WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 Question Answer – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर डॉ० राजेन्द्र प्रसाद का परिंचय दें ।
प्रश्न – 2 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान में भारत के लिए जो आदर्श रखे उनका वर्णन करें।
प्रश्न – 3 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद महात्मा गाँधी के निष्ठावान शिष्य थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 4 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के विश्व-शांति तथा परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में विचार लिखें ।
प्रश्न – 5 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद सच्चा प्रजातंत्र किसे मानते थे ? विवेचना करें ।
प्रश्न – 6 : डॉ० राजेन्द्र प्रसाद के व्यक्तित्व तथा कार्यों का उल्लेख करें ।
उत्तर :
है राजेन्द्र प्रसाद वह नाम आदर जिसे इतिहास देता है,
बढ़कर जिसके पद-चिह्नों को अंकित दिल पर कर देता है ।

अपनी सादगी तथा सरलता के कारण किसान जैसा व्यक्तित्व पाकर भी पहले राष्प्रपति बनने का गौरव पाने वाले डॉ० राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर सन् 1884 ई० के दिन बिहार राज्य के सरना जिले के एक मान्य एवं सभान्त कायस्थ परिवार में हुआ था । इन्होंने बारह वर्षों से भी अधिक समय तक देश को भविष्य का मार्ग दिखाया।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

आरंभ में राजेन्द्र बाबू राष्ट्रीय नेता गोपाल कृष्ण गोखले से, पर बाद में महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से सबसे अधिक प्रभावित रहे । दोनों का प्रभाव इनके जीवन पर स्सष्ट रूप से दिखाई देता था । जाँधी जी के सच्चे शिष्य के रूप में उन्होंने हमेशा निम्नलिखित बातों पर बल दिया –

  • हम सभी प्रकार की हिंसा से बचें ।
  • सभी राष्ट्रों के बीच शांति और मित्रता स्थापित करने के लिए संघर्ष करें ।
  • एकपक्षीय परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रस्ताव पारित एवं स्वीकृत किए जायं।
  • हमें उन कारणों को भी समाप्त करना होगा जो युद्धों का कारण बनते हैं।
  • यदि हम विश्व में एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में जीवित रहना चाहते हैं तो परस्पर भय, अविश्वास, वैरभाव तथा असुरक्षा के कारणों को दूर करना होगा ।
  • मनुष्य को यह अनुभव करना चाहिए कि समस्त मानवता एक है, भले ही उसमें जातिगत, संप्रदायगत और वर्गभेद हैं ।
  • सभी राष्ट्रों को अपनी सोच का क्षितिज व्यापक बनाना होगा, ज्ञान में वृद्धि करनी होगी, सभ्य जीवन जीना होगा और यह अनुभव करना होगा कि जब विश्व का कोई व्यक्ति या देश कष्ट उठाता है तो सभी कष्ट उठाते हैं।
  • हम एक-दूसरे से घृणा करना, शत्रुता छोड़ दें तथा प्रेमपूर्वक एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें ।

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि राजेन्द्र प्रसाद गाँधी जी के निष्ठावान शिष्य थे। प्रजातंत्र में उनका पूरापूरा विश्वास था और उनका यह मानना था कि जब तक यह पूरे संसार में व्याप्त न हो जाय, संसार के सभी समुदायों को प्रसन्नता न प्रदान करे तब तक वह सच्चा प्रजातंत्र नहीं है।

WBBSE Class 9 Hindi डॉ. राजेन्द्र प्रसाद Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 1
शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 69

  • सर्वोत्कृष्ट = सबसे अच्छा ।
  • शिखर वर्ष = अच्छे साल ।
  • बल = जोर ।
  • निरस्त्रीकरण = हथियारों पर रोक लगाना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 12 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

पृष्ठ सं० – 70

  • वैरभाव = दुश्मनी का भाव ।
  • भ्रातृत्व = भाईचारे की भावना ।
  • हासिल = प्राप्त ।
  • उतावलेपन = जल्दीबाजी।
  • अंततोगत्वा = अंत में जाकर ।

पृष्ठ सं० – 70

  • श्रोताओं = सुननेवाले ।
  • संतोषजनक = संतोष को जन्म देने वाला ।
  • निरंतर = लगातार ।
  • व्यापक = फैला ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 11 सरदार वल्लभ भाई पटेल

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 11 Question Answer – सरदार वल्लभ भाई पटेल

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर सरदार वल्लभ भाई पटेल का संक्षिप्त परिचय दें।
प्रश्न – 2 : सरदार वल्लभ भाई पटेल के व्यक्तित्व तथा कृतित्व का परिचय दें ।
प्रश्न – 3 : पटेल भारतीय एकता के संस्थापक थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 4 : सरदार को उनके जिन गुणों के आधार पर उन्हें ‘लौह पुरुष’ कहा गया – उनकी विवेचना करें ।
प्रश्न – 5 : एक गुहमंत्री के तौर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की उपलब्धियों का वर्णन करें।
प्रश्न – 6 : सरदार पटेल का जीवन हमें आधुनिक भारत के महान निर्माताओं के आत्मत्याग की याद दिलाता है – विवेचना करें ।
प्रश्न – 7 : सरदार पटेल के रूप में हमारे पास एक साहसी क्रांतिकारी, विद्वान राजनेता और आदर्श प्रशासक था-अपने विचार लिखें ।
उत्तर :
संयम, सादगी, सहिष्णुता, सत्यवादी तथा दृढ़ता के प्रतीक सरदार का जन्म 31 अक्टूबर, सन् 1875 को गुजरात में हुआ था । 22 वर्ष की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर वकालत के पेशे में आ गए। सन् 1908 में विलायत की अंतरिम परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर बैरिस्टर बन गए। फौजदारी वकालत में उन्होंने खूब यश कमाया।

जनसेवा तथा त्याग-भावना के कारण ही पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए । बोरसद सत्याग्रह, नागपुर का झण्डा सत्याग्रह, बारडोली ताल्लुका सत्याग्रह तथा गुजरात की बाढ़ के समय पटेल ने जो अपना योगदान दिया वह हमेशा याद रखा जाएगा ।

सरदार पटेल उद्देश्य के प्रति स्थिर लक्ष्य, संगठन कार्य में अप्रतिम तथा अपने आदर्शों के प्रति अटल थे । उनके चट्टानी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हे ‘लौह पुरुष’ कहा । उनकी तुलना महान राजनीतिज मैकियावेली तथा बिस्मार्क से की जाती है।

सितंबर, 1946 में जब नेहरु जी की अस्थायी सरकार बनी तो सरदार पटेल को गृहमंत्री नियुक्त किया गया । गृहमंत्री के तौर पर उन्होंने देशवासियों से कहा कि यदि हम अपने देश को प्रथम वर्ग की शक्ति बनाना चाहत हैं तो हमें कुछ अधिक करने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें अपने मतभेदों को भुलाकर देश में पूर्ण संगठन और एकता लानी होगी । जब देश में राज्यों के एकीकरण करने की बात आई तो इस समस्या को पटेल ने बिना खून-खराबी के बड़ी खूबी से हल किया।

देशी राज्यों में राजकोट, जूनागढ़, बहावलपुर, बड़ौदा, कश्मीर, हैदराबाद को भारतीय महासंघ में सम्मिलित करने में सरदार को कई पेचीदगियों का सामना करना पड़ा फिर भी उन्होंने इसे हल किया।

निष्कर्ष तौर पर यह कहा जा सकता है कि महात्मा गाँधी ने कांग्रेस में प्राणों का संचार किया तो नेहरु ने उस कल्पना और दृष्टिकोण को विस्तृत आयाम दिया । डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद से उसको आचरण मिला था और सरोजिनी नायडू ने कांग्रेस को आभार प्रदान की थी लेकिन इसके साथ ही जो शक्ति और सम्पूर्णता कांग्रेस को प्राप्त हुई वह सरदार पटेल की कार्यक्षमता का ही परिणाम था 1 15 दिसंबर, 1950 को प्रातःकाल 9 बजकर 37 मिनट पर 76 वर्ष की आयु में इस महापुरुष का निधन हो गया लेकिन उनकी राष्ष्र के प्रति की गई सेवाओं का भारतीय जन-मानस पर अमिट प्रभाव है ।

WBBSE Class 9 Hindi सरदार वल्लभ भाई पटेल Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 11 सरदार वल्लभ भाई पटेल 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 64

  • पूर्व = पहले ।
  • अनुकूल = अनुसार ।
  • राय = विचार, सलाह ।
  • परे = अलग ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • स्पष्टवादिता = स्पष्ट बोलने की आदत ।
  • दूरदर्शिता = भविष्य को देखने की गुण ।
  • शेष = बाकी ।
  • दक्षता = कुशलता।
  • चातुर्य = चतुरता ।
  • सबल = मजबूत ।
  • परिवर्तित = बदलना ।
  • एकीकरण = एक करने का प्रयास ।
  • प्रांतों = राज्यों।

पृष्ठ सं० – 65

  • कम्भा, रेड्डी, लिंगायत, वोकलीगर, कायस्थ, राजपूत = जातियों के नाम हैं।
  • नितांत = बिल्कुल।
  • गौण = एकदम साधारण ।
  • निजी = व्यक्तिगत ।
  • दूषित = गंदा ।
  • दैनिक = रोज निकलने वाला समाचार-पत्र ।
  • संगठन-क्षमता = लोगों को एकत्र करने की क्षमता।

पृष्ठ सं० – 66

  • अंश = भाग, हिस्सा ।
  • प्रण = संकल्प ।
  • चहुँमुखी = चारों ओर से ।
  • गबन = घपला ।
  • अपव्यय = गलत तरीके से खर्च करना’ ।
  • उजागर = प्रकट ।
  • मूल = मुख्य ।
  • उत्थान = विकास ।
  • संपदा = धन ।
  • अपनत्व = अपनापन ।

पृष्ठ सं० – 67

  • नैतिक आचरण = व्यक्तिगत व्यवहार ।
  • अंतराल = अंतर, दूरी ।
  • आंतरिक = भीतरी ।
  • अनंत = जिसका अंत न हो ।
  • सर्वोपरिसत्ता = ईश्वर ।
  • गहनतम = अत्यंत गहरा ।
  • प्रकृति = स्वभाव ।
  • सुचारु = अच्छे तरीके से ।

पृष्ठ सं० – 68

  • परे = अलग ।
  • कार्यान्वित = कार्य रूप देना, कार्य करना ।
  • दंभी = घमंडी, अहंकारी ।
  • पूर्वाग्रह = पहले की बातों के प्रति आग्रह ।
  • अटूट = नहीं टूटने वाला ।
  • प्रबल = शक्तिशाली ।
  • सराहना = प्रशंसा।
  • पदचिह्न = पैरों के चिह्न।
  • धूमिल = गंदा ।
  • परास्त = पराजित ।
  • कामियों = कमी ।
  • निराकरण = हल, समाधान ।
  • आकांक्षाओं = इच्छाओं ।
  • आशंका = भय से भरा संदेह ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

Students should regularly practice West Bengal Board Class 9 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर to reinforce their learning.

