WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 9 भारत और समकालीन बहिर्विश्व (ईसा के बाद सप्तम् शताब्दी के प्रथम भाग तक)

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WBBSE Class 6 Geography Chapter 9 Question Answer – भारत और समकालीन बहिर्विश्व (ईसा के बाद सप्तम् शताब्दी के प्रथम भाग तक)

विस्तृत उत्तर वालें प्रश्न (Detailed Answer Questions) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
अलक्जेण्डर (सिकंदर) द्वारा भारतीय उपमहादेश के अभियान से मौर्य साप्राज्य के विस्तार में क्या प्रभाव पड़ा था?
उत्तर :
भारत उपमहादेश के कुछ भागों में ही पारसियों का शासन था। ग्रीक शासक अलक्जेण्डर पूरी दुनिया में एक विशाल साग्राज्य स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए पारसियों के साथ उनका युद्ध हुआ। पारसिक को पराजित कर अलक्जेण्डर भारतीय उपमहादेश में पहुँचा। उपमहादेश में पारसिक का साम्राज्य अलक्जेण्डर के अभियन के कारण समाप्त हो गया। अलेक्जेण्डर अधिक दिनों तक इस उपमहादेश में नहीं था। फलस्वरूप इस अभियान का गंभीर प्रभाव भारतीय उपमहादेश में ज्यादा नहीं पड़ा। अलक्जेण्डर के अभियान के विरुद्ध कुछ शासकों ने लड़ाई की थी और कुछ शासकों ने उनकी मदद भी की। तक्षशिला का राजा आम्भीक ने उसकी मदद की थी। लेकिन अलक्जेण्डर के अभियान के फलस्वरूप छोटी-छोटी शक्तियाँ समाप्त हो गयी थी जिसके कारण मगध के लिए अपनी शक्ति का विस्तार करना सहज हो गया।

प्रश्न 2.
शक-कुषाण के आने के पहले भारतीय उपमहादेश के समाज और संस्कृति के किन विषयों की जानकारी को मिलती है?
उत्तर :
शक-कुषाण के आने के पहले भारतीय उपमहादेश के साथ बाहर के विभिन्न देशों का सांस्कृतिक विनिमय था। पारसिक साम्राज्य के अधीन क्षेत्रों में आशुमिरा भाषा एवं लिपि का प्रचलन था। पारसिक शासक ऊँचे पत्थर का स्तम्भ बनवाते थे। अलक्जेण्डर के भारत आगमुन से ग्रीक उपमहादेश की जीवनशैली और संस्कृति भारतीयों के साथ घुलमिल गई। वे बौद्ध धर्म की चर्चा करते थे, नये प्रकार की मुद्रा तैयार करते थे। विज्ञान विशेष्र कर गणित और ज्योतिष विज्ञान की चर्चा के क्षेत्र में ग्रीक और भारतीय सोच-विचार का विनिमय देखने को मिलता है। ग्रीक प्रभावित शिल्प की चर्चा भी शुरू हुआ था जिसका उदाहरण गांधार शिल्प है।

प्रश्न 3.
प्राचीन भारतीय उपमहादेश के साथ दूसरे क्षेत्र के सम्पर्क में पढ़ाई की क्या भूमिका थी?
उत्तर :
बौद्ध धर्म भारतीय उपमहादेश के साथ बाहर की दुनिया.से सम्पर्क का.एक माध्यम था। अनेक बौद्ध पण्डित एक साथ इस उपमहादेश से विभिन्न देशों में जाते थे और उन्हें शिक्षा देते थे। शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाहर से भी विद्यार्थी आते थे। इन सभी देशों में से चीन देश में शिक्षा की चर्चा सबसे जनप्रिय थी। भारतीय उपमहादेश के कश्मीर क्षेत्र में शिक्षा पर चर्चा होती थी।

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प्रश्न 4.
भारत और बहिर्विश्व के बीच सम्पर्क के साधनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्राचीन भारतीय उपमहादेश के उत्तर-पथ्विम की ओर कुछ गिरिपथ (पर्वत पथ) हैं। उत्तर- पथ्विम में इसी गिरिपथ के जरिए ही पश्चिम और मध्य एशिया के साथ इस उपमहादेश का सम्पर्क था। दूसरी ओर हिमालय पर्वव श्रेणी के गिरि पथ से चीन और तिल्बत के साथ सम्पर्क कायम था। विशेष करके उत्तर-पश्चिम गिरिपथ के जरिए ही विदेशी यहाँ आए। इस रास्ते के जरिए ही व्यापार-वाणिज्य होता था। सांस्कृतिक आदान-पदान भी होता था। इसके अलावा समुद्र पथ से राजनैतिक, अर्थनैतिक और सांस्कृतिक विनिमय होता था।

प्रश्न 5.
भारतीय उपमहादेश और पारस के सम्पर्क के बारे में तुम क्या जानते हो? संक्षेप में लिखो।
उत्तर :
भारतीय उपमहादेश के उत्तर-पश्चिम की ओर गांधार था। गांधार के जरिए ही पारसिक साम्माज्य के साथ इस उपमहादेश का सम्पर्क स्थापित हुआ था। ई० पू० छठीं शताब्दी के द्वितीय भाग में पारस इखामनीषी शासक गांधार अभियान चलाया था। उनमें श्रेष्ठ सम्राट दरायबौष अथवा दरायुष प्रमथ था। (ईसा पू॰ 522-486 तक) उनका शासन गांधार के अलावा उपमहादेश के कुछ अन्य भागों में फैल गया था। उनके एक लेख में ‘हिदुश’ शब्द का वर्णन मिलता है। सिन्धु नदी से ही यह शब्द बना था। ऐसा लगता है कि निम्न सिंधु इलाका दरायबौष के शासन के अन्तर्गत था।

ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के लेख से जानकारी मिलती है कि इन्दूस अथवा इण्डिया पारसिक सामाज्य का एक प्रदेश अथवा साट्राँपी था। दरायबौष निम्न सिंधु इलाकों में सम्पर्क व्यवस्था के ऊपर शासन कायम करने के लिए ही इस क्षेत्र पर जीत हासिल किए । उत्तर-पश्चिम भारत और उपमहादेश के उत्तर – पश्चिम भाग में पारसिक साप्राज्य के साथ काफी दिनों से जुड़े हुए थे।

प्रश्न 6.
भारतीय उपमहादेश और मध्य एशिया के साथ सम्पर्क कैसे स्थापित हुआ?
उत्तर :
भारतीय उपमहादेश के इतिहास में मौर्य शासनकाल के अंतिम समय में कुछ बदलाव आया। पथिम एशिया और मध्य एंशिया के साथ उपमहादेश की राजनीति और शासन से जुड़े। उपमहादेश के उत्तर और उत्तर-पथ्चिम भाग में ग्रीक, शक-पल्लवों का शासन था। पुष्यमित्र शुंग के समय ही ग्रीक राजा कुछ क्षेत्रों पर अपना अधिकार जमाये थे। इन ग्रीक राजाओं में अधिकांश बैक्ट्रिया के निवासी थे। उपमहादेश का उत्तर-पश्चिम सीमांत ही बैक्ट्रिया था। यह हिन्दुकुश पर्वतमाला के उस्तर-पश्चिम अर्थात् आज के अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्व का क्षेत्र था। वह बैक्ट्रिया ईसा पू० के चौथी शताब्दी के अन्त तक ग्रीक शासक सेल्यूकस के अधीन था। बैक्ट्रिया ग्रीक राजा को ही पुराण साहित्य में यवन कहा जाता था। उत्तर-पथ्चिम सीमांत का क्षेत्र गांधार, तक्षशिला तक बैक्ट्रिया ग्रीक शासन था। उपमहादेश में इस ग्रीक शासक को बैक्ट्रिया ग्रीक अथवा इन्डोग्रीक शासक कहा जाता था।

प्रश्न 7.
मीनाण्डर के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
मीनाण्डर प्रारम्भ में बैक्ट्रिया के यवन शासक ड्रेमेटियस का सेनापति था। अपने स्वामी की मृत्यु के बाद वह राजा बना और उसने भारत पर आक्रमण करके इसके विस्तृत भू-भाग पर अपना अधिकार कर लिया। उसने बौद्ध धर्म स्वीकर कर लिया था। नागसेन ने उससे प्रभावित होकर उसी के नाम पर और उसी के बारे में ‘मिलिन्द पहावों नामक ग्रन्थ की रचना की। वह उच्च कोटि का विद्वान और कला प्रिय शासक था। उसकी राजधानी साकल (आधुनिक सियालकोट) थी। उसने 160 ई० पू० से 140 ई० पू० तक शासन किया। उसने अनेक बौद्ध स्तूपों तथा बौद्ध विहारों का निर्माण कराया था।

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प्रश्न 8.
हूण के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
हूण मूलतः मध्य एशिया के निवासी थे। ये मंगोल जाति की सीथियनों की एक शाखा के थे। ये लोग खानावदोश, बर्बर और लुटेरे थे। हूणों ने सर्वप्रथम 456 ई० में स्कन्दगुप्त के समय भारत पर आक्रमण किया पर पराजित होकर लौट गए। पाँचवीं सदी के अन्त में हूण नेता तोरमाण ने गुप्त सम्राट भानुगुप्त को पराजित कर गांधार तथा पश्चिमी भारत के विशाल क्षेत्र पर अधिकार करके हूण शासन की स्थापना की। उसकी राजधानी साकल (स्यालकोट) थी। तोरमाण की मृत्यु के बाद उसका पुत्र मिहिरकुल राजा हुआ। उसने गुप्त सम्राट भानुगुप्त पर आक्रमण किया परन्तु सम्राट ने उसे परास्त कर बंदी बना लिया। अन्तत: बर्बर हूणों की शक्ति का अंतिम उन्मूलन मालवा के यशोवर्द्धन ने किया। 542 ई० में मिहिरकुल की मृत्यु के पश्थात् हूणों का राजनीतिक प्रभुत्व समाप्त हो गया।

प्रश्न 9.
ताप्रलिप्त बन्दरगाह कहाँ पर अवस्थित था ? इस बन्दरगाह से कौन चीनी यात्री जहाज पर चढ़ा था।
उत्तर :
प्राचीन भारतीय उपमहादेश में ताम्मलिप्त एक प्रसिद्ध बन्दरगाह था। सुयान जांग ने कहा था, ताम्रलिप्त समुद्र एक खाड़ी के ऊपर है। वहाँ पर स्थल मार्ग और जलमार्ग आकर मिला है। संभवतः ताम्रलिप्त पूर्व मिदनापुर तमलुक के आस-पास था। बन्दरगाह से फाहियान जहाज पर चढ़े थे। स्थल मार्ग से ही ताम्रलिप्त यातायात करना सहज था। व्यापार के अलावा शिक्षा के लिए ताम्मलिप्त प्रसिद्ध था। लेकिन नदियों के सूखने के कारण बन्दरगाह नगर का महत्व कम होता गया जिससे नगर के रूप में भी उसकी ख्याति नष्ट हो गई।

प्रश्न 10.
शक शसाक की मुद्राओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
शक शासकों ने विभिन्न प्रकार की चाँदी की मुद्रा का प्रचलन शुरू किया था। कुछ मुद्रा ग्रीक और प्राकृत दोनों ही लिपियों में लिखी जाती थी। शक शासक स्वयं ही मुद्रा में राजाधिराज की उपाधि का प्रयोग करते थे।

प्रश्न 11.
शक-शासन के सामाजिक जीवन का वर्णन करें।
उत्तर :
शक-कुषाण के शासन काल में उपमहादेश में विभिन्न प्रकार की पोशाक प्रचलित हुई थी। जैसे – कुर्ता, पैजामा, लंबा, जोब्बा, बेल्ट, जूता इत्यादि। शक और कुषाण के शासन काल में नगरों की दीवारें पक्की ईंट से बनाया जाती थी। इसके अलावा एक प्रकार की लाल मिट्टी का बर्तन बनाने की पद्धति मध्य एशिया से उस उपमहादेश में आया। कुषाण शिव, विष्णु और गौतम बुद्ध की उपासना करते थे।

प्रश्न 12.
व्यापार एवं वाणिज्य के संपर्क सूत्र बनाने में किसकी भूमिका थी?
उत्तर :
ईसा पूर्व के सातवीं ईस्वी से लेकर उस उपमहादेश के साथ बाहर के देशों से वाणिज्यिक सम्पर्क था। ईसा पूर्व 200 से ईसा के बाद 300 साल के मध्य ही वह वाणिज्यिक सम्पर्क सबसे अधिक बढ़ा था। दक्षिण एशिया के साथ मध्य और पथ्चिम एशिया एवं भू-मध्य सागरीय अंचल में लेन-देन चलता था। जल मार्ग और स्थल मार्ग से यह सम्पर्क होता था।

रोमन साम्राज्य और भू-मध्य सागर के पूर्व की ओर चीन और भारत में विभिन्न वस्तुओं की माँग थी। इनमे सबसे अधिक चीनी रेशम का महत्व था। वहाँ से विभिन्न रास्तों का अतिक्रमण करके रेशम भू-मध्य सागर के पूर्व की ओर के इलाकों की ओर पहुँच जाता था। रेशम इस स्थल मार्ग का प्रधान वाणिज्य द्रव्य था। लेकिन इस समय रेशम मार्ग नामक कोई भी नाम नहीं था। कुछ समय के बाद अर्थात् ईसा के बाद उन्नीसवीं शताब्दी में इस मार्ग को रेशम पथ कहा जाता था।

इस विशाल अंचल का कुछ भाग एक समय पारसियों के कब्जे में था। बाद में कुषाण बैक्ट्रिया पर कब्जा किया जिसके कारण रेशम पत्थर की एक शाखा दक्षिण एशिया के साथ जुड़ गई। रेशम वाणिज्य से कुषाण शासक काफी शुल्क की अदायगी करते थे। उस व्यापार के साथ युक्त विभिन्न क्षेत्र के लोग इस उपमहादेश के उत्तर और उत्तर-पश्चिम प्रांत में इकट्ठा होते थे।

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प्रश्न 13.
शक शासक प्रथम आय के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
शक शासक प्रथम आय ने एक नया वर्ष का आरंभ किया था। वह साल विक्रमी के नाम से परिचित है। कान्धार से उत्तर-पध्थिम के सीमांत क्षेत्र में प्रथम अधिकार था। धीरे-धीरे शक शासन उत्तर भारत में एवं गंगा घाटी में फैल गया।

प्रश्न 14.
फाह्यान के बारे में तुम क्या जानते हो ?
उत्तर :
फाह्यायान (399-411 ई०) : तत्कालीन चीनी यात्री फाह्यान ने भारत की राजनीति, सामाजिक एवं आर्थिक दशा का वर्णन किया है।
चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में फाह्यान नामक प्रसिद्ध चीनी यात्री भारत आया था और लगभग छः वर्ष तक यहाँ रहा। वह 399 ई० में अपने देश से चला और 414 ई० में वापस वहाँ पहुँचा। उसकी यात्रा का उद्देश्य प्रामाणिक बौद्ध ग्रन्थों को एकत्रित करना था। उसे अपनी यात्रा के मार्ग में अनेक भयकर विपत्तियों का सामना करना पड़ा था। वह चीन से स्थल मार्ग से खोतान, यारकन्द, पेशावर, तक्षशिला होता हुआ कपिलवस्तु, कुशीनगर और फिर पाटलिपुत्र पहुँचा। वहाँ कुछ वर्ष रहने के बाद वह लुम्बिनी, वैशाली तथा नालन्दा गया। वापसी में वह लंका, जावा, सुमात्रा, आदि से होता हुआ 414 ई० में वापस चीन पहुँचा। उसने भारत के बारे में जो कुछ लिखा है वह आज भी उपलब्ध है। उससे हमें तत्कालीन भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति की जानकारी मिलती हैं।

प्रश्न 15.
कुषाण कौन थे ?
उत्तर :
कुषाण यू-ची जाति की एक शाखा था, जो चीन के पध्विमोत्तर प्रदेश कान्सू में रहते थे। यू-ची नये प्रदेश की खोज में पश्थिम की ओर बढ़े और आक्सस घाटी पर अधिकार कर रहने लगे।

प्रश्न 16.
गांधार कला क्या है ?
उत्तर :
भारतीय एवं यूनानी शिल्प कला के मेल से विकसित कला को गांधार कला कहा जाता है।

प्रश्न 17.
दूतों के आपसी सम्पर्क में क्या भूमिका होती थी ?
उत्तर :
उपमहादेश और बाहर की दुनिया के मध्य सम्पर्क का एक माध्यम दूत विनिमय भी था। मूलतः मौर्य सम्राट के समय से ही दूत विनिमय आरम्भ हुआ था। ये दूत अधिकांशत: अपनी जानकारी को लिखकर रखते थे।
ग्रीक शासक सेल्यूकस का दूत मेगास्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य की सभा में आया था। मौर्य सम्राट भी अपने दूत को विदेशी शासकों की सभा में भेजते थे। बिन्दुसार के साथ सीरिया का शासक एन्टीकास प्रथम का सम्पर्क था। पथ्चिम एशिया में ग्रीकों के साथ मौर्यों ने अच्छा सम्पर्क बरकरार रखने का प्रयास किया था। सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार दूतों के माध्यम से किया था। सीरिया, मिस्र, मासीडन, सिंहल इत्यादि जगहों पर अशोक ने दूत भेजे थे। राजगृह में पाये गये लेख से हर्षवर्धन के समय चीन के साथ दूत विनिमय के विषय में जानकारी मिलती है।

प्रश्न 18.
कुमारजीव के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
कुमारजीव के पिता बाबा कुमारायन कूची में चले गये थे। कूची के राजा ने उसे राजगुरु का पद दिए। कुमारजीव के जन्म के बाद उसकी माँ जीव बौद्ध हो गई। फलस्वरूप नौ वर्ष के कुमारजीव( 342 ईसा पूर्व 413 ईसा पूर्व) माँ के साथ कश्मीर चले गये। वहाँ पर अपने मित्रों से बौद्ध धर्म और साहित्य विषय पर पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होने के बाद मध्य एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में कुमारजीव घूमे। इतने दिनों में वे पण्डित के रूप में भी काफी प्रसिद्ध हो गए।

कुछ दिनों के बाद चीनी शासक ने कूची पर आक्रमण किया। कुमारजीव उस समय कूची में ही था 1385 ई० पूर्व में कुमारजीव को कूची से कानसु प्रदेश में ले जाया गया। चीनी सम्राट के अनुरोध से 401 ईसा पूर्व में वे चीन की राजधानी गए। बाद के ग्यारह वर्ष कुमारजीव चीन की राजधानी में ही था। बौद्ध धर्म विषयक पढ़ाई में ही उनका जीवन व्यतीत हुआ था। संस्कृत और चीनी दोनों भाषाओं में कुमारजीव दक्ष थे। फलस्वरूप अनुवाद का कार्य वे सहज ही कर सकते थे। चीन में बौद्ध धर्म दर्शन प्रचार के क्षेत्र में कुमारजीव की भूमिका विख्यात है।

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प्रश्न 19.
प्राचीन विश्र की विभिन्न सभ्यताओं का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर :
मेसोपोटामिया की सभ्यता : टाइग्रिस और युफेरिस नदी के मध्य भाग के क्षेत्र को मेसोपोटामिया कहा जाता था। इस शब्द का अर्थ है दो नदियों का मध्यवर्ती देश। प्राचीन काल में इस क्षेत्र का एक भाग सुमेरीय सभ्यता का था। सुमेर की लिपि को अंग्रेजी में किउनिफर्म कहा जाता था। सुमेर के लोग गणित; ज्योतिष विज्ञान और विभिन्न ज्ञानविज्ञान की चर्चा करते थे। सुमेर के लोगों ने ही सबसे पहले लकड़ी के चक्के का प्रयोग करना आरम्भ किया। सुमेर के अलावा मेसोपोटामिया की एक प्रसिद्ध सभ्यता वेबीलोन की सभ्यता है। वेबीलोन के राजा हामूरावी ने सबसे पहले लिखित कानून आरम्भ किया था।

मिस्र की सभ्यता : उत्तर-पूर्व अफ्रीका के नील नदी के किनारे पहले से ही प्राचीन मिस्न की सभ्यता थी। ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस ने मिस्र को नील नदी का दान कहा थां। मिस्र के शासक को फराओ भी कहा जाता था। उनके मृत शरीर को रखने के लिए पिरामिड बनाया जाता था। मिस्न में पापिरस पेड़ की छाल पर लिखना शुरू हुआ था। पापिरस से ही कागज का अंग्रेजी शब्द पेपर आया। वर्ण और चित्र को मिलाकर मिस्न में एक प्रकार के लेख का प्रयोग होता था। उसे मिस्र की हायरोग्लीफ लिपि कहा जाता था। मिस्न का लापिस लाजुली पत्थर भारतीय उपमहादेश में निर्यात किया जाता था।

चीन की सभ्यता : एशिया महादेश के पूर्व में ह्यागहो और ‘ईयांग-सिकियांग’ नदी की अवाहिका प्राचीन चीन की सभ्यता थी। प्रथम कागज बनाने एवं लकड़ी के अक्षर बनाकर छापे जाने का कौशल भी चीन में ही आरम्भ हुआ। बाहरी आक्रमण रोकने के लिए चीन के शासक ने दीवार से चीन को घेर कर रखा था। उस विशाल दीवार को एक साथ चीन का प्राचीर कहा जाता है। चीन में बारूद का प्रयोग होता था।

प्राचीन ग्रीक सभ्यता : पहाड़ से घिरे ग्रीक में अनेक छोटे-छोटे राष्ट्र बने। उन सभी राष्ट्रों को नगर राष्ट्र अथवा पलिस कहा जाता था। पलिसों में एथेंन और स्पार्टा प्रसिद्ध था। उसके साथ पारसी साम्राज्य का युद्ध हुआ था। उस युद्ध की बात ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के लेख में मिलता है। एंथेन और स्पार्टा आपस में भी युद्ध किए थे। ग्रीक इतिहासकार धुकीडाइडीस ने उस युद्ध की बातों को लिखा है। प्राचीन ग्रीक सभ्यता में विज्ञान, इतिहास, गणित और विभिन्न ज्ञानविज्ञान की चर्चा होती थी। पारसिक और दूसरी सभ्यता की छाया ग्रीक सभ्यता पर भी पड़ी थी ।

रोमन सभ्यता : भू-मध्य सागर के इटली घाटी के केन्द्र पर प्राचीन रोमन सभ्यता थी। धीरे-धीरे रोमन विशाल साम्राज्य को बनाया। ग्रीस और दूसरे सभ्यता का प्रभाव रोम की सभ्यता पर पड़ा। रोम में राजनीति, कानूनी, शिल्पस्थाप्त्य इत्यादि विषयों में काफी उन्नति हुई थी। रोम के राजकर्मचारी के आदेश पर ही जेरूजालम में यीशु को ईसाई कुरा से बांधा गया था।

प्रश्न 20.
परिप्लास और मौसमी हवा के बारे में तुम क्या जानते हो ? संक्षेप में उत्तर दो।
उत्तर :
भारत महासागार, अरब सागर और पारस उपसागर को प्राचीन ग्रीक और रोमन भूगोल में इरिथियान सागर कहा जाता था। इसी इरिथ्रियान सागर में यातायात और वाणिज्य विषय पर एक पुस्तक लिखी गई थी। उसके नाम पर पेरिप्लास ऑफ द इरिथ्रियासी। पेरिप्लास का दो मतलब है- जलयान में घूमते रहना और जल मार्ग से यातायात करना । इस तरह से देखने पर पुस्तक का नाम हिन्दी के अनुसार इरिश्थियान सागर भ्रमण। पुस्तक के लेखक के बारे में जानकारी नहीं मिली है। पुस्तक ग्रीक भाषा मेंलिखी गई थी। पुस्तक का लेखक एक ग्रीक था जो मिस्र में रहता था।

पुस्तक को लेखक ने अपने अनुभव के आधार पर ही लिखा था। इसलिए पुस्तक में इरिथ्रियान सागर का बन्दरगाह और व्यापार-वाणिज्य के विभिन्न विषयों के बारे में वर्णन है। व्यापारियों की सुविधा के लिए पुस्तक को लिखा गया था। ईसा के बाद की प्रमथ शताब्दी के मध्य का समय इस पुस्तक में लिखा गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि इसके साथ विभिन्न क्षेत्रों के मनुष्य, समाज, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी विषय की भी विभिन्न बातें भी हैं। यह पुस्तक ईसा के बाद प्रथम शताब्दी के लगभग का है जिसमें अर्थनीति; इतिहास जानना जरूरी साहित्यिक उपादान हैं। ईसा पू॰ की प्रथम शतबब्दी के अन्त में दक्षिणपथ्विम और उत्तर-पूर्व मौसमी हवा के बारे में और अधिक धारणाएँ ज्ञात हुई। इस हवा की सहायता से ही इरिथ्थियान सागर में यातायात और वाणिज्य सहज रूप से होता था।

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प्रश्न 21.
सांस्कृतिक विनिमय किस प्रकार भारतीय उपमहादेश के साथ बाहर के विभिन्न क्षेत्रों से सम्पर्क साधने का सूत्र बना?
उत्तर :
भारत उपमहादेश के साथ बाहर के विभिन्न क्षेत्रों के साथ एक और माध्यम सांस्कृतिक विनिमय था। विभिन्न जाति-उपजाति से घुलने-मिलने के माध्मय से सांस्कृतिक सम्पर्क स्थापित होता था। जिसके परिणामस्वरूप उपमहादेश की संस्कृति में विभिन्न वैचित्य तैयार हुआ था। साथ ही साथ यह जाति-उपजाति में अधिकांशतः उपमहादेश के समाज और संस्कृति में घूल-मिल गया था। ‘अलक्जेण्डर’ ने भारतीय उपमहादेश में कुछ नगर बनवाया था। मौर्य साम्राज्य के समय भी वह नगर था। धीरे-धीरे ग्रीक उपमहादेश की जीवन-यात्रा और संस्कृति के साथ घुल मिल गया।

वे बौद्ध धर्म की चर्चा भी करते थे। दूसरी ओर ग्रीक से नये प्रकार की मुद्रा तैयार करना उपमहादेश के लोग सीख चुके थे। इन्डो ग्रीक उपमहादेश में सोने की मुद्रा चालू की गई। विज्ञान, गणित और ज्योतिष विज्ञान की चर्चा के क्षेत्रों में भी ग्रीक और भारतीय सोच-विचार का विनिमय देखने को मिलता है। इसके अलावा ग्रीक प्रभावित शिल्प की चर्चा भी हुई थी, जिसका प्रमुख उदाहरण गांधार कला है। शक शासक विभिन्न प्रकार के चाँदी की मुद्रा का प्रचलन शुरू किये थे। कुछ मुद्रा ग्रीक और प्राकृत दोनों ही लिपि में राजाधिराज की उपाधि का प्रयोग करते थे। शक शासक रूद्रदामन का जूनागढ़ प्रशस्ति संस्कृत भाषा में रचित पहला बड़ा लेख है। इसके पहले के सभी लेख प्राकृत भाषा में ही रचित हैं।

प्रश्न 22.
किन विदेशियों से भारतीय उपमहादेश का संपर्क स्थापित हुआ था?
उत्तर :
पारसी – उत्तर-पश्विम भाग के गिरि-पथ स्थल मार्ग से ही अधिकांश विदेशी भारत में आये थे। इनमें से सबसे प्रमुख पारसियन थे। गांधार के जरिए ही पारसियनों का भारत से संपर्क स्थापित हुआ था।
ग्रीस : ग्रीक शासक अलकजेण्डर विश्व विजेता बनने के उद्देश्य से पारसियों के साथ युद्ध किया। पारसियों को परास्त कर अलक्जेण्डर भारत पहुँचा एवं ग्रीकों का भारत से संपर्क हुआ।
शक : ईसा पूर्व 130 वर्ष के लगभग मध्य एशिया में यायावर समूह के आक्रमण से बैक्ट्रियन ग्रीक शासन समाप्त हुआ। उपमहादेश में वे शक के नाम से परिचित थे।
हूण : 458 ई० के बाद संभवतः उत्तर पश्चिम की ओर से आकर हूण जाति ने उपमहादेश का अभियान किया था।
चीन : बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार से चीन के साथ भारत का संपर्क हुआ था। ईसा के बाद चतुर्थ शताब्दी से ही चीन में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार बढ़ा।

प्रश्न 23.
गांधार शिल्पकला की विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
भारतीय कला पर विदेशी आक्रमणों के फलस्वरूप भी प्रभाव पड़ा। इनमें यूनानी कला ने भारत पर सबसे अधिक प्रभाव डाला। मौर्यकाल में यूनानी स्थापत्य शैली तथा भारतीय स्थापत्य शैली के मिश्रण से एक नई स्थापत्य शैली का विकास हुआ, जिसे गांधार कला कहते हैं। कुषाणों के समय में यह शैली अत्यधिक विकसित हुई। इस शैली का सूत्रपात सर्वप्रथम गांधार क्षेत्र में हुआ। इसलिए इसे गांधार कला भी कहते हैं।

गांधार अंचल में इस शैली के आधार पर अनेक भवनों का निर्माण हुआ। कनिष्क के समय में बुद्ध की मूर्तियों और बौद्ध मठों का इसी शैली के आधार पर निर्माण हुआ। यूनानी शिल्प कला पर रोमन शिल्पकला का प्रभाव था, अतः गांधार कला के द्वारा यूनानी, भारतीय तथा रोमन शिल्पकला का अभिनव रूप प्रस्तुत हुआ। कनिष्क के सिक्को, अभिलेखों और कलाकृतियों से पता चलता है कि कुषाणों ने भारतीय, यूनानी तथा ईरानी संस्कृतियों की मिली-जुली संस्कृति अपनायी। कुषाण काल में धर्म, साहित्य, कला, विज्ञान, व्यापार आदि की पर्याप्त प्रगति हुई। भारत के श्रेष्ठ सम्राटों में कनिष्क की भी गणना की जाती है।

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प्रश्न 24.
भारतीय उपमहादेश की संस्कृति को शक-कुषाणों ने किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर :
भारतीय उपमहादेश में शक-पल्लव और कुषाणों के जीवनयापन के कौशल का व्यापक प्रभाव पड़ा। वे भी इस उपमहादेश के समाज-संस्कृति, धर्म से बहुत कुछ सीखे थे। शक-कुषाण उपमहादेश में विभिन्न प्रकार के पोशाक को चालू किये। जैसे – कुर्ता, पैजामा, लंबा जोल्बा, बेल्ट, जूता इत्यादि। शक और कुषाणों के शासनकाल में नगरों की दीवार ईंट से बनाई जाती थी। इसके अलावा एक प्रकार की लाल मिट्टी का बर्तन बनाने की पद्धति मध्य एशिया से उपमहादेश में आया।

मध्य एशिया से आये ये सारे शासक अधिकांशतः विष्णु के उपासक बन गये। कुछ ने बौद्ध धर्म को ग्रहण कर लिया। कुषाण शिव, विष्णु और गौतम बुद्ध की उपासना करते थे। कुषाणों की मुद्रा में ग्रीक, रोमन और भारतीय विभिन्न देवीदेवताओं की मूर्तियाँ खुदाई में मिली हैं। पहले गौतम बुद्ध का किसी भी प्रकार की मूर्ति की पूजा नहीं होती थी। बुद्ध के किसी प्रतीक और चिह्न को सामने रखकर पूजा की जाती थी।

साहित्य चर्चा के प्रति भी शक-कुषाण शासक काफी उत्साही थे। उपमहादेश के नाटक चर्चा पर भी ग्रीक का प्रभाव पड़ा है। नाटक का मंच बनाना, पर्दा का प्रयोग इत्यादि क्षेत्र में भी वही प्रभाव दिखाई पड़ता है। नाटक के पर्दा को संस्कृत में यवनिका कहा जाता था। उनके यवन नाम से ही यवनिका शब्द तैयार हुआ था।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
हेरोडोटस के अनुसार इन्दस पारसिक साग्राज्य का एक __________ था।
(क) प्रदेश
(ख) देश
(ग) जिला
उत्तर :
(क) प्रदेश

प्रश्न 2.
इन्दो-ग्रीक को __________ कहा जाता है।
(क) शकदेव
(ख) बैक्ट्रिया अधिवासी
(ग) कुषाण
उत्तर :
(ख) वाकट्रीया अधिवासा

प्रश्न 3.
सेन्ट थामस ईसाई धर्म के प्रचार के लिए भारतीय उपमहादेश में __________ के शासनकाल में आए।
(क) अलक्जेण्डर
(ख) मीनान्द
(ग) गन्डोफारनेस
उत्तर :
(ग) गन्डोफारनेस

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 9 भारत और समकालीन बहिर्विश्व (ईसा के बाद सप्तम् शताब्दी के प्रथम भाग तक)

प्रश्न 4.
बैक्ट्रिया त्रीक राजा को ही पुराण साहित्य में __________
(क) यवन
(ख) इन्दोग्रीक कहा जाता था।
(ग) क्षत्रप
उत्तर :
(क) यवन

प्रश्न 5.
वेबीलोन के राजा हम्मूराबी ने सबसे पहले लिखित __________
(क) कहानी
(ख) कानून
(ग) समाचार
उत्तर :
(ख) कानून

प्रश्न 6.
उपमहादेश के बाहर बौद्ध धर्म का प्रचार सम्राट __________ ने किया था।
(क) सेल्युकस
(ख) चन्द्रगुप्त
(ग) अशोक
उत्तर :
(ग) अशोक

प्रश्न 7.
पोलिस सिद्धान्त __________ से आया था।
(क) ग्रीस
(ख) रोम
(ग) मिस्र
उत्तर :
(क) ग्रीस

प्रश्न 8.
प्रथम कागज बनाने एवं लकड़ी के अक्षर बनाकर छापने का कौशल __________ में ही आरम्भ हुआ था।
(क) भारत
(ख) चीन
(ग) फारस
उत्तर :
(ख) चीन

प्रश्न 9.
भारत में सबसे अधिक चीनी __________ का महत्व था।
(क) रेंशम
(ख) चाय
(ग) हथियार
उत्तर :
(क) रेशम नदी का दान कहा था।

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प्रश्न 10.
हेरोडोटस ने मिस्र को __________
(ख) नील
(ग) यूफ्रेटिस
(क) टाइग्रिस
उत्तर :
(ख) नील

प्रश्न 11.
वृहद्रथ एक _________ बौद्ध पण्डित थे।
(क) कश्मीरी
(ख) ग्रीस
(ग) रोमन
उत्तर :
(क) कश्मीरी

प्रश्न 12.
शक शासकों ने विभिन्न प्रकार की __________ मुद्रा का प्रचलन शुरू किया था।
(क) चाँदी
(ख) सोना
(ग) ताँबा
उत्तर :
(क) चाँदी

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. _______ को बैक्ट्रिया अधिवासी कहा जाता है।
उत्तर : इन्दो ग्रीक

2. पहाड़ से घिरे भू-भाग में अनेक छोटे-छोटे _______।
उत्तर : राष्ट्र बने।

3. भारत में सबसे अधिक __________ का महत्व था।
उत्तर : चीनी रेशम

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4. चीन में प्रथम __________ एवं __________ का कौशल आरंभ था।
उत्तर : कागज बनाने, लकड़ी के अक्षर बनाने

5. __________ शासकों में विभिन्न प्रकार की चाँदी की मुद्रा का प्रचलन था।
उत्तर : शक

6. __________ ने मिस्र को नील नदी का दान कहा था।
उत्तर : हेरोडोट्स

7. __________ के लोगों ने ही सर्वप्रथम लकड़ी के चक्के का प्रयोग प्रारंभ किया था।
उत्तर : सुमेर

8. __________ ग्रीस से आया था।
उत्तर : पोलिस सिद्धांत

9. __________ की चर्चा की एक प्रसिद्ध पुस्तक यवन जातक है।
उत्तर : ज्योतिष विज्ञान

बेमेल शब्दों को ढूंढकर लिखिए :-

  1. भृगुकच्छ, कल्याण, सोपारा, ताम्रलिप्त।
  2. वृद्धयश, कुमारजीव, परमार्थ, सुयान जांग।
  3. अलक्जेण्डर, सेल्यूकस, कनिष्क, मीनान्दर।
  4. युद्ध, संग्राम, लड़ाई, संधि।
  5. शहर, किरात, चाण्डाल, ब्राह्मण।
  6. ब्रीहि, शलि, कुमुद भन्डिया, गोलमरीच।
  7. लगाम, लम्बा, जोब्बा, वेल्ट।
  8. ताऊ-नाम, फाहियान, सुयान जांग, कुमारायन
  9. मेगास्थनीज, डायोनिसियास, विन्दुसार।
  10. भारत महासागार, अरब सागर, फारस सागर, कृष्ण सागर।

उत्तर :

  1. सोपारा
  2. सुयान जांग
  3. कनिष्क
  4. संधि
  5. ब्राह्मण
  6. गोलमरीच
  7. लगाम
  8. कुमारायन
  9. विन्दुसार
  10. कृष्ण सागर।

नीचे दिए गए वाक्यों में कौन सही एवं कौन गलत है उसे लिखिए :-

1. बैक्ट्रिया ग्रीक राजा को ही पुराण साहित्य में ‘यवन’ कहा जाता था।
उत्तर : सही

2. मिस्र के लोगों ने ही प्रथम लकड़ी के चक्के का प्रयोग प्रारंभ किया था।
उत्तर : गलत

3. वृहद्रथ एक कश्मीरी लेखक थे।
उत्तर : गलत

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4. पोलिस सिद्धांत ग्रीस से आया था।
उत्तर :सही

5. उपमहादेश के बाहर बौद्ध धर्म का प्रचार अशोक ने किया था।
उत्तर : सही

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) नक्स-ई-रूस्तम (a) सीरिया
(ii) भृगुकच्छ (b) प्रथम दरायवौष
(iii) प्रथम आन्टिकस (c) नर्मदा नदी

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) नक्स-ई-रूस्तम (b) प्रथम दरायवौष
(ii) भृगुकच्छ (c) नर्मदा नदी
(iii) प्रथम आन्टिकस (a) सीरिया

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प्रश्न 2.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) नाग सेन (a) ईसाई धर्म
(ii) पंचसिद्धांतिका (b) बौद्ध धर्म
(iii) सेंट थामस (c) वाराहमिहिर

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) नाग सेन (b) बौद्ध धर्म
(ii) पंचसिद्धांतिका (c) वाराहमिहिर
(iii) सेंट थामस (a) ईसाई धर्म

प्रश्न 3.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) गन्डोफारनेस (a) बन्दरगाह
(ii) तोरमार (b) पल्हव राजा
(iii) कल्याण (c) मिहिरकुल

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) गन्डोफारनेस (b) पल्हव राजा
(ii) तोरमार (c) मिहिरकुल
(iii) कल्याण (a) बन्दरगाह

प्रश्न 4.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) बैक्ट्रिया (a) मीनान्दार
(ii) नाग सेन (b) सेवका शक
(iii) स्काईथीयरा (c) यवन

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) बैक्ट्रिया (c) यवन
(ii) नाग सेन (a) मीनान्दार
(iii) स्काईथीयरा (b) सेवका शक

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प्रश्न 5.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) सेंट थॉमस (a) बंदरगाह
(ii) पोलिस सिद्धांत (b) गान्डोफरनेस
(iii) फराओ (c) बौद्ध धर्म
(iv) कश्मीरी बौद्ध पंडित (d) ग्रीस
(v) ज्योतिष विज्ञान की पुस्तक (e) वृहद्रथ
(vi) नील नदी का दान (f) यवन जातक
(vii) इन्दो ग्रीक (g) मिस्र के शासक
(viii) नागसेन (h) हेरोडोटस
(ix) पल्लव राजा (i) बैक्ट्रिया अधिवासी
(x) कल्याण (j) ईसाई धर्म

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) सेंट थॉमस (a) बंदरगाह
(ii) पोलिस सिद्धांत (b) गान्डोफरनेस
(iii) फराओ (c) बौद्ध धर्म
(iv) कश्मीरी बौद्ध पंडित (d) ग्रीस
(v) ज्योतिष विज्ञान की पुस्तक (e) वृहद्रथ
(vi) नील नदी का दान (f) यवन जातक
(vii) इन्दो ग्रीक (g) मिस्र के शासक
(viii) नागसेन (h) हेरोडोटस
(ix) पल्लव राजा (i) बैक्ट्रिया अधिवासी
(x) कल्याण (j) ईसाई धर्म

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 4 चट्टान और खनिज पदार्थ

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 Science Book Solutions Chapter 4 चट्टान और खनिज पदार्थ offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Science Chapter 4 Question Answer – चट्टान और खनिज पदार्थ

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
मैग्मा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
धरती की गहराई का दबाव तथा ताप ज्यादा होने के कारण पत्थर तरल अवस्था में रहता है। इसे मैग्मा कहते हैं

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 4 चट्टान और खनिज पदार्थ

प्रश्न 2.
लावा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
मैग्मा जब किसी पत्थर की दरार या पहाड़ के मुंह से बाहर आता है तब उसे लावा कहते हैं।

प्रश्न 3.
ज्वालागुखी क्या है ?
उत्तर :
जब लावा बाहर आकर जमकर सख्ज हो जाता है तब इस ठोस लावा को ज्वालामुखी कहते हैं।

प्रश्न 4.
ज्वालामुखी कितने प्रकार के हैं ?
उत्तर :
ज्वालामुखी तीन प्रकार के हैं –

  • बेसाल्ट
  • ग्रेनाइट और
  • पिडमिस

प्रश्न 5.
पिडमिस कैसे बनता है तथा इसमें छोटे-छोटे छिद्र क्यों होते हैं ?
उत्तर :
पिडमिस अधिक जला हुआ पत्थर है। गरम मैग्मा के ऊपर झाग की तरह तुरन्त जमकर पिडमिस बनता है। तरल मैग्मा में द्रवीभूत गैस के बाहर निकलने के कारण पिडमिस में छोटे-छोटे छिद्र बन जाते हैं।

प्रश्न 6.
पीली चट्टान क्या है ?
उत्तर :
जब झील, नदी, समुद्र के नीचे मिट्टी जमा होती है तब धीरे-धीरे यह मिट्टी की परत मिट्टी के नीचे चली जाती है। मिट्टी के नीचे गर्मी तथा दबाव से लाखों सालों में वही मिट्टी से पीली चट्टान बनती है।

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 4 चट्टान और खनिज पदार्थ

प्रश्न 7.
कुछ पीली चट्टान का नाम लिखो।
उत्तर :
ब्रेले पत्थर, शैल पत्थर, चूना पत्थर।

प्रश्न 8.
रूपान्तरित चट्टान किसे कहते हैं ? कुछ उदाहरण दो ।
उत्तर :
ज्वालामुखी तथा पीली चट्टानें मिट्टी के दबाव तथा ताप के कारण परिवर्तित हो जाती है। धरती का अधिकांश हिस्सा आग्नेय तथा रूपांतरित चट्टान से बना है।
चट्टान — रूपान्तरित रूप
चूना — पत्थर मार्बल
शैल — स्लेट
ग्रैनाइट — नीस

प्रश्न 9.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो
उत्तर :
चट्टान — रूपान्तरित रूप
चूना — पत्थर मार्बल
शैल — स्लेट
ग्रैनाइट — नीस

प्रश्न 9.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो
उत्तर :

धातुओं के नाम धातुओं से तैयार होने वाली वस्तुओं के नाम
(i) लोहा रेलगाड़ी, रेलगाड़ी की पटरी, गाड़ी, स्टील। कांसा, पीतल, तार, मूर्ति, बर्तन।
(ii) ताँबा कांसा, पीतल, तार, मूर्ति, बर्तन।
(iii) एल्युमीनियम बर्तन, तार, जहाज के सामान, निकेल धातु में।
(iv) जस्ता पेंट, ग्लेवनाइजिंक करने में, इलेक्ट्रोड में।
(v) चाँदी गहना बनाने में, फोटोग्राफी फिल्म को साफ करने में।
(vi) सोना गहना बनाने में।

प्रश्न 10.
खनिज क्या है ?
उत्तर :
जो धातु पृथ्वी के भीतर बालू, मिट्टी आदि के साथ एकत्रित अवस्था में मिलते हैं, उसे खनिज कहते हैं।

प्रश्न 11.
अयस्क क्या है ?
उत्तर :
जिस खनिज से धातुओं को सहजता से अलग किया जा सकता है उसे धातु का अयस्क कहते हैं। जैसे हेमाटाइट, लोहा का अयस्क।

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 4 चट्टान और खनिज पदार्थ

प्रश्न 12.
धातु निष्कासन क्या है ?
उत्तर :
खनिज से धातुओं के अलग करने, अलग करने के तरीके को धातु का निष्कासन कहते हैं।

प्रश्न 13.
संकर धातु किसे कहते हैं ?
उत्तर :
किसी धातु को दूसरी धातु के साथ मिलाकर पिघलाया जाता है उसके बाद तरल मिश्रण को ठंडा करने पर संकर धातु बनता है। जैसे – कांसा, पीतल, स्टील आदि संकर धातु हैं।

प्रश्न 14.
संकर धातु के क्या गुण हैं ?
उत्तर :
संकर धातु के निम्नलिखित गुण होते हैं –

  • इसमें एक से अधिक धातु मिले होते हैं।
  • संकर धातु का गलनांक, उबलांक उसके उपादान से अलग होता है।
  • सकर धातु का भौतिक गठन उसके उपादान से भिन्न होता है।

प्रश्न 15.
फॉसिल्स किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी के अंदर करोड़ों वर्षों में अनेक परिवर्तन हुए और एक समय में पत्थर या देह अवशेष पत्थर में परिवर्तित हो गया। इस मरे हुए पत्थर को शरीर की जीवाश्म या फोंसल्स कहते हैं। जीवाश्म में जीव का अर्थ प्राणी तथा अश्म का अर्थ पत्थर है।

प्रश्न 16.
कोयला का निर्माण कैसे हुआ ?
उत्तर :
पृथ्वी पर करोड़ों वर्ष पूर्व जो पेड़ उगते थे वे आज विलुप्त हो गए। कम गहरे जल में उगने वाले एक समय मिट्टी के नीचे हिलने-डुलने से विलुप्त हो गए। उनके ऊपर धीरे धीरे मिट्टी भी जमने लगी। करोड़ों साल मिट्टी के नीचे दबाव और गर्मी में रहते-रहते रातों में रासायनिक परिवर्तन हुआ जिससे कोयले का निर्माण हुआ। कोयले पर इन परतों के छाप रह गए।

