलवायु भी कहा जाता है।

प्रश्न 57.
किस जलवायु प्रदेश को चीन तुल्य जलवायु (China Type of Climate) कहा जाता है ?
उत्तर :
CW जलवायु अर्थांत उष्ण शीतोष्ण आर्द्र जलवायु को चीन तुल्य जलवायु (China Type of Climate) कहा जाता है।

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प्रश्न 58.
किस जलवायु के अन्तगर्त शीत ऋतु में वर्षा होती है।
उत्तर :
भूमध्य सागरीय जलवायु के अन्तर्गत शीत ऋतु में वर्षा होती है।

प्रश्न 59.
ऊँचाई के आधार पर बादल को कितने भागों में बॉटा गया है ?
उत्तर :
ऊँचाई के आधर पर बादलों को चार भागों में रखा गया है।

प्रश्न 60.
पूर्वी भारत में स्थित वृष्टि-छाया प्रदेश का नाम लिखिए।
उत्तर :
पूर्वी भारत में स्थित वृष्टि-छाया प्रदेश (Rain Shadow Area) का नाम शिलांग है।

प्रश्न 61.
इन्द्रधनुष क्या है ?
उत्तर :
इन्द्रधनुष (Rainbow) : मेघयुक्त आकाश पर प्रात: काल अथवा सांध्य समय कभी-कभी सूर्य की किरणें परावर्तित होकर सात रंगों के धनुष के रूप में दिखाई पड़ती है उसे ही इन्द्रधनुष कहा जाता है।

प्रश्न 62.
मौसम के प्रमुख दो तत्व लिखिए।
उत्तर :
तापमान और वायुदाब।

प्रश्न 63.
पाला क्या है ?
अथवा
‘पाला’ शब्द का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
पाला (Frost) : ‘पाला’ शब्द का प्रयोग धरातल पर अथवा घास-पतियों पर भाप के ठोस अवस्था में हल्की चमकदार बर्फ के तह के रूप में जम जाने के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 64.
वायुमण्डल के संगठन में जलवाष्प का प्रतिशत कितना होता है ?
उत्तर :
वायुमण्डल के संगठन में जलवाष्प का प्रतिशत 2 से 5 तक हो सकता है।

प्रश्न 65.
संघनन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
संघनन (Condesation) : जलवाष्प के जलरूप (ठोस-हिम या तरल) में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

प्रश्न 66.
ओला (Hail) क्या है ?
उत्तर :
ओला (Hail) : जब बर्फ की कड़ी एवं बड़ी गोलियों की बौछार होने लगती है तो इसे ओला कहा जाता है।

प्रश्न 67.
ट्रिगर प्रभाव (Trigger Effect) क्या है ?
उत्तर :
ट्रिगर प्रभाव (Trigger Effect) : पर्वतो द्वारा वायु के ऊपर उठने में जो सहायता मिलती है, उसे ट्रिगर प्रभाव कहा जाता है।

प्रश्न 68.
वर्षण क्या है ?
उत्तर :
संघनन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप वायु के जलवाष्प जल बूँद में बदल जाती है।

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प्रश्न 69.
आर्द्रता का मापन कैसे करते हैं ?
उत्तर :
WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 2 वायुमण्डल 1

प्रश्न 70.
भूमध्यरेखीय जलवायु प्रदेश किन अक्षांशों के बीच पाया जाता है ?
उत्तर :
यह जलवायु भूमध्य रेखा के दोनो ओर 5° से 10° तक पाई जाती है।

प्रश्न 71.
भूमध्यसागरीय जलवायु के दो प्रदेशों का नाम लिखो।
उत्तर :
(i) भू मध्य सागर के उत्तर पुर्तगाल से टकी तक तथा ईरान के पठारी क्षेत्र।
(ii) भू मध्य सागर के दक्षिणी किनारे मोरक्को, उत्तरी नाइजीरिया, टयूनीशिया तथा बलीनिया में बेंगाजी का उत्तरी क्षेत्र।

प्रश्न 72.
डोलड्रम (Doldrum) क्या है ?
उत्तर :
डोलड्रम (Doldrum) :- विषुवतीय निम्न दाब पेटी में वायुमण्डलीय दशा के अत्यधिक शांत रहने के कारण ही इस कटिबंध को डोलड्रम कहा जाता है, जिसका विस्तार विषुवत से दोनों गोलार्द्ध में 5° अक्षांशों के बीच रहता है।

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प्रश्न 73.
स्टेपी जलवायु के मुख्य दो विशेषताओं को बताओ।
उत्तर :
(i) समुद्र से दूर स्थल के भीतर स्थित होने से यहाँ वर्षा कम होती है।
(ii) अधिकांश वर्षा ग्रीष्म को प्रारम्भ में तथा वसन्त ऋतु में होती है।

प्रश्न 74.
वायुमण्डल में आक्सीजन की मात्रा कितनी है ?
उत्तर :
20.99 %

प्रश्न 75.
वायुमण्डल की सबसे निचली परत कौन-सी है ?
उत्तर :
क्षोभमण्डल (Troposphere)

प्रश्न 76.
आयनमण्डल की एक विशेषता बताइये।
उत्तर :
इस मण्डल की सहायता से बेतार के तार का संचार व्यवस्था संभव होता है।

प्रश्न 77.
प्रत्येक महीने के औसत तापमान के योग में 12 का भाग देने पर जो ताप ज्ञात होता है, उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर :
औसत वार्षिक तापक्रम।

प्रश्न 78.
शीत कटिबंध की स्थिति बताइये।
उत्तर :
यह शीतोष्ण कटिबन्ध से उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव (North pole 90° ) तक तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी धुव (South Pole 90°) तक फैला है।

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प्रश्न 79.
किसी एक ग्रीन हाउस गैस का नाम बताइये।
उत्तर :
कार्बन डाई-आक्साइड (CO2)

प्रश्न 80.
वैश्विक तापन का एक प्रभाव बताइये।
उत्तर :
हिम का पिघलना तथा सागर तल में वृद्धि होना।

प्रश्न 81.
किसी एक ठण्डी स्थानीय हवा का नाम बताइये।
उत्तर :
ब्लिजर्ड (Blizzard) सह ध्रुवीय हवा है।

प्रश्न 82.
किस शक्ति के कारण वायुमण्डल धरातल से टिका हुआ है।
उत्तर :
पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण।

प्रश्न 83.
वायुमण्डल में जलवाष्प की अधिकतम मात्रा कितनी हो सकती है ?
उत्तर :
5% से अधिक कभी भी नहीं होती है।

प्रश्न 84.
वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी ऊँचाई तक पायी जाती है ?
उत्तर :
वायुमण्डल में 120 कि॰मी॰ की ऊँचाई तक आते-आते ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है।

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प्रश्न 85.
वायुमण्डल में विद्यमान गैसों में नाइट्रोजन की मात्रा कितनी है ?
उत्तर :
78.03 %

प्रश्न 86.
वायुमण्डल की किस परत में ऊँचाई के साथ तापमान एवं वायुदबाव में परिवर्तन होता रहता है ?
उत्तर :
अधोमण्डल या क्षोभ मण्डल (Troposphere)

प्रश्न 87.
किस वर्ग के रसायन ओजोन परत के क्षरण के लिए उत्तरदायी हैं ?
उत्तर :
क्लोरो-फ्ल्यूरो कार्बन वर्ग के रसायन।

प्रश्न 88.
सूर्य से प्राप्त ताप की कितनी मात्रा पृथ्वी को प्राप्त होती है ?
उत्तर :
51 % ताप प्राप्त होती है।

प्रश्न 89.
पृथ्वी के किस कटिबंध में दिन-रात की लम्बाई 24 घण्टे से अधिक होती है ?
उत्तर :
शीत कटिबन्ध (Frigid zone) में।

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प्रश्न 90.
मानचित्र पर कौन रेखाएँ समान सागर तलीय तापमान वाले स्थानों को दर्शाती है ?
उत्तर :
समताप रेखायें (Isotherms)

प्रश्न 91.
मौसम के सभी तत्त्व किसके द्वारा नियंत्रित होते हैं ?
उत्तर :
मौसम के सभी तत्व वायुदाब द्वारा नियन्त्रित होते है।

प्रश्न 92.
किन अक्षांशों को अश्व अक्षांश कहते हैं ?
उत्तर :
30°-35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश को अरब अक्षांश कहा जाता है।

प्रश्न 93.
पृथ्वी पर कोरियोलिस बल कहाँ शून्य रहता है ?
उत्तर :
विषुवत वृत पर कोरियोलिस बल शून्य होता है।

प्रश्न 94.
किन हवाओं को दैनिक मानसून कहते हैं ?
उत्तर :
जलीय व स्थलीय हवाओं को दैनिक मानसून कहते है।

प्रश्न 95.
निरपेक्ष आर्द्रता किसमें व्यक्त की जाती है ?
उत्तर :
यह ग्राम प्रति घनमीटर वायु में व्यक्त की जाती है।

प्रश्न 96.
संतृप्त वायु की सापेक्षिक आर्द्रता कितनी रहती है ?
उत्तर :
संतृप्त वायु की सापेक्ष आर्द्रता 100 % होती है।

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प्रश्न 97.
जलीय चक्र की कितनी अवस्थाएँ हैं ?
उत्तर :
जलीय चक्र की तीन अवस्थाएँ होती है –

  • वाष्पीकरण
  • संघनन
  • वर्षन

प्रश्न 98.
जेट धारा की सामान्य गतिकितनी होती है ?
उत्तर :
इसकी सामान्य गति 150 से 200 कि॰मी॰ प्रति घण्टा होती है।

प्रश्न 99.
जब ओसांक हिमांक बिंदु के नीचे होता है तो संघनन किस रूप में होता है ?
उत्तर :
हिमकण के रूप में होता है।

प्रश्न 100.
पर्वतों के पवन विमुख ढाल को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
पवन-विमुख ढाल (Leeward slope) कहते है।

प्रश्न 101.
समुद्री जलवायु के दो प्रदेशों का नाम लिखो।
उत्तर :
रोम और दक्षिणी इटली।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
चिनक क्या है ?
उत्तर :
चिनूक (Chinook) : चिनूक शब्द का अर्थ है – ‘हिम भक्षी’। यह पवन अमेरिका एवं कनाडा में रॉकी पर्वत श्रेणों के पूर्वी ढाल पर नीचे उतरती है। रॉकी के पूरब भाग में स्थित चारागाहों को हिम के प्रभाव से मुक्त रखती है।

प्रश्न 2.
जेट स्त्रोत (धारा) की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
(i) ये अक्षांशीय उष्मा संतुलन को कायम रखने में सहायक होती है।
(ii) ये चक्रवातों के मार्ग को प्रभावित करती है।

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प्रश्न 3.
ज्वारीय-भित्ति क्या है ?
उत्तर :
नदी के खुले व चौड़े मुहाने से ज्वार इसकी तंग एवं सकरी घाटी में तीब गति से प्रवेश करता है। दूसरी तरफ नदी की जल धारा समुद्र की ओर आती है। दोनों के आपस में टकराने से जल एक ऊँची दीवार सदृश्य उठ जाता है। इसे ज्वारीय भित्ति (Tidal Bore) कहते है।

प्रश्न 4.
दक्षिणी गोलार्द्ध के दो उष्ण मरूस्थलों के नाम बताओ।
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध के दो उष्ण मरूस्थलों के नाम कालाहारी एवं अटकामा।

प्रश्न 5.
चेरी क्लासम और आप्र वृष्टि क्या हैं ?
उत्तर :
चेरी ब्लासम : कनटिक में नार्वेस्टर से होने वाली वर्षा को चेरी ब्लासमकहा जाता है, जो कॉफी की कृषि के लिए लाभदायक है।
आप्र वृष्टि : नार्वेस्टर से होने वाला वर्षा से दक्षिण भारत में आम की खेती लाभदायक सिद्ध होती हैं इसलिए आम्र वृष्टि कहते हैं।

प्रश्न 6.
वर्नियर स्थिर (Vernier Constant) क्या है ?
उत्तर :
वर्नियर स्थिर (Vernier Constant) : वायुमण्डलीय काँच की नली के दिखाई देने वाले भाग पर वायुमण्डलीय दाब मिलीबार में अंकित की जाती है। इस मापनी पर एक वर्नियर मापनी लगी रहती है जिसे ही वर्नियर स्थिर कहा जाता है।

प्रश्न 7.
सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) क्या है ?
उत्तर :
सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) :- किसी भी तापमान पर वायु में उपस्थित जलवाष्प तथा उसी तापमान पर उसी वायु की जलवाष्प धारण करने की क्षमता को सापेक्ष आर्द्रता कहते हैं। इसे प्रतिशत मात्रा में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 8.
हिमरेखा (Snow Line) क्या है ?
उत्तर :
हिमरेखा (Snow Line) :- हिम रेखा वह कल्पित रेखा है, जिसके ऊपर पूर्णतया बर्फ कभी नहीं पिघलती है अर्थात जहाँ बर्फ सालों भर जमी रहती है।

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प्रश्न 9.
ओसांक विन्दु तापक्रम (Dew Point Temperature) क्या है ?
उत्तर :
ओसांक विन्दु तापक्रम (Dew Point Temperature) :- बिना भाप के बटाये-बढ़ाये ही जिस तापमान पर वायु संतृप्त हो जाती है, उस तापमान को ओसांक विन्दु तापक्रम कहा जाता है।

प्रश्न 10.
वायु विलय पात्र (Aerosol) क्या है।
उत्तर :
वायु विलय पात्र (Aerosol) :- वायु में विभित्र प्रकार के ठोस एवं तर पदार्थ के मिश्रण को ही वायु विलय पात्र कहा जाता है।

प्रश्न 11.
हिमभक्षि (Snow-eaters) क्या है।
उत्तर :
हिमभक्षि (Snow-eaters) : – सं० रा० अ० में चिनूक हवाओं के कारण बर्फ के पिघलते ही पानी वाष्प बन कर इन हवाओं में मिल जाता है। इन हवाओं को इसीलिए हिमभक्षि (Snow-eaters) कहा जाता है।

प्रश्न 12.
चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic Rain) क्या है ?
उत्तर :
चक्रवातीय अथवा वाताग्री वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall) : चक्रवातों द्वारा होने वाली वर्षा को चक्रवाती या वाताग्री वर्षा कहा जाता है। शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में उष्ण एवं आर्द्र वायु राशि हल्की होने के कारण शीतल एवं शुष्क राशि के ऊपर चढ़ जाती है, इससे गर्म पवन में उपस्थित जलवाष्ष का संघनन हो जाता है और वर्षा होती है। इस प्रकार की वर्षा शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों के क्षेत्रों में होती है। शीत ॠतु में उत्तर-पश्चिम भारत में भी वर्षा चक्रवातो द्वारा ही होती है।’

प्रश्न 13.
उपोष्ण चक्रवात (Trorical Cyclone) क्या है ?
उत्तर :
उपोष्ण चक्रवात (Trorical Cyclone) :- ग्लोब पर दोनों गोलार्द्धों में 8° से 24° अंक्षाशों के बीच उत्पन्न चक्रवातों को उपोष्ण चक्रवात कहा जाता है।

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प्रश्न 14.
बोफर्ट मापक्रम (Bofert Scale) क्या है ?
उत्तर :
बोफर्ट मापक्रम (Bofert Scale) :- यह एक अन्तर्राष्ट्रीय वायु गति मापक यंत्र है जिसमें वायु की न्यू नतम
उत्तर :
बोफटे मापक्रम (Bofert Scale) :- यह एक अन्तरांत्ट्रीय वायु गता अधिकतम गति 12 इकाई दिखाया जाता है।

प्रश्न 15.
समताप मण्डल में ही जेट विमान क्यों उड़ते हैं ?
उत्तर :
क्या कारण है कि जेट विमान समतापमण्डल में ही उडते हैं ? समतापमण्डल परिवर्तनमण्डल के ऊ : 80 कि०मी० की ऊँचाई तक पाया जाता है। ऊँचाई के साथ समतापमण्डल में तापक्रम का परिवर्तन नहीं होता है। तापक्रम लगभग स्थिर रहता है। समतापमण्डल में जलवाष्प एवं धूल-कण बहुत कम पाये जाए हैं। अत: इस मण्डल में आँधी, तूफान हिम-वर्षा एवं धन गर्जन नहीं होते। समान तापमान, बादनलों का अपेक्षाकृत अभाव और हल्की वायु के कारण जेट विमान समतापमण्डल में ही अधिक उड़ना चाहता है।

प्रश्न 16.
विषम मण्डल क्या है ?
उत्तर :
विषम मण्डल (Heterosphere) : यह वायुमण्डल की सबसे ऊपरी परत है, इस मण्डल की ऊँचाई 90 कि०मी० से 10,000 कि०मी० तक है। इस मण्डल में स्थित विभिन्न परतों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों की विषमता के कारण ही इसका नाम विषम मण्डल है।

प्रश्न 17.
वायु विज्ञान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वायु विज्ञान : विसे कहत्तान (Aerology) : वायुमण्डल के सबसे ऊपरी परतो के अध्ययन को ही वायु विज्ञान कहा जाता है।

प्रश्न 18.
ऋतु विज्ञान क्या है?
उत्तर :
ऋतु : वतु विज्ञान (Meteorology) : वायुमण्डल के सबसे नीचली परतों के अध्ययन को ऋतु विज्ञान कहा जाता है।

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प्रश्न 19.
सामान्य ह्रास दर किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सामान्य ह्रास दर (Normal Lapse Rate) : क्षोभमण्डल की परत में ऊँचाई के साथ-साथ तापमान कम होता जाता है। तापमान की गिरावट की दर 1°C प्रति 165 मीटर होती है, इसे ही सामान्य ह्रास दर कहते हैं।

प्रश्न 20.
सम मण्डल से क्या समझते हैं?
उत्तर :
सम मण्डल (Homosphere) : सम मण्डल वायु मण्डल का निचला भाग है। समुद्र तल से इस मण्डल की ऊँचाई 90 कि॰मी॰ मानी गयी है। इस मण्डल की रचना मुख्यत: नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन दोनों गैसों से हुई है। ये दोनों गैसें वायुमण्डल के 99 प्रतिशत भाग को घेरे हुए हैं।

प्रश्न 21.
वायुमण्डल का प्रमुख संघटन क्या है ?
उत्तर :
वायुमण्डल अनेक गैसों का मिश्रण है। गैसों के अलावा वायुमण्डल में जलवाष्प तथा धूलकण भी वायुमण्डल का संघटन है।

प्रश्न 22.
वायुमण्डल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
वायुमण्डल (Atmosphere) : वायुमण्डल दो शब्दों से मिल कर बना है – वायु + मण्डल, अर्थात वायु का विशाल भण्डार जो पृथ्वी को एक खोल अर्थात लीफाफे की भॉति चारों ओर से घेरे हुए है, वायुमण्डल कहलाता है। यह वायुमण्डल अपने आप में अपने को रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन प्रकट करता है।

प्रश्न 23.
उत्तर ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Borealis) और दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Australis) क्या हैं?
उत्तर :
धुवीय प्रकाश पर सूर्य के धब्बों के परिर्वतन का भी काफी प्रभाव पड़ता है, अतः सूर्य के विद्युत विसर्जन से भी यह प्रकाश संबधित है। उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य से प्राप्त रंग-विरंगी प्रकाश पूँज को उत्तर ध्रुवीय प्रकाश तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उसी प्रकाश पूँजों को दक्षिण धुवीय प्रकाश कहा जाता है।

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प्रश्न 24.
क्षोभ सीमा क्या है ?
उत्तर :
क्षोभ सीमा (Tropopause) : क्षोभ मण्डल और समताप मण्डल के बीच स्थित पतली परत को क्षोभ सीमा कहा जाता है। इसकी ऊँचाई 1.5 कि०मी० होती है।

प्रश्न 25.
संवाहन प्रदेश किसे कहते हैं?
उत्तर :
संवाहन प्रदेश (Convectional Zone) : क्षोभ मण्डल में लम्बवत वायु की धाराएँ पायी जाती हैं और ये परते संचालन (Conduction), विकिरण (Radiation), तथा संवाहन (Convection) द्वारा गर्म और ठण्डी होती रहती है। इस भाग में संवाहन का नियम अधिक प्रचलित है, इसी कारण इसको संवाहन प्रदेश भी कहते हैं।

प्रश्न 26.
टिप्पणी लिखिए : (i) घूलकण, (ii) जलवाष्प।
उत्तर :
(i) धूलकण (Dust Particles) : वायुमण्डल में वायु के गति के कारण सुक्ष्म धूल के कण उड़ते रहते हैं। ये धूल के कण विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होते हैं। इनमें सूक्ष्म मिट्टी, धूल, समुद्री नमक, धुएँ की कालिख, राख तथा उल्कापात के कण सम्मिलित हैं। धूलकण प्रायः वायुमण्डल की निचली परत में पायी जाती है। धूलकण अधिकांश आर्द्रताग्माही केन्द्र बन जाते हैं, जिन पर वायुमण्डलीय जल वाष्प का संघनन होता है। इस प्रकार बादल बनते हैं और वर्षा होती है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय आकाश में लाल और नारंगी रंग की छटाओं के लाली को प्रभात (Dawn) तथा गोधूलि बेला (Twilight) कहते हैं।

(ii) जलवाष्प (Water Vapour) : अभी तक हम केवल शुष्क वायु में ही विभिन्न गैसों की मात्रा तथा उनके महत्व के बारे में जानते हैं, लेकिन वायमण्डल में विभिन्न गैसों के अलावा जलवाष्प की उपस्थिति भी होती है। वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा इसके कुल आयतन का 4 से 5 प्रतिशत है। धवुीय क्षेत्रों के शुष्क वायुमण्डल में जलवाष्प 1 % तथा उष्णआर्द्र प्रदेशों में इसकी मात्रा 4 % होती है। इस प्रकार ऊँचाई के वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में कमी आती जाती है। जलवाष्प की मात्रा वायुमण्डल के 8 कि०मी० की ऊँचाई तक सीमित है।

प्रश्न 27.
आकाश का रंग नीला दिखाई देता है क्यों ?
उत्तर :
चाँकि वायुमण्डल में उपस्थित धूलकण पाये जाते हैं, धूलकण सूर्यताप को रोकने तथा उसे परावर्तित करने का कार्य करते हैं। धूलकण प्राय: वायुमण्डल की निचली परत में पायी जाती है। सूर्य से आने वाली किरणों में प्रकीर्णन इन कणों द्वारा होती है, जिस कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।

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प्रश्न 28.
सूर्याताप से क्या समझते हो ?
उत्तर :
सूर्याताप (Insolation) से पृथ्वी तक पहुँचने वाले सौर विकिरण को सूर्याताप कहते हैं।
दूसरे शब्दों में सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण उर्जा को सूर्याताप कहते हैं।

प्रश्न 29.
सौर स्थिरांक अथवा अपरिवर्तनशील शक्ति क्या है ?
उत्तर :
सौर स्थिरांक अथवा अपरिवर्तनशील (Solar Constant) : वायुमण्डल की बाहरी सीमा पर सूर्य से प्रति मिनट प्रति वर्ग सेंटीमीटर पर 1.94 कैलोरी ऊष्मा प्राप्त होती है। ऊष्मा की इस मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए इसे सौर स्थिरांक कहते हैं।

प्रश्न 30.
पृथ्वी का एल्बिडो किसे कहते है ?
उत्तर :
पृथ्वी का एल्बिडो (Albedo of the earth) : वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर प्राप्त होने वाली कुल-ऊष्मा को यदि 100 इकाई मान लिया जाय तो इसमें से 35 इकाईयाँ पृथ्वी के धरातल पर पहुँचने से पहले ही अंतरिक्ष में लौट जाती है सौर विकिरण की इस मात्रा, अर्थात् 35 इकाई को ही पृथ्वी का एल्बिडो कहा जाता है।

प्रश्न 31.
पार्थिव विकिरण अथवा भौमिक विकिरण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पार्थिव विकिरण अथवा भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) : सूर्याताप का 51 % भाग ही पृथ्वी की सतह पर पहुँच कर उसे गर्म करता है। पृथ्वी भी ऊष्मा को दीर्घ तरंगों के रूप में विकिरित करती है, उसे ही पार्थिव विकिरण या भौमिक विकिरण कहा जाता है।

प्रश्न 32.
पृथ्वी का उष्मा बजट क्या है ?
उत्तर :
पृथ्वी का उष्मा बजट (Heat Budget of the Earth) : पृथ्वी पर औसत तापमान एक समान रहता है। यह सूर्याताप एवं भौमिक विकिरण में संतुलन के कारण ही संभव हुआ है। इस संतुलन को ही पृथ्वी का उष्मा बजट कहा जाता है।

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प्रश्न 33.
35° सेण्टीग्रेड तापमान को फारेनहाइट में बदलो।
उत्तर :
फारेनहाइट = 35 × \(\frac{9}{5}\) + 32 = 63 + 32 = 95° फारेनहाइट

प्रश्न 34.
212° फारेनहाइट को सेण्टीग्रेड में बदलो।
उत्तर :
सेण्टीग्रेड = \(\frac{5}{9}\) (212-32) = \(\frac{5}{9}\) × 180 = 100° सेण्टीग्रेड

प्रश्न 35.
सिक्स का अधिकतम एवं न्यूनतम थर्मामीटर क्या है ?
उत्तर :
सिक्स का अधिकतम एवं न्यूनतम थर्मामीटर (Six Maximum and Minimum Thermometer) : दिन का अधिकतम तथा रात्रि का न्यूनतम तापमान मापने के लिए एक विशेष प्रकार का थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है जिसका अविष्कार जे० सिक्स (J. Six) नामक विद्धान ने किया था।

प्रश्न 36.
समताप रेखाओं से क्यासमझते हो ?
उत्तर :
समताप रेखाएँ : समताप रेखा अम्रेंजी के शब्द ‘ISO’ और ‘therm’ दो शब्दों से मिल कर बना है जिनमें ISO का अर्थ ‘सम’ तथा ‘Therm’ का अर्थ ‘ताप’ अर्थात समताप होता है। समताप रेखाएं वे कल्पित रेखाएं है जो मानचित्र पर समान तापमान वाले स्थानों को मिलाती हैं।

प्रश्न 37.
दैनिक तापान्तर अथवा दैनिक ताप परिसर से क्या समझत हो ?
उत्तर :
दैनिक तापान्तर (Daily Range of Temperature): एक दिन के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ही दैनिक तापान्तर कहते हैं।

प्रश्न 38.
वार्षिक तापान्तर कैसे ज्ञात करते हैं ?
उत्तर :
वार्षिक तापान्तर (Annual Range of Temperature) : एक वर्ष में किसी माह का अधिक तापमान से न्यूनतम तापमान को घटा देने पर जो तापमान ज्ञात होता है वार्षिक तापान्तर होता है। जैसे 40°C-12°C=28°C

प्रश्न 39.
मासिक तापान्तर से क्या समझते हो ?
उत्तर :
मासिक तापान्तर (Monthly Range of Temperature) : एक माह के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ही मासिक तापान्तर कहा जाता है।

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प्रश्न 40.
दैनिक औसत तापमान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दैनिक औसत तापमान (Average Daily Temperature) : किसी स्थान के किसी दिन के सबसे अधिकतम तापमान तथा रात के सबसे न्यूनतम तापमान के औसत को ही औसत तापमान कहा जाता है।
जैसे – अधिकतम तापमान -29°C
न्यूनतम तापमान -15°C
अर्थात् अधिकतम और न्यूनतम तापमान को जोड़ कर दो से भाग देने पर प्राप्त तापमान ही दैनिक औसत तापमान होगा।
(29°C + 15°C) ÷ 2
= 44° ÷ 2 = 22°C

प्रश्न 41.
तापान्तर से क्या समझते हो ?
उत्तर :
तापान्तर (Range of Temperature): किसी क्षेत्र के अधिकतम और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ही तापान्तर कहा जाता है।
अत: तापान्तर = अधिकतम तापमान – न्यूनतम तापमान
जैसे :- 55°C – 40°C = 15°C

प्रश्न 42.
हिमांक और उबालांक से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जिस तापमान पर पानी जमने लगता है उसे हिमांक (Freezing Point) और जिस तापमान पर पानी खौलने लगता है उसे उबालांक (Boiling Point) कहते हैं।

प्रश्न 43.
तापीय भूमध्य रेखा क्या है ?
उत्तर :
तापीय भूमध्य रेखा (Thermal Equator) : पृथ्वी के उच्चतम वार्षिक तापमान वाले स्थानों को मिलाते हुए जो समताप रेखा खींची गयी है उसे तापीय भूमध्य रेखा कहते हैं।

प्रश्न 44.
वायुमण्डल को गर्म तथा ठण्डा करने के कौन-कौन सी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
अन्य पदार्थों की भांति वायुमण्डल भी विकिरण (Radiation), संचालन (Conduction), संवहन (Convection) और अभिवहन (Advection) द्वारा गर्म तथा ठण्डा होता है।

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प्रश्न 45.
औसत वार्षिक तापक्रम से क्या समझते हो ?
उत्तर :
औसत वार्षिक तापक्रम (Average Annaul Temperature) : किसी स्थान के वर्ष भर के औसत मासिक तापक्रमों को जोड़कर उसमें 12 से भाग देने से उस स्थान का औसत वार्षिक तापक्रम कहते है।
जैसे :- 12 महीने अर्थात जनवरी से दिसम्बर तक का कुल तापक्रम 306° है तो 306° ÷ 12 = 25.5° वार्षिक औसत तापक्रम होगा।

प्रश्न 46.
औसत मासिक तापक्रम कहने का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
औसत मासिक तापक्रम (Average Month Temperature) : किसी क्षेत्र के महीने भर के औसत दैनिक तापक्रमों को जोड़कर उसमें एक महीने के दिनों से भाग देने पर उस क्षेत्र का औसत मासिक तापक्रम ज्ञात होता है। जैसे :- 600° 30.20°C औसत मासिक तापक्रम होगा।

प्रश्न 47.
रूद्धोष्म अथवा एडियाबेटिक ताप परिवर्तन क्या है ?
उत्तर :
रूद्धोष्म अथवा एडियाबेटिक ताप परिवर्तन (Adiabotic Temperature change) : जब किसी वस्तु में ऐसा परिवतर्न होता है कि वह वस्तु न तो बाहरी माध्यम को उष्मा दे एवं न ही उससे उष्मा ले, परन्तु उसका ताप बदल जाये, तब ऐसे परिवर्तन को ही रूद्धोष्म परिवर्तन कहा जाता है।

प्रश्न 48.
तापमान का व्युत्क्रमण या विलोमता से क्या समझते हो ?
उत्तर :
तापमान का व्युत्क्रमण या विलोमता (Inversion of Temperature) : साधारणत: ऊँचाई के अनुसार तापक्रम घटने लगता है परन्तु, कभी-कभी ऐसा देखा जाता है कि ऊँचाई बढ़ने पर भी तापमान घटने की अपेक्षा बढ़ता जाता है और वायु की तहें सामान्य अवस्था के विपरीत शीलत, उष्ण और अधिक रूप में पायी जाती है। वायु तहों की ऐसी अवस्था को ही तापमान का व्युत्क्रमण या विलोमता कहा जाता है।

प्रश्न 49.
ग्रीनहाउस प्रभाव के प्रमुख गैसों का नाम लिखिए।
उत्तर :
ग्रीन हाउस प्रभाव के प्रमुख गैस कार्बन डाई-आक्साइड (CO2), मिथेन (CH4), नाइट्रस आक्साइड (N2O) हाइड्रोफ्लोरो कार्बन, पर फ्लूरो कार्बन (CFCs), एवं सल्फर हेक्सा क्लोराइड है

प्रश्न 50.
तापक्रम के आधार पर विश्व के कटिबन्धों को कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर :
तापक्रम के आधार पर विश्व के कटिबन्धों को निम्न तीन भागों में बांटा गया है।
1. उष्ण कटिबन्ध (Tropical or Torrid Zone)
2. शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zone)
3. शीत कटिबन्ध (Frigid or Cold Zone)

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प्रश्न 51.
विकिरण खिड़की किसे कहते हैं ?
उत्तर :
विकिरण खिड़की (Radiation Window) : ऊँचाई के साथ-साथ’आने वाला एवं बहिंगामी दोनों ही विकिण बढ़ता रहता है, अतः उच्च पर्वतों को पृथ्वी की विकिरण खिड़की कहा जाता है।

प्रश्न 52.
तापमान को मापने के लिए दो प्रमुख थर्मामीटर का नाम लिखिए।
उत्तर :
दो प्रमुख थर्मामीटर हैं :- (i) सेण्टीग्रेड थर्मामीटर (ii) फारेनहाइट थर्मामीटर

प्रश्न 53.
सूखे और नमीयुक्त बल्ब वाला तापमापी क्या हैं?
उत्तर :
ताप मापने में ताप और आर्द्रता का तुलनात्मक सम्बन्ध जानने के लिए एक और तापमापी यंत्र का प्रयोग किया जाता हैं। इसे ही सूखे एवं नमीयुक्त बल्ब वाला तापमापी (Dry and Wet Bulb Thermometer) कहते हैं।

प्रश्न 54.
वायुदाब से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
वायुदाब : धरातल पर या सागर तल पर प्रति इकाई के क्षेत्रफल पर स्थित वायुमण्डल की समस्त परतों के पड़ने वाले भार को ही वायुदाब या वायुभार कहा जाता है।

प्रश्न 55.
समदाब या समभार रेखा क्या है ?
उत्तर :
समदाब या समभार (Isobars) : समदाब या समभार का अंग्रेजी रूपान्तरण आइसोबार (Isobar) है। Isobar अंग्रेजी के दो शब्दों Iso का अर्थ सम तथा Bar का अर्थ ‘भार’ या ‘दाब’ होता है, अर्थात् समदाब। समदाब वे कल्पित रेखायें हैं जो समुद्र तल से समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाते हुए खींचा जाता है।

प्रश्न 56.
वायुदाब ज्वार क्या है ?
उत्तर :
वायुदाब ज्वार (Barometric Tide) : किसी स्थान पर दिन भर वायु का भार एक समान नहीं होता है। वस्तुतः किसी स्थान पर वायुभार दो बार बढ़ता एवं दो बार घटता है। वायुदाब के इस घटने-बढ़ने की क्रिया को वायुदाब ज्वार कहा जाता है।

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प्रश्न 57.
वायुदाब कटिबन्ध किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
वायुदाब कटिबन्ध (Pressure Belt) : ग्लोब पर दोनों गोलार्द्धी में भूमध्य रेखीय निम्न दाब पेटी के अलावा दो-दो उच्च वायु पेटियाँ तथा एक-एक निम्न वायु दाब की पेटियाँ पायी जाती हैं, अर्थात् कुल सात पेटियाँ या कटिबन्धें पायी जाती हैं जिन्हें वायुदाब कटिबन्ध (Pressure Belt) कहा जाता है।

प्रश्न 58.
कारिऑलिस बल क्या है? अथवा कारिऑलिस का नियम क्या है ?
उत्तर :
कारिऑलिस बल (Coriolis Force) : पवनें सामान्यत: उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती हैं, किन्तु पृथ्वी की दैनिक गति के कारण ये पवनें अपनी मूल दिशा में विक्षेपित (Deflect) हो जाती हैं। फ्रासीसी वैज्ञानिक G.G. Coriolis ने 1835 ई० में इस बल के प्रभाव का खोज किया। इसलिए इसे कारिऑलिस बल या कारिऑलिस का नियम भी कहा जाता है।

प्रश्न 59.
फेरल का नियम से तुम क्या समझते तो? अथवा फेरल का नियम क्या है ?
उत्तर :
फेरल का नियम (Farrel’s Law) : पृथ्वी की दैनिक गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में पवनें अपनी दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बायीं ओर मुड़ जाती हैं। इस विक्षेप को फेरल नामक वैज्ञानिक ने सिद्ध किया था। अत: इसे फेरल का नियम कहा जाता है।

प्रश्न 60.
बाइज-बैलेट का नियम क्या है? बाइज-बैलेट के नियम से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
बाइज-बैलेट का नियम (Bays-Ballot Law) : इस नियम के अनुसार यदि हम उत्तरी गोलार्द्ध में पवन की ओर पीठ करके खड़ा हो जायें तो उच्च वायु दाब हमारी दायीं ओर और निम्न वायु दाब बायीं ओर होगा। दक्षिणी गोलार्द्र में यह स्थिति इसके ठीक विपरीत होगा।

प्रश्न 61.
डोलड्रम या शान्त कटिबन्ध क्या है ?
उत्तर :
डोलडूम या शान्त कटिबन्ध (Doldrum or Calm Belt) : विषुवत रेखीय निम्न दाब कटिबन्ध में धरातलीय क्षैतिज पवनें नहीं चलती बल्कि अधिक तापमान के कारण वायु हल्कि होकर ऊपर को उठती है और संहवनीय धराओं का जन्म होता है। इसलिए इस कटिबन्ध को भूमघ्य रेखीय शांत कटिबन्ध या डोलड्रम कहा जाता है। इसका विस्तार भूमध्य रेखा से 5° उत्तर एवं 5° दक्षिण अक्षांशों के बीच होता है।

प्रश्न 62.
अश्व अक्षांश किसे कहा जाता है ?
अथवा
घोड़े का अक्षांश (Horse Latitude) से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
अश्व अक्षांश (Horse Latitude) : ग्लोब पर दोनों गोलार्द्धों में 30°-50° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश को अश्व अक्षांश कहा जाता है। घोड़े से लदे जहाज को बचाने के लिए इन अक्षाशों के बीच समुद्र में घोड़े को फेंक दिया जाता था। इसलिए इसे घोड़े का अक्षांश भी कहा जाता है।

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प्रश्न 63.
हैडली नियम क्या है ?
उत्तर :
हैडली का नियम (Hadley’s Law) : पृथ्वी की दैनिक गति के कारणअअकेन्द्रीय बल उत्पन्न होती है एवं पवन की दिशा में परिवर्तन आ जाता है, जिसे हैड़ी का नियम कहा जाता है।

प्रश्न 64.
अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र क्या है ?
उत्तर :
अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र (ITCZ) : यह प्रदेश विषुवतरेखीय न्यून वायुदाब की पेटी पर विस्तृत है। यहाँ जब कभी उत्तरी-पूर्वी तथा दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ मिलती हैं तो वाताग्र का निर्माण हो जाता है। इस प्रकार यहाँ व्यापारिक हवाओं के अभिसरण को ही अन्तरा-उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र कहा जाता है।

प्रश्न 65.
बहादुर पछुवा पवन से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
बहादुर पछुआ पवन (Brave Westerlies) : उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर बहने वाली पवन पहुआ पवन कहलाती है। जब यह पवन दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल के अभाव के कारण बहुत ही तीव्र गति से प्रवाहित होती है तो इसे बहादुर पछुआ पवन भी कहा जाता है।

प्रश्न 66.
जेट स्ट्रीम क्या है ?
उत्तर :
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) : जेट स्ट्रीम उच्च पवन संचार का अंग है। क्षोभ मण्डल (Troposphere) की ऊपरी मण्डल अर्थात क्षोभसीमा की सीमा पश्चिम से पूरब की ओर अत्यन्त ही तीव गति से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है।

प्रश्न 67.
बैरोमीटर क्या है ?
उत्तर :
बैरोमीटर (Barometer) : वायुमण्डलीय वायु के अन्तर्गत भार होता है तथा वह हमेशा पृथ्वी पर दबाव डालती रहती है। इस वायुभार को मापने वाले यंत्र को बैरोमीटर या वायुदाब मापी (Barometer) कहते हैं।

प्रश्न 68.
चक्रवात का आँख क्या है ?
उत्तर :
चक्रवात का आँख (Eye of Cyclone) उष्ण कटिबन्धीय चकवातों (Tropical cyclone) की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इनके केन्द्र में शांत क्षेत्र पाया जाता है जिसके ऊपर आकाश मेघ रहित होता है इस वृत्ताकार केन्द्र प्रदेश को ही चक्रवात का आँख या चक्षु (Eye of Cyclone) कहा जाता है।

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प्रश्न 69.
फॉन क्या है ?
उत्तर :
फॉन (Fohn) : यह एक प्रकार का स्थानीय गर्म हवा है जो बहुत ही जोरदार झोकेंवाली एवं शुष्क होती है यह हवा दक्षिणी आल्पस पर्वत के सहारे ऊपर उठती उत्तरी ढाल पर नीचे उतरती है। जब यह हवा नीचे उतरती है तो अधिक दाब के कारण गर्म हो जाती है। फ्रांस, इटली देशों में यह हवा प्रवाहित होती है।

प्रश्न 70.
सिराक्को से आप क्या समझते हो? अथवा खूनी वर्षा क्या है?
उत्तर :
सिराक्को (Sirocco) : सहारा मरूस्थल से इटली में प्रवाहित होने वाली यह गर्म हवा है जो बालू के कणों से युक्त रहती है। इटली में जब वर्षा होती है तो इन बालू के कणों के कारण वर्षा की बूंद लाल रंग की हो जाती है। इस प्रकार की वर्षा को इटली में खूनी वर्षा (Blood Rain) कहा जाता है। इस हवा को मिस्र में खामसिन तथा लीविया में गिबली कहा जाता है।

प्रश्न 71.
बोरा क्या है ?
उत्तर :
बोरा (Bora) : मध्य यूरोप के पर्वतीय क्षेत्रों में युगोस्लाविया के ऐड्रयांटिक तट की ओर चलने वाली ठण्डी वायु को बोरा कहा जाता है। यह वायु उत्तर-पूरब से दक्षिण-पश्चिम की ओर चलती है।

प्रश्न 72.
मिस्ट्रल क्या है ?
उत्तर :
मिस्ट्रल (Mistal) : भूमध्य सागर के उत्तरी-दक्षिणी भाग के तटीय प्रदेशों में विशेषकर फ्रांस की राइन नदी के डेल्टा में उत्तर-पश्चिम से आकर चलने वाली ठण्डी वायु को मिस्ट्रल कहा जाता है। इस वायु के आगमन पर तापक्रम हिमांक से नीचे गिर जाता है तथा मौसम सर्द हो जाता है।

प्रश्न 73.
‘लू’ क्या है ?
उत्तर :
‘लू’ (LoO) : उत्तरी भारत में गर्मी के दिनों में उत्तर-पश्चिम तथा पश्चिम से पूरब की दिशा में बहने वाली प्रचण्ड उष्ण तथा शुष्क हवा को ‘लू’ कहते हैं। यह हवा उत्तर भारत तथा पाकिस्तान के मैदानी भागों में मई तथा जून के महीने में बहती है। इस हवा के प्रभाव से तापमान 45°C से 50°C तक पहुँच जाता है।

प्रश्न 74.
ब्लिजार्ड क्या है?
उत्तर :
ब्लिजार्ड (Blizzard) : यह एक प्रकार का ध्रुवीय पवन (Polar wind) है जो अत्यधिक सर्द एवं हिम-कणों से युक्त होती है। यह पवन साइबेरिया एवं उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में प्रवाहित होती है।

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प्रश्न 75.
टेबल क्लॉथर या केप डॉक्टर क्या है ?
उत्तर :
टेबल क्लाथर (Table Clother) या केप डॉक्टर (Cap Doctor) : तीव्र शीतल हवा, जो दक्षिणी अफ्रीका के पठारी क्षेत्र से चलकर दक्षिण तट की ओर प्रवाहित होती है। टेबल क्लाथर कहा जाता है उसे जब यह हवा पठारी क्षेत्रों को ढक कर बादल का निर्माण करत है तो इसे केप डॉक्टर भी कहा जाता है।

प्रश्न 76.
वायुदाब और हवाओं के सम्बन्ध में दो महत्वपूर्ण नियम बताएँ।
उत्तर :
वायुदाब और हवाओं के सम्बन्ध में दो महत्वपूर्ण नियम निम्न है।
(i) पवन प्रवाह सदैव उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर होता है।
(ii) पवन की प्रवाह गति वायुदाब के अन्तर की न्यूनधिकतापर निर्भर करती है।

प्रश्न 77.
‘मानसून’ का अर्थ क्या है तथा इससे आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
मानसून (Monsoon) : ‘मानसून’ शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से बना है जिसका तात्पर्य ‘मौसम’ होता है। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरब सागर पर चलने वाली हवाओं के लिए किया गया था जो छ: माह उत्तर-पूरब दिशा से और छः माह दक्षिण-पश्चिम दिशा से चला करती थी।

प्रश्न 78.
जलीय चक्र (Hydrological Cycle) से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
जलीय चक्र (Hydrological Cycle) : समुद्रों, झीलों, नदियों आदि से जलवाष्पीकरण द्वारा जलवाष्प में, जलवाष्म बादल में और जल बादलों से अपक्षेपण द्वारा पृथ्वी पर द्रव रूप में परिवर्तित से जाता है तथा पृथ्वी से नदियों द्वारा पुनः समुद्र में पहुँच जाता है। जल के इस चक्र को जलीय चक्र कहा जाता है।

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प्रश्न 79.
वर्षा कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक का नाम लिखिए।
उत्तर :
वर्षा मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है।
(i) संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall) (ii) पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) (iii) चक्रवातीय वर्षा (Cylonic Rainfall)

प्रश्न 80.
जलवायु से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
जलवायु में एक विस्तृत क्षेत्र में काफी लम्बे समय को वायुमण्ड की अवस्थाओं का विवरण होता है, अर्थात् वायुमण्डल की स्थायी औसत अवस्थाओं का नाम ही जलवायु है।

प्रश्न 81.
वाष्पीकरण क्या है ?
उत्तर :
वाष्पीकरण (Evaporation) : सम्पूर्ण पृथ्वी पर सागर, नदी, तालाब, झील एवं जलाशय आदि का पानी, सूर्य की तत्प किरणों द्वारा भाप में निरंतर परिवर्तित होता रहता है। अतः वाष्पोकरण वह प्रक्रिया है जिसमे जल द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में बदल जाता है।

प्रश्न 82.
ओस बिन्दु या ओसांक किसे कहते हैं?
उत्तर :
ओस बिन्दु या ओसांक (Dew Point) : वायु का कोई भी नमूना बिना जलवाष्प की मात्रा को बढ़ाये संतृप्त हो सकता है। यदि उसके तापमान में आवश्यक मात्रा में गिरावत हो जाय या हवा का कोई भी नमूना जिस तापमान पर सतृप्त हो जाय, उस तापमान को ही ओस बिन्दु या ओसांक (Dew Point) कहा जाता है।

प्रश्न 83.
ओस (Dew) क्या है ?
उत्तर :
ओस (Dew) : हवा का जलवाष्प जब संघनित होकर छोटी-छोटी बूंदों के रूप में धरातल पर पड़ी वस्तुओं पर जमा हो जाता है तो इसे ओस कहते हैं।

प्रश्न 84.
कोहरा या कुहरा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
कोहरा (Fog) : कोहरा एक प्रकार का बादल है। जब जलवाष्प का संघनन धरातल के बिल्कुल समीप होता है तो कोहरा का निर्माण होता है। कोहरे में कुहासे की तुलना में जल के कण अधिक छोटे एवं सघन होते हैं।

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प्रश्न 85.
बादल का निर्माण कैसे होता है ?
अथवा
बादल या मेघ से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
बादल या मेघ (Cloud) : वायुमण्डल में ऊपर उठती हुई वायु का तापमान जब ओसांक बिन्दु के नीचे गिर जाता है तो शीतलता के कारण जलवायु अत्यंत सूक्ष्म जल सीकरों और हिम सीकरों में बदल जाती है। इनके समूह का विस्तार और गहराई दोनों अधिक होने पर ये घने रूप में दिखाई देते हैं उसे बादल या मेघ कहा जाता है।

प्रश्न 86.
उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु की निम्न दो विशेषता लिखिए।
उत्तर :
उष्म विषुवत रेखीय जलवायु या उष्णा भूमध्य रेखीय जलवायु की विशेषताएँ :-
(i) सालों भर समान उच्च तापक्रम
(ii) सालों भर समान उच्च वर्षा
इस जलवायु के अन्तर्ग अमेजन अमगेन बेसिन, कांगो वेसिन, गिनी तट, पूर्वी द्वीप समूह तथा फिलीपाइस को सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 87.
शुष्क जलवायु प्रदेश को कितने भागों में बाँटा गया है।
उत्तर :
शुष्क जलवायु प्रदेश को निम्न दो उप विभागों में बाँटा गया है :-
(i) शुष्क या मरूस्थलीय जलवायु।
(ii) अर्द्धशुष्क या स्टेपी जलवायु।

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प्रश्न 88.
भूमध्यसागरीय जलवायु प्रदेश के वनस्पतियों और फलों के नाम लिखिए।
उत्तर :
भूमध्यसारगीय जलवायु प्रदेश के प्रमुख वनस्पतियाँ ओक, वालनट, चेस्टनट, सिडार तथा फलो के रूप में नीबु, संतरा, अंजीर, अंगूर, जैतून आदि का नाम आता है।

प्रश्न 89.
टुण्ड़ा जलवायु प्रदेश की विशेषता क्या है ?
उत्तर :
टुण्ड्रा जलवायु प्रदेश की विशेषताएँ :-

  1. लम्बी एवं ठण्डी जाड़े की ॠतु तथा छोटी एवं शीतल ग्रीष्म ॠतु का होना।
  2. वर्ष में 2 से 4 महीने ऐसे होते हैं जबकि तापमान हिमांक बिन्दु से ऊँचा रहता है।
  3. यहाँ वर्षा बिल्कुल नहीं होती, जो कुछ वर्षा हाती है वह हिम के रूप में।

प्रश्न 90.
पवनाभिमुख ढाल और पवन-विमुख ढाल में क्या अन्तर है ?
उत्तर :
पर्वत के जिस ढाल के सहारे हवा ऊपर बढ़ती है उसे पवनभिमुख ढाल (Wind Ward Slope) कहते हैं तथा जिस ढाल के सहारे हवा विपरीत ढाल पर नीचे उतरती है उसे पवन ढाल (Lee Ward Slope) कहा जाता है।

प्रश्न 91.
कैण्डोलिल द्वारा विश्व के वनस्पति मण्डलों को कितने भागों में बॉटा गया है ?
उत्तर :
कैण्डोलिन द्वारा विश्व को पाँच वनस्पति मण्डलों में बाँटा गया है।

  1. मेगाथर्मल
  2. मेसोथर्मल
  3. माइकोथर्मल
  4. हेकिस्टोथर्मल
  5. जेरोफाइट्स।

प्रश्न 92.
मानचित्र पर सागर की शांत और सपाट लहरो को किस संकेत के रूप में दिखाया जाता है ?
उत्तर :
सागर के शांत लहर को Cm तथा सागर की सपात लहर को Sm के संकेत में दिखाया जाता है।

प्रश्न 93.
वायु मण्डल की कौन-सी परत संचार क्रिया को संभव बनाती है ?
उत्तर :
आयन मण्डल (lonosphere) संचार क्रिया को संभव बनाती है।

प्रश्न 94.
किस परत में मौसम परिवर्तन होता है?
उत्तर :
अधोमण्डल, परिवर्तन मण्डल या क्षोभ मण्डल (Troposphere) में मौसम परिवर्तन होता है।

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प्रश्न 95.
परा बैगनी किरणें पृथ्वी के सतह पर क्यों नहीं पहुँचती हैं ?
उत्तर :
ओजोन मण्डल में स्थित ओजोन गैस सूर्य से निकलने वाली गर्म तथा हानिकारक परा बैगनी किरणो को सोख लेती है।

प्रश्न 96.
भूमध्यरेखीय क्षोभ मण्डल की ऊँचाई कितनी है ?
उत्तर :
इस स्तार की ऊँचाई भूमध्य रेखा के समीप 18 कि० मी॰ है।

प्रश्न 97.
जलवायु एवं मौसम के तत्व कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
तापमान, वायुदाब, आर्द्रता हवाओं एवं वर्षा मौसम तथा जलवायु के तत्व है।

प्रश्न 98.
वायुमण्डल तापमान के विभिन्न स्रोत क्या है ?
उत्तर :
वायुमण्डल के गर्म होने का मुख्य सोत सौर्यिक विकिरण से प्राप्त ऊर्जा द्वारा पृथ्वी से परिचालन संवहन तथा विकिरण है।

प्रश्न 99.
ताप छाया प्रदेश क्या है ?
उत्तर :
पर्वतों के विमुख ढाल वाले क्षेत्र जो सूर्य की लम्बवत् किरणों से वंचित रहते है। ढालो को ताप छाया प्रदेश कहते है।

प्रश्न 100.
मेघाच्छादित रातें मेघरहित रातों की अपेक्षा गर्म होती है।
उत्तर :
जब रात में आकाश में बदल छाये रहते है तो पृथ्वी के भूपट से उसका विसर्जन तीव्र गति से नहीं हो पाता है। यही कारण है कि स्वच्छ रातो की अपेक्षा बादलों से आच्छादित राते गर्म होती है।

प्रश्न 101.
समुद्र तटीय भाग में तापान्तर बहुत कम होता है।
उत्तर :
जल भाग स्थल भाग की अपेक्षा देर से गर्म तथादेर से ठण्डा होता है। इसलिए समुद्र तट के समीप भाग में तापान्तर बहुत कम होता है।

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प्रश्न 102.
वायुमण्डलीय वायुभार, हवा की दिशा, हवा की गति, आर्द्रता एवं वर्षा मापने के यंत्रों का नाम बताइये।
उत्तर :
वायुभार arrow वायु दाब मापी यन्त्र (बैरो) हवा की दिशा arrow एनिमोमीटर (Anemometer) हवा की गति arrow एनिमोमीटर हवा की आर्द्रता एवं वर्षा arrow हाइग्रोमीटर (Hygrometer),

प्रश्न 103.
स्मोग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर :
स्मोग वायुमण्डल में उपस्थित धुआँ (smook) और कुहासा (Fog) से बना है। इसीसे इसका नाम smook + Fog अर्थात् smog बना। वास्तव में smog पानी के कणो धुए में उपस्थित कार्बन के कणो के मिश्रित होने से बनता है। और यह सर्दी के मौसम में अधिक होता है। क्योंकि उस समय कोहरे में पानी के कण हवा में होते है और कार्बन के कण उनमें मिश्रित हो जाते है।

प्रश्न 104.
रासायनिक संगठन के आधार पर वायुमण्डल को कितने भागों में बाँटा गया है ?
उत्तर :
रासायनिक संगठन के आधार पर वायुमण्डल को दो भागों में बाँटा जा सकता है :-
(i) सम मण्डल (Homosphere)
(ii) विषम मण्डल (Heterosphere)

प्रश्न 105.
क्षोभमण्डल क्या है ?
उत्तर :
वायु के सबसे निचले भागों की जिसकी ऊँचाई धरातल से 12 कि०मी० होती है, क्षोभ मण्डल कहा जाता है।

प्रश्न 106.
चुम्बक मण्डल क्या है ?
उत्तर :
आयन के ऊपर वाले वायुमण्डलीय का भाग को चुम्बक मण्डल कहते है इस मण्डल में वान अलेन रैडियेशन बेल्ट की स्थिती होती है। जिसमें पृथ्वी को मैग्नेटिक फील्ड द्वारा पकड़े गये आवेशित कण पाये जाते है। इस मण्डल की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें औरोरा आस्ट्रालिए एवं औरोरा बोरियालिस की होने वाली घटनायें है।

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प्रश्न 107.
शहरीकरण एवं औद्योगीकरण का जलवायु पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर :
शहरीकण एवं औद्योगीकरण की दर में तीब्र गति से वृद्धि होने के कारण वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड (CO2) की मात्रा धरती की सतह से परावर्तित किरणों द्वारा उत्सर्जित होने वाली तापीय ऊर्जा को वायुमण्डल से बाहर जाने से रोकती है। इस प्रकार तापीय ऊर्जा के वायुमण्डल में सान्द्रण से धरती के औसत तापमान में निरन्तर वृद्धि होती हैद्व जिससे जलवायु गर्म होता जा रहा है।

प्रश्न 108.
वैश्विक उष्मन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
वैश्विक उष्मन से ताप्तर्य वायुमण्डली तापमान में होने वाली क्रमिक वृद्धि से है।

प्रश्न 109.
एलनीनो क्या है ?
उत्तर :
एल-निनो पीरू के पश्चिमी तट के पास लगभग 180 कि०मी० दूर दक्षिण की ओर प्रवाहित होने वाली एक गर्म धारा है।

प्रश्न 110.
वायुदाब और ऊँचाई में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
जैसे जैसे हम समुद्र की सतह से ऊँचाई पर जाते है, वायुमण्डल की मोटाई कम होती जाती है और वायुभार कम हांता जाता है। साथ ही वायमुण्डल के निचले भाग में ऊपरी भागो की अपेक्षा भरी गैसे एवं धूल कण अधिक मात्रा में मिलने के कारण वायु अधिक धनी होती है और वायुभार अधिक रहता है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
ट्रोपोस्फीयर में ऊचाई बढ़ने के साथ-साथ उष्णता क्यों घटती है ?
उत्तर :
ट्रोपोस्फीयर या क्षोभमण्डल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बढ़ती ऊँचाई के साथ में प्रति 1000 मीटर पर 6.5°C की दर से तापमान में कमी होती जाती है। ऊँचाई के साथ तापमान में यह कमी ऊँचाई के साथ वायुमण्डलीय गैसों के घनत्व, वायुदाव एवं कणिकीय पदार्थों में कमी के कारण होती है। यह परत वायुमण्डल में परिचालन, संवहन एवं विकिरण विधियों के स्थानान्तरण से गर्म होता है।

प्रश्न 2.
समुद्री पवन एवं स्थलीय पवन में अन्तर स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर :

समुद्री पवन स्थलीय पवन
i. ये हवाएँ प्रातः 10 बजे से शाम 8 बजे तक चला करती है। i. ये हवाएँ सांय काल 10 बजे से प्रात: 8 बजे तक चला करती है।
ii. समुद्र से आने के कारण ये हवाएँ नम होती है। ii. स्थल से आने के कारण ये हवाएँ सूखी होती है।
iii. इन हवाओं को डॉक्टर वायु (Doctor Wind) भी कहते है। iii. इन हवाओं को दैनिक मानसून (Daily Monsoon) भी कहते है।

प्रश्न 3.
मानसूनी वायु पर जेट स्ट्रीम के प्रभाव का वर्णन करो।
या
धरातलीय मौसम पर जेट स्ट्रीम के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) उच्च स्तरीय पवन संचार व्यवस्था का अंग है। क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में क्षोभसीमा के निकट पश्चिम से पूरब की ओर अत्यंत तीव्र गीत से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है।

धरातल पर पाये जाने वाले मौसम एवं जेट स्ट्रीम में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धवुौय वाताग्र, जहाँ शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है तो इसका सम्बन्ध जेट स्ट्रीम से होता है। अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग तक होता है। जब इनका पथ जेट स्ट्रीम के नीचे पड़ता है तो उनकी प्रचण्डता में वृद्धि हो जाती है एवं वर्षा की मात्रा भी अधिक हो जाती है। चक्रवातों तथा प्रतिचक्रवातों के अलावा जेट स्ट्रीम के प्रभाव के कारण कभी बाढ़ भी आ जाती है तो कभी सूखा पड़ जाता है। इन्हीं के कारण मौसम असाधारण रूप में कभी गर्म तो कभी शीतल हो जाता है।

भारतीय मानसून की उत्पत्ति पर उष्षण पूर्वी जेट एवं उपोष्ण जेट का प्रभाव भी पड़ता है। इस प्रकार वर्षा, तूफान, हिमपात एवं शीत लहरिया आदि जेट स्ट्रीम द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।

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प्रश्न 4.
मौसम और जलवायु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

मौसम (Weather) जलवायु (Climate)
1. मौसम किसी स्थान विशेष की वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है। 1. जलवायु किसी विस्तृत क्षेत्र के वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है।
2. इसमें मौसम तत्वों की अल्प अवधि का अध्ययन होता है। 2. इसमें मौसम दशओं का लम्बे समय अर्थात 30-35 वर्षों तक अध्ययन का औसत है।
3. यह जलवायु विज्ञान का एक अंग है। 3. यह अपने आप में पूर्ण विज्ञान है।
4. मौसम अत्यंत ही परिवर्तनशील अर्थात् क्षणिक दशा है। 4. जलवायु मौसम की अपेक्षा स्थायी होता है।

प्रश्न 5.
ओजोत परत क्षरण क्या है ?
उत्तर :
ओजोत परत क्षरण (Depletion of Ozone layer) : ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultra violet rays) को अवशोषित करके पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है लेकिन क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFCs) की मात्रा में वृद्धि से यह परत नष्ट हो रही है। ओजोन परत में कमी आने से पृथ्वी के धरातल पर चर्म कैंसर एवं आँखों की बिमारियों में वृद्धि की सम्भावना बढ़ जायेगी।

प्रश्न 6.
सिराक्को या सिमूम से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
यह एक गर्म, शुष्क एवं रेत से भरी हुई हवा होती है जो कि सहारा रेगिस्तान के उत्तर दिशा में भूमध्य सागर की ओर चलकर इटली, स्पेन आदि देशों में प्रवेश करती है। सिराक्को हवा के साथ लाल रेत की मात्रा अधिक होती है। जब यह हवा भूमध्य सागर के ऊपर से होकर गुजरती है तो जलवाष्प ग्रहण कर लेती है एवं इटली में जब कभी-कभी वर्षा होती है तो रेत नीचे बैठने लगती है जिससे लगता है कि रक्त वृष्टि हो रही है। सहारा के मरुस्थल में चलने वाली इन्हीं गर्म हवाओं को सिमूम कहा जाता है। इटली में इन हवाओं के कारण मौसम काफी कष्टप्रद हो जाता है।

प्रश्न 7.
पछुआ हवा से अधिक वर्षा होती है क्यों ?
उत्तर :
पछुआ हवाएँ गर्म प्रदेशों से ठण्डे भागों की ओर चलती हैं। गर्म होने के कारण इनमें वाष्प ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती हैं। समुद्र से होकर आने के कारण इनमें पर्याप्त जलवाष्प आ जाता है। ठण्डे भागों में जाने के कारण ये भाप भरी हवाएँ क्रमशः ठण्डी हो जाती हैं जिससे पर्वतों से टकराकर महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में खूब वर्षा करती हैं।

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प्रश्न 8.
तापमान प्रतिलोम या विलोमता के उत्पत्न होने के प्रमुख कारण क्या हैं ?
उत्तर :
तापमान प्रतिलोम या विलोमता के उत्पन्न होने के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ होनी आवश्य है।

  • लम्बी रातों का होना
  • स्वच्छ आकाश
  • शुष्क वायु
  • शांत वायु
  • हिमाच्छादित या बर्फ से ढके धरातल का होना।

प्रश्न 9.
वायुमण्डल में धरातल से ऊँचाई पर जाने से तापक्रम घटने लगता है क्यों ?
उत्तर :
ऊँचाई के साथ तापक्रम घटने लगता है क्योंकि वायुमण्डल का निचला भाग पृथ्वी के सम्पर्क में होने से शीघ्र उष्मा प्राप्त कर लेता है तथा स्वयं गरम हो लेने के बाद ही संवहन तरंगों से उष्मा ऊपर की ओर स्थानांतरित करता है। इस प्रकार वायुमण्डल की प्रत्येक ऊपर की परत अपनी निचली परत की अपेक्षा देर से तथा कम मात्रा में उष्मा प्राप्त करती है। इसके अलावा ऊपर स्थित वायु परत में भार अधिक होता है तथा ऊपर जाने पर हवा का घनत्व कम हो जाता है और हवा फैलकर विरल हो जाती है। ऊँचाई के साथ पार्थिव ऊर्जा के घटते अवशोषण के कारण भी तापक्रम घटने लगता है।

प्रश्न 10.
वायुमण्डल सूर्याताप की अपेक्षा भौमिक विकिरण से अधिक गरम होता है क्यों ?
उत्तर :
वायुमण्डल सूर्याताप की अपेक्षा भौमिक विकिरण से अधिक गरम होता है क्योंकि पृथ्वी की धरातल सूर्याताप का एक अच्छा अवशोषक है और उत्सर्जक (Radiator) भी, जो सूर्याताप से प्राप्त उष्मा को पूर्णत: विकरित कर देता है। इसके अलावा वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्म, कार्बन डाई-आक्साइड गैसें लम्बी तरंगों वाली विकिरण को अच्छी तरह अवशोषित करती रहती है। वायुमण्डल सूर्याताप के लिए अधिक पारगम्य है जो सूर्य विकिरण की कुछ लम्बाइयों वाली तरंगों का अवशोषण नहीं करता है जैसे दिखने वाले प्रकाश का होता है।

प्रश्न 11.
अक्षांशीय उष्मा संतुलन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
अक्षांशीय उष्मा संतुलन (Latitudinal Heat Balance) : सम्पूर्ण धरातल पर औसत वार्षिक तापक्रम हमेशा समान रहता है क्योंकि पृथ्वी सूर्याताप और भौमिक विकिरण के बीच एक संतुलन बनाए रखती है। परन्तु पृथ्वी के प्रत्येक अक्षांश पर प्राप्त उष्मा तथा नष्ट उष्मा में समानता नहीं हो पाती है क्योंकि सूर्याताप की मात्रा विषुवत रेखा से धुवों की ओर लगातार घटती जाती है। इसी प्रकार भौमिक विकिरण की मात्रा में भी भिन्नताएँ होती है।

40° से नीचे वाले अक्षांशों पर भौमिक विकिरण द्वारा अंतरिक्ष में खोई गई उष्मा की तुलना में सौर विकिरण द्वारा अंतरिक्ष में खोई गई उष्मा की मात्रा अधिक होती है। इसके विपरीत, उच्च अक्षांशों पर प्राप्त उष्मा की तुलना में खोई जाने वाली उष्मा की मात्रा अधिक होती है। अधिकांश उष्मा का आदान-प्रदान मध्य अक्षांशों अर्थात 30° से 60° अक्षांशों के बीच होता है। इस प्रकार निम्न अक्षांशों से अतिरिक्त उष्मा को उच्च अक्षांशों के कम उष्मा वाले क्षेत्रों में स्थानान्तरण की प्रक्रिया धरातल पर संतुलन बनाए रखती है।

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प्रश्न 12.
विषुवत या भूमध्य रेखा पर सूर्याताप की मात्रा सर्वार्थिक होती है क्यों ?
उत्तर :
विषुवत या भूमध्य रेखा पर सूर्याताप की मात्रा सर्वाधिक होती है क्योंकि यहाँ पर दिन-रात की लम्बाई बराबर होती है तथा सूर्य की किरणें लगभग सालों पर लम्बवत होती हैं। परन्तु सूर्य के दक्षिणायन और उत्तरायण की स्थितियों के कारण अत्यधिक सूर्याताप मण्डल विषुवत रेखा के दोनों ओर खिसकता रहता है। विषुवत रेखा से सुर्याताप धुवों की ओर कम होता जाता है जिसके परिणामस्वरूप तापक्रम भी कम होता जाता है।

प्रश्न 13.
तापमान असंगति धनात्मक और तापमान असंगति ऋणात्मक से क्या समझते हो तथा यह कैसे होता है?
उत्तर :
तापमान असंगति घनात्मक और ऋणात्मक (Temperature Anomaly Positive and Negative) : ग्लोब पर किसी भी स्थान विशेष के औसत तापक्रम और उस स्थान के अक्षांश के औसत तापक्रम के अन्तर को तापमान असंगति (Temperature Anomaly) कहते हैं।
समुद्र तल से ऊँचाई पर जल और स्थल की विषमता, प्रचलित पवने तथा समुद्री धाराओं के प्रभाव के कारण एक ही अक्षांश पर स्थित विभिन्न स्थानों के तापक्रम में अन्तर पाया जाता है।

जैसे, यदि 30° अक्षांश का औसत वार्षिक तापक्रम 35°C है तथा उसी अक्षांश पर स्थित ‘A’ स्थान का औसत वार्षिक तापक्रम 55°C है तो तापीय असंगति 20°C होगा। उत्तरी गोलार्द्ध में स्थल भाग की अधिकता के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध की अपेक्षा तापमान की अधिकता में असंगतियाँ पायी जाती है। जब स्थान का तापक्रम उसके अक्षांश की अपेक्षा अधिक होता है तो तापमान असंगति धनात्मक होती है। इसे ही असंगति धनात्मक तापमान कहा जाता है, इसके विपरीत जब किसी स्थान का तापमान उसके अक्षांश के औसत तापमान से कम हो तो इसे असंगति ऋणात्मक तापमान कहा जाता है।

प्रश्न 14.
पृथ्वी की उष्मा बजट से क्या समझते हो और यह कैसे संतुलित होता है ?
उत्तर :
पृथ्वी की उष्मा बजट (Heat Budget of the Earth) : वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर प्राप्त होने वाली कुल उष्मा को यदि हम 100 इकाई मान लें तो इसमें से 35 इकाईयाँ पृथ्वी के धरातल पर पहुँचने से पहले ही अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाती है। 35 इकाईयों को छोड़कर बाकी 65 इकाईयाँ अवशोषित होती हैं जिसमें से 14 इकाईयाँ वायुमण्डल द्वारा तथा 51 इकाईयाँ पृथ्वी के धरातल द्वारा।

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पृथ्वी द्वारा अवशोषित यह 51 इकाईयाँ पुन: भौमिक विकिरण या पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) के रूप में लौटा दी जाती है। इनमें से 17 इकाईयाँ सीधे अंतरिक्ष में चली जाती है और शेष 34 इकाईयों में से 6 इकाइयाँ विकिरण द्वारा, 9 इकाईयाँ संवहन के द्वारा तथा 19 इकाईयाँ संघनन की गुप्त उष्मा के रूप में वायुमण्डल को प्राप्त होती है। 34 इकाईयों के अलावा वायुमण्डल 14 इकाई ऊर्जा का प्रत्यक्ष रूप से अवशोषण करता है। इस प्रकार वायुमण्डल का कुल 14 + 34 इकाईयाँ अर्थात् 48 इकाईयों का अवशोषण होता है।

वायुमण्डल विकिरण द्वारा इन 48 इकाईयों को भी अंतरिक्ष में वापस लौटा देता है। पृथ्वी के धरातल तथा वायुमण्डल से अंतरिक्ष में लौटने वाली विकिरण की इकाईयाँ क्रमशः 17 एवं 48 हैं जिनका योग 65 होता है। इस प्रकार पृथ्वी तथा इसके वायुमण्डल को प्राप्त हुई उष्मा उनके द्वारा छोड़ी गई उष्मा के बराबर है। अत: पृथ्वी तथा वायुमण्डल द्वारा प्राप्त ताप तथा उनके द्वारा ताप के ह्रास के संतुलन को ही उष्मा बजट अथवा उष्मा संतुलन कहा जाता है।

