WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

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WBBSE Class 9 Geography Chapter 6 Question Answer – प्राकृतिक आपदायें और संकट

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
प्राकृतिक संकट और प्राकृतिक आपदा में कौन अति तीव्रता से घटती है?
उत्तर :
प्राकृतिक आपदा।

प्रश्न 2.
किसी एक अन्तर्जात आपदा का नाम लिखिए।
उत्तर :
भूकम्प

प्रश्न 3.
बाढ़ किस प्रकार की आपदा है?
उत्तर :
प्राकृतिक।

प्रश्न 4.
दुर्घटनाओं का प्रभाव यदि स्थायी हो जाय तो उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
प्राकृतिक संकट।

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प्रश्न 5.
सूखा का सबसे प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर :
कम वर्षा।

प्रश्न 6.
सर्वाधिक खतरनाक प्राकृतिक आपदा किसे माना जाता है?
उत्तर :
समुद्री तूफान या चक्रवात को

प्रश्न 7.
भारत का पूर्वी तट किस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित रहता है।
उत्तर :
तूफान से

प्रश्न 8.
महासागर की तली में होने वाले भूकम्प को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर :
सुनामी

प्रश्न 9.
भारत के तटीय क्षेत्रों में सुनामी का प्रकोप कब हुआ था?
उत्तर :
26 दिसम्बर 2004 ई० में।

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प्रश्न 10.
26 दिसम्बर 2004 को भारत का पूर्वी तट किस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुआ था।
उत्तर :
सुनामी अर्थात् भूकम्य के कारण उत्पन्न समुद्री तरंगे।

प्रश्न 11.
सागरीय तूफानों की उत्पत्ति के लिए सागरों के सतह का तापमान कितना होना चाहिए?
उत्तर :
26° C

प्रश्न 12.
कुछ विनाशकारी उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के नाम लिखिए।
उत्तर :
हरिकेन, टाईफून, टारनेडो आदि।

प्रश्न 13.
बाढ़ से बचने का कोई एक उपाय बताओ।
उत्तर :
प्रबन्धक प्रयास तटस्थ होना चाहिए ।

प्रश्न 14.
भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम कब लागू हुआ?
उत्तर :
2005 ई० में ।

प्रश्न 15.
बाढ़ का क्या कारण है?
उत्तर :
अंतिवृष्टि।

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प्रश्न 16.
उड़ीसा में बाढ़ किस नदी और अन्य किस कारण से आती है?
उत्तर :
उड़ीसा में महानदी एवं बंगाल की खाड़ी के चक्रवात के कारण बाढ़ आती है।

प्रश्न 17.
बाढ़ से होने वाला एक लाभ बताइये।
उत्तर :
बाढ़ के कारण कई स्थानों पर उपजाऊ मिट्टी की परत पड़ जाती है।

प्रश्न 18.
भारत में सबसे अधिक सूखा किस प्रदेश में पड़ता है?
उत्तर :
राजस्थान में अरावली क्षेत्र एवं गुजरात में कच्छ का क्षेत्र

प्रश्न 19.
भारत में कौन सा चक्रवात विपदा का कारण होता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबंद्यीय चक्रवात

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल में चक्रवात किस महीने में आता है?
उत्तर :
मई एवं जून महीने में।

प्रश्न 21.
कोलकाता में सबसे भयंकर भूकम्प कब आया था?
उत्तर :
1737 ई० में।

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प्रश्न 22.
भारत में सबसे अधिक भू-स्खलन की घटनाएँ कहाँ घटित होती है?
उत्तर :
उत्तरी एवं उत्तरी-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्रों में।

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल का कौन-सा क्षेत्र भूकम्प की दृष्टि से संवेदनशील है?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के मैदानी एवं पठारी क्षेत्र।

प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल को किन प्राकृतिक आपदाओं को प्रायः प्रतिवर्ष सहन करना पड़ता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, बाढ़ एवं सूखा।

प्रश्न 25.
भारत के किस तट पर सुनामी का प्रभाव अधिक होता है।
उत्तर :
पूर्वी. तट पर।

प्रश्न 26.
सुनामी से बचाव का कोई एक उपाय बताओ।
उत्तर :
समुद्र तटीय क्षेत्र में घने आबादी को जल्द खाली कराना।

प्रश्न 27.
बाढ़ से होने वाली एक हानि बताओ?
उत्तर :
कृषि का नष्ट होना।

प्रश्न 28.
अन्त: केन्द्र (Hypocentre) धरातल से कितनी गहराई पर स्थित होता है?
उत्तर :
16 कि० मी० की गहराई पर।

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प्रश्न 29.
भू-पटल के जिस स्थान पर भूकम्प की तरंगें सबसे पहले पहुँचती है उसे क्या कहते हैं?
उत्तर :
वाद्य केन्द्र (Epi-centre)

प्रश्न 30.
भूकम्प की लहरों की तीब्रता, दिशा एवं अवधि का अंकन वाले यन्त्र को क्या कहते है?
उत्तर :
भूकम्प लेखक यन्त्र (Seismongraph)

प्रश्न 31.
किसी खास भूकम्प के तरंगों की तीव्रता मापने वाले यंत्र या पैमाना को क्या कहते हैं?
उत्तर :
रिक्टर स्केल कहते (Richter scale) हैं।

प्रश्न 32.
रिक्टर स्केल का आविष्कार किसने किया था?
उत्तर :
C. F. Richter

प्रश्न 33.
C. F. Richter कौन थे?
उत्तर :
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे।

प्रश्न 34.
भूकम्प के लहरों की समान तीव्रता के स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखा को क्या कहते हैं?
उत्तर :
सम भूकम्प-तीवता रेखा (Isoseismal line)

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प्रश्न 35.
जापान में भूकम्प किस प्रकार से आते हैं?
उत्तर :
ज्वालामुखी के उद्गार से।

प्रश्न 36.
विवर्तनिक भूकम्प (Tectonic Earthquake) भारत में कहाँ-कहाँ आए थे?
उत्तर :
महाराष्ट्र के लातूर तथा कोयना में।

प्रश्न 37.
हिमालय प्रदेश में किस प्रकार के भूकम्प आते हैं?
उत्तर :
भू-सन्तुलन भूकम्प (Isostatic Earthquake)

प्रश्न 38.
26 जनवरी 2001 को भातर में कहाँ भूकम्प आए थे?
उत्तर :
गुर्जरात के कच्छ क्षेत्र में।

प्रश्न 39.
तटवर्ती क्षेत्रों में किस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव अधिक विनाशक होता है?
उत्तर :
समुद्री तूफान या चक्रवात का।

प्रश्न 40.
समुद्री तूफान किन प्रदेशों में सामान्य रूप से आता रहता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में।

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प्रश्न 41.
समुद्री तूफान या चक्रवात को प्रभावित करने वाले कारक कौन हैं?
उत्तर :
उच्च तापमान एवं आर्द्रता।

प्रश्न 42.
समुद्री तूफान या चक्रवात की उत्पत्ति के लिए कितने तापमान की आवश्यकता होती है?
उत्तर :
26° C से अधिक तापमान आवश्यक होती है।

प्रश्न 43.
समुद्री तूफान या चक्रवात का व्यास कितना होता है?
उत्तर :
इसका व्यास 100 कि० मी० से 150 कि० मी॰ तक हो सकता है।

प्रश्न 44.
अटलांटिक महासागर में समुद्री तूफान को क्या कहते हैं?
उत्तर :
हरिकेन (Hurricane)

प्रश्न 45.
कैरीबियन और उत्तरी पूर्वी प्रशान्त महासागर में समुद्री चक्रवात को क्या कहते हैं?
उत्तर :
टाईफून (Typhoons)

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
संसार के प्रमुख चक्रवातों के नाम लिखो ?
उत्तर :
हरिकेन, टाईफून, टारनेडो, विली-विली आदि प्रमुख विश्व की चक्रवाते हैं।

प्रश्न 2.
क्या आग एक प्राकृतिक विपदा है ?
उत्तर :
आग के लिए प्राकृतिक तथा मानवीय दोनों ही कारक उत्तरदायी होते हैं। यह विपदा मानवीय भूलों तथा गलतियों के कारण घटित होती है। लेकिन वनो में आग लगना प्रकृतिक आपदा भी हो सकती है, जैसे बिजली गिरने से सूखे पतों में आग लग जाती है।

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प्रश्न 3.
प्राकृतिक आपदा का क्या अर्थ है?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रकोप या कारणों से उत्पन्न आपदाओं को प्राकृतिक आपदा कहा जाता है।

प्रश्न 4.
बहिर्जात आपदाओं को वायुमण्डलीय आपदा क्यों कहते हैं?
उत्तर :
बहिर्जात आपदाओं को वायुमण्डलीय आपदाएँ भी कहते है क्योंकि इनका सम्बन्ध वायुमण्डलीय घटनाओं से होता है।

प्रश्न 5.
प्राकृतिक आपदा किसे कहते हैं?
उत्तर :
प्राकृतिक रूप से घटित वे सभी घटनाएँ जो प्रलयकारी रूप धारण कर मानव सहित सम्पूर्ण जैव जगत के लिए विनाशकारी स्थिति उत्पन्न कर देती है, प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती है।

प्रश्न 6.
हिमघाव (Avalanche) क्या है?
उत्तर :
फ्रांसीसी भाषा के शब्द ‘ऐवलांश’ (Avalanche) ढोले हिम, मिट्टी व बर्फ के ढेर के एकाकार और तीव्र गति से पर्वतों से फिसलकर नीचे आ गिरने को कहते हैं।

प्रश्न 7.
आपदा प्रबंधन के सिद्धांत का वर्णन करो।
उत्तर :
आपदा प्रबंध का सिद्धान्त:- इसके तहत आपदा निवारक और संरक्षणी उपाय, तथा मनुष्यों पर आपदा के प्रभाव को कम करने के लिये राहत कार्यो की व्यवस्था की जाती है। आपदा प्रबंधन की सम्पूर्ण किया तीन चरणों में चलती है।

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प्रश्न 8.
बाढ़ से बचने के दो उपाय बताओ।
उत्तर :
बाढ़ नियत्रण के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। ये निम्न है :-

  • बाँधों का निर्माण।
  • कृत्रिम सतहों या किनारों का विकास।
  • बड़े-बड़े जलाशयों का निर्माण।

प्रश्न 9.
बाढ़ के दो प्रभाव बताइये?
उत्तर :
(i) धन-जन की अपार क्षति।
(ii) पशुचारे का अभाव।

प्रश्न 10.
मौसम विज्ञान के अनुसार सूखा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
गौसम विज्ञान के अनुसार, लम्बे समय तक अपर्याप्त वर्षा और इसका सामयिक तथा स्थानीय वितरण असंतुलित होने को सूख कहते हैं।

प्रश्न 11.
जंगलों में आग लगने के दो प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर :
(i) तीव्र हावा चलने पर वृक्षों की आपसी घर्षण के कारण
(ii) आकाशी बिजली गिरने तथा ज्वलामुखी क्रिया उत्पत्न होने से।

प्रश्न 12.
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 क्या है?
उत्तर :
इस अधिनियम को वर्ष 2005 में भारत सरकार द्वारा आपदाओं के कुशल प्रबंधन और इससे जुड़े अन्य मामलों के लिये पारित किया गया था।

प्रश्न 13.
सुनामी का क्या अर्थ है?
उत्तर :
सुनामी (स्यू-ना- मी) जापानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘ तट पर आती लहरें। ‘भू-कम्प के कारण समुद्र में उठने वाले लहर को ही सुनामी कहते है।

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प्रश्न 14.
ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाली कुछ हानिकारक गैसों के नाम लिखिए।
उत्तर :
ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाली कुछ हानिकारक गैसों के नाम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) सल्फर-डाई-ऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड्स (NOX) इत्यादि हैं।.

प्रश्न 15.
बाढ़ क्या है?
उत्तर :
नदियाँ अपनी क्षमता के अनुसार ही जल का वहन कर सकती हैं। अतिवृष्टि अथवा बर्फ के पिघलने से नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो जाती है, जो किनारों को तोड़कर आस-पास के क्षेत्रों में भर जाता है। इस स्थिति को ही बाढ़ कहा जाता है।

प्रश्न 16.
सूखा से बचने के लिए दो दीर्घकालीन उपाय क्या हैं?
उत्तर :
(i) वृक्षारोपण को प्रोत्साहन।
(ii) नदियों को जोड़ने की योजना शुरू की जानी चाहिए।

प्रश्न 17.
ज्वालामुखी क्रिया में क्या होता है?
उत्तर :
ज्वालामुखी विस्फोट से धन-जन की अपार क्षति होती है।

प्रश्न 18.
प्राकृतिक आपदाओं की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
विश्व जलवायु संगठन के अनुसार “प्राकृतिक घटनाओं का प्रलयंकारी परिणाम या ऐसी घटनाओं का सम्मेलन जिससे चोट, जीवन हानियाँ या मानव कार्यकलापों का बड़े पैमाने पर उच्छेदन हो, प्राकृतिक आपदा है।”

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प्रश्न 19.
विपत्ति से क्या समझते हो ?
उत्तर :
आपदा का अर्थ है विपत्ति। अचानक होने वाली ऐसी घटना जिससे व्यापक स्तर पर जैविक एवं भौतिक क्षति होती है, आपदा कहते हैं।

प्रश्न 20.
प्राकृतिक विपत्ति कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर :
मुख्य रूप से प्राकृतिक विपत्तियाँ निम्न हैं :-
(a) मौसमी संकट (Climatic Hazards) :- चक्रवात (Cyclone), बाढ़ (Flood), सूखा (Drought) जंगल की आग (Forest Fire)
(b) स्थलावृतिक संकट (Geomorphic Hazards) :- भूस्खलन (Landstide), हिमधाव (Avalanche), वर्फ की आँधी (Blizzard)
(c) विवर्तनिक संकट : भूकम्प (Earthquake), सुनामी ज्वालामुखी (Volcanism)

प्रश्न 21.
प्रमुख प्राकृतिक विपत्तियों के नाम लिखों।
उत्तर :
प्रमुख प्राकृतिक विपत्तियों के नाम भूकम्प (Earthquake), सुनामी (Tsunami), भू-स्खलन (Landslide), बाढ (Flood), ज्वार (Tidal Surge), सूखा (Drought), भारी वर्षा (Heavy Rainfall) आदि है।

प्रश्न 22.
भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
विश्व में भूकम्प का प्रकोप तीन क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है-प्रशान्त महासागर की अमेरिकी व एशियाई तट, आल्पस से लेकर हिमालय तक फैली मध्य महाद्विपीय पेटी तथा पश्चिमी द्वीप समूह के निकट मध्य अटलाण्टिक पेटी।

प्रश्न 23.
भू-स्खलन क्या एक प्राकृतिक आपदा है?
उत्तर :
भूस्खलन भी एक प्राकृतिक आपदा है जिसमें अपार धन-जन की हानि होती है। भू-स्खलन वह क्रिया है जिसमें चट्टानों तथा मिट्टी आदि गुरूत्वाकर्षण के कारण ढाल से नीचे की ओर सरकती हैं।

प्रश्न 24.
सूखा को प्राकृतिक आपदा क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
सूखा (Drought) एक प्राकृतिक आपदा है। मौसम विभाग के अनुसार जब किसी क्षेत्र में वर्षा सामान्य से 25 \% से 50 \% कम होती है तो सामान्य कहते हैं तथा इससे भी कम वर्षा होने पर भयकर सूखा या अकाल (Famine) कहते हैं।

प्रश्न 25.
भारत का एक सूखा प्रभावित क्षेत्र का नाम लिखो।
उत्तर :
भारत में राजस्थान राज्य अकाल व सूखे से सर्वाधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र है।

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प्रश्न 26.
भारत के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
असम, पश्चिम बंगाल, बिहार व उत्तर प्रदेश राज्यों में गंगा-ब्रह्यपुत्र नदी तन्त्रों मे प्रतिवर्ष बाढ़ आती है।

प्रश्न 27.
आपदा प्रबंधन के उद्देश्य क्या है?
उत्तर :
आपदा प्रबंधन का उद्देश्य :-
(i) प्रबंधन तथा बहुमुखी आपदा और संकटों को समझना
(ii) आपदाओं को जिवारण के लिए क्षमता का विकास करना।

प्रश्न 28.
उत्तराखण्ड का जून 2013 का बादल-फटना क्या प्राकृतिक आपदा है?
उत्तर :
उत्तराखण्ड़ का जून 2013 का बादल-फटना प्राकृतिक आपदा है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में इसी प्रकार की आपदा देखने को मिलता है । इससे अनेकों जन-धन की नुकसान होती है।

प्रश्न 29.
रासायनिक आपदा क्या है ?
उत्तर :
रासायनिक आपदा तथा इससे उत्पन्न संकट की कोई परिभाषा नहीं दी जा सकती है। सामान्यतः यह दुर्घटना मानवीय चूक के कारण हो सकता है। यह देखा गया है कि इस प्रकार की आपदा कभी-कभी रिसाव छलकने, विकिरण, विस्फोट, आग लगने, या गलत विधि से परिवहन के कारण हो सकता है।

प्रश्न 30.
क्या उत्तराखण्ड का 16 जून का भू-स्खलन और अतिवृष्टि प्राकृतिक आपदा थी?
उत्तर :
उत्तराखण्ड का 16 जून का भू-स्खलन और अतिवृष्टि प्राकृतिक आपदा है क्योंकि इससे अनेकों जन-धन की नकसान होती है तथा यातायात मार्ग में अनेक बाधाएँ भी उत्पन्न हुई थी ।

प्रश्न 31.
भारत के प्रचण्ड सूखाप्रस्त क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
भारत में राजस्थान का मरूस्थलीय एवं अर्द्ध मरूस्थलीय क्षेत्र गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश तथा उत्तर-प्रदेश का दक्षिणी भाग प्रचण्ड सूखाप्रस्त क्षेत्र है।

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प्रश्न 32.
भू-स्खलन क्या है?
उत्तर :
गुरूत्वाकर्षण के कारण पहाड़ों पर चट्टानों एवं मिट्टी के नीचे की ओर खिसकने की प्राकृतिक प्रक्रिया को भूस्खलन (Landslide) कहा जाता है।

प्रश्न 33.
भूकम्प से होने वाले दो प्रभावों का उल्लेख करो।
उत्तर :
हानि :

  • जन-धन की क्षति।
  • नदियों में बढ़ आना।
  • परिवहन में बाधा।

लाभ :

  • उपजाऊ भूमि का निर्माण।
  • खनिज़ पदार्थो की प्राप्ति की सुविधा।
  • नये जलसोतों का निर्माण।

प्रश्न 34.
भूकम्प आने पर दो आकस्मिक प्रबंधन क्या करना चाहिए?
उत्तर :
(i) जन-सामान्य को तत्काल खुले मैदान में आ जाना चाहिए।
(ii) भवनों को भूकम्परोधी बनाना अधिक हितकारी होता है।

प्रश्न 35.
ब्लिजार्ड का घर किसे कहते है ?
उत्तर :
अण्टार्कटिका में स्थित एडिलीलैण्ड को ब्लिजार्ड का घर कहते हैं।

प्रश्न 36.
भारत में बाढ़ संवेदनशील क्षेत्र कितना है ?
उत्तर :
भारत में कुल 40 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ संवदेनशील क्षेत्र हैं।

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प्रश्न 37.
सूखा क्या है ?
उत्तर :
कृषि, पशुपालन, उद्योग अथवा मानवीय जनसंख्या की आवश्यकताओं से कम जल उपलब्ध होने को सूखा कहते हैं।

प्रश्न 38.
भारत में भू-स्खलन की क्रिया प्राय: कहाँ घटित होती है ?
उत्तर :
भारत में भू-स्खलन की क्रिया प्रायः उत्तरी एवं उत्तरी-पूर्वीं पर्वतीय क्षेत्र में होती रहती है।

प्रश्न 39.
पश्चिम बंगाल में प्रतिवर्ष कौन सी प्राकृतिक आपदाएँ आते रहते हैं ?
उत्तर :
बाढ़ एवं चक्रवाती तूफाने पश्चिम बगाल में प्राय: प्रतिवर्ष ही आते रहते हैं।

प्रश्न 40.
अन्तर्जात आपदा किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी की आन्तरिक प्रक्रियाओं या शक्तियों के कारण उत्पन्न आपदाओं को अन्तर्जात आपदा कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदा तथा संकट में क्या अन्तर है?
उत्तर :

प्राकृतिक आपदा प्राकृतिक संकट
i. इसकी गति तीव्र होती है। i. इसकी गति धीमी होती है।
ii. इसका प्रभाव तात्कालिक होता है। ii. इसका प्रभाव स्थायी होता है।
iii. प्रकृति के वे क्रियाकलाप जिनसे धन-जन की व्यापक हानि होती है, सामाजिक तंत्र एवं जीवन दूषित होता है और जिन पर नियंत्रण नहीं हो रहा है। जैसे :- युद्ध, वनों का कटाव, वायुमंडल का प्रदूषण, पारिस्थितकी तंत्र के साथ छेड़छाड़। iii. पर्यावरण के वे अवयव जिनसे धन-जन की व्यापक हानि की संभावना हो वे प्राकृतिक संकट कहलाते हैं, जैसे :- महासागरीय धाराएँ, अस्थिर संरचना, रेगिस्तान या बफीले प्रदेश की विषम जलवायु।

प्रश्न 2.
हिम इंझावत (Blizard) क्या है?
उत्तर :
ब्लिजार्ड या हिम झंझावत (Blizard) :- ब्लिजार्ड या हिम झंझावत धुवीय हवाएं होती है, जो कि बर्फ के कणों से युक्त होती है। हिम कणों से युक्त होने के कारण दृश्यता नष्ट हो जाती है। इनकी गति 80 से 96 कि०मी० प्रति घंटा होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पश्चिम-पूर्व धरातलीय अवरोध की ये हवाएँ समस्त मैदानी भाग को प्रभावित करते हुए दक्षिणी भागों तक पहुँच जाती हैं। साइबेरिया, मंगोलिया और मंचूरिया में इन झंझावतों को बुरा कहते हैं। इनकी तुलना मध्य और दक्षिण संयुक्त राज्य अमेरिका के नादर्न से की जा सकती है। साइबेरिया में इसे बुरान कहते हैं।

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प्रश्न 3.
सूखे के दुष्परिणाम क्या हो सकते हैं?
उत्तर :
सूखे के दुष्परिणाम :-

  1. फसलों का उत्पादन कम होने से देश में खाद्यान्न की समस्या आती है और मंहगाई बढ़ जाती है।
  2. मेवेशियों के लिए चारा और पीने के जल का अभाव हो जाता है।
  3. सूखा से भू-जलस्तर नीचे चला जाता है। प्राकृतिक जलाशय सूख जाते हैं, जल का अकाल हो जाता है।
  4. सूखा प्रभावित क्षेत्र में मानव प्रवास, पशुपालन और पशुओं की मृत्यु सामान्य घटना है।
  5. जल के अभाव में लोग दूषित जल का प्रयोग करते हैं, अत: पशु और मनुष्य रीग्रस्त हो जाते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
भारत में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र :-

  1. पंजाब-हरियाणा में सतलुज, व्यास और यमुना नदी तथा हिमालय क्षेत्र में बर्फ पिघलने से बाढ़ आती है।
  2. उत्तर-प्रदेश, बिहार में यमुना, गंगा, घाघरा, गंडक नदियों में बाढ़ आती है।
  3. असम और समीपवर्ती क्षेत्र में बह्मपुत्र नदी प्रतिवर्ष बाढ़ की विनाश लीला उपस्थित करती है।
  4. पश्चिम बंगाल में उत्तरी बंगाल की नदियों एवं हुगली में बाढ़ आती है।
  5. उड़ीसा में महानदी एवं बंगाल की खाड़ी में चकवात के कारण बाढ़ आती है।
  6. आघ के पूर्वोतर और तमिलनाडु के उत्तरी तट पर गोदावरी, कृष्णा, तुगभद्रा एवं समुद्री तूफान से बाढ़ आती हैं।
  7. गुजरात में साबरमती, नर्मदा और ताप्ती नदियों के कारण बाढ़ आती है तथा मुहाने का क्षेत्र समुद्री तूफान से प्रभावित होता है।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी के उदगार से होने वाले विनाश को कैसे कम किया जा सकता है ?
उत्तर :
ज्वालामुखी के फटने से मानव जीवन की क्षति को कम करने के लिए निम्न बातो पर ध्यान देने की विशेष आवश्यकता है :-
a) भूमि का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए।
b) ज्वालामुखी उद्गार के समय तथा स्थान की बेहतर भविष्यवाणी एवं संभावित विनाश के बारे में समय से पहले सूचना देनी चाहिए।
c) प्रभावी परित्यक्तता योजना (Effective evacuation plans) लागू करना चाहिए, जिससे विशेष परिस्थितियों में आबादी को अन्यत्र हटाया जा सके ताकि जानमाल की कम क्षति हो सकें।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 6.
भू-स्खलन के हानिकारक प्रभावों को कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर :
भू-सखलन एक प्राकृतिक घटना है, जिसमे मानव क्रिया-कलाप एक उत्रेरक (Catalyst) का कार्य करता है। अत: निम्नलिखित उपायों द्वारा इसका नियत्रण तथा इनके दर को कम किया जा सकता है।

  1. सतही एवं भूमिगत जल की उचित निकासी को व्यवस्था करना।
  2. तार एवं पत्थरों द्वारा अपरदन और स्खलन कम करना।
  3. पर्वतीय क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए उचित आवासीय निर्माण नियमों का पालन करना।
  4. ढलानों (Slopes) पर भवन निर्माण न करना।
  5. पहाड़ी ढलानों पर कक्रोट के खंड बनाकर स्खलन रोकना।
  6. ढलानों एवं घाटी में वृक्षरोपण करना।

प्रश्न 7.
आपदा और संकट की परिभाषा दीजिए?
उत्तर :
आपदा : आपदा का अर्थ है विपत्ति। अचानक होने वाली ऐसी घटना जिससे व्यापक स्तर पर जैविक एवं भौतिक क्षति होती है, आपदा कहते हैं।
आपदा (Disaster) को परिभाषित करते हुए फ्रेडरिक क्रिमगोल्ड ने कहा है कि ” आपदा एक ऐसा संकट है जो समाज की क्षमता (सहनशीलता) के परे हो जाता है, जिससे वह उसे उस समय संभाल नहीं पाता या उसकां सामना नहीं कर पाता है।”

संकट : प्राकृतिक आपदाओं को संकट कहा जाता है। फ्रैंच भाषा में Des का तात्पर्य बुरा तथा (Aster) का तात्पर्य सितारे से है। प्राचीन काल में आने वाले संकटों से तात्पर्य प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ माना जाता है। अतः प्राकृतिक आपदाओं को प्रकृति द्वारा दण्ड माना जाता था। विश्व बैंक ने संकट के बारे में कहा है- संकट अल्पावधि की एक साधारण घटना है, जो देश की अर्थ व्यवस्था को गंभीर रूप से बिगाड़ देती है।

प्रश्न 8.
बाढ़ से होने वाली क्षति का वर्णन करो।
उत्तर :
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा का संबंध अतिवृष्टि से है। जब अत्यधिक वर्षा के कारण जल अपने प्रवाह मार्ग जैसे नदी, नालों आदि में नहीं बहकर तटबन्धों को तोड़ता हुआ विस्तृत भू-भाग को जलमग्न कर देता है, तो उसे बाढ़ कहते है। नदियों के मार्ग परिवर्तन के कारण भी यह स्थिति उत्पन्न होती है। नदी घाटियों में सघन जनसंख्या व कृषि क्षेत्र होने के कारण बाढ़ो से अत्यधिक हानि होती है। विश्व का 4 % भू-भाग बाढ़ग्रस्त क्षेत्र है जहाँ 19.5 % जनसंख्या निवास करती है या बाढ़ से प्रभावित है।

बाढ़ से पर्यावरण को क्षति पहुँचती है। मिट्टी का अपरदन अधिक होता हैं। जल प्लावित क्षेत्रों में वनस्पति व प्राणियों को हान होती है। उदाहरणार्थ वर्ष 1998 में बाढ़ के कारण काजीरंगा नेशनल पार्क का अधिकांश भाग जलमग्न हो गया तथा अनेक गेंडो व दुलभभ जीव-जन्तुओं की मृत्यु हो गई। प्रतिवर्ष बाढ़ों से अधिवासों, सड़कों रेलमार्गो, पुलों व फसलों को हानि होती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रो में महामारियाँ तेजी से फैलती है।

प्रश्न 9.
सूखे से उबरने के लिए आपदा प्रबंधन का वर्णन करो।
उत्तर :
सूखा का सामना करने के लिए निम्नांकित उपाय काम में लायें जा सकते है :-

  1. सूखा क्षेत्रो में शुष्क कृषि प्रणाली द्वारा माटे अनाज पैदा किये जाते हैं। इन प्रणाली के अन्तर्गत गहरी जुताई की जाती है।
  2. ऐसे बोजों का प्रबधन किया जाय जो सूखा सहन कर सके।
  3. वर्ष के जल का व्यवस्थित रूप से अधंकतम उपयोग छोटे बाँघ, हौज, तालाब, एनीकट, कुएँ तथा मिट्टी के अवरोंध बाँध बनाकर किया जाना चाहिए।
  4. सिंचाई के लिए नहरों को पक्का बनाना जिससे भूमि में कम से कम जल रिस सके।
  5. जिन क्षेत्रों में नमकीन मिट्टी पायी जाती है, उनमें ड्रिप सिंचाई की प्रणाली अपनाकर पुन रूद्धार की गई मिट्टी में फसलें. पैदा की जाय।

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प्रश्न 10.
बाढ़ से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन को लिखो?
उत्तर :
बढ़ से बचाव के लिए निम्न उपायों को किया जाना चाहिए :-

  1. बाढ़ नियत्रण केन्द्रों की स्थापना कर मौसम की भविष्यवाणी करनी चाहिए।
  2. बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से लोगों को निकालकर शीध सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना चाहिए।
  3. राहत साग्रगी की व्यवस्था अतिशीघ करनी चाहिए।
  4. नदियों के जलग्मण क्षेत्रों में वनों की कटाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।
  5. नदियों के प्रवाह मार्ग में बाढ़ को नियंत्रित करने हेतु भण्डारण जलाशयों अर्थात बाँधो का निर्माण करना चाहिए।

प्रश्न 11.
सुनामी से बचाव के लिए आपदा प्रबन्धन को लिखो।
उत्तर :
सुनामी लहरों के प्रतिरोधस्वरूप निम्नांकित कार्य किया जाना चाहिए :-

  1. तटीय भागों पर बने मकानों से दूर रहें।
  2. तटीय भागों पर बने मकानों की ऊँचाई बढ़ाइए।
  3. मकान भूकम्परोधी बनाइए जिसके लिए किसी इन्जीनियर की सहायता लेनी चाहिए।
  4. स्थानीय अधिकारियों द्वारा किये गये निर्देशों का पालन करना चाहिए।

प्रश्न 12.
मानव निर्मित विपत्तियाँ क्या है?
उत्तर :
ऐसी आपदाएं जिसमें भनुष्य की ही भमिका होती है, जैसे सम्र्रदायिक दंगे या जातिगत दंगे आदि। लिंग भेद, जातिभेद, धर्म, प्रादेशिकवाद एवं आर्थिक वर्ग में भिन्नता के कारण कभी-कभी ऐसी दशाएं उत्पन्न हो जाती है कि लोग अपना संतुलन खो बैठते हैं तथा उन्मादित हो जाते हैं। यह कभी-कभो इतना उग्र रूप धारण कर लंता है कि इसके चपेट में बड़ी संख्या में लोग आ जाते हैं और बहुतों को अपनी जान भी गवानी पड़ जाती है।

प्रश्न 13.
अन्तर्जात प्रक्रम किस प्रकार अन्तर्जात आपदाओं की सृष्टि करते हैं?
उत्तर :
भूकम्प और ज्वालामुखी दो ऐसे आपदा हैं जिसकी उत्पत्ति अन्तर्जात प्रक्रम के कारण होती है। पृथ्वी के भौतर कई प्रकार से अन्तर्जात प्रक्रम कार्य करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भू-गर्म से गैसों का निकलना, भू-सन्तुलन का बिगड़ना, भंशीकरण तथा ज्वालामुखी का उद्गार की सृष्टि होते हैं।

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प्रश्न 14.
वायुमण्डलीय आपदाओं की उत्पत्ति के क्या कारण हैं?
उत्तर :
बाढ़, सूखा, चक्रवात आदि वायुमण्डलीय आपदाएँ हैं। यह सभी आपदा मौसम की अनिश्चितना तथा अनियमितता के कारण आती है। इसमें बाढ और सूखा वर्षा पर निर्भर करता है, लेकिन चक्रवात वायुमण्डलीय दबाव क्रे द्वारा उत्यन्न होती है।

प्रश्न 15.
जैविक विपत्तियाँ या महामारी क्या है?
उत्तर :
सूक्ष्म जीवों द्वारा जो विपत्तियाँ उत्पन्न होती हैं उसे जैविक विपत्तियाँकहते हैं। इन जैविक सक्ष्म जीवों से महामारी फैलती है। महामारी भी एक प्रकार की आयदा है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है। प्लेग, फ्लू, हैजा, चेचक आदि प्रसिद्ध महामारियाँ हैं। आजकल भाव इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यदि इसकी रोकथाम नही की गई तो यह एक भयंकर आपदा का रूप धारण कर लेगी।

प्रश्न 16.
रासायनिक आपदा क्या है?
उत्तर :
रासायनिक आपदा (Chemical Hazards) :- विभिन्न कार्यो के लिए संसार के सभी देशो को रसायन की आवश्यकता पड़ती है, अतः उनके उत्पादन के लिए रासायनिक उद्योग लगाए जाते है, विश्व में रासायरनक रेकर्ड के अनुंसार करीब 4-5 मिलियन प्रकार के रसायन रजिस्टर है तथा प्रत्येक वर्ष हजारों नए रसगन का उत्पादन किया जाता है। इन रसायनों के उत्पादन, परिवहन, भडारण, उपयोग तथा उनके अवशिष्ट पदार्थो को निस्यादित करने के कांम मे अनेक प्रकार के जोखिम की संभावना रहती है। जिस तरह रसायनो की संख्या तथा उपयोग बढ़ता जा रहा है, इससे पैदा होने वाले जोखिम भी दिन-प्रति दिन बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 17.
बांध दूटने से जो बाढ़ आती है वह अधिक भयावह क्यों होती है?
उत्तर :
बाँध का टूटना भी एक प्रमुख आपदा है। बांधों के पीछे जलाशय व जल के दबाव के कारण पुल और बांध टूट जाते हैं। जलीय दबाव के कारण कभी-कभी नदियों के तटबध भी दूट जाते हैं जिससे पानी बड़े क्षेत्र में फैल जाता है तथा बाढ़ से भी भीषण तबाही मच जाती है। चूंकि ऐसी घटनाएँ आकस्मिक होती है, अतः लोगों को संभलने का अवसर नहीं मिलता और भारी तबाही होती है। बांधां के टूटने से होने वाली क्षति की अपेक्षा कई गुणा अधिक होती है।

प्रश्न 18.
सुनामी और भूकम्प में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :

सुनामी भूकम्प
(i) सुनामी पृथ्वी के जलीय भाग में उत्पन्न कम्पन है। (i) भूक्यम पृथ्वी के धरातल पर उत्पन्न कम्पन है।
(ii) सुनामी लहरों की उत्पत्ति भूकम्प के कारण होती है। (ii) भृकम्प की उत्पति किसी भ्रंश (Fauit) के सहार

प्रश्न 19.
चक्रवात क्यों आते हैं?
उत्तर :
विषुवत रेखा के दोनों ओर लगभग 30° अक्षांश का क्षेत्र उष्ण कटिबंध कहा जाता है। चक्रवात उण्ण कटिबंधीय प्रदेशो में सामान्य रूप से आता है। ये उच्च तापमान एवं आर्द्रता के कारण उत्पन्न होते हैं। इसके लिए समुद्री सतह का तापमान 26° से अधिक होना आवश्यक है।

प्रश्न 20.
पश्चिम बंगाल में चक्रवात से कौन-सा क्षेत्र किस प्रकार प्रभावित होता है?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी में सुन्दरवन के डेल्टा से उतरी हवाएं और पूर्वी घाट की नदियों सुवर्ण रेखा, महानदी आदि के साथ पश्चिमी हवाएं परस्पर लम्बवत् मिलती है। इससे गर्म आर्द्र वायु तेजी से ऊपर उठती है और कम दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। आर्द्रवायु का प्रवाह लगभग 15 कि० मी० ऊपर तक हो सकता है। हवा का बहाव भंवर की तरह चक्कर करते हुए ऊपर की ओर होता है।

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प्रश्न 21.
सुनामी का क्या प्रभाव है?
उत्तर :
सुनामी भूकम्प की भांति ही एक विघ्वसकारी आपदा है। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मानव, मवेशी एवं पशु-पक्षी काल के ग्रास बन जाते हैं। गहरे समुद्र में तो सुनामी का उतना प्रभाव नहीं दिखता पर तटीय भाग में यह विनाशलीला उत्पन्न कर देता है। इसका कारण यह है कि छिछले समुद्रों में लहरों की गति धीमी पड़ने लगती है तथा पीछे से तेज गति से आने वाली लहरें उस पर चढ़ जाती हैं तथा दीवार के रूप में आगे बढ़ती है तथा उसके दबाव से मकान, पुल, सड़क, रेललाइन आदि ध्वस्त हो जाती है। नौकाए तथा जहाज डूब जाती है।

प्रश्न 22.
हिमवाह या हिमघाव किन क्षेत्रों में प्रभावी होता है?
उत्तर :
हिमवाह या हिमघाव की घटना प्राय: पर्वतीय क्षेत्रों के उन भागों में घटित होती है जो जन-जीवन वाले क्षेत्रो से काफी दूर हैं। यहाँ की छोटी-छोटी बस्तियाँ तथा कस्बे जब इनके चपेट में आ जाते हैं तो उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुँचने में काफी वक्त लग जाता है। आवागमन के साधन के अभाव में लोगों को वहाँ पहुँचने में कठिनाइयों होती है जिसके कारण यह एक प्रमुख आपदा का रूप धारण कर लेती है।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
सूखा किसे कहते है? भारत में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर :
नामिया (1989) के अनुसार : सूखा वह स्थिति है जो वर्षा के अभाव में उत्पन्न होती है तथा कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। इससे जल आपूर्ति बाधित होती है तथा जल से जुड़े कार्यकलाप बुरी तरह प्रभावित होते हैं। भारत के सूखाप्रस्त क्षेत्रो को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है :-

उच्च या प्रचण्ड सूखाग्रस्त क्षेत्र :- भारत में राजस्थान का मरूस्थलीय एवं अर्द्धमरूस्थलीय क्षेत्र, गुजरात, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश का दक्षिणी भाग प्रचण्ड सूखाप्रस्त क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र का विस्तार लगभग 6 लाख वर्ग कि० मी० में है। प्रचण्ड सूखे का यह क्षेत्र त्रिभुजाकार रूप में पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम के कच्छ तक फैला हुआ है। इस प्रदेश में वर्षा का वार्षिक औसत 35 से 70 से० मी० तक रहता है। हरियाणा और पंजाब में सूखे से विशेष हानि नहीं होती क्योकि इन प्रदेशों में नहर एवं नलकूप पर्याप्त मात्रा में हैं, किन्तु अन्य भागों में सूखा से पर्याप्त क्षति होती है। इस प्रदेश को दो या तीन वर्ष में एक बार अवश्य ही प्रचण्ड सूखे का सामना करना पड़ता है।

मध्य सूखाग्रस्त क्षेत्र :- इस क्षेत्र में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश तथा तमिलनाडु राज्य का पश्चिमी भाग सम्मिलित है। यह क्षेत्र लगभग 300 कि० मी० की चौड़ाई में पश्चिमी घाट के पूर्व में चतुर्भूजाकार रूप में फैला है। यहाँ वार्षिक वर्षा का औसत 75 से॰मी॰से कम रहता है। इस प्रदेश को तीन से 5 वर्ष के मध्य एक बार सूखा-संकट का सामना करना पड़ता है।

न्यूनतम सूखाप्रस्त क्षेत्र :- भारत में न्यून या निम्न सूखाग्रस्त क्षेत्र बिखरे हुए प्रारूप में विस्तृत हैं। इस क्षेत्र में बिहार प्रान्त का पलामू क्षेत्र, पश्चिम बंगाल का पुरूलिया जनपद, उड़ीसा का कालाहाँड़ी क्षेत्र मुख्य रूप से उल्लेखनीय है।

प्रश्न 2.
भूकम्प क्या है? भारत में भूकम्प के खतरे वाले क्षेत्रों को कितने जोन में बाँटा गया है?
उत्तर :
‘भूकम्प’ दो शब्दों से मिलकर बना है : भू (Earth) अर्थात पृथ्वी और और कम्प (Quake) अर्थात कम्पन। अत: ‘भूकम्प’ का साधारण अर्थ है ‘पृथ्वी का हिलना’। किसी ज्ञात या अज्ञात, बाह्य या आन्तरिक कारण से धरातल के अचानक कॉप उठने की क्रिया को ‘भूकम्प’ कहते हैं।

भारत में भूकम्प के खतरे वाले क्षेत्र :-
जोन – 1. पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा उड़ीसा इस जोन के अन्तर्गत आते हैं। यहाँ भूकम्प का खतरा सबसे कम रहता है।
जोन – 2. इस जोन में तमिलनाडु, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल के मैदानी एवं पठारी अंचल तथा हरियाणा को शामिल किया गया है। यहाँ भूकम्प की सम्भावना रहती है।
जोन – 3. इस जोन के अन्तर्गत केरल, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से आते हैं। यहाँ भूकम्प के झटके आते रहते हैं।
जोन – 4. इस जोन में मुम्बई तंथा दिल्ली महानगर, जम्मू-कश्मीर, हिमांचल प्रदेश, पश्चिमी गुजरात तथा बिहार-नेपाल के सीमा क्षेत्र. शामिल हैं। यहाँ लगातार भूकम्प का खतरा बना रहता है तथा रूक-रूक कर भूकम्प आते रहते है।
जोन – 5. भूकम्प की दृष्टि से यह सबसे खतरनाक जोन है। इसमें गुजरात का कच्छ, उत्तरांचल तथा पूर्वोत्तर के अधिकतम राज्य आते है।

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प्रश्न 3.
वनाग्नि क्या है? वनाग्नि को रोकने के क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर :
वनाग्नि (Forest fire) :- वनाग्नि एक बड़ी आपदा (Hazard है। यह तीव्र गति से विस्तृत क्षेत्रों में फैल जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 1955 ई० से 1964 ई० की अवधि के दौरान लगभग 10 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को वनाग्नि से क्षति पहुँची थी। हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में वनों में लगने वाली आग एक बड़ी समस्या बन गयी है।
वनाग्नि को रोकने के उपाय :- वनाग्नि से वनों का विनाश होता ही है, इसके साथ-साथ वर्षा, पोषक तत्वों के चक्र, मिट्टी की उर्वरता, मिट्टी के द्यूमस तत्व आदि पर भी इसका दुष्रभाव पड़ता है तथा जीव-जन्तुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं। अत: हमें वनों को अग्नि से रक्षा करनी चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं :-

  1. वनों में कैम्प फायर का आयोजन नहीं करना चाहिए। यदि वहाँ कैम्प फायर आयोजित किए जाते हैं तो इसके लिए स्थान चुनने के बाद भूमि को साफ करके उसके चारों तरफ पत्थरों का घेरा बना देना चाहिए।
  2. वनो में वाच टावर (Watch Tower) बनाए जाने चाहिए, जिससे इनकी निगरानी की जा सके।
  3. वन क्षेत्रों में बीच-बीच में खुले क्षेत्र खाली छोड़ देने चाहिए। ये खुले क्षेत्र अग्नि रोधक का कार्य करते हैं तथा विस्तृत क्षेत्र में आग के फैलाव को रोकते हैं।
  4. वनों में या इनके निकट रहने वाले लोगों को अग्नि रक्षा के नियमों से परिचित तथा प्रशिक्षित कराया जाए।

प्रश्न 4.
बाढ़ क्या है? नदियों में बाढ़ को रोकने के क्या उपाय किए जा सकते हैं ?
उत्तर :
नदियाँ अपनी क्षमता के अनुसार ही जल का वहन कर सकती है। अतिवृष्टि अथवा बर्फ के पिघलने से नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो जाती है जो किनारों को तोड़कर आस-पास के क्षेत्रों में भर जाता है। इस स्थिति को ही बाढ़ कहा जाता है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। प्रत्येक उपाय के कुछ लाभ एवं कुछ हानियों को इसमें सम्मिलित किया गया है। ये निम्न है :-

  1. बाँधों का निर्माण।
  2. कृत्रिम सतहों या किनारों का विकास।
  3. बड़े-बड़े जलाशयों का निर्माण।
  4. नदियों की खुदाई एवं साफ-सफाई।
  5. छोटे नालों एवं नहरों को सुचारू करना एवं उनका विकास करना।
  6. नदियों को जोड़ना।
  7. वनों के काटने पर प्रतिबंध ।

प्रश्न 5.
पश्चिम बंगाल में घटित होने वाली प्राकृतिक आपदाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में घटित होने वाली प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ निम्नलिखित है, जो समय-समय पर घटटित होकर यहाँ के जन-जीवन को प्रभावित करती रहती है :-
उष्ण कटिबंधीय चक्रवात :- पश्चिम बंगाल, बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित राज्य है। बंगाल की खाड़ी इस राज्य के दक्षिण में स्थित है। इस खाड़ी में ग्रोष्म ऋतु तथा शरद ऋतु में उष्ण कटिबधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती रहती है । तीव्र दाब प्रवणता के कारण इन चक्रवातों में वायु तीव्र गति से आगे बढ़ती है तथा तट पर पहुँचकर विनाशलीला प्रारम्भ कर देती है। पश्चिम बंगाल के दक्षिणी तटवर्ती क्षेत्रों में इन चकवातों के कारण अनेको लोग मरे जाते हैं, बिजली के खम्भे तथा वृक्ष उखड़ जाते हैं, तथा भवनों को भारी क्षति पहुँचती है। समुद्र में ऊँची लहरें उठने लगती हैं जिससे मछुवारों एवं नाविकों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।

सूखा :- पश्चिम बंगाल में सूखे का प्रभाव कम देखने को मिलता है। वर्षा यहाँ द्रक्षिणीं-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होती है। जब कभी ये मानसूनी हवाएँ कमजोर पड़ जाती हैं, तो वर्षा सामान्य से कम होती है, जिससे राज्य के पश्चिमी भाग में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सूखे का सर्वाधिक प्रभाव पुरूलिया जिले में पड़ता है।

भूकम्प :- भूपटल पर होने वाले कम्पन को भूकम्प कहते हैं। पश्चिम बंगाल के उत्तर में पर्वतीय श्रेणियाँ हैं। इस अंचल में भूरर्भिक प्रक्रियाओं के घटित होते रहने के कारण अक्सर भूकस्प के झटके महसूस होते रहते हैं तथा कभी-कभी तीव्र झटकों के कारण विनाशकारी परिणाम देखने को मिलते हैं। पश्चिम बंगाल के मैदानी एवं पठारी अंचल भूकम्प की दृष्टि से अधिक संवेदनशील नहीं है। इन अचलों में कभी-कभी हल्के झटके महसूस किये जाते हैं।

भू-स्खलन :- पर्वतीय अंचलों में गुरूत्वाकर्षण के कारण चट्टानों एवं मिट्टी का बहुत बड़ा ढेर नीचे आकर तबाही मचा देता है। पश्चिम बंगाल के सूदूर उत्तरी भाग की भू-प्रकृति पर्वतीय है। यहाँ मानसून काल में प्रचूर वर्षा होती है जिससे ढीली चट्टानें गीली होकर ढाल के सहारे स्खलित होती है। जब स्खलन बड़े पैमाने पर होता है तो धन-जन की हानि होती है तथा मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं।

बाढ़ :- पश्चिम बंगाल में प्रतिवर्ष किसी न किसी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उंत्पन्न होकर जनजीवन को तबाह करती रहती है। वर्षा ऋतु में पर्वतीय अंचल में अति वृष्टि के कारण उत्तरी बंगाल में प्रवाहित होने वाली नदियों में जलातिरेक हो जाता है, जिससे इन नदियों की घाटियों में अक्सर भयकर एवं विनाशकारी बाढ़ आया करती है। नदियों पर बाँध बनाकर इनके बाढ़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। परन्तु आज भी पश्चिम बंगाल भारत के सर्वाधिक बाढ़ वाले राज्यों में से एक है। बाढ़ के कारण प्रतिवर्ष यहाँ अनेकों लोग मारे जाते हैं तथा हजारों एकड़ फसल वर्बाद हो जाती है।

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प्रश्न 6.
आपदाओं का न्यूनीकरण एवं प्रबन्धन कैसे किया जा सकता है?
उत्तर :
आपदाओं के न्यूनीकरण एवं प्रबन्षन के अन्तर्गत निम्नलिखित तीन स्थितियों पर योजना बनाने की आवश्यकता है :

  • आपदा के पूर्व प्रबन्धन योजना
  • आपदा के मध्य प्रबन्धन योजना
  • आपदा के पश्चात् प्रबन्धन योजना।

आपदा के पूर्व प्रबन्धन योजना :- आपदा के पूर्व प्रबन्धन का अर्थ किसी आपदा या विपत्ति से होने वाले जोखिम को न्यूनतम करने का पूर्व प्रयास है। इसके अंतर्गत विपत्ति का सामना करने की घूर्ण तैयारी, जनजागरूकता और आपदा न्यूनीकरण के उपायों हेतु योजना बनाई जाती है। पूर्ण तैयारी में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान एवं जोखिम का मूल्यांकन और प्रभाव का पुर्वानुमान लगया जाता है, फिर इसके आधार पर अन्य तैयारी की रूप रेखा बनाई जाती है। इसके पूर्व सूचना प्रणाली को विकसित करना, संसाधन प्रबन्धन पर ध्यान देते रहना और सत्यता के लिए अभ्यास (रिहर्सल) करते रहना आवश्यक है।

इस प्रकार की पूर्ण तैयारियों के लिए सामुदायिक सहयोग और पहल की आवश्यकता होती है, जिसे मानव समुदाय में जागरूकता के द्वारा पूरा किया जा सकता है। जागरूकता के अन्तर्गत पयार्वरण की सुरक्षा और जोखिम प्रबम्बन रण कौशलों का व्यापक प्रचार एवं वित्तीय योगदान तथा बीमा अर्थात् जोखिम का स्थानान्तरण आदि पक्षों पर ध्यान दिया जाता है। इस प्रकार आपदा पूर्व प्रबन्धन योजना में समुदाय एवं सम्बन्धित संस्थाएँ परस्पर समन्वय स्थापित कर जनसमुदाय के सदस्यों कों आपदा का सामना करने के योग्य बनाने का प्रयास करती है।

आपदा के मध्य प्रबन्धन योजना :- आपदा के मध्य प्रबन्धन से यह अभिप्राय है कि, आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर बचाव कार्यो को तत्काल शुरू किया जाय और प्रभावित मानव समुदाय की विभिन्न प्रकार से सहायता की जाय। इस अवधि में मुख्य ध्यान खोज और बचाव तथा राहत सामग्री के उंचित रूप से प्रबन्ध एवं वितरण पर दिया जाना आवश्यक है। खोज व बचाव के लिए प्रशिक्षित सुरक्षादल जो आपदा पूर्व प्रबन्धन के समय किए गए थे, इस समय महत्वपूर्ण मूमिका निभाते हैं। इसके साथ-साथ चिकित्सक समूहों के प्रबन्धन, अस्थायी आवास व्यवस्था, सूचना केन्द्र और खाद्यसाम्मगी का वितरण सुनिश्चत करने की पूर्व निर्धारित रणनीतियों को भी इसी समय क्रियान्वित किया जाता है।

आपदा के पश्चात् प्रबन्धन योजना :- आपदा के पश्चात् पुनर्वास, और विकास कार्यो से संबंधित कार्यो पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। इस समय नीति निर्धारको की अहम भूमिका होती है। उन्हे वर्तमान में हुई आपदा से क्षतिपूर्ति को पूरा करने के लिए उचित वितरण प्रणाली के साथ-साथ मानक तकनीकों के अनुसार ही विकास कार्यो को पूरा करना चाहिए। इसी अवसर पर आपदा पूर्व प्रबन्धक के अन्तर्गत स्थापित वित्तीय आपात कोष तथा जोखिम स्थानान्तरण संस्था और (बीमा कम्पनी) के कार्यों का पूरा उपयोग करते हुए, राहत एवं पुनर्वास कार्यो में सहयोग प्रदान करता है।

इस अवसर पर रोजगार, आवास तथा मूलभूत सुविधाओं को स्थापित करके प्रभावित क्षेत्र की विकास प्राथमिकाओं को पूरा करना अत्यन्त आवेश्यक है, अन्यथा प्रभावित जनसमुदाय क्षेत्र से पलायन करने लगता है तथा क्षेत्र के स्थानीय संसाधनो का अनुपयोग प्रारंभ हो जाता है-। इस अवधि में आपदा प्रबन्ध विकास को नई सतत विकास संकल्पना के साथ समन्वित करके पुर्नवास और विकास कार्यो को पूरा करने की योजना सर्वाधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होती है।

अत: आपदा निवारण हेतु आपदा न्यूनीकरण प्रबन्धन को न केवल जीवन के अंग के रूप में बल्कि आवश्यक जीवन रक्षा कौशल के रूप में अपनाकर अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहना और जनसमान्य तैयार करना ही सर्वोत्तम उपाय है।

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प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल में आपदा प्रबंधन नीति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल में आपदा प्रबंधन नीतियाँ (Disaster Management Strategies in West Bengal) :- पश्चिम बंगाल को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं जैसे :-बाढ़, सूखा, चक्रवात, भू-स्खलन, तथा भूकम्प आदि के कष्टों को सहन करना पड़ता है । बाढ़ और चक्रवाती तूफान तो पश्चिम बंगाल में लगभग प्रति वर्ष ही आते रहते हैं तथा इनसे यहाँ के विभिन्न भागों में बड़े पैमाने पर धन-जन की हानि होती है, जिससे राज्य का आर्थिक विकास प्रभावित होता है। प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से बचने के लिए या इनसे होने वाले धन-जन की हानि को न्यूनतम करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ‘पश्चिम बंग राज्य आपदा प्रबन्धन नीति’ (West Bengal State Disaster Management Policy) तैयार की गयी है। इस नीति के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं :-
i) आपदा से निपटने की तैयारी तथा आपदा बचाव सभी विकास नीतियों का अभिन्न अंग होना चाहिए। राज्य के आपदा प्रभावित जिलों में लम्बी अवधि की विकास योजनाओं को तैयार करते समय आपदा प्रबन्व को ध्यान में रखना होगा।
ii) आपदाओं से निपटने के लिए दृढ़ आपदा प्रबन्ध नीति होनी चाहिए जो सभी प्रकार की आपदाओं के लिए योजना एवं तैयारी प्रस्तुत कर सके।
iii) पश्चिम बंगाल सरकार को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपदा प्रबन्ध के सभी स्तरों जैसे :- जोखिम, राहत, साम्रगी वितरण, पुर्नवास एवं विकास कार्य आदि के लिए वर्तमान प्रशासनिक तन्त्र का पूरा उपयोग किया जा सकता है। सभी सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों तथा समितियों को उपलब्ध संसाधनों के अंतर्गत आपदा प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
iv) सफल आपदा प्रबन्धन के लिए गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), व्यक्तिगत क्षेत्रों एवं सभी सरकारी विभागों जैसे अग्नि निरोषक दस्तों, आपातकालीन सेवाओं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आदि की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
v) प्रबन्धक प्रयास तटस्थ होना चाहिए अर्थात आपदा से प्रभावित सभी लोग बचाव एवं राहत सेवाओं से समान रूप से लाभन्वित हों।

प्रश्न 8.
भूस्खलन के लिए आपदा प्रबन्धन का वर्णन करो।
उत्तर :
आपदा प्रबन्धन (Disater Management) :- पर्वतीय क्षेत्रों में वनों की कटाई, बड़े निर्माण कार्य, खनन, कृषि इत्यादि मानवीय गतिविधियों को सीमित करके भू-स्खलन की घटनाओं को कम किया जा सकता हैं। पर्वतों के नग्न ढालों पर वनस्पति लगाने से मृदा एवं चट्टानों का स्थिरीकरण होगा।

प्राक-आपदा (Pre-Disater) :- भू-स्खलन की घटनाएँ सामान्यत: वर्षा काल में अधिक होती है। अत: भारी वर्षा के समय आपदा की आशंका वाले क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी के साथ ही बचाव कार्यो के लिए त्वरित कार्यबल तैयार रखें। भूस्खलन के कारण मार्ग अवरूद्ध हो जाना स्वभाविक है। अत: मार्गो को तुरन्त खोलने के लिए विभिन्न यन्त्रों की पर्याप्त व्यवस्था रखनी चाहिए।

आपदा पश्चात् (Post-Disater) :- नदियों में पहले चट्टाने गिरनेसे अल्पकालिक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अतः स्थल मार्गो के समान ही नदी मार्ग के अवरोध को भी शीघ हटायें। आबादी क्षेत्र में भू-स्खलन हो जाने पर दबे हुए लोगों को शीघ्र निकालकर उनकी चिकित्सा, भोजन व शरण आदि की तुरन्त उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। भू-स्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में पर्वतीय ढालों पर अधिवासों के प्रचार को रोकने के साथ हीं नवीन वस्तियां स्थापित न हो इसके लिए कारगर उपाय किये जाने चाहिए।

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प्रश्न 9.
भूकम्प से उबरने के लिए आपदा प्रबन्धन का वर्णन करो।
उत्तर :
भूकम्प से उबरने के लिए आपदा प्रबंघ (Distater Management of earthquacke) : – भूकम्प जैसी आपदा को रोकना मानव के वश में नहीं है। किन्तु दीर्घकालीन उपायों से इससे होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है। भूकम्प प्रबन्धन हेतु निम्नांकित उपाय किये जाने चाहिए :-
(a) आपदा के पहले (Pre-Disaster) :

  1. भूकम्प की आशंका वाले क्षेत्रों में भूकम्प मापी यन्त्र (Richter Scale) की सहायता से किसी भी असामान्य भू-पृष्ठीय हलचल पर निगरानी रखना तथा प्रारम्भिक झटटकों को अंकित करते ही सूचना को त्वरित प्रसारण करना चाहिए।
  2. जनसामान्य को तत्काल खुले मैदान में आ जाना चाहिए।
  3. भवनों को थूकम्परोधी बनाना अधिक हितकारी होता है।

(b) आपदा के बाद (Post-Disaster) :

  1. भूकम्प आ जाने पर घटना से प्रभावित अधिक घने बसे क्षेत्र में राहत कार्य पर अधिक जोर देना चाहिए।
  2. घायलों के लिए उपचार व राहत सामग्री शीघ पहुँचाई जानी चाहिए।
  3. भूकम्प के तुरन्त बाद वहँँ फँसे लोगों को निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए।

प्रश्न 10.
आपदा प्रबन्धन में छात्रों की भूमिका का वर्णन करो?
उत्तर :
आपदा प्रबन्थन में छात्रों की मूलभूत भूमिका जागरूकता (AWAENESS) होती है कि आपदा के समय और बाद में क्या करना चाहिए। छात्रों को ऐसी शिक्षा प्रदान करनी चाहिए जिससे आपदा के समय मृतको की संख्या कम की जा सके और प्रभावित लोगों को प्राथमिक-इलाज (First-Aid) करने में छात्र सक्षम हो। यदि छात्र प्रशिक्षित होंगे तो वे आपदा के समय स्वयं की रक्षा करेंगे और प्रभावितों की भी सहायता कर सकेंगे। छात्र निम्न प्रकार से मदद कर सकते हैं :-
(i) छात्र प्रभावित व्यक्तियों के पुर्नवास में मदद कर सकते हैं।
(ii) छात्र आपदा समय में स्वय सेवी के रूप में बुलाये जा सकते हैं।
(iii) छात्र प्रभावित लोगों को मूल राहत पहुँचा सकते हैं।
इस प्रकार छात्र आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे लोगों में आपदा से निपटने का गुण भी सिखा सकते हैं।

प्रश्न 11.
आपदा प्रबंधन पर पश्चिम-बंगाल सरकार के कार्य का वर्णन करो।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की सरकार ने आपदा प्रबंधन पर काफी प्राथमिकता दी है। अतः आग, आकस्मिक सेवा और नागरिक सुरक्षा को एक मंत्रालय के अंतर्गत ला दिया है जिसमें आपदा प्रबंधन को त्वरित किया ज़ा सके। वर्तमान समय में यह आदरणीय मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी और आपदा प्रबंधन मंत्री जावेद अहमद खान के कुशल नेतृत्व में है।

पश्चिम बंगाल आपदा प्रबंधन द्वारा कार्य :- उड़ीसा में फेलिन (Phailin) तुफान के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 75000 Pcs तिरपाल, 40,000 Pakts बिस्कुट, 1000 किवंटल चुड़ा, 26.03 .2014 को सप्लाई किया गया।

हुगली जिला में 30.11 .2012 को 48 व्यक्तियों को सरकारी नौकरी और 91 परिवारों को तीन-तीन लाख की सहायता दी गयी। 30.11 .2012 के सरकारी आपदा प्रबंधन घोषणा के अनुसार 107 बहुक्षेत्रीय तूफान शरण (Multipurpose Cyclone Shelter) बनाये गये हैं।

09.05.2012 के सरकारी घोषणा के अनुसार आपदा पीड़ित 2 लाख 79 हजार परिवारों को पुन: घर निर्माण के लिए 211 करोड़ 12 लाख रूपये की घनराशि विभिन्न जिलों के लिए दी गयी है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 12.
प्राकृतिक आपदा एवं प्राकृतिक संकट का वर्णन सोदाहरण कीजिए?
उत्तर :
प्राकृतिक संकट और आपदाओं की धारणा (Concept of Hazards and Disasters) :प्राकृतिक आपदाओं तथा संकट का एक दूसरे के साथ निकट का संबंध है। अधिकतर ये एक दूसरे के पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किए जाते हैं, फिर भी इन दोनों में मूल अंतर को स्षष्ट करना आवश्यक है। प्राकृतिक, संकट, प्राकृतिक पर्यावरण में हाल के वे तत्व हैं जिनसे धन-जन या दोनों के नुकसान पहुँचाने की संभाव्यता होती है।

प्राकृतिक संकट की तुलना में प्राकृतिक आपदाएँ अपेक्षाकृत तीव्रता से घटती हैं तथा बड़े पैमान पर घन-जन की हानि तथा सामाजिक तंत्र एवं जीवन को छिन्न-भिन्न कर देता है और इनपर लोंगों को बहुत कम या कुछ भी नियंत्रण नहीं होता है। आपदा एक आशंका है तो संकट एक घटना। संकट दुखद घटना, त्रासदी या आपदा का परिणाम है।

दूसरे शब्दों में ऐसी दुर्घटनाएँ जो अचानक घटित हो और जिनसे अल्पकाल में ही किसी क्षेत्र के जन-जीवन और संपत्ति की व्यापक क्षति हो उसे प्राकृतिक आपदा कहते हैं। यदि यदि प्रभाव स्थायी हो जायें तो उसे प्राकृतिक संकट कहते हैं। प्रकृति में होने वाले विभिन्न परिवर्तन प्राकृतिक संकट और आपदा को आमंत्रित करते हैं और इनके सूचक भी हैं।

प्रश्न 13.
भरत के चार भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए? भूकम्प आते ही आप क्या करेंगे?
उत्तर :
भारत के चार भूकम्प प्रभावित क्षेत्र निम्नलिखित है :-

  1. जम्मू और काश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और पश्चिम-बगाल के तराई क्षेत्र एवं सम्पूर्ण उत्तरी पूर्वी भारत भूकम्प का सबसे बड़ा संभावित क्षेत्र है।
  2.  गुजरात का पूर्वोतर भाग, हिमालय की तराई, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, बिहार, महाराष्ट्र का पश्चिमी भाग और उड़ीसा का उत्तरी-पूर्वी कोना अति संवेदनशील क्षेत्र है।
  3. मध्य संवदेनशील क्षेत्र सतपुड़ा विघ्याचल के साथ लगी मध्यं पट्टी, मैदानी भाग का मध्य।
  4. निम्न संवेदनशील क्षेत्र :- संवेदनशील क्षेत्र से सटा भाग।

बचाव के उपाय :- भूकंप अन्य आपदाओं में सबसे भयकर और विनाशकारी होता है तथा यह एकाएक आता है। अत: इसके पूर्वानुमान एवं उसकी पूर्व सूचना संभव नहीं है। भूकम्प से सब कुछ तहस-नहस हो जाता है। बचाव का कार्य भी कठिन हो जाता है। भूकम्प आते ही लोगों को घर से निकल कर खाली स्थान पर आ जाना चाहिए। यदि घर से निकलना संभव न हो तो टेबुल, पलंग आदि के नीचे छिप जाना चाहिए।

प्रश्न 14.
पर्वतीय भागों में आनेवाली दो आपदाओं के नाम बताइये तथा किसी एक का वर्णन किजिए?
उत्तर :
पर्वतीय भागों में दो आपदाएं निम्नलिखित हैं :-
i) भू-स्खलन (Land Slide) ii) हिमघाव (Avalanche)
भू-स्खलन (Land Slide) :- अन्य आपदाओं की तुलना में भू-स्खलन एक छोटी आपदा है, पर इससे भी धन-जन की क्षति होती है। गुरूत्वाकर्षण के प्रभाव से चट्टाने तथा मिट्टी के अचानक ढलान के नीचे की ओर खिसकने की क्रिया को भू-स्खलन कहते हैं।
कारण :- यह भूकम्प तथा वर्षा के कारण चट्टानों के ढीला हो जाने से होता है। मनुष्य द्वारा रेलों, सड़कों, सुरंगों भवनों के निर्माण के लिए चट्टानों को तोड़ने और खाने खोदने से भूस्खलन होता है।
परिणाम :- भूस्खलन का प्रभाव स्थानीय और सीमित लोगों पर होता है। भूस्खलन से मार्ग अवरूद्ध हो जाता है। अत: दूरदूर के यातायात करने वाले लोग इससे प्रभावित होते हैं। इससे बस्तियों को क्षति पहुँचती है, नदियों का मार्ग बदल जाता है।
बचाव :- अधिक स्खलन के क्षेत्रों में सड़क, बाँध-निर्माण आदि के कार्य पर प्रतिबंध होना चाहिए। वनारोपण कार्य से भू-स्खलन की संभावना कम होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदायें और संकट

प्रश्न 15.
ब्लिजर्ड किन स्थानों पर आता है? इसका क्या प्रभाव होता है?
उत्तर :
ये हवाएँ उत्तरी तथा दक्षिणी धुवीय क्षेत्र, कनाडा, साइबेरिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में चलती हैं। अण्टार्कटिका के एडीलीलैण्ड में ये पवनें अधिक सक्रिय होती हैं, अत: इसे ‘ब्लिजाई घर’ कहते हैं।
प्रभाव (Effect) :- इन हवाओं के आगमन से तापमान अचानक हिमांक से नीचे गिर जाता है और सतह पर बर्फ की परत बिछ्छ जाती है और शीत लहरें चलने लगती हैं। इन पवनों से धन-जन की अपार क्षति होती है। सड़क मार्ग पर बर्फ की परत बिछ जाती है, अत: यातायात रूक जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 5 Question Answer – अपक्षय या विखण्डन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
किस प्रकार की जलवायु में रासयनिक अपक्षय अधिक होता है।
उत्तर :
आर्द जलवायु प्रदेश में।

प्रश्न 2.
रैगोलिया क्या है?
उत्तर :
मूल चट्टान के ऊपर बिछी हुई चट्टानी चूर्ण को रैगोलिया कहते है।

प्रश्न 3.
तालुस क्या है?
उत्तर :
भौतिक अपक्षय के कारण दानेदार विच्छेदन द्वारा उत्पत्र चूर्ण को तालुस कहा जाता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 4.
धरालत पर भू-समतल स्थापना का कार्य किन शक्तियों के द्वारा होता है ?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation) एवं अधिवृद्धिकरण (Aggradation)।

प्रश्न 5.
अनाच्छादन के अन्तर्गत कौन-कौन सी क्रियाएँ सम्मिलित हैं?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering) एवं अपरदन (Erosion)।

प्रश्न 6.
अनाच्छादन की किस क्रिया में चट्टान चूर्ण का परिवहन नहीं होता है ?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering)।

प्रश्न 7.
अनावृत्तिकरण की कौन-सी क्रिया स्थैतिक क्रिया है?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering) I

प्रश्न 8.
अपक्षय को प्रभावित करने वाले किसी एक कारक का नाम बताइये।
उत्तर :
सूर्यताप।

प्रश्न 9.
ऊँचे पर्वतीय भागों में अपक्षय का सबसे बड़ा साधन क्या है?
उत्तर :
पाला।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 10.
ऑक्सीकरण की क्रिया में किस गैस का योगदान होता है?
उत्तर :
आक्सीजन।

प्रश्न 11.
विखणिडत शैल राशि शंकु का निर्माण कहाँ होता है ?
उत्तर :
पर्वतीय ढालों एवं गॉर्ज की सीधी ढ़ालों पर।

प्रश्न 12.
भू-स्खलन कहाँ अधिक होती है?
उत्तर :
पर्वतीय प्रदेशों में।

प्रश्न 13.
यांत्रिक अपक्षय किन क्षेत्रों में प्रभावकारी होता है ?
उत्तर :
शुष्क एवं मरुस्थल प्रदेशों में।

प्रश्न 14.
ताप बढ़ने पर आग्नेय शैल पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
आग्नेय शैल फैलते हैं।

प्रश्न 15.
किस प्रकार के चट्टान में जंग लगता है?
उत्तर :
लौहयुक्त। :

प्रश्न 16.
उष्णार्द्र प्रदेशों में किस प्रकार का अपक्षय अधिक प्रभावी होता है।
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 17.
ताप घटने पर आग्नेय शैल पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
आग्नेय शैल संकुचित होते हैं।

प्रश्न 18.
जिस क्रिया में चट्टानों की ऊपरी परतें प्याज के छिलके की तरह चट्टानों से अलग हो जाती है, उसे क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
अपशल्कन या अपपत्रण (Exfoliation)।

प्रश्न 19.
किस प्रकार के विघटन में सूर्यास्त के आधे घंटे के अंदर बन्दुक चलंने जैसी आवाज सुनाई पड़ती है?
उत्तर :
कणिमय विघटन (Granular Disintegration)।

प्रश्न 20.
उष्ण मरुस्थलों में किस प्रकार का अपक्षय देखने को मिलता है ?
उत्तर :
भौतिक या यांत्रिक अपक्षय!