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प्रश्न 17.
ईंधन क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का उदाहरण दो।
उत्तर :
जिन पदार्थों को जलाने से ताप पैदा होता है उसे ईधन कहते है। ये सभी पदार्थ प्राणियों के जीवाश्म हैं। प्राणियो के जीवाश्म बदलने में करोड़ों वर्ष लगे है। ये तीन प्रकार के होते हैं – ठोस, द्रव्य और गैस।

  • ठोस – लकड़ी, कोयला
  • तरल – पेट्रोल, डीजल, किरोसीन
  • गैस – CNG, LPG, वाटर गैस, कोल गैस।

प्रश्न 18.
कोयले का क्या उपयोग है ?
उत्तर :

  • कोयला को जलाकर ताप विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
  • घर में रसोई बनाया जाता है।
  • धातु निष्कासन में कोयला का प्रयोग है।
  • अलकतरा से सड़क बनाया जाता है।
  • कोल गैस, गैस कार्बन, कोक बनाने में उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 19.
पेट्रोलियम क्या है? इसे कैसे शुद्ध किया जाता है ?
उत्तर :
पेट्रोलियम घटपटा एक तरल मिश्रण है। यह ईंधन में सीधे व्यवहार नहीं होता। इसमें से जल, मिट्टी तथा अभ्रयोजनीय पदार्थ को निकालने के बाद पेट्रोलियम का ईषन मिलता है। पेट्रोलियम को भंजक आसवन विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है। पेट्रोलियम को एक भट्ठी में गर्म किया जाता है। भट्टी के हरेक स्तर पर मुँह बना होता है। जहाँ से पेट्रोलियम के उपादान बारी-बारी से बाहर आ जाते हैं।

प्रश्न 20.
पेट्रोलियम का क्या उपयोग है ?
उत्तर :

  • यह एक ज्वलन है।
  • ल्यूब्रिकेन्ट बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
  • प्लास्टिक बनाने में तथा रंग बनाने में भौ इसका उपयोग होता है।

प्रश्न 21.
प्राकृतिक गैस तथा LPG क्या है ? इसका मुख्य उपयोग क्या है ? इसका उपयोग लिखो।
उत्तर :
प्राकृतिक गैस : प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम निकालने वाले कुएं से मिलती है। इसका मुख्य उपादान मिथेन है। उपयोग :

  • ज्यादा दबाव से प्राकृतिक गैस सिलिंडर में भरकर ईंधन के काम आता है।
  • CNG का इस्तेमाल गाड़ी के फ्यूल के रूप में होता है। इससे पदूषण कम होता है।

LPG :- LPG का पूरा नाम तरल प्राकृतिक गैस है। इसका मुख्य उपादान प्रोपेन है।
उपयोग : इसका उपयोग रसोईघर में ईंधन के रूप में होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
पृथ्वी के भीतर जो पदार्थ तरल अवस्था में रहता है उसे कहते हैं –
(a) लावा
(b) मैग्मा
(c) चूना
(d) चट्टान
उत्तर :
(b) मैग्मा।

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प्रश्न 2.
मैग्मा के पत्थर की दरार से ऊपर आने को कहते हैं –
(a) चट्टान
(b) लावा
(c) चूना
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(b) लावा।

प्रश्न 3.
इनमें से कौन ज्वालामुखी का प्रकार नहीं है ?
(a) बेस्लाट
(b) मोड़दार
(c) ग्रेनाइट
(d) पिड़मिस
उत्तर :
(b) मोड़दार।

प्रश्न 4.
पीली चट्टान कहाँ बनती है ?
(a) काली चट्टान में
(b) पिडमिस में
(c) बेस्लाट में
(d) पानी के नीचे
उत्तर :
(d) पानी के नीचे।

प्रश्न 5.
परिवर्तित चट्टान को क्या कहते हैं?
(a) पीली चट्टान
(b) ग्रेनाइट
(c) रूपान्तरित चट्टान
(d) सभी
उत्तर :
(c) रूपान्तरित चट्टान।

प्रश्न 6.
पीली चट्टान का एक उदाहरण दो।
(a) बेस्लाट
(b) चूना पत्थर
(c) मार्बल
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(c) मार्बल।

प्रश्न 7.
शैल परिवर्तित होकर बनाता है –
(a) मार्बल
(b) नीस
(c) स्लेट
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(c) स्लेट।

प्रश्न 8.
धरती के नीचे यौगिक बालू, मिट्टी के साथ रहते हैं इसे कहते हैं –
(a) अयस्क
(b) खनिज
(c) चट्टान
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(b) खनिज।

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प्रश्न 9.
लोहा का एक अयस्क है –
(a) बावसाइट
(b) हेमाटाइट
(c) फेल्सपार
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(b) हेमाटाइट ।

प्रश्न 10.
ब्रॉन्ज के उपादान हैं –
(a) ताँबा तथा टिन
(b) ताँबा तथा जस्ता
(c) अल्युमीनियम तथा लोहा
(d) लोहा तथा ताँबा
उत्तर :
(a) ताँबा तथा टिन

प्रश्न 11.
पीतल का उपादान है ?
(a) Cu, Zn
(b) Cn, Sn
(c) Fe, Ce
(d) Fe, Zn
उत्तर :
(a) Cu, Zn

प्रश्न 12.
विलुप्त प्राणी के पैरों की छाप कहलाती है।
(a) चट्टान
(b) फॉंसिल्स
(c) धातु
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) फॉंसिल्स ।

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प्रश्न 13.
ज्वलनशील पदार्थ है –
(a) कोयला
(b) पत्थर
(c) प्राकृतिक गैस
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) कोयला तथा (c) प्राकृतिक गैस।

प्रश्न 14.
किसके जलने से प्रदूषण कम होता है ?
(a) कोयला के
(b) पेट्रोलियम के
(c) प्राकृतिक गैस के
(d) सभी के
उत्तर :
(c) प्राकृतिक गैस के।

प्रश्न 15.
प्राकृतिक गैस का मुख्य उपादान है-
(a) इथेन
(b) ब्युटेन
(c) मिथेन
(d) सभी
उत्तर :
(c) मिथेन

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो :

1. पत्थर का निर्माण ……………….. के लावा से होता है।
उत्तर : ज्वालामुखी

2. पृथ्वी के नीचे का भाग ……………….. अवस्था में है।
उत्तर : तरल

3. मिद्टी की गहराई में जाने से ……………….. तथा ……………….. बढ़ता है ।
उत्तर : दबाव, ताप

4. पृथ्वी के नीचे में तरल अवस्था में रहने वाले पत्थर ……………….. कहलाते हैं।
उत्तर : मैग्मा

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5. पहाड़ के मुँह से निकलकर ……………….. आता है।
उत्तर : लावा

6. लोस लावा ही ……………….. है।
उत्तर : ज्वालामुखी

7. अधिक जला पत्थर ……………….. है।
उत्तर : पिडमिस

8. ……………….. चट्टान में घोंघा, मछली का जीवाश्म होता है।
उत्तर : पौली

9. ग्रेनाइट के परिवर्तन से ……………….. बनता है ।
उत्तर : नीस

10. थरती पर ……………….. मौलिक अवस्था में पाया जाता है।
उत्तर : सोना

11. धातु का निष्कासन ……………….. से होता है।
उत्तर : अयस्क

12. धातु निष्कासन एक ……………….. परिवर्तन है ।
उत्तर : रासायनिक

13. ……………….. लोहा का एक अयस्क है।
उत्तर : हेमाटाइट

14. लोहा का तथा कार्बन से मिलकर ……………….. बनता है।
उत्तर : इस्पात

15. विलुप्त प्राणी के पैरों की छाप को ……………….. कहते हैं।
उत्तर : फॉसिल्स

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 4 चट्टान और खनिज पदार्थ

16. अश्म का अर्थ ……………….. है।
उत्तर : पत्थर

17. पेड़ गोंद के बीच अटका हुआ कीड़ा का शरीर ……………….. है।
उत्तर : जीवाश्म

18. जिनको जलाने से ताप मिलता है उसे ……………….. कहते हैं ।
उत्तर : ज्वलन

19. ज्वलन एक प्रकार ……………….. है।
उत्तर : जीवाश्म

20. कोयला एवं पेट्रोलियम को ……………….. हुआ जीवाश्म कहते हैं।
उत्तर : जला

21. पेट्रोलियम एक ……………….. मिश्रण है।
उत्तर : तरल

22. LPG गैस में मुख्यत: ……………….. रहता है।
उत्तर : प्रोपेन

23. मोटरसाइकिल में ……………….. ज्वलन के रूप में उपयोग होता है।
उत्तर : पेट्रोल

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24. घरेलू ज्वलन में ……………….. व्यवहार होता है।
उत्तर : LPG

सही मिलान करो –

प्रश्न 1.

A B
(i) लावा (a) छोटे छिद्र
(ii) मैग्मा (b) ज्वालामुखी
(iii) पिडमिस (c) ग्रेनाइट
(iv) बेसाल्ट (d) शैल
(v) स्लेट (e) काला पत्थर
(vi) नीस (f) तरल पत्थर

उत्तर :

A B
(i) लावा (b) ज्वालामुखी
(ii) मैग्मा (f) तरल पत्थर
(iii) पिडमिस (a) छोटे छिद्र
(iv) बेसाल्ट (e) काला पत्थर
(v) स्लेट (d) शैल
(vi) नीस (c) ग्रेनाइट

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प्रश्न 2.

A B
(i) लोहा (a) कॉपर ग्लान्स
(ii) एल्युमीनियम (b) हेमाटाइट
(iii) ताँबा (c) जिंक ब्लेन्ड
(iv) मरकरी (d) बाक्साइट
(v) जिंक (e) कैलामाइन

उत्तर :

A B
(i) लोहा (b) हेमाटाइट
(ii) एल्युमीनियम (d) बाक्साइट
(iii) ताँबा (a) कॉपर ग्लान्स
(iv) मरकरी (e) कैलामाइन
(v) जिंक (c) जिंक ब्लेन्ड

प्रश्न 3.

A B
(i) थर्मल पावर प्लांट (a) मोटर साइकिल
(ii) LPG (b) डीजल
(iii) पेट्रोल (c) किरोसिन
(iv) ट्रक (d) कोयला
(v) स्टोव (e) रसोइघर

उत्तर :

A B
(i) थर्मल पावर प्लांट (d) कोयला
(ii) LPG (e) रसोइघर
(iii) पेट्रोल (a) मोटर साइकिल
(iv) ट्रक (b) डीजल
(v) स्टोव (c) किरोसिन

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 8 प्राचीन भारतीय उपमहादेश की संस्कृति (चर्चा के विभिन्न पहलू : शिक्षा, साहित्य, विज्ञान और शिल्प)

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 History Book Solutions Chapter 8 प्राचीन भारतीय उपमहादेश की संस्कृति (चर्चा के विभिन्न पहलू : शिक्षा, साहित्य, विज्ञान और शिल्प) offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Geography Chapter 8 Question Answer – प्राचीन भारतीय उपमहादेश की संस्कृति (चर्चा के विभिन्न पहलू : शिक्षा, साहित्य, विज्ञान और शिल्प)

विस्तृत उत्तर वालें प्रश्न (Detailed Answer Questions) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्राचीन काल में बौद्ध शिक्षा व्यवस्था के साथ आज की शिक्षा व्यवस्था की समानता-असमानता को अपनी भाषा में लिखिए :-
उत्तर :
प्राचीन युग में बौद्ध शिक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत बहुत विषयों को पढ़ाया जाता था। जैसे – काव्य, छन्द, व्याकरण, ज्योतिष विद्या, गणित, रसायन इत्यादि। आज भी कई विषयों के ऊपर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। जैसेहिन्दी, बंगला, गणित, अंग्रेजी, इतिहास, भुगोल, रसायन शास्त, जीव विज्ञान इत्यादि।
बौद्ध विहारों में दाखिला के लिए छात्रों की योग्यता और बुद्धिमता की जाँच की जाती थी। आज के दिनों में भी छात्र दाखिला के लिए बुद्धिमता, विद्वता की जाँच अधिकांश शिक्षण संस्थानों में की जाती है।

प्राचीन काल में शिक्षा व्यवस्था एवं वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समानता और असमानता निम्नलिखित हैं :-
(i) प्राचीनकाल में गुरुकुल एवं बौद्ध विहार ही शिक्षा के प्रमुख केन्द्र थे जबकि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के प्रमुख केन्द्र-विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्चविद्यालय आदि हैं।
(ii) प्राचीनकाल में बौद्ध विहारों में रहकर ही उच्च शिक्षा ग्रहण करनी पड़ता थी जबकि वर्तमान समय में शिक्षा संस्थान के बाहर अपने घर पर रहकर भी शिक्षा ग्रहण की जा सकती है ।

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प्रश्न 2.
विहार और स्तूप में क्या अन्तर है?
उत्तर :
विहार : यह शिक्षा का केन्द्र था जहाँ पर बौद्ध धर्म के अलावे विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जाती थी, विहारों में रहकर छात्र शिक्षा ग्रहण किया करते थे।
स्तूप : स्तूप उपासना के केन्द्र थे। स्तूपों में लोग जाकर भगवान बुद्ध की उपासना किया करते थे। स्तूपों के आस-पास चैता बनाया जाता था। वहाँ उपासकों के रहने की व्यवस्था होती थी।

प्रश्न 3.
नालन्दा विश्वविद्यालय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर :
नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासकों ने की। ््वेनसांग के विवरण से पता चलता है कि हर्ष के समय में नालन्दा विश्चविद्यालय शिक्षा का विश्व विख्यात केन्द्र था। इसमें चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत, श्रीलंका, वर्मा आदि विभिन्न देशों से विद्यार्थी अध्ययन करने के लिए आते थे। इस विशविद्यालय में लगभग 10,000 छात्र तथा 1500 अध्यापक थे। हर्षवर्द्धन ने 100 गाँव दान में नालन्दा विश्चविद्यालय को दिया था। इसमें छात्रों को रहने के लिए भोजन, वस्त आदि नि:शुल्क था। यहाँ पर विद्यार्थियों को बौद्ध धर्म, वेद, ज्यातिष, आयुर्वेद के अतिरिक्त विज्ञान एवं चिकित्सा की भी शिक्षा दी जाती थी। इसमें प्रवेश पाने के लिए छात्रों को कठिन परिश्रम करना पड़ता था। नालन्दा विश्विव्यालय के आचार्य शीलभद्र थे।

प्रश्न 4.
तक्षशिला महाविहार पर टिप्पणी लिखिए :-
उत्तर :
गाधार महाजनपदं की राजधानी तक्षशिला था। ग्रीक, फ्रांस, कुषाण, शक इत्याद् विदेशी शक्तियों ने समयसमय पर तक्षशिला पर अपना अधिकार कायम किया। इसलिए वहाँ पर विभिन्न देशों के पण्डितों का आना-जाना लगा रहता था। बौद्ध धर्म तक्षाशिला में काफी लोकप्रिय हुआ। धीरे-धीरे शिक्षा केन्द्र के रूप में भी तक्षशिला प्रसिद्ध हो गया।

देश के विभिन्न क्षेत्रों से छात्र तक्षशिला में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते थे। सोलह से लेकर बीस वर्ष की उम्र तक छात्र वहाँ पर भर्ती हो सकते थे। धर्म और वर्ण नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर ही छात्रों की भर्ती होती थी। लगभग आठ वर्ष तक वहाँ पर पढ़ाई-लिखाई किया करते थे। राजा और व्यापारी इस महाविहार को चलाने के लिए पैसे और जमीन का दान देते थे।
यहाँ की परीक्षा पद्धति बहुत ही सहज थी। ऐसा जाना जाता है कि वहाँ पर लिखित परीक्षा नहीं होती थी। लेकिन पढ़ाई का स्तर काफी उच्च स्तर का था। इस महाविहार के कुछ छात्र जैसे – जीवक, पाणिनी एवं चाणक्य काफी प्रसिद्ध थे।

प्रश्न 5.
विक्रमशिला विश्वविद्यालय पर टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर :
विक्रमशिला विश्धविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। इस महाविहार में देश-विदेश के प्राय: तीन हजार से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे। यहाँ 144 अध्यापक मौजूद थे। इनमें अतिश दीपकर, श्रीज्ञान, कल्याण रक्षित, श्रीधर प्रमुख थे। यहाँ बौद्ध-शारत, न्याय-शारू, तर्कशारु, दर्शन-शास्त, व्याकरण, ज्योतिष-शास्त इत्यादि विषयों की शिक्षा दी जाती थी।

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प्रश्न 6.
प्राचीन भारतीय उपमहादेश की साहित्य चर्चा का विवरण दीजिए :-
उत्तर :
भाषा का प्रयोग बातचीत करने के लिए होता है। इतना ही नहीं, लिखने के लिए भी भाषा की जरूरत पड़ती है लेकिन मौखिक और लिखित भाषा में जमीन-आसमान का अंतर है। मौखिक भाषा में आंचलिक क्षेत्र का प्रभाव रहता है, लेकिन लिखित भाषा में इन सबका प्रयोग नहीं होता है। उस समय सभी पढ़कर समझ पाए ऐसी ही भाषा में लिखा जाता है। प्राचीन भारत में मौखिक भाषा और लिखित भाषा अलग-अलग थी।

ऋग्वेद की भाषा छन्द या छन्दस जैसा अनुमान लगाया जाता था। उसी भाषा में सभी बातचीत करते थे। लेकिन धीरे-धीरे भाषा में आंचलिकता का प्रयोग होना शुरू हो गया। जिससे विभिन्न अंचलों की भाषा बनने लगी। इसलिए भाषा और उसके प्रयोग के लिए नियम बनाने की जरूरत है। उसी नियम के कारण ही व्याकरण बना। प्रसिद्ध व्याकरण आचार्य पाणिनी ने ऐसा व्याकरण लिखा जिसका नाम अष्टथ्यायी है। इसमें पाणिनी ने भाषा के विभिन्न नियमोंको बनाया जिसके फलस्वरूप भाषा का संस्कार हुआ। संस्कार होकर जो भाषा बनी उसी का नाम संस्कृत रखा गया।

विभिन्न अंचलों (क्षेत्रो) में एक ही भाषा का विभिन्न प्रकार से उच्चारण होना आरम्भ हुआ। उस भाषा को प्राकृत कहा जाता था। प्राकृत अथवा वास्तव में प्राकृत शब्द कहाँ से आया। इसलिए तो पाणिनी द्वारा संस्कार की गई भाषा से प्राकृत भाषा अलग है। दूसरी ओर छन्दस से तोड़कर पाली भाषा बनी। प्राकृत और पाली भाषा ही साधारण लोगों की मौखिक भाषा बनी। लेकिन ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से पाली और प्राकृत भाषा में लिखना आरम्भ हुआ। जैन (प्राकृत) और बौद्ध (पाली) धर्म का साहित्य भी इसी भाषा में लिखा गया।

प्रश्न 7.
प्राचीन भारतीय उपमहादेश की लिपि के बारे में तुम क्या जानते हो ? संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर :
प्राचीन भारतीय उप्रमहादेश में दो प्रकार की लिपि का प्रचलन था। खरोष्ठी और ब्राह्मी लिपि ।
खरोष्ठी लिपि दायीं ओर से बाँयीं ओर लिखी जाती थी। जबकि ब्राही लिपि बाँयी ओर से दाँयीं ओर लिखी जाती थी। उत्तर भारत में ब्राही लिपि से ही धीरे-धीरे देवनागरी लिपि बनी। धार्मिक कार्यक्रम और देवता के कार्यों के लिए नगर के बाह्मण इस लिपि का प्रयोग करते थे। इसलिए इसका नाम देवनागरी पड़ा। ब्राह्मी लिपि का सबसे अधिक प्रयोग होता था। सम्राट अशोक के शिलालेखों में अधिकांशत: ब्राही लिपि का प्रयोग हुआ है। ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से पहले ही ब्राही लिपि का प्रयोग शुरू हुआ था। धीरे-धीरे ही इस लिपि का नाम बदला।

प्रश्न 8.
पुराण के बारे में संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पुराण शब्द का अर्थ है पुराना। पुराण में बीते हुए दिनों की बातों का उल्लेख रहता है। पुराणों की संख्या अठारह है। लगभग ईसा पूर्व के पंचम अथवा चतुर्थ शताब्दी के पहले ही कुछ पुराणों की रचना हुई थी। बाकी पुराणों की रचना ईसा के द्वितीय से लेकर सप्तम शताब्दी के मध्य हुआ था। इसके अलावा कृषि, पशुपालन, व्यापार, भूगोल, ज्योतिषी इत्यादि बाते भी पुराण में हैं। पुराणों के साथ कहीं-कहीं इतिहास शब्द भी जुड़ा हुआ है। प्राचीन भारत में पुराण और इतिहास में अंतर निर्दिष्ट नहीं था। फलस्वरूप पुराण ऐसी कहानी है, जिसमें कुछ-कुछ इतिहास का उपादान भी मिला हुआ मिलता है।

प्रश्न 9.
चरक और अश्वघोष कौन थे ?
उत्तर :
चरक कनिष्क के दरबार में प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य और अश्वघोष राजकवि एवं नाटककार थे।

प्रश्न 10.
कालिदास कौन थे ?
उत्तर :
कालिदास, चन्द्रुग्त द्वितीय के दरबार के नवरल्नों में एक थे जिन्होंने संस्कृत में अनेक पुस्तकों की रचना की। कालिदास गुप्तकाल के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। उनके द्वारा रचित पुस्तकों में मेघदूतम, रहुवंशम्, कुमारसंभवम्, विक्रमावेर्शीयम्, अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मालविकाग्निमित्रम् और ऋतुसंहार आदि हैं। कालिदास काव्य और नाटक दोनों लिखते थे। मेघदूतम्, कुमार सम्भवम् उनके द्वारा लिखित दो प्रसिद्ध काव्य हैं। अभिज्ञान शाकुंतलम, मालविका ग्निमित्रम् इत्यादि उनके प्रसिद्ध नाटक हैं।

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प्रश्न 11.
वाराहमिहिर कौन थे? उसके बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
वाराहमिहिर चन्द्रगुप्त द्वितीय के नवरतों में से एक थे जो एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे। उन्होंने वृहत संहिता और पंच सिद्धांतिक नामक पुस्तकों की रचना की। सूर्य सिद्धान्त और पंच सिद्धांतिका पुस्तक में वाराहमिहिर ने पुरानी अवधारणा को काफी बदल दिया था। वर्षा का परिमाण और उसके आगामी लक्षण क्या-क्या हैं.उसे लेकर वे आलोचना किए, वहीं भूकम्प के पहले विभिन्न प्राकृतिक लक्षण विषयक आलोचना भी ‘वाराहमिहिर’ के लेखों में पाया जाता है।

प्रश्न 12.
शुद्रक का मृच्छकटिकम के बारे में क्या जानते हो?
उत्तर :
शुद्रक का मृच्छकटिकम प्राचीन संस्कृत साहित्य का एक प्रसिद्ध नाटक है। मृच्छकटिकम का अर्थ है, मिट्टी से बनी छोटी गाड़ी। मृत मतलब मिट्टी और शकटिका का मतलब छोटा शकट अथवा गाड़ी, यह दोनों मिलकर ही मृच्छकटिकम है। इस नाटक का प्रधान चरित्र चारूदत्त था। उसका पुत्र छोटू रोहसेन के पड़ोसी व्यापारी के पुत्र ने सोने से बनी खिलौने गाड़ी को देखा। इसी प्रकार की खिलौने गाड़ी को लेने की जिद रोहसेन ने की। तब उस समय उसे शांत करने के लिए एक मिट्टी की गाड़ी दी गई, लेकिन इससे भी रोहसेन का जिद और रोना बन्द नहीं हुआ। इस नाटक का दूसरा चरित्र बसंत सेन है। रोहसेन को रोता हुआ देखकर उसे दु:ख हुआ। रोहसेन के खिलौने गाड़ी को बनाने के लिए बसंत सेना ने स्वयं के सोने के गहने को दे दिया। इस नाटक के चरित्र प्राय: साधारण लोग ही हैं।

प्रश्न 13.
हर्षवर्द्धन द्वारा रचित तीन नाटकों के नाम बताइए।
उत्तर :
हर्षवर्द्धन द्वारा रचित तीन नाटक – नागानन्द, रत्नावली और प्रियदर्शिका हैं।

प्रश्न 14.
जीवक एवं आनंद कौन थे?
उत्तर :
जीवक बुद्ध के समयकाल के एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे। वे विम्बसार के राजवैद्य थे। उनका जन्म राजगृह में होने के बावजूद उन्होंने तक्षशिला जाकर गुरु आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। आनंद भगवान बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य थे। भगवान बुद्ध बाद में अपने उपदेशों को आनंद को ही सबसे पहले दिया करते थे और उनसे सम्बन्धित तथ्यों पर विचार विमर्श किया करते थे। आंद के विशेष आग्रह पर ही स्तियों को बौद्ध संघ में शामिल करने पर भगवान बुद्ध राजी हुए।

प्रश्न 15.
लक्ष्मण की शक्ति सेल से क्या समझते हैं?
उत्तर :
रावण के साथ युद्ध में शक्ति सेल अस्त्र के आघात से लक्ष्मण अचेत हो गए थे। विशल्यकरणी (संजीवनी बूटी) एक औषधीय पौधा है। लंका नरेश रावण के मुख्य चिकित्सक सुखेन वैद्य द्वारा बताए गये इस औषधि को ढूँढने के लिए हनुमान गंधमादन पर्वत (द्रोण पर्वत) पर गए लेकिन विशल्यकरणी पौधा को न पहचान पाने के कारण हनुमानजी पूरा गंधमादन पर्वत को ही उठाकर ले आये। विशल्यकरणी (संज़ीवनी बूटी) का रसपान करने से लक्ष्मण होश में आए। विशल्यकरणी (संजीवनी बूटी) की बातों का मतलब है विशेष रूप से शल्यकरण के बाद जो औषधि लगायी जाती है।

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प्रश्न 16.
साहित्य की नीति शिक्षा क्या है?
उत्तर :
सही-गलत पर विचार करने के लिए प्राचीन काल में एक प्रकार की पुस्तक लिखी जाती थी। उन पुस्तकों में मनुष्य और विभिन्न पशु-पक्षियों का चरित्र-चित्रण रहता था। उनकी बातचीत के जरिए ही कहानी बनती थी। विभित्र घटनाओं में कैसा आचारण करना उचित है, वही कहानी की बातें होती थी। इसलिए इस प्रकार की कहानी पुस्तकों को नीतिशिक्षा का संकलन ही कहा जा सकता है।

प्रश्न 17.
सुश्रुत संहिता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
सुभ्रुत संहिता में कहा गया है कि दक्ष कारीगर के साथ चिकित्सकों को विचार-विमर्श करना होगा। प्रयोजनीय यंत्र कैसा होगा, उसे कारीगर को समझा देना होगा। उसी के अनुसार कारीगर यंत्र तैयार कर देंगे। धातु और कीमती पत्थर का विचार और परख करना भी विज्ञान का अंश समझा जाता था। खनिज और पत्थर विषय पर चर्चा भी विज्ञान के अन्तर्गत आता था। विभिन्न प्रकार के धातु को मिलाने एवं अलग करने पर चर्चा होती थी।

प्रश्न 18.
सुश्रुत संहिता में कारीगरों के विषय में क्या वर्णन है?
उत्तर :
सुश्रुत संहिता में कारीगरों एवं हाथ के कार्यों की प्रशंसा की गई है। कहा जाता है कि हाथ हीं प्रधान यंत्र है। लेकिन धर्मशास्त में कारीगरी के कार्य को छोटा दिखाया गया है जिसके फलस्वरूप धीरे-धीरे शिल्प चर्चा, विज्ञान चर्चा से अलग हो गया। लेकिन स्थापत्य बनाने का कारीगरी शिल्प भी नष्ट नहीं हुआ। धार्मिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए अधिकांशतः स्थापत्य बनाया जाता था। फलस्वरूप वे मंदिर और मठ थे। उत्तर और दक्षिण भारत में इसी प्रकार के स्थापत्य का निर्माण हुआ था।

प्रश्न 19.
चंद्रकेतुगढ़ के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला के बेड़ाचापा में प्राचीन बंगाल के प्राचीन स्थल चन्द्रकेतुगढ़ का ध्वंसावशेष पाया गया है। चन्द्रकेतुगढ़ विद्याधरी नदी के जरिए गंगा के साथ जुड़ा हुआ था। यह एक व्यापार का केन्द्र था, वहीं दूसरी ओर समृद्ध जनपद भी था। यहाँ पर मौर्य के समय के पहले से ही (अनुमानिक ईसा पूर्व600-700 ई० पूर्व ईसवीं तक) पाल सेन के समय तक (अनुमानिक 750-1250 ईसा के बाद तक) के विभिन्न पुरातत्व को उदाहरण पाया गया है। जैसे विभिन्न प्रकार की मिट्टी के बर्तन, सीलमोहर, मूर्ति इत्यादि। यहाँ पर टेराकोटा अथवा जली हुई मिट्टी से बनी मूर्ति पायी गयी जिनमें नारी मूर्ति की संख्या ज्यादा है।

प्रश्न 20.
गुप्त युग और पल्लव युग में मंदिरों के निर्माण का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
स्तूप और चैता बनाना गुप्त काल में ही आरम्भ हो गया था। सारनाथ का धामेक स्तूप पहले ईंट से बनाया गया था। इस काल में उसके ऊपर पत्थर का आस्तरण दिया गया है। गुप्त काल में प्रथम स्थापत्य के रूप में मंदिर बनाना आरम्भ हुआ। मंदिर कभी ईंट तो कभी पत्थर से बनाया जाता था। इस काल के मंदिरों में देवघर का दशावतार मंदिर प्रसिद्ध है साथ ही साथ पहाड़ और पत्थर काट कर मंदिर बनाने का प्रचलन था। पल्लव के शासन काल में महाबलीपुरम पत्थर को काट कर रथ जैसा दिखने वाला मंदिर बनाया गया था। गुप्त काल में कला के साथ धर्म का सम्बन्ध काफी स्पष्ट था।

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गुप्त युग और पल्लव युग के मंदिरों की दीवारों पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्ति खुदाई की गई थी। जैसे कैलाश मंदिर में रामायण का पैनल, दशावतार मंदिर का भाष्कर्य। गुप्त युग में चित्र कला का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण मध्य भारत की अजंता गुफा के चित्र हैं। विभिन्न पेड़-पौधे और मनुष्य के चित्र वहाँ पर हैं। विभिन्न प्रकार के चित्र अजंता की गुफा में देखने को मिलते हैं। अजंता के अलावा एलोरा एवं बाघ गुफा में भी कुछ चित्र पाये गये हैं।

प्रश्न 21.
सुंग-कुषाण-सातवाहन युग की कला चर्चा के विषय में संक्षेप में उल्लेख करो।
उत्तर :
सुंग, कुषाण और सातवाहन के समय साधारण जीवन का प्रभाव कला के ऊपर पड़ा था। लेकिन धार्मिक ध्यान-सोच विचार के साथ भी कला का सम्पर्क था। इस समय धार्मिक स्थापत्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उदाहरण स्तूप, चैता और विहार था। प्रधानतः बौद्ध धर्म की चर्चा के साथ ही यह स्थापत्य शिल्प जुड़ा हुआ है। लेकिन जैन धर्म में स्तूप बनाने का उदाहरण है। ब्राह्मण धर्म के स्थापत्य का उदाहरण इस युग में काफी सामान्य था।

सुंग – कुषाण युग के अधिकांश क्षेत्र में भास्कर्य का विषय बुद्ध का जीवन और बौद्ध धर्म था। इस युग में शिल्पों का राज दरबार में प्रत्यक्ष प्रभाव देखने को नहीं मिला। इसलिए प्रकृति एवं रोज़मर्रा के जीवन के विभिन्न पहलू के रूप में भास्कर्य शिल्प बना था। तोरण के भास्कर्य में अधिकांश समय एक ही प्रकार की कहानी कही गयी है।
सुंग – कुषाण युग में गान्धार और मथुरा की शिल्प नीति का बहुत नाम था। बुद्ध का जीवन और बौद्ध-धर्म इन दोनों शिल्पकार का विषय था। गान्धार के भास्कर्य में प्रधानता ग्रीक और रोमन का प्रभाव देखा जाता था। मथुरा रीति भास्कर्य लाल चूना पत्थर का अधिक व्यवहार होता था।

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प्रश्न 22.
गांधार कला पर टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर :
गांधार कला पर यूनानी कला का अत्यधिक प्रभाव है। इसलिए गांधार कला को इण्डो-यूनानी कला भी कहा जाता है। गांधार कला के विकास का काल 50 ईं० पू० से 500 ई० तक माना जाता है। मूर्ति कला की गांधार शैली का विकास कनिष्क के समय से प्रारम्भ हुआ था। मथुरा एवं सारनाथ में कनिष्क ने कई सुन्दर भवन तथा मूर्तियों का निर्माण करवाया था। राजधानी पुरुषपुर में स्तम्भ और कनिष्कपुर में एक नगर बसाया था। उसके समय में यूनानी एवं भारतीय शिल्प कला के मेल से उत्पन्न कला गांधार क्षेत्र में ही विकसित होने के कारण उसे गांधार कला कहा गया। भगवान बुद्ध तथा कई राज़ाओं की मूर्तियाँ बनाने में गांधार शैली का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 23.
रामायण और महाभारत पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। –
उत्तर :
रामायण : राम को लेकर प्राचीन महाकाव्य लिखा गया था। इसलिए उसका नाम रामायण पड़ा। इसकी रचना संस्कृत भाषा में महार्षि वाल्मीकि के आदर्श जीवन चरित्र का वृतांत् है। कुछ इतिहासकारों का विचार है कि यह पुस्तक 400 ई० पू० से 200 ई० पू० के बीच लिखी गई है। रामायण में कुल 24 हजार श्लोक हैं। पूरा महाकाव्य सात काण्ड (भाग) में बाँटा हुआ है। इनमें से प्रथम और सातवें काण्ड सम्भवतः वाल्मीकि द्वारा नहीं लिखा गया है। इन दोनों काण्डों को रामायण में बाद में जोड़ा गया था।
रामायण के प्रमुख चरित्र राम, सीता और रावण हैं। राम-रावण के युद्ध की घटना ही रामायण की मूल कहानी है।

महाभारत : महाभारत की रचना संस्कृत भाषा में महर्षि वेद व्यास ने की थी। इस महाकाव्य में 18 अध्याय हैं और 100,000 श्लोक हैं। सम्भव है आरम्भ में यह ग्रन्थ इतना बड़ा न हो और बहुत से श्लोक बाद में जोड़े गये हों। इतिहासकारों के अनुसार यह पुस्तक 400 ई० पू॰ से 400 ई० के बीच लिखी गई होगी। महाभारत की चर्चा करने से वेद चर्चा की भाँति ही सफलता मिलेगी ऐसा अनुमान लगाया जाता था। इसलिए महाभारत को पंचम्वेद भी कहा जाता है।

महाभारत का मूल विषय कौरव और पाण्डव का युद्ध है। उसके साथ ही साथ भूगोल, विज्ञान, राजनीति, अर्थनीति एवं समाज से सम्बन्धित अनेक विषयों के बारे में भी कहा गया है।

प्रश्न 24.
भास्कर्य किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
मौर्यकाल में बने स्तम्भों को मूलत: भास्कर्य कहा जाता है। स्तम्भ के एकदम ऊपर एक प्राणी की मूर्ति बैठायी जाती थी। सिंह, हाथी, साँढ़ इत्यादि प्राणी की मूर्ति इन क्षेत्रों में प्रयोग होता था। इस प्रकार के पत्थर का स्तम्भ मौर्य युग के पहले नहीं देखा गंया। ऐसा ही एक प्रसिद्ध अशोक स्तम्भ सारानाथ में है, जो आज भारत सरकार का प्रतीक चिह्न है।

प्रश्न 25.
प्राचीन भारतीय उपमहादेश में विभिन्न भाषाओं की उत्पत्ति कैसे हुई ?
उत्तर :
बातचीत करने के लिए भाषा का प्रयोग होता है। इतना ही नहीं लिखने के लिए भाषा की जरूरत पड़ती है। लेकिन मौखिक और लिखित भाषा में जमीन आसमान का अंतर होता है। मौखिक भाषा में आंचलिक क्षेत्र का प्रभाव रहता है, लेकिन लिखित भाषा में सबका प्रयोग नहीं होता है। प्राचीन भारत में मौखिक भाषा और लिखित भाषा अलग थी। ॠग्वेद की भाषा छंद अथवा छंदस था। इसी भाषा में सभी बातचीत करते थे, लेकिन धीर-धीरे भाषा में आंचलिकता का प्रयोग बढ़ना शुरू हो गया, जिससे विभिन्न अंचलों की भाषा बनने लगी। इसलिए भाषा और उसके प्रयोग के लिए नियम बनाने की जरूरत पड़ी। उसी नियम के कारण ही व्याकरण बना। प्रसिद्ध व्याकरण आचार्य पाणिनि ने ऐसा ही व्याकरण लिखा, जिसका नाम अष्टध्यायी था। इसमें पाणिनि ने भाषा के विभिन्न नियम को बनाया, जिसके फलस्वरूप भाषा का परिमार्जन हुआ। परिमार्जन होकर जो भाषा बनी उसी का नाम संस्कृत रखा गया।

विभिन्न क्षेत्रों में एक भाषा का विभिन्न प्रकार से उच्चारण होना आरंभ हुआ। उस भाषा को प्राकृत कहा जाता था। प्राकृत शब्द कहाँ से आया? इसलिए तो पाणिनि द्वारा संस्कार की गई भाषा से प्राकृत भाषा अलग है। दूसरी ओर छंदस से तोड़कर-तोड़कर पाली भाषा बनी। प्रकृत और पाली भाषा ही साधारण लोगों की मौखिक भाषा बनी। लेकिन ईसा पूर्व षष्ठ शताब्दी से पालि और प्रकृत भाषा में लिखना आरंभ हुआ। जैन (प्राकृत) और बौद्ध (पाली) धर्म का साहित्य भी इसी भाषा में लिया गया है।

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प्रश्न 26.
प्राचीन भारतीय उपमहादेश में ज्ञान-विज्ञान की स्थिति का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर :
विज्ञान का तात्पर्य है किसी विशेष विषय के प्रति ज्ञान अर्जन करना। विज्ञान में विभिन्न प्रकार के कुछ ज्ञान रोजमर्रा के जीवन में प्रयोग करने की आवश्यकता होती है।

परवर्ती वैदिक और बौद्ध साहित्य में विभित्र औषधि और शल्य चिकित्सा की बातें हैं। चरक साहित्य में प्रायः सात सौ औषधि पेड़-पौधों के बारे में जानकारी मिलती है। इस पुस्तक में रोग के विभिन्न पहलू को लेकर आलोचना की गई है। एक आदर्श अस्पताल कैसा होना चाहिए, उसका विवरण भी चरक संहिता में मिलता है। हड्डी टूट जाने पर अथवा नाक, कान इत्यादि कट जाने पर उसे जोड़ने एवं ठीक करने के कार्य में शल्य चिकित्सक काफी निपुण थे। इस विद्या में शुश्रुत काफी प्रसिद्ध थे।

जाति भेद की प्रथा कठोर होने के कारण चिकित्सा-विज्ञान की चर्चा में समस्या उत्पन्न हुई थी। रोग को दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्यों के बारे में कहा गया, लेकिन वे सारे खाद्यों में अधिकांशतः धर्मशास्त सैजा ही खाने पर प्रतिबंध था। फलस्वरूप धर्मशास़ के साथ चिकित्सा विज्ञान का विभिन्न समय पर विरोध होता रहता था। शुश्रुत संहिता के चिकित्सा विज्ञान का महत्वपूर्ण भाग शववाल्वच्छेद अथवा मरे हुए को काटना। धर्मशास्त के मतानुसार शव अथवा मृत शरीर को छूना निषेध था। फलस्वरूप मरे हुए को काटना निषेध होने के कारण शरीरविद्या और शल्य चिकित्सा की चर्चा धीरे-धीरे कम होती गई। वाणभट्ट के बाद से शल्यचिकित्सा के संबंध में वैसा उत्साह नहीं था। इसके अलावा चिकित्सक रोगियों में किसी प्रकार का भेद-भाव अर्थात् कौन ब्राह्मण हैं या शूद्र है वे इसे नहीं मानते थे। फलस्वरूप प्रचलित वर्णाश्रम प्रथा के साथ चिकित्सा विधा में विरोध शुरू हुआ।

प्राचीन भारत में ज्योतिष विज्ञान, गणित और ज्योतिष चर्चा काफी दिनों से एक साथ चल रहां था। जैन और बौद्ध भी गणित चर्चा करते थे। उनके धर्म ग्रंथ से इस विषय पर आलोचना मिलती हैं। अंक गणित, बीजगणित और ज्यामिति को मिलाकर बौद्ध ने गणित विज्ञान को बनाया था। जैन उसे संख्यायान कहते हैं। उस समय की शिक्षा में गणित का स्थान सबसे प्रमुख था। महांवीर और गौतम बुद्ध दोनों ही गणित की चर्चा की थी। ईसा के प्रथम शताब्दी में बौद्ध पण्डित नागार्जुन एक प्रसिद्ध गणितविद् थे।

गुप्त युग में ज्योतिष विज्ञान और गणित में काफी उन्नति हुई थी। लेकिन गुप्त युग में ज्योतिष विज्ञान में अधिकांशत: ज्योतिषचर्चा के कार्य में प्रयोग होता था। आर्यभट्ट ने गणित को एक अलग चर्चा का विषय बनाया था। आर्यभट्टीय पुस्तक में गणित समय और ग्रह-नक्षत्र विषय को लेकर आर्यभट्ट ने आलोचना की है। उस पुस्तक में सर्वप्रथम संख्या के हिसाब से शून्य का प्रयोग उन्होंने किया। उस चर्चा से ही दशमलव की धारणा का आरंभ हुआ था। आर्यभट्ट ने कहा था पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने के फलस्वरूप ही चंद्रग्रहण होता है।

आर्यभट्ट के बाद वाराहमिहिर ज्योतिष विज्ञान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक हुए। सूर्य सिद्धांत और पंच सिद्धांति की पुस्तक में वराहममिहिर ने पुरानी अवधारपणा को काफी बदल दिया। वर्षा का परिमाण और उसके आगामी लक्षण क्या-क्या हैं, उसे लेकर वे आलोचना किए। भूकंप के पहले विभिन्न प्राकृतिक लक्षण विषयक आलोचना भी वाराहमिहिर के लेखों में पाया जाता है।

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प्रश्न 27.
मौर्य युग एवं गुप्त वंश की शिल्पकला के सम्बन्ध में क्या जानते हो?
उत्तर :
मौर्य काल में भारतीय शिल्प कला काफी उन्नत दशा में थी। प्रशासनिक सुधार के कारण शिल्पों में छोटे-छोटे उद्योगों का रूप ले लिया था। राज-शिल्पी राज्य के लिये धातुओं, लकड़ियों तथा पत्थरों से विविध वस्तुओं का निर्माण करते थे। जहाज बनाने, कवच तथा आयुधों का निर्माण करने, खेती के औजार बनाने जैसे शिल्पों की प्रमुखता थी तथा जंगलों से प्राप्त धातुओं और लकड़ियों से राज्य अनेक उद्योग संचालित करता था जिनमें शिल्पी अध्यक्षों के निरीक्षण में कार्य करते थे। मौर्य युग का प्रधान उद्योग वस्त उद्योग था। मेगास्थनीज ने सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा आदि के प्रयोग द्वारा चलाये जाने वाले उद्योगों के अतिरिक्त हाथी दाँत, मिट्टी तथा चमड़े के शिल्पियों की चर्चा भी की है।

पत्थर तराशने का शिल्प तो अति विकसित अवस्था में था। अशोककाल में एक ही पत्थर के बने स्तंभ इसके प्रमाण हैं। सारनाथ का सिंह स्तंभ तथा बाबर की गुफाओं की चमक अपूर्व है। मौर्य काल के शिल्प की उत्कृष्टता उस काल में बने स्तूपों, विहारों, मठों, लाटों, स्तंभों तथा इमारतों को देखने से ही ज्ञात होती है। राज प्रासाद को सात सौ वर्ष बाद देखने वाले फाह्यान को विश्वास ही नहीं हुआ कि वह मानव द्वारा निर्मित है। साँची और भरहुत के स्तूप, साँची, प्रयाग, सारनाथ और नंदनगढ़ की लाटें, बराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों के गुहागृह, अशोक द्वारा निर्मित पत्थर के स्तभ मौर्य-शिल्प के श्रेष्ठ नमूने हैं। शुंग राजाओं ने लकड़ी के स्थान पर पत्थर द्वारा भवन निर्माण आरंभ किया। भोज का मठ, काली का बौद्ध मंदिर, नासिक और खंडगिरि की गुफाएँ उस काल की श्रेष्ठ रचनाएँ हैं। अमरावती का बौद्ध विहार सातवाहन राजवंश की देन है।

गुप्तवंशीय शासनकाल को उसकी सांस्कृतिक उपलब्धियों के कारण स्वर्णयुग कहा गया। इस युग में कला-शिल्पियों ने अपनी प्रतिभा के चरम विकास का परिचय दिया। वास्तु शिल्प, चित्र शिल्प तथा मूर्ति शिल्प के उत्कृष्ट्ट उदाहरण आज भी हमें उस काल की रचनाओं तथा सारनाथ के स्तूपों, अजंता-एलोरा की गुफाओं, प्रयाग-स्तंभ, मेहरौली के लौहस्तंभ, देवगढ़ के दशावतार मंदिर तथा उस काल में निर्गित देवी-देवताओं की मूर्तियों में प्राप्त होते हैं। गुप्तोत्तर काल में शिल्प के अंतर्गत वस्र निर्माण से लेकर धातु, हाथी दाँत, लकड़ी, मिट्टी तथा चमड़े के विभिन्न उद्योग आदि सम्मिलित हैं।

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ________ के रामायण में __________ को बड़ा दिखाया गया है।
उत्तर : कम्बन, राम

2. वाणभट्ट एक __________ थे।
उत्तर : चिकित्सक/वैद्य

3. कुषाण के समय __________ शिल्प का विकास हुआ था।
उत्तर : गांधार

4. पंचतंत्र के रचयिता __________ हैं।
उत्तर : विण्णु शर्मा

5. कालिदास __________ एवं __________ दोनों लिखते थे।
उत्तर : काव्य, नाट्य

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6. चरक शब्द का अर्थ __________ है।
उत्तर : घूमनेवाला

