WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 Question Answer – पानी की कहानी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘पानी की कहानी’ पाठ किस शैली में लिखा गया है?
(क) वर्णनात्मक शैली
(ख) पत्र शैली
(ग) आत्मकथात्मक
(घ) डायरी शैली
उत्तर :
(ग) आत्मकथात्मक

प्रश्न 2.
ओस कहाँ से आई थी?
(क) घास से
(ख) पीपल के पेड़ से
(ग) आम के पेड़ से
(घ) बेर के पेड़ से
उत्तर :
(घ) बेर के पेड़ से

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प्रश्न 3.
किसके लिए ओस के असंख्य बंधुओं ने अपने प्राण नाश किए?
(क) मनुष्य
(ख) पक्षी
(ग) जीव
(घ) पेड़
उत्तर :
(घ) पेड़

प्रश्न 4.
ओस के पुरखे कौन-कौन से गैस हैं?
(क) नाइट्रोजन ओषजन
(ख) हद्रजन कार्क्म डाईआक्साइड
(ग) हद्रजन – ओषजन
(घ) हद्रजन नाइट्रोजन
उत्तर :
(ग) हद्रजन ओषजन।

प्रश्न 5.
पृथ्वी प्रारंभ में कैसा गोला थी?
(क) लोहे का
(ख) ताँबे का
(ग) मिट्टी का
(घ) आग का
उत्तर :
(घ) आग का।

प्रश्न 6.
रामचंद्र तिवारी की मृत्यु कब हुई ?
(क) 4 जनवरी 2009 ई०
(ख) 4 फरवरी 2009 ई०
(ग) 4 मार्च 2009 ई०
(घ) 4 अप्रैल 2009 ई०
उत्तर :
(क) 4 जनवरी 2009 ई०

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प्रश्न 7.
पृथ्वी प्रारंभ में कैसा गोला थी ?
(क) लोहे का
(ख) ताँबे का
(ग) मिट्टी का
(घ) आग का
उत्तर :
(घ) आग का

प्रश्न 8.
ओस की बूँद के अनुसार जड़ों के रोएँ कैसे होते हैं ?
(क) दयालु
(ख) प्रेमी
(ग) निर्द्यी
(घ) कोमल
उत्तर :
(ग) निर्दयी

प्रश्न 9.
बूँद को उड़ने की शक्ति कौन देता है ?
(क) चंद्रमा
(ख) तारें
(ग) ग्रह
(घ) सूर्य
उत्तर :
(घ) सूर्य

प्रश्न 10.
बूँद भाग्य पर भरोसा करके कहाँ सिकुड़ी रही ?
(क) जड़ में
(ख) तना में
(ग) पत्ते में
(घ) धरती पर
उत्तर :
(ग) पत्ते में

प्रश्न 11.
अपने जन्म के आरंभिक काल में बूँद किस रूप में घूमा करती थी ?
(क) जल के रूप में
(ख) भाप के रूप में
(ग) बर्फ के रूप में
(घ) ओस के रूप में
उत्तर :
(घ) ओस के रूप में

प्रश्न 12.
बूँद को आरंभ में समुद्र की कौन-सी चीज अच्छी नहीं लगी ?
(क) विस्तार
(ख) गहराई
(ग) खारापन
(घ) धाराएँ
उत्तर :
(ग) खारापन

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प्रश्न 13.
ऊपर आकाश में पहुँचकर बूँद को किस पुरानी सहेली के दर्शन हुए ?
(क) तूफान
(ख) आँधी
(ग) बाढ़
(घ) ज्वार-भाटा
उत्तर :
(ख) आँधी

प्रश्न 14.
कौन धीरे-धीरे आँखों से ओझल हो गई ?
(क) लेखक
(क) बूँद
(ग) सूर्य
(घ) चन्द्रमा
उत्तर :
(क) बूँद

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
क्रोध और घृणा से कौन काँप उठी?
उत्तर :
ओस क्रोध और घृणा से काँप उठी।

प्रश्न 2.
किसके शरीर से चमक निकलती थी?
उत्तर :
प्रकाश पिंड के शरीर से चमक निकलती थी।

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प्रश्न 3.
इनका शरीर कब ओषजन और हद्रजन में विभाजित हो गया?
उत्तर :
उनका शरीर अरबों वर्ष पहले ओषजन और हद्रजन में विभाजित हो गया।

प्रश्न 4.
किस कारण वह बूँद बनकर नीचे कूद पड़ी?
उत्तर :
बहुत से भाप जल कणों के मिलने के कारण उसका शरीर भारी हो चला और नीचे झुक आया और एक बूँद ननकर नीचे कूद पड़ी।

प्रश्न 5.
पहाड़ों के पत्थरों का रेत रूप कैसे बनता है?
उत्तर :
बूँदों के प्रहार से पहाड़ों के पत्थर टूटकर खंड-खंड हो गए। इस प्रकार वे रेत के रूप में बन गए।

प्रश्न 6.
रामचंद्र तिवारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामघंद्र तिवारी का जन्म 4 जून, 1924 ई० को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के कुकुढ़ा नामक ग्राम में हुआ था।

प्रश्न 7.
ओस को लेखक के किस भाव से दु:ख हुआ ?
उत्तर :
ओस को लेखक के अविश्वास भाव से दु:ख हुआ।

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प्रश्न 8.
बूँद का शरीर कब ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित हो गया ?
उत्तर :
एक ऊँचे तापमान वाले स्थान पर जाने के बाद बूँद का शरीर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित हो गया।

प्रश्न 9.
बूँद को कब बाहर फेंक दिया गया ?
उत्तर :
बूँद जब ज्वालामुखी के निचले हिस्से में पहुँची, तब लावा के साथ उसे भी बाहर फेंक दिया गया।

प्रश्न 10.
बूँद नल से कैसे निकलकर भागी ?
उत्तर :
नल के पाइप में घूमते हुए बूँद एक ऐसी जगह पहुँची जहाँ नल टूटा हुआ था, वहीं से निकलकर वह भागी।

प्रश्न 11.
समुद्र के तल में कैसे पौधें उगे हुए हैं ?
उत्तर :
समुद्र की गहरी तल के नीचे छोटे ठिंगले मोटे पत्तों वाले पेड़ उगे हुए हैं।

प्रश्न 12.
बूँद ऊँची शिखर पर से कहाँ गिरें ?
उत्तर :
बूँद ऊँची शिखर पर से कूद कर एक चट्टान पर गिरी।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार मूलक प्रश्न
(क) ‘क्रोध और घुणा से उसका शरीर काँप उठा।’
1. यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत हैं? इसके रचनाकार का नाम लिखिए।
2. इसका पंक्ति का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
3. किसका शरीर काँप उठा और क्यों?
उत्तर :
1. प्रस्तुत पंक्ति ‘पानी की कहानी’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार रामचंद्र तिवारी है।
2. पेड़ जितना बड़ा ऊपर दिखाई देता है, पृथ्वी के भीतर भी उतनी बड़ी उसका जड़ रहती है। उसकी जड़े और जड़ों के रोए अनगिनत जल कणों को सोख लेतें हैं। इस प्रसंग में यह पंक्ति कही गई है।
3. जल की बूँद शरीर के क्रोध और घृणा से काँप उठी। बूँद पेड़ के पास की भूमि में बहुत दिनों तक इधर-उधार घूमती रही, एकाएक पकड़ी गई, पेंड़ की जड़े तथा उनके रोएँ असंख्य जल कणों को बलपूर्वक पृथ्वी से खींच लेती हैं। कुछ को पेड़ बिल्कुल खा जाते है। अधिकांश का सब कुछ छीनकर उन्हें बाहर निकाल दूते हैं। यह देख कर बूँद का शरीर काँप उठा।

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बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
पानी का जन्म कैसे हुआ?
उत्तर :
हद्रजन और ओषजन गैसों से उत्पन्न भाप पृथ्वी के चारों ओर घूमने लगी। फिर वह ठोस बर्फ के रूप में बदल गई। फिर नीचे दबे हुए ठोस बर्फ दबकर पानी के रूप में परिवर्तित हो गई।

प्रश्न 2.
प्रारंभ में पानी के शरीर का रूप कैसा था और क्रमशः कैसा हो गया?
उत्तर :
प्रारंभ में पानी का शरीर हद्रजन और ओषजन गैसों के रूप में था। बाद में उन गैसों का अस्तित्व खत्म हो गया। फिर उनसे बनी ओस बूँदें, भाप बन गई। भाप पृथ्वी के चारों ओर घूमती-फिरती थी। उसके बाद वे ठोस बर्फ के रूप में बन गई। ठोस बर्फ ही पिघल कर पानी बन गए।

प्रश्न 3.
समुद्र के भीतर उसने क्या-क्या देखा?
उत्तर :
समुद्र के भीतर उसने धीरे-धीरे रेंगनेवाले घों, जालीदार मछालयाँ, कई-कई मनभारी कछुवे और हाथों वाली मछलियाँ देखा। एक मछली के आठ हाथ थे। उनसे वह अपने शिकार पकड़ लेती थी। समुद्र की गहराई में जाकर एक सुंदर मछली देखा, जिसके शरीर से एक प्रकार की चमक निकलती थी। समुद्र की गहरी तह में छोटे-ठिंगने मोटे पत्ते वाले पेड़, पहाड़ियों, घाटियों, गुफाओं में अनेक जीव-जन्तु को देखा।

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प्रश्न 4.
ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के फट जाने से उसमें धुआँ, रेत, पिघली, धातुएँ तथा लपटें निकलती हैं। इसे ज्वालामुखी कहते हैं।

प्रश्न 5.
पहाड़ से गिर सरिता बन वह क्या करती है और कहाँ पहुँचती है?,
उत्तर :
पहाड़ से गिर सरिता बन वह कभी भूमि को काटती, कभी पेड़ों, की खोखला कर उन्हें गिरा देती है। बहते-बहते वह एक दिन एक नगर के पास पहुँचती है।

भाषा बोध :

1. संस्कृत के वे शब्द जिनका हिन्दी में वैसे ही प्रयोग किया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे-दुर्ध, दधि, अग्न, वर्षा आदि।
संस्कृत के जिन शब्दों को हिन्दी में बदलकर प्रयोग किया जाता है, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। जैसे- दूध, दही, आग, बारिश।

निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम शब्द और तद्भव शब्द को अलग कीजिए-
मोती, उज्ज्वल, हाथ, कार्य, दृश्य, छेद, क्षण, पत्थर, मुँह, कार्य, धुँआ, पुरखे, भूमि, प्रत्यक्ष, मनुष्य।
तत्सम शब्द –  तद्भव शब्द

  • उज्ज्यल – मोती
  • कार्य – हाथ
  • दृश्य – छेद
  • क्षण – पत्थर
  • कार्य – मुंह
  • भूमि – धुआँ
  • प्रत्यक्ष – पुरखे
    मनुष्य

2. जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं उन्हें विशेषण कहते हैं। जैसे- दयालु, भारतीय, सुन्दर आदि।
निम्नलिखित शब्दों के विशेषण रूप बनाइए-

  • अंगल – जंगली
  • प्रकृति – प्राकृतिक
  • नगर – नागरिक
  • दर्शन – दर्शनीय, दार्शनिक
  • श्रद्धा – श्रद्यालु
  • साहस – साहसी
  • अनुभव – अनुभवी
  • शक्ति – शक्तिमान, शक्तिशाली

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3. निम्नलिखित शब्द युग्मों को वाक्य में प्रयोग कीजिए –

  • इधर-उधर – इधर-उधर देखकर चलना चाहिए।
  • उथल-पुथल – वर्षा के कारण उथल-पुथल मच गई।
  • बंधु-बांधवों – मैने जन्म-दिन पर बंधु बाँधनों को निमंत्रित किया।
  • जैसे-तैसे – जैसे-तैसे उसने अपना काम सम्पन्न कर लिया।
  • चहल-पहल – मेले में बड़ी चहल-पहल थी।
  • आस-पास – हमारे घर के आस-पास वृक्षों की छाया बनी रहती है।
  • मैली-कुचैली – भिखारिन मैली-कुचैली धोती पहन रखी है।
  • लाल-पीला – मुझे देखते ही वह लाल-पोला हो गया।
  • उछलने-कूदने – बच्चों को उछलने-कूदने में मजा आता है।

4. निम्नलिखित शब्दों के अंग्रेजी के समान अर्थ वाले शब्द लिखिए –

  • हद्रजन – हाइड्रोजन
  • ओषजन – ऑक्सीजन
  • रासायनिक क्रिया – कैमिकल रिएक्शन
  • तापक्रम – टेम्परेचर
  • दुर्घटना – एक्सीडेंट
  • धुन्यवाद – थैंक्स

WBBSE Class 8 Hindi पानी की कहानी Summary

लेखक-परिचय :

आचार्य रामचंद्र तिवारी का जन्म सन् 1924 ई० में वाराणसी जनपद के कुकुढ़ा ग्राम में हुआ था। हिन्दी साहित्य में ये आलोचक के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी महत्वपूर्ण रचनाएँ- हिन्दी का गद्य साहित्य, मध्ययुगीय काल साधना, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, कबीर मीमांसा, आलोचना का दायित्व आदि है। सन् 2009 में इनका देहावसान हो गया।

सारांश :

एक दिन लेखक के हाथ पर मोती-सी एक बूँद आ पड़ी। वह बूँद लेखक को अपनी कहानी सुनाने लगी। बूँद कहने लगी कि में बेर के पेड़ से आई हूँ। सामने का पेड़ का ऊपरी हिस्सा जितना बड़ा है पृथ्वी के नीचे उसकी जड़ भी उतनी बड़ी है। हमारे असंख्य बन्धुओं ने इसे इतना बड़ा बनाने में अपने प्राण नाश किए हैं। पेड़ के रोएँ असंख्य जल कणों को खींचकर खा जाते हैं, कुछ को बाहर निकाल देते हैं। लगभग तीन दिन तक मैं एक कोठरी में साँसत भोगती रही। फिर पत्तों के छेदों से होकर भागी। रक्षा पाने के लिए तुम्हारे हाथ पर कूद पड़ी। सूर्य के निकलने पर उड़ने को शक्ति मिल जाएगी। मेरा जीवन विभिन्न घटनाओं से परिपूर्ण है। उसकी कहानी मैं तुम्हें सुना रहा हूँ।

बहुत दिन पहले मेरे पुरखे हद्रजन और ओषजन नामक दो गैसें सूर्य मंडल में लपटों के रूप में विद्धमान थीं। एक दिन बाह्मण्ड के उथल पुथल होने से अनेक ग्रह और उपग्रह बन गए। एक दिन एक प्रचंड प्रकाश पिंड सूर्य की ओर बढ़ने लगा। उसकी आकर्षक शक्ति से सूर्य का एक भाग टूट कर फिर से कई टुकड़ों में टूट गया। उन्हीं में से एक टुकड़ा हमारी पृथ्वी है। यह प्रारंभ में एक बड़ा आग का गोला थी। अरबों वर्ष पहले हद्रजन और ओषजन के रासायनिक क्रिया के कारण मैं पानी बन गई। मेरा शरीर पहले भाप रूप में था। बाद में मैं ठोस बर्फ के रूप में परिवर्तित हो गई।

भार के कारण मेरे कुछ भाई पानी हो गए। कई मास मैं समुद्र में घूमती रही। एक दिन गर्म धारा से पिघल कर मैं पानी बनकर समुद्र में मिल गई। समुद्र का दृश्य अद्भुत था। समुद्र में दूसरे जीवों की चहल पहल है। उसमें निरा नमक भरा है। एक दिन समुद्र की गहराई में जाकर मैने विचित्र विचित्र जीव देखें। धीरे-धीरे रेंगने वाले घोंघे, जालीदार, मछलियाँ, कई कई मन भांरी कछुये, और हाथों वाली मछलियाँ देखी। एक लंबी मछली के आठ हाथ थे।

और गहराई में जाने पर अँधकार में एक सुन्दर मछली दिखलाई पड़ी, जिसके शरीर से चमक निकल रही थी। छोटी-छोटी मछलियों को वह खा जाती थी। नीचे समुद्र की गहरी तल में जंगल में छोटे ठिंगले मोटे पत्तों वाले पेड़ उगे हुए हैं। वहाँ पर पहाड़ियों घाटियों की गुफाओं में जीव जन्तु रहते हैं। फिर मैं चट्टान में घुल गई। एक जगह ताप क्रम बहुत ऊँचा था। एक जोर के धक्के से ऊँचे आकाश में उड़ चलो। देखा कि पृथ्वी से धुँआ, रेत, पिघली, धातुएँ तथा लपटें निकल रही है। इसे ज्वाला मुखी कहते हैं।

बहुत से भाप जल कणों के मिलने के कारण भारी होकर एक दिन बूँद बनकर नीचे कूद पड़ी। ऊँची शिखर पर से कूद कर एक चट्टान पर गिरी। हमारे प्रहार से टूटकर खंड-खंड होकर पत्थर रेत बन गया। फिर समतल भूमि देखने की इच्छा से मैं एक छोटी धारा सरिता में मिल गई। नदी के तट पर एक मीनार से निकलनेवाली हवा को देखने के लिए मैं आगे बढ़ी और साथियों के साथ एक मोटे नल में खींच ली गई। एकाएक टूटे नल में पहुँचकर उसमें से भाग निकली। पृथ्वी के अंदर घूमते-घूमते इस बेर के पेड़ के पास पहुँची। सूर्य के निकलते ही मैं लेखक के पास न रह सकी। इस प्रकार ओस की बूँद धीरे-धीरे आँखों से ओझल हो गईई।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

शब्दार्थ :

  • टटोलना – जाँच करना, परखना
  • साँसत – कठिनाई में पड़ना
  • दीर्घ जीवी – लंबे समय तक जीनेवाला
  • ज्ञान – जानकारी
  • वार्तालाप – बातचीत
  • किलकारी – हर्षध्वनि
  • खंड-खंड – टुकड़े-टुकड़े
  • रेत – धूल
  • विद्यमान – मौजूद
  • अस्तिव – विद्यमानता, सत्ता
  • ओझल-लुप्त, आँखों से परे
  • बहुतायत – अधिक
  • असहय – न सहने योग्य
  • अबाध – बाधा रहित, निर्विघ्न
  • किलोले- आनन्दं लहर
  • दृश्य – नजारा
  • अगुवा – आगे चलने वाला
  • शिखर – चोटी
  • प्रहार – आघात, हनन
  • वर्णनातीत – जिसका वर्णन न किया जा सके

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 Question Answer – शाप मुक्ति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
शाप मुक्ति किस विद्या की रचना है?
(क) क्रविता
(ख) कहानी
(ग) निबंध
(घ) नाटक
उत्तर :
(ख) कहानी

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात के बचपन का क्या नाम था?
(क) चिंदू
(ख) बब्बू
(ग) मंदू
(घ) ढब्बू
उत्तर :
(ग) मंटू

प्रश्न 3.
डॉ० प्रभात किसके डॉक्टर थे?
(क) दाँतो के
(ख) हदय के
(ग) आँखों के
(घ) हड्डी के
उत्तर :
(ग) आँखों के

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 4.
डॉ प्रभात के पास बब्दू किसका इलाज करने आया था?
(क) अपनी नानी का
(ख) अपनी दादी का
(ग) अपनी माँ का
(घ) अपनी बहन का
उत्तर :
(ख) अपनी दादी का

प्रश्न 5.
दादी किसके समझाने पर इलाज कराने को तैयार हो गई?
(क) बब्बू
(ख) डॉ० प्रभात
(ग) मंटू
(घ) परिवार जन
उत्तर :
(ख) डॉ० प्रभात।

प्रश्न 6.
शाप-मुक्ति किसकी रचना है ?
(क) डॉं० रमेश उपाध्याय
(ख) रमेशचंद्र शाह
(ग) रामचंद्र शुक्ल
(घ) रामचंद्र तिवारी
उत्तर :
(क) डॉ० रमेश उपाध्याय

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 7.
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1 मार्च, 1942 ई०
(ख) 1 अप्रैल, 1942 ई०
(ग) 1 मई, 1942 ई०
(घ) 1 जून, 1942 ई०
उत्तर :
(क) 1 मार्च, 1942 ई०

प्रश्न 8.
मंदू के पिता पेशे से क्या थे ?
(क) डॉक्टर
(ख) वकील
(ग) इंजीनियर
(घ) शिक्षक
उत्तर :
(ख) वकील

प्रश्न 9.
मंटू ने पिल्लों की आँखों में क्या डाला ?
(क) गाय का दूध
(ख) सरसों का तेल
(ग) आक का दूध
(घ) तालाब का पानी
उत्तर :
(ग) आक का दूध

प्रश्न 10.
मंदू ने कितने पिल्लों की आँखों को खराब किया ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ग) तीन

प्रश्न 12.
मंटू और बब्बू में क्या संबंध था ?
(क) भाई
(ख) मित्र
(ग) रिश्तेदार
(घ) अजनबी
उत्तर :
(ख) मित्र

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प्रश्न 13.
आक के दूध से होनेवाले नुकसान की जानकारी मंदू को किसने दी ?
(क) शिक्षक ने
(ख) दादी ने
(ग) डॉक्टर ने
(घ) मंटू को खुद पता था
उत्तर :
(क) शिक्षक ने

प्रश्न 14.
बड़ा होकरें मंटू क्या बना ?
(क) नेत्र चिकित्सक
(ख) इन्जीनीयर
(ग) पुलीस
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) नेत्र चिकित्सक

प्रश्न 15.
कौन डॉ० प्रभात से इलाज करवाने से इन्कार कर दिया।
(क) डॉ० रमेश
(ख) दादी
(ग) पड़ोसी
(घ) बब्बू
उत्तर :
(ख) दादी

प्रश्न 16.
डॉ० प्रभात ने अपने गलती के लिए किससे माफी माँगी ?
(क) बब्यू
(ख) चिंदू
(ग) दादी
(घ) लेखक
उत्तर :
(ग) दादी

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
डॉ० प्रभात के पास दादी क्यों गई?
उत्तर :
दादी आँखों का इलाज कराने के लिए डॉ० प्रभात के पास गई।

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प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात किस प्रकार के डॉक्टर थे?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक थे। दूर-दूर से लोग उनके पास अपनी आँखों का इलाज कराने आते थे। वे देश के माने हुए डॉक्टर थे।

प्रश्न 3.
डॉ० प्रभात कहाँ के रहने वाले थे?
उत्तर :
डा० प्रभात इलाहाबाद के रहने वाले थे।

प्रश्न 4.
मंदू कौन था?
उत्तर :
डॉ० प्रभात का ही बचपन का नाम मंदू था।

प्रश्न 5.
दादी डॉक्टर के पास क्यों नहीं जाना चाहती थी?
उत्तर :
डॉक्टर अपने बचपन में तीन पिल्लों की आँखों फोड़ दी थी। दादी को यह घटना याद थी। उस समय दादी उन्हें शाप भी दी थी। बचपन की इसी घटना को लेकर दादी उनके पास नहीं जाना चाहती थी।

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प्रश्न 6.
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
आक के दूध का क्या अवगुण है ?
उत्तर :
यदि आक का दूध आँखों में पड़ जाय तो आँखें अंधी हो जायेंगी।

प्रश्न 8.
दादी ने मंटू को क्या शाप दिया था ?
उत्तर :
जिस तरह मंदू ने पिल्लों की आँखें फोड़ी थी, उसी तरह मंदू की आँखें भी फूट जाय। यही शाप दादी ने मंदू को दिया था।

प्रश्न 9.
पिल्लों की मौत कैसे हुई ?
उत्तर :
मंदू द्वारा पिल्लों की आँखों में आक का दूध डालने के कारण उनकी मौत हो गई।

प्रश्न 10.
बब्नू ने एक पिल्ले को बचाने के लिए क्या प्रयास किया ?
उत्तर :
बब्बू ने एक पिल्ले को बचाने के लिए उसे पाल लिया और उसके आँखों का इलाज भी करवाया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 11.
तीसरा पिल्ला कैसे मरा ?
उत्तर :
तीसरा पिल्ला सड़क पर किसी गाड़ी के नीचे आकर मारा गया।

प्रश्न 12.
मंटू ने अपने अपराध का प्रायश्चित कैसे किया ?
उत्तर :
मंदू ने निश्चय किया कि वह आँख का डॉक्टर बनेगा और लोगों की आँखों को फिर से रोशन कर अपने अपराध का प्रायश्चित करेगा।

प्रश्न 13.
अंत में दादी ने मंदू को क्या आशीर्वाद दिया ?
उत्तर :
अंत में दादी ने मंदू को दीर्घायु होने और उसकी आँखों की ज्योति के हमेशा बने रहने का आशीर्वाद दिया।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
बब्बू ने मंदू के पापा का भेद क्यों खोल दिया?
उत्तर :
बब्बू ने पहले बात छिपाकर मित्र मंदू को बचाने की कोशिश की। दो पिल्ले तो मर गए तीसरे जीवित पिले को बचाना मंदू के कुकृत्य का भेद बता देने, और उसे पिटाई से बचाने से ज्यादा जरूरी था। इसलिए रोते हुए बब्बू ने भेद खोल दिया।

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात ने बचपन में किए पाप का प्रायश्चित किस प्रकार किया?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात नेत्र चिकित्सक बनकर हजारों लोगों को उनकी खोई हुई नेत्र-ज्योति ल्रौटाकर पाप का प्रायशचित कर लिया।

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प्रश्न 3.
शाप मुक्ति कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर पाठ का सारांश में देखिए।

प्रश्न 4.
‘शाप मुक्ति’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीव जन्तुओं के प्रति हमें सद्भाव रखना चाहिए। यदि कोई अपराध अनजान या जानबूझ में हो गया है तो अपने शुभ चिन्तकों से पूछकर प्रायश्चित कर लेना चाहिए। प्रायश्चित कर लेना, अपने पाप का अपराध के लिए अपनी गलती स्वीकार कर लेना सर्वथा उचित है। डॉ॰ प्रभात ने अपने बचपन की अबोध अवस्था में जो पाप कर्म किया था उसका प्रायश्चित उन्होंने नेत्र चिकित्सक बनकर हजारों लोगों की आँखों को ज्योति देकर कर लिया।

