WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 6 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन

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20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
सर्वभारतीय किसान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे –
(क) एन० जी० रंगा
(ख) स्वामी सहजानन्द
(ग) बाबा रामबन्द्र
(घ) लाला लाजपत राय
उत्तर :
(ख) स्वामी सहजानन्द्र।

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प्रश्न 2.
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी –
(क) कलकत्ता में
(ख) दिल्ली में
(ग) बम्बई में
(घ) मद्रास में
उत्तर :
(ग) बम्बई में।

प्रश्न 3.
‘वर्कर और पीजेण्ट’ (मजदूर और किसान) पार्टी संयुक्त थी –
(क) रौलेट सत्याग्रह से
(ख) असहयोग आन्दोलन से
(ग) बारदोली सत्याग्रह से
(घ) साइमन कमीशन विरोधी आन्दोलन से
उत्तर :
(घ) साइमन कमीशन विरोधी आन्दोलन से।

प्रश्न 4.
बायकाट आन्दोलन से आर्थिक रूप से प्रभावित हुए थे –
(क) बंगाल के कृषक
(ख) मध्यमवर्गीय लोग
(ग) जमींदार
(घ) छात्र
उत्तर :
(क) बंगाल के कृषक

प्रश्न 5.
बाबा रामचन्द्र ने कृषक आन्दोलन को नेतृत्व दिया था –
(क) बिहार में
(ख) संयुक्त प्रान्त (यूनाइटेड प्राविंस) में
(ग) राजस्थान में
(घ) महाराष्ट्र में
उत्तर :
(ख) संयुक्त प्रान्त (यूनाइटेड प्राविंस) में

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प्रश्न 6.
रम्पा जनजातीय विद्रोह संगठित हुआ था –
(क) मालाबार अंघल में
(ख) कोंकण तटीय क्षेत्र में
(ग) उड़ीसा में
(घ) गोदावरी घाटी में
उत्तर :
(घ) गोदावरी घाटी में

प्रश्न 7.
एका आन्दोलन के प्रमुख नेता थे :
(क) फर्दुनजी
(ख) मदारी पासी और सहरेब
(ग) मेहता बदर्स
(घ) बाबा रामचन्द्र
उत्तर :
(ख) मदारी पासी और सहरेब।

प्रश्न 8.
आल इंडिया ट्रेड यूनियन काँग्रेस की स्थापना हुई थी –
(क) 1917 ई० में
(ख) 1920 ई० में
(ग) 1927 ई० में
(घ) 1929 ई० में
उत्तर :
(ख) 1920 ई० में

प्रश्न 9.
बारदोली सत्याग्रह हुआ था –
(क) बम्बई में
(ख) पंजाब में
(ग) मद्रास में
(घ) गुजरात में
उत्तर :
(घ) गुजरात में

प्रश्न 10.
मजदूर और किसान पार्टी शामिल था :
(क) रौलेट सत्याम्मह में
(ख) असहयोग आंदोलन में
(ग) बारदोली सत्याग्मह में
(घ) साइमन कमीशन बहिष्कार आंदोलन में
उत्तर :
(घ) साइमन कमीशन बहिष्कार आंदोलन में।

प्रश्न 11.
सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ी महिला थी :
(क) बीना दास
(ख) कमलादेवी चट्टोपाध्याय
(ग) कल्पना दत्त
(घ) रोकेया सेखावत हुसैन
उत्तर :
(ग) कमलादेवी चट्टोपाध्याय।

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प्रश्न 12.
अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना कब और कहाँ हुई –
(क) 1935 ई० कलकत्ता में
(ख) 1942 ई० कानपुर में
(ग) 1938 ई० मद्रास में
(घ) 1936 ई० लखनऊ में
उत्तर :
(घ) 1936 ई० लखनऊ में

प्रश्न 13.
तिभागा आन्दोलन किसके सिफारिश के प्रतिफल था ?
(क) पोल आयोग के
(ख) फ्लाउड आयोग के
(ग) टेनेसी एक्ट के
(घ) ली आयोग के
उत्तर :
(ख) फ्लाउड आयोग के

प्रश्न 14.
अखिल भारतीय किसान एवं मजदूर दिवस कब मनाया जाता है ?
(क) 1 मार्च को
(ख) 1 अपैल को
(ग) 1 मई को
(घ) 5 जून को
उत्तर :
(ग) 1 मई को

प्रश्न 15.
“एक वर्ष में स्वराज” का नारा गाँधी जी ने कब दिया ?
(क) दाण्डी यात्रा के समय
(ख) सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय
(ग) भारत छोड़ो आन्दोलन के समय
(घ) असहयोग आन्दोलन के समय
उत्तर :
(घ) असहयोग आन्दोलन के समय

प्रश्न 16.
औपचारिक तौर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी।
(क) 1920 ई० ताशकन्द में
(ख) 1921 ई० बम्बई में
(ग) 1925 ई० कानपुर में
(घ) 1928 ई० मेरठ में
उत्तर :
(ग) 1925 ई० कानपुर में

प्रश्न 17.
1929 ई० के ‘मेरठ षड़यंत्र मुकदमा’ में कुल दोषी (अभियुक्त) कम्युनिस्ट नेताओं की संख्या कितनी थी –
(क) 30
(ख) 31
(ग) 32
(व) 33
उत्तर :
(घ) 33

प्रश्न 18.
1928 ई० में बारदोली किसान आन्दोलन के कुशल नेतुत्व के कारण वल्लभ भाई पटेल के ‘सरदार’ की उपाधि दी थी –
(क) कस्तूरबा गाँधी ने
(ख) मीणा वेन ने
(ग) मीठू वेन ने
(घ) शारदा वेन ने
उत्तर :
(क) कस्तूरबा गाँधी ने

प्रश्न 19.
‘हमें तीन ‘भाग चाहिए’ किस आन्दोलन का नारा था ?
(क) तेलंगाना आन्दोलन
(ख) तिभागा आन्दोलन
(ग) वर्ली आन्दोलन
(घ) पुन्नग्ना-भायालार आन्दोल
उत्तर :
(ख) तिभागा आन्दोलन।

प्रश्न 20.
1925 ई० में मजदूर किसान पार्टी की स्थापना हुई थी –
(क) कलकत्ता में
(ख) बम्बई में
(ग) मद्रास में
(घ) कानपुर में
उत्तर :
(क) कलकत्ता में

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प्रश्न 21.
छद्म नाम ‘फादर सी० मार्टिन’ किसके द्वारा व्यवहार में अपनाया गया नाम था ?
(क) एस० ए० डाँगे
(ख) एम० एन० रॉय
(ग) एस० एस मिराजकर
(घ) मुजफ्फर अहमद
उत्तर :
(ख) एम० एन० रॉय।

प्रश्न 22.
ब्रिटिश काल में सबसे अधिक प्रताड़ित और शोषित वर्ग था –
(क) कृषक
(ख) जमीदार
(ग) मध्यमवर्ग
(घ) मुस्लिम
उत्तर :
(क) कृषक।

प्रश्न 23.
फार्वड ब्लाक की स्थापना किया था –
(क) गांधीजी
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) सुभाष चन्द्र बोस
(घ) मुजफ्फर अहमद
उत्तर :
(ग) सुभाष चन्द्र बोस।

प्रश्न 24.
मोपला विद्रोह का क्षेत्र था –
(क) केरल में
(ख) कर्नाटक में
(ग) तमिलनाडु में
(घ) मालाबार में
उत्तर :
(घ) मालाबार में ।

प्रश्न 25.
बारदोली आन्दोलन का केन्द्र था –
(क) सतारा
(ख) फैजाबाद
(ग) सूरत
(घ) दिल्ली
उत्तर :
(ग) सूरत।

प्रश्न 26.
‘बारदोली सत्याग्रह’ के मुख्य नियंत्रक कौन थे ?
(क) नेताजी
(ख) गाँधीजी
(ग) राजाजी
(घ) स्वामीजी
उत्तर :
(ख) गाँधीजी।

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प्रश्न 27.
‘एका’ आंदोलन हुआ था :
(क) 1921 ई० में
(ख) 1922 ई० में
(ग) 1923 ई० में
(घ) 1924 ई० में
उत्तर :
(क) 1921 ई० में।

प्रश्न 28.
मेरठ षड़यंत्र केस ई० में हुआ था।
(क) 1928 ई० में
(ख) 1929 ई० में
(ग) 1930 ई० में
(घ) 1931 ई० में
उत्तर :
(ख) 1929 ई० में

प्रश्न 29.
‘श्रमिक-कृषक दल’ का गठन हुआ था –
(क) 1927 ई० में –
(ख) 1928 ई० में
(ग) 1929 ई० में
(घ) 1930 ई० में
उत्तर :
(ख) 1928 ई० में।

प्रश्न 30.
तिभागा आंदोलन की महिला नेत्रियों में से एक थी :
(क) बूड़ी माँ
(ख) गाँधी बूड़ी
(ग) सीमांत गांधी
(घ) घाँद बीबी
उत्तर :
(क) बूड़ी माँ।

प्रश्न 31.
तीनकठिया व्यवस्था जुड़ा हुआ था –
(क) बिहार राज्य से
(ख) हैदराबाद राज्य से
(ग) त्रिपुरा राज्य से
(घ) अवध राज्य से
उत्तर :
(क) बिहार राज्य से।

प्रश्न 32.
किस वर्ष किस दिन नमक-सत्याग्रह की घोषणा की गयी ?
(क) 6 अप्रैल, 1930 ई० को
(ख) 5 अप्रैल, 1930 ई० को
(ग) 4 अप्रैल, 1930 ई० को
(घ) 7 अप्रैल, 1930 ई० को
उत्तर :
(क) 6 अभैल, 1930 ई० को

प्रश्न 33.
भारत के कम्युनिस्ट दल का प्रतीक कौन था ?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) सुभाष चन्द्र बोस
(ग) मुजफ्फर अहमद
(घ) मानवेन्द्रनाथ राय
उत्तर :
(ग) मुजफ्फर अहमद।

प्रश्न 34.
सर्वप्रथम ‘मई दिवस’ भारत में मनाया गया था –
(क) कोलकाता में
(ख) दिल्ली में
(ग) बंबई (मुंबई) में
(घ) मद्रास में
उत्तर :
(घ) मद्रास में।

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प्रश्न 35.
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रथम सभापति कौन थे ?
(क) एन० एम० जोशी
(ख) लाला लाजपत राय
(ग) एस० ए० डाँगे
(घ) पी॰ सी॰ जोशी
उत्तर : (ख) लाला लाजपत राय।

प्रश्न 36.
भारत में सबसे पहले ‘मई दिवस’ की शुरूआत किया था –
(क) एम० एन० राय
(ख) यी.सी. जोशी
(ग) सुभाष चन्द्र बोस
(घ) सिंगारा भेलु चेट्टीयार
उत्तर :
(घ) सिंगारा भेलु चेट्टौयार।

प्रश्न 37.
‘खेड़ा आन्दोलन’ हुआ था –
(क) महाराष्ट्र में
(ख) गुजरात में
(ग) बंगाल में
(घ) बिहार में
उत्तर :
(ख) गुजरात में।

प्रश्न 38.
ताशकन्द में ‘कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया’ की स्थापना की थी –
(क) एम. एन. राय
(ख) बी. पी. वाडिया
(ग) मुजफ्फर अहमद
(घ) शौकत उस्मानी
उत्तर :
(क) एम, एन. राय।

प्रश्न 39.
भारत छोड़ो आंदोलन आंरभ हुआ था :
(क) 20 अगस्त, 1942 ई० को
(ख) 15 अगस्त, 1942 ई० को
(ग) 8 अगस्त, 1942 ई० को
(घ) 1 सितम्बर, 1942 ई० को
उत्तर :
(ग) 8 अगस्त, 1942 ई० को।

प्रश्न 40.
रम्पा विद्रोह का नेतृत्व किया था :
(क) अलूरी सीताराम राजू
(ख) बुद्धा भगत
(ग) दुर्जन सिंह
(घ) टीपू गारो
उत्तर :
(क) अलूरी सीताराम राजू।

प्रश्न 41.
तेलंगना आन्दोलन हुआ था :
(क) 1945 ई० में
(ख) 1946 ई० में
(ग) 1947 ई॰ में
(घ) 1948 ई० में
उत्तर :
(ख) 1946 ई० में।

प्रश्न 42.
‘जमीन जोतने वालों का है’ (Land for the tillers) का नारा संबंधित है :
(क) तिभागा आदोलन से
(ख) तेलंगना आंदोलन से
(ग) एका आन्दोलन से
(घ) मोपला आन्दोलन से
उत्तर :
(क) तिभागा आंदोलन से।

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प्रश्न 43.
तिभागा आंदोलन का मुख्य केन्द्र था –
(क) दिनाजपुर में
(ख) हैदराबाद में
(ग) मिदनापुर में
(घ) दक्षिण 24-परगना में
उत्तर :
(क) दिनाजपुर में। (बगाल में)

प्रश्न 44.
निम्नोक्त में से किस वर्ष ‘अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन काँग्रेस’ का गठन हुआ ?
(क) 1919 ई०
(ख) 1920 ई०
(ग) 1921 ई०
(घ) 1922 ई०
उत्तर :
(ख) 1920 ई०

प्रश्न 45.
पूर्ण स्वराज प्राप्ति के लिए गाँधी जी ने कौन-सी बात्रा प्रारम्भ की थी ?
(क) दाण्डी यात्रा
(ख) हरिजन यात्रा
(ग) भूदान यात्रा
(घ) जन जागरण यात्रा
उत्तर :
(क) दाण्डी यात्रा

प्रश्न 46.
गाँधीजी के नेतृत्व में संगठित मजदूर आंदोलन था –
(क) अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन 1918 ई०
(ख) खेड़ा सत्याग्रह 1930-34 ई०
(ग) सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930-34 ई०
(घ) शोलापुर कपास मिल मजदूर आंदोलन 1930 ई०
उत्तर :
(क) अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन 1918 ई०

प्रश्न 47.
मोपला विद्रोह हुआ था :
(क) 1920 ई० में
(ख) 1921 ई० में
(ग) 1922 ई० में
(घ) 1923 ई० में
उत्तर :
(ख) 1921 ई० में।

प्रश्न 48.
इण्डियन ट्रेड यूनियन कानून बना था :
(क) 1925 ई० में
(ख) 1926 ई० में
(ग) 1928 ई० में
(घ) 1929 ई० में
उत्तर :
(ख) 1926 ई० में।

प्रश्न 49.
तिभागा आंदोलन हुआ था :
(क) 1940-45 ई० में
(ख) 1942-44 ई० में
(ग) 1943-44 ई० में
(घ) 1945-47 ई० में
उत्तर :
(घ) 1945-47 ई० में।

प्रश्न 50.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी –
(क) 1924 ई० में
(ख) 1925 ई० में
(ग) 1926 ई० में
(घ) 1921 ई० में
उत्तर :
(ख) 1925 ई० में।

प्रश्न 51.
वेलंगाना आंदोलन आंघ्र प्रदेश के किस जिले में शुरू हुआ था –
(क) गोदावरी जिला में
(ख) गुंदूर जिला में
(ग) रम्पा जिला में
(घ) नेलोर जिला में
उत्तर :
(ख) गुंदूर जिला में।

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प्रश्न 52.
तिभागा आंदोलन के नेताओं में से एक थे :
(क) भवानी सेन
(ख) मुजफ्फर अहमद
(ग) बाबा रामचन्द्र
(घ) गांधीजी
उत्तर :
(क) भवानी सेन।

प्रश्न 53.
देशप्राण कहे जाते हैं –
(क) वल्लभ भाई पटेल
(ख) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी
(ग) गाँधीजी
(घ) वीरेन्द्रनाथ सासमल
उत्तर :
(घ) वीरेन्द्रनाथ सासमल।

प्रश्न 54.
असहयोग आंदोलन का प्रमुख चिन्ह था –
(क) सीढ़ी
(ख) चरखा
(ग) कुदाल
(घ) लाठी
उत्तर :
(ख) चरखा।

प्रश्न 55.
1920 ई० में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इणिडया की स्थापना में हुई थी ।
(क) कानपुर
(ख) दिल्ली
(ग) ताशकन्द
(घ) पेशावर
उत्तर :
(ग) ताशकन्द।

प्रश्न 56.
भारत का प्रथम श्रमिक संगठन था :
(क) मजदूर सभा
(ख) श्रमजीवी सभा
(ग) मद्रास लेबर पार्टी
(घ) कलकत्ता लेबर पार्टी
उत्तर :
(ख) श्रमजीवी सभा।

प्रश्न 57.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1884 ई० में
(ख) 1885 ई० में
(ग) 1886 ई० में
(घ) 1887 ई० में
उत्तर :
(ख) 1885 ई० में।

प्रश्न 58.
स्वदेशी आन्दोलन शुरू किया गया था :
(क) बंगाल विभाजन के विरोध के रूप में
(ख) भारतीय वस्तुओं के उपभोग को प्रोत्साहित करने के लिए
(ग) जालियांवाला बाग में भारतीयों की हत्या के विरोध में
(घ) भारत में एक उत्तरदायी सरकार बना सकने में ब्रिटिश सरकार की असफलता के कारण
उत्तर :
(क) बंगाल विभाजन के विरोध के रूप में।

प्रश्न 59.
असहयोग आंदोलन (1920-22) के अचानक स्थगित होने का कारण था :
(क) गांधीजी की अस्वस्थता के कारण
(ख) हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच मतभेदों के कारण
(ग) नेतागणों के बीच मतभेदों के कारण
(घ) चौरी-चौरा में हुई हिंसक घटना के कारण
उत्तर :
(घ) बौरी-चौरा में हुई हिंसक घटना के कारण।

प्रश्न 60.
भारत छोड़ो आदोलन (Quit India Movement) के समय इंग्लैण्ड का प्रधानमंत्री था :
(क) चैम्बरलेन
(ख) चर्चल
(ग) क्लिमेण्ट एटली
(घ) मैकडोनाल्ड
उत्तर :
(ख) चर्चिल।

प्रश्न 61.
सविनय अवज्ञा आंदोलन ( 1930 ई०) के समय गांधीजी ने किसके साथ समझौते प हस्ताक्षर किए ?
(क) लार्ड वेवेल
(ख) लार्ड इरविन
(ग) लार्ड कर्जन
(घ) लार्ड लिनलियगो
उत्तर :
(ख) लाई्ड इरविन।

प्रश्न 62.
तेलंगाना किसान आंदोलन कहाँ हुआ था ?
(क) बिहार में
(ख) बंगाल में
(ग) आन्द्र प्रदेश में
(घ) उड़ीसा में
उत्तर :
(ग) आन्ध प्रदेश में।

प्रश्न 63.
मोपला किसान विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ था ?
(क) कम्पाराम सिंह
(ख) अली मुसलियार
(ग) भवन सिंह
(घ) भगत जवाहर मल
उत्तर :
(ख) अली मुसलियार।

प्रश्न 64.
कांग्रेस समाजवादी दल (Congress Socialist Party) की स्थापना किसने किया था ?
(क) जयप्रकाश नारायण
(ख) भगत सिंह
(ग) एम० एन० रॉय
(घ) गांधीजी
उत्तर :
(क) जयप्रकाश नारायण।

प्रश्न 65.
रिवोल्यूश्नरी सोशलिस्ट पार्टी (आर० एस० पी०) का गठन कब हुआ ?
(क) 1939 ई० में
(ख) 1940 ई० में
(ग) 1941 ई० में
(घ) 1942 ई० में
उत्तर :
(ख) 1940 ई० में।

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प्रश्न 66.
मानवेन्द्र नाथ राय का वास्तविक नाम क्या था ?
(क) नरेन्द्रनाथ भट्टाचार्य
(ख) नरेन्द्रनाथ दत्त
(ग) नरेन्द्रनाथ बनर्जी
(घ) नरेन्द्रनाथ मुखर्जी
उत्तर :
(क) नरेन्द्रनाथ भट्टाचार्य।

प्रश्न 67.
‘जय हिन्द’ का नारा किसने दिया ?
(क) सुभाषचन्द्र बोस
(ख) महात्मा गाँधी
(ग) जवाहरलाल नेहरू
(घ) जय प्रकाश नारायण
उत्तर :
(क) सुभाषचन्द्र बोस।

प्रश्न 68.
पंजाब समाजवादी दल का गठन कब हुआ ?
(क) 1931 ई० में
(ख) 1932 ई० में
(ग) 1933 ई० में
(घ) 1934 ई० में
उत्तर :
(ग) 1933 ई० में।

प्रश्न 69.
साइमन कमीशन (Simon Commission) के विरोध में श्रमिक हड़ताल (Working class strike) कब की गयी ?
(क) 1920 ई० में
(ख) 1927 ई० में
(ग) 1928 ई० में
(घ) 1929 ई० में
उत्तर :
(ग) 1928 ई० में।

प्रश्न 70.
खेड़ा श्रमिक सत्याग्रह कब किया गया ?
(क) 1917 ई० में
(ख) 1918 ई० में
(ग) 1919 ईं० में
(घ) 1920 ई० में
उत्तर :
(ख) 1918 ई० में।

प्रश्न 71.
अहमदाबाद मजदूर सत्याग्रह आन्दोलन किसने शुरू किया था ?
(क) गाँधीजी ने
(ख) सुभाषचन्द्र बोस ने
(ग) मोतीलाल नेहरू में
(घ) जवाहरलाल नेहरू ने
उत्तर :
(क) गाँधीजी ने

प्रश्न 72.
रेलवेमेन्स यूनिन की स्थापना कब किया गया ?
(क) 1902 ई० में
(ख) 1904 ई० में
(ग) 1906 ई० में
(घ) 1908 ई० में
उत्तर :
(ग) 1906 ई० में।

प्रश्न 73.
‘मजदूर और किसान दल’ का गठन कब किया गया ?
(क) 1926 ई० में
(ख) 1927 ई० में
(ग) 1928 ई० में
(घ) 1930 ई० में
उत्तर :
(ग) 1928 ई० में।

प्रश्न 74.
सुभाषचन्द्र बोस को सर्वप्रथम ‘नेताजी’ नाम किसने दिया ?
(क) जी० के० गोखले ने
(ख) हिटलर ने
(ग) एम००ी० रानाडे ने
(घ) गाँधीजी ने
उत्तर :
(ख) हिटलर ने।

प्रश्न 75.
कैथलीन गफ कौन थे ?
(क) समाज सुधारक
(ख) कलाकार
(ग) इतिहासकार
(घ) क्रान्तिकारी
उत्तर :
(ग) इतिहासकार।

प्रश्न 76.
प्रसिद्ध इतिहासकार कैथलीन गफ के अनुसार सम्पूर्ण ब्रिटिश शासनकाल में हुए कृषक संघर्षों की संख्या है –
(क) 74
(ख) 75
(ग) 76
(घ) 77
उत्तर :
(घ) 77

प्रश्न 77.
प्रसिद्ध इतिहासकार कैथलीन गफ की रचना का नाम था –
(क) इण्डियन पीजेण्टस् अपराइजिंग्स
(ख) वर्कर्स एण्ड पीजेण्ट्स पार्टी
(ग) रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टीं
(घ) कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी
उत्तर :
(क) इण्डियन पीजेण्टस् अपराइजिंग्स।

प्रश्न 78.
एका आंदोलन के शुरू होने का मुख्य कारण था –
(क) कृषकों पर अत्याचार
(ख) ठेकेदारों के अत्याचार
(ग) कर में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर :
(ख) ठेकेदारों के अत्याचार।

प्रश्न 79.
वामपंथी राजनीति का उदय हुआ था –
(क) मथम विश्व युद्ध के बाद
(ख) द्वितीय विश्व युंद्ध के दौरान
(ग) प्रथम विश्व युद्ध से पहले
(घ) द्वितीय विश्व युद्ध से पहले
उत्तर :
(क) प्रथम विश्व युद्ध के बाद।

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प्रश्न 80.
पूरे भारत में रेल हड़ताल हुई थी –
(क) 1907 ई० में
(ख) 1908 ई० में
(ग) 1909 ई० में
(घ) 1910 ई० में
उत्तर :
(क) 1907 ई० में

प्रश्न 81.
अवध किसान आन्दोलन के सबसे बड़े नेता कौन थे ?
(क) जवाहर लाल नेहरु
(ख) बाबा रामचन्द्र
(ग) मदन मोहन मालवीय
(घ) सरदार पटेल
उत्तर :
(ख) बाबा रामचन्द्र।

प्रश्न 82.
भारत में कम्युनिज्म (कम्युनिस्ट पार्टी) के प्रचार के लिए कौन उत्तरदायी थे –
(क) गोषाल कृष्ण खोखले
(ख) जबाहरलाल नेहरू
(ग) मानवेन्द्रनाथ राय
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) मानवेन्द्रनाथ राय।

प्रश्न 83.
मानवेन्द्रनाथ राय का जन्म हुआ था –
(क) 1887 ई० में
(ख) 1890 ई० में
(ग) 1895 ई० में
(घ) 1900 ई० में
उत्तर :
(क) 1887 ई० में।

प्रश्न 84.
‘युगान्तर’ संगठन के संस्थापक थे –
(क) मानवेन्द्रनाथ राय
(ख) अरविन्द घोष
(ग) महात्मा गांधी
(घ) सुभाष चन्द्र बोस
उत्तर :
(क) मानवेन्द्रनाथ राय।

प्रश्न 85.
‘इण्डियन रिवोल्यूसनरी मुवमेंट’ किसने शुरू किया ?
(क) अरविन्द घोष
(ख) मानवेन्द्रनाथ राय
(ग) शिशिर कुमार घोष
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर :
(ख) मानवेन्द्रनाथ राय।

प्रश्न 86.
‘हिन्दू-जर्मन घड़यंत्र’ के संस्थापक थे –
(क) मानवेद्द्रनाथ राय
(ख) एस० मित्रा
(ग) अरविन्द् घोष
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) मानवेन्द्रनाथ राय।

प्रश्न 87.
‘रेडिकल ह्यूमनिज्म’ के लेखक थे –
(क) जोसेफ स्टालिन
(ख) मानबेन्द्र नाथ राय
(ग) रेडिकल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मानवेन्द्र नाथ राय।

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प्रश्न 88.
मानवेन्द्रनाथ का जन्म स्थान था ?
(क) अरबेलिया, 24 परगना, बंगाल
(ख) मेदनीपुर, बंगाल
(ग) मुर्शिदाबाद, बंगाल
(घ) मालदा, बंगाल
उत्तर :
(क) अरबेलिया 24 परगना, बंगाल।

प्रश्न 89.
मानवेन्द्रनाथ राय की मृत्यु हुई –
(क) 1953 ई० में
(ख) 1954 ई० में
(ग) 1955 ई० में
(घ) 1956 ई० में
उत्तर :
(ख) 1954 ई० में

प्रश्न 90.
चम्पारन सत्याग्रह कहाँ हुआ था –
(क) बिहार में
(ख) बंगाल में
(ग) उड़ीसा में
(घ) असम में
उत्तर :
(क) बिहार में।

प्रश्न 91.
‘साप्राज्यवाद-विरोधी संघ (League Against – Imperialissm) की स्थापना किसने किया ?
(क) बुसेल्स कांग्रेस ने
(ख) महात्मा गाँधी ने
(ग) मानवेन्द्रनाथ राय ने
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) बुसेल्स कांग्रेस ने।

प्रश्न 92.
अहमदाबाद सत्याग्रह कब हुआ –
(क) 1917 ई० में
(ख) 1918 ई० में
(ग) 1919 ई० में
(घ) 1920 ई० में
उत्तर :
(ख) 1918 ई० में

प्रश्न 93.
अहमदाबाद सत्याग्रह कहाँ हुआ था –
(क) अहमदाबाद, गुजरात
(ख) खेड़ा, गुजरात
(ग) बिहार
(घ) बंगाल्
उत्तर :
(क) अहमदाबाद, गुजरात।

प्रश्न 94.
‘छापेखाना ट्रामकम्पनी’ तथा कलकत्ता कॉरपोरेशन’ स्थित थी –
(क) कलकत्ता, बंगाल
(ख) पटना, बिह्हार
(ग) शिमला, हिमाचल प्रदेश
(घ) मेदनीपुर, बंगाल
उत्तर :
(क) कलकत्ता बंगाल।

प्रश्न 95.
नमक सत्याग्रह किसने शुरु किया ?
(क) गांधी जी ने
(ख) सुभाष चन्द्र बोस ने
(ग) मोतीलाल नेहरु ने
(घ) जवाहरलाल नेहरू ने
उत्तर :
(क) गांधी जी ने।

प्रश्न 96.
बारीसाल में ‘स्वदेश बांधव समिति’ का गठन किसने किया था ?
(क) रवीन्द्र नाथ ठाकुर
(ख) अश्विनी कुमार दत्त
(ग) राजा राममोहन राय
(घ) लाल लाजपत राय
उत्तर :
(ख) अश्विनी कुमार दत्त।

प्रश्न 97.
कांग्रेस ने किस घड़वंत्र में घड़यंत्रकारियों का समर्थन किया ?
(क) कानपुर षड़यंत्र
(ख) पेशावर षड़यंत्र
(ग) मेरठ षड़यंत्र
(घ) काकोरी षड़यंत्र
उत्तर :
(ग) मेरठ षड़यंत्र।

प्रश्न 98.
मेरठ घड़यंत्र मुकदमा कब चलाया गया ?
(क) 1929 ई० में
(ख) 1928 ई० में
(ग) 1930 ई० में
(घ) 1935 ई० में
उत्तर :
(क) 1929 ई० में।

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प्रश्न 99.
‘Communist Party of Maxico’ की स्थापना किसने किया था ?
(क) मानवेन्द्रनाथ राय ने
(ख) लेनिन ने
(ग) कार्ल मार्क्स ने
(घ) फ्रेडरिक ऐन्जेल्स ने
उत्तर :
(क) मानवेन्द्रनाथ राय ने।

प्रश्न 100.
बंग-भंग आन्दोलन हुआ था
(क) 1904 ई० में
(ख) 1905 ई० में
(ग) 1906 ई० में
(घ) 1907 ई० में
उत्तर :
(ख) 1905 ई० में

प्रश्न 101.
बंग-भंग विरोधी मजदूर आन्दोलन का कारण था –
(क) मावर्सवादी
(ख) मजदूर शोषण
(ग) राष्ट्रीयता की भावना
(घ) बीनी क्रान्ति
उत्तर :
(ग) राष्ट्रीयता की भावना

प्रश्न 102.
असहयोग आन्दोलन कब हुआ था ?
(क) 1910 ई० में
(ख) 1915 ई० में
(ग) 1920 ई० में
(घ) 1925 ई० में
उत्तर :
(ग) 1920 ई० में

प्रश्न 103.
अवध किसान सभा का गठन हुआ –
(क) 1920 ई० में
(ख) 1921 ई० में
(ग) 1922 ई० में
(घ) 1923 ई० में
उत्तर :
(क) 1920 ई० में

प्रश्न 104.
चौरीचौरा की घटना कब हुआ था ?
(क) 1920 ई० में
(ख) 1921 ई० में
(ग) 1922 ई० में
(घ) 1923 ई० में
उत्तर :
(ग) 1922 ई० में

प्रश्न 105.
बारदोली आन्दोलन कब हुआ था ?
(क) 1920 ई० में
(ख) 1925 ई० में
(ग) 1928 ई० में
(घ) 1930 ई० में
उत्तर :
(ग) 1928 ई० में

प्रश्न 106.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरूआत किस कानून को तोड़कर हुआ था –
(क) नमक कानून
(ख) लगान न देकर
(ग) इल्बर्ट बिल
(घ) रौलेट ऐक्ट
उत्तर :
(क) नमक कानून

प्रश्न 107.
पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव कांग्रेस ने कब पास किया ?
(क) 1929 ई० में
(ख) 1930 ई० में
(ग) 1932 ई० में
(घ) 1934 ई० में
उत्तर :
(क) 1929 ई० में

प्रश्न 108.
‘करो या मरो’ का नारा कब दिया गया ?
(क) 1942 ई० में
(ख) 1943 ई० में
(ग) 1944 ई० में
(घ) 1945 ई० में
उत्तर :
(क) 1942 ई० में

प्रश्न 109.
मातंगिनी हाजरा कब शहीद हुई ?
(क) 1905 ई० में
(ख) 1920 ई० में
(ग) 1930 ई० में
(घ) 1942 ई॰ में
उत्तर :
(घ) 1942 ई० में

प्रश्न 110.
कामगार किसान पार्टी किससे सम्बच्धित है –
(क) कांग्रेस
(ख) साम्यवादी
(ग) कांग्रेस सोसलिस्ट
(घ) किसी दल से नहीं
उत्तर :
(ख) साम्यवादी

प्रश्न 111.
एका आन्दोलन किसने चलाबा था ?
(क) वारदोली के किसानों ने
(ख) अवध के किसानों ने
(ग) चम्पारन के किसानों ने
(घ) तेलंगना के किसानों ने
उत्तर :
(ख) अवध के किसानों ने

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प्रश्न 112.
नमोशूद्र आन्द्रोलन कहाँ हुआ –
(क) बंगाल में
(ख) बिहार में
(ग) उड़ीसा में
(घ) महाराष्ट्र में
उत्तर :
(क) बंगाल में

प्रश्न 113.
अनुसूचित जाति परसंघ की स्थापना कब हुई ?
(क) 1924 ई० में
(ख) 1926 ई० में
(ग) 1927 ई० में
(घ) 1929 ई० में
उत्तर :
(क) 1924 ई० में

प्रश्न 114.
बंगाल में ‘शोक दिवस’ मनाया गया था –
(क) 16 अक्टूबर, 1905 ईं० में बंग-भंग हुआ था, जिसके कारण शोक दिवस पूरे बंगाल में मनाया गया।
(ख) पूरे बंगाल में महामारी आयी थी, उसके वजह से शोक दिवस मनाया गया।
(ग) पूरे बंगाल में दंगा हुआ था।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) 16 अक्टूबर, 1905 ई० में बंग-भंग हुआ था, जिसके कारण शोक दिवस पूरे बगाल में मनाया जाता है।

प्रश्न 115.
स्वदेशी एवं वहिष्कार आन्दोलन पूरे भारत में चलाया गया था :
(क) किसानों और मजदूरों के लिए।
(ख) अंग्रेजों को भगाने के लिए।
(ग) इगाल के विभाजन को रोकने एवं समाप्त करने के लिए।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) बंगाल के विभाजन को रोकने एवं समाप्त करने के लिए।

प्रश्न 116.
1964 ई० में साम्बवादीं दल में मतभेद हुआ :
(क) साम्यवादियों में दल बदल के कारण
(ख) 1962 ई० के भारत-चौन युद्ध के कारण
(ग) द्वितीय बिश्व युद्ध के कारण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) 1962 ई० के भारत-चीन युद्ध के कारण।

प्रश्न 117.
मजदूर किसान पार्टी (Workers and Peasants Party) का गठन :
(क) राजनीतिक दल के रूप में (मजदूर और किसानों के लिए)
(ख) राष्ट्रीयता के रूप में।
(ग) राष्ट्रीयता में मतभेद पैदा करने के लिए।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) राजनीतिक दल के रूप में (मजदूर और किसानों के लिए)।

प्रश्न 118.
अलवर रियासत में विद्रोह हुआ –
(क) 1932 ई० में
(ख) 1933 ई० में
(ग) 1934 ईं० में
(घ) 1935 ई० में
उत्तर :
(क) 1932 ई० में

प्रश्न 119.
कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना की गई –
(क) 1934 ई० में
(ख) 1935 ई० में
(ग) 1936 ई० में
(घ) 1937 ड़ई० में
उत्तर :
(क) 1934 ई० में

प्रश्न 120.
रौलेट एक्ट पास हुआ –
(क) 1981 ई० में
(ख) 1919 ई० में
(ग) 1920 ई० में
(घ) 1921 ई० में
उत्तर :
(ख) 1919 ई० में

प्रश्न 121.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू हुआ –
(क) 22 मार्व 1928 ई० में
(ख) 12 मार्य 1930 ई में
(ग) 12 मार्च 1932 ई० में
(घ) 12 मार्च 1934 ई में
उत्तर :
(ख) 12 मार्य 1930 ई० में

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प्रश्न 122.
8 अगस्त 1942 को किसने भारत छोड़ो आन्दोलन पास करवाया –
(क) मेला अनुत क्ताम आजाद
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) सरहदार पटेल
(घ) गाँधीजी
उत्तर :
(ख) जबाहरलाल नेहरू

प्रश्न 123.
कब एक अन्य दल-साम्यवादी मार्क्सवादी दल का निर्माण हुआ –
(क) 1962 इ०० में
(ख) 1964 ई० में
(ग) 1966 ई० में
(ख) 1968 ई० में
उत्तर :
(ग) 1966 ई० में

प्रश्न 124.
कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना किसकी अध्यक्षता में हुई –
(क) लाला लाजपत राय (ख) एम० एन० राय
(ग) आचार्य नरेन्द्र देव
(घ) जवाहरलाल नेहरु
उत्तर :
(ग) आचार्य नरेन्द्र देव

प्रश्न 125.
कांग्रेस की स्थापना किसने की ?
(क) ए०ओ०ह्यूम
(ख) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
(ग) उमेशचन्द्र बनर्जी
(घ) दादाभाई नैरोजी
उत्तर :
(क) ए०ओ०ह्यूम

प्रश्न 126.
लाला लाजपतराय किसान आन्दोलन से कब जुड़े ?
(क) 1879 ई० में
(ख) 1907 ई०में
(ग) 1915 ई० में
(घ) 1916 ई० में
उत्तर :
(ख) 1907 ई०में

प्रश्न 127.
वर्ली आन्दोलन हुआ था –
(क) 1945 ई० में
(ख) 1946 ई० में
(ग) 1948 ई० में
(घ) 1949 ई० में
उत्तर :
(क) 1945 ई० में

प्रश्न 128.
बंगाल का विभाजन किस वायसराय ने किया था ?
(क) लॉर्ड कैनिंग
(ख) लॉर्ड डफरिन
(ग) लॉर्ड कर्जन
(घ) लॉर्ड रिपन
उत्तर :
(ग) लॉर्ड कर्जन

प्रश्न 129.
दरभंगा का किसान आन्दोलन आरम्भ हुआ था ?
(क) 1919 ई०
(ख) 1921 ई०
(ग) 1923 ई०
(घ) 1924 ई०
उत्तर :
(क) 1919 ई०

प्रश्न 130.
उत्तर प्रदेश किसान सभा की स्थापना किसने की ?
(क) मदनमोहन मालवीय (ख) स्वामी विद्यानन्द
(ग) गणेश शंकर विद्यार्थी
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर :
(क) मदनमोहन मालवीय

प्रश्न 131.
‘एका’ आन्दोलन कहाँ हुआ था ?
(क) मद्रास
(ख) महाराष्ट्र
(ग) अवध
(घ) बिहार
उत्तर :
(ग) अवध

प्रश्न 132.
बारदोली आन्दोलन का सबसे बड़ा नेता कौन था ?
(क) गाँधी जी
(ख) जवाहर लाल नेहरू
(ग) सरदार वल्लभ भाई पटेल
(घ) राजेन्द्र प्रसाद
उत्तर :
(ग) सरदार वल्लभ भाई पटेल

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 mark)

1. ‘भारत की कम्युनिस्ट पार्टी’ के संस्थापक ………..थे।
उत्तर : मानवेन्द्रनाथ राय।

2. तेभागा आन्दोलन ………..हुआ था।
उत्तर : सन् 1946 में।

3. ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ की स्थापना ………..ने किया था।
उत्तर : सुभाषचन्द्र बोस।

4. अगस्त प्रस्ताव ………..को पास किया गया।
उत्तर : 8 अगस्त 1940 ई०।

5. बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा ………..की।
उत्तर : लार्ड कर्जन ने ।

6. खेड़ा श्रमिक सत्याग्रह ………..के नाम से भी जाना जाता था।
उत्तर : कर नहीं आन्दोलन (No Taxation Movement)!

7. सन् 1946 में पुन्नप्रा-भायालार संघर्ष ………..हुआ था।
उत्तर : त्रावणकोर (केरल) में।

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8. अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन (All India Trade Union) की स्थापना सन् ………… में हुआ था।
उत्तर : 1920 ई०।

9. भारत छोड़ो आन्दोलन सन् …………. में हुआ था।
उत्तर : 1942 ई०।

10. वर्ली संघर्ष ………..हुआ था।
उत्तर : बम्बई (मुम्बई) में।

11. ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ की स्थापना ………..में हुआ था।
उत्तर : सन् 1939।

12. पेशावर षड़्यंत्र मामला ………..में आरम्भ हुआ था।
उत्तर : सन् 1924।

13. बर्लिन कमेटी की स्थापना ………..में हुई थी।
उत्तर : सन् 1914।

14. ‘इंकलाब’ पत्रिका के सम्पादक ………..थे।
उत्तर : गुलाम हुसैन।

15. ‘सोशलिस्ट’ पत्रिका के सम्पादक ………..थे।
उत्तर : श्रीपाद अमृत डांगे।

16. ‘नवयुग’ पत्रिका के सम्पादक ………..थे।
उत्तर : मुजफ्फर अहमद।

17. गिरनी कामगार यूनियन का गठन ………..में हुआ था।
उत्तर : सन् 1928 ।

18. बिहार सोशलिस्ट पार्टी का गठन ………..में हुआ था।
उत्तर : सन् 1931

19. बिहार सोशलिस्ट पार्टी का गठन ………..ने किया था।
उत्तर : जय प्रकाश नारायण।

20. ‘भारत में श्रमिक आन्दोलन’ (The Labour Movement in India) नामक पुस्तक की रचना ………..ने किया था।
उत्तर : आर. के. दास (R. K. Das)

21. देश के विभाजन के समय कम्यूनिस्टों ने ………..की मांग का पूरा-पूरा समर्थन किया था।
उत्तर : पाकिस्तान।

22. कम्यूनिस्टों ने क्रिप्स प्रस्ताव का ………..किया था।
उत्तर : समर्थन।

23. फिलिप स्पैट 1926 ई० में भारत आया और उसने कृषक और ………..दलों को संगठित किया।
उत्तर : कामगार।

24. ………..को बूढ़ी गाँधी कहा जाता है।
उत्तर : मातंगिनी हाजरा

25. मद्रास में कम्यूनिस्ट ग्रुप के नेता ………..थे।
उत्तर : मायापुरम।

26. ………..ने गाँधीज़ी के नेतृत्व को ‘छोटा-बुर्जुआ-राष्ट्रवादी-नेतृत्व’ कहा था।
उत्तर : कम्यूनिस्टों।

27. मेरठ षड़्यंत्र केस का मुकदमा लड़ने वाले प्रमुख कांग्रेसी नेता ………..थे।
उत्तर : जवाहरलाल नेहरू।

28. ………..भाषा में ‘दीनबंधु’ पत्रिका का प्रकाशन भी किया गया।
उत्तर : मराठी।

29. एम. एन. राय द्वारा लिखित पुस्तक ………..है।
उत्तर : इण्डियन ट्रांजिसन (Indian Transition)।

30. किसान सभा का दूसरा अखिल भारतीय अधिवेशन महाराष्ट के फैजपुर गाँव में सन् ………… में हुआ।
उत्तर : 1936 ई० में।

31. बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व ………..ने किया था।
उत्तर : सरदार वल्लभ भाई पटेल।

32. 1928 ई० में पंजीकृत यूनियनों की संख्या केवल ………..थी।
उत्तर : 29

33. पुनप्रा-वायलार आन्द्रोलन ………..ई० में हुआ था।
उत्तर : 1946 ई० में।

34. बाम्बे मिल हैन्ड्स एसोसिएशन की स्थापना ………..ने की।
उत्तर : एन० एम० लोखंडे।

35. तेलंगाना किसान आन्दोलन के नेता ………..थे।
उत्तर : पी सुन्दरैया, रवि नारायण रेइडी।

36. ……….. से पेश हुए।
उत्तर : मेरठ।

37. ………..ने गाँधीजी के नेतृत्व को छोटा-बुर्जुआ-राष्ट्रवादी नेतृत्व नाम दिया।
उत्तर : साम्यवादियों।

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38. ………..को महात्मा गाँधी ने साम्राज्यवादी युद्ध घोषित कर दिया।
उत्तर : 8 अगस्त 1942 ई०।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 mark)

1. बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 ई० को कलकत्ता के टाऊन हॉल (Trueown Hall) में स्वदेशी आन्दोलन की घोषणा की गयी।
उत्तर : True

2. अहमदाबाद सत्याग्रह गाँधीजी ने भारतीय मिल मालिक और गैरसरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध किया था।
उत्तर : True

3. रॉलेट ऐक्ट जालियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत आन्दोलन के उत्तर में गाँधीजी ने 1 अगस्त 1920 ई० को असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ किया था।
उत्तर : True

4. सविनय अवश्ञा आन्दोलन अंतिम रूष से सन् 1935 में वापस लिया गया।
उत्तर : False

5. बंग-भंग विरोधी आन्दोलन असहयोग आंदोलन सविनय अवज्ञा आन्दोलन और भारत छोड़ो आंदोलन का संबंध किसान और मजदूर आंदोलनों से नहीं था।
उत्तर : False

6. भारत छोड़ो आंदोलन का संबंध महात्मा गाँधी से नहीं था।
उत्तर : False

7. अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (Internation Labour Organisation) का संबंध संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nation Organisation) से है।
उत्तर : True

8. रौलेट एक्ट को काला कानून के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : True

9. वामपंधियों ने श्रमिक आन्दोलन का समर्थन किया।
उत्तर : True

10. भारत में कम्युनिष्टों पर पेशावर षड़यंत्र केस नहीं चलाया गया।
उत्तर : False

11. पोस्टल यूनयिन की स्थापना मद्रास में हुआ था।
उत्तर : False

12. कृषक या किसान प्रजा दल की स्थापना सन् 1929 में हुआ।
उत्तर : True

13. मोपला विद्रोह सन् 1920 से लेकर 1922 ई० तक चला।
उत्तर : True

14. दरभंगा आन्दोलन सन् 1919 में शुरू हुआ था।
उत्तर : True

15. मेवाड़ का किसान आन्दोलन का प्रमुख केन्द्र राजस्थान विशेषकर मेवाड़ राज्य था।
उत्तर : True

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16. 1931 ई० में पंजाब के किसानों ने अपना सैनिक दल स्थापित किया ?
उत्तर :  True

17. बंगाल विभाजन में बंगालियों के लिए ‘बंदेमातरम्’ प्रेरणा का माध्यम रहा।
उत्तर : True

18. सन् 1936 में में अखिल भारतीय किसान सम्मेलन लखनऊ में आयोजित की गयी।
उत्तर : True

19. 1928 ई० में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने भारत में इण्डिपेन्डेन्ट सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ इण्डया की स्थापना की।
उत्तर : True

20. अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना पेरिस शांति सम्मेलन में की गयी।
उत्तर : True

21. असहयोग आन्दोलन में किसानों ने भाग नहीं लिया।
उत्तर : False

22. सविनय अवज्ञा आन्दोलन में मजदूरों ने भाग नहीं लिया।
उत्तर : False

23. महात्मा गाँधी का आन्दोलन सत्य और अहिंसा पर आधारित था।
उत्तर : True

24. बंग-भंग आन्दोलन में किसानों ने जमकर भाग लिया।
उत्तर : False

25. चौरी-चौरा के थाने में किसानों ने आग लगायी थी।
उत्तर : True

26. 1928 ई० में अखिल भारतीय कामगर तथा कृषक दल अस्तित्व में आया।
उत्तर : True

27. वामपंथियों ने द्वितीय विश्वयुद्ध में राष्ट्रवादी आन्दोलन का समर्थन किया।
उत्तर : False

28. द्वितीय विश्वयुद्ध के समय से ही वामपंथी रूस की कम्यूनिस्ट पार्टी से संचालित होने लगे।
उत्तर : True

निम्नलिखित कथनों की सही व्याख्या चुनकर लिखिए : (1 mark)

प्रश्न 1.
कथन : बंगभंग विरोघी आदोलन में श्रमिक-कृषकों के लिए कोई कर्मसूची नहीं थी।
व्याख्या 1 : श्रमिक-कृषक इस आन्दोलन के विरोधी थे।
व्याख्या 2 : ब्रिटिश सरकार श्रमिक-किसान आन्दोलन पर प्रतिबन्ध लगा दी शी।
व्याख्या 3 : बगभंग विरोधी आन्दोलन मूल रूप से मध्यवर्ग का आन्दोलन था।
उत्तर : व्याख्या 3 : बंगभंग विरोधी आन्दोलन मूल रूप से मध्यवर्ग का आन्दोलन था।

प्रश्न 2.
कथन : गाँधीजी जमींदारों के विरुद्ध कृषक आन्दोलन का समर्थन नहीं किबे।
व्याख्या 1 : गाँधीजी जमींदार वर्ग के प्रतिनिधि थे।
व्याख्या 2 : गाँधीजी हिंसक आन्दोलन के विरोधी थे।
व्याख्या 3 : गाँधीजी वर्ग संघर्ष की अपेक्षा वर्ग एकता में विश्वास करते थे।
उत्तर :
व्याख्या 3 : गाँधीजी वर्ग संघर्ष की अपेक्षा वर्ग एकता में विश्वास करते थे।

प्रश्न 3.
कथन : तेभागा आंदोलन का नारा था “धान को अपने खलिहान में जमा करो”
व्याख्या 1 : इस आंदोलन का नेतृत्व किसानों ने किया।
व्याख्या 2 : इस आदोलन का नेतृत्व मजदूरों ने किया।
व्याख्या 3 : इस आंदोलन का नेतृत्व मजदूरों ने किया।
उत्तर :
व्याख्या 1 : इस आंदोलन का नेतृत्व किसानों ने किया।

प्रश्न 4.
कथन : गाँधीजी ने ऐतिहासिक दाण्डी यात्रा की शुरूआत साबरमती आश्रम से की थी।
व्याख्या 1 : सविनय अवज्ञा आंदोलन को शुरू करने के लिए।
व्याख्या 2 : नमक सत्याग्रह को शुरु करने के लिए।
व्याख्या 3 : सत्याप्रह के आदर्श को लोकप्रिय बनाने के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 2 : नमक सत्याग्रह को शुरु करने के लिए।

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प्रश्न 5.
कथन : भारत में छात्र आंदोलन का संगठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तीव्र गति से हुआ।
व्याख्या 1 : क्योकि वे महात्मा गाँधी से प्रभावित थे।
व्याख्या 2 : क्योंकि वे राजनेताओं से प्रभावित थे।
व्याख्या 3 : क्योंकि वे अपने नेताओं के द्वारा स्थापित छात्र संगठन से प्रभावित थे।
उत्तर :
व्याख्या 3 : क्योंकि वे अपने नेताओं के द्वारा स्थापित छात्र संगठन से प्रभावित थे।

प्रश्न 6.
कथन : 1926 ई० से 1928 ई० के बीच बंगाल, बम्बई, पंजाब तथा संयुक्त प्रांतों में बड़ी संख्या में किसान पार्टियों की उत्पत्ति हुई –
व्याख्या 1 : किसानों ने अच्छे ढंग से अपने को संगठित करना शुरू किया।
व्याख्या 2 : 1926 ई० से 1928 ई० के बीच कई हड़तालें हुई।
व्याख्या 3 : 1926 ई० से किसानो ने कई पार्टियाँ बनाई।
उत्तर :
व्याख्या 1 : किसानों ने अच्छे ढंग से अपने को संगठित करना शुरु किया।

प्रश्न 7.
कथन : सन् 1942 के बाद मज़ूर आन्दोलन को कम्युनिस्ट पार्टी ने समर्थन नहीं दिया।
व्याख्या 1 : कम्यूनिस्ट पार्टी की लोकम्रियता कम थी।
व्याख्या 2 : विश्श की सारी कम्युनिस्ट पार्टियाँ रूस के इशारे पर चलती थी।
व्याख्या 3 : द्वितीय विश्चयुद्ध होने के कारण।
उत्तर :
व्याख्या 2 : विश्व की सारी कम्युनिस्ट पार्टियाँ रूस के इशारे पर चलती थी।

प्रश्न 8.
कथन : 1928 ई० के बाद मजदूर आन्दोलन शक्तिशाली हो गया –
व्याख्या 1: 1927 ई० में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का अधिवेशन कानपुर में हुआ।
व्याख्या 2 : मजदूरों ने हड़ताल और प्रदर्शनों पर उ्यादा जोर दिया।
व्याख्या 3 : कम्युनिस्टों का प्रभाव मजदूरों पर पड़ने के कारण।
उत्तर :
व्याख्या 2 : मजदूरों ने हड़ताल और प्रदर्शनों पर ज्यादा जोर दिया।

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प्रश्न 9.
कथन : 1935 ई० के बाद श्रमिक हड़तालों की संख्या बढ़ी –
व्याख्या 1: 1935 ई० में ‘रेड ट्रेड यूनियन सेण्टर, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस में शामिल हो गया।
व्याख्या 2 : संगठन के सदस्यों ने हड़तालों पर ज्यादा जोर दिया।
व्याख्या 3: 1937 ई० में आम हड़ताल हुई।
उत्तर :
व्याख्या 1: 1935 ई० में ‘रेड ट्रेड यूनियन सेण्टर, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस में शामिल हो गया।

प्रश्न 10.
कथन : 1964 ई० में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया में मतभेद हुए –
व्याख्या 1: 1962 ई० के भारत चीन युद्ध के कारण।
व्याख्या 2 : साम्यवादियों में नीतियों को लेकर अन्तर बढ़ते गये।
व्याख्या 3 : साम्यवादी मार्क्सवादी दल सर्वाधिक प्रभावशाली था।
उत्तर :
व्याख्या 2 : साम्यवादियों में नीतियों को लेकर अन्तर बढ़ते गये।

प्रश्न 11.
कथन : ग्रेट इण्डियन पेनिन्सुला रेलवे में हड़ताल हुई थी।
व्याख्या 1 : यह हड़ताल मजदूरी, काम के घण्टों तथा अन्य सेवा शर्तो में सुधार के लिए हुआ था।
व्याख्या 2 : अंग्रेज भारतीय को ट्रेन पर चढ़ने नहीं देते थे, इसलिए हुआ था।
व्याख्या 3 : भारतीय मजदूरों को अपशब्द कहते थे, इसलिए हुआ था।
उत्तर :
व्याख्या 1 : यह हड़ताल मजदूरी, काम के घण्टों तथा अन्य सेवा शर्तों में सुधार के लिए हुआ था।

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सुभाषचन्द्र बोस (a) सन् 1918 में।
(ii) सरदार वल्लभ भाई पटेल (b) भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के संस्थापक।
(iii) उत्तर प्रदेश किसान सभा का गठन (c) तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा।
(iv) ए०ओ० ह्यूम (d) सन् 1920 में।
(v) टेक्सटाइल लेबर एसोसिएसन की स्थापना (e) ‘कर’ मत दो।

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सुभाषचन्द्र बोस (c) तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा।
(ii) सरदार वल्लभ भाई पटेल (e) ‘कर’ मत दो।
(iii) उत्तर प्रदेश किसान सभा का गठन (a) सन् 1918 में।
(iv) ए०ओ० ह्यूम (b) भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के संस्थापक।
(v) टेक्सटाइल लेबर एसोसिएसन की स्थापना (d) सन् 1920 में।

प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) एका आन्दोलन की शुरूआत (a) महात्मा गाँधी।
(ii) भारत छोड़ो आन्दोलन (b) सन् 1929 में।
(iii) चौरी-चौरा की घटना (c) गोरखपुर जिला, उत्तर प्रदेश।
(iv) स्वदेशी आन्दोलन की शुरूआत (d) अवध में।
(v) बिहार किसान सभा का गठन (e) सन् 1905 में।

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) एका आन्दोलन की शुरूआत (d) अवध में।
(ii) भारत छोड़ो आन्दोलन (a) महात्मा गाँधी।
(iii) चौरी-चौरा की घटना (c) गोरखपुर जिला, उत्तर प्रदेश।
(iv) स्वदेशी आन्दोलन की शुरूआत (e) सन् 1905 में।
(v) बिहार किसान सभा का गठन (b) सन् 1929 में।

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प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बंगाल किसान लीग का गठन (a) 1920 ई०
(ii) कांग्रेस साम्यवादी दल की स्थापना (b) 1936 ई०
(iii) अखिल भारतीय किसान सभा का गठन (c) 1931 ई०
(iv) इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना (d) 1934 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बंगाल किसान लीग का गठन (c) 1931 ई०
(ii) कांग्रेस साम्यवादी दल की स्थापना (d) 1934 ई०
(iii) अखिल भारतीय किसान सभा का गठन (b) 1936 ई०
(iv) इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना (a) 1920 ई०

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) असहयोग आन्दोलन (a) 1932 ई०
(ii) बंग-भंग आन्दोलन (b) 1930 ई०
(iii) सविनय अवज्ञा आन्दोलन (c) 1905 ई०
(iv) पूना समझौता (d) 1920 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) असहयोग आन्दोलन (d) 1920 ई०
(ii) बंग-भंग आन्दोलन (c) 1905 ई०
(iii) सविनय अवज्ञा आन्दोलन (b) 1930 ई०
(iv) पूना समझौता (a) 1932 ई०

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1885 ई० (a) भारत छोड़ो आन्दोलन
(ii) 1920 ई० (b) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(iii) 1930 ई० (c) कांग्रेस की स्थापना
(iv) 1942 ई० (d) असहयोग आन्दोलन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1885 ई० (c) कांग्रेस की स्थापना
(ii) 1920 ई० (d) असहयोग आन्दोलन
(iii) 1930 ई० (b) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(iv) 1942 ई० (a) भारत छोड़ो आन्दोलन

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) अश्विनी कुमार दत्त (a) वल्लभ भाई पटेल
(ii) बारदोली आन्दोलन (b) कमरय्या
(iii) बाबा रामचन्द्र (c) किसान नेता
(iv) तेलंगाना किसान आन्दोल (d) स्वदेश बांधव समिति (बारीसाल)

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) अश्विनी कुमार दत्त (d) स्वदेश बांधव समिति (बारीसाल)
(ii) बारदोली आन्दोलन (a) वल्लभ भाई पटेल
(iii) बाबा रामचन्द्र (c) किसान नेता
(iv) तेलंगाना किसान आन्दोल (b) कमरय्या

 

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 8 उत्तर-औपनिवेशिक भारत बीसवीं शताब्दी का द्वितीयार्द्ध

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उत्तर-औपनिवेशिक भारत बीसवीं शताब्दी का द्वितीयार्द्ध Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
जो देशीय राज्य जनता के मतदान के माध्यम से भारत संघ में युक्त हुआ था वह है –
(क) काश्मीर
(ख) हैदराबाद
(ग) जूनागढ़
(घ) जयपुर
उत्तर :
(ग) जूनागढ़

प्रश्न 2.
भाषा आधारित गुजरात राज्य की स्थापना हुई थी –
(क) 1953 ई० में
(ख) 1956 ई० में
(ग) 1960 ई० में
(घ) 1965 ई० में
उत्तर :
(ग) 1960 ई० में

प्रश्न 3.
स्वतंत्र भाषा पर आधारित राज्य आन्ध्रप्रदेश किस वर्ष बना –
(क) 1947 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1953 ई० में
(घ) 1955 ई० में
उत्तर :
(ग) 1953 ई० में

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प्रश्न 4.
गोवा भारत का एक अंग बना –
(क) 1947 ई० में
(ख) 1956 ई० में
(ग) 1961 ई० में
(घ) 1971 ई० में
उत्तर :
(ग) 1961 ई० में

प्रश्न 5.
‘ए ट्रेन दू पाकिस्तान’ के लेखक हैं –
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) वी. पी. मेनन
(ग) खुशवन्त सिंह
(घ) सलमान रुश्दी
उत्तर :
(ग) खुशवन्त सिंह

प्रश्न 6.
भारत का ‘लौहपुरुष’ किसे कहा जाता है ?
(क) महात्मा गांधी
(ख) सरदार बल्लभ भाई पटेल
(ग) मुहम्मद अली जिन्ना
(घ) राजेन्द्र प्रसाद
उत्तर :
(ख) सरदार बल्लभ भाई पटेल

प्रश्न 7.
राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन हुआ था :
(क) 1947 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1953 ई० में
(घ) 1956 ई० में
उत्तर :
(ग) 1953 ई० में।

प्रश्न 8.
निम्नोक्त में से कौन एक रियासत नहीं था :
(क) बम्बई
(ख) भोपाल
(ग) हैदराबाद
उत्तर :
(क) बम्बई।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन देशी रियासत नहीं थी ?
(क) कुचबिहार
(ख) बारासात
(ग) मयुरभंज
(घ) ट्रावनकोर
उत्तर :
(ख) बारासात

प्रश्न 10.
इनमें से किसने देशी रियासतों को सफलतापूर्वक भारतीय संघ में शामिल किया था ?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) सरदार वल्लभ भाई पटेल
(ग) लार्ड माउण्ट बेटन
(घ) महात्मा गांधी
उत्तर :
(ख) सरदार वल्लभ भाई पटेल

प्रश्न 11.
स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व भारत में कुल देशी रियासतों की संख्या थी –
(क) 565
(ख) 580
(ग) 611
(घ) 661
उत्तर :
(क) 565
(घ) जयपुर

प्रश्न 12.
भारतीय राज्य पुर्नगठन अधिनियम पारित हुआ था –
(क) 1951 ई० में
(ख) 1952 ई० में
(ग) 1953 ई० में
(घ) 1956 ई० में
उत्तर :
(घ) 1956 ई० में

प्रश्न 13.
स्वतंत्र भारत में भाषा के आधार पर गठित भारत का पहला राज्य था –
(क) मध्य प्रदेश
(ख) आन्ध प्रदेश
(ग) असम
(घ) पंजाब
उत्तर :
(ख) आन्ध्र प्रदेश

प्रश्न 14.
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय इनमें से कौन से देशी रियासत भारतीय संघ में शामिल नहीं थे ?
(क) हैदराबाद
(ख) जम्मू-काश्मीर
(ग) जूनागढ़
(घ) उक्त सभी
उत्तर :
(घ) उक्त सभी

प्रश्न 15.
शरणार्थी समस्या सुलझाने के लिए किसके बीच सन्धि हस्ताक्षरित हुई थी।
(क) नेहरू – जिन्ना
(ख) नेहरू – लियाकत अली
(ग) पटेल – लार्ड माउण्ट बेटन
(घ) गाँधी – मुहम्मद अली जिन्ना
उत्तर :
(ख) नेहरू – लियाकत अली

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प्रश्न 16.
पुर्तगाली उपनिवेश गोवा, दमन और दीव भारतीय संघ में कब शामिल हुए –
(क) 1947 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1952 ई० में
(घ) 1961 ई० में
उत्तर :
(घ) 1961 ई० में

प्रश्न 17.
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण करने वाली रेखा को कहते हैं –
(क) रेडक्लिफ
(ख) मैकमोहन
(ग) सिडनी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रेडक्लिफ

प्रश्न 18.
भाषा संबन्धित उपबन्धों का उल्लेख भारतीय संविधान की किस अनुसूची में है ?
(क) प्रथम अनुसूची
(ख) तृतीय अनुसूची
(ग) पाँचवी अनुसूची
(घ) आठवी अनुसूची
उत्तर :
(घ) आठवी अनुसूची

प्रश्न 19.
अब तक कितने भारतीय भाषाओं को सरकारी भाषा का दर्जा प्राप्त है ?
(क) 15
(ख) 22
(ग) 25
(घ) 27
उत्तर :
(ख) 22

प्रश्न 20.
आन्श्र-प्रदेश के विभाजन से नवनिर्मित राज्य है –
(क) तेलांगाना
(ख) हैदराबाद
(ग) विजयवाड़ा
(घ) गोलकुण्डा
उत्तर :
(क) तेलांगाना

प्रश्न 21.
भारतीय संसद द्वारा सरकारी भाषा अधिनियम पारित हुआ था –
(क) 1950 ई०
(ख) 1960 ई०
(ग) 1963 ई०
(घ) 1975 ई०
उत्तर :
(ग) 1963 ई०

प्रश्न 22.
‘द ऑपरेशन विजय’ जे० एन० चौधरी के नूतृत्व में मे हुआ था।
(क) गोवा
(ख) कश्मीर
(ग) हैदराबाद
(घ) जूनागढ़
उत्तर :
(क) गोवा।

प्रश्न 23.
हरी सिंह राजा थे :
(क) हैदराबाद का
(ख) कश्मीर का
(ग) पंजाब का
(घ) आसाम का
उत्तर :
(ख) कश्मीर का।

प्रश्न 24.
एकहतरे डायरी (Ekatarer Diary) ………. के द्वारा लिखा गया।
(क) बी० के० गुप्ता
(ख) सेलिना हुसैन
(ग) रेनुका रोंय
(घ) बेगम सुफिया कमाल
उत्तर :
(घ) बेगम सुफिया कमाल।

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प्रश्न 25.
कश्मीर के महाराजा ने कश्मीर को भारत में विलय करने की घोषणा की –
(क) 26 अक्टूबर 1946 ई०
(ख) 26 अक्टूबर 1947 ई०
(ग) 26 अक्टूबर 1948 ई०
(घ) 26 अक्टूबर 1949 ई०
उत्तर :
(ग) 26 अक्ट्बर 1948 ई०।

प्रश्न 26.
राज्य पुनर्गठन आयोग के सभापति थे –
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) के० एम० मुंशी
(ग) फजल अली
(घ) एम० के० दास
उत्तर :
(ग) फजल अली।

प्रश्न 27.
हैदराबाद के प्रशासक को के नाम से जाना जाता था।
(क) राजा
(ख) सुल्तान
(ग) निजाम
(घ) नवाब
उत्तर :
(ग) निजाम।

प्रश्न 28.
भारत में किस अवधि को नेहरू काल के रूप में जाना जाता है ?
(क) 1947-50 ई०
(ख) 1947-57 ई०
(ग) 1947-60 ई०
(घ) 1947-64 ई०
उत्तर :
(घ) 1947-64 ई०

प्रश्न 29.
भारत में दलित आन्दोलन के नेताओं में से एक थे :
(क) डा० बी० आर० अम्द्दिकराख) राजेन्द्र प्रसाद
(ग) डा॰ राधाकृष्णन
(घ) जवाहरलाल नेहरू
उत्तर :
(क) डा० बी० आर० अम्बेदकर।

प्रश्न 30.
उस राष्ट्रीय नेता का नाम बताओ जिसने सफलतापूर्वक देशी रियासतों को भारतीय संघ में विलय किया :
(क) महात्मा गांधी
(ख) नेहरू
(ग) क्लीमेंट एटली
(घ) सरदार वल्लभ भाई पटेल
उत्तर :
(घ) सरदार वल्लभ भाई पटेल।

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प्रश्न 31.
‘पाथवे दू पाकिस्तान’ पुस्तक के लेखक थे :
(क) खुशवन्त सिंह
(ख) प्रफुल्ल चक्रवर्ती
(ग) चौधुरी खलिकुज्जामन
(घ) चौधरी रहमत अली
उत्तर :
(ग) चौधुरी खलिकुज्जामन।

प्रश्न 32.
पश्चिम बंगाल के प्रथम मुख्यमंत्री थे –
(क) विधानचन्द्र रॉय
(ख) प्रफुल्चन्द्र घोष
(ग) प्रफुल्लचन्द्र सेन
(घ) ज्योति बसु
उत्तर :
(क) विधानचन्द्र रॉय।

प्रश्न 33.
भारत प्रजातंत्र तथा गणराज्य घोषित किया गया –
(क) 26 नवम्बर 1949 को
(ख) 26 जुलाई 1950 को
(ग) 23 जनवरी 1951 को
(घ) 26 जनवरी 1950 को
उत्तर :
(घ) 26 जनवरी 1950 को।

प्रश्न 34.
“इण्डिया विन्स फ्रीडम” किसके द्वारा रचित था ?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) बिपिन चन्द्र पाल
(ग) खुशवन्त सिंह
(घ) अब्दुल कलाम आजाद
उत्तर :
(घ) अब्दुल कलाम आजाद।

प्रश्न 35.
हैदराबाद भारत में सम्मिलित हुआ था –
(क) 1905 ई०
(ख) 1947 ईं
(ग) 1948 ई०
(घ) 1949 ई०
उत्तर :
(घ) 1949 ई०।

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प्रश्न 36.
राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन ……….. के द्वारा हुआ था।
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) एम. एल. नेहरू
(ग) राजेन्द्र प्रसाद
(घ) वल्लभ भाई पटेल
उत्तर :
(क) जवाहरलाल नेहरू।

प्रश्न 37.
भारत की संघीय क्षेत्र में जूनागढ़ शामिल हुआ :
(क) जनमत के माध्यम से
(ख) संधि के जरिये
(ग) आंदोलन के माध्यम से
(घ) लिखित प्रतीज्ञा से
उत्तर :
(क) जनमत के माध्यम से।

प्रश्न 38.
भारतीय संविधान में मूल भाषा का सम्मान प्राप्त है –
(क) 12 भाषाओं को
(ख) 14 भाषाओं को
(ग) 16 भाषाओं को
(घ) 18 भाषाओं को
उत्तर :
(ख) 14 भाषाओं को।

प्रश्न 39.
भारत की राष्ट्रभाषा है :
(क) अंग्रेजी
(ख) उर्दू
(ग) हिन्दी
(घ) बंगला
उत्तर :
(ग) हिन्दी।

प्रश्न 40.
भारत में दलित का अर्थ है :
(क) पिछड़े वर्ग के लोग
(ख) उच्च वर्ग के लोग
(ग) सर्वहारा वर्ग
(घ) किसान और मजदूर
उत्तर :
(क) पिछड़े वर्ग के लोग।

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प्रश्न 41.
पूना समझौता हस्ताक्षरित हुआ था :
(क) 1910 ई० में
(ख) 1921 ई० में
(ग) 1932 ई० में
(घ) 1938 ई० में
उत्तर :
(ग) 1932 ई० में।

प्रश्न 42.
भारत की संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय भाषाओं की संख्या है :
(क) 18
(ख) 20
(ग) 22
(d) 24
उत्तर :
(ग) 22

प्रश्न 43.
‘सभ्यतार संकट’ पुस्तक के लेखक हैं :
(क) बंकिम चन्द्र चट्टृोाध्याय
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) आशापूर्णा देवी
(घ) नारायण गंगोपाध्याय
उत्तर :
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 44.
आन्ध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ था –
(क) 1952 ई० में
(ख) 1953 ई० में
(ग) 1956 ई० में
(घ) 1960 ई० में
उत्तर :
(ख) 1953 ई० में।

प्रश्न 45.
भारतीय संघ में जूनागढ़ शामिल हुआ :
(क) 1948 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1951 ई० में
(घ) 1952 ई० में
उत्तर :
(क) 1948 ई० में।

प्रश्न 46.
भारत का विशालतम स्वतंत्र देशी रियासत थी –
(क) हैदराबाद
(ख) गोवा
(ग) काश्मीर
(घ) मैसूर
उत्तर :
(क) हैदराबाद।

प्रश्न 47.
‘प्रांतिक मानव’ पुस्तक के लेखक थे :
(क) खुशवन्त सिंह
(ख) प्रफुल्ल चक्रवर्ती
(ग) विनय राय
(घ) रहमत अली
उत्तर :
(ख) प्रफुल्ल चक्रवर्ती।

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प्रश्न 48.
उद्वास्तु नामक पुस्तक किसने लिखा ?
(क) अतीन बंद्योपाध्याय
(ख) हिरणमय बंद्योपाध्याय
(ग) शंखा घोष
(घ) दक्षिणारंजन बसु
उत्तर :
(ख) हिरणमय बंद्योपाध्याय।

प्रश्न 49.
बंगाली शरणार्थी समस्या पर आधारित कम्युनिष्ट नेत्री मणिकुन्तला सेन की लिखी पुस्तक का नाम है –
(क) स्वाधीनता का स्वाद
(ख) एपार गंगा उपार गंगा
(ग) से दिनेर कथा
(घ) द मार्जिनल मैन
उत्तर :
(ग) से दिनेर कथा।

प्रश्न 50.
पंजाब में ऊँट की सवारी गीत क्या कहलाती है ?
(क) टप्पा
(ख) ठुमरी
(ग) भटियाली
(घ) गज़ल
उत्तर :
(क) टप्पा।

प्रश्न 51.
‘भारतीय स्वतंत्रता विधेयक’ अंग्रेजी संसद द्वारा पारित हुआ –
(क) 3 जून, 1947 ई० में
(ख) 15 अगस्त, 1947 ई० में
(ग) 26 जनवरी, 1947 ई० में
(घ) 30 अगस्त, 1947 ई० में
उत्तर :
(क) 3 जून, 1947 ई० में

प्रश्न 52.
‘राष्ट्रीय अन्तरिम सरकार’ में रियासतों का विभाग दिया गया था-
(क) महात्मा गाँधी को
(ख) सरदार वल्लभ भाई पटेल को
(ग) जवाहर लाल नेहरू को
(घ) भीमराव अम्बेदकर को
उत्तर :
(ख) सरदार वल्लभ भाई पटेल को

प्रश्न 53.
आजादी के समय जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा थे-
(क) गाँधीजी
(ख) कासिम रिजवी
(ग) हरि सिंह
(घ) जे० एन० चौधरी
उत्तर :
(ग) हरि सिंह

प्रश्न 54.
आजादी के पूर्व निम्नलिखित में से कौन का राज्य भारत में सम्मिलित नहीं हुआ ?
(क) पटियाला
(ख) कश्मीर
(ग) ग्वालियर
(घ) मत्स्य
उत्तर :
(ख) कश्मीर

प्रश्न 55.
हिन्दी उत्तर भारत के किस परिवार की भाषा है ?
(क) द्रविड़
(ख) तमिल
(ग) भारोपिय
(घ) आर्य
उत्तर :
(घ) आर्य

प्रश्न 56.
पुराने मैसूर का नाम बदलकर क्या रखा गया?
(क) तमिलनाडू
(ख) महाराष्ट्र
(ग) कर्नाटक
(घ) आश्थ प्रदेश
उत्तर :
(ग) कर्नाटक

प्रश्न 57.
पंजाब और हरियाणा को राजधानी बनाया गया –
(क) मैसूर को
(ख) बम्बई को
(ग) हैदराबाद को
(घ) चंडीगढ़ को
उत्तर :
(घ) चंडीगढ़ को

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प्रश्न 58.
‘झारखण्ड’ भारत का 28 वाँ राज्य कब बना ?
(क) 1995 ई० में
(ख) 2000 ई० में
(ग) 2013 ई० में
(घ) 2010 ई० में
उत्तर :
(ख) 2000 ई० में

प्रश्न 59.
भारत के अंतरिम सरकार के गृहमंत्री थे-
(क) गाँधी जी
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) सरदार वल्लभ भाई पटेल
(घ) सुभाष चन्द्र बोस
उत्तर :
(ग) सरदार वल्लभ भाई पटेल

प्रश्न 60.
इनमें से कौन-सा क्षेत्र स्वतंत्रता के समय फ्रांस के अधीन नहीं था –
(क) चन्दननगर
(ख) गोवा
(ग) पाण्डिचेरी
(घ) माही
उत्तर :
(ख) गोवा

प्रश्न 61.
1964 ई० तक भारतीय संविधान की 8 वीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं की संख्या कितनी थी ?
(क) 22
(ख) 24
(ग) 14
(घ) 18
उत्तर :
(ग) 14

प्रश्न 62.
पृथक तेलंगाना राज्य का निर्माण हुआ –
(क) 2000 ई० में
(ख) 2005 ई० में
(ग) 2010 ई० में
(घ) 2013 ई० में
उत्तर :
(घ) 2013 ई० में

प्रश्न 63.
भाषायी आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी थे-
(क) महात्मा गाँधी
(ख) सुभाष चन्द्र बोस
(ग) जवाहरलाल नेहरू
(घ) इन्दिरा गाँधी
उत्तर :
(ग) जवाहरलाल नेहरू

प्रश्न 64.
स्वतंत्रता के समय हैदराबाद के मुसलमान रजाकारों के नेता थे-
(क) जे॰ एन० चौधरी
(ख) हरि सिंह
(ग) कासिम रिजवी
(घ) मो॰ जिन्ना
उत्तर :
(ग) कासिम रिजवी

प्रश्न 65.
गोवा, दमन एवं दीव भारत में सम्मिलित हुए –
(क) 1947 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1948 ई० में
(घ) 1964 ई० में
उत्तर :
(घ) 1964 ई० में

प्रश्न 66.
वर्तमान में भारतीय संघ में राज्यों की कुल संख्या है –
(क) 25
(ख) 26
(ग) 28
(घ) 29
उत्तर :
(घ) 29

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प्रश्न 67.
भारत कब गणतांत्रिक देश बना –
(क) 1947 ई० में
(ख) 1948 ई० में
(ग) 1949 ई० में
(घ) 1950 ई० में
उत्तर :
(घ) 1950 ई० में

प्रश्न 68.
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे –
(क) फजल अली
(ख) शेख अब्दुल्ला
(ग) सरदार बलदेव सिंह
(घ) सरदार पटेल
उत्तर :
(क) फजल अली

प्रश्न 69.
जूनागढ़ किस रियासत का भाग था ?
(क) काठियावाड़
(ख) हैदराबाद
(ग) बम्बई
(घ) कलकत्ता
उत्तर :
(क) काठियावाड़।

प्रश्न 70.
पाकिस्तान नाम का प्रस्ताव सर्वप्रथम किसने दिया ?
(क) मो॰ जिन्ना
(ख) चौधरी रहमत अली
(ग) सैयद अहमद खाँ
(घ) गाँधीजी
उत्तर :
(ख) चौधरी रहमत अली।

प्रश्न 71.
भारत के दृढ़, सशक्त और ओजस्वी नेता कहलाते हैं –
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) गाँधीजी
(ग) भीमराव अम्बेदकर
(घ) सरदार वल्लभ भाई पटेल
उत्तर :
(घ) सरदार वल्लभ भाई पटेल।

प्रश्न 72.
सरदार पटेल के प्रयत्न से कितनी रियासतें भारतीय संघ में मिलने के लिए तैयार हो गई ?
(क) लगभग 136
(ख) लगभग 140
(ग) लगभग 146
(घ) लगभग 136
उत्तर :
(क) लगभग 136 ।

प्रश्न 73.
कबाईलियों ने कश्मीर पर कब आक्रमण किया था ?
(क) 15 अक्टूबर 1947 ई० में
(ख) 20 अक्टूबर 1947 ई० में
(ग) 24 अक्टूबर 1947 ई० में
(घ) 22 अक्टूबर 1947 ई० में
उत्तर :
(घ) 22 अक्टूबर 1947 ई० में।

प्रश्न 74.
विभाजन के पश्चात बंगाल में सबसे भयंकर साम्र्रदायिक दंगा हुआ था –
(क) चट्टगाँव में
(ख) कलकत्ता में
(ग) ढाका में
(घ) नोआखली में
उत्तर :
(घ) नोआखली में ।

प्रश्न 75.
‘अन्तरिम सरकार’ का गठन कब हुआ था ?
(क) 5 जुलाई 1947 ई० में
(ख) 25 जुलाई 1947 ई० में
(ग) 15 अगस्त 1947 ई० में
(घ) 26 जनवरी 1948 ई० में
उत्तर :
(क) 5 जुलाई 1947 ई० में।