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प्रश्न 15.
दैनिक तापान्तर कैसे प्रभावित होता है ?
उत्तर :
दैनिक तापान्तर प्रभावित होने के निम्न कारक है :
i. समुद्र तट से दूरी : जो स्थान समुद्र तट से दूर महाद्वीपों के भीतर स्थित होते हैं वहाँ का दैनिक तापान्तर समुद्र के निकट वाले स्थान से अधिक रहता है।

ii. समुद्र तल से ऊँचाई : ऊँची पहाड़ी और पठारी भागों में वायु के हल्के होने के कारण दिन में धरातल जल्द ही गरम हो जाता है और रात्रि में शीघ्र ठण्डा। इसलिए ऊँचे स्थानों पर मैदानी भागों की अपेक्षा दैनिक तापान्तर अधिक पाया जाता है।

iii. धरातलीए विशेषता : जो भू-भाग बर्फ से ढके रहते हैं उन स्थानों का दैनिक तापान्तर अधिक रहता है। इसी प्रकार खुले उष्ण मरुस्थलों में शुष्क वायु तथा स्वच्छ आकाश होने के कारण तापान्तर बहुत अधिक पाया जाता है।

iv. मेघाच्छादन : जब आकाश बादलों से ढका रहता है तो तापान्तर कम हो जाता है, क्योंकि बादल सूर्याभिताप को पृथ्वी तक पहुँचने और पार्थिव ताप को विकिरण द्वारा नष्ट होने में बाधा डालते हैं। इसके विपरीत मेघरहित प्रदेशों में दिन के समय तापमान अधिक बढ़ जाता है तथा रात्रि में पार्थिव विकिरण द्वारा तापमान कम हो जाता है, अत: इन प्रदेशों में तापान्तर बहुत अधिक हो जाता है।

प्रश्न 16.
तापमान प्रतिलोमन का प्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन और उसके आर्थिक विकास पर कैसे प्रभाव पड़ता है ? अथवा, तापमान की विलोमता का महत्व पर संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
तापमान की प्रतिलोमन या विलोमता वायुमण्डल की स्थानीय क्रिया है, इसके कारण कई प्रकार के मौसम तथा जलवायु सम्बन्धी प्रभाव मानव जीवन तथा उसके आर्थिक विकास पर पड़ता है।
i. ऊपर गरम तथा नीचे ठण्डी वायु की परतों के कारण कुहरा (Fog) शुरू हो जाता है। कुहरा द्वारा हानि भी होता है तथा लाभ भी। घने कुहरे के कारण दृश्यता कम हो जाने से जल एवं स्थलीय भागों पर दुर्घटनाएँ होती रहती है।
ii. तापमान में विलोमता के समय यदि ऊपर स्थित गरम वायु में आर्द्रता उपस्थित होती है तो नीचे स्थित ठण्डी वायु का तापक्रम हिमांक बिन्दु से कम हो जाता है तो पाला (Frost) पड़ने लगता है। पाला निश्चित रूप से साग-सब्जियों पर प्रभाव डाल कर आर्थिक दृष्टिकोण से हानिकारक होता है।
iii. तापमान में विलोमता के कारण ही वायुमण्डल में स्थिरता आ जाती है जिस कारण वायु का उपरीमुखी तथा अधोमुखीय संचलन स्थगित हो जाता है जिस कारण वर्षा की सम्भावनाएँ कम हो जाती हैं और मानव जीवन के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी बाधा पहुँचता है।

प्रश्न 17.
धरातल पर तापमान का क्षैतिज वितरण कैसे दिखाया गया है और क्यों ?
उत्तर :
धरातल पर तापमान का वितरण समताप रेखाओं (Isotherms) द्वारा दिखाया गया है। समताप रेखायें वे हैं जो समान औसत तापमान वाले स्थानों को मिलाती है। सामान्य रूप से समताप रेखाएँ पूरब-पश्चिम दिशा में खींची जाती है जो कि प्राय: अक्षांशों के समानान्तर होती है जिससे साफ प्रमाणित होता है कि तापक्रम के क्षैतिज वितरण पर अक्षांशों का सर्वाधिक नियंत्रण होता है। समताप रेखाएँ प्रायः सीधी खींची जाती हैं परन्तु महासागरों तथा महाद्वीपों की मिलन सीमा पर उसमें झुकाव आ जाता है जिसका प्रमुख कारण जल तथा जल के गरम और ठण्डा होने के स्वभाव में अन्तर का होना है।

दक्षिणी गोलार्द्ध में जल की अधिकता के कारण समताप रेखाएँ दूर-दूर तक सीधी रेखाओं के रूप में होती है और जब समताप रेखाएँ पास-पास होती हैं तो उससे तापक्रम में तेजी से परिवर्तन का आभास होता है तथा वे तीव्र ताप-प्रवणता (Steep Temperature Gradient) को दिखाता है। इसके विपरीत उनका दूर-दूर होना क्षीण ताप-प्रवणता (Slow Temperature Gradient) को दिखाता है। सागर से स्थल की ओर जाने पर समताप रेखाओं की स्थिति में अन्तर आ जाता है।

प्रश्न 18.
भूमण्डलीय उष्णता से बचने के लिए उपाय क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
भूमण्डलीय उष्णता से बचने के उपाय (Preventive stepts to avoid Global Warming): भूमण्डलीय उष्णता से बचने के लिए निम्न उपाय अपनाया जाना चाहिए।

  1. जीवाश्म ईधन जैसे कोयला, पेट्रोल का कम प्रयोग किया जाय।
  2. क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFC) के विकल्प का विकास किया जाय।
  3. वृक्षों की मनमाने ढंग से कटाई को कम करके अथवा रोक लगाकर और अधिक मात्रा में वृक्षारोपन के द्वारा भूमण्डलीय उष्णता को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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प्रश्न 19.
हरित गृह प्रभाव से क्या समझते हो ?
उत्तर :
हरित गृह प्रभाव (Green House Effects) : वायुमण्डल के कार्य की तुलना ग्लास हाउस या ग्रीन हाउस के कार्य से की जा सकती है। ठण्ड प्रदेशों में सब्जियों और फूलों के पौधे ‘ग्लास हाउसों’ अर्थात काँच के घरों में उगाए जाते हैं। ‘काँच घर’ का आन्तरिक भाग बाहर की अपेक्षा गरम रहता है, क्योंकि काँच, सूर्याताप को अन्दर तो जाने देता है, लेकिन पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) को तत्काल बाहर नहीं निकलने देता। पृथ्वी को चारों तरफ से घरेने वाला वायुमण्डल ‘ग्रीन हाउस’ की भाँति ही कार्य करता है। यह सूर्याताप को अपने में से गुजरने देता है परन्तु बाहर जाने वाली दीर्घ किरणों का अवशोषण कर लेता है। इसे ही वायुमण्डल का ‘हरित गृह प्रभाव’ कहते हैं।

प्रश्न 20.
सूर्याताप और तापमान में अन्तर लिखिए।
उत्तर :
सूर्याताप और तापमान में अन्तर :

सूर्याताप (Insolation) तापमान (Temperature)
i. सूर्याताप उष्मा है जिससे गर्मी पैदा होती है। i. तापमान उष्मा में पैदा हुई गर्मी का माप है।
ii.  सूर्याताप को कैलोरी में मापा जाता है। ii. तापमान को थर्मामीटर डिग्री $F / C में मापा जाता है।
iii. गर्मी कारण मात्र है। किसी पदार्थ को गर्मी देने पर उसका तापमान बढ़ा है। iii. तापमान गर्मी का प्रभाव है, गर्मी मिलने से तापमान बढता है।

प्रश्न 21.
सौर विकिरण और पार्थिव विकिरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

सौर विकिरण (Solar Radiation) पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation)
i. सौर विकिरण द्वारा निकली उष्मा लघु तरंग के रूप में होती है। i. पार्थिव विकिरण उष्मा दीर्घ तरंग के रूप में होती है।
ii. सौर विकिरण द्वारा उर्जा को एकत्रित किया जा सकता है। ii. पार्थिव विकिरण उर्जा का रूप बदल जाने के कारण एकत्रित नहीं किया जा सकता है।
iii. सौर विकिरण द्वारा में सूर्य से प्राप्त प्रत्यक्ष उर्जा 34 % होता है। iii. पार्थिव विकिरण उर्जा में विपिरीत उर्जा 23 % होता है।

प्रश्न 22.
सूर्याताप को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
सूर्याताप को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक :-

  1. आपतन कोण
  2. सूर्य से प्रकाश की अवधि
  3. सूर्य से पृथ्वी की दूरी में अन्तर
  4. सौर विकिरण की मात्रा में विभिन्नता
  5. वायुमण्डल की पारदर्शकता।

प्रश्न 23.
भूमध्य रेखा तथा ध्रुवों पर निम्न वायुदाब की पेटी पायी जाती है क्यों ?
अथवा
वायुदाब पर पृथ्वी की दैनिक गति का प्रभाव किस प्रकार देखा गया है ?
उत्तर :
वायुदाब पर पृथ्वी की दैनिक गति का भी प्रभाव देखा जाता है। पृथ्वी की दैनिक गति के कारण वायुदाब बदलता रहता है। पृथ्वी की परिभ्रमण गति के कारण आकर्षण शक्ति उत्पन्न होती है जो धरातल की समस्त वस्तुओं को पृथ्वी के केन्द्र की ओर खींचती है और उन्हें पृथ्वी से अलग नहीं होने देती। यही कारण है कि अधिक ताप के कारण भूमध्य रेखा से उठी हुई वायु पुनः मध्य अक्षांशों के निकट नीचे उत्तर जाती है। पृथ्वी की दैनिक गति के कारण भूमध्य रेखा के समीप वायु केन्द्र से दूर हटती है परन्तु ध्रुवों की वायु केन्द्र की ओर खिंचती है। इसलिए वायु का अधिकतर भाग मध्य अक्षांशों में एकत्रित होता जाता है और वहाँ वायु का दबाव वढ़ जाता है, परन्तु भूमध्य रेखा के समीप और धुवों पर वायु का दबाव कम होता है तथा निम्न वायु भार की पेटी पायी जाती है।

प्रश्न 24.
30° से 35° उत्तर-दक्षिण अक्षांशों को अश्व अक्षांश (Horse Latitude) क्यों कहा जाता है ?
अथवा,
25° से 35° उत्तर-दक्षिण अक्षांशों के बीच उपोष्ण उच्च वायुदाब की पेटियाँ क्यों पायी जाती है ?
उत्तर :
ग्लोब पर दोनो गोलार्द्धो में 25° से 35° अक्षांशों के बीच उपोष्ण उच्च वायुदाब की पेटियाँ पायी जाती है। इस भाग में शीतकाल के दो महीनों को छोड़कर सालों भर उच्च तापक्रम रहता है। इस पेटी का उच्च दाब तापक्रम से सम्बन्धित न होकर पृथ्वी की दैनिक गति तथा वायु के अवतलन से सम्बन्धित है। भूमध्य रेखा से उठी वायु तथा उप धुवीय निम्न वायुदाब की वायु इन अक्षांशों में नीचे उतरकर बैठती है, जिस कारण इनका आयतन कम होने से वायदाब अधिक हो जाता है। इस प्रकार यह उच्च वायु गति जन्य (Dynamically Induced) होता है।

इस पेटी को अश्व अक्षांश की कहा जाता है क्योंकि प्राचीन काल में यूरोप के व्यापारियों को घोड़ों से लदे नौकाओं द्वारा इस पेटी में पहुँचने पर वायु शांत रहने के कारण आगे बढ़ने में कठिनाई होती थी। ऐसी अवस्था में वे अपनी नौकाओं का भार हल्का करने के लिए घोड़ों को समुद्रो में फेक देते थे। इसलिए 30°-35° उत्तर-दक्षिण अक्षांशों को अश्व अक्षांश (Horse Latitude) कहा जाता है।

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प्रश्न 25.
चक्रवात तथा प्रतिचक्रवात की विशेषता बताएँ।
अथवा
चक्रवात और प्रतिचक्रवात में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

चक्रवात (Cyclone) प्रति-चक्रवात (Anticyclone)
1. चक्रवात में निम्न वायुदाब केन्द्र में होता है तथा केन्द्र से बाहर की ओर वायुदाब बढ़ता जाता है। 1. प्रति-चक्रवात में उच्च वायुदाब केन्द्र में होता है तथा केन्द्र से बाहर की ओर घटता जाता है।
2. चक्रवात में वायु की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी के सुई के विपरित (Anticlockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध मे वड़ी के सुई के अनुरूप (Clockwise) होती है। 2. प्रति-चक्रवात में वायु की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी के सुई के अनुरूप (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी के सुई के विपरित (Anti Clockwise) होती है।
3. चक्रवात की आकृति प्राय: गोलाकार, अण्डाकार अथवा वी V आकार की होती है। 3. प्रति-चक्रवात में समदाब रेखाए प्रायः गोलाकार हांती है

प्रश्न 26.
ग्लोब पर जनवरी माह और जुलाई माह में वायुदाब की स्थिति क्या है और कैसे ?
उत्तर :
जनवरी माह में समदाब का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिणी गोलार्द्ध के मध्य भाग में होता है क्योंकि उत्तरी गोलार्द्ध में अधिक दाब के अन्य क्षेत्र उस समय 30° उत्तरी अक्षांश के करीब कैलीफोर्निया के पश्चिम में प्रशांत महासागर कोलंबिया का पठार, सहारा मरूस्थल और अन्ध महासागर में पाए जाते हैं और इस समय दक्षिणी गोलार्द्ध में इस ऋतु में उच्च दाब के केन्द्र दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट के समीप प्रशांत महासागर, पश्चिमी अफ्रीका के तट के पास अन्ध महासागर और अस्ट्रेलिया के पश्चिम में हिन्द महासागर में पाए जाते हैं।

इसी समय न्यून वायुदाब के क्षेत्र उत्तरी गोलार्द्ध में अन्ध महासागर में आइलेंड और उत्तरी प्रशान्त महासागर में एल्युशियन द्वीपों में फैले रहते हैं तथा यह वायुदाब लगभग 1026 Mb रहता है। 30° दक्षिणी गोलार्द्ध के आस-पास उच्च वायुदाब की पेटी बिना किसी रूकावट के विस्तृत भाग में फैली हुई पायी जाती है। उत्तरी गोलार्द्ध में इस ऋतु में उच्च वायुदाब के क्षेत्र उत्तरी अन्ध महासागर में एजोर्स द्वीप और उत्तरी अमेरिका में पश्चिमी नट के समीप उत्तरी प्रशान्त महासागर में स्थित है। इसके विपरीत न्यून वायुदाब यूरोशियन के मध्य भाग, आइसलैंड और कनाडा के उत्तर में बेफिन की खाड़ी आदि स्थानों में फैले हुए पाए जाते हैं। इस प्रकार इस गोलार्द्ध में समुद्र पर न्यून वायुदाब र्धल खण्डों पर पाया जाता है।

प्रश्न 27.
पर्वतीय समीर एवं घाटी समीर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पर्वतीय समीर (Mountain Breeze or Catabatic Wind or Gravity wind) : पर्वतीय समीर एक सामयिक पवन है, रात्रि के समय पर्वतीय ढालों तथा ऊपरी भागों पर विकिरण द्वारा ताप ह्नास अधिक होता है, जिस करण हवाएँ ठण्डी हो जाती हैं। ये ठंडी तथा भारी हवाएँ पर्वतीय ढालों के सहारे घाटियों में नीचे उतरती हैं। इन्हें ही पर्वतीय समीर या गुरुत्वाकर्षण पवन या कैटाबेटिक पवन कहते हैं।
घाटी समीर (Valley Breeze or Anabatic wind) : घाटी समीर एक सामयिक पवन है जो दिन के समय पर्वतीय घाटियों के निचले भागों में अधिक तापमान के कारण हवाएँ गर्म होकर ऊपर उठती है तथा पर्वतीय ढलानों के सहारे घटी से ऊपर उठती है। इन्हें ही घाटी समीर या एनाबेटिक पवन कहा जाता है।
जब ये हवाएँ पर्वत की चोटी तक पहुँच जाती है तब वहाँ वर्षा पदार्थ करती है। मेघालय में चेरापुँजी तथा मौसिमराम में होंने वाली वर्षा इसी कारण होता है।

प्रश्न 28.
पृथ्वी पर हवा की पेटियों के खिसकाव का संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर हवा की पेटियों का खिसकाव (Shifting of the Wind Belts on the Earth) : पृथ्वी का अपनी कक्ष पर झुकी हुई होने तथा अण्डाकार मार्ग पर सूर्य की परिकमा करने के फलस्वरूप धरातल पर सूर्य की किरणें कभी एक सी नहीं चमकती। सूर्य कभी कर्क रेखा और कभी मकर रेखा पर सीधा चमकता है। सूर्य के इस प्रकार कभी उत्तरायण तो कभी दक्षिणायण होने के कारण वायुदाब और हवाओं की पेटियाँ कुछ उत्तर तथा कुछ दक्षिण की ओर खिसकती रहती है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है जिस कारण सभी वायुदाब की पेटियाँ उत्तर दिशा में खिसक जाती है। भूमध्य-रेखीय दाब 0° तथा 10° अक्षांशों के बीच उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च दाब 30°-40° अक्षांशों के बीच हो जाता है, इस कारण उनसे संबंधित वायुदाब की पेटियां भी अपने निर्दिष्ट स्थान से उत्तर की ओर खिसक जाती हैं।

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21 जून के बाद सूर्य भूमध्य रेखा की ओर अग्रसर होता है तथा 23 सितम्बर को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् चमकता है जिस कारण वायु-पेटियाँ अपनी वैसी ही स्थिति में आ जाती है, उसके बाद सूर्य दक्षिणायण हो जाता है तथा 22 दिसम्बर को मकर रेखा पर लम्बवत् होता है, जिस कारण वायुदाब तथा वायु पेटिया दक्षिण की ओर खिसक जाती है। पुनः सूर्य 21 मार्च को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् होने के कारण ये पेटयाँ वैसी ही स्थिति में आ जाती है। इस तरह ऋतु परिवर्तन के साथ वायु पेटियों में स्थानान्तरण होता रहता है।

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प्रश्न 29.
संघनन की क्रिया के लिए किन-किन दशओं का होना अत्यंत आवश्यक है ?
उत्तर :
संघनन की क्रिया के लिए निम्नलिखित दशाओं का होना अत्यंत आवश्यक है।
(i) शांत वायु का शीतल पदार्थों से सम्पर्क :- रात्रि के समय वायु सामान्यतः शांत होती है उस समय वायु में जो वाष्प होती है वह ठण्डे धरातल के सम्पर्क में आकर बूँदो में बदल जाती है।
(ii) नम तथा ठण्डी वस्तुओं से स्पर्श :- जिस समय नम वायु ठण्डी धाराओं, ठण्डे जल अथवा हिमाच्छादित प्रदेशों से होकर बहती है तो इनके स्पर्श करने से उसकी नमी जल बूँदों में बदल जाती है।
(iii) गरम वायु का ऊपर उठकर फैलना :- ऊँचाई के साथ-साथ तापक्रम कम होता जाता है। इस प्रकार धरातल की वायु ऊपर उठती है तथा फैलती है जिससे उसके तापमान में कमी के कारण उसमें जल, वाष्प धारण करने की शक्ति कम हो जाती है, परिणामत: वह जल बूँढों में बदल जाती है।

प्रश्न 30.
भूमध्य रेखीय अथवा विषुवत रेखीय प्रदेशों में सालों भर वर्षा होती है क्यों ?
उत्तर :
भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें सालों पर लम्बवत् चमकता है जिससे दिन में धरातल के असाधारण रूप से गर्म हो जाने पर उससे लगी हुई वायु गर्म होकर फैलती है और हल्की हो जाती है। यह हल्की वायु ऊपर उठने लगती है तथा संवहनीय धराओं का निर्माण होता है। ऊपर उठकर वायु ठण्डी हो जाती है और उसमें उपस्थित जलवाष्प का संघनन शुरु हो जाता है जिसे आकाश गहरे कपासी वर्षा मेघो में घिर जाता है और अंतत: भूमध्यरेखीय प्रदेशों में प्रतिदिन नियमित रूप से वर्षा होती है। यह वर्षा प्रायः दोपहर बाद हुआ करती है इसलिए इसे चार बजे वाली वर्षा (40′ Clock Rain fail) भी कहा जाता है। यहाँ संवहनीय वर्षा होती है।

प्रश्न 31.
आर्द्रता किनते प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त में वर्णन करें।
उत्तर :
आर्द्रता निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है।
(i) निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) : वायु की प्रति इकाई आयत में उपस्थित जलवाष्म की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहा जाता है और इसे ग्राम प्रति घन मीटर में व्यक्त किया जाता है। निरपेक्ष आर्द्रता प्राय: भूमध्य रेखा के निकट सबसे अधिक पाया जाता है जबकि ध्रुवों की ओर बढ़ने पर यह कम होती जाती है।

(ii) विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) : वायु के प्रति इकाई भार में जल/वाष्प के भार को विशिष्ट आर्द्रता कहते हैं, उसे ग्राम प्रति किलोग्राम की इकाई में मापा जाता है।

(iii) सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) : किसी निश्चित तापक्रम पर निश्चित आयतन वाली वायु की अत्यधिक नमी धारण करने की क्षमता तथा उसमें उपस्थित आर्द्रता की वास्तविक आर्द्रता के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहा जाता है, उसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।

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प्रश्न 32.
विकिरण कोहरा और अभिवहन कोहरा से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
विकिरण कोहरा (Radiation Fog) : विकरण कोहरा का निर्माण उस समय होता है जब ठण्डे धरातल के ऊपर गरम और आर्द्र वायु होती है। इस कारण ऊपर स्थित उष्णार्द्र वायु ठण्डी होकर संघनित हो जाती है और जल कण आर्द्रतागाही कणों के चारों ओर एकत्रित होकर जल-सीकरों में बदलकर कुहारे का निर्माण करते हैं। इस प्रकार बने कोहरे को विकिरण कोहरा कहते है।

अभिवहन कोहरा (Advection Fog) : जब उण्डे धरातल पर गर्म तथा आर्द्र वायु का आगमन होता है तो उष्णार्द्र एवं ठण्डी वायु के समिश्रण से उत्पन्न कोहरे को अभिवहन कोहरा कहा जाता है। उस तरह का कोहरा प्राय: स्थलीय भागों पर जाड़े में तथा सागरीय भागों पर गर्मी में होता है क्योंकि शीत ऋतु में स्थलीय भाग सागरीय भाग की अपेक्षा ठण्डे होते हैं।

प्रश्न 33.
वृष्टि किसे कहते हैं? वृष्टि कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वृष्टि (Precipitation) : जब वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प संघनन द्वारा तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होकर धरातल पर गिरते हैं तो इसे वृष्टि कहते हैं।
वृष्टि के प्रकार (Types of Precipitation) : धरातल पर होने वाली वृष्टि मुख्यत चार प्रकार की होती है।
i. हिम वृष्टि (Snow Fall) : जब वायु का तापक्रम हिमांक के नीचे गिर जाता है तो जल के कण जम जाते हैं और वे बर्फ के रूप में धरातल पर गिरने लगते हैं तो इसे हिम वृष्टि कहा जाता है।
ii. ओला वृष्टि (Hail Fall) : वायु मे उपस्थित जलवाष्प तेजी से हिम के मोटे-मोटे कणों में बदल जाते हैं और वे गोलों के रूप,में धरातल पर गिरने लगते हैं तो इसे ओला वृष्टि कहा जाता है।
iii. सहिम वृष्टि (Sleet) : वर्षा की बूंदें अथवा पिघले हिम वृष्टि के जल के पुन: जम जाने से सहिम वृष्टि की रचना होती है।
iv. वर्षा (Rain Fall) : वायु मण्डल में थोड़ी बहुत जलवाष्प हमेशा मिली रहती हैं। वायु में निहित वाष्प प्रवीभूत होने पर जब बूँदों के रूप में धरातल पर गिरने लगते हैं तो उसे वर्षा या जल वृष्टि कहा जाता है।

प्रश्न 34.
पवन विमुख ढाल को वृष्टि छाया प्रदेश कहा जाता है, क्यों ?
उत्तर :
पवन विमुख ढाल को वृष्टि छाया प्रदेश कहा जाता है क्योंकि जब पवनामुखी ढाल के सहारे जलवाष्प भरी हवाएँ ऊपर उठती हैं तथा पवन विमुख ढ़ाल सहारे नीचे उतरती है तो वे केवल शुष्क ही नहीं होती बल्कि अधिक दबाव के कारण गर्म भी हा जाती है जिससे वर्षा करने के स्थान पर उनकी भाप धारण करने की शक्ति बढ़ जाती है। अतः पर्वतों के दूसरे और पवन विमुख ढ़ाल वर्षा से अछूते रह जाते हैं इसलिए उसे वृष्टि छाया प्रदेश (Rain Shadow Area) कहा जाता है।

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प्रश्न 35.
कुहरा और कुहासा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

कुहरा (Fog) कुहासा (Mist)
1. कुहरा एक प्रकार का बादल है। 1. कुहासा एक प्रकार का कुहरा है।
2. इसमें जलवाष्प का संघनन धरातल के बिल्कुल समीप होता है। 2. कुहासा में कुहरे की अपेक्षा दृश्यता (Visibility) दूर तक रहती है।
3. कुहरा में जल के कण अधिक छोटे तथा संघन होते हैं। 3. कुहासा में जल के कण अधिक मोटे तथा संघन होते हैं।

प्रश्न 36.
थार्नथ्वेट तथा कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की तुलना कीजिए।
उत्तर :
थार्नथ्वेट तथा कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की तुलना :

थार्नथ्वेट कोपेन
1. यह वर्गीकरण संख्यात्मक है। 1. यह वर्गीकरण भी संख्यात्मक है।
2. थार्नथ्वेट ने जलवायु की सीमाओं को P/E तथा T/E सूत्र में माना है। 2. कोपेन ने जलवायु की सीमाएँ ताप तथा वर्षा के निश्चित मानदण्डों के अनुसार माना है।
3. इसके वर्गीकरण में संकेतों की कमी है और याद करना सरल है। 3. इसके वर्गीकरण में संकेतों की अधिकता है और याद करना कठिन है।

प्रश्न 37.
थार्नथ्वेट का तापीय दक्षता अनुपात सूत्र क्या है ?
उत्तर :
थार्नथ्वेट ने जलवायु के वर्गीकरण में तापीय दक्षता अनुपात (T/E Ratio) पर भी समान रूप से बल दिया है । उसने तापीय दक्षता अनुपात तथा तापीय दक्षता सूची ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र दिये हैं।
(i) तापीय दक्षता अनुपात ( T / E ratio) = \(\frac{T}-32}{4}\) औसत मासिक वर्षा।
(ii) तापीय दक्षता सूची (T/E Index) = \($\Sigma^{12}\left(\frac{T-32}{4}\right)$\)

प्रश्न 38.
वर्षण प्रभाविता (P/E) क्या है ?
उत्तर :
वर्षण प्रभाविता (P / E ) : थार्नथ्वेट के अनुसार वर्षण प्रभाविता से तात्पर्य कुल वार्षिक वर्षा के केवल उस भाग से है जो वनस्पति के विकास को प्रभावित करता है। इस प्रकार वर्षण प्रभाविता वर्षा की मात्रा और वाष्पीकरण का अनुपात होता है। थार्नथ्वेट ने वर्षा के लिए (P) और प्रभाविता के लिए (E) के अनुपात का परिकलन किया है।

प्रश्न 39.
ग्रहीय हवाओं से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पृथ्वी एक ग्रह है। पृथ्वी के परिभ्रमण एवं सूर्य की सापेक्ष स्थिति के कारण पृथ्वी पद उच्च एपं निम्न वायु-दाब क पंटियाँ पायी जाती है जिससे हवाओं की उत्पति होती है। पवन उच्चवायु दाब से निम्नवायु दाब की ओर चला करते है। पृथ्वी के परिभ्रमण के कारण पवन की दिशा में भी विचलन होता है। हवाओं की उत्पति एवं उनकी दिशा के निर्धारण का कारण पृथ्वी (ग्रह) का सूर्य से सम्बन्ध है अत: इन्हें प्रहीय पवन कहा जाता है। स्थायी रूप से चलने के कारण इन्हें स्थायी पवन भी कहा जाता है।

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प्रश्न 40.
वैश्विक उष्मन क्या है ?
उत्तर :
वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा बढ़ने से वायुमण्डल के तापमान में होने वाली सामान्य वृद्धि को ही भूमण्डलीय उष्णता कहते है।

प्रश्न 41.
वर्षन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
संघनन प्रक्रिया के परिणास्वरूप वायु की जलवाष्म जल – बूँद में बदल जाती है। ये जल बूँद आपस में मिलकर इतने बड़े आकार के हो जाते है कि वायु इन्हें सम्भालने में असमर्थ हो जाती है, तो ये जल-कण धरातल पर गिरना आरम्भ कर देती है। इस प्रकार जल कणो का पृथ्वी पर गिरने की क्रिया को वर्षण (Precipitation) कहते है।

प्रश्न 42.
मानसून से आप क्या समझते हैं? इनकी उत्पत्ति कैसे होती है ?
उत्तर :
मानसूनी पवनें (monsoon) अरब भाषा के Mausimशब्द में लिया गया है जिसंका अर्थ है – मौसम या ॠतु। अतः मानसून हवाओं का तात्पर्य है कि ये पवने मौसम के अनुसार दिशाएँ बदल देती है। ये पवनें 6 महीना स्थल के समुद्र की ओर तथा 6 महीना समुद्र से स्थल की ओर चलती है।

मानसून पवनों की उत्पति : मानसून पवनों की उत्पत्ति का सबसे प्रमुख कारण स्थल और समुद्र के तापमान की भिन्नता है। ग्रीष्म ऋतु में भारत एवं एशिया का स्थलीय भाग अत्यधिक गर्म रहता है जिसके कारण धरातल के समीप की हवाएँ गर्म व हल्की होकर ऊपर उठती है अतः स्थल पर निम्न वायुदाब क्षेत्र का निर्माण हो जाता है। इसके विपरीत समुद्र ठण्डा होता है। अतः समुद्रात की पवने ठण्डी व सिकुड़ जाती है जिससे समूद्र तट उच्च वायु क्षेत्र बन जाता हे। अत: पवन समुद्र में स्थल की ओर चलने लगती है। शीत ऋतु में विपरीत दशा मिलती है। जिससे पवने स्थल से समुद्र की ओर चलती है। इसी सिद्धान्त के आधार पर मानसूनी पवनों की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 43.
विभिन्न प्रकार की मानसूनी पवनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मानसूनी पवनों के प्रकार : ये मौसम के अनुसार दो प्रकार की होती है।
i. ग्रीष्मकालीन मानसून : ग्रीष्म ऋतु में जब सूर्य कर्क रेखा 23 \(\frac{1}{2}\) % उत्तर पर चमकता है तो एशिया का वृद्ध भूखण्ड सूर्य ताप से गर्म हो जाता है। इस भू-खण्ड के समीप की वायु गर्म व हल्की होकर ऊपर उठने लगती है। अत: निम्न वायु क्षेत्र (Low Pressure) बन जाता है। इस समय भूध्मण्डल की अपेक्षा समुद्री क्षेत्र ठण्डा होता है, अतः जलीय क्षेत्रपर पवने ठण्डी होकर सिकुड़ जाती है जिसे समुद्री सतह पर उच्च वायु दाब बनने लगता है। ये समुद्र से चलने के कारण भाप भारी होती है ; अतः ये पवनें एशिया के देशों में वर्षा करती है। इन्हें दक्षिण पश्चिम से चलने के कारण दक्षिणी पश्चिमी मानसून कहते है।

ii. शीतकालीन मानसून पवन : शीत ऋतु में सूर्य मकर रेखा 23 \(\frac{1}{2}\) दक्षिण अक्षांश रेखा पर लम्बवत् चमकता है। अतः हिन्द महासागर के पश्चिमोत्तर सीमा के आस पास निम्न दाब बनने लगता है। इसके विपरीत एशिया भू खण्ड के समीप की वायु ठण्डी होती है। इसीलिए उच्च वायु दाब कम बनता है। अत: स्थलीय भाग से पवनें समुद्र की ओर बहने लगती है। ये पवनें स्थल से आने के कारण शुष्क होती है।अतः इन पवनों से वर्षा नहीं होती है।

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प्रश्न 44.
भूमध्य सागरीय प्रदेशों में जाड़े में वर्षा क्यों होती है ?
उत्तर :
भू-मध्य सागरीय प्रदेश 30° से 45° अक्षांशों के मध्य महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में स्थित है। यह भाग व्यापारिक एवं पहुआ हवाओं की पेटियों के मध्य स्थित है। वायु भार एवं हवा की पेटियों के खिसकने के कारण ये भाग गर्मी में व्यापारिक पवनों के पेटी में आ जाते है जिससे महाद्वीपों के पूर्वी भाग में वर्षा होती है, पश्चिमी भाग तक आते आते ये पवन शुष्क हो जाते हैद्व, जाड़े में ये प्रदेश पहुआ पवनों की पेटी में पड़ते है। पछुआ पवन महासागरो से आने के कारण वाष्पपूर्ण होती है। अतः महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में स्थित भूमध्य सागरीय क्षेत्र में जाड़े में वर्षा होती है।

प्रश्न 45.
अयन रेखाओं के समीप महद्वीपों के पश्चिमी भाग में मरुस्थल क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर :
अयन रेखाओं (कर्क एवं मकर रेखाओ) के समीप महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में मरूस्थल पाये जाने के प्रमुख कारण निम्न है :-

  1. गर्मी में ये प्रदेश व्यापारिक हवाओं के प्रभाव में रहते है। व्यापारिक हवाओं से पूर्वी भाग में तो वर्षा होती है, पर पश्चिमी भाग में आते-आते शुष्क हो जाती है; अतः महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर वर्षा नहीं होती।
  2. जाड़े में प्रदेश उपोष्ण उच्च वायु भार की पेटियो में आ जाते है। यहाँ हवाए ऊपर से नीचे उतरती है। ये हवाये गर्म होती है अतः इनसे वर्षा नहीं होती है।
  3. इन प्रदेशों के समीप ठण्डी धारायें बहती है। इन धाराओं के ऊपर से बहने वाली हवाऐं ठण्डी हो जाती है अतः उनसे भी वर्षा नहीं होती है।

प्रश्न 46.
स्थलीय समीर और समुद्री समीर में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

स्थलीय समीर समुद्री समीर
1. ये हवाऐं स्थल से समुद्र की ओर बहती है। 1. ये हवाऐं समुद्र से स्थल भाग की ओर चलते है।
2. ये समीर सूर्यास्त के 4 बजे से सुबह 8 बजे तक बहती है। 2. ये पवनें दिन में लगभग नौ बजे से सूर्यास्त के करीब आठ बजे तक बहती है।
3. यहा दिन में भूखण्ड गर्म हो जाता है इसलिए निम्न वायु दाब बन जाता है। और समुद्र में उच्च वायु दाब बनता है। 3. यहा रात में भूखण्ड ठण्डा होने के कारण उच्च दाब तथा समुद्र गर्म रहने के कारण निम्न वायु दाब बनता है।

प्रश्न 47.
वाष्पीकरण एवं संघनन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

वाष्पीकरण (Evaporation) संघनन (Condesation)
1. जलकणों का वाष्प के रूप में बदलने की क्रिया को वाष्पीकरण कहते है। 1. जलवाष्प के जल कणों के रूप में बदलने की क्रिया को संघनन कहते है।
2. वायु में उपस्थित सुक्ष्म कणों के पास गर्म होने से वाष्पीकरण होता है। 2. वायु में उपस्थित सूक्ष्म कणों के पास ठण्ड होने से संघनन होता है।
3. वाष्पीकरण प्रक्रिया का मुख्य कारक वायुमण्डल के तापमान में वृद्धि है। 3. संघनन प्रक्रिया के मुख्य कारक तापमान में कमी तथा हवा की सापेक्ष आर्द्रता है।

प्रश्न 48.
निरपेक्ष आद्रता और सापेक्ष आर्द्रता में अन्तर बताइये।
उत्तर :

निरपेक्ष आद्रेता (Absolute Humidity) सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity)
1. किसी निश्चित आयतन की मात्रा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहते है। 1. किसी निश्चित तापक्रम पर वायु में विद्यमान जलवाष्प तथा जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहते है।
2. निरपेक्ष आर्द्रता से वर्षा की सम्भावना का पता नहीं चलता है। 2. सापेक्ष आर्द्रता से वर्षा की सम्भावना का अनुमान लगता है।
3. इसे ग्राम प्रति घनमीटर वायु में व्यक्त किया जा सकता है। 3. इसे प्रतिशत में व्यक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 49.
क्षोभ मण्डल को परिवर्तन मण्डल क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
मौसम सम्बन्धी प्राय: सभी घटनायें कुहरा, बादल, ओला, तुषार, आंधी, तूफान, मेघ, गर्जन आदि क्षोभमण्डल में सम्पादित होते है। इसी मण्डल में ऋतु परिवर्तन भी हुआ करता है इसीलिए इसे मण्डल को परिवर्तन मण्डल कहा जाता है।

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प्रश्न 50.
ओजोन मण्डल को पृथ्वी का रक्षा कवच क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
आजोन मण्डल को पृथ्वी का रक्षा कवच क्योंकि इस आवरण के कारण सूर्य की पराकासमी किरणें समतापमण्डल तथा पृथ्वी सतह तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि ओजोन गैस इन विकिण तरंगों का अवशोषण कर लेती है। यदि किरणें धरातल तक पहुंच पाती तो तापक्रम इतना बढ़ जाता कि किसी भी प्रकार का जीवन जीना भूतल तथा सागर में संभवन नहीं हो पाता।

प्रश्न 51.
शुष्क वायु में विद्यमान चार प्रमुख गैसों का उनकी मात्रा सहित नाम लिखिए।
उत्तर :
शुष्क वायु में उपस्थित गैसे :

गैसे कुल भार का %
i. नाइट्रोजन 78.08
ii. आक्सीजन 20.95
iii. कार्बन-डाई-आक्साइड 0.03
iv. आर्गन 0.9323
v. ओजोन 0.0006

प्रश्न 52.
संघनन एवं वर्षण में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

संघनन वर्षण
1. संघनन प्रक्रिया में जल वाष्प का रूप धारण कर वायुमडल में फैल जाता है। 1. वर्षण प्रक्रिया में वायुमण्डल में संघनीय आद्रता जल के बूंद का समूह रूप में धरातल पर गिरते है।
2. ओस, पाला, कुहरा, धुन्ध आदि संघनन के रूप है। 2. जलदृष्टि, हिम वर्षा, तुषार, ओला आदि वर्षण के रूप है।
3. संघनन असंतृप्त वायुमण्डल में होता है। 3. वायुमण्डल जब बहुत ज्यादा संतृप्त हो जाता है तो वर्षण होता है।

प्रश्न 53.
वायुमण्डल की किस परत को तापमण्डल कहते हैं तथा क्यों ?
उत्तर :
वायुमण्डल के समतापमण्डल के तापमंडल कहते है। क्योंकि इस भाग में सौर्य शक्ति का शोषण और निष्कमण दोनों बराबर होते है। अत: यहाँ तापमान सदैव एक समान रहता है।

प्रश्न 54.
सूर्य की पराकासी किरणें किस प्रकार जैव जगत के लिए हानिकारक होती हैं ?
उत्तर :
प्रकाश की वह तरंग जिसकी लम्बाई बैगनी किरण से कम होती है पराबैगनी किरण भी uV rays कही जाती है। ओजोन मण्डल में छिद्र हो जाने के कारण इसका प्रभाव ज्यादा बढ़ गया है। पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है साथ ही कैंसर जैसे बिमारी भी इसी से फैल रहा है।

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प्रश्न 55.
पृथ्वी के उष्मा संतुलन के बारे में लिखिए।
उत्तर :
पृथ्वी का उष्मा संतुलन (Heat Balance of the eath) सूर्य से प्राप्त ताप का 35 % भाग पुन: अतंरिक्ष (Spac) में लौट जाता है। 14 % भाग जलवाष्प, बादल, धूल-कण तथा गैसों द्वारा सोख ली जाती है। शेष 51 % ताप पृथ्वी को प्राप्त होता है। परन्तु यदि यह ताप प्रतिदिन पथ्वी को मिलता ही रहे और नष्ट न हो तो पृथ्वी का तापक्रम आवश्यकता से काफी अधिक बढ़ जाएगा। परन्तु पृथ्वी इस 51 % ताप को किसी न किसी रूप में वायमण्डल एवं अंतरिक्ष को अंतरिक्ष को लौटा देती है। 13 % भाग धरातल से दीर्घ तरंगों के रूप में परावर्तित हो जाता है।

23 % भाग वाष्पीकरण करने में खर्च हो जाता है। यह गुप्त ताप (Leaent heat) बादल के रूप में ऊपर जाता है। संघनन के बाद वायुमण्डल में मिल जाता है। 16 % भाग वायुमण्डल को गर्म करने में खर्च होता है, 9 % भाग उष्मा विक्षोभ तथा संवहन में खर्च हो जाता है। इस प्रकार पृथ्वी सूर्य से जो 5 ताप-प्राप्त करती है उसे वायुमण्डल एवं अंतरिक्ष में लौटा देती है जिससे पृथ्वी पर उष्मा की मात्रा प्राय समान रहती है। इसे ‘पृथ्वी का उष्मा संतुलन’ कहते है।

प्रश्न 56.
सूर्य की लम्बवत् किरणों से अधिक गर्मी क्यों प्राप्त होती है ?
उत्तर :
लम्बवत् किरणे धरातल के कम क्षेत्र पर पड़ती है, जिस कारण उस स्थान ताप अधिक हो जाता है, और वहाँ अधिक गर्मी प्राप्त होती है।

प्रश्न 57.
समवायु भार या वायुदाब प्रवणता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
किन्ही दो स्थानों के बीच वायु दबाव के अन्तर को वायुभार ढाल या दाब प्रवणता (Pressure gradient) या वायुबमापी ढाल (Barometric) कहते है।

प्रश्न 58.
उपधुवीय क्षेत्रों में निम्न वायुदबाव के गठन के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियाँ (sub-palar low pressure Betles) : ये वायुदाब पेटियाँ क्रमश: 45 % उत्तरी एवं दक्षिणी अंक्षाशों से क्रमश: आर्कटिक एवं अंटार्कटिक वृतों की बीच दोनों गोलाद्धों में स्थित है। सालों पर कम तापमान होने के कारण भी यहाँ निम्न वायुदाब मिलता है स्पष्ट है कि इस कम वायुदाब का तापमान से कोई संबंध नहीं है। वास्तव में पृथ्वी की दैनिक गति के कारण इन अंक्षाशों से वायु फैलकर स्थानांतरित हो जाती है, जिस कारण गति जन्य (Dynamically Induced) वायुदाब का आविर्भाव होता है। यद्यपि इस प्रक्रिया का प्रभाव सबसे अधिक ध्रवों पर होना चाहिए, परन्तु वहाँ पर तापमान इतना न कम हो जाता है कि पृथ्वी की दैनिक गति के कारण वाय के फैलने का कारक कम जोड़ पड़ जाता है, जिसके कारण धुवो पर उच्च दाब हो जाता है ज़बकि उपधुव पर निम्न वायुदाब हो जाता है।

प्रश्न 59.
व्यापारिक हवाएँ महादेशों के पूर्वी भाग में अधिक वर्षा क्यों करती हैं ?
उत्तर :
यह हवा ठण्डे भागों से गर्म भागों की ओर बहती है। अत: ये वातावरण को ठण्डे और आरामदायक बनाती है। महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में मरुस्थलों के पाये जाने के कारण यह भी है कि पूर्व की ओर आने का कारण इनसे महाद्वीपों के पूर्वी भाग में वर्षा होती है : परन्तु पश्चिमी भाग में आते-आते शुष्क हो जाती है।

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प्रश्न 60.
किन हवाओं को गरजती चालीसा कहते हैं तथा क्यों ?
उत्तर :
पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में 40 और 50 डिग्री दक्षिण के अक्षांशों (लैटीट्यूड) के बीच चलने वाली शक्तिशाली पहुआ पवन को गरजती चालीसा कहते हैं।

प्रश्न 61.
जलीय चक्र से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
वाष्पीकरण तथा पेड़ पौधों द्वारा वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रियाओं से जल वाष्प में बदलता है तथा संघनन की क्रिया से वाष्प जल में बदलती है। इस प्रकार धरातल एवं वायुमण्डल के बीच जलवाष्प एवं जल का निरन्तर आदान-प्रदान होता रहता है। जलवाष्प एवं जल के प्राकृतिक रूप से होने वाले इस आदान-प्रदान को ‘जलीय चक्र’ कहा जाता है।

प्रश्न 62.
विषुवत् रेखीय प्रदेश में संवाहनिक वर्षा क्यों होता है ?
उत्तर :
जब किसी स्थान पर अधिक गर्मी पड़ती है, तो गर्म धरातल के सम्पर्क से नीचे की वायु गर्म होकर फैलत है तथा हल्की होकर ऊपर उठती है। इस खाली स्थान को बरने के लिये आस-पास से ठण्डी हवाएँ आती हैं परन्तु वे भी गर्म होकर ऊपर उठती हैं। इस प्रकार वायु में संवहन धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। भूमध्य रेखा पर सूर्य सालो भर लम्बत चमकता हैं जिसके कारण वहाँ संवाहनिय धारा उत्पन्न हो जाती हैं और प्रतिदिन दिन के तीसरे पहर बादलों की गरज तथा बिजली की चमक के साथ मूसलाधार होती है। वर्षा के बाद सांयकाल आकाश साफ हो जाता है।

प्रश्न 63.
वृष्टिछाया प्रदेश से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
ऊँचाई के साथ-साथ वर्षा की मात्रा बढ़ती जाती है। इस प्रकार पर्वत का जो ढाल पवन के सामने होता है वहाँ अधिक वर्षा होती है उसे पवनाभिमुख ढाल (Windward slope) कहते हैं। परन्तु जैसे ही पवन पर्वत की दूसरी ढलाव पर उतरने लगती है वह गर्म और शुष्क होने लगती है और वर्षा कम करती है तो उसे पवनाविमुख ढाल अथवा वृष्टिछाया प्रदेश (Leenward side or Rain shadow Area) कहते हैं।

प्रश्न 64.
तापमान के क्षैतिज वितरण की व्याख्या करो।
उत्तर :
तापमान के क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution) : धरातल को ताप प्राप्ति का मुख्य साधन सौर्यिक उष्मा है लेकिन यह भी प्रत्येक जगह समान नहीं है। भूमध्य रेखा की अपेक्षा धुवो की ओर तापक्रम क्रमशः तीव्र गति से घटता जाता है। तापक्रम के इस घटने की दर को ताप प्रवणता कहा जाता है। कर्क और मकर रेखाओ के मध्य लगभग 450 अक्षांशीय पेटी में तापक्रम अधिक ही होता है।
तापक्रम के क्षैतिज वितरण का प्रदर्शन तथा अध्ययन समताप रेखाओ के द्वारा किया जाता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्रचलित या स्थायी या ग्रहीय पवन के विभित्र प्रकार क्या-क्या है ? उनकी व्याख्या सचित्र कीजिए।
अथवा
ग्लोब पर वायुभार की पेटियों के अनुसार ग्रहीय पवन की चित्र के साथ वर्णन कीजिए।
अथवा
धरातलपर पायी जाने वाली स्थायी वायुदाब पेटियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए। अथवा, पृथ्वी पर ग्रहीय या स्थायी पवनों की उत्पत्ति एवं प्रवाह-पथ चित्रसहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रचलित या स्थायी या ग्रहीय या निश्चित पवनें (Prevailing or Permanent or Planetary or Invariable Winds) : वह पवन जो सालों भर एक ही क्रम में एक निश्चित दिशा की ओर चलती रहती है तो इसे प्रचलित या स्थायी पवनें कहा जाता है चूंकि इनका विस्तार पूरे ग्लोब पर होता है। इसलिए इन्हें ग्लोबल पवनें भी कहा जाता है। प्रचलित पवनों की उत्पत्ति पूरे ग्लोब के तापमान तथा पृथ्वी की दैनिक गति से उत्पन्न उच्च तथा निम्न वायुदाब से सम्बन्धित है। वायुदाब तथा ताप कटिबन्धों के अनुसार इन पवनों को निम्नलिखित तीन वर्गों में सचित्र बाँटा गया है :-
i. व्यापारिक या वाणिज्य या पूर्वी पवन (Trade Wind or Easterlies)
ii. विरुद्ध व्यापारिक या पछुवा पवन (Anti Trade Wind or Westerlies)
iii. ध्रुवीय पवन (Polar Wind)

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i. व्यापारिक या वाणिज्य या पूर्वी पवन (Trade Wind or Easterlies) : उपोष्ण उच्चदाब कटिबन्ध से भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर दोनों गोलार्द्धों में चलने वाली पवन को व्यापारिक पवन कहा जाता है। इसे ‘अंग्रेजी में ट्रेड विंड कहा जाता है। ‘ट्रेड’ एक जर्मन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘ निर्दिष्ट पथ’। अत: ट्रेड पवन निर्दिष्ट पथ पर एक ही दिशा में निरंतर चलने वाली पवन है। फेरल के नियमानुसार ये पवने उत्तरी गोलार्द्ध में दायीं और तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती है। अतः उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी चलने की दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है, इसलिए इन्हें पूर्वी पवन (Easterlies) भी कहा जाता है प्राचीन काल में व्यापारियों को पालायुक्त जलयानों के संचालन में पर्याप्त सुविधा मिलने के कारण इनका नामकरण व्यापारिक पवन किया गया था।

जब यह पवन महाद्वीपों के पूर्वी भागों से चलती हैं तो वर्षा अधिक होती है और पश्चिम की ओर बढ़ती है तो शुष्क हो जाती है। यही कारण है कि व्यापारिक पवन के प्रदेशों में महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में प्रायः मरूस्थल मिलते हैं। हिन्द महासागर में यह पवन मानसून के रूप में परिवर्तित होकर चलता है।

iii. विरुद्ध व्यापारिक या पछुवा पवन (Anti Trade Wind or Westerlies) : यह पवन व्यापारिक पवन के बिल्कुल विपरीत चलता है, इसलिए इसे विरूध व्यापारिक पवन कहा जाता है। उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध से उपधुवीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर चलने वाली पवन को पछुवा पवन कहा जाता है। यह पवन उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूरब की ओर प्रवाहित होती है।

पछुवा पवन का सर्वोत्तम विकास दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल के अभाव के कारण 40° से 65° दक्षिणी अक्षांशों के बीच अधिक हुआ है और यह पवन बहुत ही तीव वेग के साथ चला करता है तो उसे बहादुर के साथ चला करता है तो उसे बहादुर पछुवा पवन (Brave Westerlies) के नाम से जाना जाता है।

पछुवा पवन के प्रचंडता के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° दक्षिणी अक्षांश पर गरजता चालिसा (Roaring Forties), 50° दक्षिणी अक्षांश पर प्रचण्ड पचासा (Furious Fifties) तथा 60° दक्षिणी अक्षांश पर चिखता साठा (Shrieking Sixties) आदि नामों से पुकारा जाता है। ये सभी नामकरण नाविकों के द्वारा दिया गया है।

इस पवन के प्रभाव से महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में वर्षा सालों भर बना रहता है जहाँ से शीतोष्ण कटिबन्धीय निम्नदाब की ओर पवन चलने लगता है। उत्तरी गोलार्द्ध में इस पवन की दिशा उत्तर-पूरब से दक्षिण-पश्चिम की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में इसकी दिशा दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है दोनों गोलाद्धों में पूरब क्षेत्र से आने के कारण इसे धुवीय पूर्वी पवन (Polar Easterlies) भी कहा जाता है।
इस पवन की वायु राशि अल्यंत ठण्डी और भारी होती है। बहुत कम तापमान वाले क्षेत्र से अपेक्षाकृत अधिक तापमान वाले क्षेत्र की ओर बहने के कारण यह पवन शुष्क होती है।

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प्रश्न 2.
‘ग्रीन हाउस’ से क्या अभिप्राय है ? भूमण्डलीय उष्षता या वैश्विक तापन के प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
अथवा
ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव का उल्लेख करें।
अथवा
वैश्विक उष्णता के प्रभाव का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
‘मीन हाउस’ का अभिग्राय है – ऐसा हाउस जिसकी छते एवं दीवारें काँच का पारदर्शी, प्लास्टिक जैसे उष्मारोधी पदार्थो से बनी हो और उसमें कोई पौधा लगाया जाये तो वह हरा-भरा रहे। इस प्रकार के घरों का प्रयोग शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में सब्जियों, फसलों एवं फलदार वृक्षों को उगाने के लिए किया जाता है। शीत ऋतु में ऐसे घरों में प्रीष्म ॠतु में पैदा होने वाली सब्ज़याँ एवं फसलें उगायी जाती हैं। इन कमरों में सूर्य की किरणें ऊष्मारोधी दीवारों को भेदकर कमरे में ताप बढ़ा देती है किन्तु कमरे से बाहर की ओर ऊष्मा का विकिरण नगण्य होता है। इस प्रकार सूर्य की ऊष्मा अन्दर प्रवेश कर वहीं अटक जाती है। फलत: शीत- ॠतु में कमरे का तापमान बाहरी वातावरण की अपेक्षा अधिक रहता है।

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि ‘पृथ्वी की वनस्पतियों तथा प्राणियों के जीवित रहने के लिए तापमान बनाए रखने की प्राकृतिक व्यवस्था को ही हरितगृह प्रभाव (Green House Effect) कहा जाता है।”
भूमण्डलीय उष्णता या ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव (Impact of Global Warming) : भूमण्डलीय उष्णता के अब तक अनेक प्रभाव दृष्टिगत हो चुके हैं जिनका विवरण निम्नलिखित रूप से प्रस्तुत है :
i. ध्रुवीय हिमचादर का पिघलन (Melting of Polar Ice Caps) : वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा में वृद्धि होने से हिमानियाँ पिघलने लगती हैं। यदि 21 वीं सदी के मध्य तक इसकी मात्रा चार से दस गुना वृद्धि हो जाय तो पृथ्वी के तापक्रम में 7°C से 12°C तक वृद्धि होगी। उस दशा में हिम चादर पिघल जाएँगी तथा समुद्र का तटीय, निचले एवं सघन बसे घने द्वीपीय भाग डूब जायेंगे और मछलियाँ नष्ट हो जायेगी।

ii. वर्षण प्रतिरूप में बदलाव (Change the Precipitation Pattern) : भूमण्डलीय उष्णता के कारण वर्षण प्रतिरूप में बदलाव आ जाएगा। कुछ स्थानों पर अधिक एवं कुछ स्थानों पर कम वर्षण होगा, जो फिलहाल ही हमें देखने को मिल रहा है।

iii. मरूस्थलीय क्षेत्र का विस्तार (Expansion of Deserts Area) : वर्तमान कृषि उत्पादन क्षेत्र मरूस्थलीय क्षेत्रों में बदल जायेंगे। इससे विश्वभर में खाद्य संकट उत्पन्न होने का गम्भीर खतरा सामने आ सकता है।

iv. प्रादेशिक जलवायु प्रतिरूप में परिवर्तन (Change in Regional Climate Pattern) : भूमण्डलीय उष्णता के कारण प्रादेशिक जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, कृषि फसल प्रतिरूप एवं जलापूर्ति में परिवर्तन हो सकता है। यह मानव तथा पशुओं के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।

v. ओजोन परत की कमी (Depletion of Ozone layer) : ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबेंगनी किरणों (Ultra violet rays) को अवशोषित करके पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है लेकिन क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFCs) की मात्रा में वृद्धि से यह परत नष्ट हो रही है। ओजोन परत में कमी आने से पृथ्वी के धरातल पर चर्म कैंसर एवं आँखों की बिमारियों में वृद्धि की सम्भावना बढ़ जायेगी।

vi. पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव (Alteration in Ecosystems) : भूमण्डलीय उष्णता के बढ़ने से पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव आ जायेगा। वर्तमान समय में बहुत से पक्षियों और जीव-जन्तुओं का तो नामों निशान मिट चुका है।

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प्रश्न 3.
वायुमण्डलीय तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
किसी स्थान या क्षेत्र के तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख करें।
अथवा
ग्लोब पर तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
वायुमण्डलीय तापमान में भित्रता के क्या कारण हैं?
उत्तर :
तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting the temperature distribution) : किसी भी स्थान या क्षेत्र में तापमान का वितरण निम्नलिखित कारकों द्वारा प्रभावित होता है।
i. अक्षांश (Latitude) या भू-मध्य रेखा से दूरी : भू-मध्य रेखा पर सूर्य की किरण लम्बवत पड़ती है जिसके कारण भूमध्य रेखा पर दिन-रात की समान अवधि के साथ-साथ सर्वाधिक सूर्याताप प्राप्त होता है तथा तापक्रम अधिक पाया जाता है। भू-मध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर बढ़ते अक्षांश के साथ दिन की अवधि अधिक होने पर भी सूर्य की किरणों के अधिक तिरछापन के कारण सूर्याताप घटता जाता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि अक्षांश बढ़ता है तो औसत वार्षिक तापक्रम घटता है।

ii. ऊँचाई (Altitude) : समुद्र तल पर उच्च ताप पाया जाता है। समुद्र तल से ऊँचाई के साथ तापक्रम घटता जाता है। वायुमण्डल अपनी अधिक उष्मा पृथ्वी द्वारा होने वाला विकिरण से प्राप्त लेता है, अत: धरातल के सम्पर्क में आने वाला भाग सबसे अधिक उष्मा प्राप्त करता है। सामान्यत: 165 मीटर की ऊँचाई पर 1°C अथवा 1 कि०मी० की दूरी पर 6.4°C तापक्रम गिर जाता है। यही कारण है कि पर्वतीय भाग मैदानों की अपेक्षा अधिक ठण्डे होते हैं। नई दिल्ली की अपेक्षा शिमला का तापक्रम कम है, क्योंकि शिमला नई दिल्ली की अपेक्षा ऊँचाई पर स्थित है।

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iii. समुद्र तट से दूरी (Distance from the sea coast) : समुद्र के पर्वतीय भागों में तापक्रम का प्रभाव समकारी होता है क्योंकि स्थल की अपेक्षा जल देर से गरम होता है और देर से ही ठण्डा होता है। यही कारण है कि समुद्र के निकटवर्ती भागों में तापान्तर कम होता है तथा उससे दूर जाने पर तापान्तर बढ़ता जाता है। उदाहरण के लिए मुम्बई का तापमान नई दिल्ली के तापक्रम की अपेक्षा अधिक समकारी है क्योंकि मुम्बई समुंद्र तट पर स्थित है जबकि नई दिल्ली समुद्र तट से काफी दूरी पर स्थित है।

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iv. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) : महासागरीय धाराएँ भी तटवर्ती क्षेत्रों के तापक्रम को प्रभावित करती हैं। जिन क्षेत्रों में गरम धारा बहती हैं वहाँ का तापक्रम अधिक होता है, इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में ठण्डी धारा बहती है, उन क्षेत्रों का तापक्रम कम हो जाता है। उदाहरण के रूप में, गल्फस्ट्रीम यूरोप के उत्तरी-पश्चिमी भाग तथा क्यूरोशिया जापान तथा उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर बहने वाली गरम धाराएँ है जो इन क्षेत्रों का तापक्रम ऊँचा बनाए रखती है। इसके विपरीत लेख्याडोर, पीरू तथा कैलीफोर्निया धाराएँ ठण्डी होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में तापक्रम अधिक नीचा कर देते हैं।

v. पवन की दिशा (Direction of Wind) : जिन स्थानों पर गरम पवनें आती हैं वहाँ का तापक्रम अधिक तथा जहाँ पर ठण्डी पवनें आती हैं वहाँ का तापक्रम कम होता है। जैसे – उत्तरी भारत के मैदानी भाग में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली लू से कई बार तापक्रम 45°C तक पहुँच जाता है। इसी प्रकार शीत ऋतु में हिमालय पर्वतीय क्षेत्र से आने वाली ठण्डी वायु अर्थात बर्फीली हवा से तापक्रम काफी नीचे गिर जाती है।

vi. भूमि का ढाल (Slope of the land) : यह कथन सत्य है कि भूमि का जो ढाल सूर्य के समाने आते हैं वे अधिक सूर्याताप प्राप्त करते हैं और वहाँ का तापक्रम भी अधिक होता है। इसके विपरीत, जो ढाल सूर्य से परे होते हैं वहाँ पर सर्याताप कम प्राप्त होता है और वहाँ का तापक्रम भी कम होता है ।
जैसे – हिमालय तथा आल्पस पर्वतों के दक्षिणी ढलानों पर तापक्रम अधिक तथा उत्तरी ढलानों पर तापक्रम कम पाया जाता है।

vii. भू-तल का स्वभाव (Nature of the Surface) : हिम तथा वनस्पति से ढँक हुए भू-तल सूर्य से प्राप्त हुए अधिकांश ताप को परावर्तित कर देते हैं। अतः इन क्षेत्रों में तापक्रम अधिक नहीं हो पाता। इसके विपरीत, बालू तथा काली मिट्टी से ढके हुए क्षेत्र अधिकांश सूर्याताप का अवशोषण कर लेते हैं और वहाँ पर तापक्रम अधिक होता है।

viii. मेघ तथा वर्षा (Cloud and Rainfall) : जिन प्रदेशों में मेघ छाए रहते हैं तथा वर्षा होती है वहाँ का तापक्रम अधिक नहीं होता क्योंकि मेघ सूर्य की किरणों का परावर्तन कर देते हैं। उदाहरणतया, भूमध्य रेखीय खण्ड में सूर्य की किरणों के लम्बवत पड़ने के अलावा भी वहाँ पर इतना अधिक तापक्रम नहीं हो पाता जितना मेघरहित उष्ण मरूस्थलीय भागों में हो जाता है।

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प्रश्न 4.
वायुमण्डल के संकेन्द्री-परतों का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
वायुमंडल के क्षोभमंडल एवं समतापमंडल के स्तरों का संक्षेप में वर्णन करो।
अथवा
वायुमण्डल को कितने भागों में बाँटा गया है प्रत्येक का वर्णन करो।
उत्तर :
पृथ्वी के तल से लेकर अपनी उच्चतम सीमा तक वायुमंडल सकेन्द्री परतों के रूप में विस्तृत है जो अपने घनत्व, तापमान तथा गैसीय संघटन की दृष्टि से एक दूसरे से हमेशा अलग है। वायुमण्डल की पर्त निम्नलिखित हैं जिसे नीचे सचित्र वर्णन किया जा रहा है

क्षोभमण्डल (Troposphere) : यह वायुमण्डल की सबसे निचली एवं सघन परत है, जिसमें वायु के सम्पूर्ण भार का 75 % भाग पाया जाता है। धरातल से इस परत की औसत ऊँचाई 14 कि॰मी० मानी जाती है। यह परत भूमध्य रेखा से धुवों की ओर पतली होती जाती है। भूमध्य रेखा पर संवहन धारा के कारण इसकी ऊँचाई 18 कि०मी० एवं ध्रुवों पर 8 से 10 कि॰मी० होती है। जलवाष्प तथा धूल-कण की उपस्थिति के कारण बादलों का निर्माण, तूफान, चकवात आदि की उत्पत्ति जैसी मौसम सम्बन्धित घटनाएँ इसी मण्डल में होती है। इस मण्डल को संवहन मण्डल भी कहा जाता है क्योंकि संवहन धाराएं इस मण्डल के बाह्य सीमा तक सीमित होती है।

इस परत में ऊँचाई के साथ-साथ तापमान में गिरावट दर 1°C प्रति 165 मी० या 3.6°F 100 मीटर है। इसलिए इसे सामान्य हास दर (Normal Lapse Rate) कहा जाता है। बादल, तूफान आदि के कारण यह मण्डल वायुयानों के उड़ने के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यह मण्डल विकिरण (Radiation), संचालन (Conduction), और संवहन (Convection) द्वारा गर्म एवं ठण्डा होता है। क्षोभमण्डल एवं समतापमण्डल के बीच स्थित संक्रमण स्तर को क्षोभ सीमा (Tropopause) कहा जाता है।

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प्रश्न 5.
अल नीनो (EL-Nino) का प्रभाव ग्लोब पर कैसा है व्याख्या कीजिए।
अथवा
अल नीनो का विश्व पर कैसे प्रभाव पड़ता है वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अल नीनो का वैश्विक प्रभाव (Effect of El-Nino) :- लगभग उसे 8 वर्षो के अंतराल के पश्चात महासागरों एवं विश्व की जलवायु में एक विचित्र परिवर्तन देखने को मिलता है। इसकी शुरूआत पूर्वी प्रशान्त महासागर से होती है एवं लगभग एक वर्ष की अवधि के लिए उसका प्रभाव सम्पूर्ण विश्व में फल जाता है।

अलनीनो की उत्पत्ति के साथ ही तटवर्ती क्षेत्र में सतह के नीचे जल का स्तर उपर आना बंद हो जाता है उसके फलस्वरूप ठण्डे जल का स्थानातंरण पश्चिम से आने वाले गर्म जल द्वारा होने लगता है एवं प्लैस तथा मछलियाँ विलुप्त होने लगती हो इन मछलियों पर निर्भर पक्षी भी मरने लगती है।

अलनीनो के कारण दक्षिणी मध्य प्रशान्त महासागर में भयानक उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है। जब पश्चिमी प्रशान्त महासागर के उच्च दाब क्षेत्र का फैलाव फिलीपीन, श्रीलंका एवं भारत तक हो जाता है, तो उस भाग में सूखा पड़ता है। अलनीनो की घटनाओं के बीच एक विपरीत एवं पूरक घटना देखने को मिलता है जिसे ला-नीनो (La-Nino) कहा जाता है।

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प्रश्न 6.
पृथ्वी पर हवा की पेटियों के खिसकाव का संक्षिप्त व्यख्या कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर हवा की पेटियों का खिसकाव (Shifting of the Wind Belts on the Earth) : पृथ्वी का अपनी कक्ष पर झुकी हुई होने तथा अण्डाकार मार्ग पर सूर्य की परिक्रमा करने के फलस्वरूप धरातल पर सूर्य की किरणें कभी एक सी नहीं चमकती। सूर्य कभी कर्क रेखा और कभी मकर रेखा पर सीधा चमकता है। सूर्य के इस प्रकार कभी उत्तरायण तो कभी दक्षिणायण होने के कारण वायुदाब और हवाओं की पेटियाँ कुछ उत्तर तथा कुछ दक्षिण की ओर खिसकती रहती है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत चमकता है जिस कारण सभी वायुदाब की पेटियाँ उत्तर दिशा में खिसक जाती है। भूमध्य-रेखीय दाब 0° तथा 10° अक्षांशों के बीच उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च दाब 30°-40° अक्षांशों के बीच हो जाता है, इस कारण उनसे संबंधित वायुदाब की पेटियां भी अपने निर्दिष्ट स्थान से उत्तर की ओर खिसक जाती हैं।

21 जून के बाद सूर्य भूमध्य रेखा की ओर अग्रसर होता है तथा 23 सितम्बर को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् चमकता है जिस कारण वायु-पेटियाँ अपनी वैसी ही स्थिति में आ जाती है, उसके बाद सूर्य दक्षिणायण हो जाता है तथा 22 दिसम्बर को मकर रेखा पर लम्बवत् होता है, जिस कारण वायुदाब तथा वायु पेटियां दक्षिण की ओर खिसक जाती है। पुन: सूर्य 21 मार्च को भूमध्य रेखा पर लम्बवत् होने के कारण ये पेटयाँ वैसी ही स्थिति में आ जाती हैं। इस तरह ॠतु परिवर्तन के साथ वायु पेटियों में स्थानान्तरण होता रहता है।

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प्रश्न 7.
मुख्य ज्वार एवं गौण ज्वार के उत्पति के कारण क्या है ?
उत्तर :
मुख्य ज्वार (Primary tide) : पृथ्वी के उस भाग के समुद्री जल के चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं जो चन्द्रमा व सूर्य के समीपस्थ पड़ता है। वहाँ केन्द्रापसारी बल की अपेक्षा गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक होती है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा की ओर आकर्षित होकर ऊपर उठ जाता है। इस जल चढ़ाव को प्रत्यक्ष ज्यार (Direct tide) या प्रारम्भिक या मुख्य ज्वार (Primary tide) कहते हैं।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव (Impact of Climatic Change) : वर्तमान समय में विश्वभर में हो रहे जलबायु परिवर्तन की व्याख्या निम्नलिखित रूप से की जा रही है।

  1. विश्व के बहुत से स्थानों का तापमान बढ़ रहा है। यह संभवतः मानवीय क्रियाकलापों से ग्रीन हाउस गैसों जैसे CO2, CFCs, CH4, N2O के बढ़ने के कारण हुआ है।
  2.  तापमान के बढ़ने से विभिन्न प्रदेशों में आने वाले भयकर तुफानों की संख्या बढ़ी है।
  3. विश्व के बहुत से आर्द्र प्रदेश शुष्क हो गए हैं और उनमें फैलाव की संभावना है।
  4. विश्व के कुछ भागों में भयकर तूफान के आने से बाढ़ें आ सकती हैं।

गौण ज्वार (Indirect Tide) : पृथ्वी का वह भाग जो चन्द्रमा के ठीक विपरीत दूरस्थ भाग पर पड़ता है तो इस भाग में गुरुत्वाकर्षण शक्ति की अपेक्षा केन्द्रापसारी बल अधिक होता है। अत: इस भाग का जल चन्द्रमा से दूर हट कर उपर उठ जाता है। इसे अप्रत्यक्ष ज्वार या गौण ज्वार कहते हैं।

प्रश्न 8.
ओजन परत की सृष्टि कैसे होती है ? ओजोन परत क्षरण के प्रमुख गैस की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ओजोन छिद्र का पता सर्वप्रथम 1985 में अंटार्कटिका के ऊपर फारमान द्वारा लगाया गया, उसके बाद ओजोन छिद्र का पता आकर्टिक एवं उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में भी लगाया गया।

समताप मंडल में 20 से 35 कि॰मी० के बीच ओजोन गैस की परत पाई जाती है। ओजोन की यह परत सूर्य की किरणों से विकरित पाराबैगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। जब विभित्र सोतों से उत्सर्जित क्लोरिन गैस ऊपर उठती है तो वह (ओजन) से प्रतिक्रिया करके क्लोरीन मोनो आक्साइड एवं आक्सीजन का निर्माण होता है। क्लोरीन का एक अणु ओजोन के अनेक अणुओं का विनाश करने में सक्षम होता है, चूकि ध्रुवों के निकट ओजोन मण्डल की ऊँचाई कम होती है। अत: यहाँ ओजोन क्षरण की समस्या सर्वाधिक गम्भीर है।

