WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Chapter 2 कश्मीर to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – कश्मीर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कश्मीर हमारे देश का क्या है ?
(क) संकट
(ख) मुकुट
(ग) राजधानी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) मुकुट।

प्रश्न 2.
कश्मीर की घाटी में बहने वाली नदी है –
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) झेलम
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) झेलम।

प्रश्न 3.
अछबल क्या है।
(क) नदी
(ख) तालाब
(ग) झरना
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) झरना।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 4.
अवन्ति वर्मा ने किस मंदिर का निर्माण करवाया था ?
(क) शिव
(ख) गणेश
(ग) विष्णु
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) विष्णु।

प्रश्न 5.
मुगल सम्राटों ने किसे अपना विश्राम शिविर बनाया था ?
(क) नैनीताल
(ख) मंसूरी
(ग) कश्मीर
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) कश्मीर।

प्रश्न 6.
राजतरंगिणी के लेखक हैं –
(क) कालिदास
(ख) कल्हण
(ग) मुद्राराक्षस
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) कल्हण।

प्रश्न 7.
‘कश्मीर’ निबंध के लेखक हैं –
(क) रामचंद्र शुक्ल
(ख) रामकुमार वर्मा
(ग) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(घ) रामविलास शर्मा
उत्तर :
(ख) रामकुमार वर्मा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 8.
डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) ग्वालियर
(ख) सागर
(ग) नागपुर
(घ) भोपाल
उत्तर :
(ख) सागर।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कश्मीर को हमारे कवियों ने क्या कहा है?
उत्तर :
कश्मीर को हमारे कवियों ने स्वर्ग का एक कोना कहा है।

प्रश्न 2.
जम्मू और कश्मीर राज्य का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
जम्मू और कश्मीर राज्य का क्षेत्रफल लग भग पचास हजार वर्गमील है।

प्रश्न 3.
राजतरंगिणी के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
राजतरंगिणी के लेखक महाकवि कल्हण हैं।

प्रश्न 4.
पहलगाँव किस घाटी में स्थित है ?
उत्तर :
पहलगाँव लिदर की घाटी में स्थित है ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 5.
झेलम के उत्तरी भाग में स्थित झरने का क्या नाम है ?
उत्तर :
झेलम के उत्तरी भाग में स्थित झरने का नाम अछबल झरना है।

प्रश्न 6.
डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ॰ रामकुमार वर्मा का जन्म 15 सितंबर, 1905 ई० में मध्यपद्रदेश के सागर जिला में हुआ था।

प्रश्न 7.
कश्मीर का वरदान किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
झेलम नदी को कश्मीर का वरदान कहा जाता है।

प्रश्न 8.
कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध झीलों के नाम लिखें।
उत्तर :
कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध झीलों में वुलर झील एवं मानसबल झील प्रमुख हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 9.
मेवों का देश किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
कश्मीर को मेवों का देश कहा जाता है ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
मुगल बादशाह जहाँगीर ने कश्मीर के संबंध में क्या कहा है ?
उत्तर :
मुगल बादशाह जहाँगीर ने कश्मीर के संबंध में कहा है कि यदि जमीन पर बहिश्त (स्वर्ग) है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है।

प्रश्न 2.
राजतरंगिणी में क्या वर्णित है ?
उत्तर :
राजतरंगिणी में कश्मीर के इतिहास का वर्णन है। कश्मीर के ऐतिहासिक वैभव का खंडहर इसमें दृष्टिगत होता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 3.
मार्तण्ड मंदिर का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मार्तण्ड मंदिर के नीचे से सरोवरों के छोटे-बड़े आकार की बड़ी कलात्मक कृतियाँ बनी हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानों एक बड़े थाल में कलाकंद के छोटे-बड़े टुकड़े तराशे गए हैं। इन कुंडों में मछलियाँ स्वच्छंदता से विचरण करती हैं। इन्हें देख कर मन मुग्ध हो जाता है।

प्रश्न 4.
अछबल झरने की सुंदरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अछबल झरने को देखकर ऐसा लगता है मानों सौन्दर्य और संगीत तरल होकर निर्झर रूप से बह रहे हैं। इस झरने की सुंदरता पर मुग्ध होक़र सम्राट जहाँगीर ने यहाँ एक सुंदर बगीचा बनवाया था। भूमि के कोड़ से तीन धाराएँ ऊपर उभरती हैं, मानों ये जलधाराएँ भूमि की नाभि से ऊपर तक जाने वाली त्रिवली रेखाएँ हैं।

प्रश्न 5.
कोकड़ नाग के बारे में आपको क्या ज्ञात हुआ है?
उत्तर :
कुक्कुट शब्द का कश्मीरी रूप कोकड़ है। यहाँ भूमि के अनेक स्थानों से जल-धारा प्रवाहित होती है। लगता है जल आँख-मिचौनी खेल रहा है। कितने स्थानों से जल की पतली-पतली धाराएँ निकल कर स्थूल बन जाती है। अत्यंत शीतल निर्मल जल तीव्र गति से बहता है।

प्रश्न 6.
कश्मीर को धरती का स्वर्ग क्यों कहा गया है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा गया है। यहाँ के लहलहाते खेत, कल-कल की ध्वनि करते झरने, गाती हुई नदियाँ, मनोरम प्राकृतिक दृश्य मन को मुग्ध कर देते हैं। इस मधुर प्रदेश में जीवन मुस्कान से भर उठता है। ईश्वर ने प्रकृति के सौन्दर्य से इसे अनेक प्रकार से सँवारा है। उपत्यकाएँ, हिमशैल, बादल, पुष्पराशि और वृक्ष-राशि ने कश्मीर की सुषमा को सौन्दर्य के एक नवीन स्वर्ग में आसीन कर दिया है। कवियों ने इसे स्वर्ग का एक कोना कहा है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

प्रश्न 7.
जब यात्री गण्र उस मार्ग पर चलते हैं तो ऐसा लगता है जैसे किसी विश्वामित्र की शक्ति से अनेक त्रिशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं – इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
चन्दनबाड़ी जाते समय दूर तक रास्ता साफ-सुथरा और सीधा है फिर पहाड़ों के निकट चढ़ाई है। लेखक ने पहाड़ी पर चढ़ते यात्रियों की तुलना स्वर्ग की चढ़ाई करने वाले त्रिशंकु से की है। विश्वामित्र ॠषि ने अपने तपोबल की शक्ति से त्रिशंकु को स्वर्ग भेजने का प्रयल् किया था। इस पहाड़ी पर चढ़ने वाले यात्री ऐसे लगते थे मानों विशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य तथा धरती की रमणीयता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
कश्मीर की नैसर्गिक सुषमा निराली है। ईश्वर ने प्रकृति के सौदर्य से इसे अनेक प्रकार से सजाया है। उपत्यकाएँ, हिमशैल, पुष्पराशि, वृक्षराशि ने कश्मीर की सुषमा को सौन्दर्य के एक नवीन स्वर्ग में आसीन कर दिया है। शीतल, मंद और सुगंधित समीर हर समय और हर स्थान पर बहती रहती है। वृक्षों के हरे-हरे पत्ते, वाटिकाओं में रंगबिरंगे पुष्ष, उन पर भ्रमरों की गुंजार चित्त को मोहित करती हैं।

सम्राट जहाँगीर ने कहा था यदि धरती पर स्वर्ग है तो यहीं है। वसन्त ॠतु में सारा पठार फूलों का एक विशाल साप्राज्य प्रतीत होता है, झेलम नदी के कारण सारे भू भाग के झरनों, लहरों तथा झीलों का जाल बिछा हुआ है। कश्मीर की घाटी के बीच बहने वाली झेलम नदी तुलर झील, मान सबल झील तथा चन्दनबाड़ी इस प्रदेश की शोभा है। हरे -भरे खेत केसर की क्यारियाँ, सेव, अंगूर, सुबार्नी आदि मेवे इस घाटी के उपज की विशेषताएँ हैं। इसीलिए कश्मीर को मेवों का देश कहा जाता है ।

सफेद वृक्षों की घनी छाया, चिनार वृक्ष वनउपवन की शोभा बढ़ाते हैं। झेलम के उत्तरी भाग में अछबल का झरना है। मटन स्थान में मार्तण्ड का मंदिर है। यहाँ नीचे सरोवरों के छोटे-बड़े आकार की कलात्मक आकृतियाँ हैं। अछबल में संगीत और सौन्दर्य का रूप साकार हो उठता है। यहाँ सम्माट जहाँगीर ने एक बगीचा बनवाया था। विशाल वृक्ष यहाँ सौन्दर्य के प्रहरी प्रतीत होते हैं। कोकड़ानाग में अनेक स्थानों से जलधारा प्रवाहित होती है। कितने स्थानों से जल की पतली-पतली धाराएँ निकलकर स्थूल बन जाती हैं। बहता हुआ जल पत्थरों से अठखेलियाँ करता हुआ हँस पड़ता है।

लिदर की घाटी में पहाड़ियों के नीचे छोटी सी बस्ती पहलगाँव है । दाहिनी ओर हटकर लिदर नदी है। यह अपने अनवरत नाद में प्रकृति के सौन्दर्य का जयघोष करती है । तीनों ओर गौरव से मस्तक उठाए हुए गिरि-भृृर हैं। इनके कोने में कभी-कभी हिम राशि स्थिर हो जाती है। चन्दनबाड़ी यहाँ से दस मील दूर है। पहाड़ों के निकट चढ़ाई पर चढ़ते हुए यात्री गण ऐसे लगते हैं मानों अनेक त्रिशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं। पहाड़ियों के बीच की समतल भूमि पर बर्फ के बड़े-बड़े मैदान बन गए हैं। ऊँची पहाड़ियों पर भूर्ज-पत्र के अनेक वृक्ष हैं। कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। कश्मीर की नैसर्गिक सुषमा मन में आनंद की धारा बहा देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

भाषा-बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए : –

सौन्दर्य – कश्मीर का सौन्दर्य मन को मोह लेता है।
कश्मीर – कश्मीर हमारे देश का मुकुट है।
झेलम – झेलम के उत्तरी भाग में अछबल झरना है।
राजतरंगिणी – कवि कल्हण ने राजतरंगिणी की रचना की है।
कलात्मक – मंदिर में अनेक कलात्मक आकृतियाँ हैं।

2. विलोम शब्द लिखें –

मानव – दानव
महान – तुच्छ
स्वर्ग – नरक
समाट – प्रजा
आयात – निर्यात

WBBSE Class 6 Hindi कश्मीर Summary

जीवन-परिचय :

रामकुमार वर्मा का जन्म सन् 1905 ई。 में मध्य प्रदेश के सागर जनपद में हुआ था। वर्मा बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार हैं। वे कवि, कथाकार, आलोचक तथा निबंधकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी प्रसिद्ध काव्य रचनाएँएकलव्य, चित्तौड़ की चिता, निशीथ आदि हैं। इनके प्रसिद्ध एकांकी संग्रह-पृथ्वीराज की आँखें, रेशमी टाई आदि हैं। वर्मा प्रयाग विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्रध्यापक तथा विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।

पाठ का सारांश – प्रस्तुत पाठ में लेखक ने कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुपम चिर्रण किया है। फूलों से परिपूर्ण कश्मीर की धरती सौन्दर्य का आगार है। देश का मुकुट कश्मीर की सुषमा को देखकर ही कवियों ने इसे धरती का स्वर्ग कहा है। जम्मू और कश्मीर का क्षेत्रफल लगभग पचास हजार वर्ग मील है। सारा पठार फूलों से परिपूर्ण अत्यंत मोहक लगता है। झेलम नदी, वुलर झील, मानसबल झील, चंदनबाड़ी आदि कश्मीर की शेभा है। झेलम के उत्तरी भाग में अछबल का झरना है। राजतरंगिणी में कश्मीर के ऐतिहासिक वैभव के खंडहर दृष्टिगत होते हैं। अवन्ति वर्मा के द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर के खंडहर आज बिखरे पड़े हैं। मार्तण्ड मंदिर की कलात्मक आकृतियाँ आकर्षक है। अछबल झरने की सुन्दरता पर लोग मुग्ध हो जाते हैं। कोंकड़नाग में भूमि के अनेक स्थानों से जलधारा प्रवाहित होती है।

लिदर की घाटी में पहलगाँव स्थित है। लिदर नदी अपने नाद से प्रकृति के सौन्दर्य का जयघोष करती है। चन्दनबाड़ी यहाँ से दस मील दूर है। पहाड़ों के निकट की चढ़ाई स्वर्ग की चढ़ाई के समान प्रतीत होती है।

ऊँची पहाड़ियों पर भूर्ज-पत्र के अनेक वृक्ष हैं। इन्हीं वृक्षों के छालों पर हमारे महर्षियों ने अमर साहित्य की रचना की है। वस्तुत: कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। उसकी सुरक्षा और उसके प्रति श्रद्धा-समर्पण प्रत्येक भारतीय का कर्त्तव्य है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

शब्दार्थ :

  • मुकुट – ताज।
  • सँवारा – सजाया।
  • सुषमा – सुंदरता।
  • सर्पिल – साँप जैसा, टेढ़ा।
  • मनोरम – सुंदर।
  • कलकल – मधुर शब्द।
  • निनाद – शब्द, आवाज।
  • स्थूलकाय – पुष्ट शरीर, विशाल शरीर।
  • शिविर – छावनी, डेरा।
  • स्मृतियाँ – यादें।
  • सर्पण – अर्पण।
  • विपुलता – अधिकता।
  • प्रशस्त – मजबूत।
  • मेहरबान – कृपालु ।
  • खुश किस्मती भाग्यशाली।
  • उपत्यकाएँ – घाटी, पर्वत के पास की भूमि।
  • वरदान – इष्ट वस्तु की प्राप्ति।
  • खंडहर – भग्नावशेष।
  • वैभव – धन-संपत्ति।
  • उत्कीर्णित – खुदे हुए।
  • विर्गलित – द्रवित।
  • अवसाद – विषाद, दीनता।
  • भंगिमा – हाव-भाव।
  • अठखेलियाँ – ठिठोली, चुलबुलापन।
  • अनवरत – निरंतर, लगातार।
  • फेनाज्ज्वल – उज्ज्वल फेन।
  • हिम-शैल – बर्फीले पहाड़।
  • उत्तरीय – चादर।
  • मार्तण्ड – सूर्य।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Chapter 1 दो भाई to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – दो भाई

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कलावती के कितने बेटे थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 2.
कलावती के दोनों बेटों का नाम था –
(क) माधव और जाधव
(ख) माधव और राघव
(ग) माधव और केदार
(घ) केदार और जाधव
उत्तर :
(ग) माधव और केदार

प्रश्न 3.
कलावती के दोनों बहुओं का नाम था –
(क) गीता और सीता
(ख) चंपा और श्यामा
(ग) गीता और चंपा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चंपा और श्यामा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 4.
केदार क्या पढ़ रहे थे?
(क) गीता
(ख) रामायण
(ग) महाभारत
(घ) कुरान
उत्तर :
(ख) रामायण।

प्रश्न 5.
केदार की बुद्धि थी –
(क) सुस्त
(ख) चुस्त
(ग) मंद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चुस्त ।

प्रश्न 6.
प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था ?
(क) प्रेम प्रकाश.
(ख) धनपतराय
(ग) नबाब राय
(घ) मुंशीराय
उत्तर :
(ख) धनपतराय ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 7.
प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1880 में
(ख) सन् 1882 में
(ग) सन् 1884 में
(घ) सन् 1886 में
उत्तर :
(क) सन् 1880 में ।

प्रश्न 8.
प्रेमचंद के जन्म स्थान का नाम क्या था?
(क) सोरों
(ख) लमही
(ग) विसपी
(घ) छतरपुर
उत्तर :
(ख) लमही ।

प्रश्न 9.
प्रेमचंद के प्यार का नाम क्या था?
(क) नबाबराय
(ख) राम
(ग) धनपतराय
(घ) अजबराय
उत्तर :
(क) नबाबराय ।

प्रश्न 10.
प्रेमचंद के पिता का नाम क्या था?
(क) शिवचंद्रराय
(ख) अजायब राय
(ग) सुंघनीसाहू
(घ) श्रीरामचंद्र
उत्तर :
(ख) अजायब राय ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 11.
प्रेमचंद् की माता का नाम क्या था ?
(क) आनंदी देवी
(ख) लक्ष्मी देवी
(ग) राधा देवी
(घ) मंगला देवी
उत्तर :
(क) आनंदी देवी ।

प्रश्न 12.
रेहन लिखने वाला कौन था ?
(क) केदार
(ख) माधव
(ग) शिवदत्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) माधव।

प्रश्न 13.
घर का रेहन कितने रुपये में लिखवाया गया ?
(क) पचास
(ख) साठ
(ग) अस्सी .
(घ) नब्बे
उत्तर :
(ग) अस्सी।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
माधव और केदार में बड़ा भाई कौन था ?
उत्तर :
माधव और केदार में बड़ा भाई केदार था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 2.
माधव के कितने पुत्र एवं पुत्रियाँ थीं ?
उत्तर :
माधव के चार पुत्र एवं चार पुत्रियाँ थीं ।

प्रश्न 3.
माधव को किसकी लालसा थी ?
उत्तर :
माधव को धन-संपत्ति की लालसा थी।

प्रश्न 4.
केदार को किसकी अभिलाषा थी ?
उत्तर :
केदार को संतान की अभिलाषा थी।

प्रश्न 5.
बेचारी चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में क्यों पिसना पड़ता था ?
उत्तर :
श्यामा अपने लड़कों को संवारने-सुधारने में लगी रहती थी। उसे घरेलू काम से फुरसत नहीं मिलती थी। इस कारण चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में पिसना पड़ता था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 6.
चम्पा और श्यामा का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर :
चम्पा कार्यकुशल और श्यामा शांत स्वभाव की थी।

प्रश्न 7.
रेहन लिखवाने के लिए किन्हें बुलाया गया था ?
उत्तर :
रेहन लिखवाने के लिए गाँव के मुखिया और नम्बरदार को बुलाया गया था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कलावती का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर :
कलावती का स्वभाव बड़ा ही उदार, कोमल तथा वात्सल्य से भरा हुआ था। उसके हृदय में प्रेम तथा नेत्रों में गर्व था। दोनों बेटों के स्नेह को देखकर वह फूली नहीं समाती थी। बेटों को गोद में खेलते देख कर उसके नेत्रों में अभिमान, हृदय में गर्व, उत्साह तथा उमंग का भाव था। वह दोनों बहुओं में सामंजस्य बैठाना चाहती थी। केदार की स्वार्थपरता को देखकर उसका हृदय शोक-संताप से भर उठा।

प्रश्न 2.
कलावती के दोनों बेटे वैमनस्य के शिकार कैसे हो गए ?
उत्तर :
दोनों बेटों की बहुओं के स्वभाव में भिन्नता थी। केदार को कोई संतान न हुई। माधव को चार पुत्र एवं चार पुत्रियाँ हुई। केदार को संतान की लालसा तथा माधव को धन-संपत्ति की चाह थी। भाग्य की इस कूटनीति ने धीरे-धीरे दोनों भाइयों में द्वेष का रूप धारण कर लिया। इस प्रकार दोनों वैमनस्य के शिकार हो गए।