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प्रश्न 76.
तसलीमा नसरीन की किस पुस्तक पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है ?
(क) लज्जा
(ख) द अनफिनिश्ड मेमोएर्स
(ग) पंजाब सेन्चुरी
(घ) द्विखण्डिता
उत्तर :
(घ) द्विखण्डिता।

प्रश्न 77.
शरणार्थियों के पुनर्वास की समस्या लगभग कब हल हो गई थी ?
(क) 1948 ई० तक
(ख) 1949 ई० तक
(ग) 1950 ई० तक
(घ) 1951 ई० तक
उत्तर :
(घ) 1951 ई० तक।

प्रश्न 78.
ट्रेन टू इण्डिया : मेमोरिज आफ बंगाल पुस्तक के लेखक हैं –
(क) खुशवन्त सिंह
(ख) केवल सिंह
(ग) मलय कृष्णा
(घ) तसलीमा नसरीन
उत्तर :
(ग) मलय कृष्गा।

प्रश्न 79.
देशी राज्यों के विलय के समय राजाओं को मुआवजे के तौर पर लगभग कितनी राशि पेंशन के रूप में दी गयी।
(क) 250 करोड़
(ख) 300 करोड़
(ग) 450 करोड़
(घ) 506 करोड़
उत्तर :
(घ) 506 करोड़।

प्रश्न 80.
लार्ड माउण्टबेटन कब तक भारत के वायसराय पद पर बने रहे ?
(क) 1947 ई०
(ख) 1948 ई०
(ग) 1949 ई०
(घ) 1950 ई०
उत्तर :
(ख) 1948 ई०।

प्रश्न 81.
एस० के० धर कौन थे ?
(क) वकील
(ख) जज
(ग) मंत्री
(घ) नेता
उत्तर :
(ख) जज।

प्रश्न 82.
तेलगांना क्षेत्र को किस राज्य में मिलाया गया था ?
(क) आन्ध प्रदेश
(ख) महाराष्ट्र
(ग) हैदराबाद
(घ) गुजरात
उत्तर :
(क) आन्भ प्रदेश।

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प्रश्न 83.
‘पंजाब सेन्चुरी’ (Punjab Century) पुस्तक के लेखक हैं –
(क) डॉ खुशवन्त सिंह
(ख) प्रकाश टण्डन
(ग) तसलीमा नसरीन
(घ) बलराम नन्दा
उत्तर :
(ख) प्रकाश टण्डन।

प्रश्न 84.
1947 से 1949 ई० की अवधि में कितने देशी रियासतें भारत संघ में सम्मिलित हो चुकी थी ?
(क) 330 रियासतें
(ख) 445 रियासतें
(ग) 555 रियासतें
(घ) 666 रियासतें
उत्तर :
(ग) 555 रियासतें।

प्रश्न 85.
कश्मीर के प्रधानमंत्री कौन थे ?
(क) शेख अब्दुल्ला
(ख) हरि सिंह
(ग) कासिम रिजवी
(घ) वी०पी० मेनन
उत्तर :
(क) शेख अब्दुल्ला।

प्रश्न 86.
भारत में पुनर्वास विभाग की स्थापना कब हुई थी ?
(क) सन् 1951 में
(ख) सन् 1947 में
(ग) सन् 1948 में
(घ) सन् 1950 में
उत्तर :
(क) सन् 1951 में।

प्रश्न 87.
भारतीय उपनिवेश किसके अधीन था ?
(क) फ्रांस
(ख) पुर्तगाल
(ग) डच
(घ) अंग्रेज
उत्तर :
(घ) अंग्रेज।

प्रश्न 88.
राष्ट्रभाषा आयोग के आधार पर कितने वर्षो बाद संसद अंग्रेजी का प्रयोग जारी रख सकता है ?
(क) 20 वर्ष
(ख) 25 वर्ष
(ग) 30 वर्ष
(घ) 15 वर्ष
उत्तर :
(घ) 15 वर्ष।

प्रश्न 89.
भारत में देशी रियासतों के लिए एक विशेष मंत्रालय स्थापित किया गया –
(क) 1947 ई० में
(ख) 1948 ई० में
(ग) 1949 ई० में
(घ) 1950 ई० में
उत्तर :
(क) 1947 ई० में

प्रश्न 90.
महाराजा हरि सिंह तथा उनके प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला ने कश्मीर को भारत में विलय करने की घोषणा की-
(क) 26 : वूदर 1946 में
(ख) 26 अक्टूबर 1947 ई०
(ग) 26 अक्टूबर 1948 में
(घ) 26 अक्टूबर 1949 ई०
उत्तर :
(ख) 26 अक्टूबर 1947 ई०

प्रश्न 91.
हैदराबाद रियासत को भारत में शामिल कर लिया गया-
(क) 1947 ई० में
(ख) 1948 ई० में
(ग) 1950 ई० में
(घ) 1949 ई० में
उत्तर :
(घ) 1949 ई० में

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प्रश्न 92.
हैदराबाद के निजाम ने भारत सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किया –
(क) 29 नवम्बर 1946 ई० में
(ख) 29 नवम्बर, 1947 ई में
(ग) 29 नवम्बर 1949 ई० में
(घ) 29 नवम्बर 1946 ई में
उत्तर :
(ख) 29 नवम्बर, 1947 ई० में

प्रश्न 93.
भारत की आजादी के बाद लगभग कितने लोग शरणार्थी बनकर भारत आये –
(क) करीब 30 लाख लोग
(ख) करीब 40 लाख लोग
(ग) करीब 50 लाख लोग
(घ) करीब 60 लाख लोग
उत्तर :
(घ) करीब 60 लाख लोग

प्रश्न 94.
सांप्रदायिक टकरावों ने किनें जिन्दा रखने का काम किया है –
(क) कहानियों को
(ख) नाटको को
(ग) छवियों को
(घ) स्मृतियों को
उत्तर :
(घ) स्मृतियों को

प्रश्न 95.
राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना कब हुई –
(क) 1953 ई० में
(ख) 1963 ई० में
(ग) 1956 ई० में
(घ) 1950 ई० में
उत्तर :
(क) 1953 ई० में

प्रश्न 96.
राष्ट्रभाषा आयोग का गठन हुआ –
(क) 1954 ई० में
(ख) 1956 ई॰ में
(ग) 1955 ई० में
(घ) 1950 ई० में
उत्तर :
(ग) 1955 ई० में

प्रश्न 97.
राष्ट्रभाषा आयोन ने अपनी रिपोर्ट कब प्रस्तुत की –
(क) 1944 ई० में
(ख) 1949 ई० में
(ग) 1950 ई० में
(घ) 1956 ई० में
उत्तर :
(घ) 1956 ई० में

प्रश्न 98.
भारत में राज्य मंत्रालय की स्थापना किसके निर्देशन में हुई ?
(क) गाँधी जी
(ख) वल्लभ भाई पटेल
(ग) सुभाषचन्द्र बोस
(घ) जवाहरलाल नेहरू.
उत्तर :
(ख) वल्लभ भाई पटेल

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प्रश्न 99.
भारत कब स्वतंत्र हुआ ?
(क) 13 अगस्त, 1947 ई
(ख) 14 अगस्त, 1947 ई
(ग) 15 अगस्त, 1947 ई०
(घ) 26 अगस्त, 1950 ई०
उत्तर :
(ग) 15 अगस्त, 1947 ई०

प्रश्न 100.
भारत के प्रथम गृहमंत्री कौन थे ?
(क) वल्लभ भाई पटेल
(ख) भीमराव अम्बेडकर
(ग) दादा भाई नैरोजी
(घ) राधा कृष्णन
उत्तर :
(क) वल्लभ भाई पटेल

प्रश्न 101.
अन्तरिम सरकार में प्रतिरक्षा मंत्री कौन थे ?
(क) अबुल कलाम आजाद
(ख) सरदार बलदेव सिंह
(ग) श्यामा प्रसाद मुखर्जी
(घ) के.सी नियोगी
उत्तर :
(ख) सरदार बलदेव सिंह

प्रश्न 102.
नेहरू-लियाकत समझौता कब हुआ था ?
(क) 8 अम्रैल 1950 ई० में
(ख) 10 जून 1947 ई० में
(ग) 15 अगस्त 1949 ई० में
(घ) 7 जून 1950 ई० में
उत्तर :
(क) 8 अप्रैल 1950 ई० में

प्रश्न 103.
जूनागढ़ कब भारत में शामिल हुआ ?
(क) 1947 ई०
(ख) 1948 ई०
(ग) 1949 ई०
(घ) 1950 ई०
उत्तर :
(ख) 1948 ई०

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. हरी सिंह ______ के राजा थे।
उत्तर :
जम्मू-कश्मीर

2. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ______ थे।
उत्तर :
पं० जवाहरलाल नेहरू।

3. स्वतंत्रता के पूर्व गोवा ______ के अधीन था।
उत्तर :
पुर्तगाल।

4. तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच ______ जल विवाद था।
उत्तर :
कावेरी।

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5. उत्तर प्रदेश के तेरह जिलों को पृथक कर ______ राज्य का गठन हुआ।
उत्तर :
उत्तरांचल।

6. जवाहरलाल नेहरू और ______ दोनों ही भाषायी आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी थे।
उत्तर :
सरदार वल्लभ भाई पटेल।

7. मुम्बई राज्य का विभाजन कर महाराष्ट्र और दो ______ राज्यों की स्थापना हुई।
उत्तर :
गुजरात।

8. तमिल भाषा ______ परिवार की भाषा है।
उत्तर :
द्रविड़।

9. कश्मीर का शासक हिन्दू था परन्तु वहाँ की बहुसंख्यक जनता ______ थी।
उत्तर :
मुसलमान।

10. वर्तमान समय में संविधान की 8 वीं अनुसूची में कुल ______ को मान्यता प्राप्त है।
उत्तर :
22 भाषाओं।

11. जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय ______ में हुआ।
उत्तर :
26 अक्टूबर 1947 ई०।

12. विभाजन के समय देश में कुल लगभग ______ रियासतें थीं ।
उत्तर :
565

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13. जब भारत का संविधान लागू हुआ उस समय देश में ______ प्रकार के राज्य थे।
उत्तर :
चार।

14. भारत का सबसे नया राज्य ______ है।
उत्तर :
तेलंगाना।

15. भारत-पाक का विभाजन ______ के आधार पर हुआ था ?
उत्तर :
साम्रदायिकता/धर्म।

16. आन्द्र-पद्रेश के निर्माण के लिए पोट्टी श्रीरामालु ने ______ दिनों तक अनशन किया था ?
उत्तर :
58 दिन।

17. केन्द्रशासित अजमेर क्षेत्र को ______ में मिला दिया गया।
उत्तर :
राजस्थान।

18. विभाजन के पश्चात् देश में भाषा और ______ के आधार पर प्रान्तों के निर्माण की माँग उठने लगी।
उत्तर :
संस्कृति।

19. गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों का निर्माण ______ में हुआ था ?
उत्तर :
1960 ई०।

20. 1966 ई० में पंजाब से पृथक होकर ______ राज्य का निर्माण हुआ ?
उत्तर :
हरियाणा।

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21. ब्रिटिश कालीन चार श्रेणियों को समाप्त कर केवल दो श्रेणियाँ रखी गई-राज्य तथा ______.
उत्तर :
केन्द्रशासित प्रदेश।

22. निजाम तथा मैसूर के महाराजा को क्रमश: 50 और ______ लाख वार्षिक पेंशन दी गई।
उत्तर :
26

23. भारत की ______ वर्ग कि० मी० जमीन पाकिस्तान के अधिकार में पड़ी है।
उत्तर :
84000 लाख।

24. राज्य पुनर्गठन आयोग ने ______ राज्यों की सफारिश की।
उत्तर :
16

25. ______ ई० में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना हुई।
उत्तर :
1953

26. ______ ई० में राष्ट्रभाषा आयोग की स्थापना हुई।
उत्तर :
1955

27. ______ ई० में मद्रास प्रान्त के कुछ तेलुगू भाषा भाषी भागों को अलग कर आंध्र प्रदेश राज्ध की स्थापना हुई।
उत्तर :
1955 ई० में।

28. ______ का 58 वें दिन के आमरण अनशन के कारण मृत्यु हो गई।
उत्तर :
पोट्टी श्रीरामालू।

29. ______ नामक पुस्तक तसलीमा नसरीन ने लिखा।
उत्तर :
लज्जा एवं द्विखण्डिता।

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30. राजाओं के परिषद् के चांसलर ______ थे।
उत्तर :
महराजा पटियाला।

31. ______ आज भी भारत के लिए समस्या बना हुआ है।
उत्तर :
शरणार्थी समस्या।

32. हैदराबाद की अधिकतर प्रजा ______ थी।
उत्तर :
हिन्दू।

33. रजाकारों का नेता ______ था।
उत्तर :
कससम रिजवी।

34. भारत का अन्तिम गर्वनर जनरल ______ था।
उत्तर :
लार्ड माउण्ट बेटन।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. हैदराबाद की भाँति कश्मीर का शासक भी स्वतंत्रता के समय पृथक रहना चाहता था।
उत्तर : True

2. संविधान द्वारा हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित किये जाने पर दक्षिण भारत में विरोध आरम्भ हो गया।
उत्तर : True

3. महाराष्ट्र और गुजरात के बीच कावेरी जल विवाद था।
उत्तर : False

4. सन् 1975 में सिक्किम भारत का 22 वाँ राज्य बना।
उत्तर : True

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5. तमिल आर्य परिवार की भाषा है।
उत्तर : False

6. बिहार से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना।
उत्तर : False

7. 1947 ई० में भारत का विभाजन साम्पदायिकता के आधार पर किया गया था।
उत्तर : True

8. सन् 1953 में मद्रास के कुछ भाग को लेकर आन्ध प्रदेश बना।
उत्तर : False

9. हैदराबाद की बहुसंख्यक जनता मुसलमान थी।
उत्तर : False

10. मेजर जनरल जे०एन० चौधरी कश्मीर के शासक थे।
उत्तर : False

11. कश्मीर की समस्या आज भी विद्यमान है।
उत्तर : True

12. सन् 1948 में जूनागढ़ का भारत में विलय हो गया।
उत्तर : True

13. अन्तरिम सरकार के गृहमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।
उत्तर : False

14. भारत और पाकिस्तान का विभाजन 1947 ई० में हुआ था।
उत्तर : True

15. आजादी के अवसर पर भारत में प्राय: 140 राज्यों में जनतंत्रीय व्यवस्था नहीं थी।
उत्तर : True

16. स्वतंत्रता के पश्चात भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगे शुरू हो गए।
उत्तर : True

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17. फ्रांसीसी उपनिवेश माही कलकत्ता बन्दरगाह के समीप स्थित था।
उत्तर : False

18. भारतीय सेनाएँ दिसम्बर 1948 ई० में हैदराबाद में प्रवेश की।
उत्तर : True

19. नवम्बर 1966 ई० में पंजाब से हरियाणा पृथक (अलग) हो गया।
उत्तर : True

20. महाराजा हरिसिंह और फजल अली ने कश्मीर को भारत में सम्मिलित करने की घोषणा की थी।
उत्तर : False

21. आन्ध्र प्रदेश में राज्य की स्थापना को लेकर भयंकर और उम्र आन्दोलन हुए थे।
उत्तर : True

22. विभाजन के समय पुर्तगाल के अधीन गोवा, दमन और चन्दननगर क्षेत्र था।
उत्तर : False

23. त्रिलोचन सिंह ने सिक्खों के लिए अलग राज्य की माँग की थी।
उत्तर : True

24. आन्ध्र प्रदेश भारत का सबसे नया राज्य है।
उत्तर : False

25. 1947 ई० तक कश्मीर रियासत को भारत में शामिल कर दिया गया।
उत्तर : True

26. भारत में 216 छोटी रियासतें थी।
उत्तर : True

27. राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना 1956 ई० में की गई।
उत्तर : False

28. भारत 15 अगस्त 1948 ई० को स्वतंत्र हुआ।
उत्तर : False

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29. द अनफिनस्ड मेमोएर्स नामक पुस्तक शेख मुजीबुर्रहहमान ने लिखा।
उत्तर : True

30. भाषायिक आधार पर बनने वाला पहला राज्य हैदराबाद था।
उत्तर : False

31. हैदराबाद का शासक हिन्दू और प्रजा मुसलमान थी।
उत्तर : True

32. प्रीवी पर्स में भारतीय राजाओं को धन एवं पदवी दी गयी।
उत्तर : False

निम्नलिखित कथनों की सही व्याख्या चुनकर लिखिए : (1 Mark)

1. कथन : गाँधी जी ने सरदार बल्लभ भाई पटेल को लौह पुरूष की उपाधि दी थी, क्योंकि –
व्याख्या 1 : उन्होंने देशी रियासतों को भारत में विलय जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूराकिया था।
व्याख्या 2 : वे कुशल स्वतंत्रता सेनानी थे।
व्याख्या 3 : वे स्वतंत्र भारत के सफल गृहमंत्री थे।
उत्तर :
व्याख्या 1 : उन्होंने देशी रियासतों को भारत में विलय जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया था।

2. कथन : भारत सरकार ने भाषा के आधार पर राज्यों का गठन शुरू किया, क्योंकि –
व्याख्या 1 : तेलगू भाषा-भाषियों ने इसके लिए प्रबल आन्दोलन किया था।
व्याख्या 2 : भारतीय संविधान में भाषा के आधार पर राज्य-गठन का उल्लेख था।
व्याख्या 3 : अंग्रेजों ने भारत सरकार को ऐसा करने के लिए बाध्य किया था।
उत्तर :
व्याख्या 1 : तेलगू भाषा-भाषियों ने इसके लिए प्रबल आन्दोलन किया था।

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3. कथन : 26 अक्टूबर 1947 ई० को महाराजा हरिसिंह तथा उनके प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला ने कश्मीर को भारत में विलय करने की घोषणा की।
व्याख्या 1 : पाकिस्तान ने कबाईली जातियों को भड़काकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया।
व्याख्या 2 : महाराजा एक हिन्दु शासक था।
व्याख्या 3 : पाकिस्तान अमेरिकी प्रभाव में था।
उत्तर :
व्याख्या 1 : पाकिस्तान ने कबाईली जातियों को भड़काकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया।

4. कथन : भारत सरकार ने एक पुनर्वास विभाग की स्थापना की।
व्याख्या 1 : हिन्दू और मुसलमान में दंगे हुए।
व्याख्या 2 : बहुत लोग शरणार्थी बनकर भारत आये।
व्याख्या 3 : पाकिस्तान में खाली पड़े हिन्दुओं के घर मुस्लिमों को पुनर्वास में दे दिया।
उत्तर :
व्याख्या 2 : बहुत लोग शरणार्थी बनकर भारत आये।

5. कथन : आंध्र प्रदेश में राज्य की स्थापना को लेकर उग्र आन्दोलन हुए-
व्याख्या 1 : आंध प्रदेश अलग राज्य की माँग पर अड़ा था।
व्याख्या 2 : मद्रास प्रान्त में दंगे होने के कारण।
व्याख्या 3 : भाषा के आधार पर आँध प्रदेश में अलग राज्य गठन की मांग उठी।
उत्तर :
व्याख्या 3 : भाषा के आधार पर आँध्र प्रदेश में अलग राज्य गठन की मांग उठी।

6. कथन : जुलाई 1956 ई० में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पास हुआ।
व्याख्या 1 : इस अधिनियम द्वारा राज्यों द्वारा केन्द्रीय प्रदेशों की व्यवस्था की गई।
व्याख्या 2 : भारत में आन्दोलन की मांग उठी।
व्याख्या 3 : भारत में दंगे-फसाद होने के कारण।
उत्तर :
व्याख्या 1 : इस अधिनियम द्वारा राज्यों द्वारा केन्द्रीय प्रदेशों की व्यवस्था की गई।

7. कथन : हिन्दी को देवनागरी लिपि की भाषा सदैव भारत की राष्ट्रभाषा बनी रहेगी।
व्याख्या 1 : संविधान में राष्ट्रपति को अधिकार दिया गया।
व्याख्या 2 : स्वतंगता के बाद देश के शासन को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए एक प्रव्चलित भाषा की आवश्यकता थी।
व्याख्या 3 : राज्य भाषा ने अपना रिपोर्ट प्रस्तुत किया।
उत्तर :
व्याख्या 2 : स्वतंत्रता के बाद देश के शासन को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए एक प्रचलित भाषा की आवश्यकता थी।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 8 उत्तर-औपनिवेशिक भारत बीसवीं शताब्दी का द्वितीयार्द्ध

8. कथन : तत्कालीन केन्द्रीय वित्तमंत्री देशमुख ने मंत्रीपद से त्याग पत्र दे दिया था –
व्याख्या 1 : क्योंकि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते थे।
व्याख्या 2 : पृथक महाराष्ट्र के स्थापना के लिए नेहरू जी नहीं माने थे।
व्याख्या 3 : संसद ने उन्हें इस पद से हटने को कहा था।
उत्तर :
व्याख्या 2 : पृथक महाराष्ट्र के स्थापना के लिए नेहरू जी नहीं माने थे।

9. कथन : सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू भाषा के आधार पर देश के बंटवारे के खिलाफ थे, क्योंकि व्याख्या 1 : भारत में अनेक भाषाएं हैं, अत: देश का विभाजन कठिन हो जायेगा।
व्याख्या 2 : प्रत्येक स्थान ऐसे हैं जहाँ विभिन्न भाषाभाषी रहते थे।
व्याख्या 3 : भाषा के आधार पर बंटवारा से देश की एकता में बाधा आती।
व्याख्या 4 : भाषा के आधार पर बंटवारा होने पर लोग धर्म के आधार पर बंटवारे की मांग करते।
उत्तर :
व्याख्या 3 : भाषा के आधार पर बंटवारा से देश की एकता में बाधा आती।

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) भारत को स्वतंत्रता (a) नवम्बर 1954 ई०
(ii) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (b) 18 जुलाई, 1947 ई०
(iii) पाण्डीचेरी, चन्दननगर, माही का विलय (c) 26 अक्टूबर, 1947 ई०
(iv) कश्मीर का विलय (d) 15 अगस्त, 1947 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) भारत को स्वतंत्रता (d) 15 अगस्त, 1947 ई०
(ii) भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (b) 18 जुलाई, 1947 ई०
(iii) पाण्डीचेरी, चन्दननगर, माही का विलय (a) नवम्बर 1954 ई०
(iv) कश्मीर का विलय (c) 26 अक्टूबर, 1947 ई०

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) राज्य पुनर्गठन नियम (a) 2000 ई०
(ii) हैदराबाद का विलय (b) अगस्त, 1956 ई०
(iii) भारतीय संविधान लागू (c) 26 जनवरी, 1950 ई०
(iv) उत्तराखण्ड का निर्माण (d) अगस्त, 1948 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) राज्य पुनर्गठन नियम (b) अगस्त, 1956 ई०
(ii) हैदराबाद का विलय (d) अगस्त, 1948 ई०
(iii) भारतीय संविधान लागू (c) 26 जनवरी, 1950 ई०
(iv) उत्तराखण्ड का निर्माण (a) 2000 ई०

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(a) 2000 ई० (a) 1951 ई०
(b) अगस्त, 1956 ई० (b) 1956 ई०
(c) 26 जनवरी, 1950 ई० (c) 5 जुलाई, 1947 ई०
(d) अगस्त, 1948 ई० (d) 1 जनवरी, 1948 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(a) 2000 ई० (d) 1 जनवरी, 1948 ई०
(b) अगस्त, 1956 ई० (c) 5 जुलाई, 1947 ई०
(c) 26 जनवरी, 1950 ई० (a) 1951 ई०
(d) अगस्त, 1948 ई० (b) 1956 ई०

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) राष्ट्रभाषा आयोग का गठन (a) 1964 ई०
(ii) तेलंगाना राज्य का निर्माण (b) सरदार वलदेव सिंह
(iii) नागालैण्ड राज्य का निर्माण (c) 1955 ई。
(iv) अन्तरिम सरकार (d) 2015 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) राष्ट्रभाषा आयोग का गठन (a) 1964 ई०
(ii) तेलंगाना राज्य का निर्माण (b) सरदार वलदेव सिंह
(iii) नागालैण्ड राज्य का निर्माण (c) 1955 ई。
(iv) अन्तरिम सरकार (d) 2015 ई०

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) अंतरिम सरकार के गृहमंत्री (a) पोट्टी श्री रामालु
(ii) फ्रांसीसी उपनिवेश (b) वी० पी० मेनन
(iii) सरदार पटेल के सचिव (c) गोवा, दमन और दीव
(iv) आंध्र प्रदेश के निर्माता (d) पण्डिचरी, चन्दननगर
(v) पुर्तगाली उपनिवेश (e) सरदार पटेल

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) अंतरिम सरकार के गृहमंत्री (e) सरदार पटेल
(ii) फ्रांसीसी उपनिवेश (d) पण्डिचरी, चन्दननगर
(iii) सरदार पटेल के सचिव (b) वी० पी० मेनन
(iv) आंध्र प्रदेश के निर्माता (a) पोट्टी श्री रामालु
(v) पुर्तगाली उपनिवेश (c) गोवा, दमन और दीव

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प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 15 अगस्त 1947 ई० (a) भारत का गणतंत्र दिवस
(ii) 26 जनवरी, 1950 ई० (b) भारत का स्वतंत्रता दिवस
(iii) 8 अप्रैल, 1950 ई० (c) राज्य मंत्रालय की स्थापना
(iv) 5 जुलाई, 1947 ई० (d) नेहरू-लियाकत समझौता

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 15 अगस्त 1947 ई० (b) भारत का स्वतंत्रता दिवस
(ii) 26 जनवरी, 1950 ई० (a) भारत का गणतंत्र दिवस
(iii) 8 अप्रैल, 1950 ई० (d) नेहरू-लियाकत समझौता
(iv) 5 जुलाई, 1947 ई० (c) राज्य मंत्रालय की स्थापना

 

 

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 5 वैकल्पिक विचार एवं प्रयास

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वैकल्पिक विचार एवं प्रयास Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रथम बी.ए. परीक्षा हुई थी –
(क) 1857 ई० में
(ख) 1858 ई० में
(ग) 1859 ई० में
(घ) 1860 ई० में
उत्तर :
(ख) 1858 ई० में

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प्रश्न 2.
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के प्रथम प्रिंसिपल थे –
(क) डॉ॰ एम० जे० ब्वाम्ली
(ख) डॉ० एच० एच० गूडिव
(ग) डॉ॰ एन० वालिश
(घ) डॉ॰ जे० ग्रान्ट
उत्तर :
(क) डॉ॰ एम० जे० ब्राम्ली

प्रश्न 3.
बंगाल टेक्निकल इंस्टीच्यूट की स्थापना हुई थी –
(क) 1905 ई० में
(ख) 1906 ई० में
(ग) 1911 ई० में
(घ) 1912 ई० में
उत्तर :
(ख) 1906 ई० में

प्रश्न 4.
बाँग्ला भाषा में प्रथम छपी पुस्तक थी –
(क) वर्ण परिचय
(ख) बाँग्ला भाषा का एक व्याकरण
(ग) मंगल समाचार मतियर
(घ) आनन्दमंगल
उत्तर :
(ख) बाँग्ला भाषा का एक व्याकरण

प्रश्न 5.
‘इन्डियन एसोसिएसन फार द कल्टीवेशन आफ साइंस’ के प्रथम नोवल पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिक थे –
(क) जगदीशचन्द्र बसु
(ख) सी.वी. रमन
(ग) प्रफुल्लचन्द्र राय
(घ) सत्येन्द्रनाथ बसु
उत्तर :
(ख) सी.वी. रमन

प्रश्न 6.
भारत में ‘हाफटोन प्रिन्टिंग’ प्रणाली प्रारम्भ की गई –
(क) उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी
(ख) सुकुमार राय
(ग) पंचानन कर्मकार
(घ) चार्ल्स विल्कन्स
उत्तर :
(क) उपेन्द्रकिशोर रायचौधरी

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प्रश्न 7.
विश्व-भारती के संस्थापक थे –
(क) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) स्वामी विवेकानन्द
(घ) देवेन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 8.
यू० एन० राय एण्ड सन्स की भूमिका से विकसित हुआ :
(क) बंगाल में विज्ञान शिक्षा
(ख) बंगाल में चिकित्सा शिक्षा
(ग) बंगाल में पाश्चात्य शिक्षा
(घ) बंगाल में मुद्रण प्राद्योगिकी
उत्तर :
(घ) बंगाल में मुद्रण प्राद्यौगिकी।

प्रश्न 9.
बोस इंस्टीच्युट की स्थापना किया था :
(क) जगदीश चन्द्र बोस
(ख) सत्येन्द्रनाथ बोस
(ग) चन्द्रमुखी बोस
(घ) सुभाष चन्द्र बोस
उत्तर :
(क) जगदीश चन्द्र बोस।

प्रश्न 10.
‘कलकत्ता मेडिकल कॉलेज’ की स्थापना कब की गयी थी ?
(क) 1735 ई० में
(ख) 1835 ई० में
(ग) 1935 ई० में
(घ) 1834 ई० में
उत्तर :
(ख) 1835 ई० में ।

प्रश्न 11.
भारत में 1550 ई० में सर्वप्रथम छापाखाना स्थापित करने का श्रेय है –
(क) अंग्रेजों को
(ख) डचों को
(ग) पुर्तगालियों को
(घ) फ्रांसीसियों को
उत्तर :
(ग) पुर्तगालियों को

प्रश्न 12.
बंगाल केमिकल की स्थापना के द्वारा हुई थी –
(क) प्रफुल्ल चन्द्र रॉय
(ख) जगदीशचन्द्र बोस
(ग) मेघनाद साहा
(घ) सत्येन्द्रनाथ बोस
उत्तर :
(क) प्रफुल्ल चन्द्र रॉय।

प्रश्न 13.
भारत में प्रेस को स्वतन्नता देने वाला गवर्नर जनरल था –
(क) लार्ड लिटन
(ख) लार्ड रिपन
(ग) लार्ड डफरिन
(घ) मेटकॉफ
उत्तर :
(घ) मेटक्कोफ

प्रश्न 14.
भारतीय पत्रकारिता का राजकुमार कहा जाता है –
(क) क्रिस्टोदास पाल
(ख) राममोहन राय
(ग) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी
(घ) मार्शमैन
उत्तर :
(क) क्रिस्टोदास पाल

प्रश्न 15.
1780 ई० में भारत का पहला समाचार पत्र ‘बंगाल गजट’ को प्रकाशित किया था –
(क) गंगाधर भट्टाघार्य
(ख) जेम्स अगस्ट्स हिक्की
(ग) मार्शमैन
(घ) हरिशचन्द्र मुखर्जी
उत्तर :
(ख) जेम्स अगस्टस हिक्की

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प्रश्न 16.
किस समाचार पत्र पर सर्वप्रथम देशी भाषा सामाचार पत्र अधिनियम आरोपित हुआ था –
(क) दिग्दर्शन
(ख) बंग दर्शन
(ग) युगान्तर
(घ) सोम प्रकाश
उत्तर :
(घ) सोम प्रकाश

प्रश्न 17.
1818 ई० में मार्शमैन द्वारा बंगाली भाषा में प्रकाशित होने वाला प्रथम समाचार पत्र था।
(क) बंगाल गजट
(ख) दिग्दर्शन
(ग) बंगाली
(घ) संवाद कौमुदी
उत्तर :
(ख) दिग्दर्शन

प्रश्न 18.
1878 ई० में भारतीय समाचारों पत्रों का मुँह बन्द करने वाला अधिनियम (गैगिंग एक्ट) किस लागू किया था ?
(क) लार्ड लिटन ने
(ख) लार्ड रिपन ने
(ग) लार्ड एडम्स ने
(घ) चार्ल्स मेटकॉफ ने
उत्तर :
(क) लार्ड लिटन ने

प्रश्न 19.
बंगाल तकनीकी संस्थान स्थापित हुआ था –
(क) 25 जुलाई 1906 ई० में
(ख) 14 सितम्बर 1907 ई० में
(ग) 22 अक्टूबर 1908 ई० में
(घ) 25 दिसम्बर 1910 ई० में
उत्तर :
(क) 25 जुलाई 1906 ई० में

प्रश्न 20.
बंगाल में पहला इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित हुआ था –
(क) कलकत्ता में
(ख) यादवपुर में
(ग) बोलपुर में
(घ) शिवपुर में
उत्तर :
(घ) शिवपुर में

प्रश्न 21.
‘किरणों के परार्वतन का प्रभाव’ की खोज की थी –
(क) मेघनाथ साहा
(ख) चन्द्रशेखर वेकटरमन
(ग) जगदीश चन्द्र बसु
(घ) आर्चाय प्रफुल्ल चन्द्र रा
उत्तर :
(ख) चन्द्रशेखर वेंकट रमन

प्रश्न 22.
‘बंगाल केमिकल’ के संस्थापक थे –
(क) डॉ॰ प्रफुल्ल चन्द्र राय
(ख) डॉ॰ महेन्द्र लाल सरकार
(ग) डॉ॰० जगदीश चन्द्र बसु
(घ) श्री सतेन्द्र नाथ बोस
उत्तर :
(क) डॉ॰० प्रफुल्ल चन्द्र राय

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प्रश्न 23.
आधुनिक भारत में कार्दृन (हास्य-व्यंग चित्र) के जनक थे –
(क) अवनीन्द्र नाथ टैगोर
(ख) गगनेन्द्र नाथ टैगोर
(ग) रवीन्द्र नाथ टैगोर
(घ) देवेन्द्र नाथ टैगोर
उत्तर :
(क) अवनीन्द्र नाथ टैगोर

प्रश्न 24.
विश्व भारती विश्वविद्यालय में हिन्दी भवन की स्थापना हुई थी –
(क) 1921 ई० में
(ख) 1925 ई० में
(ग) 1939 ई० में
(घ) 1942 इे० में
उत्तर :
(ग) 1939 ई० में

प्रश्न 25.
“कलकत्ता स्कूल बूक सोसायटी” का गठन हुआ था –
(क) 1818 ई० में
(ख) 1820 ई० में
(ग) 1817 ई० में
(घ) 1821 ई० में
उत्तर :
(ग) 1817 ई० में।

प्रश्न 26.
”शारतिनिकेतन”‘ का पूर्ववर्ती नाम था –
(क) विश्व भारती
(ख) भूबन डाँगा
(ग) पाठ भवन
(घ) कला मंदिर
उत्तर :
(ख) भबन डाँगा।

प्रश्न 27.
अधुनिक मुद्रण यंत्र के पिता के रूप में किन्हें जाना जाता है –
(क) हालहेड
(ख) चार्ल्स विल्किन्स
(ग) जोहान गुटेनबर्ग
(घ) विलिम कैरी
उत्तर :
(ग) जांहान गुटेनबर्ग।

प्रश्न 28.
असु विज्ञान मंदिर के संस्थापक कौन थे –
(क) जे० सी० बोस
(ख) मेघनाद साहा
(ग) सी० भी० रमन
(घ) एस० के मित्रा
उत्तर :
(क) जे० सी० बोस।

प्रश्न 29.
सर्वप्रथम मुद्रण के लिए बंगाली प्रेस अक्षर किसने बनाया था –
(क) डेविड हेयर
(ख) पंचानन कर्मकार
(ग) चार्ल्स विल्किंस
(घ) आगस्टस हिक्की
उत्तर :
(ग) चाल्ल्स विल्किस।

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प्रश्न 30.
भारत का प्रथम साप्ताहिक पत्र था –
(क) बगाल गजट
(ख) दिग्दर्शन
(ग) समाबार दर्पण
(घ) सम्वाद समाचार
उत्तर :
(क) बगाल गजट।

प्रश्न 31.
‘संदेश’ नामक पत्रिका के प्रकाशक थे –
(क) पचानन कर्मकार
(ख) रवीन्द्रनाथ टेगार
(ग) कंगाल हरिनाथ
(घ) उपेन्द्र किशोर रायचौधरी
उत्तर :
(घ) उपंद्ध किशोर रायचौधरो।

प्रश्न 32.
“इंड़यन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइन्स” की स्थापना किसने की ?
(क) महन्द्रलाल सरकार
(ख) जगदीश चन्द्र बोस
(ग) प्रफुल्ल चन्द्र रोंय
(घ) मंघनाद साहा
उत्तर :
(क) महनन्द्रलाल सरकार।

प्रश्न 33.
‘विलियम कैरी’ ने मुद्रणालय स्थापित किया था –
(क) श्रौरामपुर में
(ख) कलकत्ता में
(ग) चुँचुड़ा में
(घ) चन्दननगर में
इत्तर :
(क) श्रौरामपुर में।

प्रश्न 34.
‘छलेदेर’ रामायण में विभिन्न तस्वीरों को किसके द्वारा बनाया गया था ?
(क) उपन्द्र किशोर राद चौदरो(ख) रामचन्द्र राय
(ग) नन्दलाल बसु
(घ) अवनीन्द्रनाथ हैंगोए
उतर :
(क) उपंद्ध किशार राय चौधरी ।

प्रश्न 35.
‘क्रिस्कोग्राफ’ उपकरण के निर्माता थे –
(क) सत्येन्द्र नाथ घोष
(ख) मेघनाद साहा
(ग) जगदीश बंद्र बोस
(घ) सौ० भौ॰ रमन
उत्तर :
(ग) जगदीश चंद्र बोस।

प्रश्न 36.
कलकता विश्वविद्यालय की स्थापना हुई –
(क) 1921 ई० में
(ख) 1757 ई० में
(ग) 1857 ई० में
(घ) 1860 ई० में
उत्तर :
(ग) 1857 ई० में।

प्रश्न 37.
ग्वीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था –
(क) 1861 ई० में
(ख) 1862 ई० में
(ग) 1863 ई० में
(घ) 1864 ई० में
उत्तर :
(क) 1861 ई० में।

प्रश्न 38.
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शांति निकेतन में स्कूल खोला –
(क) 1900 ई० में
(ख) 1901 ई० में
(ग) 1902 ई० में
(घ) 1903 ईं० में
उत्तर :
(ख) 1901 ई० में।

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प्रश्न 39.
रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य में नोबल पुरस्कार मिला –
(क) 1919 ई० में
(ख) 1912 ई० में
(ग) 1913 ई० में
(घ) 1914 ई० में
उत्तर :
(ग) 1913 ई० में

प्रश्न 40.
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘सर’ (नाइटहुड) की उपाधि त्याग किया था –
(क) 1919 ई० में
(ख) 1920 ई० में
(ग) 1921 ई० में
(घ) 1922 ई० में
उत्तर :
(क) 1919 ई० में

प्रश्न 41.
शांति निकेतन विद्यालय कब, विश्वभारती विश्वविद्यालय के नाम के रूप में परिवर्तित हुआ –
(क) 1918 ई० में
(ख) 1919 ई० में
(ग) 1920 ई० में
(घ) 1921 ई० में
उत्तर :
(क) 1918 ई० में।

प्रश्न 42.
विश्वभारती को राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला –
(क) 1920 ई० में
(ख) 1921 ई० में
(ग) 1922 ई० में
(घ) 1924 ई० में
उत्तर :
(ख) 1921 ई० में।

प्रश्न 43.
रवीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु हुई –
(क) 1940 ई० में
(ख) 1941 ई० में
(ग) 1942 ई० में
(घ) 1943 ई० में
उत्तर :
(ख) 1941 ई० में।

प्रश्न 44.
रवीन्द्र भवन की स्थापना की गयी –
(क) 1941 ई० में
(ख) 1942 ई० में
(ग) 1943 ई० में
(घ) 1943 ई० में
उत्तर :
(ख) 1942 ई० में

प्रश्न 45.
विश्वभारती में लोक शिक्षा संसद की स्थापना कब हुआ था ?
(क) 1936 ई० में
(ख) 1937 ई० में
(ग) 1938 ई० में
(घ) 1939 ई० में
उत्तर :
(क) 1936 ई० में।

प्रश्न 46.
कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1817 ई० में
(ख) 1835 ई० में
(ग) 1857 ई० में
(घ) 1858 ई० में
उत्तर :
(क) 1817 ई० में।

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प्रश्न 47.
बनारस में संस्कृत कॉलेज की स्थापना कब हुई ?
(क) 1780 ई० में
(ख) 1781 ई० में
(ग) 1782 ई० में
(घ) 1783 ई० में
उत्तर :
(ख) 1781 ई० में।

प्रश्न 48.
‘शाति निकेतन आश्रम’ की स्थापना किसने की थी ?
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ख) देवेद्द्रनाथ टैगोर
(ग) मोहित चन्द्र सेन
(घ) राजा राममोहन रॉय
उत्तर :
(ख) देवेद्र्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 49.
‘संवाद कौमुदी’ के संपादक कौन थे ?
(क) ईकबाल
(ख) राजा राममोहन राय
(ग) मुहम्मद अली
(घ) ईश्वर चंद्र विद्यासागर
उत्तर :
(ख) राजा राममोहन राय।

प्रश्न 50.
‘अमृत बाजार पत्रिका’ के संपादक कौन थे ?
(क) शिशिर कुमार घोष
(ख) मुहम्मद अली
(ग) राजा राम मोहन राय
(घ) तारकनाथ दास
उत्तर :
(क) शिशिर कुमार घोष।

प्रश्न 51.
‘सोम प्रकाश’ साप्ताहिक पत्रिका का संस्थापक कौन था ?
(क) मनमोहन घोष
(ख) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
(ग) द्वारकानाथ टैगोर
(घ) देवेन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(ख) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर।

प्रश्न 52.
‘काल’ पत्र के सम्पादक कौन थे ?
(क) केशवबन्द्र सेन
(ख) परांजपे
(ग) अरविंद घोष
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर :
(ख) परांजपे।

प्रश्न 53.
‘इण्डियन मिरर’ पत्रिका के संपादक कौन थे ?
(क) परांजषे
(ख) केशवचन्द्र सेन
(ग) मदन मोहन मालवीय
(घ) मुहम्मद अली
उत्तर :
(ख) केशवचन्द्र सेन।

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प्रश्न 54.
‘वामाबोधिनी’ पत्रिका के सम्पादक कौन थे ?
(क) परांजषे
(ख) केशवचन्द्र सेन
(ग) मुहम्मद अली
(घ) मदन मोहन मालवीय
उत्तर :
(ख) केशवयन्द्र सेन।

प्रश्न 55.
‘होम एंड द वर्ल्ड’ के रचनाकार कौन थे ?
(क) रवन्द्रनाथ टैगोर
(ख) महात्मा गाँधी
(ग) स्वामी विवेकानन्द
(घ) देवेन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 56.
‘बंगदूत्त’ पत्र की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1830 ई० में
(ख) 1840 ई० में
(ग) 1850 ई० में
(घ) 1860 ई० में
उत्तर :
(क) 1830 ई० में।

प्रश्न 57.
‘बंगवासी’ पत्रिका की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1781 ई० में
(ख) 1881 ई० में
(ग) 1882 ई० में
(घ) 1883 ई० में
उत्तर :
(ख) 1881 ई० में।

प्रश्न 58.
‘सत्यार्थ प्रकाश’ के रचनाकार कौन थे ?
(क) स्वामी दयानन्द
(ख) दयानन्द सरस्वती
(ग) मो० इकबाल
(घ) स्वामी विवेकानन्द
उत्तर :
(ख) दयानन्द सरस्वती।

प्रश्न 59.
‘गीताजली’ के रचनाकार कौन थे ?
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ख) देवेन्द्रनाथ टैगोर
(ग) राजा राममोहन राय
(घ) स्वामी विवेकानन्द
उत्तर :
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर

प्रश्न 60.
‘एशियाटिक सोसायटी’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1781 ई० में
(ख) 1784 ई० में
(ग) 1786 ई० में
(घ) 1790 ई० में
उत्तर :
(ख) 1784 ई० में।

प्रश्न 61.
कलकत्ता में सर्वप्रथम स्याही द्वारा छपाई का कार्य आरस्भ किया गया –
(क) विलियम कैरी द्वारा
(ख) विलियम वार्ड द्वारा
(ग) शों टेरेस द्वारा
(घ) ग्राह्म शॉ द्वारा
उत्तर :
(घ) ग्राह्म शॉं द्वारा।

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प्रश्न 62.
1914 ई० में किस कॉलेज की स्थापना हुई –
(क) बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज की
(ख) कलकत्ता साईस कॉलेज की
(ग) कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की
(घ) संस्कृत कॉलेज की
उत्तर :
(ख) कलकत्ता साईंस कोंलेज की।

प्रश्न 63.
‘एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ साइंसेज’ की स्थापना कब हुई ?
(क) 1876 ई० में
(ख) 1877 ई० में
(ग) 1878 ई० में
(घ) 1879 ई० में
उत्तर :
(क) 1876 ई० में।

प्रश्न 64.
किसके प्रयास से ‘बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट’ की स्थापना हुई थी ?
(क) तारानाथ पालित / तारकनाथ पालित
(ख) जगदीश बन्द्र बसु
(ग) महेन्द्रलाल सरकार
(घ) डॉ० पवन दास
उत्तर :
(क) तारानाथ पालित / तारकनाथ पालित।

प्रश्न 65.
‘बसु विज्ञान मंदिर’ संस्था की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1917 ई० में
(ख) 1918 ई० में
(ग) 1919 ई० में
(घ) 1920 ई० में
उत्तर :
(क) 1917 ई० में।

प्रश्न 66.
राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1904 ई० मे
(ख) 1905 ई० में
(ग) 1906 ई० में
(घ) 1907 ई० में
उत्तर :
(ग) 1906 ई० में।

प्रश्न 67.
बंगला छापाखाना के अग्रदूत कौन थे ?
(क) बंकिम चन्द्र चटर्जी
(ख) उपन्द्रकिशोर रॉय चौषरी
(ग) शिशिर कुमार घोष
(घ) अरविन्द घोष
उत्तर :
(ख) उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी।

प्रश्न 68.
उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी के सिद्धान्तों का प्रकाशन कहाँ हुआ था ?
(क) पेनरोज ऐनुअल भोल्यूम्स, ब्रिटेन
(ख) कलकत्ता विश्वविद्यालय, कलकत्ता
(ग) कलकत्ता मेंडिकल कालेज, कलकत्ता
(घ) राश्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल
उत्तर :
(क) पेनरोज ऐनुअल भोल्यूम्स, बिटेन ।

प्रश्न 69.
उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1853 ई० में
(ख) 1863 ई० में
(ग) 1873 ई० में
(घ) 1883 ई० में
उत्तर :
(ख) 1863 ई० में।

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प्रश्न 70.
‘छलेदेर महाभारत’ के रचनाकार कौन थे ?
(क) उंम्द्रकिशार राँय चौभरी
(ख) बंकिम चन्द्र चटर्जी
(ग) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(घ) अरविन्द घोष
उन्तर :
(क) उंग्दाकिशोर राँय चौधरी।

प्रश्न 71.
‘U. N. Roy and Sons’ नामक प्रेस की स्थापना किसने किया था ?
(क) उषेन्द्रनाथ रौंय चौधरी
(ख) उमेशनाथ रॉय
(ग) योगेन्द्रनाथ राँय चौधनी
(घ) अरविंद घोष .
उत्तर :
(क) उंपन्द्रनाथ रॉंब चौधरी।

प्रश्न 72.
यादवपुर विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई –
(क) 1956 ई० में
(ख) 1955 ई० में
(ग) 1856 ई० में
(घ) 1755 ई० में
उत्तर :
(ख) 1955 ई० में।

प्रश्न 73.
चन्द्रशेखर बेकट रमन का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1888 ई० में
(ख) 1900 ई० में
(ग) 1902 ई० में
(घ) 1903 ई० मे
उत्तर :
(क) 1888 ई० में ।

प्रश्न 74.
चन्द्रशेखर बेकट रमन का मृत्यु कब हुआ था ?
(क) 1960 ई० मे
(ख) 1970 ई० में
(ग) 1980 ईै० में
(घ) 2000 ई० में
उत्तर :
(ख) 1970 ई० में।

प्रश्न 75.
चन्द्रशोखर बेंकट रमन को ‘भारत रल’ पुरस्कार कब मिला था ?
(क) 1953 ई० में
(ख) 1954 ई० में
(ग) 1955 ई० में
(घ) 1956 ई० मे
उत्तर :
(ख) 1954 ई० में।

प्रश्न 76.
डों० महेन्दलाल सरकार का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1832 ई० में
(ख) 1833 ई० में
(ग) 1834 है० में
(घ) 1835 इै०
उत्तर :
(ख) 1833 इं० में।

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प्रश्न 77.
इॉ० महेन्द्रलाल सरकार का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) पाईक्काड़ा गॉम, हावड़ा जिला
(ख) पार्क स्ट्रीट, कोलकाता
(ग) बाँकुड़ा
(घ) पश्चिम मेदनीपुर
उत्तर :
(क) पाईकपाड़ा गॉव, हावडा जिला।

प्रश्न 78.
डॉ० महेन्द्रलाल सरकार की मृत्यु क्रब हुई –
(क) 1901 ई० में
(ख) 1902 ई० में
(ग) 1903 ई० में
(घ) 1904 ई० में
उत्तर :
(घ) 1904 ई० में।

प्रश्न 79.
बंगाल के शिवपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना कब हुई –
(क) 1850 ड़० में
(ख) 1852 ई० में
(ग) 1854 ईै० में
(घ) 1856 ई० में
उत्तर :
(घं) 1856 ई०० में।

प्रश्न 80.
‘लंगाली’ पत्र का सम्पादन किसने किया ?
(क) अरविंद घोष
(ख) सुरेन्द्रनाध बनर्जों
(ग) उपेन्द्रकिशोर राँय चौधरी
(घ) केशवचन्द्र सेन
उत्तर :
(ख) सुरेन्द्रनाथ बनर्जों।

प्रश्न 81.
‘गुबारे खातिर’ के रचनाकार कौन थे ?
(क) मौलन असु कलाम अजद
(ख) उेन्द्रकिशोर रोंष चौधरी
(ग) मुहम्मद अली
(घ) अरविंद घाष
उत्तर :
(क) मोलाना अबुल कलाम आजाद।

प्रश्न 82.
भारत में सर्वप्रथम प्रेस में पुस्तक की छपाई कब हुई ?
(क) 1450 ई० में
(ख) 1684 ई० में
(ग) 1710 ई० में
(घ) 1850 ई० मे
उत्तर :
(ख) 1684 ई० में

प्रश्न 83.
भारत का पहला पत्र ‘द बंगाल गजट’ कब प्रकाशित हुआ ?
(क) 1684 ई० में
(ख) 1784 ई० में
(ग) 1760 ई० में
(घ) 1800 ई० मे
उत्तर :
(ख) 1784 ई० में

प्रश्न 84.
सन् 1770 से 1880 ई० के बीच भारत में कितने प्रेस थे ?
(क) 20
(ख) 40
(ग) 60
(घ) 80
उत्तर :
(ख) 40

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प्रश्न 85.
बैपटिस्ट मिशन ने श्रीरामपुर में कब प्रेस की स्थापना की ?
(क) 1720 ई० में
(ख) 1740 ई० में
(ग) 1760 ई० में
(घ) 1800 ई०० में
उत्तर :
(घ) 1800 ई० में

प्रश्न 86.
सर्वप्रथम लार्ड वेलेजली ने समाचार पत्र प्रकाशन अधिनियम कब लागू किया ?
(क) 1799 ई० में
(ख) 1888 ई० में
(ग) 1801 ई० में
(घ) 1803 ई० में
उत्तर :
(क) 1799 ई० में

प्रश्न 87.
यू० एन० राय एण्ड सन्स प्रेस की स्थापना कब हुई ?
(क) 1890 ई० में
(ख) 1900 ई० में
(ग) 1913 ई० में
(घ) 1905 ई० में
उत्तर :
(ग) 1913 ईै० में

प्रश्न 88.
बाल साहित्य के अग्रणी रचनाकार –
(क) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) उपेन्द्र किशोर राय
(घ) स्वामी विवेकानन्द
उत्तर :
(ग) उपेन्द्र किशोर राय

प्रश्न 89.
‘आश्रम विद्यालय’ की स्थापना किसने की ?
(क) स्वामी विवेकानन्द्र
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) आशुतोष मुखर्जी
(घ) राजा राममोहन
उत्तर :
(ख) रवीन्द्रनाथ टैगोर

प्रश्न 90.
‘आश्रम विद्यालय’ की स्थापना रवीन्द्रनाथ ने कब की ?
(क) 1900 ई० में
(ख) 1901 ई० में
(ग) 1902 ई० में
(घ) 1903 ई० में
उत्तर :
(ख) 1901 ई० में

प्रश्न 91.
विश्व भारती विश्वविद्यालय कब बना ?
(क) 1905 ई० में
(ख) 1921 ई० में
(ग) 1902 ई० में
(घ) 1903 ई० में
उत्तर :
(ख) 1921 ई० में

प्रश्न 92.
हुगली के श्रीरामपुर में श्रीरामपुर प्रेस की स्थापना हुई –
(क) 1800 ई० में
(ख) 1801 ई० में
(ग) 1802 ई० में
(घ) 1770 ई० में
उत्तर :
(क) 1800 ई० में

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प्रश्न 93.
ओरिएण्टल मैगजीन ऑफ कलकत्ता का प्रकाशन हुआ –
(क) 1782 ई० में
(ख) 1784 ई० में
(ग) 1785 ई० में
(घ) 1788 ई० में
उत्तर :
(ग) 1785 ई० में

प्रश्न 94.
मिरातुल अखबार (फारसी) का प्रकाशन हुआ –
(क) 1882 ई० में
(ख) 1884 ई० में
(ग) 1885 ई० में
(घ) 1888 ई० में
उत्तर :
(क) 1882 ई० में

प्रश्न 95.
मौलाना आजाद की 1912 ई० में कलकत्ता से कौन सी पत्रिका निकली –
(क) अल हिलाल
(ख) सबेरा
(ग) संध्या
(घ) काल
उत्तर :
(क) अल हिलाल

प्रश्न 96.
मिरात उल अखबार की भाषा क्या थी ?
(क) हिन्दी
(ख) अरबी
(ग) फारसी
(घ) उर्दू
उत्तर :
(ग) फारसी

प्रश्न 97.
चन्द्रिका नामक पत्रिका का सम्पादन किसने किया ?
(क) मार्शमैन
(ख) राममोहन रॉंय
(ग) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
(घ) मनमोहन घोष
उत्तर :
(ख) राममोहन राय

प्रश्न 98.
चन्द्रिका पत्रिका का प्रकाशन कब शुरू हुआ ?
(क) 1882 ई० में
(ख) 1830 ई० में
(ग) 1835 ई० में
(घ) 1840 ई० में
उत्तर :
(क) 1882 ई० में

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प्रश्न 99.
इणिडयन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस की संस्थापना किसने की ?
(क) सुकुमार राय
(ख) प्रफुल्ल चन्द्र राय
(ग) महेन्द्र लाल सरकार
(घ) जगदीश बस
उत्तर :
(ग) महेन्द्र लाल सरकार

प्रश्न 100.
‘श्री रामपुर प्रेस’ का बापिस्ट मिशन प्रेस के साथ विलय कब हुआ ?
(क) 1833 ई० में
(ख) 1835 ई० में
(ग) 1838 ई० में
(घ) 1832 ई० में
उत्तर :
(ख) 1835 ई० में

प्रश्न 101.
सन् 1778 ई० में सर्वप्रथम बंगला टाइप में हुगली स्थित प्रेस में बंगला व्याकरण की पुस्तक थी –
(क) एण्ड़ज
(ख) बंगला व्याकरण की
(ग) बंगभगग
(घ) बंगाल गजट
उत्तर :
(ख) बंगला व्याकरण की

प्रश्न 102.
किस एक्ट द्वारा विश्वविद्यालयों में विज्ञान की शिक्षा देने की बात कही गई ?
(क) 1905 ई० के एक्ट द्वारा
(ख) 1906 ई० के एक्ट द्वारा
(ग) 1909 ई० के एक्ट द्वारा
(घ) 1035 ई० के एक्ट द्वारा
उत्तर :
(ख) 1906 ई० के एक्ट द्वारा

प्रश्न 103.
कलकत्ता में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना हुई –
(क) 1940 ई० में
(ख) 1840 ई० में
(ग) 1856 ई० में
(घ) 1854 ई० में
उत्तर :
(ग) 1856 ई० में

प्रश्न 104.
बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना कब हुई ?
(क) 1905०, में
(ख) 1906 ई० में
(ग) 1907 ई० में
(घ) 1908 ई० में
उत्तर :
(ख) 1906 ईं० ने

प्रश्न 105.
ब्रह्मचर्य आश्रम की स्थापना हुई –
(क) 22 दिसम्बर, 1901 ई० में
(ख) 22 दिसम्बर, 1902 ई० में
(ग) 22 दिसम्बर, 1903 ई० में
(घ) 22 दिसम्बर, 1904 ई० में
उत्तर :
(क) 22 दिसम्बर, 1901 ई० में

प्रश्न 106.
दिग्दर्शन नामक मासिक पत्रिका किसके नेतृत्व में निकली ?
(क) गजा राममोहन राय
(ख) मार्शमेन
(ग) डेविड हेयर
(घ) विद्यासागर
उत्तर :
(ख) मार्शमैन

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प्रश्न 107.
संवाद कौमुदी का प्रकाशन कब हुआ ?
(क) 1821 ई०
(ख) 1822 ई०
(ग) 1816 ई०
(घ) 1818 ई०
उत्तर :
(क) 1821 ई०

प्रश्न 108.
ब्रहा निकल पत्रिका किस भाषा में निकलती थी ?
(क) फारसी
(ख) संस्कृत
(ग) हिन्दी
(घ) अंग्रेजी
उत्तर :
(घ) अंग्रेजी

प्रश्न 109.
भारत का प्रथम वैज्ञानिक शोध का संस्थान था –
(क) हिन्दू कॉलेज
(ख) यादवपुर विश्भविद्यालय
(घ) विश्च भारती
(घ) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीभेशन ऑफ साईस
उत्तर :
(घ) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीभेशन ऑफ साईस

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 mark)

1. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना ………….. ई० में हुई थी।
उत्तर : 1835

2. प्रफुल्लचन्द्र ………….. राय के प्रोफेसर थे।
उत्तर : रसायन विज्ञान।

3. ………….. ने बंगला कटिंग टाइप फोंट पंचानन कर्मकार से खरीदा था।
उत्तर : सर चार्ल्स विलकिन्स।

4. बंगाल के शिशु साहित्यकार ………….. बे।
उत्तर : उपन्द्रकिशोर रांय चौधरी।

5. ………….. बंगाल का ‘नवजागरण काल’ कहा जाता है।
उत्तर : राजा राममोहन राय के समय को।

6. देश का पहला होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज ………….. में स्थापित हुआ था।
उत्तर : कलकत्ता।

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7. ‘संदेश’ ………….. द्वारा प्रकाशित एक मासिक पत्रिका थी।
उत्तर : उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी।

8. ………….. दूसरा भारतीय पत्र था।
उत्तर : इंडिया गजट।

9. शान्ति निकेतन ………….. विश्वविद्यालय के रूप में ख्याति प्राप्त संस्था है।
उत्तर : अन्तर्राष्ट्रीय।

10. ………….. रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता थे।
उत्तर : देवेन्द्रनाथ टेगोर।

11. ………….. में गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी द्वारा चिकित्मा एवं व्यावसायिक शिक्षा और कृषि की शिक्षा की व्यवस्था की गई थी।
उत्तर : सन् 1911 में।

12. ………….. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना किया था।
उत्तर : विलियम बेंटिक ने।

13. मेघनाथ साहा ने ………….. में अमूल्य योगदान दिया।
उत्तर : तारा भौतिकी।

14. भारत का प्राचीनतम शोध संस्थान ………….. है।
उत्तर : इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईन्स।

15. कलकत्ता साईन्स कॉलेज ……….. के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर : यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ साईन्स एण्ड टेकनॉलोजी।

16. मिरात-उल-अखबार भाषा में है।
उत्तर : फारसी।

17. ………….. में ब्रह्म समाज की स्थापना राजा राममोहन राय ने किया।
उत्तर : सन् 1828 में।

18. सत्यजीत रॉय ………….. थे।
उत्तर : एक महान फिल्म निर्माता।

19. द्वारिकानाथ गाँगुली के दामाद ………….. .थे।
उत्तर : उपेन्द्रकिशोर रॉंय चौधरी।

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20. ‘किरणों के परावर्तन का प्रभाव’ नामक सिद्धान्त का प्रकाशन ………….. .हुआ था।
उत्तर : सन् 1928 में।

21. ………….. रीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
उत्तर : 1913 ई० में।

22. ………….. के विरुद्ध लॉर्ड लिटन का वर्नाक्यूलर प्रेस ऐक्ट लागू किया गया।
उत्तर : सोमप्रकाश।

23. ………….. .ने अंग्रेजी के बंगाली पत्र को खरीद लिया।
उत्तर : सुरेन्द्रनाथ बनर्जी।

24. द० बंगाल गजट का प्रकाशन ………….. ने किया ।
उत्तर : जेम्स आगस्ट्स हिक्की।

25. ………….. के दशी भाषा कानून के कारण सोम प्रकाश के विरुद्ध मुकदमा चला।
उत्तर : वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट।

26. इण्डिबन एसोसिएशन फॉर द कल्टीभेशन ऑफ साईस के प्रथम सेक्रेटरी………….. थे।
उत्तर : डॉ॰ महेन्द्रलाल सरकार।

27. प्रो० ………. ने 1907 से 1933 ई० के बीच इण्डियन एसोसिएशन फॉर दी कल्टीभेशन ऑफ साईंस में शोधकार्य किया।
उत्तर : चन्द्रशेखर बेंकट रमन।

28. बीसवीं शताब्दी के प्रथम दशकों में एकमात्र शोध संस्थान ……….था।
उत्तर : बसु विज्ञान मंदिर।

29. दी कलकत्ता साइंस कॉलेज के संस्थापक ……….थे।
उत्तर : आशुतोष मुखर्जी।

सही कथन के आगे ‘True’ एवं गलत कथन के आगे ‘False’ लिखिए : (1 Mark)

1. कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रथम एम० ए० महिला कार्दम्बनी बसु (गांगुली) थी।
उत्तर : False

2. बांग्ला में लाइनोटाइप को विद्यासागर ने प्रस्तावित किया था।
उत्तर : False

3. शांतिनिकेतन साधु-कुटी (आश्रम) की स्थापना सर्वप्रथम रवीन्द्रनाथ टैगोर ने को।
उत्तर : False

4. ‘टिम्दर्शन’ नामक मासिक पत्रिका के संपादक मार्शमैन थे।
उत्तर : False

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5. ब्रिटिश इण्डिन एसोसिएशन के एक सदस्य, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी थे।
उत्तर : True

6. ‘सुलभ समाचार’ हिन्दी का महत्वपूर्ण दैनिक पत्र था।
उत्तर : True

7. ‘दूनद्नीर बाई’ नामक कृति के रचनाकार उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी थे।
उत्तर : False

8. ‘मॉडर्न रिव्यू’ का प्रकाशन दुर्गाप्रसाद मिश्र के नेतृत्व में हुआ था।
उत्तर : True

9. बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना सन् 1914 में हुआ था।
उत्तर : True

10. ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ का नाम बदलकर ‘बोस इंस्टीच्यूट’ रखा गया।
उत्तर : False

11. सन् 1823 में ‘विल्सन’ की अध्यक्षता में ‘जन शिक्षा की समिति (Communittee of public instruction) का गठन किया गया।
उत्तर : True

12. ‘बह्मतर्य आश्रम’ की स्थापना ‘शांति निकेतन’ में किया गया था।
उत्तर : True

13. ‘चीन भवन’ की स्थापना प्राध्यापक ‘तान युन सान’ के प्रयास से हुई
उत्तर : True

14. विश्व के महान शिक्षाविद् ‘सिलवैन लिवी’, ‘विंटरनिद्ज स्टन नो’ तथा ‘उससी’ ने ‘कलकत्ता विश्वविद्यालय (CalcuTrueTruea UniversiTruey) का श्रमण किया था।
उत्तर : False

15. ‘चन्द्रिका’ नामक पत्रिका का प्रकाशन राजा राममोहन राय ने किया।
उत्तर : False

16. लॉर्ड वेलेजली ने सन् 1799 में समाचार-पत्रों पर अंकुश लगाया।
उत्तर : True

17. उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
उत्तर : True

18. ‘U. N. Roy and Sons’ के नाम से दक्षिण एशिया का पहला प्रेस सन् 1913 में स्थापित हुआ।
उत्तर : True

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19. सन् 1850 में बंगाल के शिवपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की गई।
उत्तर : False

20. आचार्य प्रफुल्लचन्द्र राय ने ‘कलकत्ता विज्ञान कॉलेज’ की स्थापना किया था।
उत्तर : False

21. रमन इफेक्ट के सिद्धान्त का प्रकाशन सन् 1902 में हुआ था।
उत्तर : False

22. सन् 1922 में विश्वभारती के नियम कानून को बनाया गया।
उत्तर : True

23. मुद्रण कला में बंगला हरफ के जनक का नाम ‘पंचानन कर्मकार’ था।
उत्तर : True

24. श्रीरामपुर मिशन प्रेस ने लगभग 45 भाषाओं में विभिन्न विषयों पर सन् 1800 से 1832 ई० तक लगभग 21200 पुस्तकों का प्रकाशन किया था।
उत्तर : True

25. योगेन्द्रनाथ सरकार की सिटि बुक सोसाइटी द्वारा प्रथम पुस्तक ‘छेलेदेर रामायण’ का प्रकाशन हुआ।
उत्तर : False

26. विख्यात सेंट जेवियर्स कॉलेज की स्थापना 1850 ई० में हुई।
उत्तर : False

27. 1865 ई० में अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का माध्यम निध्चित किया गया।
उत्तर : False

28. संवाद कौमुदी का प्रकाशन बंगाली भाषा में होता था।
उत्तर : True

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29. सोम प्रकाश एक दैनिक समाचार पत्र था।
उत्तर : False

30. उपेन्द्र किशोर रायचौधरी ने यू०एन०राय एण्ड सन्स की स्थापना की।
उत्तर : True

31. इण्डियन एसोसिएशन फॉर साईस का मूल उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और उस शोंध को व्यावहारिक रूप देना था
उत्तर : True

32. प्रो० सी॰वी० रमण को ‘रमन प्रभाव’ की खोज करने के कारण 1940 ई० में नोबेल पुरस्कार मिला।
उत्तर : True

33. बंगाल केमिकल और फरमैस्यूटिकल्स की स्थापना मेघनाद साहा ने की।
उत्तर : False

34. ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ की स्थापना में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने पर्याप्त आर्थिक सहयोग दिया।
उत्तर : False

35. रवीन्द्रनाथ की शिक्षा का उद्देश्य यह था कि शिक्षा द्वारा चरित्र का विकास पाश्थात्य आदर्शों के अनुरूप हां।
उत्तर : False

निम्नलिखित कथनों की सही व्याख्या चुनकर लिखिए : (1 mark)

प्रश्न 1.
कथन : रवीन्द्रनाथ उपनिवेशिक शिक्षा पसन्द नहीं करते थे।
व्याख्या 1 : क्योंकि, यह शिक्षा खर्चीली थी।
व्याख्या 2 : क्योंकि, शिक्षा व्यवस्था का माध्यम मातृभाषा थी।
व्याख्या 3 : क्योंकि, इस व्यवस्था से छात्रों का मानसिक विकास नहीं होता था।
उत्तर :
व्यखख्या 3 : क्योंकि, इस व्यवस्था से छात्रों का मानसिक विकास नहीं होता था।

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प्रश्न 2.
कथन : सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के सहयोग से, सन् 1876 में भारत सभा ने आयोजित किया
व्याख्या 1 : ब्रिटिश सरकार के विरोधिता का स्वयं को श्रेय देना।
व्याख्या 2 : सामान्य राजनीतिक आदर्शों के आधार पर भारत के विभिन्न लोगों को एकीकृत करना।
व्याख्या 3 : इलबर्ट बिल के खिलाफ जनता में आम राय बनाना।
उत्तर :
व्याख्या 2 : सामान्य राजनीतिक आदर्शों के आधार पर भारत के विभिन्न लोगों को एकीकृत करना।

प्रश्न 3.
कथन : रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा ‘नाइटहुड’ की उपाधि का त्यागना -:
व्याख्या 1 : चौरी-चौरा घटना के विरोध में टेगोर ने नाइटहुड उपाधि को लौटाया।
व्याख्या 2 : नमक पर अंग्रेजों का एकाधिकार, सविनय अवज्ञा का एक साहसिक कदम।
व्याख्या 3 : जालियांवाला सामूहिक हत्याकांड के विरोध में टैगोर द्वारा ‘नाइटहुड’ उपाधि को त्यागना।
उत्तर :
व्याख्या 3 : जालियांवाला सामूहिक हत्याकांड के विरोध में टैगोर द्वारा ‘नाइटहुड’ उपाधि को त्यागना।

प्रश्न 4.
कथन : कोलकाता आधुनिक भारतीय चित्रकारिता के जनजागरण का केन्द्र था।
व्याख्या 1 : हावेल ने संस्थानिक पाठ्यक्रम में मौलिक परिवर्तन लाया।
व्याख्या 2 : कलकत्ता आर्ट स्कूल के कई स्नातक पोट्रेट पेन्टर्स के रूप में श्रेष्ठता प्राप्त किये हैं।
व्याख्या 3 : ए हैण्ड बुक ऑफ इण्डियन आर्ट आधुनिक भारतीय चित्रकारिता का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन है।
उत्तर :
व्याख्या 2 : कलकत्ता आर्ट स्कूल के कई स्नातक पोट्रेट पेन्टर्स के रूप में श्रेष्ठता प्राप्त किये हैं।

प्रश्न 5.
कथन : पंचानन कर्मकार ने 14 भाषाओं के वर्णमालाओं का हरफ बनाया।
व्याख्या 1 : पंचानन कर्मकार मुद्रण कला के जनक थे।
व्याख्या 2 : पंचानन कर्मकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के समय से ही प्रेस कार्य का आरम्भ किया था।
व्याख्या 3 : वे एक पुस्तक विक्रेता थे।
उत्तर :
व्याख्या 2 : पंचानन कर्मकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के समय से ही प्रेस कार्य का आरम्भ किया था।

प्रश्न 6.
कथन : उपेन्द्र किशोर ने आधुनिक प्रेस की नींव रखी।
व्याख्या 1 : उनकी छपाई लोकप्रिय थी।
व्याख्या 2 : उन्होंने चित्रों का स्टुडियों खोला।
व्याख्या 3 : उन्होंने विदेश से आधुनिकतम मुद्रण यंत्रों का आयात किया।
उत्तर :
व्याख्या 3 : उन्होंने विदेश से आधुनिकतम मुद्रण यंत्रों का आयात किया।

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प्रश्न 7.
कथन : 1921 ई० में बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की गई।
व्याख्या 1 : उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए।
व्याख्या 2 : होमियोपैथी शिक्षा के प्रसार के लिए।
व्याख्या 3 : विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के प्रारूप के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 3 : विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के प्रारूप के लिए।

प्रश्न 8.
कथन : इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईंन्स की स्थापना हुई ?
व्याख्या 1 : विज्ञान तथा तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए।
व्याख्या 2 : यह संस्थान भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, ऊर्जा, बहुलक तथा पदार्थों के सीमांतवर्ती क्षेत्रों मे मैलिक शोध करने के लिए।
व्याख्या 3 : उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए।
उत्तर :
व्याख्या 2 : यह संस्थान भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, ऊर्जा, बहुलक तथा पदार्थों के सीमांतवर्ती क्षेत्रों मे मैलिक शोध करने के लिए।

प्रश्न 9.
कथन : एतिहासिक दृष्टिकोण से विश्वभारती विद्यालय पर्यटन का केन्द्र रहा है।
व्याख्या 1 : उनका घर ऐतिहासिक महत्व का इमारत है।
व्यख्या 2 : रवीन्द्रनाथ टैगोर ने यहाँ कई कालजयी साहित्यिक कृतियों का सृजन किया है।
व्याख्या 3 : यह प० बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित है।
उत्तर :
व्याख्या 1 : उनका घर ऐतिहासिक महत्व का इमारत है।

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) राजा राममोहन राय (a) तमिलनाडु में
(ii) चन्द्रशेखर वेंकट रमन का जन्म (b) अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माता
(iii) सत्यजीत राय (c) महेन्द्रलाल सरकार ने
(iv) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (IACS) (d) ब्राह्मिनिकल मैगजीन की स्थापना

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) राजा राममोहन राय (d) ब्राह्मिनिकल मैगजीन की स्थापना
(ii) चन्द्रशेखर वेंकट रमन का जन्म (a) तमिलनाडु में
(iii) सत्यजीत राय (b) अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माता
(iv) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (IACS) (c) महेन्द्रलाल सरकार ने

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प्रश्न 2.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सर सैयद अहमद खान (a) ‘श्रीरामपुर मिशन’ प्रेस
(ii) चार्ल्स विल्किस (b) अलीगढ़ साइंटिफिक सोसाइटी की स्थापना
(iii) बंगाली न्यूज पेपर और मैगजीन प्रकाशन का प्रारम्भ (c) तकनीकी शिक्षा सभिति का गठन
(iv) मेघनाद साहा (d) अंग्रेजी में ‘भगवदगीता’ का अनुवाद

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सर सैयद अहमद खान (b) अलीगढ़ साइंटिफिक सोसाइटी की स्थापना
(ii) चार्ल्स विल्किस (d) अंग्रेजी में ‘भगवदगीता’ का अनुवाद
(iii) बंगाली न्यूज पेपर और मैगजीन प्रकाशन का प्रारम्भ (a) ‘श्रीरामपुर मिशन’ प्रेस
(iv) मेघनाद साहा (c) तकनीकी शिक्षा सभिति का गठन

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बंगाल गजट (a) 1784 ई० में
(ii) श्रीरामपुर मिशन प्रेस (b) 1800 ई० में
(iii) कलकत्ता गजट (c) 1780 ई० में
(iv) ओरिएण्टल मैंगजीन ऑफ कलकत्ता (d) 1785 ई० में

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) बंगाल गजट (b) 1800 ई० में
(ii) श्रीरामपुर मिशन प्रेस (d) 1785 ई० में
(iii) कलकत्ता गजट (a) 1784 ई० में
(iv) ओरिएण्टल मैंगजीन ऑफ कलकत्ता (c) 1780 ई० में

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) कलकत्ता विश्चविद्यालय (a) 1914 ई० में
(ii) बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज (b) 1921 ई० में
(iii) कलकत्ता साइंस कॉलेज (c) 1880 ई० में
(iv) होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज (d) 1857 ई० में

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) कलकत्ता विश्चविद्यालय (d) 1857 ई० में
(ii) बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज (b) 1921 ई० में
(iii) कलकत्ता साइंस कॉलेज (a) 1914 ई० में
(iv) होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज (c) 1880 ई० में

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प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म (a) 1913 ई० में
(ii) शांतिनिकेतन में एक विद्यालय की स्थापना (b) 1941 ई० में
(iii) रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबल पुरस्कर (c) 1902 ई० में
(iv) जोड़ासांको भवन में उनकी मृत्यु (d) 1861 ई० में

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म (d) 1861 ई० में
(ii) शांतिनिकेतन में एक विद्यालय की स्थापना (c) 1902 ई० में
(iii) रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबल पुरस्कर (a) 1913 ई० में
(iv) जोड़ासांको भवन में उनकी मृत्यु (b) 1941 ई० में

प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1780 ई० (a) इण्डियन मिरर का प्रकाशन
(ii) 1861 ई० (b) मॉडर्न रिव्यू का प्रकाशन
(iii) 1979 ई० (c) अल हिलाल का प्रकाशन
(iv) 1912 ई० (d) द बंगाल गजट का प्रकाशन

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1780 ई० (d) द बंगाल गजट का प्रकाशन
(ii) 1861 ई० (a) इण्डियन मिरर का प्रकाशन
(iii) 1979 ई० (b) मॉडर्न रिव्यू का प्रकाशन
(iv) 1912 ई० (c) अल हिलाल का प्रकाशन

प्रश्न 7.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सर सी॰वी॰ रमन (a) जगदीश चन्द्र बोस, आशुतोश मुखर्जी
(ii) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिभेशन ऑफ साईंस के शिक्षक (b) डॉ॰महेन्द्र लाल सरकार
(iii) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिभेशन ऑफ साईंस के सचिव (c) जगदीश चन्द्र बसु
(iv) बसु विज्ञान मन्दिर (d) नोबल पुरस्कार

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) सर सी॰वी॰ रमन (d) नोबल पुरस्कार
(ii) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिभेशन ऑफ साईंस के शिक्षक (a) जगदीश चन्द्र बोस, आशुतोश मुखर्जी
(iii) इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिभेशन ऑफ साईंस के सचिव (b) डॉ॰महेन्द्र लाल सरकार
(iv) बसु विज्ञान मन्दिर (c) जगदीश चन्द्र बसु

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प्रश्न 8.