ओजोन क्षरण का मुख्य कारण (CFCs) है। उस गैस का प्रयोग प्रशीतक, प्रणोदक, इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की सफाई तथा आग वाली प्लास्टिक के निर्माण आदि कार्यो में होता है। इसके अलावा काबर्न-डाई-आक्साइड मिथेन आदि गैस है। ये गैसें पृथ्वी के चारों ओर प्रवाहित होकर एक घना आवरण बन देती है। जिससे पृथ्वी पर सौर विकिरण तो आ जाता है परन्तु ये गैस इन्हें वापस आंतरिक्ष में नहीं जाने देती है। उसके फलस्वरूप किरण के तापमान में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 9.
भूमण्डलीय उष्पता के लिए प्रमुख उत्तरदायी कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
वैश्विक तापन या ग्लोबल वार्मिंग से क्या अभिप्राय है ? विश्व के तापमान में वृद्धि के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
भूमण्डलीय उष्णता या वैश्विक तापन या ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) : वायुमण्डल में कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा बढ़ने से वायुमण्डल के तापमान में होने वाली सामान्य वृद्धि को ही भूमण्डलीय उष्णता (Global Warming) कहते हैं।
भूमण्डलीय उष्णता के लिए उत्तरदायी कारक (Factors Responsible for Global Warming) :भूमण्डलीय उष्णता के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं :-
i. जीवाश्म ईंधन का जलना (Burning of Fossil Fuels) : उद्योगों तथा वाहनों के द्वारा जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोल का अधिक मात्रा में प्रयोग करने पर वायुमण्डल में कार्बन-डाइ-आक्साइड (CO2) की मात्रा पिछले सौ वर्षो से 20-25 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

ii. जंगलों का विनाश (Destruction of Forests) : तेजी से बढ़ते हुए औद्योगीकरण के कारण प्राकृतिक वनस्पतियों को मनमाने ढंग से काटा जा रहा है। पेड़-पौधे कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) को अवशोषित करते हैं तथा वायु में आक्सीजन (O2) छोड़ते हैं। वृक्षों की अंधाधुन कटाई के कारण, कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) की मात्रा वायुमण्डल में बढ़ जाने से भूमण्डलीय उष्णता भी अधिक हो गई है।

iii. मिथेन गैस की मात्रा बढ़ना (Increasing amount of the Methane) : पेड़-पौधे एवं जानवरों के अवशेष के सड़ने-गलने से मीथेन (CH4) गैस की उत्पत्ति होती है जो वायुमण्डल के तापक्रम को बढ़ाने में सहायक है।

iv. क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन का बढ़ना (Increasing of Chloro-Fluoro-Carbons) : क्लोरा-फ्लोरोकार्बन (CFCS) गैस का प्रयोग फ्रिज और हवाई छिड़काव के लिए किया जाता है। इस गैस की मात्रा में वृद्धि, पृथ्वी के तापमान की वृद्धि के लिए उत्तरदायी है।

v. ओजोन परत का क्षरण (Depletion of Ozone Layer) : ओजोन परत के क्षय के कारण सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सीधे पहुँचने से धरातल के तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे भूमण्डलीय उण्णता भी अधिक हो गई है।

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प्रश्न 10.
जलवायु परिवर्तन से आप क्या समझते हो? वर्तमान समय में विश्व में हो रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
जलवायु परिवर्तन (Climatic Change ) : जलवायु, दूसरे भौतिक तत्वों के समान नहीं है बल्कि परिवर्तनशील है। कम या अधिक इसमें हमेशा परिवर्तन होता रहता है। आजकल जलवायु परिवर्तन को भविष्य में होने वाली एक विशेष घटना के रूप में देखा जाता है। अन्तरराष्ट्रीय पैनेल में जलवायु परिवर्तन के द्वारा समय-समय पर वायुमण्डल में उपस्थित हरित गृह गैसों की सान्द्रता एवं इसमें वृद्धि का आकलन किया जाता है तथा इसमें हो रहे दुष्भभावों की व्याख्या भी की जाती है।

अभी तक वैश्विक तापन के फलस्वरूप पृथ्वी के तापक्रम में 1°C का बढ़ोतरी पहले से ही चुका है और विकास एवं औद्योगीकरण की दर यदि यही बनी रही तो 21 वीं शताब्दी के अन्त तक पृथ्वी के तापक्रम में 1.5°C से लेकर 5.4°C तक की वृद्धि दर्ज की जा सकेगी। इस प्रकार पृथ्वी के गर्माने से हवाओं के रूख में परिर्वतन हो जायेंगे और वर्षा के क्रम में भी अनेक परिवर्तन उत्पन्न होंगे।

प्रश्न 11.
ग्लोब पर तापमान के प्रादेशिक वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व के तापकटिबन्धों या पेटियों की सचित्र व्याख्या कीजिए।
अथवा
ताप कटिबंधों की व्याख्या करो।
उत्तर :
ग्लोब पर प्रमुख तापकटिबन्धों या पेटियों का विभाजन (Division of Main Temperature Zones on the Globe) : तापमान के आधार पर विश्व को निम्नलिखित तीन कटिबन्धो में विभाजित किया गया है।
i. उष्ण कटिबन्ध (Tropical or Torrid Zones)
ii. शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zones)
iii. शीत कटिबन्ध (Frigid or Cold Zones)

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i. उष्ण कटिबन्ध (Tropical or Torrid Zone) : इसे विषुवत रेखीय कटिबन्ध (Tropical Equatorical Zone) भी कहते हैं। यह भू-मध्य रेखा से दोनों ओर 23 1/2° N/S तक फैला हुआ है। इसकी सीमांतक रेखा को उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा (Tropic of Cancer) और दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा (Tropic of Capricar) कहते हैं। इस कटिबन्ध में सूर्य की सीधी किरणें अन्य स्थानों से अधिक पड़ती है, इसलिए यहाँ तापमान हमेशा उच्च रहता है और यह उष्ण कटिबन्ध कहलाता है।

ii. शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zones) : यह दोनों गोलार्द्धों में 23 1/2° N / S से 66 1/2° N/S अक्षांशों के बीच फैला हुआ है। उत्तर में उत्तरी ध्रुव वृत्त और दक्षिण में दक्षिणी ध्रुव वृत्त (Artic Circle and Antartic Circle) इसकी सीमाएँ बनाती हैं। इस कटिबन्ध में जाड़े और गरमी के तापमान का अन्तर अधिक हो जाता है। पृथ्वी का अधिकांश भाग इस भाग में स्थित है।

iii. शीत कटिबन्ध (Frigid or Cold Zones) : यह शीतोष्ण कटिबन्ध से उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव (North Pole 90°) तक तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव (South Pole 90° ) तक फैला हुआ है। इस कटिबन्ध में बहुत अधिक सरदी पड़ती है। इस कटिबन्ध में सूर्य की किरणें बहुत ही तिरछी पड़ती है जिसके कारण यहाँ तापमान बहुत ही कम होता है, इसलिए इसे शीत कटिबन्ध कहा जाता है।

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प्रश्न 12.
वायुमण्डल का गरम एवं ठण्डा होने के प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
वायुमण्डल किन-किन विधियों द्वारा गरम एवं ठण्डा होता है इनकी व्याख्या प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
वायुमण्डल का गरम एवं ठण्डा होना (Heating and Coolling of the Atmosphere) : वायुमण्डल के गरम एवं ठण्डा होने की क्रियाएँ मुख्य रूप से संचालन, संवहन, विकिरण तथा अभिवाहन की विधियों से प्रस्तुत होती हैं।
i. संचालन (Conduction) : संचालन क्रिया के अंतगर्त एक अणु स्पर्श द्वारा दूसरे अणु को उष्मा प्रदान करता है। यह तभी संभव होता है जब वस्तुओं के तापक्रम में विभिन्नता होती है तथा यह क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि दोनों वस्तुओं का तापक्रम समान न हो जाय। दिन के समय पृथ्वी की धरातल सूर्याताप द्वारा गरम हो जाता है। इस कारण जब वायुमण्डल की शीतल वायु तप्त धरातल के सम्पर्क में आती है तो संचालन के द्वारा वह भी गरम हो जाती है क्योंकि वायु ऊष्मा की कुचालक है। अत: इस प्रक्रिया के द्वारा वायुमण्डल की केवल निचली परते ही गरम होती हैं।

ii. संवहन (Convection) : सौर विकिरण से ऊष्मा प्राप्त करने के बाद धरातल गर्म होने लगता है जिस कारण उसके सम्पर्क में आने वाली वायु गरम होकर ऊपर उठती है तथा फैल कर हल्की हो जाती है। इसके विपरीत ऊपर स्थित वायु अपेक्षाकृत ठण्डी होने के कारण भारी होने से नीचे उतरती है, जिस कारण नीचे उतरने से सिकुड़कर भारी होने तथा धरातलीय तापक्रम से गरम होती है। पुन: हल्की होकर ऊपर उठती है। इस तरह वायुमण्डल में संवहन तरंगों का आविर्भाव होता है जिससे ऊष्मा का स्थानांतरण होने रहने से वायुमण्डल ऊँचाई तक गरम हो जाता है।

iii. विकिरण (Radiation) : किसी पदार्थ के ऊष्मा तरंगों के संचार द्वारा सीधे गरम होने को विकिरण कहते हैं। सूर्याताप को ग्रहण करने और उसे ताप में बदल देने से पृथ्वी का धरातल गरम हो उठता है। फलत: गरम धरातल ताप को पुन: शून्य में प्रसारित करने लगता है। इस प्रकार पृथ्वी से होने वाले विकिरण को भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) कहते हैं। वायुमण्डल के ऊपरी भाग में कई प्रकार की गैसें और धूल कण भी स्वतंत्र रूप से सूर्याताप ग्रहण करते हैं और फिर गरम होकर स्वयं ताप शक्ति को प्रसारित करते हैं।

इनके द्वारा प्रसारित ताप पृथ्वी के धरातल पर पहुँचता है और धरातल को गरम करने में महत्वपूर्ण स्थान लेता है। इस प्रकार यह पृथ्वी से नष्ट होने वाली ताप शक्ति को बनाए रखने में सहयोग देता है। सूर्यताप पृथ्वी के धरातल पर लघु तरंगों (Short Waves) के रूप में पहुँचता है जबकि भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) लम्बी तरंगों (Long Waves) के रूप में होता है। वायुमण्डल सूर्याताप की अपेक्षा भौमिक विकिरण से अधिक गरम होता है।

iv. अभिवहन (Advection) : इस प्रकिया में ऊष्मा का क्षैतिज दिशा में स्थानान्तरण होता है। गरम वायु-राशियाँ जब ठण्डे क्षेत्रों में जाती हैं तो उन्हें गरम कर देती है। इससे ऊष्मा का संचार निम्न अक्षांशीय क्षेत्रों से उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों तक भी होता है। वायु द्वारा संचालित समुद्री धाराएँ भी उष्ण कटिबन्धों से धुवीय क्षेत्रों में ऊष्मा का संचार करती है।

प्रश्न 13.
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
किसी स्थान प्रदेश के वायुदाब को प्रभावित करने वाले तत्वों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या करो।
उत्तर :
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting the Pressure belts) : पृथ्वी पर वायुदाब सर्वन्न समान नहीं है। कहीं अधिक वायुदाब है तो कहीं कम। वायुदाब की इस भिन्नता के कारण निम्नलिखित हैं :-
i. वायु का तापमान (Temperature of the Air) : वायुदाब और तापमान में घनिष्ठ सम्बन्ध है। वायु का तापमान बढ़ जाने पर उसका आयतन बढ़ जाता है और यह फैलकर इधर-उधर चलने लगती है, इससे वायु का दबाव कम हो जाता है, परन्तु जब तापमान घट जाता है तो वायु सिकुड़कर एक जगह एकत्रित होने लगती है, जिससे वायुदाब बढ़ जाता है। इस तरह तापमान में परिवर्तन के साथ-साथ वायुदाब भी घटता-बढ़ता रहता है। अर्थात हम कह सकते हैं कि तापमान अधिक हुआ तो वायुदाब कम होगा और यदि तापमान कम हुआ तो वायुदाब अधिक होगा। यही करण है कि भूमध्य रेखा के आस-पास तापमान अधिक होने पर वायुदाब कम तथा धुवों के पास तापमान कम होने पर वायुदाब अधिक होता है।

ii. वायु का जलवाष्प (Water Vapour) : जलवाष्प हवा से हल्की होती है, अत: अधिक जलवाष्प युक्त वायु हल्की होती है और उसका दाब कम होता है। शुष्क वायु भारी होती है, अत: उसका दाब अधिक होता है। ऋतु के अनुसार जलवाष्प की मात्रा घटती-बढ़ती रहती है। यही कारण है कि वर्षा ॠतु में आर्द्र वायु होने पर वायु दाब कम होता है। शीत ॠतु में शुष्क वायु के कारण वायुदाब अधिक होता है।

iii. पृथ्वी की दैनिक गति (Rotation of the Earth) : पृथ्वी की दैनिक गति से उत्पन्न अपकेन्द्री बल के कारण विषुवत रेखीय भागों मे वायु दूर हटती है, दूसरी ओर उपधुवीय क्षेत्रों के वायु गुरूत्वाकर्षण के कारण निम्न अक्षाशशों की ओर खिचती है। फलस्वरूप 40° तथा 50° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के बीच हवाएँ उतरती है और वहां के वायुभार को बढ़ा देती है।

iv. ऊँचाई का प्रभाव (Effect of Altitude) : वायुदाब वायुमण्डल के वजन के कारण होता है। समुद्र तल पर वायुमण्डल की पूरी ऊँचाई का भार पड़ता है, अत: वहाँ वायुदाब सबसे अधिक होता है वहाँ से जैसे-जैसे हम ऊपर जाते है वैसे-वैसे हमारे ऊपर वायुदाब की मात्रा कम होती जाती है। ऊपर की वायु विरल भी होती है। वैज्ञानिको का मत है कि से 6 कि॰मी॰ की ऊँचाई पर वायुदाब आधा हो जाता है। 11 कि॰मी॰ की ऊँचाई पर तो वजन एक चौथाई रह जाता है।

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प्रश्न 14.
पृथ्वी पर वायुदाब की पेटियों का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
ग्लोब पर वायुमण्डलीय दाब के क्षैतिज वितरण को चित्र के साथ व्याख्या कीजिए।
अथवा
पृथ्वी पर वायुभार की कितनी पेटियाँ हैं। चित्र की सहायता से उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वायुदाब की पेटियाँ (Pressure Belts) : यदि पृथ्वी स्थिर होती, तो विषुवत रेखा के निकट निम्न वायुदाब एवं धुवों के निकट उच्च वायुदाब की उच्च पेटियाँ मिलती। परन्तु पृथ्वी की दैनिक गति के कारण उपरोक्त दोनों पेटियों के अलावा दोनों ही गोलार्द्धों में वायुदाब की और दो-दो पेटियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार वायुदाब की कुल सात पेटियाँ ग्लोब पर देखने को मिलती है जिन्हें दाब कटिबन्ध (Pressure Belt) भी कहा जाता है।
इस प्रकार सम्पूर्ण ग्लोब पर सात वायुमण्डलीय दाब पेटियों को चार समूहों में सचित्र वर्णन किया जा रहा है।

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i. भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब की पेटी (Equatorial Low Pressure Belt) : इस पेटी का विस्तार भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° या 10° अक्षांशों तक हुआ है। भूमध्य रेखा पर सालों पर सूर्य की किरणें लगभग लम्बवत पड़ती है जिंसके कारण सालों पर तापमान ऊँचा रहता है। अधिक तापमान के कारण इस क्षेत्र की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है जिसे निम्न वायु दाब पेटी का निर्माण हाता है। इस कम दाब की पेटी का प्रत्यक्ष सम्बन्ध तापमान से है, अत: इसे तापजन्य न्यूनदाब की पेटी (Thermal Pressure Belt) भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में सामन्यतः धरातलीय क्षैतिज पवन नहीं चलते है व्योंकि इस कटिबन्ध में आने वाली इसकी सीमाओं के समीप पहुँचते ही गर्म होकर ऊपर उठने लगती है। इस प्रकार इस कटिबन्ध में केवल उर्ध्वाधर या संवहनीय वायु धाराएँ पायी जाती है। वायुमण्डलीय दशा के अत्यधिक शांत रहने के कारण ही इस कटिबन्ध को शांत कटिबन्ध (Calm Belt) या डोलडूम (Doldrum) कहा जाता है।

ii. उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च वायु दाब की पेटियाँ (Sub-Tropical High Pressure Belts) : उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्दो में क्रमशः कर्क ओर मकर रेखाओं से 35° अक्षांशों के बीच उच्च वायुदाब की पेटियाँ पायी जाती है। इन पेटियों में उच्चदाब होने के कारण यह तापीय नहीं है बल्कि यह पेटी पृथ्वी की दैनिक गति एवं वायु के अवतलन से सम्बन्धित है, अर्थात यह उच्च वायुदाब गतिजन्य है।

इस पेटी में उच्च वायुदाब की उत्पत्ति का दूसरा कारण कारिआलिस बल है। भूमध्य रेखीय क्षेत्र से वायु ऊपर की ओर उठती है एवं धुवों की ओर चलने लगती है। वायुमण्डल के ऊपरी भाग में घर्षण के अभाव के कारण कारिआलिस बल के प्रभाव से ये हवाएँ उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में क्रमशः दायी एवं बायी और मुड़ने लगती है। इस वायु दाब पेटी को अश्व अक्षांश (Horse Latitude) भी कहा जाता है क्योंकि प्राचीनकाल में घोड़े से भरा पालवाला जलयान जब इस पेटी में पहुँचता या तो वायु के शांत रहने के कारण जलयान को आगे बढ़ने में कठिनाई होती थी। अतः जलयान के भार को कम करने के लिए कुछ घोड़ों को समुद्र में फेंक दिया जाता था। इस भार का सबसे अधिक प्रभाव 30°-35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के बीच पड़ा, इसलिए इसे ही अश्व अक्षांश (Horse Latitude) कहा जाने लगा।

iii. उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियाँ (Sub-Polar Low Pressure Betls) : ये वायुदाब पेटियाँ क्रमशः 45° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों से क्रमशः आर्कटिक एवं अंटार्कटिक वृतों की बीच दोनों गोलार्द्धो में स्थित है। सालों पर कम तापमान होने के कारण भी यहाँ निम्न वायुदाब मिलता है। स्पष्ट है कि इस कम वायुदाब का तापमान से कोई सम्बन्ध नहीं है। वास्तव में पृथ्वी की दैनिक गति के कारण इन अक्षांशों से वायु फैलकर स्थानांतरित हो जाती है, जिस कारण गति जन्य (Dynamically Induced) वायुदाब का आविर्भाव होता है। यद्यपि इस प्रक्रिया का प्रभाव सबसे अधिक धुवों पर होना चाहिए, परन्तु वहाँ पर तापमान इतना न कम हो जाता है कि पृथ्वी की दैनिक गति के कारण वायु के फैलने का कारक कमजोर पड़ जाता है, जिसके कारण धुवो पर उच्च दाब हो जाता है जबकि उपध्रुव पर निम्न वायुदाब हो जाता है।

iv. ध्रुवीय उच्च दाब की पेटियाँ (Polar High Pressure Belts) : 80° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांश से उत्तरी धुव तथा दक्षिणी धुव तक उच्च वायुदाब की पेटियाँ पायी जाती है, जिन्हें धुवीय उच्च वायुदाब की पेटियाँ कहा जाता है। श्रुवों पर तथा समीवर्ती क्षेत्रों में अत्यंत शीत के कारण वायुदाब स्वभावतः उच्च हो जाता है। अत: यह उच्च वायुदाब ताप जन्य (Thermally induced) होता है।

प्रश्न 15.
शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात और उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए। अथवा, शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात और उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
शीतोषण कटिबन्धीय चक्रवात (Temperate Cyclone) :

  1. शीतोष्पा कटिबन्धीय चक्रवात में समदाब रेखाएँ प्राय: ‘V’ आकार की होती है।
  2. इनमें दाब प्रव्वणता (Pressure Gradient) हल्की होती।
  3. इनका विकास जल और स्थल दोनों पर होता है।
  4. इनमें वायु धीमी गीत से पश्चिम से पूरब की ओर चलती है।
  5. शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में वर्षा धीरे-धीरे तथा कई दिनों तक होती रहती है।
  6. ये शीत ॠतु में अधिक उत्पन्न होती है।
  7. शीतोण्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार हजारों वर्ग कि०मी० क्षेत्र में होता है।

उष्मा कटिबन्धीय च्रकवात (Tropical Cyclone) :

  1. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में समदाब रेखाएँ प्राय: गोलाकार होती है।
  2. इनमें दाब प्रवणता (Pressure Gradient) तीव्र होती है।
  3. इनका विकास केवल समुद्री भाग में होता है।
  4. इनमें वायु तीब्र वेग से पूरब से पश्चिम की ओर चलती है।
  5. उष्णा कटिबन्धीय चक्रवात में वर्षा तीब गति के साथ कुछ घण्टों से अधिक नहीं होती है।
  6. ये ग्रीष्म ऋतु में अधिक उत्पन्न होते हैं।
  7. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार 80 से 300 कि॰मी० तक होती है।

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प्रश्न 16.
सामयिक पवन से आप क्या समझते हैं? सामयिक पवन को कितने वर्गों में विभाजित किया गया है ? किसी एक सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
अस्थायी पवन किसे कहते हैं ? तथा इसे कितने वर्गों में रखा गया है ?
अथवा
मानसूवी पवन, स्थलीय समीर तथा सागरीय समीर और पर्वत तथ्था घाटी समीर का अर्थ क्या है?
अथवा
धरातल पर प्रवाहित होनेवाली सामयिक पवनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सामयिक पवन या अस्थायी या ऋतु पवन (Periodical wind or Temporary Wind or Seasional Wind) : धरातल पर कुछ ऐसी पवनें भी चलते हैं जो हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलती बल्कि समय के अनुसार इनकी दिशा बदलती रहती हैं। अत: वे पवनें जिनकी गति तथा दिशा समय के अंतर के अनुसार बदलती रहती है, सामयिक या अस्थायी या ॠतु पवन कहा जाता है।
सामयिक पवनों को निम्नलिखित वर्गों में रखा गया है।
i. मानसूनी पवन (Monsoon Wind)
ii. स्थलीय तथा सागरीय समीर (Land and Sea Breeze)
iii. पर्वत तथा घाटी समीर (Mountain or Catabatic Wind and Valley or Anabatic wind)

i. मानसूनी पवने (Monsoon Winds) : ‘मानसून’ शब्द मूलरूप से अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से बना है जिसका तात्पर्य ‘मौसम’ से होता है। अत: मानसूनी पवनें वे पवनें हैं जिनकी दिशा मौसम के अनुसार बिल्कुल उलट जाती है। ये पवनें ग्रीष्म ॠतु में छ: माह में समुद्र से स्थल की ओर तथा शीत ऋतु में छ: माह में स्थल से समुद्र की और चला करती है।

मानसून शब्द का प्रयोग सबसे पहले अरब सागर पर बहने वाली हवा के लिए किया गया था, जिसकी दिशा में उलट फेर होते रहता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर उत्तरी गोलार्द्ध में उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध एवं तापीय विषुवत रेखा कुछ उत्तर की ओर खिसक जाती है। एशिया में स्थलखण्ड के प्रभाव के कारण यह खिसकाव अधिक होता है, उसके फलस्वरूप विषुवतीय पछुआ पवन भी उत्तर की ओर खिसक जाती है। ये पवन महासागर से स्थल पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के रूप में प्रवाहित होने लगती है। सूर्य के दक्षिणायन होने पर उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध एवं तापीय विषुवत रेखा दक्षिण की ओर वापस लौट आते हैं। पुन: उत्तर-पूरब वाणिज्य पवन चलने लगती है, यही शीतकालीन या उत्तर-पूर्वी मानसून है।

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ये पवनें मुख्य रूप से भारत, बंगलादेश, म्यानमार, श्रीलंका, पाकिस्तान, अरब चीन तथा जापान में चलती है।

ii. स्थलीय तथा सागरीय समीर (Land and Sea Breeze) : स्थलीय तथा सागरीय समीर संसार का एकमात्र स्थल तथा जल का गरम एवं ठंडा होने में परस्पर विरोधी स्वभाव का होना है।
दिन के समय स्थलीय भाग जल की अपेक्षा शीघ्र गरम हो जाता है। जिस कारण सागरवर्ती तटीय भाग पर निम्न दाब तथा सागरीय भाग पर उच्च दाब स्थापित हो जाता है, और सागर से स्थल की ओर हवाएँ चलने लगती हैं जिन्हें सागरीय या जलीय समीर (Sea Breeze) कहा जाता है।

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सूर्यास्त के बाद ही जलीय समीर समाप्त होने लगती है क्योंकि स्थलीय भाग से जल की अपेक्षा तीव्र विकिरण होने से उष्मा का ह्रासं अधिक होने से स्थालीय भाग पर उच्च वायुदाब तथा सागरों पर निम्न वायुदाब बन जाता है परिणामस्वरूप स्थल से जल की ओर हवाएँ चलने लगती हैं जिन्हें स्थलीय समीर (Land Breeze) कहते हैं।

iii. पर्वतीय तथा घाटी समीर (Mountain or Valley Breeze) : रात्रि के समय पर्वतीय ढालों तथा ऊपरी भागों पर विकिरण द्वारा ताप ह्रास अधिक होता है जिस कारण हवाएँ ठण्डी हो जाती हैं ये ठण्डी तथा भारी हवाएँ पर्वतीय ढालों के सहारे घाटियों में बीच में उतरती हैं, इन्हे ही पर्वतीय समीर या कैटाबेटिक पवन (Mountain or Catabatic Wind) कहा जाता है।

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दिन के समय पर्वतीय घाटियों के निचले भागों में अधिक तापमान के कारण पर्वतीय ढ़लानों के सहारे घाटी से ऊपर उठती है। इन्हें ही घाटी समीर या एनाबेटिक पवन (Valley Breeze or Anabatic Wind) कहा जाता है।

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प्रश्न 17.
धरातलीय मौसम पर जेट स्ट्रीम के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) उच्च स्तरीय पवन संचार व्यवस्था का अंग है। क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में क्षोभसीमा के निकट पश्चिम से पूरब की ओर अत्यंक तीव्र गीत से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है।

धरातल पर पाये जाने वाले मौसम एवं जेट स्ट्रीम में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धवुीय वाताग्र, जहाँ शीतोष्ण कटिबन्धीय चकवातों की उत्पत्ति होती है तो इसका सम्बन्ध जेट स्ट्रीम से होता है। अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में शीतोण्ण कटिबन्धीय चक्रवात का विस्तार क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग तक होताहै। जब इनका पथ जेट स्ट्रीम के नीचे पड़ता है तो उनकी प्रचण्डता में वृद्धि हो जाती है एवं वर्षा की मात्रा भी अधिक हो जाती है। चक्रवातों तथा प्रतिचक्रवातों के अलावा जेट स्ट्रोम के प्रभाव के कारण कभी बाढ़ भी आ जाती है तो कभी सूखा पड़ जाती है। इन्हीं के कारण मौसम असाधारण रूप में कभी गर्म तो कभी शीतल हो जाता है।

भारतीय मानसून की उत्पत्ति पर उष्ण पूर्वी जेट एवं उपोष्ण जेट का प्रभाव की पड़ता है। इस प्रकार वर्षा, तूफान, हिमपात शीत लहरिया आदि जेट स्ट्रीम द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।

प्रश्न 18.
फोरटिंस वायुदाब मापी एवं एनीरायड बैरोमीटर से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
फोरटिंस वायुदाब मापी एवं एनीरायड बैरोमीटर का सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
फोरटिंस बैरोमीटर (Fortins Barometer) : यह एक साधारण वायुदाब मापी का ही परिष्कृत रूप है इस यंत्र का अविष्कार फोर्टिन महोदय ने किया था, इसलिए इसका नाम फोटिन का वायुदाबमापी रखा गया है।

यह बैरोमीटर लगभग 100 से॰मी॰ लम्बी काँच की नली के रूप में होता है जो बाहर से एक दूसरे आवरण में बंद रहता है। यह आवरण काँच की नली को दूटने से बचाता है। इस नली में एक पारा (Mercury) भरा रहता है। नली के नीचे की ओर एक हौज होता है जिसमें नली का खुला हुआ निचला सिरा डुबा रहता है। इस हॉंज में चमरे की एक थैली होती है। जिसमें पारा होता है। इस थैली की तली लचीली होती है एवं इसके नीचे समंजन पेंच (Adjustment Screw) होता है जिसकी सहायता से लचीली थैली की तली ऊपर नीचे करके थैली में पारे की सतह को ऊपर नीचे किया जा सकता है। थैली के पारे की सतह के थोड़ा ऊपर हाथी दाँत का बना एक संकेतक (Index) लगा रहता है। इस संकेतक की नोक से शुन्य शुरु होता है।

वायुदाब मापने के लिए पेंच को ऊपर-नीचे करके पारे की सतह को इस प्रकार समायोजित (Adjust) किया जाता है कि वह संकेतक के निम्न भाग को स्पर्श कर सके। वायुभार मापने के लिए बैरोमीटर के ऊपरी भाग में वर्नियर मापक लगा होता है। इसे वर्नियर पेंच की सहायता से ऊपर या नीचे किया जा सकता है। इस वर्नियर का सम्बन्ध काँच की नली के पीछे की ओर स्थिर पीतल की एक प्लेट से होता है। इस प्लेट का निचला सिरा तथा वर्नियर मापनी का शून्य बिन्दु एक क्षैतिज रेखा में होती है। वर्नियर पेंच घुमाने पर यह प्लेट तथा वर्नियर मापनी इकट्ठे ही खिसकते है।

फोरिटिंस बैरोमीटर द्वारा बताया गया वायुभार, सागर तल से होता है, वायुभर इंच, से॰मी॰ तथा मीलीबार किसी भी इकाई में दिखाया जाता है।

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एनीरयड बैरोमीटर (Aneroid Barometer) : यह बैरोमीटर द्रवरहित तथा आकृति में घड़ीनुमा होता है। इसका अविष्कार लुसियन विडाई नामक विद्वान ने किया था। हल्का एवं द्रवरहित होने के कारण हवाई जहाजों में तथा पर्वतों पर चढ़ते समय इसका प्रयोग किया जाता है। इसके डिब्बे के अन्दर से वायु आंशिक रूप में निकाल दी जाती है। इसके अन्दर अत्यंत हल्की, पतली एवं मजबूत तथा लचकदार एक चादर लगी होती है जो वायु के हल्क भार से प्रभावित हो जाती है। इसके ऊपर लीवर तथा स्प्रिंग लगे होते हैं। इस लीवर के साथ एक बारीक धागे से एक सुई लगी होती है जो वास्तविक वायुदाब को प्रकट करती है। इस यंत्र में घड़ी की भाँति डायल बना होता है जिस घर इंच, सी॰मी॰ तथा मिलीवार के निशान बने हाते हैं। जैसे-जैसे वायुदाब में परिवर्तन होते रहता है वैसे-वैसे सुई भी घुमती है। इसके साथ ही डायल पर मौसम भी लिखे रहते हैं, जैसे – तूफानी, वर्षा, परिवर्तन, स्वच्छ तथा अति शुष्क।

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प्रश्न 19.
स्थानीय पवन से आप क्या समझते हैं ? निम्न गर्म स्थानीय तथा ठण्डी स्थानीय हवाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
स्थानीय पवन (Local Wind) : जो पवनें किसी स्थान विशेष पर वहाँ चलने वाली प्रचलित पवन के विपरीत दिशा में चलती है उसे स्थानीय पवन (Local Wind) कहते हैं।
स्थानीय तापमान तथा वायुदाब में अंतर के कारण स्थानीय पवनों की उत्पत्ति होती है। उसका प्रभाव सीमित क्षेत्रों में देखने को मिलता है।
स्थानीय गर्म हवाएँ : निम्न स्थानीय गर्म हवाओं का विवरण नीचे दिया जा रहा है।
i. सिमूम (Simoom) : अरब एवं सहारा के मरूस्थलों में चलने वाली यह एक उष्ण, शुष्क एवं दमघोट हवा है। ये हवाएँ बालुंओं से भरी होती हैं जिसके कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है।
ii. कारा बुरान (Kara-Buran) : यह मध्य एशिया के तारिम बेसिन में चलने वाली गर्म वायु है जो वायु धूल भरी हुई होती है। मध्य एशिया के लोयस के मैदान का निर्माण इसी वायु द्वारा हुआ है।
iii. आयला (Ayala): फ्रांस के सेंट्रल मौसिफ में तीव्र गति से बहने वाली गर्म वायु आयला कहलाती है।

स्थानीय ठण्डी हवाएँ : निम्न स्थानीय ठण्डी हवाओं का नाम इस प्रकार दिया जा रहा है।
i. पैम्पेरो (Pampero) : आर्जेन्टाइना एवं उरून्वे के पम्पास क्षेत्र में दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम से चलने वाली ध्रुवीय पवन है जो बहुत ही शीतल होती है। कभी-कभी ये हवाएँ चक्रवातीय वर्षा भी लाती है।
ii. ट्रामोण्टाना (Tramontana) : पश्चिम भूमध्य सागरीय क्षेत्र में शीलतकाल में प्रवाहित होने वाली शुष्क एवं शीतल हवा को ट्रामोण्टाना कहते हैं।
iii. दक्षिणी बस्टर (Southern Buster) : धुवीय क्षेत्रों में आस्ट्रेलिया में प्रवाहित होने वाली अत्यंत शुष्क एवं शीलत वायु को दक्षिणी बस्टर कहा जाता है।

प्रश्न 20.
अन्तर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान परिषद द्वारा बादलों को कितने वर्गों में रखा गया है? प्रत्येक का संक्षिप्त व्याख्या कीजिए
अथवा
ऊँचाई के आधार पर बादलों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
बादलों का वर्गीकरण (Classification of Clouds) : बादलों को निम्नलिखित वर्गो में रखा गया है।

i. पक्षाभ बादल (Cirrus Clouds) : यह बादल आकाश में सबसे अधिक ऊँचाई अर्थात 7.5 से 10.5 कि०मो० पर पाये जाते हैं। ऐसे बादल कोमल और घने होते हैं। ये सफेद एवं चमकदार रंग के होते हैं। इनके रूप के अनुसार इसका नाम भी घोड़े की पूँछ (Horse’s Tail) रखा गया है। कभी-कभी ये घुंराले बालो की तरह दिखाई दते हैं। इनसे वर्षा नहीं होती है किन्तु ये चक्रवात के आगम के सूचक होते हैं।

ii. स्तरी बादल (Status Clouds) : ये एक प्रकार के निम्न बादल हैं जो धरातल से 2 से 4 कि०मी० की ऊँचाई पर बनते हैं। जैसाकि इनके नाम से प्रकट है इन बादलों में कई परते होती है। इनकी उपस्थिति सभी जगह एक सी रहती है। यह अपने रूप से ऐसे लगते हैं जैसे – कुहरा से भी ऊपर उठ गया हो, परन्तु ये बादल आकाश में पूरी तरह छा जाते हैं। ऐसे बादल शीतोष्ण कटिबन्ध में प्रायः जाड़े की ऋतु में अधिक बनते हैं। ये बादल बहुधा स्थानीय होते हैं और इनके खण्डित होते ही नीला आकाश दिखायी पड़ने लगता है।

iii. कपासी बादल (Cumulus Clouds) : सामान्यतः ये बादल 1 से 3 कि०मी० की ऊँचाई तक पाये जाते है ये लम्ब रूप स्तम्भ की भाँति बने होते हैं। ये बहुत अधिक समतल होते हैं किन्तु शीर्ष हवा की ओर ऊपर उठते हैं। ये फूल गोभी की तरह दिखते हैं। इनका रूप छोटा, श्वेत और रूई की तरह होता है। इनसे कभी-कभी वर्षा होती है।

iv. वर्षी बादल (Numbus Clouds) : ये बादल काले घने पिण्ड के समान होते हैं। ये धरातल से लगभग डेढ़ 1 \(\frac{1}{2}\) कि॰मी० नीचे होते हैं कभी-कभी धरती को छूते नजर आते हैं। इसका कोई विशिष्ट आकार नहीं होता है। ये कुँज रूप में छाये रहते हैं, इनके किनारे आपस में मिले रहते हैं। ये प्राय: इतने सघन होते हैं कि सूर्य की किरणें इनमें प्रवेश कर धरती पर नहीं पहुँच पाती है। इन बादलों से अन्धकार-सा छा जाता है तथा बहुत ही काला होता है। इनसे बहुत ही शीघ तथा मुसलाधार वर्षा होती है।

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प्रश्न 21.
वर्षा कितने प्रकार की होती है ? प्रत्येक का नाम लिखकर सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
संवहनीय वर्षा, पर्वतीय वर्षा एवं चक्रवातीय वर्षा का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वर्षा के प्रकार (Types of Rainfall) : वर्षा मुख्यतः तीन प्रकार का होता है।

  1. संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall)
  2. पर्वतीय वर्षा (Orgraphic or Relief Rainfall)
  3. चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall)

i. संहवनीय वर्षा (Convectional Rainfall) : जब धरातल बहुत गर्म हो जाता है तो उसके साथ लगने वाली वायु भी गर्म हो जाती है। वायु गर्म होकर फैलती और हल्की हो जाती है। यह हल्की वायु ऊपर को उठ लगती है और संवहनीय धाराओं का निर्माण होता है। ऊप जाकर यह वायु ठण्डी हो जाती है और इसमें उपस्थित जलवाष्प का संघनन होने लगता है। संघनन से कपासी बादल बनते हैं जिससे घंनघोर वर्षा होती है। उसे ही संहवनीय वष्ष कहा जाता है।
भूमध्य रेखीय अंचल में यह वर्षा नियमित रूप से प्रतिदिन दोपहर बाद होती है, इसलिए इसे भूमध्यरेखीय अथवा विषुक रेखीय वर्षा (Equational Rainfall) भी कहा जाता है यह वर्षा प्रायः बादलों की गरज तथा बिजली की चमक के साथ मूसलाधार होती है।

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ii. पर्वतीय वर्षा (Orographic or Relief Rainfall) : जब जलवाष्प से लदी हुई गर्म वायु किसी पर्वत या पठार की ढलान के सहारे ऊपर उठती है तो वह वायु ठण्डी हो जाती है। ठण्डी होने से यह घनीभूत हो जाती है और ऊपर चढ़ने से जलवाष्प का संघनन होने लगता है और वर्षा होती है, उसे ही पर्वतीय वर्षा कहा जाता है। यह वर्षा उन क्षेत्रों में बहुत भारी होती है जहाँ पर्वत श्रेणी समुद्र तट के निकट तथा उसके समानान्तर होते हैं।

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ऊँचाई के साथ-साथ वर्षा की मात्रा बढ़ती जाती है। इस प्रकार पर्वत का जो ढाल पवन के सामने होता है वहाँ खूब वर्षा होती है उसे पवनाभिमुख ढाल (Windward Slope) कहते हैं। परन्तु जैसे ही पवन पर्वत की दूसरी ढलान पर उतरने लगती है वह गर्म और शुष्क होने लगती है और वर्षा कम करती है तो उसे पवनाविमुख ढाल अथवा वृष्टि छाया प्रदेश (Leenward Side or Rain Shadow Area) कहते हैं।

महावलेश्वर तथा पूणे एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर स्थित हैं परन्तु महावलेश्वर में 600 से॰मी॰ वार्षिक वर्षा होती है जबकि पूणे में केवल 70 से॰मी० ही वर्षा होती है। उसका कारण यह है कि महावलेश्वर पवनाभुविमुख ढाल पर तथा पूणे पवन विमुख ढाल या वृष्टि छाया प्रदेश में स्थित है।

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iii. चक्रवातीय अथवा वाताग्री वर्षा (Cyclonic or Frontal Rainfall) : चक्रवातों द्वारा होने वाली वर्षा को चक्रवाती या वाताग्री वर्षा कहा जाता है। शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात में उष्ण एवं आर्द्र वायु राशि हल्की होने के कारण शीतल एवं शुष्क राशि के ऊपर चढ़ जाती है इससे गर्म पवन में उपस्थित जलवाष्प का संघनन हो जाता है और वर्षा होती है। इस प्रकार की वर्षा शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों के क्षेत्रों में होती है। शीत ॠतु में उत्तर-पश्चिम भारत में भी वर्षा चक्रवातों द्वारा ही होती है।

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प्रश्न 22.
मौसम मानचित्र में शुद्ध हवा, धुन्ध, बौछार, ओस, कुहासा, निरन्तर वर्षा, तुषार, रेतीला, तुफान, दानेदार हिम, निरन्तर फुआर को रूढ़ चिन्ह एवं संकेत के रूप में दिखाएँ।
उत्तर :
मौसम मानचित्र में विभिन्न रूढ़ चिन्ह :-

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प्रश्न 23.
मौसम और जलवायु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

मौसम (Weather) जलवायु (Climate)
1. मौसम किसी स्थान विशेष की वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है। 1. जलवायु किसी विस्तृत क्षेत्र के वायुमण्डलीय दशा का अध्ययन है।
2. इसमें मौसम तत्वों की अल्प अवधि का अध्ययन होता है। 2. इसमें मौसम दशओं का लम्बे समय अर्थात 30-35 वर्षों तक अध्ययन का औसत है।
3. यह जलवायु विज्ञान का एक अंग है। 3. यह अपने आप में पूर्ण विज्ञान है।

प्रश्न 24.
ग्लोब पर प्रमुख उष्ण कटिबन्धीय जलवायु समूहों का वर्गीकरण कीजिए अथवा पृथ्वी के उष्ण जलवायु क्षेत्र का सचित्र वर्णन कीजिए। किन्हीं एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर उष्ण कटिबन्धीय जलवायु समूहों का वर्गीकरण एवं वर्णन निम्नलिखित है।
1. उष्ण कटिबन्ध वर्षा वाले जलवायु प्रदेश (Tropical Rainy Climate) : यह जलवायु विषुवत रेखा के समीप पायी जाती है। इस जलवायु प्रदेश की पेटी बहुत कुछ असमान है। यहाँ सालों भर तापक्रम उच्च रहता है और वर्षा सालों पर होती रहती है तथा शीत ॠतु नहीं होती है। उष्ण कटिबन्ध वर्षा वाले जलवायु प्रदेश को निम्न तीन उपविभागों में बाँटा गया है।

i. उष्ण विघुवतरेखीय जलवायु (Tropical Equatorial Climate) : विषुवत रेखा से उत्तर तथा दक्षिण 50° से 10° अक्षांश तक विस्तृत जलवायु वाले भाग को उष्ण विषुवत रेखीय जलवायु प्रदेश कहा जाता है। इसका विस्तार कभी-कभी भूमध्य रेखा के दोनों ओर 150° से 25° अक्षांश तक भी देखने को मिलता है। इस जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत अमेजन बेसिन, कांगो बेसिन, गिनी तट, पूर्वी द्वीप समूह तथा फिलीपिन्स को सम्मिलित किया गया है।

उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु प्रदेश की विशेषता यह है कि उस भाग में सर्वाधिक सूर्याताप प्राप्त होता है जिस कारण सालों भर तापमान उच्च बना रहता है। यहाँ औसत तापक्रम 25°F से 26°C के बीच होता है दैनिक तापान्तर वार्षिक तापान्तर से अधिक होता है। दैनिक तापान्तर 5° से 6° तक रहता है।

उस जलवायु प्रदेश में वर्षा सालों भर होती रहती है, यहाँ शुष्क मौसम का अभाव रहता है । यहाँ होने वाली अधिकांश वर्षा संवहनीय प्रकार की होती है।
यहाँ वर्ष भर उच्च तापक्रम तथा वर्षा होने के कारण उष्ण कटिबन्धीय चौड़ी पत्ती के सदाबहार वन मिलते हैं जिनमें रबर, एबोनी, महोगनी, चंदन, सिनकोना आदि प्रमुख हैं।

ii. उष्ण मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate) : मानसूनी जलवायु का विस्तार भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° से 30° अक्षांशों के बीच पाया जाता है, इस जलवायु के अन्तर्गत भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश, थाइलैंड, काम्बोडिया, लाओस, उत्तरी तथा दक्षिणी वियतनाम, पूर्वी द्वीप समूह, अफ्रिका का पूर्वी तटीय भाग, आस्ट्रेलिया का उत्तरी भाग आदि इसी सम्मिलित किया गया है।

उष्षा मानसूनी जलवायु में तापक्रम सालों भर उच्च रहता है किन्तु सूर्य के उत्तरायण तथा दक्षिणायन की स्थितियों के कारण गर्मी का मौसम तथा ठण्डी का मौसम का आविर्भाव होता है। गर्मी में औसत तापमान 27°-32°C तक रहता है जबकि ठण्डा में औसत तापमान 10°-27°C के बीच पाया जाता है। उत्तरी भारत में गर्मी के महींने में लू चला करती है जबकि शीत ऋतु में शीतलहरी चलती है।

मानसूनी प्रदेशों में वर्षा मुख्यत: चक्रवार्तीय तथा पर्वतीय प्रकार की होती है। परन्तु कुछ भी वर्षा संवहनीय प्रकार की होती है। जून से अक्ट्बर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाओं से वर्षा होती है। भारत के चेरापूंजी एवं मौसिनराम में वार्षिक वर्षा 1000 से॰मी॰ से अधिक होती है जबकि, राजस्थान के थार मरुस्थल में 12 से॰मी॰ से भी कम वर्षा होती है।
मानसूनी प्रदेशों में वर्षा की मात्रा में विषमता के कारण विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ पायी जाती हैं जिनमें सागौन, साल, आम, शीशम, महुआ आदि प्रमुख हैं।

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iii. उष्ण सवाना जलवायु (Tropical Savana Climate) : सवाना जलवायु उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु और शुष्क सहारा जलवायु के बीच पाया जाता है। इस जलवायु प्रदेश का अधिकांश विस्तार विषुवत रेखा के दोनों ओर 5° से 15° अक्षांश तक पाया जाता है। यह जलवायु क्षेत्र वेनेजुएला, कोलम्बिया, गुयाना, दक्षिणी-मध्य ब्राजील, अफ्रिका में सुडान, नाजीरिया, घाना, आस्ट्रेलिया के उत्तरी तथा भीतरी भागों में पाया जाता है। इस जलवायु में सालों भर उच्च तापक्रम बना रहता है। ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 18°C रहता है तथा शीत ऋतु में औसत तापमान 12°-16°C तक पाया जाता है।

यहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 40 से॰मी॰ से 60 से॰मी॰ के बीच रहता है। अधिकतर वर्षा ग्रीष्म ऋतु में होती है। जाड़े की ऋतु शुष्क रूप में बीतती है। वनस्पति के रूप में घास पायी जाती है जिसका नाम सवाना है। इसलिए इसे सवाना, जलवायु प्रदेश भी कहा जाता है। यहाँ अधिकतर वृक्ष छोटे-छोटे रूप में पाये जाते हैं। घास का रंग तथा ऊँचाई एवं वृक्षों की ऊँचाई तथा संख्या में अन्तर पाया जाता है । गर्मी के दिनों में घास सूखकर पीली हो जाती है।

प्रश्न 25.
ग्लोब पर पाये जाने वाला प्रमुख जलवायु प्रदेश का नाम लिखिए तथा किन्हीं एक का सचित्र वर्णन कीजिए। अथवा, पृथ्वी पर पाये जाने वाला प्रमुख भूमध्यसागरीय जलवायु प्रदेश का सचित्र व्यख्या कीजिए। उत्तर : ग्लोब पर प्रमुख जलवायु प्रदेश को छ: भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित है –
1. उष्पा कटिबन्ध जलवायु प्रदेश (A) :
(A) उष्ण विषुवतरेखीय जलवायु (Af)
(B) उष्ण मानसूनी जलवायु (Am)
(C) उष्ण सवाना जलवायु (Aw)

2. शुष्क जलवायु प्रदेश (B)
(a) उष्ण तथा उपोष्ण मरूस्थलीय जलवायु (Bwh)
(b) उष्ण तथा उपोष्ण स्टेपी (Bsh)
(c) मध्य अक्षांशीय मरूस्थलीय जलवायु (Bwk)

3. शीतोष्ण आर्द्र जलवायु प्रदेश (C)
(a) भूमध्यसागरीय जलवायु (Cs)
(b) आर्द्र उपोष्ण जलवायु (Ca)
(c) पश्चिमी यूरोपीय तुल्य जलवायु (Cb)

4. शीतल आर्द्र जलवायु प्रदेश (D)
(a) आर्द्र महाद्वीपीय गरम ग्रीष्मकाल (Da)
(b) आर्द्र महाद्वीपीय शीतल ग्रीष्मकाल (Db)
(c) उपधुवीय जलवायु (Dc, Dd)

5. धुवीय जलवायु प्रदेश (E C)
(a) टुण्ड़ा जलवायु (ET)
(b) ध्रुवीय हिमाच्छादित जलवायु (EF)

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6. उच्च प्रदेश की जलवायु (H) भूमध्यसागरीय जलवायु (Mediterranean Climate – CS) :

स्थिति एवं विस्तार : यह जलवायु महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में 30° से 40° अक्षांशों के बीच पायी जाती है । इस जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत भूमध्यसागर के चारों और फैले फ्रांस की राइन तथा सेओन नदियो की घाटियों, दक्षिणी इटली, यूनान, पश्चिमी टर्की, सीरिया, पश्चिमी इजराइल, उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीका का अल्जीरिया प्रदेश, उत्तरी अमेरिका में कैलीफोर्निया, दक्षिणी अमेरिका में मध्य चिली, दक्षिणी आस्ट्रेलिया के भाग सम्मिलित हैं।

तापक्रम : शीतकाल में औसत तापक्रम 4.4°C से 10°C तक होता है जबकि ग्रीष्मकाल में औसत तापक्रम 21°C से 26°C तक पहुँच जाता है। शीतकाल साधारण होता है। वास्तव में यह जलवायु अपने स्वास्थ्यवर्द्धक तथा आनन्ददायक शीतकाल के लिए ही अधिक सुप्रसिद्ध है।

वर्षा : वार्षिक वर्षा औसत 15 इन्च से 25 इन्च के बीच होता है। अधिकांश वर्षा शीत ॠतु में होता है। ग्रीष्म ऋतु में वर्षा पछुवा हवाओं के साथ आने वाले चक्रवातों के द्वारा होता है।

वनस्पति : भूमध्यसागरीय जलवायु में ओक, वालनट, चेस्टनट, साइप्रस, सिडार, आदि प्रमुख वृक्ष पाये जाते हैं। इसके अलावा यह जलवायु प्रदेश अपने रसीले फलों के लिए विश्व विख्यात है जिसमें नीबु, सतरा, जौतून, अंजीर, खूबानी, अंगूर आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 26.
जल चक्र की व्याख्या करो।
उत्तर :
जलीय चक्र (Hy6drogical cycle) : सूर्यताप के कराण पृथ्वी पर स्थित जलीय भाग के उपर वाष्पीकरण की क्रिया निरन्तर होती रहती है तथा यह आर्द्रता वायु राशियों एवं हवाओं द्वारा सम्युर्ण वायुमण्डल में मिश्रित होती रहती है, आधा से अधिक जलवाष्प वायुमण्डल की निचली परतो में धरातल से 6000 मी० की ऊचाई तक सकेन्द्रित होत है, वाष्पीकरण तथा पेड़-पौधों द्वारा वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रियाओ से जल वाष्प में बदलता है तथा संघनन की क्रिया से वाष्प जल में बदलत है, इस प्रकार धरातल एवं वायुमण्डल के बीच जलवाष्प एवं जल का निरन्तर आदान-प्रदान होत रहता है। जलवाष्प एवं जल के प्राकृतिक रूप से होने वाले इस आदन-प्रदान को ‘जलीय चक्र’ कहते है।

प्रश्न 27.
भूमध्यरेखीय जलवायु का वर्णन करो।
उत्तर :
जलवायु : भूमध्यरेखीय प्रदेशो में वर्ष भर जलवायु समान रहती है। सूर्य लगभग वर्षभर लम्बवत् चमकता है तथा वर्षभर रात व दिन की अवधि में भी बहुत कम अन्तर रहता है। प्रदेशों मे वर्ष भर ऊँचे तापमान रहते है। औसत तापमान 27° एवं वार्षिक तापान्तर केवल 2°C से 3°C मिलता है। यहाँ शीत ॠतु नहीं होती है तथा वर्ष भर संवाहनिक वर्षा होती है। वर्षा प्राय: रोजना सायंकाल 3 बजे से प्रारम्भ होत है जो कि बहुत तेज व मूसलाधार होती है। वर्षा का वार्षिक औसत तटीय एवं पर्वतीय भागों में क्रमश: 200 से 300 से॰मी० है। मध्यवर्ती भागों में वर्षा तड़ित झंझा के साथ होती है। यहाँ मेघाच्छत्रता अधिक रहती है। प्राय: कपासी बादल पाए जाते है। दिन में अधिक तापमान वाले समय मेघाच्छन्नता अधिक रहती है। जबकि रात्रि तथा प्रात: काल के समय आकाश स्वच्छ रहता है।

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प्रश्न 28.
उष्ण कटिबंधी उष्ण मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश का वर्णन करो।
उत्तर :
उष्ण कटिबंधी उष्ण मरुस्थलीय जलवायु : शुष्क एवं विषम है। वर्षा बहुत ही कम किन्तु वाष्भीकरण क्षमता कई-कई गुना अधिक है। तापमान के वितरण के आधार पर यहाँ पर दो मौसम होते हैं-ग्रीष्म काल एवं शीत काल। ग्रीष्मकाल का औसत तापमान 35° से 40° से० रहता है। दोपहर के समय तापमान 48°C से 49°C तक पहुँच जाते है। अधिकतम तापमान अल्जीरिया में 58.4C अंकित किए गए है।

दिन एवं रात्रि का तापमान्तर 15° से 20° तक एवं वार्षिक तापान्तर 20°C से 32°C शीतकाल में भी दिन के समय तापमान 15°C से 25°C तक रहते है। रात्रि के समय तापमान काफी गिर जाते है। रेतीले मरुस्थलों में रात्रि का तापमान 3°C तक पहुँच जाता है। इस प्रकार उष्ण मरुस्थली भागों में वार्षिक तथा दैनिक दोनों ही तापान्तर अधिक होते है। स्वच्छ आकाश, वनस्पति विहीन धरातल, न्यूनतम आर्द्रता, रेतीली मिट्टी आदि कारण इसके लिए उत्तरदायी है। यहाँ की वार्षिक वर्षा इतनी कम तथा परिवर्तनशील है कि औसत का निर्धारण करना भी कठिन है।

वर्षा 2 से 15 सेमी॰ के मध्य होती है। यह औसत इसलिए भी बेमाने है क्योंकि कभी-कभी 3-4 वर्षो तक एक बूँद पानी तक नहीं बरसता, तो कभी-कभी 2-3 वर्ष में एक ही दिन में 10-15 से॰मी० वर्षा हो जाती है। आकाश प्राय: मेघरहित रहता है, जिससे वर्ष भर घूप मिलती रहती है।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

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वायुमण्डल Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
घूमकेतु जलकर राख बन जाती है निम्नलिखित स्तर में :
(a) आयनमण्डल
(b) समतापमण्डल
(c) क्षोभमण्डल
(d) बहिर्मण्डल
उत्तर :
(a) आयनमण्डल

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प्रश्न2.
पृथ्वी का सर्वाधिक विनाशकारी चक्रवात टारनेडो को संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में इस नाम से जाना जाता है :
(a) साइक्लोन
(b) द्विस्टर
(c) टाइफून
(d) हरीकेन
उत्तर :
(b) टिवस्टर

प्रश्न 3.
हेट्रोस्फीयर की सबसे ऊपरी सतह है –
(क) आणविक हाइड्रोजन स्तर
(ख) हीलियम स्तर
(ग) परमाणविक आव्सीजन स्तर
(घ) आणविक नाइट्रोजन स्तर
उत्तर :
(क) आणविक हाइड्रोजन स्तर

प्रश्न 4.
जिस यंत्र से वायु की आर्द्रता मापी जाती है –
(क) थर्मामीटर
(ख) बैरोमीटर
(ग) हाइग्रोमीटर
(घ) अनीमोमीटर
उत्तर :
(ग) हाइग्रोमीटर

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प्रश्न 5.
‘जेट स्ट्रीम’ दिखाई देती है :
(a) क्षोम मण्डल में
(b) समताप मण्डल में
(c) मध्य मण्डल में
(d) अयन मण्डल में
उत्तर :
(a) क्षोम मण्डल में।

प्रश्न 6.
पृथ्वी का एल्बिडो का इकाई का प्रतिशत है :
(a) 32 %
(b) 34 %
(c) 34 %
(d) 38 %
उत्तर :
(c) 34 %

प्रश्न 7.
ऋतु परिवर्तन देखने में नहीं मिलता है :
(a) उष्णकटिबन्धीय मानसूनी जलवायु में
(b) भूमध्य रेखीय जलवायु में
(c) उष्ण मरूस्थलीय जलवायु में
(d) चीन तुल्य जलवायु में
उत्तर :
(c) उष्ण मरूस्थलीय जलवायु में।

प्रश्न 8.
समुद्र तल पर वायुमण्डीय दाब हैं :
(a) 1013.14 Mb
(b) 1013.25 Mb
(c) 1024.56 Mb
(d) 996.04 Mb
उत्तर :
(b) 1013.25 Mb

प्रश्न 9.
भूमध्य सागरीय क्षेत्र में शीत कालीन वर्षा होती है :
(a) व्यापारिक पवन से
(b) पछुवा पवन से
(c) ध्रुवीय पवन से
(d) स्थानीय पवन से
उत्तर :
(b) पछुवा पवन से।

प्रश्न 10.
वायु के उत्तरी गोलार्द्ध में दायीं ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बाई ओर मुड़ने के कारण हैं :
(a) बायज बैलट का नियम
(b) फार्टिन्स नियम
(c) फेरल का नियम
(d) कोरियालिस निमय
उत्तर :
(c) फेरल का नियम।

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प्रश्न 11.
एलनिनो (EI NINO) पाया जाता है :
(a) अफ्रीका के पश्चिमी घाट में
(b) पेरू एवं इक्वेडोर के पश्चिमी तट में
(c) मडागास्कर के तट में
(d) आस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट में
उत्तर :
(b) पेरू एवं इक्वेडोर के पश्चिमी तट में।

प्रश्न 12.
रेडियोधर्मी अपशिष्ट का उदाहरण है :
(a) कृषिगत अपशिष्ट
(b) CFC
(c) थोरियम
(d) जैविक अपशिष्ट
उत्तर :
(c) थोरियम।

प्रश्न 13.
वायु का अवतलन देखने को मिलता है :
(a) विभुवतरेखीय निम्न वायुदाब क्षेत्र में
(b) उपोष्ण उच्च वायुदाब क्षेत्र में
(c) आर्कटिक निम्न वायुदाब क्षेत्र में
(d) अण्टार्कटिक निम्न वायुदाब क्षेत्र में
उत्तर :
(b) उपोष्ण उच्च वायुदाब क्षेत्र में।

प्रश्न 14.
मौसमी घटनाएँ घटित होती हैं :
(a) क्षोभ मण्डल में
(b) समताप मण्डल में
(c) मध्य मण्डल में
(d) ओजोन मण्डल में
उत्तर :
(a) क्षोभ मण्डल में।

प्रश्न 15.
वायुमण्डल में ऑक्सीजन की मात्रा है :
(a) 78.1%
(b) 78.9%
(c) 20.99%
(d) 23.2.1%
उत्तर :
(c) 20.99%

प्रश्न 16.
पूर्वी भारत का एक वृष्टिछाया प्रदेश है :
(a) देहरादून
(b) गोवा
(c) मौसिनराम
(d) शिलांग
उत्तर :
(d) शिलांग।

प्रश्न 17.
नमी की मात्रा सर्वाधिक रहती है :
(a) क्षोभमण्डल में
(b) समताप मण्डल में
(c) मध्यमण्डल में
(d) अयनमण्डल में
उत्तर :
(a) क्षोभमण्डल में

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प्रश्न 18.
जापान सागर के उष्णा चक्रवात को कहते हैं :
(a) टाइफून
(b) हरिकेन
(c) फॉन
(d) टारनेडो
उत्तर :
(a) टाइफृन

प्रश्न 19.
ग्लोबल वार्मिग (Global Warming) के लिए उत्तरदायी ग्रीन हाउस गैस है :
(a) CFC
(b) CO2
(c) CH4
(d) NO2
उत्तर :
(b) CO2

प्रश्न 20.
फ्रांस की रोन घाटी में प्रवाहित होने वाली स्थानीय पवन है :
(a) फॉन
(b) चिनूक
(c) मिस्टूल
(d) बोरा
उत्तर :
(c) मिस्ट्रल।

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प्रश्न 21.
एक हरित गृह गैस है :
(a) CO2
(b) O2
(c) H2O
(d) N2
उत्तर :
(a) CO2

प्रश्न 22.
कौन प्राकृतिक सौर आवरण है :
(a) हीलियम
(b) ओजोन
(c) नाइट्रोजन
(d) ऑक्सीजन पटल
उत्तर :
(b) ओजोन।

प्रश्न 23.
किस जलवायु क्षेत्र में तापमान की विविधता नहीं पायी जाती है ?
(a) भूमध्यरेखीय
(b) भूमध्यसागरीय
(c) टुण्ड्रा
(d) मरुस्थलीय
उत्तर :
(a) भूमध्यरेखीय।

प्रश्न 24.
सामयिक पवने हैं :
(a) दो
(b) चार
(c) सात
(d) पाँच प्रकार के
उत्तर :
(d) पाँच प्रकार के।

प्रश्न 25.
आल्पस पर्वत के उतरी ढाल पर नीचे उतरती हवा को कहते हैं।
(a) फोन
(b) रवार्मसिन
(c) बोरा
(d) चिनूक
उत्तर :
(a) फोन (Fohn)

प्रश्न 26.
जेट स्ट्रीम का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था ?
(a) ए०जी० टान्सले
(b) एम०टी० यीन
(c) सी०जी० रॉसबी
(d) टी० पी० नन
उत्तर :
(c) सी०जी० रॉंसबी।

प्रश्न 27.
मानचित्र पर समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखा को कहते हैं :
(a) समभार
(b) समताप
(c) समवर्षा
(d) समोच रेखा
उत्तर :
(a) समभार।

प्रश्न 28.
पछुआ हवाएँ प्रवाहित होती हैं-
(a) उपोष्ण क्षेत्र की ओर
(b) ध्रुवीय क्षेत्र कि ओर
(c) भूमध्यरेखीय क्षेत्र की ओर
(d) उपध्रुवीय क्षेत्र की ओ
उत्तर :
(d) उपधुवीय क्षेत्र की और

प्रश्न 29.
निम्नलिखित में से कन हवाओं की दिशा ऋतु परिवर्तन के साथ बदल जाती है-
(a) स्थानीय हवाओं की
(b) स्थायी हवाओं की
(c) मानसूनी हवाओं की
(d) उपरोक्त सभी की
उत्तर :
(c) मानसूनी हवाओं की

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प्रश्न 30.
चक्रवात में वायु के चलने की दिशा उतरी गोलार्द्व में होती है :
(a) घड़ी की सुई की दिशा में
(b) घड़ी को सुई की शिरिर दिश में
(c) उत्तरी दिशा में
(d) दक्षिणी दिशा में
उत्तर :
(a) घड़ी की सुई की दिशा में।

प्रश्न 31.
40° दक्षिणी अक्षांश पर चलने वाली पछुवा पवन को क्या कहा जाता है ?
(a) भयंकर पचासा
(b) घीखता साठा
(c) काल वैशाखी
(d) गरजती घालीसा
उत्तर :
(d) गरजती चालीसा

प्रश्न 32.
एनाबेटिक वायु (Anabatic Wind) भी कहते हैं ?
(a) पर्वतीय समीर को
(b) घाटी समीर को
(c) समुद्री समीर को
(c) स्थलीय समीर को
उत्तर :
(b) घाटी समीर को।

प्रश्न 33.
CO2 का वायुमण्डलीय वाष्प में घुलकर वर्षा के रूप में गिरने को कहा जाता है :
(a) खूनी वर्षा
(b) आग्र वर्षा
(c) अम्ल वर्षा
(d) ओला वृष्टि
उत्तर :
(c) अम्ल वर्षा।

प्रश्न 34.
वायुमण्डल में नाइट्रोजन गैस का परिमाण है :
(a) 99 %
(b) 78.4 %
(c) 0.03 %
(d) 20.99 %
उत्तर :
(b) 78.4 %

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प्रश्न 35.
क्षोभमण्डल एवं समतापमण्डल के बीच परत पायी जाती है :
(a) समताप सीमा
(b) ओजोनमण्डल
(c) क्षोभ सीमा
(d) अयनमण्डल
उत्तर :
(c) क्षोभ सीमा।

प्रश्न 36.
वायुमण्डल का प्रमुख संघटन नहीं है :
(a) गैस
(b) जलवाष्प
(c) धूलकण
(d) अक्षांश
उत्तर :
(d) अक्षांश।

प्रश्न 37.
उत्तर ध्रुवीय प्रकाश और दक्षिण धवरीय प्रकाश पूँज वायुमण्डल की परत में पायी जाती है :
(a) अयनमण्डल
(b) मध्यमण्डल
(c) क्षोभमण्डल
(d) वाह्य मण्डल
उत्तर :
(a) अयनमण्डल।

प्रश्न 38.
रासायनिक संघटन की दृष्टि से वायुमण्डल को मुख्य रूप से निम्न भागों में बाँटा गया है :
(a) चार
(b) तीन
(c) दो
(d) पाँच
उत्तर :
(c) दो।

प्रश्न 39.
मौसम, जलवायु तथा अन्य प्राकृतिक परिवर्तनों की दृष्टि से परत बहुत ही महत्वपूर्ण है :
(a) क्षोभपरत
(d) समताप परत
(c) आयनपरत
(d) मध्यपरत
उत्तर :
(a) क्षोभपरत।

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प्रश्न 40.
विषुवत रेखा पर क्षोभमण्डल की ऊँचाई पायी जाती है।
(a) 8 कि०मी०
(b) 12 कि० मी०
(c) 18 कि०मी०
(d) 10 कि०मी०
उत्तर :
(c) 18 कि०मी०।

प्रश्न 41.
वायुमण्डल के निचली परतों के अध्ययन को कहते हैं :
(a) वायु विज्ञान
(b) जन्तु विज्ञान
(c) पाराबैगनी किरण
(d) ऋतु विज्ञान
उत्तर :
(d) ॠतु विज्ञान।

प्रश्न 42.
जीवनदायिनी गैस कहा जाता है :
(a) ऑक्सीजन
(b) कार्बन
(c) नाइट्रोजन
(d) नियान
उत्तर :
(a) ऑक्सीजन।

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प्रश्न 43.
वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा कुल आयतन का परिमाण है :
(a) 90%
(b) 4-5%
(c) 10-15%
(d) 50%
उत्तर :
(b) 4-5%

प्रश्न 44.
व्रायुमण्डल में कार्बन डाइ-आक्साइड की मात्रा है :
(a) 0.01%
(b) 20.99%
(c) 0.03%
(d) 0.005%
उत्तर :
(c) 0.03%

प्रश्न 45.
ओजनमण्डल को अधिक क्षति होने का प्रमुख कारण है :
(a) CFC
(b) O2
(c) N2
(d) Ar
उत्तर :
(a) CFC

प्रश्न 46.
किस गैस के कारण पराबैंगनी किरणों (Ultra Violet Rays) से जीवों की रक्षा होती है ?
(a) हीलियम
(b) आर्गन
(c) ओजोन
(d) नियोन
उत्तर :
(c) ओजोन।

प्रश्न 47.
सूर्य तल का औसत तापमान है :
(a) 5700° K
(b) 1.5 करोड़ डिग्री
(c) 2000° C
(d) 6000° C
उत्तर :
(d) 6000° C

प्रश्न 48.
किस मण्डल की सहायता से बेतार का तार संचार व्यवस्था संभव हो सकती है ?
(a) क्षोभ मण्डल
(b) ओजन मण्डल
(c) अयन मण्डल
(d) समताप मण्डल
उत्तर :
(c) अयन मण्डल।

प्रश्न 49.
तापमान मापने वाले यंत्र का नाम है :
(a) बैरोमीटर
(b) थर्मामीटर
(c) रेंजगेज
(d) हाइयोमीटर
उत्तर :
(b) थर्मामीटर।

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प्रश्न 50.
पृथ्वी को प्राप्त होने वाली सौर्यिक उर्जा को कहते हैं :
(a) सूर्याताप
(b) प्रकाश-पुंज
(c) अपसौर
(d) उपसौर
उत्तर :
(a) सूर्यांताप।

प्रश्न 51.
पृथ्वी सौर्धिक उर्जा का कितना प्रतिशत भाग प्राप्त करती है :
(a) 16%
(b) 34%
(c) 51%
(d) 14%
उत्तर :
(c) 51%

प्रश्न 52.
पृथ्वी के ताप कटिबन्ध को निम्न भागों में बाँटा गया है :
(a) चार
(b) पाँच
(c) दो
(d) तीन
उत्तर :
(d) तीन।

प्रश्न 53.
वायुमण्डल की बाहरी सीमा पर सूर्य से प्रति मिनट प्रति वर्ग सेण्टीमीटर पर कैलोरी उष्मा प्राप्त होती है :
(a) 1.96
(b) 1.94
(c) 1.90
(d) 1.92
उत्तर :
(b) 1.94

प्रश्न 54.
गैसीय अथवा तरल पदार्थ के एक भाग से दूसरे भाग की ओर उसके तत्वों द्वारा उष्मा के संचा को कहते हैं :
(a) संचालन
(b) अभिवहन
(c) विकिरण
(d) संवहन
उत्तर :
(d) संवहन।

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प्रश्न 55.
मानचित्र पर समान ताप वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को कहते हैं :
(a) समताप रेखा
(b) समभार रेखा
(c) समवृद्धि रेखा
(d) समोच्व रेखा
उत्तर :
(a) समताप रेखा।

प्रश्न 56.
23° से 66° 30‘ अक्षांशों के बीच प्रत्येक गोलार्द्ध में स्थित ताप कटिबन्ध है :
(a) उष्ण ताप कटिबन्ध
(b) शीतोष्ण ताप कटिबन्ध
(c) शीत ताप कटिबन्ध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) शीतोष्ण ताप कटिबन्ध।

प्रश्न 57.
जिस तापमान पर पानी जमने लगता है उसे कहते हैं :
(a) हिमांक
(b) उबालांक
(c) गलांक
(d) मध्यांक
उत्तर :
(a) हिमांक।

प्रश्न 58.
सेण्टीग्रेड धर्मामीटर का अविष्कार किया था :
(a) जे. सिक्स
(b) टोरीसीली
(c) एण्डर्स सेल्सियस
(d) रियूमर
उत्तर :
(c) एण्डर्स सेल्सियस।

प्रश्न 59.
सिक्स का अधिकतम एवं न्यूनतम थर्मामीटर का अविष्कार किया था :
(a) जे० सिक्स
(b) एम० सिक्स
(c) एस० सिक्स
(d) जेड सिकस
उत्तर :
(a) जे० सिक्स।

प्रश्न 60.
फारनेहाइट थर्मामीटर पर हिमांक तथा क्वथनांक के बीच अन्तर होता है :
(a) 32°
(c) 212°
(c) 180°
(d) 100°
उत्तर :
(c) 180°

प्रश्न 61.
पृथ्वी के उच्चतम वार्षिक तापक्रम वाले स्थानों को मिलाते हुए जो समताप रेखा खींची गयी है उसे कहते हैं :
(a) शीत प्रेरित रेखा
(b) तापीय भूमध्य रेखा
(c) समताप रेखा
(d) समदाब रेखा
उत्तर :
(b) तापीय भूमध्य रेखा।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 62.
दिन के अधिकतम और न्यूनतम तापमान के अन्तर को कहते हैं :
(a) वार्षिक तापान्तर
(b) मासिक तापान्तर
(c) दैनिक तापान्तर
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(c) दैनिक तापान्तर।

प्रश्न 63.
भूमध्य रेखा पर समुद्री जल का वार्षिक औसत तापमान होता है :
(a) 23°C
(b) 14°C
(c) 35°C
(d) 26°C
उत्तर :
(d) 26°C

