WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 Question Answer – गुरु नानक

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : गुरु नानक के धर्म-संबंधी विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 2 : ‘ईश्वर ही सत्य है, और सत्य से ऊपर कुछ भी नहीं है’ – गुरु नानक के इस कथन के आलोक में उनके धर्म-संबंधी विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 3 : गुरु नानक ने सतनाम के बारे में क्या कहा है ?
प्रश्न – 4 : गुरु नानक ने ईश्वर-प्राप्ति के बारे में क्या कहा है ?
प्रश्न – 5 : गुरु नानक के अनुसार ईश्वर को कैसे अनुभव किया जा सकता है ?
प्रश्न – 6 : गुरु नानक की वाणी को सच्चे धर्म का केन्द्रीय सिद्धान्त कहा जा संकता है – कैसे?
प्रश्न – 7 : हममें से अधिकांश व्यक्ति बाह्य जीवन जीते हैं और जीवन के अंतर में नहीं झांकते – पठित पाठ ‘गुरु नानक’ के आधार पर विवेचना करें ।
उत्तर :
गुरु नानक का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब भारत में राजनैतिक या सामाजिक नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक संकट छाया हुआ था । लोग धर्म के सच्चे स्वरूप को भूल गए थे। धर्म के नाम पर अंधविश्वास करना तथा अर्थहीन धर्माधंता ही धर्म कहा जाने लगा था। धर्म लोगों को जोड़ने की जगह एक दूसरे से अलग कर रहा था।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

ऐसे समय में गुरु नानक ने हमारे सामने ऐसे विचार रखे जो किसी भी सच्चे धर्म के केन्द्रीय सिद्धांत कहे जा सकते हैं। उन्होंने सर्वपथम ‘ओंकार’ पर बल दिया । यह तीन अक्षरों अर्थात् ‘अ’ (अकार), ‘उ’ (उकार) और ‘म्’ (मकार) का संयुक्त रूप है। ‘अ’ का अर्थ जाग्रत अवस्था, ‘उ’ का स्वप्नावस्था तथा ‘म’ का अर्थ है सुपुप्ति अवस्था । ओंकार हमें सत्य से मिलाता है। ओंकार अदृश्य, गुणों से परे तथा भावों से परे है – शिवम् शान्तम् अद्वैतम् ! यह एक मूल सत्य है। सत्य ही सबसे ऊपर है – सतनाम । ईश्वर ही सत्य है और सत्य से बढ़कर कुछ भी नही है।

ये सारी बाते हमारे पाचीन ॠषियों ने भी हमें बतायी थी लेकिन हम उनके बताए हुए मार्ग से भटक गए हैं। जब जब उनके बताए मार्ग से भटक जाते हैं तब-तब अंधकार, दुःख और पराजय का हमारे जीवन में बोलबाला हो जाता है।

गुरु नानक के अनुसार यदि कोई इस सत्य को पाना चाहता है तो उसे अपने छददय के अंदर पवेश करना होगा। परमात्मा, वास, समुद्द, आसमान, तारों, मंदिरों, मस्जिदों आदि में नहीं है, वह तो मनुष्य के हेदय में है । कबीर ने भी कहा है –

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग दृँढ़े बन मांहि ।
ऐसे घटि घटि राम हैं, दुनियां देखे नांहि ।।

प्रत्येक व्यक्ति के हदयय में एक ऐसा गुप्त स्थान है जहाँ ईश्वर है, जहाँ उसे हुआ जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है । प्रार्थना, ध्यान तथा आध्यात्मिक क्रियाएँ उसे पाने के साधन हैं। गुर नानक ने कहा कि सच्चा धर्म प्रेम व्यवहार है, दया की भावना है। जो लोग धर्म के नाम पर लोगों को तोड़ने का काम करते हैं वे ईश्वर के शन्तु हैं। हम सब मिलकर ही परमात्मा-ईश्वर के शरीर हैं।

दूसरी महत्वपूर्ण शिक्षा जो गुरू नानक ने हमें दी-वह यह कि हम ईश्वर के विभिन्न रूपों को लेकर आपस में लड़ते हैं। यह भूल जाते हैं कि हम सभी एक ही लक्ष्य की खोज में तीर्थयात्री हैं । सभी जानना चाहते हैं कि वह परमात्मा कहाँ है ? कुरान और पुराण हमें एक ही शिक्षा देते हैं ? मंदिर हो या मस्जिद हमें एक ही परमात्मा दिखायी देता है।

अब वह समय आ गया है कि गुरु नानक की वाणी को स्वीकार करें । सतनाम और सदावार के महान् उपदेशों को याद रखें । हमें अपने जीवन के पत्येक क्षण अपने-आप से यह पूछना चाहिए कि हम जो उपदेश दूसरो को देते हैं क्या अपने दैनिक जीवन में उसका पालन भी करते हैं ? जिस दिन हम जीवन के प्रात ऐसा दृष्टिकाण अपनाएंगे उस दिन हमारी आत्मा सच्ची धार्मिक आत्मा होगी । अगर हम इसकी अवहेलना करते हैं तो अपने अंतःकरण से विमुख हो जाते हैं। हम जीवन में गहरे प्रवेश न करके केवल ऊपरी जीवन, दिखावे का जीवन जीते हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न – 8 : गुरु नानक के अनुसार सच्चा धार्मिक व्यक्ति कौन है ?
प्रश्न – 9 : गुरु नानक के अनुसार किन दोषों को अपने से दूर कर हम सच्चे धार्मिक हो सकते हैं?
प्रश्न – 10 : नानक के फटकार की हमें आज भी उतनी ही आवश्यकता है – पठित पाठ के आधार पर ल्बिखें ।
प्रश्न – 11 : गुरु नानक के अनुसार व्यक्ति सच्चा धार्मिक कैसे बनता है ?
प्रश्न – 12 : सन्त जीवन गैर-संसारी नहीं है – गुरु नानक के विचार को स्पष्ट करें ।
प्रश्न – 13 : गुरु नानक के अनुसार सबसे बड़े पैगेम्बर कौन हैं – विवेचना करें ।
प्रश्न – 14 : साघुता या पविव्रता संसार-विमुखता नहीं है – इस बारे में गुरु नानक के विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं।
प्रश्न – 15 : गुरु नानक ने धार्मिक जीवन किसे कहा है ? पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
उत्तर :
गुरु नानक ने हमें यह कहा था कि हम हमेशा धर्म का पालन अपनी रीद़ की हड्डी, मन्रोवारण तथा जप आदि के माध्यम से करते रहे हैं और यह सोचते रहे हैं कि हम धार्मिक हैं। हम धोखे में हैं। ऐसा करके कोई सच्चा धार्मिक व्यक्ति नहीं बना है और न ही बनेगा।
गुरु नानक के अनुसार जो व्यक्ति अपने अंतः करण में ईश्वर का अनुभव करता है, जिसे परमात्मा का नशा है, जो परमात्मा को अपने में मानता है तथा जिसने अपने होने का अर्थ समझ लिया है – वही सच्चा धार्मिक है। वैसे लोग जो मंदिर-मस्जिदों में जाते हैं लेकिन जीवन में नाना प्रकार के पाप करते हैं – कभी धार्मिक नहीं हो सकते।

जो गेरुआ वस्र धारण कर लेता है तथा हायों में भिक्षा पात्र थाम लेता है, सांसारिक जीवन से विमुख हो जाता हैवह कभी भी धार्मिक या पैंगेम्बर नहीं हो सकता। सबसे बड़े पैगेम्बर तो वे हैं जो भूखों को खिलाते हैं, बीमारों का उपचार करते हैं तथा पापियों को क्षमा करते हैं । ऐसे व्यक्ति की साधुता या पविव्रता को हम संसार-विमुखता नहीं कह सकते।
अगर हमने अंदर के ईश्वर को अनुभव नहीं किया है, यदि हम आपस में लड़ते हैं, यदि हम किसी को सूली पर चढ़ाते हैं तो हम धर्म, संस्कृति तथा मानवता के हत्यारे हैं। ईश्वर हमें कभी भी ऐसा करने को नहीं कहता क्योंकि उसी ने तो सबों को रचा है।

वैसे गुरु जो जाति प्रथा तथा बुआघूत को दूर करने को कहते हैं लेकिन स्वयं उस पर अमल नहीं करते या हम उसपर अमल नहीं करते तो भला हम किस प्रकार धार्मिक हो सकते हैं।

प्राचीन काल में हमारे ॠषियों ने हमें ‘वसुधैव कुटंबकम’ अर्थात् सम्पूर्ण मानवता के लिए सद्भावना का संदेश दिया था – लेकिन हममें से कितने लोग इसे अपने जीवन में उतार पाते हैं। गुरु नानक ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि धर्म ऐसी चीज़ नहीं जिसे हम दक्षिणा देकर खरीद सकते हैं, मंदिर, मस्जिद या गुरुद्धारे में जाकर प्राप्त कर सकते हैं।

यदि हम सच्चा धार्मिक बनना चाहते हैं तो हमें इन बुराइयों से अपने-आप को दूर रखना होगा । हमें महान ऋषि तथा गुरु की बातों को अपने जीवन में उतारना होगा।
निष्कर्ष के तौर पर गुरु नानक हमें यह सीख देते हैं कि जात-पाँत, छूआवूत, धार्मिक मतभेद – हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि भेद-भावों से अपने-आप को दूरखें क्योंकि हम सभी उसी एक परमात्मा के परिवार के सदस्य हैं।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नानक ने किस पर बल दिया ?
उत्तर :
‘ओंकार’ (ओइम) पर ।

प्रश्न 2.
‘ओंकार’ कितने अक्षरों से मिलकर बना है ?
उत्तर :
‘ओंकार’ तीन अक्षरों से मिलकर’ बना है – अ, उ और म्।

प्रश्न 3.
‘ओंकार’ ‘अ’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
जाग्रत अवस्था।

प्रश्न 4.
‘ओंकार’ के ‘उ’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
स्वपावस्था या स्वप्न की अवस्था।

प्रश्न 5.
‘ओंकार’ के ‘म्’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
सुषुप्तावस्था या सोने की अवस्था।

प्रश्न 6.
ओंकार किससे हमारा साक्षात्कार कराता है ?
उत्तर :
सत्य से ।

प्रश्न 7.
गुरु नानक किस विवाद में नहीं पड़ते थे ?
उत्तर :
धार्मिक हठवादिता के विवाद में।

प्रश्न 8.
‘ओंकार’ को क्या कहा गया है ?
उत्तर :
अदृशय, गुणों से परे तथा भाव से परे ।

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प्रश्न 9.
मूल सत्य क्या है ?
उत्तर :
ओंकार।

प्रश्न 10.
परमात्मा का वासं कहाँ है ?
उत्तर :
मनुष्य के अंतःकरण (हदय) में ।

प्रश्न 11.
हमारे देश में कैसे लोगों को धार्मिक कहा गया है ?
उत्तर :
जो परमात्मा को अपने में मानते हैं।

प्रश्न 12.
हमारा कर्त्तव्य क्या है ?
उत्तर :
ईश्वर को अपने हृय में अनुभव करना।

प्रश्न 13.
किसके माध्यम से ईश्वर को अनुभव किया जा सकता है ?
उत्तर :
प्रार्थना, ध्यान तथा आध्यात्मिक क्रियाओ से।

प्रश्न 14.
कैसे लोगों को गुरु नानक ने ईश्वर का शब्रु कहा है ?
उत्तर :
जो लोग केवल ईश्वर का नाम लेते हैं लेकिन अपना कर्त्तव्य नहीं करते ।

प्रश्न 15.
अज्ञानी पुरुष कौन हैं ?
उत्तर :
जिन्हें यह नहीं पता कि सत्य क्या है ?

प्रश्न 16.
सच्चा धार्मिक कौन है ?
उत्तर :
जिसने ईश्वर को अनुभव किया है ?

प्रश्न 17.
गुरु नानक के अनुसार सतनाम क्या है ?
उत्तर :
जीवन में सदाचार या सात्विक जीवन बिताना।

प्रश्न 18.
सतनाम से भी बड़ा क्या है ?
उत्तर :
प्रेम तथा दया का व्यवहार ।

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प्रश्न 19.
सही अर्थों में धार्मिक व्यक्ति कौन है ?
उत्तर :
जिसके हुदय में प्रकाश, आनंद और संपूर्ण मानवता के लिए दयाभाव है ।

प्रश्न 20.
मानक जैसे महापुरुषों के वचन हमारे लिए क्या है ?
उत्तर :
प्रेरणा और प्रताड़ना देने वाले ।

प्रश्न 21.
हममें से अधिकांश व्यक्ति कैसा जीवन जीते हैं ?
उत्तर :
बाहरी जीवन।

प्रश्न 22.
नानक हमें क्यों फटकारते हैं ?
उत्तर :
अपना सही स्वरूप भूल जाने के कारण।

प्रश्न 23.
कौन-सी चीज संसार-विमुखता नहीं है ?
उत्तर :
साधुता या पवित्रता।

प्रश्न 24.
गुरु नानक की पहली शिक्षा क्या है ?
उत्तर :
ईश्वर ही सत्य है और सत्य से ऊपर कुछ भी नहीं है।

प्रश्न 25.
गुरु नानक की दूसरी शिक्षा क्या है ?
उत्तर :
संसार के अनेक धर्मो का एक सामान्य आधार है ।

प्रश्न 26.
हम सभी क्या क्या जानना चाहते हैं ?
उत्तर :
परमात्मा कहाँ है।

प्रश्न 27.
किसके फटकार की हमें आज भी जरुरत हैं ?
उज्ञर :
गुरु नानक के फटकार की।

प्रश्न 28.
गुरु नानक के फटकार की जरूरत क्यों है ?
उत्तर :
क्योंकि हम दिखावटी जीवन जी रहे हैं।

प्रश्न 29.
कौन-सा जीवन संसार से पलायन नहीं है ?
उत्तर :
सन्त-जीवन।

प्रश्न 30.
महान कलाएँ किसके आस-पास घूमती हैं ?
उत्तर :
धार्मिक पथ-प्रदर्शकों के आसपास।

प्रश्न 31.
महान गुरुओं ने हमें क्या अपनाने को कहा था ?
उत्तर :
नयी चेतना ।

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प्रश्न 32.
हम सब किसके परिवार के सदस्य हैं ?
उत्तर :
परमात्मा के परिवार के सदस्य हैं।

प्रश्न 33.
हमारे देश में कौन-से काल (समय) आते रहे हैं ?
उत्तर :
प्रकाश और अंधकार, सुख और दुःख तथा जय और पराजय के ।

प्रश्न 34.
हम किसके बताए मार्ग से भटक गए हैं ?
उत्तर :
महान ॠषियों के बताए मार्ग से।

प्रश्न 35.
गुरु नानक का जन्म कैसे समय में हुआ था ?
उत्तर :
नैतिक और आध्यात्मिक संकट के समय में ।

प्रश्न 36.
गुरु नानक का युग कैसा था ?
उत्तर :
सामाजिक अव्यवस्था का ।

प्रश्न 37.
मूल सत्य क्या है ?
उत्तर :
ओकार।

प्रश्न 38.
सच्चे अर्थों में धार्मिक कौन है ?
उत्तर :
जिसे परमात्मा का नशा है ।

प्रश्न 39.
अब कौन-सा समय आ गया है ?
उत्तर :
गुरु नानक की वाणी को अपने जीवन में उतारने का।

प्रश्न 40.
हमें सतनाम के बारे में किसने बताया ?
उत्तर :
गुरुनानक ने ।

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प्रश्न 41.
क्या करना ईश्वर को सूली पर चढ़ाने जैसा है ?
उत्तर :
जाति, धर्म आदि के आधार पर मानवों को अलग-अलग करना ईश्वर को सूली पर चढ़ाने के जैसा है।

प्रश्न 42.
हमारा जीवन नीरस क्यों होता जा रहा है ?
उत्तर :
सांसारिक माया-मोह के कारण।

प्रश्न 43.
गुरुनानक की वाणी से हम क्या अनुभव करते हैं ?
उत्तर :
जीवन के आध्यात्मिक पहलू को ।

प्रश्न 44.
कौन-से लोग समाज के दु:ख या विफलताओं के प्रति कठोर दृष्टिकोण नहीं रखते हैं ?
उत्तर :
जो परमात्मा का साक्षात्कार करते हैं।

प्रश्न 45.
कौन-से दो ग्रंथ एक ही शिक्षा देते हैं ?
उत्तर :
‘पुराण’ और ‘कुरान’।

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प्रश्न 46.
गुरु नानक ने किन बातों पर बल दिया ?
उत्तर :
आन्तरिक सजगता और बाह्म कुशलता ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गुरु नानक का जन्म कैसे समय में हुआ था ?
उ्तर :
गुरु नानक का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब देश में नैंतिक और आध्यात्मिक संकट छाया हुआ था। लोग दिखावे के लिए धर्म का आचरण कर रहे थे । एक-दूसरे से जुड़ने की बजाय वे अलग हो रहे थे। चारों ओर असामाजिक अव्यवस्था फैली हुई थी ।

प्रश्न 2.
गुरु नानक ने ‘ओंकार’ के बारे में क्या बताया ?
उत्तर :
गुरु नानक ने ओंकार को काफी महत्व दिया है । यह अ, उ ओ म् के मिलने से बना है जिसके अर्थ क्रमशः जाग्रतवस्था, स्वप्नावस्था तथा सुपुज्तावस्था हैं। ये तीनों अवस्थाएँ मिलकर ओंकार में एकाकार हो जाती है। ओंकार ही हमें सत्य से साक्षात्कार कराता है । यह औंकार अदृश्य, गुणातीत और भावातीत है।

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प्रश्न 3.
गुरु नानक ने परमात्मा के बारे में क्या कहा है ?
उत्तर :
गुरू नानक के अनुसार परमात्मा का वास आसमान, तारे या समुद्र में नहीं है। वह तो मनुष्य के हृदय में रहता है। व्यक्ति चाहे तो प्रार्थना, ध्यान तथा आध्यात्मिक क्रियाओं से उसे अनुभव कर सकता है ।

प्रश्न 4.
गुरु नानक ने सतनाम के बारे में क्या बताया है ?
उत्तर :
गुरु नानक के अनुसार सतनाम का अर्थ है – जीवन में सदाघार या सात्विक जीवन व्यतीत करना।

प्रश्न 5.
गुरु नानक के अनुसार कैसा व्यक्ति धार्मिक है ?
उत्तर :
गुरु नानक के अनुसार वह व्यक्ति धार्मिक है जिसने ईश्वर को अनुभव किया है । धार्मिक व्यक्ति कभी कोई ऐसा काम नहीं करता जो उसकी आत्मा के प्रतिकूल है या किसी भी तरह से अपविव्र है । धार्मिक व्यक्ति के मन में प्रकाश, आनंद और संपूर्ण मानवता के लिए दयाभाव रहता है।

प्रश्न 6.
गुरु नानक जैसे महापुरुषों के वचन हमारे लिए किस प्रकार के हैं ?
उत्तर :
गुरु नानक जैसे महापुरुषों के वचन हमारे लिए प्रेरणा और प्रताड़ना देनेवाले हैं। प्रेरणा इसलिए कि उनसे हम आध्यात्मिक जीवन के बारे में जानते है। नानक के वघन प्रताड़ना इस अर्थ में हैं कि हम धर्म का सही स्वरूप भूल गए है , सतही जीवन जी रहे हैं तथा दिखावे का व्यवहार कर रहे हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

प्रश्न 7.
गुरु नानक की शिक्षा क्या है ?
अथवा
प्रश्न 8.
गुरु नानक की धर्म के बारे में क्या धारणा है ?
उत्तर :
गुरु नानक की धर्म के बारे में सबसे बड़ी शिक्षा यह है कि सभी धर्मो का एक सामान्य आधार है। ‘पुराण’ तथा ‘कुरान’ दोनों ही लोगों को प्रेम तथा भाइचारे का संदेश देते हैं। मान्दिर हो या मस्जिद परमात्मा एक है तथा ईश्वर का निवास मंदिर, मस्जिद, तारे या आसमान में नहीं है। वह तो सबके हूदय में वास करता है ।

प्रश्न 9.
गुरु नानक के अनुसार कैसे लोग ईश्वर के शत्रु हैं ?
अथवा
प्रश्न 10.
कैसे लोग ईश्वर को सूली पर चढ़ा रहे हैं ?
उत्तर :
जो लोग ईश्वर की अनुभूति अपने द्वयय में न करके धर्म के नाम पर लोगों के बीच द्वेष की भावना फैलाते है, आपस में लड़ाते हैं वे लोग ईश्वर के शत्रु हैं तथा ईश्वर को सूली पर चढ़ा रहे हैं।

प्रश्न 11.
पहले की तुलना में हिंसा आज कहीं अधिक आम हो गयी है – क्यों ?
उत्तर :
इतिहास के प्रारंभ से ही हमारे अषियों ने हमें ‘वसुधैव कुटुम्यकम्’ का पाठ पढ़ाया था । कहने का भाव यह है कि हमें सम्मूर्ण मानवता के लिए सद्भावना रखनी चाहिए। लैकिन अधिकांश लोगों ने इस सीख को अनदेखा किया है । यही कारण है कि पहले की तुलना में हिंसा आज कहीं अधिक आम हो गयी है।

WBBSE Class 9 Hindi गुरु नानक Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 11

  • जय = जीत ।
  • पराजय = हार ।
  • अवतरित = प्रकट ।
  • अपितु = बल्कि ।
  • धर्माचरण = धर्म का आचरण।
  • अरुचिकर = नापसंद ।
  • ओंकार = ओहम् (तीन अक्षरों अ, उ और म का मेल) ।
  • समाहित = मिली हुई ।
  • हठधर्मिता = हठ को धर्म बना लेना
  • विवाद = झमेले ।
  • अदृश्य = जो दिखायी न दे।
  • गुणातीत = गुण से परे ।
  • भावातीत = भाव से परे ।
  • शिवम् = कल्याणकारी
  • अद्वैतम् = एक ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • सतनाम = सच्चा नाम ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

पृष्ठ सं० – 12

  • अनिवार्य = जरूरी
  • अन्त:करण = हृदय ।
  • अभिप्राय = अर्थ, तात्पर्य ।
  • मठ = मंदिर ।
  • विहार = बौद्ध-मंदिर।
  • यातना = कष्ट ।
  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • गहन = गहरा ।
  • निष्ठा = विश्वास ।
  • व्यक्त = प्रकट।
  • सदाचार = सच्चा व्यवहार।

पृष्ठ सं० – 13

  • मतभेद = विचार का अंतर ।
  • संयम = अपने पर काबू रखना ।
  • सहिष्णुता = सहने की शक्ति ।
  • दृष्टिकोण = देखने का तरीका ।
  • अंधविश्वास = वह विश्वास जो अंधा हो ।
  • यन्त्रवत = मशीन की तरह।
  • बुद्धिवादी = केवल बुद्धि में विश्वास
  • रखने वाले ।
  • धर्मनिरपेक्ष = धर्म से अलग ।
  • आयाम = पहलू।
  • अपूर्ण = अधूरा ।
  • प्रताड़ना = कष्ट ।

पृष्ठ सं० – 14

  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • विमुख = दूर ।
  • सतही = ऊपरी ।
  • बाह्य = बाहरी ।
  • कालातीत = काल से परे।
  • विद्यमान = मौजूद ।
  • हेतु = कारण ।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • गैर-संसारी = संसार से अलग ।
  • पैगम्बर = देवदूत ।

पृष्ठ सं० =15

  • पलायन = भागना ।
  • वस्तुत: = वास्तव में ।
  • स्थापत्य = वास्तु, गृह-निर्माण कला ।
  • अमल = अपनाना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 2 गुरु नानक

पृष्ठ सं० – 16

  • प्रवृत्तियों = गुणों ।
  • एषणाओं = इच्छाओं ।
  • चरितार्थ = उतारना ।
  • आम = सामान्य ।
  • मन्त्रोचारण = मंत्र का उच्चारण।
  • अस्पर्श्यता = छुआछूत ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 1 हरिहर काका to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 Question Answer – कालिदास

दीर्य उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : कालिदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का मूल्यांकन करें ।
प्रश्न – 2 : संस्कृत साहित्य के प्रमुख कवि के रूप में कालिदास का परिचय दें ।
प्रश्न – 3 : कालिदास का सामान्य परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख करें ।
प्रश्न – 4: भारत की आत्मा, सौंदर्य एवं प्रतिभा के महान प्रतिनिधि कवि के रूप में कालिदास का परिचय दें ।
प्रश्न – 5 : कालिदास संस्कृत साहित्य के प्रथम और अंतिम कवि हैं – अपने विचार लिखें ।
प्रश्न – 6 : कालिदास का जीवन-परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करें ।
उत्तर :
कालिदास भारत के संस्कृत साहित्य के महान कवि और नाटककार हैं। संस्कृत-साहित्य में उनकी बराबरी करनेवाला कोई दूसरा साहित्यकार पैदा न हुआ । कालिदास और उनकी रचनाएँ कालजयी हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

कालिदास के जीवन के बारे में हमें विशेष जानकारी प्राप्त नहीं होती है क्योंकि अपने साहित्य में उन्होंने अपने बारे में विशेष कुछ नहीं लिखा है। उनके जीवन से संबंधित अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं लेकिन उनका कोई ऐतिहासिक महत्व नहीं है । प्राप्त ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार कालिदास उज्जयनी के राजा विक्रमादित्य के राजदरबारी कवि थे ।

अन्य साक्ष्य के अनुसार कालिदास गुप्तकाल के थे । उन्हें विक्रमादित्य की पदवी प्राप्त थी। वे 345 ई० में सत्ता में आए तथा 414 ई० तक शासन किया ।

कालिदास की रचनाओं से प्राप्त विवरण के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि उनका अर्विभाव ऐसे युग में हुआ था, जो वैभव और सुख-सुविधा से परिपूर्ण था। कालिदास को संगीत, नृत्य तथा चित्रकला से विशेष प्रेम था। उन्हें विज्ञान, कानून, दर्शन तथा संस्कारों का भी ज्ञान था।

जहाँ तक कालिदास की रचनाओं का प्रश्न है, निम्नलिखित सात रचनाओं को कालिदास की मौलिक रचना मानी जाती है तथा इनके बारे में कोई विवाद नहीं है –

अभिज्ञान शांकुतल :- यह सात अंकों का नाटक है । इसमें राजा दुष्यंत और शंकुतला के प्रेम और विवाह का वर्णन है ।

विक्रमोर्वशीय :- यह पाँच अंकों का नाटक है । इसमें पुरुखा और उर्वशी के प्रेम और विवाह का वर्णन है। मालविकाग्निमित्र :- यह भी पाँच अंकों का नाटक है। इसमें मालविका और अग्निमित्र के प्रेम का वर्णन है। रघुवंश :- उन्नीस सर्गों के इस महाकाव्य में सूर्यवंशी राजाओं के जीवन चरित्र हैं।

कुमारसम्भव :- सरह सर्गो के इस महाकाव्य में शिव-पार्वती के विवाह तथा युद्ध के देवता कुमार के जन्म का वर्णन हैं। मेघदूत :- इसमें यक्ष द्वारा अपनी प्रेयसी को मेघ द्वारा पहुँचाए गए संदेश का वर्णन एक सौ ग्यारह छंदों में किया गया है।
ॠतुसंहार :- इसमें विभिन्न ॠतुओं का वर्णन है । इन रचनाओं के कारण कालिदास की गणना विश्व के सर्वश्रेष्ठ कवियों और नाटककारों में होती है । उनकी रचनाओं का साहित्य के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी है।

कालिदास ने अपने संपूर्ण काव्य में इतना स्वाभाविक वर्णन किया है कि पाठक आनंदविभोर हो उठता है । उनके शब्द-चित्र मानों हमारी आँखों के सामने साकार हो उठते हैं । उपमा तथा रूपक का जितना सुंदर प्रयोग कालिदास ने किया है – वह दूसरे कवियों में देखने को नहीं मिलता है । अपने इन्हीं गुणों के कारण कालिदास संस्कृत साहित्य के सिरमौर तथा कालजयी कवि हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न – 7 : ‘कालिदास’ पाठ के आधार पर उनकी धर्म-संबंधी विचारों पर प्रकाश डालें ।
प्रश्न – 8 : कालिदास सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करनेवाले थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 9 : कालिदास को सभी धर्मों के प्रति सहानुभूति थी – स्पष्ट करें ।
उत्तर :
कालिदास के सारे ग्रंथ हिन्दु धर्म तथा सस्कृति से जुड़े हैं । इसका यह अर्थ नहीं है कि वे कट्टर हिंदू थे । कालिदास सभी धर्मों को समान सम्मान देते थे । धर्म के प्रति उनमें कोई दुराग्रह नहीं था और न ही वे धर्माध थे । उनका यह मानना था कि निराकार ईश्वर एक है भले ही उसके रूप अनेक हैं। इसलिए व्यक्ति को यह स्वतंत्रता है कि ईश्वर तक पहुँचने का कोई भी मार्ग चुन ले ।

भारत में जितने भी धर्म हैं सबका विश्वास पुनर्जन्म में है । पुनर्जन्म का आशय है कि व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार फिर से जन्म लेना पड़ता है । यह जन्म हमें पूर्णता की ओर ले जाने वाला हो सकता है अगर हम इस जन्म में अच्छे कर्म कर लें। मनुष्य के कर्म जन्म-जन्मांतर तक उसका पीछा करते हैं।

कालिदास आध्यात्मिक जीवन में विश्वास करते हैं लेकिन काम(Sex) से भी उनका विरोध नहीं है। अगर काम संयमित है तो वह अपनी प्रकृति में आध्यात्मिक है । उनके अनुसार कोई गृहस्थ जीवन जीने के साथ-साथ साधु भी हो सकता है। कबीर इसके उदाहरणस्वरूप रखे जा सकते हैं । उपनिषद में भी कहा गया है – ‘त्यक्तेन भुंजीथा’ ।
अर्थात् त्याग से भोग करो। कहने का भाव यह है कि जीवन का उद्देश्य आंन और सात्विकता है, न कि विलासिता या इन्द्रिय सुख-भोग|

कालिदास का धर्म के प्रति व्यापक दृष्टिकोण था। उन्होंने मानव को ब्रह्नांड तथा धर्म की शक्तियों से अलग करके नहीं देखा । वे जीवन में चार पुरुषार्थों – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में सामंज्यस देखना चाहते थे । उन्होंने राजनीति और कला को भी धर्म से अलग करके नहीं देखने की बात कही। यही कारण था कि तुलसीदास ने जीवन, लोके, चित्रों और फूलों में समान आनंद लिया।

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि कालिदास के लिए धर्म जीवन के विभिन्न उद्देश्यों के समन्वित पालन और व्यक्तित्व के सुगठित विकास में निहित है । कालिदास के लिए जीवन और धर्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

प्रश्न – 10 : ‘कालिदास’ ने राजाओं के किन आवश्यक गुणों का उल्लेख किया है ? लिखें।
प्रश्न – 11 : कालिदास के अनुसार एक आदर्श राजा में किन गुणों का समावेश होना आवश्यक है ?
प्रश्न – 12 : पठित पाठ ‘कालिदास’ के आधार पर बताएँ कि राजा में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर :
कालिदास मात्र कवि एवं नाटककार ही नहीं थे, उन्होंने अपने ग्रथथों में राजनीति विषयक बातों का भी उल्लेख किया है । इससे पता चलता है कि वे एक नीतिज़ भी थे । कालिदास के अनुसार एक आदर्श राजा में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –

(क) धार्मिक, न्यायप्रिय तथा प्रजापालक :- कालिदास के अनुसार राजा को धार्मिक, न्यायप्रिय तथा प्रजापालक होना चाहिए। प्रजा से वसूले गए धन को जन-कल्याण के लिए उसी प्रकार खर्च किया जाना चाहिए जिस प्रकार सूर्य पृथ्वी से लिए गए जल को सहस्त्र गुणा करके लौटा देता है । राजा को प्रजा का सच्चा पिता, शिक्षक, रक्षक तथा जीविका प्रदान करने वाला होना चाहिए ।
‘अभिज्ञान शांकुतल’ में राजा से तपस्वी कहता है – ”आपके शस्त्र दुखी और पीड़ितों की रक्षा के लिए है न कि निदोर्षो पर प्रहार के लिए ।”

(ख) आत्मसंयम :- कालिदास ने राजा के लिए आत्म-संयम को अनिवार्य बताया है। दुष्यंत एवं शंकुंतला का पुत्र भरत, जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा है – उसका सबसे बड़ा गुण आत्मसयंम था। इसके विपरीत ‘रघुवंश’ में अग्निवर्ण दुराचारी होने के कारण क्षय रोग से असमय ही मर जाता है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

(ग) अंतरात्मा की आवाज सुननेवाला :- राजा को अंतिम निर्णय के लिए अंतरात्मा की आवाज सुननेवाला होना चाहिए । अर्जुन ने क्षत्रिय होने के नाते समाज द्वारा आरोपित युद्ध करने के अपने दायित्व से मना कर दिया था। दूसरा उदाहरण सुकरात का है जब वे एथेंसवासियों से कहते हैं – “एथेसवासियों ! मैं ईश्वर की आज्ञा का पालन करूँगा, तुम्हरीी आशा का नहीं।”

(घ) निष्कलंक :- राजा को सभी प्रकार के कलंकों से मुक्त होना चाहिए। उदाहरण के लिए रघुवंश के राजा जन्म से ही निष्कलंक थे । इन्होंने धन का संग्रह दान के लिए किया, सत्य के लिए चुने हुए शब्द कहे, विजय की आकांक्षा यश के लिए की और गृहस्थ जीवन पुत्र-प्राप्ति के लिए अपनाया।

अति लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
साहित्य में कालजयी रचनाएँ कैसे जन्म लेती हैं ?
उत्तर :
गहन-गंभीर मानवीय अनुभवों से ।

प्रश्न 2.
किस चेतना के मूल से कालिदास की कृतियों का जन्म हुआ है ?
उत्तर :
भारतौय राष्र्रीय चेतना के मूल से।

प्रश्न 3.
कालिदास की रचनाओं में कौन-से गुण हैं ?
उत्तर :
भाषा की सरलता, उक्तियों की सटीकता, गहन कवित्व संवेदना तथा भावों व विचारों का प्रस्कुटन आदि।

प्रश्न 4.
कालिदास के नाटकों की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
शक्ति, सौदर्य, कथा के गठन तथा पात्रों के चरित्र-चित्रण में अनुपम कौशल।

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प्रश्न 5.
भारत के संस्कृत साहित्य में कालिदास का क्या स्थान है ?
उत्तर :
सर्वश्रेष्ठ कवि तथा नाटक कार होने का स्थान ।

प्रश्न 6.
कालिदास किस राजा के समकालीन थे ?
उत्तर :
राजा विक्रमादित्य के समकालीन ।

प्रश्न 7.
विक्रम संवत किसने चलाया ?
उत्तर :
राजा विक्रमादित्य ने ।

प्रश्न 8.
‘अभिज्ञान शाकुंतल’ में किसका वर्णन हैं ?
उत्तर :
दुष्यंत और शकुंतला के प्रेम तथा विवाह का वर्णन।

प्रश्न 9.
‘विक्रमोर्वशीय’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
पुरुखा और उर्वशी के प्रेम तथा विवाह का।

प्रश्न 10.
‘रघुवंश’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
सूर्यवंशी राजाओं के जीवन-चरित्र का वर्णन है।

प्रश्न 11.
‘कुमार संभव’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
शिव-पार्वती के विवाह तथा युद्ध के देवता कुमार के जन्म का वर्णन।

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प्रश्न 12.
‘मेघदूत’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
यक्ष द्वारा अपनी पत्नी को पहुँचाए गए सन्देश का वर्णन।

प्रश्न 13.
‘ऋतुसंहार’ में किसका वर्णन है ?
उत्तर :
सभी ऋतुओं का।

प्रश्न 14.
कालिदास अपने साहित्य का विषय-वस्तु कहाँ से चुनते हैं ?
उत्तर :
देश की सांस्कृतिक विरासत से ।

प्रश्न 15.
सर्वज्ञ, सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान क्या है ?
उत्तर :
चरम सत्य।

प्रश्न 16.
कालिदास को किस धर्म के प्रति सहानुभूति है ?
उत्तर :
सभी धर्मों के प्रति।

प्रश्न 17.
कालिदास किस सिद्धांत को मानते हैं ?
उत्तर :
पुनर्जन्म के सिद्धान्त को।

प्रश्न 18.
कालिदास का उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
अपनी संबंधो को स्वच्छ और उज्ज्वल बनाना।

प्रश्न 19.
कालिदास के अनुसार इतिहास क्या है ?
उत्तर :
कालिदास के अनुसार इतिहास मानव की नैतिक इच्छा का फल है, जिसकी अभिव्यक्तियाँ स्वतंत्रता और सृजन हैं ।

प्रश्न 20.
रघुवंश का शासन-क्षेत्र क्या था ?
उत्तर :
धरती से लेकर समुद्र तक।

प्रश्न 21.
राजा अज के राज्य में प्रत्येक व्यक्ति का क्या मानना था ?
उत्तर :
राजा प्रजा का व्यक्तिगत मित्र है।

प्रश्न 22.
किसके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा है ?
उत्तर :
दुष्यंत एवं शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर।

प्रश्न 23.
शालीन मानव-जीवन के लिए क्या अनिवार्य है ?
उत्तर :
संयम अनिवार्य है ।

प्रश्न 24.
राजा के लिए क्या अनिवार्य है ?
उत्तर :
आत्मसंयम अनिवार्य है ।

प्रश्न 25.
कालिदास के काव्य में किसको भव्यता प्रदान की गई है ?
उत्तर :
तप को।

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प्रश्न 26.
आरंभिक वैदिक साहित्य में किसका निरूपण है ?
उत्तर :
जड़-चेतन की एकरूपता का निरूपण ।

प्रश्न 27.
कालिदास के पात्र किसके प्रति संवेदनशील हैं ?
उत्तर :
पेड़-पौधों, पर्वतों तथा नदियों तथा पशुओं के प्रति।

प्रश्न 28.
शंकुतला किसकी कन्या है ?
उत्तर :
प्रकृति की।

प्रश्न 29.
सीता के परित्याग का प्रकृति पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
सीता के परित्याग के समय मयूरों ने नाचना बंद कर दिया, वृक्ष पुष्परहित हो गए और हिरणों ने मुँह के आधे चबाए हुए दुर्वादलों (घासों) को नीचे गिरा दिया।

प्रश्न 30.
कालिदास का प्रकृति का ज्ञान कैसा था ?
उत्तर :
यथार्थ एवं सहानुभूतिपूर्ण।

प्रश्न 31.
कालिदास को किस विषय ने अपनी ओर आकर्षित किया ?
उत्तर :
पुरुष और नारी के प्रेम ने।

प्रश्न 32.
दुष्यंत शकुंतला को क्यों नहीं पहचान पाते ?
उत्तर :
अपंनो कमजोर स्मरणशक्ति के कारण।

प्रश्न 33.
संस्कृत साहित्य के किस कवि को प्रथम और अंतिम कवि माना जाता है ?
उत्तर :
कालिदास को।

प्रश्न 34.
कालिदास को किन कलाओं से विशेष प्रेम था ?
उत्तर :
संगीत, नृत्य तथा चित्रकला से।

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प्रश्न 35.
कालिदास को किन विषयों का विशेष ज्ञान था?
उत्तर :
तत्कालीन ज्ञान-विज्ञान, विधि, दर्शन-शास्त्र तथा संस्कारों का विशेष ज्ञान था।

प्रश्न 36.
कालिदास अपने किन गुणों कें कारण प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
कम शब्दों में अधिक भा्बि प्रकट करना तथा कथन की स्वाभाविकता।

प्रश्न 37.
कालिदास किन अलंकारों के प्रयोग में सर्वोपरि हैं ?
उत्तर :
उपमा तथा रूपक अलंकार।

प्रश्न 38.
कालिदास की शैली किस प्रकार की है ?
उत्तर :
निवेदन-शैली।

प्रश्न 39.
किसकी अनेक पंक्तियाँ संस्कृत में सूक्तियाँ बन गयी हैं ?
उत्तर :
कालिदास की।

प्रश्न 40.
कालिदास किसके उपासक थे ?
उत्तर :
भगवान शिव के।

प्रश्न 41.
कालिदास ने किन चीजों का समान आनंद लिया ?
उत्तर :
जीवन, लोक, चिर्रों तथा फूलों का।

प्रश्न 42.
मानव जीवन के चार पुरुषार्थ कौन-से हैं ?
उत्तर :
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ।

प्रश्न 43.
कालिदास किसकी रचना में बेजोड़ हैं ?
उत्तर :
मानस-चित्रों की रचना में ।

प्रश्न 44.
कालिदास के अनुसार जीवन का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
आनंद और सात्विकता न कि विलासिता या इन्द्रयय सूख- भोग।

प्रश्न 45.
शिव और पार्वती के जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
कुमार का जन्म ।

प्रश्न 46.
कालिदास किन चीजों में चेतन व्यक्तित्व मानते हैं ?
उत्तर :
नदियों, पर्वतों, वन-वृक्षों में ।

प्रश्न 47.
कालिदास के अनुसार प्रत्येक को सही आचरण के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
अपने अंत:करण में झांकना चाहिए ।

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प्रश्न 48.
रात और दिन, ॠतु-परिवर्तन – ये सब किसके प्रतीक हैं ?
उत्तर :
मानव-मन के परिवर्तन, विविधता और चंचलता के प्रतीक हैं।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कालिदास की रचनाओं से उनके जीवन के बारे में हमें क्या जानकारी प्राप्त होती है ?
उत्तर :
कालिदास की रचनाओं से उनके जीवन के बारे में यह जानकारी प्राप्त होती है कि वे ऐसे युग में हुए थे जो वैभव और सुख-सुविधाओं से पूर्ण था। संगौत, चृत्य, चित्र कला से उन्हें विशेष प्रेम था। उन्हें तत्कालौन ज्ञान-विज्ञान, विधि (कानून), दर्शन-शास्त्र तथा संस्कार विधि का विशेष ज्ञान था। वे हिमालय से कन्याकुमारी तक की भौगोलिक स्थिति से पूरी तरह परिचित थे।