प्रश्न 3.
माधव एवं केदार की पतियाँ कैसी थीं ?
उत्तर :
माधव की पत्नी सॉवली-सलोनी अत्यंत रूपवती थी। वह मधुर बोलनेवाली, सुंदर शीलवाली तथा शांत स्वभाव की थी। केदार की पत्नी अधिक बोलनेवाली तथा चंचल स्वभाव की थी। वह कार्य कुशल थी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 4.
माधव को केदार ने किस एवज में पैसे दिए ?
उत्तर :
माधव ने अपनी कन्या के गहने बंधक रखकर दो साल का बकाया लगान चुका दिया। सवा सौ रुपये में बंधक रखे गहनों को छुड़ाने के लिए माधव केदार के पास गया था। केदार ने रेहन लिखा कर माधव को पैसे दिए।

प्रश्न 5.
केदार के व्यवहार से कलावती दु:खी क्यों थी ?
उत्तर :
कलावती माँ थी। दोनों बेटे उसके हददय के टुकड़े थे। दोनों को अपनी छाती का दूध पिलाकर उसने बड़ा किया था। दोनों बेटों के प्रति उसके दिल में असीम स्नेह का भाव था। माधव की शोचनीय आर्थिक दशा पर वह क्षुब्ध थी। केदार ने माधव की सवा सौ रुपये के लिए उसका घर रेहन लिखा लिया। माँ ने जब यह सुना तो वह अत्यंत दु:खी हो गई। उसने सोचा कि क्या केदार बिना रेहन लिखाए छोटे भाई की मदद नहीं कर सकता था।

प्रश्न 6.
‘हृदय चाहे रोए पर होंठ हँसते रहें’ कहने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
माधव की आर्थिक दशा शोचनीय थी। आमदनी कम थी पर खर्च अधिक था। कुल की प्रतिष्ठा का भी निर्वाह करना था। इसलिए माधव अपने मन की व्यथा को मन में छिपा कर रखना चाहता था। उसके दिल में अपनी दरिद्रता का दर्द था, वह उस दर्द को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहता था। मन में भले पीड़ा सहे पर उस दर्द को वाणी से प्रकट नहीं करता था। हमेशा हँसता तथा प्रसन्नता प्रकट करता था।

प्रश्न 7.
इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भाई-भाई के बीच परिवार की तरह स्नेह एवं ममत्व का व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख एवं दु:ख में साथ देना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘दो भाई’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? इस कहानी के द्वारा लेखक ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर :
दो भाई कहानी द्वारा लेखक ने मानव समाज को यह शिक्षा दी है कि भाई-भाई के बीच कुटुम्ब-सा व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख-दु:ख में साथ देना चाहिए। कहानी में केदार और माधव दोनों भाइयों के उदाहरण से लेखक ने इस कटु सत्य को उजागर किया है कि संसार में स्वार्थ आदमी को संकीर्ण बना देता है अपने तथा परायेपन की भावना भाई-भाई में नफरत का भाव पैदा कर देती है। बचपन में दोनों भाइयों में कितना प्रेम था, कितनी सौम्यता थी, पर सयाना तथा समझदार होते ही सारी सरसता समाप्त हो गई। एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना पैदा हो गई। दूसरे के अभाव को अपने स्वार्थ पूर्ति तथा आनन्द का साधन माना जाने लगा।

भाई-भाई में अविश्वास उत्पन्न हो गया। एक माँ के गर्भ से उत्पन्न होने वाले, सहोदर कहे जाने वाले सगे भाई भी इतने स्वार्थी तथा लोलुप हो जाते हैं कि मनुष्यता भी लजाने लगती है। केदार ने अपने सहोदर भाई को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए उसे 80 रु० देने के लिए उससे उसका घर रेहन लिखवा लेता है। गाँव के मुखिया, नंबरदार तथा मुख्तार भी केदार के काम से विस्मित हो गए। लेखक ने इस भावना और संकीर्णता को निंदनीय बतलाया है। संसार में सहोदर भाई मिलना कठिन है। इसलिए कभी भी भाई का अपमान करना, उसे नफरत की दृष्टि से देखना मानवता के खिलाफ है।

हमारी भारतीय संस्कृति भ्रातृ पेम की, भाई-भाई के बीच मधुर व्यवहार की शिक्षा देती है। भाई के सुख-दुःख को अपना समझना एक दूसरे के प्रति हमदर्दी दिखलाना उचित कर्तुव्य है। भाई के दु:ख को अपना दु:ख समझ कर उसे दूर करने का प्रयल्ल करना चाहिए। उसे अपना अभिन्न अंग समझना चाहिए। जहाँ भाइयों में परस्पर मेल, सद्भावना एवं सहयोग की भावना है वहीं सुख, शांति तथा संतोष का वातावरण बना रहता है । जहाँ नफरत, घृणा, विद्वेष का भाव है वहाँ सुख शांति नहीं घुटन और पीड़ा का साम्राज्य है। अत: भाई-भाई के बीच मधुर स्नेह-पूर्ण संबंध बनाकर गृहस्थ जीवन को आनंदमय बना लेना चहिए। लेखक ने यही संदेश दिया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 2.
‘दो भाई’ कहानी के आधार पर माँ कलावती की पीड़ा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कलावती का हदय माता का हृदय था। वह ममत्व तथा सेह से परिपूर्ण था। उसके दोनों बेटे- केदार और माधव उसके हदय के टुकड़े थे। दोनों बेटों को जाँघों पर बैठाकर दूध और रोटी खिलाती। उन्हें पुचकार कर बुलाती और बड़े-बड़े कौर खिलाती। उसके हूदय में प्रेम की उमंग और नेत्रों में गर्व की झलक थी। दोनों भाई साथ-साथ स्नेहपूर्वक स्कूल जाते, साथ-साथ खाते और साथ ही रहते थे। दोनों को निहार कर माँ निहाल हो जाती थी।

दोनों भाइयों का विवाह हो गया। दोनों भाई अपनी पतियों पर मुग्ध थे, पर माँ कलावती का मन किसी से न मिला। दोनों से प्रसन्न और दोनों से अप्रसन्न थी। दोनों भाई सयाने और समझदार हो गए। माधव को धन की लालसा थी और केदार को संतान की। अब दोनों भाइयों में धीरे धीरे द्वेष का भाव उत्पन्न होने लगा। परिणामस्वरूप चंपा और श्यामा दोनों बहुएँ अलग हो गई। उस दिन एक ही घर में दो चूल्हे जले। कलावती विवश थी, वह सारे दिनरोती रही। दोनों बेटे माँ की तनिक परवाह न किए।

दोनों भाई कभी एक ही पलथी पर बैठते थे, एक ही थाली में खाते थे और एक ही छाती से दूध पीते थे, उन्हें अब एक घर में एक गाँव में रहना कठिन हो गया। अब उनमें मातृ स्नेह न था। केवल भाई के नाम की लाज थी, लड़कियों की शादी में खर्च के कारण माधव की दशा अत्यंत दयनीय बन गई। विवश होकर उसे बड़े भाई केदार के पास जाना पड़ा। केदार और चंपा को अवसर मिल गया श्यामा और माधव को नीचा दिखाने का। एक गोद में खेलने वाले, एक छाती में दूध पीने वाले आज इतने बेगाने हो गए। केदार ने माधव का घर अपने नाम रेहन लिखाकर उसे रुपये दिए। इस घटना से सभी लोग चकित हो गए। भाई-भाई के बीच इतना बड़ा अविश्वास। बूढ़ी माँ कलवाती ने सुना तो उसकी आँखों से आँसू की नदी उमड़ आई।

उसने आकाश की ओर देखकर अपना माथा ठोंक लिया। उसे दोनों बेटों की बचपन की याद आई। उस समय माँ के नेत्रों में कितना अभिमान था। हुदय में कितनी उमंग और कितना उत्साह था। आज लाचार बूढ़ी माँ के नेत्रों में लज्जा और हृदय में शोक-संताप था। उसने पृथ्वी को देखकर, अपने हृदय की गहरी पीड़ा से क्रुब्ध होकर कातर स्वर में ईश्वर को संबोधित कर कहने लगी कि ऐसे ही पुत्रों को मेरी कोख में जन्म लेना था। आज दोनों बेटों के जन्म को वरदान नहीं बल्कि अभिशाप समझने लगी।

भाषा-बोध :

(क) संज्ञा – सूर्य, रोटी, माधव, पाठशाला, कुशलता।
सर्वनाम – वह, उसे, अपना, मेरा, उसका।
विशेषण – चतुर, सलोनी, मलीन, खुश, प्यारी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखें।
प्रसन्न – खुश, संतुष्ट, हर्षित ।
मुरझाया – कुम्हलाया, सुस्त, उदास।
अभिलाषा – लालसा, इच्छा, चाह, कामना।
छोटा – लघु, न्यून, उम्र में कम।
भाई – भाता, भैया, बंधु।

WBBSE Class 6 Hindi दो भाई Summary

जीवन-परिचय :

इनका असली नाम मुंशी धनपतराय प्रेमचंद है । इनका जन्म सन् 1880 ई० में वाराणसी जनपद के लमही नामक गाँव में हुआ था। ये हिन्दी साहित्य जगत् में कथा सम्राट माने जाते हैं। इनका जीवन अनेक कठिनाइयों में बीता। इनकी रचनाओं में कृत्रिमता नहीं है। इनकी भाषा तथा शैली में एक अनोखी सजीवता तथा चुस्ती पाई जाती है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – सेवासदन, कर्मभूमि, गबन, गोदान, प्रतिज्ञा आदि हैं। इनकी कहानियाँ ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में प्रकाशित हैं। गोदान हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। इनकी मृत्यु सन् 1936 में हुई।

कहानी का सारांश – माँ कलावती अपने दोनों बेटों – केदार व माधव को जाँघों पर बैठा कर दूध-रोटी खिलाती, प्यार से पुचकारती थी । दोनों बेटे उसकी आँखों के तारे थे। दोनों में बड़ा स्नेह था। दोनों बेटों को निहारकर कलावती गर्व और प्रेम से भर जाती थी। दोनों साथ-साथ पाठशाला जाते, साथ-साथ खाते और साथ-साथ रहते थे। दोनों भाई बड़े हुए दोनों का विवाह हुआ। बड़े बेटे केदार की बहू चंपा चंचल स्वभाव की थी। छोटे भाई माधव की वधू श्यामा सांवली, सुन्दर एवं शान्त रूपराशि की खान थी। कलावती का मान किसी से न मिला। केदार को संतान की अभिलाषा थी। माधव को धन संपत्ति की। माधव को चार पुत्र तथा चार पुत्रियाँ थीं ।

दोनों भाई समझदार और बुद्धिमान हो गए। दोनों में धीरे-धीरे वैर-भाव पनपने लगा। दोनों भाई अलग हो गए। एक ही घर में दो चूल्हे जले। कलावती सारे दिन रोती रही। माँ के दिल के टुकड़े माँ के सामने ही अलग हो गए । उन्हें अब अपने पराये की पहचान हो गई। माधव की दशा शोचनीय थी। खर्च अधिक था, आमदनी कम। दो कन्याओं के विवाह में जमीन बिक गई। तीसरी लड़की के विवाह में घर में जो कुछ था समाप्त हो गया।

कन्या का गौना भी न हुआ था कि माधव पर दो साल के बकाया लगान का वारंट आ गया। कन्या के गहने बंधक रख कर उसका समाधान किया। चंपा ने नातेदारों को इसकी सूचना दे दी। दूसरे ही दिन एक नाई और दो ब्राह्मण माधव के दरवाजे पर आ गए। अब माधव अधीर तथा बेचैन हो उठा, कोई दूसरा रास्ता न देख, विवश था। केदार के सामने सहायता का प्रस्ताव रखा।

केदार और चंपा दोनों को अच्छा मन चाहा मौका मिल गया। चंपा ने कहा कि दोनों कोठरी पर कोई महाजन कदाचीत ही रुपये दे । केदार ने एक महाजन से अपनी जान-पहचान के बारे में बतलाया पर कोई महाजन सवा सौ रुपये नहीं दे सकता था । अंत में मामला तय हो गया। माधव की इच्छा पूरी नहीं हुई। केदार और चंपा दोनों की मनोकामना पूरी हुई। चंपा ने सोचा कि अब श्यामा रानी इस घर में कैसे शान से रहेंगी। सबेरे केदार के द्वार पर मुखिया, नंबरदार, मुंशी दातादयाल सब उपस्थित हुए। केदार और चंपा प्रसन्न थे। माधव विषाद से भरा हुआ था।

अभी तक माधव तथा आए हुए लोग समझते थे कि भाई की सहायता के लिए केदार किसी महाजन से रुपये दिला रहे हैं । पर रेहन का कागज लिखते समय केदार ने लिखने वाले का नाम माधव तथा लिखाने वाले का नाम केदार बतलाया तो सभी विस्मित हो गए। माधव चकित होकर बड़े भाई की ओर निहारने लगा। सभी ने सोचा – भाई-भाईके बीच इतना अविश्वास। सभी को आश्चर्य हुआ।

बूढ़ी माँ ने सुना तो उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उसने आकाश की ओर देखकर माथा ठोंक लिया। उसे उनके बचपन के दिनों की याद आई, जब दोनों उसकी गोद में उछल-कूद कर दूध रोटी खाते। उस समय माँ के नेत्रों में कितना अभिमान था, उमंग थी, उत्साह था, पर आज नयनों में लज्जा तथा हृदय में शोक-संताप है। पृथ्वी की ओर देख कर कातर स्वर में कहा है नारायण! क्या ऐसे पुत्रों को मेरी कोख से जन्म लेना था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

शब्दार्थ :

  • सुहावनी – सुंदर।
  • अमित भाषिणी – बहुत अधिक बोलने वाली।
  • हृदयोद्गार – मन का उबाल।
  • सलोनी – सुंदर ।
  • घाम – धूप।
  • मृदु भाषिणी – मधुर बोलने वाली।
  • कौर – निवाला।
  • रीझे – प्रसन्न हुए।
  • उमंग – उत्साह।
  • वधू – बहू। नेत्रों – आँखो।
  • गिरो – बंदक (बंधक) ।
  • व्यर्थ – बेकार।
  • विवश – लाचार।
  • व्यय – खर्च।
  • जायदाद – संपत्ति।
  • कुत्सित – बुरा।
  • मर्म भेदी – हदय में चुभने वाली।
  • लालसा – इच्छा।
  • सेंत – मुफ्त।
  • अभिलाषा – इच्छा।
  • सराहना प्रशंसा।
  • वैमनस्य – शत्रुता।
  • निपुण – चतुर।
  • रमणी – स्री।
  • बेगाने – पराये।
  • कातर – व्याकुल, विवश।
  • संताप – कष्ट।
  • गँवार – अनपढ़।
  • गवई – गाँव का।
  • छटा – शोभा।
  • मर्यादा – प्रतिष्ठा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 8 बादल चले गये वे to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – बादल चले गये वे

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
किसने अपने चित्रों से आकाश सजाया ?
(क) वर्षा ने
(ख) सूर्य ने
(ग) तारों ने
(घ) बादल ने
उत्तर :
(घ) बादल ने।

प्रश्न 2.
बादल के जाने के बाद आसमान कैसा दिखाई देता है ?
(क) हरा
(ख) सफेद
(ग) काला
(घ) नीला
उत्तर :
(घ) नीला।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 3.
इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं ?
(क) सुख
(ख) दुःख
(ग) सुख -दुःख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सुख -दुःख दोनों ।

प्रश्न 4.
त्रिलोचन किस साहित्यिक धारा के अंतिम कड़ी माने जाते हैं ?
(क) छायावाद
(ख) हालावाद
(ग) प्रगतिशील धारा
(घ) प्रयोगवादी धारा
उत्तर :
(ग) प्रगतिशील धारा।

प्रश्न 5.
‘चित्त’ का क्या अर्थ है ?
(क) मन
(ख) धन
(ग) गाड़ी
(घ) मस्तिष्क
उत्तर :
(क) मन।

प्रश्न 6.
इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं ?
(क) सुख
(ख) टु:ख
(ग) सुख और दु:ख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सुख और दु:ख दोनों।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 7.
कवि के अनुसार जीवन में कितने दिन दुःख-सुख रहता है ?
(क) दो दिन
(ख) तीन दिन
(ग) चार दिन
(घ) एक दिन
उत्तर :
(क) दो दिन।

प्रश्न 8.
कवि ने किसे मेहमान के समान बताया है ?
(क) दु:ख को
(ख) धरती को
(ग) बादल को
(घ) आसमान को
उत्तर :
(ग) बादल को।

प्रश्न 9.
कौन सदा आकाश में नहीं ठहरते ?
(क) जल
(ख) बादल
(ग) तारे
(घ) सूरज
उत्तर :
(ख) बादल।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 10.
बादल अपनी शोभा से लोगों के ………. मुग्ध बना देते हैं ?
(क) मन को
(ख) दिल को
(ग) पड़ोस को
(घ) खेतो को
उत्तर :
(क) मन को।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कौन अपनी छवि से चित्त चुरा लेता है ?
उत्तर :
सूने आकाश में सुन्दर चित्र सजाकर बादल अपनी छवि से चित्त चुरा लेता है।

प्रश्न 2.
धरती का रंग कैसा दिखाई देता है ?
उत्तर :
धरती का रंग पीला दिखाई देता है।

प्रश्न 3.
पाहुन किसे कहा गया है ?
उत्तर :
पाहुन आकाश में आकर चले जाने वाले बादल को कहा गया है।

प्रश्न 4.
शिशिर ॠतु का प्रभात कैसा होता है?
उत्तर :
शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला तथा ओस के कणों से भीगा होता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 5.
इस संसार में सभी का जीवन किससे युक्त रहता है ?
उत्तर :
इस संसार में सभी का जीवन नवीन तरंगों से युक्त रहता है ?