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 Question Answer – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : रवीन्द्रनाथ ठाकुर सर्वतोमुखी प्रतिभासंपन्न , साहित्यकार, कलाकार, शिक्षक, कवि, गीतकार और अभिनेता थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 2 : बहुमुखी साहित्यकार के रूप में रवीन्द्रनाथ ठाकुर का मूल्यांकन करें ।
प्रश्न – 3 : संकलित पाठ के आधार पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर का साहित्यिक परिचय दें ।
उत्तर :
अगर हम ऐसा कहें कि कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि थे तो ऐसा कहना अतिशयोक्ति न होगी। इनका जन्म 7 मई, सन् 1861 को सोमवार के दिन जोड़ासाँकू (कलकत्ता) में हुआ था।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर एक ही साथ कवि, कलाकार, शिक्षक, कवि, संत, विचारक और मानवता के सच्चे पुजारी थे। साहित्य की कोई ऐसी विधा नहीं थी, जिसमें उन्होंने न लिखा हो – कहानी, उपन्यास, नाटक, प्रहसन, गीत, गीतिका, कीर्त्तन, आलोचना आदि उन्होंने सब लिखा।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

विषय की बात करें तो उन्होने धर्म, शिक्षा, समाज, राजनीति, इतिहास, अर्थशास्व, विज्ञान, संगीत आदि सभी विषयों पर लिखा । यह भी लिए गर्व की बात है कि किसी भी भारतीय साहित्यकार की रचनाओं का अनुवाद उतनी भाषाओं में नहीं हुआ जितनन रवीन्द्धनाथ ठाकुर की रचनाओं का । संसार की अनेक भाषाओं में इनके ग्रंध आ चुके हैं। श्री ठाकुर का दर्शन-ज्ञान भी अपूर्व था। भारतीय दर्शन पर उनके व्याख्यान को सुनकर यूरोप और अमेरिकावाले भी दंग रह जाते थे । इनकी कविताओं की पंक्ति-पंक्ति में संगीत भरा है । कंठ भी सुंदर था । जब ये गाने लगते तो ऐसा प्रतीत होता मानो संगीत पंख लगाकर चारों और मंडराते हुए उड़ रहे हों ।

सत्तर वर्ष की आयु में इन्होंने चित्रकला प्रारंभ की । टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों से रंगों का समन्वय कुछ ऐसा किया कि संसार के चित्रकला-मर्मझ भी विस्मय-विमुग्ध रह गए। संसार की बड़ी-बड़ी आर्ट-गैलरियों में इनके चित्र रखे गए। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल साहित्यिक या कवि ही नहीं थे, उनका व्यक्तित्व भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में ऊँचा स्थान प्राप्त कर चुका था।

वास्तव में रवीन्द्र की प्रतिभा में भारतीय संस्कृति के विविध अंगों का समावेश और समन्वय की सामर्श्य प्रचुरता से पायी जाती है । इसलिए उनकी काव्यधारा में एक साथ ही वेदान्त, वैष्णववाद, यौद्धदर्शन, सूफी मत, बाऊल सम्पदाय, ईसाई धर्म सभी का एक अभूतपूर्व समन्वय माप्त होता है । सन् 1941 में यह ‘भारत-रवि’ अस्त हो गया।

प्रश्न – 4 : संकलित पाठ के आधार पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर के ईश्वर-संबंधी विचारों को लिखें।
प्रश्न – 5 : रवीन्द्रनाथ का धर्म उनकी दृष्टि और अनुभव पर आधारित है, न कि ज्ञान पर – विवेचना करें।
प्रश्न – 6 : टैगोर के लिए ईश्वर, मानव और प्रकृति एक में ही समाविष्ट है – पठित पाठ के आधार पर टैगोर के थर्म-संबंधी विचारों को लिखें ।

प्रश्न – 7 :
धर्म को आचरण के आडा्बर या समारोहपूर्वक पूजा-पाठ मानकर भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए प्रस्तुत पंक्ति के आलोक में रवीन्दनाथ ठाकुर के धर्म तथा ईश्वर-संबंधी विचारों को लिखें।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ धार्मिक, ईश्वरवादी के साथ-साथ मानवतावादी भी थे । यह उनके दर्शन की विशिश्रता है कि भारतीय वेदान्तिक परम्परा से प्रेरणा लेते हुए मानव को ईश्वर का ही अंश माना । ईश्वर और मानव का संबंध रबीन्द्रकाव्य में एक अपूर्व रूप ले लेता है । असीम ईश्वर और ससीम (जिसकी सीमा हो) मानव में कोई भेद नहीं है । मानव और ईश्वर दोनों में एक सेतु (पुल) है – प्रेम का सेतु । संत रविदास ने भी ईश्वर को नरहरि कहकर संबोधित किया है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर का ईश्वर संबंधी दर्शन भक्तकवि चण्डीदास से प्रभावित था –

“सुन हे मानुष भाई
सबार ऊपरे मानुष सत्य
ताहार ऊपरे नाई ।”

हैगोर के लिए यह संसार विविध, सुन्दर और नवीन है । उनके अनुसार मानव तो प्रेम और प्रेम पाने के लिए ही पैदा हुआ है । इस प्रेम को पाने के लिए आत्मिक शुद्धि बहुत आवश्यक है। इसलिए मनुष्य को धर्म के नाम पर आडम्बर या समरोहपूर्वक पूजा-पाठ न मना कर भ्रम से दूर ही रहना चाहिए। अहंकार के लोप से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

टैगोर के लिए सामाजिक उद्देश्य और आध्यात्मिक जीवन में कोई टकराहट नही है। रवान्द्रनाथ के लिए आत्मसंयम ही तपस्या है और वह सांसारिक कर्मों से पलायन नहीं है। यही वह बिन्दु है उन्हें मानवधर्म या मानवतावाद की ओर ले जाता है। रवौन्द्रनाथ अंधविश्वासों से रहित, मानव स्वतंगता की सर्जनात्मकता तथा विवेक की सार्थक्ता को ही ईश्वर-दर्शन मानते थे । उनका यह कहना था कि प्राचीन अंधविश्वास हमारे दिल-दिमाग को नहीं कृते – उन्हें बंदलना होगा।

टैगोर ने अपने मानवतावादी — ईश्वरवाद का प्रतिपादन अपने सर्व श्रेष्ठ ग्रंथ, जो धर्म-दर्शन पर है – “The Religion of Man” में विस्तृत रूप से किया है । उनके धर्म-दर्शन का साराश यह है कि ईश्वर मानव की आत्मा में ही निवास करता है । मानव से प्रेम करना ही ईश्वर से प्रेम करना है ।

प्रश्न – 8 : भारतीय स्वाथीनता-संग्राम में रवीन्र्रनाथ ठाकुर के योगदान का उल्लेख करें ।
प्रश्न – 9 : “जब बुराई पनपने लगे तो यह हमारे लिए जरूरी हो जाता है कि हम आवाज उठाएँ” प्रस्तुत पंक्ति के आलोक में रवीन्द्रनाथ ठाकुर के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करें।
प्रश्न – 10 : रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल कवि – साहित्यकार ही नहीं महान क्रांतिकारी भी थे संकलित पाठ के आधार पर लिखें ।
उत्तर :
रबीन्द्ननाथ ठाकुर मूलतः साहित्यिक कलाकार थे लेकिन जब भी देश में अन्याय हुआ तो उन्होंने उसका विरोध किया। उनका यह विचार था कि जब भी वुराई पनपने लगे तो हमारा यह दायित्व बनता है कि विरोध करें। सन् 1995 में जब राजद्रोह विधेयक पास हुआ और तिलक को गिरफ्तार कर लिया, टैगोर ने ऐसे समय में सरकार की दमन-नीति के विरुद्ध आवाज उठाई और उनके बचाव के लिए धन इकट्टा करने में अपना योगदान दिया। जन सन् 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ तो इसने टैगोर को विचलित कर दिया। उस समय उन्होने देशप्रेम से भरे गीतों की रचना करके लोगो में चेतना जगाने की कोशिश की।

जब जालियांवाला बाग में हजारों निर्दोष मारे गए तो उन्होने अंग्रेजी सरकार को अपना ‘नाइटहुड’ का खिताब लौटा दिया। इतना ही नहीं विरोध व्यक्त करने के लिए उन्हांने वायसराय चेम्सफोर्ड को पत्र लिखा। इस पत्र का अंतिम अंश था –
“अब समय आ गबा है जब सम्मान के तमगे विशिप्टता के उस विसंगत संदर्भ में, जिसमें मेरे देशवासी अपनी तथाकथित हीनता के कारण वह अपमान सह रहे हैं, जो मानवोचित नहीं है – हमारी शर्म को और उजागर करते हैं ।'”

अंग्रेजों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति के विरोध में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जहाँ-जहाँ अलगाव की भावना सर्वोपरि है वहाँ-वहाँ अंधकार का राज्य है। वे राजनीति में हिंसा के विरोधी थे। उनका कहना था – सभ्यता हिंसा में जीवित नहीं रह सकती। केवल आध्यात्मिक मूल्यों को पुन: अपनाकर ही मानवता को विनास से बचाया जा सकता है । उनके मन में किसी भी जाति या सम्पदाय के लिए घृणा का भाय न था –

“‘इन मुसलमानों का जिन्होंने प्राचीनकाल से और अनेक पीढ़ियों से अपने जन्म और मरण से इस मिद्वी को अपना कहा है, उसका भी भारत के इतिहास में स्थान है ।.यहाँ तक कि अंग्रेज भी हमारे इतिहास के अंग हैं ।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

राजनीति में मानव-मात्र से प्रेम का उदाहरण सी०एफ०एण्डुज को लिखे पत्र में उनके इस कथन में मिलता है –
“बिटेन राप्प्र से अपनी सभी शिकायतों के बावजूद मैं आपके देश को प्रेम करने के लिए विवश हूँ. जिन्होंने मुझे अनेक परम प्रिय मित्र दिए हैं । मैं इस सच्चाई के कारण अत्यंत प्रसन्न हूँ क्योंकि धृणा करना एक घृणित कार्य है । सत्य बह है कि सभी देशों के सबसे अच्छे लोग आपस में प्रेम करते हैं ।”

WBBSE Class 9 Hindi रवीन्द्रनाथ ठाकुर Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 45

  • सर्वतोमुखी = बहुमुखी ।
  • अभिनेता = अभिनय करनेवाले ।
  • उदार = खुले दिल का ।
  • मान्यताएँ = विचार ।
  • आलोक = प्रकाश ।
  • सौहाद्र = प्रेम ।
  • साकार = आकार के साथ ।
  • शाश्वत = जो हमेशा से है ।
  • जीवन्त = जिंदा।
  • उद्दाम = साहस।
  • मिश्रित = मिला हुआ ।
  • कौतूहल = जानने की उत्सुकता ।
  • हिमायत = पैरवी ।
  • क्रूर = कठोर ।
  • संक्रमण = बीमारियों से ग्रस्त होना ।
  • परिधानों = वस्त्रों ।
  • दुराग्रहों = बुरे चीजों के लिए आग्रह, जिद्न ।
  • जड़ता = मूखर्खता ।

पृष्ठ सं० – 46

  • पुनर्नवीकरण = पुन: नया करना ।
  • पुनसर्मपण = फिर से सर्मपण ।
  • सार = तत्व ।
  • असीम = जिसकी सीमा न हो।
  • राग = प्रेम ।
  • व्यक्त = प्रकट ।
  • परिष्कृत = अच्छा ।
  • एकांतसेवी = एकांत में रहनेवाले।
  • पूर्वानुभूति = पहले से होनेवाली अनुभूति ।
  • भावी = होनेवाला ।
  • पूर्वपीठिका = भूमिका ।
  • नीड़ = घोंसला।
  • अवास्तविकता = जो वास्तविक नहीं है ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

पृष्ठ सं० – 47

  • स्मारक = स्मृति का स्थान ।
  • कामना = इच्छा ।
  • सामंज्यस = तालमेल ।
  • प्रशांत = विशाल ।
  • सहकार = सहयोग करने वाले ।
  • परिवेश = वातावरण ।
  • अतृप्त = जो तृप्त न हो ।
  • द्वंद्व = युद्ध ।
  • अपयशकारी = कलंक लगाने वाली ।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • तपोवन = वह वन जहाँ ॠषि तप किया करते थे ।