प्रश्न 5.
‘चेहरा किसी दुखदाई स्पृति में काला-सा हो गया’ किसका चेहरा दुखदाई स्मृति में काला हो गया था? वह दुखदाई स्मृति क्या है?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात का चेहरा किसी दुखदाई स्मृति में काला-सा हो गया। वह दुखदाई स्मृति डॉ॰ प्रभात का बचपन में अबोध अवस्था में किया गया पाप था उन्होंने एक कुतिया के तीन पिल्लों की आँखों में आक का दूध डाल कर उन्हें अंधा बना दिया था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
‘जीते रहो, मेरे लाल! तुम्हारी आँखों की ज्योति हमेशा बनी रहे।’
(क) यह गद्यांश किस पाठ का है और इसके लेखक कौन हैं?
(ख) इस पंक्ति का वक्ता कौन हैं? वक्ता ने ऐसा कब और क्यों कहा ?
(ग) इस कथन के अनुसार स्पष्ट कीजिए कि प्रायश्चित कर लेने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है?
उत्तर :
(क) यह गद्यांश ‘शाप मुक्ति’ पाठ से उदधृत है। इस पाठ के लेखक डॉ० रमेश उपाध्याय हैं।

(ख) इस पंक्ति की वक्ता दादी है। डॉ० प्रभात दादी के घर आकर दादी को तसल्ली देने लगे। बचपन में दादी के द्वारा दिए गए शाप की याद दिला कर बोले कि उन्हें उस घटना से बचपन की अबोध अवस्था में किए गए पाप का बोध हुआ और तभी उन्होंने निश्चय कर लिया कि उन्हें जीवन में नेत्र चिकित्सक बनना है। डॉ० प्रभात की बातों से प्रभावित होकर दादी ने उन्हें आशीर्वाद् देते हुए यह कहा।

(ग) सचमुच प्रायश्चित कर लेने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है। बचपन मे अज्ञान की स्थिति में इस प्रभात ने पिल्लों की आँखें फोड़कर अपराध किया था। उन्हें इस अपराध का स्वयं ज्ञान हुआ। उन्होंने नेत्र चिकित्सक बनकर न जाने कितने लोगों की आँखों की ज्योति दीं। उनके पाप बोध पश्चाताप तथा नेत्र चिकित्सक बनकर अनेक आँखों को ज्योति देने से वे निष्पाप हो गये। स्वयं दादी ने अपने शाप को आशीर्वाद में बदल दिया। इस प्रकार डॉ० प्रभात निष्पाप हो गए।

भाषा बोध :

1. ‘बचपन’ में बच शब्द में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाई गई है। इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाइए।

(क) लड़ाका + पन = लड़कपन।
(ख) अजनवी + पन = अजनवीपन।
(ग) अन्धा + पन = अन्धापन।
(घ) अपना + पन = अपनापन।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

2. निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए-

पढ़ना – पढ़ाना
चलना – चलाना
रंगना – रंगाना
लिखना – लिखाना
पढ़वाना
चलवाना
रंगवाना
लिखवाना

3. किसी वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध क्रिया के साथ स्पष्ट होता है, उसे कारक कहते हैं-

(क) डॉ० प्रभात ने कोई उत्तर न दिया। कर्त्ता कारक
(ख) दादी के लिए दवाई का पर्ची लिखी। संप्यदान कारक
(ग) बाजार से दवा मँगवा लेना। अपादान कारक
(घ) दूध पिल्लों के आँखों में डाल रहा था। अधिकरण कारक
(ङ) सब लोगों ने मंदू को बुरा भला कहा। कर्म कारक

4. निम्नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  • दिन – आज का दिन बहुत अच्छा है।
  • दीन – दीन जनों पर दिया दिखाना चाहिए।
  • कहा – मैं ने कुछ नहीं कहा।
  • कहाँ – तुम कहाँ रहते हो।
  • दादी – दादी माँ कहानी सुनाती है।
  • दीदी – हर भाई अपनी दीदी का सम्मान करता है।
  • बांग – बाग में बहुत पेड़ हैं।
  • बाघ – बाघ एक हिंसक जानवर है।
  • कल – मैं कल घर जाऊँगा।
  • काल – सदा काल बीतता रहता है।
  • बाहर – घर के बाहर बच्चे खेल रहे हैं।
  • बहार – इस ऋतु में बाटिका में बहार आ गई है।
  • भला – सब का भला हो।
  • भाला – भाला एक अस्त्र है।
  • धुल – उसका चेहरा धुल गया।
  • धूल – धूल में मत खेलो।
  • सुन – मैं सब कुछ सुन रहा हूँ।
  • सुन्न – उसके अंग सुन्न हो गए हैं।

WBBSE Class 8 Hindi शाप मुक्ति Summary

लेखक-परिचय :

डॉ० रमेश उपाध्याय का सन् 1942 ई० में उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था। डॉ० उपाध्याय आधुनिक युग के महत्वपूर्ण कहानीकार हैं। इनकी कहानियों में भारतीय संस्कृति तथा समाज का यथार्थ चित्रण मिलता है। अपनी पैनी दृष्टि से उन्होंने रूढ़ियों तथा अंधविश्वासों की तह तक पहुँच कर उनका पर्दाफाश किया है। इन्होने पन्द्रह कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, तीन-नाटक तथा अनेक आलोचनात्मक पुस्तकों की रचना की। साहित्य और संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका ‘कथन’ के वे संस्थापक सम्पादक रहे। वे अनेक पुरस्कार तथा सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन कार्य में संलग्न है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

सारंश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने अबोध अवस्था में एक बालक द्वारा हुए अपराध और उसके प्रायश्चित की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। एक दिन लेखक अपनी बूढ़ी दादी की आँखों का इलाज कराने दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ॰ प्रभात के पास गया। कुछछ बातचीत के बाद डॉक्टर हँसते हुए दादी से बात करते हुए दादी की आँखों की जाँच की।

लेखक को डॉ० प्रभात की हँसी तथा उनका चेहरा कुछ परिचित सा जान पड़ा। लेखक के पूछने पर डॉक्टर साहब ने अपने को इलाहाबाद का बतलाया। लेखक भी इलाहाबाद का ही था। इलाहाबाद का पता पूछने पर दादी ने घर का पता बतला दिया। डॉंक्टर ने तुरंत पहचान कर लेखक के बचपन के नाम बब्बू को याद कर पूछा कि वह बब्बू हैं। लेखक ने अपने बाल सखा मंदू को पहचान लिया।

डॉक्टर ने पुराने मित्र से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की। दादी ने बतलाया कि इलाहाबाद में हमारे पड़ोस में एक वकील साहब रहते थे। इसी मंदू नाम का उनका लड़का बड़ा बदमाश था। सहसा डॉ॰ प्रभात बहुत गंभीर हो गए। दादी के लिए दवाई का पर्चा लिखते हुए फिर कभी बातें करने का इरादा व्यक्त किया। फिर उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह आँखों का ऑपरेशन होगा। ईश्वर की कृपा से आँखें ठीक हो जाएँगी।

बाहर आते ही दादी यह जान गई यही वकील का बेटा मंदू है, जिसने आक के पौधे का दूध डाल कर कुतिया के तीनों पिल्लों की आँखें फोड़ दी थी। दादी ने निश्चय किया कि अब इस दुष्ट से अपनी आँखें नहीं फुड़वाऊँगी। दवा लेना भी जिद्द करके नामंजूर कर दी। लेखक के समझाने पर भी दादी उस डॉक्टर से इलाज कराने को तैयार न हुई।

दादी के द्वारा याद दिलाए जाने पर लेखक के मन में वह दुखद स्मृति ताजी हो गई। इलाहाबाद में लेखक के पड़ोसी वकील साहब की कोठी के पीछे बाग की मेड़ पर आक के बहुत से पौधे उगे हुए थे। प्रक दिन स्कूल के अध्यापक ने लेखक को आक के पत्ते तोड़ते देखकर बतलाया कि इसका सफेद दूध यदि आँखों में चला जाए तो आदमी अंधा हो जाता है। इसकी सच्चाई जानने के लिए मंदू ने कुतिया के तीन पिल्लों की आँखों में आक के पौधे का दूध डाल दिया। लेखक ने इस बेवकूफी के लिए उसे झिड़का और कहा कि ये पिल्ले अब अंधे हो जाएँगे। तीनों पिल्ले अंधे हो गए।

मंदू को भी एहसास हो गया कि प्रयोग के रूप में उसने बड़ा पाप कर डाला। मंदू ने गिड़गिड़ाकर लेखक से कहा कि वह किसी को न बताए। दो पिल्ले तो मर गये, तीसरे को बचाने की इच्छा से लेखक ने सारी बात बताकर तीसरे पिल्ले को बचाने के लिए उसका इलाज कराने की जिद्द पकड़ ली। सब लोगों ने मंदू को बुरा-भला कहा। वकील साहब ने उसकी पिटाई भी की। तीसरे पिल्ले को लेखक ने पाल लिया। लेखक और उसकी दादी ने पिल्ले की बड़ी सेवा की। एक दिन वह सड़क पर किसी वाहन से कुचल कर मर गया आज वही मंटू इतनाबड़ा नेत्र चिकित्सक बन गया। दादी को पैंतीस साल की पुरानी घटना अब भी याद थी। प्रभात को भी वह घटना याद थी।

लेखक ने दादी को समझाया कि डॉ० प्रभात ने हजारों की नेत्र ज्योति लौटाई। अत: उनका बचपन का अबोध अवस्था में किया गया पाप अब धुल गया होगा। पर दादी टस से मस न हुई। उनसे अपना इलाज न कराने की जिद्द न छोड़ी। डॉ० प्रभात यह सुनकर बोले कि मैं आकर दादी को समझाऊँगा। डॉ० प्रभात हमारे घर आकर दादी से कहने लगे। दादी माँ, बचपन के पाप को मैं नहीं भूला हूँ। आप ने जो शाप दिया था कि ‘तुम्हारी भी आँख फूटेगी।’

वह भी नहीं भूला हूँ। आप के इस शाप से मुझे पाप का बोध हुआ। मैंने नेत्र-चिकित्सक बनने का फैसला कर लिया। अपनी आँख फूटने के पहले मैं बहुत सी आँखों को रोशनी दूँगा, उसमें दो आँखें आप की भी होंगी। डॉ० प्रभात की बातों में ऐसा जादू था कि सब की आँखों में आँसू आ गये। दादी भाव विद्धल होकर उन्हें हृदय से लगा लिया और आशीर्वाद दिया कि मेरे लाल तुम्हारों आँखों की ज्योति सदा बनी रहे।’ फिर लेखक से कहने लगी कि अपने बाल सखा की खातिरदारी करो। अच्छी सी मिठाई लाओ और मेरी आँखों के लिए जो दवाई लिखी थी वह भी खरीद लाना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

शब्दार्थ :

  • अबोध – अनजान, अज्ञान
  • दुबारा – पुन: एक बार
  • आक – मदार
  • तकलीफ – कष्ट
  • अचरज-आश्चर्य
  • लुप्त – गायब
  • भाव – विचार, अभिप्राय
  • परिवर्तन – बदलाव
  • मासूम – कोमल, भोला
  • बाल सखा -बचपन का मित्र
  • उपकरण – सामग्री, सामान, यंत्र
  • असर – प्रभाव
  • स्मृति – याद
  • नेत्र चिकित्सक – आँखों का डॉक्टर
  • ज्योति – रोशनी
  • अकसर – प्राय:
  • कुकृत्य – बुरा कार्य
  • एहसास – समझ
  • जिज्ञासा – जानने की इच्छा
  • प्रयास – कोशिश
  • वाहन – सवारी
  • पिल्ला – कुत्ते का बच्चा
  • प्रायश्चित – जिस कृत्य को करने से पाप से छुटकारा मिल जाए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 6 अपराजिता to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 Question Answer – अपराजिता

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
डॉ० चन्द्रा का शरीर जन्म से कितने दिनों में पोलियो ग्रस्त हो गया?
(क) आठवें दिन
(ख) अद्ठारहवें दिन
(ग) अट्ठारहवें महीने
(घ) अट्ठारहवें वर्ष
उत्तर :
(ग) अट्ठारहवें महीने।

प्रश्न 2.
किस वर्ष डॉ० चन्द्रा को डॉक्टरेट की उपाधि मिली?
(क) 1966
(ख) 1978
(ग) 1986
(घ) 1976
उत्तर :
(घ) 1976 ई०

प्रश्न 3.
डॉ० चन्द्रा ने किस विषय में एम०एस०सी० पास किया?
(क) रसायन शास्त्र
(ख) प्राणिशास्त्र
(ग) वनस्पति शास्त्र
(घ) भौतिक शास्त्र
उत्तर :
(ख) प्राणि शास्त्र

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 4.
डॉ० चन्द्रा ने स्नातकोत्तर किस श्रेणी में पास की?
(क) द्वितीय
(ख) तृतीय
(ग) प्रथम
(घ) सातकोत्तर पास नहीं की
उत्तर :
(ग) प्रथम

प्रश्न 5.
डॉ० चन्द्रा ने कितने वर्षों में शोध कार्य पूरा किया?
(क) सात
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) तीन
उत्तर :
(ग) पाँच

प्रश्न 6.
शिवानी का पूरा नाम क्या था ?
(क) गौरीपंत शिवानी
(ख) गौरापंत शिवानी
(ग) गोरापंत शिवानी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) गौरापंत शिवानी

प्रश्न 7.
शिवानी ने स्नातक की पढ़ाई कहाँ से पूरी की ?
(क) प्रेसीडेन्सी कॉलेज
(ख) शांतिनिकेतन
(ग) रवीन्द्रभारती विश्वविद्यालय
(घ) कलकत्ता विश्वविद्यालय
उत्तर :
(ख) शांतिनिकेतन

प्रश्न 8.
डॉ० चंद्रा का शरीर जन्म के कितने दिनों में पोलियो ग्रस्त हो गया ?
(क) आठवें दिन
(ख) अट्ठारहवें दिन
(ग) अट्टारहवें महीनें
(घ) अद्टारहवें वर्ष
उत्तर :
(ग) अट्टारहवें महीनें

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 9.
डॉ० चंद्रा ने किस विषय में एम० एस-सी० पास किया ?
(क) रसायन शास्त्र
(ख) प्राणि शास्त्र
(ग) वनस्पति शास्त्र
(घ) भौतिक शास्त्र
उत्तर :
(ख) प्राणिशास्त्र

प्रश्न 10.
डॉ० चंद्रा ने कितने वर्षों में शोधकार्य पूरा किया ?
(क) सात
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) तीन
उत्तर :
(ग) पाँच

प्रश्न 11.
हवाई द्वीप के ईस्ट-वेस्ट सेंटर में कौन काम करता था ?
(क) डॉ० चंद्रा
(ख) लेखिका
(ग) लेखिका के दामाद
(घ) डॉ० चंद्रा की माँ
उत्तर :
(ग) लेखिका के दामाद

प्रश्न 12.
किस डॉक्टर के उपचार से डॉ॰ चंद्रा के हाथों में थोड़ी-बहुत जान आई ?
(क) इ० एन० टी० सर्जन के
(ख) त्वया रोग विशेष्ज के
(ग) ऑर्थेंपिडिक सर्जन के
(घ) जेनेरल फिजिशियन के
उत्तर :
(ग) ऑर्थोपिडिक सर्जन के

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिताc

प्रश्न 13.
डॉ० चंद्रा की माँ ने उसका दाखिला किस विद्यालय में करवाया ?
(क) सेंट जेवियर स्कूल
(ख) सेंट जोसेफ स्कूल
(ग) माउंट कारमेल कॉन्वेंट
(घ) उपरोक्त कोई नहीं
उत्तर :
(ग) माउंट कारमेल कॉन्वेंट

प्रश्न 14.
डॉ० चंद्रा के माता-पिता ने चंद्रा के लिए कहाँ से व्कील चेयर मँगवाया ?
(क) लंदन
(ख) न्यूयार्क
(ग) वाशिंगटन
(घ) पेंसिलवानिया
उत्तर :
(घ) पेंसिलवानिया

प्रश्न 15.
कौन नूरमंजिल में शरण लिया है ?
(क) नवयुवक
(ख) शिवानी
(ग) लेखिका
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) नवयुवक

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 16.
कौन ‘जननी पुरस्कार’ ग्रहण कर रही है ?
(क) लेखिका
(ख) डॉ॰ चन्द्रा
(ग) श्रीमती सुबह्मणयम
(घ) लड़की
उत्तर :
(ख) डॉ० चन्द्रा

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
लेखिका किसके जीवन में प्रभावित हुई?
उत्तर :
लेखिका डॉ॰ चन्द्रा के जीवन से प्रभावित हुई,

प्रश्न 2.
डॉ० चन्द्रा कब पोलियोग्रस्त हुई?
उत्तर :
डा० चन्द्रा जन्म के अट्ठारहवें महीने में पोलियोग्रस्त हुई।

प्रश्न 3.
डॉ० चन्द्रा की माँ का नाम लिखिए।
उत्तर :
डॉ॰ चन्द्रा की माँ का नाम श्रीमती शारदा सुबह्हण्यम था।

प्रश्न 4.
विज्ञान के अतिरिक्त डॉ०चन्द्रा किन-किन कार्यों में दक्ष थी?
उत्तर :
विज्ञान के अतिरिक्त डॉ॰ चन्द्रा काव्य रचना, कढ़ाई, बुनाई, जर्मन भाषा का ज्ञान, भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत आदि में दक्ष थी।

प्रश्न 5.
डॉ० मेरीवर्गीज कौन थी?
उत्तर :
डॉ॰ मेरीवर्गीज एक अपंग महिला होते हुए भी मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर सेवा कार्य किया था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 6.
डॉ॰ चन्द्रा ने अपनी माँ का चित्र कहाँ लगा रखा था?
उत्तर :
डॉ॰ चन्द्रा ने अपने एलबम के अन्तिम पृष्ठ पर अपनी माँ का बड़ा-सा चित्र लगा रखा था।

प्रश्न 7.
लखनऊ का मेधावी युवक इलाहाबाद क्यों गया था ?
उत्तर :
लखनऊ का मेधावी युवक आई० ए० एस० की परीक्षा देने इलाहाबाद गया था।

प्रश्न 8.
डॉ० चंद्रा ने किसके निर्देशन में शोधकार्य पूरा किया ?
उत्तर :
डॉ॰ चंद्रा ने प्रोफेसर सेठना के निर्देशन में शोधकार्य पूरा किया।

प्रश्न 9.
चंद्रा की माता को कौन-सा पुरस्कार मिला ?
उत्तर :
चंद्रा की माता को ‘वीर जननी’ पुरस्कार मिला।

प्रश्न 10.
डॉ० चंद्रा के प्रोफेसर ने उनकी प्रशंसा में क्या कहा ?
उत्तर :
डॉ० चंद्रा के प्रोफेसर ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ० चंद्रा ने विज्ञान की प्रगति में महान् योगदान दिया है।

प्रश्न 11.
‘अपराजिता’ किस विधा की रचना है ?
उत्तर :
‘अपराजिता’ शिवानी द्वारा लिखित एक संस्मरण है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 12.
रवीन्द्रनाथ टैगोर शिवानी को क्या कहकर बुलाते थे ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर शिवानी को ‘गोरा’ कहकर बुलाते थे।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
लेखिका का परिचय डॉ० चन्द्रा से कब और कहाँ हुआ?
उत्तर :
लेखिका ने डॉ० चन्द्रा को पहली बार कार से उतरते देखा। किस प्रकार वह निर्जीव धड़ के होते हुए भी कार से उतर कर कील चेयर पर बैठकर घर के भीतर जाती थी। लेखिका नित्य अपनी कोठी से उसे देखती। आश्चर्य चकित होकर प्रभावित हुई। धीरे-धीरे लेखिका का उससे परिचय हो गया।

प्रश्न 2.
डॉ० चन्द्रा को मेडिकल में प्रवेश क्यों नहीं मिला?
उत्तर :
निचला धड़ निर्जीव होने के कारण वह सफल शल्य चिकित्सक नहीं बन सकती थी। यही सोचकर डॉ० चन्द्रा को मेड़िकल में प्रवेश नहीं मिला।

प्रश्न 3.
चन्द्रा की माँ को चन्द्रा को शिक्षा प्राप्ति में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर :
चन्द्रा की माँ कील चेयर लेकर प्रत्येक पीरिएड में उसके पीछे खड़ी रहती। अपने सारे सुख त्याग कर नित्य छाया बनी पुर्री की पहिया लगी कुर्सी के पीछे चक्र सी घूमती रहती। पच्चीस वर्ष तक सहिष्यु माँ पुर्री के साथ-साथ कठिन साधना की।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 4.
‘वीर जननी’ का पुरस्कार किसे और क्यों दिया गया?
उत्तर :
‘वीर जननी’ का पुरस्कार डॉ० चन्द्रा की माँ श्रीमती टी० सुबह्मण्यम को मिला। चन्द्रा की माँ ने जीवन के सारे सुख त्याग कर पुत्री की चिकित्सा तथा उसकी शिक्षा के लिए अपना जीवन लगा दिया। उनकी कठिन साधना के कारण डा० चन्द्रा सफल हुई और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। सचमुच वे अद्भुत साहसी तथा कष्ट सहिष्णु महिला थी। इसी कारण उन्हें यह पुरस्कार दिया गया।

प्रश्न 5.
डॉ० चन्द्रा के विषय में उनके प्रोफेसर का क्या विचार है?
उत्तर :
डॉ० चन्द्रा के विषय में उनके प्रेफ्फेसर का विचार है कि चन्द्रा ने विज्ञान की प्रगति में महान योगदन दिया है।

प्रश्न 6.
डॉ० चन्द्रा का चिरित्र चित्रण लिखिए।
उत्तर :
डॉ॰ चन्द्रा का व्यक्तित्व विलक्षण है। उस में अद्भुत साहस, अदम्य उत्साह उत्कृट.निजीविषा का भाव तथा महत्वाकांक्षाएँ भरी हुई है। अपने अद्भुत साहस से नियति को अंगूठा दिखा डॉक्टरेट प्राप्त कर ली। उसमें अद्भुत प्रतिभा थी। प्रत्येक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीत सकी। कढ़ाई बुनाई तथा संगीत में भी उसकी रुचि है। अपने प्रयोगशाला में अपना संचांलन उसने सुगम बना लिया। अपना सारा काम स्वयं निपटा लेती है। ऐसी भयंकर परिस्थिति में भी वह दृढ़ता से खड़ी रही। नियति के कठोर आघात को धैर्य और साहस से झेलती हुई वह देवांगना से कम नहीं लगी। विज्ञान की प्रगति में डा० चन्द्रा ने महान योगदान दिया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

प्रश्न 7.
‘चिकित्सा ने जो खोया, वह विज्ञान ने पाया’ उक्त गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
डॉ० चन्द्रा की डॉक्टर बनने की प्रबल इच्छा थी। परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर भी उसे मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला, क्यों कि उसका निचला धड़ निर्जीव था। इसलिए वह चिकित्सा के क्षेत्र में अपना योगदान न कर सकी। चिकित्सा ने इस प्रकार आदर्श सेविका को खो दिया। डॉ० चन्द्रा डॉक्टर नहीं बनी पर अच्छीवैज्ञानिक बन गई। विज्ञान उसे पाकर गैरवान्वित हुआ। विज्ञान की प्रगति में डॉ० चन्द्रा ने महत्पूपर्ण योगदान दिया है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –
‘नियति के प्रत्येक कठोर आघात को अति मानवीय धैर्य एवं साहस के झेलती वह वित्ते मर की लड़की मुझे किसी देवांगना से कम नहीं लगी।
(क) उद्धृत पंक्तियाँ किस रचनाकार की किस रचना से उद्धृत है?
(ख) यहाँ ‘वहाँ तथा ‘मुझे’ शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
(ग) इस अवतरण की व्यख्या कीजिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ सुश्री श्विानी कृत ‘अपराजिता’ से उद्धुत है।
(ख) यहाँ ‘वह’ शब्द का प्रयोग चन्द्रा के लिए तथा ‘मुझे’ शब्द का प्रयोग लेखिका शिवांनी के लिए हुआ है।
(ग) प्सस्तुत अवतरण में लेखिका ने चन्द्रा के धैर्य एवं साहस का वर्णन किया है। धीरे-धीरे लेखिका का परिचय चन्द्रा से हुआ। चन्द्रा की कहानी सुनकर लेखिका आश्चर्य चकित रह गई। चन्द्रा पक्षाघात से अपंग बन गई थी। उसका निचला धड़ निष्पाण केवल मांस पिंडमात्र रह गया। भाग्य ने बचपन में उस पर कठोर प्रहार कर दिया था। पर उसमें अद्भुत साहस एवं धैर्य था। सारे कष्टों को झेलती हुई वह नह्हीं सी बालिका कभी हार नहीं मानी, कभी निराश नहीं हुई। लेखिका उसके इस अपूर्व धैर्य और उत्साह उसकी मानसिक शक्ति तथा लगन को देखकर उसकी तुलना देवांगना (देवी) से की है। वह मानवी भाव विचार से बहुत ऊपर थे।

भाषा बोध :

1. इस पाठ से पाँच तत्सम शब्द चुनकर उसके तद्भव शब्द लिखिए:

  • आश्चर्य – अचरज
  • द्वार – दरवाजा
  • उच्च – ऊँचा
  • स्वर्ण – सोना
  • धैर्य – धीरज

2. निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग अलग कीजिए :

  • अमानवीय अ + मानवीय
  • प्रसद्धि प्र + सिद्ध
  • उल्लास उत् + लास
  • विज्ञान वि + ज्ञान
  • प्रगति प्र + गति
  • अवरुद्ध अव + रुद्ध

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :-

  • पिछली – अगली
  • निर्जीव – सजीव
  • उजले – अंधेरे
  • साहसी – कायर
  • अभिशाप – वरदान
  • इच्छा – अनिच्छा
  • सर्वेच्च – सर्वनिम्न

4. संज्ञा और दूसरे विकारी शब्दों की संख्या का गिनती का जिससे बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं – (क) एक वचन (ख) बहुवचन।
निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तित कीजिए –

  • कोठी – कोठियाँ
  • बैशाखियों – बैशाखी
  • वस्त्र – वस्बों
  • पंक्ति – पंक्तियों
  • महत्वाकांक्षाएँ – महत्वाकांक्षा
  • टाँग – टाँगों
  • स्त्री – स्त्रियाँ
  • पुरुष – पुरुषों
  • लड़की – लड़कियाँ
  • कठिन -कठिनाइयाँ
  • वर्ष – वर्षो

WBBSE Class 8 Hindi टोबा टेक सिंह Summary

लेखक-परिचय :