प्रश्न 6.
शीत काल का सबेरा कैसा दिखाई पड़ता है ?
उत्तर :
शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भीगा हुआ दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 7.
‘त्रिलोचन’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
‘त्रिलोचन’ का जन्म 20 अगस्त, 1917 ई० को उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिला के कठघरा चिराना पट्टी नामक गाँव. में हुआ था ।

प्रश्न 8.
‘त्रिलोचन’ का वास्तविक नाम क्या था ?
उत्तर :
‘त्रिलोचन’ का वास्तविक नाम ‘वासुदेव सिंह’ था।

प्रश्न 9.
‘त्रिलोचन’ किस दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे ?
उत्तर :
त्रिलोचन ‘जनवार्ता’ नामक दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 10.
आसमान का रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
आसमान का रंग नीला होता है ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
आसमान अब नीला-नीला क्यों दिखाई देने लगा है ?
उत्तर :
बादलों ने सूने आकाश में आकर सुन्दर चित्र बनाकर आकाश को सुन्दर तथा बहुरंगी बना दिया था। पर जब वे बादल आकाश से चले गए तो आकाश फिर सूना हो गया। उसका निरंतर बना रहने वाला रंग नीला दिखाई देने लगा।

प्रश्न 2.
बादलों ने सूने आकाश को किस प्रकार सजाया ?
उत्तर :
बादलों ने सूने आकाश में सुन्दर बहुरंगी चित्र बनाकर उसे सजा दिया। अपने विविध रंग, अपनी शोभा से, क्षण-क्षण परिवर्तित रूप से आकाश को सुसज्जित कर दिया।

प्रश्न 3.
सुख-दु:ख जीवन के संगी क्यों कहे गए हैं ?
उत्तर :
सुख-दुःख व्यक्ति के जीवन में सदा आते-जाते रहते हैं। दुःख भी थोड़े समय के लिए आता है, सुख भी थोड़े समय के लिए आता है। सुख-दु:ख के इस मधुर मिलन से जीवन परिपूर्ण होता है। इसीलिए सुख-दु:ख जीवन के संगी कहे गए हैं।

प्रश्न 4.
‘बादल चले गए वे’ कविता का मूलभाव लिखिए।
उत्तर :
‘कविता का सारांश देखिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –
(क) बना-बनाकर चित्र सलोने, यह सूना आकाश सजाया।
(i) पाठ और कवि का नाम बताइए ।
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘बादल चले गए वे’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि त्रिलोचन हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शिशिर ऋतु शीतकाल का मौसम है। इस ऋतु का सबेरा चमकीला होता है। सबेरे सूर्य की सुनहली किरणें चारों और फैल जाती हैं। रात में ओस के कण पड़ते हैं। इसलिए वातावरण सबेरे आर्द्र बना रहता है।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बादल के चले जाने के बाद आकाश नीला-नीला दिखाई देने लगा है। अब वह साँवला सजधज से युक्त नजर आने लगा है। धरती का रंग पीले रंग का दिखाई देता है। वह हरी भरी तथा रस से भरी हुई और आनंद से परिपूर्ण नजर आती है । शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भींगा हुआ दिखाई पड़ता है। अब बादल आकाश से चले गए हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
आकाश से बादलों के चले जाने पर प्रकृति में क्या परिवर्तन होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
ग्रीष्म ॠतु का अवसान होते ही वर्षा ऋतु का आगमन होता है। आकाश का कलेवर काले-काले बादलों से ढँक जाता है। सावन के आकाश में छाए बादलों की शोभा निराली बन जाती है। बादल अपनी विभिन्न प्रकार की आकृति के सुन्दर चित्र बनाकर सूने आकाश को अलंकृत कर देते हैं। आकाश की शोभा अत्यंत मोहक बन जाती है। अपने बहुरंगी रूपों तथा आकार से वे बादल आकाश को सुन्दर बना देते हैं। क्षण-क्षण परिवर्तित होने वाला उनका आकार उनकी शोभा मन को अपनी ओर खींच लेती है। बादलों के चले जाने पर आकाश का रंग नीला हो जाता है। आकाश नीले-साँवले रंग से सज जाता है।

धरती पीली हो जाती है। सर्वत्र हरियाली तथा सरंसता छा जाती है। प्रकृति बड़ी ही मोहक बन जाती है। शिशिर ॠतु का सबेरा तो बड़ा ही सुहावन बन जाता है। सारा वातावरण भीगा-भीगा तथा प्रकाशमान बन जाता है। प्रभात में सूर्योदय के समय सूर्य की सुनहली किरणें वातावरण को चमकीला बना देती हैं। जिस प्रकार ऋतु परिवर्तन से प्रकृति में परिवर्तन हो जाता है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी परिवर्तन होता रहता है। मनुष्य के जीवन में सुख-दु:ख दोनों आते-जाते रहते हैं।

न तो दु:ख ही स्थायी रहता है और न सुख ही। दोनों एक दूसरे के साथी हैं। आते-जाते रहना उनकी नियति है। जीवन में कभी हास्य है तो कभी रुदन है। सुख-दुःख के मधुर मिलन से जीवन पूर्ण होता है। जिस प्रकार घर में कोई मेहमान आता है और दो दिन रहकर चला जाता है, उसी प्रकार बादल भी वर्षा ऋतु के बीतते ही आकाश से कूच कर जाते हैं। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत् नियम है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द लिखें –
आसमान – नभ, आकाश
बादल – मेघ, घन, जलद
धरती – पृथ्वी, धरा, भूमि
अश्रु – आँसू, नयनजल, नयन नीर
सुख – आनंद, चैन, मजा

(ख) विलोम शब्द –
राग – द्वेष, विराग
दिन – रात
एक – अनेक
श्याम – श्वेत
जीवन – मृत्यु

WBBSE Class 6 Hindi बादल चले गये वे Summary

जीवन-परिचय :

त्रिलोचन (1917-2007) का मूल नाम वासुदेव सिंह था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम. ए. की परीक्षा पास की और लाहौर से शास्त्री की डिग्री ली। ये ‘आज’ और ‘जनवार्ता’ दैनिक समाचार पत्र से भी जुड़े रहे। इनकी कविता सहजता, कोमलता तथा माधुर्य से परिपूर्ण हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – मिट्टी की बारात, ताप के तपे हुए दिन हैं। इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

कविता का सारांश – कवि त्रिलोचन ने बादल के उदाहरण से स्पष्ट किया है कि जीवन में सुख-दुःख दोनों आतेजाते रहते हैं। बादल आकाश को अपने रंगों से सजाकर, अपनी शोभा से सभी को प्रसन्न कर छिप जाते हैं। आकाश नीले रंग -काले रंग में तथा धरती पीले रंग में हरी भरी बन जाती है। शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला हो जाता है। सुखदु:ख दोनों जीवन के संगी हैं क्योंकि जीवन में कभी खुशहाली तथा कभी रुदन आता है। इसी प्रकार मेहमान की तरह बादल भी आकर चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

शब्दार्थ :

  • सलोने – सुंदर ।
  • प्रभात – सबेरा ।
  • राग – प्रेम ।
  • पाहुन – मेहमान ।
  • चित्र – आकृति ।
  • समुज्ज्वल – चमकीला ।
  • छवि – शोभा ।
  • नवल – नया ।
  • हास – हँसी, खुशी ।
  • तरंगी – तरंग युक्त, मनमौजी ।
  • सजीला – सजधज के साथ रहने वाला।
  • शिशिर – शीतकाल ।

पद – 1

बना-बनाकर
चित्र सलोने
यह सूना आकाश सजाया
राग दिखाया
रंग दिखाया
क्षण-क्षण छवि से चित्त चुराया
बादल चले गये वे।

व्याख्या : प्रस्तुत पद्यांश त्रिलोचन कवि रचित ‘बादल चले गये वे’ कविता से उद्धृतं है। इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि सूने आकाश को बादल किस प्रकार सजा देते हैं।

सूने आकाश में आकर बादल अपने चिर्रों से आकाश को सुसज्जित कर देते हैं। वे सुन्दर चित्र बनाकर आकाश को सजा देते हैं। वे अपना प्रेम प्रकट करते हैं। अपना विविध रंग दिखलाते हैं। हर क्षण अपनी शोभा से लोगों के मन को मुग्ध बना देते हैं पर वे बादल सदा आकाश में नहीं ठहरते। अपनी सुन्दरता, अपना रंग दिखा कर वे चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

पद – 2

आसमान अब
नीला-नीला
एक रंग रस श्याम सजीला
धरती पीली
हरी रसीली
शिशिर प्रभात समुज्ज्वल गीला
बादल चले गये वे ।

व्याख्या – बादल के चले जाने के बाद आकाश नीला-नीला दिखाई देने लगा है। अब वह साँवला सजधज से युक्त नजर आने लगा है। धरती का रंग पीले रंग का दिखाई देता है। वह हरी-भरी तथा रस से भरी हुई आनंद से परिपूर्ण नजर आती है। शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भींगा हुआ दिखाई पड़ता है। अब बादल आकाश से चले गए हैं।

पद – 3

दो दिन दु:ख का
दो दिन सुख का
दु:ख-सुख दोनों संगी जग में
कभी हास है
कभी अश्रु है
जीवन नवल तरंगी जग में
बादल चले गये वे
दो दिन पाहुन जैसे रहकर।

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि सुख-दुःख जीवन के संगी हैं। जीवन में दुःख भी थोड़े दिनों के लिए आता है और सुख भी थोड़े दिनों के लिए आता है। सुख-दुःख का क्रम सदा बना रहता है। जीवन में कभी हासविलास अर्थात् खुशियाँ रहती हैं। कभी आँसू अर्थात्यु:ख भरे दिन होते हैं। इस संसार में सभी का जीवन नवीन तरंगों से युक्त बना रहता है। फिर कवि ने बादल को मेहमान के समान बतलाया है। जिस प्रकार किसी के घर मेहमान कुछ समय के लिए आते हैं फिर अपने घर चले जाते हैं, उसी प्रकार बादल आकाश में मेहमान की तरह आकर फिर चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 7 कठपुतली to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – कठपुतली

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
गुस्से से कौन उबली ?
(क) कठपुतली
(ख) लड़की
(ग) खेल्ली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कठपुतली।

प्रश्न 2.
कठपुतली के आगे-पीछे क्या है ?
(क) कठपुतली
(ख) धागा
(ग) आदमी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) धागा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 3.
कठपुतली ने दूसरी कठपुतिलयों से क्या कहा ?
(क) बंधन तोड़ने के लिए
(ख) आत्मनिर्भर होने के लिए
(ग) स्वतंत्र होने के लिए
(घ) दिए गए सभी
उत्तर :
(घ) दिए गए सभी।

प्रश्न 4.
कठपुतलियों ने पहली कठपुतली के समक्ष क्या सहमति दी ?
(क) स्वतंत्र हो जाए
(ख) भाग जाए
(ग) धीरे-धीरे आगे बढ़ने की
(घ) एक साथ मिलकर आगे बढ़ने की
उत्तर :
(क) स्वतंत्र हो जाए।

प्रश्न 5.
‘हमें अपने मन के छंद हुए’ से क्या तात्पर्य है ?
(क) अपने लिए जीना
(ख) अपने मन की बात सुनना
(ग) इशारों पर नाचना
(घ) नया जीवन जीना
उत्तर :
(ख) अपने मन की बात सुनना।

प्रश्न 6.
पहली कठपुतली क्या सोचने लगी ?
(क) क्या बंधन टूट जाएँगे ?
(ख) क्या स्वतंत्र होना सुखमय होगा ?
(ग) क्या आगे बढ़ पाएँगे ?
(घ) क्या लक्ष्य पा लेंगे ?
उत्तर :
(ख) क्या स्वतंत्र होना सुखमय होगा ?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 7.
क्या कठपुतलियाँ स्वतंत्र हो पाई ? यदि हो पाई तो कौन-सी ?
(क) नहीं, कोई भी नहीं
(ख) आधी हो गई
(ग) हाँ
(घ) सबसे छोटी वाली हो गई
उत्तर :
(क) नहीं, कोई भी नहीं।

प्रश्न 8.
‘कठपुतली’ शब्द का क्या अर्थ है?
(क) कटी हुई पुतली
(ख) काठ की पुतली
(ग) काठ और पुतली
(घ) उपर्युक्त सभी गलत
उत्तर :
(ख) काठ की पुतली।

प्रश्न 9.
कठपुतली का जीवन कैसा था ?
(क) रस्सी में बँधा हुआ
(ख) स्वतंत्र का
(ग) परतंत्रता का
(घ) आजादी का
उत्तर :
(ग) परतंत्रता का।

प्रश्न 10.
कठपुतली को किस बात का दु:ख था ?
(क) हर समय नाचने का
(ख) मुस्कराते रहने का
(ग) धागे में बँधने का
(घ) दूसरों के इशारे पर नाचने का
उत्तर :
(घ) दूसरों के इशारे पर नाचने का।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 11.
‘पाँवों पर छोड़ देने’ का क्या भाव है ?
(क) स्वतंत्र कर देना
(ख) गुलाम बना लेना
(ग) सहारा लेना
(घ) सहारा छीन लेना
उत्तर :
(क) स्वतंत्र कर देना।

लघूतरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर :
कठपुतली ने सोचा कि वह धागे से बँधी हुई पराधीन है। उसके आगे-पीछे धागे हैं। वह अपने पाँव पर खड़ी नहीं हो सकती। इसीलिए कठपुतली को गुस्सा आया।

प्रश्न 2.
कठपुतली क्या तोड़ने के लिए कहती है ?
उत्तर :
कठपुतली अपने आगे-पीछे के धागों के बंधन को तोड़ने के लिए कहती है ।

प्रश्न 3.
कठपुतली की बात का समर्थन किसने किया ?
उत्तर :
कठपुतली की बात का समर्थन सभी कठपुतलियों ने किया।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 4.
पहली कठपुतली क्या सोचने लगी ?
उत्तर :
पहली कठपुतली सोचने लगी कि हमारे मन में यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई। यह चुनौती भरा कदम समझदारी से उठाना चाहिए।

प्रश्न 5.
उपर्युक्त पद्यांश किस कविता से लिया गया है ?
उत्तर :
उपर्युक्त पद्यांश ‘कठपुतली’ नामक कविता से लिया गया है।

प्रश्न 6.
कठपुतली क्यों कोधित हो गई ?
उत्तर :
कठपुतली धागे से बँधे-बँधे तथा दूसरों के इशारों पर नाचते-नाचते परेशान हो गई थी, इसलिए वह क्रोधित हो गई थी।

प्रश्न 7.
कठपुतली ने क्या कहा ?
उत्तर :
कठपुतली ने कहा कि मेरे आगे-पीछे ये धागे क्यों हैं, इन्हें तोड़कर मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

प्रश्न 8.
“मुझें मेरे पाँवों पर छोड़ दो।” पंक्ति से कठपुतली का क्या आशय है ?
उत्तर :
कठपुतली आत्मनिर्भर होना चाहती है। वह अपनी इच्छानुसार कार्य करना चाहती है, इसलिए उसने कहा कि मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 9.
कठपुतली के कथन का क्या आशय है ?
उत्तर :
कठपुतली के कथन का आशय है कि वह स्वतंत्र होना चाहती है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कठपुतली कविता का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने कठपुतली के माध्यम से स्वतंत्रता के महत्त्व को स्सष्ट किया है। पराधीनता किसी को भी अच्छी नहीं लगती। गुलामी की बेड़ययों को सभी उतार कर फेंक देना चाहते हैं। धागे में बँधी हुई पराधीन कठपुतली को दूसरों के इशारे पर नाचने से दु:ख होता है। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। गुलामी को दूर करने के लिए वह विद्रोह का स्वर मुखर करती है। स्वाधीनता के महत्त्व को बतलाना ही कविता का उद्देश्य है।

प्रश्न 2.
कठपुतली स्वयं को अपने पांवों परँछोड़ द्रेने के लिए क्यों कहती है ?
उत्तर :
कठुपुली को धागों का बंधन पसंद नहीं है। वह धागों में बँधी हुई पराधीन है। उसे दूसरों के इशारे पर नाचना पड़ता है। वह अपने पाँवों पर खड़ा होना चाहती है। इसीलिए वह ख्वयं को अपने पाँवों पर छोड़ देने के लिए कहती है।

प्रश्न 3.
‘ये कैसी इच्छा मेरे मन में जगी’ पहली कठपुतली के ऐसा सोचने का क्या कारण है ?
उत्तर :
पहली कठपुतली की बात सभी को अच्छी लगी। सभी कठपुतलियाँ स्वतंत्र होना चाहती थीं। अब पहली कठपुतली पर सब की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आ गई तो उसने भली-भाँति सोच-विचार कर ही कोई कदम उठाना चाही। इसीलिए पहली कठपुतली सोचने लगी कि मेरे मन में एकाएक यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 4.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर :
कठपुतली बहुत दिनों से धागे से बँधी थी तथा उसे दूसरे लोग अपनी अँगुलियों के इशारों पर नचा रहे थे। वह इस पराधीनता से मुक्त होना चाहती थी। वह आज़ाद रहना चाहती थी तथा अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहती थी, इसलिए उसे गुस्सा आया।

प्रश्न 5.
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती ?
उत्तर :
कठपुतली को स्वतंत्र रूप से अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा है, लेकिन वह खड़ी नहीं होती क्योंकि वह धागों से बँधी हुई है। वह दूसरों के अधीन है। उसका स्वयं पर कोई वश नहीं चलता। दूसरों की इच्छा पर ही वह अपने हाथ-पैर हिला सकती है।

प्रश्न 6.
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी ?
उत्तर :
आज़ादी सबको अच्छी लगती है। पराधीन रहना किसी को पसंद नहीं। सभी अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहते हैं। किसी भी कठपुतली को धागे से बँधे रहना और दूसरों की इच्छा से नाचना पसंद नहीं था। इसीलिए पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को अच्छी लगी।

प्रश्न 7.
पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि – ‘ये धागे क्यों हैं मेरे पीछे-आगे / इन्हें तोड़ दो / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।’ तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि – ‘ये कैसी इच्छा / मेरे मन में जगी ?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए –
उसे दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी महसूस होने लगी।
उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।
वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने ली।
वह डर गई, क्योंकि उसकी उप्र कम थी।
उत्तर :
जब पहली कठपुतली बंधन का जीवन जीते-जीते दु:खी हो गई थी, उसे अपनी पराधीनता पर कोध आ गया, तब उसने स्वतंत्र होने की इच्छा जताई, लेकिन जब सारी कठपुतलियाँ उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिलाने लगी और उसके नेतृत्व में विद्रोह के लिए तैयार होने लगी, तो वह डर गई। वह सोच में पड़ गई कि सबकी जिम्मेदारी लेकर वह इतना बड़ा कदम कैसे उठाए। अब तक सभी दूसरों पर आश्रित रहे हैं, एकदम से मिली स्वतंत्रता में कहीं उनके कदम लड़खड़ा तो नहीं जाएँगे। यही कारण था कि पहली कठपुतली चिंतित होकर अपने फैसले के विषय में सोचने लगी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

(क) सुनकर बोली और – और
कठपुतलियाँ
कि हाँ
बहुत दिन हुए
हमें अपने मन के छंद छुए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश किस कवि की किस रचना से उद्धुत है ?
उत्तर :
प्सस्तुत पद्यांश भवानी प्रसाद मिश्र रचित ‘कठुुतली’ कविता से उद्धृत हैं।

(ii) ‘मन के छंद छुए’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पहली कठपुतली की स्वतंग्रता की बात सुन कर सभी कठुुतलियाँ कहने लगी कि बहुत दिनों से हमारे मन में कोई उमंग, कोई खुशी नहीं आई। बंधन के कारण मन सदा वुझा सा रहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘कठपुतली’ कविता के आधार पर बतलाइए कि पराधीनता या गुलामी का जीवन हर प्रकार से दु:खद है।
उत्तर :
कठपुतली अपने हाथ-पाँव धागे या रस्सियों से बँधा देखकर क्रोध से उबल पड़ती है। वह उन धागों को तोड़कर स्वतंत्र होने तथा अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा व्यक्त करती हैं। अन्य कठपुतलियाँ भी उसके प्रस्ताव का समर्थन करती है। दीर्घकाल से वे सभी पराधीनता के कारण अपने मन के स्वतंत्र विचार को व्यक्त करने की इच्छानुसार व्यवहार करने में असमर्थ बनी रहीं। पहली कठपुतली सोचने लगी कि एकाएक मन में यह इच्छा क्यों उत्पन्न हुई? विचार कर परिणाम सोचकर ही किसी क्रांति या आन्दोलन का नेतृत्व करना चाहिए।

इस प्रकार इस कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि पराधीनता का जीवन हर प्रकार से दुखदाई होता है। पराधीनता में सपने में भी सुख नहीं होता। पशु-पक्षी भी पराधीनता को अभिशाप समझते हैं। पराधीनता की जंजीरों को तोड़कर सभी आजाद होना चाहते हैं। अपने अधीन रहना, स्वाधीन जीवन जीना सब प्रकार से सुखद होता है। पर वश में रहना कभी सुख संतोष, शांतिमय नहीं हो सकता। क्रांति या आन्दोलन द्वारा स्वतंत्र होना कौन नहीं चाहता। पर इसका अगुआ होना सभी के वश की बात नहीं। परिणाम क्या होगा इसे कोई नहीं सोच सकता।