प्रश्न 21.
किन चट्टानों में दानेदार विघटन होता है ?
उत्तर :
जो चट्टान विभिन्न खनिज एवं रंग वाले होते हैं।

प्रश्न 22.
लौहयुक्त चट्टानों में रासायनिक अपक्षय की कौन-सी विधि सक्रिय रहती है ?
उत्तर :
आक्सीकरण (Oxidation) 1

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 23.
चूना पत्थर वाले क्षेत्रों में रासायनिक अपक्षय की कौन-सी विधि प्रभावी रहती है?
उत्तर :
कार्बनीकरण (Carbonation)।

प्रश्न 24.
किस जलवायु प्रदेश में भौतिक अपक्षय प्राय: नगण्य रहती है?
उत्तर :
शीत जलवायु प्रदेशों में।

प्रश्न 25.
शुष्क प्रदेशों में किस प्रकार का अपक्षय होता है?
उत्तर :
यात्रिंक या भौतिक अपक्षय।

प्रश्न 26.
शीतोष्ण प्रदेशों में अपक्षय का सबसे बड़ा साधन क्या है?
उत्तर :
सूर्यताप, पाला।

प्रश्न 27.
जीव-जन्तुओं द्वारा किस प्रकार का अपक्षय होता है?
उत्तर :
जैविक।

प्रश्न 28.
चूने के चट्टानों वाले प्रदेशों में किस प्रकार का अपक्षय होता है।
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय।

प्रश्न 29.
भौतिक विखण्डन के प्रमुख कारक कौन हैं?
उत्तर :
तापक्रम परिवर्तन, तुषार या पाला एवं वर्षा।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 30.
चट्टानों के बड़े-बड़े टुकड़ों में टूटने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
पिंड विन्छेदन (Block Disintegration)।

प्रश्न 31.
दानेदार विघटन (Granular Disintegration) किस भाग में अधिक होता है?
उत्तर :
मरुस्थल भाग से।

प्रश्न 32.
प्याज के छिलके की तरह चट्टानों के विखण्डन की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अपदलन (Exfoliation)।

प्रश्न 33.
उच्च अक्षांशों अथवा उच्च पर्वत-शिखरों पर चट्टानों के विखण्डन के प्रमुख कारक क्या है ?
उत्तर :
तुषार या पाला (Frost)।

प्रश्न 34.
रासायनिक अपक्षय की विभिन्न क्रियाओं के लिए कौन-सी भौतिक परिस्थिति आवश्यक है?
उत्तर :
उच्च तापव्रम एवं पर्याप्त नमी।

प्रश्न 35.
लोहें में जंग लगना रासायनिक विखण्डन की किस विधि द्वारा होती है?
उत्तर :
ऑक्सीकरण (Oxidation)।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 36.
कार्बनीकरण (Carbonation) की क्रिया किस प्रदेश में अधिक प्रभावी होती है ?
उत्तर :
कार्स्ट प्रदेश में।

प्रश्न 37.
रासायनिक विधि द्वारा जल के चट्टानों के खंनिजों में अवशोषित हो जाने को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
जलयोजन (Hydration)।

प्रश्न 38.
फेलस्पार (Felspar) धातु का काओलीन (Kaolion) में बदलना किस विधि द्वारा होता है ?
उत्तर :
जलयोजन (Hydration)।

प्रश्न 39.
कौन-सा खनिज पदार्थ पानी में घुलकर घोल के रूप में बह जाते हैं?
उत्तर :
नमक तथा जिप्सम।

प्रश्न 40.
सीलिका का जल में घुलकर अलग हो जाने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
डिसिलिकेशन (Desilication)।

प्रश्न 41.
जीव-जन्तुओं द्वारा होने वाले विखण्डन को क्या कहते हैं?
उत्तर :
जैविक विखण्डन (Biological Weathering)।

प्रश्न 42.
रासायनिक विखण्डन किस चट्टान में अधिक होता है ?
उत्तर :
आग्नेय चट्टान में।

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प्रश्न 43.
उष्ण एवं शुष्क मरुस्थलों में किसके द्वारा चट्टानों का विखण्डन अधिक होता है ?
उत्तर :
यांत्रिक विखण्डन (Mechanical Weathering)।

प्रश्न 44.
शीत प्रदेश में किस कारक द्वारा यांत्रिक विखण्डन प्रभावित होता है?
उत्तर :
पाला (Forst) द्वारा।

प्रश्न 45.
रासायनिक विखण्डन किस जलवायु प्रदेश में अंधिक होता है।
उत्तर :
उष्ण एवं नम जलवायु प्रदेश में।

प्रश्न 46.
वह बाह्य शक्तियाँ जो उच्च भागों को काट-छांटकर समतल या चौरस बनाती है क्या कहलाते हैं?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation)।

प्रश्न 47.
कटे-छटे पदार्थों के निम्न भागों में निक्षेपण से धरातल का समतल होने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अभिवृद्धिकरण (Aggradation)।

प्रश्न 48.
चट्टानों का विघटन (Disintegration) तथा अपघटन (Decomposition) किस क्रिया द्वारा होता है ?
उत्तर :
अपक्षय क्रिया द्वारा।

प्रश्न 49.
किन प्रदेशों में सूर्यास्त के आधे घंटे के अन्दर बन्दूक के चलने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं ?
उत्तर :
शुष्क मरुस्थलीय प्रदेशों में।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 50.
9 घन सेंटीमीटर जल जब जमकर बर्फ बनता है तो वह कितना स्थान घेरता है?
उत्तर :
10 घन सेंटीमीटर।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
अपक्षय क्या है ?
उत्तर :
अपक्षय (Weathering) : प्राकृतिक कारकों द्वारा अपने ही स्थान पर चट्टानों का भौतिक एवं रासायनिक विधि से जो विघटन और अपघटन होता है, उसे अपक्षय कहते हैं।

प्रश्न 2.
अपरदन क्या है ?
उत्तर :
अपरदन (Erosion) : अपरदन एक गतिक (Dynamic) प्रक्रिया है, जिसमें विघटित तथा विनियोजित चट्टानों का स्थानान्तरण होता है। अपरदन की क्रिया जिन कारको द्वारा सम्पन्न होती है, उसे अपरदन कर्ता कहते हैं। नदी, हिमनदी, पवन, सागरीय तरंगे, भूमिगत जल अदि प्रमुख अपरदन कर्ता हैं।

प्रश्न 3.
धरातल पर समतल स्थापना का कार्य किन रूपों में होता है ?
उत्तर :
बाह्य शक्तियाँ धरातल पर समतल स्थापना का कार्य करती हैं। इनके द्वारा समतल स्थापना का यह कार्य निम्नलिखित दो रूपों में होता है –
(a) निम्नीकरण (Degradation)
(b) अधिवृद्धिकरण (Aggradation)

प्रश्न 4.
वृहत् संचलन (Mass Wasting) क्या है ?
उत्तर :
विखण्डित चट्टान चूर्ण का ढाल के सहारे सामूहिक रूप से नीचे की ओर स्थानान्तरण वृहत् संचलन (Mass Wasting) कहलाता है।

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प्रश्न 5.
पिण्ड विघटन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
पिण्ड विघटन (Block Disintegration) : कभी-कभी पर्वतीय क्षेत्रों में दबाव एवं तापमान सम्बन्धी विभिन्नताओं के फलस्वरूप उत्पत्न दाब के कारण शैलें बड़े-बड़े टुकड़ों में विभक्त हो जाती हैं तो इसे पिण्ड विघटन (Block Disintegration) कहते हैं। इस प्रकार के आकार नाइजीरिया तथा मोजाम्बिक में द्वीपाभगिरि (Inselbergs) की भाँति गुम्बदाकार होते हैं, जो मूल शैल से क्रमश: निकलते हैं।

प्रश्न 6.
जैविक अपक्षय किसे कहते हैं?
उत्तर :
अपक्षय मुख्य रूप से वनस्पति, जीव-जन्तुओं तथा मानव द्वारा भी होता है। इसलिए इसे जैविक अपक्षय कहते हैं।

प्रश्न 7.
अनाच्छादन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अनाच्छादन (Denudation) : जब अपक्षय और अपरदन की क्रियायें एक साथ होती है तो उसे अनाच्छादन कहते हैं। अपक्षय द्वारा चट्टाने असंगठित हो जाती है एवं बाह्य बल उसे उस स्थान से स्थानान्तरित कर देते हैं। इस प्रकार धरातल का आवरण हट जाता है, इसे अनाच्छादन याद अनावृत्तिकरण (Denudation) कहा जाता है।

प्रश्न 8.
रासायनिक अपक्षय क्या है?
उत्तर :
जब चट्टानों में विखण्डन की क्रिया रासायनिक प्रतिक्रियाओं के द्वारा होती है तब उसे रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) कहते हैं।

प्रश्न 9.
भौतिक अपक्षय क्या है ?
उत्तर :
ताप, वर्षा, पाला आदि विभिन्न मौसमी तत्वों द्वारा यांत्रिक रूप से (स्वाभाविक रूप से) भू-पृष्ठ के टूटने-फूटने को यांत्रिक या भौतिक अपक्षय कहा जाता है।

प्रश्न 10.
आक्सीकरण (Oxidation) क्या है ?
उत्तर :
लौहयुक्त खनिज पदार्थो के साथ आक्सीजन के संयोग होने की रासायनिक क्रिया आक्सीकरण कहलाती है। जब आक्सीजन गैस से युक्त वर्षा का जल लौह-युक्त चट्टानों पर पहुँचता है तो वह चट्टानों के लोहा को आक्साइड में बदल देता है जिससे लोहे में जंग लग जाता है और चट्टाने जल कर नष्ट हो ज़ाती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 11.
कार्बनीकरण (Carbonation) क्या है?
उत्तर :
चट्टानों में स्थित विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ वायुमण्डल के कार्बन-डाई-आक्साइड (CO2) से संयोग कर चट्टानों को तोड़ते हैं एवं नये खनिज का निर्माण करते हैं। इस क्रिया को कार्बनीकरण (Carbonation) कहते हैं। जैसे वर्षा का जल वायुमण्डल के कार्बन-डाई-आक्सइड से संयोग कर कार्बनिक अम्ल (Carbonic acid) H2 CO3 बनाता है। चूनायुक्त प्रदेशों में यह अम्ल चूना पत्थर को घुला देता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन 1

प्रश्न 12.
भौतिक अपक्षय के कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
तापमान, वर्षा, तुषार या पाला, आर्द्रता, ओस, कुहरा आदि भौतिक या यांत्रिक अपक्षय के प्रमुख कारक हैं।

प्रश्न 13.
अपरदन के कौन-कौन से कारक हैं ?
उत्तर :
बहता हुआ जल, नदी, पवन, हिमनद, भूमिगत जल तथा समुत्री लहरें आदि अपरदन के मुख्य कारक हैं।

प्रश्न 14.
रासायनिक अपक्षय के कारक कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
कार्बनीकरण, आवसीजन, जलयोजन, घोल, डी-सिलिकेशन आदि विरोध विधि द्वारा रासायनिक अपक्षय होता है।

प्रश्न 15.
जलयोजन क्रिया का वर्णन करो।
उत्तर :
जलयोजन (Hydration): जल चट्टान के खनिज पदार्थों में रासायनिक क्रिया करके उनके आयतन को बढ़ा देता है, जिससे खनिज पदार्थ विच्छेदित हो जाते हैं। इस क्रिया को जलयोजन (Hydration) कहते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 16.
चट्टानों में दानेदार विघटन का क्या कारण है ?
उत्तर :
मरूस्थलों में जहाँ चट्टाने विभिन्न खनिजों एवं रंगों वाली होती हैं वहाँ एक ही चट्टान के विभिन्न भागों में फैलाव व संकुचन विभिन्न दरों से होता है, जिससे चट्टान महीन कणों में टूट जाती है। इसे दानेदार विघटन (Granular Disintegration) कहते हैं।

प्रश्न 17.
पेड़-पौधे किस प्रकार चट्टानों के विखण्डन के लिए उत्तरदायी हैं?
उत्तर :
पेड़-पौधे की जड़ें चट्टानों के सेंधों एवं दरारों में प्रवेश कर जाती है। वृक्षों के बढ़ने के साथ उनकी जड़ें भी मोटी हो जाती हैं और वे चट्टानों की दरारों पर दबाव डालकर उन्हें और चोड़ी कर देती है। इस प्रकार जड़ें चट्टानों को निर्बल बना देती है।

प्रश्न 18.
मिट्टी संरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
विभित्र उपायों से मिट्टी की समस्याओं को दूर करके उसे लम्बे समय तक उपजाऊ एवं कृषि के योग्य बनाये रखने को मिट्टी कां संरक्षण (Soil conservation) कहते हैं।

प्रश्न 19.
अपक्षय के कौन-कौन से प्रकार हैं?
उत्तर :
अपक्षय के प्रकार (Types of Weathering) : अपक्षय तीन प्रकार के होते हैं –

  • भौतिक या यांत्रिक अपक्षय (Physical or Mechanical Weathering)
  • रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering)
  • जैविक अपक्षय (Biological Weathering)

प्रश्न 20.
अपदलन या अपपत्रण या पल्लवीकरण या अपश्लकन की क्रिया किस प्रकार होती है?
उत्तर :
मरुस्थलों एवं अर्द्ध मरुस्थलों में, जहाँ चट्टानों की तापीय चालकता कम होती है, वहाँ चट्टानों की ऊपरी परतें अधिक गर्म होकर अधिक फैलती है। वहाँ चट्टानों का ऊपरी आवरण निचली परत से उसी प्रकार अलग हो जाता है जिस प्रकार प्याज से छिलका उतारा जाता है। इस क्रिया को अपदलन या अपपत्रण या पल्लवीकरण या अपश्लकन (Exfoliation) कहते हैं।

प्रश्न 21.
कणिकामय विघटन (Granular disintegration) किस प्रकार होता है?
उत्तर :
उष्ण मरूस्थलों में दैनिक तापान्तरों की अधिकता होती है। बड़े कणों वाली बौले, जो विभिन्न खनिजों तथा रंगो वाली होती हैं, तापान्तरों से अधिक प्रभावित होती हैं। एक ही शैल के भीतर संरचना की भिन्नता के कारण ताप प्राप्ति में अन्तर पैदा होता है। परिणामत: उनमें प्रकार एवं संकुचन की भिन्नता होती है। परिणामस्वरूप ये चट्टाने छोटे-छोटे कणों के रूप में विघटित हो जाती हैं जिसे कणिकामय विघटन कहते हैं।

प्रश्न 22.
रासायनिक अपक्षय किन प्रदेशों में अधिक सक्रिय रहता है तथा क्यों ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्धीय आर्द्रद्रदों में उच्च तापमान एवं अधिक आर्द्रता के कारण रासायनिक अपक्षय अधिक सक्रिय रहता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 23.
भौतिक या यांत्रिक अपक्षय किन प्रदेशों में अधिक सक्रिय रहता है तथा क्यों ?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्धीय मरूस्थलीय जलवायु प्रदेशों में उच्च दैनिक तापान्तर के कारण भौतिक अपक्षय सक्रिय रहता है।

प्रश्न 24.
मानसूनी प्रदेशों में किस ऋतु में रासायनिक अपक्षय और किस ऋतु में यांत्रिक अपक्षय प्रभावी रहता है?
उत्तर :
मानसूनी प्रदेशों में वर्षा ॠतु में उच्च तापमान एवं नमी के कारण रासायनिक अपक्षय अधिक सक्रिय रहता है तथा शुष्क ग्रीष्म ॠतु में यांत्रिक अपक्षय प्रभावी रहता है।

प्रश्न 25.
शीत जलवायु प्रदेशों में भौतिक अपक्षय प्रायः नगण्य रहता है ; परन्तु रासायनिक अपक्षय प्रभावी रहता है। क्यों ?
उत्तर :
शीत जलवायु प्रदेशों में भौतिक अपक्षय प्राय: नगण्य रहता है परन्तु यहाँ रासायनिक अपक्षय अधिक प्रभावी रहता है क्योंकि कम तापमान पर कार्बन-डाई-आक्साइड के अधिक घुलनशील होने के कारण यहाँ हिम के पिघलने से प्राप्त जल में कार्बोनिक अम्ल की अधिकता रहती है।

प्रश्न 26.
गोलाय अपक्षय (Spheroidal Weathering) क्या है ?
उत्तर :
कभी-कभी जलयोजन (Hydration) के कारण चट्टानों की ऊपरी परत फूलकर निचली परत से अलग हो जाती है। चट्टानों में इस तरह के विखण्डन को गोलाय अपक्षय (Spheroidal Weathering) कहते हैं।

प्रश्न 27.
अपक्षय और अपरदन में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
अपक्षय और अपरदन दोनों अलग-अलगप्रक्रियाएँ हैं। बिना अपक्षय के भी अपरदन हो सकता है। अपक्षय के पश्चात् अपरदन हो, यह आवश्यक नहीं है। अपरदन की प्रक्रिया में अपक्षय सहायक होता है, परन्तु यह अपरदन का अंग नहीं है।

प्रश्न 28.
भारत सरकार द्वारा मिट्टी के संरक्षण के लिए कहाँ पर भूमि संरक्षण अनुसंधान केन्द्र स्थापित की गई है।
उत्तर :
मिट्टी के संरक्षण के लिए भारत सरकार ने देहरादून, कोटा, आगरा तथा दूसरी ओर मरूस्थलीय भाग में जोधपुर, जयपुर एवं जैसलमेर में भूमि संरक्षण अनुसंधान केन्द्र स्थापित किये हैं।

प्रश्न 29.
भूमि सर्पण (Solifluction) एवं शैल राशि शंकु (Talus) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उच्च पर्वतीय भागों में भौतिक अपक्षय द्वारा होने वाले अपक्षय से प्राप्त चट्टान चूर्ण गुरूत्वाशक्ति के कारण जब निचले ढाल की ओर सरकने लगते हैं तो इसे भूमि सर्पण (Solifluction) कहते हैं तथा यही पदार्थ जब पर्वतों के निचले भाग में टीले के रूप में संचित हो जाते हैं तो उसे विखण्डित शैल राशि शंकु (Talus) कहते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 30.
अपक्षय को स्थैतिक क्रिया क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
चट्टानों का अपने स्थान पर टूटना-फूटना या सड़ना-गलना अपक्षय कहा जाता है। चूंकि यह क्रिया अपने स्थान पर होती है, अत: इसे स्थैतिक क्रिया कहते हैं। इसमें टूटे-फूटे शिलाखण्ड अपने स्थान पर पड़े रहते हैं।

प्रश्न 31.
निक्षेपण (Deposition) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
भू-पृष्ठ पर क्रियाशील विभिन्न प्रकमों जैसे – बहते हुए जल, हवा, हिमनद, तथा समुद्री ज्वार द्वारा परिवहित किये गये पदार्थों को किसी विशेष स्थान पर जमा करने की क्रिया निक्षेपण (Deposition) कहलाती है।

प्रश्न 32.
जलगति क्रिया (Hydraulic action) क्या है ?
उत्तर :
बिना किसी अन्य पदार्थ की सहायता से मात्र जल द्वारा की जाने वाली अपरदन की क्रिया जलगति क्रिया (Hydraulic action) कहलाती है।

प्रश्न 33.
अपक्षय के कौन-कौन से रूप हैं ?
उत्तर :
चट्टानों का अपक्षय मुख्यत: दो रूपों में होता है :-
(i) विघटन (Disintegration)
(ii) अपघटन (Decomposition)

प्रश्न 34.
निम्नीकरण (Degradation) किसे कहते हैं?
उत्तर :
निम्नीकरण (Degradation) : जब बाद्य शक्तियाँ धरातलीय उच्च भागों को काट-छाँट कर समतल बनाने का कार्य करती हैं तो इसे निम्नीकरण (Degradation) की क्रिया कहते हैं।

प्रश्न 35.
अधिवृद्धिकरण (Aggradation) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अधिवृद्धिकरण (Aggradation) : जब बाह्य शक्तियाँ कटे-छंटे पदार्थों का निक्षेपण निम्न भागों में करके समतल स्थापना का कार्य करती हैं तो यह क्रिया अधिवृद्धिकरण कहलाती है।

प्रश्न 36.
तलसंतुलन (Gradation) क्या है ?
उत्तर :
अपरदन एवं निक्षेपण के माध्यम से धरातल पर उच्चावच्च के मध्य अन्तर का कम होना तलसंतुलन (Gradation) कहलाता है।

प्रश्न 37.
अनाच्छादन की क्रिया किन विधियों द्वारा होता है ?
उत्तर :
अनाच्छादन के अन्तर्गत निम्नलिखित तीन क्रियाएँ सम्मिलित हैं –
(a) अपक्षय (Weathering)
(b) वृहद् संचलन (Mass Movement)
(c) अपरदन (Erosion)

प्रश्न 38.
वृहत्क्षरण से क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शिलाखण्डों का सरकना या वृहतक्षरण वह किय़ा है, जिससे गुरूत्व के सीधे प्रवाह से टूटी-फूटी चट्टानें नीचे की ओर खिसकती है या गिरती है।

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प्रश्न 39.
अनावृत्तिकरण के अन्तर्गत क्या क्रियाएँ होती हैं ?
उत्तर :
भू-पटल पर समतल स्थापन की सभी प्रकार की क्रियाएँ (निम्नीकरण और अभिवृद्धिकरण) इसके अन्तर्गत होती है।

प्रश्न 40.
अभिवृद्धिकरण के अन्तर्गत क्या कार्य होता है ?
उत्तर :
कटे-छटे पदार्थो के निम्न भागों में निक्षेपण से धरातल का समतल या चौरस करने का कार्य इसके अन्तर्गत होता है।

प्रश्न 41.
अपक्षय में कौन-कौन सी क्रियाएँ सम्पिलित है ?
उत्तर :
अपक्षय क्रियाओं में चट्टानों का विघटन (Disintegration) तथा अपघटन (Decomposition) की क्रियाएँ सम्मिलित हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
चट्टानों का क्षय कैसे होता है ?
उत्तर :
अपक्ष्य के विभिन्न साधनो द्वारा चट्टाने असंगठित हो जाती हैं एवं ढीली पड़ जाती हैं। अपक्ष्य के द्वारा चट्टाने अपने ही स्थान पर टूट-दूट कर अपखण्डित होती रहती हैं। इसके दूसरी ओर गतिशील शक्तियों (नदी, पवन, हिमानी, समुद्री लहरों) के घर्षण, अपघर्षण, भौतिक एवं रासायनिक कटाव जैसी शक्तियों का चट्टानों पर सामूहिक प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार संक्षेप में अनाच्छादन (अपक्ष्य + अपरदन) द्वारा चट्टानों का क्षय होता रहता है।

प्रश्न 2.
मरूस्थलीय भागों में सूर्यास्त के बाद पिस्तौल के छूटने की आवाज आती है क्यों ?
उत्तर :
मरूस्थलीय भागों में दिन में ऊँचे तापमान के कारण चट्टानें तेजी से फैलती हैं एवं रात के पिछले पहर में तापमान गिरने से यही चट्टानें पुन: तेजी से सिकुड़ने लगती हैं। इस प्रकार बार-बार फैलने और सिकुड़ने से चट्टाने अपने संधि के सहारे टूटने लगती हैं। ये चट्टानें कठोर होती हैं तथा जब अपने संधियों के सहारे टूटती हैं तो जोर की आवाज होती है। अत: मरूस्थल में सूर्यास्त के कुछ समय बाद चट्टानों के टूटने से उत्पन्न आवाजें बन्दूक छूटने जैसी लगती है।

प्रश्न 3.
रासायनिक अपक्षय के लिए गर्मी और आर्द्रता दोनों की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय में चट्टानों के खनिजों की संरचना पर जल में धुली विभिन्न गैसों का विशेष प्रभाव पड़ता है। इससे चट्टानों के आपस में जुड़ना ढीले पड़ जाते हैं। सामान्यतः उष्मा के प्रभाव से आर्द्रता पाने वाले चट्टानों के संरचना ढीलों पड़ जाते है, चट्टानें अपघटित हो जाती हैं। यही कारण है कि रासायनिक अपक्षय के लिए गर्मी और आर्द्रता दोनो की आवश्यकता पड़ती है।

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प्रश्न 4.
शुष्क जलवायु में अपक्षय की गति धीमी क्यों होती है ?
उत्तर :
शुष्क जलवायु में सबसे अधिक यांत्रिक अपक्षय के मूकारक तापान्तर, वर्षा, जल व वायु हैं। इन कारकों के सम्मिलित प्रभाव से सर्वप्रथम चट्टानें अपने संन्धियों के सहारे टृटती हैं। ये चट्टानें अत्यधिक कठोर होते हैं तथा चट्टान संधि पर कमजोर होने में लम्बा समय लगता है। अत: कठोर चट्टानों के विखण्डन में काफी समय लगता है। अतः शुष्क प्रदेशों में अपक्षय अपेक्षाकृत मंद गति से होता है।

प्रश्न 6.
उष्णार्द्र प्रदेशों में रासायनिक अपक्षय क्यों अधिक सक्रिय रहता है ?
उत्तर :
रासायनिक विखण्डन मुख्यतः नम प्रदेशों में होता है, इसका प्रधान कारण निम्नलिखित है :वायुमण्डल में बहुत से तत्व मिले हुए हैं। ऑक्सीजन एवं कार्बन-डाईऑक्साइड आदि गैसें वायुमण्डलं के निचले स्तर में पाये जाती हैं। विखण्डन की दृष्टि ये गैसें तब तक निष्किय रहती हैं जब तक ये शुष्क रहती हैं। चट्टानों का जल से सम्पर्क होते ही ये गैसे सक्रिय हो जाती हैं। ये घोलक के साधन बन जाते हैं और चट्टानों में रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। अत: विखण्डन आसान हो जाता है। इसी कारण रासायनिक विखण्डन नम प्रदेशों में अधिक होता है।

प्रश्न 7.
वृहद संचलन से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
वृहत् संचलन या वृहदक्षरण (Mass Wasting) :- जब भौतिक और रासायनिक अपक्षय द्वारा चट्टानें विघटन एवं वियोजन की क्रिया से असंगठित हो जाती हैं तब ये असंगठित चट्टाने गुरूत्व बल या जल के स्नेहन द्वारा नीचे की ओर आती हैं अथवा अपने स्थान से स्थानन्तरित होती हैं। जब यह क्रिया वृहद पैमाने पर होती है तो इसे सामूहिक क्षय (Mass Wasting) कहते हैं। इसके अंतर्गत भूमिसर्पण, भूमि स्थलन, पंकवाह, मलवा स्खलन आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं।

प्रश्न 8.
शीत जलवायु प्रदेशो में किस प्रकार का अपक्षय अधिक प्रभावी रहता है तथा क्यों? अथवा-शीत क्षेत्रों में भौतिक अपक्षय किस प्रकार होता है ?
उत्तर :
शीत जलवायु प्रदेशों में भौतिक या यांत्रिक अपक्षय अधिक प्रभावी रहता है, क्योंकि ऐसे भाग में रात में तापक्रम हिमांक से नीचे गिर जाता है। अतः दिन में चट्टानों की दरारों में भरा पानी रात में ठण्डक पाकर पाले (वर्फ) के रूप में जम जाता है। वर्फ के रूप में जमने पर पानी का आयत्न बढ़ जाता है जिससे वह फैलकर चट्टानों की दरारों पर दबाव डालता है जिससे दरारें चौड़ी हो जाती हैं। दिन के तापक्रम बढ़ने पर वर्फ पिघल जाता है और उसका आयतन घटने से दरारों में और पानी आ जाता है तथा रात्रि में पुन: जल जम जाता है। बार-बार यही क्रिया होने पर चट्टाने खण्ड-खण्ड होकर चूर्ण हो जाती हैं।

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प्रश्न 9.
तुषार क्रिया से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
ऊँचे अक्षांशों तथा हिमालय जैसे उच्य पर्वतीय प्रदेशों में पाला चट्टानों को तोड़ता-फोड़ता रहता है। दिन के समय चट्टानों की दरारों में जल भर जाता है और रात्रि को तापमान हिमांक से कम होने के कारण जल जम जाता है। जमने से उसका आयतन बढ़ जाता है। 1 घन सेंटीमीटर जल जब ज़ कर बर्फ में परिवर्तित होता है तब वह 10 घन सेंटीमीटर स्थान घेरता है। इससे चट्टानो पर लगभग 10 किलोग्राम प्रतिवर्ग सेंटीमीटर प्रतिबल पड़ता है। इन प्रचण्ड प्रतिबल के प्रभावाधीन चट्टानें टूट-फूट जाती हैं और दरारों का आकार बड़ा हो जाता है। अगले दिन अधिक जल इन दरारों में प्रवेश करता है और चट्टाने अधिक मात्रा में टूटती हैं। इस क्रिया को जमना-पिघलना (Freeze-Thaw) भी कहते हैं।

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प्रश्न 10.
अपरदन को गतिशील क्रिया क्यो कहते है ?
उत्तर :
अपरदन वह क्रिया है, जिसमें गतिशील बाह्म कारकों (नदी, हिमनद, पवन, भूमिगत जल तथा सागरीय लहर) द्वारा भौतिक एवं रासायनिक विधि से धरातल की चट्टाने खण्डित एवं गलित होकर स्थानान्तरित होती रहती हैं। इस प्रकार अपक्षय के विपरीत अपरदन एक गतिशील क्रिया है।

प्रश्न 11.
उष्ण क्षेत्रों में भौतिक अपक्षय क्यों होता है?
उत्तर :
उष्ण क्षेत्रों में ताप परिवर्तन के कारण चट्टानो का भौतिक अपक्षय अधिक होता है। इसका कारण यह है कि इन प्रदेशों में दिन के समय तापमान अधिक हो जाता है और रात्रि के समय नीचे गिर जाता है। अत: दिन में अधिक तापमान के कारण चट्टाने फैलती हैं और रात्रि के समय तापमान में कमी आ जाने से चट्टाने सिकुड़ जाती हैं। चट्टानों को इस प्रकार फैलने और सिकुड़ने से उनमें तनाव उत्पन्न होता है तथा दरारें पड़ जाती है। इस प्रकार चट्टानें बड़े-बड़े टुकड़ों में विभाजित हो जाती हैं।

प्रश्न 12.
कणिकामय विघटन (Granular disintegration) किस प्रकार होता है?
उत्तर :
उष्ण मरूस्थलों में दैनिक तापान्तरों की अधिकता होती है। बड़े कणों वाली बौले, जो विभिन्न खनिजों तथा रंगो वाली होती हैं, तापान्तरों से अधिक प्रभावित होती हैं। एक ही शैल के भीतर संरचना की भिन्नता के कारण ताप प्राप्ति में अन्तर पैदा होता है। परिणामत: उनमें प्रकार एवं संकुचन की भिन्नता होती है। परिणामस्वरूप ये चट्टानें छोटे-छोटे कणों के रूप में विघटित हो जाती हैं जिसे कणिकामय विघटन कहते हैं।

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प्रश्न 13.
जल अपघटन (Hydrolysis) क्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जल अपघटन (Hydrolysis) :- वर्षा का जल शैल पदार्थो से ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, अनेक अम्लो तथा कार्बनिक पदार्थों को घोल लेता है तथा उस घोल से नये रासायनिक मिश्रण उत्पन्न करता है। जल की यह रासायनिक अभिक्रिया जल अपघटन (Hydrolysis) कहलाती है। इससे न केवल शैलों के खनिज भिगोकर तर किए जाते हैं अपितु उनमें रासायनिक परिवर्तन भी होता है। फलत: वह खनिज पदार्थ नये यौगिक तथा नये खनिज में बदल जाता है। इस प्रकार निर्मित नये खनिज दीर्घकाल तक स्थायी रहते हैं।

प्रश्न 14.
मनुष्य किस प्रकार अपक्षय में सहायक होता है?
उत्तर :
आज मनुष्य की आर्थिक क्रियाएं बहुत बढ़ गयी है। मनुष्य अपनी विभिन्न आर्थिक कियाओ द्वारा शैलो के अपक्षय में योग देता है। वनों के शोषण से वह वनस्पतिक अपक्षय में योग देता है। सुरंगें, खान आदि खोदकर शैलो के अपक्षय में योग देता है। इसके अतिरिक्त वह अपने आवास के लिए, गमनागमन के लिए मार्ग बनाने, खनिज संपत्ति प्राप्त करने के लिए तथा जंगलों को काटकर कृषि योग्य नई भूमि प्राप्त करने के लिए चट्टानों को तोड़ता-हटाता है।

प्रश्न 15.
पौधे किस प्रकार अपक्षय में सहायक होते हैं ? अथवा पेड़-पौधे अपक्षय के कारक होते हैं, कैसे?
उत्तर :
पौधे, घास तथा वृक्षों की जड़े भूमि में गहराई तक प्रविष्ट होती रहती हैं, नीचे की ओर फैलती जड़ें शैलों की दरारो को विस्तृत करती है जिससे शैलो में तनाव तथा विघटन होता है।

प्रश्न 16.
जीव-जन्तु अपक्षय में किस प्रकार सहायक होते है ?
उत्तर :
सभी प्रकार के जीव-जन्तु अपक्षय में सहायक होते हैं। अधिकांश जीव जैसे लोमड़ी, गीदड़, बिच्छु, केंचुए, चूहे, दीमक आदि अपनी सुरक्षा के लिए गुफाएँ तथा बिल बनाते है। जिससे भूमि का असंगठित मलवा बाहर निकाल दिया जाता और उसका परिवहन हो जाता है। होम्स के मुताबिक प्रति एकड़ भूमि में डेढ लाख केचुएँ एक वर्ष में 10-15 टन चट्टानों को उर्वर रूप में तैयार कर उपरी परत पर लाते हैं।

प्रश्न 17.
किलेटन (Chelatan) क्या है ?
उत्तर :
वनस्पतियो की जड़ों में जीवाणु पाये जाते है जो शैल खनिजों को वियोजित करके शैलो को कमजोर बनाते हैं। वनस्पतियों और जीवों के अवशेष जब सड़-गल जाते हैं तो उनके भीतर से कार्बन-डाई-ऑक्साइड तथा जैविक अम्ल पृथक हो जाते हैं। जल के साथ मिलकर ये सक्रिय घोलक का कार्य करते हैं तथा खनिज शैलों को वियोजित करते हैं। इस क्रिया को किलेटन (Chelatan) कहते हैं।

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प्रश्न 18.
वेदिकाओं (Terrace) और सोपानों (Steps) का निर्माण किस प्रकार होता है ?
उत्तर :
हिमानी पंक प्रवाह शीत जलवायु वाले प्रदेशों में सामान्य रूप से घटित होता है। यहाँ स्थायी तुषार भूमि के क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु के आरम्भ होने पर ऊपर का हिम पिघलने लगता है परन्तु नीचे की भूमि हिमाच्छादित अवस्था में ही रहती है जिससे जल अधिक गहराई तक नहीं पहुँच पाता है। ऊपरी संतृप्त मिट्टी ढाल के सहारे अति मंद गति से संचालित होती रहती है। इस प्रकार के प्रवाहों द्वारा किए गए निक्षेपो से वेदिकाओं (Terrace) और सोपनों (Steps) का निर्माण होता है।

प्रश्न 19.
आन्तरिक शक्ति और बाहम शक्ति में कभी अन्तर है ?
उत्तर :

आन्तरिक शक्ति बाह्य शक्ति
i. ये शक्तियाँ भू-गर्भ में नि:शुद्ध परिवर्तन करने में लगी रहती है। i. ये शक्तियाँ धरातल के ऊपरी आवरण को परावर्तित करने का कार्य करती है।
ii. धरातल को असमतल बनाना इनका कार्य है। ii. ये शक्तियाँ मन्द गति से काम करती है।
iii. ये शक्तियाँ बहुत तेज गति से काम करती है। iii. धरातल को समतल बनाना इनका कार्य है।
iv. ये शक्तियाँ निर्माणकारी हैं। इनसे सील, द्वीप, एवं पर्वतों का निर्माण होता है। iv. ये शक्तियाँ विनाशकारी हैं। ये बनी हुई आकृति का विनाश कर देती है।
v. इन शक्तियों में ज्वालामुखी एवं भूकम्प मुख्य हैं v. इन शक्तियों में हिमनद, वायु, नदी आदि प्रमुख हैं।

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विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
यांत्रिक अपक्षय या भौतिक अपक्षय क्या है ? इसके विभिन्न प्रक्रियायों का वर्णन करो।
उत्तर :
भौतिक या यांत्रिक अपक्षय :- सूर्यताप, तुषार तथा वायु द्वारा चट्टानो में विघटन होने की क्रिया को यान्त्रिक अपक्षय या भौतिक अपक्षय कहा जाता है। यांत्रिक अपक्षय में यद्यपि ताप का परिवर्तन सर्वाधिक प्रभावशाली कारक है फिर भी इसमें अर्न्तगत दाब मूक्ति, जल का जमना-पिघलना तथा गुरुत्व का भी सहयोग रहता है। शुष्क, अर्द्धशुष्क, तीतोष्ण तथा शीत कटिबन्धीय भागों में एवं उच्च पर्वतों के ऊपरी भाग पर यांत्रिक अपक्षय की क्रिया सक्रिय होती है। इस प्रक्रिया में विघटन द्वारा चट्टाने टुकड़ेटुकड़े हो जाती हैं। परन्तु इनमें कोई रासायनिक परिवर्तन नहीं होता है। इसके निम्नलिखित प्रकार होते हैं :-

तापमान के प्रभाव से विघटन :- दिन में अधिक गर्मी पड़ती है अत: चट्टाने गर्म होकर आयतन में फैलती हैं। रात में अधिक ठण्ड पड़ने के कारण चट्टाने सिकुड़ने लगती हैं। इस प्रकार तापमान के दैनिक परिवर्तन एवं तापान्तर के कारण चट्टानों में हमेशा तनाव एवं संकुचन की क्रिया होती रहती है जिससे उनमें दरारें पड़ जाती हैं। ये दरारें क्रमश: बढ़ती हैं और अन्त में चट्टानें विखण्डित होकर टूट जाती हैं। ऐसा मरुस्थलों में अधिक होता हैं क्योंकि इन प्रदेशों में रात-दिन के तापमान में बहुत अन्तर पाया जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में दाब एवं तापमान सम्बन्धी विभिन्नताओं के फलस्वरूप उत्पन्न दाब के कारण चट्टाने बड़े-बड़े टुकड़ों में विभक्त हो जाती हैं तो जिसे पिण्ड विघटन (Block disintegration) कहते हैं।

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इस प्रकार के आकार नाइजीरिया तथा मोजाम्बिक में द्वीपाभगिरि (Inselberg) की तरह गुम्बदाकार होते हैं जो मूल चट्टान से क्रमश: निकलते हैं। इस विधि को अपपत्रण (Exfoliation) भी कहते हैं। अधिक समय तक फैलने एवं सिकुड़ने की क्रिया से चट्टानों के खनिज अलग-अलग विभक्त हो जाते हैं, जिसे कणदार विघटन (Granular Disintegration) कहते हैं। यह क्रिया स्वच्छ आकाश, उच्च तापमान तथा अधिक तापान्तर वाले प्रदेशों में अधिक होती है। कहीं-कही चट्टानें ट्टकर तीक्ष्ण एवं कोणदार टुकड़ों में विघटित हो जाती हैं। इस क्रिया को भंजन या विखण्डन (Shattering) कहते हैं। टूटी-फूटी चट्टानों का ढेर गुरुत्वाकर्षण के कारण पहाड़ी पादों के निकट एकत्र हो जाता है। इसे शैल-मलबा (Scree या Talus) कहा जाता है। राजस्थान के मरुस्थल में यह क्रिया दिखाई देती है।

पाला या तुषार द्वारा विघटन :- रात के समय अधिक ठण्ड पड़ने के कारण चट्टानों में मौजूद जल जम जाता है और इसका आयतन बढ़ जाता है। इससे चट्टानों पर दबाव पड़ने लगता है और चट्टाने चौड़ी होती जाती है। अन्त में चट्टाने टट जाती हैं। यह क्रिया ऊँचे प्रदेशों एवं पर्वतीय भागों में अधिक तेजी से होती है। पर्वतीय ढालों के नीचे भागों में टूटी हुई शैलों का ढेर संपात के रूप में इकट्ठा हो जाता है और उसका कुछ अंश नदियों या हिमनदियों द्वारा प्रवाहित हो जाता है। इस विधि द्वारा चट्टानें बड़े-बड़े टुकड़ों मे विभक्त हो जाती हैं। जब इन खनिज शैल-पिण्डों से विस्तृत भू-भाग आच्छादित हो जाता है तो इसको खण्डाश्मपुश (Belsenmer) कहते हैं।

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पौधों एवं प्राणियों द्वारा यान्त्रिक एवं रासायनिक क्रिया :- शैलों के सूक्ष्म छिद्रों एवं दरारों में पेड़-पौधे उग आते हैं। जब इनकी जड़ें मोटी हो जाती हैं तो दरारें फैलकर चौड़ी हो जाती हैं। फलतः शैलों के टुकड़े अलग हो जाते हैं। बहुत से पेड़ों की जड़ों से निकले रस से शैलों के खनिजो पर रासायनिक प्रभाव पड़ता है और इससे इनके विघटन में सहायता मिलती है।

दीमक एवं केंचुए बिल बनाकर या कुतरकर शैल को नरम बना देते हैं। मिट्टी में मिले हुए छोटे जीवों एवं वनस्पतियों के अवशेष कीटाणुओं द्वारा नष्ट किये जाते हैं, जिससे अवशेष कार्बन-डाइ-ऑक्साइड तथा विभिन्न प्रकार के अम्लों का निर्माण होता है। इनसे जल की घोलन शक्ति में वृद्धि होती है।

दबाव में कमी के कारण विघटन :- आग्नेय या कायान्तरित चट्टानें अन्य चट्टानों के नीचे दबी रहती हैं। इनके ऊपर की चट्टानों का अपक्षय हो जाने से दबाव कम हो जाता है। इससे उनमें दरारें पड़ जाती हैं और उनका विघटन शुरू हो जाता है। इस प्रकार का विघटन कैलीफोर्निया में येसोमाइट की घाटी में होता है।

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प्रश्न 2.
रासायनिक अपक्षय क्या है ? इसकी प्रक्रियायों का वर्णन करो।
उत्तर :
रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) :- रसायनिक क्रियाओं के द्वारा जब चट्टानों में विखण्डन की क्रिया होती है तो उसे रसायनिक अपक्षय कहते हैं। वायुमडल में निचले स्तर की लगभग सभी गैसे जैसे कार्बन-डाईआक्साइड (CO2), आक्सीजन (O2), जल-वाष्प (Water Vapour), नाइट्रोजन (N2) आदि वर्षा जल से क्रिया करके रसायनिक अपक्षय को बढ़ावा देते हैं। रसायनिक अपक्षय का कार्य पृथ्वी सतह के ऊपर तथा नीचे, दोनों क्षेत्रों में होता रहता है। चूना पत्थर पर रसायनिक अपक्षय अधिक होता है। उष्ण एवं आर्द्र प्रदेशों में यह क्रिया सर्वाधिक

होती है। रासायनिक क्रिया की पाँच विधियाँ होती हैं :-
ऑक्सीकरण (Oxidation) :- इस क्रिया में वायु, जल में मिश्रित ऑक्सीजन शैलों के खनिजों के साथ मिल जाती है और इनको ढीला कर देती है। ऑक्सीकरण का स्पष्ट प्रभाव लौहमय शैलों पर दिखाई पड़ता है। लोहा फैरिक अवस्था में लाल-भूरे रंग का दिखाई पड़ता है। वर्षा ऋतु में लोहे पर लगा जंग या मोरचा (Iron Oxide) लोहे और ऑक्सीजन के मिलने से बनता है। यह क्रिया आर्द्र प्रदेशों में व्यापक रूप में होती है।

4 FeO + 3 H2O + O2 = 2 Fe2O3 + 3 H2O.

कार्बनीकरण (Carbonation) :- वर्षा तथा बहते हुए जल में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड मिलकर कार्बोनिक अम्ल का निर्माण करती है। जिसके द्वारा शैलों के कुछ खानिज कार्बनेट में बदल जाते है। इस क्रिया को कार्बनीकरण कहते है। घुलनशील होने के कारण कार्बोनेट जल में घुल जाते हैं। यह क्रिया आर्द्र जलवायु में विशेष रूप से सक्रिय होती है।

H2O + CO2 = H2CO3
CaCO3 + H2O + CO2 = Ca (HCO3)2

कार्बोनिक अम्ल चूना मिश्रित शैलों को बड़ी सुविधा से घुला डालता है। वर्षा के जल से चूने का पत्थर नहीं घुलता है। अत: भवनों के निर्माण में इसका उपयोग अधिक होता है। भूमिगत जल मे कार्बोनिक अम्ल मिला रहता है। अतः चूने के पत्थरों में अधिक परिवर्तन ला देता है। इस क्रिया से ग्रेनाइट तथा फेल्सपार की शिलायें मृत्तिका (Clay) तथा बालू के रूप में बदल जाती हैं।

जल-योजन (Hydration) :- जब भू-पृष्ठ की शैलों के खनिजों द्वारा पानी सोख लिया जाता है तो खनिजों का आयतन बढ़ जाता है और शैलों के अन्तर्गत दाब-वृद्धि होने से विघटन की क्रिया निष्पादित होने लगती है। शैलों की परतें उभर जाती हैं। जल-योजन का प्रभाव फेल्सपार खनिज पर सर्वाधिक पड़ता है।

ग्रेनाइट शैलों में अपपत्रण या अपशल्कन (Exfoliation) का कारण यह है कि जल-योजन से ग्रेनाइट में मिश्रित फेल्सपार धातु फैल जाती है और घुलित तहें यान्त्रिक विधि से अलग हो जाती हैं। जल-योजन से फेल्सपार धातु केओलिन (Kaoline) मिट्टी में परिवर्तित हो जाती है। जबलपुर की पहाड़ियों में केओलिन भी फेल्सपार के निबन्धन सेनिर्मित होता है। जल एवं कैल्सियम सल्फेट के मिश्रण से जिप्सम की रचना होती है।

घोलन (Solution) :- साधारण जल में बहुत कम शैले घुलती है। घुलनशील शैलों में शैल लवण तथा जिप्सम मुख्य हैं। पानी घुलित कार्बन-डाइ-ऑक्साइड गैस से कार्बोनिक अम्ल बनता है, जिससे चूने का पत्थर धीरे-धीरे घुलता रहता है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप अवशैल तथा उच्छेल का निर्माण होता है। यह कार्य पाकिस्तान स्थित नमक की पहाड़ियों पर देखा जाता है।

डिसिलिकेशन (Desilication) :- ग्रेनाइट आदि चट्टानों में सिलिका अधिक मात्रा में पायी जाती है। रासायनिक बिधि द्वारा शैलों से सिलिका का जल में घुलकर अलग हो जाने को ही डिसिलिकेशन कहा जाता है। इससे चट्टानें ढीली पड़ जाती हैं और उनका विघटन आसान हो जाता है।

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प्रश्न 3.
जैविक अपक्षय क्या है ? यह कैसे होता है ?
उत्तर :
जैविक अपक्षय (Biological Weathering) :- धरातल पर जैविक अपक्षय वनस्पति, जीव-जन्तुओं तथा मानव द्वारा निष्पादित होता है। किन्तु ये सभी कारक जहाँ अपक्षय क्रिया सम्पन्न करते हैं, वहीं इनके द्वारा रचनात्मक कार्य भी होता है।

वानस्पतिक अपक्षय (Weathering due to Vegetation) :- वनस्पति द्वारा अपक्षय भौतिक तथा रासायनिक दोनों प्रकार से किया जाता है। सामान्यतः चट्टानों की दरारें या संधियों में जब वनस्पतियों की जड़ें प्रवेश करती हैं तथा वहाँ मोटी होने लगती हैं तो संधियाँ या दरारें बढ़ने लगती हैं और चट्टानें ढीली पड़कर विघटित होने लगती हैं। कुछ वनस्पतियों की जड़ें चट्टानो से विशेष प्रकार के तत्त्वों को सोखती रहती हैं जिससे रासायनिक अपक्षय होता है।

बैक्टीरिया युक्त जल भी चट्टानों के खनिजों तथा मिट्टी पर तीव्र क्रिया कर जीव (Organisms) तथा जीवाणु (Bacteria) इत्यादि नष्ट करते हैं। इन्हीं के द्वारा कुछ अम्लों की उत्पत्ति होती है, जैसे जैविक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल तथा अमोनिया इत्यादि। वनस्पति के द्वारा मिट्टी में हुई क्रियायें ह्यूमस (Humus) की उत्पत्ति करती है। वनस्पतियाँ अपक्षय के अलावा धरातलीय मिट्टी को अपनी जड़ों द्वारा बाँधे रखती हैं, जिससे अपक्षय के कारक अधिक प्रभावी नहीं हो पाते।

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जीव-जन्तु कृत अपक्षय (Animals Weathering) :- सभी पकार के जीव-जन्तु अपक्षय में सहायक होते हैं। अधिकांश जीव जैसे लोमड़ी, गीदड़, बिच्छू, केंचुए, चूहे, दीमक आदि अपनी सुरक्षा के लिये गुफाएँ तथा बिल बनाते हैं। जिससे भूमि का बहुत-सा असंगठित मलवा बाहर निकाल दिया जाता है और उसका परिवहन हो जाता है। होम्स के मुताबिक प्रति एकड़ भूमि में डेढ़ लाख केंचुए एक वर्ष में 10-15 टन चट्टानों को ऊर्वर रूप में तैयार कर ऊपरी परत पर लाते हैं।

मानव कृत अपक्षय (Human Weathering) :- मानव अपने प्रारंभिक समय से ही अपक्षय का कारक रहा है। वर्तमान काल में यह अपक्षय का एक बड़ा कारक बन गया है। आज यह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पहाड़ों को मैदान बना रहा है। सड़कें, रेलमार्ग और विशाल भवनों का निर्माण करता है, खनिजों का शोषण करता है, चट्टानो को तोड़ता, खोदता और उसे ध्वस करता है। इससे चट्टानों का भौतिक अपक्षय के साथ रासायनिक अपक्षय भी होता है।

प्रश्न 4.
अपरदन क्या है ? इसके विभिन्न कारकों एवं क्रियाओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
अपरदन (Erosion) :- जब अपक्षय द्वारा प्राप्त प्रवाह शैल गतिशील शक्तियों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान को ले जाई जाती है तो इस क्रिया को अपरदन या परिवहन कहते हैं। परिवहन किये जाते समय प्रवाह शैल भू-पृष्ठ को खरोंचता एवं घिसता है। इस क्रिया को अपरदन कहते हैं। अपरदन के निम्नलिखित कार्य होते हैं :-

  1. प्रवाह शैल का उठाना (Picking)
  2. प्रवाह शैल का अपनयन (Transportation)
  3. प्रवाह शैल द्वारा भू-पृष्ठ का खरोंचना (Corrasion)
  4. प्रवाह शैल का अन्यत्र निक्षेपण (Deposition)।

मुख्य कारक :- पवन, प्रवाहित जल (नदियाँ), भूमिगत जल, हिमानी (Glacier) तथा सागरीय लहरे अपरदन के मुख्य कारक हैं जो भिन्न-भिन्न प्रकार तथा विधियों से अपरदन कार्य निष्पादन करते हैं। इनमें प्रवाहित जल का कार्य अन्य कारकों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होता है। अपरदन के कारकों का प्रभाव उनके आयतन (Volume), वेग (Velocity), तथा उनके प्रवाह शैलों के भार (Load), पर निर्भर करता है। नदी में उसकी अवस्थानुसार आयतन भित्नभिन्न होता है। पर्वतीय मार्ग में उसका वेग अधिक होता है। अतः अपरदन की क्षमता भी अधिक होती है।

अपरदन के विभिन्न साधनो द्वारा परिवहन का कार्य भी निम्नलिखित तीन क्रमों में पूरा किया जाता है:-

1. प्रवाह शैल को घुलाकर (In Solution), जैसे जल अपने में नमक एवं चूने को घुलाकर प्रवाहित होता है।
2. भू-पृष्ठ पर एकत्रित शैल के मलबे को अपने साथ तैराते हुए (In Suspension) जैसे – नदी एवं वायु धरातल से बारीक कणों को अपने साथ उठाकर अन्यत्र ले जाते हैं।
3. अपेक्षाकृत बड़े आकार के शिलाखण्डों को जो न घुल सकते हैं और न उड़कर या तैरकर जा सकते है, उन्हें धरातल पर घसीट कर (Intraction) ले जाया जाता है। इस क्रिया से धरातल पर अत्यधिक अपरदन होता है। पर्वतीय नदियों तथा हिमनदियों में शिलाखण्डों की घर्षण शक्ति बहुत अधिक होती है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 5.
संक्षेप में अपरदन के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करो।
उत्तर :
अपरदन के प्रकार (Types of Erosion) :- कार्य के स्वभाव की दृष्टि से अपरदन निम्न प्रकार के होते हैं :-
अपघर्षण (Abrasion or Corrasion) :- अपरदन के कारकों द्वारा प्रवाह शैल उठाकर ले जाते समय धरातल को सैण्डपेपर की तरह घर्षित किया जाता है। अतः यह यंत्र की तरह काम करता है। इसी प्रक्रिया को अपघर्षण कहते हैं।
सत्रिघर्षण (Attrition) :- धरातल के असंगठित पदार्थ, जो अपरदन के विभिन्न कारकों से परिवहित होते है, वे आपस में टरकाकर चूर-चूर होते रहते हैं। बड़े-बड़े शिलाखण्ड छोटी-छोटी गिट्टियों में तथा बाद में रेत के कणो में बदल जाते हैं। यह प्रक्रिया सत्रिघर्षण कहलाती है।
संक्षारण (Corrasion) :- यह जल की एक रासायनिक क्रिया है, जिससे शैलों के खनिज घुलाकर बहा दिये जाते हैं।
अपवाहन (Deflation) :- यह क्रिया पवनों द्वारा शुष्क एवं मरुस्थलीय भागों में सम्पन्न की जाती है जिसमें भौतिक अपक्षय द्वारा विखण्डित पदार्थों को वायु अपने साथ उड़ाती रहती है।
निक्षेपण (Deposition) :- अपरदन के साधनों की परिवहन क्षमता हमेशा एक सी नहीं रहती है। परिवहन शक्ति के क्षीण होने पर साथ ढोकर लाये गये प्रवाह शैल को घरातल पर यत्र-तत्र छोड़ने को निक्षेपण कहते हैं। निक्षेपण द्वारा भू-पृष्ठ पर विभिन्न प्रकार की नवीन भू-आकृतियों का निर्माण होता है।

प्रश्न 6.
अपक्षय के क्या प्रभाव हैं ?
उत्तर :
अपक्षय अथवा विखण्डन के प्रभाव निम्नलिखित हैं :-
लाभदायक प्रभाव (Beneficial or Useful effect) :-
खनिज-पदार्थों की प्राप्ति :- अपक्षय के कारण चट्टानों से भिन्न-भिन्न तरह के खनिज-पदार्थ एक ही स्थान पर इकट्ठा हो जाते हैं। अत: उनको प्राप्त करने में आसानी हो जाती है। जिप्सम, खड़िया, चूना आदि इसी विधि द्वारा प्राप्त होते हैं।
इीलों का निर्माण :- पहाड़ी भागों में अपक्षय के कारण दूटे हुए बड़े-बड़े चट्टान फिसलकर नदियों के मार्ग में आ जाते हैं जो नदियों के प्रवाह को रोक कर झीलों का निर्माण करते हैं।
समतल भूमि का निर्माण :- हिमनदी, नदियाँ एवं हवायें अपक्षय द्वारा चूर्ण किये गये पदार्थों कोनिम्न भागों मेंनिक्षेपित करती हैं। इससे समतल भूमि की रचना होती है।
मिट्टी की रचना :- अपक्षय के करण चट्टानों में टूट-फूट होती है और मिट्टी का निर्माण होता है, जिसमे कृषि की जाती है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effect) :-

  1. हिम पिणडों का फिसलना :- उंडे प्रदेशों में चट्टानों का विघटन होता है। इसके साथ ही बड़े-बड़े हिम पिण्ड फिसलकर समुद्र में चले जाते हैं। इससे बड़े-बड़े जहाजों के चलने में बाधा होती है।
  2. मरुभूमि का निर्माण :- अपक्षय के कारण बड़ी-बड़ी चट्टानें टूट-फूट कर बालू के कण बन जाती हैं। ये बालू के कण चारों ओर फैल कर मरुभूमि का निर्माण करते हैं।
  3. मिट्टी के कटाव का होना :- अपक्षय के कारण मिट्टी ढोली पड़ जाती है। नदी, वायु आदि इसे आसानी से काटते हैं। अतः भूमि अनुपजाऊ हो जाती है।
  4. मानव-बस्तियों पर प्रकोप :- अपक्षय के कारण पर्वतीय भागों में विशाल शैलो के टुकड़े लुढ़कते हुए चले आते हैं और मानव-बस्ती तथा निवासियों को क्षतिग्रस्त करते है।

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प्रश्न 7.
मिट्टी के निर्माण के बारे में तुम क्या जानते हो ? मिट्टी निर्माण के विभिन्न प्रक्रियाओं का वर्णन करो।
उत्तर :
मिट्टीका निर्माण एक जटिल पक्रिया है जिसमें प्राकृतिक वातावरण का प्रत्येक तत्व अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। अपक्षय एवं अपरदन, भू-पृष्ठ की चट्टानों को चूर्ण बना देते हैं। इस चूर्ण में लम्बे समय तक वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं के सड़े-गले अवशेष मिश्रित होकर चट्टान-चूर्ण को उप्जाऊ मिट्टी का रूप ग्रदान करते हैं। यही तत्व पेड़-पौधों को जीवन प्रदान करते हैं।
मिट्टी का निर्माण (Formation of Soil) :- चट्टानों के अपक्षय (weathering) से मिट्टी बनती है। चट्टानों का अपक्षय भौतिक (physical), रासायनिक (chemical) तथा जैविक (biological) शक्तियों (forces) द्वारा होता है।

भौतिक शक्तियाँ (Physical forces) :- ये निम्नलिखित हैं –

  • पानी
  • बर्फ
  • हिमनद
  • वायु
  • तापमान।

पानी (Water) :- वर्षा का पानी अपनी शक्ति के अनुसार चट्टानों को तोड़ता है। पहाड़ी ढालो पर बहते समय वर्षा का पानी अपनें साथ अनेक छोटे-छोटे ककड़-पत्थर, रेत, सिल्ट इत्यादि लिए चलता है। ये रगड़ खाकर सूक्ष्म कणों में टूट-दूटकर मिट्टी में बदलते रहते हैं। सिंधु-गंगा का मैदान इसी प्रकार बना है।

बर्फ (lce) :- दो चट्टानों के बीच उपस्थित वर्षा तथा सोतों का जल शीतकाल में जमकर बर्फ बन जाता है। बर्फ का आयतन (volume) जल के आयतन से अधिक होने के कारण बहुत दबाव (pressure) उत्पन्न होता है, जिससे चट्टानें छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं।

हिमनद (Glacier) :- पहाड़ों पर बहते समय हिमनद में उपस्थित चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े दबाव तथा घर्षण से सूक्ष्म कणों में बदलते रहते हैं। ये चूर-चूर होकर मिट्टी का निर्माण करते हैं।

वायु (Wind) :- वायु के वेग से पत्थर के टुकड़े आपस में रगड़ खाकर मिट्टी के कणों में परिवर्तित हो जाते हैं।

तापमान (Temperature) :- चट्टानों में उपस्थित विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थों के कारण चट्टाने ताप तथा उंडक में असमान रूप से फैलती तथा सिकुड़ती है, जिससे चट्टानें टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाती हैं और फिर मिट्टी का निर्माप करती हैं।

रासायनिक शक्तियाँ (Chemical forces) :- ये निम्नलिखित हैं –

  • ऑक्सीकरण
  • कार्बनीकरण
  • जलयोजन।

ऑक्सीकरण (Oxidation) एवं लघुकरण (Reduction) :- चट्टानों में उपस्थित लोहा तथा अन्य खनिज पदार्थों के साथ ऑक्सीजन (O2) एवं जल (H2O) की रासायनिक क्रिया होती है। आयरन सल्फाइड पर O2 तथा H2O की रासायनिक क्रिया से आयरन ऑक्साइड तथा गधक का अम्ल (H2SO4) बनता है। इस अम्ल के प्रभाव से चट्टाने कमजोर होकर टूट जाती हैं। इसके अलावा, जब किसी रासायनिक पदार्थ से ऑक्सीजन बाहर निकल जाता है तब चट्टाने कमजोर होकर दूट जाती हैं।

कार्बनीकरण (Carbonation) :- कार्बन-डाइ-ऑक्साइड द्वारा उत्पन्न कार्बनिक अम्ल पानी के साथ मिलकर पानी की घुलनशीलता बढ़ा देता है जिसके ग्रभाव से चट्टानों में उपस्थित घुलनशील पदार्थ घुल जाते हैं एवं चट्टाने टूट जाती हैं।

जलयोजन (Hydration) :- कभी-कभी पानी चट्टानों में उपस्थित दूसरे पदार्थों के साथ मिलकर एक मिश्रण बनाता है, जिसके प्रभाव से चट्टान ढीली तथा कमजोर हो जाती है एव टूटकर मिट्टी में बदल जाती हैं।

जैविक शक्तियाँ (Biological forces) :- जब चट्टानों पर स्थित बड़े-बड़े वृक्ष की विशाल जड़ें भोजन की खोज में बढ़ने लगती हैं तो इससे चट्टानें टूटने-फूटने लगती हैं। इस क्रिया से चट्टानों के छोटे टुकड़े और भी छोटे टुकड़ों में बदल जाते हैं। किसी-किसी पौधे की जड़ो से अम्ल निकलता है, जो छोटी चट्टानों को तोड़ता है। इसके अलावा, विभिन्न प्रकार के प्राणी भी चट्टानों के टूटने में मदद करते हैं तथा मिट्टी के बड़े कणों को पीसकर बारीक कणों में बदल देते हैं।

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प्रश्न 8.
मिट्टी अपरदन के प्रमुख कारण क्या हैं और इसके नियंत्रण का उपाय क्या है ?
उत्तर :
मिट्टी अपरदन के कारण (Causes of soil erosion) :-
1. तेज गति से वर्षा का होना :- तेज वर्षा के कारण भूमि की ऊपरी परत कटकर जल में मिलकर बह जाती है। अत: मिट्टी का कटान तेज वर्षा के कारण होता है।
2. वनों का विनाश :- आजकल वनों का विनाश तेजी से हो रहा है। वनों के नष्ट होने के कारण मिट्टी का कटाव तेजी से होने लगता है।
3. भूमि का अधिक ढालू होना :- मिट्टी का कटाव ढालू जमीन पर अधिक होता है। यर्वतीय भागो में जमीन के ढालू होने से मिट्टी का कटाव अति तीव्व गति से होता है।
4. पशु चराई :- अधिक पशुचारण के कारण मिट्टी के कण बिखर जाते हैं। पशुओं के खुर से मिट्टी के कण ढीले पड़ जाते हैं। इस तरह मिट्टी का कटाव अधिक होता है।
5. कृषि का स्थानान्तरण होना :- इस प्रकार की कृषि से वनो का विनाश तेज गति से होता है। अतः मिट्टी का कटाव भी बहुस तेजी से होने लगता है।
6. भूमि के ढाल के अनुरूप खेतों की जुताई :- खेतों की जुताई अनियन्त्रित रूप से होती है। जमीन की ढ़ाल के अनुरूप जुताई होने के कारण मिट्टी के कटाव में वृद्धि हो जाती है।
7. बाढ़ आना :- भयकर वर्षा के कारण नदियों में बाढ़ आ ज़ाती है। पानी तेज गति से बहता है। उपज़ाऊ मिट्टी कटने लगती है, मिट्टी का अधिक कटाव बढ़ के कारण होता है।
8. आँधी के कारण :- हवा में अपार शक्ति होती है। आँधी के कारण धरती के ऊपर की मुलायम मिट्टी उड़ जाती है। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भू-कटाव का कारण वायु ही है।
9. खेतों को खाली छोड़ना :- वर्षा के समय किसान खेत जोतकर खाली,छोड़ देते हैं। अत: हवा एवं वर्षा का जल मिट्टी के कणों को बहा ले जाते हैं। अतः मिट्टी का कटान तेजी से होता है।
10. खेतों की मेढ़ों को तोड़ डालना :- किसान खेतों की मेढ़ो को व्यर्थ समझकर तोड़ डालते है। मेढ़ों से पानी की गति रुकती है तथा भूमि का कटाव नहीं हो पाता है। किसान मेढों को तोड़ कर अनाज बो देते हैं। मेढ़ न होने से पानी की गति रुकती नहीं और भूमि का कटाव होता रहता है।

मिट्टी का कटाव रोकने के उपाय :-

1. चारागाहों का प्रबन्ध :- पशुओं को चरने के लिये अलग से चारागाहों की व्यवस्था जखूरी है। ग्राम की खाली भूमि को चारागाहों मे बदला जा सकता है। उसमें उन्नत किस्म की घास बोयी जा सकती. है।
2. चराई पर प्रतिबन्ध :- पशुओं की अनियमित चराई पर प्रतिबन्ध लगाना जरूरी है। नहरों के किनारों पर पशुओं के चरने पर प्रतिबन्ध होना चाहिए। पशुओं के खुरों से उखड़नेवाली मिट्टी का तेजी से अपरदन हो जाता है। अतः इस पर ध्यान देना जरूरी है।
3. वनों के कटान पर प्रतिबन्ध :- मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिर्य वनों का कटान अंधाधुन्ध करता जा रहा है। वनों के कटाव से मिट्टी ढीली हो जाती है। वर्षा से बढ़ें आती हैं। भू-स्खुलन होता है। अतः वनों के कटाव पर रोक होनी चाहिए।
4. वृक्षारोपण :- खाली स्थानों पर वृक्ष लगाना चाहिए। इसीलिये प्रतिवर्ष वन-महोत्सव मनाया जाता है। वनों को काटने के पहले नए वनों को लगाना चाहिए जिससे मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे।
5. बालू के बन्धकों को उगाना :- पौधों की जड़ों में मिट्टी को जकड़े रहने की क्षमता होती है। सैकरम मुंजा, सैकरम स्पाण्टेनियम, साइनोडम डैक्टाइलोन, इण्डिगोफेरा, कार्डिफोलिया आदि ऐसे पौधे हैं जिनमें मिट्टी को जकड़े रहने की क्षमता होती है। ऐसे वृक्षों को नहरों के किनारे पर लगाना चाहिए।
6. बाँध का निर्माण :- नदियों पर बाँध बनाकर बाढ़ के प्रकोप को रोका जा सकता है। बाद़ रुकने पर मिट्टी का कटाव भी रुक जाता है।
7. खेतों में हरे चारे वाली फसल उगाना :- वर्षा-कतु में खेतों को खुला छोड़ने की अपेक्षा सनई, ढेंचा, मूंग आदि हरी खाद वाली फसले बो देने से भूमि का कटाव रुक जायेगा।
8. नाली एवं गड्ठों को समतल बनाना :- अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल बहने से गहरी नालियाँ तथा गड्दे बन जाते हैं। उन्हें मिट्टी से भरकर सपाट कर देने से मिट्टी का कटाव नहीं होगा ऐऐसे क्षेत्रों में शीघ्र घने होने वाले वृक्षों को लगाना श्रेखस्कर होता है।
9. जल के निकास की उचित व्यवस्था :- खेतों में समोच्च बाँघ होना चाहिए। जल के निकास के लिये पक्की नाली बनाना चाहिए। ढालू भूमि पर सीढ़ीदार खेत बनाना ठीक होता है।
10. ढाल के विपरीत जुताई :- भूमि में जुताई ढाल के विपरीत करने से मिट्टी का कटाव रुक जाता है।
11. स्थानान्तरित खेती को रोकना एवं स्थायी कृषि का विकास करना।
12. भूमि की उपजाऊ शक्ति सदैव एक-सी बनाये रखने के लिये खाद का प्रयोग करना।
13. मरुभूमियों एवं अन्य भूमियों पर कतारों में वृक्षारोपण करना।
14. फसल-चक्र अपनाना, हर समय भूमि पर कोई न कोई फसल खड़ी करना।
15. काटने योग्य वृक्षों को समूल नष्ट न करना।
16. परती भूमि पर कृषि करना और भूमि को परती न छोड़ना।

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प्रश्न 9.
मृदा संरक्षण क्या है ? स्वाधीनता के पश्चात मृदा संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये गये कदम क्या हैं ?
उत्तर :
मृदा संरक्षण वह क्रिया है जिसके अन्तर्गत विविध प्रकार से मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने का प्रयास किया जाता है। मिट्टी को अपने स्थान पर स्थिर रखना, उर्वरता में अभिवृद्धि करना, उर्वर तत्वों की अपेक्षित मात्रा तथा अनुपात को बनाये रखना और दीर्घकाल तक उत्पादन प्राप्त करते रहने के लिये इसकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना आदि मृदा संरक्षण के प्रमुख उद्देश्य होते हैं।
विभिन्न उपायों से मिट्टी की समस्याओं को दूर करके उसे लम्बे समय तक उपजाऊ एवं कृषि के योग्य बनाये रखने को मिट्टी का संरक्षण कहते हैं।

मिट्टी के संरक्षण के लिये सरकार द्वारा निम्नलिखित कार्य किये गये हैं :-
खाद के कारखानों की स्थापना :- मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिये भारत में सिन्दरी, गोरखपुर आदि स्थानों में खाद के कारखाने खोले गये हैं।
प्रदर्शन योजनाओं को चालू करना :- अनेक स्थानों पर प्रदर्शन योजनाएँ चालू की गई है जिससे लोगों को मिट्टी संरक्षण की विधियों की जानकारी हो सके।
नये-नये वृक्षों को लगाना :- बाढ़ के नियन्त्रण के लिये तथा मिट्टी के कटान पर रोक लगाने के लिये वृक्षारोपण किया जा रहा है। इससे मरुस्थल के प्रसार पर भी रोक लगेगी।
कर्मचारियों को प्रशिक्षण :- मिट्टी के कटान को रोकने के लिये कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकारी कर्मचारी देहरादून में प्रशिक्षण पा रहे हैं।
अनेक अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना :- मिट्टी के कटान की जाँच के लिये अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना की गई है। काली मिद्टी के लिये बेलारी, शुष्क मिट्टी के लिये जोधपुर, क्षारीय मिट्टी के लिये कोटा तथा पहाड़ी भूमि के लिये ऊटकमण्ड, चण्डीगढ़ तथा देहरादून में अनुसंधान केन्द्र स्थापित किये गये हैं।

योजनाओं के अन्तर्गत किये गये भूमि संरक्षण कार्य :- हमारे देश में विभित्र पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भूमि संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। प्रथम योजना में भूमि संरक्षण कार्य के लिये 1.6 करोड़ रु० व्यय किये गये, 10 क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र खोले गये। राजस्थान में सन् 1952 ई० में जोधपुर में एक मरुस्थल वृक्षारोपण तथा अनुसंधान केन्द्र खोला गया। लगभग 6 हजार हेक्टेयर भूमि पर सर्वोच्च बाँध बाँधे गये। 4000 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोफण किया गया तथा 1.89 लाख हेक्टेयर भूमि के संरक्षण के कार्यक्रम लागू किये गये।

द्वितीय योजना काल में इस कार्यक्रम पर 18 करोड़ रु० खर्च किये गये। महाराष्ट्र में लगभग 50 हजार हेंक्टेयर भूमि पर मेड़बन्दी की गई, 300 लाख हेक्टेयर भूमि का संरक्षण की दृष्टि से सर्वेक्षण किया गया। राजस्थान में जोधपुर के निकट ही चारागाहों के विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत 500 हेक्टयर भूमि में 55 बाड़े स्थापित करने का कार्य आरम्भ किया गया, जो सभी तैयार हो गये।

तृतीय योजना काल में 77 करोड़ रु० खर्च किया गया जिसमें 300 लाख हेक्टेयर भूमि पर मेड़बन्दी, 5.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर शुष्क खेती, नदी घाटियों में बने बाँधों को अधिक स्थायी बनाने, बाढ़ों को रोकने, भूमि कटाव पर नियन्त्रण, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने, औद्योगिक लकड़ी की माँग पूरा करने, भाखड़ा-नांगल, दामोदर, हीराकुण्ड तथा अन्य नदी-घाटी योजनाओं के कार्य, नमकीन ऊसर भूमि का पुनरुद्धार, मरुस्थलीय क्षेत्रों में चारागाह निर्माण एवं वृक्षारोपण क्रिया आदि कार्य किये गये।

सन् 1966 – 1969 ई० की तीन एकवर्षीय योजनाओं में भूमि संरक्षण कार्यक्रम पर 87 करोड़ रु० व्यय किये गये। चतुर्थ योजना में 161 करोड़ की लागत से 71 हेक्टेयर भूमि का सुधार किया गया।

पंचम योजना काल में 215 करोड़ रुपयों का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें बाढ़ क्षेत्रों से जल निकास, मध्यम वर्षा क्षेत्रों मे जल संचय, मरुस्थल विस्तार रोकने, नदी-घाटी क्षेत्रों के संग्रहण क्षेत्रों में भूमि संरक्षण आदि कार्य किये गये छठी योजना में इस मद पर 450 करोड़ रुपये रखे गये जिसमें भूमि के कटाव वाले क्षेत्रों में नालियों को भरने, कंटूरबंध बनाने, मेड़बन्दी करने, बाढ़ों को रोकने और भूमि क्षरण कार्यो में लगे कर्मियों को प्रशिक्षण देने के कार्य किए गए। अब तक (1984 – 1985 तक) 29.4 मि० हेक्टेयर भूमि का सुधार किया गया।

सातवीं योजना में 740.39 करोड़ रुपये व्यय किये गये, जिसके अन्तर्गत अतिरिक्त भूमि के कटाव को रोकने मिट्टी की उत्पादकता में वृद्धि करने के कार्यक्रम कार्यान्वित किये गये।

आठवीं योजना में 1600 करोड़ रुपये भूमि संरक्षण कार्यक्रम में खर्च करने का लक्ष्य रखा गया जिसके अन्तर्गत पश्चिमी भारत एवं दक्षिणी पठार के शुष्क एवं अर्द्धशुष्क प्रदेशों में भूमि संरक्षण हेतु क्षेत्रवार वनों की पट्टियाँ लगाने, सामाजिक वानिकी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने, समोच्च बन्द तथा मेड़बन्दी, वन क्षेत्र विस्तार, मरुभूमि, विकास कार्यक्रम एवं शुष्क क्षेत्र विकास एवं बाढ़ संरक्षण जैसे कार्य किये गये।