पृष्ठ सं० – 48

  • नगण्य = नहीं गिनने योग्य ।
  • उपरान्त = बाद ।
  • कतिपय = कुछ ।
  • प्रवासी = जो दूसरे देश में वास करता हो ।
  • एकत्व = एक होने की भावना ।
  • विखण्डत्व = अलगाव ।

पृष्ठ सं० – 49

  • प्रज्ञा = विवेक, ज्ञान ।
  • दार्शनिक = विचारक ।
  • प्रखर = तेज ।
  • बौद्विक = बुद्धि से जुड़ा हुआ ।
  • आभास = अनुभव।
  • दृष्टिगोचर = दृष्टि से दिखाई देने वाली ।
  • स्पर्श = छूने ।
  • अपितु = बल्कि ।
  • अन्तरिक्ष = शून्य ।
  • यन्त्रवत् = मशीन की तरह।
  • अन्धाधुन्ध = बिना सोचे-समझे ।
  • नकारने = नहीं मानना ।

पृष्ठ सं० – 50

  • मुक्ति = आज़ादी ।
  • सुदूर = बहुत दूर ।
  • छोर = सिरे ।
  • तान = धुन ।
  • धरातल = धरती का तल, सतह ।
  • अन्यतम = जिसके समान अन्य न हो ।
  • गहन = घना।
  • अज्ञान = नहीं जानना ।
  • ज्ञान = जानना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

पृष्ठ सं० =51

  • सघन = बहुत घना ।
  • बोध = ज्ञान ।
  • कोहरा = धुंध ।
  • आन्तरिक = अंदर का ।
  • आलोक = प्रकाश।
  • निरर्थक = जिसका कोई अर्थ न हो ।
  • एकाकार = एक में सिमटना ।
  • दीप्तिमान = उज्ज्चल ।
  • वर्णनातीत = वर्णन से परे, अलग।
  • परम सत्य = सबसे बड़ा सत्य
  • अमर = नहीं मरनेवाला ।
  • रीति = विधि, तरीका ।
  • अनन्त = जिसका अंत न हो ।
  • नितांत = बिलकुल ।
  • निजी = अपना ।
  • मुख = चेहरा, मुँह ।
  • स्मरण = याद ।
  • कृपापात्र = कृपा पाने का अधिकारी ।

पृष्ठ सं० – 52

  • परे = अलग ।
  • अभिव्यक्ति = अपने विचारों को प्रकट करना ।
  • आत्म-प्रकटीकरण = अपने भावों को प्रकट करना।
  • संज्ञाहीन = जिसका कोई नाम न हो ।
  • पालनहार = पालन करनेवाला ।
  • समाविष्ट = समाये हुए ।
  • कटु = कड़वा ।

पृष्ठ सं० – 53

  • अन्यथा = वरना ।
  • अस्तित्व = होना ।
  • आडम्बर = दिखावा ।
  • भम = जो वस्तु जो नहीं है उसे वही मना लेना, जैसे – रस्सी को साँप या साँप को रस्सी मान लेना ।
  • पुननिर्माण = फिर से निर्माण ।
  • अहम् = अहंकार।
  • लोप = गायब।
  • अर्पण = अर्पित करना, न्योछावर करना, बलिदान करना

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

पृष्ठ सं० – 54

  • बिम्ब = चित्र ।
  • एकाकार = मिलकर एक हो जाना ।
  • बन्धुवत् = मित्र की तरह ।
  • स्कुलिंग = चिनगारी।
  • इंगित = ईशारा ।
  • अवहेलना = उपेक्षा ।
  • अन्धविश्वास = अंधे की तरह विश्वास करना ।
  • वंचित = जिसे प्राप्त न हुआ हो ।
  • स्वप्नद्रष्टा = सपने देखने वाला ।
  • भविष्यवक्ता = भविष्य के बारे में बोलने वाला ।
  • निरंतर = लगातार ।
  • संतरी = रक्षक ।

पृष्ठ सं० – 55

  • आत्मसंयम = अपने पर संयम रखना ।
  • आशय = भाव ।
  • सृजन = सृष्टि ।

पृष्ठ सं० – 56

  • निष्क्रिय = क्रियाहीन ।
  • अनुसरण = पीछे चलना ।
  • शिवम् = कल्याण ।
  • पूर्ण संयोग = पूरी तरह मिलना ।
  • कर्मच्युत = कर्म से भागना ।
  • समक्ष = सामने ।
  • विस्तृत = फैला हुआ ।
  • शिखर = चोटी ।
  • आकृष्छ = आकार्षि ।

पृष्ठ सं० – 57

  • चिरयौवन = हमेशा युवा ।
  • तरुणाई = युवावस्था ।
  • कालखण्ड = समय का टुकड़ा ।
  • अभिपाय = मतलब ।
  • तरुण = जवान ।
  • सचेत = सावधान ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

पृष्ठ सं० – 58

  • स्वर्ण = सोना ।
  • संकोच = लज्जा ।
  • सर्जक = सृष्टि करने वाला, सृजन करनेवाला ।
  • परे = अलग।
  • संयोग = मिलना।
  • वियोग = बिद्धुरना ।
  • अपरिहार्य = जरूरी, आवश्यक ।
  • परिवेश = वातावरण ।

पृष्ठ सं० =59

  • विकासवाद = वह विचारधारा जो यह विश्वास करती है कि मनुष्य क्रमश: विकास करता हुआ इस अवस्था तक पहुँचा है ।
  • फ्रायड = एक मनोविज्ञानी ।
  • अचेतन = जहाँ चेतना न हो ।
  • प्रतिवर्ती = एक-दूसरे से जुड़ी ।
  • योगदान = सहायता ।
  • रहित = बिना ।
  • अपशकुन = बुरा, अमंगल का सूचक ।
  • बाधित = बाधा पहुँचाना ।
  • तानाशाह = मनमानी करने वाला ।
  • उन्नायक = विकास कराने वाला ।
  • हनन = दबाना ।
  • अमूल्य = जिसका मूल्य न हो सके।
  • अर्जित = इकट्ठा।
  • धरोहर = याती, पूर्वजों द्वारा दी गई संपत्ति ।

पृष्ठ सं० -60

  • अम्बार = ढ़ेर ।
  • अशक्तता = कमज़ोरी ।

पृष्ठ सं० – 61

  • खिताब = सम्मान ।
  • विसंगत = विशेष संगत ।
  • हीनता = बुरीस्थिति ।
  • मानवोचित = मानव के लिए उचित ।
  • घातक = घात करनेवाला, चोट पहुँचानेवाला ।
  • दायित्व = जिम्मेवारी ।
  • आकृष्ट = आकर्षित।

पृष्ठ सं० – 62

  • विचलित = व्याकुल, चिंतित ।
  • बर्बरता = जंगलीपन ।
  • उबार = निकाल ।
  • विध्वंसक = विध्वंश करने वाला ।
  • विलगाव = अलगाव ।
  • गरिमा = सम्मान ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 10 रवीन्द्रनाथ ठाकुर

पृष्ठ सं० – 63

  • पुनरूत्थान = फिर से उत्थान ।
  • पथप्रदर्शक = रास्ता दिखानेवाला ।
  • प्रवक्ता = उपदेशक ।
  • वसीयत = अंतिम इच्छा।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 Question Answer – लाला लाजपत राय

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : “लाला लाजपत राय जैसे व्यक्ति तब तक नहीं मर सकते जब तक भारतीय आकाश में सूर्य चमक रहा है” – संकलित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 2 : लाला लाजपत राय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें ।
प्रश्न – 3 : लाला लाजपत राय को उनकी किन विशेषताओं के आधार पर ‘पंजाब केसरी’ नाम से जाना जाता है – लिखें ।
प्रश्न – 4 : संकलित पाठ के आधार पर लाला लाजपत राय का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करें ।
उत्तर :
पंजाब की उर्वर भूमि, जुझारु एवं कर्मठ व्यक्तित्व को जन्म देती रही है । इसी प्रांत के लुधियाना जिले के घुड़ी गाँव में 28 जनवरी, 1865 को एक बालक का जन्म हुआ जो आगे चलकर पंजाब केसरी लाला लाजपत राय्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ । इनके पिता श्री राधाशरण अग्रवाल शिक्षक थे तथा माँ गुलाब देवी भी विदुषी महिला थी । लाहौर से कानून की पढ़ाई पूरी कर ये हिसार की जिला अदालत में वकालत का काम करने लगे ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

आगे चलकर ये आर्य समाजी बनकर शिक्षा, धर्म, मानव-सेवा और साहित्य सभी क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी तथा वकालत छोड़कर स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। उन्होंने ‘भारत सुधा’ तथा ‘पंजाबी’ पत्र के माध्यम से भी लोगों को जगाने का प्रयास किया । उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व एवं स्वाधीनता-संग्राम में उनकी सक्रियता देखकर अंग्रेजी सरकार सतर्क हुई तथा इन्हें भारत से निर्वासित कर माण्डले जेल भेज दिया गया । उनपर विद्रोह भड़काने तथा अंग्रेजी राज मिटाने का आरोप भी लगाया गया। उनके निर्बासन की खबर पूरे देश में फैल गई तथा चारों ओर से अंग्रेजी सरकार पर दबाब बढ़ने लगा । परिणाम यह हुआ कि 11 नवंबर, 1907 को 6 महीने के भीतर ही उन्हें मुक्त कर लाहौर पहुँचाया गया । इसी एक घटना से उनकी लोकप्रियता का अदांजा लगाया जा सकता है।

लाला लाजपत राय महान मानवतावादी थे । वे दलितों, पीड़ितों, अनाथों, विधवाओं, असहायों के सच्चे सेवक थे। अछूतों की दुर्दशा के प्रति कट्टर हिन्दूवादियों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से 1912-13 में उन्होंने काशी, प्रयाग, बरेली तथा मुरादाबाद की यात्रा की तथा अपने ओजस्वी भाषणों द्वारा हिन्दुओं से इस कलंक को मिटाने की भी अपील की थी । सन् 1913 ई० में गुरुकुल कांगड़ी में उनकी अध्यक्षता में एक अछूत सम्मेलन भी हुआ था । उन्होंने अकाल, महामारी एवं भूकम्प पीड़ितों की भी तन-मन-धन से सेवा की । उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा, देश-भाषा तथा देश की सभ्यता पर विशेष जोर दिया ।

भारत में शासन-सुधार कैसा हो ? इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए बिटिश सरकार ने साइमन कमीशन को भारत भेजा । इसके सभी सदस्यों के अंग्रेज होने के कारण भारतीय ने इसका उटकर विरोध किया। 30 अक्टूबर, 1928 को इसके लाहौर पहुँचने पर, लाला लाजपत राय ने विरोध करनेवाले जुलूस का नेतृत्व किया।

पंजाब केसरी के ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारे से आकाश गूंज उठा । क्रूर अंग्रेज सैनिक एवं निष्ठुर पुलिस प्रमुख साण्डर्स ने देशभक्तों की आवाज को दबाने का पूरा प्रयास किया और भारत माँ के इस वीर सपूत को लाठियों से लहूलुहान कर दिया। “मेरे शरीर पर पड़ी हर एक लाठी की चोट बिटिश सरकार के कफ़न में कील साबित होगी” का सिंहनाद करता हुआ भारतमाता का यह सपूत 17 नवंबर, 1928 को भारत माँ की गोद में सदा-सदा के लिए सो गया ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

इस देशभक्त के बारे में राष्ट्रपिता गाँधी ने जो कहा था वे शत-प्रतिशत सही थे –
“‘उन्हें पंजाब केसरी की उपाधि यों ही नहीं मिली थी । जब तक भारतीय क्षितिज में सूर्य चमकता रहेगा, तबतक देशवासी उन्हें विस्मृत नहीं कर सकते ।”