अत: सफलता-असफलता के गंभीर परिणाम को भलीभाँति सोच-विचार कर उचित कदम उठाना चाहिए। दूसरे के अधीन और नियंत्रण में रहना कोई नहीं चाहता। पराधीनता की स्थिति में मन तथा बुद्धि कुंठित हो जाती है। अनुचित बंधन से मन उबलने लगता है। प्राण और मन पर यह बोझ जीवन को धोर निराशा तथा पीड़ा से भर देता है। गुलामी की स्थिति में सुख के सारे साधक भी व्यर्थ प्रतीत होते हैं। सोने के पिंजड़े में कैद पक्षी मुक्त होना चाहता है। अत: स्वाधीनता हर प्रकार के सुख, शांति एवं उल्लास से जीवन को भर देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द लिखें –
मुन – चित्त, जी, अंतर, मानस।
इच्छा – चाह, कामना, अभिलाषा।
गुस्सा – कोप, कोध, रोष, क्षोभ।
दिन – वार, दिवस, वासर, दिवा।

(ख) लिंग बताइए –
कठपुतली – स्त्रीलिंग
दिन – पुलिंग
छंद – पुलिंग
इच्छा – स्व्रीलिंग
मन – पुलिंग

WBBSE Class 6 Hindi कठपुतली Summary

जीवन-परिचय :

इनका जन्म सन् 1913 ई० में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ था। प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा सोहागपुर, जबलपुर एवं होशंगाबाद में हुई थी। बी. ए. की शिक्षा के बाद ये कल्पना में सम्पादक हुए फिर ऑल इन्डिया रेडियो में नौकरी की। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कमल के फूल, वाणी की दीनता, सतपुड़ा के जंगल आदि हैं। इनकी मृत्यु सन् 1985 ई० में हुई ।

कविता का सारांश – प्रस्तुत कविता में कठपुतलियाँ स्वाधीन होने की इच्छा व्यक्त करती हैं। पहली कठपुतली सभी धागों को तोड़ देने की बात कहती है। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। उसकी बात सुनकर सभी कठपुतलियाँ प्रसन्न होती हैं। पर पहली कठपुतली स्वतंग्रता की जिम्मेदारी के प्रश्न पर सोच-समझकर कदम उठाना चाहती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

शब्दार्थ :

  • कठपुतली – काठ की बनी हुई पुतली ।
  • गुस्से – कोध ।
  • पुतली – गुड़िया ।
  • पाँवों – पैरों ।
  • इच्छा-कामना; चाह ।
  • जगी – पैदा हुई।
  • उबली – नाराज हुई ।

पद -1

कठपुतली
गुस्से से उबली
क्यों हैं मेरे पीछे-आगे ?
इन्हें तोड़ दो
मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ कठपुतली पाठ से ली गई है। इसके कवि भवानी प्रसाद मिश्र हैं। इन पंक्तियों में पहली कठपुतली स्वतंत्र होने की इच्छा व्यक्त कर रही है।

व्याख्या – धागे में बँधी हुई कठपुतली अपनी पराधीनतां को देखकर क्रोध और आवेग से भर उठती है। वह जोश में आकर कहने लगती है कि उसके आगे-पीछे ये धागे क्यों हैं ? इन धागों को तोड़ दीजिए, मुझे मेरे चरणों पर खड़े होने तथा चलने के लिए मुक्त कर दीजिए। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। इस प्रकार पराधीनता के दुःख से बाहर निकलने के लिए वह विद्रोह कर देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

पद – 2

सुंनकर बोली और- और
कठपुतलियाँ
कि हाँ ।
बहुत दिन हुए।
हमें अपने मन के छंद हुए।

व्याख्या – पहली कठपुतली की बात सभी कठपुतलियों को अच्छी लगती है क्योंकि स्वतंत्र रहना सभी चाहती हैं। अजादी सभी को अच्छी लगती है। वे कहने लगती हैं कि बहुत दिनों से हमारे मन में कोई उमंग, कोई खुशी नहीं आई। धागे में बँधी हुई हम सदा से पराधीन हैं। दूसरों के इशारे पर हमें नाचना पड़ता है। अपने मन के अनुसार हम कोई काम नहीं कर सकतीं।

पद -3

मगर
पहली कठपुतली सोचने लगी
ये कैसी इच्छा
मेरे मन में जगी।

व्याख्या – पहली कठपुतली के द्वारा कही गई स्वतंत्र होने की इच्छा का सभी कठपुतलियों ने स्वागत किया लेकिन पहली कठपुतली पर जब स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आती है तो वह सोच समझ कर कदम उठाना चाहती है। इस लिए वह कहने लगती है कि मेरे मन में एकाएक यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई? यह चुनौती भरा कदम समझदारी से समझ-बूझ कर ही उठाना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 6 जीवन का झरना to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – जीवन का झरना

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झारने से
(घ) समुद्र से
उत्तर :
(ग) झरने से

प्रश्न 2.
निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर :
(क) आगे बढ़ने को

प्रश्न 3.
जीवन रूपी निर्झर के दो तीर हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दु;ख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर :
(ख) सुख-दुख

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 4.
यह जीवन क्या है ?
(क) नदी
(ख) निर्झर
(ग) आकाश
(घ) वायु
उत्तर :
(ख) निर्झर।

प्रश्न 5.
निईर का जन्म कहाँ होता है?
(क) पर्वत के भीतर
(ख) जल में
(ग) तालाब में
(घ) आकश में
उत्तर :
(क) पर्वत के भीतर।

प्रश्न 6.
‘जीवन का झरना’ किसकी रचना है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) श्रीधर पाठक
(ग) आरसी प्रसाद सिंह
(घ) भवानी प्रसाद मिश्र
उत्तर :
(ग) आरसी प्रसाद सिंह।

प्रश्न 7.
‘आरसी प्रसाद सिंह’ का जन्म किस राज्य में हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) हरियाणा
उत्तर :
(क) बिहार।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 8.
चंदा मामा किस तरह की रचना है ?
(क) स्त्री साहित्य
(ख) दलित साहित्य
(ग) प्रबंध काव्य
(घ) बाल साहित्य
उत्तर :
(घ) बाल साहित्य।

प्रश्न 9.
कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झरने से
(घ) समुद्र से
उत्तर :
(ग) झरने से।

प्रश्न 10.
निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर :
(क) आगे बढ़ने को।

प्रश्न 11.
जीवन रूपी निर्झर के दो किनारे (तीर) हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दुःख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर :
(ख) सुख-दु:ख।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 12.
‘दुर्दिन’ शब्द का क्या अर्थ है ?
(क) दु:ख भरे दिन
(ख) दूर के मित्र
(ग) दूर के दिन
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर :
(क) दु:ख भरे दिन।

प्रश्न 13.
‘निई्झर कहता है
(क) लड़े चलो
(ख) भाग चलो
(ग) बढ़े चलो
(घ) सोये रहो
उत्तर :
(ग) बढ़े चलो।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें सतत् गतिशील बने रहने, जीवन-पथ पर सदा आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है।

प्रश्न 2.
निर्झर की धुन क्या है ?
उत्तर :
निई्ईर की सिर्फ एक धुन सतत् चलते रहने, आगे बढ़ते रहने की है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 3.
झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
झरने की गति रुक जाने पर उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 4.
जीवन का आनंद किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनंद सतत कर्म करते रहने तथा जीवन में आगे बढ़ते रहने में ही है।

प्रश्न 5.
जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा झरना से दी गई है।

प्रश्न 6.
आरसी प्रसाद सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
आरसी प्रसाद सिंह का जन्म 19 अगस्त, 1911 ई० को बिहार के दरभंगा जिला के एरोट नामक गाँव में हुआ था ।

प्रश्न 7.
निर्झर’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘निर्झर’ झरना का पर्याय है और झरना जीवन की गतिशीलता का।

प्रश्न 8.
झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 9.
निईरार हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
निईर की बस एक ही धुन है – सतत् चलते रहने की ।

प्रश्न 10.
झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
झरने की गति रुक जाने पर वह सूख जाएगा, अर्थात् उसकी मृत्यु हो जाएगी।

प्रश्न 11.
जीवन का आनन्द किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनन्द सतत् आगे बढ़ने, मुसीबतों को हराकर पार करने तथा सुख-दुःख दोनों में अविचलित हुए बगैर चलते रहने में है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने किन कारणों से जीवन की तुलना निईरा से की है?
उत्तर :
कवि ने जीवन की तुलना झरने से की है क्योंकि मनुष्य का जीवन झरने के समान है। जिस प्रकार झरना दो किनारों के बीच स्वच्छंद गति से चलता है उसी प्रकार मनुष्य भी सुख-दु:ख दो किनारों के बीच जीवन बिताता है।

प्रश्न 2.
जीवन का झरना कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर :
पाठ के प्रारंभ में दिया गया हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 3.
निर्झर का जन्म कहाँ होता है? वह अपनी यात्रा में किन-किन अवरोधों का सामना करता है ?
उत्तर :
निर्झर का जन्म पर्वत के अन्तस्थल से होता है। वह अपनी यात्रा में अनेक अवरोधों का सामना करता है। उसके रास्ते पर रोड़े आकर बाधा डालते हैं, कठोर चट्टानें पड़ जाती हैं। जंगल के वृक्ष रास्ते में पड़ जाते हैं पर वह सभी बाधाओं को पार कर आगे बढ़ता जाता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) यह जीवन क्या ……….. मनमानी है।
(i) इस अंश के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर :
इस अंश के रचनाकार आरसी प्रसाद सिंह हैं।

(ii) जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा निर्झर से दी गई है ।

(iii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता संख्या 1 की व्याख्या देखिए।

(ख) चलना है केवल चलना है ……….. निईर झर कर यह कहता है।
(i) यह अंश किस पाठ से लिया गया है ?
उत्तर :
यह अंश जीवन का झरना पाठ से लिया गया है।

(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता सात की व्याख्या देखिए ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

(ग) बाधा के रोड़ों से लड़ता ……….. यौवन से मदमाता।
(i) बाधा के रोड़ों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
निई्झर के रास्ते में पत्थर के कठोर टुकड़े आ जाते हैं। वे इसके मार्ग को रोककर बाधा बनते हैं। पर निर्झर अपनी शक्ति से उनसे लड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है।

(ii) इस अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता की व्याख्या देखिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
कवि ने इस कविता में जीवन की तुलना झरने से किस प्रकार की है? यह कविता हमें क्या संदेश देती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने जीवन की तुलना झरने से की है। कवि ने झरने के माध्यम से जीवन को समझाने की कोशिश की है कि मनुष्य का यह जीवन एक झरना है। इस जीवन रूपी झरने के पानी जीवन का आनंद है। सुख और दु:ख इस जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं। मानव जीवन सदा सुख-दुःख में बीतता रहता है। जीवन में सदा सुख-दुःख का क्रम बना रहता है। झरना पर्वत से निकल कर विभिन्न अंचलों से नीचे उतरता है। फिर विभिन्न घाटियों से होता हुआ समतल क्षेत्र में बहने लगता है। व्यक्ति का जीवन भी अनेक पड़ावों से गुजरता हुआ, अपनी समस्याओं का समाधान करता हुआ स्थिर शान्त जीवन बिताने लगता है।

झरना अपनी मस्ती में गाता हुआ निरंतर गतिशील बना रहता है। आगे बढ़ते रहना ही उसका जीवन है। मनुष्य को भी सादा अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ते रहने का दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए। झरना अपने मार्ग में पड़ने वाले पत्थरों से लड़ता हुआ, पेड़ों से टकराता हुआ अपने यौवन की शक्ति से संपन्न वह आगे बढ़ता रहता है। मनुष्य भी अपने जीवन पथ में आने वाली समस्त बाधाओं से संघर्ष करता हुआ अपने लक्ष्य तक पहुँचता है ।

झरने की गतिशीलता ही उसका जीवन है। जिस दिन उसकी गति रूक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मनुष्य के जीवन में ही चलते रहना, कर्म करते रहना ही जीवन है, रुकना, जड़ हो जाना ही मौत है। जिस दिन मनुष्य अपने कर्त्तव्य से विमुख होकर निष्क्रिय बन जाएगा, उस दिन उसका भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसलिए जीवित रहना है तो कर्त्तव्य करते रहना चाहिए। झरना कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता, सदा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहता है, अन्त में अपने लक्ष्य पर पहुँच कर ही दम लेता है। मनुष्य को भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। मनुष्य को किसी प्रकार सोच-विचार में न पड़कर केवल अपने लक्ष्य पर चलना ही उचित है। मनुष्य को जीवन में निरतंतर चलते रहना चाहिए। रुकना मर जाना है। कर्म से विरत हो जाने, निष्क्रिय हो जाने से जीवन का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है।

‘जीवन का झरना’ कविता हमें संदेश देती है कि निरंतर आगे बढ़ते रहना, गतिशील बने रहना ही जीवन है। चलना, गतिशील रहना तथा सक्रिय रहने में ही जीवन में सुख शांति है। जीवन-पथ पर गतिशील रह कर ही बाधाओं तथा विपत्तियों को परास्त कर अपना जीवन प्रशस्त बना सकते हैं। गतिशीलता एवं सक्रियता में ही जीवन का सच्चा आनंद है। निष्क्रियता तो नारकीय पीड़ा है। चलते रहना ही जीवन की निशानी है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

भाषा-बोध :

(क) लिंग निर्णय कीजिए –
जीवन -पुलिंग
गति – स्त्री लिंग
पानी – पुलिंग
चट्टान – स्त्री लिंग

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखिए –
पानी – जल, नीर, वारि, तोय
पेड़ – वृक्ष, विटप, तरु, पादप
मानव – मनुष्य, आदमी, इंसान, मनुज
जग – संसार, विश्व, जगत्, दुनिया
गिरि – पहाड़, अचल, पर्वत, नग

(ग) विलोम शब्द लिखें –
समतल – असमतल, खुरदरा
सुख – दु:ख
अन्तर – समान
गति – रुकना
दुर्दिन-सुदिन

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

(घ) वचन बदलिए –
तारों – तारा
पेड़ों – पेड़
चट्टानों – चट्टान
राह – राहें
बाधा – बाधाएँ
मानव – मानवों

WBBSE Class 6 Hindi जीवन का झरना Summary

जीवन-परिचय :

इनका जन्म सन् 1911 ई॰ में बिहार के दरभंगा जनपद में ‘एरोट’ गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रकृति और जीवन की विविध प्रवृत्तियों का सरल, सुगम व मधुर हिन्दीभाषा में रचित रचनाओं द्वारा अत्यन्त सरस एवं प्रभावपूर्ण किया है। इनकी प्रमुख रचनाएं-शतदल, सूर्यमुखी, जीवन और यौवन, पांचजन्य आदि हैं। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य-साधना में लगा दिया।

कविता का सारांश – प्रस्तुत कविता में कवि झरने के माध्यम से बतलाया है कि मनुष्य का जीवन झरने के समान होना चाहिए। सुख-दु:ख जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं। झरना पर्वत के ह्रदय से फूटकर विभिन्न प्रदेशों से नीचे उतरता है। वह समतल भूमि पर आकर बहने लगता है। इसलिए वह मस्ती से गाते हुए आगे बढ़ता रहता है। रास्ते में पत्थरों से लड़ता हुआ, पेड़ों से टकराता हुआ चट्टानों पर चढ़ जाता है।

आगे बढ़ते रहना ही उसका जीवन है। जिस दिन उसकी गति रुक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। उसी दिन वह भी इस संसार से दिन गिनकर समाप्त हो जाएगा। मनुष्य भी जिस दिन रुक जाएगा, कर्त्तव्य से विमुख हो जाएगा । झरना, सदा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता रहता है। कहता है कि चलते रहना ही जीवन है । रूक जाना ही मृत्यु है। अत: मनुष्य को सदा सन्मार्ग पर चलते रहना चाहिए।

शब्दार्थ :

  • निर्झर – झरना।
  • मस्ती – आनंद।
  • तीर – किनारा।
  • गिरि – पर्वत।
  • अन्तर – हृदय।
  • अंचल – प्रदेश।
  • गति – चाल।
  • धुन – लगन।
  • समतल – समान भूमि।
  • रोड़ा – चट्टान।
  • जग – संसार।
  • दुर्दिन – बुरा समय।
  • राह – रास्ता।
  • यौवन – जवानी।
  • बाषा – रुकावट ।
  • घड़ियाँ – क्षण, पल।
  • घाटी – पर्वतों के बीच की समतल भूमि।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 1

यह जीवन क्या है ? निई्झर है,
मस्ती ही इसका पानी है।
सुख – दुःख के दोनों तीरों से,
चल रहा चाल मनमानी है।

व्याख्या – प्रस्तुत कविता ‘जीवन का झारना’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि आरसी प्रसाद सिंह हैं। यहाँ कवि ने मनुष्य जीवन की तुलना झरने से की है। यह संदेश दिया है कि झरने की तरह मनुष्य को सदा गतिशील रहना चाहिए। क्योंकि गतिशीलता ही जीवन है । मनुष्य का जीवन झरने के समान है। उसके जीवन की खुशियाँ ही उसका जल है। जिस प्रकार झरना दोनों किनारों के बीच स्वच्छंद गति से आगे बढ़ता है, उसी प्रकार मनुष्य सुख-दु:ख इन दो किनारों के बीच जीवन जीता रहता है।

पद – 2

कब फूटा गिरि के अन्तर से,
किस अंचल से उतरा नीचे।
किस घाटी से बहकर आया,
समतल में अपने को खींचे।

व्याख्या – यह झरना पहाड़ के भीतर से न जाने कब निकला और न जाने किस प्रदेश से नीचे उतरा । विभिन्न घाटियों से बहता हुआ यह अपने को आगे खींचता हुआ मैदान की समतल भूमि पर आ गया।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 3

निर्झर में गति है, यौवन है,
वह आगे बढ़ता जाता है।
धुन एक सिर्फ है चलने की
अपनी मस्ती में गाता है।

व्याख्या : झारने में गति है, जवानी की शक्ति है। इसलिए वह तेज गति से आगे बढ़ता जाता है। उसके मन में केवल आगे बढ़ने की लगन है। अपनी मस्ती में वह कल-कल की ध्वनि करता हुआ आगे बढ़ता जाता है।

पद – 4

बाधा के रोड़ों से लड़ता,
वन के पेड़ों से टकराता।
बढ़ता चट्टानों पर चढ़ता,
चलता यौवन से मदमाता।

व्याख्या : झरने के रास्ते में पत्थर के टुकड़े आकर उसे बाधा पहुँचाते हैं, परंतु झरना अपनी शक्ति से उनसे लड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है। कठोर चट्टानों पर भी चढ़ जाता है। जंगल के वृक्षों से टकराकर आगे निकल जाता है। जवानी की शक्ति से भरा हुआ वह मस्ती के साथ आगे बढ़ता रहता है।

पद – 5

निर्झर में गति ही जीवन है,
रुक जाएगी यह गति जिस दिन ।
उस दिन मर जाएगा मानव,
जग-दुर्दिन की घड़ियाँ गिन-गिन ।