नवीं योजना में भी भूमि संरक्षण के कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। तीव्र गति से वनों का प्रतिशत बढ़ाना, नदी-घाटी क्षेत्रो का विकास सामाजिक वानिकी को आगे बढ़ाना जैसे अनेकानेक कार्य किये जा रहे हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 5 अपक्षय या विखण्डन

प्रश्न 10.
मिट्टी अपरदन से क्या समझते हो ? विभिन्न प्रकार के मिट्टी अपरदन का उल्लेख करो।
उत्तर :
भूमि को ऊपरी परत या आवरण के नष्ट होने को ही भूमि अपरदन कहते हैं।
प्राकृतिक शक्तियाँ जब किसी प्रदेश की भूमि के ऊपरी आवरण को नष्ट कर देती हैं तो उसे भूमि का कटाव भूमि अपरदन या भूमि अवक्रमण कहा जाता है। भूमि की ऊपरी उपजाऊ परत के नष्ट हो जाने से उस पर किसी भी प्रकार की वनस्पतियों का उगना दुष्कर हो जाता है, जिससे पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों का जीवन संकट में पड़ जाता है।

Types of soil erosion :- भूमि अपरदन निम्नलिखित प्रकार से होता है :-

परत अपरदन :- मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत जब वायु या जल द्वारा बहाकर या उड़ाकर ले जाई जाती है, तब इसके नीचे की अनुपजाऊ परत ऊपर निकल आती है। इस मिट्टी में फसले नहीं उग पाती हैं। जल के द्वारा अपरदन दो रूपों में होता है :-
(a) नालियों के रूप में (Gully erosion)
(b) स्तर के रूप में।

भारत में जल के द्वारा अपरदन हिमालय की तलहटी के सभी क्षेत्रों, असम, बंगाल, बिहार, झारखण्ड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हो रहा है। ढालों पर जल वर्षा से क्षरण होता है तथा तटीय भागों में लहरों के द्वारा भूमि क्षरण होता है, जैसे – केरल में। किसान इस मिट्टी को बंजर भूमि के रूप में प्राय: छोड़ देते हैं।

अवनालिका अपरदन :- जब जल नग्न भूमि पर तेजी से बहता है तो उसकी विभिन्न धारायें मिट्टी को कुछ गहराई तक काट डालती हैं जिससे जमीन पर छोटी-छोटी नालियाँ-सी बन जाती है और चारों ओर नालियों एवं धाराओं के हो जाने से एक जालीदार संरचना निर्मित हो जाती हैं, इसे ही अवनालिका अपरदन कहते हैं। यह ढालदार भूमि पर अधिक प्रभावी होता है। चम्बल क्षेत्र के बीहड़ अवनालिका अपरदन के उदाहरण हैं।

पवन द्वारा भूमि अपरदन :- रेगिस्तानी भागों में पवन द्वारा मिट्टी को उड़ा लिया ज्ञाता है जिससे उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो जाती है। पवन द्वारा अपरदन मुख्य रूप से राजस्थान में होता है।

हिम द्वारा भूमि अपरदन :- हिमानी क्षेत्रों में हिम-घर्षण से हिमानियाँ मलबा बहाकर घाटियों में जमा कर देती है जिससे भूमि क्षरण होता है। यह क्रिया हिमालय क्षेत्रों में ही मुख्यत: होती है।

रिल अपरदन :- जब परत अपरदन अधिक समय तक निर्बाध रूप से चलता रहता है, तो कटाव के फलस्वरूप भूमि की सतह पर अंगुलियों के समान, पतली-पतली नालियाँ-सी बन जाती हैं, जिनमें जल बहता रहता है। इस प्रकार के अपरदन को रिल अपरदन कहते हैं।

तटवर्ती अपरदन :- तीव गति से बहते जल का बहाव अपनी सतह की ऊँचाई तक नदी के किनारे की मिट्टी को काटता रहता है, जिससे ऊपर की मिट्टी ढहती है। तीव्र गति से बहने वाली नदियों के किनारे कगारों की मिट्टी ढहती रहती है। इस प्रकार के अपरदन को तटवर्ती अपरदन कहते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 4 भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 4 भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 4 Question Answer – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
वहिर्जात प्रक्रियाओं के दो कारण क्या हैं?
उत्तर :
गतिमान जल, हवा, हिमानी आदि।

प्रश्न 2.
अंतर्जात प्रक्रियाओं के एक कारक का नाम बताइए?
उत्तर :
पृथ्वी की आन्तरिक उष्मा।

प्रश्न 3.
किस प्रक्रिया के अन्तर्गत उच्च भाग वाह्य शक्ति से कट-छाटकर चौरस या समतल बनते हैं।
उत्तर :
निम्नीकरण (Digradation)

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 4 भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

प्रश्न 4.
पर्वतों के सबसे ऊँचे भाग को क्या कहते हैं?
उत्तर :
चोटी या शिखर (Peak) कहते हैं।

प्रश्न 5.
भारत के एक प्राचीन मोड़दार पर्वत का नाम लिखिए।
उत्तर :
अरावली

प्रश्न 6.
मोड़दार पर्वतों में नीचे की ओर घँसे हुए मोड़ों को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अभिनति (Syncline)

प्रश्न 7.
भारत के प्राचीन मोड़दार पर्वतों के नाम बताओ।
उत्तर :
अरावली एवं विन्ध्याचल।

प्रश्न 8.
विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी का क्या नाम है?
उत्तर :
माउन्ट एवरेस्ट।

प्रश्न 9.
हिमालय किस प्रकार के पर्वत का उदाहरण है?
उत्तर :
मोड़दार (वलित)।

प्रश्न 10.
अनावृत्ति के अन्तर्गत आनेवाली क्रिया का नाम बताइये।
उत्तर :
अनावृत्तिकरण (Denudation)

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 4 भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

प्रश्न 11.
प्रथम क्रम की एक धराकृति का नाम बताइए।
उत्तर :
महासागर और महाद्वीप

प्रश्न 12.
पहाड़, पठार, मैदान किस क्रम की स्थलाकृतियाँ है ?
उत्तर :
द्वितोय क्रम

प्रश्न 13.
जर्मनी का ब्लैक फररेस्ट किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
ब्लॉक पर्वत या गुटका पर्वत का अंशोत्य पर्वत।

प्रश्न 14.
भारत में स्थित एक भ्रंश घाटी का नाम लिखिए।
उत्तर :
नर्मदा घाटी।

प्रश्न 15.
ज्वालामुखी पर्वतों का आकार कैसा होता है?
उत्तर :
शंकुनुमा (Cone Shaped)

प्रश्न 16.
भूतल के कितने प्रतिशत भाग पर पठारों का विस्तार है?
उत्तर :
33 प्रतिशत

प्रश्न 17.
टेथिस क्या था?
उत्तर :
सागर।

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प्रश्न 18.
एक अन्तरापर्वतीय पठार का उदाहरण बताओ।
उत्तर :
तिब्बत का पठार ।

प्रश्न 19.
किसे विश्व की छत कहा जाता है?
उत्तर :
पामीर।

प्रश्न 20.
एण्डिज किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
नवीन मोड़दार पर्वत।

प्रश्न 21.
डेल्टा किस क्रम की स्थलाकृति है?
उत्तर :
तृतीय क्रम

प्रश्न 22.
जब कई पर्वत श्रेणियाँ क्रम से स्थित हो और सभी एक ही युग की बनी हो तो इसे क्या कहते है?
उत्तर :
पर्वत श्रेणी (Mountain range) या पर्वत प्रणाली

प्रश्न 23.
पर्वत प्रणाली का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हिमालय, हिन्दूकुश, आल्पस आदि।

प्रश्न 24.
किस भू-द्रोणी की कोख में हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ था?
उत्तर :
टेथिस सागर (Tythys Sea)

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प्रश्न 25.
तिब्बत का पठार किन पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ है?
उत्तर :
हिमालय एवं क्यूनलुन पर्वत से घिरा हुआ है।

प्रश्न 26.
भारत का प्रायद्वीपीय पठार किस प्रकार का पठार है?
उत्तर :
लावा निर्मित पठार।

प्रश्न 27.
लावा पठारों का निर्माण किन चट्टानों से हुआ है?
उत्तर :
बैसाल्ट चट्टानों से।

प्रश्न 28.
गंगा-सिंधु का मैदान किस प्रकार का मैदान है?
उत्तर :
जलोढ़ या नदी निर्मित मैदान।

प्रश्न 29.
हंगरी का मैदान किस प्रकार का मैदान है?
उत्तर :
झीलकृत मैदान (Lacustrine plain)

प्रश्न 30.
विश्व के सबसे प्राचीन मोड़दार पर्वत का नाम बताइए ।
उत्तर :
भारत का अरावली पर्वत।

प्रश्न 31.
ज्वालामुखी पर्वत का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
कोटापैक्सी (5897 मी०)

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प्रश्न 32.
ब्लैक फरिस्ट किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
अ्रंशोत्थ पर्वत या खंड पर्वत या संवर्ग पर्वत।

प्रश्न 33.
संसार का छत किस पठार को कहा जाता है?
उत्तर :
पामीर का पठार

प्रश्न 34.
अन्तःपर्वतीय पठार का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
तिब्बत का पठार

प्रश्न 35.
ब्लैक फारेस्ट किस प्रकार का पर्वत है?
उत्तर :
गुटका पर्वत या भरोत्थ पर्वत।

प्रश्न 36.
दक्षिण भारत का पठार किस प्रकार के पठार का उदाहरण हैं?
उत्तर :
लावा निर्मित पठार ।

प्रश्न 37.
भारत के एक श्रंशोत्य पर्वत का नाम बताओ।
उत्तर :
सतपुरा।

प्रश्न 38.
महाद्वीप, पर्वत, पठार आदि भू आकृति का निर्माण किस संचलन द्वारा होता हैं?
उत्तर :
पटल विरूपणी संचलन या दीर्घकालिक संचलन।

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प्रश्न 39.
पटल विरूपण के अन्तर्गत कौन सी घटनाएं सम्पिलित की जाती है?
उत्तर :
दीर्घकालिक घटनाएं।

प्रश्न 40.
धरातल पर उत्क्षेप (Uplift) एवं अवतलन (Subsidenes) किस गति द्वारा होता है?
उत्तर :
उर्ष्वाधर गति द्वारा

प्रश्न 41.
तनाव (Tension) एवं संपीडन (Compression) की क्रियाएँ किस गति से होती है?
उत्तर :
क्षैतिज गति (Horizontal movement) द्वारा

प्रश्न 42.
तनाव के कारण कौन-सी भू आकृति का निर्माण होता है?
उत्तर :
भूपटल भंग या अंश (Crustal Fracture) होता है।

प्रश्न 43.
संपीडन के कारण कौन-सी भू-आकृति का निर्माण होता है?
उत्तर :
वलन (Foids) पड़ते हैं ।

प्रश्न 44.
भूतल पर उत्पन्न विषमताओं को दूर कौन-सा बल करता है?
उत्तर :
बहिर्जात बल।

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प्रश्न 45.
बहिर्जात बलों का प्रमुख कार्य क्या है?
उत्तर :
अनाच्छादन (Denudation) ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
मोनेडनॉक (Monadnok) क्या है?
उत्तर :
नदियाँ अपने अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था में उच्च स्थलखंडों (पर्वतों, पठारों आदि) को काटकर मंद ढाल वाले समप्राय मैदानों का निर्माण करती हैं। ये मैदान पूर्ण रूप से समतल नहीं होते हैं, इनके यत्र-तत्र प्रतिरोधी चट्टानों के टीले या पहाड़ियाँ दिखायी देती हैं, जिन्हें मोनेडांक (Monadnok) कहते हैं।

प्रश्न 2.
पेडीमेण्ट प्लेन क्या है?
उत्तर :
कई पेडीमेण्ट के आपस में मिलने से निर्मित मैदान को पेडीमेण्ट प्लेन कहते हैं।

प्रश्न 3.
पर्वत किसे कहते हैं?
उत्तर :
स्थल का वह भाग जो अपने आस-पास के क्षेत्र से 1000 मीटर से भी अधिक ऊँचा हो जिसका आधार विस्तृत तथा शिखर संकीर्ण हो, पर्वत कहलाता है।

प्रश्न 4.
पर्वत श्रेणी एवं पर्वत शृंखला से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
पर्वत माला या श्रेणी या श्रृंखला (Mountain Chain) : जब विभिन्न प्रकार के लम्बे तथा सँकरे पर्वतों का विस्तार समानान्तर रूप में चला जाता है तो उसे पर्वत माला या पर्वत श्रेणी या पर्वत श्रृखला कहते हैं।

प्रश्न 5.
अनावृत्तिकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
बाह्य शक्तियों द्वारा घरातल की ऊँचाई-निचाई समाप्त कर उसे समतल बनाने का प्रयास में लगी समस्त प्रक्रियाओं को अनावृत्ति करण (Denudation) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
अपरदन की परिवहन क्रिया से क्या समझते हो?
उत्तर :
अपरदन के अन्तर्गत गतिशील, अभिकरण (Agents or erosion) जैसे नदी, हवा, हिमनदी, समुद्री तरंगे शिलाखण्डों का स्थानान्तरण करते हैं। अपक्षयित पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की क्रिया को परिवहन कहते हैं।

प्रश्न 7.
कार्डिलेरा या पर्वत समूह क्या है?
उत्तर :
कार्डिलेरा या पर्वत समूह (Mauntain System) : दो या दो से अधिक पर्वत श्रेणियों द्वारा एक ही युग में बने क्रम को पर्वत समूह कहते हैं।

प्रश्न 8.
भ्रंश घाटी क्या है?
उत्तर :
दीवार के समान किनारों वाली लम्बी और गहरी घाटियाँ जो भू-पटल में बड़ी-बड़ी दरारों के पड़ने से जिन घाटियों का निर्माण होता है उसे भंश घाटी (Rift Valley) कहते हैं।

प्रश्न 9.
पठारों को ‘खनिजों का भर्डार’ क्यों कहते हैं?
उत्तर :
प्राचीन चट्टानों से निर्मित होने के कारण पठार खनिज पदार्थो से सम्पन्न होते हैं। दक्षिणी भारत के पठारी भाग में लोहा, कोयला, मैगनीज, अभक, सोना आदि खनिज पदार्थो की अधिकता है। अतः पठारों को ‘खनिज का भण्डार’ कहते हैं।

प्रश्न 10.
अपरदनात्मक मैदानों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
भू-पटल पर उत्पन्न विषमताओं को समतल स्थापक शक्तियाँ (नदी, हिमनद, पवन, सागरीय लहरें) दूर करने का प्रयास करती है। जिससे उत्थित स्थलखण्ड एक सपाट एवं आकृतिविहित मैदान का आकार ग्रहण कर लेते हैं। जिन्हें अपरदनात्मक मैदान (Erosional Plain) कहते हैं।

प्रश्न 11.
अवशिष्ट पर्वत के दो उदाहरण दो ।
उत्तर :
भारत का अरावली पर्वत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का मोनेडनाक पर्वत अवशिष्ट पर्वतें है।

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प्रश्न 12.
विछिन्न पठार के दो उदाहरण दें।
उत्तर :
भारत के छोटानागपुर का पठार एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलोरेडो का पठार विछ्धिन्न पठार के उदाहरण हैं।

प्रश्न 13.
पेनीप्लेन क्या है?
उत्तर :
नदियों के अपरदन द्वारा निर्मित मैदानों में सर्वप्रमुख पेनीप्लेन या समपदाय मैदान है। नदियाँ अपने अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था में उच्च स्थल खण्ड (पहाड़, पठार आदि) को काटकर अपने आधार-तल को प्राप्त कर लेती है। इस तरह से निर्मित मैदान को पेनीप्लेन या समप्राय मैदान कहते हैं।

प्रश्न 14.
द्वितीय क्रम की स्थलाकृतियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
महाद्वीपों पर उच्यावच के विचार से तीन म्रधान स्थल रूप देखने को मिलते हैं। वे हैं – पहाड़, पठार और मैदान। निर्माण के विचार से ये तीनों भिन्न स्थलाकृतियाँ उपस्थित करते है। ये द्वितीय क्रम की स्थलाकृतियाँ हैं।

प्रश्न 15.
पर्वत प्रणाली से क्या समझते हो?
उत्तर :
जब कई पर्वत श्रेणियाँ क्रम में स्थित हों और सभी एक ही युग की बनी हो उनसे पर्वत प्रणाली (Mountain Range) का निर्माण होता है।

प्रश्न 16.
नवीन मोड़दार पर्वत की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर :
नये या नवीन मोड़दार पर्वत (Young Fold Mountain) पर्वत निर्माण की नवीनतम प्रक्रिया में निर्मित पहाड़ों को नये मोड़दार पर्वत कहते हैं। इनका निर्माण अल्पाइन संचलन अवधि में हुआ है। हिमालय, आल्पस, रॉकी एवं एण्डीज नये मोड़दार पर्वत है।

प्रश्न 17.
अपरदित पठार की उत्पत्ति सोदाहरण लिखिए।
उत्तर :
जब उच्च पर्वतीय भाग बाह्य शक्तियों द्वारा लगातार घर्षित होकर निम्न भूमि में परिवर्तित हो जाता है और पठार का रूप धारण कर लेता है तो इस प्रकार के पठार को अपरदित या विच्छेदित या घर्षित पठार (Dissected Plateaus) कहा जाता है। कभी-कभी पठारी भाग में अधिक अपरदन होने से वहाँ अन्तर्भेदी आग्नेय चट्टानें (जैसे ग्रेनाइट) उभर आती है। दक्षिण भारत के मैसूर और राँची क्षेत्रों में इसी प्रकार के पठारों का निर्माण हुआ है।

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प्रश्न 18.
हिमानी घर्षित मैदान किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हिमानी घर्षित मैदान (Glacial Plain) : हिमनद और हिमावरण से ढँके क्षेत्रों में जब हिमानी की घर्षित क्रिया से भूमि चौरंस होकर मैदान का रूप ले लेती है तो उसे हिमानी घर्षित मैदान कहते हैं। जैसे-फीनलैण्ड, स्वीडेन और कनाडा में।

प्रश्न 19.
दो लावा पठारों के नाम लिखों?
उत्तर :
भारत के दक्कन के पठार एवं संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया पठार लावा निर्मित पठार के उदाहरण है।

प्रश्न 20.
संरचनात्मक मैदानों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
संरचनात्मक मैदानों (Structural Plain) का निर्माण महादेशीय संचलन (Epeirogenetic movement) के कारण भूपटल में उत्थान (Uplift) तथा अवतलन (Subsidenece) अथवा सागर तल के निर्गमन (Emergence) या निमज्जन (Submergence) के फलस्वरूप होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के महान मैदान तथा रूसी प्लेटफार्म का निर्माण महादेशीय संचलन के अन्तर्गत उत्थान के कारण ही हुआ है।

प्रश्न 21.
निक्षेपात्मक मैदान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
अपरदन के कारकों द्वारा धरातल के किसी भाग से अपरदित पदार्थों को परिवहित कर के अन्यत्र निक्षेपित करते रहो से निक्षेपात्मक मैदानों (Deposional Plain) का निर्माण होता है।

प्रश्न 22.
लोयस मैदान एवं लावा मैदानों का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर :
लोयस मैदान – लोयस मैदानों का निर्माण मरूस्थलीय प्रदेशों से बहुत दूर पवन द्वारा उड़ा कर लायी गयी मिट्टी के महीन कणों के निक्षेपण से होता है।
लावा मैदान – ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाला लावा जब निचले भागों में पतले चादर के रूप में निक्षेपित होता है तो लावा मैदानों का निर्माण होता है। लावा पठारों के अपरदन से प्राप्त अवसादों का निक्षेपण नदियों द्वारा अन्यत्र स्थानों पर किए जाने से भी लावा मैदानों का निर्माण होता है।

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प्रश्न 23.
जलोढ़ पंख से क्या समझते हो?
उत्तर :
जहाँ पर नदी पहाड़ी भाग से उतरकर निचले भाग में प्रवेश करती है, वहाँ पर ढाल में अचानक कमी आ जाने के कारण नदी अपने साथ लाए गए बड़े-बड़े टुकड़ों वाला मलवा आगे नहीं ले जा पाती है। फलस्वरूप पर्वतों या पहाड़ियों के पाद के पास उसका निक्षेप होने लगता है, जिससे जलोढ़ पंख (Alluvial Fan) का निर्माण होता है।

प्रश्न 24.
मेसा क्या है?
उत्तर :
प्राचीन कठोर शैलों वाले पठारों पर अपरदन की अधिकता के कारण मेज के आकार की सपाट संरचनाएँ दृष्टिगोचर होती है, जिन्हें मेसा कहते हैं।

प्रश्न 25.
टेथिस सागर कहाँ पर स्थित था?
उत्तर :
आज से लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले हिमालय के स्थान पर टेथिज सागर था।

प्रश्न 26.
अवशिष्ट पर्वत के धरातलीय स्वरूपों का उदाहरण दें।
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत (Residual or Relict Mountain) : भारत में अरावली, यूरोप में यूराल, स्काटलैण्ड की पहाड़ियाँ और नेनाइन श्रेणी, संयुक्त राज्य अमेरिका के मोनॉडनक अवशिष्ट पर्वत के उदाहरण है।

प्रश्न 27.
विभाजित पठार के धरातलीय स्वरूपों का उदाहरण दें।
उत्तर :
विभाजित पठार (Dissected Plateau) : वेल्स, स्कॉटलैण्ड, छोटानागपुर, कर्नाटक के मालनद तथा मेघालय के पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलोरेडो तथा कनाडा का लारेशियन पठार विभाजित पठार है।

प्रश्न 28.
बजाडा क्या है?
उत्तर :
बजाडा पेडीमेण्ट के नीचे का भाग है। यहाँ पर बहकर आये पदार्थ व रेत जमा होते रहते हैं। यह वायु एवं पानी के कटाव एवं जमाव क्रिया द्वारा निर्मित होता है। इनका ढाल धीमा किन्तु लहरदार होता है। इनका निर्माण मोटे व महीन कणों के मिश्रण की अलग-अलग मोटाई की परतों के जमा होने से होता है। यहाँ कृषि कार्य एवं पशुपालन किया जाता है।

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प्रश्न 29.
ओरोगेनी से क्या समझते हो?
उत्तर :
ओरोगेनी ग्रीक भाषा के दो शब्दों के मेल से बना है जिसमें ओरो का अर्थ पर्वत तथा गेनी का अर्थ निर्माण होता है। अर्थात पर्वत निर्माण । ओरोगेनी वह प्राथमिक क्रियाविधि है जिसके द्वारा पर्वतों का निर्माण किया जाता है।

प्रश्न 30.
प्राकृतिक तटबंध से क्या समझते हो ?
उत्तर :
प्राकृतिक तट बाँध (Natural Levee) : बाढ़ के समय मैदानी भाग में मिट्टी का जमाव अधिक होता है। यह कालान्तर में आस-पास की भूमि से अधिक ऊँचा हो जाता है। ये बाँध के समान होते हैं। इन्हें तट बाँध कहते हैं। चूँकि ये बाँध प्रकृति द्वारा बनाये जाते हैं तथा इनसे बाढ़ के समय सुरक्षा होती है, अतः इस तट बाँध को प्राकृतिक तट बाँध (Natural Levee) कहते हैं।

प्रश्न 31.
भू-आकृतिक देहली (Geomorphic Threshold) से क्या समझते हो?
उत्तर :
भू आकृति विज्ञान में वह स्थल या बिन्दु जहाँ बाह्य प्रभावी कारकों में परिवर्तन के अभाव में अथवा बाह्य प्रभावी कारकों में प्रगामी परिवर्तनों द्वारा स्थलरूपों में एकाएक परिवर्तन होता है, उसे भू-आकृतिक देहली (Geomorphic Threshold) कहते हैं।

प्रश्न 32.
भ्रंश या दरार क्या है?
उत्तर :
भ्रंश या दरार (Fault) : पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण जब किसी मैदान या पठार की चट्टानों पर दो विपरीत दिशाओं से दबाव या तनाव पड़ता है, तो कभी-कभी चट्टाने मुड़ने के बजाय टूट जाती हैं और उनमें दरारे पड़ जाती है, इन्हीं दरारों को भ्रंश कहते है।

प्रश्न 33.
पैंजिया क्या है?
उत्तर :
पैंजिया (Pangea) : प्राचीनकाल से सभी महाद्वीप एक साथ जुड़े हुए थे। इसे पैंजिया कहते हैं। भू-हलचल की प्रक्रिया द्वारा इन महाद्वीपों का प्रवाह हुआ और ये ट्ट कर अलग होते चले गए और वर्तमान क्रम में स्थापित हुए।

प्रश्न 34.
अंगारालैण्ड और गोण्डवाना लैण्ड क्या है?
उत्तर :
अंगारालैण्ड और गोण्डवाना लैण्ड (Angera and Gondwana Land) : टेथिस सागर के उत्तर स्थित भू-भाग को अंगारालैण्ड एवं टेथिस सागर के दक्षिण स्थित भू-भाग को गोण्डवाना लैण्ड कहा जाता है जो वर्तमान में प्रायद्वीपीय भारत में है।

प्रश्न 35.
अपनति एवं अभिनति क्या है?
उत्तर :
अपनति (Anticline) : भू-पटल के आन्तरिक बल व क्षैतिज संचलन द्वारा चट्टानों में बलन (Folds) पड़ जाते हैं। वलन के ऊपर उठे भाग को अपनति कहते हैं।
अभिनति (Syncline) : सम्पीडन के कारण जब चट्टानो के भाग नीचे की ओर मुड़ जाते हैं तो इसे अभिनति बलन कहते हैं।

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प्रश्न 36.
सममित और असममिति वलन क्या है?
उत्तर :
सममति वलन (Symmetrical folds) – जब किसी वलन की दोनों भुजाओं का घ्युकाव या कोण बराबर हो तो उसे सममति वलन कहते हैं।
असममति वलन (Asymmetrical folds) – जब वलन की दोनों भुजाओं की लम्बाई या झुकाव का कोण बराबर हो तो उसे सममति वलन कहते हैं।

प्रश्न 37.
पहाड़ी (Hill) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पहाड़ी (Hiil) स्थल का वह भाग जो अपने आस-पास के क्षेत्र से 300 मीटर से अधिक परन्तु 1000 मीटर से कम ऊँचा हो, पहाड़ी कहलाती है। जैसे बिहारीनाथ ( 450 मी०) शिशुनिय ( 440 मी०) बाघमुण्डी ( 677 मी॰) आदि।

प्रश्न 38.
भूद्रोणी (Geo Synclines) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के उन अधिक लम्बे किन्तु कम चौड़े और उथले सागरों को भूद्रोणी (Geo Synclines) कहते हैं। टेथिस सागर (Tethys Sea) इसका एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न 39.
प्लेटों की गति का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर :
प्लेटों की गति का मुख्य कारण रेडियो सक्रिय तत्वों से निकली ताप के फलस्वरूप उत्पन्न संवाहनिक धाराएँ हैं।

प्रश्न 40.
रचनात्मक प्लेट किनारा क्या है ?
उत्तर :
जब दो प्लेटें एक दूसरे से विपरीत दिशा में गतिशील होती है तो उनके किनारे अपसारी या रचनात्मक प्लेट किनारा (Constructive Plate Margines) कहलाता है।

प्रश्न 41.
अभिसारी या विनाशात्मक प्लेट किनारा (Destructive Plate Margines) किसे कहते हैं?
उत्तर :
जब दो प्लेट एक दूसरे के निकट आकर आपस में टकराते हैं तो उनके किनारों को विनाशात्मक प्लेट किनारा (Destructive Plate Margines) कहते हैं।

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प्रश्न 42.
संरक्षी प्लेट किनारा (Conservative Plate Margines) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जहाँ दो प्लेट एक दूसरे के अलग-बगल सरक जाते हैं तो वहाँ रूपान्तर भंश का निर्माण होता है। ऐसे प्लेट को संरक्षी प्लेट किनारा कहते हैं।

प्रश्न 43.
पर्वत कटक (Mountain Ridge) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पर्वत कटक (Mountain Ridge) : लम्बे, सँकरे एवं ऊँचे पर्वतों के क्रमबद्ध स्वरूप को पर्वत कटक (Mountain Ridge) कहते हैं।

प्रश्न 44.
पर्वत श्रेणी (Mountain Range) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पर्वत श्रेणी (Mountain Range) : एक ही काल एवं एक ही प्रक्रिया द्वारा बने पर्वतों एवं पहाड़ियो का ऐसा क्रम जिसमें कई शिखर, कटक, घाटियाँ आदि सम्मिलित हों, पर्वत श्रेणी कहलाते हैं। ये एक सीध में सँकरी पट्टी के रूप में फैले होते हैं, जैसे-हिमालय पर्वत श्रेणी।

प्रश्न 45.
पर्वत श्रृंखला (Mountain Chain) किसे कहते हैं?
उत्तर :
विभिन्न युगों में निर्मित लम्बे एवं सँकरे पर्वतों का समानान्तर विस्तार पर्वत शृंखला या पर्वतमाला कहलाता है। जैसे-अप्लेशियन पर्वतमाला।

प्रश्न 46.
पर्वत तन्र (Mountain System) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पर्वत तन्त्र (Mountain System) : एक ही युग में निर्मित विभिन्न पर्वत श्रेणियों के समूह को पर्वत प्रणाली या पर्वत तन्न (Mountain System) कहते हैं।

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प्रश्न 47.
कार्डिलेरा या पर्वत समूह (Cordillera) किसे कहते हैं?
उत्तर :
कार्डिलेरा या पर्वत समूह (Cordillera) : जब विभिन्न युगों में निर्मित पर्वत श्रेणियाँ, पर्वत शृंखलाएँ तथा पर्वत तंत्र एक ही साथ बिना किसी क्रम के विस्तृत होते हैं तो इन्हें कार्डिलेरा कहा जाता है, जैसे- उत्तरी अमेरिका का प्रशान्त कार्डिलेरा।

प्रश्न 48.
बुट्टी (Butte) किसे कहते हैं?
उत्तर :
पठारों पर स्थित सपाट शिखर वाली लघु पहाड़ियाँ जो प्रतिरोधी शैल स्तरों से ढॅकी रहती है, बुट्टी (Butte) कहलाती है।

प्रश्न 49.
हमादा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
मरूस्थलीय प्रदेशो में पवन के अपघर्षण से नग्नीकृत चद्टानों के सपाट भाग जो अधिक विस्तृत होते है, हमादा कहलाते हैं।

प्रश्न 50.
पेडीमेण्ड (Pediment) किसे कहते हैं?
उत्तर :
मरूस्थलीय प्रदेशों में पर्वतों या पठारों के अग्रढाल पर जल के अपरदन से निर्मित अवतल ढाल वाले स्थलरूप को पेडीमेण्ट (Pediment) कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
प्राचीन मोड़दार पर्वत एवं नवीन मोड़दार पर्वत के बीच अंतर लिखिए।
उत्तर :
प्राचीन मोड़दार पर्वत :

  1. बहुत समय पहले इन पर्वतों का निर्माण हुआ है।
  2. अपक्षरण एवं विखण्डन की क्रियाओं का अधिक प्रभाव इन पर पड़ा है।
  3. इन पर्वतों पर कठोर चट्टाने मिलती हैं क्योंकि कोमल चट्टाने तो कट कर हट गयी है।
  4. ये कम ऊँचे होते हैं।
  5. इनके शिखर कुछ गोल होते हैं।

नवीन मोड़दार पर्वत :

  1. नवीन मोड़दार पर्वतों का निर्माण अपेक्षाकृत बाद में हुआ है।
  2. इन पर अपक्षरण एवं विखण्डन की क्रियाओं का कम प्रभाव पड़ा है।
  3. इन पर्वतों पर कोमल चट्टाने मिलती हैं।
  4. ये अधिक ऊँचे होते हैं।
  5. इनके शिखर नुकिले होते हैं।

प्रश्न 2.
ज्वालामुखी पर्वत एवं अवशिष्ट पर्वत में अंतर लिखो।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत :

  1. इनका निर्माण भू-गर्भ से निकलने वाले मैग्मा के ठण्डा तथा जमकर ठोस होने से होता है।
  2. इसमें शिखर की आकृति शक्वाकार होती है, जिसे क्रेटर कहा जाता है।
  3. ये अधिक ऊँचे होते हैं।
  4. ये पृथ्वी के आन्तरिक क्रिया के फलस्वरूप बनते हैं।
  5. ये विनाशकारी क्रियाओं से बने हैं।

अवशिष्ट पर्वत :

  1. इनका निर्माण किसी ऊँचे पर्वत के कटने, छँटने, घिसने तथा टूटने से होता है।
  2. इसका ऊपरी हिस्सा समतल या उबड़-खाबड़ होता है।
  3. ये कम ऊँचे होते हैं।
  4. इनका निर्माण बाहरी अपरदनकारी शक्तियों के वर्षा, ताप, पाला आदि से क्रिया होता है।
  5. ये निर्माणकारी क्रियाओं से बने हैं।

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प्रश्न 3.
ज्वालामुखी पर्वत के भेद को उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत के तीन भेद है –

  1. सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcanoes)
  2. प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dorment Volcanoes)
  3. शान्त ज्वालामुखी (Extinct Volcanoes)।

प्रसुत ज्वालामुखी पर्वत उसे कहते हैं जिसके मुख से आग, राख धुँआ आदि निकला करता है । जैसे – इटली का एटना।
प्रसुप्त ज्वालामुखी पहाड़ उसे कहते हैं जो बहुत दिन तक शान्त रहने के बाद अचानक किसी समय भड़क उठता है, जैसे जापान का फ्यूजीयामा।
मृत या शान्त ज्वालामुखी पहाड़ वे है जो हमेशा के लिए शान्त हो गये हैं। उसमें कभी भी उद्गार की आशा नहीं रह गई है। जैसे- म्यॉमार का पोपा।

प्रश्न 4.
अवशिष्ट पर्वत में ऊँची चोटियाँ क्यों नहीं पाई जाती है?
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत का निर्माण विखण्डन एवं अपक्षरण की क्रियाओं द्वारा होता है। इनके द्वारा प्राचीन पठारों एवं ऊँचेऊँचे पर्वत भी घिसकर-कटकर छोटे हो जाते हैं। कालान्तर में ये पर्वत घिस कर पठार बन जाते हैं। इस तरह इसकी ऊँचाई घटती जाती है और इनमें चोटियाँ नहीं पायी जाती है।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी पर्वत को संग्रहीत पर्वत भी कहते हैं, क्यों?
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत संचयन या निक्षेपण से बने पर्वत हैं। इनका निर्माण ज्वालामुखी उद्गार से निकले पदार्थों, शिल खण्डों एवं लावा के लगातार जमाव और पर्वत रूप लेने से होता है। ज्वालामुखी नली या द्वार के सहारे पिघली चट्टान (लावा) बाहर निकल कर धरातल पर फैल जाती है और शंकु की तरह जमा होकर कोणाकार पर्वत बनाती है। यदि शिला खण्डों की अधिकता हुई तो, ऐसे पर्वत का ढाल तीव्व होगा और यदि लावा की अधिकता हुई तो ढाल क्रमिक होगा ज्वालामुखी की क्रिया से निकलने वाले पदार्थों के संग्रह से निर्मित होने के कारण ज्वालामुखी पर्वत को संग्रहीत पर्वत भी कहा जाता है।

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प्रश्न 6.
मोड़दार पर्वत में क्यों जीवाश्म पाये जाते हैं?
उत्तर :
मोड़दार पर्वत में समुद्री जीव-जन्तुओं के अवशेष पाये जाते है। इन पर्वतों का निर्माण उथले समुद्रों से हुआ है। इनकी चट्टानों में छिछले सागर में रहने वाले जीवों के जीवाश्म पाये जाते हैं। नदियाँ समुद्रों में तरह-तरह के जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों के सड़े-गले अवशेषों को मलबे के साथ समुद्रों में तह के ऊपर तह के रूप में जमा करती हैं। यही कारण है कि मोड़दार पर्वतों में जीवाश्म पाये जाते हैं।

प्रश्न 7.
गुम्बदाकार पर्वत को वर्षा का द्वीप क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
गुम्बदाकार पर्वत पृथ्वी के धरातल पर फोड़े की तरह पैदा होते हैं तथा जो मैग्मा के नीचे से ऊपर उठने के कारण बन जाते हैं। कभी-कभी मेग्मा धरातल पर न आकर मैदानों के अन्दर परतदार चट्टानों में ही जमा हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में वहाँ की चट्टाने गुम्बदाकार हो उठती हैं। ये गुम्बद के केन्द्र से बाहर की ओर समान रूप से ढालू बने रहते हैं जिनमें वर्षा के बादल टकराकर पर्याप्त मात्रा में वर्षा करते हैं । इन गुम्बदों पर अधिक वर्षा होती है। अतः इन्हे वर्षा के द्वीप (Island of precipitation) कहा जाता है।

प्रश्न 8.
पहाड़ी भागों पर जनसंख्या का घनत्व कम क्यों होता है?
उत्तर :
पर्वतीय भागों में जनसंख्या का घनत्व कम है, इसका मुख्य कारण निम्नलिखित है –

  1. पर्वतों की बनावट अनिश्चित होती है।
  2. इनकी घाटियाँ संकरी होती है।
  3. मिट्टी की पतली तह कृषि कार्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है।
  4. यातायात के साधनों का सर्वथा अभाव रहता है।
  5. कृषि उद्योग का स्थान नगण्य है।
  6. जलवायु की विषमता के कारण आबादी घनी नहीं है।
  7. समतल भूमि की कमी है। इन्हीं सब कारणों से इन प्रदेशों में आबादी बहुत कम रहती है।

प्रश्न 9.
मोड़दार या वलित पर्वत की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
वलित पर्वत की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. ये भू-तल के नवीनतम पर्वत है, जिनमें विश्व की उच्चतम चोटियाँ पाई जाती है।
  2. इनका निर्माण अवसादी चट्टानों में दबाब पड़ने से मोड़ पड़ने के कारण हुआ है।
  3. इन पर्वतों की चट्टाने जलज हैं अर्थात् इनका निक्षेप जलीय भागों में हुआ था। इनमें सागरीय जीवों के अवशेष पाये जाते हैं।
  4. वलित पर्वतों में तल-छट का जमाव अत्यधिक गहरे सागर के साथ ही उथले सागर में भी हुआ है।
  5. वलित पर्वतों का विस्तार लम्बाई में अधिक परन्तु चौड़ाई में बहुत कम होता है। हिमालय का विस्तार पश्चिम से पूरब दिशा में 1,500 मील की लम्बाई तथा उत्तर से दक्षिण 250 मील की चौड़ाई में पाया जाता है।
  6. वलित पर्वत चाप के आकार में पाये जाते हैं, जिनका एक ढाल अवतल तथा दूसरा ढाल उत्तल होता है, जिधर से दबाव की शक्ति का आगमन होता है।

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प्रश्न 10.
गुटका पर्वत और भ्रंशघाटी का निर्माण आपस में संबंधित है, स्पष्ट कीजिए?
उत्तर :
अवरोधी या ब्लॉक पर्वत का निर्माण तनाव या खिंचाव की शक्तियों की क्रियाशीलता के कारण होता है । खिचाव के कारण भू-पटल पर दरारें या भंश पड़ जाती हैं, जिसके कारण धरातल का कुछ भाग ऊपर उठ जाता है तथा कुछ भाग नीचे घंस जाता है। ऊपर उठे भाग के अवरोधी या ब्लोंक पर्वत कहते हैं तथा नीचे धंसे भाग जो प्रंश दरार या भ्रंश के कारण होता है, अतः इसे प्रंशोत्थ पर्वत भी कहते हैं। ये प्राय: दो समानान्तर भागों दूसरों के बीच स्थित होते हैं। इस प्रकार ब्लॉक पर्वत का निर्माण धरातलीय भागों में प्रंश पड़ने के कारण होता है। अत: ब्लॉक पर्वत्तें एवं भ्रंश घाटियों का आपस में अन्तर्सम्बन्य है।

प्रश्न 11.
भूसन्नति सिद्धांत क्या है?
उत्तर :
भूसन्नति सिद्धांत : पर्वत निर्माण संबंधी समस्याओं की व्याख्या हेतु कोबर महोदय ने भूसन्नति सिद्धांत का प्रांतपादन किया। वे एक जर्मन भूगर्भशास्त्री थे जिन्होंने बताया कि पर्वतों की उत्पत्ति भूसन्नति के गर्भ में होती है। उनकी मान्यता थी कि मोड़दार पर्वतों का निर्माण धरातल के संकुचन का परिणाम है। कोबर का सिद्धांत निम्नलिखित तीन मान्यताओं पर आधारित है।
(i) पर्वत की उत्पत्ति एक भूसन्नति या छिछले सागर में होती है।
(ii) इस भूसन्नति में नदियों द्वारा अनवरत मलवा निक्षेपण होता रहा और उनमें धँसान भी हुआ।
(iii) तीसरी मान्यता है कि भूसन्नति में होने वाले अवतलन क्रिया में चट्टानों में संकुचन हुआ और इस संकुचन से भू-सन्नति में निक्षेपित मलवे मुड़कर मोड़दार पर्वत के रूप में परिवर्तित हुए।

वस्तुत: भूसन्नति का मलवा ही मोड़दार पर्वत के रूप में उत्थित होगा। परन्तु सभी मलवों में मोड़ नहीं पड़ता है। भूसन्नति के दोनों किनारे वाले मलवे सबसे पहले मुड़कर पर्वत बनते हैं। बीच में स्थित मलवा बिना मुड़े ऊपर उठ जायेगा। जिसे मध्य पिण्ड (Medium Mass) कहते हैं। तिब्बत, हंगरी का मैदान ऐसे ही मध्य पिण्ड के उदाहरण हैं।

प्रश्न 12.
प्रशान्त महासागर की आग की अंगुठी क्या है?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर की आग की अंगुठी (Pacific Ring of Fire) : विश्व के मानचित्र का अध्ययन करने पर हम यह पाते हैं कि ज्वालामुखी पर्वतों का एक वितरण प्रशान्त महासागर के चारों तरफ गोलाई में फैला हुआ है। इसे प्रशान्त महासागर की आग की अंगुठी (Ring of Fire) कहते हैं।

प्रश्न 13.
खण्ड पर्वत का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
खण्ड पर्वत या गुटका पर्वत या संवर्ग पर्वत (Block or Faulted Mountain) : पृथ्वी के बाह्य और आंतरिक शक्तियों के अचानक तनाव के कारण जब प्रस्तरित चट्टानें (Śtratified Rocks) टूट जाती हैं तो इनमें दरारें यड़ जाती हैं। जिस रेखा के सहारे ये टूटती है उसे Fault Line कहते हैं। इन दरारों के बीच का भूखण्ड कभी उठकर ऊपर चला जाता है तो कभी खिसक कर नीचे चला जाता है। ऐसी हालत में ऊपर उठा भू-भाग पर्वत के रूप में दिखाई पड़ता है, जिसे संवर्ग पर्वत (Block or Faulted Mountain) कहते हैं। संसार में मोड़दार पर्वत की अपेक्षा संवर्ग पर्वत कम है।
उदाहरण – यूरोप में हार्ज पर्वत, वॉसजेज (फ्रांस) ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी) तथा पाकिस्तान का साल्ट रेंज (Salt Pange) इसी प्रकार के पर्वत हैं।

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प्रश्न 14.
वलित पर्वत की विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर :
वलित या मोड़दार पर्वत की विशेषताएँ – (The Characteristics of Fold Mountains)

  1. मोड़दार पर्वत अत्यधिक लम्बाई में पाये जाते हैं। इनकी चौड़ाई लम्बाई की अपेक्षा बहुत कम होती है।
  2. ये प्राय: धनुषाकार या चापतुल्य होते हैं।
  3. इनका निर्माण छिछले सागर या भूसन्नतियों में और तलछटी परतदार चट्टानों से हुआ है।
  4. मोड़दार पर्वत में चट्टानों की परतें मुड़ी हुई तथा भ्रंशित होती है।
  5. इन पर्वतों की चट्टानों में छिछले सागर में रहने वाले जीवों के जीवाश्मा (Fossils) पाए जाते हैं।
  6. विश्व के सर्वोच्च शिखर मोड़दार पर्वत में ही जाए जाते हैं।

प्रश्न 15.
ज्वालामुखी पर्वत क्या है?
उत्तर :
इन पर्वतों का निर्माण ज्वालामुखी (Vent) के उद्गारों के साथ निकले पदार्थों के उसके चारों ओर जमा हो जाने से होता है। ज्वालामुखी उद्गारों में लावा शिलाखण्ड राख, धूल, कीचड़, ज्वालामुखी बम और सिंडर जैसे पदार्थ निकलते हैं। ये पदार्थ परत- दर-परत एक शंकु की आकृति में जमा हो जाते हैं। कालांतर में शंकु एक पर्वत जैसा बन जाता है। ये पर्वत पदार्थों के जमा होने से बनते हैं। अतः इन्हें संचयित पर्वत भी कहते हैं।

प्रश्न 16.
ज्वालामुखी पर्वत के तीन उदाहरण दो।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत के उदाहरण है – जापान का फ्यूजीयामा (Fujiyama), अफ्रीका के केनिया व किलिमांजरों (Kilimanjaro), इटली का विसूवियस (Visuvious) तथा एटना एवं बर्मा का पोपा है।

प्रश्न 17.
संग्रहित पर्वत से क्या समझते हो?
उत्तर :
ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाले लावा, राख शिलाखण्ड चट्टानों के चूर्ण आदि पदार्थ उसके मुँह (Crater) के चारों ओर शंकु (Cone) के आकार में जमा हो जाते हैं जिससे ज्वालामुखी पर्वत बन जाता है। ये त्रिकोणाकृति के होते है तथा इनका ऊपरी भाग कीप (Funnel) के आकार का होता है। ज्वालामुखी के पदार्थों के संग्रह से निर्मित होने के कारण ज्वालामुखी पर्वत को संग्रहित पर्वत (Mountains of Accumulation) कहते हैं।

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प्रश्न 18.
भ्रंशोत्थ पर्वत की विशेषताओं को उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
श्रंशोत्य या खण्ड पर्वत की विशेषताएँ (The Characteristics of Block Mountains):

  1. खण्ड पर्वत मोड़दार पर्वतों की अपेक्षाकृत छोटे होते हैं और इनका विस्तार सीमित क्षेत्रों में होता है।
  2. खण्ड पर्वत आकार में प्राय: सीधे होते है तथा भ्रंशन के कारण उपालंब बनाते हैं।
  3. इन पर्वतों का निर्माण पहाड़ी क्षेत्रों में होता है, चाहे वह मोड़दार पर्वत का क्षेत्र हो या पठारी क्षेत्र हो।
  4. खण्ड पर्वतों के निर्माण में मुख्यत: तनाव बल (Tensional force) काम करता है। यद्यपि कहीं-कहीं पार्शिवक दबाव या संपीडन बल (Compressional force) भी काम करता है।
  5. इनका निर्माण चट्टानों के दरार अथवा भ्रंशन से होता है न कि उनके मुड़ने से।
  6. विश्व में खण्ड पर्वत बहुत कम पाये जाते हैं।

प्रश्न 19.
पर्वत क्या है? पर्वत के निर्माण के लिए तीन कारकों का उल्लेख करें।
उत्तर :
पर्वत (Mountain) : पर्वत धरातल के वे ऊँचे उठे भू-भाग हैं जो अपने आस-पास की भूमि से काफी ऊँचे उठे हुए हैं। इनमें चोटियाँ पायी जाती है। इनके शिखर का क्षेत्रफल आधार के क्षेत्रफल से बहुत कम होता है। इनका निर्माण आन्तरिक हलचलों से होता है तथा इसकी औसत सागर तल से ऊँचाई 2000 मीटर से 3000 मीटर होती है।

पर्वत निर्माण के कारण (Factors) :

  1. मलवे का सागर की तलहटी में जमा होना।
  2. भू हलचल के द्वारा पर्वत निर्माणकारी गति (Orogenic Movement) का सक्रिय होना।
  3. भू-पृष्ठ पर बलन एवं भंश का निर्माण होना।

प्रश्न 20.
पठार किसे कहते हैं ? पठारों के निर्माण के लिए किन्हीं तीन कारकों का उल्लेख करें?
उत्तर :
पठार (Plateau) : पठार धरातल का विस्तृत ऊँचा भू-खण्ड है, जो समुद्रतट से एकदम ऊँचा उठ गया है। पठार का शीर्ष लगभग सपाट होता है। इसके किनारे खड़े ढाल वाले होते हैं । पठारो के शीर्ष का क्षेत्रफल आधार से अधिक होता है। कुछ पठारों का संस्तर कभी-कभी हुका हुआ रहता है।
पठारों के निर्माण के कारक (Factors) :

  1. उच्च-ऊँचाई – साधारणतया एक पठार की ऊँचाई अधिक होती है।
  2. क्षैतिज चट्टान स्तर – पठारों में उँचाई के साथ क्षैतिज चट्टान स्तर होता है।
  3. भू हलचल एवं धरातल का उठना।
  4. ज्वालामुखी क्रिया एवं संग्रहण के कारण पठार का निर्माण आदि।
  5. ऊँचे उठे भू-भाग का अपरदन के कारको द्वारा विखण्डित होना।

प्रश्न 21.
उदाहरण सहित किन्हीं तीन प्रकार के पर्वतों का उल्लेख कीजिए?
उत्तर :

  1. वलित पर्वत (Fold Mountains) : हिमालय, आल्पस, काकेशस, एण्डीज, पेरेनीज आदि।
  2. भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountain) : वास्जेज एवं ब्लैक फारेस्ट, साल्टरेंज आदि।
  3. ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountain) : फ्यूजियामा, एकांकागुआ, कोटोपैक्सी आदि।

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प्रश्न 22.
विभिन्न प्रकार के मैदानों के निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन करो।
उत्तर :

  1. नदियों के द्वारा मलवे का घाटी में जमाव।
  2. समुद्र का शान्त एवं उथला होना जिसमें मुहाने पर डेल्टा का जमाव।
  3. नदी द्वारा उच्च भू-भाग को काटकर समप्राय भू-भाग में बदलना।
  4. भू-हलचल द्वारा तटीय भागों का नीचा होना एवं उठना।
  5. भू-गर्भ जल तथा चूने प्रदेश का घोलीकरण आदि।
  6. मैदानों की उत्पत्ति पूथ्वी की आन्तरिक शक्तियों (भूकम्प, ज्वालामुखी) और बाद्य शक्तियों जैसे अपरदन और निक्षेपण से होता है।

प्रश्न 23.
उत्पत्ति के आधार पर मैदान का वर्णन करें।
उत्तर :
उत्पत्ति के आधार पर मैदनों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. संरचनात्मक मैदान (Structural Plains) महाद्वीप निमग्न से ऊपर उठे मैदान।
  2. अपरदनजनित मैदान (Erosional Plains)
  3. निक्षेपण जनति मैदान (Depositional Plains)

अपरदन जनित मैदान को चार भागों में बाँटा गया है –

  • समपाय मैदान (Pene Plain)
  • कार्स्ट मैदान (Karst Plain)
  • हिमानी अपरदित मैदान (Glacial erosion plain)
  • मरूस्थलीय मैदान (Desert Plain)

निक्षेपण जनित मैदान को पाँच भागों में बाँटा जा सकता है –

  • जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain)
  • अपोढ़ मैदान (Drift Plain)
  • सरोवरी मैदान (Lacustrine Plain)
  • समुद्रतटीय मेदान (Coastal Plain by Deposition)
  • लोयस मैदान (Loess Plain)

प्रश्न 24.
कटाव द्वारा निर्मित तीन पर्वतों का वर्णन करें।
उत्तर :
कटाव की प्रक्रिया द्वारा निर्मित अवशिष्ट पर्वतों को तीन भागों में बाँटा गया है-
(a) बुटी (Buttes) : बुटी का निर्माण मेसा (Mesa) के अपरदन द्वारा होता है। यह मरूभूमि में पाया जाता है, इसका सिरा क्ठोर चट्टानों से निर्मित चौरस होता है।
(b) इन्सेलबर्ग (Inselberg) : इन्सेलबर्ग खड़े ढालों वाली पहाड़ियाँ हैं। इन्सेलबर्ग नदियों के अपरदन से निर्मित उपर उठे विस्तृत क्षेत्र हैं। ये अवशिष्ट पर्वत का ही एक रूप है।
(c) मोनाडॉक (Monadnock) : सममाय मैदान में कठोर चट्टानों से निर्मित छोटे-छोटे गुम्बदाकार टीलों को मोनाडॉक कहते हैं। इनका निर्माण नदियो के अपरदन से होता है।

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प्रश्न 25.
ज्वालामुखी पर्वत एवं अवशिष्ट पर्वत में अंतर लिखों।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत :

  1. ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण जमाव की प्रक्रिया से होता है।
  2. ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाले मलवे राख, धूल, मैग्मा आदि के जमाव से होता है।
  3. ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण कम समय में होता है।

अवशिष्ट पर्वत :

  1. अवशिष्ट पर्वत का निर्माण अपरदन की क्रिया द्वारा होता है।
  2. अवशिष्ट पर्वत का निर्माण अपरदन एवं अपक्षय के कारको द्वारा होता है।
  3. अवशिष्ट पर्वत के निर्माण में लम्बा समय लगता है।

प्रश्न 26.
मैदानों की विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर :
मैदानों की विशेषताएँ (Characteristics of Plains) :- मैदान की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. मैदान में जहाँ-तहाँ टीले पाये जाते है और इनका ढाल क्रमिक होता है।
  2. मैदान का धरातल विस्तृत, समतल एवं लहरदार होता है।
  3. मैदान में प्राय: मुलायम मिट्टी का आवरण मिलता है।
  4. मैदान का जमाव प्राय: एक ही प्रकार की मिट्टी से होता है।
  5. सामान्यत: समुद्र तल से मैदानों की औसत ऊँचाई 150 मीटर होती है।
  6. मैदानों के निर्माण में भिन्नता पायी जाती है।

प्रश्न 27.
ज्वालामुखी पर्वत की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
ज्वालामुखी पर्वत की विशेषताएँ (Characteristics of Volcanic Mountain) :

  1. ये पर्वत शंक्वाकार (Conical Shaped) होते हैं।
  2. इन पर्वतों का ऊपरी भाग कीप की भाँति होता है जिसे Crater कहते हैं।
  3. ये पर्वत बहुत जल्दी ऊँचे हो जाते हैं।
  4. प्रधानत: प्रशान्त महासागर के तटीय भाग एवं समुद्री शैल शिराओं के ऊपरी भाग में ये पर्वत दिखाई पड़ते हैं।
  5. ऐसे पर्वतों की आकृति प्राय: त्रिभुज की तरह होती है।
  6. भू-गर्भ से निकलने वाले तरल लावा के बाहर आकर जमने के बाद ऐसे पर्वत का निर्माण होता है।

प्रश्न 28.
अवशिष्ट पर्वत की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत की विशेषताएँ (Characteristics of Relict or Residual Mountain :

  1. इन पर्वतों का ऊपरी हिस्सा घर्षण के कारण चपटा होता है।
  2. इस प्रकार के पर्वत पुराने पर्वतों के घर्षण से बने होते हैं।
  3. इन पर्वतों की ऊँचाई और ढाल अधिक नहीं होता है।
  4. इनका ऊपरी हिस्सा समतल या ऊबड़-खाबड़ होता है।
  5. इनका निर्माण बाह्य अपरदनकारी शक्तियों (पवन, वर्षा, ताप, पाला) के क्रिया से होता है।

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प्रश्न 29.
पठारों की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर :
पठारों की निम्नलिखित विशेषताएँ होती है :

  1. सामान्यत: पठारों की सागर-तल से ऊँचाई 300 से 1000 मीटर तक होती है।
  2. पठार सागर-तल या अपने आसपास की भूमि से कम से कम एक ओर से खड़े ढाल द्वारा अलग होते है।
  3. इनकी धरातल मेज की भाँति विस्तृत होता है। इनमें चोटियाँ नहीं होती है।
  4. इनका धरातल मैदानों की भाँति बिल्कुल समतल न होकर कुछ उबड़-खाबड़ होता है।
  5. इनके ऊपरी भाग का क्षेत्रफल आधार की अपेक्षा कुछ कम रहता है।
  6. ये पृथ्वी के अति माचीन भाग हैं ।
  7. इनमें प्राय: कठोर चट्टानें मिलती है।

प्रश्न 30.
पर्वत और पठार में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर :
पर्वत (Mountain) :

  1. ये सागर तल या अपने आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचे उठे होते हैं।
  2. इनका शिखर नुकीला होता है।
  3. इनमें प्राय: नवीन एवं कम कठोर चट्टानें पायी जाती हैं ।
  4. पर्वत पर तापक्रम काफी कम रहता है।
  5. इनके चारों ओर का ढाल तीव्र होता है।
  6. ये अनुपजाऊ एवं कृषि के अयोग्य होते हैं ।

पठार (Plateau) :

  1. ये अपने समीप के घरातल से अपेक्षाकृत कम ऊंचे उठे होते हैं
  2. इनका शिखर चौरस होता है।
  3. इनमें अत्यन्त प्राचीन एवं कठोर चट्टाने पायी जाती हैं।
  4. पठारों पर तापक्रम पर्वतों से अधिक होता है।
  5. इनमे कम से कम एक ओर का ढाल खड़ा होता है।
  6. ये अपेक्षाकृत् उपयुक्त होते हैं।

प्रश्न 31.
पठार और मैदान में अंतर लिखिए ।
उत्तर :
पठार (Plateau) :

  1. ये मैदानों की अपेक्षा कम उपजाऊ होते है।
  2. इन पर जनसंख्या का घनत्व कम पाया जाता है।
  3. इनका शिखर विस्तृत होता है।
  4. इस पर खनिज पदार्थ अधिक मात्रा में पाया जाता है।
  5. पठारों पर तापक्रम कम रहता है।
  6. इनका धरातल उबड़-खाबड़ होता है।

मैदान (Plain) :

  1. ये उपजाऊ तथा कृषि के योग्य होते हैं।
  2. इन पर जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है।
  3. इनका धरातल विस्तृत होता है।
  4. मैदानी भागों में खनिज पदार्थो का प्राय: अभाव रहता है।
  5. मैदानो पर तापक्रम अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
  6. इनका धरातल समतल होता है।

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प्रश्न 32.
मैदानी भागों में घनी जनसंख्या क्यों पायी जाती है ?
उत्तर :
मैदानी भागों में कृषि की सुविधा, उद्योग-धन्धों का विकास, यातायात के साधनों का विकास एवं अन्य जीवनपयोगी वस्तुओं की सुविधा के कारण जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 33.
पर्वत नदियों के उद्गम स्थल होते हैं। कैसे?
उत्तर :
अधिकांश नदियाँ पहाड़ों से निकलती हैं । ऊँचे पहड़ों पर अधिक वर्षा तथा हिम के पिघलने से निरन्तर जल प्राप्त होता रहता है। अत: यहाँ से सदावाहिनी नदियों की उत्पत्ति होती है। ये नदियाँ उपजाऊ मैदानों का निर्माण करती हैं। इनसे सिंचाई भी की जाती है।

प्रश्न 34.
पर्वतीय भागों में होटल व्यवसाय का विकास क्यों हुआ है ?
उत्तर :
ऊँचाई के कारण गर्मी में भी पहाड़ी स्थान ठण्डे बने रहते हैं। अत: गर्मी में मैदानी भाग की गर्मी से बचने तथा स्वास्थ्य लाभ करने के लिए अमीर लोग पहाड़ी स्थानों पर चले जाते हैं। हिमालय पर शिमला, नैनीताल, मंसूरी, दार्जिलिंग आदि स्वास्थ्यवर्द्धक स्थान हैं। पहाड़ का दृश्य मनोरम एवं आकर्षक होता है। अत: ये पर्यटन के केन्द्र होते है, जहाँ होटल व्यवसाय का विकास हो जाता है।

प्रश्न 35.
नवीन मोड़दार पर्वतों के शिखर हिमाच्छादित ही रहते हैं।
उत्तर :
नवीन मोड़दार पर्वत टर्शियरी युगीन अल्पाइन पर्वत वर्ग में आते हैं। रॉकी, एण्डीज, आल्स, हिमालय आदि इसके उदाहरण हैं। इन पर्वतों में पर्वत वर्ग, पर्वत तंत्र, श्रेणियाँ, कटक, शिखरें पायी जाती हैं। अधिक ऊँचाई के कारण ये सदैव हिमाच्छादित रहते हैं।

प्रश्न 36.
पर्वतीय भाग आर्थिक क्रिया में विकसित क्यों नहीं होते ?
उत्तर :
असमतल एवं अनुपजाउ भूमि होने से पर्वतीय भाग कृषि के योग्य नहीं होते, कहीं-कहीं पर्वतीय ढाल पर सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती की जाती है। दूसरी ओर यहाँ कच्चे माल एवं यतायात के साधनों की कमी के कारण आर्थिक विकास नहीं हो पाया है। यही कारण है कि पर्वतीय भाग आर्थिक दृष्टि के विकसित नहीं होते हैं।

प्रश्न 37.
मैदानी भाग आर्धिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों होते हैं ?
उत्तर :
मैदानी भागों कीमिट्टी समतल, कोमल एवं उपजाऊ होता है। यहाँ सिंचाई की पर्याप्त सुविधा होती है। साथ ही साथ कच्चे माल की सुविधा, यातायात के साधन की सुलभता आदि सुविधा के कारण मैदानी भाग आर्थिक रूप से काफी विकसित होते हैं।

प्रश्न 38.
भंश या दरार क्या है?
उत्तर :
भ्रंश या दरार (Fault) : पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण जब किसी मैदान या पठार की चट्टानों पर दो विपरीत दिशाओ से दबाव या तनाव पड़ता है, तो कभी-कभी चट्टाने मुड़ने के बजाय टूट जाती हैं और उनमें दरारें पड़ जाती हैं, इन्ही दरारों को भंश कहते हैं।

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प्रश्न 39.
भू-आकृतिक देहली से क्या समझते हो?
उत्तर :
भू-आकृतिक विज्ञान में वह स्थल या बिन्दु जहाँ बाह्य प्रभावी कारकों में परिवर्तन के अभाव में अथवा बाह्म प्रभावी कारकों में प्रगामी परिवर्तनों द्वारा स्थलरूपों में एकाएक महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है, उसें भू-आकृतिक देहली (Geomorphic Threshold) कहते हैं।

प्रश्न 40.
विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में निवास करती है क्यों?
उत्तर :
निम्नलिखित कारणों से विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में निवास करती हैं –

  1. कृषि क्षेत्र के लिए मैदान सबसे उपयुक्त भू-आकृतिक है। नदियों द्वारा निर्मित मैदान संसार में सबसे अधिक उपजाऊ होते हैं।
  2. मैदानों में वर्ष भर जल की उपलब्थता रहती है। यहाँ भूमित जल का दोहन भी बड़ी सरलता से हो जाता है।
  3. मैदानों में यातायात की सुविधा रहती है। समतल भूमि होने के कारण सड़कों आदि का निर्माण करना आसान होता है।
  4. नहरों का निर्माण मैदानी भागों में ही संभव है।
  5. आवास की दृष्टि से मैदानी भाग सबसे अनुकूल होते हैं।

प्रश्न 41.
बाढ़ के मैदान और डेल्टाई मैदान में क्या अन्तर है?
उत्तर :

बाढ़ के मैदान (Flood Plain) डेल्टाई मैदान (Delta Plain)
i. इसमें मिट्टी के महीन कण मिलते है। i. इनमें मिट्टी के कण बहुत ही महीन होते हैं।
ii. इनमें दलदली भाग नहीं मिलते। ii. इसमें दलदली भाग मिलते हैं।
iii. इस भाग में धान, गेहूँ, दलहन, तिलहन आदि पैदा होते हैं। iii. इस भाग में नारियल एवं जूट की उपज होती है।
iv. ये सागर तल से ऊँचे उठे रहते हैं। iv. ये सागर तल से बहुत कम ऊँचे उठे होते हैं।
v. इनका निर्माण नदी के मध्य भाग में होता है। v. इनका निर्माण नदी के मुहाने के पास होता है।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
भू-पटल पर परिवर्तन लाने वाले शक्तियों के बारे में उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पृथ्वी की सृष्टि के बाद से अब तक धरातल का स्वरूप हमेशा बदलता रहा है। भू-पटल पर जैसे ही कोई भूभाग ऊँचा उठता है वैसे ही परिवर्तन की शक्तियाँ उसे समतल करने में जुट जाती है। भू-गर्भिक अर्थात् आन्तरकि शक्ति (Internal Forces) धरातल पर विभिन्न स्वरूपों की जन्म देती है और बाहरी शक्तियाँ (External Forces) इन स्वरूपों का क्षय करने में लगी रहती है। इस तरह धरातल पर परिवर्तन लाने वाली शक्तियों को दो भागों में बाटाँ जा सकता है –
(i) आन्तरिक शक्तियाँ (Internal forces or Endogenetic Forces or Tectonic Forces)
(ii) बाह्य शक्तियाँ (External Forces or Exogenetic Forces or Grandational Force)

(i) आन्तरिक शक्तियाँ (Internal or Endogenetic Forces) : ये शक्तियाँ भू-गर्भ में हमेशा परिवर्तन करने में लगी रहती है। ये शक्तियाँ तीव्र गीत से कार्य करती है। भू-गर्भ में विभिन्न प्रकार के खनिज तत्व तथा रेडियम का प्रभाव डालने वाले तत्व (Redioactive Elements) के ताप के कारण चट्टानें पिघल जाती हैं। इन पिघले पदार्थो का भूपटल पर ऊपर आने के प्रयास के फलस्वरूप ज्वालमुखी के उद्गार तथा भूकम्प आते हैं। इन भू-पटल निर्माणकारी शक्तियों से पर्वत, पठार, झील एवं सागर आदि का निर्माण होता है। ये शक्तियाँ धरातल को ऊँचा-नीचा बनाने में लगी रहती है। इनमें भू-कम्प एवं ज्वलामुखी प्रधान है।

(ii) बाह्य शक्तियाँ (External or Erogenetic Forces) : ये शक्तियाँ धरातल के ऊपरी आवरण को परिवर्तित करने का कार्य करती है। इनका कार्य भू-गर्भ के हलचलों के फलस्वरूप बने धरातल के विभिन्न स्वरूपों को नष्ट करना है। बाह्म शक्तियाँ मंद गति से कार्य करती हैं। ये निरतर

परिवर्तन के कार्य में लगी रहती है। ये शक्तियाँ दो प्रकार की है –
(a) स्थिर शक्तियाँ (Static Forces) तथा
(b) गतिशील शक्तियाँ (Dynamic or mobile force)

(a) स्थिर शक्तियाँ (Static Forces) : ये शक्तियाँ अपने स्थान पर ही कार्यशील रहती है और चट्टानों को नोड़फोड़ कर अथवा मुलायम या ढीला बनाकर उन्हें हटाये जाने योग्य बना देती है। स्थिर शक्तियों के कृरणों में वर्षा, ताप, हिम आदि हैं। इनके द्वारा चट्टानों में परितर्वन होता है। मगर उनमें गति नहीं होती। चट्टाने खण्ड खण्ड हो जाती है। और प्राय: वही पड़ी रहती हैं। इन शक्तियों को ऋतु अपक्षय कहा जाता है। इस क्रिया में तापान्तर, वर्षा, पाला आदि की भूमिका रहती है।

(b) गतिशील शक्तियाँ (Mobile Force) : ये शक्तियाँ एक ही स्थान पर स्थिर नहीं रहती। ये गतिशील होती है। ये शक्तियाँ स्थिर शक्तियों द्वारा जोड़ी गयी चट्टानों को बहाकर ले जाती है, और उन्हें दूसरे स्थान पर जमा कर देती है। गतिशील शक्तियों में बहता हुआ जल, हवा, हिमनद तथा भू-गर्भित जल प्रमुख है। इस वर्ग की शक्तियों का अपरदन, अपक्षरण अथवा आवरण क्षय कहा जाता है। इन शक्तियों से भू-पटल पर कहीं तोड़-फोड़ और कहीं भू-रचना का कार्य होता रहता है जिससे अनेक नये भू-आकार बन जाते हैं।

बाह्य शक्तियों में अपक्षय तथा अपरदन आते हैं। अपक्षय के अंन्तर्गत स्थिर शक्तियाँ है। ये स्थिर शक्तियाँ सूर्यताप, वर्षा, पाला, पेड़, पौधे, जीव-जन्तु, मनुष्य हैं। Erosion के अन्तर्गत गतिशील शक्तियों (Mobile Forces) में बहता हुआ जल, हवा, हिमनद, समुद्र तथा भूमित जल प्रमुख है।

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प्रश्न 2.
पहाड़ क्या है? पहाड़ के भागों का नाम लिखिए।
उत्तर :
स्थल का वह भू-भाग जो अपने आस-पस के क्षेत्र से कम-से-कम 600 मीटर से अधिक ऊँचा हो और जिसका शीर्ष चोटीनुमा तथा पृष्ठ तीव ढाल युक्त हो, प्रव्वत कहलाता है।
पर्वत के निम्नलिखित भाग होते हैं –
(i) पर्वत कटक (Mountain Ridge) : सँकरे एवं ऊँचे पहाड़ी क्रम को ‘पर्वत कटक’ कहते हैं। ये आकार में लम्बे तथा सँकरे होते हैं। अल्पेशियन का ब्लू रिज पर्वत कटक का उदाहरण है।
(ii) पर्वत-श्रेणी (Mountain Range) : पहाड़ों तथा पहाड़ियों के क्रम के क्रम को ‘पर्वत श्रेणियाँ’ कहते हैं। जिनमें कई कटक, शिखर तथा घाटियाँ होती हैं। हिमालय को पर्वत श्रेणियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
(iii) पर्वत शृंखला (Mountain Chain) : इसे पर्वत माला भी कहते हैं। जब विभिन्न प्रकार से निर्मित लम्बे तथा संकरे पर्वतों का विस्तार समानान्तर रूप में पाया जाता है, तब उसे पर्वत श्रृंखला कहा जाता है। अल्यूशियन पर्वतमाला इसका प्रमुख उदाहरण है।
(iv) पर्वत तंत्र (Mountain System) : एक ही युग में निर्मित विभिन्न पर्वत श्रेणियों के समूह को पर्वत-तंत्र कहते हैं। अल्पेशियन पर्वत, पर्वत समूह का सबसे उत्तम उदाहरण है।
(v) पर्वत वर्ग (Mountain Group) : पर्वत-वर्ग को पर्वत समुदाय भी कहा जाता है। पर्वत-वर्ग में साधारणतया कटक एवं श्रेणियाँ गोलाकार रूप में पायी जाती हैं।
(vi) पर्वत-समूह (Cordillera) : पर्वत वर्ग को पर्वत समूह अथवा पर्वत प्रदेश कहा जाता है। पर्वत प्रदेश में विभिन्न युगों में भिन्न प्रकार से निर्मित पर्वत श्रेणियाँ (Range), पर्वत तंत्र (Systems) तथा श्वृखलाएँ (Chains) पायी जाती हैं । उत्तरी अमेरिका के प्रशान्त तटीय पर्वतीय भाग पर्वत प्रदेश या पर्वत समूह का प्रमुख उदाहरण है। इसे प्रशान्त कार्डिलेरा कहते है।
(vii) पर्वत शिखर (Mountain Peak) : किसी पहाड़ अथवा पहाड़ी चोटी (सर्वोच्च नुकीला भाग) जो पर्वत श्रेणी के अन्य भागों तथा आस-पास के प्रदेश से अधिक ऊँचा होती है उसे पर्वत शिखर कहते हैं। यह सुई की तरह नुकीला तथा सींग (Horn) के तरह होता है।
(viii) एकल पर्वत (Isolated Mountains) : इस प्रकार के पर्वतों की उत्पत्ति ज्वालामुखी के विस्फोट अथवा अत्यधिक विस्तृत अपरदन के कारण होती है। ये अपवादर व रूप पाये जाते हैं जैसे गुजरात की चाँदुआ पहाड़ी।

प्रश्न 3.
उत्पत्ति के आधार पर पर्वतों के भेद उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
उत्पत्ति के आधार पर पर्वतों के भेद निम्नलिखित हैं –
वलित पर्वत (Fold Mountain) : जब चट्टानों में पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों द्वारा मोड़ या वलन पड़ जाते हैं। तो उसे मोड़दार पर्वत कहते हैं। वलित पर्वत विश्व के सबसे ऊँचे तथा सर्वाधिक विस्तृत पर्वते हैं जिनका विस्तार प्राय: हर महाद्वीपों में पाया जाता है। हिमालय, अल्पाइन पर्वत समूह, रॉकीज, एटलस आदि ऐसे ही पर्वत है। इनकी उत्पत्ति प्राचीन काल में महासागर में जमे अवसादों से हुई हैं।