WBBSE Class 9 Hindi लाला लाजपत राय Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 42

  • केसरी = सिंह ।
  • निर्वासन = निकाल देना, देशानकाला ।
  • ख्याति = प्रसिद्धि ।
  • अर्जित = पाना ।
  • पीड़ित = दु:खी ।
  • कटृरता = कठोरता ।
  • दासता = गुलामी ।
  • अस्त्र = हथियार ।
  • कृतज्ज = किए गए उपकार को माननेवाला ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

पृष्ठ सं० – 43

  • पारित = पास, स्वीकृत ।
  • अतिनाटकीयता = बहुत ज्यादा अभिनय (over acting) ।
  • अतिसंवेदन नीीलता = बहुत
  • अधिक भावुक होना ।
  • शतकों = सैकड़ों वर्षों ।
  • पैगम्बर = देवदूत ।
  • स्वप्नद्रष्ट = स्वप्न देखनेवाला ।
  • दूरदर्शी = दूर तक
  • देखने वाले, भविष्यद्रष्टा ।
  • संगीन = तलवार ।
  • यातना = दु:ख ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 9 लाला लाजपत राय

पृष्ठ सं० – 44

  • धैर्य = साहस ।
  • भरसक = शक्ति- भर ।
  • प्रमाणों = सबूतों ।
  • सबक = शिक्षा ।
  • जोखिम = खतरा ।
  • शहादत = बलिदान।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 Question Answer – मोतीलाल नेहरू

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : उनका व्यक्तित्व देखकर हमें रोम के वाणिज्य दूतों की याद आती थी – पंक्ति के आधार पर मोंतीलाल नेहरू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का वर्णन करें ।
प्रश्न – 2 : वे एक महान् वकील थे, महान देश-भक्त, महान व्यक्ति – पंक्ति के आधार मोतिलाल नेहरु की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें ।
प्रश्न – 3 : उन्हें मानव की आत्मा में और उससे इतिहास को बदल देने की क्षमता में पूर्ण विश्वास था – के आधार पर मोतीलाल नेहरू का वर्णन करें ।
प्रश्न – 4 : संसदीय संस्थाओं के विकास में मोतिलाल नेहरू के योगदान की चर्चा संकलित पाठ के आधार पर करें।
उत्तर :
भारत में संसदीय संस्थाओं के विकास के लिए मोतीलाल नेहरू के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। मोतोलाल नेहरू उस सर्वदलीय समिति के अध्यक्ष थे जिसे हमारे देश के संविधान का मसौदा तैयार करने का दायित्व दिया गया था । उन्होंने संविधान का निर्माण करने में निम्नलिखित बातों का ध्यान प्रमुखता से रखा –

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

  • संसद का स्वरूप प्रजातांत्रिक हो।
  • हम हठधर्मिता का दृष्टिकोण न रखें ।
  • अन्तर्रोश्रीय संबंधों में मध्यम मार्ग अपनाएँ।
  • धर्म को राजनीति से नहीं जोड़ा जाय।

हमारा भारतीय संविधान समाज के जिन उद्देश्यों तथा सिद्धांतों पर आधारित है – वह मोतीलाल नेइरू की ही देन है। उन उद्देश्यों को पूरा करने में हम आज तक सफल नहीं हो पाए हैं क्योंकि हमारे अंदर वह कर्त्तव्य-भावना, उर्जा, परिश्रम तथा संगठन का अभाव है ।

मोतीलाल नेहरू के व्यक्तित्व तथा कायों से प्रभावित होकर तथा महात्मा गाँधी से पेरित होकर उनका पूरा परिवार ही राट्रीय आंदोलन का हिस्सा बन गया था। वे स्वतंत्र मस्तिष्क, पूर्वाग्रहों से मुक्त थे तथा हिन्दू, मुस्लिम और अंग्रेज सभी के अच्छे प्रभावों को ग्रहण करने वाले थे ।

एक महान वकील, महान देशभक्त तथा महान व्यक्तित्व के धनी होने के कारण उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि वे कोई निदनीय कार्य करेंगे त्येक अर्थ में वे एक विशाल हृदय के व्यक्ति थे ।

स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने पर उन्होंने अपनी विदेशी पोशाक का त्याग कर दिया और खादी को अपना लिया और खादी पहनने के बाद उनका व्यक्तित्व और भी आकर्षक हो उठा। इतना ही नहीं, उन्होंने इलाहाबाद की गलियों में खादी भी बेची । सन् 1930 ई० में गाँधी जी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें सजा भी भोगनी पड़ी ।

मोतीलाल नेहरू अपने जीवन के अंतिम दिनों में गायत्री मंत्र का जाप करने लगे थे । लेकिन ऐसा वे किसी ईश्वरीय भय के कारण नहीं करते थे क्योंकि उनका यह मानना था कि ईश्वर न तो कोधी पिता है और न ही कोई कठोर जज।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

मोतौलाल नेहरू के बारे में जो अंतिम बात कही जा सकती है – वह यह कि उनमें मानव की आत्मा तथा उनके इतिहास को बदल देने की क्षमता में पूरा पूरा विश्वास था। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है क्शि4 सितंबर, सन् 1924 में मोतोलाल नेहरू ने जिस एकता सम्मेलन की अध्यक्षता की उसमें उन्होंने यह संकल्प पारित किया –
“किसी भी धर्म के पूजा स्थलों को अपवित्र करना या किसी व्यक्ति को धर्म बदलने के लिए यातना या सजा देने जैसे कार्य निन्दा के योग्य हैं । दूसरे लोगों को विवश करके अपना धर्म स्वीकार करवाना या दूसरों की कीमत पर अपना धर्म लागू करना जैसे कार्य भी निन्दनीय हैं।”‘

WBBSE Class 9 Hindi मोतीलाल नेहरू Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 37

  • प्रगति = विकास ।
  • विविध = अनेक प्रकार की ।
  • उल्लेखनीय = उल्लेख करने योग्य ।
  • विशिष्ट = विशेष ।
  • योगदान = सहयोग ।
  • मसौदा = प्रारूप ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • अचूकता = सटीकता ।
  • उग्रवाद = हिंसा ।
  • फासीवाद = जर्मनी की एक विचारधारा ।
  • बहुधा = अक्सर ।
  • हठधर्मिता = जिद को ही धर्म बना लेना ।
  • अपेक्षित = आवश्यक ।
  • दुराग्रह = बुरा आग्रह ।
  • एकाधिकार = एक का अधिकार ।
  • मध्यस्थता = बीच-बचाव ।
  • संयम = संतोष।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

पृष्ठ सं० – 38

  • सम्पदाय = धर्म ।
  • पारित = स्वीकृत ।
  • नामित = मनोनीत ।
  • कडुता = कड़वाहट ।
  • उपनिवेशवाद = साप्राज्यवाद ।
  • परिसर = चहारदीवारी, आँगन ।
  • स्मरण = याद ।
  • मनोग्रंथि = मन की ग्रंधि/गांठ ।
  • आधुनिकतम = आधुनिक से आधुनिक ।
  • सुसज्जित = अच्छी तरह सजा हुआ ।
  • मनमानी = अपने मन की ।
  • उद्यम = परिश्रम ।

पृष्ठ सं० – 39

  • वृतान्त = कहानी ।
  • समस्त = पूरा ।
  • ग्रहणशील = ग्रहण करने वाले ।
  • शाही = राजाओं की तरह।
  • सर्वथा = सब प्रकार से ।
  • अमिट = नहीं मिटने वाला ।

पृष्ठ सं० – 40

  • तत्कालीन = उस समय का ।
  • आदी = अभ्यस्त ।
  • कताई = धागा कातना ।
  • खद्दर = खादी ।
  • सविनय = विनय के साथ।
  • अवज्ञा = आज्ञा नहीं मानना ।
  • मानक = स्वीकृत रूप ।
  • अनुकरणीय = अनुकरण करने योग्य ।
  • कुशाग्र = कुश की तरह तेज ।
  • अर्द्ध = आधा ।
  • सौहार्द् = प्रेम ।
  • चाह = इच्छा ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 8 मोतीलाल नेहरू

पृष्ठ सं० – 41

  • अतीत = बीता हुआ समय ।
  • नासूर = घाव ।
  • सुचिंतित = अच्छाई के लिए घिंतित ।
  • उन्माद = उग्र भाव ।
  • दुर्गम = जहाँ आसानी से नहीं पहुँचा जा सके
  • ऊजाड़ = जहाँ कोई पेड़-पौधा न हो ।
  • गल्प = कहानी ।
  • आधात = चोट।
  • सजग = सावधान ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 Question Answer – बाल गंगाधर तिलक

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 

प्रश्न – 1 : संकलित पाठ के आधार पर बाल गंगाधर तिलक की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
प्रश्न – 2 : स्वाधीनता संघर्ष में बाल गंगाधर तिलक के योगदान पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 3 : बाल गंगाधर तिलक के स्वाधीनता संबंधी विचारों पर प्रकांश डालें।
प्रश्न – 4 : तिलक का जीवन कर्म-योग के आदर्श का दृष्टांत था – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : तिलक का जीवन आध्यात्म और समाजिकता का संयोग था – अपने विचार लिखें।
प्रश्न – 6 : संकलित पाठ के आधार पर तिलक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर :
भारत के दूसरे शिवाजी तथा स्वाधीनता संग्राम के ‘सिद्ध महात्मा’ लोकमान्य बाल ‘गंगाधर ने 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के एक ब्राह्यण परिवार में अंधकार में ‘प्रकाश ज्योति’ की तरह जन्म लिया। अभिमन्यु की तरह उनमें सहज प्रतिभा तथा संघर्ष के लिए साहस का असीम भण्डार था।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

सन् 1879 में कानून की डिग्री लेने के बाद वे देश के स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गए। अपने विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने दो साप्ताहिक पत्र मराठी भाषा में ‘केसरी’ तथा अंग्रेजी भाषा में ‘मराठा’ प्रकाशित किए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा, बहिष्कार तथा सत्याग्रह को प्रमुख कार्यक्रम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने महाराष्ट्र के लोकप्रिय त्योहारों को भी देशभक्ति से जोड़ दिया।

तिलक उदारवादियों की ‘राजनीतिक भिक्षावृत्ति’ की नीति में विश्वास नहीं करते थे। उनका कहना था ‘हमारा आदर्श दया याचना नहीं, आत्म निर्भरता है।’ उनका मानना था – ‘महान उद्देश्य (पूर्ण स्वराज) की प्राप्ति के लिए सभी साधन न्यायोचित हैं।

तिलक बाँस के वृक्ष की तरह नहीं थे कि जिधर हवा बहे, उधर ही झुक जाए। वे अपने उग्र विचारों पर दृढ़ थे, लेकिन इसकी कीमत उन्हें 1897 में चुकानी पड़ी, जब उन्हें 18 माह का कठोर कारावास मिला। सजा सुनाए जाने के बाद उन्होंने कहा –
“‘इस ट्रिब्यूनल से ऊपर भी कोई सत्ता है जो हमलोगों के भाग्य को शासित करती है और वह उसी सत्ता की इच्छा से हो सकती है कि मैं जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता हूँ वह मेरे मुक्त रहने की अपेक्षा जेल की यातना से अधिक फलीभूत हो।”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