प्रश्न 2.
कालिदास की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखें ।
उत्तर :
कालिदास की पमुख रचनाएँ है – अभिज्ञान, शकुंतला, विक्रमोर्वशीय, मालविकागिन्निन्र, रघुवंश, कुमार संभव, मेघदूत, ऋतुसंहार।

प्रश्न 3.
धर्म के बारे में कालिदास के क्या विचार थे ?
उत्तर :
कालिदास सभी धर्मों को समान आदर देते थे । धर्म के बारे में उनका कोई पू प्वाग्रह या अंधविश्वास नहीं था 1 उनका यह मानना था कि ईश्वर एक है, निराकार है तथा उसके विभिन्न रूप एक ही हैं।

प्रश्न 4.
कालिदास की रचनाओं से किस गलत धारणा का निराकरण हो जाता है ?
उत्तर :
कालिदास की रवनाओं से हिन्दू धर्म की इस गलत धारणा का निराकण हो जाता है कि हिन्दुओं ने भाव की अपेक्षा ज्ञान को अधिक महत्व दिया तथा उन्होंने सासारिक दु:ख-दद्दों की अवहेलना की।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

प्रश्न 5.
प्राचीन काल में राजा राजस्व की वसूली क्यों करते थे ?
उत्तर :
प्रायीन काल में राजा राजस्व की वसूली इसालिए किया करते थे ताकि उस राशि से जन-कल्याण का काम किया जा सके । ठीक वैसे ही जैसे सूर्य जितना जल लेता है उसका सहस्तगुणा करके लौटा देता है ।

प्रश्न 6.
शकुंतला कौन थी ? उसका लालन-पालन किसने किया ?
उत्तर :
शंकुतला प्रकृति की कन्या (पुत्री) थी। कठोर हृदय की माँ मेनका ने जब उसे त्याग दिया तो आकाश में विचरण करनेवाले पक्षियों ने उसे उठाया तथा उसका पालन-पोषण तब तक किया जब तक कि कण्व ॠषि उसे अपने आश्रम में नहीं ले गए । कण्व ॠषि ने ही उसे पाल-पोष कर बड़ा किया।

प्रश्न 7.
शकुंतला के विवाह के अवसर पर किसने क्या किया ?
उत्तर :
शंकुतला के विवाह के अवसर पर वन के वृक्षों ने उपहार दिया, वन की देवियों ने उस पर फूलों की वर्षा की तथा कोयलों ने खुशियों के गौत गाए ।

प्रश्न 8.
जब राम ने सीता का परित्याग किया तो उसका प्रकृति पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
राम के द्वारा सीता के परित्याग किए जाने पर मयूरों ने नृत्य करना बंद कर दिया, वृक्षों ने अपने पुष्षों का त्याग कर दिया तथा मृगियों (हिरणियों) ने मुँह के आधे चबाए हुए दुर्वादलों (घासों) को अपने मुँह से गिरा दिया।

प्रश्न 9.
शकुंतला की विदाई का आश्रमवासियों, प्रकृति तथा वन्यप्राणियों पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
शकु गला की विदाई के समय सारे आश्रमवासी दुःखी हो उठे । मयूरों ने नृत्य करना बंद कर दिया। मृगों के मुखों से चारा छूट कर रडड़ा तथा लताओं ने अश्रु के रूप में अपने पत्रों (पत्तों) को गिराया।

प्रश्न 10.
कालिदास प्रक्ति को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर :
कालिदास प्रकृतति को निर्जाव-रूप में नहीं देखते हैं। उनके लिए नदियों, पर्वतो, वन-वृक्षों में भी प्राण हैं जैसा कि पशुओं, मनुष्यों तथा देवताओं में है।

प्रश्न 11.
यक्ष मेघ को अपनी पत्नी का विवरण किस प्रकार देता है ?
उत्तर :
यक्ष मेघ को अपनी पत्नी का विवरण देते हुए कहता है कि समस्त नारियों में वह इतनी सुंदर है मानो ईश्वर ने सबसे पहले उसी की रचना की है। वह पतली, गोरी है, उसके दाँत सुंदर है । नोचे के ओठ बिम्ब फल की तरह लाल हैं। कमर पतली है । आँखें चकित हिरणी की आँखों के समान हैं । नाभि गहरी है । नितंब के भार से उसकी चाल धीमी है तथा स्तन के भार से वह आगे की ओर झुकी हुई है ।

प्रश्न 12.
कालिदास के समय में लोगों का सामाजिक जीवन कैसा था ?
उत्तर :
कालिदास के समय में लोगों का सामाजिक जीवन समृद्ध था। लोगों की रुचि विभिन्न कलाओं में थी। राजा जनकल्याण के कार्य में रुचि लेते थे । नारियों का समाज में सम्मानपूर्ण स्थान था तथा पुरुषों का जीवन संदेहमुक्त था। पुरुषों के लिए एक से अधिक विवाह करना साधारण बात थी। पत्नी पति की सहर्धर्मिणी हुआ करती थी।

प्रश्न 13.
कालिदास का जीवन के प्रति क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर :
कालिदास आध्यात्मिक जीवन को सर्वोच्च मानते थे लेकिन जीवन में काम (Sex) से भी विरोध नहीं था। उनका यह मानना था कि नियम और संयम में बँधा हुआ काम भी अपनी प्रकृति में आध्यात्मिक ही है । इसलिए कोई गृहस्थ-जीवन बिताते हुए भी स्वभाव से साधु हो सकता है।

प्रश्न 14.
कालिदास के अनुसार जीवन का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
कालिदास के अनुसार जीवन का उद्देश्य आनंद और सात्विकता है । केवल विलासिता या सुखों का भोग करना जीवन का उद्देश्य नहीं है। इनके अनुसार जीवन में प्रेम का उद्देश्य पुरुष और नारी का सुखद सामंजस्य है । दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, एक-दूसरे से मिलकर ही दोनों का जीवन पूर्ण हो सकता है।

WBBSE Class 9 Hindi कालिदास Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 1

  • कालजयी = काल पर विजयी ।
  • गहन = गहरा ।
  • अंतराल = अंतर ।
  • नितान्त = बिल्कुल ।
  • परे = अलग ।
  • कृतियों = रचनाओं ।
  • आत्मसात = आत्मा में लीन करना ।
  • परिवेश = वातावरण ।
  • आयामों = पहलुओं ।
  • प्रस्कुटन = खिलना।
  • अनुपम = जिसकी उपमा न दी जा सके ।
  • शृंगों = शिखरों, वोटियों।
  • गणना = गिनती ।
  • समकालीन = बराबर समय के ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

पृष्ठ सं० – 2

  • सुविख्यात = बहुत प्रसिद्ध ।
  • विशिष्टता = महत्व ।
  • उत्कर्ष = उत्थान ।
  • शिलालेख = पत्थर पर खुदा लेख ।
  • मान्यता = विचार ।
  • सर्गों = अध्याय, पर्व ।

पृष्ठ सं० – 3

  • अनुरूप = अपने अनुसार ।
  • वियोग = विछोह, बिद्धुड़ना ।
  • समग्रता = संपूर्णता ।
  • माधुर्य = मधुरता
  • किंवदंतियाँ = कहावत ।
  • विदित = मालूम ।
  • विधि = कानून ।
  • विशद = विस्तृत ।

पृष्ठ सं० – 4

  • उपदेशात्मक = उपदेश देनेवाली ।
  • मनुहार = मनाना ।
  • समक्ष = सामने ।
  • आचरण =व्यवहार ।
  • मोक्ष = जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाना ।
  • अवगत = जानकारी ।
  • विखण्डता = अनेकता ।
  • संरक्षित = सुरक्षित ।
  • प्रारब्ध = भाग्य, किस्मत ।
  • नित = रोज ।
  • वर्णनातीत = वर्णन से परे ।
  • सूक्तियाँ = कथन।
  • आध्यात्मिक = आत्मा से जुड़ी।
  • संकीर्ण = संकरी ।
  • कालातीत = काल, समय से परे ।
  • सर्वज्ञ = सब जानने वाला ।
  • कर्ता = जन्म देनेवाला ।
  • पालक = पालन करनेवाला ।
  • संहारक = संहार करने वाला।
  • उपासक = उपासना करने वाले ।
  • श्लोक = दोहा ।
  • दृष्टिकोण = देखने का तरीका, नज़रिया।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

पृष्ठ सं० – 5

  • दुराग्रह = बुरा आग्रह ।
  • धर्मान्धता = धर्म को अंधे की तरह मानना ।
  • निराकार = बिना आकार के।
  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • निष्कलंक = बिना कलंक के ।
  • आकांक्षा = इच्छा ।
  • पुत्रेष्ण = पुत्र-प्राप्ति ।

पृष्ठ सं० – 6

  • राजस्व = कर (टैक्स) ।
  • दुराचारी = बुरे आचरण वाला ।
  • क्षय = यक्ष्मा (टी०बी०) ।
  • जड़ = निर्जीव।
  • नाना = विविध ।

पृष्ठ सं० – 7

  • यन्त्रवत् = यंत्र (मशीन) की तरह ।
  • भातृभावना = भाई की तरह भावना ।
  • षट = छ: ।
  • हृदयस्पर्शी = हदय को छूने वाला ।
  • चेतन = सजीव ।
  • अमानुषी = जो मानवी न हो ।
  • आकाशगामी = आकाश में गमन करनेवाला ।
  • दुर्वादलों = घास।
  • सतही = ऊपरी ।
  • अन्तरतम = हृदय ।

पृष्ठ सं० – 8

  • सुसंस्कार = अच्छे संस्कार ।
  • सामंज्यस = तालमेल ।
  • विधाता = ईश्वर ।
  • निष्ठावान = विश्वास रखना ।
  • प्रेममय = प्रेम से भरा हुआ ।
  • यातनाएँ = दु:खों ।
  • धरिणी = धरती ।
  • अविवेकी = बिना विवेक के ।
  • इन्द्रियपरक = शारीरिक।
  • स्वार्थजन्य = स्वार्थ से जन्मा हुआ ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 कालिदास

पृष्ठ सं० – 9

  • विस्मरणशीलता = भूलने की आदत ।
  • काम = इंद्रिय-सुख, शारीरिक मिलन ।
  • सहधर्मकारिणी = साथ-साथ धर्म का कार्य करनेवाली।

पृष्ठ सं० – 10

  • हृषित = खुश ।
  • निहित = समाया हुआ ।
  • सर्वाधिक = सबसे अधिक ।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण प्रत्यय to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(क) लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं ?
उत्तरः
वे शब्दांश, जो धातु रूप या शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।
उदाहरण – होन + हार = होनहार, महान + ता = महानता, गा + वैया = गवैया।

प्रश्न 2.
प्रत्यय के कितने भेद हैं ?
उत्तरः
प्रत्यय के दो भेद हैं –
(क) कृत या कृदन्त प्रत्यय
(ख) तद्वित प्रत्यय

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 3.
कृत प्रत्यय की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तरः
जो प्रत्यय क्रिया के मूल धातु-रूप के साथ लगकर संज्ञा अथवा विशेषणों का निर्माण करते हैं, वे कृत प्रत्यय कहलाते हैं।
उदाहरण – घिस + आई = घिसाई। इसमें ‘आई ‘रत्यय है।
कृत प्रत्यय के कुछ अन्य उदाहरण नीचे दिए गए हैं –

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 1

प्रश्न 4.
हिन्दी में प्रचलित कृत प्रत्ययों को लिखें तथा उनसे कम से कम दो-दो शब्द बनाएँ।
उत्तरः
हिन्दी में प्रचलित कृत प्रत्यय और उनसे निर्मित शब्द निम्नलिखित हैं –
अन – ढक + अन = ढक्कन, मनन, झाड़न, मरण, चिन्तन।
अक्कड़ – घूम + अक्कड़ = घुमक्कड़, पियक्कड़, रुअक्कड़।
अंत – गढ़ + अन्त = गढ़ंत, रटंत।
आ – सोच + आ = सोचा, भूला, समझा, पढ़ा, लिखा, भटका।
आई – पिटा + आई = पिटाई, लिखाई, लड़ाई, चढ़ाई, कमाई, पढ़ाई।
आऊ – कमा + आऊ = कमाऊ, बिकाऊ, चलाऊ, टिकाऊ।
आक – तैर + आक = तैराक , चालाक।
आका – लड़ + आका = लड़ाका, धड़ाका।
आकू – लड़ + आकू = लड़ाकू , पढ़ाकू, उड़ाकू।
आन – मिल + आन = मिलान, लगान, उठान, कटान, उड़ान, चालान।
आवट – सज + आवट = सजावट, मिलावट, लिखावट , बनावट , थकावट।
आवना – सुह + आवना = सुहावना, लुभावना, डरावना।
आवा – दिख + आवा = दिखावा, भुलावा, बुलावा, पहनावा।
आलू – झगड़ + आलु = झगड़ालु, दयालु, लजालु।
आस – पी + आस = प्यास, छपास, निकास।
आहट – चिल्ला + आहट = चिल्लाहट, घबराहट, मुस्कराहट।
इयल – मर + इयल = मरियल, सड़ियल, दड़ियल।
इया – बढ़ + इया = बढ़िया, जड़िया, घटिया।
ई – हँस + ई = हँसी, खिड़की, घुड़की, धमकी, बुहारी, बोली।
ऊ – खा + ऊ = खाऊ, चालू, रददू, उतारू, झाडू।
एरा – लूट + एरा = लुटेरा, कमेरा।
ऐया – खेव + ऐया = खिवैया, गवैया, पढ़ैया, रखैया।
ऐल – रख + ऐल = रखैल।
औती – मान + औती = मनौती, फिरौती।
औना – बिछ + औना = बिछौना, खिलौना।
क – लिख + क = लेखक, पालक।
कर – लिख + कर = लिखकर, पढ़कर, गिनकर, सोचकर, सोकर।
त – बच + त = बचत, खपत, लिखत।
ता – डूब + ता = डूबता, जाता, रमता, बहता, पीटता, मारता।
ती – चल + ती = चलती, फिरती, गिनती, बढ़ती, घटती।
न – बेल + न = बेलन, चलन, पान, खान, लेन-देन।
ना – लिख + ना = लिखना, पढ़ना, टहलना, पाना, जीना, बैठना।
नी – जन + नी = जननी, चटनी, मथनी, करनी, भरनी, ओढ़नी।
या – बो + या = बोया, खोया, पाया, जाया, सोया।
वाई – सुन + वाई = सुनवाई, कटवाई, चिरवाई, तुलवाई।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 5.
संस्कृत के निम्नलिखित प्रत्ययों से शब्द-निर्माण करें –
अन, अनीय, अना, आ, ई, उक, ऐया, क, ता, ति, य, र, व्य, स्थ।
उत्तरः
संस्कृत के प्रत्ययों से बने शब्द –

  • अन – गमन, भवन, जलन, चलन, श्रवण, करण।
  • अनीय – पठनीय, गोपनीय, करणीय।
  • अना – भावना, वंदना, प्रार्थना, कामना।
  • आ – पूजा, इच्छा, विद्या।
  • ई – त्यागी, उपकारी।
  • उक – भिक्षुक, भावुक।
  • ऐया – शख्या।
  • क – पाठक, सेवक, गायक, चालाक, कारक।
  • ता – नेता, दाता, कर्ता, वक्ता, विक्रेता, अभिनेता।
  • ति – गति, मति, यति, शक्ति, नीति।
  • य – देय, गेय, पेय।
  • र – नम्र, हिंस्त।
  • व्य – कर्त्तव्य, मंतव्य, गंतव्य।
  • स्थ – गृहस्थ, स्वस्थ, दूरस्थ।

प्रश्न 6.
तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं ?
उत्तरः
तद्धित प्रत्यय :- जो प्रत्यय क्रिया के धातु रूपों को छोड़कर संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण सूचक शब्दों के साथ जुड़ते हैं, वे तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे – पंजाब + ई = पंजाबी। यहाँ ‘ई तद्धित प्रत्यय है, क्योंकि यह पंजाब’ नामक संज्ञा के साथ मिलकर नया शब्द बना रहा है। हिन्दी में संस्कृत के अतिरिक्त अरबी-फारसी के प्रत्यय भी पर्याप्त मात्रा में प्रचलित हैं।

प्रश्न 7.
हिन्दी के तद्धित प्रत्ययों को लिखें तथा उनसे शब्द् बनाएँ।
उत्तरः
हिन्दी के तद्वित प्रत्यय और उनसे बने शब्द निम्नलिखित हैं –
आ – मैल + आ = मैला, ठंडा, भूखा, प्यासा, घना।
आई – भला + आई = भलाई, बुराई, मिठाई, चतुराई, ठकुराई, पंडिताई, अच्छाई।
आऊ – 34 + जाऊ = उपजाऊ, पंडिताऊ।
आना – साल + आना = सालाना, जुर्माना, घराना, रोजाना।
आनी – जेठ + आनी = जेठानी, देवरानी, मेहतरानी, पंडितानी।
आर – चम + आर = चमार, तुहार, सुनार।
आरी – जुआ + आरी = जुआरी, भिखारी, पुजारी।
आस – मीठा + आस = मिठास, खटास, भड़ास।
आहट – गरम + आहट = गरमाहट, चिकनाहट, कड़वाहट।
इक – समाज + इक = सामाजिक, साहित्यिक, धार्मिक, वैदिक, नैतिक, दैनिक।
इम – सुनार + इन = सुनारिन, लुहारिन, पुजारिन, कहारिन।
ई – बुद्धिमान + ई = बुद्धिमानी, चाची, नानी, धनी, लालची, घंटी, रस्सी, ऊनी।
इन – नमक + ईन = नमकीन, शौकीन, रंगीन।
ईला – रंग + ईला = रंगीला, चमकीला, नुकीला, सुरीला, रसीला, बर्फीला।
एरा – साँप + एरा = संपेरा, चितेरा, ममेरा, फुफेरा, मौसेरा, अन्धेरा।
एँ – पुस्तक + एँ = पुस्तके, बोतलें, सड़कें।
कार – पत्र + कार = पत्रकार, कथाकार, कलाकार, स्वर्णकार, चित्रकार, नाटककार, साहित्यकार, कहानीकार, इतिहासकार।
खोर – हराम + खोर = हरामखोर, सूदखोर, घूसखोर।
गर – सौदा + गर = सौदागर, कारीगर, जादूगर।
गुना – सौ + गुना = सौगुना, तिगुना, दुगना, चौगुना।
ची – अफीम + ची = अफीमची, तोपची, खजांची।
ड़ा – दुख + ड़ा = दुखड़ा, मुखड़ा, बछड़ा।
तया – विशेष + तया = विशेषतया, सामान्यतया, मुख्यतया।
दार – देन + दार = देनदार, लेनदार, दुकानदार, ईमानदार, जमींदार।
पन – बच्चा + पन = बचपन, लड़कपन, कालापन।
पा – मोटा + पा = मोटापा, बुढ़ापा, पुजापा।
री – कोठी + री = कोठरी, बाँसुरी, छतरी।
ला – पीछे + ला = पिछला, अगला, लाड़ला।
वाँ – दस + वाँ = दसवाँ, पाँचवाँ, सातवाँ, आठवाँ।
वान – कोच + वान = कोचवान, गाड़ीवान, देहवान, धनवान।
वाला – चाय + वाला = चायवाला, रिक्शावाला, इक्केवाला, ताँगेवाला, मिठाईवाला, बंदरवाला।
हरा – इक + हरा = इकहरा, दुहरा, तिहरा।
हारा – सर्व + हारा = सर्वहारा, लकड़हारा।
वान् – गुण + वान् = गुणवान्, बलवान्, धनवान्, दयावान्।

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प्रश्न 8.
उर्दू के निम्नलिखित प्रत्ययों से शब्द-निर्माण करें :- अंदाज, आना, इंदा, इश, ई, ईना, दान, मन्द, बाज, साज।
उत्तरः

  • अंदाज – गोलदांज, तीरंदाज।
  • आना – सालाना, मेहनताना, शुकराना, नजराना।
  • इंदा – आइंदा, जिंदा।
  • इश – कोशिश, फरमाइश, आजमाइश।
  • ई – आमदनी।
  • ईना – महीना, पसीना, कमीना।
  • दान – पीकदान, कलमदान, इत्रदान।
  • मन्द – दौलतमंद, जरूरतमंद, अक्लमंद।
  • बाज – चालबाज, धोखेबाज, पतंगबाज।
  • साज – जालसाज।

प्रश्न 9.
उपसर्ग तथा प्रत्यय का प्रयोग एक साथ किस प्रकार होता है ? उदाहरण सहित दिखाएँ।
उत्तरः
हिंदी में शब्द-रचना के लिए उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का एक साथ भी प्रयोग होता है और उनसे एक नया शब्द बन जाता है। जैसे –
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 2

प्रश्न 10.
कृदन्त’ किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तरः
क्रिया या धातु के अन्त में लगनेवाले प्रत्यय कृत’ प्रत्यय कहलाते हैं और कृत् प्रत्यय से बनने वाले शब्द ‘कृदन्त’ कहलाते हैं। जैसे – लड़ाई = लड़ (धातु) + आई (प्रत्यय); चलता = चल (धातु) + ता (प्रत्यय)। इनमें ‘आई’ और ता’ कृत् प्रत्यय हैं।
कृत् प्रत्यय जोड़ने से दो प्रकार के शब्द बनते हैं – 1. विकारी शब्द और 2. अविकारी शब्द।
विकारी कृदन्त :- विकारी कृदन्त से निम्नलिखित शब्द बनते हैं-
(क) कर्तृवाचक संज्ञा
(ख) भाववाचक संज्ञा
(ग) गुणवाचक विशेषण
(घ) क्रियार्थक संज्ञा
(ङ) वर्तमानकालिक कृदन्त और
(च) भूतकालिक कृदन्त।

अविकारी (शब्द) कृदन्त :- अविकारी (शब्द) कृदन्त से निम्न प्रकार के शब्द बनते हैं –
(क) पूर्ण क्रियाद्योतक शब्द
(ख) अपूर्ण कियाद्योतक शब्द
(ग) पूर्वकालिक शब्द और
(घ) प्रत्यय शब्द।

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प्रश्न 11.
कृत और तद्धित प्रत्यय में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
कृत और तद्धित प्रत्यय में अंतर इस प्रकार है –
कृत प्रत्यय :- क्रिया के धातु रूप में जो प्रत्यय लगते हैं, उन्हें कृत प्रत्यय कहते हैं और बने हुए नये शब्दों को ‘कृदन्त’ कहते हैं। जैसे – पढ़ + आई = पढ़ाई; लिख + आई = लिखाई; खड़खड़ा + हट = खड़खड़ाहट; बना + वट = बनावट।

तद्धित प्रत्यय :- क्रिया को छोड़कर अन्य शब्दों के अन्त में जो प्रत्यय आते हैं, उन्हेंतद्धित प्रत्यय कहते हैं। इनसे बने शब्दों को ‘दद्धितान्त’ कहते हैं। जैसे-सुन्दर + ता = सुन्दरता; गाड़ी + वान = गाड़ीवान; झगड़ा + आलू = झगड़ालू ; नाक + ऐं = नाकें।

प्रश्न 12.
कृत और कृदन्त में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तरः
क्रिया के धातु रूप में लगने वाले प्रत्यय को कृत प्रत्यय कहते हैं तथा इससे बने हुए नए शब्दों को कृदन्त कहते हैं।
उदाहरण :-
पढ़ + आई = पढ़ाई
यहाँ ‘आई’ कृत प्रत्यय है तथा थढ़ाई’ कृदन्त।

प्रश्न 13.
कृदन्त तथा तद्धितांत में क्या अंतर है ?
उत्तरः
क्रिया के धातु रूप में कृत प्रत्यय के लगने से बनने वाले शब्द को कृदन्त कहते हैं जब्बांक किया के धातु रूपों को छोड़कर संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण सूचक शब्दों के अंत में जब प्रत्यय के जुड़ने से नए शब्द बनते हैं तो उन्हें तद्धितांत कहते हैं।
उदाहरण :-
लड़ (क्रिया) + आई = लड़ाई – कृदंत
पत्र (संज्ञा) + कार = पत्रकार – तद्धितांत

प्रश्न 14.
कर्तुवाचक संज्ञा किसे कहते हैं ? कर्तृवाचक संज्ञाओं का निर्माण किन प्रत्ययों से होता है? उदाहरण सहित लिखें।
उत्तरः
कर्तुवाचक संज्ञा :- धातु या क्रिया के अन्त में प्रत्यय लगने से कर्ता अर्थात् करनेवाले का बोध होता है, उसे कर्तृवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – बेचना = बेचनहार, लिखना = लिखनेवाला इत्यादि।
ऊपर के उदाहरणों में हार और ‘वाला प्रत्यय लगाकर कर्तृवाचक संज्ञाएँ ‘बेचनहार’ और ‘लिखनेवाला’ बनाई गई हैं। कर्तवाचक संज्ञा निम्न प्रकार के प्रत्ययों से बनती है-

  • प्रत्यय – कर्विवाचक संज्ञाएँ
  • आक – तैरना-तैराक; पैरना-पैराक।
  • आका – लड़ना-लड़ाका; उड़ना-उड़ाका।
  • आकू – लड़ना-लड़ाकू; पढ़ना-पढ़ाकू।
  • आऊ – बिकना-बिकाऊ; टिकना-टिकाऊ।
  • इयल – मरना-मरियल; सड़ना-सड़ियल।
  • इया – गढ़ना-गढ़िया; जुड़ना-जुड़िया।
  • वैया – गाना-गवैया; खेना-खेवैया।

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प्रश्न 15.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :-
(क) भाववाचक कृदन्त
(ख) गुणवाचक कृदन्त
(ग) क्रियार्थक कृदन्त
(घ) वर्तमानकालिक कृदन्त
(ङ) भूतकालिक कृदन्त।
उत्तरः
(क) भाववाचक कृदन्त :- धातु या क्रिया में प्रत्यय लगने से जो कृदन्त भाव, गुण, दशा, व्यापार आदि के नाम का बोध कराता है, उसे भाववाचक कृदन्त कहते हैं। जैसे-छापना-छापा, खाँसना-खाँसी।
इसमें ‘आ’ और, ‘ई’ अव्यय से (कृदन्त) भाववाचक संज्ञाएँ बनाई गई हैं।
निम्नम्रकार के प्रत्ययों से भाववाचक कृदन्त संज्ञाएँ बनती हैं – अ, आ, ई, आई, आ, आन, न, ती, आवट, आहट आदि।
लड़ना – लड़ाई; देना-देन; सजना-सजावट; उड़ना-उड़ान; घेरना-घेरा; चढ़ना-चढ़ाई आदि।

(ख) गुणवाचक कृदन्त :- जो कृदन्त प्रत्यय लगाने से गुणवाचक विशेषण का रूप धारण करते हैं, उन्हें गुणवाचक कृदन्त कहते हैं। जैसे-उपजना – उपजाऊ; जड़ना-जड़ाऊ; काँटा-कँटीला आदि।

(ग) क्रियार्थक कृदन्त :- क्रिया के (धातु) के अन्त में ‘ना प्रत्यय जोड़ने से जो कृदन्त बनते हैं, उन्हें क्रियार्थक कहते हैं। जैसे-टहल-टहलना; गान-गाना; पी-पीना आदि।

(घ) वर्तमानकालिक कृदन्त :- वर्तमानकालिक कृदन्त वर्तमान काल की क्रिया के धातु रूप में ‘ता’ प्रत्यय लगाकर बनते हैं। जैसे-चढ़ना-चढ़ता; चलना-चलता; उठना-उठता आदि। कभी-कभी ‘हुआ’ भी लगाकर बनाते हैं। जैसे – बहना – बहता हुआ; उड़ना-उड़ता हुआ आदि।

(ङ) भूतकालिक कृदन्त :- जिन प्रत्ययों के लगने से कृदन्त का भूतकालिक रूप बन जाता है, उन्हें भूतकालिक कृदन्त कहते हैं। जैसे-पढ़-पढ़ा, लिख-लिखा, छू-छुआ, बो-बोया आदि।

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प्रश्न 16.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें :-
(क) अनुषंग शब्द
(ख) निष्पन्न शब्द
(ग) अनुकरणमूलक शब्द
(घ) द्वैत या द्वित् शब्द
(ङ) अपूर्ण क्रियाद्योतक शब्द
(च) पूर्वकालिक क्रिया शब्द
(छ) तात्कालिक शब्द।
उत्तरः
(क) अनुषंग शब्द :- हिन्दी में बहुत से ऐसे शब्द हैं जो ध्वनि के आधार पर बने हैं, इन्हें अनुषंग या ध्वन्यात्मक शब्द भी कहा जाता है। जैसे – टनटन, टपटप, खटखट, फटफट, कलकल आदि। इन्हीं ध्वनियों को हम अपनी रचनावली में अर्थ के अनुसार प्रयोग करते हैं। ये शब्द क्रिया और अन्य रूपों में भी प्रयोग में आते हैं।

(ख) निष्पन्न शब्द :- जो भाषा जितनी शब्द- भंडार से युक्त होती है, वह उतनी ही समृद्धशाली बनती है। धातु और अन्य शब्दों के अन्त में प्रत्यय लगा देने से नये-नये शब्दों की रचना होती है। ये प्रत्यय ही नवीन शब्दों को जन्म देते हैं। हिन्दी में संस्कृत और देशी भाषा के अतिरिक्त फारसी, अरबी, अंग्रेजी, पुर्तगाली आदि प्रत्यय भी शब्दों में जुड़कर नये शब्दों की सृष्टि करते हैं, उन्हें ‘निष्पन्न शब्द’ कहते हैं।

(ग) अनुकरणमूलक शब्द :- हिन्दी में बहुत से ऐसे शब्द हैं जो किसी ध्वनि या आवाज के आधार पर अपने अर्थ को व्यक्त करते हैं, जिन्हें अनुकरणमूलक शब्द कहते हैं। जैसे-कचकच, खटखट, टनटनाना, फड़फड़ाना, भनभनाना, भिनभिनाना आदि। इनके अन्त में प्राय: प्रत्यय लगते हैं।

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(घ) द्वैत या द्वित् शब्द :- कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका उच्चारण हम एक साथ दो बार करते हैं और इस तरह उनके अर्थ भिन्न हो जाते हैं, इन्हें ही शब्द द्वैत’ या ‘द्वित्’ कहते हैं। कभी-कभी ये विपरीत शब्द, द्वन्द्ध समास आदि के रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। जैसे – बार-बार; घर-घर; बात-बात; हाथ-हाथ; साथ-साथ; संग-संग; भीतरभीतर; घन-घन आदि।

(ङ) अपूर्ण क्रियाद्योतक शब्द :- धातु में ए’ जोड़ने से जो शब्द बनते हैं, उन्हें अपूर्ण क्रियाद्योतक शब्द कहते हैं। जैसे-गाना-गाते; घबराना-घबराते आदि।

(च) पूर्वकालिक क्रिया शब्द :- धातु में ‘कर’ जोड़कर बनाए गए शब्द पूर्वकालिक क्रिया शब्द कहलाते हैं। जैसे – पढ़ना-पढ़कर; खाना-खाकर; सोना-सोकर आदि।

(छ) तात्कालिक शब्द :- अपूर्ण क्रियाद्योतक के बाद ‘ही’ जोड़कर बनाए गए शब्दों को तात्कालिक शब्द कहते हैं। जैसे – सोना-सोते ही, चलना-चलते ही, खाना-खाते ही आदि।

प्रश्न 17.
हिन्दी के कृत प्रत्ययों से शब्द-निर्माण करें।
उत्तरः
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ये प्रत्यय सारी धातुओं (क्रियाओं) में लगते है। इन प्रत्यय से बना हुआ अव्यय पूर्व-कालिक कृदन्त कहलाता है। इसका प्रयोग क्रिया-विशेषण के समान तीनों कालों में होता है।

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इस प्रत्यय से अपूर्ण कियाद्योतक कृदन्त बनाए जाते हैं जिनका प्रयोग क्रिया-विशेषण की तरह किया जाता है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 5

[कर (ना) + नी = करनी इसी तरह ऊपर दिए गए और उदाहरणों को समझें।

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यह प्रत्यय सारी क्रियार्थक संज्ञाओं में लगता है और इसके योग से संज्ञा और विशेषण बनते हैं। इस प्रत्यय के लगने से सामान्य क्रिया का ‘आ, ए’ में बदल जाता है। पढ़ना + वाला = पढ़नेवाला।

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प्रश्न 17.
तद्धित प्रत्ययों के योग से संज्ञा, सर्वनाम तथा विशेषण आदि से शब्दों की रचना करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय 8

प्रश्न 18.
ध्वन्यात्मक शब्द किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर समझाएँ
उत्तरः
ध्वन्यात्मक शब्द :- हिन्दी भाषा में विभिन्न ध्वनिमूलक शब्द प्रचलित हैं जिनका प्रयोग किन्हीं विशेष अर्थो में ही किया जाता है। ये ध्वनियाँ विभिन्न पशुओं तथा पक्षियों की होती हैं, अथवा एक प्रकार की अन्य प्राकृतिक उपादानों तथा जड़ वस्तुओं के प्रयोग से जन्म लेती हैं। यथा – चूँ-चूँ करना (चूहा), भिनभिनाना (मक्खी), झंकारना (झींगुर), गरजना (शेर), खनखनाना (चूड़ियाँ)। अन्य वाक्य प्रयोगगत उदाहरण –

  1. उल्लू घुघुआता है।
  2. ऊँट बलबलाता है।
  3. कबूतर गुटरता है।
  4. बकरी मिमियाती है।
  5. झींगुर झनकारता है।
  6. साँप फुफकारता है।
  7. मक्खियाँ भिनभिनाती हैं।
  8. बन्दर दाँत किटकटाते हैं।
  9. मेढक टरटराता है।
  10. साँड़ डकारता है।
  11. मेघ गरजते हैं।
  12. चिता चटचटाती है।
  13. पत्ते खड़खड़ाते हैं।
  14. शस्त्र झनझनाते हैं।
  15. जूता मचमचाता है।
  16. हवा सनसनाती है।
  17. चूड़ियाँ खनखनाती हैं।
  18. रुपये खनखनाते हैं।
  19. कपड़ा फड़फड़ाता है।
  20. बिजली कड़कती है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 19.
आवृत्ति-निर्मित शब्द किसे कहते हैं? वाक्य-प्रयोग द्वारा सोदाहरण समझाएँ।
उत्तरः
जहाँ एक ही शब्द कम से कम दो या उससे अधिक बार आता है, तो उसे आवृत्ति-निर्मित शब्द् कहते हैं।
(क) वह घर-घर घूम रहा है।
(ख) वह दाने-दाने को मोहताज है।
(ग) रेशा-रेशा अलग कर दो।
(घ) रंग-रंग के फूल खिले हैं।
(ङ) बच्चा रोते-रोते सो गया।

प्रश्न 20.
पर्यायवाची शब्दों की द्विरुक्ति के पाँच उदाहरण वाक्य-प्रयोग द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तरः
(क) ज्यादा लाड़-प्यार दिखाने की जरुरत नहीं है।
(ख) वह सीधी-सादी लड़की है।
(ग) माया-मोह छोड़ देने में ही भलाई है।
(घ) ये ऋषि-मुनियों की बातें हैं।
(ङ) रबड़ी-मलाई रोज नहीं मिलती।

प्रश्न 21.
वाक्य-प्रयोग द्वारा विपरीतार्थक शब्द-युग्म के पाँच उदाहरण दें।
उत्तरः
(क) मृत्यु राजा-रंक में भेद नहीं करती।
(ख) हार-जीत तो लगी ही रहती है।
(ग) हमेशा जीवन-मरण की बातें न करें।
(घ) अपना-पराया सोंचना नीच का काम है।
(ङ) बात आस्था-अनास्था की नहीं है।

प्रश्न 22.
भिन्नार्थक शब्द द्वित किसे कहते हैं ? वाक्य प्रयोग द्वारा उदाहरण दें।
उत्तरः
भिन्न-भिन्न अर्थों वाले शब्दों के जोड़े को भिन्नार्थक शब्द द्वित कहते हैं।
वाक्य प्रयोग द्वारा उदाहरण :-
(क) रोने-चिल्लाने से कोई फायदा नहीं।
(ख) तुम्हारी आशा-अभिलाषा पूरी हो।
(ग) वह खा-पीकर सो गया।
(घ) भूकंप में धन-जन की काफी क्षति हुई।
(ङ) घर-गृहस्थी से पीछा कैसे छूटे ?