शिवानी का जन्म राजकोट गुजरात में सन् 1933 ई० में हुआ। इनकी शिक्षा शान्तिनिकेतन तथा कोलकाता में हुई। इनकी प्रमुख रचनाएँ- कृष्णकली, चौदह फेरे, पाताल भैरवी, श्मशान, चम्पा, कैंजा, यात्रिक आदि हैं। इन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनकी सहज, सरल, प्रवाहपूर्ण भाषा में लोच तथा कोमलता भरी है। पाठक इनकी रचनाओं को पढ़ने में तल्लीन हो जाते हैं। भाषा को प्रवाह और माधुर्य से परिपूर्ण शैली अत्यंत हलययग्राही है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

सारांश :

प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने बताया है कि एक अपंग पोलियो अभिशप्त लड़की आत्मशक्ति, साहस तथा धैर्य से अपने जीवन को अभिशाप से वरदान बना दिया। विषम परिस्थितियों में भी दृढ़ बनी रही। कहानी डॉ॰ चन्द्रा की है। लेखिका उसके निर्जीव निचले धड़ को कुशलता से कार से उतरते, बैशाखियों से कीलचेयर तक पहुँचने, फिर उसे चलकर कोठी के भीतर पहुँच, देखकर आश्चर्य चकित रह जाती थी। लेखिका अपनी यह रचना एक मेधावी नवयुवक को पढ़ने के लिए कह रही है। जो एक हाथ के कट जाने से बिल्कुल निराश होकर मानसिक संतुलन भी खो बैठा। नशे की गोलियाँ खाने लगा और नूरमंजिल में शरण लिया है।

जन्म के अट्ठारहवें महीने में चन्र्रा की गर्दन के नीचे का पूरा शरीर पोलियों से निर्जीव हो गया। सामान्य ज्वर के चौथे दिन पक्षाघात से यह घटना घटी। उसकी माँ ने बड़े-बड़े डाक्टरों को दिखलाया, पर सभी डॉक्टरों से जवाब मिल गया। फिर भी माँ श्रीमती सुब्रह्हण्यम् ने आशा न छोड़ी। एक आर्थेपिडिक डॉक्टर के इलाज से इसके ऊपरी धड़ में गति आ गई। हाथ की उँगलियाँ हिलने लगी। निर्जीव धड़ को सहारा देकर बैठना सीख गई।

बंगलौर के प्रसिद्ध माउंट कारमेल में प्रवेश हो जाने पर उसकी माँ कील चेयर लेकर अपंग पुत्री को कक्षाओं में पहुँचाती। मेधावी चन्द्रा ने प्रत्येक परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीते। बी०एस०सी० किया। फिर प्राणिशास्त्र में एम० एस० सी० में प्रथम स्थान प्राप्त किया और बंगलुरू के प्रख्यात इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस में स्पेशल सीट प्राप्त कर ली। अपनी निष्ठा, धैर्य एवं साहस से प्रोफेसर सेठना के निर्देशन में पाँच वर्ष शोध कार्य किया। सन् 1976 में चन्द्रा को माइकोबायोलॉजी में डॉक्टरेट मिली। अपंग स्त्री पुरुषों में इस विषय में डॉक्टरेट पाने वाली डॉ० चन्द्रा प्रथम भारतीय है।

डा० चन्द्रा ने मार्मिक कविताओं की रचना की। कढ़ाई-बुनाई के काम में भी सफलता हासिल की। जर्मन भाषा में माता-पुत्री दोनों ने मैक्समूलर भवन से विशेष योग्यता सहित परीक्षा उत्तीर्ण की। भारतीर्य एवं पाश्चात्य संगीत में उसकी समान रुचि थी। गर्ल गाइड में राष्ट्रपति का स्वर्ण कार्ड पानेवाली यह प्रथम अपंग बालिका थी। अपने एलबम को वह लेखिका को दिखाने लगी। पुरस्कार ग्रहण करती डॉ० चन्द्रा, प्रधान मंत्री के साथ मुस्कराती डॉ० चन्द्रा, राष्ट्रपति को सलामी देती डॉ० चन्द्रा, कील चेयर में लैदर जैकेट में जकड़ी बैसाखियों का सहारा देकर अपनी डॉक्टरेट ग्रहण करती डॉ० चन्द्रा०।

निचला घड़, निर्जीव होने के कारण चन्द्रा को मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला। पर चिकित्सा ने जो खोया विज्ञान ने पाया। डा० चन्द्रा के एलबम के अन्तिम पृष्ठ पर उनकी माता का बड़ा-सा चित्र है, जिसमें वे जे० सी० बंगलुरू द्वारा प्रदत्त विशिष्ट ‘जननी पुरस्कार’ ग्रहुण कर रही है। पुत्री के प्रेम में अपने सारे सुख त्याग कर छाया की तरह उसकी सेवा में तत्पर अद्भुत साहसी जननी शारदा सुब्रह्माण्यम् के शब्द – ईश्वर सब द्वार एक साथ बंद नहीं करता। यदि एक द्वार बंद करता भी है तो दूसरा द्वार खोल भी देता है। आज भी गूँज रहे हैं।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 अपराजिता

शब्दार्थ :

  • प्रौढ़ा – अधिक अवस्था वाली स्त्री
  • नियति – भाग्य
  • आघात – चोट, प्रहार, धक्का
  • विलक्षण- अद्भुत
  • रिक्तता – खालीपन
  • आवागमन – आना-जाना
  • मेधावी – बुद्धिमान
  • उत्फुल्ल – प्रसन्न
  • नियत – निश्चित
  • साधना- तपस्या
  • यातनाप्रद – कष्ट दायक
  • पक्षाघात -लकवा मारना
  • सर्वाग – सारा अंग
  • निष्ठा – आस्था
  • विशिष्ट – विशेष, खास
  • विचित्र – अलग कर देना
  • देवांगना – दिव्य गुणवाली स्त्री, देवी
  • विषाद – दु:ख
  • अदम्य – जिसे दबाया न जा सके, प्रचंड, प्रबल
  • उत्कट – प्रबल
  • जिरह बख्तर – कवच, जिससे शरीर की रक्षा हो
  • क्षत-विक्षत – बुरी तरह घायल
  • आभामंडित – तेजस्वी, कांति से शोभायान
  • जिजीविषाा – जीने की इच्छा
  • अभिशाप – शाप से ग्रस्त
  • अचल – निष्क्रिय, जो हिल न सके
  • आर्थेपिडिक – हड्डी संबंधित
  • पटुता – चतुरता, कुशलता
  • सुदीर्घ – अधिक समय, लंबा
  • अधर- ओठ
  • अपंग – अंगहीन, असमर्थ, लंगड़ा
  • पाश्चात्य – पश्चिमी

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 Question Answer – टोबा टेक सिंह

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘टोबाटेक’ सिंह कहानी पर आधारित है-
(क) देश विभाजन पर
(ख) स्वाधीनता आन्दोलन
(ग) पागलों की हरकत पर
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(क) देश विभाजन पर

प्रश्न 2.
‘टोबाटेक’ सिंह स्थित है-
(क) बंगलादेश में
(ख) हिन्दुस्तान में
(ग) पाकिस्तान में
(घ) श्रीलंका मे
उत्तर :
(ग) पाकिस्तान में

प्रश्न 3.
‘कायदे आजम’ की उपाधि मिली थी-
(क) खान अन्दुल गफफार खाँ को
(ख) लियाकत अली को
(ग) मोहम्मद अली जिन्ना को
(घ) याहिया खान को
उत्तर :
(ग) मोहम्मद अली जिन्ना को

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 4.
बिशन सिंह की बेटी का नाम था-
(क) हर प्रीत कौर
(ख) रूपमती
(ग) रूप कौर
(घ) हरमीत कौर।
उत्तर :
(ग) रूप कौर

प्रश्न 5.
बिशन सिंह किस शहर के पागल खाने में था?
(क) सयाल कोट
(ख) अमृतसर
(ग) चियौट
(घ) लाहौर
उत्तर :
(घ) लाहौर

प्रश्न 6.
सआदत हसन मंटो किस भाषा के लेखक थे ?
(क) हिंदी
(ख) अंग्रेजी
(ग) बंगला
(घ) उर्दू
उत्तर :
(घ) उर्दू

प्रश्न 7.
इनमें से कौन-सा सम्मान सआदत हसन मंटो को मिला –
(क) निशान-ए-पाक
(ख) निशान-ए-इम्तियाज
(ग) निशान-ए-हिन्द
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) निशान-ए-इम्तियाज

प्रश्न 8.
मंटो ऑल इंडिया रेडियो की किस शाखा में काम करते थे ?
(क) कलकत्ता
(ख) दिल्ली
(ग) बम्बई
(घ) तमिलनाडु
उत्तर :
(ख) दिल्ली

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 9.
मंटो की मृत्यु कब हुई ?
(क) सन् 1947 में
(ख) सन् 1950 में
(ग) सन् 1955 में
(घ) सन् 2005 में
उत्तर :
(क) सन् 1947 में

प्रश्न 10.
मुसलमानों के लिए अलहदा कौन-सा मुल्क बना ?
(क) भारत
(ख) पाकिस्तान
(ग) श्रीलंका
(घ) नेपाल
उत्तर :
(ख) पाकिस्तान

प्रश्न 11.
एंग्लो-इंडियन पागल किस वार्ड में रखे गये थे –
(क) हिन्दू वार्ड में
(ख) मुस्लिम वार्ड में
(ग) यूरोपियन वार्ड में
(घ) सिख वार्ड में
उत्तर :
(ग) यूरोपियन वार्ड में

प्रश्न 12.
स्वयं को खुदा कहने वाले पागल के अनुसार टोबा टेक सिंह कहाँ था ?
(क) हिंदुस्तान में
(ख) पाकिस्तान में
(ग) दोनों जगह
(घ) कहीं नहीं
उत्तर :
(घ) कहीं नहीं

प्रश्न 13.
बिशन सिंह के मुसलमान दोस्त का क्या नाम था ?
(क) करमदीन
(ख) फजलदीन
(ग) फरमुद्दीन
(घ) फजलुद्दीन
उत्तर :
(ख) फजलदीन

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 14.
बिशन सिंह कितने साल पागलखाने में रहा ?
(क) 5 वर्ष
(ख) 10 वर्ष
(ग) 15 वर्ष
(घ) 20 वर्ष
उत्तर :
(ग) 15 वर्ष

प्रश्न 15.
कौन बेहोश हो गया ?
(क) हिन्दू पागल
(ख) मुसलमान पागल
(ग) अधिकारी
(घ) लेखक
उत्तर :
(ख) मुसलमान पागल

प्रश्न 16.
सिख पागल कितने वर्षों तक सोया नहीं ?
(क) आठ वर्षों
(ख) नौ वर्षों
(ग) दस वर्षों
(घ) पन्द्रह वर्षों
उत्तर :
(घ) पन्द्रह वर्षों

प्रश्न 17.
पागल खाने में एक पागल अपने आप को क्या कहता था ?
(क) प्रधानमंत्री
(ख) वकील
(ग) खुदा
(घ) पुलिस
उत्तर :
(ग) खुदा

प्रश्न 18.
अधिकतर पागल किसके पक्ष में नहीं थे ?
(क) पाकिस्तान के
(ख) हिन्दुस्तान के
(ग) तबादले
(घ) अधिकारी
उत्तर :
(ग) तबादले

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 19.
कौन समाप्त हो गया ?
(क) विशन सिंह
(ख) फजलद्दीन
(ग) लेखक
(घ) पागल
उत्तर :
(क) विशन सिंह

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
मुसलमानों के लिए अलग देश किसने बनाया?
उत्तर :
मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाया।

प्रश्न 2.
एक पागल दरख् पर क्यों चढ़ गया?
उत्तर :
एक पागल हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के चक्कर में पड़कर और ज्यादा पागल हो गया। झाडू देते समय वह दरख्त पर चढ़ गया।

प्रश्न 3.
पागल हिन्दू वकील लीडरों को क्यों गालियाँ देने लगा?
उत्तर :
हिन्दू वकील प्रेम में असफल हो जाने के कारण पागल हो गया। अमृतसर की एक लड़की से वह प्रेम करता था। लड़की ने उसे ठुकरा दिया, पर वह दीवानगी में उस लड़की को नहीं भूला था। जब उसने सुना कि अमृतसर हिन्दुस्तान में चला गया, जहाँ वह लड़की रहती है तो उसे बहुत दु:ख हुआ। इसलिए वह लीडरों को गालियाँ देने लगा।

प्रश्न 4.
बिशन सिंह कैसे परिवार का सदस्य था?
उत्तर :
विशन सिंह एक जमींदार परिवार का सदस्य था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 5.
बिशन सिंह ने हिन्दुस्तान जाने से इन्कार क्यों किया?
उत्तर :
विशन सिंह समझता था कि पाकिस्तान में उसकी जमीन हैं, उसके साथी है। पागलखाने में भी उसके साथी थे। इसलिए वह हिन्दुस्तान जाने से इन्कार कर दिया।

प्रश्न 6.
सआदत हसन मंटो का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
सआदत हसन मंटो का जन्म 11 मई, 1912 ई० को लुधियाना जिला के समराल नामक क्षेत्र के पपरौदी गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
मंटो के माता-पिता का क्या नाम था ?
उत्तर :
मंटो के पिता का नाम गुलाम हसन मंटो और माता का नाम सरदारी बेगम थी।

प्रश्न 8.
मुसलमानों के लिए अलग देश किसने बनाया ?
उत्तर :
कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाया।

प्रश्न 9.
बिशन सिंह क्या बड़बड़ाता रहता था ?
उत्तर :
‘ओंपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्सदि बेध्यानाँ दि मुंग दि दाल आफ दी लालटेन’।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 10.
बिशन सिंह ने क्या मिन्नत की ?
उत्तर :
बिशन सिंह ने स्वयं को खुदा मानने वाले पागल से मिन्नत की कि वह हुक्म दे दे कि टोबा टेक सिंह हिंदुस्तान में रहे या पाकिस्तान में।

प्रश्न 11.
बिशन सिंह से मिलने कौन लोग आते थे ?
उत्तर :
बिशन सिंह से मिलने उसके रिश्तेदार आया करते थे।

प्रश्न 12.
खामोश होकर सड़क पर कौन टहलता था ?
उत्तर :
एक एम० एस-सी० पास रेडियो इंजीनियर पागल खामोश होकर सड़क पर टहलता था।

प्रश्न 13.
एक सिख पागल ने दूसरे सिख पागल से क्या पूछा ?
उत्तर :
एक सिख पागल ने दूसरे सिख पागल से पूछा कि उन्हें हिन्दुस्तान क्यों भेजा जा रहा है ?

प्रश्न 14.
मोहम्मद अली नामक पागल ने क्या ऐलान किया था ?
उत्तर :
मोहम्मद अली नामक पागल ने खुद को कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना घोषित कर दिया था।

प्रश्न 15.
बिशन सिंह के परिवारवालों ने फजलदीन के पास क्या छोड़ा ?
उत्तर :
बिशन सिंह के परिवारवालों ने फजलदीन के पास अपनी भैंस छोड़ी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

प्रश्न 16.
बिशन सिंह की मौत कहाँ हुई ?
उत्तर :
बिशन सिंह की मौत भारत-पाकिस्तान की सीमा (बागाह बॉर्डर) पर हुई।

प्रश्न 17.
‘टोबा टेक सिंह’ कहानी का हिंदी अनुवाद किसने किया है ?
उत्तर :
‘टोबा टेक सिंह’ कहानी का हिंदी अनुवाद नरेन्द्र शर्मा ने किया है।

प्रश्न 18.
प्रस्तुत कहानी में किसकी त्रासदी को दिखाया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के विभाजन की त्रासदी को दिखाया गया है।

प्रश्न 19.
कौन प्यार में असफल हो जाने से पागल हो गया था ?
उत्तर :
अमृतसर की एक लड़की से प्यार करने वाला हिन्दू वकील प्यार में असफल हो जाने से पागल हो गया था।

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प्रश्न 20.
एंग्लो इंडियन पागल क्या सुनकर दु:खी हो गया ?
उत्तर :
एंग्लो इंडियन पागल आजाद करके अंग्रेजों के चले जाने की खबर सुनकर दु:खी हो गया।

बोधमूलक प्रश्न :

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार दीजिए-
(क) … और यह भी कौन सीने पर हाथ रखकर कह सकता है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, दोनों किसी दिन सिरे से गायब हो जाएँगे।’ उद्धुत पंक्तियों में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के समय कोई भी पागल टोबा टेक सिंह को सटीक उत्तर न दे सका कि वह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। सभी उलझन में थे कि कौन क्षेत्र किस देश में है और फिर भविष्य में क्या परिवर्तन हो जाएगा, यह निश्चित नहीं है। अत: दृढ़ता और पूरे विश्वास के साथ कौन कह सकता हैं कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का अलग-अलग आस्तित्व ही कभी समाप्त हो सकता है।

(ख) आधिकांश पागल अदला-बदली के पक्ष में क्यों नहीं थे और इस अदला-बदली से उनकी क्या दशा थी?
उत्तर :
अधिकांश पागल की समझ में नहीं आ रहा था कि उन्हें अपनी जगह से उखाड़ कर कहाँ फेंका जा रहा है। कुछ पागल, नारेबाजी करने लगे, जिससे कई बार दंगा होते-होते बचा। कुछ मुसलमानों तथा सिखों को यह नारे सुनकर तैश आ गया था । पागलों को उनके दूसरे अफसरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था। कुछ पागल आपस में झगगड़ने लगे, कुछ रोने लगे, कुछ अपने कपड़े उतार कर नंगे होने लगे। कुछ पागल औरतें शोर शराबा करने लगीं। कड़ाके की सर्दी भी पड़ रही थी।

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(ग) टोबा टेक सिंह उर्फ बिशन सिंह का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर :
बिशन सिंह पहले खाता-पीता जमींदार था। एकाएक उसका दिमाग उलट गया, जिससे उसके रिश्तेदार पागलखाने में दाखिल कर गए। बिशन सिंह हृष्ट-पुष्ट तथा मजबूत शरीर का था। पागल होते हुए भी वह साहसी तथा दृढ़ निश्चयवाला था। पंद्रह वर्षों तक वह कभी सोया नहीं। हर वक्त खड़ा रहने से उसके पाँव सूज गए। तकलीफ के बावजूद वह टस से मस न हुआ। तबादले के समय पागलों की बातें वह ध्यान से सुनता। हमेशा यह जानने की कोशिश करता कि वह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। मिलने के लिए आनेवाले रिश्तेदारों से वह नहाकर कपड़े बदलकर उनसे मिलता था। तबादले के समय उसे मालूम हुआ कि अभी वह पाकिस्तान में है। वह प्रसन्न होकर अपने साथियों से मिलने लगा। बहुत समझाने पर भी वह हिन्दुस्तान जाने को तैयार न हुआ। जबर्दस्ती करने पर वह अपनी सूजी हुई टाँगों पर खड़ा हो गया, पर हिला नहीं। अन्त में चीखकर प्राण त्याग दिया। वह अपने दृढ़ निश्चय पर अडिग था। कष्ट सहने की उसमें अद्भुत शक्ति थी।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

यथानिर्देश प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. ‘आदमी चूँकि बे-जरर था, इसलिए उसमें मजीद जबर्दस्ती न की गई।’
(क) उपर्युक्त पंक्ति किस लेखक के लिए पाठ से उद्धृत है?
(ख) इसका प्रसंग बतलाइए।
(ग) पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंति सआदत हसन मेटो रचित ‘टोबा टेक सिंह’ पाठ से उद्धृत है।
(ख) निर्णय के अनुसार पागलों का तबादला होने लगा। टोबाटेक सिंह को सिपाहियों ने पकड़ लिया और उसे दूसरी तरफ ले जाने लगे। पर टस से मस न हुआ। वह एक जगह खड़ा हो गया, उसे कोई हालत न हिला सकी। इसी प्रसंग में यह उक्ति उद्धृत है।
(ग) टोबाटेक सिंह (बिशन सिंह) एक जगह अपनी सूजी टाँगों पर दृढ़ता पूर्वक खड़ा हो गया, जिससे उसे कोई हिला न सके। वह बिल्कुल निडर व्यक्ति था। इसलिए उसके साथ जबर्दस्ती न की गई। उसे बल पूर्वक उसके स्थान से हटाने का इरादा छोड़ दिया गया।

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भाषा बोध :

1. इस पाठ में आए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूप –

कान्फेंन्स – सम्मेलन
इंजीनियर – यंत्रकार
प्रैक्टिस – अभ्यास
ब्रेकफास्ट – नाश्ता
गवर्नमेंट – सरकार
एनेक्स – पूरक अंश
सुपरिंटेंडेंट – अधीक्षक

2. नीचे दिए गए वाक्यों में से पहचान कर बताइए कि इनमें साधारण, संयुक्त, मिश्र वाक्यों कौन है।

(क) एक सिक्ख था जिसे पागलखाने में दाखिल हुए पंद्रह वर्ष हो चुके थे- मिश्र वाक्य।
(ख) महीने में एक बार मुलाकात के लिए यह लोग आते थे और उसकी खैर – खैरियत दरयाफ्त करके चले जाते थेसंयुक्त वाक्य।
(ग) यूरोपियन वार्ड में दो एंग्लो इंडियन पागल थे – साधरण वाक्य।
(घ) पागलों की लारियों में निकलना और उनको दूसरे अफसरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था – संयुक्त वाक्य।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

3. निम्नलिखित शब्दों में प्रत्यय पृथक् कीजिए।

हुकूमतों – हुकुमत + ओं।
गिरफ्तारी – गिरफ्तार + ई।
तब्दीली – तब्दील + ई।
जमीनें – जमीन + एँ।
मिठाइयाँ – मिठाई + इयाँ।
हमदर्दों – हमदर्द + ई।
मुसलमानों – मुसलमान + ओं

WBBSE Class 8 Hindi टोबा टेक सिंह Summary

लेखक-परिचय :

सआदत हसन मंटो का जन्म सन् 1912 ई० में पंजाब प्रांत के लुधियाना जनपद के सम्बराला नामक गाँव में हुआ था। ये उर्दू कहानीकार के रूप में प्रसिद्ध रहे। सन् 1955 में लाहौर में इनका देहावसान हो गया। इन्होंने अपनी कहानियों में देश-विभाजन की त्रासदी, संकीर्ण साप्रदायिकता के भयावह परिणाम, समाज की विकृत स्थितियों का कच्चा चिंट्ठा उजागर किया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

सारांश :

प्रस्तुत्त कहानी में हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के विभाजन की त्रासदी को दिखाया गया है। विभाजन के दो-तीन साल बाद दोनों देशों की सरकारों के ध्यान में आया कि दोनों देशों के पागलों का भी तबदला होना चाहिए। दोनों तरफ के अधिकारियों ने परामर्श कर तबादले का दिन निश्चित कर दिया। छानबीन कर हिन्दू तथा मुसलमान पागलों को बार्डर पर पहुँचा दिया गया। लाहौर के पागलखाने में इस खबर पर शोर-शराबे होने लगे। मुसलमान पागल तथा हिन्-सिख पागल सभी अपने पागलपन में अनाप शनाप प्रश्नोत्तर करने लगे।

एक मुसलमान पागल जोर से पाकिस्तान जिन्दाबाद का नारा लगाकर फिसल गया और बेहोश हो गया। कुछ पागल ऐसे थे जो पागल नहीं थे, पर उनके संबंधियों ने उनके अपराध से उन्हें फाँसी से बचाने के लिए अधिकारियों से मिलकर उन्हें पागलखाने में भेज दिया था। उन्हें भी हिन्दुस्तान पाकिस्तान के विषय में कोई जानकारी नहीं थी। उन्हें इतना मालूम था कि मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान नामक एक अलग देश बनाया है। पर वे किस देश में हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

एक पागल एक दिन वृक्ष की टहनी पर दो घंटे बैठकर पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के नाजुक मसले पर तकरार करता रहा। सिपाहियों के कहने पर भी न उतरा और कहा कि वह इस वृक्ष पर ही रहेगा। जब दौरा ठंडा पड़ा तो उतर कर हिन्दू-सिख मित्रों को गले लगाकर रोने लगा। उसने सोचा कि ये दोस्त उसे छोड़कर हिन्दुस्तान चले जाएँगे। एक इंजोनियर मुसलमान पागल नंग धडंग होकर बाग में घूमता रहा। दो पागल अपने को मोहम्मद अली जिन्ना तथा मास्टर तारा सिंह कहने लगे। अमृतसर की एक लड़की से प्यार करने वाला हिन्दू वकील प्यार में असफल हो जाने से पागल हो गया था। इस विभाजन को जानकर वह नेताओं को गाली देने लगा। एंग्लो इंडियन पागल आजाद करके अंग्रेजों के चले जाने की खबर सुनकर दु:खी हो गए।

एक सिख पागल पंद्रह वर्षों में कभी भी सोया नहीं। कभी-कभी किसी दीवार के साथ टेंक लगा लेता था। शरीरिक तकलीफ के बावजूद भी वह आराम नहीं करता था। पागलों के तबादले की बातों को वह गौर से सुनता था। वह इसे जानने के लिए उत्सुक रहता था कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में। वह बहुर्त कम नहाता था। किसी से झगड़ा नहीं करता था। पाकिस्तान में जमींदार था। दिमाग उलट जाने से उसके रिश्तेदार पागलखाने में दाखिल कर गए। उसका नाम विशन सिंह था, मगर सब उसे टोबा टेक सिंह कहते थे। हर महीने उसके रिश्तेदार उससे मिलने आते थे।

विभाजन के बाद यह क्रम समाप्त हो गया। उसकी एक लड़की भी थी। पागल खाने में एक पागल अपने को खुदा कहता था। उससे भी उसने पूछा कि वह पाकिस्तान में है या हिन्दुस्तान में, पर उससे भी उत्तर न मिला। एक दिन उसका दोस्त फजलदीन मिलने आया। उसने बतलाया कि तुम्हारे सब आदमी सकुशल हिन्दुस्तान चले गए। यथा संभव उनकी मदद मैंने की। उसने बतलाया कि तुम अभी पाकिस्तान में ही हो।

तबादले की तैयारियाँ निश्चित हो गई थी। बड़ी कठिनाई से पागलों को दूसरे अफसरों के हवाले किए जाने लगा। कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। पागलों में कोई गालियाँ बकने लगा। कोई गाना गाने लगा। जो नंगे हो जाते उन्हें कपड़े पहनाए जाते। कुछ रोते तथा झगड़ रहे थे। अधिकतर पागल तवादले के पक्ष में नहीं थे। वे नारे लगा रहे थे। बिशन सिंह को अफसर ने बतलाया कि वह पाकिस्तान में है। यह सुनकर वह बचे हुए साथियों के पास पहुँच गया।