व्याख्या : हमेशा आगे बढ़ते रहना, गतिशील बने रहना ही झरने का जीवन है। जिस दिन उसकी गति रुक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मनुष्य भी जब तक गतिशील है तभी तक उसका जीवन है। जिस दिन उसके जीवन की गति रुक जाएगी, वह चलना, आगे बढ़ना बंद कर देगा, उसी दिन वह सांसारिक बुरे क्षण को देख कर समाप्त हो जाएगा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 6

निईर कहता है – ‘बढ़े चलो’
तुम पीछे मत देखो मुड़कर।
यौवन कहता है – बढ़े चलो,
सोचो मत क्या होगा चलकर।

व्याख्या : झारना हमेशा यह संदेश देता रहता है कि गतिहीन हो जाने पर मनुष्य का जीवन निस्सार एवं मृत्यु-तुल्य हो जाता है। अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़ता जाए। कभी भी पीछे मुड़कर न देखे। मनुष्य की शक्ति, उसका यौवन (जवानी) भी यही प्रेरणा देता है कि जीवन में सदा आगे बढ़ते चलो। परिणाम के विषय में मत सोचो।

पद – 7

चलना है केवल चलना है,
जीवन चलता ही रहता है।
मर जाना है बस, रूक जाना,
निर्झर झरकर यह कहता है।

व्याख्या : मनुष्य का जीवन आगे बढ़ते रहने के लिए ही है। मनुष्य जीवन की सार्थकता आगे बढ़ने में ही है। सदा आगे बढ़ता हुआ झरना भी यही संदेश देता है कि चलते रहना ही जीवन है और रुक जाना ही मृत्यु है। इसलिए मनुष्य को सदा कर्त्रव्य करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। जीवन में सदा गतिशील बने रहना ही सच्चा जीवन है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 5 धानों का गीत to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – धानों का गीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 2.
कवि किसको आने के लिए कहता है ?
(क) चन्दा को
(ख) सूरज को
(ग) बादल को
(घ) हवा को
उत्तर :
(ग) बादल को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 3.
आगे कौन पुकारेगा ?
(क) अँखड़ियाँ
(ख) डगरिया
(ग) गुजरिया
(घ) कलगियाँ
उत्तर :
(ख) डगरिया।

प्रश्न 4.
‘धान का गीत’ किसकी रचना है ?
(क) केदारनाथ अग्रवाल
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) नागार्जुन
(घ) निराला
उत्तर :
(ख) केदारनाथ सिंह।

प्रश्न 5.
‘धान का गीत’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) गीत
(ग) कविता
(घ) नाटक
उत्तर :
(ग) कविता।

प्रश्न 6.
खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 7.
ज्वार कब झारेंगे ?
(क) सुबह
(ख) दोपहर
(ग) रात
(घ) पूजा की बेला में
उत्तर :
(घ) पूजा की बेला में।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 8.
किस पौधे को पवित्र माना जाता है ?
(क) धान
(ख) तुलसी
(ग) कनेर
(घ) बेंत
उत्तर :
(ख) तुलसी।

प्रश्न 9.
भारतीय गाँवों के किसानों के जीवन का आधार क्या है ?
(क) धान
(ख) मकई
(ग) ज्वार
(घ) चाय
उत्तर :
(क) धान।

प्रश्न 10.
कवि किसको कच्ची धान की बालियां कहते है ?
(क) सूरज को
(ख) चंदा को
(ग) तारे को
(घ) जल को
उत्तर :
(ख) चंदा को ।

प्रश्न 11.
कवि किसको सूखी रेत में बाँधने की बात कहता है ?
(क) चंदा को
(ख) पानी को
(ग) सूर्य को
(घ) आग को
उत्तर :
(ग) सूर्य को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 12.
धूप के ढलते ही किसके पत्ते झरने लगते हैं ?
(क) आम के
(ख) बेर के
(ग) तुलसी के
(घ) ज्वार के
उत्तर :
(ग) तुलसी के।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 13.
कवि चंदा को किसमें बाँधने की बात कहता है ?
उत्तर :
कवि चंदा को धान की कच्ची बालियों में बाँधने की बात कहता है।

प्रश्न 14.
गीली अँखड़ियाँ किसे पुकारेगी ?
उत्तर :
गीली अँखड़ियाँ संझा को पुकारेंगी।

प्रश्न 15.
धानों का गींत किस प्रकार की कविता है ?
उत्तर :
धानों का गीत ग्रामीण परिवेश का ग्राम्य कविता है।

प्रश्न 16.
केदारनाथ सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
केदारनाथ सिंह का जन्म 1 जुलाई, 1934 ई० में बलिया जिला के चकिया गाँव में हुआ था ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 17.
किसके घिरने पर ज्वार झरने लगते हैं ।
उत्तर :
शाम के घिरने पर कनेर तथा पूजा की बेला में ज्वार झरने लगते हैं।

प्रश्न 18.
हमारे खेतों में क्या प्राण के समान हैं?
उत्तर :
हमारे खेतो में पके हुए धान हमारे प्राण के समान हैं ।

प्रश्न 19.
कवि धान की खेती के लिए किसका आह्वान करते हैं ?
उत्तर :
कवि धान की खेती के लिए वादल की आह्लान करते हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किनके द्वारा किया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किसानों द्वारा किया गया है। किसानों के अतिरिक्त चंदा, सूरज, पेड़, पौधे, खेत-आदि सभी बादल का स्वागत करते हैं।

प्रश्न 2.
कवि ‘आनाजी बादल जरूर’ कहकर बादलों का आह्बान क्यों करता है?
उत्तर :
बादल कृषि प्रधान भारतवर्ष के लोगों के जीवन का आधार है। जल के अभाव में खेतों में धान की फसल सूख जाती है। सभी पेड़-पौधे, वन-उपवन वर्षा के लिए बेचैनी से बादलों की ओर निहारते रहते हैं। नदियाँ सूख जाती हैं। वर्षा होते ही सारी धरती हरी-भरी हो जाती है। सारि-सरोवर जल से परिपूर्ण हो जाते हैं। सर्वत्र आनंदमय वातावरण बन जाता है। इसीलिए कवि बादलों का आह्नान करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 3.
बादल का स्वागत कौन-कौन और कब-कब करते हैं ?
उत्तर :
बादल का स्वागत किसान, वन पर्वत, खेत-खलिहान, रास्ते तथा खेतों की फसलें करती हैं। जब धरती वर्षा के अभाव में वीरान बन जाती है। फसलें जल के बिना-सूखने लगती हैं। गर्मी की कतु के बाद खेती करने का समय आषाढ़ का महीना आ जाता है। उस समय सभी बादल का स्वागत करते हैं।

प्रश्न 4.
‘धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे’ इस पंक्ति में धान को प्राण क्यों कहा गया है?
उत्तर :
कहा गया है कि अन्न ही प्राण है। अन्न के बिना प्राण की रक्षा नहीं हो सकती है। धान के पक जाने पर लोगों के प्राण की रक्षा करने वाला अन्न तैयार हो जाता है। धान लोगों की जीविका का आधार है। धान के पक जाने पर अर्थात् धान की फसल तैयार हो जाने पर लोग प्रसन्न हो उठते हैं। इसीलिए धान को प्राण कहा गया है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) धूप ढरे तुलसी वन झेरेंगे ……….. धान दिये की बेर।
(i) साँझ घिरने पर कौन झरता है?
उत्तर :
साँझ घिरने पर तुलसी-वन, कनेर, ज्वार झरता है।

(ii) ऊपर की पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पद 3 का अर्थ देखें।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

(ख) आगे पुकारेगी सूनी डगरिया पीछे झुके वन-बेंत।
(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ धानों का गीत पाठ से ली गई हैं। इसके कवि का नाम केदारनाथ सिंह है।

(ii) सूनी डगरिया से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर :
बादल के आने में देरी होने तथा वर्षा न होने से सब जगह वातावरण वीरान बन जाता है। कठिन गर्मी तथा धूप के कारण लोग घरों से नहीं निकल पाते। इसलिए सारे रास्ते सुनसान बन जाते हैं। कहीं चहल-पहल नहीं रह जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
कवि ने बादलों का आह्वान क्यों किया है? कविता के माध्यम से बादलों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य के जीवन में बादलों का बहुत अधिक महत्व है। बादलों के आने पर ही वर्षा होती है। धरती पर हरियाली और सरसता की सृष्टि होती है। भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है। इसलिए बादल और बादलों से होने वाली वर्षा ही कृषि का आधार है। वर्षा ही जीवन का आधार है। वर्षा के बिना धरती वीरान बन जाती है। जीवन की सरसता समाप्त हो जाती है। इसलिए कवि ने किसान के स्वर में बादल का स्वागत किया है।

जल से ही खेतों में धान की फसलें लहलहाती हैं और यही लोगों के प्राणों का आधार है। सूने रास्ते, वीरान वन-प्रदेश, पेड़-पौधे सभी बादल के लिए बेचैन हो उठते हैं। जब बादल धरती पर झुकेकर जल से उसे तृप्त कर देता है, पूरी पृथ्वी आनंदित हो उठती है। धान की फसल भी लहलहाने लगती है। पानी के बिना धान की खेती हो ही नहीं सकती । इसीलिए गाँव के किसान निरंतर बादल की प्रतीक्षा करते रहते हैं।

आकाश में बादल छा जाते हैं, जल की वर्षा करने लगते हैं, तो किसानों का मन ताजा हो जाता है। उनका मुर्झाया मन खिल जाता है। धान की बालियाँ लहलहा उठती हैं। जब धान खेत में पक जाते हैं तो किसान का सारा परिश्रम सफल हो जाता है। धान के पक जाने से किसान के प्राण भी ताजगी से भर उठते हैं। ज्वार आदि अन्य फसलें भी तैयार हो जाती हैं। इस प्रकार कवि ने कृषि प्रधान देश भारत के लोगों के जीवन में बादल के महत्व को स्पष्ट किया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

भाषा-बोध :

(क) तद्भव – तत्सम साँझ –
प्रान – प्राण अँखड़ियाँ –
चंदा _ चंद्रमा गीली –
खेत – क्षेत्र डगरिया –
सरज – सूर्य

(ग) पर्यायवाची शब्द लिखें :-
बादल – मेघ, घन, जलद
साँझ – संध्या, सायंकाल, दिनांत
भोर – प्रभात, सवेरा, प्रातःकाल
वन – कानन, जंगल, अरण्य

WBBSE Class 6 Hindi धानों का गीत Summary

जीवन-परिचय :

केदारनाथ सिंह का जन्म सन् 1934 ई० में उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुआ था। ये दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यापक रह चुके हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक गई, अकाल में सावन आये आदि हैं।

शब्दार्थ :

  • उगना – उपजना ।
  • कलगियाँ – धन की बालियाँ ।
  • रेत – बालू।
  • डगरिया – रास्ते ।
  • कनेर – एक वृक्ष।
  • संझा – शाम ।
  • तुलसी – एक पवित्र पौधा।
  • बेला – समय।
  • ढरे – ढलना ।
  • ज्वार – एक अन्न ।
  • बेर – बेला।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

पद – 1

धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे
उगेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर!
चन्दा को बाँधेंगी कच्ची कलगियाँ
सूरज को सूखी रेत में
आना जी बादल जरूर !

संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने किसान के स्वर में धान, चाँदनी तथा गाँव में प्रचलित विश्वास का सरस वर्णन किया है। कवि ने किसानों के स्वर में बादलों का स्वागत करते हुए उनका आह्वान किया है।

व्याख्या : भारतीय गाँवों के किसानों के जीवन का आधार खाद्यान्न धान है। उनके खेतों में उपजने वाले धान उनके प्राण के समान हैं। धान की खेती के लिए आवश्यक जल की वर्षा करने वाले बादल का वह आह्बान (पुकार) करता है कि बादल जरूर आएँ और जल की वर्षा करें। कवि चंदा को कच्ची धान की बालियों और सूर्य को सूखी रेत में बाँधने की बात कहता है।

पद – 2

आगे पुकारेगी सूनी डगरिया
पीछे झुके वन-बेंत,
संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ
भोर हुए धन-खेत,
आना जी बादल जरूर
धान कँपेंगे कि प्रान कँपेंगे
कँपेंगे हमारे खेत में
आना जी बादल जरूर !

व्याख्या : सुनसान गाँवों के रास्ते आगे पुकारेंगे । पीछे वन प्रदेश के बेंत झुके हुए हैं। गीली आँखें संध्या बेला में पुकारेंगी। खेतों में धान पक रहे हैं। हमारे खेतों में ये पके हुए धान ही हमारे पके प्राण के समान हैं। यहाँ धान को प्राण कहा गया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

पद – 3

धूप ढरे तुलसी-वन झरेंगे
साँझ घिरे पर कनेर,
पूजा की बेला में ज्वार झारेंगे
धान-दिये की बेर,
आना जी बादल जरूर,
धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे
पकेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर !

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने गाँवों के निवासियों के विश्वास की ओर संकेत किया है। धूप के ढलते ही तुलसी के पत्ते झरने लगते हैं। शाम के घिरने पर कनेर तथा पूजा की वेला में ज्वार झरने लगते हैं। हमारे खेतों में धान पक कर तैयार हो गए हैं, इसलिए इन धानों के रूप में हमारे प्राणों को नव जीवन मिल गया है। इसलिए खेती के लिए, अन्य पेड़पौधों के लिए बादल अवश्य आए। हम उसका स्वागत करते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – भगवान के डाकिए

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
पक्षी और बादल किसके डाकिए हैं ?
(क) मनुष्य के
(ख) भगवान के
(ग) धरती के
(घ) पक्षियों के
उत्तर :
(ख) भगवान के।

प्रश्न 2.
एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है?
(क) धन
(ख) अन्न
(ग) सुगंध
(घ) स्नेह
उत्तर :
(ग) सुगंग।

प्रश्न 3.
भगवान के डाकिए की चिट्ठी कौन बाँचता है ?
(क) पेड़
(ख) पौधे
(ग) पानी और पहाड़
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 4.
‘भगवान के डाकिए’ कविता के रचयिता कौन हैं ?
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर :
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’।

प्रश्न 5.
‘भगवान के डाकिए’ कविता में डाकिए किन्हे कहा गया है?
(क) मनुष्यों को
(ख) पक्षी तथा बादलों को
(ग) बच्चों को
(घ) उपर्युक्त सभी को
उत्तर :
(ख) पक्षी तथा बादलों को।

प्रश्न 6.
भगवान के द्वारा भेजे गए संदेश कौन पढ़ पाते हैं ?
(क) मनुष्य
(ख) अध्यापक
(ग) पेड़-पौधे, पानी, पहाड़
(घ) केवल भगवान के दूत
उत्तर :
(ग) पेड़-पौधे, पानी, पहाड़।

प्रश्न 7.
एक देश की धरती दूसरे देश की धरती को क्या भेजती हैं ?
(क) संदेश
(ख) चट्टान
(ग) पेड़-पौधे
(घ) सुगंध
उत्तर :
(घ) सुगंध।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 8.
इनमें ‘पंक्षी’ शब्द का पर्यायवाची है –
(क) खग
(ख) पंख
(ग) पर
(घ) प्रकाश
उत्तर :
(क) खग।

प्रश्न 9.
एक देश की भाप दूसरे देश तक किस रूप में जाती हैं ?
(क) फूल के रूप में
(ख) पानी के रूप में
(ग) हवा के रूप में
(घ) चट्टान के रूप में
उत्तर :
(ख) पानी के रूप में।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
भगवान के डकिए कौन हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं।

प्रश्न 2.
भगवान के डाकिए कहाँ जाते हैं ?
उत्तर :
भगवान के डाकिए एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं।

प्रश्न 3.
एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है ?
उत्तर :
एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है ?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 4.
सौरभ कहा तैरता है?
उत्तर :
सौरभ हवा में और पक्षियों के पंखों पर तैरता है।

प्रश्न 5.
एक देश का भाप दूसरे देश में क्या बनकर गिरता है ?
उत्तर :
एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।

प्रश्न 6.
कवि ने डाकिए किन्हें और क्यों कहा ?
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादलों को डाकिए कहा है क्योंकि ये भगवान का संदेश पृथ्वी पर लाते हैं।

प्रश्न 7.
पक्षी और बादलों द्वारा लाए गए संदेश कौन पढ़ पाते हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादलों द्वारा लाए गए संदेश पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 8.
‘पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ में कौन-सा अलंकार’ है ?
उत्तर :
‘पेड़, पौधे, पानी तथा पहाड़’ में अनुप्रास अलंकार है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 9.
काव्यांश में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है ?
उत्तर :
काव्यांश की भाषा सरल तथा सहज है, जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 10.
कवि और कविता का नाम लिखिए ।
उत्तर :
कवि का नाम रामधारी सिंह ‘ दिनकर’ तथा कविता का नाम ‘भगवान के डाकिए’ है।

प्रश्न 11.
‘पक्षियों की पंखों पर’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
उत्तर :
‘पक्षियों की पंखों पर’ पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 12.
‘सौरभ’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर :
‘सौरभ’ शब्द के पर्यायवाची हैं – सुगंध, खुशबू।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए बताया है क्योंकि ये हमेशा एक देश से दूसरे देश में जाते रहते हैं और एक दूसरे की चिट्ठियाँ दूसरी जगह ले जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल के महत्त्व को बतलाया है। ये दोनों एक देश के समाचार दूसरे देश में ले जाते हैं। वहाँ के पेड़-पौधों तथा पहाड़ पर इनका प्रभाव पड़ता है। इनके माध्यम से एक देश की धरती दूसरे देश को अपनी खुशबू भेजती है। बादल के द्वारा एक देश का भाप दूसरे देश में जल की वर्षा करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 3.
ये डाकिए परंपरागत डाकियों से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर:
परंपरागत डाकिए मनुष्य द्वारा मनुष्यों को भेजे गए संदेश लाते हैं जिन्हें मनुष्य स्वयं पढ़ लेता है, जबकि पक्षी और बादल भगवान के संदेश पृथ्वी पर लाते हैं, जिन्हें मनुष्य नहीं पढ़ पाता है, बल्कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ ही पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 4.
पद्यांश में पक्षियों तथा बादलों की किस क्रिया का वर्णन किया गया है ?
उत्तर :
इस प्यांश में कवि का कहना है कि पृथ्वी पर एक देश के फूलों की सुगंध बिना किसी बाधा के दूसरे देश को जाती है। यह सुगंध पक्षियों के उड़ते पंखों के सहारे चारों ओर फैल जाती है और बादलों के द्वारा एक देश का पानी भाप बनकर दूसरे देश में बरस जाता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :-

प्रश्न 1.
हम तो केवल यह आँकते हैं कि एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है ?
(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से ली गई हैं। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस अंश में कवि ने यह अनुमान व्यक्त किया है कि पक्षी और बादल के माध्यम से एक देश की पृथ्वी दूसरे देश को अपनी खुशबू भेज देती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में किस प्रकार स्पष्ट किया है ? पक्षी और बादल डाकिए की भूमिका किस प्रकार निभाते हैं?
उत्तर :
आधुनिक जीवन में डाकिए का महत्व बढ़ गया है। यों तो आधुनिक युग में संचार माध्यमों के द्वारा डाकिए की भूमिका का निर्वाह किया जा रहां है। प्रस्तुत कविता में दिनकर जी ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में चित्रित किया है। पक्षी और डाकिए दोनों ही भगवान के डाकिए माने जाते हैं। पक्षी भी एक देश से दूसरे देश उड़कर जाते हैं। बादलों की भी कोई सीमा नहीं होती, वे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में विचरण करते रहते हैं। मनुष्य भले ही उन्हें न समझ सके, मगर पेड़-पौधे, पानी और पर्वत उनके पत्रों को पढ़ते और समझते हैं। बादल भाप भरी हवाओं को लेकर जहाँ जाते हैं, वहाँ जल की वर्षा कर देते हैं। इस समाचार से पेड़-पौधे हरे-भरे और प्रफुल्ल बन जाते हैं। जलते हुए वीरान पर्वत प्रदेश भी जल प्राप्त कर तृप्त हो जाते हैं।