वास्तव में देखा जाए तो वे महात्मा गाँधी के अग्रदूत थे। लगान न देने का आन्दोलन, सरकारी नौकरियों का बहिष्कार, शराबबंदी तथा स्वदेशी जैसे आन्दोलन जो गाँधी जी ने चलाए थे, तिलक पहले ही इन पर प्रयोग कर चुके थे। उनका जीवन दिव्य था।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भारतीय चेतना का जनक कहा जाता है।भारत-मंत्री मांटेग्यू ने ठीक ही कहा था –
“भारत में केवल एक ही अकृत्रिम उग्र राष्ट्रवादी था और वह थे – तिलक।”
तिलक के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा कर्मयोगी होने से देशवासियों ने उन्हें न केवल ‘लोकमान्य’ की उपाधि दी वरन् उन्हें ‘तिलक भगवान’ कहकर भी पुकारा।

WBBSE Class 9 Hindi बाल गंगाधर तिलक Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 34

  • ज्वलन्त = जलता हुआ।
  • दुर्लभ = जिसे आसानी से पाया न जा सके।
  • अदम्य = जिसका दमन न किया जा सके, जिसे दबाया न जा सके।
  • आकृष्ट = आकर्षित।
  • हाशिये = चौपाई।
  • पारावार = सीमा।
  • कर्मपरक = कर्म करने वाले।
  • मुक्त = आजाद ।
  • लोक-संग्हह = लोगों को एकजुट करना।
  • दृष्टांत = उदाहरण।
  • नि:स्वार्थ = बिना स्वार्थ के।
  • आराधना = पूजा, अर्चना।
  • शोधकर्ता = खोज करने वाला।
  • प्राच्यविद्या = प्राचीन विद्या।
  • सर्वोत्कृष्ट = सबसे उत्कृष्ट/अच्छा।
  • पराधीन = दूसरे के अधीन/गुलाम।
  • विकल्प = पर्याय।
  • स्वराज = अपना राज।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 7 बाल गंगाधर तिलक

पृष्ठ सं० – 35

  • अन्तरक = अंतर करने वाला।
  • गणन-विधि = गिनती करने की विधि।
  • बायकाट = बहिष्कार ।
  • सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह।
  • मद्य-निषेध = शराबबंदी , नशाबंदी।
  • अस्पृश्यता = छुआछूत।
  • उन्मूलन = खात्मा।
  • रक्तपात = खून बहाना।
  • उग्रवाद = हिंसा में विश्वास करने वाली विचारधारा।
  • आत्मघाती = अपने-आप को नष्ट करना।
  • केसरी = सिंह।
  • उकसाना = प्रेरित करना।
  • कायरता = डरपोकपना, भीरूता ।
  • मान्यताओं = विचारों।
  • यातनाएँ = कष्ट।
  • ट्रिब्यूनल = न्यायालय।
  • फलीभूत = फलदायी।

पृष्ठ सं० – 36

  • वर्ग = श्रेणी।
  • अनुचित = जो उचित न हो।
  • भावी = आनेवाला।
  • मतभेद = विचार का भेद।
  • सहिष्णुता = सहने की शक्ति।
  • निष्ठावान = विश्वास रखनेवाला।
  • निर्भय = जिसे भय न हो।
  • स्पष्ट वक्ता = दो टूक कहने वाला/साफ-साफ कहने वाला।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 Question Answer – गोपाल कृष्ण गोखले

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : गोपाल कृष्ण गोखले एक सच्चे राजनैतिक कार्यकर्ता थे – पठित पाठ के आधार पर उनकी चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 2 : ‘वे हमारे राष्ट्रीय आचरण के सबसे बड़े संत सिपाही थे’ – पंक्ति के आधार पर गोपाल कृष्ण गोखले के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 3 : गाँधी जी गोखले की किन विशेषताओं के आधार पर उन्हें गुरू मानते थे – उल्लेख करें।
प्रश्न – 4 : गोपाल कृष्ण गोखले के राजनीतिक विचारों पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 5 : संकलित पाठ के आधार पर बताएँ कि गोपाल कृष्ण गोखले के जीवन से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
युग पुरूष, अहिंसा के पुजारी, मानवता के उद्धारक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के राजनीतिक गुरू – गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई, 1866 ई० को महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के कोतलुक नामक प्राम में हुआ था। 13 वर्ष की अवस्था मे पिता का देहांत हो जाने पर अपने जीवन का निर्माण उन्होंने अपने चिंतन, लगन एवं अथक परिश्रिम से किया। 1884 ई० में एलफिन्सटन कॉलेज, बम्बई से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। सन् 1886 ई० में फर्ग्युसन कॉलेज में इतिहास और अर्थशास्त्र के प्राध्यापक नियुक्त हुए। वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत 22 वर्ष की आयु में बाम्बे विधान परिषद का सदस्य बनकर की।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

गोखले आधुनिक भारत के सर्वपथम कूटनीतिज्ञ थे। काउंसिल के सदस्य के रूप में उन्होने नि:शुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रारंभ करने, नमक कर को समाप्त करने और राजकीय सेवा में भारतीयों को अधिक संख्या में नियुक्त किए जाने पर जोर दिया।

गोखले का ब्रिटिश उदारवाद में अत्यधिक विश्वास था। वे अंग्रेजों की न्यायप्पियता, निष्पक्षता एवं सदाशयता में पूर्ण विश्वास करते थे। वे भारत के भविष्य के प्रति काफी आशावान थे। उदारवादी होने के कारण संवैधानिक साधनों तथा तोड़फोड़ की प्रवृत्ति में उनका विश्वास नहीं था। उनके संवैधानिक साधनों में प्रार्थना, विरोध, अनशन एवं सुधार का प्रमुख स्थान था। उन्होंने अंग्रेजी शासन की अच्छाइयों की प्रशंसा और बुराइयों का विरोध किया।

ब्रिटिश शासन के पक्षधर होते हुए भी उनके लिए राष्ट्रीय हित सबसे बड़ा था। सरोजिनी नायडू ने गोखले के बारे. में कहा था कि, “वे हमारे राष्ट्रीय आचरण के सबसे बड़े संत सिपाही थे, जिनका जीवन पवित्र था।”
गोखले की इन्हीं खूबियों से प्रभावित होकर गाँधी जी ने गोखले के बारे में कहा था –
” वे मुझे ऐसे लगे जैसा कि मैं एक सच्चे राजनैतिक कार्यकर्ता को देखना चाहता हूँ – स्फटिक की भांति स्वच्छ, मेमने की तरह सीधे, सिंह की भांति साहसी और हद पार करने की सीमा तक उदार। …….”

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

ऐसी महान प्रतिभा का देहावसान 19 फरवरी, 1915 को 49 वर्ष की अल्पायु में ही हो गया। उनके आश्चर्यजनक कार्यों को देखकर उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी, उग्रदल के प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक जी से भी उनकी प्रशंसा के शब्द नियंत्रित न हो सके। उनके अनुसार –
“गोखले भारत का रत्न तथा महाराष्ट्र का सपूत था। वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अग्रणी था।”
उनके बारे में महात्मा गाँधी ने भी कहा –
“मेरे लिए इतना ही पर्याप्त है कि इसके विपरीत उनमें कोई दोष नहीं मिला। मेरे लिए वे हमेशा राजनीति के क्षेत्र के पूर्ण व्यक्ति थे और रहेंगे।”

WBBSE Class 9 Hindi गोपाल कृष्ण गोखले Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 29

  • जटिल = उलझा हुआ।
  • पूर्वाग्रहों = पूर्व के विचार से ग्रसित।
  • बहुधा = अक्सर ।
  • जमाखोरी = आवश्यकता की चीजों को छिपाकर रखना ताकि अभाव की स्थिति में उसे ऊँचे मूल्य पर बेचा जा सके।
  • सत्यनिष्ठा = सच्चे विश्वास।
  • लगन = रुचि।
  • राजद्रोह = राष्ट्र के प्रति विद्रोह की भावना।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

पृष्ठ सं० – 30

  • तर्क सम्मत = तर्क की कसौटी पर खरा।
  • आदिम जाति = आदिवासी।
  • मध्यमार्गी = बीच का रास्ता अपनाने वाला।
  • ध्येय = लक्ष्य।
  • अनुलंघनीय = उल्लंघन न करने लायक।
  • इतिश्री = समाप्ति।
  • आकृष्ट = आकर्षित।
  • दुर्भावना = बुरी भावना।
  • आगामी = आने वाला।
  • हेतु = कारण।

पृष्ठ सं० – 31

  • तिलांजलि = त्याग।
  • एकत्र = जमा, इकट्ठा।
  • व्यवसाय = रोजगार।
  • कर्तव्यनिष्ठ = जिनमें कर्त्वव्य के प्रति निष्ठा हो।
  • निकाय = संस्था।
  • विधान = नियम।
  • सुसज्जित = अच्छी तरह सजकर ।
  • संघर्षरत = संघर्ष में रहना।
  • प्रकोष्ठों = खानों।
  • नि:शुल्क = बिना शुल्क के।
  • अनिवार्य = जरूरी।

पृष्ठ सं० – 32

  • उदारवाद = उदारता में विश्वास करनेवाली विचारधारा।
  • दमन = अत्याचार।
  • सम्मति = सहमति।
  • तत्परता = जल्दीबाजी।
  • अंतर्मन = हृदय।
  • सत्याग्रह = सत्य के लिए आग्रह।
  • विलीन = गायब।
  • कृतज्ञ = उपकार को माननेवाला।
  • सन्मार्ग = सही मार्ग।
  • हित = भलाई।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 6 गोपाल कृष्ण गोखले

पृष्ठ सं० – 33

  • अजनबी = अपरिचित।
  • विकार = दोष।
  • सुधारवाद = सुधार में विश्वास करने वाली विचारधारा।
  • न्यायोचित = न्याय की दृष्टि से उचित।
  • समानता = बराबरी।
  • निरर्थक = जिसका कोई अर्थ नहीं है।
  • आदर्श = अच्छा रूप, वह जो होना चाहिए ।
  • कर्मठ = कर्म में विश्वास रखने वाला।
  • सत्यनिष्ठा = सत्य में श्रद्धा रखने वाला।
  • खड्यंत्र = कुचक्र।
  • विधर्मी = धर्म को नहीं माननेवाला।
  • स्फटिक = मणि।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 Question Answer – आचार्य जगदीश चंद्र बोस

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : आचार्य जगदीश चंद्र बोस के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डालें।
प्रश्न – 2 : ‘आचार्य जगदीश चन्द्र बोस को विज्ञान की देन’ पर एक संक्षिप्त निबंध लिखें।
प्रश्न – 3 : प्राकृतिक विज्ञान के शोध के प्रणेता के तौर पर आचार्य जगदीश चंद्र बोस का मूल्यांकन करें।
प्रश्न – 4 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस वैज्ञानिक होने के साथ-साथ धार्मिक तथा आस्तिक भी थेपठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस में विज्ञान, कला और धर्म का संतुलित सामंज्यस था – पठित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 6 : आचार्य जगदीश चन्द्र बोस ने अपने शोध कार्यों के द्वारा भारतीय ॠषियों की गहन अंतर्दृष्टि की वैज्ञानिक व्याख्या और सत्यता प्रदान की – संकलित पाठ के आधार पर लिखें।
उत्तर :
आचार्य जगदीश चन्द्र बोस का जन्म सन् 1854 ई० में बंगाल के मैमनसिंह जिले के फरीद्युर गाँव में हुआ था। आचार्य बोस अद्भूत प्रतिभा के धनी थे। वे वेदों तथा क्रषियों की गहन अंतर्दृष्टि से विशेष प्रभावित थे जिसमें प्रकृति को सजीव मानकर उनकी विशद व्याख्या की गई है। संस्कृत कवियों ने भी लाजवंती तथा सूयंमूखी फूलों के माध्यम से उनकी संवेदनशोलता का वर्णन किया है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