पाकिस्तानी सिपाही उसे पकड़ कर दूसरी तरफ ले जाने लगे, मगर वह हिलने से इन्कार कर दिया। उसे समझाया गया कि अब टोबा टेक सिंह हिन्दुस्तान में चला गया है। उसे जबर्दस्ती दूसरी तरफ से ले जाने की कोशिश की गई। किन्तु वह अपनी सूजी हुई टाँगों पर खड़ा हो गया। इसलिए उसे वहीं खड़ा रहने दिया गया। सूर्य निकलने से पहले शान्त एवं खामोश विशन सिंह के मुँह से एक चीख निकली। अफसरों ने देखा कि जो आदमी पंद्रह वर्ष तक दिन-रात अपनी टाँगों पर खड़ा रहा, आज वह समाप्त हो गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 5 टोबा टेक सिंह

शब्दार्थ :

  • बँटवारा – विभाजन
  • हुकूमत – शासन
  • तबादला – स्थानांतरण
  • अख्लाकी – सामाजिक
  • माकूल – उचित, ठीक
  • दानिशमंद – विद्वान, बुद्धिमान
  • मुकर्रर – निश्चित, निर्धारित
  • हिफाजत – सुरक्षा
  • लवाहकीब – संबंधी, रिश्तेदार
  • चेमेगोइयाँ – शोरगुल, बातचीत
  • मुतमाइन – संतुष्ट
  • बाज – कुछ
  • अक्सरीयत – अधिकार
  • तक्सीम – हिस्से में आना
  • अलहदा – अलग
  • महले वकू – भौगोलिक स्थिति
  • माऊफ – खराब, बिगड़ा
  • दरब-वृक्ष, दरख
  • मुसलसल – निरंतर लगातार
  • बाकीमांदा – बचे हुए शेष
  • मजीद – ज्यादा
  • शकित व शामित – शांति एवं खामोश
  • रविश – सड़क, मार्ग
  • नमूदार – प्रकट
  • दफेदार – प्रहरी, रक्षक
  • कारकुन – कार्यकर्ता
  • यकलख्त – एकदम
  • गुफ्तुगु – गुप्त बातचीत
  • जहर-माहर – जबर्दस्ती खाना
  • मुताल्लिक – बारे में, विषय में
  • बे-जरर – निर्भय, निडर
  • दरयाफ्त – जानकारी लेना
  • कत्अन – कतई
  • अजीबो-अकारिब – निकट संबंधी
  • इत्मीनान बखश – संतोषजनक
  • मसरुफ – व्यस्त
  • फेहरिस्त – सूची, तालिका
  • मुहाफिज – रक्षक
  • तरफैन – दोनों तरफ के
  • इब्तिदाई – आरंभिक, शुरू का
  • शोरो-गोगा – शोरगुल
  • शिगाफ – गगन भेदी
  • खिदमत – सेवा
  • दरमियान – मध्य, बीच

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 4 भिखारिन to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 Question Answer – भिखारिन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
रोजाना अंधी कहाँ जाकर खड़ी रहती है?
(क) झोपड़ी के दरवाजे पर
(ख) महल के दरवाजे पर
(ग) मस्जिद के दरवाजे पर
(घ) मन्दिर के दरवाजे पर
उत्तर :
(घ) मन्दिर के दरवाजे पर

प्रश्न 2.
झोपड़ी में उसके साथ कितने वर्ष का लड़का रहता था?
(क) पाँच
(ख) आठ
(ग) दस
(घ) बारह
उत्तर :
(ग) दस

प्रश्न 3.
उस लड़के का क्या नाम था ?
(क) सोहन
(ख) रोहन
(ग) मोहन
(घ) भुवन
उत्तर :
(ग) मोहन

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

प्रश्न 4.
सेठ के पास जमा नकदी को कितने वर्ष बाद वह माँगने गई?
(क) दो वर्ष
(ख) तीन वर्ष
(ग) चार वर्ष
(घ) पाँच वर्ष
उत्तर :
(क) दो वर्ष

प्रश्न 5.
‘नहीं तो, इस नाम पर एक पाई भी जमा नहीं है।’ कौन कहता है?
(क) सेठ
(ख) सेठानी
(ग) मुनीम
(घ) नौकर
उत्तर :
(ग) मुनीम

प्रश्न 6.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कब हुआ था ?
(क) 7 मई 1861 ई० में
(ख) 7 मई 1862 ई० में
(ग) 8 मई 1863 ई० में
(घ) 9 मई 1864 ई० में
उत्तर :
(क) 7 मई 1861 ई० में

प्रश्न 7.
‘नोबेल पुरस्कार’ पाने वाले पहले भारतीय कौन हैं ?
(क) सत्येन्द्र सत्यार्थी
(ख) अमर्त्य सेन
(ग) डॉ॰ हरगोविंद खुराना
(घ) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
उत्तर :
(घ) रवीन्द्रनाथ ठाकुर।

प्रश्न 8.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) महिषादल
(ख) जोड़ासाँकू
(ग) रवीन्द्र सदन
(घ) रवीन्द्र सारणी
उत्तर :
(ख) जोड़ासाँकू।

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प्रश्न 9.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने किस संस्था की स्थापना की ?
(क) शांतिनिकेतन
(ख) संगीत निकेतन
(ग) नृत्य निकेतन
(घ) बाऊल निकेतन
उत्तर :
(क) शांतिनिकेतन।

प्रश्न 10.
रवीन्द्रनाथ टैगोर की पत्नी का नाम था –
(क) शिवानी देवी
(ख) मृणालिनी देवी
(ग) साविश्री देवी
(घ) इसमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मृणालिनी देवी

प्रश्न 11.
सेठजी का पूरा नाम क्या था ?
(क) सेठ कन्हैयालाल
(क) सेठ बनवारी दास
(ग) सेठ बनारसी दास
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सेठ बनारसी दास

प्रश्न 12.
मोहन के शरीर के किस अंग पर लाल निशान था ?
(क) हाथ
(ख) पीठ
(ग) पेट
(घ) जाँघ
उत्तर :
(घ) जाँघ

प्रश्न 13.
बुखार उतरने पर मोहन के मुँह से सबसे पहला शब्द क्या निकला ?
(क) माँ
(ख) अम्मा
(ग) मम्मी
(घ) उपरोक्त कोई नहीं
उत्तर :
(क) माँ

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प्रश्न 14.
“इसमें तुम्हारी धरोहर है”‘ – यहाँ धरोहर का संबंध किससे है ?
(क) जमीन
(ख) रुपयाापैसा
(ग) संतान
(घ) सोना-चाँदी
उत्तर :
(ख) रुपया-पैसा

प्रश्न 15.
औरत क्या दे देती थी ?
(क) प्रसाद
(ख) पैसे
(ग) अनाज
(घ) पीने का पानी
उत्तर :
(ग) अनाज

प्रश्न 16.
बूढ़िया किसे आशिर्वाद देते हुए चली गयी ?
(क) बच्चे को
(ख) सेठजी को
(ग) मुनीमजी को
(घ) लेखक को
उत्तर :
(ख) सेठजी को

प्रश्न 17.
कितने वर्ष बाद लड़के को ज्वर हो गया ?
(क) दो वर्ष
(ख) तीन वर्ष
(ग) चार वर्ष
(घ) पाँच वर्ष
उत्तर :
(क) दो वर्ष

प्रश्न 18.
किसने कहा “भगवान तुम्हें बहुत्त दे”‘ –
(क) भिखारिन
(ख) सेठजी
(ग) भक्त
(घ) मुनीमजी
उत्तर :
(क) भिखारिन

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प्रश्न 19.
अंधी को किससे नफरत हो गई ?
(क) सेठजी से
(ख) मन्दिर से
(ग) भक्त से
(घ) मुनीमजी से

प्रश्न 20.
मोहन के जाँघ पर किस रंग का चिन्ह था ?
(क) काले रंग का
(ख) नीले रंग का
(ग) लाल रंग का
(घ) हरे रंग का
उत्तर :
(ग) लाल रंग का

प्रश्न 21.
अंधी निराश होकर कहाँ चल दी ?
(क) झोपड़ी में
(ख) घर में
(ग) मन्दिर में
(घ) मस्जिद में
उत्तर :
(क) झोपड़ी में

प्रश्न 22.
मोहन कितने दिनों में स्वस्थ हो गया ?
(क) आठ-दस
(ख) दस-पन्द्रह
(ग) दस-बारह
(घ) सात से पन्द्रह
उत्तर :
(ख) दस-पन्द्रह

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
मन्दिर में कैसे लोग आते हैं?
उत्तर :
मंदिर में सहृदय और श्रद्धालु लोग आते हैं।

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प्रश्न 2.
अंधी को बच्चा कितने वर्ष पहले कहाँ मिला?
उत्तर :
अंधी को बच्चा पाँच वर्ष पहले किसी मेले में मिला था।

प्रश्न 3.
पैसा माँगने पर सेठ ने अंधी को गुस्से में क्या कहा?
उत्तर :
पैसा माँगने पर सेठ ने अंधी को गुस्से में कहा- जाती हो या फिर नौकर को बुलाऊँ।

प्रश्न 4.
अंधी को किस शब्द ने बेचैन कर दिया?
उत्तर :
सेठजी नेकहा कि बच्चा मेरा है, अब मिला है, इसलिए इसे कहीं जाने न दूँगा। सेठजी के ये शब्द सुनकर अंधी बेचैन हो गई।

प्रश्न 5.
अंधी माँ से मिलने पर वह कितने दिन में ठीक हुआ?
उत्तर :
अंधी माँ से मिलने पर वह दस-पन्द्रह दिन में ठीक हो गया।

प्रश्न 6.
निम्न पंक्तियाँ कौन किससे कह रहा है?
(क) ‘कैसी जमा-पूँजी? कैसे रुपये?’
उत्तर :
सेठजी अंधी भिखारिन से कह रहे हैं।
(ख) ‘अच्छा’ भगवान तुम्हें बहुत दे।’
उत्तर :
अंधी भिखारिन सेठजी से कह रही है।
(ग) ‘इसमें तुम्हारी धरोहर है, तुम्हारे रुपये। मेरा वह अपराध. . ।’
उत्तर :
सेठजी ने अंधी भिखारिन से कहा।

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प्रश्न 7.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर के माता-पिता का नाम लिखें।
उत्तर :
र्वीन्द्रनाथ ठाकुर के पिता का नाम श्री देवेन्द्रनाथ ठाकुर तथा माता का नाम शारदा देवी था।

प्रश्न 8.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर :
कलकत्ता (कोलकाता) के जोड़ासाँकू स्थित ‘प्रासादोपम भवन’ में हुआ था।

प्रश्न 9.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कब हुआ था?
उत्तर :
7 मई, सन् 1861 को।

प्रश्न 10.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्राथमिक शिक्षा कहाँ हुई थी?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्राथमिक शिक्षा घर पर ही हुई थी।

प्रश्न 11.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर बैरिस्ट्री पढ़ने के लिए कहाँ गए थे?
उत्तर :
लंदन।

प्रश्न 12.
रवीन्द्रनाथ ने नाईटहुड की उपाधि क्यों लौटा दी ?
उत्तर :
जालियाँवाला बाग हत्याकाण्ड से आहत होकर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाईटहुड की उपाधि लौटा दी।

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प्रश्न 13.
कौन लोग धन्नासेठों से महान तथा उदार होते हैं ?
उत्तर :
अभावग्रस्त लाचार लोग अपने विचारों तथा कर्मों से धन्नासेठों से महान तथा उदार होते हैं।

प्रश्न 14.
काशी के सेठ कैसे व्यक्ति थे ?
उत्तर :
काशी के सेठ बनारसी दास बहुत प्रसिद्ध देशभक्ल, धर्मात्मा व्यक्ति थे।

प्रश्न 15.
भिखारिन किसके लिये पैसे इकट्टे किये हैं ?
उत्तर :
भीख माँग कर बच्चे के लिए पैसे इकट्टे किए हैं।

प्रश्न 15.
भिखारिन किसलिए सेठजी को जमा पूँजी देने के लिये कहा ?
उत्तर :
अंधी ने किसी डॉक्टर से इलाज कराने का निश्चय किया। इसलिए वह सेठ जी के पास जाकर अपनी जमा पूँजी में से कुछ रुपये देने के लिए कहने लगी।

प्रश्न 16.
अंधी ने ठहाका लगाकर क्या कही ?
उत्तर :
अंधी ने ठहाका लगाकर कहीं कि तुम्हारा बच्चा है इसलिए लाख प्ययल् करके तुम बचाओगे, पर मेरा बच्चा होता तो उसे मर जाने देती।

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प्रश्न 17.
सेठजी निश्चय कर कहाँ पहुँचे ?
उत्तर :
सेठजी निश्चय कर अंधी की झोपड़ी में पहुँचे।

प्रश्न 18.
अंधी ने सेठ को क्या जवाब दिया ?
उत्तर :
अंधी ने जवाब दिया कि अब हम माँ-बेटे दोनों एक साथ स्वर्वलोक जाएँगे, वहाँ बच्चा सुख में रहेगा।

प्रश्न 19.
रवीन्द्रनाथ को नोबेल पुरस्कार कब और क्यों दिया गया ?
उत्तर :
सन् 1913 में रवीन्द्रनाथं को उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना ‘गीतांजलि’ के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया।

प्रश्न 20.
सफेद वस्त्र वाले राहगीरों का बूढ़िया के प्रति कैसा व्यवहार होता था ?
उत्तर :
सफेद वस्त्र वाले अधिकार राहगीर बूढ़िया को भिक्षा देने के बजाय झिड़कियाँ दिया करते थे।

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प्रश्न 21.
मोहन सेठ कौन था ?
उत्तर :
मोहन सेठ बनारसीदास का खोया हुआ बेटा था, जिसका पालन-पोषण अंधी भिखारिन ने किया।

प्रश्न 22.
अंधी भिखारिन ने सेठजी से कब विदाई माँगी ?
उत्तर :
मोहन के पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद अंधी भिखारिन ने सेठजी से विदाई माँगी।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
काशी के सेठ के बारे में लोग क्या जानते थे?
उत्तर :
काशी के सेठ के बारे में लोग जानते थे कि वे बहुत बड़े भक्त और धर्मात्मा है। धर्म में उनकी बड़ी रुचि है। स्नान-ध्यान में संलग्न रहते हैं।

प्रश्न 2.
अंधी भिखारिन से पैसे ले उसके साथ क्या व्यवहार किया गया?
उत्तर :
अंधी भिखारिन से पैसे लेकर उसके साथ बिल्कुल अन्याय किया। सेठजी बिल्कुल नकार गए कि उसकी पूँजी उनके पास जमा है। उसे धमकी मिली की कि वह तुरंत वहाँ से चली जाए। उसे मारने का डर दिखाया गया। उसके रोने गिड़गिड़ाने पर भी उसके पैसे उसे न मिले।

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प्रश्न 3.
अंधी ने ठहाका क्यों लगायी?
उत्तर :
सेठजी ने अंधी से कहा कि यह बच्चा उनका है, इसलिए वे इसे कहीं जाने नहीं देंगे और लाख कोशिशें करके भी इसके प्राण बचाएंगे। सेठजी के इसी वचन पर अंधी ने ठहका लगायी और कहा कि बच्चा तुम्हारा है, इसलिए लाख प्रयल करके उसे बचाएँगे। यदि मेरा बच्चाहोता तो उसे मर जाने देते क्यों? यह भी कोई न्याय है।

प्रश्न 4.
सेठ और भिखारिन में किसे महान कहा जा सकता है? और क्यों?
उत्तर :
सेठ और भिखारिन में भिखारिन को महान कहा जा सकता है। भिखारिन ने अपनी धरोहर के रुपये भी सेठजी को ही लौटा दिया। सेठजी को भिखारी बना दिया ओर स्वयं को देने वाली। सेठजी ने उससे बेईमानी की, बच्चे को भी छीन लिए, पर वह ममता के कारण बच्चे की सेवा की। स्वस्थ्य हो जाने पर सेठजी के यहाँ रहने को राजी न हुई। सेठ उसके सामने नतमस्तक हो गए।

प्रश्न 5.
इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी भी अपना धर्म-कर्त्तव्य, ईमानदारी को नहीं भूलना चाहिए। तुच्छ धन के लिए बेईमान बनना मानवता के खिलाफ है। सहुदयता, दया, प्रेम, दीनों, अपाहिजों, भिखारियों के प्रति सहद्य होना चाहिए। व्यक्ति को अपने विचारों तथा कर्मों से महान बनना चाहिए। महानता धन में नहीं ममता में मानवता में सहृदयता में होती है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
प्रस्तुत कहानी में मानवीय मूल्य बोध को मार्मिक ढंग से उजागर किया गया है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने एक अंधी भिखारिन के चरित्र से मानवीय मूल्य बोध को स्पष्ट किया है, तथा इस तथ्य को स्पष्ट किया है कि अंधी भिखारिन अभावग्रस्त, अंधी थी, पर विचारों और कर्मों से वह अतिशय महान थी। प्रतिदिन वह मंदिर के दरवाजे पर खड़ी रहकरे भिक्षा माँगती थी। शाम के समय अपनी झोपड़ी में पहुँच कर दस साल के एक लड़के से स्नेह दिखाती, उसका माथा चूमती। वह लड़का काशी के बड़े सेठ का लड़का था, जो सात साल पूर्व एक मेले में खो गया था। न जाने कैसे वह भिखारिन के पास पहुँचा। वह भिखारिन को ही माँ समझने लगा। अंधी झोपड़ी में एक हंडिया गाड़ रखी थी। जो कुछ माँग कर लाती उसे सुरक्षा के लिए उसमें डाल देती थी।

काशी के सेठ बनारसी दास बहुत बड़े धर्मात्मा, देशभक्त तथा प्रसिद्ध व्यक्ति थे। अंधी अपनी पूँजी सेठ जी के पास धरोहर रूप में रखने के लिए आई। उसने सेठजी को अपनी हंडिया की पूँजी जमा कर लेने के लिए कहा। सेठजी के संकेत पर मुनीम ने बुढ़िया से उसका नाम पूछा और नकदी गिनकर जमा कर दिया। बुढ़िया सेठजी को आशीर्वाद देती हुई अपनी झोपड़ी में चली गई। दो वर्ष बाद एक दिन लड़के को तेज ज्वर हो गया। झाड़-फूँक टोने-टोटके के प्रयोग से लड़के का ज्वरन उतरा। उसने किसी डॉक्टर से इलाज कराने का निश्चय किया। अंधी सेठ जी के पास जाकर अपनी जमा पूँजी में से दस-पाँच रुपये इलाज के लिए माँगने लगी।

पर सेठजी अंधी की जमा-पूँजी को बिल्कुल नकार गए। सेठ जी के इशारे पर मुनीम ने भी कहा कि इस नाम पर एक पाई भी जमा नहीं है। रोती हुई बुढ़िया धर्म के नाम पर कुछ माँगने लगी जिससे उसका बच्चा जी जाए। पर पत्थर में कोमलता न आई। फिर वह सेठजी को आशीर्वाद देकर बुझे दिल से चली गई। इतना धनी आदमी उस अंधी का रुपये नकार गए इससे अधिक मानवीयता का लोप और क्या हो सकता है।

एक दिन अंधी तेज ज्वर से जलते शरीर वाले बच्चे को गोद में उठाकर ठोकरे खाती सेठजी के पास पहुँची। सेठजी ने नौकरों को उसे भगा देने के लिए कहा। पर वह अपने स्थान से न हिली। सेठजी बाहर आए और उस बच्चे को पहचान गए। सात वर्ष पहले मेले में उनका बेटा खो गया था। मोहन की जाँघ पर लाल चिह्न को देखकर निश्चय कर लिया कि अपना बच्चा है और उसे अपनी गोद में ले लिए। बुढ़िया अपने बच्चे के लिए चिल्लाने लगी। निराश वह चली गई। दूसरे दिन मोहन का बुखार उतर गया। वह माँ के लिए बेचैन हो उठा। फिर ज्वर से पीड़ित हो गया। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया।

फिर सेठजी ने विवश होकर बुढ़िया के सामने रोकर गिड़गिड़ाकरले आए बुढ़िया के हाथ के स्पर्श से मोहन स्वस्थ होकर माँ तुम आ गई कहने लगा। मोहन के पूरी तरह ठीक हो जाने पर बुढ़िया जाने के लिए तैयार हो गई सेठजी के मिन्नत करने पर भी वह न रुक सकी। सेठजी ने बुढ़िया की रुपयो की थैली देते हुए कहा कि यह तुम्हारी धरोहर है। मेरे अपराध को क्षमा कर दो। बुढ़िया ने कहा कि यह रुपये तो मैने तुम्हारे मोहन के लिए इकट्ठे किए थे, उसी को दे देना। एक भिखारिन होते हुए भी वह उस प्रसिद्ध सेठ से महान थी। इस समय सेठ भिखारी का और वह देने वाली थी। इस प्रकार लेखक ने मानवीय गुणों को स्पष्ट किया है।

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भाषा बोध :

1. निम्न शब्दों में तत्सम् और तद्भव शब्दों को अलग करें –

तत्सम् – तद्भव
सहृदय – हाथ
मिथ्या – आँसू
नेत्र – बुढ़िया
शाप – बच्चा
वस्तु – कोशिश
वस्त्र
याचना
दृष्टि

2. जिन शब्दों का प्रयोग किसी संज्ञा के स्थान पर किया जाता है, उसे सर्वनाम कहते हैं। नीचे दिए वाक्यों में सर्वनाम शब्द रेखांकित कीजिए।

(क) उसकी गोद में एक बच्चा देखा, वह रो रहा था।
(ख) मेरें रुपये तो हजम कर गए, अब क्या मेरा बच्चा भी मुझसे छीन लोगे।
(ग) मैं उसको अपने हृदय से नहीं जाने दूँगा।
(घ) तुम्हारे जाने से वह बच जाएगा।

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3. निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

मन-ही-मन – मन में ही – अव्ययी भाव समास
थोड़ा बहुत – थोड़ा या बहुत – द्वून्द्व समास
देश भक्त – देश का भक्त – तत्पुरुष समास
धर्मात्मा – धार्मिक है आत्मा जिसकी वह – बहुव्रीहि समास
खून पसीना – खून और पसीना – द्वन्द्ध समास

4. जो अक्षर या अक्षर समूह शब्दों के अन्त में लगाए जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं (क) कृत (ख) तद्धित।
निम्नलिखित शब्दों से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए-

नम्रता – नम्र + अता
बुढ़िया – बूढ़ा + इया
नकदी – नकद + ई
भिखारिन – भिखारी + इन
श्रद्धालु – श्रद्धा + आलु
चिन्तित – चिन्ता + इत
धनी – धन + ई
भिखारी – भिखार + ई

WBBSE Class 8 Hindi भिखारिन Summary

लेखक-परिचय :

रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता के जोड़ासाँकू में ठाकुर परिवार में 1861 ई. में हुआ। बचपन में रवीन्द्रनाथ ने अपने पिता से ध्यान, प्रार्थना, एकान्त्रेम, शांति आदि बाते सीखीं। साहित्य सृजन में इनकी रुचि बचपन से ही थी। रवीन्द्रनाथ ने लगभग एक हजार से अधिक कविताएँ दो हजार से अधिक गीत तथा उपन्यास, कहानी नाटक आदि लिखे।

उन्हें गीतांजलि रचना पर नोबेल पुरस्कार मिला। 1940 ई० में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्षिटी ने इन्हें डी० लिद् की उपाधि दी। वे एक सच्चे देश भक्त, समाज सेवी तथा शिक्षाविद् थे। साहित्यकार के साथ-साथ वे संगीतकार और कलाकार थे। स्मरण, खेवैया, नौका डूबी इनकी मार्मिक कृतियाँ है। विश्व साहित्य में सौन्दर्य पूजा की दृष्टि से चित्रा और उर्वशी उनकी बेजोड़ रचनाएँ हैं। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की साहित्यिक उपलब्धियाँ विशिष्ट हैं। इनका सन् 1941 अगस्त महीना मे देहावसान हो गया।

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सारांश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने एक अंधी भिखारिन की कथा के माध्यम से स्सष्ट किया है कि अभावग्रस्त लाचार लोग अपने विचारों तथा कर्मों से धन्नासेठों से महान तथा उदार होते हैं। एक अन्धी भिखारिन प्रतिदिन एक मंदिर के दरवाजे पर खड़ी रहकर दर्शन कर लौटने वालों से अपना हाथ फैलाकर नम्रता पूर्वक दया की याचना करती थीं। मन्दिर में आनेवाले सह्दय श्रद्धालु उसमे हाथ पर कुछ पैसे रख देते। औरतें कुछ अनाज दे देती थीं।

शाम को वह नगर से बाहर अपनी झोपड़ी में पहुँच जाती। एक दिन पड़ोस के लोगों ने उसकी गोद में एक बच्चा देखा। बच्चा अन्धी के पास था और प्रसन्न था। बच्चा दस साल का हो गया। अंधी के आते ही बच्चा उससे चिपट जाता। अंधी टटोल कर उसके माथे को चूमती.। अंधी अपने से अच्छा उसे खिलाती-पिलाती। अंधी अपनी झोपड़ी में एक हंडिया गाड़ रखी थी। शाम को जो कुछ माँग कर लाती उसमें डाल देती। सुबह वह बच्चे को खिलाकर फिर मंदिर के दर वाजे पर खड़ी हो जाती।

काशी के सेठ बनारसी दास बहुत प्रसिद्ध देशभक्त, धर्मात्मा व्यक्ति थे। सैकड़ों भिखारी अपनी जमा पूँजी उनके पास धरोहर के रूप में रखते थे। हॉडी के भर जाने पर अंधी भी उसे उखाड़ कर सेठ के पास जमा करने पहुँची। उसने बतलाया कि भीख माँग कर बच्चे के लिए पैसे इकट्ठे किए हैं। इन्हें जमा कर लीजिए। सेठ का इशारा पाकर मुनीमजी ने नकदी गिनकर उसके नाम पर जमा कर लिया। बुढ़िया सेठ जी को आशीर्वाद देते हुई चली गई। दो वर्ष बाद लड़के को ज्वर हो गया। झाड़-फूंक, टोटके से ठीक न हुआ। अंधी ने किसी डॉक्टर का इलाज कराने का निश्चय किया।