7. नागार्जुन एक __________ थे।
उत्तर : गणितविद्

8. वराहमिहिर __________ थे।
उत्तर : प्रसिद्ध ज्योतिष थे।

9. पुराण शब्द का अर्थ __________ है।
उत्तर : वेद

10. रामायण महाकाव्य __________ में बँटा हुआ है।
उत्तर : सात भाग

बेमेल शब्दों को ढूंढकर लिखिए :-

  1. नालन्दा, तक्षशिला, बल्लभी, पाटलिपुत्र।
  2. ब्राह्मी, संस्कृत, खरोष्टी, देवनागरी।
  3. रत्नावली, मृच्छकटिकम, अर्थशास्त, अभिज्ञान शाकुन्तलम।
  4. संस्कृत, अंकगणित, बीजगणित, ज्यामिति।
  5. काव्य, व्याकरण, ज्योतिष, व्यवसाय।
  6. भरहुत, मगध, साँची, अमरावती।
  7. मेघदूतम, कुमारसम्भवम, अभिज्ञान शांकुतलम, अर्थ शार्ब।
  8. नागान्द, रत्नावली, प्रियदर्शिका, दशकुमार चरित।
  9. महाभारत, जयकाव्य, पंचमवेद, सर्ग।
  10. पाटलिपुत्र, कब्नौज, मिथिला, मालदा।

उत्तर :

  1. बल्लभी
  2. संस्कृत
  3. अर्थशास्त
  4. संस्कृत
  5. व्यवसाय
  6. मगध
  7. अर्थशास्ब
  8. दशकुमार चरित
  9. सर्ग
  10. मालदा।

नीचे दिए गए वाक्यों में कौन सही एवं कौन गलत है उसे लिखिए :-

1. नालन्दा महाविहार में केवल ब्राह्मण छात्र ही पढ़ सकता था।
उत्तर : गलत

2. कम्बन के रामायमण में राम को बड़ा दिखाया गया है।
उत्तर : सही।

3. वाणभट्ट एक चिकित्सक थे।
उत्तर : सही।

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4. कुषाण के समय ही गांधार कला का विकास हुआ था।
उत्तर : सही।

5. ‘पुराण’ शब्द का अर्थ है ज्ञान।
उत्तर : गलत

6. जीवक ने गौतम बुद्ध का कई बार उपचार किया था।
उत्तर : गलत

7. महाभारत महाकाव्य अठारह सर्गों में बँटा हुआ है।
उत्तर : सही।

8. भाषा और उसके प्रयोग के लिए जो नियम थे उसे व्याकरण कहा जाता है।
उत्तर : सही।

9. रामायण महाकाव्य काण्ड छ: (भाग) में बँटा हुआ है।
उत्तर : गलत

10. अजंता को गुफा गुप्तकाल के शिल्प के उदाहरण नहीं है।
उत्तर : गलत

11. ‘चरक’ शब्द का अर्थ है जो घूमते रहते हैं।
उत्तर : सही।

12. वाराहमिहिर ज्योतिष विज्ञान के प्रसिद्ध ज्योतिष थे।
उत्तर : सही।

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13. पंचतंत्र एक रसिक परक कहानी है।.
उत्तर : गलत

14. स्तूप के चारों ओर के दरवाजे को ‘तोरण’ कहते हैं।
उत्तर : सही।

15. नागार्जुन एक प्रसिद्ध गणितज्ञ थे।
उत्तर : सही।

16. रामायण महाकाव्य को सोलह सर्गों में बाँटा गया है
उत्तर : गलत

17. वाराहमिहिर एक प्रसिद्ध शतरंज के खिलाड़ी थे।
उत्तर : गलत

18. भाषा प्रयोग के लिए जो नियम बनाए गए हैं वही व्याकरण है
उत्तर : सही।

19. वाणभट्ट एक प्रसिद्ध ज्योतिष थे।
उत्तर : गलत

20. कम्बन के रामायण में ‘सीता’ को बड़ा दिखाया गया है।
उत्तर : गलत

21. अजंता की गुफा शिल्पकाल के उदाहरण हैं।
उत्तर : सही।

22. कृषि कार्य एवं बस्ती के बढ़ाने हेतु जगल की कटाई होती है।
उत्तर : सही।

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23. नालंदा विश्वविद्यालय में केवल मात्र छात्र ही पढ़ सकते हैं।
उत्तर : गलत

24. ‘चरक संहिता’ में प्राचीन काल के औरधि एवं औषधीय पोधों आदि का विवरण मिलता है।
उत्तर : सही।

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) महाबलौपुरम (क) कुषाण युग
(ii) गांधार शिल्प कला (ख) नागार्जुन
(iii) गणितविद् (ग) तमिल महाकाव्य
(iv) मनिमेखलाई (घ) गुफा का चित्र
(v) अजंता (ङ) रथ जैसा मंदिर

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) महाबलौपुरम (ङ) रथ जैसा मंदिर
(ii) गांधार शिल्प कला (क) कुषाण युग
(iii) गणितविद् (ख) नागार्जुन
(iv) मनिमेखलाई (ग) तमिल महाकाव्य
(v) अजंता (घ) गुफा का चित्र

प्रश्न 2.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) मृच्छकटिकम (क) हर्षवर्द्धन
(ii) रत्नावली (ख) मिट्टी से बनी छोटी गाड़ी
(iii) तक्षशिला (ग) महिला उपाध्याय
(iv) वैश्य (घ) गांधार महाजनपद की राजधानी
(v) उपाध्यायी (ङ) व्यापार करने वाला

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) मृच्छकटिकम (ख) मिट्टी से बनी छोटी गाड़ी
(ii) रत्नावली (क) हर्षवर्द्धन
(iii) तक्षशिला (घ) गांधार महाजनपद की राजधानी
(iv) वैश्य (ङ) व्यापार करने वाला
(v) उपाध्यायी (ग) महिला उपाध्याय

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प्रश्न 3.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) रामायण (क) तोरण
(ii) महाभारत (ख) काव्य एवं नाटक दोनों के लेख
(iii) स्तूप एवं चैता निर्माण प्रारंभ (ग) विहार
(iv) नागार्जुन (घ) प्राचीनकाल के वैद्य
(v) चरक (ङ) पंचतंत्र
(vi) घूमनेवाला (च) चरक
(vii) नालंदा विश्वविद्यालय (छ) गणितविद्
(viii) नीति परक कहानी का संकलन (ज) गुप्तकाल
(ix) कालिदास (झ) अठारह सर्ग
(x) स्तूप के चारों ओर का दरवाजा (স) छः काण्ड

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) रामायण (স) छः काण्ड
(ii) महाभारत (झ) अठारह सर्ग
(iii) स्तूप एवं चैता निर्माण प्रारंभ (ज) गुप्तकाल
(iv) नागार्जुन (छ) गणितविद्
(v) चरक (घ) प्राचीनकाल के वैद्य
(vi) घूमनेवाला (च) चरक
(vii) नालंदा विश्वविद्यालय (ग) विहार
(viii) नीति परक कहानी का संकलन (ङ) पंचतंत्र
(ix) कालिदास (ख) काव्य एवं नाटक दोनों के लेख
(x) स्तूप के चारों ओर का दरवाजा (क) तोरण

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 7 अर्थनीति और जीवन यात्रा (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सप्तम शताब्दी का प्रथम भाग)

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 History Book Solutions Chapter 7 अर्थनीति और जीवन यात्रा (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सप्तम शताब्दी का प्रथम भाग) offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Geography Chapter 7 Question Answer – अर्थनीति और जीवन यात्रा (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सप्तम शताब्दी का प्रथम भाग)

विस्तृत उत्तर वालें प्रश्न (Detailed Answer Questions) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्रथम नगरायण (हड़प्पा) एवं द्वितीय (महाजनपद) के मध्य किस प्रकार का अन्तर देखने को मिलता है ?
उत्तर :
प्राचीन भारत के इतिहास में पहला नगर हड़पा सभ्यता में देखा गया। उसे प्रथम नगरायण कहा जाता है। उसके प्राय: चार हजार वर्ष के बाद ही पुन: नगर बनते हुए देखा गया। यह नगरायण मूलत: उत्तर भारत में विशेषकर गंगा घाटी में बना था। ईसा पूर्व के 600 साल के लगभग बन यह नगरायण द्वितीय नगरायण के रूप में परिचित था। उस युग के लेख में ग्राम और नगर के मध्य अन्तर देखने को मिलता है। अधिकांश महाजनपदों की राजधानी ही प्रसिद्ध नगर था। वे नगर पत्थर और मिट्टी अथवा ईंट से बने और आकार में घिरे हुए होते थे।

नगर ग्रामीण बस्ती की तुलना में आकार में बड़े थे। शासन और व्यवसाय से जुड़े हुए लोग प्रधानतः नगर में रहते थे। इनमें से कोई भी स्वयं अपने लिए खाद्य उत्पादन नहीं करता था। फलस्वरूप इसके लिए नियमित खाद्य ग्राम से आता था। इसलिए तो नगर ग्रामीण इलाके के आस-पास बनता था।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारत में जल सिंचाई व्यवस्था क्यों की गई थी? उस युग की जल सिंचाई व्यवस्था एवं आज की जल सिंचाई व्यवस्था में क्या अंतर है?
उत्तर :
प्राचीन भारतीय उपमहादेश की जल सिंचाई व्यवस्था कृषि कार्य की उत्नति के लिए जरूरी थी। प्राचीन भारतीय उपमहादेश के शासक इस ओर ध्यान देते थे। नदी का जल सिंचाई के जरिए खेतों में पहुँचाने के लिए विभिन्न प्रयास करते थे। जल सिंचाई योजना को सेतु कहा जाता था। यह सेतु दो प्रकार का होता था। एक प्रकार का सेतु प्राकृतिक जल के उत्स को आधार करके था, तो दूसरा कृत्रिम उपाय दूसरे क्षेत्र से आवश्यक जल को लाकर सेतु बनाया जाता था। सेतु जल का प्रयोग करने के लिए किसानों को जल कर भी देना पड़ता था। धनी व्यक्ति स्वयं के प्रयास से जल सिंचाई योजना तैयार करते थे।

प्राचीन काल में भारत में भी कृत्रिम जलधारा बनाकर कूप या जलाशय से सिंचाई की जाती थी। प्राचीन भारत में चाक की तरह यंत्रों की सहायता से कूप के पानी को बाहर लाकर सिंचाई की व्यवस्था की जाती थी। वर्तमान युग में आधुनिक यंत्रों एवं बिजली का प्रयोग कर सिंचाई के यंत्रों को और भी उन्नत बनाया गया है।

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प्रश्न 3.
सुदर्शन झील क्या था?
उत्तर :
प्राचीन भारतीय उपमहादेश में राजकीय प्रयास से जल सिंचाई व्यवस्था का एक प्रधान उदाहरण सदुर्शन झील था। मौर्य युग से लेकर गुप्त युग तक इस झील का प्रयोग होता रहा था। चन्द्रुप्त मौर्य के शासनकाल में काठियावाड़ क्षेत्र में यह बनाया गया था। बाड़ का मतलब शहर होता है। यह एक प्रकार से नदी आधारित बड़े पैमाने सिंचाई योजना (सेतु) है। अशोक के शासन काल में इस योज़ना में खाल (नहर) को भी जोड़ा गया। शक शासक रूद्रदमन इस झील का संस्कार (150 ईसवी) में किया। बाँध को बड़ा और शक्तिशाली बनाया गया। इस पूरे कार्य का वर्णन रूद्रदामन ने जूनागढ़ के एक शिलालेख में खुदाई करके किया है। गुप्त सम्राट स्कन्दगुप्त के शासन के प्रथम वर्ष में ही पुन: झील की संस्कार की आवश्यकता हुई। ईसा पूर्व के चतुर्थ शतक से लेकर ईसा के पंचम शतक तक सुदर्शन हद का लगातार प्रयोग होता था।

प्रश्न 4.
ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से लेकर ईसा पूर्व के चतुर्थ शताब्दी तक कृषि क्षेत्र में हुए परिवर्तन का उल्लेख करो।
उत्तर :
महाजनपद के समय भारतीय उपमहादेश की अर्थनीति और समाज भी बदल गया था। जनपद कहने से कृषि आधारित ग्रामीण क्षेत्र को समझा जाता था। फलस्वरूप जनपद और महाजनपद में कृषिजीवी लोगों की बस्तियाँ भी थी। महाजनपदों में राजकर्मचारी और योद्धाओं के भरण-पोषण की पूर्ति कृषि से ही होती थी। अधिकांश जनपद गंगा घाटी के किनारे थे।

कृषि ही उस समय की प्रधान जीविका थी। उस युग के विभिन्न लेखों में कृषि कार्य के बारे में विवरण मिलता है। उर्वरता के अनुसार जमीन को विभिन्न प्रकार से बाँटा जाता था। विभिन्न प्रकार के ॠतुओं में विभिन्न प्रकार की खेती होती थी। ॠतु अनुसार फसलों के अलग-अलग नाम भी थे। कृषि में धान ही प्रधान फसल. था। धानों में सबसे प्रमुख शालि धान था। मगध क्षेत्र में शालि धान की खेती सबसे ज्यादा होती थी। कृषि फसलों में गेहूँ, जौ और ईख की खेती भी होती थी।

प्रश्न 5.
मौर्य युग में महिलाओं की क्या स्थिति थी?
उत्तर :
महिलाओं की साधारण स्थिति मौर्य काल में भी पूर्व जैसी ही थी। लेकिन घर-गृहस्थी के कार्यों के अलावा महिलाएं कुछ पेशाओं में योगदान करने के लिए बाहर भी जाती थीं। सूत उत्पादन के कार्य में महिला श्रमिकों के बारे में जानकारी मिलती है। गुप्तचर और राज कर्मचारी के रूप में भी महिलाओं की नियुक्ति होती थी।

प्रश्न 6.
मौर्य युग में व्यापार और वाणिज्य की स्थिति कैसी थी?
उत्तर :
मौर्य युग में ग्रीस, रोम, सिंहल एवं चीन इत्यादि देशों के साथ भारत का विदेशी व्यापार होता था। मौर्य युग में अर्थनीति मूलतः कृषि के ऊपर ही निर्भर था। समाज के अधिकांश लोग कृषि कार्य के साथ जुड़े हुए थे। आबादी का क्षेत्र बढ़ाने की ओर भी उस काल में विशेष ध्यान दिया जाता था। कारीगर और व्यापांरियों के कार्यों की खोज-खबर राज्य लेता था। खादान और खनिज संपदा के ऊपर राज्य का एकाधिक अधिकार था। खदानों की देखभाल के लिए राज कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती थी।

नमक को भी खानिज द्रव्य के रूप में स्वीकार किया गया था। व्यापार के विभिन्न पहलुओं से संबंधित विषय की खोज-खबर रखने के लिए अलग से राज कर्मचारी रहते थे। मौर्य काल में राजधानी के साथ साग्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में यातायात की व्यवस्था उन्नत थी। राजपथ की नियमित देखभाल करने के लिए राज कर्मचारी रहते थे। रास्ते के किनारे दूरी और दिशा को समझने के लिए संकेत (फलक) लगाया जाता था। उनमें से अधिकांशतः आज के किलोमीटर संकेत जैसा ही था।

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प्रश्न 7.
मौर्यकाल में पुरुषों एवं महिलाओं का पहनावा कैसा था?
उत्तर :
मौर्य काल में साधारण पुरुष लगभग आज की तरह धोती-चादर की तरह पोशाक पहनते थे। महिलाएँ पोशाक के ऊपर चादर और दुपट्टे का प्रयोग करती थी। धनी और राजपरिवार के सदस्य कीमती पोशाक पहनते थे। सूती कपड़ों की माँग साधारण लोगों में सबसे ज्यादा थी। पशम और रेशम के कपड़े का प्रयोग भी होता था। अधिकांश पुरुष सिर पर पगड़ी पहनते थे। धनी लोग कीमती पत्थर और सोने के बने गहने भी पहनते थे।

प्रश्न 8.
कुषाण युग में आर्थिक एवं सामाजिक जीवन कैसा था?
उत्तर :
आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से इन पाँच सौ वर्षों में काफी बदलाव देखा जाता है। विन्ध्यांचल पर्वत के दक्षिण में पहले की तरह कृषि ही प्रधान जीविका थी। धान, गेहूँ, जौ, ईख (गन्ना), कपास आदि प्रधान फसल थे। दक्षिणात्य में काली मिट्टी में रूई की अत्यधिक खेती होती थी। केरल में गोलमरीच की खेती काफी प्रसिद्ध थी।
कृषि कार्य में विभिन्न प्रकार के उपकरण का प्रयोग इस समय देखने को मिला। मिट्टी की खुदाई से लोहे की कुल्हाड़ी, कुदाल एवं दाँव इत्यादि मिला। इस समय समस्त जमीन के ऊपर सम्राट का मालिकाना हक नहीं था। बल्कि अधिकांश जमीन के मालिक निर्दिष्ट व्यक्ति हुआ करते थे।

प्रश्न 9.
मेगास्थनीज की दृष्टि में भारतीय उपमहादेश का समाज कितने भागों में बँटा हुआ था ?
उत्तर :
मेगास्थनीज भारतीय उपमहादेश के समाज के चार वर्ण की बातों के बारे में नहीं जानते थे। पेशादार और वृत्तजीवी विभिन्न जातियों को उन्होंने देखा था। उनके अनुसार भारत का जन-समाज सात जातियों में विभक्त था। जैसे ब्राह्याण अथवा पण्डित, किसान, पशुपालक और शिकारी, शिल्पी और व्यवसायी, योद्धा, गुप्तचर अथवा पर्यटक एवं सचिव अथवा मंत्री। मेगास्थनीज का कहना था कि भारत में दास प्रथा नहीं थी।

प्रश्न 10.
उपमहादेश के भीतर और बाहर वाणिज्य के विकास के क्या कारण थे?
उत्तर :
वाणिज्य की उन्नति में जल मार्ग और स्थल मार्ग की भूमिका महत्वपूर्ण थी। विदेशी बाजार में उपमहादेश के मसलीन और दूसरे कपड़े की माँग थी। इसके अलावा हीरा, वैदुर्य, मुक्ता और मशाला का विदेशी बाजार में विशेष महत्व था। चीन का रेशम आयात द्रव्यों में सबसे प्रधान था। काँच से बनी विभिन्न वस्तुओं का विदेशों से आयात किया जाता था। इस समय कारीगरी शिल्प और पेशा में विभिन्नता बढ़ी थी। वाराणसी और मथुरा कीमती कपड़ा बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। प्राचीन बांग्ला का सूक्ष्म कपड़ा मसलीन का भी विशेष महत्व था।

प्रश्न 11.
मौर्य युग में लोग अपने अवकाश के दिनों को कैसे व्यतीत करते थे?
उत्तर :
मौर्य युग में लोग अवकाश के समय को बिताने के लिए विभित्र प्रकार के उपाय करते थे। जैसे : नृत्य, गीत, और अभिनय का भी प्रचलन था। साथ ही साथ जादू का खेल और विभिन्न प्रकार की रस्सी के कसरत से साधारण लोगों को खुशी मिलती थी। पाशा (शतरंज खेलना, शिकार, रथ का दौड़, कुश्ती इत्यादि का खेल) धनी लोगों के लिए समय बिताने का माध्यम था। बड़े-बड़े उत्सवों में समस्त लोगों के लिए बिना पैसे का भोजन और पेयजल का वितरण किया जाता था।

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प्रश्न 12.
सातवाहन शासनकाल में ग्राम्य जीवन कैसा था?
उत्तर :
ग्रामवासी मूलत: कृषिजीवी थे। धान, तेल का बीज, कपास और शन प्रमुख फसल थी। ग्राम के घर-द्वार बीचाली से बना था एवं दीवार देकर घिरा रहता था। तालाब, फूलों का बगीचा और बरगद के पेड़ सभी कुछ ग्राम में देखने को मिलता था। ग्राम में विभिन्न प्रकार के पालतू पशु-पक्षी थे। ग्राम में चौड़ा और पतला दोनों प्रकार के रास्ते थे। वर्षा के समय रास्ता कीचड़ से भर जाता था। ग्राम का शासन ग्रामीणों के हाथों में ही था। चोरी-डकैती से पैसा बचाने के लिए अधिकांश लोग मिट्टी की खुदाई करके मिट्टी के नीचे पैसे रखते थे। विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्र और चित्र बनाने की प्रथा ग्रामों में थी। उत्सव के समय ग्रामीण लोग नृत्य, गीत और वाद्य यंत्रों पर झूम उठते थे। सूर्य, अग्नि इत्यादि देवताओं की पूजा मंदिर में होती थी। ग्राम में बौद्ध धर्म का भी प्रचलन था।

प्रश्न 13.
ईसा पूर्व सातवीं शताब्दी से छठवीं शताब्दी तक के लोगों का खान-पान कैसा था?
उत्तर :
प्राचीन भारीय उपमहादेश में चावल, गेहूँ, जौ और शाक-सब्जी ही प्रधान भोजन था। धनी व्यक्तियों में मांस खाने का ज्यादा प्रचलन था। मध्य वर्गीय समाज में दूध और दूध से बने विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ का प्रयोग होता था। गरीब लोग घी के बदले तेल का प्रयोग करते थे। इसके अलावा मटर, तिल, मधु, गुड़, नमक इत्यादि भोज्य पदार्थों का उल्लेखभी मिलता है। कुछ क्षेत्रों में निरामिष भोज्य पादर्थ पर ज्यादा महत्व दिया जाता था। सभी प्रकार की मछलियों के खाने पर प्रतिबन्ध था। दूध एवं विभिन्न प्रकार के फलों के रस से बने पानीय जल का प्रयोग होता था।

प्रश्न 14.
गुप्त युग में किस प्रकार की मुद्राओं का प्रचलन था?
उत्तर :
गुप्त युग की अनेक सोना एवं चाँदी की मुद्राएँ पाई गई हैं। गुप्त राजाओं द्वारा आरंभ की गई सोने की मुद्रा को दीनार और सुवर्ण कहा जाता था। सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में चाँदी की मुद्रा सर्वप्रथम चालू किया गया। उस मुद्रा का नाम रूपक था। सोना और चाँदी की मुद्रा व्यापार-वाणिज्य में प्रयोग होता था। रोजमर्रा के कार्यों के लिए ताँबे की मुद्राओं का प्रचलन गुप्त शासको ने आरम्भ किया था। लेकिन गुप्त शकों के समय में दक्षिण में वाकटक शासक किसी भी प्रकार के मुद्रा का प्रचलन नहीं किए। फलस्वरूप भारतीय उपमहादेश के सभी जगहों पर मुद्रा का लेन-देन एक समान नहीं था। इसके अलावा समाज में कृषि कार्य के बढ़ने से व्यापार-वाणिज्य का प्रतिशत कम हो गया था। इन सबके कारण नगर पहले की तुलना में कमजोर हो गए थे।

प्रश्न 15.
उत्तर भारत के काले चमकते हुए मिट्टी के बर्तन के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
गौतम बुद्ध के समय में एक प्रकार से मिट्टी का बर्तन बनाने का उद्योग काफी विकसित था। पुरातत्वकार उन सभी को उत्तर भारत के काले चमकते हुए मिट्टी का बर्तन कहते थे। इन बर्तनों में पहले के समय के धुल-धुसरित मिट्टी के बर्तनों से काफी उन्नत किस्म की मिट्टी से इन बर्तनों को बनाया जाता था। कुम्हारों के चक्के का व्यापक प्रयोग होने के कारण यह बर्तन बनाना काफी सहज था। बर्तनों को अच्छी किस्म के चूल्हे में जलाकर काला किया जाता था। जलाने के बाद बर्तनों को पालिश किया जाता था। इन मिट्टी के बर्तनों से विभिन्न प्रकार की थाली और कटोरे बनाये जाते थे।

प्रश्न 16.
ई० पूर्व षष्ठ शताब्दी में नये-नये नगरों के विकास के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी में प्रधानत: उत्तर भारत में नगरायण हुआ था। दूसरी तरफ इस समय प्राय: पूरे उपमहादेश में नए नगर बने। तक्षशिला सिरकाय का पुरातत्वकारों ने मिट्टी खोद कर एक नगर की खोज की। इससे यह कहा जा सकता है कि ईसा पूर्व 200 से 300 ई० ईस्वी तक नगरों की काफी उन्नति हुई थी। कुषाण युग में गंगा-यमुना की कादा मिट्टी से बनी हुई ईंट और जली हुई ईंटों का प्रयोग होता था। इस समय मथुरा काफी महत्वपूर्ण राजनैतिक और वाणिज्यिक केन्द्र था। सधुरा का भास्कर्य और दूसरा उद्योग भी प्रसिद्ध था।

मौर्य युग में प्राचीन बंगाल में महास्थानगढ़ और वानगढ़ नगर होने का उल्लेख मिलता है। वहीं दूसरी तरफ इस समय ताग्रलिप्ति, चन्द्रकेतुगढ़ इत्यादि नगर भी बना था। प्राचीन ओडिशा के क्षेत्र में शिशुपालगढ़ नगर की खोज हुई। दक्षिणात्य और दक्षिण भारत में इस समय नये-नये नगर बने। कावेरी नदी एवं द्वीप पर कावेरीपट्टनम बन्दरगाह काफी प्रसिद्ध था।

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 7 अर्थनीति और जीवन यात्रा (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सप्तम शताब्दी का प्रथम भाग)

प्रश्न 17.
गुप्त युग की सामाजिक अवस्था कैसी थी?
उत्तर :
समाज में वर्णाश्रम व्यवस्था चालू थी। लेकिन सभी कठोर रूप से उसे नहीं मानते थे। निम्न वर्ग के लोगों के प्रति ब्राह्मणों के मनोभाव में विशेष बदलाव नहीं आया था। एक ही अपराध के लिए राजा द्वारा बाह्मण और शूद्रों को अलगअलग सजाएं मिलती थी। उधार लेने पर शूद्रों को काफी अधिक दर पर सूद देना पड़ता था, लेकिन इस युग में शूद्र कृषि, पशुपालन और व्यापार कर सकते थे। उस समय सबसे ज्यादा खराब स्थिति चांडालों की थी। वे ग्राम अथवा शहर में नहीं रह सकते थे। ऐसा था कि ब्वाह्मण उनके द्वारा छू न लिए जाएं इससे वे हमेशा बचा करते थे।

प्रश्न 18.
गुप्त युग में पारिवारिक व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर :
गुप्त युग में परिवार के प्रधान पिता हुआ करते थे। लड़कियों की कम उम्र में शादी करने की परंपरा थी। उस समय लड़कियों की शादी के समय कुछ सम्पत्ति मिलती थी। उस सम्पत्ति के ऊपर केवल लड़कियों का ही अधिकार होता था। इन्हें स्वीधन कहा जाता था I लड़कियाँ अपनी इच्छानुसार इस सम्पत्ति का प्रयोग करती थी लेकिन स्रीधन प्रथा समस्त वर्णों के मध्य प्रचलित नहीं था।

प्रश्न 19.
बंगाल में गुप्तकाल के ताप्रलेखों से क्या जानकारी प्राप्त हुई है?
उत्तर :
गुप्तकाल में बंगाल में पाये जाने वाले ताम्र लेखों में जमीन खरीदने-बेचने की बातों का उल्लेख मिलता है। कुछ क्षेत्रों में एक जमीन को पहले खरीदा जाता था। उसके बाद उस जमीन को बाह्मण अथवा बौद्ध-विहार को दान दे दिया जाता था। यह दान की गई जमीन साधारण कर के अन्तर्गत नहीं आती थी। गुप्त और गुप्त के पश्चात् युग में धार्मिक उद्देश्य के कारण इस जमीन दान को अग्रहार व्यवस्था कहा जाता था। इस व्यवस्था के फलस्वरूप जमीन का व्यक्तिग्त मालिकाना काफी बढ़ा था। दान में मिली हुई जमीन में कृषि श्रमिक की नियुक्ति की जाती थी। इस जमीन के उत्पादान से धार्मिक कार्यक्रम का खर्च ब्राह्मण और बौद्ध विहार वहन करते थे। कुछ खाली जमीन को दान के रूप में भी दिया जाता था। उस जमीन में भी कृषि श्रमिकों को नियुक्त किया जाता था जिसके फलस्वरूप वे जमीन भी आबादी वाली जमीन हो गई थी।

प्रश्न 20.
बौद्ध भिक्षु सुजान जांग (फाह्यान) ने अपने लेखों में भारतीय महादेश की तात्कालिक सामाजिक व्यवस्था पर क्या प्रकाश डाला है ? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में फाह्यान चीन से भारतीय उपमहादेश में आया था। उनके लेख से उपमहादेश के मनुष्य और समाज के बारे में विभिन्न प्रकार की बातों की जानकारी मिलती हैं। लेकिन उनके लेख में कहीं भी चन्द्रगुप्त द्वितीय की बातों का उल्लेख नहीं है।

फाह्यान ने लिखा है कि उपमहादेश में बहुत सारे नगर थे। मध्य देश का नगर काफी उन्नत था। वहाँ की जनता सुख से निवास करती थी। लेकिन चाण्डाल नगर के बाहर रहता था। इसकी जानकारी उन्होंने ही दी। जो दुष्ट प्रवृत्ति के लोग थे उन्हें ही चण्डाल कहा जाता था। इस देश के लोग अतिथियों का सम्मान करते थे। विदेशियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो इस ओर विशेष ध्यान देते थे। पाटलिपुत्र देश का श्रेष्ठ नगर था। वहाँ के लोग सुखी और सम्पदशाली थे। धनी विशिष्टनगरों के विभिन्न स्थानों पर दातव्य चिकित्सा की व्यवस्था करते थे। बिना मूल्य में वहाँ से दवाइयाँ दी जाती थी। गरीब के लिए रहने एवं खाने की भी व्यवस्था की गई थी।

सुयान जांग के लेख में भारतवर्ष-ईन-तु नाम से परिचित हुआ। उनके अनुसार ईन-तु-र के लोग अपने देश को विभिन्न नामों से पुकारते थे। देश के पाँच भाग – उत्तर, दक्षिण। पूर्व, पश्चिम और मध्य। ईन-तु-ते में अस्सी राज्य थे। प्रत्येक राज्य में निजी राजा होने के बावजूद वे बड़े सम्माट के अनुगत थे।

सुयान जांग ईन-तु-ते को मूलत: गर्म देश कहा गया है। वहाँ पर नियमित वर्षा होती थी। उत्तर और पूर्व के क्षेत्रों में मिट्टी काफी उर्वर है। दक्षिण क्षेत्र वन से ढंका है। पश्चिम क्षेत्र की मिट्टी पत्थर की ओर अनुर्वर है। धान और गेहूँ प्रधान फसल था। लोगों के बीच जातिगत भेद-भाव भी था।

शहर के घर ईंट और बालू से बनता था। घर का बरामदा लकड़ी से बनता था। ग्राम के घरों की दीवार और फर्श मिट्टी की थी। विभिन्न प्रकार के कीमती धातु और पत्थरों का व्यवसाय होता था। शासक वर्ग जनता की सुविधा की बातों को हमेशा ध्यान में रखते थे।

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प्रश्न 21.
भोगपटिका क्या है ? ‘ब्रहोदय’ एवं ‘देवदान’ सम्पत्ति से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
गुप्त युग की कृषि अर्थनीति में ‘भोगपटिका’ एवं ‘बह्मदोय’ तथा ‘देवदान सम्पत्ति’ की विशेष भूमिका थी-
(i) भोगपटिका : गुप्त युग में राज्य कर्मचारियों को वेतन के बदले जमीन दान की प्रथा का प्रचलन था। इस प्रथा के अनुसार वे तीन पुश्तों तक भूमि भोग करने की रीति थी। इसी प्रकार की भूमि को ग्रहण करने वाले कोभोगपटिका कहा जाता था।
(ii) ‘ब्रहोदय’ एवं ‘देवदान’ :- राजा द्वारा किसी भूमि को एक या एक से अधिक ब्राह्मण को दान करने की प्रथा को ‘ब्रह्योदय’ सम्पत्ति कहा गया है। दूसरी तरफ जिस जमीन की राजस्व स्वामित्व मंदिर की पूजा के लिए दान किया जाता था उसे ‘देवदान’ सम्पत्ति कहा गया है।

प्रश्न 22.
प्राचीन युग में जाति प्रथा के विषय में क्या जानते हो?
उत्तर :
प्राचीन युग में जाति प्रथा का अस्तित्व था :-
(i) मौर्य युग : मूलतः मौर्य युग से ही जातिभेद प्रथा की धारणा स्पष्ट होने लगी थी।
(ii) मौर्य परवर्ती युग : लोहा की खोज, नगरों का विकास, वाणिज्य वृद्धि होने के फलस्बरूप जातिभेद प्रथा के नियम शिथिल हो गये।
(iii) गुप्त युग :- गुप्त युग में मिस्न या शंकर जाति का अस्तित्व रहते हुए भी उन्हें समाज में असृश्य ही समझा जाता था। जैसे – चांडाल।

प्रश्न 23.
प्राचीन भारत के इतिहास में प्रथम नगर कहाँ देखा गया? संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर :
प्राचीन भारत के इतिहास में पहला नगर हड़प्पा सभ्यता में देखा गया। उसे प्रथम नगरायण कहा जाता है। उसके प्राय: चार हजार वर्ष के बाद ही पुन: नगर बनते हुए देखा गया। यह नगरायण मूलतः उत्तर भारत में विशेषकर गंगा घाटी में बना था। ईसा पूर्व के 600 साल के लगभग बने इस नगरायण को द्वितीय नगरायण के रूप में जानते हैं। उस युग के लेख में ग्राम और नगर के मध्य स्पष्ट पार्थक्य देखने को मिला। अधिकांश महजनपदों की राजधानी ही प्रसिद्ध नगर था। वे नगर पत्थर और मिट्टी अथवा ईंट से बनी दीवारों से घिरा हुआ था।

नगर ग्रामीण बस्ती की तुलना में आकार में बड़ा था। शासन और व्यवसाय से जुड़े हुए लोग प्रधानत: नगर में रहते थे। इनमें से कोई भी स्वय अपने लिए खाद्य उत्पादन नहीं करता था। फलस्वरूप कुछ नवीन जीविका के बारे में भी जानकारी मिली है। इस समय उत्तर भारत में धोबी, नाई और चिकित्सक की जीविका काफी परिचित थी।

परिवार और समाज में महिलाओं की स्थिति पुरुष के बाद ही थी। महिलाओं के लिए शिक्षा का अवसर क्रमश: कम हो गया था। छोटी सी उम्र में लड़कियों का विवाह करने की परपरा क्रमशः समाज में बढ़ गया लेकिन महिलाओं के प्रति बौद्ध धर्म का सोच-विचार ब्राह्मण धर्म की तुलना में कुछ उदार था।

प्रश्न 26.
कुषाण युग में कारीगर एवं व्यवसायियों के संघ की स्थिति का उल्लेख करो।
उत्तर :
ईसा पूर्व के षष्ठीं शताब्दी से ही व्यापार-वाणिज्य काफी बढ़ गया था। साथ ही साथ कारीगर और व्यवसायियों का संघ बना था। यह संघ कारीगरी और व्यापार से संबंधित विवादों को बात-चीत से निपटाते थे। इसके अलावा पेशागत सुरक्षा की और भी संघ ध्यान रखता था। वस्तुओं की गुणगत मान और कीमत ठीक रखने का दायित्व संघ के अंतर्गत आता था। यह संघ श्रेणी, गण इत्यादि नामों से परिचित था।

कुषाण युग में पेशा निजस्व के कानून के अनुसार चलते थे, लेकिन बड़ी गड़बड़ी होने पर राजा अथवा सम्राट व्यवस्था लेते थे। श्रेणी:अथवा संघ नियमित रूप से अर्थ का लेन-देन करता था। समाज के विभिन्न प्रकार के लोग वहाँ पर अपनी अमानत के धन को जमा रखते थे। नगर अर्थ के अलावा जमीन, पेड़ इत्यादि स्थायी अमानत के रूप में भी रखा जाता था। उस जमा अमानत पर सूद भी दिया जाता था। इस अमानत के धन को विभिन्न शिल्पों को मूलधन के रूप में दिया जाता था। इस तरह श्रेणी अथवा संघ एक प्रकार से बैंक जैसा ही कार्य करता था। नर्मदा नदी के उत्तर में हीरे की खान को लेकर कुषाण, सातवाहन एवं शक-क्षत्रप के बीच लड़ाई हुआ करती थी।

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प्रश्न 27.
प्राचीन भारतीय उपमहादेश के लोगों के भोज्य-पदार्थ क्या-क्या थे ?
उत्तर :
प्राचीन भारतीय उपमहादेश के लोगों के भोज्य पदार्थ चावल, गेहूँ, जौ और शाक-सब्जियाँ थे। धनी व्यक्तियों में माँस खाने का ज्यादा प्रचलन था। मध्य वर्गीय समाज में दूध और दूध से बने विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ का प्रयोग होता था। गरीब लोग घी के बदले तेल का प्रयोग करते थे। इसके अलावा मटर, तील, मधु, गुड़, नमक इत्यादि भोज्य पदार्थ का उल्लेख मिलता है। कुछ क्षेत्रों में निरामिष भोज्य-पदार्थ का ज्यादा महत्व दिया जाता था। ऐसा कि सभी प्रकार की मछली खाने पर भी निषेधाधिकार था। दूध एवं विभिन्न प्रकार के फलों के रस से बने पानीयजल का प्रयोग ही होता था।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
जनपद _________ ग्रामीण इलाका था।
(क) कृषि आधारित
(ख) शिल्प आधारित
(ग) श्रमिक आधरित
उत्तर :
(क) कृषि आधारित

प्रश्न 2.
मौर्य युग में अर्थनीति मूलत: _________ के ऊपर निर्भर करती थी।
(क) शिल्प
(ख) कृषि
(ग) वाणिज्य
उत्तर :
(ख) कृषि

प्रश्न 3.
गुप्त और गुप्त-पश्चात् युग में धार्मिक उद्देश्यों के लिए जमीन दान को _________ व्यवस्था कहा जाता था।
(क) सामंत
(ख) सामंत
(ग) अग्रहार
उत्तर :
(ग) अग्रहार

प्रश्न 4.
गुप्त एवं पश्चात् गुप्तकाल में _________ प्रमुख फसल होती थी।
(क) धान
(ख) गेहूँ
(ग) जूट
उत्तर :
(क) धान

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प्रश्न 5.
गाथा सप्तशती ग्रन्थ का संकलन _________ ने किया था।
(क) सप्तकणा
(ख) हॉल
(ग) नहपाहन
उत्तर :
(ख) हॉल

प्रश्न .
सोलह महाजनपद के समय वस्त्र उद्योग के रूप में _________
(क) वाराणसी
(ख) मगध प्रसिद्ध था।
उत्तर :
(क) वाराणसी

प्रश्न 7.
ई० पू० _________ सदी के बाद से ही पालतू पशुओं की बलि में कमी आयी थी।
(क) चौथा
(ख) पाँचवीं
(ग) छठवीं
उत्तर :
पाँचवीं।

प्रश्न 8.
ई० पू० _________ के समय के नगरायण को द्वितीय नगरायण कहा जाता है।
(क) 400
(ख) 600
(ग) 500
उत्तर :
(ख) 600

प्रश्न 9.
सोलह महाजनपद के समय कर्यापन बहुत ही प्रचलित एक प्रकार की _________ थी।
(क) मुद्रा
(ख) लिपि
(ग) कर
उत्तर :
(क) मुद्रा

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. प्राचीनकाल में वस्त्र उद्योग का केन्द्र _________ था।
उत्तर : वाराणसी

2. इतिहास के अनुसार प्रथम नगरायण का समय _________ है।
उत्तर : ई० पू० 1600

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3. धान _________ एवं _________ काल में मुख्य फसल थी।
उत्तर : गुप्त वंश परवर्ती गुप्त

4. प्राचीनकाल में चिकित्सक को _________ कहते थे।
उत्तर : वैद्य

5. गुप्त राजा के सोने की मुद्रा का नाम _________ था।
उत्तर : दीनार

6. इतिहास के अनुसार द्वितीय नगरायण का समय _________ माना जाता है।
उत्तर : ई० पू० 600

7. मौर्यकालीन अर्थनीति मूलत: _________ पर ही निर्भर था।
उत्तर : कृषि

8. हाल ने _________ ग्रंथ का संकलन किया था।
उत्तर : गाथा सप्तशती

9. सोलह महाजनपद काल में वाराणसी _________ के लिए प्रसिद्ध था।
उत्तर : वस्त शिल्प

10. इतिहासकारों के अनुसार सुदर्शन झील जीर्णोद्धार _________ माना गया है।
उत्तर : 150 ई०

11. ई० पू० छठवीं सदी के बाद ही _________ की बली में कमी आई।
उत्तर : पालतू पशुओं

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12. मथुरा _________ दोआब अंचल का नगर है।
उत्तर : गंगा-यमुना

13. मेगास्थनीज ने पेशा के आधार _________ जातियों का उल्लेख मिलता है।
उत्तर : सात

14. मौर्य युग का प्रधान हद _________ है।
उत्तर : सुदर्शन हद

15. गुप्त युग में _________ एवं _________ पाई गई हैं।
उत्तर : सोना एवं चाँदी

सही विकल्प को चुनकर चिह्न (✓) लगाओ :

1. मौर्य युग में उत्पादित फसल का \(\frac{1}{4}\) से \(\frac{1}{6}\) भाग राजस्व के रूप में देना पड़ता था।
उत्तर : सही।

2. मौर्य युग में धनी और राजपरिवार के लोग भी धोती-चादर ही पहनते थे।
उत्तर : गलत।

3. सोलह जनपद के लोगों का प्रधान जीविका कृषि एवं पशुपालन था।
उत्तर : गलत।

4. मौर्य युग के लोगों का प्रधान जीविका कृषि एवं पशुपालन था।
उत्तर : सही।

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5. मेगास्थनीज में पेशा के आधार पर हमेशा सात जातियों का उल्लेख मिलता है।
उत्तर : सही।

6. मौर्य युग में जाति भेद प्रथा का अस्तित्व बिल्कुल भी नहीं था।
उत्तर : गलत।

7. मौर्य युग में महिलाओं को सर्वाधिक अपमान सहना पड़ता था।
उत्तर : गलत।

8. मौर्य युग में स्रियों को सैनिक में भर्ती लिया गया था।
उत्तर : सही।

निम्नलिखित कथन के साथ नीचे के व्याख्याओं में कौन-सी व्याख्या उपयुक्त है ? उसे ढूढ़कर लिखो।

1. कथन : मौर्य परवर्ती युग में बहुत सारे गिल्ड बना था।
व्याख्या : 1 : राजा ने व्यापार वाणिज्य को बढ़ाने के लिए गिल्ड बनाया था।
व्याख्या : 2 : कारीगर और व्यापारी गिल्ड बनाये थे।
व्याख्या : 3 : साधारण लोगों ने पैसों के लेन-देन और एकत्रित रखने के लिए गिल्ड बनाया था।
उत्तर :
व्याख्या : 2 : कारीगर और व्यापारी गिल्ड बनाये थे।

2. कथन : दक्षिणात्य में अच्छी किस्म की रूई की खेती होती थी।
व्याख्या : 1 : दक्षिणात्य की काली मिट्टी रूई की खेती के लिये अच्छी थी।
व्याख्या : 2 : दाक्षिणात्य के सभी किसान केवल रूई की खेती करते थे।
व्याख्या : 3: दाक्षिणात्य की जमीन पर और कोई फसल नहीं होती थी।
उत्तर :
व्याख्या : 1 : दक्षिणात्य की काली मिट्टी रूई की खेती के लिये अच्छी थी।

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) कावेरीपट्टनम बन्दरगाह (क) प्राचीन ओंडिशा
(ii) गंगा यमुना दोआब अंचल के नगर (ख) बंगाल
(iii) शिशुपाल गढ़ (ग) मथुरा
(iv) ताप्रलिप्त बन्दरगाह (घ) तमिलनाडु

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) कावेरीपट्टनम बन्दरगाह (घ) तमिलनाडु
(ii) गंगा यमुना दोआब अंचल के नगर (ग) मथुरा
(iii) शिशुपाल गढ़ (क) प्राचीन ओंडिशा
(iv) ताप्रलिप्त बन्दरगाह (ख) बंगाल

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प्रश्न 2.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) व्यापारिक संगठन (क) वन
(ii) गुप्त राजा के सोने की मुद्रा का नाम (ख) दीनार
(iii) द्वितीय चंद्रगुप्त के समय की चाँदी की मुद्रा का नाम (ग) व्यापारिक गाँव
(iv) व्यापारिक संघ (घ) रूपक

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) व्यापारिक संगठन (ग) व्यापारिक गाँव
(ii) गुप्त राजा के सोने की मुद्रा का नाम (ख) दीनार
(iii) द्वितीय चंद्रगुप्त के समय की चाँदी की मुद्रा का नाम (घ) रूपक
(iv) व्यापारिक संघ (क) वन

प्रश्न 3.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) रूद्रदमन (क) सातवाहन शासक
(ii) स्कन्दगुप्त (ख) मौर्य शासक
(iii) अशोक (ग) गुप्त शासक
(iv) हाल (घ) शक शासक

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) रूद्रदमन (घ) शक शासक
(ii) स्कन्दगुप्त (ग) गुप्त शासक
(iii) अशोक (ख) मौर्य शासक
(iv) हाल (क) सातवाहन शासक

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प्रश्न 4.