हमारे ॠषियों की इन्हीं आंतरिक विवेकशीलता को आचार्य बोस ने अपने वर्णन किया है। हमारे ॠषियों की इन्हीं आंतरिक विवेकशीलता को आचार्य बोस ने अपने शोधकार्यों के द्वारा सत्यता प्रदान की। उन्होंने यहि सिद्ध किया कि पौधों तथा पशुओं के भावावेग समान होते है। इस सच्चाई को उन्होंने अपने द्वारा निर्मित जटिल यंत्रों से सिद्ध करके दिखाया।

आचार्य बोस ने प्रकृति को विज्ञान से श्रेष्ठतर बताया क्योकि उनका कहना था – रासायनिक, विद्युतीय और इलेक्टिक क्रियाएँ वह नहीं कर सकती जो गेहूँ के बीज का एक दाना वसन्त में अंकुरित होकर कर देता है।

आचार्य बोस ने अपने वैज्ञानिक शोधों के दौरान यह अनुभव किया कि मनुष्य प्रकृति के बारे में कितना कम जानता है तथा ज्ञान की अपेक्षा अज्ञान कितना विस्तृत है। उन्होने यह स्वीकार किया कि धार्मिक संत के लिए प्रकृति निष्ठा का विषय है जो स्वयसिद्ध हो जाता है लेकिन वैज्ञानिक उसे प्रयोगों द्वारा सिद्ध करने की कोशिश करते हैं।

जगदीश चन्द्र बोस के वैज्ञानिक शोधों का उद्देश्य मानवता का कल्याण, ईश्वर की गरिमा को बनाए रखना, विश्व को समृद्ध करना तथा स्थायी विश्वबंधुत्व था। पौधों में जीवन-विषय पर उनके शोध का मूल आधार भारतीय ॠषियों द्वारा निरूपित ये सत्य थे –

  • भारतीय ॠषि विश्व को सकल रूप में देखते हैं तथा उनके अनुसार पिण्ड और श्रहाण्ड एक-दूसरे के बिम्बप्रतिबिम्ब है।
  • विश्व का विस्तार निस्प्राण नहीं बल्कि प्राणवान है।
  • प्रकृति में कहीं व्यतिरेक नहीं है।

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि आचार्य जगदीशघन्द्र बोस धार्मिक होने के साथ-साथ आस्तिक भी थे। उनके व्यक्तित्व में विज्ञान, कला तथा धर्म का अद्भुत सामंज्यस था।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वेद कितने हैं ?
उत्तर :
चार।

प्रश्न 2.
वेदों के नाम लिखें ।
उत्तर :
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

प्रश्न 3.
‘वेदों का वेद’ किसे कहा गया है ?
उत्तर :
‘पुराण’ को ।

प्रश्न 4.
भारत में पुनर्जागृति कब आई ?
उत्तर :
उन्नीसवीं शताब्दी में ।

प्रश्न 5.
भारत की प्रगति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर किसने बल दिया ?
उत्तर :
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार ने।

प्रश्न 6.
‘भारतीय संघ’ की स्थापना किसने की ?
उत्तर :
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार ने

प्रश्न 7.
भारतीय ॠषि विश्व को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर :
पूर्ण रूप में ।

प्रश्न 8.
भारतीय ऋषि के अनुसार पिण्ड और व्रह्वाण्ड क्या हैं ?
उत्तर :
एक-दूसरे के बिंब-पतिबिंब।

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प्रश्न 9.
‘स्वाह रात्रो पत्र-संकोच:’ – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
रात में पत्तियों में संकुचन होता है ।

प्रश्न 10.
उदयन के पौधे में किसके समान गतिविधियाँ दिखायी दी ?
उत्तर :
मानव के समान ।

प्रश्न 11.
हमांर :ग्रि्षियों की अंतः प्रज्ञा को किसने वैज्ञानिक सत्यता प्रदान की ?
उत्तर :
जगदीश द्र बोस ने ।

प्रश्न 12.
विज्ञान अर्भी तक किसकी व्याख्या नहीं कर पाया है ?
उत्तर :
जैविक विकास और उसके पुनरूत्थान की व्याख्या ।

प्रश्न 13.
किसने यह प्रमाणित कि पौधों में भी जीवन है ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने।

प्रश्न 14.
‘मैन ऑन दिज नेचर’ के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
सर चार्ल्स शेरिंगटन ।

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प्रश्न 15.
अरस्तू ने दो हजार वर्ष क्या पूछा था ?
उत्तर :
मस्तिष्क का शरीर से क्या संबंध है ?

प्रश्न 16.
सध्चा विज्ञान उसके प्रणेता को क्या बना देता है ?
उत्तर :
विनाम्म।

प्रश्न 17.
चार्ल्स डारविन के शोध-प्रबंध का नाम क्या है ?
उत्तर :
‘द डिसेंट ऑंक मैन’ ।

प्रश्न 18.
किसकी नींव पर हम बेहतर भविष्य बना सकते हैं ?
उत्तर :
अतीत की नींव पर ।

प्रश्न 19.
वैज्ञानिकों की जीवन्त आत्मा किसका प्रतिबिंब हैं ?
उत्तर :
देवी रहस्य का।

प्रश्न 20.
जगदीश चन्द्र बोस की महत्वाकांक्षा क्या थी ?
उत्तर :
हम लोग खोज और शोध-कार्य जारी रखें।

प्रश्न 21.
सच्चा विज्ञान उसके प्रणेता को क्या अनुभव करा देता है ?
उत्तर :
वास्तव में वह (मणेता) कितना कम जानता है और अझान बहुत विस्तृत है ।

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प्रश्न 22.
जगदीश चन्द्र बोस की रुचि किस सुमेल में थी ?
उत्तर :
व्रहाण्ड की निरतरता तथा सुमेल में ।

प्रश्न 23.
जैन तथा वैशेघिक लेखक गुणारल और शंकर मिश्र ने पौधों के किन गुणों की चर्चा की है ?
उत्तर :
पौधों में अंतर्निह्नित चेतना है और वे सुख-दु ख अनुभव करते हैं।

प्रश्न 24.
संस्कृत कवियों ने किस फूल की चर्चा की है ?
उत्तर :
सूर्यमुखी।

प्रश्न 25.
किस उपनिषद में ज्ञान-विज्ञान के विषयों का उल्लेख है ?
उत्तर :
छान्दोग्य उपनिषद् में ।

प्रश्न 26.
भारतीयों की गहन रुचि किन नियमों को जानने में रही है ?
उत्तर :
उन नियमों मे जो बह्नाण्ड के विविध पक्षों को शासित करते हैं।

प्रश्न 27.
जगदीश चन्द्र बोस किस शोध के प्रणेता थे ?
उत्तर :
प्राकृतिक विज्ञान के ।

प्रश्न 28.
जर्मनी के प्रो० हीबरलैण्ड किस विषय के वैज्ञानिक थे ?
उत्तर :
वनस्पति विज्ञान के ।

प्रश्न 29.
‘न्याय-बिन्दु टीका’ के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर :
धर्मोत्तर ।

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प्रश्न 30.
‘मिमोसा पुदिका’ को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
लाजवन्ती या हुई-मुई।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विज्ञान के विकास में भारत का एक लम्बा और सतत् इतिहास रहा है – कैसे ?
उत्तर :
प्राचीन भारत के उपलब्य ग्रथों से यह पता चलता है कि विज्ञान के विकास में भारत का एक लंबा और सतत् इतिहास रहा है । उदाहरण के लिए, हमारे चारों वेदों, छान्दोग्य उपनिषद्, महाकाव्यों तथा पुराणों में ज्ञान-विज्ञान के विषयों का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 2.
भारत की वैज्ञानिक प्रगति में डॉ० महेन्द्रलाल सरकार के योगदान की चर्चा करें ।
उत्तर :
19 वीं सदी में डॉ॰ महेन्दलाल सरकार ने भारत की प्रर्गति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर जोर दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने ‘भारतीय संघ’ की स्थापना की। प्रो० सी० वी० रमन तथा के० एस० कृष्ण जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने उस समय इस संघ में कार्य किया।

प्रश्न 3.
जगदीश चन्द्र बोस ने भारतीय कषियों की किन बातों की वैज्ञानिक व्याख्या की तथा उन्हें सत्यता प्रदान की ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने भारतीय ॠषियों की जिन बातों की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए उन्हें सत्यता प्रदान की, वे निम्नांकित हैं –

  • पिण्ड और बह्ाणण्ड एक दूसरे के बिम्ब-प्रतिबिम्ब हैं।
  • सम्पूर्ण विश्व तथा बहाण्ड प्राणवान है।
  • प्रकृति में कहीं अवरोध नही है।
  • पौंधों में भी जीवन है तथा वे भी सुख-दुःख अनुभव करते हैं।

प्रश्न 4.
जगदीश चन्द्र बोस ने पौधे की जीवंतता को समझाने के लिए किसका उदाहरण दिया ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बोस ने पौधै की जीवंतता को समझाने के लिए पत्वर के टुकड़े तथा आम की गुठली का उदाहरण दिया। पत्थर का टुकड़ा वर्षो तक यूँ ही पड़ा रहेगा लेकिन गुठली के लिए परिस्थितिया अनुकूल होने पर वह एक बड़े वृक्ष में बदल सकती हैं।

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प्रश्न 5.
अतीत के बारे में जगदीश चन्द्र बोस ने क्या कहा ?
उत्तर :
अतीत के बारे में बताते हुए जगदीश चन्द्र बोस ने कहा कि अतीत को तो हम वापस नहीं ला सुके लेकिन उसकी नींव पर एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते है । अगर हम प्रयत्ल करें तो अपने वर्तमान को अच्छे भविष्य में बदल सकते हैं।

प्रश्न 6.
भारतीबों की रुचि किन नियमों को जानने में रही है ?
उत्तर :
भारतौयों की रुचि उन नियमों को जानने में रही है जो पूरे बह्नाण्ड को शासित करते हैं, उसे एक नियम में बाँधकर रखते हैं। इसका पता हमारे प्राचीन ग्रंथों से भी मिलता है। यही कारण है कि विज्ञान के विकास में भारत का एक लम्बा और सतत इतिहास रहा है ।

प्रश्न 7.
विज्ञान आज तक किसकी व्याख्या नहीं कर पाया है ?
उत्तर :
विज्ञान आज तक जैविक विकास तथा उसके पुनरुत्यान की व्याख्या नहीं कर पाया है । उदाहरण के लिए रासायनिक, विद्युतीय और इलेक्ट्रानिक क्रियाएँ वह नहीं कर सकती जो गेहूँ के बीज का एक दाना वसंत में अंकुरित होकर कर देता है।

WBBSE Class 9 Hindi आचार्य जगदीश चंद्र बोस Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 24

  • दक्षता = कुशलता।
  • कायल = प्रभावित।
  • वेदी = धर्म के काम के लिए प्रयोग में लाया जानेवाला चबूतरा।
  • उत्साहजन्य = उत्साह से जन्मा हुआ।
  • शोध = खोज।
  • ख्याति = प्रसिद्धि।
  • सतत = लगातार ।
  • पितरों = पूर्वजों।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

पृष्ठ सं० – 25

  • खगोल-विद्या = भूगोल ।
  • सघन = बहुत अधिक।
  • सुषुप्त = सोया हुआ।
  • पिपासा = प्यासा।
  • प्रणेता = जनक, प्रारंभ करनेवाले।
  • पादप = पौधा।
  • बिम्ब = छाया।
  • प्रतिबिम्ब = प्रतिच्छाया।
  • चराचर = हमेशा।
  • संचरण-व्यतिरेक = बाधा।