ब्लॉक अथवा भ्रंशोत्थ पर्वत (Block Mountain) : इस पर्वत को अवरोधी पर्वत भी कहते हैं। इनका निर्माण तनाव या खिंचाव की शक्तियों द्वारा होता है। खिंचाव के कारण धरातलीय भागों में दरारें या अंश पड़ जाती है जिस कारण धरातल का कुछ भाग ऊपर उठ जाता है तथा कुछ भाग नीचे घँस जाता है। इस प्रकार दरारों के समीप ऊँचे उठे भाग को ब्लॉक पर्वत कहा जाता है। ब्लॉक पर्वत दो समानान्तर दरारों के मध्य में स्थित होते हैं जिनका आकार मेज की तरह होता है। सतपुड़ा, वासजेज तथा ब्लैक फॉरेस्ट इसका उदाहरण है। इसी प्रकार के पर्वत पाकिस्तान में साल्ट रेंज, यू०एस०ए० में सियरा नेवादा, फ्रांस में वासजेस हैं।

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संग्रहित पर्वत (Mountain of Accumulation) : धरातल के ऊपर मिट्टी, मलवा, लावा इत्यादि के निरन्तर जमा होते रहने से निर्मित पर्वतों को संग्रहित पर्वत कहते हैं। ज्वालामुखी के उद्गार से विस्तृत लावा, विखण्डित पदार्थ तथा राखचूर्ण आदि के क्रमबद्ध अथवा असम्बद्ध संग्रह के फलस्वरूप ऐसे पर्वतों का निर्माण होता है। इन्हें ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountain) भी कहा जाता है। ज्वालामुखी के उद्गार के समय जो लावा आदि पदार्थ बाहर निकलता है वह मुख के चारों ओर शंकु के आकार में जमा हो जाता है। धीरे- धीरे ज्वालामुखी शंकु ऊँचा उठकर पर्वत बन जाता है। पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में रास्ता हुड तथा रेनियर, फिलीपाइन्स में मचान तथा जापान में फ्यूजीयामा इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

गुम्बदाकार पर्वत (Donce Shaped Mountain) : जब पुथ्वी के भीतर का लावा बाहर निकलने की चेष्टा करता है तो वह धरातल की परतों में फोड़े की तरह उभार पैदा कर देता है जिससे गुम्बदाकार पर्वत का निर्माण हो जाता है। ये पर्वत केन्द्र से बाहर की ओर समान रूप से ढाल वाले होते हैं। उत्तरी अमेरिका के ऊटा राज्य का हेनरी पर्वत इसका उदाहरण है।

अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain) : अपरदन की शक्तियों द्वारा प्रारभिक पर्वत कटकर नीचे हो जाते हैं तथा उनका अवशिष्ट या शेष अवरोधक भाग दिखाई पड़ने लगता है। इनका निर्माण अन्य प्रकार के पर्ततों पर अत्यधिक अपरदन होने से होता है, अतः इन्हें घर्षित पर्वत (Circum rosional) या अवशिष्ट पर्वत (Residual mountain) भी कहा जाता है। भारत के विन्ध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, महादेव, पश्चिमी घाट तथा पूर्वी घाट पहाड़, पारसनाथ आदि अवशिष्ट पर्वत के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 4.
पर्वत के महत्व को लिखिए।
उत्तर :
पर्वतों का महत्त्व निम्नलिखित है –
(i) जलवायु प्रभाव – पर्वत किसी देश की जलवायु को प्रभावित करता है। पर्वत के सामने वाले भाग में वर्षा होती है। परन्तु विपरीत भाग वृष्टि छाया में पड़ जाता है। इन प्रदेशों का तापमान निम्न रहता है, मनोरम जलवायु लोगों को आकर्षित करती हैं।
(ii) सीमा का निर्धारण – दो देशों के बीच सीमा बनाने में पर्वत सहयोग देते हैं। परिनीज पर्वत फ्रांस के बीच सीमा बनाता है। इसी प्रकार हिमालय पर्वत भी मध्य एशिया के बीच सीमा बनाता है।
(iii) शरण देना – संसार की कई आदिवासी एवं जनजातियाँ पहाड़ी भागों में रहती है।
(iv) यातायात में बाधक – पहाड़ी मार्ग कठिन होते है। यातायात में इनसे बाधा पड़ती हैं।
(v) चट्टानों की प्राप्ति – पर्वतीय भाग में चट्टाने मिलती हैं जिनसे घर बनाये जाते हैं।
(vi) जड़ी-बुटियों की प्राप्ति- पर्वतीय भाग से जड़ी-बूटियाँ मिलती हैं जिनसे लोगों का कल्याण होता है।
(vii) खनिजों की प्राप्ति- पर्वत से अनेक प्रकार के खनिज मिलते हैं। रॉकी पर्वत में पेट्रोल तथा कोयला मिलता है। एण्डीज पर्वत में सोना, चाँदी, ताँबा आदि पाया जाता है।
(viii) स्वाथ्यवर्द्धक स्थान – पर्वतों पर अनेक स्वास्थ्यवर्द्धक केन्द्र स्थापित हैं। वहाँ लोग अपना स्वास्थ्य सुधारने के लिए जाते हैं। स्विटजरलैण्ड, कश्मीर आदि इसके अच्छे उदाहरण हैं।
(ix) चारागाह – पर्वतों पर अच्छे चारागाह पाये जाते हैं। वहाँ पशुपालन होता है। पशुओं से दूध तथा ऊन प्राप्त होता है।
(x) हिमागार की प्राप्ति – पर्वतों पर स्थित हिमागार से निकलने वाली नदियाँ वर्षभर जलपूर्ण रहती हैं। ऐसी नदियों से मैदानी भाग में सिंचाई का काम होता-है। पर्वतों पर झरने एवं जल प्रपात भी पाये जाते हैं जिससे बिजली तैयार होती है जो उद्योग-धंधों में सहायक होती है।
(xi) खेती के योग्य ढाल – पहाड़ी ढालों पर चाय एवं कहवा की खेती होती है।
(x) जंगलों का पाया जाना – पहाड़ी भागों में भिन्न-भिन्न प्रकार के जंगल मिलते हैं। जंगलों से हमें लकड़ियाँ, लाख, गोंद आदि अनेक चीजे मिलती है। जंगलों से लकड़ी उद्योग तथा तत्सम्बन्धी अन्य उद्योग-धन्धों को कच्चा माल प्राप्त होता है।

प्रश्न 5.
बलित पर्वत की परिभाषा लिखिए। वलित पर्वत की उत्पत्ति का वर्णन चित्रानुसार कीजिए।
उत्तर :
वलित पर्वत (Fold Mountain) – जब चट्टानों में पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों द्वारा मोड़ या वलन पड़ जाते हैं, उसे मोड़दार या वलित पर्वत कहते हैं! वलित पर्वत विश्व के सबसे ऊँचे तथा सर्वाधिक विस्तृत पर्वत है जिनका विस्तार प्राय: हर महाद्वीप में पाया जाता है। हिमालय, रॉकीज, एटलस ऐसे ही पर्वत हैं।
मोड़दार पर्वत का निर्माण – मोड़दार पर्वतों का निर्माण पूर्व भू-अभिनति या भू सन्नति (Geasynclins) से हुआ है। भू-सन्नति या अभिनति छिछले एवं संकरे किन्तु लम्बे समुद्र को कहते हैं। जहाँ पर नदियों द्वारा लाया गया तलछट जमा किया जाता है।

भू सन्नतियों के विकास की तीन अवस्थायें होती हैं और ये तीन अवस्थायें ही मोड़दार पर्वतों के विकास की भी अवस्थाये हैशैल जनन अवस्था – भूसन्नति का निर्माण मलना का निर्माण होता है। सर्वप्रथम भूसन्नति के निर्माण के बाद समीपवर्ती उच्च स्थलीय भागों से नदियाँ अवसादों को ला-ला कर इसमें जमा करती जाती हैं। अत: भूसन्नति की तली में घंसाव होने लगता है, परन्तु विशेष बात यह है कि जमाव एवं धंसाव में ऐसा अनुपात होता है कि जल की गहराई अधिक नहीं हो पाती है। फलत: सागर छिछला ही बना रहता है।

पर्वत निर्माण अवस्था – पर्वतों के निर्माण की वास्तविक प्रक्रिया शुरू होती है। दरअसल लगातार निक्षेपण की वजह से भू संचलन प्रारम्भ हो जाता है। भूसंचलन के कारण पार्श्व भाग पर क्षैतिज दबाव पड़ने लगता है। जिसे परतदार चट्टानों को मोड़ पड़ने लगते हैं। दबाव की शक्ति किनारे पर ज्यादा पड़ती है, अत: दोनों किनारों की चट्टाने मुड़ जाती हैं। परन्तु बीच का भाग अप्रभावित रहता है। इसे मध्य पिण्ड (Median mass) कहा जाता है। हिमालय एवं क्युनलुन के मध्य तिब्बत का पठार ऐसा ही मध्य पिण्ड है।

विकास अवस्था – इसमें पर्वतों का उत्थान जारी रहता है और अत्यधिक ऊच्चाई प्राप्त कर लेता है। इस अवस्था में अपरदनकारी शक्तियाँ भी सक्रिय हो जाती है जिससे धरातलीय विषमताओं के वृद्धि होने लगती है और एक बार पुन: अवस्था उत्पन्न हो जाती है। भूसंतुलन को पुन: व्यवस्थित करने हेतु पर्वत और भी ऊँचे उठ जाते हैं। यह क्रिया लम्बे समय तक चलती रहती है और पर्वतो की ऊँचाई बढ़ती जाती है। ऐसा अनुमान है कि हिमालय में आज भी उत्थान हो रहा है और यह प्रतिवर्ष 5c.m. की दर से ऊँच्म उठ रहा है।

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प्रश्न 6.
प्लेट टेक टोनिक सिद्धांत के आधार पर मोड़दार पर्वत के निर्माण पर निबंध लिखिए।
उत्तर :
‘पर्वत निर्माण भूसन्नति सिद्धांत’ – पर्वत निर्माण सम्बन्धी समस्याओ ने भूसन्नति सिद्धांत का प्रतिपादन किया। वह एक जर्मन भूगर्भ शास्त्री थे, जिन्होंने बताया कि पर्वतो की उत्पत्ति भूसन्निति के गर्भ में होती है। उनकी मान्यता थी कि मोड़दार पर्वत का निर्माण धरातल के संकुचन का परिणाम है। कोबर सिद्धांत निम्नलिखित तीन मान्यताओं पर आधारित है।
1. पर्वतों की उस्पत्ति एक भूसन्नति या छिछली सागर में होती है।
2. इस भूसन्नति से नदियों द्वारा अनवरत मलवा निक्षेपण होता रहा और उसमें धंसान भी हुआ।
3. तीसरी मान्यता है कि भूसन्नति में होने वाले अबतलन से चट्टानों में संकुचन हुआ और इस संकुचन से भूसन्नति में निक्षेपित मलवे मुड़कर मोड़दार पर्वत के रूप में परिवर्तित हुए।

वस्तुत: भूसन्नति का मलवा ही मोड़दार पर्वत के रूप में उत्थित होगा परन्तु सभी मलवों में मोड़ नहीं पड़ता है। भूसन्नति के दोनों किनारे वाले मलवे सबसे पहले मुड़कर पर्वत बनते हैं, बीच में स्थित मलवा बिना मुड़े ऊपर उठ जायेगा जिसे मध्य पिंड कहते हैं। तिब्बत के हंगर का मैदान ऐसे ही मध्य पिंड का उदाहरण है।

कोबर का पर्वत निर्माणकारी सिद्धांत तीन अवस्थाओं में पूर्ण होता है जो वस्तुतः भूसन्नति की ही अवस्था है।

1. भूसन्नति में निक्षेप की अवस्था
2. पर्वत निर्माण की अवस्था
3. विकास की अवस्था

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प्रारम्भिक अवस्था में भूसन्नति के अन्तर्गत मलवे का निक्षेप होता है और निक्षेपित मलवे को दाब से स्थानीय चट्टानों में सिकुड़न आती है। इसी से वास्तविक पर्वत का निर्माण शुरू होता है। सिकुड़न से निक्षेपित परतदार चट्टानों पर दबाव होता है। इससे मोड़ पड़ता है। मोड़ का क्रिया दोनों किनारों पर सर्वाधिक होती है और बीच का भाग क्षैतिज रूप से ऊपर आ जाता है। तीसरी अवस्था में असंतुलन स्थापित हो जाता है और इस क्रिया में कहीं उत्थान और कहीं अवतलन होता है और अन्तत: संतुलन स्थापित हो जाता है।

यह सिद्धांत विश्वव्यापी महत्व रखता है। यह मोड़दार पर्वतों की भौतिक आकृति का सही विश्लेषण करता है। जैसे इस सिद्धांत के अनुसार दो मोड़दार पर्वत के बीच एक पठार होगा। इसी के अनुरूप हिमालय एवं क्युनलुन के मध्य तिब्यत पठार स्थित है।

यद्यपि यह सिद्धान्त हिमालय की उत्पत्ति को तो स्पष्ट करता है पर रॉकी एवं एण्डीज पर्वतों की व्याख्या इससे नहीं हो पाती। वर्तमान में वह सिद्धांत जो सबसे ज्यादा विश्वसनीय एवं तार्किक है, वह है प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत जिससे लगभग सभी कालों के सभी प्रकार के पर्वतों की व्याख्या हो जाती है।

प्रश्न 7.
गुटका पर्वत की परिभाषा लिखिए। गुटका पर्वत के निर्माण को चित्रानुसार समझाइए।
उत्तर :
गुटका पर्वत या अवरोधी पर्वत या भ्रंशोत्थ पर्वत (Block mountain or Horst) ; दो समानान्तर भंशो के बीच के भू-खण्ड के ऊपर उठ जाने से अथवा दो समानान्तर भ्रशों के बाहरी भू-खंडों के नीचे धँस जाने से निर्मित उच्च भूमि या घर्वत को गुटका पर्वत कहते हैं। इसका आकार मेज के समान होता है जिसका ऊपरी भाग सपाट तथा किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं। ऐसे पर्वतों की उत्पत्ति भ्रंशों के कारण होती है। अतः इन्हें भंशोत्थ पर्वत भी कहा जाता है। जर्मन भाषा में इसे होर्स्ट (Horst) कहते हैं। U.S.A. में वासाय रेंज तथा सियरा नेवादा, यूरोप में वासजेज तथा ल्लैक फॉरेस्ट, पाकिस्तान में साल्ट रेंज इनके उदाहरण हैं। भ्रंशोत्थ के विपरीत दो उठे हुए भागों के मध्य धँसा हुआ भाग अ्रंश घाटी (Rift Valley) कहलाता है।

गुटका का पर्वत का निर्माण (Formation of block mountain) : इस पर्वत के उत्पत्ति के संबंध में दो मत प्रचलित है। (i) भ्रंश सिद्धांत (Fault Theory) – किंग, गिलबर्ट, लूडरबैक, डेविस आदि विद्वानों का मत है कि भ्रंशोत्य पर्वत का निर्माण भू-पटल पर बड़े पैमाने में अंश या दरारें पड़ने के कारण ज्ञात होता है। इन दरारों के सहारे स्थल का एक बड़ा भाग ऊपर या नीचे चला जाता है, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका का ग्रेट बेसिन रेंज।

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(ii) विशेषक अपरदन सिद्धांत (Differential Erosion theory) : जे ई. स्पर महोदय के अनुसार भ्रंशोत्थ पर्वतों का निर्माण अंशन द्वारा नहीं हुआ है। बल्कि ये विशेषक अपरदन (Differential Erosion) का परिणाम है। किन्तु यह मत अधिक मान्य नहीं हैं।
भंश या दरार सिद्धांत के मुताबिक ब्लॉक पर्वतों का निर्माण कई रूपों में होता है।

(a) जब दो समान्य दरारों के बीच का भाग ऊपर उठ जाता है तो ल्लॉक पर्वत का निर्माण होता है। इसमें ऊपर उठे हुए स्थल खण्ड को ही ब्लॉक पर्वत कहा जाता है। इस प्रकार से निर्मित ब्लॉक पर्वत का ऊपरी भाग पठार की तरह सपाट होता है, परन्तु इसके किनारे वाले ढाल तीव्र होते हैं।

(b) जब दरार के निर्माण के समय मध्यवर्ती भाग के दोनों ओर के स्थल खण्ड नीचे की ओर खिसक जाते है तथा मध्यवर्ती भाग अपनी जगह पर स्थित रहता है तो ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है। समीपवर्ती भाग के नीचे धँस जाने से मध्यवर्ती भाग उठा हुआ लगता है, जो कि एक होर्स्ट (Horst) का स्वरूप होता है। ऊँचे पठारी भाग या चौड़े गुम्बदों में इस क्रिया के कारण ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है।

(c) जब धरातल के किसी भाग में दो समानान्तर दरारों के बीच का भाग नीचे की ओर खिसक जाता है तो किनारे वाले भाग ऊपर उठे दिखाई पड़ते हैं। धँसा हुआ भाग भू- भ्रंश घाटी (Rift Valley) कहलाता है, परन्तु किनारे वाले उठे भाग ब्लॉक पर्वत की श्रेणी में रखे जाते हैं।

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प्रश्न 8.
ज्वालामुखी पहाड़ की परिभाषा लिखिए। ज्वालामुखी पर्वत निर्माण का वर्णन चित्रानुसार कीजिए?
उत्तर :
ज्वालामुखी विवर (मुख) के चारों ओर विखंडित शैल पदार्थों तथा लावा के जमाव से निर्मित शंक्वाकार पर्वत, ज्वालामुखी पर्वत कहलाता है।
ज्वालामुखी के विस्फोट से समय भू-गर्भ से निकलने वाला कंकड़-पत्थर, मिट्टी या मैग्मा आदि पदार्थ ज्वलामुखी के अलग-बगल इकट्ठे होकर ऊंचे उठ जाते हैं। इस ऊँचे उठे हुए भू-भाग ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। इसे Mountain of Accumulation or Mountain of Deposition भी कहते है। अफ्रीका का केनिया व किलिमंजारो, इटली का विसुवियस तथा एटना, बर्मा का पोपा, सिसली का स्ट्रामबोलियन, दक्षिण अमेरिका का एकांकगुआ, चिम्बोरेजी तथा कोटोफैक्सी जापान का फ्यूजीयामा प्रमुख ज्वालामुखी पर्वतें है। संसार का सबसे ऊँचा एवं जाग्रत ज्वालामुखी पर्वत कोटोपैक्सी है जो एण्डीज पर्वत पर स्थित है।

ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण (Formation of Volcanic Mountain) : ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण ज्वालामुखी उद्गार से निकले पदार्थों के जमाव से पर्वत का रूप लेने से होता है। ज्वालामुखी नली से पिघली हुई चट्टान (लावा) बाहर निकल कर धरातल पर फैल जाती है और शंकु की तरह जमा होकर कोणादार पर्वत बनाती है। यदि शिलाखण्डों की अधिकता हुई तो इन पर्वतों का दाल तीव्र होता है। यदि लावा की अधिकता हुई तो ढाल क्रमिक होगा।

कभी-कभी ज्वालामुखी का निर्माण समुद्र तल पर होता है, जैसे एल्यूशियन द्वीप समूह, कभी-कभी ज्वालामुखी पर्वतों का अविर्भाव भू-संचलन द्वारा निर्मित पर्वत श्रेणियों पर होता है, जैसे दक्षिण अमेरिका की एण्डीज पर्वत माला पर। उत्तरी अमेरिका की कास्केड श्रेणी ज्वालामुखी पहाड़ी से भरी पड़ी है।

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प्रश्न 9.
अवशिष्ट पर्वत क्या है? अवशिष्ट पर्वत निर्माण का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अवशिष्ट पर्वत (Relict mountain or Residuala Mountain) : जब धरातल के ऊँचे भाग की कोमल चट्टानें, हवा, पाला, वर्षा, धूप आदि द्वारा कट जाती है तो केवल चट्टानें ही खड़ी रहती है। इस कठोर कड़ी चट्टानों को अवशिष्ट या अनावृत्त पर्वत (Residual or Relict Mountain) कहते हैं। इन्हें घर्षित पर्वत (Circum Erosional Mountain) भी कहा जाता है।

अवशिष्ट पर्वत का निर्माण (Formation of Residual Mountain) : किसी पूर्ववर्ती क्षेत्र में अपरदन के पश्चात् जो शेष पहाड़ियाँ बचती हैं, उन्हें अवशिष्ट या घर्षित पर्वत (Circum Mountain) कहा जाता है। चूँकि ये पर्वत अपनी प्रारंभिक स्थिति या रूप से परिवर्तित होकर इस स्थिति में आते हैं, अतः इन्हें परवर्ती (Subsequent) पर्वत भी कहा जाता है। अवशिष्ट पर्वतों का आकार-प्रकार अपरदन के साधनों और पर्वत की शैल रचना पर निर्भर करता है। भारत में विन्ध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, सहयाद्रि, पारसनाथ आदि तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में ओजार्क पर्वत वर्तमान में अवशिष्ट पर्वतें हैं।

वर्तमान में सर्वोच्च वलित जो पर्वत है, वे भी कालान्तर में नदी, हिमनद वायु, तुषार आदि के प्रभाव से कटकर तथा घिसकर निम्न पर्वत का रूप धारण करके अवशिष्ट पर्वत हो सके हैं। अत्यधिक अपरदन के कारण ऊँचा उठा पर्वत घिसकर नीचा हो जाता है तथा कुछ भाग ऊपर खड़े रह जाते हैं। जो कि समीपवर्ती भाग से ऊँचे होते हैं। विंध्य पर्वत कभी एक उच्च पर्वत था परन्तु वर्तमान समय में घर्षण के कारण इसकी ऊँचाई 12,000 से 25,000 फीट तक ही रह गयी है।

प्रश्न 10.
पठार क्या है? पठारों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :
सपाट या लगभग सपाट भूमिवाला विस्तृत ऊँचा क्षेत्र जिसकी ऊँचाई सागर तल से समान्यत: 300 मीटर से अधिक होती है और किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं और जो अपने समीपवर्ती स्थल से पर्याप्त ऊँचा हो तथा जिसका शिखरीय भाग चौड़ा व सपाट हो उसे पठार कहा जाता हैं।
पठारों का निर्माण (Formation of Plateaus) : पठारों का निर्माण निम्न प्रकार से होता है-

  1. मैदानी भागों में लावा के निक्षेप से पठारों की रचना होती है जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में कोलम्बिया का पाठार।
  2. जब किसी विस्तृत भू-भाग का कुछ भाग उत्संवलन (Up warding) द्वारा अपने समीपस्थ भू-भाग से ऊँचा उठ जाय तो ऊँचा भाग पठार बन जायेगा।
  3. पठार वाला भू-भाग अपने स्थान पर बना रहे किन्तु उसके आस-पास का भू-भाग अवसंलन (Down warding) से नींचा हो जाय तो ऊँचा मध्य भाग पठार बन जायेगा।
  4. पर्वत-निर्माण के समय पर्वतों के समीपस्थ भाग जो अधिक ऊँचे नहीं उठ पाते वे पठार का रूप ले लेते हैं। जैसेसंयुक्त राज्य अमेरिका का पीडमाण्ड पठार।
  5. भू-अभिनतियों में क्षैतिजिक संपीडन से तटीय भाग में वलित श्रेणियाँ बन जाती हैं किन्तु मध्य भाग कुछ ऊँचा किन्तु अप्रभावित रह जाता है। जैसे तिब्बत का पठार।
  6. ऊँच्च पर्वतीय प्रदेश दीर्घकाल तक अनाच्छादन के कारण पठार का रूप ले लेते हैं।
  7. वायु द्वारा उड़ाकर लाई गई मिट्टियों के निक्षेप से पठार का निर्माण होता है। जैसे-चीन में लोयस का पठार।

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प्रश्न 11.
पठारों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पठारों का महत्व (Importance of Plateaus) : पठारों का महत्व निम्नलिखित है :-
पठार तथा खनिज : पठार खनिज भण्डरों से समृद्ध होते हैं। पठारों में अधातु खनिज एवं धातु खनिज पाये जाते हैं। अधातु खनिजों में मृत्तिका, रेत, पत्थर, फॉस्फेट, लवण, जिप्सम, सल्फर, चूने का पत्थर, भवन-निर्माण के लिए आवश्यक पत्थर, कोयला, मिट्टी का तेल, अभ्रक, मैंगनीज आदि प्रमुख हैं। धातु खनिज में लोहा, ताम्र, जिक, काँच, रजत तथा स्वर्ण प्रमुख हैं। कनाडियन शील्ड, छोटानागपुर का पठार तथा हजारीबाग आदि खनिजों के लिय प्रसिद्ध हैं। विश्व के अधिकतम पठार खनिज समृद्ध हैं।

पठार एवं कृषि : कृषि के लिये पठार महत्वपूर्ण नहीं है। चट्टानों से उत्पन्न मिट्टियाँ लेटराइट तथा लाल होती है। ये अनुपजाऊ हैं। लावा-निर्मित पठारों पर काली मिट्टी के कारण कृषि सुलभ होती है। दक्षिण भारत की लावा-निर्मित काली मिट्टी में कपास तथा गेहूँ की खेती होती है। चट्टानी सतह के कारण नहरों तथा कुओं का खोदना कठिन होता है। अत: सिंचाई की असुविधा खेती के लिये बाधक होती है। दक्षिणी भारत में नहरों एवं कुओं का अभाव है।

पठार तथा वनस्पति – पठारों पर वनस्पति का होना वहाँ की जलवायु पर निर्भर है। आर्द्र प्रदेशों वाले पठारों पर वन पाये जाते हैं जिसमें लकड़ी व्यवसाय तथा उससे सम्बन्धित उद्योगों का विकास होता है। छोटानागपुर के पठार में लाख अधिक पाया जाता है। दक्षिण के पठार से कीमती लकड़ियाँ मिलती है। उनसे भवन निर्माण होता है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र के बाँस कागज उद्योग में उपयोगी होते हैं। शुष्क तथा आर्द्र शुष्क जलवायु वाले भागों में पठारों पर छोटी घासें उगती है, अतः पशुचारण व्यवसाय विकसित है।

पठार तथा यातायात – समतल तथा सपाट पठारी भागों में रेलों तथा सड़कों का विकास हो जाता है, क्योकि इनमें निर्माण के लिए समतल भू-भाग तथा पत्थर, चूना आदि आसानी से मिल जाते हैं। उबड़-खाबड़ तथा तंग घाटियों वाले पठार यातायात के साधनों से रहित (कम) होते हैं।

पठार तथा जनसंख्या- खनिज-पदार्थों वाले पठारों पर खानों के पास नगर बस जाने तथा उद्योगों के स्थापना के कारण जनसंख्या अधिक हो जाती है। घने जंगलों वाले, उबड़-खाबड़ तथा पथरीली भूमि वाले पठार बिखरी जनसंख्या वाले होते हैं।

पठार तथा जलवायु – मैदानों की अपेक्षा पठार की जलवायु ठंडी होती है। अत: गरम प्रदेशों में इन पर मानव आवास होता है। परन्तु ठंडी जलवायु वाले पठार मरूस्थल हो जाते हैं। फलस्वरूप यहाँ लोग पशुचारण करने वाले विचरणशील होते हैं।

प्रश्न 12.
संरचना एवं आकृति के अनुसार ज्वालामुखी पर्वतों का वर्गीकरण तथा उनका वर्णन कीजिए। उत्तर : आकृति के आधार पर ज्वालामुखी पर्वतों को चार मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
अंगार अथवा राख शंकु ज्वालामुखी (Cinder or cone Volcanic Mountains) : इस प्रकार के ज्वालामुखी की रचना विस्फोटप्य ज्वालामुखी द्वारा होता है। ये ढीले एवं असंगठित पदार्थों से बनते हैं। इनमें राख (Ash) तथा अंगार (Cinder) की मात्रा अधिक होती है। ये पूर्ण शंकु के आकार के होते हैं। जापान तथा हवाई द्वीप समूह में ऐसे अनेक ज्वालामुखी मिलते हैं।

गुम्बदाकार ज्वालामुखी पर्वत (Dome Shaped Vocanic Mountains) : ज्वालामुखी के धीमे उद्गार के कारण जब ज्वालामुखी मुख के चारो ओर आम्लिक लावा का निक्षेपण होता है तो गुम्बदाकार आग्नेय पर्वत बन जाता है। हवाई द्वीप समूह में ऐसे ज्वालामुखी मिलते हैं।

विस्फोटीय ज्वालामुखी पर्वत (Explosion vent Volcanic Mountain) : ज्वालामुखी के तीव्र विस्फोट के कारण जब क्रेटर का आकार खूब बड़ा हो जाता है तो उसके चारो ओर ज्वालामुखी पर्वत बन जाते हैं। इन्हें विस्फोटीय ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। आइसलेण्ड में ऐसे ज्वालामुखी मिलते हैं।

मिश्रित शंकु ज्वालामुखी (Composite cone Volcanic Mountain) : जब काफी लम्बी अवधि में. ज्वालामुखी के कई उद्गार होते हैं तब ज्वालामुखी पर्वत में एक मुख्य क्रेटर के साथ-साथ कई अन्य क्रेटर भी बन जाते हैं तो ऐसे ज्वालामुखी पर्वतो को मिश्रित शंकु ज्वालामुखी कहते हैं। जापान का फ्यूजीयाम तथा मैक्सिको का पोपोकेटे पेटी मिश्रित शंकु ज्वालामुखी के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 13.
निर्माण विधि के आधार पर पठारों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनका संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
निर्माण के आधार पर पठारों के प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं –
विभाजित पठार (Dissected Plateau) : ऐसे पठार प्राय: ऊँचे होते हैं। परन्तु तीव्रगामी नदियाँ या हिमनद इनमें गहरी व सँकरी घाटियाँ बना देती है जिससे मुख्य पठार कई उप पठारों में विभाजित हो जाता है। कई भागों में विभक्त इन पठारों को विभाजित अथव कटे-फटे पठार कहते हैं। वेल्स, स्कॉटलैण्ड, छोटानागपुर, कर्नाटक के मालनद तथा मेघालय के पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कालोरेडो तथा कनाडा का लारशियमन पठार विभाजित पठार ही हैं।

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अन्तःपर्वतीय पठार (Internmontane Plateau) : चारों ओर से पर्वतमालाओ से घिरे पठारों को अन्त: पर्वतीय पठार कहते हैं। ऐसे पठार काफी ऊँचे होते है परन्तु इनका विस्तार कम होता है। इन पठारों का निर्माण पर्वतों के साथ ही साथ उनके बीच के धरातल के भी उपर उठने से होता है। एण्डीज पर्वतो से घिरे हुए इक्वेडोर व बोलीबिया के पठार तथा हिमालय के क्युनलुन से घिरा तिब्बत का पठार, पूर्वों एवं पश्चिमी सियरा निवादा पर्वतों के बीच में स्थित मैविसको का पठार, एलबुर्ज एवं जेग्रोस पर्वत के बीच स्थित ईराक का पठार, पौष्टिक एवं टौरस पर्वतों के बीच में स्थित टर्की का अनात्तिया का पठार अन्तःपर्वतीय पठार ही है। गोबो, ईरान इत्यादि पठार भी अन्तः पर्वतीय पठार ही हैं।

लावा पठार (Lava Plateau) : ज्वालामुखी के उद्गार से निकलने वाला लावा ज्वालामुखी के मुख से चारों ओर दूर तक फैल जाता है। इस प्रकार यह भाग अपने आस-पास के क्षेत्र से ऊंचा हो जाता है जिससे लावा के पठार बन जाते हैं। इन पठारों का निर्माण काले रंग की बैसाल्ट चट्टानों से हुआ है। अत: इनके विखण्डन में उपजाऊ काली मिट्टी का निर्माण होता है। भारत के दक्कन का पठार के उत्तर पश्चिम में स्थित दक्कन ट्रेप, आयरलैण्ड का राष्ट्रीय पठार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया पाठार लावा निर्मित पठार के उदाहरण हैं।

पर्वतपदीय पठार (Piedmont Plateau) : किसी पर्वत के सहारे स्थित पठार को पीडामाण्ट पठार या गिरिपद पठार कहते है। ये पठार व मैदान अथवा पर्वत व समुद्र के बीच स्थित होते हैं। इन पठारो का निर्माण उन पर्वतों के उत्थान के साथ-साथ होता है जिनसे ये संलग्न होते हैं। उत्तरी अमेरिका की अल्पेशियन एवं अन्ध महासागर के बीच एक ऐसा पठार स्थित है जिसे पीडमाण्ट का पठार कहते हैं। इसी प्रकार दक्षिणी अमेरिका में एण्डीज पर्वत तथा अन्ध महासागर के बीच पैटागोनिया का पठार भी गिरिपद पठार ही हैं।

महाद्वीपीय पठार (Continental Plateau) : पटल विरूपणी बलों द्वारा धरातल के किसी विस्तृत भू-भाग के ऊपर उठ जाने से निर्मित विस्तृत पठारों को महाद्वीपीय पठार कहते हैं। ये पठार सागर तट या मैदानों से घिरे रहते हैं तथा सागर तट या मैदानों एवं इनका उभार स्पष्ट दिखायी देता है। भारत का प्रायद्वीपीय पठार, आस्ट्रेलिया का पठार, अरब का पठार, दक्षिण अफ्रीका का पठार आदि महाद्वीपीय पठार के उदाहरण हैं। अंटाकर्टिका एवं ग्रीनलैण्ड के पठारों को नवीन महाद्वीपीय पठारों के अन्तर्गत रखा जाता है।

प्रश्न 14.
विभिन्न प्रकार के अपरदनात्मक मैदानों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अपरदनात्मक मैदान (Erosionel Plain) : भूपटल पर उत्पन्न विषमताओं को समतल स्थापक शक्तियाँ नदी, हिमनदी, पवन, सागरीय लहरें) दूर करने का प्रयास करती रहती हैं जिससे उत्थित स्थलखण्ड एक सपाट एवं आकृतिविहीन मैदान का आकार ग्रहण कर लेते हैं, जिन्हें अपरदनात्मक मैदान कहते हैं। अपरदनात्मक मैदानों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है।

नदी अपरदान द्वारा निर्मित मैदान या समप्राय मैदान (Peneplain): अपने अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था में नदियाँ उच्च स्थल खण्डों, पवतों-पठारों आदि को काटकर मंद ढाल वाले समप्राय मैदानों का निर्माण करती हैं। ये मैदान पूर्ण रूप से समतल नहीं होते हैं। इनके यत्र-तत्र प्रतिरोधी चट्टानों के टीले या पहाड़ियाँ दिखायी देते हैं जिन्हें मोनेडानॉक कहते हैं। पेरिस बेसिन, आमेजन बेसिन का दक्षिणी भाग, मिसीसिपी बेसिन का ऊपरी भाग, पूर्वी इंग्लैण्ड का मैदान, भारत का अरावली क्षेत्र एवं राँची तथा हजारीबाग के मैदान समप्राय मैदान के उदाहरण हैं।

हिमानी अपरदित मैदान (Plains of Glacial Erosion) : हिमनदों के अपघर्षण से निर्मित सपाट परन्तु ऊच्चावचयुक्त मैदान इस श्रेणी में आते हैं। इन मैदानों में मिट्टी की परत् पतली होती है तथा अवरोधी चट्टानों के टीले एवं झीलें देखने को मिलती हैं। इनमें कहीं-कहीं दलदल भी पाए जाते हैं। इस प्रकार के मैदान उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग तथा उत्तर-पश्चिम यूरेशिया में पाए जाते हैं। भारत में लद्दाख का मैदान हिमानी अपरदित मैदान का उदाहरण है।

पवन अपरदित मैदान (Wind eroded Plains) : शुष्क एवं अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पवन की अपरदन क्रिया के फलस्वरूप इन मैदानों का निर्माण होता है। इन मैदानों को सहारा मरूस्थल में ऐसेरिग तथा हमादा कहते हैं। पवन अपरदित मैदानों में प्रतिरोधी चट्टानों के टीले विद्यमान रहते हैं, जिन्हें इंसेलवर्ग (Inselberg) कहते हैं।

कार्स्ट मैदान (Karst Plain) : चूना पत्थर वाले प्रदेशों में वर्षा के जल तथा भूमित जल की धुलनक्रिया द्वारा सतह के उपर तथा नीचे अपरदन होते रहता है जिससे सम्पूर्ण प्रदेश घिसकर नीचा हो जाता है तथा एक निम्न मैदान का आकार ग्रहण कर लेता है। इस तरह के मैदानों का ऊपरी सतह पूर्णत: समतल नहीं होता है। बल्कि ये उबड़-खाबड़ एवं तरंगित होते हैं तथा यत्रतत्र चट्टानों के अवशेष टीलों या ढेर रूप में विद्यमान रहते हैं। इन टीलों को ह्यूमस (Hums) कहते हैं। यूगोस्लाविया के कार्स्ट प्रदेश, उत्तरी अमेरिका के फ्लोरिडा एवं यूकाटान तथा भारत के चित्रकुट एवं उत्मोड़ा में कार्स्ट मैदान देखने को मिलते हैं।

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प्रश्न 15.
नदी निर्मित मैदान या जलोढ़ मैदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जलोढ़ या नदी निर्मित मैदान (Alluvial Plains) : नदियाँ अपने साथ बहाकर लायी गयी मिट्टी या जलोढ़ को अपने घाटी में यत्र तत्र जमा करती हैं जिससे जलोढ़ मैदानों की रचना हो जाती है। संसार के अधिकांश बड़े मैदान जैसे मिसीसिपी-मिसौरी का मैदान, गंगा-सिन्धु का मैदान, हांगहो-यांगटिसी का मैदान, वोल्गा डेन्यूब, नीले के मैदान तथा इटली की पो नदी का मैदान जलोढ़ मैदान ही हैं। स्थिति के अनुसार नदी निर्मित मैदानों के 30 उपभेद हो सकते हैं।

गिरिपद मैदान (Pledmont Plains) : पर्वतीय भाग में उतरते समय ढाल एकदम कम हो जाने से नदी का वेग अत्यंत कम हो जाता है। अत: वहाँ नदी पर्वतीय भाग से लाए गए अवसादों को जमा कर देती है। इसमें नीचे की तरफ भारी रोड़े उसके ऊपर बजरी और सबसे ऊपर बारीक रेत जमा हो जाते हैं। जिससे वहाँ एक तिकोना मैदान बन जाता है। इसे गिरिपद मैदान कहते हैं। उत्तरी भारत में इन मैदानों को भाबर मैदान कहते हैं।

बाढ़ के मैदान (Flood Plains) – नदी के मध्य भागा में मन्द ढाल के कारण नदी की गति इतनी धीमी हो जाती है कि वहाँ वह केवल सुक्ष्म कणों को ही ले जा सकती है। नदी में बाढ़ आ जाने पर ये सूक्षकण नदी-घाटी के दोनों ओर के बाढ़ क्षेत्रों में जमा हो जाते हैं। जिससे बाढ़ के मैदान बन जाते हैं। इन मैदानों की चौड़ाई उद्गम की ओर कम तथा मुहाने की ओर अधिक होती है। यहाँ नदियाँ प्रतिवर्ष नवीन मिट्टी जमा करती हैं। अतः ये मैदान अत्यन्त उपजाऊ होते हैं।

डेल्टाई मैदान (Deltaic Plains) – नदियों द्वारा लायी गयी अत्यन्त महीने मिट्टी के जमा होने से उनके मुहानों पर त्रिभुजाकार मैदान बन जाते हैं। ऐसे मैदानों को डेल्टाई मैदान कहते हैं। डेल्टाई भाग में नदी कई शाखाओं में विभाजित हो जाती है। गंगा-बह्मपुत्र का डेल्टा या सुन्दरवन का डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है। सिन्यु, नील, पो, हांगहो और मिसीसिपी नदियों ने अपने मुहानों पर बड़े-बड़े डेल्टाई मैदानों का निर्माण किया है। डेल्टाई मैदान प्राय: समतल और सपाट होते हैं। इनमें यत्र-तंत्र दलदल व उथली झीलें भी पायी जाती है।

प्रश्न 16.
मैदानों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
मैदानों के महत्व का वर्णन निम्न शीर्षको के अन्तर्गत किया जा सकता है:-
(i) मानव सभ्यता का विकास – हर प्रकार की सुविधा मिलने के कारण ही मैदान प्राचीनकाल से ही मानव-सभ्यता के केन्द्र रहे हैं। सिन्धु, गंगा, दजला-फरात एवं नील नदियों के मैदान अपनी प्राचीन सभ्यताओं के लिए विख्यात हैं।

(ii) कृषि का विकास – मैदानी भाग की भूमि समतल एवं मिट्टी कोमल व उपजाऊ होती है। यहाँ कुएँ तथा नहर आसानी से बनाये जा सकते हैं। अत: सिंचाई की सुविधा रहती है । यही कारण है कि मैदानों में कृषि का विकास अधिक होता है।

(iii) यातायात की सुविधा – मैदानों का धरातल समतल होता है। अत: वहाँ सड़कों, रेलमार्गों तथा हवाई अड़ों का निर्माण आसानी से हो सकता है। नदियाँ मंद गति से बहने के कारण जल यातायात योग्य होती है। यह्ही कारण है कि मैदानों में यातायात के साधनों का विकास अधिक हुआ है।

(iv) उद्योग-धंधों का विकास – मैदानी भागों में कृषि पर आधारित कच्चे मालों के उत्पादन, यातायात के साधनों के विकास, सस्ते श्रमिकों एवं खपत क्षेत्रों की सुविधा के कारण जनसंख्या का घनत्व अधिक मिलता है एवं उद्योग-धंधों का खूब विकास हुआ है।

(v) नगरों की अधिकता – अधिक जनसंख्या एवं यातायात के साधनों के विकास के कारण विश्व के बड़े-बड़े व्यापारिक एवं औद्योगिक नगरों की स्थापना मैदनों में ही हुई है। कोलकाता, कानपुर, शिकागो, ब्यूनेस आयर्स आदि नगर मैदानों में ही स्थित हैं।

(vi) आक्रमण का भय – मैदानी भाग में प्राकृतिक सीमा के अभाव, यातायात की सुविधा एवं आर्थिक सम्पन्नता के कारण आक्रमणकारी उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इसी से मैदान प्राचीनकाल से युद्ध के क्षेत्र बने रहे हैं।

(vii) सघन जनसंख्या – मैदानी भागों में कृषि की सुविधा, यातायात के साथनों के विकास, उद्योग-धन्धों के विकास तथा अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं की सुविधा के कारण सघन जनसंख्या यहाँ निवास करती है।

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प्रश्न 17.
निर्माण के आधार पर पठारों का वर्गीकरण करते हुए उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :
पठारों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है –

  1. उत्पत्ति के विचार से
  2. स्थिति के विचार से
  3. जलवायु के विचार से
  4. आकृति के विचार से।

उत्पत्ति के अनुसार पठारों का वर्गीकरण (According to Origin):-
(A) सरल पठार (Simple Plateau)
(B) संयुक्त पठार (Composite Plateau)

(A) सरल पठार (Simple Plateau) :- इसकी उत्पत्ति एक ही प्रकार की शैलों से होती है । इसकी रचना किसी एक ही कारक से होती है। कारक के अनुसार सरल पठार निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-

  1. हिम्य पठार (Plateau of Glacial Origin)
  2. जलीय पठार (Plateau of Aqueous Origin
  3. वायोढ़ पठार (Plateau of Aeolian Origin)
  4. निः सृत पठार (Plateau of Effusive Origin)

हिम्य पठार (Glacial Plateau) :- हिम-नदियों के अपरदन तथा हिमोढ़ों के निक्षेप से बने पठार हिम्य पठार कहे जाते हैं। महाद्वीपीय हिम-नदियों ने ग्रीनलेण्ड तथा अण्टार्कटिक को घिस-घिस कर पठार बना दिया है। भारत में गढ़वाल का पठार ऐसा ही एक उदाहरण है।

जलीय पठार (Aqueous Plateau) :- जल द्वारा निक्षेपित अवसादों के शिलारूप ग्रहण करने पर कभीकभी भू-गर्भिक हलचलों के कारण शिलास्तर पठार का रूप धारण कर लेते हैं। बालुका पत्थर से निर्मित विन्ध्य पठार, चेरा पत्थर से निर्मित चेरापूँजी पठार तथा चूने के पत्थर से निर्मित शान पठार (म्यांमार) इसके सर्वोतम उदाहरण हैं। उत्तरी अमेरिका में कोलारेडो पठार भी इसी प्रकार का है। ये पठार जल में डूबे धरातल के ऊपर उठने से बनते हैं।

कायोढ़ पठार (Aeolion Plateau) :- वायु द्वारा निर्मित पठार इस श्रेणी में आते हैं । चीन का विशाल लोयस पठार तथा पाकिस्तान का पोटवारा पठार इसके उदाहरण हैं।

नि:सृत पठार (Effusive Plateau) :- ये पठार धरातल पर लावा-प्रवाह से बनते हैं। दक्षिणी भारत का लावा पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलम्बिया पठार तथा पूर्वी अफ्रीका के पठार इसी प्रकार के हैं। इसमें बेसाल्ट की प्रधानता है।

(B) संयुक्त पठार (Composite Plateau) :- इन पठारों की उत्पत्ति कई प्रकार की शैलों के मिश्रण से होती है। दक्षिण भारत का पठार इसका उदाहरण है। यह पठार कई बार समुद्री अतिक्रमण के फलस्वरूप जलमग्न हुआ और कालान्तर में फिर बाहर निकल आया । फलतः यह पठार विभिन्न युगों की आग्नेय, अवसादी तथा कायान्तरित शैलों से निर्मित है।

स्थिति के अनुसार पठार (According to location) पठारों का वर्गीकरण :- इस तरह के पठारों के निम्नलिखित भेद है :-

अन्तरा पर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) :- ये पठार जो चारों ओर से पर्वतों द्वारा घिरे होते हैं । इनकी रचना वलित पर्वतों के साथ हुई होती है। ये पठार प्राय: दो अभिर्नियों अथवा सीमा श्रेणी के बीच में विस्तृत मध्य पिण्ड (Median Mass) के रूप में होते हैं। संसार के उच्च पठार इसी श्रेणी में आते है। तिब्बत का पठार हिमालय तथा कुनलुन पर्वतों के बीच स्थित है। बोलीविया, कोलम्बिया तथा तारिम के पठार भी इसी प्रकार के हैं।

पर्वतपदीय पठार (Piedmont Plateau) :- ये पर्वतों के आधार पर बने होते हैं जहाँ एक ओर ऊँचे पर्वत और दूसरी ओर मैदान या समुद्र रहते हैं। इनका विस्तार अत्यन्त सीमित हीता है। ये मैदानों की तरफ कगार बनाते हैं जिनकी ऊँचाई 90 मीटर से 180 मीटर तक होती है। पेण्टागोनिया का पठार इसका उदाहरण है। यह एण्डीज पर्वत तथा अटलाण्टिक महासागर के बीच स्थित है।

महाद्वीपीय पठार (Continental Plateau) :- ये पठार स्थल के विशाल एवं विस्तृत उच्च प्रदेश हैं। मैदान या समुद्र तट से स्पष्टः ऊँचे उठे होते हैं। इनके किनारे पर ऊँची पर्वत श्रेणियाँ कदाचित् ही होती हैं। दक्षिण अफीका का पठार, दक्षिण भारत, अरब तथा स्पेन में इसी वर्ग के पठार हैं। ये पठार बहुत पुराने हैं। किन्तु ग्रीनलैंड तथा अण्टार्कटिका नवीन पठार कहे जाते हैं।

तटीय पठार (Coastal Plateau) :- ये समुद्र तट पर स्थित पठार हैं। इस प्रकार के पठारों का ऊपरी भाग तट के निकट फैला हुआ तथा निचला भाग समुद्र में डूबा हुआ होता है। भारत के कोरोमण्डल का पठार तथा इण्डोचीन के प्रायद्वीपीय पठार ऐसे ही हैं।

जलवायु के अनुसार पठारों के भेद (Plateau according to climate):- जलवायु के आधार पर पठारों के तीन भेद हैं :-

  • मरुस्थली या शुष्क पठार (Arid Plateau)
  • आर्द्र पठार (Humid Plateau)
  • हिमाच्छादित पठार (Ice caped Plateau)

मरुस्थलों में शुष्क पठार मिलते हैं। वहाँ वर्षा का अभाव रहता है। पाकिस्तान का पोटवार पठार इसी श्रेणी का है । अधिक वर्षा वाले प्रदेशों में स्थित पठार आर्द्र पठार कहलाते हैं। जैसे असम का पठार। धुवीय जलवायु के प्रदेशों में हिम आच्छादित पठार पाये जाते हैं । जैसे ग्रीनलैंड का पठार।

आकृति के अनुसार पठारों के भेद (Plateau according to Shape) :- आकृति के अनुसार पठारों के तीन भेद हैं।

  • गुम्बदाकार पठार (Dome-Shaped Plateau);
  • विच्छेदित पठार (Dissected Plateau)
  • सोपानतुल्य पठार (Step-like Plateau)

गुम्बदाकार पठार का बाह्य पृष्ठ गोलाकार होता है। छोटानागपुर का पठार ऐसा ही है। विच्छेदित पठार नदियों द्वारा कटे-छँटे होते हैं। दक्षिण भारत का पठार विच्छेदित पठार है। जिन पठारों की रचना सोपान-तुल्य प्रतीत होती है उनको सोपान-तुल्य पठार कहते हैं । विन्क्य पठार इसका उदाहरण है।

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प्रश्न 18.
पहाड़ और पठार में क्या अन्तर है?
उत्तर :

पहाड़ (Mountain) पठार (Plateau)
i. इनका ऊपरी क्षेत्रफल आवार के क्षेत्रफल से अधिक होता है। i. इनका ऊपरी क्षेत्रफल आधार के क्षेत्रफल से कम होता है।
ii. ये सागर तल या अपने आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचे उठे होते हैं। ii. ये अपने समीप के धरातल से अपेक्षाकृत कम ऊँचे उठे होते हैं।
iii. इनका शिखर नुकीला होता है। iii. इनका शिखर चौरस होता है।
iv. इनमें प्राय: नवीन एवं कम कठोर चट्टाने पायी जाती हैं। iv. इनमें अत्यन्त प्राचीन एवं कठोर चट्टाने पायी जाती हैं।
v. पर्वतों पर तापक्रम बहुत कम रहता है। v. पठारों पर तापक्रम पर्वतों से अधिक रहता है।
vi. इनके चारों ओर का ढाल तीव होता है। vi. इनमें कम से कम एक ओर ढाल खड़ा होता है।
vii. ये अनुपजाऊ एवं कृषि के अयोग्य होते हैं। vii. ये अपेक्षाकृत उपयुक्त होते हैं।
viii. इनमें चोटियाँ होती हैं। viii. इनमें चोटियों का अभाव होता है।

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

Well structured WBBSE 9 History MCQ Questions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद can serve as a valuable review tool before exams.

क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
नेपोलियन का जन्म हुआ था –
(a) एल्बा द्वीप में
(b) सेन्ट हेलेना में
(c) कार्सिका द्वीप पर
(d) फ्रांस में।
उत्तर :
(c) कार्सिका द्वीप पर

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 2.
सम्राट के रूप में नेपोलियन का राज्याभिषेक कब हुआ –
(a) 2 दिसम्बर 1804
(b) 4 जनवरी 1804
(c) 16 मार्च 1803
(d) 20 अप्रैल 1803
उत्तर :
(a) 2 दिसम्बर 1804

प्रश्न 3.
नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म कहाँ हुआ था ?
(a) कोर्सिका द्वीप
(b) वियना
(c) वार्साय
(d) पेरिस
उत्तर :
(a) कोर्सिका द्वीप

प्रश्न 4.
नेपोलियन ने कब नया संविधान बनाया ?
(a) 1789 ई०
(b) 1799 ई。
(c) 1804 ई०
(d) 1815 ई。
उत्तर :
(b) 1799 ई०

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 5.
फ्रांस की राज्य क्रान्ति कब हुई ?
(a) 1789 ई०
(b) 1799 ई०
(c) 1804 ई०
(d) 1815 ई。
उत्तर :
(a) 1789 ई०

प्रश्न 6.
नेपोलियन ने विवाह किससे किया था ?
(a) मैरिया
(b) जोजेफिन
(c) विक्टोरिया
(d) ऐलिजाबेथ
उत्तर :
(b) जोजेफिन

प्रश्न 7.
अमीन्स की संधि कब हुई थी ?
(a) 1789 ई०
(b) 1801 ई。
(c) 1802 ई०
(d) 1804 ई०
उत्तर :
(c) 1802 ई०

प्रश्न 8.
महाद्वीपीय व्यवस्था के द्वारा नेपोलियन किस देश को हानि पहुँचाना चाहता था –
(a) प्रशा
(b) इंग्लैण्ड
(c) स्पेन
(d) इटली
उत्तर :
(b) इंग्लैण्ड

प्रश्न 9.
नेपोलियन की मृत्यु कब हुई –
(a) 1821
(b) 1830
(c) 1824
(d) 1820
उत्तर :
(a) 1821

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प्रश्न 10.
आइबेरिया द्वीप किस यूरोपीय देश का अंग था ?
(a) इटली
(b) जर्मनी
(c) फ्रांस
(c) पुर्तगाल
उत्तर :
(c) पुर्तगाल

प्रश्न 11.
14 अक्टूबर 1806 ई० में नेपोलियन ने किस देश को पराजित किया था ?
(a) प्रशिया
(b) जर्मनीं
(c) रूस
(d) इटली
उत्तर :
(c) रूस

प्रश्न 12.
नेपोलियन ने कब ‘फ्रांस का राष्ट्रीय सम्राट’ की उपाधि प्राप्त की ?
(a) 1799 ई० में
(b) 1801 ई० में
(c) 1804 ई० में
(d) 1807 ई० में
उत्तर :
(c) 1804 ई०में।

प्रश्न 13.
नेपोलियन कब वाटरलू के मैदान में हार गया ?
(a) 1789 ई०
(b) 1802 ई०
(c) 1804 ई०
(d) 1815 ई。
Ans.
(d) 1815 ई०

प्रश्न 14.
सिविल कोड की रचना की थी –
(a) नेपोलियन
(b) चार्ल्स
(c) रूसो
(d) अन्य
उत्तर :
(a) नेपोलियन

प्रश्न 15.
नेपोलियन का जन्म कब हुआ था –
(a) 15 अगस्त 1769
(b) 20 जनवरी 1770
(c) 2 मार्च 1771
(c) 1 अप्रैल 1772
उत्तर :
(a) 15 अगस्त 1769

प्रश्न 16.
पवित्र संघ की स्थापना किसने की थी ?
(a) रूस के जार अलेक्जेंडर
(b) ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरुनिक
(c) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
(d) अमेरिका के राष्ट्रपति
उत्तर :
(a) रूस के जार अलेक्जेंडर

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प्रश्न 17.
महादेशीय व्यवस्था किसने चलायी थी ?
(a) मेटरनिक
(b) अलेक्जेंडर
(c) नेपोलियन
(d) बिटेन के प्रधानमंत्री
उत्तर :
(c) नेपोलियन

प्रश्न 18.
‘कान्ति का पुत्र’ किसे कहा जाता था ?
(a) मेटरनिक
(b) जार अलेक्जेंडर
(c) बिटेन के प्रधानमंत्री
(d) नेपोलियन
उत्तर :
(d) नेपोलियन

प्रश्न 19.
पिरामिडों के युद्ध में नेपोलियन ने हराया –
(a) प्रशा
(b) रूस
(c) मिस्त
(d) इटली
उत्तर :
(c) मिस्र

प्रश्न 20.
नेपोलियन द्वारा स्पेन पर आक्रमण के समय स्पेन का राजा कौन था –
(a) वार्ल्स
(b) वाल्टेयर
(c) रूसो
(d) वेलेजली
उत्तर :
(d) वेलेजली

प्रश्न 21.
‘वाटरलू’ किस देश में हैं –
(a) फ्रांस
(b) बेल्जियम
(c) इंग्लैण्ड
(d) हालैण्ड
उत्तर :
(b) बेल्जियम

प्रश्न 22.
टुलोज पर वेलेजली का अधिकार कब हुआ –
(a) 12 अप्रैल 1814
(b) 12 जनवरी 1816
(c) 14 फरवरी 1813
(d) 10 मार्च 1800
उत्तर :
(a) 12 अप्रैल 1814

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प्रश्न 23.
14 जून 1807 ई० में नेपोलियन ने किस देश को पराजित किया था ?
(a) प्रशिया
(b) जर्मन
(c) रूस
(d) पुर्तगाल
उत्तर :
(c) रूस

प्रश्न 24.
नेपोलियन कब फ्रांस का सम्राट बना ?
(a) 1789 ई०
(b) 1804 ई०
(c) 1814 ई०
(d) 1815 ई०
उत्तर :
(b) 1804 ई०

प्रश्न 25.
टिलसिट की संधि किसके-किसके बीच हुई?
(a) बिटेन और फ्रांस
(b) रूस और फ्रांस
(c) इटली और रूस
(d) जर्मनी और रूस
उत्तर :
(b) रूस और फ्रांस

प्रश्न 26.
महाद्वीपीय व्यवस्था किस देश ने लागू किया था?
(a) ब्रिटेन
(b) रूस
(c) प्रशिया
(d) फ्रांस
उत्तर :
(d) फ्रांस

प्रश्न 27.
नेपोलियन की पत्ली का क्या नाम था –
(a) जोसेफिन बोहार्नेस
(b) मारिया
(c) रुकसाना
(d) सोनिया
उत्तर :
(a) जोसेफिन बोहार्नेस

प्रश्न 28.
नेपोलियन की मृत्यु हुई 5 मई –
(a) 1815 ई० में
(b) 1817 ई० में
(c) 1819 ई० में
(d) 1821 ई० में
उत्तर :
(d) 1821 ई० में।

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प्रश्न 29.
किस देश की पराधीनता से इटली को मुक्त करके नेपोलियन ‘मुक्तिदाता’ के नाम से परिचित हुए?
(a) इंग्लैण्ड
(b) रूस
(c) ऑंस्ट्रिया
(d) स्पेन
उत्तर :
(c) ऑस्ट्रिया।

प्रश्न 30.
नेपोलियन ने फ्रांस की शासन व्यवस्था में दखल किया।
(a) 1799 ई० में
(b) 1801 ई० में
(c) 1804 ई० में
(d) 1807 ई॰ में
उत्तर :
(a) 1799 ई० में ।

प्रश्न 31.
नेपोलियन पहले कितने वर्ष के लिये कांसुल नियुक्त हुए ?
(a) 5 वर्ष
(b) 10 वर्ष
(c) 15 वर्ष
(d) आजीवन
उत्तर :
(a) 5 वर्ष।

प्रश्न 32.
कान्सुलेट संविधान के रचयिता थे।
(a) आवेसियस
(b) मैराट
(c) रोजर डूकास
(d) नेपोलियन
उत्तर :
(a) आवेसियस।

प्रश्न 33.
नेपोलियन ने किस शक्ति की बाथा से तुलो बन्दरगाह का पुनरुद्धार किया ?
(a) रूस
(b) ऑंस्ट्रिया
(c) स्पेन
(d) इंग्लैण्ड
उत्तर :
(d) इंग्लैण्ड।

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प्रश्न 34.
नेपोलियन ने समस्त फ्रांस को कितने प्रदेशों में बाँटा था ?
(a) 70
(b) 83
(c) 150
(d) 300
उत्तर :
(b) 83

प्रश्न 35.
प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में नेपोलियन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि है –
(a) धार्मिक
(b) शिक्षा
(c) अर्थनैतिक
(d) आचार-संहिता प्रवर्तन
उत्तर :
(d) आचार-संहिता प्रवर्तन।

प्रश्न 36.
फ्रांसीसी क्रांति का अग्नि तलवार कहा जाता है –
(a) रूसो को
(b) वाल्टेयर को
(c) नेपोलियन को
(d) रोब्सपियर को
उत्तर :
(c) नेपोलियन को।

प्रश्न 37.
मैरेंगो/होहेन लिण्डेन/ऊल्म के युद्ध में फ्रांस से पराजित हुआ –
(a) आस्ट्रिया
(b) रूस
(c) सेन
(d) पुर्तगाल
उत्तर :
(a) आस्ट्रिया।

प्रश्न 38.
किस सन्धि के द्वारा नेपोलियन साम्राज्य सर्वोच्च सीमा पर पहुँचा ?
(a) लुनमिल की
(b) प्रेसवर्ग की
(c) टिलसिट की
(d) ऐविऐन्स की
उत्तर :
(c) टिलसिट की।

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प्रश्न 39.
1807 ई० में फ्रांस एवं रूस के बीच कौन-सा युद्ध हुआ था ?
(a) अस्टारलिजे का
(b) पिरामिड का
(c) नीलन का
(d) फ्रिडलैण्ड का
उत्तर :
(d) फ्रिडलैण्ड कां।

प्रश्न 40.
नेपोलियन के सार्थ टिलसिट की संधि करने को कौन बाध्य हुआ ?
(a) इंग्लैण्ड
(b) रूस
(c) ओंस्ट्रिया
(d) पर्सिया
उत्तर :
(b) रूस।

प्रश्न 41.
नेपोलियन द्वारा जर्मनी के 300 राज्यों को तोड़कर कितने राज्य बनाए गए ?
(a) 39
(b) 67
(c) 150
(d) 250
उत्तर :
(a) 39

प्रश्न 42.
नेपोलियन ने सर्वप्रथम कब महादेशीय अवरोध व्यवस्था की घोषणा की ?
(a) 1804 ई० में
(b) 1805 ई० में
(c) 1806 ई० में
(d) 1807 ई० में
उत्तर :
(c) 1806 ई० में।

प्रश्न 43.
किस देश के विरुद्ध महादेशीय अवरोध घोषित हुआ ?
(a) ऑंस्ट्रिया
(b) स्पेन
(c) पुर्तगाल
(d) इंग्लैण्ड
उत्तर :
(d) इंग्लैण्ड।

प्रश्न 44.
बर्लिन डिक्री जारी किया –
(a) आवेसियस ने
(b) नेपोलियन ने
(c) मंटजेलर्ड ने
(d) ब्रान्सविक ने
उत्तर :
(b) नेपोलियन ने।

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प्रश्न 45.
नेपोलियन के बर्लिन डिक्री के प्रत्युत्तर में इंग्लैण्ड ने जारी किया –
(a) मिलान डिक्री
(b) आर्डार-इन-लॉ
(c) आर्डर-इन-कौसिल
(d) वार्स-डिक्री
उत्तर :
(c) आर्डर्स-इन-कौसिल।

प्रश्न 46.
स्पेन के युद्ध में फ्रांस के सेनापति थे –
(a) दूँप
(b) नेलसन
(c) मार्शल जूनो
(d) नेपोलियन
उत्तर :
(a) दूँप।

प्रश्न 47.
वोरोडिनो के युद्ध में फ्रांसीसी वाहिनी के विरुद्ध सफलता दिखाया रूस के सेनापति –
(a) नेलसन ने
(b) वाग्रासियों ने
(c) वार्कले ने
(d) कुतुजोब ने
उत्तर :
(d) कुतुजोब ने।

प्रश्न 48.
नेपोलियन का अन्तिम उल्लेखनीय युद्ध विजय है –
(a) सालामांका
(b) ड्रेसडेन
(c) बेलेन
(d) विट्टोरिया
उत्तर :
(b) ड्रेसडेन।

प्रश्न 49.
कौन-सा युद्ध ‘जातिसमूह का युद्ध’ के नाम से परिचित है ?
(a) लिपजिंग
(b) उपद्वीप
(c) वाटरलू
(d) वोरोडिनो
उत्तर :
(a) लिपजिंग।

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प्रश्न 50.
नेपोलियन के किस युद्ध में पराजित होने पर जर्मनी उसकी अधीनता से मुक्त हुआ ?
(a) वोरोडिनो
(b) विट्टोरिया
(c) लिपजिंग
(d) ड्रेसडेन
उत्तर :
(c) लिपजिंग।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. __________ को नेपोलियन का जन्म हुआ था।
उत्तर : 15 अगस्त, 1769 ई०।

2. 1796 ई० में नेपोलियन को __________का अभियान सौंपा गया।
उत्तर : इटली के सैनिक

3. नेपोलियन क्रान्ति का पुत्र और __________दोनों था।
उत्तर : विनाशक

4. __________ने कहा कि, ‘वह युद्धों की उपज हैं।’
उत्तर : नेपोलियन

5. __________नेपोलियन के पतन का मुख्य कारण था।
उत्तर : स्पेन युद्ध

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6. नेपोलियन की मृत्यु __________ई० में__________ में हुई थी।
उत्तर : 18 जून, 1815, सेंट हेलेना

7. __________समानता और __________फ्रांसीसी क्रान्ति के प्रमुख सिद्धान्त थे।
उत्तर : स्वतंत्रता, भातृत्व ।

8. नेपोलियन मात्र 17 वर्ष की उम्र में फ्रांस की सेनावाहिनी में __________के पद पर भर्ती हुए।
उत्तर : सब-लेफ्टिनेंट।

9. नेपोलियन ने ब्रिटिश सेना से तुलों बन्दरगाह का पुनरुद्धार कर जो सफलता दिखाई उसके परिणामस्वरूप उन्हें __________का पद मिला।
उत्तर : बिगेडियर जेनरल।

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10. कान्मुलेट के शासन में __________सर्वशक्तिमान कन्सुल थे।
उत्तर : नेपोलियन।

11. नेपोलियन आजीवन कन्मुल के पद पर नियुक्त हुए __________ई० में।
उत्तर : 18021

12. ‘यूरोप का मुक्तिदाता’ को__________ कहा जाता है।
उत्तर : नेपोलियन।

13. __________को ‘यूरोप का राष्ट्रवादी शत्रु’ कहा जाता है।
उत्तर : नेपोलियन।

14. ‘कोड नेपोलियन’ में विधि संख्या थी __________
उत्तर : 2287 ।

15. नेपोलियन ने __________म्यूजियम की प्रतिष्ठा की।
उत्तर : नेल्यूबे।

16. नील नदी/ट्राफेलार के युद्ध में फ्रांस __________से पराजित हुआ।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

17. नेपोलियन __________के विरुद्ध बर्लिन/मिलान/वार्स फ़ँतेन्ब्लू डिक्री जारी किया।
उत्तर : इंग्लैण्ड।

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18. __________के महादेशीय व्यवस्था मानने से इन्कार करने पर नेपोलियन ने उन्हें बन्दी बनाया।
उत्तर : रोम के पोप।

19. नेपोलियन ने __________से सेनावाहिनी भेजकर पुर्तगाल में महादेशीय व्यवस्था लागू की।
उत्तर : स्पेनं।

20. नेपोलियन __________को स्पेन की गद्दी पर बैठाया।
उत्तर : जोसेफ बोनापार्ट।

21. नेपोलियन ने __________को नेपल्स के सिंहासन पर बैठाया।
उत्तर : मूराट।

22. __________के खिलाफ 1813 ई० में चतुर्थ गठबंधन तैयार हुआ।
उत्तर : फ्रांस।

23. __________नामक बुखार से रूस में असंख्य फ्रांसीसी सैनिकों की मृत्यु हुई।
उत्तर : टाइफस।

24. “__________ अभियान नेपोलियन साप्राज्यवाद का अन्तिम अभियान था।”
उत्तर : मास्को।

25. पर्सिया के नेतृत्व में __________नेपोलियन के विरुद्ध राष्ट्रवादी आन्दोलन आरंभ हुआ।
उत्तर : जर्मनी में।

26. राष्ट्रसमूह के युद्ध में यूरोप के __________देश नेपोलियन के खिलाफ युद्ध में भाग लिये थे।
उत्तर : 13

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27. एल्बा द्वीप से फ्रांस लौटकर नेपोलियन __________दिन शासन करने में सक्षम हुए ।
उत्तर : 100

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. नेपोलियन के पिता का नाम कार्लो बोनापार्ट एवं माँ का नाम लेटिजिया था।
उत्तर : True

2. ‘भँदेमिया’ या ‘अक्टूबर’ की घटना के बाद नेपोलियन ब्रिगेडियर जनरल बने।
उत्तर : False

3. नेपोलियन फ्रांस की क्रांति की साम्य नीति को नहीं मानते थे।
उत्तर : False

4. कन्सुलेट का संविधान फ्रांस की क्रांति के तीसरे साल रचित हुंआ था इसीलिए यह ‘तृतीय वर्ष का संविधान’ नाम से परिचित है।
उत्तर : False

5. कान्सुलेट के शासनकाल में फ्रांस की विधायिका चार कक्षों में विभक्त हुई एवं निम्नकक्ष को छोड़कर अन्य तीन कक्ष के सदस्यों का मनोनयन (निर्वाचन) प्रथम कन्सुल द्वारा होता था।
उत्तर : True

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6. नेपोलियन ने जर्मनी के 300 राज्यों को तोड़कर 39 राज्य बनाए।
उत्तर : True

7. नेपोलियन फ्रांस की क्रांति की समानता एवं मैन्री आदर्श को ग्रहण करने के बावजूद स्वाधीनता के आदर्श को प्रहण नहीं किये।
उत्तर : True

8. 1802 ई० में फ्रांस एवं रूस में एमियेन्स की सन्धि हुई थी।
उत्तर : False

9. नेपोलियन ने इंग्लैण्ड, रूस, स्पेन, पुर्तगाल आदि देशों के विरुद्ध महादेशीय अवरोध की घोषणा की।
उत्तर : False

10. नेपोलियन द्वारा घोषित महादेशीय अवरोध की विभिन्न घोषणाओं को एकत्रित ‘अर्डार-इ-इ-लॉ’ नाम से जाना जाता है
उत्तर : False

11. नेपोलियन की महादेशीय अवरोध प्रथा की घोषणा के बाद पर्सिया, रूस एवं ऑस्ट्रिया इस प्रथा को मान लेने पर भी हालैण्ड, रोम के पोप, पुर्तगाल, स्वीडेन अदिद देश इसको मानने से इन्कार कर दिये।
उत्तर : True

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12. स्पेन के महादेशीय अवरोध प्रथा को मानने से इन्कार करने पर नेपोलियन ने पुर्तगाल से अभियान चलाकर स्पेन दखल किया।
उत्तर : False

13. पुर्तगाल दखल कर लौटते समय रास्ते में स्पेन को दखल करके वहाँ की गद्दी पर नेपोलियन ने अपने भाई जोसेफ को बैठा दिया।
उत्तर : True

14. नेपोलियन की सेना विट्टोरिया के युद्ध में पराजित होकर स्पेन छोड़ने को बाध्य हुई।
उत्तर : True

15. नेपोलियन के पतन के बाद फ्रैंकफर्ट की सन्धि द्वारा वूर्वो वंश के लुई अठारहवें फ्रांस के सिंहासन पर बैठे।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. नेपोलियन का जन्म 1. नतोर दम गिर्जा
B. नेपोलियन का प्रथम निर्वासन 2. कार्सिका द्वीप
C. नेपोलियन की मृत्यु 3. एल्बा द्वीप
D. नेपोलियन का अभिषेक 4. सेण्ट हेलेना द्वीप

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. नेपोलियन का जन्म 2. कार्सिका द्वीप
B. नेपोलियन का प्रथम निर्वासन 3. एल्बा द्वीप
C. नेपोलियन की मृत्यु 4. सेण्ट हेलेना द्वीप
D. नेपोलियन का अभिषेक 1. नतोर दम गिर्जा

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. लुई 1. हालैण्ड
B. जोसेफ 2. रूस
C. पोप 3. स्पेन
D. अलेकजेण्डर प्रथम 4. रोम

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. लुई 1. हालैण्ड
B. जोसेफ 3. स्पेन
C. पोप 4. रोम
D. अलेकजेण्डर प्रथम 2. रूस

प्रश्न 3.

स्तम्म ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. टलेन्टिनों की सन्धि 1. ऑस्ट्रिया के साथ
B. लुनविले की सन्धि 2. पोप के साथ
C. एमियेन्स की सन्धि 3. रूस के साथ
D. टिलसिट की सन्धि 4. इंग्लैण्ड के साथ

उत्तर :

स्तम्म ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. टलेन्टिनों की सन्धि 2. पोप के साथ
B. लुनविले की सन्धि 1. ऑस्ट्रिया के साथ
C. एमियेन्स की सन्धि 4. इंग्लैण्ड के साथ
D. टिलसिट की सन्धि 3. रूस के साथ

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प्रश्न 4.