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) सूदर्शन हद (क) उत्तर भारत
(ii) गंगा-यमुना दोआब का अंचल नगर (ख) वेतन के बदलने जमीन
(iii) चमकते मिट्टी के बरतन (ग) ई० पू० छठवीं सदी
(iv) पालतु पशुओं की बलि में कमी (घ) एक से अधिक ब्राह्मण को दान
(v) रेशम मार्ग (ङ) ब्राह्मणों की प्रधानता
(vi) भोग पटिका (च) मथुरा
(vii) देवदान (छ) चीन बैक्ट्रिया होते हुए रोमन
(viii) गुप्त युग (ज) मौर्य युग का प्रमुख हद
(ix) जाति भेदक अस्तित्व कायम (झ) मौर्य युग
(x) स्कन्दगुप्त (স) गुप्त शासक

उत्तर :

स्ताम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) सूदर्शन हद (ज) मौर्य युग का प्रमुख हद
(ii) गंगा-यमुना दोआब का अंचल नगर (च) मथुरा
(iii) चमकते मिट्टी के बरतन (क) उत्तर भारत
(iv) पालतु पशुओं की बलि में कमी (ग) ई० पू० छठवीं सदी
(v) रेशम मार्ग (घ) एक से अधिक ब्राह्मण को दान
(vi) भोग पटिका (ख) वेतन के बदलने जमीन
(vii) देवदान (घ) एक से अधिक ब्राह्मण को दान
(viii) गुप्त युग (স) गुप्त शासक
(ix) जाति भेदक अस्तित्व कायम (ङ) ब्राह्मणों की प्रधानता
(x) स्कन्दगुप्त (झ) मौर्य युग

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 6 साम्राज्य विस्तार और शासन (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सातवीं शताब्दी तक)

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 History Book Solutions Chapter 6 साम्राज्य विस्तार और शासन (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सातवीं शताब्दी तक) offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Geography Chapter 6 Question Answer – साम्राज्य विस्तार और शासन (अनुमानिक ईसा पूर्व के षष्ठ शताब्दी से ईसा के सातवीं शताब्दी तक)

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
बिम्बसार कौन था ?
उत्तर :
विम्बसार मगध में हर्यक वंश का संस्थापक था।

प्रश्न 2.
छठीं शताब्दी ई० पू॰ में उत्तर में कितने महाजनपद थे?
उत्तर :
सोलह महाजनपद थे।

प्रश्न 3.
बिम्बसार की राजधानी कहाँ थी?
उत्तर :
राजगृह ।

प्रश्न 4.
नन्दवंश का संस्थापक कौन था ?
उत्तर :
महापद्मनन्द।

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प्रश्न 5.
नन्दवंश का अंतिम राजा कौन था ?
उत्तर :
धनानन्द।

प्रश्न 6.
मौर्य वंश का संस्थापक कौन था ?
उत्तर :
चन्द्रगुप्त मौर्य।

प्रश्न 7.
अलेक्जेण्डर कौन था ?
उत्तर :
मेसीडोनिया के शासक फिलिप का द्वितीय पुत्र था।

प्रश्न 8.
मौर्य वंश का सबसे श्रेष्ठ शासक कौन था ?
उत्तर :
सम्राट अशोक।

प्रश्न 9.
चन्द्रगुप्त मौर्य का राजतिलक कब हुआ था?
उत्तर :
ईसा पूर्व 321 में।

प्रश्न 10.
चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आने वाले यूनानी दूत का नाम बताइए।
उत्तर :
मेगास्थनीज।

प्रश्न 11.
मेगास्थनीज कौन था ?
उत्तर :
मेगास्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आने वाला सेल्यूकस का यूनानी राजदूत था।

प्रश्न 12.
अशोक का राज्याभिषेक कब हुआ था?
उत्तर :
269 ईसा पूर्व में।

प्रश्न 13.
अशोक ने कलिंग पर कब आक्रमण किया था ?
उत्तर :
262-61 ईसा पूर्व में।

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प्रश्न 14.
अशोक का हृदय परिवर्तन करने वाले युद्ध का नाम बताइए।
उत्तर :
कलिंग का युद्ध।

प्रश्न 15.
अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा किसने दी?
उत्तर :
आचार्य उपगुप्त।

प्रश्न 16.
अशोक ने कौन-सी उपाधियाँ धारण की?
उत्तर :
देवानाम् प्रिय और प्रियदर्शी।

प्रश्न 17.
सतवाहन वंश का संस्थापक कौन था ?
उत्तर :
सिमुक।

प्रश्न 18.
सतवाहन वंश का सबसे श्रेष्ठ शासक कौन था ?
उत्तर :
गौतमी शतकर्णी।

प्रश्न 19.
कुषाण वंश का संस्थापक कौन था ?
उत्तर :
कुजुल कदफिस प्रथम।

प्रश्न 20.
कनिष्क की राजधानी कहाँ थी ?
उत्तर :
पुरुषपुर (आधुनिक पेशावर)।

प्रश्न 21.
विक्रमादित्य की उपाधि किसने धारण की?
उत्तर :
स्कन्दगुप्त।

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प्रश्न 22.
अर्थशास्त्र के रचयिता कौन थे?
उत्तर :
कौटिल्य।

प्रश्न 23.
इण्डिया के रचयिता का नाम बताइए।
उत्तर :
मेगास्थनीज।

प्रश्न 24.
चरक संहिता की रचना किसने की?
उत्तर :
चरक ने।

प्रश्न 25.
गुप्त शासकों की राजधानी कहाँ थी?
उत्तर :
पाटलिपुत्र।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
कलिंग युद्ध के परिणाम के साथ अशोक का धम्म से क्या सम्बंध था ? धम्म उसके शासन को कितना प्रभावित किया था ?
उत्तर :
कलिंग युद्ध एवं अशोक के धम्म का संपर्क : कलिंग युद्ध के भयंकर नर-संहार को देखकर अशोक का हृदय काँप गया था। इस दृश्य को देखकर अशोक ने कभी भी किसी दूसरे राज्य पर आक्रमण नहीं करने का निर्णय लिया। उसी समय अशोक उपगुप्त नामक बौद्धभिक्षु द्वारा अहिंसा मंत्र से दीक्षित हुआ।

अशोक के शासन पर धम्म का प्रभाव : शासक के रूप में अशोक अहिंसा नीति को मानकर मौर्य शासन का संचालन करने लगा। उन्होंने युद्ध नीति के स्थान पर लोक कल्याणकारी नीति को ग्रहण किया।

प्रश्न 2.
साप्राज्य से क्या समझते हो ?
उत्तर :
साम्राज्य एक विशाल अंचल (क्षेत्र) को कहा जाता है। अनेक राज्यों को जोड़कर एक बड़ा शासन क्षेत्र होता है। वह बड़ा शासन क्षेत्र ही साम्राज्य कहलाता है।

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प्रश्न 3.
सप्राट या शासक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
साम्राज्य में जो शासन करते है उसे ही सम्राट कहते हैं।

प्रश्न 4.
भारतीय उपमहादेश में प्रथम साप्राज्य किस प्रकांर था ?
उत्तर :
जनपद से ही महाजनपद का निर्माण हुआ था। एक-एक महाजनपद ही एक-एक राज्य था। मगध महाजनपद में लगातार तीन राजवंशों ने शासन किया था। वे सब राजा ही दूसरे महाजनपदों को अधिकांशतः अपने-अपने दखल में |कया। अन्त में मगध को केन्द्र बिन्दु बनाकर ही भारत में प्रथम साम्राज्य बना और नाम मौर्य साम्राज्य पड़ा।

प्रश्न 5.
अलक्जेण्डर कौन था? वह भारत उपमहादेश में कब और किसलिए आया था?
उत्तर :
अलक्जेण्डर यूनानी शासक फिलिप का द्वितीय पुत्र था।
ईसा पूर्व 300 साल के लगभग हिन्दुकुश पर्वत को पार करके भारतीय उपमहादेश में अलक्जेण्डर ने प्रवेश किया। उपमहादेश के विभिन्न छोटे बड़े शासकों के साथ उसका युद्ध हुआ था। इन युद्धों में एंडरल पोरस के साथ हुई उसकी नड़ाई प्रसिद्ध है। पोरस की पराजय हुई लेकिन उसकी वीरता की भावना को ग्रीकों ने सम्मान दिया।
अलेक्जेण्डर प्राय: 3 साल बाद एशिया होते हुए जब ग्रीस लौट रहा था तभी रास्ते में बेवीलोन में उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 6.
चन्द्रगुप्त मौर्य के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
चन्द्रगुप्त मौर्य, मौर्य वश का संस्थापक था। उसके विषय में इतिहासकारों में मतभेद है। एक अनुश्रुति के भनुसार चन्द्रगुप्त का जन्म महापद्मनन्द की एक दासी मूरा के गर्भ से हुआ था। अनेक विद्वानों का अनुमान है कि मूरा के नाम पर ही चन्द्रगुप्त ने अपने वंश का नाम मौर्य रखा। अनेक इतिहासकारों का कहना है कि चन्द्रगुप्त अपना बाल्यकाल और किशोरावस्था अपनी माता के साथ मगध में बिताया। वह नन्द शासक धनानन्द की सेवा में था एवं अपनी योग्यता के आधार पर सेनापति के पद पर पहुँच गया था। परन्तु बाद में चन्द्रगुप्त से असंतुष्ट होकर नन्द राजा ने उसे मृत्यदण्ड दे ददया। चन्द्रगुप्त ने किसी प्रकार मगध से भागकर अपने प्राण की रक्षा की। इसी दौरान उसकी भेंट तक्षशिला के आचार्य विष्गुगुप्त या चाणक्य से हुई जो पहले से ही नन्द वंश का नाश चाहता था और दोनों ने मिलकर नन्द वंश का विनाश किया और 322 ई० पू॰ के आसपास मगध की गद्दी पर बैठा।

प्रश्न 7.
अर्थशास्त्र के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
कौटिल्य ने ‘अर्थशास्त’ की रचना की जो राजनैतिक दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। अर्थशास्त के अनुसार गक्ष्रीय शासन कार्य का प्रधान राजा होता था। उनकी बात ही अंतिम बात होती थी। जरूरत पड़ने पर राजा को छल और नालाकी भी करना पड़ता था। राज-काज के समस्त विषयों के बारे में गम्भीरता से अर्थशास्त में जिक्र है। पुस्तक मेंभी लिखा गया है – शासक को क्या-क्या करना चाहिए। लेकिन उसके सभी उपदेशों को मौर्य शासक मानते थे, ऐसी बात नहीं है।

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प्रश्न 8.
चन्द्रगुप्त मौर्य की उपलब्धियों के विषय में क्या जानते हो ?
उत्तर :
चन्द्रगुप्त मौर्य प्राचीन भारत का सर्वश्रेष्ठ राजा था।
मौर्य वंश की उपलब्धियाँ :-

  1. मौर्य वंश की स्थापना : चन्द्रगुप्त मौर्य ने धनानन्द को पराजित कर एवं उसे मारकर मौर्यवंश की स्थापना ई० पू० 324 में की।
  2. ग्रीक शासन को समाप्त करना : चन्द्रगुप्त मौर्य ने उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीक शासन को समाप्त किया।
  3. सुविशाल साप्राज्य का निर्माण : चन्द्रगुप्त मौर्य ने एक सुविशाल साम्माज्य की स्थापना की।

प्रश्न 9.
अशोक कौन था ?
उत्तर :
अशोक बिन्दुसार का पुत्र था। वह अपने पितामह चन्द्रगुप्त की भाँति वीर और पराक्रमी था। पिता की मृत्यु के पश्चात् अपने निन्याबे भाइयों की हत्या कर 268 ई० पू० गद्दी पर बैठा था।

प्रश्न 10.
कलिंग युद्ध का संक्षिप्त विवरण दीजिए :
उत्तर :
मगध के पड़ोस में ओडिशा क्षेत्र के अन्तर्गत कलिंग राज़्य था, जो स्वतंत्र एवं शक्तिशाली था। 262 ई० पू० उसने कलिंग पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध में लगभग सवा लाख व्यक्ति मारे गये और लगभग डेढ़ लाख बन्दी बनाए गए। भीषण नर संहार के कारण अशोक को युद्ध से घृणा हो गई। इस हिंसा के लिए अशोक को काफी दु:ख हुआ। कहा जाता है कि बौद्ध संन्यासी उपगुप्त ने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। बौद्ध धर्म के प्रभाव के कारण अशोक ने हिंसा को बन्द किया। युंद्ध करना भी छोड़ दिया। पशुओं को मारना भी बन्द कर दिया।

प्रश्न 11.
अशोक के साप्राज्य की सीमा क्या थी?
उत्तर :
अभिलेखों द्वारा ज्ञात होता है कि अशोक का साम्राज्य सम्पूर्ण उत्तरी भारत, पथ्चिम में अफगानिस्तान तथा बलूचिस्तान, पूर्व में बंगाल एवं कलिंग और दक्षिण-पश्चिम में सौराष्ट्र तक विकसित था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार नेपाल और कश्मीर भी अशोक के राज्य में सम्मिलित थे।

प्रश्न 12.
अशोक का धम्म क्या था ?
उत्तर :
अशोक का धम्म केवल एक धर्म न होकर आदर्श जीवन-यापन की एक रूपरेखा अथवा आचार संहिता था। उसके धम्म में सभी धर्मों का निचोड़ था। उसके धम्म का मूल आधार अहिंसा और सहिष्णुता थी।

अशोक के धम्म का उद्देश्य प्राणीमात्र का उद्धार करना था। उनके ‘धम्म’ में संसार के सभी अच्छे गुणों का समावेश है। अशोक के विचार में एक सच्चा धर्म वही होता है जिसमें बड़ों का आदर, आज्ञापालन, अहिंसा, धार्मिक सहनशीलता, सत्य, दान, सच्चे रीति-रिवाज, शुद्ध जीवन आदि सभी बातों का समावेश रहता है। भारतीय इतिहास में अशोक की महानता के मूल में उसकी विजय नहीं वरन् उनका ‘धम्म’ ही है।

प्रश्न 13.
मौर्य सम्राट गुप्तचर की नियुक्ति क्यों करते थे?
उत्तर :
साप्राज्य की खोज-खबर रखने के लिए मौर्य साम्राज्य में गुप्तचर की नियुक्ति की गई थी। विदेशी अथवा अपरिचित लोगों पर गुप्तचरों का ध्यान रहता था। राज्य कर्मचारी ऐसे थे कि राजकुमार भी इनकी दृष्टि से नहीं बच पाते। साम्राज्य की सारी खबरें सम्राट के पास पहुँच जाती थीं।

प्रश्न 14.
मेगास्थनीज की दृष्टि में पाटलिपुत्र नगर का संचालन किस तरह होता था?
उत्तर :
मेगास्थनीज के लेख से पाटलिपुत्र नगर के शासन संचालन के बारे में जानकारी मिलती है। नगर संचालन के लिए छ: दल मिलकर ही पूरे नगर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों की देख-भाल करते थे। वे मंदिर, मस्जिद, बन्दरगाह एवं वस्तुओं की कीमत को तय करते थे। नगर संचालन के कार्य के लिए सैनिक भी रहते थे।

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प्रश्न 15.
कलिंग युद्ध का क्या महत्व है?
उत्तर :
कलिंग युद्ध में हुए भीषण नरसहार को देखकर अशोक का हुदय करुणा से पसीज उठा और उसने भविष्य में कभी भी युद्ध न करने की प्रतिज्ञा की। उसने बौद्ध धर्म स्वीकार कर दिग्विजय के स्थान पर धर्म विजय की नीति को अपनाया।

प्रश्न 16.
मौर्य साग्राज्य के पतन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
मौर्य साम्राज्य के पतन के निम्नलिखित कारण थे :

  1. विशाल साम्राज्य और अयोग्य उत्तराधिकारी : मौर्य साम्राज्य इतना विशाल हो गया था कि अशोक के बाद उसके अयोग्य उत्तराधिकारी उसे सम्भाल नहीं सके जिसके कारण मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया।
  2. अशोक की अहिंसात्मक नीति : अशोक की अहिंसा की नीति मौर्य वंश के पतन का सबसे बड़ा महत्वपूर्ण कारण थी।
  3. योग्य उत्तराधिकारी का अभाव : मौर्य वंश के पतन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण योग्य उत्तराधिकारी का अभाव था। अशोक के बाद मौर्य वंश का कोई भी शासक योग्य नहीं हुआ जिसके कारण मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया।

प्रश्न 17.
मौर्यकाल में जंगल के निवासियों की स्थिति कैसी थी?
उत्तर :
मौर्य शासन विभिन्न प्रकार के लोगों को एक ही स्थान के अन्तर्गत लाना चाहते थे। लेकिन जंगल के निवासियों के प्रति उनकी सोच अन्छी नहीं थी। जंगल में जो लोग रहते थे उन्हें नीच, असभ्य और बेकार समझा जाता था। अटवी का अर्थ है – जंगल/ जो जंगल में रहते हैं, वे आटवीक हैं। कहा जाता था कि वे विभिन्न प्रकार के झमेले का सूत्रपात मौर्य साग्राज्य में करते थे। वहीं दूसरा समूह जंगल के निवासी अरण्यचर था। वे बहुत ही शांत और अच्छे थे। लेकिन जंगल के निवासियों को जनपद में नहीं रखा जाता था। गुप्तचर ऋषि के रूप में उन पर नजर रखते थे। जंगल से बहुत कुछ मिलता था। इस जंगल के ऊपर अपना कब्जा जमाना जरूरी था। पेड़ काटने अथवा पशु-पक्षी को मारने पर उन्हें द्ण्ड भी मिलेगा। ऐसी घोषणा समाट अशोक ने की थी ।

प्रश्न 18.
गंगारिदाई राज्य के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
ग्रीक और रोमन में मगध के पूर्व की ओर एक शक्तिशाली गंगारिदाई राज्य था। इस राज्य की राजधानी गंगा अथवा गांगे बन्दरगाह नगर था। राजा नन्द के शासनकाल में इस राज्य के साथ मगध के सम्पर्क की बाते ग्रीक लेखक तालमीर ने लिखा है। अलक्जेण्डर (सिकंदर) के आक्रमण के समय ही गंगारिदाई के सैनिक मगध सैनिकों के साथ जुड़े हुए थे। इस राज्य के हाथी वाहिनी और योद्धाओं की वीरता की कहानी को ग्रीक लेखको ने लिखा है। ऐसा लगता है कि गंगारिदाई राज्य को ही येरीप्लास के लेखक ने गंगादेश के रूप में उल्लेख किया है। इस राज्य के नाम से ही गंगा नदी के सम्बन्ध में उसकी स्थिति स्पष्ट होती है।

प्रश्न 19.
कौटिल्य (चाणक्य) ने अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र में राजा की दिनचर्या के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर :
कौटिल्य के अर्थशार्त के अनुसार आलसी राजा की प्रजा भी आलसी होती हैं। अगर राजा कार्य करते हैं तो प्रजा भी कार्य में व्यस्त रहेगी। इसलिए एक राजा को प्रत्येक दिन क्या-क्या करना चाहिए उसकी तालिका कौटिल्य ने नीचे दी है। 24 घण्टे को दो भागो में बाँटा गया है। प्रत्येक 12 घण्टे में आठ प्रकार के कार्य राजा को करनां चाहिए। सूर्य निकलने के बाद रात तक यह सारे कार्य संपत्न होने चाहिए।

तालिका निम्न प्रकार हैं :-

दिन रात
i) जमा एवं खर्च के हिसाब की जाँच तथा सुरक्षा व्यवस्था के बारे में खोज-खबर लेनी होगी। i) गुप्तचरों के साथ बातचीत करना।
ii) नगर और ग्राम के लोगों की सुविधा-असुविधा की बात सुनना। ii) स्नान, खाना और पढ़ाई-लिखाई करना।
iii) स्नान-खाना और पढ़ाई-लिखाई करना, आराम करना। iii) गीत सुनते-सुनते बिछावन पर सो जाना।
iv) नगद राजस्व लेना। विभित्र मंत्रियों के बीच कार्य का बंटवारा। iv) राज्य संचालन के प्रति नये-नये कार्य की रूपरेखा तैयार करना।
v) मंत्री परिषद् का परामर्श लेना, पत्र लिखना। v) सोएंगे (कुल मिलाकर 4 1/4 घण्टा सोने का समय राजा के लिए निश्चित किया गया।
vi) आराम करना अथवा अपनी इच्छानुसार कार्य करना। vi) संगीत के शब्द को सुनकर नींद से उठना। शासन की विभिन्न पद्धतियों को लेकर सोचना। क्या-क्या कार्य करना होगा, इसके बारे में भी सोच विचार करना।
vii) हाथी, घोड़ा, रथ सेना एवं सामंतों की स्थिति के बारे में जानकारी लेना। vii) मंत्रियों के साथ आलोचना करना। गुप्तचरों को विभिन्न कार्य के लिए भेजना।
viii) सेनापति के साथ युद्ध और सैनिक के बारे में आलोचना करना। viii) पुरोहितों का आशीर्वाद लेना। अपने चिकित्सक के साथ मुलाकात करना। प्रधान रसोइया एवं ज्योतिषी के साथ भी मुलाकात करना।

प्रश्न 20.
कुषाण कौन थे ?
उत्तर :
मध्य एशिया से एक यायावर समूह पश्चिम की और चले गए। वे वहाँ के अफगानिस्तान और भारतीय उपमहादेश के उत्तर-पश्चिम भाग में पहुँचे। इनमें से इडेयझी समूह सबसे महत्वपूर्ण था। इस समूह की एक शाखा कू एई सुयात थी। वे वाकट्रियार के ऊपर अधिकार कायम किए हुए थे। ये लोग ही भारतीय इतिहास में कुषाण के नाम से परिचित थे। धीरे-धीरे कुषाणों ने एक विशाल साप्राज्य का निर्माण किया।

प्रश्न 21.
कुषाण राजा कनिष्क के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
कुषाण वंश का सबसे महान शासक कनिष्क था, जो 78 ई० में शासक बना। लगभग तेईस वर्ष तक कनिष्क ने शासन किया। उसी साल से ही शताब्दी (शकाब्द) की गिनती शुरू हुई। कनिष्क के शासनकाल में कुषाण का शासन गंगा के पर्वतीय क्षेत्रों के विशाल भाग में फैल गया था। यहाँ के पाकिस्तान का प्रायः पूरा क्षेत्र ही कुषाण शासक के अन्तर्गत था। मथुरा तक भारतीय उपमहादेश में कुषाणों का शासन फैल गया था। कनिष्क की राजधानी पुरुषपुर अथवा पेशावर था। लेकिन कुषाणों का प्रधान शासन केन्द्र वाकट्रिया अथवा बलहिक प्रदेश था।

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प्रश्न 22.
कुषाण की शासन व्यवस्था के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
प्राचीन चीन के सम्राट स्वयं को देवता का पुत्र कहते थे। कुषाण वास्तव में चीन से आए थे। इसीलिए वे चीनी सम्राट की भाँति स्वयं को देवपुत्र अर्थात् देवता के पुत्र के रूप में घोषित करते थे। विम कदफिसेस विश्व बह्माण्डकर्ता की भी उपाधि लिए थे। कनिष्क ने महाराजाधिराज देवपुत्र शाही की उपाधि धारण की। कुषाणों की मुद्रा में सिर के पीछे एक प्रकार का ज्योतिर्वलय दिखाई देता था। वैसा ही ज्योतिर्वलय देवताओं के सिर के पीछे खुदाई किया जाता था।

सम्राट और देवता दोनों को एक ही समझने के लिए शासक वर्ग विभिन्न प्रकार के प्रयास करते थे। वैसा ही एक प्रयास देवकुल की प्रतिष्ठा थी। विशाल कुषाण साम्राज्य में विभिन्न प्रकार के लोग निवास करते थे। उन सभी को एकजुट करने के लिए ही शासक को देवता के रूप में प्रचार किया जाता था। देवकल मंदिर जैसा ही एक पूजा स्थान था। वहाँ पर कुषाण की मूर्ति रखी जाती थी। मथुरा में एक देवकुल था। वहाँ पर सम्राट विम की सिंहासन पर बैठी हुई मूर्ति पाई गई है। संभवतः प्रथम कनिष्क का सिर दूटा हुआ मूर्ति इसी देवकुल का था।

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कुषाण शासन में विशेष ध्यान देने की बात यह है कि यहाँ दो लोग मिलकर राजपाट चलाते थे। कुछ क्षेत्रों में यह देखा गया है कि पिता और पुत्र दोनों एक साथ शासन के कार्य करते थे। शासन व्यवस्था की सुविधा के लिए सामाज्य को कई प्रदेशों में बाँटा जाता था। इन प्रदेशों के शासक को क्षत्रप कहा जाता था।

प्रश्न 23.
सातवाहन कौन थे ?
उत्तर :
सातवाहन शासकों की जाति और कुल के विषय में निश्चित रूप से कुछ ज्ञात नहीं है। इन्हें आंध्र जाति का माना गया है जो गोदावरी तथा कृष्णा नदियों के बीच के क्षेत्र में निवास करते थे। सातवाहनों को आंध्र भृत्य भी कहा गया है क्योंकि ये मगध में नौकरी करते थे। आंध्र जाति का एक योग्य व्यक्ति सातवाहन ने दक्षिण भारत में अपना राज्य स्थापित कर गोदावरी तट पर स्थित नगर पैठन (प्रतिष्ठान) को अपनी राजधानी बनाया। उसी के नाम पर इस वश का नाम सातवाहन वंश पड़ा।

बाद में सातवाहनों ने आंध्र पर अधिकार कर अपने राज्य का विस्तार किया। प्रसिद्ध सातवाहन शासक सिंधउक या सिमुक ने मगध के कणव वंश के शासक सुशर्मा को मारकर मगध में सातवाहन शासन स्थापित किया। अधिकार करने के उपरांत उन्हें सातवाहन कहा गया। सातवाहन शासकों में गौतमी पुत्र शातकणीं सर्वश्रेष्ठ शासक था। उसने एक शासक को पराजित करने का गौरव प्राप्त किया। सातवाहनों ने 231 वर्षो तक शासन किया।

प्रश्न 24.
गौतमी पुत्र शातकर्णी पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
गौतमी पुत्र शातकर्णी सातवहान वंश का महान एवं प्रतापी राजा था। उसने 130-106 ई० पू० तक शासन किया। गौतमी पुत्र शातकर्णी महान विजेता, महान योद्धा होने के साथ-साथ महान सुधारक भी था। उसने क्षत्रियों के अहंकार को नष्ट कर ब्राह्मणों की मर्यादा बढ़ाई। नासिक अभिलेख में गौतमी पुत्र शातकर्णी की उपलब्धियों की चर्चा की गयी है। वह अपनी माता का आज्ञाकारी पुत्र था। वह एक महान विजेता के रूप में विख्यात हुआ है। उसने शक राजा नाझाम को भी बुरी तरह पराजित किया। उसने शक-यवन, पद्मव स्निरूदम की उपाधि धारण की। गौतमी पुत्र शातकर्णी को नासिक गुहा लेख में ‘त्रि समुद्रतटीय पीत वाहनस्थ’ कहा गया है जिसका अर्थ होता है उसकी सेना के वाहन तीनों समुद्रों का जल पीते थे। इससे स्पष्ट होता है कि उसके साप्राज्य की सीमाएँ अरब सागर, हिन्द महासागर और बंगाल की खाड़ी तक फैली थीं।

प्रश्न 25.
सातवाहन शासन-व्यवस्था के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
सातवाहन शासन व्यवस्था में राजा ही प्रधान होता था। इतना ही नहीं वे सेना के भी प्रधान होते थे। कुषाणों की भाँति सातवाहन के शासक भी शासन व्यवस्था की सुविधा के लिए बड़े क्षेत्रों को छोटे-छोटे प्रदेशों में विभाजित किए थे। सातवाहन शासन में प्रदेश का दायित्व अमारी नामक कर्मचारी पर रहता था। ‘भाग’ और ‘बलि’ दोनों प्रकार का वर लिया जाता था। उत्पन्न फसल का 7 / 6 भाग कर के रूप में लिया जाता था। वाणिज्यिक लेन-देन से भी कर की अदायगी किया करते थे। व्यापारियों से नकद कर सातवाहन के समय लिया जाता था। सातवाहन शासक धार्मिक प्रतिष्ठान को जमीन देने पर कर नहीं लेते थे। विशेष क्षेत्रों में कभी-कभी कर में रियायत भी दी जाती थी। मौर्य सामाज्य की भाँति सातवाहन ने भी नमक पर कर लगाया था।

राजतांत्रिक शासन के साथ-साथ अराजतांत्रिक समूह का भी शासन था। मध्य भारत और पथ्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों में अराजतांत्रिक समूह टिका हुआ था। उन्होंने स्वयं ही ताँबे की मुद्रा का प्रचलन शुरू किया। राजशक्ति के साथ एवं समूहों के साथ लड़ाई भी हुआ करती थी।

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प्रश्न 26.
गुप्त कौन थे?
उत्तर :
गुप्त वंश की उत्पत्ति के विषय में निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। बीसवीं शताब्दी के मध्य में कुषाण साम्माज्य के पतन के पश्चात् भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया। यह राजनैतिक अव्यवस्था कई वर्षो तक चलती रही। तीसरी शताब्दी के अंत तथा चौथी शताब्दी के प्रारम्भ में श्रीगुप्त का पता चलता है जो इस वंश के संस्थापक माने जाते हैं। इस वंश के सम्राट के अन्त में गुप्त लगे होने के कारण इस वंश का नाम गुप्त वंश पड़ा।

प्रश्न 27.
गुप्त साप्राज्य के राजाओं का परिचय संक्षेप में दीजिए।
उत्तर :
अनुमानत: 262 ई० के लगभग में उत्तर भारत में कुषाण शासन का अन्त हो गया। उसके भी प्रायः पचास वर्ष से भी ज्यादा समय तक उत्तर भारत में गुप्त शक्तियाँ शक्तिशाली बन रही थी।

चन्द्रगुप्त प्रथम के समय से ही गुप्त शासन की क्षमता चारों तरफ फैल गई थी। 399-330 ईस्वी में चन्द्रगुप्त प्रथम शासक बने। इस समय से ही गुप्त काल का आरंभ माना जाता है। मध्य गंगा की घाटी के आधार पर ही गुप्त साम्राज्य का विस्तार हुआ। सम्भवत: 335 ई० तक चन्द्रगुप्त प्रथम का शासन काल था।

परवर्ती शासक समुद्रगुप्त के शासनकाल में गुप्त साम्राज्य का काफी विस्तार हुआ था। आर्यावर्त के नौ शसको को समुद्र गुप्त ने पराजित किया था। जंगल अथवा आटविक राज्य भी उनके अधीन हो गया था जिसके परिणामस्वरूप पूर्व राढ़ से पथ्चिम गंगा घाटी के ऊपर के भाग तक गुप्त शासन का विस्तार हुआ। दक्षिण भाग में बारह राजाओं को समुद्रगुप्त ने पराजित किया। सुदूर दक्षिण में तमिलनाडु के उत्तर-पूर्व भाग तक गुप्त साम्राज्य का अधिकार हुआ।

समुद्रगुप्त का पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय 386 ई० के लगभग शासक बना। गुजरात क्षेत्र से शक-क्षत्रप शासको को हटाने का कार्य चन्द्रगुप्त द्वितीय ने ही किया। इसलिए उन्हें शकारि कहा गया। उनके शासनकाल में ही सबसे पहले चाँदी की मुद्रा का प्रचलन आरम्भ हुआ था। चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में गुप्त साम्राज्य की परिधि का विस्तार हुआ था।

चन्द्रगुप्त द्वितीय के पश्चात् कुमार गुप्त प्रथम समाट बना। उसके शासनकाल में गुप्त साम्राज्य की परिधि और क्षमता पहले ही जैसी थी। उसने साम्राज्य में विभिन्न प्रकार की मुद्रा का प्रचलन किया। उसके समय में ही नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। कुमार गुप्त प्रथम का पुत्र स्कन्दगुप्त इसके बाद सम्राट बना। अनुमानतः 458 ईस्वी में उपमहादेश के उत्तरपश्चिम की ओर हूणों ने आक्रमण किया। स्कंदगुप्त इसके सफलतापूर्व इस आक्रमण का मुकाबला किया। वे ही सम्भवत: अंतिम गुप्त सम्राट थे।

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प्रश्न 28.
इलाहाबाद प्रशस्ति से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
इलाहाबाद दुर्ग के भीतर एक शिलालेख है। उस लेख में गुप्त युग की बाह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में खुदाई की गई थी। इलाहाबाद के कौशाम्बी ग्राम में वह लेख था। बाद में मुगल सम्राट अकबरने उसे वहाँ से लाकर दुर्ग में रखा। इस लेख में ही प्रशस्ति की खुदाई की गई। इस लेख में सम्राट समुद्रगुप्त के युद्ध, राज-काज इत्यादि बातों को लिखा गया था।

प्रश्न 29.
चंद राजा का स्तम्भ कहाँ अवस्थित है ? उसके बारे में लिखो।
उत्तर :
दिल्ली के कुतुबमीनार के पास एक ऊँचा लोहे का स्तम्भ है। उसके ऊपर एक लेख की खुदाई की गई थी। चंद नाम के एक शक्तिशाली विष्णुभक्त राजा के युद्ध का वर्णन किया गया था। उस लेख में साल, तारीख का उल्लेख नहीं है। यह चंद राजा कौन था, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिली है। यह लेख सम्भवतः ईसा के पाँचवीं शताब्दी में ही खुदाई की गई थी। इस चंद राजा को चंद्रगुप्त द्वितीय ही माना जाता है क्योंकि लेख में उन्हीं के समकालीन असंख्य मेल होने के बावजूद जो लेख में कहा गया था कि चंद्रगुप्त द्वितीय ने सभी क्षेत्रों पर जीत हासिल नहीं की थी। यह वर्णन काफी हद तक काल्पनिक है।

प्रश्न 30.
गुप्त वंश के पतन का कारण क्या था?
उत्तर :
गुप्त साम्राज्य के पतन के लिए राज परिवार को लेकर अन्तर्द्वन्द्व एवं राजवंश की दुर्बलता एक प्रमुख कारण था। सम्राट प्रथम कुमार गुप्त की मृत्यु के बाद सम्भवतः एक संघर्ष के द्वारा स्कन्दगुप्त गद्दी पर बैठा। सत्ता को लेकर गुप्त राज्य दुर्बल हो गया जिसका लाभ उठा कर शकों और हूणों ने बार-बार गुप्त साम्राज्य पर आक्रमण किया। स्कन्द गुप्त ने विदेशी आक्रमणकर्ता को पराजित अवश्य किया परन्तु उसके बाद कोई भी योग्य और शक्तिशाली शासक नहीं हुआ जो बाहरी आक्रमणों को रोक सके, जिसके फलस्वरूप गुप्त साप्राज्य का पतन हो गया।

प्रश्न 31.
हर्षवर्द्धन कौन था?
उत्तर :
हर्षवर्द्धन पुष्यभूति वंश के शासक प्रभाकर वर्द्धन का सबसे छोटा पुत्र था। अपने बड़े भाई राजवर्द्धन की मृत्यु के बाद 16 वर्ष की आयु में वह 606 ई० में सिंहासन पर बैठा एवं 647 ई० तक शासन किया था।

प्रश्न 32.
हर्षवर्द्धन की विजय के बारे में आप क्या जानते हो?
उत्तर :
हर्ष ने बहुत ही महत्वपूर्ण विजय प्राप्त की परन्तु वह बंगाल के गौड़ शासक शशांक को कभी पराजित नहीं कर पाया। शशांक की मृत्यु के बाद ही वह आसाम के शासक भास्कर बर्मन के साथ मिलकर बंगाल पर विजय प्राप्त कर सका जिसे सम्भवतः दोनों ने आपस में बाँट लिया। इसके पश्चात् उसने मालवा को पराजित किया और उसके राज्य के भागों को अपने राज्य में मिला लिया। उसके बाद बल्लवी शासक ध्रुवसेन द्वितीय को पराजित करके हर्ष ने सूरत तक अपने राज्य का विस्तार किया। बाद में ध्रुवसेन से हर्ष ने अपनी लड़की का विवाह करके सम्बन्ध स्थापित कर लिया था। परन्तु हर्ष को दक्षिण में चालुक्य राज्य पुल्केशिन द्वितीय के विरुद्ध पराजय का मुख देखना पड़ा।

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हर्ष का साम्राज्य विस्तार : सम्भवतः जिस समय हर्ष अपनी शक्ति एवं गौरव की चरम सीमा पर था उस समय उसका साम्राज्य पूर्व में आसाम, बंगाल, बिहार एवं ओडिशा से उत्तर में पंजाब एवं उत्तर प्रदेश तक तथा मध्य एवं पश्चिमी भारत में मालवा, सूरत एवं गंजम तक विस्तृत था। उसकी जीवनी में लेखक वाणभट्ट ने यद्यपि सिंध एवं नेपाल को भी उसके साम्राज्य के अन्तर्गत बताया है।

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प्रश्न 33.
हर्षवर्द्धन के शासन प्रबंध के बारे में लिखिए ।
उत्तर :
शासन व्यवस्था के प्रधान व्यक्ति हर्षवर्द्धन स्वयं थे। उन्हें मंत्री परिषद् सहायता करती थी। इसके अलावा अमात्यों के भी हाथों में राज-काज का दायित्व रहता था। लगातार युद्ध करने के कारण ही हर्षवर्द्धन की विशाल सेनाएँ थी। हर्षवर्द्धन की सेना में 6000 हाथी, 29000 घुड़सवार एवं 100000 पैदल सेना थे।
शासन व्यवस्था के लिए आवश्यक सम्पत्ति कर से ही आती थी। जमीन से उत्पादित फसल का 1 / 6 भाग कर के रूप में लिया जाता था। इसके अलावा व्यापारियों से भी कर की वसूली की जाती थी। धार्मिक प्रतिष्ठान में बिना कर के ही जमीन का दान दिया जाता था।

प्रादेशिक शासन के क्षेत्र में गुप्त शासन की तरह बुनियादी संरचना हर्षवर्द्धन के समय भी देखी जाती है। सम्भवतः शासन-व्यवस्था को चलाने के लिए ही मंत्रियों को लेकर गठित परिषद उनकी सहायता करते थे। दूर के प्रदेशों में सामंत राजा का कोई प्रतिनिधि शासन करता था। प्रत्येक प्रदेश जिला में विभक्त था। शासन-व्यवस्था में सबसे नीचे ग्राम था। हर्षवर्द्धन की मृत्यु के पश्चात् पुष्यभूति वंश का शासन समाप्त हो गया।

प्रश्न 34.
ह्वेनसांग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
ट्वेनसांग हर्षवर्द्धन के शासनकाल में भारत आने वाला एक चीनी यात्री था। वह चीन के चिन-ल्यू नामक नगर का निवासी था। वह बौद्ध धर्म ग्रन्थों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए चीन के राजा से अनुमति लेकर 620 ई० में भारत के लिए चल पड़ा। मार्ग में अनेक मुश्किलों का सामाना करते हुए ताशकन्द, फरगना, चारकन्द, खोतान आदि राज्यों से होते हुए 630-631 ई० में वह भारत पहुँचा। ह्लेनसांग आठ वर्षो तक कन्नौज के राजा हर्षवर्द्धन के दरबार में रहा तथा उसने नालन्दा विश्धविद्यालय में बौद्ध ग्रन्थों का अध्ययन किया।

प्रश्न 35.
वाणभट्ट द्वारा रचित हर्षचरित के बारे में लिखिए ।
उत्तर :
वाणभट्ट हर्षवर्द्धन को लेकर हर्षचरित काव्य को लिखे थे। यह वास्तव में एक प्रशस्ति काव्य था। अर्थात् इस काव्य में केवल हर्ष का गुणगान ही किया गया था, साथ ही साथ पुष्यभूतियों के राजत्व और उसके इतिहास की आलोचना भी वाणभट्ट ने की। हर्ष का गुणगान करते हुए उनके विरोधियों को नीच दिखाया गया। जैसे राजा शशांक को छोटा करके दिखाने का प्रयास किया गया है। हर्षचरित वास्तव में हर्षवर्द्धन की संक्षिप्त जीवनी है। लेकिन केवल गुणगान करने के उद्देश्य से ही यह लिखा गया था।

प्रश्न 36.
हर्षवर्द्धन के बौद्ध सम्मेलन और प्रयाग दान के सम्बन्ध में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
हर्षवर्द्धन प्रत्येक वर्ष बौद्ध सम्मेलन का आयोजन करते थे, वहाँ पर वे 21 दिन तक विचार-विमर्श करते थे। जो अच्छे कार्य करते थे, उन्हें पुरस्कृत किया जाता था। गलत कार्य करने पर उन्हें राज्य से निकाल दिया जाता था।
प्रयाग में हर्ष के महादान क्षेत्र और उत्सव को लेकर सुयान जंग ने लिखा है कि महादान के क्षेत्र में बुद्ध और शिव की मूर्ति बैठाई जाती थी। आठ दिनों तक विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का दान किया जाता था जिसके फलवस्वरूप पाँच साल तक जमा की गई सम्पत्ति समाप्त हो जाती थी। सब कुछ दान करके हर्ष केवल एक पुरानी पोशाक ही पहनते थे। इसके बाद बुद्ध की पूजा करके उत्सव समाप्त होता था।

प्रश्न 37.
अशोक को सर्वश्रेष्ठ सम्राट कहा जाने का कारण क्या था?
उत्तर :
भारत तथा विश्व के इतिहास में अशोक सर्वश्रेष्ठ शासकों में से एक है :-

  1. धर्म विजेता के रूप में :- कलिंग युद्ध के बाद अशोक बौद्ध धर्म ग्रहण किया तथा उस धर्म को विश्व धर्म के रूप में स्थापित किया।
  2. लोक कल्याणकारी शासक के रूप में :- अशोक ही विश्व का पहला शासक था जो एक कल्याणकारी राष्ट्र व्यवस्था का निर्माण किया था।
  3. मानव के प्रति प्रेम : मानव जाति के प्रति अत्यधिक प्रेम तथा लगाव ने उन्हें विश्व इतिहास में स्थायी शासन दिया।
  4. कला-संस्कृति के पृष्ठपोषक :- अशोक के प्रयास से असंख्य स्तूप, स्तंभ का निर्माण हुआ एवं बाह्मी तथा खरोष्ठी लिपियों का प्रचलन हुआ।

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प्रश्न 38.
‘अशोक धम्म’ पर टिप्पणी लिखो।
उत्तर :
अशोक ने बौद्ध धर्म के साथ-साथ प्राणी मात्र के कल्याण हेतु कुछ विशेष धर्म सिद्धांतों का प्रचार किया। ये सिद्धांत सभी धर्मों के अनुकूल अर्थात् सर्व धर्म के सार रूप में थे। अशोक सभी धर्मों का आदार करता था। वह मानव के साथ-साथ समस्त-जीव-जंतुओं के सुख की कामना करता था। उसने पशुबलि पर रोक लगा दी थी। उसके राज्य में आखेट तथा मांसाहार की आज्ञा न थी। स्वयं बौद्ध होते हुए भी उसने अपनी प्रजा में सभी धर्मों के मूल तत्वों पर आधारित मानव-धर्म का प्रचार किया जिसे अशोक का धम्म कहा गया है। धम्म में नैतिक आचरण पर विशेष जोर दिया गया है।

उसमें कर्मकांड, पूजा-पाठ आदि के लिए कोई स्थान नहीं था। माता-पिता, गुरु और वृद्धों की सेवा-सुश्रुषा करना तथा उनके प्रति आदर का भाव रखना और दीन-दुखियों तथा समस्त जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का भाव प्रदर्शित करना ही धम्म के विशेष अंग थे। परोपकार, सत्य, पवित्रता, संयम और साधुता के आचरण के साथ-साथ क्रोध, अभिमान, ईष्या, कठोरता जैसे अमानवीय कार्यों का त्याग करने के उपदेश दिये जाते थे। अशोक ने उन सभी उच्च आदर्शों एवं नैतिक मूल्यों का प्रचार किया जिनसे सामान्य जन-जीवन में शांति और सुख की स्थापना हो सकती थी। अशोक का धम्म विशुद्ध मानवतावादी आचार-विचार का धर्म था।

प्रश्न 39.
मौर्य सम्राट अपना साम्राज्य कैसे चलाते थे?
उत्तर :
विशाल साम्राज्य को चलाने के लिए सम्राट प्रजा से कर लेते थे। मौर्य ने ही सबसे पहले राजस्व अथवा कर व्यवस्था को लागू करवाया। राजस्व का सबसे ज्यादा आदायगी कृषि से ही होता था। किसान अपनी फसल के 1 / 6 भाग राजस्व के रूप में देते थे। बलि और भाग नाम की दो प्रकार की भूमि राजस्व मौर्य के शासन काल में आरंभ-हुआ लेकिन सम्माट अपनी इच्छानुसार कर में छूट भी देते थे। गौतम बुद्ध का जन्मस्थान लुंबनी ग्राम में वलि कर में सम्राट अशोक ने छूट दी थी। कारीगर, व्यवसायी, व्यापारी, सभी से मौर्य प्रशासन कर की अदायगी करता था। लेकिन पाटलिपुत्र में बैठकर विशाल साम्राज्य पर शासन करना संभव नहीं था।

उस साम्राज्य के विभिन्न प्रदेशों में शासन कार्य की देखभाल करने के संबंध में सम्राट को सोचना पड़ता था। प्रदेश के नीचे जिला प्रशासन था। जिला प्रशासन को आहार कहा जाता था। इस प्रकार से सम्राट और उसके नीचे राजकर्मचारियों के विभिन्न स्तर भाग शासन व्यवस्था में देखा गया है। साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की भाषा भी अलग थी। उसी बात को ध्यान में रखकर ही सम्राट के वक्तव्य को विभिन्न भाषाओं में प्रचारित किया जाता था। साम्राज्य के उत्तर भाग में पालि भाषा का प्रयोग होता था। वहीं दूसरी ओर दक्षिण भाग में संस्कृत भाषा में प्रचार होता था।

केवल कर्मचारी, सेना एवं गुप्तचर के ऊपर ही मौर्य साम्राज्य की नींव टिकी हुई नहीं थी। मौर्य सम्राट अशोक ने अपने धम्मनीति अथवा धर्म नीति से जनता को एकजुट करने का प्रयास किया। कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने और कोई दूसरा युद्ध नहीं किया। हिंसा के बदले शांति की नीति को उन्होंने अपनाया। बौद्ध रीति-नीति का उन पर प्रभाव पड़ा था, मनुष्य और पशु-पक्षी के ऊपर हिंसा को रोकने के लिए अशोक ने प्रयास किए। साम्राज्य के सभी जगह उन्होंने धम्म की बातों को पहुँचाया था।