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) गोपी गाइन बाघा बाइन नामक कृति (a) ‘अल हिलाल’ पत्रिका का प्रकाशन
(ii) मौलाना अबुल कलाम आजाद (b) मार्शमैन
(iii) चीन भवन (c) उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी
(iv) दिगदर्शन (d) तान पुन सान

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’  स्तम्भ ‘ख’
(i) गोपी गाइन बाघा बाइन नामक कृति (c) उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी
(ii) मौलाना अबुल कलाम आजाद (a) ‘अल हिलाल’ पत्रिका का प्रकाशन
(iii) चीन भवन (d) तान पुन सान
(iv) दिगदर्शन (b) मार्शमैन

 

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 8 उत्तर-औपनिवेशिक भारत बीसवीं शताब्दी का द्वितीयार्द्ध

Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 History Book Solutions Chapter 8 उत्तर-औपनिवेशिक भारत बीसवीं शताब्दी का द्वितीयार्द्ध offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 History Chapter 8 Question Answer – उत्तर-औपनिवेशिक भारत बीसवीं शताब्दी का द्वितीयार्द्ध

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
ऊषा महतो किस आन्दोलन से जुड़ी थी ?
उत्तर :
1942 ई० के भारत छोड़ो आन्दोलन या अगस्त आन्दोलन से।

प्रश्न 2.
पत्ती (पोट्टी) श्रीरामुलु कौन थे ?
उत्तर :
ये भाषायी आन्दोलन के नेता थे। इन्हें आत्र्ध प्रदेश का निर्माता कहा जाता है।

प्रश्न 3.
स्वतन्त्र भारत का प्रथम और अन्तिम गर्वनर जनरल कौन था ?
उत्तर :
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी।

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प्रश्न 4.
देशी रजवाड़ों को भारतीय संघ में शामिल होने के लिए किस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने पड़ते थे?
उत्तर :
इंस्टूमेण्ट आँफ एक्सेसन और स्टैड स्टिल एग्रीमेण्ट पर अथवा (विलय पत्र एवं अंगीकर पत्र पर)।

प्रश्न 5.
जे० एन० चौधरी कौन थे ?
उत्तर :
हैदराबाद रियासत के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही करने वाले टुकड़ी के नेता तथा भारतीय सेना के मेजर जनरल थे।

प्रश्न 6.
रजाकार कौन थे ?
उत्तर :
हैदराबाद के दीवान कासिम रिजवी की सम्पदायिक सेना थी।

प्रश्न 7.
हैदराबाद के प्रधान शासक को क्या कहा ज़ाता था ?
उत्तर :
निजाम।

प्रश्न 8.
‘लज्जा’ किसकी रचना है।
उत्तर :
‘लज्जा’ बंगलादेश की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन की रचना है।

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प्रश्न 9.
रजाकार किसकी आतंकवादी सैन्यवाहिनी थी ?
उत्तर :
हैदराबाद के निजाम के दीवान कासिम रिजवी।

प्रश्न 10.
भारत एवं पाकिस्तान के बँटवारा ने किस समस्या को जन्म दिया ?
उत्तर :
कश्मीर एवं शरणार्थी समस्या।

प्रश्न 11.
पाकिस्तान की माँग कब की गयी थी ?
उत्तर :
सन् 1940 के लाहौर अधिवेशन में।

प्रश्न 12.
मुस्लिम लीग की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
सन् 1906 में।

प्रश्न 13.
‘तसलीमा नसरीन’ कौन हैं ?
उत्तर :
यह एक बंगलादेशी लेखिका हैं।

प्रश्न 14.
राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष कौन थे ?
उत्तर :
न्यायमूर्ति फजल अली।

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प्रश्न 15.
वी० पी० मेनन कौन थे ?
उत्तर :
रियासत संबंधी राज्य मंत्रालय के सचिव थे।

प्रश्न 16.
नेहरू-लियाकत समझौता कब और क्यों हुआ था ?
उत्तर :
8 अप्रैल, सन् 1950 को भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुलझाने के लिए यह समझौता हुआ था।

प्रश्न 17.
भारत गणतंत्र/धर्म निरपेक्ष कब बना ?
उत्तर :
26 जनवरी, 1950 ई० को।

प्रश्न 18.
‘बंगलादेश’ का गठन कब हुआ था ?
उत्तर :
बंगलादेश का गठन 1971 ई० में हुआ था। पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र होकर बंगलादेश बना था।

प्रश्न 19.
महाराजा पटियाला कौन थे ?
उत्तर :
राजाओं के परिषद (Chamber of Princes) के चांसलर (मधानमंत्री) थे।

प्रश्न 20.
अन्तरिम सरकार में प्रतिरक्षा मंत्री कौन थे ?
उत्तर :
सरदार बलदेव सिंह।

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प्रश्न 21.
बरामदे के युद्ध के वास्तविक हीरो कौन थे ?
उत्तर :
बरामदे के युद्ध के वास्तविक हीरो थे – विनय बसु; दिनेश गुप्ता और बादल गुप्ता।

प्रश्न 22.
स्वतंत्रता के समय ब्रिटिश भारत का गवर्नर जनरल कौन था ?
उत्तर :
लाई माउण्टबेटन।

प्रश्न 23.
शेख अब्दुल्ला कौन थे ?
उत्तर :
शेख अब्दुल्ला कश्मीर के नेशनल कांफ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष थे।

प्रश्न 24.
हैदराबाद में किसके नेतृत्व में सैनिक कार्यवाही की गई थी ?
उत्तर :
मेजर जनरल जे० एन० चौधरी के नेतृत्व में।

प्रश्न 25.
‘राष्ट्रभाषा आयोग’ का गठन कब हुआ था ?
उत्तर :
1950 ई० में।

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प्रश्न 26.
विभाजन के समय फ्रांस के पास कितने उपनिवेश थे ?
उत्तर :
तीन उपनिवेश- पांडिचेरी, चन्दननगर, माही।

प्रश्न 27.
पुर्तगाल के उपनिवेशों के नाम बताओ।
उत्तर :
गोवा, दमन और दीव।

प्रश्न 28.
जूनागढ़ को भारत संघ में कब मिलाया गया ?
उत्तर :
फरवरी, 1948 ई० में।

प्रश्न 29.
मराठी आन्दोलन कब आरम्भ हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1960 में।

प्रश्न 30.
भारतीय भाषाओं को कितने भाषायी परिवार में बाँटा गया है ?
उत्तर :
दो भाषायी परिवार – (1) आर्य परिवार एवं (2) द्रविड़ परिवार।

प्रश्न 31.
भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे ?
उत्तर :
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद थे।

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प्रश्न 32.
नागालैण्ड का निर्माण कब किया गया ?
अथवा
नागालैण्ड का भारतीय संघ में विलय कब हुआ ?
उत्तर :
1963 ई० में।

प्रश्न 33.
सिंधी भाषा को कब आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया ?
उत्तर :
1967 ई० में।

प्रश्न 34.
तसलीमा नसरीन द्वारा लिखित दो पुस्तकों के नाम बताएँ जिसमें विभाजन की त्रासदी का वर्णन है।
उत्तर :
तसलीमा नसरीन बंगलादेश की प्रमुख लेखिका हैं। इनकी दो पुस्तके ‘लज्जा’ एवं ‘द्विखण्डिता’ है।

प्रश्न 35.
‘अन्तरिम सरकार’ का गठन कब हुआ था ?
उत्तर :
5 जुलाई, 1947 ई० को।

प्रश्न 36.
मेहरचन्द महाजन कौन थे ?
उत्तर :
कश्मीर के मुख्यमंत्री।

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प्रश्न 37.
कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत सरकार से सैनिक सहायता की माँग कब की ?
उत्तर :
24 अक्टूबर 1947 ई० को।

प्रश्न 38.
भारत-पाकिस्तान युद्ध-विराम कब हुआ था ?
उत्तर :
1 जनवरी 1948 ई० को।

प्रश्न 39.
‘द अनफिनिश्ड मेमोएर्स’ के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
शेख मुजीबुर रहमान।

प्रश्न 40.
वर्तमान में भारत का कितना वर्ग कि॰मी० जमीन पाकिस्तान के अधिकार में है ?
उत्तर :
84000 वर्ग कि०मी०।

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प्रश्न 41.
हैदाराबाद के निजाम ने भारत सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कब किया ?
उत्तर :
नवम्बर 1949 ई० में।

प्रश्न 42.
वर्तमान में भारत में कितनी भाषाओं को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है ?
उत्तर :
22 भाषाओं को।

प्रश्न 43.
भारत की आजादी के समय गृह मंत्री कौन थे ?
उत्तर :
सरदार वल्लभ भाई पटेल।

प्रश्न 44.
पं० जवाहर लाल नेहरू ने कबं पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ में अपील दायर की ?
उत्तर :
1 जनवरी, ई० 1948 को।

प्रश्न 45.
भारतीय सेनाएँ कब हैदराबाद रियासत में प्रवेश हुई ?
उत्तर :
13 दिसम्बर, 1948 ई० को।

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प्रश्न 46.
भारत में पुनर्वास विभाग की स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
1951 ई० में।

प्रश्न 47.
जनमत संग्रह द्वारा किस देशी रियासत को भारतीय संघ में शामिल किया गया था ?
उत्तर :
जूनागढ़ को।

प्रश्न 48.
आपरेशन ‘पोलो’ किस देशी रियासत के सैन्य कार्यवाही से जुड़ा है ?
उत्तर :
हैदराबाद से।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
डार कमीशन (1948 ई०) क्यों बनाया गया था ?
उत्तर :
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद अनेक राज्यों के लोगों ने भाषा के आधार पर नवीन राज्य के गठन की मांग करने लगे थे। उनकी मांग को ध्यान में रख कर 1948 में भारत सरकार ने ड़ार कमिशन का गठन किया था।

प्रश्न 2.
पत्ती श्रीरामालू कौन थे ?
उत्तर :
पत्ती श्रीरामलू तेलगू नेता थे। इन्होंने मद्रास राज्य के 13 तेलगू भाषी जिलों को लेकर अलग राज्य गठन के लिए आन्दोलन शुरू किया। 53 दिनों तक अनशन पर बैठे रहे। इसी दौरान उनकी मृत्यु हो गयी। फलस्वरूप उनके अनुयायी5 दिनों तक उत्पात मचाते रहे। अन्तत: 1952 में सरकार भाषा के आधार पर देश का पहला राज्य ‘आन्ध्रदेश’ बनाने की घोषणा की।

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प्रश्न 3.
‘भारत मुक्ति दलील’ (Instrument of Accession) का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
1947 ई० में जम्मू-कश्मीर देशी रियासत के शासक महाराजा हरि सिंह ने जिस वैधानिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके भारत संघ में शामिल हुए और भारत के प्रभुत्व को स्वीकार किया था, उसे ही ‘भारत मुक्ति दलील’ या ‘विलय पत्र (दस्तावेज)’ कहा जाता है।

प्रश्न 4.
किन परिस्थितियों में कश्मीर के शासक हरि सिंह भारत के अधीन संधि पर हस्ताक्षर किये थे ?
उत्तर :
कश्मीर के शासक व महाराजा हरि सिंह जम्मू एवं कश्मीर को एक स्वतन्त्र राष्ट्र बनाना चाहते थे। पाकिस्तान ने अचानक आक्रमण कर कश्मीर के एक बड़े भाग पर कब्जा कर लिया। ऐसी दशा में कश्मीर को मुक्त कराने के लिए भारत से सैनिक सहायता प्राप्त करने के लिए संधि पत्र पर हस्ताक्षर किये थे।

प्रश्न 5.
राज्य पुनर्गठन आयोग (1953 ई०) में क्यों गठित हुआ था ?
उत्तर :
स्वाधीनता प्राप्ती के साथ देश में भाषाओं के आधार पर राज्यों के निर्माण की माँग की जाने लगी। इसी माँग को ध्यान में रखते हुए, तथा राज्यों को पुनर्गठित करने के लिए 1953 ई० में गृह मन्त्रालय ने सैयद फजल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठित-आयोग गठित किया था।

प्रश्न 6.
नेहरू-लियाकत समझौता (1950 ई०) क्यों हस्ताक्षरित हुआ ?
उत्तर :
भारत विभाजन से उत्पन्न शरणार्थी समस्या तथा अल्पसंख्यको की सुरक्षा के प्रश्न को सुलझाने के लिए 1950 ई० में भारत व पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू-लियाकत अली के बीच ‘नेहरू-लियाकत’ समझौता हस्ताक्षरित हुआ।

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प्रश्न 7.
शरणार्थी समस्या के इतिहास को बताने में स्मृति किस प्रकार स्रोत की भूमिका निभाती है ?
उत्तर :
शरणार्थी समस्या के इतिहास को बताने में स्मृति ग्रंथों तथा अन्य प्रंथों का प्राथमिक स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका है। इन ग्रंथों के माध्यम से हमें शरणार्थियों के दिन-प्रतिदिन की समस्या, रोजी-रोटी की समस्या, आवास की समस्या, इज्जत-आबरू बचाने की समस्या आदि की जानकारी प्राप्त होती है।

प्रश्न 8.
होलोकॉस्ट क्या है ?
उत्तर :
बँटवारा या महाध्वंस को होलोकॉस्ट कहा जाता है। बँटवारे के दौरान हुई चौतरफा हिंसा का पता चलता है। इस बँटवारे में कई लाख लोग मारे गए।

प्रश्न 9.
पेप्सु से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पेप्सू (Patiyala and East Punjab States Union) भारत में 1948 ई० से लेकर 1956 ई० तक का आठ देशी रियासतों का समूह था। इसकी राजधानी पटियाला थी।

प्रश्न 10.
राज्य पुनर्गठन कमीशन के सदस्य कौन-कौन थे ?
उत्तर :
राज्य पुनर्गठन कमीशन के सदस्य थे – फजल अली, के एम. पाणिक्कर और हृदयनाथ कुँजरू।

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प्रश्न 11.
भाषा पर आधारित प्रदेशों का विभाजन क्यों हुआ ?
उत्तर :
भाषा पर आधारित प्रदेशों का विभाजन इसलिए हुआ क्योंकि अलग-अलग भाषा वाले प्रान्तों में देंगे उत्पन्न हो गए थे, जिसे नियंत्रण में लाने का एकमात्र उपाय भाषा के आधार पर प्रदेशों का निर्माण करना था।

प्रश्न 12.
राज्य पुनर्गठन विधेयक के प्रस्ताव के आधार पर कितने राज्य और केन्द्र शासित राज्यों का उदय हुआ?
उत्तर :
राज्य पुनर्गठन के प्रस्ताव के आधार पर 14 राज्य और 6 केन्द्र शासित राज्यों का उदय हुआ।

प्रश्न 13.
बुढ़ी गाँधी के नाम से कौन जानी जाती है और क्यों ?
उत्तर :
मातंगिनी हाजरा को बुड़ी गाँधी कहा जाता है। ये 73 वर्ष की उम्र में गाँधी नीति पर चलते हुए भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेकर शहीद हुई थी। इसलिए इन्हें बुढ़ी गाँधी कहा जाता है।

प्रश्न 14.
राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन कब और किस उद्देश्य से किया गया था ?
उत्तर :
1953 ई० में राज्य पुर्नगठन आयोग का गठन हुआ। इसका उद्देश्य आजादी के बाद स्वतन्त्र हुए राज्यों को नये ढंग से गठित करने के लिए हुआ था।

प्रश्न 15.
हैदराबाद का भारत में कब और कैसे विलय हुआ ?
उत्तर :
नवम्बर 1947 ई० में हैदराबाद पर सैन्य कार्यवाई करने के बाद भारत में शामिल हुआ।

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प्रश्न 16.
भारत का अन्तिम तथा स्वतंन्त्र भारत का प्रथम वायसराय कौन था ?
उत्तर :
भारत का अन्तिम तथा स्वतन्त्र भारत का प्रथम वायसराय लार्ड माउण्टबेटन था।

प्रश्न 17.
वे कौन से राज्य थे, जिन्होने भारतीय संघ में विलय का विरोध किया था ?
उत्तर :
हैदराबाद, जूनागढ़ एवं जम्मू-कश्मीर ने भारतीय संघ में विलय का विरोध किया था।

प्रश्न 18.
बंगाल और पंजाब में शरणार्थियों के अनुप्रवेश में क्या अन्तर था ?
उत्तर :
बंगाल के शरणार्थियों में भाषायी एकरूपता के कारण पहचानना कठिन थां, तथा उन्हें दूसरे राज्यों में बसाना कठिन था। जबकि पंजाब के शरणार्थियों को भाषा के आधार पहचानना तथा, उन्हें दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान जैसे दूसरे राज्य में बसाना सरल था। इस प्रकार इन दोनों की शरणार्थी समस्या भिन्न थी।

प्रश्न 19.
भारत का लौह-पुरुष किसे तथा क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह-पुरुष के नाम से जाना जाता है। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् सैकड़ों देशी रियासते जो आजादी के पश्चात् स्वतंत्र अस्तित्व में थी और जिन्हें भारत अथवा पाकिस्तान में शामिल होने अथवा स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखने की आजादी थी, को उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति एवं सूझ-बूझ से अखण्ड भारत का हिस्सा बनाया। इसी कार्य की सफलता से प्रसन्न होकर गांधीजी ने उन्हें लौह-पुरूष की उपाधि दी थी।

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प्रश्न 20.
देशी रिसायतों से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
देशी रियासतों से तात्पर्य उन राज्यों से है जो ब्विटिश शासन काल में भी अपने शासन को बनाए हुए थे। वे बाहरी और आन्तरिक रूप से अंग्रेजों की कृपा पर आश्रित थे तथा अपनी प्रजा पर स्वयं शासन करते थे।

प्रश्न 21.
जे. वी. पी. समिति का गठन क्यों हुआ था ?
उत्तर :
जे. वी. पी. समिति की स्थापना 1949 ई० में हुई थी। इसका नामकरण इस समिति के तीन सदस्यों के नाम के अंग्रेजी के पहले अक्षर के आधार पर रखा गया। इसके प्रमुख सदस्य थे – जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल, पट्टाभि सीतारमैया। इस समिति का प्रमुख कार्यधर कमीशन के प्रस्तावों में संशोधन करना था।

प्रश्न 22.
भाषायी आयोग का गठन कब हुआ था और इसके उद्देश्य क्या थे ?
उत्तर :
1948 ई० में भारत सरकार ने इलाहाबाद उच्च-न्यायालय के जज एस० के० धर की निगरानी में एक आयोग का गठन किया। इस आयोग का प्रमुख कार्य भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन करना था।

प्रश्न 23.
देश के विभाजन के समय देशी रियासतों के समक्ष क्या विकल्प था ?
उत्तर :
देश के विभाजन के समय अंग्रेजी सरकार ने देशी रियासतों को दो तरह के विकल्प दिए थे –
(i) वह चाहे तो भारतीय संघ में सम्मिलित हो जाए या पाकिस्तान के साथ जाए।
(ii) स्वयं को पूर्ण रूप से स्वतंत्र घोषित कर दे।

प्रश्न 24.
‘राज्य मंत्रालय’ की स्थापना कब और किसके नेतृत्व में हुई थी ?
उत्तर :
5 जुलाई, 1947 ई० को सरदार पटेल के नेतृत्व में।

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प्रश्न 25.
कांग्रेस के कौन-कौन से नेता भाषायी आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी थे ?
उत्तर :
पं० जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल एवं पट्टाभि सीतारमैया इत्यादि।

प्रश्न 26.
देशी राज्यों को भारत में मिलाने में सरदार पटेल की मदद किसने की ?
उत्तर :
देशी राज्यों को भारत में मिलाने में सरदार पटेल की मदद लॉर्ड माउण्टबेटन तथा राज्य मंत्रालय के सचिव वी. पी. मेनन और राजाओं की परिषद् के चान्सलर महाराजा

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल में शरणार्थियों के पुनस्स्थापना में विधानचंद्र राय की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
विधानचंद्र रॉय ने पश्चिम बंगाल में शरणार्थियों के पुनस्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए अंडमान-निकोबार को चुना। इसके अलावा इन्होंने बंगाल के विभिन्न जिलों में सरकारी भूमि पर इनके पुनर्वास की व्यवस्था की।

प्रश्न 28.
हैदराबाद को भारतीय संघ में किस प्रकार शामिल किया गया ?’
उत्तर :
भारत सरकार ने निजाम के इच्छा के विरुद्ध सैनिक कार्रवाई करके तथा जनमत के बल पर हैदराबाद् को भारतीय संघ में सम्मिलित किया था।

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प्रश्न 29.
भारतीय स्वतंत्रता विधेयक में भारतीय रियासतों के विषय में क्या प्रवधान थे ?
अथवा
ब्रिटिश सरकार ने विभाजन के समय देशी नरेशों के संबंध में क्या निर्णय दिया था ?
उत्तर :
1947 ई० के अंग्रेजी संसद द्वारा पारित स्वतंत्रता विधेयक में भारतीय रियासतों के विषय में प्रावधान थे – ‘सभी संधियाँ, समझौते इत्यादि, जो महामहीम की सरकार तथा भारतीय रियासतों के प्रशासकों के बीच हैं वे सब समाप्त हो जायेंगे। शाही उपाधियों तथा शैलियों (Royal style and titles) में से ‘भारत का सम्राट’ शब्द हटा दिया जाएगा। भारतीय रियासतों को यह अनुमति होगी कि वे भारत अथवा पाकिस्तान में से किसी एक में सम्मिलित हो जाए।” या स्वतन्त्र राज्य बनाये रखे।

प्रश्न 30.
फ्रांस की उपनिवेशों चन्दननगर, कालीकट और माही को किस प्रकार भारतीय संघ में मिलाया गया?
उत्तर :
यद्यपि भारत के फ्रांसीसी क्षेत्रों को पेरिस स्थित विधानमण्डल में प्रतिनिधित्व प्राप्त था और फ्रांस के मानव अधिकार भी प्राप्त थे फिर भी वहाँ की सरकार ने अपनी स्वेच्छा से तीनों उपनिवेशों (चन्दननगर, कालीकट और माही) को भारतीय संघ में विलय के लिए सौप दिया।

प्रश्न 31.
शरणार्थियों से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
स्वाधीनता आंदोलन के दौरान मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र की माँग की, फलस्वरूप पाकिस्तान की स्थापना हुई थी। पाकिस्तान में हिन्दू एवं भारत में मुसलमान खुद को असुरक्षित समझते थे। अतः पाकिस्तान से बड़ी सख्या में हिन्दुओं का तथा भारत से मुसलमानों का पलायन आरंभ हुआ ऐसे सहाराहीन लोगों को शरणार्थी कहा गया।

प्रश्न 32.
गोवा, दमन एवं दीव (पुर्तगाली उपनिवेशों) को कैसे भारत में मिलाया गया ?
उत्तर :
भारतीय संघ में विलय के संबंध में पुर्तगाल का रुख असहयोगात्मक था। उनका कहना था कि गोवा पुर्तगाल के महानगरीय क्षेत्र का भाग है इसलिए वे अपना क्षेत्र नहीं छोड़ेंगे। भारत का कहना था कि ये क्षेत्र साम्राज्यवाद के प्रतीक है और भारत मे उनका विलय परम आवश्यक है। भारतीय सरकार ने राजनयिक प्रयास भी किये परन्तु पुर्तगाल नहीं माना। अन्त में 19 सितम्बर, 1961 को सैनिक कार्यवाई कर गोवा, दमन एवं दीव तीनों को भारत में मिला लिया गया।

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प्रश्न 33.
सरकार ने पुनर्वास (Rehabilitation) विभाग की स्थापना क्यों की थी ?
उत्तर :
विभाजन के समय पाकिस्तान से आये लोगों (शरणार्थियों) की सहायता तथा उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए केन्द्रीय सरकार ने पुनर्वास विभाग की स्थापना की थी। जो मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे, उनकी भूमि और सम्पत्तियों को इन शरणार्थियों में बाँटा भी गया था। इस कार्य में भारत के करोड़ों रुपये का व्यय हुआ था।

प्रश्न 34.
स्टेट्स पीपुल्स कांफ्रेन्स का आयोजन कब और कहाँ किया गया था ?
उत्तर :
स्टेद्स पीपुल्स कांफ्रेन्स का आयोजन 1927 ई० में बम्बई में हुआ था।

प्रश्न 35.
सन् 2000 में किन-किन राज्यों का गठन हुआ था ?
उत्तर :
सन् 2000 में छत्तीसगढ़ (मध्य प्रदेश से अलग होकर), उत्तरांचल (उत्तर प्रदेश से निकलकर) और झारखण्ड (बिहार से पृथक होकर) तीन राज्यों का निर्माण हुआ था।

प्रश्न 36.
‘सीमा आयोग’ का गठन क्यों किया गया था ?
उत्तर :
भारत के विभाजन के समय देश की सीमाओं का निर्धरण करने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा न्यायमूर्ति रेडक्लिफ की अध्यक्षता में एक सीमा आयोग का गठन किया गया था जिसका प्रमुख कार्य हिन्दू तथा मुस्लिम बहुसंख्या पर अधिक ध्यान न रखकर अन्य तत्व जैसे – संचार साधन, नदियों तथा पहाड़ों आदि को ध्यान में रखकर सीमा का निर्धरण करना था। केवल 6 सप्ताह में आयोग ने अपने आँकड़े प्रस्तुत कर दिये, जो सही नहीं थे।

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प्रश्न 37.
आन्ध्र प्रदेश के गठन ने देश में अन्य भाषायी आन्दोलन को कैसे तेज किया ?
उत्तर :
स्वतंत्रता के पूर्व ही राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषा को ही आधार बनाया गया जिसके परिणामस्वरूप आन्ध्ध प्रदेश पहला भाषायी राज्य बना। आन्थ प्रदेश का निर्माण होते ही अन्य स्थानों पर भी भाषा के आधार पर प्रान्तों के निर्माण के लिए आन्दोलन होने लगे। इन आन्दोलनों में अहिन्दी राज्यों में हिन्दी का विरोध भी एक मुद्दा बन गया। इस समस्या के समाधान के लिए 1954 ई० में फजल आयोग का गठन किया गया था।

प्रश्न 38.
भाषा के आधार पर बम्बई का विभाजन कैसे किया गया?
उत्तर :
भाषा के आधार पर बम्बई का विभाजन करने के लिए 1960 ई० में मराठी आन्दोलन शुरू हो गया। बम्बई में जगह-जगह हिंसा भड़क उठी और मराठी आन्दोलन का तीव्र गति से प्रचार-प्रसार शुर्रू होने लगा। अतः बाध्य होकर बम्बई राज्य का विभाजन कर महाराष्ट्र एवं गुजरात दो राज्यों की स्थापना हुई।

प्रश्न 39.
1964 ई० तक भारतीय संविधान में सूचीबद्ध भाषाएँ कौन-कौन सी थीं ?
अथवा
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 1964 ई० तक कितनी भाषाओं को सरकारी मान्यता मिली थी ?
उत्तर :
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 1964 ई० तक 14 भाषाओं को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता मिली थी। ये थे –

  1. असमी
  2. बंगला
  3. गुजराती
  4. हिन्दी
  5. कन्नड़
  6. कश्मीरी
  7. मलयालम
  8. मणिपुरी
  9. उड़िया
  10. पंजाबी
  11. संस्कृत
  12. तमिल
  13. तेलुगु
  14. उर्दू।

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प्रश्न 40.
2004 ई० को किन चार भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल गिया गया ?
उत्तर :
चार भाषाएँ –

  1. मैथिली
  2. संथाली
  3. डोगरी
  4. बोडो इत्यादि।

प्रश्न 41.
जूनागढ़ की समस्या क्या थी ?
अथवा
जूनागढ़ को भारतीय संघ में कैसे शामिल किया गया ?
उत्तर :
जूनागढ़, काठियावाड़ में एक छोटी सी रियासत थी, जिसने भारत में सम्मिलित होने में कठिनाई उपस्थित की। दहाँ का शासक मुस्लिम था पर राज्य की बहुसंख्यक जनता हिन्दू थी। नवाब ने अपनी रियासत को बिना जनता की राय और समर्थन से पाकिस्तान में सम्मिलित कर दिया। वहाँ की जनता ने नवाब के खिलाफ विद्रोह कर दिया और एक ‘स्वतंत्र अस्थायी हुकूमत’ की स्थापना भी कर ली। नवाब विद्रोह से घबड़ाकर पाकिस्तान भाग गया। तत्पश्वात् फरवरी, 1948 ई० नें जनमत संग्रह करवाकर जूनागढ़ को भारतीय संघ में सम्मिलित कर लिया गया।

प्रश्न 42.
भारत में विभाजन के समय कौन-कौन रियासतें पाकिस्तान में शामिल हो गई ?
उत्तर :
खैरपुर, बहावलपुर रियासतें।

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प्रश्न 43.
भारतीय संघ में शामिल होने के लिए देशी राज्यों के लिए कौन-कौन से प्रस्ताव पारित किये गये थे?
उत्तर :
दो प्रस्ताव पारित किये गये थे –
(i) इस्टूमेंट ऑंफ एक्सेशन (Instrument of accession)
(ii) स्टेंड स्टिल एग्रीमेंट (Stand still agreement)

प्रश्न 44.
भारत ने 1 जनवरी 1948 ई० में सुरक्षा परिषद में क्या शिकायत की थी ?
उत्तर :
भारत ने 1 जनवरी 1948 ई० में सुरक्षा परिषद् में कश्मीर समस्या के बारे में शिकायत की थी। भारत की शकायत थी कि पाकिस्तान से सहायता प्राप्त कबायली कश्मीर पर लगातार आक्रमण कर रहे हैं जिससे अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। अत: इस समस्या पर शीघ्र विचार किया जाय। भारत ने सुरक्षा परिषद (UNO) में यही शिकायत की थी।

प्रश्न 45.
जे० वी० जोशी कौन थे ? उन्होंने निजाम की कार्यकरिणी से त्याग पत्र क्यों दिया ?
उत्तर :
जोशी हैदराबाद के निजाम की कार्यकारिणी के सदस्य थे। निजाम की शह पाकर मुस्लिम रजाकारों का नेता कासिम रिजवी बहुसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार करने लगा और यहाँ तक की बाह्मणों को मौत के घाट उतारना प्रारम्भ कर दिया। उसने धमकी दी थी कि सम्पूर्ण भारत को जीत कर दिल्ली के लाल किले पर अपना झण्डा फहरा देंगे। निजाम बब कुछ जानते समझते हुए मूक दर्शक बना रहा। तब असन्तुष्ट होकर रिजवी के विरोध में जोशी ने त्याग पत्र दे दिया था।

प्रश्न 46.
कब और किसके प्रयास से हैदाराबाद को भारतीय संघ में मिलाया गया?
उत्तर :
मेजर जनरल जे० एन० चौधरी के नेतृत्व में 18 सितम्बर 1948 ई० को हैदराबाद में सैनिक कार्रवाई करके उसे भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया था। इस सैन्य अभियान का नाम ‘आपरेशन योलो’ दिया गया था।

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प्रश्न 47.
अन्तरिम सरकार में शामिल बंगाल के दो केन्द्रीय मंत्रियों (Cabinet minister) के नाम बताइए।
उत्तर :
(i) डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी। (ii) के० सी॰ नियोगी।

प्रश्न 48.
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और के० सी० नियोगी ने केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से त्याग-पत्र क्यों दिया था?
उत्तर :
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुलझाने के उद्देश्य से 8 अप्रैल, 1950 ईं० को भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते को हिन्दू सम्पदायवादियों ने अस्वीकार कर दिया साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी और के० सी० नियोगी ने इसी समझौता के विरोध में मंत्रिमण्डल से त्याग पत्र दिया था।

प्रश्न 49.
तत्कालीन केन्द्रीय वित्तमंत्री देशमुख ने मंत्रीपद से त्याग पत्र क्यों दे दिया था ?
उत्तर :
राज्य-पुनर्गठन अधिनियम की रिपोर्ट के आते ही महाराष्ट्र के लोग भाषा के आधार पर पृथक महाराष्ट्र राज्य की माँग करने लगे। वित्तमंत्री देशमुख पृथक महाराष्ट्र राज्य की स्थापना के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से वाच- चीत किए, परन्तु नेहरू जी नहीं माने। इसी परिप्रेक्ष्य में वित्तमंत्री देशमुख ने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया।

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प्रश्न 50.
किन-किन क्षेत्रों को मिलाकर बम्बई राज्य का गठन हुआ था ?
उत्तर :
विदर्भ राज्य और हैदराबाद राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र को मिलाकर बृहंद् बम्बई राज्य का गठन हुआ था।

प्रश्न 51.
खुशवन्त सिंह कौन थे ? उनकी एक रचना का नाम बताएँ।
उत्तर :
एक सिक्ख डाक्टर थे। एक रचना – ” लव इज स्टांगर देन हेट, ए रिमेम्बेरेंस ऑफ 1947 ” है।

प्रश्न 52.
सरदार बल्लभ भाई पटेल ने देशी राज्यों को भारत में शामिल करने के लिये कौन सी नीति अपनाई थी ?
उत्तर :
सरदार पटेल एक सशक्त, साहसी और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति थे। देशी राज्यों को भारतीय संघ में शामिल करने के लिए उन्होंने कोमल और कठोर दो तरह की नीतियाँ अपनाई। कुछ राज्यों को उन्होंने भारतीय संघ में सम्मिलित होने का लाभ बताया और उन्हें समझा-बुझाकर भारत में शामिल करने की नीति अपनायी। कुछ राज्य जैसे – जूनागढ़, हैदराबाद ने उनकी बातों को ठुकरा दिया तो उन्होंने बल-प्रयोग द्वारा सीधी कार्रवाई करके उन्हें भारतीय संघ का अंग बनाने के लिए कठोर सैन्य कार्यवाही की नीति आपनायी।

प्रश्न 53.
वर्तमान समय में भारत में संविधान द्वारा स्वीकृत भाषाएँ कितनी हैं ? उनके नाम बताओ।
उत्तर :
भाषाओं को संविधान द्वारा स्वीकृति मिली है। ये हैं –

  1. आसामी
  2. बंगाली
  3. गुजराती
  4. हिन्दी
  5. कन्नड़
  6. कश्मीरी
  7. मलयालम
  8. मराठी
  9. उड़िया
  10. पंजाबी
  11. संस्कृत
  12. तमिल
  13. तेलगू
  14. उर्दू
  15. सिंधी
  16. कोंकणी
  17. मणिपुरी
  18. नेपाली
  19. मैथिली
  20. संथाली
  21. डोगरी
  22. बोडो इत्यादि।

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प्रश्न 54.
कश्मीर मुद्दा में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
1947 ई० में जब पाकिस्तान द्वारा कबाईलीयों को भड़काकर आक्रमण किया गया। तब इसके खिलाफ भारत ने स०रा० संघ में शिकायत की। तब राष्ट्र संघ इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए युद्ध-विराम तथा पूर्ण शान्ति स्थापित होने के बाद जनमत संग्रह द्वारा कश्मीर समस्या के समाधान करने की बात कही।

प्रश्न 55.
शरणार्थियों के भारत आगमन के समय भारत के खाद्यान्नों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर :
शरणार्थियों के आगमन के समय भारतमें खाद्यानों की बड़ी ही विकट स्थिति थी क्योंकि देश के लोगों के लिये खाद्यान्न विदेशों से आयात करना पड़ता था। भारत मे उद्योगों की संख्या नाममात्र की थी विदेशी व्यापार कम से कम होता था ऐसे में भारत को खाद्यान्य को लेकर गम्भीर स्थिति झेलना पड़ रहा था।

प्रश्न 56.
भारतीय स्वतंत्रता आधिनियम को ब्रिटिश संसद ने कब मंजूरी दी ?
उत्तर :
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई 1947 ई० को मंजूरी दी।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
भारत सरकार ने किस प्रकार देशीय रियासतों को भारत संघ में मिलाने के प्रश्न का समाधान की थी?
अथवा
देशी रियासतों के विलय में सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए। अथवा, भारत में देशी रियासतों का विलय कैसे हुआ ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
देशी रियासतों का भारतीय संघ में शामिल होना : भारत की आजादी के समय कुल 601 देशी रियासतें (देशी राजाओं का राज्य) थी, बँटवारा के बाद 565 देशी राज्य भारत में तथा 36 देशी राज्य पाकिस्तान के हिस्से में पड़े। अंग्रेज भारत को आजादी देने से पहले इनके भाग्य का निर्णय करने के लिए उन्हें स्वतंत्र दी थी कि वे भारत के साथ मिलना चाहते हैं या पाकिस्तान के साथ मिलना चाहते हैं, या अपना स्वतंत्र राज्य (देश) बनाना चाहते हैं, इस छूट से बहुत से ऐसे देशी रियासत थी, जो भारत और पाकिस्तान किसी के साथ न मिलकर अपना स्वतंत्र राज्य बनाये रखना चाहते थे, ऐसी स्थिति में भारत कई टूकड़ों में बँट जाता,

और आजादी प्राप्त करने तथा अखण्ड भारत को बनाये रखने का सपना चकनाचूर हो जाता, ऐसी विषम परिस्थिति में भारत सीमा के अन्दर स्थित सभी देश रियासतों को भारतीय संघ में विलय कर एक सुदृढ़ भारत की स्थापना करना चुनौतीपूर्ण कार्य था। इस कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी देशी के तत्कालीन एवं प्रथम गृह मंत्री ‘सरदार वल्लभ भाई पटेल’ को सौंपी गई, उन्होंने अपने सूझ-बूझ से 551 देशी रियासतों को विलय दस्तावेज पत्र पर हस्ताक्षर करा कर भारतीय संघ में शामिल कर लिया। 216 छोटी-छोटी रियासतों को मिलाकर दो बड़े प्रान्त बम्बई और मध्यप्रदेश बनाये गये, 267 देशी राज्यों को मिलाकर पंजाब, राजस्थान, सौराष्ट्र प्रान्त बनाये गये।

कुछ छोटी-छोटी रियासतों को मिलाकर 6 केन्द्रशासित प्रदेश बनाये गये। अब केवल 4 रियासते जम्मु-कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़, और ट्रावणकोर रियासते थी जिन्हें भारतीय संघ में शामिल करना था, ट्रावणकोर (वर्तमान केरल) और जम्मु-कश्मीर के शासक अपना स्वतंत्र देश बनाना चाहते थें, तो वहीं चारों तरफ भारत भूमि से घिरे हैदराबाद और जूनागढ़ पाकिस्तान में मिलना चाहते थें, इनमें से जम्मु-कश्मीर को छोड़कर तीनों रियासतों की जनता अपने शासकों के निर्णय का विरोध कर रही थीं, और वे अपने को भारत में विलय करने के लिए आन्दोलन कर रही थी, जिसे वहाँ की सेना उन पर तरह-तरह का अत्याचार कर रही थी, ऐसे में वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय संघ में शामिल होने की चेतावनी देते हुए सैनिक कार्यवाही करने की धमकी दी।

इसके बाद भी उनके ऊपर जब कोई प्रभाव नहीं पड़ा तब उनके विरूद्ध सैनिक कार्यवाही करनी पड़ी। भारतीय सेना ज्योंहि इनके राज्य में पहुँची, वहाँ के शासक और सैनिक थोड़े-बहुत संघर्ष के बाद आत्मसमर्पण कर दिये और विलयपत्र पर हस्ताक्षर कर भारतीय संघ में शामिल हो गये। इसी प्रकार जम्मु-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह कश्मीर पर पाकिस्तान के धोखे से आक्रमण से विचलित व पेरशान होकर 26 Oct 1947 ई० को स्वेच्छा से विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल होने की घोषणा कर दी।

इस प्रकार अनेकों संघर्ष, सुझ-बूझ और चतुराई, धमकी आदि के कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल सभी देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर आज के मजबूत भारत को बनाने में अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया, उनके इसी कठिनाईपूर्ण कायों को सही ढंग से पूरा करने से प्रसन्न होकर महात्मा गाँधी ने उन्हें ‘लौह-पुरूष” की उपाधि दी थी।

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प्रश्न 2.
काश्मीर समस्या किस प्रकार उत्पत्न हुई ?
उत्तर :
कश्मीर की समस्या : देशी राज्यों का भारतीय संघ में विलय के संबंध में जम्मू-कश्मीर राज्य की समस्या सबसे जटिल थी क्योंकि वहाँ का शासक हरि सिंह हिन्दू था परन्तु राज्य की 80 % जनता मुसलमान थी। महाराजा को यह भय था कि यदि हम भारत में शामिल होते हैं तो यहाँ की मुस्लिम जनता विद्रोह कर देगी और दूसरी ओर यदि पाकिस्तान में सम्मिलित होंगे तो हमें महाराजा की गद्दी से हाथ धोना पड़ेगा।

ऐसी स्थिति में महाराजा ने स्वतंत्र रहकर भारत तथा पाकिस्तान दोनों से मैत्रीपूर्ण समझौता करने का फैसला किया। अत: भारत सरकार ने भी महाराजा हरि सिंह पर कोई दबाव नहीं डाला परन्तु पाकिस्तान के सैनिकों ने कबाइलियों के साथ मिलकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया तथा हिन्दूओं पर अत्याचार करने लगे यही से कश्मीर समस्या का जन्म हुआ।

कबाइली जब आक्रमण करते हुए श्रीनगर के करीब पहुँच गए तो महाराजा ने भारत सरकार से सहायता माँगी और बिना शर्त भारत में सम्मिलित होने के लिए सहमत हो गए। 27 अक्टूबर, 1947 ई० को भारतीय हवाई सेना ने आक्रमण करके श्रीनगर को बचा लिया और वहाँ शान्ति स्थापित की। इस प्रकार आक्रमण करके युद्ध द्वारा कश्मीर को भारत में मिला लिया गया परन्तु कश्मीर का बहुत बड़ा क्षेत्र आज भी ‘आजाद कश्मीर’ के नाम से पाकिस्तान के कब्जे में है और यही क्षेत्र आज भी भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।

प्रश्न 3.
हैदराबाद राज्य किस प्रकार भारत के अधीन हुआ ?
अथवा
हैदराबाद को किस प्रकार भारत संघ में सम्मिलित किया गया था ? संक्षेप में उत्तर दीजिए। अथवा, भारतीय संघ के विलय में हैदराबाद की क्या समस्यायें थीं ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
82 हजार वर्ग मील में फैला भारत का एक बड़ा राज्य हैदराबाद था, जहाँ की आबादी 1.86 करोड़ थीं। यहाँ की जनसंख्या का लगभग 85 % जनता हिन्दू थी और शेष मुसलमान थे। निजाम यहाँ का मुसलमान शासक था जो पाकिस्तान में शामिल होने का सपना देख रहा था परन्तु राज्य की बहुसंख्यक हिन्दू जनता हैदराबाद को भारतीय संघ में सम्मिलित करेने के पक्ष में थी। अन्त में निजाम ने अपने लिए स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने का प्रयास किया।

इसलिए उसने मुस्लिम रज्जाकारों से साठ-गाँठ कर रज्जाकार नामक सेना का गठन भी कर लिया था जिसका नेता कासिम रिजवी था। रिजवी मुस्लिम रजाकारों को सैनिक प्रशिक्षण देकर उन्हें भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था। ये सैनिक बड़े ही आक्रामक एवं साम्प्रदायिक थे। पाकिस्तान भी इन सैनिकों को भरपूर मदद कर रहा था और निजाम भी उनके लिए अस्त्र-शस्त्र का इंतजाम कर रहा था।

लार्ड माउण्टबेटन ने निजाम को काफी समझाया-बुझाया पर वह भारत सरकार से यथास्थिति समझौते (Standstill Agreement) पर हस्ताक्षर करने के अलावा और कुछ भी करने से मुकर गया क्योंकि पाकिस्तान उसको प्रोत्साहन दे रहा था। पाकिस्तान के बहकावे में आकर निजाम ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर लिया और उसके रज्जाकार सैनिक बहुसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार करने लगे। भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित गाँवों पर हमले किये जाने लगे। भारत से होनेवाला यातायात ठप कर दिया गया।

रज्जाकारों के नेता कासिम रिजवी ने भारत को धमकी देते हुए कहा कि समूर्ण भारत पर विजय प्राप्त करके दिल्ली के किले पर निजाम का आसफजाही झण्डा फहराएगा। ऐसी परिस्थिति में भारत सरकार ने निजाम को 1948 ई० में एक अल्टिमेटम भेजा। निजाम ने सरकार के अल्टिमेटम को अनसुना कर दिया तब 13 सितम्बर, 1948 ई० को जनरल जे० एन० चौधरी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने हैदराबाद में प्रवेश किया और 18 सितम्बर तक पूरे राज्य पर सेना ने अधिकार कर लिया।

कुछ दिनों के लिए भारत सरकार ने वहाँ सैनिक शासन स्थापित कर दिया 11 नवम्बर, 1948 ई० को हैदराबाद औपचारिक रूप से भारत संघ का अंग बन गया। निजाम को हैदराबाद का संवैधानिक पद प्रधान नियुक्त किया गया 1956 ई० के राज्य पुनर्गठन के समय हैदराबाद को तीन भाग कर उसके पास स्थित पड़ोसी प्रान्तों आक्ष, बम्बई और मैसूर में मिला दिया गया। उपरोक्त विवरणों से यह पूर्ण रूप से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार ने निजाम की इच्छा के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करके ताकत के बल पर हैदराबाद को भारतीय संघ में सम्मिलित किया था।

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प्रश्न 4.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए : 1947 में देश विभाजन के पश्चात उत्पन्न शरणार्थी समस्या।
उत्तर :
15 अगस्त 1947 ई० की तिथि के साथ दो नये स्वतंत्र राज्य भारत और पाकिस्तान का जन्म हुआ। इस कारण इससे एक तरफ देश में आजादी प्राप्त करने की खुशियाँ मनायी जा रही थी, तो दूसरी तरफ अखण्ड भारत का सपना चूरचूर हो जाने तथा देश-विभाजन हो जाने से देश के विभिन्न भागों में साम्पदायिक दंगे तथा विभाजन से प्रभावित हुए, करोड़ो हिन्दूओं मुस्लमानों को अपना मूल निवास स्थान को छोड़कर असहाय, निर्वासित शरणार्थी जैसा जीवन गुजारने के लिए बाध्य होना पड़ा था।

इनके बीच भड़की हिंसा ने शरणार्थी समस्या को विकराल बना दिया था, कुछ ही महीनों में 5 लाख से अधिक लोग मार डाले गये। लाखों की सम्पत्ति लूटी और बर्बाद की गयी करोड़ों लोगों को एक राष्ट्र से दूसरे राष्ट्र में शरणार्थी के रूप में जीवन-जीने के लिए बाध्य कर दिया। प० पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को भाषा की समानता के कारण उन्हें बसाना आसान था, किन्तु पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थियों को भाषा की समस्या के कारण उन्हे दूसरे राज्यों में बसाना कठिन था।

इस प्रकार भारत के विभाजन ने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के सामने शरणार्थीयों से सम्बंधित गंम्भीर समस्याओं ओो जन्म दिया जिसे सुलझाने के लिए 8th April 1950 ई० को भारत के प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू तथा किसान के तुधानमंत्री (लियाकत अली खाँ) Liaquet ali Khan) के बीच समझौौता हुआ।

जिसे नेहरू-लियाकत अमझौता कहा जाता है। यद्याप इस समझौते का हिन्दू-सम्पदायों ने घोर विरोध किया, किन्तु केन्द्र सरकार ने इस समझौते ओो स्वीकार कर शरणार्थी समस्या को सुलझाने के लिए शरणार्थी पुर्नवास मंत्रालय का गठन किया। इस मंत्रालय ने सबसे जहले भारत में मुसलमानों द्वारा छोड़ी गई सम्पत्ति एवं भूमि को शरणार्थियों मे बाँट दिया, पश्चिमी पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों का प० उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा एवं पंजाब जैसे राज्यों में राजकीय भूमि देकर उन्हें बसाया या, जो धीरे- धीरे भारतीय समाज से घूल-मिलकर एक हो गये।

पूर्वी पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को भी ‘अण्डमान प्ड निकोबार’ द्वीप समूह में बसाया गया, किन्तु भाषायी समस्या होंने के कारण इन्हें दूसरे भाषायी प्रान्तों में बसाना कठिन वा। साथ ही विभाजन के बाद लम्बे समय तक चोरी- छिपे, पूर्वी पाकिस्तान अर्थात बंग्लादेश के ‘चकमा’ शरणार्थी आते हे, इसलिए इनको बसाना एक गंभीर समस्या बन गयी, जो निरन्तर आज भी जारी है। जो देश की अर्थव्यवस्था तथा एकता खण्डता के लिए चुनौती बना हुआ है।

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प्रश्न 5.
स्वतंत्रता के बाद भाषा के आधार पर भारत किस प्रकार पुनर्गठित हुआ ?
उत्तर :
भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन :- वैसे तो देश की आजादी के पहले से ही भाषा के आधार पराज्यों को बनाये जाने की माँग होती रही, किन्तु 1920 में कांग्रेस पार्टी ने अपने नागपुर अधिवेशन में सर्वप्रथम भाषायी आधार पर राज्यों के पुनः पुनर्गठन की माँग स्वीकार कर ली। 1928 में नेहरू रिपोर्ट में पुनः भाषा के आधार पर राज्यों केाठन की संस्तुति की गयी।

1948 में श्री ए. के दर के अध्यक्षता में संविधान सभा ने भाषायी आयोग की नियुक्ति की। इसी र्ष कांग्रेस ने भी जे बी. पी. (जवाहर, बल्लभ-भाई पटेल, पट्टाभि सीता रमैया) समिति की नियुक्ति की। इस समिति ने भी आषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन करने की सलाह दी। इस सलाह के आने के बाद देश भर में भाषा के आधार पर उज्यों के गठन की माँग को लेकर आन्दोलन शुरु हो गया।

अक्टृबर 1952 में तेलगू नेता पोट्टि श्री रामलू ने भाषा के आधार पर आध्रराज्य की गठन को लेकर अनशन शुरु कर किया। 58 दिन तक चलने वाले अमरण अन्सन के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी। जिसके कारण सम्पूर्ण आन्ध प्रदेश दंगो की पेट में आ गया। इसके बाद सरकार दबाव में आकर आन्ध्र राज्य की माँग को स्वीकार कर लिया।

इस प्रकार अक्टूबर 1953 में देश का पहला भाषायी राज्य आन्थ्र प्रदेश अस्तित्व में आया। इसके बाद पूरे देश में भाषा के आधार पर असम, इमिल, पंजाब, हरियाणा, उड़िसा, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र राज्यों का पुनर्गठन हुआ। आज यही भाषायी आधार पर शज्यों का नामकरण देश की एकता, अखण्डता के लिए संकट बन गया है।

प्रश्न 6.
भारत में शरणार्थी समस्या और इसके समाधान का संक्षिप्त वर्णन करो। इस घटना से संबंधित चार वस्तकों के नाम बताओ।
उत्तर :
शरणार्थियों की समस्या : भारत का विभाजन होते ही पाकिस्तान से हिन्दूओं का तथा भारत से मुसलमानों का पलायन आरम्भ होने लगा। भारत और पाकिस्तान सीमा के नगरों एव ग्रामों के गैर- मुसलमान (हिन्दू) भारत में असंगठित दलों के रूप में आना आरम्भ कर दिए। पाकिस्तानी सैनिको की सहायता से हिन्दू भारत की सीमा में झुण्ड के झुण्ड प्रवेश करने लगे। पाकिस्तान में हिन्दू और भारत में मुसलमान खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे।

अत: पाकिस्तान से बड़ी संख्या में हिन्दूओं का पलायन एवं भारत से ससलमानों कां पलायन करने से दोनों देशों में शरणार्थियों के पुनर्वास और उनके देख-रेख की समस्या पैदा हो गई थी। शरणार्थियों के पुनर्वास का प्रयास :शरणार्थियों के पुनर्वास की समस्या भारत और पाकिस्तान दोनो के सामने विकराल रूप ध्रारण किये खड़ी थी। साम्मदायिकता के आधार पर देश के विभाजन के कारण ही साम्पदायिक दंगे आरम्भ हुए थे। करीब एक करोड़ लोगों को अपना सबकुछ त्यागकर दूसरे राष्ट्र में जाने के लिए मजबूर कर दिया गया।

पूर्वी बंगाल के ज्यादातर शरणार्थियों का पुनर्वास भारत के नये राज्य पश्चिम बंगाल में हुआ था, इसके अलावा असम और त्रिपुरा में भी जाकर ये बस गए थे। पाकिस्तान और भारत में शरणार्थियों की समस्याओ को देखते हुए 8 औरल, 1950 ई० को भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच उनकी सुरक्षा के सवाल को मुलझाने के लिए एक संधि हुई, जिसे ‘नेहरू लियाकत समझौता’ के नाम से जाना जाता है। देश के अन्दर तमाम विरोधाभास के होंते हुए भी इसे स्वीकार कर लिया गया। परन्तु इसके बाद भी पूर्वी बंगाल से हिन्दूओं का पलायन जारी रहा शरणार्थी समस्या से संबंधित चार पुस्तके हैं –

  1. ट्रेन दू पाकिस्तान (लेखक खुशवंत सिंह)
  2. तमस (लेखक, भीष्म सहानी)
  3. फ्रीडम एट मिडनाइट (लेखक लैरी कोलिंस) एवं
  4. दि सैडो लाइन (लेखक अभिताभ घोष)।

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प्रश्न 7.
स्वाधीनता के दौरान रियासती राज्यों को भारतीय उपनिवेश में मिलाने के लिए अपनाये गये पदक्षेप क्या थे ?
उत्तर :
देशी-राज्यों का भारतीय संघ में विलय का प्रयास : भारत की स्वाधीनता से पूर्व देश में 565 देशी रियासतें थीं। समस्त भारत का 2 / 5 क्षेत्र तथा 1 / 4 जनसंख्या इन रियासतों में निवास करती थी। प्रशासन, क्षेत्रफल, जनसंख्या और वित्तीय संसाधनों की दृष्टि से इन राज्यों में भारी असमानता थी। इन राज्यों में वहाँ की जनता को कोई अधिकार नहीं थे। कांग्रेस के हरिपुरा सम्मेलन के बाद कुछ देशी रियासतों में नागरिक अधिकार एवं उत्तरदायी सरकार के लए आन्दोलन हुए, परन्तु उन्हें कोई विशेष सफलतः नहों मिली।

बिटिश सरकार ने जब भारत की सत्ता भारतीयों को हस्तांतरित करने का निश्चय कर लिया तब 18 जुलाई, 1947 ई० को बिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947) पारित किया। इस अधिंनिम द्वारा देशी राज्यों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता पुन: देशी राज्यों को लौटा दी गई अर्थात् देशी रखासते पूर्ण स्वतंत्र हो जाएगी और यह उनकी इच्छा पर निर्भर होगा कि वे चाहें तो पाकिस्तान में मिले या हिन्दुस्तान में अथवा वे चाहे तो अपना स्वतत्र अस्तित्व भी बनाए रख सकते हैं।

15 जुलाई, 1947 ई॰ को अन्तरिम सरकार के गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के निर्देशन में ‘राज्य मन्त्रालय”‘ की स्थापना की गई और उन्हे भारत की ओर से देशी नरेशों के साथ बातचीत करने का उत्तरदायित्व सौपा गया। 15 अगस्त, 1947 ई० को भारत स्वतत्र हो गया। भारत के विभाजन के समय खैरपुर, बहावलपुर आदि रियासतें पाकिस्तान में सम्मिलित हो गई और शेष भारत में रह गईं।

प्रश्न 8.
भारतीय संविधान में किस प्रकार विभिन्न भाषाओं को स्वीकृति मिली।
अथवा
भारत में भाषा आन्दोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
स्वतत्रता प्राप्ति के बाद देश के शासन व्यवस्था को चलाने के लिए एक राष्ट्रीय भाषा की जरूरत महसूस हुई, प्रत्येक राज्यो की अपनी-अपनी मातुभाषा थी, ऐसे में शासन चलाने में कठिनाई हो रही थी, इसी समस्या को सुलझाने के लिए भारत सरकार ने 1955 ई० मे रष्ट्र भाषा आयोग का गठन किया। इस आयोग ने 1956 ई० में अणे रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए सुझाव दिया था, कि सरकार के सभी विभागों में धीरे-धीरे अंग्रेजी की जगह हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे 15 वर्ष बाद अंग्रेजी को समाप्त किया जा सके। तभी हिन्दी को पूर्ण रूप से देश की राष्ट्र भाषा बनाया जा सकता है।

आयाग की इस सुझाव के बाद राष्ट्र भाषा को लेकर उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच विवाद हो गया, इस विवाद के बाद भारत सरकार को देश की 14 भाषा को 8 वीं अनुसूचि में 14 क्षेत्रीय/प्रान्तीय भाषाओं – आसामी, गुजराती, बंगाली, पजाबी, कश्मीरी, हिन्दी, मराठो, सस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उड़ीया एवं उर्दु इसके बाद 1967 ई० में हिन्दी भाषा को 1992 ई० में कोंकणी मनीपरी और नेपाली भाषा को 8 वी अनुसूची में शामिल किया गया, इस प्रकार अनेको संघर्ष एवं राजनीतिक उठा-पटक के बाद हिन्दी को राप्ट्भाषा, हिन्दी, अंग्रेजी को राजभाषा तथा 16 राज्यों की मातृभाषाओं को 8 वो अनुसूची में डालकर उनका संरक्षण और समबर्द्धन करके भाषा-विभाग का अन्त किया गया।

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प्रश्न 9.
कश्मीर समस्या क्या शी ?
उत्तर :
कश्मीर समस्या : 15 th Aug 1947 ई० को जब भारत आजाद हुआ, उस समय जम्मु-कश्मीर रियासत भारतीय संध में शामिल नहीं था। इस रियासत की बहुसख्यक जनता मुस्लिम थी, किन्तु शासक हिन्दू महाराजा हरि सिंह थे, इस राज्य की सीमायें, भारत और पाकिस्तान दोनों से मिली हुई थी ऐसे स्थिति में यहाँ के राजा हरि सिंह भारत व भाक्रिस्तान दोनों राज्यों से अलग रहते हुए स्वतंत्र राज्य बनाये रखने का निर्णय लिया।

यह निर्णय पाकिस्तान को पसंद्ध नहीं आया और उसने मुस्लिम बहुल कश्मीर का पाकिस्तान में मिलाने के लिए, उत्तरी-पश्चिमी सीमा प्रान्त के ‘कबाइलियों’ के भष-भूषा में पाकिस्तान के सैनिकों ने 22 अक्टबर 1947 ई० को कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। तब घबराये हुये, हरिसिंह न भारत-सरकार से सैनिक सहायता देने का अनुरोध किया, किन्तु बिना भारत में शामिल हुए, उन्हें सैनिक सहायता से सरकार सहायता देने से इन्कार कर टिया, इसके नाद 26 th oct 1947 ई० को हरि सिंह ने विलय दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके बिना शर्त जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल कर दिया।

इसके बाद भारतीय सेना कश्मीर पहुँचकर पाकिस्तानो कब्जे से जम्मू-कश्मीर के आधिकांश भाग को आजाद कराया इस प्रकार जम्मू-कश्मीर भारतीय-संघ में शामिल हुआ। उसी समय से कश्मीर के कुछ भाग पर आज भी पाकिस्तान को लकर कश्मीर विवाद बना हुआ है। इस कब्जे का सफल समाधान नहीं हो सका। इस विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर की नरीह जनता आज भी कष्ट भुगत रही है।

प्रश्न 10.
आत्म-जीवनी एवं संस्मरणों में देश के विभाजन की चित्रों किस प्रकार प्रतिविंबित हुई हैं ?
उत्तर :
स्मृति ग्रथ इतिहास जानने के एक महन्वपूर्ण साधन है। स्मृति ग्रथथ के अन्तर्गत आत्मकथा, यात्रा-वृतांत, निबंध लेखन, साहित्य, उपन्यास, इतिहास लेखन आदि ग्रन्थ आते हैं। आत्मजीवन मूलक ग्रथों का प्रधान विषय-वस्तु स्मृति कथा है। इस प्रकार स्मृति कथा एक प्रकार का साहित्य है जहाँ लेखक अपने जीवन में घटित घटनाओं का विवरण अपने स्मृति के माध्यम से करता है।

इन सब ग्रन्थों में बंगाली, पजाबी, सिन्धी, हिन्दू, शरणार्थियों का देश त्याग, अव्यवस्थित व असुरक्षित जीवन, विभिन्न शरणार्थी शिविरों की खाद्य, चिकित्सा, अभाव, विघटन एवं अपनों से विदुड़ने की पीड़ा का चित्रण बहुत से लोगों ने किया है। तत्कालीन शरणार्थी कमिशनर हिरन्यमय भट्टाचार्य ने ‘उदवास्तु’ दक्षिणा रंजन बसु ने ‘छेड़े आसा ग्राम’ मणी कुन्तला सेन ने ‘सेदिने कथा’ चौधरी खालिक्कू जमान ने ‘पाथवे टू पाकिस्तान’ में देश का बटवारा, दंगा-फसाद, शरणार्थी जीवन की अन्तहीन दुर्दशा तथा संघर्षमय जोवन की झाँकी प्रस्तुत की है। हिन्दी, अंग्रजी, उर्दू, पंजाबी भाषाओं में भी बटवारा और रारणार्थी समक्या पर लिखि गई आत्मकथाओं और समृति ग्रंथों की कमी नहीं है।

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प्रश्न 11.
राज्य-पुनर्गठन अधिनियम (State Reorganisation Act) के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
पं० जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में दिसम्बर, 1953 ई० में राज्य-पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गई। इसकी स्थापना से भारत में दंगे-फसाद की सम्भावना लगभग कम हो गई। रिपोर्ट के प्रकाश में आते ही देश के विभिन्न भागों में विद्रोह शुरू हो गये। इसका सबसे अधिक प्रभाव बम्बई पर पड़ा। यहाँ दंगा-फसाद आरम्भ हो गया। महाराष्ट्र के लोग भाषा के आधार पर पृथक महाराष्ट्र राज्य की माँग करने लगे, तो दूसरी ओर गुजराती सौराष्ट्र और गुजरात को मिलाकर अलग महा गुजरात राज्य की माँग करने लगे।

केन्द्रीय वित्तमंत्री देशमुख महाराष्ट्र की स्थापना के लिये जवाहरलाल नेहरू से बातचीत किये पर नेहरू जी ने इसे अस्वीकार कर दिया। असन्तुष्ट होकर देशमुख जी ने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया। संसद के दोनों सदनों में भी इस बात पर बहस होने लगी। अन्त में जुलाई, 1956 ई० में संसद ने ‘राज्य पुर्गठठन अधिनियम’ (State Reorganisation Act) पारित कर दिया जिसके अनुसार 14 राज्यों तथा 6 राज्यों को केन्द्रशासित को राज्य का दर्जा दिया गया।

इस अधिनियम द्वारा आयोग की रिपोर्ट में कुछ परिवर्तन किये गये। इस अधिनियम के अनुसार पंजाब और पेप्सू को मिलाकर एक राज्य बना दिया गया। बम्बई राज्य को और विस्तृत कर दिया गया। विदर्भ राज्य और हैदराबाद राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र को बम्बई में मिला दिया गया।हैदराबाद का कुछ अंश मैसूर को दे दिया गया तथा तेलंगाना क्षेत्र को आन्ध मराठवाड़ा क्षेत्र को बम्बई में मिला दिया गया। हैदराबाद का कुछ कम्मिल कर दिया गया।

भोपाल का विलय मध्य प्रदेश में हो गया और अजमेर राजस्थान में शामिल हो गया। आयोग के संतरिश के आधार पर मध्य प्रदेश और केरल दो राज्य बनाए गए। इस अधिनियम की “व विशेषता थीं- राजाओं एवं शासकों के प्रमुख पदों की समाप्ति तथा राज्यों के लिए राज्यपात्Governer) पद की व्यवस्था करना। मिटिश प्रान्तों के चार श्रेणियों को समाप्त कर केवल दो श्रेणियाँ रखी गयी- राज्य तथा केन्द्रशासित प्रदेश।

अतः इस अधिनियम के अनुसार 14 राज्यों तथा 6 केन्द्रशासित राज्यों का गठन किया गया जिनके नाम इस प्रकार थे –

राज्य :

  1. जम्मू-कश्मीर
  2. पंजाब
  3. उत्तर प्रदेश
  4. बिहार
  5. पश्चिम बंगाल
  6. असम
  7. उड़ीसा
  8. आन्ध्र प्रदेश
  9. तमिलनाडु
  10. केरल
  11. मैसूर
  12. बम्बई
  13. मध्य प्रदेश
  14. राजस्थान।

केन्द्रशासित राज्य :

  1. हिमांचल प्रदेश
  2. दिल्ली
  3. मणिपुर
  4. त्रिपुरा
  5. अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह तथा
  6. लक्षद्वीप तथा मिनिकाय द्वीप।

समूह तथा (6) लक्षद्वीप तथा मिनकाय द्वीप। इन विवरणों से यह ज्ञात होता है कि अधिनियम ने तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही राज्यों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया था और राज्यों की माँग के आधार पर ही नये राज्यों का गठन करने का प्रयास किया था। बाद में और भी नये राज्यों का गठन तथा निर्माण कार्य चलता रहा और आन्दोलन भी जारी रहा।

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प्रश्न 12.
सरदार पटेल भाषा के आधार पर बँटवारे के विरुद्ध क्यों थे ? संक्षेप में उत्तर दें।
उत्तर :
देश के स्वतंत्र हो जाने के बाद ब्रिटिश भारत एवं देशी राज्यों को मिलाकर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय संघ की इकाइयों का निर्माण तो कर दिया, परन्तु लोगों को इससे संतोष नहीं हुआ। उनका कहना था कि अंग्रेजो के शासन काल में भारत के प्रान्तों (राज्यों) का निर्माण किसी सिद्धान्त के आधार पर नहीं किया गया था।

उन्होंने नये प्रान्तों का गठन अपने राज्य की सुरक्षा, सामरिक महत्व तथा प्रशासनिक सुविधा आदि बातों को ध्यान में रखकर किया था, भाषा और संस्कृति के आधार पर नहीं। इसके अलावा कांग्रेस प्रादेशिक भाषाओं के आधार पर राज्यों का निर्माण का आश्वासन बहुत पूर्व सन 1920 ई० में ही दे चुकी थी। जब सरकार ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया तो भाषा व संस्कृति के आधार पर प्रान्तों के पुनर्गठन की माँग जोर पकड़ने लगी।

सरदार प्टेल, जवाहरलाल नेहरू और पट्टाभि सीतारमैया इत्यादि नेताओं ने इसका जोरदार विरोध किया। सरदार पटेल तो भाषायी आधार पर राज्यों (ग्रान्तों) के गठन के बिल्कुल खिलाफ थे। उन्हें यह आशंका उत्पन्न हो गई थी कि भाषा व संस्कृति के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन करने से विघटनकारी प्रवृत्तियों को बल मिलेगा, जिससे देश की राजनैतिक और सांस्कृतिक एकता के लिए भयकर खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

सरदार पटेल ने कहा, “‘इस समय भारत की पहली और आखिरी जरूरत है कि उसे एक राष्ट्र बनाया जाय। राष्ट्रवाद का बढ़ावा देने वाली हर ड्रीज आगे बढ़नी चाहिए और उसके रास्ते में रूकावट डालने वाली हर चीज को खारिज किया जाना चाहिए।” सन् 1948 में सांविधान सभा ने न्यायपूर्ति एस० के० धर की अध्यक्षता में एक आयोग की स्थापना की जिसने भाषायी आधार पर राज्यों के गठन की माँग को ठुकरा दिया।

इसके बाद इस समस्या ने व्यापक आन्दोलन का रूप ले लिया। आन्द्र में भाषा के आधार पर राज्य की स्थापना को लेकर उग्र आन्दोलन हुए साथ ही मद्रास प्रान्त भी दंगों के लपेट में आ गया। जब स्थिति अनियन्त्रित हो गयी तो विवश होकर भारत सरकार को 953 ई० में मद्रास प्रान्त के तेलगू भाषा- भाषी लोगो को अलग कर एक नये आन्ध्र प्रदेश की स्थापना करनी पड़ी। इसके बाद देश के अन्य कई प्रान्तों का निर्माण भी भाषायी आधार पर किया गया।

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प्रश्न 13.
भारत के स्वतंत्रता के बाद देश की सबसे बड़ी समस्या क्या थी ? अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :
भारत के स्वतंत्रता के बाद देशी राज्यों (रियासतों) के विलय और उनका एकीकरण करना एक बहुत बड़ी समस्या थी। स्वाधीनता पूर्व देश में कुल छोटी-बड़ी लगभग 600 रियासतें थीं जिनकी जनसंख्या लगभग 9 करोड़ थी और देश के 48 % भूभाग में फैले हुए थे। जनसंख्या, क्षेत्रफल, प्रशासन तथा वित्तीय संसाधनों की दृष्टि से सभी रियासतें एक दूसरे से अलग थीं।

रियासतों के संबंध में कैबिनेट मिशन का प्रस्ताव : 16 मई, 1946 ई० को कैबिनेट मिशन ने देशी राज्यों के संबंध में निम्नलिखित तीन तरह का प्रस्ताव रखा था-

  1. भारत के स्वाधीन होते ही वहाँ से बिटिश प्रभुसत्ता समाप्त हो जाएगी।
  2. आजादी के बाद भारत संघ का गठन ब्रिटिश शासित.भारत और देशी रियासतों (राजाओं द्वारा शासित) को मिलाकर होगा तथा विदेश नीति, सुरक्षा और आवागमन के संसाधनों पर भारत संघ का नियंत्रण होगा।
  3. इन तीनों विभागों के अलावा देशी रियासतों को आन्तरिक प्रशासन की स्वतंत्रता होगी।

प्रश्न 14.
भारत-पाकिस्तान विभाजन से उत्पन्न समस्या का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
देश स्वाधीन होने के पश्चात् 1947 ई० में भारत को दो संप्रभुता सम्पन्न राज्यों में बाँट दिया गया। इस प्रकार से भारत के दो टुकड़े होने का मुख्य कारण साम्भदायिक दंगो का होना था अतः हिन्दू बाहुल्य देश का नाम भारत तथा मुस्लिम बाहुल्य देश का नाम पाकिस्तान पड़ा। दोनों देशों में बहुत बड़े स्तर पर हिंसक घटनाएँ हुई तथा लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा।

यूरोपीय महाध्वश की भाँति हमें बैंटवारें को केवल राजनीतिक घटना नहीं समझना चाहिए। इस बँटवारे के पश्चात् दोनों देशों में शरणार्थियों की समस्या का जन्म हुआ जिसके कारण बहुत बड़े पैमाने पर विध्वंश हुए और लाखों लोगों को साम्पदायिकत्ता के नाम पर जान से हाथ धोना पड़ा।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
विभाजन के पश्रात भारत में देशी राज्यों (रियासतों) के विलय की व्याख्या कीजिए।
अथवा
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी राज्यों के विलय को लेकर भारत को किन-किन संकटों का सामना करना पड़ा और उसका समाधान किस प्रकार किया गया ?
उत्तर :
भारत के स्वतंत्रता के बाद देशी राज्यों (रियासतों) के विलय और उनका एकीकरण करना एक बहुत बड़ी समस्या थी। स्वाधीनता पूर्व देश में कुल छाटी-बड़ी लगभग 565 रियासतें थी जिनकी जनसंख्या लगभग 9 करोड़ थी और देश के 48 % भूभाग में फेले हुए थे। ज़नस्या, क्षेत्रफल, प्रशासन तथा वित्तीय संसाधनों की दृष्टि से सभी रियासते एक दूसरे से अलग थीं।

रियासतों के संबंध में कैबिनेट मिशन का प्रस्ताव : 16 मई, 1946 ई० को कैबिनेट मिशन ने देशी राज्यों के संबंध में निम्नलिखित तीन तरह का प्रस्ताव रखा था –

  1. भारत के स्वाधीन होते ही वहाँ से ब्रिटिश प्रभुसत्ता समाप्त हो जाएगी।
  2. आजादी के बाद भारत संघ का गठन ब्रिटिश शासित भारत और देशी रियासतों (राजाओं द्वारा शासित) को मिलाकर होगा तथा विदेश नीति, सुरक्षा और आवागमन के संसाधनों पर भारत संघ का नियंत्रण होगा।
  3. इन तीनों विभागों के अलावा देशी रियासतों को आन्तरिक प्रशासन की स्वतंत्रता होगी।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ई० और देशी रियासतें (The Indian Independence Act-1947 and Native States) : स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में प्राय: 140 राज्य ऐसे थे जो अंग्रेजी शासन के अधीन रहकर राज्य करते थे परन्तु आन्तरिक रूप से वे स्वतंत्र थे। ब्रिटिश शासन द्वारा देश छोड़ने तथा स्वाधीनता प्रदान करने की बात सुनकर इन्हें (राज्यों को) बड़ी चिन्ता हुई। उन्होंने अंग्रेजी सरकार से इस संबंध में वार्तालाप भी किया पर उसका कोई परिणाम नहीं निकला।

18 जुलाई, 1947 ई० को ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया। इस अधिनियम में कहा गया कि ब्रिटिश प्रभुसत्ता भारतीय राज्यों पर से समाप्त हो जाएगी और उनसे की गयी संधियाँ और समझौते उसी दिन समाप्त हो जाएंगे जिस दिन भारत व पाकिस्तान स्वतंत्र राज्यों का निर्माण होगा।

यह भी कहा गया कि वे अपनो इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में मिल सकते हैं या चाहे तो स्वतंत्र रहकर अपना अस्तित्व बनाए रख सकते हैं। यह स्पष्ट था कि देशी रियासतों के शासकों को कुछ अंग्रेजी पदाधिकारी तथा भारतीय नेता उन्हें स्वतंत्र रहने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। अतः अंग्रेजों ने जाते-जाते देश को विकट समस्याओं में डाल दिया था।

15 अगस्त, 1947 ई० को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी स्पष्ट शब्दों में घोषित किया कि अंग्रेजों को भारत छोड़कर चले जाने के बाद कांग्रेस किसी भी देशी रियासत को स्वायत्तता की मान्यता नहीं देगी। प० जवाहरलाल नेहरू का भी कहना था कि – “भारतीय संघ की भौगोलिक सीमा के भीतर किसी भी स्वतंत्र देशी राज्य को मान्यता नहीं दी जाएगी।”

देशी राज्यों का भारतीय संघ में विलय में सरदार पटेल का योगदान : देशी रियासतों को भारतीय संघ में बिलय करने के लिए भारत सरकार ने तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल के नेतृत्व में जुलाई, 1947 ई० में एक विशेष ‘राज्य मंत्रालय’ की ‘स्थापना की। सरदार पटेल इस मंत्रालय के प्रभारी (Incharge) थे और वी० पी० मेनन सचिव थे।

विभाजन के समय खैरपुर और बहावलपुर आदि रियासतें पाकिस्तान में शामिल हो गई और शेष भारत में रह गई। सरदार पटेल ने देशी रियासती के राजाओं एवं शासकों से अपील की कि वे अपनी इच्छा से भारत संघ में शामिल हो जाएं और देश की अखण्डता बनाए रखने में मदद करें। दूसरी ओर उन्होंने देशी राजाओं पर कूटनीतिक दबाव डालते हुए यह धमकी भी दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो अलगाववादी देशी रियासतों के विरुद्ध बल प्रयोग भी किया जाएगा।

20 जुलाई, 1947 ई० को देशी राज्यों के प्रमुखों (शासकों) की बैठक हुई जिसमें लार्ड माउण्टबेटन ने सलाह दी कि वे सुरक्षा, विदेश नीति यातायात एवं संचार सेवा को भारतीय संघ को सौप कर अपना अस्तित्व बनाए रखें। सरदार पटेल ने 40 दिनों तक पूरे देश में घूम-घूमकर देशी रियासतों को भारत संघ मे शामिल होने के लिए आग्रह किया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि कांग्रेस राज्यों के आन्तरिक मामलों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगा।

उन्होंने राजाओं की आर्थिक हितों का आश्षासन दते हुए उनके सांस्कृतिक भावनाओं को भी जागृत किया। देशी राज्यों को भारतीय संघ में सम्मिलित होने के लिए अन्तिम तिथि 5 अगस्त, 1947 ई० को घोषित की गई थी। इस तिथि को प्रवेश-ग्रात्र (instrument of Accession) पर सबों ने हस्ताक्षर कर दिया। केवल जूनागढ़, हैदराबाद एवं कश्मीर तीन देशी राज्य भारतीय संघ में शामिल होने में आपत्ति जताई जिन्हें भारत संघ में शामिल करने में विशेष कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।

जूनागढ़ की समस्या : जूनागढ़, काठियावाड़ में एक छोटी सी रियासत थी, जहाँ का शासक (नवाब) मुसलमान था नवाब ने सितम्बर, 1947 ई० में जनता की राय लिए बिना पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था। यहाँ की बहुसंख्यक जनसंख्या हिन्दू थी तथा यह राज्य भारतीय सीमाओं से घिरा हुआ था। जनता ने नवाब के फैसले का तीव्र विरोध करते हुए वहाँ ‘स्वतंत्र अस्थायी सरकार’ की स्थापना कर ली। भारत सरकार ने भी नवाब के निर्णय की निदा की। नवाब विद्रोह से घबड़ाकर पाकिस्तान भाग गया। फरवरी, 1948 ई० में जनमत संग्रह द्वारा जूनागढ़ को भारत संघ में सम्मिलित कर लिया गया।

हैदराबाद की समस्या : हैदराबाद दक्षिण भारत की एक बड़ी रियासत धी जो चारों तरफ से भारतीय सीमाओं से घिरा हुआ था। यहाँ का शासक मुसलमान था जबकि यहाँ बहुसंख्यक जनसंख्या हिन्दूओं की थी। प्रशासन के क्षेत्र में मुसलमान अधिकारियों का प्रभाव उसके राज्य में अधिक था। हिन्दू जनता हैदराबाद को भारतीय सघ में शामिल करने के पक्ष में थी परन्तु वहाँ का निजाम (नवाब) अपने राज्य के स्वतंत्र अस्तित्व को कायम रखना चाहता था।

लार्ड माउण्ट बेटन के प्रयास से नवम्बर, 1947 ई० में भारत और निजाम के बीच अस्थायी एक समझौता हुआ था किन्तु निजाम ने समझौते का पालन नहीं किया। उसके संरक्षण और प्रोत्साहन से मुसलमान रज्जाकार हिन्दुओं पर अत्याचार करने लगे। दूसरी ओर से पाकिस्तान भी इन आक्रमणकारियों को अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहा था। अन्त में विवश होकर भारत सरकार ने सितम्बर, 1948 ई० में हैदराबाद के खिलाफ सैनिक कार्यवाही आरम्भ कर दी। मेजर जनरल जे० एन० चौधरी ने 18 सितम्बर, 1948 ई० को हैदराबाद के सैनिक गवर्नर का पद सम्भाला और अपने ताकत के बल पर हैदराबाद को भारतीय संघ में मिला लिया

कश्मीर की समस्या : देशी राज्यों का भारतीय सघ में विलय के संबंध में जम्म-कश्मीर राज्य की समस्या सबसे जटिल थी क्योंकि वहाँ का शासक हरि सिंह हिन्दू था परन्तु राज्य की 80 % जनता मुसलमान थी। महाराजा को यह भय था कि यदि हम भारत में शामिल होते हैं तो यहाँ की मुस्लिम जनता विद्रोह कर देगी और दूसरी ओर यदि पाकिस्तान मे सम्मिलित होंगे तो हमे महाराजा की गद्दी से हाथ धोना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में महाराजा ने स्वतंत्र रहकर भारत तथा पाकिस्तान दोनों से मैत्रीपूर्ण समझौता करने का फैसला किया।

अत: भारत सरकार ने भी महाराजा हरि सिंह पर कोई दबाव नहीं डाला परन्तु पाकिस्तान के सैनिकों ने कबाइलियों के साथ मिलकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया तथा हिन्दूओं पर अत्याचार करने लगे यही से कश्मीर समस्या का जन्म हुआ। कबाइली ज़ब आक्रमण करते हुए श्रीनगर के करीब पहुँच गए तो महाराजा ने भारत सरकार से सहायता माँगी और बिना शर्त भारत में सम्मिलित होने के लिए सहमत हो गए।

27 अक्टूबर, 1947 ई० को भारतीय हवाई सेना ने आक्रमण करके श्रीनगर को बचा लिया और वहाँ शान्ति स्थापित की। इस प्रकार आक्रमण करके युद्ध द्वारा कश्मीर को भारत में मिला लिया गया परन्तु कश्मीर का बहुत बड़ा क्षेत्र आज भी ‘आजाद कश्मीर’ के नाम से पाकिस्तान के कब्जे में है और यही क्षेत्र आज भी भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का कारण बना हुआ है।

इस प्रकार उपरोक्त विवरणों से यह ज्ञात होता है कि विभाजन के पहले एवं पक्षात भारत के देशी रियासतों को विलय करने में भारी मसक्कत करनी पड़ी थी। अत: सरदार पटेल, लार्ड माउण्टबेटन, जवाहरलाल नेहरू, वी० पी० मेनन, शेख अब्दुल्ला और मेजर जनरल जे० एन० चौधरी के अंथक परिश्रम से देशी राज्यों का भारतीय संघ में विलय सम्भव हो पाया।