इसलिए वह सेठ जी के पास जाकर अपनी जमा पूँजी में से कुछ रुपये देने के लिए कहने लगी। सेठ बिल्कुल नकार गए। फिर सेठ जी के इशारे पर मुनीमजी से बही में नाम देखने को कहा कि इसके नाम पर कुछ जमा है, मुनीमजी बोले नहीं है। अंधी रो-रोकर प्रार्थना करने लगी कि परमात्मा के नाम पर धर्म के नाम पर कुछ दे दीजिए, जिससे मेरा बच्चा जी जाए। पर सेठजी क्रुद्ध हो कर उसे तुरंत हट जाने को कहा। अंधी उन्हें ‘भगवान तुम्हें बहुत दें’ कहकर चली गई।

अंधी को सेठ से नफरत हो गई। एक दिन वह बच्चे को अपनी गोद में उठाकर सेठजी के पास पहुँची और दरवाजे पर धरना देकर बैठ गई। नौकर के डराने धमकाने पर भी वह नहीं टली। सेठ जी स्वयं बाहर आए। बच्चे को देखकर उन्हें अचम्भा हुआ कि उसकी रूपाकृति उनके सात वर्ष पूर्व मेले में खोए बच्चे मोहन से मिलती-जुलती थी। मोहन की जाँघ पर एक लाल रंग का चिह्न था। उन्होंने बच्चे की जाँध पर चिह्न देखकर यकीन कर लिया कि यह उन्हीं का बच्चा है।

उन्होंने बच्चे को लेकर अपने कलेजे से चिपका लिया। बच्चे का शरीर बुखार से तप रहा था। नौकर को डॉक्टर लाने के लिए भेजा और स्वयं मकान के अंदर चले गए। अंधी बच्चे के लिए चिल्लाने लगी। सेठजी ने कहा कि बच्चा मेरा है, लाख प्रयत्न करके इसे बचाऊँगा। अंधी ने ठहाका लगाकर कहा कि तुम्हारा बच्चा है इसलिए लाख प्रयत्न करके तुम बचाओगे, पर मेरा बच्चा होता तो उसे मर जाने देते। अंधी निराश होकर अपनी झोपड़ी की ओर चल दी।

ईश्वर की कृपा से दवा ने प्रभाव डाला या टोटका ने। मोहन का बुखर उतर गया। होश में आने पर वह माँ कहकर अंधी को खोजने लगा। फिर उसका ज्वर तेज हो गया। डॉक्टरों ने जबाब दे दिया। सेठजी निश्चय कर अंधी की झोपड़ी में पहुँचे। अंधी का शरीर भी अग्नि की तरह तप रहा था। सेठजी ने कहा कि बच्चा तुम्हें पुकार रहा है। डॉक्टर निराश हो गए हैं। अब चलकर तुम्हीं उसके प्राण बचा सकती हो। अंधी ने जवाब दिया कि अब हम माँ-बेटे दोनों एक साथ स्वर्ग लोक जाएँगे, वहाँ बच्चा सुख में रहेगा। सेठजी रोने लगे। बोले कि ममता की लाज रख लो। तुम उसकी माँ हो- तुम्हारे जाने से बच जाएगा।

अंधी चलने को प्रस्तुत हो गई। फिटन पर बैठकर दोनों कोठी पर पहुँचे। सेठजी सहारा देकर अंधी को उतारकर अन्दर ले गए। अंधी मोहन के माथे पर हाथ फेरने लगी। बच्चे ने आँखें खोल दी। कहा कि माँ तुम आ गई। दस-पन्द्रह दिन में मोहन बिल्कुल स्वस्थ हो गया। मोहन के ठीक हो जाने पर अंधी वहाँ रहने के लिए राजी न हुई। वह चलने लगी तो सेठजी ने रुपयों की थैली उसके हाथ में देकर कहा कि यह तुम्हारी धरोहर है, तुम्हारे ही रुपये हैं। अंधी ने कहा कि यह रुपये तो मैने मोहन के लिए इकट्ठे किये थे, उसी को दे देना। अंधी थैली वहीं छोड़कर चल दी। बाहर घर की ओर नेत्र उठाए। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। एक भिखारिन होते हुए भी वह सेठजी से महान थी। इस समय सेठ भिखारी था, वह देनेवाली थी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 भिखारिन

शब्दार्थ :

  • सहृदय – दयालु, दूसरों के दुःख को समझनेवाला ।
  • पूँजी – धन, संपत्ति ।
  • श्रद्धालु – जिसके मन में श्रद्धा हो, श्रद्धावान् ।
  • ज्वर – बुखार ।
  • मिथ्या – गलत, असत्य ।
  • धरोहर – थाती ।
  • दुआएँ – आशीर्वाद ।
  • नफरत – घृणा ।
  • सराहती – प्रशंसा करती ।
  • राजी – तैयार हो जाना ।
  • बनिस्बत – मुकाबले में की अपेक्षा ।
  • जान में जान आना – संतोष मिलना ।
  • राहगीरो यात्रियों ।
  • टस से मस न होना – अपने स्थान से न डिगना ।
  • हंडिया – मिट्टी का बर्तन ।
  • खून पसीना एक करना – बहुत मेहनत करना ।
  • संलग्न – लीन, लगा हुआ।
  • सिरहाने – सिर के पास ।
  • चिपट – चिपकाना।
  • ममता – माता का पुत्र पर स्नेह, मोह।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 3 नीलू to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 Question Answer – नीलू

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
नीलू पाठ हिन्दी साहित्य की कौन-सी गद्य विधा है?
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) रेखाचित्र
(घ) प्रहसन
उत्तर :
(ख) संस्मरण

प्रश्न 2.
नीलू किस प्रजाति का कुत्ता था?
(क) अल्सेशियन
(ख) भूटिया
(ग) अल्लेशियन-भूटिया वर्ण संकर
(घ) देशी
उत्तर :
(ग) अल्सेशियन-भूटिया वर्ण संकर

प्रश्न 3.
महादेवी वर्मा की जन्म-मृत्यु की कौन-सी तिथि सही है?
(क) सन् 1907-1980
(ख) सन् 1980-2014
(ग) सन् 1807-1887
(घ) सन् 1907-1987
उत्तर :
(ग) सन् 1907,1987

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 4.
लूसी की मृत्यु कैसे हुई?
(क) ठंड लगने से
(ख) भूटिया कुत्ते द्वारा मारने
(ग) लकड़बग्घे द्वारा
(घ) कजली और बादल के द्वारा
उत्तर :
(ग) लकड़बघ्घे द्वारा

प्रश्न 5.
‘नीलू’ किस गद्य विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) संस्मरण
(ग) रेखाचित्र
(घ) प्रहसन
उत्तर :
(ख) संस्मरण

प्रश्न 6.
लूसी किस प्रजाति का कुत्ता था ?
(क) भूटिया
(ख) अल्सेशियन
(ग) जंगली
(घ) देशी
उत्तर :
(ख) अल्सेशियन

प्रश्न 7.
लूसी ने कितने बच्चों को जन्म दिया था ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सा गुण नीलू में था ?
(क) पूँछ हिलाना
(ख) अकारण भौंकना
(ग) दीनभाव से पीछे घूमना
(घ) दर्प्भाव
उत्तर :
(घ) दर्पभाव

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 9.
किन दौनों में गहरी दोस्ती थी ?
(क) नीलू-लूसी में
(ख) कजली-बादल में
(ग) नीलू-कजली में
(ङ) नीलू-बादल में
उत्तर :
(ग) नीलू-कजली में

प्रश्न 10.
नीलू का जीवन-काल कितने वर्षों का था ?
(क) ग्यारह
(ख) बारह
(ग) तेरह
(घ) चौदह
उत्तर :
(घ) चौदह

प्रश्न 11.
नीलू की मृत्यु कैसी थी ?
(क) शांत-निर्लिप्त
(ख) दैन्य
(ग) भयानक
(घ) असामयिक
उत्तर :
(क) शांत-निर्लिप्त

प्रश्न 12.
कौन रोशनदानों से नीचे गिर जाते थें ?
(क) नीलू
(ख) गौरैया
(ग) गौरैया के बच्चे
(घ) लूसी
उत्तर :
(ग) गौरैया के बच्चे

प्रश्न 13.
रात को कंपाउंड का चक्कर लगाकर कौन पहरेदारी करता था ?
(क) लूसी
(ख) नीलू
(ग) खरगोश
(घ) लेखक
उत्तर :
(ख) नीलू

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

प्रश्न 14.
किसको बिल्ला और सियार का आहार बनना पड़ा ?
(क) खरगोश को
(ख) गौरया को
(ग) नोलू
(घ) मोर को
उत्तर :
(क) खरगोश को

प्रश्न 15.
सरदी लगने से किसको निमोनिया हो गया ?
(क) नीलू को
(ख) लेखक को
(ग) खरगोश को
(घ) मोर को
उत्तर :
(क) नीलू को

प्रश्न 16.
लेखिका सबसे अधिक किसको महत्व देती थी ?
(क) लूसी को
(ख) नीलू को
(ग) खरगोश को
(घ) मोर को
उत्तर :
(ख) नीलू को

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
लूसी कौन थी?
उत्तर :
लूसी उत्तरायण में रहने वाली एक अल्सेशियन कुतिया थी। वह नीलू की माँ थी।

प्रश्न 2.
उत्तरायण के लोग लूसी से सामान कैसे मँगवाते थे?
उत्तर :
उत्तरायण के लोग लूसी के गले में रुपये और सामग्री की सूची के साथ एक कपड़ा बाँध कर उससे सामान लाने का अनुरोध करते थे। लूसी दुकान तक पहुँच जाती थी। दुकानदार उसके गले से कपड़ा खोलकर रुपया, सूची लेने के बाद सामान की गठरी उसके गले या पीठ से बाँध देता और लूसी बोझ के साथ बर्फोला रास्ता पार कर सकुशल लौट आती थी। लोग अपना सामान प्राप्त कर लेते थे।

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प्रश्न 3.
लेखिका को मित्र के आने की सूचना नीलू से कैसे मिलती थी?
उत्तर :
नीलू किसी विशेष परिचित को आया देखकर, धीरे-धीरे भीतर आकर लेखिका के कमरे के दरवाजे पर खड़ा हो जाता। नीलू का इस प्रकार आना ही लेखिका के लिए किसी मित्र के आने की सूचना थी।

प्रश्न 4.
नीलू अकेले कैसे रह गया?
उत्तर :
नीलू कुत्तों में केवल कजली के सामीप्य से प्रसन्न रहता था, परंतु कजली और बादल एक क्षण के लिए भी एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे। इस प्रकार बेचारा नीलू अकेला रह गया।

प्रश्न 5.
अल्सेशियन और भूटिया कुत्तों के स्वभाव में क्या अन्तर होता है?
उत्तर :
अल्सेशियन कुत्ते आखेट प्रिय होते हैं। भूटिया कुत्ते हिंसक और कोधी स्वभाव के होते हैं।

प्रश्न 6.
गौरैया कहाँ अपना घोंसला बना लेती थी?
उत्तर :
गौरैया लेखिका के बँगले के रोशनदानों में अपना घोंसला बना लेती थी।

प्रश्न 7.
नीलू की मृत्यु क्या सामान्य कुत्तों की भाँति हुई?
उत्तर :
नीलू की मृत्यु सामान्य कुत्तों की भौंति नहीं हुई। सामान्य कुत्ते बड़े टुःख के साथ कराहते हुए मरते हैं। पर नीलू की मृत्यु कष्ट रहित, शांत निर्लिप्त भाव से हुई।

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प्रश्न 8.
महादेवी वर्मा जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च, 1907 ई० को उत्तर प्रदेश के फरूरखाबाद जिला में हुआ था।

प्रश्न 9.
जब लेखिका दाना देने निकलती है, तो कौन प्रत्येक कक्ष का निरीक्षण करता था ?
उत्तर :
जब लेखिका मोर, खरगोश आदि को दाना देने निकलती तो नीलू सदा उनके साथ घूमता और प्रत्येक कक्ष का निरीक्षण करता।

प्रश्न 10.
नीलू कैसे अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होता था ?
उत्तर :
रात में सबके सो जाने पर वह पूरे कंपाउंड का चक्कर लगाकर पहरेदारी करता था। जाड़ा हो, गरमी या बरसात वह अपने कर्त्तव्य से कभी विमुख नहीं होता था।

प्रश्न 11.
मोटर दुर्घटना में किसे अस्पताल जाना पड़ा ?
उत्तर :
एक बार मोटर दुर्घटना में आहत होने पर लेखिका को असताल जाना पड़ा।

प्रश्न 12.
नीलू कुत्तों में किसके निकटता से प्रसन्न रहता था ?
उत्तर :
कुत्तों में वह केवल कजली की निकटता से ही प्रसन्न रहता।

प्रश्न 13.
अपरिचित को देखकर नीलू क्या करता था ?
उत्तर :
अपरिचित को आया देखकर वह कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ा हो जाता, फिर लेखिका के संकेत करने पर पुन: दरवाजे पर जा बैठता था।

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प्रश्न 14.
नीलू का स्वभाव आश्चर्यजनक था कैसे ?
उत्तर :
तेरह वर्ष के जीवन में नोलू कभी भी किसी पशु पक्षी पर नहीं झपटा। उसका यह स्वभाव सचमुच आश्चर्यजनक था।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
लूसी की रूपाकृति का वर्णन करो।
उत्तर :
लूसी सामान्य कुत्तों से भिन्न थी। हिरणी के समान वह तीव्रगति वाली थी। उसकी देह मानों साँचे में ढली हुई थी। काला लगनेवाले पीली कांति वाले रोयें थे। आँखेे काली छोटी, सजग खड़े कान, रोएँदार लंबी पूँछ थी। वह बड़ी आकर्षक प्रतीत होती थी।

प्रश्न 2.
लूसी का स्वभाव स्वच्छंद सहचरी के समान क्यों था?
उत्तर :
अल्सेशियन कुत्ता एक ही स्वामी को स्वीकार करता है। यदि एक व्यक्ति का स्वामित्व उसे नहीं मिल पाता तो वह सब के साथ सहचर जैसा आवरण करने लगता है। वह आदेश किसी का नहीं मानता, पर सबके सेहपूर्ण अनुरोध की रक्षा करता है। अल्लेशियन जाति होने के कारण लूसी की स्थिति भी स्वच्छंद सह चरी के समान हो गई थी।

प्रश्न 3.
नीलू ने खरगोशों की प्राण रक्षा किस प्रकार की?
उत्तर :
खरगोश सुरंग कर दूसरे कंपाउंड में जा निकले। आगे पहुँचने वाले खरगोशों के अंग जंगली बिल्ला द्वार क्षतविक्षत कर दिए गए। कुछ खरगोश बिल्ले या सियार के आहार बन गएं। पहरे के नित्य क्रम में घूमते हुए नींलू ने चाहरदीवारी के पार देखा। खरगोशों के संकट को देखकर वह कूदकर उस पार पहुँच गया। उसके पहुँचते ही बिल्ला भाग गया। खरगोश को बाहर निकलने से रोकने और उनकी सुरक्षा के लिए वह रात भर ओस से भींगता हुआ सुरंग के द्वार पर खड़ा रहा। इस प्रकार नीलू ने खरगोशों की रक्षा की।

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प्रश्न 4.
नीलू के स्वभाव गत विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर :
नीलू का स्वभाव अन्य कुत्तों से बिलकुल भिन्न था। वह खाने के लिए लालांयित नहीं रहता था। प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए पूँछ हिलाना, कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए चाहना, स्वामी के पीछे-पीछे घूमना, अकारण भौंकना, काटना आदि उसके स्वभाव में नहीं था। वह दीनता से रहित दर्प भाव से युक्त था। अपनी सहज चेतना से वह अपरिचित को पहचान लेता था। वह हिंसक स्वभाव का नहीं था।

प्रश्न 5.
लेखिका का नीलू प्रेम अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
नीलू की माँ के मर जाने पर लेखिका शावक नीलू को दुग्ध-चूर्ण से दूध बनाकर पिलाया। कोमल ऊन डालिया रख कर उसमें सुलाया। आने के समय उसे प्रयाग ले आई। नीलू हमेशा घर के बाहरी बरामदे में ही बैठा करता। नीलू के निमोनिया हो जाने पर उसे दवा तथा इंजेक्शन लगवाकर उसे स्वस्थ्य बनाया। जन्म से मृत्युतक वह हमेशा. लेखिका के साथ रहा।

प्रश्न 6.
लूसी के अभाव में नीलू का पालन-पोषण कैसे हुआ?
उत्तर :
माँ के अभाव में नीलू दूध के लिए शोर मचाने लगा। लेखिका ने दुग्ध-चूर्ण से दूध बनाकर पिलाया। रजाई में भी उसे माँ के पेट की गर्मी न मिलती और रोने चिल्लाने लगता। फिर लेखिका ने उसे कोमल ऊन और अधबुने स्वेटर की डालिया में रख दिया। अब वह आराम से सोने लगा। आने के समय लेखिका उसे भी प्रयाग लेते आई।

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प्रश्न 7.
‘जीवन के समान उसकी मृत्यु भी दैन्य से रहित थी’ आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में लेखिका ने स्पष्ट किया है कि नीलू का जीवन मस्ती और आनंद से भरा था। उसमें दीनता की हीन भावना नहीं थी। उसी प्रकार उसकी मृत्यु भी कष्ट रहित थी। उसकी मृत्यु अत्यंत शांत भाव से हुई। मृत्यु के समय वह निर्लिप्त बना रहा।

प्रश्न 8.
‘एक व्यक्ति का स्वामित्व उसे सुलभ नहीं होता, तो वह सबके साथ सहचर जैसा आचरण करने लगता है।’ आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत अवतरण में लेखिका ने अल्सेशियन कुत्ते के स्वभाव का चित्रण किया है। अल्सेशियन कुत्ते को यदि कोई एक स्वामी (मालिक) नहीं मिल जाता तो वह सब के साथ सहचर जैसा व्यवहार करने लगता है। वह किसी का आदेश नहीं मानता, परंतु सहचर की तरह प्रेम भरे अनुरोध को स्वीकार करता है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
‘नीलू’ के माध्यम से स्पष्ट कीजिए कि पशु मानव समाज के लिए बड़े उपयोगी होते हैं?
उत्तर :
लेखिका ने अपने पालतू कुत्ते नीलू और उसकी माँ लूसी की जीवन गाथा से उनके संबंध, क्रिया कलाप, स्वामिभक्ति, कर्त्तव्यपरायणता का सहज वर्णन किया है। इनके क्रिया कलाप से यह सिद्ध हो जाता है कि पशु मानव के लिए बड़े उपयोगी हैं।

उत्तरायण में लूसी की स्थिति स्वच्छंद सहचरी के समान थी। उत्तरायण से एक रास्ता दो पहाड़ियों के बीच से मोटर मार्ग तक जाता था। उसके अन्त में मोटर स्टाप पर एक ही दुकान थी। जिसमें आवश्यक खाद्य सामग्री प्राप्त हो सकती थी। शीतकाल में बर्फ से ढक जाने से रास्ते का चिह्न भी नहीं रह जाता था। उस समय उत्तरायण के निवासी दुकान तक पहुंचने में असमर्थ हो जाते थे। ऐसी स्थिति में लूसी ही उनका सहयोग करती थी। उत्तरायण के निवासी लूसी के गले में रुपये और सामग्री की सूची के साथ एक कपड़ा या चादर बाँध कर सामान लाने का अनुरोध करते थे।

वंश परपरा से बर्फ में मार्ग बना लेने की सहज चेतना के कारण लूसी सारे व्यवधान पार कर दुकान तक पहुँच जाती थी। दुकानदार उसके गले से कपड़ा खोलकर रुपया सूची आदि लेने के बाद सामान की गठरी उसको गले या पीठ से बाँध देता और लूसी सारे बोझ के साथ बर्फीला मार्ग पार करती हुई सकुशल लौट आती। किसी किसी दिन उसे कई बार आना-जाना पड़ता था। इस प्रकार वह चीनी, चाय, आटा, आलू आदि सामग्री लोगों को पहुँचाकर उनकी भलाई किया करती थी।

नीलू अत्यंत समझदार कुत्ता था। वह बारह वर्ष तक लेखिका के घर के बाहरी बरामदे में रहता था। वह प्रत्येक आनेजाने वाले की भली-भाँति देखता था। लेखिका से मिलने वालों में सभी को पहचानता था। किसी अपरिचित को देखकर भीतर आकर कमरे के दरवाजे पर खड़े हो कर भौंकता था। इस प्रकार वह लेखिका को किसी मित्र की उपस्थिति की सूचना दे देता था। नीलू का ध्वनिज्ञान सूँबने का अत्यंत गहरा था। बाहर घूमतें समय यदि कोई कह देता कि तुम्हें गुरुजी बुला रही हैं तो तुरंत कमरे के सामने आकर खड़ा हो जाता था। कभी किसी पशु या पक्षी पर आक्रमण नहीं करता था। बँगले के रोशन दानों में गौरैया के घोंसले बने थे। उनसे कभी उनके बच्चे गिर पड़ते थें। उस समय नीलू बड़ी सतर्कता के साथ कुत्तों तथा बिल्लियों से उन शावकों की रक्षा किया करता था।

सब के सो जाने पर गरर्मियों में बाहर लॉन पर और सर्दियों में बरामदे में बैठकर पहरेदारी सजगता के साथ किया करता था। एक रात में लेखिका के खरगोश बिल खोदकर दूसरे कंपाउंड में निकल गए। जैसे ही वे बाहर निकलते सियार यां मार्जार उन्हें आहार बना डालते। संकेत से यह जानकर नीलू कूदकर दूसरी ओर सुरंग के पास पहुँच गया। उसे देखते ही बिल्ला भाग गया। खरगोशों की रक्षा के लिए वह रातभर जाड़े में खड़ा रहा। मोटर-दुर्टटना में आहत हो जाने पर लेखिका अस्पताल में भर्ती हुई। नोलू वहाँ भी पलंग के चारों घूमता और प्रहरी की तरह पलंग के नीचे जा बैठता। इन क्रिया कलापों से स्पष्ट हो जाता है कि पशु कितने समझदार और मनुष्य के सहायक तथा मित्र होते हैं।

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भाषा बोध :

1. निम्न शब्दों का संधि विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए।

उत्तरायण = उत्तर + अयन – स्वर संधि
कालान्तर = काल + अन्तर – स्वर संधि
स्वभाव = सु + भाव – स्वर संधि
कुहराच्छन्न = कुहरा + आच्छन्न – स्वर संधि
प्रतिक्षा = प्रति + इक्षा – स्वर संधि

2. निम्नलिखित शब्दों से मूल शब्द और उपसर्ग अलग कीजिए-

परिस्थिति परि + स्थिति
आचरण आ + चरण
सकुशल स + कुशल
सुडौल सु + डौल
निर्लिप्त निर + लिप्त
सतर्क स + तर्क

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

3. क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रिया विशेषण कहते है। जैसे- नीलू धीरे-धीरे खरगोशों के पास गया। ऐसे कुछ क्रियाविशेषण चुनिए-
(क) स्वामी के पीछे-पीछे घूमना उसे पसंद न था।
(ख) वह सदर्प धीरे-धीरे आकर दरवाजे पर खड़ा हो जाता।

4. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करो-

कुत्ते की मौत मरना – बुरी तरह मरना।
उत्तरायण होना – उत्तर की ओर, उत्तर गति होना।
अवज्ञा होना – उपेक्षा या तिरस्कार करना।
कुत्ते की मौत मरना – जो व्यक्ति जीवन में बुरा आचरण करता है, वह अन्त में कुत्ते की मौत मरता है।
उत्तरायण होना – भीष्म पितामह उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे।
अवज्ञा करना – हमें बड़ों को कभी अवज्ञा नहीं करनी चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi नीलू Summary

लेखक-परिचय :

आधुनिक युग की मीरा हिन्दी साहित्य की यशस्वी कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के फरूखाबाद में सन् 1907 ई. में होली के दिन हुआ था। छायावादी काव्य चेतना के उन्नयकों में महादेवी जी का अन्यतम स्थान हैं। इन्होंने संस्कृत में प्रथम श्रेणी में एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। प्रयाग महिला पीठ की प्रधानाचार्य के पद पर रहकर उन्होंने नारी-शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सन् 1987 ई. में इनका देहावसान हो गया।

इनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ – नीहार, रशिम, नीरजा, दीपा शिखा, यामा तथा गद्य रचनाएँ- अतीत के चलचित्र, श्रृंखला की कड़ियाँ, पथ के साथी और मेरा परिवार आदि हैं। कविता और गद्य पर उनका समान अधिकार है। भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ अलंकार में सम्मानित किया। ‘यामा’ और ‘दीप शिखा’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से विभूषित किया गया। महादेवी जी की भाषा शुद्ध संस्कृत निष्ठ, कोमल खड़ी बोली है। इन्होंने गद्ध और पद्य दोनों विधाओं में रचनाकर हिन्दी साहित्य को नये शिखर पर पहुँचा दिया।

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साराश :

प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने अपने पालित कुत्ते नीलू तथा उसकी माँ लूसी की जीवन गाथा के साथ जुड़ी स्मृतियों का सहज वर्णन किया है। नीलू की अल्सेशियन माँ उत्तरायण में लूसी नाम से पुकारी जाती थी। लूसी सामान्य कुत्तों से भिन्न थी। काली छोटी आँखें, सघन खड़े कान, लंबी पूँछ से युक्त लूसी की देह साँचे में ढली हुई लगती थी। लूसी स्वछंद सहचरी की तरह साथ के स्नेहपूर्ण अनुरोध की रक्षा करती थी। उत्तरायण से मोटर स्टाप तक एक पगडंडी जाती थी। वहीं एक दुकान थी जिसमें आवश्यक खाद्य-सामग्री प्राप्त हो सकती थी। शीतकाल में बर्फ के भर जाने से यह रास्ता चिद्न लुप्त हो जाता था।

आवागमन बंद हो जाता था। उत्तरायण के निवासी दुकान तक पहुँचने में असमर्थ हो जाने पर लूसी से सामान मँगवाते थे। वे लूसी के गले में रुपये और सामग्री की सूची के साथ एक अँगोछा या चादर बाँधकर उससे सामान लाने का अनुरोध करते थे। वह सारे व्यवधान पार कर दुकान तक पहुँच जाती थी। दुकानदार उसके गले से कपड़ा खोलकर रुपया, सूची लेकर सामान की गठरी गले या पीठ से बाँध देता था। लूसी बर्फीला रास्ता पार कर सकुशल लौट जाती थी। इस प्रकार चीनी, चाय, आटा, आलू आदि लोग उससे मँगबाते थे। एक दिन भटकता एक भूटिया कुत्ता दुकान पर आ गया और लूसी से उसकी मिश्रता हो गई। उन्हीं सरदियों में लूसी ने दो बच्चों को जन्म दिया। एक बच्चा तो शीत के कारण मर गया पर दूसरा जीवित बचा रहा। चार-पाँच दिन के बाद लूसी बच्चे को छोड़ कर फिर दुकान तक आने जाने लगी। एक संध्या लूसी गई फिर लौट न सकी। हुआ यह कि एक लकड़बग्घे से संघर्ष करती वह दम तोड़ दी।