प्रश्न 40.
कुषाण सप्राट कनिष्क की उपलब्धियों का संक्षेप में वर्णन करो :-
उत्तर :
कनिष्क की उपलब्धियाँ :-
राज्य विजय : कनिष्क पाटलिपुत्र, गांधार, पुरुषपुर के अलावा मध्य एशिया के काशगर, यारकंद, खोतान इत्यादि देशों पर विजय अभियान चलाकर अधिकार स्थापित किया।
बौद्ध धर्म के प्रति लगाव :- बौद्ध धर्म के पृष्ठपोषक के रूप में कनिष्क ने पुराने बौद्ध मठ, विहार का जीर्णोद्धार किया तथा बहुत से नये बौद्ध मठ, स्तूप का निर्माण किया।
साहित्य एवं कला के पोषक :- कनिष्क महान साहित्य-प्रेमी था। उसके दरबार में बड़े-बड़े विद्वान रहते थे। इनमें चरक और कनिष्क के मंत्री माठर अधिक प्रसिद्ध हैं। महान कवि और नाटककार अश्वघोष भी कनिष्क के दरबार में रहते थे। कनिष्क कला का भी महान-प्रेमी था। कश्मीर में उसने एक नगर स्थापित किया। उसने अनेक बौद्ध मठों एवं स्तम्भों का निर्माण कराया। कनिष्क के शासनकाल में गांधार कला एवं मधुरा कला का भी विकास हुआ।
विदेशियों के साथ संपर्क : कनिष्क के शासनकाल में भारत-चीन, भारत-रोम संपर्क में उन्नति दिखाई पड़ी थी तथा जापान, मिस्र, ग्रीस के साथ भारत का सम्मर्क स्थापित हुआ था।

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प्रश्न 41.
मौर्यकालीन कला एवं साहित्य का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
कला :- मौर्यकालीन कला अभूतपूर्व थी। अशोक से पूर्व कला कृतियों में प्राय: ईंट एवं लकड़ी का प्रयोग होता था। चन्द्रगुप्त का राज प्रसाद भी प्रमुखतः लकड़ी का बना होता था। परन्तु अशोक ने पाषाण का प्रयोग प्रारम्भ किया। मौर्यकालीन कला पर ईरानी एवं यूनानी कला का प्रभाव अवश्य था। परन्तु वह केवल उनकी नकल मात्र नहीं थी।
वस्त्र निर्माण कला इस युग में समुन्रत थी। इस युग में हाथी दाँत की वस्तुएं व आभूषण के निर्माण की कला अत्यन्त विकसित थी। अशोक ने स्तूपों, विहारों, मठों एवं लाटों का निर्माण कराया। बौद्ध अनुश्रुतियों के अनुसार अशोक ने 84 हजार स्तूपों का निर्माण करवाया था जो भारत के विभिन्न भागों में विद्यमान थे। अशोक द्वारा निर्मित भरहुत तथा सांची के स्तूप, प्रयाग, सारनाथ तथा नन्दनगढ़ मौर्य कला के अनुपम उदाहरण हैं।

साहित्य :- मौर्यकाल में साहित्य का भी पर्याप्त विकास हुआ। कौटिल्य का अर्थशाख्त पाणिनी का व्याकरण मेगास्थनीज की इंडिका, त्रिपिटक आदि मौर्य युग के प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं।

प्रश्न 42.
कनिष्क ने बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए क्या-क्या प्रयत्न किया?
उत्तर :
वास्तव में कनिष्क का महत्व एक शासक और विजेता की अपेक्षा अपने धर्म प्रचार, भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के प्रति प्रेम के कारण अधिक था। विद्वान ऐसा मानते हैं कि कनिष्क पहले यूनानी धर्म का अनुयायी था। उसकी मुद्राओं पर यूनानी देवता, सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि और सर्वाधिक रूप में बुद्ध के चित्र मिलते हैं। बौद्ध दार्शनिक अश्चघोष के सम्पर्क में आकर वह बौद्ध धर्म चीन, तिब्बत, जापान और मध्य एशिया के अनेक देशों में फैल गया। बौद्ध धर्म के मतभेद को मिटाने के लिए कनिष्क ने कश्मीर में चौथी सभा का विराट आयोजन किया था। कनिष्क ने अशोक की भांति बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अनेक प्रकार के उपाय और प्रयास किए। इसके समय में गांधार बौद्ध धर्म का प्रमुख केन्द्र बन गया था। ‘तक्षशिला’ विश्व विद्यालय शिक्षा और ज्ञान का केन्द्र बन गया था।

प्रश्न 43.
कलिंगराज खारबेल हाथी गुफा के शिलालेख के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में कलिंग मौर्य साम्राज्य के अन्तर्गत था। मौर्यों के पश्चात् कलिंग पुन: स्वाधीन हो गया। चेदी वंश के शासको ने कलिंग पर शासन करना आरम्भ किया। इस वंश के शासक खारबेल कलिंग का प्रथम शक्तिशाली राजा था। ईसा पू० की प्रथम शताब्दी के अन्त तक खारबेल का शासन था। हाथी गुफा के शिलालेख से खारबेल के बारे में जानकारी मिलती हैं। इस शिलालेख में ही ‘भारतवर्ष’ शब्द का प्रयोग किया गया। लेकिन वहाँ पर भारतवर्ष का मतलब सम्भवतः गंगा के पर्वतीय क्षेत्र का एक भाग समझा जाता था। लेकिन ईशा के प्रथम शताब्दी के प्रथम में ही चेदियों का शासन समाप्त हो गया था।

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प्रश्न 44.
नासिक लेख का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
महाराष्ट्र के नासिक से दो लेख मिला है। पहला गौतमी पुत्र सतकर्णी के शासनकाल के 18 वर्ष, दूसरा 24. वर्ष के शको को ध्वंस कर के गौतमीपुत्र सातवाहन के खोए हुए गौरव को वापस पाने का उल्लेख मिलता है। ऐसा लगता है कि वे पुन: नासिक क्षेत्र पर शासन किए थे। मुद्रा से भी इस बात का प्रमाण मिला है। पश्चिम की घाटी से पूर्व की घाटी तक पूरे दक्षिणात्य में अपना अधिकार कायम किए थे। शक क्षेत्र महपान के विरुद्ध सफल होने के बावजूद कादेमक वंश के शक राजा चष्टनेर से गौतमी पुत्र सतकर्णी पराजित हो गए थे।

प्रश्न 45.
मौर्य वंश की सामाजिक दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कौटिल्य के अर्थशास्र एवं मेगास्थनीज के वर्णन से मौर्यकालकी सामाजिक दशा की जानकारी मिलती है।
वर्णाश्रम और वर्ण व्यवस्था :- इस काल में बाह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र चार जातियाँ थी तथा बह्मचर्य गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास चार आश्रम थे। धीरे -धीरे वर्ण व्यवस्था कठोर तथा शूद्रों एवं दासों की स्थिति खराब होने लगी थी। मेगास्थनीज ने दार्शनिक, वणिक, शिल्पी, सैनिक, गोपालक, निरकक्षक तथा गुप्तचर नामक सात जातियों का उल्लेख किया है।
स्त्रियों की दशा :- इस काल में स्रियों के सम्मान तथा शिक्षा का कम प्रचार था। पर्दा प्रथा का प्रचलन था। खियों को पुनर्विवाह करने की स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी।
विवाह व्यवस्था :- कौटिल्य के अनुसार समाज में ब्राह्मण, शौल्क, प्रजापत्य, देव, गन्धर्व, असुर, राक्षस और पैशाच नामक आठ विवाह पद्धतियाँ प्रचलित थी।
खान-पान एवं वेश-भूषा :- लोगों का खान-पान और वस्त सादा था। सामान्त और कुलीन लोग सोने-चाँदी के तारों से जड़े रेशमी वस्र पहनते थे। माँस भक्षण तथा मदिरा सेवन आदि सीमित मात्रा में होता था।
आमोद-प्रमोद :- रथदौड़, घुड़दौड़, मल्लयुद्ध, उत्सव, मेला, जुआ आदि मनोरंजन के प्रमुख साधन थे। शतरंज और आखेट द्वारा भी मनोरंजन होता था।
जन-जीवन :- संयुक्त परिवार का प्रचलन था। लोगों का नैतिक जीवन उच्च था। दण्ड व्यवस्था बहुत कठोर थी।

प्रश्न 46.
राज्यश्री कौन थी ? आप इसके बारे में क्या जानते हैं ?
उत्तर :
राज्यश्री प्रकाकर वर्द्धन की पुत्री और राज्यवर्द्धन एवं हर्षवर्द्धन की बहन थी। राजश्री का विवाह मौरवी नरेश ग्रहवर्मन के साथ हुआ था। इस वैवाहिक सम्बन्ध ने दोनों राज्यों की स्थिति को मजबूत बना दिया। प्रभाकर-वर्द्धन की मृत्यु के बाद शशांक ने मालवा के राजा देवगुप्त की सहायता से कन्नौज पर आक्रमण कर दिया एवं ग्रह वर्द्धन की हत्या कर उसकी पत्नी राज्यश्री को कैद कर लिया। यह समाचार सुन कर राज्यवर्द्धन ने राज्यश्री को मुक्त कराने के लिए कन्नौज पहुंचा लेकिन शशांक ने धीखे से राज्यवर्द्धन की हत्या कर दी। राज्यवर्द्धन की मृत्यु के बाद हर्षवर्द्धन ने राज्यश्री को विन्ध्य के जंगलों में ढूँढने में सफल हो गया। तत्पश्चात वह राज्यश्री को लेकर कन्नौज गया तो शशांक कन्नौज छोड़ चुका था। यहाँ राज्यश्री तथा कन्नौज के मंत्रियों के विशेष अनुरोध पर हर्षवर्द्धन ने कन्नौज का शासन भार भी ग्रहण कर लिया तथा कन्नौज को ही अपनी राजधानी बनाया।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
छठीं सदी में ही __________ की शक्ति क्रमशः कमजोर होने लगी थी।
(क) मौर्य
(ख) कुषाण
(ग) गुप्त
उत्तर :
(ग) गुप्त।

प्रश्न 2.
कनिष्क __________ ई० में शासक हुए।
(क) 72
(ख) 75
(ग) 78
उत्तर :
(ग) 78

प्रश्न 3.
ग्रीक शासक सेल्यूकस के दूत के रूप में __________ कन्धार से पाटलीपुत्र के दरबार में गए।
(क) मेगास्थनीज
(ख) सुयाना
(ग) जांग
उत्तर :
(क) मेगास्थनीज।

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प्रश्न 4.
अर्थशास्त्र ग्रन्थ की रचना __________ ने की थी।
(क) कल्हण
(ख) कौटिल्य
(ग) तुलसी दास
उत्तर :
(ख) कौटिल्य।

प्रश्न 5.
शिलादित्य की उपाधि __________ ने ग्रहण किया था।
(क) हर्षवर्द्धन
(ख) अशोक
(ग) समुद्रगुप्त
उत्तर :
(क) हर्षवर्धन।

प्रश्न 6.
गुप्त शासक __________ के समय से ही गुप्तवंश की शक्ति कमजोर होने लगी।
(क) समुद्रगुप्त
(ख) प्रथम कुमार गुप्त
(ग) स्कंदगुप्त
उत्तर :
(ख) प्रथम कुमार गुप्त।

प्रश्न 7.
हर्षवर्द्धन के समय भूमि में उत्पादित फसल का __________ हिस्सा कर के रूपमें लिया करते थे।
(क) \(\frac{1}{2}\)
(ख) \(\frac{1}{4}\)
(ग) \(\frac{1}{6}\)
उत्तर :
\(\frac{1}{6}\)

प्रश्न 8.
__________ धर्म के प्रभाव के कारण अशोक ने हिंसा का त्याग किया था।
(क) शैव
(ख) बौद्ध
(ग) जैन
उत्तर :
(ख) बौद्ध

प्रश्न 9.
भारतीय उपमहादेश में पहली बार सोने की मुद्रा का प्रचलन __________ ने किया था।
(क) विम कदफिस
(ख) कनिष्क
(ग) स्कंदगुप्त
उत्तर :
(क) विम कदफिस

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प्रश्न 10.
__________ युग का इतिहास जानने का एकमात्र साधन अर्थशाख्त्र है।
(क) मौर्य
(ख) कुषाण
(ग) गुप्त
उत्तर :
(क) मौर्य

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. सप्राट __________ पर शासन करते हैं।
उत्तर : साप्राज्य

2. बौद्ध धर्म के प्रभाव से सम्राट अशोक ने __________ का त्याग दिया।
उत्तर : हिंसा

3. गुप्त की शक्ति __________ शदी से ही क्रमशः कमजोर होने लगी।
उत्तर : छठवीं।

4. हर्षवर्द्धन ने __________ की उपाधि ग्रहण की।
उत्तर : शिलादित्य

5. 605 ई० में __________ सिंहासन पर बैठे थे।
उत्तर : हर्षवर्द्धन

6. __________ के शासनकाल में नालन्दा महाविद्यालय स्थापित हुआ था।
उत्तर : गुप्त शासक प्रथम कुमार गुप्त

7. गुप्त सप्राट स्कंदगुप्त के समय से ही गुप्तवंश की शक्ति __________ होने लगी।
उत्तर : कमजोर।

8. मौर्य साप्राज्य ही __________ उपमहादेश में पहला साप्राज्य था।
उत्तर : भारत

9. 78 ई० में __________ शासक हुए।
उत्तर : कनिष्क

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10. अशोक के सिंहासनारोहण का समय __________ ई० है।
उत्तर : 273 ई०

11. कनिष्क के सिंहासनारोहण का समय __________ है।
उत्तर : 78 ई०

12. हर्षवर्द्धन की राजधानी __________ थी।
उत्तर : थानेश्वर

13. कनिष्क की राजधानी __________ थी।
उत्तर : पुरुषपुर

14. ________ की राजधानी पेशावर थी।
उत्तर : गौतमीपुत्र सतकर्णी

15. कुषाण साप्राज्य की स्थापना __________ ने की थी ।
उत्तर : कुजुल कदफिस

16. मौर्यवंश के श्रेष्ठ शासक __________ थे।
उत्तर : सम्राट अशोक

17. गुप्त वंश के श्रेष्ठ शासक __________ थे।
उत्तर : समुद्रगुप्त

18. हर्षवर्द्धन की मृत्यु के बाद __________ शासन समाप्त हो गया।
उत्तर : पुष्य भूति

इन वाक्यों में से सही वाक्य के सामने (सही) एवं गलत वाक्यों के सामने (गलत) लिखो :

1. सेल्यूकस और चन्द्रगुप्त मौर्य के बीच हमेशा शत्रुता थी।
उत्तर : सही।

2. मौर्य शासन काल में महिला को भी महामातेर का दायित्व मिलता था।
उत्तर : सही।

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3. कुषाण इस देश के ही नागरिक थे।
उत्तर : गलत।

असमानता वाले शब्द को ढूंढ़कर लिखिए :-

  1. गंगा, गोदावरी, कावेरी, काशी।
  2. वाराणसी, वैशाली, कृष्णा, उज्ज्यनी।
  3. चालुक्य, गुप्त, चोल, पल्लव।
  4. स्कंद गुप्त, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त मौर्य, प्रथम चन्द्रगुप्त।
  5. लड़ाई, संघर्ष, युद्ध, संधि।
  6. चंद्रगुप्त मौर्य, कुजुल कदफिस, सिमुक, समुद्रगुप्त।
  7. सम्राट, राजा, मंत्री, सुल्तान।

उत्तर :

  1. काशी
  2. कृष्णा
  3. गुप्त
  4. चन्द्रगुप्त मौर्य
  5. संधि
  6. सिमुक
  7. मंत्री।

नीचे दिए गई विवृति के साथ कौन सी व्याख्या सबसे ज्यादा सटीक है, उसे चुनकर लिखो :

1. विवृति : अशोक ने अपने साप्राज्य में पशु हत्या को बन्द किया था।
व्याख्या 1 : अपने राज्य में पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए।
व्याख्या 2 : धम्म का अनुसरण करने के लिए।
व्याख्या 3 : पशु व्यापार बढ़ाने के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 2 : धम्म का अनुसरण करने के लिए।

2. विवृति : कुषाण सम्राट अपनी मूर्ति देवालयों में रखते थे।
व्याख्या 1 : वे देवता के वंशधर थे।
व्याख्या 2 : वे प्रजा के सामने स्वयं को देवता जैसा ही सम्मानीय के रूप में उपस्थित करते थे।
व्याख्या 3 : वे देवताओं की काफी भक्ति करते थे।
उत्तर :
व्याख्या 2 : वे प्रजा के सामने स्वयं को देवता जैसा ही सम्मानीय के रूप में उपस्थित करते थे।

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3. विवृति : गुप्त सम्राट बड़ी-बड़ी उपाधियाँ लेते थे।
व्याख्या 1 : उपाधि सुनने में अच्छा लगता था।
व्याख्या 2 : प्रजा देती थी।
व्याख्या 3 : सम्राट इसके जरिए अपनी विशाल क्षमता का प्रदर्शन करते थे।
उत्तर :
व्याख्या 3 : सम्राट इसके जरिए अपनी विशाल क्षमता का प्रदर्शन करते थे।

4. विवृति : सुयान जांग चीन से भारतीय उपमहादेश में आए थे।
व्याख्या 1 : भारतीय उपमहादेश घूमने के लिए।
व्याख्या 2 : हर्षवर्धन के शासन के विषय में पुस्तक लिखने के लिए।
व्याख्या 3 : बौद्ध धर्म के बारे में और अधिक पढ़ाई-लिखाई करने के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 2 : हर्षवर्धन के शासन के विषय में पुस्तक लिखने के लिए।

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) गौतमीपुत्र सतकर्णी की राजधानी (क) थानेश्वर
(ii) कनिष्क की राजधानी (ख) पेशावर
(iii) हर्षवर्द्धन की राजधानी (ग) पुरुषपुर
(iv) अशोक की राजधानी (घ) पाटलिपुत्र

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) गौतमीपुत्र सतकर्णी की राजधानी (ख) पेशावर
(ii) कनिष्क की राजधानी (ग) पुरुषपुर
(iii) हर्षवर्द्धन की राजधानी (क) थानेश्वर
(iv) अशोक की राजधानी (घ) पाटलिपुत्र

प्रश्न 2.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) सतवाहन साम्राज्य की स्थापना (क) सिमुक
(ii) मौर्य साम्राज्य की स्थापना (ख) श्रीगुप्त
(iii) गुप्त साम्माज्य की स्थापना (ग) चन्द्रगुप्त मौर्य
(iv) कुषाण सम्राज्य की स्थापना (घ) कुजुल कदफिस

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) सतवाहन साम्राज्य की स्थापना (क) सिमुक
(ii) मौर्य साम्राज्य की स्थापना (ग) चन्द्रगुप्त मौर्य
(iii) गुप्त साम्माज्य की स्थापना (ख) श्रीगुप्त
(iv) कुषाण सम्राज्य की स्थापना (घ) कुजुल कदफिस

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प्रश्न 3.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) साम्राज्य पर शासन करने वाला (क) अर्थशास्त
(ii) कौटिल्य की रचना (ख) गुप्त सम्माट
(iii) अशोक (ग) पाटलिपुत्र
(iv) समुद्रगुप्त (घ) सम्राट
(v) गुप्त सम्राज्य के स्थापक (ङ) हर्षवर्द्धन की राजधानी
(vi) सम्राट अशोक की राजधानी (च) हर्षवर्द्धन
(vii) शिलादित्य की उपाधि (छ) 606 ई०
(viii) थानेश्वर (ज)78 ई०
(ix) हर्षवर्द्धन का सिंहासनारोहण (झ) चन्द्रगुप्त मौर्य
(x) कनिष्क को सम्राट पद प्राप्ति (অ) मौर्य सम्राट

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) साम्राज्य पर शासन करने वाला (क) अर्थशास्त
(ii) कौटिल्य की रचना (ख) गुप्त सम्माट
(iii) अशोक (ग) पाटलिपुत्र
(iv) समुद्रगुप्त (घ) सम्राट
(v) गुप्त सम्राज्य के स्थापक (ङ) हर्षवर्द्धन की राजधानी
(vi) सम्राट अशोक की राजधानी (च) हर्षवर्द्धन
(vii) शिलादित्य की उपाधि (छ) 606 ई०
(viii) थानेश्वर (ज)78 ई०
(ix) हर्षवर्द्धन का सिंहासनारोहण (झ) चन्द्रगुप्त मौर्य
(x) कनिष्क को सम्राट पद प्राप्ति (অ) मौर्य सम्राट

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 5 ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी के भारतीय उपमहादेश (राष्ट्र व्यवस्था और धर्म का विवर्तन उत्तर भारत)

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 History Book Solutions Chapter 5 ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी के भारतीय उपमहादेश (राष्ट्र व्यवस्था और धर्म का विवर्तन उत्तर भारत) offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Geography Chapter 5 Question Answer – ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी के भारतीय उपमहादेश (राष्ट्र व्यवस्था और धर्म का विवर्तन उत्तर भारत)

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
महावीर का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
महावीर का जन्म 599 ई० पू-० वेशाली के निकट ‘कुण्डग्राम’ के एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था।

प्रश्न 2.
बुद्ध का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर :
बुद्ध का जन्म 566 ई० पू॰ में कपिलवस्तु के निकट ‘लुम्बनी’ नामक स्थान पर हुआ था।

प्रश्न 3.
महावीर की मृत्यु कब और कहाँ हुई ?
उत्तर :
महावीर स्वामी की मृत्यु 72 वर्ष की आयु में नालन्दा जिले के पावापुरी नामक स्थान पर 468 ई० पू॰ में हुई थी।

प्रश्न 4.
बुद्ध की मृत्यु कब और कहाँ हुई ?
उत्तर :
गौतम बुद्ध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर नामक स्थान पर 486 ई० पू॰ में हुई।

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प्रश्न 5.
बुद्ध द्वारा चलाये गए धर्म का क्या नाम था? बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश कहाँ दिया?
उत्तर :
बुद्ध द्वारा चलाये गये धर्म का नाम ‘बौद्ध धर्म’ था। बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में अपने पाँच पुराने शिष्यों को दिया था ।

प्रश्न 6.
तीर्थकर के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
जैन धर्म के प्रचारक तीर्थकर कहे जाते हैं।

प्रश्न 7.
जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर कौन थे?
उत्तर :
जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेवजी थे।

प्रश्न 8.
जैन धर्म के दो सम्प्रदाय कौन-कौन हैं?
उत्तर :
जैन धर्म के दो सम्पदाय (i) दिगम्बर और (ii) श्वेताम्बर हैं।

प्रश्न 9.
बौद्ध धर्म के दो भाग कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
बौद्ध धर्म के दो सम्पदाय (i) हीनयान और (ii) महायान हैं।

प्रश्न 10.
छठी शताब्दी ई० पू॰ के भारत के दो धार्मिक सुधारकों के नाम बताइए।
उत्तर :
छठी शताब्दी ई० पू० के भारत के दो धार्मिक सुधारकों के नाम महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध हैं।

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प्रश्न 11.
पार्श्वनाथ कौन थे?
उत्तर :
पार्श्वनाथ काशी के इक्ष्वाकु वंश के राजा अश्वसेन के पुंत्र थे। ये जैन धर्म के तेईसवें तीर्थकर थे।

प्रश्न 12.
दसशील क्या है?
उत्तर :
भगवान बुद्ध ने जीवन की नैतिकता और आचरण की पवित्रता को बनाये रखने के लिये दस नियम बनाए जिसे दसशील कहा जाता है।

विस्तृत उत्तर वालें प्रश्न (Detailed Answer Questions) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
जनपद से सोलह महाजनपद एवं उससे मगध राज्य कैसे बना ? उसे पिरामिड के आकार में दिखाओं।
उत्तर :
प्राचीन भारत में ग्राम से बड़े अंचल को जन कहा जाता था। उसी जन को केंद्र्र बनाकर छोटे-छोटे राज्य बने थे। इसी प्रकार से जन से जनपद शब्द बना था। छठवीं शताब्दी के अंत में भारतीय उपमहादेश में इस प्रकार बहुत सारे जनपदों के बारे में जानकारी मिलती हैं। वहाँ के जनपद अधिकांशत: वहाँ के शासक वंश के नाम से ही परिचित होते थे। इन जनपदों के आधार पर ही बाद में बड़े-बड़े राज्य बने थे। मगध जैसे कुछ जनपद धीरे-धीरे महाजनपद के रूप में परिणत हुए।

प्रश्न 2.
जनपद से महाजनपद कैसे बना ?
उत्तर :
प्राचीन भारत में ग्राम से बड़े अंचल को जन कहा जाता था। उसी जन को केन्द्र बनाकर छोटा-छोटा राज्य बना था। इसी प्रकार से जन से जनपद शब्द बना था। वहीं दूसरी ओर जहाँ साधारण लोग अथवा जनपद निवास करते थे, उन्हें जनपद् कहा जाता था।

छठवीं शताब्दी के अन्त में भारतीय उपमहाद्वीप में इस प्रकार बहुत सारे जनपदों के बारे में जानकारी मिलती हैं। वहाँ के जनपद अधिकांशत: वहाँ के शासक वंश के नाम से परिचित होते थे। इन जनपदों के आधार पर ही बाद में बड़ा-बड़ा राज्य बना था, जैसे – मगध। कुछ जनपद धीरे-धीरे महाजनपद के रूप में परिणत होते चले गए।

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प्रश्न 3.
सोलह-महाजनपद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :-
उत्तर :
ईसा से लगभग 600 वर्ष पूर्व उत्तर भारत में 16 महाजनपदों का नाम पाया जाता है जो निम्न हैं :-

  • अंग (उत्तर-पूर्व बिहार)
  • मगध (आधुनिक बिहार के गया और पटना के क्षेत्र)
  • काशी (वर्तमान वाराणसी का समीपवर्ती क्षेत्र)
  • कौशल (वर्तमान अवध)
  • कुरु (दिल्ली के आसपास का क्षेत्र)
  • पांचाल (रुहेलखण्ड)
  • मत्स्य (जयपुर के आसपास का क्षेत्र)
  • शूरसेन (मधुरा का क्षेत्र)
  • अस्मक (दक्षिण गोदावरी का क्षेत्र)
  • अवन्ति (मध्य प्रदेश तथा मालवा का क्षेत्र)
  • गांधार (पेशावर, रावलपिंडी तथा कश्मीर के अंश)
  • कम्बोज (गांधार के पास कश्मीर का दक्षिण-पश्चिमी भाग)
  • बज्जि (उत्तरी बिहार)
  • मल्ल (गोरखपुर)
  • चेदि (बुन्देलखष्ड क्षेत्र)
  • वत्स (इलाहाबाद के पास यमुना का दक्षिणी क्षेत्र)।

प्रश्न 4.
महाजनपदों में मगध के शक्तिशाली होने का कारण क्या था?
उत्तर :
मगध राज नदी और पहाड़ों से घिरा हुआ था। फलस्वरूप बाहरी आक्रमण से मगध सहज ही बच सकता था। गंगा नदी की गीली मिट्टी ने इस क्षेत्र की कृषि जमीन को उर्वरा बनाया था। मगध क्षेत्र के घने जंगल में अनेक हाथी मिलते थे। उन हाथियों को मगध के राजा युद्ध के समय व्यवहार करते थे। साथ ही साथ वहाँ पर अनेक लोहा और ताँबा की खान भी थी। फलस्वरूप मगध के राजा सहज ही लोहा के अस्त्र-शस्त का प्रयोग करते थे। जल और स्थल मार्ग से मगध का व्यापार होता था। इन सभी सुविधाओं के कारण ही मगध अंत तक सबसे शक्तिशाली महाजनपद के रूप में परिणत हुआ।

प्रश्न 5.
समाज के कौन-कौन से वर्ग के लोगों ने धर्म-आंदोलन का समर्थन किया था और क्यों?
उत्तर :
ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में धर्म के नाम पर आडम्बर, यज्ञ, अनुष्ठान, जाति भेद इत्यादि बढ़ गया था। इसी के प्रतिवाद स्वरूप धर्म-आन्दोलन की शुरुआत हुई थी।
आंदोलन का समर्थन : समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग जिसमें व्यापारी, कारीगर, कृषक आदि थे, ने इस धर्म आंदोलन का समर्थन किया था।
समर्थन का कारण : ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में देश में यातायात व्यवस्था बहुत सुरक्षित नहीं था, फलस्वरूप व्यापारी वर्ग क्षुब्ध थे। यज्ञ के समय पशुबलि को किसानों के लिए मानना सम्भव नहीं था। दूसरी तरफ क्षत्रियों की क्षमता में वृद्धि होने के कारण वे बाह्मणों की क्षमता को सहन नहीं कर सके।

प्रश्न 6.
बज्जियों की उन्नति के साथ किए गए नियम कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
बज्जियों की उन्नति के नियम निम्नलिखित हैं :-

  1. बज्जियों को प्राय: सभा करके राज्य चलाना।
  2. बज्जियों को सभी कार्य सबको एकजुट होकर करना।
  3. बज्जियों को अपने द्वारा बनाए गए नियम के अनुसार ही चलना ।
  4. बज्जी समाज को वयस्क व्यक्तियों की बात को सुनकर चलना होगा और उनका सम्मान करना होगा।
  5. अपने क्षेत्र के पेड़-पौधे और पशु-पक्षियों के ऊपर अत्याचार नहीं करना होगा।

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प्रश्न 7.
बर्द्धमान महावीर का जीवन परिचय लिखिए।
उत्तर :
महावीर स्वामी का जन्म 540 ई० पू॰ (कुछ इतिहासकारों के अनुसार 599 ई० पू॰) में वैशाली के निकट कुण्डग्राम में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। इनके बचनप का नाम बर्द्धमान था। उनका विवाह यशोदा नामक युवती से हुआ एवं प्रियदर्शन नामक पुत्री भी उत्पन्न हुई। 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर ये भिक्षुक बन गये। 13 वर्ष तक तपस्या के पश्चात् अपने वस्त्रों का भी परित्याग कर दिया। 12 वर्ष तक तपस्या के पश्चात् ॠुु पालिका नदी के किनारे जुम्भिक ग्राम में साल के वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। इन्द्रियों को जीत लेने के कारण जैन कहलाये एवं महावीर के नाम से विख्यात हुए। महावीर के अनुयायी जैन कहलाने लगे। ज्ञान प्राप्ति के बाद महावीर स्वामी ने तीस वर्षों तक घूम-घूम कर अपनी शिक्षा का प्रचार किया।
72 वर्ष की अवस्था में पटना जिले के पावापुरी नामक स्थान पर 468 ई० पू॰ वे पंचतत्व में विलीन हो गए।

प्रश्न 8.
जैन धर्म के मूल नीतियों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर :
जैन धर्म की मूल नीतियाँ :-
कर्मफल एवं जन्मान्तरवाद से मुक्ति प्राप्त करने के लिए महावीर स्वामी ने तीन उपाय बताये थे –
(क) सत्य विश्चास
(ख) सत्य आचार
(ग) सत्य ज्ञान। इन तीन नीतियों को त्रिरत्ल कहा गया है।

चतुर्याम :- पाश्र्वनाथ द्वारा प्रचारित चार मूल नीतियाँ हैं –
(क) अहिंसा
(ख) सत्य
(ग) अस्तेय
(घ) अपरिग्रह। ये चारों चतुर्याम नाम से प्रसिद्ध हैं।

पंचमहाव्रत :- महावीर ने चतुर्याम की चार नीतियों को ग्रहण किये एवं उसके साथ महावीर स्वामी ने एक नीति और भी जोड़ दी। यह पाँचवीं नीति बुद्ध पर्यु थी। इसका अर्थ पवित्र जीवन-यापन करना था। इन पाँचों को एक साथ पंच महाव्रत कहा गया है।

प्रश्न 9.
जैन धर्म किन-किन राज्यों के मध्य लोकप्रिय था?
उत्तर :
जैन धर्म मगध, विदेह, कौशल और अंग राज्यों के मध्य लोकप्रिय था। मौर्य युग में जैनों का प्रभाव बढ़ता गया। कहा जाता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य ने अन्तिम समय में जैन धर्म धारण कर लिया था। इसके बाद ही तो ओडिशा से मधुरा तक जैन धर्म का विस्तार हुआ था।

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प्रश्न 10.
जैन साहित्य के विषय में संक्षेप में लिखिये।
उत्तर :
जैन धर्म का प्रमुख ग्रन्थ अंग (आगम) है। महावीर स्वामी के उपदेशों को बारह अंगों में संकलित किया गया जो द्वादश अंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जैन साहित्य प्राकृत भाषा में लिखा गया है।
सम्पूर्ण जैन साहित्य को छ: भागों में बाँटा गया है :-

  1. बारह अंग
  2. बारह उपांग
  3. दस प्रकीर्ण
  4. छ: छंद सूत्र
  5. चार मूल सूत्र
  6. विविध साहित्य।

प्रश्न 11.
दिगम्बर और श्वेताम्बर के बारे में क्या जानते हो?
उत्तर :
चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अन्त में एक भयानक अकाल पड़ा। उस समय असंख्य जैन उत्तर पूर्व भारत से दक्षिण की ओर चले गए। उनके चले जाने के कारण ही जैन धर्म दो भागों में बंट गया। दक्षिण में चले गए जैन संन्यासी के नेता भद्रबाहु थे। महावीर के जैसे ही भद्रबाहु और उनके अनुगामी किसी भी प्रकार का पोशाक नहीं पहनते थे। इसीलिए उन्हें दिगम्बर कहा जाता था।

वहीं दूसरी ओर उत्तर भारत की ओर गये जैनों के नेता स्थूलभद्र थे। वे पार्श्वनाथ के मतानुसार जैन को एक सफेद कपड़ा व्यवहार करने के पक्षपाती थे। इन जैन संन्यासियों का समूह श्षेताम्बर के नाम से परिचित था।

प्रश्न 12.
गौतम बुद्ध का संक्षिप्त जीवन परिचय लिखिए।
उत्तर :
गौतम बबद्ध का जन्म 567-66 ई० प० नेपाल की तराई में स्थित लम्बिनी के वन में हुआ था। इनके पिता युद्दोद्धन शाक्य क्षत्रियों के एक छोटे से गणराज्य कपिलवस्तु के राजा थे। गौतम के जन्म के सातवें दिन उनकी माता माया देवी की मृत्यु हो गई। उनका लालन-पालन उनकी मौसी महाप्रजापति गौतमी ने की। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। 16 वर्ष की आयु में इनका विवाह यशोधरा नामक युवती से हुआ तथा उनसे उन्हें राहुल नामक पुत्र भी हुआ। परन्तु इन सबके बावजूद गौतम बुद्ध सांसारिक बंधन में बंधकर नहीं रह पाये। अन्त में 20 वर्ष की अवस्था में गौतम बुद्ध एक दिन रात्रि के समय अपनी पत्नी एवं पुत्र को सोते हुए छोड़कर दु:खों से निवृत्ति का मार्ग खोजने के लिए गृहत्याग कर निकल पड़े। बौद्ध परम्पराओं में यह घटना ‘महाभिनिक्रमण ‘ के नाम से भी जानी जाती है।

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 5 1

गौतम ने बोधगया के निकट निरंजना नदी के तट पर एक पीपल के वृक्ष के नीचे समाधि लगाकर बैठ गये। 49 वें दिन उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ एवं बुद्ध कहलाये। इन्होंने विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया एवं उपदेश दिये। लगभग 45 वर्षों तक धर्मोपदेश के बाद 486 ई० पू॰ 80 वर्ष की अवस्था में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर नामक स्थान पर ‘महापरिनिर्वाण’ (परलोक) को प्राप्त किया।

प्रश्न 13.
महात्मा बुद्ध ने पहला उपदेश कहाँ और किसको दिया था?
उत्तर :
गौतम बुद्ध गया से वाराणसी के नजदीक सारनाथ गए। वहाँ पर पहुँच कर पाँच लोगों के बीच ही उन्होंने प्रथम उपदेश दिया था। उनके सामने उन्होंने मनुष्य के जीवन में आने वाले दु:खों के कारण की व्याख्या की। बाद में इस घटना को ‘धर्मचक्र’ प्रवर्तन कहा गया।

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प्रश्न 14.
बुद्ध के उपदेश क्या थे?
उत्तर :
गौतम बुद्ध ने अपना उपदेश जन साधारण की भाषा ‘पाली’ में दिये थे। उनकी शिक्षाएँ सीधी एवं सरल थीं। गौतम बुद्ध ने चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया जो निम्नलिखित है :-
(i) दु ख (ii) दु:ख समुदाय (iii) दु:ख विरोध और (iv) दु:ख निरोध मार्ग। गौतम बुद्ध ने दु:खों का अंत करने के लिए आठ मार्ग बताये हैं जिन्हें अष्टांगिक मार्ग कहा जाता है। शुद्ध आचरण के लिए बुद्ध ने दस नियमों को पालन करने का उपदेश दिये थे। बुद्ध के उपदेश ‘त्रिपिटक’ नामक ग्रन्थ में संग्रहीत हैं।

प्रश्न 15.
त्रिपिटक पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रन्थ त्रिपिटक है। त्रिपिटक पाली भाषा में लिखे गये हैं। इन्हें तीन भागों में बाँटा गया है। –
(i) विनय पिटक
(ii) सूक्ति पिटक
(iii) अभिधम्म पिटक।

1. विनय पिटक : विनय पिटक में बौद्ध भिक्षुओं के लिए आचरण सम्बन्धी नियम हैं।
2. सूक्त पिटक : सूक्त पिटक में बुद्ध के उपदेश हैं।
3. अभिधम्म पिटक : अभिधम्म पिटक में बौद्ध धर्म के दार्शनिक तत्वों का संग्रह है।

प्रश्न 16.
हीनयान और महायान के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर :
बौद्ध धर्म दो पथों में बंट गया – (क) हीनयान (ख) महायान।
(क) हीनयान : इस पथ को मानने वाले बड़े कट्टरपंथी होते हैं और बौद्ध धर्म के परम्परावादी स्वरूप को ही स्वीकार करते थे। हीनयान वालों ने पाली भाषा में ग्रन्थ की रचना की है।
(ख) महायान : इस पथ को मानने वाले उदारवादी होते हैं। इसकी विशेषता यह है कि ये सभी प्राणी जगत की आत्मा में विश्वास करते हैं। इन्होंने अपना ग्रन्थ संस्कृत में लिखा है।

प्रश्न 17.
अष्टांगिक मार्ग क्या है ?
उत्तर :
महात्मा बुद्ध ने इस सांसारिक दु:खों से छुटकारा पाने के लिये जो आठ मार्ग बताये हैं उन्हें अष्टांगिक मार्ग कहा जाता है। ये आठ मार्ग निम्न प्रकार से बतलाये गये हैं :-

  1. सम्यक् दृष्टि
  2. सम्यक् संकल्प
  3. सम्यक् वचन
  4. सम्यक् कर्म
  5. सम्यक् जीविका
  6. सम्यक् व्यायाम
  7. सम्यक् स्मृति एवं
  8. सम्यक् समाधि।

बौद्ध साहित्य में इस अप्टांगिक मार्ग को ‘मज्झिमा परिषदा’ भी कहा गया है।

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प्रश्न 18.
जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म में समानता और असमानता का उल्लेख करो।
उत्तर :
जैन एवं बौद्ध दोनों धर्मों में समानताएँ एवं असमानताएँ दिखाई पड़तीहैं जो इस प्रकार हैं :-
समानाताएँ :

  • इन दोनों ही धर्मों के संस्थापक क्षत्रिय राजकुमार थे।
  • दोनों ही धर्मो की उत्पत्ति ब्राह्मण धर्म की बुराइयों के विरोध में हुई।
  • दोनों ही धर्मों में अहिंसा पालन पर बल दिया गया है।
  • दोनों ही धर्मो में विभाजन हो गया।
  • दोनों ही धर्मों ने मोक्ष प्राप्ति के लिए मार्ग बताए हैं।

असमानताएँ :

  • जैन धर्म बौद्ध धर्म से प्राचीन है।
  • अहिंसा में दोनों का विश्वास है परन्तु जैन धर्म में अहिंसा पर अधिक जोर दिया गया है।
  • बौद्ध धर्म का प्रचार विदेशों में भी हुआ पर जैन धर्म भारत तक ही सीमित रहा।
  • बौद्ध धर्म भारत से प्रायः समाप्त हो गया पर जैन धर्म आज भी भारत में विद्यमान है।

प्रश्न 19.
त्रिरत्न से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
जैन और बौद्ध दोनों धर्म में त्रिरत्न नामक एक धारणा है। तीन विषय को दोनों धर्म में विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके एक-एक विषय को रत्न कहा जाता है। संख्या में यह तीन हैं। इसलिए तो एक साथ त्रिरत्न कहते हैं। लेकिन जैन धर्म का त्रिरत्न बौद्ध धर्म के त्रिरत्न से अलग है। सत्य विश्वास, सत्य आचरण के ऊपर जैन धर्म ज्यादा जोर देते थे। इन तीनों को एक साथ जैन धर्म में त्रिरत्ल कहा जाता था। बौद्ध धर्म में गौतम बुद्ध प्रधान व्यक्ति थे। उनके द्वारा प्रचार किया क्या धर्म ही बौद्ध धर्म है। बौद्ध धर्म के प्रचार का दायित्व बौद्ध संघ पर है। यह तीनो मिलकर होता है बौद्ध धर्मसंघ। यही तीनों बौद्ध धर्म का त्रिरत्न है।

प्रश्न 20.
जातक की कहानी से क्या समझते हो?
उत्तर :
त्रिपिटक में जातक को लेकर कुछ कहानियाँ हैं। ऐसा कहा जाता है कि गौतम बुद्ध का पहले भी विभिन्न समय में जन्म हुआ था। वही पहले जन्म की कहानी एक-एक कहानी में कही गयी है। प्रत्येक कहानी में कुछ-न-कुछ उपदेश अवश्य है। साधारण लोगों के बीच धर्म का प्रचार करने के लिए ही जातक की कहानी का प्रयोग किया जाता था। पाँच सौ से अधिक जातकों की कहानियाँ हैं। कहानियाँ पाली भाषा में लिखी गई है। मनुष्य के साथ-साथ पशु पक्षी भी जातक की कहानी के चरित्र के रूप में आये हैं। जातक की कहानी से उस समय के समाज के बारे में बहुत कुछ जानकारियाँ मिलती हैं।

प्रश्न 21.
जातक कहानी के अनुसार सेरीयान और सेरीवा किस राज्य में रहते थे?
उत्तर :
जातक कहानी के अनुसार सेरीयान और सेरीवा दो फेरीवाले सरीब राजा के राज्य में रहते थे। वे पुरानी वस्तुओं को खरीदते तथा नयी वस्तुओं को बेचते थे। सेरीवा सभी को ठगता था। अधिक कीमत पर वस्तुओं की बिक्री करता था। लेकिन सेरीयान किसी को भी नहीं ठगता था। वह उचित कीमत पर ही वस्तुओं की बिक्री करता था।

एक दिन सेरीवा एक घर के सामने जाकर खिलौना ले लो – खिलौना ले लो कहकर चिल्लाने लगा। उस घर में एक छोटी लड़की अपनी नानी के साथ रहती थी। वे बहुत गरीब थे। छोटी लड़की अपनी नानी से उस खिलौने को खरीदने के लिये जिद्ध करने लगी। तब नानी एक टूटी हुई थाली को लेकर खिलौना खरीदने आयी। सेरीवा से ननी बोली – इस थाली की जितनी कीमत होती है वह दे दो जिससे नतिनी के लिए मैं एक खिलौना लूँगी।

सेरीवा ने अच्छी तरह से थाली को देखा कि थाली सोने की है या नहीं। वह चालाकी करते हुए कहा, थाली तो दूटी हुई है, इसकी दो कौड़ी से ज्यादा कीमत नहीं है। अगर आप इस कीमत पर देंगी तो ले लूंगा। नानी बोली, तो रहने दो। सेरीवा ने सोचा थोड़ी देर बाद घूमकर फिर वहाँ आऊँगा। ऐसे तो वह देगी नही। लेकिन दो कौड़ी से कुछ ज्यादा देने पर निश्धय ही थाली दे देगी। थोड़ी देर बाद दूसरी फेरीवाला सेरीयान उसी घर के सामने आया।

उसने भी सुंदर खिलौना ले लो, सुंदर खिलौना ले लो। कहकर चिल्लाने लगा। नन्हीं लड़की फिर से खिलौना के लिए नानी से जिद्द करने लगी। नानी फिर उस दूटी थाली को सेरीयान को देखने के लिए दी। थाली को देखकर, ईमानदार सेरीयान ने कहा, यह तो सोने की थाली है। मेरे पास इस थाली को खरीदने की क्षमता नहीं है। तब उस समय नानी सेरीयान से बोली, तुम जो कुछ दे सकते हो वही दो। मैं ज्यादा नहीं चाहती हूँ। तुम्हारे बोलने से पहले मैं नहीं जानती थी कि यह सोने की थाली है। इसलिए इसे तुम ले लो।

सेरीयान उस समय अपना सारा धन नानी के हाथों में दे दिया तथा उनकी नतिनी को एक सुन्दर खिलौना भी दिया। नानी और नतिनी उसी में खुश थी। थाली को लेकर सेरीयान चला गया। इधर लालची सेरीवा कुछ देर बाद ही उस घर के सामने आया। वहां आने के बाद जब उसने सब कुछ सुना तो वह समझ गया कि थाली सेरीयान ही ले गया है। सेरीयान को पकड़ने के लिये दौड़ा ताकि थाली मिल सके। लेकिन सेरीयान को वह ढूंढ नहीं सका। सोने की थाली सेरीयान से सेरीवा को नहीं मिल सकी।

इस जातक कहानी से निष्कर्ष निकलता है कि यदि सेरीवा भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर व्यापार करता तो सोने की थाली सेरीयान की जगह उसके पास ही होती। परन्तु सेरीवा लालच में पड़कर हाथ आए सम्पत्ति को भी खो दिया।

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प्रश्न 22.
चार बौद्ध संगीति का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर :
बुद्ध देव के परवर्ती समय में बौद्ध धर्म की नीति निर्धारण एवं समस्या के समाधान के लिए चार संगीति का आयोजन किया गया था। विभिन्न बौद्ध संगीति का परिचय निम्न है –
पहला बौद्ध संगीति : मगध राजा अजातशत्रु के प्रयास से राजगृह के सप्तपर्णी गुफा में प्रथम बौद्ध संगीति (सम्मेलन) का आयोजन ईसा पूर्व 487 में किया गया था। इस सम्मेलन का नेतृत्व बौद्ध पंडित महाकश्यप ने किया था।

दूसरा बौद्ध संगीति : कालशोक या काकवर्ण के समय राजधानी वैशाली में दूसरा बौद्ध संगीति ईसा पूर्व 387 में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन का नेतृत्व महास्थविर यश ने किया था।