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(ख) दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1.
तद्धित प्रत्यय से किस प्रकार के शब्द बनते हैं ? विस्तारपूर्वक तथा उदाहरणसहित लिखें।
उत्तरः
तद्धित प्रत्यय से निम्नप्रकार के शब्द बनते है –
(क) कर्तृवाचक संज्ञा
(ख) भावचाचक संज्ञा
(ग) अपत्यवाचक संज्ञा
(घ) उनवाचक संज्ञा
(ङ) करणवाचक संज्ञा
(च) अधिकारवाचक संज्ञा
(छ) वस्त्रवाचक संज्ञा
(ज) स्थानवाचक संज्ञा
(झ) समुदायवाचक संज्ञा
(अ) सम्बन्धवाचक संज्ञा
(ट) गुणवाचक संज्ञा
(ठ) सादृश्यवाचक संज्ञा और
(ङ) पूर्णतावाचक संज्ञा।

(क) कर्तृवाचक संज्ञा – जिन तद्धितान्त शब्दों से कर्ता का बोध होता है, उन्हें तद्धितान्त कर्तृवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – साँप + ऐरा = संपेरा, तेल + ई = तेली आदि।
इसमें एरा, आर, ई, इया, हारा, वाला, ऐत आदि प्रत्यय लगते हैं। दुखिया, लकड़हारा, लठैत, गाड़ीवाला, लोहार, पुजारी, भिखारी आदि।

(ख) भाववाचक संज्ञा – तद्धित प्रत्यय के योग से बने वे शब्द जिनसे भाव, दशा, स्थिति, गुण आदि का बोध होता है, उन्हें भाववाचक संज्ञा (तद्धितांत) कहते हैं। जैसे – बच्चा + पन = बच्चापन, चिकना + आहट = चिकनाहट आदि।
इनमें पा, पन, ता, त्व, आहट, आयत, आई, आ, आका, क, त, य, स आदि प्रत्यय लगते हैं – बचपन, बुढ़ापा, मूर्खता, भलाई, सौन्दर्य, ठंडक, रंगत आदि।

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(ग) अपत्यवाचक संज्ञा – तद्धित प्रत्यय से बनी हुई वे संज्ञाएँ जो वंश, नाम का बोध कराती हैं, उन्हें अपत्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – पाण्डु से पाण्डव, कुन्ती से कौन्तेय आदि।
इसमें ‘अ’, इ, एय’, ई, य आदि प्रत्यय लगते हैं- वसुदेव, कौरव, दाशरथ, गांगेय, दैत्य, द्यानन्दी आदि।

(घ) ऊनवाचक संज्ञा – तद्धित प्रत्यय से बने हुए वे शब्द जो न्यूनता (लघु या छोटा) का बोध कराते हैं, उन्हें ऊनवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – छतरी, चुहिया, खटिया, पहाड़ी आदि। इसमें इइया’, ‘ई’, ‘ओला’, ‘डा’, ‘ली’, री’ आदि प्रत्यय लगते हैं।

(ङ) करणवाचक संज्ञा – जिन संज्ञाओं से करण (साधन) का बोध होता है, उन्हें करणवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – हाथ से हथौड़ा; लेख से लेखनी आदि। इसमें ‘औड़ा’ व ‘नी’ प्रत्यय लगते हैं।

(च) अधिकारवाचक संज्ञा – जिन तद्धितीय संज्ञाओं से अधिकार का बोध होता हैं, उन्हें अधिकारवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – पोलवान, द्वारपाल, दरवान आदि। इनमें ‘वान’ और पाल’ प्रत्यय लगते हैं।

(छ) वस्त्रवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे वस्त्रों का बोघ हो, उन्हें वस्त्रवाचक संज्ञा कहते हैं जैसे – जाँघिया, लँगोटी, अँगोछी आदि। इनमें इया’, ‘ओटी’, और ‘ओछी प्रत्यय लगते हैं।

(ज) स्थानवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे स्थान का बोध होता है, उन्हें स्थानवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – राजस्थान, राजपूताना, ससुराल, ननिहाल आदि।

(झ) समुदायवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे समूह या समुदाय का बोध होता है, उन्हें समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-कागजात, जवाहरात आदि। इसमें ऐरा’, ‘जो’, ‘आल, ‘ओई’ और ‘आन’ प्रत्यय अधिक लगते हैं।

(अ) सम्बन्धवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जो सम्बन्ध बताती हैं, उन्हें सम्बन्धवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे-जेठानी, देवरानी, भतीजा, बहनोई, ननदोई आदि। इसमें ‘एरा’, ‘जो, ‘आल’, ‘ओई’ और ‘आन’ प्रत्यय अधिक लगते हैं।

(ट) गुणवाचक संज्ञा – वे तद्धितीय संज्ञाएँ जिनसे गुण का बोध होता है, उन्हें गुणवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – झगड़ालू, जंगली, बनैला, बाजारू, शीलवंत, रसीला, लाडला, मानसिक, भूखा आदि। इसमें ‘आ’, ‘आलू, ‘इक, ‘ई, ईईला, ‘ऐला’, ‘ला’, ऊ’ और उआ’ प्रत्यय लगते हैं।

(ठ) सादृश्यवाचक संज्ञा – जिस शब्द से सादृश्य का बोध होता है, उसे सादृश्यवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – सुनहरा; मुझसा; काला-सा आदि। इसमें ‘सा’ और ‘हरा आदि प्रत्यय लगते हैं।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण प्रत्यय

(ङ) पूर्णतावाचक संज्ञा – जिस शब्द से पूर्णता का बोध होता है, उसे पूर्णतावाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे – पाँचवाँ, चौथा, दूसरा, तीसरा आदि। इसमें ला’, ‘रा, ‘वाँ, ‘था और ‘ठा आदि प्रत्यय लगते हैं।

प्रश्न 2.
प्रत्यय पृथक कीजिए एवं उनके रूप लिखिए –
उत्तरः
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WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 8 कर चले हम फ़िदा

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions Poem 8 कर चले हम फ़िदा to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – कर चले हम फ़िदा

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : कैफी आज़मी की कविता ‘कर चले हम फ़िदा’ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 2 : ‘कर चले हम फ़िदा’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 3 : ‘कर चले हम फ़िदा’ कविता के माध्यम से कवि ने हमें क्या संदेश देना चाहा है ?
प्रश्न – 4 : ‘कर चले हम फ़िदा’ कविता में कवि वतन को किसके हवाले करना चाहते हैं और क्यों? विस्तार से लिखें।
प्रश्न – 5 : ‘कर चले हम फ़िदा’ कविता में व्यक्त कैफ़ी के विचारों को अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 6 : ‘कर चले हम फ़िदा’ कविता हमें देश की रक्षा करने व उसपर बलिदान होने की प्रेरणा देती है – वर्णन करें।
उत्तर :
साहित्य ही वह आईना है जिसमें हम देख सकते हैं कि कैसे एक खालिस (सच्चा) भारतीय खुद को बिल्कुल अपने तरीके से व्यक्त करता है। ‘कर चले हम फिदा’ जैसी नज़्म केवल उसी के द्वारा लिखी जा सकती है, जों भग्तीय संस्कृति में पृरी तरह रम गया हो – जाति तथा धर्म की आँच जिसे छू भी नहीं पायी हों। अख्कर हुरेन किन्ी गेरे केन आज़मी एसं ही शायर है, जिसमें भारतोय और इस्लामिक तत्व एकाकार हो गए हैं। भारत-चौन युद्ध की पृष्ठभूमि में लिखी गई यह नज़्म राष्ट्रीयता की भावना से आं-प्रोत है

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 8 कर चले हम फ़िदा

वीरगति पाये जवानों के माध्यम से कैफी कहते है कि हमने अपनी जान मातृभूमि की रक्ष के लिए फ़िदा कर दी और अब मैं इसकी रक्षा का भार तुम्हारे ऊपर छोंड़कर जा रहा हूँ। हिमालय की ऊँचाइयों पर मातृभूमि की रक्षा करते-करते वहाँ की हड्डी जमा देने वाली ठंड में हमारी साँसे थम गई, हमारे नब्ज जम गए फिर भी हमने अपने कदम को नहीं रोका। ये कदम आगे बढ़ते ही गए। अगर मातृभूमि की रक्षा के लिए हमने सर भी कटा दिए तो हमें इसका जरा भी गम नहीं है क्योंक हमने हिमालय के सिर को झुकने नहीं दिया। मरते दम तक हमने अपनी वीरता नहीं छोड़ी। अब जब मैं तुमसे, अपनी मातृभूमि से विदा ले रहा हूँ तो इस वतन की रक्षा की जिम्मेवारी तुम्हारे ऊपर छोड़कर जा रहा हूँ।

हमारे जवानों ने सच्चाई को काफी गहराई से महसूस किया कि जीवन में जिंदा रहने के हजारों मौंक आएगें लेकिन मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान दनने के मौके रोज-रोज नहीं आते। जिसमें अपनी भारत की सुंदरता तथा उसके प्रति प्रेम का जज़्बा नहीं है उसकी जवानी बेकार है। जवानी तो वह है जो इन दोनों के लिए अपना खून बहाने को तैयार रहे। हमारी प्यारी धरती प्राकृतिक सौदर्य के प्रसाधनों से दुल्हन की तरह सजी-सँवरी है। इस दुलहन की रक्षा का जिम्मा अब तुम्हारा ही है क्योंकि हम अपनी जान न्योछावर कर इस दुनिया से विदा हों रहे हैं।

हमारे सैनिक कहते हैं कि उन्होंने जिस प्रकार मातृभूाम की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया, अपनेआप को कुर्बान कर दिया – कुर्बानी की यह राह कभी वीरान न हो । यह तुम्हारी जिम्मेवारी है कि कुर्बानी की इस राह में नए-नए काफिले सजाते रहां। अभी तों हमारी जिंदगी मौन से गले मिल रही है – पहले इस गले मिलने का जश्न तो मना लें, जीत का जश्न तो हम बाद में मनातं रहेंगे। हम वतन को अब तुम्हारे हवाले करके इस दुनिया से कूच कर रहा हूँ इसलिए अब इसकी रक्षा की जिम्मेवारी तुम्हारी है। इसकी रक्षा के लिए तुम अपने सर पर कफ़न बाँध लो।

आज हमारी सीमा का अतिकमण करके जो भारत में प्रवेश करना चाहते हैं उन्हें रोकने के लिए सीमा पर अपने खून से एक लकीर खींच दो। कहने का भाव यह है कि तुम्हारे जीते-जी कोई रावण हमारी धरती पर पैर न रखने पाए। हमारी सीतारूपी धरती के आँचल को अगर कोई स्पर्श भी करना चाहे तो तुम उसके हाथ तोड़ डालो। अब तुम्हें ही राम और लक्ष्मण बनकर इस सीता की रक्षा करनी है, रावणों का अंत करना है।

अति लघूत्तरीय/लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘कर चले हम फ़िदा’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
कर चले हम फिदा का अर्ध है कि हमने अपनी जान मातृभूमि की रक्षा के लिए निछावर कर दी।

प्रश्न 2.
सैनिकों को किस बात का गम नहीं है ?
उत्तर :
सैनिकों को अपना सर कटा देने (बलिदान हो जाने) का गम नहीं है।

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प्रश्न 3.
सैनिकों ने किसका सिर झुकने नहीं दिया ? क्यों ?
उत्तर :
सैनिकों ने हिमालय का सिर झुकने नहीं दिया क्योंकि हिमालय हमारा गौरव है, भारत का मुकुट है।

प्रश्न 4.
सैनिक किसको किसके हवाले करने की बात करते हैं ?
उत्तर :
सैनिक अपने वतन को देशवासियों के हवाले करने की बात करते हैं।

प्रश्न 5.
किसके मौसम बहुत हैं ?
उत्तर :
जिंदा रहने के बहुत सारे मौसम (समय) हैं।

प्रश्न 6.
कौन-सी रुत रोज-रोज नहीं आती है ?
उत्तर :
देश के लिए मर-मिटने की रुत रोज-रोज नहीं आती है।

प्रश्न 7.
कवि ने किसे जवानी नहीं कहा है ?
उत्तर :
जो हुस्न और इश्क को रूस्वा करे तथा जो देश के लिए खून में न नहाए उसे कवि ने जवानी नहों कहा है ।

प्रश्न 8.
धरती को किसके समान बताया गया है ?
उत्तर :
धरती को दुल्हन के समान बताया गया है।

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प्रश्न 9.
कवि ने किस राह को वीरान न करने को कहा है ?
उत्तर :
कवि ने कुर्बानी की राह को वीरान न करने को कहा है।

प्रश्न 10.
‘तुम सजाते ही रहना नए काफिले’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
नए काफिले सजाते रहने का अर्थ है कि देश के लिए कुर्बान होनेवालों का काफिला कम नहीं होना चाहिएयह निरंतर बढ़ते ही रहना चाहिए।

प्रश्न 11.
किसकी जिंदगी किससे गले मिल रही है ?
उत्तर :
देश के रक्षक सैनिकों की जिंदगी मौत से गले मिल रही है।

प्रश्न 12.
कवि ने साथियों से अपने सर पर क्या बाँधने को कहा है?
उत्तर :
कवि ने साथियों ने अपने सर पर कफ़न बाँधने को कहा है।

प्रश्न 13.
‘रावण’ से किसकी ओर संकेत किया गया है ?
उत्तर :
रावण से आकमणकारियो की ओर संकेत किया गया है।

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प्रश्न 14.
कवि ने किसके हाथ तोड़ने की बात कही है ?
उत्तर :
कवि ने उन आक्रमणकारियों के हाथ तोड़ने की बात कही है जो हमारी धरती को छूने का भी साहस करे।

प्रश्न 15.
कवि ने साथियों को किसके समान बताया है ?
उत्तर :
कवि ने साधियों को राम और लक्ष्मण के समान बताया है।

प्रश्न 16.
रावण को रोकने के लिए कवि ने क्या कहा है ?
उत्तर :
रावण को रोकने के लिए कवि ने जमीन पर खून से वैसी ही लकीर खींचने को कहा है जिस प्रकार लक्ष्मण ने सीता की रक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा खींची थी।

प्रश्न 17.
‘कर चले हम फ़िदा’ किस प्रकार की कविता है ?
उत्तर :
‘कर चले हम फ़िदा’ देशभक्ति की कविता है।

प्रश्न 18.
‘साँस थमती गई, नब्ज जमती गई’ में कहाँ के वातावरण का वर्णन है ?
उत्तर :
‘साँस थमती गई, नब्ज जमती गई’ में हिमालय के हड्डियों को भी जमा देनेवाली ठंड का वर्णन है।

प्रश्न 19.
हमारे सैनिकों ने मरते-मरते भी अपने किस गुणों को नहीं छोड़ा ?
उत्तर :
देशभक्ति तथा वीरता दो ऐसे गुण है जिन्हें हमारे सैनिकों ने मरते-मरते दम तक नहीं छोड़ा।

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प्रश्न 20.
फतह का जश्न किस जश्न के बाद है ?
उत्तर :
फतह का जश्न कुर्बानी के जश्न के बाद है ।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अखतर हुसैन रिजवी फिल्मी दुनिया में किस नाम से जाने जाते हैं?
(क) शेलेन्द्र
(ख) कैफ़ी
(ग) अख्नर हुसैन
(घ) कैफ़ी आजमी
उत्तर :
(घ) कैफी आज़मी।

प्रश्न 2.
कैफ़ी के ‘आज़मी’ किस स्थान का सूचक है?
(क) आज़गढ़ का
(ख) आजमपुरा का
(ग) आजाममुहल्ला का
(घ) आज़म नगर का
उत्तर :
(क) आज़गढढ का।

प्रश्न 3.
कैफ़ी आज़मी का जन्म किस जिला में हुआ था ?
(क) बलिया
(ख) मेदिनीपुर
(ग) आजमगढ
(घ) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(ग) आजमगढ़।

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प्रश्न 4.
कैफ़ी आज़मी का जन्म किस राज्य में हुआ था?
(क) मध्य प्रदेश
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) छत्तोसगढ
(घ) बिहार
उत्तर :
(ख) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 5.
कैफ़ी आज़मी ने अपनी पहली गज़ल किस उप्र में लिखा ?
(क) 19 वर्ष
(ख) 10 वर्ष
(ग) 11 वर्ष
(घ) 12 वर्ष
उत्तर :
(ग) 11 वर्ष।

प्रश्न 6.
कैफ़ी आज़मी किस विचारधारा से प्रभावित थे?
(क) वामपंधी
(ख) प्रग्गतिवादी
(ग) साम्यवादी
(घ) छायावादी
उत्तर :
(ग) साम्यवादी।

प्रश्न 7.
कैफ़ी आज़मी किस विचारधारा से परेशान थे?
(क) धार्मिक रूढ़िवादिता
(ख) राजनीतिक
(ग) सामाजिक
(घ) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(क) धार्मिक रूढ़िवादिता।

प्रश्न 8.
कैफ़ी आज़मी को किस विचारधारा से अपनी सारी समस्याओं का हल मिल गया ?
(क) प्रगतिवादी
(ख) प्रयोगवादी
(ग) साम्यवादी
(घ) साम्माज्यवादी
उत्तर :
(ग) साम्यवादी।

प्रश्न 9.
कैफ़ी आज़मी ने किसके संदेश के लिए लेखन का लक्ष्य निश्चय किया ?
(क) राजनीतिक संदेश
(ख) सामाजिक संदेश
(ग) आर्थिक संदेश
(घ) धार्मिक संदेश
उत्तर :
(ख) सामाजिक संदेश।

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प्रश्न 10.
कैफ़ी आज़मी ने किस दल की सदस्यता ग्रहण की ?
(क) कांग्रेस
(ख) साम्यवादी
(ग) साम्माज्यवादी
(घ) जनता दल
उत्तर :
(ख) साम्यवादी।

प्रश्न 11.
कैफ़ी आज़मी किस भाषा के शायर थे ?
(क) हिन्दी
(ख) पंजाबी
(ग) उर्दू.
(घ) अरबी
उत्तर :
(ग) उर्दू।

प्रश्न 12.
कैफ़ी आज़मी की शैली क्या है?
(क) गज़ल-नज़्म
(ख) भक्तिगीत
(ग) कहानी
(घ) उपन्यास
उत्तर :
(क) गजल-नज्म।

प्रश्न 13.
कैफ़ी आज़मी ने किस उर्दू अखबार का संपादन किया ?
(क) हिन्दुस्तान
(ख) आजाद हिन्द
(ग) मजदूर मोहल्ला
(घ) सलाम दुनिया
उत्तर :
(ग) मजदूर मोहल्ला।

प्रश्न 14.
कैफ़ी आज़मी की पत्नी का नाम क्या था ?
(क) शाजिया
(ख) शौकत
(ग) शैकत
(घ) शबनम
उत्तर :
(ख) शौकत।

प्रश्न 15.
कैफ़ी आज़मी को किस फिल्म में पहला मौका मिला?
(क) बुजदिल
(ख) हकीकत
(ग) आखिरी खत
(घ) शमा
उत्तर :
(क) बुजदिल।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना कैफ़ी आज़मी की नहीं है?
(क) आवरा सजदे
(ख) इंकार
(ग) आखिरे-शब
(घ) साये में धूप
उत्तर :
(घ) साये में धूप।

प्रश्न 17.
कैफ़ी आज़मी का नया जीवन क्या था ?
(क) अपने लिए जीना है
(ख) केवल अपने परिवार के लिए जीना है
(ग) दूसरों के लिए जीना है
(घ) केवल फिल्मों के लिए जौना है
उत्तर :
(ग) दूसरों के लिए जीना है।

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प्रश्न 18.
कैफ़ी आज़मी के पैतृक गाँव का नाम क्या है ?
(क) मिजवान
(ख) सुपौल
(ग) आजमपुर
(घ) आजमपुरा
उत्तर :
(क) मिजवान।

प्रश्न 19.
कैफ़ी आज़मी की पल्नी उनकी किस बात से प्रभावित थीं ?
(क) लेखन से
(ख) व्यक्तित्व से
(ग) अमीरी से
(घ) राजनीति से
उत्तंर :
(क) लेखन से ।

प्रश्न 20.
कैफ़ी आज़मी को किस वर्ष षद्मश्री से सम्मानित किया गया ?
(क) सन् 1960 में
(ख) सन् 1974 में
(ग) सन् 1990 में
(घ) सन् 1980 में
उत्तर :
(ख) सन् 1974 में ।

प्रश्न 21.
कैफ़ी आज़मी को पद्मश्री के अलावे और कौन-सा पुरस्कार मिला ?
(क) ऊंस्कर अवार्ड
(ख) कबीर सम्मान
(ग) फिल्मफेयर अवार्ड
(घ) लाइफ टाईम एचीव अवार्ई
उत्तर :
(ग) फिल्मफेयर अवाई

प्रश्न 22.
कैफ़ी आज़मी की मृत्यु कब हुई ?
(क) सन् 1999 में
(ख) सन् 2000 में
(ग) सन् 2001 में
(घ) सन् 2002 में
उत्तर :
(घ) सन् 2002 में ।

प्रश्न 23.
‘कर चले हम फ़िदा’ के शायर कौन हैं ?
(क) कैफ़ी आज़मी
(ख) मिर्जा गालीब
(ग) कुमार विश्वास
(घ) गुल्जार
उत्तर :
(क) कैफ़ी आज़मी।

प्रश्न 24.
‘सर कटाना’ का अर्थ है ?
(क) सर कट जाना
(ख) मर जाना
(ग) हत्या करना
(घ) अपने-आपको बलिदान कर देना
उत्तर :
(घ) अपने-आपको बलिदान कर देना।

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प्रश्न 25.
‘सर न झुकने देना’ का अर्थ है ?
(क) सर उठाए रखना
(ख) सर गिरने न देना
(ग) सम्मान को बनाए रखना
(घ) सम्मान करना
उत्तर :
(ग) सम्मान को बनाए रखना ।

प्रश्न 26.
यहाँ किसके सर को न झुकने देने की ब्ञात कही गई है ?
(क) हिमालय के
(ख) देश के
(ग) दुल्हन के
(घ) वतन के
उत्तर :
(क) हिमालय के ।

प्रश्न 27.
किसके रहने के मौसम बहुत हैं ?
(क) मरते रहने के
(ख) जिंदा रहने के
(ग) शत्रु के रहने के
(घ) जान रहने के
उत्तर :
(ख) जिंदा रहने के ।

प्रश्न 28.
घरती की तुलना किससे की गई है ?
(क) युवती से
(ख) दुल्हन से
(ग) खेत से
(घ) वतन से
उत्तर :
(ख) दुल्हन से ।

प्रश्न 29.
किसके वीरान न होने की जात कही गई है ?
(क) राजमार्ग के
(ख) गली के
(ग) कुर्बानी की राह के
(घ) इश्क की राह के
उत्तर :
(ग) कुर्बानी की राह के।

प्रश्न 30.
कवि ने किसे सजाते रहने की बात कही है ?
(क) हिमालय को
(ख) स्वयं को
(ग) दुल्हन को
(घ) काफिले को
उत्तर :
(घ) काफिले को।

प्रश्न 31.
फतह का जश्न किस जश्न के बाद होगा ?
(क) जीत के जश्न
(ख) कुर्बानी के जश्न
(ग) इशक के जश्न
(घ) हुस्न के जश्न
उत्तर :
(ख) कुर्बानी के जश्न

प्रश्न 32.
‘सर पर कफ़न बाँधना’ का अर्थ है ?
(क) सर पर कपड़ा बाँधना
(ख) मर जाना
(ग) मरने के लिए तैयार रहना
(घ) जिंदा न रहना
उत्तर :
(ग) मरने के लिए तैयार रहना ।

प्रश्न 33.
‘रावण’ किसके प्रतीक के रूप में इस कविता में आया है ?
(क) डाकू के
(ख) चोर के
(ग) आक्रमणकारी के
(घ) विद्वान के
उत्तर :
(ग) आक्रमणकारी के।

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प्रश्न 34.
राम और लक्ष्मण किसके प्रतीक है ?
(क) रक्षक
(ख) भक्षक
(ग) आक्रमणकारी
(घ) महान पुरुष
उत्तर :
(क) रक्षक।

प्रश्न 35.
‘जमीं पर लकीर खींचना’ का तात्पर्य है ?
(क) सीमा-रेखा तय कर देना
(ख) जमीन पर निशान लगाना
(ग) लकीर का फकीर होना
(घ) बेकार बैठे रहना
उत्तर :
(क) सीमा-रेखा तय कर देना ।

प्रश्न 36.
‘कर चले हम फ़िदा’ किस रस की कविता है ?
(क) रौद्र रस
(ख) वौर रस
(ग) हास्थ रस
(घ) करुण रस
उत्तर :
(ख) वौर रस ।

प्रश्न 37.
‘कर चले हम फ़िदा’ किस कोटि की रचना है ?
(क) हास्य
(ख) व्यंग्य
(ग) प्रकृति-चित्रण
(घ) देशरक्ति
उत्तर :
(घ) देशारक्ति

प्रश्न 38.
कवि ने किस जवानी को जवानी नहीं कहा है ?
(क) जो इश्क न किया हो
(ख) जो हुस्न का दीवाना न हो
(ग) जिसने मातृभूमि के लिए अपना खून न बहाया हो
(घ) जिसने सबको रूस्वा किया हो
उत्तर :
(ग) जिसने मातृभूमि के लिए अपना खून न बहाया हो।

टिप्पणियाँ

1. हिमालय : प्रस्तुत शब्द कैफी आजमी की कविता ‘कर चले हम हम फ़िदा’ से लिया गया है।
हिमालय भारत का सबसे ऊँचा पर्वत है जो उत्तर में देश की लगभग 2500 कि०मी० लंबी सीमा बनाता है तथा देश को उत्तर एशिया से अलग करता है। कश्मीर से लेकर असम तक इसका विस्तार है।

2. वतन : प्रस्तुत शब्द कैफी आजमी की कविता ‘कर चले हम हम फ़िदा’ से लिया गया है।
जो व्यक्ति जिस वतन (देश) में पैदा होता है उसे वह अपने जान से भी प्यारा होता है। अपने वतन की रक्षा के लिए जो भी कीमत चुकाई जाए वो कम है।

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3. रूत : प्रस्तुत शब्द कैफी आजमी की कविता ‘कर चले हम हम फ़िदा’ से लिया गया है।
रूत अर्थात् समय परिवर्तनशील है। यह किसी का इंतजार नहीं करता। रूत के फेर से आदमी क्या से क्या कर जाता हैसमय के एक

तमाचे की देर है प्यारे
मेरी फकीरी भी क्या, तेरी बादशाही क्या।

4. कफ़न : प्रस्तुत शब्द कैफी आजमी की कविता ‘कर चले हम हम फ़िदा’ से लिया गया है।
मृतक को जिस सफेद कपड़े में लपेटा जाता है उसे कफ़न कहते हैं । कोई दुनिया में कितना ही धन जमा कर ले लेकिन कफ़न सबके लिए एक ही होता है फिर भी आदमी की इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता। कैफी आज़मी ने लिखा है|

इन्साँ की ख्वाहिशों की कोई इन्तिहा नहीं
दो गज जमीं भी चाहिए, दो गज़ कफ़न के बाद।

5. रावण : प्रस्तुत शब्द कैफी आजमी की कविता ‘कर चले हम हम फ़िदा’ से लिया गया है।
लंका का राजा रावण पुलस्त्य का पौत्र और विश्रवा का पुत्र था। इसकी माता का नाम कैकसी था। रावण अवनी वीरता के लिए प्रसिद्ध था लेकिन सीता के स्वयंकर में वह शिव-धनुष को उठा भी न सका। सीता-हरण तथा राम-रावण का युद्ध तो विश्वपसिद्ध है।

पाठ्याधारित व्याकरण

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कवि परिचय 

कैफी आज़मी का मूल नाम अख्तर हुसैन रिज़वी था । इनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटेसे गाँव मिजवां में 14 जनवरी सन् 1919 को हुआ था। गाँव के भोले-भाले माहौल में कविताएँ पढ़ने के शौक ने आगे चलकर इन्हें शायर बना दिया। 11 साल की उम्र में इन्होंने अपनी पहली गज़ल लिखी।

सन् 1936 में साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित होकर इन्होंने साम्यवादी दल की सदस्यता ग्रहण कर ली। साम्यवादी विचारधारा से जुड़कर कैफी आजमी को धार्मिक रूढ़िवादिता से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान मिल गया और उन्होंने यह निश्चय कर लिया कि वे अपनी कलम और कविता का उपयोग सामाजिक संदेश के लिए ही करेंगे।

सन् 1943 में साम्यवादी दल ने बंबई में कार्यालय शुरू किया और उन्हें जिम्मेदारी देकर भेजा। यहाँ आकर कैफी ने उर्दू अखबार ‘मजदूर मोहल्ला’ का संपादन कार्य भी संभालना। यहीं उनकी मुलाकात शौकत से हुई। शौकत आर्थिक रूप से संपत्र तथा साहित्यिक संस्कारोंवाली थीं। उन्हें कैफी के लेखन ने प्रभावित किया। शादी के बाद शौकत ने रिश्ते को इस तरह निभाया कि खेतबाड़ी नामक स्थान में कैफ़ी के साथ ऐसी जगह रहीं जहाँ उन्हें सार्वजनिक शौचालय में जाना पड़ता था। वहीं शबाना और बाबा का जन्म हुआ। शबाना आज़मी हिंदी फिल्मों की मशूहर अभिनेत्री बनीं।

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बाद में कैफ़ी जुहू स्थित बंगले में आए। फिल्मों में मौका ‘बुजदिल’ (1951) से मिला। स्वतंत्र रूप से लेखनकार्य भी चलता रहा। आगे चलकर कैफ़ी ने हकीकत, कागज के फृल, शमा, शोला और शबनम, नकली नवाब, कोहरा, दो दिल, आखिरी खत, अनुपमा, हीर रांझा जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखे।

कैफ़ी की भावुक, रोमांटिक और प्रभावी लेखनी से प्रगति के रास्ते खुलते गए और वे केवल गीतकार ही नहीं बल्कि पटकथाकार के रूप में भी स्थापित हो गए। सादगीपूर्ण व्यक्तित्व वाले कैफी अपने व्यक्तिगत जीवन में काफी हँसमुख थे।

वर्ष 1973 में ब्रेनहैमरेज से लड़ते हुए नया जीवन-दर्शन मिला कि बाकी जिदगी दूसरों के लिए जीना है। अपने गाँव मिजवाँ में कैफी ने स्कूल, अस्पताल, पोस्ट ऑफिस तथा सड़क बनवाने में मदद की । उत्तर प्रदेश सरकार ने सुल्तानपुर से फूलपुर जानेवाली सड़क का नामकरण ‘कैफ़ी मार्ग’ किया। 10 मई 2002 को ‘ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं गुन-गुनाते हुए इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
प्रमुख रचनाएँ : आवारा सज़दे, इंकार, आखिरे-शब आदि।
सम्मान : वर्ष 1974 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री के अलावे कई बार फिल्म फेयर अवार्ड से भी सम्मानित।

ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या

1. कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
साँस थमती गई, नब्ज जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

शब्दार्थ :

  • फ़िदा = न्योछावर ।
  • हवाले = सहारे, जिम्मे ।
  • जानो-तन = शरीर और ग्रणा ।
  • वतन = देश।
  • थमती = रूकती।
  • नब्ज = धड़कन ।
  • जमती गई = कम होती गई ।
  • बाँकपन = बहादुरी, वीरता।

संदर्भ : प्रस्तुत अंश कैफ़ी आज़मी की ‘कर चले हम फ़िदा’ नामक नज़्म (कविता) से लिया गया है। यह कविता भारत-चीन युद्ध में वीरगति पाए सैनिकों की श्रद्धाज्जाल में लिखो गयो थो।

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व्याख्या : कविता की इन पंक्तियों में भारतीय सैनिको की भावनाओं को व्यक्त करने हुए कैफी कहते हैं कि हमने अपने जान मातृरूमि की रक्षा के लिए फ़िदा कर दी और अब मैं इसकी रक्षा का भार तुम्हारे ऊपर छोड़कर जा रहा हूँ। हिमालय की ऊँचाइयों पर मातृभूमि की रक्षा करते-करते वहाँ की हड्दु जमा देने वाली ठंड में हमारी साँसे थम गई, हमारे नब्ज जम गए फिर भी हमने अपने कदम को नहीं रोका। ये कदम आग बढ़ते ही गए। अगर मातृभ्भूमि को रक्षा के लए हमने सर भी कटा दिए तो हमें इसका जरा भी गम नहीं है क्योंकि हमने हिमालय के सिर को झुकने नहीं दिया। मरते दम तक हमने अपनी वीरता नहीं छोड़ी। अब जब मै तुमसे, अपनो मानृभूमि से विदा ल रहा हूं तो इस बत्न की रक्षा की जिम्मेवारी तुम्हारे ऊपर छोड़कर जा रहा हूँ।

विशेष :

1. यह कैफ़ी आज़मी का प्रसिद्ध नज्म है जो भारत-चीन युद्ध के दौरान लिखा गया थां।
2. कवि ने वीरगति पाए सैनिकों के माध्यम से देशवासियों को यह संदेश दिया है कि व अपने कर्ग््य का भलीभांत निभाया, अब बारी देशवासियों की है।
3. हिमालय हमारे गौरव तथा शौर्य के प्रतीक के रूप में आया है।
4. कविता की इन पंक्तियों में कैफी आजमी का ज़ज्बा देश के प्रति स्पष्ट रूप से झलकता है।
5. कविता में उत्साह के साथ करूण रस भी है।
6. भाषा ओजपूर्ण है।

2. जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज आती नहीं
हुस्न और इशक दोनों को रुस्वा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
आज धरती बनी है दुल्हन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

शब्दार्थ :

  • मौसम = अवसर,मौका।
  • रुत = समय।
  • हुस्न = सुंदरता।
  • इश्क = प्रेम ।
  • रस्वा = नाराज।
  • ग्वँ = खृन, लहू।

संदर्भ : प्रस्तुत अंश कैफ़ी आज़मी की ‘कर चले हम फिदा’ नामक नज्म (कविता) से लिया गया है। यह कविता भारत-चौन युद्ध में वीरगति पाए सैनिको की श्रद्धार्जाल में लिखो गयो थी।

व्याख्या : हमारे जवानों ने सच्चाई को काफी गहराई से महसूस किया कि जीवन में जिंदा रहने के हजारों मौंक आएगं लेकिन मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान देने के मौके रोज-रोज नहीं आते। जिसमें अपनी भारत की सुंदरता नथा उसके प्रति प्रेम का जज्बा नही है उसकी जवानी बेकार है। जवानी तो वह है जो इन दानोों के लिए अणना खन बहाने को तैयार रहे। हमारी प्यारी धरती प्राकृतिक सौंदर्य के प्रसाधनों से दुल्हन की तरह सजी-सँवरी है। इस दुल्हन की रक्षा का जिम्मा अब तुम्हारा ही है क्योंकि हम अपनी जान न्योछावर कर इस दुनिया से विदा हो रहे हैं।

विशेष :

1. यह कैफ़ी आज़मी का प्रसिद्ध नज़्म है जो भारत-चीन युद्ध के दौरान लिखा गया था।
2. कवि ने वोरगाति पाए सैनिकों के माध्यम से देशवासियों को यह्ह संदेश दिया है कि वे अपने कर्त्तव्य को भलीभाति निभाया, अब बारी देशवासियों की है।
3. हिमालय हमारे गौरव तथा शौर्य के प्रतीक के रूप में आया है।
4. कविता की इन पंक्तियों में कैफी आज़मी का ज़ज्बा देश के प्रति स्पष्ट रूप से झलकता है ।
5. भारतभूमि की कल्पना दुल्हन रूप में की गई है अत: मानवीकरण अलंकार है।
6. भाषा ओजपूर्ण है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 8 कर चले हम फ़िदा

3. राह कुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नए काफिले
फ़त का जश्न इस जश्न के बाद है
जिंदगी मौत से मिल रही है गले
बाँध लो अपने सर से कफन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साधियों

शब्दार्थ :

  • कुर्बानियों = बलिदानों।
  • वीरान = सूना।
  • काफिले = दल।
  • फ़तह = जीत, विजय।
  • जश्न = खुशी।
  • कफ़न = मृतक कों पहनाया जाने वाला कपड़ा ।

संदर्भ : प्रस्तुत अंश कैफ़ी आज़मी की ‘कर चले हम फ़िदा’ नामक नज़्म (कविता) से लिया गया है। यह कविता भारत-चीन युद्ध में बीरगति पाए सैनिकों की श्रद्धांजलि में लिखी गयी थी।

व्याख्या : हमारे सैनिकों का कहना है कि उन्होंने जिस प्रकार मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया, अपने-आप को कुर्बान कर दिया – कुर्बानी की यह राह कभी वीरान न हो। यह तुम्हारी जिम्मेवारी है कि कुर्बानी की इस राह में नए-नए काफ़िले सजाते रहो। अभी तो हमारी जिंदगी मौत से गले मिल रही है – पहले इस गले मिलने का जश्न तो मना ले, जीत का जश्न तो हम बाद में मनाते रहेंगे। हम वतन को अब तुम्हारे हवाले करके इस दुनिया से कूच कर रहा हूँ इसलिए अब इसकी रक्षा की जिम्मेवारी तुम्हारी है। इसकी रक्षा के लिए तुम अपने सर पर कफ़नन बाँध लो।

विशेष :

1. यह कैफ़ी आज़मी का पसिद्ध नज़्म है जो भारत-चीन युद्ध के दौरान लिखा गया था।
2. काव ने वीरगति पाए सैनिकों के माध्यम से देशवासियों को यह संदेश दिया है कि उन्होंने अपने कर्त्तव्य को भलीभांति निभाया, अब बारी देशबासियों की है।
3. हिमालय हमारे गौरव तथा शौर्य के प्रतीक के रूप में आया है।
4. कविता की इन पंक्तियों में कैफी आज़मी का ज़ज्बा देश के प्रति स्पष्ट रूप से झलकता है ।
5. देश के लिए मर-मिटने की प्रेरणा देशवासियों को दी गई है।
6. भाषा ओजपूर्ण है।

4. खींच दो अपने खूँ से जमीं पर लकीर
इस तरफ आने पाए न रावन कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाए न सीता का दामन कोई
राम भी तुम, तुप्हीं लक्ष्मण साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

शब्दार्थ :

  • रावन = रावण, आततायी।
  • दामन = आँचल ।

संदर्भ : प्रस्तुत अंश कैफ़ी आजमी की ‘कर चले हम फ़िदा’ नामक नज़्म (कविता) से लिया गया है। यह कविता भारत-चीन युद्ध में वोरगति पाए सैनिको की श्रद्धाजलि में लिखी गयी थी।

व्याख्या : आज हमारी सीमा का अतिक्रमण करके जो भारत में प्रवेश करना चाहते हैं उन्हें रोकने के लिए सीमा पर अपने खून से एक लकीर खींच दो। कहने का भाव यह है कि तुम्हारे जीत-जी कोई रावण हमारी ध्रग्ती पर पैर न रखने पाए। हमारी सीतारूपी धरती के आँचल को अगर कोई स्पर्श भी करना चाहे तो तुम उसके हाथ तोड़ डालो। अब तुम्हे ही राम और लक्ष्मण बनकर इस सीता की रक्षा करनी है, रावणों को अंत करना है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 8 कर चले हम फ़िदा

विशेष :

1. यह कैफ़ी आज़मी का प्रसिद्ध नज़्म है जो भारत-चीन युद्ध के दौरान लिखा गया था।
2. कवि ने वीरगति पाए सैनिकों के माध्यम से देशवासियों को यह संदेश दिया है कि उन्होंन अपने कर्तव्य को भलीभांति निभाया, अब बारी देशवासियों की है।
3. हममालय हमारे गौरव तथा शौर्य के प्रतीक के रूप में आया है।
4. कविता की इन पक्तियों में कैफी आजमी का जज्बा देश के प्रति स्पष्ट रूप से झलकता है ।
5. राम लक्ष्मण – सैनिकों के, सीता भारत भूमि तथा रावण-चीन क प्रतीक के रूप में आए है।
6. भाषा ओजपूर्ण है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions Poem 7 यमराज की दिशा to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – यमराज की दिशा

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न – 1 : ‘यमराज की दिशा’ कविता का सारांश लिखें ।
प्रश्न – 2 : ‘यमराज की दिशा’ कविता का मूलभाव अपने शब्दों में लिखें ।
प्रश्न – 3 : ‘यमराज की दिशा’ कविता के माध्यम से चंद्रकांत देवताले ने क्या संदेश देना चाहा है ?
प्रश्न – 4 : ‘यमराज की दिशा’ कविता में व्यक्त विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 5 : ‘यमराज की दिशा’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए ।
प्रश्न – 6 : ‘पर आज जिधर भी पैर करके सोओ
वही दक्षिण दिशा हो जाती है’ – पंक्ति के आधार पर कविता का भाव स्पष्ट करें।
प्रश्न – 7 : ‘यमराज की दिशा’ कविता कविता में मानव-जीवन अपनी विविधता और विडंबनाओं के साथ उपस्थित हुआ है – विवेचना करें।
प्रश्न – 8: कवि के अनुसार माँ द्वारा वर्णित यमराज और आधुनिक यमराज में क्या अंतर है? अपने शब्दों में लिखें ।
उत्तर :
पौराणिक कथाओं को लेकर रचनाओं के सृजन की परंपरा पुरानी रही है। लेकिन चंद्रकांत देवताले उन थोड़े-से कवियों में हैं जिन्होंने पौराणिक कथाओं का प्रयोग आध्धुनिक संदर्भ में किया है। पाठ्य पुस्तक में संकलित यमराज की दिशा’ ऐसी ही कविता है जिसमें यमराज की कथा को आधुनिक समाज की विद्रूपता के साथ जोड़कर देखा गया है।

कवि अपनी माँ को याद करते हुए कहते हैं कि उसकी मुलाकात ईश्वर से हुई थी या नहीं, ठीक से नहीं जानता। लेकन माँ विश्वास से यह बात कहा करती थी कि ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है । ईश्वर समय-समय पर उनका मार्गदर्शन भी करते रहते हैं। उन्हीं के सलाह पर चलकर वह जिदंगी जीने तथा जीने के लिए दु:खों को सहने के रास्ते भी खोज लेती है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

कवि को यह अच्छी तरह याद है कि एक बार माँ ने चेतावनी देते हुए यह कहा था कि दक्षिण दिशा मृत्यु अर्थात् यमराज की दिशा है। कभी भी दक्षिण दिशा की ओर पैर करके नहीं सोना चाहिए । ऐसा करने से यमराज को क्रोध आ जाता है । यमराज को क्रोध दिलाना कोई समझदारी की बात नहीं है।

कवि कहते हैं कि माँ के बार-बार समझाने के बाद वे कभी भी दक्षिण-दिशा की ओर पैर करके नहीं सोए। माँ की इस सीख का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि उन्हें दक्षिण दिशा को पहचानने में कभी भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा । चूँकि कवि ने माँ की सीख का अनुसरण किया, अत: इस दिशा के बारे में उन्होंने जब कभी सोचा, उन्हें माँ की सीख याद आई।

वे अपने जीवन में दक्षिण दिशा में दूर-दूर तक गए । जब-जब वे दक्षिण दिशा में गए उन्हें माँ और माँ की सीख याद आती रही । उन्होंने यह अनुभव किया कि दक्षिण दिशा को लाँध पाना संभव नहीं है। यदि यह संभव होता कि वे दक्षिण दिशा के छोर तक पहुँच पाते तो निश्चय ही यमराज के उस घर को भी देख लेते जिसके बारे में माँ ने बताया था।

माँ आज नहीं है । उन्हें गुज़रे हुए काफी समय बीत चुका है । कवि कहते हैं कि माँ जिस यमराज की दिशा के बारे में जानती थी वह दिशा भी निश्चित नहीं रही । आज हर ओर दक्षिण दिशा है और हर दिशा में यमराज निवास करते हैं। कहने का भाव यह है कि माँ जिस यमराज को जानती थी उसकी जानकारी का आधार धर्म था। आज के यमराज तो वे है जो शोषक, अन्यायी, समाज में विद्रूपता तथा भय फैलाने वाले हैं । इनकी कोई निश्चित दिशा नहीं । ये हरेक दिशा में अपना स्वामित्व जमाए बैठे हैं । जो भी इनकी सीमा मे प्रवेश करना चाहते हैं उन्हें वे अपनी दहकती आँखों से भस्म कर देना चाहते हैं, अपने रास्ते से हटा देना चाहते हैं । यही कारण है कि आज हर दिशा यमराज की दिशा हो गई है ।

अति लघूत्तरीय/लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल क्यों नहीं हुई ?
उत्तर :
माँ ने कवि को बार-बार दक्षिण-दिशा के बारे में, उस दिशा में यमराज के घर होने तथा उस दिशा मे पैर करके सोने के बुरे प्रभाव के बारे में बताया था, इसलिए उसे दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल नहीं हुई।

प्रश्न 2.
कवि ने ऐसा क्यों कहा कि दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था ।
उत्तर :
साधारण अर्थ में दक्षिण दिशा अनंत है, अपार है, इसलिए उसे लाँध लेना संभव नहीं था।
विशेष अर्थ में समाज में जो शोषणकारी हैं उनकी शक्ति असीम है, इसलिए उनकी सीमा को लाँध पाना संभव नहीं है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

प्रश्न 3.
माँ ने एक बार कवि से क्या कहा था ?
उत्तर :
माँ ने एक बार कवि से यह कहा था कि दक्षिण दिशा मृत्यु की दिशा है और यमराज को क्रुद्ध करना कोई बुद्धिमानी की बात नहीं है।

प्रश्न 4.
माँ ने यमराज के घर की क्या दिशा बताई थी ?
उत्तर :
माँ ने यमराज के घर की दिशा बताते हुए कहा था कि तुम जहाँ कहीं भी रहोगे – वहाँ से दक्षिण दिशा में यमराज का घर होगा।

प्रश्न 5.
कवि को कब हमेशा माँ की याद आई ?
उत्तर :
कवि जब कभी दक्षिण दिशा में दूर-दूर तक गये तब-तब उन्हें हमेशा माँ की याद आई।

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार अब यमराज का घर किस दिशा में है ?
उत्तर :
कवि के अनुसार आज सभी दिशाओं में यमराज का घर है ।

प्रश्न 7.
माँ क्या जताती रहती थी ?
उत्तर :
माँ हमेशा यह जताती रहती थी कि ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है।

प्रश्न 8.
कवि की माँ किसकी सलाह से कौन-सी रास्ते खोज लेती थी ?
उत्तर :
कवि की माँ ईश्वर की सलाह से जिन्दगी में जीने और दुःख सहन करने के रास्ते खोज लेती थी ।

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प्रश्न 9.
माँ के समझाने का कवि पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
माँ के समझाने का कवि पर यह असर पड़ा कि वह कभी दक्षिण दिशा में पैर करके नहीं सोया और उसे कभी दक्षिण दिशा पहचानने में मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा।

प्रश्न 10.
माँ के अनुसार कौन-सी बात बुद्धिमानी की नहीं है ?
उत्तर :
माँ के अनुसार यमराज को क्रुद्ध करना बुद्धिमानी की बात नहीं है।

प्रश्न 11.
‘समी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं’ – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल होने का अर्थ है कि आज चारो दिशाओं में शोषणकारी तथा विध्वंशकारी लोग सक्रिय हैं।

प्रश्न 12.
माँ के समय तथा अभी के समय में दक्षिण दिशा में क्या अंतर आया है ?
उत्तर :
माँ के समय में केवल दक्षिण दिश्म में यमराज का घर था लेकिन अब हर दिशा में यमराज का घर हो गया है।

प्रश्न 13.
यमराज को किस बात से कोध आता है ?
उत्तर :
यदि कोई दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोता है तो यमराज को कोध आ जाता है क्योंकि दक्षिण दिशा में यमराज का घर है।

प्रश्न 14.
माँ के अनुसार दक्षिण दिशा किसका प्रतीक था ?
उत्तर :
माँ के अनुसार दक्षिण दिशा मृत्यु का प्रतीक था ।

प्रश्न 15.
कवि की माँ ने किस दिशा को मृत्यु की दिशा कहा था ?
उत्तर :
कवि की माँ ने दक्षिण को मृत्यु की दिशा कहा था ।