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प्रश्न 2.
भाषाओं के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का प्रयास किस प्रकार किया गया था ?
अथवा
भाषायी आधार पर देशी राज्यों के पुनर्गठन में भारत को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा था ? इनका समाधान किस प्रकार किया गया ?
उत्तर :
15 अगस्त, 1947 ई० को भारत स्वतंत्र हुआ और साथ हो साम्भदायिकता के आधार पर देश का विभाजन कर दिया गया। दोनों देशों में उनके अधीन राज्यों को संगठित और पुनर्गठन करने की समस्या पैदा हो गई। भारत में सबसे पहले देशी राज्यों को भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया।

तत्पश्चात जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर की समस्याओं को सुलझाकर उन्हे भारतीय संघ का अंग बनाया गया। देशी रियासतों (राज्यों) का भारतीय संघ में विलय के पध्धात देश मे भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन को नई समस्या पैदा हो गई और देश के विभिन्न भागों में भाषायी आधार पर राज्यो के गठन की माँग जोर पकड़ने लगी।

सरदार बल्लभ भाई पटेल के दृढ़ नेतृत्व एवं कुशल कृटनीति के द्वारा देशी रियासते भारत संघ में सम्मिलित हो गई, परन्तु भारतीयों को इससे संतोष नहीं हुआ। उनका तर्क था कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय प्रान्तो का निर्माण किसी सिद्धान्त के आधार पर नहा किया गया था। धीरे-धीरे अंग्रेों का प्रभुत्व क्षेत्र बढ़ता गया और नए-नए प्रान्त भी अस्तित्व में आते गए। अंग्रेजों ने अपने विजित क्षेत्रों का संगठन किसी उचित आधार पर नहीं किया था।

उन्होंन नए प्रान्तो का गठन अंग्रेजी राज्य की सुरक्षा, विजित क्षेत्र का सामरिक महत्व, राजनीतिक आवश्यकता तथा प्रशासनिक सुविधा आदि को ध्यान में रखकर किया था, प्रान्तीय तथा भाषायो आधार पर नहीं किया था। स्वतंभ्रता के पूर्व से ही भारत में भाषायी आधार पर प्रान्तों के गठन करने की माँग की जाने लगी थी और उस समय कांग्रेस तक प्रादेशिक भाषाओं के आधार पर राज्यों के निर्माण करने का आशासन भी दे चुकी थी।

परन्तु आजादी के बाद कांग्रेस सरकार इन बातों पर ध्यान न देकर राज्यों क पुनर्गठन की कोशिश में लगी हुई थी। उसी समय एक बार फिर प्रान्तीय भाष्ण और संस्कृति के आधार पर प्रान्तों के पुनर्गठन की माँग जोर पकड़ने लगी। आजादी के प्रारम्भिक तीन-चार वर्षों तक कांग्रेस सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया।

सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू दोनों ही भाषा के आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी थे। सरदार पटेल ने कहा कि ‘इस समय भारत की पहली और आखिरी जरूरत यह है कि इसे एक राष्ट्र बनाय” जाए। राप्र्रवाद को बढ़ावा देने वाली हर चीज आगे बढ़नी चाहिए और उसके रास्ते में रुकावट ड़ालने वाली हर चीज को खारिज किया जाना चाहिए।”

कांग्रेसी नेताओं में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और पट्टाभि सीतारमैया इत्यादि को यहु आशंका थी कि भाषा और संस्कृति के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन करने से विघटनकारी प्रवृत्तियों को बल मिलेगा, जो देश कों। राजनीतिक एवं सांस्कृतिक एकता के लिए घातक सिद्ध होगा। 1948 ई० में भारत सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज एस० के० धर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया।

इसका प्रमुख कार्य भाषा के आधार पर देशी राज्यों का पुर्गठन करना था परन्तु इसने भाषायी आधार पर राज्यों की गठन की माँग को ठुकरा दिया केवल इसने राज्यों के ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं आर्थिक हालातों पर ही ध्यान दिया। दिसम्बर, 1948 ई० में राष्ट्रीय कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और पट्टाभि सोतारमैया के निगरानी मे एक समिति का गठन किया जिसे जे० बी० पी० समिति कहा जाता है।

इसका प्रमुख कार्य भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के विषय को नये सिरे से देखना था। अप्रेल, 1949 ई० में इस समिति ने अपना रिपोर्ट पेश किया जिसमें भाषायी आधार पर राज्यों के गठन को अस्वीकार कर दिया गया और कहा गया कि जनता के चाहन पर ही इस विषय पर पुन: विचार किया जा सकता है।

अत: जब कांग्रेसी नेताओं और समितियों ने भाषायी आधार पर राज्यों के गठन की माँग को ठुकरा दिया तो इस समस्या ने एक विशाल आन्दोलन का रूप ले लिया। जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। कन्नड़भाषी मलयालम भाषी और मराठी भाषा-भाषी के लोग अलग-अलग राज्य की माँग करने लगे।

सर्वपथम आथ्ध में भाषायी आधार पर आन्ध राज्य को स्थापना की माँग को लेकर आन्दोलन शुरू हुआ था। सबसे गहता असंतोष मद्रास प्रेसीडेन्सी के तेलगू भाषी जिलों में दिखाई दिया। जब 1952 ई० के आम चुनावों में नहरू जी वहाँ गए तो वहाँ के लोगों ने उन्हें काले झण्डे दिखाए और ‘हमें आव्स चाहिए” का नारा लगाया।

उसी वर्ष वयोवृद्ध गाँधीवादी नेता पोड़ी श्रैरामाल्लु ने तेलगूभाषियों के हितों की रक्षा करने के लिए आन्दोलन में शामिल हो गए। उन्होंने तत्काल आब्य प्रदेश राज की स्थापना के लिए भारत सरकार से आग्रह किया। सरकार ने जब उनकी माँग को ठुकरा दिया तो वे सरकार के विरोध में आमरण अनशन पर बैठ गए और 58 वें दिन 15 दिसम्बर, 1952 ई० को उनकी मृत्यु हो गई।

उनके मृत्यु के पक्धात मद्राल प्रान्त में दंगे आरम्भ हो गए। धीरे- धीरे आन्दोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। सरकार के दमन चक्र के बाद भी जब स्थिति काबू में नहीं आई तो भारत सरकार ने विवश होकर अक्टूबर, 1953 ई० में मद्रास प्रान्त के कुछ तेलगू भाषा-भाषी क्षेत्रों की अलग करके एक नये आन्ध राज्य की स्थापना कर दी। इस प्रकार भाषायी आधार पर आश्भ प्रदेश सबसे पहला राज्य बना।

आक्ष प्रदेश की स्थापना के बाद अन्य भाषा-भाषी क्षेत्र के लोग भी अपने-अपने अलग राज्यों की माँग करने लगे। अत: 22 दिसम्बर, 1953 ई० को जवाहरलाल नहहरू ने फजल अली के नेतृत्व में एक समिति का गठन की घोषणा की जो भाषायी आधार पर राज्यों के गठन की माँग पर ध्यान दे। के० एम० पाणिक्कर और हुदनाथ कुँजरू इसके प्रमुख सदस्य थे। देश्रा के विभिन्न भागों का दौरा करके सन् 1955 में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की।

इस आयोग ने पूरे देश को सोलह राज्यों और तीन केन्द्रशासित राज्यों में पुनर्गठन करने की अपील की। परन्तु इस आयोग ने पंजाबी भाषा और मराठी भाषा के राज्य के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं बनाया था। राज्य पुनर्गठन आयोग की त्रुटियों को दूर करने के लिए भारतीय संसद नवम्बर, 1956 ई० में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित किया जिसके अनुसार 14 राज़्यों और 6 केन्द्रशासित राज्यों का उद्य हुआ।

1960 ई० में आन्दोलन और हिंसा के कारण बम्बई राज्य का विघटन कर महाराष्ट्र और गुजरात राज्य कों। स्थापना इस अधिनियम के तहत की गई। फलस्वरूप भारत में राज्यों की संख्या 15 हो गई। सन् 1962 में चण्डीगढ़ नामक कंद्रशासित क्षेत्र बना। सन् 1963 में नागा लोगों के लिए नागालैण्ड का निर्माण किया गया। अब कुल राज्यों की संख्या 16 हो गई थी। सन् 1964 में गोवा, दमन एवं दीव, पाण्डीचेरी, दादर एवं नगर हवेली केन्द्रशासित क्षेत्रों का गठन किया गया।

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प्रश्न 3.
विभाजन के पश्चात शरणार्थियों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा था और उसका समाधान किस प्रकार किया गया ?
अथवा
भारत में आने वाले और भारत से पाकिस्तान जाने वाले शरणार्थियों के कष्टों और समस्याओं का उल्लेख करते हुए उसे सुलझाने के प्रयासों का वर्णन करें।
उत्तर : 15 अगस्त, 1947 ई० को हमारा देश (भारत) स्वतंत्र हुआ और उसी समय भारत का विभाजन साम्भदायिकता के आधार पर कर दिया गया था। संयुक्त भारत को दो भागों में बाँटकर पूर्वी एवं पध्धिमी पाकिस्तान तथा भारत दो अलग देशों का निर्माण हुआ था। देश के विभाजन में सबसे अधिक क्षति पंजाब और बंगाल प्रान्तों की हुई थी क्योंकि इन दोनों प्रान्तों का विभाजन कर ही पाकिस्तान का गठन हुआ था। बंगाल का पूर्वी भाग जो वर्तमान में बंगलादेश के नाम से जाना जाता है उसे पाकिस्तान में सम्मिलित कर दिया गया और पश्चिम बंगाल को भारत में शामिल कर लिया गया। उसी प्रकार पंजाब के पथ्विमी भाग को पाकिस्तान में तथा पूर्वी भाग को भारत में विभाजन कर दिया गया।

शरणार्थियों की समस्या : विभाजन होते ही पाकिस्तान से हिन्दूओं का तथा भारत से मुसलमानों का पलायन आरम्भ हुआ। भारत और पाकिस्तान सीमा के नगरों एवं ग्रामों के गैर-मुसलमान (हिन्दू) भारत में असंगठित दलों के रूप में आना आरम्भ कर दिए। पाकिस्तानी सैनिकों की सहायता से हिन्दू भारत की सीमा में झुण्ड के घुण्ड प्रवेश करने लगे। सहायता की आड़ में पाकिस्तानी सैनिक हिन्दुओं के साथ बदसलूकी करते थे। रास्ते में बच्चों एवं ख्तियों का अपहरण हो जाता था। उनकी अनाधिकृत तलाशी ली जाती थी और उनके रुपये-पैसे सब छीन लिये जाते थे।

हजारों लड़कियों को पाकिस्तानी सैनिक और अफसर रास्ते में बलपूर्वक रोक लेते थे। पाकिस्तान में हिन्दू और भारत में मुसलमान खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे। अतः पाकिस्तान से बड़ी संख्या में हिन्दुओं का पलायन एवं भारत से मुसलमानों का पलायन करने से दोनों देशों में शरणार्थियों के पुनर्वास और उनके देख-रेख की समस्या पैदा हो गई थी। देश के विभिन्न हिस्से में साम्पदायिकता की आग फैल गई थी। जगह-जगह दंगे आरम्भ हो गए थे।

साम्पदायिक दंगों का सबसे अधिक प्रभाव पजाब और पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में दिखाई पड़ रहा था। विभाजन के समय पलायन के दौरान पंजाब में दंगे भड़क गए। सिक्ख, मुसलमानों को दोषी ठहराते थे और मुसलमान सिक्खों को दोषी ठहराते थे। लाहौर में कर्फ्यू लगाकर मुसलमान अफसरों ने हिन्दुओं के दुकानों में आग लगा दी, उनके दुकानों को लूट लिया। हिन्दू, सिक्ख और मुसलमानों के हथियार बन्द दस्ते (समूह) शहर के चारों ओर घूम-घूमकर निहत्थी जनता पर गोलियाँ बरसा रहे थे। साम्पदायिकता की आग में पूरा पंजाब जलकर खाक हो गया। इस आग में लगभग चार लाख लोगो की जाने चली गई। करीब 60 लाख हिन्दू और सिक्ख पाकिस्तान से भारत आए एवं करीब उतने ही मुसलमान भारत से पाकिस्तान के तरफ कूच किए।

दूसरी ओर बंगाल के नोआखाली में भी साम्पदायिक दंगे आरम्भ हो गए थे। देश के विभिन्न राज्यों में भी दंगों का प्रभाव पड़ने लगा था। धौरे-धीरे गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी साम्पदायिक दंगे आरम्भ होने लगे थे। प्रतिरक्षा मंत्री सरदार बलदेव सिंह साम्पदायिक दंगों को रोकने में असमर्थ थे। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल के सैनिक अपने ही देश के लोगों पर गोली चलाने से इन्कार कर दिये थे। दिन पर दिन शरणार्थियों की समस्या विकट रूप धारण कर रही थी।

देश में भोजन एवं अन्य दैनिक आवश्यक सामग्रियों का अभाव हो रहा था और देश पर प्रशासनिक तंत्र के दूट कर समाप्त हो जाने का खतरा मँडरा रहा था। लाखों की संख्या में लोग निर्वासित होकर इधर-उधर भटकने लगे और उन्हें शरणार्थियों की तरह जीवन बिताने के लिए विवश होना पड़ा। बहुत सारे हिन्दू और मुसलमान अपने ही देश में निर्वासित हो गए। अत: देश में शरणार्थियों के पुनर्वास की समस्या पैदा हो गई।

शरणार्थियों को पुनर्वास करने का प्रयास : शरणार्थियों के पुनर्वास की समस्या भारत और पाकिस्तान दोनों के सामने विकराल रूप धारण किये खड़ी थी। साम्पदायिकता के आधार पर देश विभाजन के कारण ही साम्भदायिक दंगे आरम्भ हो गये थे। दोनों ही देशों में अल्पसंख्यकों पर भीषण अत्याचार होने लगे थे। विभाजन के कुछ ही महीनों के दौरान करीब 5 लाख निर्दोष जनता को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और अरबों की सम्पत्ति जलकर खाक हो गई। करीब एक करोड़ लोगों को अपना सबकुछ त्यागकर दूसरे राष्ट्र में जाने के लिए मजबूर कर दिया गया।

पूर्वी बंगाल के ज्यादातर शरणार्थियों का पुनर्वास भारत के नये राज्य प्विम बंगाल में हुआ था, इसके अलावा असम और त्रिपुरा में भी उन्हें बसाया गया। पाकिस्तान और भारत में शरणार्थियों की समस्याओं को देखते हुए 8 अप्रैल, 1950 ई० को भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच उनकी सुरक्षा के सवाल को सुलझाने के लिए एक संधि हुई, जिसे ‘नेहरू लियाकत समझौता’ के नाम से जाना जाता है।

हिन्दू सम्प्रदाय के लोगों ने इसे अंस्वीकार कर दिया और इसी परिपेक्ष में बंगाल के दो कैबिनेट मंत्री डॉ॰० श्यामा प्रसाद मुखर्जी और के० सी० नियोगी ने मंत्रीमण्डल से विरोध स्वरूप अपना त्यार्ग पत्र दे दिया। देश के अन्दर तमाम विरोधाभास के होते हुए भी इसे स्वीकार कर लिया गया। परन्तु इसके बाद भी पूर्वी बंगाल से हिन्दूओं का पलायन जारी रहा।

देश के लिए सबसे बड़ी समस्या पाकिस्तान से आए 60 लाख शरणार्थियों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था करना था और साथ ही उनके विकट समस्याओं को सुलझाना था। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत सरकार एक नया विभाग पुनर्वास के लिए गठित किया। इस विभाग ने शरणार्थियों के समस्याओं को सुलझाने के लिए अथक प्रयास किया। इस विभाग ने भारत से पलायन किए हुए मुसलमानों की धन-सम्पत्ति एवं जमीनों को भारत में आए शरणार्थियों के बीच बाँट दिया।

पूर्वी बंगाल से आए शरणार्थी को भारत के अन्य राज्यों में बसाया गया। अनुमानत: करीब 5 लाख दिल्ली में एवं 3 लाख मुम्बई में और लगभग 6 लाख से ज्याद लोग बगाल में आकर बस गए। 1951 ई० तक आते-आते शरणार्थियों की समस्या लगभग हल हो गई थी। भारत में आए सभी शरणार्थी अब भारत के संविधान को स्वीकार कर पूर्ण रूप से भारतवासी बन गए।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन, विशेषताएँ एवं निरीक्षण

Detailed explanations in West Bengal Board Class 10 History Book Solutions Chapter 7 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन, विशेषताएँ एवं निरीक्षण offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 10 History Chapter 7 Question Answer – 20वीं शताब्दी में भारत में महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों के द्वारा आंदोलन का संगठन, विशेषताएँ एवं निरीक्षण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
मास्टर दा के नाम से किसे जाना जाता था ?
उत्तर :
सूर्य सेन को ‘मास्टर दा’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 2.
मतुआ संप्रदाय के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर :
श्री हरिचाँद ठाकुर।

प्रश्न 3.
‘गाँधीबूड़ि’ किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
मातंगिनी हाजरा को।

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प्रश्न 4.
अनुशीलन समिति की स्थापना का क्या उद्देश्य थे ?
उत्तर :
अनुशीलन समिति की स्थापना का उद्देश्य ऋषि बंकिम चन्द्र चटर्जी के बताये व दिखाये गये क्रान्तिकारी मार्गो का अनुशीलन करना था।

प्रश्न 5.
बंगाली समाज अर्थात् बंगाल में क्रान्तिकारियों की मौसी किसे कहा जाता था ?
उत्तर :
हावड़ा की बाल विधवा ननीबाला देवी को।

प्रश्न 6.
भारत की प्रथम छात्रा संगठन का क्या नाम था ?
उत्तर :
दीपाली छात्रा संघ।

प्रश्न 7.
सर्व प्रथम राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना 8 नवम्बर 1905 को कहाँ हुई थी ?
उत्तर :
रंगपुर में।

प्रश्न 8.
देश की प्रथम स्नातक महिला कौन थी ?
उत्तर :
कांदबिनी गांगुली (गंगोपाध्याय) थी।

प्रश्न 9.
भारत में किस अधिनियम के द्वारा स्त्रियों को मताधिकार प्राप्त हुआ था ?
उत्तर :
1919 ई० के अधिनियम द्वारा।

प्रश्न 10.
अखिल भारतीय महिला संघ की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
1927 ई० में।

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प्रश्न 11.
शहीद मातंगिनी हाजरा ने किस स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया था ?
उत्तर :
1942 ई० के भारत छोड़ो आन्दोलन में।

प्रश्न 12.
12 फरवरी को मनाया जाने वाला ‘रशिद अली दिवस’ को राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी किस रूप में मनाती है ?
उत्तर :
हिन्दू-मुस्लिम एकता दिवस के रूप में।

प्रश्न 13.
1904 ई० में स्थापित गुप्त संगठन ‘मित्र मेला’ का परिवर्तित नाम क्या था ?
उत्तर :
अभिनव भारत।

प्रश्न 14.
मेरठ षड़यंत्र मुकदमा के किसी एक अभियुक्त का नाम लिखिए।
उत्तर :
एम० एस० डांगे, या मुजफ्फर अहमद।

प्रश्न 15.
ताप्रलिप्त राष्ट्रीय सरकार की स्थापना किसने की ?
उत्तर :
सतीशचन्द्र सामंत ने ताम्मलिप्त राष्ट्रीय सरकार की स्थापना की।

प्रश्न 16.
बंग-भंग आन्दोलन कब समाप्त हो गया ?
उत्तर :
सन् 1911 में।

प्रश्न 17.
नामशुद्र (नमशुद्र) आन्दोलन के एक नेता का नाम लिखिए।
उत्तर :
श्री हरिचाँद ठाकुर।

प्रश्न 18.
पुलिन बिहारी दास कौन थे ?
उत्तर :
ये ढाका के अनुशीलन समिति के संचालक थे।

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प्रश्न 19.
भारत के प्रथम क्रांतिकारी कौन थे ?
उत्तर :
महाराष्ट्र के बासुदेव बलवन्त फड़के।

प्रश्न 20.
बाघा जतीन किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
यतीन्द्रनाथ मुखोपाध्याय (मुखर्जी) को।

प्रश्न 21.
अनुशीलन समिति के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर :
सतीश चन्द्र बसु।

प्रश्न 22.
बंगाल का प्रथम शहीद कौन था।
उत्तर :
खुदीराम बोस सन् 1908 में।

प्रश्न 23.
‘हिन्दू मेला’ की स्थापना किसने की ?
उत्तर :
नवगोपाल मित्र ने।

प्रश्न 24.
भारत का क्रांतिकारी कवि कौन है ?
उत्तर :
काजी नजरूल इस्लाम को भारत का क्रांतिकारी कवि माना जाता है।

प्रश्न 25.
‘संजीवनी’ पत्रिका के सम्पादक कौन थे ?
उत्तर :
कृष्ण कुमार मित्र।

प्रश्न 26.
बंगाल में क्रांतिकारी आन्दोलन के जनक कौन थे ?
उत्तर :
अरविन्द घोष।

प्रश्न 27.
रशीद अली दिवस कब मनाया गया था ?
उत्तर :
12 फरवरी सन् 1946 को।

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28.
बसन्ती देवी कौन थी ?
उत्तर :
बसन्ती देवी चित्तरंजन दास की पत्नी थी। वह असहयोग आन्दोलन की एक सक्रिय महिला आंदोलनकारी थी।

प्रश्न 29.
सावरकर बन्धु कौन थे?
उत्तर :
गणेश सावरकर और विनायक दामोदर सावरकर को सावरकर बन्धु कहते है।

प्रश्न 30.
चापेकर बन्यु कौन थे ?
उत्तर :
दामोदर चापेकर और बालकृष्ण चापेकर को चापेकर बन्धु कहा जाता है। दोनों महाराष्ट्र के क्रांतिकारी थे।

प्रश्न 31.
महाराष्ट्र के दो क्रांतिकारी संगठनों के नाम बताइये।
उत्तर :
‘बाल समाज’ और ‘बान्धव समाज’।

प्रश्न 32.
केशव मेनन कौन थे ?
उत्तर :
केशव मेनन दक्षिण भारत के केरल के वाईकोम सत्याग्रह आन्दोलन के नेता थे, जिन्होंने दलितों के उद्धार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया था।

प्रश्न 33.
‘मूकनायक’ और ‘बहिष्कृत भारत’ नामक पत्रिका का प्रकाशन किसने किया था ?
उत्तर :
डॉ॰० भीमराव अम्बेदकर ने।

प्रश्न 34.
‘भारत कोकिला’ किन्हें कहा जाता है ?
उत्तर :
सरोजनी नायड्ड को।

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प्रश्न 35.
श्रीमती ऐनीबेसेन्ट कौन थी ?
उत्तर :
श्रीमती ऐनीबेसेन्ट एक आयरिश महिला थी। भारत में होमरूल लीग की स्थापना में इनका महत्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 36.
लक्ष्मी भण्डार की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर :
सरला देवी चौधुरानी ने।

प्रश्न 37.
भारतीय महिला राष्ट्रीय परिषद की स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
सन् 1925 में।

प्रश्न 38.
डॉ० भीमराव अम्बेदकर कौन थे ?
उत्तर :
डॉ॰ अम्बेदकर जी भारतीय संविधान के निर्माता थे। उन्होंने सबसे पहले हमारे देश में छुआ-छूत के विरुद्ध आन्द्रोलन किया था।

प्रश्न 39.
वाईकोम क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
वाइकोम केरल राज्य में स्थित एक गाँव है। यह गाँव दलितों द्वारा मन्दिर में प्रवेश लेकर हुए सत्याग्रह आन्दोलन के कारण प्रसिद्ध है।

प्रश्न 40.
विधवा आश्रम एवं लक्ष्मी भण्डार की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर :
सरला देवी चौधुरानी एवं अन्य महिलाओं के प्रयास से।

प्रश्न 41.
गुजरात के छात्र-छात्राओं ने भारत-छोड़ो आन्दोलन के समय किस सेना का गठन किया था ?
उत्तर :
वानर सेना।

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प्रश्न 42.
दक्षिण भारत में दलित आन्दोलन के पथ प्रदर्शक कौन थे ?
उत्तर :
केरल के श्री नारायण गुरु।

प्रश्न 43.
गाँधी जी द्वारा दलितों के लिए प्रयोग किया गया ‘हरिजन’ शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
ईश्वर की सन्तान।

प्रश्न 44.
मंदिर प्रवेश बिल कब पास हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1933 में।

प्रश्न 45.
‘बंगाल नेशनल कॉलेज और स्कूल’ की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
14 अगस्त, 1906 को।

प्रश्न 46.
गाँधी जी किसे अपना राजनीतिक गुरू मानते थे ?
उत्तर :
गोपाल कृष्ण गोखले को।

प्रश्न 47.
नेशनल काउन्सिल आफ एजुकेशन की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
16 नवम्बर 1905 ई० में।

प्रश्न 48.
भवानी मंदिर की रचना किसने की ?
उत्तर :
अरविन्द्र घोष ने।

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प्रश्न 49.
स्वतंत्र भारत का प्रथम स्वास्थ्य मंत्री कौन थी ?
उत्तर :
राजकुमारी अमृता कौर।

प्रश्न 50.
एंटी-सरकुलर सोसाइटी के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर :
सचीन्द्र नाथ बसु।

प्रश्न 51.
‘आनंद मठ’ की रचना किसने की थी ?
उत्तर :
बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय (चटर्जी) ने।

प्रश्न 52.
‘युगान्तर दल’ के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर :
वारीन्द्र कुमार घोष।

प्रश्न 53.
बाघा जतीन किस युद्ध में मारे गये।
उत्तर :
बूढ़ी बालम के युद्ध या कोपाद पेदा के युद्ध में।

प्रश्न 54.
रामास्वामी नैय्यर कौन थे ?
उत्तर :
रामास्वामी नैव्यर दक्षिण भारत के सामाजिक और धार्मिक सुधारक थे, जिन्होने अस्यृश्यता के विरुद्ध अभियान चलाया था।

प्रश्न 55.
नामशुद्र आन्दोलन कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
पूर्वी बंगाल (बंगाल)।

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प्रश्न 56.
पूना पैक्ट या पूना समझौता कब हुआ था ?
उत्तर :
26 अगस्त 1932 ई० में।

प्रश्न 57.
भारतीय उदारपंथी संघ के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर :
श्री पी० त्याग राय और डॉ॰० टी० एम० नैयर।

प्रश्न 58.
मंदिर प्रवेश बिल कब पास हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1933 में।

प्रश्न 59.
‘कुमारी सभा’ का गठन किसने किया था ?
उत्तर :
इलाहाबाद में रामेश्वरी नेहरू ने इस सभा का गठन किया था।

प्रश्न 60.
‘सत्याग्रह कमिटी’ की महिला सदस्यों का नाम बताओ।
उत्तर :
‘उर्मिला देवी, हेमप्रभा दास और ज्योतिर्मयी गांगुली।

प्रश्न 61.
‘वंदेमातरम्’ नामक पत्रिका का प्रकाशन कब हुआ था ?
उत्तर :
1909 ई० में।

प्रश्न 62.
बंगाल के विभाजन के लिए सर्वप्रथम प्रस्ताव किसने दिया था ?
उत्तर :
सन् 1896 में विलियम बार्ड ने।

प्रश्न 63.
‘डान’ पत्रिका का सम्पादक कौन था ?
उत्तर :
सतीश चन्द्र मुखर्जी।

प्रश्न 64.
मानिकतल्ला में बम फैक्ट्री किसने स्थापित की थी ?
उत्तर :
उल्लासकर दत्त ने।

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प्रश्न 65.
सर्वप्रथम बहिष्कार का नारा किसने दिया था ?
उत्तर :
कृष्ण कुमार मित्र ने अपनी बंगाली साप्ताहिक पत्रिका ‘संजीवनी’ में।

प्रश्न 66.
‘गीता रहस्य’ नामक पुस्तक की रचना किसने की ?
उत्तर :
बाल गंगाधर तिलक ने।

प्रश्न 67.
पश्चिम भारत में सर्वप्रथम बालिका विद्यालय की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
ज्योतिबा फूले और उनकी पत्नी सावित्री बाई ने 1851 ई० में।

प्रश्न 68.
‘द ऑल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लास फेडरेशन’ (The All India Depressed Class Federation) की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
1920 ई० में डा० अम्बेदकर जी द्वारा।

प्रश्न 69.
‘अनुसूचित जाति परसंघ’ की स्थापना कब और किसने की थी ?
उत्तर :
1924 ई० में, डा० अम्बेदकर जी ने।

प्रश्न 70.
युगान्तर दल का मुख्य केन्द्र कहाँ था ?
उत्तर :
मानिकतल्ला का गार्डेन हाउस।

प्रश्न 71.
गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन कब शुरू किया ?
उत्तर :
1 अगस्त 1920 ई० को।

प्रश्न 72.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय युगान्तर पार्टी की मुख्य सदस्य कौन थी ?
उत्तर :
कमला दास गुप्ता, बीना दास।

प्रश्न 73.
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की दुर्घटना कहाँ हुई ?
उत्तर :
फारमोसा द्वीप पर।

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प्रश्न 74.
बंगाल स्वयंसेवी संस्था के प्रमुख कौन-कौन थे ?
उत्तर :
विनय बादल दिनेश।

प्रश्न 75.
सूर्यसेन को फाँसी कब हुई ?
उत्तर :
12 जनवरी 1934 ई० को।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
दलित किसे कहते हैं ?
उत्तर :
हिन्दू समाज की वे अछुत जातियाँ जिन्हे लम्बे समय तक उन्हें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक व सांस्कृतिक अधिकारो से बल पूर्वक दबाकर वंचित रखा गया। उन्हें दलित कहते है। जैसे – चमार, चंडाल, दुसाध, डोम, पासी इत्यादि।

प्रश्न 2.
मातंगिनी हाजरा का स्मरण क्यों किया जाता है ?
उत्तर :
‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में हमारे देश के पुरुषों, महिलाओं, छात्रों और किसानों ने भाग लिया था। देश के कोनेकोने में विद्रोह, हड़ताल और सभाओं का आयोजन किया जा रहा था। बंगाल के तमलुक क्षेत्र में मातंगिनी हाजरा भारत छोड़ो आन्दोलन का नेतृत्व कर रही थी। वह जुलूस लेकर तमलुक थाना पर अधिकार करने की कोशिश में पुलिस की गोलियों से मारी गई। उनके बलिदान की याद में जनता ने उन्हें ‘देश माता’ की उपाधि से विभूषित किया। इसी साहस व वीरतापूर्ण कायों से महिलाओं में जोश पैदा करने के कारण उन्हें स्मरणीय रखा जाता है।

प्रश्न 3.
‘रशीद अली दिवस’ क्यों मनाया जाता था ?
उत्तर :
कैप्टन रशीद अली आजाद हिन्द फौज के प्रसिद्ध अधिकारी थे। जब उन्हें सात वर्ष की सजा हुई तो उनके सजा के विरोध में 12 फरवरी 1946 ई० को मजदूरों, छात्रों, ट्राम के मजदूरों तथा बहुत से लोगों ने जोरदार जूलूस व हड़ताल किये। इस प्रकार उनके मुक्ति तथा राष्ट्रीय एकता के रूप में ‘राशिद अली दिवस’ मनाया गया था।

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प्रश्न 4.
एन्टी सर्कुलर सोसाइटी किस उद्देश्य से स्थापित की गयी ?
उत्तर :
1905 ई० के बंग-भंग विरोधी आन्दोलन से छात्रों को दूर रखने के लिए तत्कालीन वायसराय लाई कर्जन के शिक्षा सचिव कर्लाइल ने एक परिपत्र जारी किया था, उसी परिपत्र के विरु द्ध छात्र नेता सचीन्द्र प्रसाद बसु ने 1905 ई० में एण्टी कर्लाइल जारी किया था। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूल से बाहर निकाले गये छात्रों को वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था करना, तथा उनमें देश प्रेम की भावना जागृत करना था।

प्रश्न 5.
दीपाली संघ क्यों स्थापित किया गया ?
उत्तर :
लीला नाग (राय) द्वारा 1923 ई० में नारियों को शिक्षित करने, उन्हें स्वावलम्बी बनाने, देशप्रेम की भावना को जागृत करने तथा क्रान्तिकारी विचार-धारा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘दीपाली संघ’ की स्थापना की गई थी।

प्रश्न 6.
प्रीतिलता वाद्देदर के बारे में क्या जानते हो ?
या
प्रीतिलता वाद्देदर क्यों स्मरणीय है ?
उत्तर :
यह बंगाल की राष्ट्रवादी क्रांतिकारी एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की प्रथम महिला शहीद नेत्री थी। वह बड़ी शूर-वीर और साहसी महिला थी एवं सूर्यसेन के साथ कई क्रांतिकारी आन्दोलनों में शामिल थी। वह छापामार दस्ता की सदस्य थी। उन्होंने एक यूरोपियन क्लब पर आक्रमण किया और पकड़े जाने के भय के कारण “पोटैशियम साइनाइड’ खाकर आत्महत्या कर ली। बंगाल की यह वीरांगना भारत माँ की गोद में सदा के लिए सो गई। इस कारण वह भारतीय इतिहास में स्मरणीय है।

प्रश्न 7.
‘श्रमिक एवं किसान पार्टी’ क्यों बनायी गयी थी ?
उत्तर :
1925 ई० में कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा किसान और मजदूरों को संगठित करने तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए ‘श्रमिक एवं किसान पार्टी बनायी गयी थी।

प्रश्न 8.
बाबा राम चन्द्र कौन थे ?
उत्तर :
बाबा रामचन्द्र अवध किसान सभा के एक प्रमुख नेता थे, जो अवध क्षेत्र से अपना विद्रोह शुरू किये थे तथा किसानों पर हुए अत्याचार का विरोध किये थे।

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प्रश्न 9.
ताप्रलिप्ता जातीय सरकार द्वारा किस प्रकार की कार्यवाइयाँ अपनायी गयी थीं ? बीना दास क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
भारत छोड़ो आन्दोलन के समय बंगाल के मिदनापुर के तमलुक तहसील में सतीश सामन्ता के नेतृत्व में गठित राष्यीय सरकार ने अंग्रेजों से लड़ने के लिए विद्युतवाहिनी सेना का गठन किया। सरकारी कार्यालयों पर अधिकार कर उदार शासन शुरू किया। लोगों को जमीन अधिकार प्रदान किया गया। इस प्रकार राष्ट्रीय सरकार द्वारा अनेकों जन कल्याण कार्य कीये गये।

ताम्मलिप्ता जातीय सरकार द्वारा ब्रिटिश शासन के विरोध में अपनायी गई कार्यक्रमों के आधार पर बीना दास को बंगाल के गवर्नर स्टैनले जैक्सन को मारने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 6 फरवरी, 1932 ई० को दीक्षांत समारोह में गवर्नर ने जैसे ही भाषण देना प्रारंभ किया, बीना दास ने उसके सामने जाकर रिवाल्वर से गोली चला दी। निशाना चूक गया और वह बच गया। बीना दास को गिरफ्तार कर उन्हें 9 वर्ष की कड़ी सजा सुनाई गयी। जेल से छूटने के बाद भी ये क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ी रही किन्तु 26 दिसम्बर, 1986 ई० में ऋकेश में इनकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 10.
अति शुद्र या अवर्ण किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
हिन्दू समाज में चारो वर्णों से भी नीचे एक नीच वर्ण है। जिन्हें अपृश्य अधुत माना जाता है। उसे ही अतिशुद्र या अवर्ण कहा जाता है। इन्हें अछुत, मलेच्छ, पंचम वर्ण, चण्डाल आदि नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न 11.
‘अरंधन’ से क्या समझते हो ?
उत्तर :
16 अक्टूवर 1905 को बंगाल विभाजन के दिन शोक मनाने के लिए सम्पूर्ण बंगाली समाज अपने घर में चूल्हा नहीं जलाने का व्रत का पालन किया। उसे ही ‘अरंधन’ कहा जाता है।

प्रश्न 12.
बगाल में बंग-भंग विरोधी आंदोलन के दौरान छात्र आंदोलन की दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर :
(i) छात्रों ने सर्वप्रथम विदेशी कागज; कलम का उपयोग न करने की शपथ ली साथ ही साथ विदेशी दुकानों पर धरना देना शुरू किया और लोगों से विदेशी वस्तुएँ न खरीदने की प्रार्थना की।
(ii) छात्र नेता सचीन्द्र नाथ बसु ने कृष्ण कुमार और राधाकान्त राय की सहायता से 4 नवम्बर 1905 ई० को एण्टी सर्कुलर सोसाइटी की स्थापना की जिसका उद्देश्य सरकारी शिक्षण संस्थाओं से निकाले गए छात्रों की सहायता करना था।

प्रश्न 13.
पूना समझौता कब और किनके बीच हुआ ?
उत्तर :
पूना समझौता 1932 ई० को गाँधीजी तथा भीमराव अम्बेदकर के बीच हुआ।

प्रश्न 14.
आजाद हिन्द फौज की नारी वाहिनी की स्थापना किसने और कब की ?
उत्तर :
आजाद हिन्द फौज की सेना में महिला रेजीमेंट की घोषणा 23 अक्टूबर 1943 ई० को सुभाषचन्द्र बोस ने स्वयं किया था।

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प्रश्न 15.
सांप्रदायिक निर्णय क्या था ?
उत्तर :
ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमजे मैकडॉनल्ड ने 16 अगस्त 1932 ई० को संप्रदायिक निर्णय (Communal Award) नीति की घोषणा कर दिया। इस नीति के द्वारा – मुस्लिम, सिक्ख, बौद्ध, एँग्लो-इंडियन, भारतीय ईसाई इत्यादि सम्प्रदाय को पृथक निर्वाचन का अधिकार दिया गया। हिन्दू सम्पदाय के अंदर भी पिछड़े हिन्दू एवं संपन्न हिन्दू को दो भागों में बाँट कर उन्हें भी पृथक निर्वाचन का अधिकार दिया गया।

प्रश्न 16.
एण्टी सर्कुलर सोसाइटी की स्थापना कब और क्यों की गई थी ?
उत्तर :
‘एण्टी सर्कुलर सोसाइटी’ की स्थापना 1906 ई० में कार्लाइल सर्कुलर के द्वारा स्कूल, कॉलेज से निकाले गये छात्रों को शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

प्रश्न 17.
सत्य शोधक समाज की स्थापना किसने और किस उद्देश्य से किया था ?
उत्तर :
सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिबा फूले ने किया था इसका उद्देश्य दलित वर्ग के दशा में सुधार करना था।

प्रश्न 18.
1907 ई० का सुरत विभाजन क्या था ?
उत्तर :
1907 ई० में गुजरात के सुरत नगर में राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ। इस अधिवेशन में काँग्रेस गरम दल और नरम दल में बँट गया था। इसे ही 1907 ई० का सुरत विभाजन कहते हैं।

प्रश्न 19.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
1885 ई० को भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी की स्थापना हुई थी। इसे ए० ओ० हयूम ने किया था।

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प्रश्न 20.
रशीद अली दिवस को कांग्रेस ने किस रूप में मनाना शुरू किया ?
उत्तर :
रशीद अली दिवस को कांग्रेस हिन्दू-मुस्लिम एकता दिवस के रूप में मनाना शुरू किया।

प्रश्न 21.
लीला नाग कौन थी ?
उत्तर :
लीला नाग बंगाल की एक सक्रिय आन्दोलनकारी महिला थी। 1923 ई० में हेमचन्द्र घोष के साथ मिलकर दीपाली संघ की स्थापना की। इस संघ का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता यैदा करना था।

प्रश्न 22.
कल्पना दत्त कौन थी ?
उत्तर :
कल्पना दत्त एक क्रांतिकारी महिला तथा सशस्त्र क्रांतिकारी आन्दोलन की अग्रणी नेत्री थी। एक साधारण परिवार में जन्मी कल्पना में अद्म्य साहस व वोरता की भावना कूट-कूटकर भरी थी। वह बड़ी दृढ़ इच्छा शक्ति की बालिका थी। उन्होंने सूर्यसेन के साथ कई क्रांतिकारी आन्दोलनों में भाग लिया था। फरवरी 1995 ई० में कलकत्ता में इनका निधन हो गया।

प्रश्न 23.
बंग-भंग विरोधी आंदोलन के कुछ महिला नेत्रियों के नाम बताओ।
उत्तर :
बंग-भंग विरोधी आंदोलन में भाग लेनेवाली महिला नेत्रियों में निर्मला सरकार, सरला देवी चौधुरानी, लीलावती मित्रा एवं कुमुदिनी आदि प्रमुख थी।

प्रश्न 24.
मैड़म कामा कौन थी ?
उत्तर :
मैड्रम कामा को भारत में क्रांतिकारी आंदोलन की जननी कहा जाता है। विदेश में रहकर इन्हांने क्रांतिकारी आन्दोलन को चलाया। इन्होने इण्डियन होमरूल सोसायटी (1905 ई०), पारसी इण्डियन सोसायटी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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प्रश्न 25.
‘अनुशीलन समिति’ का प्रमुख कार्य क्या था ?
उत्तर :
क्रांतिकारी साहित्यों का प्रकाशन, वितरण, नवयुवकों को सैनिक व शारीरिंक प्रशिक्षण, धन इकट्ठा हेतु लूट व डकैती तथा सरकारी अंग्रेज अधिकारियों एवं उनके सहयोगी पिट्रुओं की हत्या करना इस संस्था की स्थापना का प्रमुख कार्य एवं उद्देश्य था।

प्रश्न 26.
‘समाज समता संघ’ की स्थापना किसने की थी ? इसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर :
डा० भीमराव अम्बेदकर ने 1924 ई० में इस संघ की स्थापना की। इसका प्रमुख उद्देश्य हिन्दुओं और अछूतों में सामाजिक समानता के सिद्धान्त का प्रचार करना था।

प्रश्न 27.
दलित समुदाय के प्रति गांधीजी का मत क्या था ?
उत्तर :
महात्मा गाँधी दलितों का उत्थान चाहते थे। उन्होंने दलितों को हरिजन का नाम दिया तथा हरिजन के नाम से दलितों के उत्थान के लिए एक पत्रिका भी निकाली। उन्होंने हरिजनों के बस्तियों में जाकर साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी ली तथा उनके अधिकारों एवं माँगों को लेकर सदैव सजग रहे।

प्रश्न 28.
सूर्य सेन का नाम स्मरणीय क्यों है ?
उत्तर :
बंगाल के क्रांतिकारी सर्यूसेन को ‘मास्टर दा’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि वे एक अध्यापक थे। सूर्य सेन अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर सन् 1930 में चटगाँव के शस्त्रागार का लूट किया। पुलिस ने 16 फरवरी 1933 ई० को उन्हें गिरफ्तार कर लिया और जनवरी 1934 ई० में फाँसी पर लटका दिया।

प्रश्न 29.
ज्योति राव फुले कौन थे ?
उत्तर :
ज्योतिराव फूले ने 1873 ई० में ‘सत्य शोधक समाज’ की स्थापना किया। इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य समाज के निम्न, दलित एवं कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय दिलाना था। इस संस्था ने अनाथों तथा स्त्रियों के लिए अनेक अनाथालय तथा विद्यालयों की स्थापना की और ब्राह्मणवाद का घोर विरोध किया।

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प्रश्न 30.
बंगाल का नामशुद्र आंदोलन क्या था ?
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की अनुसूचित जातियों में नामशुद्र सबसे प्रमुख जाति थी। यह एक शिक्षित जनजाति थी, जिसने दलितों के अधिकार प्राप्ति के लिए बहुत संघर्ष किया था। बंगाल के हिन्दुओं में नमोशुद्र को अस्तृश्य (अछूत) माना जाता था जिसके कारण इन्हें जगह-जगह ब्राह्मणों की अवहेलना सहनी पड़ती थी और सामाजिक विषमता का शिकार होना पड़ता था। सन् 1872 में बाध्य होकर इन्होंने ब्राह्मणों के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ दिया।

प्रश्न 31.
बंग-भंग आन्दोलन में भाग लेने वाले कुछ समितियों के नाम लिखिए।
उत्तर :
सेवक समिति, शक्ति समिति, ब्रति समिति, अनुशीलन समिति और युगान्तर दल इत्यादि।

प्रश्न 32.
भारतीय इतिहास में सरोजनी नायड़ क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
वह एक क्रांतिकारी महिला थी जिन्होंने असहयोग आन्दोलन और सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्होंने विधवा पुनर्विवाह, स्त्री-शिक्षा और स्त्रियों की मुक्ति के लिए भी आन्दोलन किया था। सन् 1925 में कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्षता भी इन्होंने की थी।

प्रश्न 33.
बंगाल की दो गुप्त समितियों के नाम लिखो।
उत्तर :
(i) अनुशीलन समिति – संस्थापक : प्रमथ नाथ मित्र।
(ii) युगान्तर दल – संस्थापक : वारीन्द्र कुमार घोष।

प्रश्न 34.
गदर पार्टी की स्थापना कब और किसने किया था ?
उत्तर :
गदर पार्टी की स्थापना लाला हरदयाल ने सन् 1913 में अमेरिका के सेनफ्रांसिस्को शहर में किया था।

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प्रश्न 35.
कोर्लाइल सर्कुलर क्या था ? छात्रों ने इसका विरोध क्यों किया ?
उत्तर :
बंग-भंग प्रतिरोध आन्दोलन में पुरुषों, महिलाओं के साथ-साथ भारतीय छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। आर॰ डब्ल्यू० कोर्लाइल उस समय बंगाल के कार्यवाहक मुख्य सचिव थे। उन्होंने छात्रों को राष्ट्रीय आन्दोलन से अलग-थलग करने के लिए 10 अक्टूबर 1905 ई० को एक सर्कुलर जारी किया जिसे ‘कोर्लाइल सर्कुलर’ के नाम से जाना जाता है। इस सर्कुलर के अनुसार जो छात्र-छात्राएँ राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेंगे, उन्हें सरकारी शिक्षण-संस्थानों से बहिष्कृत कर दिया जाएगा और उनकी छात्रवृत्तियाँ बंद् कर दी जाएंगी। इसलिए छात्रों ने इस सर्कुलर का बड़े पैमाने पर पूरजोर विरोध किया।

प्रश्न 36.
बंगाल वॉलटियर्स के कुछ सदस्यों के नाम बताएँ।
उत्तर :
विनय बसु, दिनेश गुप्त और बादल गुप्त इस क्रांतिकारी संस्था के प्रमुख सदस्य थे।

प्रश्न 37.
चटगाँव शस्त्रागार पर कब्जा कब और किसने किया था ?
उत्तर :
सन् 1930 में सूर्य सेन ने किया था।

प्रश्न 38.
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान स्थापित कुछ शिक्षण संस्थानों के नाम बताओ।
उत्तर :
बिहार विद्यापीठ, काशी विद्यापीठ, गुजरात विद्यापीठ एवं जामिया मिलिया इस्लामिया आदि।

प्रश्न 39.
‘बरामदे का युद्ध’ के बारे में क्या जानते हो ?
उत्तर :
विनय-बादल-दिनेश तीनों बंगाल वॉलेंटियर्स के सदस्य थे। बंगाल वॉलेंटियर्स (स्वयंसेवी संगठन) एक क्रांतिकारी संस्था थी। विनय बोस, बादल गुप्त और दिनेश गुप्त तीनों ने 8 दिसम्बर 1930 ई० को कलकत्ता के राइटर्स बिल्डिंग में घुस कर जेल अधीक्षक (सुपरिण्टेडेन्ट) सिम्पसन की हत्या कर दी। यह खबर तुरन्त आग की तरह फैल गयी और लाल बाजार से पुलिस आकर उन्हें बरामदे में ही घेर लिया। दोनो तरफ से फायरिंग (युद्ध) शुरू हो गई जिसे बरामदे का युद्ध कहा जाता है। विनय बसु और बादल गुप्त ने आत्महत्या कर ली। दिनेश गुप्त को पकड़कर 7 जुलाई 1931 ई० को फाँसी दे दी गई।

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प्रश्न 40.
‘बाधा जतीन’ क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
यतीन्द्र नाथ मुख़्जी को बाघा जतीन के नाम से जाना जाता है। वे क्रांतिकारी संस्था युगान्तर दल के सदस्य थे, जिन्होंने बंगाल के सभी क्रांतिकारियों को संगठित किया। संस्था ने इन्हें अस्त्र-शस्त्र लुटने का दायित्व सौंपा था। सन् 1914 में अपने क्रांतिकारी साथियों की मदद से इन्होंने कलकत्ता की एक फैक्टरी से अस्त्र-शस्त्र लूट लिया। जर्मनी से हथियार मंगाने के प्रयास में पुलिस से मुठभेड़ हुई और लड़ते हुए शहीद हो गये।

प्रश्न 41.
‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एशोसियेशन’ की स्थापना कब और किसके प्रेरणा से हुई थी ?
उत्तर :
इस क्रांतिकारी संस्था की स्थापना सचीन्द्र नाथ सन्याल की प्रेरणा से सन् 1928 में की गयी थी।

प्रश्न 42.
कप्तान रशीद अली के मुकदमा को लेकर कलकते में क्या प्रतिक्रिया हुई थी ?
उत्तर :
आजाद हिन्द फौज के कप्तान पर मुकदमा चलाकर अंग्रेजी सरकार ने 10 फरवरी 1946 ई० को सात वर्ष की सश्रम कारावास की दण्ड दे दी। देश भर में इसका विरोध किया गया। कलकत्ता में 11 से 13 फरवरी तक व्यापक पैमाने पर जुलुस निकालकर छात्रों, हिन्दुओं और मुसलमानों ने सरकार का विरोध किया। 12 फरवरी को रशीद अली दिवस के रूप में बड़े पैमाने पर हड़ताल किया गया था।

प्रश्न 43.
भारत छोड़ो आन्दोलन में सुचेता कृपलानी का क्या योगदान था ?
उत्तर :
‘सुचेता कृपलानी’ भारत छोड़ो आन्दोलन की प्रमुख महिला नेत्री थी । वह भारत के सभी आन्दोलनकारियों से मिलती थी और महिलाओं को आन्दोलन में भाग लेने के लिए उत्साहित करती रहती थी । इस कार्य के लिए अंग्रेजी सरकार ने उन्हें दो साल की सजा भी दी। आन्दोलन में विरोध प्रदर्शन से लेकर हड़ताल तक के सभी कार्यों में इनकी सक्रिय भूमिका रहती थी।

प्रश्न 44.
‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की स्थापना किस उद्देश्य से की गई. थी ?
उत्तर :
डॉ॰ भीमराव अम्बेदकर ने समाज के असृश्य जातियों के भौतिक और नैतिक उन्नति के लिए 1924 ई० में इस सभा की स्थापना बम्बई में की थी। अस्पृश्य जातियों का उद्धार करने तथा उन्हें सामाजिक अधिकार दिलाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई थी।

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प्रश्न 45.
इण्डिपेनडेन्ट लेबर पार्टी की स्थापना कब और किसने की ?
उत्तर :
डॉ० भीमराव अम्बेदकर ने सन् 1936 में इस पार्टी की स्थापना की थी।

प्रश्न 46.
द्रविड़ आन्दोलन में सी० एन० अन्नादुरै की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
सी॰ एन० अन्नादुरै, रामास्वामी नैयर के अनुयायी तथा मित्र थे जिन्होंने द्रविड़ आन्दोलन को आगे बढ़ाया। इन्होंने सन् 1944 में न्याय दल का नाम बदल कर द्रविड़ संघ कर दिया। इन्होंने तमिलनाडु का निर्माण किया और दलितों के उत्थान के लिये आजीवन संघर्ष किया। अपने अथक परिश्रम से वे तमिलनाडु के प्रथम द्रविड़ मुख्यमंत्री भी बने। वे देश की राष्ट्रीय एकता का विरोधी नहीं थे, परन्तु राज्यों की स्वायत्तता की माँग करते रहे। इस तरह वे द्रविड़ आन्दोलन को मजबुत व सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 47.
‘मण्डल आयोग’ का गठन क्यों किया गया था ?
उत्तर :
भारतीय संविधान के भाग XVI में अनुसूचित जातियों,जन-जातियों तथा एंग्लो-इण्डियनों के लिए विशेष संरक्षण का प्रावधान है। इसी संदर्भ में 1955 ई० में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की अवस्था के निर्धारण तथा पहचान के लिए काका साहब कालेलकर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया था। सन् 1980 में इसी आयोग को बी० एन० मण्डल की अध्यक्षता में पिछड़े वर्गों की शिकायतों की जाँच-पड़ताल करने तथा उन्हें संरक्षण का सुझाव देने के लिए मण्डल आयोग का गठन किया गया था।

प्रश्न 48.
बंगाल के सशस्त्र क्रांतिकारी आन्दोलन में बीना दास का क्या योगदान था ?
उत्तर :
बीना दास कॉलेज में पढ़ने वाली एक शांत स्वभाव की छात्रा थी। यह नेताजी के शिक्षक बेनी माधव दास की सबसे छोटी पुत्री थी। अंग्रेजों के अत्याचार और शोषण को देखकर वह क्रांतिकारी आन्दोलन में शामिल हो गई। 6 फरवरी, 1932 ई० को कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बंगाल के तत्कालीन गर्वनर स्टैनले जैक्सन को गोली मारने की कोशिश की परन्तु निशाना चुक गया। उसे गिरफ्तार कर 9 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई गयी।

प्रश्न 49.
‘श्री नारायण धर्मपालन योगम’ की स्थापना किसने और क्यों की थी ?
उत्तर :
केरल के नारायण गुरु ने इस संस्था की स्थापना की। इसका प्रमुख उद्देश्य अस्पृश्यता की प्रथा को समाप्त करना और सभी वर्गों के लिए मंदिर बनवाना था।

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प्रश्न 50.
‘शारदा ऐक्ट’ कब और किसके प्रयास से पास हुआ था ?
उत्तर :
श्री हरविलास शारदा के प्रयासों से शारदा ऐक्ट 1928 ई० में पास हुआ था। इस ऐक्ट के द्वारा बाल-विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

प्रश्न 51.
‘नारी कर्म मंदिर’ की स्थापना किसने और क्यों की थी ?
उत्तरः
उर्मिला देवी ने महिलाओं में चरखा के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा नारियों को संगठित करने के उद्देश्य से ‘नारी कर्म मंदिर की स्थापना की थी।

प्रश्न 52.
‘सत्याग्रह कमिटी’ का प्रमुख कार्य क्या था ?
उत्तर :
इस कमिटी की अनेक शाखाएँ थी जिनके निम्नलिखित कार्य थे –

  1. बहिष्कार एवं लूट-पाट शाखा : यह शाखा महिलाओं को विदेशी दुकानों का बहिष्कार करने और उनमें लूटपाट करने का प्रशिक्षण देती थी।
  2. स्वदेशी व्यवहार शाखा : यह शाखा खादी का प्रयोग करने के लिए लीगों को प्रोत्साहित करती थी।
  3. प्रभात फेरी शाखा : यह शाखा देश के विभिन्न भागों में जुलूसों का आयोजन करती थी।

प्रश्न 53.
‘अरूणा आसफ अली’ क्यों स्मरणीय है ?
उत्तर :
अरूणा आसफ अली हमारे देश की एक वीरांगना थी जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन को विदेशों में जाकर जायज ठहराने का प्रयास किया था। वे प्रारम्भ से ही गाँधी जी और अब्दुल कलाम आजाद की सभाओं में जाती थी। सविनय अवज्ञा आन्दोलन में उन्होंने विभिन्न जुलुसों, धरना-प्रदर्शन तथा बहिष्कार आन्दोलन में भाग ली तथा जेल भी गई। इसी देश प्रेम के कायों के लिए वे स्मरणीय है।

प्रश्न 54.
डान सोसाइटी (Dwan Society) के बारे में क्या जानते हैं ?
उत्तर :
डान सोसाइटी : यह विद्यार्थियों का संगठन था जिसके सचिव सतीश चन्द्र मुखर्जी थे। शिक्षा के प्रचार-प्रसार में इस संस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस संस्था ने छात्रों को राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया और उनमें जागृति पैदा की।

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प्रश्न 55.
कब और किस अधिवेशन में भारत छोड़ो सम्बन्धी अगस्त प्रस्ताव पारित हुआ था ?
उत्तर :
8 अगस्त 1942 ई० में कांग्रेस कमिटी के बम्बई अधिवेशन में अगस्त प्रस्ताव पारित हुआ था।

प्रश्न 56.
‘अभिवन भारत’ के कुछ क्रांतिकारी सदस्यों के नाम बताएँ।
उत्तर :
दामोदर सावरकर, पाडुरंग महादेव वायट और कृष्ण जी गोपाल कर्वे।

प्रश्न 57.
‘अनुशीलन समिति’ का प्रमुख कार्य क्या था ?
उत्तर :
कार्य : क्रांतिकारी साहित्यों का प्रकाशन व वितरण, नवयुक्कों को सैनिक व शारीरिक प्रशिक्षण देना, धन इकट्ठा हेतु लूट व ड़केती करना तथा सरकारी अंग्रेज अधिकारियों एवं उनके सहयोगी पिट्ठओं की हत्या करना इस संस्था का प्रमुख कार्य था।

प्रश्न 58.
‘बंगाल स्वयं सेवक’ (Bengal Volunteers) संस्था की स्थापना क्यों की गयी थी ?
उत्तर :
बऱाल स्वय सेवक संगठन की स्थापना बंगाल के छात्र एवं छात्राओं में देश-प्रेम तथा राष्ट्रीयता की भावना का संचार करना साथ ही साथ उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ भड़काना एवं हिंसक विद्रोह करने के लिए उत्साहित करने के लिए किया गया था।

प्रश्न 59.
पंजाब के क्रान्तिकारी नेताओं के नाम बताइये।
उत्तर :
अजित सिंह, लाला हरदयाल और सूफी अम्बा प्रसाद।

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प्रश्न 60.
लाल, बाल, पाल का पूरा नाम क्या था ?
उत्तर :
पंजाब केसरी लाला जालपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चन्द्र पाल था।

प्रश्न 61.
क्रांतिकारी उग्रवाद ने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को किस प्रकार प्रभावित किया ? कोई दो कारण बताएँ।
उत्तर :
1. क्रांतिकारियों ने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों द्वारा अंग्रेजों के मन में भय पैदा कर दिया।
2. क्रातिकारियों के साहसी और निर्भीक कार्यो ने देश के नवयुवकों को कांति के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रश्न 62.
‘मित्र मेला’ का आयोजन किसने और किस उद्देश्य से किया था ?
उत्तर :
महाराष्ट्र के विनायक दामोदर सावर कर ने 1899 ई० में मित्र मेला का आयोजन किया था। इसका प्रमुख उद्देश्य क्रांतिकारियों को अंग्रेज्में के खिलाफ भड़काना तथा उन्हें अस्त्र-शस्त्र चलाने का प्रशिक्ष्र देना था।

प्रश्न 63.
‘स्वदेशी’ और ‘वायकाट’ शब्दों का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘स्वदेशी’ का अर्थ है अपने देश में निर्मित (बनी हुई) वस्तुओं का प्रयोग करना तथा ‘बायकाट’ का अर्थ है विदेशों में बनी हुई वस्तुओं का बहिष्कार (परित्याग) करना।

प्रश्न 64.
‘हरिजन’ पत्रिका का प्रकाशन कब और किसने किया था।
उत्तर :
जनवरी 1939 ई० में, गाँधी जी ने।

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प्रश्न 65.
अम्बेदकर द्वारा लिखित दो रचनाओं के नाम बताइए।
उत्तर :
1. रीडिल्स ऑफ हिन्दूइज्म और
2. एनीहिलेसन ऑफ कॉस्ट।

प्रश्न 66.
पूना में रैड तथा अयर्स्ट नामक अंग्रेज अधिकारियों की हत्या कब और किसने की ?
उत्तर :
जून, 1897 ई० में चापेकर बन्धुओं ने।

प्रश्न 67.
प्रिंस ऑफ वेल्स’ के भारत आने पर देश में क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तर :
नवम्बर 1921 ई० में प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आने पर छात्रों ने बड़ी संख्या में संगठित होकर उनको काले झण्डे दिखाकर स्वागत किया और जगह-जगह पर धरना-प्रदर्शन किया।

प्रश्न 68.
नामशुद्र जाति कहाँ निवास करती थी ?
उत्तर :
नामशुद्र (चण्डाल) जाति सामजिक दृष्टि से अति पिछड़ी एवं अछुत, अवर्ण जाति थी जो तत्कालीन पूर्वी बंगाल के वक्रगंज, फरीदपुर, ढाका, मैमन सिंह, जैसोर तथा खुलना आदि जिले के $75 \%$ भाग में बसे हुए थे। कुछ संख्या वर्तमान पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में निवास करती थी।

प्रश्न 69.
नामशुद्र जातियों के आन्दोलन का क्या उद्देश्य था ?
उत्तर :
नामशुद्र जाति एक अस्पृश्य (अछूत) जाति थी, जो वर्णाश्रम व्यवस्था से बाहर थे। इन्हे नीच एवं पतित माना जाता था। इन्होंने अपने अस्तित्व, सम्मान तथा गौरव की रक्षा के लिए आन्दोलन किया था। इनके आन्दोलन का स्वरूप सामाजिक एवं राजनीतिक था। अतः इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य प्रचलित वाहाण प्रधान समाजिक व्यवस्था में सुधार लाना तथा सम्मान प्राप्त करना था।

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प्रश्न 70.
बंग-भंग विरोधी आन्दोलन में किन-किन उग्र राष्ट्रवादियों ने योगदान दिये थे ?
उत्तर :
बंग-भंग विरोधी आन्दोलन में अरविन्द घोष, बाल गंगाधर तिलक तथा विपिनचन्द्र पाल जैसे उग्र राष्ट्रवादियों ने योगदान दिया था।

प्रश्न 71.
असहयोग आन्दोलन में भाग लेनेवाली प्रमुख महिलाएँ कौन-कौन थी ?
उत्तर :
दुर्गाबाई देशमुख, मुधुलक्ष्मो रेड़ी, स्वरूप रानी, सरोजनी नायडू आदि महिलाओं ने असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया था।

प्रश्न 72.
गाँधीजी ने नमक कानून कैसे तोड़ा ?
उत्तर :
गाँधीजी 24 दिन पैदल यात्रा करके 5 अपैल 1930 ई० को गाँधीजी दांडी पहुँचे, तत्पश्चात दूसरे दिन प्रार्थना करने के बाद समुद्री जल से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा था।

प्रश्न 73.
न्यायदल की स्थापना किसने और कब किया ?
उत्तर :
श्री पी० त्यागराय तथा डाक्टर टी० एम नैख्यर द्वारा 1917 ई० में न्याय दल की स्थापना की गई थी।

प्रश्न 74.
दुर्गा भाभी के नाम से किन्हें जाना जाता है ?
उत्तर :
सुविख्यात क्रान्तिकारी भगवती चरण बोहरा की पत्नी दुर्गावती को दुर्गा भाभी के नाम से जाना जाता है।

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प्रश्न 75.
स्वदेश बान्धव समिति की स्थापना किसने और कहाँ किया था ?
उत्तर :
छात्रों की मदद से बारीसाल के एक अध्यापक अश्वनी कुमार दत्त ने ‘स्वदेश बान्धव समिति’ की स्थापना किया था

प्रश्न 76.
सरला देवी चौधुरानी के बारे में क्या जानते हैं ?
उत्तर :
सरला देवी चौधुरानी रवीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई की पुत्री थी। यह एक शिक्षाविद् एवं नारीवादी महिला थी। इन्होंने नारी उत्थान एवं उनकी शिक्षा के लिये काफी कार्य किया था। टैगोर परिवार में जन्म होने के कारण शुरू से ही राजनीति एवं साहित्य में इनकी जिज्ञासा बनी रही।

प्रश्न 77.
सरोजनी नायडु के बारे में क्या जानते हैं ?
उत्तर :
असहयोग आन्दोलन में भाग लेनेवाली महिलाओं में सरोजनी नायडू की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने नारी जागरण का कार्य किया। महिलाओं ने उनकी अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय स्त्री संघ’ की स्थापना की। उर्मिला देवी ने इस संस्था द्वारा भारतीय महिलाओं से देश की सेवा के लिये घर छोड़ने की अपील की। बम्बई की लगभग 1 हजार स्त्रियों ने प्रिंस आप वेल्स के भारत आगमन का सशक्त विरोध किया। इनकी प्रेरणा से मुस्लिम महिलाओं ने भी हिस्सा लिया था।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
सशस्त्र क्रान्ति आन्दोलन में नारियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर :
सशस्त्र क्रांति आन्दोलन में नारियों की भूमिका : इतिहास गवाह है कि 1857 ई० से लेकर 1947 ई० तक की भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में देश की माँ, बेटी, बहने घरेलू चौका-चौकी से बाहर निकल कर सशस्त्र क्रांतिकारी आन्दोलन में अंग्रेजों की विरूद्ध पुरूषों के कन्धे से कन्धे मिलाकर अपना कर्त्तव्य निभाया।

जिन महिलाओं ने आजादी की लड़ाई को अपनी वीरता तथा अदम्य साहस से सशस्त्र क्रांति द्वारा नई धार दी थी, उनमें कल्याणी दास, उज्जवला मजूमदार, वीनादास, कल्पना दत्त, लीला नाग, दुर्गा भाभी, प्रतिलता वाडेदार, मैडम भीकम जी कामा, ननी बाला, सुनीति चौधरी का अमूल्य योगदान रहा।

कल्याणी दास ने ‘छात्री संघ’ की स्थापना कर छात्राओं को क्रांति के लिए उत्साहित करती रही। बंगाल स्वंयसेवी की उग्रवादी सदस्य उज्जवला मजूमदार ने अंग्रेज अधिकारी एण्डर्सन पर जान-लेवा हमला किया, जिसमें वह तो बच गया उसकी जगह अन्य लोग मारे गये। वीना दास अपनी दीदी कल्याणी दास के साथ बंगाल स्वयम-सेवक वाहिनी से जुड़कर कई क्रान्तिकारी घटनाओं को जन्म दिया।

उन्होनें गर्वनर जैक्सन पर गोली चलाई, जिसके लिए उन्हें 7 वर्ष की जेल की सजा भुगतनी पड़ी। लीला नाग (राय) ने 1923 ई० में ढाका में दिपाली संघ की स्थापना की तथा महिलाओं को क्रान्तिकारी आन्दोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। सूर्य सेन (मास्टर दा) के क्रांतिकारी आर्दशों से प्रेरित होकर सशस्त्र क्रान्ति से जुड़ने वाली महिलाओं में कल्पना दत एवं प्रीतिलता वडेदार का नाम अग्रणीय है। कल्पना ने चटगाँव शास्त्रागार लूट मे शस्त्र भाग लिया।

क्रान्तिकारियों को गुप्त सूचनायें पहुँचाती थी। प्रीतिलता ऊर्फ फुलतार ने भी चटगाँव शास्त्रागार लूट में शस्त्र भाग लिया, उन्होने पुलिस लाइन, टेलीफोन एवं टेलीग्राफ आफिस को उड़ाने में सक्रिय भूमिका निभायी। पुलिस के हाथों गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने जहर खाँ कर आत्महत्या कर ली।

दुर्गाभाभी भी क्रान्तिकारियों को सूचना हथियार पहुँचाने, उन्हें छिपाने भगाने में योगदान करती थी। क्रान्तिकारियों की माता कहलाने वाली मैडम कामा ने भी संगठन बनाने, चन्दा एकत्र करने, सूचनाओं को क्रान्तिकारियों तक पहुँचाने, उन्हें संरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये। इस प्रकार से भारतीय नारियों ने क्रान्तिकारी आन्दोलन में अपने कर्त्त्यों का निर्वाह किया।

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प्रश्न 2.
दलित अधिकारों पर गांधी और अम्बेदकर के बीच वाद-विवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
दलित अधिकारों पर गाँधी और अम्बेदकर के बीच वाद-विवाद :- गाँधीजी और अम्बेदकर दोनों दलित अधिकारों को लेकर अपने-अपने ढंग से आन्दोलन कर रहे थे। बहुत समय तक दोनों एक-दूसरे के व्यक्तिगत स्वभाव से अपरिचित रहे। 1932 ई० के पूना समझौता के समय वे एक-दूसरे के स्वभाव और सामाजिक कार्यों से परिचित हुए। गांधी जी अम्बेदकर के दलित आन्दोलन से प्रभावित थे। अम्बेदकर के दलितों के लिए राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के लड़ाई का समर्थन कर रहे थे।

वे पश्चिमी ढंग से दलितों की लड़ाई लड़ रहे थे। इसके लिए अम्बेदकर ने 1920 ई० में ‘आल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लास फेडेरेशन’ 1924 ई० में बम्बई में ‘बहिष्कृत हितकारिणी’ सभा की तथा मजदूर वर्ग के हितों के लिए एक धर्मनिरपेक्ष ‘स्वतंत्र श्रमिक पार्टी’ का गठन किया। 1930 ई० में नासिक के कला राम मन्दिर में अछूतों के प्रवेश को लेकर सत्याग्रह शुरु किया। अम्बेदकर के दलित उद्धार आन्दोलन को थोड़ा-बहुत लाभ जरुर प्राप्त हुआ, किन्तु वे बाह्मणों के पुरातन व्यवस्था को पूरी तरह तोड़ न सके और अंत में हिन्दू समाज के जाति व्यवस्था से खिन्न होकर 1924 ई० में हजारों समर्थकों के साथ बदद्ध धर्म को अपना लिया।

अम्बेदकर की तरह गाँधी भी दलितों का उद्धार चाहते थे, किन्तु वे पश्चिमी व्यवस्था के तर्ज पर नहीं बल्कि भारतीय व्यवस्था के अन्तर्गत चाहते थे। उन्होंने दलितों के अपमानजनक शब्द के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया। इसके लिए उन्होंने दलितों के लिए सड़क, कुएँ, तालाब, स्कूल आदि के उपयोग के लिए समान अधिकार वर्ग की वकालत की। समाज में इनके अधिकारों के प्रति जागरुकता लाने के लिए उन्होंने ‘हरिजन सेवक संघ’ की स्थापना की। ‘हरिजन’ नामक पत्रिका का सम्पादन किया |1933-1934 ई० के बीच हजारों मील की ‘हरिजन यात्रा’ की, जिसका उद्देश्य मानवता पर कलंकरूपी जातिगत् छुआछूत को मिटाना था।

इस प्रकार दोनों महापुरुषों ने एक-दूसरे के आत्मीय सम्बन्धों को स्वीकार करते हुए दलितों के उद्धार और कल्याण के लिए कार्य किया। एक जगह अम्बेदकर ने गाँधीजी से कहा था – ‘यदि आप अपने-आप को केवल दलितों के कल्याण के लिए समर्पित कर दें, तो आप हमारे हीरो बन जायेंगे।’

इस प्रकार दोनों मनीषियों ने दलित बहुजन, हरिजनों के हितों, आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और आशाओं को सम्मान दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने मानवीय विचारों को उदारता पूर्वक अपनाने का प्रयास किया गांधी और अम्बेदकर दोनों दलित सुधार आन्दोलन में सितारों की तरह टिमटिमाते नजर आयेंग। अंधेरे में रास्ते का जानकारी पाने के लिए हमें टेकने के लिए लाठी और देखने के लिए प्रकाश की जरुरत होती है। ऐसे में गाँधी की हाँथ में पड़ी अहिंसा रूपी लाठी और अम्बेदकर के हाथ में पड़ी कानूनरुपी प्रकाश की पुस्तक दोनों की जरुरत पड़ेगी। जब-जब हम सामाजिक और राजनीतिक सुधार की ओर बढ़ेगे तब-तब हमें दोनों के विचारों की जरुरत पड़ेगी।

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प्रश्न 3.
बंगाल में स्वयंसेवी संस्थाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
शशस्त्र क्रान्तिकारी आन्दोलन में बंगाल स्वयंसेवी संस्थाओं/ स्वयं सेवकों के योगदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में बंगाल स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान :- भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में बंगाल की धरती शुरु से ही क्रान्तिकारियों की प्रेरणा स्थली रही है तथा अरविन्द घोष बंगाल में क्रान्तिकारियों के प्रेरणादाता माने जाते हैं।

कलकत्ता में बंगाल स्वयंसेवी नामक संगठन की स्थापना 1928 ई० में देश बन्धु चितरंजन दास तथा सुभाषचन्द्र बोस के नेतृत्व में किया गया था। इससे पहले 1912 ई० में क्रान्तिकारी नेता ‘हेमचन्द्र घोष’ ने ढाका में बंगाल स्वयंसेवी नामक गुप्त क्रान्तिकारी संगठन की स्थापना की थी। जिसे गाँधीजी ने बंगाल के स्वयंसेवी सेवको को ‘पार्क का सर्कस’ कहकर मजाक उड़ाया था। किन्तु इसी संगठन के सदस्यों ने अपनी सशस्त्र क्रान्तिकारी कार्यों द्वारा आजादी तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए कुर्बान हो जाने की भावना को भारत के कोने-कोने तक फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बंगाल स्वयंसेवी संगठन के सदस्यों ने जेल में कैद भारतीयों पर पुलिस द्वारा किये जाने वाले अत्याचार के विरुद्ध 1930 ई० में ‘आपरेशन फ्रीडम’ (Operation freedom) नामक आन्दोलन चलाया। इस आन्दोलन से प्रेरित होकर ही सूर्यसेन, उन्नत सेन, बिनय बसु, दिनेश गुप्ता, बादल गुप्ता, चक्रवर्ती, गणेश घोष जैसे क्रान्तिकारी इस संगठन से जुड़े। तथा विनय, बादल और दिनेश जैसे युवाओं ने 1930 ई० में राइटर्स बिलडिगं (Writers Building) में घुसकर जेल के इंस्पेक्टर (Inspector) जनरल सिम्पसन की। इस बरामदे या गलियारे के युद्ध में हत्या की और बादल, विनय और दिनेश तीनों शहीद हो गये।

सूर्यसेन ने भी चटगाँव शस्त्रागार लूट जैसी घटनाओं को जन्म दिया अन्त में बहुत से स्वयंसेवी संस्था के सदस्य सुभाष चन्द्र बोस के विचारों से प्रभावित होकर ‘फार्वड ब्लाक’ (अग्रगामी दल) (forward block) में शामिल हो गये।

इस प्रकार बंगाल के स्वयंसेवी सेवकों ने एक तरफ अपने विभिन्न कारनामों द्वारा अंग्रेजों को नाको चना चबवाते रहे तो दूसरी तरफ भारतीय नवयुवकों में स्वतंत्रता और रक्षा के लिए उनमें राष्ट्रीयता तथा बलिदान की भावना जगाते रहे। इस प्रकार उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन को अपने क्रिया-कलाप द्वारा प्रज्वलित बनाए रखा।

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प्रश्न 4.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन की पृष्ठभूमि एवं कार्यक्रम का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सविनय अवज्ञा आन्दोलन की पृष्ठभूमि :- असहयोग आन्दोलन की सफलता से देशवासियों में उत्पन्न निराशा की भावना, साईमन कमीशन एवं क्रान्तिकारी गतिविधियाँ, अंग्रेजी सरकार का दिनोंदिन बढ़ता शोषण और अत्याचार, कांग्रेस में युवा वामपंथी सदस्यों का दबाव ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों के नमक बनाने पर रोक तथा नमक पर कर लगाये जाने के कारण देश की राजनीतिक स्थिति विकट हो गई थी।

देश हिंसक क्रान्ति की ओर बढ़ रहा था। इन्हीं सब स्थितियों को देखकर कांग्रेस ने गाँधीजी के नेतृत्व में अहिंसात्मकढंग से सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरु करने का निश्चय किया। जिसका प्रस्ताव 26th January 1930 ई० को लाहौर अधिवेशन में स्वीकार कर लिया गया था। उपर्युक्त परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का निर्णय लिया फिर आन्दोलन शुरु करने से पहले अपने समाचार पत्र ‘यंग इण्डिया’ के माध्यम से तत्कालिन वायसराय लार्ड इर्विन के पास 11 सूची माँगों को भेजवाया।

किन्तु वायसराय ने उसे स्वीकार नहीं किया तब गाँधीजो ने कहा “’मैने रोटी माँगी थी बदले में पत्थर मिला’ इसी के साथ उन्होंने बाध्य होकर 6th April 1930 ई० को गुजरात के समुद्र तटीय गाँव दांडी में नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंधन कर सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत की थी।

कार्यक्रम :
सविनय अवज्ञा आन्दोलन जिसे नमक आन्दोलन या करबन्दी आन्दोलन आदि नामों से जाना जाता है। इस आन्दोलन के प्रमुख कार्यक्रम निम्नलिखित है :-

  1. देश के प्रत्येक गाँवों के व्यक्तियों को नमक बनाने के लिए चलना चाहिए।
  2. हिन्दू, छुआछुत की भावना का त्याग करें।
  3. विदेशी वस्तुओं की होलीका जलायी जाये।
  4. विदेशी समान बेचने वाले दुकानों तथा शराब बेचने वाले दुकानों के सामने धरना-पर्दश्रन किया जाना चाहिए।
  5. सरकारी स्कूलों का विद्यार्थियों द्वारा बहिष्कार किया जाए।
  6. सभी सरकारी कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में काम करने ना जाएँ।

4th may, 1930 ई० को गाँधीजी को गिरफ्तार कर लेने के बाद कर बन्दी इसके कार्यक्रम में शामिल कर लिया गया। इन्हीं कार्यक्रमों के द्वारा संविनय अवज्ञा आन्दोलन धीरे-धीरे देश का जन आन्दोलन का रूप धारण करने लगा।

प्रश्न 5.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महिलाओं के योगदान का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महिलाओं का योगदान : गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरु करने के साथ देश के सभी वर्ग की महिलाओं को आन्दोलन में साथ देने के लिए आहवान किया। इसी के साथ देश के भिन्न-भिन्न भागों से देश के प्रमुख महिला नेताओं के नेतृत्व में महिलाएँ घर की चारदीवारी लांघ कर आन्दोलन में भाग लेने का निश्चय किया।

दिल्ली की लगभग 1600 महिलाओं ने सरोजनी नायडू के नेतृत्व में दिल्ली के शराब के दुकानों पर घरना दिया। विदेशी वस्त्रों एवं वस्तुओं की होलीका जलाई। इसी तरह नमक कानून भंग करने के आरोप में सरोजनी नायडू, लीलावती मुंशी, कमला नेहरू, वीणा दास, विजय लक्ष्मी पण्डित, कल्पनादत्त आदि महिलाओं ने अपने भिन्न-भिन्न कार्यों द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लिया।

युगांतर पार्टी की सदस्य बीना दास और कल्पना दत को गवर्नर जेक्सन को मारने के जुर्म मे गिरफ्तार कर लिया गया। बीनादास की बड़ी बहन कल्याणी ने छात्र नेता बनकर छात्रावासों की छात्राओं को आन्दोलन में भाग लेने के लिए सक्रिय किया। इस प्रकार असहयोग आन्दोलन को सफल बनाने में भारतीय महिलाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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प्रश्न 6.
सूर्यसेन (मास्टर दा) का देश के स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान था ? संक्षिप्त परिचय दीजिए।
अथवा
‘चट्टगाँव शस्त्रागार लूट’ (Chittagong Armary Raid) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
सूर्यसेन को भारतीय इतिहास में ‘मास्टर दा’ के नाम से जाना जाता है। इनका जन्म 22 मार्च, 1894 ई० को चट्टगाँव में हुआ था। इनके पिता (राम निरंजन) एक शिक्षक थे। सूर्यसेन की प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा चट्टगाँव में ही हुई थी। बचपन से ही ये साहसी, निडर और स्वाभिमानी थे। 22 वर्ष की अवस्था में राष्ट्रीय विचारों से प्रेरित होकर बंगाल की क्रांतिकारी संस्था ‘युगान्तर दल’ के सदस्य बन गए। चट्टगाँव के स्थानीय युवाओं और छात्रों को संगठित कर उन्हे क्रांति के लिए प्रोत्साहित करते थे।