लूसी के लिए गाँव के सभी लोग रोए। उसके बच्चे को दुग्ध चूर्ण से दूध बनाकर पिलाया गया। आने के समय लेखिका उसे अपने साथ प्रयाग ले आई। बड़े होने पर वह अपनी माँ के समान ही विशिष्ट था। उसका सिर बड़ा और चौड़ा, पूँछें सघन रोमों से युक्त, पैर लंबे, पंजे मजबूत, आँखें शहद के रंग के समान थीं। नीलू के बल और स्वभाव में भी विशेषता थी। अन्य कुत्तों की भाँति वह दीनभाव से स्वामी के पीछे-पीछे घुमना, अकारण भौंकना, काटना आदि कुत्तों के स्वाभाविक गुणों का उसमें अभाव था। नीलू कभी प्रिय खाद्य-पदार्थ को यदि अवज्ञा से दिया जाता तब स्वीकार न करता।

इसमें अलभ्य दर्प का भाव था। डाँट देने पर फिर उसकी भिन्न करनी पड़ती थी। वह सदा लेखिका के घर के बाहरी बरामदे में ही बैठता था और घर आने जाने वालों का निरीक्षण करता था। घर मिलने वाले को पहचानता था। अपरिचित को आया देखकर वह कमरे के दरवाजे पर आकर खड़ा हो जाता, फिर लेखिका के संकेत करने पर पुनः दरवाजे पर जा बैठता था।

नीलू का ध्वनि ज्ञान बड़ा गहरा था। बाहर या रास्ते में घूमते समय यदि उसे किसी से संकेत मिलता तो वह तुरंत जाकर, उनके सामने खड़ा हो जाता, फिर जब तक जाने का संकेत नहीं मिलता तब तक खड़ा रहता। उसमें हिंसा की प्रवृत्ति बिलकुल नहीं थी। तेरह वर्ष के जीवन में नीलू कभी भी किसी पशु पक्षी पर नहीं झपटा। उसका यह स्वभाव सचमुच आश्चर्य जनक था।

लेखिका के बँगले के रोशनदानों में प्राय: गौरैया तिनकों से घोंसला बना लेती थी। कभी-कभी गौरैया के बच्चे उड़ने में असफल प्रयास में रोशन दानों से नीचे गिर जाते थे। इन दिनों नीलू सावधानी से इनकी रक्षा करता था। कोई भी कुत्ता या बिल्ली उसके भय से यहाँ आने, उन्हें हानि पहुँचाने की हिम्मत नहीं कर पाता था। कभी-कभी वह छोटे पक्षी-शावकों को मुख में हौले से दबाकर लेखिका के पास ले आता, ताकि वे पुनः उन बच्चों को घोंसलें में पहुँचा दें। जब लेखिका मोर, खरगोश आदि को दाना देने निकलती तो नीलू सदा उनके साथ घूमता और प्रत्येक कक्ष का निरीक्षण करता।

रात में सबके सो जाने पर वह पूरे कंपाउंड का चक्कर लगाकर पहरेदारी करता था। जाड़ा हो या गर्मी या बरसात वह अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होता था। एक रात लेखिका के खरगोश बिल खोद कर दूसरे कंपाउंड में निकल गये। बाहर निकलने पर उन्हें बिल्ला और सियार का आहार बनना पड़ा। नीलू खरगोशों के संकट को पहचान कर कूद कर दूसरी ओर पहुँच गया। उसके पहुँचते ही बिल्ला तो भाग गया, पर नीलू खरगोशों को रोकने के लिए रात भर ओस से भींगता हुआ सुरंग के द्वार पर खड़ा रहा। सरदी लगने से नीलू को न्यूमोनिया हो गया। वह शांति पूर्वक कड़वी दवा खा लेता तथा सुई लेने का कष्ट सहता।

एक बार मोटर दुर्घटना में आहत होने पर लेखिका को अस्पताल जाना पड़ा। कपड़े-चादर, कंबल आदि अस्पताल ले जाते देख नीलू की सहज चेतना के किसी अनिष्ट का आभास हो गया। तीन दिन तक उसने न खाया, न पिया। डॉक्टर से अनुर्मति लेकर उसे अस्पताल लाया गया। वह पलंग के चारों ओर घूमता और रक्षक की तरह पलंग के नीचे बैठता। वह नियमित रूप से अस्पताल आने लगा। डॉक्टर और नर्सें भी उससे परिचित हो गई।

नीलू को चौदह वर्ष का जीवन मिला था। वह जन्म से मृत्यु के क्षण तक लेखिका के पास ही रहा। कुत्तों में वह केवल कजली की निकटता से ही प्रसन्न रहता। पर कजली और बादल एक क्षण के लिए एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते थे। इसलिए नीलू सदा एकाकी ही रहा। अत्यंत शांत निर्लिप्त भाव से नीलू की मृत्यु हुई। लेखिका अपने पाले हुए अनेक जीव-जंतुओं में नीलू को ही सर्वाधिक महत्त्व देती थी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 नीलू

शब्दार्थ :

  • अल्सेशियन = कुत्तों की एक नस्ल।
  • ऊष्मा = ऊर्जा, गर्मी, आवेश।
  • वेगवती = तेज गति वाली ।
  • स्तब्ध = हक्काबक्का हो जाना, जड़ीभूत।
  • पीताभ = पीली कांति।
  • भूटिया = कुत्ते की एक नस्ल।
  • स्वच्छंद = स्वतंत्र, मुक्त।
  • तुषार = बर्फ, हिम।
  • व्यवधान = रुकावट।
  • अनगढ़, शिलखंड = ऊबड़-खाबड़, पत्थर।
  • पनीले = जल युक्त। अवज्ञा = उपेक्षा।
  • वर्ण संकर = दो विभिन्न जातियों से उत्पन्न।
  • निरपेक्ष =तटस्थ, उदासीन ।
  • स्तब्धता = सन्नाटा, स्थिरता।
  • व्यतिक्रम = बिना क्रम के।
  • अलभ्य दर्प = असाधारण गर्व।
  • विषादमयी = दु:ख से भरी।
  • निर्लिप्त = जो किसी विषय में आसक्त न हो।
  • काम्य = बांछनीय, प्रिय।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 2 सुभान खाँ to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – सुभान खाँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
लेखक सुभान दादा से कौन-सी सौगात लाने के लिए कहता है?
(क) बादाम
(ख) खजूर
(ग) छुआरे
(घ) मटर
उत्तर :
(ग) बुआरे

प्रश्न 2.
जियारत का अर्थ है-
(क) यात्रा करना
(ख) भ्रमण करना
(ग) तीर्थ यात्रा करना
(घ) नौका यात्रा करना
उत्तर :
(ग) तीर्थ यात्रा करना

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 3.
किस दिन लेखक को बचपन में मुसलमान बच्चों की तरह कूदना पड़ता था।
(क) ईद
(ख) बकरीद
(ग) मुहर्रम
(घ) शबे-बारात
उत्तर :
(ग) मुहर्रम

प्रश्न 4.
सुभान दादा का क्या अरमान था?
(क) वृद्धा आश्रम बनाने का
(ख) बाल सुधार गृह बनवाने का
(ग) अस्पताल बनाने का
(घ) मस्जिद बनाने का
उत्तर :
(घ) मस्जिद बनाने का।

प्रश्न 5.
सुभान खाँ थे –
(क) हिन्दू
(ख) राजमिस्त्री
(ग) हलवाई
(घ) दर्जी
उत्तर :
(ख) राजमिस्त्री

प्रश्न 6.
सुभान खाँ सिर पर कैसी टोपी पहनते थे ?
(क) लाल
(ख) सफेद
(ग) दुपलिया
(घ) हरे
उत्तर :
(ग) दुपलिया

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 7.
सुभान खाँ की वाणी कैसी थी ?
(क) मधुर
(ख) कठोर
(ग) कर्कस
(घ) तोतला
उत्तर :
(क) मधुर

प्रश्न 8.
अल्लाह के रसूल किस मुल्क से आए थे ?
(क) पुर्वी मुल्क
(ख) पश्चिम के मुल्क
(ग) उत्तरी मुल्क
(घ) दक्षिण मुल्क
उत्तर :
(ख) पश्चिम के मुल्क

प्रश्न 9.
सुभान खाँ कैसे करके पैसे इकट्दे करते थे ?
(क) परिश्रम करके
(ख) बचत करके
(ग) चोरी करके
(घ) भीख माँग करके
उत्तर :
(क) परिश्रम करके

प्रश्न 10.
सुभान खाँ ने लेखक के लिए मक्का से क्या लाने को कहा ?
(क) प्रसाद
(ख) छुआरे
(ग) काजु
(घ) जल
उत्तर :
(ख) छुआरे

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 11.
सुभान खाँ किसको लेकर करबला की ओर चले?
(क) बच्चों को
(ख) लेखक को
(ग) दादी को
(घ) दादा को
उत्तर :
(ख) लेखंक को

प्रश्न 12.
किसके बगीचे से मस्जिद बनाने के लिए लकड़ी गई थी ?
(क) सुभान दादा
(ख) लेखक
(ग) मौलवी साहब
(घ) मामा के बगीचे से
उत्तर :
(घ) मामां के बगीचे से

प्रश्न 13.
रामवृक्ष बेनीपुरी की मृत्यु किस वर्ष हुई ?
(क) 1966 ई० में
(ख) 1967 ई० में
(ग) 1968 ई॰ में
(घ) 1969 ई० में
उत्तर :
(ग) 1968 ई० में

प्रश्न 14.
मक्का कहाँ है ?
(क) भारत में
(ख) पाकिस्तान में
(ग) अरब में
(घ) बंगलादेश में
उत्तर :
(ग) अरब में

प्रश्न 15.
कर्ज लेकर जियारत करने से क्या नहीं मिलता है ?
(क) पाप
(ख) पुण्य
(ग) दान
(घ) सौगात
उत्तर :
(ख) पुण्य

प्रश्न 16.
खुदा किससे बातें करता है ?
(क) इस्सान से
(ख) फकीर से
(ग) रसूल से
(घ) किसी से नहीं
उत्तर :
(ग) रसूल से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 17.
सुभान खाँ के दिल में किस चीज की मंदाकिनी बहा करती थी ?
(क) इर्ष्या की
(ख) द्वेष की
(ग) हिंसा की
(घ) प्रेम की
उत्तर :
(घ) प्रेम की

प्रश्न 18.
लेखक को बचपन में सुभान खाँ की दाढ़ी में क्या मिलता था ?
(क) अबीर
(ख) रंग
(ग) मिट्टी
(घ) पानी
उत्तर :
(क) अबीर

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
सुभान खाँ का घर किसका अखाड़ा था?
उत्तर :
सुभान खाँ का घर बच्चों का आखाड़ा था। पोते-पोतियों, नाती-नातियों की भरमार उनके घर में थी।

प्रश्न 2.
मजदूरी करने की विषय में उनकी क्या राय थी?
उत्तर :
उनकी राय थी कि काम करते हुए अल्लाह को न भूलना और अल्लाह से फुर्सत पाकर फिर अपने कांम में जुट जाना चाहिए।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

प्रश्न 3.
लेखक के मामा और सुभान दादा अपने किन पर्वों पर एक दूसरे की नहीं भूलते थे।
उत्तर :
लेखक के मामा होली, दिवाली पर और सुभान दादा ईद-बकरीद पर एक दूसरे को नहीं भूलते थे।

प्रश्न 4.
लेखक के सौगात माँगने पर सुभान दादा ने क्या कहा?
उत्तर :
लेखक के सौगात माँगने पर सुभान दादा ने कहा कि वहाँ के लोग खजूर और छुआरें लाते हैं।

प्रश्न 5.
पश्चिम दिशा की तरफ मुँह करके सुभान दादा क्यों नमाज पढ़ते थे?
उत्तर :
पश्चिम ओर से मुल्क में अल्लाह के रसूल आए थे। जहाँ से रसूल आए थे वहाँ तीर्थ है। इसलिए सुभान दादा तीर्थों की ओर मुँह करके नमाज पढ़ते थे।

प्रश्न 6.
प्रस्तुत कहानी में लेखक ने क्या प्रकाश डाला है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी में लेखक ने सुभान खाँ के चरित्र के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम एकता पर प्रकाश डाला है।

प्रश्न 7.
सुमान खाँ लेखक के साथ कैसा व्यवहार करते थे ?
उत्तर :
सुभान खाँ लेखक के साथ अत्यंत स्नेहपूर्वक व्यवहार करते थे।

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प्रश्न 8.
सुभान खाँ क्यों पैसे इकट्टे कर रखे थे ?
उत्तर :
जिससे एक-दो साल में मक्का की तीर्थ यात्रा कर सके।

प्रश्न 9.
सुभान खाँ ने लेखक को क्या बतलाया ?
उत्तर :
सुभान खाँ ने लेखक को बतलाया कि केवल रसूल की उनसे बातें होती थीं। रसूल की दाढ़ी के कुछ बाल मक्का में रखे हैं। मक्का तीर्थ में उन बालों को दर्शन होते हैं।

प्रश्न 10.
सुभान खाँ को क्या दो चीजें सबसे प्यारी थी ?
उत्तर :
सुभान खाँ को दो ही चीजें सबसे प्यारी थी – काम करते हुए भी अल्लाह को न भूलना और अल्लाह से समय पाकर काम में जुट जाना।

प्रश्न 11.
सुभान दादा का अरमान क्या था ?
उत्तर :
सुभान दादा को एक मस्जिद बनाने का अरमान था।

प्रश्न 12.
अब तक लोगों ने क्या नहीं भूला था ?
उत्तर :
अब तक भी लोग उस मस्जिद के उद्घाटन के दिन की दादा की मेहमानदारी भूले नहीं थे।

प्रश्न 13.
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 23 दिसम्बर, 1899 ई० को बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के बेनीपुर नामक एक छोटे-से गाँव में हुआ था।

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प्रश्न 14.
इस्लाम के रसूल कौन थे ?
उत्तर :
पैगम्बर हजरत मोहम्मद को इस्लाम धर्म का रसूल माना जाता है।

प्रश्न 15.
लेखक के मामा और सुभान दादा अपने किन पर्वों पर एक-दूसरे को नहीं भूलते थे ?
उत्तर :
लेखक के मामा होली-दीवाली पर एवं सुभान दादा ईद-बकरीद में एक-दूसरे को नहीं भूलते थे।

प्रश्न 16.
मक्का में क्या रखा गया है ?
उत्तर :
मक्का में हजरत मुहम्मद के दाढ़ी के बाल रखे गये हैं।

प्रश्न 17.
सुभान दादा ने मस्जिद का उद्घाटन समारोह किस दिन रखा था ?
उत्तर :
सुभान दादा ने मस्जिद का उद्घाटन समारोह जुमा (शुक्रवार) के दिन रखा था।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
सुभान दादा कर्ज के पैसे से क्यों नहीं जाना चाहते थे?
उत्तर :
कर्ज के पैसे से तीर्थ करने में सवाब नहीं मिलतां। इसलिए दादा कर्ज के पैसे से नहीं जाना चाहते थे।

प्रश्न 2.
सुभान दादा का क्या अरमान था, वह कैसे पूर्ण हुआ?
उत्तर :
सुभान दादा का अरमान मस्जिद बनाने का था। दादा एक साधारण राजमिस्त्री थे, पर उनका दृढ़ निश्चय था मस्जिद बनवाने का। उनके लड़के पैसे कमा लिए थे। लेखक के मामा ने अपने बगीचे से मस्जिद की सारी लकड़ी दी। दादा ने अपनी जिन्दगी भर की सारी कमाई लगा दी। सारे नक्शे उन्होंने खींचे थे। उनकी निगरानी में मस्जिद बनकर तैयार हो गई।

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प्रश्न 3.
इस पाठ की किन घटनाओं से साम्प्रदायिक एकता का पता चलता है?
उत्तर :
लेखक का बचपन में सुभान खाँ के साथ जो स्नेहपूर्ण व्यवहार, बातें होती थी उससे साम्पदायिक एकता स्पष्ट होती है। ईद-बकरीद के दिन सुभान खाँ लेखक की नहीं भूलते तथा होली-दीवाली के दिन सुभान खाँ को नानी पूए, खीर तथा गोश्त परोसकर खिलाती थी। लेखक अपने हाथों से अबीर लेकर उनकी दाढ़ी में मलता था। सुभान दादा मक्का से छुआरे लाकर बड़े ही प्रेम से लेखक को दिए। सुभान दादा की मस्जिद की सारी लकड़ी लेखक के मामा के बगीचे से गई। मस्जिद के तैयार हो जाने पर क्षेत्र के सभी मुसलमानों तथा हिन्दुओं को दादा ने न्योता दिया। हिन्दुओं के सत्कार के लिए मिठाइयाँ, पान, इलायची का अलग से प्रबंध किये थे। इन्हीं घटनाओं से साम्प्रदायिक एकता का पता चलता है।

प्रश्न 4.
सुभान दादा ने हिन्दुओं का सत्कार किस प्रकार किया?
उत्तर
हिन्दुओं के सत्कार के लिए सुभान दादा ने हिन्दू हलवाई रख कर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनवाई थी, पान इलायची का प्रबंध किया था।

प्रश्न 5.
सुभान दादा का चरित्र-चित्रण संक्षेप में कीजिए : (छ: वाक्यों में)
उत्तर :
सुभान दादा एक अच्छे परिश्रमी राज मिस्त्री थे। उनमें जाति, धर्म, संप्रदाय को लेकर संकीर्णता की भावना नहीं थी। वे सीधे-सादे सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। बच्चों के प्रति उनके मन में बड़ा कोमल, स्नेहभरा भाव था। वे धार्मिक प्रवृत्ति के थे। पर दूसरे धर्म की भी इज्जत करते थे। हिन्दुओं का भी सत्कार करते थे। ईमानदारी के कारण झगड़ों की पंचायतों में उन्हें पंच निश्चित किया जाता था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
‘सुभान खाँ’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी से हमें राष्ट्रीय एकता की शिक्षा मिलती है। इस कहानी में लेखक ने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल दिया है। कहानी के प्रमुख पात्र सुभान खाँ के जीवन व्यवहार, अनुपम चरित्र को स्पष्ट किया है कि मानवता का स्थान सर्वोपरि है। सुभान खाँ धार्मिक प्रवृत्ति के परिश्रमी व्यक्ति थे। वे उदार उपकारी थे। धार्मिक, साम्पदायिक संकीर्णता की भावना उनमें बिलकुल नहीं। सुभान खाँ मुसलमान थे, परवे हिन्दू बालक पर अत्याधिक स्नेह वात्सल्य का भाव रखते थे।

उनके मन में नफरत का स्पर्श भी नहीं था। लेखक को अपनी गोद में लेकर घुमाते कहानियाँ सुनाते उनका मन बहलाते थे। उनके मन में मक्का की तीर्थ यात्रा करने की उत्कट अभिलाषा थी पर अपने परिश्र्रम से अर्जित धन से ही तीर्थयात्रा करना पुण्यदायक समझते थे। कर्ज लेकर या दूसरों की सहायता लेकर वे तीर्थयात्रा न कर सकते। मुहर्रम के दिन लेखक दादा ने यहाँ जाते। फिर शाम को दादा के कंधे पर चढ़कर घर आते। इर्द-बकरीद की सुभान दादा लेखक को नहीं भूल सकते थे, होली दीपावली के दिन लेखक के घर में दादा का खान-पान से सत्कार होता था।

सुभान खाँ की आर्थिक हालत ठीक हो गई और वह हज कर आए। लेखक भी अब बड़ा हो गया था। बचपन में वादा किए छुआरे लाने की बात दादा न भूले थे। इसलिए छुआरे ले आए। अरब से लाए हुए छुआरे को पाकर लेखक ने आनंद व्यक्त किया। सुभान दादा का मस्जिद बनवाने का अरमान भी पूरा होने का समय आ गया। मस्जिद बनकर तैयार हो गई। लेखक के मामाजी के बगीचे से ही काम आनेवाली सारी लकड़ी मुफ्त में आ गई। जिस दिन मस्जिद बनकर तैयार हुई, उस दिन सुभान दादा ने समस्त क्षेत्र के लोगों को न्योता दिया। हिन्दू-मुसलमान दोनों ही इस उत्सव में प्रसन्न चित्त से

आए। मुसलमानों ने मस्जिद में नमाज पढ़ी। हिन्दुओं के सत्कार के लिए सुभान दादा ने हिन्दू हलवाई रखकर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनवाई थी, पान इलायची का भी प्रबंध किया था। मस्जिद को उद्धाटन के दिन सुभान दादा की मेहमानदारी लोग कभी नहीं भूलें। इस प्रकार सुभान खाँ के चरित्र, कार्य तथा व्यवहार से स्पष्ट हो जाता है। कि साम्पदायिक संकीर्णता भेद भाव, धर्म के लेकर समाज में नफरत पैदा करना, तुच्छ स्वार्थी लोगों की ही चेष्टा होती है। सुभान दादा जैसे लोग ही अपनी सद्भावना से प्रेम, सौमनस्य तथा एकता का भाव पैदा कर समाज का कल्याण कर सकते हैं।

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भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए :

  • संसार = सम् + सार – व्यंजन संधि
  • पवित्र = पो + इत्र – स्वर संधि
  • शिष्टाचार = शिष्ट + आचार – स्वर संधि
  • आनंदातिरेक = आनंद + अतिरेक – स्वर संधि
  • सज्जनता = सत् + जनता – व्यंजन संधि
  • सत्कार = सत् + कार – व्यंजन संधि
  • उद्घाटन = उत् + घाटन – व्यंजन संधि

2. निम्नलिखित सामासिक पदों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-

  • दाढ़ी-मूँछ = दाढ़ी और मूँछ – द्वनन्द्व समास
  • पूरब-पश्चिम = पूरब और पश्चिम – द्वनन्द्य समास
  • भाव-विभार = भाव में विभारे = तत्पुरुष समास
  • बड़ी-बड़ी = बड़ी-बड़ी – कर्म धारण समास
  • रस-भरी = रस से भरी – तत्पुरुष समास
  • लाल-छड़ियाँ = लाल हैं जो छड़ियाँ – कर्म धारय समास

3. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लीखिए –

  • अरमान – इच्छा, कामना, चाह।
  • मुल्क – राष्ट्र, जनपद, राज्य।
  • नूर – रोशनी, प्रकाश, उजाला।
  • तकदीर – भाग्य, नसीब, किस्मत।
  • सौगात- भेंट, उपहार, तोहफा।
  • पेड़ – वृक्ष, तरु, विटप।
  • बगीचे – बाग, उपवन, उद्यान।

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4. निम्नलिखित उर्दू शब्दों के हिन्दी अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  • पैक – परिक्रमा – मुहर्रम के दिन ताजिये का पैक किया जाता है।
  • तसबीह – माला – बुजुर्ग हाथ में तसबी के दाने फेरते हैं।
  • रसूल – पैगंबर – ईश्वर के दूत को रसूल कहते हैं।
  • पेशानी – मसाफ – उनकी पेशानी पर चमक थी।
  • उम्र-दराज – बड़ी उम्र का – पंचायत में उम्र दराज के लोग थे।
  • नूरानी – प्रकांशमान – उनके चेहरे पर नूरानी झलकती थी।
  • मुकर्रर – निश्चित – लोग दादा को पंच मुकर्रर करते थे।

WBBSE Class 8 Hindi सुभान खाँ Summary

लेखक-परिचय :

बेनीपुरी जी का जन्म 1902 में बिहार के मुजफ्फरपुर जनपद के बेनीपुर गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनका देहावसान सन् 1968 ई. में हुआ। बेनीपुर जी एक सुपसिद्ध शब्द चित्रकार थे। उन्होंने उपन्यास, नाटक, कहानी, संस्मरण, निबंध, यात्रा विवरण, शब्दचित्र आदि सभी गद्य विधाओं में श्रेष्ठ रचना की। इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ – अंबपाली (नाटक), पतितों के देश में (उपन्यास), चिता के फूल (कहानी), माटी की मूरतें (रेखाचिच्र) गेहूँ, और गुलाब (निबंध और रेखाचित्र) आदि हैं। बेनीपुरी जी एक कर्मठ देशभक्त थे। उन्होनें अनेक पत्रिकाओं का संपादन किया।

सारांश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने सुभान खाँ के चरित्र के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम एकता पर प्रकाश डाला है। सुभान खाँ एक अच्छे राज मिस्त्री थे। इनका बदन लम्बा-चौड़ा तगड़ा था। लम्बी सफेद दाढ़ी थी। वे सिर पर दुपलिया टोपी, शरीर में आधे बाँह का कुर्ता, कमर में कच्छेवाली धोती, पैर में चमरोधा जूता पहनते थे। वे भद्रलोगों की तरह आचरण व्यंवहार का पालन करते थे। उनका चेहरा प्रकाशमान था। वाणी बड़ी मधुर थी। बचपन में लेखक की घनिष्ठता सुभान खाँ से हो गई थी। सुभान खाँ लेखक के साथ अत्यंत सेहपूर्वक व्यवहार करते थे। लेखक के पूछने पर उन्होंने बतलाया कि अल्लाह के रसूल पश्चिम के मुल्क से आए थे। जहाँ से रसूल आए थे, वह हमारा तीर्थ है। उसी तीर्थ की ओर मुँह करके हम अल्लाह को याद करते हैं। सुभान खाँ ने यह भी बतलाया कि वे परिश्रम करके पैसे इकट्ठे कर रखे है। जिससे एक-दो साल में मक्का की तीर्थ यात्रा कर सके। लेखक के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सुभान खां ने कहा कि वे लेखक के लिए मक्का से छुआरे आवश्य लाएँगे।

नमाज के समय सुभान खाँ धारीदार और सादा कुरता पहन घुटने टेक, दोनों हाथ छाती से जरा ऊपर उठा, आधी आँखें मूँदकर जब मंत्र सा पढ़ने लगते तो लेखक विस्मय विमुग्ध होकर उन्हें देखता और सोचता कि सचमुच उनके अल्लाह वहाँ आ गए है और ये होठों से उन्हीं से बातें कर रहे हैं। सुभान खाँ ने लेखक को बतलाया कि केवल रसूल की उनसे बातें होती थीं। रसूल की दाढ़ी के कुछ बाल मक्का में रखे हैं। मक्का तीर्थ में उन बालों को दर्शन होते हैं।