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प्रश्न 16.
चंड्रकांत देवताले की कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
उुत्तर :
चंद्रकांत देवताले की कविताओं को सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उत्तर आधुनिकता को भारतीय साहित्यिक सिद्धांत के रूप में न मानने वालो को भी यह स्वीकार करना पड़ता है कि इनकी कविताओं में समकालौन समय की सभी प्रवृत्तियाँ मिलती हैं ।

प्रश्न 17.
चंद्रकांत देवताले की कविता की जडेें कहाँ हैं ?
उत्तर :
चंद्रकांत देवताले की कविता की जड़े गाँव-कस्बों और निम्न-मध्यवर्ग के जीवन मे है।

प्रश्न 18.
चंद्रकांत देवताले की कविताओं की भाषा किस प्रकार की है ?
उत्तर :
चंद्रकात देवताले की कविताओं की भाषा पारदर्शी है तथा उसमें विरल (सुक्ष्य) संगीतात्मकता है।

प्रश्न 19.
‘यमराज की दिशा’ कविता में ‘दहकती आँखों’ शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
उत्तर :
‘यमराज की दिशा’ कविता में दहकती आँखों शब्द् का प्रयोग उन लोगों के लिए हुआ है जो समाज के लोगों के लिए यमराज के समान भयकारी हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
चंद्रकांत देवताले का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1930 में
(ख) सन् 1936 में
(ग) सन् 19409 में
(घ) सन् 1942 में
उत्तर :
(ख) सन् 1936 में।

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प्रश्न 2.
चंद्रकांत देवताले ने उच्च शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
(क) सागर विश्वविद्यालय
(ख) इंदौर
(ग) दिल्ली
(घ) वाराणसी
उत्तर :
(ख) इंदौर ।

प्रश्न 3.
चंद्रकांत देवताले ने पी-एच.डी. की उपाधि किस विश्वविद्यालय से प्राप्त की ?
(क) दिल्ली विश्वविद्यालय
(ख) कुरुक्षेत्र विश्वववद्यालय
(ग) सागर विश्वविद्यालय
(घ) विश्वभारती विश्वविद्यालय
उत्तर :
(ग) सागर विश्वविद्यालय ।

प्रश्न 4.
‘हड्डियों में छिपा ज्वर’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कैफी आजमी
(ख) चंद्रकांत देवताले
(ग) दिनकर
(घ) अरुण कमल
उत्तर :
(ख) चंद्रकांत देवताले ।

प्रश्न 5.
‘दीवारों पर खून से’ किसकी रचना है ?
(क) चंद्रकात देवताले की
(ख) पाश की
(ग) कुँवर नारायण की
(घ) सर्वेश्वरदयाल सवसेना की
उत्तर :
(घ) सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की ।

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प्रश्न 6.
‘लकड़बग्या हैंस रहा है’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) कैफ़ी आजमी
(घ) चंद्रकांत देवताले
उत्तर :
(घ) चंद्रकांत देवताले ।

प्रश्न 7.
‘रोशनी के मैदान की तरफ’ किसकी रचना है ?
(क) चंद्रकांत देवताले की
(ख) दिनकर की
(ग) कैफ़ी आजमी की
(घ) अरणण कमल की
उत्तर :
(घ) अरुण कमल की।

प्रश्न 8.
‘भूखंड तप रहा है’ – के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अरुण कमल
(ख) उषा प्रियंवदा
(ग) चंद्रकांत देवताले
(घ) दिनकर
उत्तर :
(ग) चंद्रकांत देवताले ।

प्रश्न 9.
‘हर चीज आग में बताई गई थी’ किसकी रचना है ?
(क) चंद्रकांत देवताले की
(ख) पाश की
(ग) कुँवर नारायण की
(घ) महांदेवी वर्मा की
उत्तर :
(क) चंद्रकांत देवताले की ।

प्रश्न 10.
‘पत्थर की बेंच’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कुँवर नारायण
(ख) चद्रकांत देवताल
(ग) दिनकर
(घ) पाश
उत्तर :
चंद्रकांत देवताले ।

प्रश्न 11.
‘इतनी पत्थर रोशनी’ किसकी रचना है ?
(क) धर्मवीर भारती की
(ख) प्रमयंद की
(ग) चंद्रकांत देवताले की
(घ) दिनकर की
उत्तर :
(ग) घंद्रकांत देवताले की।

प्रश्न 12.
‘उजाड़ में संग्रहालय’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) अवतार सिंह ‘पाश’
(ग) पाश
(घ) चंद्रकात देवताले
उत्तर :
(घ) चद्रकांत देवताले।

प्रश्न 13.
कवि के लिए क्या कहना मुश्किल है ?
(क) माँ की ईश्वर से मुलाकात के बारे में
(ख) यमराज के बारे में
(ग) दक्षिण दिशा के बारे में
(घ) उत्तर दिशा के बारे में
उत्तर :
(क) माँ की ईश्वर से मुलाकात के बारे में ।

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प्रश्न 14.
माँ की बातचीत किसके साथ होती रहती थी ?
(क) कवि के साथ
(ख) ईश्वर के साथ
(ग) यमराज के साथ
(घ) अपन साथ
उत्तर :
(ख) ईश्वर के साथ।

प्रश्न 15.
दक्षिण को किसकी दिशा बताया गया है ?
(क) यमराज की
(ख) गणेश की
(ग) लक्ष्मी की
(घ) कुबेर की
उत्तर :
(क) यमराज की।

प्रश्न 16.
किसे कुछ्ध करना बुद्धिमानी की बात नहीं ?
(क) माँ को
(ख) ईश्वर को
(ग) यमराज को
(घ) अपन-आप को
उत्तर :
(ग) यमराज को।

प्रश्न 17.
किसने माँ से यमराज के घर का पता पूछा था ?
(क) कवि ने
(ख) पड़ोसी ने
(ग) ईश्वर ने
(घ) पिता ने
उत्तर :
(क) कवि ने ।

प्रश्न 18.
यमराज का घर किस दिशा में बताया गया है ?
(क) उत्तर
(ख) दक्ष्णण
(ग) पूरब
(घ) पश्चिम
उत्तर :
(ख) दक्षिण ।

प्रश्न 19.
कवि दक्षिण दिशा में पैर करके नहीं सोया क्योंकि
(क) ईश्वर प्रसन्न हां जाते
(ख) यमराज क्रुद्ध हो जाते
(ग) माँ गुस्सा करतो
(घ) गंदगी फैली थी
उत्तर :
(ख) यमराज क्रुद्ध हो जाते ।

प्रश्न 20.
कवि को किस बात में कभी मुशिकल का सामना नहीं करना पड़ा ?
(क) उत्तर दिशा पहचानने में
(ख) पूरब दिशा पहचानने में
(ग) दक्षिण दिशा पहचानने में
(घ) पश्चिम दिशा पहधानने में
उत्तर :
(ग) दक्षिण दिशा पहचानने में ।

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प्रश्न 21.
कवि किस दिशा में दूर-दूर तक गया ?
(क) उत्तर
(ख) दक्षिण
(ग) पूरब
(घ) पश्चिम
उत्तर :
(ख) दक्षिण ।

प्रश्न 22.
कवि को दक्षिण दिशा में हमेशा किसकी याद आई ?
(क) यमराज की
(ख) सामान की
(ग) कविता की
(घ) माँ की
उत्तर :
(घ) माँ की।

प्रश्न 23.
आज कौन-सी दिशा दक्षिण हो जाती है ?
(क) पृरब
(ख) पश्चिम
(ग) उत्तर
(घ) सभी दिशाएँ
उत्तर :
(घ) सभी दिशाएँ,

प्रश्न 24.
आज यमराज के आलीशन महल किस दिशा में हैं ?
(क) हर दिशा में
(ख) उत्तर दिशा मे
(ग) पूरब दिशा में
(घ) पश्चिम दिशा में
उत्तर :
(क) हर दिशा में।

प्रश्न 25.
‘समझाइश’ का अर्थ है ?
(क) मेहनत
(ख) समझाना
(ग) डाँटना
(घ) बताना
उत्तर :
(ख) समझाना ।

प्रश्न 26.
चंद्रकांत देवताले को निम्न में से कौन-सा पुरस्कार प्राप्त हुआ ?
(क) माखनलाल चतुवेदी पुरस्कार
(ख) साहित्य अकादमी पुरस्कार
(ग) कबीर सम्मान
(घ) पद्मश्री
उत्तर :
(क) माखनलाल चतुर्वेदो पुरस्कार ।

प्रश्न 27.
चंद्रकांत देवताले को निम्न में से कौन-सा पुरस्कार प्राप्त हुआ ?
(क) शलाका सम्मान
(ख) शिखर सम्मान
(ग) कबीर सम्मान
(घ) पद्म भूषण
उत्तर :
(ख) शिखर सम्मान ।

प्रश्न 28.
निम्न में से कौन-सा पुरस्कार मध्य प्रदेश का है ?
(क) शिखर सम्मान
(ख) पद्म भूषण
(ग) साहित्य अकादमी पुरस्कार
(घ) मंगला प्रसाद पारितोषिक
उत्तर :
(क) शिखर सम्मान

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प्रश्न 29.
चंद्रकांत देवताले की कविता में है ?
(क) छंद
(ख) अलंकार
(ग) व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा
(घ) नारी-सौंदर्य का चित्रण
उत्तर :
(ग) व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा।

टिप्पणियाँ

1. ईश्वर : प्रस्तुत शब्द चंद्रकांत देवताले की कविता ‘यमराज की दिशा’ से लिया गया है।
भारत्तीय दर्शन में ईश्वर शब्द का प्रयोग सृष्टि के रचयिता, पालनकर्ता और सहारकर्ता के लिए होता है । वह सर्वोच्च है, शक्तिमान है और सबकुछ करने में समर्थ है। वह जीवों को उनके कर्म का फल देता है और दुखो से मुक्ति दिलाता है।

2. दक्षिण : प्रस्तुत शब्द चंद्रकांत देवताले की कविता ‘यमराज की दिशा’ से लिया गया है।
दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा बताया गया है । यही कारण है कि पुराणों में दक्षिण दिशा में कुआं, तालाब, मंदिर आदि बनवाने तथा इस दिशा में पैर करके सोने को मना किया गया है।

3. यमराज : प्रस्तुत शब्द चंद्रकांत देवताले की कविता ‘यमराज की दिशा’ से लिया गया है।
पुराणों में यम को मृत्यु का देवता माना गया । इसके दो रूप हैं – यमराज तथा धर्मराज। यमराज के रूप में यह दुष्टों को दंड देकर नरक भेजता है । धर्मराज के रूप में इसका काम धर्मात्मा मनुष्यों को पुरस्कार देना और स्वर्ग भेजना है। यम की नगरीं गमपुरी कहलाती है।

पाठ्याधारित व्याकरण
WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा 1

WBBSE Class 9 Hindi यमराज की दिशा Summary

कवि परिचय 

चंद्रकांत देवताले का जन्म सन् 1936 में मध्य प्रदेश के बैतूल जिला के जौलखेड़ा नामक गाँव में हुआ था । इनकी उच्च शिक्षा इंदौर में हुई । सागर विश्वविद्यालय, सागर से इन्हें पीएच० डी० की उपाधि मिली। पेशे से प्रोफेसर चंद्रकांत देवताले की पह्चान साठोत्तरी हिंदी कविता के प्रमुख कवि के रूप में है ।
WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा 2
चंद्रकांत देवताले की कविता मुख्य रूप से समय की कविता है । इनके आलोचकों को भी यह मानने में कोई दुविधा नहीं है कि आधुनिकता की सभी सर्जनात्मक प्रवृत्तियाँ इनकी कविताओं में दिखाई पड़ती है । आधुनिकता अर्थात् जो समय से आगे हो।

देवताले की कविताओं की जड़ेे गाँव, कस्बों तथा निम्न मध्यवर्गीय लोगों के जीवन में है। यही कारण है कि इनकी कविताओं में मानव-जीवन अपनी संपूर्ण विविधता तथा विडंबनाओं के साथ चित्रित है । एक ओर जहाँ इनकी कविताओं में इस व्यवस्था की कुरूपता के लिए क्रोध है वहीं दूसरी ओर आम आदमी के लिए मानवीय प्रेम भी है । देवताले जो भी कहना चाहते हैं वे सीधे-सीधे तथा लक्ष्य पर चोट करने की तरह कहते हैं इसीलिए इनकी भाषा में पारदर्शिता है, कहीं कोई रहस्यात्मकता नहीं है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

प्रमुख रचनाएँ : हड्डुयों में छिपा ज्वर, दीवारों पर खून से, लकड़बग्धा हँस रहा है, रोशनी के मैदान की तरफ, भूखंड तप रहा है, हर चीज आग में बताई गई थी, पत्थर की बेंच, इतनी पत्थर रोशनी, उजाड़ में संग्रहालय आदि ।
सम्मान : माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, मध्यप्रदेश शासन का शिखर सम्मान ।

ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या

1. माँ की ईश्वर से गल्नाकात हुई या नहीं
कहना मुश्किल है
पर वह जताती थी जैसे
ईश्वर से उसकी बातचीत होती रहती है
और उससे प्राप्त सलाहों के अनुसार
जिन्दगी जीने और दुख वरदाश्त करने के
रास्ते खोज लेती है ।

शब्दार्थ्य :

  • मुलाकात = भंट, मलना ।
  • जतातो = विश्वासपूर्वक कहना ।
  • सलाह = मार्गदर्शन।

संदर्भ : प्रस्तुत पांकितयाँ चंद्रकांत देवताले की कविता ‘यमराज की दिशा’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कविता की इन पंक्तियों में कवि अपनो मॉँ को याद करते हुए कहते हैं कि उसकी मुलाकात ईश्वर से हुई थी या नहों, ठोक से नहीं जानता। लेकिन माँ विश्वास से यह बात कहा करती थी कि ईश्वर से उसकी बातचीत होती गहती है । ईश्वर समय-समय पर उनका मार्गदर्शन भी करते रहते है । उन्ही के सलाह पर चलकर वह जिदगी जीने तथा जोंन के लिए टु खां को सहन के रास्तं भो खांज लंती है ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. चंद्रकात टंबताले की कविता में समय तथा समाज का गहरा सरोकार दिखाई देता है।
2. मो की सीख का अनुसरण करने में परपरा के प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है।
3. कविता में समकालौन व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा झुलकता है।
4. मिथक के प्रसंग का आध्नुनिक प्रसंग में सफलतापूर्वक प्रयांग किया गया है।
5. भाषा पारदर्शी तथा सीधि-सीधि लक्ष्य कों भंदनवाली है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

2. माँ ने एक बार मुझसे कहा था –
दक्षिण मृत्यु की दिशा है
और यमराज को कुद्ध करना
बुद्धिमानी की बात नहीं
तब मैं छोटा था
और मैंने यमराज के घर का पता पूछा था
उसने बताया था –
तुम जहाँ भी हो वहाँ से हमेशा दक्षिण में ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ चं्रकात देवताले की काविता ‘यमराज को दिशा’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कवि को यह अन्छी तरह याद है कि एक वार मां ने चतावनी देते हुए यह कहा था कि दक्षिण दिशा मृत्यु अथान यमराज की दिशा है । क्री भी दक्षिण दिशा को आर पैर करके नहीं सोना चाहिए । ऐसा करने से यमराज को क्रंध आ जाता है। यमराज कों क्रांध दिलाना कोई समझदारी की बात नहीं है ।

यह बात तब की है जब कवि छाटा था । उसने उत्सुकतावश यमराज के घर का पता पूछ लिया। माँ ने यमराज का प्ता ग्रतांत हुए यही कहा कि – तुम जहाँ कही भी रहोगे, वहाँ से जो दक्षण दिशा हांगी, वही यमराज का घर होगा। तब से कवि के मन में यह बात अच्छी तरह सं वैठ गई कि दक्षिण की और पैर करके नहीं सोना है क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज का घर है।

काव्यगत विशेपताएँ :

1. चद्रकात दंवताले की कविता में समय तथा समाज का गहरा सरोकार दिखाई देता है।
2. माँ की सीख का अनुसरण करने में परुपरा के प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है ।
3. कविता में समकालीन व्यवस्था को कुरूपता के खिलाफ गुस्सा इलकता है।
4. मिथक के प्रसंग का आध्रुनिक गसंग में सफलतापूर्वक्क प्रयांग किया गया है।
5. भाषा पारदर्शीं तथा सोधे-सोधे लक्ष्य का भदननवाली हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

3. माँ की समझाइश के बाद
दक्षिण दिशा में पैर करके मैं कभी नहीं सोया
और इससे इतना फायदा जरूर हुआ
दक्षिण दिशा पहचानने में
मुझे कभी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा ।

संदर्भ : प्रस्तुत पक्तियाँ वंद्रकांत देवताले की कविता ‘यमराज की दिशा’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कविता के इस अंश में कवि कहते हैं कि माँ के बार-बार समझाने के बाद वे कभी भी दक्षिण-दिशा की आर पैर करके नहीं सोए। माँ की इस सीख का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि उन्हे दक्षिण दिशा को पहचानने में कभी भी काउनाई का सामना नही करना पड़ा। चूँकि कवि ने माँ की सीख का अनुसरण किया, अतः इस दिशा के बारे में उन्हॉन जब कभी सोचा, उन्हें माँ की सीख याद आई ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. चद्रकात देवताले की कविता में समय तथा समाज का गहरा सरोकार दिखाई देता है ।
2. माँ की सीख का अनुसरण करने में परपरा के प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है।
3. कविता में समकालीन व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा इलकता है।
4. मिथक के प्रसंग का आध्धुनिक प्रसंग में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है ।
5. भाषा पारदर्शी तथा सीधे-सीधे लक्ष्य को भेदनेवाली हैं।

4. मैं दक्षिण में दूर-दूर तक गया
और मुझे हमेशा माँ याद आई
दक्षिण को लाँध लेना सम्भव नहीं था
होता छोर तक पहुँच पाना
तो यमराज का घर देख लेता

शब्दार्थ :

  • लाँध लेना = पार कर लेना ।
  • छोर = किनारा ।

संदर्भ : प्रस्नुत पक्तियाँ चद्रकांत देवताल की कविता ‘यमराज की दिशा’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कवि कहते हैं कि वे अपन जीवन में दक्षिण दिशा में दूर-दूर तक गए । जब-जब वे दक्षिण दिशा में गए उन्हे माँ और माँ की सीख याद आती रही । उन्हाने यह अनुभव किया कि दक्षिण दिशा को लाँध पाना संभव नहीं है । यदि यह संभव होता कि वे दक्षिण दिशा के छोर तक पहुँच पाते तो निश्चय ही यमराज के उस घर को भी देख लेते जिसके बरे में माँ ने बताया था ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. चंद्रकांन देवताल की कविता में समय तथा समाज का गहरा सरोकार दिखाई देता है।
2. माँ की सीख का अनुसरण करने में परपरा क प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है।
3. कविता में समकालीन व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा झलकता है
4. मिथक क प्रसग का आधुनिक प्रसंग में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है ।
5. भाषा पारदर्शी तथा सीधे-सौधे लक्ष्य को भेदनवाली हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 7 यमराज की दिशा

5. पर आज जिधर भी पैर करके सोओ
वही दक्षिण दिशा हो जाती है
सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महलें हैं
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं
माँ अब नहीं है
और यमराज की दिशा भी वह नहीं रही
जो माँ जानती थी ।

शब्दार्थ :

  • आलीशान = भव्य, शानदार ।
  • दहकती = जलती हुई ।
  • विराजते = रहते ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ चंद्रकांत देवताले की कविता ‘यमराज की दिशा’ से ली गई हैं।
व्याख्या : कविता के इस अंतम अंश में कवि कहते हैं कि पहले तो यमराज की दक्षिण दिशा निश्चित थी । लेकिन आज जिधर भी पर करके सांता हूँ, वही दक्षिण दिशा हो जाती है आज यमराज का घर केवल दक्षिण दिशा मे नही सभी

दिशाओं में है । इन आलीशान महलों में रहने वाले यमराज अपनी दहकती हुई आँखों से उन्हें घूरते है जो जो उनकी दिशा में आते हैं|
माँ आज नहीं है । उन्हें गुज़े हुए काफी समय बीत चला है । कवि कहते हैं कि माँ जिस यमराज की दिशा के बारे में जानती थी वह दिशा भी निश्चित नहीं रही। आज हर ओर दक्षिण दिशा है और हर दिशा में यमराज निवास करते हैं।

कहने का भाव यह है कि माँ जिस यमराज को जानती थी उसकी जानकारी का आधार धर्म था। आज के यमराज तो वे हैं जो शोषक, अन्यायी, समाज में विद्रुपता तथा भय फैलाने वाले हैं। इनकी कोई निश्चित दिशा नहीं । ये हरेक दिशा में अपना स्वामित्व जमाए बैठे हैं।जो भी इनकी सीमा में प्रवेश करना चाहते हैं वे अपनी दहकती आँखों से उसे भस्म कर देना चाहते हैं, अपने रास्ते से हटा देना चाहते हैं। यही कारण है कि आज हर दिशा यमराज की दिशा हो गई है ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. चंद्रकांत देवताले की कविता में समय तथा समाज का गहरा सरोंकार दिखाई देता है
2. माँ की सीख का अनुसरण करने में परंपरा के प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है
3. कविता में समकालीन व्यवस्था की कुरूपता के खिलाफ गुस्सा झलकता है
4. मिथक के प्रसंग का आधुनिक प्रसंग में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है।
5. भाषा पारदर्शी तथा सीधे-सीधे लक्ष्य को भेदनेवाली हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 6 सबसे खतरनाक

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions Poem 6 सबसे खतरनाक to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – सबसे खतरनाक

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : ‘सबसे खतरनाक’ कविता का सारांश लिखें।
प्रश्न – 2 : ‘सबसे खतरनाक’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 3 : ‘सबसे खतरनाक’ कविता में निहित संदेश को लिखें।
प्रश्न – 4 : ‘सबसे खतरनाक’ कविता में व्यक्त कवि ने विचारों को अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 5 : ‘सबसे खतरनाक’ कविता में कवि ‘पाश’ ने किन स्थितियों की बात की है तथा उनमें से सबसे खतरनाक स्थिति किसे और क्यों बताया है?
प्रश्न – 6 : ‘सबसे खतरनाक’ कविता में वर्णित खत्तनाक स्थितियों का वर्णन करते हुए इसके उदेश्य को अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
कवि ‘पाश’ पजाबी के उन चंद इने-निने कवियों में से हैं जिन्होंने आम आदमी की पीड़ा तथा उसकी पीड़ा के कारणों को अपनी कविता में आवाज दी है। इनकी कविताओं में आम आदमी का संघर्ष, निराशा, दुख की छायाएँ, अपने समय से टकराने की इच्छा और सपनों के बनने-टूटने की गूज शामिल है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 6 सबसे खतरनाक

कवि ‘पाश’ का कहना है कि किसी भी समाज में रहने वाले व्यक्ति के लिए किसी के द्वारा उसके मेहनत की कमाई लूट लिए जाने या दोषो न होते हुए भी पुलिस का अत्याचार या किसी के द्वारा किए गए विश्वासधात या फिर रिश्वतखोरी का शिकार होना उतना खतरनाक नहीं है। हलाँकि ये सारी स्थितियाँ भी किसी व्यक्ति के लिए खतर नाक हैं लेकिन कवि इन स्थिथियो को उतना खतरनाक नही मानता क्योंकि समाज में इसमें भी बुरी और खतरनाक स्थितियाँ हैं जिसका शिकार आम आदमी को अपने रोजमर्रा के जीवन में होना पड़ता है।

कवि ने सरकारी तंत्र की पोल खोलते हुए कहा है कि आज की स्थिति बड़ी ही भयावह है। अपराधी समाज में खुले आम घूमते हैं लेकिन अपराध पर नियंग्रण तथा अपराधियों के गिरफ्तारी के नाम पर निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता है । लोग भय के कारण सहम कर चुपी ओढ़े रहते हैं । ये स्थितियाँ अच्छी तो नहीं कही जा सकतीं फिर भी काव इन स्थितियों को उतना खतरनाक नहीं मानते वयोंकि समाज में इससे भी खतरनाक स्थितियों को भोगने के लिए लोग विवश हैं।

कवव ने इस सच्याई को करीब से देखा है कि आज के माहौल में सच्याई की आवाज को दबा दिया जाता है क्योंकि कपटी लोगों की आवाज उनसे ऊँची है। ऐसे में सच्चे व्यक्ति को सही होते हुए भी दब जाना पड़ता है। यह स्थिति आज की नहीं है – सदियों से है। कवि रहीम भी इसी स्थिति के शिकार बने थे –

पावस देख रहीम मन, कोयल साधे मौन।
अब तो दादुर बोलिहैं, हमें पूछिहैं कौन ?

जुगनू की ली में पढ़ना इस बात का प्रतीक है कि जो शिक्षा-व्यवस्था आज है, वह रोजी-रोटी देने की बजाय आँखों की रोशनो भी छीन लेती है। यह बुरा तो है लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता क्योंकि हम केवल अपनी मुट्ठियों को भौंचकर, भीतर ही भीतर कोध प्रकट करते हुए किसी भी तरह इस समय को काटते चलें। फिर भी ये स्थितियाँ उतनी खतरनाक नहीं हैं क्योंकि हमे इससे भी खतरनाक स्थितियों को झेलने के लिए विवश होना पडेगा।

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कवि पाश तत्कालौन स्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि अन्याय, छल-कपट, शोषण आदि का बिना विरोध किए, मुर्दे की तरह जीना बाकी स्थितियों से खतरनाक स्थिति है। जिस व्यक्ति में इस व्यवस्था को देखकर कोई बेचैनी नहीं पैदा होती है – वह जिंदा नहीं चलती-फिरती लाश के समान है। रोजी-रोटी कमाने के लिए रोज घर से निकलना और फिर वापस घर लौट आना-यह बंधी-बँधायी जिंदगी तो पशु भी जी लेते है। जबतक हमारे दिल में विरोध की चिगारी नहीं पैदा होगी तबतक यह सबसे खतरनाक स्थिति है। कवि दुष्यंत ने ऐसी ही स्थिति के बारे में सचेत करते हुए लिखा है –

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।

कवि का ऐसा मानना है कि हर हालत में हमें अपने सपने को जिंदा रखना होगा अन्यथा यह सबसे खतरनाक स्थिति होगी। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि तत्कालीन समस्याओं से मुँह मोड़कर उन्हे ज्यों का त्यों सहन न करने का, अपने सपनों को न टूटने देने का संदेश ही ‘पाश’ की इस कविता का लक्ष्य है, उद्देश्य है। कवि को अपने इस प्रयास में पूरीपूरी सफलता मिली है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बैठे-बिठाए पकड़े जाने का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर :
आज की भ्रष्ट नौकरशाही व्यवस्था में पुलिस भी नेता की तरह भ्रष्ट हो चुकी है। आपराधिक मामले की रोकथाम न कर पाने तथा नेताओं के दबाब में वह भी गलत कदम उठाती है। हाय-हल्ला मचने पर वह खाना-पूर्ति के लिए अपराधियों के बजाय आम आदमी को पकड़ लेती है और अपनो सफलता का ढिढोरा पीटती है।

प्रश्न 2.
‘जुगनू की लौ में पढ़ने’ का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
‘जुगनू की लौ मे पढ़ना’ से आज की शिक्षा-व्यवस्था पर घोट की गई है। आज की शिक्षा-व्यवस्था में गरीबों क लिए जगह नहीं है । न तो इसके पास पैसे हैं न ही उम्मीदों के समान अवसर। आम आदमी आँखेे फोड़कर पढ़ने के बाद भी दो वक्त की रोटी के लिए तरसता है। जिस प्रकार जुगनू के प्रकाश से हमारे जीवन में उजाला नहीं आ सकता, उसी प्रकार आज की शिक्षा-व्यवस्था हमारे काम नहीं आ सकतो।

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प्रश्न 3.
सही होते भी दब जाना – का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
आज समाज में भ्रष्टाचारी, बेईमान तथा आपराधिक छविवाले व्यक्तियों का ही बोलबाला है। सच्चा व्यक्ति इनके भय से कुछ बोलने में भी हिचकता है। वह ऐसी शक्तियों के आगे सही होते हुए भी दबने को विवश हो जाता है।

प्रश्न 4.
‘मुर्दा शांति से मर जाना’ का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
जिस प्रकारा मुर्दा संसार से कोई नाता न रखकर शांत रहता है – सही-गलत का कोई असर उसपर नहीं हैंता, ठीक वैसे ही जिस व्यक्ति के सपने मर जाते हैं वह जीवित होते हुए भी मुर्दे की तरह जीता है।

प्रश्न 5.
‘मुद्डियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना-बुरा तो है’ – आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
कवि ‘पाश’ का ऐसा मानता है कि सामने अनाचार अत्याचार को होते देखकर भी उसका विरोध न कर पाना और केवल मुद्दियों को भींचकर रह जाना तो व्यक्ति के लिए बुरा तो है लेकिन यह स्थिति भी उतनी खतरनाक नहीं है ।

प्रश्न 6.
‘न होना तड़प का सब सहन कर जाना’ — से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
सामने सब कुछ गलत होते देखकर भी दिल में किसी प्रकार की बेचैनी का पैदा न होना- यह खतरनाक स्थिति है । अगर आदमी में ऐसी स्थिति में बंचैनी नहीं है तो इसका मतलब यह है कि वह जीते-जी मर चुका है क्योंकि मुरदों में तड़प नहीं होती।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने किन परिस्थितियों को खरतनाक नहीं माना है?
उत्तर :
कवि ने मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी, लोभ, कपट के शोर में सच्चे ईमानदार आदमी की आवाज का दब जाना, बैठे-बिठाए पकड़ा जाना, जुगनू की लौ में पढ़ना, समय को यू ही काट लेने को खतरनाक नहीं माना है।

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प्रश्न 2.
कवि ने सबसे खतरनाक किसे माना है?
उत्तर :
कवि ने जड़ स्थितियों को बदलने की, प्यास के मर जाने और बेहतर भविष्य के सपनो के गुम हो जाने को सबसे खतरनाक स्थिति माना है।

प्रश्न 3.
कवि मेहनत की लूट को सबसे खतरनाक क्यों नहीं मानता?
उत्तर :
अगर कोई हमारे मेहनत को लूट ले जाय तो फिर से उसे मेहनत करके पाया जा सकता है, इसीलिए कवि ने मेहनत की लूट को सबसे खतरनाक नहीं माना है।

प्रश्न 4.
‘पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती’ – का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
पुलिस की थर्ड डिप्री या उसकी मार हमार सपनों को नहीं मार सकती, इसलिए कवि ने पुलिस की मार को सबसे खतरनाक नहीं माना है।

प्रश्न 5.
‘कपट के शोर’ का तात्पर्य स्पष्ट करें ?
उत्तर :
आज की भ्रष्ट व्यवस्था में गलत, छली और धाखेबाजों की आवाज हो सबसे ऊँची है। इसकी आवाज में सच्चे व्यक्ति की आवाज घुटकर रह जाती है। कपट के शोर का तात्पर्य यही है।

प्रश्न 6.
कवि ‘पाश’ की ‘सबसे खरतनाक’ कविता का उद्देश्य क्या है?
उत्तर :
‘सबसे खतरनाक’ कविता के माध्यन से कवि ने हमें यह संदेश देना चाहा है कि बुरी से बुरी खतरनाक परिस्थितियों में भी हम अपने सपने को न मरने दें।

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प्रश्न 7.
कवि ‘पाश’ के कविताओं की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
‘पाश’ की कविताओं में विचार, भाव, संस्कृति और परपरा का गहरा बोध मिलता है। इनकी कविताओं में वह व्यवस्था, निराशा और गुस्सा नजर आता है जो गहरे लगाव के बगैर संभव हो नहीं है।

प्रश्न 8.
‘पाश’ किस कवि का उपनाम है ?
उत्तर :
‘पाश’ करतार सिंह संधू का उपनाम है।

प्रश्न 9.
‘सबसे खतरनाक’ कविता का मूल संदेश क्या है ?
उत्तर :
‘सबसे खतरनाक’ कविता का मूल संदेश उस खौफनाक स्थिति की आर इशारा करना करना है, जहाँ विपरीत परिस्थितयों से जुझने की शबित क्षीण पड़ती जा रहो है।

प्रश्न 10.
कवि ‘पाश’ किन घटनाओं पर ‘आउटसाइडर’ की तरह प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते ?
उत्तर :
कवि ‘पाश’ जन-सामान्य के जीवन में घट रही घटनाओं पर ‘आउटसाडर’ की तरह प्रतितिकया व्यक्त नहीं करते

प्रश्न 11.
‘पाश’ की राजनीतिक कविताओं की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :
अपनी सस्कृति नथा परपरा से गहरा लगाव ही ‘पाश’ की राजनोतिक कविताओं की विशेषताएँ हैं।

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प्रश्न 12.
‘सबसे खतरनाक’ कविता में किसका चित्रण किया गया है ?
उत्तर :
‘सबसं खतरनाक’ कविता में दिनोदिन अधिक कूर होनी जा रही दुनिया की विद्यूपताओं का चित्रण किया गय है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘पाश’ का पूरा नाम क्या है?
(क) करतार सिंह सधू
(ख) सरदार सिंह संधु
(ग) परमजीत सिंह संधू
(घ) सरबजीत सिंह संधू
उत्तर :
(क) करतार सिह संधू।

प्रश्न 2.
‘पाश’ का जन्म किस राज्य में हुआ था?
(क) बिहार
(ख) बंगाल
(ग) पजाव
(घ) गुजरात
उत्तर :
(ग) पंज्ञाय ।

प्रश्न 3.
‘पाश’ के गाँव का नाम है –
(क) बाजारबासा
(ख) अमृतसर
(ग) तलवंडी सलेम
(घ) अबू सलंम
उत्तर :
(ग) तलवंडी सलेम ।

प्रश्न 4.
कवि ‘पाश’ का जन्म कब हुआ था?
(क) सन् 1950 में
(ख) सन 1960 में
(ग) सन 1970 में
(घ) सन् 1940 में
उत्तर :
(क) सन् 1950

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प्रश्न 5.
‘पाश’ मूलतः किस भाषा के कवि हैं ?
(क) हिंदी
(ख) उर्दू
(ग) पंजाबी
(घ) बग्ला
उत्तर :
(ग) पज्जाबी ।

प्रश्न 6.
‘लौह कथा’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) पाश
(ख) वेखव
(ग) दिनकर
(घ) द्विवेदी
उत्तर :
(क) पाश।

प्रश्न 7.
‘उड़दें बाजां मगर’ किसकी रचना है ?
(क) कुँवर नारायण की
(ख) अरुण कमत्न का
(ग) पाश की
(घ) सर्वेश्वर की
उत्तर :
(ग) पाश की।

प्रश्न 8.
‘साड़े सिमिया बिच’ किस भाषा में रचित है ?
(क) उर्दू में
(ख) बंग्ला में
(ग) मराठी ने
(घ) पज्ञाबी म
उत्तर :
(घ) पजाबी में

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प्रश्न 9.
‘लड़ड़ेंगे साथी’ किसकी ग्चना है :
(क) दिनकर की
(ख) धर्मवीर
(ग) शुक देव प्रसाद की
(घ) पाश की
उत्तर :
(घ) पाश की

प्रश्न 10.
‘बीच का रास्ता नहीं होता’ क :
पर क्षान ।
(क) प्रेमचद
(ख) कैफा भाजमा
(ग) पाश
घ्ब अरणा कमल
उत्तर :
(ग) पाश।

प्रश्न  11.
‘लहू है कि तब मी गाता है किस विधा की रचना है ?
(क) कहानं।
(ख) नाटक
(ग) कविता
(घ) उपन्यास
उत्तर :
(ग) कविन्:

प्रश्न 12.
‘साडै सिमिया बिच’ के कवि कौन हैं ?
(क) पाश
(ख) पंत
(ग) पंत
(घ) प्रसाद
उत्तर :
(क) पाश ।

प्रश्न 13.
इन सबमें सबसे खतरनाक है ?
(क) जुगन की लौ में पढ़ना
(ख) सपनों का मर जाना
(ग) मेहनत की लूट
(घ) पुलिस की मार
उत्तर :
(ख) सपनो का मर जाना।

प्रश्न 14.
‘मुर्दा-शांति से भर जाना’ का अर्थ है –
(क) मुर्दा का शांति से मर जाना
(ख) मुर्दा का जाग जाना
(ग) तटस्थ हो जाना
(घ) मुर्दे का उठ बैठना
उत्तर :
(ग) तटस्थ हो जाना।

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प्रश्न 15.
‘मुद्वियाँ भीचकर’ का अर्थ है ?
(क) गुस्सा व्यक्त करना
(ख) मुट्री खोलना
(ग) मुट्री गर्म करना
(घ) मुट्ठी भरना
उत्तर :
(क) गुस्सा व्यक्त करना।

प्रश्न 16.
‘सबसे खतरनाक’ मूलतः किस भाषा की कविता है?
(क) उर्दू
(ख) मराठी
(ग) तेलगू
(घ) पंजाबी
उत्तर :
(घ) पंजाबी।

प्रश्न 17.
‘वक्त निकाल लेना’ का अर्थ है ?
(क) वक्त चुराना
(ख) वक्त को समझना
(ग) वक्त बिता देना
(घ) वक्त पर निकल आना
उत्तर :
(ग) वक्त बिता देना ।

प्रश्न 18.
‘सबसे खतरनाक’ कविता किस वाद की कविता है ?
(क) छायावाद
(ख) प्रयोगवाद
(ग) प्रर्गतिवाद
(घ) नकेनवाद
उत्तर :
(ग) प्रर्गतिवाद ।

प्रश्न 19.
कवि ‘पाश’ पंजाब के किस जिला में पैदा हुए थे ?
(क) जलंधर
(ख) लुधियाना
(ग) अमृतसर
(घ) तरनतारन
उत्तर :
(क) जलंधर ।

प्रश्न 20.
‘बीच का रास्ता नहीं होता’ मूलतः किस भाषा में रचित है ?
(क) मलदालम
(ख) हिन्दी
(ग) पंजाबी
(घ) गुजराती
उत्तर :
(ग) पंजाबी।

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प्रश्न 21.
‘लहू है कि तब भी गाता है’ किस भाषा की कविता है?
(क) पंजाबी
(ख) उर्दू
(ग) ब्रज
(घ) मराठी
उत्तर :
(क) पंजाबी।

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प्रश्न 22.
इनमें के कौन-सी बात सबसे खतरनाक नहीं है ?
(क) किसी जुगनू की लौ में पढ़ना
(ख) मुर्दा शांति से भर जाना
(ग) न होना तड़प का
(घ) सपनों का मर जाना
उत्तर :
(क) किसी जुगनू की लौ में पढ़ना।

टिप्पणियाँ

1. पुलिस : प्रस्तुत शब्द कवि ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से लिया गया है।
लोक प्रशासन को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेवारी पुलिस पर ही होती है। उसका काम लोगों की सुरक्षा करना है लेकिन कभी-कभी वह ऐसे गैर-कानूनी कार्य को अंजाम देती है जिससे लोगों में उसकी छवि धूमिल हो गयी है।

2. लोभ की पुट्ठी :प्रस्तुत शब्द कवि ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से लिया गया है।
लोभ की मुट्री का तात्पर्य रिश्वतखोरी से है। आज पूरा का पूरा भारत रिश्वतखोरो की गिरफ्त में आ चुका है। कार्यालयों में फेले भ्रष्टाचार

के बारे में शायर रहमान ने लिखा है-
मेरी अर्जी बाबू की टेबल तक कैसे जाए
पेपरवेट नहीं, फाइल पर बाबू बैठा है।

3. मुर्दा-शांति : प्रस्तुत शब्द कवि ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से लिया गया है।
जिस व्यक्ति के दिल में अनाचार, अत्याचार तथा गलत को देखकर भी कोई तड़प पैदा न हो उसकी तुलना मुद्राशांति से की गई है। मुर्दा-शांति का तात्पर्य है जीते-जी भावना-शून्य हो जाना।

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4. जुगनू : प्रस्तुत शब्द कवि ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से लिया गया है।
जुगनू एक प्रकार का कीट होता है। उड़ने के समय इसकी दुम से एक तेज रोशनी निकलती है जो रात में काफी आकर्षक लगता है।

5. सपना : प्रस्तुत शब्द कवि ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से लिया गया है।
अक्सर सपना उसे कहा जाता है जो हम रात में सोये हुए अवस्था में देखते हैं। कवि ‘पाश’ के अनुसार सच्चे सपने वे होते हैं जो हम दिन में जगी हुई आँखों से बेखते हैं क्योंकि इसी पर हमारा जीवन निर्भर करता है।

पाठयाधारित व्याकरण

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WBBSE Class 9 Hindi सबसे खतरनाक Summary

कनीवि- परिचिया

9 सितंम्बर सन् 1950 को तलबंडी सलेम, तहसील नकोदर, जिला जालंधर (पंजाब) में जन्मे ‘पाश’ का पूरा नाम अवतार सिंह संधू ‘पाश’ है।
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पाश आधुनिक पंजाबी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इनका परिवार मध्यमवर्गीय किसान परिवार था। इन्होंने गुरू नानकदेव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से स्नातक (बी.ए) किया। विभिन्न जन-आंदोलनों से जुड़े रहने के कारण इनकी कविताओं में विद्रोह का तीखा स्वर सुनाई देता है। इनकी राजनीतिक कविताओं में विचार और भाव के साथ-साथ लोकसंस्कृति और परंपरा में जो व्यथा, निराशा और गुस्सा नज़र आता है, वह आम आदमी से गहरे जुड़ाव के बिना संभव नहीं है।

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‘पाश’ की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं –
लौहकथा, उड़दे बाजां मगर, साडै समिया बिच, लड़ेंगे साथी, बीच का रास्ता नहीं होता, लहू है कि तब भी गाता है।
पंजाबी साहित्य के इस प्रतिनिधि कवि का देहांत मात्र 37 वर्ष की उम्र में 23 मार्च सन् 1988 को हो गया।

ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या

1. मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती
गद्वारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती

शब्दार्थ : गद्दारी = विश्वासघात करना।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ अवतार सिंह संधू ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कविता की इन पंक्तियों में कवि ‘पाश’ का कहना है कि किसी भी समाज में रहने वाले व्यक्ति के लिए किसी के द्वारा उसके मेहनत की कमाई लूट लिए जाने या दोषी न होते हुए भी पुलिस का अत्याचार या किसी के द्वारा किए गए विश्वासघात या फिंर रिश्वतखोरी का शिकार होना उतना खतरनाक नहीं है। हलाँकि ये सारी स्थितियाँ किसी भी व्यक्ति के लिए खतरनाक है लेकिन कवि इन स्थितियों को उतना खतरनाक नहीं मानता क्योंकि समाज में इससे भी बुरी और खतरनाक स्थितियाँ हैं जिसका शिकार आम आदमी को अपने रोजमर्रा के जीवन में होना पड़ता है।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता के प्रस्तुत अंश में कवि ने दिनोंदिन नृशंस और कूर होती जा रही स्थितियों का वर्णन किया है।
2. वर्णित सारी स्थितियाँ खतरनाक तो हैं लेकिन इससे भी बुरी और खरतनाक स्थिथियों का हमें रोजाना सामना करना पड़ता है, इसलिए कवि इन स्थितियों को उतना खतरनाक नहीं मानते हैं।
3. मेहनत की लूट, पुलिस की मार तथा गहारी-लोष की मुट्ठो- जैसे शब्द हमारे समाज की, व्यवस्था की, सरकारी तंत्र की पोल खोलते हैं।
4. वर्तमान व्यवस्था के प्रति विद्रोह का भाव इन पंक्तियो में साफ-साफ झलकता है।
5. भाषा सीधी-सपाट लेकिन गहरी चोट करने वाली है।

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2. बैठे-बिठाए पकड़े जाना-दुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना-बुरी तो है
पर सबसे खतरनाक नहीं होता

शब्दार्थ :

  • बैठे-बिठाए = बेवजह, बिना किसी कास्य के।
  • सहमी-सी चुप = भय से उपजी हुई चुपी।
  • जकड़े जाना = फेंदे में फैस जाना ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंवितयाँ अबतार सिंह संधू ‘षाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से लो गई हैं।

व्याख्या : कवि ने विता की इन पंक्तियों में सरकारी तंन्र की पोल खोलते हुए कहा है कि आज की स्थिति बड़ी ही भयावह है। अपराधी समाज में खुले आ छूयके सीजिय अभराध पर नियंन्रण तथा अपराधियों की गिरफ्तारी के नाम पर निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर लिया आता है। लोग भख्व के कारण सहम कर चुप्पी साधे रहेते है । यं स्थितियाँ अच्छी तो नहीं कही जा सकतीं फिर भी कवि इन स्थितियों के अतना खतरनाक नहीं मानते क्योंकि समाज में इससे भी खतरनाक स्थितियों को भोगने के लिए लोग विवश हैं। इसी स्थिति का चित्रण करते हुए नागार्जुन ने लिखा था –

‘बदूकें ही हुई अभ्ब माध्वम शासन का
गाली ही पर्याय बन गयी है राशन का।’

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता के प्रस्तुत अंश्यें कवि ने दिनोंदिन नृशंस और कूर होती जा रही स्थितियों का वर्णन किया है।
2. वर्णित सारी स्थितियाँ खतर नाक तो हैं लॉकिम इससे धी बुरी और खरतनाक स्थितियों का हमें रोजाना सामना करना पड़ता है, इसलिए कवि इन स्थितियों को उतना खतरनाक नहीं मानते हैं।
3. ‘बैठे-बिठाए पकड़े जाना’ तथा ‘सहतमी-सी धुप में छक्डे जाना’ पुलिसिया खेल का वर्णन करती हैं।
4. वर्तमान व्यवस्था के प्रति विद्रोह का भाव इन पंक्तियों में साफ-साफ झलकता है।
5. भाषा सीधी-सपाट लेकिन गहरी घौट करने काली है।

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3. कपट के शोर में
सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है
किसी जुगनू की लौ में पढ़ना-छुरा तो है
मुद्वियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना-बुरा तो है
सबसे खतरनाक नहीं होता

शब्दार्थ :

  • कपट = छल ।
  • लौ = रोशनी ।
  • भींचकर = कसकर ।
  • वक्त निकाल लेना = समय को बिता लेना ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ अवतार सिंह संधू ‘पाश’ की कविता ‘सबसे खतरनाक’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कविता की इन पंक्तियों में कवि ‘पाश’ का व्यवस्था के प्रति विद्रोह-भाव प्रकट हुआ है।
कवि ने इस सच्चाई को करीब से देखा है कि आज के माहौल में सच्चाई की आवाज को दबा दिया जाता है क्योंक कपटी लोगों की आवाज उनसे ऊँची हैं । ऐसे में सच्चे व्यक्ति को सही होते हुए भी दब जाना पड़ता है। यह स्थिति आज की नहीं है – सदियों से है। कवि रहीम भी इसी स्थिति के शिकार बने थे –

पावस देख रहीम मन, कोयल साधे मौन।
अब तो दादुर बोलिहैं, हमें पूछिहैं कौन ?