हम सब भी यही समझते हैं और अनुमान लगाते हैं कि एक देश की पृथ्वी, वहाँ के वातावरण और फूलों की सुगंधि दूसरे देशों में तैरने लगती है। पक्षी अपने पंखों को फैलाए हुए पवन के सहारे दूसरे देशों में जाते हैं। एक देश की सुगंधि दूसरे देश में इस प्रकार पहुँच जाती है। एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बन कर गिरता है । इस प्रकार पक्षी और बादल दोनों ही एक दूसरे देश की प्रकृति का, वातवरण का प्रचार-प्रसार करते हैं। अतः पक्षी और बादल सचमुच ईश्वर के डाकिए हैं, वे मनुष्य की चिट्ठियाँ नहीं ले जाते पर देशों व महादेशों को संदेशवाहक बनकर जोड़ते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

भाषा-बोध :

(क) महा + देश = महादेश ।
महा + पुरुष = महापुरुष ।

(ख) निम्नलिखित शब्दों का लिंग बताइए :-
चिट्ठी – स्त्रीलिंग
पहाड़ – पुलिंग
पेड़ – पुलिंग
सुगंध – स्त्रीलिंग
पक्षी – पुलिंग

(ग) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :-
पहाड़ – पर्वत, गिरि, अचल।
सौरभ – सुगंध, खुशबू, महक।
पंख – पर, डैना।
पानी – जल, नीर, वारि।
धरती – पृथ्वी, धरा, भू।

WBBSE Class 6 Hindi भगवान के डाकिए Summary

जीवन-परिचय :

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908-1974) का जन्म सन् 1908 में बिहार के मुंगेर जनपद के सिमरिया गाँव में हुआ था। दिनकर जी राष्ट्रीय धारा के नवीन कवियों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इनके विचार राष्ट्रीय जन जागरण में बहुत सहायक हुए हैं। इन्होंने बी.ए, तक की शिक्षा प्राप्त की। ये हाई स्कूल के प्र,धानाध्यापक से लेकर विभिन्न पदों से होते हुए भारत सरकार के हिन्दी के सलाहकार भी रहे। भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया। इनकी मृत्यु सन् 1974 में हुई। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कुरुक्षेत्र, रशिमरथी, हुंकार, उर्वशी आदि हैं। इनके काव्य ‘उर्वशी’ पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

पक्षी और बादल

पद – 1

ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते है
मगर उनकी लाई चिद्ठियाँ,
पेड़, पौघे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।

शब्दार्थ :

  • डाकिए – डाक, चिट्ठी बाँटने वाले कर्मचारी ।
  • महादेश – महाद्वीप, चिट्ठियाँ – पत्र ।
  • बाँचना – पढ़ना।

संदर्भ – प्रस्तुत कविता हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।
इस कविता में कवि ने पक्षी और बादल को भगवान का डाकिया बतलाया है क्योंक ये विभिन्न देशों में विचरण करते हैं।

व्याख्या – कवि ने बतलाया है कि पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं। ये हमेशा एक देश से दूसरे देश में भ्रमण करते हैं। इनके द्वारा लाए गए समाचार को हम समझ नहीं पाते। लेकिन पेड़, पौधे, जल और पर्वत इनके द्वारा लाई गई चिट्ठियों को पढ़ते हैं। पक्षी और बादल जहाँ भी जाते हैं वहाँ के पेड़-पौधों, जल तथा पहाड़ों पर इनका प्रभाव पड़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

पद – 2

हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।

शब्दार्थ :

  • आँकना – अनुमान करना ।
  • सुगंध – महक ।
  • सौरभ – सुगंध।
  • पाँखों – पंखों ।
  • भाप – वाष।

व्याख्या :- इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि डाकियों – पक्षी और बादल का दूसरे देशों पर क्या ग्रभाव पड़ता है। पक्षी और बादल एक देश से दूसरे देश में जाते हैं और उस देश के वातावरण को प्रभावित करते हैं। हमारा तो केवल यही अनुमान है कि इनके माध्यम से एक देश की पृथ्वी दूसरे देश को अपनी खुशबू भेजती है। वह सुगंध हवा में तिरता रहता है और पक्षियों के पंखों पर तैरने लगता है। बादल के द्वारा एक देश का वाष्य दूसरे देश में जल की वर्षा करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – वह चिड़िया जो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
चिड़िया के पंख हैं –
(क) नीले
(ख) पीले
(ग) हरे
(घ) लाल
उत्तर :
(क) नीले।

प्रश्न 2.
चिड़िया कैसी है ?
(क) मोटी
(ख) बड़ी
(ग) छोटी
(घ) काली
उत्तर :
(ग) छोटी।

प्रश्न 3.
चिड़िया किसके लिए गाती है ?
(क) आदमी के लिए
(ख) बच्चों के लिए
(ग) पशु-पक्षियों के लिए
(घ) बूढ़े वन-बाबा के लिए
उत्तर :
(घ) बूढ़े वन-बाबा के लिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 4.
चिड़िया कौन-से मोती ले जाती है ?
(क) सोने के
(ख) चाँदी के
(ग) जल के
(घ) दाने के
उत्तर :
(ग) जल के।

प्रश्न 5.
चिड़िया किसका दिल टटोलती है ?
(क) बूढ़े बाबा का
(ख) कवि का
(ग) इस्सान का
(घ) नदी का
उत्तर :
(घ) नदी का।

प्रश्न 6.
कविता के रचयिता कौन हैं ?
(क) केदारनाथ अप्रवाल
(ख) सरोजिनी नायडू.
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(क) केदारनाथ अप्रवाल।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 7.
चिड़िया किसके दाने खाती है
(क) मूँगफली के
(ख) जुंडी के
(ग) चने के
(घ) धान के
उत्तर :
(ख) जुंडी के।

प्रश्न 8.
दूध से भरे हुए क्या हैं?
(क) नदियाँ
(ख) तालाब
(ग) जुंडी के दाने
(घ) मक्का के दाने
उत्तर :
(ग) जुंडी के दाने।

प्रश्न 9.
चिड़िया का गीत कैसा है ?
(क) उबाऊ
(ख) नीरस
(ग) कर्कश
(घ) मधुर
उत्तर :
(घ) मधुर।

प्रश्न 10.
चिड़िया का स्वभाव कैसा हैं ?
(क) संतोपी
(ख) चिड़चिड़ा
(ग) घुमक्कड़
(घ) फुर्तोला
उत्तर :
(क) संतोषी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 11.
चिड़िया कैसे गाती है ?
(क) तीव स्वर में
(ख) कंठ खोलकर
(ग) धीरे-धीरे
(घ) मंद स्वर में
उत्तर :
(ख) कंठ खोलकर।

प्रश्न 12.
‘संतोषी’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय लगा हुआ है ?
(क) षी
(ख) तोषी
(ग) ई
(घ) सम्
उत्तर :
(ग) ई।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में कौन-सा अन्न का नाम है ?
(क) चना
(ख) जुंडी
(ग) गेहूँ
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

प्रश्न 14.
‘नदी’ शब्द का बहुवचन रूप कौन-सा है ?
(क) नदियाँ
(ख) नदियों
(ग) नदीएँ
(घ) नदें
उत्तर :
(क) नदियाँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 15.
इनमें ‘जल’ शब्द का पर्यायवाची कौन-सा है ?
(क) नीर
(ख) तोय
(ग) वारि
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

प्रश्न 16.
चिड़िया स्वयं को ‘छोटी संतोषी’ कहती है, क्योंकि –
(क) वह छोटी-छोटी चीजों से ही संतोष कर लेती है
(ख) वह जौ-बाजरे के दाने खाकर ही संतोष कर लेती है
(ग) वह यह मानकर संतोष कर लेती है कि वह छोटी है
(घ) वह केवल चोंच मारकर ही खा लेती है
उत्तर :
(ख) वह जौ-बाजरे के दाने खाकर ही संतोष कर लेती है।

प्रश्न 17.
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है, क्योंकि –
(क) वह अन्न का महत्व समझती है
(ख) अन्न उगाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है
(ग) उसे अन्न खाना ही अच्छा लगता है
(घ) वह छोटी और संतोषी चिड़िया है
उत्तर :
(क) वह अन्न का महत्व समझती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 18.
चिड़िया बूढ़े वन-बाबा की खातिर रस उँड़ेलकर गाती है, क्योंकि –
(क) वह जानती है कि वन-बाबा बूढ़े हैं
(ख) वन-बाबा को रसीले गीत सुनना अच्छा लगता है
(ग) वन-बाबा को धन्यवाद देना चाहती है
(घ) वह छोटी, मुँहबोली और नीले पंखोंवाली है
उत्तर :
(घ) वह छोटी, मुँहबोली और नीले पंखोंवाली है।

प्रश्न 19.
चिड़िया को विजन से बहुत प्यार है, क्योंकि –
(क) विजन उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है
(ख) उसे एकांत स्थान में रहना अच्छा लगता है
(ग) विजन में उसके अलावा कोई नहीं रहता
(घ) विजन में वन-बाबा रहते हैं
उत्तर :
(ख) उसे एकांत स्थान में रहना अच्छा लगता है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कविता में कैसी चिड़िया की बात की गई है।
उत्तर :
कविता मे छोटी संतोषी चिड़िया की बात की गई है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 2.
चिड़िया अपनी चोंच से किस प्रकार के दाने खाती है ?
उत्तर :
विड़िया अपनी चोंच से दूध से भरे अधपके जुंडी अर्थात् ज्वार-बाजरा की बालियों के दानें ख्वादपूर्वक खाती है।

प्रश्न 3.
चिड़िया का स्वभाव कैसा है ?
उत्तर :
चिड़िया का संतोषी स्वभाव है।

प्रश्न 4.
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है। कैसे ?
उत्तर :
चिड़िया का पेट अन्न से ही भरता है। वह अन्न के दानों को पूरे मन और स्वाद से खाती है। इसालिए उसे अन्न से बहुत प्यार है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए –
(क) जुंडी
(ख) संतोषी
उत्तर :
(क) जुंडी : ज्वार-बाजरा की बालियाँ।
(ख) संतोषी : जिसे संतोष हो या संतोष करने वाली।

प्रश्न 6.
कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर :
कवि का नाम केदारनाथ अम्रवाल एवं कविता का नाम वह चिड़िया जो।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 7.
चिड़िया किसकी खातिर गाती है?
उत्तर :
चिड़िया बूढ़े (पुराने) जंगल की खातिर गाती है।

प्रश्न 8.
चिड़िया का गाना कैसा है ?
उत्तर :
चिड़िया का गाना सुरीला, रसीला तथा आकर्षक है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के अर्थ लिखिए –
(क) कंठ
(ख) विजन
उत्तर :
(क) कंठ : गला।
(ख) विजन : एकांत जंगल।

प्रश्न 10.
चिड़िया नदी से जल कैसे लेती है ?
उत्तर :
चिड़िया जल की मोती के समान बूँद लेने से पूर्व उसका हृदय टटोलती है अर्थात् उसकी इच्छा जानती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 11.
चिड़िया को किससे प्यार है ?
उत्तर :
चिड़िया को अन्न, वन और नदी से प्यार है।

प्रश्न 12.
“जल का मोती ले जाती है।” पंक्ति का क्या आशय है ?
उत्तर :
पंक्ति का आशय है – जल से मोती रूपी बूँद ग्रहण करना।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘वह चिड़िया जो’ कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर :
इस कविता में कवि ने एक छोटी सी चिड़िया की विशेषताओं का वर्णन किया है। वह छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच से ज्वार के दाने प्रेम से खाती है। वह सदा संतुष्ट रहती है, अन्र से प्यार करती है। बूढ़े वन-बाबा के लिए मधुर कंठ से गीत गाती है। उस प्यारी चिड़िया को एकान्त से बहुत प्यार है। वह बढ़ी हुई नदी के जल से मोती निकाल लेती है। वह गर्वीले स्वभाव की है। उसे नदी से बहुत प्यार है।

प्रश्न 2.
चिड़िया कौन-कौन से कार्य करती है ?
उत्तर :
चिड़िया अपनी चोंच मारकर ज्वार के दाने खाती है। बूढ़े वन-बाबा के लिए गीत गाती है। बढ़ी नदी के जल से मोती लाती है। नदी से प्यार करती है।

(क) वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।
(i) इस पद्यांश के कवि कौन हैं ? यह किस शीर्षक से उद्धुत है ?
उत्तर :
इस पद्यांश के कवि श्री केदारनाथ अप्रवाल हैं। यह कविता ‘वह चिड़िया जो’ शीर्षक से उद्धृत है।

(ii) चिड़िया को किससे प्यार है ? उसे संतोषी क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है। चिड़िया को संतोषी कहा गया है क्योंकि वह जुंडी के दूध भरे दाने को बड़े शौक तथा आनंद से खाकर प्रसन्न हो जाती है। इसी से संतुष्ट हो जाती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

(ख) वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ।
मुझे विजन से बहुत प्यार है।
(i) चिड़िया को मुँह बोली क्यों कहा गया है?
उत्तर :
चिड़िया सभी को बहुत प्यारी होती है। वह मधुर बोलती है तथा मधुर गीत गाती है। इसलिए चिड़िया को मुँह बोली कहा गया है।

(ii) विजन का क्या अर्थ है? चिड़िया को विजन से क्यों प्रेम है ?
उत्तर :
विजन का अर्थ एकांत प्रदेश से है। चिड़िया को विजन से प्रेम है क्योंकि एकांत में चिड़िया निडर होकर विचरती तथा गीत गाती है। वहाँ बूढ़े वन-बाबा के लिए वह मधुर कंठ से गीत गाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘वह चिड़िया जो’ कविता के माध्यम से क्या सीख दी गई है? उसे हम अपने जीवन में कैसे अपना सकते हैं?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में प्रगतिवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल ने चिड़िया के माध्यम से हमें उदार, संतोषी, सेवा परायण तथा परिश्रमशील बनने की प्रेरणा दी है। चिड़िया, संतोषी स्वभाव वाली है। वह जुंडी के दाने से अपनी रुचि और लगन से दूध खींच लेती है। वह अन्न से बहुत प्यार करती है। मनुष्य को भी अपने परिश्रम तथा प्रयल्न से जीवन में आनंद ग्रहण करना चाहिए। बिना परिश्रम के उसे कुछ नहीं मिल सकता। उसे समझनना चाहिए कि अन्न ही प्राण है। अन्न से प्यार करना चाहिए। अन्न उत्पादन तथा रक्षण के लिए सदा प्रयत्न करना चाहिए। अन्न सृष्टि जीवन मात्र का आधार है। अत: अन्न का एक कण भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

चिड़िया खुले कंठ से बूढ़े वन बाबा के प्रति सम्मान का भाव रखती है। वह उनके आनंद के लिए अपने कंठ से सरस मीठे गीत गाती है। उसे एकोंत से, जंगल से, वन वृक्षों से अतिशय प्रेम और लगाव है। हमें भी अपने जीवन में वृद्धजनों की सेवा करनी चाहिए। उनकी प्रसनता के लिए मधुर वचन और उनके मनोरंजन के लिए मीठे गान का आयोजन करना चाहिए। चिड़िया की तरह हमें भी वन से, वहाँ के पेड़-पौधों से तथा एकांत से प्यार करना चाहिए। यह प्रकृति ही जीवन का आधार है। वन रहेंगे तब हम भी रहेंगे। इसलिए आज हमें प्रकृति की ओर बढ़ने की जरूरत है।

चिड़िया नदी से प्यार करती है। स्वाभिमान का भाव रखती है। वह नदी की बाढ़ को देखकर भयभीत नहीं होती, बल्कि नदी से मोती प्राप्त कर लेती है। मनुष्य को भी नदी से प्यार करना सीखना चाहिए। जल ही जीवन है। नदी अपने जल से सभी प्राणियों की नि: ख्वार्थ भाव से सेवा करती है। हमें साहस औरपरिश्रम से गहरे पानी में जाकर मोती प्राप्त करना चाहिए व्योंकि गहरे पानी में प्रवेश करने से ही मोती मिल सकता है। बड़ी वस्तु पाने के लिए ठोस प्रयल करना चाहिए। इस प्रकार हमें चिड़िया की सीख को अपने जीवन में अपना लेना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द :
चिड़िया -खग, विहग, पक्षी।
नदी-सरिता, सरि, तटनी।
मोती- मुक्ता, मौक्तिक, सीपिज।
दूध-दुग्ध, क्षीर, पय, गोरस।
वन- कानन, जंगल, विपिन।
(ख) चिड़िया, जड़िया, डाकिया, धुनिया।

WBBSE Class 6 Hindi वह चिड़िया जो Summary

जीवन-परिचय :

केदारनाथ अप्रवाल का जन्म बाँदा जनपद के कमासिन गाँव में सन् 1911 में हुआ था। प्रगतिवादी कवियों में इनका प्रमुख स्थान है। गाँव में जन्मे केदारनाथ अग्रवाल का गाँव से गहरा लगाव रहा। इनकी कविताओं में मानव और प्रकृति के सौन्दर्य का बड़ा ही सहज और उन्मुक्त चित्रण मिलता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ–युग की गंगा, लोक और आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं आदि हैं। इनकी मृत्यु सन् 2000 में हुई।

पद – 1

वह चिड़िया जो –
चोंच मारकर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से रस से खा लेती है
वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ :

  • जुंडी – ज्वार।
  • रुचि – शौक।
  • रस – आनंद।
  • संतोषी – संतुष्ट।
  • अन्न – अनाज।

संदर्भ : प्रस्तुत कविता ‘वह चिड़िया जो’ पाठ से ली गई है। इसके कवि श्री केदारनाथ अग्रवाल हैं।

व्याख्या : इस कविता में कवि ने चिड़िया की विशेषताओं का वर्णन किया है । वह छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच मारकर जुंडी के दानें जिसमें दूध भरे रहते हैं उसे खाकर अपनी भूख मिटाती है। उस दाने को वह बड़े शौक तथा आनंद से खाती है। वह सदा संतुष्ट एवं प्रसन्न रहने वाली है, जिसके पंख नीले रंग के हैं। वह चिड़िया मैं ही हूँ। मैं अन्न को बहुत रुचिकर एवं प्यारा समझती हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

पद – 2

वह चिड़िया जो –
कंठ खोलकर
बूंढ़े वन-बाबा की खातिर
रस उड़ेलकर गा लेती है
वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखोंवाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ :

  • कंठ – गला।
  • मुँहबोली – प्यारी, मधुर बोलने वाली ।
  • विजन – एकांत ।
  • वन – बाबा-जंगल।

संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने छोटी चिड़िया के स्वरूप, उसकी विशेषताओं तथा कार्यों का वर्णन किया है।