पृष्ठ सं० – 26

  • अन्तर्निहित = अंदर में निहित/विद्यमान ।
  • मन्द = धीमी।
  • अंतः प्रज्ञा = अंदर का विवेक ।
  • सत्यता = सच्चाई।
  • आघात = चोट।
  • प्रहारों = चोरों।
  • स्नायुतंत्र = इंद्रियाँ।
  • अवयवों = अंगों।
  • वनस्पति = पौधे।
  • आवेग = आवेश/उत्तेजना।
  • नितांत = बिल्कुल।
  • भावावेग = भाव का आवेग।
  • तथ्य = सच्चाई।
  • दर्शाने = दिखाने।
  • वक्र = टेढ़ा।
  • सुमेल = अच्छा मेल।
  • गुटिका = टुकड़ा।
  • गुठली = बीज (आम के अंदर का कड़ा भाग)

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 5 आचार्य जगदीश चंद्र बोस

पृष्ठ सं० – 27

  • कालान्तर = समय का अंतर।
  • अज्ञात = अनजाना।
  • पुनरूत्पादन = फिर से उत्पादन।
  • जीवेतर = जीव से भिन्न।
  • उत्कर्ष = विकास ।
  • संचरित = फैलते।

पृष्ठ सं० – 28

  • ज्ञात = मालूम।
  • चयन = चुनना।
  • उर्जा = शक्ति।
  • अपरिवर्तनीय = परिवर्तन न होने वाला।
  • अनसुलझे = जिसे सुलझाया नहीं जा सका।
  • हल = सिद्ध।
  • अविराम = बिना आराम किए।
  • पोषित = पोसा गया, पाला गया।
  • अतीत = बीता हुआ समय।
  • सृजन = रचना।
  • भागीदार = हिस्सेदार, सहायक।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 Question Answer – राजा राममोहन राय

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : समाज सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय का परिचय दें ।
प्रश्न – 2 : राजा राममोहन राय आधुनिक भारत का पुनर्जागरण का सूत्रपात करनेवाले थे – विवेचना करें।
प्रश्न – 3 : राजा राममोहन राय के धर्म संबंधी विचारों को लिखें ।
प्रश्न – 4 : राजा राममोहन राय आधुनिक भारत के प्रणेता थे – पठित पाठ के आधार पर लिखें।
प्रश्न – 5 : राजा राममोहन राय मानव मात्र की समानता चाहते थे – संकलित पाठ के आधार पर लिखें ।
प्रश्न – 6 : संकलित पाठ के आधार पर राजा राममोहन राय के आदर्शों को लिखें ।
प्रश्न – 7 : सहायक पाठ में संकलित ‘राजा राममोहन राय’ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
अंध विश्वास और अनेक कुरीतियों से ग्रस्त भारतीय जनजीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जानेवाले राजा राममोहन राय भारतीय विभूतियों में से एक थे । वे प्रतिक्रिया तथा प्रगति के मध्य-बिन्दु थे। भारतीय पुनर्जागरण के प्रभात तारा थे ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

राजा राममोहन राय अनेक भाषा के ज्ञाता होने के कारण विभिन्न धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया था। अध्ययन के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि सभी धर्मों में एकेश्वरवाद का ही प्रचलन है। ईश्वर एक है, सर्वोपरि है, संसार का रचयिता है जिसका वर्णन अनेक रूपों में मिलता है । सबका सार तत्व एक है । यदि हम उस सर्वोपरि सत्य के स्वरूप को जान पाएँ तोधर्म के नाम पर कोई विवाद ही नहीं रह जाएगा । इसी दृष्टिकोण को अपनाकर हम उस परमेश्वर को अच्छी तरह समझ पाएँगे ।

समाज सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय विशेष रूप से याद किए जाते हैं। उन्होंने सती-प्रथा, बाल-विवाह, जाति-प्रथा, अस्पृश्यता जैसे रोगों से ग्रसित और विकृत भारतीय समाज में नवचेतना का संचार किया । राष्ट्रीय एकता व अखंडता के लिए वे एक समर्पित कर्मवीर थे । ऊँच-नीच तथा छुआख्यूत की भावना को भी उन्होंने मानवता का महान शत्रु बताया । स्वयं उनके ही शब्दों में – ”जाति-भेद, जिससे हिन्दू समाज अनेक जाति-उपजाति में बँट गया है – हमारी गुलामी का प्रमुख कारण रहा है । एकता के अभाव में ही हम दासता की जंजीर में जकड़े रहे ।

राजा राममोहन राय भारत की आज़ादी के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता को बहुत ही आवश्यक मानते थे । रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने उनके बारे में सही कहा था –
“उनके हृदय में हिन्दू, मुस्लिम, इसाई आदि सबके लिए जगह थी । वस्तुतः उनकी आत्मा भारत की आत्मा थी ।”
राजा राममोहन राय समाज सुधारक के साथ ही एक महान शिक्षाशास्वी भी थे । वे भारत के विकास के लिए पाश्चात्य शिक्षा और अंग्रेजी शिक्षा को आवश्यक मानते थे । सन् 1885 ई० में उन्होंने कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की भी स्थापना की । ऐसे सर्वतोन्मुखी प्रतिभाशाली महापुरुष का देहांत 27 दिसंबर सन् 1883 को ब्रिस्टल में तब हुआ, जब वे इंग्लैण्ड में भारतवासियों के कल्याण-कार्य में लगे हुए थे ।

अति लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक भारतीय पुर्नजागरण का सूत्रपात करने वाले कौन थे ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय।

प्रश्न 2.
राजा राममोहन राय किसमें विश्वास रखते थे ?
उत्तर :
मानवीय स्वतंत्रता में ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

प्रश्न 3.
भारत ने किसे अपना पवित्र ग्रंथ माना ?
उत्तर :
उपनिषदों को ।

प्रश्न 4.
राजा राममोहन राय ने किन धर्मग्रंथों का अध्ययन किया ?
उत्तर :
हिन्दू, इस्लाम और ईसाई धर्मग्रंथों का।

प्रश्न 5.
भारत किन विवादों में फंस गया ?
उत्तर :
कर्मकांड तथा खंडन-मंडन के विवादों में ।

प्रश्न 6.
हम अपने छोटे-छोटे मतभेदों को कैसे भुला सकते हैं ?
उत्तर :
विश्व प्रेम तथा सत्यप्रेम को अपना कर ।

प्रश्न 7.
राजा राममोहन राय के अनुसार सच्चा धार्मिक कौन है ?
उत्तर :
जो व्यक्ति अपने को परमात्मा का अंश मानता है।

प्रश्न 8.
राजा राममोहन राय के अनुसार समानता का मूल सिद्धांत क्या है ?
उत्तर :
मानव-मात्र की समानता।

प्रश्न 9.
प्राचीन काल में नारियों को कौन-से अधिकार मिले हुए थे ?
उत्तर :
जो अधिकार पुरुषों के थे।

प्रश्न 10.
राजा राममोहन राय हमें कौन-से महान आदर्श देना चाहते थे ?
उत्तर :
सत्य का धर्म, सामाजिक समानता, तथा मानव-मात्र की एकता का महान आदर्श।

प्रश्न 11.
विश्व का निर्माण या परिवर्तन किन व्यक्तियों के द्वारा होता है ?
उत्तर :
जो विश्व का सबसे अधिक विरोध करते हैं।

प्रश्न 12.
हमें किन बातों को तिलांजलि देने में प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए ?
उत्तर :
जो हमारे अंतःकरण की पूर्णता में बाधक है।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

प्रश्न 13.
मानव की गरिमा को कौन कम करता है ?
उत्तर :
अंधविश्वास, कुरीतियाँ तथा सामाजिक बुराइयाँ।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
राजा राममोहन राय ने किन धर्मग्रंथों का अध्ययन किया तथा उन्होंने क्या पाय्या ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय ने हिंदू, इस्लाम तथा ईसाई धर्मग्रंथों का अध्ययन किया। अध्ययन के बाद उन्होंने यह पाया कि ईश्वर में आस्था ही सभी धर्मो का सार है। सारे धर्म ये बताते है कि ईश्वर एक है, सर्वोपरि हैं।

प्रश्न 2.
राजा राममोहन राय किस स्वतंत्रता में विश्वास करते थे ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय मानवीय स्वतंत्रता में विश्वास करते थे । उन्होंने कहा कि जो देश अपने-आप को सत्य कहता है उसे भी मानव-मात्र की स्वतंत्रता तथा समानता में विश्वास करना चाहिए। मानवता प्रेम के नाते उन्होंने भारत की स्वतंग्रता के लिए फांस तथा बिटेन के विधायकों से जो अपील की थी – उसे सब जानते हैं। उनका यह मानना था कि यदि हम अपने देश की बुराइयों को मिटाना चाहते हैं तो हमें प्रतिबंधों को हटाना होगा।

प्रश्न 3.
राजा राममोहन राय के महान आदर्श क्या थे ?
उत्तर :
सत्य का धर्म, सामाजिक समानता तथा मानव-मात्र की एकता राजा राममोहन राय के महान आदर्श थे। लेकिन दु:ख की बात है कि हम आज भी इन आदर्शों से बहुत दूर हैं। वे जिन आदर्शों के लिए जीवन-भर संघर्ष करते रहे, वे अब तक प्राप्त नहीं हो सके हैं।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय

प्रश्न 4.
राजा राममोहन राय का सम्पूर्ण जीवन किन कार्यों में बीता ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय अपने पूरे जीवन भर समानता, व्यक्ति-स्वतंत्रता तथा मानव-प्रेम के लिए संघर्ष करते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने भारतीय समाज में फैले अंधविश्वासों, कुरीतियों, बुराइयों, जातिवाद तथा अधिनायकवाद के विरुद्ध संघर्ष किया।

WBBSE Class 9 Hindi राजा राममोहन राय Summary

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 4 राजा राममोहन राय 1

शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 21

  • प्रणेता = निर्माणकर्ता ।
  • सूत्रपात = आरंभ ।
  • पुनर्जागरण = फिर से जागना ।
  • पुनस्थ्थापना = फिर से स्थापना ।
  • समन्वय = तालमेल ।
  • तार्किक = तर्क की ।
  • असंगत = बेमेल ।
  • निर्ममता = बिना ममता के।
  • कुरीतियों = बुरी प्रथाएँ।
  • गरिमा = सम्मान
  • लोचन = आँख।
  • मानस = मनुष्य ।
  • खंडन = गलत साबित करना ।
  • मंडन = सही साबित करना।
  • सार = मूल तत्व ।
  • अपूर्ण = जो पूरा नहीं है ।
  • मौन = चुपचाप।
  • आराधना = उपासना, पूजन ।

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पृष्ठ सं० – 22

  • गूढ़ = गहरा ।
  • प्रकृति = स्वभाव ।
  • गंवा = बिता ।
  • प्रतिबंध = रोक ।
  • सदियाँ = सैकड़ों वर्ष ।
  • पराधीनता = गुलामी।
  • निष्ठा = विश्वास ।

पृष्ठ सं० – 23

  • हामी = समर्थक ।
  • संगत = उचित ।
  • कार्यान्वित = कार्य पूरा करना ।
  • यातनाएँ = कष्ट ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

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WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 Question Answer – स्वामी दयानंद सरस्वती

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न – 1 : भारत के उत्थान के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने क्या सुझाव दिए ?
प्रश्न – 2 : स्वामी दयानंद द्वारा समाज-सुधार के लिए दिए गए उपायों पर विचार करें ।
प्रश्न – 3 : सामाजिक तथा व्यक्ति के उत्थान के लिए स्वामी दघानंद सरस्वती ने भारतीयों से किन बातों को अपनाने को कहा ?
प्रश्न – 4 : समाज-सुधारक के तौर पर स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करें।
प्रश्न – 5 : स्वामी दयानंद सरस्वती के धर्म संबंधी विचारों को पठित पाठ के आधार पर लिखें।
उत्तर :
आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इनका अविर्भाव ऐसे समय में हुआ जब भारत की अनेक परंपराएँ क्कृत हो रही थीं । लोग अंध विश्वासों से घिरे थे। ऐसे समय में स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों के आधार पर लोगों को धर्म का स्वरूप समझाया।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