जुगनू की लौ में पद्ना इस बात का प्रतीक है कि जो शिक्षा-व्यवस्था आज है, वह रोजी-रोटी देने की बजाय आँखों की रोशनी भी छीन लती है। यह बुरा तो है लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता क्योंकि हम केवल अपनी मुद्वियों को भींचकर, भीतर ही भीतर कोध प्रकट करते हुए किसी भी तरह इस समय को काटते चलें। फिर भी ये स्थितियाँ उतनी खतरबाक नहीं हैं क्योंकि हमें इससे भी अधिक खतरनाक स्थितियों को झेलने के लिए विवश होना पड़ेगा।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता के प्रस्तुत अंश में कवि ने दिनोंदिन नृशंस और कूर होती जा रही स्थितियों का वर्णन किया है।
2. वर्णित सारी स्थितियाँ खतरनाक तो हैं लेकिन इससे भी बुरी और खरतनाक स्थितियों से हमें रोजाना दो चार होना पड़ता है, इसलिए कवि इन स्थितियों को उतना खतरनाक नहीं मांनते हैं।
3. ‘कपट के शोर में दब जाना’ सच्चे व्यक्ति की दयनीय स्थिति को दर्शाता है।
4. ‘जुगनू की लौ में पढ़ना’ हमारी शिक्षा-व्यवस्था की ओर संकेक्ष करता है जिसके बारे में भारतेंदु ने भी लिखा थाआँखें फूटीं भरा न पेट क्यों सखी साजन नहिं ग्रेजुएट।
5. वर्तमान व्यवस्था के प्रति विद्रोह का भाव इन पंक्तियों मे साफ-साफ झलकता है।
6. भाषा सीधी-सपाट लेकिन गहरी चोट करने वाली है।

4. सबसे खतरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
न होना तड़प का सब सहन कर जाना
घ० से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना।।

शब्दार्श्थ :

  • मुद्वा शार्त = निष्किय, बिना किसी विरोध के ।
  • तड़प = बेचैनी ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंद्तथां अवतार सिंदू संधू ‘पाश’ की कवित्ता ‘सबसे खतरनाक’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कवि पाश तत्कालीन स्थितियों का चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि अन्याय, छल-कपट, शोषण आदि का विना विरोध किए, मुर्दें की तरह जीना बाकी स्थितियों से खतरमाक स्थिति है। जिस व्यक्ति में इस व्यवस्था को देखकर कोई बैचैनी नहीं पैदा होती है – वह जिदा नहीं चलती-फिरती लाश के समान है। रोजी-रोटी कमाने के लिए रोज घर से निकलना और फिर वापस घर लौट आना-यह बंधी-बँधायी जिंदगी तो पशु भी जी लेते हैं। जबतक हमारे दिल में विरोध की चिगारी नहीं पैदा होगी तबतक यह सबसे खतरनाक स्थिति है। कवि दुष्यंत ने ऐसी ही स्थिति के बारे में सचेत करते हुए लिखा है –

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मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता के प्रस्तुत अंश में कवि ने दिनोदिन नृशंस और कूर होती जा रही स्थितियों का वर्णन किया है।
2. वर्णित सारी स्थितियाँ खतरनाक तो हैं लेकिन इससे भी बुरी और खतरनाक स्थितियों से हमें रोजाना दो-चार होना पड़ता है, इसलिए काव इन स्थितियों को उतना खतरनाक नहीं मानते हैं।
3. पाश ने विरोध न करने को सबसे खतरनाक स्थिति माना है।
4. वर्तमान व्यवस्था के प्रति विद्रोह का भाव इन पंक्तियों में साफ-साफ झलकता है।
5. भाषा सीधी-सपाट लेकिन गहरो चोट करने वाली है।

 

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions and व्याकरण उपसर्ग to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 1.
उपसर्ग से क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तरः
वे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व अथवा पहले लगकर उस शब्द का अर्थ बदल देते हैं अथवा उसमें नई विशेषता पैदा कर देते है।
अथवा
लघुतम सार्थक शब्द-खंड जो अन्य शब्दों के आदि में जुड़कर उनका अर्थ बदल देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। शब्द के पूर्व जो अक्षर या अक्षर समूह लगाया जाता है उसे उपसर्ग कहते हैं।

जैसे – सु + पुत्र = सुपुत्र। यहाँ ‘सु शब्दांश ‘पुत्र शब्द के साथ जुड़कर नये शब्द का निर्माण करता है। ‘सु’ शब्दांश है शब्द नहीं है। शब्द वाक्य में

स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त हो सकता है, शब्दांश नहीं। शब्दांश तो केवल किसी शब्द से जुड़कर ही नए शब्द या अर्थ की रचना में सहायक होता है। जो शब्दांश शब्द से पूर्व लगता उसे उपसर्ग कहते हैं।

उपसर्ग की उपर्युक्त परिभाषा में तीन बातें सषष्ट हैं-

उपसर्ग सार्थक खंड होते हैं।

वे शब्द-खंड अपने आप में अपूर्ण होते हैं, अतः उनका स्वतंत्र प्रयोग नहीं हो सकता, किसी अन्य शब्द के साथ जुड़ने पर ही वाक्य में उनका प्रयोग होता है।

उपसर्ग किसी शब्द के आदि (आरंभ) में जुड़ते हैं और जिस शब्द के आदि में जुड़ते हैं, उसका मूल अर्थ बदल जाता है, अर्थात् एक नये शब्द की रचना अथवा निर्माण हो जाता है। जैसे-‘हार’ एक शब्द है जिसके सामान्यतः दो अर्थ पराजय’ और गले की माला’ लिए जा सकते हैं, किंतु उपसर्गों के योग से ‘हार’ से अनेक नए शब्दों की रचना हो जाएगी अथवा यह भी कह सकते हैं कि अलग-अलग उपसर्ग उसे अनेक अर्थ प्रदान करेंगे। उदाहरणार्थ-

आ + हार = आहार
प्र + हार = प्रहार
वि + हार = विहार
नि + हार = निहार
उप + हार = उपहार
सम् + हार = संहार

उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि इन शब्दों में आ, वि, उप, प्र, नि तथा सम् उपसर्ग हैं। इन सभी उपसर्गों में ‘हार’ शब्द के जुड़ने से अनेक शब्दों की रचना होती है।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 2.
उपसर्ग शब्द में लगकर क्या-क्या करता है ?
उत्तरः
उपसर्ग शब्द के प्रारंभ में लगकर उनमें निम्नांकित परिवर्तन ला देता है-

  1. उपसर्ग जोड़ने से नये-नये शब्दों की उत्पत्ति होती है।
  2. ये शब्द का अर्थ बदल देते हैं।
  3. उपसर्ग लगने से कभी-कभी तो मूल अर्थ में बिल्कुल परिवर्तन नहीं होता और कभी-कभी परिवर्तन भी होता है।
  4. कभी-कभी उपसर्ग शब्दार्थ में विशेषता ला देते हैं।
  5. उपसर्ग के प्रयोग से कभी-कभी शब्द का अर्थ अपने मूल अर्थ के प्रतिकूल हो जाता है।

प्रश्न 3.
हिन्दी भाषा में शब्द रचना के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपसर्ग कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तरः
हिन्दी भाषा में शब्द रचना के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपसर्ग तीन प्रकार के हैं –

  • तत्सम् (संस्कृत के उपसर्ग)
  • तद्भव (हिन्दी के उपसर्ग)
  • आगत या विदेशी (विदेशी भाषाओं के उपसर्ग)

प्रश्न 4.
उपसर्ग से जुड़े विशेष तथ्यों को लिखें।
उत्तरः
उपसर्ग से जुड़े विशेष तथ्य इस प्रकार हैं :-

1. एक उपसर्ग का एक ही अर्थ नहीं होता। एक ही उपसर्ग एक से अधिक, भिन्न अथवा कभी-कभी बिल्कुल विपरीत अर्थ भी प्रदान करता है। जैसे-‘नि’ उपसर्ग निषेध (नि + यम) भी बनाता है। ‘वि’ विशिष्ट (वि + शिष्ट) और वियोग (वि + योग) दोनों ही बनाता है।
2. तत्सम उपसर्गों में कुछ उपसर्ग ऐसे हैं जो अर्थ तो समान देते हैं, किंतु उनके रूप भिन्न होते हैं। दुर, दुस,, दुष, निर, निस्, नि, ष, इ, त, छ से बनने वाले क्रमशः दुर्भाग्य, दुस्साहस, दुष्काम, निर्जन, उत्थान और उच्छ्वास शब्द उदाहरण रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
3. आवश्यक नहीं कि तत्सम, तद्भव या विदेशी उपसर्ग उसी कोटि के शब्दों के साथ प्रयुक्त हों। जैसे-‘अप’ तत्सम उपसर्ग ‘अपयश’ में भी है और ‘अपजस’ में भी है। इसी प्रकार तद्भव उपसर्ग अन ‘अनज़ान’ में भी है, और ‘अनवध’ में भी है।
4. उपसर्ग से युक्त किसी शब्द की व्याकरणिक कोटि बदलती है और किसी की नहीं। जैसे –
अन + पढ़ = अनपढ़। अ + ज्ञात = अज्ञात। अ + थाह = अथाह।

यहाँ पढ़, ज्ञात और थाह की व्याकरणिक कोटि में अंतर आ गया है , किंतु अन + होनी = अनहोनी, भर + पूर = भरपूर, भर + मार = भरमार की व्याकरणिक कोटि में कोई अंतर नहीं आएगा।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 5.
उपसर्ग लगाकर शब्द-निर्माण करते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए ?
उत्तरः
उपसर्ग लगाकर शब्द-निर्माण करते समय निम्न बातों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए-
1. प्राय: जिस प्रकार का शब्द है उसी प्रकार का उपसर्ग उस शब्द के साथ लगाना चाहिए, जैसे-तत्सम शब्द के साथ तत्सम उपसर्ग, तद्भव शब्द के साथ तद्भव उपसर्ग तथा विदेशी शब्द के साथ विदेशी उपसर्ग। जैसे-‘सु’ तत्सम उपसर्ग है यह तत्सम शब्द ‘पुत्र के साथ लगकर सुपुत्र बनता है किंतु, पूत’ (तद्भव) के साथ ‘सुपूत’ नहीं।
2. कभी-कभी जब कुछ उपसर्ग भाषा में बहुप्रचलित हो जाते हैं या कभी-कभी साहित्यकार नये-नये प्रयोग करने लगते हैं, तब भिन्न स्रोत के शब्दों के साथ भी प्रयुक्त हो जाते हैं जैस-बेजोड़, अथाह आदि।
3. एक उपसर्ग एक से अधिक अर्थों में भी प्रयुक्त हो सकता है।
4. संस्कृत के निषेधवाची ‘अन् उपसर्ग का रूप हिन्दी में ‘अन’ के रूप में परिवर्तित हो जाता है, जैसे-अनदेखा, अनजाना, अनकहा, अनसुना।
5. उपसर्ग जोड़ते समय संधि-नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए।
6. मूल शब्द के आरंभ के आआ स्वर को नहीं बदलना चाहिए। जैसे-आधारित को अधारित’ नहीं बना देना चाहिए।
7. ध्वनि परिवर्तनों में कहीं एक जगह तो कहीं दो जगह वृद्धि होती है। जैसे-मधुर शब्द को माधुरी बनाने के लिए केवल म + आ = ‘मा’ एक वृद्धि होकर ‘माधुरी’ शब्द बन जाएगा। किंतु परलोक’ को पारलौकिक’ बनाने के लिए प’ के स्थान पर पा’ तथा ‘लो’ के स्थान पर ‘लौ’ हो जाएगा, तब ‘पारलौकिक’ शब्द बनेगा।

प्रश्न 6.
हिन्दी में प्रयुक्त तत्सम् उपसर्ग किस भाषा से आए हैं ? संस्कृत में कितने उपसर्ग हैं? हिन्दी में प्रयुक्त तत्सम् उपसर्गों के अर्थ लिखते हुए उनसे शब्द-रचना करें।
उत्तरः
हिन्दी में प्रयुक्त तत्सम उपसर्ग संस्कृत से आए हैं। संस्कृत में बाईस उपसर्ग हैं। इन उपसर्गों से बने अनेक शब्द हमें हिन्दी में मिलते हैं। हिन्दी में प्रयुक्त संस्कृत उपसर्ग निम्नलिखित हैं –

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प्रश्न 7.
संस्कृत के ऐसे उपसर्गों से शब्द-रचना करें जो प्राय: समास रचना के पहले भाग में आते थे लेकिन अब उनका प्रयोग हिन्दी में उपसर्गों की तरह होने लगे हैं। इन उपसर्गों के अर्थ भी लिखें।
उत्तरः
अंतः/अंतर (भीतर के अर्थ में) :- अन्त:करण, अंतर्जातीय, अंतर्मन, अंतर्देशीय, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्मुखी, अंतर्धान, अंतः करण, अंतःपुर।
अ (अभाव) :- अज्ञान, अविद्या, अभाव, अकाल, अबाध, असाध्य, अधर्म, अहिंसा, अचर, अगम्य, अन्याय, असुन्दर।
अधः (नीचे के अर्थ में) :- अधः पतन, अधाराति, अधोलिखित, अधोमुखी, अधोपतन, अधस्थल।
अन् (अभाव) :- अनुपम, अनर्थ, अनायास, अनादि, अनेक, अनुचित, अनन्त, अनाचार, अनागत, अनिच्छा।
अलम् (बहुत) :- अलंकार, अलंकरण।
कु (बुरा) :- कुकर्म, कुपुत्र, कुरूप, कुयोग, कुपात्र, कुकृत्य, कुख्यात, कुलक्षण, कुमत, कुभाव।
चिर (बहुत देर) :-चिरायु, चिरजीवी, चिरपरिचित, चिरकाल, चिरकुमार, चिरस्थायी, चिरंजीव।
तिरस्/तिर: (निपेध) :- तिरोंभाव, तिरोहित, तिरस्कार।
पर (अन्य) :- परदेश, परलोक, पराधीन, परमुखापेक्षी।
पुनर (फिर) :- पुनर्विवाह, पुनर्जागरण, पुनरागमन, पुनर्मिलन, पुनर्जन्म, पुनरुत्थान, पुनर्निर्माण, पुनरावृत्ति, पुनर्भ, पुनरकाक्ति, पुनर्नवा, पुनर्कथन।
पुरस् (सामने) :- पुरस्कार, पुरस्कर्ता।
पुरा (पहले) :- पुराकाल, पुरातत्व, पुरातन, पुरावृत्त।
प्राक्/प्राग (पहले) :- प्राक्कथन, प्रागैतिहासिक, प्राग्वैदिक।
प्रादुर (प्रकट होना) :- प्रादुर्भाव, प्रादुर्भूत।
बहिस/बहिर (बाहर) :- बहिष्कार, बहिर्मुखी, बहिरंग, बहिर्गमन।
सत् (सच्चा) :- सत्पुरुष, सद्गति, सदाचार, समकोण, सत्कर्म, सज्जन, सत्संग, सद्भावना।
सम (समान) :- समकोण, समकालीन, समकालिक।
सह (साथ) :- सहचर, सहपाठी, सहर्मति, सहगान, सहोदर, सहकारिता।
स्व (अपना) :- स्वराज्य, स्वजन, स्वचालित, स्वतंत्र, स्वदेश, स्वभाव।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 8.
तद्भव उपसर्ग से आप क्या समझते हैं ?
उत्तरः
नद्भव उपसर्ग वे हैं जो तत्सम उपसर्गो से ही विकसित हुए हैं, लेकिन हिन्दी तक आते-आते इनका रूप परिवर्तित हों गया है। इसीलिए इन्हें हिन्दी उपसर्ग भी कहा जाता है।
तद्भव उपसर्ग मुख्यत: अभाव, निषध, संख्या, अच्छाई, बुराई, पूर्णता आदि का अर्थ लिए होते हैं।
उदाहरण :-अनहांनी, अनपढ़, कपूत, कुचाल, अधपका, चौपाया आदि।

प्रश्न 9.
निम्नांकित तद्भव उपसर्गों से शब्द-रचना करें :- अ, अन, उन, औ, क, कु, नि, पर, स, सु, अध, दु, बिन, भर, चौ।
उत्तरः
अ/अन-अभाव, निषेध :- अनहोनी, अनपढ़, अनजान, अछूत, अथाह, अनबन, अचेत, अनमोल, अलग, अटल, अभागा, अपढ़, अमोल, अजर, अनसुनी, अनकहा, अनबोला।
उन-कम :- उनचास, उनसठ, उनहत्तर, उनतालीस।
औ :- औगुन, औघट, औतार।
क/कु-बुरा :- कपूत, कुचाल, कुढंग, कुलक्षण, कुरूप।
नि-रहित :- निडर, निपूता, निहत्था, निकम्मा, निधड़का।
पर-परदादा, परनाना, परपोता
स/सु-अच्छा :- सुजान. सुडौल, सुघड़, सपूत, सहित, सुफल, सचेत, सकाम।
अध-आधा :- अधकचरा, अधपका, अधजला, अधमरा।
दु :- दुलारा, दुसाध्य, दुधारू, दुबला।
बिन-बिना :- बिनब्याही, बिनमाँगे, बिनजाने, बिनखाये।
भर-पूरा :- भरपेट, भरसक, भरपूर, भरमार।
चौ-चार :- चौपाई, चौमासा, चौराहा, चौकन्ना, चौपाया।

प्रश्न 10.
आगत या विदेशी उपसर्ग किसे कहते हैं ?
उत्तरः
वे उपसर्ग जो विदेशी भाषाओं से हिन्दी में आए हैं, उन्हें आगत या विदेशी उपसर्ग कहते हैं। ब, बा, बे, बद, खुश, ना, गैर, ला, सब, हाफ, डिप्टी आदि विदेशी उपसर्ग हैं।

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प्रश्न 11.
निम्नलिखित अरबी-फारसी के उपसर्गों के अर्थ लिखकर शब्द-रचना करें :-ब, बा, बे, बढ़, खुश, ना, गैर, ला, हम, हर, कम, दर, सर।
उत्तरः
ब-के साथ’, ‘स’-बगैर, बदौलत, बखूबी, बनाम।
बा-साथ’ से-बाकायदा, बाअदब, बावजूद।
बे – बिना’ बेघर, बेहोश, बेसमझ, बेईमान, बेवफा, बेरहम, बेगुनाह, बेअदब, बेखटके, बेदाग, बेबुनियाद, बेइज्जत, बेकसूर।
बद-बुरा-बदनाम, बदमाश, बदचलन, बदतमीज, बदसूरत, बदहज़मी, बदकिस्मत, बदबू।
खुश-अच्छा-खुशकिस्मत, खुशहाल, खुशनसीब, खुरमिजाज, खुशदिल।
ना-अभाव-नालायक, नाकाराज, नाराज़, नासमझ, नाउम्मीद, नाबालिग, नापसंद, नाचीज़।
गैर-भिन्न-गैरहाज़िर, गैरसरकारी, गैरजरूरी, गैरज़िम्मेदारी, गैरकानूनी।
ला-नहीं, अभाव-लाजवाब, लाइलाज, लापरवाह, लावारिस, लापता।
हम-आपस में, साथ-हमउम्न, हमजोली, हमवतन, हमसफ़, हमनाम, हमशक्ल, हमराह, हमराज।
हर-प्रत्येक-हरवक्त, हरदिल, हरहाल, हररोज़, हरघड़ी, हरतरफ, हरएक।
कम-थोड़ा-कमसमझ, कमबख़, कमअक्ल, कमजोर, कमउम्र।
दर-में-दरगुजर, दरअसल, दरमियान, दरकार।
सर – मुख्य – सरपंच, सरताज।

प्रश्न 12.
उन शब्दों को लिखे जिनके निर्माण में एक से अधिक उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है।
उत्तरः
वे शब्द निम्नांकित हैं जिनके निर्माण में एक से अधिक उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है :
असुरक्षित = अ + सु + रक्षित
समाचार = सम् + आ + चार
समालोचना = सम् + आ + लोचना
सुसंगठित = सु + सम् + गठित
पर्यावरण = परि + आ + वरण
व्याकरण = वि + आ + करण
निराकरण = नि + आ + करण
प्रत्याघात = प्रति + आ + घात
निरभिमानी = निर + अभि + मानी
अनासक्ति = अन् + आ + सक्ति
अत्याचार = अति + आ + चार
अण्रत्यक्ष = अ + प्रति + अक्ष
अनियंत्रित = अ + नि + यन्त्रित
अप्रत्याशित = अ + प्रति + आशित
प्रत्युपकार = प्रति + उप + कार
प्रत्यालोचना = प्रति + आ + लोचना
निरभिमानी = निर + अभि + मानी

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 13.
इन अंग्रेजी के उपसर्गों से दो-दो शब्द-निर्माण करें :- डिप्टी, सब, हेड।
उत्तरः
डिप्टी – डिप्टी इस्पेक्टर, डिप्टी कलेक्टर।
सब – सबजज, सबइन्सपेक्टर।
हेड – हेडमास्टर, हेडक्लर्क।

प्रश्न 14.
उन शब्दों को उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत करें जिनके निर्माण में एक से अधिक उपसर्गों का प्रयोग होता है।
उत्तरः
वे शब्द निम्नांकित हैं, जिनके निर्माण में एक से अधिक उपसर्गों का प्रयोग होता है –
समालोचना = सम् + आ + लोचना
व्याकरण = वि + आ + करण
अप्रत्याशित = अ + प्रति + आशित
निराकरण = नि: + आ + करण
सुसंगठित = सु + सम्+ गठित
प्रत्याघात = प्रति + आ + घात
अप्रत्यक्ष = अ + प्रति + अक्ष
अनियंत्रित = अ + नि + यंत्रित
पर्यावरण = परि + आ + वरण
दुर्व्यवहार = दुर + वि + अव + हार
प्रत्यालोचना = प्रति + आ + लोचना
प्रत्युपकार = प्रति + उप + कार
समाचार = सम + आ + चार
अनासक्ति = अन् + आ + सक्ति।
निरभिमानी = निर + अभि + मानी
असुरक्षित = अ + सु + रक्षित

प्रश्न 15.
हिन्दी शब्दों की रचना मुख्यत: कितने प्रकार से होती है ?
उत्तरः
हिन्दी शब्दों की रचना मुख्यत: पाँच प्रकार से होती है। जैसे-

  • उपसर्ग जोड़कर – अध + पका = अधपका।
  • प्रत्यय जोड़कर – लड़ + आका = लड़ाका।
  • समास द्वारा – राजा + महल = राजमहल।
  • संधि द्वारा – रवि + इन्द्र = रवीन्द्र।
  • पुनरुक्ति या द्विरुक्ति द्वारा – गाँव-गाँव, लाल-लाल आदि।

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 16.
निम्नांकित संस्कृत के उपसर्गो के अर्थ लिखें तथा उनसे शब्द-निर्माण करें – अति, अधि, अनु, अप, अपि, अभि, अव, आ, उत्, उद्, उप, दुर, दुस, नि, निर,, निस्, प्र, परा, प्रति, परि, वि, सु, सम्।
उत्तरः

WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग 1

प्रश्न 17.
निम्नलिखित हिन्दी के उपसर्गों के अर्थ लिखें तथा इनसे शब्द-निर्माण करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग 2

प्रश्न 18.
अल्, ऐन, गैर, फी, बिल, बिला, ला अरबी के उपसर्ग हैं। इनका अर्थ लिखकर इनसे शब्दों का निर्माण करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग 3

प्रश्न 19.
निम्नांकित फारसी के उपसर्गो के अर्थ लिखें तथा इनसे शब्द की रचना भी करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग 4

प्रश्न 20.
डबल, डिप्टी, फुल, सब, हाफ, हेड आदि अंग्रेजी के उपसर्ग हैं। इनका अर्थ लिखकर इनसे शब्दों का निर्माण करें।
उत्तरः
WBBSE Class 9 Hindi व्याकरण उपसर्ग 5

नोट-1. संस्कृत में कुछ ऐसे शब्द है, जिनमें दो या तीन उपसर्ग भी मिलते हैं। जैसे –

पर्यावरण = परि + आ + वरण।
समालोचन = सम् + आ + लोचन।
व्याकरण = वि + आ + करण।
दुर्व्यहार = दुर + वि + अव + हार।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 5 कलकत्ता

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – कलकत्ता

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : ‘कलकत्ता’ कविता में वर्णित कवि के कलकत्ता-प्रेम को अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 2 : ‘कलकत्ता’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें ।
प्रश्न – 3 : ‘कलकत्ता’ कविता का मूलभाव अपने शब्दों में लिखें ।
प्रश्न – 4 : ‘कलकत्ता’ शीर्षक कविता में व्यक्त कवि के विचारों को अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 5 : ‘कलकत्ता’ शीर्षक कविता के आधार पर लिखें कि यह शहर प्राचीन और नवीन का अद्भुत सामंजस्य है ।
प्रश्न – 6 : ‘कलकत्ता’ शीर्षक कविता के आधार पर इस शहर में आए बदलाव का चित्रण करें
प्रश्न – 7 : कवि अरुण कमल ने कलकत्ता शीर्षक कविता के माध्यम से इसमें आए किन बदलावों का वर्णन किया है ?
प्रश्न – 8: ‘कलकत्ता’ कविता के आधार पर कवि की निजी अनुभूतियों का वर्णन करें।
प्रश्न – 9: बायस्कोप से लेकर ट्राम तक के बदलाव को ‘कलकत्ता’ कविता में किस प्रकार वर्णित किया गया है – लिखें
प्रश्न – 10 : कवि अरुण कमल बार-बार कोलकाता क्यों जाना चाहते हैं ? ‘कलकत्ता’ कविता के आधार पर लिखें।
उत्तर :
कोलकाता भारत का एक बड़ा तथा प्रसिद्ध नगर है । इसका संबंध संसार के सभी देशों से है । यहाँ विश्व के विभिन्न भागों से आए लोग निवास करते हैं। यहाँ प्रायः संसार के सभी भाषा-भाषी तथा सभी प्रकार के वस्त्र पहनने वाले लोग देखे जाते हैं । विद्याध्ययन तथा आजीविका की समस्या को हल करने या भ्रमण करने के लिए लाखों की संख्या में लोग यहाँ आते-जाते रहते हैं। कोलकाता का जो रूप आज है वह ढाई सौ वर्ष पहले नहीं था। अपनी कलकत्ता-यात्रा में कवि अरुण कमल ने कोलकाता की इस विकास-यात्रा को अपनी कविता ‘कलकत्ता’ में व्यक्त किया है।

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कलकत्ता शहर ने अरुण कमल को काफी आकर्षित व प्रभावित किया है । वे उन दिनों को याद करते हैं जब वे पहली बार कलकत्ता गए थे । उस समय उसका नाम कोलकाता नहीं बल्कि कलकत्ता था। यह उन दिनों की बात है जब सिनेमा की जगह बच्चों के लिए बॉयस्कोप ही मनोरंजन का प्रमुख साधन था तथा बॉयस्कोप दिखानेवाले अपने बॉयस्कोप में कलकत्ता के प्रसिद्ध स्थानों का चित्र लगाना नहीं भूलते थे । कवि को अच्छी तरह याद है कि पहली बार कोलकाता वह अपने दादा के कंधे पर बैठकर गए थे । उन्होंने पालकी की सवारी का भी आनंद उठाया था। पालकी पर बैठकर उन्हें गालिब की याद आई।

यह उन दिनों की बात है जब उनके गाँव का पहला दल रोजी-रोटी की तलाश में कलकत्ता गए थे। कवि भी अपनी पीठ पर सत्तू की गठरी लादे उन लोगों के साथ महिषादल तक गए थे। सुबह-सुबह जब वे हावड़ा पहुँचे तो उन्हें हावड़ा पुल के चमकते मस्तूल ने अपनी और आकर्षित किया था। यह आकर्षण आज भी ज्यों का त्यों है, इसलिए कवि बारबार कलकत्ता जाने के प्रण को दुहराते हैं।

कवि यह महसूस करते हैं कि कोलकातां आज भी उनके दिल के इतने करीब है जैसे गंगा में सागर का अवक्षेप हो या धरती के जितने करीब कंदमूल है । भले ही कोलकाता कवि के घर से काफी दूर है लेकिन यही कोलकाता रात में आकाश में तारा के रूप में उड़हुल बनकर चमकता है। कवि को कोलकाता का साँदर्य, उसका भोलापन ऐसा लगता है मानो हाथी गन्ना चूस रहा हो या फिर कोई दमकल सड़क पर अपनी घंटी की सुरीली आवाज बिखेरता चला जा रहा हो। उन दिनो की याद आज भी ताजी है जब कवि खेत-खलिहानों में चलनेवाले पाँवों से कलकत्ता की सड़कों पर एक लाठी भर जगह को घेरता हुआ नंगे पाँव चलता था ।

कोलकाता में प्राचीन से लेकर नवीन गति वाले यातायात के साधन मौजूद हैं। जहाँ एक ओर धीमी गति से चलने वाले हाथ रिक्शे हैं वहीं दूसरी ओर तेज गति से चलनेवाले मेट्रो भी मौजूद हैं । इन सारी रफ्तारों के बीच कवि अपनी रफ्तार का तालमेल बिठाना चाहते हैं । वे इन सारे छंदों में अपने छंद को ठृंढ़े हैं । इस तेज रफ्तारवाले शहर में पैदल चलनेवाले बेसहारा राहगीर हैं तथा उस जगह की खोज कर रहे हैं जहाँ से वे चौराहे को पार कर सकें । कहने का भाव यह है कि तब के कलकत्ता और आज के कोलकाता की रफ्तार में काफी अंतर आ चुका है । इतनी सारी तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच एक पैदल चलने वाला राहगीर चौराहे को पार करने में अपने को बेसहारा पाता है।

लंदन, पेड़चिंग तथा न्यूयार्क विश्वप्रसिद्ध हैं जिन्हें एक बार देख लेने पर पुनः देखने की इच्छा मिट जाती । लेकिन कोलकाता ऐसा शहर है जहाँ बार-बार जाने के बाद भी वहाँ से मन नहीं ऊबता। वहाँ बार-बार जाने को मन करता है । इसलिप कवि बार-बार कोलकाता जाने की दृढ़ इच्छा प्रकट करते हैं।
प्रश्न – 11 : पठित कविता के आधार पर अरुण कमल की काव्यगत विशेषताओं का वर्णन करें।
प्रश्न – 12 : अरुण कमल की साहित्यिक विशिषृताओं का वर्णन करें।
प्रश्न – 13 : अरुण कमल की कविता को भाषा व शैलीगत विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर :
अरुण कमल आधुनिक काल के उन थोड़े कवियों में हैं जिनकी कविताओं में कल्पना की ऊँची उड़ान नहीं बल्कि अपने ही आस-पास के चेहरे तथा अपनी मिट्टी की सोंधी गंध बहुत करीब से महसूस की जा सकती है ।

हमारे पाठ्य पुस्तक में संकलित कविता ‘कलकत्ता’ इस दृष्टिकोण से उनकी कुछ बेजोड़ कविताओं में से एक कही जा सकती है।
अरुण कमल की काव्यगत विशेषताओं को हम इन शीर्षकों में देख सकते हैं-

1. सामाजिक तथा वैयक्तिक यथार्थ – अरुण कमल सच्चाई पर परदा नहीं डालना चाहते बल्कि उसे सामाजिक तौर पर स्वीकारना जानते हैं । इस कविता में उन्होंने अपनी सामाजिक तथा वैयक्तिक स्थिति का कुछ्ड यूं ही चित्रण किया है –

मैं वहाँ बाबा के कंधे पर बैठकर गया
मैं वहाँ गालिब की पालकी में सजकर गया
जब मेरे गाँव से पहला टोल गया चटकल मजदूरों का
सत्रू की गठरी पीठ पर लादे मैं भी गया महिषादल तक ।

2. प्रकृति प्रेम – अरुण कमल की कविताएँ सामाजिक यथार्थ की कविताएँ हैं । इसके बावजूद उन्होंने प्रकृति से अपना नाता नहीं तोड़ा है । अनेक सामाजिक विसंगतियों का वर्णन करने के क्रम में वे प्रकृति को नहीं भूल पाते । यही कारण है कि अपने गाँव में भी रहने पर कोलकाता का सौंदर्य बार-बार अपना रूप बदलकर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करता है –
मेरे घर से इतनी दूर कि रात को झलके वही तारा बन उड़हुल

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3. परिवर्तन से कोई शिकायत नहीं – कवि जानते हैं कि परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है और वे इस परिवर्तन को सहर्ष स्वीकारते हैं। कलकत्ता से कोलकाता तथा पालकी से लेकर मेट्रो ट्राम तक आए परिवर्च्तन में वे कोई शिकायत नहीं करते । वे नवीनता को भी प्राचीनता के समान ही सहज रूप में स्वीकार कर लेते हैं –

मेट्रो ट्राम से लेकर हाथ रिक्शे तक सृष्टि के समस्त
छंदों के मध्य अपना छंद बूँढता
मैं एक बेसहारा पैदल राहगीर वो जगह ढूँढ़ रहा हूँ ।

4. स्वदेश-प्रेम – कवि अरुण कमल ने भारत के प्रतिनिधि के तौर पर रूस, कांगो, चीन, इग्लैंड, पाकिस्तान, म्यांमार तथा दक्षिण अफ्रीका की यात्राएँ की हैं फिर भी उनके मन में स्वदेश के प्रति गहरा प्रेम है । सामाजिक वैषम्य एवं अभावो की कटुता के रहते हुए भी अपने देश, अपने समाज, अपने देशवासी, अपने नदी, वन, पर्वत, अपने खेतखलिहान, अपने गाँव-नगर के प्रति उनमें गहरा

अनुराग है । तभी तो वे कह उठते है –
लंदन पेइचिंग न्यूयार्क एक बार
कोलकाता बार बार बार बार कोलकाता

5. अलंकारिता – प्राय: अतुकांत कविताएँ या आधुनिक कविताओं में अलंकार के प्रति मोह नहीं होता । लेकिन अरुण कमल की कविताएँ इसके अपवाद हैं। चाहे-अनचाहे इसमें अलंकार उत्पम्न हो गया मालूम पड़ता है । कविता की कुछ्ड पंक्तियों को उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है-

बार-बार सौ बार कोलकाता जाऊँगा – छेकानुप्रास अलंकार
रात को झलके वही तारा बन उड़हुल – उपमा अलंकार
इतना प्यारा जैसे हाथी गत्ने चूसता कोई – उत्पेक्षा अलंकार
खेत-खलिहान के पाँवों से – अनुप्रास अलंकार
इस तरह के अन्य कई उदाहरण लिए जा सकते है ।

6. बिंब तथा प्रतीक-अरुण कमल ने अपनी कविता में बिंब तथा प्रतीक का भी बड़ा ही सुंदर प्रयोग किया है तब से जब वह बॉयस्कोप के भीतर था – प्राचीनता का प्रतीक
कोई दमकल घंटी बजाता दौड़ता – रफ्तार का प्रतीक
जैसे हाथी गत्ने चूसता कोई – चाक्षुष बिंब, उत्पेक्षा अलंकार आदि ।

7. भाषा – अरुण कमल की भाषा सरल, सहज तथा उसमें झरने के जल के समान प्रवाहमयता है – कोई भी पाठक कहीं ठहराव नहीं महसूस करता । शब्द मानो आँखों के सामने से फिसलते से चले जाते हैं –

मैं बाबा के कंधे पर बैठकर गया
मैं वहाँ गालिब की पालकी में सजकर गया ।

इसलिए अर्थ की प्रतीति में कोई रुकावट नहीं होती। अरुण कमल ने अपनी कविताओं में शब्दों से कोई परहेज नहीं किया है । इस कविता को ही लें तो इसमें हिंदी, उर्दू (गालिब), देशज (सत्तू, टोल, चटकल), विदेशज (बॉंयस्कोप, मेट्रो ट्राम, रिक्शा, ट्रैफिक आदि) सारे शब्दों का इस्तेमाल बखूबो किया है।

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इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि अरुण कमल की कविता आधुनिक होते हुए भो प्राचीन और नबीन के मध्य पूरे गौरव के साथ एक सेतु (पुल) की तरह है ।
प्रश्न – 14 : पठित कविता के आधार पर कोलकाता का वर्णन करें ।
प्रश्न – 15 : कोलकाता प्राचीनता तथा नवीनता का अद्भुत सम्मिश्रण है – वर्णन करें।
प्रश्न – 16 : पठित कविता के आधार कर कोलकाता (कलकत्ता) की ऐतिह्हासिक यात्रा का बखान करें।
उत्तर :
अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ में वर्णित कोलकाता का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है। समाट अकबर के चुंगी दस्तावेजों में तथा पद्रहवी सदी के कवि विप्रदास की कविताओं में इस शहर का नाम बार-बार आया है। इसके नाम के बारे में कई तरह की कहानियॉ प्रचालित है । सबसे लोकमिय कहानी के अनुसार हिंदुओं की देवो काली के नाम से इस तरह के नाम की उत्पत्ति हुई है । इस शहर का उल्लेख चीनी तथा फारसी व्यापारियों के दस्तावेज में भी मिलते हैं।