व्याख्या : जो छोटी सी प्यारी चिड़िया वृद्ध वन -बाबा (जंगल) की प्रसन्नता के लिए खुले गले से मधुर गीत गाती है। अपने मधुर कंठ से रस भर देती है अर्थात् आनंद से भर देती है। वह चिड़िया सभी को अत्यंत प्यारी तथा मीठी बोली बोलनेवाली लगती है। उसके पंख नीले रंग के हैं। उसे एकांत से बहुत प्यार है। वह चिड़िया मैं ही हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

पद – 3

वह चिड़िया जो –
चोंच मारकर
चढ़ी नदी का दिल टटोलकर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ –

  • चढ़ी – जल से भरी ।
  • दिल – मन ।
  • टटोलना – जाँचना ।
  • परख करना, गरबीली – गर्ववाली, घमंडी।

संदर्भः प्रस्तुत कविता में कवि ने चिड़िया के दिल की परख, प्रयत्न, उसके स्वभाव तथा नदी के प्रति प्यार का वर्णन किया है।

व्याख्या : जो चिड़िया निडर होकर बढ़ी नदी के भीतर जाँच-परख कर जल के भीतर से मोती प्राप्त कर लेती है। वह छोटी सी चिड़िया गर्वीले स्वभाव वाली है। उसके पंख नीले हैं। वह नदी से बहुत प्यार करती है। वह चिड़िया मैं ही हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 2 इनसे सीखो to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – इनसे सीखो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
फूलों से हमें क्या सीखना चाहिए ?
(क) गाना
(ख) पढ़ना
(ग) हँसना
(घ) खिलना
उत्तर :
(ग) हँसना।

प्रश्न 2.
दीपक हमें क्या सिखाते हैं ?
(क) जलना
(ख) बुझना
(ग) अंधेरा हरना
(घ) अंधेरा करना
उत्तर :
(ग) अंधेरा हरना।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 3.
पृथ्वी सें हमें क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?
(क) सच्ची सेवा करनां
(ख) झगड़ा करना
(ग) कष्ट सहना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सच्ची सेवा करना।

प्रश्न 4.
ज़लधारा से हमें क्या सीखना चाहिए ?
(क) जीवन पथ पर चढ़ना
(ख) सच्ची सेवा करना
(ग) जगना और जगाना
(घ) चरित्र निज गढ़ना
उत्तर :
(क) जीवन पथ पर चढ़ना।

प्रश्न 5.
हरदम उँचे पर चढ़ना किससे सीखना चाहिए ?
(क) जल से
(ख) धुएं से
(ग) लता से
(घ) वृक्षों से
उत्तर :
(ख) धुएं से

प्रश्न 6.
अपने गुरु से क्या सीखना चाहिए ?
(क) खेलना
(ख) दीपक जलाना
(ग) पढ़ना
(घ) गले लगाना
उत्तर :
(ग) पढ़ना।

प्रश्न 7.
जगना और जगाना किससे सीखना चहिए ?
(क) सूरज से
(ख) चन्द्रमा से
(ग) तारा से
(घ) लोगों से
उत्तर :
(क) सूरज से

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 8.
चरित्र को आदर्शवान और व्यावहारिक बनाने के लिए कौन प्रेरणा देता है ?
(क) गुरु
(ख) दीपक
(ग) महान और सज्जन व्यक्ति
(घ) पृथ्वी
उत्तर :
(ग) महान और सज्जन व्यक्ति

प्रश्न 9.
श्रीधर पाठक का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) बंगाल
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) उड़ीसा
उत्तर :
(ग) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 10.
श्रीधर पाठक किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(घ) आधुनिक काल।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना श्रीधर पाठक की है ?
(क) भारत-भारती
(ख) भारत गीत
(ग) भारतवर्ष
(घ) भारतमाता
उत्तर :
(ख) भारत गीत।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 12.
लता और वृक्ष से क्या सीखना चाहिए ?
(क) हाथ मिलाना
(ख) सेवा करना
(ग) गले लगाना
(घ) आगे बढ़ना
उत्तर :
(ग) गले लगाना।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें क्या सिखाती हैं ?
उत्तर :
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें शीश झुकाना सिखाती हैं।

प्रश्न 2.
सूरज की किरणें हमें क्या शिक्षा देती हैं ?
उत्तर :
सूरज की किरणें हमें जागने और जगाने की शिक्षा देती हैं।

प्रश्न 3.
अपने गुरु से हमें क्या सीखनी चाहिए ?
उत्तर :
अपने गुरु से हमें उत्तम विद्या सीखना चाहिए।

प्रश्न 4.
हमारा चरित्र कौन गढ़ता है ?
उत्तर :
सत्पुरुषों का आदर्श जीवन हमारा चरित्र गढ़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 5.
श्रीधर पाठक का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक का जन्म 11 जनवरी, 1858 ई० में आगरा (उत्तर प्रदेश) जिला के जौंधरी नामक गाँव में हुआ था ।

प्रश्न 6.
श्रीधर पाठक ने किन भाषाओं में कविता लिखी है ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक ने बजभाषा और खड़ी बोली हिन्दी में कविताएँ लिखी हैं।

प्रश्न 7.
श्रीधर पाठक के पिता का नाम क्या था ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक के पिता का नाम पण्डित लीलाधर पाठक था।

प्रश्न 8.
श्रीधर पाठक की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
उनकी मृत्यु 13 सितम्बर, 1928 ई० में हो गई ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
हमारे जीवन में सत्पुरुष औरगुरु का क्या योगदान है ? स्पष्ट करे ।
उत्तर :
सज्जन पुरुष और गुरु का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। सत्पुरुषों के जीवन से हमें चरित्र गठन की शिक्षा मिलती है। हमारे अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। गुरु से बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है। शिक्षा के बिना व्यक्ति जीवन में उन्नति नहीं कर सकता। जिन्दगी में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा जरूरी है।

प्रश्न 2.
दीपक की क्या विशेषता है ? हमें उससे क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?
उत्तर :
दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर प्रकाश फैला देता है। हमें दीपक से शिक्षा लेनी चाहिए कि हम भी शक्ति भर अपने आस-पास के अंधकार को दूर करें। लोगों के मन के अज्ञान, अशिक्षा को दूर कर उनके मन में ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 3.
‘इनसे सीखो’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘इनसे सीखो’ कविता में कवि ने बच्चों को अपने आस-पास के परिवेश से शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा दी है। कवि ने बच्चों को प्रेरणा दी है कि वे फूलों से हँसना और खुश रहना सीखें। वृक्ष की डालियों से नग्र रहना सीखें। सूर्य की किरणों से प्रात: जागने और दूसरों को जगाना सीखें। लता और वृक्षों से दूसरों से प्रेम करना सीखें। दीपक से आसपास के अंधकार को दूर करने तथा पृथ्वी से प्राणियों की सच्ची सेवा करना सीखें। जल की धारा से सदा जीवन में आगे बढ़ने तथा धुएँ से सदा ऊपर चढ़ना, जीवन में उन्नति करना सीखें। सज्जनों से वरित्र निर्माण तथा गुरु से श्रेष्ठ विद्या ग्रहण करना सीखें। इस प्रकार इन सभी से शिक्षा प्राप्त कर बच्चे जीवन में उन्नति कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
‘इनसे सीखो’ कविता में किस-किस से क्या सीखने की प्रेरणा दी गई है?
उत्तर :
‘इनसे सीखो’ कविता में बच्चों को फूलों से, भौरों से, वृक्ष की डालियों से, सूर्य की किरणों से, लता और वृक्षों से, दीपक और पृथ्वी से, जलधारा से, धुएँ से, सत्पुरुषों से तथा अपने गुरु से सीखने की प्रेरणा दी गई है। फूलों से हँसने की, भौंरों से गुनगुनाने की, वृक्ष की डालियों से मस्तक ड्युकाने, सूर्य की किरणों से जगने और जगाने, लता वृक्षों से गले लगाने, दीपक से अंधकार हरने, पृथ्वी से जीवों की सेवा करने, जल-धारा से जीवन में आगे बढ़ने, धुएँ से ऊँचाई पर चढ़ने, सत्पुरुषों से चरित्र गठन करने तथा गुरु से उत्तम विद्या पढ़ने के लिए सीखने की प्रेरणा दी गई है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

(क) फूलों से नित …………. सीखो शीश झुकाना।
(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘इनसे सीखो’ पाठ से उद्धृत हैं। इसके कवि श्रीधर पाठक हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता की प्रथम संख्या में अर्थ दिया गया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

(ख) जलधारा से सीखो ………… ऊँचे पर ही चढ़ना।
(i) जीवन पथ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
जीवन-पथ का तात्पर्य है जिन्दगी का रास्ता। व्यक्ति को अपने जीवन में सदा अपने पथ पर-अपने लक्य्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिस प्रकार जल की धारा रुकती नहीं निरंतर अपने रास्ते पर बढ़ती रहती है, उसी प्रकार मनुष्य को सदा चलते रहने चाहिए।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता चार की व्याख्या को देखिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘इनसे सीखो’ कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
सुकवि श्रीधर पाठक ने प्रस्तुत कविता में बड़े ही सहज ढंग से हमें विनम्रता, सद्भावना, सेवा, सहानुभूति की भावना तथा जीवन में सच्ची शिक्षा प्राप्त कर प्रगतिशील होने की प्रेरणा दी है। मनुष्य को फूलों जैसा खिला हुआ, हँसता हुआ सदा प्रसन्नचित्त बने रहना चाहिए। भौरे सदा गुनगुनाया करते हैं। मनुष्य को भी उनसे सीख लेकर सदा गुनगुनाते रहना चाहिए। जिस प्रकार वृक्ष की डालियाँ द्रुकी रहती हैं, उसी प्रकार व्यक्ति को भी मस्तक द्युकाकर विन्म बने रहना चाहिए। इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है। सूर्य के उदित होते ही उसकी सुनहली किरणें सभी को जागरण की शिक्षा देती हैं।

उसी प्रकार हमें भी जागृत होने और दूसरों को भी जागरण के लिए उत्साहित करना चाहिए। लताओं और वृक्षों से शिक्षा लेकर हमें दूसरों से प्रेम से मिलना, गले लगना चाहिए। नन्हा सा दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर देता है, हमें भी उससे सीख लेकर चारों ओर प्रकाश फैलाना चाहिए। पृथ्वी समस्त प्राणियों की सेवा करती है, उसी प्रकार हमें भी सभी प्राणियों की सच्ची सेवा लगनपूर्वक पेम से करनी चाहिए।

कवि ने हमें जीवन में निरंतर उन्नति करने और प्रगतिशील बनने की प्रेरणा दी है। जिस प्रकार जल धारा सदा अपने लक्ष्य की ओर प्रवाहित होती रहती है, वैसे ही मनुष्य को भी सदा जीवन पथ पर लक्ष्य की ओर अग्रसर होते रहना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi इनसे सीखो Summary

जीवन-परिचय :

श्रीधर पाठक जी का जन्म उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के जौंधरी गाँव में सन् 1859 में हुआ था। बज भाषा तथा खड़ीबोली में इन्होंने स्वदेश प्रेम, समाज सुधार तथा देश प्रेम से संबंधित सरस कविताओं की रचना की है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कश्मीर सुषमा, जगत सच्चाई सार, भारत गीत हैं। इनकी रचना ‘एकांतवासी योगी’ में सीधी-सादी खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है । इसमें जनता की रुचि तथा रूप का निर्वाह हुआ है। सन् 1928 में इनकी मृत्यु हो गई।

पद – 1

फूलों से नित हँसना सीखो
भौरों से नित गाना,
तरु की झुकी डालियों से नित
सीखो शीश झुकना।

शब्दार्थ :

  • नित = प्रतिदिन, हमेशा।
  • तरु = वृक्ष, पेड़।
  • हँसना = खुश होना।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘इनसे सीखो’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बच्चों को यह नसीहत दी है कि फूलों, भौरों तथा वृक्ष की डालियों से सीख लें ।

व्याख्या : कवि ने बच्चों को प्रेरणा दी है कि वे खिले हुए हंसते फूलों से सदा प्रसन्न बने रहना तथा हँसते रहना सीखें। भौौंरों से सदा गुनगुनाना अर्थात् गाते रहना सीखें तथा वृक्ष की झुकी हुई डालियों से सर्वदा मस्तक झुकाना अर्थात् नम्र बने रहना सीखें। कवि चाहता है कि बच्चे हमेशा हँसते हुए, गाते हुए तथा विनम्र बने रहें।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 2
सूरज की किरणों से सीखो
जगना और जगाना,
लता और वृक्षों से सीखो
सबको गले लगाना।

शब्दार्थ :

गले लगाना = भेंटना, आलिंगन करना।

व्याख्या : इस कविता में कवि ने सूर्य की किरणों तथा लता-वृक्षों से सीखने की प्रेरणा दी है।

कवि ने बच्चों को यह प्रेरणा दी है कि वे सूर्य की किरणों से सबेरे जगना तथा जगाना सीखें। रात बीतते ही सूर्य उदय होता है, सूर्य की किरणों के प्रकाश में बच्चों को भी जाग कर दूसरों को जगाना चाहिए। जिस प्रकार लता और वृक्ष आपस में लिपटते-गले लगते है, उसी प्रकार बच्चों को भी उनसे शिक्षा लेकर आपस में प्रेम से एक दूसरे को गले लगाना चाहिए।

पद – 3

दीपक से सीखो जितना
हो सके अंधेरा हरना,
पृथ्वी से सीखो जीवों की
सच्ची सेवा करना।

शब्दार्थ :

  • दीपक = दीया, दीप ।
  • अंधेरा = अंधकार ।
  • जीवों = प्राणियों।

व्याख्या – इस कविता में कवि ने दीपक तथा पृथ्वी से सीखने की प्रेरणा दी है।,

कवि ने बन्चों से कहा है कि वे जितना हो सके दोपक से अंधकार दूर करने की शिक्षा लें। नन्हा-सा दीपक अपने चारों ओर के अंधकार को दूर कर रोशनी कर देता है। वैसे ही बच्चों को भी दीपक से सीख कर अपने आस-पास के अंधेरे को दूर कर देना चाहिए। जिस प्रकार पृथ्वी सभी प्राणियों की सच्ची सेवा करती है, उसी प्रकार बच्चों को भी पृथ्वी के सभी प्राणियों की सच्चाई के साथ सेवा करने की सीख लेनी चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 4

जलधारा से सीखो आगे
जीवन-पथ पर बढ़ना,
और धुएँ से सीखो हरदम
ऊँचे ही पर चढ़ना।

शब्दार्थ :

  • जलधारा = जल का प्रवाह ।
  • जीवन पथ = जीवन रूपी मार्ग ।
  • हरदम = हमेशा।

व्याख्या – इस कविता में कवि ने बच्चों को जल-धारा तथा धुएँ से सीखने की प्रेरणा दी है।

जल का प्रवाह सदा आगे बढ़ता रहता है। उससे सीख लेकर बच्चों को भी सदा अपने जीवन के मार्ग पर अर्थात् अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिस प्रकार आग से निकलने वाला धुआँ सदा ऊपर ही चढ़ता रहता है, उसी प्रकार बच्चों को भी धुएँए से सीख लेकर हमेशा ऊँचाई पर चढ़ते रहना चाहिए अर्थात् सदा उन्नति करते रहना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 5

सत्पुरुषों के जीवन से सीखो
चरित्र निज गढ़ना,
अपने गुरु से सीखो बच्चों
उत्तम विद्या पढ़ना।

शब्दार्थ :

  • सीख = शिक्षा, परामर्श।
  • गढ़ना = रचना, बनाना।
  • निज = अपना।
  • उत्तम = श्रेष्ठ।
  • सत्पुरुष = सज्जन व्यक्ति।

व्याख्या – प्रस्तुत कविता में कवि ने बच्चों को सज्जन लोगों तथा गुरु से सीखने की प्रेरणा दी है।

कवि ने बच्चों को गह परामर्श दिया है कि वे सज्जन पुरुषों के जीवन से शिक्षालेकर अपने चरित्र का निर्माण करें। अपने गुरु से वे सदा श्रेष्ठ अच्छी विद्या की शिक्षा प्राप्त करें। गुरु से अन्छी विद्या सीख कर ही वे जीवन में उन्नति कर सकते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 1 वृंद के दोहे to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 Question Answer – वृंद के दोहे

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
वृंद किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(ग) रीतिकाल।

प्रश्न 2.
कवि वृंद के पिता का क्या नाम था ?
(क) रूपजी
(ख) स्वरूपजी
(ग) भूपजी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रूपजी।

प्रश्न 3.
वृंद के गुरु कौन थे ?
(क) रामानंद
(ख) तारा पंडित
(ग) नरहरिदास
(घ) बल्लभाचार्य
उत्तर :
(ख) तारा पंडित।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 4.
वृंद किसके दरबारी कवि थे ?
(क) अकबर के
(ख) शाहजहाँ के
(ग) औरंगजेब के
(घ) बहादुरशाह के
उत्तर :
(ग) औरंगजेब के।

प्रश्न 5.
युद्ध में क्या शोभा नहीं देता हैं ?
(क) तलवार
(ख) वीरता
(ग) श्रृंगार
(घ) भाला
उत्तर :
(ग) शृंगार।

प्रश्न 6.
सौर का क्या अर्थ हैं ?
(क) सूर्य
(ख) चादर
(ग) पेड़
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चादर ।

प्रश्न 7.
विष को कंठ में किसने बसाया हैं ?
(क) बह्मा ने
(ख) विष्णु ने
(ग) शिव ने
(घ) इन्द्र ने
डत्तर :
(ग) शिव ने।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार सब लोग किसकी सहायता करते हैं ?
(क) निर्बल की
(ख) सबल की
(ग) दुर्बल की
(घ) इनमें से किसी की नहीं
उत्तर :
(ख) सबल की

प्रश्न 9.
हमें दान किसको देना चाहिए ?
(क) हीन को
(ख) प्रवीन को
(ग) दीन को
(घ) किसीं को नहीं
उत्तर :
(ग) दीन को

प्रश्न 10.
कौन आग को बढ़ा देता है और दीपक को बुझा देता है ?
(क) पानी
(ख) बादल
(ग) हवा
(घ) वर्षा
उत्तर :
(ग) हवा

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दान किसको देना चाहिए ?
उत्तर :
दान दीन को अर्थात् गरीब व्यक्ति को देना चाहिए।

प्रश्न 2.
विद्या की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम तथा उद्यम करना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 3.
मीठी बोली बोल कर तोता कहाँ कैद हो जाता है ?
उत्तर :
मीठी बोली बोलकर तोता पिंजड़े में कैद हो जाता है।

प्रश्न 4.
कौन अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है ?
उत्तर :
दुष्ट अर्थात् नीच व्यक्ति अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है।

प्रश्न 5.
विष कौन-सा गुण नहीं त्यागता है ?
उत्तर :
विष अपनी स्यामला अर्थात् कालिमा गुण को नहीं त्यागता है।

प्रश्न 6.
कवि वृंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
कवि वृदद का जन्म 1643 ई० मे बीकानेर के मेड़ता नामक गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
कवि वृंद ने किस प्रकार की रचनाएँ लिखी हैं ?
उत्तर :
कवि वृंद ने रीति और नीतिपरक रचनाएँ लिखी हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 8.
वृंद की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर :
बारहमासा, नयन पचीसी, यमक-सतसई, इत्यादि वृंद की कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं।