वे शिक्षक का कार्य भी करते थे साथ ही छात्रों को क्रांति के लिए उत्साहित भी करते थे। छात्रों में इनका इतना प्रभाव था कि छात्र इनके लिए जान देने को तैयार रहते थे। चट्टगाँव का क्रांतिकारी दल इनके नेतृत्व में काफी प्रसिद्ध हो गया था। अनंत सिंह, गणेश घोष, अम्बिका चक्रवर्ती और लोकनाथ जैसे क्रांतिकारी युवक इनके दल के प्रमुख सदस्ये थे।

चट्टगाँव शस्त्रागार लूट : सूर्य सेन के नेतृत्व में बंगाल में कांतिकारी आन्दोलन का विकास तीव्र गति से होने लगा : राष्ट्रीय विद्यालय के शिक्षक होते हुए भी उन्होंने सशस्त्र विद्रोहियों को सुसंगठित किया और क्रांतिकारियों को हथियार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी शस्त्रागारों को लूटने की योजना बनाया। योजनानुसार, 18 अप्रैल 1930 ई० को सूर्य सेन ने अपने सहयोगी कल्पना दत्त और प्रीतिलता वादेदर एवं छात्र सेना को लेकर मध्य रात्रि में चट्टगाँव शस्तागार पर धावा बोल दिया और वहाँ के हथियारों पर अधिकार जमा लिया।

परन्तु गोला – बारुद उनके हाथ नहीं लगे। क्रांतिकारियों ने रेल लाइन, तार एवं टेलीफोन लाइन को नष्ट कर दिया। क्रांतिकारियों ने पुलिस शस्वागार के सामने ही ‘बंदेमातरम्’ और ‘इंकलाब जिन्दाबाद’ के नारों के साथ प्रांतीय क्रांतिकारी सरकार का गठन कर सूर्य सेन को अपना अध्यक्ष चुना और अंग्रेजी झण्डे को उतारकार अपना राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। दूसरे क्रांतिकोंरियों ने अंग्रेजी सेना को बंगाल की खाड़ी में ही रोक दिया।

22 अप्रैल को अंग्रेजी सेना ने उन्हें घेर लिया और दोनों के बीच भारी लड़ाई हुई जिसमें 12 क्रांतिकारी शहीद हो गए। सूर्य सेन लगभग तीन वर्षों तक अंग्रेजों से लड़ते रहे। 16 फरवरी 1933 ई० को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया। 12 जनवरी, 1934 ई० को उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया गया। इस प्रकार हमारे देश का एक महान क्रांतिकारी भारत माता की गोद में सदा के लिए सो गया।

प्रश्न 7.
बंगाल में नामशुद्र आंदोलन के विकास का उल्लेख करो।
उत्तर :
पश्चिम बंगाल की अनुसूचित जातियों में नामशुद्र एक अछुत जाति थी जिसने दलितों के अधिकार प्राप्ति में बहुत संघर्ष किया था। इस जाति को पहले ‘चण्डाल’ के नाम से जाना जाता था। यह जाति वैदिक धर्म के चार वर्णों से बाहर थी और अवर्ण की श्रेणी में आते थे। इनका प्रमुख पेशा खेती करना तथा नाव चलाना था।

जया चटर्जी बताती हैं कि 1870 के दशक में बक्रगंज और फरीदपुर के चण्डालों ने हिन्दुओं का बहिष्कार शुरू कर दिया जब उनके एक प्रधान के खाने के निमत्रण को हिन्दुओं ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी सामाजिक स्थिति को सुद्धढ़ किया और उनमें सुधार भी किया। उन्होंने स्वयं अपनी आदरणीय पदवी ‘नमोशुद्र’ को धारण कर लिया।

भारत की एक और जनजाति मतुआ सम्पदाय के लोग भी नामशुद्र की उपाधि ले लिया था। बंगाल के हिन्दूओं में नामशुद्र को अस्पृश्य (अछूत) माना जाता था जिसके कारण इन्हें जगह-जगह ब्राह्मणों कीप्रताड़ना सहनी पड़ती थी और सामाजिक विषमता का शिकार होना पड़ता था। सन् 1872 में बाध्य होकर इन्होंने ब्राह्मणों के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ दिया।

इन्होंने घोषणा किया कि किसी भी उच्च जाति के घरों में काम तब तक नहीं करेंगे जब,तक उन्हें उच्च श्रेणी में स्थान नहीं दे दिया जाता है। यह आंदोलन हरीचंद ठाकुर के नेतृत्व में ‘ओराकांडी’ नामक ग्राम से आरम्भ हुआ था। 20 वीं शताब्दी के आरम्भ में यह विधान मण्डलों, सरकारी नौकरी तथा सरकारी संस्थानों में आरक्षण की मांग करने लगे।

1907 ई० में हरिचाँद के पुत्र गुरुचाँद ठाकुर ने बंगाल के गवर्नर के निकट उनकी स्थिति सुधारने के लिए आवेदन पत्र लिखा था। इन्होंन मुस्लिम लीग से भी सम्पर्क बनाया दोनों का सहयोग और समर्थन पा कर यह आन्दोलन शक्तिशाली हो उठा तथा सामाजिक मर्यादा पाने के लिए इसाई और इस्लाम धर्म में दीक्षित होने लगे।

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प्रश्न 8.
दलित आंदोलन संगठित करने में ज्योति राव फुले एवं श्री नारायण गुरु के योगदान का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
उत्तर :
ज्योतिबा फूले : पश्चिमी भारत में ज्योतिराव गोविन्दराव फूले (1827-1890 ई०) ने निम्न जातियों के लिए संघर्ष किया। कई स्थानों पर महिलाओं के लिए आश्रम का निर्माण करवाया। ज्योतिराव ने पुणे में माली कुल में जन्म लिया था। उनके पूर्वज पेशवाओं को पुष्प, मालाएँ इत्यादि उपलब्ध कराया करते थे इसलिए उन्हें फूले कहा जाने लगा था।

नारायण गुरु : श्री नारायण गुरु (1854-1928 ई०) ने केरल में तथा केरल के बाहर एस.एन. डी पी. (श्री नारायण धर्म परिपालन योगम्) नाम की एक संस्था तथा उसकी शखाएँ स्थापित की। श्री नारायण गुरु तथा उनके सहलयोगियों ने एझवा (एक अस्पृश्य जाति) वर्ग के उत्थान के लिए दो बिन्दुओं का कार्यक्रम बनाया जिसका पहला बिन्दु था कि अपने से नोची जातियों के प्रति असृश्यता की प्रथा को समाप्त करना। इसके अतिरिक्त नारायण गुरु ने मन्दिर बनवाए जिसके दरवाजे सभी वर्णों के लिए खुले थे।

प्रश्न 9.
भारत में दलित आंदोलन के विकास में डॉ॰ बी० आर० अम्बेदकर द्वारा पालन की गई भूमिका का उल्लेख करो।
उत्तर :
डॉ० भीमराव अम्बेदकर दलित् जाति के उद्धारक माने जाते हैं जिन्हांने सबसे पहले दलितों के उत्थान के लिए कदम बढ़ाया था। इनका जन्म महार नामक अछूत जाति में हुआ था। इनका परिवार कबीर पंथी था। इनके ऊपर भी कबीर दास के विचारों का प्रभाव पड़ा था। कबीर दास के गुणों एवं विचारों से प्रेरित होकर इन्होंने समाज में व्याप्त असृश्यता को दूर करने का बीड़ा उठाया।

भारतीय समाज में पीड़ित, शोषित तथा दलित वर्ग को समानता का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से सन् 1920 में अम्बेदकर जी ने मराठी भाषा में मूकनायक (गूगों का नेता) नामक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरु किया। अस्पृश्य (दलित) जाति के लोगों के नैतिक तथा भौतिक उन्नति के लिये 1924 ई० में बम्बई में ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ को स्थापना की।

1927 ई० में प्रत्येक भारतीय को सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्वतंत्रता दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने ‘बहिष्कृत भारत’ नामक मराठी पत्र का प्रकाशन शुरू किया। उन्होंने अचुतों (दलितों) के लिए मंदिरों में प्रवेश तथा जनसाधारण के कुँए से पानी भरने के अधिकार के लिए आन्दोलन किया। अछूतों के लिए अलग मताधिकार की भी माँग उन्होंने की थी। मंदिरों में दलितों एवं अचूतों के प्रवेषाधिकार के लिए उन्होंने 1930 ई० में आन्दोलन शुरू कर दिया।

मंदिर में प्रवेश के अधिकार को लेकर उन्होंने सत्याग्रह शुरू कर दिया। मंदिर के सभी फाटक बंद होने के कारण सभी सत्याग्रही फाटक के बाहर ही आन्दोलन करते रहे। लगभग एक महीने तक संघर्ष चलता रहा और संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा था 1933 ई० में बम्बई में ‘मंदिर प्रवेश बिल’ (Temple Entry Bill) पास किया गया। इस बिल के द्वारा दलितों एवं अस्पृश्य जातियों के लिए मंदिर में राजनीतिक प्रवेशाधिकार मिल गया।

महाड़ एवं नासिक में अम्बेदकर जी ने दलितों के उद्धार के लिए सत्याग्रह आन्दोलन चलाया जिसमें सवर्ण (उच्च वर्ग) के हिन्दुओं ने उग्र प्रतिक्रिया की और उन्हें प्रताड़ना दिया। जिससे क्षुब्ध होकर अम्बेदकर जी यह सोचने पर मजबर हो गये कि वे हिन्दू धर्म में रहें या त्याग दें। सन् 1955 में एक दलित सम्मेलन में उन्होंने ऐलान किया कि ‘ मेरा दुर्भाग्य है कि मैं हिन्दू धर्म में जन्मा हूँ पर बड़ी गम्भीरता से कहना चाहता हूँ कि मै एक हिन्दू के रूप में नहीं मरूँगा।” इसी घोषणा का पालन करते हुए अम्बेदकर जी अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म को ग्रहण कर लिया।

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प्रश्न 10.
20 वीं सदी में गांधीजी द्वारा संगठित आंदोलन में नारी आंदोलन की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर :
प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक भारतीय महिलाओं ने समय-समय पर अपनी साहस, वीरता और त्याग का परिचय दिया है और देश के लिए मर-मिटने को हमेशा तत्पर रही है। वैदिक काल में नारियों ने वेदों की व्याख्या की, मुगल काल में रानी दुर्गावती ने मुगलों से लोहा ली और 1857 ई० के महाविद्रोह में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने मरते दम तक अंग्रेजों से लड़ती रही। भारत के स्वाधीनता आन्दोलनों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गाँधी जी द्वारा चलाये गये ‘सविनय अवज्ञा’ और ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलनों में महिलाओं की भागीदारी का संक्षिप्त विवरणइस प्रकार है –

i. सविनय अवज्ञा आन्दोलन : महात्मा गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत अप्रैल, 1930 ई० में ‘दांडी मार्च’ से किया था। वे समुद्र तट पर नमक बनाकर सरकारी कानून को भंग किए। यह आन्दोलन धीरे-धीरे भारत के सभी प्रान्तों में फैल गया। इस आन्दोलन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाएँ समुद्र तट पर सविनय अवज्ञा के कार्यक्रम को प्रचारित करती थीं। देश के लगभग सभी प्रान्तों की महिलाओं ने रसोई घर से निकलकर, पर्दा प्रथा को त्यागकर इस आन्दोलन में हिस्सा लिया। बम्बई और दिल्ली की महिलाओं ने इस आन्दोलन में काफ़ी उत्साह दिखाया था।

उन्होंने विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों पर धरना दी जिसके कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी गिरफ्तारियाँ भी हुई, फिर भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ। कस्तूरबा गाँधी, कमला नेहरू, सरांजिनी नायडू, बसन्ती देवी, उर्मिला देवी, सरला बाला देवी और लीला नाग आदि ने इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए कठोर कदम उठाया और दमनात्मक नीति का सहारा लिया। महिलाओं के जुलूस और पदर्शन पर लाठी चार्ज किया गया, गिरफ्तारियाँ भी की गई फिर भी इनका उत्साह कम नहीं हुआ और उनकी भागीदारी बढ़ती गई।

ii. भारत छोड़ो आन्दोलन : गाँधी जी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे के साथ सन् 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ आरम्भ किया। उन्होंने देशवासियों को ‘करो या मरो’ का नारा दिया। इस आन्दोलन में समाज के सभी वर्ग के लोगों की भांति नारियों ने भी जमकर हिस्सा लिया। नारियों में विशेषकर कॉलेज और स्कूल का छात्राआ न इस आन्दालन में भाग ली थी। मातंगिनी हाजरा, अरुणा आसफ अली, उषा महतो, सुचेता कृपलानी और कनकलता बरुआ आदि प्रमुख महिलाएँ ने भारत के विभिन्न भागों में महिलाओं का नेतृत्व किया। सभा और जुलूसों में महिलाएँ बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं।

मातंगिनी हाजरा बंगाल के तामलुक क्षेत्र का नेतृत्व कर रही थीं। उन्होंने 29 सितम्बर, 1942 ई० को सरकारी अदालत और पुलिस चौकी पर कब्जे के लिए जुलूस निकाली और हाथ में तिरंगा थामे एक सभा को सम्बोधित कर रही थी। उसी समय पुलिस की गोली-बारी में उनको गोली लग गयी जिससे उनकी घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई। दूसरी आन्दोलनकारी अरुणा आसफ अली भूमिगत आतंकवादियों की संगठनकर्ता थी।

वह भूमिगत रहकर महिलाओं और छात्राओं को अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए प्रेरित करती रहीं। 1939 ई० में सुचेता कृपलानी गाँधी जी से मिलकर कांग्रेस कार्य समिति से जुड़ गई। बाद में उन्हें कांग्रेस की महिला विभाग के गठन की जिम्मेदारी दी गई। इस प्रकार से वे विभिन्न आन्दोलनो में सहयोग दिया।

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प्रश्न 11.
गांधीवादी आंदोलन में छात्र विद्रोह की विशेषताएँ एवं महत्व का उल्लेख करो।
उत्तर :
गाँधी जी हमारे देश के एक महान नेता थे, जिन्होंने देश को स्वाधीन कराने के लिए कई महत्वपूर्ण आन्दोलन असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन और भारत छोड़ो आन्दोलन चलाए जिसमें छात्रों का महत्वपूर्ण योगदान था।

असहयोग आन्दोलन : गाँधी जी ने सन् 1920 में रौलेट एक्ट और जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड के विरोध में अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आन्दोलन छेड़ दिया। देशबन्धु चित्तरंजन दास और गाँधीजी ने छात्रों को आन्दोलन में भाग लेने के लिए आह्नान किया। उनके आह्रान पर हजारों छात्रों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को त्याग कर आन्दोलन में कूद पड़े। पूरे देश में लगभग 9000 विद्यार्थियों ने सरकारी विद्यालयों और काँलेजों को त्याग दिया था, जिनके लिए लगभग 80 राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गयी थी।

ये छात्र इन शिक्षण संस्थानों में पढ़ने लगे। सरकारी शिक्षा का बहिष्कार आदोलन बंगाल में चित्तरंजन दास और नेताजी के नेतृत्व में सबसे अधिक सफल रहा। पंजाब में आन्दोलन का नेतृत्व लाला लाजपत राय के हाथों में था। जिनके आह्वान पर छात्रों ने सरकारी शिक्षण संस्थानो को त्यागकर असहयोग आन्दोलन में शामिल हुए थे।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन : 6 अप्रैल, 1930 ई० को नमक कानून तोड़कर गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया। इस आन्दोलन में भी छात्रों ने सक्रिय योगदान दिया था। गाँधी जी के आह्धान पर हजारों छात्र-छात्राएँ सरकारी शिक्षण-संस्थानों को त्यागकर इस आन्दोलन में कूद पड़े। गुजरात विद्यापीठ के कई छात्र गाँधी जी के साथ ही पैदल साबरमती आश्रम से डांडी तक गये। छात्रों ने विदेशी वस्तुओं एवं शराब की दुकानों पर धरना-प्रदर्शन किया, विदेशी कपड़ों की होली जलाई तथा जनता से विदेशी वस्तुएँ न खरीदने का आग्रह किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन : 8 अगस्त, 1942 ई० को गाँधी जी ने ‘करो या मरो’ के आह्वान के साथ ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ की शुरुआत की। यह आन्दोलन गाँधोजी का सबसे अन्तिम और लोकग्रिय आन्दोलन था। अन्य आन्दोलनों की तरह इस आन्दोलन में भी छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। इलाहाबाद विश्धविद्यालय के छात्र संगठन ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आन्दोलन शुरू होते ही गाँधीजी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेता गिरफ्तार कर लिये गये तभी छात्रों ने शिक्षण संस्थानों का बहिष्कार करके आन्दोलन में कूद पड़े। दिल्ली, बम्बई, बंगाल और केरल के विद्यार्थियों में उत्साह अधिक था।

पुलिस के दमन चक्र और बड़े-बड़े नेताओं की अनुपस्थिति में नवयुवक छात्र हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देने लगे। हिंसक छात्र जगह-जगह रेल की पटरियाँ उखाड़ दिये, पुल तोड़ दिये, तार एवं टेलीफोन की लाइने काट दी, सरकारी भवन तथा दफ्तरों में तोड़-फोड़ की और वहाँ राष्ट्रीय झाण्डा फहरा दिये। 11 अगस्त, 1942 ई० को पटना में सात छात्र विरोध करते हुए शहीद हो गये।

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प्रश्न 12.
20 वीं सदी में औपनिवेशिक प्रभुत्व के विरोध में युवाओं के विद्रोह का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर :
उदारपंथी नेताओं की नीति से राष्ट्रीय काँग्रेस का ही एक पक्ष असंतुष्ट हीकर उग्रपंथी बन गया, उसी तरह उग्रपंथियों की नीतियों से भी असंतुष्ट वर्ग संत्रासवादी नीति से काम लेने की तैयारी कर रहा था। बलिदानी युवक-युवतियों का क्रांतिकारी वर्ग हिंसा-अहिंसा किसी भी नीति का सहारा लेकर विदेशियों को देश से बाहर निकाल फेंकने को इच्छुक था।

जब सरकारी तंत्र ने जन-आंदोलनों का क्रूरतापूर्वक दमन आरंभ कर दिया और नि:सहाय स्वयंसेवको पर मनमाने जुल्म ढाने लगा, तब कुछ देशभक्तों के हृदय प्रातशोध की ज्वाला से सुलग उठे और उन्होंने हिंसा और आतंक की नीति अपनाने का संकल्प लिया। यह दल काँग्रेसी खेमे से बाहर रहकर अपनी योजनाएँ बनाता था और उसके अनुसार कार्य करता था। बींसवी सदी के आरंभ में आतंकवाद अथवा संत्रासवाद की लहर मुख्यत: बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश में तेजी के साथ प्रसारित हुआ।

क्रांतिकारी न तो वैधानिक सुधार चाहते थे और न स्वशासन की माँग करते थे, बल्कि वे अपनी मातृभूमि को विदेशी शासनश्रृंखला से सर्वथा मुक्त देखना चाहते थे। उनका विश्वास था कि हिंसा और शक्ति द्वारा स्थापित ब्विटिश राज उसी हिंसा और शक्ति द्वारा समाप्त किया जा सकता है। अतएव आतंकवादियों ने अंग्रेजों के जुल्मों का जवाब गोलियों तथा बम के गोलों से देना आरंभ किया। वे न हत्यारे थे और न लुटेरे थे, किन्तु अंग्रेज हत्यारों और अत्याचारियों को उचित सबक सिखाने के लिए वे उनकी हत्या करना आवश्यक समझते थे।

बड़े-बड़े अंग्रेज पदाधिकारियों की हत्या करना उनके आंदोलन का महत्तवपूर्ण अंग था। हथियार इकट्ठा करना, बम बनाना, गुप्त सभाएँ करना, धन के लिए सरकारी खजाना लूटना तथा समयसमय पर किसी अंग्रेज पदाधिकारी की हत्या करना उनके क्रियाकलाप थे। वे पूर्ण अराजकतावादी थे जिनकी दृष्टि में विदेशी प्रशासन के लिए कोई नरमी नहीं था। उनका एकमात्र उद्देश्य था विदेशी चंगुल से मातृभूमि की मुक्ति करना।

प्रश्न 13.
असहयोग आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रौलैट एक्ट और जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड के विरोध में सन् 1920 में गाँधीजी ने अहिंसक असहयोग आन्दोलन चलाया। इस आन्दोलन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही है। स्त्रियों ने सरकारी कार्यालय तथा विद्यालय त्याग कर आन्दोलन में भाग लिया। वे घर-घर घुमकर विदेशी वस्तुओं को त्याग कर अपने देश में बनी वस्तुओं के प्रयोग करने के लिए अनुरोध किया। वे अपने घरों का काम-काज छोड़कर जुलुसों में भाग लेना शुरू किया, विदेशी वस्तुओं की दुकानों पर धरना दी और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ भी दीं।

बसंती देवी, सरोजनी नायडू, उर्मिला देवी, सुनीति देवी और हेमप्रभा मजुमदार आदि नारियों ने इस आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा लज्जावंती, पार्वती देवी, पेरिन कैप्टन (दादा भाई नौरोजी की पौत्री) नन्दूबेन कानूनगो तथा सरदार वल्ल्बभाई पटेल की पुत्री मनिबेन आदि महिलाओं ने भी इस अहिंसक आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

चितरंजन दास की पत्नी बसन्ती देवी, उर्मिला देवी और सुनीति देवी तीनों संगठित होकर विदेशी कपड़ों के दुकानों पर धरना दी तथा सरकार द्वारा राजनीतिक धरनों पर पाबन्दी का खुलकर विरोध किया। इस विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने बसन्ती देवी को गिरफ्तार कर लिया। इनकी गिरफ्तारी का लोगों पर विद्युत सा असर पड़ा। इस खबर से उत्तेजित लोगों ने पुलिस को घेर लिया और इन्हें मुक्त कराने के लिए बाध्य किया।

असहयोग आन्दोलन में भाग लेनेवाली महिलाओं में सरोजनी नायडू की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने नारी जागरण का कार्य किया । महिलाओं ने इनकी अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय स्त्री संघ’ की स्थापना की। उर्मिला देवी ने इस संस्था द्वारा महिलाओं सं देश की सेवा के लिए घर छोड़ने कीअपील की। बम्बई की लगभग 1 हजार स्त्रियों ने प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का सशक्त विरोध किया। इस आन्दोलन में मुस्लिम महिलाओं ने भी हिस्सा लिया था।

अत: अहिंसक असहयोग आन्दोलन में हमारे देश की लगभग सभी वर्ग की हिन्दू और मुस्लिम महिलाओं ने बढ़-चढ़कर अपना अमूल्य योगदान दिया था।

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प्रश्न 14.
आजाद हिन्द फौज की नारी संगठन के बारे में आप क्या जानते हो ? संक्षेप में उत्तर दीजिए।
उत्तर :
आजाद हिन्द फौज का गठन सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने के लिए किया था। वे दक्षिण-पूर्व एशिया के स्तियों को भी आजाद हिन्द फौज में शामिल करने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मी बाई के नाम पर झाँसी की रानी बिग्रेड नामक नारी सैनिक संगठन का गठन किया। इसमें मलेशिया में रहने वाली भारतीय युवतियों तथा कुछ भारतीय महिलाओं को शामिल कर उन्हें विशेषकर जंगली युद्ध कौशल (गोरिल्ला युद्ध प्रणाली) का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रथम 500 महिलाओं को मार्च 1944 ई० में सिंगापुर में प्रशिक्षित किया गया और उन्हें भारत में आन्दोलन करने के लिए तैयार किया गया। इस बिग्रेड को आजाद हिन्द फौज के सैनिकों की सेवा और सहयोग का भी दायित्व सौंपा गया था। इस दल में लगभग 1500 महिलाएँ थीं जो नीडर और साहसपूर्वक युद्ध का संचालन कर रही थी।

इस संगठन की कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन (लक्ष्मी सहगल) थी, जिन्हें 1945 ई० में गिरफ्तार कर भारत लाया गया और उन्हें छोड़ दिया गया। इनका जन्म 24 अक्टूबर 1914 ई० को मद्रास में हुआ था। ये बचपन से ही विद्रोही प्रवृत्ति की थी। लगभग 30 वर्ष की अवस्था में सिंगापुर गयी और नेताजी से मिलकर आजाद हिन्द फौज की कप्तान बनी। आजाद हिन्द फौज के सेना के कप्तान प्रेम कुमार सहगल से विवाह कर ये लक्ष्मी सहगल बन गयी।

भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में आजाद हिन्द फौज के सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसमें झाँसी की रानी बिग्रेड़ ने भी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

प्रश्न 15.
बंगाल के बहिष्कार आन्दोलन (बंग-भंग आन्दोलन) में छात्रों की क्या भूमिका रही है ? संक्षेप में उत्तर दें।
उत्तर :
बंग-भंग के विरोध में हुए स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को सफल बनाने में समाज के लगभग सभी वर्ग के पुरुषों तथा नारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है साथ ही साथ छात्रों ने भी इसमें जमकर हिस्सा लिया था। बंगाल विभाजन की घोषणा होते ही 5 अगस्त 1905 ई० को अलबर्ट-हाल में एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें एक कोष की स्थापना की गयी। इसका उद्देश्य उन विद्यार्थियों को सहायता देना था जिन्होंने सरकारी शैक्षणिक संस्थानों का वहिष्कार कर आंदॉलन में शामिल हुए थे।

छात्रों ने सर्वप्रथम विदेशी कागज, कलम का उपयोग न करने की शपथ ली साथ ही साथ विदेशी दुकानों पर धरना देना शुरू किया और लोगों से विदेशी वस्तुएँ न खरीदने की प्रार्थना की। वे स्वय विदेशी वस्त्रों का परित्याग किये और साथ ही साथ विदेशी सिगरेट, शराब पीना त्याग दिया। उन्होंने विदेशी समानों को नष्ट करना शुरू कर दिया।

सभाओ तथा प्रदर्शनों में छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कलकत्ता के कॉलेज स्क्वायर में बग-भंग के विरोध में लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। वे ‘संयुक्त बंगाल’ और ‘बंदेमातरम्’ का नारा लगाते हुए कलकत्ता के टाउन हॉल पहुँचे तथा विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की शपथ ली।

छात्रों का अन्दोलन जितना उग्र होता गया सरकारी दमन चक्र भी उतना ही कठोर होता गया। जिन स्कूलों एवं कॉलेजों के विद्यार्थी आंदोलन में सक्रिय हुए, उन्हें शैक्षणिक संस्थानों से निकालने की धमकी दी गयी, उनकी छात्रवृत्ति रोक दी गयी, आर्थिक जुर्माने के साथ ही कैद की सजा दी गयी। इसके अलावा उनके विशेषाधिकार छीन लिए गये और सरकारी नौकरी से उन्हें वचित रखने का निर्णय लिया गया।

10 अक्टूबर 1905 ई० को कार्लाइल सरकुलर जारी कर अंग्रेजी सरकार ने छात्रों के राजनीतिक क्रिया-कलापों पर अंकुश लगाना चाहा लेकिन विद्यार्थियों का उत्साह और भी बढ़ता गया। छात्र नेता सचीन्द्र नाथ बसु ने कृष्ण कुमार और रामाकान्त राय की सहायता से 4 नवम्बर 1905 ई० को एण्टी सर्कुलर सोसाइटी की स्थापना की जिसका उद्देश्य सरकारी शिक्षण संस्थाओं से निकाले गए छात्रों की सहायता करना था। निष्कासित छात्रों के लिए शिक्षण संस्थाओं की स्थापना भी की गयी।
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि छात्रों के सक्रिय सहयोग ने बंग-भंग विरोधी आन्दोलनको उग्र और सफल बनाने में भरपूर सहयोग दिया था

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प्रश्न 16.
‘बंगाल वॉलेंटियर्स’ संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
‘बगाल वॉलेंटियर्स’ एक क्रांतिकारी संस्था थी जिसकी स्थापना हेमचन्द्र घोष ने ढाका में की थी । धीरे-धीरे बंगाल में इसकी कई शाँखायें खुल गयीं। सर्वप्रथम इस संगठन की स्थापना कांग्रेस की मदद के उद्देश्य से की गयी थी। बाद में यह संस्था क्रांतिकारी संस्था बन गई। सन् 1930 ई० में इस संगठन ने जेलों में होने वाले पुलिस जुल्म के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की घोषणा की।

इसी उद्देश्य से प्रेरित होकर मेडिकल कॉलेज के छात्र विनय कृष्ण बसु ने इन्सपेक्टर लोमैन और ढाका के पुलिस सुपरिटेडन्ट हडसन पर गोली चलायी। लामैन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और हडसन गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद विनय वेश बदलकर कलकत्ता आ गए।

क्रांतिकारियों ने अगला निशाना एन० एस० सिम्पसन को बनाया जो जेल में बंद केदियों के ऊपर अत्याचार करता था। 8 दिसम्बर 1930 ई० को विनय बसु, बादल गुप्त और दिनेश गुप्त ने जेल अधीक्षक सिम्पसन को मारने के लिए कलकत्ता के राइटर्स बिल्डिंग पर आक्रमण कर दिया और उसे गोलियों से भून दिया ।

घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गयी। इस घटना की खबर तुरंत आग की तरह फैल गयी। लालबाजार पुलिस ने आकर उन्हें बिल्डिंग के बरामदे में ही घेर लिया। पुलिस और क्रांतिकारियों के बीच काफी गोलियाँ चली, इसे बरामदा का युद्ध कहा जाता है। पुलिस के हाथ न लगे इस भय से विनय, बादल और दिनेश ने आत्महत्या की कोशिश की ।

विनय और बादल की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दिनेश जीवित पकड़े गए और उन्हें मुकदमा चलाकर 7 जुलाई 1931 ई० को फाँसी दे दी गयी।

बंगाल के मिदनापुर में भी यह दल काफी सक्रिय था। इस संगठन के सदस्य विमल दास गुप्त और ज्योति जीवन घोष ने निदनापुर के जिला जज, 1932 ई० में प्रद्युत भट्टाचार्य ने जिला शासक डगलस और अनाथ पंजा तथा मृगेन दत्त ने जिला मजिस्ट्रेट बार्गे की हत्या कर दी। इस दल ने पूरे बंगाल में लूट तथा हत्याकाण्ड जैसे घटनाओं का अंजाम दिया।
इसके बाद भी यह दल सक्रिय रहा और पूरे उमंग तथा उत्साह के साथ भारत के स्वाधीनता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता रहा।

प्रश्न 17.
दक्षिण भारत के ‘वायकोम आन्दोलन’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
वायकोम आन्दोलन : सन् 1923 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अस्पृश्यता (छुआ-छूत) को समाप्त करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाया, जिसमें केरल का वायकोम आन्दोलन सबसे प्रमुख था। केरल में छुआ-छूत की भावना तीव्र गति से पनप रही थी। समाज के दलित वर्ग और निम्न श्रेणी के लोग इस कुरीति के शिकार थे।

समाज के सवर्ण (उच्च श्रेणी) इनको घृणा को दृष्टि से देखते थे, उन पर अत्याचार भी करते थे। ‘एझवा’ तथा ‘पुलैया’ जाति सबसे ज्यादा शोषण के शिकार थी। समाज की ऐसी स्थिति को देखकर केरल प्रदेश काँग्रेस कमिटी ने छुआ-छुत उन्मूलन के लिए आन्दोलन किया और हिन्दू मंदिरों तथा सार्वजनिक सड़कों पर अवर्णो के प्रवेश के लिए आंदोलन छेड़ दिया।

त्रावणकोर के एक गाँव वायकोम में एक शिव मंदिर था, जिसके चारों ओर स्थित सड़कों पर अवर्णों का चलना वर्जित था। केरल काँग्रेस ने 30 मार्च 1924 ई० को सवर्णो और अवर्णो ने एक जुलूस निकालकर छुआ-छूत कानून का उल्लंघन करते हुए वायकोम मंदिर में पहुँच गया। अवर्ण के साथ-साथ सवर्ण के अनेक संगठनों ने भी इस आंदोलन में साथ दिया। यह आन्दोलन लम्बे अरसे तक चलता रहा। मार्च 1925 ई० में गाँधीजी केरल पहुँचे और इस समस्या का हल निकाले।

अत: गाँधोजी की प्रयास से सदर्ण और अवर्ण के बीच एक समझौता हुआ जिसके अनुसार मंदिर के बाहर की सड़कें अवर्णों क लिए खोल दो गई परन्तु मन्दिर के भीतर उनका प्रवेश वर्जित रहा। बाद में मन्दिर प्रवेश की अनुमति भी मिल गई। इस प्रकार टक्षिण भारत में अस्पृश्यता के उन्मूलन में केरल प्रांत का वायकोम आन्दोलन महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

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प्रश्न 18.
भारत के सशस्त्र क्रांतिकारी आन्दोलन में कल्पना दत्त की क्या भूमिका थी ?
अथवा
कल्पना दत्त कौन थी ? भारत के सशस्त्र क्रांतिकारी आन्दोलन में उनका क्या योगदान था?
उत्तर :
कल्पना दत्त एक क्रांतिकारी महिला तथा सशस्त्र कांतिकारी आन्दोलन की अग्रणी नेत्री थी।
इनका जन्म 27 जुलाई 1913 ई० को चटगाँव के श्रीपुर गाँव में हुआ था। हाई स्कूल में पढ़ते समय ही उनके जीवन पर गण्टोंयता और कांतिकारी विचारो का गहरा प्रभाव पड़ा। माध्यमिक शिक्षा के बाद वह कलकत्ता के बेधुन कालेज में विज्ञान विषय से स्नातक करने लगी। शहीद खुदीराम बोस तथा क्रांतिकारी कानाईलाल दत्त के आदर्शो से प्रभावित होकर इन्होंने कालज़ के ‘छात्रा संब’ में शामिल हो गई।

एक साधारण परिवार में जन्मी कल्पना में अद्म्य साहस व वीरता की भावना कूट-कूटकर भरी थी। वह बड़ी दृढ़ इच्छा झ़क्ति की वालिका थी। अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के उद्देश्य से वह क्रांतिकारी आन्दोलन में कूद पड़ी। पूर्णनेन्दू दस्तीदार के माध्यम से वह सूर्यसेन के सम्पर्क में आयी और इण्डियन रिपल्बिकन आर्मी के चटगाँव शाखा में शामिल हो गई।

उन्हांने सर्यसंन के साथ कई कांतिकारी आन्दोलनों में भाग लिया था। 1931 ई० में सूर्यसेन ने कल्पना एव प्रीतिलता के साथ पहाड़ी की तल्नटी में स्थित एक यूरोपियन क्लब पर आक्रमण की योजना बनाया था। सितम्बर 1932 ई० को पहाड़ी तल्ला के पहल निरीक्षण करत समय पुरुष वेष में गिरफ्तार कर ली गयी। जेल से छुटने के बाद वह किसो गुप्त स्थान पर छिप गयी और वहीं से कातिकारी गतिविधियों में भाग लेती रही।

सन् 1933 ई० में पुलिस ने उनके गुप्त स्थान पर छापा मारा, परन्तु वहाँ से भी वह भागने में कामयाब रहीं किन्तु सूर्यसेन सहित कई क्रांतिकारी गिरफ्तार कर लिये गए। पुलिस के हाथों से वह ज्यादा दिन तंक बच नहीं पायी और एक दिन पुलिस ने उनके घर पर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 1934 ई० में उन्हें आजींबन् कारावास की सजा हुई। गाँधी जी और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रयास से सरकार ने उन्हें 1939 ई० में जेल से छांड़ लिया।

बाद में उन्होंन कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली और देश में साम्यवादी विचारों को फैलाने काकार्य किगा। 1946 ई० में कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से उन्होंने बगाल विधान सभा का चुनाव भी लड़ा था, परन्तु हार गई। फरवरी 995 इ० में कलकता में इनका निधन हो गया। मरणोपरांत पूना में उन्हें वीर महिला की उपाधि से विभूषित किया गया।

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प्रश्न 19.
बीना दाम के बारे में क्या जानते हैं ? संक्षिप्त परिचय दीजिए।
अथवा
बंगाल के सशस्त्र क्रांतिकारी आन्दोलन में बीना दास की भूमिका का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
बगाल के क्रांतिकारी आन्दोलनों में महिलाओं एवं छात्राओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी। उन्होनें अपनी वीरता और सात सं के बल पर अंप्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। ऐसी छात्राओं में बीना दास भी शामिल थी, जिसने बंगाल के सशस्त्र क्रातिकारो गतित्रिधियो में अपना अमूल्य योगदान दिया था। इनका जन्म 24 अगस्त, 1911 ई० को बंगाल के कृष्णनगर में हुआ था। इनके पिता का नाम बेनी माधव दास था जो एक प्रसिद्ध अध्यापक थे। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान व्यक्ति इनके छात्र रह चुके थे।

बोना देवी की माता सरला दास एक सामाजिक महिला थी जिसने निराश्रित महिलाओं के लिए ‘पुष्याग्रम’ नामक संस्था भी बनाई थी। इनके पूरे परिवार में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। बीना दास और उनकी बड़ी बहन कल्याणी दास पर भी इसका प्रभाव पड़ा था। मेजिनी, गैरी वाल्डी और बकिमचन्द्र जैसे महान साहित्यकारों को रचनाओं और विचारों से वह बहुत प्रभावित हुई और देश की स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ी।

कलकत्ता के बंधुन कॉलेज में पढ़ते समय ही बीना दास 1928 ई० में साइमन कमीशन के बहिष्कार आन्दोलन में शामिल हो गई और अन्य छात्राओं के साथ मिलकर कॉलेज के फाटक पर धरना प्रदर्शन की। वह कई बार काँग्रेस के अधिवेशन में भी भाग ली थी। चट्दगाँव शस्त्रागर लूट के बाद बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रियता आ गई और इसी समय वह कांतिकारी संख्था ‘युगान्तर दल’ में शामिल हो गई।

उन दिनों क्रांतिकारियों को बंगाल़ के बड़े अंग्रेज अधिकारों को मारने की जिम्मेदारी दी गई। बीना दास भी इसी कार्य में सम्मिलित हो गई और उसे बंगाल के गवर्नर स्टैनले जैक्सन को मारने की जिम्मेदारी सौपो गई। 6 फरवरी, 1932 ई० को बंगाल के गर्वनर स्टैने जैक्सन को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उपाधियाँ बाँटनी थी। उसी समय भाष्ण के दौरान बीना ने उसे मारने की योजना बनाई थी।

6 फरवरी, 1932 ई० दीक्षांत समारोह में गवर्नर ने जैसे ही भाषण देना प्रारंभ किया, बीना दास ने उसके सामने जाकर रिवाल्वर से गोली चला दी। बीना को तेजी से सामने आता देखकर गर्वनर अपनी जगह से हट गया जिससे निशाना चूक गया और वह बच गया। बीना को गिरफ्तार कर उन्हे 9 वर्ष की कड़ी सजा सुनाई गयी।

1937 ई० में उन्हें छोड़ दिया गया, फिर वह गाँधी जी के साथ स्वतंत्रता आन्दोलन में शामिल हो गई। भारत छोड़ो आन्दोलन के समय अंग्रेजी सरकार ने उन्हें तीन वर्ष के लिए नजरबन्द कर दिया था। गाँधी जी के साथ वह कई आन्दोलनों में भाग ली थी। 26 दिसम्बर, 1986 मे ॠषिकेश में इनकी मृत्यु हो गई।

इस प्रकार देश को अंग्रेजी की दासता से मुक्त कराने वाली एक वीर महिला क्रांतिकारी बीना दास सदा के लिए इतिहास के पत्नों में अपने को अमर बना दिया।

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प्रश्न 20.
भारत में दलित वर्ग के आन्दोलन के क्या कारण थे ?
उत्तर :
भारतीय समाज की सबसे बड़ी बुराई जाति-प्रथा, अस्पृश्यता एवं छुआछूत की भावना थी। जाति-प्रथा ने हमारे समाज को दो भागों (सवर्ण और अवर्ण) में बाँट दिया था। सवर्ण हिन्दू अवर्णो को अछूत मानकर उन्हें समाज से अलगथलग कर दिया था। वे लोग सामाजिक असमानता, दमन एवं शोषण के शिकार थे अत: वे ही दलित कहलाते थे।

दलितों ने समय-समय पर सामाजिक समानता तथा अपने सुधारों के लिए तथा समाजसेवी संस्थानों ने भी दलितों के उद्धार तथा जाति प्रथा के उन्मूलन के लिए आवाजे उठाई परन्तु सफल नहहीं हुए। आज भी हमारे देश में जाति-प्रथा जैसी कुरीतियाँ व्याप्त है जिसका समूल नष्ट करने के लिए निरन्तर आन्दोलन हो रहे हैं।
दलित वर्ग के आन्दोलन के कारण :
i. शिक्षा के प्रचार-प्रसार के कारण दलितों में सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागृति पैदा हुई और ये अपनी वर्तमान परिस्थिति से असन्तुष्ट होने लगे। इनका असन्तोष दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया। उन्हें अच्छी तरह समझ में आ गया कि कानून की नजर में सभी लोग एक समान हैं, व्यर्थ ही सवर्ण जाति के लोग दलितों पर अत्याचार करते है जो कानून के खिलाफ है।

ii. निम्न जातियाँ (दलित) पश्चिमी शिक्षा और वहाँ के स्वतंत्र विचारों से प्रभावित होकर यह अनुभव किया कि वहाँ के स्वतंत्र विचारों को अपनाने से उनकी उन्नति हो सकती है और भारतीय समाज में सम्मानीत एवं उचित स्थान मिल सकता है। क्योंकि पश्चिमी देशों में निम्न जाति जैसा कोई वर्ग नहीं था तथा समाज में सबको एक समान अधिकार प्राप्त था।

iii. यातायात और । ‘संचार माध्यमों ने भी सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा दिया। यात्रा करते समय सवर्ण और अवर्ण दोनो जाति के लोग अपने में ज्यादा अन्तर रखने में असमर्थ थे। फलस्वरूप उनके बीच की दूरी धीरे-धीरे कम होती गई और सवर्णो का जो अवर्णों के प्रति घृणा की भावना की, वह दूर होती गई। इस प्रकार अवर्ण (दलित) अपने अधिकारों के प्रति सचेत और जागरूक होने लगे।

इन प्रमुख कारणों के अलावा अन्य कई और कारण भी दलित आन्दोलन के लिए उत्तरदायी थे। दलित जातियाँ अपने उत्थान के लिए इतनी उम्म थी कि उन्होंने सवर्णो के विशेष अधिकारों और उनके राजनीतिक प्रभावों को समाप्त करने के लिए आन्दोलन करने लगे। धीरे-धीरे ये सरकार से सामाजिक स्वीकृति, रोजगार और अपने राजनीतिक अधिकारों की मांग करने लगे। यहीं से हमारे देश में जातीय आन्दोलन का प्रादुर्भाव हुआ।

देश की सामाजिक संस्थाए भी दलितों के उत्थान और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए आन्दोलन कर रहे थे। हमारे देश के महान नेता महात्मा गाँधी और दलित नेता अम्बेदकर ने भी दलितों के उत्थान में अपना सर्वस्व जीवन न्योछावर कर दिया। फिर भी हमारे समाज में जाति-प्रथा जैसी कुरीतियाँ आज भी विद्यमान हैं; जो देश की प्रगति के लिए घातक है। इसका समूल नष्ट करना अति आवश्यक है।

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प्रश्न 21.
भारत छोड़ो आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत छोड़ो आन्दोलन : गाँधी जी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे के साथ सन् 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ आरम्भ किया। उन्होंने देशवासियों को ‘करो और मरो’ का नारा दिया। इस आन्दोलन में समाज के सभी वर्ग के लोगों की तरह नारियों ने भी जमकर हिस्सा लिया। नारियों में विशेषकर कॉलेज और स्कूल की छात्राओं ने इस आन्दोलन में भाग लिया था।

मातंगिनी हाजरा, अरुणा आसफ अली, उषा महतो, सुचेता कृपलानी और कनकलता बरुआ आदि प्रमुख महिलाएँ थीं जिन्होंने भारत के विभिन्न भागों में महिलाओं का नेतृत्व किया था। सभा और जुलूसों में महिलाएँ बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। मातंगिनी हाजरा बंगाल के तामलुक क्षेत्र का नेतृत्व कर रही थीं।

उन्होंने 29 सितम्बर, 1942 ई० को सरकारी अदालत और पुलिस चौकी पर कब्जे के लिए जुलूस निकाला और हाथ में तिरंगा थामे एक सभा को सम्बोधित कर रही थी। उसी समय पुलिस के लाठी चार्ज और गोली-बारी में उनको गोली लग गयी। घटना स्थल पर ही इनकी मौत हो गई। दूसरी आन्दोलनकारी अरुणा आसफ अली भूमिगत आतंकवादियों की संगठनकर्त्ता थीं।

वह भूमित रहकर महिलाओं और छात्राओं को अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए प्रेरित करती रहीं। 1939 ई० में सुचता कृपलानी गाँधीजी से मिलकर कांग्रेस कार्य समिति से जुड़ गई। बाद में उन्हें कांग्रेस की महिला विभाग के गठन की जिम्मेदारी मिल गई। आन्दोलनों में सक्रियता के कारण उन्हें दो साल की कैद हुई।

1942 ई० में सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया फिर वह छिपकर देश में सक्रिय सभी आन्दोलनकारियों से मिलती रही और उन्हें उत्साहित करती रही। मेदिनीपुर के महिषादल और सूताहाटा में महिला स्वयसंसिकाओं की भर्ती करके ‘भगिनी सेना’ (बहनों की सेना) का गठन किया गया था जो छिपकर महिलाओं को राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती रहती थी और देश के लिए शहीद होने की प्रेरणा देती थी। असम की कनकलता बरुआ और पंजाब की वीर महिला योगेध्वरी फुकोननी का नाम भी शहीद होने वाली महिलाओं में शामिल है।

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि विरोध प्रदर्शन से लेकर आन्दोलन के संगठन में भारतीय महिलाओं ने बड़ी सक्रियता दिखाई। इस आन्दोलन में देश की हजारों स्रियाँ शामिल थीं, जो प्रत्यक्ष या अम्रत्यक्ष रूप से आन्दोलन का नेतृत्व कर रही थी। अतः इस आन्दोलन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 22.
प्रीतिलता वादेद्दर क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
प्रीतिलता वाद्देदर सशख्र क्रान्तिकारी आन्दोलन की प्रथम क्रान्तिकारी शहीद नेत्री थीं। वह बचपन से ही बहुत साहसी एवं निडर थी। राष्ट्रीयता उसमें कूट-कूटकर भरी हुई थी। सूर्य सेन के नेतृत्व में वह क्रान्तिकारी आन्दोलन में शामिल हो गयी और उनके साथ कई आन्दोलनों में भाग ली। वह छापामार दस्ता की नेत्री थी। 24 सितम्बर, 1932 ई० को वह अपने साथियों के साथ पहाड़ी की तलहटी में स्थित एक यूरोपियन क्लब पर आक्रमण कर भारी तबाही मचाई। इस आक्रमण में कई अंग्रेज घायल हो गये और एक महिला की मौत हो गई। पुलिस ने क्रान्तिकारियों को चारों तरफ से घेर लिया। दोनों के बीच घण्टों गोलाबारी हुई। पुलिस के हाथों पकड़े जाने के भय से प्रीतिलता ने पोटैशियम साइनाइड (जहर) खाकर आत्महत्या कर ली थी।

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प्रश्न 23.
रशीद अली दिवस पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
कैप्टन अब्दुल रशीद अली आजाद हिन्द फौज के साथ मिलकर बहुत सारे सैनिक कार्यवाही में हिस्सा लिये। रशीद अली की मुख्य भूमिका आजाद हिन्द फौज के सैनिकों में प्राण फूंकना था। आजाद हिन्द फौज के समर्पण के बाद रशीद अली को 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी। मुस्लिम लीग द्वारा रशीद अली को अपना नायक बना लिया गया अत: उनकी सजा की खबर चुनते ही चारों तरफ प्रतिरोध और तोड़फोड़ तथा साथ ही साथ आगजनी की कार्यवाही हुई।

रशीद अली की रिहाई के उद्देश्य को ध्यान में रखकर मुस्लिम छात्र लीग ने 11 फरवरी 1946 ई० को स्दूडन्टस फेडरेशन द्वारा समर्थन मिलने पर छात्रों द्वारा हड़ताल का आयोजन किया गया था, इस हड़ताल में जब छात्र समूह डलहौजी स्क्वायर के तरफ बढ़ रहा था तब पुलिस द्वारा निहत्ये छात्रों पर गोलियाँ चलाई गई जिसमें 48 छांत्र मारे गये थे और लगभग 500 छात्र घायल हो गये थे।

उनको 11 फरवरी 1946 ई० को सजा सुनायी गई और 12 फरवरी 1946 ई० को मुस्लिम लीग ने पूरे भारत में रशीद अली दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया। जिसे रशीद अली दिवस के रूप में मनाया जाता है। रशीद अली दिवस का तात्पर्य हिन्दू मुस्लिम एकता एक स्वतन्त्रता का प्रतिक से था।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
बंग-भंग प्रतिरोध आन्दोलन में भारतीय नारियों के योगदान का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
अथवा
बंगभंग विरोधी आन्दोलन में नारी समाज ने किस प्रकार भाग लिया था ? उनके आन्दोलन की सीमाबद्धता क्या थी ?
उत्तर :
लार्ड कर्जन ने बंगाल की बढ़ती हुई राष्ट्रीय चेतना को कम करने तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता को खण्डित करने के उद्दश्य से 16 अक्टूबर, 1905 ई० को बंग-भंग कानून लागू कर दिया। इसके लागू होते ही पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। बंग-भंग विरोध आन्दोनल में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने भाग लिया। इस आन्दोलन में स्तियाँ एवं छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

बंगाल के विभाजन का विरोध करने के लिए स्वदेशी और बहिष्कार आन्दोलन चलाया गया जिसमें महिला अन्दोलनकारियों ने कलकत्ता के कई स्थानों पर धरना और प्रदर्शन की। महिलाओं ने विदेशी प्रसाधन की वस्तुओं एवं कपड़ों का उपयोग करना छोड़ दिया। बंगाल की प्रतिष्ठित घंरों की औरतों ने विदेशी शराब की दुकानों पर धरना दिया, जुलूसों में भाग लिया तथा विदेशी उपहार लेना बन्द कर दिया।

यहाँ तक कि स्त्रियों ने सुहाग की निशानी चुड़ियों (विदेशी) को पहनने से इन्कार कर दिया तथा रसोई घरों में विदेशी नमक का उपयोग करना छोड़ दिया। घर-घर घुमकर उन्होंने लोगों को विदेशी सामानों का प्रयोग न करने का अनुरोध की। महिलाओं ने एक-दूसरे के हाथों में रॉखी बाँधकर एकता और अखण्डता का परिचय दिया।

उन्होंने सरकारी कार्यालयों के बाहर धरना एवं प्रदर्शन किया तथा विदेशी कपड़ों की होली जलाई। ऐसी महिलाओं में निर्मला सरकार, सरला देवी चौधुरानी, लीलावती,ममंत्रा, कुमुदिनी और हेमागिंनी दास सबसे अग्रणी थी। देवी चौधुरानी ने अपने मित्रों तथा अनुयायियों को देश की आजादी के लिए अपना जीवन कुर्बान करने का संकल्प लेने का दबाव डाला और उन्हें प्रोत्साहित किया।

इन्होंने लक्ष्मी भण्डार की स्थापना की। ब्रिटिश सरकार आन्दोलनकारियों से भयभीत हो गयी और सोचा कि भारतीय जनता की उपेक्षा कर बंगाल का विभाजन सही नहीं है। अन्त में भारत सम्राट जार्ज पंचम ने सन् 1911 में बंग-भंग कानून रह् कर दिया। यह भारतीयों का प्रथम संयुक्त आन्दोलन था जिसने राष्ट्रीय आन्दोलन की पृष्ठभूमि तैयार की।

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प्रश्न 2.
भारत के सशख्त क्रान्तिकारी आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
20 वीं शताब्दी के आरम्भ में सबसे पहले बंगाल में ही सशख्त क्रान्ति का जन्म हुआ, जिसमें पुरुषों के साथ-साथ नारियों ने भी प्राणों की बाजी लगा दी। क्रान्तिकारी आन्दोलन के प्रथम चरण में सरला देवी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बंगाल की क्रान्तिकारी संगठन अनुशीलन समिति से जुड़कर उन्होंने कलकत्ता में एक व्यायामशाला की स्थापना की जिसका उद्देश्य शारीरिक प्रशिक्षण देना था।

बाद में यह संस्था क्रान्तिकारी संगठन के रूप में बदल गयी। सुहुटय नामक इस क्रान्तिकारी संस्था में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान था। बंगाल की दूसरी क्रान्तिकारी महिला ननीबाला देवी थी जो जेल में एक अपराधी की भाँति रहकर अनुशीलन समिति को खबर पहुँचाती रही। बाघाजतीन और उनके कुछ क्रान्तिकारियों को उन्होने आश्रय भी दिया था। क्रान्तिकारी आन्दोलन में सक्रिय होने के कारण पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जहाँ उन्हें प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा।

सन् 1920 आते-आते क्रान्तिकारी आन्दोलनों में महिलाओं की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ने लगी। उच्च घराने की महिलाएँ भी आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने लगीं। देश की मेधावी छात्राएँ पढ़ाई-लिखाई छोड़कर क्रान्तिकारी आन्दोलन में कूद पड़ी। उन्होंने जुलूस निकाला और धरना प्रदर्शन किया। बहुत सी छात्राओं ने सशर्र क्रान्तिकारी आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

मेंावी छात्रा कल्याणी दास ने छात्री संय की स्थापना की जिसका उद्देश्य छात्राओं को क्रान्ति के लिए उत्साहित करना था। जिन महिलाओं एवं छात्राओं ने सशख्त क्रान्तिकारी आन्दोलन में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाग लिया उनमें बंगाल की प्रतिभा भद्र, किरण चक्रवर्ती, ननी बाला देवी, बीना दास, लीला नाग, कल्याणी दास, रानी गिडालू, कल्पना दत्त, प्रौतिलता वाद्देदर, उज्ज्वला मजुमदार, शान्ति घोष और सुनीति चौधरी आदि प्रमुख थी।

बंगाल वॉलेंटियर्स की उग्रवादी सदस्या उज्जवला मजुमदार ने अपने क्रान्तिकारी गारिविधियों से अंग्रेजी सरकार की निंद उड़ा दी। उसने सन् 1934 में एण्डर्सन की हत्या करने की कोशिश की पर वह बाल-बाल बच गया, उसके बदल अन्य लोग मारे गए। महिलाओं में सामाजिक और राजनीतिक जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से लीला नाग ने सन् 1923 में ढाका में ‘दीपाली संघ’ नामक एक महत्वपूर्ण संस्था की स्थापना की।

लीला नाग ने नारी जागरण और नारी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में ज्यादातर कार्य किया। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय भो खोले। राजनीतिक गतिविधियों पर जोर देने के उद्देश्य से हेमचन्द्र घोष ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस से मिलकर दीपाली संघ का विलय बंगाल वलेंटियर्स में कर दिया। सुभाषचन्द्र बोस के आह्वान पर बंगाल की अनेक महिलाओं ने स्वयसेवी संगठनों के सदस्य के रूप में भाग लिया और धीरे- धीरे क्रान्तिकारी आन्दोलन में शामिल हो गयी।

अब महिलाएँ सैन्य वेश में आन्दोलन में भाग लेने लगीं। सूर्य सेन भी युव्वतियों और छात्राओं को आन्दोलन से जुड़ने की प्रेरणा देते थे। बगाल की कल्पना दत्त और प्रीतिलता वाद्देदर उन्हीं की प्रेरणा से सशस्त क्रान्तिकारी आन्दोलन में शामिल हुई थी। ये दोनों चट्टगाँव के सशस्त्र क्रान्तिकारी संगठन की महिला नत्री थी।

कल्पना दत्त का जन्म चट्टगाँव के श्रीपुर गाँव में हुआ था। छात्र जीवन में ही उनके ऊपर राष्ट्रीयता एव क्रान्तिकारी विधारों का गहरा प्रभाव पड़ा और वह गाँधी जी के विचारों से प्रेरित होकर असहयोग आन्दोलन में कूद पड़ीं । सूर्य सेन ने 1931 ई० में कल्पना और प्रीतिलता के साथ मिलकर एक युरोपियन क्लब पर आक्रमण की योजना बनाई थी पर पुलिस को इस बात की सूचना मिल गई और क्लब के पास ही कल्पना पुरुष वेश में गिरफ्तार कर ली गयी।

जेल सं छुटने के बाद वह भूमिगत हो गई। परन्तु उस गुप्त स्थान की भी भनक पुलिस को लग गई और पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। सूर्य सेन पकड़ लिए गए किन्तु कल्पना वहाँ से भाग निकली। 19 मई, 1933 ई० को पुलिस ने कल्पना को घर से गिरफ्तार कर लिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई। गाँधी जी और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रयास से 1939 ई० में ही जेल से मुक्त हुई और फिर से देश-सेवा में लग गई।

प्रीतिलता वाद्देदर सशस्त क्रान्तिकारी आन्दोलन की प्रथम क्रान्तिकारी शहीद नेत्री थीं। वह बचपन से ही बहुत साहसी एव निडर थी। राष्ट्रीयता उसमें कूट-कूटकर भरी हुई थी। सूर्य सेन के नेतृत्व में वह क्रान्तिकारी आन्दोलन में शामिल हो गयी और उनके साथ कई आन्दोलनों में भाग ली। वह छापामार दस्ता की नेत्री थी। 24 सितम्बर, 1932 ई० को वह अपने साथियों के साथ पहाड़ी की तलहटी में स्थित एक यूरोपियन क्लब पर आक्रमण कर भारी तबाही मचाई।

इस आक्रमण में कई अंग्रेज घायल हो गये और एक महिला की मौत हो गई। पुलिस ने क्रान्तिकारियों को चारों तरफ से घेर लिया। दोनों के बीच घण्टों गोलाबारी हुई। पुलिस के हाथों पकड़े जाने के भय से प्रीतिलता ने पोटैशियम साइनाइड (जहहर) खाकर आत्महत्या कर ली।

विदेशों में भी क्रान्तिकारी आन्दोलन सक्रिय था जिसका नेतृत्व पुरुषों के साथ-साथ महिलाएँ भी कर रही थीं। ऐसी महिलाओं में मैडम कामा सबसे अग्रणी थी। वह भारत तथा विदेशों में क्रान्तिकारी आन्दोलनों में श्यामजी कृष्ण वर्मा, एस०आर० राणा के साथ जुड़ी थीं। ये क्रिसमस के उपहार के रूप में रिवाल्वर को खिलौनों में छिपाकर भंजती थीं। वह एक अन्तर्राष्ट्रीय विचार वाली महिला थी जो आजीवन देश सेवा में लगी रही।

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि भारत की हजारों महिलाओं ने अंग्रेजी सरकार को समाप्त करने के लिए अपने प्राणों की बलि चढ़ा दी। इनके सशख्त क्रान्तिकारी आन्दोलनों से ब्रिटिश सरकार भयभीत हो गयी थी।

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प्रश्न 3.
भारत छोड़ो आन्दोलन की पृष्ठभूमि और महत्व का संक्षेप में उल्लेख कीजिए तथा इस आन्दोलन की असफलता के कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
भारत छोड़ो आन्दोलन की पृष्ठभूमि :- भारत छोड़ो आन्दोलन गाँधीजी द्वारा शुरु किये गये सभी स्वतंत्रता आन्दोलन में अन्तिम और महत्वपूर्ण आन्दोलन था। इस आन्दोलन की पृष्ठभूमि में सविनय अवज्ञा आन्दोलन की असफलता से देशवासियों में आन्दोलन के प्रति बढ़ती निराशा की भावना, क्रिप्स मिशन की असफलता द्वितीय विश्चयुद्ध में भारत पर जापानी आक्रमण का भय आदि अन्य परिस्थितियों को देखकर कांग्रेस और गाँधीजी ने महसूस किया कि यही उपयुक्त अवसर है जब ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालकर आजादी प्राप्त की जा सकती है।

इसी को ध्यान में रखकर 8 अगस्त, 1942 ई० में कांग्रेस ने गाँधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आन्दोलन शुरु करने का प्रस्ताव पास किया। उसी दिन गाँधीजी ने सम्पूर्ण देशवासियों को “करो या मरो” Do or Die का नारा देते हुए इस आन्दोलन को शुरु करने की घोषणा की।

भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्व : यद्यपि भारत छोड़ो आन्दोलन सफल नहीं हो सका फिर भी कई अर्थो में यह महत्वपूर्ण रहा। जिसे निम्न रूप में देखा जा सकता है।

  1. भारत छोड़ो अगस्त आन्दोलन अब तक का सबसे बड़ा व्यापक जन आन्दोलन था। जिसकी व्यापकता को देखकर अंग्रेज सरकार की जड़ें हिल गई और वे सोचने पर बाध्य हुए कि भारत में उनके दिन पूरे हो चूके हैं।
  2. इस आन्दोलन में देश के कोने-कोने के सभी वर्गों ने भाग लिया था अत: यह एक जन आन्दोलन बन गया था।
  3. इस आन्दोलन में किसान और मजदूरों ने खुलकर साथ दिया, जिससे आन्दोलन व्यापक हो सका।
  4. इस आन्दोलन ने स्पष्ट कर दिया की भारत की स्वतंत्रता बहुत दूर नहीं है।

भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता :- भारत छोड़ो आन्दोलन एक व्यापक जन आन्दोलन होते हुए भी निम्नलिखित कारणों से सफल न हो सका –

  1. आन्दोलन शुरु होने से पहले हीं कांग्रेस तथा देश के सभी बड़े-बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। अतः उचित नेतृत्व के अभाव में यह आन्दोलन अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सका।
  2. नेतृत्व के अभाव में जनता हिंसक आन्दोलन करने लगी। इसी हिंसा का लाभ उठाकर अग्रेजों ने इस विद्रोह का दमन कर दिया।
  3. इस आन्दोलन में देश के बड़े-बड़े जमीदारों मुस्लिम लीग तथा साम्यवादी दलों ने भारतीयों का साथ ना देकर अंग्रेजों का साथ दिया था।
  4. यह आन्दोलन भारत जैसे विविधिता वाले देश में नेतृत्व के अभाव में अचानक शुरु हो गया था। अतः संगठन साधन और उचित मार्गदर्शक के अभाव में यह आन्दोलन असफल हो गया।

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प्रश्न 4.
असहयोग आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रौलैट एक्ट और जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड के विरोध में सन् 1920 में गाँधीजी ने अहिंसक असह्योगा आन्दोलन चलाया। इस आन्दोलन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही है। स्त्रियों ने सरकारी कार्यालय तथा विद्यालय त्याग कर आन्दोलन में भाग लिया। वे घर-घर घुमकर विदेशी वस्तुओं को त्याग कर अपने देश में बनी वस्तुओं के प्रयोग करने के लिए अनुरोध किया।

वे अपने घरों का काम-काज छोड़कर जुलुसों में भाग लेना शुरू की, विदेशी वस्तुओं की दुकानों पर धरना दी और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ भी दी। बसंती देवी, सरोजनी नायड्द, उर्मिला देवी सुनीति देवी और हेमप्रभा मजुमदार आदि नारियों ने इस आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा लज्जावती पार्वती देवी, पेरिन कैप्टन (दादा भाई नौरोजी की पौत्री) नन्दूबेन कानूनगो तथा सरदार वल्लभभाई पटेल की पुत्री मनिबेन आटि महिलाओं ने भी इस अहिंसक आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

चितरंजन दास को पत्नी बसन्ती देवी, उर्मिला देवी और सुनीति देवी तीनों संगठित होकर विदेशी कपड़ों के दुकानों पर धरना दी। इस विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने बसन्ती देवी को गिरफ्तार कर लिया। इनकी गिरफ्तारी का लोगों पर विद्युत सा असर पड़ा। इस खबर से उत्तेजित लोगों ने पुलिस को घेर लिया और उन्हें मुक्त करने के लिए बाध्य किया।

असहयोग आन्दोलन में भाग लेनेवाली महिलाओं में सरोजनी नायडू की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने नारी जागरण का कार्य किया। महिलाओं ने इनकी अध्यक्षता मे ‘राष्ट्रीय स्त्री संघ’ की स्थापना की। उर्मिला देवी ने इस संस्था द्वारा भहिलाओं से देश की सेवा के लिए घर छोड़ने कीअपील की। बम्बई की लगभग 1 हजार स्त्रियों ने प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का सशक्त विरोध किया। इस आन्दोलन में मुस्लिम महिलाओं ने भी हिस्सा लिया था?
अत: अहिंसक असहयोग आन्दोलन में हमारे देश के लगभग सभी वर्ग की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर अपना अमूल्य योगदान दिया था।

प्रश्न 5.
गाँधी जी द्वारा शुरू किये गये सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में भारतीय नारियों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक भारतीय महिलाओं ने समय-समय पर अपनी साहस, वीरता और त्याग का परिचय दिया है और देश सेवा के लिए मर-मिटने को हमेशा तत्पर रही है। वैदिक काल में नारियों ने वेदो की व्याख्या की, मुगल काल में रानी दुर्गावती ने मुगलों से लोहा ली और आधुनिक काल में 1857 ई० के महाविद्रोह के समय झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई में मरते दम तक अंग्रेजों से लड़ती रही, ठीक इसी प्रकार गाँधी जी द्वारा चलाय गये ‘सविनय अवज्ञा’ और ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलनों में महिलाओं की भागीदारी निभाई जिसका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –

सविनय अवज्ञा आन्दोलन : महात्मा गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत अप्रैल, 1930 ई० में ‘दांडी मार्च’ से किया था। उन्होंने समुद्र तट पर नमक बनाकर सरकारी कानून को भंग किया। यह आन्दोलन धीरे-धीरे भारत के सभी प्रान्तों में फैल गया। इस आन्दोलन में पुरुषों के साथ-साथ नारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाएँ सविनय अवज्ञा के कार्यक्रम को प्रचारित करती थीं।

देश के लगभग सभी प्रान्तों की महिलाओं ने रसोई घर से निकलकर, पर्दा प्रथा को त्यागकर इस आन्दोलन में हिस्सा लिया। बम्बई और दिल्ली की महिलाओं ने इस आन्दोलन में काफी उत्साह दिखाया था। उन्होंने विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों पर धरना दिया जिसके कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी गिरफ्तारियाँ भी हुई, फिर भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ। कस्तूरबा गाँधी, कमला नेहरू, सरोजिनी नायड़, बासन्ती देवी, उर्मिला देवी, सरला बाला देवी और लीला नाग आदि नारियों ने इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन में सरोजिनी नायड्ड का सक्रिय योगदान रहा है। 22 मार्च, 1930 ई० को उन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व सम्भाला। क्रान्तिकारी गतिविधियों के कारण सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस आन्दोलन में गिरफ्तार होने वाली यह प्रथम महिला थी। अरुण बाला सेनगुप्ता ने कलकत्ता में अपना मोर्चा सम्भाला था। उन्होंने विदेशी कपड़ों और शराब के दुकानों पर धरना प्रदर्शन किया। नागालेण्ड की रहने वाली ‘रानी गिडालू’ मात्र तेरह वर्ष की उम्र में इस आन्दोलन में कूद पड़ी। रानी ने सरकारी टैक्स न चुकाने के लिए आन्दोलन की थी।

सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए कठोर कदम उठाया और दमनात्मक नीति का सहारा लिया। महिलाओं के जुलूस और प्रदर्शन पर लाठी चार्ज किया गया, गिरफ्तारियाँ भी की गई फिर भी इनका उत्साह कम नहीं हुआ और उनकी भागीदारी बढ़ती गईं।

भारत छोड़ो आन्दोलन : गाँधी जी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के नारे के साथ सन् 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ आरम्भ किया। उन्होंने देशवासियों को ‘करो और मरो’ का नारा दिया। इस आन्दोलन में समाज के सभी वर्ग के लोगों की तरह नारियों नें भी जमकर हिस्सा लिया। नारियों में विशेषकर कॉलेज और स्कूल की छात्राओं ने इस आन्दोलन में भाग लिया था। मातंगिनी हाजरा, अरुणा आसफ अली, उषा महतो, सुचेता कृपलानी और कनकलता बरुआ आदि प्रमुख महिलाएँ थीं।

जिन्होंने भारत के विभिन्न भागों में महिलाओं का नेतृत्व किया था। सभा और जुलूसों में महिलाएँ बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। मातंगिनी हाजरा बंगाल के तामलुक क्षेत्र का नेतृत्व कर रही थीं। उन्होंने 29 सितम्बर, 1942 ई० को सरकारी अदालत और पुलिस चौकी पर कब्जे के लिए जुलूस निकाला और हाथ में तिरंगा थामे एक सभा को सम्बोधित कर रही थी।

उसी समय पुलिस के लाठी चार्ज और गोली-बारी में उनको गोली लग गयी। घटना स्थल पर ही इनकी मौत हो गई। दूसरी आन्दोलनकारी अरुणा आसफ अली भूमिगत आतंकवादियों की संगठनकर्त्ता थी। वह भूमिगत रहकर महिलाओं और छात्राओं को अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए प्रेरित करती रहीं। 1939 ई० में सुचेता कृपलानी गाँधीजी से मिलकर कांग्रेस कार्य समिति से जुड़ गई। बाद में उन्हें कांग्रेस की महिला विभाग के गठन की जिम्मेदारी मिल गई।

आन्दोलनों में सक्रियता के कारण उन्हें दो साल की कैद हुई। 1942 ई० में सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया फिर वह छिपकर देश में सक्रिय सभी आन्दोलनकारियों से मिलती रही और उन्हे उत्साहित करती रही। मेदिनपपुर के महिषादल और सूताहाटा में महिला स्वयंसेविकाओं की भर्ती करके ‘भगिनी सेना’ (बहनों की सेना) का गठन किया गया था जो छिपकर महिलाओं को राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती रहती थी और देश के लिए शहीद होने की प्रेरणा देती थी। असम की कनकलता बरुआ और पंजाब की वीर महिला योगेशररी फुकोननी का नाम भी शहीद होने वाली महिलाओं में है।

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि विरोध प्रदर्शन से लेकर आन्दोलन के संगठन में भारतीय महिलाओं ने बड़ी सक्रियता दिखाई। इस आन्दोलन में देश की हजारों स्त्रियाँ शामिल थीं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आन्दोलन का नेतृत्व कर रही थी। अत: इस आन्दोलन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था दिया था।

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प्रश्न 6.
गाँधी जी द्वारा चलाए गये स्वाधीनता आन्दोलनों में छात्रों की भागीदारी का उल्लेख करें।
उत्तर :
गाँधी जी हमारे देश के एक महान नेता थे, जिन्होंने देश को स्वाधीन कराने के लिए कई महत्वपूर्ण आन्दोलन किये। उनके आन्दोलनों में समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग शामिल हुए और सक्रिय भूमिका निभाई। उनके आन्दोलनो को गतिशील बनाने में छात्रों की महत्वपूर्ण भागीदारी थी। गाँधी जी ने देश को अंग्रेजों के चगुल से मुक्त कराने के तीन महत्वपूर्ण आन्दोलन असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन और भारत छोड़ो आन्दोलन चलाए जिसमें विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान था।

असहयोग आन्दोलन : गाँधी जी ने सन् 1920 में रोलेट एक्ट और जालियांवाला बाग हत्याकाण्ड के विरोध में अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आन्दोलन छेड़ दिया। देशबन्धु चित्तरंजन दास और गाँधीजी ने विद्यार्थियों को आन्दोलन में भाग लेने के लिए आह्वान किया। उनके आद्धान पर हजारों छात्रों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को त्याग कर आन्दोलन में शामिल हो गये।

इन छात्रों के पढ़ने के लिए काशी विद्यापीठ, गुजरात विद्यापीठ, बिहार विद्यापीठ और जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे अनेक शिक्षण संस्थान स्थापित किये गये। पूरे देश में लगभग 9000 विद्यार्थियों ने सरकारी विद्यालयों और कोलेजों को त्याग दिया था, जिनके लिए लगभग 800 राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गयी थी। ये छात्र इन शिक्षण संस्थानों में पढ़ने लगे।

सुभाषचन्द्र बोस, राजेन्द्र प्रसाद, लाला लाजपत राय, डॉ॰ जाकिर हुसैन और आचार्य नरेन्द्र देव आदि महानुभावों ने इन विद्यालयों में पढ़ाना आरम्भ किया। सरकारी शिक्षा का बहिष्कार आंदोलन बंगाल में चित्तरंजन दास और नेताजी के नेतृत्व में सबसे अधिक सफल रहा।

पंजाब में आन्दोलन का नेतृत्व लाला लाजपत राय के हाथों में था जिनके आह्नान पर छात्रों ने सरकारी शिक्षण संस्थानों को त्यागकर असहयोग आन्दोलन में शामिल हुए थे । बिहार, उड़ीसा, असम, उत्तर प्रदेश और बम्बई के विद्यार्थियों ने भी अपने विद्यालयों और कॉलेजों को त्यागकर असहयोग आन्दोलन में कूद पड़े।

असहयोग आन्दोलन में छात्रों ने जगह-जगह धरना-प्रदर्शन किया, जुलूस निकाला, विदेशी वस्तुओं तथा शराब की दुकानों पर धरना दिया और विदेशी कपड़ों की होली जलाई। उन्होंने विदेशी कागज और स्याही का उपयोग करना छोड़ दिया साथ ही साथ घूम-घूमकर विदेशी वस्तुओं का उपयोग न करने का सुझाव दूसरों को दिया। सन् 1921 में प्रिन्स ऑफ वेल्स के आने पर पूरे देश में हड़ताल और जुलूसों से उसका स्वागत किया गया, जिसमें छात्रों ने बड़ी उत्सुकता से भाग लिया था। सन् 1922 के चौरी-चौरा काण्ड के बाद गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन : 6 अप्रैल, 1930 ई० में नमक कानून तोड़कर गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया। इस आन्दोलन में भी छात्रों ने सक्रिय योगदान दिया था। गाँधी जी ने आन्दोलन के निम्नलिखित कार्यक्रम बनाए थे- नमक कानून तोड़ना, विदेशी वस्तुओं तथा शराब बेचने वाली दुकानों पर धरना-प्रदर्शन, विदेशी कपड़ों को नष्ट करना, सरकारी टैक्स (कर) न देना तथा सरकारी दफ्तर (कार्यालय) तथा विद्यालयों का त्याग करना।

गाँधी जी के आह्वान पर हजारों छात्र-छात्राएँ सरकारी शिक्षण-संस्थानों को त्यागकर इस आन्दोलन में कूद पड़े। गुजरात विद्यापीठ के कई छात्र गाँधी जी के साथ ही पैदल साबरमती आश्रम से दांडी तक चले गये। छात्रों ने विदेशी वस्तुओं एवं शराब की दुकानों पर धरना-प्रदर्शन किया, विदेशी कपड़ों की होली जलाई तथा जनता से विदेशी वस्तुएँ न खरीदने का आग्रह किया।

बम्बई, गुजरात तथा बंगाल के विद्यार्थियों ने इस आन्दोलन में काफी उत्साह दिखाया। छात्रों ने देश के विभिन्न प्रान्तों में ‘युवा लीग’ की स्थापना की जिसके सदस्य खादी वस्त पहनते थे। असम में ‘कनिंघम सर्कुलर’ के विरोध में छात्रों ने एकजुट होकर एक शक्तिशाली आन्दोलन चलाया।

क्योंकि इस सर्कुलर में छात्रों और उनके अभिभावकों को अपने सद्व्यवहार का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। छात्र एवं छात्राएँ एकजुट होकर प्रात:काल गाँवों में घूम-घूमकर राष्ट्रीय गीत गाते थे और लोगों को आन्दोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते रहते थे। अंग्रेजी सरकार के दमन चक्र के कारण 8 मई, 1934 ई० को कांग्रेस कमिटी ने इस आन्दोलन को समाप्त कर दिया।

भारत छोड़ो आन्दोलन : 8 अगस्त, 1942 ई० को गाँधी जी ने ‘करो या मरो’ के आह्नान के साथ ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ की शुरुआत की। यह आन्दोलन गाँधीजी का सबसे अन्तिम और लोकप्रिय आन्दोलन था। अन्य आन्दोलनों की तरह इस आन्दोलन में भी छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। इलाहाबाद विश्चविद्यालय के छात्र संगठन के विद्यार्थियों में इसमें प्रभावपूर्ण योगदान दिया था। आन्दोलन शुरू होते ही गाँधी जी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेता गिरफ्तार कर लिये गये तभी छात्रों ने शिक्षण संस्थानों का बहिष्कार करके आन्दोलन में कूद पड़े। दिल्ली, बम्बई, बंगाल और केरल के विद्यार्थियों में उत्साह अधिक था।

पुलिस के दमन चक्र और बड़े-बड़े नेताओं की अनुपस्थिति में नवयुवक छात्र हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देने लगे। हिंसक छात्र जगह-जगह रेल की पटरियाँ उखाड़ दिये, पूल तोड़ दिये, तार एवं टेलीफोन की लाइनें काट दी, सरकारी भवन तथा दफ्तरों में तोड़-फोड़ की और वहाँ राष्ट्रीय झण्डा फहरा दिये। 11 अगस्त, 1942 ई० को पटना में सात छात्र विरोध करते हुए शहीद हो गये।

यह खबर सुनकर अगले ही दिन छात्रों ने पटना के जिलाधिकारी के कार्यालय का घेराव किया जिसमें पुलिस की गोली से छात्र नेता पट्यधर लाल की मृत्यु हो गई। जगह-जगह विद्रोह बढ़ता गया और सरकार का दमन चक्र भी उतना ही कठोर होता गया। पुलिस के आतंक से विद्यार्थी बहुत भयभीत हो गये और आन्दोलन धीरे-धीरे शिथिल पड़ गया।

इस प्रकार यह सष्ट होता है कि इस आन्दोलन को सफल बनाने में पूरे देश के छात्रों ने अपने जान की बाजी लगा दी थी। इस आन्दोलन में छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया था।

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प्रश्न 7.
सशस्त्र क्रान्तिकारी आन्दोलन में छात्रों की भूमिका का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
20 वीं सदी के प्रारम्भ में देश के युवा वर्ग अंग्रेजी सरकार की नीतियों और अत्याचारों से त्रस्त होकर क्रान्तिकारी गतिविधियों के द्वारा उनको सबक सिखाने के लिए एकजुट हो गये। अंग्रेजी शासन से ये युवा वर्ग पूर्ण रूप से असंतुष्ट थे और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए उन्होंने हिंसात्मक नीति का सहारा लिया।