महाभारत में भी कुछ राजाओं के नाम हैं जो कौरव सेना की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे। सन् 1690 में इस्ट इडिया कंपनी के अधिकारी जॉब चार्नक ने यहाँ शहर बसाने के लिए स्थानीय जमींदार परिवार सावर्ण रायचौधुरी से तीन गाँव (सूतानाटी, कोलिकाता तथा गोबिंदपुर) पद्टे पर लिया था । सन् 1756 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने कोलिकाता पर आक्रमण कर उसे जीत लिया तथा इसका नाम ‘अलीनगर’ रखा । लेकिन साल भर के अंदर ही यह पुनः अंग्रेजों के अधिकार में चला गया । सन् 1911 तक कलकत्ता अंग्रेजों की राजधानी बनी रही।

ब्रिटिश शासन के दौरान जब कलकत्ता एकीकृत भारत की राजधानी थी, इसे लंदन के बाद व्रिटिश सामाज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता था। इस शहर की पहचान ‘महलों का शहर’, ‘पूरब का मोती’ इत्यादि के रूप में थी।

आज भी कोलकाता की पहचान भारत के प्रमुख नगरों में से एक है । भारतीय रेल द्वारा संचालित कोलकाता मेट्रो भारत में सबसे पुरानी भूमिगत धातायात प्रणाली है । शहर के कुछ क्षेत्रों में साइकिल-रिक्शा तथा हाथ-रिव्शा आज भी स्थानीय छोटी दूरियों के लिए प्रचलन में हैं।

शिक्षा, कला, संस्कृति तथा व्यवसाय की दृष्टि से भी कोलकाता की अपनी अलग पहचान है । कोलकाता को लंबे समय से अपने साहित्यिक, क्रांतिकारी तथा कलात्मक धरोहरों के लिए जाना जाता है । यहाँ नयी प्रतिभा को सदा प्रोत्साहन देने की क्षमता ने इस शहर को ‘अत्यधिक सृजनात्मक उर्जा का शहर’ बना दिया है।

कोलकाता-संस्कृति का एक खास अंग है – पाड़ा, यानि पास-पड़ोस के क्षेत्र । प्रत्येक पाड़ा में एक सामुदायिक केन्द्र, कीड़ा स्थल आदि होते है जो समयानुसार अनेक प्रतियोगिताएँ आयोजित करते हैं। पाड़ा के लोग इसमें उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं । खाली समय में बैठकर समूहों में बातें करने (अड्डुा मारना) की आदत एक मुक्त-शैली तथा बौद्विक वार्तालाप को उत्साहित करती है । इन्हीं कारणों से कोलकाता को कभी-कभी भारत की ‘सांस्कृतिक राजधानी’ भी कह दिया जाता है ।

कोलकाता में अनेक दर्शनीय स्थल हैं तथा यह रेलमार्ग तथा हवाईमार्ग से पूरे भारत से जुड़ा हुआ है । कोलकाता के खानपान के मुख्य घटक है – चावल और माछेर झेल (मछली-भात) तथा साथ में रॉसोगुल्ला और मिष्षि दोइ (मीठा दही)। बगाली लोगों के प्रमुख मछली आधारित व्यंजनों में हिल्सा (इलिस माछ) बेहद पसंद किया जाता है ।

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साठ के दशक में ‘भूखी पीढ़ी’ नाम के एक साहित्यिक आंदोलनकारियों का आगमन हुआ। इसके सदस्यों ने पूरे कलकत्ता शहर को अपने आंदोलनकारी गतिविधियों तथा लेखन के द्वारा हिला दिया था । इनके चर्चे विदेशों तक जा पहुँचे थे । इस आंदोलन के प्रमुख साहित्यकार थे – मलय राय चौधुरी, सुबिमल बसाक, देवी राय, समीर राय चौधुरी, फालगुनि राय, अनिल करनजय, बासुदेव दास गुप्ता, त्रिदिब्ब मित्रा, शक्ति चट्टोपाध्याय तथा नृपेन्द्र चक्रवर्ती।

लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि के गाँव से चटकल मजदूर कलकत्ता क्यों गए थे ?
उत्तर :
कलकत्ता में अनेक कल-कारखाने तथा उद्योग-धधे हैं । इनमें लाखों पढे-लिखे तथा अनपढ़ व्यक्ति कार्य कर अपनी जीविका की समस्या को हल करते हैं। अपनी आजीविका की खोज में ही कवि के गाँव से चटकल मजदूर कलकत्ता गए थे ।

प्रश्न 2.
कलकत्ता शहर की स्थापना कब और किसने की ?
उत्तर :
इस्ट इण्डिया कम्पनी के व्यापारी दल के नेता जॉंब चार्नक ने सन् 1690 ई० में कलकत्ता नगर बसाने का निर्णय लिया । उस समय वहाँ केवल तीन गाँव गोविद्युर, सूतानाटी तथा कलिकाताथे । बाकी स्थानों में घने जंगल थे जिसमें हिसक जगली पशु रहते थे । निकट में हुगली नदी के प्रवाहित होने तथा उसके समुद्र में मिलने के कारण विदेशों से जहाज द्वारा व्यापार करने की विशेष सुविधा थी। अत: जंगलों को काट कर शहर-निर्माण का कार्य आरंभ हुआ तथा इसका नया नाम कलकत्ता रखा गया।

प्रश्न 3.
जाऊँगा जाऊँगा मैं कोलकाता जाउँगा
बार बार सौ बार कोलकाता जाऊँगा ।
– रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें । पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना ‘कलकत्ता’ तथा इसके रचनाकार अरुण कमल हैं।
बचपन से ही कलकत्ता तथा वहाँ का सौंदर्य एवं संस्कृति ने कवि को काफी आकर्षित किया है, अत: वे वहाँ बार-बार जाना चाहते हैं।

प्रश्न 4.
मैं वहाँ तब से जा रहा हूँ जब वह कलकत्ता था
तब से जब वह बॉयस्कोप के भीतर था
– पाठ का नाम लिखें । पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर :
पाठ का नाम है – ‘कलकत्ता’।
कवि कहते हैं कि वे कोलकाता तब से जा रहे हैं जब उसे कलकत्ता के नाम से जाना जाता था। यह नाम जॉब-चार्नक ने रखा था जो इस्ट इण्डिया कम्पनी के व्यापारी दल का नेता था। कलकत्ता इतना प्राचीन शहर है कि इसके चित्रों के बिना बॉयस्कोप अधूरा था ।लोग तथा बच्चे कलकत्ता को बॉयस्कोप में देखकर ही संतुष्ट हो जाते थे ।

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प्रश्न 5.
मैं वहाँ गालिब की पालकी में सजकर गया –
– ‘मै” से कौन संकेतित है ? गालिब का संक्षिप्त परिचय दें ।
उत्तर :
मैं से कवि अरुण कमल संकेतित हैं।
उर्दू के विख्यात कवि/शायर गालिब का पूरा नाम मिर्जा असदुल्ला खां था । इनका जन्म आगरा शहर में हुआ था। शिक्षा फारसी भाषा में हुई । पहले ये फारसी भाषा में लिखा करते थे । बाद में उर्दू में लिखना प्रारंभ किया और उस भाषा के युग प्रवर्त्तक शायर माने गाए।’दीवाने गालिब’ इनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है ।

प्रश्न 6.
‘जब मेरे गाँव से पहला टोल गया चटकल मजदूरों का’ –
– कवि कौन हैं ? उनके गाँव से चटकल मजदूरों का पहला टोल कहाँ और क्यों गया?
उत्तर :
कवि अरुण कमल हैं।
कवि के गाँव से घटकल मजदूरों का पहला टोल कलकत्ता गया ताकि उन्हे वहाँ के कल-कारखाने में रोजगार मिल सके । आज भी लाखो की संख्या में बिहार के लोग कोलकाता में कहीं न कहीं काम करके अपनी आजीविका चलाते है।

प्रश्न 7.
‘अब भी याद है मुझे वह सुबह’
– कौन किस सुबह की बात कर रहा है ? उसे वह सुबह क्यों याद है ?
उत्तर :
कवि अरुण कमल हावड़ा की पहली सुबह की बात कर रहे हैं|
कवि जब कलकत्ता नहीं गए थे तब उन्होने उसे गाँव में बॉयस्कोप में ही देखा था लेकिन अपनी आँखों से जब हावड़ा पुल के चमकते मस्तूल को उन्होंने पहली बार देखा तो वह दृश्य उन्हें आज भी ज्यों का त्यो याद है ।

प्रश्न 8.
‘मेरे घर से इतनी दूर कि रात को झलके वही तारा बन उड़हुल’
– रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें । पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना ‘कलकत्ता’ है तथा इसके रचनाकार अरुण कमल हैं।
कलकत्ता कवि के गाँव से काफी दूर है लेकिन वह उनकी कल्पना में भी रात्रि के समय तारा में उसकी छवि उड़हुल के रूप में देखते हैं।

प्रश्न 9.
‘इतना प्यारा जैसे हाथी गन्ने चूसता’
– यहाँ किसके बारे में कहा जा रहा है ? उसकी विशेषताएँ लिखें ।
उत्तर :
यहाँ कोलकाता के बारे में कहा जा रहा है।
कोलकाता को लंबे समय से अपने साहित्यिक, क्रांतिकारी तथा कलात्मक धरोहरों के लिए जाना जाता है । कोलकातावासियों के मानस पटल पर हमेशा से ही कला और साहित्य के लिए विशेष स्थान रहा है । इसकी पहचान सूजनात्मक उर्जा के शहर के रूप में है । इन्हीं कारणों से कोलकाता को भारत की सास्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है।

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प्रश्न 10.
‘बीच चौरंगी पर दौड़ा
और दोनों तरफ ठहर गयी सारी गतियाँ सबकुछ थम’
– बीच चौरंगी पर कौन दौड़ा ? पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर :
बीच चौरंगी पर वह आदिवासी बच्चा दौड़ा जो नंग-धड़ंग था ।
नृपेन्द्र चक्रवर्त्ती की कविता में वर्णित आदिवासी बच्चा जब चौरंगी के बीच दौड़ा तो उसे बचाने के लिए सारा यातायात मानो थम-सा गया । अचानक सभी गाड़ियों की गति एकबारगी रुक गई।

प्रश्न 11.
‘जो गति उसकी वही गति मेरी’
– यह पंक्ति किस पाठ से ली गई है ? पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर :
यह पंक्ति अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ नामक पाठ से ली गई है।
यहाँ कवि उस आदिवासी बच्चे की स्थिति से अपनी तुलना करते हैं जो द्रैफिक की लाल हरी पीली को न समझ अचानक ही दौड़ पड़ा था । कवि को भी इन बत्तियों से उलझन-सी होती है और वे कहते हैं कि हम दोनों की दशा एक जैसी है ।

प्रश्न 12.
‘लंदन, पेइचिग, न्यूयार्क एक बार कोलकाता बार बार बार बार कोलकाता’
– ‘एक बार’ और ‘बार-बार’ का अतंर स्पष्ट करें ।
उत्तर :
कविता की इस पंक्ति में कवि अरुण कमल कहते हैं कि लंदन, पेइचिंग तथा न्यूयार्क शहर को मैं एक ही बार देखना चाहूँगा लेकिन कोलीकाता को बार-बार देखना चाहूँगा । कारण यह है कि कवि के मन में उन शहरों की अपेक्षा कोलकाता का आकर्षण अधिक है।

प्रश्न 13.
‘जब वह कलकत्ता था’ – कलकत्ता तथा कोलकाता में क्या फर्क है ?
उत्तर :
कलकत्ता शहर, भारत के प्राचीनतम शहरों में से है। सन् 1600 ई० में इस शहर की स्थापना की गई और सन् 2001 में इसका नामकरण ‘कोलकाता’ किया गया। कहने का भाव यह है कि कवि ने कलकत्ता को कोलकाता में परिवर्तित होते देखा है।

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प्रश्न 14.
‘गालिब की पालकी’ का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
‘गालिब की पालकी’ का तात्पर्य है कि मिर्जा गालिब को अपना वजीफ़ा लेने के लिए बनारस से कोलकाता तक नाव से यात्रा करनी पड़ती थी। और फिर अंग्रेजों के राजदरबार तक जाने के लिए बुढ़ापे के कारण पालकी की सहायता लेनी पड़ती थी। पालकी पर बैठकर कवि भी खुद को गालिब से कम नहीं समझता।

अति लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कँवि अरुण कमल ब्वार-बार कहाँ जाना चाहते हैं ? क्यों ?
उत्तर :
कवि अरुण कमल बार-बार कोलकाता जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें बचपन से ही कोलकाता ने बहुत आकर्षित किया है ।

प्रश्न 2.
कवि कब से कोलकाता जा रहे हैं ?
उत्तर :
कवि तब से कोलकाता जा रहे जब लोग उसे कलकत्ता के नाम से जानते थे । आम लोग तो कलकत्ता को बॉयस्कोप में देखकर संतोष कर लेते थे ।

प्रश्न 3.
‘गालिब की पालकी में सजकर गया’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
कीभी गालिब अपने अंतिम दिनों में लाई बेंटिक से वजीफा पाने की उम्मीद में पालकी द्वारा उनके दरबार जाया करते थे । कवि भी पालकी में बैठकर उसी गालिय को याद करते हैं।

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प्रश्न 4.
पहली बार अरुण कमल किसके साथ कलकत्ता गए थे ?
उत्तर :
अरुण कमल पहली बार बाबा के साथ उनके कुंधे पर बैठकर कलकत्ता गए थे ।

प्रश्न 5.
पहली बार अरुण कमल किन लोगों के साथ कलकत्ता गए थे ?
उत्तर :
अरुण कमल जब बच्चे थे तो उनके गाँव से चटकल मजदूरों का दल कलकत्ता गया था – कवि भी उन्हीं लोगों के साथ पहली बार कलकत्ता गए थे ।

प्रश्न 6.
कवि को हावड़ा की कौन-सी सुबह आज भी याद है ?
उत्तर :
कवि जब पहली बार हावड़ा आए तो हवड़ा पुल का चमकता हुआ मस्तूल ने उन्हें काफी आकर्षित किया और वह सुबह उन्हें आज भी याद है।

प्रश्न 7.
कवि को रात में कोलकाता किस रूप में नजर आता है ?
उत्तर :
कवि को रात में कोलकाता तारा या उड़हुल के रूप मे नजर आता है

प्रश्न 8.
कवि ने कोलकाता की तुलना किससे की है ?
उत्तर :
कवि ने कोलकाता की तुलना गत्ना चूसते हाथी एव घटी बजाकर दौड़ते हुए दमकल से की है।

प्रश्न 9.
कवि के लिए चौरस्ता पार क्ररना कठिन क्यों है ?
उत्तर :
कोलकाता में तेज रफ्तार वाली गाड़ियों की इतनो भीड़ है कि उन्हे चौरस्ता षार करना कठिन लगता है।

प्रश्न 10.
कवि ने ट्रैफिक की तुलना किससे की है ?
उत्तर :
कवि ने ट्रैफिक की तुलना फुटते नकसीर से की है ?

प्रश्न 11.
कोलकाता के किस कवि ने अपनी कविता में नंग-धड़ंग आदिवासी बच्चे का जिक्र किया है ?
उत्तर :
कोलकाता के नुपेन्द्र चक्रवर्त्ती ने अपनी कविता में नंग-धड़ंग आदिवासी बच्चे का जिक्र किया है ।

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प्रश्न 12.
कवि किन शहरों को एक बार और किस शहर को बार-बार देखना चाहते हैं ?
उत्तर :
कवि लंदन, पेइिंग तथा न्यूयॉर्क शहर को एक बार लंकिन कोलकाता को बार-बार देखना चाहते हैं।

प्रश्न 13.
कवि को ट्रैफिक की बत्तिबों को देखकर क्या उलझन होती है ?
उत्तर :
जब कवि ट्रैफिक की लाल, पीली और हरी बत्तियों को देखते हैं तो उन्हे यह उलझन होती है कि न जाने उनमें से कौन-सी बत्ती उनके लिए है ।

प्रश्न 14.
अरुण कमल की कौन सी कविता आपकी पाठच-पुस्तक में संकलित है ?
उत्तर :
अरुण कमल की ‘कलकत्ता’ कविता हमारी पाठ्य-पुस्तक में सकालत है।

प्रश्न 15.
‘बार-बार, सौ बार कोलकाता जाऊँगा’ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि कवि कि तनी ही बार कालकाता जाएँ, उनका मन ऊबने वाला नहीं है।

प्रश्न 16.
‘मैं वहाँ बाबा के कंधों पर बैठ कर गया’ – कौन, कहाँ बाबा के कंधों पर बैठ कर गया?
उत्तर :
अरुण कमल पहली बार बचपन में अपने दादा के कंधों पर बैठ कर कलकता आए थे।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अरुण कमल का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) बंगाल
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) महाराप्र
उत्तर :
(क) बिहार ।

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प्रश्न 2.
अरुण कमल पेशे से हैं :
(क) व्यापारी
(ख) डॉक्टर
(ग) वकील
(घ) प्रध्यापक
उत्तर :
(घ) प्रध्यापक ।

प्रश्न 3.
अंग्रेजी-काव्य-संग्रह जो अरुण कमल द्वारा रचित है :
(क) वायसेज
(ख) डेफोडिल्स
(ग) सोल्जर
(घ) आर्मस् एव मैन
उत्तर :
(क) वायसेज ।

प्रश्न 4.
अरुण कमल का पहला काव्य-संग्रह कौन-सा है ?
(क) नये इलाके में
(ख) अपनो कवल धार
(ग) सबूत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
अपनी केवल धार ।

प्रश्न 5.
अरुण कमल का दूसरा काव्य-संग्रह कौन-सा है ?
(क) सबूत
(ख) नये इलांक में
(ग) अपनी केवल धार
(घ) इनमें से कांड नहीं
उत्तर :
(क) सबूत ।

प्रश्न 6.
अरुण कमल का तीसरा काव्य-संग्रह कौन-सा है ?
(क) सबूत
(ख) नये इलाके में
(ग) अपनी केवल धार
(घ) इनमें से कोई नहीं
‘उत्तर :
(ख) नये इलाके में ।

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प्रश्न 7.
‘अपनी केषल धर’ का प्रकाशच्व-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 1980
(ख) सन् 1981
(ग) सन् 1982
(घ) सन् 1983
उत्तर :
(क) सन् 1980 ।

प्रश्न 8.
‘सबूत’ का च्रकाशन-ष्ये चापा है ?
(क) सन् 1988
(ख) सन् 1989
(ग) सन् 1990
(घ) सन् 1991
उप्तर :
(ख) सन् 1989 ।

प्रश्न 9.
किपलिंग की ‘अगल बुक’ के अनुवादक कौन हैं ?
(क) पाश
(ख) कैफ़ी आज़ामी
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) अरुण कमल
उत्तर :
(घ) अरुण कमल ।

प्रश्न 10.
अरुण कमल को उनके किस काव्य-संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
(क) सबूत
(ख) नये इलाके में
(ग) अपनी केवल धार
(घ) जागल-लुक
उत्तर :
(ख) नये इलाके में ।

प्रश्न 11.
अरुण कमल को निम्न में से कौन-सा पुरस्कार नहीं मिला ?
(क) पद्म भूष्षण
(ख) भारत भूक्षण अश्रवाल पुरस्कार
(ग) सोवियत भूमि नेहरु पुरस्कार
(घ) श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार
उक्षर :
(क) पद्म भूषण ।

प्रश्न 12.
अरुण कमल को निम्न में से कौन-सा पुरस्कार नहीं मिला ?
(क) रधुवीर संहाय स्मृति पुरस्कार
(ख) कबीर सम्मान
(ग) शमशेर सम्मान
(घ) साहित्य अकादमी पुरस्कर
उत्तर :
(क) कबीर सम्मान ।

प्रश्न 13.
‘कविता और समय’ (आलोचना) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अरुण कमल
(ख) शमशेर
(ग) प्रेमचंद
(घ) धर्मवीर भारती
उत्तर :
(क) अरुण कमल ।

प्रश्न 14.
‘गोलमेज’ (आलोचना) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) दिनकर
(ख) अरुण कमल
(ग) धर्मवीर भारती
(घ) कुँवर नारायण
उत्तर :
(ख) अरुण कमल।

प्रश्न 15.
‘कलकत्ता’ कविता के रचनाकार हैं।
(क) प्रेमचंद
(ख) धर्मवीर भारती
(ग) चंद्रकांत देवताले
(घ) अरुण कमल
उत्तर :
(य) अरुण कमल ।

प्रश्न 16.
‘कलकत्ता’ कविता में बंगाल के किस कवि का नाम आया है ?
(क) शततचंद्र
(ख) नुपेन्द्र चक्रवर्ती
(ग) रवीन्द्र नाथ ठाकुर
(घ) काजी नजरुल इस्लाम
उत्तरं :
(ख) नृपेन्द्र चक्रवर्ती ।

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प्रश्न 17.
अरुण कमल बार-बार कहाँ जाना चाहते हैं ?
(क) लंदन
(ख) पेइचिंग
(ग) कलकत्ता
(घ) न्यूयार्क
उत्तर :
(ग) कलकत्ता ।

प्रश्न 18.
अरुण कमल कितनी बार कोलकाता जाने की बात करते हैं ?
(क) पचास बार
(ख) सौ बार
(ग) दो सौ बार
(घ) तीन बार
उत्तर :
(ख) सौ बार ।

प्रश्न 19.
अरुण कमल कब से कोलकाता जा रहे हैं ?
(क) जब वह कोलकाता था
(ख) जब वह सूतानाटी था
(ग) जब वह कोलिकाता था
(घ) जब वह कलकत्ता था
उत्तर :
(घ) जब वह कलकत्ता था।

प्रश्न 20.
पहली बार अरुण कमल किसके कंधे पर कलकत्ता गए ?
(क) भाई के
(ख) बाबा के
(ग) पिता के
(घ) नौकर के
उत्तर :
(ख) बाबा के ।

प्रश्न 21.
अरुण कमल कलकत्ता में कहाँ गए थे ?
(क) धर्मतल्ला
(ख) दक्षिणेश्वर काली
(ग) महिषादल
(घ) कालीघाट
उत्तर :
(ग) महिषादल ।

प्रश्न 22.
गालिब कौन थे ?
(क) उपन्यासकार
(ख) शायर
(ग) कहानीकार
(घ) नाटककार
उत्तर :
(ख) शायर ।

प्रश्न 23.
हावड़ा की किस चीज ने कवि को आकर्षित किया ?
(क) हावड़ा पुल
(ख) विद्यासागर सेतु
(ग) सूती-वस्त्र कारखाना
(घ) हावड़ा स्टेशन
उत्तर :
(क) हावड़ा पुल ।

प्रश्न 24.
कवि ने कोलकाता की तुलना इनमें से किससे नहीं की है ?
(क) तारा
(ख) कमल
(ग) दमकल
(घ) उड़हुल
उत्तर :
(ख) कमल।

प्रश्न 25.
कवि ने कोलकाता की तुलना डुनमें से किससे नहीं की है ?
(क) हाथी
(ख) तारा
(ग) गुलाब
(घ) उड़हुल
उत्तर :
(ग) गुलाब।

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प्रश्न 26.
अरुण कमल कोलकाता में अपने को किस रूप में पाते हैं ?
(क) यात्रो
(ख) पर्यटक
(ग) बेसहारा पैदल राहगीर
(घ) साहित्यकार
उत्तर :
(ग) बेसहारा पैदल राहगीर ।

प्रश्न 27.
‘सृष्टि के समस्त छंदों’ किसे कहा गया है ?
(क) मेट्रो ट्राम से लेकर हाथ रिक्शे तक को
(ख) कलकत्ता से कौलकाता तक को
(ग) गाँच से महिषादल तक को
(घ) गंगा से सागर तक को
उत्तर :
(क) मंट्रो ट्राम से लेकर हाथ रिक्शे तक को।

प्रश्न 28.
‘कलकत्ता’ कविता में ‘बेसहारा पैदल राहगीर’ कौन है ?
(क) सड़क पर चलने वाला
(ख) कवि
(ग) मेट्रो ट्रेन
(घ) हाथ-रिक्शा
उत्तर :
(ख) कवि ।

प्रश्न 29.
‘आदिवासी बचचे’ का चित्रण किसकी कविता में किया गया है ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ख) अरुण कमल
(ग) नृपेन्द्र चक्रवर्तो
(घ) कैफी आजमी
उत्तर :
(ग) नृपेन्द्र चक्रवर्ती ।

प्रश्न 30.
‘जो गति उसकी वही गति मेरी’ – किसकी गति की तुलना किससे की गई है ?
(क) ट्राम की तुलना हाथ-रिक्शे से
(ख) आदिवासी बच्चे की तुलना कवि से
(ग) कवि की तुलना आदिवासी बच्चे से
(घ) हाथी की तुलना दमकल से
उत्तर :
(ख) आदिवासी बच्चे की तुलना कवि से ।

प्रश्न 31.
कवि को हावड़ा की कौन-सी चीज अब भी याद है ?
(क) हावड़ा स्टेशन की चहल-पहल
(ख) हावड़ा में चलनं वाले हाथ रिक्शे
(ग) हावड़ा के पुल का मस्तूल
(घ) विद्यासागर सेतु का मस्तूल
उत्तर :
(ग) हावड़ा के पुल का मस्तूल।

प्रश्न 32.
‘जो गति उसकी’ में किसकी गति के बारे में कहा गया है ?
(क) काव की गति के बारे में
(ख) ट्राम की गति के बारे में
(ग) आदिवासी बच्चे की गति के बारे में
(घ) हाथ-रिक्शा की गति के बारे में
उत्तर :
(ग) आदिवासी बच्चे की गति के बारे में ।

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प्रश्न 33.
‘वही गति मेरी’ में मेरी से कौन संकेतित है ?
(क) कवि
(ख) आदिवासी बच्चा
(ग) ट्रैफिक
(घ) कोलकाता
उत्तर :
(क) कवि।

प्रश्न 34.
कवि के गाँव से किसका पहला दल कलकत्ता गया ?
(क) कवियों का
(ख) चटकल मजदूरों का
(ग) हाथियो का
(घ) दमकल का
उत्तर :
(ख) चटकल मजदूरों का ।

प्रश्न 35.
‘चौरंगी’ क्या है ?
(क) चौराहा
(ख) कोलकाता का एक स्थान
(ग) चार रंगों वाला
(घ) कोलकाता का पुराना नाम
उत्तर :
(ख) कोलकाता का एक स्थान ।

प्रश्न 36.
सरकारी तौर पर कलकत्ता का नामकरण ‘कोलकाता’ कब किया गया ?
(क) सन् 2000 में
(ख) सन् 1900 में
(ग) सन् 2001 में
(घ) सन् 2005 में
उत्तर :
(ग) सन् 2001 में ।

टिप्पणियाँ

1. कलकत्ता/कोलकाता :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
कोलकाता भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर तथा पाँचवाँ सबसे बड़ा बदरगाह है। इस शहर का इतिहास अन्यंत प्राचीन है । इसक आधुनिक स्वरूप का विकास अग्रेज एवं फ्रांस के उपनिवेशवाद के इतिहास से जुड़ा हुआ है । भारत के प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में कोलकाता का बहुत अधिक महत्व है ।

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2. बॉयस्कोप :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
बॉयस्कोप बॉंवस की तरह का एक यंत्र होता है जिसमें लंस लगा होता है। अंदर एक पट्टी पर आकर्षक चित्र चिपकाए रहते हैं जिन्हें एक हैंडल की सहायता से लेंस के सामने से गुजारा जाता है तथा चित्र आकर्षक दिखाई देते हैं। पहले बॉयस्कोप दिखाने वाला गा-गाकर चित्रों के बारे मे बताता था। आगे चलकर इसके साथ ग्रामाफोन भी लागाया जाने लगा जिससे गाने सुनाए जाते थे ।

3. गालिब :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
उर्दू के विख्यात कवि/शायर गालिय का पूरा नाम मिर्जा असदुल्ला खां था । इनका जन्म आगरा शहर में हुआ था। शिक्षा फारसी भाषा में हुई । पहले ये फारसी भाषा में लिखा करते थे । बाद में उर्दू में लिखना प्रारंभ किया और उस भाषा के युग प्रवर्तक शायर माने गाए।’दीवाने गालिब’ इनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है।

4. हावड़ा :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
हावड़ा पश्चिम बगाल का एक प्रमुख शहर है । हावड़ा तथा कोलकाता के बीच में गंगा बहती है। कोलकाता आने वाले प्राय: हावड़ा रेलवे जंक्शन पर ही उतरते हैं । हावड़ा से पूरे देश के लिए रेलगाड़ी है । यहाँ विभिन्न प्रकार के इजीनियरिंग उद्योग, जूते तैयार करने के कारखाने, होजरी उद्योग तथा चाय विक्रय केन्द्र हैं।

5. हावड़ा पुल :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
हावड़ा तथा कोलकाता को जोड़ने वाला पुल ही हावड़ा पुल है । अब इसका नाम बदलकर ‘रवींद्र सेतु’ कर दिया गया है । हावड़ा स्टेशन से बाहर निकलते ही हावड़ा पुल एक अनोखा दृश्य उपस्थित करता है । इससे थोड़ीदूरी पर नया पुल ‘विद्यासागर सेतु’ बनाया गया है । इसके बनने से हावड़ा पुल पर यातायात का भार काफी कम हुआ है।

6. गंगा :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कवित्ता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
कोलकाता में गंगा नदी की शाखा हुगली होने से इसका धार्मिक महत्व बढ़ गया है । गंगा तट पर एक और दक्षिणेश्वर का मंदिर है तो दूसरी और बेलूर मठ कोलकाता का विशेष धार्मिक स्थान है ।

7. चटकल :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
पहले सारे कार्य मानव-शक्ति से ही होते थे । आगे चलकर इनका स्थान भाप से फिर बिजली से चलनेवाली मशीनों ने ले लिया। इन मशीनों से चटपट कार्य हो जाने के कारण आगे चलकर कारखाने के पर्याय के रूप में चटकल शब्द का हीं प्रचलन हों गया । चटकल शब्द का प्रयोग बंगाल में पाट कारखाने के लिए भी होता है।

8. सत्तू :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
सतू चने से बना खानेवाली सामग्री है । इसे पानी तथा नमक के साथ मिलाकर खाया जाता है। इससे अनेक प्रकार के व्यजन बनाए जाते हैं । सस्ता, स्वाध्यवर्धक तथा शक्तिप्रदान करनेवाले भोजन के रूप में यह पहले मजदूरों के बीच काफी प्रचल्चलत था ।

9. उड़हुल :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
उडहुल एक प्रकार का फूल है । बंगाल में यह काफी लोकप्रिय है क्योंकि यह माता काली को काफी प्रिय है। वैसे तो उड़हुल कई प्रकार के होते हैं लेकिन लाल रंग के उड़हुल का तंत्र-विद्या में काफी महत्व है । लाल उड़हुल को ‘रक्तजावा’ के नाम से भी जाना जाता है।

10. खलिहान :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
खलिहान उस स्थान को कहते हैं जहाँ खेत से पकी फसल को लाकर जमा किया जाता है। फिर यहाँ बैल या मशीन की सहायता से फसल से अनाज के दाने अलग किए जाते हैं । कहीं-कहीं गाँवों में सार्मूहिक खलिहान भी तैयार किए जाते हैं।

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11. मेट्रो :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है ।
भारतीय रेल द्वारा संचालित मेट्रो कोलकाता में सबसे पुरानी भूमिगत यातायात म्रणाली है। ट्राम सेवा कैल्कटा ट्रामवेज कपनी द्वारा सचालित है । बढ़ती जनसख्या तथा आवागमन के सस्ते साधन के कारण कोलकाता मेट्रों रेलवे से शहर को काफी राहत मिला है ।

12. हाथ-रिक्शा :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकता’ से लिया गया है।
हाथ-रिकशा कोलकाता का प्रमुख आकर्षण है । यह रिकशा हाथ से खींचा जाता है । इसका ग्रचलन अंग्रेजों के समय से ही है । मानवीयता की दृष्टि से अब इस हाथ-रिक्शे पर रोक लगाया जा रहा है ।

13. छंद :- प्रस्तुत शव्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्रा’ से लिया गया है।
मात्रा, वर्णसख्या, विराम, गति अथवा लय या तुक आदि के नियमों से युक्त रचना को ‘बन्दू’ या ‘पद्ग’ कहते हैं। छंद के घार भेद हैं – वर्णवृन, मात्रिकवृत्त, अभयवृत्त तथा स्वच्छंद या मुक्त वृत्त।

14. चौरस्ता :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
चौरस्ता के लिए ‘चौराहा’ शब्द का भो प्रयोग किया जाता है । जहाँ पर चार सड़कें आकर एक जगह मिलती हैं उसे चौरस्ता कहते हैं। चौरस्ते पर गाड़ययों के आने-जाने के लिए ट्रैफिक साधनो तथा नियमों को प्रयोग में लाया जाता है।

15. नकसीर :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल को कविता ‘कलकत्ता’ से अचानक ही लिया गया है।
नकसीर एक प्रकार की बीमारी है। इसमें अक्सर नाक से रक्त निलकना शुरू हो ज्ञाता है।

16. ट्रैफिक :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल को कविता ‘कलकता’ से लया गया है।
ट्रैफिक गाड़ियों के आन-जान (आवागमन) को कहते हैं । दुर्घटनारहित आवागमन के लिए ट्रॉफिक के नियम बनाए गए हैं जिनका पालन सभी को करना होता है। रूकने, तैयार रहने तथा आगे बढ़ने के लिए क्रमशः लाल, नारंगी एवं हरो रंग की बत्तियों का प्रयोग किया जाता है ।

17. आदिवासी :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ सं लिया गया है ।
आदिवासी का अर्थ ही है प्रारंभिक काल से रहनेवाले । वैसी जातियाँ जो मानव-सभ्यता के प्रारभिक काल से ही जंगलों में अपनी भाषा तथा रीति-रिवाज के साथ रहते आए है उन्हें आदिवासी कहते हैं। आज भी कई ऐसी आदिवासी जातियाँ है जिनकी अपनी ही दुनिया है तथा इनका संपर्क बाहरी दुनिया से नही है । अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए ये पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर रहते हैं।

18. नृपेन्द्र चक्रवर्त्ती :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकक्ता’ से लिया गया है।
साठ के दशक में भूखी पोढ़ी (हंगरी जनरेशन) नाम के साहित्यिक आदोलनकारियों ने अपनी लंखनी से पूरे कालकाता शहर को हिला दिया था। इनके चर्चे विंदेशों तक जा पहुँचे थे। नृपन्द्र चक्रवर्तो इन्हीं साहित्यकारों में से एक थे

19. लंदन :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल को कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
लंदन संयुक्त राजशाही तथा इग्लैंड की राजधानी है । आज यह्न विश्व का प्रमुख सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक केन्द्र है। राजनीति, शिक्षा, मनोरजन, मीडिया, फैशन तथा कला के क्षेत्र में यह विश्व में प्रमुख स्थान रखता है ।

20. पेइचिंग :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकता’ से लिया गया है।
यह जापान का एक प्रमुख पारंपरिक शहर है जो समुराई योद्धाओं के लिए भी विख्यात है। संस्कृति के मामले में ये किसी के साथ कोई समझौता करना पसंद नहीं करते हैं ।

21. न्यूयार्क :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल की कविता ‘कलकता’ से लिया गया है।
यह अमेरिका का सबसे बड़ा और प्रमुख नगर है । यह विश्व का एक प्रमुख महानगर है और विश्व व्यापार, वाणिज्य, सस्कृति, फैशन और मनारंजन पर इसका बहुत प्रभाव है । विशाल बंदरगाहवाले इस महानगर में पाँच प्रशासनिक इकाइयाँ हैं ।

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22. भेरी :- प्रस्तुत शब्द अरुण कमल को कविता ‘कलकत्ता’ से लिया गया है।
एक प्रकार का वाद्ययंत्र जिसे युद्धभूमि में सैनिकां का उत्साह बढ़ाने के लिए बजाया जाता था, भेरी कहते थे। कोलकाता में गाड़ियों के इतन सारे हॉन्न एक साथ बज उठने पर एसा प्रतीत होता है मानो युद्ध भूमि में भेरी बज रही हो।

पाठ्याधारित व्याकरण

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WBBSE Class 9 Hindi कलकत्ता Summary

कवि परिचय 

अरुण कमल का जन्म 15 फरवरी, 1954 ई० को बिहार के रोहतास जिले के नासरीगंज गाँव में हुआ था। इनकी पहचान हिंदी कवि तथा साहित्यिक निबंधकार के रूप में है । अरुण कमल आधुनिक काल के उन कवियों में अपना प्रमुख स्थान रखते हैं जिन्होंने मध्यम एवं निम्नवर्ग की समस्याओं, उनके जीवन-यथार्थ को अपनी कविताओं का विषय बनाया है। भाषा सहज एवं बोधगम्य होने के कारण पाठकों को आकर्षित करती हैं।
WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 5 कलकत्ता 2
अरुण कमल की रचना-संसार का परिचय इस प्रकार है –
कविता-संग्रह : ‘अपनी केवल धार’, ‘सबूत’, ‘नए इलाके’, ‘पुतली में’ ।
अनुवाद : रूसी कवि तोहू की कविताओं का अनुवाद, किपलिंग की पुस्तक ‘जंगल बुक’ का अनुवाद ।
अंग्रेजी कविता-संकलन : ‘वापसेज’ ।
साक्षात्कार : केथोपकथन ।
आलोचना : ‘कविता और समय’, ‘गोलमेज’ ।
पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, सोवियत भूमि नेहरु पुरस्कार, श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार, रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, शमशेर सम्मान तथा कविता-संग्रह ‘नए इलाके’ के लिए वर्ष 1998 का साहित्य अकादमी पुरस्कार ।

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ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या

1. जाऊँगा मैं जाऊँगा कोलकाता जाऊँगा
बार बार सौ बार कोलकाता जाऊँगा
मैं वहाँ तब से जा रहा हूँ जब वह कलकत्ता था
तब से जब वह बॉयस्कोप के भीतर था
मैं वहाँ बाबा के कंधे पर बैठकर गया
मैं वहाँ गालिब की पालकी में सजकर गया
जब मेरे गाँव से पहला टोल गया चटकल मजदूरों का
सत्तू की गठरी पीठ पर लादे मैं भी गया महिषादल तक
अब भी याद है मुझे वह सुबह जब मैं हावड़ा में उतरा
और चमके हावड़ा पुल के मस्तूल

शब्दार्थ :

  • कल = कोलकाता का पुराना नाम ।
  • बाबा = दादा ।
  • गालिब = उर्दु के प्रसिद्ध कवि/शायर ।
  • पालकी = आवागमन का पुरान धधन जिसके अंदर लोग बैठते थे तथा दो-चार व्यक्ति उसे कंधे पर उठाकर चलते थे ।
  • टोल = झुंड ।
  • चटकल = चट कार्य करनेवाला मशीन (पाट के कारखाने को भी चटकल कहा जाता है।)
  • महिषादल = बंगाल का एक स्थान ।
  • वड़ा = बंगाल का प्रसिद्ध स्थान – यहीं पर विश्वविख्यात हावड़ा पुल है जो गंगा नदी पंर बना है ।
  • मस्तूल = ऊपरी सिरा ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कलकत्ता शहर ने अरुण कमल को काफी आकर्षित व प्रभावित किया है । वे उन दिनो को याद करते हैं जब वे पहली बार कलकत्ता गए थे । उस समय उसका नाम कोलकाता नहीं बल्कि कलकत्ता था । यह उन दिनों की बात है जब सिनेमा की जगह बच्चों के लिए बॉयस्कोप ही मनोरंजन का प्रमुख साधन था तथा बॉयस्कोप दिखानेवाले अपने बॉंयस्कोप में कलकत्ता के प्रसिद्ध स्थानों का चित्र लगाना नहीं भूलते थे । कवि को अच्छी तरह याद है कि पहली बार कोलकाता अपने बाबा के कंधे पर बैठकर गए थे । उन्होंने पालकी की सवारी का भी आनंद उठाया था । पालकी पर बैठकर उन्हें गालिब की याद आई ।

यह उन दिनों की बात है जब उनके गाँव का पहला दल रोजी-रोटी की तलाश में कलकत्ता गया था कवि भी अपनी पीठ पर सत्तू की गठरी लादे उन लोगों के साथ महिषादल तक गए थे। सुबह-सुबह जब वे हावड़ा पहुँचे तो उन्हें हावड़ा पुल के चमकते मस्तूल ने अपनी ओर आकर्षित किया था। यह आकर्षण आज भी ज्यों का त्यों है, इसलिए कवि बारबार कलकत्ता जाने के प्रण को दुहराते हैं।

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काव्यगत विशेषताएँ :

1. प्रस्तुत अंश में कवि के बचपन तथा कलकत्ता की पहली यात्रा का वर्णन कुछ इस तरह किया है कि दोनों को एक-दूसरे से अलग करके देखना संभव नहीं है।
2. ‘कलकत्ता’, बॉयस्कोप, गालिब की पालकी, चटकल तथा महिषादल जैसे शब्द न केवल कलकत्रा की पाचीनता को दर्शाते है बल्कि उसकी साहित्यिक, सांस्कृतिक वैभव के साथ उसके आर्थिक महत्व को भी दर्शाते हैं।
3. कलकत्ता शहर का जो वर्णन कवि ने किया है वह उनके निजी अनुभव पर आधारित है।
4. कविता की भाषा सरल होते हुए भी आकर्षक है।

2. इतना पास कोलकाता
गंगा में समाया हुआ सागर का अवक्षेप धरती में कंदमूल
मेरे घर से इतनी दूर कि रात को झलके वही तारा बन उड़हुल
इतना प्यारा जैसे हाथी गन्रे चूसता कोई दमकल घंटी बजाता दौड़ता
अब भी याद है मुझे वो दिन जब मैं कलकत्ता की सड़को पर
खेत खलिहान के पाँवों से चला लाठी भर जगह छेकता

शब्दार्थ :