फिर लेखक को कंधे पर लेकर बातें और कहानियाँ सुनाकर उनका मन बहलाते, फिर अपने काम में लग जाते। उन्हें दो ही चीजें सबसे प्यारी थी – काम करते हुए भी अल्लाह को न भूलना और अल्लाह से समय पाकर काम में जुट जाना। काम और अल्लाह का यह ताल मेल से उनके दिल में प्रेम की गंगा बहती रहती थी।

एक दिन नानी ने लेखक को सुभान खाँ के साथ हुसैन साहब के पैक जाने के लिए तैयार होने को कहा । नौ साल की उम्र तक, जनेऊ होने के पहले लेखक मुहर्रम के दिन मुसलमान बच्चों की तरह नई रंगीन घड़ी लेकर ताजिये के चारों ओर कूदता। खुशी के साथ नये-नये कपड़े पहनकर उछलता कूदता / सुभान दादा आए और लेखक के कंधे पर लेकर अपने गाँव गए। वहाँ सभी बच्चों की तरह कमर में घंटी बाँध कर दो लाल छड़ियाँ दे दी और लेखक को लेकर करबला की ओर चल दिए। फिर शाम को सुभान दादा घर पहुँचा दिए। ईद-बकरीद के दिन सुभान दादा लेखक को नहीं भूल सकते थे। दीवाली, होली के दिन लेखक की नानी उन्हें पूए, खीर तथा गोश्त खिलाती थी। होली के दिन लेखक अबीर लेकर अपने हाथों से उनकी दाढ़ी की रंगीन बना देता था।

लेखक अब कुछ बड़े हो गए। सुभान दादा भी हज कर आए। दादा अनुपम सौगात छुआरे लेकर लेखक के पास पहुँचे। अब बेटों की मेहनत से दादा सम्पन्न हो गए थे, पर उनमें वही विनम्रता और सज्जनता थी। छुआरे लेखक को देकर वे अत्यधिक आनंदित हुए। लेखक छुआरे लेकर सिर चढ़ाया। लेखक का बचपना अब बीत चुका था। इसलिए वह अपने प्रेम के आँसुओं से अपने को पवित्र कर उनके चरणों में अपनी श्रद्धांजलि चढ़ा दी। हज से लौटने के बाद दादा का ज्यादा वक्त नमाज-बंदगी में ही बीतता। अपने क्षेत्र में वे पंच निश्चित किए जाते थे।

सुभान दादा को एक मस्जिद बनाने का अरमान था। अल्लाह की कृपा से उनकी मस्जिद बनकर तैयार हो गई। उनकी निगरानी में छोटी सी परंतु कलात्मक खूबसूरत मस्जिद बनी। लेखक के मामा के बगीचे से मस्जिद की सारी लकड़ी गई थी। जिस दिन मस्जिद बनकर तैयार हुई थी, सुभान दादा ने क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठित लोगों को निमंत्रित किया था। मुसलमानों ने मस्जिद में नमाज पढ़ी। हिन्दुओं के सत्कार के लिए दादा ने हिन्दू हलवाई रखकर तरह-तरह की मिठाइयाँ बनवाई थी, पान-इलायची का प्रबंध किया था। अब तक भी लोग उस मस्जिद के उद्घाटन के दिन की दादा की मेहमानदारी भूले नहीं है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 2 सुभान खाँ

शब्दार्थ :

  • अल्लाह = ईश्वर।
  • उम्रदराज = अधिक उम्र का
  • पेशानी = मस्तक
  • नीम- आस्तीन = आधी बाँह का कुर्ता।
  • उल्लास = खुशी, प्रसन्नता।
  • नूर = रोशनी, प्रकाश।
  • नमाज = प्रार्थना।
  • मजहब = धर्म।
  • मुलक = देश।
  • सामंजस्य = मेल।
  • रसूल = पैगंबर, ईश्वर का दूत।
  • अनुपम = अनोखा।
  • पाक = पवित्र।
  • फरमाइश = आज्ञा, माँग।
  • जियारत = तीर्थ यात्रा।
  • तसबीह = माला।
  • सौगात = भेंट, उपहार।
  • ज्वार (ज्वार) भर = क्षेत्रभर।
  • मुकर्रर = निश्चित, नियुक्त।
  • मेहरबानी = कृपा, अनुकंपा।
  • आनंदातिरेक = बहुत अधिक खुशी।
  • दयानतदारी = सच्चाई।
  • रोमांचकारी = पुलकित, रोगटे खड़े करने वाला।
  • नूरानी = प्रकाशमान।
  • न्योता = निमंत्रण।
  • तुनककर = चिढ़कर।
  • प्रतिष्ठित = सम्मानित।
  • विस्मय = विमुग्ध, आश्चर्य से मुग्ध।
  • ख्वाहिश = मन में इच्छा।
  • पैक = ताजिये की परिक्रमा।
  • बुजुर्गी = बुढ़ापा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 8 वापसी to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – वापसी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि लौटकर किस वृक्ष पर बसेरा बनाया चाहता है?
(क) आम
(ख) बरगद
(ग) नीम
(घ) पीपल
उत्तर :
(ग) नीम।

प्रश्न 2.
पलाश के फूलों का रंग होता है-
(क) पीला
(ख) हरा
(ग) नीला
(घ) लाल
उत्तर :
(घ) लाल।

प्रश्न 3.
हम किसे लक्ष्य नहीं कर पाएँगे?
(क) कवि को
(ख) नई छाल को
(ग) फूलों को
(घ) हरियाली को
उत्तर :
कवि को।

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प्रश्न 4.
हरियाली से हमें क्या मिलता है?
(क) दुःख और पीड़ा
(ख) राहत और सुख
(ग) क्रोध और घृणा
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) राहत और सुख।

प्रश्न 5.
कौन पक्षी के रूप में वापस आएगी ?
(क) पंरपराएँ
(ख) लेखक
(ग) जीवन
(घ) हरियाली
उत्तर :
(क) पंरपराएँ

प्रश्न 6.
‘वापसी’ कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है ?
(क) शहर अब भी संभावना है
(ख) बहुरि अकेला
(ग) तत्पुरूष
(घ) घास में दूब का आकाश
उत्तर :
(क) शहर अब भी संभावना है

प्रश्न 7.
हो सकता है हम लौटें –
(क) पक्षी की तरह
(ख) हवा की तरह
(ग) रेत की तरह
(घ) नदी की तरह
उत्तर :
(क) पक्षी की तरह

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प्रश्न 8.
कवि कहाँ घोंसला बनाने की बात करता है ?
(क) पेड़ पर
(ख) छत पर
(ग) दरवाजे पर
(घ) बरामदे के पंखे के ऊपर
उत्तर :
(घ) बरामदे के पंखे के ऊपर

प्रश्न 9.
कवि के अनुसार कौन वापस आयेंगे और पहचाने न जायेंगे ?
(क) पक्षी
(ख) परंपरा
(ग) बगीचा
(घ) फूल-पेड़
उत्तर :
(ख) परंपरा

प्रश्न 10.
गडुमडु का अर्थ है –
(क) आपस में मिल जाना
(ख) अलंग-अलग होना
(ग) अबोध होना
(घ) विलुप्त होना
उत्तर :
(क) आपस में मिल जाना

प्रश्न 11.
कौन एक जैसे रहेंगे ?
(क) प्राकृतिक तत्व
(ख) लेखक
(ग) पक्षी
(घ) जीवन
उत्तर :
(क) प्राकृतिक तत्व

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि कहाँ घोंसला बनाना चाहता है ?
उत्तर :
कवि बरामदे में पंखे के ऊपर घोंसला बनाना चाहता है।

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प्रश्न 2.
कवि को क्यों लगता है कि हम उसे नहीं पहचान सकेंगे?
उत्तर :
कवि पक्षी की तरह रूप बदलकर आएगा, और बारिश के बाद हरियाली में वह बिखरा हुआ रहेगा। इसी से उसे लगता है कि हम उसे पहचान नहीं सकेंगे।

प्रश्न 3.
बारिश के बाद क्या छा जाती है?
उत्तर :
बारिश के बाद हरियाली छा जाती है।

प्रश्न 4.
कवि की पहचान को कौन बदल देगा?
उत्तरः
कवि की पहचान को आधुनिक जीवन संस्कृतियों की चकाचौंध में बेसुध लोग बदल देंगे।

प्रश्न 5.
अशोक वाजपेयी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
अशोक वाजपेयी का जन्म 16 जनवरी सन् 1941 को मध्य प्ददेश के दुर्ग जिला में हुआ था।

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार हम कैसे बदल जाएँगे ?
उत्तर :
कवि के अनुसार हम बिना रूप बदले ही बदल जाएँगे।

प्रश्न 7.
परंपरा को क्यों लक्ष्य नहीं किया जा सकता ?
उत्तर :
परंपरा विविध प्रकार के चकाचौंध के मध्य छिपी रहती है, जिसे आसानी से लक्ष्य नहीं किया जा सकता।

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प्रश्न 8.
कवि के अनुसार हमें क्या पता नहीं चलेगा ?
उत्तर :
कभी-कभी परंपराएँ और मूल्य बहुत ही चुपके से हमारे जीवन के आकर्षणों के बीच सरल रूप से प्रवेश कर जाएँगे कि हमें पता भी नहीं चलेगा।

प्रश्न 9.
किन-चीजों को अलग कर पाना संभव नहीं हो पायेगा ?
उत्तर :
जीवन-मूल्य और परंपराएँ इस कदर एकाकार हो जायेंगे कि उनको इन चीजों से अलग कर पाना संभव नहीं हो पायेगा।

प्रश्न 10.
किसका मात्र रूप बदलेगा ?
उत्तर :
परंपराओं का मात्र रूप बदलेगा।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘तुम बिना रूप बदले भी, बदल जाओगे….. का क्या आशय है?
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर व्याख्या-३ में देखिए।

प्रश्न 2.
हमें अपनी परंपरा, अपने पूर्वजों और अपनी प्रकृति के प्रति सहिष्णु क्यों होना चाहिए?
उत्तर :
मनुष्य व्यक्तित्व का निर्माण उसकी परंपरा, पूर्वजों के संस्कार तथा अपनी स्वाभाविक प्रकृति से होता है। अपनी पुरानी परंपरा ने हमारे रीति रिवाज का गठन किया है। हमें एक सुव्यस्थित संस्कार दिया है। परंपराएँ ही हमारी पहचान है। कुछ विकृत रूढ़िवादी विचारों का हम त्याग कर सकते हैं, पर पुराना सब खराब है अनुपयोगी है यह कहा नहीं जा सकता। हमारे सामाजिक ढाँचे की रचना इसी परंपरा की है। हमारे पूर्वजों ने अपने ज्ञान, आदर्श से दुनिया में अपना स्थान बनाया था। इसलिए हम अपनी परंपरा तथा पूर्वजों को नजर अंदाज नहीं कर सकते। अतः हमें अपनी परंपरा, पूर्वजों तथा अपनी प्रकृति के प्रति सहिष्णु होना चाहिए।

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व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. या फिर थोड़ी सी बारिश के बाद
तुम्हारे घर के सामने छा गयी
हरियाली की तरह वापस आएँ हम
जिससे राहत और सुख मिलेगा तुम्हें
पर तुम जान नहीं पाओगे कि
उस हरियाली में हम छिटके हुए हैं।

प्रश्न :
(क) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उद्ध्धत है?
(ख) बारिश के बाद क्या परिवर्तन हो जाता है?
(ग) इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ अशोक बाजपेयी रचित कविता ‘वापसी से उद्धृत है।
(ख) बारिश के बाद वातावरण में शीतलता का सुखद अहसास होता है। चांरों ओर हरियाली छा जाती है।
(ग) कवि का कथन है कि बारिश के बाद हरियाली छा जाने पर वह अपनी प्रकृति तथा परंपरा में आएगा। लोगों को सुख-सुविधा की अनुभूति होगी। पर वे कवि को पहचान नहीं पाएँगे।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित वाक्यांश में आए कारक विभक्तियों का नाम लिखिए-
(क) पक्षी की तरह
(ख) पलाश के पेड़ पर नई छाल की तरह
(ग) हमारी पहचान हमेशा क लिए गड्डमड्ड हो जाएगी।
उत्तर :
(क) पक्षी की – सम्बंध कारक।
(ख) पलाश के – संबंध कारक
पेड़ पर-अधिकरण कारक
छाल की – संबंध कारक।
(ग) हमारी – संबंध कारक, के लिए संप्रदान कारक।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

2. वाक्यों में प्रयोग कर लिंग निर्णय कीजिए-

पक्षी – पक्षी डाल पर बैठा है- पुल्लिंग।
बगिया – हमारे घर के सामने छोटी-सी बगिया है- स्त्रीलिंग।
घोंसला – वृक्ष पर घोंसला बना हुआ है- पुल्लिग।
हरियाली – बारिश के बाद हरियाली छा गई – स्त्रीलिंग।
रूप – लड़का का रूप अच्छा लग रहा है- पुल्लिंग।

WBBSE Class 8 Hindi वापसी Summary

कवि परिचय :

अशोक वाजपेयी का जन्म सन् 1941 ई० में मध्य प्रदेश में हुआ था। वाजपेयी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम०ए० की परीक्षा पास की। उन्होने भारत सरकार के संस्कृति विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर भी कार्य किया। इनकी प्रमुख रचनाएँ – शहर अब भी संभावना है, एक पतंग अनंत में, तत्पुरुष, बहुरि अकेला, कहीं नहीं वहीं इनके काव्य संग्रह है। वाजपेयी जी रागवृत्ति के कवि हैं। उनकी कविता के मुख्य विषय हैं- प्रेम, प्रकृति जीवन और मृत्यु। इनकी भाषा सरल, बोधगाम्य है। इन्होंने काव्य को नये राग में सँवारा।

शब्दार्थ :

  • बरजो = मना करना।
  • बसेरा = आश्रय।
  • राहत = आराम, छुटकारा।
  • छिटके = बिखरा होना, अलग होना।
  • बगिया = बगीचा। रक्तिम = लाल।
  • लक्ष्य = निशाना, उद्देश्य।
  • चकाचौंध = तिलमिलाहट, रंगीनियाँ।
  • गड्डमड्ड = घालमेल, तालमेल अव्यवस्थित रूप से एक दूसरे से मिलाया हुआ।

1. जब हम वापस आयेंगे
तो पहचाने न जायेंगे –
हो सकता है हम लौटें
पक्षी की तरह
और तुम्हारी बगिया के किसी नीम पर बसेरा करें
फिर जब तुम्हारे बरामदे के पंखे के ऊपर
घोंसला बनायें
तो तुम्हीं हमें बार-बार बरजो –

सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्यांश ‘वापसी’ कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता अशोक वाजपेयी है।
सन्दर्भ – इस कविता में कवि ने ‘आज के जीवन में परपपरा और स्थापित जीवन मूल्यों के प्रति लोगों की अनभिज्ञता को दिखलाया हैं।

व्याख्या – कवि का कथन है कि जब वह लौटकर पुनः आएगा तो लोग उसे पद्नचान नहीं सकेंगे। संभव है कि वह पक्षी की तरह लौटकर तुम्हारे बगीचे में किसी नीम के पेड़ पर अपना बसेरा घोसला बनाए। फिर वह तुम्हारे बरामदे में पंखे के ऊपर अपना घोसला बनाए। लेकिन बार-बार तुम ना करोगे, हटाने की चेष्टा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

2. या फिर थोड़ी सी बारिश के बाद
तुम्हारे घर के सामने छा गयी
हरियाली की तरह वापस आयें हम
जिससे राहत और सुख मिलेगा तुम्हें
पर तुम जान नहीं पाओगे कि
उस हरियाली में हम छिटके हुए हैं

व्याख्या – कवि कह रहा है कि यदि थोड़ा-सी वर्षा हो जाएगी तो बारिश के बाद तुम्हारे घर के सामने हरियाली छा जाएगी। उस समय वह हरियाली की तरह उल्लास पूर्वक आएगा। हरियाली से तुम्हें आराम और सुख-शांति की अनुभूति होगी। पर तुम अपने सुख-चैन में इस प्रकार बेसुध बने रहोगे कि हमें पहचान नहीं पाओगे। उस हरे भरे वातावरण में हम बिखरे हुए रहेंगे।

3. हो सकता है हम आयें
पलाश के पेड़ पर नयी छाल की तरह
जिसे फूलों की रक्तिम चकाचौंध में
तुम लक्ष्य भी नहीं पर पाओगे
हम रूप बदलकर आयेंगे
तुम बिना रूप बदले भी
बदल जाओगे –

व्याख्या : कवि ने स्पष्ट किया है कि संभव है कि वह दुबारा पलाश वृक्ष पर नवीन छाल की तरह आए। पलास के लाल-लाल फूलों की चमक में तुम मुझे देख भी न पाओगे। इस प्रकार कवि ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक जीवन संस्कृति तथा शैली में लोग अपने पुरानी संस्कृति परंपरा से अनजान बन गए हैं। फिर कवि कह रहा है कि वह तो रूप बदलकर आएगा। पर तुम बिना बदले ही बदल जाओगे।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 8 वापसी

4. हालाँकि घर, बगिया,पक्षी-चिड़िया,
हरियाली फूल-पेड़ वहीं रहेंगे
हमारी पहचान हमेशा के लिए गड्डमड्ड कर जायेगा
वह अन्त
जिसके बाद हम वापस आयेंगे
और पहचाने न जायेंगे

व्याख्या : कवि ने स्पष्ट किया है कि घर, बाग-बगीचे, पक्षी-चिड़िया फूल, वृक्ष तथा वातावरण की हरियाली वैसे ही अपरवर्तित बनी रहेगी। पर हमारी पहचान खो जाएगी। सदा के लिए हमारी पहचान अव्यवस्थित रूप से एक दूसरे से मिल जाएगी। इस घालमेल के कारण हमारी पहचान अबोध बन जाएगी। इस प्रकार हमारा अन्त इसी रूप में होगा कि पुन: वापस आने पर पहचाने नहीं जाएँगे। हमारी पहचान ही विलुप्त हो जाएगी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – नई नारी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
नई नारी किस चाल से चलती है?
(क) तामसी
(ख) सादगी
(ग) राजसी
(घ) निर्भीक
उत्तर :
(ख) सादगी भरी

प्रश्न 2.
‘नई नारी’ कविता के रचयिता है?
(क) सुब्रह्मण्य स्वामी
(ख) राधाकृष्ण भारती
(ग) सुबह्मण्य भारती
(घ) केशवदास
उत्तर :
(ग) सुब्रह्मण्य भारती।

प्रश्न 3.
नई नारी किससे गौरवान्वित है?
(क) शृंगार की दीप्ति से
(ख) विद्या की दीप्ति से
(ग) धन की दीप्ति से
(घ) शक्ति की दीप्ति से।
उत्तर :
(ख) विद्या की दीप्ति से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 4.
नई नारी को कहाँ भटकना स्वीकार नहीं है?
(क) मिथ्या परंपराओं में
(ख) अज्ञान के अंधेरे में
(ग) सुख-सुविधाओं के संसार में
(घ) अंधविश्वास के बंधन में
उत्तर :
(ख) अज्ञान के अंधेरे में।

प्रश्न 5.
नारी अपने व्यवहार से किससे प्रशंसा प्राप्त कर लेगी ?
(क) कवि से
(ख) पुरूषों से
(ग) समाज से
(घ) देवता से
उत्तर :
(ख) पुरूषों से

प्रश्न 6.
नई नारी कविता के रचनाकार कौन हैं ?
(क) निराला
(ख) गोपाल दास
(ग) सी० सुब्रह्मण्य भारती
(घ) बाजपेयी
उत्तर :
(ग) सी० सुब्रह्मण्य भारती

प्रश्न 7.
हिकारत का अर्थ है –
(क) घृणा
(ख) झूठ
(ग) प्रथा
(घ) अंधविश्वास
उत्तर :
(क) घृणा

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 8.
आज की नारी कैसी अनुभूति कर रही है ?
(क) गौरव की
(ख) चकाचौंध
(ग) विलासिला
(घ) विकास
उत्तर :
(क) गौरव की

प्रश्न 9.
कैसे विहीन जीवन को आज की नारी हिकारत से नामंजूर कर देती है ?
(क) सुःख
(ख) संस्कृति
(ग) विद्या
(घ) दु:ख
उत्तर :
(ख) संस्कृति

प्रश्न 10.
कवि के अनुसार कौन सभी अंधविश्वासों को तोड़ फेंकेंगी ?
(क) आज की नारी
(ख) कविं
(ग) भारती जी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) आज की नारी

प्रश्न 11.
नई नारी ने किसका अध्ययन कर ज्ञान प्राप्त किया हैं ?
(क) विचारों का
(ख) संस्कृति का.
(ग) शास्त्रों का
(घ) आचरण का
उत्तर :
(ग) शास्त्रों का

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 12.
सी० सुब्रह्यण्य भारती मूलतः किस भाषा के रचनाकार हैं ?
(क) हिन्दी
(ख) अंग्रजी
(ग) बंगला
(घ) तमिल
उत्तर :
(घ) तमिल

प्रश्न 13.
नई नारी किस चीज को तोड़ फेकेंगी ?
(क) परंपरा,
(ख) विश्वास
(ग) संस्कृति
(घ) अंधविश्वास
उत्तर :
(घ) अंधविश्वास

प्रश्न 14.
सुक्रह्यण्य भारती को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
(क) महाकवि कालिदास
(ख) महाकवि भरतियार
(ग) महाकवि तुलसीदास
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) महाकवि भरतियार

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
नई नारी को क्या स्वीकार नहीं है?
उत्तर :
नई नारी को अज्ञान, अशिक्षा के गहरे अंधकार में भटक जाना स्वीकार नहीं है।

प्रश्न 2.
नई नारी किसका अध्ययन करेंगी?
उत्तर :
नई नारी अनेकानेक शास्त्रों का अध्ययन करेंगी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 3.
कवि किनको तोड़ने और हटाने की कामना करता है ?
उत्तर :
कवि पुरानी गलत परंपराओं को हटाने और सभी अंधविश्वासों को तोड़ने की कामना करता है।

प्रश्न 4.
नई नारी निर्भीक क्यों है?
उत्तर :
नई नारी अपनी शिक्षा, स्थिर बुद्धि, विचार के कारण निर्भीक है।

प्रश्न 5.
आधुनिक युग में स्त्रियाँ कौन-सा स्थान प्राप्त कर ली हैं ?
उत्तरः
आधुनिक युग में स्तियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर उसके प्रकाश से समाज तथा देश में गैरवपूर्ण स्थान प्राप्त कर ली हैं।

प्रश्न 6.
सुक्रह्मण्य भारती का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
सुबह्हण्य भारती का जन्म 11 दिसंबर 1882 ई० को तिरुनेवेली जिला (तमिलनाडूर) के एट्टयपुरम गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
नई नारी कविता का हिन्दी अनुवाद किसने किया है ?
उत्तर :
नई नारी कविता का हिन्दी अनुवाद प्रभाकर द्विवेदी ने किया है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 8.
नई नारी किसका ध्यान रखेंगी ?
उत्तर :
नई नारी हर प्रकार के मानव गतिविधि का ध्यान रखेंगी।

प्रश्न 9.
नई नारी किसको देवतुल्य बनाना चाहती हैं ?
उत्तर :
नई नारी सभी मनुष्यों को देवतुल्य बनाना चाहती हैं।

प्रश्न 10.
आज की नारी किस ओर अग्रसर हो रही है ?
उत्तर :
आज की नारी विकास के विभिन्न क्षेत्रों की ओर अग्रसर हो रही है।

प्रश्न 11.
कवि के अनुसार आज की नारी कैसी है ?
उत्तर :
कवि के अनुसार आज की नारी शिक्षित, ज्ञानी, और अध्ययनशील है।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि सुब्रह्यण्य भारती ने नई नारी में किन-किन गुणीं की कल्पना की है?
उत्तर :
नई नारी विद्या की आभा से सम्मानित होती है। वह दृढ़ चित्त वृत्ति वाली वर्तमान जीवन की चकाचौंध से अप्रभावित, अज्ञान से मुक्त होगी। वह सभ्य संस्कृति के जीवन स्वीकार करेगी। शास्त्रों का अध्ययन कर जीवन को सुखद बना देगी। पुरानी गलत परंपराओं, अंधविश्वासों को तोड़ देगी। मानव के आचरण व्यवहार पर ध्यान रखेगी। कवि ने इन्हीं गुणों की कल्पना की है।

प्रश्न 2.
‘वे कभी चकाचौंघ में राह नहीं भूल सकती’ – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
नई नारी अपनी विद्या, ज्ञान के प्रभाव से स्थिर विचार वाली होगी और जीवन की रंगीनियों में पड़कर अपना सही मार्ग नहीं भूलेंगी। कभी भी गलत आचरण, व्यवहार को नहीं अपनाएँगी। वह सदा सच्चे राह पर ही चलना पसंद करती है। अपने आचरण व्यवहार को सदा मर्यादित बनाए रखेंगी।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

प्रश्न 3.
नई नारी के विकास का मार्ग में कौन-सी बाधाएँ हैं और वह कैसे दूर कर सकते है?
उत्तर :
नई नारी के मार्ग में अशिक्षा, पुरानी गलत परंपराएँ अंधविश्वास आदि बाधाएँ है नारी उसे अपनी शिक्षा, ज्ञान, दृढ़ चित्त वृत्ति, सादगी, अपने शास्त्र अध्ययन से दूर कर सकती हैं।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
देश एवं समाज के सर्वांगीण विकास के लिए नारी का शिक्षित और प्रगतिशील होना आवश्यक है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
आधुनिक युग में नारी सुश्शिक्षित होकर आगे बढ़ रही और हैं विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर हो रही है। यह देश और समाज के लिए शुभ और कल्याणकारी है। यह निर्विवाद सत्य है कि नारी के उत्थान तथा योग़दान के बिना किसी भी देश या समाज की सच्ची प्रर्गति नहीं हो सकती। जैसे एक पहिये से रथ की गति आगे नहीं बढ़ती वैसे ही नारी के बिना समाज का प्रगति का रथ आये नहीं बढ़ सकता।