तीसरा बौद्ध संगीति : सम्राट अशोक ने पाटलिपुत्र में तीसरा बौद्ध संगीति का आयोजन ईसा पूर्व 251 में किया था। इसके सभापति मोग्गलिपुत्त तिस्य थे।

चौथा बौद्ध संगीति : चतुर्थ बौद्ध संगीति (Council) का आयोजन कश्मीर में कुषाण समाट कनिष्क के द्वार। प्रथम सदी के अंतिम वर्षों में किया गया था। इस महासभा में उस काल के श्रेष्ठ विद्वानों ने भाग लिया था। इसमें उन बी ह सिद्धांतों पर विचार-विमर्श किया गया जिन पर मतभेद था। इस सभा में विद्वानों ने समस्त बौद्ध साहित्य पर टीका लिखवाई। सभा का प्रधान बसुमित्र था। अश्वघोष, नागार्जुन जैसे श्रेष्ठ विद्वानों ने इसमें भाग लिया था। इस संगीनि का सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि ‘ ‘महाविभाष’ नामक ग्रंथ की रचना है, जो बौद्ध दर्शन का महान ग्रंथ माना जाता है।

इस सभा में समस्त बौद्ध ग्रंथ एकत्रित किये गये और एक ज्ञान कोष की रचना भी की गई। यद्यपि यह सभा बौद्ध धर्म वे विवादों को सुलझाने के लिए बुलाई गई थी पर कनिष्क को इसमें सफलता नहीं मिली। यहीं पर बौद्ध धर्म हीनयान तथा महाग नामक दो संप्रदायों में विभक्त हो गया।

प्रश्न 23.
महावीर एवं गौतम बुद्ध में क्या समानतां थी?
उत्तर :
महावीर एवं गौतम बुद्ध में काफी समानता थी। वे दोनों ही क्षत्रिय परिवार के थे। ब्राहण धर्म के आचरा। कार्यक्रम का दोनों ने घोर विरोध किया। समाज में साधारण लोगों के लिए धर्म का प्रचार किया था। समाज के सभी को समझने की सुविधा के लिए उन्होंने सहज एवं सरल भाषा का प्रयोग किया था। प्राकृत भाषा और साहित्य की उन्न जैन धर्म से ही संभव हो पाया। बौद्ध धर्म प्रचार की भाषा पालि थी। लेकिन महावीर कठोर तपस्या के ऊपर जोर दिए ? वहीं दूसरी ओर गौतम बुद्ध को ऐसा लगता था कि कठोर तपस्या निर्वाण अथवा मुक्ति का उपाय नहीं है। वहीं केवल भोग-विलास से भी मुक्ति की प्राप्ति नहीं होती। इसलिए बुद्ध ने मध्य मार्ग की बाते कही थीं।

महावीर और बुद्ध दोनों ही धर्म प्रचार करने के लिए नगर में जाते थे। नगर में विभिन्न प्रकार के लोगों के साथ संनर्व स्थापित होता था / शहर की तुलना में ग्राम के अधिकांश लोग किसान ही थे। वहीं ब्राह्मण धर्म में नगर में जाना अथन। रहना पाप समझा जाता था। इसलिए जैन और बौद्ध धर्म उस समय नगरों में ज्यादा विस्तारित हुआ। यह बात अवश्य है. नवधर्म (नवीन धर्म) आंदोलन के रूप में थी लेकिन मूलत: यह आंदोलन नगर केंद्रित था।

भगवान बुद्ध एवं महावीर स्वामी को तत्कालीन राजा-महाराजाओं का भी सहयोग मिला। वे भी बौद्ध एवं जैन धर्म के आदर्शों को मानने के लिए बाध्य हो गये थे क्योंकि प्रचलित वैदिक धर्म के जटिल कर्म-कांड तथा राजपुरोहितों, पोड़ः: के राज-काज में बढ़ते दखल से शासन व्यवस्था का संचालन लगभग असंभव हो चला था। यज्ञों में होने वाली पातन पशुओं की आहूति के कारण उनकी संख्या में तेजी से गिरावट हो रही थी जिससे कृषि आधारित किसान समाज का वैदिक धर्म के प्रति विश्वास खत्म हो चला था। अतः वे भी वैदिक धर्म की कठोर कर्मकांड तथा बाहागों से तंग होकर बोर एवं जैन धर्म को इच्छापूर्वक अपनाने लगे।

प्रश्न 24.
हीनयान और महायान में अंतर का उल्लेख करो।
उत्तर :
हीनयान और महायान में अंतर :-
हीनयान के अनुयायी बुद्ध को एक महान धर्म प्रचारक माना है। दूसरी तरफ महायान के अनुयायियों ने बुद्ध को देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
हीनयान का प्रधान लक्ष्य था व्यक्तिगत प्रयास से निर्वाण की प्राप्ति, लेकिन महायान का मूल लक्ष्य समग्र संसार का कल्याण साधन करना था।
हीनयान मतावलंबी पालि भाषा में बौद्ध धर्म का प्रचार किया करते थे। महायान मतावलंबी संस्कृत भाषा में बौद्ध स्रांग का प्रचार करते थे।
हीनयान पंथ के बौद्ध संन्यासी सदैव भगवान बुद्ध की तरह ही घूम-घूम कर बुद्ध के उपदेशों को लोगों को बता? तथा उन्हें बुद्ध के अनुयायी बनाते थे। वे भोजन के लिए दिन में केवल एक ही बार दोपहर के समय भिक्षा मांगते थे।

महायान पंथ के बौद्ध संन्यासी राजा-महाराजाओं, सेठ-साहूकारों द्वारा बनवाये गये बौद्ध मठों-विहारों में रहकर भगवा बुद्ध के बताये गये उपदेशों एवं आचरण संबंधी बातों को बताकर लोगों को बुद्ध के अनुयायी बनाकर बौद्ध धर्म का प्रचाए किया करते थे। बौद्ध मठों-विहारों में रहने वाले सभी भक्त, संन्यासी का भोजन, वस्त्र तथा चिकित्सा इत्यादि सभी खर्न राजा-महाराजाओं, सेठ-साहूकारों तथा समाज द्वारा दिये गये दान पर ही चलता था।

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प्रश्न 25.
महाजनपद की शासन व्यवस्था के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
अधिकांश महाजनपदों पर राजा का शासन था। इन महाजनपदों को राजतांत्रिक राज्य कहा जाता था। राज्यों की शासन व्यवस्था में सबसे ऊपर राजा थे। राजा किसी विशेष वंश के सदस्य थे। वही वंश ही सालों-दर साल राज्य करते थे। एक समय उन्हें पराजित कर दूसरे वंश के कोई राजा बनते थे। शासन के कार्य में एक सभा राजा की सहायता, करते थे। इनके सदस्य राजा को विभिन्न विषयों पर परामर्श करके कर की उनकी अदायगी की जाती थी। कर से प्राप्त पैसे राज्य के शासन कार्य को चलाने के लिए खर्च किये जाते थे।

प्रश्न 26.
मगध राजाओं के साल-तारीख किस प्रकार निश्चित किया जाता था?
उत्तर :
मगध जनपद में कुल तीन राजवंशों ने शासन किया था। वे हुए हर्यक, शैशुनाग और नन्द राजवंश। लेकिन कब कौन मगध के राजा थे, यह कहना मुश्किल है। एक अनुमानिक साल तारीख अवश्य ही तैयार किया जा सकता है। गौतम बुद्ध की मृत्यु के साथ ही मिलाकर इन सालों को गिना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि राजा अजातशत्रु के राजत्व के आठ वर्षों में गौतम बुद्ध की मृत्यु हुई। उस साल को 486 ईसा पू॰ माना गया। इस दृष्टिकोण से मगध में हर्यक वंश का शासन 545 में आरम्भ हुआ। वहीं नन्द वंश का शासन 324 ईसा पू॰ में समाप्त हुआ था।

प्रश्न 27.
चतुर्याम और पंचमहाव्रत क्या है?
उत्तर :
जैन धर्म चार मूल नीति को आवश्यक मानकर चलते थे। वह है :-
(क) कभी प्राणी की हत्या नहीं करना।
(ख) झूठ नहीं बोलना।
(ग) किसी दूसरे की वस्तु को नहीं छीनना।
(घ) स्वयं के लिए सम्पत्ति कासंचय नहीं करना।

पर्श्वनाथ इसी चार मूल नीति को मान कर चलने का निर्देश दिया करते थे। इन चारों प्रकार की नीति को ही एक साथ चातुर्यामवत कहा जाता था। महावीर इन चारों नीतियों के साथ एक और नीति को जोड़े। उनके अनुसार ब्रह्मचर्य नीति भी जैनों को मानकर चलना चाहिए। इन पाँचों प्रकार की नीति को एक साथ ही पाँच महाव्रत कहा जाता है ।

प्रश्न 28.
चार्वाक और आजीविका से आप क्या समझते हो?
उत्तर :
जैन और बौद्ध के पहले भी बहाण और ब्राहाण धर्म का विरोध आजीविका समूह ने किया था। वे किसी भी तरह से वेद को नहीं मानते थे। चार्वाक, वर्णाश्रम प्रथा के विरोधी थे। वे स्वर्ग की अवधारणा को भी नहीं मानते थे। यज्ञ में पशुबलि का चार्वाक विरोध करते थे। आजीविका समूह गोसाल ने बनाया। कहा जाता है कि वे महावीर के मित्र थे। आजीविका वेद और किसी भी प्रकार के देवता पर विश्चास नहीं करते थे। वे यह भी नहीं मानते थे कि मनुष्य अगर अच्छा कर्म करता है तो उसे अच्छा फल भी मिलेगा। आजीविका का किसी भी प्रकार का धर्मग्रन्थ नहीं पाया गया। उन्हें मौर्य सम्राट बिन्दुसार और अशोक से भी सहायता मिली थी।

प्रश्न 29.
जैन धर्म और बौद्ध धर्म के अभ्युदय के क्या कारण थे?
उत्तर :
छठी शताब्दी ई॰ पू॰ ब्राह्मण धर्म में अनेकानेक दोष आ गये थे तथा तत्कालीन समाज इनसे मुक्ति पाने के लिए छटपटा रहा था जिसके परिणामस्वरूप बाहाण धर्म के सामने दो नये धर्म (जैन तथा बौद्ध) का अभ्युदय हुआ।

प्रश्न 30.
घर्मचक्र प्रवर्तन का प्रचार किसने किया? उसका क्या अर्थ है?
उत्तर :
धर्म चक्र प्रवर्तन का प्रचार गौतम बुद्ध ने किया था। बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपने धर्म का सर्वप्रथम उपदेश सारनाथ में दिया था एवं पाँच साथियों ने शिष्यता ग्रहण की इसे ही धर्म चक्र प्रवर्तन कहा गया है।

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प्रश्न 31.
महाभिनिष्क्रमण और महापरिनिर्वाण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
बौद्ध धर्म में गौतम बुद्ध के गृह त्याग की घटना को महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है और शरीर त्याग की घटना को महापरिनिर्वाण कहा जाता है।

प्रश्न 32.
बौद्ध धर्म का मध्यम मार्ग क्या है?
उत्तर :
गौतम बुद्ध ने साधारण जनता की बोलचाल की भाषा ‘पालि’ में अत्यन्त सरल ढंग से समझाया कि कुछ नियमों का पालन करके मनुष्य को इस सांसारिक दु:ख से छुटकारा मिल सकता है। उनका यह मोक्ष प्राप्ति करने का मार्ग ही मध्यम मार्ग कहलाता है। यह कठिन तप और भोग विलास के मध्य का मार्ग है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
महाजनपद का उद्भव शताब्दी में हुआ था।
(क) ईसा पूर्व छठवीं
(ख) ईसा पूर्व सातवीं
(ग) ईसा पूर्व आठवीं
(घ) ईसा पूर्व पचंमी
उत्तर :
(क) ईसा पूर्व छठवीं

प्रश्न 2.
गौतम बुद्ध का जन्म __________ वंश में हुआ था।
(क) लिच्छवी
(ख) हर्षक
(ग) शाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) शाक्य

प्रश्न 3.
पाश्र्वनाथ __________ थे।
(क) मगध के राजा
(ख) बज्जियों के प्रधान
(ग) जैन तीर्थकर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) जैन तीर्थकर

प्रश्न 4.
आर्य सत्य __________ धर्म का भाग था।
(क) बौद्ध
(ख) जैन
(ग) आजीविक
(घ) शाक्य
उत्तर :
(क) बौद्ध

प्रश्न 5.
दक्षिण भारत में एकमात्र महाजनपद __________ था।
(क) कौशल
(ख) अस्मक
(ग) बज्जि
(घ) जैन
उत्तर :
(ख) अस्मक

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प्रश्न 6.
दिगम्बर समुदाय के प्रमुख नेता __________ थे।
(क) भद्रबाहु
(ख) स्थूलभद्र
(ग) महाकश्यप
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) भद्रबाहु

प्रश्न 7.
श्वेताम्बर समुदाय के नेता __________ थे।
(क) स्थूलभद्र
(ख) महाकाश्यप
(ग) भद्रबाहु
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) स्थूलभद्र

प्रश्न 8.
________ धर्म के प्रधान प्रचारक को तीर्थकर कहते हैं।
(क) बौद्ध
(ख) जैन
(ग) आजीविक
उत्तर :
(ख) जैन

प्रश्न 9.
बज्जि की राजधानी __________ थी।
(क) वैशाली
(ख) चम्पा
(ग) राजगृह
उत्तर :
(क) वैशाली

प्रश्न 10.
जैन धर्म की मूल नीति __________ है।
(क) चतुर्याम
(ख) अश्वमेध यज्ञ
(ग) अष्टांगिक मार्ग
उत्तर :
(क) चतुर्याम

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. अस्मक __________ भारत का एकमात्र महाजनपद था।
उत्तर : दक्षिण

2. मगध एक __________ महाजनपद था।
उत्तर : राजतांत्रिक।

3. बज्जि की राजधानी __________ थी।
उत्तर : वैशाली।

4. मगध की राजधानी __________ थी।
उत्तर : राजगृह।

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5. द्वादश अंग __________ धर्म में प्रचलित थे।
उत्तर : जैन धर्म।

6. मगध महाजनपद के राजा का नाम __________ था।
उत्तर : अजात शत्रु।

7. स्थूल भद्र __________ समुदाय के नेता थे।
उत्तर : श्वेताम्बर।

8. भद्रबाहु __________ समुदाय के प्रमुख नेता थे।
उत्तर : दिगम्बर।

9. जैन धर्म के प्रचारक को __________ कहते हैं।
उत्तर : तीर्थकर ।

10. मगध सबसे शक्तिशाली __________ के रूप में उभर रहा था।
उत्तर : महाजनपद।

11. पार्श्वनाथ __________ थे।
उत्तर : जैन तीर्थकर।

12. मगध के उत्यान को __________ युग कहा जाता है।
उत्तर : सोलह महाजनपद।

13. जैन धर्म के प्रवर्तक __________ थे।
उत्तर : महावीर।

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14. सिद्धार्थ __________ के बचपन का नाम था।
उत्तर : गौतम बुद्ध।

असमानता वाले शब्द को ढूंढकर लिखिए :-

  1. अजातशत्रु, अशोक, कनिष्क, बुद्ददेव।
  2. हर्यकवंश, शिशुनाग वंश, नन्दवंश, गुप्तवंश।
  3. उज्जैन, मधुरा, वैशाली, मगध।
  4. गंगा, यमुना, सहारा, कावेरी।
  5. पाश्र्वनाथ, नेमीनाथ, महावीर, कुरुक्षेत्र।
  6. सरस्वती, कावेरी, कृष्णा, थार मरूभूमि
  7. महावीर, गौतम बुद्ध, विवेकानन्द, पाटलिपुत्र
  8. वैशाली, अस्मक, बज्जि, स्थूलभद्र
  9. काशी, कौशल, मगध, बौद्ध धर्म

उत्तर :

  1. बुद्धदेव
  2. गुप्त वंश
  3. मगध
  4. सहारा
  5. कुरु क्षेत्र
  6. थार मरूभूमि
  7. पाटलिपुत्र
  8. स्थूल भद्र
  9. बौद्ध धर्म

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) मगध की राजधानी (क) जैन धर्म
(ii) महाकश्यप (ख) बौद्ध धर्म
(iii) द्वादश अंग (ग) राजगृह
(iv) हीनयान – महायान (घ) प्रथम बौद्ध संगीति

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) मगध की राजधानी (ग) राजगृह
(ii) महाकश्यप (घ) प्रथम बौद्ध संगीति
(iii) द्वादश अंग (क) जैन धर्म
(iv) हीनयान – महायान (ख) बौद्ध धर्म

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प्रश्न 2.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) उत्तर भारत के महाजनपद (क) वैशाली
(ii) दक्षिण भारत के महाजनपद (ख) अस्मक
(iii) गणराज्य (ग) कुरु
(iv) बज्जि की राजधानी (घ) बज्जि

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) उत्तर भारत के महाजनपद (ग) कुरु
(ii) दक्षिण भारत के महाजनपद (ख) अस्मक
(iii) गणराज्य (घ) बज्जि
(iv) बज्जि की राजधानी (क) वैशाली

प्रश्न 3.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) बौद्ध धर्म (क) महावीर
(ii) जैन धर्म (ख) द्वादश अंग
(iii) सिद्धार्थ (ग) अप्टांगिक मार्ग
(iv) केवलिन (घ) गौतम बुद्ध

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) बौद्ध धर्म (ग) अप्टांगिक मार्ग
(ii) जैन धर्म (ख) द्वादश अंग
(iii) सिद्धार्थ (घ) गौतम बुद्ध
(iv) केवलिन (क) महावीर

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प्रश्न 4.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) अस्मक (क) पोटान
(ii) अवन्ति (ख) उज्ज्यनी
(iii) गान्धार (ग) राजपुर
(iv) कम्बौज (घ) तक्षशिला

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) अस्मक (क) पोटान
(ii) अवन्ति (ख) उज्ज्यनी
(iii) गान्धार (घ) तक्षशिला
(iv) कम्बौज (ग) राजपुर

प्रश्न 5.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) महानजपद का उद्भव (क) भद्रबाहु
(ii) जैन धर्म की मूल नीति (ख) स्थूल भद्र
(iii) दिगम्बर समुदाय के प्रमुख नेता (ग) तीर्थकर
(iv) श्षेताम्बर समुदाय के प्रमुख नेता (घ) चातुर्याम
(v) जैन धर्म के प्रचारक (ङ) ईसा पर्व छठवीं

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) महानजपद का उद्भव (क) भद्रबाहु
(ii) जैन धर्म की मूल नीति (ख) स्थूल भद्र
(iii) दिगम्बर समुदाय के प्रमुख नेता (ग) तीर्थकर
(iv) श्षेताम्बर समुदाय के प्रमुख नेता (घ) चातुर्याम
(v) जैन धर्म के प्रचारक (ङ) ईसा पर्व छठवीं

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प्रश्न 6.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) पाशर्वनाथ (क) शाक्य वंश
(ii) अजात शत्रु (ख) राजतांत्रिक महाजनपद
(iii) नंद्वश की समाप्ति (ग) जैन तीर्थकर
(iv) बज्जि की राजधानी (घ) सबसे शक्तिशाली महाजनपद
(v) मगध (ङ) 324 ई० पूर्व
(vi) गौतम बुद्ध का जन्म (च) बौद्ध धर्म का अंग
(vii) मगध (छ) मगध
(viii) आर्य सत्य (ज) वैशाली

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) पाशर्वनाथ (ग) जैन तीर्थकर
(ii) अजात शत्रु (ङ) 324 ई० पूर्व
(iii) नंद्वश की समाप्ति (च) बौद्ध धर्म का अंग
(iv) बज्जि की राजधानी (ज) वैशाली
(v) मगध (घ) सबसे शक्तिशाली महाजनपद
(vi) गौतम बुद्ध का जन्म (क) शाक्य वंश
(vii) मगध (ख) राजतांत्रिक महाजनपद
(viii) आर्य सत्य (छ) मगध

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 Science Book Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Science Chapter 2 Question Answer – हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
एक एकमुखी घटना का उदाहरण दें।
उत्तर :
चावल उबाल कर भात बनाना।

प्रश्न 2.
एक द्विमुखी घटना का उदाहरण दें।
उत्तर :
गर्मी के दिनों में सड़क पर बिछी पिच का गल जाना।

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प्रश्न 3.
तूफान आना, बाढ़ आना कैसी घटना है ?
उत्तर :
अपर्यावृत

प्रश्न 4.
जंगल में पशुओं की मृत्यु कैसी घटना है ?
उत्तर :
प्राकृतिक

प्रश्न 5.
खाना बनाने के लिए आग जलाना कैसी घटना है ?
उत्तर :
मानव निर्मित

प्रश्न 6.
असामाजिक लोगों द्वरा मृत्यु।
उत्तर :
अराजकता द्वारा

प्रश्न 7.
मेढक और पक्षी फसलों के नुकसानदायक कीड़े-मकौड़े को खा जाते हैं।
उत्तर :
कीड़े-मकोड़े मेढक और पक्षी के भोजन हैं।

प्रश्न 8.
गाड़ी से निकलने वाला घुआँ किस घटना श्रेणी में है?
उत्तर :
अनैच्छिक या अनभिप्रेत।

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र

प्रश्न 9.
प्यूपा से तितली होना द्रुत या मन्थर घटना है।
उत्तर :
मन्थर

प्रश्न 10.
एक भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन साथ-साथ होने की क्रिया बताओ।
उत्तर :
मोमबत्ती का जलना

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
एकमुखी क्या है ?
उत्तर :
वे घटनाएँ जो एक बार घटित होने के बाद उसे पुन: उसी स्वरूप में नहीं लाया जा सकता है उसे एकमुखी घटना कहते हैं। जैसे चावल से भात का बनना।

प्रश्न 2.
द्विमुखी क्या है ?
उत्तर :
वे घटनाएं जो एक बार घटित होने के बाद उसे पुन: उसी स्वरूप में लाया जा सकता है उसे द्विमुखी घटना कहते हैं। जैसे – बर्फ से जल तथा पुन: जल से बर्फ का बनना।

प्रश्न 3.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो ।
उत्तर :

कौन सी घटना देख रहे हो एकमुखी / द्विमुखी
(क) बर्फ का पिघलना i) द्विमुखी
(ख) पानी का वाष्प बनना ii) द्विमुखी
(ग) उद्भिज का बढ़ना iii) एकमुखी
(घ) वाष्पोत्सर्जन iv) द्विमुखी

प्रश्न 4.
पर्यावृत तथा अपर्यावृत किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी निर्दिष्ट समय पर घटना का पुन: होना पर्यावृत कहलाता है। जो घटना समय के नियम के अनुसार नहीं घटती है उसे अपर्यावृत कहते हैं।

उदाहरण :-

  • दिन-रात का होना पर्यावृत है।
  • बाढ़ आना, तूफान आना अपर्यावृत है।

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प्रश्न 5.
नीचे की तालिका को पूरा करें।
उत्तर :

कौन सी घटना हुई पहले की अवस्था में लाया जा सकता हैया नहीं?
(क) गर्मी के दिनों में सड़क पर बिछी पीच गल जाने पर पहली अवस्था में लाया जा सकता है।
(ख) चावल उबालकर भात बनाया गया पहली अवस्था में नहीं लाया जा सकता है।
(ग) खाना खाने के बाद हजम हो गया पहली अवस्था में नहीं लाया जा सकता है।
(घ) बर्फ को पिघलाकर पानी बनाया गया पहली अवस्था में लाया जा सकता है।
(ङ) कपूर को जलाया गया पहली अवस्था में नहीं लाया जा सकता है।

प्रश्न 6.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो।
उत्तर :

कौन सी घटना पर्यावृत या अपर्यावृत और क्यों?
i) सिलिंग फैन या टेबल फैन के ब्लेड का घूमना पर्यावृत, क्योंकि घूमना समय पर, निर्दिष्ट समय पर होता है।
ii) रास्ते में गाड़ी का आना-जाना अपर्यावृत, क्योंकि गाड़ी का आना-जाना समय पर निर्भर नहीं है।
iii) ज्वार भाटा पर्यावृत, क्योंकि यह निर्दिष्ट समय पर घटित होता है।
iv) साँप का केंचुली छोड़ना अपर्यावृत, क्योकि यह निर्दिष्ट समय पर नहीं होता है।
(v) सुनामी अपर्यावृत, क्योंकि इसके होने का समय निर्दिष्टि नहीं रहता है।
(vi) लीपईयर पर्यावृत, क्योंकि यह निर्दिष्ट समय पर घटित होता है।
(vii) समुद्र के जल की लहरें अपर्यावृत, क्योंकि इसके होने का समय निर्दिष्ट नहीं है
(viii) पेड़ के पत्ते टूटकर गिरना अपर्यावृत, क्योकि इस घटना का कोई निर्दिष्ट समय नहीं है।
(ix) स्कूल में विभिन्न विषयों से संबंधित पीरियड पर्यावृत, क्योंकि हरेक विषय का पीरियड होने का समय निर्दिष्ट है।
(x) आकाश में धूमकेतु का देखा जाना अपर्यावृत, क्योंकि धूमकेतु देखे जाने का समय तय नहीं होता।

प्रश्न 7.
नीचे की तालिका को पूरा करें।
उत्तर :

जिसको घटते हुए देखा ऐच्छिक / अनैच्छिक
(क) फूल का खिलना ऐच्छिक
(ख) पेड़ का बढ़ना ऐच्छिक
(ग) पेड़ का कटना अनैच्छिक
(घ) कूड़ा को फेंकना अनैच्छिक
(ङ) गाड़ी से धुआँ निकलना अनैच्छिक
(च) माइक का शोर करना अनैच्छिक

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प्रश्न 8.
प्राकृतिक घटना क्या है? इसका उदाहरण दें ।
उत्तर :
जो घटनाएं स्वाभाविक रूप या प्राकृतिक कारणों से घटित होती हैं उसे प्राकृतिक घटना कहते हैं। उदाहरण –

  • जंगल में आग लगना
  • मनुष्य की मृत्यु होना
  • बाढ़ का आना
  • भूकम्प होना
  • सुनामी

प्रश्न 9.
मानव निर्मित घटना क्या है? इसका उदाहरण दो।
उत्तर :
जो घटनाएं मानव के द्वारा किये गये क्रिया-कलाप द्वारा घटित होती है उसे मानव निर्मित घटना कहते हैं। ये घटनाएं प्रकृति को काफी नुकसान पहुँचाती हैं। उदाहरण :-

  • खाना पकाना ।
  • रोशनी करने के लिए या खाना बनाने के लिए आग जलाना ।
  • बाँध बनाना।
  • असामाजिक लोगों द्वारा मृत्यु ।
  • कीटनाशक दवा छिड़क कर कीड़े-मकोड़े को मारना ।

प्रश्न 10.
रासायनिक कीटनाशक कैसे हमारे शरीर तक पहुँच जाता है ?
उत्तर :
रासायनिक खाद तथा कीटनाशक मछली के शरीर में प्रवेश कर इसे विषैला बना देता है। जब हम मछली खाते है तब मछली के शरीर द्वारा विष हमारे शरीर के किडनी, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़ा आदि में जमा हो जाता है।

प्रश्न 11.
बड़े टुकड़ों की तुलना में छोटे टुकड़ों का द्रवण आसानी से होता है, क्यों ?
उत्तर :
बड़े टुकड़े को यदि छोटे टुकड़ों में तोड़ दें तो उसका क्षेत्रफल बढ़ जाता है। इसी प्रकार साग-सब्जी को छोटेछोटे टुकड़ों में काटने पर टुकड़े का क्षेत्रफल बड़े टुकड़े से ज्यादा हो जाता है जिससे वह शीघ्र पक जाता है। इसके साथ भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाने पर भोजन नली में आसानी से पच जाता है। इसी प्रकार रासायनिक पदार्थ को पीसकर अथवा द्रवण तैयार करने पर रासायनिक क्रिया तेजी से होती है।

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प्रश्न 12.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो। क्या देखा?
उत्तर :

क्या देखा कौन द्रुत या मन्थर ?
a) प्यूपा से तितली होना मन्थर
b) टेडपॉल से टोड होना मन्थर
c) आम की मंजरी से आम होना मन्थर
d) उबलते हुए दूध में नींबू का रस मिलाने पर छेना का बनना दुत

प्रश्न 13.
बाथरूम साफ करने के लिए जिस एसिड को हम व्यवहार करते हैं उससे एक जल से युक्त द्रव्य तैयार करो। ध्यान रखो कि यह तुम्हारे शरीर, आँख पर न गिरे। इस द्रव का दो भाग करो और अलग-अलग काँच के ग्लास में रखो। एक ग्लास में मार्बल पत्थर डालो तथा दूसरे में कुछ पाउड़ डालो।
उत्तर :

किस ग्लास में क्या
देख पा रहे हो
ऐसा क्यों हो रहा है ?
ग्लास ‘A’ ग्लास ‘A’ में मार्बल पत्थर का टुकड़ा डाला गया, कुछ समय बाद धीरे- धीरे प्रतिक्रिया होती है और CO2 गैस निकलती है।
ग्लास ‘B’ ग्लास ‘B’ में पाउडर डाला गया, पाउडर का कुल क्षेत्रफल मार्बल पत्थर के टुकड़े से ज्यादा है जिससे प्रतिक्रिया द्रुत गति से होती है। CO2 गैस जल्दी निकलने लगता है।

प्रश्न 14.
भौतिक परिवर्तन क्या है ? इसके कुछ उदाहरण दो।
उत्तर :
वे परिवर्तन जो कुछ समय के लिए किसी बाह्य कारक द्वारा पूरा होता है तथा कारक को हटाकर पदार्थ को पुन: उसी रूप में लाया जा सकता है उसे भौतिक परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण :-

  • मोमबत्ती का जलना।
  • प्लेटिनम के धातु को गर्म करना।
  • जल से वाष्प तथा वाष्प से जल का बनना।
  • बल्ब का जलना।
  • लोहे से चुम्बक बनना।

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प्रश्न 15.
रासायनिक परिवर्तन क्या है ? इसके कुछ उदाहरण दो।
उत्तर :
वे परिवर्तन जो पदार्थ की मूल अवस्था में परिवर्तन ला देता है और उसे पुन: पहले की स्थिति में नहीं लाया जा सकता है। इसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण :-

  • लकड़ी जलाना
  • दूध से दही तैयार करना
  • काले बालों का पककर सादा होना
  • लोहे में जंग लगना
  • पेड़ के पत्तों का रंग बदलना
  • कपूर का उड़ जाना

प्रश्न 16.
भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन में अन्तर लिखें।
उत्तर :

भौतिक परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन
i) इसमें पदार्थ स्वरूप नहीं बदलता i) इसमें पदार्थ का स्वरूप बदल जाता है।
ii) इसमें किसी नये पदार्थ का निर्माण नहीं होता। ii) इसमें नये पदार्थ का निर्माण होता है।
iii) इसमें पदार्थ का केवल भौतिक गुण कुछ समय के लिए बदल जाता है। iii) इसमें पदार्थ का रासायनिक गुण हमेशा के लिए बदल जाता है।
iv) इसमें पदार्थ को पुन: प्राप्त किया जा सकता है। iv) इसमें पदार्थ को पुन: प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
v) भौतिक परिवर्तन उभयमुखी घटना है। v) रासायनिक परिवर्तन एकमुखी घटना है।

प्रश्न 17.
बैलगाड़ी के चक्के पर लोहे का छल्ला लगाने के लिए उसे गर्म किया जाता है, क्यों?
उत्तर :
लोहे के छल्ले का आकार बैलगाड़ी के चक्के की तुलना में छोटा होता है। लोहे के छल्ले को गर्म करने पर वह फैल कर बड़ा हो जाता है। बैलगाड़ी का चक्का उसमें फिट हो जाता है। ठंडा होने पर वह पहली वाली स्थिति में आ जाता है। यह एक भौतिक परिवर्तन का उदाहरण है।

प्रश्न 18.
रेलगाड़ी की पटरियों के बीच में कुछ जगह छोड़ी जाती है, क्यों?
उत्तर :
रेलगाड़ी की पटरियाँ लोहे की बनी होती हैं। गर्मी के दिनों में लोहे की पटरी गर्मी पाकर फैल जाती है। यदि उसे बढ़ने के लिए जगह न मिले तो वह टेढ़ा हो सकता है। इसलिए पहले से वहाँ पटरी के बीच फाँक छोड़ दी जाती है।

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र

प्रश्न 19
एक छोटा आलू लो और बीच में से काटकर उसके दो टुकड़े कर लो। उसके भीतर के हिस्से का रंग तुमने कैसा देखा। कुछ समय के लिए आलू को ऐसे रख दो आलू के भीतर वाले हिस्से का रंग बदल जाता है या एक जैसा ही है।
उत्तर :
WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र 1

प्रश्न 20.
फलों को काटकर अधिक समय तक क्यों नहीं रखना चाहिए?
उत्तर :
कटे हुए फलों में जीवाणु रासायनिक परिवर्तन कर वंश की वृद्धि करते हैं। कटे फलों के हिस्से पर मक्खियाँ आकर बैठती हैं उससे कई बीमारियाँ हो सकती हैं। इसलिए कटे फलों को अधिक समय तक नहीं रखना चाहिए।

प्रश्न 21.
नीचे दी गई बीमारियाँ किस मौसम में होती हैं, सही स्थान पर भरो
उत्तर :
WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र 2

प्रश्न 22.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो।
उत्तर :
WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र 3

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र

प्रश्न 23.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो :
उत्तर :
WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र 5

प्रश्न 24.
नीचे दिये गये चित्र में मानव अंगों के नाम लिखें।
उत्तर :
WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 2 हमारे चारों ओर परिव्याप्त घटनाओं का चक्र 6

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
बर्फ का जल में बदलना क्या है ?
(a) एकमुखी
(b) द्विमुखी
(c) कोई नहीं
(d) दोनों
उत्तर :
(b) द्विमुखी

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प्रश्न 2.
मोमबत्ती का गलना तथा जमना क्या है ?
(a) एकमुखी
(b) दिमुखी
(c) कोई नहीं
(d) दोनों
उत्तर :
(b) दिमुखी ।

प्रश्न 3.
चावल उबालकर भात बनाना कौन सी घटना है ?
(a) द्विमुखी
(b) एकमुखी
(c) दोनों
(d) कोई नही
उत्तर :
(b) एकमुखी।

प्रश्न 4.
रास्ते में गाड़ी का आना-जाना कैसी क्रिया है?
(a) एकमुखी
(b) द्विमुखी
(c) पर्यावृत
(d) अर्यावृत
उत्तर :
(d) अपर्यावृत ।

प्रश्न 5.
लीप ईयर किस प्रकार की घटना है ?
(a) एकमुखी
(b) अप्यावृत
(c) पर्यावृत
(d) द्विमुखी
उत्तर :
(c) पर्यावृत।

प्रश्न 6.
भूकम्प किस प्रकार की घटना है?
(a) अप्यावृत
(b) प्रकृतिक
(c) मानव निर्मित
(d) द्विमुखी
उत्तर :
(b) प्राकृतिक ।

प्रश्न 7.
स्वाभाविक मृत्यु किस प्रकार की घटना है ?
(a) अपर्यावृत
(b) मानव निर्मित
(c) प्राकृतिक
(d) पर्यावृत
उत्तर :
(c) प्राकृतिक

प्रश्न 8.
कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना कौन सी घटना है?
(a) प्रकृतिक
(b) ऐच्छिक
(c) मानव निर्मित
(d) अनैक्छिक
उत्तर :
(b) ऐं्छिक।

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प्रश्न 9.
मिथेलिन क्या है?
(a) खाब्ध
(b) कम्पोस्ट
(c) रासायनिक कौटनाशक
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(c) रासायनिक कीटनाशक ।

प्रश्न 10.
लोहे से चुम्बक बनना कैसा परिवर्तन है?
(a) भौतिक परिवर्तन
(b) रासायनिक परिवर्तन
(c) दोनों
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) भौतिक परिवर्तन ।

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प्रश्न 11.
कौन सा परिवर्तन स्थायी है?
(a) रासायनिक परिवर्तन
(b) भौतिक परिवर्तन
(c) कोई नहीं
(d) सभी
उत्तर :
(a) रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 12.
मोमबत्ती का जलना कौन सा परिवर्तन है ?
(a) रासायनिक परिवर्तन
(b) भौतिक परिवर्तन
(c) दोनों
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(c) दोनों

प्रश्न 13.
आँख में जलन होना किस परिवर्तन के कारण होता है?
(a) रासायनिक परिवर्तन
(b) भौतिक परिवर्तन
(c) दोनों
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) रासायनिक परिवर्तन

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. जो घटना एक बार होती है वह …………………. घटना है।
उत्तर : एकमुखी

2. अनाज से खाना बनाना एक …………………. घटना है।
उत्तर : एकमुखी

3. बर्फ से जल तथा जल से बर्फ बनना …………………. घटना है।
उत्तर : द्विमुखी

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4. …………………. घटना एक निर्दिष्ट समय पर घटती है।
उत्तर : पर्यावृत

5. लीपईयर एक …………………. घटना है।
उत्तर : पर्यायवृत

6. ज्वारभाटा …………………. घटना है जबकि बाढ़ आना …………………. घटना है।
उत्तर : पर्यावृत, अपर्यावृत

7. …………………. एक ऐच्छिक घटना है।
उत्तर : पेड़ काटना

8. फूल का खिलना …………………. घटना है।
उत्तर : अनैच्छिक

9. स्वाभाविक रूप से घटित घटना …………………. घटना है।
उत्तर : प्राकृतिक

10. पेड़ का बढ़ना …………………. क्रिया है।
उत्तर : द्रुत

11. लोहे में जंग लगना …………………. परिवर्तन है।
उत्तर : रासायनिक

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12. दूध से छेना का बनना …………………. परिवर्तन है।
उत्तर : द्रुत

13. पदार्थों को चूर्ण कर द्रव तैयार करने पर …………………. विक्रिया शीघ्र होती है।
उत्तर : रासायनिक

14. गेहूँ से आटा बनना …………………. परिवर्तन है।
उत्तर : एकमुखी भौतिक

15. जल से वाष्प बनना …………………. परिवर्तन है।
उत्तर : उभयमुखी भौतिक

16. रासायनिक परिवर्तन से …………………. उत्पत्र होता है।
उत्तर : ताप

17. पौधे भोजन तैयार करने के लिए …………………. शक्ति का प्रयोग करते हैं।
उत्तर : सूर्य ताप

18. पौधों द्वारा तैयार भोजन ………….. शक्ति …………… शक्ति में बदलकर आबद्ध रहता है।
उत्तर : ताप, रासायनिक

19. पौधों का भोजन तैयार करना ………….. परिवर्तन है।
उत्तर : रासायनिक

20. सामान्य खाने वाला नमक मिले जल से ऑक्सीजन हम पाते हैं। यह घटना इसलिए ………….. शक्ति के प्रमाण से ………….. परिवर्तन की घटना है।
उत्तर : ताप, रासायनिक

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21. तालाब या नदी से जल के वाष्प में ताप ………….. से मिलता है।
उत्तर : सूर्य

सही मिलान करो :

प्रश्न 1.

A B
(i) यूरिया a) रासायनिक कीटनाशक
(ii) कार्वारिल b) रासायनिक कीटनाशक
(iii) मेलाथियन c) रासायनिक खाद
(iv) डाइ अमोनियम फासफेट d) रासायनिक खाद

उत्तर :

A B
(i) यूरिया c) रासायनिक खाद
(ii) कार्वारिल a) रासायनिक कीटनाशक
(iii) मेलाथियन b) रासायनिक कीटनाशक
(iv) डाइ अमोनियम फासफेट d) रासायनिक खाद

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प्रश्न 2.