प्रश्न 64.
निम्नलिखित में वह कौन-सा तत्व है जो किसी स्थान की तापमान को प्रभावित नहीं करता है :
(a) अक्षांश
(b) समुद्र तल की दूरी
(c) समुद्र की गहराई
(c) वनस्पति
उत्तर :
(c) समुद्र की गहराई।

प्रश्न 65.
सूर्याताप का कितना प्रतिशत उर्जा परावर्तित होकर अन्तरिक्ष में विलीन हो जाता है :
(a) 35%
(b) 14%
(c) 51%
(d) 65%
उत्तर :
(a) 35%

प्रश्न 66.
शीत प्रदेशों में फूल तथा सब्जी आदि उगाने के लिए बनाये जाने वाले घर कहलाता है :
(a) मिन हाउस या शीशे का घर
(b) लकड़ी का घर
(c) इैट का घर
(d) बांस का घर
उत्तर :
(a) ग्रीन हाउस या शीशे का घर।

प्रश्न 67.
अल-नीनों की शुरूआत होनेवाली महासागर है :
(a) अन्ध महासागर
(b) हिन्द महासागर
(c) पूर्वी प्रशांत महासागर
(d) लाल सागर
उत्तर :
(c) पूर्वी प्रशांत महासागर।

प्रश्न 68.
पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से बचाने के लिए विश्वव्यापी सम्मेलन का आयोजन होनेवाला वर्ष था :
(a) 1997 ई०
(b) 1987 ई०
(c) 1985 ई०
(d) 1992 ई०
उत्तर :
(a) 1997 ई०।

प्रश्न 69.
वायुदाब मापने के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाता है ?
(a) सिस्मोग्राफ
(b) बैरोमीटर
(c) हाइमोमीटर
(d) थर्मामीटर
उत्तर :
(b) बैरोमीटर।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 70.
वायुदाव को प्रभावित करने वाले सबसे प्रमुख कारक हैं :
(a) समुद्र
(b) बादल
(c) जलवाष्ष
(d) वर्षा
उत्तर :
(c) जलवाष्म।

प्रश्न 71.
शांत पेटी या डोलड्रम किन अक्षांशों के बीच स्थित है ?
(a) 10°NS से 20°NS
(b) 0° से 5°NS
(c) 15°NS से 20°NS
(d) 30°NS से 35°NS
उत्तर :
(b) 0° से 5°NS

प्रश्न 72.
समुद्र तल पर औसत वायु दाब कितना सेण्टीमीटर माना जाता है ?
(a) 1013.25 से॰मी०
(b) 1034 से॰मी०
(c) 76 से॰मी०
(d) 29.92 से॰मी०
उत्तर :
(c) 76 से॰मी०

प्रश्न 73.
अश्व अक्षांश (Horse Latitude) किन दो अक्षांशों के बीच पाया जाता है ?
(a) 0° से 10° उ०/द०
(b) 60° से 65°उ०/द०
(c) 30° से 35° उ०/द०
(d) 40° से 50° उ०/द०
उत्तर :
(c) 30° से 35° उ०/द०

प्रश्न 74.
40° दक्षिणी अक्षांश पर चलने वाली पछुवा पवन को क्या कहा जाता है ?
(a) भयकर पचासा (Furious Fifties)
(b) चीखता साठा (Shrieking Sixties)
(c) काल वैशाखी (Norwester)
(d) गरजती चालीसा (Roaring Forties)
उत्तर :
(d) गरजती चालीसा (Roaring Forties)

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प्रश्न 75.
ग्लोब पर वायुदाब की कुल पेटियाँ पायी जाती है :
(a) सात
(b) चार
(c) पाँच
(d) तीन
उत्तर :
(a) सात।

प्रश्न 76.
बहादुर पछुवा (Brave Westerlies) पवन है :
(a) अप्रचलित पवन
(b) प्रचलित पवन
(c) मानसूनी पवन
(d) स्थानीय पवन
उत्तर :
(b) प्रचलित पवन।

प्रश्न 77.
आस्ट्रेलिया में चलने वाली स्थानीय ठण्डी पवन का नाम है :
(a) बोरा
(b) सिरोक्को
(c) विलि-विलि
(d) हबूल
उत्तर :
(c) विलि-विलि।

प्रश्न 78.
किस स्थानीय पवन को डॉक्टर वायु (Doctor Wind) कहा जाता है ?
(a) हरमट्टन
(b) सिमूम
(c) फॉन
(d) लू
उत्तर :
(a) हरमट्टन।

प्रश्न 79.
चिनूक (Chinook) किस देश का स्थानीय पवन है ?
(a) संयुक्त रूस
(b) संयुक्त राज्य अमेरिका
(c) भारत
(d) चीन
उत्तर :
(b) सयुक्त राज्य अमेरिका।

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प्रश्न 80.
‘उत्तरी गोलर्द्ध में हवाएँ दायीं और दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं” इस नियम के प्रतिपादक कौन हैं ?
(a) बाइज बैलट
(b) कुम
(c) हैडली
(d) फेरल
उत्तर :
(d) फेरल।

प्रश्न 81.
फॉन (Fohn) कहाँ का स्थानीय पवन है ?
(a) एशिया
(b) अफ़िका
(c) यूरोप
(d) आस्ट्रेलिया
उत्तर :
(c) यूरोप।

प्रश्न 82.
जेट स्ट्रीम (Jet Stream) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसके द्वारा किया गया ?
(a) सी॰ जी० रॉसबी
(b) फेरल
(c) हेडली
(d) बाइज बैलेट
उत्तर :
(a) सी० जी० रॉसबी।

प्रश्न 83.
क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में अत्यन्त तीव्र गति से चलने वाली पवन धारा को क्या कहते हैं?
(a) पूर्वी हवा
(b) पहुवा हवा
(c) धुवीय हवा
(d) जेट स्ट्रीम
उत्तर :
(d) जेट स्ट्रीम।

प्रश्न 84.
बालू के कणों से युक्त वर्षा की बूदों को इटली में क्या कहा जाता है ?
(a) डॉक्टर वायु
(b) खूनी वर्षा
(c) आयला
(d) केष डॉक्टर
उत्तर :
(b) खूनी वर्षा।

प्रश्न 85.
किस स्थानीय पवन को हिम भक्षी (Snow eater) कहा जाता है ?
(a) चिनूक
(b) लू
(c) बर्ग
(d) ब्लैकरोलर
उत्तर :
(a) चिनूक।

प्रश्न 86.
एनाबेटिक वायु (Anabatic Wind) भी कहते हैं ?
(a) पर्वत्तीय समीर को
(b) घाटी समीर को
(c) समुद्री समीर को
(c) स्थलीय समीर को
उत्तर :
(b) घाटी समीर को।

प्रश्न 87.
चीन सागर में उत्पन्न होने वाली उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात को क्या कहते हैं ?
(a) टोरनेडो
(b) हरीकेन
(c) चक्रवात
(d) टाइफून
उत्तर :
(d) टाइफून।

प्रश्न 88.
उष्ग कटिबन्धीय चक्रवातों को क्या कहा जाता है ?
(a) तारों का चक्रवात
(b) बादलों का चक्रवात
(c) बक्रवात का आँख
(d) चक्रवात का सागर
उत्तर :
(c) बक्रवात का आँख।

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प्रश्न 89.
प्रति-चक्रवात (Anti-Cyclone) के केन्द्र में पाया जाता है :
(a) उच्च दाब
(b) निम्न दाब
(c) मध्य दाब
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) उच्च दाय।

प्रश्न 90.
शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों की उत्पत्ति दोनों गोलाद्धों में किन दो अक्षांशों के मध्य होती है ?
(a) 6° से 15°
(b) 35° से 65°
(c) 0° से 5°
(d) 65° से 80°
उत्तर :
(b) 35° से 65°

प्रश्न 91.
युगोस्लाविया के एड्रियाटिक तट की ओर चलने वाली ठण्डी वायु का नाम है :
(a) मिस्ट्र
(b) नार्दर
(c) बोरा
(d) बाइज
उत्तर :
(c) बोरा।

प्रश्न 92.
उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात के चलने की दिशा होती है :
(a) उत्तर से दबिण को ओर
(b) पशिचम से पूर्व की ओर
(c) दब्बिण से उत्तर की ओर
(d) पूल से पश्चिन की ओर
उत्तर :
(d) पूरब से पश्चिम की ओर।

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प्रश्न 93.
ठण्डी स्थानीय हवा मिस्ट्रल किस देश में प्रवाहित होती है ?
(a) फ्रांस
(b) भारत
(c) बंगलादेश
(d) ब्राजील
उत्तर :
(a) फ्रांस।

प्रश्न 94.
एनीरायड बैरोमीटर का अविष्कार किस वैज्ञानिक ने किया था ?
(a) लूसियन विडाई
(b) फोर्टिन
(c) ब्यूफोर्ट
(d) इवानगेलिस्टा टोरीसीली
उत्तर :
(a) लूसियन विडाई।

प्रश्न 95.
आर्द्रता मापने के लिए किस यंत्र का प्रयोग किया जाता है ?
(a) बैरोमीटर
(b) हाइमोमीटर
(c) रेनगेंज
(d) थर्मामीटर
उत्तर :
(c) रेनगेंज।

प्रश्न 96.
सापेक्ष आर्द्रता को किसमें व्यक्त किया जाता है ?
(a) ग्राम प्रति घन
(b) ग्राम प्रति कि० प्रा०
(c) ओसांक विन्दु
(d) प्रतिशत
उत्तर :
(d) प्रतिशत।

प्रश्न 97.
सबसे अधिक वर्षा किस बादल से होती है ?
(a) बर्षी मेघ
(b) कपासी मेघ
(c) पक्षाभ मेघ
(d) स्तरी मेघ
उत्तर :
(a) वर्षी मेघ।

प्रश्न 98.
चार बजे वाली वर्षा (4 O’Clock Rainfall) किस वर्षा को कहा जाता है ?
(a) चक्रवाती वर्षा
(b) संवहनीय वर्षा
(c) पर्वतीय वर्षा
(d) ओला वृष्टि
उत्तर :
(b) संवहनीय वर्षा।

प्रश्न 99.
भारत के पश्चिमी घाट में वृष्टिछाया प्रदेश का नाम क्या है ?
(a) पूना
(b) महाबलेश्वर
(c) गोवा
(d) मुम्बई
उत्तर :
(a) पूना।

प्रश्न 100.
भारत में अधिकतर वर्षा किस प्रकार की होती है ?
(a) संवहनीय वर्षा
(b) पर्वतीय वर्षा
(c) चक्रवातीय वर्षा
(d) वर्षी मेघ
उत्तर :
(b) पर्वतीय वर्षा।

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प्रश्न 101.
भूमध्यरेखीय वर्षा वन क्षेत्र पाया जाने वाला सदाबहार वन को ब्राजील के आमेजन घाटी में क्या कहा जाता है ?
(a) सेल्वा
(b) पम्पास
(c) प्रेयरी
(d) वेल्ड
उत्तर :
(a) सेल्वा।

प्रश्न 102.
रूढ़ चिन्ह =Δ किसे प्रर्दशित करता है :
(a) ओला
(b) वृष्टि
(c) हवा
(d) इन्द्रधनुष
उत्तर :
(a) ओला।

प्रश्न 103.
भूमध्य सागरीय जलवायु प्रदेश में वर्षा होती है –
(a) ग्रीष्म ॠतु में
(b) शीत ॠतु में
(c) बसंत ॠतु में
(d) शरद ऋतु में
उत्तर :
(b) शीत ॠतु में।

प्रश्न 104.
AW जलवायु को किस प्रदेश के नाम से जाना जाता है ?
(a) सवाना
(b) स्टेपी
(c) टुड्रा
(d) चीन तुल्य
उत्तर :
(a) सवाना ।

प्रश्न 105.
सालों भर वर्षा किस जलवायु क्षेत्र में होती है ?
(a) भूमध्यसागरीय जलवायु क्षेत्र में
(b) उष्ण मानसूनी जलवायु क्षेत्र में
(c) शुष्क जलवायु क्षेत्र में
(d) भूमध्य रेखीय जलवायु क्षेत्र में
उत्तर :
(d) भूमध्यरेखीय जलवायु क्षेत्र में।

प्रश्न 106.
आर्द्रता कितने प्रकार का होता है ?
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
उत्तर :
(c) तीन।

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प्रश्न 107.
जलवाष्प के जल रूप में बदलने की क्रिया को क्या कहते हैं ?
(a) संघनन
(b) तापमान
(c) पवन
(d) चक्रवात
उत्तर :
(a) संघनन

प्रश्न 108.
जल के जलवाष्प में परिणत होने में लगने वाली ऊर्जा को कहते हैं –
(a) आर्द्रता
(b) गुप्त उर्जा
(c) संघनन
(d) वर्षा
उत्तर :
(b) गुप्त उर्जा।

प्रश्न 109.
जलवायु का कौन-सा घटक निम्न में से नहीं है ?
(a) तापमान
(b) आर्द्रता
(c) वायुदाब
(d) स्थल
उत्तर :
(d) स्थल।

प्रश्न 110.
जलवायु वर्गीकरण के आधार पर वनस्पति मण्डल को कितने भागों में बाँटा गया है ?
(a) पाँच
(b) तीन
(c) चार
(d) दो
उत्तर :
(a) पाँच।

प्रश्न 111.
धरातल एवं जलवायु के बीच जलवाष्प एवं जल के लगातार आदान-प्रदान को क्या कहा जाता है ?
(a) तापीय चक्र
(b) अपरदन चक्र
(c) वायु चक
(d) जलीय चक्र
उत्तर :
(d) जलीय चक्र।

प्रश्न 112.
किस जलवायु वैज्ञानिक ने सबसे पहले विश्व के जलवायु का वर्गीकरण किया था ?
(a) ब्लाडीमीर कोपेन
(b) फेरल
(c) धार्नथ्वेट
(d) कैण्डोलिल
उत्तर :
(a) ब्लाडीमीर कोपेन।

प्रश्न 113.
ग्रीनलैंड किस जलवायु क्षेत्र के अन्तर्गत आता है ?
(a) उपधुवीय जलवायु
(c) टुण्डा जलवायु
(d) शुष्क जलवायु
उत्तर :
(c) टुण्ड्रा जलवायु।

प्रश्न 114.
संतृप्त वायु की सापेक्षिक आर्द्रता होती है –
(a) 100%
(b) 50%
(c) 80%
(d) 75%
उत्तर :
(a) 100%

प्रश्न 115.
वायुमण्डल के ऊपरी तह में रहती हैं –
(a) भारी गैसें
(b) जेनान
(c) निष्किय गैसें
(d) हल्की गैसें
उत्तर :
(d) हल्की गैसे

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प्रश्न 116.
सूर्य से आने वाली पराबैगनी विकिरण को अवशोषित करती है –
(a) N2 गैस
(b) CO2 गैस
(c) O3 गैस
(d) धूल कण
उत्तर :
(c) O3 गैस

प्रश्न 117.
बर्हिमण्डल में तापमान पाया जाता है-
(a) 1000°C
(b) 3000°C
(c) 2000°C
(d) 500°C
उत्तर :
(c) 2000°C

प्रश्न 118.
सिक्स थर्मामीटर है-
(a) वायुतापमापी
(b) वायु दाब मापी
(c) वर्षा मापी
(d) इनमें से कुछ भी नहीं
उत्तर :
(a) वायुतापमापी

प्रश्न 119.
समताप रेखायें हैं –
(a) समुद्र तल से समान तापमान को मिलानेवाली रेखा
(b) समुद्री गहराई
(c) तापमान में तोब्रता का लक्षण
(d) तापमान का स्थिरीकरण
उत्तर :
(a) समुद्र तल से समान तापमान को मिलानेवाली रेखा

प्रश्न 120.
क्लोरो-फ्लोरो कार्बन है –
(a) एक ग्रीन हाउस गैस
(b) एक प्रकार का जलवाष्ष
(c) कार्बन का प्रतिशत
(d) एक स्वास्थायवर्धक गैस
उत्तर :
(a) एक ग्रीन हाउस गैस

प्रश्न 121.
एलनीनो है –
(a) समुद्री ऊर्जा
(b) पध्धिमी प्रशान्त महासागर के वायु की गर्मी
(c) मानसूनी वर्षा
(d) वृष्टिछाया
उत्तर :
(b) पथिमी प्रशान्त महासागर के वायु की गर्मी

प्रश्न 122.
जेट स्ट्रीम है –
(a) भारत-तिब्यत सीमा पर चलनेवाली उच्चवायु
(b) एक प्रकार का विमान
(c) एक प्रकार का विमान
(d) एक प्रकार की वर्षा
उत्तर :
(a) भारत-तिब्यत सीमा पर चलनेवाली उच्चवायु

प्रश्न 123.
जलवायु है –
(a) किसी भी स्थान के 12 वर्षो के मौसमी दशा का औसत
(b) वर्षा की स्थिति
(c) तापमान की स्थिति
(d) वायुमण्डलीय दाब की दशा
उत्तर :
(a) किसी भी स्थान के 12 वर्षो के मौसमी दशा का औसत

प्रश्न 124.
वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा में पायी जाने वाली गैस है –
(a) नाइट्रोजन
(b) आक्सीजन
(c) कार्बन डाई आक्साइड
(d) आर्गन
उत्तर :
(a) नाइट्रोजन

प्रश्न 125.
किस परत में आँधी, तूफान, मेघ आदि क्रियाएं होती हैं ?
(a) परिवर्तन मण्डल
(b) समतापमण्डल
(c) मध्यमण्डल
(d) आयनमण्डल
उत्तर :
(a) परिवर्तन मण्डल

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प्रश्न 126.
किस परत को रक्षा परत कहते हैं ?
(a) आयनमण्डल
(b) मध्यमण्डल
(c) ओजोन परत
(d) समतापमण्डल
उत्तर :
(c) ओजोन परत

प्रश्न 127.
शीतोष्ण कटिबंघ की स्थिति है-
(a) विषुवत रेखा से 5° दक्षिण
(b) 23 1/2°  से 66 1/2° उत्तरी अक्षांश
(c) 23 1/2° से 66 1/2° दक्षिणी अक्षांश
(d) 23 1/2° से 66 1/2° त्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश
उत्तर :
(d) 23 1/2° से 66 1/2° त्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश

प्रश्न 128.
निम्नलिखित में कौन भूमण्डलीय उष्मन का प्रभाव नहीं है ?
(a) हिमनदों का पिघलना
(b) समुद्र सर का बढ़ना
(c) फस्लों का कम-अविक हेमा
(d) उत्पादन में कमी होना
उत्तर :
(d) उत्पादन में कमी होना

प्रश्न 129.
निम्नलिखित में कौन स्थायी पवन है ?
(a) मानसून वायु
(b) पर्वतीय समीर
(c) समुद्री समीर
(d) धुवीय पवन
उत्तर :
(d) धुवीय पवन

प्रश्न 130.
वायुमण्डलमें हल्की गैसों की मात्रा है –
(a) 10 %
(b) 0.1 %
(c) 0.01 %
(d) 1.0 %
उत्तर :
(c) 0.01 %

प्रश्न 131.
वायुमण्डल की सबसे निचली परत है –
(a) समाताप मण्डल
(b) ओजोन मण्डल
(c) क्षोभ मण्डल
(d) आयन मण्डल
उत्तर :
(c) क्षोभ मण्डल

प्रश्न 132.
सूर्य की पराकासनी किरणों को धरातल पर पहुँचने से रोककर रक्षा कवच का काम करता है-
(a) ओजोन मण्डल
(b) मध्य मण्डल
(c) आयन मण्डल
(d) क्षोभ मण्डल
उत्तर :
(a) ओजोन मण्डल

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प्रश्न 133.
सबसे अधिक सूर्याताप प्राप्त होता है-
(a) उपोष्ण मरूस्थलों पर
(b) सागरों पर
(c) धुवीय क्षेतों पर
(d) उपधुवीय क्षेत्रों पर
उत्तर :
(a) उपोष्ण मरूस्थलों पर

प्रश्न 134.
भूमध्य रेखा पर वर्ष भर अधिक गर्मी पड़ने का कारण है-
(a) वर्ष भर सूर्य की लम्बवत् किरणों का बमकना
(b) निम्न धरातल
(c) गर्म महासागरीय धाराओं का चलना
(d) गर्म हवाओं का चलना
उत्तर :
(a) वर्ष भर सूर्य की लम्बवत् किरणों का चमकना

प्रश्न 135.
सामान्य ताप पतन दर है-
(a) 200 मी० की ऊँचाई पर 1ºC
(b) 165 मी० की ऊँचाई पर 1ºC
(c) 100 मी० की ऊँचाई पर 1ºC
(d) 50 मी० की ऊँचाई पर 1ºC
उत्तर :
(b) 165 मी० की ऊँचाई पर 1ºC

प्रश्न 136.
सागर तल पर वायु दबाव इन्च में रहता है –
(a) 29.92 इंच
(b) 76 इंच
(c) 1011.3 इंच
(d) 1013.25 इंच
उत्तर :
(a) 29.92 इंब

प्रश्न 137.
किन्हीं दो स्थानों के बीच वायु दबाव के अन्तर को कहते हैं-
(a) ताप प्रवणता
(b) दाब म्रवणता
(c) ढाल प्रवणता
(d) निम्न वायु दाब
उत्तर :
(b) दाब प्रवणता

प्रश्न 138.
शान्त पेटी या डोलड़म कहते है-
(a) विषुवत रेखीय क्षेत्र को
(b) उपोष्ण क्षेत्र को
(c) उपधुवीय क्षेत्र को
(d) धुवीय क्षेत्र को
उत्तर :
(a) विषुवत रेखीय क्षेत्र को

प्रश्न 139.
घरातल पर चलने वाली हवाओं की दिशा में विचलन का कारण है-
(a) पृथ्वी का परिक्रमण
(b) पृथ्वी का आवर्तन
(c) बन्द्रमा का परिक्रमण
(d) सूर्य की आभासीय गति
उत्तर :
(b) पृथ्वी का आवर्तन

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प्रश्न 140.
ग्रहीय पवन कहते हैं-
(a) मानसूनी हवाओं को
(b) चक्रवातों को
(c) स्थायी हवाओं को
(d) स्थानीय हृवाओं को
उत्तर :
(c) स्थायी हवाओं को

प्रश्न 141.
व्यापारिक हवाएँ वर्षा करती है-
(a) महादेशों के पध्विमी भाग में
(b) महादेशों के पूर्वी भाग में
(c) महादेशों के उत्तरी-पधिमी भाग में
(d) महादेशों के किसी भी भाग में
उत्तर :
(b) महादेशों के पूर्वी भाग में

प्रश्न 142.
जलकणों या हिमकणों के धरातल पर गिरने की क्रिया को कहते है-
(a) वर्षण
(b) वर्षा
(c) ओलावृष्टि
(d) हिमपात
उत्तर :
(c) ओलावृष्टि

प्रश्न 143.
संवाहनीय वर्षा मुख्यरूप से होती है-
(a) भूमध्यसागरीय प्रदेश में
(b) धुवीय प्रदेश में
(c) भूमध्यरेखीय प्रदेश में
(d) आयनवर्ती जलवायु क्षेत्र में
उत्तर :
(c) भूमध्यरेखीय प्रदेश में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. वायुमण्डल में ऊँचाई के बढ़ने के साथ-साथ उष्णता के वृद्धि को कहा …………. जाता है।
उत्तर : तापमान की विलोमता।

2. किसी स्थान के वर्षा-तापक्रम ग्राफ में यदि तापक्रम रेखा वर्षा के मध्य में नीचे की तरफ हो जाय तो वह स्थान………….. गोलार्द्ध में स्थित है।
उत्तर : उत्तरी।

3. पृथ्वी का ………….बल के प्रभाव से द्वितीयक उच्चज्वार होता है।
उत्तर : द्वितीयक।

4. शीत-ताप नियंत्रक यन्त्र वातावरण में ………….गैस छोड़ता है।
उत्तर : हाइड्रोफ्लोरो कार्बन।

5. ध्रुवीय ज्योति की सृष्टि में ………….होती है।
उत्तर : अयनमण्डल।

6. ………….उष्मा से जलवाष्प संघनन में बदलता है।
उत्तर : गुप्त।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

7. अधिकतम और न्यूनतम तापमान में होने वाले अन्तर को …………….. कहा जाता है
उत्तर : तापान्तर।

8. सौर विकिरण की ……………..कहा जाता है। जाती है। मात्रा वायुमण्डल द्वारा परावर्तन के रूप में पुनर्विकरित की
उत्तर : 35%

9. समताप मण्डल के ऊपरी अस्थाई सीमा को ……………..कहते हैं।
उत्तर : समताप सीमा (Tropopause).

10. उष्ण एवं आर्द्र तथा शीतल एवं शुष्क वायु राशियों के मिलने से ………………..वर्षा होती है।
उत्तर : चक्रवातीय।

11. पर्वतों के ऊपरी भागों से घाटी की ओर बहने वाली हवा को ………………..कहते हैं।
उत्तर : पर्वतीय हवा।

12. तापमान-वर्षा ग्राफ में यदि किसी स्थान की औसत मासिक तापमान रेखा वर्ष के मध्य में निम्नमुखी है तो वह स्थान ………………..गोलार्द्ध में स्थित होगा।
उत्तर : दक्षिणी।

13. यदि वायु का तापमान बढ़ता है तो उसकी नमी धारण क्षमता भी ………………..है।
उत्तर : बढ़ती।

14. रेफ्रिजरेटर तथा एयरकंडीशनर के उद्योग से ………………..गैस का उत्सर्जन होता है।
उत्तर : क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC)

15. सागर तल पर औसत वायु दबाव ………………..मिलीबार रहता है।
उत्तर : 1013.25

16. चक्रवात के केन्द्र को ………………..के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : चक्रवात चक्षु।

17. क्षोम मंडल की सबसे ऊपरी सीमा ………………..को के नाम से जानते हैं।
उत्तर : ट्रोपोपाज।

18. स्थलीय समीर और सागरीय समीर ………………..पवन के उदाहरण हैं।
उत्तर : सामयिक।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

19. पृथ्वी के चारों तरफ कई सौ किलोमीटर की मोटाई में व्याप्त गैसीय आवरण को ………………..कहा जाता है।
उत्तर : वायुमण्डल

20. वायुमण्डल में ऑक्सीजन ………………..प्रतिशत है।
उत्तर : 20.99

21. समताप मण्डल की ऊपरी सीमा पर ………………..की संक्रमण पेटी स्थित है।
उत्तर : समताप मंडल सीमा

22. वायुमण्डल के निचले भाग को ………………..कहते हैं।
उत्तर : सम मण्डल

23. क्षोभमण्डल की परत में प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर ………………..तापमान कम हो जाता है।
उत्तर : 1°C

24. सूर्य से निकलने वाली अत्यन्त गर्म किरण को ………………..कहते हैं।
उत्तर : पराबैगनी किरण (Ultraviolet Rays)

25. वायुमण्डल की गैसों में……………….. प्रधान है।
उत्तर : नाइट्रोजन।

26. नीचे से ऊपर जाने पर ताप की कमी की दर को ………………..कहते हैं।
उत्तर : तापमान की लम्बवत् द्वाल या लैप्स रेट (Lapse Rate)

27. वर्ष के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान के अन्तर को ………………..कहते हैं।
उत्तर : वार्षिक तापान्तर।

28. विषुवत रेखा और उसके आस-पास सालों भर सूर्य की किरण ………………..पड़ती है।
उत्तर : सीधी या लम्बवत्।

29. ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से बचने के लिए दिसम्बर 1997 ई० में ………………..में एक विश्वव्यापी सम्मेलन का आयोजन किया गया।
उत्तर : जपान के क्योटो शहर।

30. सूर्यताप एवं भौतिक विकिरण में संतुलन को ही पृथ्वी का ………………..कहा जाता है।
उत्तर : उष्मा बजट।

31. सिक्स के अधिकतम तथा न्यूनतम थर्मामीटर में प्रयोग किए जाने वाले दो द्रव्य पदार्थे ………………..हैं।
उत्तर : पारा तथा अल्कोहल।

32. ऊँचाई के साथ तापमान के बढ़ने को ……… कहते हैं।
उत्तर : तापमान का व्युत्क्रमण या प्रतिलोम अथवा विलोम।

33. विघुवत रेखा से 23 1/2° उत्तर एवं दक्षिण अक्षांशों के बीच ………स्थित है।
उत्तर : उष्ण कटिबन्ध।

34. सूर्य से निकलने वाली सौर उर्जा या उष्मा को ………कहते हैं।
उत्तर : सौर विकिरण (Solar Rodiation)

35. जिस तापमान पर पानी जमने लगता है उसे ………कहते हैं।
उत्तर : हिमांक (Freezing Point) ।

36. सागरतल पर वायुदाब……… होता है।
उत्तर : अधिकतम

37. प्रति इकाई क्षेत्रफल पर वायु के स्तम्भ के ……… कहते हैं।
उत्तर : वायुदाब।

38. वायुमण्डल में ……… की मात्रा बढ़ने पर वायुदाब में कमी आ जाती है।
उत्तर : जलवाष्प और तापमान।

39. सागर तल पर सामान्यत: ………। वायुमण्डलीय दाब वायु भार 1013.25 मिलीबार के 76 से॰मी० बराबर होता है
उत्तर : 76 से॰मी॰।

40. मानचित्र पर समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखा ……… को कहते हैं।
उत्तर : समदाब रेखा (Isobar)।

41. भूमध्य रेखा या विधुवत रेखा पर ……… वायुदाब की पेटी पायी जाती है।
उत्तर : निम्न।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

42. समुद्रतल से हम ज्यों-ज्यों ऊँचाई पर जाते हैं त्यों-त्यों वायुभार ……… जाता है।
उत्तर : घटता।

43. दो स्थानों के बीच वायुदाब के अन्तर को ……… कहते हैं।
उत्तर : दाब-प्रवणता (Pressure Gradient)।

44. ‘ट्रेड’ (Trade) एक जर्मन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ ……… होता है।
उत्तर : निश्चित मार्ग या निर्दिष्ट पथ।

45. पछुवा पवनों का सर्वोत्तम विकास ……… अक्षांशों के बीच होता है।
उत्तर : 40° से 65° दक्षिणी।

46. उत्तरी गोलार्द्ध में धुवीय पवन उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में ……… की ओर प्रवाहित होती है।
उत्तर : दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम।

47. इवानगेलिस्टा टोरीसीली (Evangelesta Torricelli) ने ……… यंत्र की खोज किया था।
उत्तर : पारद वायुदाबमापी (Mercury Barometer)।

48. क्षोभमण्डल की ऊपरी परतों में अत्यंत तीव्र गति से चलने वाली जेट स्ट्रीम (Jet Stream) की दिशा ……… की ओर होती है।
उत्तर : पश्चिम से पूरब।

49. चक्रवात में वायु के चलने की दिशा उत्चरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के …………..दिशा में होती है।
उत्तर : विपरीत (Anti)।

50. 60° दक्षिणी अक्षांश पर चलने वाली बहादुर पछुवा पवन को ………….. कहते हैं।
उत्तर : बीखता साठा (Shreiking Sixties)।

51. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात दोनो गोलार्द्धों में ………….. के मध्य पाए जाते हैं।
उत्तर : 5° से 30° अक्षांशों।

52. शीतोष्ण कटिबन्यकीय चक्रवात ………….. दिशा में प्रवाहित होती है।
उत्तर : पश्चिम से पूरब।

53. पृथ्वी की दैनिक गति के कारण हवाओं की दिशा में ………….. हो जाता है।
उत्तर : विक्षेपण (Deflection) ।

54. समदाब रेखाओं के समानान्तर गतिशील वायु को कहा जाता है।
उत्तर : भू-विक्षेप पवन (Geostrophic Wind)।

55. पर्वत से घाटी की ओर चलने वाली वायु को भी ………….. कहा जाता है।
उत्तर : गुरुत्वाकर्षण या उत्रेक्षक पवन (Gravity or Catabatic Wind)।

56. समुद्र तटों के समीप सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक चलने वाली हवा को …………..कहते हैं।
उत्तर : जलीय समीर (Sea Breeze)।

57. सहारा मरुस्थल से इटली में प्रवाहित होने वाली स्थानीय गर्म वायु को …………..कहते हैं।
उत्तर : सिरोक्को (Sirocco)।

58. जब समदाब या समभार रेखाएँ दूर-दूर तक खींची होती हैं तो दाब प्रवणता (Pressure Gradient) …………..होता है।
उत्तर : कम।

59. शान्त कटिबन्थ या डोलड्रम में वायु का प्रवाह …………..होता है।
उत्तर : ऊपर की ओर या लम्बवत् (Vertical)।

60. मैक्सिको की खाड़ी में उत्पन्न होने वाली उष्पा कटिबन्धीय चक्रवात को …………..कहते हैं।
उत्तर : टोरनेडो (Tornado)।

61. उष्ण मानसूनी जलवायु क्षेत्र में वर्षा …………..ॠतु में होती है।
उत्तर : म्रीष्म

62. पर्वतों के …………… ढाल पर वर्षा अधिक होती है।
उत्तर : पवना भिमुख।

63. वर्षा मापने वाले बंत्र को …………..कहते हैं।
उत्तर : रेंगेज।

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64. निरपेक्ष आर्द्रता को ग्राम प्रति …………..में व्यक्त किया जाता है।
उत्तर : घन मीटर।

65. गोभी के फूल जैसे दिखने वाला मेघ …………..है।
उत्तर : कपासी।

66. उष्णार्द्र एवं ठंडी वायु के संमिश्रण से उत्पन्न कोहरे को …………… कहते हैं।
उत्तर : अभिवहन कोहरा अथवा सम्पर्कीय कोहरा।

67. वायु के प्रति क्षण बदलने वाली भौतिक दशाओं को …………..कहते हैं।
उत्तर : मौसम।

68. समुद्र के निकट सापेक्ष आर्द्रता …………..पाया जाता है।
उत्तर : अधिक।

69. जिस ताप मान पर वायु संतुप्त हो जाती है उसे …………..कहते हैं।
उत्तर : ओसांक बिंदु (Dew Point)!

70. मौसम मानचित्र पर (ख.ढ़ चिन्ह)………….. का संकेत करता है।
उत्तर : चमक (Lightening)।

71. वायुमण्डल की सबसे ऊपरी परत …………..है।
उत्तर : क्षोभ मण्डल (Troposphere)

72. ओजोन गैस की रचना आक्सीजन के तीन …………..के संयोगों से होती है।
उत्तर : अणुओं

73. …………..परत को पृथ्वी का छाता कहा जाता है।
उत्तर : ओजोन

74. …………. एक प्रकार की ऊर्जा है।
उत्तर : ताप।

75. वायुमण्डल के गर्म होने की विधियाँ हैं।
उत्तर : तीन।

76. सिक्स थर्मामीटर का आकार अंग्रेजी के अक्षर की तरह होता ………….है।
उत्तर : U

77. ………….की विलोमता के लिए साफ आकाश जरूरी है।
उत्तर : तापमान।

78. पर्वतीय वर्षा का दूसरा नाम ………….वर्षा है।
उत्तर : धरातलीय।

79. जिस दिशा से ………….चलती है उसके अनुसार ही पवन का नामकरण होता है।
उत्तर : वायु।

80. बोरा एक ………….हवा है।
उत्तर : स्थानीय ठण्डी।

81. वायुमण्डल में पायी जाने वाली भारी गैसों में सबसे हल्की गैस ………….है।
उत्तर : हाइड्रोजन।

82. ………….गैस सूर्य की गर्म पराकासनी किरणों की गर्मी अवशोषित करती है।
उत्तर : ओजो।

83. वायुमण्डल में ………….की ऊँचाई तक आते-आते ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है।
उत्तर : 120 कि०मी०/ 90 कि०मी०।

84. आयन मण्डल को…………. मण्डल भी कहते हैं।
उत्तर : ताप।

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85. पृथ्वी के उष्मा बजट का ………….प्रतिशत भाग वाष्पीकरण पर खर्च होता है।
उत्तर : 23/23

86. सूर्याभिताप का ………….भाग ही धरातल पर पहुँच पाता हैं।
उत्तर : 51%

87. सूर्य की किरणों से विमुख पर्वतीय ढाल को ………….कहते हैं।
उत्तर : तापछाया प्रदेश।

88. वायुदाब तथा तापमान में ………….सम्बन्ध है।
उत्तर : विपरीत।

89. दोनो-गोलाद्धो में 30° 35° अक्षांशों को ………….कहते हैं।
उत्तर : अश्च अक्षांश।

90. दोनों ध्रुवों पर…………. भार पाया जाता है।
उत्तर : उच्च।

91. उत्तरी गोलार्द्ध में हवाओं की दिशा में विचलन ………….ओर होती है।
उत्तर : दाएँ।

92. …………. उपोष्ण उच्च वायुदाब से अध्रुवीय निम्न वायुदाब की ओर चलती हैं।
उत्तर : पछुआ।

93. सूर्य के उत्तरायण की स्थिति में वायुदाब पेटियाँ ………….की ओर खिसकती हैं।
उत्तर : उत्तर।

94. चक्रवातों के केन्द्र में ………….भार रहता है।
उत्तर : निम्न।

95. शीत ऋतु में एड्रियाटिक सागर के पूर्वी तट पर चलने वाली स्थानीय हवा को…………. कहते हैं।
उत्तर : बोरा।

96. जलवाष्प की मात्रा स्थिर पर सापेक्षिक आर्द्रता का तापमान के साथ ………….सम्बन्ध है।
उत्तर : विक्षोभ।

97. जलवाष्प का जलकणों एवं हिमकणों में रूपान्तरण …………. कहलाता है।
उत्तर : संघनन।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. फोर्टिन बैरोमीटर द्वारा वायुदाब मापा जाता है।
उत्तर : True

2. ओजोन स्तर को प्राकृतिक सौर पर्दा कहा जाता है।
उत्तर : True

3. सेल्सियस थर्मामीटर में हिमांक तापमान 32° है।
उत्तर : False

4. उष्ग मरूस्थलीय जलवायु प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 75 से. मी. है।
उत्तर : False

5. मिस्ट्रल एक स्थानीय पवन है।
उत्तर : True

6. भूमध्यसागरीय जलवायु क्षेत्र में मीष्मत्रतु आर्द्र होती है।
उत्तर : False

7. मानसूनी जलवायु क्षेत्र में शीत ऋतु आर्द्र होती है।
उत्तर : False

8. कोहरा वृष्टि का रूप नहीं है।
उत्तर : False

9. धरातल से 90 कि॰मी० तक की ऊँचाई का वायुमण्डल विषममण्डल कहलाता है।
उत्तर : False

10. मानसून एक स्थनीय पवन है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

11. मोनाडनाक शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
उत्तर : False

12. मानसून पवन का एक अन्य नाम व्यापारिक पवन है।
उत्तर : False

13. ‘लू’ एक शीतल प्रकार की वायु है।
उत्तर : False

14. प्रतिचक्रवातों में आसमान स्वच्छ एवं बादल रहित दिखाई देता है।
उत्तर : True

15. सामान्यतः प्रति 1000 मीटर अथवा 1 कि०मी० की ऊँचाई पर $6.4^{\circ} \mathrm{C}$ तापमान कम हो जाता है।
उत्तर : True

16. विषम मण्डल वायुमण्डल का निचला भाग है।
उत्तर : False

17. मध्य मण्डल की ऊपरी सीमा को मष्य सीमा (Mesopause) कहा जाता है।
उत्तर : True

18. नवीनतम खोजों के आधार पर वायुमण्डल की अनुमानत: ऊँचाई 32000 कि॰मी॰ तथा इससे भी अधिक आँकी गई है।
उत्तर : True

19. ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में अधिकता पायी जाती है।
उत्तर : False

20. समताप रेखायें कल्पित रेखाएँ होती हैं।
उत्तर : True

21. पार्थिव विकिरण की 51 इकाइयाँ हैं।
उत्तर : True

22. शीत कटिबन्ध दोनों गोलार्दों में 23 1°/2  से 66 1°/2 अक्षांशों के बीच स्थित है।
उत्तर : False

23. एक माह के अधिकतम तापमान और न्यूनतम तापमान के अन्तर को दैनिक तापान्तर कहते हैं।
उत्तर : False

24. अल-नीनो (El-Nino) की घटनाओं के बीच एक विपरीत एव पूरक घटना देखने को मिलती है जिसे ला-नीनो (La-Nino) कहते हैं।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

25. ‘ग्रीन हाउस सम्मेलन’ में म्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effects) के लिए आक्सीजन O2 को जिम्मेदार माना गया है।
उत्तर : False

26. वायुदाब और तापमान में घनिष्ठ सम्बन्ध है।
उत्तर : True

27. वायुदाब को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्व पृथ्वी की दैनिक गति है।
उत्तर : True

28. साधारणंतः 300 मीटर की ऊँचाई पर 34 मिलीबार वायुदाब अधिक हो जाता है।
उत्तर : False

29. फ्लोन के अनुसार डोलड्रम की पेटी में अत्यंत तेज गति से पवन पश्चिम से पूरब की ओर चला करती है।
उत्तर : False

30. सूर्य के उत्तरायण की एवं दक्षिणायन होने के कारण वायुदाब की पेटियाँ क्रमशः उत्तर एवं दक्षिण की ओर स्थानांतरण हो जाता है।
उत्तर : True

31. उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबन्ध से उपधुवीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध की ओर बहने वाली पवन व्यापारिक या वाणिज्य या पूर्वी पवन कहलाती है।
उत्तर : False

32. वायुमण्डलीय दाब में भूमध्य रेखा पर निम्न दाब कटिबन्ध तथा धुवों पर उच्च दाब कटिबन्ध ताप प्रेरित कटिबन्ध (Thermally Induced Belts) हैं।
उत्तर : True

33. एनीरायड बेरोमीटर (Aneroid Barometer) द्रवसहित तथा आकृति में घड़ीनुमा होता है।
उत्तर : False

34. फोर्टिन बैरोमीटर (Fortins Barometer) की खोज फोर्टिन महोदय ने किया था।
उत्तर : True

35. वायुभार को मीटर, कि०मी० की इकाई में दिखाया जाता है।
उत्तर : False

36. अधिक दाब-प्रवणता (Pressure Gradient) में समभार रेखाएँ पास-पास खींची जाती है।
उत्तर : True

37. 50° दक्षिणी अक्षांश के समीप चलने वाली प्रचण्ड पहुवा पवन को गरजने वाली चालीसा (Roaring Forties) कहते हैं।
उत्तर : False

38. समुद्र तटों के समीप रात्रि को स्थल भाग से समुद्रों की ओर चलने वाली हवाओं को स्थलीय समीर (Land Breeze) कहते हैं।
उत्तर : True

39. उत्तरी भारत एवं पाकिस्तान के मैदानी भागों में मई एवं जून में प्रवाहित होने वाली गर्म शुष्क हवा को लू (Loo) कहते हैं।
उत्तर : True

40. चक्रवात की आँख (Eye of Cyclone) में उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का वायु भार केन्द्र में अधिक होता है।
उत्तर : False

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41. शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की उत्पत्ति समुद्र एवं स्थल भागों में समान रूप से होती है।
उत्तर : True

42. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात को पश्चिमी द्वीप समूह मे ‘हरीकेन’ (Hurricane) कहते हैं।
उत्तर : True

43. चक्रवात (Cyclone) में वायु की चलने की दिशा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के विपरीत (Anti-clockwise) में होती है।
उत्तर : False

44. सालोंभर एक दिशा में सुनिश्चित पेटियों में प्रवाहित होने वाली पवन को स्थानीय पवन्Local Wind) कहते हैं।
उत्तर : False

45. जेट स्ट्रीम (Jet Sream) की गति 120-150 कि०मी॰ प्रति घण्टा से भी अधिक होती है।
उत्तर : True

46. विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) को ग्राम प्रति किलोग्राम की इकाई में व्यक्त किया जाता है।
उत्तर : True

47. पक्षाभ मेघ वायुमण्डल में निचले भाग पर पाया जाता है।
उत्तर : False

48. उष्ण मरूस्थलीय जलवायु प्रदेश में औसत वर्षा 75 से॰मी० होती है।
उत्तर : False

49. मानचित्र पर समान वर्षा वाले क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा समताप रेखा (Isotheren) कहलाती है।
उत्तर : True

50. ‘Am’ को उष्ण तथा उपोष्ण स्टेपी जलवायु कहा जाता है।
उत्तर : False

51. सापेक्ष आर्द्रता को शुष्क एवं आर्द्र बल्ब थर्मामीटर से मापा जाता है।
उत्तर : True

52. चेरापूँजी की औसत वार्षिक वर्षा प्राय: 2,207 कि०मी० होती है।
उत्तर : False

53. मौसम मानचित्र पर (•) रूढ़ चिन्ह के धीमी वर्षा का संकेत है।
उत्तर : True

54. धार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण संभाव्य वाष्मोत्सर्जन की संकल्पना पर आधारित है।
उत्तर : True

55. चक्रवातीय वर्षा को सहिम वृष्टि कहते हैं।
उत्तर : False

56. जलवाष्प जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
उत्तर : False

57. ओजोन सूर्य के पराबैगनी विकिरण को सोख लेता है।
उत्तर : True

58. उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश शान्तमण्डल में दिखता है।
उत्तर : True

59. किसी स्थान के 12 घंटे के सबसे कम तापमान को न्यूनतम तापमान कहते हैं।
उत्तर : False

60. महाद्वीपीय जलवायु 80° से 90° अक्षांशों के बीच मिलती है।
उत्तर : False

61. नगरों के विनाश से वैश्विक उष्मन बढ़ रहा है।
उत्तर : False

62. मीथेन महत्वपूर्ण ग्रीन हाउस गैस है।
उत्तर : True

63. वैश्विक उष्मन का खतरा समुद्र तटवर्ती प्रदेशों को है।
उत्तर : True

64. टॉरिसेली बैरोमीटर से वायु की आर्द्रता मापी जाती है।
उत्तर : False

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65. चिनूक को हिम भक्षी (Snow Eater) कहा जाता है। [F]
उत्तर : True

66. 40° दक्षिणी अक्षांश पर वायु का वेग इतना अधिक एवं गरजने वाला होता है कि इसे अन्च अक्षांश कहते हैं।
उत्तर : False

67. प्रति 1000 मीटर की ऊँचाई पर तापमान 5.4°C की दर से कम होता है।
उत्तर : False

68. समाताप मण्डल में ओजोन गैसों का जमाव सबसे अधिक होता है।
उत्तर : False

69. दो पछुआ पवने अन्तरा उष्ण कटिबन्धीय अभिसरण (ITC) क्षेत्र में मिलती हैं।
उत्तर : False

70. पृथ्वी के वायुमण्डल का 66% भाग प्रवेशी सौर्यिक विकिरण से गर्म होता है।
उत्तर : True

71. पारा का हिमांक बिन्दु 4°C है।
उत्तर : False

72. वायुमण्डल की सबसे निचली परत को समताप मण्डल कहते हैं।
उत्तर : False

73. सूर्यताप धरातल पर आने वाली सौर्यिक ऊर्जा है।
उत्तर : True

74. एनीमोमीटर से पवन का वेग मापा जाता है।
उत्तर : True

75. मानसून एक सामयिक पवन है।
उत्तर : True

76. पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण वायुमण्डल घरातल से सटा रहता है।
उत्तर : True

77. वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा ऑक्सीजन गैस की है।
उत्तर : False

78. वायुमण्डल में जलवाष्प की मात्रा परिवर्तित होती रहती है।
उत्तर : True

79. मौसमी घटनाएँ समताप मण्डल में घटित होती रहती हैं।
उत्तर : True

80. नायुमण्डल 20-35 कि०मी०ऊँचाई के मध्य है।
उत्तर : False

81. ताप को मापने के लिए बैरोमीटर का उपयोग किया जाता है।
उत्तर : False

82. भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर तापमान बढ़ता जाता है।
उत्तर : False

83. सागरतटीय क्षेत्रों की जलवायु सम होती है।
उत्तर : True

84. धुव वृत्तों एवं धुवों के बीच का क्षेत्र शीतोष्ण कटिबंध कहलाता है।
उत्तर : False

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85. ऊँचाई के साथ तापमान में वृद्धि को ऋणात्मक ताप पतन दर कहते हैं।
उत्तर : True

86. मानचित्र पर समवायुभार रेखाओं की निकट स्थित उच्च वायुभार ढाल प्रवणता को दर्शाती है।
उत्तर : True

87. ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ वायुदबाव भी बढ़ता जाता है।
उत्तर : False

88. व्यापाररिक हवाओं के मार्ग में महादेशों के पश्चिमी भाग शुष्क रहते हैं।
उत्तर : True

89. सागरतटीय क्षेत्रों में स्थलीय समीर दिन के समय प्रवाहित होते हैं।
उत्तर : False

90. चक्रवातों में वायु केन्द्र की ओर घड़िवत दिशा में चलती है।
उत्तर : True

91. मानसूनी हवाओं की उत्पत्ति का सम्बन्ध पूर्वी जेट धारा से है।
उत्तर : True

92. धरातल एवं वायुमण्डल के बीच जलवाष्प एवं जल के आदान-प्रदान को जलीय चक्र कहते हैं।
उत्तर : True

93. निरपेक्ष आर्द्रता को प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
उत्तर : False

94. विशिष्ट आर्द्रता पर वायु दबाव एवं तापमान परिवर्तन का प्रभाव नहीं पड़ता।
उत्तर : True

95. ओस निर्माण के लिए तापमान हिमांक से ऊपर होना चाहिए।
उत्तर : False

96. संवाहनिक वर्षा गरज एवं चमक के साथ मूसलाधार रूप में होती है।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘अ’ को स्तम्भ ‘ब’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. सममण्डल (i) आर्गन
B. हीलियम परत (ii) धूलकण
C. भारी गैस (iii) 1100-3500 कि०मी०
D. धुँधलापन (iv) क्षोभमण्डल
E. विकिरण (v) समतापमण्डल
F. चिनक (vi) हिम भक्षि

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. सममण्डल (v) समतापमण्डल
B. हीलियम परत (iii) 1100-3500 कि०मी०
C. भारी गैस (i) आर्गन
D. धुँधलापन (ii) धूलकण
E. विकिरण (iv) क्षोभमण्डल
F. चिनक (vi) हिम भक्षि

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प्रश्न 2.

बायां स्तम्भें दायां स्तम्भ
1. TISCO 1. धान्द
2. धूपगढ़ 2. कुल्टी बर्नपुर
3. छिद्र का निर्माण वायु संचालन से 3. सतपुड़ा
4. कपास की खेती 4. उष्ण प्रदेश
5. लैटराइट मिट्टी 5. बाल विविल

उत्तर :

बायां स्तम्भें दायां स्तम्भ
1. TISCO 2. कुल्टी बर्नपुर
2. धूपगढ़ 3. सतपुड़ा
3. छिद्र का निर्माण वायु संचालन से 1. धान्द
4. कपास की खेती 5. बाल विविल
5. लैटराइट मिट्टी 4. उष्ण प्रदेश

प्रश्न 3.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. ग्रीन हाउस गैस (i) 66 1°/2 से 90° N/S
B. सूर्य के सतह पर तापमान (ii) 95°F
C. शीत कटिबन्ध (iii) CO2
D. 35°C तापमान बराबर (iv) 6000°C
E. थर्मामीटर (v) 1742 ई०
F. सेण्टीग्रेड थर्मामीटर का आविष्कार (vi) तापमान
G. सूर्याताप (vii) कैलोरी

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. ग्रीन हाउस गैस (iii) CO2
B. सूर्य के सतह पर तापमान (iv) 6000°C
C. शीत कटिबन्ध (i) 66 1°/2 से 90° N/S
D. 35°C तापमान बराबर (ii) 95°F
E. थर्मामीटर (vi) तापमान
F. सेण्टीग्रेड थर्मामीटर का आविष्कार (v) 1742 ई०
G. सूर्याताप (vii) कैलोरी

प्रश्न 4.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. वायुदाब का घटना-बढ़ना (i) 22 दिसम्बर को
B. उपोष्ण उच्च दाब पेटियाँ (ii) प्रचण्ड पचासा
C. कॉरिआलिस बल का प्रभाव (iii) क्षोभमण्डल के ऊपर
D. सन्मार्गी पवन (iv) 1835 ई०
E. मकर रेखा पर सूर्य की किरण (v) वायुदाब उच्चावचन
F. जेट प्रवाह (vi) पूर्वी पवन
G. अंतरा उष्णकटिबन्धीय अभिसरण (vii) मिस्र में
H. खमसिन (Khamsin) (viii) अश्व अक्षांश
I. चक्रवात (Cyclone) (ix) टोरीसीली ने
J. पारा बैरोमीटर की खोज (x) बंगाल की खाड़ी
K. बहादुर पछुवा (Brave Westerlies) (xi) समभार रेखा
L. दाब प्रवणता (Pressure Gradient) (xii) भू-मध्य रेखा

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. वायुदाब का घटना-बढ़ना (v) वायुदाब उच्चावचन
B. उपोष्ण उच्च दाब पेटियाँ (viii) अश्व अक्षांश
C. कॉरिआलिस बल का प्रभाव (iv) 1835 ई०
D. सन्मार्गी पवन (vi) पूर्वी पवन
E. मकर रेखा पर सूर्य की किरण (i) 22 दिसम्बर को
F. जेट प्रवाह (iii) क्षोभमण्डल के ऊपर
G. अंतरा उष्णकटिबन्धीय अभिसरण (xii) भू-मध्य रेखा
H. खमसिन (Khamsin) (vii) मिस्र में
I. चक्रवात (Cyclone) (x) बंगाल की खाड़ी
J. पारा बैरोमीटर की खोज (ix) टोरीसीली ने
K. बहादुर पछुवा (Brave Westerlies) (ii) प्रचण्ड पचासा
L. दाब प्रवणता (Pressure Gradient) (xi) समभार रेखा

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 5.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. वर्षामापी यंत्र (i) विषुवत रेखीय वर्षा
B. समान वर्षा वाले क्षेत्र (ii) 23 1°/2 उ०/द० से 66 1°/2 उ०/द०
C. संवहनीय वर्षा (iii) कुहासा
D. रूढ़ चिन्ह तट (iv) रेंजगेज
E. जेरोथर्म (v) समवर्षण (Isohyte)
F. शीतोष्ण कटिबन्ध (vi) लम्बे समय तक
G. वृष्टि (vii) BW
H. पक्षाभ मेघ (viii) हाइग्रोमीटर
I. आर्द्रता (ix) घोड़े.का पूँछ (Horse Tail)
J. जलवायु (x) बदलों की गरजना

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. वर्षामापी यंत्र (iv) रेंजगेज
B. समान वर्षा वाले क्षेत्र (v) समवर्षण (Isohyte)
C. संवहनीय वर्षा (i) विषुवत रेखीय वर्षा
D. रूढ़ चिन्ह तट (x) बदलों की गरजना
E. जेरोथर्म (vii) BW
F. शीतोष्ण कटिबन्ध (ii) 23 1°/2 उ०/द० से 66 1°/2 उ०/द०
G. वृष्टि (iii) कुहासा
H. पक्षाभ मेघ (vi) लम्बे समय तक
I. आर्द्रता (viii) हाइग्रोमीटर
J. जलवायु (ix) घोड़े.का पूँछ (Horse Tail)

प्रश्न 6.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. N2 गैस (i) 20.94 %
B. वायुमण्डल में CO2 की मात्रा (ii) अधिकतम और न्यूनतम थर्मामीटर
C. वायुमण्डल में O2 की मात्रा (iii) औसत तापमान
D. सिक्स थर्मामीटर (iv) 78.04 %
E. अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान के अन्तर (v) टुण्ड्रा वनस्पति
F. ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ना (vi) भारतीय मानसून के उत्पत्ति की व्याख्यय
G. लाइकेन कार्ड घासें (vii) ग्रीन हाउस प्रभाव
H. जेट स्ट्रीम (viii) 0.03%
I. वषुवतीय शान्त मण्डल (ix) डोलड्रम
J. CO2 एवं मीथेन गैस (x) तापमान की बिलोमता

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
A. N2 गैस (iv) 78.04 %
B. वायुमण्डल में CO2 की मात्रा (iii) औसत तापमान
C. वायुमण्डल में O2 की मात्रा (i) 20.94 %
D. सिक्स थर्मामीटर (ii) अधिकतम और न्यूनतम थर्मामीटर
E. अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान के अन्तर (iii) औसत तापमान
F. ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ना (x) तापमान की बिलोमता
G. लाइकेन कार्ड घासें (v) टुण्ड्रा वनस्पति
H. जेट स्ट्रीम (vi) भारतीय मानसून के उत्पत्ति की व्याख्यय
I. वषुवतीय शान्त मण्डल (ix) डोलड्रम
J. CO2 एवं मीथेन गैस (vii) ग्रीन हाउस प्रभाव

प्रश्न 7.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. वायुमण्डल क , गठन (a) आयनमण्डल
2. वायुमण्डल की परत (b) अक्षांश
3. वायुमण्डल क गर्म होने की विधि (c) गैस, जल वाष्प
4. वायुमण्ड नोय तापक्रम में परिवर्तन का कारण (d) संचालन, संवहन

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. वायुमण्डल क गठन (c) गैस, जल वाष्प
2. वायुमण्डल की परत (a) आयनमण्डल
3. वायुमण्डल क गर्म होने की विधि (d) संचालन, संवहन
4. वायुमण्ड नोय तापक्रम में परिवर्तन का कारण (b) अक्षांश

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 2 वायुमण्डल

प्रश्न 8.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. अधोम ग्डल (a) बीच के माध्यम को गर्म किए बिना ताप का स्थानान्तरण
2. अभि, वहन (b) वायु की क्षैतिज गति का मूल कारण
3. र्वि करण (c) क्षैतिज वायु प्रवाह के कारण ताप का स्थानान्तरण
4. ता पीय भूमध्यरेखा (d) ॠणात्मक ताप पतन दर
5. नपक्रम की विलोमता (e) वायुमण्डल की सबसे निचली परत
6. वायुभार ढाल (f) सभी देशान्तर रेखाओं के सबसे गर्म स्थानों को मिलांनेवाली कल्पित रेखा
7. गरजती चालीसा (g) क्षोभ मण्डल की ऊपरी परतों में तीव्र गित से चलनेवाली परिध्रुवीय पवन
8. जेट धारा (h) 40° दक्षिण अक्षांश के पास प्रवाहित होनेवाली पछुआ वायु

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. अधोम ग्डल (e) वायुमण्डल की सबसे निचली परत
2. अभि, वहन (c) क्षैतिज वायु प्रवाह के कारण ताप का स्थानान्तरण
3. र्वि करण (a) बीच के माध्यम को गर्म किए बिना ताप का स्थानान्तरण
4. ता पीय भूमध्यरेखा (f) सभी देशान्तर रेखाओं के सबसे गर्म स्थानों को मिलांनेवाली कल्पित रेखा
5. नपक्रम की विलोमता (d) ॠणात्मक ताप पतन दर
6. वायुभार ढाल (b) वायु की क्षैतिज गति का मूल कारण
7. गरजती चालीसा (h) 40° दक्षिण अक्षांश के पास प्रवाहित होनेवाली पछुआ वायु
8. जेट धारा (g) क्षोभ मण्डल की ऊपरी परतों में तीव्र गित से चलनेवाली परिध्रुवीय पवन

 

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

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WBBSE Class 10 Geography Chapter 1 Question Answer – बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
सहारा बालुकामय मरुस्थल को किस नाम से जाना जाता है।
उत्तर :
उष्ण मरुस्थल।

प्रश्न 2.
दो नदी व्यवस्था को अलग करने वाली उच्च भूमि का नाम लिखें।
उत्तर :
जलविभाजक (Water shed)

प्रश्न 3.
किस प्रकार के कार्य से ड्रमलिन की उत्पत्ति होती है ?
उत्तर :
हिमनद के निक्षेपण के कार्य से ड्रमलिन (Drumlin) की उत्पत्ति होती है।

प्रश्न 4.
भारत में अवस्थित हिमालय की सबसे ऊँची चोटी कौन है ?
उत्तर :
कंचनजंघा।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

प्रश्न 5.
पथरीले मरुस्थल को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
हमादा (Thar Desert)

प्रश्न 6.
विश्व के वृहत्तम जल-प्रपात का नाम लिखिए।
उत्तर :
न्याग्रा।

प्रश्न 7.
जलविभाजक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
अरावली पर्वत गंगा एवं सिन्धु क्रम की नदियों के बीच जल विभाजक है।

प्रश्न 8.
रेत के टीले क्या हैं ?
उत्तर :
तीव्र आँधी के मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आने पर वहाँ बालू के कण संचित हो जाते हैं जिससे कहीं गोल, कहीं नवचन्द्राकर तथा कहीं अर्द्धवृत्ताकार टीले बन जाते हैं। इन्हें बालुका-स्तूप कहते हैं।

प्रश्न 9.
समतल स्थापना की दो विधियाँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation) और अधिवृद्धिकरण (Aggradation)

प्रश्न 10.
नदी की किस अवस्था में डेल्टा का निर्माण होता है ?
उत्तर :
नदी की अंतिम अवस्था में डेल्टा का निर्माण होता है।

प्रश्न 11.
सर्क देखने में कैसा होता है ?
उत्तर :
गहरे सीट वाली आराम कुर्सी की तरह सर्क दिखायी देता है।

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प्रश्न 12.
शुष्क प्रदेश में स्थित एक स्थलरूप का नाम लिखिए जिसका निर्माण पवन एवं जल की संयुक्त क्रिया द्वारा होता है।
उत्तर :
पेडीमेण्ट।

प्रश्न 13.
नदी अपरदन की कितनी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
नदी अपरदन की चार विधियाँ हैं –

  1. अपघर्षण
  2. सन्निघर्षण
  3. घोलीकरण
  4. जलगति क्रिया।

प्रश्न 14.
किस बल द्वारा धरातल पर समतल स्थापना का कार्य होता है ?
उत्तर :
बहिर्जात बल (Exogenetic Force)।

प्रश्न 15.
बहिर्जात बल के किसी एक अभिकर्ता का नाम लिखिए।
उत्तर :
नदी, हिमनद, पवन आदि बहिर्जात बल के अभिकर्ता हैं।

प्रश्न 16.
नदी बेसिन किससे घिरे रहते हैं ?
उत्तर :
नदी बेसिन जल विभाजकों से घिरे होते हैं।

प्रश्न 17.
उद्गम से मुहाने तक के नदी के मार्ग को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
नदी घाटी।

प्रश्न 18.
विश्व का सबसे गहरा कैनियन कौन-सा हैं ?
उत्तर :
ग्रैण्ड कैनियन (Grand canyon)।

प्रश्न 19.
विश्व का सबसे ऊँचा जल-प्रपात कौन-सा हैं ?
उत्तर :
एंजेल जलप्रपात (बेनेजुएला में)।

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प्रश्न 20.
नदी के अपरदन की अन्तिम सीमा को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
आधार तल (Base Level) कहते हैं।

प्रश्न 21.
जब नदियाँ अपने मोड़ को छोड़कर सीधे प्रवाहित होने लगती हैं तो किसका निर्माण होता है ?
उत्तर :
छाड़न झील या वृषभ-धनु (Ox-bow Lake)।

प्रश्न 22.
नदियाँ किस अवस्था में अनेक शाखाओं में बँट जाती है ?
उत्तर :
वृद्धावस्था या डेल्टाई भाग में।

प्रश्न 23.
किस डेल्टा के किनारे वक्राकार होते हैं।
उत्तर :
दंताकार डेल्टा (Cuspate Delta)

प्रश्न 24.
हिमरेखा की ऊँचाई कहाँ सागर तल पर रहती है ?
उत्तर :
ध्रुव प्रदेशों में।

प्रश्न 25.
भारत का सबसे बड़ा हिमनद कौन-सा है ?
उत्तर :
सियाचेन हिमनद।

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प्रश्न 26.
स्कॉटलैण्ड में सर्क को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
कोरी (Corrie)।

प्रश्न 27.
आल्पस पर्वत श्रेणी का मैअर हॉर्न किसका उदाहरण है ?
उत्तर :
गिरिभृंड्र का उदाहरण है।

प्रश्न 28.
मेष शैल का सम्मुख ढाल कैसा होता है ?
उत्तर :
चिकना एवं साधारण होता है।

प्रश्न 29.
हिमनद द्वारा ढोकर लाए गए पदार्थों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
हिमोढ़ (Moraine)।

प्रश्न 30.
जहाँ ड्रमलिन समूह में पाए जाते हैं, उस स्वरूप को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अण्डे की टोकरी की स्थलाकृति (Basket of eggs Topography)

प्रश्न 31.
जिन प्रदेशों में यारडंग का निर्माण होता है वे प्रदेश किन रूपों में बदल जाते हैं ?
उत्तर :
नालियों एवं टीलों (Furrows and ridges) कहते हैं।

प्रश्न 32.
मंगोलिया में अपवाहन बेसिन को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
पांगक्यागनाम कहते हैं।

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प्रश्न 33.
किन बालुका स्तूपों को क्रियाशील या जीवित स्तूप भी कहते हैं ?
उत्तर :
अनुप्रस्थ बालुका स्तूप (Transverse sand-dunes) कहते हैं।

प्रश्न 34.
जब नदी का वेग दोगुना हो जाता है तो उसकी अपरदन शक्ति कितनी बढ़ जाती है ?
उत्तर :
चार गुना बढ़ जाती है।

प्रश्न 35.
यदि नदी का वेग दो गुना कर दिया जाय तो उसकी भार वहन करने की क्षमता कितनी बढ़ जाती है ?
उत्तर :
चौसठ गुना हो जाती है।

प्रश्न 36.
विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात किस नदी पर है ?
उत्तर :
वेनेजुएला के रियो कैरानी (Rio Caroni) नदी पर।

प्रश्न 37.
अवनमन कुंड (Plung Pool) क्या है ?
उत्तर :
जब जलगतर्तिका की गहराई एवं व्यास अधिक हो जाता है, तो इसे अवनमन कुंड कहते हैं।

प्रश्न 38.
नदी के मोड़ों का मिएण्डर नाम कैसे पड़ा ?
उत्तर :
एशिया माइनर की मिएण्डर नदी के नाम पर नदी के मोड़ो को मिएण्डर नाम दिया गया है।

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प्रश्न 39.
उपधाराओं से युक्त छोटी-छोटी नदियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
गुम्फित नदी (Braided river)।

प्रश्न 40.
विश्व के किस महादेश में कोई स्थाई हिमक्षेत्र नहीं पाया जाता है ?
उत्तर :
आस्ट्रेलिया महादेश में।

प्रश्न 41.
हिमालय का सबसे लम्बा हिमनद कौन-सा है ?
उत्तर :
सासाईनी हिमनद (154.8 कि॰मी०)

प्रश्न 42.
अफ्रीका के कितने प्रतिशत भू-भाग पर मरूस्थल है।
उत्तर :
34 % भाग।

प्रश्न 43.
सासाईनी हिमनदी हिमालय के किस क्षेत्र में है।
उत्तर :
काराकोरम क्षेत्र में।

प्रश्न 44.
बर्फ से ढँकी पर्वतों की ऊँची चोटियाँ जहाँ से हिमनद निकलती हैं, क्या कहलाते हैं ?
उत्तर :
हिमटोपी (Ice-cap)

प्रश्न 45.
वर्तमान समय में स्थलमण्डल का कितना प्रतिशत भाग हिमाच्छादित है ?
उत्तर :
10 प्रतिशत भाग।

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प्रश्न 46.
विश्व का कौन-सा महादेश पूर्ण रूप से हिमाच्छादित है ?
उत्तर :
अण्टार्कटिका महादेश।

प्रश्न 47.
विश्व का सबसे बड़ा हिमनद का नाम क्या है ?
उत्तर :
बियर्डमोर हिमनद (अण्टार्कटिका में)।

प्रश्न 48.
हिमनदों के लुप्त हो जाने पर बने झील का क्या नाम है ?
उत्तर :
पेटरनास्टर झील (Peternaster) कहते हैं।

प्रश्न 49.
पवन के उड़ाव क्रिया द्वारा बने अपवाहन बेसिन (Deflation Basin) को मंगोलिया में क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
पांगक्यागनाम कहते हैं।

प्रश्न 50.
वायु के अपक्षरण द्वारा बने भू-आकृति, आग्नेय चट्टान को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
छत्रक शिला या छतरीनुमा स्तंभ कहते हैं।

प्रश्न 51.
छत्रक शिलाओं या आग्नेय चट्टान की भू-आकृति रचना को जर्मनी में क्या कहते हैं ?
उत्तर :
पिल्जफेल्सन (Pilzfelsen) कहा जाता है।

प्रश्न 52.
मरूस्थलों में रेत के अपघर्षण से निर्मित धारीदार चट्टानों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
वेन्टीफेक्ट (Ventifact) या तिपहल कहते हैं।

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प्रश्न 53.
झाड़ियों, दीवार आदि बाधाओं के कारण निर्मित बालुका स्तूप को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
नेब्नखास (Nebkhas) कहते हैं।

प्रश्न 54.
लोयस कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
लोयस दो प्रकार के होते हैं :- (a) रेगिस्तानी लोयस (b) हिमनदीय लोयस

प्रश्न 55.
फ्रांस और बेल्जियम में लोयस को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
लिमोन।

प्रश्न 56.
अमेरिका में लोयस को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
अडोबे (Adobe)।

प्रश्न 57.
दूर तक फैली नग्न चट्टानों से निर्मित मरूस्थलों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
हमादा (Hamada)।

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प्रश्न 58.
कंकड़-पत्थरों से निर्मित मरूस्थल को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
रेग (Reg) कहते है।

प्रश्न 59.
दंक्षिण अफ्रिका के कालाहारी के मरूस्थल में वायु के अपक्षरण के फलस्वरूप असमान शिला खण्डों को क्या कहते है ?
उत्तर :
इस्सेल्वर्ग या द्वीपगिरी कहते हैं।

प्रश्न 60.
वायु का कार्य सबसे अधिक प्रभावी कहाँ होता है ?
उत्तर :
वनस्पतिविहीन मरूभूमि में।

प्रश्न 61.
विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप कौन-सा है ?
उत्तर :
ब्रह्मपुत्र नदी की माजुली द्वीप।

प्रश्न 62.
विश्व का सबसे ऊँचा जल प्रपात कौन-सा है ?
उत्तर :
दक्षिण अमेरिका का राइयों नदी साल्टो एंजेल (Salto Angel) जल प्रपात।

प्रश्न 63.
पृथ्वी का सबसे गहरा कैनियन कहाँ है ?
उत्तर :
संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलेरडो नदी का ग्रैण्ड-कैनियन (1800 मी॰) सबसे गहरा कैनियन है।

प्रश्न 64.
गंगा की पर्वतीय प्रवाह मार्ग या युवा अवस्था कहाँ से कहाँ तक है ?
उत्तर :
गोमुख से हरिद्वार तक।

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प्रश्न 65.
गंगा नदी की परिपक्वावस्था कहाँ से कहाँ तक है।
उत्तर :
हरिद्वार से धुलियान तक।

प्रश्न 66.
मानव जीवन के दृष्टिकोण से किस नदी को आदर्श नदी कहते हैं ?
उत्तर :
नील नदी को।

प्रश्न 67.
नदी की शक्ति किस पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
जल की मात्रा एवं उसके वेग पर।

प्रश्न 68.
पृथ्वी की सतह या धरातल पर उत्पन्न होने वाले बल को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
बहिर्जात बल (Exogenetic Force)।