  • सागर = समुद्र ।
  • अवक्षेप = अवशिष्ट (बचा हुआ) पदार्थ ।
  • कदमूल = पौधे का जमीन के अंदर का वह हिस्सा जिसे खाया जाता है ।
  • उड़हुल = एक प्रकार का फूल जो बंगाल में ‘जावा’ के नाम से जाना जाता है ।
  • खलिहान = वह स्थान जहाँ तैयार फसल से अनाज के दाने अलग किए जाते हैं ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कवि यह महसूस करते हैं कि कोलकाता आज भी उनके दिल के इतने करीब है जैसे गगा में सागर का अवक्षेप हो या धरती के जितने करीब कंदमूल है । भले ही कोलकाता कवि के घर से काफी दूर है लेकिन यही कोलकाता रात में आकाश में तारा के रूप में उड़हुल बनकर चमकता है । कवि को कोलकाता का सौंदर्य, उसका भोलापन ऐसा लगता है मानो हाथी गन्ना चूस रहा हो या फिर कोई दमकल सड़क पर अपनी घंटी की सुरीली आवाज बिखेरता चला जा रहा हो । उन दिनों की याद आज भी ताजी है जब कवि खेत-खलिहानों में चलनेवाले पाँवों से कलकत्ता की सड़को पर एक लाठी भर जगह को घेरता हुआ नंगे पाँव चलता था ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. प्रस्तुत अंश में कवि के बचपन तथा कलकत्ता की पहली यात्रा का वर्णन कुछ इस तरह किया है कि दोनों को एक-दूसरे से अलग करके देखना संभव नहीं है।
2. कवि कोलकाता से अपने-आप को इतना निकट महसूस करते हैं जैसे गंगा में सागर का अवक्षेप या धरती के अंदर कंदमूल ।
3. कोलकाता के भोलेपन तथा उसके संगीत-प्रेम की तुलना गत्ना चूसते हाथी तथा दमकल की घंटी से किया गया है।
4. कवि ने कोलकाता की धरती को भी इतनी ही निकटता से जाना है जितनी निकटता से अपने गाँव के खेतखलिहान को ।
5. कलकत्ता शहर का जो वर्णन कवि ने किया है वह उनके निजी अनुभव पर आधारित है।
6. कविता की भाषा सरल होते हुए भी आकर्षक है ।

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3. एक बार फिर मैं बूँढ़ा हूँ अपनी चाल अपनी
गति दुनिया की समस्त गतियों के मध्य
मेट्रो ट्राम से लेकर हाथ रिक्शे तक सृष्टि के समस्त
छंदों के मध्य अपना छंद ढूँढता
मैं एक बेसहारा पैदल राहगीर वो जगह दूँढ़ रहा हूँ
जहाँ से पार कर सकूँ यह चौरस्ता

शब्दार्थ :

  • समस्त = सभी ।
  • गतियों = रफ्तारों ।
  • मध्य = बीच ।
  • मेट्रो = जमीन के अंदर चलने वाली रेलगाड़ी।
  • ट्राम = सड़कों पर पटरी पर रेलगाड़ी की तरह बिजली से चलनेवाली गाड़ी।
  • हाथ रिक्शे=वह रिक्शा जिसे पैडल मारकर नहीं बल्कि दाथ से खींचा जाता है ।
  • सृष्टि = प्रकृति ।
  • छंदों = कविता लिखने की शैली ।
  • बेसहारा = बिना सहारे के ।
  • राहगीर = राह में चलनवाला ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कविता के इस अंश में कवि कहते हैं कि आज कोलकाता में पाचीन से लेकर नवीन गति वाले यातायात के साधन मौजूद हैं । जहाँ एक ओर धीमी गति से चलने वाले हाथ रिक्शे हैं वहीं दूसरी और तेज गति से चलनेवाले मेट्रो भी मौजूद हैं । इन सारी रफ्तारों के बीच कवि अपनी रफ्तार का तालमेल बिठाना चाहते हैं। वे इन सारे छंदों में अपने छंद को ढूंढ़ेते हैं । इस तेज रफ्तारवाले शहर में पैदल चलनेवाले बेसहारा राहगीर हैं तथा उस जगह की खोज कर रहे हैं जहाँ से वे चौराहे को पार कर सकें । कहने का भाव यह है कि तब के कलकत्ता और आज के कोलकाता की रफ्तार में काफी अंतर आ चुका है । इतनी सारी तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच एक पैदल चलनेवाला राहगीर चौराहे को पार करने में अपने को बेसहारा पाता है।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता के इस अंश में कलकत्ता तथा कोलकाता के बीच आए रफ्तार की तुलना की गई है ।
2. कोलकाता – नाम भले ही नया हो लेकिन आज भी यहाँ पुराने और नए का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिलता है।
3. हाथ रिव्शा प्राचौनता का तो ट्राम और ट्रैफिक की लाल-हरी-पोली बत्तियाँ आधुनिकता की प्रतीक हैं।
4. कलकत्ता शहर का जो वर्णन कवि ने किया है वह उनके निजी अनुभव पर आधारित है।
5. कविता की भाषा सरल होते हुए भी आकर्षक है ।

4. लंदन पेइचिंग न्यूयॉर्क एक बार
कोलकाता बार बार बार बार कोलकाता ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ अरुण कमल की कविता ‘कलकत्ता’ से ली गई हैं।

व्याख्या : कविता के इस अंश में कवि यह कहना चाहते हैं लंदन, पेइचिंग तथा न्यूयार्क विश्वप्रसिद्ध हैं जिन्हें एक बार देख लेने पर पुन: देखने की इच्छा मिट जाती । लेकिन कोलकाता ऐसा शहर है जहाँ बार-बार जाने के बाद भी वहाँ से मन नहीं ऊबता । वहाँ बार-बार जाने को मन करता है । इसलिए कवि बार-बार कोलकाता जाने की दृढ़ इच्छा प्रकट करते हैं।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कवि को कोलकाता का सौदर्य लंदन, पेइघिंग तथा न्यूयार्के से भी अच्छा लगता है ।
2. हाथरिक्शा प्राचीनता का तो ट्राम और ट्रैफिक की लाल-हरी-पीली बत्तियाँ आधुनिकता की प्रतीक हैं।
3. कलकत्ता शहर का जो वर्णन कवि ने किया है वह उनके निजी अनुभव पर आधारित है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 4 जरुरतों के नाम पर

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions Poem 4 जरुरतों के नाम पर to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – जरुरतों के नाम पर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : ‘जरुरतों के नाम पर’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखें ।
प्रश्न – 2: ‘जरुरतों के नाम पर’ कविता का सारांश लिखें ।
प्रश्न – 3 : ‘जररतो के नाम पर’ कविता के माध्यम से कुँवर नारायण ने क्या संदेश देना चाहा है, लिखें ।
प्रश्न – 4 : ‘जरुरतों के नाम पर’ कविता में निहित संदेश को अपने शब्दों में लिखें ।
उत्तर :
‘नयी कविता’ के प्रमुख कवियां में से एक कुँवर नारायण ने अपनी कविताओं में ऐसे सवालों को उठाया है जिसका सबंध मनुष्य के पूर्ण अस्तित्व से है । आज हमारे समाज का यह दुर्भाग्य ही है कि साहित्यकार को वह सम्मान, इज्जत तथा पहचान नहीं मिल पाती जिसके वे हकदार होंते हैं। उन्हे पहचाननेवालं लोग थे किन्तु वे सत्तासीन नहीं थे, ईमानदार थे । …एक व्यक्ति की पहचान के रास्ते जों स्ता के गलियारों, मीडिया की चकाचौंध से होकर जाते है, कुँवर नारायण को स्वीकार न थे। जिस व्यवस्था के खिलाफ वे सीना तानकर खड़े थे, उसकी गुलामी भी वे कैसे कर सकते थे।

यहु उनकी प्रकृति में है कि गलत को गलत कह डालते हैं, उस पर सही होने की पॉलिश नहीं चढ़ांते । उनकी इसी प्रकृति तथा सच्याई का साथ देने के कारण उन्हें गलतफहमियो का शिकार बनाकर उन्हीं गलतफहमियों से अपने- आपको लड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। इस गलतफहमी के सबसे बड़े शिकार वे तब होते है जब उन्हे इस संशय में डाल दिया जाता है कि जिसे वे गलत कह रहे हैं, वास्तव में वह गलत है भी या नहीं ।

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कवि ने उन लोगों के बारे में कहा है जो जीवन में खुद तो कभी इस व्यवस्था से जीत नहीं पाए लेकिन अगर कोई जीतता है तो उसकी जीत भी उनसे सहन नहीं होता। उनके सह न पाने की परिस्थितियों के बीच उन्हें उसी प्रकार अस्वीकार कर दिया जाता है जिस म्रकार किसी अपमानजनक रिश्ते को बिना किसो माया-मोह के तोड़ दिया जाना है ।

कवि इस सच्चाई को अच्छी तरह से समझते हैं कि लोंग कितनी चालाकी से उनकी अपेक्षा कर दराकिनार (एक किनारे) कर देते है । दर असल नई कविता मूलतः एक परिस्थिति के भीतर पलते हुए मानव एवं व्यक्ति की निजो स्थिति की कविता है। कवि अच्छी तरह जानते हैं कि समाज में उनकी स्थिति ठोक वैसी है जैसी कि किसी घरलू उपन्यास के अंत में जोड़ी गई शिक्षाप्रद कहानियों की सूवी को होती है – उन्हें कोई नही पढ़ता फिर भी वह पुस्तक का अश होती है। ठीक यही स्थिति कवि की है – वह समाज में रहते हुए भी समाज के कचडे के समान हैं जिसकी कोई उपयांगिता नहीं है।

कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि वे समाज के भीड़ में अकेले पड़ गए हैं क्योंकि उनमें सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस है । ये लोग मिलकर कवि की सच्चाई को भी झुठला देते हैं और यह कहते हैं कि यहों समय की माँग है । जरुरत के नाम पर वे कवि की जिन्दगो से खिलवाड़ करते है – इनकी भावनाओं का मजाक उड़ांते हैं तथा फिर उन्हीं से पूछते हैं कि जिंदगी क्या है ? जिदगी कहते किसे हैं ?

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि कुँवर नारायण ने प्रस्तुत कविता के माध्यम से समाज में रह रहे मध्यवर्गीय, बुद्धिजीवी व्यक्ति के मन के बाह्य और भीतरी संघर्ष, जिंदा रहने की छटपटाहट में फेसे हुए जन तथा इसके साथ ही साहित्यकार तथा साहित्य से जुड़े अनेक सवालों को उठाया है।

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प्रश्न – 5 : कुँवर नारायण की काव्यगत-विशेषताओं को लिखें ।
प्रश्न – 6 : नयी कविता के प्रमुख कवि के रूप में कुँवर नारायण का मूल्यांकन करें ।
प्रश्न – 7 : कुँवर नारायण की कविताओं की भाषा व शिल्य पर विचार करें ।
प्रश्न – 8 : कुँवर नारायण की एक कवि के रूप में उनकी विशेषताओं को लिखें ।
उत्तर :
कुँवर नारायण को पढ़ने समय हमें बराबर यह अनुभव होता है कि वे विचारों, मूल्यों के कवि है । चाहे वह प्रेम हो, विषाद हो या फिर मृत्यु से जुड़े सवाल – उनका अपना अनुभव कविता मे नया विचार बनता है ! कुँवर नारायण का आत्मबोध केवल अपने- आप तक सीमित नहीं है, वह व्यक्ति और व्यापक सत्य के बीच एक नया सबंध बनाता है।

आज़ादी के बाद भारत के पारिवारिक ढाँचे, सामाजिक संबंधों, जीवन मूल्यों में ऐसे परिवर्तन हुए जिसकी कल्पना मनुष्य ने नहीं की थी। ये परिवर्तन सकारात्मक के साथ-साथ नकारात्मक भी हैं । कुँवर नारायण के शब्दों में ‘ पहियों और पंखोंवाली इस बेसिर-पैर की सभ्यता में ‘ यह पता लगाना आसान नहीं है कि कौन किसे चला रहा है – व्यक्ति समाज को या समाज व्यक्ति को, आदमी सत्ता को या सत्ता आदमी को । ऐसे में जीवन के प्रति जिस ऊब, खीझ, निराशा और कुठा की अभिव्य्यक्ति होगी वह कुछ इस प्रकार होगो –

प्रत्येक रोचक प्रसंग से हटा कर
शिक्षाप्रद पुस्तकों की सूची की तरह
घरेलू उपन्यासों के अंत में
लापरवाही से जोड़ दिया जाता हूँ ।

कुँवर नारायण ने आज़ादी से पूर्व ही लिखना शुरू किया था । आजादी से पहले जनता को यंह विश्वास थां कि देश आजाद होने के बाद हमारे नेता एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जिसमें रोटी, कपड़ा, मकान का अभाव नहीं होगा । जाति, भाषा, रंग तथा पद आदि के आधार पर किसी में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा ।

लेकिन ये सब आदर्श थे। यथार्थ तो यही था कि राप्ट्रीय आदोलन के लगभग सभी नेता जिस वर्ग से आए थे वह समाज का अभावग्रस्त नहीं बल्कि समाज का खाता-पीता वर्ग था। इसलिए यह स्वाभाविक था कि वे समाज के इस वर्ग और पूँजीपति वर्ग के हितों की रक्षा करें तथा इसके लिए उन लोगों की उपेक्षा कर दी जाय जो सच्चाई के पक्षधर है –

वे सब मिल कर
मेरी बहस की हत्या कर डालते हैं
जरूरतों के नाम पर…
और एक कवि से पूछते हैं कि जिन्दगी क्या है
जिन्दगी को बदनाम कर ।

जहाँ तक कुँवर नारायण के रचनाओं की भाषा शिल्य आदि का सवाल है – वह भाषा आम आदमी की भाषा है । लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि साहित्य की भाषा अलग होती है – कुँवर नारायण की भाषा ने यह भेद मिटा दिया है –

शिक्षाप्रद पुस्तकों की सूची की तरह
घरेलू उपन्यासों के अंत में
लापरवाही से जोड़ दिया जाता हूँ ।

काव्य-शिल्प के बारे में कुँवर नारायण का ऐसा मानना है कि नयी कविता की शैली की प्रमुखता यह है कि वह सीधेसीधे चेतना को छूना चाहती है। कुँवर नारायण काव्य-शिल्य के सिद्ध कवि हैं। वे कम से कम शब्दों का प्रयोग कर बड़ी बात कह जाते हैं। इससे उनकी कवित्व की शक्ति और सौमा का एक साथ पता चल जाता है।

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निष्कर्ष के तौर पर हम यह कह सकते हैं कि कुँवर नारायण नयी कविता के ऐसे कवि हैं, जिन्होने काव्य-भाषा और काव्य-शिल्प की दृष्टि से हिन्दी कविता को नयी समृद्धि दी । इससे नयी कविता की पहचना बनी ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

1. गलतफहामियों के बीच
बिल्कुल अकेला छोड़ दिया जाता हूँ …

प्रश्न :
इसके रचनाकार कौन हैं ? प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर :
इसके रचनाकार कुँवर नारायण हैं।
प्रस्तुत पंकित के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि बूँकि वे गलत को गलत साबित कर देते हैं इसलिए उन्है गलतफहमियों का शिकार बना कर उन गलतफहमियों से लड़ने के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है । लोग अपनी बहस के बाद उन्हे इस गलतफहमी में डाल देते हैं कि जिन्हें वे लगत कह रहे हैं, वास्तव में वह गलत है भी या नहीं।

2. वे जो अपने से जीत नहीं पाते
सही बात का भी जीतना सह नहीं पाते

प्रश्न :
कवि और कविता का नाम लिखें । पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
कवि कुँवर नारायण तथा कविता का नाम ‘जरुरतों के नाम पर’ है।
कवि का कहना है कि जो लोग अपनी ही कमजोंरयों से जीत नहीं पाते वे लगत को गलत और सही को सही कहने का साहस नहीं कर पाते । इसका परिणाम यह होता है कि सही व्यक्ति की जोत कों भी वे नहीं सह पाते क्योंकि वैसे व्यक्ति की जीत में उन्हें अपनी हार दिखती है।

3. घरेलू उपन्यासों के अंत में
लापरवाही से जोड़ दिया जाता हैँ ।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है । पंक्ति का भाव स्पप्व करें ।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘जकुरों के नाम पर’ पाठ से ली गई है।
आज समाज में सही व्यक्ति की कोई कद्र नहीं रह गई है । उन्हें समाज नकारा (किसी काम का नहीं) समझ कर एक किनारे कर देती है । ठीक वैसे ही जैसे किसी घरेलू उपन्यास के अंत में संदर्भ-सूची के तौर पर शिक्षाप्रद पुस्तकों के नाम जोड़ दिए जाते हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं होता

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4. और एक कवि से पूछते हैं कि जिन्दगी क्या है
जिन्दगी को बद्नाम कर ।

प्रश्न :
रचना का नाम लिखें । पंक्ति का आशय स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना का नाम है ‘जरुतों के नाम पर’
आज समाज में वैसे व्यक्ति की कोई पूछ नहीं जो सच्चाई को बंधड़क कह डालतं हैं । इतिहास साक्षी है कि ऐसं लोगों कां समाज ने ही मिटा डाला । इससे बड़े दुःख की बात और क्या हो सकतो है कि जो दूसरों की जिन्दगो को तबाह कर डालतं हैं वही जिन्द्री की परिभाषा पूछते हैं कि आखिर जिन्दगी किस चिड़िया का नाम है ?

5. मैं किसी अपयानजनक नाते की तरह
बेमुरौवत तोड़ दिया जाता हूँ ।

प्रश्न :
‘मै” का प्रयोग किसके लिए किया गया है ? पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
‘मै’ का प्रयोग कवि कुँवर नारायण ने अपने लिए किया है ।
जब भी कवि किसी गलत को गलत उहराने की कांशिश करतं है तो लोग कुचक्र चलाकर बेवजह बहस में फसा कर उन्हे हो गलत ठहराने की कांशिश करते हैं। यह बहस उनकी जरूरतों कां पूरा करने का एक हिस्सा है । इसका परिणाम यह होता है कि कवि को समाज से उसी तरह ताड़ दिया जाता है जिस प्रकार किसी अपमानजनक रिश्ते को बिना किसी मुरौवत के एक झटके से तोड़ दिया जाता है ।

6. वे सब मिलकर
मेरी बहस की हत्या कर डालते हैं

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प्रश्न :
‘वे सब’ कौन हैं ? वे किसके बहस की हत्या कर डालते हैं और क्यों ?
अथवा, पंक्ति का भाव स्पप्ट करें ।
उत्तर :
‘वे सब’ वे लोग हैं जिनमें गलत को गलत कहन का साहस नहीं है।
इस पंक्ति में कवि ने एसं लोगों की ओर ईशारा किया है जो इस सड़ी-गलो व्यवस्था के अंग बन चुके हैं तथा व्यवस्था को चलाते रहने के लिए सच्चाई की हत्या करने से भी नहीं हिचकेते

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न 1.
कौन गलत को साबित कर देता है ?
उत्तर :
कवि गलत को साबित कर देते हैं।

प्रश्न 2. कौन, किसके बीच अकेला छोड़ दिया जाता है?
उत्तर :
कवि को गलतफहमियां के बीच अकेला छांड़ दिया जाता है।

प्रश्न 3.
कवि को क्या दिखाने को अकेला छोड़ दिया जाता है ?
उत्तर :
कवि को वह सब दिखाने को अंकला छाड़ दिया जाता है जो सब उसने कह दिखाया है।

प्रश्न 4.
कौन-से लोग सही बात का भी जीतना नहीं सह पाते हैं ?
उत्तर :
वैसे लोग जो अपने से जोत नहीं पाते, वें सही बात का जोतना नहीं सह पाते।

प्रश्न 5.
किसे अपमानजनक नाते की तरह बेमुरव्वत तोड़ दिया जाता है ?
उत्तर :
सही को सही कहने वाले व्यक्ति को अपमानजनक नाते की तरह बेमुरव्यत तोड़ दिया जाता है।

प्रश्न 6.
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता में कवि ने अपनी तुलना किससे की है ?
उत्तर :
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता में कवि ने अपनी तुलना शिक्षाप्रद पुस्तको की सूची से की है।

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प्रश्न 7.
घरेलू उपन्यासों के अंत में किसे लापरवाही से जोड़ दिया जाता है ?
उत्तर :
घरेलू उपन्यासों के अंत में शिक्षाप्रद पुस्तकों पुस्तकों की सूची को लापरवाही से जोड़ दिया जाता है।

प्रश्न 8.
कौन लोग कवि के बहस की हत्या कर डालते हैं ?
उत्तर :
जो लोग गलत को हो सही ठहराते है, वैसे ही लोग कवि के बहस की हत्या कर डालते हैं।

प्रश्न 9.
कवि अपने आपको बिल्कुल ही अकेला क्यों पाते हैं ?
उत्तर :
कवि उन लोगों की भीड़ में शामिल नहीं हो पांत, जों गलत को भी सही ठहराते हैं; इसलिए कवि अपने आपकां बिल्कुल ही अंकला पाते हैं:

प्रश्न 10.
‘जरूरतों के नाम पर’ का आशय क्या है ?
उत्तर :
‘जरूरतों के नाम पर’ का आशय यह है कि अपनी आवश्यकता के अनुसार गलत को सही और सही को गलत ठहराना।

प्रश्न 11.
‘प्रत्येक रोचक-प्रसंग से हटाकर’ का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
‘प्रत्येक रोचक-प्रसंग से हटाकर’ का तात्पर्य है कि जहाँ कवि को ख्याति मिलने वाली होती है, वहाँ से उसे दरकिनार कर दिया जाता है।

प्रश्न 12.
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता के अंत में कवि से कौन-सा प्रश्न पूछा जाता है ?
उत्तर :
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता के अंत में कवि से यह प्रश्न पूछा जाता है जिंदगो क्या है?

प्रश्न 13.
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता में किसकी हत्या का जिक्र है ?
उत्तर :
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता में कवि की वहस की हत्या का जिक है।

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प्रश्न 14.
‘उनकी असहिप्युता के बीच’ में किसकी असहिष्पुता की बात की गई है ?
उत्तर :
‘उनकी असहिष्गुता के बीच’ में उन लोगों की अस्ाहिष्युता की वात की गई है, जो न तो स्वयं जीत पाते हैं और न ही किसी सही बात
का जीतना सह पाते हैं।

प्रश्न 15.
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता का मूल कथ्य क्या है ?
उत्तर :
‘जरूरतों के नाम पर’ कविता का मूल कध्य यह है कि वैसे लोग जो सही को सही और गलत को गलत क्हते हैं. अवसरवादो लोंग उन्हें पसंद नहीं कर पातं।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कुँवर नारायण का जन्म कब हुआ था ?
(क) 19 सितबर 1927 को
(ख) 20 सितंबर 1928 को
(ग) 21 सितबर 1929 को
(घ) 30 सितंबर 1926 को
उत्तर :
(क) 19 सितंबर 1927 को।

प्रश्न 2.
कुँवर नारायण किस सप्तक के प्रमुख कवि हैं ?
(क) तार सप्तक
(ख) दूसरा सप्तक
(ग) तौसरा सप्तक
(घ) इनमें से किसी के नहीं
उत्तर :
(ग) तीसरा सप्तक ।

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प्रश्न 3.
कुँवर नारायण की कविताओं का प्रमुख विषय क्या है ?
(क) धर्म
(ख) राजनोति
(ग) मिथक
(घ) इतिहास और मिथक
उत्तर :
(घ) इतिहास और मिथक

प्रश्न 4.
कुँवर नारायण किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(घ) आधुनिक काल।

प्रश्न 5.
कुँवर नारायण ने किस पत्रिका के लिए अनुवाद का कार्य किया ?
(क) हंस
(ख) सारिका
(ग) माधुरी
(घ) तनाव
उत्तर :
(ग) तनाव ।

प्रश्न 6.
कुँवर नारायण को किस वर्ष ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिला ?
(क) सन् 2001 में
(ख) सन् 2003 में
(ग) सन् 2005 में
(घ) सन् 2007 में
उत्तर :
(ग) सन् 2005 में।

प्रश्न 7.
कुँवर नारायण किस पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य रहे ?
(क) हंस
(ख) नया प्रतीक
(ग) माधुरी
(घ) दिनमान
उत्तर :
(ख) नया प्रतीक।

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प्रश्न 8.
कुँवर नारायण का प्रथम काव्य-संग्रह इनमें से कौन-सा है ?
(क) तीसरा सप्तक
(ख) परिवेश : हम-तुम
(ग) आमने-सामने
(घ) चक्रव्यूह
उत्तर :
(घ) चक्रव्यूह ।

प्रश्न 9.
‘वाजश्रवा के बहाने’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कैफ़ी आजमी
(ख) चन्द्रकांत देवताले
(ग) कुँवर नारायण
(घ) अरुण कमल
उत्तर :
(ग) कुँवर नारायण ।

प्रश्न 10.
‘आत्मजयी’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) सर्वेश्वर
(ख) उषा प्रियंवदा
(ग) दिनकर
(घ) कुँवर नारायण
उत्तर :
(घ) कुँवर नारायण

प्रश्न 11.
‘दूसरा कोई नहीं’ किसकी रचना है ?
(क) पंत की
(ख) अज्ञेय की
(ग) कुंवर नारायण की
(घ) अरुण कमल की
उत्तर :
(ग) कुँवर नारायण की !

प्रश्न 12.
‘इन दिनों’ किसकी रचना है ?
(क) कुँवर नारायण की
(ख) हरिशकर परसाई की
(ग) जयशंकर प्रसाद की
(घ) महादेवी वर्मा की
उत्तर :
(क) कुँवर नारायण की ।

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प्रश्न 13.
‘आकारों के आसपास’ किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) कविता
(ग) कहानी
(घ) आलोचना
उत्तर :
(ग) कहानी

प्रश्न 14.
‘आत्मजयी’ का रचना-काल क्या है ?
(क) सन् 1955
(ख) सन् 1960
(ग) सन् 1965
(ग) सन् 1970
उत्तर :
(ग) सन् 1965 ।

प्रश्न 15.
‘वाजश्रवा के बहाने’ का रचना-काल क्या है ?
(क) सन् 2008
(ख) सन् 2010
(ग) सन् 2012
(घ) सन् 2014
उत्तर :
(क) सन 2008

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना कुँवर नारायण की नहीं है ?
(क) दूसरा कोई नहीं
(ख) इन दिनों
(ग) चक्रव्यूह
(घ) क्षणदा
उत्तर :
(घ) क्षणपा ।

प्रश्न 17.
निम्न में से कौन-सी समीक्षा-विचार कुँवर नारायण का नहीं है ?
(क) मेंर साक्षात्कार
(ख) आज और आज से पहल
(ग) संकल्पत्ता
(घ) साहित्य के कुछ अन्तविष्विषयक संदर्भ
उत्तर :
(ग) संकल्पिता ।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में कौन-सा संकलन कुँवर नारायण का नहीं है ?
(क) कुँवर नारायण – संसार
(ख) कुँवर नारायण उपस्थिति
(ग) कुंवर नारायण : प्रार्तानिि कविताएँ
(घ) कल्पलता
उत्तर :
(घ) कल्पलता।

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प्रश्न 19.
‘आज और आज से पहले’ के रचनाकार हैं ?
(क) नामवर सिंह
(ख) दिनकर
(ग) कुँवर नारायण
(घ) नगेंद्र
उत्तर :
(ग) कुँवर नारायण ।

प्रश्न 20.
निम्न में से कौन-सा पुरस्कार कुँवर नारायण को नहीं मिला ?
(क) आशान पुरस्कार
(ख) प्रेमचंद पुरस्कार
(ग) मंगलाप्रसाद पारितोषिक
(घ) राध्रैय कबीर सम्मान
उत्तर :
(ग) मगलाप्रसाद पारितांषिक

प्रश्न 21.
निम्न में से कौन-सा पुरस्कार कुँवर नारायण को नहीं मिला ?
(क) साहित्य अकादमी पुरस्कार
(ख) व्यास सम्मान
(ग) शलाका सम्मान
(घ) नाँबेल पुरस्कार
उत्तर :
(घ) नाबेल पुरस्कार ।

प्रश्न 22.
निम्न में से कौन-सा सम्पान कुँवर नारायण को नहीं मिला ?
(क) मेंडल ऑफ वॉरसा
(ख) माखनलाल चतुर्वेदो पुरस्कार
(ग) प्रीमियो फेरेनिया सम्मान
(घ) शलाका सम्मान
उत्तर :
(ख) माखनलाल चतुत्वेदी पुरस्कार ।

प्रश्न 23.
‘तीसरा सप्तक’ का प्रकाशन काल क्या है ?
(क) सन् 1959
(ख) सन् 9960
(ग) सन् 1961
(घ) सन् 1962
उत्तर :
(क) सन् 1959

प्रश्न 24.
‘परिवेश : हम-तुम’ का प्रकाशन-काल क्या है ?
(क) सन् 1959
(ख) सन् 1960
(ग) सन् 1961
(घ) सन् 1962
उत्तर :
(ग) मन् 1961

प्रश्न 25.
‘कोई दूसरा नहीं’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 1991
(ख) सन् 1992
(ग) सन् 1993
(घ) सन् 1994
उत्तर :
(ग) सन् 1993

प्रश्न 26.
‘आकारों के आसपास’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 1973
(ख) सन् 1974
(ग) सन् 1975
(घ) सन् 1970
उत्तर :
(क) सन् 1973।

प्रश्न 27.
‘आज और आज से पहले’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 1970
(ख) सन् 1998
(ग) सन् 1980
(घ) सन् 1981
उत्तर :
(ख) सन् 1998

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प्रश्न 28.
‘मेरे साक्षात्कार’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 1999
(ख) सन् 2000
(ग) सन् 2002
(घ) सन् 2008
उत्तर :
(क) सन् 19991

प्रश्न 29.
‘साहित्य के कुछ अन्तर्विषयक संदर्भ’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन 2004
(ख) सन् 2003
(ग) सन् 2001
(घ) सन् 2000
उत्तर :
(ख) सन् 2003

प्रश्न 30.
‘कुँवर नारायण-संसार’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 2002
(ख) सन् 2003
(ग) सन् 2004
(घ) सन् 2005
उत्तर :
(क) सन् 2002

प्रश्न 31.
‘कुँवर नारायण उपस्थिति’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन 1900
(ख) सन 2000
(ग) सन् 2008
(घ) सन् 2002
उत्तर :
(घ) सन् 20021

प्रश्न 32.
‘कुँवर नारायण चुनी हुई कविताएँ’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन्. 2003
(ख) सन् 2000
(ग) सन् 1998
(घ) सन् 2000
उत्तर :
(क) सन 2003।

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प्रश्न 33.
‘कुँवर नारायण-प्रतिनिधि कविताएँ’ का प्रकाशन-वर्ष क्या है ?
(क) सन् 2003
(ख) सन् 2008
(ग) सन् 1990
(घ) सन् 1955
उत्तर :
(ख) सन् 2008 ।

प्रश्न 34.
कौन गलत को गलत साबित कर देता है ?
(क) अरुण कमल
(ख) कैफी आजमी
(ग) कुँवर नारायण
(घ) शुकदेव प्रसाद
उत्तर :
(ग) कुँवर नारायण ।

प्रश्न 35.
किसे गलतफहमियों के बीच अकेला छोड़ दिया जाता है ?
(क) कुँवर नारायण कों
(ख) अरुण कमल को
(ग) पाश को
(घ) सर्वेश्वर को
उत्तर :
(क) कुँवर नारायण कां।

प्रश्न 36.
कौन कवि की बहस की हत्या कर डालते हैं ?
(क) प्रेमचंद
(ख) धर्मवीर भारती
(ग) लोग
(घ) चेखव
उत्तर :
(ग) लोंग।

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प्रश्न 37.
कौन सही बात को भी जीतना नहीं सह पाते ?
(क) कवि
(ख) लंखक
(ग) जो अपने से जोत नहीं पाते
(घ) जो जीतना नहीं चाहते
उत्तर :
(ग) जो अपने से जीत नहीं पाते ।

प्रश्न 38.
‘जरूरतों के नाम पर’ किसकी रचना है ?
(क) अरुण कमल की
(ख) चंद्रकांत देवतालं की
(ग) कुॅवर नारायण की
(घ) पाश की
उत्तर :
(ग) कुँवर नारायण की।

प्रश्न 39.
कुँवर नारायण की पहचान मुख्य रूप से किस में है ?
(क) कवि
(ख) निबंधकार
(ग) उपन्यासकार
(घ) कहानोकार
उत्तर :
(क) काव

प्रश्न 40.
‘कवि से पूछते हैं कि जिन्दगी क्या है’ – कवि कौन है ?
(क) सूर
(ख) तुलसी
(ग) अरुण कमल
(घ) कुँवर नारायण
उत्तर :
(घ) कुँवर नारायण

टिप्पणियाँ

1: नई कविता :- साहित्य में यह विवाद का विषय रहा है कि जिस ‘नई कविता’ के नाम से जाना जाता है, वह किन अर्थों में नई है क्योंक हरेक कविता अपने-आप मे नई होती है । इस दृष्पिकोण से इसे नयी कविता कहना सही नहीं है । सच तो यह है कि इस नई कावता पर भी प्रर्गतिशील और प्रगतिवाद ही नहीं, छायावाद का भी प्रभाव दिखाई देता है। इस प्रकार नई कविता की कोई सर्वंमान्य परिभाषा देना एक कठिन कार्य है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि नई कविता का संबंध अपने युग के यथार्थ से है लेकिन इस यथार्थ को व्यक्त करनंबाली दृष्पियाँ भी एक नहीं, भिन्न-भिन्न है :

2. घरेलू उपन्यास :- प्रस्तुत शब्द कुँवर नारायण की कविता ‘जरुरतों के नाम पर’ कविता से लिया गया है । सर्वप्रथम घरेलू उपन्यासों की शुरूआत करने का श्रेय किशोंरीलाल गास्वामी को ज्ञाता है। इन्होने ‘उपन्यास’ पत्रिका निकाली जिसमें उनके 65 छोटे-बड़े उपन्यास प्रकाशित हुए । इनके उपन्यासं की पृष्ठ भूमि घरेलू तथा सामाजिक थी । लेकिन इन उपन्यासों में विलासिता का चित्रण अधिक था।

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3. शिक्षाप्रद पुस्तक :- प्रस्तुत शब्द कुँवर नारायण की कविता ‘जरूरतों के नाम पर’ कविता के लिया गया है ।
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है – शिक्षापद पुस्तक का तात्पर्य वैसी पुस्तकों से है जो हमें शिक्षा देने का कार्य करती हैविशेष कर चरित्र-निर्माण संबंधी । प्राचीन काल से ही ऐसी पुस्तको को छारोपयोगी माना जाता रहा है। पंचतंत्र की कहानियाँ, हितोपदेश, विशप की कहानियाँ तथा गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित अनेक पुस्तको को शिक्षाप्रद पुस्तको के अतर्गत रखा जा सकता है।

पाठ्याधारित व्याकरण
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WBBSE Class 9 Hindi जरुरतों के नाम पर Summary

कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर सन् 1927 को हुआ था। इनकी कवि के रूप में मुख्य रूप से पहचान अझेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ से बनी। ये नई कविता के प्रमुख कवियों में से हैं। कुँवर नारायण मूलतः कवि हैं। इनकी कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्होंने इतिहास तथा मिथक के माध्यम से वर्तमान की समस्याओ को उठाया है । कविता के अलावे कुँवर नारायण ने कहानियों, लेख तथा समीक्षाएँ भी लिखीं हैं, साथ ही साथ इन्होंने सिनेमा, रंगमंच एवं साहित्य की अन्य कलाओं पर भी अपनी लेखनी चलाई है । इनकी रचनाएँ ऐसी हैं जिन्हें पाठक सहज ही समझ पाते हैं ।

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अधिकांश रचनाओं में इन्होंने नए-नए प्रयोग भी किये हैं – जो नयी कविता की विशेषता है । इनकी अनेक रचनाएँ ऐसी हैं जिनका अनुवाद कई विदेशी भाषाओं में हो चुका है । इतना ही नहीं स्वयं इन्होने ‘तनाव’ पत्रिका के लिए कवाफी तथा ब्रोर्खस की कविताओं का हिन्दी में अनुवाद किया है । सन् 2009 में कुँवर नारायण को उनकी साहित्य-सेवा के लिए वर्ष 2005 के लिए देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कुँवर नारायण की प्रकृति चिंतन-मनन की ओर अधिक है – यह बात उनकी काव्य भाषा में आसानी से देखी जा सकती है ।

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कुँवर नारायण की महत्वपूर्ण प्रकाशित कृतियाँ निम्नलिखित हैं –
काव्य-संग्रह : चक्रव्यूह (1956), तीसरा सप्तक (1959), परिवेश : हम-तुम (1961), आमने-सामने (1971), कोई दूसरा नहीं (1993), इन दिनों (2002), कुँवर नारायण : चुनी हुई कविताएँ (2003), कुँवर नारायण-प्रतिनिधि कविताएँ (2008) ।
खण्ड-काव्य : आत्मजयी (1965) और वाजश्रवा के बहाने (2008) ।
कहानी-संग्रह : आकारों के आसपास (1973) ।
निबंध-संग्रह : कुँवर नारायण – संसार (2002), कुँवर नारायण उपस्थिति (2002) ।
समीक्षा : आज और आज से पहले, मेरे साक्षात्कार, साहित्य के कुछ अन्तर्विषयक संदर्भ ।
पुरस्कार सम्मान : ज्ञानपीठ पुरस्कार के अलावे साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान, कुमार आशान पुरस्कार, प्रेमचंद पुरस्कार, राष्ट्रीय कबीर सम्मान, शलाका सम्मान, मेडल ऑफ वेरसा, प्रीमियो फेरेनिया सम्मान, पद्मभूषण सम्मान ।

ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या

1. क्योंकि मैं गलत को साबित कर देता हूँ
इसलिए हर बहस के बाद
गलतफहमियों के बीच
बिल्कुल अकेला छोड़ दिया जाता हैँ
बह सब कर दिखाने को
जो सब कह दिखाया ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ कुँवर नारायण की कविता ‘जरूरतो के नाम पर’ से उद्दुत की गई हैं ।

व्याख्या : कविता की इन पंक्तियों में कुँवर नारायण ने जीवन के भोगे हुए अनुभवों को व्यक्त किया है । यह उनकी प्रकृति में है कि गलत को गलत कह डालते हैं, उस पर सही होने की पोलिश नहीं चढ़ाते । उनकी इसी मकृति तथा सच्चाई का साथ देने के कारण गलत-फहमियों का शिकार बनाकर उन्ही गलतफहमियों से अपने-आपको लड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हैं ।

इस गलतफहमी के सबसे बड़े शिकार वे तब हॉंते हैं जब उन्हें इस संशय में डाल दिया जाता है कि जिसे वे गलत कह रहे है, वास्तव में वह गलत है भी या नहीं । लोग उन्हें अपन हाल पर छांड़ देते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी कहा है उसे करके भी दिखाएँ – समाज इसमें उनकी कोई मदद करनेवाला नहीं है । वह केवल तमाशबौन बनकर तमाशा देखना चाहते हैं।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता कवि के निजी अनुभव्रों का बखान करती है ।
2. यहाँ कवि ने ऐसे सवालों को उठाया है जिसका संबध मनुष्य के सपूर्ण अस्तत्व से है।
3. वर्तमान माहौल के प्रति कवि के मन में गहरा आक्रोश है
4. काव्य-भाषा में चितंन की प्रवृत्ति दिखाई दती है ।
5. ‘भीड़ में अंकेला पड़ता व्यक्ति’ नयी कावता की प्रमुख विशेषता रही है, जो इस कावता में साफ-साफ झलकती है।

2. वे जो अपने से जीत नहीं पाते
सही बात का भी जीतना सह नहीं पाते,
और उनकी असहिष्युता के बीच
मैं किसी अपमानजनक नाते की तरह
बेमुरौवत तोड़ दिया जाता हूँ ।

शब्दार्थ :

  • असहिष्गुता = नहीं सह पाना ।
  • नाते = रिश्ते, संबंध ।
  • बेमुरौवत = बिना किसी दया के

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ कुँवर नारायण की कविता ‘जरुतों के नाम पर’ से उद्दुत की गई हैं ।

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व्याख्या : कविता के प्रस्तुत अंश में कवि ने उन लोगों क बारं में कहा है जो जीव्रन में खुद तो कभी इस व्यवस्था से जीत नहीं पाए लेकन अगर कोई जीतता है तो उसकी जीत भी उनसे सहन नहीं होती। उनके सह न पाने की परिस्थितियों के बीच उन्हें उसी प्रकार अस्वीकार कर दिया जाता है जिस प्रकार किसी अपमानजनक रिश्ते को बिना किसी माया-मोह के तोड़ दिया जाता है। यहाँ कवि मध्यवर्ग के प्रतिर्नाध के रूप में हमार सामने आंत है जिसकी सबसं बड़ी इच्छा है व्याक्ति की निजी स्वतंत्रता । कविता के इस अंश में कवि की अनास्था, निराशा, विफसता, कुठा तथा टृटन जैस भाव स्पष्ट रूप में दिखाई देते हैं।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता कवि के निजी अनुभवों का बखान करती है ।
2. यहाँ कवि ने एसे सवालो को उठाया है जिसका संबंध मनुष्य के सपूर्ण अस्तित्व से है।
3. वर्तमान माहौल के प्रति कवि के मन मे गहरा आक्रोश है।
4. काव्य-भाषा में चितंन की प्रवृन्ति दिखाई देती है ।
5. ‘भीड़ में अकेला पड़ता व्यक्ति’ नयी कविता की प्रमुख विशेषता रही है, जो इस कविता में साफ-साफ झलकती है

3. प्रत्येक रोचक प्रसंग से हटा कर,
शिक्षाप्रद पुस्तकों की सूची की तरह
घरेलू उपन्यासों के अन्त में
लापरवाही से जोड़ दिया जाता हूँ ।

शब्दार्थ :

  • रोचक = रचिकर, अच्छा लगनेवाला ।
  • शिक्षाप्रद = शिक्षा देनेवाली ।
  • लापरवाही = विना किसी परवाह के ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ कुँवर नारायण की कविता ‘जरुरतों के नाम पर’ से उद्दृत की गई हैं।

व्याख्या : कविता के प्रस्तुत अंश में कुँवर नारायण की इस व्यवस्था में फिट न होने की पौड़ा साफ-साफ झलकती है । कवि इस सच्चाई को अच्छी तरह से समझते हैं कि लोग कितनी चालाकी से उनकी अपेक्षा कर दरकिनार (एक किनारे) कर देते हैं । दरअसल नई कविता मूलतः एक परिस्थिति के भीतर पलते हुए मानव की व्यक्ति की निजी स्थिति की कविता है।