आज नारियाँ सुशिक्षित होकर विद्या-ज्ञान की चमक से गौरवान्वित हो रही हैं। पढ़ी-लिखी प्रबुद्ध नारियाँ दृढ़ चित्तवृत्ति वाली होती हैं। वातावरण की चकाचौंध में वे कभी सन्मार्ग से नहीं भटक सकती। ज्ञान की कांति से वे सदा जगमगाती रहती है। कभी अज्ञान के अंधकार में भटक नहीं सकतीं। अपना सच्चा रास्ता कभी भूल नहीं सकतीं। वे अपनी संस्कृति, सभ्यता, चाल, व्यवहार, नम्रता को कभी छोड़ नहीं सकती असंस्कृत जीवन को घृणा पूर्वक अस्वीकार कर देती हैं।

शिक्षित विदुषी, नारियाँ ही सभी शास्तों का अध्ययन कर सकती हैं। अपने व्यवहार तथा सद्जान और विवेक से जीवन को सुख-सुविधाओं से संपन्न बना देती है। वे नारियाँ युगों से व्याप्त अंध-विश्वासों अनुपयोगी दकियानूसी विचारों को त्यागकर समाज-घर को वातावरण को दिव्य तथा सुखद बनाएँगी। घर में नवनिता आधुनिकता लाएँगी। । पत्येक मानव की गतिविधियों को जाँच परख कर सभी में दैवी गुणों का संचार कर सभी को देवता के समान दिव्य एवं लोकहितकारी बना देगी। अत: आधुनिक युग में प्रबुद्ध नारी समाज को नई दिशा, नई गति दे सकती है।

भाषा बोध :

1. ‘ना’ उपसर्ग जोड़कर शब्द बनाइए-
नामंजूर, नालायक, नापाक, नापसंद, नाकाबिल, नाखुश, नाबालिग।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

2. निम्नलिखित समोच्चरित भिन्नार्थक शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

  • नारी – नारी आज विद्या के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
  • नाड़ी – वैद्य नाड़ी देखकर रोग का निदान करते हैं।
  • विद्या- विद्या सबसे बड़ा धन है।
  • विधा – सदा सही विधा पर अमल करना चाहिए।
  • घन – आकाश में घन छाये हुए हैं।
  • धन – जीवन में धन का महत्व है।
  • शास्त्र – आज की नारी शास्त्र अध्ययन करती है।
  • शस्त्र – शस्त्र से शुत्र नहीं, मित्र बनाना चाहिए।
  • देव – शिव महान देव है।
  • देह – देह रक्षा करना सब का कर्त्तव्य है।

WBBSE Class 8 Hindi नई नारी Summary

कवि परिचय :

सुब्रह्मण्य ज़ी का जन्म सन् 1882 ई. में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जनपद के एट्टयपुरम में हुआ था। तमिल पुनर्जागरण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन्होंने अनेक पत्रिकाओं का संपादन तथा प्रकाशन किया। पांचाली, शपथम, कन्नन पाटदु (कृष्णगीत) और कुचिल पाट्दु (कोयल गीत) इनकी तीन महत्वपूर्ण कविताएँ हैं। देश प्रेम तथा भारत महिमा पर भी इन्होंने अच्छे गीतों की रचना की। सन् 1921 ई० में इनका देहावसान हो गया।

1. और वह गौरवान्वित है अपनी विद्या की दीप्ति से।
ऐसी स्त्रियाँ स्थिरमति वाली होती हैं और
वे कभी चकाचौंध में राह नहीं भूल सकतीं।
अज्ञान के घने अंधकार में
भटक जाना उन्हें कतई स्वीकार नहीं।

शब्दार्थ :

गौरवान्वित = सम्मानित।
चकाचौंध = तिलमिलाहट, तीव्र प्रकाश के कारण आखों का झँपना।
दीप्ति = चमक, प्रकाश।
घन = घना, अधिक।
स्थिरमति = दृढ़ बुद्धि विचार।
कतई = पक्का, बिलकुल।

सन्दर्भ – प्रस्तुत अवतण ‘नई नारी’ कविता से उद्धृत है। इसके रचनाकार सी० सुबह्मण्य है।
प्रसंग – प्रस्तुत कविता में कवि ने आधुनिक प्रर्गतिशील, प्रबुद्ध नारी के जीवन के विविध क्षेत्रों में अग्रसर होने की ओर ध्यान केन्द्रित किया है।

व्याख्या – आधुनिक युग में स्त्रियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर उसके प्रकाश से समाज तथा देश में गौरव पूर्ण स्थान प्राप्त कर ली हैं, और सम्मानित भी हुई हैं। ऐसी सुशिक्षित स्त्रियाँ दृढ़ बुद्धि-विचार वाली होती हैं। वे जीवन की रंगीनियों में पड़कर कभी अपना सच्चा रास्ता नहीं भूलतीं। सदा सन्मार्ग पर ही अग्रसर होती है। अज्ञान के सघन अंधकार में कभी भी भटक नहीं सकती। पथ भ्रष्ट होना, गलत रास्ते पर बढ़ना उन्हें बिल्कुल स्वीकार नहीं है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 7 नई नारी

2. संस्कृति विहीन जीवन को
वे हिकारत से नामंजूर कर देती है।
वे अनेकानेक शास्त्रों का अध्ययन करेंगी।
जीवन में और भी सुखों-सुविधाओं को लाएँगी।
युगों पुरानी मिथ्या परंपराओं को वे हटाएँगी,
और सभी अंधविश्वासों को तोड़ फेंकेंगी,
हर मानव गतिविधि का वे ध्यान रखेंगी
ताकि सभी देव तुल्य बन सकें।
वे पुरुषों की प्रशंसा को जीत लेंगी।

शब्दार्थ : संस्कृति = संस्कार, मानसिक विकास सभ्यता। मिथ्या = झूठ, असत्य। हिकारत = घृणा, उपेक्षा। परंपरा $=$ प्रथा, परिपाटी। अंधविश्वास $=$ विचार रहित विश्वास। गति विधि = आचरण व्यवहार आदि के रंग ढंग। तुल्य = समान। नामंजूर = अस्वीकार।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने स्पष्ट किया है कि प्रबुद्ध शिक्षित नारी अपने व्यवहार से पुरुषों की प्रशंसा प्राप्त कर लेंगी। शिक्षित नारी संस्कार रहित, असम्भ्य जीवन की उपेक्षा करते हुए उसे अस्वीकार कर देती है। वह असभ्य, संस्कृति रहित जीवन को स्वीकार नहीं कर सकती। आधुनिक युग की नारी अनेक शास्त्रों का अध्ययन करेगी। जीवन को तमाम सुख सुविधाओं से.सम्पन्न कर देगी। पुरानी जीर्ण शीर्ण झूठी प्रथाओं को दूर कर देगी। अंधविश्वासों तथा रूढ़ियों को समाप्त कर देंगी। समाज के प्रत्येक व्यवहार, आचरण के रंग ढंग और नियम तरीके पर अपनी पैनी नजर रखेंगी। उसका लक्ष्य होगा कि सभी देवता के समान निष्याप पवित्र तथा सर्वहितकारी बने। इस प्रकार अपने व्यवहार, आचरण, कर्त्तव्य से आधुनिक युग की शिक्षितनारी पुरुष समाज की प्रशंसा जीत सकेंगी।

इस प्रकार कवि ने स्सष्ट किया है कि आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर नारी पुरानी दकियानूसी परंपराओं को खत्म कर समाज को एक नई दिशा देगी। समाज का कायाकल्प कर डालेगी। आज नारी विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रसर हो रही है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – कोई नहीं पराया

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि गोपालदास ‘नीरज’ किसे अपना घर मानते हैं?
(क) सारे घर को
(ख) सारे संसार को
उत्तर :
(ख) सारे संसार को।

प्रश्न 2.
कवि ‘नीरज’ का आराध्य कौन हैं?
(क) गुलाम
(ख) भीड़
(ग) आदमी
(घ) देवता।
उत्तर :
(ग) आदमी।

प्रश्न 3.
‘काई नहीं पराया’ में कवि क्या सिखलाना चाहते हैं?
(क) सिर्फ अपने लिये सुख की तलाश
(ख) स्वर्ग पाने की कोशिश
(ग) जियो और जीने दो की भावना
(घ) देवत्व पाने की भावना
उत्तर :
(ग) जियो और जीने दो की भावना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 4.
इस कविता का मुख्य संदेश क्या है ?
(क) संसार के सभी प्राणी समान है
(ख) सारा संसार अपना घर है
(ग) सुख-दु:ख आते-जाते रहते हैं
(घ) हमेशा हसते रहना चाहिए
उत्तर :
(ख) सारा संसार अपना घर है।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार ईश्वर का निवास कहाँ है ?
(क) मन्दिर में
(ख) मस्जिद में
(ग) हर मनुष्य में
(घ) जल में
उत्तर :
(ग) हर मनुष्य में

प्रश्न 6.
कवि के अनुसार सबसे प्रिय कौन है ?
(क) ईश्वर
(ख) मनुष्य
(ग) गाय
(घ) दलित
उत्तर :
(ख) मनुष्य

प्रश्न 7.
‘नीरज’ किसका उपनाम है ?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) गोपाल दास
(घ) रामेश्वर शुक्ल
उत्तर :
(ग) गोपाल दास

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 8.
‘कोई नहीं पराया’ नामक कविता किस काव्य-संग्रह से लिया गया है ?
(क) संघर्ष
(ख) अंतध्विनि
(ग) विभावरी
(घ) प्राण-गीत
उत्तर :
(घ) प्राण-गीत

प्रश्न 9.
कवि को क्या भाता है ?
(क) देवत्व
(ख) मनुषत्व
(ग) अमरत्व
(घ) पशुता
उत्तर :
(ख) मनुष्त्व

प्रश्न 10.
हमारे अपने सुख में और किसका हिस्सा है ?
(क) नदी का
(ख) पहाड़ का
(ग) हवा का
(घ) संसार का
उत्तर :
(घ) संसार का

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि मंदिर मस्जिद के बजाय कहाँ सिर टेकना चाहता है?
उत्तर :
कवि मंदिर मस्जिद के बजाय हर द्वार पर सिर टेकना चाहता है, क्योंकि हर द्वार उसके लिए देवालय है और आदमी ही आराध्य है।

प्रश्न 2.
कवि को किस पर अभिमान है और उसे क्या भाता है?
उत्तर :
कवि को अपनी मानवता पर अभिमान है और उसे मनुष्य (मानवता) भाता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 3.
कवि को स्वर्ग-सुख की कहानियों से ज्यादा क्या प्रिय है?
उत्तर :
कवि को स्वर्ग सुख की कहानियों से ज्यादा प्रिय अपनी धरती है।

प्रश्न 4.
कवि किस प्रकार हँसने और चलने का संदेश देता है?
उत्तर :
कवि संदेश देता है कि इस प्रकार हँसों कि तुम्हारे साथ पैरों से कुचली धूल भी हँसे और इस प्रकार चलों कि स तुम्हारे चरणों से कोई काँटा भी न कुचल जाये।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत अंश में कवि ने क्या स्पष्ट किया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश में कवि ने क्या स्पष्ट अंश में कवि स्पष्ट किया है कि सारा संसार ही अपना घर है। यहाँ कोई भी पराया नहीं है, सभी अपने हैं।

प्रश्न 6.
कवि अपने आप को क्यों असमर्थ मानते हैं ?
उत्तर :
कवि अवि मन्दिर-मस्जिद के सामने सिर झुकाने में स्वयं को असमर्थ मानते हैं।

प्रश्न 7.
गोपाल दास ‘नीरज’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
गोपाल दास ‘नीरज’ का जन्म 4 जनवरी 1925 ई० को इटावा जिला (उत्तर प्रदेश) के पुंरावली गाँव में हुआ था।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 8.
गोपाल दास ‘नीरज’ के चार प्रमुख काव्य-संग्रहों के नाम लिखें।
उत्तर :
दर्द दिया, प्राण-गीत, बादल बरस गये, दो गीत, संघर्ष आदि।

प्रश्न 9.
कवि के अनुसार हमारी धरती कैसी है ?
उत्तर :
कवि के अनुसार हमारी धरती सैकड़ों स्वर्गों से ज्यादा सुकुमार है।

प्रश्न 10.
कवि लोगों में क्या बाँटने का संदेश देते हैं ?
उत्तर :
कवि लोगों में प्रेम बाँटने का संदेश देते हैं।

प्रश्न 11.
विश्व को शांति और सुखमय कैसे बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
‘जिवो और जीने दो’ का शाश्वत् सिद्धांत अपनाकर ही विश्व को शांति और सुखमय बनाया जा सकता है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 12.
डाली का फूल डाली का नहीं पहले बगीचे की शोभा बढ़ाये इसका निष्कर्ष क्या है ?
उत्तर :
इसका निष्कर्ष यह है कि व्यक्ति को केवल अपने सुख स्वार्थ की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। परमार्थ की चिन्ता होनी चाहिए। पृथ्वी को अपना परिवार समझना चाहिए।

बोध मूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
इस कविता को पढ़कर क्या आपको लगता है कि आज भी एकता विद्यामान है?
उत्तर :
जाति, धर्म संप्रदाय की विभिन्नता के होते हुए भी मानव समुदाय में एकता विद्यमान है। सभी धर्म के लोग एक साथ रहते हैं। सभी के सुख-दुःख में सम्मिलित होते हैं। सभी अपने देश से प्यार करते हैं। विभिन्न विचार, रहन-सहन के बावजूद मानवता सभी में मौजूद हैं। संकीर्णता को त्याग कर आज उदारता का माहौल बना है। अपनी धरती सभी को प्यारी है। सभी अपने देश, अपनी संस्कृति पर गर्व का अनुभव करते हैं। करुणा, परोपकार मानवता की भावनासभी को एकता के सूत्र में जोड़े हुए है। विश्व बंधुत्व की भावना को सभी स्वीकार करते हैं। एकता के रास्ते में व्यवधान के बावजूद एकता का अस्तित्व बना हुआ है।

प्रश्न 2.
‘मुझको अपनी मानवता पर बहुत-बहुत अभिमान है।’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने स्पष्ट किया है कि मानव का परिचय मानवता ही होता है। मानवता ही जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है। कवि को मानवता पर अर्थात् मानव के सद्युणों पर गर्व है। मनुष्य ही अपने दिव्य गुणों से, सेवा, त्याग, स्नेह, परोपकार की भावना से पूजनीय बन जाता है। इसीलिए कवि को मानवता पर गर्व का अनुभव होता है।

प्रश्न 3.
‘हँसों इस तरह, हैसे तुम्हारे साथ दलित यह धूल भी’ का क्या तात्पर्य हैं?
उत्तर :
कवि ने लोगों को सलाह दी है कि वे इस प्रकार हँसे कि उनके पैरों के नीचे दबी, कुचली, धूल भी हँस पड़े। व्यक्ति मन से खुश होकर मन की खुशी को प्रकट करने के लिए हँसता है पर उसे दबे, कुचले, दुर्बल कमजोर लोगों को प्रसन्न बनाना चाहिए। उनके मन में भी खुशियों का संचार होना चाहिए। तभी वे भी अपनीप्रसन्नता को व्यक्त करने के लिए हँसेंगे। हँसने का सच्चा आनन्द तभी है, जब उसके आश्रित कमजोर लोग भी हँसे।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Poem 6 कोई नहीं पराया

प्रश्न 4.
कवि प्यार को बाँटने की सलाह क्यों देता है ?
उत्तर :
कवि ने लोगों को यह सलांह दी है कि वे प्यार बाँटकर विश्व प्रेम तथा विश्व मानवता की भावना को प्रतिष्ठित करें। प्यार बाँटने से अर्थात् ध्रर्म, जाति, संप्रदाय, के भेद-भाव को त्याग कर सभी के साथ प्रेम करने से भाई-चारे की भावना आएगी। एकता की भवना दृढ़ बनेगी। प्यार या प्रेम ऐसी शक्ति हैं जिससे पराये भी अपने हो जाते हैं। इसी कारण जीवन को सुखमय बनाने के लिए कवि ने प्यार बाँटने की सलाह दी है।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

प्रश्न :
हम कविता के द्वारा कवि ने क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
इस कविता में कवि ने सभी प्राणियों के प्रति अपनापन का भाव रखते अपने पराये के संकीर्ण विचार को त्यागने एकता तथा भाईचारा के सूत्र में बाँधने की प्रेरणा दी है। मनुष्य को चाहिए कि वह देश, जाति, धर्म, संप्रदाय, ऊँच-नीच की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर विश्व को एक परिवार के रूप में देखें। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सारी पृथ्वी ही हमारा परिवार है, इस विचार को प्रश्रय दे।

व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि इस दुनिया में कोई भी प्राणी पराया नहीं है। सारा संसार अपने घर के समान है। किसी धर्म का गुलाम न बनकर मंदिर या मस्जिद में माथा न टेककर हर आदमी को देवता तथा हर घर को मंदिर समझना चाहिए। संसार के किसी भी कोने में रहे, पर इंसान के प्रति प्यार तथा ममत्व की भावना बनी रहे। अपनी मानवता तथा मानवीय गुणों-सत्य, धर्म, दया, परोपकार की भावना से हममें अभिमान बना रहे। देवत्व नहीं मनुज्त्व अर्थात् मानवता हो मुझे सदा प्रिय बनी रहे। सच्चे मनुष्य प्यार को छोड़कर अमरता की प्राप्ति भी स्वीकार नहीं। स्वर्गीय सुख की कोमल कहानियाँ उतनी प्रिय तथा ग्राह्व नहीं है, जितनी प्रिय धरती की कोमलता, सहजता तथा दिव्यता है।

अपनी पृथ्वी की गाथा ही सबसे प्यारी तथा रुचिकर है। सारी मानवता को ‘जिओ ओर जीने दो’ के शाश्वत् सिद्धान्त की शिक्षा देकर विश्व में शान्ति सुख और अमन-चयन का केन्द्र बनाया जा सकता है। अपना प्यार बाँटना सभी से सच्चा प्यार करना ही सबसे महत्वपूर्ण कर्त्वव्य है। अपनी हँसी – खुशी को सार्वजनिक बनाना संसार के कण-कण को हँसी से सम्मित करना चाहिए। अपने कर्त्तव्य के व्यवहार से एक काँटो को भी दबाना या पीड़ा देना उचित नहीं है। अपने व्यक्तिगत सुख में सारे संसार को भी भागीदार बना लेना चाहिए। सोचना यह चाहिए कि हमारे सुख में संसार भर के लोगों की भागीदारी है। फूल की डाली के पहले उपवन का श्रृंगार करना चाहिए। हमेशा इस तथ्य को स्वीकार कि करना चाहिए सारा संसार ही हमारा घर है।

भाषा बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –
संसार – विश्व, दुनिया।
उपवन – बाग, बगीचा।
इंसान- मानव, आदमी।
शूल-काँटा, कंटक।
घर – गृह, सदन।

2. निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए-
देश काल – देश और काल – द्वन्न्व समास।
घट-घट – प्रत्येक घट – अव्ययी भाव समास
देवालय – देव के लिए आलय – तत्पुरुष समास।
स्वर्ग-सुख-स्वर्ग का सुख-तत्पुरुष समास।

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3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –

पराया – अपना
गुलाम – स्वामी
प्यार – नफरत, घृणा
स्वर्ग – नरक
स्वीकार – अस्वीकार
शूल-फूल
मानवता – दानवता

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कवि परिचय :

श्री गोपाल दास ‘नीरज’ का जन्म सन् 1926 ई. में उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के पुराबला नामक ग्राम में हुआ था। नीरज वर्तमान समय के लोकप्रिय कवि एवं गीतकार हैं। ये मंचीय गीतकार के रूप में पर्याप्त लोक प्रिय हुए हैं। इनके गीतों में अतृष्ति, नियति तथा मृत्युबोध की छाया है। इसके प्रमुख गीत संग्रह-संर्ष, विभावरी, अन्तर्ध्वीने, प्राण-गीत, दर्द दिया है, आसावरी, बादल बरस गए, नदी किनारे आदि हैं। नीरज की भाषा सरल, सरस, तथा प्रवाहपूर्ण है।

1. कोई नहीं पराया, मेरा घर सारा संसार हैं।
मैं न बाँधा हूँ देश काल की जंग लगी जंजीर में,
मैं न खड़ा हूँ जाति-पाँति की ऊँची-नीची भीड़ में।
मेरा धर्म न कुछ स्याही-शब्दों का सिर्फ गुलाम है,
मै बस कहता हूँ कि प्यार है तो घट-घट में राम है।
मुझसे तुम न कहो मन्दिर-मस्जिद पर मैं सर टेक दूँ,
मेरा तो आराध्य आदमी देवालय हर द्वार है।
कोई नही पराया मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ :

  • पराया = दूसरा।
  • जंग = लोहे का मोरचा।
  • स्याही शब्दों = काले अक्षरों।
  • जंजीर = बेड़ी।
  • गुलाम = दास, पराधीन।
  • घट-घट में = प्रत्येक प्राणी के हृदय में।
  • आराध्य = पूजनीय।
  • देवालय = मंदिर, देवस्थान।

सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘कोई नहीं पराया’ कविता से ली गई हैं। इसके रचनाकार श्री गोपालदास ‘नीरज’ है।
प्रसंग – इस अवतरण में कवि ने समस्त मानव को अपना समझने की प्रेरणा दी है। संकीर्णता को छोड़कर विश्व को ही परिवार समझना चाहिए।

व्याख्या – प्रस्तुत अंश में कवि ने स्पष्ट किया है कि सारा संसार ही अपना घर है। यहाँ कोई भी पराया नहीं है, सभी अपने हैं। देश तंथा कालकी जंग लगी बेड़ी में मैं नहीं बँध हूँ। अर्थात् देश काल की संकुचित सीमा को तोड़कर पृथ्वी को ही परिवार समझता हूँ। जाति-पाँति, ऊँचा-नीच की संकीर्ण विचारधारा को मैने त्याग दिया है। हर प्राणी के हृदय में ईश्वर विराजमान है, इसलिए हर प्राणी से प्यार करना ईश्वर प्रेम का रूप है। मंदिर तथा मस्जिद में माथा टेकना, उपासना करना व्यर्थ है, मुझे वह स्वीकार नहीं है। मेरे लिए हर घर का दर वाजा मन्दिर-देव स्थान है तथा व्यक्ति हमारे लिए पूजनीय है। ईश्वर मंदिर-मस्जिद में नहीं, हर व्यक्ति के हृदय में निवास करते हैं। इसी कारण मैं सारे संसार को ही अपना घर मंदिर समझता हूँ। अपने-पराये का भेद-भाव मैंने छोड़ दिया है। क्योंकि इस विश्व में मेरा कोई पराया नहीं है।

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2. कहीं रहे कैसे भी मुझको प्यारा यह इंसान है,
मुझको अपनी मानवता पर बहुत-बहुत अभिमान है।
अरे नहीं देवत्व, मुझे तो भाता है मनुजत्व ही,
और छोड़ कर प्यार नहीं स्वीकार सकल अमरत्व भी।
मुझे सुनाओ तुम न स्वर्ग-सुख की सुकुमार कहानियाँ,
मेरी धरती, सौ-सौ स्वर्गों से ज्यादा सुकुमार हैं।
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ :

  • अभिमान = स्वाभिमान।
  • देवत्व = देवता की विशेषता।
  • इंसान = मनुष्य।
  • अमरत्व = अमरता, मृत्यु का अभाव
  • मानवता = आदमीयत।
  • धरती = पृथ्वी।
  • मनुजत्व = मानव के गुण।
  • सुकुमार = कोमल।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने बताया है कि यह धरती स्वर्ग से भी अधिक प्रिय तथा आकर्षक है। कवि को संसार में सबसे प्रिय मनुष्य है। उसे अपनी मानवीय विशेषताओं उसकी अच्छाइयों पर बहुत अभिमान है। मानवता को ही वह सबसे प्यारा समझता है। देवत्व की उपेक्षा वह मनुजत्व को ही अधिक प्रिय समझता है। उसे देवता नहीं मनुष्य ही बन्दनीय है। मानव मानवता से प्यार करे, यही कवि की अभिलाषा है। वह मानवता के प्यार को ठुकरा कर अमरता को भी स्वीकार नहीं कर सकता। कवि को स्वर्ग के सुख, वैभव की कहानियाँ प्रिय नहीं है, उन्हें वह सुनना नहीं चाहता। कवि इसं पृथ्वी को सैकड़ों स्वर्ग से भी कोमल तथा मनोरमा समझता है। वह सारी पृथ्वी को ही अपना घर समझता है।

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3. मैं सिखलाता हूँ कि जियो और जीने दो संसार को,
जितना ज्यादा बाँट सको तुम बाँटो अपने प्यार को।
हँसो इस तरह, हँसे तुम्हारे साथ दलित यह घूल भी,
चलो इस तरह कुचल न जाय पग से कोई शूल भी।
सुख न तुप्हारा सुख केवल, जग का भी उसमें भाग है,
फूल डाल का पीछे, पहले उपवन का श्रृंगार है।
कोई नहीं पराया, मेरा घर सारा संसार है।

शब्दार्थ :

  • दलित = दबाया हुआ, कुचला हुआ।
  • उपवन = बगीचा।
  • कुचल = पैरों से रौंदना।
  • शृंगार = साज-सज्जा।
  • शूल = काँटा।
  • जग = संसार।

व्याख्या – कवि ने इस अवतरण में बतलाया है कि ‘जिओ और जीने दो’ का शाश्वत् सिद्धांत अपनाकर ही विश्व को शांति और सुखमय बनाया जा सकता है। कवि संपूर्ण संसार को ‘जियो और जीने दो’ की शिक्षा दे रहा है। जितना भी संभव हो सके सभी में अपनत्व बाँटो। इस तरह हँसों कि तुम्हारे पैरों से दबी-कुचली धूल भी हँसने लगे। इस तरह खुशी मनाओं जिससे लोग भी खुशी में भागीदार बने। इस प्रकार चलो कि कोई काँटा भी तुम्हारे पैरों से दबा या कुचला जाये, ने ऐसी चेष्टा हो कि तुम्हारे किसी भी क्रिया कलाप से तुम्हारे शत्रु को भी कष्ट न हो। तुम्हारे सुख में संसार भी सम्मिलित हो। अपने को विस्तृत कर सारे संसार को सुखी बनाने का प्रयास करो। डाली का फूल डाली का नहीं, पहले बगीचे की शोभा बढ़ाए। निष्कर्ष यह है कि व्यक्ति को केवल अपने सुख स्वार्थ की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। परमार्थ की चिन्ता होनी चाहिए। पृथ्वी को परिवार समझना चाहिए।