क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजों के जुल्म और अत्याचार का जवाब गोलियों तथा बमों से दिया। देश के विभिन्न भागों में क्रान्तिकारी संगठनों एवं दलों की स्थापना की गयी जिसमें अनुशीलन समिति, युगान्तर दल, गदर पार्टी, बंगाल वॉलेंटियर्स छात्री संघ, मुक्ति संघ और साधना समिति आदि प्रमुख थे। इन क्रान्तिकारी संस्थाओं ने छात्रों को सशस्र क्रान्ति की शिक्षा देकर उन्हें मातृभूमि की सेवा में मर-मिटने की प्रेरणा दी।

इनके प्रेरणा स्रोत हजारों विद्यार्थियों ने अपने शिक्षण संस्थानों को त्यागकर देश के सशस्ब क्रान्तिकारी आन्दोलनों में शामिल हो गये और देश को विदेशी चंगुल से मुक्त कराने के लिये कटिबद्ध हो गये। क्रान्तिकारी संस्थाओं को संचालन करने के लिए धन इकट्ठा करना, हथियार इकट्ठा करना, गुप्त सभाएँ करना, बम बनाना तथा अन्य अस्त्र-शख्र चलाने की प्रशिक्षण देना एवं जुल्मी-अत्याचारी अधिकारियों की हत्या करना इन संस्थाओं का प्रमुख कार्य था।

बंग-भंग के विरोध में हुए स्वदेशी और बहिष्कार आन्दोलन को सफल बनाने में छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन्होंने विदेशी कागज, कलम, स्याही आदि का प्रयोग न करने के साथ ही विदेशी शिक्षण-संस्थानों में शिक्षा का भी बहिष्कार किया। छात्रों ने विदेशी वस्तु बेचने वाली दुकानों पर धरना-प्रदर्शन किया और विदेशी कपड़ों की दुकानों को आग के हवाले कर दिया तथा घूम-घूमकर लोगों को विदेशी वस्तु न खरीदने के लिए उनसे प्रार्थना की।

सरकार ने छात्रों को राष्ट्रीय आन्दोलनों से दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के अध्यादेश जारी किए जिसमें सबसे महत्वपूर्ण ‘कार्लाइल सर्कुलर’ था। छात्र नेता सचीन्द्र नाथ बसु ने कलकत्ता में ‘एण्टी सर्कुलर सोसाइटी’ की स्थापना की जिसका उद्देश्य स्कूल अथवा कॉलेज से निकाले गये छात्रों के लिए नयी शिक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत शिक्षण संस्थानों की स्थापना करना था। 8 नवम्बर, 1905 ई० को रंगपुर में प्रथम राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना की गयी।

11 मार्च, 1906 ई० को इसी उद्देश्य से ‘नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन’ की स्थापना की गयी। इसी प्रकार देश के विभिन्न प्रान्तों जैसे बंगाल के ढाका, मैमन सिंह, दिनाजपुर, मालदह जिले तथा बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना की गई।

बंगाल के क्रान्तिकारी आन्दोलन में अनुशीलन समिति, युगान्तर दल के छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैमन सिंह जिला में ‘साधना समिति’ और ‘सुदृढ़ समिति’, फरीदपुर की ‘वाती समिति’ तथा ढाका जिले की ‘मुक्ति संघ’ ने छात्रों को सशस्ल-क्रांति की शिक्षा देने का काम किया। बंगाल के बहुत से छात्र-छात्राएँ स्कूल और कॉलेज को त्याग कर इन संस्थानों में जुड़ गए।

23 दिसम्बर, 1907 ई० को ढाका के भूतपूर्व मजिस्ट्रेट मिस्टर ‘एलेन’ को छात्रों ने गोली मारी किन्तु वह बच गया। 30 अप्रैल सन् 1908 को खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर के जज ‘किंग्सफोर्ड’ की बग्गी पर बम फेंका। किन्तु वह बच गया क्योंकि उस वग्गी में वह नहीं था, वग्गी में सवार दो व्यक्तियों (मि० कनेडी और मिसेस कनैडी) की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। प्रफुल्ल चाकी ने पकड़े जाने के भय से आत्महत्या कर ली।

खुदीराम बोस पकड़े गए और 11 अगस्त सन् 1908 को उन्हें फाँसी दे दी गयी। इस घटना के कुछ दिनों के बाद ही पुलिस ने छापा मारकर कलकत्ता के मुरारी पुकुर (मानिकतल्ला) मुहल्ले में एक बम का कारखाना पकड़ा और कई क्रांतिकारियों को पकड़कर उन पर अलीपुर षडबंच्र मुकदमा चलाया।

इस मुकदमा में वारीन्द्र घोष, उल्लास दत्त और हेमचन्द्र दास सहित 15 क्रांतिकारियों को दण्डित किया गया। इस षड्यंत्र केस के बाद बाघा जतीन (यतीन्द्र नाथ मुखर्जी) ने बंगाल के क्रांतिकारी आन्दोलन को आगे बढ़ाया। गार्डेनरीच और बेलियाघाटा की डकैतियों का नेतृत्व इन्होंने ही किया था। इसके अलावा इन्होंने कलकत्ता की एक कम्पनी से 50 माउजर पिस्टल और 45,000 गोलियाँ लूट लिया था। जर्मनी से हथियार मंगाने के प्रयास में पुलिस से मुठभेड़ हो गई और इनकी मृत्यु हो गयी।

दूसरे चरण के क्रांतिकारी आन्दोलन में छात्रों के प्रेरणास्सोत स्कूल शिक्षक सूर्य सेन (मास्टर दा) थे। 18 अप्रैल, 1930 ई० में छात्रों ने इनके नेतृत्व में चटगाँव शखागार को लूट लिया, टेलिफोन व टेलीग्राफ की लाइने काट दीं और वहाँ क्रान्तिकारी सरकार का गठन किया। क्रान्तिकारी दल कई भागों में विभक्त होकर गुरिल्ला युद्ध प्रणाली द्वारा पुलिस से मुठभेड़ जारी रखा।

परन्तु 2 फरवरी, 1933 ई० को सूर्य सेन पुलिस के हाथों पकड़ लिए गये और उन्हें 13 जनवरी, 1934 ई० को मुकदमा चलाकर फाँसी दे दी गई। उनके सहयोगी क्रान्तिकारी गनेश घोष, अनन्त सिंह, निर्मल सेन, जीवन घोषाल, अम्बिका चक्रवर्ती और कल्पना दत्त एवं प्रीतिलता जैसी वीर नारियाँ थीं।

उसी तरह ढाका और मैमन सिंह जिलों में भी क्रांतिकारी सक्रिय थे। ढाका में हेमचन्द्र घोष ने ‘बंगाल वॉलेटियर’ नामक क्रांतिकारी संगठन का गठन किया। बंगाल में भी इस दल की कई शाखाएँ खुल गई। विनय बसु जो मेडिकल कॉलेज का छात्र था इस दल से जुड़ा हुआ था। उसने इंस्पेक्टर लामैन और ढाका के पुलिस सुपरिटेण्डेन्ट हडसन पर गोली चलायी। लामैन की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी और हडसन गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद विनय बसु कलकत्ता आ गये।

8 दिसम्बर, 1930 ई० को वह बादल गुप्त और दिनेश गुप्त के साथ मिलकर कलकत्ता के राइटर्स बिल्डिंग पर धावा बोलकर जेल सुपरिटेन्डेन्ट की हत्या कर दी। लालबाजार पुलिस ने भागते समय इन्हें बरामदे में ही घेर लिया। पुलिस के हाथों न लग सके इस भय से तीनों ने आत्महत्या करने की कोशिश की।

बादल गुप्त और विनय बसु की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई परन्तु दिनेश गुप्त बच गये और उन्हें 7 जुलाई, 1931 ई० को फाँसी पर लटका दिया गया। बंगाल के मिदनापुर में भी क्रान्तिकारी काफी सक्रिय थे। 1931 ई० में विमल दासगुप्त तथा ज्योतिजीवन घोष ने मिदनापुर के जिला जज पेड़ी की, 1932 ई० में प्रद्युत भट्टाचार्य ने जिला शासक डगलस को और 1833 ई० में अनाथ पांजा तथा मृगेन दत्त ने जिला मजिस्ट्रेट वार्गे की हत्या कर दी।

उस समय बंगाल का प्रत्येक भाग आतंक का केन्द्र बना हुआ था। छात्रों के साथसाथ छात्राएँ भी क्रान्तिकारी आन्दोलन में शामिल थीं। शान्ति घोष, बीना दास और सुनीति चौधरी प्रमुख क्रान्तिकारी छात्राएँ थीं जिन्होंने सशख्त क्रान्तिकारी आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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प्रश्न 8.
भारत की राजनीति में दलितों के प्रति डॉ० भीमराव अम्बेदकर की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
ॠग्वेद काल से ही हमारा समाज चार वर्णों में विभाजित था- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र जिनमें तीन वर्णों को विशेषाधिकार प्राप्त था। चौथा वर्ण जो शुद्र कहलाता था वही तीनों वर्णों की सेवा-सत्कार करता था और समाज के सबसे निम्न श्रेणी में इन्हें गिना जाता था। यही वर्ग दलित कहलाता थां।

दलित शब्द का अर्थ है- जो दले गये हैं या कुचले गये हैं अर्थात जिन जातियों के लोग सामाजिक असमानता, दमन एवं शोषण के शिकार हैं, वे ही दलित हैं। औपनिवेशिक काल में भी यही सामाजिक परम्परा प्रचलित थी। सन् 1921 में सम्पन्न जनगणना में ब्रिटिश सरकार ने अस्पृश्य (अछूत) जातियों के लिए सरकारी तौर पर डिप्रेस्ड क्लासेज (दलित वर्ग) नाम का प्रयोग किया।

डॉं० भीमराव अम्बेदकर ने भी इसी नामकरण का प्रयोग किया है। सन् 1931 की जनगणना और भारत शासन अधिनियम 1935 एवं भारतीय संविधान में दलित जातियों के लिए शिड्यूल कास्ट (अनुसूचित जाति) शब्द का प्रयोग किया गया है।

डॉ० भीमराव अम्बेदकर दलित जाति के उद्धारक माने जाते हैं जिन्होंने सबसे पहले दलितों के उत्थान के लिए कदम बढ़ाया था। इनका जन्म महार नामक अछूत जाति में हुआ था। इनका परिवार कबीर पंथी था। इनके ऊपर भी कबीर दास के विचारों का प्रभाव पड़ा था। कबीर दास के गुणों एवं विचारों से प्रेरित होकर इन्होंने समाज में व्याप्त असृश्यता को दूर करने का बीड़ा उठाया।

भारतीय समाज में पीड़ित, शोषित तथा दलित वर्ग को समानता का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से सन् 1920 में अम्बेदकर जी ने मराठी भाषा में मूकनायक (गूंगों का नेता) नामक समाचार पत्र का प्रकाशन शुरु किया। अस्पृश्य (दलित) जाति के लोगों के नैतिक तथा भौतिक उन्नति के लिये 1924 ई० में बम्बई में ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की।

1927 ई० में प्रत्येक भारतीय को सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्वतंत्रता दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने ‘बहिष्कृत भारत’ नामक मराठी पत्र का प्रकाशन शुरू किया। उन्होंने अछूतों (दलितों) के लिए मंदिरों में प्रवेश तथा जनसाधारण के कुँए से पानी भरने के अधिकार के लिए आन्दोलन किया। अछूतों के लिए अलग मताधिकार की भी माँग उन्होंने की थी।

लन्दन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों में वे अछूतों के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिये थे। मंदिरों में दलितों एवं अछूतों के प्रवेषाधिकार के लिए उन्होंने 1930 ई० में आन्दोलन शुरू कर दिया। उनके आह्नान पर 15 हजार स्री एवं पुरुषों ने नासिक के कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए माँग करने लगे।

मंदिर में प्रवेश के अधिकार को लेकर उन्होंने सत्याग्रह शुरू कर दिया। मंदिर के सभी फाटक बंद होने के कारण सभी सत्याग्रही फाटक के बाहर ही आन्दोलन करते रहे। लगभग एक महीने तक संघर्ष चलता रहा और संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा था। तभी 1933 ई० में बम्बई में ‘मंदिर प्रवेश बिल’ (Temple Entry Bill) पास हो गया। इस बिल के द्वारा दलितों एवं अस्पृश्य जातियों के लिए मंदिर में राजनीतिक प्रवेशाधिकार मिल गया।

ब्रिटिश सरकार भी भारतीय नेताओं के मतभेद को जानती थी क्योंकि सविनय अवज्ञा आन्दोलन में कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता एकजुट नहीं थे। अतः अंग्रेजी सरकार ने जाति-पाँति की खाई को अपने ‘फूट डालो राज करो’ की नीति के तहत बढ़ाने का ही कार्य किया। भारतीय नेताओं में सर्वसम्मति के अभाव के चलते सन् 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमजे मैकडॉनल्ड ने सांभादायिक निर्णय (Communal Award) नीति का घोषणा कर दिया जिसके अन्तर्गत दलितों (अछूतों) को अल्पसंख्यक मानकर उन्हें पृथक निर्वाचन का अधिकार दिया गया। दलितों के लिए सुरक्षित स्थानों के अतिरिक्त सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों से भी चुनाव लड़ने की छूट प्रदान की गयी।

लेकिन गाँधी जी इस विभाजन से बहुत दु:खी थे और क्षुब्ध होकर उन्होंने 20 सितम्बर, 1932 ई० को पूना की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया। कांग्रेसी नेताओं के प्रयास से गाँधीजी और डॉ॰ अम्बेदकर के बीच समझौता हुआ जिसे पूना पैक्ट (समझौता) के नाम से जाना जाता है।

इस समझौता के द्वारा दलित वर्गो के लिए साधारण वर्ग में ही सीटों का आरक्षण मिल गया। अत: अम्बेदकर जी के प्रयास से दलितों को कम्युनल एवार्ड के बदले में पहली बार राजनीतिक आरक्षण प्रदान किया गया। अम्बेदकर जी की यह ऐतिहासिक जीत थी।

महाड़ एवं नासिक में अम्बेदकर जी ने दलितों के उद्धार के लिए सत्याग्रह आन्दोलन चलाया जिसमें सवर्ण (उच्च वर्ग) के हिन्दुओं ने उग्र प्रतिक्रिया की और उन्हें प्रताड़ना दिया। जिससे क्षुब्ध होकर अम्बेदकर जी यह सोचने पर मजबूर हो गये कि वे हिन्दू धर्म में रहें या त्याग दें। सन् 1955 में एक दलित सम्मेलन में उन्होंने ऐलान किया कि ‘ ‘मेरा दुर्भाग्य है कि मैं हिन्दू धर्म में जन्मा हूँ पर बड़ी गम्भीरता से कहना चाहता हूँ कि मैं एक हिन्दू के रूप में नहीं मरूँगा।” इसी घोषणा का पालन करते हुए अम्बेदकर जी ने अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म को ग्रहण कर लिया।

अत: इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि डॉ॰ भीमराव अम्बेदकर आजीवन दलितों के उद्धार के लिए संघर्ष करते रहे और उन्हें राजनीतिक आरक्षण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दलितों को सामाजिक तथा धार्मिक अधिकार प्रदान कराने में इनका महत्वपूर्ण योगदान था।

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प्रश्न 9.
साम्रदायिक निर्णय (Communal Award) और पूना समझौता के बारे में क्या जानते है? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में साम्पदायिकता की उत्पत्ति के कई कारण थे। ब्रिटिश शासन की स्थापना के पहले हमारे देश में साम्पदायिकता नाम की कोई चीज नहीं थी। अत: यह ब्रिटिश साम्राज्य की उपज थी। अपने साम्राज्यवादी हित के लिये अंग्रेजों ने एक सम्पदाय को दूसरे के विरुद्ध भड़काना और उसकाना आरम्भ किया था। इसके अलावा अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ समुदाय के लोगों ने साम्पदायिकता की भावना को और भी बढ़ा दिया।

अंग्रेजों ने अपने राजनीतिक हितों की रक्षा के लिये हमारे देश के दो प्रमुख समुदाय (सम्पदाय) हिन्दू और मुस्लिम के बीच फूट डालने का कार्य आरम्भ कर दिया क्योंकि यह एकता अंग्रेजी सरकार के लिये घातक थी। अतः अपने साम्राज्य की सुरक्षा के लिये उन्होंने ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति का अनुसरण करना आरम्भ कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं में आपसी मतभेद को देखकर ब्रिटिश सरकार को साम्पदायिकता की खाई को चौड़ा करने का मौका मिल गया।

इसी समय भारत में साम्पदायिकता को ध्वंस एवं ब्रिटिश विरोधी आन्दोलन को कमजोर करने के लिये ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमजे मैकडॉनाल्ड ने 16 अगस्त, 1932 ई० को साम्पदायिक निर्णय (Communal Award) नीति की घोषणा कर दी।

साम्पदायिक निर्णय (Communal Award) : इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित थीं-
1. मुसलमान, सिक्ख, इसाई, बौद्ध, जैन तथा एंग्लो-इण्डियन (Anglo-Indian) इत्यादि सम्पदाय के लिए पृथक निर्वाचन का विधान किया गया।
2. दलितों (अछूतों) को अल्पसंख्यक मानकर उन्हें भी पृथक निर्वाचन तथा प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया गया।

इस साम्पदायिक निर्णय की प्रमुख विशेषता यह थी कि मुसलमानों और यूरोपियनों की भौति अछूतों को भी हिन्दूओं से अलग कर उन्हें पृथक निर्वाचन तथा पृथक प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया था। इस घोषणा से गाँधी जी को बहुत दुःख हुआ परन्तु मुस्लिम नेताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। दलितों के नेता अम्बेदकर जी भी इस निर्णय के पक्ष में थे।

इस साम्पदायिक निर्णय से क्षुब्ध होकर गाँधी जी ने 20 सितम्बर, 1932 ई० को पूने के यरवदा जेल में आमरण अनशन आरम्भ कर दिया। अनशन से गाँधी का स्वास्थ्य तेजी से गिरने लगा। सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। गाँधी जी की सोचनीय स्थिति को देखकर सी० राजगोपालाचारी और डॉ० अम्बेदकर ने 6 दिनों तक आपस में विचार-विमर्श कर एक ऐसा समझौता पत्र तैयार किया जिसे मानने के लिये गाँधी और अम्बेदकर दोनों सहमत हो गये।

पूना समझौता (Poona Pact) : गाँधी जी तथा सरकार के प्रतिनिधि अम्बेदकर के बीच एक समझौता हुआ जिसे पूना समझौता कहा जाता है। इस समझौते को बिटिश सरकार ने ख्वीकृति दे दी। इस समझौते की प्रमुख बाते निम्नलिखित थीं-

  1. साम्पदायिक निर्णय की तुलना में हरिजनों को ज्यादा स्थान दिए गये। उनके लिए व्यवस्थापिका सभाओं में 71 स्थान के बदले 148 स्थान सुरक्षित किये गये।
  2. चुनाव दोनों स्तर पर होंगे। पहले हरिजन अपना प्रतिनिधि चुनेंगे और फिर समस्त हिन्दू (हरिजन सहित) चार वर्णों में से एक प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे।
  3. हरिजनों को सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी मत देने का अधिकार होगा।
  4. केन्द्रीय एसेम्बली में लगभग 20 सीटें हरिजनों के लिए सुरक्षित कर दी गयी।

इस प्रकार पूना पैक्ट द्वारा हरिजनों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की माँग छोड़ दी गयी और संयुक्त निर्वाचन के सिद्धान्त को स्वीकार किया गया। इसकी सूचना ब्रिटिश प्रधानमंत्री मैकडॉनल्ड को दी गई। उसी दिन महात्मा गाँधी ने आमरण अनशन समाप्त कर दिया। अतः एक तरह से पूना समझौता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिये एक पराजय थी क्योंकि परोक्ष (अप्रत्यक्ष) रूप से उसने साम्पदायिकता को स्वीकार कर लिया था। पूना समझौता हो जाने के बाद भी गाँधीजी और अम्बेदकर के बीच दलितों के उद्धार एवं अधिकार को लेकर आजीवन मतविरोध और गतिरोध जारी रहान

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प्रश्न 10.
हिन्दूस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन (Hindustan Republican Association) और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (Hindustan Socialist Republican Association) के बारे में संक्षिप्त विवरण दीजिए।
अथवा
बंगाल के बाहर क्रांतिकारी आन्दोलनों में हिन्दुस्तान रिपक्लिकन एसोसियेशन और हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन का क्या योगदान था ? संक्षेप में उत्तर दीजिए।
अथवा
बंगाल के बाहर आतंकवादी गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
हिन्दूस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन : बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही हमारे देश में क्रांतिकारी गतिविधियाँ सक्रिय थी। परन्तु 1922 ई० में गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन के असफल होने के बाद देश में क्रांतिकारी कार्यों में तेजी आ गई। बंगाल की अनुशीलन समिति और युगान्तर दल पुन: सक्रिय हो गए और सारे देश में कांतिकारी संगठन बनने लगे।

अब देश के क्रांतिकारी दलों को किस प्रकार आपस में ताल-मेल कराया जाय और एक जगह संगठित होकर आपस में विचार-विमर्श किया जाए, क्रांतिकारी नेता इस बात पर जोर देने लगे। इसी उद्देश्य से सन् 1924 में समस्त क्रांतिकारियों का दल कानपुर के एक सम्मेलन में एकत्रित हुए। इसके परिणामस्वरूप सचीन्द्र नाथ सान्याल की प्रेरणा से सन् 1928 में हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का जन्म हुआ।

धीरे-धीरे बंगाल, बिहार, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा मद्रास आदि शहरों में इसकी अनेक शाखाएं खुली। इस संगठन का प्रमुख सराहनीय कार्य काकोरी रेल डकैती काण्ड था जिसका नेतृत्व राम प्रसाद बिस्मिल ने किया था। 9 अगस्त 1925 ई० को राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने काकोरी स्टेशन से कुछ पहले ही रेलगाड़ी रोककर सरकारी खजाना लूट किया।

गुप्तचर विभाग की मदद से पुलिस ने 28 व्यक्तियों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया और उनपर मुकदमा चलाया गया। सन् 1927 में राम प्रसाद विस्मिल, राजेन्द्र लाहिड़ी, रोशन सिंह और अशफाक उल्लाह को फाँसी, सचीन्द्र सान्याल, सचीन्द्र बक्सी को आजीवन कारावास तथा मन्मथनाथ गुप्त सहित बाकी लोगों को 5 वर्ष से 14 वर्ष तक की सजा का दण्ड दिया गया।

इस घटना के बाद हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिऐशन क्रांतिकारियों के अभाव में निर्बल एवं निष्किय हो गया क्योंकि काकोरी काण्ड के अभियुक्तों की तलाश में अंग्रेजी पुलिस द्वारा बंगाल एवं पंजाब में बड़े पैमाने पर तलाशी ली गयी और अनेकों को गिरफ्तार भी किया गया। सैकड़ों क्रांतिकारियों को देवली, हुगली तथा बक्सर कोर्ट में नजरबन्द कर दिया गया। पुलिस के छापेमारी से सभी क्रांतिकारी घबड़ा गये थे। परन्तु वे चोरी-छिपे संगठन का संचालन करते रहे।

हिन्दूस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के नाम में संशोधन एवं चन्द्रशेखर आजाद का नेतृत्व : हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन को अधिक संगठित एवं फिर से प्रभावशाली बनाने के लिए 8-9 सितम्बर, 1928 ई० को दिल्ली के फिरोजशाह किले में देश के प्रमुख क्रांतिकारियों की एक सभा हुई, जिसमें चन्द्रशेखर आजाद को इस संस्था का सेनापति और अध्यक्ष्ष चुना गया। सरदार भगत सिंह, सुखदेव, विजय कुमार सिन्हा, कुन्दन लाल और शिव शर्मा को देश के सभी क्षेत्रों में संगठन की स्थापना तथा क्रांतिकारियों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

संगठन को मजबूत करने और नये क्रांतिकारियों की भर्ती का भार भी इन्हीं के कंधों पर था। चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु और बटुकेश्वर दत्त ने गरीब, शोषित, पीड़ित जनता एवं किसानों को इस संस्था की तरफ आकर्षित करने के लिए संस्था के नाम में संशोधन कर उसमें ‘सोशलिस्ट’ शब्द जोड़ दिया। अब दल का नाम ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियशन’ हो गया। धीरे-धीरे इसकी शाखायें देश के अन्य भागों में खुल गयी।

पंजाब में सन् 1928 में साइमन कमीशन का विरोध करते समय लाल लाजपत राय को पुलिस ने इतनी बूरी तरह से पीटा की कुछ दिनों के बाद ही इनकी मृत्यु हो गई। यह खबर सुनते ही देश में शोक की लहर दौड़ गई। कांतिकारियों ने इसका बदला लेने का निश्चय किया। चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह तथा सुखदेव ने मिलकर 17 दिसम्बर 1928 ई० को लाहौर के पुलिस सुपरिटेन्डेन्ट सान्डर्स जिसने लाठी चार्ज का हुक्म दिया था, की हत्या कर दी।

जनता में जागृति पैदा करने तथा संगठन के उद्देश्यों को उजागर करने के लिए सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 ई० को केन्द्रीय एसेम्बली में बम फेका। यह कार्य केवल अंग्रेजी सरकार के प्रतिरोध में उन्हें डराने के लिए किया गया था। उन्होंने भागने के बजाय अपनी गिरफ्तारी दी। इस काण्ड के बाद सरकार ने तीसरा लाहौर केस चलाया और इस केस को सांडर्स हत्याकाण्ड से जोड़ दिया। मुकदमें के निर्णय के अनुसार 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फाँसी दे दी गयी।

इसके बाद चन्द्रशेखर आजाद अकेले क्रांतिकारी कार्यों में लगे रहे। एक विश्वासघाती के गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने 27 फरवरी 1931 ई० को चन्द्रशेखर आजाद को इलाहाबाद के अल्फेड पार्क में घेर लिया। आजाद ने बड़ी वीरता के साथ उनका मुकाबला किया। पुलिस से लड़ते-लड़ते जब अन्तिम गोली बची तो उन्होंने स्वयं अपने सिर में मारकर वीरगति को प्राप्त किया । जीवन के अंतिम क्षण तक वह लड़ते रहे, परन्तु अंग्रेजों के सामने नतमस्तक नहीं हुए।

जोगेशचन्द्र चटर्जी और शचीन्द्र नाथ सन्याल के नेतृत्व में आंतकवादी गतिविधियाँ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और देश के अन्य क्षेत्रों में चल रही थी। क्रांतिकारी चुपचाप शान्त बैठे हुए नहीं थे, वे घुम-घुम कर पूरे देश में क्रांति का संचालन कर रहे थे। उन्होंने 1931 में पटना षड्यंत्र केस, मोतिहारी षड्यंत्र केस तथा हाजीपुर ट्रेन डकैती का काण्ड तथा इर्विन पर बम फेकने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी।

इस प्रकार क्रांतिकारी देश के कोन-कोने में क्रांतिकारी गतिविधियों चला रहे थे। सरकार का दमन चक्र बढ़ने के साथसाथ क्रांतिकारियों की सक्रियता भी बढ़ती जा रही थी। उन्होंने अंग्रेजी सरकार की नींद उड़ा दी थी। देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए क्रांतिकारी पूरी तरह से कमर कस लिए थे। अतः इससे स्पष्ट होता है कि देश के स्वतंत्रतासंग्राम में क्रांतिकारियों की महत्वपूर्ण सहयोग व समर्थन बना रहा।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण

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संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण Class 10 WBBSE MCQ Questions

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
“वन्देमातरम्” संगीत की रचना हुई थी –
(क) 1870 ई० में
(ख) 1872 ई० में
(ग) 1875 ई० में
(घ) 1876 ई० में
उत्तर :
(ख) 1872 ई० में

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प्रश्न 2.
‘वर्तमान भारत’ ग्रन्थ की रचना किये थे –
(क) अक्षय कुमार दत्त
(ख) राजनारायण वसु
(ग) स्वामी विवेकानन्द
(घ) रमेशचन्द्र मजुमदार
उत्तर :
(ग) स्वामी विवेकानन्द्

प्रश्न 3.
गगनेन्द्रनाथ ठाकुर थे –
(क) संगीतकार
(ख) नाटककार
(ग) कवि
(घ) व्यंगचित्रकार
उत्तर :
(घ) व्यंगचित्रकार

प्रश्न 4.
1857 ई० की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा था –
(क) रमेशचन्द्र मजुमदार
(ख) सुरेन्द्रनाथ सेन
(ग) विनायक दामोदर सावरकर
(घ) दादाभाई नौरोजी
उत्तर :
(ग) विनायक दामोदर सावरकर

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण

प्रश्न 5.
भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी का शासन समाप्त हुआ –
(क) 1857 ई० में
(ख) 1858 ई० में
(ग) 1919 ई० में
(घ) 1947 ई० में
उत्तर :
(ख) 1858 ई० में

प्रश्न 6.
भारत सभा के प्रथम सभापति (अध्यक्ष) थे-
(क) सुरेन्द्रनाथ वंद्योपाध्याय
(ख) आनन्द मोहन बोस
(ग) रेव. कृष्णमोहन वंद्योपाष्याय
(घ) शिवनाथ शास्त्री
उत्तर :
(ग) रेव. कृष्णमोहन वंद्योपाध्याय

प्रश्न 7.
1878 ई० के वननियम के अनुसार जंगलों को बाँटा गया था –
(क) दो स्तरों में
(ख) तीन स्तरों में
(ग) चार स्तरों में
(घ) पाँच स्तरों में
उत्तर :
(ख) तीन स्तरों में।

प्रश्न 8.
1857 ई० के महाविद्रोह को किसके द्वारा भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम वर्णित किया गया –
(क) सुभाषचन्द्र बोस
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) वी. डी. सावरकर
(घ) रासबिहारी बोस
उत्तर :
(ग) वी. डी. सावरकर।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण

प्रश्न 9.
भारत का प्रथम राजनैतिक संगठन था –
(क) भारतीय संगठन
(ख) भारतीय राष्ट्रीय कंप्मेस
(ग) बंग भाषा प्रकाशिका सभा
(घ) जमींदार सोसाइटी
उत्तर :
(ग) बंग भाषा प्रकाशिका सभा।

प्रश्न 10.
‘भारत माता’ का चित्र किसने बनाया ?
(क) गगनेन्द्र नाथ टैगोर
(ख) अवनीन्द्र नाथ टैगोर
(ग) नन्दलाल बोस
(घ) रामकिन्कर
उत्तर :
(ख) अवनीन्द्र नाथ टैगोर।

प्रश्न 11.
महारानी की घोषणा-पत्र (1858 ई०) के अनुरूप नियुक्त होनेवाला भारत का प्रथम वायसराय था :
(क) लार्ड डलहौसी
(ख) लार्ड कैनिंग
(ग) लार्ड बेंटिक
(घ) लार्ड माउण्टबेटन
उत्तर :
(ख) लार्ड कैनिंग।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण

प्रश्न 12.
भारत सभा के क्रियाकलापों के साथ जुड़े व्यक्ति थे :
(क) केशव चन्द्र सेन
(ख) सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय
(ग) हरीशबन्द्र मुखोपाध्याय
(घ) गगनेन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(ख) सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय।

प्रश्न 13.
निम्नोक्त में एक असंगत सूत्र है :
(क) भारतमाता
(ख) गोरा
(ग) आनंदमठ
(घ) वर्तमान भारत
उत्तर :
(क) भारतमाता।

प्रश्न 14.
‘छिहत्तर के अकाल’ (1976 ई०) का संवेदनशील विवरण किस उपन्यास में मिलता है ?
(क) गोरा
(ख) आनन्दमठ
(ग) वर्तमान भारत
(घ) पाथेर दाबी
उत्तर :
(ख) आनन्द्रमठ।

प्रश्न 15.
1857 ई० के महान विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था ?
(क) नाना साहब
(ख) बहादु शह ‘जर’ (द्वितय)
(ग) वीर कुँवर सिंह
(घ) मंगल पाण्डे
उत्तर :
(ख) बहादुर शाह ‘जफर’ (द्वितीय)

प्रश्न 16.
1857 ई० के महान विद्रोह के समय भारत का वायसराय कौन था ?
(क) वारेन हेस्टिंग्स
(ख) लाई डलहौजी
(ग) लार्ड कैनिग
(घ) लार्ड कार्नवालिस
उत्तर :
(ग) लार्ड कैनिग

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प्रश्न 17.
1857 ई० के ठीक बाद बंगाल में कौन सा विद्रोह हुआ था ?
(क) नील विद्रोह
(ख) रंगपुर विद्रोह
(ग) पावना विद्रोह
(घ) बारासात विद्रोह
उत्तर :
(क) नोल विद्रोह

प्रश्न 18.
1857 ई० के विद्रोह का प्रथम आगाज (शुरूआत) कहाँ हुआ था ?
(क) मेरठ में
(ख) बेरकपुर में
(ग) आरा-जगदीशपुर में
(घ) कानपुर में
उत्तर :
(ख) लैरकपुर में

प्रश्न 19.
समस्त भारतवासी किस दिन को ‘क्रान्ति दिवस’ के रूप में मनाते हैं ?
(क) 29 मार्च को
(ख) 8 औरेल को
(ग) 10 मई को
(घ) 31 मई को
उत्तर :
(ग) 10 मई को

प्रश्न 20.
1857 ई० के महान विद्रोह का तात्कालिक कारण था –
(क) राजनीतिक
(ख) सामाजिक
(ग) आर्थिक
(घ) धार्मिक (कारतूस वाली घटना)
उत्तर :
(घ) धार्मिक (कारतूस वालौ घटना)

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प्रश्न 21.
किस अधिनियम के द्वारा भारत में वायसराय का पद स्थापित किया गया था ?
(क) 1813 ई० के
(ख) 1833 ई० के
(ग) 1853 ई० के
(घ) 1858 ई० के
उत्तर :
(घ) 1858 ई० के

प्रश्न 22.
1857 ई० का विद्रोह का आरम्भ किस शहर से हुआ था ?
(क) बैरकपुर
(ख) मेरठ
(ग) दिल्ली
(घ) झाँसी
उत्तर :
(ख) मेरठ

प्रश्न 23.
विक्टोरिया का ‘महान घोषणा पत्र’ कहाँ पढ़ा गया था ?
(क) दिल्ली में
(ख) कलकत्ता में
(ग) जयपुर में
(घ) इलाहाबाद में
उत्तर :
(घ) इलाहाबाद में

प्रश्न 24.
भारतमाता के चित्र का विचार सबसे पहले किस पुस्तक में उद्भव हुआ था ?
(क) आनन्दमठ
(ख) गोरा
(ग) हिन्दू मेला
(घ) वर्तमान भारत
उत्तर :
(क) आनन्दमठ

प्रश्न 25.
‘दक्षिणेश्वर का संत’ कहा गया है –
(क) राम कृष्ण को
(ख) विवेकानन्द को
(ग) अरविन्द घोष को
(घ) राम मोहन राय को
उत्तर :
(क) राम कृष्ण को

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प्रश्न 26.
1857 ई० के विद्रोह का समर्थन किसने नहीं किया था ?
(क) देशी राजाओं ने
(ख) उच्च वर्ग ने
(ग) मध्यम वर्ग ने
(घ) किसान एवं मजदूरों ने
उत्तर :
(ग) मध्यम वर्ग ने

प्रश्न 27.
‘हिन्दू मेला’ का मुखपत्र था –
(क) द बंगाली
(ख) द नेशनल पेपर
(ग) द बंगदूत
(घ) द प्रवासी
उत्तर :
(ग) द बंगदूत।

प्रश्न 28.
‘हिन्दू मेला’ किस दूसरे नाम से विख्यात था –
अथवा
हिन्दू मेला का प्रांरभिक नाम था –
(क) चैत्र मेला
(ख) पौष मेला
(ग) जयदेव का मेला
(घ) स्वदेशी मेला
उत्तर :
(क) चैत्र मेला।

प्रश्न 29.
बंगाल के बेताज बादशाह के रूप में किन्हें जाना जाता है ?
(क) सुरेन्द्रनाथ बंद्योषाष्याय
(ख) मदन मोहन घोष
(ग) राममोहन रॉय
(घ) केशवचन्द्र सेन
उत्तर :
(क) सुरेन्द्रनाथ बंद्योपाध्याय।

प्रश्न 30.
अखिल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना कब हुआ था ?
(क) 1880 ई० में
(ख) 1883 ई० में
(ग) 1884 ई० में
(घ) 1885 ई० में .
उत्तर :
(d) 1885 ई० में।

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प्रश्न 31.
‘गोरा’ उपन्यास के लेखक हैं :
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ख) स्वामी विवेकानन्द
(ग) बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय
(घ) विद्यास
उत्तर :
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 32.
“19वीं सदी सभा और समितियों का युग था” – कहा था :
(क) डॉ० अनिल सेन ने
(ख) ताराचन्द मुखर्जी ने
(ग) सुकुमार मित्रा ने
(घ) कालीप्रसन्न सिंहा ने
उत्तर :
(क) डॉ० अनिल सेन ने।

प्रश्न 33.
भारत में सर्वप्रथम राजनीतिक कार्टून बनाया था –
(क) कालीमसत्रा सिंह
(ख) अवनीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) शिवनाथ शास्त्री
(घ) ज्ञानेन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(क) कालीमसन्ना सिंह।

प्रश्न 34.
वर्नाकुलर प्रेस ऐक्ट एवं आर्म्स ऐक्ट लागू हुआ था –
(क) 1875 ई० में
(ख) 1878 ई० में
(ग) 1879 ई० में
(घ) 1880 ई० में
उत्तर :
(ख) 1878 ई० में।

प्रश्न 35.
असम में सिपाही विद्रोह का नेतृत्व किया था –
(क) नाना साहय
(ख) मोनीराम दीवान
(ग) मौलवी अहमदुल्ला
(घ) भकत खान
उत्तर :
(ख) मोनीराम दीवान।

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प्रश्न 36.
भारत के प्रथम वायसरॉय कौन था ?
(क) लाई लिंटन
(ख) लार्ड क्लाईव
(ग) लाई केनिंग
(घ) लार्ड बेंटिंक
उत्तर :
(ग) लार्ड कैनिंग।

प्रश्न 37.
विवेकानन्द द्वारा लिखित एक ग्रंथ है –
(क) आनन्द् मठ
(ख) वर्तमान भारत
(ग) नील दर्पण
(घ) हिन्दू पैट्रियॉंट
उत्तर :
(ख) वर्तमान भारत।

प्रश्न 38.
एशियाटिक सोसाबटी की स्थापना में हुई थी –
(क) 1784 ई०
(ख) 1774 ई०
(ग) 1798 ई०
(घ) 1764 ई०
उत्तर :
(क) 1784 ई०

प्रश्न 39.
रानी की उद्योषणा प्रकाशित हुआ था :
(क) 1858 ई० में
(ख) 1859 ई० में
(ग) 1860 ई० में
(घ) 1861 ई० में
उत्तर :
(क) 1858 ई० में।

प्रश्न 40.
क्रांति शब्द का अर्थ होता है –
(क) सम्पूर्ण परिवर्तन
(ख) मंद परिवर्तन
(ग) परिवर्तन
(घ) उपरोक्त कोई नहीं
उत्तर :
(क) सम्पूर्ण परिवर्तन।

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प्रश्न 41.
बंग भाषा प्रकाशिका सभा का गठन हुआ था :
(क) 1836 ई० में
(ख) 1837 ई० में
(ग) 1838 ई० में
(घ) 1839 ई० में
उत्तर :
(क) 1836 ई० में।

प्रश्न 42.
भारत सभा की स्थापना हुई थी –
(क) 1876 ई० में
(ख) 1877 ई० में
(ग) 1879 ई० में
(घ) 1880 ई० में
उत्तर :
(क) 1876 ई० में।

प्रश्न 43.
अखिल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का आह्वान किया गया था :
(क) 1880 ई० में
(ख) 1883 ई० में
(ग) 1884 ई० में
(घ) 1885 ई० में
उत्तर :
(घ) 1885 ई० में।

प्रश्न 44.
1857 की महाक्रांति को प्रथम स्वाधीनता संग्राम कहा था –
(क) दीनबन्धु मित्र
(ख) माइकल मधुसूदन दत्त
(ग) जेम्स लाँग
(घ) हरिशचन्द्र मुखोपाध्याय
उत्तर :
(ग) जेम्स लॉंग।

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प्रश्न 45.
‘आनन्दमठ’ उपन्यास के लेखक हैं :
(क) बेकिमचन्द्र चट्टोताष्याय
(ख) रवीन्द्रनाथ टै गोर
(ग) स्वामी विवेकानन्द
(घ) गगनेन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(क) बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय।

प्रश्न 46.
इण्डियन वार ऑफ इण्डिपेंडेंस – द्वारा लिखा गया था।
(क) वि० डी० सावरकर
(ख) रजनी पाम दत्त
(ग) दादाभाई नौरोजी
(घ) जावहरलाल नेहरू
उत्तर :
(क) वि॰ डी॰ सावरकर।

प्रश्न 47.
भारत सभा की स्थापना किसके द्वारा हुई थी ?
(क) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी
(ख) सुरेन्द्र नाथ घोष
(ग) लालमोहन घोष
(घ) शिशिर कुमार घोष
उत्तर :
(क) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी।

प्रश्न 48.
भारत का सांस्कृतिक शहर कौन सा है ?
(क) कोलकाता
(ख) मुम्बई
(ग) दिल्ली
(घ) चेन्नई
उत्तर :
(क) कोलकाता।

प्रश्न 49.
जेनरल असेम्बली इंस्टीट्यूशन को वर्तमान में जाना जाता है –
(क) स्कॉटिश चर्च कॉलेज
(ख) विद्यसागर कॉलेज
(ग) प्रेसीडेंसी कॉलेज
(घ) चित्तरंजन कॉलेज
उत्तर :
(क) स्कॉटिश चर्च कॉलेज।

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प्रश्न 50.
महारानी विक्टोरिया को ‘भारत की सम्राज्ञी’ के रूप में सम्मानित किया गया था –
(क) 1858 ई० में
(ख) 1865 ई० में
(ग) 1875 ई० में
(घ) 1877 ई० में
उत्तर :
(क) 1858 ई० में।

प्रश्न 51.
बंगभाषा प्रकाशिका सभा की स्थापना किसके द्वारा हुई ?
(क) गौरो शंकर तर्कबागीस
(ख) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
(ग) द्वारकानाथ ठाकुर
(घ) नवगोपाल मित्र
उत्तर :
(क) गौरी शंकर तर्कबागीस।

प्रश्न 52.
‘हिन्दू मेला का उपहार’ नामक कविता किसने लिखा ?
(क) राजनारायण बसु
(ख) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(ग) नवगोपाल मित्र
(घ) गगनेन्द्र नाथ ठाकुर
उत्तर :
(ग) नवगोपाल मित्र।

प्रश्न 53.
‘जाटासुर’ नामक चित्र के द्वारा बनाया गया।
(क) गगनेन्द्रनाथ टैगोर
(ख) अवनीन्द्रनाथ टैगोर
(ग) द्विजेन्द्रनाथ टैगोर
(घ) ज्योतिरिन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर :
(क) गगनेन्द्रनाथ टैगोर।

प्रश्न 54.
1857 ई० के विद्रोह का तात्कालिक कारण था –
(क) चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग
(ख) डलहौजी का जब्ती सिद्धान्त
(ग) बिटिश सैनिको एवं भारतीय सैनिकों के केतन में भारी अन्तर
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर :
(क) चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग ।

प्रश्न 55.
वह पहला भारतीय कौन था, जिसने चर्बी वाले कारतूस का प्रयोग करने से इंकार किया ?
(क) मंगल पाण्डेय
(ख) शिव राम
(ग) हरदेव
(घ) अब्दुल रहीम
उत्तर :
(क) मंगल पाण्डेय।

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प्रश्न 56.
1857 ई० का विद्रोह का सूत्रपात करने वाला मंगल पाण्डे का सम्बन्ध किस इन्फेन्ट्री से था ?
(क) 34 वीं नेटिव इफैंट्री से
(ख) 22 वीं नेटिव इफैंट्री से
(ग) 19 वी नेटिव इफेट्री से
(घ) 38 वों नेटिव इफेंट्री से
उत्तर :
(क) 34 वीं नेटिव इंफेंट्री से।

प्रश्न 57.
बेगम हजरत महल ने 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किस शहर से की थी ?
(क) लखनक
(ख) कानपुर
(ग) बनारस
(घ) इलाहाबाद
उत्तर :
(क) लखनऊ।

प्रश्न 58.
वर्ष 1857 ई० के विद्रोह के निम्न नेताओं में किसने सबसे पहले अपना बलिदान दिया ?
(क) कुँवर सिंह
(ख) तात्या टोपे
(ग) लक्ष्मीबाई
(घ) मंगल पाण्डे
उत्तर :
(घ) मंगल पाण्डे।

प्रश्न 59.
1857 ई० के विद्रोह के समय कानपुर में सैनिको का नेतुत्व किसने किया था ?
(क) कुँवर सिंह
(ख) बख्त खाँ
(ग) लक्ष्मीबाई
(घ) नाना साहेब
उत्तर :
(घ) नाना साहेब।

प्रश्न 60.
1857 ई० के विद्रोह की शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण आधार क्या था ?
(क) नाना साहब का नेरृत्व
(ख) बहादुरशाह का सहयोग
(ग) हिन्दू-मुस्लिम एकता
(घ) झाँसी की रानी का नेतृत्व
उत्तर :
(ग) हिन्दू-मुस्लिम एकता।

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प्रश्न 61.
रानी लक्ष्मीबाई का मूल नाम क्या था ?
(क) मणिकर्णिका
(ख) जयश्री
(ग) परा
(घ) अहल्या
उत्तर :
(क) मणिकर्णिका।

प्रश्न 62.
भारत के शिक्षित मध्यम वर्ग ……….।
(क) 1857 ई० की क्रान्ति का विद्रोह किया
(ख) 1857 ई० की क्रान्ति का समर्थन किया
(ग) 1857 ई० की क्रान्ति में तटस्थ रहे
(घ) देशी शासकों के विरुद्ध संघर्ष किया
उत्तर :
(ग) 1857 ई० की क्रान्ति में तटस्थ रहे।

प्रश्न 63.
1857 ई० की क्रान्ति के समय ब्रिटेन का प्रधानमंत्री कौन था ?
(क) बेंजामिन डिजरायली
(ख) लायड जार्ज
(ग) ग्लैस्टोन
(घ) लाई्ड पामर्स्टन
उत्तर :
(घ) लाईं पामर्स्टन।

प्रश्न 64.
1857 ई० में अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध पंजाब में किसने सशख्त विद्रोह किया?
(क) सैनिकों ने
(ख) नामधारी सिखों ने
(ग) अकाली सिखों ने
(घ) निरंकारी सिखों ने
उत्तर :
(ख) नामधारी सिखों ने।

प्रश्न 65.
बिहार में 1857 ई० की कान्ति के नेता कुँवर सिंह का देहांत कब हुआ ?
(क) 10 और, 1858 ई
(ख) 17 जून, 1858 ई०
(ग) 9 मई, 1858 ई०
(घ) 20 जून, 1858 ई०
उत्तर :
(ग) 9 मई, 1858 ई०।

प्रश्न 66.
अंग्रेजो द्वारा भारतीय सेना में चर्बीवाले कारतूसों से चलनेवाली एनफील्ड राइफल कब शामिल की गई ?
(क) नवम्बर, 1856 ई०
(ख) दिसम्बर, 1856 ई०
(ग) जनवरी, 1857 ई०
(घ) फरवरी, 1857 ई०
उत्तर :
(ग) जनवरी, 1857 ई०

प्रश्न 67.
निम्नलिखित में से कौन-सा आयोग 1857 ई० का विद्रोह दमन के बाद भारतीय फौज के नव संगठन से संबंधित है ?
(क) पू्लिक सार्विस आयोग
(ख) पील आयोग
(ग) हन्टर आयोग
(घ) साइमन आयोग
उत्तर :
(ख) पील आयोग।

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प्रश्न 68.
1857 ई० के विद्रोह को किस उर्दू कवि ने देखा था ?
(क) मीर तकी मीर
(ख) जौफ
(ग) मिर्जा गालिब
(घ) इकबाल
उत्तर :
(ख) मिर्जा गालिब।

प्रश्न 69.
निम्नलिखित में से कौन 1857 ई० के विद्रोह में अंग्रेजों का सबसे कट्टर दुश्मन था ?
(क) मौलवी अहमदुल्ला शाह
(ख) मौलवो इंदाहुल्लाह
(ग) मौलाना फज्सेहक ख़ेाबादी
(घ) नवाब लियाकत अली
उत्तर :
(क) मौलवी अहमदुल्ला शाह।

प्रश्न 70.
जगदीशपुर के राजा थे –
(क) नाना साहब
(ख) तात्या टोपे
(ग) लक्ष्मीबाई
(घ) कुँवर सिंह
उत्तर :
(घ) कुँवर सिंह।

प्रश्न 71.
1857 ई० के विद्रोह का नेतुत्व बिहार में किसने किया ?
(क) खान बहादुर खाँ
(ख) कुँबर सिंह
(ग) तात्या टोपे
(घ) रानी राम कुआंरि
उत्तर :
(ख) कुँवर सिंह।

प्रश्न 72.
1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किस मुगल सम्राट ने किया था, जिसे गिरफ्तार कर रंगून भेज दिया गया, जहाँ 1862 ई० में उसकी मृत्यु हो गई ?
(क) अजीमुल्ला को
(ख) शाहआलम द्वितीय को (ग) बहादुरशाह प्रथम को
(घ) बहादुराहाह द्वितीय (जघर) को
उत्तर :
(घ) बहादुरशाह द्वितीय (जफर) को।

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प्रश्न 73.
1857 ई० का विद्रोह मुख्यत: किस कारण से असफल रहा ?
(क) हिन्दू-मुस्लिम एकता की कमी
(ख) किसी सामान्य योजना और केन्द्रीय संगठन की कमी
(ग) इसके प्रभाव का सीमित क्षेत्र
(घ) जमींदारों की असहभागिता
उत्तर :
(ख) किसी सामान्य योजना और केन्द्रीय संगठन की कमी।

प्रश्न 74.
निम्नलिखित में किसने 1857 ई० के विद्रोह को एक ‘षड़्यंत्र’ की संज्ञा दी ?
(क) जेम्स आउट्रम एवं डब्ल्यू. टेलर
(ख) सर जॉन के
(ग) सर जॉन लारेन्स
(घ) टी.आर. होम्स
उत्तर :
(क) जेम्स आउट्रम एवं डब्ल्यू. टेलर।

प्रश्न 75.
डॉ. अनिल सेन ने किस सदी को ‘समितियों का युग’ का नाम दिया ?
(क) अठारहवीं सदी को
(ख) उन्नीसवीं सदी को
(ग) बीसरीं सदी को
(घ) सोलहवी सदी को
उत्तर :
(ख) उन्नीसवीं सदी को।

प्रश्न 76.
‘बंगभाषा प्रकाशिका सभा’ का निर्माण किसके नेतृत्व में किया गया था ?
(क) राजा राममोहन राय के
(ख) द्वारकानाथ ठाकुर के
(ग) विलियम काब्री के
(घ) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के
उत्तर :
(ख) द्वारकानाथ ठाकुर के।

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प्रश्न 77.
लैणड होल्डर्स ऐसोशिएसन (बंगाल जमींदार सभा) का निर्माण किसके नेतृत्व में किया गया था ?
(क) द्वारकानाथ ठाकुर के
(ख) राजा राममोहन राय के
(ग) विलियम काबी के
(घ) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के
उत्तर :
(क) द्वारकानाथ ठाकुर के।

प्रश्न 78.
भारतीय सभा (Indian Association) का निर्माण किसने किया था ?
(क) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनन्द मोहन घोष ने
(ख) द्वारकानाथ ठाकुर ने
(ग) विलियम काब्नी ने
(घ) राजा रामोहन राय ने
उत्तर :
(क) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनन्द मोहन घोष ने।

प्रश्न 79.
हिन्दू मेला (Hindu Mela) का गठन किसने किया था ?
(क) नवगोपाल मित्र ने
(ख) राजा राममोहन राय ने
(ग) आनन्द मोहन घोष ने
(घ) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने
उत्तर :
(क) नवगोपाल मित्र ने।

प्रश्न 80.
स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म कब हुआ था ?
(क) 12 अवरी, 1863 ई में
(ख) 13 जसकरो, 1863 ई में
(ग) 14 असवरी, 1863 ई में
(घ) 15 जनकरो, 1863 ई में
उत्तर :
(क) 12 जनवरी, 1863 ई० में।

प्रश्न 81.
स्वामी विवेकानन्द जी का मूल नाम क्या था ?
(क) नरेन्द्रनाथ दत्त
(ख) गंगाधर भट्टाचार्य
(ग) नरेन्द्रनाथ भट्टाचार्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) नरेन्द्रनाथ दत्त।

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प्रश्न 82.
‘राजयोग’ किसकी रचना है ?
(क) अवनीन्द्रनाय टैगोर की
(ख) स्वामी विवेकानन्द् की
(ग) रवीन्द्रनाथ टैगोर की
(घ) राजा राममोहन राय की
उत्तर :
(ख) स्वामी विवेकानन्द की।

प्रश्न 83.
‘वुड्स डिस्पैच’ कब पारित हुआ था ?
(क) 1755 ई० में
(ख) 1758 ई० में
(ग) 1854 ई० में
(घ) 1857 ई० में
उत्तर :
(ग) 1854 ई० में।

प्रश्न 84.
‘बंगाल ब्रिटिश इण्डिया सोसाइटी’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1842 ई० में
(ख) 1843 ई० में
(ग) 1844 ई० में
(घ) 1845 ई० में
उत्तर :
(ख) 1843 ई० में।

प्रश्न 85.
‘ब्रिटिश इणिडया एसोसिएशन’ की स्थापना कब हुआ ?
(क) 1843 ई० में
(ख) 1838 ई० में
(ग) 1851 ई० में
(घ) 1876 ई० में
उत्तर :
(ग) 1851 ई० में।

प्रश्न 86.
‘बॉम्बे एसोसिएशन’ की स्थापना कब हुआ ?
(क) 1850 ई० में
(ख) 1851 ई० में
(ग) 1852 ई० में
(घ) 1853 ई०० में
उत्तर :
(ग) 1852 ई० में।

प्रश्न 87.
‘इण्डियन एसोसिएशन’ की स्थापना कब हुआ ?
(क) 1874 ई० में
(ख) 1875 ई० में
(ग) 1876 ई० में
(घ) 1877 ई० में
उत्तर :
(ग) 1876 ई० में।

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प्रश्न 88.
‘उपबोधन’ या ‘उद्वोधन’ का प्रकाशन कब हुआ था ?
(क) 1879 ई० में
(ख) 1880 ई० में
(ग) 1890 ई० में
(घ) 1899 ई० में
उत्तर :
(घ) 1899 ई० में।

प्रश्न  89.
बंगाल में ‘रेण्ट एक्ट’ कब पारित हुआ था ?
(क) 1859 ई० में
(ख) 1860 ई० में
(ग) 1861 ई० में
(घ) 1862 ई० में
उत्तर :
(क) 1859 ई० में।

प्रश्न 90.
रवीन्द्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार कब दिया गया ?
(क) 1913 ई० में
(ख) 1914 ई० में
(ग) 1915 ई० में
(घ) 1916 ई० में
उत्तर :
(क) 1913 ई० में।

प्रश्न 91.
1857 ई० के बरेली विद्रोह का नेता कौन था ?
(क) खान बहादुर खाँ
(ख) कुँवर सिंह
(ग) मौलवी अहमदशाह
(घ) बिराजिस कादिर
उत्तर :
(क) खान बहादुर खाँ।

प्रश्न 92.
आजादी की पहली लड़ाई 1857 ई० में किसने भाग नहीं लिया ?
(क) तात्या टोपे
(ख) लक्ष्मीबाई
(ग) भगत सिंह
(घ) कुँवर सिंह
उत्तर :
(ग) भगत सिंह ।

प्रश्न 93.
तात्या टोपे का मूल नाम था-
(क) बालाजी राव
(ख) अलि मुसालियार
(ग) रामचन्द्र पाण्डुरंग
(घ) आत्माराम पाण्डुरंग
उत्तर :
(ग) रामचद्द्र पाण्डुरंग।

प्रश्न 94.
मेरठ में विद्रोह आरम्भ हुआ-
(क) 10 मई, 1857 ई० को
(ख) 11 मई, 1857 ई० को
(ग) 04 जून, 1857 ई० को
(घ) 09 मई, 1857 ई॰ को
उत्तर :
(क) 10 मई, 1857 ई० को।

प्रश्न 95.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक क्षेत्र 1857 के विद्रोह से प्रभावित नहीं था ?
(क) झाँसी
(ख) चित्तौड़
(ग) जगदीशपुर
(घ) लखनक
उत्तर :
(ख) चित्तौड़।

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प्रश्न 96.
मंगल पाण्डे को कब फाँसी दी गई ?
(क) 8 अफल, 1857 ई० में
(ख) 8 मई, 1857 ईु में
(ग) 8 जून, 1857 ई० में
(घ) 8 सितम्बर, 1857 ईमें
उत्तर :
(क) 8 अपैल, 1857 ई० में।

प्रश्न 97.
संन्यासी विद्रोह का वर्णन किस पुस्तक में है ?
(क) आनन्दमठ में
(ख) गोरा में
(ग) वर्तमान भारत में
(घ) किसी में नहीं
उत्तर :
(क) आनन्दमठ में।

प्रश्न 98.
इलबर्ट बिल का समर्थन किसने किया ?
(क) जमीन्दार सभा ने
(ख) ग्रिटिश इण्डिया एसोसिएशन ने
(ग) हिन्दू मेला ने
(घ) इण्डियन एसोसिएशन ने
उत्तर :
(ख) ब्रिटिश इण्डिया एसोसिएशन ने।

प्रश्न 99.
गगनेन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित पुस्तक ‘बाजरा’ कब प्रकाशित हुआ ?
(क) 1917 ई० में
(ख) 1918 ई० में
(ग) 1916 ई० में
(घ) 1919 ई० में
उत्तर :
(क) 1917 ई० में।

प्रश्न 100.
‘एमन कर्म आर करबो ना’ नामक नाटक है –
(क) गगनेन्द्रनाथ टैगोर की
(ख) ज्योतिन्द्रनाथ टैगोर की
(ग) देवेन्द्रनाथ टैगोर की
(घ) अवनीन्द्रनाथ टैगोर की
उत्तर :
(ख) ज्योतिन्द्रनाथ टैगोर की।

प्रश्न 101.
‘ईस्ट इण्डिया एसोसिएशन’ की स्थापना कहाँ हुई थी ?
(क) लंदन में
(ख) इण्डिया में
(ग) कलकत्ता में
(घ) बिहार में
उत्तर :
(क) लंदन में।

प्रश्न 102.
‘नेशनल इण्डियन ऐसोसिएशन’ की स्थापना कब हुई थी ?
(क) 1866 ई० में
(ख) 1867 ई० में
(ग) 1868 ई० में
(घ) 1869 ई० में
उत्तर :
(ख) 1867 ई० में।

प्रश्न 103.
‘इण्डियन सोसायटी’ की स्थापना कहाँ हुई थी ?
(क) लंदन में
(ख) इण्डिया में
(ग) कलकत्ता में
(घ) बिहार में
उत्तर :
(क) लंदन में।

प्रश्न 104.
‘भारतीय राष्ट्रीय कॉन्क्रेंस’ कहाँ हुआ था ?
(क) कलकत्ता में
(ख) मद्रास में
(ग) उड़ीसा में
(घ) दिल्ली में
उत्तर :
(क) कलकत्ता में।

प्रश्न 105.
‘मद्रास महाजन सभा’ की स्थापना कहाँ हुआ ?
(क) कलकत्ता में
(ख) मद्रास में
(ग) उड़ीसा में
(घ) दिल्ली में
उत्तर :
(ख) मद्रास में।

प्रश्न 106.
‘बम्बई प्रेसीडेंसी ऐसोसिएशन’ की स्थापना कब हुआ था ?
(क) 1884 ई० में
(ख) 1885 ई० में
(ग) 1886 ई० में
(घ) 1887 ई० में
उत्तर :
(ख) 1885 ई० में।

प्रश्न 107.
1876 ई० में किस सभा की स्थापना हुई –
(क) आत्मीय सभा
(ख) भारतीय सभा
(ग) किसान सभा
(घ) सैनिक सभा
उत्तर :
(ख) भारतीय सभा

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प्रश्न 108.
‘भारत के उत्तर-पश्चिमी सूबे के विद्रोह पर कुछ पत्र’ नामक पुस्तक निकाला –
(क) ब्रुस नॉटर्स
(ख) डब्ल्यू टेलर
(ग) सर जान लरिंस
(घ) चार्ल्स राइक्स
उत्तर :
(घ) चार्ल्स राइक्स

प्रश्न 109.
‘बंगाली’ पत्रिका किसके द्वारा प्रकाशित की गई थी ?
(क) आनन्द मोहन बोस द्वारा
(ख) मनमोहन घोष द्वारा
(ग) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी द्वारा
(घ) द्वारकानाच ठाकुर द्वारा
उत्तर :
(ग) सुरेन्द्र नाथ बनर्जी द्वारा

प्रश्न 110.
‘वंदे मातरम्’ नामक गीत किस पुस्तक से उद्धुत है ?
(क) आनन्दमठ
(ख) वर्तमान भारत
(ग) द हिन्दू
(घ) अमृत बाजार
उत्तर :
(क) आनन्दमठ

प्रश्न 111.
एक पुस्तक के रूप में वर्तमान भारत का प्रकाशन हुआ –
(क) 1899 ई० में
(ख) 1905 ई० में
(ग) 1900 ई० में
(घ) 1906 ईै० में
उत्तर :
(क) 1899 ई० में

प्रश्न 112.
‘अंग्रेजो ने जिस विद्रोह को सैनिक विद्रोह कहा वह वास्तव में राष्ट्रवादी विद्रोह था ।’ – किसका कथन है –
(क) सर जॉन लारेंस
(ख) जेम्स आउड्रम
(ग) काल मार्क्स
(घ) डॉ॰ मजूमदार
उत्तर :
(ग) काल मार्क्स

प्रश्न 113.
भारत के अंतिम गवर्नर जनरल कौन थे ?
(क) लाई कैनिंन
(ख) लार्ड डलहौजी
(ग) लॉर्ड डफरिन
(घ) लॉर्ड मैकाले
उत्तर :
(क) लार्ड कैनिंन

प्रश्न 114.
सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम पारित हुआ –
(क) 1855 ई० में
(ख) 1854 ई० में
(ग) 1853 ई० में
(घ) 1856 ई० में
उत्तर :
(घ) 1856 ई० में

प्रश्न 115.
1857 ई० के विद्रोह की निर्धारित तिथी क्या थी ?
(क) 10 मई 1857 ई०
(ख) 11 मई 1857 ई०
(ग) 21 अग्रैल 1857 ई०
(घ) 31 मई 1857 ई०
उत्तर :
(घ) 31 मई 1857 ई०

प्रश्न 116.
हिन्दू मेला की स्थापना हुई –
(क) 1837 ई० में
(ख) 1847 ई० में
(ग) 1857 ई० में
(घ) 1867 ई० में
उत्तर :
(घ) 1867 ई० में

प्रश्न 117.
बहादुरशाह जफर के मुकदमे की सुनवाई किस जज ने की ?
(क) मेजर हैरियट
(ख) जॉन सुलीवन
(ग) धूरसर
(घ) आत्मारामा
उत्तर :
(क) मेजर हैरियट

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प्रश्न 118.
जमींदार सभा की स्थापना कब हुई ?
(क) 1820 ई० में
(ख) 1838 ई० में
(ग) 1850 ई० में
(घ) 1857 ई० में
उत्तर :
(ख) 1838 ई० में

प्रश्न 119.
इलबर्ट बिल सम्बन्यी विधेयक कब प्रस्तुत किया गया ?
(क) 1880 ई० में
(ख) 1833 ई० में
(ग) 1883 ई० में
(घ) 1885 ई० में
उत्तर :
(ग) 1883 ई० में

प्रश्न 120.
आनन्दमठ है –
(क) एक काव्य
(ख) एक उपन्यास
(ग) एक नाटक
(घ) एक लेख
उत्तर :
(ख) एक उपन्यास

प्रश्न 121.
‘वर्तमान भारत’ किस भाषा में रचित है ?
(क) हिन्दी
(ख) अंग्रेजी
(ग) गुजराती
(घ) बगला
उत्तर :
(घ) बंगला

प्रश्न 122.
‘श्वेत लोगों का बोझ सिद्धान्त’ के जनक कौन हैं ?
(क) रवीन्द्र नाथ टैगोर
(ख) ऐनी बेसेन्ट
(ग) किप्लिंग
(घ) गाँधी
उत्तर :
(ग) किप्लिंग

प्रश्न 123.
भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम हुआ था-
(क) 1857 ई० में
(ख) 1858 ई० में
(ग) 1859 ई० में
(घ) 1850 ई० में
उत्तर :
(क) 1857 ई० में

प्रश्न 124.
1857 ई० के विद्रोह के समय दिल्ली का बादशाह था-
(क) फरूखशियर
(ख) जहाँदार शाह
(ग) शाह आलम द्वितीय
(घ) बहादुर शाह द्वितीय
उत्तर :
(घ) बहादुर शाह द्वितीय

प्रश्न 125.
‘The Great Revolt’ नामक पुस्तक किसने लिखी ?
(क) फिरोजशाह मेहता
(ख) जबाहर लाल नेहरू
(ग) अशोक मेहता
(घ) बी.डी. सावरकर
उत्तर :
(ग) अशोक मेहता

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प्रश्न 126.
बंगाल में राजनीतिक आन्दोलन को आरम्भ करने का श्रेय किसको है ?
(क) राजा राममोहन राय
(ख) विद्यासागर
(ग) मैडम कामा
(घ) देरोजियो
उत्तर :
(क) राजा राममोहन राय

प्रश्न 127.
ब्भिटिश इण्डिया सोसाइटी की स्थापना किसने की ?
(क) एडम्स
(ख) विलियम कार्वी
(ग) थियोडोर डिकेंस
(घ) जे०ए०प्रिसेप
उत्तर :
(क) एडम्स

प्रश्न 128.
बैरकपुर में विद्रोह शुरू किया –
(क) मंगल पाण्डे
(ख) लक्ष्मीबाई ने
(ग) तात्या टोपे ने
(घ) नाना साहब ने
उत्तर :
(क) मंगल पाण्डे

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 mark)

1. …………. बारासात विद्रोह के नेता थे।
उत्तर : तीतूमीर।

2. हिन्दू मेला को …………. मेला भी कहते हैं।
उत्तर : चैत्र।

3. आनन्द मठ …………. भाषा का एक उपन्यास है।
उत्तर : बंगला।

4. वर्तमान भारत …………. भाषा का एक निबन्ध है।
उत्तर : बंगला।

5. न्यायपालिका को सन् में …………. इण्डियन हाई कोर्द्स ऐक्ट के अन्तर्गत पुनर्गठित किया गया।
उत्तर : 1861

6. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ………….ई० में हुई।
उत्तर : 1885

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7. ‘बंगाल जमीन्दार सभा’ के प्रथम सचिव ………….थे।
उत्तर : प्रसन्न कुमार ठाकुर (टैगोर)।

8. नव गोपाल मित्र ने एक राष्ट्रीय ………….की स्थापना किया।
उत्तर : मेला

9………….. प्रकाशन ने 1899 ई० में वर्तमान भारत का प्रकाशन करवाया।
उत्तर : ‘उपबोधन’ या ‘उद्वोधन’ नामक पत्रिका के।

10. भारत में ………….को ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
उत्तर : स्वामी विवेकानन्द जी के जन्म दिवस।

11. ………….के अनुसार सन् 1857 का विद्रोह ‘सैनिक विद्रोह’ था।
उत्तर : सर जॉन लारेन्स और सीले।

12. ………….के अनुसार सन् 1857 का विद्रोह ‘धर्मान्धों का ईसाइयों के विरुद्ध युद्ध’ था।
उत्तर : एल. ई. आर. रोज।

13. आधुनिक भारत की प्रथम संवैधानिक राजनीतिक संस्था ………… थी।
उत्तर : ‘लैण्ड होल्डर्स सोसाइटी’ या ‘बंगाल जमीन्दार सभा’।

14. महारानी विक्टोरिया की घोषणा पत्र के अनुसार देशी राजाओं को अपनी इच्छानुसार …………. चुनने की छूट दी गयी।
उत्तर : अपना उत्तराधिकारी।

15. महारानी विक्टोरिया की घोषणा पत्र के अनुसार ………….को समाप्त कर दिया गया।
उत्तर : स्वत्वाधिकार की नीति (Doctrine of lapse)।

16. महारानी विक्टोरिया की घोषणा पत्र के अनुसार ………….सरकारी सेवा में नियुक्त किया जाएगा।
उत्तर : बिना भेद-भाव के।

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17. भारत सभा (Indian Association) ने सिविल सर्विस परीक्षा ………….आन्दोलन चलाया।
उत्तर : विरोधी।

18. ‘गोरा’ एक प्रेम-कथा है जिसमें …………. की भावना को दिखाया गया है।
उत्तर : आकर्षक प्रेम के साथ प्राचीन और नवीन विचारधाराओं के संघर्ष।

19. ‘गोरा’ उपन्यास में ………….ही प्रमुख नायक है।
उत्तर : गोरा।

20. ‘वन्दे मातरम्’ गीत …………..है।
उत्तर : राष्ट्रीय गीत।

21. ‘वन्दे मातरम्’ गीत से ………….लिया गया है।
उत्तर : आनन्दमठ।

22. विद्रोह की शुरूआत 10 मई 1857 ई० को ………….हुई।
उत्तर : बैरकपुर।

23. ………….ने हिन्दू मेला का गठन किया।
उत्तर : नव गोपाल मित्र।

24. ………….ने वर्तमान भारत लिखा।
उत्तर : स्वामी विवेकानन्द।

25. आनन्द मठ नामक उपन्यास………….. ने लिखा।
उत्तर : बंकिम चन्द्र चटर्जी।

26. ………….ने भारतमाता की तस्वीर बनाई थी।
उत्तर : अवनीन्द्र नाथ टैगोर।

27. कानपुर में 1857 ई० के सिपाही विद्रोह के नेता ………….थे।
उत्तर : नाना साहब।।

28. बिहार के 1857 ई० का सिपाही विद्रोह के नेता …………. थे।
उत्तर : कुँवर सिंह।

सही कथन के आगे ‘ T ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ F ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. भारत सभा ने इलबर्ट बिल का विरोध किया था।
उत्तर : False

2. 1896 ई० में आधुनिक ओलम्पिक खेलों को पुन: आरम्भ किया गया।
उत्तर : True

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3. प्रथम बोलती फिल्म आलमआरा 1931 ई० में प्रदर्शित की गई थी।
उत्तर : True

4. टीपूगारो पागलपंथी आन्दोलन के नेता थे।
उत्तर : True

5. 18 वीं सदी “संस्थाओ के युग’ के रूप में प्रसिद्ध है।
उत्तर : False

6. शांतिनिकेतन साधु-कुटी (आश्रम) की स्थापना सर्वप्रथम रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की।
उत्तर : False

7. मोपला विद्रोह एक श्रमिक विद्रोह था।
उत्तर : False

8. पाभात्य देश के लोगों ने स्वामी जी को तूफानी हिन्दू कहकर सम्बोधित किया।
उत्तर : True

9. हिन्दू मेला की स्थापना ऋतुराज नारायण के प्रयास से की गई थी।
उत्तर : True

10. ‘लैण्ड होल्डर्स सोसाइटी’ आधुनिक भारत की दूसरी संवैधानिक-राजनीतिक संस्था थी।
उत्तर : False

11. 1857 ई० के बाद भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के व्यापारियों का शासन समाप्त हो गया एवं ब्रिटिश संसद और ताज का शासन आरम्भ हुआ।
उत्तर : True

12. ‘बगभाषा प्रकाशिक सभा’ की स्थापना सन् 1739 में हुई थी।
उत्तर : False

13. हिन्दू-मेला एक सामाजिक सांस्कृतिक संस्था थी।
उत्तर : True

14. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारतमाता को चार भुजाधारी हिन्दू देवी के रूप में बित्रित किया था।
उत्तर : False

15. 10 मई, 1857 ई० के दिन मेरठ की पैदल टुकड़ी 20 N.I. से 1857 ई० की क्रान्ति की शुरुआत हुई।
उत्तर : True

16. नवगोपाल मित्र एक नाटककार, कवि, निबन्धकार तथा देशभक्त थे।
उत्तर : True

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17. बी० डी० सावरकर का दल इंग्लैण्ड तथा फ्रांस में सक्रिय था।
उत्तर : True

18. अमेरिका में भारतीय क्रान्तिकारियों के नेता हरदयाल थे।
उत्तर : True

19. ‘बंगभाषा प्रकाशिका सभा’ एक धार्मिक संस्था थी।
उत्तर : False

20. ‘लैण्ड होल्डर्स सोसाइटी’ का अन्य नाम ‘जमीन्दार सभा’ था।
उत्तर : True

21. ‘हिन्दू मेला’ एक राष्ट्रीय मेला था।
उत्तर : True

22. गगनेन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) ने औषनिवेशिक बंगाल का व्यंग्यपूर्ण चित्रांकन किया है।
उत्तर : True

23. गगनेन्द्रनाथ टैगोर प्रसिद्ध चित्रकार हरिनारायण बंद्योपाध्याय से चित्रकला की शिक्षा ग्रहण किये थे।
उत्तर : True

24. गगनेन्द्रनाथ टैगोर के चित्रकला के ऊपर जापान के पसिद्ध चित्रकार ‘याकोहामा तैकान’ का बहुत प्रभाव था।
उत्तर : True

25. गगनेन्द्रनाथ टैगोर के पुस्तक का नाम ‘बाजरा’ है।
उत्तर : True

26. गगनेन्द्रनाथ टैगोर का पुस्तक ‘नव हुलोड़’ का प्रकाशन सन् 1921 में हुआ। ‘
उत्तर : True

27. गगनेन्द्रनाथ टैगोर का पुस्तक ‘अन्दुत लोक’ सन् 1917 में प्रकाशित हुआ।
उत्तर : True

28. सर जॉन लॉरेंस के अनुसार “यह सैनिक विद्रोह को छोड़कर और कुछ भी नहीं था और उसका तात्कालिक कारण कारतूस की घटना थी।”
उत्तर : True

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29. हिन्दू मेला का गठन 1867 ई० में हुआ था।
उत्तर : False

30. विनायक दामोदर सावरकर ने 1875 ई० के विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा है।
उत्तर : True

31. हिन्दू मेला का उद्देश्य हिन्दू धर्म के लोगों में एकता का भाव पैदा करना था।
उत्तर : True

32. ‘वन्दे मातरम्’ गीत आनन्द मठ से लिया गया है।
उत्तर : True

निम्नलिखित कथनों की सही व्याख्या चुनकर लिखिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.
कथन : भारत सरकार ने 1929 ई० में मेरठ षड्यन्त्र मामला शुरू किया।
व्याख्या 1 : इसका उद्देश्य विरोधियों का दमन करना था।
व्याख्या 2 : इसका उद्देश्य कानून भंग आन्दोलन का दमन था।
व्याख्या 3 : इसका उद्देश्य देशव्यापी साम्यवादी क्रियाकलापों का दमन करना था।
उत्तर :
व्याख्या 3 : इसका उद्देश्य देशव्यापी साम्यवादी क्रियाकलापों का दमन करना था।

प्रश्न 2.
कथन : मंगल पाण्डे ने अपने सैनिक अधिकारी हयूडसन को गोली मार दी क्योंकि वह-
व्याख्या 1 : गाली दे रहा था।
व्याख्या 2 : उन्हें घर जाने की छुट्टी नहीं दे रहा था
व्याख्या 3 : चर्बी लगी कारतूस चलाने के लिए बाध्य कर रहा था।
उत्तर :
व्याख्या 3 : चर्बी लगी कारतूस चलाने के लिए बाध्य कर रहा था।

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प्रश्न 3.
कथन : ब्रिटिश सरकार द्वारा 1929 ई० में मेरठ षड़बंत्र मुकदमा चलाने का उद्देश्य था –
व्याख्या 1 : देश में फैल रहे साम्यवादी आन्दोलन को कुचलना।
व्याख्या 2 : स्वतंत्रता आन्दोलन को रोकना।
व्याख्या 3 : मजदूरों की आर्थिक दशा में सुधार लाना।
उत्तर :
व्याख्या 1 : देश में फैल रहे साम्यवादी आन्दोलन को कुचलना।

प्रश्न 4.
कथन : ‘महारानी की घोषणा पत्र”‘ को ‘महाधिकार पत्र”‘ कहा जाता था –
व्याख्या 1 : भारत के गर्वनर जनरल भारत के वायसराय बने।
व्याख्या 2 : ब्रिटिश संसद ने ऐक्ट पारित कर ईस्ट इण्डिया कंपनी से भारत का नियंत्रण ब्रिटिश ताज को स्थानान्तरित किया।
व्याखया 3 : महारानी की घोषणापत्र में ‘गोद निषेध प्रथा’ को प्रस्तावित किया गया।
उत्तर :
व्याख्या 2 : ब्रिटिश संसद ने ऐक्ट पारित कर इस्ट इण्डिया कंपनी से भारत का नियंत्रण ब्रिटिश ताज को स्थानान्तरित किया।

प्रश्न 5.
कथन : महाविद्रोह का प्रत्यक्ष कारण एनफिल्ड राइफल थी, क्योंकि –
व्याख्या 1 : इसकी कार्यक्षमता अच्छी नहीं थी।
व्याख्या 2 : यह राइफल बहुत भारी थी।
व्याख्या 3 : इसकी गोली में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग हुआ था।
उत्तर :
व्याख्या 3 : इसकी गोली में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग हुआ था।

प्रश्न 6.
कथन : सन् 1857 ई० का विद्रोह राष्ट्रीय विद्रोह था।
व्याख्या 1 : सिपाहियों ने इस विद्रोह की शुरूआत की थी।
व्याख्या 2 : सिपाहियों एवं साधारण लोगों ने इस विद्रोह की शुरूआत की थी।
व्याख्या 3 : स्थानीय नेताओं ने सिपाहियों के साथ मिलकर विद्रोह किया।
उत्तर :
व्याख्या 2 : सिपाहियों एवं साधारण लोगों ने इस विद्रोह की शुरूआत की थी।

प्रश्न 7.
कथन : 1857 ई० की क्रांति में हिन्दूओं तथा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचा।
व्याख्या 1 : सैनिको को गाय तथा सुअर की चर्बीयुक्त आवरणवाले कारतूसों को दाँत से काट कर राइफल में भरना पड़ता था ?
व्याख्या 2: 34 वीं बटालियन के सैनिक मंगल पांडे ने एक अंग्रेज अफसर को घायल कर दिया था।
व्याख्या 3: 1857 ई० की क्रांति का नेतृत्व मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर कर रहे थे।
व्याख्या 4 : इनमें से कोई नही।
उत्तर :
व्याख्या 1 : सैनिकों को गाय तथा सुअर की चर्बीयुक्त आवरणवाले कारतूसों को दाँत से काट कर राइफल में भरना पड़ता था ?