कवि अच्छी तरह जानते हैं कि समाज में उनकी स्थिति ठीक वैसी है जैसी कि किसी घरेलू उपन्यास के अंत में जोड़ी गई शिक्षाप्रद कहानियों की सूची की होती है – उन्हे कोई नहीं पढ़ता फिर भी वह पुस्तक का अंश होता है। ठीक यही स्थिति कवि की है – वह समाज में रहते हुए भी समाज के कचड़े के समान हैं जिसकी कोई उपयोगिता नहीी है ।

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काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता कवि के निजीं अनुभवों क्या बखाम करती है।
2. यहाँ कवि नै ऐसे संबम्लों को उढया हैं जिसक्क संब्ध मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व से है।
3. वर्तमान माहॉल के प्रति कवि के मन में गहरा आक्रंशश है ।
4. काव्य-भाषा में चितन की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
5. ‘भीड़ में अंकला पड़ता व्यक्ति’ नयी कविता की प्रमुख विशेषता रही है, जो इस कविता में साफ-साफ झलकती है ।

4. वे सब मिल कर
मेरी बहस की हत्या कर डालते हैं
जरुरतों के नाम पर…
और एक कवि से पूछते हैं कि जिन्दगी क्या है
जिन्दगी को बद्नाम कर ।

संद्र्भ : ग्रस्तुत पंक्तियाँ कुँवर नारायण की कविता ‘जरुतों के नाम पर’ से उद्धत की गई हैं।

व्याख्या : कवि को ऐसा ग्रतीत होता है कि वे समाज के भीड़ में अकेले पड़ गए हैं क्योकि उनमें सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस है । ये लोग मिलकर कवि की सच्चाई को भी झुठला देते हैं और यह कहते हैं कि यही समय की माँग है । जरूरत के नाम पर वे कवि की जिन्दगी से खिलवाड़ करते हैं – इनकी भावनाओं का मजाक उड़ाते हैं तथा फिर उन्हीं से पूछते हैं कि जिंदगी क्या है, जिंदगी कहते किसे हैं ? यहाँ आज़ादी के बाद की स्थिति को लेकर कवि में असंतोष का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है । यह स्थिति नयी कविता के लगभग सारे कवियों की है कि वे स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद की स्थिति से असंतुष्ट थे ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता कवि के निजी अनुभवों का बखान करती है ।
2. यहाँ कवि ने ऐसे सवालों को उठाया है जिसका संबंध मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व से है।
3. वर्तमान माहौल के प्रति कवि के मन में गहरा आक्रोश है ।
4. काव्य-भाषा में चितंन की प्रवृत्ति दिखाई देती है ।
5. ‘भीड़ में अकेला पड़ता व्यक्ति’ नयी कविता की प्रमुख्ख विशेषता रही है, जो इस कविता में साफ-साफ झलकतीहै।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 3 पेड़ का दर्द

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions Poem 3 पेड़ का दर्द to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – पेड़ का दर्द

दिर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : ‘पेड़ का दर्द’ शीर्षक कविता का मूलभाव अपने शब्दों में लिखें ।
प्रश्न – 2 : ‘पेड़ का दर्द’ कविता के माध्यम से व्यक्त कवि के संदेश को अपने शब्दों में लिखें।
प्रश्न – 3 ‘पेड़ का दर्द’ कविता का सारांश लिखें ।
प्रश्न – 4 : ‘पेड़ का दर्द’ कविता में पर्यावरण के प्रति कवि का गहरा दर्द झालकता है – विवेचना करें।
प्रश्न – 5 : ‘पेड़ का दर्द’ कविता के मूल भाव को अपने शब्दों में लिखें ।
उत्तर :
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना में परिवेश के प्रति सजगता अपने समकालीन कवियों से अधिक है । जब स्थिति में अराजकता फैलती है और सत्ता बेढंगे रास्ते पर चलने लगती है तो उनका दर्द ‘जंगल का दर्द’ बन जाता है। उनकी कविताओं में यथार्थ को मोहक सतरंगे आवरण में ढकने वाली कल्पना नहीं है, वह यधार्थ से खेलनेवाली है।

पर्यावरण के प्रति कवि अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहते है कि मुझे उन जंगलों की याद मत दिलाओ जो अब केवल कल्पना में ही जीवित बची है। निरतर कटते जंगलों से हरियाली-विहोन धरती को देखकर कवि अपना दर्द व्यक्त करते हुए कहते हैं कि धुआँ, लपटें, कोयले और राख के अवशेष को छोड़ता हुआ मैं घूल्हे में लकड़ी की तरह जल रहा हूं। नश होते जंगलों का यह दर्द ही कवि का दर्द है इसलिए कवि का कहना है कि कोई मुझे उन नष्ट हो गए जंगलों की याद अब न दिलाए।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 3 पेड़ का दर्द

कवि उन दिनों की याद करता है जब हेरे-भरे जंगलों के वृक्षों की तरह उसका भी अस्नत्व था। हरें-भरे पंड़ों की डालों पर चिड़ियाँ चहचहाया कर्ती थीं, धामिन पेड़ों से लिपटी रहती थी तथा गुलदार डालों पर बैठकर पड़ों के प्रति अपना स्नेह जताता था। हंरे भरे पेड़, फूलों से लदो डालियाँ कवल सुख ही नही पदान करती थी बल्कि वह काव के व्यक्तित्व का एक हिस्सा भी थी।

कवि को अब जगलों को नही बल्कि उन कुल्हाड़याओ की याद शंष रह गई है जिन कुल्हाड़यों ने जगल के पड़ों का काम तमाम कर दिया था । कवि को केवल उन आरों की याद शेष रह गई है जिन्होंने पंड़ों को दुकड़ों में बाँट डाला था। पड़ों का दुकड़ों में बँटना कवि को अपने व्यक्तित्च का बँटना अनुभव होता है क्योंक उन्हीं पेड़ो से कवि के व्यक्तित्व को संपूर्णता मिली थी । कवि को लगता है जैसे उसकी संपूर्णता उससे छीन ली गई हो – अब वह अपने-आप में इन जंगलों को तरह आधा-अधूरा है

जंगलों को यूँ कबतक नष्ष किया जाता रहेगा – यह कवि को पता नहीं । अनिश्चितता की इस स्थिति में कवि सोचता है कि वह तो चूल्हे में जलती लकड़ी के समान है, जिसे यह भी नहीं पता कि चूल्हे पर रखी हाँड़ी में कुछ पक भी रहा है या नहीं । न जाने उससे किसी का पेट भो भरेगा या फिर वह हाँड़ी यूँ ही खुदबुद कर रही है।

कवि यह चाहता है कि लोग भी उसकी तरह आँच से तषें, तमतमाएँ, उनके भी चेहरे गुस्से से लाल हों और वे उसका साथ देने के लिए व्यवस्था क विरोंध में उठ खड़े हों । लंकिन भीतर ही भीतर कहीं एक शका भी है – कहीं ये लोग पानी डालकर उसे ही न बुझा दें । अगर एसा ही होना है तो कवि लोगों से उन जंगलों की याद दिलाने को नहीं कहते हैं।

कविता के अंत में कवि कहते हैं कि बूल्हे में जलती लकड़ी सं निकलती एक-एक चिनगारी, चिनगारी नहीं है – वह ता पड़ो से झरतो पत्तियाँ हैं । इन चिनगारी रूपी पत्तियों को चूम लेना चाहते है, इस धरती को चूम लेना चाहते हैं जिसमे पेड़ो की जड़े थीं। चिनगारी में पत्तियों को देखना और धरती को चूमने में कवि का विश्वास झलकता है कि कभी न कभी हम अपनी गलतियों से सबक लेंग। कभी न कभी फिर यह धरती जंगलों को हरा-भरा देखेगी ।
प्रश्न – 6 : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की काव्यगत विशेषताओं को लिखें ।
प्रश्न – 7 : भाषा एवं शिल्प के स्तर पर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविताओं की विशेषताओं को लिखें।
प्रश्न – 8 : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना भाषा को कवि-कर्म की ईमानदारी का प्रतीक मानते हैं विवेचना करें ।
उत्तर :
सर्वश्वर के काव्य में परम्परागत काव्य-भाषा का अभाव मिलता है । इसका कारण यह रहा है कि वं उस भाषा को जन-जीवन की सामान्य अनुभूतियो का उजागर करने में अक्षम मानते थे। उनकी काव्य-भाषा में पांडित्य का नहीं बल्कि आम बोलचाल की भाषा का समावेश हुआ है । उनकी काव्य-भाषा भारी भरकम शब्दों एवं कठिन पदबधों से मुक्त है ।

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रोजमर्रा के शब्दों, मुहावरों का प्रयोग ही उनके काव्यों में नजर आता है। खेत-खलिहान, गली-मोहल्ले, चूल्हेचौपाल से आयी यह भाषा सर्वेश्वर की कविता की मूल संबेदना-ग्रामीण संवेदना की प्रामाणिकता की पहचान है । उनकी भाषा में लोक-जोवन और जन-सामान्य से जुड़ाव आसानी से देखा जा सकता है ।

यहाँ बड़ा दिखने की बात का अर्थ भाषा को गहनता से है । बोलचाल की भाषा को जब कवि काव्य-भाषा के रूप में अपनाता है, तो इसका मतलब यह नहीं होंता कि वह ‘सपाटबयानी’ करता है । बल्कि इसका मतलब यह होता है कि बालचाल की भाषा की स्पष्टता और सरलता तो कविता में होती हो है अर्थ की विशिष्टता और गहनता का भी समावेश कविता में हो जाता है –

कुछ इतना बड़ा न हो
जो मुझसे खड़ा न हो
सामने पहाड़ हो ।
लेकिन अड़ा न हो
भाषा को कवि ने कवि-कर्म की ईमानदारी का प्रतीक माना है –
एक गलत भाषा में
गलत बयान देने से
मर जाना बेहतर है ।

सर्वेश्वर की भाषा में खड़ी-बोली, अवधी, उर्दू के साथ बोलचाल की भाषा की अंग्रेजी मिश्रित शब्दावली का प्रयोग हुआ है –

तुम
जिसके बालों में बनावटी कर्ल नहीं
जिसकी आँखों में न गहरी चटक शोखी है
थर्मामीटर के पारे से
चुपचाप जिसमें भावनाएँ चढ़ती उतरती है।

ग्रामीण संवेदना और लोकभाषा के साथ सर्वेश्वर की कविता में लोक-छन्दों और लोकोक्तियों का भी समावेश हुआ है । मुक्तछंद के प्रयोग में सर्वेश्वर की कविता निराला की परम्परा में दिखाई देती है । अपनी संवेदना और शिल्प के माध्यम से नयी कविता को नया मुहावरा दिया है । सर्वेश्वर की भाषा स्पष्ट और सरल होने के साथ ही अर्थगर्भित और प्रतीकात्मक भी हैं। उदाहरण के तौर पर हम इन पंक्तियों को देख सकते है –
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लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

1. चूल्हे में लकड़ी की तरह मैं जल रहा हूँ
मुझे जंगल की याद मत दिलाओ ।

प्रश्न :
रचना और रचनाकार का नाम लिखें । पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना ‘पेड़ का दर्द’ है तथा इसके रचनाकार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं।
इन पंक्तियों में कवि कह रहे हैं कि जंगलों को कटने से न रोक पाने की विवशता में वे बेबसी में चूल्हे में लकड़ी की तरह जल रहे हैं। नस्ट हो चुके जंगलों की याद कवि के दर्द को बढ़ाती है। इसलिए वे लोगों से कहते हैं कि कोई उन्हें खो चुके जंगलों की याद न दिलाए।

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2. जंगल की याद
अब उन कुल्हाड़ियों की याद रह गई है ।

प्रश्न :
रचना और रचनाकार का नाम लिखें । पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना ‘पेड़ का दर्द’ है तथा इसके रचनाकार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं।
इन पंक्तियों में पर्यावरण के प्रति कवि का दर्द उभर आया है । लोगों ने और सत्ता में आसीन नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए जंगलों को नष्ट कर दिया । उन हरे-भरे जंगलों की जगह अब केवल केक्रीट के जंगल ही नज़र आतेहैं तथा उन कुल्हाड़ियों की याद ही शेष रह गई हैं जिन्होंने बेरहमी से पेड़ों को काटकर जंगलों का सफाया कर दिया ।

3. लकड़ी की तरह अब मैं जल रहा हूँ
बिना यह जाने, कि जो हाँड़ी चढ़ी है
उसकी खुदबुद झूठी है ।

प्रश्न :
रचना और रचनाकार का नाम लिखें । पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना ‘पेड़ का दर्द’ है तथा इसके रचनाकार सर्वश्वरदयाल सक्सेना हैं।
कवि का कहना है कि वे यह नहीं समझ पाते है कि चूल्हे में लकड़ी की तरह जलने में उनकी सार्थकता क्या है । उन्हें यह भी नहीं पता कि चूल्ह के ऊपर हॉड़ी चढ़ो है उसमें कुछ पक भो रहा है या फिर उसके खुदबुदाने की आवाज झूठी है ।

4. एक-एक चिनगारी
झरती पत्तियाँ हैं
जिन्हें अब भी मैं चूम लेना चाहता हूँ ।

प्रश्न :
रचना और रचनाकार का नाम लिखें । पंक्ति का भाव स्पष्ट करें ।
उत्तर :
रचना ‘पड़ का दर्द’ है तथा इसके रचनाकार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं।
कविता के इस अश में कवि कहना चाहते हैं कि चूल्हे में जलती लकड़ी की चिनगारियाँ उन्हे ऐसीं प्रतीत होतो हैं मानों पेड़ से पत्तियाँ झर रही हों । जलती लकड़ी में भी कवि उन हरी- भरी पत्तियों की याद को अपनी स्मृति से नहीं निकाल पाते हैं ।

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प्रश्न 5.
कवि जंगल की याद दिलाने क्यों नहीं कहते हैं ?
उत्तर :
कवि चाहते हैं कि यह पर्यावरण उसी तरह हरा-भरा रहे जैसा उनके बचपन में था। आज विकास के नाम पर जगलों कों काटकर नए किया जा रहा है जो कवि के लिए काफी दु:खदायी है। इसीलिए कवि जगल की याद दिलाने को नही कहते हैं।

प्रश्न 6.
कवि के व्यक्तित्व की संपूर्णता किससे थी ? वह संपूर्णता किसने छीन ली ?
उत्तर :
कवि के व्यक्तित्व की सपूर्णता हर भर जगलों से थी । कवि की वह सपूर्णता कुल्हाड़ियों तथा आरों ने छीन ली ।

प्रश्न 7.
‘उसकी खुदबुद झूठी है’ – से क्या आशय है ?
उत्तर :
पर्यावरण की रक्षा तथा हरं भर जगलों को बचान का आश्वासन सरकार द्वारा निरतर दी जाती है लंकिन यह आश्वासन उतना ही झूटा है जितना कि बिना अन्न के हाँडी में पानी की खुदबुदाहट।

प्रश्न 8.
कवि किसे चूम लेना चाहते हैं और क्यों ?
उत्तर :
कवि इस धरतो को चृम लेना चाहतं हैं व्यांक इसी धरती में उनकी जड़े थीं, जो कवि के व्यक्तित्च का हिस्सा थीं।

अति लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘पेड़ का दर्द’ कविता में कौन किसके दर्द से पीड़ित है ?
उत्तर :
‘पेड़ का दर्द’ कविता में पंड़ जंगलों के कटने के दर्द से पोड़ित है।

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प्रश्न 2.
पेड़ कहाँ और किस रूप में जल रहा है ?
उत्तर :
मेड़ चूल्हे में लकड़ी की तरह तरह जल रहा है|

प्रश्न 3.
‘पेड़ का दर्द’ कविता में कौन, किसकी याद न दिलाने को कह रहा है ?
उत्तर : ‘
पेड़ का दर्द’ कविता में पड़ जंगलों की याद न दिलाने को कह रहा है।

प्रश्न 4.
जलता हुआ पेड़ अपने पीछे क्या छोड़े जा रहा है?
उत्तर :
जलता हुआ पंड़ अपने पीछे कुछ्ध धुँआ, लपटें, कोयले और राख छाड़े जा रहा है।

प्रश्न 5.
हरे- भरे जंगल में कौन संपूर्ण रूप से खड़ा था ?
उत्तर :
हरे -भरे जगल में पेड़ सम्पूर्ण रूप से खड़ा था।

प्रश्न 6.
पेड़ से कौन लिपटी रहती थी ?
उत्तर :
पड़ सं धामिन लिपटी रहती थी।

प्रश्न 7.
कौन उछलकर कंधे के ऊपर बैठ जाता था ?
उत्तर :
गुलदार उछलकर कंधे के ऊपर बैठ जाता था।

प्रश्न 8.
जंगल की याद के बदले अब किसकी याद शेष रह गई है ?
उत्तर :
जगल की याद के बदल अब केवल उन कुल्हाड़ियों और आरों की यांद रह गई हैं जिसने पेड़ों के टुकड़े किए थे।

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प्रश्न 9.
पेड़ की संपूर्णता किसने छीन ली थी ?
उत्तर :
कुल्हाड़े तथा आरों ने पेड़ की संपूर्णता छीन ली थी।

प्रश्न 10.
पेड़ अब किसकी तरह जल रहा है ?
उत्तर :
पेड़ अब चूल्हे की लकडी की तरह जल रहा है।

प्रश्न 11.
पेड़ क्या बिना जाने चूल्हे में लकड़ी की तरह जल रहा है ?
उत्तर :
पेड़ बिना यह जाने कि चूल्हे पर जो हॉड़ी चढ़ी है, उसकी खुदबुद की आवाज झूठी है या फिर उससे किसी का पेट भरेगा – लकड़ी की तरह जल रहा है।

प्रश्न 12.
किसी की आत्मा कब तृप्त होगी ?
उत्तर :
जब किसी का पेट भरेगा तभी पेड़ की आत्मा तृप्त होगी।

प्रश्न 13.
पेड़ को चूल्हे से निकलती एक-एक चिनगारी किसके समान प्रतीत होती है ?
उत्तर :
पेड़ को चूल्हे से निकलती एक-एक चिनगारी झरती हुई पत्तियों के समान प्रतीत होती है।

प्रश्न 14.
पेड़ किसे चूम लेना चाहता है और क्यों ?
उत्तर :
पेड़ धरती को चूम लेना चाहता है क्योंकि इसी धरती में उसकी जड़ेे थीं।

प्रश्न 15.
‘पेड़ का दर्द’ कविता का वर्ण्य विषय क्या है ?
उत्तर :
‘पेड़ का दर्द’ कविता का वर्ण्य विषय नष्ट होता पर्यावरण है।

प्रश्न 16.
‘पेड़ का दर्द’ कविता के माध्यम से कवि हमें क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर :
‘पेड़ का दर्द’ कविता के माध्यम से कवि हमें यह संदेश देना चाहते हैं कि हम जगल को नष्ट न करें अन्यथा इसका परिणाम बुरा होगा।

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प्रश्न 17.
किसकी आँच से कौन तमतमा रहा है ?
उत्तर :
चूल्हे में जलती लकड़ी की आँच से लोगों के चेहरे तमतमा रहे हैं।

प्रश्न 18.
‘मुझ पर पानी डाल सो जाएँगे’ – का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
इसका तात्पर्य यह है कि अधिकांश लोगों को आज भी जगलों के नष्ट होने का कोई दु:ख नहीं है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1924 में
(ख) सन् 1925 में
(ग) सन् 1926 में
(घ) सन् 1927 में
उत्तर :
(घ) सन् 1927 में ।

प्रश्न 2.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना किस तार-सप्तक के कवि हैं ?
(क) पहले
(ख) दूसरे
(ग) तीसरे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) तीसरे ।

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प्रश्न 3.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने निम्न से किस पत्रिका में संपादक का कार्य किया ?
(क) पराग
(ख) चंदामामा
(ग) कादम्बिनी
(घ) हंस
उत्तर :
(क) पराग ।

प्रश्न 4.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने निम्न में से किस पत्रिका में प्रमुख उप-सम्पादक के पद पर कार्य किया?
(क) धर्मयुग
(ख) हिंदुस्तान
(ग) दिनमान
(घ) साप्ताहिक हिंदुस्तान
उत्तर :
(ग) दिनमान ।

प्रश्न 5.
‘काठ की घंटियाँ’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) रामेश्वर शुक्ल अंचल
(ख) शमशेर
(ग) सर्वेश्वर दयाल सकसेना
(घ) निराला
उत्तर :
(ग) सर्वेश्वर द्याल सक्सेना।

प्रश्न 6.
‘बाँस का पुल’ किसकी रचना है ?
(क) निराला की
(ख) नागार्जुन की
(ग) सर्वेश्वर दयाल सक्संना की
(घ) पंत की
उत्तर :
(ग) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की।

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प्रश्न 7.
‘एक सूनी नाव’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की
(ख) नागार्जुन की
(ग) केदारनाथ सिंह की
(घ) धूमिल की
उत्तर :
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की।

प्रश्न 8.
‘गर्म हवाएँ” किसकी रचना है ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की
(ख) कुँवर नारायण की
(ग) पाश की
(घ) अज्ञेय की
उत्तर :
(क) सर्वेश्वर टयाल सक्सेना की।

प्रश्न 9.
‘गर्म हवाएँ” किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) नाटक
(ग) उपन्यास
(घ) निबंध
उत्तर :
(क) कविता ।

प्रश्न 10.
‘बकरी’ किस विधा की रचना है ?
(क) व्यंग्य
(ख) नाटक
(ग) कविता
(घ) एकांकी
उत्तर :
(ख) नाटक

प्रश्न 11.
‘अब गरीबी हटाओ’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) प्रसाद
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ग) निराला
(घ) पंत
उत्तर :
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ।

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प्रश्न 12.
‘लड़ाई’ (नाटक) के रचयिता कौन हैं ?
(क) नरेन्द्र शर्मा
(ख) शमशेर
(ग) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(घ) धर्मवीर भारती
उत्तर :
(ग) सर्वेश्वर दययाल सक्सेना

प्रश्न 13.
‘कल फिर भात आएगा’ की रचना किसने की ?
(क) अश्क ने
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने
(ग) रेणु ने
(घ) केदारनाथ सिंह ने
उत्तर :
(ख) सर्वेश्वर दथाल सवसेना ने ।

प्रश्न 14.
‘राज-बाज बहादुर’ के रचयिता निम्न में से कौन हैं ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ख) वियोगी
(ग) यशपाल
(घ) केदारनाथ सिंह
उत्तर :
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्संना ।

प्रश्न 15.
‘रानी रूपमती’ किसकी रचना है ?
(क) नरेश मेहता की
(ख) प्रेमचंद की
(ग) सरेशे्वर द्याल सक्सेना की
(घ) अज्ञेय की
उत्तर :
(ग) सर्वेश्वर द्याल सक्सेना की।

प्रश्न 16.
‘पागल कुत्तों का मसीहा’ किसकी रचना है ?
(क) अज्ञयय की
(ख) धर्मवीर भारती की
(ग) नागार्जुन की
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की
उत्तर :
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की ।

प्रश्न 17.
‘सोया हुआ जल’ किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) नाटक
(ग) उपन्यास
(घ) एकांकी
उत्तर :
(क) कविता

प्रश्न 18.
‘चरचे और नरखे’ किस विधा की रचना है ?
(क) उपन्यास
(ख) निबंध-संग्रह
(ग) कविता
(घ) संस्मरण
उत्तर :
(ख) निबध-सग्रह ।

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प्रश्न 19.
‘खूँटियों पर टँगे लोग’ किसकी रचना है ।
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की
(ख) निराला की
(ग) मुक्तिबोध की
(घ) रघुवीर सहाय की
उत्तर :
(क) सर्वेश्वर द्याल सक्सेना की।

प्रश्न 20.
‘चरचे और चरखे’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) शमशेर
(ख) अंजय
(ग) मुक्तिबोध
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्संना
उत्तर :
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना।

प्रश्न 21.
‘सोया हुआ जल’ के रचयिता कौन हैं ?
(क) अज्ञेय
(ख) कुँवर नारायण
(ग) सर्वेश्वर द्याल सक्सेना
(घ) निराला
उत्तर :
(ग) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना।

प्रश्न 22.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने अपनी तुलना किससे की है ?
(क) चलल्हे से
(ख) चल्हे में जलती लकड़ी से
(ग) पेड़ से
(घ) जागल से
उत्तर :
(ख) चूल्हे में जलती लकड़ी सं ।

प्रश्न 23.
कवि किसकी याद न दिलाने को कहते हैं ?
(क) पेड़ की
(ख) पत्ती की
(ग) जंगल की
(ख) चूल्हे की
उत्तर :
(ग) जंगल की ।

प्रश्न 24.
जंगल की बजाय अब किसकी याद शेष रह गई है ?
(क) आरों की
(ख) लकड़ी की
(ग) पत्तियों की
(घ) कुल्हाड़ियो की
उत्तर :
(घ) कुल्हाड़ियों की ।

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प्रश्न 25.
कवि किसे चूम लेना चाहता है ?
(क) जंगल को
(ख) धरती को
(ग) पत्तियों को
(घ) धामिन को
उत्तर :
(ख) धरती कां।

प्रश्न 26.
‘कुआनो नदी’ किसकी रचना है ?
(क) शमशेर की
(ख) अज्ये की
(ग) मुक्तिबांध की
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की
उत्तर :
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की।

प्रश्न 27.
‘बतुता का जूता’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अझेय
(ख) पंत
(ग) नागार्जुन
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
उत्तर :
(घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना।

प्रश्न 28.
‘लाख की नाक’ किसकी रचना है ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की
(ख) नरेन्द्र शर्मा की
(ग) धर्मवीर भारती की
(घ) महादेवी वर्मा की
उत्तर :
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की।

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प्रश्न 29.
‘महाँगू की टाई’ के रचयिता कौन हैं ?
(क) नरन्द्र शर्मा
(ख) चन्द्रकांत देवताले
(ग) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(घ) अरुण कमल
उत्तर :
(ग) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ।

प्रश्न 30.
‘भौं-भौं, खौं-खौं किसकी रचना है ?
(क) अरुण कमल की
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की
(ग) कैफी आज़मी की
(घ) कुँवर नारायण की
उत्तर :
(ख) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की।

प्रश्न 31.
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को निम्न में किस रचना पर ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ मिला?
(क) खूँटयों पर टँगे लोग
(ख) सोया हुआ जल
(ग) बकरी
(घ) वाँस का पुल
उत्तर :
(क) खूटयों पर टँगे लोग ।

टिप्पणियाँ

1. गुलदार :- प्रस्तुत शब्द सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘पेड़ का दर्द’ से लिया गया है। गुलदार तेंदुआ प्रजाति का एक जंगली पशु होता है। जो पेड़ों पर आसानी से चढ़ जाता है।

2. जंगल :- प्रस्तुत शब्द सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘पेड़ का दर्द’ से लिया गया है।
वह स्थान जो अपने-आप उगनेवाले वृक्षों, झाड़ों तथा वन्य पशुओं से युक्त हो, जंगल कहलाता है। पर्यावरण की दृष्टि से जंगलों का हमारे लिए बहुत महत्व है लेकिन विकास के नाम पर हम जंगलों को काटकर अपने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं।

3. धामिन :- प्रस्तुत शब्द सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘पेड़ का दर्द’ से लिया गया है ।
धामिन साँप की एक प्रजाता है जो अधिकतर जंगलों में पेड़ों पर पाया जाता है । इस साँप की विशेषता यह है कि इसके पूँछ में विष रहता है ।

4. आत्मा :- प्रस्तुत शब्द सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘पेड़ का दर्द’ से लिया गया है ।
आत्मा इस शरीर का प्राणतत्व है। ऐसी मान्यता है कि आत्मा परमात्मा का ही अंश है तथा शरीर के नष्ट हो जाने के बाद भी आत्मा नष्ट नहीं होती । वह दूसरे शरीर को धारण कर लेती है ।

5. साहित्य अकादमी (पुरस्कार) :- भारतीय साहित्य के संवर्धन के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक स्वायत्तशासी संस्था। इसका उद्घाटन 12 मार्च 1925 ई॰ को हुआ था । इस संस्था का प्रबंध विभिन्न क्षेत्रों के 70 चुने हुए विद्वानों की एक परिषद् के हाथों में है । इस परिषद के प्रथम अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे ।

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अकादमी के उद्देश्य इस प्रकार है :

  • भारतीय साहित्य का विकास करना,
  • साहित्यिक प्रतिमान कायम करना,
  • विविध भारतीय भाषाओं में होनेवाले साहित्यिक कार्यों को अग्रसर करना, उनमें मेल पैदा करना तथा,
  • उनके माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता का उन्नयन करना। यह संस्था साहित्य-निर्माण को प्रोत्साहित करती है तथा साहित्यकारों को पुरस्कृत और सम्मानित करती है ।

पाठयाधारित व्याकरण

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 3 पेड़ का दर्द 1

WBBSE Class 9 Hindi पेड़ का दर्द Summary

कनकि- पारिचाय

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना आधुनिक हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार हैं। नई कविता के कवियों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला में 15 सितंबर सन् 1927 को हुआ । इन्होंने एंग्लो संस्कृत विद्यालय, बस्ती से हाई स्कूल पास करने के बाद क्वींस कॉलेज वाराणसी में प्रवंश लिया । एम ए. की परीक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की और इसके बाद जीवन एवं काव्यक्षेत्र में उतर आए । कुछ समय तक आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर के रूप में कार्य करने के बाद इन्होंने ‘दिनमान’ के प्रमुख उपसम्पादक और फिर बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका ‘पराग’ का संपादन-कार्य भी किया
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अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरे तारसप्तक (1959) के माध्यम सं इनको पहचान नई कविता के कवि-रूप में हुई । सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविताओं में रोमानियत, मांसल प्रेम, प्रकृति के प्रति लगाव तथा तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक प्रश्न प्रमुखता से दिखाई देते हैं । इन्होंन अपनी कविताओं में जीवन के विविध पक्षों को नए रंग-ढुंग से व्यक्त किया है। ये युवाओं को लीक पर न चलकर नई खोज के लिए प्रोत्साहित करते हैं क्योंक –
लीक पर वे चलें जिनवे चरण दुर्बल एवं हारे हैं ।
हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं।।
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की साहित्यिक कृतियाँ इस प्रकार हैं –
काव्य-संग्रह : काठ की घंटियाँ, वाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ, जंगल का दर्द, खूटियों पर टँगे लोग, कुआनो नदी ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions Poem 3 पेड़ का दर्द

नाटक : बकरी, कल फिर भात आएगा, लड़ाई, अब गरीबी हटाओ, राज-बाज बहादुर और रानी रूपमती, हांरी धूम मचा री।
उपन्यास : पागल कुत्तों का मसीहा, सोया हुआ पल, सड़क
निबंध-संग्रह : चरचे और चरखे ।
बाल-साहित्य : बतूता का जूता, मँहगू की टाई, भौं-भौं खौं-खों तथा लाख की नाक।
इनकी काव्य-संग्रह ‘खूँटियों पर टंगे लोग’ को सन् 1983 के ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
23 सितंबर 1983 को मात्र 56 वर्ष की आयु में इनका देहांत हो गया।

ससंदर्भ आलोचनात्मक व्याख्या 

1. कुछ धुआँ
कुछ लपटें
कुछ कोयले
कुछ राख छोड़ता
चूल्हे में लकड़ी की तरह मैं जल रहा हैँ
मुझे जंगल की याद मत दिलाओ ।

संदर्भ : प्रस्तुत पक्तियाँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता ‘जंगल का दर्द’ से उद्दुत की गई हैं। सक्सेना नई कविता के प्रमुख कवियों में से एक हैं । पर्यावरण के प्रति चिता तथा आदमी की पीड़ा को उनकी कवितां में वाणी मिली है।

व्याख्या : सक्सेना की इन पंक्तियों में स्वपों के टूटने, आस्थाओं के बिखरने की पस्तो तथा निराशा है । आजादी के बाद अपनी पाकृतिक संपदा के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, वही कवि का दर्द है।

पर्यावरण के प्रति कवि अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि मुझे उन जंगलो की याद मत दिलाओ जो अब केवल कस्पना में ही जीवित बची हैं। निरतर कटते जंगलों से हरियाली-विहीन धरती को देखकर कवि अपना दर्द व्यक्त करते हुए कहते हैं कि धुआँ, लपटें, कोयले और राख के अवशेष को छोड़ता हुआ मैं चूल्हे में लकड़ी की तरह जल रहा हूँ। नष्ट होते जगलो का यह दर्द ही कवि का दर्द है इसलिए कवि का कहना है कि कोई मुझे उन नष्ष हो गए जगलों की याद अब न दिलाए।
इन हरे-भरे जगलों के नए होने के लिए वे उस सत्ता को उत्तरदायी मानते हैं जो इस अपसंस्कृति को बढ़ावा दे रही है –

एक तेंदुआ
सारे जंगल को
काले तेंदुए में बदल रहा है ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता की इन पंक्तियों में पर्यावरण के प्रति कवि का गहरा दर्द झलकता है।
2. लोक-जीवन और लोक संस्कृति से गहरी जुड़ाव उनकी कविता में प्रत्यक्ष रूप से झलकती है।
3. अधिकाश प्रतीक प्रकृति और ग्रामीण जीवन से आए हैं।
4. कवि ने प्रकृति का चित्र एकदम नए ढग से खींचा है।
5. बिंब नए प्रकार के हैं।
6. भाषा सहज और सरल है ।

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2. हरे-भरे जंगल की
जिसमें मैं संपूर्ण खड़ा था
चिड़ियाँ मुझ पर बैठ चहचहाती थीं
धामिन मुझसे लिपटी रहती थी
और गुलदार उछलकर मुझ पर
बैठ जाता था ।

संदर्भ : प्तस्तुत पंक्तियाँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता ‘जंगल का दर्द’ से उद्धृत की गई हैं। सक्सेना नई कविता के प्रमुख कवियों में से एक हैं । पर्यावरण के प्रति चिंता तथा आदमी की पीड़ा को उनकी कविता में वाणी मिली है।

व्याख्या : कवि उन दिनों की याद करता है जब हरे-भरे जंगलों के वृक्षों की तरह उसका भी अस्तित्व था । हरेभरे पेड़ों की डालों पर चिड़ियाँ चहचहाया करती थीं, धामिन पेड़ों से लिपटी रहती थी तथा गुलदार डालों पर बैठकर पेड़ों के प्रति अपना स्नेह जताता था । हरे- भरे पेड़, फूलों से लदी डालियाँ केवल सुख ही नहीं प्रदान करती थी यल्कि वह कवि के व्यक्तित्व का एक हिस्सा भी थी। कवि ने अपने इस अनुभव को अन्य कविता में इस प्रकार व्यक्त किया है –

फूलों भरी जल
जिसको था पकड़ इतराता
फूल गिरी मुझपर अजगर-सी
ठंडी एक लपेट ने
मुझे आज फिर कसा

जहाँ कहीं भी कवि प्रकृति के सौंदर्य को आंकते हैं वहाँ बिंबों की एक खास तरह की ताज़गी प्रस्तुत हांती है।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता की इन पंक्तियों में पर्यावरण के प्रति कवि का गहरा दर्द झलकता है।
2. लोक-जीवन और लोक संस्कृति से गहरी जुड़ाव उनकी कविता में प्रत्यक्ष रूप से झलकती है।
3. अधिकाश प्रतीक प्रकृति और ग्रामीण जोवन से आए हैं।
4. कवि ने प्रकृति का चित्र एक दम नए ढंग से खींचा है ।
5. बिंब नए प्रकार के हैं।
6. भाषा सहज और सरल है।

3. जंगल की याद
अब उन कुल्हाड़ियों की याद रह गई है
जो मुझ पर चली थीं
उन आरों की जिन्होंने
मेरे दुकड़े-टुकड़े किए थे
मेरी संपूर्णता मुझसे छीन ली थी ।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ सवेशे्वर दयाल सक्सेना की काविता ‘जंगल का दर्द’ से उद्धत की गई हैं। सक्सेना नई कविता क प्रमुख कवियों में से एक हैं। पर्यावरण के पति चिता तथा मनुष्य की पौड़ा को उनकी कविता में वाणी मिली है ।

व्याख्या : कवि का अब जंगलों की नहीं बल्कि उन कुल्हाड़ययों की याद शेष रह गई है जिन कुल्हाड़ियों ने जंगल वे पेड़ों का काम तमाम कर दिया था। कवि को केवल उन आरों की याद शेष रह गई है जिन्होंने पड़ों को टुकडों में बाँट डाला था । पेड़ों का टुकड़ों में बटटना कवि को अपने व्यक्तित्व का बँटना अनुभव हांता है क्यांकि उन्हीं पेड़ों से कवि के व्यंकित्व को संपूर्णतता मिली थी। कवि को लगता है जैसे उसकी संपूर्णता उससे छीन ली गई हो – अव वह अपने- आप में इन जगलों की तरह आधे-अधूरे हैं। जंगलों के बिना कवि को अब वह दृश्य याद नहीं आता-

आकाश का साफा बाँधकर
सूरज की चिलम खींचता
बैठा है पहाड़
घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी ।

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काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता की इन प्रक्तयों में पर्यावरण के प्रति कवि का गहरा दर्द झलकता है।
2. लोक-जीवन और लोक संस्कृति से गहरी जुड़ाव उनकी कविता में प्रत्यक्ष रूप से झलकती है।
3. अधिकांश प्रतीक प्रकृति और ग्रामीण जीवन से आए हैं।
4. कवि ने प्रकृति का चित्र एक दम नए दंग से खींचा है ।
5. बिंब नए प्रकार के हैं।
6. भाषा सहज और सरल है ।

4. चूल्हे में
लकड़ी की तरह अब मैं जल रहा हूँ
बिना यह जाने, कि जो हाँड़ी चढ़ी है
उसकी खुदबुद झूठी है ।
या उससे किसी का पेट भरेगा
आत्मा तृप्त होगी ।

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता जजग का दर्द’ से उद्धुत की गई हैं। सक्सेना नई कविता के प्रमुख कवियों में से एक हैं। पर्याववरण के प्रति चिंता तथा आदमी की पोड़ा को उनकी कविता में वाणी मिली है।

व्याख्या : सक्सेना की इन पंक्तियों में स्वपनों के दूटने, आस्थाओं के बिखरने की पस्ती तथा निराशा है । आजादी के बाद अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, वही कवि का दर्द है ।

जगलों को यूँ कबतक नए किया जाता रहेगा – यह कवि को पता नहीं । अनिश्चितता की इस स्थिति में कवि सोचता है कि वह तो चूल्हे में जलती लकड़ी के समान है, जिस यह भी नहीी पता कि चूल्हे पर रखी हाँड़ी में कुछ पक भी रहा है या नहीं । न जाने उससे किसी का पेट भी भरेगा या फिर वह हाँड़ो यूँ ही खुदबुद कर रही है । दरअसल यहाँ कवि की वह पौड़ा व्यक्त हुई है कि वह चाहकर भो इन जंगलों को नहीं वचा पा रहा है । उसकी नियति तो केवल लकड़ी की तरह जलते रहना है। उसका दर्द है कि वह इस कुव्यवस्था को क्यों नहीं बदल पा रहा है । आखिर समाज में ऐसा कबतक होता रहेगा कि बड़ी मछली छोटी मछली का निगलती रहेगी –

ताकतवर ने सब खा लिया
कमजोर ने उच्छिष्टू (जूठन) से
संतोष कर, दर्द से मुँह छिपा लिया ।

काव्यगत विशेषताएँ :

1. कविता की इन पंक्तियों में पर्यावरण के प्रति कवि का गहरा दर्द झलकता है।
2. लोक-जीवन और लोक संस्कृति से गहरो जुड़ाव उनकी कविता में प्रत्यक्ष रूप से झलकती है ।
3. अधिकाश प्रतीक प्रकृति और ग्रामीण जीवन से आए हैं।
4. कवि ने प्रकृति का चित्र एक दम नए ढंग से खींचा है।
5. बिंब नए प्रकार के हैं।
6. भाषा सहज और सरल है ।

5. बिना यह जाने
कि जो चेहरे मेरे सामने हैं
वे मेरी आँच से
तमतमा रहे हैं
या गुस्से से,
वे मुझे उठाकर चल पड़ेंगे
या मुझ पर पानी डाल सो जाएँगे
जंगल की याद मुझे मत दिलाओ ।

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संद्रा्भ : पस्तुत पंक्तियाँ सर्वेश्वर दयाल सवसना की कविता ‘जंगल का दर्द’ से उद्धत की गई हैं। सक्सेना नई कविता के प्रमुख कवियों में से एक है । पर्यावरण के प्रति चिता तथा मनुष्य की पोड़ा को उनकी कविता में वाणी मिली है ।

व्याख्या : सक्सेना की इन पंक्तियों में स्वप्नों के टूटने, आस्थाओ के बिखरने की पस्ती तथा निराशा है। आजादी के बाद अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, वही कवि का दर्द है।

कवि यह चाहता है कि लोग भी उसकी तरह आँच से तपे, तमतमाएँ, उनके भी चेहरे गुस्से से लाल हों और वे उसका साथ देने के लिए व्यवस्था के विरोध में उठ खड़े हों । लंकिन भीतर ही भीतर कहीं एक शंका भी है – कहीं ये लोग पानी डालकर उसे ही न बुझा दें । अगर ऐसा ही होना है तो कवि लोगों से उन जगलों की याद दिलाने को नहीं कहते हैं। इन सबके बावजूद कवि के सीने में कहीं न कहीं आशा की एक चिनगारी भी है । वे कहते हैं –

तुम्हारी मृत्यु में
प्रतिबिंबित है हम सब की मृत्यु
कवि कहीं अकेला मरता है !

विशेष :
1. कविता की इन पंक्तयों में पर्यावरण के प्रति कवि का गहरा दर्द झलकता है।
2. लोक-जीवन और लोक संस्कृति से गहरी जुड़ाव उनकी कविता में पत्यक्ष रूप से झलकती है।
3. अधिकांश प्रतीक प्रकृति और ग्रामोण जीवन से आए हैं।
4. कवि ने प्रकृति का चित्र एक दम नए दंग से खींचा है ।
5. बिंब नए प्रकार के हैं।
6. भाषा सहज और सरल है।