स्वामी दयानंद के अनुसार ईश्वर सर्वव्यापक है, निराकार है, सर्वोपरि है, उसकी सत्ता को अनुभव किया जा सकता है तथा तर्क के आधार पर जाँचा जा सकता है । उन्होंने कहा कि ईश्वर एक है, हम सब उसकी संतान हैं तो फिर भेदभाव क्यों, जाति-प्रथा क्यों और नारियों पर अनेक पाबंदियाँ क्यों ? मनुष्य होने के नाते, मानवता के नाते प्रत्येक को आध्यात्मिक अराधना का अधिकार है।
दयानंद सरस्वती ने आत्मिक उत्नति तथा सामाजिक सुधार के लिए निम्नोक्त सुझाव दिए –

(क) यदि तुम परमात्मा में विश्वास करते हो तो तुम्हें सभी व्यक्तियों और नारियों की समानता में विश्वास करना पड़ेगा।
(ख) विश्व में किसी पर ऐसी पाबंदी नहीं लगायी जा सकती कि वह वेद न पढ़ सके ।
(ग) इस देश के किसी भी व्यक्ति को आध्यात्मिक क्रिया-कलापों से रोका नहीं जाना-चाहिए।
(घ) प्रत्येक व्यक्ति को सत्यसिद्धि के लिए उसे सर्वोपरि अवसर प्रदान करने का प्रयत्ल करना चाहिए
(ङ) हम अपने राष्ट्र को उसी स्थिति में सबल बना सकते हैं जब मानव द्वारा बनाए गए भेद-भावों कों समाप्त कर दें ।
(च) यदि हम अपने अतीत से सबक नहीं लेंगे तो हमें बार-बार अतीत में जीना पड़ेगा ।

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उन्होने सन् 1875 में आर्य समाज की स्थापना की तथा आर्य समाज के लिए दस नियमों को बनाया जो निम्नांकित हैं –

  • सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उन सबका आदि मूल परमेश्वर है ।
  • ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अनत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है । उसी की उपासना करने योग्य है ।
  • वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक हैं । वेदों का पढ़ना-पढ़ाना, सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है ।
  • सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने में सर्वदा उद्यत (तैयार) रहना चाहिए ।
  • सब काम धर्म के अनुसार सत्य और असत्य का विचार करके करना चाहिए।
  • संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उश्नति करना।
  • सबसे प्रीतिपूर्वक (प्रेमपूर्वक) धर्मानुसार (धर्म के अनुसार) व्यवहार करना चाहिए ।
  • अविद्या (अज्ञान) का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए ।
  • प्रत्येक को अपनी ही उत्राति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए । किन्तु सबकी उव्नति में अपनी उन्नति समझानी चाहिए ।
  • सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वहितकारी नियम का पालन करने में परतंत्र रहना चाहिए और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतंत्र रहें ।

WBBSE Class 9 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 3 स्वामी दयानंद सरस्वती

आज भी आर्य समाज स्वामी दयानंद सरस्वती के बताए मार्ग पर चलकर देश-विदेश में आत्मिक-सामाजिक उश्नति के कार्य कर रहा है।

अति लघूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वामी दयानंद सरस्वती में किसके प्रति घनिष्ठ निष्ठा थी ?
उत्तर :
सत्य के प्रति।

प्रश्न 2.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने किसके उद्धार के लिए कार्य किया ?
उत्तर :
धर्म, राजनीति, समाज तथा संस्कृति के उद्धार के लिए।

प्रश्न 3.
इस संसार में किसे सर्वोपरि स्थान दिया गया है ?
उत्तर :
ईश्वर की सर्वव्यापकता को ।

प्रश्न 4.
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार ईश्वर को किस विधि से प्राप्त किया जा सकता है ?
उत्तर :
ध्यान तथा धारणा की विधि से ।

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प्रश्न 5.
वेद हमें क्या बताते हैं ?
उत्तर :
सभी देवों का देव परमात्मा मूलतः एक है और उसके अनेक रूप नहीं हो सकते।

प्रश्न 6.
विश्व का सर्वोपरि देव कौन है ?
उंत्तर :
परमात्मा।

प्रश्न 7.
स्वामी दयानन्द सरस्वती ने क्या ज्ञात करने को कहा ?
उत्तर :
अंतिम सत्य क्या है ?

प्रश्न 8.
पाणिनी के अनुसार तप क्या है ?
उत्तर :
चिंतन-मनन तथा आलोचना है।

प्रश्न 9.
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार परमात्मा में विश्वास करनेवाले को किंसकी समानता में विश्वास करना पड़ेगा ?
उत्तर :
सभी व्यक्तियों तथा नारियों की समानता में ।

प्रश्न 10.
स्वामी जी ने किस नियम की उद्योषणा की ?
उत्तर :
नारी और पुरुष की समानता के नियम की।

प्रश्न 11.
स्वामी जी के हृदय में किसके विरुद्ध आग थी ?
उत्तर :
सामाजिक अन्याय के विरुद्ध।

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प्रश्न 12.
स्वामी दयानंद सरस्वती के दो मूल सिद्धान्त क्या थे ?
उत्तर :
एक-एक ईश्वर की उपासना तथा दो – जाति, रंग और संप्रदाय के पेद के बिना मानव की सेवा।

प्रश्न 13.
स्वामी दयानन्द ने किस समाज की स्थापना की ?
उत्तर :
आर्य समाज।

प्रश्न 14.
स्वामी जी का कौन-सा सबक हमेशा मस्तिष्क में रहना चाहिए ?
उत्तर :
यदि हम अतीत से सबक नहीं लेंगे तो बार-बार हमें अतीत में जीना पड़ेगा ।

प्रश्न 15.
स्वतंत्रता के बाद हमारे सामाजिक कानून में क्या परिवर्तन आया है ?
उत्तर :
पुरुष और नारी को समानता प्रदान की गई है।

प्रश्न 16.
धर्म का मार्गदर्शक क्या था ?
उत्तर :
तर्क का नियम ।

प्रश्न 17.
ज्ञानियों के लिए परमात्मा का वास कहाँ है ?
उत्तर :
अपनी ही आत्मा में ।

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प्रश्न 18.
समाज में मूर्तिपूजा को स्थान क्यों मिला ?
उत्तर :
हमारी सस्कृति ने ईश्वर तक पहुँचने के लिए सभी माग्गों को स्थान दिया इसालिए मूर्तिपूजा को भी स्थान मिला।

प्रश्न 19.
संसार की प्रगति और व्यवस्था करनेवाला कौन है ?
उत्तर :
एक महान रहस्य अर्थांत् ईश्वर।

प्रश्न 20.
परम सत्य को कैसे समझा जा सकता है ?
उत्तर : हदयय, ज्ञान तथा इच्छा से ।

प्रश्न 21.
स्वामी जी के अनुसार संसार में किसी पर भी कौन-सी पाबंदी नहीं लगाई जा सकती ?
उत्तर : वेद को पढ़ने से रोकना या गायत्री मंत्र का जाप करने से रोकना।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती का स्थान प्रमुख क्यों है ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद सरस्वती का अर्विभाव ऐसे समय में हुआ था जब सम्पूर्ण भारत में आध्यात्मिक प्रांतियों का जाल फैला हुआ था तथा लोग अंधविश्वासों से घिरे थे। स्वामी जी ने उस समय धर्म, राजनीति, समाज तथा संस्कृति का उद्दार करने के लिए पूरे भारत में घूम-घूमकर कार्य किया। यही कारण है कि आधुनिक भारत के निर्माताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती का स्थान प्रमुख है ।

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प्रश्न 2.
मूर्त्रि-पूजा के प्रचलन के बारे में स्वामी दयानंद सरस्वती ने क्या बताया है ?
उत्तर :
भारतीय संस्कृति में ईश्वर तक पहुँचने के लिए लोग जलाशयों, नदियों, पेड़, पर्वतों, ग्रहों आदि की पूजा किया करते थे । इसी क्रम में कुछ लोग मिट्टी और पत्थर की प्रतिमाओं की भी पूजा करते थे क्योंकि हमने ईश्वर तक पहुँचने के लिए सभी मार्गो को अपनाया। इसी कारण से मूर्त्ति-पूजा का भी प्रचलन हो गया।

प्रश्न 3.
वेदों में परमात्मा के बारे में क्या कहा गया है ?
उत्तर :
वेदों में परमात्मा के बारे में कहा गया है कि परमात्मा एक है और उसके अनेक रूप नहीं हो सकते। परमात्मा ही सर्वोपरि देव है – अजन्मा, अंनत, अनादि, निराकार, अजर, अमर और सृष्टिकर्ता है।

प्रश्न 4.
स्वामी दयानंद सरस्वती का विश्वास किसमें था ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद सरस्वती का विश्वास एक मानव, एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर और एक ही पूजा-पद्धति में अटूट विश्वास था।

प्रश्न 5.
पाणिनी के अनुसार तप क्या है ?
उत्तर :
पाणिनी के अनुसार तप चिंतन-मनन की प्रक्रिया है । इसके अंतर्गत विश्व की रचना, इसका कर्ता, आदि पर विचार किया जाता है तथा उसे तर्क और ज्ञान के नियमों से जाँच किया जाता है।

प्रश्न 6.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने परमात्मा में विश्वास करने के बारे में क्या कहा ?
उत्तर :
ख्वामी दयानद ने परमात्मा में विश्वास करने के बारे में यह कहा कि यदि हम परमात्मा में विश्वास करते हैं तो हमें नर-नारी की समानता में विश्वास करना पड़ेगा। हम किसी पर यह पाबंदी नहों लगा सकते कि कोई जाति, धर्म अथवा लिंग के आधार पर वेदों को नहीं पढ़ सकता या फिर गायत्री मंत्र का जाप नहीं कर सकता।

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प्रश्न 7.
असहिष्णुता भारत के लिए विनाशकारी रही है – कैसे ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद ने कहा कि हम भारतवासी – जाति, धर्म, भाषा आदि के आधार पर आपस में लड़ते रहे हैं। आपसी लड़ाई के कारण ही हम गुलामी में फंसे। यदि हमने सहिष्युता से काम लिया होता तो भारत का विनाश नहीं होता।

प्रश्न 8.
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार अगर हम अपने अतीत से सबक नहीं लेंगे तो क्या होगा ?
उत्तर :
स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार हमें अतीत से शिक्षा लेनी चाहिए तथा आपसी मतभेदों, लड़ाई-झगड़ों को मिटाकर एक ही परमात्मा में विश्वास करना चाहिए। अगर हम अपने अतीत से सबक नहीं लेंगें तो हमें बार-बार अतीत में जाना पड़ेगा।

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शब्दार्थ

पृष्ठ सं० – 17

  • भांतियाँ = भ्रम ।
  • विकृत = बुरा ।
  • सशक्त = मजबूत ।
  • सर्वव्यापकता = जो हरेक जगह मौजूद है ।
  • घुमंतू = घुम्मकड़
  • प्रकृति = स्वभाव ।

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पृष्ठ सं० – 18

  • ज्ञात = पता, मालूम ।
  • औचित्य = अर्थ ।
  • स्फुलिंग = चिनगारी ।
  • पाबंदियाँ = रोक ।

पृष्ठ सं० – 19

  • यत्न = कोशिश ।
  • अपितु = बल्क ।

पृष्ठ सं० – 20

  • भ्रमण = घूमना ।
  • सबल = मजबूत ।
  • सर्वोपरि = सबसे ऊपर ।
  • सहिष्णुता = सहन नहीं करना ।
  • अतीत= बीता हुआ समय।