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प्रश्न 8.
कथन : 1857 ई० की क्रांति के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन का अंत हो गया तथा ब्रिटिश ताज समूचे प्रशासनिक विभाग कोअपने हाथों में ले लिया।
व्याख्या 1 : सन् 1857 की क्रांति के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने परवर्तन करना जरूरी समझा।
व्याख्या 2 : सन् 1857 की क्रांति के बाद इंग्लेण्ड की महारानी विक्टोरिया ने एक घोषणा पत्र जारी किया था।
व्याख्या 3: 1858 ई० में सरकार ने पुनर्गठन पर ध्यान दिया।
व्याख्या 4 : इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
व्याख्या 2 : सन् 1857 ई० की क्रांति के बाद इंग्लेण्ड की महारानी विक्टोरिया ने एक घोषणा पत्र जारी किया था।

प्रश्न 9.
कथन : सन् 1905 से 1919 ई० कई संघर्षशील राष्ट्रवादी पार्टियों का उदय हुआ।
व्यखख्या 1 : भारतीय हिसात्मक तरीके अपनाना चाहते थे।
व्याख्या 2 : की गुप्त समितियाँ बंगाल में फैली हुई थी।
व्याख्या 3 : भारतीय उग्रवादी नेता तथा जनता ने उदारवादो या अनुनय-विनय की नीति के मार्ग को त्याग कर दिया था।
व्याख्या 4 : इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
व्याख्या 2 : की गुप्त समितियाँ बंगाल में फैली हुई थीं।

प्रश्न 10.
कथन : आनन्द मठ पुस्तक की विषय-वस्तु राष्ट्रीय है-क्योंकि।
व्याख्या 1 : इसमें सन्यासी विद्रोह का वर्णन है।
व्याख्या 2 : इसमे गोरा नामक एक देशभक्त युवक की कहानी है।
व्याख्या 3 : इसमे बिटिश सरकार के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा अपनी माँगे प्रस्तुत की गई है।
व्याख्या 4 : इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
व्याख्या 1 : इसमें सन्यासी विद्रोह का वर्णन है।

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) ‘द ग्रेट रिबेलियन’ नामक पुस्तक (a) सन् 1858 में
(ii) ‘पूना सार्वजनिक सभा’ का गठन (b) डॉ. एस. बी. चौधरी
(iii) इलाहाबाद (c) सन् 1865 में
(iv) ‘ब्रिटिश इण्डिया सोसाइटी’ की स्थापना (d) लियाकत अली
(v) ‘गोरा’ उपन्यास (e) सन् 1870 में
(vi) नागरिकों का विद्रोह (f) औपन्यासिक महाकाव्य
(vii) वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (g) डॉ. मजूमदार
(viii) ‘लंदन इण्डिया सोसाइटी’ की स्थापना (h) लंदन में
(ix) ‘Civil Rebellion in the Indian Munities’नामक पुस्तक (i) सन् 1878 में
(x) महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र (j) अशोक मेहता

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) ‘द ग्रेट रिबेलियन’ नामक पुस्तक (j) अशोक मेहता
(ii) ‘पूना सार्वजनिक सभा’ का गठन (e) सन् 1870 में
(iii) इलाहाबाद (d) लियाकत अली
(iv) ‘ब्रिटिश इण्डिया सोसाइटी’ की स्थापना (h) लंदन में
(v) ‘गोरा’ उपन्यास (f) औपन्यासिक महाकाव्य
(vi) नागरिकों का विद्रोह (g) डॉ. मजूमदार
(vii) वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (i) सन् 1878 में
(viii) ‘लंदन इण्डिया सोसाइटी’ की स्थापना (c) सन् 1865 में
(ix) ‘Civil Rebellion in the Indian Munities’ नामक पुस्तक (b) डॉ. एस. बी. चौधरी
(x) महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र (a) सन् 1858 में

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण

प्रश्न 2.

‘क’ स्तम्भ  ‘ख’ स्तम्भ
(i) अनुशीलन समिति (a) सुरेश चन्द्र मजुमदार
(ii) गदर पार्टी (b) राम राम बसु
(iii) बंगाल वॉलिंटियर्स (c) विलियम कैरी
(iv) बंकिम चन्द्र (d) मंगल पाण्डे

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ  ‘ख’ स्तम्भ
(i) अनुशीलन समिति (c) विलियम कैरी
(ii) गदर पार्टी (a) सुरेश चन्द्र मजुमदार
(iii) बंगाल वॉलिंटियर्स (b) राम राम बसु
(iv) बंकिम चन्द्र (d) मंगल पाण्डे

प्रश्न 3.

‘क’ स्तम्भ   ‘ख’ स्तम्भ
(i) लाइनो टाइप (a) सुरेश चन्द्र मजुमदार
(ii) श्रीरामपुर मिशन (b) राम राम बसु
(iii) प्रतापादित्य चरित्र (c) विलियम कैरी
(iv) सिपाही विद्रोह (d) मंगल पाण्डे

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ   ‘ख’ स्तम्भ
(i) लाइनो टाइप (a) सुरेश चन्द्र मजुमदार
(ii) श्रीरामपुर मिशन (c) विलियम कैरी
(iii) प्रतापादित्य चरित्र (b) राम राम बसु
(iv) सिपाही विद्रोह (d) मंगल पाण्डे

प्रश्न 4.

‘क’ स्तम्भ  ‘ख’ स्तम्भ
(i) एकैडेमिक एसोसिएशन (a) द्वारकानाथ टैगोर
(ii) जमींदार सभा (b) एन. जी. रंगा
(iii) नेशनल एडुकेशन काउन्सिल (c) देरोजियो
(iv) ऑल इण्डिया किसान कांग्रेस (d) रास बिहारी बोस

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ  ‘ख’ स्तम्भ
(i) एकैडेमिक एसोसिएशन (c) देरोजियो
(ii) जमींदार सभा (a) द्वारकानाथ टैगोर
(iii) नेशनल एडुकेशन काउन्सिल (d) रास बिहारी बोस
(iv) ऑल इण्डिया किसान कांग्रेस  (b) एन. जी. रंगा

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण

प्रश्न 5.

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) हुतोम प्यानचार नक्शा (a) केशवचन्द्र सेन
(ii) ब्रह्म समाज (b) लोकनृत्य
(iii) बिहू (c) अक्षय कुमार दत्त
(iv) तत्व बोधिनी (d) कालीप्रसन्न सिंहा

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) हुतोम प्यानचार नक्शा (d) कालीप्रसन्न सिंहा
(ii) ब्रह्म समाज (c) अक्षय कुमार दत्त
(iii) बिहू (b) लोकनृत्य
(iv) तत्व बोधिनी (a) केशवचन्द्र सेन

प्रश्न 6.

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) कानपुर (a) बेगम हजरत महल
(ii) बिहार (b) नाना साहब
(iii) लखनऊ (c) लक्ष्मीबाई
(iv) झाँसी (d) बाबू कुँवर सिंह

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) कानपुर (b) नाना साहब
(ii) बिहार (d) बाबू कुँवर सिंह
(iii) लखनऊ (a) बेगम हजरत महल
(iv) झाँसी (c) लक्ष्मीबाई

प्रश्न 7.

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) सैनिक विद्रोह (a) सर जान लॉरेंस
(ii) हिन्दू-मुस्लिम षड़यंत्र (b) विनायक दामोदर सावरकर
(iii) स्वाधीनता संग्राम (c) जेम्स आउड्रम एवं डब्ल्यू टेलर
(iv) भारत की स्वतंत्रता (d) 1857 ई० का विद्रोह

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) सैनिक विद्रोह (a) सर जान लॉरेंस
(ii) हिन्दू-मुस्लिम षड़यंत्र (d) 1857 ई० का विद्रोह
(iii) स्वाधीनता संग्राम (c) जेम्स आउड्रम एवं डब्ल्यू टेलर
(iv) भारत की स्वतंत्रता (b) विनायक दामोदर सावरकर

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 6 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन : विशेषताएँ एवं अवलोकन

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WBBSE Class 10 History Chapter 6 Question Answer – 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन : विशेषताएँ एवं अवलोकन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
‘सरदार’ उपाधि से कौन विभूषित थे ?
उत्तर :
बल्लभ भाई पटेल।

प्रश्न 2.
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (1920 ई०) में कहाँ स्थापित हुई थी ?
उत्तर :
बम्बई में।

प्रश्न 3.
फारवर्ड ब्लाक की स्थापना किस वर्ष हुई थी ?
उत्तर :
1939 ई० में।

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प्रश्न 4.
बंगाल विभाजन के दिन एकता प्रकट करने के लिए किसने ‘राखी-दिवस’ मनाने का सुझाव दिया था ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने।

प्रश्न 5.
संयुक्त प्रान्त (उ० प्र०) किसान आन्दोलन का प्रमुख नेता कौन था ?
उत्तर :
बाबा रामचन्द्र।

प्रश्न 6.
किस आन्दोलन की सफलता ने वल्लभ भाई पटेल को देश का किसान नेता बनाया था ?
उत्तर :
बारदोली किसान सत्याग्रह आन्दोलन ने।

प्रश्न 7.
1928 ई० का देश का सबसे बड़ी बम्बई कपड़ा मिल की हड़ताल कितने दिनों तक चली थी।
उत्तर :
6 महीने तक।

प्रश्न 8.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
देश में राजनीतिक जागरूकता लाना तथा नमक कानून का विरोध करना।

प्रश्न 9.
गाँधीजी ने किस घटना से मर्माहत होकर असहयोग – आन्दोलन को स्थगित कर दिया था ?
उत्तर :
गोरखपुर जिले की चौरी-चौरा की हिंसक घटना से।

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प्रश्न 10.
मानवेन्द्रनाथ राय कौन थे ?
उत्तर :
मानवेन्द्रनाथ राय (वास्तविक नाम – नरेन्द्र नाथ भट्टाचार्य) भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के संस्थापक थे।

प्रश्न 11.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सबसे पहली महिला अध्यक्षा कौन थी ?
उत्तर :
ऐनी बेसेंट।

प्रश्न 12.
नमक सत्याग्रह कब शुरू किया गया ?
उत्तर :
12 मार्च,सन् 1930 में।

प्रश्न 13.
‘करो या मरो’ का नारा किस आन्दोलन के दौरान दिया गया था ?
उत्तर :
भारत छोड़ो आन्दोलन (Quit India Movemnet) के दौरान।

प्रश्न 14.
रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी का गठन किसने किया था?
उत्तर :
मानवेन्द्रनाथ राय (M. N. Roy) ने।

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प्रश्न 15.
मजदूर किसान पार्टी (Workers and Peasants Party) की स्थापना सर्वप्रथम कहाँ हुई थी ?
उत्तर :
कलकत्ता में।

प्रश्न 16.
भारत छोड़ो आन्दोलन के समय भारत का गवर्नर जनरल (Governor General) कौन था ?
उत्तर :
लॉर्ड लिनलिथगो (Lord Linlithgo)।

प्रश्न 17.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष (President) कौन थे ?
उत्तर :
उ उमेशचन्द्र बनर्जी (W.C. Banerjee)।

प्रश्न 18.
मोपला विद्रोह कहाँ हुआ था?
उत्तर :
मालाबार (केरल) में।

प्रश्न 19.
भारत छोड़ो आन्दोलन के एक महिला नेत्री का नाम लिखो।
उत्तर :
मातंगिनी हाजरा।

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प्रश्न 20.
‘शेर-ए-पंजाब’ या ‘पंजाब केसरी’ के नाम से कौन जाने जाते थे ?
उत्तर :
लाला लाजपत राय।

प्रश्न 21.
दरभंगा किसान आन्दोलन किसके नेतुत्व में किया गया था ?
उत्तर :
विशुभरण उर्फ स्वामी विद्यानन्द।

प्रश्न 22.
कानपुर षड़्यंत्र केस कब चलाया गया था ?
उत्तर :
सन् 1924 में।

प्रश्न 23.
भारत की प्रथम फर्मास्यूटिकल (दवा बनाने वाली) कम्पनी का नाम लिखिए।
उत्तर :
बंगाल केमिकल भारत की प्रथम फर्मास्यूटिकल कम्पनी है।

प्रश्न 24.
एटक का पूरा नाम लिखो।
उत्तर :
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (A.I.T.U.C)।

प्रश्न 25.
बंग-भंग पूर्ण रूप से कब प्रभावी हुआ था ?
उत्तर :
16 अक्टूबर, 1905 ई० को।

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प्रश्न 26.
बारदोली किसान सत्याग्रह कब चलाया गया था ?
उत्तर :
अक्टूबर, 1928 ई० में।

प्रश्न 27.
असहयोग आन्दोलन किसने चलाया ?
उत्तर :
महात्मा गाँधी ने।

प्रश्न 28.
‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का प्रस्ताव (Proposal) किसने किया था ?
उत्तर :
काँग्रेस ने।

प्रश्न 29.
बारदोली क्षेत्र कहाँ है ?
उत्तर :
गुजरात के सूरत जिले में।

प्रश्न 30.
लाला लाजपत राय और अजीत सिंह कब किसान आन्दोलन से जुड़े ?
उत्तर :
सन् 1907 में।

प्रश्न 31.
बंगाल विभाजन का फैसला (निर्णय) कब रह हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1911 में।

प्रश्न 32.
एटक की स्थापना कब हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1920 में।

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प्रश्न 33.
किसने 1928 ई० में लगान में वृद्धि के खिलाफ बारदोली के किसानों के संघर्ष का नेतृत्व किया ?
उत्तर :
वल्लभ भाई पटेल ने।

प्रश्न 34.
बंगाल किसान लीग का गठन कब हुआ ?
उत्तर :
1931 ई० में।

प्रश्न 35.
एका आन्दोलन कहाँ से शुरू हुआ ?
उत्तर :
अवध से।

प्रश्न 36.
दि रेड यूनियन सेन्टर की स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
1931 ई० में।

प्रश्न 37.
असहयोग आन्दोलन के समय लगभग कितने श्रमिक हड़ताल पर रहे ?
उत्तर :
लगभग 15 लाख श्रमिक।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
कृषक आन्दोलन में बाबा रामचन्द्र की भूमिका क्या थी ?
उत्तर :
अदभूत व्यक्तित्व के मालिक बाबा रामचन्द्र ने अवध क्षेत्र के किसानो की दुर्दशा देखकर पीढ़ियों से अत्याचार सहने की चली आ रही प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए किसानों को जागृत किया, उनमें एकता व संघर्ष की भावना पैदा की। इनके प्रयास बे 7 अक्टूबर 1920 को ‘अवध किसान सभा’ का गठन हुआ। इस प्रकार बाबा के सहयोग एवं प्रेरणा से आन्दोलन खुब फला-फूला।

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प्रश्न 2.
मदारी पासी कौन थे ?
उत्तर :
मदारी पासी 1921 ई० में शुरू हुए अवध क्षेत्र में एका आन्दोलन का जन नायक था। अछूत होने पर भी उसने अहीर, गडेरिया, तेली, पासी, चमार, काछी, आरख और गद्दी जैसी उपेक्षित जातियों को एक जुट करने तथा आन्दोलन के जोड़ने में सफल रहा। इन्होंने अंग्रेजों और उनके चाटुकारो के नाकों में दम कर रखा था।

प्रश्न 3.
‘एका’ आन्दोलन क्यों शुरु हुआ ?
उत्तर :
1921-22 ई० में उत्तर प्रदेश के बाराबकी, सीतापुर एवं बहराइच अचंल में अत्यधिक लगान वृद्धि, जबरन कर वसूली, कृषि भूमि से बेदखल करना, एवं बेगारी के विरूद्ध मदारी पासी के नेतृत्व में स्फूर्त एका आन्दोलन हुआ था।

प्रश्न 4.
वारदोली सत्याग्रह आन्दोलन क्यों शुरु हुआ ?
उत्तर :
1928 ई० में गुजरात राज्य के सूरत जिले के बारदोली तहसील के किसानों ने उच्च वर्ग के किसानों के अत्याचार, 27 से 30% तक भू-राजस्व (लगान) में वृद्धि, जल संकट, तथा विदेशी बाजार में कपास की कीमत गिर जाने से नाराज होकर पटेल के नेतृत्व में बारदोली सत्याग्रह आन्दोलन शुरू किया था।

प्रश्न 5.
बंगाल में विज्ञान शिक्षा के विकास में ‘इण्डियन एसोसियेसन फार द कल्टीवेशन आफ साइंस’ की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
‘इण्डियन एसोसियेसन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइन्स’ ‘ बंगाल का ही, नही देश का सबसे प्राचीन विज्ञान की शिक्षा और शोधकार्य वाला संस्थान था। इसने विज्ञान के विद्यार्थियों को भौतिक, रसायन, जैविक ऊर्जा तथा पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और शोध का अवसर प्रदान किया तथा यहाँ अध्ययन करने वाला छात्र अपने- ज्ञान-अनुभव एवं नईनई खोजों से देश-दुनिया में भारत के नाम को महिमामण्डित किया। सी०बी० रमन ऐसे ही छात्र थे। इस प्रकार से इस संस्थान ने बंगाल तथा देश में विज्ञान की शिक्षा के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 6.
आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना किस उद्देश्य से की गयी थी ?
उत्तर :
1920 ई० में ‘आल इण्डिया ट्रेड यूनियम कांग्रेस’ की स्थापना- श्रमिकों के हितों की रक्षा करने, संगठन को मजबूत बनाने तथा उद्योगों के राष्ट्रीयकरण की माँग को पूरा करने के उद्देश्य से की गई थी।

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प्रश्न 7.
गाँधीजी ने अचानक असहयोग आन्दोलन वापस क्यों ले लिया था ?
उत्तर :
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा की पुलिस स्टेशन की हिंसक घटना से दु:खी होकर अचानक गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया था।

प्रश्न 8.
भारत के बाहर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना कब और कहाँ हुई थी ?
उत्तर :
भारत के बाहर 1920 ई० में ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी।

प्रश्न 9.
‘गलीयारा का युद्ध’ कब और कहा हुआ था ?
उत्तर :
गलीयारा (बरामदे) का युद्ध 1930 ई० को कलकत्ता के राइर्टस बिल्डिंग के बरामदे में हुआ था।

प्रश्न 10.
‘स्कूल बुक सोसाइटी’ की स्थापना किसने और किस उद्देश्य से किया था ?
उत्तर :
जोनाथन डकन ने ‘स्कूल बुक सोसाइटी’ की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य आधुनिक पाश्चात्य शिक्षा के प्रचार के लिए पुस्तकों का वितरण करना था।

प्रश्न 11.
बंगाल में राष्ट्रीय शोक दिवस कब और क्यों मनाया गया ?
उत्तर :
16 अक्टुबर 1905 ई० को बंगाल विभाजन के कारण राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया गया। विभाजन के विरोध में एकता प्रदर्शित करने के लिए और जागरूकता के संचार के लिए मनाया गया है।

प्रश्न 12.
अखिल भारत किसान सभा की स्थापना के दो उद्देश्य बताओ।
उत्तर :
अखिल भारत किसान सभा के कुछ विशेष उद्देश्य थे, जिनके आधार पर वह काम करती थी। पहला उद्देश्य, जमीन्दारी प्रथा का अन्त, कृषि ॠण की समाप्ति तथा बेगारी प्रथा का अन्त आदि था। दूसरा उद्देश्य, भूमि कर में 50% की कमी तथा जमीन्दारों की भूमि को भूमिहीन किसानों में बाँटना आदि था।

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प्रश्न 13.
तेलंगाना आन्दोलन के दो उद्देश्य बताओ।
उत्तर :
तेलंगाना आन्दोलन : तेलंगाना आंदोलन भी तेभागा और वर्ली आंदोलन के समान ही था जो सन् 1945 ई० से लेकर 1951 ई० तक चला। यह आंदोलन आंश्र प्रदेश के हैदराबाद समेत कई क्षेत्रों में किया गया। इस आंदोलन में किसान ठेकेदारो एवं कर संग्रहकों द्वारा बुरी तरह से प्रताड़ित हुए थे जिसका परिणाम अत्यन्त ही भयानक था। इन सभी क्षोभ के कारण ही किसानों ने ठेकेदारों और कर (Tax) संग्रहाकों के विरुद्ध यह आंदोलन चलाया।

प्रश्न 14.
तेलंगाना कृषक आन्दोलन कब और किसके नेतृत्व में आरम्भ किया गया ?
उत्तर :
तेलंगाना कृषक आन्दोलन जुलाई, 1946 ई० में पी सुन्दरैया, रवि नारायण रेड्डी के नेतृत्व में आरम्भ किया गया।

प्रश्न 15.
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना किसने और कब किया ?
उत्तर :
सन् 1920 में एन० एम० जोशी, लाला लाजपत राय, जोजेफ बैपटिस्ट, दीवान चमनलाल आदि मजदूर नेताओं ने मिल जुलकर अखिल भारतीय ट्रेड युनियन कांग्रेस की स्थापना की।

प्रश्न 16.
तीनकठिया व्यवस्था क्या है ?
उत्तर :
1917-18 ई० में गाँधीजी के नेतृत्व मे चम्पारन सत्याग्रह हुआ जिसके फलस्वरूप तीनकठिया नामक जबरन नील की खेती कराने की प्रथा समाप्त हुई। तीनकठिया के अन्तर्गत किसानों को 3 / 20 (बीस कट्ठा में तीन कट्ठा) भू भाग पर नील की खेती करनी पड़ती थी, जो जमींदारों द्वारा जबरन थोपी गई थी।

प्रश्न 17.
दाण्डी मार्च क्या है ?
उत्तर :
दाण्डी मार्च : 12 मार्च 1930 ई० को गाँधीजी ने अपने 79 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से समुद्र तट पर स्थित दाण्डी नामक स्थान पर जाकर प्राकृतिक तरीके से नमक बनाकर नमक कानून भंग करने का निश्चय किया। इस यात्रा को ही दाण्डी मार्च के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 18.
मेरठ षड्यंत्र मुकदमा के बारे में क्या जानते हैं ?
उत्तर :
सरकार ने सन् 1929 में राष्ट्रवादियों और ट्रेड यूनियन के लोगों पर सरकार के विरूद्ध षड़्यंत्र का मुकदमा चलाया जिसमें 27 लोगों को दण्डित किया गया था। यह मुकदमा सन् 1933 तक चला जिसमें जवाहरलाल नेहरू, कैलाश नाथ काटजू, अंसारी आदि प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए थे।

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प्रश्न 19.
मोपला विद्रोह के लक्ष्य क्या थे ?
उत्तर :
मोपला कृषक आन्दोलन (1920 – 1922 ई०) : महात्मा गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन के दौरान ही केर (मालाबार क्षेत्र) में किसानों ने अंग्रेजों से मदद प्राप्त जमीदारों और ठेकेदारों के खिलाफ मोपला आन्दोलन चलाया, जिसका नेतृत्य किसान जाति के ‘अलि मुसलियार’ ने किया था। मोपला विद्रोह मालाबार क्षेत्र में रहने वाले मोपला जाति के किसानों ने किया था जो साम्राज्यवाद के खिलाफ एक सशस्त्र और विशाल विद्रोह था।

प्रश्न 20.
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन (AITU) या अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) के दो नेताओं के नाम लिखो।
उत्तर :
एन० एम० जोशी और लाला लाजपत राय।

प्रश्न 21.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत छोड़ो आन्दोलन का समर्थन क्यों नहीं किया ?
उत्तर :
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत छोड़ो आन्दोलन का समर्थन नहीं किया क्योंकि विश्व की सारी कम्युनिस्ट पारियाँ रूस के इशार पर चलती थी और रूस इंग्लैण्ड और पश्चिमी देशों के विरुद्ध नहीं जाना चाहता था।

प्रश्न 22.
बारदोली के किसानों के संघर्ष का नेतृत्व किसने और क्यों किया ?
उत्तर :
1928 ई० में सरदार पटेल ने लगान में वृद्धि के खिलाफ बारदोली के किसानों के संघर्ष का नेतृत्व किया।

प्रश्न 23.
चम्पारण आन्दोलन क्या था ?
उत्तर :
चम्पारण क्षेत्र में यूरोपीय नील व्यापारी नील की खेती करने वाले किसानों के साथ दुर्व्यवहार करते थे। इनके अत्याचारों के कारण किसानो की स्थिति दयनीय हो गई थी। गाँधीजी ने किसानों को संगठित कर सत्याग्रह आंदोलन छेड़ दिया और वे हर परिस्थिति का सामना करने को तैयार हो गये। सरकार ने गाँधीजी सहित कई लोगों की एक समिति बनाई। किसानों का शोषण समाप्त हुआ। इस सत्याग्रह ने गाँधीजी को राष्ट्र का सफल जननेता के पद पर प्रतिष्ठित कर दिया।

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प्रश्न 24.
खेड़ा आन्दोलन की दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर :
गाँधोजी ने 1918 ई० में गुजरात के खेड़ा जिले में किसानों की फसल नष्ट हो जाने के बावजूद सरकार द्वारा लगान में छूट न दिए जाने के कारण सरकार के विरुद्ध किसानों को लेकर सत्याग्रह आन्दोलन चलाया। इस आन्दोलन में गाँधीजो का साथ वल्लभ भाई पटेल, इन्दुलाल याग्निक तथा अन्य नेताओं ने दिया।

प्रश्न 25.
अयोध्या किसान आंदोलन किस प्रकार संगठित हुआ ?
उत्तर :
बाबा रामचन्द्र ने अलध या अयोध्या के किसानों को जमींदारों के विरुद्ध संगठित किया। उन्होंने किसानों को एकताबद्ध होकर जमोंदारों और सरकार के अन्याय का विरोध करना सिखाया । 1920 ई० में किसान आंदोलन गाँधीजी के असहैयोग आंदोलन से जुड़ गया।

प्रश्न 26.
वामपंथी आन्दोलन के विकास का समय कब से कब तक माना गया तथा इसके स्टा कौन थे ?
उत्तर :
सन् 1920 से लेकर 1922 ई० तक माना गया और इसके सृष्टा मानवेन्द्रनाथ राय थे। मानवेन्द्र राय ने वामपंथी बिचारधारा को न केवल मैक्सिको एवं रूस में फैसाया बल्कि भारत में भी प्रचार-प्रसार किया।

प्रश्न 27.
जेन्मे (Jenme) किसे कहा जाता था ? उनके खिलाफ विद्रोह क्यों हुआ ?
उत्तर :
दक्षिण भागत के मालाबार क्षेत्र के मुस्लिम जमीदारों को जेन्मे कहा जाता था। मोपलाओं ने इनके अत्याचार के खिलाफ 1921 ई० में विद्रोह किया था:

प्रश्न 28.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के संदर्भ में किसान आंदोलन की दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर :
(i) सन् 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का गठन किया गया था। इसके प्रथम अध्यक्ष व्वामी सुहजानंद सरस्वती थे, जिनके प्रयास से किसानों को जमीन्दारों से मुक्ति मिली।
(ii) मन् 1937 में पंजाब कृषक आन्दोलन चलाया गया तथा पंजाब के किसानों को अंग्रेजी सरकार के कर बोझ से मुक्ति दिलाया

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प्रश्न 29.
तंभागा आन्दोलन के उद्देश्य क्या थे ?
उत्तर :
तेभागा आन्दोलन में किसानों का कहना था कि जमीन जोतने वालों की है। अतः उनकी माँगे थी कि जोतदारों के जिनके अधिकार में भूमि थी, हिस्से में दी जाने वाली फसल में कटौती की जाए। किसानों ने माँग किया कि जोतदारों को कवज़ एक तिहाई फसल दी जाय और दो तिहाई फसल पर किसान का अधिकार हो।

प्रश्न 30.
क्या तेभागा आन्दोलन सफल हुआ ?
उत्तर :
नहीं, सरकार ने तभागा आदोलन को दबाने में सफलता पाई। किन्तु उसने 1949 ई० में वर्गादार नियंत्रण बिल चारित कर एक आर्डिन्स के द्वारा किसानों की अधिकांश बातें मान ली।

प्रश्न 31.
मजदूर आंदोलन पर दमन नीतियों की विशेषताएँ क्या थे ?
उत्तर :
भारताय श्रमिकों को शोषण का अभिशाप उसी प्रकार झेलना पड़ा जिस प्रकार यूरोप तथा अन्य देशों के श्रमिकों को काफी लंबी अव्वधि तक झेलना पड़ा था। कम मददूरी, दैनिक कार्य का लंबा समय, अस्वस्थ परिवेश एवं वातावरण, काम करने में किसी प्रकार की सुविधा का अभाव आदि शोषणमूलक स्थितियों में उन्हें काम करना पड़ता था। साथ ही औपनिवेशिक शासन के दुर्व्यवहार भी झेलने पड़ते थे।

प्रश्न 32.
मानवेन्द्रनाथ राय का नाम स्मरणीय क्यों है ?
उत्तर :
मानवेन्द्र नाथ राय (एम० एन० राय) वामपंथी विचारधारा के सूत्र माने जाते हैं जिन्होंने वामपंथी विचारधारा को न केवल मैक्सको और रूस में फैलाया बल्कि भारत में भी प्रचार-प्रसार किया। इन्होंने मैक्सिको में ‘Communist Party of Maxico’ तथा सन् 1925 में भारत में ‘Communist Party of India’ की स्थापना की। इतना ही नहीं, इन्होंने सन् 1940 ई० में ‘Radical Democratic Party’ की भी स्थापना किया।

प्रश्न 33.
बारदौली आंदोलन के दो नेताओं के नाम बताओ।
उत्तर :
बरदौली आंदोलन त्रिटिश सरकार के मनमाना राजस्व या भूमि कर के विरोध में किया गया कृषक आंदोलन था जिसके प्रमुख नेता बल्लभ भाई पटेल और महात्मा गाँधी थे। इसके साथ ही शारदा बेन साह एवं मीटू बेन का नाम भी उल्लेखनीय है।

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प्रश्न 34.
गिरनी कामगार यूनियन क्या था ?
उत्तर :
साम्यवादी प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित युवा वर्ग द्वारा 1925 ई० के आस-पास क्रांतिकारी ट्रेड यूनियन स्थापित की जाने लगी। इन्हीं यूनियनों में आर्थिक संघर्ष के साथ-साथ राजनीतिक संघर्ष में भाग लेने वाली वामपंथी विचारधारा से प्रभावित प्रथम यूनियन ‘गिरनी कामगार यूनियन’ बम्बई में स्थापित हुई। बम्बई के लगभग सभी कम्युनिस्ट नेता, जैसे आल्वे, मिराजकर, जोगलेकर आदि इससे जुड़े हुए थे।

प्रश्न 35.
मजदूर और किसान पार्टी की स्थापना किसने और कब किया ?
उत्तर :
साम्यवाद से प्रेरित भारतीय युवा वर्ग का एक दल धीरे-धीरे मजदूर संगठनों में अपनी प्रभाव वृद्धि करने लगा। कई मजदूर संगठनों का नेतृत्व भी उनके हाथों में आ गया। ऐसे युवा वर्ग ने कलकत्ता में “पीजेन्द्स एण्ड वर्कर्स पाटी” बनाई एवं बम्बई में ‘वर्कर्स एण्ड पीजेन्द्स पार्टी’ का गठन किया। मुजफ्फर अहमद, कवि नजरुल इस्लाम, कुतुबुद्दीन अहमद, हेमन्त कुम्र सर फार आदि ने इस कार्य में प्रमुख भूमिका निभाई।

प्रश्न 36.
वामपंथी आ नन के विकास का समय कब से कब तक माना गया तथा इसके स्रोता कौन थे ?
उत्तर :
सन् 1920 ₹. कर 1922 ई० तक और इसके स्रोता मानवेन्द्रनाथ राय थे।

प्रश्न 37.
किसान सभा वा है ?
उत्तर :
किसानों को निलाकर जो संघ बनायी गयी, उसे किसान सभा कहते है। अर्थात् दूसरे शब्दो में आगरा एवं अवध क्षेत्र के जमीन्दार, किसानों से मनमाना कर (Tax) वसूलते थे। इसी वजह से अवध क्षेत्र स्थित होमरूल के कार्यकर्ताओं ने किसान वर्ग को मिलाकर एक संघ बनाया, जिसका नाम ‘किसान सभा’ दिया गया।

प्रश्न 38.
संयुक्त प्रान्त का किसान आन्दोलन की शुरूआत और अंत कब हुई ?
उत्तर :
संयुक्त प्रान्त का किसान आन्दोलन की शुरूआत सन् 1920 में और अंत सन् 1922 में हुआ।

प्रश्न 39.
चौरी-चौरा घटना से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
5 फरवरी, 1922 ई० को गोरखपुर जिले (उत्तर प्रदेश) के चौरी चौरा नामक स्थान पर असहयोग आन्दोलनकारियों ने कोध में आकर थाने में आग लगा दी, जिससे एक थानेदार एवं 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गयी। इस घटना से दु:खी होकर गाँधी जी ने 11 फरवरी, 1922 ई० को असहयोग आन्दोलन स्थांगत कर दिया।

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प्रश्न 40.
दक्कन विद्रोह कब हुआ और इसके नेताओं के नाम लिखो।
उत्तर :
दक्कन विद्रोह सन् 1875 में हुआ तथा इस विद्रोह के नेता उमा नाइक और आत्याभील थे।

प्रश्न 41.
चम्पारन सत्याग्रह कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1917 में महात्मा गाँधी जी ने बिहार में चम्पारन सत्याग्रह किया।

प्रश्न 42.
किसानों का एका आंदोलन किन-किन प्रान्तों में हुआ ?
उत्तर :
हरदोई, बहराइच, बाराबंकी तथा सुल्तानुपर इत्यादि प्रांतों में।

प्रश्न 43.
‘इण्डियन फेडरेशन ऑफ लेबर’ की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1940 में एम० एन० राय (मानवेन्द्र नाथ राय) ने की।

प्रश्न 44.
‘हिन्दुस्तान मजदूर सभा’ की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1938 में पटेल एवं राजेन्द्र प्रसाद ने किया।

प्रश्न 45.
‘बॉम्बे मिल हैन्ड्स एसोसिएशन’ की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1890 में एन० एम० लोखंडे ने किया।

प्रश्न 46.
अश्विनी कुमार दत्त कौन थे ?
उत्तर :
अश्विनी कुमार दत्त बारीसाल के एक शिक्षक थे। इन्होंने मुसलमान बहुल क्षेत्रों में किसानों को आन्दोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इनके द्वारा गठित समिति बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय हुई थी।

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प्रश्न 47.
मोपला विद्रोह के क्या कारण थे ?
उत्तर :
मोपला विद्रोह के कारण निम्नलिखित थे :
(क) मोपलाओं पर जमींदारों का अत्याचार और
(ख) अंग्रेजी सरकार के खिलाफ विरोधी नीतियाँ।

प्रश्न 48.
बाबा रामचन्द्र कौन थे ?
उत्तर :
बाबा रामचन्द्र अवध किसान सभा के एक प्रमुख नेता थे, जिन्होने अवध क्षेत्र के किसानों पर हुए अत्याचार का विरोध किया था।

प्रश्न 49.
बारदौली आन्दोलन क्यों हुआ ?
उत्तर :
सन् 1926 में अंग्रेजी सरकार के लगान पुनर्निरीक्षण अधिकारी ने गुजरात के सूरत जिले के बारदोली तालुक में लगान में 30 फीसदी बढ़ोत्तरी की सिफारिश की जिसे देना किसानों के लिए सम्भव नहीं था, अत: उन्होंने लगान न देने का आन्दोलन (No Taxation Movement) किया।

प्रश्न 50.
मोपला कौन कहलाते थे ?
उत्तर :
केरल राज्य (दक्षिण मालावार) के मुसलमानों, पट्टेदारों तथा बंधुआ मजदूरों को मोपला कहा जाता था।

प्रश्न 51.
स्वामी सहजानंद सरस्वती कौन थे ?
उत्तर :
स्वामी सहजानंद् सरस्वती एक सन्यासी थे, गाजीपुर के रहने वाले थे। अखिल भारतीय किसान कांग्रेस (1936 इ०) के अध्यक्ष थे। इसके नेतृत्व में किसान आन्दोलन चलाया गया।

प्रश्न 52.
फिलिप स्रैट कौन था ?
उत्तर :
भारत में साम्यवादी विचारों के प्रचार-प्रसार का दायित्व इंग्लैण्ड के साम्यवादी दल ने लिया था और इस काम के लिए 1926 ई० में फिलिप सैट को भारत भेजा गया था। भारत आकर फिलिप ने यहाँ पर कई संस्थाओं का गठन किया, समाचार-पत्रों का सम्पादन किया।

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प्रश्न 53.
रौलट एक्ट क्या था ?
उत्तर :
सर सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक कानून पारित किया गया जिसके आधार पर किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता था। इस कानून के तहत अभियोग पक्ष न ही वकील रख सकते थे और न ही इनकी सुनवाई होती थी।

प्रश्न 54.
अन्तर्राप्ट्रीय श्रम संगठन (Intrenational Labour Organisation) की स्थापना क्यों हुई ?
उत्तर :
पेरिस शान्ति सम्मलन में अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना की गई। इस सम्मेलन में दुनिया के मजदूरों की स्थिति ठीक करने के उद्देश्य से अन्नराष्ट्रीय श्रम सगठन (आई० एल० ओ०) की स्थापना की गयी।

प्रश्न 55.
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष बनने वाले नेताओं के नाम बताएँ।
उत्तर :
चित्तरंजन दास, जवाहरलाल, नहहरू और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस आदि।

प्रश्न 56.
भारत छोड़ो आन्दोलन को अगस्त आंदोलन क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रस्ताव 8 अगस्त, 1942 ई० कोअखिल भारतीय कांग्रेसी कमीटि द्वारा पारित किया गया था। अतः इसे अगस्त आन्दोलन कहा जाता है।

प्रश्न 57.
लेबर किसान गजट का प्रकाशन किसने आरम्भ किया ?
उत्तर :
एस० ए० डांगे, मुजफ्फर अहमद एवं सिगारवेलु चटियार ने लेबर किसान गजट का प्रकाशन आरम्भ किया।

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प्रश्न 58.
बंगाल क्यों विभाजित हुआ ?
उत्तर :
बंगाल विभाजन के पीछे लॉर्ड कर्जन का मुख्य उद्देश्य पूर्वी बंगाल के मुसलमानों तथा पश्चिम बंगाल के हिन्दुओं के बीच की एकता को भंग कर राष्ट्रीयता की लहर को कमजोर करना था।

प्रश्न 59.
तेभागा आन्दोलन के प्रमुख नेता कौन थे ?
उत्तर :
कम्पाराम सिंह और भवन सिंह ।

प्रश्न 60.
मेवाड़ का कृषक आन्दोलन कब और किनके नेतृत्व में हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1920 में विजय सिंह पथिक, माणिकलाल वर्मा, रामनारायण तथा बाबा सीताराम दास के नेतृत्व में कृषक आदोलन हुआ था।

प्रश्न 61.
उड़ीसा में कृषक आन्दोलन कब और किसके नेतृत्व में हुआ ?
उत्तर :
सन् 1935 में मालती चौधरी के नेतृत्व में उड़ीसा कृषक आन्दोलन हुआ।

प्रश्न 62.
1921 के मोपला विद्रोह का क्या महत्व है ?
उत्तर :
मोपला विद्रोह मालाबार क्षेत्र में रहने वाले मोपला जाति के किसानों ने किया थाजो साम्राज्यवाद के खिलाफ एक सशस्त्र और विशाल विद्रोह था।

प्रश्न 63.
बंगाल विभाजन के समय स्वयंसेवक संगठनों का क्या योगदान था ?
उत्तर :
बंगाल विभाजन के समय स्वयंसेवक संगठनों द्वारा नसली भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना, हड़तालों के दौरान ट्रेड-यूनियने कायम करना, साग्राज्यवाद का विरोध करना इत्यादि योगदान संगठनों ने की।

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प्रश्न 64.
असहयोग आन्दोलन के समय कृषक वर्ग ने किन-किन क्षेत्रों में हड़ताले की ?
उत्तर :
महात्मा गाँधी द्वारा प्रस्तावित असहयोग आंदोलन में कृषक वर्ग ने जमीदारो की अनुचित मांग को पूरा नहीं करना, सरकारी कर का भुगतान नहीं करना, विदेशी वस्तुओं का वहिष्कार करने वाले क्षेत्रों में हड़ताल किया।

प्रश्न 65.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत छोड़ो आन्दोलन का समर्थन क्यों नहीं किया ?
उत्तर :
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी ने भारत छोड़ो आन्दोलन का समर्थन नहीं किया क्योंकि विश्व की सारी कम्यूनिस्ट पार्टियाँ रूस के इशारे पर चलती थी।

प्रश्न 66.
बंगाल विभाजन के समय मजदूर वर्गों ने किस प्रकार की हड़ताले की ?
उत्तर :
बंगाल विभाजन के समय ईस्ट इण्डिया में दो बड़ी हड़ताले हुई जिसमे पहली हड़ताल सरकारी मुद्राणालय के मजदूरों तथा नगरपालिका कर्मचारियों द्वारा की गई तथा दूसरा हड़ताल कपड़ा मिलों में भी व्यापक स्तर पर हुई।

प्रश्न 67.
इंडियन ट्रेड यूनियम कांग्रेस की स्थापना के मुख्य उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
यह संगठन अंखिल भारतीय स्तर पर मजदूरों और किसानों को भारतीय ब्रिटिश सरकार के शोषण से मुक्ति दिलातो थी। इस संगठन की स्थापना सन् 1920 में लाला लाजपत राय, जोसेफ बैपटिस्टा और दीवान चमनलाल द्वारा किया गया था।

प्रश्न 68.
पंजाब में कृषक आन्दोलन से जुड़ने वाले दो कांग्रेसी नेताओं के नाम बनाएँ।
उत्तर :
प्रथम लाला लाजपत राय तथा द्वितीय अजीत सिंह थे।

प्रश्न 69.
तेलंगाना आन्दोलन कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
1946 ई० में तेलंगाना आन्दोलन पुर्मा वायलार क्षेत्र में हुआ था।

प्रश्न 70.
दरभंगा में किसान आन्दोलन कब और किसके नेतृत्व में हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1919-20 में दरभंगा में किसान आन्दोलन विशुभरण उर्फ स्वामी विद्यानन्द ने चलाया था ।

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प्रश्न 71.
भारत में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना कब और किसके द्वारा की गई ?
उत्तर :
सिंगार वेलुचेट्टियार द्वारा 1925 ई॰ में कम्युनिस्ट पार्टी को स्थापना को गई

प्रश्न 72.
असहयोग आन्दोलन में किसानों ने किस रूप में योगदान दिया ?
उत्तर :
प्रथम योगदान के रूप में किसानो द्वारा सामन्तवादी विचारधारा का विरोध करना तथा द्वितीय यागदान के रूप में राष्ट्रीय आंदोलन को मुख्य धारा से जोड़ना था।

प्रश्न 73.
1905 ई० के बंग-भंग आन्दोलन को कलकता के मजदूरों ने किस रूप में लिया ?
उत्तर :
1905 ई० के बंग-भंग आन्दोलन को कलकत्ता के मजदूगें ने जनव्यापी साम्याज्य विरोधी आंटोलन कर रूप में लिया।

प्रश्न 74.
वामपंथियों ने कांग्रेस और गांधीजी की आलोचना क्यों की ?
उत्तर :
जिस समय राष्ट्रवादी आन्दोलन महात्मा गाँधी द्वारा उनके नेतृत्व में आगे बढ़ रहा धा, उसी समय 1928 ई० में अन्तर्राष्ट्रीय साम्यवादी संगठन से संकेत पाकर साम्यवादियों ने कांग्रेस और गाँधीजी की आलोचना की।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
असहयोग आन्दोलन में किसानों की भूमिका/ या (योगदान) का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
असहयोग आन्दोलन में किसानों की भूमिका : भारत में दिनो-दिनों अंग्रेजों के बढ़ते शोषण और अत्याचार के कारण भारतीयों में अंग्रेजो के विरूद्ध आक्रोश क्रान्तिकारी, भावनाएँ, जाँलियावाला बाग हत्याकाण्ड जैसी घटनाएँ, रालैट एक्ट जैसे भारतीयों की स्वतंत्रता का गला घोटने वाला काला कानून, प्रथम विश्वयुद्ध के आर्थिक दुष्परिणाम, खिलाफत आन्दोलन द्वारा लोगों में जागरुकता आदि जैसी परिस्थितियों ने अंग्रेज सरक्रार के विरुद्ध संघर्षमय परिस्थितियाँ पैदा कर दी थी।

महात्मा गाँधीजी ने देश की जनता की इस मनोवृत्ति को समझा और 1920 ई० में अंग्रेजों के विरुद्ध अहिसात्मक असहयोग आन्दोलन की शुरुआत कर दी, इस आन्दोलन में गाँधी ने देश की समस्त जनता से अंग्रेजो के कार्यों में किसी भी प्रकार के सहयोग न करने का आहवान किया, इस घोषणा के बाद सभी वर्गो ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिसमें देश के किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस आन्दोलन में संयुक्त प्रान्त के किसान सभा, बिहार का दरभंगा किसान सभा, राजस्थान का मेवाड़ कृषक सभा, बंगाल का कृषक प्रजा पारी, अवध का कृषक एका आन्दोलन, दक्षिण मालावार (केरल) का मोपला गुजरात का बारदौली, आन्धप्रदेश का गुटुर किसान सभा आदि, किसान संगठनों और उसके नेता तथा सदस्यों ने बिटिश सरकार, उनके चमचे जमीन्दारों सांमतो, सेठ-साहूकारों के विरुद्ध बढ़ चढ़कर आन्दोलन में भाग लिया बडे पैमाने पर किसानों के भाग लेने से ही अतिअल्प समय में असहयोग आन्दोलन पूरे देश के कोने-कोने में फैलकर जन आन्दोलन का रूप ग्रहण कर लिया।

इस आन्दोलन में लोगों की सक्रिय भागोदारी को देखते हुये, गाँधी ने उत्साहित होकर 1921 ई० तक स्वराज लाने की घोषणा कर दी, किन्तु दुर्भाग्यवश 5 फरवरी 1922 ई० को गोरखपुर के 3000 किसानों के शांतिपूर्ण जुलूस पर चौरी-चौरा थाने के पुलिस ने गोलियाँ चला दी, जिससे वहाँ के किसानों ने उत्तजजित होकर चौरी-चौरा थाने में आग लगा दी।और 22 पुलिस कर्मी जिन्दा जल गये, इसी घटना से दु:खी होकर गाँधीजी ने आन्दोलन को स्थगित कर दिया। इस प्रकार किसानों के सक्रिय सहयोग से सफलता की ओर बढ़ रहा, असहयोग आन्दोलन बिना किसी लक्ष्य प्राप्ति के समाप्त हो गया।

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प्रश्न 2.
किसान सभा की स्थापना के पीछे क्या उद्देश्य था ?
उत्तर :
अखिल भारतीय किसान सभा : प्रथम विश्चयुद्ध के बाद अंग्रेजों का भारतीय किसानों पर आर्थिक शोषण और अत्याचार बढ़ गया, उनकी दर्द और पीड़ा को कोई सहलाने व आँसू पोछने वाला संगठन नहीं था, ऐसे में किसानों को स्वयं अपने आँसू को पोछने के लिए आगे आना पड़ा। इसके लिए सबसे पहले भिन्न-भिन्न प्रान्तों में किसान सभाएँ जैसे 1927 ई० में बिहार किसान सभा, 1933 ई० में आन्ध प्रदेश किसान सभा, इसी तरह 1929 ई० में बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी की स्थापना हुई।

इसके बाद सभी किसान संगठनों के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर पर अपैल 1936 ई० में लखनऊ अधिवेशन में अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना हुई। जिसके पहले अध्यक्ष ‘स्वामी सहजानन्द’ सरस्वती’ तथा महासचिव एन०जी०रंगा चुने गये तथा इसी वर्ष 1 सितम्बर को किसान दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

इस प्रकार अखिल भारतीय किसान सभा का मुख्य उद्देश्य जमीदारी प्रथा की समाप्ति, किसानों के ॠण और बेरोजगारी प्रथा को समाप्त करने, भूमिहीन किसानों में भूमि वितरण करने, बटाईदार किसानों को उनका उचित अधिकार दिलाने तथां उन्हे सभी प्रकार के शोषण से मुक्त रखना था। ‘ज्यादा बोओ, ज्यादा काटो’ किसान सभा का मुख्य नारा था। इस नारा ने देश के किसानों में साहस और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की भावना पैदा की।

प्रश्न 3.
भारत छोड़ो आन्दोलन में मजदूर वर्ग के योगदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मजदूर वर्ग का भारत छोड़ो आन्दोलन में योगदान : 1942 ई० में महात्मा गाँधी जी ने जब भारत छोड़ो आन्दोलन शुरु किया तो पूरा भारतवर्ष इस आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्राय: हर स्कूल के छात्र-छात्राँए, कॉलेज के छात्र-छार्ताएए, औरत, बच्चे, बूढ़े सभी ने जैसे ठान लिया था, कि अब वे भारत को अंग्रेजों के चुंगल से छुड़ा कर ही रहेंगे। मजदूर वर्ग भी इस आन्दोलन से अछुता नहीं था। भारत छोड़ो प्रस्ताव के वजह से जब गाँधीजी और उनके कुछ साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया, तब पूरे भारत में इसका आक्रोश फूट पड़ा। कई जगह हड़ताले, बन्द हुई। ये हड़तालें कई सप्ताह तक चली।

दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, बंगलौर के मजदूरों ने एक सप्ताह का हड़ताल का पालन किया। ‘टाटा स्टील प्लांट’ के कर्मचारियों ने तेरह दिन (13 days) तक हड़ताल किया और उनका दावा था कि जब तक एक राष्ट्रीय सरकार का निर्माण नहीं कर लेगें, वे काम पर नहीं जायेंगे। उन मजदूरों ने लगभग साढ़े तीन महीने तक हड़ताल जारी रखी। 1945 ई० में मजदूरों का योगदान और भी प्रबल हो गया।

नेताओं द्वारा बुलाई गई मोटिंग में वे बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे। मुम्बई और कलकत्ता के बन्दरगाह के मजदूरों ने इण्डोनेशिया में जानेवाले जहाजों के समान लादकर भेजने से साफ इंकार कर दिया। 1946 ई० में एक घटना घटी। 22 फरवरी 1946 ई० में मजदूरों ने औजारों का त्याग करते हुए काम करने से साफ मना कर दिया। इस हड़ताल के कारण पुलिस हस्तेक्षेप करते ही हड़ताल ने एक तूफान का रूप ले लिया।

मजदूरों को काबू करने के लिए दो बटालियन पुलिस बुलाई और शान्ति स्थापित की प्रक्रिया में 250 मजदूरों की जान चली गई। मालिकों का जुल्म जब-जब जागते तब-तब मजदूरों का आक्रोश भी भड़क उठता था। जिसके फलस्वरूप मारपीट और हड़ताले होती थी। इस प्रकार भारत छोड़ो आन्दोलन को जन आन्दोलन बनाने में मजदूरो का सबसे बड़ा योगदान रह।

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प्रश्न 4.
श्रमिक या मजदूर आन्दोलन के रूप में मजदूर किसान दल (Workers and Peasants Party) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
श्रमिक या मजदूर आन्दोलन के रूप में मजदूर किसान दल (Workers and Peasants Pariy) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस दल के माध्यम से अनेकों श्रमिको या मजदूरों तथा कृषक या किसानों को बिटिश सरकार के विभिन्न राजस्व कर (Tax) से राहत मिलती थी। इतना ही नहीं, बल्कि उनको ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रताडित भी नहीं किया जा रहा था। मजदूर किसान दल भारत की एक राजनीतिक पार्टी थी। इस पार्टी की स्थापना सर्वप्रथम कलकत्ता में प्रान्तीय स्तर पर हुई थी।

इसके बाद इस दल को ‘अखिल भारतीय मजूदर एवं किसान दल’ (All india Workers and Peasants’ Party) में रूपान्तरित किया गया था। इसका गठन सन् 1928 में हुआ और इसका पहला अधिवेशन कलकत्ता में आयोजित किया गया। इस अधिवेशन के अध्यक्ष ‘सोहनलाल जोशी’ थे।

मजदूर किसान दल (Workers and Peasants’ Party) के अन्तर्गत राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निम्नलिखित कार्य करता रहता है –
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization) : यह संगठन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बनायी गयी थी जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों तथा किसानों की समस्याओं का समाधान करता था तथा उन्हें इन्साफ भी दिलाता था।

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (All India Trade Union Congress) : यह भारतीय स्तर पर मजदूरों और किसानो को भारतीय ब्रिटिश सरकार के शोषण से मुक्ति दिलाती थी। इस संगठन की स्थापना सन् 1920 में लाला लाजपत राय, जोसेफ बैपटिस्टा और दीवान चमनलाल द्वारा किया गया था।

कांग्रेस समाजवादी दल (Congress Socialist Party) : इस दल की स्थापना बम्बई में सन् 1934 ई० में जय-प्रकाश नारायण, मीनू मसानी और एन० एम० जोशी ने किया था। इन सभी मजदूर किसान दलों के अतिरिक्त अन्य संगठन भी हैं जिसने मजदूर और किसानों के लिए अनेकों कार्य किये। इसमें अखिल भारतीय किसान सभा (AlI India Kishan Sabha), अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनिस्ट फेडरेशन (All India Trade Unionist Federation) तथा इन्डियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस (Indian Trade Union Congress) आदि हैं।

प्रश्न 5.
किसान आंदोलन के रूप में ‘एका’ आन्दोलन (Eka Movement) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
एका का अर्थ होता है एकता अर्थात् मिलजुल कर रहना। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो अवध के समस्त किसान, निम्न वर्ग और ब्रिटिश सरकार द्वारा अपमानित छोटे-छोटे निम्न वर्गीय किसान, जमीन्दारों के एकजुट होकर ब्रिटिश प्रशासन के अधीन जमीदारों और ठेकेदारों के विरुद्ध छेड़ा गया आन्दोलन को एका आन्दोलन (Eka Movement) कहते हैं।

एका आन्दोलन सन् 1921 में मदारी पासी और सहरेब के द्वारा चंलाया गया था। यह आन्दोलन अवध क्षेत्र के हरदोई, बहराईच, सुल्तानपुर, बाराबंकी और सीतापुर इत्यादि जिला में हुआ था। मदारी पासी और सहरेब दोनों किसान एवं निम्न वर्ग (जाति) के थे, जो भलीभांति किसानों और निम्नवर्ग के समस्या (दु:ख) को समझते थे। पासी और सहरेब इस किसान आदोलन में उन लोगों के साथ थे, जो त्रिटिश सरकार द्वारा शोषित व प्रताड़ित थे।

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प्रश्न 6.
भारत में 20 वीं सदी के कृषक आन्दोलन की विशेषताएँ क्या थी ?
उत्तर :
भारतीय किसान, सरकार की भू-राजस्व नीति तथा जमींदारों के अत्याचार से पीड़ित थे।20 वीं सदी तक उन्होंने समझ लिया कि संगठित हुए बिना उनकी रक्षा नहीं हो सकती। फलतः 20 वों सदी के दूसरे दशक में किसानों के सामूहिक आदोलन के दौर आरंभ हो गये। महारष्ट्रीयन ब्राह्मण बाबा रामचन्द्र ने अवध के किसानों को जमीदारों के विरुद्ध संगठित किया। सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया तो हजारों किसान कचहरी पहुँचकर उनकी रिहाई की माँग करने लगे।

1920 ई० में किसान आंदोलन गाँधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़ गया। 1920 ई० तक किसान आदोलन उत्तर प्रदेश के रायबरेली, फैजाबाद और सुलतानपुर जिलों तक फैल गया। किसानों के प्रदर्शन तथा जमींदारों और महाजनों के घर पर उनके धावे आरंभ हो गये। 1922 ई० के आरंभ में हरदोई, बाराबंको, सीतापुर आदि जिलों में भौ आंदोलन फैल गया। किसानों ने मदारी पासी के नेतृत्व में एक आंदोलन छड़ दिया।

उत्तर बिहार में स्वामी विद्यानन्द ने किसान आंदोलन का नेतृत्व किया। बंगाल में किसानों ने कर न देने का आंदोलन छेड़ दिया । मिदनापुर जिला में किसानों ने यूनियन बोर्ड को कर नहीं दिया फलस्वरूप यूनियन बोर्ड के सदस्यों को इस्तोफा दने पड़ा। गुजरात में वल्लभभाई पटेल तथा कनवर जी मेहता के नेतृत्व में सन् 1929 में बारदोली सत्याग्रह आन्दोलन शुरू किया गया। इसके सामने सरकार को झुकते हुए भू-राजस्व की बढ़ी हुई दर कम करनी पड़ी। उत्तर प्रदेश में सन् 1930 में लगान वृद्धि के विरुद्ध किसानों ने आंदोलन छेड़ दिया। इन्होंने लगान देना बंद कर दिया। रायबरेली, इटावा, कानपुर, उन्नाव और इलाहाबाद जनपद इससे प्रभावित हुए, किन्तु सरकार ने इसे सखी के साथ कुचल दिया।

1937-38 ई० में किसान सभा ने बिहार में जमींदारों के विरुद्ध आदोलन छेड़ दिया। यह आंदोलन किसानों को जमीन से जमींदारों द्वारा बेदखल करने के विरोध में था। बंगाल में बर्दवान के किसानों ने आंदोलन किया तो उनके कर में कमी की गयी। उत्तर बंगाल में जमीदार हाट-मेलों में चावल, सब्जी, धान आदि बेचने वालों पर कर वसूलते थे। किसानों ने कर देना मंजूर नहीं किया।

1939 ई० में किसानों ने बंगाल में बटाईदार आंदोलन छेड़ दिया। उड़ीसा और आंध प्रदेश में भी आंदोलन हुए। कृषक आंदोलन में आंध का ‘तेलंगाना विद्रोह’ और बंगाल का ‘तेभागा आंदोलन’ उल्लेखनीय आंदोलन थे।

प्रश्न 7.
भारत में 20 वीं सदी के श्रमिक आन्दोलन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मालिकों के शोषण तथा अत्याचार के शिकार मजदूरों ने 19 वीं सदी के प्रथर्मार्द्ध एवं द्वितीयार्द्ध में देश के विभिन्न उद्योगों में जहाँ-तहाँ हड़ताले आरंभ कर दी थी। 1827 ई० में पालकीवालों ने एक महीने की लंबी हड़ताल की, 1862 ई० में रेलवे के लेखा विभाग के कर्मचारियों ने, 1869 ई० में बम्बई नगरपालिका के कसाइयों ने, 1873 ई० में बम्बई के सरकारी प्रेस कर्मचारियों ने तथा 1877 ई० में नागपुर की टाटा एम्प्रेस मिल के बुनकरों की हड़ताल जैसी घटनाएँ होती रहीं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों का कोई ऐसा संगठन नहीं था जो उनकी समस्याओं को सुने तथा सरकार तक पहुँचा सके क्षेत्रिय स्तर पर कई श्रमिक संगठन सक्रीय थे।

आल इंडिया ट्रेड यूनियन काँग्रेस : प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1917 ई० से 1920 ई० तक प्रत्यकक सरकारी और गैरसरकारी क्षेत्र में मजदूरों के अनेक संगठन बन गये। 31 अक्टूबर 1920 ई० को अखिल भारतीय संस्था ‘आल इंडिया ट्रेड यूयियन काँग्रेस’ की स्थापना की गई। इसके अध्यक्ष लाल लजपत राय तथा उपाध्यक्षों में तिलक, एनी बिसेन्ट, सी० एफ० एण्डूज, ब्रेलवी तथा वपतिस्ता थे। इस संस्था की प्रेरणा से श्रमिक हड़तालों की संख्या और क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई।

साम्यवाद से प्रभावित एक युवा वर्ग मजदूर संगठनों में प्रभावी हो उठा। ए०आई०टी॰यू॰सी॰ में भी उनकी सक्रियता बढ़ गई। ऐसी ही युवा वर्ग ने कलकत्ता में पीजेन्टस एण्ड वर्कर्स पार्टी तथा बम्बई में वर्कर्स एण्ड पीजेन्टस पारी का गठन किया। 1934 ई० में कांग्रेस के वामपंथी वर्ग ने ‘सोशलिस्ट फोरम’ नामक समाजवादी गुट बनाया जिसके नेता जयप्रकाश नायायण थे। बाद में डाँगे आदि कम्यूनिस्ट नेता भी उसमें शामिल हो गये। इससे राष्ट्रीय स्तर पर मजदूर आंदोलन चल निकला। अत: मजदूर आंदोलन ने व्यवस्थित रूप ले लिया और बाद के दिनों में कई प्रखर हड़तालें होती रहीं।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 6 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन : विशेषताएँ एवं अवलोकन

प्रश्न 8.
तेभागा एवं तेलंगाना आन्दोलन के स्वरूप का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
तेभागा आन्दोलन और तेलंगाना आंदोलन दोनों ही किसान आंदोलन हैं, जो आधुनिक भारतीय इतिहास में अहम स्थान रखते हैं। इन दोनों आंदोलन के माध्यम से किसान अपने वर्चस्व को कायम रख पाये थे।

तेभागा आंदोलन सन् 1946 से सन् 1947 तक चला। इस आंदोलन का नेतृतव कम्पाराम सिंह और भवानी सिंह ने किया। यह आदोलन बंगाल के कई क्षेत्रों में किया गया था। जैसे – दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, रंगपुर, मैमनसिंह, मेदनीपुर, मालदा और 24 परगना (काकद्वीप) आदि।
वहीं दूसरी तरफ उसी वर्ष आन्थ्र प्रदेश में तेलंगाना आंदोलन किया गया। यह आंदोलन सन् 1946 से लेकर सन् 1951 तक चला। यह संघर्ष या आंदोलन हैदराबाद के किसानों द्वारा किया गया था। उस समय हैदराबाद के निजाम के अधीनस्थ जमींदारों और ठेकेदारों ने वहाँ के किसानों के ऊपर अत्याचार किया करते थे, कभी-कभी मनमाना भूमि कर (Land tax) वसूलते थे। इसी के विरोध में वहां के किसानों ने विद्रोह छेड़ दिया था।

प्रश्न 9.
किसान आन्दोलन के रूप में बारदौली सत्याग्रह (Bardauli Satyagraha) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
किसान आन्दोलन के रूप में बारदौली सत्याग्रह की एक अहम भूमिका रही है। यह सत्याग्म या आन्दोलन ब्रिटिश सरकार के विरोध में की गयी थी, क्योंकि ब्रिटिश सरकार बारदौली के किसानों से मनमाना राजस्व या भूमि कर (Tax) वसूला करती थी। यह घटना गुजरात स्थित सूरत जिले के बारदौली इलाके की है जहाँ सन् 1928 के पहले से ही ब्रिटिश या अंग्रेजी प्रशासन किसानों से मनमाना भूमि कर वसूलती थी।

बारदौली सत्याग्रह सन् 1928 में श्री बल्लभ भाई पटेल के द्वारा किया गया था अर्थात् पटेल के नेतृत्व में बारदौली के समस्त किसानों (पुरुषों, महिलाओं तथा बच्चों और बूढ़ो) ने बढ़ी हुयी भूमिकर के विरुद्ध अंग्रेजी सरकार के खिलाफ यह सत्याप्रह या आन्दोलन चलाये। इस सत्याप्रह में भारी तादाद में महिलाओं ने भी भाग लिया। इन महिलाओं में कस्तूरबा गाँधी, मनी बेन पटेल (बल्लभ भाई पटेल की पुत्री), शारदा बेन शाह, मीटू बेन, भक्तिबा और शारदा मेहता इत्यादि थी।

यह सत्याग्रह या आन्दोलन आग की भाँति तीव्र रूप ले लिया था जिसके वजह से पटेल जो को अंग्रेज़ी सरकार गिरफ्तार करने के लिए आतूर हो गये। परन्तु अगस्त, 1928 ई० में गाँधीजी बारदौली पहुँचे और उन्होंने घोषणा किया कि यदि सरकार पटेल जी को गिरफ्तार करती है तो वे स्वयं इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। अंत में सरकार ने एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल (Maxwell) से इस मामले की जांच करवाई जाय। उसने भी लगान की वृद्धि को अनुचित बताया।

अत: लगान या कर घटा दिया गया। इस प्रकार अहिंसात्मक कृषक या किसान आन्दोलन के रूप में बारदौली सत्याग्रह सफल हुआ और इस सफलता का मुख्य पात्र श्री बल्लभ भाई पटेल और गाँधीजी थे। बारदौली के किसान महिलाओं ने इस सफलता से प्रसन्न होकर पटेल जी को ‘सरदार’ नाम की उपाधि दी। तब से श्री बल्लभ भाई पटेल सरदार बल्लभ भाई पटेल कहे जाने लगे।

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प्रश्न 10.
सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय किसानों की भूमिका क्या थी ?
या
सविनय अवज्ञा आंदोलन के साथ किसान आंदोलन का क्या संबंध की विवेचना कीजिए।
या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930) का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर :
महात्मा गाँधी द्वारा नमक सत्याग्रह के साथ शुरू किया गया सविनय अवज्ञा आन्दोलन में देश के किसानों और मजदूरों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था। इस आन्दोलन के दौरान किसानों के विभिन्न आंदोलन शुरु हुए थे। गाँधी जी किसानों पर हो रहे अत्याचारों का सामना करने के लिए उठ खड़े हुए तथा उनकी प्रेरणा और समर्थन से निम्न आन्दोलन शुरू हुए थे –
1. लखनऊ में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का गठन : सन् 1936 ई० में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का गठन किया गया था। इसके प्रथम अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती थे। इनके ही प्रयास से किसानों को जमीन्दारों से मुक्ति मिली।
2. पंजाब में कृषक आंदोलन : सन् 1937 ई० में पंजाब कृषक आन्दोलन चलाया गया तथा पंजाब के किसानों को अंग्रेजी सरकार के कर बोझ से मुक्ति दिलाया।

इसी प्रकार के कई और किसान आन्दोलन हैं, जिनका सविनय अवज्ञा आन्दोलन से संबंध गहरा है । जैसे :- आंध प्रदेश का कृषक आंदोलन, बिहार का कृषक आंदोलन और मालाबार क्षेत्र का किसान आन्दोलन आदि। सविनय अवज्ञा आदोलन पूर्णरूप से सन् 1934 ई० में समाप्त हो गयी लेकिन किसान आंदोलन चलती रही।

प्रश्न 11.
वामपंथी राजनीति में एम० एन० राय की भूमिका का विवरण दीजिए।
या
मानवेन्द्र नाथ राय (एम० एन० राय) के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
मानवेन्द्र नाथ राय (एम० एन० राय) वामपंथी विचारधारा के सूत्रधर माने जाते हैं जिन्होंने वामपंथी विचारधारा को न केवल मैक्सिको और रूस में फैलाया बल्कि भारत में भी प्रचार-प्रसार किया। इनको साम्यवादी विचारधारा के लोग भारत में वामपंथी राजनीति के दाता या खुदा मानते हैं।
मानवेन्द्र नाथ राय का जन्म सन् 1887 ई० में चौब्बीस परगना जिला के चांगरीपोता(Changripota) नामक गाँव में हुआ था इनको राष्ट्रवादी क्रांतिकारी और विश्वपसिद्ध राजनीतिक सिद्धान्तकार कहा जाता है। उनका मूल नाम ‘नरेन्द्रनाथ भट्टाचार्य’ था।

इन्होंने मैक्सिको में ‘Communist Party of Maxico’ तथा सन् 1925 में भारत में ‘Communist Party of India’ की स्थापना की। इतना ही नहीं, इन्होंने सन् 1940 ई० में ‘Radical Democratic Party’ की भी स्थापना किया। जो इनके राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रयास का प्रतिफल था ।

एम० एन० राय की जीवनी लेखक ‘मुंशी और दीक्षित’ के अनुसार, राय का जीवन स्वामी विवेकानन्द, स्वामी रामतीर्थ और स्वामी द्यानन्द से प्रभावित रहा। राय जी के जीवन पर विपिन चन्द्र पाल और विनायक दामोदर सावरकर का मीं जबरदस्त प्रभाव पड़ा। राय जी हमेशा क्रान्तिकारी भाव से काम किया करते थे तथा वामपथी राजनीति का हमेशा समर्थन किय: करते थे क्योंकि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वामपंथियों ने एक अहम भूमिका निभाया, जिसका असर राय जी पर जबरदस्त पड़।

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प्रश्न 12.
भारत में साम्यवादी दल की स्थापना कब और कैसे हुई ? वामपंथी आन्दोलन की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं ?
उत्तर :
सन् 1917 में लेनिन के नेतृत्व में रूसी कांति (Russian Revolution) इई फलस्वरूप रूस में सान्यदादी दल की स्थापना हुई । भारत में भी लेनिन के सहयोग से मानवेन्द्र नाथ राय ने साम्यवादी (Communist) दल की स्थापना की भारत में साम्यवादी को वामपंथी दल के नाम से जाना जाता है । इस प्रकार भारत में लेनिन के माध्यम से वामपंथीं विचारधाराओं का बीजारोपन हुआ। वास्तव में भारत में वामपंथी दल या कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना सन् 1920 में हुयी इस दल की स्थापना मानवेन्द्र नाथ राय (M. N. Roy), अवनी मुखर्जी, ए० टी० राय और मुहम्मद अली आदि के माध्यम से हुई थी।

वामपंथी आंदोलन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं :

  1. वामपंथी आन्दोलन के माध्यम से मजदूरों और किसानों ने अपनी-अपनी समख्याओं का समाधान करने का तरीका ढुँद्ध लियः
  2. वामपंथी आन्दोलन के होने से भारत में पहली बार देखा गया कि किसानों और मजदूरों में कितनी एकता है और वे इस आन्दोलन में पह्हली बार एक साथ भाग लिये।
  3. इस आंदोलन के माध्यम से वामपंथियों ने समस्त भारतवर्ष में साम्यवादी विचारों का प्रचार-प्रसार कियं।
  4. इस आन्दोलन के माध्यम से किसान और मजदूर दोनों ही ब्रिटिश सरकार को राजस्व कर(Land Tax) नहीं देते थे

उपर्युक्त व्याख्या से हम पाते हैं कि भारत जैसे राष्ट्र में साम्यवादी या वामपंथी आन्दोलन ने लोगों में शक्ति फूँक दी है। उसं एक नयी दिशा जैसे मिल गयी हो।

प्रश्न 13.
असहयोग आन्दोलन के साथ मजदूर आन्दोलन के संबंध का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
या
असहयोग आन्दोलन को मजदूर आन्दोलन से क्यों जोड़ा जाता है ?
उत्तर :
काँग्रेस का नागपुर अधिवेशन जो 1920 ई० में हुआ, उसमें असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव पारित किया गया। और अगस्त, 1920 ई॰ में महात्मा गाँधी जी ने भारत में यह आन्दोलन चलाया। इस आन्दोलन में गाँधी जी ने मजदूरों से अंग्रेजी सरकार को समर्थन या सहयोग न देने को कहा।

असहयोग आन्दोलन गाँधीजी द्वारा किये गये सन् 1918 का अहमदाबाद सत्याम्रह का परिणाम था जिसमें मिलों के मालिकों द्वारा मजदूरों पर किये गये शोषण और जुर्म का नजारा था। मजदूरों ने गाँधी जी के नेतृत्व में हड़ताल का सहार: लिया था और मिलो के मालिक मजदूरों पर अत्याचार करना बन्द करने को बाध्य हुए थे।

इतना ही नहीं, गाँधीजी का असहयोग आंदोलन का संबंध सन् 1920 के ‘Textile Labour Association’ से भी जिसके माध्यम से गाँधीजी ने कपड़ा मिल के मजदूरों को अपना सहयोग सर्मथन दिया। ऐसे ही कुछ श्रमिक आदोलन क् घटना असहयोग आदोलन के दौरान हुई थी जिसका परिणाम असहयोग आंदोलन था। प्रसिद्ध इतिहासकार सुमि: सरकार के अनुसार, “ट्रेड यूनियने हड़तालों से पहले बनने के स्थान पर हड़तालों के बाद संगठित होती थीं और प्राय: इनका स्वरूप अल्पकालीन होता था।”

इस प्रकार गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन को मजदूर आंदोलनों से जोड़े रखा । इतना ही नहीं, गाँधीजी ने सन् 192 ? में असहयोग आंदोलन वापस ले लेने के बाद भी वे मजदूर आन्दोलनों से जुड़े रहे।

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प्रश्न 14.
मातंगिनी हाजरा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
मातंगिनी हाजरा एक देशभक्त महिला थी जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण को न्यौछावर कर दिया। इनका जन्म सन् 1870 ई० में मिदनापुर के होगला ग्राम में हुआ था। इनके अन्दर अपने देश के प्रति कुट-कुट कर देशभक्ति की भावना थी। मातंगिनी हाजरा जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930 ई०) में भाग ली थी तथा बिटिश सरकार का हमेशा विरोध की। इनके ही प्रयासों से इस आन्दोलन को कुछ हद तक सफलता मिली।

इसके बाद सन् 1942 ई० के भारत छोड़ो (Quit India) आन्दोलन में भाग लिये तथा इस आन्दोलन में इनका आन्दोलन (Contribution) महत्वपूर्ण रहा। मिदनापुर जिले के तामलुक अदालत के भवन पर राष्ट्रीय तिरंगा फहराने के लिए वे झण्डा लेकर आगे बढ़ी, जनसमूह उनके पीछे था। अंग्रेजो ने रोकने का बहुत प्रयास किये, गोलियाँ, बारूद चलवाये और आखिरकार मातंगिनी हाजरा वीरगति को प्राप्त हो गयी। इन सभी कार्यो के वजह से मातंगिनी हाजरा आज भी भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 15.
अखिल भारतीय किसान सभा पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
कांग्रेस समाजवादी दल (Congress Socialist Party) की स्थापना कांग्रेस के ही अन्दर सन् 1934 में आचार्य नरेन्द्र देव और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बम्बई में हुआ। इस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर ही समाजवादियों और साम्यवादियों ने ‘अखिल भारतीय किसान कांग्रेस’ की स्थापना की। वैसे तो इस आन्दोलन में कम्यूनिस्टों ने भारी संख्या में योगदान दिया किन्तु आरंभ में इसका नेतृत्व कांग्रेस के हाथ में रहा। एन० जी० रंगा इसके सचिव और स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके अध्यक्ष बने। सन् 1936 में इस संगठन ने अपना कार्यक्रम प्रकाशित किया।

अखिल भारतीय किसान सभा के निम्न उद्देश्य थे, जिनके आधारा पर वह काम करती थी। पहला उद्देश्य, जमीन्दारी प्रथा का अन्त, कृषि ॠण की समाप्ति तथा बेगारी प्रथा का अन्त आदि था। दूसरा उद्देश्य, भूमि कर में 0% की कमी तथा जमीन्दारों की भूमि का भूमिहीन किसानों में बाँटना आदि। इस सभा का दूसरा अधिवेशन सन् 1937 में गया के नियामतपुर में हुआ।

प्रश्न 16.
भारतीय साम्यवादी दल (Indian Communist Party) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
उत्तर प्रदेश के कम्युनिस्टों समूह के नेता सत्यभक्त ने सन् 1924 ई० में कानपुर में ‘भारतीय साम्यवादी दल’ की स्थापना की घोषणा की। सत्यभक्त इस दल के संचिव बने।
इस दल के निम्न उद्देश्य थे, जिनमें सम्पूर्ण स्वराज प्राप्त करना एवं एक ऐसे समाज की स्थापना करना जहाँ उत्पादन और धन क वितरण का स्वामित्व सामूहिक हो, प्रमुख माने जाने थे। सन् 1925 ई० में सिंगारवेलु चेट्टियार ने बम्बई में विभिन्न कम्युनिस्ट समूहों को संगठित कर ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी’ की स्थापना की घोषणा की। इस दल को कम्युनिस्ट इण्टरनेशनल ने अपनी मान्यता दी। इस प्रकार पार्टी का नया संविधान भी स्वीकार किया गया जिसमें तीन प्रमुख उद्देश्य निर्धारित किए गए –

  1. भारत को पूर्णरूप से स्वतंत्र कराना।
  2. ब्रिटिश शासन को समाप्त करना।
  3. भारत में सोवियत रूस जैसी सरकार की स्थापना करना।

इस प्रकार, हमलोग भारतीय सम्यवादी दल के विभिन्न कार्य एवं उद्देश्यों को देख पाते हैं।

प्रश्न 17.
मोपला कृषक आन्दोलन के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
मोपला कृषक आन्दोलन (1920 – 1922 ई०) : महात्मा गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन के दौरान ही केरल (मालाबार क्षेत्र) में किसानों ने अंग्रेजो से मदद प्राप्त करने वाला जमीदारों और ठेकेदारों के खिलाफ मोपला आन्दोलन शुरू हुआ था, जिसका नेतृत्च किसान जाति के ‘अलि मुसलियार’ ने किया था। वे गाँधी जी के द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चल कर इस आंदोलन का नेतृत्व किये। मोपला विद्रोह मालाबार क्षेत्र में रहने वाले मोपला जाति के किसानों ने किया था।

मोपला विद्रोह की अपनी अलग विशेषता भी सामान्यत: इसे हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रादिक संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस संघर्ष का वास्तविक चरित्र सामंतवाद, साम्राज्यवाद विरोधी था। मोपला कृषक आन्दोलन साम्राज्यवाद के खिलाफ एक सशस्त्र और विशाल विद्रोह था। इस विद्रोह में हजारों विद्रोही मारे गये तथा हजाग्रें-हजारों विद्रोही घायल हुये थे अन्त में सरकार सैन्य ताकत के बल पर इस विद्रोह को दबा दिया।

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प्रश्न 18.
पुत्रप्रा-वायलार किसान आंदोलन एवं संयुक्त प्रान्त किसान आंदोलन के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
पुनप्रा-वायलार एक किसान आंदोलन था, जो सन् 1946 ई० में त्रावणकोर में किया गया था। यह आंदोलन त्रावणकोर के किसानों और अंग्रेजी सरकार के नीतियों के बीच हुआ था। इस आंदोलन का नेतृत्व पी॰ सुन्दरैया और रवि नारायण रेड़ी ने किया था। परन्तु सरकार ने इस आन्दोलन को बुरी तरह से दमन कर दिया।

असहयोग आंदोलन के समय, अवध एवं आगरा के क्षेत्रों में संयुक्त प्रान्तीय किसान आंदोलन चलाया गया था। यह आंदोलन सन् 1920 ई० में शुरू हुई थी। इस आंदोलन का मुख्य कारण जमींदारों द्वारा किसानों से मनमाना कर वसूली था। इस आदोलन के दौरान अवध एवं आगरा के क्षेत्रों में विभिन्न किसान संगठन और सभा बनायी गयी। जैसे, सन् 1920 ई० में ‘अवध किसान सभा’, सन् 1918 ई० में ‘उत्तर प्रदेश किसान सभा’ आदि। परन्तु सरकार ने इसे भी समाप्त कर दिया।