A B
(i) भूकम्प (a) एकमुखी
(ii) मुर्गी का अंडा देना (b) एकमुखी
(iii) ज्वार भाटा (c) ऐच्छिक
(iv) लीपईयर (d) अनैच्छिक
(v) खाना खाने के बाद (e) पर्यावृत
(vi) हजम होना (f) अपर्यावृत
(vii) सुनामी (g) अपर्यावृत

उत्तर :

A B
(i) भूकम्प (d) अनैच्छिक
(ii) मुर्गी का अंडा देना (e) पर्यावृत
(iii) ज्वार भाटा (f) अपर्यावृत
(iv) लीपईयर (c) ऐच्छिक
(v) खाना खाने के बाद (a) एकमुखी
(vi) हजम होना (g) अपर्यावृत
(vii) सुनामी (b) एकमुखी

 

 

 

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 4 भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (द्वितीय पर्याय (चरण) लगभग ईसा पूर्व 1500-6000 तक)

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 History Book Solutions Chapter 4 भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (द्वितीय पर्याय (चरण) लगभग ईसा पूर्व 1500-6000 तक) offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Geography Chapter 4 Question Answer – भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (द्वितीय पर्याय (चरण) लगभग ईसा पूर्व 1500-6000 तक)

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
विश्व की सबसे प्राचीन पुस्तक का नाम बताओ।
उत्तर :
ॠग्वेद।

प्रश्न 2.
आर्यों का मूल निवास स्थान कहाँ था?
उत्तर :
आर्यों का मूल निवास स्थान मध्य एशिया था।

प्रश्न 3.
वेद शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर :
वेद शब्द का अर्थ है ज्ञान ।

प्रश्न 4.
आर्य परिवार का प्रधान कौन होता था?
उत्तर :
पिता।

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प्रश्न 5.
आर्यों के साहित्य को क्या कहा जाता है?
उत्तर :
वैदिक साहित्य।

प्रश्न 6.
वैदिककालीन सिक्कों के क्या नाम थे?
उत्तर :
निष्क, शतमान।

प्रश्न 7.
ऋग्वेद में कितने सूक्त हैं ?
उत्तर :
1028 सूक्त हैं।

प्रश्न 8.
वेद का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर :
वेद का दूसरा नाम श्रुति है।

प्रश्न 9.
वैदिक साहित्य को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर :
वैदिक साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है – वेद तथा वेदांग।

प्रश्न 10.
वैदिक समाज की राजनैतिक सभाओं का नाम बताइए।
उत्तर :
सभा और समिति।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
वेद को सुन-सुनकर याद रखना पड़ता था। इसके क्या कारण थे ?
उत्तर :
वैदिक साहित्य से ही उस युग की शिक्षा व्यवस्था के बारे में पता चलता है। शिक्षा व्यवस्था के प्रधान गुरु थे। मौखिक रूप से शिक्षा की बाते होती थी। गुरु एक भाग को पढ़कर उसके अर्थ को बता देते थे। छात्र उसे सुनकर उसकी आवृत्ति तथा याद करते थे। याद करने के लिए उच्चारण पर ज्यादा जोर दिया जाता था। वैदिक युग में किसी भी प्रकार की लिषि की खोज पुरातत्त्ववेताओं को नहीं मिला।

प्रश्न 2.
आर्य कौन थे ?
उत्तर :
विद्वानों का मानना है कि आर्य वैदिक सभ्यता के संस्थापक थे। आर्य शब्द का अर्थ होता है – श्रेष्ठ। ये स्वभाव से अध्ययनशील और पर्यटनशील होते थे। ये बहुत पराक्रमी, साहसी तथा युद्धप्रिय होते थे। इनका प्रमुख पेशा कृषि और पशुपालन था। आर्य प्रधानत: संस्कृत भाषा बोलते थे।

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प्रश्न 3.
आर्य कहाँ के मूल निवासी थे ?
उत्तर :
इस सम्बन्ध में अधिकांश इतिहासकारो एवं विचारकों का यह मानना है कि आर्य या इण्डो आर्य जो कि इण्डोयूरोपियनों के वंशज थे, भारत के मूल निवासी नहीं थे वरन्बंजारे थे और शुरू में ऑस्ट्रिया में और उत्तरी ईरानी पठार पर रहे जहाँ से वे हिन्दुकुश के दर्रों से होकर भारत में प्रवेश किये। उनके मूल निवास के सम्बन्ध में भी विचारों में मतभेद है। मध्य एशिया, दक्षिणी रूस, पामीर का पठार, ज़र्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और भारत ही विभिन्न विद्वानों द्वारा आर्यों के सम्भावित मूल स्थान के रूप में माना जाता रहा है। मैक्समूलर ने मध्य एशिया को आयों का मूल स्थान माना है। सर्वाधिक मान्य विचार यही है कि वे मध्य एशिया के विभिन्न भागों से आये थे।

प्रश्न 4.
वैदिक साहित्य का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर :
संस्कृत में विद् शब्द का अर्थ जानना या ज्ञान होता है। इस विद् शब्द से ही वेद शब्द की उत्पत्ति हुई है ।
वेद : मूल विभाग : वेदों को प्रमुख रूप से चार भागों में बाँटा गया है – ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद एव अथर्वेद। प्रत्येक के चार भाग हैं – संहिता, बाह्मण, अरण्यक, उपनिषद या वेदांत।
सूत्र साहित्य : वैदिक साहित्य के मूल तत्व को संक्षेप में तथा सही तरीके से समझने के लिए सूत्र साहित्य की रचना की गई है।
इसके दो भाग हैं – (i) वेदांग (ii) षड्दर्शन।
(i) वेदांग : वेद पाठ के लिए जिस छ: विद्या की जरूरत होती है, उसे वेदांग कहा गया है।
(ii) घड्दर्शन : ऋषि, मुनियों ने छ: दर्शन ग्रन्थों की रचना की जिन्हे षड्दर्शन कहते हैं।

प्रश्न 5.
वेदों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर :
वेद शब्द का अर्थ है ज्ञान । वेद आर्यों का प्रधान ग्रन्थ था। वेद का दूसरा नाम श्रुति भी है। वेदों की रचना2500ई० पू० के आसपास मानी जाती है। वेद चार हैं – ॠग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्वेद। ॠग्वेद संसार का सबसे प्राचीन धर्म ग्रन्थ माना जाता है। वेदों में मंत्रों का संग्रह है। इसलिए वेदों को संहिता भी कहा जाता है।

  1. ऋग्वेद में अग्नि, इन्द्र, वरुण इत्यादि देवताओं की स्तुति से सम्बन्धित मंत्रों का संग्रह है।
  2. सामवेद में ऋचाओं का संग्रह है।
  3. यजुर्वेद में यज्ञ सम्बन्धी सूत्रों का संग्रह है।
  4. अथर्वेद में तंत्र-मंत्र तथा चिकित्सा आदि की चर्चा है।

प्रश्न 6.
ऋग्वेद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
ॠग्वेद संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्य है। ऋग्वेद में अग्नि, इन्द्र, वरुण इत्यादि देवताओं की स्तुति से सम्बन्धित मंत्रों का संग्रह है। ॠग्वेद में कुल 1028 सूक्त हैं, प्रत्येक सूक्त स्तुति मंत्रों में विभक्त है, जिनकी कुल संख्या 10580 हैं। क्रेक दस खण्डों में विभक्त है। इसकी रचना 2500 ई० पू० से 1500 ई० पू० तक के मध्य में सप्त सिन्धु प्रदेश में हुई थी।

प्रश्न 7.
ऋग्वैदिक युग के चतुराश्रम का परिचय दीजिए :-
उत्तर :
वैदिक काल में आर्यों ने अपने जीवन को एक सौ वर्ष का मानकर उसे ब्रहाचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास नामक चार आश्रमों में बाँट लिया था। इसे चतुराश्रम कहते हैं। प्रत्येक आश्रम के लिष्ट2 5 वर्ष का समय निश्चित किया गया था।

  1. ब्रह्मचर्य : बह्मचर्य आश्रम मे ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए व्यक्ति गुरुकुल में जाकर विद्या अध्ययन करता था।
  2. गृहस्था आश्रम : गृहस्था आश्रम में व्यक्ति विवाह कर घर पर रहते हुए सांसारिक जिम्मेदारियाँ संभालता था।
  3. वानप्रस्थ : वान्रस्थ में घर पर ही रहकर गृहकार्यों से अलग होकर ईश्शर चिन्तन करता था।
  4. संन्यास आश्रम : संन्यास आश्रम में व्यक्ति घर छोड़कर जंगल में चला जाता था एवं वहीं पर ईश्वर चिन्तन करते हुए शरीर का त्याग करता था।

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प्रश्न 8.
वैदिक समाज को कितने भागों में बाँटा गया था तथा उनके प्रत्येक भाग के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
समाज में एक ही व्यक्ति के लिए सभी प्रकार का कार्य करना संभव नहीं था। इस विषय को ध्यान में रखते हुए समाज को चार भागों में विभक्त किया गया था। ये भाग थे – (i) ब्राह्मण (ii) क्षत्रिय (iii) वैश्य (iv) शूद्र।
ब्राह्मण का काम शिक्षा देना तथा यज्ञ करना, क्षत्रीय का काम शासन करना एवं रक्षा करना था, वैश्य का काम कृषि एवं व्यापार करना और शूद्र का काम सेवा तथा सफाई करना था।

प्रश्न 9.
वैदिक काल में राजा बनने के लिए कौन-कौन तरीके थे ?
उत्तर :
वैदिक काल में एक राजा दूसरे राजाओं से युद्ध करके जीत कर राजा बनते थे तो कोई राजा के पुत्र केनाते उत्तराधिकार के रूप में राजा बनते थे। कभी-कभी तो समूह के सभी लोग मिलकर अपनों के बीच से एक राजा का चुनाव करते थे।

प्रश्न 10.
ऋग्वैदिक काल में ‘सभा’ और ‘समिति’ के क्या कार्य थे?
उत्तर :
राजा स्वेच्छाचारी न हो इसके लिए ‘सभा’ और ‘समिति’ नामक दो संस्थानों का गठन किया जाता था। समिति मे राज्य के प्रमुख सम्मानित पुरुष शामिल होते थे। समिति का प्रमुख कार्य राजा का चुनाव करना तथा कर्त्तव्य का पालन न करने पर उन्हें पद से अलग कर देने का था। विद्वानों एवं वयोवृद्ध लोगों को लेकर सभा का गठन होता था। सभा समिति से छोटी होती थी। सभा का मुख्य कार्य राजा को सलाह देना तथा न्याय करने में मदद करना होता था।

प्रश्न 11.
ॠग्वैदिक समाज में नारियों की क्या स्थिति थी?
उत्तर :
कग्वैदिक युग में ख्रियों को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था। ये गृहस्वामिनी होती थें और धार्मिक कारों में अपने पति के साथ भाग लेती थीं। समाज में इनको आदर की दृष्टि से देखा जाता था। ॠग्वेद में कुछ विदुषी खियों का उल्लेख भी मिलता है। गार्गी, अपाला, घोषा तथा लोषामुप्रा इस काल की परम विदुषी खियाँ थीं। बाल विवाह तथा पर्दा प्रथा कमचलन न था। स्रियों को भी उचित शिक्षा द्वारा योग्य बनाया जाता था। स्रियों को सदैव किसी के संरक्षण में रहना पड़ता था।

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प्रश्न 12.
रामायण और महाभारत के बारे में क्या जानते हो?
उत्तर :
वेदों के बाद रामायण और महाभारत नामक दो महाकाव्यों की रचना हुई। रामायण की रचना महाकवि महार्षि वाल्मीकि ने की और महाभारत की रचना महर्षि वेद व्यास ने की। इन महाकाव्यों से वैदिक युग के बाद की राजनीतिक, सामाजिक और सांसारिक दशा का ज्ञान प्राप्त होता है।

प्रश्न 13.
ॠग्वैदिक युग में आर्यों के आर्थिक जीवन के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
आर्यों की आजीविका का प्रधान साधन कृषि था। बैलों के जोड़े की सहायता से खेतों की जुताई होती थी। गेहूँ एवं जौ उत्पादन की प्रमुख वस्तुएँ थीं। आर्य गाय, बैल, घोड़े, बकरी, कुत्ते, गदहे आदि पालते थे। आर्य व्यापार एवं उद्योग धंधों के प्रति उदासीन नहीं थे। व्यापार अधिकांशत: ‘वणिक’ के हाथों में था। गाय विनिमय की प्रमुख साधन थी। यद्यपि सोने का निष्क भी लेन-देन में प्रयोग होता था।
खेती, पशुपालन एवं व्यापार के अलावा कुछ उद्योग एवं कला-कौशल भी प्रचलित थे। बढ़ई, लोहार, सोनार और कुम्हार तरह-तरह के सामानों का निर्माण करते थे। इन वस्तुओं का निर्यात विदेशों में भी होता था।

प्रश्न 14.
परवर्ती वैदिक समाज में नारी की स्थिति कैसी हो गई?
उत्तर :
परवर्ती वैदिक समाज में नारी की मर्यादा एवं स्वाधीनता दोनों ही कम होने लगी थी। नारी को सम्पत्ति के अधिकार से वंचित किया जाने लगा। सामाजिक पाबंदियाँ बढ़ने लगीं। फिर भी युग की कुछ विदुषी महिलाएँ गार्गी, अपाला, घोषा आदि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता दिखाई थी।

प्रश्न 15.
वैदिक युग में गुरु और शिष्य के बीच कैसा सम्पर्क था?
उत्तर :
वैदिक युग में शिक्षा के क्षेत्र में गुरु और शिष्य के बीच का सम्पर्क बहुत ही मधुर था। गुरु वेद का एक अंश बोलकर उसका अर्थ शिष्य को समझा देते थे। शिष्य गुरु द्वारा समझाये गये अंश को पुनः पाठ करते एव याद रखते थे। शिक्षा के साथ-साथ शिष्य अनेक कार्य भी किया करते थे। शिष्यों के रहने एवं भोजन की जिम्मेदारी गुरु के ऊपर ही होती थी।

प्रश्न 16.
परवर्ती वैदिक समाज में वैश्य और शूद्रों की स्थिति कैसी थी?
उत्तर :
परवर्ती वैदिक समाज में वैश्य और शूद्रों की स्थिति धीरे-धीरे खराब होती गयी।परवर्ती वैदिक साहित्य में वैश्य को हेय (नीच) करके दिखाया गया। वर्ण व्यवस्था का सबसे खराब प्रभाव शूद्रों पर पड़ा था। उनके लिए किसी भी प्रकार की सामाजिक सुख-सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं।

प्रश्न 17.
गोत्र से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
समूह में पालतू पशु को रखने की जगह को गोत्र कहा जाता था। बाद में इस गोत्र का मतलब पूर्वजों के उत्तराधिकारी के रूप में व्यक्त किया जाने लगा जाति-पाति, भेद-भाव प्रथा को कठोर बनाने के क्षेत्र में गोत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी।

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प्रश्न 18.
परवर्ती वैदिक युग में शिक्षा में क्या परिवर्तन हुए?
उत्तर :
परवर्ती वैदिक युग में शिक्षा के साथ उपनयन संस्कार देखा जाता था। उपनयन कार्यक्रम के जरिए गुरु उस छात्र को शिष्य के रूप में स्वीकार करता था। लड़कियों का भी उपनयन होता था। गुरु के पास रहकर ही छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे। वहाँ पर शिक्षण के साथ-साथ दूसरे प्रकार के जीवन-यापन संबंधी कार्य भी शिष्यों से करवाए जाते थे। शिष्यों को रखने और खिलाने का दायित्व गुरु के ऊपर होता था।

प्रश्न 19.
आरुणी कौन था? वह किसका शिष्य था?
उत्तर :
प्राचीन समय में आयोद धौम नामक एक ऋषि थे। उनके तीन विख्यात शिष्य थे। उसमें आरुणी नाम का एक शिष्य था। वह बहुत ही आज्ञाकारी शिष्य था।
एक दिन जोरों की वर्षा हुई। आश्रम के पास धान का खेत था। गुरुजी ने खेत में पानी देखने के लिए आरुणी को भेजा और कहा कि यदि कहीं खेत में मेड़ से पानी निकल रहा हो तो उसे बाँध देना। आरुणी खेत पर पहुँचा। उसने देखा कि खेत में पानी लगा है। अब वह घूम-घूम कर देखने लगा कि कहीं मेड़ तो नहीं टूटी है। अचानक दिखाई पड़ा कि एक स्थान पर मेड़ टूटी हुई है और पानी तेजी से निकल रहा है। उसने बाँध को बाँधने का काफी प्रयास किया लेकिन इसके बावजूद खेत का सभी पानी उसी जगह से बाहर निकल रहा था। इसलिए उस पर बाँध बाँधने में काफी मुश्किल हो सकती थी।

वहीं दूसरी ओर गुरु के आदेश का पालन करने के लिए पानी को रोकना ही था। तब अन्त में आरुणी असहाय होकर बाँध के ऊपर ही सो गया। इस प्रकार अपने शरीर के द्वारा जल सोत को रोकने का प्रयास किया। आरुणी को जब खेत से लौटने में देर हुई तो गुरुजी उसकी तलाश करते हुए खेत के पास पहुँचे। गुरु की आवाज को सुनकर आरुणी बाँध से ऊपर उठ गया। गुरुजी आरुणी के मुख से सारी बातें सुनकर उसकी गुरु भक्ति से काफी प्रसन्न हुए। खेत के बाँध और केदार खण्ड को भेदकर आरुणी उठकर आया था। इसलिए महर्षि ने उनका नाम उद्दालक रखा। उद्दालक बाद में एक प्रसिद्ध गुरु हुए।

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 4 1

प्रश्न 20.
समावर्तन कार्यक्रम कब सम्पन्न होता था?
उत्तर :
साधारण तौर पर बारह वर्ष तक शिक्षा प्राप्त करने का कार्य चलता था। कुछ लोग तो जीवन भर छात्र बने रहते थे। ऐसे ही बारह वर्ष की पढ़ाई समाप्त अथवा पूरी होने पर समावर्तन कार्यक्रम होता था। इस कार्यक्रम के जरिए ही छात्र को स्नातक की उपाधि मिलती थी। पढ़ाई-लिखाई के अंत में छात्रों के विशेष स्नान करने की प्रथा थी। उससे ही स्नातक शब्द आया है। गुरु आश्रम छोड़कर जाने से पहले छात्र अपनी सामर्थ्य के अनुसार गुरु को गुरु दक्षिणा देते थे।

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प्रश्न 21.
वैदिक युग में शिक्षा पद्धति में किस विषय पर बहुत जोर दिया जाता था?
उत्तर :
वैदिक युग में वेद पाठ के जरिए ही शिक्षा प्रदान की जाती थी। उसके साथ गणित, व्याकरण और भाषा शिक्षण के ऊपर भी जोर दिया जाता था। स्वयं बहुत कुछ सीखना पड़ता था। छात्रों को स्वयं की रक्षा करने के लिए अस्र-शस्र चलाना भी सीखना पड़ता था। ऐसा कि ब्राह्मण भी अस्त्र-शस्र की शिक्षा ग्रहण करते थे। जैसे – महाराभारत में द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और परशुराम के बारे में जानकारी मिलती हैं। छात्र चिकित्सा करना भी सीखते थे। लडुकियाँ दूसरे विषयों के साथ नृत्य और गीत की शिक्षा भी लिया करत करती थीं।

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प्रश्न 22.
एकलव्य के बारे में क्या जानते हो? उल्लेख करो।
उत्तर :
हिरनधनु भीलों के राजा थे। उनका एकलौता पुत्र एकलव्य था। एकलव्य बहुत ही साहसी और परिश्रमी था। एकलव्य को तीर चलाना सीखने की इच्छा हुई। उसने सुना था कि गुरु द्रोणाचार्य सबसे बड़े अस्त्र शिक्षक थे। उसने द्रोणाचार्य से तीर चलाने की शिक्षा नहीं ली लेकिन गुरु-दक्षिणा के रूप में उसे अपना एक अंगूठा देना पड़ा।

प्रश्न 23.
एकलव्य अपने पिता हिरनधनु से द्रोणाचार्य के विषय में क्या जानना चाहता था?
उत्तर :
एकलव्य ने अपने पिता से द्रोणाचार्य के बारे में जानना चाहा कि गुरु द्रोणाचार्य केवल क्षत्रिय बालको को ही अखु शिक्षा देते हैं। भील बालक को वे किसी भी तरह से अपना शिष्य नहीं बनाएंगे। इस बाल को सुनकर एकलव्य ने कहा, मैं तो केवल आचार्य, द्रोणाचार्य से ही तीर चलाने की शिक्षा प्राप्त करूँगा।

प्रश्न 24.
एकलव्य ने द्रोणाचार्य से अपनी किस आशंका का निराकरण किया?
उत्तर :
द्रोणाचार्य की कुटिया में जाकर उन्हें प्रणाम करके अपना परिचय दिया। द्रोणाचार्य से कहा, मैं आपसे तीर चलाने की शिक्षा लेने आया हूँ। आप मुझे अपना शिष्य बना लीजिए। द्रोणाचार्य ने एकलव्य को समझाते हुए कहा- मैं तुम्हें अपना शिष्य नहीं बना सकता हूँ। मैं केवल क्षत्रिय को ही अस्र का शिक्षा देता हूँ और तुम भील पुत्र हो, इसलिए घर को लौट जाओ।

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प्रश्न 25.
एकलव्य किस प्रकार धनुष विद्या में पारंगत हुआ?
उत्तर :
एकलव्य द्रोणाचार्य की कुटिया से निकलकर घर की ओर नहीं लौटा। जंगल में जाकर वह मिट्टी से आचार्य द्रोण की मूर्ति बनायी और अकेले ही उस मूर्ति के समक्ष तीर चलाने का अभ्यास करने लगा। इसी तरह से कुछ दिनों के बाद वह वास्त्व में एक बहुत बड़ा धनुर्धारी बन गया। एक दिन द्रोणाचार्य की मूर्ति को सामने रखकर तीर चलाने का अभ्यास कर रहा था, तभी अचनाक एक कुत्ते की आवाज से उसका ध्यान भंग हो गया। लाचार होकर एकलव्य ने कुत्ते के मुँह को तीर से बन्द कर दिया।

उसी अवस्था में वह कुत्ता दौड़ते हुए कौरवों और पांडवों के राज कुमारों के पास गया। कुत्ते की अवस्था को देखकर वे समझ गए कि इस तरह से तीर मारना आश्वर्य की बात है। अर्जुन भी इस तरह से तीर नहीं चला सकता था। द्रोणाचार्य कुत्ते को देखकर आश्र्य चकित हो गए। वे मन ही मन उस धनुर्धरी की प्रशंसा करने लगे।

कुछ दूरी पर जाकर द्रोणाचार्य ने देखा कि एकलव्य तीर चलाने का अभ्यास कर रहा है। उन्होने एकलव्य से पूछा, तुम्हारा गुरु कौन है? एकलव्य ने कहा- आचार्य द्रोणाचार्य मेरे गुरु हैं। तब एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य की मूर्ति को दिखाया। द्रोणाचार्य एकलव्य के परिश्रम और सीखने के अभ्यास को देखकर काफी प्रसत्न हुए। लेकिन उन्होंने अर्जुन को वचन दिया था कि वे उसे दुनिया का सबसे अच्छा धनुर्धारी बनाएँगे। लेकिन एकलव्य ने अर्जुन को भी पीछे छोड़ दिया था।

प्रश्न 26.
द्रोणाचार्य ने एकलव्य से गुरुदक्षिणा के रूप में क्या माँगा?
उत्तर :
एकलव्य से गुरुदक्षिणा के रूप में द्रोणाचार्य ने कहा, तब तो तुम मुझे अपनी दाहिने हाथ की अंगूठे को दे दो। एकलव्य ने तुरन्त ही अपने दाहिने हाथ के अंगूठे को काटकर गुरु द्रोणाचार्य को गुरु दक्षिणा के रूप में दे दिया।

प्रश्न 27.
मेगालीथ के बारे में क्या जानते हो?
उत्तर :
बड़े पत्थरों की समाधि को मेगालीथ कहा जाता है। प्राचीन भारत में लोहा का प्रयोग के साथ ही इस समाधि क सम्पर्क में जानकारी मिली है? विभिन्न क्षेत्रों के जनसमूह बड़े-बड़े पत्थरों को परिवार के मृत व्यक्तियों की समाधि को चिह्लित करते थे। बड़े पत्थरों से चिह्नित इस समाधि में विभिन्न प्रकार के आकृति देखने को मिलता था। कहीं आकाश की ओर देखती हुई बड़ी पत्थर तो कहीं वृत्ताकार सजाए हुए असंख्य पत्थर, तो कहीं पर अनेक पत्थरों से एक बड़े पत्थर को ढंका गया था। कहीं पर पहाड़ को काटकर बनाई गई गुफा के भीतर समाधि। इन सभी समाधियों से मनुष्य के कंकाल और उनके द्वारा प्रयोग की गई वस्तुएं मिली। कश्मीर के बुरजाहोम, राजस्थान के भरतपुर एवं इनामगाँव प्रसिद्ध मेगालीथ केन्द्र थे।

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प्रश्न 28.
वैदिक युग में किस दूसरे समाज का पता चला है? उनके बारे में क्या जानते हो?
उत्तर :
पूरे भारतीय उपमहादेश में वैदिक सभ्यता का विस्तार नहीं हुआ था। सिंधु और गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों में हो वैदिक बस्तियाँ थी। पूर्व, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भाग में वैदिक सभ्यता नहीं थी। उपमहादेश के दूसरे क्षेत्रों में इस समय दूसरे प्रकार की संस्कृति की खोज पुरातत्ववेत्ता को मिली। उन संस्कृतियों में मनुष्य लोहा और ताँबा का अस्र प्रयोग करते थे। काले और लाल रंग की मिट्टी के पात्र (बर्तन) का व्यवहार करते थे। मिट्टी से बने दूटे घर की खोज पुरातत्ववेत्ता को मिली। पश्चिम बंगाल के महिषादल में ऐसी ही संस्कृति की खोज मिली है। वहाँ पर ग्रामीण कृषि समाज के बारे में जानकारी मिलती है। वे मृतकों को समाधि देते थे। महाराष्ट्र के इनामगाँव में भी ऐसे ही समाज की खोज मिली है।

प्रश्न 29.
आर्यों द्वारा अपनी बस्ती के विस्तार किये जाने का उल्लेख करो।
उत्तर :
आर्यों के बस्ती विस्तार को लेकर इतिहासकारों में विभिन्न मत प्रचलित हैं –

  1. सप्त सिंधु क्षेत्र : आर्यों ने सबसे पहले सिंधु नदी के पूर्वी तट सप्त सिंधु क्षेत्र में अपनी बस्ती का निर्माण किया था।
  2. गंगा-यमुना का दोआब क्षेत्र : परवर्ती समय में आरों ने गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में अपना निवास-स्थल बनाया था।
  3. पूर्वी भारत : ॠग्वेद के परवर्ती समय में आर्य सभ्यता सिंधु नदी को पीछे छोड़ते हुए पूर्व की तरफ अपने को विस्तृत किया था।
  4. दक्षिण भारत : परवर्ती युग के अंतिम भाग में दक्षिण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में आर्यो की सभ्यता का विकास हुआ था।

प्रश्न 30.
ऋग्वैदिक युग में आर्यों की सामाजिक अवस्था से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
सामाजिक अवस्था :-

  1. परिवार प्रथा : ऋग्वैदिक युग का समाज पितृ तांत्रिक था। पितृ तांत्रिक परिवार को ऋग्वेद में ‘कुल’ कहा जाता था तथा परिवार के प्रधान पुरुष को कुलपति या गृहपति कहा जाता था। पिता ही परिवार का प्रधान होता था।
  2. समाज में नारी का स्थान : ऋग्वैदिक युग में नारी को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। उस समय नारियाँ सामाजिक उत्सव, विद्याचर्चा एवं युद्ध में हिस्सा लेती थीं। नारियों को अपने जीवन साथी स्वयं चुनने का अधिकार था।
  3.  वर्ण भेद प्रथा : आर्य समाज को गुण और कार्य के आधार पर ब्राहण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र इन-वार वर्णों में विभाजित किया गया था। ब्राह्मण का कार्य पूजा करना एवं शिक्षा देना, क्षत्रिय का युद्ध करना, वैश्य लोग व्यापार एवं शूद्रों का कर्तव्य शेष तीनों वर्गों के लोगों की सेवा करना था।

प्रश्न 31.
ब्राह्मण ग्रन्थ क्या है?
उत्तर :
बाह्मण ग्रन्थ गद्य रचनाएँ हैं। इनमें यज्ञ के समय में प्रयोग की जाने वाले नियमों का वर्णन मिलता है। चूँकि यज्ञ ब्राह्मण करवाते हैं तथा इन ग्रन्थों में उन्हीं को निर्देश दिये गये हैं अतः उन्हें ब्राह्मण ग्रन्थ कहा गया है ।

प्रश्न 32.
ॠग्वैदिक काल में राजा की क्या स्थिति थी?
उत्तर :
ऋग्वैदिक काल में राजा का पद वंशानुगत होता था। राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था लेकिन स्वेच्छाचारी नहीं होता था। प्रजा की रक्षा करना तथा शान्ति-व्यवस्था की स्थापना करना राजा का प्रमुख कार्य होता था।

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प्रश्न 33.
उत्तर वैदिक काल में किन लोगों ने कृषि के उत्पादन में वृद्धि की और किसने इसका उपयोग किया।
उत्तर :
i) उत्तर वैदिक काल में वैश्य और शूद्र जाति के लोगों ने परिश्रम करके कृषि के उत्पादन में वृद्धि की।
ii) ब्राह्मण एवं क्षत्रिय वर्ग के लोगों ने इसका उपयोग किया और आनन्द से जीवन व्यतीत किया।

प्रश्न 34.
संहिता क्या है ?
उत्तर :
वेदों को संहिता कहा जाता है। क्योंकि वेदों में मंत्रों का संग्रह किया गया है।

प्रश्न 35.
उपनिषद् क्या है? उन्हें वेदान्त क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
i) उपनिषद् मूलत: दार्शनिक ग्रन्थ हैं। उपनिषद् शब्द का अर्थ ‘पास में बैठना’। इनमें जीव, आत्मा, परमात्मा, ब्रह्म कर्म इत्यादि की चर्चा की गई है। ये ज्ञान और दर्शन के भण्डार हैं।
ii) उपनिषद् वेद के अन्तिम भाग हैं। अत: इन्हे वेदान्त भी कहते हैं।

प्रश्न 36.
सूत्र क्या हैं ?
उत्तर :
जब वैदिक साहित्य का रूप बहुत बड़ा हो गया तब उसे याद रखना बहुत कठिन हो गया था। अत: विद्वान ने बड़े-बड़े भाव को छोटे-छोटे कथनों के रूप में संक्षिप्त रूप दे दिया। इसलिए इन्हें सूत्र कहा गया है।

प्रश्न 37.
परवर्ती वैदिक युग में शिक्षा में किस प्रकार का परिवर्तन देखने को मिलता है?
उत्तर :
इस युग में शिक्षा के साथ एक और भी चीज देखने को मिलती थी वह था उपनयन संस्कार। इस रिवाज के अनुसार गुरु छात्रों को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करते थे। लड़कियों के भी उपनयन के थोड़े-बहुत प्रमाण मिलते हैं। गुरुआश्रम में ही छात्र-छात्राओं के रहने की व्यवस्था होती थी एवं शिक्षा के साथ-साथ अन्य जीवन-यापन संबंधी कार्य करवाए जाते थे। शिष्यों के रहने, खाने एवं उनकी सुरक्षा का दायित्व गुरु के हाथों में होता था।

प्रश्न 38.
एकलव्य के विषय में आप क्या जानते हो?
उत्तर :
एकलव्य भीलों के राजा हिरनधनु का इकलौता पुत्र था। एकलव्य बचपन से ही बहुत साहसी और परिश्रमी था। एकलव्य अपने पिता से सुना था कि गुरु द्रोणाचार्य सबसे बड़े असु-शिक्षक हैं किन्तु वे सिर्फ राजकुमारों को ही धनुर्विद्या सिखाते हैं। एकलव्य को जब गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा देने से इनकार कर दिया तो उसने उनकी प्रतिमा बनाई और उनको गुरु मानकर धनुष विद्या का अभ्यास करने लगा। लेकिन जब यह बात गुरु द्रोणाचार्य को मालूम हुई तो उन्होंने उससे गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य का दाहिना अंगूठा ही माँग लिया जिसे एकलव्य ने सहर्ष स्वीकार करते हुए गुरु दक्षिणा के रूप में अपना दाहिना अंगूठा दे दिया।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
आदि वैदिक युग के इ्तिहास को जानने का प्रधान स्रोत है $i$
(क) जैन अवेस्ता
(ख) महाकाव्य
(ग) ऋग्वेद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) ॠग्वेद

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प्रश्न 2.
मेगालीथ को भी कहा जाता है।
(क) पत्थर की गाड़ी
(ख) पत्थर की समाधि
(ग) पत्थर के खिलौन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) पत्थर की समाधि

प्रश्न 3.
ॠग्वेद में राजा __________ थे।
(क) समूह के प्रधान
(ख) राज्य के प्रधान
(ग) समाज के प्रधान
(घ) देश का प्रधान
उत्तर :
(क) समूह प्रधान

प्रश्न 4.
वैदिक समाज में परिवार का प्रधान __________ होते थे।
(क) राजा
(ख) विशपति
(ग) पिता
(घ) माता
उत्तर :
(ग) पिता

प्रश्न 5.
दस राजा के युद्ध की कहानी __________ में है।
(क) क्रेद्वे
(ख) सामवेद
(ग) यजुर्वेद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) ऋग्वेद

प्रश्न 6.
वेदांग की संख्या __________ है ।
(क) तीन
(ख) छ:
(ग) नौ
(घ) चार
उत्तर :
(ख) छ:

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प्रश्न 7.
ऋग्वेद में __________ पर्वत का उल्लेख नहीं है।
(क) अरावली
(ख) हिमालय
(ग) विन्न्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) विन्थ्य

प्रश्न 8.
ऋग्वैदिक युग में __________ प्रमुख पालतू पशु था।
(क) हाथी
(ख) हिरण
(ग) घोड़ा
(घ) शेर
उत्तर :
(ग) घोड़ा

प्रश्न 9.
वैदिक साहित्य को सही तरीके से समझने के लिए __________ की रचना हुई थी।
(क) गीता
(ख) वेदांग
(ग) उपनिषद्
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) वेदांग

प्रश्न 10.
__________ शब्द का अर्थ संकलन करना है।
(क) बाह्मण
(ख) संहिता
(ग) आरण्यक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) संहिता

प्रश्न 11.
________ को गीता की तरह गाया जाता है।
(क) सामवेद
(ख) यजुर्वेद
(ग) अथर्वेद
(घ) समवेद
उत्तर :
(ख) यजुर्वेद

प्रश्न 12.
विद् शब्द का अर्थ है।
(क) ज्ञान
(ख) बुद्धि
(ग) मेधा
(घ) इनेमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) ज्ञान

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प्रश्न 13.
इतिहासकारों का मत है कि __________ दिशा से आर्यों भारत में प्रवेश किया था ।
(क) उत्तर – पूर्व
(ख) उत्तर – पथिम
(ग) दक्षिण – पश्चिम
(घ) पूर्व – दक्षिण
उत्तर :
(ख) उत्तर – पश्चिम

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ॠग्वेद _______ युग का इतिहास जानने का प्रमुख साधन है।
उत्तर : वैदिक।

2. आर्य भारत में __________ दिशा से प्रवेश किए थे।
उत्तर : पश्चिम।

3. पत्थर की समाधि के रूप में __________ को जानते हैं।
उत्तर : मोगलिथ।

4. विद् शब्द का प्रयोग __________ के लिए हुआ है।
उत्तर : ज्ञान।

5. __________ द्रोणाचार्य के श्रेष्ठ शिष्य थे।
उत्तर : अर्जुन।

6. हिरनधनु के पुत्र का नाम __________ था।
उत्तर : एकलव्य।

7. __________ इन्डो आर्य की भाषा है
उत्तर : ॠग्वेद।

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8. __________ में जादू-मंत्र का संकलन है।
उत्तर : अथर्वेद।

9. __________ आर्य के प्रधान पशु था
उत्तर : घोड़ा।

10. वृक्ष __________ देवता है
उत्तर : सोम

असमानता वाले शब्द को ढूंढकर लिखिए :-

  1. ॠग्वेद, महाकाव्य, सामवेद, अथर्वेद
  2. ब्राह्मण, क्षत्रीय, शूद्र, नृपति।
  3. इनामगाँव, हस्तिनापुर, कौशाम्बी, श्रावस्ती।
  4. उषा, अदिति, पृथ्वी, दुर्गा।
  5. रामायण, महाभारत, इलियड, अकबरनामा।
  6. ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, ब्राह्मण।
  7. गंगा, यमुना, गोदावरी, मथुरा।

उत्तर :

  1. महाकाव्य
  2. नृपति
  3. इनामगाँव
  4. दुर्गा
  5. अकबरनामा
  6. ब्राह्मण
  7. मथुरा।

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) आयोद धौम के शिष्य (a) अरुणी
(ii) हिरन मुनि के पुत्र (b) पत्थर की समाधि के क्षेत्र
(iii) मेगालीथ (c) अर्जुन
(iv) द्रोणाचार्य के शिष्य (d) एकलव्य

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) आयोद धौम के शिष्य (a) अरुणी
(ii) हिरन मुनि के पुत्र (d) एकलव्य
(iii) मेगालीथ (b) पत्थर की समाधि के क्षेत्र
(iv) द्रोणाचार्य के शिष्य (c) अर्जुन

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प्रश्न 2.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) असंख्य कार्यो में सहायक (a) घोड़ा
(ii) आर्य के प्रधान पशु (b) रत्नीन
(iii) वैदिक युग की मुद्रा (c) गोत्र
(iv) पशुओं की बाड़ (d) निष्क

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) असंख्य कार्यो में सहायक (b) रत्नीन
(ii) आर्य के प्रधान पशु (a) घोड़ा
(iii) वैदिक युग की मुद्रा (d) निष्क
(iv) पशुओं की बाड़ (c) गोत्र

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प्रश्न 3.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) अर्जुन (a) छ:
(ii) एकलव्य (b) पिता
(iii) आरुणी (c) द्रोणाचार्य के श्रेष्ठ शिष्य
(iv) विद् (d) हिरनधनु के पुत्र
(v) वेदांग की संख्या (e) आयोदधौम के शिष्य
(vi) वैदिक समाज में परिवार के प्रधान (f) ज्ञान

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) अर्जुन (a) छ:
(ii) एकलव्य (b) पिता
(iii) आरुणी (c) द्रोणाचार्य के श्रेष्ठ शिष्य
(iv) विद् (d) हिरनधनु के पुत्र
(v) वेदांग की संख्या (e) आयोदधौम के शिष्य
(vi) वैदिक समाज में परिवार के प्रधान (f) ज्ञान

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 3 भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (प्रथम पर्याय : लगभग ईसा पूर्व 7000-1500)

Detailed explanations in West Bengal Board Class 6 History Book Solutions Chapter 3 भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (प्रथम पर्याय : लगभग ईसा पूर्व 7000-1500) offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 6 Geography Chapter 3 Question Answer – भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (प्रथम पर्याय : लगभग ईसा पूर्व 7000-1500)

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
मेहरगढ़ सभ्यता का विकास कब हुआ था?
उत्तर :
6000 ई० पू॰ के आसपास।

प्रश्न 2.
विश्व की प्राचीनतम सभ्यता कौन-सी थी?
उत्तर :
मेहरगढ़ की सभ्यता।

प्रश्न 3.
मेहरगढ़ सभ्यता की खोज कब हुई थी?
उत्तर :
1974 ई० में।

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प्रश्न 4.
मेहरगढ़ सभ्यता की खोज किसने की थी?
उत्तर :
फ्रांसीसी पुरातत्वविद् जॉ फांसोया जारिज ने की थी।

प्रश्न 5.
मेहरगढ़ सभ्यता के लोग किस धातु से परिचित थे ?
उत्तर :
ताम्बा।

प्रश्न 6.
गोमाल घाटी के खुदाई से प्राप्त अवशेष कौन-कौन से थे?
उत्तर :
गोमाल घाटी की खुदाई में प्राप्त अवशेष मिट्टी के लिपे-पुते गड्दे, जानवरों की हड्डियाँ आदि थीं।

प्रश्न 7.
मेहरगढ़ की सभ्यता कितनी वर्ष पुरानी है?
उत्तर :
मेहरगढ़ की सभ्यता हड़प्पा सभ्यता से भी लगभग 4000 वर्ष पूर्व की सभ्यता है।

प्रश्न 8.
मेहरगढ़ की सभ्यता कैसी सभ्यता थी?
उत्तर :
ग्रामीण सभ्यता थी।

प्रश्न 9.
भारत की सबसे प्राचीनतम सभ्यता का नाम बताओ।
उत्तर :
सिन्धु घाटी की सभ्यता।

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प्रश्न 10.
सिन्धुघाटी सभ्यता की खोज कब हुई थी?
उत्तर :
सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज 1922 ई० में हुई थी ।

प्रश्न 11.
सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज किसके नेतृत्व में हुई?
उत्तर :
सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में।

प्रश्न 12.
सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज किसने की थी?
उत्तर :
सिन्धुघाटी सभ्यता की खोज राखालदास बनर्जी और दयाराम साहनी ने की।

प्रश्न 13.
हड़प्पा की खोज किसने की?
उत्तर :
हड़प्पा की खोज दयाराम साहनी ने की।

प्रश्न 14.
हड़प्पा कहाँ स्थित है?
उत्तर :
पंजाब के माण्टगोमरी जिले में (पाकिस्तान) स्थित है।

प्रश्न 15.
हड़प्पा सभ्यता का विकास कब हुआ?
उत्तर :
3500 ई० पू॰ से लेकर 1500 ई० पूर्व के बीच।

प्रश्न 16.
सिन्धु घाटी सभ्यता किस प्रकार की थी?
उत्तर :
नगरीय सभ्यता थी।

प्रश्न 17.
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोग किसकी पूजा करते थे?
उत्तर :
पशुपति शिव तथा शक्ति की।

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प्रश्न 18.
सिन्धु घाटी की सभ्यता के लोग किस धातु का प्रयोग करते थे?
उत्तर :
ताम्बा एवं कांसा का।

प्रश्न 19.
सिन्धु घाटी सभ्यता में प्रयुक्त लिपि का नाम क्या था?
उत्तर :
सिन्धु लिपि या द्रविड़ लिपि।

प्रश्न 20.
उन पशुओं का नाम बताइए जिनकी आकृतियाँ सिन्धु घाटी की सभ्यताकी मोहरों पर खुदी हुई हैं?
उत्तर :
हाथी, बैल, भैस, बाघ, घड़ियाल, कुत्ता आदि।

प्रश्न 21.
सिन्धु सभ्यता का विनाश कैसे हुआ?
उत्तर :
मोहनजोदड़ो का विनाश प्राकृतिक प्रकोप (बाढ़, भूकम्प) से हुआ तथा हड़प्पा का विनाश आर्यो ने किया।

प्रश्न 22.
मेहरगढ़ सभ्यता के प्रमुख केन्द्र कौन-कौन थे?
उत्तर :
मेहरगढ़ सभ्यता के कुल 6 प्रमुख केन्द्र थे।

  1. अंजीरा
  2. कीली-गुल-मुहम्मद
  3. सियादामव
  4. बुरजाहोम
  5. सराईखोला
  6. गुमला

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प्रश्न 23.
मेहरगढ़ सभ्यता की कला के बारे में क्या जानते हो?
उत्तर :
मेहरगढ़ के निवासी अनेक प्रकार की कला में पारंगत होते थे। जैसे :-

  1. मृदाशिल्प कला :- यहाँ सभ्यता के द्वितीय भाग में लोग मिट्टी की तरह-तरह की वस्तुएँ तैयार करना जानते थे।
  2. धातुशिल्प कला :- सभ्यता के प्रथम एवं द्वितीय भाग में ताँबा आदि गलाकर अंगूठी, आभूषण, छुरी, बरछी आदि तैयार करने में भी वे निपूण थे।
  3. आभूषण कला :- सिर्फ ताँबा ही नहीं वरन ये लोग पत्थर को काटकर भी तरह-तरह के आभूषण बनाना जानते थे।
  4. बुनाई कला :- इस सभ्यता के लोग पशुओं के बाल एवं ऊन से तरह-तरह के कपड़ा बनना जानते थे।

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प्रश्न 24.
हड़प्पा सभ्यता में नगरी जीवन कैसा था?
उत्तर :
इस सभ्यता के नगर जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू शौचागार एवं स्नानागार था जिससे पता चलता है कि नगर प्रायः स्वच्छ होते थे। इस सभ्यता में कुएँ कम देखने को मिले किन्तु शौचालय प्रत्येक घरों में मिला है। नाली की निकासी की पक्की व्यवस्था थी। मुख्य नाला को ढँका गया था। उन्नत नगर शासन की व्यवस्था का नमूना जल निकासी की व्यवस्था ही था।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
मेहरगरढ़ सभ्यता की खोज के विषय में क्या जानते हो?
उत्तर :
फ्रांसींसी पुरातत्वविद् जॉ फ्रांसोया जारिज ने पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के प्रधान रिचार्ड मेडो को साथ लेकर बलूचिस्तान तथा उसके निकटवर्ती क्षेत्रों में खनन कार्य प्रारंभ किया था। उनके इस प्रयास के फलस्वरूप कच्ची समभूमि (बलूचिस्तान के पथ्चिम में सिन्धु नदी के तटवर्ती) क्षेत्र में मेहरगढ़ सभ्यता के अवशेष की खोज हुई।

प्रश्न 2.
मेहरगढ़ की सभ्यता का विकास कब और किस क्षेत्र में हुआ था?
उत्तर :
मेहरगढ़ की सभ्यता का विकास लगभग 7000 ई० पू॰ सिन्ध प्रदेश के उत्तर-पथ्थिम सीमान्त में स्थित बलूचिस्तान के सीबी जिले में बोलन नदी के किनारे हुआ था।

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प्रश्न 3.
मेहरगढ़ सभ्यता क्या है? इस सभ्यता के चिह्न कहाँ मिलते है?
उत्तर :
(i) मेहरगढ़ सभ्यता एक ग्रामीण सभ्यता थी।
(ii) इस सभ्यता के चिह्न सिन्धु घाटी, गोमाल घाटी, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा आदि स्थानों पर मिलते हैं।

प्रश्न 4.
मेहरगढ़ सभ्यता के प्रमुख केन्द्रों का नाम बताओ।
उत्तर :

  1. बुरजाहीम
  2. सराईखोला
  3. गुमला
  4. कीली-गुल-मुहम्मद
  5. सियादामव एवं
  6. अजीर।

प्रश्न 5.
मेहरगढ़ सभ्यता की समय-सीमा का उल्लेख कीजिए :-
उत्तर :
पुरातत्ववेत्ता जॉ फ्रांसीसी जारिज ने मेहरगढ़ की सभ्यता को तीन चरणों में बाँटा है।
(i) प्रथम चरण – (i) 7000 ई० पू० से 6000 ई० पू०
(ii) दूसरा चरण – (iii) 5000 ई० पूर्व से 4000 ई॰ पूर्व
(iii) तीसरा चरण – (iii) 4300 ई० पू० से 3800 ई०पू०तक।

प्रश्न 6.
मेहरगढ़ सभ्यता के मकान कैसे होते थे?
उत्तर :
मेहरगढ़ सभ्यता के मकान में कच्ची ईंटों को धूप में सुखा कर प्रयोग किया जाता था। उन मकानों में एक से अधिक घर होते थे। कुछ इमारत साधारण घर से काफी बड़ी होती थी। पुरातत्वकार ऐसा अनुमान लगाते हैं कि उनमें खाद्य सुरक्षित रखा जाता था। उपमहादेश में सबसे पुराना खाद्य रखने का घर मेहरगढ़ में पाया गया है।

प्रश्न 7.
मेहरगढ़ निवासियों की जीविका कैसी थी?
उत्तर :
मेहरगढ़ निवासियों की जीविका के प्रधान साधन कृषि कार्य, पशुपालन, शिकार, व्यापार-वाणिज्य इत्यादि था।

  • कृषि कार्य : मेहरगढ़ निवासी उन्नत व्यवस्था के द्वारा जौ, गेहूँ, कपास, खजूर इत्यादि फसलों का उत्पादन करते थे।
  • पशुपालन : गाय, भेंड़, बकरी, भैंस इत्यादि को पालना ही मेहरगढ़ निवासियों का महत्वपूर्ण कार्य था।
  • शिकार : निकटवर्ती नदी एवं तालाब से मछली पकड़ना, जंगली जानवरों का शिकार करना मेहरगढ़ निवासियों की प्रधान जीविका थी।
  • व्यापार-वाणिज्य : मेहरगढ़ निवासी देश के अन्दर व्यापार के साथ बाहर के देशों के साथ भी वाणिज्य किया करते थे।

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प्रश्न 8.
मेहरगढ़ की सभ्यता के पतन के क्या कारण थे?
उत्तर :
मेहरगढ़ की सभ्यता के पतन के निम्नलिखित कारण थे।
प्राकृतिक आपदा : पुरातात्विक वैज्ञानिकों का मानना है कि मेहरगढ़ सभ्यता का पतन बाढ़ या भूकम्प का आना था।
जलवायु में परिवर्त्तन : बहुत दिनों तक वर्षा न होने के कारण सम्पूर्ण क्षेत्र रेगिस्तान (मरूभूमि) में बदलने से मेहरगढ़ निवासी दूसरी जगह चले गये। जिसके कारण यह क्षेत्र क्रमशः जनहीन होने लगा तथा खंडहर में बदल गया।
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निवास भूमि का परिवर्तन : मेहरगढ़ निवासी उन्नत जीवन-यापन व निश्चित भोजन की खोज में हड़प्पा, मोहनजोदड़ो की तरफ बढ़ने लगे तथा उसी स्थान पर रहना आरंभ किया, ऐसा अनुमान लगाया जाता है।

प्रश्न 9.
हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो की खोज किसने की थी ?
उत्तर :
सिन्धु घाटी की सभ्यता पूर्णत: विकसित एवं नगरीय सभ्यता थी। 1921-22 की खुदाइयों के परिणामस्वरूप हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका जॉन मार्शल, राखालदास बनर्जी एवं दयाराम साहनी की रही। राखालदास बनर्जी ने सिन्ध के लरकाना जिले में मोहनजोदड़ो एवं दयाराम साहनी ने पंजाब के मांटगोमरी जिले में हड़प्पा की खोज की थी।

प्रश्न 10.
सिन्धु घाटी की सभ्यता को हड़प्पा की सभ्यता क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
सिन्धु घाटी की सभ्यता सिन्धु घाटी के बाहरी क्षेत्रों में भी फैली थी और हड़प्पा इस सभ्यता का प्रमुख केन्द्र था, इसलिए विद्वानों ने इस सभ्यता को हड़प्पा की सभ्यता कहा।

प्रश्न 11.
हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालिबंगाल, चानूहोदड़ो, बनाउयाली लोथाल, सुरकोटाडा, डोलबिया कुनेतासी इत्यादि स्थानों पर योजनाकृत नगर के ध्वंसावशेष पाये गये थे।

  1. नगर : नगर क्षेत्र को दो भागों में बाँटा गया था। (क) पूर्वी क्षेत्र का निम्न क्षेत्र (ख) पथ्चिम के ऊंचे दुर्ग का क्षेत्र।
  2. मकान : हड़प्पा सभ्यता में मकान पक्की ईंटों के बने होते थे। हड़प्पा सभ्यता में एक तरफ दो मंजिला मकान था तो दूसरी तरफ छोटे-छोटे मकान भी पाये गये हैं।
  3. रास्ते : हड़प्पा सभ्यता के रास्ते 9 से 34 फुट चौड़े होते थे। ये रास्ते नगर के बीचों-बीच उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम समान रूप से विस्तृत होते थे।
  4. निकासी व्यवस्था : हड़प्पा सभ्यता के अन्तर्गत राजमार्ग के दोनों तरफ ढंकी हुई नाली की व्यवस्था की गयी थी।

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प्रश्न 12.
हड़प्पा सभ्यता के स्नानागार के विषय में तुम क्या जानते हो?
उत्तर :
हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों में मोहनजोदड़ो से प्राप्त विशाल स्नानागार विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसकी लम्बाई 54 मी०, चौड़ाई 30 मीटर तथा बाहरी दीवारों की मोटाई 3 मीटर है।
आँगन के मध्य में 11.88 मीटर लम्बा, 7.01 मीटर चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा एक स्नानागार है जिसमें जल की सतह तक सीढ़ियाँ हैं। चारों ओर बरामदे, गैलरियाँ और कमरे हैं। इसके समीप ही कुण्ड में जल भरने के लिए एक कुआँ बना हुआ था। स्री और पुरुष दोनों के नहाने के लिए अलग-अलग घाट बने हुए थे।