प्रश्न 69.
पृथ्वी के किस बल द्वारा धरातल पर असमासनताएँ तथा विषमताएँ उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
अन्तर्जात बल।

प्रश्न 70.
बहिर्जात बल किन स्थितियों में कार्य करते हैं ?
उत्तर :
बहिर्जात बल दो स्थितियों में कार्य करते हैं :- (i) अपक्षय (ii) अपरदत।

प्रश्न 71.
अपरदन का कार्य किन प्राकृतिक अभिकर्ताओं द्वारा सम्पन्न होता है ?
उत्तर :
नदी, हिमनद, पवन, भूमिगत जल तथा सागरीय लहरें आदि प्राकृतिक अभिकर्ताएँ हैं।

प्रश्न 72.
अपरदन के अभिकर्ताओं द्वारा पृथ्वी की सतह पर मौजूद गर्तों में अपरदित पदार्थों को जमा करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है ?
उत्तर :
निक्षेपण प्रक्रिया कहलाती है।

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प्रश्न 73.
बहिर्जात बल अपनी विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा भूपृष्ठ पर कौन सा कार्य करते रहते हैं ?
उत्तर :
भूपृष्ठ के ऊपर स्थलरूपों का निर्माण, विकास तथा विनाश करते रहते हैं।

प्रश्न 74.
भूतल पर समतल स्थापत्य करने वाले बलों में किसका कार्य सबसे महत्वपूर्ण है ?
उत्तर :
नदी का कार्य।

प्रश्न 75.
गंगा नदी की उत्पत्ति किस हिमनद से हुई है ?
उत्तर :
गंगोत्री हिमनद।

प्रश्न 76.
यमुना नदी की उत्पत्ति किस हिमनद से हुई है ?
उत्तर :
यमुनोत्री हिमनद।

प्रश्न 77.
गंगा नदी का मुहाना कहाँ है ?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी।

प्रश्न 78.
गंगा की सहायक नदियों के नाम लिखो।
उत्तर :
यमुना, घाघरा, कोसी, सोन आदि।

प्रश्न 79.
गंगा की शाखा नदी किस नदी को कहते हैं ?
उत्तर :
भागीरथी गंगा की शाखा नदी है।

प्रश्न 80.
गंगा और यमुना नदियों का संगम स्थान कहाँ है ?
उत्तर :
इलाहाबाद (प्रयाग) में।

प्रश्न 81.
भारत की सबसे बड़ी नदी बेसिन का नाम लिखो।
उत्तर :
गोदावरी नदी का बेसिन।

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प्रश्न 82.
आस्ट्रेलिया के कितने प्रतिशत भू-भाग पर मरूस्थल फैला हुआ है ?
उत्तर :
75 % भाग।

प्रश्न 83.
वह ऊँचा भू-भाग जो दो नदियों के प्रवाह क्षेत्र को अलग करता है, क्या कहलाता है ?
उत्तर :
जल विभाजक।

प्रश्न 84.
गंगा और सिन्धु क्रम की नदियों के बीच कौन जल विभाजक है ?
उत्तर :
अरावली पर्वत।

प्रश्न 85.
उद्ग्म से मुहाने तक नदी के दोनों किनारों के बीच के निम्न भाग को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
नदी घाटी (River Valley) कहते हैं।

प्रश्न 86.
भारत की एक सदावाहिनी नदी कौन है ?
उत्तर :
गंगा नदी।

प्रश्न 87.
नदी का जल किस विधि द्वारा चूनायुक्त चट्टानों को घुला कर अपने साथ बहा ले जाता है ?
उत्तर :
रासायनिक विधि।

प्रश्न 88.
हिमशीला खण्ड (Iceberge) क्या है ?
उत्तर :
समुद्र में तैरते हुए बर्फ के टुकड़ों को हमशीला खण्ड (Iceberg) कहा जाता है।

प्रश्न 89.
गंगा नदी के डेल्टाई भाग का विस्तासर कहाँ से कहाँ तक है ?
उत्तर :
राजमहल की पहाड़ी से बंगाल की खाड़ी तक।

 

प्रश्न 90.
‘छठी शक्ति का सिद्धांत’ का प्रतिपादन किसने किया ?
उत्तर :
गिलबर्ट महोदय ने।

प्रश्न 91.
विश्व के स्थल भाग में कितने प्रतिशत मरूस्थल हैं ?
उत्तर :
लगभग 35 % भाग मरूस्थल है।

प्रश्न 92.
विश्व का सबसे गहरा गार्ज कहाँ है ?
उत्तर :
काश्मीर की सिन्धु नदी में (500 मी० गहरा) (काली गण्डकी या अन्धा गलची)

प्रश्न 93.
ग्रैण्ड कैनियन की गहराई एवं लम्बाई कितनी है ?
उत्तर :
गहराई 2000 मी० तथा लम्बाई 483 कि०मी० है।

प्रश्न 94.
जब गार्ज अधिक गहरा और संकरा हो जाता है तो उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर :
कैनियन (Canyon)।

प्रश्न 95.
एशिया के कितने प्रतिशत भू-भाग पर मरूस्थल है।
उत्तर :
31 % भाग।

प्रश्न 96.
भारत का सबसे ऊँचा जल प्रपात कौन है ?
उत्तर :
गरसोधा जल प्रपात या जोग जल प्रपात।

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प्रश्न 97.
जोग या गरसोधा जल प्रपात किस नदी पर है ?
उत्तर :
भारत के कर्नाटक राज्य में सरस्वती नदी पर।

प्रश्न 98.
न्याग्रा जल प्रपात किस देश में हैं ?
उत्तर :
उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 99.
विक्टोरिया जल प्रपात किस नदी पर है ?
उत्तर :
अफ्रीका में नील नदी पर।

प्रश्न 100.
प्राचीन काल में ब्रह्मपुत्र नदी ने किस नदी अपहरण किया था ?
उत्तर :
साँपू नदी।

प्रश्न 101.
जहाँ पर अपहूत नदी समकोण पर हरणकर्ती नदी के साथ मिलती है उस मोड़ को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अपहरण की कुहनी (Elbow of Capture)।

प्रश्न 102.
अपहरण की कुहनी तथा शीर्ष कटी नदी के ऊपरी भाग के बीच में स्थित शुष्क स्थान को क्या करते हैं ?
उत्तर :
विण्ड गैप (Wind Gap)।

प्रश्न 103.
नदी अपना अपक्षरण, परिवहन और निक्षेपण तीनों कार्य किस भाग में या अवस्था में करती है ?
उत्तर :
मैदानी या मध्य भाग या परिपक्वावस्था में।

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प्रश्न 104.
नदी के मैदानी भाग में निर्मित विसर्पण या मिएण्डर आकृति नाम किस नदी के नाम पर पड़ा।
उत्तर :
टर्की के मिएण्डर नदी के नाम पर।

प्रश्न 105.
जलोढ़ पंख में निक्षेपित पदार्थों का निक्षेपण किस प्रकार का होता है?
उत्तर :
इसमें नीचे की तरफ भारी रोड़े, उसके ऊपर बजरी और सबसे ऊपर बारीक रेत जमा हो जाती है।

प्रश्न 106.
चीन का शोक (Sorrow of China) किस नदी को कहते हैं?
उत्तर :
ह्वांगहो नदी को।

प्रश्न 107.
मुख्य नदी के साथ बहने वाली सहायक नदी को क्या कहते हैं?
उत्तर :
याजू नदी (Yazoo)।

प्रश्न 108.
भारत की एक याजू नदी का उदाहरण दें।
उत्तर :
उत्तरी बिहार की पुनपुन नदी।

प्रश्न 109.
डेल्टा का आकार किससे मिलता है?
उत्तर :
ग्रीक भाषा के डेल्टा (Δ) अक्षर से मिलता है।

प्रश्न 110.
विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा कौन सा है?
उत्तर :
गंगा-बह्मपुत्र का डेल्टा या सुन्दरवन का डेल्टा।

प्रश्न 111.
चापाकार डेल्टा की आकृति कैसी होती है?
उत्तर :
एक धनुष या पंखे की तरह।

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प्रश्न 112.
मिसीसिपी नदी किस प्रकार के डेल्टा का उदाहरण है?
उत्तर :
पंजाकार डेल्टा।

प्रश्न 113.
चापाकार डेल्टा का आधार कैसा होता है?
उत्तर :
अर्द्धवृत्ताकार होता है।

प्रश्न 114.
दंताकार डेल्टा के किनारे का आकार कैसा होता है?
उत्तर :
वक्राकार होता है।

प्रश्न 115.
इटली के पश्चिमी तट पर टाइबर नदी का डेल्टा किस प्रकार के डेल्टा का उदाहरण है?
उत्तर :
दंताकार डेल्टा (Cuspate Delta)।

प्रश्न 116.
जिस नदी का मुहाना साफ-सुथरा रहता है उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
एस्चुअरी कहते हैं।

प्रश्न 117.
उत्तम प्राकृतिक बन्दरगाह कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर :
एस्चुअरी पर।

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प्रश्न 118.
लन्दन किस नदी के एस्चुअरी पर है?
उत्तर :
टेम्स नदी के एस्वुअरी पर।

प्रश्न 119.
भारत में कौन-सी नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा नहीं बनाती हैं?
उत्तर :
नर्मदा एवं ताप्ती नदियाँ।

प्रश्न 120.
पिछले 100 वर्षों में भूमण्डलीय तापमान में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर :
लगभग 0.5° से० 0.7° से०।

प्रश्न 121.
उन द्विपों का नाम बताएँ जो सागरीय जलस्तर में वृद्धि के कारण जलमग्न हो गए हैं।
उत्तर :
लोहाछारा (Lohachara), न्यूमोर (Newmore) तथा सुपारीभांगा।

प्रश्न 122.
वर्ष भर हिमाच्छादित रहने वाले प्रदेश को क्या कहते हैं?
उत्तर :
कण हिम (Nave) या हिमक्षेत्र (Snow field) या फर्न (Firm)।

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प्रश्न 123.
एण्डीज पर्वत तथा हिमालय पर हिम रेखा की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर :
एण्डीज पर्वत पर 5,500 मी० तथा हिमालय पर 400-500 मी० ऊँचाई है।

प्रश्न 124.
हिम रेख की ऊँचाई सागर-तट कहाँ पर पाई जाती है?
उत्तर :
ध्रुव प्रदेशों में।

प्रश्न 125.
हिमनद की गति मन्द ढाल तथा तीव्र ढाल वाले भागों में कितनी होती है?
उत्तर :
मन्द ढाल वाले भाग में प्रतिदिन 15 से॰मी० तथा तीव्र ढाल होने पर 3 से 6 मीटर होती है।

प्रश्न 126.
विश्व का सबसे तेज बहने वाला हिमनद कौन सा है?
उत्तर :
ग्रीनलैण्ड का जाकोब्सावन हिमनद (20 मी० प्रतिदिन)।

प्रश्न 127.
विश्व का सबसे लम्बा हिमनद कौन-सा है ?
उत्तर :
अण्टार्कटिका का लम्बवत हिमनद (700 कि०मी०)।

प्रश्न 128.
भारत का सबसे विशाल हिमनद कौन सा है?
उत्तर :
सियाचेन हिमनद।

प्रश्न 129.
सियाचेन हिमनद और गंगोत्री हिमनद कहाँ स्थित है?
उत्तर :
सियाचेन हिमनद काराकोरम पर्वत पर तथा गंगोत्री हिमनद हिमालय पर्वत पर।

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प्रश्न 130.
अल्पाइन हिमनद अथवा पर्वतीय या घाटी हिमनद का उदाहरण दें।
उत्तर :
भारत का सियाचेन हिमनद तथा गंगोत्री हिमनद।

प्रश्न 131.
अलास्का का मेलास्पिना हिमनद किस प्रकार का हिमनद है?
उत्तर :
गिरिपद हिमनद (Piedmont Glacier)।

प्रश्न 132.
महाद्वीपीय हिमनद किस प्रदेश में मिलती है?
उत्तर :
धुवों के समीप समतल प्रदेशों में ।

प्रश्न 133.
महाद्वीपीय हिमनद किस देश में पाए जाते है?
उत्तर :
ग्रीनलैण्ड तथा अण्टार्कटिका में।

प्रश्न 134.
उच्च पर्वतीय भागों में हिम पिघलने पर दरार बन जाता है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
हिमगहर या सर्क।

प्रश्न 135.
गहरे सीट वाली अरामकुर्सी की आकृति को फ्रांस में क्या कहते हैं?
उत्तर :
सर्क (Cirque)।

प्रश्न 136.
हिमगहर या सर्क को स्कॉटलैण्ड में क्या कहते हैं?
उत्तर :
कौरी (Corrie)।

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प्रश्न 137.
हिमगहर या सर्क या कौरी को वेल्स में क्या कहते हैं?
उत्तर :
CWM कहते हैं।

प्रश्न 138.
हिम के पिघल जाने पर जब सर्क पहाड़ी झीलों का रूप धारण कर लेते है तो इसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
टार्न (Torn)

प्रश्न 139.
प्रशिखा या कंघीनुमा श्रेणी का उदारहण दें।
उत्तर :
स्वीटरजलैण्ड का कंघीनुमा (Comb Ridge)।

प्रश्न 140.
स्विटजरलैण्ड का मैटरहॉर्न तथा जंगफ्रां भू-आकृति किसका उदाहरण है।
उत्तर :
गिरिशृंद्भ भू-आकृति का (Horn Pyramidal Peak)।

प्रश्न 141.
भारत में गिरिश्रृंग भू-आकृति कहाँ पाई जाती है।
उत्तर :
गंगोत्री के पास नीलकण्ठ तथा शिवलिंग गिरिभृंग है।

प्रश्न 142.
अण्डो की टोकरी की स्थलाकृति ज्यादातर किस देश में पाई जाती है?
उत्तर :
आयरलैण्ड तथा उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 143.
किस प्रदेश में वायु का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है?
उत्तर :
शुष्क एवं अर्द्धशुल्क मरूस्थलीय प्रदेश में।

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प्रश्न 144.
पवन की उड़ाव क्रिया द्वारा बनने वाले उथले व चौड़े तश्तरीनुमा गह्छो को क्या कहते है?
उत्तर :
वहिर्धमन या अपवाहन बेसिन (Deflation Basin)।

प्रश्न 145.
विश्व का सबसे बड़ा बहिर्धमन कहाँ है?
उत्तर :
मिस्न देश में कतारा (Qattara) गर्त है।

प्रश्न 146.
कुकुरमुत्ता जैसे भू-आकृति वाले छतरीनुमा स्तम्भ को क्या कहते हैं?
उत्तर :
छत्रक (Mushroom), गारा (Gara) या ग़र (Gour) कहते हैं।

प्रश्न 147.
वायु की प्रवाह की दिशा के समानान्तर बनने वाले स्तूपों को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अनुदैर्ध्य बालुका स्तूप या सीफ (Seif) कहते हैं।

प्रश्न 148.
सीफ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
सीफ अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘तलवार’ (Sword)।

प्रश्न 149.
सहारा, आस्ट्रेलिया के महान मरूस्थल में किस प्रकार के बलुका स्तूप पाए जाते हैं ?
उत्तर :
अनुदैर्ध्य बालुकास्तूप (Longitudinal Sand-dones)।

प्रश्न 150.
अर्द्धचन्द्राकार बालू के अनुप्रस्थ टीलो (Transverse sand-dunes) को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
बरखान (Bankhan) कहते हैं।

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प्रश्न 151.
वायु के निक्षेपण से बने मैदानों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
लोयस का मैदान (Loess Plain)।

प्रश्न 152.
लोयस का मैदान कहाँ-कहाँ पाए जाते हैं ?
उत्तर :
उत्तरी चीन, मिसीसिपी बेसिन तथा मध्य यूरोप में।

प्रश्न 153.
शुष्क या अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पर्वतों से घिरी बेसिन को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
बालसन।

प्रश्न 154.
बाल्सन के केन्द्र में स्थित अल्पकालिक झीलों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्लाया (Playa)।

प्रश्न 155.
अरब के मरूस्थल में स्थित प्लाया झीलों को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
खाबरी (Khabari) एवं ममलाहा (Mamlaha)।

प्रश्न 156.
सहारा के मरूस्थल में प्लाया को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
शट्स (Shatts)।

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प्रश्न 157.
प्लाया झील में जब लवण की मात्रा बढ़ जाती तो उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर :
सैलीना (Salina)।

प्रश्न 158.
मरूस्थली में अल्पकालिक जलप्रवाह के फलस्वरूप निर्मित घाटी को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
वाडी (Wadi)।

प्रश्न 159.
वाडी (Wadi) को अमेरिका में क्या कहते हैं ?
उत्तर :
वाश (Washes)।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
‘अपवाहन गर्त’ का निर्माण किस प्रकार होता है ?
उत्तर :
अपवाहन गर्त (Deflaction hollow) : पवन धरातल की ढीली तथा असंगठित शैलों को अपवाहन क्रिया द्वारा उड़ाकर ले जाता है। इससे छोटे-छोटे गर्त बनते है जिन्हें वातगर्त या अपवाहन वर्ग कहते है। इनका आकार तश्तरीनुमा होता है। ऐसी आकृति सहारा, कालाहारी आदि मरुस्थलों में पाई जाती है।

प्रश्न 2.
हिमशैल क्या है?
उत्तर :
जब किसी प्रदेश में बहता हुआ हिमनद समुद्र तक पहुँच जाता है तो उसकी हिमशिलाएँ समुद्र में तैरने लगती है। इसे हिमशैल (lce berg) कहते है।

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प्रश्न 3.
पक्षियों के पांव की तरह डेल्टा का निर्माण कैसे होता हैं ?
उत्तर :
जब नदी के जल के साथ बारीक कण घोल के रूप में मिले हुए होते है तथा उनमें अवसाद की मात्रा अधिक होती है, तो इनके निक्षेपण से पंजाकार डेल्टा का निर्माण होता है।

प्रश्न 4.
बर्गश्रुण्ड क्या हैं ?
उत्तर :
जब उच्च पर्वतीय भागों से हिम पिघल कर नीचे आता है तो वह ढालों पर दरार बना देता है। इस दरार को वर्गश्रुण्ड (Bergschrund) कहते हैं।

प्रश्न 5.
डूमलिन या हिमोढ़ टीले या टिब्बे क्या है ?
उत्तर :
डूमलिन (Drumlin) :- हिमनद बोल्डेर क्ले के निक्षेपण द्वारा उल्टी नाव आकृति की एक स्थलाकृति का निर्माण होती है, जिसे डूमलिन या हिमोढ़ टीले या टिब्वे कहा जाता है। दूर से देखने पर ये ‘अंडे की टोकरी’ (Egg’s Topography) के समान प्रतीत होता है।

प्रश्न 6.
बहिर्जात बल को समतल स्थापक बल क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
बहिर्जात बल को समतल स्थापक बल भी कहते है, क्योंकि ये बल पृथ्वी के अन्तर्जात बलों द्वारा भूतल पर उत्पन्न विषमताओ को दूर करने में सतत् प्रयत्नशील रहते है।

प्रश्न 7.
‘दून’ क्या है ?
उत्तर :
शिवालिक हिमालय के दक्षिण में कंकड़ और मिट्टी से बने कई ऊँचे मैदान को दून (dun) कहा जाता है।

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प्रश्न 8.
तल संतुलन (Gradation) क्या है ?
उत्तर :
तल संतुलन (Gradation) :- यह प्रक्रिया धरातल की विषमताओं को कम करके समतल भूमि का निर्माण करती है इसे ही तल संतुलन कहते है।

प्रश्न 9.
प्लाया (Playa) क्या है ?
उत्तर :
प्लाया (Playa) : मरूस्थलीय प्रदेशों में जलोढ़ में निर्मित धरातल को जिसमें कभी झील थी प्लाया कहा जाता है।

प्रश्न 10.
पेटरनाँस्टर झील (Paternoster Lake) का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर :
पेटरनाँस्टर (Paternoster Lake) :- जब हिम पिघल जाती है तो हिम सोपानों पर बने सिलार्गत झीलो में बदल जाते हैं, ऐसे झीलों को पेटरनाँस्टर झील कहा जाता है।

प्रश्न 11.
पेडीमेण्ट (Pediment) का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर :
पेडीमेण्ट (Pediment) :- शुष्क एवं अर्द्वशुष्क प्रदेशो में प्राय: किसी पर्वत, पठार अथवा द्वीपगिरी के पदों में एक सामान्य दालयुक्त अपरदित चट्टानी सतह वाले मैदान पर पेडीमेण्ट का निर्माण होता है।

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प्रश्न 12.
अवतल (Concave) और उत्तल (Convex) नदी के दोनों किनारे पर कैसे बनता है ?
उत्तर :
नदी जब मैदानी भाग से प्रवाहित होती है, तो नदी जल का वेग धीमा हो जाता है जिससे यह अपरदन के साथसाथ निक्षेपण भी करती है और नदी मार्ग में रूकावट आने पर नदी अपना मार्ग बदल देती है तथा नदी विसर्प करने लगती है। इस प्रकार नदी का मार्ग घुमावदार होकर बहने लगती है तो अवतल और उत्तल का निर्माण होने लगता है।

प्रश्न 13.
छठी शक्ति का सिद्धान्त (Six Power’s Law) क्या है ?
उत्तर :
छठी शक्ति का सिद्धान्त (Six Power’s Law) :- नदी के वेग तथा उसकी परिवहन क्षमता के बीच गहरा सम्बन्ध है जिसे गिलबर्ट ने छठी शक्ति का सिद्धान्त के रूप में प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 14.
अपघर्षण (Abrasion) प्रक्रिया अपरदन में कैसे कार्य करता है ?
उत्तर :
अपघर्षण प्रक्रिया मुख्य रूप से नदी, हवा, हिमनद, समुद्री लहर तथा भूमिगत जल द्वारा होता है। जब बड़ी मात्रा में पदार्थ को नदी, हवा, हिमनद आदि द्वारा प्रवाहित करते हुए अपने साथ ले जाती है, तो पदार्थ टूटती-फूटती है।

प्रश्न 15.
एक दक्षिणी अफ्रिका और एक दक्षिणी अमेरिका के मरूस्थल का नाम बताए।
उत्तर :
दक्षिणी अफ्रिका के मरूस्थल का नाम कालाहाड़ी मरूस्थल और दक्षिणी अमेरिका का मरूस्थल का नाम अटका मरूस्थल है।

प्रश्न 16.
वैश्विक उष्मन क्या है ?
उत्तर :
वैक्षिक उष्मन या भूमण्डलीय ताप का सम्बन्ध वायुमण्डलीय तापमान में होने वाली क्रमिक वृद्धि से है। जिसके फलस्वरूप भूमण्डलीय विकरण संतुलन में बदलाव आ जाता है।

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प्रश्न 17.
जलीय अपरदन क्या है ?
उत्तर :
जलीय अपरदन (Fluvial Erosion) : नदी के अपघर्षण, जलगति क्रिया, सत्रिघर्षण एवं घोलीकरण द्वारा होने वाले कटाव को जलीय अपरदन (Fluvial Erosion) कहते हैं।

प्रश्न 18.
याजू धारा क्या है ?
उत्तर :
याजू धारा (Yazoo) : बाढ़ के दौरान कभी-कभी छोटी सहायक नदियों पर तटबन्ध का निर्माण हो जाता है। इससे सहायक नदी टेढ़ी घाटियों से बहने पर मजबूर हो जाती है। इसे याजू धारा कहते हैं।

प्रश्न 19.
नदी के किस अवस्था में सबसे अधिक जल-प्रपात पाये जाते हैं ?
उत्तर :
नदी के पर्वतीय अवस्था में सबसे अधिक जलग्रपात पाये जाते हैं।

प्रश्न 20.
एक पंजाकार डेल्टा का नाम लिखो।
उत्तर :
मिसिसिपी का डेल्टा पंजाकार डेल्टा है।

प्रश्न 21.
सहायक नदी से क्या समझते हो ?
उत्तर :
एक नदी जो दूसरे नदी में मिलती है, उसे सहायक नदी कहते हैं, जैसे गंगा की सहायक नदी यमुना है।

प्रश्न 22.
नदी और हिमनदी द्वारा निर्मित चट्टानों का आकार लिखो।
उत्तर :
नदी V-आकार की घाटी का निर्माण करती है एवं हिमनदी U – आकार की घाटी का निर्माण करती है।

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प्रश्न 23.
किस अवस्था में नदी का जमाव कार्य सबसे अधिक होता है।
उत्तर :
नदी की निम्न अवस्था (Lower Course) में उसका जमाव कार्य सबसे अधिक होता है।

प्रश्न 24.
विश्व के सबसे गहरे कैनियन का नाम लिखो।
उत्तर :
विश्व का सबसे बड़ा कैनियन ग्रैण्ड कैनियन है।

प्रश्न 25.
विसर्प क्या है?
उत्तर :
नदी मैदानी भाग में टेढ़ी-मेढ़ी घाटियों से प्रवाहित होती है। इसे विसर्प कहते हैं।

प्रश्न 26.
नदी की धारा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
किसी उच्च भू-भाग या पर्वतीय अंचल से वर्षा का वाही जल, बर्फ या पिघले हुए हिमनद का जल, जब नीचे की भूमि पर बहता हुआ बड़े जलाशयों, झील या समुद्र में जलधारा के रूप में प्रवेश करता है तो उसे नदी की जलधारा कहते हैं।

प्रश्न 27.
नदी का प्रवाह क्षेत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर :
नदी की जलधारा उद्गम क्षेत्र से मुहाने तक जिस भू-भाग से प्रवाहित होती है, उसे नदी का प्रवाह क्षेत्र कहते है।

प्रश्न 28.
नदी के प्रवाह क्षेत्र को कितने भागों में बाँटा गया है।
उत्तर :
नदी के प्रवाह क्षेत्र को तीन भागों में बाँटा गया है।
(a) पर्वतीय अवस्था
(b) मैदानी अवस्था
(c) डेल्टाई अवस्था।

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प्रश्न 29.
जलोढ़ शंकु का निर्माण कहाँ होता है ?
उत्तर :
पर्वतपदीय प्रदेशों में जलोढ़ शंकु का निर्माण होता है।

प्रश्न 30.
प्राकृतिक तटबन्ध एवं बाढ़ के मैदान का निर्माण कहाँ होता है।
उत्तर :
प्राकृतिक तटबंध एवं बाढ़ के मैदान का निर्माण नदी के प्रौढ़ावस्था (Mature Stage) में होता है।

प्रश्न 31.
नदी की निकासी (बहाव) से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जिस क्षेत्र से होकर नदी प्रवाहित होती है उसे नदी का निकासी कहते हैं। नदी का वेग मलवे को ढोने में सहायक होता है। नदी का वेग दो गुना होने पर उसकी वहन क्षमता में 64 गुना की वृद्धि होता है। यही नदी का बहाव है।

प्रश्न 32.
छठे घात का सिद्धांत क्या है ?
उत्तर :
नदी की परिवहन क्षमता उसके वेग पर निर्भर करती है। गिलबर्ट महोदय ने नदी के वेग एवं उसके परिवहन के विषय में एक सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसे छठे घात का सिद्धांत कहते हैं। इसके अनुसार यदि नदी का वेग दो गुना हो जाता है तो उसकी परिवहन शक्ति की वेग में छठे घात के अनुपात में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 33.
नदी किसे कहते हैं ?
उत्तर :
धरातल पर स्वाभाविक रूप से बहने वाली जलधारा को नदी कहते हैं।

प्रश्न 34.
नदी के उद्गम (Origin of River) से क्या समझते हो ?
उत्तर :
जहाँ से नदी निकलती है उसे नदी का उद्गम (Origin of river) कहते हैं। जैसे यमुना का उद्गम यमुनोत्री है।

प्रश्न 35.
सहायक नदी किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सहायक नदी (Tributaries) : जब छोटी-छोटी नदियाँ बड़ी नदी में जाकर मिल जाती हैं तो उसे उस नदी की सहायक नदी (Tributaries) कहते हैं, जैसे गंगा की सहायक नदी यमुना है।

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प्रश्न 36.
नदी संगम किसे कहते हैं ?
उत्तर :
नदी संगम (Confluence): जिस स्थान पर दो या दो से अधिक नदियाँ आकर मिलती हैं उस स्थान को नदी संगम कहते हैं। जैसे – गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम इलाहाबाद में है।

प्रश्न 37.
शाखा नदी किसे कहते हैं ?
अथवा
हिमनद के अपरदन की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
शाखा नदी (Distributeris) : जब कोई नदी मुख्य नदी से निकलकर समुद्र या झील में गिरती है तो उस नदी को शाखा नदी कहते हैं; जैसे भागीरथी नदी, गंगा नदी की शाखा है।

प्रश्न 38.
दोआब किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दोआब (Doab) या दियरा : दो नदियों के बीच का क्षेत्र दोआव (Doab) कहलाता है।

प्रश्न 39.
खादर से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
खादर (Khadar) : जिस भाग में प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा नई मिट्टी जमा होती है उसे खादर (Khadar) कहते हैं। पश्चिम बंगाल में खादर अधिक हैं।

प्रश्न 40.
बाँगर से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
बाँगर (Bangar) : नदियों द्वारा लाई गई प्राचीन मिट्टी के बने उस भाग को जहाँ बाढ़ का पानी नहीं पहुँच सकता उसे बाँगर कहते हैं। उत्तर प्रदेश में बाँगर अधिक पाए जाते हैं।

प्रश्न 41.
अन्तः प्रवाह क्षेत्र क्या हैं ?
उत्तर :
अन्तः प्रवाह क्षेत्र : उन नदियों द्वारा प्रवाहित क्षेत्र जिनके द्वारा नदी का पानी सागर या महासागर में नहीं पहुँचता है।

प्रश्न 42.
वितरिकाएँ से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
नदी की शाखाएँ जिनके द्वारा नदी का पानी बँट जाता है उन्हें वितरिकाएँ कहते हैं।

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प्रश्न 43.
नदी द्रोणी क्या है ?
उत्तर :
वह विस्तृत भू-भाग जिसके पानी को एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियाँ बहाकर ले जाय उसे नदी द्रोणी कहते हैं।

प्रश्न 44.
नदी प्रवेश या प्रवाह क्षेत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उद्गम से मुहाने तक नदी का प्रवाह मार्ग नदी बेसिन या प्रवाह क्षेत्र कहलाता है।

प्रश्न 45.
जल विभाजक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दो नदी प्रदेशों को अलग करने वाली उच्च भूमि जलविभाजक (Water portting) कहलाती है।

प्रश्न 46.
नदी घाटी या उपत्यका किसे कहते हैं ?
उत्तर :
नदी जिस मार्ग से होकर बहती है उसे उसकी घाटी कहते हैं या पहाड़ी प्रदेश का वह नीचा भू-भाग जहाँ दो पहाड़ियों के आधार मिलते हैं, नदी घाटी या उपत्यका (River Valley) कहलाता है।

प्रश्न 47.
लटकती घाटी में जल प्रपातों का निर्माण क्यों होता है ?
उत्तर :
मुख्य हिमनदी अपनी सहायक हिमनदी की अपेक्षा बड़ी होने के कारण अधिक कटाव करती है जिससे मुख्य हिमनदी की घाटी सहायक हिमनदी की घाटी की अपेक्षा अधिक गहरी होती है। अतः दोनों के संगमस्थल पर सहायक हिमनदी की घाटी मुख्य हिमनदी की घाटी पर लटकती हुई प्रतीत होती है। हिमनद के पिछले तट पर इस लटकती हुई घाटियों से जल मुख्य हिमनदी की घाटी में गिरता है तो जल प्रपात का निर्माण होता है।

प्रश्न 48.
कार्य के आधार पर नदी के प्रवाह क्षेत्र को कितने भागो में बाँटा जा सकता है ?
उत्तर :
कार्य के आधार पर नदी की तीन अवस्थायें होती हैं –

  • युवावस्था या पर्वतीय भाग
  • प्रौढ़ावस्था या मैदानी भाग
  • वृद्धावस्था या डेल्टाई भाग

प्रश्न 49.
एस्चुअरी क्या है ?
उत्तर :
एस्चुअरी : सभी नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती हैं। छोटी नदियाँ अपने मुहाने पर इतना जमाव नहीं करती कि उनके मुहाने अवरूद्ध हों। गहरे समुद्र तथा डूबे हुए तट पर गिरने वाली नदियाँ भी डेल्टा नहीं बनाती। जो नदियाँ दीर्घ ज्वार-भाटे वाले सागर में गिरती हैं उनके मुहाने का अवसाद ज्वार के समय समुद्र में बह जाता है। इनका मुहाना चौड़ा होता है, ऐसे मुहानों को एस्चुअरी कहते है। विश्व का सबसे बड़ा एस्चुअरी उत्तरी रूस में ओब नदी का मुहाना है। इसकी लम्बाई 885 कि०मी० एवं चौड़ाई 80 कि०मी० है।

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प्रश्न 50.
अभिशीर्ष अपहरण क्या है ?
उत्तर :
अभिशीर्ष अपहरण (Headword Erosion) : पर्वतीय भाग में कभी-कभी नदी अपने उदगम स्थान से ऊपर की ओर कटाव का कार्य (Headword erosion) करती है। बाद में जल विभाजक को काटकर शक्तिशाली नदी दूसरी कमजोर नदी से मिलकर उसके पानी को हड़प लेती है, जिससे कमजोर नदी की,घाटी शक्तिशाली नदी में चला जाता है। इसे अभिशीर्ष अपहरण कहते हैं। इस प्रकार नदी घाटी की लम्बाई बढ़ जाती हैं।

प्रश्न 51.
नदी अपहरण क्या है ? या नदी चोर किसे कहते हैं ?
उत्तर :
नदी अपहरण (River Capture) : जब एक नदी दूसरी नदी या जल का अपहरण कर लेती है तो उस अवस्था को नदी अपहरण (River Capture) कहा जाता है। नदी अपहरण अधिकांश पर्वतीय भाग में होता है जहाँ प्रत्येक नदी अपनी सहायक नदी में मिलती है जिसे जल विभाजन सदैव पीछे खिसकता जाता है। जल विभाजक के ढाल समान स्वभाव वाले नहीं होते हैं। यदि एक ढाल दूसरे की अपेक्षा अधिक तेज हो तथा वहाँ की चट्टाने कोमल हों, वर्षा अधिक होती हो तो ढाल से निकलने वाली नदी का जल दूसरे ढाल की नदी की अपेक्षा नीचा होता है। प्रथम नदी की कटाव शक्ति दूसरी की अपेक्षा अधिक होगी। निम्न तली वाली नदी शीर्ष की ओर अधिक कटाव करती है। बाद में जल विभाजक को काट कर दूसरी ओर की नदी के जल का अपहरण कर लेती है। इसे नदी अपहरण करते हैं। अपहरण के बाद दूसरी नदी (अपहत नदी) की घाटी सूख जाती है।

प्रश्न 52.
तट बाँध क्या है ?
उत्तर :
तट बाँध (Levee) : बाढ़ के समय मैदानी भाग में मिट्टी का जमाव अधिक होता है। यह कालान्तर में आसं पास की भूमि से अधिक ऊँचा हो जाता है। ये बाँध के समान होते हैं। इन्हें तट बाँध कहते हैं। चूँकि ये बाँध प्रकृति द्वाराबनाये जाते हैं तथा इनसे बाढ़ के समय सुरक्षा होती है, अतः इस तट बाँध को प्राकृतिक तट बाँध(Natural Levee) कहते हैं।

प्रश्न 53.
उपनदी से क्या समझते हो ?
उत्तर :
मुख्य नदी में अनेक छोटी-छोटी जलधाराएँ मिलती हैं, इन्हीं जलधाराओं को उपनदी या धारा कहते हैं।

प्रश्न 54.
नदी के घर्षण और घोल विधि से क्या समझते हो ?
उत्तर :
घर्षण (Abrassion) : नदी जब पहाड़ी क्षेत्र से बहती है तो असमान धरातल के कारण तीव्रगति से बहते हुए तली और किनारों को काटते हुई चलती है। नदी के जल की भाति उसके साथ बहते पदार्थ भी यंत्र की भांति घाटी को घिसत-खरोंचते आगे बढ़ते हैं, इसे घर्षण कहते हैं।
घोल (Corration) : यह एक रासायनिक प्रक्रिया है। जब नदी का जल घुलनशील चट्टानों (चूना युक्त प्रदेश) के ऊपर से बहता है तो इन प्रदेशों में कटान की क्रिया तीव्र गति से होती है। इसे घोल कहते हैं।

प्रश्न 55.
शाखा नदी का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
बड़ी या गुख्य नदी में मिलने वाली छोटी नदी को बड़ी नदी की सहायक नदी या शाखा नदी कहते हैं। जैसे – गंगा की सहायक नदी यमु है।

प्रश्न 56.
विसर्पण क्या है ?
उत्तर :
विसर्पण (Meander) : मैदानी भाग में नदी के प्रवाह में थोड़ी भी बाधा आने से यह साँप की भाँति मुड़कर बहने लगती है। इन मोड़ो को ‘विसर्पण’ कहते हैं।

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प्रश्न 57.
पक्षी के पैर के आकार के एक डेल्टा का नाम बताओ।
उत्तर :
मिसीसिपी नदी का डेल्टा।

प्रश्न 58.
नदी के किस भाग में सबसे अधिक संख्या में जल-प्रपात पाए जाते हैं ?
उत्तर :
नदी के ऊपरी भाग में सबसे अधिक जल प्रपात पाये जाते हैं।

प्रश्न 59.
हिमोढ़ क्या है ?
उत्तर :
हिमोढ़ (Moraine) : जब हिम नदी पिघलने लगती है या पीछे हटने लगती है तो अपने साथ लाई गई सामग्री का निक्षेप करने लगती है, जिसे हिमोढ़ (Moraine) कहते हैं।

प्रश्न 60.
हिमक्षेत्र क्या है?
उत्तर :
हिमक्षेत्र (Snow field) : जो प्रदेश या पहाड़ हिम-रेखा से अधिक ऊँचाई पर स्थित है वहाँ हिम का ढेर लगा रहता है। ऐसे प्रदेशों को हिम-क्षेत्र (Snow-field) कहते हैं। टुण्डा प्रदेश, ग्रीन-लैण्ड आदि क्षेत्र वर्ष भर हिम से ढँके रहते हैं। अतः ये हिम-क्षेत्र के अच्छे उदारहण हैं।

प्रश्न 61.
हिम-रेखा क्या है ?
उत्तर :
हिम-रेखा (Snow-line) : हिम-क्षेत्र की निचली सीमा को हिम-रेखा (Snow line) कहते हैं। यह वह रेखा होती है, जिसके ऊपर वर्ष भर हिमावरण रहता है तथा बर्फ पिघल नहीं पाती है। हिम-रेखा की ऊँचाई भू-पटल के समस्त भागों पर समान न होकर अलग-अलग होते हैं। यह भूमध्य रेखा पर अधिक ऊँचाई पर होती है तथा धुवों पर कम ऊँचाई पर होती है। हिमालय में हिमरेखा की ऊँचाई 4500 से 600 मीटर है जबकि नार्वे (यूरोप में) 1500 मीटर तथा आर्कटिक प्रदेश में यह घटकर समुद्र तल पर आ जाती है।

प्रश्न 62.
हिम-चादर क्या है ?
उत्तर :
हिम-चादर (lce-Sheet) : जब किसी विशाल क्षेत्र में हिम के लगातार संचयन के कारण हिम की विस्तृत चादर का विकास हो जाता है तो उस भाग में अलग-अलग हिमनद न होकर समस्त भाग एक हिमनदी के रूप में होता है। इस तरह के हिमनदी का विस्तार सर्वाधिक होता है। इसी कारण इसे महाद्वीपीय हिमनदी कहते हैं। महाद्वीपीय हिम को हिम-चादर (Ice-sheet) भी कहा जाता है।

प्रश्न 63.
गोलाश्म मृतिका और टिल पर टिष्पणी लिखिए।
उत्तर :
गोलाश्म मृतिका एवं टिल : हिमोढ़ के निर्माण में बड़े और गोल आकार के कंकड़-पत्थर को बोल्डर कहते है। हिमनद द्वारा सभी प्रकार के निक्षेपण को हिम ड्रिफ्ट कहते हैं। ड्रिफ्ट को टिल कहते हैं। टिल में छोटे-छोटे कंकड़ोपत्थरों का अनियमित जमाव होता है।

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प्रश्न 64.
हिम-टोपियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
हिम-टोपियाँ (Ice-caps) : पर्वतों की चोटियों पर स्थित हिम चादर को हिम-टोपी (Ice caps) कहते हैं। ये अधिक ऊँचाई पर होती हैं। यहाँ कई हिमनदों का सृजन होता है।

प्रश्न 65.
हिमनदी द्वारा निर्मित घाटी का आकार कैसा होता है ?
उत्तर :
हिमनद द्वारा निर्मित घाटी का आकार अंग्रेजी अक्षर ‘ U ‘ के समान होता है।

प्रश्न 66.
पाशर्वस्थ हिमोढ़ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जो हिमोढ़ हिमनद के दोनों किनारों पर पाये जाते हैं, उन्हें पाश्श्वस्थ हिमोढ़ कहते हैं।

प्रश्न 67.
किन क्षेत्रों में बालुका स्तूपों का निर्माण होता है ?
उत्तर :
शुष्क मरुस्थलों एवं समुद्र तटीय भागों में बालुका स्तूपों का निर्माण होता है।

प्रश्न 68.
हिमानी धौत मैदान क्या है ?
उत्तर :
हिमानी धौत मैदान : जहाँ अन्तिम हिमोढ़ के पश्चात पानी की धाराएँ बहना प्रारम्भ करती है, वहाँ से धीरेधीरे सभी प्रकार के हिमोढ़ बहते जल में आकर व्यवस्थित रूप में, जमा होने लगते हैं और धीरे – धीरे समतलग्राय छोटे-छोटे मैदानी क्षेत्र बनते हैं। इन्हें हिमानी के अवक्षेप (Outwash) मैदान कहते हैं।

प्रश्न 69.
भेड़-पीठ शैल क्या है ?
उत्तर :
भेड़-पीठ शैल (Rock Mountonne) : ऐसे ऊभार को जिसके एक ओर हल्का ढाल व चिकना तल तथा दूसरी ओर तीव्र उबड़-खाबड़ ढाल हों, भेड़ शिला कहते हैं। दूर से देखने पर यह आकृति बैठी हुई भेड़ों के पीठ जैसी दिखाई देती है। अतः इसे भेड़-पीठ शैल भी कहा जाता है।

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प्रश्न 70.
हिमनद निर्मित मैदान एवं शैल पद-पर्वतीय शुष्क मैदान में अन्तर करो।
उत्तर :

  1. पर्वतीय शुष्क मैदान का निर्माण वायु द्वारा होता है जबकि हिमानी मैदान का निर्माण हिमनद द्वारा होता है।
  2. पेडीमेण्ट का निर्माण वायु के अपरदन द्वारा होता है, जबकि हिमानी मैदान का निर्माण हिमनद द्वारा होता है।
  3. पेड़ीमेण्ट हल्के ढाल वाले, पथरीली मैदान भाग है जबकि हिमानी मैदान का निर्माण चट्टानों, बालू, कंकड़ों एवं पत्थरों द्वारा होता है।

प्रश्न 71.
हिमोढ़ द्रोणी क्या है ?
उत्तर :
हिमोढ़ द्रोणी (Glacial Trough) : पहाड़ी भागों में नदियों द्वारा निर्मित घाटियों में जब हिम प्रवाहित होता है तो वह घाटी में खरोंच एवं काट-छाँट द्वारा इसे ‘U’ आकार का बना देता है। इस घाटी के किनारों का ढाल विशेष तेज या खड़ा और पेंदे का ढाल समतल प्राय: होता है। इस प्रकार हिमानी द्वारा निर्मित विस्तृत U आकार की घाटी को हिमोढ़ द्रोणी कहते हैं।

प्रश्न 72.
कूरी एवं एरेटे किसे कहते हैं ?
उत्तर :
कूरी (Corrie) : घाटी हिमनद की उत्पत्ति जिस स्थान पर होती है वहाँ पर विशेष प्रकार का गड्दुा पाया जाता है । यह विशाल या दैत्याकार कुर्सी की तरह होता हैं। इस रूप को सर्क (Cirque) या हिमद्रोणी कहते हैं। स्कॉटलैण्ड में इसे कोरी (Corrie) कहते हैं।
एरेटे (Arete): जब किसी पर्वत श्रेणी के दोनों तरफ सर्क का निर्माण हो जाता है तो उसके मध्य में कंघी के आकार में श्रेणी बन जाती है। इसे एरेटे कहते हैं। इसी को कंघीनुमा श्रेणी भी कहते हैं।

प्रश्न 73.
हिमरेखा क्या है?
उत्तर :
वह तल या स्तर जिसके ऊपर सदैव हिम जमी रहती है उसे हिमरेखा कहा जाता है। इसकी ऊँचाई अक्षांशों तथा धरातल की ऊँचाई के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है। विषुवत् रेखा के निकट हिमरेखा समुद्रतल से 5500 मीटर तथा हिमालय में 4500 मीटर आल्पस में 31000 मीटर, माउण्ट फोरेल पर 650 मीटर की ऊँचाई पर तथा धुवों पर सागर तल पर पाई जाती है।

प्रश्न 74.
बर्फ निर्मित मैदान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
हिम क्षेत्र स्थाई हिम का एक प्रदेश होता है जो केवल पर्वतीय क्षेत्रों में तथा उच्च अक्षांशों में निम्न तापमान के कारण पाया जाता है।

प्रश्न 75.
प्लावी हिमशैल (Ice berge) क्या है ?
उत्तर :
जब हिमनद आगे बढ़कर समुद्र तक पहुँच जाता है तो उसकी हिमशिलाएँ समुद्र में तैरने लगती हैं। इसे प्लावी हिमशैल कहते हैं। लैब्रोडोर की ठंडी जलधाराएँ अपने साथ बहाकर प्लावी हिम शिलाओं को उत्तरी-अमेरिका के पूर्वी तट पर स्थित न्यू-फाउलैण्ड तट तक लाती है। यह जलयानों के लिए हानिकारक होती है। हिमशिला से टकराकर ही टाइटैनिक डूबा था।

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प्रश्न 76.
हिम युग से क्या समझते हो?
उत्तर :
यह वह भू-वैज्ञानिक अवधि है जिनमे महाद्वीपों पर हिमनदियाँ बर्फ की चादर के रूप में छा गई थी। इसका अवशेष है। पृथ्वी पर अब तक तीन हिम युग आ चुके हैं। इनमें से अंतिम हिमयुग प्लीस्टोसीन हिमयुग था।

प्रश्न 77.
सिरेक्स क्या है?
उत्तर :
जब हिमानी के ऊपरी तल पर कई हिम विदर बन जाते हैं तो उसका तल विषम हो जाता है। इस प्रकार कई हिम शिखर मिलकर सिरेक्स का रूप धारण करते हैं।

प्रश्न 78.
बर्गश्रुण्ड क्या है?
उत्तर :
जब घाटी हिमनद का ऊपरी भाग अलग हो जाता है तो वहाँ विशाल हिम विदर या दरार उत्पन्न हो जाता है। इसे बर्गश्रुण्ड कहते हैं।

प्रश्न 79.
हिमगर्तिका या केतली किसे कहते हैं?
उत्तर :
यह हिमनदीय अपोढ़ में पाये जाने वाला वह गर्त है जो बड़े हिम खण्डों के पिघलने से बनता है। इसमे जल भरा हाता है। इसे हिमगर्तिका कहते हैं।

प्रश्न 80.
केम क्या है?
उत्तर :
ये हिमानी धौत मैदानों में रेत और बजरी से बने गोल टीले हैं। इनकी ऊँचाई 35 मी० से 60 मी० तक होती है।

प्रश्न 81.
पाशिर्वक हिमोढ़ क्या है?
उत्तर :
हिमनद की घाटियों के किनारों पर स्थित जमाव को पार्शिवक (लेटरल) हिमोढ़ कहते हैं।

प्रश्न 82.
हिमनदी द्वारा निर्मित घाटी का आकार कैसा होता है?
उत्तर :
हिमनदी U – आकार की घाटी का निर्माण करती है।

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प्रश्न 83.
जल चक्र में नदियों की भूमिका लिखिए ।
उत्तर :
सूर्य से प्राप्त गर्मी के कारण महासागरों, सागरों एवं झीलों आदि का जल जलवाष्ष का रूप धारण कर वायुमण्डल में प्रवेश करता है। बाद में जलवाष्प का जब भी संघनन होता है तो धरातल पर वर्षा होती है। वर्षा से प्राप्त जल नदी, नालों के रूप में भू-पृष्ठ पर प्रवाहित होता है तथा अंत में महासागरों एवं सागरों में प्रवेश कर जाता है। इस प्रकार सौर ऊर्जा के कारण जल में जो चक्रीय गति उत्पन्न होती है, उसमें धरातल पर प्रवाहित होने वाली नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रश्न 84.
नदी के प्रवाह क्षेत्र या बेसिन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
कोई मुख्य नदी अपनी सहायक नदियों सहित जिस क्षेत्र का जल लेकर प्रवाहित होती है उसे उस नदी का प्रवाहक्षेत्र या बेसिन कहा जाता है। गोदावरी नदी का बेसिन भारत में सबसे बड़ा नदी बेसिन है। बेसिन जल विभाजको से घिरे होते हैं।

प्रश्न 85.
गुम्फित नदी से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
डेल्टाई अवस्था में नदी की मुख्य धारा कई छोटी-छोटी उपधाराओं में विभाजित हो जाती है। उपधाराओं से युक्त ऐसी नदियाँ गुम्भित नदी (Braided river) कहलाती हैं।

प्रश्न 86.
भौतिक और रासायनिक अपरदन की तुलना करो।
उत्तर :
भौतिक विखण्डन मुख्यतः शुष्क प्रदेशों में होता है। रासायनिक अपरदन उष्ण-आर्द्र प्रदेश में होता है।

प्रश्न 87.
पृथ्वी की अन्तः आन्तरिक गति का नाम लिखो।
उत्तर :
पृथ्वी के आन्तरिक भाग दो प्रकार की गति होती है (i) क्षैतिज गति (ii) लम्बवत् गति।

प्रश्न 88.
अपक्षय क्या है ?
उत्तर :
पृथ्वी की सतह पर प्राकृतिक कारको द्वारा चट्टानों के अपने ही स्थान पर यांत्रिक विधि द्वारा दूटने अथवा रासायनिक अपघटन होने की क्रिया को अपक्षय कहा जाता है।

प्रश्न 89.
अपरदन क्या है?
उत्तर :
अपरदन एक गतिक प्रक्रिया है, जिसमें विघटित चट्टानो का स्थानान्तरण होता है।

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प्रश्न 90.
जैविक अपक्षय क्या है?
उत्तर :
धरातल पर जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों एवं मनुष्यो द्वारा चट्टानो के तोड़-फोड़ के कार्य को जैविक अपक्षय कहते हैं।

प्रश्न 91.
बहते हुए जल के विभिन्न क्रियाओं का नाम लिखो।
उत्तर :
बहते हुए जल अपक्षरण, परिवहन तथा निक्षेपण का कार्य करती है।

प्रश्न 92.
बहिर्जात प्रक्रिया क्या है?
उत्तर :
वे प्रक्रिया जो धरातल पर निरन्तर धीरे-धीरे क्रियाशील रहती है और धरातल पर विभिन्न स्थलाकृतियों का निर्माण करती है, बहिर्जात प्रक्रिया कहते है।

प्रश्न 93.
भूस्खलन क्या है ?
उत्तर :
गुरूत्वाकर्षण के कारण पहाड़ों पर चट्टानो एवं मिट्टी के नीचे की ओर खिसकने की प्राकृतिक प्रक्रिया को भूस्खलन कहा जाता है।

प्रश्न 94.
चट्टानो के दूटने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
चट्टानो के टूटने की क्रिया को पिण्ड विच्छेदन (Block disintegration) कहते है।

प्रश्न 95.
ढाल अधिक होने पर नदी कटाव करती है या जमाव ?
उत्तर :
ढाल अधिक होने पर नदी कटाव कार्य अधिक करती है।

प्रश्न 96.
विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप कौन-सा है ?
उत्तर :
बह्मपुत्र नदी का माजुली द्वीप विश्ष का सबसे बड़ा नदी द्वीप है।

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प्रश्न 97.
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर चलने पर हिमरेखा की ऊँचाई कम होती है या अधिक ?
उत्तर :
भूमध्य रेखा से धुवों की ओर चलने पर हिमरेखा की ऊँचाई कम होती है।

प्रश्न 98.
मरुस्थलीय भाग में भू-स्वरूप का निर्माण कौन करता है ?
उत्तर :
मरुस्थलीय भाग में भू-स्वरूप का निर्माण नदी करता है।

प्रश्न 99.
नदी निर्मित एक स्थलस्वरूप का नाम बताओ।
उत्तर :
नदी पर्वतीय भाग में V आकार की घाटी का निर्माण करती है।

प्रश्न 100.
अन्तर्जात और बहिर्जात बलों की तुलना करो।
उत्तर :
अन्तर्जात बल भूतल पर असमानता उत्पन्न करता है। बहिर्जात बल इस विषमता को दूर करता है।

प्रश्न 101.
अपक्षय और अपरदन की तुलना करो।
उत्तर :
अपक्षय क्रिया में चट्टाने टूट-टूट कर अपने ही स्थान पर रहती है जबकि अपरदन में चट्टाने आगे बढ़ जाती है।

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प्रश्न 102.
बहिर्जात बल के प्रमुख अभिकर्त्ता कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
बहिर्जात बल के प्रमुख अभिकर्त्ता नदी, हिमनद तथा वायु है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
नदी के मुहाने पर डेल्टा का निर्माण क्यों होता है ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
नदी अपनी अन्तिम अवस्था में मुहाने के पास लाये हुए मलवे का जमाव करने लगती है। नदी की मुख्य शाखा कई उपशाखाओ में विभाजित हो जाती है। समुद्र तल के निकट की असमतल जमीन एक समतल त्रिभुजाकार भू भाग में बद्ल जाती है। इस प्रकार एक त्रिकोण डेल्टा का निर्माण होता है। गंगा और पद्मा नदियों का मध्य त्रिकोण भाग संसार का सबसे बड़ा डेल्टा है।

डेल्टा के निर्माण की आवश्यक दशाएं :-

  1. नदी की धारा में पर्याप्त मात्रा में अवसाद आना चाहिए।
  2. समुद्र की ओर से ज्वारीय लहर या तूफानी लहर कम उठे।
  3. सम्पूर्ण डेल्टा का जल विशेष धीमा रहे जिससे नदी की मुख्य शाखा कई उपशाखाओं मेंबँटकर अवसाद फैलाती है।
  4. नदी के निचले बेसिन में अधिक वर्षा होते रहने से भी डेल्टा के विस्तार में विशेष सहायता मिलती है।
  5. तटीय समुद्र भाग उथला हो जिससे नदी द्वारा मुहाने पर अवसाद का जमाव सुगमता से होता है।

प्रश्न 2.
मरूस्थलीय क्षेत्रों में वायु कार्य प्रधान होता है क्यों ?
उत्तर :
मरुस्थलीय प्रदेशों में वर्षा के अभाव, वनस्पति की न्यूनता, तापमान की अधिकता, वाष्पीकरण की तीब्रता, दैनिक तापान्तर का अत्यधिक भेद और मेघरहित आकाश आदि के कारण वायु कार्य प्रधान होता है।

प्रश्न 3.
भेड़-पीठ शैल एवं ड्रमलिन में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर :
भेड़-पीठ शैल एवं डूमलिन में अन्तर :

भेड़-पीठ शैल ड्रमलिन
1. इनका निर्माण हिमनद के अपक्षरण द्वारा होता है। इनका निर्माण हिमनद के निक्षेपण द्वारा होता है।
2. ये देखने में बैठी हुई भेड़ की तरह मालूम पड़ती है। ये देखने में उल्टी नाव या अण्डे की टोकरी मालूम पड़ती हैं।
3. इसका सम्मुख ढाल चिकना एवं साधारण ढाल वाला तथा विपरीत ढाल खड़ा एवं ऊबड-खाबड़ होता है। इनका सम्मुख ढाल खड़ा एवं खुरदुरा तथा विमुख ढाल चिकना एवं मंद ढाल वाला होता है।

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प्रश्न 4.
वृहदक्षरण की व्याख्या करो।
उत्तर :
वृहदक्षरण संचालन के अन्तर्गत वे सभी सचलंन आते है। जिनमें, शैलो के मलवा की बृहद् का गरुत्वाकर्षण के सीधे प्रभाव के कारण ढाल के अनुरूप स्थानान्तरण होता है। बृहद संलन तीन प्रकार के होते है, जो निम्नलिखित है:
i. मंद सचंलन (slow movement): मंद संचलन के प्रकार के रूप में मंद विरूपण है। यह मध्यम तीव्र एवं मृदा से आच्छादित ढाल पर घटित होता है। इसमें पदार्थो का सचलन इतना मंद होता है, कि दीर्घकालिक पर्यवेक्षण से ही इसका पता चलता है। यह प्रक्रिया उन क्षेत्रों में आम होती है, जहां परिवहमानीय एवं आर्द्र शीतोष्ण क्षेत्र होते है, जहाँ पर गहराई तक हिमकृत मैदान का सतही पिघलाव होता है। तथा जहाँ लम्बी लगातार वर्षा होती है।
ii. तीव्र सचंलन (Rapid movement) : तीव्र सचंलन आर्द्र जलवायु प्रदेशों में निम्न से लेकर तीव्र ढालो पर घटित होते है, मृदा प्रवाह (soil flow), कीचड़ प्रवाह (Mud flow) तथा मालवा अवधाव (Avalanche) इस संलन के प्रकार है।
iii. भुस्खलन (Lardslide) : (भुस्खलन अपेक्षाकृत तीव्र एवं अवगम्य सचंलन है। इसमें स्वखलित होने वाले पदार्थ अपेक्षतया शुष्क होते है।

प्रश्न 5.
लटकती घाटी में जलप्रपात की सृष्टि क्यों होती हैं ?
अथवा
लटकती घाटी में जल प्रपातों का निर्माण क्यों होता है ?
उत्तर :
लटकती घाटी में जल-प्रपात की उत्पत्ति का कारण : सहायक हिमनद के घाटी के तली मुख्य हिमनद की घाटी की तली से ऊँची होती है, जिसके कारण सहायक हिमनद की घाटियाँ मुख्य हिमनद की घाटी पर लटकती हुई सी प्रतीत होती है। तापामन बढ़ने पर हिम के पिघलने से लटकती घाटियों से जल मुख्य हिमदन की निचली घटटी में गिरने लगता है जिससे जल प्रपातों का निर्माण होता है। इसीलिए लटकती घाटियों पर जल-प्रपात जाते हैं।

प्रश्न 6.
नदी के वृद्धावस्था में डेल्टा का निर्माण कैसे होता है तथा डेल्टा के निर्माण के लिए कौन-कौन सी दशाएं आवश्यक हैं ?
अथवा
डेल्टा का निर्माण नदी की किस अवस्था में होता है ? डेल्टा के निर्माण के लिए अनुकूल दशाओं को लिखिए।
अथवा
डेल्टा के निर्माण की आदर्श दशा क्या है ?
अथवा
डेल्टा का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर :
नदी अपनी अन्तिम अवस्था में मुहाने के पास लाये हुए मलवे का जमाव करने लगती है। नदी की मुख्य शाखा कई उपशाखाओं में विभाजित हो जाती है। समुद्र तल के निकट की असमतल जमीन एक समतल त्रिभुजाकार भू भाग में बदल जाती है। इस प्रकार एक त्रिकोण डेल्टा का निर्माण होता है। गंगा और पद्मा नदियों का मध्य त्रिकोण भाग संसार का सबसे बड़ा डेल्टा है।

डेल्टा के निर्माण की आवश्यक दशाएं :-

  1. नदी की धारा में पर्याप्त मात्रा में अवसाद आना चाहिए।
  2. समुद्र की ओर से ज्वारीय लहर या तूफानी लहर कम उठे।
  3. सम्पूर्ण डेल्टा का जल विशेष धीमा रहे जिससे नदी की मुख्य शाखा कई उपशाखाओं में बाँटकर अवसाद फैलाती है।
  4. नदी के निचले बेसिन में अधिक वर्षा होते रहने से भी डेल्टा के विस्तार में विशेष सहायता मिलती है।
  5. तटीय समुद्र भाग उथला हो जिससे नदी द्वारा मुहाने पर अवसाद का जमाव सुगमता से होता है।

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प्रश्न 7.
नदी अपने प्रवाह मार्ग में कौन-कौन सी कार्य करती है ?
अथवा
नदी के कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
नदी के निम्न तीन कार्य हैं :-
i. अपरदन (Erosion): नदी अपने तल को काटती, खुरचती रहती है। नदी के जल में पदार्थों के रासायनिक रूप में घुलन क्रिया होती रहती है। इस प्रकार नदी अपने मार्ग में आने वाले चट्टानों का अपरदन करती रहती है।
ii. परिवहन (Transportation): नदी द्वारा अपरदित पदार्थों को अपने जल के वेग के साथ बहाकर ले जाने की क्रिया को परिवहन कहते हैं। नदी जिन पदार्थो का परिवहन करती है उसे बोझा या नदभार (River load) कहते हैं।
iii. निक्षेपण (Deposition): जैसे ही नदी का दाल कम हो जाता है, नदी का वेग घट जाता है। नदी द्वारा अपने साथ बहाकर लाये गये मलवे का जमाव नदी की गति में कमी, जल की मात्रा में कमी या भार वृद्धि के कारण होती है।

प्रश्न 8.
नदी का अपरदन कार्य किन बातों पर निर्भर करता है ?
उत्तर :
अपरदन कार्य को प्रभावित करने वाले कारक :-

  1. जल प्रवाह का वेग : नदी की प्रवाह जितना तेज होगा वह अपरदन उतना ही अधिक करेगी।
  2. जल की मात्रा : जल की मात्रा अधिक होने से अपरदन की क्षमता बढ़ जाती है।
  3. चट्टानों के प्रकार : नदी का जल कठोर चट्टानों की तुलना में मुलायम चट्टानों का अपरदन अधिक करता है।
  4. प्रवाह में अपरदित पदार्थों की मात्रा : नदी की धारा में बहने वाले रेत, बजरी, रोड़े एवं बड़ी-बड़ी शिलाएँ आदि अपरदन कार्य में सहायता करते हैं।

प्रश्न 9.
नदी के परिवहन कार्य को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन हैं ?
उत्तर :

  1. जल का वेग : जब नदी का वेग बढ़ जाता है तो उसके परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
  2. जल की मात्रा : प्रवाहित जल की मात्रा परिवहन की शक्ति को प्रभावित करती है।
  3. बोझ एवं उसका आकार : महीन शैल कण दूर-दूर तक बहाए जा सकते हैं एवं बड़े-बड़े शैल खण्ड कुछ दूर ही बहाये जा सकते हैं।

प्रश्न 10.
नदी के निक्षेपण को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
निक्षेपण : जब नदी वेग एवं परिवहन न करके मलवे को जमा करने लगती है तो इसे नदी का निक्षेपण कहते हैं। नदी निक्षेपण को प्रभावित करने वाले कारक :

  1. धारा का वेग : धारा जितनी ही क्षीण होगी निक्षेपण उतना हीअधिक एवं तेज धारा में उतना ही कम होगा।
  2. परिवहन सामग्री : नदी में बोझ अधिक होने पर नदी निक्षेपण अधिक होता है।
  3. कणों का आकार : नदी भारी कणों का परिवहन सीमित दूरी तक करती है जबकि महीन कणों का परिवहन दूर तक करती है।
  4. मार्ग की बाधा : यदि नदी के मार्ग में कोई बाधा आ जाती है तो नदी बहाकर लाये गए मलवे का निक्षेपण करने लगती है।

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प्रश्न 11.
नदी मार्ग के विभित्र भागों का नाम लिखकर उनका संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें। अथवा, किसी आदर्श नदी के प्रवाह मार्ग को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर :
नदी अपने उद्गम स्थान से मुहाने तक तीन अवस्थाओं से होकर गुजरती है :-
i. पर्वतीय अवस्था (Mountain stage) : यह नदी का उद्गम स्थल है। यहाँ पर नदी का ढाल अधिक होता है, नदी इस अवस्था में कटाव का कार्य अधिक करती है। नदी गहरी एवं संकरी घाटियों का निर्माण करती है।
ii. मैदानी अवस्था (Plain stage): मैदानी अवस्था में नदी का ढाल कम हो जाता है। इस अवस्था में नदी कटाव और परिवहन एवं जमाव का कार्य करती है, नदी अपनी घाटी को चौड़ा करती है।
iii. वृद्धावस्था (Old stage) : नदी जब अपने मुहाने पर पहुँचती है तो वह परिवहन करने में असमर्थ हो जाती है एवं अपने साथ बहाकर लाये गए मलवे का निक्षेप करने लगती है। मुख्य शाखा कई उप-शाखाओं में बँट जाती है एवं त्रिभुजाकार डेल्टा का निर्माण करती है।

प्रश्न 12.
नदी घाटी का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर :
प्रत्येक नदी का प्रमुख कार्य घाटी का निर्माण करना है। नदी घाटी का निर्माण निम्न अवस्थाओं से होकर गुजरती है :-

  1. सर्वप्रथम वर्षा जल द्वारा छोटी-छोटी नालियों का विकास होता है।
  2. द्वितीय अवस्था में कई अवनलियाँ आपस में मिलकर छोटे-छोटे स्रोतों का विकास करती है।
  3. विकसित स्रोत और विकसित होकर लम्बे होते जाते हैं।
  4. चतुर्थ दशा में विकसित स्रोत वृक्षाकार रूप में पूर्णत: विकसित हो जाते हैं।
  5. पाँचवीं अवस्था में नदी अपहरण की क्रिया प्रारम्भ हो जाती है एवं नलिकाओं का विकास प्रारम्भ हो जाता है।
  6. अन्तिम अवस्था में इसमें कई नलिकाएँ (Rivalet) आपस में मिलकर नदी का पूर्ण विकास सम्पन्न करती है। इस प्रकार उपर्युक्त विधियों द्वारा नदी घाटी का निर्माण सम्पन्न होता है।

प्रश्न 13.
जलोढ़ शंकु का निर्माण कहाँ होता है ?
उत्तर :
पर्वतीय प्रदेशों में जलोढ़ शंकु का निर्माण होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में नदी घाटी के ढाल में एकदम कमी आने लगता है। इस प्रकार पर्वतीय भाग में नदी त्रिकोणाकार या पंखाकार जमाव फैलाकर बिछाती है। इसे ही जलोढ़ शंकु कहते हैं।

प्रश्न 14.
एस्चुअरी एवं डेल्टा में अंतर लिखो।
उत्तर :

एस्चुअरी डेल्टा
1. ये नदियों के मुहाने हैं जहाँ पर नदी का जमाव कार्य नहीं होता है। 1. ये नदियों के मुहाने हैं जहाँ पर नदियों द्वारा त्रिभुजाकार समतल भू-भाग का निर्माण किया जाता है।
2. एस्चुअरी का निर्माण जहाँ होता है वहाँ मुहाने पर तेज समुद्री धाराएँ पायी जाती हैं। 2. डेल्टा का निर्माण जहाँ होता है वहाँ समुद्र का जल शांत रहता है।
3. जहाँ पर एस्चुअरी का निर्माण होता है, उन मुहानों पर विकसित एवं प्राकृतिक बंदरगाह पाये जाते हैं। 3. डेल्टा जहाँ निर्मित होता है उन समुद्री मुहानों पर विकसित बन्दरगाह नहीं पाये जाते हैं।
4. एस्चुअरी का निर्माण काफी गहरे तटों पर होता है। 4. डेल्टा का निर्माण उथले तटों पर होता है।

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प्रश्न 15.
गार्ज और कैनियन में क्या अंतर हैं ?
उत्तर :

गार्ज कैनियन
1. जब नदी उच्च पर्वतीय भागों में कटाव कर अत्यधिक गहरे एवं संकरी घाटी का निर्माण करती है तो उसे गार्ज कहते हैं। 1. इसमें नदी अपनी धरातल से सैकड़ों मीटर की गहराई में खड़े ढालों के बीच गहरे मोड़ बनाती हुई बहती है। अत: कैनियन का आकार गार्ज से भी विस्तृत होता है।
2. गार्ज का निर्माण स्थान विशेष पर ही होती है। 2. कैनियन में गार्ज जैसी घाटी की लम्बाई कुछ कि॰मी० से कई कि०मी० तक होती है।
3. नदी की घाटी में पानी तेजी से प्रवाहित होता है। 3. तेज ढाल बना रहने के कारण नदी का पानी तेजी से घाटी में आवाज करता हआ बहता है।

प्रश्न 16.
गंगा को आदर्श नदी क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
जिस नदी में तीनों अवस्थाएँ पाई जाती हैं उसे आदर्श नदी कहते हैं।

  1. गंगा गंगोत्री ग्लेश्यिर से निकलकर हरिद्वार तक पर्वतीय अवस्था में प्रवाहित होती है।
  2. गंगा नदी हरिद्वार से मुर्शिदाबाद तक अपने मैदानी अवस्था में प्रवाहित होती है।
  3. मुर्शिदाबाद से आगे गंगा नदी भागीरथी-हुगली नदियों के रूप में प्रवाहित होती हुई अपने डेल्टा में प्रवेश करती है। इस प्रकार नदी की तीनों अवस्थाओं के पाए जाने के कारण गंगा नदी को आदर्श नदी कहते हैं।

प्रश्न 17.
नदीकृत घाटी एवं हिमानी कृत घाटी में अंतर लिखो। अथवा, नदी घाटी और हिमनद घाटी में अन्तर बताओ।
उत्तर :

नदी द्वारा निर्मित घाटी हिमानी द्वारा निर्मित घाटी
1. नदी V आकार की घाटी का निर्माण करती है। 1. हिमानी U आकार की घाटी का निर्माण करती है।
2. नदी द्वारा निर्मित घाटी तंग एवं संकरी होती है। 2. हिमानी द्वारा निर्मितघाटी चौड़ी होती है।
3. नदी की घाटी का ढाल अधिक होने से पानी तेज गति से बहता है। 3. हिमानी द्वारा निर्मित घाटी कम ढालयुक्त होती है जिसमें हिमानी धीमी गति से अग्रसर होती है।
4. नदी अपने घाटी का निर्माण स्वतः प्राकृतिक रूप से करती है। 4. नदी द्वारा निर्मित V आकार की घाटी को ही हिमानी अपरदित करके $U$ आकार की घाटी में परिवर्तित करती है।

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प्रश्न 18.
नदियों के अपरदन की विभिन्र विधियाँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर :
नदियाँ निम्नलिखित तरीकों से अपरदन का कार्य करती है।
i. जलगति की क्रिया (Hydraulic Action) : नदी अपने जल के वेग के धक्के से अपनी तली एवं किनारों की चट्टानों के कणों को अलग करके बहा ले जाती है।
ii. अपघर्षण (Abrasion or Corrasion) : नदी के साथ बहने वाले कंकड़ों एवं पत्थरों के टुकड़े एक छेदन यंत्र या वर्मा मशीन (Drilling tool) का कार्य करते हैं जो नदी घाटी के किनारों एवं तली की चट्टानो को काटते हैं। इसे अपघर्षण कहते हैं।
iii. सत्रिघर्षण (Attrition) : नदी के जल के साथ बहने वाले कंकड़ – पत्थर आपस में टकरा कर छोटे-छोटे कणों में टूट जाते हैं। इसे सन्रिघर्षण कहते हैं।
iv. रासायनिक विधि (Corrosion) : नदी का जल घोल तथा कार्बोनेशन आदि रासायनिक विखण्डन की क्रियाओ द्वारा घुलनशील तथा चुनायुक्त चट्टानों को घुला कर अपने साथ बहा ले जाती है।