स्तम्म ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. पिरामिड का युद्ध 1. पर्सिया के विरुद्ध
B. गैरेंगा का युद्ध 2. ऑस्ट्रिया के विरुद्ध
C. फ्रिडलैण्ड का युद्ध 3. इंग्लैण्ड के विरुद्ध
D. वारस्टेट का युद्ध 4. रूस के विरुद्ध

उत्तर :

स्तम्म ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. पिरामिड का युद्ध 3. इंग्लैण्ड के विरुद्ध
B. गैरेंगा का युद्ध 2. ऑस्ट्रिया के विरुद्ध
C. फ्रिडलैण्ड का युद्ध 4. रूस के विरुद्ध
D. वारस्टेट का युद्ध 1. पर्सिया के विरुद्ध

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. ऑस्ट्रिया की राजकन्या 1. आवेसियस’
B. आर्थार वेलेसली 2. नेपोलियन
C. द्वितीय जास्टिनियन 3. ड्यूक ऑफ वेलिंगटन
D. कानून विशारद 4. मैरी लुइस

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. ऑस्ट्रिया की राजकन्या 4. मैरी लुइस
B. आर्थार वेलेसली 3. ड्यूक ऑफ वेलिंगटन
C. द्वितीय जास्टिनियन 2. नेपोलियन
D. कानून विशारद 1. आवेसियस’

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. जली – मिट्टी की नीति 1. जर्मनी
B. लाइपजिंग का युद्ध 2. रूस
C. अर्डार्स-इन-लॉ 3. इंगलैण्ड
D. अर्डार्स-इन-कौसिल 4. फ्रांस

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. जली – मिट्टी की नीति 2. रूस
B. लाइपजिंग का युद्ध 1. जर्मनी
C. अर्डार्स-इन-लॉ 4. फ्रांस
D. अर्डार्स-इन-कौसिल 3. इंगलैण्ड

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प्रश्न 7.

स्तष्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. प्रथम शक्तिगुट 1. 1804-05 ई०
B. द्वितीय शक्तिगुट 2. 1793 ई०
C. तृतीय शक्तिगुट 3. 1813 ई०
D. चतुर्थ शक्तिगुट 4. 1799 ई०

उत्तर :

स्तष्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. प्रथम शक्तिगुट 2. 1793 ई०
B. द्वितीय शक्तिगुट 4. 1799 ई०
C. तृतीय शक्तिगुट 1. 1804-05 ई०
D. चतुर्थ शक्तिगुट 3. 1813 ई०

प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1801 ई० 1. बर्लिन डिक्री
B. 1806 ई० 2. मिलान डिक्री
C. 1807 ई० 3. फँतेनब्लू डिक्री
D. 1810 ई० 4. कन्कार्ड का समझौता

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1801 ई० 4. कन्कार्ड का समझौता
B. 1806 ई० 1. बर्लिन डिक्री
C. 1807 ई० 2. मिलान डिक्री
D. 1810 ई० 3. फँतेनब्लू डिक्री

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1799 ई० 1. नेपोलियन को सम्राट की पदवी मिली
B. 1804 ई० 2. कान्सुलेट शासन का प्रवर्तन
C. 1807 ई० 3. 100 दिनों का राज
D. 1815 ई० 4. ‘कोड नेपोलियन’ का नामकरण

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1799 ई० 2. कान्सुलेट शासन का प्रवर्तन
B. 1804 ई० 1. नेपोलियन को सम्राट की पदवी मिली
C. 1807 ई० 4. ‘कोड नेपोलियन’ का नामकरण
D. 1815 ई० 3. 100 दिनों का राज

प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1798 ई० 1. वेलेन का युद्ध
B. 1805 ई० 2. फ्रिडलैण्ड का युद्ध
C. 1806 ई० 3. अस्टर लिब्जे का युद्ध
D. 1808 ई० 4. नीलनदी का युद्ध

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1798 ई० 4. नीलनदी का युद्ध
B. 1805 ई० 3. अस्टर लिब्जे का युद्ध
C. 1806 ई० 2. फ्रिडलैण्ड का युद्ध
D. 1808 ई० 1. वेलेन का युद्ध

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 2 क्रांतिकारी आदर्श, नेपोलियन का साम्राज्य एवं राष्ट्रवाद

प्रश्न 11.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1809 ई० 1. लाइपजिंग का युद्ध
B. 1812 ई० 2. वाग्राम का युद्ध
C. 1813 ई० 3. वाटरलू का युद्ध
D. 1815 ई० 4. वोरोडिनो का युद्ध

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1809 ई० 3. वाटरलू का युद्ध
B. 1812 ई० 1. लाइपजिंग का युद्ध
C. 1813 ई० 2. वाग्राम का युद्ध
D. 1815 ई० 4. वोरोडिनो का युद्ध

प्रश्न 12.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. कूतुजोव 1. फ्रांसिसी सेनापंति
B. मन्टजेलार्ड 2. ब्रिटिश सेनापति
C. आर्थार वेलेसली 3. रूस का सेनापति
D. ब्लूकर 4. पर्सिया का सेनापति

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. कूतुजोव 3. रूस का सेनापति
B. मन्टजेलार्ड 1. फ्रांसिसी सेनापंति
C. आर्थार वेलेसली 2. ब्रिटिश सेनापति
D. ब्लूकर 4. पर्सिया का सेनापति

 

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 3 Question Answer – धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
कोणिक दूरी को कैसे मापा जाता है?
उत्तर :
भूमध्य रेखीय तल एवं प्रधान मध्याह्न तल द्वारा।

प्रश्न 2.
अक्षांश का मान बढ़ने पर अक्षांश रेखाओं की परिधि छोटी या बड़ी होती है?
उत्तर :
छोटी होती है।

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प्रश्न 3.
सबसे बड़ी अक्षांश रेखा कौन-सी है?
उत्तर :
भूमध्य रेखा।

प्रश्न 4.
किस अक्षांश रेखा को महान वृत्त कहते हैं?
उत्तर :
0° अक्षांश रेखा या भू-मध्य रेखा को।

प्रश्न 5.
भूमध्य रेखा का अक्षांश कितना है?
उत्तर :
भूमध्य रेखा का अक्षांश 0° है।

प्रश्न 6.
किसी स्थान और उसके प्रतिपाद स्थान में कितने समय का अन्तर होता है?
उत्तर :
किसी स्थान एवं उसके प्रतिपाद स्थान के स्थानीय समय में 12 घण्टे का अन्तर होता है।

प्रश्न 7.
किसे महानवृत्त कहा जाता है?
उत्तर :
भूमध्यरेखा या विषुवत रेखा।

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प्रश्न 8.
मुख्य मध्यान्ह रेखा का देशानतर कितना है?
उत्तर :

प्रश्न 9.
अक्षांश रेखाओं का महत्व सबसे अधिक क्यों है?
उत्तर :
अक्षांश रेखाओं की सहायता से जलवायु की जानकारी मिलती है।

प्रश्न 10.
ग्रीनविच मध्याह्न रेखा का मान क्या है?
उत्तर :
0° देशान्तर रेखा।

प्रश्न 11.
किन रेखाओं को मध्याह्न रेखा कहते हैं?
उत्तर :
उत्तर से दक्षिण खींची गयी कल्पित रेखा को।

प्रश्न 12.
किस देशान्तर रेखा को ग्रीनविच रेखा भी कहते हैं।
उत्तर :
प्रधान मध्याह्न रेखा को।

प्रश्न 13.
भारत का प्रमाणिक देशानतर कितना है?
उत्तर :
82 \(\frac{1}{2}\)° पूरव

प्रश्न 14.
मुख्य मध्यान्ह रेखा कहाँ से होकर गुजरती है।
उत्तर :
ग्रीनवीच।

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प्रश्न 15.
कर्क रेखा से क्या समझते हैं?
उत्तर :
कर्क रेखा पृथ्वी की उत्तरम अक्षांश रेखा है।

प्रश्न 16.
किस तारीख को मकर रेखा पर सूर्य की किरणें चमकती हैं?
उत्तर :
21 जून।

प्रश्न 17.
किस अक्षांश पर जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में रहता है 24 घण्टे का दिन होता है?
उत्तर :
66 \(\frac{1}{2}\)° उत्तर

प्रश्न 18.
A.M. (Ante-meridian) का क्या अर्थ है?
उत्तर :
दोपहर के पहले का समय।

प्रश्न 19.
P.M. (Post-meridian) का क्या अर्थ है?
उत्तर :
दोपहर के बाद का समय।

प्रश्न 20.
एक डिग्री देशान्तर के परिवर्तन से समय में कितना अन्तर होता है?
उत्तर :
4 मिनट ।

प्रश्न 21.
भारतीय प्रमाणिक समय और ग्रीनविच समय में कितना अन्तर है?
उत्तर :
5 घं० 30 मिनट।

प्रश्न 22.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहाँ से होकर गुजरती है?
उत्तर :
प्रशान्त महासागर से होकर ।

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प्रश्न 23.
कोलकाता का अक्षांश और देशान्तर बताओ।
उत्तर :
22° 30′ उत्तर और 88° 30° पूरब।

प्रश्न 24.
उत्तरी गोलार्द्ध के किस स्थान से धुवतारा की ऊँचाई 90° होती है?
उत्तर :
उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी धुव (90° उत्तरी अक्षांश) पर घुवतारे की ऊँचाई 90° होती है।

प्रश्न 25.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा किस जलडमरूमध्य से होकर खींची गयी है?
उत्तर :
बेरिंग जलडमरूमध्य से।

प्रश्न 26.
पृथ्वी पर किन्हीं दो स्थानों के बीच लघुतम दूरी के लिए किस पथ का अनुसरण किया जाता है?
उत्तर :
महान वृत्त पथ।

प्रश्न 27.
शीत कटिबन्ध किन अक्षांशों के बीच स्थित है?
उत्तर :
66\(\frac{1}{2}\)° अक्षांश रेखाओं के बीच।

प्रश्न 28.
कोलकाता के प्रतिपाद स्थान का देशान्तर कितना है?
उत्तर :
180° – 88° 30′ पूरव = 91° 30′ पश्चिम।

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प्रश्न 29.
भारतीय प्रमाणिक देशान्तर रेखा कहाँ से होकर गुजरती है?
उत्तर :
प्रयागराज (82° 30′ पूरब)।

प्रश्न 30.
मुख्य मध्यान्ह रेखा का प्रतिपाद क्या होगा?
उत्तर :
180° – 0° = 180°

प्रश्न 31.
कौन सी अक्षांश रेखा पृथ्वी को दो समान भागों में बाँट देती है?
उत्तर :
भूमध्य रेखा।

प्रश्न 32.
उत्तरी ध्रुव से ध्रुव तारे की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर :
90°

प्रश्न 33.
180° देशान्तर को किस रूप में जाना जाता है?
उत्तर :
180° देशान्तर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 34.
प्रतिपाद बिन्दु क्या है?
उत्तर :
पृथ्वी के ग्लोब पर स्थित किसी स्थान के ठीक ज्यामितीय विपरीत स्थित स्थान को प्रतिपाद बिन्दु कहते हैं।

प्रश्न 35.
रूस में कुल कितने समय जोन हैं?
उत्तर :
रूस में कुल 11 समय जोन हैं।

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प्रश्न 36.
कोई व्यक्ति अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करते समय कब एक दिन बढ़ाता है?
उत्तर :
जब कोई व्यक्ति अन्तरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पश्चिम से पूर्व को पार करता है तो वह एक दिन बढ़ा लेता है।

प्रश्न 37.
उच्च अक्षांश क्या है?
उत्तर :
60° से 90° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों को उच्च अक्षांश कहते हैं।

प्रश्न 38.
किस देशान्तर को भारतीय प्रमाणिक देशान्तर माना जाता है?
उत्तर :
80° 30′ E देशान्तर को भारतीय प्रमाणिक देशान्तर माना गया है।

प्रश्न 39.
प्रधान मध्याह्न रेखा का प्रतिपाद क्या है?
उत्तर :
प्रधान मध्याह्न रेखा (0° देशान्तर) का प्रतिपाद 180° देशान्तर है।

प्रश्न 40.
किसी स्थान की स्थिति का अन्दाजा किस रेखा की सहायता से लगाया जा सकता है?
उत्तर :
भूमध्य रेखा की सहायता से।

प्रश्न 41.
एक वृत्त में कितने (°) डिग्री होते हैं?
उत्तर :
360° होते हैं।

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प्रश्न 42.
भूमध्य रेखा से उत्तरी धुव या दक्षिणी धुव के बीच कितने (°) डिग्री की दूरी होती है?
उत्तर :
90° की दूरी होती है।

प्रश्न 43.
सर्वोच्च अक्षांश किसे कहते हैं?
उत्तर :
90° उत्तर तथा 90° दक्षिण अक्षांश को सर्वोच्च अक्षांश कहते हैं।

प्रश्न 44.
किस अक्षांश रेखा को महान वृत्त कहते हैं?
उत्तर :
भूमध्य रेखा (Equator) को महान वृत्त (Great Circle) कहते हैं।

प्रश्न 45.
दोनों गोलार्द्धों में कर्क और मकर रेखा के बीच कौन सा कटिबन्ध पड़ता है?
उत्तर :
उष्ण कटिबन्ध (Torrid or Tropical Zone)।

प्रश्न 46.
दोनों गोलार्द्धों में 23 \(\frac{1}{2}\) ° तथा 66 \(\frac{1}{2}\)°, अक्षांश रेखाओं के मध्य कौन सा कटिबन्ध स्थित है?
उत्तर
शीतोष्ण कटिबन्य।

प्रश्न 47.
शीतोष्ण कटिबन्ध (Temperate Zone) को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर :
दो भागों में-उष्ण-शीतोष्ण कटिबन्ध और शीत-शीतोष्ण कटिबन्ध।

प्रश्न 48.
विषुवत् रेखा से मुम्बई की दूरी कितनी है?
उत्तर :
2109 किमी० उत्तर।

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प्रश्न 49.
विषुवत रेखा से दिल्ली की दूरी कितनी है?
उत्तर :
3330 किमी० उत्तर।

प्रश्न 50.
मध्याह्न रेखा कहाँ से गुजरती है?
उत्तर :
लन्दन के ग्रीनविच प्रयोगशाला से।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
प्रतिपाद स्थान क्या है?
उत्तर :
पृथ्वी के ग्लोब पर स्थित किसी स्थान को ठीक ज्यामितिक विपरीत स्थित स्थान को प्रतिपाद बिन्दु या स्थान कहते हैं।

प्रश्न 2.
पृथ्वी का ग्रिड क्या है?
उत्तर :
ग्लोब पर देशान्तर और अक्षांश रेखाओं का पूर्ण नेटवर्क (Complete Network) जो एक-दूसरे को क्रिसक्रॉस (Criss-Cross) करते हुए खींचा गया है, इसे पृथ्वी का ग्रिड कहते हैं।

प्रश्न 3.
अक्षांश से क्या समझते हैं?
उत्तर :
भूमध्य रेखा से उत्तर तथा दक्षिण किसी स्थान विशेष की कोणात्मक दूरी को अक्षांश कहते हैं।

प्रश्न 4.
अक्षांश रेखाओं की विशेषताएँ बताओ।
उत्तर :

  1. अक्षांश रेखा विषुवत रेखा के समानान्तर होती है।
  2. अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 180 होती है ।
  3. अक्षांश रेखा पश्चिम से पूर्व खिंची गई है ।

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प्रश्न 5.
अक्षांश किसे कहते हैं?
उत्तर :
अक्षांश (Latitude) :- भूमध्य रेखा से उत्तर तथा दक्षिण किसी स्थान विशेष की कोणात्मक दूरी को अक्षांश कहते हैं।

प्रश्न 6.
अक्षांश रेखाएँ क्या हैं?
उत्तर :
अक्षांश रेखा (Parallel of Latitude) :- समान अक्षांश वाले सभी स्थानों को मिलाती हुई पूर्व से पथ्चिम खींची गयी कल्पित रेखा को अक्षांश रेखा कहते हैं।

प्रश्न 7.
देशान्तर किसे कहते हैं?
उत्तर :
देशान्तर (Longitude) :- प्रधान मध्याह्न रेखा से पूर्व या पश्चिम की ओर स्थित किसी स्थान की कोणात्मक दूरी को देशान्तर कहा जाता है।

प्रश्न 8.
महान वृत्त किसे कहते हैं?
उत्तर :
(0° अक्षांश) भूमध्यरेखा ही एक काल्पनिक महान वृत्त है।

प्रश्न 9.
180° देशान्तर को किस रूप में जाना जाता है?
उत्तर :
180° देशान्तर को अन्तराष्ट्रीय तिथि रेखा के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 10.
रूस में कुल कितने समय कटिबंध है?
उत्तर :
रूस में कुल 11 समय कटिबंध है।

प्रश्न 11.
उच्च अक्षांश से क्या समझते हैं?
उत्तर :
60° से 90° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों को उच्च अक्षांश कहते हैं।

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प्रश्न 12.
कर्क रेखा को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
भूमध्य रेखीय वृत्त से 23 \(\frac{1}{2}\)°, उत्तरी अक्षांश पर खींचे गये वृत्त ही कर्क रेखा कहलाते हैं।

प्रश्न 13.
मकर रेखा से क्या समझते हैं?
उत्तर :
भूमध्य रेखा वृत्त से 23 \(\frac{1}{2}\)° दक्षिणी अक्षांश पर खींचे गये वृत्त को मकर रेखा कहते हैं।

प्रश्न 14.
अक्षांश रेखाओं का दो उपयोग लिखें।
उत्तर :
(i) इन रेखाओं से पृथ्वी के गोले पर स्थित किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण आसानी से किया जा सकता है। अक्षाश एवं देशान्तर रेखाओं के कटाव बिन्दु द्वारा किसी स्थान की स्थिति की जानकारी होती है।
(ii) अक्षांश रेखाओं से जलवायु की जानकारी होती है। भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण जाने पर तापक्रम कम होता जाता है।

प्रश्न 15.
अक्षांश एवं देशान्तर रेखाओं के क्या उपयोग हैं?
उत्तर :
अक्षांश रेखा की सहायता से किसी देश की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है ।
देशान्तर रेखा की सहायता से किसी देश की स्थिति और समय की जानकारी प्राप्त होती है ।

प्रश्न 16.
देशान्तर रेखाओं की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :

  1. देशान्तर रेखा प्रधान मध्याह्न रेखा के समानान्तर होती है।
  2. देशान्तर रेखाओं की कुल संख्या 360 होती है।
  3. देशान्तर रेखा उत्तर से दक्षिर खिंची गई है ।

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प्रश्न 17.
उष्ण कटिबंध से क्या समझते हैं?
उत्तर :
भूमध्य रेखा के उत्तर एवं दक्षिण स्थित 30° अक्षांश तक के क्षेत्र को निम्न अक्षांश कहा जाता है। यह भाग सूर्य से अधिक उष्मा प्राप्त करता है, अत: यह गर्म भाग है और इस कटिबंध को उष्ण कटिबंध (Tropical Zone) कहते हैं।

प्रश्न 18.
देशान्तर से क्या समझते हैं?
उत्तर :
प्रधान मध्याह्ल रेखा से पूर्व या पध्चिम की ओर स्थित किसी स्थान की कोणात्मक दूरी को देशान्तर कहा जाता है।

प्रश्न 19.
देशान्तर रेखाओं की पारस्परिक दूरी से क्या समझते हैं?
उत्तर :
देशान्तर रेखायें परस्पर समानान्तर नहीं होते, अत: दो समानान्तर रेखाओं के बीच की दूरी सर्वत्र समान नहीं होती है। साधारणतया 1° के अन्तर पर दो देशान्तर रेखाओं के बीच विषुवत रेखा पर सर्वाधिक दूरी 111.1 किमी०, कर्क रेखा एवं मकर रेखा (23 \(\frac{1}{2}\)° अक्षांश) पर 102.4 किमी० तथा उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव वृत्तों पर 44.8 किमी० और धुवीय बिन्दुओं पर वे आपस में मिल जाती हैं।

प्रश्न 20.
प्रधान मध्याह्न रेखा क्या है?
उत्तर :
जिस प्रकार अक्षांश रेखाओं की गणना के लिए एक संदर्भ बिन्दु के रूप में भूमध्य रेखा (0°) की परिकल्पना की गयी है, उसी प्रकार देशान्तर रेखाओं की गणना के लिए प्रधान मध्याह्न (0° देशान्तर) की कल्पना की गयी है। 1884 ई० में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह निर्णय लिया गया कि लंदन के निकट अवस्थित ग्रीनविच के रॉयल ऑब्जर्वेटरी (Royal Observatory) से गुजरने वाली रेखा प्रधान मध्याह्न रेखा होगी। इस देशान्तर का मान 0° है। इस रेखा को ग्रीनविच मध्याह्न रेखा भी कहते हैं।

प्रश्न 21.
पृथ्वी जाल से क्या समझते हैं?
उत्तर :
ग्लोब पर अक्षांश और देशान्तर रेखाओं की एक जाल (Net) सदृश्य रचना होती है। इससे पृथ्वी के धरातल पर स्थित स्थान की स्थिति ठीक-ठीक ज्ञात होती है। अक्षाश व देशान्तर रेखाओं के जाल की रचना को पृथ्वी का जाल (Earth Grid) कहते हैं।

प्रश्न 22.
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
(i) फिजी तथा न्यूजीलैण्ड आदि द्वीपों को दूर रखने के लिए यह दक्षिणी प्रशान्त महासागर में पूरब की ओर मुड़ जाती है।
(ii) एलूशियन द्वीप समूह के पथ्विमी किनारे से होकर यह जाती है।

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प्रश्न 23.
देशान्तर रेखाएँ क्या हैं ?
उत्तर :
देशान्तर रेखा (Meridian of Longitude) :- मुख्य मध्याह्न रेखा के समान कोणिक दूरी या समान देशान्तर के स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखा को देशान्तर रेखा कहते हैं।

प्रश्न 24.
ग्रीनविच मीन टाइम (G.M.T.) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दोनों धुवों को मिलाते हुए तथा भूमध्य रेखा को समकोण पर काटते हुए उत्तर से दक्षिण खींची गयी कल्पित रेखा को मध्याह्न रेखा (Meridian) कहते है, क्योंकि इस रेखा के सभी स्थानों पर मध्याह्न काल एक ही साथ होता है। इसमें (26 जून 1884 ई० में हुए अन्तर्राष्ट्रीय सहमति के आधार पर) एक रेखा को, जो लन्दन के निकट स्थित ग्रिनविच प्रयोगशाला से होकर गुजरती है, मुख्य या प्रधान मध्याह्न रेखा कहते हैं। इस रेखा को ग्रीनविच मध्याह्न रेखा भी कहते हैं।

प्रश्न 25.
क्रोनोमीटर क्या है?
उत्तर :
क्रोनोमीटर :- यह एक प्रकार की घड़ी है, जो ग्रीनविच के समय के अनुसार चलती है। यह सदेव ग्रीनविच का समय बताती है। ग्रीनविच का समय और किसी अन्य स्थान का समय ज्ञात रहने पर उस स्थान का देशान्तर ज्ञात किया जाता है।

प्रश्न 26.
सेक्सटेण्ट क्या है?
उत्तर :
सेक्सटेण्ट :- यह एक यंत्र है जिसकी सहायता से सूर्य, चन्द्रमा और तारों की क्षितिज रेखा से कोंणिक ऊँचाई ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 27.
किसी स्थान एवं उसके प्रतिपाद स्थान के बीच समय का अन्तर 12 घण्टे क्यों होता है?
उत्तर :
किसी स्थान तथा उसके प्रतिपाद के बीच 12 घण्टे का अन्तर इसलिए होता है, क्योंकि प्रतिपाद (Antipode) किसी स्थान के ठीक विपरीत स्थित स्थान को कहते हैं।

प्रश्न 28.
10° उत्तरी अक्षांश एवं 60° पूर्वी देशान्तर पर स्थित किसी स्थान का प्रतिपाद स्थान ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
निश्चित स्थान का प्रतिपाद स्थान 10° 5 अक्षांश तथा 180° – 60° = 120° W देशान्तर परं होगा।

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प्रश्न 29.
अक्षांश रेखाओं को समानान्तर अक्षांश रेखा क्यों कहते हैं?
उत्तर :
भूमध्य रेखा से समान कोणिक दूरी अर्थात समान अक्षांश के स्थानों को मिलाने वाली पश्चिम से पूर्व खींची गयी कल्पित रेखा को अक्षांश रेखा कहते हैं। ये रेखाएँ भूमध्य रेखा के समानान्तर होते हैं, अतः इन्हें समानान्तर अक्षाश या समानान्तर रेखाएँ (Parallels) भी कहते हैं।

प्रश्न 30.
मुख्य मध्याह्न रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर :
प्रधान मध्याह्न (Prime Meridian) :- दोनों धुवों को मिलाते हुए उत्तर से दक्षिण खींची गयी कल्पित रेखा को मध्याह्न रेखा कहते हैं क्योंकि इन रेखाओं पर मध्याह्न काल या दोपहर एक साथ ही होता है। मध्याह्न रेखाओं की कुल संख्या 360 है। इनमें से बिटेन के लन्दन शहर में स्थित ग्रीनविच प्रयोगशाला से होकर गुजरने वाली मध्याह्ल रेखा को मुख्य मध्याह्न रेखा या ग्रीनविच रेखा कहते हैं, इसका देशान्तर 0° है।

प्रश्न 31.
10° उत्तरी अक्षांश तथा 82° 30″ पूर्व देशान्तर के प्रतिपाद स्थान का निर्धारण करो।
उत्तर :
10° उत्तरी अक्षांश का प्रतिपाद – 10° दक्षिण अक्षांश तथा 82° 30″ पूर्व देशान्तर के प्रतिपाद 180°- 82° 30″ पूर्व = 97° .30″ पश्चिम ।

प्रश्न 32.
क्रोनो मीटर क्या है?
उत्तर :
क्रोनोमीटर एक घड़ी है जो हमेशा ग्रीनविच समय (G.M.T.) या 0° देशान्तर रेखा का स्थानीय समय बताती है। अन्तर्राष्ट्रीय कार्यो में इस घड़ी का प्रयोग किया जाता है। क्रोनोमीटर हर जहाजी अपने पास रखता है। अगर किसी स्थान का स्थानीय समय और ग्रीनविच का समय मालूम कर लें तो दोनों के अन्तर में 4 का भाग देने से (क्योंकि 1° पर 4 मिनट का अन्तर पड़ता है) उस स्थान का देशान्तर मालूम हो जायेगा।

प्रश्न 33.
किसी स्थान और उसके प्रतिपाद स्थान के समय में 12 घण्टे का अन्तर क्यों होता है?
उत्तर :
किसी स्थान एवं उसके प्रतिपाद स्थानों के देशान्तरों में 180° का अन्तर होता है। चूंकि 1° देशान्तर के अन्तर पर 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है। अत: 180° देशान्तर के अन्तर पर 180 × 4 = 720 मिनट 12 घण्टे समय का अन्तर पड़ता है। यही कारण है कि किसी स्थान एवं उसके प्रतिपाद स्थान के समयों में 12 घण्टे समय का अन्तर होता है।

प्रश्न 34.
भारत का प्रामाणिक समय क्या है?
उत्तर :
सम्पूर्ण भारत देश में घड़ियाँ 82 \(\frac{1}{2}\)° पूर्वी देशान्तर रेखा के स्थानीय समय के अनुसार चलती है। अत: 82 \(\frac{1}{2}\)° पूर्वी देशान्तर रेखा के स्थानीय समय को भारत का प्रमाणिक समय (Indian Standard Time या I.S.T.) कहते है।

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प्रश्न 35.
कौन-सी रेखा पूर्ण गोलार्द्ध को उत्तरी और दक्षिणी दो बराबर गोलार्द्धो में बाँटती है? इसका अक्षांश कितना है?
उत्तर :
भू-मध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिणी गोलार्द्ध नामक दो समान अर्द्ध भागों में विभाजित करती है। इसकी अक्षांश संख्या 0° है।

प्रश्न 36.
55° उत्तरी अक्षांश और 23° पश्रिम देशान्तर स्थान का प्रतिपाद स्थान क्या होगा?
उत्तर :
55° N अक्षांश के प्रतिपाद स्थान का अक्षांश 55° S होगा। 23° W देशान्तर के प्रतिपाद स्थान का देशान्तर = 180° – 23° W = 157° E देशान्तर होगा।

प्रश्न 37.
सन् 1900 ई० अधिवर्ष क्यों नहीं है?
उत्तर :
सन् 1900 शताब्दी है, पर यह 400 से विभाजित नहीं होता है। इसलिए यह अधिवर्ष (Leap Year) नहीं है।

प्रश्न 38.
भारत किस मध्याह्न से प्रमाणिक समय निकालता है?
उत्तर :
भारत का प्रमाणिक समय 88\(\frac{1}{2}\)° (इलाहाबाद के समीप नैनी, कड़ा) देशान्तर रेखा से ज्ञात किया ज़ाता है।

प्रश्न 39.
एक यात्री भूमध्यरेखा के सहारे यात्रा करने पर कब समय के परिवर्तन का अनुभव करता है?
उत्तर :
पृथ्वी के अपनी कीली पर पश्चिम से पूरब घूमने के कारण ही देशान्तर में परिवर्तन के साथ स्थानीय समय में अन्तर मिलता है। प्रति 1° देशान्तर पार करने पर 4 मिनट स्थानीय समय में अन्तर मिलता है। अत: भूमध्य रेखा के सहारे यात्रा करने पर देशान्तर परिवर्तन होता रहता है।

प्रश्न 40.
भूमध्य रेखा से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
भूमध्य रेखा (Equator) :- वह कल्पित रेखा जो 0° पर पृथ्वी के बीचों-बीच पथ्चिम से पूर्व खींची गयी है। यह पृथ्वी को दो बराबर भागों में विभाजित करती है। यह पृथ्वी का सबसे बड़ा अक्षांशीय वृत्त है। इस पर वर्ष में दो बार सूर्य की किरणें लम्बवत् चमकती है। इसे प्रधान अक्षांश रेखा भी कहते हैं।

प्रश्न 41.
उच्च, मध्य और निम्न अक्षांश से क्या समझते हो?
उत्तर :
उच्च अक्षांश (High Latitude) :- विषुवत रेखा के उत्तर व दक्षिण 60° से ध्रुवों के बीच के अक्षांशों को उच्च अक्षांश कहते हैं।
मध्य अक्षांश (Mid Latitude) :- भूमध्य रेखा के उत्तर व दक्षिण 30° अक्षांश से 60° अक्षांश के बीच के अक्षांशों को मध्य अक्षांश कहते हैं।
निम्न अक्षांश (Low Latitude) :- भूमध्य रेखा के उत्तर एवं दक्षिण में 30° अक्षांशों के बीच के क्षेत्र को निम्न अक्षांश कहते हैं।

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प्रश्न 42.
गोलार्द्ध से क्या समझते हो?
उत्तर :
गोलार्द्ध (Hemisphere) :- पृथ्वी के मध्य में विषुवत रेखा पश्चिम से पूर्व खींची गयी है। इस रेखा के उत्तरी भाग को उत्तरी गोलार्द्ध और दक्षिणी भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं। इसी प्रकार प्रधान देशान्तर या ग्रीनविच रेखा भी पृथ्वी को दो बराबर भागों में बॉटती है। इसके पथ्विमी एवं पूर्वी भाग को क्रमशः पथ्चिमी गोलार्द्ध और पूर्वी गोलार्द्ध कहते हैं।

प्रश्न 43.
समय कटिबंध क्या है?
उत्तर :
समय कटिबंध (Time Zone) :- बड़े देशों के देशान्तर से प्रमाणिक समय ज्ञात करने में अनेक असुविधाएँ उत्पन्न हो जाती है; जैसे- सयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और रूस के विभित्र स्थानों के समय में चार-पाँच घण्टे का अन्तर हो जाता है। इन असुविधाओं को ध्यान मे रखकर भूमण्डल को 24 समय कटिबन्धों में बाँटा गया है। इसका एक मानक समय होता है। इस समय कटिबंध में एक-एक घण्टे का अन्तर रहता है। पृथ्वी पर प्रत्येक काल क्षेत्र में 15° देशान्तर का विस्तार रहता है। कनाडा में 5 काल क्षेत्र है। वहाँ 60,75,90,105 तथा 120 देशान्तर रेखाओं के स्थानीय समय को प्रमाणिक समय माना जाता है। यूरोप में तीन समय कटिबन्ध हैं।

प्रश्न 44.
कोणात्मक दूरी किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के वक्राकार सतह पर स्थित किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच जो कोण भूमध्यरेखीय व्यास के सहारे भू-केन्द्र पर बनता है, उस कोण को कोणात्मक दूरी (Angular Distance) कहते हैं।

प्रश्न 45.
भूमध्य रेखा को अन्य किन नामों से पुकारते हैं और क्यों?
उत्तर :
भूमध्य रेखा का अन्य नाम विषुव रेखा या समदिवा रात भी है। विषुवत (Equinox) का तात्पर्य दिन और रात की समान अवधि से है। भूमध्य रेखा पर सूर्य वर्ष भर लम्बवत् चमकता है। अत: यह समदिवा रात्रि या विषुवत रेखा (Line of Equinox) भी कहलाती है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
अक्षांश और अक्षांश रेखायें क्या हैं?
उत्तर :
अक्षांश (Latitude) :- पृथ्वी के केन्द्र से भू-पृष्ठ पर भू-मध्य रेखा (Equator) के उत्तर और दक्षिण में स्थित एक स्थान पर किसी भी बिन्दु की कोणिक स्थिति जिसे अंशों, मिनटों और सेकेण्डों में व्यक्त की जाती है उसे अक्षांश (Latitude) कहते है।

अक्षांश रेखायें (Parallels of Latitude) :- विषुवत रेखा के दोनों ओर जो रेखायें विषुवत रेखा के समानान्तर खींची हुई (कल्पित रेखायें) दिखाई देती है उन्हें अक्षांश रेखायें कहते हैं। अक्षांश रेखायें छोटे-छोटे वृत्त हैं जो विषुवत रेखा के समानान्तर दोनों धुवों के बीच खींचे जाते हैं। इसे अक्षांश वृत्त भी कहते हैं। ग्लोब पर उत्तरी या दक्षिणी धुव को केन्द्र मानकर खींची हुई समानान्तर रेखायें जो भू-मध्य रेखा के समानान्तर केन्द्रीय वृत्त बनाती है। भू-मध्य रेखा वृहत्तम अक्षांश वृत्त है जिसके दोनों ओर अक्षांश वृत्त क्रमशः छोटे होते जाते हैं और धुव बिन्दु मात्रा से प्रदर्शित होता है।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण

प्रश्न 2.
अक्षांश रेखाओं की विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर :
अक्षांश रेखाओं की विशेषताएँ (Features of lines of latitude) :-

  1. अक्षांश रेखायें 0° से 90° दक्षिण तथा 0° से 90° उत्तर तक खींची जाती है। इनकी कुल संख्या 180 है।
  2. ये सभी रेखायें भू-मध्य रेखा के समानान्तर होती हैं।
  3. दो करीब के अक्षांशों के बीच की दूरी लगभग 111 कि॰मी० होती है।
  4. ये रेखायें पूरब-पःचिम दिशा में खींची जाती हैं।
  5. ये रेखायें पूर्ण वृत्त होती हैं।
  6. भू-मध्य रेखा एक अक्षांश रेखा है और सभी अक्षांश रेखायें इसके उत्तर एवं दक्षिण समानान्तर खींची जाती हैं।

प्रश्न 3.
अक्षांश रेखाओं की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर :
अक्षांश रेखाओं की उपयोगिताएँ (Uses of lines of latitude) :-

  1. दूरी का ज्ञान :- दो अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी 111 कि॰मी॰ होती है। अक्षांश रेखाओं की सहायता से किसी स्थान की भू-मध्य रेखा से उत्तर तथा दक्षिण की दूरी मालूम की जाती है।
  2. किसी स्थान की स्थिति का ज्ञान :- किसी स्थान की स्थिति की जानकारी में अक्षांश रेखा सहायक होती है।
  3. तापमान का ज्ञान :- विषुवत रेखा पर गर्मी अधिक पड़ती है। भू-मध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण जाने पर तापमान कम होता जाता है। अक्षांश रेखाओं की सहायता से ताप कटिबन्धों का ज्ञान होता है।
  4. जलवायु का ज्ञान :- अक्षांश रेखाओं द्वारा किसी स्थान की जलवायु की जानकारी मिलती है। इन्हीं के द्वारा पृथ्वी को वायुभार एवं स्थायी हवाओं की पेटियों में बाँटा गया है।

प्रश्न 4.
देशान्तर और देशान्तर रेखा की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
देशान्तर (Longitude) :- भू-तल के किसी बिन्दु से गुजरने वाली मध्याह्न (Meridian) तथा प्रधान मध्याह्न (Prime Meridian) रेखा के मध्य की कोणिक दूरी उक्त बिन्दु की देशान्तर (Longitude) होती है। ग्रीनविच (लन्दन) से गुजरनेवाली मध्याह्न रेखा को प्रधान मध्याह्न रेखा माना गया है। मुख्य मध्याह्न रेखा के पूरब या पश्चिम किसी स्थान विशेष की कोणात्मक दूरी को देशान्तर कहते हैं। यह कोण मुख्य मध्याह्न रेखा एवं निश्चित स्थान से गुजरने वाली मध्याह्ल रेखाओं को भू-मध्य रेखा से मिलाने वाली बिन्दुओं को भू-केन्द्र से मिलाने पर बनता है। पूरब की कोणात्मक दूरी पूर्वी देशान्तर और पश्चिम की कोणात्मक दूरी पथिमी देशान्तर कहलाती है।

देशानतर रेखायें (Meridians of Longitude) :- मुख्य मध्याह्न रेखा के समान कोणिक दूरी या समान देशान्तर के स्थानों को मिलाते हुए उत्तर से दक्षिण खींची गयी कल्पित रेखा को देशान्तर रेखा कहते हैं। देशान्तर रेखायें प्रधान मध्याह्न रेखा से 180° पूर्व और 180° पथिम तक होती है। ग्लोब पर 1° के अन्तर पर खोंची हुई देशान्तर रेखाओं की कुल संख्या 360 हैं जिनमें 180 पूर्व और 180 पक्चिम तक होती है। देशान्तर रेखायें दोनों धुवों (उत्तर एव दक्षिण) को मिलाती है।

अत: सभी देशान्तर रेखाओ की लम्बाई बराबर होती है। 1° के अन्तर पर दो क्रमिक देशान्तर रेखाओ के बीच की सर्वाधिक दूरी 111.32 कि०मी० भू-मध्य रेखा पर होती है और वहाँ से धुवों के ओर इनक बीच की दूरी क्रमशः कम होती जाती है तथा धुवों पर ये एक बिन्दु पर मिल जाती हैं। एक दूसरे के ठीक विपरीत भाग में स्थित दो देशान्तर रेखाओ को मिलाने से वृहद् वृत्त का निर्माण होता है, जैसे 0° और 180° देशान्तर अथवा 10° पूर्वी और 170° पध्धिमी देशान्तर।

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प्रश्न 5.
देशान्तर रेखाओं की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
देशान्तर रेखाओं की विशेषताएँ (Features of Meridians of Longitude) :-

  1. देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी धुवों पर कम होती जाती है।
  2. प्रत्येक देशान्तर रेखा अक्षांश रेखा पर लम्ब होती है।
  3. एक देशान्तर रेखा पर स्थित सभी स्थानों का देशान्तर समान होता है।
  4. पूर्वी और पथ्धिमी दोनो गोलार्द्धो की देशान्तर रेखायें मिलकर पूर्ण और वृहद् वृत्त बनाती हैं।
  5. देशान्तर रेखायें अर्द्ध-वृत्त होती हैं।
  6. 180° पूर्वी तथा पथिमी देशान्तर एक ही है।
  7. देशान्तर रेखाओं की कुल संख्या 360 है तथा ये समान लम्बाई की होती है ।
  8. देशान्तर रेखायें उत्तर-दक्षिण दिशा में खींची जाती है।
  9. देशान्तर रेखायें आपस में समानान्तर नहीं होती।

प्रश्न 6.
देशान्तर रेखाओं की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर :
देशान्तर रेखाओं की उपयोगिताएँ (Uses of Meridian of Longitude) :-

  1. समय कटिबन्ध निश्चित करने में ये रेखायें सहायक होती हैं।
  2. किसी स्थान की स्थिति का पता लगाने में सहायक होती है।
  3. इनके द्वारा किसी स्थान का समय मालूम किया जा सकता है।
  4. इनके द्वारा स्थानीय समय का निर्धारण होता है।

प्रत्येक देश की सरकार अपने देश के लगभग मध्य भाग से होकर गुजरे वाली किसी देशान्तर रेखा को प्रमाणिक देशान्तर मानती है और उसका स्थानीय समय ही उस देश का प्रमाणिक समय होता है।

प्रश्न 7.
धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर :
अक्षांश तथा देशान्तर रेखाओं के द्वारा हम किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण कर सकते हैं। उत्तरी-दक्षिणी स्थिति का ज्ञान हमें अक्षांश रेखा से तथा पूर्वी-पध्धिमी स्थिति का ज्ञान देशान्तर रेखा से आसानी से हो जाता है। देशान्तर रेखा अक्षांश रेखा को लम्ब रूप से काटती है। इनका कटान बिन्दु किसी स्थान की स्थिति को बतलाता है। अक्षांश रेखा की सहायता से उत्तरी तथा दक्षिणी एवं देशान्तर रेखा की सहायता से पूर्वी तथा पंचिमी स्थिति का निर्धारण किया जा सकता है। उदाहरण के लिए हमें असम राज्य के धुबरी नगर की स्थिति का पता करना है। धुबरी का अक्षांश 20° उत्तरी अक्षांश है।

इसका देशान्तर 90° पूर्वी देशान्तर है। मानचित्र पर धुबरी नगर की स्थिति वही होगी जहाँ पर ये दोनों रेखायें एक दूसरे को काटती हैं। इसी तरह यदि हमें कोट्टायम की स्थिति का पता करना है और कहा जाय कि वह 9° 36′ N अक्षांश रेखा पर है तो हम उसकी स्थिति का ठीक निर्णय नहीं कर सकते। इसी प्रकार यदि इलाहाबाद शहर की स्थिति जानने के लिए कहा जाय कि यह 25° 30′ N अक्षांश रेखा पर है तो हमें असुविधा होगी। 25° 30′ N अक्षांश रेखा पर कई अन्य नगर भी हो सकते हैं। अत: किसी स्थान की सही स्थिति जानने के लिए अक्षांश रेखा के साथ ही देशान्तर रेखा को जानना जरूरी है।

इसी प्रकार अगर किसी स्थान का सिर्फ देशान्तर कहा जाय तो हम आसानी से उस स्थान की स्थिति नही जान सकते। अलीपुरद्वार को सिर्फ 89° 30′ E कहा जाय तो हम सही स्थिति नहीं जान सकते। अगर देशान्तर के साथ ही अक्षांश भी दिया जाय तो स्थिति जानने में सुविधा होगी। इलाहाबाद की स्थिति जानने के लिए हमें इसका 25° 30′ उत्तरी अक्षांश तथा 81° 54′ पूर्वी देशान्तर जानना होगा। इन दोनों के कटान बिन्दु पर हम इलाहाबाद की स्थिति आसानी से जान सकते हैं। अक्षांश तथा देशान्तर रेखाओं का कटान बिन्दु ही किसी स्थान की वास्तविक स्थिति होती है।

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प्रश्न 8.
अक्षांश रेखाएँ और देशान्तर रेखाओं में क्या अन्तर है?
उत्तर :

अक्षांश रेखाएँ देशान्तर रेखाएँ
1. इनकी संख्या 180 हैं। 1. इनकी कुल संख्या 360 हैं।
2. ये पूर्ण वृत्त होती हैं। 2. ये अर्द्ध वृत्त होते हैं।
3. एक ही अक्षांश रेखा पर स्थित स्थानों के सूर्योदय, सूर्यास्त एक साथ नहीं होते हैं। 3. एक ही देशान्तर पर स्थित स्थानों पर सूर्योदय, सूर्यास्त, दोपहर एक साथ होते हैं।
4. 1°अक्षांश में 111 कि०मी० की दूरी होती है। 4. 1°देशान्तर में 4 मिनट का अन्तर होता है।
5. ये भूमध्यरेखा के समानान्तर पूरब से पश्चिम खींची जाती हैं। 5. ये प्रधान मध्याह्न रेखा के दोनों ओर उत्तर से दक्षिण खींची जाती हैं।

प्रश्न 9.
स्थानीय समय (Local Time) और प्रामाणिक समय (Standard Time) में क्या अन्तर है?
उत्तर :

स्थानीय समय (Local Time) प्रामाणिक समय (Standard Time)
1. किसी स्थान के मध्यकालीन सूर्य द्वारा स्थानीय समय का निर्धारण होता है। 1. किसी देश के लगभग मध्य में स्थित प्रामाणिक मध्याह्न रेखा के मध्यकालीन सूर्य द्वारा प्रामाणिक समय का निर्धारण किया जाता है।
2. किसी की जन्मपत्री बनाने तथा कार्यालय सम्बन्धी कार्य में स्थानीय समय का प्रयोग होता है। 2. मानक समय का व्यवहार सम्पूर्ण देश में किया जाता है।
3. एक ही देश के भिन्न-भिन्न देशान्तरों पर स्थित स्थानों का स्थानीय समय भिन्न-भिन्न होता है। 3. प्रामाणिक समय सम्पूर्ण देश में एक समान होता है।

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प्रश्न 10.
स्थानीय समय से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
स्थानीय समय (Local Time) :- किसी स्थान का स्थानीय समय मध्याह्नकालीन सूर्य की सहायता से निर्धारित किया जाता है। इसी से स्थानीय समय को सौर समय (Solar Time) भी कहते हैं। दिन में जब किसी स्थान पर सूर्य की ऊँचाई सबसे अधिक होती है और किसी वस्तु की छाया सबसे छोटी होती है, तो उस समय उस स्थान पर मध्याह्नकाल (12 बजे दोपहर) होता है। एक ही देशान्तर रेखा के सभी स्थानों पर मध्याह्नकाल एक ही साथ होता है। पुथ्वी की दैनिक गति के कारण 1° देशान्तर पार करने में 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है। पृथ्वी अपनी कीली पर पथ्चिम से पूर्व घूमती है, अत: पूर्व के स्थानों का समय पथ्रिम के स्थानों के समय से अधिक होता है। देशान्तरीय स्थिति के अनुसार मध्याह्लकाल को दोपहर (12.00 Noon) मानकर निर्धारित किये गये किसी स्थान विशेष के समय को वहाँ का स्थानीय समय कहते हैं।

प्रश्न 11.
प्रामाणिक समय क्या है?
उत्तर :
प्रामाणिक समय (Standard Time) :- पृथ्वी के विभित्र स्थानों का स्थानीय समय भित्न-भित्र होता है। अत: यदि किसी देश के भीतर प्रत्येक स्थान पर उसका स्थानीय समय व्यवहार में लाया जाय तो रेल, डाक, तार आदि सरकारी कार्य में काफी कठिनाईयाँ होगी। साथ ही यात्रा-काल में यात्रियों को बार-बार घड़ी का समय बदलना पड़ेगा। इसी कठिनाई को दूर करने के लिए प्रत्येक देश की सरकार अपने देश के लगभग बीच में स्थित किसी देशान्तर रेखा को प्रामाणिक देशान्तर रेखा (Standard Meridian) मान लेती है और उसका स्थानीय समय ही सम्पूर्ण देश का प्रामाणिक समय (Standard Time) माना जाता है।

प्राय: 15° या 7\(\frac{1}{2}\)° से विभाजित होने वाली देशान्तरों को ही प्रामाणिक देशान्तर रेखा माना जाता है ताकि किसी देश के प्रामाणिक समय एवं ग्रीनविच समय में अन्तर एक या आधे घण्टे का अपवर्त्य (Multiple) हो। 0° देशान्तर या ग्रीनविच रेखा का स्थानीय समय सम्पूर्ण ग्रेट ब्रिटेन का प्रामाणिक समय माना जाता है। 0° देशान्तर रेखा को विश्व की प्रामाणिक मध्याह्न रेखा (World’s Standard Meridian) माना गया है।

इस रेखा के समय को ग्रीनविच समय या अन्तराष्ट्रीय समय कहा जाता है। भारत में इलाहाबाद के समीप स्थित कड़ा स्थान से जाने वाली 82 \(\frac{1}{2}\)° E देशान्तर रेखा को भारत की प्रामाणिक देशान्तर रेखा मानकर उसके स्थानीय समय को भारत का प्रामाणिक समय (Indian Standard Time or I.S.T.) माना जाता है। भारत का प्रामाणिक समय ग्रीनविच के समय से 5\(\frac{1}{2}\)° – घण्टा आगे है।

प्रश्न 12.
समय कटिबन्ध से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
समय कटिबन्ध (Time Zone) :- बड़े देशों का एक प्रामाणिक समय ज्ञात करने में अनेक असुविधायें उत्पन्न हो जाती हैं, जैसे- संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और रूस के विर्भिन्न स्थानों के समय में चार-पाँच घण्टे का अन्तर हो जाता है। इन असुविधाओं को ध्यान में रंखकर भूमण्डल को 24 समय कटिबन्धों में बाँटा गया है। इनका एक मानक समय होता है। इस समय कटिबन्ध में एक-एक घण्टे का अन्तर रहता है। पृथ्वी पर प्रत्येक काल क्षेत्र में 150° देशान्तर का विस्तार रहता है। कनाडा में 5 काल क्षेत्र हैं। वहाँ 60,75,90,105 तथा 120 देशान्तर रेखाओं के स्थानीय समय को प्रामाणिक समय माना जाता है। यूरोप में तीन समय कटिबन्ध हैं।

प्रश्न 13.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा केवल महासागरों से होकर क्यों खींची गयी हैं?
अथवा
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा सदैव 180° से मेल क्यों नहीं खाती है?
उत्तर :
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (180°) को पार करने पर तिथि में परिवर्तन कर दिया जाता है। यह रेखा प्रशान्त महासागर के मध्य से होकर गुजरती है। यदि इस रेखा को ज्यों का त्यों अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा मान लिया जाये तो एक ही देश में इस रेखा के दोनों तरफ दो तिथियाँ हो जायेगी। इससे व्यवहारिक कठिनाईयाँ आयेगी। यही कारण है कि इस रेखा को टेढ़ीमेढ़ी कर केवल महासागर पर ही खींचा हुआ मान लिया जाता है।

प्रश्न 14.
महान वृत्त क्या है? इनका उपयोग लिखिए।
उत्तर :
महान वृत्त (Great Circle) :- पृथ्वी के धरातल पर खींचे गये वे सबसे बड़े वृत्त जिनका केन्द्र पृथ्वी का केन्द्र हो तथा जो पृथ्वी को दो समान भागों में बाँट सकते हैं, महान वृत्त कहलाते हैं।
महान वृत्त का उपयोग :- गोल पृथ्वी पर किन्हीं दो स्थानों के बीच की लघुत्तम दूरी तय करने के लिए महान वृत्त पथ का अनुसरण किया जा सकता है। इसीलिए जलयान तथा वायुयान समय एवं ईंचन की बचत के लिए जहाँ तक सम्भव होता है, महान वृत्त के पथ का ही अनुसरण करते हैं। ग्लोब पर एक दूसरे के विपरीत स्थित स्थानों के लिए महान वृत्त पथ का विशेष महत्व है।

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प्रश्न 15.
प्रतिपाद स्थान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
प्रतिपाद, वितल, प्रतिलोम, प्रतिधुव, व्यासात (Antipode) :- जब पृथ्वी की सतह पर के दो स्थान ठीक एक-दूसरे के विपरीत पड़ते हैं अर्थात् जब ये पृथ्वी के व्यास के दोनों छोर पर एक-दूसरे के आमने-सामने पड़ते हैं तो उन्हें एक-दूसरे का वितल (Antipode) कहते हैं।
पृथ्वी की सतह पर एक-दूसरे के विपरीत भाग में स्थित दो बिन्दु जो पृथ्वी के केन्द्र से होकर जाने वाले व्यास के दो छोर होते हैं। यथार्थ प्रतिघ्रुवों के मध्य 180° देशान्तरीय अंतर होता है। दोनों प्रतिधुवों का अक्षांशीय मान समान होता है, किन्तु वे विपरीत गोलार्द्ध में स्थित होते हैं। यदि भू-तल पर कोई बिन्दु 20° पथिमी देशान्तर तथा 25° उत्तरी अक्षांश पर स्थित हो तो उसका प्रतिधुव 160° पूर्वी देशान्तर एवं 25° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित होगा। भू-तल पर किसी प्रदेश के विपरीत भाग में स्थित दूसरे प्रदेश के लिए भी प्रतिधुव शब्द का प्रयोग होता है। प्रतिध्रुव की स्थितियों में मौसम तथा दिन या रात के समय एक-दूसरे के विपरीत होते हैं।

प्रश्न 16.
हम अपने दैनिक जीवन में स्थानीय समय का उपयोग क्यों नहीं करते हैं?
उत्तर :
किसी स्थान पर जब सूर्य आकाश में सबसे अधिक ऊँचाई पर होती है तब दिन के 12 बजते है । इस समय को वहाँ का स्थानीय समय कहते है। एक देशान्तर पर स्थित सभी स्थानों का स्थानीय समय एक होता है। विभिन्न देशान्तर रेखाओं पर स्थित स्थानों के स्थानीय समय में अवश्य अंतर होगा। स्थानीय समय के इस अन्तर के कारण लोग इसका अपने दैनिक जीवन में उपयोग नहीं करते हैं।

प्रश्न 17.
ग्रीनविच मीन समय एवं भारतीय प्रामाणिक समय में तुलना करो।
उत्तर :

ग्रीनविच मीन टाइम (G.M.T.) भारत का प्रामाणिक समय (I.S.T.)
1. 0° देशान्तर रेखा या मुख्य मध्याह्न का स्थानीय समय ग्रीनविच समय (Greenwich Mean Time) कहलाता है। 1. 82 1/2° पूर्वी देशान्तर रेखा के स्थानीय समय को भारत का प्रामाणिक समय (Indian Standard Time) कहते हैं।
2. यह ग्रेट ब्रिटेन का प्रामाणिक समय है, साथ ही यह सम्पूर्ण विश्व का प्रमाणिक समय भी है। 2. यह भारत का प्रामाणिक समय है। सम्पूर्ण भारत की घड़ियाँ इसी के समय के अनुसार चलती है।

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प्रश्न 18.
1 घण्टा 15° देशान्तर के बराबर क्यों होता है? व्याख्या करो।
उत्तर :
चूँकि पृथ्वी अपनी काल्पनिक अक्ष पर पथिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसीलिए ग्रीनविच से पूर्व के स्थानों का समय ग्रीनविच समय से आगे होगा और ग्रीनविच से पथिम के स्थानों का पीछे होगा । समय के अन्तर की इस दर से गणना ठीक-ठाक की जा सकती है। पृथ्वी 24 घंटे में 360° देशान्तर घूम जाती है, इसीलिए पृथ्वी की घूर्णन की गति 15° देशान्तर प्रति घंटा या प्रति चार मिनट में 1° देशान्तर है। दूसरे शब्दों में –
∵ 15° घूमने में 60 मिनट समय लगते हैं।
∴ 1° घूमने में \(\frac{60}{15}\) = 4 मिनट समय लगेंगे।
इस प्रकार जब ग्रीनविच में दोपहर के बारह बजते है उस समय ग्रीनविच के पूर्व में 15° देशान्तर पर एक घण्टा समय आगे होगा। अर्थात् वहाँ दिन का एक बजा होगा। किन्तु ग्रीनविच के पधिम में 15° देशान्तर पर समय 15 × 4 = 60 मिनट अर्थात् 1 घण्टा पीछे होगा। अर्थात् वहाँ सुबह के 11 बजे होंगे। इसी प्रकार 180° देशान्तर पर उस समय आधी रात होगी जब ग्रीनविच में दोपहर 12 बजे का समय होगा।

प्रश्न 19.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 180° देशान्तर के समानान्तर खींची नहीं जाती क्यों ?
उत्तर :
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 180° देशान्तर तिथि विभाजक का कार्य करती है। इस रेखा से ठीक पूरब और पध्चिम 24 घण्टे का अन्तर होता है। यदि यह किसी देश या द्वीप से होकर गुजरती है, तो उस देश या द्वीप में एक ही समय में दो दिन और दिनांक होंगे। अत: इस समस्या को सुलझाने के लिए 1884 ई० में वाशिंगटन में एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया। वहाँ यह तय किया गया कि अन्तरांट्रीय तिथि रेखा इस प्रकार से निर्धारित की जाय कि यह किसी देश से होकर न पार करे। अत: यह कहीं कुछ पथिम और कहीं कुछ पूर्व की ओर मुड़ गयी है।

प्रश्न 21.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि-रेखा की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि-रेखा की विशेषताएँ :-

  1. यह पूर्ण रूप से प्रशान्त महासागर में 180° देशान्तर का अनुसरण नहीं करती।
  2. यह आर्कटिक महासागर में 75° उत्तरी अक्षांश पर महाद्वीप से बचने के लिए पूरब की ओर मुड़ जाती है और बेरिंग समुद्र से निकलती गयी है।
  3. बेरिंग समुद्र में यह पथिम की ओर मुड़ जाती है।
  4. यह एलूशियन द्वीप-समूह के पश्चिमी किनारे से होकर जाती है।
  5. फिजी तथा न्यूजीलैण्ड टापुओं को दूर रखने के लिए यह दक्षिणी प्रशान्त महासागर में पूरब की ओर मुड़ जाती है।
  6. इस रेखा को स्थल भाग से दूर रखा गया है। यह रेखा यदि किसी देश के बीच से होकर गुजरती है तो उसके दोनों दिशाओं की एक ही दिशा में अलग-अलग तिथियाँ माननी पड़ती है।

प्रश्न 22.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि-रेखा से क्या समझते हो ?
उत्तर :
180° देशान्तर से मेल खाती हुई टेढ़ी- मेढ़ी काल्पनिक (Imaginary) रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि-रेखा कहते हैं। भू-मण्डल पर 180° देशान्तर के लगभग साथ-साथ निर्धारित एक काल्पनिक रेखा प्रशांत महासागर के जलीय भाग से गुजरती है। इस तिथि रेखा के दोनों ओर एक तिथि या दिन का अन्तर पाया जाता है। अत: इस रेखा को पार करते समय तिथि-परिवर्तन किया जाता है। यदि इस रेखा के पूरब में सोमवार है तो इसके पथ्विम में मंगलवार होगा। अत: जब कोई जलयान अन्तर्राष्ट्रीय तिथि-रेखा को पार करके पध्चिम की ओर जाती है तो वर्तमान तिथि में एक तिथि जोड़ दी जाती है। इसके विपरीत पूरब की ओर जाने पर एक तिथि घटा दी जाती है।

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इस तिथि-परिवर्तन का मूल कारण यह है कि शून्य देशान्तर या ग्रीनविच रेखा से पूरब की ओर यात्रा करने पर स्थानीय समय क्रमश: बढ़ता है जो 180° पूर्वी देशान्तर तक ग्रीनविच माध्य समय से 12 घंटे तक बढ़ जाता है। इसी प्रकार ग्रीनविच देशान्तर से पथ्थिम की ओर जाने पर स्थानीय समय क्रमश: घटता है और 180° पथिम देशान्तर तक ग्रीनविच माध्य समय से 12 घंटे कम हो जाती है। अत: 180° देशान्तर के दोनों ओर इसके निकट स्थित दो स्थानों के बीच एक दिन (लगभग 24 घंटे) का अन्तर हो जाता है। इस अन्तर के व्यावहारिक समाधान के उद्देश्य से 180° देशान्तर को अन्तर्राष्ट्रीय तिथिपरिवर्तन के लिए चुना गया है।
जलयान सागर से गुजरते हैं। अत: जहाँ 180° देशान्तर रेखा स्थल से गुजरती है वहाँ अन्तर्राष्ट्रीय तिथि-रेखा 180° देशान्तर से मुड़कर सागर में मुड़ती हुई मान ली गयी है।

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प्रश्न 23.
देशान्तर और स्थानीय समय में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर :
देशान्तर एवं स्थानीय समय में सम्बन्ध :- देशान्तर एवं स्थानीय समय के बीच एक निध्चित सम्बन्ध है। पृथ्वी अपनी धूरी पर सूर्य के सामने प्रत्येक 24 घण्टे में एक पूरा चक्कर लगाती है। पृथ्वी पर कुल 360 देशान्तर रेखायें हैं। अत: 360 देशान्तर रेखाओं को पार करने पर 24 घण्टे समय का अन्तर पड़ता है। इस प्रकार 1° देशान्तर पार करने पर \(\frac{24}{360}\) घण्टा = \(\frac{1}{15}\) = 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है।

चूंकि पूथ्वी अपनी धूरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, अतः सूर्य प्रति घण्टे 15° या प्रति 4 मिनट में 1° की दर से पूर्व से पथिम घुमता हुआ दिखाई पड़ता है। पूर्व के स्थानों में सूर्योदय व सूर्यास्त पश्चिम के स्थानों से पहले होता है। अन्य शब्दों में पूर्व के स्थानों के स्थानीय समय पश्चिम के स्थानों के स्थानीय समय की अपेक्षा अधिक रहता है। ग्रीनविच या 0° देशान्तर रेखा पर यदि प्रातःकाल 6 बजा है तो 1° पूर्वी देशान्तर रेखा पर स्थित स्थान का स्थानीय समय प्रात: 6 बजकर 4 मिनट तथा 1° पश्चिमी देशान्तर पर स्थित स्थान का स्थानीय समय प्रात: 5 बजकर 56 मिनट होगा।

प्रश्न 24.
ग्लोब पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण कैसे किया जाता है?
अथवा
भू-पृष्ठ के किसी स्थान की स्थिति किस प्रकार से निर्णीत किया जाता है?
उत्तर :
अक्षांश रेखायें पृथ्वी के पूर्वी-पथ्चिमी भाग को वेष्टित की है एवं विषुवत रेखाओं का अक्षांश 0° है। दूसरी ओर देशान्तर रेखाएँ पृथ्वी के उत्तरी धुव से लेकर दक्षिणी धुव तक विस्तृत है। इंग्लैण्ड के अन्तर्गत ग्रीनविच शहर के ऊपरी भाग से जो देशान्तर रेखा गुजरती है उस देशान्तर रेखा को प्रमुख मध्याह्न रेखा या 0° देशान्तर रेखा कहा जाता है।

प्रत्येक देशान्तर रेखा प्रत्येक अक्षांश रेखा को लम्बवत् रूप से भेदन करती है, एव इसी भेदन बिन्दु की सहायता से पृथ्वी के जिस किसी भी स्थान की स्थिति को निक्वित किया जाता है। अक्षांश रेखा की सहायता से उत्तर-दक्षिण एवं देशान्तर रेखा की सहायता से पूर्वी-पध्चिमी स्थिति का निर्धारण किया जाता है। अर्थात् भू-पृष्ठ पर के किसी स्थान की स्थिति का निर्णय करते समय अक्षांश रेखा एवं देशान्तर रेखा समान रूप से आवश्यक है।

उदाहरण – कलकत्ता का अक्षांश 22° 34′ उत्तर एवं देशान्तर 88° 34′ पूर्व माना गया है। इसका अर्थ यह है कि 22° 34′ उत्तरी अक्षांश रेखा एवं 88° 30′ पूर्वी देशान्तर रेखा के भेदन बिन्दु पर अवस्थित है।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
किसी स्थान के प्रतिपाद स्थान का ज्ञान कैसे कीजिएगा?
उत्तर :
प्रतिपाद स्थान के अक्षांश का निर्णय :-

  1. प्रतिपाद स्थान का अक्षांश उतनी ही डिग्री होता है जितनी डिग्री अक्षांश का स्थान ज्ञात करना है। उसके डिग्री और अक्षांश में कोई अन्तर नहीं होता।
  2. प्रतिपाद स्थान हमेशा विपरीत गोलार्द्ध में होते हैं। यदि कोई स्थान उत्तरी गोलार्द्ध में है तो उसका प्रतिपाद स्थान दक्षिणी गोलार्द्ध में होगा।
  3. प्रतिपाद अक्षांश की स्थिति भू-मध्य रेखा के उत्तर तथा दूसरे स्थान की स्थिति भू-मध्य रेखा के दक्षिण होती है।
  4. प्रतिपाद स्थान का निर्धारण भू-मध्य रेखा को प्रारम्भ मानकर किया जाता है। भू-मध्य रेखा का कोई प्रतिपाद स्थान नहीं होता। भू-मध्य रेखा पर स्थित प्रतिपाद स्थान का गणना संभव नहीं है।

प्रतिपाद स्थान के देशान्तर का निर्णय :-

  1. यदि 180° में से किसी स्थान का देशान्तर घटा दें तो उसके प्रतिपाद स्थान का देशान्तर मिल जाता है।
  2. यदि कोई स्थान 180° देशान्तर रेखा से जितना पूर्व है तो उसका प्रतिपाद स्थान प्रधान मध्याह्न रेखा (0° देशान्तर रेखा) से उतना ही पश्चिम होगा।
  3. यदि कोई स्थान 180° देशान्तर रेखा से जितना पथिम है तो उसका प्रतिपाद स्थान प्रधान मध्याह्न रेखा से उतना ही पूर्व होगा।
  4. जिस स्थान का प्रतिपाद ज्ञात करना हो तो ध्यान रखना होगा कि यदि उसकी दिशा पूर्व में है तो प्रतिपाद स्थान की दिशा पश्चिम में होगी। यदि वह स्थान पश्चिम में है तो उसका प्रतिपाद स्थान पूर्व में होगा।
  5. किसी स्थान एवं प्रतिपाद स्थान के स्थानीय समय का अन्तर 12 घण्टा का होता है। कोलकाता में दिन का 12 बंजा है तो इसके प्रतिपाद स्थान पर रात का 12 बजा होगा।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण

प्रश्न 2.
किसी स्थान के अक्षांश का निर्धारण कैसे कीजिएगा?
उत्तर :
किसी स्थान के अक्षांश का निर्घारण निम्नलिखित तरीके से होता है-
लम्बवत् लड्ठा गाड़कर :- एक सीधा लट्ठा को लम्बवत् गाड़ने पर लट्ठा के शीर्ष एवं उसकी छाया को मिलाने पर घरातल के साथ जो कोण बनता है वह सूर्य की ऊँचाई होता है। किसी स्थान के ठीक ऊपर स्थित बिन्दु के उस स्थान के शिरो बिन्दु (Zenith) कहते हैं। लम्बवत् लटुके स्थान के साथ सूर्य की किरणों से बनने वाले कोण को सूर्य की शिरो बिन्दु से दूरी कहते हैं। सूर्य की कोणिक ऊँचाई एवं सूर्य के शिरो बिन्दु से दूरी का योग 90° होता है। अत: सूर्य की शिरो बिन्दु की दूरी = 90° – सूर्य की ऊँचाई।

दक्षिणी तारा (Cross Star) :- दक्षिणी गोलार्द्ध में धुवतारा दिखाई नहीं पड़ता है । दक्षिणी गोलार्द्ध में ध्रुवतारे की तरह ही दक्षिणी तारा दक्षिणी ध्रुव पर लम्बवत् चमकता है। अतः गोलार्द्ध के किसी स्थान का अक्षांश उतना ही होता है जितना वहाँ दक्षिणी तारा की कोणिंक ऊँचाई होती है।

धुवतारा (Pole Star) :- रात में उत्तरी गोलार्द्ध में किसी स्थान का अक्षांश धुवतारा से मालूम किया जाता है। उत्तरी धुव पर धुवतारा लम्बवत् चमकता है। 90° उत्तरी अक्षांश पर धुवतारे की कोणिक ऊँचाई 90° होती है। विषुवत् रेखा पर (जिसका अक्षांश 0° है) इस तारे की कोणिक ऊचाई 0° होती है। इस प्रकार किसी स्थान पर ध्रुवतारे की कोणिक ऊँचाई जितनी होती है वहाँ का अक्षांश उतने ही अंश का होता है।

सेक्सटेन्ट यन्त्र :- दूरबीन लगा हुआ यह एक प्रकार का यन्त्र है। इसकी सहायता से किसी स्थान का अक्षांश ज्ञात किया जाता है।

मध्याह्नकालीन सूर्य :- किसी स्थान का अक्षांश दिन में मध्याह्लकालीन सूर्य द्वारा ज्ञात किया जाता है, यदि यह मालूम हो कि सूर्य किस अक्षांश रेखा पर लम्बवत् चमकता है। इस विधि के द्वारा निम्नलिखित ढंग से अक्षांश मालूम किया जाता है-

(क) 21 मार्च एवं 23 सितम्बर के दिन :- इन दोनों दिनों में सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लम्बवत् पड़ती है। 0° अक्षांश विषुवत रेखा का है, अत: वहाँ 0° अक्षांश रेखा पर सूर्य की ऊँचाई 90° की होती है। 90° अक्षांशों पर सूर्य की ऊँचाई 0° होती है। अत: इन दोनों दिनों में किसी स्थान का अक्षांश 90° में से सूर्य की ऊँचाई घटाने से प्राप्त होता है। यदि किसी स्थान पर मध्याह्लकालीन सूर्य की कोणिक ऊँचाई 60° हो तो वहाँ का अक्षांश = 90° – 60° = 30° उत्तर या 30° दक्षिण होगा।

(ख) 21 जून तथा 22 दिसम्बर :- इन दोनों दिनों में सूर्य विषुवत रेखा पर लम्बवत् पड़कर 21 जून को कर्क रेखा (23 \(\frac{1}{2}\)° N) पर तथा 22 दिसम्बर को (मकर रेखा पर) लम्बवत् चमकता है। अत: इन दो दिनों में किसी का अक्षांश ज्ञात करने का सूत्र है-

अक्षांश = 23\(\frac{1}{2}\)° शिरो बिन्दु से मध्याह्नकालीन सूर्य की दूरी। परिणाम धनात्मक (+) होने पर स्थान उसी गोलार्द्ध में होगा जिस गोलार्द्ध में मध्याह्लकालीन सूर्य लम्बवत् चमकता है। परिणाम ऋणात्मक (-) होने पर स्थान विपरीत गोलार्द्ध में होगा।

(ग) अन्य तिथियों पर :- अन्य तिथियों पर अक्षांश ज्ञात करने के लिए नाविक पंचांग (Nautical Almanac) की सहायता लिया जाता है कि उस दिन मध्याह्नकालीन सूर्य किस अक्षांश रेखा पर लम्बवत् पड़ता है। इसके बाद ऊपर की विधि से निम्नलिखित सूत्र द्वारा अक्षांश ज्ञात किया जाता है-
अक्षांश = मध्याह्लकालीन सूर्य की लम्बवत् पड़ने का अक्षांश + शिरो बिन्दु से मध्याह्लकालीन सूर्य की दूरी।

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प्रश्न 3.
अक्षांश रेखायें और देशान्तर रेखाओं में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

अक्षांश रेखायें देशान्तर रेखायें
i. ये रेखायें विषुवत रेखा के उत्तर या दक्षिण कोण के हिसाब से खींची गई है। i. प्रधान मध्याह्न रेखा के पूर्व तथा पश्चिम समान कोण की दूरी पर ये रेखायें खींची हुई हैं।
ii. अक्षांश रेखायें कल्पित वृत्त हैं। ii. ये रेखायें अर्द्ध-कल्पित वृत्त हैं।
iii. अक्षांश रेखायें समानान्तर होती हैं। iii. ये रेखायें समानान्तर नहीं हैं। विषुवत रेखा से दूर जाने पर इन रेखाओं के बीच की दूरी कम होती जाती है।
iv. अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 180 है। iv. इन रेखाओं की कुल संख्या 360 है।
v. अक्षांश रेखायें आपस में कभी नहीं मिलती हैं। v. सभी देशान्तर रेखायें भुवों पर आपस में मिल जाती हैं।
vi. ये रेखायें विषुवत से 90° उत्तर तथा 90° दक्षिण खींची गई हैं। vi. ये रेखायें ग्रीनविच रेखा से 180° पूर्व तथा 180° पश्चिम खींची गई हैं।
vii. विषुवत रेखा का अक्षांश 0° है। ध्रुव का अक्षांश 90° उत्तर तथा 90° दक्षिण है। अक्षांश की माप विषुवत रेखा से की जाती है। vii. कोई भी देशान्तर रेखा ऐसी नहीं है जहाँ से माप शुरू की जाय। किसी भी देशान्तर रेखा से अन्य देशान्तर की गणना की जा सकती है। विषुवत रेखीय वृत्त की तरह कोई भी देशान्तर रेखा स्वाभाविक नहीं है।
viii. भू-मध्य रेखीय व्यास की लम्बाई सबसे अधिक है। अत: विषुवत वृत्त पृथ्वी का सबसे बड़ा अक्षांश वृत्त है। viii. विषुवत वृत्त से सभी देशान्तर रेखायें छोटी होती हैं। देशान्तर रेखायें लम्बाई में आपस में बराबर होती हैं। पृथ्वी का दोनों धुव चपटा है। इसी कारण देशान्तर रेखायें विषुवत वृत्त से होती है।
ix. अक्षांश रेखाओं से जलवायु तथा दिन-रात की लम्बाई की जानकारी होती है। ix. देशान्तर रेखाओं से स्थानीय समय की जानकारी होती है।