प्रश्न 13.
सिन्धु घाटी सभ्यता के निवासियों के सामाजिक जीवन का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
सिन्धु घाटी का समाज मुख्यत: चार वर्गों में बंटा हुआ था – (i) शासक वर्ग (ii) योद्ध-वर्ग, (iii) व्यापारी और शिल्पी वर्ग (iv) श्रमिक एवं दासवर्ग। सिन्धु घटटी के लोग भेड़, बकड़ी, मछली, अण्डा, गेहूँ, जौ, शाक-सब्जियाँ आदि खाते थे। पुरुष एवं स्रियों के पोशाक सामान्यतः एक सी ही थी। वस्रों में ऊनी तथा सूती दोनों का प्रयोग होता था। ख्रीपुरुष दोनों ही आभूषण धारण करते थे। हार, अंगूठी एवं कंगन स्त्री-पुरुष दोनों ही धररण किया करते थे। सिन्धु घाटी के लोग नृत्य, गायन, आखेट, नौका दौड़, शतरंज-पासा आदि के द्वारा अपना मनोरंजन करते थे। शव, के अन्तिम संस्कार में जलाना एवं दफनाना दोनों ही प्रकार के तरीके प्रचलित थे।

प्रश्न 14.
सिन्धु घाटी सभ्यता के आर्थिक जीवन का वर्णन कीजिए :-
उत्तर :
सिन्धु घाटी की सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि एवं पशुपालन था। वे लोग गेहूँ, जौ, कपास, खजूर आदि की खेती करते थे। गाय, बैल, भैंस, सूअर, बकरी, कुत्ता आदि उनके पालतू पशु थे। कृषि एवं पशुपालन के अतिरिक्त अन्य लघु उद्योग एवं व्यवसाय भी प्रचलित थे जिसमें बढ़ई, जुलाहा, कुम्हार, सुनार आदि थे। सिन्धु घाटी की सभ्यता के दौरान व्यापार उपमहाद्वीप के उत्तरी तथा दक्षिणी क्षेत्रों के अतिरिक्त मेसोपोटामिया, मिस्स, सुमेरिया, अफगानिस्तान तथा फारस की खाड़ी से भी जल एवं स्थल दोनों ही माध्यम से होता था।

प्रश्न 15.
हड़प्पा सभ्यता के धार्मिक जीवन के विषय में क्या जानते हो?
उत्तर :
सिंधु नदी के किनारे किसी देवालय की खोज नहीं हुई थी लेकिन यहाँ विभिन्न प्रकार के देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिली हैं।
मातुपूजा की अधिकता : हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त असंख्य नारी मूर्तियों को देखकर यह अनुमान लगाया जाता है कि यहाँ मातृ देवी की पूजा अधिक की जाती थी।
शिव की मूर्ति : हड़प्पा सभ्यता में पशुपति या शिव की तरह की मूर्ति पाई गई है। अत: यह अनुमान लगाया जाता है कि वे शिव मूर्ति की पूजा भी किया करते थे।
परलोक में विश्वास : हड़प्पा के विभिन्न स्थानों पर मनुष्यों की कब्र पाई गई हैं। कब्र देने की रीति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जाता है कि हड़प्यावासी परलोक में विभास करते थे।

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प्रश्न 16.
हड़प्पा सभ्यता में व्यापार-वाणिज्य कैसा था?
उत्तर :
हड़प्पा सभ्यता में देश के अन्दर एवं देश के बाहर भी व्यापार-वाणिज्य हुआ करता था।
आन्तरिक व्यापार : हड़प्पा सभ्यता के अन्तर्गत लोथक रोपड़ कोटदिजी इत्यादि केन्द्रों के साथ व्यापारिक लेनदेन होता था।
बाहरी व्यापार : बाहरी व्यापार के अन्तर्गत हड़पा सभ्यता के निवासियों के साथ पश्चिम एशिया, बलूचिस्तान, मेसोपोटामिया, मिस्र, फारस, अफगानिस्तान इत्यादि देशों का व्यापारिक सम्पर्क स्थापित था।
आयात-निर्यात की वस्तुएँ : हड़प्पा सभ्यता में सोना, चाँदी, ताम्र, मूल्यवान पत्थर, हांथी दाँत से बनी वस्तुएँ आयात की जाती थी। जौ, मैदा, कपड़ा इत्यादि निर्यात किए जाते थे ।
व्यापारिक मार्ग : हड़प्पा सभ्यता का व्यापार बाहरी देशों के साथ नदी मार्ग से जुड़ा हुआ था। दूसरी तरफ स्थल मार्ग के द्वारा मैसूर, गुजरात, कश्मीर इत्यादि स्थानों में देश का व्यापार चलता था।

प्रश्न 17.
हड़प्पा सभ्यता के पतन के क्या कारण थे ?
उत्तर :
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के पतन के निम्न कारण बताये जाते हैं :-
प्राकृतिक आपदा :- इतिहासकारों का अनुमान है कि मोहनजोदड़ो का विनाश प्राकृतिक आपदा जैसे – बाढ़, भूकम्प से हुआ और हड़प्पा का विनाश बाहरी शत्रु (आर्यो) के आक्रमण से हुआ।
सिन्धु नदी का पथ परिवर्तन :- सिन्धु नदी द्वारा अपना मार्ग परिवर्तन करने के कारण व्यापार एवं कृषि व्यवस्था क्षतिग्रस्त हो गई थी। आर्थिक अवस्था खराब होने के कारण हड़प्पावासी इस क्षेत्र को छोड़कर भारत उपमहादेश के दक्षिणी भाग कावेरी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा आदि नदियों के बेसिन में बसकर द्रविड़ सभ्यता का विकास कर लिए।

प्रश्न 18.
मेहरगढ़ सभ्यता की कुछ विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
मेहरगढ़ सभ्यता की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
नव प्रस्तर युग की सभ्यता : भारत में नव प्रस्तर युग की सूचना लगभग ई० पूर्व 8000 वर्ष पहले हुई थी। तीन भागों में विभक्त मेहरगढ़ सभ्यता की समय सीमाई० पूर्व 7000 से ई० पूर्व 3800 तक थी। इसीलिए इतिहासकारों ने साधारण रूप में मेहरगढ़ सभ्यता को नव प्रस्तर युग की सभ्यता कहा है।

प्रागैतिहासिक सभ्यता : जिस प्राचीन सभ्यता में कोई लिखित विवरण नहीं पाया जाता बल्कि केवल मात्र पुरातात्विक अवशेषों के ऊपर निर्भर रह करके ही सभ्यता के विषय में जानकारी प्राप्त की जाती है, उसी सभ्यता को प्रागैतिहासिक सभ्यता कहा जाता है। मेहरगढ़ में विभिन्न पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर ही सभ्यता का अध्ययन चरणबद्ध तरीके से किया गया है। अत: मेहरगढ़ सभ्यता को प्रागैतिहासिक सभ्यता कहा गया है।

प्रश्न 19.
मेहरगढ़ सभ्यता की कला से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
मेहरगढ़ सभ्यता के निवासी विभिन्न प्रकार की कला में पारंगत हुआ करते थे। वे निम्न कलाओं के ज्ञाता थे :

  1. मृदाशिल्प कला : मेहरगढ़ सभ्यता के लोगों ने द्वितीय भाग में मिट्टी की तरह-तरह की वस्तुएँ तैयार करना शुरू किया था।
  2. धातुशिल्प कला : मेहरगढ़ सभ्यता के प्रथम एवं द्वितीय भाग में तांबा गलाकर अंगूठी, छुरी, बरछी सह विभिन्न प्रकार के वस्तु तैयार करते थे।
  3. आभूषण कला : मेहरगढ़ वासी पत्थर को काटकर आभूषण बनाने की कला से परिचित थे तथा इसका प्रयोग भी करते थे।
  4. बुनाई कला : मेहरगढ़ सभ्यता के निवासी पशु के बाल एवं ऊन से कपड़े बनाने की कला को जानते थे।

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प्रश्न 20.
सिन्धु लिपि के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
सिन्धु सभ्यता की लिषि एक चित्रात्मक लिपि थी। यह लिपि सुमेर, मिस्र और चीन की लिपियों से मिलती-जुलती थी। इस काल की अनेक मुहरें लिपियुक्त पाई गयी हैं, इनमें कुल 400 चिह्न हैं।

प्रश्न 21.
सिन्धु घाटी सभ्यता के निर्माता के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
सिन्धु घाटी सभ्यता के निर्माता के सम्बन्ध में इतिहासकारों में मतभेद है। सिन्धु घाटी की सभ्यता में भूमध्यसागरीय आष्टेलायन, अल्पाइन के अस्थिपंजर प्राप्त हुए हैं। इनमें आष्टेलायन वर्ग के अस्थिपंजर की अधिकता है। इसी के आधार पर विद्वान लोग सिन्धु-सभ्यता के निर्माताओं को द्रविड़ मानते हैं।

प्रश्न 22.
आर्य सभ्यता किसे कहते हैं?
उत्तर :
विद्वानों का मानना है कि सिन्धु घाटी की सभ्यता के पतन के बाद भारत में एक महान सभ्यता का विकास हुआ। इस सभ्यता के संस्थापक ‘आर्य’ थे। अतः इस सभ्यता को आर्य सभ्यता कहा जाता है।

प्रश्न 23.
आर्य सभ्यता को वैदिक सभ्यता क्यों कहते हैं?
उत्तर :
आर्यों की सभ्यता वैदिक साहित्य की रचना करने वाले मनीषियों द्वारा निर्दिष्ट नियमों के अनुसार विकसित हुई थी। इसी कारण आर्य सभ्यता को वैदिक सभ्यता भी कहते हैं।

प्रश्न 24.
मेहरगढ़ की समाधि के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
मेहरगढ़ सभ्यता की महत्वपूर्ण विशेषता समाधि स्थल है। समाधि में मृतदेह को सीधा अथवा घुमाकर सुला दिया जाता था। मृतक के साथ विभिन्न प्रकार की वस्तु दी जाती थी जैसे : शंख अथवा पत्थर का गहना, कुदुल इत्यादि। इसके अलावा समाधि में विभिन्न प्रकार के पालतू पशुओं को भी दिया जाता था। समाधि में बहुमूल्य पत्थर भी मिले हैं। मृतको को लाल कपड़े में लपेटकर एवं लाल रंग लगाकर समाधि में दिया जाता था।

प्रश्न 25.
भारतीय उपमहादेश हड़प्पा को प्रथम नगरायण क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
भारतीय उपमहादेश में हड़प्पा में ही प्रथम नगर तैयार हुआ था। इसलिए इसे प्रथम नगरायण कहा जाता है। मोहनजोदड़ो और हड़ष्पा दोनों सबसे बड़े नगर थे। उस तुलना में लोथाल और कालिबंगान छोटा था।

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प्रश्न 26.
सिंघु नदी के किनारे हड़प्पा सभ्यता के शहर क्यों विकसित हुए थे ?
उत्तर :
हड़प्पा सभ्यता के नगर सिंधु नदी के किनारे ही निर्मित हुए थे, इसके निम्नलिखित कारण हैं –
कृषि : नदी के किनारे की जमीन बहुत उर्वर थी एवं यहाँ सिचाई की सुविधा भी थी। अर्थात कृषि की सरलता के कारण सिंधु निवासी नदी के किनारे निवास करने लगे।
यातायात एवं वाणिज्य : हड़प्पा के निवासी नदी मार्ग से वाणिज्य एवं अन्य कारणों से देश के अंदर-बाहर विभिन्न अंचलों में आते-जाते थे। इस प्रकार की सुविधा के कारण हड़प्पा वसियों ने नदी के किनारे निवास करना आरंभ किया।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता में गृह __________ से निर्मित थे।
(क) पत्थर
(ख) पक्की ईंटों
(ग) लकड़ी
(घ) मिट्टी
उत्तर :
(ख) पक्की ईंटों

प्रश्न 2.
हड़प्पा सभ्यता __________ की सभ्यता थी।
(क) पत्थर युग
(ख) ताम्र एवं कांस्य युग
(ग) लकड़ी युग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) ताम्र एवं कांस्य युग

प्रश्न 3.
भारतीय उपमहादेश की हड़प्पा सभ्यता में ही __________ देखा गया है।
(क) प्रथम नगर
(ख) प्रथम ग्राम
(ग) द्वितीय नगर
(घ) द्वितीय ग्राग
उत्तर :
(क) प्रथम नगर

प्रश्न 4.
मेहरगढ़ सभ्यता की खोज __________ ई० में हुई थी ।
(क) 1964
(ख) 1974
(ग) 1984
(घ) 1940
उत्तर :
(ख) 1974

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प्रश्न 5.
हड़प्पा सभ्यता में __________
(क) सोना की एक नारी की मूर्ति पाई गई है।
(ग) कांस्य
(ख) ताप्र
(घ) चांदी
उत्तर :
(ग) कांस्य

प्रश्न 6.
हड़प्पा के नगरों के ऊँचे क्षेत्रों का नाम __________ है।
(क) सिराडेल
(ख) जिगुरात
(ग) कुनताशा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सिराडेल

प्रश्न 7.
प्राय: __________ लाख वर्ग कि०मी॰ के क्षेत्र में हड़प्पा की सभ्यता फैली हुई थी।
(क) 7
(ख) 9
(ग) 10
(घ) 12
उत्तर :
(क) 7

प्रश्न 8.
ताप्र एवं पत्थर के प्रयोग का काल __________ के नाम से परिचित है।
(क) प्राचीन युग
(ख) ताम्र – पत्थर युग
(ग) लौह युग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) ताम्र – पत्थर युग

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ________ सभ्यता के गृह पक्की ईंटों से निर्मित होते थे।
उत्तर : हड़प्पा।

2. समय के साथ __________ सभ्य होते चले गए।
उत्तर : आदि मानव।

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3. 1974 ई० में __________ सभ्यता की खोज हुई।
उत्तर : मेहरगढ़।

4. ऊँचे क्षेत्रों को हड़प्पा सभ्यता में __________ कहते थे।
उत्तर : सिरडेल।

5. __________ सभ्यता में कांस्य की एक नारी की मूर्ति पाई गई है।
उत्तर : हड़प्पा।

6. आर्य सभ्यता का दूसरा नाम __________ भी था।
उत्तर : सिंधु घाटी सभ्यता।

7. हड़प्पा सभ्यता __________ में फैली हुई थी।
उत्तर : 7 लाख वर्ग कि० मी०।

8. ताप्र पत्थर युग में __________ एवं __________ का प्रयोग हुआ करता था।
उत्तर : ताप्र एवं पत्थर

9. बुरजाहोम __________ का प्रमुख केन्द्र था।
उत्तर : मेहरगढ़ सभ्यता।

सही एवं गलत का निर्णय करो : True or False (1 mark)

1. लिपि का व्यवहार सभ्यता का एक वैथिक रूप है।
उत्तर : (सही)

2. मेहरगढ़ सभ्यता का आविष्कार दयाराम साहनी ने किया था।
उत्तर : (गलत)

3. हड़प्पा सभ्यता प्राक-ऐतिहासिक युग की सभ्यता है।
उत्तर : (सही)

4. हड़प्पा के लोग लिखना जानते थे।
उत्तर : (सही)

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5. हड़प्पा के लोग मूर्ति पूजा नहीं करते थे।
उत्तर : (गलत)

6. हड़प्पा के लोगों का व्यापार संपर्क विदेश तक था।
उत्तर : (सही)

7. हड़प्पा के नगर को प्रथम नगरायण कहा जाता है।
उत्तर : (गलत)

8. हड़प्पा के लोग लोहे का प्रयोग नहीं जानते थे।
उत्तर : (सही)

9. हड़प्पा की सभ्यता 6 लाख वर्ग कि० मी० तक फैली थी।
उत्तर : गलत।

10. हड़प्पा सभ्यता के लोग मूर्ति पूजा के विरोधी थे।
उत्तर : गलत।

11. हड़प्पा सभ्यता में पशुपालन का प्रचलन था।
उत्तर : सही।

12. हड़प्पा के लोग विदेशों में व्यापर नहीं करते थे।
उत्तर : गलत।

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13. हड़प्पा सभ्यता के लोगों में लिखने का प्रचलन नहीं था।
उत्तर : गलत।

14. हड़प्पा सभ्यता की खोज “जाँ फ्रांसोया जारिम” ने की थी।
उत्तर : गलत।

बेमेल शब्द को छाँटकर लिखो :-

1. धान, गेहूँ, मटर, जौ
उत्तर : मटर।

2. गाय, बकरी, कुत्ता, हाथी
उत्तर : हाथी।

3. इन्द्र, सूर्य, गणेश, शिव
उत्तर : गणेश।

4. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, धोबी
उत्तर : धोबी।

5. कुम्हार, सोनार, लोहार, तांत्रिक
उत्तर : तांत्रिक।

6. बुरजाहोम, अंजीरा, सियादाभव, पटना
उत्तर : पटना।

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7. मृदाशिल्प, धातुशिल्प, आभूषण, कला,
उत्तर : आभूषण।

बेमेल शब्दों को ढूंढकर बाहर निकालिए :-

  1. ताँम, काँसा, पत्थर, लोहा।
  2. घोड़ा, हाथी, गेंडा, साँढ़
  3. कालिबागान, मेहरगढ़, वनवाली, ढोलाबिरा।
  4. इन्द्र, सूर्य, शिव, गणेश।
  5. कुम्हार, सोनार, तांती, श्रेष्ठी।
  6. बाह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, मछुआरा।
  7. लिपि, मुद्रा, स्थापत्य, सभ्यता।
  8. जौ, गेहूँ, धान, कपास।

उत्तर :

  1. पत्थर
  2. साँढ़
  3. मेहरगढ़
  4. सूर्य
  5. श्रेष्ठी
  6. मछुआरा
  7. सभ्यता
  8. कपास।

सही मिलान करो Match the following : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
i) हड़प्पा सभ्यता का केन्द्र a) यानहूढाड़ो
ii) मेहरगढ़ सभ्यता का केन्द्र b) गुमला
iii) मेहरगढ़ सभ्यता का पालतू पशु c) कुत्ता
iv) हड़ण्पा सभ्यता का पालतू पशु d) बकरी

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
i) हड़प्पा सभ्यता का केन्द्र a) यानहूढाड़ो
ii) मेहरगढ़ सभ्यता का केन्द्र b) गुमला
iii) मेहरगढ़ सभ्यता का पालतू पशु d) बकरी
iv) हड़ण्पा सभ्यता का पालतू पशु c) कुत्ता

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प्रश्न 2.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) वर्ण (a) यज्ञ
(ii) कला (b) लिपि
(iii) याम (c) शहर
(iv) नगर (d) स्थापत्य

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) वर्ण (b) लिपि
(ii) कला (d) स्थापत्य
(iii) याम (a) यज्ञ
(iv) नगर (c) शहर

प्रश्न 3.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) याम (a) शहर
(ii) नगर (b) यज्ञ
(iii) हड़प्पा सभ्यता (c) चेम्पर वारियाल
(iv) कष्ट समाधि (d) नगर सभ्यता

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) याम (b) यज्ञ
(ii) नगर (a) शहर
(iii) हड़प्पा सभ्यता (d) नगर सभ्यता
(iv) कष्ट समाधि (c) चेम्पर वारियाल

WBBSE Class 6 History Solutions Chapter 3 भारतीय उपमहादेश के प्राचीन इतिहास की धारा (प्रथम पर्याय : लगभग ईसा पूर्व 7000-1500)

प्रश्न 4.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) वर्ण (a) स्थापत्य
(ii) कला (b) लिपि
(iii) मेहरगढ़ सभ्यता (c) चाहनुदाड़ो
(iv) हड़प्पा सभ्यता (d) पिटवारिस्थल
(v) गधे की समाधि (e) ग्रामीण सभ्यता

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) वर्ण (a) स्थापत्य
(ii) कला (b) लिपि
(iii) मेहरगढ़ सभ्यता (c) चाहनुदाड़ो
(iv) हड़प्पा सभ्यता (d) पिटवारिस्थल
(v) गधे की समाधि (e) ग्रामीण सभ्यता

प्रश्न 5.

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) समाधि प्रथा (a) लापिसलजुप्लि
(ii) नील कान्तमणि (b) मेगालिथ
(iii) वैदुर्यमणि (c) टार्कोयाण
(iv) मेहरगढ़ सभ्यता का केन्द्र (d) हड़प्पा का पालतू पशु
(v) कुत्ता (e) गुमला
(vi) बकरी (f) लोथल
(vii) रावी (g) मेहरगढ़ सभ्यता का पशुपालन
(viii) चिनाय (h) आसिक्ति
(ix) शिव (i) इरावत
(x) मृतकों का स्थान (j) पशुपति

उत्तर :

स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख)
(i) समाधि प्रथा (b) मेगालिथ
(ii) नील कान्तमणि (c) टार्कोयाण
(iii) वैदुर्यमणि (a) लापिसलजुप्लि
(iv) मेहरगढ़ सभ्यता का केन्द्र (e) गुमला
(v) कुत्ता (d) हड़प्पा का पालतू पशु
(vi) बकरी (f) लोथल
(vii) रावी (g) मेहरगढ़ सभ्यता का पशुपालन
(viii) चिनाय (h) आसिक्ति
(ix) शिव (j) पशुपति
(x) मृतकों का स्थान (i) इरावत

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 1 परिवेश एवं जीव जगत् की पारस्परिक निर्भरता

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WBBSE Class 6 Science Chapter 1 Question Answer – परिवेश एवं जीव जगत् की पारस्परिक निर्भरता

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
पौधे के किन हिस्सों को हम खाते हैं?
उत्तर :
फल, फूल, बीज, पत्ता

प्रश्न 2.
गौरैया शलिक पक्षी कहाँ अपना घर बनाते हैं ?
उत्तर :
डाली, शाखाओं वाले पेड़ पर।

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प्रश्न 3.
लाल चीटियाँ कैसे घर बनाती हैं?
उत्तर :
चौड़े, गोल पत्तियों वाले पेड़-पौधों की डालियों को सजाकर ।

प्रश्न 4.
ताड़ के पेड़ के पत्ते से क्या बनता है?
उत्तर :
हाथ पंखा ।

प्रश्न 5.
रस्सी किनके तंतुओं से बनायी जाती है?
उत्तर :
नारियल तथा पाट ।

प्रश्न 6.
बोरे तथा बस्ते किसके तंतु से तैयार होते हैं?
उत्तर :
जूट (पाट) के तंतु से ।

प्रश्न 7.
लकड़ियों को चमकाने के लिए क्या व्यवहार होता है?
उत्तर :
वार्निश।

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प्रश्न 8.
बार्निश किन पेड़ों से प्राप्त होता है?
उत्तर :
पाइन तथा शाल के पेड़ से ।

प्रश्न 9.
रबड़ क्या है?
उत्तर :
उत्सर्जी पदार्थ ।

प्रश्न 10.
कुनैन किसका उत्सर्जी पदार्थ है?
उत्तर :
सिनकोना का ।

प्रश्न 11.
कुछ औषधीय पौधों के नाम लिखें।
उत्तर :
तुलसी, नीम, सर्पगन्था, बसाक।

प्रश्न 12.
वातावरण में CO2, का अवशोषक कौन है?
उत्तर :
पेड़ ।

प्रश्न 13.
चींटी तथा एफिड में क्या संबंध है?
उत्तर :
सहजीविता का।

प्रश्न 14.
माँस खाने वाले जीव क्या कहलाते हैं?
उत्तर :
माँसाहारी।

प्रश्न 15.
घास, फल, फूल खाने वाले जीव कहलाते हैं?
उत्तर :
शाकाहारी ।

प्रश्न 16.
फीताकृमि, अमाशय का जीवाणु क्या है?
उत्तर :
परजीवी ।

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प्रश्न 17.
सिल्क किससे मिलता है?
उत्तर :
रेशम के कीड़े से ।

प्रश्न 18.
यकृत के तेल में क्या रहता है?
उत्तर :
विटामिन A

प्रश्न 19.
कार्ड मछली में क्या पाया जाता है?
उत्तर :
कार्ड मछली में विटामिन A तथा विटामिन D पाया जाता है ।

प्रश्न 20.
परिवहन में सहायक प्राणियों के नाम लिखें।
उत्तर :
बैल, घोड़ा, ऊँट ।

प्रश्न 21.
एक लाभदायक बैक्टीरिया का नाम लिखें।
उत्तर :
लैक्टोवेसिल्स ।

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प्रश्न 22.
औषधि निर्माण में सहायक बैक्टीरिया का नाम बताएं।
उत्तर :
स्ट्रेप्टोमाइसेस बैक्टीरिया।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
नीचे लिखी तालिका को पूरा करो –
उत्तर :

कौन काम किसके ऊपर निर्भर करता है
i) सोना का काम सोनार पर
ii) बाल काटने का काम नाई पर
iii) मिठाई बनाने का काम हलवाई पर
iv) कपड़ा धोने का काम धोबी
v) पाइप लाईन का काम पानी मिस्री पर
vi) बिजली का काम बिजली मिस्र्री पर
vii) लकड़ी का काम बढ़ई पर

प्रश्न 2.
नीचे दिये गये प्राणी, पौधे के किस अंश को खाते हैं?
उत्तर :

प्राणी के नाम पेड़ पौधे के किस अंश को खाते हैं
i) गाय तना
ii) बकरी पत्ते, मुलायम तना, डाल
iii) मुर्गी कीड़-मकौड़े
iv) बंदर मुलायम डाल, पत्ता
v) गिलहरी पत्ता
vi) तोता दाना

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प्रश्न 3.
प्राणी किस तरह खाद्य के लिए पेड़ों पर निर्भर रहते हैं?
उत्तर :
मनुष्य तथा प्राणियों के खाने-पीने की सभी वस्तुएँ पेड़ों से प्राप्त होती हैं। गाय, मुर्गी, बकरी भी अपने जीवन यापन के लिए पेड़ों से मिलने वाले अंश को खाकर करते हैं। मुर्गी जिन कीड़े-मकौड़ों को खाती हैं वे भी किसी तरह गे पौधों को खाकर अपना जीवन-यापन करते हैं।

प्रश्न 4.
आवास के लिए प्राणी कैसे पेड़ों पर नर्भर हैं? बताओ ।
उत्तर :
पेड़ों की सखी डाल तथा पत्तों को जमाकर पक्षी अपना घोंसला बनाते हैं। गौरैया, शालक जैसे पक्षी डाली शाखाओं वाले पेड़-पौधे की छोटी डालियों को सजाकर घोंसला तैयार करते हैं। गिलहरी, मकड़ी, चीटियाँ पेड़ की ड। में कोठरी बनाकर उनमें रहती हैं। बंदर पेड़ की डाल पर रहते हैं।

प्रश्न 5.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करो ।
उत्तर :

पेड़ का कौन सा हिस्सा पेड़ का नाम किस काम में आता है ?
i) तना ………………….. ………………….
ii) ………………….. ताड़ का पेड़ हाथ पंखा
iii) फल ………………….. ………………….
iv) ………………….. ………………….. ………………….

उत्तर :

पेड़ का कौन सा हिस्सा पेड़ का नाम किस काम में आता है ?
i) तना शाल घर निर्माण में
ii) पत्ता ताड़ का पेड़ हाथ पंखा बनाने में
iii) फल आम का पेड़ खाद्य के रूप में
iv) बीज भुट्टा खाद्य के रूप में

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प्रश्न 6.
वातावरण में CO2, O2 का संतुलन कैसे स्थापित होता है?
उत्तर :
प्राणी श्वांस द्वारा O2 ग्रहण करते हैं तथा श्वांस छोड़ते समय कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। पेड़ अपन भोजन बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उपयोग करते हैं। प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान पे ऑक्सीजन (O2) निकालते हैं। इस प्रकार प्राणी और पेड़ के बीच CO2 तथा O2 का आदान-प्रदान चलता रहता है। इस वातावरण में CO2, O2 का संतुलन बना रहता है।

प्रश्न 7.
नीचे दी गई तालिका को पूरा करें।
उत्तर :

किस तरह निर्भर करते हैं? किस-किस उद्भिज से मिलता है? उद्भिज के किस अंश से पाते हैं?
i) लकड़ी को पालिश करने के लिए पाइन तथा शाल से गुड़ी से
ii) पेंसिल का दाग मिटाने के लिए वटवृक्ष डाल से पत्ता टूटने पर
iii) मलेरिया की दवा सिनकोना पेड़ की छाल
iv) डायबिटीज की दवा नयनतारा पत्ता
v) कीटनाशक औषधि के लिए नीम बीज से

प्रश्न 8.
तंतु किसे कहते हैं? प्रकृति से प्राप्त होने वाले तंतुओं के नाम तथा उपयोग लिखें।
उत्तर :
धागे का महीन भाग जो आपस में जुटकर धागा का निर्माण करते हैं उसे तंतु कहते हैं। कपड़े के लिए धागा, धागा के लिए तंतु की आवश्यकता होती है। कपड़ा — धागा — तंतु

प्राकृतिक तंतु उपयोग
i) सूती तंतु कपड़ा बनाने में
ii) नारियल का तंतु रस्सी बनाने में
iii) सुतली का तंतु रस्सी बनाने में
iv) जूट का तंतु जूट का बैग, बोरा

प्रश्न 9.
पराग मिलन क्या है?
उत्तर :
फूलों के चटकदार रंग तथा खुशबू कीट पतंगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कीट पतंग एक से अधिक फूलों के रेणु का मिश्रण करते हैं। इसे पराग मिलन कहते हैं।

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प्रश्न 10.
सहजीविता क्या है?
उत्तर :
जब दो जीव के परस्पर सहयोग से दोनों जीवों का उपकार होता है तो उसे सहजीविता कहते हैं। समुद्र फूलकलाउन मछली या चींटियां-एफिड के बीच का सम्पर्क सहजीविता है।

प्रश्न 11.
एजोला के रहने से जमीन में खाद की जरूरत नहीं पड़ती है, क्यों?
उत्तर :
एजोला एक कलमी लता है। इसके पत्तों के बीच एक बैक्टीरिया रहता है जो हवा से नाइट्रोजन को लेता है। इससे एजोला का लाभ होता है। खाद्य के लिए एजोला को नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है तथा एजोला अपने पत्तों पर बैक्टीरिया को रहने की जगह देता है। इस तरह एजोला तथा बैक्टीरिया सहजीविता द्वारा-अपना काम चला लेते हैं।

प्रश्न 12.
परजीवी क्या है?
उत्तर :
वे जीव जो दूसरे जीव पर आश्रित होकर अपना भोजन बनाते हैं उन्हें परजीवी कहते हैं। स्वर्णलता एक परजीवी है जो हल्दी के रस को सोखकर जिंदा रहती है।

प्रश्न 13.
परजीवी किस तरह हमें नुकसान पहुँचाते हैं? लिखें।
उत्तर :

परजीवी कहाँ घर बनाते हैं? शरीर में क्या-क्या लक्षण दिखाई देता है?
i) सूक्ष्म जीवाणु फेफड़ा, हड्डी और अन्य अंश बुखार, शरीर का वजन घटना, खाँसी
ii) फीताकृमि आंत, पेशी, मस्तिष्क, यकृत दुर्बलता
iii) मलेरिया के जीवाणु यकृत, लाल रक्त कणिका बुखार, रक्त की कमी, दुर्बलता
iv) अमाशय के जीवाणु आंत बार-बार पतला दस्त होना, शरीर में पानी कम हो जाना

प्रश्न 14.
नीचे की तालिका को पूरा करो –
उत्तर :

खाद्य पदार्थ का नाम किस प्राणी से मिलता है?
i) मधु मधुमक्खी
ii) मांस मुर्गी, बकरी, सूअर
iii) अण्डा मुर्गी, हंस
iv) दूध गाय, बकरी, भैस
v) ऊन भेड़
v) सिल्क रेशम कीट

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प्रश्न 15.
नीचे की तालिका को पूरा करो –
उत्तर :

वस्त्र बनाने के उपादान किस प्राणी / उद्भिज से मिलता है?
i) रेशम रेशम कीट
ii) ऊन भेड़
iii) सूती धागा कपास
iv) प्लैकस जूट

प्रश्न 16.
पेड़ – पौधे किस तरह प्राणियों पर निर्भर हैं?
उत्तर :
पेड़ – पौधे निम्नलिखित रूप में प्राणियों पर निर्भर है :-

  • परागमिलन के लिए।
  • दूर- दूर बीज बिखेरने के लिए।

प्रश्न 17.
मनुष्य/प्राणी किस प्रकार पेड़ों पर निर्भर हैं ?
उत्तर :
मनुष्य/प्राणी निम्नलिखित कारणों से पेड़ों पर निर्भर हैं?

  • खाद्य के लिए ।
  • घोंसला तथा कोठरी बनाने के लिए ।
  • घर निर्माण के लिए ।
  • वस्त्र बनाने के लिए ।

प्रश्न 18.
मनुष्य कैसे दूसरे प्राणियों पर निर्भर करते हैं?
उत्तर :
मनुष्य निम्नलिखित कारणों से प्राणियों पर निर्भर करते हैं।

  • खाद्य के लिए ।
  • वस्न निर्माण के लिए ।
  • औषधियों के लिए

प्रश्न 19.
प्राणियों से मिलने वाली औषधियों के बारे में लिखें ।
उत्तर :
कार्ड जैसी समुद्री मछलियों में यकृत का तेल रहता है। यकृत के तेल में विटामिन A पर्याप्त मात्रा में मिलता है। हह आँखों के लिए उपयोगी होता है। विटामिन A तथा विटामिन D शरीर तथा दाँतों को मजबूत बनाते हैं। बकरी और तर्गी के कलेजी में विटामिन रहता है जो मनुष्य के भोजन का उपादान है।

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प्रश्न 20.
नीचे की तालिका को पूरा करो :-
उत्तर :

प्राणियों के नाम किस तरह हमारे आस-पास के परिवेश को स्वच्छ रखते हैं?
i) कौआ आस-पास की जगह को साफ रखता है।
ii) सूअर नाले की गंदगी खाकर परिवेश को स्वच्छ
रखता है।
iii) गिद्ध आस-पास मरे हुए जीवों के शरीर को खाकर परिवेश को साफ रखता है।

प्रश्न 21.
नीचे की तालिका को पूरा करो :-
उत्तर :

प्राणियों के नाम कैसे परिवहन के लिए सहयोगी है? तुमने कहाँ देखा?
i) बैल कैसे परिवहन के लिए सहयोगी है गाँव में
ii) घोड़ा खेत से सामान को ढोकर बाजार ले जाने के लिए। गाँव में
iii) ऊँट मनुष्यों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के लिए। रेगिस्तान में
iv) खच्चर रेगिस्तान में सवारी तथा माल ढुलाई में। पहाड़ों पर चढ़ने तथा सामान ढुलाई में। पहाड़ पर

प्रश्न 22.
दूध से दही कैसे बनता है? इसकी प्रक्रिया लिखें।
उत्तर :
दूध से दही बनाने की निम्नलिखित प्रक्रिया है।

  • दही का कुछ अंश लेते हैं ।
  • दूध को गर्म करते हैं।
  • गर्म दूध में दही का अंश मिलाकर रख देते हैं।
  • कई परिवर्तन के बाद दूध का दही बन जाता है।

प्रश्न 23.
पावरोटी कैसे बनता है? पावरोटी में छेद कैसे बनते हैं?
उत्तर :
पावरोटी में मैदा, आटा, पानी का व्यवहार होता है। आटा या मैदा में ईस्ट मिला दिया जाता है, यह एक प्रकार का फंगस है। यह मैदा या आटा के शर्करा को तोड़ देता है। इससे कार्बन डाइ-ऑक्साइन तथा अल्कोहल तैयार होता है, CO2 आटा या मैदा के मिश्रण के फुलाने में सहायता करता है। CO2 मिश्रण से बाहर निकल जाता है और पारवराटी में हल्के-हल्के छिद्र बन जाते हैं।

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प्रश्न 24.
औषधि निर्माण में बैक्टीरिया की क्या भूमिका है?
उत्तर :
प्रकृति में कुछ ऐसे बैक्टीरिया हैं जो जीवाणुओं को नष्ट कर देते हैं। इन बैक्टीरिया से दवाओं के उपादन मिलते है। रट्रोटाइसेस एक प्रकार का बैक्टीरिया है। स्ट्रोप्टोमाइसीन बैक्टीरिया की विभिन्न प्रजाति से 50 से अधिक बैक्टीरिया नाशक, फंगस पेस्ट्रीसाइडनाशक दवाइयाँ बनती हैं। स्ट्रीप्टामाइसीज ररिथोमाइसिन स्ट्रोप्टोमाइसीन से प्राप्त ऐसी दवा है जो हमारे शरीर में प्रवेश होने वाले जीवाणुओं को मार देती है।

प्रश्न 25.
समुद्र फूल और क्लाउन मछली की सहजीविता को लिखें।
उत्तर :
क्लाउन मछली सागर फूल के संग रहती है। समुद्र फूल की शत्रु जैसी तितली मछलियों को भगा देती है। और समुद्र के खाने वाले हिस्सा क्लाउन मछली पा जाती है। कई बार क्लाउन मछली का पीछा करते हुए आने वाले प्राणी समुद्र फूल का शिकार हो जाते हैं।

प्रश्न 26.
चींटी और एफिड के बीच सहजीविता सम्पर्क को लिखें?
उत्तर :
एफिड या रस चूसने वाले पंतगे पेड़ों के शर्करा युक्त रस का शोषण करके समृद्ध वर्ण का त्याग करते हैं। इस वर्ज्य पदार्थ का नाम मधुरस है। चींटियां बड़े मजे लेकर खाती है। खाने के उद्देश्य से चींटियाँ एफिड या रस चूसने वाले पतंगों का भरण-पोषण करती हैं और उन्हें नष्ट होने से बचाती हैं। यहाँ तक कि एफिड का खाना नष्ट होने पर उन्हें एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक ले जाती है।

प्रश्न 27.
समुद्र फूल और संन्यासी केंकड़ा के बीच की सहजीविता को लिखें।
उत्तर :
संन्यासी केंकड़ा का पेट का हिस्सा काफी नरम होता हैं। इसलिए वह किसी मृतक समुद्री प्राणी के खोल में अपना निवास बनाता है और उसकी पीठ पर सागर कुसुम को लेकर इधर उधर बहता रहता है। संन्यासी केकड़े की देह जैसे-जैसे बढ़ती है समुद्र फूल इसे ढंककर रखते हैं। समद्र फूल अपने विषैली कोषयुक्त स्पर्शक की सहायता से संन्यासी केकड़ा की रक्षा करता है। संन्यासी केकड़ा की खाद्ध सामग्रियों में से ही समुद्र फूल का हिस्सा होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
घर का खाना कौन बनाता है ?
(a) माँ
(b) पिता
(c) चाचा
(d) मामा
उत्तर :
(a) माँ

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प्रश्न 2.
मनुष्य के खाने की चीज क्या है ?
(a) चावल
(b) पानी
(c) हरितकी
(d) रबड़
उत्तर :
(a) चावल।

प्रश्न 3.
मनुष्य घर बनाने के लिए क्या इस्तेमाल करता है ?
(a) लकड़ी
(b) कोयला
(c) पेट्रोल
(d) पानी
उत्तर :
(a) लकड़ी ।

प्रश्न 4.
बंदर पेड़ का कौन सा भाग खाता है ?
(a) तना
(b) फूल
(c) फल
(d) सभी
उत्तर :
(c) फल।

प्रश्न 5.
बकरी पेड़ का कौन सा भाग खाती है ?
(a) पत्ता
(b) लकड़ी
(c) तना
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) पत्ता।

प्रश्न 6.
आम का कौन सा हिस्सा हम खाते हैं ?
(a) फल
(b) बीज
(c) छिलका
(d) सभी
उत्तर :
(a) फल ।

प्रश्न 7.
इनमें से किस वनस्पति का पत्ता इस्तेमाल होता है?
(a) गाजर
(b) सहजन
(c) पालक
(d) आम
उत्तर :
(c) पालक ।

प्रश्न 8.
घोंसला कौन से जीव बनाते हैं?
(a) पक्षी
(b) गिलहरी
(c) मकड़ी
(d) सभी
उत्तर :
(a) पक्षी।

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प्रश्न 9.
हाथ पंखा किससे बनता है ?
(a) आम के पेड़ से
(b) ताड़ के पेड़ से
(c) खजूर के पेड़ से
(d) नारियल के पेड़ से
उत्तर :
(b) ताड़ के पेड़ से ।

प्रश्न 10.
सूती धागा किससे बनता है ?
(a) कपास से
(b) ताड़ से
(c) नारियल से
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) कपास से।

प्रश्न 11.
किस प्राणी से तंतु प्राप्त होता है ?
(a) मधुमक्खीं
(b) कपास
(c) रेशम
(d) सभी
उत्तर :
(c) रेशम

प्रश्न 12.
रबर क्या है ?
(a) खाद्य पदार्थ
(b) उत्सर्जी पदार्थ
(c) कोई नहीं
(d) सभी
उत्तर :
(b) उत्सर्जी पदार्थ ।

प्रश्न 13.
मलेरिया की दवा किससे तैयार होती है ?
(a) सर्पगंधा से
(b) चाय से
(c) कुनैन से
(d) सभी से
उत्तर :
(c) कुनैन से।

प्रश्न 14.
सहजीवी का उदाहरण है –
(a) गाय-बगुला
(b) चींटी-एफिड
(c) गैडा-सूअर
(d) केंकड़ा-साँष
उत्तर :
(a) गाय-बगुला
(b) चीटी-एफिड ।

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प्रश्न 15.
एक परजीवी है –
(a) फीताकृमि
(b) गाय
(c) कौआ
(d) बैक्टीरिया
उत्तर :
(a) फीताकृमि

प्रश्न 16.
समुद्री मछलियों में कौन सी विटामिन होती है ?
(a) विटामिन ‘A’ तथा ‘B’
(b) विटामिन ‘B’ तथा ‘C’
(c) विदामिन ‘A’
(d) विटामिन ‘E’
उत्तर :
(a) विटामिन ‘A’ तथा ‘B’ ।

प्रश्न 17.
प्रदूषण कम करने वाला एक प्राणी है –
(a) कुत्ता
(b) बिल्ली
(c) सूअर
(d) सभी
उत्तर :
(c) सूअर ।

प्रश्न 18.
परिवहन के कार्य में आने वाला जीव है –
(a) बैल
(b) घोड़ा
(c) बकरा
(d) गाय
उत्तर :
(a) बैल (b) घोड़ा ।

प्रश्न 19.
एक लाभदायक बैक्टीरिया है –
(a) प्लाजमोडियम
(b) लैक्टोवैसिल्स
(c) पेनिसीलियम
(d) प्रोटोजोवा
उत्तर :
(b) लैक्टोवैसिल्स ।

प्रश्न 20.
हेपोटाइसेस क्या है ?
(a) वायरस
(b) कवक
(c) बैक्टीरिया
(d) प्रोटोजोवा
उत्तर :
(c) बैक्टीरिया।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. ………. की लकड़ी घर निर्माण के काम में आती है।
उत्तर : शाल

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2. ……….. एक औषधीय वृक्ष है।
उत्तर : नीम

3. ……….. की जड़ खाने के काम में आती है।
उत्तर : अदरक

4. ……….. का बीज खाने के काम आता है।
उत्तर : भुट्टा

5. ………. से सूती कपड़ा का तंतु मिलता है।
उत्तर : कपास

6. ……….के तंतु से रस्सी बनाई जाती है।
उत्तर : नारियल

7. पॉलिश के लिए बॉर्निश ……………..तथा………………. पेड़ से प्राप्त होती है।
उत्तर : पाइन, शाल

8. परागमिलन की प्रक्रिया …………….. के …………….. के मिलने से होता है।
उत्तर : फूलों, रेणु,

9. …………. तथा ………… के बीच सहजीविता है।
उत्तर : समुद्र फूल, कलउन मछली

10. स्वर्णलता एक प्रकार का ……………. पौधा है।
उत्तर : परजीवी

11. हमारी आँखों के लिए ……………. अच्छा होता है।
उत्तर : विटामिन ‘A’

12. ईस्ट एक प्रकार का ……………. है।
उत्तर : लाभकारी कवक

13. ……………. एक हानिकारक कवक है।
उत्तर : स्पंजेलिस

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14. स्टोंटाइसेस एक प्रकार का ……………. है।
उत्तर : परजीवी

सही मिलान करो :

प्रश्न 1.

A B
(i) भुट्टा (a) पत्ता
(ii) भुट्टा (b) जड़-तना
(iii) गाजर (c) फल
(iv) कुम्हड़ा (d) बीज
(v) केला (e) फूल – फल

उत्तर :

A B
(i) भुट्टा (d) बीज
(ii) भुट्टा (a) पत्ता
(iii) गाजर (b) जड़-तना
(iv) कुम्हड़ा (e) फूल – फल
(v) केला (c) फल

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प्रश्न 2.

A B
(i) कपास (a) एफिड
(ii) पाट (b) बगुला/मैना
(iii) सेमल (c) कलाउन मछली
(iv) नारियल (d) बगुला

उत्तर :

A B
(i) कपास (c) कलाउन मछली
(ii) पाट (d) बगुला
(iii) सेमल (a) एफिड
(iv) नारियल (b) बगुला/मैना

प्रश्न 3.

A B
(i) गाय (a) एफिड
(ii) चीटियाँ (b) बगुला/मैना
(iii) गैंडा (c) कलाउन मछली
(iv) समुद्र फूल (d) बगुला

उत्तर :

A B
(i) गाय (d) बगुला
(ii) चीटियाँ (a) एफिड
(iii) गैंडा (b) बगुला/मैना
(iv) समुद्र फूल (c) कलाउन मछली

WBBSE Class 6 Science Solutions Chapter 1 परिवेश एवं जीव जगत् की पारस्परिक निर्भरता

प्रश्न 4.

A B
(i) सुक्ष्म जीवाणु (a) आंत
(ii) फीताकृमि (b) फेफड़ा, हड्डी
(iii) मलेरिया का जीवाणु (c) आंत, पेशी, यकृत
(iv) आमाशय के जीवाणु (d) लाल रक्त कणिका

उत्तर :

A B
(i) सुक्ष्म जीवाणु (b) फेफड़ा, हड्डी
(ii) फीताकृमि (c) आंत, पेशी, यकृत
(iii) मलेरिया का जीवाणु (d) लाल रक्त कणिका
(iv) आमाशय के जीवाणु (a) आंत