प्रश्न 9.
प्यास कहाँ नहीं बुझती हैं?
उत्तर :
रीते सरवर अर्थात् सूखे तालाब के पास जाने से प्यास नहीं बुझुती है।

प्रश्न 10.
औषधि किसको देनी चाहिए ?
उत्तर :
औषधि बीमार व्यक्ति को देनी चाहिए।

प्रश्न 11.
सबकी चिंता कौन करता है ?
उत्तर :
सबकी चिंता ईश्वर करता है।

प्रश्न 12.
रिश्ता तोड़कर जोड़ने पर क्या होता है?
उत्तर :
रिश्ता तोड़कर पुनः जोड़ने पर मन में एक गाँठ पड़ जाती है अर्थात् शंका रह जातीं है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दुष्ट की दुष्टता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
दुष्ट व्यक्ति कभी भी अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। उसे कितना ही बड़ा स्थान मिल जाय अथवा बड़े लोगों की संगति मिल जाय पर वह अपनी दुष्टता को, अपनी बुराइयों को नहीं छोड़ पाता। जैसे विष अपने स्वाभाविक धर्म-गुण को नहीं छोड़ता, उसी प्रकार दुष्ट लोग भी अपने दोष को कभी नहीं छोड़ सकते।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 2.
बिना अवसर की बात कैसी लगती है ?
उत्तर :
बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। शृंगार की बात संभी को अच्छी लगती है लेकिन युद्ध या लड़ाई के समय यदि भृंगार रस की बात कही जाय तो वह किसी को अच्छी नहीं लगेगी। उचित अवसर पर ही उचित बात का महत्व होता है। कितनी भी अन्छी बात हो, पर अनुपयुक्त अवसर पर कही जाती है तो किसी को अच्छी नहीं लगती।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
“जाही ते कछु पाइये ………. कैसे बुझत पिआस’
(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।
उत्तर :
प्रस्तुत दोहा ‘वृंद के दोहे’ पाठ से लिया गया है। इसके कवि का नाम वृंद है।

(ii) उपर्युक्त अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत नीति-परक दोहे में कवि वृंद ने यह व्यावहारिक शिक्षा दी है कि जिससे कुछ प्राप्त करने की उम्मीद हो, उसी की आशा करनी चाहिए। ऐसे व्यक्ति से कभी भी कुछ आशा नहीं करनी चाहिए जो स्वयं अक्षम हो। वहाँ से निराशा ही हाथ लगेगी। जैसे सूखे, जलहीन सरोवर में जाने पर किसी की प्यास नहीझ सकती।

प्रश्न 2.
“विद्या धन उद्यम बिना ………… ज्यों पंखे का पौन।”
(i) विद्या रूपी धन की प्राप्ति कैसे हो सकती है ?
उत्तर :
विद्या रूपी धन की प्राप्ति प्रयास, परिश्रिम तथा उद्यम करने से हो सकती है। आलसी व्यक्ति को, परिश्रम से जी चुराने वाले व्यक्ति को विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि वृंद ने बतलाया है कि परिश्रमी व्यक्ति ही अपनी मेहनत से विद्या रूपी धन की प्राप्ति कर सकता है। आलसी तथा निठल्ला व्यक्ति कभी भी विद्या को नहीं प्राप्त कर सकता। इस संबंध में कवि ने पंखे की हवा का उदाहरण दिया है। हवा की प्राप्ति के लिए, शरीर को सुख पहुँचाने के लिए पंखे को हिलाने का श्रम करना पड़ता है। बिना डुलाए, बिना परिश्रम किए हवा नहीं मिल सकती। उसी प्रकार विद्या-रूपी अमूल्य धन को पाने के लिए सद़ा परिश्रम करना ही पड़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 3.
“कबहूँ प्रीति न जोरिये ………… गाँठि परति गुन माहि।’
(i) कवि यहाँ क्या नहीं करने को कहता है ?
उत्तर :
कवि यहाँ प्रीति न जोड़ने और जोड़ कर न तोड़ने के लिए कह रहा है।

(ii) इस दोहे से कवि क्या संदेश देना चाहता है ?
उत्तर :
इस दोहे से कवि व्यावहारिक जीवन में सफल होने का संदेश देना चाहता है। कवि ने इस सच्चाई को सष्ट किया है कि प्रीति कर के उसे तोड़ देने का परिणाम अच्छा नहीं होता।

इसलिए यदि किसी से लगाव बनाते हैं तो उसका निर्वाह कीजिए। प्रीति करके कभी उसे मत तोड़िए क्योंकि एक बार जब प्रीति दूट जाती है तो फिर नहीं जुड़ती, यदि जुड़ती भी है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। एक रस्सी के उदाहरण से कवि ने इसे समझाया है। जिस प्रकार रस्सी के तोड़ने तथा फिर जोड़ने से उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रीति के टूट जाने पर फिर सच्चा प्रेम नहीं हो पाता। संदेह की गाँठ पड़ जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
वृंद के दोहों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
कवि वृंद को मानव प्राकृति और व्यवहार का अच्छा ज्ञान था। इनके नीतिपूर्ण दोहे मानव जीवन में बड़े ही उपयोगी हैं। इनके कुछ दोहे लोक-जीवन की वाणी बने हुए हैं। कवि ने व्यावहारिक शिक्षा देते हुए कहा है कि मनुष्य को अवसर के अनुकूल ही कोई बात कहनी चाहिए। बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। जैसे युद्ध के की उम्मीद हो, जो समर्थ हो, उसी से पाने की आशा रखनी चाहिए। जलहीन सूखे तालाब में जाने पर प्यास नहीं बुझ सकती।

कवि ने कहा है कि मनुष्य को अपनी क्षमता, साधन तथा स्थिति के अनुकूल ही कार्य करना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करता तो कष्ट में पड़ जाता है, उसे उसका कुफल भोगना पड़ता है। कहा भी गया है कि चादर जितनी लंबी हो हमें अपना पाँव उतना ही फैलाना चाहिए। चादर के बाहर पैर पसारना कष्ट को आमंत्रित करना है। कार्य आरंभ करने के पूर्व अपनी क्षमता, स्थिति तथा साधन का मूल्यांकन कर लेना चाहिए। यदि हम अपनी क्षमता और साधन के अनुकूल कार्य करते हैं तो हम निश्चय ही सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति करने में सफल होंगे।

परिश्रम के बिना इस संसार में कोई भी व्यक्ति विद्या-रूपी अमूल्य धन नहीं पा सकता। इस जगत् में शक्ति संपन्न व्यक्ति की ही सब लोग सहायता करते हैं। कभी-कभी गुण भी दोष बन जाता है। अच्छाई भी दु:ख का कारण बन जाती है। मधुर वाणी बोलने के कारण ही तोता को पिंजड़े में कैद होना पड़ता है। कवि बड़ी उपयेगीी बात बतलाई है कि हमें अभावग्रस्त, पीड़ित गरीब व्यक्ति को ही दान देना चाहिए जिससे उसकी दरिद्रता दूर हो जाए। दबा उसी को दी जानी चाहिए जिसके शरीर में रोग हो। अतः सम्पन्न व्यक्ति को दान देना व्यर्थ है। महान स्थान पाकर भी दुष्ट अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। महादेव के गले में स्थान पाकर भी विष अपनी कालिमा का परित्याग नहीं करता।

कवि ने परमेश्वर की प्राणियों पर असीम अनुकेपा का वर्णन किया है। ईश्वर जगत के सभी प्राणियों के कल्याण की चिन्ता करते हैं। बच्चे के जन्म के पहले ही प्रभु उसे जीवित रहने के लिए माता की छाती में दूध की व्यवस्था कर देते हैं। बच्चे को दुग्ध पान की व्यवस्था ईश्वर की अतिशय कृपा है। फिर नीति की उपयोगी बात कवि ने बतलाई है। व्यक्ति को कभी भी अपने परस्पर के प्रेम संबंध को नहीं तोड़ना चाहिए। एक बार यदि प्रेम संबंध टूट जाता है फिर वह नहीं जुड़ता है। जुड़ता भी है तो उसमें संदेह की गाँठ पड़ जाती है। पूर्व जैसी एकरसता नहीं रह जाती। कवि ने रस्सी के उदाहरण से स्पष्ट किया है रस्सी के टूट जाने पर यदि पुनः उसे जोड़ा जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। अतः हमें अपने प्रेम संबंध को बचाकर रखना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

भाषा-बोध :

(क) शब्दों के शुद्ध रूप –

सिंगार – शृंगार
पिआस – प्यास
करतब – कर्त्तव्य
पौन – पवन
सबन – सब
प्रीति – प्रीति (प्रेम)

(ख) पर्यायवाची शब्द –

अवसर – मौका, समय, संयोग।
सरवर – सरोवर, तालाब, जलाशय।
पवन – वायु, हवा, अनिल।
आग – अग्नि, पावक, अनल।
शरीर – तन, देह, बदन, काया।

WBBSE Class 6 Hindi वृंद के दोहे Summary

जीवन-परिचय :

वृंद का जन्म सन् 1643 में जोधपुर के मेड़ते ग्राम में एक बाह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही ये सुशील, गंभीर और तीव्र बुद्धि के थे। काशी में तारा पंडित के पास रहकर इन्होंने, व्याकरण, वेदान्त, साहित्य तथा गणित आदि का ज्ञान प्राप्त किया। औरंगजेब के दरबारी कवि रहे। इनकी मृत्यु सन् 1723 में हुई । इनकी प्रमुख रचनाएं बारह मासा, नयन पचीसी, पवन पचीसी और यमक सतसई हैं। इनके दोहे सरल, सरस तथा कलापूर्ण हैं। इनके दोहे लोकजीवन की वाणी बन गए हैं। सूक्तिकार के रूप में ही ये अधिक प्रसिद्ध हैं। इनकी भाषा परिष्कृत ब्रज भाषा है। नीति काव्य रचना के क्षेत्र में कवि वृन्द का स्थान अन्यतम है।

पद – 1, 2

नीकी पै फीकी लगै, बिन अवसर की बात।
जैसे बरनत युद्ध में, नहिं सिंगार सुहात ।।
जाही ते कछु पाइये, करिये ताकी आस ।
रीतै सरवर पर गये, कैसे बुझत पिआस ।।

शब्दार्थ :

  • नीकी = अच्छी।
  • जाही ते = जिससे।
  • फीकी = बुरी, खराब।
  • ताकी = उसकी।
  • बरनत = वर्णन करना।
  • आस = आशा।
  • सिंगार = शृंगार।
  • रीते = खाली।
  • सुहात = अच्छा लगना।
  • सरवर = तालाब।
  • बुझत = बुझना ।
  • पिआस = प्यास।

सन्दर्भ – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘वृंद के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। यहाँ कवि ने नीति की उपयोगी शिक्षा दी है।

व्याख्या – कविवर वृंद कहते हैं कि अच्छी बात भी अगर बिना अवसर के कही जाती है तो वह खराब लगती है। अर्थात् उपयुक्त अवसर पर कही गई बात ही अन्छी लगती है। जैसे युद्ध के समय यदि श्रृंगार का वर्णन किया जाता है तो वह किसी को अच्छा नहीं लगता।

कवि ने यह व्यावहारिक शिक्षा दी है कि जिससे कुछ पाने का निश्चय हो, उसी की आशा करनी चाहिए। जैसे खाली (जल रहित) तालाब में जाने पर कैसे प्यास बुझ सकती है। अर्थात् बिना जलवाले सूखे तालाब में जाने पर किसी की प्यास नहीं बुझ सकती। अतः जिसके दिल में दया, परोपकार की भावना नहीं है, जो स्वभाव से कंजूस है, उसके पास जाना, उससे कुछ पाने की आशा रखना व्यर्थ है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 3,4

अपनी पहुँच विचारि कै, करतब करिये दौर ।
तेते पाँव पसारिये, जेती लंबी सौर ।।
विद्या धन उद्यम बिना, कहा जु पावै कौन ।
बिना डुलाये ना मिले, ज्यों पंखे का पौन।।

शब्दार्थ :

  • पहुँच = सामर्थ्य।
  • उद्यम = उद्योग।
  • करतब = कर्त्रव्य ।
  • पावै = पाना ।
  • दौर = दौड़कर ।
  • डुलाये = हिलाना।
  • तेते = उतना।
  • ज्यों = जिस प्रकार ।
  • पाँव = पैर।
  • पौन = हवा।
  • पसारिये = फैलाइए।
  • सौर = चादर।

संदर्भ – प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने यह शिक्षा दी है कि अपने साधनों के अनुसार ही व्यक्ति को काम करना चाहिए। व्याख्या – मनुष्य को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही दौड़ कर अपना कर्त्वव्य करना चाहिए। जितनी लंबी चादर हो, उतना ही पैर फैलाना चाहिए अर्थात् अपनी आमदनी के अनुसार ही खर्च करना चाहिए। आमदनी से अधिक खर्च करने से मुसीबत का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार इस दोहे में कवि ने शिक्षा दी है कि मनुष्य को अपनी क्षमता तथा साधन के अनुसार ही कोई कार्य करना चाहिए। तभी उसे सफलता मिल सकती है।

प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम तथा उद्यम की आवश्यकता पर बल दिया है।
विद्या रूपी धन परिश्रम के बिना कोई कैसे पा सकता है , अर्थात् प्रयत्न और मेहनत के बिना कोई भी मनुष्य विद्या रूपी धन को प्राप्त नहीं कर सकता। इस संबंध में कवि ने पंखे की हवा का उदाहरण दिया है। पंखा हिलाए बिना पंखे की हवा नहीं मिल सकती। हमें हवा प्राप्त करने के लिए पंखा हिलाने का परिश्रम करना पड़ता है। अत: विद्या की प्राप्ति के लिए हमें परिश्रम करना ही होगा। आलसी को विद्या नहीं मिल सकती।

पद – 5, 6

सबै सहायक सबल को, कोई न निबल सहाय।
पवन जगावत आग को, दीपहि देत बुझाय।।
कहूँ-कहूँ गुन ते अधिक, उपजत दोष सरीर।
मधुरी बानी बोलि कै, परत पींजरा कीर।।

शब्दार्थ :

  • सबल = शक्तिशाली।
  • कहूँ = कहीं।
  • निबल = कमजोर।
  • गुन = गुण।
  • पवन = हवा।
  • उपजत = उत्पन्न होना।
  • दीपहि = दीये को।
  • मधुरी = मीठी।
  • सहाय = सहायक।
  • बानी = वाणी।
  • जगावत = जगाना।
  • कीर = तोता।

सन्दर्भ : प्रस्तुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि सभी लोग ताकतवर व्यक्ति की ही सहायता करते हैं, कमजोर की कोई नहीं।

व्याख्या : इस संसार में शक्तिशाली व्यक्ति के सहायक सभी हो जाते हैं पर कमजोर-दुर्बल व्यक्ति की सहायता कोई नहीं करता। हवा और दीपक के उदाहरण से कवि ने इसे समझाया है। हवा आग को जगा देती है अर्थात् तीव्र बना देती है पर वही हवा छोटे दीपक को अपने झोंके से बुझा भी देती है।

प्रतुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि कभी-कभी गुण भी दोष बन जाता है और प्राणी के जीवन को दु:खी कर देता है।
कहीं-कहीं शरीर का गुण ही दोष उत्पन्न कर देता है। तोता की मीठी बोली ही उसके लिए बुराई बन जाती है। मधुर वाणी के कारण वह पींजरे में पड़कर बन्दी का जीवन जीता है। मीठी बोली के कारण ही लोग तोते को पिंजड़े में बन्द करके पालते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 7, 8

दान दीन को दीजिए, मिटै दरिद की पीर ।
औषधि वाको दीजिए, जाके रोग शरीर।।
दुष्ट न छाड़ै दुष्टता, बड़ी ठौर हूँ पाय।
जैसे तजत न स्यामला, विष शिव कंठ बसाय।

शब्दार्थ :

  • दीन = गरीब।
  • दुष्ट = नीच।
  • मिटै = खतम होना।
  • दुष्टता = नीचता।
  • दरिद = दरिद्र, गरीब।
  • ठौर = स्थान ।
  • पीर = पीड़ा।
  • तजत = छोड़ना।
  • औषधि = दवा।
  • स्यामला = कालिमा।

संदर्भ : प्रस्तुत नीति परक दोहे में कवि ने गरीब की सहायता करने के लिए कहा है।

व्याख्या : गरीब व्यक्ति को ही दान देकर उसकी सहायता करनी चाहिए। इससे उस दीन-हीन दुखी व्यक्ति की पीड़ा, उसकी दरिद्रता खत्म हो जायगी। दवा उसी को दी जानी चाहिए जिसके शरीर में कोई रोग हो। नीरोगी को दवा देना व्यर्थ है। उसी प्रकार जरूरतमंद की ही सहायता करनी चाहिए।

प्रस्तुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि सम्मानजनक बड़ा स्थान पाकर भी दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्टता को, अपनी स्वाभाविक बुराई को नहीं छोड़ता। जैसे विष शिव जी के गलेमें स्थान पाकर भी अपनी कालिमा को, अपने दोष को नहीं छोड़ता।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 9

प्रभु को चिन्ता सबन की, आपु न करिये ताहिं।
जनम आगरू भरत है, दूध मातृ-धन माहिं।।

शब्दार्थ :

  • प्रभु = ईश्वर।
  • जनम = जन्म।
  • सबन = सब।
  • आगरू = पहले ही।
  • आपु = स्वयं।
  • भरत = भर देते हैं।
  • चिन्ता = सोच, फिक्र।
  • मातृ = माँ।

व्याख्या : प्रस्तुत दोहे में ईश्वर की महिमा का वर्णन करते हुए कवि ने बतलाया है कि ईश्वर सब प्रकार से सभी प्राणियों की रक्षा करते हैं। सचमुच ईश्वर सभी की चिन्ता करते हैं। सभी के हित के विषय में सोचते हैं। इसलिए व्यक्ति को स्वयं चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। प्रभु को लोगों के हित की इतनी चिन्ता रहती है कि शिशु के जन्म के पहले ही वे माँ की छाती में दूध भर देते हैं, जिससे जन्म लेते ही बच्चे को माँ का दूध मिलने लगता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

पद – 10

कबहूँ प्रीति न जोरिए, जोरि तोरिये नाहिं।
ज्यों तोरे-जोरे बहुरि, गाँठ परति गुन माहिं।।

शब्दार्थ :

  • प्रीति = प्रेम ।
  • ज्यों = जैसे, जिस प्रकार।
  • जोरिये = जोड़ना।
  • बहुरि = फिर, पुनः।
  • तोरिये = तोड़ना।
  • गुन = रस्सी।

व्याख्या : इस दोहे में कवि ने नीति की उपयोगिता पर शिक्षा दी है। कवि का कथन है कि बहुत सोच-समझकर ही प्रेम संबंध बनाना चाहिए। बिना विचारे प्रेम नहीं करना चाहिए। प्रेम संबंध बनाकर तोड़ना नहीं चाहिए। प्रेम के टूट जाने पर यदि पुन: जोड़ने की चेष्टा की जाती है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। जिस प्रकार रस्सी के टूट जाने पर यदि उसे जोड़ा जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रेम के टूट जाने पर यदि फिर प्रेम संबंध जोड़ा जाता है तो उसमें संदेह की गाँठ पड़ जाती है। पहले जैसे प्रेम की सरसता नहीं रह जाती।