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प्रश्न 4.
किसी स्थान के देशान्तर का निर्धारण कैसे कीजिएगा?
उत्तर :
किसी स्थान के देशान्तर को जानने के तरीके निम्नलिखित हैं-
स्थानीय समय द्वारा :- किसी स्थान का देशान्तर मालूम करने के लिए उस स्थान के स्थानीय समय एवं ग्रीनविच के समय का अन्तर निकाला जाता है। उस अन्तर को मिनट में बदलकर फिर 4 से भाग दिया जाता है। भागफल उस स्थान के देशान्तर को बतलाता है। यदि किसी स्थान पर दिन के 6 बजे हैं और ग्रीनविच में दोपहर है तो उस स्थान का देशान्तर = \(\frac{(12-6) \times 60}{4}\) = 90° होगा। यदि किसी स्थान का समय ग्रीनविच के समय से अधिक है तो वह स्थान ग्रीनविच से पूर्व और यदि कम है तो वह स्थान ग्रीनविच से पध्चिम होगा, क्योकि सूर्योदय एवं सूर्यास्त ग्रीनविच से पूर्व और पश्चिम के स्थानों की अपेक्षा पहले होगा।

क्रोनोमीटर तथा मध्यकालीन सूर्य द्वारा :- ग्रीनविच के समय को बताने वाली घड़ी क्रोनोमीटर है। किसी स्थान पर जब सूर्य की कोणिक ऊँचाई सबसे अधिक होती है तो उस समय वहाँ दोर्पहर 12 बजे का समय होता है। क्रोनोमीटर की सहायता से ठीक उसी समय ग्रीनविच के समय का पता चल जाता है। फिर प्रथम विधि द्वारा गणना करके दूसरे स्थान का देशान्तर आसानी से मालूम किया जा सकता है।

सूर्य घड़ी द्वारा :- ग्रीनविच का समय ज्ञात करने पर धूप घड़ी की सहायता से किसी स्थान का देशान्तर मालूम किया जा सकता है। माना ‘क’ स्थान का देशान्तर मालूम करना है। अतः उस स्थान पर एक लट्ठा गाड़ दिया गया। दोपहर के कुछ पहले यह देखा गया कि उसकी छाया ‘ख’ बिन्दु तक जाती है। ‘क’, ‘ख’ को मिला दिया गया, ‘क’ को केन्द्र मानकर ‘क’, ‘ख’ की दूरी लेकर एक अर्द्धवृत्त खींचा। फिर दोपहर के बाद यह देखा गया कि किस स्थान पर लट्ठे की छाया अर्द्धवृत्त को छूती है। मान लिया कि वह छाया ‘ग’ बिन्दु पर स्पर्श करती है।

अत: ‘क’, ‘ख’ को मिलाया और इसी तरह ∠क ख ग गना। ∠क, ख, ग के क घ रेखा सम-द्विभाग करती है। ‘घ’ बिन्दु उत्तर तथा ‘क’ बिन्दु दक्षिण दिशा को प्रकट कर रही है। जब इस रेखा पर लट्ठे की छाया पड़ेगी तो 12 बजेगा। अब ग्रीनविच का समय ज्ञात किया जा सकता है। माना कि ग्रीनाविच में 5 बजे प्रातःकाल का समय है तथा अभिष्ट स्थान पर 12 बजे दिन है तो उस स्थान का देशान्तर = \(\frac{(12-6) \times 60}{4}\) = \(\frac{420}{4}\) = 105° हुआ। चूँकि ग्रीनविच का समय कम है इसलिए अभिष्ट स्थान पूर्व की तरफ होगा, अत: उसका देशान्तर 105°E हुआ।

प्रश्न 5.
प्रमुख अक्षांश वृत्तों का वर्णन करो।
उत्तर :
विघुवत वृत अथवा विषुवत रेखा (Equator) :- उत्तरी तथा दक्षिणी धुवों के बीचोबीच पृथ्वी के ठीक मध्य स्थान पर पूर्व से पश्चिम की ओर खींची गई काल्पनिक वृत्ताकार रेखा को विषुवत रेखा कहते हैं। विषुवत रेखा प्रथान अक्षांश रेखा है जिसे 0° अक्षांश लिखकर व्यक्त किया जाता है। इसे भूमध्य रेखा, महान वृत्त (Great Circle) अथवा विषुवतीय समक्षेत्र (Equatorial Plane) भी कहते हैं। यह पृथ्वी को उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में विभाजित करती है।

कर्क रेखा अथवा कर्क वृत्त (Tropic of Cancer) :- कर्क रेखा अथवा कर्क वृत्त उत्तरी गोलार्द्ध में एक महत्वपूर्ण अक्षांश वृत्त है। यह विषुवत वृत्त से 23°30′ उत्तर कोणीय दूरी पर है। कर्क रेखा हमारे देश भारत के लगभग बीचोबीच से होकर गुजरती है।

मकर रेखा अथवा मकर वृत्त (Tropic of Capricorn) :- मकर रेखा अथवा मकर वृत्त दक्षिणी गोलार्द्ध का प्रमुख अक्षांश वृत्त है। यह कर्क वृत्त के समान ही दक्षिणी गोलार्द्ध में विषुवत वृत्त से 23.30 दक्षिण कोणीय दूरी पर स्थित है।

आर्कटिक रेखा अथवा आर्कटिक वृत्त (Arctic Circle) :- आर्कटिक रेखा अथवा आर्कटिक वृत्त उत्तरी गोलार्द्ध का दूसरा महत्वपूर्ण अक्षांश वृत्त है । यह विषुवत वृत्त के उत्तर में 66°30′ उत्तर की कोणिक दूरी पर स्थित है। इसे उत्तर-ध्रुवीय वृत्त भी कहा जाता है।

अंटार्कटिक रेखा अथवा अंटार्कटिक वृत्त (Antarctic Circle):- अंटार्कटिक रेखा अथवा अंटार्कटिक वृत्त दक्षिणी गोलार्द्ध का दूसरा महत्वपूर्ण अक्षांश वृत्त है। आर्कटिक वृत्त की तरह ही विषुवत वृत्त के दक्षिण में 66°30′ दक्षिण की कोणीय दूरी पर स्थित है। इसे दक्षिण-धुवीय वृत्त भी कहते हैं।

उत्तरी धुव (North Pole) :- उत्तरी धुव उत्तरी गोलार्द्ध की सबसे छोटी अक्षांश रेखा (बिन्दु) है जो विषुवत वृत्त से 90° उत्तर की दूरी पर स्थित है। इसे आधारभूत उत्तरी संदर्भ बिन्दु भी कहा जाता है।

दक्षिणी धुव (South Pole) :- दक्षिणी ध्रुव दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित सबसे छोटी अक्षांश रेखा (बिन्दु) है। उत्तरी धुव के समान ही यह भी विषुवत रेखा से 90° दक्षिण की दूरी पर स्थित है। इसे भी आधारभूत दक्षिणी संदर्भ बिन्दु कहा जाता है।

प्रश्न 6.
विश्ण के ताप कटिबंधों का सचित्र वर्णन करो।
उत्तर :
विश्ष को निम्नलिखित तीन ताप कटिबन्धों अथवा पेटियों में बाँटा गया है –
उष्ण कटिबंध (Torrid Tropical Zone) :- कर्क तथा मकर रेखा (23 \(\frac{1}{2}\)°N. और .23 \(\frac{1}{2}\)°S) के सभी अक्षांशों पर सूर्य वर्ष में दो बार (कर्क रेखा पर 21 जून तथा मकर रेखा पर 22 दिसम्बर को) ठीक सिर के ऊपर होता है। इस स्थिति में सूर्य को किरणें लम्बवत् पड़ती हैं। फलस्वरूप यह क्षेत्र अत्यधिक गर्मी प्राप्त करता है। अत: उष्णकटिबंध की सीमा बनती है। इस कटिबंध में किसी भी स्थान का वार्षिक औसत तापमान 27°C से अधिक होता है।

शीतोष्ण कटिबंध (Temperate Zone) :- यह उष्णकटिबंध के पार 66 \(\frac{1}{2}\)°, अक्षांश का क्षेत्र है। कर्क रेखा के उत्तर तथा मकर रेखा के दक्षिण सूर्य कभी भी ठीक ऊपर नहीं रहता है। इस स्थिति में इस क्षेत्र में सूर्य की किरणें सदैव तिरछी पड़ती है। परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क वृत्त और आर्कटिक वृत्त के बीच तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर वृत्त तथा अंटार्कटिक वृत्त के बीच सामान्य तापमान रहता है। यहाँ न अधिक सर्दी होती है और न अधिक गर्मी। अत: इसे शीतोष्ण कटिबन्ध कहते हैं। यहाँ वार्षिक औसत तापमान 20°C से कम होता है।

शीत कटिबंध (Cold Zone) :- यह 66 \(\frac{1}{2}\)° अक्षांशो से धुवों तक का क्षेत्र है। उत्तरी गोलार्द्ध के आर्कटिक वृत्त और उत्तरी धुव तथा दक्षिण गोलार्द्र में अंटार्कटिक वृत्त और दक्षिणी धुव के बीच के क्षेत्र में सूर्य कभी क्षितिज के ऊपर नहीं जाता। सूर्य की किरणें यहाँ बहुत ही तिरछी पड़ती हैं। फलस्वरूप इन क्षेत्रों में बहुत अधिक ठण्ड पड़ती है। इसलिए इसे शीत कटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की लम्बाई छ: महीने तक हुआ करती है। पृथ्वी के ये सबसे सर्द भाग हैं।

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प्रश्न 7.
भौगोलिक ग्रिड द्वारा किस प्रकार किसी भी स्थान की स्थिति का निर्धारण किया जाता है? वर्णन करो।
उत्तर :
भौगोलिक ग्रिड (Geographical Grid) :- ग्लोब पर देशान्तर और अक्षांश रेखाओं का पूर्ण नेटवर्क (Complete Network) जो एक दूसरे को क्रिस-क्रॉस (Criss-Cross) करते हुए खींचा गया है, इसे भौगोलिक ग्रिड कहते हैं। इससे पृथ्वी के सतह पर किसी भी स्थान की स्थिति का निर्धरण किया जाता है।

मंहान वृत्त की अवधारणा (Concept of Great Circle) :- भूमध्य रेखा (0° अक्षांश) एक काल्पनिक महान वृत्त है जिसका व्यास 40,077 किमी० है। इसे भूमध्यरेखीय तल कहा जाता है। विषुवतीय तल पृथ्वी के अक्ष से 90° पर है। इस पर सभी बिन्दु 0° द्वारा परिभाषित किये जाते हैं।

भूमध्यरेखा पूरे पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध दो भागों में बाँटती है। अत: यह महान वृत्त है। भू-मध्यरेखा (0° अक्षांश) को महान वृत्त कहा जाता है, क्योंकि इसकी निम्न विशेषताएँ हैं:-

  1. इसका तल पृथ्वी के केन्द्र से होकर गुजरता है, अतः महान वृत्त बनाता है।
  2. विषुवत रेखा पृथ्वी की परिधि है। कोई भी लघु वृत्त (Small Circle) पृथ्वी की परिधि नहीं हो सकता।
  3. विषुवत रेखा का केन्द्र पृथ्वी के केन्द्र के अनुरूप (Coincides) है।
  4. भूमध्यरेखा (0° अक्षांश) पूरे पृथ्वी को दो बराबर भागों-उत्तरी गोलार्द्ध एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बाँटती है। कोई भी महान वृत्त ही पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँट सकती है।

उपर्युक्त विशेषताओं के कारण ही भूमध्यरेखा (0° अक्षांश) को महान वृत्त (Great Circle) कहा जाता है।

प्रश्न 8.
अक्षांश रेखा को ज्ञात करने के तरीके क्या हैं?
अथवा
आप किसी स्थान के अक्षांश का निर्धारण कैसे करेंगे?
उत्तर :
अक्षांश रेखाएँ पृथ्वी के धरातल पर भूमध्यरेखा से उत्तर या दक्षिण किसी भी स्थान की कोणात्मक दूरी होती है। इन्हें निम्न विधियों से ज्ञात किया जाता है-
ध्रुवतारा द्वारा (By polar star) :- धुवतारा उत्तरी गोलार्द्ध में 90°N पर लम्बवत् चमकता है। इस प्रकार उत्तरी गोलार्द्ध में धुवतारे की सहायता से किसी भी स्थान के अक्षांश का निर्धारण किया जा सकता है।

सेक्सटैण्ट द्वारा (By sextant) :- सेक्सटैण्ट की सहायता से किसी भी स्थान के अक्षांश का निर्धारण किया जाता है।

खम्भा द्वारा (By pole) :- किसी भी स्थान पर खम्भा सीधा गाड़ने पर सूर्य के प्रकाश द्वारा जो छाया बनता है, उस छाया से धरातल के साथ जितने डिग्री का कोण बनता है वह उस स्थान पर उस समय सूर्य की ऊँचाई होती है। इस प्रकार यह कोण सूर्य का शिरो बिन्दु (Zenith) से दूरी होती है।

हेडले ओक्टेण्ट द्वारा (By Hadley’s Octant) :- दक्षिणी गोलार्द्ध में 90°S पर धुवतारा की भाँति एक तारा चमकता है। इस तारे की सहायता से दक्षिणी गोलार्द्ध में किसी स्थान के स्थिति का अक्षांश निर्धारित किया जा सकता है।

सूर्य के विभिन्न स्थितियों द्वारा (By different positions of sun) :- सूर्य के विभित्र स्थितियों जैसे मध्याह्नकालीन सूर्य, 21 मार्च और 23 सितम्बर को भूमध्यरेखा पर लम्बवत् चमकता सूर्य, 21 जून को कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता सूर्य, 22 दिसम्बर को मकर रेखा पर लम्बवत् चमकता सूर्य आदि द्वारा गणितीय गणना के आधार पर अक्षांश रेखाओं को ज्ञात किया जात है।

प्रश्न 9.
किसी भी स्थान के देशान्तर को ज्ञात करने का तरीका क्या है?
अथवा
किसी स्थान के देशान्तर का निर्धारण किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर :
किसी भी स्थान का स्थानीय समय और ग्रीनविच के स्थानीय समय में अन्तर को निकाल कर फिर उसे मिनट में बदल दिया जाता है। तत्पश्चात् 4 से भाग देने पर जो परिणाम आता है वह उस स्थान का देशान्तर होता है। यदि उस स्थान का समय G.M.T. से आगे है तो उस स्थान का देशान्तर E होगा तथा यदि उस स्थान का समय G.M.T. से पीछे है तो देशान्तर W होगा।
उदाहरण – किसी स्थान का समय 6 P.M. है एवं G.M.T. पर दिन के 12 बजे हैं तो उस स्थान का देशान्तर-

= 6.00 hrs. – 12.00 hrs.
= (6.00+12.00 hrs.) – 12.00 hrs.
= 18.00 hrs.-12.00 hrs.
= 6.00 hrs.
= 6 × 60 mins
= 360 mins
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= 90°

चूंकि स्थान का समय G.M.T. से आगे है अत: देशान्तर 90°E होगा।

धूप घड़ी द्वारा (By Solar Watch) : यदि ग्रीनविच का समय ज्ञात हो तो धूप घड़ी की सहायता से किसी स्थान के समय का निर्धारण किया जा सकता है। धूप घड़ी द्वारा किसी स्थान के दिन के 12 बजे की स्थिति ज्ञात की जाती है। अब मान लिया जाय कि ग्रीनविच पर शाम के 4 बजे हैं तो उस स्थान का देशान्तर की गणना निम्न विधि द्वारा होगी –
समय में अन्तर –
4.00 hrs.-12.00 hrs.
= (4 + 12.00 hrs) – 12.00 hrs.
= 16.00 hrs-12.00 hrs.
= 4.00 hrs.
= 4 × 60 mins-240 mins
= \(\frac{240}{4}\) = 60°
= 60°

चूँकि स्थान का समय ग्रीनविच से पीछे है अत: देशान्तर = 60°W होगा।

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प्रश्न 10.
कोलकाता और सिओल के देशान्तर क्रमश: 88°30’E और 127°06’E हैं। सिओल का स्थानीय समय क्या होगा जबकि कोलकाता में दिन के 12 बजे हैं? (The longitude of Kolkata and Seoul are 88°30’E and 27°06’E respectively. What is the local time of Seoul when it is 12 noon at Kolkata?)
उत्तर :

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= 154 \(\frac{2}{5}\) × 60 = 154 मि० 24 सेकेण्ड =154 ÷ 60 घं० 24 से० = 2 घं० 34 मि० 24 से०
= 2 घं० 34 मि० 24 सेकेण्ड, सिउल कोलकाता से पूरब है।
अत: वहाँ का समय आगे होगा
अत: सिउल का समय =12 दोपहर + 2 घं० 34 मि० 24 सेकेण्ड
= 2 बजकर 34 मि॰ 24 सेकेण्ड P.M.

प्रश्न 11.
ग्रीनविच का स्थानीय समय क्या होगा जबकि भारत (I.S.T.) में दिन के 12.00 बज़े है?
(What is the Greenwich mean time when it is 12 noon as per Indian Standard Time?)
उत्तर :
भारत का प्रामाणिक समय निकालने के लिये इलाहाबाद के कड़ा नामक स्थान के देशान्तर का प्रयोग होता है, जो 82° .30′ है।

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भारत एवं ग्रीनविच के देशान्तरों में अन्तर = 82° .30′ E – 0°
= 82°.30′ = 82 \(\frac{1}{2}\)° = \(\frac{165}{2}\)°

∵ 1° देशान्तर पार करने में समय लगता है 4 मिनट।
∴ \(\frac{165}{2}\) ,, ,, ,, लगेगा = \(\frac{165}{2}\) × 4 = 330 मिनट
= 330 ÷ 60 = 5 घं० 30 मि०
ग्रीनविच भारत से पश्चिम में है। अत: भारत के समय से ग्रीनविच का समय कम होगा।
अत: ग्रीनविच का समय = 12 दोपहर -5 घं० 30 मि०
= 6 बजकर 30 मि० A.M.

प्रश्न 12.
न्यूयार्क (74° W) का स्थानीय समय और दिन क्या होगा जबकि कोलकाता (88° 30′ E) में 1 जनवरी 2004 को सुबह का 9 बजा है?
[What would be the local time and date of New York (74° W) when it is 9 A.M. in Kolkata (88° .30′ E) on 1st January 2004 ?]
उत्तर :

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= 10 घं० 50 मिनट
न्यूयार्क कोलकाता से पंक्चिम है, अत: वहाँ का समय कोलकाता से पीछे होगा। अर्थात् कोलकाता का समय = 9-10 घं० 50 मि०
= (9 + 12) = 10 घं० 50 मि०
= 21 – 10 घं० 50 मि० = 10 घंटा 10 मि० = 10 बजकर 10 मि० P.M. 31st दिसम्बर सन् 2003

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प्रश्न 13.
भारतीय प्रामाणिक समय (IST) क्या होगा जबकि कोनोमीटर पर दिन के 12.00 बजे हैं?
(What will be the Indian Standard Time when it is 12 noon in Chronometer?)
उत्तर :
क्रोनोमीटर ग्रीनविच का समय बताने वाली घड़ी है। अत: ग्रीनविच का देशान्तर 0° है।

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भारत ग्रीनविच से पूरब में है। अत: भारत का समय आगे होगा। अर्थात् भारत का समय =12 दोपहर +5 घं० 30 मि० =17 घं० 30 मिनट अर्थात् = 5 बजकर 30 मि० P.M.

प्रश्न 14.
न्यूयार्क (74° W) और मुम्बई (73° E) का स्थानीय क्या होगा जबकि ग्रीनविच (0°) पर दिन के 12.00 बजे हैं?
[What would be the local time at New York (74° W}) and at Mumbai (73° E) when it is 12 noon at Greenwich?]
उत्तर :
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ग्रीनविच एवं न्यूयार्क के देशान्तर में अन्तर = 74° W-0°=74°
∵ 1° देशान्तर पार करने में समय लगता है 4 मिनट।
∴ 74° देशान्तर पार करने में समय लगेगा = 74 W × 4 = 296 मि०
= 296 ÷ 60 = 4 घं० 56 मिनट
न्यूयार्क ग्रीनविच से पथिम में स्थित है। अतः वहाँ का समय ग्रीनविच से पीछे होगा। अर्थात न्यूयार्क का समय 12 दोपहर -4 घं० 56 मि० = 7 घं० 04 मि० =7 बजकर 04 मि० A.M.
अब मुम्बई ग्रीनविच से पूरब में स्थित है।
ग्रीनविच तथा मुम्बई के देशान्तर में अन्तर = 73° E-0° = 73°
∵ 1° देशान्तर पार करने में समय लगता है 4 मिनट।
∴ 73°, ., ,. ,” ., लगेगा 73 × 4 = 292 मि०
= 292 = 292 ÷ 60 = 4 घं० 52 मि०
मुम्बई का समय आगे होगा क्योंकि
मुम्बई का समय =12 दोपहर +4 घं० 52 मि०
=16 घं० 52 मि० =4 बजकर 52 मि० P.M.

प्रश्न 15.
1 जनवरी 2006, रविवार को कलकत्ता (88° 30′ E / 22° 30′ N) का स्थानीय समय 10 a.m. है तो इसके प्रतिपाद स्थान का स्थानीय समय, दिन एवं तारीख क्या होगी?
[When the local time at Kolkata (88° 30′ E / 22° 30′ N) was 10 a.m. on Sunday, the 1st January, 2006 then what would be the local time, day and date at its antipode?]
उत्तर :
किसी स्थान एवं उसके प्रतिपाद स्थान के देशान्तरों में 180° का अन्तर पड़ता है। अक्षांश के अन्तर का स्थानीय समय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
कोलकाता के प्रतिपाद स्थान का देशान्तर = 180° – 88° 30′ = 91° 30′ W}
∵ 1° देशान्तर के अन्तर पर 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है।

∴ 180°,, ,, ,,  4 × 180 = 720 मिनट = 12 घण्टे

कोलकाता का प्रतिपाद स्थान
चूँकि कोलकाता का प्रतिपाद स्थान कोलकाता से पश्चिम में है, अत: वहाँ का स्थानीय समय कोलकाता के स्थानीय समय से कम (पीछे) होगा।
कोलकाता के प्रतिपाद स्थान का समय =10 A.M. -12 घण्टा
= (10 + 12 – 12) P.M. = 10 P.M. रविवार, 31 दिसम्बर, 2005

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प्रश्न 16.
जब इलाहाबाद (82 \(\frac{1}{2}\)° E) में शाम के 4 बजे हों तो जम्पू (75° E) तथा डिब्रूगढ़ (95° E) का स्थानीय समय ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
जम्मू एवं इलाहाबाद के बीच देशान्तरों में अन्तर = 82 \(\frac{1}{2}\)° E – 75° E = 7 \(\frac{1}{2}\)° = \(\frac{15}{2}\)°

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण 8

∵ 1° देशान्तर को पार करने में 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है।
∴ \(\frac{15}{2}\)° देशान्तर पार करने में 4 × \(\frac{15}{2}\)° = 30 मिनट
चूँकि जम्मू इलाहाबाद से पथ्चिम में स्थित है; अत: वहाँ का समय इलाहाबाद के समय से पीछे (कम) होगा। जम्मू का समय =4 P.M. -30 मिनट = 3.30 P.M.
इसी प्रकार, इलाहाबाद एवं डिबूगढ़ के बीच देशान्तरों में अन्तर =95° E – 82 \(\frac{1}{2}\)° E = 12 \(\frac{1}{2}\) = \(\frac{25}{2}\)°
∵ 1° देशान्तर को पार करने में 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है।
∴ \(\frac{25}{2} देशान्तर पार करने में = [latex]\frac{425}{2}\) = 50 मिनट
चूँकि डिब्रूगढ़ इलाहाबाद से पूर्व में स्थित है, अत: वहाँ का समय इलाहाबाद के समय से अधिक होगा।
डिबूगढ़ का स्थानीय समय = 4 P.M. + 50 मिनट = 4.50 P.M.
जम्मू का स्थानीय समय = 3.30 P.M.
डिबूगढ़ का स्थानीय समय = 4.50 P.M.

प्रश्न 17.
जब कोलकाता (88° 30′ E) में 1 जनवरी 2006 रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह के 10 बजे हो तो इसके प्रतिपाद स्थान का समय, दिनांक एवं दिन क्या होगा?
उत्तर :
किसी स्थान एवं उसके प्रतिपाद स्थान के देशान्तरों में 180° का अन्तर होता है। अक्षांश के अन्तर का स्थानीय समय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
कोलकाता के प्रतिपाद स्थान के देशान्तर में अन्तर 180° – 88° 30′ = 91° 30′ W
∵ 1° देशान्तर को पार करने में 4 मिनट समय का अन्तर पड़ता है।
∴ 180°,, ,, 4 × 180 = 720 मिनट = 12 घण्टे

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण 9

चूँकि (चित्र के अनुसार) कोलकाता का प्रतिपाद स्थान कोलकाता से पथ्चिम में है, अत: वहाँ का स्थानीय समय कोलकाता के स्थानीय समय से कम (पीछे) होगा।
कोलकाता के प्रतिपाद स्थान का समय = 10 A.M. – 12 घण्टा
= (10 + 12 – 12) P.M. = 10 P.M. रविवार 31 दिसम्बर, 2005

प्रश्न 18.
जब चेन्नई (80° 15′ E) में सुबह के 6 बज रहे हों (6 A.M.) तो न्यूरॉर्क में पिछले दिन के शाम के 8 बजकर 13 मिनट (8.30 P.M.) का समय होगा। न्यूयॉर्क का देशान्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
चेन्नई तथा न्यूयॉर्क के स्थानीय समयों में अन्तर = 6.30 A.M. – 8.13 P.M.
= (6.30 + 12)-8.13 = 18.30-8.13 = 10 घण्टे 17 मिनट = 617 मिनट

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण 10

चूँकि न्यूयॉर्क का समय चेत्रई के समय से पीछे (कम) है, अत: वहाँ का देशान्तर चेत्रई के देशान्तर से 154° 15′ पश्चिम में होगा। न्यूयॉर्क का देशान्तर =154° 15′-80° 15′ = 74° W

प्रश्न 19.
जब किसी निश्चित स्थान पर सूर्य की कोणिक ऊँचाई सर्वाधिक (90°) हो तथा उसी समय ग्रीनविच मीन टाईम 5.40 P.M. हो तो उस निश्चित स्थान का देशान्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
जिस समय किसी स्थान पर सूर्य की कोणिक ऊँचाई सबसे अधिक (90°) होती है, उस समय वहाँ दोपहर के 12 बजे का समय होता है।
इसी समय ग्रीनविच का समय = 5.40 P.M. है।
∴ दोनों स्थानों के स्थानीय समयों में अन्तर = 5.40 P.M. -12.00 दोपहर

= 5 घण्टे 40 मिनट = 5 × 60 + 40 मिनट = 340 मिनट

दोनों स्थानों के देशान्तरों में अन्तर = 340 ÷ 4 = 85°
चूँकि निश्चित स्थान का समय ग्रीनविच के समय से पीछे है,
अत: वहाँ का देशान्तर ग्रीनविच (0° देशान्तर) से 85° पध्धिम में होगा।
निध्चित स्थान का देशान्तर = 85° W

प्रश्न 20.
ग्रीनविच में दिन के 12 बजे हैं तो कोलकाता में (जिसका देशान्तर 82 \(\frac{1}{2}\)° पूर्व है।) स्थानीय समय क्या होगा?

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 3 धरातल पर किसी स्थान की स्थिति का निर्धारण 11

ग्रीनविच का देशान्तर 0° है।
∴ ग्रीनविच और कोलकाता के देशान्तर में 88 \(\frac{1}{2}\) का अन्तर हुआ।
∵ 1° देशान्तर में 4 मिनट समय का अन्तर होता है।
∴ 88 \(\frac{1}{2}\)° देशान्तर में 88 \(\frac{1}{2}\)° × 4 = 354 मिनट समय का अन्तर होगा।
∵ कोलकाता ग्रीनविच से पूर्व में है अत: यहाँ समय अधिक (+) होगा।
∴ 12 बजे दिन (ग्रीनविच का समय) + 5 घण्टा 54 मिनट = 5 बजकर 54 मिनट शाम (P.M.)
यही कोलकाता का स्थानीय समय हुआ।

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प्रश्न 21.
दोपहर में ग्रीनविच से भेजा गया एक सिग्नल किसी स्थान पर 4.32 P.M. (ग्रीनविच समय) पर प्राप्त किया गया। यदि सिग्नल उस जगह पर पहुँचने में 2 मिनट का समय लेता है तो उस समय का देशान्तर क्या होगा?
उत्तर :
ग्रीनविच में दोपहर है और उस निर्दिष्ट स्थान में समय 4.32 P.M. हो, अर्थात् वह निर्दिष्ट स्थान के स्थानीय समय में अन्तर = 4.32-2 मिनट = 4.30 मिनट = 270 मिनट
चूँकि 4 मिनट का अंतर होता है 1° देशान्तर में
इसलिए 270 मिनट का अन्तर होगा = \(\frac{270}{4}\) = 67° 30′
अत: उस समय का देशान्तर होगा 67° 30′ E

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

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फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
“चूंकि मैं चाहता हूँ इसलिए कानूनी है” किसका कथन है-
(a) लुई XIV
(b) लुई XV
(c) लुई XVI
(d) नेपोलियन
उत्तर :
(c) लुई XVI

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

प्रश्न 2.
फ्रांस की जनता को राजखजाने में भूमिकर के रूप में कौन-सा कर देना पड़ता था ?
(a) टैली
(b) टाईथ
(c) गैबेल
(d) कार्वी
उत्तर :
(a) टैली।

प्रश्न 3.
फ्रांस की पुरातन व्यवस्था से आप क्या जानते हैं ?
(a) फ्रांस क्रान्ति के पहले का समय
(b) फ्रांस क्रान्ति के आरम्भ का समय
(c) फ्रांस के क्रान्ति के समय
(d) ये तीनों सही नहीं है।
उत्तर :
(a) फ्रांस क्रान्ति के पहले का समय

प्रश्न 4.
फ्रांस की क्रान्ति के समय स्टेद्स जनरल का अधिवेशन कितने वर्षो के बाद बुलाया गया था।
(a) 160 वर्ष बाद
(b) 165 वर्ष बाद
(c) 175 वर्ष बाद
(d) 180 वर्ष बाद
उत्तर :
(c) 175 वर्ष, बाद

प्रश्न 5.
फ्रांस की क्रान्ति कब हुई थी ?
(a) 1789 ई० में
(b) 1783 ई० में
(c) 1799 ई० में
(d) 1804 ई० में
उत्तर :
(a) 1789 ई० में।

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प्रश्न 6.
आर्थिक गलतियों का अजायबघर किस देश को बताया गया था-
(a) फ्रांस
(b) इंग्लैण्ड
(c) जापान
(d) अमेरिका
उत्तर :
(a) फ्रांस

प्रश्न 7.
‘कर वसूल करने की यह प्रणाली प्राचीन तथा आधुनिक युग दोनों में ही अत्यन्त घृणित प्रमाणित हुई है।” यह किसका कथन है –
(a) हेजन
(b) नेपोलियन
(c) लुई XV
(d) निशलू
उत्तर :
(a) हेजन

प्रश्न 8.
सुविधा प्राप्त वर्ग में कौन लोग नहीं आते थे ?
(a) पादरी
(b) राजा का परिवार
(c) कुलीन वर्ग
(d) किसान
उत्तर :
(d) किसान

प्रश्न 9.
द्वितीय इस्टेट में कौन लोग नहीं आते थे ?
(a) पादरी
(b) कुलीन
(c) किसान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) कुलीन

प्रश्न 10.
प्रथम इस्टेट के अन्तर्गत आने वाला वर्ग था –
(a) पादरी
(b) सामन्त
(c) जनता
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) पादरी

प्रश्न 11.
“भौतिक कठिनाइयों तथा बौद्धिक उफान के संयोग के कारण ही फ्रांस की क्रान्ति हुई” यह कथन किसका है –
(a) वेटयूब्रिआंड
(b) माण्टेस्क्यू
(c) रूसो
(d) वाल्टेयर
उत्तर :
(a) वेटयूब्रिआंड

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प्रश्न 12.
फ्रांस की क्रान्ति के समय वहाँ का शासक कौन था ?
(a) लुई चौदहवाँ
(b) लुई पन्द्रहवाँ
(c) लुई सोलहवाँ
(d) चार्ल्स दशम
उत्तर :
(c) लुई सोलहवाँ।

प्रश्न 13.
क्रान्ति के पूर्व फ्रांसीसी समाज कितने भागों में बँटा हुआ था ?
(a) तीन भागों में
(b) चार भागों में
(c) पाँच भागो में
(d) छ: भागों में
उत्तर :
(a) तीन भागों में।

प्रश्न 14.
‘शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त’ का प्रतिष्ठाता कौन था ?
(a) वाल्टेयर
(b) रूसो
(c) मांटेस्क्यू
(d) दिदेरो
उत्तर :
(c) मांटेस्क्यू।

प्रश्न 15.
फ्रांस में स्टेद्स जनरल की स्थापना हुई –
(a) 1320 ई०
(b) 1360 ई०
(c) 1300 ई०
(d) 1420 ई०
उत्तर :
(a) 1320 ई०

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प्रश्न 16.
टेनिस कोर्ट की शपथ किसके नेतृत्व में ली गयी –
(a) बेली
(b) बिसों
(c) वेरियो
(d) लुई XVI
उत्तर :
(a) बेली

प्रश्न 17.
वास्टिल के दुर्ग का पतन हुआ –
(a) 20 जून, 1849
(b) 23 जून, 1787
(c) 14 जुलाई, 1789
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) 14 जुलाई, 1789

प्रश्न 18.
फ्रांस की राज्य क्रान्ति में किसका योगदान ज्यादा था ?
(a) दार्शनिकों का
(b) किसानों का
(c) मजदूरों का
(d) कुलीनों का
उत्तर :
(b) किसानों का

प्रश्न 19.
फ्रांस राज्य कान्ति के समय कितने राजनीतिक दल थे ?
(a) एक दल
(b) दो दल
(c) तीन दल
(d) चार दल
उत्तर :
(b) दो दल

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प्रश्न 20.
कार्वी का अर्थ क्या है?
(a) ग्रामीण लोग
(b) बेगार श्रम वाले
(c) पढ़े लिखे लोग
(d) मजदूर लोग
उत्तर :
(b) बेगार श्रम वाले

प्रश्न 21.
टेनिस कोर्ट की शपथ से डर कर राजा ने तीनों सदनों की बैठक कब बुलाई?
(a) 23 जून 1789 ई०
(b) 27 जून 1789 ई०
(c) 28 जून 1789 ई०
(d) 29 जून 1789 ई०
उत्तर :
(d) 29 जून 1789 ई०

प्रश्न 22.
“The Social Contract” पुस्तक किसने लिखी –
(a) रूसो
(b) लॉक
(c) बेली
(d) ब्रिसो
उत्तर :
(a) रूसो

प्रश्न 23.
‘ममैं ही राष्ट्र हूँ” – यह कथन किस फ्रांसीसी राजा का है ?
(a) लुई तेरहवां
(b) लुई चौदहवा
(c) लुई पन्द्रहवा
(d) लुई सोलहवा
उत्तर :
(b) लुई चौदहवां।

प्रश्न 24.
आतंक के राज्य का संस्थापक कौन था ?
(a) दाँते
(b) मैडम रौलेण्ड
(c) राब्सपीयर
(d) डों. भराट
उत्तर :
(c) राब्सपीयर

प्रश्न 25.
मेरी एंत्वायनेत कौन थी ?
(a) पर्सिया की राजकुमारी
(b) लुई सोलहवें की पत्नी
(c) रूस के जार की पत्नी
(d) ऑंस्ट्रिया के सम्राट की पत्नी
उत्तर :
(b) लुई सोलहवें की पत्नी।

प्रश्न 26.
‘सज्जनों मैं निर्दोष हूं। मुझ पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। मेरा रक्त फ्रांस की जनता के लिए कल्याणकारी हो, यही मेरी कामना है।” बह किसका कथन है –
(a) लुई XVI
(b) लुई XV
(c) बेली
(d) लुई XIV
उत्तर :
(a) लुई XVI

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प्रश्न 27.
“क्रान्ति दो पाटों के बीच में है – घर में भी शत्रु है, सीमा पर भी शत्तु हैं।” यह कथन किसका है।
(a) दांतों
(b) रूसो
(c) लॉंक
(d) लुई XIV
उत्तर :
(a) दांतों

प्रश्न 28.
लुई XVI को कब गिलोटिन पर चढ़ाकर मृत्यु-दण्ड दिया गया –
(a) 21 जनवरी 1793
(b) 22 फरवरी 1793
(c) 6 दिसम्बर 1994
(d) 16 मार्च 1796
उत्तर :
(a) 21 जनवरी 1793

प्रश्न 29.
जैकोबिन दल ने कब राष्ट्रीय सम्मेलन पर अधिकार कर लिया था-
(a) 31 मई 1793
(b) 18 अप्रैल 1796
(c) 20 फरवरीं 1794
(d) 1 जनवरी 1795
उत्तर :
(a) 31 मई 1793

प्रश्न 30.
दांतो, राब्स्पीयर, सेंट जस्ट तथा कार्नो किस दल के नेता थे-
(a) जैकोबिन दल
(b) कांग्रेस दल
(c) जिरोंदिस्ट दल
(d) कम्युनिस्ट दल
उत्तर :
(a) जैकोबिन दल

प्रश्न 31.
नेशनल गार्स्स का सेनापति था –
(a) लाफायते
(b) वाल्टेयर
(c) रूसो
(d) दांतो
उत्तर :
(a) लाफायते

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प्रश्न 32.
फ्रांस के प्रथम लिखित संविधान की रचना किस वर्ष हुई ?
(a) 1789 ई० में
(b) 1791 ई० में
(c) 1793 ई० में
(d) 1795 ई० में
उत्तर :
(b) 1791 ई० में।

प्रश्न 33.
फ्रांस में बँटाईदार किसानों को बोला जाता था :
(a) सार्फ
(b) मेतायर
(c) मेसल
(d) पिजेण्ट
उत्तर :
(b) मेतायर।

प्रश्न 34.
फ्रांस में तृतीय सम्रदाय के मुख्य पात्र थे :
(a) याजक लोग
(b) कुलीन लोग
(c) साँकुलोत लोग
(d) बुर्जुआ लोग
उत्तर :
(d) बुर्जुआ लोग।

प्रश्न 35.
फ्रांस में धर्म कर का नाम था :
(a) टाइले
(b) टाइद
(c) पैबेला
(d) कैपिटेशन
उत्तर :
(b) टाइद।

प्रश्न 36.
‘द स्पिरिट ऑफ लाज’ पुस्तक के रचयिता हैं :
(a) मान्टेस्क्यू
(b) वाल्टेयर
(c) रूसो
(d) एडम स्मिथ
उत्तर :
(a) मान्टेस्क्यू।

प्रश्न 37.
‘द पर्सियन लेटर्स’ – पुस्तक की रचना की थी –
(a) वाल्टेयर
(b) माण्टेस्क्यू
(c) रूसो
(d) डेनिस दिदेरो
उत्तर :
(b) माण्टेस्क्यू।

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प्रश्न 38.
‘एक ही व्यक्ति के हाय में सरकार का कानून, शासन एवं विचार व्यवस्था का दायित्व रहने से व्यक्ति की स्वतंत्रता नष्ट हो जायेगी।’ यह कथन किसका है ?
(a) डेनिस दिदेरो का
(b) रूसो का
(c) वाल्टेयर का
(d) माण्टेस्क्यू का
उत्तर :
(d) माण्टेस्क्यू का।

प्रश्न 39.
वाल्टेयर द्वारा रचित पुस्तक है :
(a) सामाजिक समझौता
(b) द स्पिरिट ऑफ ला
(c) पर्सिया की पत्रावली
(d) कांदिद
उत्तर :
(d) कांदिद।

प्रश्न 40.
‘दार्शनिक का अभियान’ – ग्रन्थ की रचना की
(a) माण्टेस्क्यू
(b) वाल्टेयर
(c) रूसो
(d) एडम स्मिथ
उत्तर :
(b) वाल्टेयर।

प्रश्न 41.
फ्रांसीसी क्रान्ति के जनक थे :
(a) रूसो
(b) मिराव्यू
(c) माण्टेस्क्यू
(d) वाल्टेयर
उत्तर :
(a) रूसो।

प्रश्न 42.
‘विषमता का सूत्रपात’ – ग्रन्थ के रचयिता थे।
(a) माण्टेस्क्यू
(b) वाल्टेयर
(c) डेनिस दिदेरो
(d) रूसो
उत्तर :
(d) रूसो।

प्रश्न 43.
‘फिजिक्रेट’ मतवाद के समर्थक थे।
(a) केने
(b) डेनिस दिदेरो
(c) डि’ एलेमवर्ट
(d) रूंसो
उत्तर :
(a) केने।

प्रश्न 44.
‘द वेल्थ ऑफ नेशन्स’ – ग्रन्थ के रचनाकार हैं।
(a) केने
(b) एडम स्मिथ
(c) ओवेसियस
(d) राब्सपीयर
उत्तर :
(b) एडम स्मिथ।

प्रश्न 45.
एसे आन प्रिविलेजेज’ – ग्रन्थ की रचना की थी।
(a) ओवेसियस
(b) मिराव्यू
(c) केने
(d) ज्याँ पॉल माराट
उत्तर :
(a) ओवेसियस।

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प्रश्न 46.
‘सूर्य राजा’ किसको कहा जाता था ?
(a) लुई तरेहवें को
(b) लुई चौदहवें को
(c) लुई पन्द्रहवें को
(d) लुई सोलहवें को
उत्तर :
(d) लुई सोलहवें को।

प्रश्न 47.
‘प्रजापिता राजा’ किसको कहा जाता था ?
(a) लुई पन्द्रहवें को
(b) लुई सोलहवें को
(c) लुई सत्रहवें को
(d) लुई अठारहवें को
उत्तर :
(a) लुई पन्द्रहवें को।

प्रश्न 48.
फ्रांस की राष्ट्रीय सभा नहीं हुई थी।
(a) 100 साल
(b) 125 साल
(c) 150 साल
(d) 175 साल
उत्तर :
(d) 175 साल।

प्रश्न 49.
फ्रांस में सर्वप्रथम राजद्रोह शुरू किया।
(a) कुलीन व्यक्ति
(b) याजक
(c) बुर्जुआ
(d) कृषक
उत्तर :
(a) कुलीन व्यक्ति।

प्रश्न 50.
टेनिस कोर्ट में शपथ ग्रहण किस तारीख को हुआ था ?
(a) 4 अगस्त
(b) 14 जुलाई
(c) 17 जून
(d) 20 जून
उत्तर :
(d) 20 जून।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. क्रान्ति के पहले _______विशेष अधिकार को ‘लिट द जस्टिस’ कहा जाता था।
उत्तर : राजा के।

2. फ्रांसीसी समाज में _______सबसे अधिक सुविधाभोगी सम्प्रदाय था।
उत्तर : याजक।

3. फ्रांस में _______नमक आयकर लिया जाता था।
उत्तर : विटियेमें।

4. फ्रांस में किसान _______नामक विवशतावश बेगार श्रम देते थे।
उत्तर : कार्वि।

5. फ्रांसीसी दार्शानिक _______शक्ति-स्वातंत्र्य के कट्टर समर्थक थे।
उत्तर : माण्टेस्क्यू।

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6. _______का कहना है कि एक बार समझौते के माध्यम से जनता राजा के हाथों में क्षमता सौंप देती है।
उत्तर : रूसो।

7. _______कैयोलिक गिरजा को ‘विशेष अधिकार प्राप्त उत्यात’ कहकर सम्बोधित किया है।
उत्तर : वाल्टेयर ने।

8. ‘फिजियोक्रेट’ मतवाद के प्रवक्ता हैं _______
उत्तर : एडम स्मिथ।

9. ‘फ्रेण्ड ऑफ द पीपुल’ पत्रिका के सम्पादक _______थे।
Ans. ज्याँ पॉल मराट।

10. फ्रांसीसी नागरिक _______लालची बाघ कहकर बुलाते थे।
उत्तर : इन्टेण्डेण्ट को।

11. लुई सोलहवें ने 1788 ई० में _______नयी अदालते स्थापित की।
उत्तर : 571

12. 1789 ई० में _______को बैस्टील दुर्ग का पतन हुआ।
उत्तर : 14 जुलाई।

13. फ्रांसीसी क्रांति के समय क्रांतिकारियों ने _______नामक राष्ट्रीय संगीत की रचना की।
उत्तर : वार्साई।

14. 9 जुलाई 1789 ई० में संविधान सभा में_______बनी।
उत्तर : राष्ट्रीय सभा।

15. फ्रांसीसी संविधान सभा ने फ्रांस को _______विभागों में विभक्त किया।
उत्तर : 83।

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16. को 21 जनवरी 1793 ई० को _______मृत्युदण्ड दिया गया।
उत्तर : लुई सोलहवें।

17. आतंक के शासनकाल में _______वर्षपंजिका आरम्भ हुई।
उत्तर : प्रजातात्रिक।

18. फ्रांस में स्टेद्स जनरल का अधिवेशन 1789 ई० में_______ वर्षों बाद हुआ।
उत्तर : 175

19. 1792 ई० में फ्रांस में प्रथम _______आरंभ हुआ।
उत्तर : प्रजातंत्र।

20. राष्ट्रीय एसेम्बली द्वारा वजन एवं परिमाण पद्धति को सुधार कर _______पद्धति चालू की गयी।
उत्तर : मैट्रिक।

21. _______उत्पादन आधारित आयकर था।
उत्तर : कपितासिम।

22. आसिमा रेजिम का अर्थ है _______समाज।
उत्तर : प्राचीन।

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23. पादुआ का घोषणापात्र जारी की _______के राजा लियोपोल्ड।
उत्तर : ओंस्ट्रिया।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. कांति के पहले फ्रांसीसी समाज में याजक एवं बुर्जुआ विशेष अधिकार का भोग करते थे।
उत्तर : False

2. फ्रांस में अधिकारहीन मनुष्य प्राय: 96 प्रतिशत थे।
उत्तर : True

3. फ्रांस के गिरजा से याजको को प्रति वर्ष 20 करोड़ लाभ आय हांती थी।
उत्तर : False

4. फ्रांस का गिरजा टाईद या धर्म-कर के रूप में कुल आय का 10 प्रतिशत अर्थ अदा करता था।
उत्तर : True

5. फ्रास में बुर्जुआओं को साँकुलोत कहा जाता था।
उत्तर : False

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6. वाल्टेयर शक्ति-स्वातंत्य नीति एवं नियमतांत्रिक राजतन्त्र के समर्थक थे।
उत्तर : False

7. डेनिस दिदेरो एवं डि’ एलेमवर्ट ने 17 खण्डों का एक विश्वकोष की रचना की थी।
उत्तर : True

8. राईकर, तेइन, रूस्तान, सेतोब्रियाँ, भादेलाँ, जोरेस भातिये आदि इतिहासकारों ने फ्रांसीसी क्रांति में दार्शनिकों की भूमिका स्वीकार की है।
उत्तर : True

9. फ्रांस के राजा लुई पन्द्रहवें का कहना था, ‘मैं ही राष्ट्र हूँ।’
उत्तर : False

10. 1789 ई० के मई महीने में कुलीन क्रांति एवं जून महीने में बुर्जुआ क्रांति हुई थी।
उत्तर : True

11. आन्दोलनकारी महिलाओं द्वारा फ्रांस के राजमहल में घुसकर राजपरिवार को पेरिस में आने को बाध्य करने की घटना (1789 ई०) ‘द्वितीय फ्रांसीसी क्रांति’ के नाम से परिचित है।
उत्तर : False

12. 1792 ई० में गठित फ्रांसीसी विधानसभा ‘राष्ट्रीय महासभा’ या ‘नेशनल कन्वेशन’ नाम से परिचित है।
उत्तर : True

13. गिलोटिन यंत्र रोब्सपियर ने बनाया था।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 History MCQ Questions Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति के विभिन्न पहलू

14. फ्रांस में शराब, तम्बाकू आदि नशीले द्रव्यों पर लगाये गये कर का नाम तेराज था।
उत्तर : False

15. फ्रांसीसी कृषक फसलों के लिये ‘बानालित’ नामक कर देने के लिये विवश थे।
उत्तर : True

16. राजा लुई सोलहवें ने अपने भाई ड्यूक ऑफ अर्लियेन्स को संसद से निर्वासित किया।
उत्तर : True

17. फ्रांसीसी राजा सन्देह के कानून का प्रयोग करके ससंद द्वारा पारित कानून को कुछ समय के लिए रद्द कर सकते थे।
उत्तर : False

18. बैस्टील दुर्ग के पतन ( 1789 ई०) की घटना ‘फ्रांस की द्वितीय क्रांति’ के नाम से परिचित है।
उत्तर : False

19. संविधान सभा की कार्यावली में एक उल्लेखनीय त्रुटि थी – ‘निष्क्रिय’ नागरिकों को मताधिकार से वंचित करना।
उत्तर : True

20. फ्रांस ने प्रजातन्त्र द्वारा संविधान सभा की प्रतिष्ठा की।
उत्तर : False

21. फ्रांस में पब्लिक सुरक्षा समिति एवं साधारण सुरक्षा समिति आतंकी शासन के दो संगठन थे।
उत्तर : True

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22. ‘लेतर द काचे’ नामक गिरफ्तारी के फरमान के जरिये किसी भी साधारण फ्रांसीसी नागरिक को बिना विचार किये बन्दी बनाया जा सकता था।
उत्तर : True

23. ‘लेतर द ग्रेस’ जारी किये जाने के माध्यम से अभियुक्त फ्रांसीसी नागरिकों को मुक्ति दी जाती थी।
उत्तर : True

24. रोब्सपियर जिरोल्डिन का दलनेता था।
उत्तर : False

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

1. स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. लुई चौदहवाँ 1. मेरे बाद ही महाप्रलय आ रहा है।
B. लुई पन्द्रहवाँ 2. राष्ट्र को जिन्दा रखने के लिये राजा को मरना होगा।
C. लुई सोलहवाँ 3. मै ही राष्ट्र हूँ।
D. रोब्सपियर 4. मैं जो चाहता हूँ वही कानून है।

उत्तर :

1. स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. लुई चौदहवाँ 3. मै ही राष्ट्र हूँ।
B. लुई पन्द्रहवाँ 1. मेरे बाद ही महाप्रलय आ रहा है।
C. लुई सोलहवाँ 4. मैं जो चाहता हूँ वही कानून है।
D. रोब्सपियर 2. राष्ट्र को जिन्दा रखने के लिये राजा को मरना होगा।

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. एडम स्मिथ 1. आतंक-शासन के नेता
B. वाल्टेयर 2. कुलीन नेता
C. रोब्सपियर 3. राजनैतिक कारागार
D. मिराबो 4. भामक अर्थनीति का जादूघर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. एडम स्मिथ 4. भामक अर्थनीति का जादूघर
B. वाल्टेयर 3. राजनैतिक कारागार
C. रोब्सपियर 1. आतंक-शासन के नेता
D. मिराबो 2. कुलीन नेता

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. इन्टेंडैण्ट 1. आतंक-राज
B. लेतर द कैचे 2. लालची बाघ
C. ससपेन्सिम विटो 3. गिरफ्तारी – फरमान
D. पब्लिक सुरक्षा समिति 4. कुछ समय के लिए कानून को स्थगित करना

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. इन्टेंडैण्ट 2. लालची बाघ
B. लेतर द कैचे 3. गिरफ्तारी – फरमान
C. ससपेन्सिम विटो 4. कुछ समय के लिए कानून को स्थगित करना
D. पब्लिक सुरक्षा समिति 1. आतंक-राज

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प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. टाइले 1. उत्पादन कर
B. कैपिटेशन 2. भूमि कर
C. मिटिंयेमे 3. श्रम कर
D. कार्वि 4. आयकर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. टाइले 2. भूमि कर
B. कैपिटेशन 1. उत्पादन कर
C. मिटिंयेमे 4. आयकर
D. कार्वि 3. श्रम कर

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
A. पैवेला 1. धर्म कर
B. तेराज 2. रास्ता-घाट व्यवहार करने का टैक्स
C. कांट्रैक्ट ऑफ पोइसी 3. नमक कर
D. टाइद 4. स्वेच्छाकर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
A. पैवेला 3. नमक कर
B. तेराज 2. रास्ता-घाट व्यवहार करने का टैक्स
C. कांट्रैक्ट ऑफ पोइसी 4. स्वेच्छाकर
D. टाइद 1. धर्म कर

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. द स्पिरिट ऑफ लॉ 1. माण्टेस्वय
B. कौंदिद 2. रूसो
C. सामाजिक संधि 3. दिदरो एवं डि’एलेमवर्ट
D. विश्वकोष 4. वाल्टेयर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. द स्पिरिट ऑफ लॉ 1. माण्टेस्वय
B. कौंदिद 4. वाल्टेयर
C. सामाजिक संधि 2. रूसो
D. विश्वकोष 3. दिदरो एवं डि’एलेमवर्ट

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 5 मई 1. बुर्जुआ क्रांति की सूचना
B. 20 जून 2. बैस्टील दुर्ग का पतन
C. 27 जून 3. टेनिस कोर्ट की शपथ
D. 14 जुलाई 4. राष्ट्रीय सभा का अधिवेशन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 5 मई 4. राष्ट्रीय सभा का अधिवेशन
B. 20 जून 3. टेनिस कोर्ट की शपथ
C. 27 जून 1. बुर्जुआ क्रांति की सूचना
D. 14 जुलाई 2. बैस्टील दुर्ग का पतन

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प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1789 ई० 1. फ्रांस का प्रथम लिखित संविधान
B. 1790 ई० 2. फ्रांस कौ क्रांति
C. 1791 ई० 3. जनता द्वारा राजमहल पर आक्रमण
D. 1792 ई० 4. गिरजा की अचल-सम्पत्ति जब्त

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. 1789 ई० 2. फ्रांस कौ क्रांति
B. 1790 ई० 4. गिरजा की अचल-सम्पत्ति जब्त
C. 1791 ई० 1. फ्रांस का प्रथम लिखित संविधान
D. 1792 ई० 3. जनता द्वारा राजमहल पर आक्रमण

प्रश्न 9.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. बैस्टील दुर्ग का पतन 1. संविधान सभा
B. सामंतंत्र की समाप्ति 2. जैकोबिन दल
C. प्रजातंत्र-प्रतिष्ठा 3. राष्ट्रीय महासभा
D. आतंक का शासन 4. पेरिस की

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. बैस्टील दुर्ग का पतन 4. पेरिस की
B. सामंतंत्र की समाप्ति 1. संविधान सभा
C. प्रजातंत्र-प्रतिष्ठा 3. राष्ट्रीय महासभा
D. आतंक का शासन 2. जैकोबिन दल

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प्रश्न 10.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. जैकोबिन 1. वामपन्धी
B. फिठलेण्ट 2. निरपेक्ष
C. जिरोंदिस्ट 3. उप्र वामपन्थी
D. मध्यपन्थी 4. दक्षिणपन्धी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
A. जैकोबिन 3. उप्र वामपन्थी
B. फिठलेण्ट 4. दक्षिणपन्धी
C. जिरोंदिस्ट 1. वामपन्धी
D. मध्यपन्थी 2. निरपेक्ष

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Geography Book Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Geography Chapter 9 Question Answer – मानचित्र एवं मापक

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
मानचित्र निर्माण में सबसे आवश्यक क्या है ?
उत्तर : मापनी ।

प्रश्न 2.
मानचित्र का वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता हैं?
उत्तर :
मापक के आधार पर और उद्देश्य के आधार पर ।

प्रश्न 3.
किस प्रकार के मानचित्र बड़े मापनी पर बनाये जाते हैं?
उत्तर :
वृहद मापनी मानचित्र ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 4.
दीवाल मानचित्र किस प्रकार की मापनी पर बनाये जाते हैं?
उत्तर :
यह मानचित्र 1:15,000,000 से 1:2,500,000 के मापनी पर बने होते हैं।

प्रश्न 5.
एटलस मानचित्र किस प्रकार की मापनी पर बने होते हैं?
उत्तर :
लघु मापनी पर ।

प्रश्न 6.
मापक के अनुसार मानचित्र कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर :
दो प्रकार के ।

प्रश्न 7.
किस मानचित्र में बड़े आकार कम विवरणों में प्रस्तुत रहते हैं?
उत्तर :
लघु मापक मानचित्र ।

प्रश्न 8.
भारत के विभिन्न स्थलाकृतिक मानचित्रों को किस वर्ग के मानचित्र में सम्मिलित किया जा सकता है?
उत्तर :
भू-पत्रक अथवा स्थलाकृतिक मानचित्र |

प्रश्न 9.
यू० एस० जियोलॉजिकल सर्वे ने भू-आकृतिक मानचित्रों का क्या नाम दिया है?
उत्तर :
टीरेन डायग्राम (Terrain Diagram) ।

प्रश्न 10.
वृहत्मापक मानचित्रों के दो उदाहरण दीजिए ।
उत्तर :
मेज मानचित्र तथा दीवाल मानचित्र |

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 11.
वायु विज्ञान सम्बन्धी कार्यालय किस प्रकार के मानचित्र का उपयोग करते हैं?
उत्तर :
ऋतु मानचित्र ।

प्रश्न 12.
भारत में स्थलाकृतिक मानचित्रों का निर्माण कौन करता है?
उत्तर :
भारतीय सर्वेक्षण विभाग देहरादून द्वारा ।

प्रश्न 13.
मापक को प्रदर्शित करने की तीन विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर :

  • साधारण कथन विधि
  • निरूपक भिन्न विधि
  • आलेखी विधि

प्रश्न 14.
किस मापक से बने मानचित्र की गणना किसी भी इकाई के माध्यम से की जा सकती है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न मापक से।

प्रश्न 15.
किस मापक में दूरी एक रेखा के सहारे दिखायी जाती है?
उत्तर :
रचनात्मक या रैखिक मापक में ।

प्रश्न 16.
किस मापनी में एक इंच या एक सेंटीमीटर के 100 वें भाग को दिखाया जा सकता है?
उत्तर :
विकर्ण मापनी में ।

प्रश्न 17.
आकृति के विचार से वर्नियर मापनी कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर :
दो प्रकार की ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 18.
‘Mappa’ का शाब्दिक अर्थ बताओ ।
उत्तर :
मेजपोश या रूमाल ।

प्रश्न 19.
बड़ी मापनी के मानचित्र का एक उदाहरण बताओ ।
उत्तर :
स्थलाकृति ।

प्रश्न 20.
छोटी मापनी के मानचित्र का एक उदाहरण बताओ।
उत्तर :
एटलस ।

प्रश्न 21.
मानचित्र शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के किस शब्द से हुई है ?
उत्तर :
Mappa शब्द से ।

प्रश्न 22.
साधारण मानचित्र किसके द्वारा इंगित किया जाता है?
उत्तर :
अक्षांस एवं देशान्तर रेखाओं द्वारा ।

प्रश्न 23.
मानचित्र की स्पष्टता को बढ़ाने के लिए मानचित्र में किसका अंकन होता है?
उत्तर :
चिन्हों एवं प्रतीकों का।

प्रश्न 24.
धरातलीय बनावट को किस मानचित्र में प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर :
प्राकृतिक मानचित्र ।

प्रश्न 25.
किस मानचित्र का उद्देश्य किसी देश की सीमा रेखाओं व दृष्टव्य चित्र प्रस्तुत करना है?
उत्तर :
राजनैतिक मानचित्र ।

प्रश्न 26.
कौन सा मानचित्र भूगोलवेत्ताओं और सैनिक विशेषज्ञों द्वारा प्रयोग किए जाते हैं?
उत्तर :
भूपत्र अथवा स्थलाकृतिक मानचित्र ।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 27.
किस मानचित्र द्वारा भू-गर्भिक संरचना को छायारंगों द्वारा उनकी निजी स्थितियों को सूचित किया जाता है?
उत्तर :
भू-वैज्ञानिक मानचित्र द्वारा ।

प्रश्न 28.
रेज (Raisz) ने भू-आकृति मानचित्र को क्या नाम दिया है?
उत्तर :
मार्फोलॉजिक अथवा लैंडफॉर्म मैप नाम दिया है।

प्रश्न 29.
भू-आकृतिक मानचित्र को फिजिओग्राफिक डायग्राम के नाम से किसने सम्बोधित किया है?
उत्तर :
लोबेक महोदय ने ।

प्रश्न 30.
किस मानचित्र में भू-सम्पत्ति, खेती, बागों, तथा मकानों आदि की सीमाओं को चित्रित किया जाता है?
उत्तर :
भूकर मानचित्र |

प्रश्न 31.
किस मानचित्र में वायु दाब, तूफान, तापमान, मेघाच्छादन, वर्षा आदि की स्थिति को समय विशेष पर सूचित करते हैं?
उत्तर : ऋतु मानचित्र में ।

प्रश्न 32.
मानचित्र में नीले रंग से क्या दिखाए जाते हैं?
उत्तर :
धरातल पर स्थित जलीय भाग को ।

प्रश्न 33.
मानचित्र में शहरों को किस रंग द्वारा दर्शाया जाता है?
उत्तर :
गहरे पीले रंग से ।

प्रश्न 34.
सड़कों को दर्शाने के लिए मानचित्र में किस रंग का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
बैगनी रंग का ।

प्रश्न 35.
मानचित्रों का निर्माण की कला कब से शुरू हुई ?
उत्तर :
लिखने की कला से पहले शुरू हुई।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 36.
विश्व का प्राचीनतम मानचित्र कहाँ पाया जाता है?
उत्तर :
मेसोपोटामिया में।

प्रश्न 37.
आधुनिक मानचित्र कला की नींव रखने का श्रेय किसको जाता है?
उत्तर :
यूनानी भूगोलवेताओं को ।

प्रश्न 38.
पाठ्य पुस्तकों में दिए गए चित्र किस प्रकार के मानचित्र होते हैं?
उत्तर :
लघुमापक मानचित्र होते हैं।

प्रश्न 39.
कक्षा में अध्यापन के लिए किस प्रकार के मानचित्र का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर :
दीवाली मानचित्र का उपयोग होता है?