प्रश्न 19.
किसी आदर्श नदी के प्रवाह मार्ग को कितने भागों में बाँटा जा सकता है ?
उत्तर :
किसी आदर्श नदी के मार्ग को हम तीन भागों में बाँट सकते हैं।

  • पर्वतीय भाग, ऊपरी भाग या युवावस्था,
  • मैदानी भाग, मध्य भाग या परिपक्वावस्था,
  • डेल्टाई भाग, निम्न भाग या वृद्धावस्था।

गंगा नदी में ये तीनों भाग स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं। गंगा नदी का ऊपरी भाग गंगोत्री से हरिद्वार तक, मध्य भाग हरिद्वार से राजमहल की पहाड़ी तक तथा निम्न या डेल्टाई भाग राजमहल की पहाड़ी से बंगाल की खाड़ी तक है।

प्रश्न 20.
पर्वतीय अवस्था में नदियों द्वारा ‘ V ‘ आकार की घाटियों का निर्माण क्यों होता है?
उत्तर :
यह नदी की प्रारम्भिक अवस्था होती है। यहीं से नदी की उत्पत्ति होती है। प्रारम्भ में नदी पतली एवं संकीर्ण नाले के रूप में बहती है परततु बाद में कई धाराओं के मिलने पर यह नदी का रूप धारण कर लेती है। पर्वतीय भाग में भूमि का ढाल अत्यंत तीव्र होता है, अत: नदी अत्यंत तीव गति से बहती है। बड़े-बड़े शिलाखण्ड भी इनके प्रवाह को नहीं रोक पाते। नदी की तीव गति के कारण इस भाग में अपक्षरण ही होता है। नदी के ऊपरी भाग में अधिक वेग, शक्ति तथा क्रियाशीलता के कारण ही यह नदी की यौवनावस्था कही जाती है। तेज गति के कारण पर्वतीय भाग में नदी अपनी तली को काटकर उसे गहरा करने का कार्य अधिक करती है और किनारों को काटकर उसे चौड़ा करने का कार्य कम करती है। अत: यहाँ नदी की घाटी अंग्रेजी के V अक्षर के समान हो जाती है।

प्रश्न 21.
स्थिति एवं विस्तार की दृष्टि से हिमनदी को कितने भागों में बांटा गया है ?
उत्तर :
स्थिति एवं विस्तार की दृष्टि से हिमनदी का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया जा सकता है :
i. पर्वतीय या घाटी हिमनद (Mountain or Valley glacier) : ऊँचे पर्वतीय भागों में ढाल के सहारे पुरानी नदियों की घाटियों से होकर फिसलने वाले हिमनद को पर्वतीय या घाटी हिमनद कहते हैं; जैसे – पश्चिमी हिमालय का सियाचेन (60 किमी० लम्बा) हिमनद, गंगोत्री हिमनद (39 किमी० लम्बा), जेमू हिमनद (26 किमी० लम्बा) है। यहीं से तिस्ता नदी निकलती है, सिन्धु घाटी का बियाको बलतोरो हिमनद (60 किमी०), हिस्पार व बाइरा हिमनद (50 किमी०) आदि। इसके अलावा रॉकी, आल्पस, एन्डीज के ऊँचे ढालों पर भी ऐसे हिमनदों का विस्तार है।

ii. गिरिपद हिमनद (Piedmont glacier) : पर्वतों से उतर कर जो हिमनद पर्वतों की तलहटी तक चला आता है, उसे गिरिपद हिमनद कहते हैं। अलास्का का मेलस्पाइना (Malaspina) इसी कोटि का हिमनद है। इसका फैलाव प्राय: 4000 वर्ग किमी० में है।

iii. महाद्वीपीय हिमनद (Continental glacier) : जो हिमनद अपने हिमावरण (Icesheets) से सम्पूर्ण महादेश को ढक लेता है, उसे महाद्वीपीय हिमनद कहते हैं। गीनलेण्ड और अण्टार्कटिका में महाद्वीपीय हिमनद अधिक पाये जाते हैं।

प्रश्न 22.
हिमनद अपना अपरदन कार्य किस प्रकार करता है ?
उत्तर :
अपरदन कार्य(Erosional Work) : हिमनद का अधिकांश अपरदन कार्य हिम दबाव के कारण दो रूपों में होता है –
(क) चट्टानों के उत्पाटन द्वारा (Big Pluking) तथा
(ख) चट्टानों के घर्षण द्वारा (By Abrasion)
i. शैलों के उत्पाटन द्वारा : जब हिमनदी की तली में बर्फ चट्टानों की संधियों में जमा हो जाता है तो वह चट्टानो को बड़े-बड़े टुकड़ों में तोड़ दैता है। ये चट्टानी टुकड़े हिम प्रवाह से आगे खिसका दिए जाते हैं। शैलों के उत्पाटन की इस क्रिया में ऊपरी हिम के लम्बवत दबाव का हाथ होता है। यह दबाव चट्टानों में खिंचाव उत्पन्न करता है जिससे संधियाँ चौड़ी हो जाती हैं। हिम जब पिघलता है तो संधियों में जल जमा हो जाता है एवं चट्टानों को तोड़कर खोखला बना देता है। धीरे-धीरे यह खोखला भाग झील में बदल जाता है।

ii. शिलाओं के घर्षण द्वारा : घर्षण का कार्य अकेले हिम द्वारा नहीं हो सकता। यह कार्य हिम में जमे शिलाखण्डों एवं चट्टानी पदार्थों द्वारा होता है। शैलों द्वारा उत्पाटित छोटे-बड़े शिलाखण्ड हिम के साथ खिसकते हैं। ये जब बढ़ते हैं तो तलों एवं किनारों को घिसते हैं। हिमानी की रगड़ से उसकी तलहटी की चट्टानों में खरोंच आ जाती है।

प्रश्न 23.
ड्रमलिन और एस्कर में क्या अन्तर है ?
उत्तर :

ड्रमलिन (Drumlin) एस्कर (Esker)
1. ये हिमनद के थोड़े समय के बाद आगे-पीछे हटने से बनता है। 1. ये हिमनद के अन्तिम सिरे से निकलने वाली तेज धारा के साथ आने वाले अवसादों के जमाव से बनते हैं।
2. ये टीले उल्टे नाव या कटे अण्डे के समान होते हैं। 2. ये टेढ़े-मेढ़े तथा पतले होते हैं।
3. ये कम लम्बे तथा अधिक ऊँचे होते हैं। 3. ये अधिक लम्बे तथा कम ऊँचे होते हैं।

प्रश्न 24.
हिमनद द्वारा किये जाने वाले विभिन्न कार्य क्या हैं ?
अथवा
हिमनद अपने प्रवाह मार्ग में कौन-कौन से कार्य करता है ?
उत्तर :
हिमनद के कार्य (Works of Glacier) : हिमनद के प्रमुख कार्य है :- i. अपरदन या कटाव (Erosion) ii. बहाव या परिवहन (Transportation) और iii. निक्षेपण (Deposition)

  1. अपरदन (Erosion) : घाटी या मार्ग में शिलाखण्डों की सहायता से खरोचने या काटने को कटाव या अपरदन कहते हैं।
  2. परिवहन (Transportation) : अपक्षय से प्राप्त शिलाखण्डों तथा अपरदन से प्राप्त शिला चूर्णों को बहाकर ले जाना परिवहन कहलाता है।
  3. निक्षेपण (Deposition) : परिवर्तित चट्टानों एवं शिलाचूर्णों को आगे ले जाकर समतल या निम्नभूमि पर जमा करने को निक्षेपण कहते हैं।

प्रश्न 25.
हिमनद में दरार पड़ने के क्या कारण हैं ?
अथवा
किन कारणों से हिमनद में दरारें पड़ जाती हैं ?
उत्तर :
हिमनद की दरारें (Crevasses) : कभी-कभी किसी कारणवश हिमनद दूट जाता है जिससे उसमें दरारें पड़ जाती हैं। हिमनद में दरार पड़ने के निम्न कारण हैं :-
i. हिमनद घाटी की असमानता : हिमनद के घाटी की चौड़ाई या तल असमान होता है, अतः हिमनद की तली तथा पार्श्वो पर दबाव पड़ने से हिमनद की सतह पर संकरी दरारें पड़ जाती हैं।
ii. ढाल से नीचे उतरना : जब उन्नतोदर ढाल के कारण हिमनद का ढाल तीव्र हो जाता है तो दरारें पड़ती हैं एवं हिम खण्ड टूट जाते हैं।
iii. हिमनद के विभिन्न भागों की गति में भित्रता : हिमनद के मध्य भाग में उसके पार्शों की अपेक्षा अधिक गति होती है। हिमनद के आर-पार तट के समानान्तर दरार पड़ जाती है। इसी तरह हिमनद के ऊपरी भाग में तली की अपेक्षा अधिक गति होती है जिससे मध्य भाग में आर पार दरार पड़ जाती है।

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प्रश्न 26.
हिमानी अपना अपरदन कार्य किस प्रकार करती है ?
अथवा
हिमनद के अपरदन की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ?
अथवा, हिमनद कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर : हिमानी मुख्यतः तीन प्रकार से अपरदन करती है :-
i. उत्पाटन (Plucking) : हिमानी की तली में अपक्षय के कारण बने चट्टानों के बड़े-बड़े टुकड़े गतिशील हिम के साथ फंस कर आगे खिसकते रहते हैं। इसे उत्पाटन क्रिया कहते हैं।
ii. अपघर्षण (Abrasion): हिमानी का अधिकांश अपरदन कार्य अपघर्षण विधि ग्रे ही होता है। किन्तु अकेले हिम में अपघर्षण की अधिक क्षमता नहीं होती है। जब इसमें उत्पाटन द्वारा शिलाखण्ड व कंकड़-पत्थर जुड़ जाते हैं तो घाटी की तली व पार्श्वों को रगड़ने व खरोचने लगते हैं। अपरदन कार्य में हिमानी से पिघला हुआ जल भी सहायता करता है।
iii. सत्रिघर्षण (Attrition) : हिमानी के साथ प्रवाहित होते हुए कंकड़, पत्थर व शिलाखण्डं आपस में भी रगड़ खाने से खण्डित होते हैं एवं घिसते हैं। इस प्रक्रिया को सन्रिर्षण कहते हैं।

प्रश्न 27.
लटकती या निलम्बित घाटी क्या है ?
अथवा
हिमनद लटकती घाटी का निर्माण कैसे करती है ?
उत्तर :
लटकती या निलम्बित घाटी (Hanging Valleys) : मुख्य हिमनद अपनी सहायक नदी की अपेक्षा बड़े होने के कारण अधिक कटाव करती है जिससे मुख्य हिमनद की घाटी सहायक हिमनद की घाटी की अपेक्षा अधिक गहरी होती है। अत: दोनों के संगम स्थल पर सहायक हिमनद की घाटी मुख्य हिमनद की घाटी पर लटकती हुई प्रतीत होती है।

प्रश्न 28.
परस्पर संयुक्त पर्वत प्रक्षेप क्या है ?
उत्तर :
परस्पर संयुक्त पर्वत प्रक्षेप (Interlocking spur) : उच्च पर्वत का जो भाग बाहर निकलकर निम्न भाग में मिल जाता है उसे पर्वत प्रक्षेप कहते हैं। पर्वत प्रक्षेप की आकृति नदी घाटी से ठीक उल्टी होती है। पर्वतीय भाग में कभीकभी नदी के मार्ग में कठोर चट्टानों का अवरोध इस प्रकार पड़ता है कि नदी बाध्य होकर बार-बार टेढ़ी-मेढ़ी होकर बहने लगती है। इस भाग में लम्बवत कटान होने से नदी की घाटी गहरी हो जाती है। ऐसी दशा में नदी के एक ओर के उत्तल तट का पर्वत प्रक्षेप अवतल तट के धंसान में प्रवेश कर जाता है। इस प्रकार दोनों ओर के पर्वत प्रक्षेप एक दूसरे से मिले दिखाई पड़ते हैं। इन्हें परस्पर संयुक्त पर्वत प्रक्षेप (Interlocking Spur) कहते हैं।

प्रश्न 29.
शुष्क क्षेत्रों में वायु के कामों की प्रधानता क्यों होती है ?
उत्तर :
धरातल पर परिवर्तन लाने वाली बाह्म शक्तियों में वायु एक महत्वपूर्ण साधन है। पवन का कार्य अर्द्धशुष्क (Semi-arid) तथा शुष्क (arid) मरूस्थलीय भागों में अधिक होता है। प्रधानतः मरुभूमि अंचल में वायु का कार्य सबसे अधिक होता है, क्योंकि :

  1. इस क्षेत्र में पर्वत, वनस्पति आदि के न होने से वायु प्रवाह में बाधा कम पड़ती है।
  2. आर्द्रता, वृष्टिपात और वनस्पति के अभाव में भूमि का क्षय होता है। मिट्टी शिथिल रहती हैऔर धरातल के ऊपर के बालू पर वायु प्रभाव अधिक होता है।
  3. मरुभूमि अंचल में शीत-ग्रीष्म का तथा रात- दिन के तापान्तर अधिक होने के फलस्वरूप संकुचन और प्रसारण अधिक होने से भौतिक क्रियाएं प्रबल हो जाती हैं।

प्रश्न 30.
वायु के अपक्षरण या अपरदन कार्य से क्या समझते हैं? वायु अपना अपरदन कार्य किन विधियों द्वारा करती है ?
अथवा
पवन के अपरदन की विभित्र विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शुष्क क्षेत्रों में वायु के कार्यो की प्रधानता क्यों होती है? वायु के अपक्षरण कार्य का वर्णन करो।
उत्तर :
शुष्क क्षेत्रों में वायु निम्नलिखित कार्य करती है –
अपक्षरण (Erosion) : शुष्क प्रदेशों में वायु का अपक्षरण कार्य प्रधान होता है क्योंकि पेड़-पौधों के अभाव में वायु तीव्र गति से चलती है तथा बालू एवं धूलकणों को उड़ाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है। वायु द्वारा मुख्यतः यांत्रिक (Mechanical) अपक्षरण होता है। पवन तीन प्रकार से अपक्षरण कार्य करता है।
i. उड़ान या अपवाहन (Deflation) : दैनिक तापान्तर, पाला, वर्षा आदि द्वारा विखण्डित चट्टानों को तेज हवा पर्त दर पर्त उड़ा ले जाती है।
ii. अपघर्षण (Abration) : जब पवन के साथ उड़ते हुए कण किसी चट्टान से टकराते हैं तो दे चट्टान को उसी प्रकार खुरच देते हैं जैसे रेगमाल (Sand paper) से लकड़ी को घिसा जाता है।
iii. सत्निघर्षण (Attrition) : पवन के साथ उड़ते हुए धूलकण मार्ग में पड़ने वाले चट्टानों को घिसने के साथ आपस में रगड़ खाकर स्वयं भी बारीक होते जाते हैं। इस क्रिया को सत्रिघर्षण कहते हैं।

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प्रश्न 31.
वायु के अपवाहन कार्य से क्या समझते हैं ? वायु अपने अपवाहन कार्य द्वारा किस प्रकार की स्थलाकृतियों का निर्माण करती है ?
उत्तर :
अपवाहन (Deflation) : दैनिक तापान्तर, वर्षा, पाला आदि विखण्डित चट्टानों को परत दर परत हवा उड़ा ले जाती है, जिसे अपवाहन कहते हैं। इसके द्वारा निम्नलिखित स्थलाकृतियों का निर्माण होता है।
i. ध्रान्ध (Dhand) : मरुभूमि में शिथिल बालू के ढेर में अपवाहन के फलस्वरूप कहीं-कहीं छोटा-बड़ा गड्दा बन जाता है। राजस्थान की स्थानीय भाषा में इस गड्दा को धान्द कहते हैं।
ii. मरुद्यान (Oasis) : मरुस्थलीय भागों में तीव्र वायु प्रवाह द्वारा धरातलीय रेत उड़ा दिये जाते हैं, कभी-कभी रेत किसी स्थान पर जल स्तर तक उड़ा दिये जाते हैं, जिससे मरुद्यान का निर्माण होता है।
iii. हमादा (Hamada) : जब तीव्र वायु किसी प्रदेश से सम्पूर्ण बालू एवं धूल उड़ा ले जाती है तो नीचे नग्न एवं चिकनी चट्टानें विस्तृत क्षेत्र में फैली पायी जाती हैं। ऐसे मरुस्थलों को हमादा कहा जाता है। सहारा एवं लिबिया के मरूस्थलों में ऐसे हमादा अधिक पाये जाते हैं।

प्रश्न 32.
वायु के परिवहन कार्य से क्या समझते हैं ? वायु अपना परिवहन कार्य किस प्रकार करती है ?
उत्तर :
परिवहन कार्य (Transportation work) : अपक्षरण से प्राप्त पदार्थों को पवन एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है। वायु परिवहन का कार्य निम्नलिखित तीन प्रकार से सम्पन्न होता है –

  1. निलम्बन (Suspension) : महीन बालू के कण हवा में लटके हुए या हवा के साथ चलते हैं।
  2. उत्परिवर्तन (Saltation) : बालू के कुछ भाग को हवा आगे-पीछे धकेलती हुई चलती है।
  3. लुढ़कना (Surface creep) : कुछ बालू को वायु धरातल के सहारे लुढ़काते हुए ले जाती है।

प्रश्न 33.
बरखान एवं सीफ में अन्तर लिखो।
उत्तर :

बरखान (Barkhan) सीफ (Sief)
1. बरखान का निर्माण वायु की दिशा में होता है। इनका आकार चापाकर होता है। 1. सीफ अनुदैर्ध्य स्तूप है जिनका विकास वायु की दिशा के समानान्तर होता है।
2. बरखान का विस्तार सामान्यतया 15-30 मी० की ऊँचाई में तथा 50-200 वर्ग मी० के क्षेत्रफल में होता है। 2. सीफ 150-200 मी॰ इंच लंबा तथा कुछ किमी० तक विस्तृत होते हैं।
3. बरखान अस्थायी स्तूप है जिनका निर्माण एक के बाद एक होता रहता है। 3. ये विस्तृत एवं काफी संख्या में एक-दूसरे के समानान्तर विकसित होते रहते हैं।

प्रश्न 34.
ज्यूगेन (Zeugen) और यारडंग (Yardang) में क्या अंतर है ?
उत्तर :

ज्यूगेन (Zeugen) यारडंग (Yardang)
1. इनकी आकृति ढक्कनदार दावात की तरह होती है। 1. यह नुकीले शिखर वाले उठे हुए भाग की तरह होता है।
2. इनका निर्माण उन भागों में होता है जहां कठोर चट्टानों की परत कोमल चट्टानों के ऊपर क्षैजित अवस्था में मिलती है। 2. इनका निर्माण उन क्षेत्रों में होता है जहां कठोर तथा कोमल चट्टान की परत लम्बवत् अवस्था में मिलती है।
3. इनका निर्माण अपक्षय तथा वायु के अपरदन दोनों क्रिया द्वारा होता है। 3. इनका निर्माण वायु के अपरदन द्वारा होता है।
4. इनके बीच की नालियाँ अधिक गहरी तथा कम चौड़ी होती हैं। 4. इनके बीच.की नालियाँ अधिक चौड़ी किन्तु कम गहरी होती हैं।

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प्रश्न 35.
शुष्क प्रदेशो में वायु कैसे कार्य करती है ?
उत्तर :
वायु शुष्क प्रदेशों में अपक्षरण, अपवाहन, निक्षेपण एवं परिवहन द्वारा कार्य करती है।
अपक्षरण कार्य से निर्मित भूदृश्य (Resultant landforms due to Abration) : वायु के अपघर्षण द्वारा छत्रक शिला, द्वीपाभगिरी, ड्राइकाण्टर, यारडंग, ज्यूगेन एवं पाषाण जालकों का निर्माण होता है।
अपवाहन द्वारा निर्मित भूदृश्य (Resultant landforms due to Deflation) : अपवाहन द्वारा धान्द, मरुद्यान एवं हमादा का निर्माण होता है।
परिवहन द्वारा निर्मित भूदृश्य (Resultant landforms due to Transportation) : वायु परिवहन द्वारा पेडीमेण्ट का निर्माण करती है।
जमाव द्वारा निर्मित भूदृश्य (Resultant landform due to Deposition) : वायु जमाव के कार्य द्वारा बालू का स्तूप, तरंग चिन्ह एवं लोयस का निर्माण होता है।

प्रश्न 36.
बहिर्जात बल को समतल स्थापक बल क्यों कहते हैं ?
अथवा
बहिर्जात बल से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पृथ्वी की सतह या धरातल पर उत्पन्न होने वाले बल को बहिर्जात बल (Exogenetic Force) कहत हैं। इस बल द्वारा धरातल पर समतल स्थान की प्रक्रियाओं को बहिर्जात प्रक्रियाएँ (Exogenetic processes) कहत हैं। भूसंचलन, भूकम्प, ज्वालामुखी आदि पृथ्वी के अन्तर्जात बल हैं जहाँ एक तरफ भूतल पर असमानताएँ तथा विषमताएँ उपस्थित करते रहते हैं वहीं दूसरी तरफ बहिर्जात बल इन विषमताओं को दूर करने का प्रयास करता है। इसीलिए बहिर्जात बल को समतल स्थापक बल भी कहते हैं।

प्रश्न 37.
बहिर्जात बल के प्रमुख अभिकर्ता कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
ये वे प्रक्रियाएँ हैं जो पृथ्वी के धरातल पर काम करती हैं, परिणामस्वरूप नयी स्थलाकृतियों का निर्माण होता है। इन प्रक्रियाओं के अंतर्गत अपक्षय अथवा अपक्षरण, वृहतक्षरण, अपरदन, परिवहन तथा निक्षेप आदि होता है। ये कार्य नदी, हिमनदी, वायु तथा सागरीय धाराओं द्वारा किये जाते हैं। ये सभी प्रक्रियाएँ भू-पृष्ठ को समतल करने का काम करती हैं। ये प्रक्रियाएँ सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती है और इसी की सहायता से काम करती है।

प्रश्न 38.
हमादा तथा रेग क्या हैं ?
उत्तर :
हमादा या चट्टानी मरुस्थल (Hamada) : ऐसे मरुस्थल जिनकी सतह पर मुख्यत: नग्न चट्टाने पायी जाती है, जहाँ चट्टानों का ऊपरी आवरण, बालू और धूल हवा द्वारा उड़ा लिया जाता है हमादा कहलाता है। वायु के अपवाहन तथा अपघर्षण कार्य से चट्टानी सतह पर कहीं गड्दु तो कहीं टीले बन जाते हैं। मरुस्थल का यह प्रकार विशेषत: सहारा में पायी जाती है।
रेग या पथरीला मरुस्थल(Reg) : ये ऐसे मरुस्थल हैं जिनकी सतह से महीन बालू उड़ गयो होती है और धरातल पर केवल छोटे-छोटे पत्थर तथा बजरी शेष रह गयी होती है। सहारा में ऐसी मरुभूमियाँ पायी जाती हैं। इसे बजरी मरुस्थल भी कहते हैं।

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प्रश्न 39.
किसी आदर्श नदी के प्रवाह मार्ग को कितने भागों में बाँटा जा सकता है ?
उत्तर :
किसी आदर्श नदी के मार्ग (Course) को हम निम्न तीन भागों में बाँट सकते हैं :-

  1. पर्वतीय भाग, ऊपरी भाग या युवावस्था
  2. मैदानी भाग, मध्य भाग या परिपक्वावस्था
  3. डेल्टाई भाग, निम्न भाग या वृद्धावस्था।

गंगा नदी में ये तीनों भाग स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं। गंगा नदी का ऊपरी भाग गंगोत्री से हरिद्वार तक, मध्य भाग हरिद्वार से राजमहल की पहाड़ी तक तथा निम्न या डेल्टाई भाग राजमहल की पहाड़ी से बंगाल की खाड़ी तक है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
हिमनद के जमाव द्वारा निर्मित भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
हिमनद के निक्षेपण से बनने वाली स्थलाकृतियों का वर्णन करो।
अथवा
हिमनद जलोढ़ द्वारा निर्मित प्रमुख निक्षेपणात्मक स्थालाकृतियों का चित्रसहित वर्णन कीजिए।
उत्तर :
तापमान बढ़ने से हिमानी की बर्फ पिघलने लगती है तो हिमानी का वहीं पर अन्तिम भाग प्रारम्भ हो जाता है। हिमानी का जमाव कार्य नदी से पूर्णतः भिन्न है। हिमानी के जमावों से बननेवाली स्थलाकृतियाँ निम्नलिखित हैं-
i. हिमोढ़ (Moraines): जब हिमनदी पिघलने लगती है या पीछे हटने लगती है तो वह अपने साथ लायी हुई सामग्री का निक्षेप करने लगती है जिसे हिमोढ़ कहते हैं। हिमोढ़ में रेत के महीन कणों से लेकर 15 से 20 मीटर व्यास वाले विशाल शिलाखण्ड सम्मिलित होते हैं। इन्हे ‘टिल’ (till) कहते हैं। हिमोढ़ निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।

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(क) पार्शिवक हिमोढ़ (Lateral Moraines) : हिमानी के दोनों किनारों पर निक्षिप्त हिमोढ़ों को पार्श्विक हिमोढ़ कहते हैं।
(ख) अंतस्थ हिमोढ़ (Terminal Moraines) : हिमानी जहाँ पिघलती है, वहाँ हिमोढ़ों की एक कटक (Ridge) बन जाती है। जैसेजैसे हिमानी पिघलती है, वैसे-वैसे एक के बाद एक नयी कटक बनती जाती है। इन्हें अंतस्थ हिमोढ़ कहते हैं।
(ग) मध्यस्थ हिमोढ़ (Medial Moraines) : दो हिमानियों का संगम होने पर दो पार्श्विक हिमोढ़ एक दूसरे से मिल जाते हैं। इसे मध्यस्थ हिमोढ़ कहा जाता है।
(घ) तलस्थ हिमोढ़ (Ground Moraines) : कुछ मलवे को हिमानी अपने साथ नहीं ढो पाती है, वह उसके तल पर जमा होता रहता है इससे तलस्थ हिमोढ़ बन जाते हैं।

ii. हिमोढ़ टीले या टिब्धे (Dumlins) : ये हिमोढ़ों के निक्षेपण से बनते हैं। ये चौड़े कम और लम्बे अधिक होते हैं। इनकी आकृति टोकरी मे रखे अण्डों जैसी होती है। इनकी आकृति की तुलना ह्वेल की पीठ से की जाती है। ये टीले 50 मीटर तक ऊँचे, एक किलोमीटर लम्बे तथा 0.5 कि०मी० चौड़े हो सकते हैं। इन टीलों का ढाल एक ओर तीव्र तथा दूसरी ओर मंद होता है। इनकी लम्बाई हिमानी प्रवाह की दिशा के समानान्तर होती है।

सरिताहिमी निक्षेप (Fluvio-Glacial Deposits) : निक्षेपण कार्य अकेले हिमानी द्वारा ही नहीं होता अपितु हिमानी के पिघलने पर बना जल भी इसमें सहायक होता है। हिमानी और बहते जल दोनों की संयुक्त क्रिया के द्वारा निम्नलिखित स्थलाकृतियाँ बन जाती है –
(क) हिमगर्तिका या केतली (Icehole or Kettle) : सरिता हिमी निक्षेपों में बने छोटे-छोटे गड्दु हिमगर्तिका या केतली हैं। हिमानी के पिघलते समय बर्फ के कुछ बड़े-बड़े खण्ड अवसादों में दबे रह जाते हैं। कुछ समय बाद ये पिघल जाते हैं। इस तरह अवसादों में गड्दे बन जाते हैं। इनमें पानी भरे रह जाने पर छोटी-छोटी झीलें बन जाती हैं, जिन्हें केतली कहते हैं।

(ख) एस्कर या हिमनदमृद कटक (Eskar) : ये हिमजलीय प्रक्रिया से बनते हैं। ये रेत और बजरी की परतों से बनी संकरी और टेढ़ी-मेढ़ी कम ऊँचाई की कटक (Ridge) होती हैं। ये देखने में प्राकृतिक बंध जैसे लगते हैं। हिमानी के पिघलने से अवसाद वहीं जमा हो जाते हैं। ये उत्तरी अमेरिका, यूरोप, उत्तरी एशिया के हिमनदी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यूरोप में इनके ऊपर से होकर सड़कें बनाई जाती हैं।

(ग) हिमानीधौत मैदान (Outwash plain) : हिमानी के पिघलने से जल की धाराएँ बहने लगती हैं। ये जल धाराएँ अपने साथ अंतस्थ हिमोढ़ों के महीन अवसादों को बहाकर ले जाती हैं। इन अवसादों के जमा होने से ऊँची-नीची भूमि समतल हो जाती है और डेल्टा की तरह एक मैदान बन जाता है, यही हिमानीधौत मैदान कहलाता है।

(घ) घाटी हिमोढ़ (Valley Moraine) : यह घाटी की दिवारों के बीच तथा उसके निचले भाग में निक्षेपित अवसादों से बनता है। हिमानी के पिघलने से बनी जलधाराएँ हिमोढ़ के पथरीले भाग को बहा ले जाती है। इन पथरीले अवसादों से घाटी हिमोढ़ बनते हैं।

(ङ) केम (Kame) : ये हिमानीधौत मैदानों में रेत और बजरी से बने गोल टीले हैं। ये 35-60 मीटर तक ऊँचे हो सकते हैं।

(च) सुदूर फैले या विस्थापित शिलाखण्ड (Erratic Blocks) : कभी-कभी महाद्वीपीय हिमानी अपने साथ विशाल आकार का पत्यर मैदानी भाग तक बर्फ के साथ खींचकर ले आती है। वूँकि यह अपने जन्मस्थान से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक बहाए जाते हैं, अत: इन्हें विस्थापित शिलाखण्ड कहते हैं।

(छ) केतलीनुमा जमाव (Glacial kettle) : अन्तिम हिमोढ़ क्षेत्र में जमे हिमोढ़ के बीच प्राकृतिक रूप से छोटे-छोटे गड्दे पाये जाते हैं जो शंकु की तरह होते हैं। इनमें बड़े-बड़े हिमखण्ड होते हैं जो प्रीष्मऋतु में पिघलकर पीछे हट जाते हैं। ये गड्दे पानी के गड्दु के रूप में बदल जाते हैं। इसे केतलीनुमा जमाव या गड्दे कहते हैं।

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प्रश्न 2.
पवन एवं बहते हुए जल के संयुक्त कार्य द्वारा उत्पत्र स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शुष्क क्षेत्रों में वायु एवं जलप्रवाह के संयुक्त प्रवाह से बनी स्थल आकृतियों का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पवन एवं बहते हुए जल के संयुक्त कार्य द्वारा उत्पन्न स्थलरूप :- मरुस्थलीय प्रदेशों में अचानक वर्षा से उत्पन्न अल्पकालिक तथा आंतरिक नदियों का कार्य भी पवन के साथ संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। इनके कटाव एवं जमाव की सम्मिलित क्रिया से निम्नलिखित महत्वपूर्ण स्थलरूपों का निर्माण होता है –
i. प्लाया (Playa) : शुष्क या अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पर्वतों से घिरी बेसिन को बालसन (Balson) कहते हैं। चारों तरफ स्थित पर्वतों से अनेक नदियाँ निकलकर बालसन में जाती हैं। इनमें से कुछ नदियाँ मार्ग में ही सूख जाती हैं तथा कुछ बालसन के केन्द्र में पहुँच जाती हैं, जिसके केन्द्र में जल एकत्रित होने से अल्पकालीन झीलों का निर्माण होता है। बालसन के केन्द्र में स्थित इन अल्कालीन झीलों को प्लाया (Playa) कहते हैं।

प्लाया का क्षेत्रफल कुछ वर्ग किलोमीटर से लेकर सैकड़ों वर्ग किलोमीटर तक हो सकता है। तारीम बेसिन में स्थित लेपनार झील प्लाया का उदाहरण है। अरब के मरुस्थल में स्थित प्लाया झीलों को खाबरी (Khabari) एवं ममलाहा (Mamlaha) तथा सहारा के मरूस्थल में शद्स (Shatts) कहते हैं। जब प्लाया में लवण की मात्रा बढ़ जाती है तो उसे सैलीना (Salina) कहा जाता है।

ii. बजाडा (Bajada) : मरुस्थलीय प्रदेशों में पर्वतीय अग्रभाग तथा प्लाया के मर्ध्य स्थित मन्द ढाल वाले मैदान का निचला भाग बजाडा कहलाता है। यह एक निक्षेपित मैदान है, जिसका निर्माण प्लाया के किनारे पर कई जलोढ़ पंखों के मिलने से होता है। बजाडा का ढाल ऊपरी भाग में 8° से 10° तक रहता है तथा निचले भाग में प्लाया के पास 1° से भी कम होता है। ऊपरी भाग में निक्षेपित मलवा की मोटाई कम एवं निचले भाग में अधिक रहती है।

iii. शैलपद या पेडीमेण्ट (Pediment) : बालसन में पर्वतीय अग्रभाग तथा प्लाया के मध्य स्थित सामान्य ढाल वाले मैदान को शैलपद या पेडीमेण्ट कहते हैं। पेडीमेण्ट का निर्माण पर्वतीय अग्रभाग के निम्नीकरण (Degradation) से होता है। इस प्रकार पेडीमेण्ट एक अपरदित शैल सतह वाले मैदान का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका ढाल पर्वतीय अग्रभाग से दूर जाने पर कमश: मंद होता चला जाता है।

iv. वाडी (Wadi) : मरुस्थलों में अल्पकालिक जलप्रवाह के फलस्वरूप निर्मित घाटियाँ सहारा में वाडी (Wadi) कहलाती है। इस प्रकार की घाटियों को अमेरिका में वाश (Washes) कहते हैं।

प्रश्न 3.
नदी द्वारा पर्वतीय भाग में कटाव या अपरदन से निर्मित भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
नदी के कटाव द्वारा निर्मित भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
नदी अपने युवावस्था में किन-किन भू-आकृतियों की रचना करती है? सचित्र वर्णन करो। अथवा, पर्वतीय या ऊपरी भाग में नदी के अपरदन से बनने वाले स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
नदी पर्वतीय भाग में निम्नलिखित भू-दृश्यों का निर्माण करती है :-
i. V आकार की घाटी (V-shaped valley) : नदी जब पर्वतीय अवस्था में रहती है तो ढाल अधिक होने के कारण नदी का वेग अधिक होता है। अतः नदी क्षैतिज अपरदन कम करती है। नदी द्वारा लम्बवत कटाव अधिक होता है। अत: नदी ‘ V ‘ अक्षर जैसे आकार की घाटी का निर्माण करती है। इस घाटी के किनारे खड़े एवं ऊँचे ढाल वाले होते हैं।

ii. गार्ज (Gorge) : पर्वतीय अवस्था में नदी जब बहुत संकरी और गहरी घाटी का निर्माण करती है तो उनके किनारे खड़े ढाल वाले होते हैं, और उसे गार्ज कहते हैं। इसका निर्माण नदी द्वारा तीव्र गति से निम्न प्रवाह होने पर होता है। सिन्धु, कोसी, सतलुज एवं बह्मपुत्र नदियों में कई स्थानों पर खड्ड या गार्ज का निर्माण हुआ है।

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iii. कैनियन (Canyon) : कैनियन गार्ज से कुछ भिन्न होता है। कैनियन में गार्ज जैसे घाटी की लम्बाई कुछ किमी० से कई किमी० तक होती है। कैनियन में अपने धरातल से सैकड़ों मीटर की गहराई में खड़ी ढालों के बीच गहरे मोड़ बनाती हुई बहती है। संयुक्त राज्य अमेरिका की को लोरेडो नदी पर कैनियन का निर्माण हुआ है जिसे प्राण्ड कैनियन कहते हैं।

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iv. जल प्रपात (Water Fall) : पर्वतीय अवस्था में जब नदी के मार्ग में मुलायम और कठोर चट्टाने क्षैतिज अवस्था में पायी जाती हैं तो नदी मुलायम चट्टान का अपरदन कर देती है तथा कठोर चट्टान के ऊपर से पानी नीचे की ओर गिरने लगता है। इस प्रकार खड़े ढ़ाल के सहारे जल के गिरने की दशा को जलम्रपात कहते हैं।
जल प्रपात के लिए आवश्यक है कि i. चट्टानों की कठोरता में अन्तर हो, ii. चट्टानों के स्तर उद्गम की ओर झुके हों iii. चट्टानों की परतें क्षैतिज अवस्था में हो एवं iv. नदी के मार्ग में अंश की क्रिया सम्पादित हो।

v. द्रुतवाह/क्षिप्रिका (Rapids) : जब नदी के मार्ग में कोमल एवं कठोर चट्टानें लम्बवत स्थिति में पायी जाती हैं तो नदी के कटाव द्वारा मुलायम चट्टाने कटकर बह जाती हैं एवं कठोर चट्टाने मार्ग में खड़ी रहती हैं। नदी का जल इन लम्बवत खड़ी कठोर चट्टानों से ऊपर उठकर आगे बढ़ता है। ऐसी स्थिति में पानी का प्रवाह आगे की ओर न होकर पीछे की ओर होने लगता है जिसे द्रुतवाह (Rapids) कहते हैं।

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vi. जलगर्तिका (Pot Holes) : पर्वतीय मार्ग में नदी के द्वारा मुलायम चट्टाने काटकर बहा ली जाती है। इन चट्टानी भाग में गड्दे बन जाते हैं। कालान्तर में नदी के साथ प्रवाहित होने वाले ककड़ और पत्थर इन गड्दों को काटकर चौड़ा तथा गहरा कर देते हैं। इसे जल गर्तिका (Pot Holes) कहते हैं।

vii. नदी अपहरण (River capture) : नदी अपहरण की दशा निरन्तर शीर्षवर्ती कटाव की क्रिया बढ़ते रहने पर विकसित होती है। इसका सम्बन्ध नदी की अपरदन क्षमता पर विकसित होता है। नदी अपहरण जल विभाजन पर विकसित होता है। नदी जल विभाजक को काटकर अपनी घाटी का प्रसार करने लगती है। दूसरी ओर स्थिर कमजोर नदी को शक्शिाली नदी हड़प लेती है। इसे नदी अपहरण कहते हैं।

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प्रश्न 4.
चित्र की सहायता से नदी के जमाव द्वारा बनाये गये तीन भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
चित्र की सहायता से नदी निक्षेपण द्वारा बनी स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
मैदानी या मध्यवर्ती भाग में नदियों के निक्षेपण कार्य द्वारा बनने वाले प्रमुख स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
अथवा
नदी निक्षेपण से बनने वाली स्थलाकृतियों का वर्णन करो।
उत्तर :
नदी के अवसाद कंकड़, पत्थर, रोड़े, गोलाश्म, बजरी, बालू, विविध प्रकार की महीन मिट्टी एवं रासायनिक पदार्थ आदि मैदानी भाग एवं डेल्टाई भाग में अनुकूल दशाएँ मिलने पर जमा होते रहते हैं। इनके जमाव द्वारा निम्न भूआकृतियाँ विकसित होती हैं :-
i. जलोढ़ शंकु एवं जलोढ़ पंख (Talus/Alluvial Cone and Alluvial Fan): नदी जब मैदानी भाग में पहुँचती है तो उसके ढाल में कमी आती है। नदी पर्वतपदीय भाग में त्रिकोणाकार या पंखाकार जमाव फैलाकर बिछाती है। छोटी सरिताएँ एवं नाले शंकु की आकृति के तेज ढाल वाले त्रिकोणाकार जमाव करते हैं। इन्हें ही जलोढ़ शंकु (Talus/Alluvial cone) कहते हैं। दूसरी ओर बड़ी नदियाँ पर्वतीय भाग में कंकड़, पत्थर व मोटे कण वाले जमाव पंखाकार स्वरूप में इकट्ठा करते हैं। घटटी के भीतरी भाग में मोटे कण जमा होते हैं। बजरी, बालू एवं मिट्री के जमाव बाहर की ओर फैले हुए पंख की तरह बड़े त्रिकोण के रूप में होते हैं, इसे जलोढ़ पंख कहते हैं।

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ii. नदी के मोड़ या विसर्प (River Meanders) : नदी जब मैदानी भाग में पहुँचती है तो एक तट का कटाव करती है एवं दूसरे तट पर जमाव करती है। इस प्रकार नदी का मार्ग धीरे-धीरे सर्पाकार बन जाता है। मैदानी भाग में मोड़ों को विसर्प कहते हैं। ऐसे मोड़ एवं घुमावदार विसर्प निरन्तर अधिक मोड़ या बल खाते रहते हैं।

iii. गोखुराकार या धनुषाकार झील (Oxbow Lake) : जब विसर्प या मोड़ निरन्तर बढ़ता जाता है तो ऐसे विसर्पो के आमने-सामने के भागों में कटाव होता रहता है। नदी अब विसर्पाकर मार्ग से बहकर सीधे रास्ते में बहने लगती है तो विसर्प या विशाल मोड़ वाला भाग धनुष या विशाल गोलाकार रूप में वहाँ बचा रहता है। यह मुख्य नदी से अलग हुआ भाग होता है। वर्षा ॠतु में यहाँ पर पानी भर जाता है। इसे गोखुर या धनुषाकार झील कहते है। आदर्श गोख़ुर झीलें मिसीसिपी नदी की निचली घाटी में पायी जाती हैं।

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iv. प्राकृतिक तटबन्ध (Natural Levee) : बाढ़ के समय बहाकर लाये गए अवसाद नदी के दोनों किनारों से कुछ दूर दोनों ओर जमा होते रहते हैं। इस प्रकार नदी के दोनो किनारें नदियों से ऊँचे उठने लगते हैं। यहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ के समय अधिक अवसाद मुख्य धारा से दोनों ओर फैलता रहता है। इस प्रकार किनारे पर ऊपर उठे भाग प्राकृतिक तटबन्ध कहलाते हैं।

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v. बाढ़ का मैदान (Flood plain) : वर्षा ऋतु में जब बाढ़ आती है तो नदी की घाटी के दोनों ओर विशाल मात्रा में जलोढ़ मिट्टी का जमाव होता है। इससे नदी घाटी के दोनों ओर स्थित निम्न भूमि ऊपर उठकर समतल मैदान में बदल जाते है, इसे बाढ़ का मैदान कहते हैं। इस प्रकार के मैदानों का विकास मध्य-निम्न गंगा नदी की घाटी, ह्नांगहो, यांगटिसीक्यांग और अन्य बड़ी नदियों की घाटियों से हुआ है। ये बाढ़ के मैदान अत्यधिक उपजाऊ और घने-बसे होते हैं।

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प्रश्न 5.
चित्र की सहायता से नदी द्वारा डेल्टाई मार्ग में बनाये गये विभिन्न प्रकार के भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
नदी के अपक्षरण द्वारा बनने वाली किन्हीं दो स्थलाकृतियों का वर्णन करो।
उत्तर :
नदी अपनी अन्तिम अवस्था में अपनी परिवहन क्षमता लगभग खो देती है और अपने साथ बहाकर लाये गए मलवे का जमाव करने लगती है। नदी की मुख्य शाखा कई उपशाखाओं में विभाजित हो जाती है। इस प्रकार नदी निम्न भू-दृश्यों का निर्माण करती है :-
i. डेल्टा (Delta) : नदी अपनी अन्तिम अवस्था में समुद्र के पास अथवा समुद्र से मिलने से पूर्व अपने साथ बहाकर लाये गये अवसाद का जमाव करती है। अवसाद का जमाव अधिक होने से नदी की मुख्य शाखा कई वितरिकाओं में बँटकर प्राय: त्रिकोणाकार मैदान का निर्माण करती है। इसे डेल्टा (Delta) कहते हैं।
डेल्टा के प्रकार : सामान्यत: आकृति के आधार पर डेल्टा निम्न प्रकार के होते हैं :-
(a) चापाकार डेल्टा (Arcuate Delta) : ऐसे डेल्टा का अग्र भाग चापाकार या धनुषाकार होता है। अधिकांश नदियाँ प्राय: इसी प्रकार के डेल्टा का निर्माण करती हैं। नदी की मुख्य शाखा कई उपशाखाओं में बँट जाती हैं। नदी धारा के दोनों ओर एवं सागर से मिलने के स्थान पर मलवे का जमाव बराबर मात्रा में करती है। इससे डेल्टा त्रिकोणाकार होने के साथ आगे की ओर चापाकार होने लगता है।

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(b) पंजाकार डेल्टा (Bird’s foot Delta) : जब नदी की अन्तिम घाटी में महीन भौतिक अवसाद कम एवं रासायनिक अवसाद अधिक हो साथ ही समुद्र के तट व मुहाने पर शान्त दशाएँ पाई जाएँ तो नदियों की मुख्य शाखा के पास ही अधिक रासायनिक पदार्थ का जमाव होता रहता है। ऐसी दशा में अन्य शाखाओं पर जमाव कम गति से होता है। इस प्रकार के डेल्टा की आकृति पक्षी के पंजे जैसे होती है। उदाहरणस्वरूप मिसीसिपी नदी की डेल्टा पंजाकार डेल्टा है।

ii. एस्चुरी (Es, ‘lary) : जब नदी के मुहाने के पास समुद्र की जल धारा काफी तीव्र रहती है तो महाने पर नदी द्वारा जमा किया गया अवसाद मुख्य घाटी की धारा के साथ-साथ कुछ दूर तक सागर की ओर फैल जाता है। नदी एक धारा के रूप में सीधे सागर में गिरती है। ऐसी नदी मुख को एस्वुरी या मुहाना कहते हैं। भारत की नर्मदा, ताप्ती नदियाँ डेल्टा का निर्माण न करके सिर्फ एस्चुरी का निर्माण करती हैं।

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iii. बालू भित्ति एवं बालू द्वीप (Sand Bars and Sand Island) : कुछ नदियाँ अपने साथ चीका एवं दोमट मिट्टी के साथ-साथ बालू के कण भी लाती रहती हैं। साथसाथ समुद्री लहरों द्वारा भी मुहाने पर बालू इकट्ठा होता है। इस प्रकार अपतटीय समुद्र में अवसादों के जमा होते रहने से बालू के द्वीप का निर्माण होता है। ब्रहमपत्र नदी में ऐसे स्थायी बालू के द्वीप पाये जाते हैं।

iv. वितिरिका (Distribuary) : मुहाने के पास नदी के अत्यधिक जमाव के कारण उसकी मुख्य शाखा कई उपशाखाओं में विभाजित होकर वितिरिका का निर्माण करती है। यह उप-शाखा मुख्य नदी को छोड़ देती है। जब नदी की निचली घाटी का ढाल समान रहता है एवं अवसाद का जमाव अधिक होता है, तभी वितिरिकाएँ निर्मित होती हैं।

प्रश्न 6.
नदी के अपक्षरण या अपरदन कार्य से क्या समझते हैं ? नदी अपरदन कार्य किस प्रकार करती है ? अथवा, नदी के घर्षण और घोल विधि से क्या समझते हो ?
उत्तर :
अपरदनात्मक कार्य (Erosional work) : नदी की धारा अपनी तली व तटों को काटती हुई प्रवाहित होती है। इसे अपक्षरण या कटाव (Erosion) कहते हैं। नदियों का अपक्षरण कार्य मुख्यत: चार प्रकार से होता है।
i. जलदाब क्रिया (Hydraulic action) : पर्वतीय अंचलों में नदी की धारा की प्रबलता के कारण शिलाओं के छोटे-छोटे खण्ड हो जाते हैं और बहुत दूर तक बहाये जाते हैं, इसे जलदाब क्रिया (Hydraulic action) कहते हैं।

ii. अवर्धण (Corrosion) : नदी की धारा के साथ छोटे-छोटे शिलाखण्डों के कारण अनेक छोटे-छोटे गड्दु (Pot holes) हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को अवर्षण (Corrosion) कहते हैं।

iii. सत्निघर्षण (Attrition) : नदियों द्वारा बहा कर ले जाते हुए शिलाखण्डों एवं शिलाचूर्णों का आपस में तथा तल (Bed) से रगड़ (Attrition) खाना, फलसूप शिलाखण्डों के टूट-टूट कर गोल और चिकना होना तथा अन्त में चूर-चूर हो जाना।

iv. घोलीकरण : घोलीकरण क्रिया के अन्तर्गत कोई नदी अपने अवसादों को जल में घुलाकर निलंम्बित (SUSpended) रूप में अपरदन करती है। यह क्रिया वहाँ प्रमुखता से होती है, जहाँ पर घुलनशील चट्टानें विद्यमान होती हैं। यही कारण है कि कार्स्ट प्रदेशों (Karst Regions) में यह अपरदन की प्रमुख प्रक्रिया है।

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प्रश्न 7.
नदी का परिवहन (Transportation) कार्य क्या है ? नदी अपना परिवहन कार्य किस प्रकार करती है ?
उत्तर :
परिवहन कार्य (Transportation Work) : अपरदन से प्राप्त पदाथों को नदियाँ काट कर बहा ले जाती हैं। इसे परिवहन (Transporation) कहते हैं।
बहकर जाने वाले शिला चूर्ण नदियों के बोझ या भार हैं जो चार निम्नलिखित प्रकार से होते हैं :
i. घोल क्रिया (Load in solution): नदी की धारा में पदार्थ घुलकर बह जाते हैं। इसे Solution कहते हैं। चूना पत्थर (Limestone) क्षेत्र में और सेंधा नमक (Rock Salt) क्षेत्र में यह प्रक्रिया अधिक होती है।

ii. निलम्बित प्रतिक्रिया (Load in suspension) : छोटे-छोटे पदार्थ जैसे बालू नदी की धारा में चकाकार रूप में प्रभावित होते है और एक स्थान से दूसरे स्थान पर उल्पलावि रूप में जाते है तथा इसी रूप में नदी की धारा के साथ बहते है, इसे घसान (Suspension) कहते हैं।

iii. नदी तल के साथ सघर्षण (Saltation) : कंकड़-पत्थर नदी के जल में ऊपर-नीचे होने लगते हैं और अन्त में नदी की धारा के साथ बहते हैं। इसे सघर्षण (Saltation) कहते हैं।

iv. तल प्रवाह (Traction) : इस प्रक्रिया में भारी पदार्थ जैसे कंकड़ के टुकड़े, पत्थर आदि नदी की धारा की दिशा में परिवहन शक्ति के कारण तल के साथ प्रवाहित होते हैं।

नदी में ककड़, पत्थर, मिट्टी, बालू इत्यादि की शक्ति जल की मात्रा, जल का वेग तथा चट्टानों के ढोने के आकार पर निर्भर करती है। इस कारण नदी का परिवहन कार्य सदा एक-सा नहीं रहता।

प्रश्न 8.
हिमनद के कटाव द्वारा किस प्रकार के भू-दृश्यों का निर्माण होता है?
अथवा
हिमनद के अपरदनात्मक स्थल रूपों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
पर्वतीय हिमनद के कटाव द्वारा निर्मित भू-दृश्यों का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर :
हिमानी अपरदन से बनी स्थलाकृतियां निम्न प्रकार हैं :- (Landforms created by the erosional work of glacier)
i. हिमविदर (Crevasses) : हिमनदी के विभिन्न भागों में हिम की गति भी भिन्न होती है। उदाहरणतया, जब हिमनद किसी तीन्न ढाल पर चलती है तो हिम के ऊपरी भाग में गति अधिक होती है तथा निचला भाग जो धरातल पर होता है, मन्द गति से आगे बढ़ता है। इससे हिम के ऊपरी भाग में इसके आर-पार विदरे या दरारें पड़ जाती हैं, जिन्हें हिमविदर कहते हैं।

ii. हिमदर अथवा बर्गश्रुण्ड (Bergehrund) : घाटी हिमनद का ऊपरी सिरा जब हिम-क्षेत्र से बाहर निकल आता है तो वहाँ एक विशाल हिमदर बन जाना है जिसे बर्गश्रुण्ड कहते हैं।

iii. हिम गहवर अथवा सर्क (Cirque) : यह हिमनद के अपरदन द्वारा उत्पन्न हुई ऐसी स्थलाकृति है जो दूर से अर्ध-गोलीय रंगमंच (Amphi-theater) अथवा गहरी सीट वाली आराम कर्सी (Armchair) जैसी दिखाई देती है।

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iv. श्रृंग (Horn) : जब कई हिम गहवर उच्च पर्वतीय भाग को चारों ओर से काटना आरम्भ कर दे तो वहाँ बीच में एक नुकीली चोटी का निर्माण होता है जिसे पिरैमिडल चोटी या श्रृंग कहते हैं। स्विस आलप्स का मैटरहार्न (Materhorn) विश्व में सबसे प्रसिद्ध श्रृंग है। हिमालय पर्वत में स्थित त्रिशूल पर्वत भी श्रृंग का उत्तम उदाहरण है।

v. कॉल (Col) : यदि किसी पर्वत के दोनों ओर सर्क की अपरदन क्रिया लगभभ एक ही ऊँचाई पर हो जाए तो उन सर्को के पिछले भाग एक दूसरे से मिल जाते हैं और पर्वत के आर-पार दर्रा-सा बन जाता है। इस दर्र को कॉल कहते हैं।

vi. कंघीनुमा कटक (Comb Ridge) : जब एक पर्वतीय कटक के दोनों ढालों पर हिमनदियाँ अनके सर्क बना देती हैं तब कंघीनुमा कटक का निर्माण होता है। अधिक अपरदन के कारण तेज नुकीली सुइयाँ खड़ी दिखाई देती हैं, जिन्हें एरीस् (Arete) कहते हैं।

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vii. हिमनद श्रेणी तथा द्रोणी झील : हिमनदियों द्वारा अपने तल का घर्षण करने से हिमनद द्रोणी का निर्माण होता है। यह घाटी हिमानी का एक मार्ग ही है। यदि हिमनद द्रोणी जल से भर जाता है तो द्रोणी झील की उत्पत्ति होती है।

viii. फियोर्ड (Fiord) : जो हिमानी द्रोणी समुद्र के पास बनती है, वह समुद्र जल से भर जाती है इसे फियोर्ड कहते हैं।

ix. U आकार की घाटी (U-shaped valley) : हिमनदी अपनी घाटी स्वयं नहीं बनाती, बल्कि पूर्व स्थित नदियों की V-आकार की घाटी से होकर बहती है। कालान्तर में हिमानी अपने किनारों को काटने लगती है और निरन्तर कटाव से उस घाटी का आकार U जैसा हो जाता है।

x. लटकती घाटी (Hanging valley) : नदियों की भाँति हिमनदी की भी सहायक हिमनदियाँ होती हैं और वे मुख्य हिमनदी के साथ आकार मिलती हैं। मुख्य हिमनदी सहायक हिमनदियों की अपेक्षा अपनी घटटी को शीघ्रता से अधिक गहरा करती है और मुख्य हिमनदी तथा सहायक हिमनदी के संगम स्थल पर तीव्र ढाल पैदा हो जाता है। जब बर्फ पिघलती है तो सहायक हिमनदी का जल मुख्य हिमनदी की घाटी में जल-प्रपात के रूप में गिरने लगती है तथा सहायक हिमनदी की घाटी मुख्य हिमनदी की घाटी में लटकती हुई प्रतीत होती है, इसे लटकती हुई घाटी कहते हैं।

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xi. भेड़शिला अथवा भेड़-पीठ शैल (Sheep rocks or roche Moutonnes): ऐसे ऊभार जिसके एक और हल्का ढाल हो, भेड़ शिला कहते हैं। दूर से देखने पर यह आकृति बैठी हुई भेड़ों की पीठ जैसी दिखाई देती है। अत: इसे भेड़-पीठ शैल भी कहा जाता है।

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प्रश्न 9.
नदी की विभित्र अवस्था के कार्यों का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
उत्तर :
नदी की तीन अवस्थायें होती है –

  1. पर्वतीय भाग या युवावस्था
  2. मैदानी भाग या परिपक्वावस्था
  3. डेल्टाई भाग या वृद्धावस्था।

नदी अपने तीनों रूपों में अलग-अलग कार्य करती है, जिसे निम्नलिखित रेखाचित्र द्वारा समझाया जा सकता है –

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प्रश्न 10.
हिमनद किसे कहते हैं ? आकार के आधार पर हिमनदों को मुख्य रूप से कितने भागों में वर्गीकृत किया गया है ?
अथवा
हिमनदी क्या है? विभित्र प्रकार के हिमनदियों का वर्णन करो। ग्लेशियर कैसे कार्य करता है ?
उत्तर :
हिमनद (Glacier) : हिम क्षेत्रों में गुरुत्वाकर्षण व भार के कारण ढाल के अनुसार खिसकती हुई राशि को हिमानी कहते हैं। लोवेक ने हिमानी को बर्फ की नदी माना है।
हिमानियों के प्रकार (Typs of Glacier) : हिमानियों के मुख्य प्रकार निम्न हैं –
i. घाटी हिमानी (Valley Glaciers) : ऊँचे पर्वतीय भागों जहाँ विशाल हिमक्षेत्र पाए जाते हैं, वहाँ से बर्फ फिसलकर घाटी में बहता रहता है, इसे घाटी हिमनद कहते हैं। ये 2 \mathrm{~km}-10 \mathrm{~km} लम्बे होते हैं।
ii. पर्वतपदीय हिमानी (Piedmont Glacier) : शीतोष्ण प्रदेशों में हिमरेखा काफी नीचे उतर आती है। यहां छोटी-छोटी हिमानी पहाड़ों की तलहटी में उतरकर आपस में मिलने लगती हैं। इसे पर्वतपदीय हिमानी कहते हैं।
iii. महाद्वीपीय हिमानी (Continental Glaciers) : कुछ हिमानियों का विस्तार लाखों वर्ग कि०मी० क्षेत्रों में होता है। इसे महाद्वीपीय हिमानी कहते हैं।
iv. हिमटोपी (Ice cap) : महाद्वीपीय हिमानी का छोटा रूप हिम टोपी कहलाता है।
v. ज्वारीय हिमानी (Tidal Glaciers) : जब महाद्वीपीय हिमानी का विस्तार समुद्र तट तक होता है तो ऐसे बर्फ का एक भाग जीभ की तरह समुद्र की ओर खिसकता जाता है। इसी को ज्वारीय हिमानी कहते हैं।

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प्रश्न 11.
हिमोढ़ किसे कहते हैं? विभित्र प्रकार के हिमोढ़ों का नाम लिखकर वर्णन करें। अथवा, हिमोढ़ कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
हिमोढ़ (Moraine) : जहाँ हिमनदी जल के रूप में परिणत होती है ठीक उसके पहले साथ आये हुए पत्थर के टुकड़े छूट जाते हैं और उनका एक ढेर लग जाता है जिसे हिमोढ़ या मोरेन कहते हैं। मोरेन को निम्नलिखित भागों में बाँट सकते हैं।
(अ) पाश्श्ववर्ती हिमोढ़ (Lateral moraine) : जो हिमोढ़ बगल में किनारे पर बनते हैं उसे पार्श्ववर्ती हिमोढ़ कहते हैं।
(ब) मध्यवर्ती हिमोढ़ (Medial moraine) : जब हिमोढ़ हिमनद के बीच में बनते हैं, तो उन्हें मध्यवर्ती हिमोढ़ कहते हैं।
(स) तलीय या भूमिगत हिमोढ़ (Ground moraine) : जब कोई हिमनद किसी कारणवश शीघ्रता से पिघल जाता है तो उसकी तली में फँसा हुआ मलवा घाटी की तली में निक्षेपित हो जाता है। इसे तलीय या भूमिगत हिमोढ़ कहते हैं।
(द) अन्तिम हिमोढ़ (Terminal moraine) : हिमनद का अन्तिम भाग पिघल जाने से उसका आगे बढ़ना रूक जाता है। फलस्वरूप हिमनद के साथ बहाकर लाये गये पदार्थ उसके अग्रभाग में एकत्रित हो जाते हैं। इसे अंतिम हिमोढ़ कहते हैं।

प्रश्न 12.
हिमनद क्या है ? इसकी उत्पत्ति कैसे होती है ?
उत्तर :
हिमनद (Glacier) : हिम काफी चिकना पदार्थ है। यह बहुधा पहाड़ी और उच्च अक्षांशों पर जमा होता रहता है। जब हिम राशि अधिक जमा हो जाती है तो स्थिर नहीं रह पाती। यह हिम राशि गुरुत्वाकर्षण तथा अधिक दबाव के कारण उच्च स्थल से निम्न ढाल की ओर स्वयं प्रभाहित होने लगता है। इसी सरकती हुई हिम राशि को हिमनद या हिम नदी कहते हैं। हिमनद की उत्पत्ति : हिम जलवाष्प का ठोस रूप है। जब वायुमण्डल का तापमान 0°C से कम हो जाता है तो जल जमकर ठोस रूप में बदल जाता है, जिससे हिम की वर्षा होती है तो उसे ‘हिमपात’ कहते हैं।

शीत प्रदेशों (उच्च अक्षांशों तथा पर्वतीय भागो) में वायुमण्डल का तापमान कम होने के कारण बर्फ बनता है। शीतकाल में पड़ी हिम राशि जब ग्रीष्म ऋतु में पिघल नहीं पाती, अतः प्रति वर्ष हिम राशि में निरन्तर वृद्धि होती रहती है। ये प्रदेश वर्ष भर हिमाच्छादित रहते हैं। ऐसे प्रदेशों को हिम प्रदेश कहते हैं। हिम राशि अधिक हो जाने के कारण उच्च स्थानों से निम्न स्थानों की ओर खिसकाने लगती है। इस प्रकार हिमनद की उत्पत्ति होती है। हिम नदी की उत्पत्ति के लिए दो बतों की आवश्यकता होती है –
i. तापमान बहुत कम हो ताकि हिम राशि की वृद्धि होती रहे।
ii. ढाल (slope) इतना अधिक हो कि हिम राशि बाध्य होकर नीचे की ओर खिसकना प्रारम्भ कर दे।

प्रश्न 13.
नदी एवं हिमनदी के कार्यों में अन्तर करो।
अथवा
नदी और हिमनद के कार्यों की तुलना कीजिए।
उत्तर :
नदी या हिमनदी की कार्यों में अन्तर :

नदी हिमनदी
1. नदी और उसके कार्य केवल रेगिस्तान एवं बर्फ के मैदानों को छोड़कर धरातल के सभी भागों में पाया जाता है। 1. हिमनदी एवं उसके कार्य केवल ध्रुवों एवं बर्फ के मैदानों पर ही पाया जाता है।
2. नदी का बहाव तेज होता है। 2. हिमनदी अत्यन्त धीमी गति से आगे की ओर बढ़ती है।
3. नदी में जल प्रवाहित होता है। 3. हिमनदी में बर्फ प्रवाहित होता है।
4. नदी $V$-आकार की घाटी का निर्माण करती है। 4. हिमनदी $U$-आकार की घाटी का निर्माण करती है।
5. नदी की उत्पत्ति किसी ग्लेशियर या किसी उच्च पठारी भू-भाग से होती है। 5. हिमनदी की उत्पत्ति हिम क्षेत्र से होती है।
6. कटाव के कार्यों द्वारा नदी घाटी असमान एवं खुरदरी हो जाती है। 6. कटाव द्वारा हिमानी की घटी चिकनी हो जाती है।
7. नदी अपने जमाव द्वारा उपजाऊ मैदानी भाग का निर्माण करती है। 7. हिमनदी अपने निक्षेप द्वारा अनुपजाऊ मैदान का निर्माण करती है।
8. नदी का अपक्षरण कार्य अपघर्षण, सत्रिघर्षण, जलयोजन एवं घोलीकरण द्वारा होता है। 8. हिमनद का अपक्षरण कार्य तोड़ने, दबाव एवं घर्षण के द्वारा होता है।
9. नदी कंकड़, पत्थर, रेत, बजरी, कीचड़ सभी प्रकार के पदार्थो का परिवहन करती है। 9. हिमनदी अपेक्षाकृत भारी कणों का परिवहन करती है।
10. नदी अपना निक्षेपण कार्य मैदानी एवं डेल्टाई दोनों भागों में करती है। 10. हिमनदी अपना निक्षेपण कार्य जहाँ पिघलती है वहीं करती है।

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प्रश्न 14.
हिमनद की दरार से आप क्या समझते हैं ? इनके निर्माण के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
हिमनद की दरारें (Crevasses): कभी-कभी किसी कारणवश हिमनद के दूटने से दरारें पड़ जाती हैं। इसे हिमनद की दरारे कहते हैं।
हिमनद में दरार पड़ने के निम्नलिखित कारण हैं –
i. हिमनद की घाटी का असमान होना : हिमनद की घाटी की तली एवं चौड़ाई सर्वन्र समान नहीं होती है, अत: हिमनद की हिमराशि पर तली तथा पार्श्वों से दबाव पड़ने के कारण हिमनद की सतह पर कम गहरी सँकरी दरारें पड़ जाती हैं।

ii. ढाल से नीचे उतरना : जहाँ हिमनद अचानक उन्नतोदर ढाल से नीचे उतरती है अर्थात् जहाँ हिमनद का ढाल अचानक तीव्र हो जाता है वहाँ दरारें अधिक पड़ती हैं जिससे हिम-पिण्ड खण्ड-खण्ड,होकर ट्ट जाते हैं।

iii. हिमनद के विभिन्न भागों की गति में भिन्नता : हिमनद के मध्य भाग में उसके पाश्व्वों की अपेक्षा अधिक गति होती है जिससे हिमनद के आर-पार तट के समानान्तर दरारें पड़ जाती हैं। इसी प्रकार हिमनद के ऊपरी भाग में तली की अपेक्षा अधिक गति होती है जिसे हिमनद के आर-पार मध्य भाग में दरारें पड़ जाती हैं।

प्रश्न 15.
वायु के अपदनात्मक कार्य द्वारा बने स्थलरूपों का संक्षेप में वर्णन करो।
अथवा
चित्र की सहायता से वायु के कटाव द्वारा निर्मित तीन प्रकार के भू-दृश्यों का वर्णन करो।
उत्तर :
वायु के अपरदन के कार्य :- पवन अपरदन क्रिया द्वारा निम्न प्रकार के भू-दृश्यों का विकास होता है –
i. तिपहल शिलाखण्ड (Drikanter) : पत्थर के टुकड़े ढलों पर विविध आकारों में एकत्रित होते हैं। इसके किनारें व कोने नुकीले होते हैं। ये शुष्क प्रदेशों में पवनों के प्रहार से निरन्तर घिसकर चिकने होते रहते हैं। ये तीन या चार पहलू वाले नुकीले प्रस्तर खण्ड होते हैं।

ii. गारा या छत्रक (Gara or Mushroom) : पवन भूमि से एक या दो मीटर की ऊँचाई तक सबसे अधिक कटाव कार्य करता है। इस प्रकार धरातल के निकट बड़े कण रगड़ खा-खाकर बहते रहते हैं। लम्बे समय के बाद चट्टानें कटकर कुकुरमुत्ता या छाते के आकार की हो जाती हैं। अफ्रीका के मरुस्थल में इन्हें गारा कहते हैं।

iii. जालीदार शिला (Stone Lattic) : जब शुष्क प्रदेशों में ऊभरी चट्टानों की संरचना में अंतर पाया जाता है तो मुलायम चट्टानी भाग शीघ्र घिस जाता है और वहां गड्दे बन जाते हैं। इस प्रकार इन भागों में जालीदार छिद्र बनते जाते हैं। वर्षा के समय रासायनिक अपक्षय से ये छिद्र और बड़े होकर आरिकल जालक में बदल जाते हैं।

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iv. भूस्तम्भ (Demoisels or Hoodos) : शुष्क प्रदेशों में जब कोमल और कठोर चट्टानों की परतें लम्बवत अवस्था में पायी जाती हैं तो वहां पर वायु के अपरदन क्रिया द्वारा मुलायम चट्टाने कट जाती हैं तथा कठोर चट्टाने खम्भे की तरह खड़ी रहती हैं। इसे भू-स्तम्भ कहते हैं।

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v. ज्यूगेन (Zeugen) : शुष्क प्रदेशों में जब कठोर और मुलायम चट्टानों की संरचना क्षैतिज अवस्था में पायी जाती हैं तो कठोर चट्टानो में धीरे-धीरे संधि विकसित होने के साथ-साथ हवा की अपघर्षण क्रिया से चौड़े होते जाते हैं। थोड़े समय बाद नीचे स्थित मुलायम चट्टानों में तेजी से कटाव होने लगता है। कोमल चट्टानों के स्तर कठोर होने लगते हैं। कोमल चट्टानों के स्तरों पर पड़ी कठोर चट्टानें दवात के ढक्कन जैसी आकृति लिए होती हैं। सहारा मरुस्थल में इसे ज्यूगेन कहते हैं।

यारडंग (Yardang) : जब कठोर व मुलायम चट्टानों की लम्बवत् संरचना पायी जाती है तो वायु के घर्षण द्वारा मुलायम चट्टाने कटती जाती हैं। इसे यारडंग(Yardang) कहते हैं। यारडंग का विकास स्थान पवन की दिशा के समानान्तर होता है।

vii. द्वीपाभगिरि (Inselberg) : मरुस्थली प्रदेशों में जब कठोर चट्टानें अपघर्षण के बाद भी गुम्बद् के रूप में खड़ी रहती हैं तो रेत के समुद्र में ये द्वीप की भांति दिखायी पड़ती हैं। ये प्रायः ग्रेनाइट या नीस चट्टानों से बने होते हैं। द्वीपाभगिरि दक्षिणी अफ्रीका एवं सहारा में अधिक पाये जाते हैं। दक्षिण अफ्रीका की तीन बहने(Three sisters) इन्सेलबर्ग के अच्छे उदाहरण हैं।

viii. वातगर्त (Blow out) : मरूस्थली भागों में वायु के तेज प्रवाह के कारण रेत का विशाल भाग उड़कर बह जाने से वहां बड़े-बड़े गड्दु या वातगर्त बन जाते हैं। कुछ वातगर्त समुद्र तल से नीचे तक कट-छट कर गहरे हो जाते हैं।

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प्रश्न 16.
वायु के जमाव द्वारा निर्मित भू-दृश्यों का संक्षेप में वर्णन करो।
अथवा
वायु के निक्षेपण से बनने वाले भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
नदी एवं वायु के सम्मलित कार्यों का वर्णन करो।
उत्तर :
हवा अनेक प्रकार से एवं अलग-अलग परिस्थितियों में जमाव कार्य करती है। हवा के मार्ग में जहाँ भी बाधा आ जाती है, रेत या बालू का जमाव प्रारम्भ हो जाता है। इस प्रकार हवा के निक्षेप से बनी स्थलाकृतियाँ निम्न हैं:-
i. बरखान (Barkhans) : बालू और धूल का वहन करती वायु के मार्ग में जब कोई बाधा आ जाती है तो वायु अपने साथ उड़ाकर लाये गये मलवे का निक्षेप करने लगती है। इस प्रकार चापाकर भू-दृश्य का निर्माण होता है जिसे बरखान कहते हैं। बरखान प्रचलित पवन के समकोण पर निर्मित होते हैं। इनके शिखर की ओर पूर्ण विकसित दो सींगे होती हैं। इनका निर्माण उस समय होता है, जब रेत की पूर्ति एवं पवन का वेग दोनों सामान्य हो। बरखान प्रायः भृंखला में स्थित होते हैं एवं उनकी भृंखलाएँ पवन की दिशा में होती हैं।

ii. उर्मिकायें (Ripples) : रेतीले मरुस्थलों में सतह पर सागरीय लहरों की भांति निशान पाये जाते हैं। इनका निर्माण पवन की दिशा के समकोण पर महीन रेत के निक्षेपण से होता है।