प्रश्न 40.
मापक का परिमाण साधारण शब्दों में किस प्रकार के मापक में प्रयोग किए जाते हैं?
उत्तर :
कथानात्मक मापक में।

प्रश्न 41.
किस मापक से बनें मानचित्र की किसी भी इकाई के माध्यम से गणना की जा सकती है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न मापक ।

प्रश्न 42.
किस मापक मानचित्र की गणना में कोई असुविधा नहीं होती है?
उत्तर :
प्रदर्शक मापक मानचित्र ।

प्रश्न 43.
किस मापक में दूरी एक रेखा के सहारे दिखाई जाती है?
उत्तर :
रचनात्मक या रैखिक मापक ।

प्रश्न 44.
कितने लम्बाई की रेखा रेखामापक के लिए सर्वोत्तम है?
उत्तर :
6 इंच या 15 से०मी० की रेखा ।

प्रश्न 45.
रचनात्मक मापक में लम्बाई नापने के लिए कौन से भाग किए गये हैं?
उत्तर :
प्राथमिक और गौण भाग किए गये हैं।

प्रश्न 46.
किस मापक को अन्तर्राष्ट्रीय मापक कहते हैं?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न मापक को ।

प्रश्न 47.
किस मापनी में एक ही इकाई के तीन मापकों को प्रदर्शित किया जा सकता है?
उत्तर :
विकर्ण मापनी (Diagonal Scale)

प्रश्न 48.
किस मापनी में एक इंच या एक सेंटीमीटर के 100 वें भाग को दिखलाया जा सकता है?
उत्तर :
विकर्ण मापनी में ।

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प्रश्न 49.
वर्नियर मापनी में धरातल पर स्थानों के बीच के कोणों के अंश, मिनट और सेकेण्ड में मान ज्ञात करने के लिए किस यंत्र का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
सेक्सेटैंट तथा थियोडोलाइट सर्वेक्षण यंत्र का ।

प्रश्न 50.
किस मापनी द्वारा वृत्त के अर्द्धव्यास ज्ञात किये जाते हैं?
उत्तर :
वर्गमूल मापनी द्वारा ।

प्रश्न 51.
किस मापनी द्वारा गोलों के अर्द्धव्यास ज्ञात किए जाते हैं?
उत्तर :
घनमूल मापनी द्वारा।

प्रश्न 52.
किस मानचित्र में ढाल की मात्रा या प्रवणता का अन्तसंबंध प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर :
ढाल की मापनी (Scale of Scape)

प्रश्न 53.
किसी मानचित्र को उसके मूल आकार से बड़ा बनाने के लिए मापनी को क्या किया जाता है?
उत्तर :
मापनी का विवर्धन किया जाता है ।

प्रश्न 54.
किसी मानचित्र को अपेक्षाकृत छोटे आकार का बनाने के लिए मापनी का क्या किया जाता है?
उत्तर :
मापनी का लघुकरण किया जाता है।

प्रश्न 55.
कौन-सा यंत्र समानान्तर चतुर्भुज के सिद्धान्त पर कार्य करता है?
उत्तर :
पेन्टोग्राफ ।

प्रश्न 56.
मानचित्र से क्षेत्रफल ज्ञात करने के यंत्र का नाम क्या है?
उत्तर :
प्लेनीमीटर (Planimeter)।

प्रश्न 57.
प्लेनीमीटर नामक यंत्र का आविष्कार किसने किया?
उत्तर :
प्रो० जे० एम्सलर (Prof. J. Amsler) ने।

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प्रश्न 58.
मानचित्र पर टेढ़ी-मेढ़ी या वक्र रेखाओं को मापने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
ऑपिसोमीटर (Opisometer) का।

प्रश्न 59.
लघु मापकं की ईकाई क्या है?
उत्तर :
मील या कि० मी० ।

प्रश्न 60.
वृहद् मापक की इकाई क्या है?
उत्तर :
फर्लांग, गज या फुट ।

प्रश्न 61.
स्थलाकृति मानचित्र को किस श्रेणी में रखा जाता है?
उत्तर :
दीर्घमापक मानचित्र की श्रेणी में ।

प्रश्न 62.
कौन – सा मानचित्र राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्मित होते हैं?
उत्तर :
राजनैतिक मानचित्र ।

प्रश्न 63.
किस मानचित्र द्वारा लेखपाल या अमीन ग्रामीण जमीनों की सटीक पैमाइस करता है?
उत्तर :
मौजा मानचित्र द्वारा ।

प्रश्न 64.
भारत में ग्रामों के मानचित्र किस मापनी पर बने होते हैं?
उत्तर :
16 ” = 1 मील के मापनी पर ।

प्रश्न 65.
प्रदर्शक भिन्न किस इकाई में व्यक्त किया जाता है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न की इकाई R. F. है ।

प्रश्न 66.
मानचित्र किस विषय का एक अनिवार्य उपकरण है?
उत्तर :
भूगोल ।

प्रश्न 67.
किसे समतल कागज या रूमाल पर प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर :
मानचित्र को ।

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प्रश्न 68.
मानचित्र शब्द किस भाषा से लिया गया है?
उत्तर :
लैटिन भाषा से ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
मापक क्या है?
उत्तर :
किसी मानचित्र में दो स्थानों के बीच की दूरी और जमीन पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की असली दूरी के अनुपात को मापनी कहते हैं।

प्रश्न 2.
मापक प्रदर्शित करने की कौन-सी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
मानचित्र पर मापनी या मापक प्रदर्शित करने की तीन विधियाँ होती हैं।

  • साधारण कथन विधि (Simple Statement Method)
  • निरूपक भिन्न विधि (Representative fraction or R.F. Method)
  • आलेखी विधि (Graphical Method)

प्रश्न 3.
प्रदर्शक भिन्न क्या है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न या निरूपक भिन्न :- मानचित्र अथवा प्लान की मापनी को प्रदर्शित करने की एक ऐसी विधि, जिसमें मानचित्र या प्लान पर दिखाई गई दूरी तथा धरातल की वास्तविक दूरी के बीच के अनुपात को भिन्न द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 4.
साधारण मापक क्या है?
उत्तर :
वह विधि जिसमें कथनों द्वारा मापनी व्यक्त की जाती है, उसे साधारण कथन विधि या साधारण मापक कहते हैं।
जैसे :- 1 से०मी०= 1 कि०मी० अथवा 1 ईंच = 1 मील इत्यादि ।

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प्रश्न 5.
लघु मापक क्या है?
उत्तर :
लघु मापक मानचित्र वे मापक हैं जो धरातल की विशाल दूरी को मानचित्र पर लघु दूरी के रूप में दर्शाते हैं।
जैसे : 1 सें.मी. = 1 किमी या 1 ” = 1 मील आदि ।

प्रश्न 6.
रेखात्मक मापक की लम्बाई कितनी होनी चाहिए?
उत्तर :
रेखात्मक मापक की लम्बाई 15 सें.मी. तक ही होना चाहिए।

प्रश्न 7.
विकर्ण क्या है?
उत्तर :
छोटे-छोटे भागों में बांटना ।

प्रश्न 8.
प्रदर्शक भिन्न का क्या लाभ है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न को किसी भी इकाई में बदला जा सकता है।

प्रश्न 9.
मानचित्र कला से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
मानचित्र चार्ट, खाका और अन्य प्रकार के ग्राफ बनाने की कला है।

प्रश्न 10.
मानचित्र क्रम क्या है?
उत्तर :
किसी देश या क्षेत्र के लिए समान मापनी, प्रकार तथा विशिष्ट के साथ बनाए गए मानचित्रों का समूह मानचित्र क्रम है।

प्रश्न 11.
दीर्घ मापक क्या है?
उत्तर :
दीर्घ मापक- ये मापक धरातल की छोटी दूरी को मानचित्र पर बड़ी दूरी से दर्शाते हैं जैसे- 5 cm = 1000 किमी० या 10 ” = 100 मील ।

प्रश्न 12.
रैखिक मापक कितने प्रकार का होता है?
उत्तर :
रचनात्मक या रैखिक मापक दो प्रकार के होते हैं –

  • प्राथमिक मापक ( Primary Scale)
  • गौण मापक (Secondary Scale)

प्रश्न 13.
मापक को प्रदर्शित करने की तीन बिधियां क्या है?
उत्तर :

  • कथनात्मक मापक
  • प्रदर्शक मापक
  • रेखिक मापक

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प्रश्न 14.
मापक का क्या महत्व है?
उत्तर :
मापक का महत्व (Importance of Scale):- मापक की सहायता से हम एक विशाल धरातल को भी सुविधाजनक छोटे धरातल पर प्रदर्शित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मानचित्र ऐसा होना चाहिए कि इसे हाथ में लिया जा के और आसानी से उसका अध्ययन किया जा सके। मानचित्र का आकार मानचित्र में प्रयुक्त मापक पर निर्भर करता है। मापक की सहायता से हम उपलब्ध सीमित स्थान में भी मानचित्र को आवश्यकतानुसार बना सकते हैं।

प्रश्न 15.
प्रदर्शक भिन्न अथवा प्रतिनिधि भिन्न किस इकाई में व्यक्त किया जाता है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न अथवा प्रतिनिधि भिन्न = मानचित्र पर दूरी/धरातल पर दूरी

प्रश्न 16.
मानचित्र से क्या समझते हैं?
उत्तर :
किसी मापनी से लघुकृत हुए आयामों के आधार पर सम्पूर्ण पृथ्वी या उसके किसी भाग का चयनित, संकेतात्मक तथा सामान्य प्रदर्शन मानचित्र कहलाता है।

प्रश्न 17.
मापनी की परिभाषा दीजिए।
उत्तर :
“मानचित्र की मापनी मानचित्र में प्रदर्शित किन्हीं दो बिन्दुओं या स्थानों के बीच की दूरी तथा उन बिन्दुओं या स्थानों के बीच धरातल पर वास्तविक दूरी के मध्य का अनुपात है।

प्रश्न 18.
वृहत् मापनी मानचित्र से क्या समझते हैं?
उत्तर :
इस प्रकार के मानचित्र बड़े मापनी पर बनाये जाते हैं जिसमें पैमाना 6″ : 1 मील होता है।

प्रश्न 19.
लघु मापनी मानचित्र से क्या समझते हैं?
उत्तर :
यह मानचित्र छोटे पैमाने पर बनाये जाते हैं। इससे पैमाना 1” : 16 मील से छोटा होता है।

प्रश्न 20.
एटलस मानचित्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
एटलस मानचित्र लघु मापनी पर बने होते हैं। इस मानचित्र में सम्पूर्ण विश्व के महाद्वीपों, देशों या प्रदेशों के केवल मुख्य-मुख्य भौगोलिक तथ्यों को दर्शाया जाता है।

प्रश्न 21.
मापनी का विवर्धन या लघुकरण क्या है ?
उत्तर :
किसी मानचित्र को उसके मूल आकार से बड़ा आकार में बनाने के लिए मापनी का विवर्धन तथा अपेक्षाकृत छोटे आकार का बनाने के लिए मापनी का लघुकरण किया जाता है।

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प्रश्न 22.
मापक का मानचित्र में क्या उपयोग है?
उत्तर :

  • मापक का मानचित्र में महत्वपूर्ण उपयोग है। यह धरातल पर किन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी तथा मानचित्र पर उन्हीं दोनों स्थानों की दूरी के आधार पर सही बोध कराता है ।
  • मापक की सहायता से समतल कागज पर समस्त पृथ्वी के किसी भी अंश का सूक्ष्मता से अध्ययन किया जा सकता है ।

प्रश्न 23.
मानचित्र में किन बातों का होना आवश्यक है?
उत्तर :
मानचित्र पर परम्परागत चिन्हों एवं प्रतीकों का भी अंकन होता है जो मानचित्र की सुगमता एवं स्पष्टता को बढ़ा देते हैं।

प्रश्न 24.
मापक के आधार पर मानचित्र को कौन-कौन से भागों में विभक्त किया जाता है?
उत्तर :
मानचित्र के विभिन्न लक्ष्यों और अभिप्रायों को ध्यान में रखकर हम उन्हें निम्न वर्गों में बाँट सकते हैं।

  • प्राकृतिक मानचित्र
  • राजनैतिक मानचित्र
  • सांख्यिकी अथवा वितरण मानचित्र,
  • विशिष्ट मानचित्र

प्रश्न 25.
मौजा मानचित्र किस काम में सहायक होते है ?
उत्तर :
ये नगर मानचित्रकारों के लिए बड़े उपयोग के होते हैं और उनके उत्कृष्ट मानचित्रों के लिए आधारभूत होते हैं।

प्रश्न 26.
प्रतिनिधि अथवा प्रदर्शक भिन्न क्या है?
उत्तर :
प्रतिनिधि भिन्न या निरूपक भिन्न धरातल पर के दो स्थानों की वास्तविक दूरी तथा मानचित्र पर के दो स्थानों के दूरी का अनुपात होता है। इसमें अंश का मान सदैव एक होता है।

प्रश्न 27.
रैखिक मापक क्या है?
उत्तर :
रैखिक मापक में मापन दूरी एक रेखा के सहारे प्रदर्शित की जाती है।

प्रश्न 28.
राजनैतिक मानचित्र का क्या उद्देश्य है?
उत्तर :
इनका मुख्य उद्देश्य या तो स्पष्ट सीमा रेखाओं अथवा हल्के रंग तथा सीमाओं द्वारा विश्व या महाद्वीप का देश का दृष्टव्य चित्र प्रस्तुत करना है।

प्रश्न 29.
सांख्यिक अथवा वितरण मानचित्र का क्या उपयोग है?
उत्तर :
ये पृथ्वी के सामाजिक तथा आर्थिक ढाँचों, कृषि, उद्योग, व्यापार और परिवहन, जनसंख्या और बस्तियों आदि के प्रदर्शन के लिए भी प्रयोग किए जाते हैं।

प्रश्न 30.
भू-वैज्ञानिक मानचित्र क्या सूचित करते हैं?
उत्तर :
ये मानचित्र किसी खास क्षेत्र की भू-गर्भिक संरचना को छायारंगों द्वारा उनकी निजी स्थितियों को सूचित करते हैं।

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 31.
प्राकृतिक मानचित्र किस काम में प्रयोग किए जाते हैं?
भूगोल
उत्तर : ये स्थानों के नाम तथा सीमाओं आदि के समक्ष अन्य प्रासंगिक सूचनाओं के लिए भी आधार रूप में प्रायः प्रयोग किए जाते हैं।

प्रश्न 32.
भू- कर मानचित्र किसलिए प्रयोग किए जाते हैं?
उत्तर : इस प्रकार के मानचित्र भू-सम्पत्ति, खेतों, बागों तथा मकानों आदि की सीमाओं के लिए प्रयोग किये जाते हैं।

प्रश्न 33.
ऋतु मानचित्र द्वारा क्या सूचित किया जाता है?
उत्तर :
ये ऋतु तत्वों अर्थात वायुदाब, तूफान, तापमान, मेघाच्छादन, वर्षा आदि की स्थिति को समय विशेष पर सूचित करते हैं।

प्रश्न 34.
सामुद्रिक चास क्या प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर :
ये समुद्र की गहराई, समुद्रतल का उभार तथा ज्वार-भाटा एवं धाराओं को भी प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 35.
वृहत् मापनी मानचित्र में क्या दिखाया जाता है?
उत्तर :
इस तरह के पैमाने पर भूसम्पति मानचित्रों, नगरों के प्लानों तथा स्थलाकृतिक मानचित्रों को बनाया जाता है।

प्रश्न 36.
रेखीय मापनी के लिए कौन-सी विधि अपनायी जाती है?
उत्तर :

  • सरल या सीधे रेखा की दूरी मापना।
  • तिरछी रेखा की लम्बाई मापना ।

प्रश्न 37.
सरल मापनी में क्या प्रदर्शित की जाती है ?
उत्तर : सरल मापनी के द्वारा किसी रैखिकं माप प्रणाली के अधिक से अधिक दो मात्राओं में धरातल की दूरियाँ प्रदर्शित की जाती है।

प्रश्न 38.
तुलनात्मक मापनी में क्या प्रदर्शित की जाती है?
उत्तर :
इस मापनी द्वारा एक से अधिक माप प्रणालियों में दूरियाँ एक साथ प्रदर्शित की जाती है।

प्रश्न 39.
वर्नियर मापनी की कितनी मापनियाँ होती हैं?
उत्तर :
वर्नियर मापनी में वस्तुत: दो मापनियाँ होती है? बड़ी मापनी को मुख्य या प्राथमिक मापनी तथा छोटी मापनी को वर्नियर मापनी कहते हैं।

प्रश्न 40.
आकृति के विचार से वर्नियर मापनी कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर :
आकृति के विचार से वर्नियर मापनी दो प्रकार की होती हैं :-

  • सीधे किनारे वाली मापनी
  • वक्र किनारे वाली मापनी ।

प्रश्न 41.
स्थलाकृति मानचित्र पर क्या दिखलाया जाता है?
उत्तर :
इन मानचित्रों पर धरातल की रचना, पर्वत, पठार, मैदान, जल प्रवाह प्रणाली, जंगल, सड़क, रेलमार्ग, नहरें आदि दिखाये जाते हैं।

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प्रश्न 42.
लघु मापनी मानचित्र पर क्या दिखाया जाता है?
उत्तर :
विश्व के मानचित्र, दीवाल मानचित्र एवं एटलस मानचित्र इसी पैमाने पर बने होते हैं।

प्रश्न 43.
सैन्य मानचित्र सैनिकों के लिए किस प्रकार लाभदायक है ?
उत्तर :
सैन्य मानचित्रों की सहायता से सैनिक अधिकारी सेना के संचालन का मार्ग तथा आक्रमण करने के स्थल सुनिश्चित करते हैं।

प्रश्न 44.
मानचित्र प्रक्षेप किसे कहते हैं?
उत्तर :
गोलाकार सतह को समतल सतह पर प्रदर्शित करने की प्रणाली मानचित्र प्रक्षेप कहलाती है।

प्रश्न 45.
रेखाचित्र से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
वास्तविक मापनी या अभिविन्यास के बिना मुक्त हस्त द्वारा खींचे गए सरल मान चित्र को रेखाचित्र कहते हैं ।

प्रश्न 46.
मापनी क्या है?
उत्तर :
मापनी एक मानचित्र खाका या छायाचित्र पर दी गई दूरी या वास्तविक दूरी के बीच का अनुपात है।

प्रश्न 47.
व्यापीकरण मानचित्र (Extensive Map) किसे कहते हैं?
उत्तर :
मानचित्र पर आकृतियों का सरल प्रदर्शन, जो इसकी मापनी या उद्देश्य के उपर्युक्त हो एवं उनके वास्तविक स्वरूप को प्रभावित नहीं करता हो ।

प्रश्न 48.
अंश क्या है?
उत्तर :
भिन्न में रेखा के ऊपर स्थित अंक को अंश कहते हैं।

प्रश्न 49.
हर से आप क्या समझते है?
उत्तर :
भिन्न में रेखा के नीचे स्थित अंक को हर कहते हैं।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
मानचित्र की विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर :
मानचित्र की विशेषताएँ (Characteristics of Maps) :

  • मानचित्र वास्तविक भू-भाग से बहुत ही छोटा होता है, जिसका चित्रण किया गया है।
  • प्रत्येक मानचित्र एक निश्चित मापक पर बनाया जाता है जो मानचित्र के दो बिन्दुओं तथा पृथ्वी का अनुपात निर्धारण करता है।
  • साधारण मानचित्र अक्षांश एवं देशान्तर रेखाओं द्वारा इंगित किया जाता है जिससे किसी भी स्थान की सही स्थिति का ज्ञान हो जाता है।
  • मानचित्र पर परम्परागत चिन्हों एवं प्रतीकों का भी अंकन होता है जो मानचित्र की सुगमता एवं स्पष्टता को बढ़ा देते हैं।
  • मानचित्र की एक अपनी प्रमुख विशेषता है कि वह पृथ्वी के तल के जैसा की ऊपर से दृष्टिगत होता है, प्रतिरूप है।

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प्रश्न 2.
मानचित्र का अर्थ स्पष्ट कीजिए :
उत्तर :
मानचित्र का अर्थ :- भूगोल के अध्ययन के लिए मानचित्र एक अनिवार्य उपकरण है। यह मानव तथा पर्यावरण के लिए स्थानिक सम्बन्ध की व्याख्या के लिए अनुगणक एवं दृश्य- सहायक है। मानचित्र समस्त पृथ्वी का या किसी छोटे- भू-भाग का निश्चित पैमाने के आधार पर सांकेतिक चिन्हों के माध्यम से चित्रण है। इसे समतल कागज या रूमाल (छोटे कपड़े पर प्रदर्शित किया जाता है। मानचित्र (MAP) शहर लैटिन भाषा के Mappa से लिया गया है। इसका अर्थ कपड़े की चादर अर्थात् रूमाल से है । सर्वप्रथम मानचित्र का प्रयोग कपड़े पर ही किया जाता था किन्तु वर्तमान समय में इसका चित्रण कागज पर बहुतायत से होने लगा है।

प्रश्न 3.
मानचित्र के महत्व पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर :
मानचित्र का महत्व (Importance of Map) :- वर्तमान काल में मानचित्र का महत्व अधिक हो गया है। क्योंकि यह योजनाओं का युग है। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय योजनाएं, नगरीय एवं ग्रामीण योजनाएँ हमारे प्रयोगात्मक लक्ष्य हो गये है। वास्तव में मानचित्र ही हमारी योजनाएँ है। सैनिक कार्यवाही के लिए मानचित्रों का और भी अधिक महत्व है क्योंकि वायु में जो भी युद्ध होते हैं, उनकी जीत या हार बहुत अंश तक मानचित्रों पर ही निर्भर होती है। यही कारण है कि युद्ध के लिए मानचित्रों के महत्व को पहले से ही महसूस किया गया और सेना द्वारा अनेक पैमाइशों को सम्पादित किया गया है। निम्न कार्यों के लिए मानचित्र आवश्यक है :-

  • युद्ध-काल सम्बन्धी योजनाओं के लिए ।
  • सैन्य-समूह सम्बन्धी सूचनाएं देने के लिए ताकि सुरक्षा और आक्रमण के लिए उचित स्थान चुना जा सके
  • बस्तियाँ, जंगलों, पुलों, जलापूर्ति आदि के सम्बन्ध में सूचना प्राप्त करने के लिए
  • वार्ता वहन के साधनों की सूचना के लिए
  • शत्रु के स्थान की सूचना देने के लिए

प्रश्न 4.
मानचित्र पर दूरी मापने के लिए किन विधियों का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
मानचित्र पर दूरी का मापन – मानचित्र पर प्रदर्शित स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी, मार्गों, नदियों आदि
की वास्तविक लम्बाई ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है :

  • पटरी अथवा डिवाइडर्स द्वारा (By Scale or Dividers)
  • महीन तार अथवा धागे द्वारा (By thio wire or thread)
  • ऑपिसोमीटर द्वारा (By Opisometer)

प्लेनीमीटर (Planimeter), मानचित्र से क्षेत्रफल ज्ञात करने का एक यंत्र है। इस यंत्र का अविष्कार जे० एम्सेलर (Prof. J. Amslor) द्वारा किया गया है।

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प्रश्न 5.
कथनात्मक मापक के गुण एवं दोषों को बताएं।
उत्तर :
कथनात्मक मापक के गुण (Merit of Simple Statements) :-

  • इसको आसानी से प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • इसको रेखीय मापक या प्रदर्शक भिन्न की तरह याद करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • एक सामान्य ज्ञान रखने वाले व्यक्ति को समझने में असुविधा नहीं होगी।

दोष (Demerits) :-

  • समस्त विश्व में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। किसी एक भाषा के कथनात्मक मापक प्रदर्शित करने पर दूसरे भाषा के लोगों को समझना कठिन हो जाता है।
  • यदि मानचित्र के आकार को छोटा या बड़ा किया जाय तो कथनात्मक मापक दोष पूर्ण हो जायेगा ।

प्रश्न 6.
प्रदर्शक भिन्न के गुण एवं दोषों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न के गुण :

  • प्रदर्शक भिन्न के मापक से बने मानचित्र की किसी भी इकाई के माध्यम से गणना की जा सकती है।
  • प्रदर्शक भिन्न मापक को आसानी से कथनात्मक मापक तथा रेखीय मापक में परिवर्तित किया जा सकता’
  • प्रदर्शक मापक मानचित्र की गणना में कोई असुविधा नहीं होती है।

प्रदर्शक भिन्न के दोष :-

  • R.F. की गणना के लिए गणित का ज्ञान होना आवश्यक है।
  • मानचित्र को बड़ा या छोटा करने पर मापक की यथार्थता समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 7.
ग्लोब और मानचित्र में क्या अन्तर है?
उत्तर :

ग्लोब मानचित्र
(i) ग्लोब पृथ्वी का मॉडल रूप है। (i) मानचित्र समस्त पृथ्वी का या किसी छोटे भू-भाग का निश्चित पैमाने के आधार पर सांकेतिक चिन्ह के माध्यम से चित्रण है।
(ii) ग्लोब की रचना के लिए किसी कठोर गोलाका आकृति जैसी वस्तु की जरूरत होती है। (ii) मानचित्र की रचना किसी समतल कागज या कपड़े पर किया जाता है।
(iii) ग्लोब को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में कठिनाई होती है। (iii) मानचित्र को मोड़कर कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।
(iv) सैनिकों के लिए ग्लोब सहायक नहीं होते हैं। (iv) मानचित्र सैनिकों की बहुत सहायता करते हैं।


विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार के मानचित्रों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनके बारे में संक्षेप में लिखिए ।
उत्तर :
मानचित्रों की अत्यधिक संख्या होने के कारण उनका सही-सही वर्गीकरण करना बहुत ही कठिन होता है । मापकों के आधार पर उन्हें दो वर्गों में बाँट सकते हैं। लघु मापक मानचित्र तथा वृहद् मापक मानचित्र । मानचित्र के विभिन्न लक्ष्यों और अभिप्रायों को ध्यान में रखकर हम उन्हें निम्न वर्गों में बाँट सकते हैं।

(A) प्राकृतिक मानचित्र (Physical Maps ) :- वे मानचित्र हैं जो भूमि के उभरे आकारों को छायाकारों या खाड़ी रेखाओं या समुच्च रेखाओं के बीच विभिन्न छायाओं अथवा हल्के रंगों (हरा, पीला, तथा भूरा) द्वारा चित्रित करते हैं तथा उसके जल प्रवाह को भी प्रदर्शित करते हैं । ये स्थानों के नाम तथा सीमाओं आदि के समक्ष अन्य प्रासंगिक सूचनाओं के लिए भी आधार रूप में प्राय: प्रयोग किए जाते हैं।

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(B) राजनैतिक मानचित्र (Political Maps ) :- इनका मुख्य उद्देश्य या तो स्पष्ट सीमा रेखाओं अथवा हल्के रंग तथा सीमाओं द्वारा विश्व या महाद्वीप या देश का दृष्टव्य चित्र प्रस्तुत करना है। अन्य दो प्रधान रूप रेखाएँ :- प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक उसके परिपार्श्व में दिखाई जाती है। एक अच्छा राजनैतिक मानचित्र स्पष्ट और प्रभावोत्पादक होता है।

(C) सांख्यिकी अथवा वितरण मानचित्र (Statistical Maps Or Distribution Maps ) :- ये मानचित्र प्राकृतिक तत्वों के परिणाम सम्बन्धी गुणों जैसे उच्चावच, वर्षा, तापमान, वायु-दाब आदि को प्रदर्शित करते हैं । ये पृथ्वी के सामाजिक तथा आर्थिक ढाँचों, कृषि, उद्योग, व्यापार और परिवहन, जनसंख्या आदि के प्रदर्शन के लिए भी प्रयोग में लाए जाते हैं।

(D) विशिष्ट मानचित्र (Special Maps ) :- यह नाम उन विशेष मानचित्रों के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है जो विशिष्ट कार्य के लिए वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोग में लाए जाते हैं। ये निम्नलिखित हैं :-

(1) भूपत्र अथवा स्थालाकृतिक मानचित्र (Topographical, Maps ) :- इस प्रकार के मानचित्रों का प्रयोग और व्याख्या के लिए विशेष प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। ये मानचित्र भूगोलवेताओं और सैनिक विशेषज्ञों द्वारा प्रयोग किए जाते हैं। भारत के विभिन्न स्थलाकृतिक मानचित्र इस वर्ग में सम्मिलित किये जाते हैं। संसार के मापक मानचित्र तथा British Cooridnance Survery मानचित्र भी इसी वर्ग में सम्मिलित किये जाते हैं।

(2) भू-वैज्ञानिक मानचित्र (Geological Maps ) :- ये मानचित्र बिल्कुल भू-पत्रों के समान होते हैं, जो क्षेत्र की भू-गाभिर्क संरचना को छायारंगों द्वारा उनकी निजी स्थितियों को सूचित करते हैं। अधिकांश भू-वैज्ञानिक मानचित्रों में बड़ी रेखाएँ दिखाई जाती है। ये प्रायः मुड़े हुए पत्रों के रूप में प्रकाशित होते है, जिन्हें Geological Polio कहते हैं।

(3) आकृति मानचित्र (Physiographic Maps ) :- ये छोटे मापक पर हाथ से खींचे गए मानचित्र हैं, जो भू- आकृतियों को प्रदर्शित करते हैं। ये Black Diagram के विकसित रूप कहे जा सकते हैं। इन ब्लॉक चित्रों का निर्माण अमेरिका के प्राकृतिक भूगोल- वेताओं ने अपने प्राकृतिक भूगोल सम्बन्धी सिद्धान्तों की व्याख्या के लिए किया था।

इनका मुख्य उद्देश्य साधारण व्यक्तियों को भू-गर्भिक ज्ञान से परिचित कराना था। एक भू-आकृति अपने क्षेत्रीय वातावरण में कैसी दिखाई देती है, भू-आकृति मानचित्र उसी का प्रतिरूप मात्र होता है। रेज ने इनको मार्फोलॉजिक अथवा लौंडफार्म मैप नाम दिया है। जबकि लोबेक ने फिनियोग्राफिक डायग्राम के नाम से सम्बोधित किया है, यू-एस० जियोलॉजिकल सर्वे ने इनको हीरेन डायग्राम की संज्ञा दी है।

(4) मौजा यां नगर मानचित्र (Mouza or Town Maps ) :- नगर मानचित्र एक विशिष्ट प्रकार के मानचित्र हैं। ये वृहद् मापक मानचित्र हैं, जिनका मापक 3″ = 1 मील अथवा 6″ = 1 मील अथवा 6″ = 1 से० मी० = 100 अथवा 200 मीटर होता है। नगर मानचित्रों में मुख्य नगरों की भू-आकृत्तियों को अलग-अलग दिखाया जा सकता है। ये नगर मानचित्रकारों के लिए बड़े उपयोग के होते हैं और उनके उत्कृष्ट मानचित्रों के लिए आधारभूत होते हैं।

(5) भू-कर मानचित्र (Codastral Maps ) :- इस प्रकार के मानचित्र भू-सम्पति, खेतों, बागों तथा मकानों आदि की सीमाओं के लिए प्रयोग किये जाते हैं। ये मानचित्र सरकारी कार्यालयों द्वारा तैयार किये जाते हैं और लगान सम्बन्धी कार्यों के लिए प्रयोग किये जाते हैं। लेखपालों द्वारा प्रयुक्त मानचित्रों को इसी श्रेणी में रख सकते हैं। नगर मानचित्रों की तरह इनके भी मापक बड़े होते हैं, कभी-कभी तो 1″ = 1⁄2 फर्लांग अथवा 1 से० = 100 मीटर ।

(6) ऋतु मानचित्र (Weather Maps ) :- ये मानचित्र वायु-विज्ञान सम्बन्धी कार्यालयों द्वारा निर्मित किये जाते हैं। ये ऋतु तत्वों अर्थात् वायु दाब, तूफान, तापमान, मेघाच्छादन, वर्षा आदि की स्थिति को समय विशेष पर सूचित करते हैं | बेतार तार तथा टेलीफी से इस प्रकार के मानचित्र का निर्माण संभव हो गया है क्योंकि इनके द्वारा किसी दूर के स्टेशन से मुख्य केन्द्र पर समाचार शीघ्र ही भेजा जा सकता है।

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(7) सामुद्रिक चार्टस् (Navigational Charts) :- ये चार्टस योग्य सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रकाशित किए जाते हैं। ये तट तथा तटीय जलाशयों पर ही विशेष बल देते हैं। अतः ये उन विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं जो सागर से दृष्टिगोचर होती है। इनमें समुद्र की गहराई, समुद्रतल का उभार तथा ज्वार-भाटा एवं धाराओं को भी प्रदर्शित करते हैं । अव्यचदस जो नाविकों के उपयोग में आते है, विभिन्न समुद्रों के नियतकलिब चार्टस्, ग्रेट सीकेल चार्टस्तथा इसी प्रकार के अन्य चार्टस् हैं।

(8) वैमानिक चार्टस् (Aeranautical Charts) :- इस वायु युग ने वैमानिक चार्टस् के महत्व तथा उसकी प्रसिद्धि को बढ़ाने में अत्यधिक योग दिया है। चार्टस् विमान चालकों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। ये भूमि के स्थानिक भौगोलिक आकारों को बहुरंगी समुच्य रेखाओं में प्रस्तुत करते हैं। रेखाएँ भू-रंग, मुख्य उभार, परम्परागत रंगयोजना में (सर्वोच्च भाग काले भूरे रंग में तथा सबसे नीचा भाग हरे रंग में) जलीय धरातल नीले रंग में, शहर गहरे पीले रंग में, सड़कें तथा सांस्कृतिक आकार काले रंग में दिखाए जाते हैं। वायुयान चालन सम्बन्धी अन्य सहायताओं जैसे निर्धारित हवाई मार्ग, हवाई अड्डे, हवाई खण्ड, संकेत द्वीप, रेडियो यंत्र आदि गहरे रंगों में प्रदर्शित किये जाते हैं।

प्रश्न 2.
भूगोलवेता के लिए मानचित्रों का क्या महत्व है? मानचित्र के महत्व पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर :
मानचित्र का महत्व :- भूगोलवेता के लिए मानचित्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपकरण है। वह मानचित्रों का व्यावसायिक प्रयोग करनेवाला है। परन्तु मानचित्र केवल भूगोलवेताओं के लिए ही उपयोगी नही हैं, वरन् अन्य वैज्ञानिकों के लिये भी, जिनका अध्ययन भूगोल के सहयोग की अपेक्षा रखता है, मानचित्र अत्यधिक उपयोगी होते हैं। शोध कार्यों, शिक्षा तथा उनकी सफलताओं के प्रचार में मानचित्रों का बहुत हाथ रहता है।

अतः विशिष्ट मानचित्रों के प्रकार की वृद्धि होती रहती है। मानचित्र शासकों तथा यात्रियों के लिए सहयोगी एवं निर्देशक का कार्य करता है। शासक मानचित्रों का प्रयोग अपनी शासन व्यवस्था ठीक रखने के लिए करता है, जबकि यात्री अपने मार्गों का पता लगाने के लिए। प्रान्तों, जिलों तथा व्यक्तिगत राज्यों की सीमाओं का ठीक-ठीक निर्धारण, बिना मानचित्रों के नहीं हो सकता। इस प्रकार वे न्याय प्रबन्ध, सीमा

आयोगों तथा न्यायालयों की सहायता करते हैं। वार्तावहन तथा यातायात के कार्यों में मानचित्रों का प्रयोग जनता तथा सरकार दोनों द्वारा होता है। पिछड़े देशों के लिए तो मानचित्रों का महत्व और अधिक है, क्योंकि बिना मानचित्रों की सहायता से कृषि योग्य तथा बसने योग्य भूमि का निश्चय ही नहीं हो सकता। जब नई सड़कें, रेलवे लाइनें, नहरें आदि बनाई जाती हैं तो उनकी पैमाइस के लिए विशेष प्रकार के मानचित्र तैयार किये जाते हैं।

प्रश्न 3.
रेखिक पापक के विभिन्न प्रकारों के बारे में संक्षेप में लिखिए |
उत्तर :
रैखिक मापनी के प्रकार (Kinds of Graphical Scale)
(i) सरल पापनी (Plain Scale) : सरल मापनी के द्वारा किसी रैखिक माप- प्रणाली के अधिक से अधिक दो मात्रकों में धरातल की दूरियाँ प्रदर्शित की जाती हैं, जैसे- गज व फीट, मील व फर्लांग, किलोमीटर व हेक्टोमीटर आदि ।

(ii) तुलनात्मक मापनी (Comparative Scale) : इस मापनी के द्वारा एक से अधिक माप प्रणालियों में दूरियाँ एक साथ प्रदर्शित की जाती है। जैसे- गज व मीटर, मील व किलोमीटर आदि ।

(iii) विकर्ण मापनी (Diagonal Scale) : इस मापनी में विकर्णों की सहायता से गौण भागों को पुनः और छोटे भागों में विभाजित कर दिया जाता है। इस मापनी में एक ही इकाई के तीन मात्रकों को प्रदर्शित किया जा सकता है। जैसे मील- फर्लांग-गज या किलोमीटर हेक्टोमीटर डेकामीटर आदि । इस मापनी में एक इंच या एक सेंटीमीटर के 100 वें भाग को दिखलाया जा सकता है, जो कि सरल मापनी द्वारा संभव नहीं है।

(iv) वर्नियर मापनी (Vernier Scale) : वर्नियर मापनी में दो मापनियाँ होती हैं। बड़ी मापनी को मुख्य या प्राथमिक मापनी तथा छोटी मापनी को वर्नियर मापनी कहते हैं। आकृति के विचार से वर्नियर मापनी दो प्रकार की होती है, सीधे किनारे वाली मापनी तथा वक्र किनारे वाली मापनी किसी सरल रेखा में स्थित दो बिन्दुओं के बीच की दूरी पढ़ने के लिए सीधे किनारे वाली वर्नियर मापनी बनायी जाती है जबकि वक्र किनारे वाली वर्नियर मापनी की सहायता से सेक्सेटैंट तथा थियोडोलाइट आदि सर्वेक्षण यंत्रों के द्वारा धरातल पर स्थानों के बीच के कोणों के अंश, मिनट और सेकेण्ड में मान ज्ञात किये जाते हैं। वर्नियर मापनी का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसके द्वारा प्राथमिक या मुख्य मापनी के सबसे छोटे भाग के चित्रात्मक भागों को विकर्ण मापनी की तुलना में अधिक शुद्धता से मापा या पढ़ा जा सकता हैं।

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(v) वर्गमूल मापनी (Square Root Scale) : कभी-कभी विभिन्न प्रदेशों के क्षेत्रफल अथवा विभिन्न भागों में निवास करने वाली जनसंख्या आदि के तुलनात्मक महत्व को स्पष्ट करने के लिए वृत्त रेखाओं का प्रयोग किया जाता है। इन रेखाओं में वृत्त का आकार या क्षेत्रफल किसी संख्या की मात्रा बतलाता हैं। अतः भिन्न-भिन्न संख्याओं को प्रदर्शित करने के लिए भिन्न-भिन्न आकार वाले वृत्तों की रचना की जाती है।

(vi) घनमूल मापनी (Cube Root Scale) : रचना के दृष्टिकोण से घनमूल मापनी बहुत कुछ वर्गमूल मापनी के समान होती है। अंतर बस इतना है कि वर्गमूल मापनी के द्वारा वृत्तों के अर्द्धव्यास ज्ञात किये जाते हैं जबकि घनमूल मापनी की सहायता से गोलों के अर्द्धव्यास ज्ञात होते हैं। वृजा रेखों में वृत्त के क्षेत्रफल द्वारा कोई संख्या प्रदर्शित की जाती हैं जबकि गोलाकार आरेखा के गोलों के आयतन से किसी संख्या का बोध कराया जाता है।

(vii) ढाल की मापनी (Scale of Slope) : ढाल की मापनी के द्वारा किसी दिये गये समुच्य रेखी मानचित्र में क्षैतिज तुल्यांक तथा ढाल की मात्रा या प्रवणता का अंतसंबंध प्रदर्शित किया जाता है जिससे मानचित्र में किन्हीं दो उत्तरोत्तर समुच्य रेखाओं के मध्य ढाल की मात्रा को मापनी में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 4.
मापनी के आधार पर मानचित्र कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर :
मापनी के अनुसार मानचित्र निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं :-
1. भूसम्पत्ति मानचित्र ( Cadastral Maps ) : “कैडस्ट्रल” शब्द फ्रांसीसी भाषा के ‘कैडस्टर’ (Cadastre) शब्द से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ ‘सम्पत्ति रजिस्टर’ होता है। यह बड़े मापनी पर बनाये जाते हैं। इसके अन्तर्गत नगरों के प्लान जिसमें मार्ग एवं नागरिकों के भवनों की सीमाएँ वर्णित अथवा किसी ग्राम का मानचित्र, जिसमें खेतों की सीमाएँ मार्ग, जलाशय, कुएँ, सार्वजनिक स्थान इत्यादि को प्रदर्शित किया जाता है, उसे भूसम्पत्ति मानचित्र कहते हैं। भारत देश में ग्रामों के मानचित्र 16 = 1 मील के मापनी पर बने होते हैं। इसका मुख्य उपयोग भूमि एवं भवन कर वसूलने, नगर योजना तथा ग्रामीण भूमि उपयोग योजना के सन्दर्भ में होता है।

2. स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Maps ) :- वह मानचित्र जिसमें अंकित प्रत्येक स्थल की आकृति एवं स्थिति को देखकर उसे धरातल पर पहचाना जा सके उसे स्थलाकृतिक मानचित्र कहते हैं। यह मानचित्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है जो मुख्यत: 1″ = 1 मील के पैमाने पर बने होते हैं।

3. दीवाल मानचित्र ( Wall maps ) :- दीवाल मानचित्र सामान्यतः सुस्पष्ट बनाये जाते हैं ताकि वर्ग या कक्षा में इसका प्रयोग किया जा सके। यह सम्पूर्ण विश्व या उसके अंश को दर्शाता है। इसके द्वारा किसी विशेष क्षेत्र में भू-प्रकृति,जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, खनिज, मिट्टी, कृषि, उद्योग, जनसंख्या इत्यादिको दर्शाया जाता है। इसका निर्माण आवश्यकतानुसार भिन्न-भिन्न मापनी पर किया जाता है। वैसे इसका मापनी स्थलाकृतिक मानचित्र से छोटा लेकिन एटलस मानचित्र से बड़ा होता है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के द्वारा यह मानचित्र 1:15,000,000 से 1:2,500,000 के मापनी पर बने होते हैं।

4. एटलस मानचित्र (Atlas maps ) :- एटलस मानचित्र लघुमापनी पर बने होते हैं। इस मानचित्र में सम्पूर्ण विश्व के महाद्वीपों, देशों या प्रदेशों के केवल मुख्य-मुख्य भौगोलिक तथ्यों को दर्शाया जाता है। इस प्रकार के मानचित्र मुख्यतः 1:2,000,000 से छोटी मापनी पर बनाये जाते हैं।

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प्रश्न 5.
उद्देश्य के आधार पर मानचित्रों का वर्णन कीजिये ।
उत्तर :
प्रत्येक मानचित्र बनाने का कोई उद्देश्य होता है, जिसे मानचित्र में प्रदर्शित किये गये तथ्यों की देखकर भली-भाँति समझा जा सके। वस्तुत: पृथ्वी का प्रतिरूप प्राकृतिक एवं मानवीय बल के द्वारा निर्धारित होता है। अतः इसी से संबंधित विवरण को मानचित्र में प्रस्तुत किया जाता हैं। उद्देश्य के आधार पर मानचित्र निम्न प्रकार के होते हैं :-

(a) भौतिक मानचित्र (Physical Maps ) :- वह मानचित्र जो प्राकृतिक वातावरण के तत्वों का विवरण प्रदर्शित करता है उसे भौतिक मानचित्र कहा जाता हैं, जैसे- खगोलिय मानचित्र, समदिक्याती मानचित्र, भूकम्पीय मानचित्र, भू- वैज्ञानिक मानचित्र, उच्चावच मानचित्र, जलवायु एवं मौसम मानचित्र, मृदा मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, अपवाह मानचित्र, महासागरीय मानचित्र इत्यादि ।

(b) जनसंख्या एवं बस्ती मानचित्र (Population and Settelment Maps ) :- वह मानचित्र जिसके द्वारा जनसंख्या का वितरण, घनत्व, लिंगानुपात, व्यवसायिक संरचना इत्यादि प्रदर्शित किया जाता है उसे जनसंख्या मानचित्र कहते हैं। जबकि वह मानचित्र जो किसी नगर या ग्रामों की बनावट या विन्यास तथा परिवहन मार्गों के जल को प्रकट करता है उसे बस्ती मानचित्र कहते हैं ।

(c) सामाजिक-सांस्कृतिक मानचित्र (Sociao Cultural Maps ) :- वह मानसित्र जो धर्म, जाति, शिक्षा, भाषा इत्यादि को प्रकट करता है उसे सामाजिक मानचित्र कहा जाता है।

(d) राजनीतिक मानचित्र (Political Maps) :- जब किसी मानचित्र के द्वारा राष्ट्रीय या अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं, राजधानियों एवं प्रशासनिक केन्द्रों का प्रदर्शन किया जाता है तो उसे राजनीतिक मानचित्र कहा जाता है।

(e) ऐतिहासिक मानचित्र (Historical Maps) :- वह मानचित्र जो प्राचीन समय के राजाओं-महाराजाओं के अधिकार क्षेत्र, दुर्गों, आक्रमण मार्ग एवं प्रमुख नगरों को दर्शाता है, उसे ऐतिहासिक मानचित्र कहते हैं।

(f) सैनिक मानचित्र (Military Maps) :- वह मानचित्र जो सैनिकों के उपयोग हेतु बनाए जाते हैं। जैसे:- सामान्य मानचित्र, राजनीतिक मानचित्र, सामरिक मानचित्र, फोटो मैप इत्यादि ।

(g) आर्थिक मानचित्र (Economic Maps) :- वे मानचित्र जो आर्थिक क्रियाकलापों से सबंधित मानचित्रों को दर्शाता है उसे आर्थिक मानचित्र कहा जाता है, जैसे: परिवहन मानचित्र, भूमि उपयोग मानचित्र, कृषि मानचित्र, खनिज मानचित्र, औद्योगिक मानचित्र इत्यादि

प्रश्न 6.
मानचित्र की परिभाषा देते हुए उसके उपयोग को दर्शाएं।
उत्तर :
मानचित्र विषयवस्तु को ध्यान में रखते हुए नियोजित किया जाता है। मानचित्र की परिभाषा अनेक विद्वानों द्वारा दी गई है :-
फिन्च एवं ट्रिवार्था – “मानचित्र धरातल के आलेखी निरूपण होते हैं।” (Map are graphic representation of the Surface of the Earth’ – Finch and Trewartha) एफ. जे. मॉकहाऊंस – “निश्चित मापनी के अनुसार धरातल के किसी भाग के लक्षणों के समतल सतह पर निरूपण को मानचित्र की संज्ञा दी जाती है।” (Map is a representation on a plane surface of the Features of part of the Earth’s Surface of drawn to some specific Scale – F.J. Mankhouse) ।

अन्ततः उपरोक्त सभी परिभाषाओं का अध्ययन करते हुए आरपी मिश्रा एवं रमेश महोदय ने मानचित्र को निम्न रूपों से परिभाषित किया है. समस्त पृथ्वी या उसके किसी भाग, आकाश या किसी अन्य आकाशीय पिण्ड के दृश्य एवं विचारे गये अवस्थितिक तथा वितरणात्मक प्रतिरूपों का मापनी के अनुसार प्रतीकात्मक आरेखन मानचित्र कहलाता है।”

WBBSE Class 9 Geography Solutions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

मानचित्र का उपयोग :- मानचित्र भौगोलिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण उपकरण है। वर्तमान युग में मानचित्रों का उपयोग काफी बढ़ गया है। वास्तव में मानचित्र ही भूगोल की कुँजी है। यह भूगोल के विद्यार्थियों के लिए एक संकेत लिपि (Shorthand) का कार्य करता है। मानचित्रों का उपयोग निम्न रूपों में किया जाता है।

  • भूगोल :- प्रयोगात्मक भूगोल के लिए मानचित्र आवश्यक है। इसके बिना भूगोल का विद्यार्थी एक ऐसे योद्धा के समान है जिसके पास हथियार न हो।
  • युद्धो में :- मानचित्र का उपयोग युद्धों में किया जाता है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय कई करोड़ मानचित्र तैयार किये गये थे । हिलटर के शब्दो में “Give me a detailed map of a country and I shall conquer it.”
  • यात्रियों के लिए :- मानचित्र यात्रियों व पर्यटकों के लिए मार्गदर्शन हेतु उपयोगी होता है।
  • प्रबन्धक के लिए :- मानचित्रों द्वारा ही भिन्न-भिन्न प्रान्तों का राज्य प्रबन्ध चलाया जाता है।
  • यातायात के साधनों के लिए :- रेल, सड़क, समुद्री और हवाई मार्गों की जानकारी के लिए मानचित्र काफी उपयोगी होता है !
  • मानचित्र :- विद्यार्थियों, अध्यापकों, उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों, इंजीनियरों के लिए उपयोगी होता है।

प्रश्न 7.
मापनी की परिभाषा देते हुए उसके महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मापनी (Scale) :- किसी मानचित्र में दो स्थानों के बीच की दूरी और जमीन पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की असली दूरी के अनुपात को मापनी कहते हैं। इसको हम इस प्रकार भी समक्ष सकते हैं। यदि किसी धरातल की एक कि०मी० की दूरी को मानचित्र पर से० मी० की दूरी के द्वारा दिखाया गया है तो इसका तात्पर्य है, मानचित्र पर दो बिन्दुओं के बीच से० मी० की दूरी, धरातल पर उन्हीं दो बिन्दुओं के बीच 1km के बराबर होगी।

परिभाषा :-
(i) ए० एन० स्ट्रालर के अनुसार – “मापक, धरातल की वास्तविक दूरी तथा मानचित्र पर प्रदर्शित दूरी के पारस्परिक अनुपात को कहते हैं।’
(ii) आर० एल० सिंह के अनुसार, “धरातल की वास्तविक दूरी तथा मानचित्र पर प्रदर्शित दूरी के सम्बन्ध को मापक कहते हैं । ”
मापक का महत्व (Importance of Scale) : मापक की सहायता से हम एक विशाल धरातल को भी सुविधाजनक छोटे धरातल पर प्रदर्शित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मानचित्र ऐसा होना चाहिए कि इसे हाथ में लिया जा सके और आसानी से उसका अध्ययन किया जा सके। मानचित्र का आकार मानचित्र में प्रयुक्त मापक पर निर्भर करता है । मापक की सहायता से हम उपलब्ध सीमित स्थान में भी मानचित्र को आवश्यकतानुसार बना सकते हैं।

प्रश्न 8.
मापक को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मानचित्र पर मापनी प्रदर्शित करने की तीन विधियां होती हैं।

  • साधारण कथन विधि (Simple Statement Method)
  • निरूपक भिन्न विधि (Representative fraction or. R.F. Method)
  • आलेखी विधि (Graphical Method).

साधारण कथन विधि (Simple Statement Method) :- वह विधि जिसमें कथनों द्वारा मापनी व्यक्त की जाती है उसे साधारण कथन विधि कहते हैं। जैसे :- 1 से०मी० = 1 कि०मी० अथवा 1 ईंच = 1 मील इत्यादि । इस मापनी का उपयोग भारतवर्ष में ग्रामों की भू-सम्पत्ति मानचित्रों तथा व्यक्तिगत भवनों आदि के प्लानों को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। वैसे इस विधि का सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता है क्योंकि प्रत्येक देश की माप इकाई भिन्न-भिन्न ‘होती है। साथ ही उसके संदर्भ में जानकारी रखना आवश्यक हो जाता है। अतः कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि यह उपर्युक्त विधि नहीं है।

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निरूपक भिन्न विधि (Representative Fraction or R.T. Method) :- प्रतिनिधि भिन्न या निरूपक भिन्न धरातल पर के दो स्थानों की वास्तविक दूरी तथा मानचित्र पर के दो स्थानों के दूरी का अनुपात होता है। इसमें अंश का मान सदैव एक होता है। जबकि हर धरातल पर उसी माप प्रणाली की इकाई दूरी होती है। इसे प्रस्तुत करने के लिए निम्न सूत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।
प्रतिनिधि भिन्न = मानचित्र में किसी रैखिक माप की इकाई दूरी/उस रैखिक माप की उन्हीं इकाइयों में धरातल पर मापी गई दूरी

आलेखी विधि (Graphical Method) :- इस विधि में निरूपक भिन्न या प्रतिनिधि भिन्न के अनुसार प्राप्त लम्बाई के बराबर मानचित्र पर एक रेखा खींच कर उसे प्राथमिक एवं गौण भागों में विभाजित कर देते हैं तथा इन उपविभागों पर उनके द्वारा प्रदर्शित वास्तविक दूरियों के मान लिख दिए जाते हैं।

प्रश्न 9.
विभिन्न प्रकार की मापनी का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सामान्यत: मापनियों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है :
(i) बड़ी मापनी तथा छोटी मापनी (Large Scale and Small Scale)
(ii) प्लेन मापनी (Plain Scale)
(iii) तुलनात्मक मापनी (Comparative Scale)
(iv) विकर्ण मापनी (Diagonal Scale)

(i) बड़ी मापनी तथा छोटी मापनी (Large Scale and Small Scale) : – सामान्यत: मापनी बड़ी तथा छोटी दो प्रकार की होती है। यह जानने के लिए कि मापनी बड़ी है या छोटी, हमें मानचित्र पर दूरी तथा धरातल पर दूरी के अनुपात का निरीक्षण करके निरूपक भिन्न ज्ञात करनी चाहिए। बड़े निरूपक भिन्नता वाली मापनी को बड़ी मापनी तथा छोटे निरूपक भिन्न वाली मापनी को छोटी मापनी कहते हैं । निम्नलिखित उदाहरण से इसे स्पष्ट करेंगे ।

  • बड़ी मापनी (Large Scale) : – बड़ी मापनी वाले मानचित्र में कई से०मी० अथवा इंच एक कि०मी० अथवा एक मील को दर्शाते हैं।
  • छोटी मापनी (Small Scale) :- छोटी मापनी में एक से०मी० अथवा एक इंच क्रमश: कई कि०मी० अथवा मीलों को दर्शाता है ।

(ii) प्लेन मापनी (Plain Scale ) :- यह एक सरल रेखा होती है, जिसकी लम्बाई दी गई मापनी के अनुसार निश्चित की जाती है। इस रेखा को सुविधा के अनुसार कुछ भागों में बाँटा जाता है। इन्हें प्राथमिक भाग (Primary Division) कहते हैं और ये निश्चित दूरी दर्शाते हैं। कम दूरियाँ पढ़ने के लिए बाईं ओर से पहले प्राथमिक भाग को गौण भागों में (Secondary Divisions) बाँटा जाता है। इसकी रचना तथा प्रयोग बहुत सरल है। इसलिए इसे सरल मापनी (Simple Scale) भी कहा जाता है।

(iii) तुलनात्मक मापनी (Comparative Scale) :- तुलनात्मक मापनी वह मापनी है जिसमें दो या दो से अधिक इकाइयों में दूरियाँ मापने की सुविधा होती है।जैसे :- मील एवं किलो मीटर, गज एवं मीटर आदि । कई बार तय की गई दूरी तथा उसमें लगने वाले समय को भी तुलनात्मक मापनी द्वारा दर्शाया जाता है।

(iv) विकर्ण मापनी (Diagonal Scale) :- जिस मापक में विकर्ण की सहायता से गौण भागों को और भी छोटे भागों में बाँटा जाता है उसे विकर्ण मापक कहते हैं। सरल मापक द्वारा दो ही इकाइयों जैसे, मील- फर्लांग अथवा किलोमीटर- हेक्टोमीटर आदि में दूरियाँ पढ़ी जाती हैं जबकि विकर्ण मापक के द्वारा तीन इकाईयों में जैसे- मील- फर्लांग- गज अथवा किलोमीटर- हेक्टोमीटर – डेसीमीटर में दूरियाँ पढ़ी जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त विकर्ण मापक में 1 इंच अथवा 1 सेंटीमीटर का 100 वाँ भाग दिखलाया जा सकता है, जो साधारण रैखिक मापक द्वारा संभव नहीं है।

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प्रश्न 10.
प्रदर्शक भिन्न या निरूपक भिन्न से क्या लाभ है?
उत्तर :
प्रदर्शक या निरूपक भिन्न से लाभ :- इस विधि में किसी मापन प्रणाली का प्रयोग नहीं होता, इसलिए इसका प्रयोग किसी भी देश में किया जा सकता है। इंच (ब्रिटिश), वर्स्ट (रूस), सेण्टीमीटर (फ्रांस), चांग (चीन) आदि माप की इकाइयों का ज्ञान न होने पर भी इन देशों में यह विधि प्रयोग की जा सकती है। यदि हम यह कहें कि किसी मानचित्र की प्रदर्शक भिन्न 1:1,00,000 है तो ब्रिटेन का साधारण व्यक्ति यह समझेगा कि मानचित्र का 1 इंच धरातल के 1,00,000 इंच को प्रदर्शित करता है।

इसी प्रकार को फ्रांस में 1 से० मी० 1,00,000 से० मी०, चीन में 1 चांग को 1,00,000 चांग और रूस में 1 वर्स्ट को 1,00,000 वर्स्ट प्रदर्शित करता है। इसलिए इसे अन्तर्राष्ट्रीय मापक International Scale या प्राकृतिक मापक (Natural Scale) भी कहते हैं। मानचित्र के मापक प्रदर्शित करने की यह विधि बहुत ही लोकप्रिय हो गई है और इसका बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
प्रदर्शक भिन्न के गुणों और अवगुणों का वर्णन करो।
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न के गुण :-

  • प्रदर्शक भिन्न के मापक से बने मानचित्र की किसी भी इकाई के माध्यम से गणना की जा सकती है
  • प्रदर्शक भिन्न मापक को आसानी से कथनात्मक मापक रेखीय मापक में परिवर्तित किया जा सकता है।
  • प्रदर्शक मापक मानचित्र की गणना में कोई असुविधा नहीं होती है।

प्रदर्शक भिन्न के दोष :-

  • R. F. की गणना के लिए गणित का ज्ञान होना आवश्यक है।
  • मानचित्र को बड़ा या छोटा करने पर मापक की यथार्थता समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 12.
रेखात्मक मापनी की क्या विशेषता है?
उत्तर :
रेखात्मक या रैखिक व रचनात्मक मापनी की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं :-

  • इस विधि में मापन पूरी एक रेखा के सहारे प्रदर्शित की जाती है।
  • इस मापक से सुविधा ये है कि मानचित्र के दो बिन्दुओं के बीच की दूरी से उसके सदृश्य ही पृथ्वी पर दो बिन्दुओं की दूरी को शुद्ध रूप में मापा जा सकता है।
  • यदि मूल चित्र छोटा या बड़ा किया जाता है तो रैखिक मापक भी अनुपात में छोटा या बड़ा हो जाता है।
  • सभी मानचित्रों के लिए रैखिक या रचनात्मक मापक सुविधाजनक है।

प्रश्न 13.
प्रदर्शक भिन्न की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
प्रदर्शक भिन्न अथवा प्रतिनिधि भिन्न द्वारा जैसे यह 1: 50,000 जिसका अर्थ मानचित्र की एक इकाई दूरी धरातल के 50,000 इकाई दूरी को दर्शाता है, एक प्रदर्शक भिन्न विश्व के किसी भी देश द्वारा समान रूप से प्रयुक्त होने का गुण रखती है। भिन्न-भिन्न देशों में जहाँ माप की भिन्न-भिन्न इकाइयाँ प्रचलित हैं, वहाँ प्रदर्शक भिन्न के मापक के प्रयोग में कोई असुविधा नहीं होती, अधिकांश मानचित्र प्रदर्शक भिन्न वाले मापक में ही दिखाए जाते हैं किन्तु इसके साथ ही उस देश में प्रयोग में आनेवाली अन्य मापों की इकाई भी रचनात्मक मापक में दे दिया जाता है।

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प्रश्न 14.
मानचित्रों को मापक के आधार पर कितने भागों में बांटा गया है? वर्णन करें।
उत्तर :
मानचित्रों को मापक के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है :
(i) दीर्घ मापक मानचित्र (Large Scale Maps ) :- इन मानचित्रों का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जाता है। इन मानचित्रों द्वारा विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाता है। इनमें प्राय: स्केल 1cm = 1km की दूरी पर दिखाया जाता है। स्थलाकृति मानचित्र (Topographical Map) को भी दीर्घमापक मानचित्र की श्रेणी में रखा जाता है।

(ii) लघु मापक मानचित्र (Small Scale Maps ) :- इनका निर्माण छोटे मापकों पर किया जाता है। ये मानचित्र विशाल क्षेत्र का विवरण सीमित करके दिखाने में समर्थ होते हैं। इनमें प्राय: स्केल 1cm = 1000km की दूरी पर दिखाया जाता है। एटलस एवं दीवार मानचित्र इसी प्रकार के मानचित्र हैं।

प्रश्न 15.
रेखीय दूरी को मापने की विधियों का वर्णन करें।
उत्तर :
रेखीय दूरी को मापने की विधियाँ रेखीय दूरी को दो प्रकार से मापा जाता है ।

  • सरल या सीधे रेखा की दूरी मापना।
  • तिरछी रेखा की लम्बाई मापना।

सीधी रेखा की दूरी मापना :- सीधी रेखाएं, सड़क, रेलवे ट्रैक, नहरों द्वारा दर्शायी जाती है। मापक को पढ़कर, नक्शे की दूरी को धरातल पर दर्शाया जाता है और रेल मार्ग या नहर की लम्बाई ज्ञात कर ली जाती है।

बक्र रेखा की लम्बाई मापना :- नदियों, समुद्रों, झीलों, तालाबों आदि को बक्र रेखा द्वारा दर्शाया जाता है। इसको मापने के लिये धागे का प्रयोग किया जाता है। धागे द्वारा मैप की लम्बाई मापकर पुन: इसे स्केल पर पढ़ा जाता है और नदियों की तट रेखाओं, झीलों, तलाबों एवं समुद्री भाग की लम्बाई तय की जाती है।

प्रश्न 16.
मापक से क्या लाभ है?
उत्तर :
मापक या मापनी से निम्नलिखित लाभ है :-

  • मापनी के द्वारा समस्त पृथ्वी अथवा उसके किसी भाग को छोटे आकार में दिखलाया जा सकता है।
  • मापनी का इस्तेमाल कर हम मानचित्र के दो स्थानों की दूरियों के आधार पर धरातल के वास्तविक दूरी की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • मापनी का प्रयोग करके मानचित्र पर प्रदर्शित क्षेत्रों की वास्तविक लम्बाई, चौड़ाई एवं क्षेत्रफल की सही-सही गणना की जा सकती है।
  • बिना मापनी के मानचित्र एक पूर्णमान चित्र नहीं होता बल्कि वह रेखाचित्रं (Sketch Map) हो जाता है।
  • वृहद् क्षेत्रों को दिखलाने के लिए लघु मापनी का इस्तेमाल करते हैं लेकिन छोटे स्थानों को प्रदर्शित करने के लिए बड़े मापनी का इस्तेमाल किया जाता है।

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प्रश्न 17.
मापक का मानचित्र में क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
(1) मापक का मानचित्र में महत्वपूर्ण उपयोग है। यह धरातल पर किन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी तथा मानचित्र पर उन्हीं दोनों स्थानों की दूरी के आधार पर सही बोध कराता है।
(2) मापनी की सहायता से समतल पर समस्त पृथ्वी या पृथ्वी के किसी भी अंश का सूक्ष्मता से अध्ययन किया जा सकता हैं।
(3) मापक मानचित्र और प्रदर्शित क्षेत्रफल का अनुपात नहीं है, मापक केवल दो दूरियों के अनुपात को प्रदर्शित करता है to क्षेत्रफल के अनुपात से मिला है।
(4) मानचित्र – धरातलीय भू-भाग से बहुत छोटा होता है, जिसका वह चित्रण करता है। अतः प्रत्येक मानचित्र एक मापक पर बनाया जाता है, जो मानचित्र के दो बिन्दुओं तथा पृथ्वी पर उसकी वास्तविक दूरी के अनुपात का निर्धारण करता है।
(5) यदि प्रदर्शक भिन्न का हर 63360 से बड़ी संख्या है तो प्रदर्शक भिन्न लघु मापक होगी। लघु मापक धरातल के विस्तृत भू-भाग को मानचित्र पर दर्शाता है। इसे मील या कि० मी० इकाई से मापते हैं।
(6) यदि प्रदर्शक भिन्न का हर 63360 से छोटी संख्या है तो प्रदर्शक भिन्न वृहद् मापक होगा। जब इसे रेखात्मक रूप में दिखाए जाते हैं, फर्लांग, गज या फुट में दिखाए जाते हैं।

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

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मानचित्र एवं मापक Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
मापक की विशेषता है।
(a) शुद्ध मानचित्र की रचना
(b) दूरी मापना
(c) दूरी दशांना
(d) दूरी निक्कानना
उत्तर :
(b) दूरी मापना

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प्रश्न 2.
प्रदर्शक भिन्न क्या है?
(a) नक्शे पर व्यक्त दूरी
(b) जमीन पर व्यक्त दूरी
(c) नवशे और जमीन की दूरी का अनुपात
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) नक्शे और जमीन की दूरी का अनुपात

प्रश्न 3.
प्रदर्शन भिन्न किस इकाई में लिखी जाती है?
(a) मीटर
(b) सेण्टीमीटर
(c) किमी०
(d) इन्में से क्रोई नहीं
उत्तर :
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 4.
ग्लोब क्या है :
(a) पृथ्वी का स्वरूप
(b) पर्वतों का नाम
(c) एक प्रकार का खनिज
(d) बच्च्यां का सिलौना
उत्तर :
(a) पृथ्वी का स्वरूप

प्रश्न 5.
बड़ी मापनी के मानचित्रों का एक उदाहरण है :
(a) एटलस
(b) दीवार मानचित्र
(c) स्थलाकृति मार्नचित्र
(d) मौज मार्नांबत्र
उत्तर :
(c) स्थलाकृति मानचित्र

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प्रश्न 6.
छोटी मापनी के मानचित्रों का एक उदाहरण दीजिए :
(a) कैडेस्ट्रल मानचित्र
(b) स्थलाकति मानचित्र
(c) एटलस
(d) इनम से छोई नहीं
उत्तर :
(c) एटलस

प्रश्न 7.
1 मील में कितना km होता है?
(a) 1.5 km
(b) 1.2 km
(c) 1.75 km
(d) 1.60 km
उत्तर :
(d) 1.609 km

प्रश्न 8.
1 km में कितना cm होता है?
(a) 10,00,000 cm
(b) 15,00,000 cm
(c) 13,00,000 cm
(d) 1,00,000 cm
उत्तर :
(d) 1,00,000 cm

प्रश्न 9.
1 मील में कितने इंच होते हैं
(a) 63,00 इंच
(b) 63,360 इंच
(c) 64,000 इंच
(d) 63,300 इच
उत्तर :
(b) 63,360 इंच

प्रश्न 10.
1 मील में कितने फर्लाग होते हैं?
(a) 8 फलांग
(b) 6 फर्लाग
(c) 7 फर्लाग
(d) 9 फलोग
उत्तर :
(b) 6 फर्लांग

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प्रश्न 11.
मैप (Map) शब्द मैप्पा (Mapp(a) शब्द से लिया गया है। यह शब्द किस भाषा का शब्द है?
(a) अंगेजी
(b) फ्रेंच
(c) ग्रीक
(d) लैटिन
उत्तर :
(b) फ्रेंच

प्रश्न 12.
कैस्ट्रल का अर्थ सम्पत्ति रजिस्टर होता है। यह किस भाषा का शब्द है ?
(a) अंग्रेजी
(b) फ्रेंच
(c) मीक
(d) लौटन
उत्तर :
(b) फ्रेंच

प्रश्न 13.
बहत् मापनी पर बना वह मानचित्र जिसमें अंकित प्रत्येक स्थल की प्रत्येक आकृति को पहचाना जा सके उसे कहते हैं :
(a) भू-संपत्ति मानचित्र
(b) स्थलाकृति मानचित्र
(c) दीवाल मानचित्र
(d) एटलस मानचित्र
उत्तर :
(b) स्थलाकृति मानचित्र

प्रश्न 14.
भौतिक मानचित्र में निम्नलिखित में किसका चित्रण नहीं होता है?
(a) खगोलीय मानचित्र
(b) भूकपी मानचित्र
(c) जनसंख्या मानचित्र
(d) मृदा मानचित्र
उत्तर :
(c) जनसंख्या मानचित्र

प्रश्न 15.
मानचित्र किस विषय के अध्ययन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है?
(a) राजनीति शाख़
(b) अर्थ शाख
(c) भूगोल
(d) भौतिक विज्ञान
उत्तर :
(c) भूगोल

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प्रश्न 16.
वर्षा, तापमान, वायु-दबाव आदि को प्रदर्शित करने वाला मानचित्र है :-
(a) वितरण मानवित्र
(b) राजनैतिक मानचित्र
(c) प्राकृतिक मानचित्र
(d) धरातलीय मानचित्र
उत्तर :
(a) वितरण मानचित्र

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में कौन सा मानचित्र के लिए अनिवार्य नहीं है?
(a) मानचित्र व्यापीकरण
(b) मानचित्र प्रक्षेप
(c) मानचित्रों का इतिहास
(d) मानचित्र अभिकल्पना
उत्तर :
(c) मानचित्रों का इतिहास

प्रश्न 18.
किसी भी एटलस की भूगार्भिक संरचना को सूचित करने वाले मानचित्र हैं :-
(a) भू-आकृति मारचित्र
(b) घू-वैज्ञानिक मानवित्र
(c) स्थालाकृतिक मानचित्र
(d) राजनीतिक मानचित्र
उत्तर :
(b) भू-वैज्ञानिक मानचित्र

प्रश्न 19.
मारचित्रों में निम्नलिखित में कौन अनिवार्य है ?
(a) मानचित्र मापनी
(b) मानचित्र रूढ़ी
(c) प्रतीक
(d) उत्तर दिशा
उत्तर :
(a) मानचित्र मापनी

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में किस मानचित्र के मापक बड़े होते हैं ?
(a) प्राकृतिक मानचित्र
(b) मौजा या नगर मानचित्र
(c) वितरण मानचित्र
(d) राजनेतिक मानचित्र
उत्तर :
(b) मौजा या नगर मानचित्र

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प्रश्न 21.
स्थानिक भौगोलिक आकारों को बहुरंगी समुच्च रेखाओं में प्रंस्तुत करने वाले मानचित्र हैं।
(a) पैमानिक चाट्स
(b) सामुद्रिक चार्स
(c) भू-वैज्ञानिक मानचित्र
(d) भू-कर मानचित्र
उत्तर :
(a) पैमानिक चार्स्स

प्रश्न 22.
एक मानचित्र जिसका मापक से०मी० =100 या 200 मीटर होता है कहा जाता है।
(a) सामुद्रिक चाद्स
(b) मौजा या नगर मानचित्र
(c) स्थलाकृति मानचित्र
(d) भू-वैज्ञानिक मानचित्र
उत्तर :
(c) स्थलाकृति मानचित्र

प्रश्न 23.
मानचित्र पर किन्हीं दो स्थानों के बीच की दूरी तथा धरातल पर उन्हीं दोनों स्थानों के बीच की दूरी के अनुपात को कहते हैं :-
(a) मानचित्र
(b) मापक
(c) प्रदर्शक भिन्न
(d) कथनात्मक मापक
उत्तर :
(b) मापक

प्रश्न 24.
मापक को प्रदर्शित करने की सबसे सरल विधि है :
(a) कथनात्मक मापक
(b) प्रदर्शक भिन्न
(c) विकर्ण मापनी
(d) वर्गमूल मापनी
उत्तर :
(a) कथनात्मक मापक

प्रश्न 25.
निम्नलिखित में से किस मापक में आवश्यकतानुसार मूल चित्र को छोटा या बड़ा किया जा सकता है?
(a) प्रदर्शक भिन्न
(b) रैखिक मापक
(c) कथनात्मक मापक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) रेखिक मापक

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प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से किस मापक को अन्तर्राष्ट्रीय मापक कहा जाता है?
(a) कथनात्मक मापक
(b) रैखिक मापक
(c) प्रदर्शक भिन्न
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) प्रदर्शक भिन्न

प्रश्न 27.
1 से॰ मी० =20 कि॰ मी॰ मापक है :
(a) कथनात्मक मापक
(b) प्रदर्शक भिन्न
(c) रैखिक मापक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) कथनात्मक मापक

प्रश्न 28.
मापक में अंश व्यक्त करता है :
(a) धरातल पर दूरी
(b) मानचित्र पर दूरी
(c) दोनों दूरियाँ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) मानचित्र पर दूरी

प्रश्न 29.
कथनात्मक मापक 1 से० मी० =2 कि॰मी० का प्रदर्शन भिन्न होगा :
(a) \(\frac{1}{2000}\)
(b) \(\frac{1}{20000}\)
(c) \(\frac{1}{200000}\)
(d) \(\frac{1}{2000000}\)
उत्तर :
(c) \(\frac{1}{200000}\)

प्रश्न 30.
मैप शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
(a) ज्ञान रिचर
(b) गैलिलियो
(c) सेन्ट रिक्वीयर
(d) सर जार्ज एवरेस्ट
उत्तर :
(d) सर जार्ज एवरेस्ट

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प्रश्न 31.
स्थलाकृतिक मानचित्र किस प्रकार के मानचित्र है?
(a) कोटी मापनी
(b) बड़ी मापनी
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों
(d) दोनों में से कोई नहीं
उत्तर :
(b) ब्रड़ी मापनी

प्रश्न 32.
भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना कब हुई?
(a) सन् 1867 ई०
(b) सन् 1967 ई०
(c) सन् 1845 ई०
(d) सन् 1767 ई०
उत्तर :
(d) सन् 1767 ई०

प्रश्न 33.
भारत के पहले surveyour General कौन थे?
(a) सर जार्ज एवरेस्ट
(b) मेजर जेम्स रेनेल
(c) मेजर बेटेन
(d) जान एडम
उत्तर :
(c) मेजर बेटेन

प्रश्न 34.
किस मानचित्र को भूकर मानचित्र कहते है?
(a) स्थाकृतिक
(b) एटलस
(c) दीवार
(d) मौचा
उत्तर :
(a) स्थाकृतिक

प्रश्न 35.
‘Give me a detallod Map of a country and I shall conqure it.’ किसने कहा था?
(a) नेपोलियन
(b) हिटलर
(c) मुसोलिन
(d) लार्ड डालहौजी
उत्तर :
(b) हिटलर

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 46.
मानचित्र पर किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच की दूरी तथा पृथ्वी पर इन्हीं दो बिन्दुओं के बीच की वास्तविक दूरी को क्या कहते हैं?
(a) मापक
(b) शीर्षक
(c) परम्परागत रुठ चिन्ह
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर :
(a) मापक

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. मानचित्र वास्तविक भू-भाग से बहुत _______ होता है।
उत्तर : छोटा।

2. लघुमापक मानचित्र बड़े क्षेत्रफल _______धरातल पर प्रस्तुत करते है।
उत्तर : की सीमित।

3. मौजा या नगर मानचित्र _______मापक मानचित्र है।
उत्तर : वृहद्।

4. _______ मानचित्र का प्रयोग भू-सम्पत्ति, खेतों, बागों तथा मकानों आदि की सीमाओं के लिए किया जाता है।
उत्तर : पू-आकार।

5. _______की सहायता से किसी देश या प्रदेश को एक छोटे से समतल कागज पर प्रदर्शित किया जा सकता है।
उत्तर : मापक।

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

6. अधिकांश मानचित्र _______वाले मापक में ही दिखाए जाते हैं।
उत्तर : प्रदर्शक भिन्न

7. विकर्ण मापनी में _______की सहायता से गौण भागों को पुन: और छोटे भागों में विभाज़ित कर दिया जाता है।
उत्तर : विकर्णे।

8. _______मानचित्र से क्षेत्रफल ज्ञात करने का एक यंत्र है।
उत्तर : प्लेनीमीटर।

9. पैमाना स्थल की वास्तविक दूरी और मानचित्र पर दिखाई गई दूरी के बीच का _______होता है
उत्तर : मापक।

10. मापक द्वारा _______का ज्ञान होता है।
उत्तर : स्थलाकृति।

11. _______ मापनी के मानचित्र पृथ्वी के छोटे क्षेत्र को बड़े आकार में प्रस्तुत करते है।
उत्तर : मोजा।

12. भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना सन् _______में हुई।
उत्तर : 1767 ई०

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

13. सर जार्ज एवरेस्ट अपने _______की अवधारणा के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : मैप (नक्सा)।

14. _______को भूआकार मानचित्र भी कहते है।
उत्तर : स्थलाकृति।

15. दीवारी मानचित्र _______मापक पर बनाये गये मानचित्र होते है।
उत्तर : छोटा ।

16. प्रतिनिधी भिन्न में अंश और हर एक ही _______में व्यक्त किये जाते हैं।
उत्तर : प्रतिनिधि भिन्न ।

17. _______मानचित्र क्षेत्रफल ज्ञात करने का एक यंत्र है।
उत्तर : प्लेनीमीटर

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

18. _______को वक्र रेखा के साथ चलाकर डायल पर उसकी सम्पूर्ण माप ली जाती है।
उत्तर : आंपिसमीटर

19. _______मापक धरातल के विस्तृत भूभाग के मानचित्र पर दर्शाता है।
उत्तर : लघु

20. _______मापनी में एक इंच या एक सेंटीमीटर के 100 वें भाग को दिखलाया जा सकता है।
उत्तर : विकर्ण

21. वास्तव में मानचित्र ही भूगोल की _______है।
उत्तर : कुंजी

22. मानचित्र भूगोल के विद्यार्थियों के लिए एक _______लिपि का कार्य करता है।
उत्तर : सकेत

23. प्रत्येक मानचित्र पर उसका _______अंकित होना चाहिए।
उत्तर : मापनी

24. प्रत्येक मानचित्र एक निश्चित पर _______बनाया जाता है।
उत्तर : मापक

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

25. _______के लिए मानचित्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपकरण है।
उत्तर : भूगोलवेताओं

26. वास्तव में _______ही हमारी योजनाएँ हैं।
उत्तर : मानचित्र

27. मानचित्र का आकार मानचित्र में प्रयुक्त _______पर निर्भर करता है।
उत्तर : मापक

28. मानचित्र के आकार को छोटा-बड़ा करने पर _______दोषपूर्ण हो जाता है।
उत्तर : कथनात्मक

29. R.F. की गणना के लिए _______का ज्ञान होना आवश्यक है।
उत्तर : गणित

30. _______मापक की सहायता से दूरियाँ आसानी से मापी जा सकती है।
उत्तर : रैखिक

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

31. _______ल्यूसिडा विधि प्रकाशीय नियमों पर आधारित है।
उत्तर : कैमरा

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. मापक दी प्रकार के होते हैं – लघुमापक और दीर्घमापक।
उत्तर : True

2. प्रदर्शक भिन्न मानचित्र और घरातल की दूरी का अनुपात है।
उत्तर : False

3. 1 कि॰ मी० की दूरी 10,00,000 से॰मी॰ के बराबर होती है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

4. 1 मील में 10 फर्लांग होता है।
उत्तर : False

5. 1 मील की दूरी 1760 गज के बराबर होतो है।
उत्तर : True

6. 1 मील में 63,360 इंच होते हैं।
उत्तर : True

7. मानचित्र किसी स्थान के कल्पित चित्र हैं।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

8. मानचित्र का उपयोग सामरिक दृष्टिकोण से किया जाता है।
उत्तर : False

9. मापक की इकाई को परिवर्तित नहीं किया सकता है।
उत्तर : False

10. वर्तमान समय में मापक की कोई उपयोगिता नहीं है।
उत्तर : False

11. भूगोल के अध्ययन के लिए मानचित्र एक अनिवार्य उपकरण है।
उत्तर : True

12. राजनैतिक मानचित्रों में जलप्रवाह को भी प्रदर्शित किया जाता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

13. सैनिक विशेषज्ञों द्वारा स्थलाकृतिक मानचित्रों का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर : True

14. मौजा या नगर मानचित्र लघुमापक मानचित्र है।
उत्तर : False

15. वृहत्मापक मानचित्र विवरणों को अधिक शुद्धता से प्रदर्शित करते हैं।
उत्तर : True

16. यदि मानचित्र को छोटा या बड़ा किया जाय तो कथनात्मक मापक दोषपूर्ण नहीं होगा।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

17. प्रदर्शक भिन्न मापक को आसानी से कथनात्मक मापक रेखीय मापक में परिवर्तित किया जा सकता है।
उत्तर : True

18. वर्नियर मापक द्वारा छोटे-छोटे मापों को पढ़ा जा सकता है।
उत्तर : True

19. मापक द्वारा दिशा का ज्ञान होता है।
उत्तर : False

20. धरातल पर उपस्थित विभिन्न स्वरूपों को प्रदर्शित करने के लिए परम्परागत रूढ़ चिन्हों का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर : True

21. मौजा मानचित्र छोटी मापनी के मान चित्र है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

22. स्थलाकृतिक मानचित्र बड़ो मापनी के मानचित्र है।
उत्तर : True

23. भारतीय सर्वेक्षण विभाग का मुख्यालन देहरादून में है।
उत्तर : True

24. स्थालाकृतिक मानचित्रों को भू-सम्पति या कैडस्ट्रल मानचित्र भी कहते है।
उत्तर : False

25. दीवारी मानचित्र छोटी मापनी के मार्नचित्र है।
उत्तर : True

26. कथनात्मक मापक में जब किसी मानचित्र को बोटा या बड़ा किया जाता है तो उसकी मापनी भी बदल जाती है।
उत्तर : True

27. लघु मापक धरातल के विस्तृत भू-भाग को मारचित्र पर दर्शाता है।
उत्तर : True

28. प्रदर्शक भिन्न मापक विधि में किसी माप्रक प्रणाली का प्रयोग नहीं किया जाता है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

29. R.F. की गणना के लिए गणित का ज्ञान होना आवश्यक नहीं है।
उत्तर : False

30. मानचित्रों का निर्माण लिखने की कला के बाद शुरू हुआ।
उत्तर : False

31. मानचित्र शासकों तथा यात्रियों के लिए सहयोगी एवं निर्देशक का कार्य करता है।
उत्तर : True

32. मानचित्र का अर्थ कपड़े की चादर अर्थात् रूमाल से है।
उत्तर : True

33. सर्वप्रथम मानचित्र का प्रयोग कपड़े पर ही किया जाता था।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सामाजिक-सांस्कृतिक मानचित्र (क) राजा महाराजाओं के अधिकृत क्षेत्र से सम्बन्धित होता है।
(ii) भौतिक मानचित्र सम्बन्धित होता है (ख) आर्थिक संपदा से सम्बन्धित होता है।
(iii) ऐतिहासिक मानचित्र (ग) धर्म, जाति, भाषा से सम्बन्धित होता है।
(iv) आर्थिक मानचित्र (घ) मौसम, जलवायु।

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सामाजिक-सांस्कृतिक मानचित्र (ग) धर्म, जाति, भाषा से सम्बन्धित होता है।
(ii) भौतिक मानचित्र सम्बन्धित होता है (घ) मौसम, जलवायु।
(iii) ऐतिहासिक मानचित्र (क) राजा महाराजाओं के अधिकृत क्षेत्र से सम्बन्धित होता है।
(iv) आर्थिक मानचित्र (ख) आर्थिक संपदा से सम्बन्धित होता है।

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 9 मानचित्र एवं मापक

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) भू-कर मानचित्र (क) सैनिक विशेषज्ञों द्वारा प्रयुक्त मानचित्र
(ii) स्थलाकृतिक मानचित्र (ख) लेखपालों द्वारा प्रयुक्त मानचित्र
(iii) ऑपपिसमीटर (ग) मानचित्र से क्षेत्रफल ज्ञात करने का यंत्र
(iv) प्लेनीमटर (घ) मानचित्र पर वक्र रेखाओं को मापने का यंत्र

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) भू-कर मानचित्र (ख) लेखपालों द्वारा प्रयुक्त मानचित्र
(ii) स्थलाकृतिक मानचित्र (क) सैनिक विशेषज्ञों द्वारा प्रयुक्त मानचित्र
(iii) ऑपपिसमीटर (घ) मानचित्र पर वक्र रेखाओं को मापने का यंत्र
(iv) प्लेनीमटर (ग) मानचित्र से क्षेत्रफल ज्ञात करने का यंत्र

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) स्थालाकृतिक मानचित्र (क) छोटी मापनी मानचित्र
(ii) रैखिक माप (ख) भूकर मानचित्र
(iii) एटलस मानचित्र (ग) ग्राफी मापक
(iv) मौजा मानचित्र (घ) बड़ी मापनी का मानचित्र

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) स्थालाकृतिक मानचित्र (ख) भूकर मानचित्र
(ii) रैखिक माप (ग) ग्राफी मापक
(iii) एटलस मानचित्र (घ) बड़ी मापनी का मानचित्र
(iv) मौजा मानचित्र (क) छोटी मापनी मानचित्र

 

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

Well structured WBBSE 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल can serve as a valuable review tool before exams.

पश्चिम बंगाल Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
वर्तमान समय में भारत में कुल कितने राज्य हैं?
(क) 28
(ख) 32
(ग) 29
(घ) 7
उत्तर :
(ग) 29

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 2.
देश के कुल क्षेत्रफल के कितने भाग में पश्चिम बंगाल राज्य का विस्तार है?
(क) 2 पतिशत भाग में
(ख) 2.7 प्रतिशत भाग में
(ग) 3 प्रतिशत भाग में
(घ) 5 प्रतिशत भाग में
उत्तर :
(ख) 2.7 प्रतिशत भाग में

प्रश्न 3.
पश्चिम बंगाल में महानगर हैं :-
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4
उत्तर :
(क) 1

प्रश्न 4.
पश्चिम बंगाल के दक्षिणी भाग से कौन-सी रेखा गुजरती है?
(क) क्रक्क रेखा
(ख) भूमध्य रेखा
(ग) मकर रेखा
(घ) विषुवत रेखा
उत्तर :
(क) कर्क रेखा

प्रश्न 5.
क्षेत्रफल के अनुसार पश्चिम बंगाल का भारत में स्थान है –
(a) पहला
(b) दूसरा
(c) चौदह़वा
(d) तैरवहा
उत्तर :
(d) तैरहवा

प्रश्न 6.
क्षेत्रफल की दृष्टि से पश्चिम बंगाल राज्य का भारत में स्थान है –
(क) चौथा
(ख) आठवाँ
(ग) बारहवाँ
(घ) चौदहवाँ
उत्तर :
(ग) बारहवाँ

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 7.
पश्चिम बंगाल में जनसंख्या का घनत्व है –
(क) 1029 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि० मी०
(ख) 904 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि० मी०
(ग) 1000 व्यक्तित प्रतिवर्ग कि० मी०
(घ) 800 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि० मी॰
उत्तर :
(क) 1029 व्यक्ति प्रतिवर्ग कि० मी॰

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में किस राज्य की सीमा पश्चिम बंगाल की सीमा के साथ जुड़ी हुई है?
(क) झारखण्ड
(ख) छत्तीसगढ़
(ग) त्रिपुरा
(घ) मध्य प्रदेश
उत्तर :
(क) झारखण्ड

प्रश्न 9.
पश्चिम बंगाल में पर्वतीय अंचल को दो भागों में विभाजित करती है :-
(क) तीरसा नदी
(ख) तिस्ता नदी
(ग) जलढाका
(घ) महानंदा नदी
उत्तर :
(ख) तिस्ता नदी

प्रश्न 10.
पश्चिम बंगाल की राजधनी है –
(a) कोलकाता
(b) दार्जिलिंग
(c) मुर्शिदाबाद
(d) हल्दिया
उत्तर :
(a) कोलकाता

प्रश्न 11.
पश्चिम बंगाल का कुल क्षेत्रफल है :-
(क) 40,000 वर्ग किमी०
(ख) 32,000 वर्ग किमी०
(ग) 88,752 वर्ग किमी०
(घ) 80,000 वर्ग किमी०
उत्तर :
(ग) 88,752 वर्ग किमी०

प्रश्न 12.
पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे देश हैं :-
(क) चीन और पाकिस्तान
(ख) अफगानिस्तान और चीन
(ग) श्रोलका और महाद्वीप
(घ) भूटान और बंगलादेश
उत्तर :
(घ) भूटान और बंगलादेश

प्रश्न 13.
वर्तमान में पश्चिम बंगाल में जिले हैं :-
(क) 18
(ख) 19
(ग) 20
(घ) 21
उत्तर :
(ग) 20

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 14.
पश्चिम बंगाल का सबसे नया जिला है –
(क) मालदह
(ख) अलीपुरदुआर
(ग) दार्जिलिंग
(घ) उत्तर 24 परणना
उत्तर :
(ख) अलीपुरदुआर

प्रश्न 15.
पश्चिम बंगाल की सर्वोच्च चोटी है –
(क) फ्लूट
(ख) सिंगलीला
(ग) अयोध्या पहाड़ी
(घ) सन्दाकफू
उत्तर :
(घ) सन्दाकफ

प्रश्न 16.
दामोदर नदी है :-
(क) उत्तर के पर्वतीय भाग की
(ख) मध्य के मैदानी भाग की
(ग) पश्चिम के पठारी भाग की
(घ) डेलटाई भाग की
उत्तर :
(ग) पश्चिम के पठारी भाग की

प्रश्न 17.
बारेन्द्र भूमि पायी जाती है –
(क) तराई क्षेत्र में
(ख) उत्तरी मैदान में
(ग) राढ़ प्रदेश में
(घ) डेलटाई प्रदेशः में
उत्तर :
(ख) उत्तरी मैदान में

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 18.
किस क्षेत्र का निर्माण नवीन जलोढ़ मिट्टी से हुआ है?
(क) राद़ प्रदेश का
(ख) पश्चिन के पठारी भाग का
(ग) गगा के डेल्टाई भाग का
(घ) समुद्री तटीय बालू क्षेत्र का
उत्तर :
(ग) गंगा के डेल्टाई भाग का

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से किस पहाड़ी पर दार्जिलिंग शहर स्थित है –
(क) सिंगलीला
(ख) कर्सियांग
(ग) कलियोग
(घ) टाइ़गर हिल
उत्तर :
(घ) टाइगर हिल

प्रश्न 20.
‘राढ’ शब्द का अर्थ है –
(क) जलोढ़ मैदान
(ख) पथरीली भूमि
(ग) काली मिट्टी
(घ) निम्न भूमि
उत्तर :
(ख) पथरीली भूमि

प्रश्न 21.
गंगा के डेल्टा का निर्माण हुआ है –
(क) प्राचीन जलोढ़ मिट्टी से
(ख) नवीन जलोढ़ मिट्टी से
(ग) लाल मिट्टी से
(घ) लैटेराइट मिट्टी से
उत्तर :
(ख) नवीन जलोढ़ मिट्टी से

प्रश्न 22.
सुन्दरवन के डेल्टाई भाग में स्थित जलमग्न निम्न भूमि को कहते हैं –
(क) चार
(ख) दियारा
(ग) ताल
(घ) बिल
उत्तर :
(ग) ताल

प्रश्न 23.
पश्चिम बंगाल की उत्तरी मैदान में स्थित प्राचीन जलोढ़ मिट्टी के ऊँचे मैदान को कहते हैं ,
(क) बारिन्द्र भूमि
(ख) चार
(ग) राढ़ अंचल
(घ) डुआर्स
उत्तर :
(क) बारिन्द्र भूमि

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 24.
नेपाल की राजधानी है –
(a) काठमाण्डु
(b) पुनाखा
(c) पशुपतिनाथ्व
(d) हेमकुण्ड
उत्तर :
(a) काठमाण्ड

प्रश्न 25.
सिक्किम पश्चिम बंगाल के –
(a) पूर्व
(b) पश्चिम
(c) उत्तर
(d) दक्षिण में स्थित है
उत्तर :
(c) उत्तर

प्रश्न 26.
असम पश्चिम बंगाल के –
(a) पूर्व
(b) पश्चिम
(c) उत्तर पूर्व में
(d) दक्षिण में स्थित है
उत्तर :
(c) उत्तर पूर्व में

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल के दक्षिण पश्चिम में स्थित है –
(a) उड्ड़सा
(b) मेघालय
(c) असम
(d) श्रारखण्ड
उत्तर :
(a) उड़ीसा

प्रश्न 28.
झारखण्ड की राजधानी है –
(a) रांची
(b) पटना
(c) हजारी बाग
(d) बोकारो
उत्तर :
(a) राची

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 29.
भूटान की राजधानी है –
(a) थिम्मू
(b) पुनाखा
(c) पारो
(d) बाका
उत्तर :
(a) थिम्मू

प्रश्न 30.
प्रशासन की सुविधा के लिए पश्चिम बंगाल को
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) दो भागों में बाँटा गया है
उत्तर :
(a) तीन

प्रश्न 31.
धरातलीय बनावट के आधार पर पश्चिम बंगाल को कितने भागों में बाँटा गया है –
(a) बार
(b) पाँच
(c) छ:
(d) तीन
उत्तर :
(c) छ:

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी है –
(a) टाइगर हिल
(b) घूम
(c) सदाकफ़
(d) साबरमाम
उत्तर :
(c) संदाकफ़

प्रश्न 33.
पश्चिम बंगाल में कुल कितने प्रशासनिक विभाग हैं?
(क) 2
(ख) 3
(ग) 4
(घ) 5
उत्तर :
(घ) 5

प्रश्न 34.
ताल (Tal) से तात्पर्य है :-
(क) दियरा
(ख) तराई
(ग) झील
(घ) कोई नहीं
उत्तर :
(ग) झील

प्रश्न 35.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग से निकलने वाली सबसे प्रमुख नदी है –
(क) तिस्ता
(ख) महानंदा
(ग) दामोदर
(घ) अजय
उत्तर :
(ग) दामोदर

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 36.
पशिचम बंगाल का सबसे अधिक धान (चावल) उत्पादक जिला है –
(क) हुगली
(ख) बर्द्धवान
(ग) वीरभूमि
(घ) नदिया
उत्तर :
(ख) बर्द्धवान

प्रश्न 37.
किस फसल को सुनहले रेशे की फसल कहते हैं?
(क) जूट
(ख) कपास
(ग) सनई
(घ) गन्ना
उत्तर :
(क) जूट

प्रश्न 38.
चाय किस स्थान की सबसे प्रसिद्ध है?
(क) असम
(ख) जलपाईगुड़ी
(ग) दार्जिलिंग
(घ) कूचबिहार
उत्तर :
(ग) दार्जिलिंग

प्रश्न 39.
झरिया किस लिए प्रसिद्ध है –
(क) लौह इस्पात
(ख) मैंगनोज
(ग) कोयला
(घ) बालू पत्यर
उत्तर :
(ग) कोयला

प्रश्न 40.
पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा लौह-इस्पात उत्पादन केन्द्र है –
(क) आसनसोल
(ख) बेलूर
(ग) दुर्गापुर
(घ) बर्नपुर
उत्तर :
(घ) बर्नपुर

प्रश्न 41.
पश्चिम बंगाल में आलू के कितने कोल्ड स्टोरेज हैं ?
(क) 500
(ख) 382
(ग) 300
(घ) 296
उत्तर :
(ख) 382

प्रश्न 42.
पश्चिम बंगाल के पर्यटन का ब्राण्ड अम्बेस्डर कौन है ?
(क) अमीर खान
(ख) सलमान खान
(ग) अभिताभ बच्चन
(घ) शाहरूख खान
उत्तर :
(घ) शाहरूख खान

प्रश्न 43.
बौद्ध धर्मावलम्बियों का प्रमुख तीर्थ कहाँ है?
(क) कर्सियांग
(ख) कलिंगपोग
(ग) दार्जिलिंग
(घ) बोलपुर
उत्तर :
(ख) कलिंगपोंग

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 44.
शान्ति निकेतन विश्वविद्यालय कहाँ स्थित है?
(क) रामपुरहाट
(ख) दीघा
(ग) बोलपुर
(घ) दुर्गापुर
उत्तर :
(ग) बोलपुर

प्रश्न 45.
हल्दिया बंदरगाह कहाँ पर स्थित है –
(क) हुगली नदी के तट पर
(ख) दामोदर नदी पर
(ग) हुगली एवं हल्दी नदी के तट पर
(घ) मातला नदी पर
उत्तर :
(ग) हुगली एवं हल्दी नदी के तट पर

प्रश्न 46.
पश्चिम बंगाल की राजधानी है –
(क) कोलकाता
(ख) हावड़ा
(ग) दुर्गापुर
(घ) दार्जिलिंग
उत्तर :
(क) कोलकाता

प्रश्न 47.
पश्चिम बंगाल का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का कितना है?
(क) 5%
(ख) 7%
(ग) 2%
(घ) 3%
उत्तर :
(ग) 2%

प्रश्न 48.
लाल मिट्टी पश्चिम बंगाल के किस जिले में सबसे अधिक पायी जाती है?
(क) बर्द्धमान
(ख) हावड़ा
(ग) कोलकाता
(घ) दुर्गापुर
उत्तर :
(क) बर्द्धमान

प्रश्न 49.
पश्चिम बंगाल में रूढ़ अंचल किसे कहते हैं ?
(क) बर्द्धवान
(ख) हावड़ा
(ग) कोलकाता
(घ) दुर्गापुर
उत्तर :
(घ) दुर्गापुर

प्रश्न 50.
पश्चिम बंगाल में कुल कितने जिले हैं –
(a) 16
(b) 18
(c) 19
(d) 23
उत्तर :
(d) 23

प्रश्न 51.
किन नदियों का मुहाना सबसे अधिक चौड़ा है?
क) उत्तर के पर्वतीय भाग की
(ख) पश्चिम के पठारी भाग की
(ग) उत्तरी मैदान की
(घ) सुन्दर वन की
उत्तर :
(घ) सुन्दर वन की

प्रश्न 52.
पश्चिम बंगाल में जल संसाधन के अभाव का कारण है –
(क) नदियों का अभाव
(ख) भौम जल स्तर की कमी
(ग) वर्षा कम होना
(घ) उचित जल प्रबंधन का अभाव
उत्तर :
(घ) उचित जल प्रबंधन का अभाव

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 53.
पश्चिम बंगाल के पठारी भाग की जलवायु है :-
(क) विषम
(ख) शीत प्रधान
(ग) सम
(घ) उष्ण एवं नम
उत्तर :
(क) विषम

प्रश्न 54.
पश्चिम बंगाल में वर्षा होती है –
(क) दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से
(ख) उत्तरी-पूर्वी मानसून से
(ग) उत्तरी – पश्चिमी मानसून से
(घ) सभी से
उत्तर :
(क) दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से

प्रश्न 55.
किस मिट्टी में चूना, फास्फोरस एवं जीवांश की कमी होती है?
(क) जलीढ़ मिट्टी में
(ख) लेटराइट मिट्टी में
(ग) नमकीन मिट्टी में
(घ) लाल मिट्टी में
उत्तर :
(ख) लेटराइट मिट्टी मे

प्रश्न 56.
रॉयल बंगाल टाइगर पाया जाता है :-
(क) पर्वतीय वनों में
(ख) मैदानी बनों में
(ग) तराई वनो में
(घ) सुन्दरवन में
उत्तर :
(घ) सुन्दरवन में

प्रश्न 57.
सबसे बड़ा धान उत्पादन राज्य है –
(क) उत्तर-प्रदेश
(ख) बिहार
(ग) पश्चिम बगाल
(घ) उड़ौसा
उत्तर :
(ग) पश्चिन बंगाल

प्रश्न 58.
किस कृषि फसल का गवेषणा केन्द्र बैरकपुर में है?
(क) धान
(ख) जूट या पाट
(ग) चाय
(घ) गेहूँ
उत्तर :
(ख) जूट या पाट

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 59.
जूट किस प्रदेश का सबसे बड़ा उद्योग है?
(क) उत्तर-प्रदेश
(ख) बिहार
(ग) झारखण्ड
(घ) पश्चिम बगाल
उत्तर :
(घ) पश्चिम बंगाल

प्रश्न 60.
पश्चिम बंगाल में लौह इस्पात उद्योग का केन्द्र है :-
(क) आसनसोल
(ख) हावड़ा
(ग) दुर्गापुर
(घ) सिलीगुड़ी .
उत्तर :
(ग) दुर्गापुर

प्रश्न 61.
उत्तरी बंगाल की सबसे बड़ी नदी है –
(क) जलदाका
(ख) महानंदा
(ग) तिस्ता
(घ) तोरसा
उत्तर :
(ख) महानंदा

प्रश्न 62.
निम्नलिखित में से कौन एक ज्वारीय नदी है ?
(क) विद्याधरी
(ख) संकोष
(ग) अजय
(घ) कंसावती
उत्तर :
(क) विद्याधरी

प्रश्न 63.
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक जल की मांग है :-
(क) औद्योगिक क्षेत्र में
(ख) कृषि क्षेत्र में
(ग) घरेलू क्षेत्र में
(घ) विद्युत उत्पादन में
उत्तर :
(ख) कृषि-क्षेत्र में

प्रश्न 64.
पश्चिम बंगाल में प्रीष्म ऋतु में वर्षा होती है –
(क) दक्षणणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओ से
(ख) उत्तरी-पूर्वी मानसूनी हवाओं से
(ग) प्रक्रिमी हवाओं से
(घ) पश्चिमी विक्षोभ से
उत्तर :
(क) दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से

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प्रश्न 65.
पश्चिम बंगाल में ग्रीष्म ऋतु में उत्पन्न होने वाले तूफानों को कहते हैं :-
(क) आमवर्षा
(ख) लू
(ग) फूलों और बौछार
(घ) काल बैशाखी
उत्तर :
(घ) काल बैशाखी

प्रश्न 66.
पश्चिम बंगाल में मानसून प्रत्यावर्तन का समय है –
(क) अक्टूबर – नवम्बर
(ख) जुलाई – अगस्त
(ग) मई – जून
(घ) दिसम्बर – जनवरी
उत्तर :
(क) अक्ट्बर – नवम्बर

प्रश्न 67.
पश्चिम बंगाल में प्रीष्म ऋतु में सबसे अधिक तापमान रेकार्ड किया जाता है :
(क) पश्चिमी पठारी अंचल में
(ख) उत्तरी पर्वतीय अचल में
(ग) उत्तरी मैदानी अचल में
(घ) डेल्टाई अचल मे
उत्तर :
(क) पश्चिमी पठारी अंचल में

प्रश्न 68.
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक वर्षा होती है –
(क) पश्चिमी पठारी अंचल मे
(ख) राढ़ अंचल मे
(ग) सुन्दरवन क्षेत्र में
(घ) पर्वतीय क्षेत्र में
उत्तर :
(घ) पर्वतीय क्षेत्र में

प्रश्न 69.
पश्चिम बंगाल में नमकीन मिट्टी पायी जाती है –
(क) राढ़ अंचल में
(ग) सुन्दरवन के डेल्टाई अचल में
(ख) पर्वतीय अंचल में
(घ) पठारी अंचल में
उत्तर :
(ग) सुन्दरवन के डेल्टाई अंघल में

प्रश्न 70.
सुन्दरवन अंचल की प्राकृतिक वनस्पतियाँ हैं –
(क) मैग्रोव प्रकार की
(ग) टेगा प्रकार की
(ख) भू-मध्य सागरीय प्रकार की
(घ) पतझड़ प्रकार को
उत्तर :
(क) मैंग्रोव प्रकार की

प्रश्न 71.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख औद्योगिक फसल है –
(क) चाय
(ख) गन्ना
(ग) कहवा
(घ) जूट
उत्तर :
(घ) जूट

प्रश्न 72.
पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक उत्पन्न होने वाली खाद्य फसल है –
(क) चावल
(ख) गेहूँ
(ग) मक्का
(घ) ज्वार
उत्तर :
(क) चावल

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प्रश्न 73.
चाय के उत्पादन में पश्चिम बंगाल का भारत में स्थान है –
(क) पहला
(ख) दूसरा
(ग) तीसरा
(घ) चौथा
उत्तर :
(ख) दूसरा

प्रश्न 74.
विश्व का सबसे बड़ा चाय निर्यातक बंदरगाह है –
(क) कोलकाता
(ख) विशाखापत्तनम
(ग) कोचीन
(घ) मुम्बई
उत्तर :
(क) कोलकाता

प्रश्न 75.
दुर्गापुर इस्पात संयन्त्र स्थित है –
(क) बर्द्धमान जिले में
(ख) बोरभूम जिले में
(ग) बाँकुड़ा जिले में
(घ) पुरूलिया जिले में
उत्तर :
(क) बर्द्धमान जिले में

प्रश्न 76.
वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल में जूट मिलों की कुल संख्या है –
(क) 85
(ख) 59
(ग) 100
(घ) 75
उत्तर :
(ख) 59

प्रश्न 77.
पश्चिम बंगाल में चाय बगानों की कुल संख्या है –
(क) 343
(ख) 245
(ग) 255
(घ) 350
उत्तर :
(ख) 245

प्रश्न 78.
भारत में सबसे अधिक ताजे जल की मछलियाँ पकड़ी जाती है –
(क) आंघ्र प्रदेश में
(ख) पश्चिम बंगाल में
(ग) उडिशा में
(घ) तमिलनाडु में
उत्तर :
(ख) पश्चिम बंगाल में

प्रश्न 79.
निम्नलिखित में से किस वर्ष पश्चिम बंगाल में पर्यटन को उद्योग दर्जा प्राप्त हुआ –
(क) 1996 में
(ख) 2000 में
(ग) 1981 में
(घ) 1995 में
उत्तर :
(क) 1996 में

प्रश्न 80.
कोलकाता मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त है –
(क) लगभग एक लाख लोग
(ख) लगभग पचास हजार लोग
(ग) लगभग तीस हजार लोग
(घ) लगभग दो लाख लोग
उत्तर :
(क) लगभग एक लाख लोग

प्रश्न 81.
पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग प्रभावित होता है –
(a) सरकारी नीतियों से
(b) जलवायुगत कारणों से
(c) आवागमन के साधनों के अविकास से
(d) पर्यटन स्थलों की कमी से
उत्तर :
(b) जलवायुगत कारणों से

प्रश्न 82.
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन में सन् 2020 तक पश्चिम बंगाल का लक्ष्य है –
(a) देश में कुल उत्पादन का 15% उत्पादन
(b) देश के कुल उत्पादन का 10% उत्पादन
(c) देश के कुल उत्पादन का 25% उत्पादन
(d) देश के कुल उत्पादन का $40% उत्पादन
उत्तर :
(a) देश में कुल उत्पादन का 15% उत्पादन

प्रश्न 83.
बंगाल के पठारी भाग की सबसे ऊँची चोटी है –
(a) बिहारीनाथ
(b) शुशुनिया
(c) गोरगाबुरु
(d) पंचेत पहाड़ी
उत्तर :
(c) गोरगाबुरु

प्रश्न 84.
निम्नलिखित में कौन सी नदी पश्चिम बंगाल के उत्तरी पर्वतीय भागों को दो भागों में बाटटती है –
(a) तिस्ता
(b) जलब्माका
(c) रापडक
(d) दामोदर
उत्तर :
(a) तिस्ता

प्रश्न 85.
पश्चिमी पठारी भाग की सबसे प्रमुख नदी है –
(a) दामोदर
(b) अजय
(c) महानदी
(d) तोरसा
उत्तर :
(a) दामोदर

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प्रश्न 86.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख ज्वारीय नदी हैं-
(a) इच्छामती
(b) जलढ़ाका
(c) दामोदर
(d) हुगली
उत्तर :
(d) हुगलीं

प्रश्न 87.
पश्चिम बंगाल में वर्षा का औसत है –
(a) 250 सेमी०
(b) 175 सेमी०
(c) 200 सेमी०
(d) 300 सेमी०
उत्तर :
(d) 300 सेमी०

प्रश्न 88.
पश्चिम बंगाल में काल बैशाखी आती है –
(a) मार्च-अप्रैल में
(b) अप्रैल मई में
(c) मई-जून में
(d) किसी में नहीं
उत्तर :
(b) अप्रैल मई में

प्रश्न 89.
पश्चिम बंगाल में लेटेराइट मिट्टी पायी जाती है –
(a) बांकुडा
(b) हावड़ा
(c) पुरुलिया
(d) (a) और (c) दोनों
उत्तर :
(d) (a) और (c) दोनों

प्रश्न 90.
पर्वतीय वन के वृक्ष है –
(a) चीड़
(b) नारियल
(c) सुन्दरी
(d) आम
उत्तर :
(a) चीड़

प्रश्न 91.
ज्वारीय वन के वृक्ष है –
(a) नारियल
(b) आम
(c) सुन्दरी
(d) पलाश
उत्तर :
(c) सुन्दरी

प्रश्न 92.
पश्चिम बंगाल में वर्षा होती है –
(a) द.प मानसूनी
(b) उत्तर पूर्वी
(c) उत्तरी हवा
(d) दक्षिणी हवा द्वारा
उत्तर :
(a) द. प. मानसूनी

प्रश्न 93.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलो में तापमान होता है –
(a) सबसे अधिक
(b) सबसे कम
(c) सम
(d) कम
उत्तर :
(b) सबसे कम

प्रश्न 94.
पश्चिम बंगाल की ग्रीष्मकालीन राजधानी है –
(a) दार्जिलिंग
(b) जलपाईंगुड़ी
(c) सिलीगुड़ी
(d) गंगटोक
उत्तर :
(a) दार्जिलिंग

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प्रश्न 95.
पश्चिमी बंगाल के उत्तरी भाग में पायी जाने वाली मिट्टी है –
(a) लाल
(b) जलोढ़
(c) पहाड़ी
(d) लेटेराइट
उत्तर :
(b) जलोढ़

प्रश्न 96.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख खाद्यात्र है –
(a) गेहूँ
(b) चावल
(c) मक्का
(d) ज्चार
उत्तर :
(b) चाबल

प्रश्न 97.
पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में जिस कृषि उपज का सबसे अधिक उत्पादन होता है वह है –
(a) चावल
(b) चाय
(c) कहवा
(d) जूट
उत्तर :
(b) चाय

प्रश्न 98.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख औद्योगिक फसल है –
(a) जूट
(b) रबड़
(c) चाय
(d) चावल
उत्तर :
(a) जूट

प्रश्न 99.
शन्तिनिकेतन एक प्रमुख –
(a) पर्यटन
(b) औद्योगिकरण
(c) व्यापारिक धार्मिक सीन है
उत्तर :
(a) पर्यटन

प्रश्न 100.
दुर्गापुर प्रसिद्ध है –
(a) लौह इस्पात
(b) सूती वस्व
(c) खाद्य प्रसंस्करण
(d) रेडीमेड वस्त्र उद्योग के लिए
उत्तर :
(a) लौह इस्पात

प्रश्न 101.
पशिचम बंगाल का प्रमुख बन्दरगाह है –
(a) कोलकाता
(b) कांडला
(c) पाराद्वीप
(d) कोचीन
उत्तर :
(a) कोलकाता

प्रश्न 102.
पश्चिम बंगाल की प्रमुख नकदी फसल है।
(a) जूट
(b) चावल
(c) गेहूँ
(d) चाय
उत्तर :
(a) जूट

प्रश्न 103.
जूट उद्योग के पश्चिम बंगाल का भारत में स्थान है –
(a) प्रथम
(b) द्वितीय
(c) तृतीय
(d) चौथा
उत्तर :
(a) प्रथम

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प्रश्न 104.
पश्चिम बंगाल का सबसे प्रमुख उद्योग है –
(a) जूट उद्योग
(b) लौह इस्पात उद्योग
(c) सूती वस्त्र उद्योग
(d) चाय उद्योग
उत्तर :
(a) जूट उद्योग

प्रश्न 105.
पश्चिम बंगाल में पर्यटन उद्योग प्रभावित होता है –
(क) सरकारी नीतियों से
(ख) जलवायुगत कारणों से
(ग) आवागमन की साधनों की अविकास से
(घ) पर्यटन स्थलों की कमी से
उत्तर :
(ख) जलवायुगत कारणों से

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. __________ एक नवीकरण संसाधन है।
उत्तर : वन

2. अधिक सिंचाई से जल के साथ घुलनशील तत्व घुलकर नीचे चले जाते हैं। इसे __________क्रिया कहते हैं।
उत्तर : निछालन

3. उत्तर के पर्वतीय भाग में जाड़े का तापक्रम __________डिग्री रहता है।
उत्तर : 6°-7°

4. पश्चिम बंगाल के उत्तर के पर्वतीय भाग में __________से०मी० वर्षा होती है।
उत्तर : 300-400

5. सुन्दरवन की नदियों का मुहाना __________होता है।
उत्तर : चौड़ा

6. मानसून __________भाषा का शब्द है जिसका अर्थ मौसम होता है।
उत्तर : अरबी

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7. __________मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाये गए अवसादों से होता है।
उत्तर : जलोढ़

8. तराई क्षेत्र में __________वन पाये जाते हैं।
उत्तर : सदाबहार

9.__________ वृक्ष की अधिकता के कारण इसे सुन्दरवन कहते हैं।
उत्तर : सुन्दरी

10. कर्क रेखा पश्चिम बंगाल के __________भाग से होकर गुजरती है।
उत्तर : दक्षिणी

11. पश्चिम बंगाल का कुल क्षेत्रफल __________वर्ग कि॰मी० है।
उत्तर : 88.752

12. जनघनत्व की दृष्टि से पश्चिम बंगाल का भारत में __________स्थान है।
उत्तर : दूसरा

13. पशिचम बंगाल की राजधानी__________ है।
उत्तर : कोलकाता

14. पशिचम बंगाल में कुल जिले __________हैं।
उत्तर : 20

15. पश्चिम बंगाल का क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल का __________प्रतिशत है।
उत्तर : 2.7

16. पश्चिम बंगाल की__________ प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है।
उत्तर : 68.11

17. पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी__________ है।
उत्तर : संदाकफू

18. पश्चिम बंगाल की पठारी अंचल की औसत ऊँचाई __________मीटर है।
उत्तर : 600

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19. तराई अंचल की पूर्वी भाग को __________कहते हैं।
उत्तर : बारिन्द्र का भूमि

20. मालदह जिले में स्थित नदी द्वीपों को __________कहते हैं।
उत्तर : दियारा

21. राढ़ शब्द का अर्थ है __________भूमि है।
उत्तर : पथरीली

22. पश्चिम बंगाल के पठारी अचंल की सबसे लम्बी नदी __________है।
उत्तर : दामोदर

23. मुर्शिदाबाद जिले के __________नामक स्थान पर गंगा नदी दो शाखाओं में विभाजित हुई है।
उत्तर : धुलियान

24. तिस्ता नदी __________हिमनद से निकलती है।
उत्तर : जेम

25. पश्चिम बंगाल में देश के कुल जल संसाधन का __________प्रतिशत विद्यमान है।
उत्तर : 7.5

26. कोलकाता में __________मिलियन लोग आर्सेनिक की समस्या से जूझ रहे हैं।
उत्तर : 26

27. पश्चिम बंगाल की औसत वार्षिक वर्षा __________से० मी० है।
उत्तर : 175

28. शरद् काल में पश्चिम बंगाल में आने वाले ऊष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों को __________कहते हैं।
उत्तर : अथिन तूफान

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29. पश्चिम बंगाल भारत की कुल कच्चे जूट का __________प्रतिशत उत्पादन करती है।
उत्तर : 73.95

30. दुर्गापुर इस्पात संयंत्र की स्थापना __________के सहयोग से हुई है।
उत्तर : बिटेन

31. पश्चिम बंगाल में __________प्रतिशत जूट के सामानों का उत्पादन किया जाता है।
उत्तर : 85

32. पश्चिम बंगाल में सूती वस्त की कुल __________मिले हैं।
उत्तर : 39

33. पश्चिम बंगाल में चाय के बगान __________हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं।
उत्तर : 103.950

34. हरिनघाटा में __________प्रसंस्करण उद्योग का विकास हुआ है।
उत्तर : मांस एवं पोल्ट्री

35. गंगासागर का मेला __________में लगता है।
उत्तर : मकर संक्रान्ति

36. सुन्दरवन में __________वृक्षों की अधिकता है।
उत्तर : सुन्दरी

37. भारतवर्ष को __________स्वतंत्र हुआ।
उत्तर : 15 अगस्त 1947

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38. पश्चिम बंगाल के पूर्व में __________स्थित है।
उत्तर : बांगलादेश।

39. भारत में राज्यों की कुल संख्या __________है।
उत्तर : 28

40. पश्चिम बंगाल में कुल __________जिले है।
उत्तर : 23

41. __________पूर्वी भारत का प्रसिद्ध बन्दरगाह है।
उत्तर : विशाखापतनम, हल्दिया।

42. __________सिक्किम की राजधानी है।
उत्तर : गंगटोक।

43. __________के उत्पादन में असम का प्रमुख स्थान है।
उत्तर : चाय, चावल।

44. नेपाल की प्रमुख नदी __________है।
उत्तर : कोठी, वागमती।

45. बाघमती __________से होकर बहती है।
उत्तर : नेपाल और भारत।

46. __________की राजघनी गंगटोक है।
उत्तर : सिक्किम।

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47. पश्चिम बंगाल का सबसे गर्म स्थान__________ है।
उत्तर : मेदिनीपुर (2021) पुरुलिया।

48. सुन्दरवन अंचल में विश्व विख्यात __________पाया जाता है।
उत्तर : बाघ।

49. पश्चिम बंगाल में काल बैशाखी __________महीने में आती है।
उत्तर : अग्रैल से मई।

50. पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी __________है।
उत्तर : संदाकफू।

51. __________पर्वत श्रेणी पश्चिम बंगाल को नेपाल से अलग करती है।
उत्तर : सिंगलीला।

52. __________वृक्षों की अधिकता के कारण सुन्दरवन नाम पड़ा।
उत्तर : सुन्दरी।

53. __________पश्चिम बंगाल का एक प्रमुख पवतीय शहर है।
उत्तर : दार्जिलींग।

54. अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में आने वाले तूफान को कहा __________जाता है।
उत्तर : काल वैशाखी।

55. __________दार्जिलिंग हिमालय की प्रमुख नदी है।
उत्तर : तीस्ता।

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56. __________को पश्चिम बंगाल का रूर कहा जाता है?
उत्तर : दुर्गापुर।

57. मुर्शिदाबाद की __________कृषि के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : धान और जूट।

58. विश्व में __________के उत्पादन में पशिचम बंगाल का महत्वपूर्ण स्थान है।
उत्तर : चावल।

59. पश्चिम बंगाल की __________अपनी सुगन्ध एवं स्वाद के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।
उत्तर : चाय

60. पश्चिम बंगाल की एकमात्र तेल शोधनशाला __________में है।
उत्तर : हल्दिया।

61. __________जिला पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा चावल उत्पादक जिला है।
उत्तर : मिदनापुर, वर्धमान।

62. पश्चिम बंगाल की प्रमुख बागानी फसल __________है।
उत्तर : चाय।

63. कुल्टी __________उद्योग के लिये प्रसिद्ध है।
उत्तर : लौह उद्योग।

64. __________पश्चिम बंगाल का सबसे प्रमुख शहर है।
उत्तर : कोलकाता।

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65. __________ दक्षिण बंगाल का प्रमुख पर्यटक स्थान है।
उत्तर : दीघा।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. तीनों पड़ोसी राष्ट्रों के साथ पश्चिम बंगाल का सम्बन्ध ठीक नहीं है।
उत्तर : False

2. कोलकाता बंदरगाह का प्रयोग बंगलादेश करता है।
उत्तर : False

3. त्रिपुरा की सीमा भी पश्चिम बंगाल से मिलती है।
उत्तर : False

4. उत्तर बंगाल की प्रमुख नदी तीरसा है।
उत्तर : False

5. कलिंगपोंग श्रेणी का सर्वोच्च शिखर श्वृंग लीला है ।
उत्तर : True

6. पश्चिम की पठार की औसत ऊँचाई 100M है।
उत्तर : True

7. मयूराक्षी और अजय मिलकर रूपनारायण नदी का निर्माण करती है।
उत्तर : False

8. दामोदर उत्तर-बंगाल की प्रमुख नदी है।
उत्तर : False

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9. पश्चिम बंगाल में वर्षा ऋतु जून से सितम्बर तक है।
उत्तर : True

10. पठारी क्षेत्र में प्रीष्मकाल का औसत तापमान 40°C है।
उत्तर : True

11. लैटेराइट मिट्टी पके ईंट जैसी लाल होती है।
उत्तर : True

12. सुन्दरवन में चिरहरित बन पाये जाते हैं।
उत्तर : False

13. पूरा पश्चिम बंगाल दक्षिण-पश्चिम मानसूनी क्षेत्र में पड़ता है।
उत्तर : False

14. दार्जिलिंग की प्रमुख फसल चाय है।
उत्तर : True

15. पठारी भाग की प्रमुख नदी तिस्ता है।
उत्तर : False

16. पश्चिम बंगाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास नहीं हुआ है।
उत्तर : False

17. पश्चिम बंगाल लौह इस्पात में अत्यधिक विकसित है।
उत्तर : True

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18. हल्दिया पश्चिम बंगाल का प्रमुख बन्दरगाह है।
उत्तर : True

19. पश्चिम बगाल में धान का उत्पादन देश की कुल उत्पादन का 20.69% है।
उत्तर : True

20. पश्चिम बंगाल की पर्वतीय भाग में पाट की कृषि होती है।
उत्तर : False

21. पश्चिम बंगाल का चाय उत्पादन में देश में दूसरा स्थान है।
उत्तर : True

22. पश्चिम बंगाल में सूचना प्रौद्योगिक उद्योग विकसित है ।
उत्तर : True

23. पश्चिम बंगाल में जाड़े में वर्षा होती है।
उत्तर : False

24. पश्चिम बंगाल की सबसे उपजाक मिट्टी जलोढ़ मिट्टी है।
उत्तर : True

25. दार्जिलिंग हिमालय में 3000 मीटर की ऊँचाई पर त्रिकोणी पत्री के वन मिलते हैं।
उत्तर : True

26. ज्वारीय वनो का कोई उपयोग नहीं है।
उत्तर : False

27. अमन धान की बुवाई वर्षाकाल में होती है और यह जाड़े में काटा जाता है।
उत्तर : True

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28. धान जल का प्यासा पौधा है।
उत्तर : True

29. अधिक सिंचाई के क्षेत्र में वृक्षविहीन दृश्याबली का निर्माण होता है।
उत्तर : False

30. 88°50’ पूर्वी देशान्तर रेखा पश्चिम बंगाल के मध्य से होकर गुजरती है।
उत्तर : False

31. पश्चिम बंगाल के पर्वती अंचल में पूर्वी हिमालय की श्रेणियों का विस्तार है।
उत्तर : True

32. नेपाल पश्चिम बंगाल के पूर्व में स्थित है।
उत्तर : False

33. सिक्किम राज्य पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित है।
उत्तर : True

34. बाग्लादेश की राजधनी थिम्पू है।
उत्तर : False

35. दामोदर नदी को पश्चिम बंगाल का शोक कहा जाता था।
उत्तर : True

36. हिमालय के पर्वतपदीय अंचल को तराई प्रदेश कहते हैं।
उत्तर : True

37. मालदह जिले में जलमरन निम्नभूमि को बिल कहते हैं।
उत्तर : False

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38. राढ़ अंचल को पश्चिम बंगाल का खालहाल कहते हैं।
उत्तर : True

39. इच्छामुती हुगली की शाखा नदी है।
उत्तर : False

40. पश्चिम बगाल में उपलब्ध कुल धरातलीय जल का 80% उपयोग योग्य है।
उत्तर : False

41. उत्तरी बंगाल में बाढ़ नियंश्रण के लिए उत्तरी बंगाल नदी प्रबन्धन परिषद की स्थापना की गयी है।
उत्तर : True

42. सन् 2025 तक पश्चिम बंगाल में आवश्यक जल का घाटा 59 प्रतिशत तक हो जाने की संभावना है।
उत्तर : True

43. पश्चिम बंगाल का उत्तरीय भाग उष्ण कटिबंध में पड़ता है।
उत्तर : False

44. कोलकाता की औसत वार्षिक वर्षा 300 से॰मी॰ है।
उत्तर : False

45. पश्चिम बंगाल के पठारी अंचल में जलोढ़ मिट्टी पायी जाती है।
उत्तर : False

46. पश्चिम बंगाल के 77% कृषि योग्य भूमि पर चावल की खेती की जाती है।
उत्तर : True

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47. जूट की सबसे अधिक कृषि पश्चिम बंगाल के डेल्टाई अंचल में की जाती है।
उत्तर : True

48. पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग का केन्द्रीकरण उत्तरी बंगाल में हुआ है।
उत्तर : उत्तर : False

49. पश्चिम बंगाल में लौह-इस्पात इकाइयों को कोयले की प्राप्ति रानीगंज कोयला क्षेत्र से होती है।
उत्तर : उत्तर : True

50. पश्चिम बंगाल में सूती वस्त्र उद्योग को कच्चे माल की कमी की सामना करना पड़ रहा है।
उत्तर : उत्तर : True

51. कोलकाता भारत का सबसे बड़ा चाय बाजार है।
उत्तर : उत्तर : True

52. मालदा जिसे में लाख उद्योग का विकास हुआ है।
उत्तर : उत्तर : True

53. पश्चिम बंगाल में 18 जिले है।
उत्तर : False

54. पश्चिम को 3 प्रशासनिक भागों में बाँटा गया है।
उत्तर : True

55. नेपाल की प्रमुख नदी सरस्वती है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

56. भूटान एक औद्योगिक देश है।
उत्तर : False

57. नेपाल की जनसख्या कृषि पर निर्भर है।
उत्तर : False

58. प्रेसीडेन्सी विभाग में कुल 6 जिले है।
उत्तर : True

59. पश्चिम बंगाल के उत्तर में हिमालय पर्वत एवं दक्षिण मे बंगाल की खाड़ी स्थित है।
उत्तर : True

60. बंगाल देश पश्चिम बंगाल का प्रमुख पड़ोसी देश है।
उत्तर : True

61. नेपाल पशिचम बंगाल के उत्तर पश्चिम में स्थित है।
उत्तर : True

62. नेपाल की भाषा असमी है।
उत्तर : False

63. पश्चिम बंगाल में वर्षा का वितरण असमान है।
उत्तर : True

64. संडकफू पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी है।
उत्तर : True

65. घूम विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे स्टेशन है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

66. गोरगाबुरू पश्चिमी पठारी भाग की सबसे ऊँची चोटी है।
उत्तर : True

67. दामोदार पश्चिम बगाल की सबसे लम्बी नदी है।
उत्तर : False

68. मालदह में स्थित पुराने जलोढ़ मैदान को वारिन्द्र कहते है।
उत्तर : True

69. उत्तरी बगाल की नदिया बर्फ पोषित है।
उत्तर : True

70. पश्चिम बंगाल की जलवायु मानसूनी हवाओं से प्रभावित होती है।
उत्तर : True

71. कालिन्दी एवं गंगा के बीच दियरा मैदान स्थित है।
उत्तर : True

72. सुन्दरवन का डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।
उत्तर : True

73. तिस्ता एक बर्फ पोषित नदी है।
उत्तर : True

74. मातला एक ज्वारीय नदी है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

75. पश्चिम बंगाल की जलवायु उष्ण आर्द्र मानसूनी है।
उत्तर : True

76. सिलीगुड़ी को उत्तर पूर्व का प्रवेश द्वार कहा जाता है।
उत्तर : True

77. सुन्दरवन में सुन्दरी वृष्षो की अधिकता है।
उत्तर : True

78. पश्चिम बगाल के उत्तरी भाग में लेटेराइट मिट्टी पायी जाती है।
उत्तर : False

79. पश्चिम बंगाल देश का सबसे बड़ा जूट उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

80. चावल के उत्पादन में पश्चिम बंगाल का देश में प्रथम स्थान है।
उत्तर : True

81. चाय के उत्पादन का पश्चिम बंगाल का देश में प्रथम स्थान है।
उत्तर : False

82. पश्चिम बंगाल की प्रमुख कृषि उपज गेहूं है।
उत्तर : False

83. चाबल पश्चिम बंगाल का प्रमुख खाद्यान्न है।
उत्तर : True

84. पश्चिम बंगाल देश का प्रमुख सूती बस्व उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

85. पश्चिम बंगाल में सबसे पहले सूती वस्त का कारखाना स्थापित किया गया था।
उत्तर : False

86. दुर्गापुर सूती वस्त्र उत्पादन का केन्द्र है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

87. दुर्गापुर को पश्चिम बगाल का रूर कहा जाता है।
उत्तर :

88. कोलकाता पूर्वी भारत का प्रमुख बन्दरगाह है।
उत्तर : True

89. शान्तिनिकेतन एक औद्योगिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है ।
उत्तर : True

90. पश्चिम बगाल में कुटिर उद्योग की प्रधानता है।
उत्तर : True

91. हल्दिया पश्चिम बंगाल का सबसे प्रमुख शहर है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

92. पश्चिम बंगाल के जूट उद्योग की प्रधानता है।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) पृथ्वी के धरातल के नीचे के जल को कहते हैं (क) जल चक्र बाधित होता है
(ii) जल के अधिक उपयोग से (ख) सुन्दरवन
(iii) यदि हिमालय पर्वत न होता (ग) भौम जल
(iv) पश्चिम बंगाल का सबसे दक्षिणी भाग (घ) पश्चिम बंगाल में वर्षा नहीं होती

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) पृथ्वी के धरातल के नीचे के जल को कहते हैं (ग) भौम जल
(ii) जल के अधिक उपयोग से (क) जल चक्र बाधित होता है
(iii) यदि हिमालय पर्वत न होता (घ) पश्चिम बंगाल में वर्षा नहीं होती
(iv) पश्चिम बंगाल का सबसे दक्षिणी भाग (ख) सुन्दरवन

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 8 पश्चिम बंगाल

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बारिन्द्र भूमि (क) पर्यटन स्थल
(ii) चार (ख) स्वर्णिम रेशा
(iii) दार्जिलिंग (ग) पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार
(iv) जूट (घ) महानंदा नदी के पूरब में स्थित प्राचीन जलोढ़ मैदान
(v) कोलकाता (ङ) सुन्दरवन अंचल की उच्च भूमि को निर्माण के आधार पर
(vi) दीया (च) पश्चिम बगाल की प्रीष्मकालीन राजधानी

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बारिन्द्र भूमि (घ) महानंदा नदी के पूरब में स्थित प्राचीन जलोढ़ मैदान
(ii) चार (ङ) सुन्दरवन अंचल की उच्च भूमि को निर्माण के आधार पर
(iii) दार्जिलिंग (च) पश्चिम बगाल की प्रीष्मकालीन राजधानी
(iv) जूट (ख) स्वर्णिम रेशा
(v) कोलकाता (ग) पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार
(vi) दीया (क) पर्यटन स्थल

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

Well structured WBBSE 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन can serve as a valuable review tool before exams.

भारत के संसाधन Class 9 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
लौह अयस्क का उत्पादन किया जाता है :-
(क) गिरीड़ीह में
(ख) अंकलेश्वर में
(ग) डिगबोई में
(घ) पापनाशय में
उत्तर :
(क) गिरीडीह में

प्रश्न 2.
कोयले के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है :-
(क) गिरीडीह
(ख) अंकलेश्वर
(ग) डिगबोई
(घ) पापनाश्म
उत्तर :
(क) गिरीडीह

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन जैविक संसाधन है :-
(क) लोहा
(ख) चाँदी
(ग) मिट्टी
(घ) प्राकृतिक वनस्पति
उत्तर :
(घ) प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 4.
अनवीकरणीय संसाथन है :-
(क) कोयला
(ख) मिट्टी
(ग) जल
(घ) प्राकृतिक वनस्पति
उत्तर :
(क) कोयला

प्रश्न 5.
पशुधन है :-
(क) जैविक संसाधन
(ख) अजैविक संसाथन
(ग) राष्ट्रीय संसाधन
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन
उत्तर :
(क) जैविक संसाधन

प्रश्न 6.
लौह अयस्क है :-
(क) नवीकरण संसाधन
(ख) जैव संसाधन
(ग) चक्रीय संसाथन
(घ) विकसित संसाधन
उत्तर :
(ग) चक्रीय संसाधन

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन प्रवाहमान शक्ति का साधन है?
(a) कोयला
(b) खनिज तेल
(b) जल विद्युत
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(b) जल विद्युत

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन पारस्परिक ऊर्जा स्रोत नहीं है।
(a) कोयला
(b) खनिज तेल
(c) जल विद्युत
(d) ज्वारीय शक्ति
उत्तर :
(c) जल विद्युत

प्रश्न 9.
भारत में प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र है :-
(क) नरोरा
(ख) मुम्बई हाई
(ग) शिव समुद्रम
(घ) जूनागढ़
उत्तर :
(ख) मुम्बई हाई

प्रश्न 10.
एक प्रमुख परमाणु उत्पादक केन्द्र है :-
(क) तारापुर
(ख) रिहन्द
(ग) तालचर
(घ) बारामूला
उत्तर :
(क) तारापुर

प्रश्न 11.
जब कोई वस्तु मानव की आवश्यकताओं को पूरा करती है, तो उसे कहते हैं :-
(क) पेट्रोलियम
(ख) कोयला
(ग) संसाथन
(घ) बाक्साइट
उत्तर :
(ग) संसाथन

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 12.
कोयला – पेट्रोलियम है :-
(क) नवीकरण संसाधन
(ख) अचक्रीय संसाधन
(ग) चकीय संसाधन
(घ) सब कुछ
उत्तर :
अचक्रीय संसाघन

प्रश्न 13.
निम्नतम कोटि का लौह अयस्क है :-
(क) मैन्नेटाईट
(ख) हेमेटाईट
(ग) लिमोनाइट
(घ) सिडेराइट
उत्तर :
(घ) सिडेराइट

प्रश्न 14.
भारत में सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है :-
(क) तमिलनाडु
(ख) उड़ीसा
(ग) छत्तीसगंढ़
(घ) उत्तर-प्रदेश
उत्तर :
(ग) छत्तीसगढ़

प्रश्न 15.
सर्वोत्तम कोटि का कोयला है :-
(क) एन्भासाइट
(ख) विद्युमिनस
(ग) लिग्नाइट
(घ) पीट
उत्तर :
(क) एन्भासाइट

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन सर्वसुलभ संसाथन है :-
(क) वायु
(ख) पेट्रोलियम
(ग) जलविद्युत
(घ) कोयला
उत्तर :
(क) वायु

प्रश्न 17.
निम्न में से किसे श्वेत कोयला कहा जाता है?
(a) खनिज तेल
(b) ज्वारीय शक्ति
(c) जल विद्युत
(d) वायु शक्ति
उत्तर :
(c) जल विद्युत

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 18.
किस प्रकार की शक्ति के उत्पादन के लिए थोरियम की आवश्यकता पड़ती है।
(a) ताप विद्युत
(b) जल विद्युत
(c) परमाणु शाक्ति
(d) किसी के लिए नहीं
उत्तर :
(c) परमाणु शक्ति

प्रश्न 19.
तातापानी प्रसिद्ध है।
(a) जल विद्युत
(b) ताप विद्युत
(c) परमाणु विद्युत
(d) भूतापीय ऊर्जा के उत्पादन के लिए
उत्तर :
(a) जल विद्युत

प्रश्न 20.
उर्जा संसाधन है :-
(क) प्राकृतिक वनस्पति
(ख) पेट्रोलियम
(ग) सोना
(घ) मिद्टी
उत्तर :
(ख) पेट्रोलियम

प्रश्न 21.
सर्वश्रेष्ठ लौह अयस्क है :-
(क) सिडेराइट
(ख) लिमोनाइट
(ग) मैग्नेटाइट
(घ) हेमेटाइट
उत्तर :
(घ) हेमेटाइट

प्रश्न 22.
भारत में सबसे अधिक लौह-अयस्क निर्यात होता है :-
(क) मुम्बई बन्दरगाह से
(ख) कोलकाता बन्दरगाहु से
(ग) विशाखापत्तनम बन्दरगाह से
(घ) मुर्मुगाँव बन्दरगाह से
उत्तर :
(घ) मुर्मुगाँव बन्दरगाह से

प्रश्न 23.
उर्जा के परम्परागत संसाधन हैं :-
(क) परमाणु विद्युत
(ख) भू तापीय विद्युत
(ग) कोयला और पेट्रोल
(घ) जल विद्युत
उत्तर :
(ग) कोयला और पेट्रोल

प्रश्न 24.
उर्जा का गैर-परम्परागत संसाघन है :-
(क) कोयला
(ख) पेट्रोल
(ग) जल विद्युत
(घ) जीवाश्म ईघन
उत्तर :
(ग) जल विद्युत

प्रश्न 25.
सबसे उत्तम किस्म का लौह-अयस्क है :-
(क) हेमेटाइट
(ख) मैग्नेटाइट
(ग) लिमोनाइट
(घ) सिडेराइट
उत्तर :
(ख) मैगनेटाइट

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 26.
कायेले का सबसे उत्तम किस्म है –
(a) बिदुमिनस
(b) लिग्नाइट
(c) पीट
(d) एन्थासाइट
उत्तर :
(d) एन्थासाइट

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में सही कथन को चिह्लित कीजिए :-
(क) संसाधन प्रकृति का उपहार है
(ख) मनुष्य संसाधन का निर्माता है
(ग) प्रकृति संसाधन का निर्माण करती है
(घ) संसाधन होने के लिए प्रकृति, प्रौद्योगिकी एवं मनुष्य का होना जरूरी है
उत्तर :
(घ) संसाषन होने के लिए प्रकृति, प्रौद्योगिकी एवं मनुष्य का होना जरूरी है

प्रश्न 28.
सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है :-
(क) उत्तर – प्रदेश
(ख) बिहार
(ग) उड़ीसा
(घ) झारखण्ड
उत्तर :
(घ) झारखण्ड

प्रश्न 29.
दामोदर घाटी की खान है :-
(क) पश्चिमी बोकारो
(ख) कोरबा
(ग) तालचेर
(घ) सिगरौली
उत्तर :
(क) पश्चिमी बोकारो

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 30.
भारत का सबसे बड़ा खनिज़ तेल उत्पादक राज्य है :-
(क) महाराष्ट्र
(ख) गुजरात
(ग) राजस्थान
(घ) आंध प्रदेश
उत्तर :
(क) महाराष्ट्र

प्रश्न 31.
इनमें किससे प्रदूषण नहीं होता है :-
(क) कोयला
(ख) पेट्रोलियम
(ग) आणविक
(घ) पवन ऊर्जा
उत्तर :
(घ) पवन ऊर्जा

प्रश्न 32.
संरक्षण आवश्यक है :-
(क) सौर शक्ति
(ख) भूतापीय
(ग) पवन शक्ति
(घ) पेट्रोलियम
उत्तर :
(घ) पेट्रोलियम

प्रश्न 33.
नागार्जुन सागर योजना है –
(क) ताप शष्ति योजना
(ख) आणविक शक्ति योजना
(ग) पवन विद्युत योजना
(घ) कुछ नहीं
उत्तर :
(ग) पवन विद्युत योजना

प्रश्न 34.
जल विद्युत शक्ति का अधिक विकास हुआ है –
(क) दक्षिण भारत में
(ख) उत्तर भारत में
(ग) पूर्वी भारत में
(घ) पश्चिम भारत में
उत्तर :
(ग) पूर्वी भारत में

प्रश्न 35.
भारत सबसे अधिक लौह-अयस्क निर्यात करता है :-
(क) जापान को
(ख) इटली को
(ग) जर्मनी को
(घ) पौलैण्ड को
उत्तर :
(क) जापान को

प्रश्न 36.
विश्व की 50 प्रतिशत शक्ति प्राप्त होती है :-
(क) कोयला से
(ख) पेट्रोलियम से
(ग) जल विद्युत्र से
(घ) भू-ताप से
उत्तर :
(क) कोयला से

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 37.
भारत की सबसे बड़ी कोयले की खान है :-
(क) रानीगंज कोयला खान
(ख) झरिया कोयला खान
(ग) तालचर कोयला खान
(घ) सिंगरौली कोयला खान
उत्तर :
(क) रानीगंज कोयला खान

प्रश्न 38.
भारत में कोयले का सर्वाधिक खपत है :-
(क) ताप विद्युत उत्पादन में
(ख) लौह-इस्पात उद्योग में
(ग) सीमेण्ट उद्योग में
(घ) घरेलू ईषन के रूप में
उत्तर :
(क) ताप विद्युत उत्पादन में

प्रश्न 39.
भारत का सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र है :-
(क) असम तेल क्षेत्र
(ख) गुजरात तेल क्षेत्र
(ग) मुम्बई हाई क्षेत्र
(घ) गंगा बेसिन
उत्तर :
(क) असम तेल क्षेत्र

प्रश्न 40.
भारत द्वारा किये जाने वाले कुल आयात खनिज तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों का हिस्सा है:-
(क) 28 प्रतिशत
(ख) 40 प्रतिशत
(ग) 50 प्रतिशत
(घ) 108 प्रतिशत
उत्तर :
(क) 28 प्रतिशत

प्रश्न 41.
गैर-परम्परागत शक्ति का साधन है :-
(क) पेट्रोलियम
(ख) कोयला
(ग) परमाणु ऊर्जा
(घ) सौर उर्जा
उत्तर :
(घ) सौर उर्जा

प्रश्न 42.
पश्चिम बंगाल का एक ताप ऊर्जा केन्द्र है :-
(क) कोलाघाट
(ख) रेनू सागर
(ग) तालचर
(घ) कोर्बा
उत्तर :
(क) कोलाघाट

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 43.
भारत का पहला परमाणु संयंत्र लगाया गया :-
(क) नावेली में
(ख) तारापुर में
(ग) कोटा में
(घ) नरोरा में
उत्तर :
(ख) तारापुर

प्रश्न 44.
महाराष्ट्र का तारापुर प्रसिद्ध है –
(a) परमाणु विद्युत
(b) जल विद्युत
(c) ताप विद्युत
(d) खनिज तेल शोधन के लिए
उत्तर :
(a) परमाणु विद्युत

प्रश्न 45.
कोयले से बनाई जाने वाली विद्युत को कहा जाता है –
(a) ताप विद्युत
(b) जल विद्युत
(c) परमाणु विद्युत
(d) सभी
उत्तर :
(a) ताप्र विद्युत

प्रश्न 46.
यूरेनियम से जो विद्युत उत्पन्न की जाती है, वह है –
(a) ताप विद्युत
(b) जल विद्युत
(c) परमाणु विद्युत
(d) भूतापीय ऊर्जा
उत्तर :
(c) परमाणु विद्युत

प्रश्न 47.
बरौनी में है –
(a) ताप विद्युत का केन्द्र
(b) जल विद्युत का केन्द्र
(c) परमाणु विद्युत का केन्द्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) ताप विद्युत का केन्द्र

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 48.
खनिज लोहा में सर्वश्रेष्ठ लौह-अयस्क है :-
(क) हैमेटाइट
(ख) मैग्नेटाइट
(ग) लिमोनाइट
(घ) सिडेराइट
उत्तर :
(ख) मैग्नेटाइट

प्रश्न 49.
हैमेटाइट लौह-अयस्क में लौहांश की मात्रा होता है :-
(क) 50%
(ख) 60%
(ग) 70%
(घ) 80%
उत्तर :
(ग) 70%

प्रश्न 50.
कार्बन की मात्रा सबसे अधिक किस किस्म के कोयले में पाया जाता है?
(क) एन्थासाइड
(ख) बिटूमिनस
(ग) लिग्नाइट
(घ) पीट
उत्तर :
(क) एन्थ्रासाइड

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. _________ एक नवीकरण संसाधन है।
उत्तर : वन

2. अन्तर्राष्ट्रीय सहमति के बिना उपयोग न किए जाने वाले संसाधनों को _________ कहते हैं।
उत्तर : अन्तराष्ट्रीय संसाधन

3. गांधीजी संसाधनों के_________ पर जोर देते थे।
उत्तर : संरक्षण

4. यूरेनियम एक _________ संसाथन है।
उत्तर : अद्वितीय।

5. संसाधनों का उपयोग _________ तथा _________ ढंग से किया जाना चाहिए।
उत्तर : विबेकपूर्ण, सुव्यवस्थित।

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

6. महाराष्ट्र का तारापुर शक्ति _________ उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : परमाणु।

7. राजस्थान का _________ परमाणु विद्युत उत्पादन केन्द्र है।
उत्तर : रावतभाटा।

8. भारत में विश्व का लगभग _________ प्रतिशत लौह अयस्क संचित है।
उत्तर : 20

9. कुडनकूलम विद्युत केन्द्र _________ राज्य में है।
उत्तर : तमिलनाडु।

10. भारत विश्व का लौह _________ अयस्क निर्यात देश है।
उत्तर : चौथा।

11. लौह अयस्क के समस्त विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा _________ प्रतिशत है।
उत्तर : 9.9

12. भारत में कुल _________ तेल शोधन कारखाने हैं।
उत्तर : 25

13. पश्चिम बंगाल का एकमात्र तेलशोधन कारखाना _________ में स्थित है।
उत्तर : हल्दिया।

14. _________ सर्वश्रेष्ठ कोयला है।
उत्तर : एन्थासाइट।

15. भारत विश्व का _________ सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है।
उत्तर : पाँचवा।

16. _________ को तरल सोना कहते हैं।
उत्तर : पेट्रोलियम।

17. भूतापीय ऊर्जा _________ ऊर्जा स्रोत है।
उत्तर : प्रकृति।

18. पश्चिम बंगाल के बंडेल में _________ विद्युत केन्द्र है।
उत्तर : थर्मल पावर स्टेशन।

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

19. लौह अयस्क के उत्पादन में  _________  राज्य भारत का में पहला स्थान है।
उत्तर : कर्नाटक।

20. _________ सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है।
उत्तर : छत्तीसगढ

21. भारत में सौर ऊर्जा का पहला प्लाण्ट_________ के निकट गाँव में स्थापित किया गया।
उत्तर : गुजरात में।

22. पृथ्वी पर मिलने वाले गर्म स्रोतों से _________ऊर्जा प्राप्त होती हैं।
उत्तर : भू-तापीय।

23. लिग्नाइट एवं पीट कायेले के उत्पादन है। _________में राज्य का प्रथम स्थान है।
उत्तर : तमिनाडु।

24. सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य _________ है।
उत्तर : झारखण्ड

25. ब्रह्मपुत्र और सूरमाघाटी तेल क्षेत्र _________ राज्य में स्थित हैं।
उत्तर : असम

26. भारत खनिज तेल का _________ करता है।
उत्तर : आयात

27. जल विद्युत शक्ति _________ उर्जा संसाधन है।
उत्तर : परम्परागत

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

28. नागार्जुन सागर जल विद्युत योजना _________ की योजना है।
उत्तर : बहुउद्देशीय नदी घाटी

29. तारापुर_________ शक्ति का केन्द्र है।
उत्तर : आणविक

30. आज _________ विश्व में सबसे उपयोगी धातु है।
उत्तर : लोहा

31. पोल्लिरासाल विद्युत केन्द्र _________ में है।
उत्तर : केरल

32. शिवसमुद्रम _________ में है।
उत्तर : कर्नाटक

33. लोकटँक विद्युत केन्द्र _________ में है।
उत्तर : मणिपुर

34. गांधी सागर _________ में है।
उत्तर : मध्य प्रदेश

35. कर्णपुर एक _________ केन्द्र है।
उत्तर : परमाणु विद्युत

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

36. कोयला एक _________ संसाधन है।
उत्तर : संचित

37. जल, सूर्य ऊर्जा, पवन ऊर्जा _________ संसाधन है।
उत्तर : प्रवाहमान

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. सागर सम्राट का उपयोग बम्बई हाई में समुद्र तल से खनिज तेल को निकालने के लिए किया जाता है।
उत्तर : True

2. कोयली नेपाल का सबसे बड़ा तेलशोधन कारखाना है।
उत्तर : False

3. कोयला नवीकरण योग्य संसाधन है
उत्तर : False

4. देश में पाये जाने वाले सभी संसाधन राष्ट्रीय संसाधन कहे जाते हैं।
उत्तर : False

5. कोयला एक संचित संसाधन है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

6. कृषि योग्य भूमि सर्वसुलभ संसाधन है।
उत्तर : False

7. कलयक्कम जल विद्युत उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर : False

8. तारापुर परमाणु विद्युत उत्पादन केन्द्र है।
उत्तर : True

9. भारत से अधिकांश मैग्नेटाइट प्रकार के लौह अयस्क का निर्यात कर दिया जाता है।
उत्तर : True

10. भारत में लोह -अयस्क का अनुमानित भण्डार 3200 करोड़ टन है।
उत्तर : True

11. सागरीय क्षेत्र में सीमा से सटा 19.2 कि०मी० का क्षेत्र राष्ट्रीय संसाधन के अन्तर्गत आता है।
उत्तर : True

12. कर्नाटक सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

13. कोयला उत्पादन की दृष्टि से पश्चिम बंगाल का भारत में पहला स्थान है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

14. झरिया कोयला क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा स्टीम कोयला क्षेत्र है।
उत्तर : True

15. कुडनकुलम महाराष्ट्र का परमाणु विद्युत प्लाण्ट है।
उत्तर : False

16. सौर ऊर्जा नवीनतम ऊर्जा का प्रवाहमान संसाधन है।
उत्तर : True

17. जल विद्युत ऊर्जा का अनवीकरण संसाधन है।
उत्तर : False

18. पेट्रोलियम ऊर्जा का गैरपम्परागत संसाधन है।
उत्तर : False

19. भूतापीय ऊर्जा, भूगर्भ में होने वाली प्राकृतिक प्रक्रमों से पैदा होती है।
उत्तर : True

20. कोयला एक घात्विक खनिज है।
उत्तर : False

21. लौह अयस्क आधुनिक सभ्यता के विकास की रीढ़ है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

22. भारत लौह अयस्क का आयात करता है।
उत्तर : True

23. भारत में कोकिंग कोयले का अभाव है।
उत्तर : True

24. भारत का सबसे बड़ा खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र मुम्बई हाई है।
उत्तर : True

25. सौर ऊर्जा परम्परागत ऊर्जा संसाधन है।
उत्तर : False

26. कलपक्कम अणु शक्ति केन्द्र चेन्नई के पास स्थित हैं।
उत्तर : True

27. भारत को विश्व में पवन महाशक्ति का दर्जा प्राप्त है।
उत्तर : True

28. भारत कोकिंग कोल का निर्यात करता है।
उत्तर : True

29. गुजरात तेल क्षेत्र से देश का लगभग 17.9 प्रतिशत खनिज तेल प्राप्त होता है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

30. पश्चिम बंगाल का सुन्दरवन डेल्टाई क्षेत्र खनिज तेल की सम्भावना वाला क्षेत्र है।
उत्तर : True

31. जलविद्युत शक्ति का अक्षय साधन है।
उत्तर : True

32. ताप विद्युत के उत्पादन में भारत का विश्व में पाँचवा स्थान है।
उत्तर : False

33. भारत में पवन ऊर्जा की क्षमता 45000 मेगावाट आँकी गयी है।
उत्तर : True

34. जल विद्युत को सफेद कोयला कहा जाता है।
उत्तर : False

35. कोयले एवं डीजल से जल विद्युत बनाया जाता है।
उत्तर : False

36. दक्षिण भारत में जल विद्युत का उत्पादन उत्तरी भारत की तुलना में अधिक होता है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

37. जल विद्युत एक नवीकरणीय ऊर्जा का सस्ता साधन है।
उत्तर : True

38. भारत में सबसे अधिक बिजली उत्पादन में ताप विद्युत की मात्रा सबसे अधिक है।
उत्तर : True

39. उत्तर प्रदेश के नरोरा में परमाणु विद्युत उत्पादन केन्द्र है।
उत्तर : True

40. गोवा सबसे बड़ा खनिज तेल उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

41. छत्तीसगढ़ द्वितीय सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है।
उत्तर : True

42. आंधप्रदेश सबसे अधिक अभ्रक उत्पादक राज्य है।
उत्तर : False

43. श्रीसलेम एक जल विद्युत उत्पादक केन्द्र है।
उत्तर : True

44. जल विद्युत प्रदूषण मुक्त है।
उत्तर : True

45. भारत के मुख्य विद्युत केन्द्र ताप विद्युत केन्द्र है।
उत्तर : True

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) अजैव संसाधन है (क) मत्स्य
(ii) जैव संसाधन है (ख) संभावी संसाधन
(iii) व्यक्तिगत संसाधन है (ग) खनिज
(iv) वे संसाधन जिनका उपयोग नहीं होता (घ) व्यक्ति का अपना मकान

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) अजैव संसाधन है (ग) खनिज
(ii) जैव संसाधन है (क) मत्स्य
(iii) व्यक्तिगत संसाधन है (घ) व्यक्ति का अपना मकान
(iv) वे संसाधन जिनका उपयोग नहीं होता (ख) संभावी संसाधन

WBBSE Class 9 Geography MCQ Questions Chapter 7 भारत के संसाधन

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) लौह अयस्क उत्पादक राज्य (क) तमिलनाडु
(ii) टर्शीयर कोयला उत्पादक राज्य (ख) भू-तापीय ऊर्जा
(iii) खनिज तेल उत्पादक राज्य (ग) छत्तीसगढ़, कर्नाटक
(iv) पृथ्वी के आन्तरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न ऊर्जा (घ) महाराष्ट्र, असम

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) लौह अयस्क उत्पादक राज्य (ग) छत्तीसगढ़, कर्नाटक
(ii) टर्शीयर कोयला उत्पादक राज्य (क) तमिलनाडु
(iii) खनिज तेल उत्पादक राज्य (घ) महाराष्ट्र, असम
(iv) पृथ्वी के आन्तरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न ऊर्जा (ख) भू-तापीय ऊर्जा

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) प्राकृतिक गैस (क) एशिया का सबसे बड़ा पवर्न ऊर्जा केन्द्र
(ii) प्राकृतिक वनस्पति (ख) भारत का सबसे बड़ा तेलशोधक कारखाना
(iii) सिडेराइट (ग) नवीकरणीय संसाधन
(iv) कोयली (घ) अनवीकरणीय संसाधन
(v) माण्डवी (ङ) निम्न कोटि का लौह अयस्क

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) प्राकृतिक गैस (घ) अनवीकरणीय संसाधन
(ii) प्राकृतिक वनस्पति (ग) नवीकरणीय संसाधन
(iii) सिडेराइट (ङ) निम्न कोटि का लौह अयस्क
(iv) कोयली (ख) भारत का सबसे बड़ा तेलशोधक कारखाना
(v) माण्डवी (क) एशिया का सबसे बड़ा पवर्न ऊर्जा केन्द्र