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iii. बालुका स्तूप (Sand Dunes) : शुष्क प्रदेशों की वायु के जमाव से बनी सबसे महत्तूर्ण आकृति बालुका स्तूप है। जब रेत एवं धूल का वहन करती हुई वायु के मार्ग में कोई बाधा उपस्थित होती है तो वायु अपने साथ उड़ाकर लाये मलवे का निक्षेप करने लगती है। यह निक्षेप कटक और छोटी पहाड़ियों के रूप में होता है। बालू का यह टीला धीरे-धीरे पवनप्रवाह की दिशा में आगे खिसकता रहता है। बालुका स्तूप तीन प्रकार के होते हैं :
(क) अर्ध चन्द्राकार बालुका स्तूप : इनका जमाव अर्ध चन्द्रमा के आकार के रूप में होता है। इन्हीं का विकसित रूप बरखान कहलाता है। बरखान में मिट्टी के मोटे कण होते हैं। ऐसे अर्ध चन्द्राकार स्तूप थार मरुस्थल में पाये जाते हैं।

(ख) अनुदैर्ध्य बालुका स्तूप : इनका विस्तार पवन की प्रवाह दिशा के सामानान्तर होता जाता है। इनकी लम्बाई 2 से 5 किलोमीटर एवं ऊँचाई 20-40 मी० तक होती है। सहारा में इन्हें सीफ एवं धार में इन्हें घोरे कहते हैं।

(ग) अनुप्रस्थ बालुका स्तूप : ऐसे स्तूप निरन्तर एक दिशा में चलने वाली पवन के क्षेत्र में पाये जाते हैं। बहती पवन के मार्ग में बाधा आने पर इनका निर्माण एवं विस्तार होता है। कुछ स्तूपों के मध्य के निम्न क्षेत्र में भंवर पड़ जाने से भी बालू का जमाव होता है रहता है। इन्हें अनुप्रस्थ बालुका स्तूप कहते हैं।

कभी-कभी नदी तट पर एवं समुद्र व झीलों के तट पर भी विभिन्न आकृति में स्तूपों का जमाव होता रहता है। मरुस्थलीय भागों में पुराने बालुका स्तूप पवन प्रवाह के साथ अपना स्थान बदलते रहते हैं। वनस्पति आवरण होने पर ये बालु का स्तूप स्थायी भी हो जाते हैं।

iv. बालुका चादर (Sand Sheet) : ये बालू के विस्तृत, समतल एवं आकारविहीन क्षेत्र होते हैं। इनमे मात्र उर्मियाँ पायी जाती हैं। लीबिया का सेलिमा चादर इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।

v. लोयस (Loess) : वायु जब मरुस्थलीय सीमा के बाहर अपने साथ उड़ाकर लाये गये महीन बालू एवं मिट्टी का जमाव करती है और वायु के निक्षेपण द्वारा बड़े मैदानी भागों का निर्माण होता है तो इसे लोयस कहते हैं। यह भू-भाग उपजाऊ होता है। ढीले होने के कारण इसे नदियाँ आसानी से काट देती हैं। लोयस के निक्षेप उत्तरी चीन, न्यूजीलेण्ड, मध्यपूर्वी ऑस्ट्रेलिया व उत्तरी अमेरिका में पाये जाते हैं।

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प्रश्न 17.
वायु के कटाव एवं जमाव की सम्मिलित क्रिया से निर्मित भू-दृश्यों का वर्णन करो।
अथवा
पेडीमेण्ट, बाजाडा एवं प्लाया का वर्णन करो।
उत्तर :
अर्द्धशुष्क प्रदेशों में वायु के सम्मिलित कटाव एवं जमाव की क्रिया से पेडीमेंट, बजाडा एवं प्लाया का निर्माण होता है :
पेडीमेण्ट (Pediment) : शुष्क प्रदेशों में पर्वत, पठार एवं इन्सेलबर्ग के पदीय भागों में सामान्य ढाल वाला समतल मैदान का निर्माण होता है। शिलाखण्डों के चूर्णी को नदी और वायु बहाकर एवं उड़ाकर पदीय भागों में जमा करते हैं। इनका पीछे का पर्वतीय भाग काफी तेज ढालवाला होता है। इनके आगे के भाग में बारीक मिट्टी का जमाव पाया जाता है।

बजाडा (Bajada) : बजाडा पेडीमेण्ट के नीचे का भाग है। यहाँ पर बहकर आये पदार्थ व रेत जमा होते रहते हैं। यह वायु एवं पानी के कटाव एवं जमाव क्रिया द्वारा निर्मित होता है। इसका ढाल धीमा किन्तु लहरदार होता है। इनका निर्माण मोटे व महीन कणों के मिश्रण की अलग-अलग मोटाई की परतों के जमा होने से होता है। यहाँ कृषि कार्य एवं पशुपालन किया जाता है।

प्लाया या छिछले दलदल (Playa) : मरुस्थलीय भागों में अंतर्देशीय प्रवाह पाया जाता है। जिन भागों में नदी-नालों का पानी इकट्ठा होता रहता है वहाँ मिट्टी के जमाव में नमक भी सम्मिलित रहता है। इससे कठोर चट्टानों के परत के जमाव या ड्राकस्ट (Duracrust) बनते जाते हैं। वर्षा के दिनों में यहाँ पर पानी जमने से ये दलदल में बदल जाते हैं। इन्हें प्लाया कहते हैं। इनका विस्तार कुछ वर्ग कि॰मी० से लेकर सैकड़ों कि॰मी० तक पाया जाता है।

प्रश्न 18.
मरुस्थलों के विस्तार के क्या कारण हैं? इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है ?
उत्तर :
विश्व में मरुस्थलों के विस्तार के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :-
i. मानव द्वारा प्राकृतिक वनस्पतियों का उन्मूलन, ii. वायु का अपरदन एवं परिवहन, iii. अनियंत्रित पशुचारण, iv. भूमिगत जल स्तर में गिरावट, v. अल्प वर्षा, vi. कृषि भूमि में लगातार एक ही फसल का बोया जाना, तथा (vii) मिट्टी की लवणता में कमी।

वास्तव में मरुस्थलों के विस्तार का मूल कारण संसाधनों का अत्यधिक शोषण है, जिसके लिए मानव स्वयं उत्तरदायी है। अतः इसे नियंत्रण करने का प्रयास भी मानव को ही करना होगा।
निम्नलिखित उपायों को अपनाकर मरुस्थलीकरण को रोका जा सकता है :-
i. मरुस्थली वनस्पतियों की कटाई पर रोक।
ii. अधिक मात्रा में ऐसे वृक्षों को लगाना जो सीमित नमी में भी विकसित हो सकें।
iii. चारागाहों का विकास करके अनियंत्रित पशुचारण पर रोक लगाना।
iv. वायु के मार्ग में वृक्षों की पेटी का विकास करना जिससे सीमान्त क्षेत्रों में मरुस्थलों का प्रसार रुक सके।v. बालुका स्तूपों के स्थानान्तरण को रोकने का उपाय।
vi. भूमिगत जल तथा वर्षा के जल का उचित उपयोग।
vii. नमी संरक्षण एवं शुष्क कृषि (Dry farming) का विकास।
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि मरुस्थलों का विस्तार एक विकट समस्या बन गयी है। इसे शासकीय एवं सामाजिक प्रयासों तथा उचित प्रबन्धन द्वारा ही सीमित किया जा सकता है तथा इससे पर्यावरण को होनेवाली हानि से बचाया जा सकता है।

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प्रश्न 19.
भौतिक अपक्षय को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करो।
उत्तर :
सुर्य, जल, ताप, पाला तथा वायु द्वारा चट्टानो में विघटन होने की क्रिया को यांत्रिक अपक्षय कहते है, ये निम्नलिखित कारण से होता है :
i. सूर्य ताप : सुर्य ताप द्वारा चट्टानो के अपक्षय का कार्य शुष्क प्रदेशो में अधिक होता है, मरुस्थलीय भागों में वनस्पति के अभाव में दैनिक तापान्तर अधिक होने के कारण दिन में सुर्य की गर्मी से चट्टाने फैलती है, एवं रात में ठण्डक पड़ने से सिकुड़ती है, बार-बार फैलने और सिकुड़ने से चट्टाने कमजोर हो जाती है जिससे उसमें दरार पड़ जाती है, और वे बड़ेबड़े टुकड़ों में टुट जाती है। चट्टानो के इस प्रकार टुटने की क्रिया को पिण्ड विच्छेदन, (Block disintegration) कहते है। ये टुटे हुए चट्टानो के टुकड़ों गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से ढाल के अनुरूप लुढ़ककर निचले भाग में एकत्र हो जाते है। इस टुकड़े को सपंत Screenttalus कहते है।

ii. गोलाश्म अपक्षय, पल्लवीकरण या अपशल्कन : पहले लोगो की धारणा थी कि अपपत्तण की क्रिया चट्टानो के उपरी तथा भीतरी भागों में असमान तनाव के कारण होती है वे ऐसा सोचते थे कि यह क्रिया दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर अधिक होने के कारण होती है, परन्तु वर्तमान वैज्ञानिको के निरीक्षण द्वारा यह सिद्ध हो गया कि अपक्षय की क्रिया चट्टानो में उपस्थित खनिज पदार्थो के प्रसारण तथा तापक्रम में परिवर्तन के कारण होती है।

चट्नानो का निर्माण करने वाले भिन्न-भिन्न खनिज भिन्न-भिन्न रंग के होते है। जो सुर्य के तापमान को विभिन्न मात्रा में ग्रहण करते है, जिससे चट्टाने दिन में फैलती है और रात में ठण्डक के कारण सिकुड़ती है, इस कारण चट्टानो के उपरी भाग में तनाव उत्पन्न होता है, और चट्टानो के उपरी भाग प्याज के छिलके के तरह अलग होने लगता है, जिससे चट्टाने गोलाकार रूप में बदल जाती है, इस क्रिया को अपपत्तण (Exfoliation) या गोलाभ अपक्षय (Spherieal weathering) कहते है।

iii. पाला एवं दरारों में जल जमना : ठण्डे प्रदेशो में चट्टानो की दरारो में जब कभी जल भर जाता है, तो रात में ठण्डक के कारण जल जम जाता है, अतएव जल का आयतन बढ़ जाता है और चट्टाने फैलती है जिससे दरारो पर दबाव पड़ता है, और वे चौड़ी हो जाती है, दिन में सुर्य ताप से जमा हुआ जल पिघल जाता है और रात में फिर जम जाता है लागातार इस क्रिया के होते रहने से चट्टानो की दरारें चौड़ी होती जाती है और अन्त में चट्टाने टूटकर टुकड़े टुकड़े हो जाते है, यह प्रक्रिया शीत प्रदेशों अथवा उच्च पर्वत शिखरों पर अधिक होती है।

iv. वर्षा : उष्ण प्रदेशों में सुर्य की गर्मी से तप्त एवं फैली हुई चट्टानो पर अचानक वर्षा का जल गिरता है तो वे उसी प्रकार चटक जाती है जिस प्रकार पानी का छिटा पड़ते ही गर्म चिमनी चटक जाती है। चिटकने से चट्टाने शीघ्रता से छोटे छोटे टुकड़ो में विखंडित हो जाते है, सयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सॉस प्रदेश में वर्षा के बाद टूटे हुए विशाल चट्टानो के खण्ड दिखाई पड़ते है।

v. दाब मुक्ति : भु-पृष्ठ के नीचे अग्नेय तथा रूपान्तिरत चट्टाने प्रचण्ड दाब के कारण संकुचिंत अवस्था में रहती है, अपरदन के कारण जब उपर की चट्टाने हट जाती है तब इस दाब मुक्ति के कारण ये चट्टाने थोड़ा फैल जाती है। और उनमें दरारे पड़ जाती है, इस प्रकर दाब मुक्ति के कारण चट्टानो का विघटन होता रहता है,’इस क्रिया द्वारा मुख्यत: ग्रेनाइट और सगमरमर जैसे स्थुल चट्टानों का अपक्षय होता है।

प्रश्न 20.
रासायनिक अपक्षय कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय चार प्रकार के होते है या रासायनिक अपक्षय चार विधियों द्वारा होते है।
i. आक्सीकरण (oxidation): इसमें आक्सीजन गैस युक्त जल चट्टान के लौह-खनिजो के साथ मिल जाती है, जिससे लौह खनिज आक्साईडो में बदल जाती है तथा इससे लोहे में जंग लग जाता है। फलतः चट्टाने ढीली पड़ जाती है। और शीघ्र ही नष्ट हो जाती है।

ii. कार्बोनीकरण (carbonation) : जब कार्बन-डाई-आक्साईड गैस का मिश्रण जल से होता है, तो कई प्रकार के कार्बोनिट बन जाते है जो कि जल में घुलनशील होते हैं। इन कार्बोनिट के निर्माण के कारण चट्टानो का घुलनशील तत्व उससे अलग होकर जल के साथ हो लेता है। जैसे चूना पत्थर का संयोग कार्बन डाई-आक्साईड युक्त जल से होता है, तो चूने का पत्थर कैल्सियम काबोनिट में बदल जाता है, जो आसानी से जल के साथ घुल जाता है, युगोस्लाविया का कार्स्ट प्रदेश इसका उदाहरण है।

iii. जलयोजन (Hydration): चट्टानो के खनिजों का जल के मिलने से खनिजों का आयतन बढ़ जाता है। जिससे. खनिज कण भीतर ही भीतर पिसकर चुर हो जाते है, इससे चट्टाने ढ़ीली पड़ जाती है। और परत बिखर जाती है, जैसे केओलिन एवं जित्सम की रचना जलयोजन द्वारा होने वाले अपक्षय से हुई है।

iv. सिल्का का पृथकीकरण (De-silication): अनेक चट्टानो में सिलीका की मात्रा अधिक होती है, जब जल द्वारा रासायनिक विधि से सिलीकायुक्त चट्टानो से सिलीका अलग हो जाता है तो इस क्रिया को डि-सीलीकेशन कहते है, सिलीकेट के जल द्वारा चट्टान का पृथकीकरण आसानी से ढीली पड़ जाती है और उसका वियोजन शीघ्र प्रारम्भ हो जाता है।

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प्रश्न 21.
तल संतुलन के कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
धरातल को सामान्य तल पर लाने में लगी सभी प्रक्रियाओ को तल सतुलन की प्रक्रियाएँ कहते है। इसमें निम्नीकरण और अधिवृद्धि प्रक्रियाँए दोनो शामिल है।
निम्नीकरण या अनाच्छादन (Degradation or denudation) : निम्नीकरण (अनाच्छादन) भूमि के ऊचे भागो का क्रमिक रूप से नीचे होना, इस प्रक्रिया में नदी, हिमानी आदि अपरदन के कारक ऊँचे भागो को काट छांट कर दूसरे स्थानो पर ले जाकर निक्षेपित कर देती है आजकल भु-आकृतिक विज्ञान में अनाच्छादन और निम्नीकरण पर्यायवाची शब्द है। अनाच्छादन में अपघर्षण (Abrsion) संचरण (carrosion) बृहत क्षरण (Mass wasting) अपरदन और अपक्षय की प्रक्रियाएँ शामिल है।

अधिवृद्धि (Aggradation): धरातल के नीचले हिस्से या गड्दो में अपरदित पदार्थो के निक्षेपण से निम्न क्षेत्रो के भराव को अधिवृद्धि कहते है, संतुलित तल एक अस्थायी (Temporary) स्थिति है, क्योकि जैसे ही कोई भूमि भाग उपर हो जाता है, तभी अपरदन कारी शक्तियाँ अपना विनाश कार्य प्रारम्भ कर देती है।

प्रश्न 22.
नदी की कितनी अवस्थायें हैं ?वर्णन करो।
उत्तर :
नदी के मार्ग के कार्यो के आधार पर नदी को तीन अवस्थाओ में बाँटा जा सकता है।
i. पर्वतीय भाग या युवावस्था : जब नदी पहाड़ी चट्टानो से होकर बहती है तब उस अवस्था में अधिक ढाल होने के कारण उसकी धारा बहुत तेज होती है, तेजी से बहता हुआ पानी चट्टानो को तोड़ता-फोड़ता मिट्टी और पत्थर को काटता हुआ आगे बढ़ता है, जो चट्टान और पत्थर पानी की धारा में पड़ जाते है वे आपस में रगड़ खाकर महीन बालु और कंकड़ बन जाते है, इसकी रगड़ से बहते हुए पानी के नीचे की जमीन भी कटती जाती है, जिससे नदी का तल गहरा होता जाता है। इस अवस्था में नदी के तट सीधे होते है। इस अवस्था को नदी का पर्वतीय भाग या युवावस्था (mountainous or youth stage) कहते है। गंगा नदी गोमुख से हरिद्वार तक 230 कि॰मी॰ पर्वतीय भाग में बहती है।

ii. मैदानी भाग परिपक्वावस्था : जब नदी मैदान में प्रवेश करती है तो ढ़ाल कम होने के कारण नदी का वेग कम हो जाता है इसलिए उसकी धारा में जो पहाड़ी मिट्टी और पत्थर बहकर आते है वे सब नदी के तल में जमा होने लगते है, इस अवस्था में नदी का खास काम परिवहन रहता है, चौरस मैदान में वेग कम होने से यह अपने तल को गहरा करने के बदले तटो की मुलायम मिट्टी को काटती है और उसे एक जगह से बहाकर दुसरी जगह जमा करती है, इस कारण मैदान में नदी का तल अधिक गहरा नहीं होता, दुसरे मैदान में चूकि नदी का वेग कम रहता है।

इसलिए जिधर उसे मुलायम मिट्टी मिलती है, उसी और यह तट की मिट्टी को काटती है और पुरानी तलहटी को भरती जाती है, इसलिए मैदान में नदी सीधी न बहकर टेढे-मेढ़े राह से बहती है। नदी की यह अवस्था मैदानी या परिपक्वास्था (Plain or maturity stage) कहलाती है। जैसे हरिद्वार से लेकर राजमहल पहाड़ी तक गंगा नदी का मैदानी भाग है।

iii. डेल्टाई भाग या वृद्धावस्था : जब नदी समुद्र के निकट पहुँचती है उस समय उसके जल में इतनी अधिक मिट्टी और बालु मिला रहता है कि नदी की धारा बहुत मन्द हो जाती है और उसके साथ आयी हुई मिट्टी एवं बालु उसके मुहाने पर जमा होने लगता है। इस अवस्था में नदी का खास काम जमाव (Deposition) करना रहता है।

WBBSE Class 10 Geography Solutions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

प्रश्न 23.
सक्रिय डेल्टा क्षेत्रों पर वैश्विक ऊष्मण के प्रभाव का वर्णन करो।
उत्तर :
भुमण्डलीय तापमान में वृद्धि के अनेक दुष्परिणाम दावानल जैव विविधता की हानि, मरुस्थलीकरण, प्रवाल भण्डारो का क्षरण आदि के रुप में देखने को मिल रहा है, इसके साथ ही साथ महाद्वीपीय हिमनद तथा अण्टार्कटिका एवं ग्रीनलैण्ड के हिमचादरो के पिघलने का खतरा उपस्थित हो गया है, हिम के पिघलने से सागरीय जलस्तर में वृद्धि हो रही है जिससे छोटे द्वीप एवं नीचले तटीय स्तर जलायमान हो सकते है, नदियों के सक्रिय डेल्टा अचल अतिनिम्न तटीय भू भाग है। अत: सागरीय जलस्तर में वृद्धि के कारण इनके जलमग्न होने का खतरा सबसे अधिक रहता है।

भुमण्डलीय तापमान वृद्धि के कारण इनके जलमग्न होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। भु मण्डलीय तापमान वृद्धि एवं जलवायु परिवर्तन के कारण सागरीय जलस्तर में होने वाली वृद्धि के कारण सुन्दरवन डेल्टा क्षेत्र के सुदुर दक्षिणी भाग में स्थित लोहाद्वार (Lohachara) न्युमोर (Newmore) तथा सुपारीभांगा द्वीप जलमग्न हो गए है, घोरामारा (Ghoramara) सहित अन्य 12 द्वीप जलमग्न होने के कगार पर खड़े है। इस प्रकार भुमण्डलीय तापन के कारण सागरीय जलस्तर में वृद्धि से नदियो के सक्रिय डेल्टा अचंल के पुर्ण या आंशिक रुप से जलमग्न होने का खतरा बना हुआ है।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

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बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
शुष्क क्षेत्रों के महाखडु को कहा जाता है :
(a) कैनियन
(b) V- आकार की घाटी
(c) जलर्गर्तिका
(d) धान्द
उत्तर :
(a) कैनियन

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प्रश्न 2.
पंजाकार डेल्टा की उत्पत्ति होती है :
(a) नील नदी के मुहाने पर
(b) ह्वांग हो नदी के मुहाने पर
(c) सिन्धु नदी के मुहाने पर
(d) मिसीसिपी-मिसौरी नदी के मुहाने पर
उत्तर :
(d) मिसीसिपी-मिसौरी नदी के मुहाने पर

प्रश्न 3.
जिस विधि द्वारा प्राकृतिक कारक भूपृष्ठ के ऊपर कार्य करके पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन करते हैं उसे कहते हैं –
(क) बहिर्जात प्रक्रिया
(ख) अन्तर्जात प्रक्रिया
(ग) पर्वतो की उत्पत्ति की प्रक्रिया
(घ) भू-संचलन
उत्तर :
(क) बहिर्जात प्रक्रिया

प्रश्न 4.
लवणयुक्त चट्टानों के ऊपर नदी का मुख्य अपरदन कार्य है –
(क) अवघर्षण क्षय
(ख) घर्षण क्षय
(ग) जल प्रवाह क्षय
(घ) द्रवण क्षय
उत्तर :
(घ) द्रवण क्षय

प्रश्न 5.
फियोर्ड का निर्माण होता है –
(a) हिमानी
(b) नदी
(c) हवा
(d) भूमिगत जल
उत्तर :
(a) हिमानी।

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प्रश्न 6.
निम्नभूमि की ऊँचाई बढ़ने का कारण है :
(a) अधिवृद्धि प्रक्रिया
(b) निम्नीकरण प्रक्रिया
(c) अपघर्षण प्रक्रिया
(d) अनच्छादन प्रक्रिया
उत्तर :
(a) अधिवृद्धि प्रक्रिया

प्रश्न 7.
पक्षी के पंजे की आकार की डेल्टा जिस नदी के मुहाने पर देखा जाता है वह है :
(a) नील
(b) सिंधु
(c) ह्वांगहो
(d) मिसीसीपी-मिसौरी
उत्तर :
(d) मिसीसीपी-मिसौरी।

प्रश्न 8.
शिवालिक के गिरीपद पर निक्षेपित ककड़-पत्थर और बजरी से निर्मित मैदान को कहते हैं
(a) खादर
(b) भाबर
(c) भांगर
(d) बेट
उत्तर :
(b) भाबर

प्रश्न 9.
दंताकार डेल्टा का निर्माण नदी के मुहाने पर होता है:
(a) नील
(b) सिन्धु
(c) इब्रो
(d) यागरी सिक्यांग
उत्तर :
(c) इब्रो।

प्रश्न 10.
बहिर्जात प्रक्रियाएँ (Exogenous Processer) हैं :
(a) अकस्मात कार्य
(b) मंद कार्य
(c) अकस्मात एवं मंद कार्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) मंद कार्य।

प्रश्न 11.
नदी के ऊपरी मार्ग में निर्मित एक स्थलाकृति है :
(a) जलगर्तिका
(b) नदी विसर्ष
(c) डेल्टा
(d) प्राकृतिक तटबन्ध
उत्तर :
(a) जलगर्तिका।

प्रश्न 12.
हिमनद के ऊपर विकसित दरारों की श्रृंखला है :
(a) एरीट
(b) हिमविदर
(c) हिमदर
(d) फियोड
उत्तर :
(c) हिमदर।

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प्रश्न 13.
बाह्य विधि द्वारा स्थलखण्ड की ऊँचाई में होनेवाली कमी को कहते हैं :
(a) निम्नीकरण
(b) अधिवृद्धिकरण
(c) समतल स्थापना
(d) अपवाहन
उत्तर :
(a) निम्नीकरण।

प्रश्न 14.
उच्च भूमि जो एक या एक से अधिक नदियों के प्रवाह को पृथक करती है, कहलाती हैं –
(a) नदी बेसिन
(b) कैचमेण्ट बेसिन
(c) जलविभाजक
(d) दोआब
उत्तर :
(c) जलविभाजक।

प्रश्न 15.
एक बहिजाति प्रक्रिया का उदाहरण है :
(a) भूकंष
(b) ज्वालामुखी
(c) जल संचारण
(d) नदी का कार्य
उत्तर :
(d) नंदी का कार्य।

प्रश्न 16.
अनुदैर्ध्य बालुका-स्तूप का उदाहरण है :
(a) बरखान
(b) रोइस
(c) सीक
(d) केल बैंक
उत्तर :
(c) सीफ।

प्रश्न 17.
विश्व की सबसे लम्बी घाटी हिमनद है :
(a) हुबर्ड
(b) मेलस्पिना
(c) लाम्बर्ट
(d) सियाचीन
उत्तर :
(c) लाम्बर्ट।

प्रश्न 18.
चापाकार डेल्टा है :
(a) नील नदी का डेल्टा
(b) मिसिसिपी डेल्टा
(c) एवो नदी का डेल्टा
(d) सिंधु नदी का डेल्टा
उत्तर :
(a) नील नदी का डेल्टा।

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प्रश्न 19.
भारत का सबसे बड़ा हिमनद है :
(a) जेमू
(b) सियाचेन
(c) हुबार्ड
(d) गंगोत्री
उत्तर :
(b) सियाचेन।

प्रश्न 20.
किस महादेश में नदियाँ वहाँ के भू-प्रकृति को परिवर्तित करने में कोई भूमिका नहीं निभाती ?
(a) ओशीनिया
(b) एशिया
(c) दक्षिण अमेरिका
(d) अण्टार्कंटिका
उत्तर :
(d) अण्टार्कटिका।

प्रश्न 21.
पवन के कार्य सक्रिय रहते हैं :
(a) उच्च अक्षासीय क्षेत्रों में
(b) मरूस्थलीय क्षेत्र में
(c) कार्स्ट क्षेत्र में
(d) आर्द्र क्षेत्र में
उत्तर :
(b) मरूस्थलीय क्षेत्र में।

प्रश्न 22.
नदी के मध्यवर्ती भाग में निर्मित स्थल रूप है :
(a) जल प्रपात
(b) जल गर्तिका
(c) बजाडा
(d) प्राकृतिक तटबंध
उत्तर :
(d) प्राकृतिक तटबंध।

प्रश्न 23.
दो सर्को के बीच स्थित कटक को कहते हैं :
(a) वर्ग श्रुंड
(b) हिमानी दरार
(c) एरीट
(d) टोला
उत्तर :
(c) एरीट।

प्रश्न 24.
नदी का अपरदन कार्य अधिक होता है :
(a) ऊपरी अवस्था में
(b) मध्य अवस्था में
(c) निम्न अवस्था में
(d) सभी अवस्थाओं में
उत्तर :
(a) ऊपरी अवस्था में।

प्रश्न 25.
वायुमण्डल को गर्म करने वाली सौर विकिरण की मात्रा है :
(a) 55 %
(b) 63 %
(c) 65 %
(d) 90 %
उत्तर :
(c) 65 %

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प्रश्न 26.
मरूस्थलीय क्षेत्र में वायु के अपरदन कार्य से बनी पहाड़ी को कहा जाता है :
(a) एस्कर
(b) स्तूप
(c) द्वीपगिरी
(d) हिमशिलाखण्ड
उत्तर :
(c) द्वीपगिरी (Inselberg)

प्रश्न 27.
भुष्क क्षेत्र का घाटी है।
(a) कैनियन
(b) गार्ज
(c) जलजगर्तिका
(d) सोपानी पात
उत्तर :
(a) कैनियन (Lambart)

प्रश्न 28.
पवन की दिशा के समानान्तर बनने वाले बालुका स्तूप का नाम है :
(a) सर्क
(b) बरखान
(c) यारडंग
(d) ज्यूगेन
उत्तर :
(b) बरखान।

प्रश्न 29.
नदियाँ जहाँ से निकलती हैं, उस स्थान को कहते हैं –
(a) नदी का उद्ग्गम स्थल
(b) नदी का मुहाना
(c) जल विभाजक
(d) नदी का बेसिन
उत्तर :
(a) नदी का उद्गम स्थल।

प्रश्न 30.
उद्गम से मुहाने तक नदी के दोनों किनारों के बीच के निम्न भाग को कहते हैं –
(a) दोआब्र
(b) संगम
(c) नदी घाटी
(d) मुहाना
उत्तर :
(c) नदी घाटी।

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में से कौन बहिर्जात बल का अभिकर्त्ता है :-
(a) भूसंचलन
(b) हिमनद
(c) भूकम्प
(d) ज्वालामुखी
उत्तर :
(b) हिमनद।

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प्रश्न 32.
नदी के अपरदन कार्य द्वारा निर्मित स्थलरूप है :-
(a) जलप्रपात
(b) प्राकृतिक तटबन्ध
(c) डेल्टा
(d) बाढ़ का मैदान
उत्तर :
(a) जलपपात।

प्रश्न 33.
जब जलगर्तिका का गहराई एवं घास अधिक हो जाता है तो उसे कहते है :-
(a) कैनियन
(b) अवनामित या जल कुण्ड
(c) द्रुतवाह
(d) गार्ज
उत्तर :
(b) अवनमित या जल कुण्ड।

प्रश्न 34.
जलोढ़ पंख का निर्माण होता है :-
(a) पर्वतपदीय भाग में
(b) डेल्टाई भाग में
(c) पर्वतीय अंचल में
(d) उपरोक्त सभी भागों में
उत्तर :
(a) पर्वतपदीय भाग में।

प्रश्न 35.
नदी द्वारा त्यागे गए विसर्प निर्माण करते हैं :-
(a) टार्न झीलों का
(b) पेटरनास्तर झीलों का
(c) वृष्भ धनु झीलों का
(d) लैगूनों का
उत्तर :
(c) वृष्भ धनु झीलों का।

प्रश्न 36.
गंगा-ब्रहापुत्र नदी का डेल्टा है :-
(a) पंजाकार
(b) दंताकार
(c) त्रिभुजाकार
(d) ज्वारनदमुखी
उत्तर :
(c) त्रिभुजाकार।

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में से कौन हिमनद के अपरदन से निर्मित स्थलरूप है ?
(a) लटकती घाटी
(b) ड्रमलन
(c) केम
(d) एस्कर
उत्तर :
(a) लटकती घाटी।

प्रश्न 38.
निम्नलिखित में से कौन हिमनद के अपरदन की एक विधि है ?
(a) संत्रिर्षण
(b) अपवाहन
(c) उत्पाटन
(d) घोलीकरण
उत्तर :
(c) उत्पाटन।

प्रश्न 39.
आल्पस पर्वत श्रेणी का मैटरहर्न उदाहरण है :-
(a) गिरिभृंग का
(b) लटकती घाटी का
(c) सर्क का
(d) कंघीनुमा घाटी का
उत्तर :
(a) गिरिश्रृंग का।

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प्रश्न 40.
हिमनद के निक्षेपण से निर्मित उल्टे नाव के आकार का स्थलरूप है :-
(a) केम
(b) एस्कर
(c) ड्रमलिन
(d) केटिल
उत्तर :
(c) ड्रमलिन।

प्रश्न 41.
पवन के उड़ाव क्रिया द्वारा बनने वाली तश्तरीनुमा गड्वों को कहते हैं :-
(a) द्वीपाभगिरि
(b) छत्रक शिला
(c) पाषाण जालक
(d) अपवाहन बेसिन
उत्तर :
(d) अपवाहन बेसिन।

प्रश्न 42.
मरूस्थलों में रेत के अपघर्षण से निर्मित धारीदार चड्टानों को कहते हैं :-
(a) यारडंग
(b) तिषहल
(c) भूस्तम्भ
(d) पेडीमेण्ट
उत्तर :
(b) तिपहल।

प्रश्न 43.
शुष्क तथा अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पर्वतों से घिरी बेसिन को कहते है :-
(a) बालसन
(b) बजाडा
(c) वाडी
(d) पेड़ीमेण्ट
उत्तर :
(a) बालसन।

प्रश्न 44.
मरूस्थलों में पर्वतीय अग्रभाग के निम्नीकरण से निर्मित अपरदित गैल सतह वाले मैदान हैं-
(a) बजाड़ा
(b) लोयस
(c) पेडीमेण्ट
(d) वाडी
उत्तर :
(a) बजाडा।

प्रश्न 45.
अरब के मरूस्थल में प्लाया झीलों को कहते हैं :-
(a) वाड़ी
(b) खाबरी
(c) शद्स
(d) वाश
उत्तर :
(b) खाबरी।

प्रश्न 46.
पवन द्वारा दूरस्थ प्रदेशों से उड़ाकर लाई गयी मिट्टी के महीन कणों में निक्षेपण से निर्मित होते हैं :-
(a) पेडीमेण्ट
(b) बालुका स्तूप
(c) बजाडा
(d) लोयस
उत्तर :
(d) लोयस।

प्रश्न 47.
पर्वतीय भाग में नदी घाटियाँ होती हैं –
(a) ‘V’ आकार की
(b) ‘U’ आकार की
(c) ‘ W’ आकार की
(d) ‘N’ आकार की
उत्तर :
(a) ‘V’ आकार की।

प्रश्न 48.
गार्ज का निर्माण होता है :-
(a) शुष्क पर्वतीय अंचलों में
(b) आर्द्र पर्वतीय अंचलों में
(c) डेल्टाई अंचलों में
(d) पर्वतपदीय अंचलों में
उत्तर :
(a) शुष्क अंचलों में।

प्रश्न 49.
नदी के मोड़ों को कहते हैं –
(a) जलोढ़ पंख
(b) प्राकृतिक तटबन्ध
(c) विसर्ष
(d) कैनियन
उत्तर :
(c) विसर्प।

प्रश्न 50.
नदी के परित्यक्त विसर्प में जल भरने से निर्मित झीलों को कहते हैं :
(a) वृषक धनु झोल
(b) लावा बाँध-झील
(c) केटर झौल
(d) टार्न झील
उत्तर :
(a) वृषक झील।

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प्रश्न 51.
पंजाकार डेल्टा का उदाहरण है :-
(a) नील नदी की डेल्टा
(b) गंगा नदी की डेल्टा
(c) मिसीसिपी नदी की डेल्टा
(d) राइन नदी की डेल्टा
उत्तर :
(c) मिसीसिपी नदी की डेल्टा।

प्रश्न 52.
हिमरेखा की ऊँचाई सागर तल पर पायी जाती है :-
(a) धुवीय क्षेत्र में
(b) भूमध्य रेखीय क्षेत्र में
(c) अयन रेखीय क्षेत्रों में
(d) पर्वतीय क्षेत्रों में
उत्तर :
(a) धुवीय क्षेत्र में।

प्रश्न 53.
विश्व का सबसे तेज बहने वाला हिमनद है :-
(a) ग्रीनलैण्ड का जैकोत्सावन हिमनद
(b) अलास्का का मेलस्पीना हिमनद
(c) न्यूजीलैण्ड का फ्रान्ज जोसेफ हिमनद
(d) हिमालय क्षेत्र के सियाचीन हिमनद
उत्तर :
(a) म्रीनलैण्ड का जैकोत्सावन हिमनद।

प्रश्न 54.
महाद्विपीय हिमनद पाए जाते हैं :-
(a) पर्वत पदीय क्षेत्रों में
(b) पर्वतीय क्षेत्रों में
(c) विषुवत रेखीय क्षेत्रों में
(d) धुनीय क्षेत्रों में
उत्तर :
(d) धुवीय क्षेत्रों में।

प्रश्न 55.
स्काटलैण्ड में सर्क को कहते है :-
(a) कोरी
(b) कार
(c) CWM
(d) Botn
उत्तर :
(a) कोरी।

प्रश्न 56.
स्वीटजरलैड की मैटरहार्न चोटी उदाहरण है :-
(a) प्रशिखा का
(b) नूनटाक का
(c) गिरिश्रृंग का
(d) मेष शैल का
उत्तर :
(c) गिरिशृंग का।

प्रश्न 57.
निम्नलिखित में से कौन स्थलरूप हिमनद में निक्षेपण से निर्मित अण्डाकार पहाड़ियों जैसी है ?
(a) ड्रमलिन
(b) एस्कर
(c) केटिल
(d) मेष शैल
उत्तर :
(a) ड्रमलिन

प्रश्न 58.
पवन का कार्य सबसे अधिक प्रभावी रहता है :-
(a) शौत मरूस्थलों में
(b) उष्ण मरूस्थलों में
(c) उष्मार्द्र अंचलों में
(d) घास के मैदानों में
उत्तर :
(b) उष्ण मरूस्थलों में।

प्रश्न 59.
निम्नलिखित में से किस स्थलरूप को ‘गारा’ भी कहते हैं ?
(a) छत्रक शिला
(b) द्वीपाभगिरी
(c) भूस्तम्भ
(d) यारडंग
उत्तर :
(a) छत्रक शिला।

प्रश्न 60.
झाड़ियों की बाधा के कारण निर्मित बालुका स्तूपों को कहते हैं :-
(a) लुनेद्स
(b) नेवखास
(c) ओडेवे
(d) रेग
उत्तर :
(b) नेवखास।

प्रश्न 61.
तारीम बेसिन में स्थित लेपनार झील उदाहरण है :-
(a) बजाडा
(b) वाडी
(c) प्लाया
(d) वाश
उत्तर :
(c) प्लाया।

प्रश्न 62.
मरूस्थलों के विस्तार का प्रमुख कारण है :-
(a) वृक्षारोपण
(b) वृक्षो का कटाव
(c) फसलों का हेर-फेर
(d) भूमिगत जलस्तर में वृद्धि
उत्तर :
(b) वृक्षों का कटाव।

प्रश्न 63.
किसी मुख्य नदी में आकर मिलने वाली नदियाँ कहलाती हैं :-
(a) गुम्फित नदी
(b) डेल्टा
(c) हिमनद
(d) सहायक नदी
उत्तर :
(d) सहायक नदी।

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प्रश्न 64.
नदी के निक्षेपण कार्य से निर्मित स्थलरूप का उदाहरण है :-
(a) बरखान
(b) लटकती घाटी
(c) डेल्टा
(d) हिमनद
उत्तर :
(c) डेल्टा।

प्रश्न 65.
अनेक उपधाराओं से युक्त नदी को क्या कहते हैं ?
(a) गुम्फित नदी
(b) सहायक नदी
(c) साखा नदी
(d) उपसाखा नदी
उत्तर :
(a) गुम्फित नदी।

66.
बर्फ से ढँकी पर्वतों की ऊँची चोटियाँ कहलाती हैं :-
(a) सीफ
(b) हिमटोपी
(c) सासाईनी हिमनद
(d) सर्क
उत्तर :
(b) हिमटोपी।

प्रश्न 67.
हिमालय का सबसे लम्बा हिमनद का नाम हैं –
(a) सीफ
(b) हिमटोपी
(c) सियाबेन
(d) सर्क
उत्तर :
(c) सियाचेन।

प्रश्न 68.
हिमनदों के अपरदन से निर्मित अर्द्धगोलाकार गड्छे कहलाते हैं :-
(a) सीफ
(b) हिमटोपी
(c) गार्ज
(d) सर्क
उत्तर :
(d) सर्क।

प्रश्न 70.
समतल स्थापक बल किसे कहते हैं ?
(a) बहिर्जात बल
(b) अन्तर्जात बल
(c) आधार बल
(d) डेल्टा
उत्तर :
(a) बहिर्जात बल।

प्रश्न 71.
भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन का नाम है :-
(a) बहिर्जात बल
(b) गोदवरी बेसिन
(c) आधार तल
(d) महानदी बेसिन
उत्तर :
(b) गोदावरी बेसिन।

प्रश्न 72.
नदी के निम्न कटाव की अन्तिम सीमा कहलाता है :-
(a) घाटी
(b) आधार तल
(c) डेल्टा
(d) मुहाना
उत्तर :
(b) आधार तल।

प्रश्न 73.
नदी के निम्न भाग में निर्मित स्थलरूप कहलाता है :-
(a) डेल्टा
(b) छाडन झील
(c) तट बाँध
(d) पुलीन
उत्तर :
(a) डेल्टा।

प्रश्न 74.
हिमरेखा क्या है ?
(a) वह ऊँचाई जिसके ऊपर हमेशा बर्क जमी रहती है
(b) अण्डों के टोकरी की स्थलाकृति
(c) अर्द्धचन्द्रकार बालुका स्तूप
(d) लोयस का मैदान
उत्तर :
(a) वह ऊँचाई जिसके ऊपर हमेशा बर्फ जमी रहती है।

प्रश्न 75.
लिमोन क्या है ?
(a) एक काल्पनिक हिमरेखा
(b) अण्डों के टोकरी की स्थलाकृति
(c) अर्द्धचन्द्रकार बालुका स्तूप
(d) फ्रांस एव बेल्जियम में स्थित लोयस
उत्तर :
(d) फ्रांस एवं बेल्जियम में स्थित लोयस।

प्रश्न 76.
बरखान किसे कहते हैं ?
(a) समुद्र में तैरती हुई बर्फ को
(b) बाढ़ के मैदान को
(c) अर्द्धचन्द्रकार बालुका स्तूप को
(d) लोयस के मैदान को
उत्तर :
(c) अर्द्धचन्द्रकार बालुका स्तूप को।

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

प्रश्न 77.
ड्रमलिन किसे कहते है ?
(a) अण्डों के टोकरी की स्थलाकृति को
(b) अर्द्धचन्द्रकार बालुका स्तूप को
(c) लटकती हुई घाटी को
(d) मरूस्थल में पाए जाने वाले टीलों को
उत्तर :
(a) अण्डों के टोकरी की स्थलाकृति को।

प्रश्न 78.
नदी के वेग दोगुना होने पर उसकी परिवहन शक्ति हो जाएगी :-
(a) चौगुनी
(b) आठ गुना
(c) 64 गुना
(d) दस गुना
उत्तर :
(c) 64 गुना।

प्रश्न 79.
नदी के जल के साथ बहने वाले कंकड़-पत्थर का आपस में टकराकर दूटना किस विधि द्वारा होता है ?
(a) जलगति क्रिया
(b) अपघर्षण
(c) सत्रिघर्षण
(d) रासायनिक विधि
उत्तर :
(c) संत्रिघर्षण।

प्रश्न 80.
ताड़ के पंखे के समान की भू-आकृति को क्या कहते हैं ?
(a) मिएण्डर
(b) जलोढ़ फंख या जलोढ़ शंक्षु
(c) छाडन झील
(d) बाढ़ का मैदान
उत्तर :
(b) जलोढ़ पंख या जलोढ़ शंकु।

प्रश्न 81.
बैल के खुर के समान की भू-आकृति को क्या कहते हैं ?
(a) जलोढ़ पंख
(b) याजू
(c) वृक्क-धनु या छाडन झोल
(d) नदी वेदिका।
उत्तर :
(c) वृषक-धनु या छाडन झील।

प्रश्न 82.
जलोढ़ पंख के मध्य स्तर में किसका जमाव रहता है ?
(a) भारी रोड़े
(b) बजरी
(c) रेत
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(b) बजरी।

प्रश्न 83.
भूमण्डलीय तापमान में वृद्धि के दुष्परिणाम हैं :-
(a) दावानल
(b) जैव विविधता की हानि
(c) मरूस्थलीकण
(d) इनमें से सभी
उत्तर :
(d) इनमें से सभी।

प्रश्न 84.
निम्नलिखित में से किस आकृति का सम्बन्ध नदी के कार्यों से नहीं है ?
(a) जल प्रपात
(b) गोखुर झील
(c) बरखान
(d) ‘वी’ आकार की घाटी
उत्तर :
(c) बरखान।

प्रश्न 85.
नदी की युवावस्था में बनने वाली आकृति कहलाती है :-
(a) डेल्टा
(b) विसर्पण
(c) गोखुर झील
(d) गॉर्ज
उत्तर :
(d) गोर्ज।

प्रश्न 86.
निम्नलिखित में से किस नदी का कैनियन विश्वर्वियात है ?
(a) अमेजन नदी
(b) कोलोरैडो नदी
(c) सिन्धु नदी
(d) जार्डन नदी
उत्तर :
(b) कोलोरैडो नदी।

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प्रश्न 87.
नील नदी को डेल्टा है :
(a) धनुषाकार
(b) पंजाकार
(c) क्षीणाकार
(d) कटा-फटा
उत्तर :
(a) धनुषाकार।

प्रश्न 88.
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :-
(i) कैनियन एक चरम प्रकार की ‘वी’ आकार की घाटी है जिसके किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं तथा इस घाटी की तली नहीं होती है।
(ii) ग्रांड कैनियन कोलोरेडो नदी से सम्बन्धित है।
दिए गए उक्त कथनों में से कौन सही है ?
(a) केवल (i)
(b) केवल (ii)
(c) (i) व (ii) दोनों
(d) न तो (i) न (ii)
उत्तर :
(b) केवल (ii)

प्रश्न 89.
छोटी पर्वतीय झीलों को विशेषतः उन्हें जो सर्क बेसिन के पृष्ठ भाग में पथरीले पदार्थों के पीछे बनती हैं, कहा जाता है :-
(a) कॉल
(b) अरेटे
(c) हार्न
(d) टार्न
उत्तर :
(d) टार्न।

प्रश्न 90.
निम्नलिखित में से कौन-सी भू-आकृति का निर्माण नदी की अपरदन क्रिया द्वारा होता है ?
(a) गोर्ज
(b) बाढ़ का मैदान
(c) जलोढ़ पंख
(d) डेल्टा
उत्तर :
(a) गॉर्ज।

प्रश्न 91.
हिमानी अपरदन से निर्मित प्रमुख भू-आकृति है :-
(a) नूनाटक
(b) कंकटरिरि
(b) ड़मलिनि
(d) मोरेन
उत्तर :
(a) नूनाटक।

प्रश्न 92.
निम्नलिखित में से किस भू-आकृति का निर्माण हिमानी अपरदन द्वारा नहीं होता है ?
(a) लटकती घाटी
(b) गिरिभृंग
(c) टार्न
(d) ड्मलिन
उत्तर :
(d) ड्रमलिन।

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प्रश्न 93.
गहरे, लम्बे व विस्तृत गर्त या बेसिन जिनके शीर्ष दीवार खड़े ढाल वाले व किनारे खड़े व अवतल होते हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?
(a) सर्क
(b) पाश्र्वक हिमोढ़
(c) घाटी हिमनद
(d) एस्कर
उत्तर :
(a) सके।

प्रश्न 94.
किस हिमानीकृत भू-आकृति में तोड़ने की प्रक्रिया सम्मिलित है।
(a) मेड़-पीठ शिला
(b) एस्कर
(c) ड्रमलिन
(d) श्रंग व पुच्छ
उत्तर :
(a) भेड़-पीठ शिला।

प्रश्न 95.
निम्नलिखित में से कौन एक हिमानी अपरदित भू-आकृति नहीं है ?
(a) सर्क
(b) कोल
(c) ड्रमलिन
(d) टार्न
उत्तर :
(c) ड्रमलिन।

प्रश्न 96.
‘हिमजल निर्मित (हिमानी घौत) मैदान’ सम्बन्धित है :-
(a) हिमानी से
(b) नदी से
(c) सागरीय लहरों से
(d) वायु क्रिया से
उत्तर :
(a) हिमानी से।

प्रश्न 97.
एक गहरी घाटी जिसकी विशेषता सीढ़ीनुमा खडे ढाल होते हैं; किस नाम से जानी जाती है?
(a) U आकार की घाटी
(b) अन्धी घाटी
(c) गॉर्ज
(d) कैनियन
उत्तर :
(d) कैनियन।

प्रश्न 98.
कोल शब्द सम्बच्थित है :-
(a) हिमानी से
(b) नदी से
(c) भूमिगत जल से
(d) सागरीय लहरों से
उत्तर :
(a) हिमानी से।

प्रश्न 99.
निम्न में से कौन-सा वक्तव्य लैपीज शब्द को परिभाषित करता है ?
(a) छोटे से मध्यम आकार के उथले गर्त।
(b) ऐसे स्थलरूप जो धरातल से जल के टपकने से बनते हैं।
(c) ऐसे स्थल रूप जिनके ऊपरी मुख वृत्ताकार व नीचे से कीप के आकार के होते हैं।
(d) अनियमित धरातल जिनके तीखे कटक खाँच हो।
उत्तर :
(d) अनियमित घरातल जिनके तीखे कटक व खाँच हो।

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प्रश्न 100.
ड्रमलिन के बारे में निम्नलिखित में से कौन एक कथन सत्य है :-
(a) यह हिमानीकरण से सम्बन्थित एक अपरदित भू-आकृति है।
(b) यह हिमानीकरण से सम्बन्धित एक निक्षेपित भू-आकृति है।
(c) यह वायु के निक्षेपण से सम्बन्धित भू-आकृति है।
(d) बह वायु के अपरदन से सम्बन्धि भू-आकृति है।
उत्तर :
(b) यह हिमानीकरण से सम्बन्धित एक निक्षेपित भू-आकृति है।

प्रश्न 101.
निम्नलिखित में से कौन-सी भू-आकृति हिमनदी के कार्य सम्बन्थित है ?
(a) जलप्रपात
(b) रोधिका
(c) सर्क
(d) टिब्बा
उत्तर :
(c) सर्क।

प्रश्न 102.
निम्नलिखित से नदीय-हिमानी निक्षेपों की पहचान करें।
(a) हिमानीघौत मैदान
(b) बाढ़कृत मैदान
(c) पेन्नी प्लेन
(d) पेन प्लेन
उत्तर :
(a) हिमानीधौत मैदान।

प्रश्न 103.
डेल्टा केम परिणाम है।
(a) हिमनद अपरदन का
(b) वायु निक्षेपण का
(c) नदी निक्षेपण का
(d) हिमनद निक्षेपण का
उत्तर :
(d) हिमनद निक्षेपण का

प्रश्न 104.
निम्नलिखित में से कौन-सा हिमजलीय निक्षेपण भूरूप नहीं है ?
(a) एस्कर
(b) ड्रमलिन
(c) केम
(d) हार्न
उत्तर :
(d) हार्न।

प्रश्न 105.
प्लाया गर्त होते हैं जो निर्मित होते हैं :-
(a) वायु के अपवाहन कार्य से
(b) हिमनदी अपरदन से
(c) नदी अपरदन से
(d) सागरीय अपरदन से
उत्तर :
(a) वायु के अपवाहन कार्य से।

प्रश्न 106.
यारडंग बनने का प्रमुख कारण है :
(a) हवा का अपरदन
(b) हवा द्वारा निक्षेपण
(c) हवा द्वारा परिवर्तन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) हवा का अपरदन।

प्रश्न 107.
निम्नलिखित में से कौन पवन अपरदन द्वारा नहीं बनता है ?
(a) गारा
(b) भू-स्तम्भ
(c) ज्यूगेन
(d) बालुका स्तूष
उत्तर :
(d) बालुका स्तूप।

प्रश्न 108.
कठोर चट्टान से निर्मित खड़े ढाल वाला उच्च सपाट भाग जो सामान्यत: शुष्क प्रदेशों में पाया जाता है, को कहते हैं :-
(a) अर्ग
(b) क्वेस्टा
(c) मेसा
(d) कगार
उत्तर :
(c) मेसा।

प्रश्न 109.
निम्नलिखित में से कौन मरूस्थल की अपरदित आकृति नहीं है ?
(a) भू-स्तम्भ
(b) बजाडा
(c) इन्सेलवर्ग
(d) ज्यूगेन
उत्तर :
(b) बजाड़ा।

प्रश्न 110.
‘अपवाहन’ शब्द निम्न में से किसके सम्बन्धित है ?
(a) हिमनद
(b) प्रवाहित जल
(c) सागरीय लहरें
(d) वायु क्रिया
उत्तर :
(d) वायु क्रिया।

प्रश्न 111.
इन्सेलवर्ग शब्द में से किससे सम्बन्धित है।
(a) हिमनद
(b) प्रवाहित जल
(c) भूमिगत जल
(d) वायु के कार्य
उत्तर :
(d) वायु के कार्य।

प्रश्न 112.
अवशिष्ट पहाड़ियों को मरूस्थलीय प्रदेशों में कहा जाता है :-
(a) इनलीयर
(b) इन्सेलवर्ग या द्वीपगिरी
(c) प्लाया
(d) पेडीमेंट
उत्तर :
(b) इन्सेलवर्ग या द्वीपगिरी।

प्रश्न 113.
बरखान का निर्माण निम्नलिखित में से किससे सम्बन्धित है ?
(a) नदी
(b) हिमनदी
(c) भौमजल
(d) पवन
उत्तर :
(d) पबन।

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प्रश्न 114.
‘हमादा’ शब्द का आशय है :-
(a) सागरीय लहरों द्वारा अपरदित एवं तटीय निम्न भूमि
(b) शुष्क प्रदेशों में एक निक्षेपित मैदान
(c) मरूस्थल की समतल चट्टानी सतह जो बोल्डर के अतिरिक्त अन्य किसी अतिरिक्त पदार्थ से रहित हो।
(d) एक कार्स्ट निक्षेपित मेदान
उत्तर :
(c) मरूस्थल की समतल चट्टानी सतह जो बोल्डर के अतिरिक्त अन्य किसी अतिरिक्त पदार्थ से रहित हो।

प्रश्न 115.
शुष्क प्रदेशों में पर्वत पदीय ढलवां मार्ग पर नदियों द्वारा निक्षेपित बालू कहलाती है :-
(a) हमादा
(b) बजाडा
(c) मरू. प्रज्ञालन
(d) पेडीमेंट
उत्तर :
(b) बजादा।

प्रश्न 116.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उत्तात भूमि के बारे में सही नहीं है ?
(a) उत्खात भूमि एक कटी-फटी स्थलाकृति है जो प्राय: अपेक्षाकृत निम्न उच्यावच की होती है।
(b) उत्सात भूंमि आर्द्र भूमि से सम्बन्धित है।
(c) उत्बात भूमि वनस्पति विहीन होती है।
(d) उत्बात भूमि शुष्क तथा अर्द्ध शुष्क प्रदेशों से सम्बन्धित होती है।
उत्तर :
(c) उत्खात भूमि वनस्पति विहीन होती है।

प्रश्न 117.
उत्खात भूमि (बैडलैण्ड) स्थलाकृति निम्नलिखित की मिली-जुली का उत्पाद है।
(a) पवन एवं हिमानी
(b) पवन एवं जल
(c) जल एवं हिमानी
(d) जल एवं तापमान
उत्तर :
(b) पवन एवं जल।

प्रश्न 118.
सीफ निर्मित होते हैं :-
(a) गुरूत्व द्वारा
(b) वायु द्वारा
(c) लहरों द्वारा
(d) जलधाराओं द्वारा
उत्तर :
(b) वायु द्वारा।

प्रश्न 119.
पृथ्वी की अन्तः गति को क्या कहते हैं –
(a) वहिवर्ती बल
(b) अन्त: वर्ती बल
(c) भू-पृष्ठ
(d) दैनिक गति
उत्तर :
(b) अन्त: वर्ती बल

प्रश्न 120.
अपक्षय और अपरदन के कारको को समझा जाता है-
(a) बहिर्जात बल
(b) अन्त: वर्ती बल
(c) अपक्षय
(d) अपरदन
उत्तर :
(a) बहिर्जात बल

प्रश्न 121.
ज्वालामुखी तथा भूकम्प को क्या कहा जाता है-
(a) अन्तर्जात बल
(b) बहिर्जात बल
(c) गतिमान प्रक्रिया
(d) क्रियात्मक प्रक्रिया
उत्तर :
(a) अन्तर्जात बल

प्रश्न 122.
भौतिक अपक्षय क्या है-
(a) चट्टानों का दूटना
(b) चट्टानों का ढ़ील होना
(c) चट्टानों का बहना
(d) चट्टानों का सड़ना
उत्तर :
(a) चट्टानों का दूटना

प्रश्न 123.
जैविक अपक्षय क्या है ?
(a) पशुओं द्वारा जमीन खुरचना
(b) चट्टानी अपघटन
(c) रासायनिक क्रिया
(d) बट्टानों का सजीवों द्वारा असंगठित होना
उत्तर :
(d) चट्टानों का सजीवों द्वारा असंगठित होना

प्रश्न 124.
वादी क्या है ?
(a) शुष्क नदी घाटौ
(b) अपरदित द्रोणी
(c) बाढ़ का मैदान
(d) नदी तटबंध
उत्तर :
(a) शुष्क नदी घाटी

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प्रश्न 125.
वर्गश्रुण्ड किसका प्रतिफल है ?
(a) हिमनद अपरदन
(b) हिमनद पवाह
(c) नदी का जमाव
(d) बायु द्वारा अपवाहन
उत्तर :
(a) हिमनद अपरदन

प्रश्न 126.
चट्टानों के अपने स्थल पर टूट-फूट को कहते हैं-
(a) वियोजन
(b) निम्नीकरण
(c) अपक्षय
(d) अपक्षरण
उत्तर :
(c) अपक्षय

प्रश्न 127.
नदी का अपरदनात्मक कार्य कहाँ होता है ?
(a) पर्वतीय भाग में
(b) मैदानी भाग में
(c) पठारी भाग में
(d) डेल्टाई भाग में
उत्तर :
(a) पर्वंतीय भाग में

प्रश्न 128.
नदी अपनी अन्तिम अवस्था में क्या करती है ?
(a) अपरदन कार्य
(b) परिवहन कार्य
(c) निक्षेपन कार्ब
(d) कोई कार्य नहीं
उत्तर :
(c) निक्षेपन कार्य

प्रश्न 129.
किस हिमोढ़ का आकार अर्द्ध चन्द्रकार होता है ?
(a) पार्श्रिक हिमोढ़
(b) मध्यस्थ हिमोढ़
(c) अन्तिम हिमोढ़
(d) किसी का नहीं
उत्तर :
(c) अन्तिम हिमोद

प्रश्न 130.
V आकार की घाटी का निर्माण किसके द्वारा होता है ?
(a) नदी द्वारा
(b) हमनदी द्वारा
(c) पवन द्वारा
(d) किसी के द्वारा नहीं
उत्तर :
(a) नदी द्वारा

प्रश्न 131.
इनमें से किसका आकार छतरीनुमा होता है ?
(a) वातग्त का
(b) छइक शिला का
(c) ज्यूगेन का
(d) यारडंग का
उत्तर :
(b) छत्रक शिला का

प्रश्न 132.
इस्सेलबर्ग किस भाषा का शब्द है ?
(a) हिन्दी
(b) अंग्रेजी
(c) फंच
(d) जर्मन
उत्तर :
(d) जर्मन

प्रश्न 133.
लोयस मिट्टी किस देश में अधिक पाई जाती है ?
(a) चौन
(b) भारत
(c) अमेरिका
(d) रूस
उत्तर :
(a) चौन

प्रश्न 134.
मरुस्थल रोकने का सबसे बड़ा उपाय है-
(a) कृषि करना
(b) वृक्षारोपण
(c) शहर निर्माण
(d) उद्योग की स्थापना
उत्तर :
(b) वृक्षारोपण

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ……… नदी के नामानुसार नदी में उत्पन्न विसर्प ‘मियेण्डर’ के नाम से जाना जाता है ?
उत्तर : टर्की की मिएण्डर।

2. हिमनद की सतह पर उत्पन्न आर-पार और समानान्तर दरारों को ………कहा जाता है।
उत्तर : हिमदर या वर्गश्रुंड।

3. विभिन्न प्रकार के वाह्य बलों द्वारा भूमि के समतलीकरण को ………कहते हैं।
उत्तर : अनाच्छादन प्रक्रिया।

4. हिम प्रवाह और जल प्रवाह द्वारा बालू और कंकड़ इत्यादि से एकत्र हुए लम्बे, सकरे, घुमावदार, सीढ़ीनुमा शैलशिरा रूपी भूमि को………. कहते हैं।
उत्तर : एस्कर।

5. श्रृंग के विमुख भाग को ………नाम से जाना जाता है।
उत्तर : पूंछ (Tail)

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6. एस्कर का निर्माण हिमानी के ……… कार्य द्वारा होता है।
उत्तर : निक्षेपण

7. एक जलप्रपात जिसमें अधिक मात्रा में जल रहता है ………कहलाता है।
उत्तर : महाभपात

8. फिर्याड का ………भूमि देश को कहा जाता है।
उत्तर : नार्वे।

9. इटली का टाइवर नदी का डेल्टा ………है।
उत्तर : दंताकार।

10. शुष्क क्षेत्रों में सूखे एवं सँकरे नदी गर्त कहलाते हैं………
उत्तर : कैनियन।

11. तल संतुलन (Gradation) शब्द का सर्वप्रथम प्रस्तुत कर्ता ………हैं।
उत्तर : डब्लू. एम, डेविस।

12. राजस्थान में स्थानान्तरित बालकास्तूप को ………नाम से जाना जाता है।
उत्तर : श्रियान।

13. शुष्क प्रदेशों में नदी-घाटी को ………देश को कहा जाता है।
उत्तर : वाडी।

14. शुष्क पर्वतीय भाग में नदी द्वारा तल की काट-छांट से बनने वाली गार्ज को ………कहते हैं।
उत्तर : कैनियन।

15. अर्द्धचन्द्राकार बालू के टीलों को ………कहते हैं।
उत्तर : बरखान

16. ……… शुष्क क्षेत्र में ‘I ‘ आकार की घाटी को
उत्तर : कैनियन।

17. ………भारत का सबसे बड़ा हिमनद है।
उत्तर : सियाचेन हिमनद।

18. नदी के प्रवाह के माप की इकाई ………है।
उत्तर : घन मीटर प्रति सेकण्ड।

19. ………एक बहिर्जात प्रक्रिया है।
उत्तर : अपक्षय।

20. लोयस शब्द का अर्थ है ……….
उत्तर : पौले या भूरे रंग की महीन बलुई मिट्टी का जमाव।

21. नदी के द्वारा सर्वाधिक अपरदन का कार्य उसके……… प्रवाह में होता है।
उत्तर : उच्य (पर्वतीय)।

22. पृथ्वी की सतह पर उत्पत्र होने वाले बल को ………कहते हैं।
उत्तर : बहिर्जांत।

23. ………एक गतिशील प्रक्रिया है।
उत्तर : अपरदन।

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24. ………दो नदियों के प्रवाह क्षेत्र को अलग करते हैं।
उत्तर : जलविभाजक।

25. पर्वतीय भाग में नदियों द्वारा निर्मित घाटियाँ ……… आकार की होती हैं।
उत्तर : V

26. ………भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है।
उत्तर : जोग या गरसोण्पा

27. नदी के दोनों तट पर मिट्टी के निक्षेपण से ………आकार की होती हैं।
उत्तर : प्राकृतिक तटबंध।

28. मुहाने के पास नदियों के निक्षेपण से निर्मित भू-भाग को ………कहते हैं।
उत्तर : डेल्टा।

29. ………के समीप हिमरेखा की ऊँचाई सर्वाधिक रहती है।
उत्तर : विषुवत् रेखा।

30. अलास्का का मेलस्पाइना एक हिमनद ………है।
उत्तर : गिरिपद।

31. सर्क के हिम के पिघलने से……… झीलों का निर्माण होता है।
उत्तर : टार्न।

32. लटकती घाटियों को ………भी कहते हैं।
उत्तर : प्रपाती घाटी।

33. समुद्र में घुसी हुई हिमनद की घाटियों को ………कहते हैं।
उत्तर : फियोर्ड।

34. मरुस्थलों में पवन के अपरदन से निर्मित ढक्कनदार दवात जैसे स्थलरूप को ………कहते हैं।
उत्तर : ज्यूगेन।

35. अनुदैर्ध्य बालुका स्तूपों को ………भी कहते हैं।
उत्तर : सीफ।

36. नग्न चट्टानों से निर्मित मरुस्थलों को ………कहते हैं।
उत्तर : हमादा।

37. ………पवन एवं बहते हुए जल के संयुक्त कार्यों द्वारा निर्मित स्थलरूप है।
उत्तर : बजाडा।

38. धरातल पर समतल स्थापना की प्रक्रिया को ………कहते हैं।
उत्तर : बहिर्जात प्रक्रिया।

39. ………को समतल स्थापक बल भी कहते हैं।
उत्तर : बहिर्जात बल।

40. नदी का वेग दोगुना होने पर उसकी परिवहन शक्ति ………हो जाती है।
उत्तर : 64 गुना ।

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41. नदी के निम्न कटाव की अंतिम सीमा को ………कहते हैं।
उत्तर : आधार तल।

42. अनतिर्ति का निर्माण सामान्यत: ………के आधार पर होता है।
उत्तर : जल प्रपातों ।

43. ………अवस्था को नदी की परिपक्वास्था भी कहते हैं।
उत्तर : मैदानी अवस्था।

44. नदी के दोनों तटों पर बने लम्बे एवं कम ऊँचे कटकों को ………कहते हैं।
उत्तर : प्राकृतिक तटबंध।

45. नदी की ………अवस्था में मुख्य धारा कई छोटी-छोटी उपधाराओं में विभाजित हो जाती है।
उत्तर : डेल्टाई।

46. उपधाराओं से युक्त नदी ………कहलती है।
उत्तर : गुम्फित नदी।

47. गंगा-ब्रहमपत्र का ………डेल्टा डेल्टा है।
उत्तर : त्रिभुजाकार

48. विश्व का सबसे लम्बा हिमनद ………हिमनद्ध है।
उत्तर : अण्टार्कटिका का लम्बर्त।

49. हिमनदों को अल्पाइन हिमनद भी कहते हैं।
उत्तर : पर्वतीय।

50. उत्पाटन …….. के अपरदन की विधि है।
उत्तर : हिमनद।

51. सर्क का निर्माण ………भाग में होता है।
उत्तर : उच्य पर्वतीय।

52. स्वीटजरलैण्ड का कंघीनुमा कटक एक……… है।
उत्तर : एरीट।

53. हिमनद की लम्बी चौड़ी घाटियों को ………कहते हैं।
उत्तर : हिमद्रोणी।

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54. जब सहायक हिमनदों की उत्पत्ति मुख्य हिमनद की अपेक्षा अधिक ऊँचाई से होती है तो ………का निर्माण होता है।
उत्तर : लटकती घाटी।

55. ड्रमलिन ………के आकार के दिखाई देते हैं।
उत्तर : उल्टे नाव।

56. केटिल में पाए जाने वाले छोटे-छोटे टीलों को ………कहते हैं।
उत्तर : हमक।

57. ………विश्व का सबसे बड़ा बहिधर्मन है।
उत्तर : मिस्न का कतारा।

58. छतरीनुमा स्तम्भ के छत्रकशिला को जर्मनी में……… कहते हैं।
उत्तर : पिट्जफेल्सन।

59. सहारा में समानान्तर बालुका स्तूपों के मध्य बालू रहित गलियारों को ………कहते हैं।
उत्तर : गासी।

60. बजाडा एक ………स्थलरूप है।
उत्तर : निक्षेपजनित।

61. ………की घाटी का निर्माण नदी द्वारा होता है।
उत्तर : V – आकार।

62. ……… U- आकार की घाटी का निर्माण करते हैं।
उत्तर : हिमनद।

63. ……… द्वारा गोखुर झील का निर्माण होता है।
उत्तर : जमाव।

64. ………गहरे एवं छिछले गर्त हैं।
उत्तर : वातगर्त

65. जल प्रपात का निर्माण नदी के ………घाटी में होता है।
उत्तर : ऊपरी।

66. हिमोढ़ का निर्माण ………द्वारा होता है।
उत्तर : हिमनद के जमाख।

67. संकरी और गहरी घाटी को ………कहते हैं।
उत्तर : कैनियान।

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68. इन्सेलबर्ग का निर्माण वायु के ………द्वारा होता है।
उत्तर : अपरदन।

69. जब मुलायम और कठोर चट्टानें ………अवस्था में रहती हैं तो ज्यूगेन का निर्माण होता है।
उत्तर : क्षैतिज।

70. जलप्रपात का निर्माण कठोर और मुलायम चद्वानों के ………अवस्था में रहने पर होता है।
उत्तर : क्षैतिज।

71. ………के कारक नदी, हिमनद और वायु हैं।
उत्तर : बहिर्जात बल।

72. ………जलीय चक्र का एक हिस्सा है।
उत्तर : नदी।

73. नदी जब अपनी तली व तट को कटाती है तो इसे नदी का……… का कहा जाता है।
उत्तर : अपरदनात्मक कार्य।

74. डेल्टा का आकार ………होता है।
उत्तर : त्रिभुजाकार।

75. शुष्क तथा अर्द्ध शुष्क मरुस्थलों में ………का कार्य विशेष दिखता है।
उत्तर : पवन।

76. ………की गहराई की अन्तिम सीमा भौमजल स्तर द्वारा सीमित होती है।
उत्तर : असंतृप्त क्षेत्र या अस्थाई क्षेत्र।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. जलप्रपात के आधार पर जलर्गर्तिका का निर्माण होता है।
उत्तर : False

2. शीफ बालू का टीला बरखान बालू के टीले से परिवर्तित होता है।
उत्तर : True

3. चट्टानी मरूस्थल को हमादा कहा जाता है।
उत्तर : True

4. मरूस्थलीय प्रदेशों में जलोढ़ से निर्मित झील को प्लाया कहते हैं।
True

5. नदी के मुहाने पर डेल्टा निर्माण में ज्वार-भाटा सहायता करता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

6. आल्पस का मैटरहार्न एक गिरिशृंग है।
उत्तर : True

7. मरुस्थलीय प्रदेशों की अवशिष्ट को मोनाडनाक के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : True

8. नदियों का मुहाना जहाँ डेल्टा निर्माण होता है, वहाँ ज्वार का प्रभाव कम होता है।
उत्तर :False

9. राजस्थान के गतिशील बालुकास्तूपों को घ्रियान कहते हैं।
उत्तर : True

10. सर्क आराम कुर्सी की तरह से दिखाई देते हैं।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

11. बरखान एक स्थित बालुका स्तूप होते हैं।
उत्तर : True

12. बरखान अर्द्धचन्द्राकार होता है।
उत्तर : False

13. बहिर्जात बल धरातल पर विषमताएँ उत्पन्न करते हैं।
उत्तर : True

14. अपक्षय एक स्थैतिक क्रिया है।
उत्तर : False

15. जलीय चक्र में नदियों की महृत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उत्तर : True

16. जलप्रपातों का निर्माण नदियों के मैदानी अवस्था में होता है।
उत्तर : True

17. जब गार्ज अधिक गहरे, संकरें और विस्तृत हो जाते हैं, तो उन्हें कैनियन कहते हैं।
उत्तर : False

18. जलोढ़ पंखों का निर्माण नदियों के डेल्टाई भाग में होता है।
उत्तर : True

19. डेल्टा वृत्ताकार होता है।
उत्तर : False

20. मिसीसिपी नदी द्वारा निर्मित डेल्टा (Bird’s foot Delta) पंजाकार है।
उत्तर : False

21. हिमनद के प्रवाह की गति उसके मध्य में अधिक होती है।
उत्तर : True

22. सर्फ पवन के अपरदन से निर्मित स्थलरूप है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

23. फियोर्ड का निर्माण शीत कटिबंधीय प्रदेशों में होता है।
उत्तर : False

24. ड्रमलन का निर्माण तलस्थ हिमोढ़ के निक्षेपण से होता है।
उत्तर : True

25. छत्रकशिलाओं को गारा भी कहते हैं।
उत्तर : True

26. यारडंग का निर्माण पवन की दिशा के समानान्तर होता है।
उत्तर : True

27. लोयस मैदान का निर्माण नदी के निक्षेपण से होता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

28. जब प्लाया झीलों में लवण की मात्रा बढ़ जाती है तो उन्हें सैलीना कहते हैं।
उत्तर : False

29. प्रायः बाढ़ नदी के पर्वतीय अवस्था में रहता है।
उत्तर : True

30. नखलिस्तान मरूस्थलों में पाये जाने वाले जलीय भाग एवं कृषि क्षेत्र होते हैं।
False

31. विसर्ष नदी के मैदानी अवस्था में बनता है।
उत्तर : True

32. हिमनद घाटी द्वारा निर्मित अर्ध-गोलकार बेसिन को सर्क कहते हैं।
उत्तर : True

33. एक छोटी नदी जो बड़ी नदी में मिलती है, सहायक नदी कहलाती है।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

34. नदी की पर्वतीय अवस्था में सबसे अधिक जलप्रपात पाये जाते हैं।
उत्तर : True

35. नदी U-आकार की घटी का निर्माण करती है।
उत्तर : False

36. हिमनदी V-आकार की घाटी का निर्माण करती है।
उत्तर : False

37. नदी अपने डेल्टाई अवस्था में जमाव का कार्य तेजी से करती है।
उत्तर : True

38. नदी द्वारा उपरी घाटी में जमाव कार्य अत्यधिक किया जाता है।
उत्तर : False

39. नदी के अपरदन को जलीय अपरदन कहा जाता है।
उत्तर :True

40. छोटी नदियाँ जो टेढ़ी-मेढ़ी घाटियों से बहती हैं, इसे बिसर्प कहते हैं।
उत्तर :True

41. वह काल्पनिक रेखा जिस पर बर्फ नहीं पिघलती, उसे हिम रेखा कहते हैं।
उत्तर :True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

42. पाश्श्विक हिमोढ़ का जमाव हिमनद-घाटी के किनारों पर होता है।
उत्तर :True

43. ग्रैण्ड कैनियन विश्व का सब्से गहरा कैनियन है।
उत्तर :True

44. बालुका स्तूप का निर्माण मरूस्थलों एवं तटीय प्रदेशों में होता है।
उत्तर :True

45. सियाचीन जापान का सबसे बड़ा घाटी हिमनद है।
उत्तर :False

46. अलास्का का मेलस्पाइना हिमनद सबसे बड़ा पर्वतपतीय हिमनद है।
उत्तर :True

47. मालावार तट पर स्थित बालुका स्तूपों को टेरिस कहा जाता है।
उत्तर :True

48. मालावार तट पर स्थित झीलों को कयाम कहा जाता है।
उत्तर :True

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

49. नदी, हिमनदी, वायु और समुद्री लहरें अपरदन के अभिकर्ता हैं।
उत्तर :True

50. नदी के कटाव द्वारा डेल्टा का निर्माण होता है।
उत्तर :False

51. जलोढ़ मैदान का निर्माण वायु के जमाव द्वारा होता है।
उत्तर :False

52. नदी की घाटी में प्राकृतिक तटबंध पाये जाते हैं।
उत्तर :True

53. हिमनद के जमाव द्वारा ड्रमलिन का निर्माण होता है।
उत्तर :True

54. हिमनद के जमाव द्वारा बरखान का निर्माण होता है।
उत्तर :False

55. हिमोढ़ का निर्माण हिमनद के कटाव द्वारा होता है।
उत्तर : False

56. छठे घात के सिद्धांत का प्रतिपादन प्रोफेसर गिलबर्ट ने किया है।
उत्तर : True

57. पहाड़ियों के बीच स्थित संकरी घाटी को गार्ज कहते हैं जो नदी-अपरदन द्वारा बनता है।
उत्तर : True

58. रैपिड्स और कैटरैक्ट नदी के जमाव द्वारा बनाये जाते हैं।
उत्तर : False

59. सैण्डबार का निर्माण नदी के उद्गम स्थल पर होता है।
उत्तर : False

60. गोखुर झील और तटबंध का निर्माण नदी के जमाव द्वारा होता है।
उत्तर : True

61. हिमनद पर एक गहरी दरार को हिमविदर कहते हैं।
उत्तर : True

62. न्यूजीलैंड में ‘सर्क’ को कोरी कहा जाता है।
उत्तर : False

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63. भेन्रिला का निर्माण हिमनद के जमाव द्वारा होता है।
उत्तर : False

64. हिम-प्रद ह मैदान का निर्माण हिमनद के जमाव द्वारा होता है।
उत्तर : True

65. वायु अपना रदनात्मक कार्य अपवाहन, अपघर्षण और सन्निघर्षण द्वारा करती है।
उत्तर : True

66. लुढ़कावे की ध्रा में वायु छोटे ककड़ों, पत्थरों को धरातल के सहारे लुढ़काते हुए ले जाती है।
उत्तर : True

67. हमादा एक बड़ा खड्ड है, जिसका निर्माण वायु के अपवाहन द्वारा होता है।
उत्तर : False

68. ज्यूगेन और यारडंग का निर्माण वायु-अपरदन द्वारा होता है।
उत्तर : True

69. नदी के पर्वतीय अवस्था में V- आकार घाटी बनती है।
उत्तर : True

70. यदि नदी का वेग बढ़ेगा तो परिवहन क्षमता घटेगी।
उत्तर : False

71. गार्ज नदी के मुहाने पर बनता है।
उत्तर : False

72. जल प्रपात नदी के कटाव द्वारा बनता है।
उत्तर : True

73. स्कन्ध ढाल हिमानी के जमाव में बनता है।
उत्तर : False

74. नदी के निक्षेपण से नदी मोड़ का निर्माण होता है।
उत्तर : True

75. बाढ़ के कारण जब नदी के दोनों किनारों का भाग आसपास से अधिक ऊँचा हो जाता है तो उसे बाढ़ का मैदान कहते हैं।
उत्तर : False

76. हिमनद स्वयं अपनी घाटी नहीं बनाता, बल्कि यह पुरानी नदी घाटी को ग्रहण कर लेता है।
उत्तर : True

77. हिमद्रोणी का आकार उल्टी नौका या फटे अंडे के आकार का होता है।
उत्तर : False

78. हिमनद की गति मन्द होती है।
उत्तर : True

79. वजादा मन्द ढालयुक्त मैदान है जो पेडिमेण्ट तथा प्लाया के मध्य अवस्थित होते हैं।
उत्तर : True

80. वृक्षारोपण मरुस्थल के विकास में सहायक होता है।
उत्तर : False

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81 पवन के कार्य मरूस्थलीय क्षेत्र में अधिक क्रियाशील है।
उत्तर : True

बायें स्तम्भ से दायें स्तम्भ को मिलाइये : (1 Mark)

प्रश्न 1.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. समतल भूमि निर्माण की क्रिया (a) नदी
2. अपक्षरण का कारक (b) हुगली
3. गंगा की सहायक नदी (c) तल सन्तलुन
4. गंगा की शाखा नदी (d) यमुना

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. समतल भूमि निर्माण की क्रिया (c) तल सन्तलुन
2. अपक्षरण का कारक (a) नदी
3. गंगा की सहायक नदी (d) यमुना
4. गंगा की शाखा नदी (b) हुगली

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प्रश्न 2.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. लोएस (a) नदी निक्षेप
2. हिमोढ़ (b) हिमानी निक्षेप
3. बजरी (c) वायु निक्षेप
4. सिल्ट (गाद) (d) समुद्री निक्षेप

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. लोएस (c) वायु निक्षेप
2. हिमोढ़ (b) हिमानी निक्षेप
3. बजरी (d) समुद्री निक्षेप
4. सिल्ट (गाद) (a) नदी निक्षेप

प्रश्न 3.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. अन्त: वर्ती बल (a) 1,30,00,000 वर्ग किमी है
2. बर्हिवर्ती बल (b) नदी द्वारा निर्मित भू दृश्य
3. चट्टानों का टूटना (c) नदी द्वारा मैदानी अवस्था में निर्मित भूदृश्य
4. चट्टानों का विघटन (d) नदी के पर्वतीय अवस्था में निर्मित भूदृश्य
5. जल का वेग दो गुना होने पर (e) परिवहन कार्य 64 गुना होता है।
6. दुतवाह स्थल रूप है (f) रासायनिक अपक्षय है
7. कैनियन (g) भौतिक अपक्षय है
8. धनुषाकार झील (h) नदी, हिमनदी एवं वायु है
9. एस्चुअरी (i) भूकम्प एवं ज्वालामुखी है
10. अण्टार्कटिका में हिम का क्षेत्रफल (j) नदी जल का टकराकर पीछे लौटना

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. अन्त: वर्ती बल (i) भूकम्प एवं ज्वालामुखी है
2. बर्हिवर्ती बल (h) नदी, हिमनदी एवं वायु है
3. चट्टानों का टूटना (g) भौतिक अपक्षय है
4. चट्टानों का विघटन (f) रासायनिक अपक्षय है
5. जल का वेग दो गुना होने पर (e) परिवहन कार्य 64 गुना होता है।
6. दुतवाह स्थल रूप है (j) नदी जल का टकराकर पीछे लौटना
7. कैनियन (d) नदी के पर्वतीय अवस्था में निर्मित भूदृश्य
8. धनुषाकार झील (c) नदी द्वारा मैदानी अवस्था में निर्मित भूदृश्य
9. एस्चुअरी (b) नदी द्वारा निर्मित भू दृश्य
10. अण्टार्कटिका में हिम का क्षेत्रफल (a) 1,30,00,000 वर्ग किमी है

WBBSE Class 10 Geography MCQ Questions Chapter 1 बहिर्जात प्रक्रियाएँ तथा उत्पन्न स्थलरूप

प्रश्न 4.

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. किसी मुख्य नदी में आकार मिलनेवाली नदियाँ (a) सीफ
2. बहिर्जात बल का एक अभिकर्ता (b) बाढ़कृत मैदान
3. नदी के निक्षेपण कार्य से निर्मित स्थलरूप (c) सर्क
4. अनेक उपधाराओं से युक्त नदी (d) सहायक नदी
5. बर्फ से ढँकी पर्वतों की ऊँची चोटियाँ (e) हिमनद
6. हिमालय का सबसे लम्बा हिमनद (f) हिमटोपी
7. हिमदों के अपरदन से निर्मित अर्द्धगोलाकार गड्दे (g) गुम्फित नदी
8. पवन की दिशा के समानान्तर बनने वाले बालुका स्तूप (h) सासाइनी हिमनद

उत्तर :

बायां स्तम्भ दायां स्तम्भ
1. किसी मुख्य नदी में आकार मिलनेवाली नदियाँ (a) सीफ
2. बहिर्जात बल का एक अभिकर्ता (b) बाढ़कृत मैदान
3. नदी के निक्षेपण कार्य से निर्मित स्थलरूप (c) सर्क
4. अनेक उपधाराओं से युक्त नदी (d) सहायक नदी
5. बर्फ से ढँकी पर्वतों की ऊँची चोटियाँ (e) हिमनद
6. हिमालय का सबसे लम्बा हिमनद (f) हिमटोपी
7. हिमदों के अपरदन से निर्मित अर्द्धगोलाकार गड्दे (g) गुम्फित नदी
8. पवन की दिशा के समानान्तर बनने वाले बालुका स्तूप (h) सासाइनी हिमनद

 

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन

Well structured WBBSE 10 History MCQ Questions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन can serve as a valuable review tool before exams.

20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन की हत्या का प्रयास किये थे –
(क) बीना दास
(ख) कल्पना दत्ता
(ग) प्रीतिलता वाद्देदार
(घ) सुनीति चौधरी
उत्तर :
(क) बीना दास।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन

प्रश्न 2.
एन्टी-सर्कुलर सोसाइटी के सम्पादक थे –
(क) सचीन्द्र पाद बसु
(ख) कृष्णकुमार मित्रा
(ग) चित्तरंजन दास
(घ) आनन्दमोहन बसु
उत्तर :
(क) सचीन्द्र प्रसाद बसु।

प्रश्न 3.
वाइकम (Vykom) सत्याग्रह हुआ था –
(क) मालावार में
(ख) मद्रास में
(ग) महाराष्ट्र में
उत्तर :
(क) मालावार में।

प्रश्न 4.
‘नारी कर्म मन्दिर’ की स्थापना की थीं –
(क) उर्मिला देवी
(ख) बासन्ती देवी
(ग) कल्पना दत्त
(घ) लीला राय (नाग)
उत्तर :
(क) उर्मिला देवी

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन

प्रश्न 5.
सूर्यसेन द्वारा स्थापित आन्दोलनकारी संगठन जाना जाता है –
(क) अनुशीलन समिति
(ख) गदर पार्टी
(ग) भारतीय रिपिलिक क्ल (आर्मी)
(घ) बंगाल वालन्टियर्स
उत्तर :
(ग) भारतीय रिपब्लिकन बल (आर्मी)

प्रश्न 6.
दलित को ‘हरिजन’ किसने कहा था –
(क) ज्योतिबा फूले
(ख) नारायण गुरु
(ग) गाँधीजी
(घ) डा० अम्बेदकर
उत्तर :
(ग) गाँधीजी

प्रश्न 7.
बंग भंग विरोधी आन्दोलन प्रारंभ हुआ था –
(क) 1904 ई० में
(ख) 1905 ई० में
(ग) 1906 ई० में
(घ) गोदावरी घाटी में
उत्तर :
(ख) 1905 ई० में

प्रश्न 8.
मातंगिनी हाजरा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में जिस स्थान पर सम्मिलित हुई थीं वह स्थान था –
(क) तमलुक
(ख) सूताहाटा
(ग) बरिसाल
(घ) पुरुलिया
उत्तर :
(क) तमलुक

प्रश्न 9.
‘दीपाली संघ’ की स्थापना की थी –
(क) कल्पना दत्त
(ख) लीला नाग (राय)
(ग) बसन्ती देवी
(घ) बीना दास
उत्तर :
(ख) लीला नाग (राय)

प्रश्न 10.
‘दलित’ के बदले ‘हरिजन’ शब्द का सर्वप्रथम व्यवहार किया था
(क) बी० आर० अम्बेद्कर
(ख) महात्मा गांधी
(ग) जोगेन्द्रनाथ मंडल
(घ) इ० वी॰ रामास्वामी नैयर
उत्तर :
(ख) महात्मा गांधी।

प्रश्न 11.
चट्टगाँव शस्त्रागर लूट का नेतृत्व किया था –
(क) भंग सिंह
(ख) विनय बोस
(ग) सूर्य सेन
(घ) रासबिहारी बोस
उत्तर :
(ग) सूर्य सेन।

प्रश्न 12.
‘गाँधी बुड़ी” के नाम से किनें जाना जाता है ?
(क) सरोजनी नायडू
(ख) अरुणा आसफ अली
(ग) सुचेता कृपलानी
(घ) मातंगिनी हाजरा
उत्तर :
(घ) मातंगिनी हाजरा।

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प्रश्न 13.
‘साम्रदाबिक पंचाट की घोषणा’ की थी –
(क) गाँधीजी
(ख) मुहम्मद अली जिन्ना
(ग) रैम्से मैकडोनाल्ड
(घ) लार्ड माउंटबेटन
उत्तर :
(ग) रैम्स मैकडोनाल्ड।

प्रश्न 14.
‘जयश्री’ पत्रिका का प्रकाशन की थी :
(क) कल्पना दत्त
(ख) लौला नाग
(ग) बेला देवी
(घ) सरला देवी चौधुरानी
उत्तर :
(ख) लीला नाग।

प्रश्न 15.
इणिडयन नेशनल आर्मी (INA) के महिला ब्रिगेड की मुखिया कौन थी ?
(क) लक्ष्मी स्वामीनाथन (सहगल)(ख) कनकलता बरुआ
(ग) पियाली बरुआ
(घ) ऊषा मेहता
उत्तर :
(क) सक्ष्मी स्वामीनाथन (सहुल)।

प्रश्न 16.
‘सखी समिति’ गठन की थी :
(क) स्वर्ण कुमारी देवी
(ख) सारा देवी
(ग) कार्दंबरी देवी
(घ) मृणालिनी देवी
उत्तर :
(क) स्वर्ण कुमारी देवी।

प्रश्न 17.
स्वाधीनता-पूर्व भारत की प्रथम शहीद महिला थी :
(क) वीणा दास
(ख) कल्पना दत्त
(ग) मातंगिनी हाजरा
(घ) प्रीतिलता बाद्देदर
उत्तर :
(घ) प्रीतिलता बाब्देदर।

प्रश्न 18.
‘लक्ष्मी भण्डार’ की स्थापना की थी :
(क) स्वर्ण कुमारी देवी
(ख) चपला देवी
(ग) सरला देवी चौधुरानी
(घ) अनन्दिता देवी
उत्तर :
(ग) सरला देवी चौधुरानी।

प्रश्न 19.
‘बंगाल विभाजन’ रह किया गया था –
(क) 1905 ई० में
(ख) 1907 ई० में
(ग) 1909 ई० में
(घ) 1911 ई० में
उत्तर :
(घ) 1911 ई० में।

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प्रश्न 20.
‘सत्य शोधक समाज’ की स्थापना किसने किया था ?
(क) ज्योतिबा फूले
(ख) राणाडे
(ग) गोपाल हरि
(घ) विवेकानन्द
उत्तर :
(क) ज्योतिबा फूले।

प्रश्न 21.
एण्टी कार्लाइल सर्कुलर सोसाइटी की स्थापना हुई थी –
(क) 1905 ई० में
(ख) 1906 ई० में
(ग) 1908 ई० में
(घ) 1911 ई॰० में
उत्तर :
(क) 1905 ई० में।

प्रश्न 22.
इनमें से किसे भारत कोकिला के नाम से जाना जाता है ?
(क) बसंती देवी
(ख) उर्मिला देवी
(ग) सरला देवी चौधुरानी
(घ) सरोजनी नायड्र
उत्तर :
(घ) सरोजनी नायड्ड।

प्रश्न 23.
राशिद्ध अली दिवस मनाया गया था –
(क) 11 फरवरी 1975 ई० को
(ग) 18 फरवरी 1984 ई० को
(ख) 12 फरवरी 1946 ई० को
(घ) 26 फरवरी 1956 ई० को
उत्तर :
(ख) 12 फरवरी 1946 ई० को।

प्रश्न 24.
‘करो या मरो’ का नारा किसने दिया था ?
(क) सरदार क्तथ भाई पटेल नेख) फे० जवाहरलाल नेहरू ने
(ग) महात्मा गाँधी ने ,
(घ) सुभाषचन्द्र बोस ने
उत्तर :
(ग) महात्मा गाँधी ने।

प्रश्न 25.
‘गुलामगिरी’ पुस्तक के रचनाकार थे –
(क) श्रौ नारायण गुरु
(ख) ज्योतिबा फूले
(ग) केशव चन्द्र सेन
(घ) डॉं० बी० आर० अम्बेदकर
उत्तर :
(ख) ज्योतिबा फुले।

प्रश्न 26.
‘बंगाल वाँलन्टिबर पार्टी’ के संस्थापक थे –
(क) सूर्य सेन
(ख) सुभाष चंद्र बोस
(ग) हेमचन्द्र घोष
(घ) ज्योतिबा फुले
उत्तर :
(ग) हेमचन्द्र घोष।

प्रश्न 27.
बंगाल के गर्वनर स्टेनली जेक्शन की हत्या का प्रयास किसने किया था ?
(क) बीना दास
(ख) प्रीतिलता बाद्देदर
(ग) कल्पना दत्त
(घ) कल्याणी दास
उत्तर :
(क) बीना दास।

प्रश्न 28.
1906 ई० में स्थापित बंगाल नेशनल कॉलेज के प्रथम प्रार्चाय थे –
(घ) आर० डबलू० कार्लाइक
(क) अरविन्द घोष
(ख) शचीन्द्र प्रसाद बसु
(ग) पी० सी० राय
(घ) सुभाष चन्द्र बोस
उत्तर :
(क) अरविन्द घोष

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प्रश्न 29.
झाँसी की रानी रेजीमेण्ट का गठन किसके नेतृत्व में हुआ था ?
(क) लक्ष्मी सहगल
(ख) आनन्द मोहन बोस
(ग) अनीता पाठक
(घ) सुभाष चन्द्र बोस
उत्तर :
(घ) सुभाष घन्द्र बोस

प्रश्न 30.
‘महाद’ सत्याग्रह के संगठनकर्ता थे –
(क) गुरू बाँद ठाकुर
(ख) डॉ० अम्बेदकर
(ग) ज्योतिबा फूले
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर :
(ख) डों० अम्बेदकर

प्रश्न 31.
‘मतुआ सम्रदाय’ के प्रवर्तक थे –
(क) अनुकूल ठाकुर
(ख) रवीन्द्र ठाकुर
(ग) हरिबाँद ठाकुर
(घ) इनमें से कॉई नहीं
उत्तर :
(ग) हरिचाँद ठाकुर

प्रश्न 32.
इनमें से किसे ‘लौह महिला’ के नाम से जाना जाता है ?
(क) कस्तुरबा गाँधी
(ख) सरोजनी नायड्ट
(ग) रानी लक्ष्मी बाई
(घ) दुर्गाबाई देशमुख
उत्तर :
(घ) दुर्गाबाई देशमुख

प्रश्न 33.
बंगाल में अछूत एवं दलित आन्दोलन को किस नाम से जाना जाता है ?
(क) भद्रलोक आन्दोलन
(ख) नामसेज आन्दोलन
(ग) नामशुद्र आन्दोलन
(घ) राजवंशी आन्दोलन
उत्तर :
(ग) नामशुद्र आन्दोलन

प्रश्न 34.
1942 ई० के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान देश में समानान्तर एवं जातीय (राष्ट्रीय) सरकारें स्थापित हुई थी –
(क) बलिया में
(ख) सतारा में
(ग) तमलुक में
(घ) उक्त सभी में
उत्तर :
(घ) उक्त सभी में

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन

प्रश्न 35.
अनुशीलन समिति की स्थापना किया था :
(क) सतीश घन्द्र बसु
(ख) अरविन्द घोष
(ग) बारिन्द्र घोष
(घ) सूर्य सेन
उत्तर :
(क) सतीश चन्द्र बसु।

प्रश्न 36.
बंगाल के किस जिले में भारत छोड़ो अन्दोलन ने एक भयावह रूप ले लिया था ?
(क) उत्तर 24 परगना
(ख) हावड़ा
(ग) हुगली
(घ) मिदनापुर
उत्तर :
(घ) मिदनापुर।

प्रश्न 37.
बंगाल वाँलन्टियर्स का संक्षिप्त नाम था :
(क) वी० भौ०
(ख) बंगाल
(ग) बेव
(घ) वॉलन्टियर्स
उत्तर :
(क) वी० भी०

प्रश्न 38.
विनय, बादल और दिनेश ने राइटर्स बिल्डिंग पर आक्रमण किया था :
(क) 1925 ई० में
(ख) 1930 ई० मे
(ग) 1932 ई० में
(घ) 1934 ई० में
उत्तर :
(ख) 1930 ई० में।

प्रश्न 39.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन की महिला नेत्री थी –
(क) बसन्ती देवी
(ख) कमला नेहरू
(ग) कस्तुरबा गाँधी,
(घ) प्रभावती देवी
उत्तर :
(ग) कस्तुरबा गाँधी।

प्रश्न 40.
भारत में प्रथम महिला छात्र संगठन था :
(ग) दीपाली संघ
(घ) मिताली संघ
उत्तर :
(ग) दीपाली संघ।

प्रश्न 41.
दीपाली संघ की स्थापना …….. में हुई।
(क) ढाका
(ख) कोलकाता
(ग) बहरमपुर
(घ) बारिसाल
उत्तर :
(क) दाका।

प्रश्न 42.
वायकोम सत्याप्रह का नेतृत्व किए थे –
(क) बी० आर० अम्बेदकर
(ख) श्री नरायण गुरु
(ग) रामास्वामी नायर
(घ) केलण्पन
उत्तर :
(घ) केलपन।

प्रश्न 43.
बरामदा युद्ध के नेताओं में से एक थे :
(क) अवनी लाहड़ी
(ख) विनय बसु
(ग) खुदीराम बसु
(घ) प्रफुल्ल चाकी
उत्तर :
(ख) विनय बसु।

प्रश्न 44.
केरल में दलित आंदोलन का नेतुत्व किया था :
(क) ज्योतिबा फुले
(ख) श्री नारायण गुरू
(ग) बाबा रामचन्द्र
(घ) हरिचन्द्र ठाकुर
उत्तर :
(ख) श्री नारायण गुरु।

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प्रश्न 45.
‘वायकोम सत्याग्रह”‘ के संचालक थे –
(क) गॉधीजी
(ख) नारायण गुरु
(ग) भीमराव अम्बेदकर
(घ) ज्योतिबा फुले
उत्तर :
(ख) नारायण गुरु।

प्रश्न 46.
‘सुपुरी बोनेर साड़ी” के लेखक कौन थे ?
(क) अतिन बन्द्योपाध्याय
(ख) प्रफुल्ल चक्रवर्ती
(ग) संखा घोष
(घ) अरुधंती रॉय
उत्तर :
(ग) संखा घोष।

प्रश्न 47.
अंगाल में नमोशुद्र आंदोलन की शुरू आत किया था :
(क) प्रमथ रंजन ठाकुर
(ख) हरिचन्द ठाकुर
(ग) गौड़चन्द ठाकुर
(घ) जोगेन उाकुर
उत्तर :
(ख) हरिचन्द ठाकुर।

प्रश्न 48.
घूरोपियन क्लब पर आक्रमण की थी :
(क) लीला नाग
(ख) प्रीतिलता वादेदर
(ग) कल्यना दत्त
(घ) रानी दत्त
उत्तर :
(ख) प्रीतिलता वाद्देदर।

प्रश्न 49.
बंगाल का विभाजन किया था –
(क) लाई क्लाईव ने
(ख) लार्ड डफरिन ने
(ग) लाई कर्जन ने
(घ) लाई मैकाले ने
उत्तर :
(ग) लार्ड कर्जन ने।

प्रश्न 50.
गाँधी जी ने असहयोग आन्द्रोलन चलाया था –
(क) 1919 ई० में
(ख) 1920 ई० में
(ग) 1922 ई० में
(घ) 1930 ई० में
उत्तर :
(ख) 1920 ई० में।

प्रश्न 51.
आजाद हिन्द फौज की महिला सैन्य दल का नेतृत्व किया था –
(क) बासन्ती देवी
(ख) सरोजिनी नायड्
(ग) कस्तूरबा गाँधी
(घ) लक्ष्मी सहगल
उत्तर :
(घ) लक्ष्मी सहगल।

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प्रश्न 52.
पातंगिनी हाजरा ने भाग ली थी –
(क) बंग-भाः आन्दोलन में
(ख) असहयोग आन्दोलन में
(ग) भारत छोड़ो आन्टालन में
(घ) माविनय अवज़ा आन्दोलन मे
उत्तर :
(ग) भारत छोड़ो आन्दोलन में।

प्रश्न 53.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष थी –
(क) ऐनीबेसेन्ट
(ख) सरोजनी नायड्ट
(ग) मातंगिनी हाजरा
(घ) इंदिरा गांधी
उत्तर :
(क) ऐनीबेसेन्ट

प्रश्न 54.
‘दांडी मार्च’ आन्दोलन का भाग था –
(क) बंग-भग आन्दोलन
(ख) असहयोग आन्दोलन
(ग) सविनय अवश्श आन्दोलन
(घ) भारत छोड़ो आन्दोलन
उत्तर :
(ग) सविनय अवज्ञा आन्दोलन।

प्रश्न 55.
भारतीय महिला संघ की स्थापना हुई थी –
(क) 1905 ई० में
(ख) 1907 ई० में
(ग) 1917 ई० में
(घ) 1920 ई० में
उभ्षर :
(ग) 1917 ई० में।

प्रश्न 56.
लीला नाग एक आन्दोलनकारी महिला थी –
(क) बंगाल की
(ख) पजाब की
(ग) मद्रास की
(घ) बम्बई की
उत्तर :
(क) बंगाल की।

प्रश्न 57.
‘कोर्लाइल सरकुलर’ जारी किया गया था –
(क) 1905 ई० में
(ख) 1907 ई० में
(ग) 1920 ई० में
(घ) 1930 इं० में
उत्तर :
(क) 1905 ई० में।

प्रश्न 58.
‘करो या मरो’ का नारा दिया गया था
(क) असहयोग आन्दोलन में
(ख) बग-भाग आन्दोलन में
(ग) सिविनय अवज़ा आद्दोलन में
(घ) भारत छोड़ो आद्दोलन में
उत्तर :
(घ) भारत छोड़ो आन्दोलन में।

प्रश्न 59.
‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ में जेल जाने वाली प्रथम महिला थी –
(क) कल्पना दत्त
(ख) बासन्ती देवी
(ग) कस्तूरबा गाँधी
(घ) सरोजिनी नायडू
उत्तर :
(घ) सरोजनी नायडू।

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प्रश्न 60.
प० जवाहर लाल नेहरू की माता का नाम था –
(क) कमला नेहरू
(ख) स्वरूपा रानी
(ग) उर्मिला देवी
(घ) बासन्ती देवी
उत्तर :
(ख) स्वरूपा रानी।

प्रश्न 61.
खुदीराम बोस के क्रांतिकारी साथी थे –
(क) प्रफुल्ल चाकी
(ख) गाँधीजी
(ग) भगत सिंह
(घ) मोतीलाल नेहरू
उत्तर :
(क) प्रफुल्ल चाकी।

प्रश्न 62.
‘छात्री संघ’ से इनमें से कौन सम्बद्ध थीं –
(क) कमला दास गुप्ता
(ख) बीना दास
(ग) कल्पना दत्त
(घ) कमला नेहरू
उत्तर :
(क) कमला दास गुप्ता।

प्रश्न 63.
‘राष्ट्रीय स्त्री संघ’ की अध्यक्षा थी –
(क) कस्तूरबा गाँधी
(ख) कमला नेहरू
(ग) बीना दास
(घ) सरोजिनी नायड्ड
उत्तर :
(घ) सरोजनी नायड्।

प्रश्न 64.
विदेश में तिरंगा फहराने वाली महिला थी –
(क) मातंगिनी हाजरा
(ख) प्रीतिलता वाडेकर
(ग) लीला नाग
(घ) मैडम कामा
उत्तर :
(घ) मैड़म कामा।

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प्रश्न 65.
‘आजाद हिन्द फौज’ में महिला बिग्रेड की स्थापना हुई थी –
(क) 1942 ई० में
(ख) 1930 ई० में
(ग) 1946 ई० में
(घ) 1943 ई० में
उत्तर :
(घ) 1943 ई० में।

प्रश्न 66.
चट्टगाँव विद्रोह में किस महिला ने साथ दिया था वह थी –
(क) कमला नेहरू ने
(ख) कस्तूरबा गाँधी ने
(ग) कल्पना दत्त ने
(घ) मैडम कामा ने
उत्तर :
(ग) कल्पना दत्त ने।

प्रश्न 67.
बाई अम्मा ने जिस आन्दोलन में भाग लिया वह था –
(क) बंग-भंग आन्दोलन
(ख) असहयोग आन्दोलन
(ग) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(घ) भारत छोड़ो आन्दोलन
उत्तर :
(ख) असहयोग आन्दोलन।

प्रश्न 68.
वह क्रांतिकारी महिला जो पुलिस द्वारा पकड़े जाने के भय से जहर खाकर आत्महत्या कर ली, उसका नाम है –
(क) कल्पना दत्त
(ख) अमृता कौर
(ग) लीला नाग
(घ) प्रीतिलता वाद्देदर
उत्तर :
(घ) प्रीतिलता वाद्देदर।

प्रश्न 69.
‘एण्टी सर्कुलर सोसाइटी’ की स्थापना सचीन्द्र नाथ बसु ने जिसके सहायता से की वह थे –
(क) रामाकान्त राय
(ख) बाघा जतीन
(ग) सूर्य सेन
(घ) भगत सिंह
उत्तर :
(क) रामाकान्त राय।

प्रश्न 70.
जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना हुई थी –
(क) मद्रास में
(ख) अलीगढ़ में
(ग) अजमेर में
(घ) कश्मीर में
उत्तर :
(ख) अलीगढ़ में।

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प्रश्न 71.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान बानर सेना का गठन किया गया था –
(क) औरतों की सहायता से
(ख) बच्चों की सहायता से
(ग) पुरुषों की सहायता से
(घ) बंदरों की सहायता से
उत्तर :
(ख) बच्चों की सहायता से।

प्रश्न 72.
‘अनुशीलन समिति’ की स्थापना की गयी थी –
(क) कलकत्ता में
(ख) बम्बई में
(ग) दिल्ली में
(घ) मद्रास में
उत्तर :
(क) कलकज्ता में।

प्रश्न 73.
‘काकोरी डकैती काण्ड’ का नेतृत्व किया था –
(क) भगत सिंह
(ख) चन्द्रशेखर यादव
(ग) खुदीराम बोस
(घ) रामप्रसाद बिंस्मिल
उत्तर :
(घ) रामप्रसाद बिस्मिल।

प्रश्न 74.
भगत सिंह और उनके एक साथी ने मिलकर पुलिस कमिश्नर साडर्स की हत्या की, उस साथी का नाम था –
(क) चन्द्रशेखर आजाद
(ख) बटुकेश्वर दत्त
(ग) खुदीराम बोस
(घ) सुखदेव
उत्तर :
(घ) सुखदेव।

प्रश्न 75.
‘वायकोम आन्दोलन’ चलाया गया था –
(क) केरल में
(ख) मद्रास में
(ग) बम्बई् में
(घ) कलकत्ता में
उत्तर :
(क) केरल में।

प्रश्न 76.
‘मूकनायक’ समाचार पत्र की भाषा थी –
(क) गुजराती
(ख) मद्रासी
(ग) उड़िया
(घ) मराठी
उत्तर :
(घ) मराठी।

प्रश्न 77.
हरीचंद और गुरुचंद्ध किस आन्दोलन के नेता थे वह था –
(क) वायकोम आन्दोलन के
(ख) नमोशुद्र आन्दोलन के
(ग) द्रविड़ आन्दोलन के
(घ) गुरुवायूर सत्याग्रह्न के
उत्तर :
(ख) नमोशुद्र आन्दोलन के।

प्रश्न 78.
तमिलनाडु का निर्माता कहा जाता है –
(क) रामास्वामी नैयर को
(ख) पी० त्याग राय को
(ग) केशव मेनन को
(घ) सी० एन० अन्ना दुरै को
उत्तर :
(घ) सी० एन० अन्ना दुरै को।

प्रश्न 79.
मण्डल आयोग का गठन किया गया था –
(क) 1950 ई० में
(ख) 1965 ई० में
(ग) 1971 ई० में
(घ) 1980 ई० में
उत्तर :
(घ) 1980 ई० में।

प्रश्न 80.
‘मानव के लिए एक धर्म, एक जाति तथा एक ईश्वर’ का नारा दिया था –
(क) अम्बेदकर
(ख) श्री नारायण गुरु
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) रामास्वामी नैयर
उत्तर :
(ख) श्री नारायण गुरु।

प्रश्न 81.
द्रविड़ आन्दोलन के नेता थे –
(क) रामास्वामी नैयर
(ख) श्री नारायण गुरु
(ग) भीमराव अम्बेदकर
(घ) गाँधी जी
उत्तर :
(क) रामास्वामी नैयर।

प्रश्न 82.
‘जात-पात-तोलक समाज’ की स्थापना की थी –
(क) भीमराव अम्बेदकर ने
(ख) वी० एन० मण्डल ने
(ग) गाँधीजी ने
(घ) नारायण गुरु ने
उत्तर :
(क) भीमराव अम्बेदकर ने।

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प्रश्न 83.
नारी शक्ति के लिए ‘ऑल इण्डिया वोमेंस कान्फ्रेंस’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1925 ई० में
(ख) 1926 ई० में
(ग) 1927 ई० में
(घ) 1928 ई० में
उत्तर :
(ग) 1927 ई० में।

प्रश्न 84.
किसके सुझाव पर महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिलकर ‘राखी दिवस’ मनाया था ?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) सुरेन्द्रनाथ बनर्जीं
(घ) जवाहरलाल नेहरू
उत्तर :
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 85.
बसंती देवी को बंगाल प्रादेशिक कांग्रेस का सभापति चुना गया था –
(क) 1920 ई० में
(ख) 1919 ई० में
(ग) 1921 ई० में
(घ) 1922 ई० में
उत्तर :
(घ) 1922 ई० में।

प्रश्न 86.
किसके नेतृत्व में बंगाल में ‘राष्ट्रीय संघ’ की स्थापना हुई थी ?
(क) उर्मिला देवी
(ख) हेमप्रभा दास
(ग) बसंती देवी
(घ) लतिका घोष
उत्तर :
(घ) लतिका घोष।

प्रश्न 87.
सत्याग्रह कमिटी का गठन किया था –
(क) लतिका घोष ने
(ख) हेमप्रभा दास ने
(ग) उर्मिला देवी ने
(घ) कस्तुरबा गाँधी ने
उत्तर :
(ग) उर्मिला देवी ने।

प्रश्न 88.
‘विद्युत वाहिनी’ किस संस्था का भाग था ?
(क) बगाल वॉलटियर्स
(ख) युगान्तर दल
(ग) अनुशीलन समिति
(घ) भगिनी सेवा संघ
उत्तर :
(क) बंगाल वॉलेटियर्स।

प्रश्न 89.
महिलाओं के आत्मरक्षा हेतु ‘भगिनी सेवा संघ’ बनाया गया था –
(क) मुर्शिदाबाद में
(ख) कलकत्ता में
(ग) ढाका में
(घ) पूना में
उत्तर :
(क) मुर्शिदाबाद में।

प्रश्न 90.
कनकलता बरूआ किस आन्दोलन में शहीद हुई थी ?
(क) बंग-भंग आन्दोलन
(ख) असहयोग आन्दोलन
(ग) सविनय अवज़ा आद्दोलन
(घ) भारत छोड़ो आन्दोलन
उत्तर :
(घ) भारत छोड़ो आन्दोलन।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन

प्रश्न 91.
कलकत्ता के ‘टाउन हॉल’ में किस आन्दोलन की घोषणा 7 अगस्त 1905 ई० को हुई थी ?
(क) स्वदेशी आन्दोलन
(ख) बहिक्कार आन्दोलन
(ग) बंगभंग आन्दोलन
(घ) असहयोग आन्दोलन
उत्तर :
(क) स्वदेशी आन्दोलन।

प्रश्न 92.
‘रंगपुर नेशनल स्कूल’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 5 सितम्बर, 1904 ई० में
(ख) 8 नवम्बर, 1905 ई० में
(ग) 16 नवम्बर, 1905 ई० में
(घ) 20 अगस्त, 1905 ई० में
उत्तर :
(ख) 8 नवम्बर, 1905 ई० में।

प्रश्न 93.
‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद’ की स्थापना की थी –
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर ने
(ख) सचीन्द्र प्रसाद बसु ने
(ग) गाँधीजी ने
(घ) सदगुरु दास बनर्जी ने
उत्तर :
(घ) सदगुरु दास बनर्जी ने।

प्रश्न 94.
‘सीमांत गाँधीजी’ के नाम से जाने जाते हैं –
(क) मोतीलाल नेहरू
(ख) इन्दिरा गाँधी
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) खान अब्दुल गफ्फार खान
उत्तर :
(घ) खान अब्दुल गफ्फार खान।

प्रश्न 95.
क्रांतिकारी आन्दोलन का प्रारम्भ किस राज्य में हुआ था ?
(क) महाराष्ट्र
(ख) बंगाल
(ग) गुजरात
(घ) पंजाब
उत्तर :
(क) महाराष्ट्र।

प्रश्न 96.
प्रमथनाथ मित्र कौन थे ?
(क) पुलिस अधीक्षक
(ख) बैरिस्टर
(ग) डॉक्टर
(घ) मजिस्ट्रेट
उत्तर :
(ख) बैरिस्टर।

प्रश्न 97.
किंग्स फोर्ड कहाँ का जज था ?
(क) कलकत्ता का
(ख) बम्बई का
(ग) मुजफ्फरपुर का
(घ) पूना का
उत्तर :
(ग) मुजफ्फरपुर का।

प्रश्न 98.
‘समाज समता संघ’ की स्थापना किया था –
(क) महात्मा गांधी ने
(ख) डा० भौमराव अम्बेदकर ने
(ग) सी० केशबन ने
(घ) जवाहरलाल नेहरू ने
उत्तर :
(घ) जवाहरलाल नेहरू ने।

प्रश्न 99.
1942 ई० में ‘जनजाति संघ’ की स्थापना किसने की ?
(क) गांधीजी
(ख) के० अयष्पन
(ग) डा० अम्बेदकर ,
(घ) रामास्वामी नैय्यर
उत्तर :
(ग) डा० अम्बेदकर।

प्रश्न 100.
भारत छोड़ो आन्दोलन के समय मिदनापुर में वयोवृद्ध महिला ने भाग लिया था –
(क) लीला नाग ने
(ख) कमला नेहरु ने
(ग) सरोजिनी नायड्ू ने
(घ) मातंगिनी हाजरा ने
उत्तर :
(घ) मातंगिनी हाजरा ने।

प्रश्न 101.
‘नामसेज समाज’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1910 ई० में
(ख) 1911 ई० में
(ग) 1912 ई० में
(घ) 1915 ई० में
उत्तर :
(ग) 1912 ई० में।

प्रश्न 102.
बंगाल के वक्रगंज और फरीदपुर में आन्दोलन हुआ था –
(क) बंग-भंग आन्दोलन
(ख) दलित आन्दोलन
(ग) असहयोग आन्दोलन
(घ) नमोशुद्र आन्दोलन
उत्तर :
(घ) नमोशुद्र आन्दोलन।

प्रश्न 103.
देशबन्धु के नाम से जाने जाते हैं –
(क) गाँधी जी
(ख) मोतीलाल नेहरू
(ग) चितरंजन दास
(घ) सरदार पटेल
उत्तर :
(ग) चितरंजन दास।

प्रश्न 104.
‘बन्दे मातरम्’ गीत की रचना की है –
(क) बंकिम चन्द्र चटर्जी ने
(ख) सचीन्द्र नाथ मुखर्जी ने
(ग) अरविन्द घोष ने
(घ) सुरेन्द्र नाथ मुखर्जी ने
उत्तर :
(क) बंकिम चन्द्र चटर्जी ने।

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प्रश्न 105.
लाला हरदयाल क्रांतिकारी थे –
(क) बंगाल के
(ख) पूना के
(ग) पंजाब के
(घ) ढाका के
उत्तर :
(ग) पंजाब के ।

प्रश्न 106.
‘स्वतंत्र श्रमिक पार्टी’ का गठन किया था –
(क) डा० भैमराव अम्बेदकर ने
(ख) गाँधीजी ने
(ग) नारायण गुरु ने
(घ) अरविन्द घोष ने
उत्तर :
(क) डा० भीमराव अम्बेदकर ने।

प्रश्न 107.
‘अखिल भारतीय छुआ-छूत विरोधी लीग’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1924 ई० में
(ख) 1930 ई० में
(ग) 1933 ई० में
(घ) 1932 ई० में
उत्तर :
(घ) 1932 ई० में।

108.
नमोशुद्र जाति सर्वप्रथम निवास करते थे –
(क) पश्चिम बंगाल में
(ख) पूर्वी बंगाल में
(ग) उत्तर बंगाल में
(घ) दक्षिण बंगाल में
उत्तर :
(ख) पूर्वी बंगाल में।

प्रश्न 109.
नमोशुद्र को प्राचीन काल में किस नाम से जाना जाता था ?
(क) चाण्डाल
(ख) ब्राह्मण
(ग) राजपूत
(घ) भद्रलोक
उत्तर :
(क) चण्डाल।

प्रश्न 110.
बंगाल में नमोशुद्र एसोसियेशन की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1911 ई० में
(ख) 1912 ई॰ में
(ग) 1920 ई० में
(घ) 1922 ई० में
उत्तर :
(ख) 1912 ई० में।

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प्रश्न 111.
किसने कहा, “‘बंगाल विभाजन की घोषणा एक बम के समान गिरी। हमें लगा कि हमें अपमानित किया गया है, लज्जित किया गया है और छला गया है।’?
(क) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने
(ख) रवीन्द्रनाय टेगोर ने
(ग) गाँधी जी ने
(घ) सिस्टर नीवेदिता ने
उत्तर :
(क) सुरेद्र्रनाथ बनर्जी ने

प्रश्न 112.
बंग-भंग आन्दोलन में महिलाओं को जोड़ने के लिए किसने पम्पलेट बाँटे ?
(क) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने
(ख) गंगाधर तिलक ने
(ग) ए० बी० जोशी ने
(घ) रमेन्द्र सुन्दरी त्रिवेदी ने
उत्तर :
(ग) ए० बी० जोशी ने

प्रश्न 113.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ हुआ-
(क) 12 मार्च 1932 ई०
(ख) 12 मार्च 1930 ई०
(ग) 12 मार्घ 1934 ई०
(घ) 12 मार्च 1936 ई०
उत्तर :
(ख) 12 मार्च 1930 ई०

प्रश्न 114.
24 अक्टूबर 1905 ई० को कलकत्ता में किसकी अध्यक्षता में एक जनसभा हुई ?
(क) भूपेन्द्रनाथ बसु की
(ख) कृष्ण कुमार मित्र की
(ग) सतीश चन्द्र मुखर्जी को
(घ) बैरिस्टर अब्दुल रसूल को
उत्तर :
(घ) बैरिस्टर अब्दुल रसूल की

प्रश्न 115.
एन्टी-सर्कुलर सोसाटी स्थापित किया गया –
(क) सचिन्द्रनाथ बोस द्वारा
(ख) मनोरंजन गुहा द्वारा
(ग) विपिन चन्द्र पाल द्वारा
(घ) आर डब्ल्यू काईल द्वारा
उत्तर :
(क) सचिन्द्रनाथ बोस द्वारा

प्रश्न 116.
युवा सदस्य एवं मेडिकल छात्र विनय कृष्ण ने बंगाल के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस लॉ मैन को गोली मारी –
(क) 30 अगस्त 1930 में
(ख) 31 अगस्त 1930 में
(ग) 30 अगस्त 1932 में
(घ) 30 अगस्त 1933 में
उत्तर :
(ख) 31 अगस्त 1930 में

प्रश्न 117.
न्याय दल के सभापति थे –
(क) नारायण गुरु
(ख) ज्योतिबा फूले
(ग) रामास्वामी नैयर
(घ) अम्बेडकर
उत्तर :
(ग) रामास्वामी नैयर

प्रश्न 118.
गाँधीजी तथा अम्बेदकर के बीच पूना समझौता हुआ –
(क) 1930 ई० में
(ख) 1932 ई० में
(ग) 1924 ई० में
(घ) 1938 ई० में
उत्तर :
(ख) 1932 ई० में

प्रश्न 119.
दक्षिण भारत में हिन्दू विधवा आश्रम की स्थापना किसने की ?
(क) श्री गंगा राम
(ख) डी॰ के० कर्वे
(ग) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
(घ) राममोहन
उत्तर :
(ख) डी० के० कर्वे

प्रश्न 120.
ऑल इण्डिया वीमेंस कान्फ्रेंस की स्थापना कब हुई ?
(क) 1920 ई० में
(ख) 1925 ई० में
(ग) 1927 ई० में
(घ) 1930 ई० में
उत्तर :
(ग) 1927 ई० में

प्रश्न 121.
राखी दिवस कब मनाया गया ?
(a) बंग-भंग के समय
(ख) असहयोग आन्दोलन के समय
(ग) भारत विभाजन के समय
(घ) भारत छोड़ो आन्दोलन के समय
उत्तर :
(a) बंग-भंग के समय

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प्रश्न 122.
1922 ई० में किसे बंगाल प्रादेशिक कांग्रेस का सभापति चुना गया ?
(क) विजया लक्ष्मी पंडित
(ख) बसंती देवी
(ग) उर्मिला देवी
(घ) सुनीति देवी
उत्तर :
(ख) बसंती देवी

प्रश्न 123.
कुमारी सभा का गठन किसने किया ?
(क) बसंती देवी
(ख) उर्मिला देवी
(ग) सुनीति देवी
(घ) रामेध्चरी नेहरू.
उत्तर :
(घ) रामेश्वरी नेहरू

प्रश्न 124.
चटगांव अस्त्रागार लूट में भाग लेने वाली महिला –
(क) लीला नाग
(ख) सुहासनी गांगुली
(ग) ननी बाला देवी
(घ) कल्पना दत्त
उत्तर :
(घ) कल्पना दत्त

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 mark)

1. ………….. ‘मास्टरदा’ के नाम से जाने जाते थे।
उत्तर : सूर्यसेन।

2. मातंगिनी हाजरा ………….. आंदोलन में शहीद हो गयी।
उत्तर : भारत छोड़ो।

3. बंगाल विभाजन के समय महिलाओं ने ………….. पर धरना एवं प्रदर्शन किया।
उत्तर : विदेशी दुकानों।

4. बसन्ती देवी ………….. की पत्ली थी।
उत्तर : चितरंजन दास।

5. सरोजनी नायडू उत्तर प्रदेश की …………..थी।
उत्तर : राज्यपाल।

6. श्रीमती एनीबेसेन्ट …………..सोसाइटी की सद्स्या थी।
उत्तर : थियोसोफिकल!

7. 7 अगस्त 1905 ई० को बंग-भंग के विरोध में …………..के टाउनहॉल में 5000 विद्यार्थी उपस्थित हुए।
उत्तर : कलकत्ता।

8. पंजाब में असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व …………..ने किया था।
उत्तर : लाला लाजपत राय।

9. बंगाल वॉलटियर की स्थापना…………..में हुई थी।
उत्तर : ढाका।

10. कैप्टन रशीद अली के मुकदमे की सुनवाई………….. में शुरु हुई थी।
उत्तर : दिल्ली।

11. अन्रादुर्रे ने …………..का नाम बदलकर द्रविड़ संघ कर दिया था।
उत्तर : न्याय दल

12. ज्योतिराव गोविन्द फूले ने …………..जाति के लिए संघर्ष किया था।
उत्तर : दलित अथवा निम्न।

13. प्रधान मंत्री …………..ने अनुसूचित जातियों तथा जन-जातियों के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान किया था।
उत्तर : श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ।

14. सरला देवी चौधुरानी मैमन सिंह जिले में………….. संघ के साथ जुड़ी हुई थी।
उत्तर : सुत्द्यद।

15. वीर सावरकर ने …………..की स्थापना की थी।
उत्तर : अभिनव भारत।

16. कल्पना दत्त ने …………..पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।
उत्तर : कम्युनिस्ट।

17. कल्पना दत्त तथा प्रीतिलता वाद्देदर ने …………..पर हमला किया था।
उत्तर : चट्टगाँव शस्तागार।

18. जर्मनी से हधियार मँगाने के प्रयास में …………..शहीद हो गए।
उत्तर : बाधा जतीन।

19. गांधीजी और …………..के बीच पूना समझौता हुआ था।
उत्तर : डा० अम्बेदकर।

20. …………..नेशनल कालेज के अध्यक्ष थे।
उत्तर : अरविन्द्र घोष।

21. बंग-भंग के समय बंगाल का गवर्नर जनरल …………..था।
उत्तर : लार्ड कर्जन।

22. ‘जनज़ाति संघ’ की स्थापना …………..ने की।
उत्तर : डॉ० अम्बेदकर।

23. झाँसी की रानी रेजीमेन्ट में कैप्टन का पद् …………..को मिला।
उत्तर : डॉ० लक्ष्मी सहगल।

24. गाँधीजी ने भारत छोड़ो आन्दोलन के समय …………..का नारा दिया।
उत्तर : करो या मरो।

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25. सूर्यसेन की प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा में…………..हुई थी।
उत्तर : बट्टुगाँव।

26. सूर्यसेन …………..के नाम से जाने जाते थे।
उत्तर : मास्टर दा।

27. नारायण गुरु द्वारा स्थापित संस्था का नाम …………..था।
उत्तर : श्री नारायण धर्म परिपालन योगम्।

28. अम्बेदकर ने 1946 ई० …………..नामक निबंध लिखा।
उत्तर : एनीहिलेशन आफ कास्ट।

29. 1942 ई० में तमलुक के भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने वाली प्रसिद्ध महिला………….. थी।
उत्तर : मंतगिनो हाजरा।

30. 20 सितम्बर, 1942 ई० को …………..ने धाने पर तिरंगा फहराने की चेष्टा में गोली खाई।
उत्तर : कनकलता बरूआ।

31. कानपुर के …………..की छात्राओं ने साहस का परिचय 1942 ई० के आन्दोलन में दिया।
उत्तर : कान्य कुज्ज स्कूल।

32. बंग-भंग के समय प्रतिष्ठित परिवार की नारियों ने …………..की दुकानों पर धरना दिया।
उत्तर : विदेशी शराबों।

33. जवाहरलाल की पत्नी …………..और माता …………..ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था।
उत्तर : कमला नेहरू, स्वरूपा रानी।

34. क्रिसमस के उपहार के रूप में रिवाल्वर को खिलौने में छिपाकर भारत भेजने वाली महिला …………..थी
उत्तर : मैडम कामा।

35. अंग्रेजों द्वारा पीछा करने पर …………..ने साइनाइड खाकर अपने आप को क्रान्तिकारियों की सूची में अमर कर लिया।
उत्तर : प्रीतिलता वाद्देदर।

36. 1916 ई० में ब्राह्मणों के विरोध में मद्रास में …………..पार्टी की स्थापना हुई थी ।
उत्तर : जस्टिस।

सही कथन के आगे ‘True’ एवं गलत कथन के आगे ‘False’ लिखिए : (1 Mark)

1. बंगाल में सशस्त्र क्रान्तिकारी आन्दोलन की मुख्यनेत्री बासन्ती देवी थी।
उत्तर : False

2. दीपाली संघ की संस्थापक कल्पना दत्ता थी।
उत्तर : False

3. मातंगिनी हाजरा बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन की नेत्री थी।
उत्तर : False

4. भीमराव अम्बेदकर दलित आन्दोलन के महान नेता थे।
उत्तर : True

5. सुरेन्द्रनाथ बनर्जी छात्र समिति के खिलाफ थे।
उत्तर : False

6. भारतीय महिला संघ की स्थापना कलकत्ता में हुई थी।
उत्तर : False

7. देवी चौधुरानी ने बंग-भंग विरोधी आन्दोलन में भाग लिया था।
उत्तर : True

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8. छात्री संघ का गठन कल्पना दत्त ने किया था।
उत्तर : False

9. डॉ॰ अघोरनाथ चट्टोपाध्याय क्रांतिकारी महिला सरोजिनी नायडू के पिता थे।
उत्तर : True

10. नागालैण्ड की रानी गेडिलियो मात्र तेरह वर्ष की उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़ी।
उत्तर : True

11. सूर्य सेन को बाधा जतीन के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : False

12. चन्द्रशेखर आजाद ने पुलिस कमिश्नर सांडर्स की हत्या किया था।
False

13. भगत सिंह और राजगुरु को लाहौर बड़यन्त्र केस में फाँसी दे दी गयी।
उत्तर : True

14. युगान्तर दल एक क्रांतिकारी संस्था नहीं थी।
उत्तर : False

15. दलित आन्दोलन के नेता डॉ० भीमराव अम्बेदकर जी थे।
उत्तर : True

16. ‘एझवा’ और ‘पुलैया’ जाति सवर्णो की थी।
उत्तर : False

17. ‘नामशुद्र आन्दोलन’ मद्रास में हुआ था।
उत्तर : False

18. पूना समझौता 26 अगस्त 1932 ई० में हुआ था।
उत्तर : True

19. श्री नारायण गुरु केरल के एक दलित आन्दोलन के नेता थे।
उत्तर : True

20. 1911 ई० के जनगणना के अनुसार बंगाल के अछुत चांडाल को नामशुद्र (नमशुद्र) कहा जाने लगा।
उत्तर : True

21. आनन्द मोहन बोस भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिए थे।
उत्तर : False

22. छात्र आन्दोलन के दौरान विजया लक्ष्मी पंडित ने अपने सोने का गहना दान में दे दिया था।
True

23. श्री गंगाराम ने लाहौर में विधवा-विवाह को रोकने की कोशिश की।
उत्तर : True

24. सीता देवी बंगाल की महिला क्रांतिकारी थी।
उत्तर : False

25. महिला क्रांतिकारी दुर्गावती को दुर्गा भाभी के नाम से जाना जाता था।
उत्तर : True

26. नौ-सेना विद्रोह 1948 ई० में हुआ था।
उत्तर : False

27. अध्यापक अश्विनी कुमार दत्त ने स्वदेश बान्धव समिति का गठन किया था।
उत्तर : True

28. कैप्टन रशीद अली को 7 वर्ष की सश्रम कारावास का दण्ड मिला था।
True

29. अलीपुर बम केस का प्रमुख अभियुक्त सूर्यसेन थे।
उत्तर : False

30. मद्रास में होम रूल लीग की स्थापना एनी बेसेन्ट ने की थी
उत्तर : True

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31. नारायण गुरु ने सत्य शोधक समाज की स्थापना की थी।
उत्तर : False

32. डॉ॰ टी॰ एम० नैयर ने प्रथम इतर ब्राह्मण संस्था गठित की थी।
उत्तर : True

33. नारायण गुरू एक असृश्य जाति के थे।
उत्तर : True

34. मदन लाल ढ़ीगरा ने कर्नल वाइली की हत्या की थी।
उत्तर : True

35. असहयोग आन्दोलन के समय 300 नगर बन्धुओं ने भाग लिया था।
उत्तर : True

36. गाँधीजी ने अपना ऐतिहासिक दाँडी यात्रा 12 मार्च, 1930 ई० को 78 कार्यकर्ताओ के साथ साबरमती आश्रम से शुरू किया।
उत्तर : True

37. प्रीतिलता वाद्देदर ने दीपाली संघ की स्थापना की।
उत्तर : False

38. नारी कर्म मन्दिर की स्थापना उर्मिला देवी ने की।
उत्तर : True

39. खुर्शीद बहन महात्मा गाँधी की पोती थी।
उत्तर : False

40. मातंगिनी हाजरा बंगाल की प्रमुख क्रांतिकारी थी।
उत्तर : True

41. सविनय अवज्ञा आन्दोलन में सरोजिनी नायडू जेल गयीं।
उत्तर : True

42. असम की बालिका कनकलता बरुआ असहयोग आन्दोलन में शहीद हो गयी।
उत्तर : True

43. सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय बच्चों की बानर सेना का गठन किया गया।
उत्तर : False

निम्नलिखित कथनों की सही व्याख्या चुनकर लिखिए : (1 mark)

प्रश्न 1.
कथन : बं गभंग विरोधी आन्दोलन में श्रमिक-कृषकों के लिए कोई कर्मसूची नहीं थी।
व्याख्या 1 : श्रमक-कृषक इस आन्दोलन के विरोधी थे।
व्याख्या 2 : ब्रिटिश सरकार श्रमिक-किसान आन्दोलन पर प्रतिबन्ध लगा दी थी।
व्याख्या 3 : बंगभंग विरोधी आन्दोलन मूल रूप से मध्यवर्ग का आन्दोलन था।
उत्तर :
व्याख्या 3 : बंगभंग विरोधी आन्दोलन मूल रूप से मध्यवर्ग का आन्दोलन था।

प्रश्न 2.
कथन : गाँधीजी जमींदारों के विरुद्ध कृषक आन्दोलन का समर्थन नहीं किये।
व्याख्या 1 : गाँधीजी जमींदार वर्ग के प्रतिनिधि थे।
व्याख्या 2 : गाँधीजी हिंसक आन्दोलन के विरोधी थे।
व्याख्या 3 : गाँधीजी वर्ग संघर्ष की अपेक्षा वर्ग एकता में विश्वास करते थे।
उत्तर :
व्याख्या 3 : गाँधीजी वर्ग संघर्ष की अपेक्षा वर्ग एकता में विश्वास करते थे।

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प्रश्न 3.
कथन : 20 वीं शताब्दी में भारत के उपनिवेश विरोधी आन्दोलन में वामपंथियों की मुख्य भूमिका थी।
व्याख्या 1 : वे वामपंथी जमींदारों एवं उद्योगपतियों के समर्थक थे।
व्याख्या 2 : वे ब्रिटिश साम्राज्यवाद के समर्थक थे।
व्याख्या 3 : वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध किसानों एवं श्रमिकों के संयुक्त संघर्ष के समर्थक थे।
उत्तर :
व्याख्या 3 : वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध किसानों एवं श्रमिकों के संयुक्त संघर्ष के समर्थक थे।

प्रश्न 4.
कथन : भारतीय नारियों ने राष्ट्रीय आन्दोलन में प्रथम बार बंग-भंग के समय भाग लिया।
व्याख्या 1 : क्योंकि वे गांधीजी द्वारा प्रेरित थीं।
व्याख्या 2 : क्योंकि वे अरविन्द घोष के क्रान्तिकारी सिद्धान्त से प्रेरित थीं।
व्याख्या 3 : क्योंकि वे विदेशी वस्तुओं का त्याग करना चाहती थीं।
उत्तर :
व्यख्या 3 : क्योंकि वे विदेशी वस्तुओं का त्याग करना चाहती थीं।

प्रश्न 5.
कथन : देश के क्रांतिकारी आन्दोलन में बंगाल की महिलाएँ शर्शि पर थी –
व्याख्या 1 : क्योंकि बंगाल की महिलाएँ हठी और अधिक साहसी थी।
व्याख्या 2 : क्योंकि बंगाल की महिलाओं में शिक्षा अधिक संप्रसारित थी।
व्याख्या 3 : क्योंकि बंगाल की महिलाएँ अन्य राज्यों से श्रेष्ठ बनना चाहती थी।
उत्तर :
व्याख्या 2 : क्योंकि बंगाल की महिलाओं में शिक्षा अधिक संप्रसारित थी।

प्रश्न 6.
कथन : नामशुद्रों द्वारा हिन्दूओं के विरुद्ध एक अलग धार्मिक पहचान की मांग करने का कारण था
व्याख्या 1 : नमोशुद्र हिन्दू रीति-रिवाज को नापसन्द करते थे।
व्याख्या 2 : नमोशुद्र अंग्रेजी शासन का बहिष्कार करना चाहते थे।
व्याख्या 3 : वे कांग्रेस दल में शामिल होना चाहते थे।
उत्तर :
व्याख्या 1 : नमोशुद्र हिन्दू रीति-रिवाज को नापसन्द करते थे।

प्रश्न 7.
कथन : रौलेट एक्ट भारतीयों द्वारा विरोध करने का कारण था
व्याख्या 1 : ब्रिटिश सरकार ने भारतीय नेताओं को आश्वासन दिये थे।
व्याख्या 2 : यह एक प्रकार का दमनात्मक कानून था।
व्याख्या 3 : अंग्रेज न्यायप्रियता से हटने लगे।
उत्तर :
व्याख्या 2 : यह एक प्रकार का दमनात्मक कानून था।

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प्रश्न 8.
कथन : 12 मार्च, 1930 ई० को गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया।
व्याख्या 1 : नमक कानून तोड़ने तथा जन जागरण के लिए।
व्यख्या 2 : समुद्रतट की यात्रा करने के लिए।
व्याख्या 3 : स्वदेशी और बहिष्कार आन्दोलन चलाने के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 1 : नमक कानून तोड़ने तथा जन जागरण के लिए।

प्रश्न 9.
कथन : 9 अगस्त, 1942 ई० को प्रात: काल ही गाँधीजी तथा कांग्रेस के प्रमुख नेता बन्दी बना लिये गये।
व्याख्या 1 : गाँधीजी तथा कांग्रेसी नेता भारतीय थे।
व्याख्या 2 : गाँधीजी ने अंग्रेजों के खिलाफ 8 अगस्त, 1942 ई० को भारत छोड़ो आन्दोलन की घोषणा की थी।
व्याख्या 3 : गाँधीजी हिंसा में विश्चास नहीं रखते थे।
उत्तर :
व्याख्या 2 : गाँधीजी ने अंग्रेजों के खिलाफ 8 अगस्त, 1942 ई० को भारत छोड़ो आन्दोलन की घोषणा की थी।

प्रश्न 10.
कथन : हेमचन्द्र घोष के साथ मिलकर लीला नाग ने दीपाली संघ का स्थापना किया था व्याख्या 1 : लीला नाग क्रांतिकारी संगठन आरम्भ करना चाहती थी।
व्याख्या 2 : लीला नाग शिक्षाओं में परिवर्तन करना चाहती थी।
व्याख्या 3 : लीला नाग सामाजिक और राजनीतिक जागृति बढ़ाना चाहती थी।
उत्तर :
व्याख्या 3 : लीला नाग सामाजिक और राजनीतिक जागृति बढ़ाना चाहती थी।

प्रश्न 11.
कथन : गाँधीजी तथा अम्बेदकर के बीच 1932 ई० में पूना समझौता हुआ।
व्याख्या 1 : राष्ट्रीय राजनीति में भाग लेने के लिए।
व्याख्या 2 : दलित वर्गों के प्रति अस्पृश्यता को समाप्त करने के लिए।
व्याख्या 3 : दलित वर्गों के लिए साधारण वर्ग में ही सीटों का आरक्षण देने के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 3 : दलित वर्गों के लिए साधारण वर्ग में ही सीटों का आरक्षण देने के लिए।

प्रश्न 12.
कथन : सूर्यसेन को ‘मास्टर दा’ के नाम से जाना जाता है-क्योंकि व्याख्या 1 : उन्होंने अपने जीवन की शुरूआत एक शिक्षक के रूप में की थी।
व्याख्या 2 : उन्होंने चटगाँव लूट के बाद शिक्षक की नौकरी की।
व्याख्या 3 : वे लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे।
उत्तर :
व्याख्या 1 : उन्होंने अपने जीवन की शुरूआत एक शिक्षक के रूप में की थी।

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) छात्री संघ (a) महात्मा गाँधी
(ii) दीपाली संघ (b) प्रेम कुमार सहगल
(iii) दांडी यात्रा (c) कल्याणी दास
(iv) शिवाजी उत्सव (d) बाल गंगाधर तिलक
(v) आजाद हिन्द फौज (e) लीला नाग

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) छात्री संघ (c) कल्याणी दास
(ii) दीपाली संघ (e) लीला नाग
(iii) दांडी यात्रा (a) महात्मा गाँधी
(iv) शिवाजी उत्सव (d) बाल गंगाधर तिलक
(v) आजाद हिन्द फौज (b) प्रेम कुमार सहगल

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बंगाल वॉलेंटियर्स (a) ए. के. गोपालन
(ii) अल्फ्रेड पार्क (b) उज्ज्वला मजुमदार
(iii) द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (c) डॉ॰ भीमराव अम्बेदकर
(iv) गुरुवायूर सत्याग्रह (d) सी० एन० अन्ना दुरै
(v) बहिष्कृत हितकारिणी सभा (e) चन्द्रशेखर आजाद

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बंगाल वॉलेंटियर्स (b) उज्ज्वला मजुमदार
(ii) अल्फ्रेड पार्क (e) चन्द्रशेखर आजाद
(iii) द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (d) सी० एन० अन्ना दुरै
(iv) गुरुवायूर सत्याग्रह (a) ए. के. गोपालन
(v) बहिष्कृत हितकारिणी सभा (a) ए. के. गोपालन

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प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) विजय लक्ष्मी पंडित (a) भारत छोड़ो आन्दोलन
(ii) कमला नेहरू (b) आजाद हिन्द फौज
(iii) मातंगिनी हाजरा (c) असहयोग आन्दोलन
(iv) डॉ०लक्ष्मी स्वामीनाथन (d) सविनय अवज्ञा आन्दोलन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) विजय लक्ष्मी पंडित (c) असहयोग आन्दोलन
(ii) कमला नेहरू (d) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(iii) मातंगिनी हाजरा (a) भारत छोड़ो आन्दोलन
(iv) डॉ०लक्ष्मी स्वामीनाथन (b) आजाद हिन्द फौज

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) एन्टी-सर्कुलर सोसायटी (a) विनय-बादल-दिनेश
(ii) बरामदे का युद्ध (b) सचिन्द्र प्रसाद बसु
(iii) चटगाँव आर्मरी रेड (शास्त्रागार लुट) (c) सूर्यसेन
(iv) सत्य शोधक समाज (d) ज्योतिबा फूले

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) एन्टी-सर्कुलर सोसायटी (a) विनय-बादल-दिनेश
(ii) बरामदे का युद्ध (b) सचिन्द्र प्रसाद बसु
(iii) चटगाँव आर्मरी रेड (शास्त्रागार लुट) (c) सूर्यसेन
(iv) सत्य शोधक समाज (d) ज्योतिबा फूले

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) राशिद अली दिवस (a) मास्टर दा
(ii) नौजवान सभा (b) 1905 ई० में
(iii) चटगाँव शस्रागार रेड (लूट) (c) 12 फरवरी
(iv) एन्टी सर्कुलर सोसायटी (d) भगत सिंह

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) राशिद अली दिवस (c) 12 फरवरी
(ii) नौजवान सभा (d) भगत सिंह
(iii) चटगाँव शस्रागार रेड (लूट) (a) मास्टर दा
(iv) एन्टी सर्कुलर सोसायटी (b) 1905 ई० में

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प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1927 ई० (a) बंगाल में नम: शूद्र एसोसिएसन
(ii) 1927 ई० (b) 1956 ई० में
(iii) 1924 ई० (c) न्यू लेबर पार्टी
(iv) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया (d) बहिष्कृत हितकारिणी सभा

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1927 ई० (c) न्यू लेबर पार्टी
(ii) 1927 ई० (a) बंगाल में नम: शूद्र एसोसिएसन
(iii) 1924 ई० (d) बहिष्कृत हितकारिणी सभा
(iv) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया (b) 1956 ई० में

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) मातंगिनी हाजरा (a) रोहतक की महिला क्रांतिकारी
(ii) सीता देवी (b) बंगाल की महिला क्रांतिकारी
(iii) भगवंती (c) लाहौर की महिला क्रांतिकारी
(iv) दुर्गा देवी (d) अमृतसर की महिला क्रांतिकारी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) मातंगिनी हाजरा (b) बंगाल की महिला क्रांतिकारी
(ii) सीता देवी (c) लाहौर की महिला क्रांतिकारी
(iii) भगवंती (d) अमृतसर की महिला क्रांतिकारी
(iv) दुर्गा देवी (a) रोहतक की महिला क्रांतिकारी