प्रश्न 19.
बंगाल विभाजन विरोधी आन्दोलन में कृषकों की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
बंग-भंग विरोधी आन्दोलन में किसानों की भूमिका : यह आन्दोलन किसी एक वर्ग का नहीं था अपितू. इसमें सभी श्रेणियों के साथ-साथ किसान वर्ग की भी विशेष भूमिका रही है। किसान वर्ग को उग्रपंथी विचार के लोग क्रान्तिकारी पर्चे बाँटते थे जिनमें अंग्रेजों को चोर शासक कहा गया था तथा इन्हें अपना शासक मानने से इन्कार कर दिया गया था कारण इन्हीं लोगों के कारण हमारे देश का हर प्रकार का उद्योग जैसे कपड़ा उद्योग, चमड़ा उद्योग, लोहा उद्योग को बर्बाद हुआ था, ये अपने देश की बनी हुई चीजों का आयात करते हैं और हमारे बाजारों में हमारे ही लोगों की रोटी छीन लेते है इसके अलावा हमपर दिनोंदिन नये-नये करों का बोझ लादते हैं अत: ये हमारे शासक नहीं है। इस प्रकार बंग-भंग विरोधी आंदोलन में किसानों की प्रमुख भूमिका थी।

प्रश्न 20.
बंगाल में विभाजन विरोधी आन्दोलन में मजदूरों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
बंग-भंग आन्दोलन के दौरान बहुत बड़ी संख्या में मजदूरों द्वारा सरकारी कारखानों का बहिष्कार किया गया जिसमें रेल कर्मचारियों द्वारा 1907 ई० में किया गया हड़ताल सबसे बड़ा और प्रमुख था।

मालिकों के शोषण तथा अत्याचार के शिकार मजदूरों ने 19 वीं सदी के प्रथमार्द्ध एवं द्वितीयार्द्ध में ही जहाँ-तहाँ हड़तालें करनी आरंभ कर दी थी। 1827 ई० में पालकीवालों ने एक महीने की लंबी हड़ताल की, 1862 ई० में रेलवे के लेखा विभाग के कर्मचारियों ने, 1869 ई० में बम्बई नगरपालिका के कसाइयों ने, 1873 ई० में बम्बई के सरकारी प्रेस कर्मचारियों ने तथा 1877 ई० में नागपुर की टाटा एम्पेस मिल के बुनकरों की हड़ताल जैसी घटनाएँ होती रहीं। धीरे- धीरे मजदूर संगठन बनने लगे।

आल इंडिया ट्रेड यूनियन काँग्रेस : प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1917 ई० से 1920 ई० तक प्रत्येक सरकारी और गैरसरकारी क्षेत्र में मजदूरों के अनेक संगठन बन गये। 31 अक्टूबर 1920 ई० को अखिल भारतीय संस्था ‘आल इंडिया ट्रेड यूयियन काँग्रेस’ की स्थापना की गई। इसके अध्यक्ष लाल लजपत राय तथा उपाध्यक्षों में तिलक, एनी बिसेन्ट, सी० एफ० एण्डूज, बेलवी तथा वपतिस्ता थे। इस संस्था की प्रेरणा से श्रमिक हड़तालों की संख्या और क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई।

साम्यवाद से प्रभावित एक युवा वर्ग मजदूर संगठनों में प्रभावी हो उठा। ए०आई०टी०यू०सी० में भी उनकी सक्रियता बढ़ गई। ऐसी ही युवा वर्ग ने कलकत्ता में पीजेन्टस एण्ड वर्कर्स पार्टी तथा बम्बई में वर्कर्स एण्ड पीजेन्टस पार्टी का गठन किया। अतः मजदूर आंदोलन ने व्यवस्थित रूप ले लिया और बाद के दिनों में कई प्रखर हड़तालें होती रहीं।

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प्रश्न 21.
1929 ई० के बाद वामपंथी राष्ट्रवादी आन्दोलन से क्यों अलग-थलग पड़ने लगे थे ?
उत्तर :
1928 ई० में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने भारत मं इण्डीपण्डेण्ट सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ इण्डिया की स्थापना की माँग की जिसके कारण जमीन तथा उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया जाता। राष्ट्रवादियों के बहुलता के कारण गिरनी कामगर यूनियन को इस यूनियन में जगह नहीं मिला परन्तु 1929 ई० में नागपुर में आयोजित दसवें अधिवेशन में दक्षिणपंथी ट्रेड यूनियनिस्टों ने अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनिस्ट फेडरेशन ऑफ इण्डिया की स्थापना की।

सरकार द्वारा ब्रिटिश राज के खिलाफ षड़यन्त्र का आरोप लगाकर उनके 33 नेताओं को गिरफ्तार किया गया। मास्को के मार्गदर्शन के कारण कांग्रेस द्वारा संचालित 1931-1932 ई० में समस्त भारत में चल रहे जन आन्दोलन में भाग नहीं लेने की गलती के कारण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की साख जनता के बीच कमजोर हो गयी। इससे ट्रेड यूनियन आंदोलन काफी कामजोर हो गया। इस प्रकार वामपन्थी देश के राष्ट्रीय स्वतन्त्रता आन्दोलन से अलग-थलग पड़ने लगे।

प्रश्न 22.
1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में वामपंथियों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू होते ही कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत में बिटिश सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया। परन्तु रूस तथा मित्र राष्ट्रों द्वारा जर्मनी से युद्ध करने के कारण इस पार्टी ने ब्रिटिश सरकार का समर्थन किया। इस प्रकार से समर्थन करने का एकमात्र कारण भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का रूस के इशारों पर चलना था। इसलिये यह पार्टी 1942 ई० के भारत-छोड़ो आन्दोलन का समर्थन नहीं करने का निर्णय लिया और इसी प्रकार के गलती होने के कारण भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का पतन होने लगा तथा बाद में इस पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

लेकिन युद्द के समाप्त होने के पश्चात् भारत की कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्र के प्रति होने वाले आन्दोलनों में पूर्णरूप से पुनः सक्रिय हुई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के हुंकार पर भारतवर्ष में मजबूर वर्ग द्वारा किये गये हड़तालों का ताँता लग गया। समस्त दक्षिण भारत में 1946 ई० में चालिस दिनों तक पूर्णत: सफल रेल-हड़ताल चला। ठीक इसी प्रकार से बंदरगाहों के मजदूरों ने भी हड़ताल किया। इस प्रकार मजदूर संघ का एकीकरर हो जाने से वह और भी शक्तिशाली हो गया।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
भारत छोड़ो आन्दोलन में मजदूर वर्ग की भूमिका का विश्लेषण कीजिए तथा मजदूर एवं किसान दल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर :
भारत छोड़ो आंदोलन में श्रमिक वर्ग की भूमिका : द्वितीय विश्वयुद्ध एवं भारत छोड़ो आंदोलन काल में भारतीय श्रमिक वर्ग ने आर्थिक व राजनीतिक दोनों प्रकार के संघर्षो में अपनी भागीदारी दी। 3 सितम्बर, 1939 ई० को प्रारम्भ हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के विरोध में बम्बई के मजदूरों ने 2 अक्टूबर, 1939 ई० को सशक्त हड़ताल का प्रदर्शन किया था। इस हड़ताल में लगभग 90,000 मजदूरों ने भाग लिया था। सितम्बर 1940 ई० में एक प्रस्ताव पारित कर एटक ने साम्माज्यवादी युद्ध में सम्मिलित होने से इन्कार कर दिया। इसी वर्ष एम. एन. रॉय ने सरकार समर्थित इण्डियन फेडरेशन ऑफ लेबर की स्थापना की।

रूस के महायुद्ध में सम्मिलित होने से भारतीय मजदूर वर्ग पर इसका प्रभाव पड़ा तथा उसका एक भाग 1942 ई० के भारत छोड़ो आंदोलन से अलग बना रहा। परन्तु इससे भारत छोड़ो आंदोलन में मजदूरों की भागीदारी में ज्यादा कमी नहीं आई। भारत छोड़ो आन्दोलन के दौर में दिल्ली, कलकत्ता, लखनऊ, कानपुर, बम्बई, नागपुर, अहमदाबाद, जमशेदपुर, मद्रास, इंदौर, बंगलौर इत्यादि शहरों में जबरदस्त श्रमिक हड़ताले हुई। बिटिश साम्राज्यवाद के अन्तिम वर्षो में सम्पूर्ण भारत आर्थिक स्थिति की समस्या को लेकर मजदूर हड़तालों से अशान्त बना रहा था।

इन हड़तालों में डाक-तार विभाग की हड़ताल सर्वाधिक चर्चित थी। द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के उपरान्त श्रमिक आन्दोलन में पुन: उबाल आया। इस उबाल का श्रेष्ठतम रूप बम्बई में नौ-सेना विद्रोह के समर्थन में मजदूर संघर्ष के रूप में देखने को मिला था। धीरे-धीरे कांग्रेस तथा श्रमिक संघों में मन-मुटाव बढ़ता चला गया। राष्ट्रवादियों ने सरदार बल्लभ भाई पटेल के नतृत्व में मई, 1947 ई० में एटक से पृथक हांकर भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना की जबकि कांग्रेस के समाजवादी गुट ने हिन्द मजदूर सभा की स्थापना की।

मजदूर-किसान पार्टी (Workers and Peasants’ Party) : मजदूर किसान पार्टी भारत की एक राजनीतिक पार्टी थो। इस पार्टी की स्थापना सर्वप्रथम कलकत्ता में प्रान्तोय स्तर पर हुई थी। इसके बाद सभी प्रान्तीय दलों ने मिलकर 1928 ई० में अखिल भारतीय मजदूर एवं किसान पार्टी का गठन किया। इसका प्रथम अधिवेशन सोहनलाल जोशी की अध्यक्षता में कलकत्ता में हुआ। इस दल ने कांग्रेस के साथ ही 1925 ई० से लेकर 1929 ई० तक किसानों एवं राष्ट्रहित में अनेकों काम किया। भारत में इस पार्टी ने कम्युनिस्ट पार्टी की योजनाओं को मूर्त्त रूप देने का भी कार्य किया।

1928 ई० में बम्बई कपड़ा मिल के मजदूरों ने जब हड़ताल किया, तब इस पार्टी ने मजदूरों को संगठित किया। यह आंदोलन करीक माह तक चला और इसमें करीब डेढ़ लाख लोगों ने भाग लिया। इस दल के प्रमुख नेता थे काजी नजरुल इस्लाम, हेमंत कुमार सरकार, कुतुबुद्दीन अहमद तथा शम्शुद्दीन हुसैन इत्यादि। इस दल ने प्रमुख समाजवादी नेता एवं कांग्रेस के नेता जवाहरलाल नेहरू को भी अपनी तरफ आकर्षित किया था। इस प्रकार देश के राष्ट्रीयता आन्दोलन में इस संगठन सक्रीय योगदान रहा।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 6 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन : विशेषताएँ एवं अवलोकन

प्रश्न 2.
20 वीं सदी में गांधीजी के काल में हुए कृषक आंदोलन का वर्णन करो।
उत्तर :
सन् 1920 ई० में महात्मा गांधी जी ने असहयोग आंदोलन (Non-cooperation Movement) चलाया था। भारतवर्ष में जब अंग्रेजी शासन का दबदबा बढ़ता चला जा रहा था तब गांधी जी ने अंग्रेजों को सहयोग करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने किसानों एवं मजदूरों को भी अंग्रेजों को सहयोग नहीं देने का आह्वान किया। जिसे गाँधीजी ने असहयोग आंदोलन (Non-cooperation Movement) नाम से जन आन्दोलन शुरू किया। यह पुर्णत: अहिंसात्मक आन्दोलन था जिसमें विदेशी वस्तुओं का वहिष्कार करना, सरकारी पदों का त्याग करना तथा कर न देना आद् कार्यक्रम अपनाये गये। असहयोग आंदोलन के दौरान ही अंग्रेजों के खिलाफ अनेकों कृषक या किसान आंदोलन (Peasant Movement) हुए थे जो निम्नलखित थे –

i. मोपला किसान आंदोलन (1920-22 ई०) : गांधीजी के असहयोग आंदोलन के दौरान ही केरल (मालाबार क्षतत्र) में किसानों ने अंग्रेजों से मदद पाने वाले जमीदारों और ठेकेदारों के खिलाफ मोपला आंदोलन चलाया था जिसका नेतृत्व ‘अलो मुसलियार’ ने किया। वे गाँधीजी के द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चल कर इस आंदोलन का नेतृत्व किए। मोपला विद्रोह मालाबार क्षेत्र में रहने वाले मोपला जाति के किसानों द्वारा किसान आन्दोलन था जो बाद में सांम्पदायिक रूप ग्रहण कर लिया था जिसमें बड़े पैमाने पर हिन्दुओं की हत्या की गई तथा उन्हें जबरन मुसलमान बनाया गया। अन्तत: ब्रिटिश सरकार मार्शल लॉ लागू कर विद्रोह को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

ii. एका आंदोलन (1921-22 ई०) : एका आंदोलन भी एक किसान आंदोलन था, जो अवध क्षेत्रों में चलाया गया था। यह आंदोलन असहयोग आंदोलन के समय अधिक तीव्र हो गया था, जब गाँधीजी ने अंग्रेजी सरकार को समर्थन न देने की बात की। एका आंदोलन अवध के किसान ‘मदारी पासी’ और ‘सहरेब’ द्वारा चलाया गया था, यह आदोलन सन् 1921 से 1922 ई० तक अधिक तीव्र रूप ग्रहण कर लिया था। इस आंदोलन के आरंभ होने का मुख्य कारण अंग्रेजी सरकार द्वारा मदद प्राप्त जमीदारों और ठेकेदारों का किसानों के ऊपर किया गया अत्याचार तथा लगान वृद्धि था जिसे सरकार ने सैन्य ताकत के आधार पर इसे दबा दिया।

iii. दरभंगा का किसान आंदोलन (1919-20 ई०) : असहयोग आंदोलन के समय किये गये किसानों द्वारा दरभंगा किसान आंदोलन (1919-20 ई०) का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह आंदोलन बिहार क्षेत्र के दरभंगा में सन् 1919 में ‘विशुभरण उर्फ स्वामी विद्यानन्द’ के नेतृत्व में हुआ था। इस आंदोलन का मुख्य कारण अंग्रेजी सरकार द्वारा मनमाना राजस्व कर वसूलना था। यह आंदोलन सन् 1922 तक चला था।

iv. संयुक्त प्रान्त का किसान आंदोलन (1920-22 ई०) : असहयोग आंदोलन के समय, अवध एवं आगरा के क्षेत्रों में संयुक्त प्रान्तीय किसान आंदोलन चलाया गया था। यह आंदोलन सन् 1920 में शुरू हुई थी। इस आंदोलन का मुख्य कारण जमीदारों द्वारा किसानों से मनमाना कर (Tax) वसूली था। इस आदोलन के दौरान अवध एवं आगरा के क्षेत्रों में विभिन्न किसान संगठन और सभा बनायी गयी, जैसे, सन् 1920 में ‘अवध किसान सभा’, सन् 1918 में ‘उत्तर प्रदेश किसान सभा’ आदि। इस आन्दोलन के प्रेरणा स्रोत व नेता बाबा रामचन्द्र दास थे।

v. मेवाड़ का किसान आंदोलन (सन् 1920) : मेवाड़ किसान आंदोलन भी उपरोक्त सभी किसान आंदोलन की भाँति सरकार के विरुद्ध बिचौलिया और बेगू को मुद्दा बनाकर मेवाड़ क्षेत्र में सन् 192 में किया गया था। इसका नेतृत्व विजय सिंह पथिक, रामनारायण, मणिकलाल एवं बाबा सीताराम दास ने किया था।

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प्रश्न 3.
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान किसानों की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर :
महात्मा गाँधी जी ने सन् 1942 में अंप्रेज विरोधी आन्दोलन चलाया जिसका नाम था भारत छोड़ों आन्दोलन इसका अर्थ था “अंग्रेजों भारत को छोड़ कर चले जाओ।” इसी आन्दोलन के दौरान गाँधीजी ने अंग्रेजों को कड़े शब्दो में कहा है कि अंग्रेज भारत छोड़ो वरना इसका अंजाम और भी बुरा होगा। इसी आंदोलन के समय समस्त भारतवर्ष में किसान आंदोलन छाया हुआ था अर्थात् जहाँ एक तरफ भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ भारत में किसान आदोलन अपने सब्र की बाढ़ को तोड़ चुका था।

इतना ही नहीं, जिस समय भारत में भारत छोड़ो आंदोलन (1942 ई०) चल रहा था वहीं उस समय पूरे विश्व में द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) ई० चल रहा था और इसका प्रभाव अंग्रेजी सरकार की राजस्व व्यवस्था पर पड़ा था। किसानों द्वारा किये गये आंदोलन से अंग्रेजी सरकार की नीतियों (राजस्व कर) पर अधिक प्रभाव पड़ा था। भारत छोड़ो आंदोलन के समय भारतवर्ष के कई प्रदेशों में अंग्रेजी सरकार के विरोध में किसान आंदोलन (Peasant Movement) शुरू किया गया था, जो इस प्रकार से हैं :-

i. वर्ली आंदोलन (1945-1949) ई० : बम्बई (मुम्बई) के ठाणे जिले के दनानू, पालधार एवं उम्बेर गाँव और जवाहर ताल्लुकों के बहुसंख्यक आदिवासी किसानों की भूमि जमीन्दारों एवं महाजनों के अधिकार में चली गई थी, क्यांकि उनके द्वारा अनाज के रूप में लिए गए ॠण का भुगतान वे नहीं कर सके थे। महाजन सामान्यत: पचास से दो सौ प्रतिशत का ब्याज लगाते थे। वर्ली के आदिवासी अकाल एवं अपनी कठिनाई के दिनों में महाजनो एवं जमीन्दारों से अनाज क्रण लेते रहते थे। ऋण न चुका पाने पर उनपर घोर अत्याचार किया जाता था। अत्याचार इतना बढ़ गया था कि वर्ली के आदिवासी किसानों ने जमोंदारों एवं महाजनों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया। परन्तु अंग्रेजी सरकार द्वारा मदद प्राप्त जमींदारों और महाजनों ने इस आदोलन को दबा दिया।

ii. तेभागा आंदोलन : तेभागा आंदोलन एक किसान आंदोलन था। यह आंदोलन सन् 1946 से लेकर 1947 ई० तक बंगाल के कई क्षेत्रों में चलाया गया था जिसमें दिनाजपुर, मिदनापुर, रंगपुर, 24 परगना, खुलना, जलपाईगुड़ी और मैमनसिंह आदि हैं। यह आंदोलन किसानों के ऊपर बढ़ाये गये राजस्व (भूमि) कर के विरोध में किया गया था जिसका नेतृत्व कम्पाराम सिंह और भवन सिंह कर रहे थे। परन्तु अंग्रेजी सरकार के विशेष मदद से जमींदारों ने इस आंदोलन को दबा दिया।

iii. तेलंगाना आंदोलन : तेलंगाना आंदोलन भी तेभागा और वर्ली आंदोलन के समान ही था जो सन् 1945 से लेकर 1951 ई० तक चला। यह आंदोलन आंध प्रदेश के हैदराबाद समेत कई क्षेत्रों में किया गया। इस आंदोलन में किसान ठेकेदारों एवं कर संप्रहकों द्वारा बुरी तरह से प्रताड़ित हुए थे जिसका परिणाम अत्यन्त ही भयानक था। इन सभी क्षोभ के कारण ही हैदराबाद समेत कई क्षेत्रों के किसानों ने ठेकेदारों और कर (Tax) संग्रहकों के विरुद्ध यह आदोलन चलाया। परन्तु बाद में इस आंदोलन को दबा दिया गया।

iv. पुनप्रा-वायलार किसान आंदोलन : उपर्युक्त आंदोलनों की भाँति ही पुनप्रा-वायलार आंदोलन भी एक भयानक परिणाम वाला किसान आंदोलन था, जो सन् 1946 में त्रावणकोर में किया गया था। यह आंदोलन त्रावणकोर के किसानों और अंग्रेजी सरकार के नीतियों के बीच हुआ था। इस आंदोलन का नेतृत्व पी॰ सुन्दरैया और रवि नारायण रेड्डी ने किया। परन्तु सरकार ने इस आंदोलन को बुरी तरह से समाप्त कर दिया। इसमें लगभग 1000 किसान मारे गये थे और बहुत सारे गाँव भी प्रभावित हुये थे।

v. बकाश्त किसान आंदोलन : बकाश्त किसान आंदोलन भी एक किसान आंदोलन था, जो सन् 1946 से लेकर 1947 ई० तक चला था। यह आंदोलन बिहार के कई क्षेत्रों में चलाया गया था, जैसे – मुंगेर, गया, दरभगा, भागलपुर, नधुबनी और मुजफ्फपुर आदि। परन्तु इस आदोलन को भी सरकार ने बड़ी दर्दनाक तरीके से दमन कर दिया।

उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट होता है कि भारत छोड़ो आंदोलन के समय बिटिश सरकार के राजस्व कर (भूमि कर), अनाज ₹र और रैयती कर के विरुद्ध विभिन्न क्षेत्रों में किसानों आदोलन किये। परन्तु ब्रिटिश सरकार ने उन सारे आदोलनों को प्रक्ति के बल पर फिर भी दबा दिया। लेकिन विश्व के इतिहास और भारतवर्ष के इतिहास में इन सभी आंदोलनों का अहम पा महत्वपूर्ण स्थान है। जिसने आजादी की लड़ाई को अन्जाम तक पहुँचाने में सक्रीय सहयोग दिया।

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प्रश्न 4.
सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय श्रमिक या मजदूर आंदोलन का विवरण कीजिए।
या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के साथ मजदूर आंदोलन के संबंध का वर्णन करें।
या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
इत्कर : अंग्रेजी सरकार द्वारा गुजरात के डांडी क्षेत्र में साबरमती नदी के किनारे जिन मजदूरों द्वारा नमक बनाया जाता था, उसपर कर (Tax) बढ़ा दिया गया और इतना ही नहीं उन मजदूरों पर घोर अत्याचार किया जाता था, जो असहनीय घा इन संदी अत्याचारों और नमक पर बढ़ाये गये कर (Tax) के विरुद्ध महात्मा गाँधी जी ने अहिंसा (Non-Violence) को अप्रना आधार बनाकर डांडी अभियान किया, जिसे नमक सत्याग्रह आंदोलन कहा जाता है, जो इस प्रकार से है :

डांडी अभियान (Dandi March) : महात्मा गाँधीजी 12 मार्च, 1930 ई० को अपने 78 समर्थकों के साथ दाबरमती आश्रम से डांडी की ओर प्रस्थान किये। लगभग 24 दिनों बाद 6 अप्रेल, 1930 ई० को डांडी पहुँचकर गाँधीजी न नमक बनाकर नमक कानून भंग किया। इसी अभियान को नमक सत्याग्रह (Salt Satyagraha) कहते हैं।

नमक सत्याग्मह के बाद उसी दिन अर्थात् 6 अप्रैल, 1930 ई० को गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आदोलन (Civil Disobedience) या कानून भंग आंदोलन शुरू किये। गाँधीजी द्वारा आदोलन शुरू करने के बाद मानों भारतवर्ष में अंग्रेजी एग्कार द्वारा प्रत्येक कार्यों में जो कानून लगाया गया था, मजदूरों और छात्रो के जन आंदोलन ने उसे भग (ताड़ना) कर दिया।

एँजद्रों द्वारा किये गये इस आंदोलन का अभियान देखते ही देखते पूरे भारतवर्ष में फैल गया। साबरमती नदी के किनारे जां नमक बनाया जाता था, उसके मजदूर भी इस आंदोलन में तीव्र संक्रिय हो गये और गाँधीजी के साथ मिलकर उनके द्वारा घलायें गयं मजद्र आंदोलन में शम्मिलित हो गये, जो अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध या खिलाफ था।

गाँधीजी के साथ मिलकर मजदूरों ने कम समय में ही भारतवर्ष के सभी क्षेत्रों में आन्दोलन को आग और हवा की भाँति क्ता दिये। अंग्रेजी सरकार इस दृश्य को देखकर बौखला उठी। साथ ही साथ डरने भी लगी। वे इस आदालन को दबाना चाहते थे। परन्तु मजदूरों की भूमिका इतनी जबरजस्त थी कि वे आंदोलन को आसानी से दबा नहीं सके।

डंखत ही देखते मजदूरों का साथ देने के लिए कई ट्रेड यूनियनों (Trade Unions) सामने आये। जैसे- ‘AITUC’ और ‘हिन्दुस्तान मजदूर सभा’ आदि। 21 मई को धारासभा नमक करखाने पर ‘श्रीमतो सरोजिनी नायडु’ और ‘इमाम साहेब’ के नेतृत्व सं ढ़ाई हजार सेवकों ने धावा बोल दिया। ऐसे धावे कई बार बोले गये। परन्तु हड़तालियों ने अहिंसा को सदा ध्यान में रखा। गौधीजो द्वारा चलाये गये सविनय अवज्ञा आन्दोलन के साथ मजदूर आदोलन अपने चरम सीमा पर जा पहुँची। इस गजददृर आदालन को समाप्त करने के लिए अंग्रेजी सरकार ने अथक प्रयास किया। अंततः अंग्रेजी सरकार ने इस आंदोलन को विभिन्न समझौते के माध्यम से दबा दिया।

प्रश्न 5.
भारत छोड़ो आन्दोलन (Quit India Movement) के साथ मजदूर आंदोलन के संबंधों का वर्णन कीजिए। या, भारत छोड़ो आंदोलन में मजदूर वर्ग कहाँ तक सफल हुए बताइए।
या
भारत छोड़ो आंदोलन एक मजदूर आंदोलन है, वर्णन करें।
चा
भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख करें।
उत्तर :
महात्मा गाँधी जी ने सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movment) की शुरूआत किया। इस आंदोलन में ‘बिनोवाभावे’, ‘जवाहरलाल नेहरू’, ‘बह्मदत्त’, ‘आगा खाँ’, ‘राजेन्द्र प्रसाद’ और अन्य सभी भारतीय नेताओं ने साथ दिया अत: इस आन्दोलन में मजदूर वर्ग की भागीदारी को निम्नरूप में देखा जा सकता है –

गाँधोजो ने इस आंदोलन के पहले इससे सम्बन्धित अन्य कई कार्य किये। इस आंदोलन की उत्पत्ति कुछ इस प्रकार से हुयी थी सन् 1940 का सत्याग्रह : महात्मा गाँधीजी ने 17 अक्टूबर, 1940 ई० को पावनार में व्यक्तिगत सत्याग्रह आदोलन शुरू किया। इस आदोलन के प्रथम सत्याग्रही ‘बिनोवा-भावे’, दूसरे सत्याग्रही ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू’ एवं तीसरे त्याआ्मही ‘ब्रह्यदत्त’ थे। इस आंदोलन को ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन भी कहा जाता है।

इस सत्याग्रह आंदोलन से सरकार घबरा गयी और सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। इतना ही नहीं, समस्त श्रमिको को भो गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारियों के बाद से ही पूरे भारतवर्ष में हा-हाकार मच गया। पूरा भारत एकजुट हो गया। इतना ही नहीं, समस्त मजदूर वर्गों ने गाँधी जी के समर्थन में जगह-जगह अंग्रेजी सरकार का विरोध किया, पूरे भारतवर्ष में हड़तालें (Strike) किये गये, सभी मिलों को बंद कर दिया गया।

ऐसे गंभीर समय में गाँधीजी ने वर्धा से ही भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) सन् 1942 में शुरू किया। जबकि कांग्रेस ने पहले ही ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का प्रस्ताव पारित कर चुका था। 7 अगस्त, 1942 ई० को कांग्रेस की बैठक बम्बई के ऐतिहासिक ग्वालियर टैक (Gwalior Tank) में हुई। गाँधी जी के भारत छोड़ों प्रस्ताव को काँग्रेस कार्य समिति ने 8 अगस्त, 1942 ई० को स्वीकार कर लिया और गाँधीजी ने 9 अगस्त, 1942 ई० को भारत छोड़ो आंदोलन शुरू कर दिया।

देखते ही देखते इस आंदोलन से श्रमिक या मजदूर वर्ग जुड़ गये और अंग्रेजों के दमननीतियों को दबाना शुरू कर दिये। इतना ही नहीं, गाँधीजी ने आंदोलन के दौरान समस्त भारतवर्ष और श्रमिक संगठनों को ‘करो या मरो’ (Do or Die) का नारा दिये। जिसके बाद से पूरे भारत में मजदूरों ने आंदोलन आरंभ कर दिया अंग्रेज विरोधी। वहीं दूसरी तरफ, 9 अगस्त, 1942 ई० को अंग्रेजो ने सबेरे ही गाँधीजी एवं कांग्रेस के अन्य समस्त महत्वपूर्ण नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

गाँधीजी को पूना के आगा खाँ महल में तथा काँप्रेस कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को अहमदनगर के दुर्ग में रखा गया था। राजेन्द्र प्रसाद को भी नजरबंद कर दिया गया था। गिरफ्तारियों के बाद समस्त भारत में अंग्रेजी सरकार के पुतले फूँके गये, जगह-जगह मजदूरों ने कारखानों को बंद कर दिया और विभिन्न प्रकार के मजदूर संगठन भी बनाया गया। दिल्ली, कलकत्ता, लखनक, कानपुर, बम्बई, नागपुर, जमशेदपुर, अहमदाबाद, मद्रास, इंदौर और बंगलौर इत्यादि शहरों में, जबरजस्त मजदूर हड़ताले हुई।

इतना ही नहीं, इस आंदोलन का प्रभाव सन् 1946 के बम्बई के नौ-सेना विद्रोह के मजूदरों पर भी पड़ा। धीरे-धीरे काँग्रेस तथा श्रमिक संगठनों में मन-मुटाव बढ़ता चला गया और काँग्रेस ने सरदार बल्लभाई पटेल के नेतृत्व में, 1947 ई० में एटक से पृथक होकर ‘भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ की स्थापना किया। जबकि, काँग्रेस का सामाजवादी गुट ने ‘हिन्दू मजदूर सभा’ की स्थापना किया।

उपर्युक्त विवरणों से स्पष्ट होता है कि गाँधीजी द्वारा शुरू किया गया ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में देश के मजदूरों एवं मजदूर संघों ने भरपूर साथ दिया तथा अंग्रेजी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों को समाप्त करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 6 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन : विशेषताएँ एवं अवलोकन

प्रश्न 6.
भारतीय राजनीति में वामपंथी विचारधारा का विवेचना कीजिए।
या
बीसवीं शताब्दी में भारत में उपनिवेश विरोधी आन्दोलन में वामपन्थियों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
20 वीं शताब्दी में भारत में साम्यवादी दल का आगमन हुआ था। यह दल रूस से होते हुए फ्रांस के माध्यम से भारत में आयी थी अर्थात् साम्यवादी दल की उत्पत्ति रूस और फ्रांस की देन मानी जाती है। इतनी ही नहीं, साम्यवादी दल का वजूद रूस एवं चीन में भी जबरदस्त है। जैसे – रूस में ‘Russian Comunist Party’ और चीन में ‘China Communist Party’ हैं।

सन् 1917 में लेनिन ने रूस में रूसी क्रांति चलाया, जिसका परिणाम रूस में साम्यवादियों की उत्पत्ति हुयी। भारत में भी लेनिन के माध्यम से ही साम्यवादी दल की स्थापना की गयी। चूँकी भारत में साम्यवादी का दूसरा नाम वामपंथी है, इसीलिए भारत में लेनिन के माध्यम से ही वामपंथी विचारधाराओं का वृक्षारोपण हुआ। वास्तव में भारत में वामपंथी दल की स्थापना सन् 1920 में हुयी। इस दल की स्थापना मानवेन्द्र नाथ राय (M. N. Roy), अवनी मुखर्जी, ए० टी॰ राय और मुहम्मद अली आदि के माध्यम से हुयी थी।
भारत में वामपंथी आन्दोलन के इतिहास को पाँच स्पष्ट चरणों में बाँटा जा सकता है :-

प्रथम चरण (First Phase) : भारत में वामपंथी आन्दोलन का इतिहास पुराना है तथा अधिक विस्तृत माना जाता है। वामपंथी लोग शुरू से ही साम्राज्यवादी नीतियों को समाप्त करना चाहते थे, जिसके प्रति उन लोगों ने आन्दोलन का सहारा लिया जिसे वामपंथी आंदोलन कहा जाता है तथा इस काल को “तीन षड्यंत्रों के मुकदमों का काल” भी माना जाता हैं क्योंकि वामपंधियों की बढ़ती शक्ति को देखकर सरकार ने उनपर तीन षड्यंत्रकारी मुकदमे चलाये। जिनमें, पेशावर षड्यंत्र केस (1922 ई०), कानपुर षड्यंत्र केस (1924 ई०) तथा मेरठ षड्यंत्र केस (1929 ई०) हैं। इन केसों के माध्यम से साम्यवादी दलों के नेताओ को पकड़ कर जेल में भर दिया गया।

द्वितीय चरण (Second Phase) : इस काल को ‘राजनीतिक पशुता का काल’ कहा जाता है। जहाँ एक तरफ महात्मा गाँधी राष्ट्रवादी आन्दोलन में सक्रिय थे वहीं साम्यवादी आन्दोलन प्रश्न के कगार पर चला गया था। 1928 ई० में अन्तर्राष्ट्रीय साम्यवादी संगठन से संकेत प्राप्त कर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वामपंथी और दक्षिणापंथी अंगों पर प्रहार करना आरम्भ कर दिया। उन्होंने गाँधीजी को ‘बुर्जुआ वर्ग का नेता’ घोषित कर दिया। इन सब कारणों से साम्यवादियों का महत्व घट गया। 1934 ई० में ब्रिटिश सरकार ने साम्यवादी दल पर प्रतिबंध लगा दिया।

तीसरा चरण (Third Phase) : इस काल को “साम्यवादी और साम्राज्यवादी विरोधी संयुक्त मोर्चा योजना’ भी कहा जाता है। भारत में साम्यवादी दल को साम्राज्यवादी कई नीतियों का पालन करना पड़ा है जिसके तहत साम्राज्यवादी विरोधी आन्दोलन भी चलाना पड़ा। सन् 1936 ई० में आर० पी० दत्त और बैन ब्रेडली ने अपना निबंध ‘भारत में साम्माज्यवाद विरोधी जनता का मोर्चा’ प्रकाशित किया।

चौथा चरण (Fourth Phase) : इस काल को “द्वितीय विश्वयुद्ध और साम्यवादियों की उल्टी छलाँग” भी कहा जाता है। साम्यवादी दलों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय सामाज्यवाद का घोर विरोध किया। इसीलिए जब 1941 ई० में हिटलर ने रूस पर आक्रमण किया तब भारतीय साम्यवादियों ने इस युद्ध को लोकयुद्ध कहना शुरू कर दिया। इसी कारण कांग्रेस के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध भी साम्यवादियों ने किया।

पाँचवा चरण (Fifth Phase) : इस चरण को “शक्ति के हस्तांतरण के लिए बातचीत तथा साम्यवादियों की बहुराष्ट्रवादी नीति” भी कहा जाता है। इस काल में साम्यवादी नीति को मुस्लिमों का साथ मिला। साम्यवादी हमेशा भारत को जोड़ना एवं साम्राज्यवाद का नाश करना चाहते थे।

सन् 1942 ई० में साम्यवादी दल ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें घाषण की गई थी कि भारत एक बहुराष्ट्रवादी राज्य हैं और इसमें न्यूनतम 16 राष्ट्र हैं। 1946 ई० में भारतीय साम्यवादी दल ने मंत्रिमंडीय शिष्टमण्डल के सम्मुख एक प्रस्ताव रखा कि भारत को 17 पृथक् प्रभुसत्ता पूर्ण राज्यों में बाँट दिया जाए, जैसा कि बाल्कन में अथवा सोवियत संघ में हुआ था।
उपर्युक्त विवरणों से प्राप्त होता है कि वामपंथी लोगों ने भारत एवं भारतीय राजनीति में अहम भूमिका निभायी है तथा अपने विचारों से भारत में राष्ट्रवाद का विकास किया।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 6 20वीं शताब्दी में भारत के किसान, मजदूर वर्ग एवं वामपंथी आन्दोलन : विशेषताएँ एवं अवलोकन

प्रश्न 7.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय कृषकों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
सविनय आन्दोलन का पर्चाय भूमिकर के विरूद्ध ब्रिटिश सरकार से संघर्ष था। इस आन्दोलन के बाद किसानों ने अपने-अपने वर्ग के प्रति संगठन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। इस आन्दोलन में किसानों की भूमिका अत्यन्त प्रशंसनीय रही। कांग्रेस ने भूमिकर न देने का नारा दिया। इसलिये 1930 ई० में किसानों द्वारा अनेकों आन्दोलन किये गये 19291933 ई० में विश्व की बिगड़ती आर्थिक दशा ने विस्तृत रूप से अधिकांश किसानों को भिखारी बना दिया था। गाँधीजी द्वारा सबिनय अवज्ञा आन्दोलन के समर्थन में किसान संगठित होकर बड़े पैमाने पर हिस्सा लिये। इन्होंने 1930 ई० से लेकर 1940 ई० के दशक तक अपने आन्दोलन को नया आयाम दिया। इस स्थिति में 1930 ई० में सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ होते ही किसानों ने आन्ध, गुजरात तथा संयुक्त प्रान्तों में आन्दोलन शुरू किया।

इसमें इन्होंने आन्दोलन को लगानबंदी या लगान में कमी कराने को अपना विशेष मुद्दा बनाया। महाराष्ट्र, बिहार तथा मध्य प्रान्तों के किसानों ने ‘जंगल सत्याग्रह’ चलाया। इस आन्दोलन में किसानों का साथ जमींदारों ने भी सक्रिय भूमिका निभायी। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के शोषण एवं अत्याचार के विरूद्ध अहिंसा की नीति का पालन किया। विपिन चन्द्र के अनुसार – ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन ने किसान आन्दोलन के अभ्युदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई – इसके गर्भ से युवा लड़ाकू राजनीतिक कार्यकताओं की एक पूरी पीढ़ी पैदा हुई”।

इस आन्दोलन के द्वारा गाँधीजी किसानों के एकमात्र नेता सिद्ध हुए परन्तु गाँधीजी द्वारा रखे गये। सूत्री मांगों का प्रत्यक्ष रिश्ता किसानों से न होने के कारण किसानों को बिना कोई राहत दिलाये यह आन्दोलन समाप्त हो गया। राष्ट्र के प्रति तथा किसानों के प्रति उग्र राष्ट्रवादियों के प्रेम ने किसानों के साथ होने वाले अन्याय की बात सर्वप्रथम उठाया तथा उन्होंने आवश्यक रूप से किसानों के एक स्वतंत्र वर्ग संगठन के निर्माण को मान्यता दी।

इसी परिवेश में 1927 ई० में स्वामी सहजानन्द सरस्वती के नेतृत्व में बिहार किसान सभा का निर्माण हुआ। इसी संस्था ने आगे चलकर अखिल भारतीय किसान सभा का रूप लिया। गाँधीजी द्वारा इस जन आन्दोलन को 14 जुलाई 1930 ई० को रोक दिया गया परन्तु व्यक्तिगत सत्याग्रह चलता रहा। 14 अफैल 1930 ई० को महात्मा गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन को स्थगित कर दिया। इस वजह से कुछ समय के लिए किसानों का आन्दोलन भी मन्द पर गया।

प्रश्न 8.
भारत के मजदूर आन्दोलन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा वामपंथी राजनीति ने किस प्रकार प्रभावित किया ?
उत्तर :
भारत में मजदूर आन्दोलन का उद्भव कांग्रेस के स्थापना के पहले ही हुआ था। सामान्य रूप से मजदूरों के सगठन का इतिहास 1884 ई० से प्रारम्भ माना जाता है। कांग्रेस के स्थापना के बाद मजदूरों को राजनीतिक आधार मिला। इस्दी एमय एन० एम० लोखंड़ द्वारा बाम्बे मिल हैन्ड्स ऐसोसिएशन की स्थापना की गई। इस संगठन के द्वारा भजदूरों के कार्य के घण्टों, साप्ताहिक अवकाश, लंच टाइम इत्यादि मुद्दों को उठाया। लोखंडे मजदूरों के हमदर्द थे तथा उन्होने ‘दीनबधु’ चत्रिका का प्रकाशन भी किया।

कांग्रेस द्वारा इनके कार्यो की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। प्रथम मजदूर संगठन के रूप मे 1897 ई० में ‘अमलगमेटेड़ सोसायटी ऑफ रेलवे सर्वेट्स आफ इण्डिया एण्ड वर्मा’ नामक संगठन बना। इस प्रकार यह संगठन भजदूरों की पहली संगठन थी। इस संगठन ने ‘ग्रेट इण्डियन पेनन्सुला रेलवे’ नामक ब्विटिश स्वामिल और प्रबन्धन चलने वाली रेलों में हड़ताल किया। यह हड़ताल 1899 ई० में की गई। इस हड़ताल का समर्थन करने वाली लगभग सभी रांट्रीय अखबारों ने पूरे जोर-शोर से इसका प्रचार किया। अतः कांग्रेस के स्थापना काल में इसका मजदूर संगठनों के प्रति अव्नहार में सक्रियता का अभाव था परन्तु प्रथम विश्वयुद्ध के बाद इस व्यवहार में बदलाव आया।

1928 ई० बाद मजदूर आन्दोलन का शक्तिशाली रूप देखा गया। मजदूरों ने हड़ताल और प्रदर्शन ने आन्दोलन को नई दिशा दी। इस बीच मजदूरों कं संगउन में कम्युनिस्टों तथा गैर-कम्युनिस्टों के बीच भेदभाव बढ़ने के कारण बम्बई के वस्त्र उद्योगके मजदूरों द्वारा पूर्णरूप से एक गिरनी कामगर नामक संगठन बनाया गया। इस संगठन का नेतृत्व डांगे तथा एक ब्रिटिश कम्युनिस्ट द्वारा प्रदान किया गया। 1928 ई० में जो भी हड़ताले हुई वह लम्बे समय तक चलती रहीं।

1928 ई० में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने भारत में इण्डीपण्डेण्ट सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ इण्डिया की श्रगणना की माँग की जिसके कारण जमीन तथा उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया। राष्ट्रवादियों के बहुलता के कारण गण० जो कामगर यूनियन् को इस यूनियन में जगह नहीं मिला परन्तु 1929 ई० में नागपुर में आयोजित दसवें अधिवेशन में दक्षिण्वथी टेड युनियनिस्टों ने अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनिस्ट फेडरेशन ऑफ इण्डिया की स्थापना की।

सरकार द्वारा ब्विदिश राज के खिलाफ वड़यन्न्न का आरोप लगाकर उनके 33 नेताओ को गिरफ्तार किया गया। मास्को के मार्गदर्शन के कारण कांग्रेस द्वारा संचालित 1931-1932 ई॰ में समस्त भारत में चल रहे जन आन्दोलन में भाग नहीं लेने की गलती के कारण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की साख जनता के बीच कमजोर हो गयी। इससे ट्रेड यूनियन आंदोलन काफी कामजोर हो गया।

मजदूरों का यह आन्दोलन भी किसानों के आन्दोलनों की तरह राष्ट्रीय आन्दोलन के साथ गहराई से जुड़ा था। इस आन्दोलन का मुख्य लक्ष्य श्रमिकों के जीवन-स्तर में सुधार लाना था। बाद में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, चित्तरजन दास तथा जवाहरलाल नेहरू इस मजदूर संगठन के अध्यक्ष बने। अत: इस काल में संगठन के रूप में मजदूरो द्वारा उनका आन्दोलन सब समय अग्रगति से संचालित होता रहा।

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प्रश्न 9.
बंग-भंग प्रतिरोध आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
बंग-भंग प्रतिरोध आन्दोलन : 20 जुलाई 1905 ई० में बंगाल के वायसराय लार्ड कर्जन द्वारा जब बंगाल को विंगजित कर दिया गया तब उस समय बंगाल की जनसंख्या लगभग आठ करोड़ थी तथा उस समय के बंगाल में आजक विहार, झारखण्ड, उड़ीसा तथा बगलादेश भी शामिल थे। लार्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन करने का एक है: उद्देश्य था कि आपस में मिलकर रहने वाले हिन्दू और मुसलमान भाईयों को अलग-अलग करके लड़ाया जाय। बगाल उस समय भारल की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक था तथा बंगालियों में अधिकतमा राजनीतिक चेतना थी। जिसे दबाने के लिये लार्ड कर्जन द्वारा बगाल के विभाजन की नीति अपनाई गई।

बंगाल विभाजन की खबर जब जनता तक पहुँची ना पूरे बंगाल में इस विभाजन के विस्द्ध आवाजें उठने लगी। इस विभाजन के दिन को पूरे बंगाल में ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाया गया। जिसमें आम नागरिक के साथ-साथ किसानों ने भी हिस्सा लिया। सम्पूर्ण बंगाल में रवीन्द्रनाथ टैगोर के सलाह पर इस दिन ‘राखी दिवस’ के रूप में मनाया गया।

विभाजन के समय बंगाल में अधिकांशतः जमीन के मालिक हिन्दू थे और मुस्लिमो का काम खेती करना था। अंग्रेजों द्वारा इस समय का लाभ उठाते हुए उन्होंने मुस्लिम किसानों में साम्पदुायिकता का जहर बोया। जिसके कारण मुस्लिम किसान इस आन्दोलन से अलग हो गये तथा ढाका के नवाब सलीमुल्लाह ने भी इस कार्य में अंग्रेजों का साथ दिया, केनल बारीसाल ही इसका अपवाद रहा। अतः ऐसा माना जाता है कि यह आन्दोलन बंगाल को प्रभावित नहीं कर पाया।

इसका परिणाम यह हुआ कि जहाँ एकतरफ पश्चिम बंगाल के किसान इस आन्दोलन में शामिल हुए तो दूसरीतरफ पूर्व बंगाल के लोग इस आन्दोलन से दूर रहे। स्वदेशी और बहिष्कार आन्दोलन किसी एक वर्ग का आन्दोलन नहों था। यह राष्ट्रीय आन्दोलन था तथा इस आन्दोलन में भाग लेनेवाले किसानों, स्त्रियों, विद्यार्थियों तथा मजदूरों ने काफी आगे बढ़कर इस आन्दोलन में भाग लिया। उग्रवादियों द्वारा गाँवो में भी ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का प्रचार किया गया।

आन्दोलनकारियों का कहना था कि ‘हक भला इन चारों को अपना शासक कैसे मान संकते हैं जो हमारे देश में आकरघरेलू उद्योगों को नष्ट कर दिये हैं। हम इन विदेशियों को अपना शासक नहीं मानते हैं जो नित्य नये-नये कर का बोझ हमपर लादते रहने हैं। इस विभाजन के विरूद्ध न केवल बंगाल में बल्कि पूरे भारतवर्ष में सरकार के विरूद्ध तीव्र शेष व्यक्त किया गया’।

इस आन्दोलन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कलकत्ता के कई स्थानों पर धरना और प्रदर्शन की। ब्रिटिश सरकार आन्दोलनकारियों से भयभीत हो गयी और सोचा कि भारतीय जनता की उपेक्षा कर बंगाल का विभाजन सही नहीं है। अन्त में भारत सम्राट जार्ज पंचम ने सन 1911 ई० में बंग-भंग कानून रद्द कर दिया। यह भारतीयों का प्रथम संयुक्त आन्दोलन था जिसने राष्ट्रीय आन्दोलन की पृष्ठभूमि तैयार की।

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प्रश्न 10.
बारदोली एवं एका आन्दोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
एका आन्दोलन : एका आन्दोलन में शामिल होने वाले को शपथ लेना पड़ता था जो इस प्रकार है –

  1. किसी प्रकार के अपराध में संलग्न नहीं रहना होगा।
  2. सरकार को दिया जानेवाले लगान उचित होगा, किसी भी दशा में समय पर लगान दिया जायेगा।
  3. पचायत का निर्णय सर्वमान्य होगा।
  4. अपनी भृमि को छोड़कर बेगारी नहीं करेंगे।

यह आन्दोलन पूर्व के किसान आन्दोलनों से भिन्न था क्योंकि किसान आन्दोलन में केवल किसानों द्वारा भाग लिया जाता था। परन्तु एका आन्दोलन में छोटे-छोटे किस्म के जमीदार भी हिस्सा लिये थे। जमीदारों द्वारा इस आन्दोलन में हिस्सा लेने का मुख्य कारण सरकार द्वारा लगानों की बढ़ोत्तरी थी जिसके कारण वे हमेशा पेरशान रहते थे।

किन्तु सरकार ने अपने दमन चक्र के बल पर इस आन्दोलन को मार्च 1922 ई० में समाप्त कर दिया अत: एका आन्दोलन पूरी तरह सफल नही हो सका । इस आन्दोलन का मुख्य केन्द्र सुल्तानपुर, सीतापुर, बाराबंकी, बहराइच तथा हरदोई थे। इस आन्दोलन से जुड़ेप्रमुख नेता निम्न वर्ग के थे। इस असंगठित आन्दोलन को ब्रिटिश सरकार शक्ति के बल पर दबा दिया।

बारदोली आन्दोलन : 1922 ई० के बाद गुजरात में सूरत जिले के बारदौली क्षेत्र राजनीतिक क्रियालाप का केन्द्र बना हुआ था। देश में साइमन कमीशन का पूरी ताकत के साथ विरोध चल रहा था तथा दूसरी तरफ बारदौली के किसानों द्वारा लगान वृद्धि के खिलाफ सघर्ष हो रहा था। 1926-1927 ई० में कपास के मूल्यों में अत्यधिक गिरावट के बावजूद भी बारदौली के किसानों की लगान में सरकार ने 22% वृद्धि की घोषणा की थी। किसान अपनी जमीन तक बेचने को तैयार थे, परन्तु मन्दी क कारण जमीन का उचित दाम नहीं मिल रहा था।

कांग्रेस ने इस अवस्था में वल्लभ भाई पटेल को इस लगान वृद्धि के प्रतिवाद में नेतृत्व प्रदान करने का अनुरोध किया, अत: इस सिलसिले में 4 फरवरी 1928 ई० को सरदार वल्लभ भाई पटेल बारदौली गये। निर्णय लिया जबतक सरकार किसी निष्पक्ष न्यायधिकरण का गठन नहीं कर लेती। इस तरह से बारदौली सत्याप्रह का आरम्भ हुआ। सत्याग्रह में साथ देने के लिये गाँधीजी भी बारदौली पहुँचे। इस सत्याग्रह आन्दोलन में कस्तूवा गाँधी, मनी बेन पटेल, मीठ बेन शारदा बेन एवं भक्ति बा आदि अन्य महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

किसान आन्दोलन के रूप में बारदौली सत्याग्रह की एक अहम भूमिका रही है। यह सत्याग्रह या आन्दोलन ब्रिटिश सरकार के विरांध में किया गया था। क्योंकि ब्रिटिश सरकार बारदौली के किसानों से मनमाऩा राजस्व या भूमि कर (Tax) वसूला करती थी। यह घटना गुजरात स्थित सूरत जिले के बारदौली इलाके की है जहाँ सन् 1928 के पहले से ही ब्रिटिश या अंग्रेजी प्रशासन किसानों से मनमाना भूमि कर वसूल रही थी।

यह सत्याग्रह या आन्दोलन आग की भाँति तीव्र रूप ले लिया था जिसकी वजह से पटेल जी को अंग्रेजी सरकार गिरफ्तार करने के लिए आतूर हो गयी। परन्तु अगस्त, 1928 ई० में गाँधीजी बारदौली पहुँचे और उन्होंने घोषणा किया कि यदि सरकार पटेल जी को गिरफ्तार करती है तो वे स्वयं इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। अंत में सरकार ने एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल (Maxwell) से इस मामले की जांच करवाई जाय।

उसने भी लगान की वृद्धि को अनुचित बताया। अत: लगान या कर घटा दिया गया। इस प्रकार अहिंसात्मक कृषक या किसान आन्दोलन के रूप में बारदौली किसान सत्याग्रह आन्दोलन सफल हुआ इस सफलता का मुख्य पात्र श्री बल्लभ भाई पटेल और गाँधीजी थे। बारदौली के किसान महिलाओं ने इस सफलता से प्रसत्र होकर पटेल जी को ‘सरदार’ नाम की उपाधि दी। तब से श्री बल्लभ भाई पटेल सरदार बल्लभ भाई पटेल कहे जाने लगे।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 3 प्रतिरोध और आन्दोलन

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प्रतिरोध और आन्दोलन Class 10 WBBSE MCQ Questions

A. बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
तीतूमीर का वास्तविक नाम था –
(क) चिराग अली
(ख) हैदर अली
(ग) मीर निसार अली
(घ) तोराप अली
उत्तर :
(ग) मीर निसार अली

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प्रश्न 2.
संन्यासी-फकीर विद्रोह की मुख्य नेत्री थी –
(क) रानी कर्णावती
(ख) रानी शिरोमणि
(ग) देवी चौधरानी
(घ) रानी दुर्गावनी
उत्तर :
(ग) देवी चौधरानी

प्रश्न 3.
कोल विद्रोह (1831-32 ई०) में हुआ था –
(क) मेदिनीपुर में
(ख) झाड़ग्राम में
(ग) छोटानागपुर में
(घ) रांची में
उत्तर :
(ग) छोटानागपुर में

प्रश्न 4.
भारत में प्रथम जंगल नियम पारित हुआ था –
(क) 1859 ई० में
(ख) 1860 ई० में
(ग) 1865 ई० में
(घ) 1878 ई० में
उत्तर :
(ग) 1865 ई० में

प्रश्न 5.
सुई मुण्डा नेता थे –
(क) चुआड़ विद्रोह
(ख) कोल विद्रोह
(ग) सन्थाल हूल विद्रोह
(घ) मुण्डा विद्रोह
उत्तर :
(ख) कोल विद्रोह

प्रश्न 6.
बारासात विद्रोह का नेतृत्व किया था :
(क) दूधू मियाँ
(ख) दिगम्बर विश्वास
(ग) तीतूमीर
(घ) बिरसा मुंडा
उत्तर :
(ग) तीतूमीर।

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प्रश्न 7.
इनमें से किस विद्रोह का सम्बन्ध देवी चौधुरानी से है ?
(क) फकीर विद्रोह
(ख) पागलपन्थी विद्रोह
(ग) पावना विद्रोह
(घ) सन्यासी विद्रोह
उत्तर :
(घ) सन्यासी विद्रोह

प्रश्न 8.
मोपला विद्रोह भारत के किस क्षेत्र में हुआ था ?
(क) मालावार क्षेत्र
(ख) जंगल महल क्षेत्र
(ग) खान प्रदेश
(घ) अवध क्षेत्र
उत्तर :
(क) मालावार क्षेत्र

प्रश्न 9.
बंगाल में वहाबी आन्दोलन का नेता था ?
या, बंगाल में वहाबी आन्दोलन की शुरूआत
(क) मजनू शाह
(ख) टीपू शाह
(ग) तीतूमीर
के द्वारा हुई थी।
उत्तर :
(ग) तीतूमीर

प्रश्न 10.
‘काटोंग बाबा काटोंग’ किस विद्रोह का नारा था ?
(क) मुण्डा विद्रोह
(ख) संथाल विद्रोह
(ग) कोल विद्रोह
(घ) चुआड़ विद्रोह
उत्तर :
(ग) कोल विद्रोह

प्रश्न 11.
बाबा तिलक माँझी का सम्बन्ध किस विद्रोह से है ?
(क) भील विद्रोह
(ख) रम्पा विद्रोह
(ग) मुण्डा विद्रोह
(घ) संथाल विद्रोह
उत्तर :
(घ) संथाल विद्रोह

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प्रश्न 12.
केशव चन्द्र सेन द्वारा किसकी सहायता के लिए ‘संगत सभा’ की स्थापना की गई थी ?
(क) अनाथ बच्चों के लिए
(ख) मझदूरों की सहाबता के लिए
(ग) विधवा स्त्रियों के लिए
(घ) सुखा राहत के लिए
उत्तर :
(ग) विधवा स्त्रियों के लिए

प्रश्न 13.
फूलों और झानों जुड़वा बहनों ने किस विद्रोह का नेतृत्व किया था ?
(क) संथाल विद्रोह
(ख) भील विद्रोह
(ग) चुआड़ विद्रोह
(घ) मोपला विद्रोह
उत्तर :
(क) संथाल विद्रोह

प्रश्न 14.
1825 ई० में खान देश के भील विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था ?
(क) चितर सिंह
(ख) सेवरम
(ग) टीपू शाह
(घ) तीरथ सिंह
उत्तर :
(ख) सेवरम

प्रश्न 15.
1882 ई० बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित उपन्यास ‘आनन्द मठ’ किस विद्रोह की घटना पर आधारित है ?
(क) पागलपन्थी विद्रोह
(ख) चुआड़ विद्रोह
(ग) संयासी विद्रोह
(घ) रंगपुर विद्रोह
उत्तर :
(ग) संयासी विद्रोह

प्रश्न 16.
कोल विद्रोह का तत्कालिक कारण था –
(क) संधालों से रेल मार्ग निर्माण में बेगारी कराना
(ख) वन सुरक्षा कानून का लागू होना
(ग) आदिवासी महिलाओं के साथ की जा रही बदसलुकी(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) आदिवासी महिलाओं के साथ की जा रही बदसलुकी

प्रश्न 17.
किसने ोेषणा किया की दिकुओं से अब हमारी लड़ाई होगी और उनके खून से जमीन लाल झण्डे का तरह लाल होगी?
(क) जोआ भगत
(ख) भगीरथ मांझी
(ग) सुई मुण्डा
(घ) बिरसा मुण्डा
उत्तर :
(घ) बिरसा मुण्डा

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प्रश्न 18.
‘तीनकठिया व्यवस्था’ का सम्बन्य किस आन्दोलन से है ?
(क) तिभागा आन्दोलन
(ख) संथाल विद्रोह
(ग) नील विद्रोह
(घ) पाइक विद्रोह
उत्तर :
(ग) नील विद्रोह

प्रश्न 19.
नील किसानों की दुर्दशा का सर्वप्रथम उल्लेख किस समाचार पत्र ने किया था ?
(क) संजीवनी
(ख) संदेश
(ग) सोम प्रकाश
(घ) हिन्दू पेट्रियाट
उत्तर :
(घ) हिन्दू पेट्रियाट

प्रश्न 20.
घाटशिला का जमींदार जगत्नाथ सिंह किस विद्रोह से सम्बंधित थे ?
(क) पाइक विद्रोह
(ख) पावना विद्रोह
(ग) चुआड़ विद्रोह
(घ) रम्पा विद्रोह
उत्तर :
(ग) चुआड़ विद्रोह

प्रश्न 21.
वहाबी आन्दोलन का प्रमुख केन्द्र था –
(क) पटना
(ख) बारासात
(ग) सिधाना
(घ) उक्त सभी
उत्तर :
(घ) उक्त सभी

प्रश्न 22.
औपनिवेशिक वन अधिनियम लागू हुआ था :
(क) 1860 ई० में
(ख) 1865 ई० में
(ग) 1870 ई० में
(घ) 1866 ई० में
उत्तर :
(ख) 1865 ई० में।

प्रश्न 23.
मजनूँशाह जिस विद्रोह के नेता थे, वह विद्रोह था –
(क) पावना विद्रोह
(ख) संथाल विद्रोह
(ग) महाविद्रोह
(घ) फकीर विद्रोह
उत्तर :
(घ) फकीर विद्रोह।

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प्रश्न 24.
किसने खुद को ‘धरती बाबा’ घोषित किया था ?
(क) बिरसा मुण्डा
(ख) सिद्धू
(ग) कानू
(घ) भैरव
उत्तर :
(क) बिरसा मुण्डा।

प्रश्न 25.
“पागल पंथी विद्रोह” का उत्पत्ति केन्द्र था –
(क) फरीद्युर
(ख) रंगपुर
(ग) मैमनसिंह
(घ) पावना
उत्तर :
(ग) मैमनसिंह।

प्रश्न 26.
“संसार का वास्तविक मालिक अल्लाह है।” – किसने कहा है ?
अथवा
जमीन अल्लाह का दान है ………. ने कहा था –
(क) शरीयत उल्लाह
(ख) द्घूमियाँ
(ग) तितूमीर
(घ) सैयद अहमंद
उत्तर :
(क) शरीयत उल्लाह।

प्रश्न 27.
‘कोल विद्रोह’ के नेता कौन थे ?
(क) बुद्धा भगत
(ख) सुई मुन्डा
(ग) बिरसा मुण्डा
(घ) भवानी पाठक
उत्तर :
(क) बुद्धा भगत।

प्रश्न 28.
‘बंगाल के नाना साहेब’ की उपाधि किसे दी गई है ?
(क) रामरतन मल्लिक
(ख) हरीश्चन्द्र मुखोपाध्याय
(ग) दिगम्बर विश्वास
(घ) दीनबंधु मित्र
उत्तर :
(क) रामरतन मल्लिक।

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प्रश्न 29.
द ग्रेट रिवेलियन (The Great Rebellion) के लेखक हैं –
(क) रजनी पाम दत्ता
(ख) तालमोज खाल्देन
(ग) पी॰ सी॰ जोशी
(घ) चार्ल्स रेक्स
उत्तर :
(क) रजनी पाम दत्ता।

प्रश्न 30.
संथाल विद्रोह का नेता कौन था ?
(क) दुर्जन सिह
(ख) भवानी पाठक
(ग) सिधू
(घ) बिरसा मुण्डा
उत्तर :
(ग) सिधू।

प्रश्न 31.
‘दामिन-ए-कोह’ शब्द का अर्थ है –
(क) भूमि का किनारा
(ख) सागर का किनारा
(ग) पहाड़ी का किनारा
(घ) जंगल का किनारा
उत्तर :
(घ) जंगल का किनारा।

प्रश्न 32.
कौन-सा विद्रोह भगनाडिही में हुआ था ?
(क) भील विद्रोह
(ख) रंगपुर विद्रोह
(ग) मोपला विद्रोह
(घ) संथाल विद्रोह
उत्तर :
(घ) संथाल विद्रोह।

प्रश्न 33.
मुण्डा विद्रोह का नेता था :
(क) बिरसा मुण्डा
(ख) दुर्जन अली
(ग) मुशा मुण्डा
(घ) डिकू मुण्डा
उत्तर :
(क) बिरसा मुण्डा।

प्रश्न 34.
सन् 1857 ई० की क्रान्ति में अवध से विद्रोह का नेतृत्व किया –
(क) लक्ष्मीबाई
(ख) नानासाहब
(ग) बेगम हजरत महल
(घ) ताँत्या टोपे।
उत्तर :
(ग) बेगम हजरत महल।

प्रश्न 35.
“गदर पार्टी” का गठन किया था –
(क) सावरकर
(ख) लाला हरदयाल
(ग) लाला लाजपत राय
(घ) इनमें से किसी ने नह
उत्तर :
(ख) लाला हरदयाल।

प्रश्न 36.
चुआड़ का अर्थ होता है –
(क) उच्च जाति के लोग
(ख) निम्न जाति के लोग
(ग) आदिवासी
(घ) असभ्य लोग
उत्तर :
(घ) असभ्य लोग

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प्रश्न 37.
उलगुलान शब्द सम्बन्धित है –
(क) कोल विद्रोह से
(ख) चुआड़ विद्रोह से
(ग) संथाल विद्रोह से
(घ) मुंडा विद्रोह से
उत्तर :
(घ) मुंडा विद्रोह से

प्रश्न 38.
‘एका’ आन्दोलन कहाँ हुआ था ?
(क) संयुक्त राज्य में
(ख) मध्य राज्यों में
(ग) बिहार में
(घ) बंगाल में
उत्तर :
(क) संयुक्त राज्य में।

प्रश्न 39.
द्वितीय चुआड़ विद्रोह का नेता कौन था ?
(क) सिथू
(ख) दुर्जन सिंह
(ग) विरसा मुण्डा
(घ) मुशा साह
उत्तर :
(ख) दुर्जन सिंह।

प्रश्न 40.
नील आयोग का गठन हुआ था :
(क) 1860 ई० मे
(ख) 1865 ई० में
(ग) 1870 ई० में
(घ) 1875 ई० में
उत्तर :
(क) 1860 ई० में।

प्रश्न 41.
1855 ई० के किस दिन संथाल विद्रोह हुआ था ?
(क) 20 जून को
(ख) 23 जून को
(ग) 28 जून को
(घ) 30 जून को
उत्तर :
(घ) 30 जून को।

प्रश्न 42.
आदिवासी लोगों का सम्बन्ध इनमें से किस विद्रोह से नहीं है ?
(क) चुआड़ विद्रोह
(ख) कोल विद्रोह
(ग) सन्धाल विद्रोह
(घ) पावना विद्रोह
उत्तर :
(घ) पावना विद्रोह।

प्रश्न 43.
संन्यासी विद्रोह का नेता था :
(क) सिधू
(ख) मुशा अली
(ग) भवानी पाठक
(घ) तीतूमीर
उत्तर :
(ग) भवानी पाठक।

प्रश्न 44.
अचल सिंह नेता थे –
(क) कोल विद्रोह
(ख) संथाल विद्रोह
(ग) नील विद्रोह
(घ) चुआड़ विद्रोह
उत्तर :
(घ) चुआड़ विद्रोह।

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प्रश्न 45.
फराजी विद्रोह के संस्थापक थे –
(क) शरीयतुल्लाह
(ख) तीतूमीर
(ग) दुद्दूमियाँ
(घ) सैयद अहमद
उत्तर :
(क) शरीयतुल्लाह।

प्रश्न 46.
रंगपुर विद्रोह के नेता थे –
(क) शिवराम
(ख) नुरूलुद्दीन
(ग) मजनु शाह
(घ) भवानी पाठक
उत्तर :
(ख) नुरूलुद्दीन।

प्रश्न 47.
रम्मा विद्रोह को नेतुत्व किसने किया था ?
(क) अलुरी सीताराम राजू
(ख) सिंगार वेल्लु चेट्टियार
(ग) बाबा रामबन्द्र
(घ) मदारी पासी
उत्तर :
(क) अलुरी सीताराम राजू।

प्रश्न 48.
चुआड़ विद्रोह के प्रमुख नेता थे –
(क) बुदु भगत
(ख) दुर्जन सिंह
(ग) केशव भगत
(घ) नरेन्द्र शाह
उत्तर :
(ख) दुर्जन सिंह

प्रश्न 49.
नील विद्रोह कब हुआ था ?
(क) 1857 ई० में
(ख) 1858 ई० में
(ग) 1859 ई० में
(घ) 1861 ई० में
उत्तर :
(ग) 1859 ई० में

प्रश्न 50.
चुआड़ विद्रोह हुआ था-
(क) 1750-51 ई० में
(ख) 1800 ईं० में
(ग) 1798-99 ई० में
(घ) 1801 ई० में
उत्तर :
(ग) 1798-99 ई० मे

प्रश्न 51.
संथाल विद्रोह कब हुआ था ?
(क) 1750-51 ई० में
(ख) 1855 ई० में
(ग) 1850 ई० में
(घ) 1860 ई० में
उत्तर :
(ख) 1855 ई० में

प्रश्न 52.
बुद्ध भगत किस विद्रोह का नेता था ?
(क) चुआर विद्रोह का
(ख) संथाल विद्रोह का
(ग) कोल विद्रोह का
(घ) संन्यासी विद्रोह का
उत्तर :
(ग) कोल विद्रोह का

प्रश्न 53.
मुण्डा विद्रोह कब हुआ ?
(क) 1800 ई० में
(ख) 1850 ई० में
(ग) 1870 ई० में
(घ) 1900 ई० में
उत्तर :
(घ) 1900 ई० में।

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प्रश्न 54.
भील विद्रोह कहाँ हुआ था ?
(क) बंगाल में
(ख) बिहार में
(ग) गुजरात में
(घ) महाराष्ट्र में
उत्तर :
(ग) गुजरात में।

प्रश्न 55.
कोल विद्रोह कब आरम्भ हुआ था ?
(क) 1831 ई० में
(ख) 1835 ई० में
(ग) 1840 ई० में
(घ) 1848 ई० में
उत्तर :
(क) 1831 ई० में

प्रश्न 56.
बाबा तिलक माँझी के नेतृत्व में संथाल विद्रोह हुआ था-
(क) 1784 ई० में
(ख) 1793 ई० में
(ग) 1790 ई० में
(घ) 1799 ई० में
उत्तर :
(क) 1784 ई० में।

प्रश्न 57.
बंगाल में स्थायी बन्दोवस्त का प्रवर्तक कौन था ?
(क) लॉर्ड हेस्टिंग्स
(ख) लॉर्ड वेलेजली
(ग) लॉर्ड कार्नवालिस
(घ) लॉर्ड रिपन
उत्तर :
(ग) लॉर्ड कार्नवालिस

प्रश्न 58.
राजस्थान में भील विद्रोह कब हुआ था ?
(क) 1820 ई० में
(ख) 1821 ई० में
(ग) 1825 ई० में
(घ) 1830 ई० में
उत्तर :
(ख) 1821 ई० में

प्रश्न 59.
फराजी आन्दोलन था-
(क) कृषक आन्दोलन
(ख) मजदूर आन्दोलन
(ग) धार्मिक आन्दोलन
(घ) सामाजिक आन्दोलन
उत्तर :
(ग) धार्मिक आन्दोलन

प्रश्न 60.
वहाबी आन्दोलन का प्रवर्तक था –
(क) अब्दुल वहाब
(ख) सैख्यद अहमद बरेलवी
(ग) वली अल्लाह
(घ) तीतूमीर
उत्तर :
(क) अब्दुल वहाब

प्रश्न 61.
बंगाल में संन्यासी विद्रोह हुआ –
(क) 1760 ई० में
(ख) 1770 ई० में
(ग) 1780 ई० में
(घ) 1790 ई० में
उत्तर :
(ख) 1770 ई० में।

प्रश्न 62.
पागलपंधी विद्रोह का प्रथम चरण का समय कब से कब तक था ?
(क) 1820-1825 ई तक
(ख) 1822-1827 ई तक
(ग) 1825-1827 ई० तक
(घ) 1825-1829 ई० तक
उत्तर :
(ग) 1825-1827 ई० तक।

प्रश्न 63.
मेघालय में खासियों के विद्रोह का नेतुत्व किया था-
(क) सिद्धू-कानू
(ख) बिरसा मुण्डा
(ग) तीरत सिंह
(घ) सीता राजू
उत्तर :
(ग) तीरत सिंह

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प्रश्न 64.
संथाल विद्रोह कब से कब तक चला ?
(क) 1851-52 ई० तक
(ख) 1852-53 ई० तक
(ग) 1854-55 ई० तक
(घ) 1855-56 ई० तक
उत्तर :
(घ) 1855-56 ई० तक

प्रश्न 65.
छोटानागपुर में काश्तकारी अधिनियम पारित हुआ –
(क) 1899 ई० में
(ख) 1900 ई० में
(ग) 1908 ई० में
(घ) 1901 ई० में
उत्तर :
(ग) 1908 ई० में।

प्रश्न 66.
पधिमी तट के खान देश जिले में भील नामक आदिवासी द्वारा विद्रोह हुआ –
(क) 1810-20 ई० तक
(ख) 1811-21 ई० तक
(ग) 1812-22 ई० तक
(घ) 1812-19 ई० तक
उत्तर :
(घ) 1812-19 ई० तक

प्रश्न 67.
हाजी शरीयत उल्ला ने किस धार्मिक सम्रदाय की स्थापना की थी ?
(क) वहाबी
(ख) फराजी
(ग) सूफी
(घ) भक्ति
उत्तर :
(ख) फराजी

प्रश्न 68.
कृषक राहत अधिनियम कब पारित हुआ था ?
(क) 1870 ई० में
(ख) 1872 ई० में
(ग) 1875 ई० में
(घ) 1880 ई० में
उत्तर :
(ग) 1875 ई० में

प्रश्न 69.
रम्पाओं (रम्पा) का विद्रोह कब हुआ था ?
(क) 1879 ई० में
(ख) 1880 ई० में
(ग) 1881 ई० में
(घ) 1882 ई० में
उत्तर :
(क) 1879 ई०

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प्रश्न 70.
बस्तर का विद्रोह कब हुआ था ?
(क) 1900 ई० में
(घ) 1910 ई० में
(ग) 1920 ई० में
(घ) 1930 ई० में
उत्तर :
(ख) 1910 ई०

प्रश्न 71.
बंगाल में ब्रिटिश प्रभुत्व की स्थापना हुई –
(क) 1557 ई० में
(ख) 1657 ई० में
(ग) 1757 ई० में
(घ) 1857 ई० में
उत्तर :
(ग) 1757 ई० में

प्रश्न 72.
सन् 1855 ई० में संथालों ने किस अंग्रेज कमांडर को हराया ?
(क) कैप्टन नेक फेविले
(ख) लेफ्टिनेंट बास्टीन
(ग) मेजर बरो
(घ) कर्नल ह्वाइट
उत्तर :
(ग) मेजर बरो

प्रश्न 73.
‘हो’ विद्रोह हुआ –
(क) 1620-21 के दौरान
(ख) 1720-21 के दौरान
(ग) 1820-21 के दौरान
(घ) 1920-21 के दौरान
उत्तर :
(ग) 1820-21 के दौरान

प्रश्न 74.
1908 के ‘छोटानागपुर काश्त अधिनियम’ ने रोक लगाई –
(क) वन-उत्पाद के स्वतंत्र उपयोग पर
(ख) वनों को जलाने पर
(ग) बंधुया मजदूरी पर
(घ) खूंटकटी भूमि व्यवस्था पर
उत्तर :
(ग) बंधुया मजदूरी पर

प्रश्न 75.
मानव बलि प्रथा निषेध किये जाने के कारण अंग्रेजों के विरुद्ध विरोध करने वाली जनजाति का नाम बताएँ –
(क) कूकी
(ख) खोंड
(ग) उरांव
(घ) नाइकदा
उत्तर :
(ख) खोंड

प्रश्न 76.
महाराष्ट्र में ‘रामोसी कृषक जत्था’ किसने स्थापित की थी ?
(क) न्यायमूर्ति राणाड़े
(ख) गोपाल कृष्ण गोखले
(ग) वासुदेव बलवंत फड़के
(घ) ज्योतिबा फूले
उत्तर :
(ग) वासुदेव बलवंत फड़के

प्रश्न 77.
छोटानागपुर जनजाति विद्रोह कब हुआ ?
(क) 1808-09 ई० में
(ख) 1820 ई० में
(ग) 1858 ई० में
(घ) 1829 ई० में
उत्तर :
(ख) 1820 ई० में।

प्रश्न 78.
‘उलगुलान’ (महाविद्रोह) से कौन जुड़ा था ?
(क) संथाल
(ख) कच्छा नागा
(ग) कोल
(घ) वीरसा मुण्डा
उत्तर :
(घ) वीरसा मुण्डा

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प्रश्न 79.
खैरवार आदिवासी आन्दोलन कब हुआ ?
(क) 1860 ई० में
(ख) 1874 ई० में
(ग) 1870 ई० में
(घ) 1861 ई० में
उत्तर :
(ख) 1874 ई० में।

प्रश्न 80.
पागलपंथी विद्रोह की प्रकृति थी –
(क) किसान आन्दोलन
(ख) धार्मिक आन्दोलन
(ग) कर सुधार आन्दोलन
(घ) अर्द्ध धार्मिक आन्दोलन
उत्तर :
(घ) अर्द्ध धार्मिक आन्दोलन।

प्रश्न 81.
वर्ष 1765 में दीवानी प्रदान किये जाने के बाद ब्रिटिश सबसे पहले निम्नलिखित में से किस पर्वतीय जनजाति के सम्पर्क में आए ?
(क) गारो
(ख) खासी
(ग) कूकी
(घ) टिप्पराह
उत्तर :
(ख) खासी

प्रश्न 82.
किस कृषक विद्रोह के नेताओं ने यह नारा दिया- ‘हम महारानी और सिर्फ महारानी की रैयत होना चाहते हैं’ ?
(क) पावना विद्रोह
(ख) दक्कन विद्रोह
(ग) चम्पारण का नील विद्रोह
(घ) नील विद्रोह
उत्तर :
(क) पावना विद्रोह।

प्रश्न 83.
किस प्रदेश में ब्रिटिश के विरुद्ध वीरसा मुण्डा विद्रोह का संचलन रहा था ?
(क) पंजाब
(ख) छोटानागपुर
(ग) तराई
(घ) मणिपुर
उत्तर :
(ख) छोटानागपुर

प्रश्न 84.
‘दादनी प्रथा’ (Dadani System) का संबंध है-
(क) संन्यासी विद्रोह से
(ख) फराजी आन्दोलन से
(ग) नील विद्रोह से
(घ) पागलपंथी विद्रोह से
उत्तर :
(ग) नील विद्रोह से।

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प्रश्न 85.
‘नील दर्पण’ (Nil Darpan) नाटक का अंग्रेजी में अनुवाद किया –
(क) माइकेल मघुसूटन दत्त ने(ख) दीनबंधु मित्र ने
(ग) हरिश्न्द्र मुखर्जी ने
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) माइकेल मधुसूदन दत्त ने।

प्रश्न 86.
पागलपंथी विद्रोह के नेता थे-
(क) टीपू
(ख) मजनूनशाह
(ग) चिराग अली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) टीपू

प्रश्न 87.
सैबद अहमद कहाँ के थे ?
(क) बिहार के
(ख) भागलपुर के
(ग) रायबरेली के
(घ) पटना के
उत्तर :
(ग) रायबरेली के।

प्रश्न 88.
पावना में किसान विद्रोह कब हुआ ?
(क) 1840 ई० में
(ख) 1850 ई० में
(ग) 1865 ई० में
(घ) 1870 ई० में
उत्तर :
(घ) 1870 ई० में

प्रश्न 89.
कहाँ के किसान नील की कृषि के कारण पीड़ित थे ?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) बंगाल
(ग) महाराष्ट्र
(घ) गुजरात
उत्तर :
(ख) बंगाल

प्रश्न 90.
तारीख-ए-मुहम्मदिया के नेता थे –
(क) दुधू मियां
(ख) अब्दुल वहाब
(ग) टीपू शाह
(घ) सैयद अहमद बरेलव
उत्तर :
(घ) सैयद अहमद बरेलवी

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प्रश्न 91.
फराजी आन्दोलन के जन्मदाता थे –
(क) हाजी शरीयतुल्लाह
(ख) दुधू मियां
(ग) अब्दुल वहाब
(घ) तीतूमीर
उत्तर :
(क) हाजी शरीयतुल्लाह

प्रश्न 92.
तीतूमीर ने अपना बंस का किला कहाँ बनवाया था ?
(क) नारकेलेक्ड़िया (बारासात) में
(ख) सुलपुर में
(ग) फरीदपुर में
(घ) हैदरपुर में
उत्तर :
(क) नारकेलबेड़िया (बारासात) में

प्रश्न 93.
फराजी का क्या अर्थ है –
(क) नास्तिक
(ख) अल्लाह का सेवक
(ग) परिश्रम करनेवाला
(घ) सुस्त व्यक्ति
उत्तर :
(ख) अल्लाह का सेवक

प्रश्न 94.
‘दारुल उल हर्ब’ का अर्थ होता है –
(क) अल्लाह की भूमि
(ख) मित्रों की भूमि
(ग) दुश्मनों की भूमि
(घ) किसी की नहीं
उत्तर :
(ग) दुश्मनों की भूमि

प्रश्न 95.
अरब में वहाबी धर्म सुखार किसने शुरू किया ?
(क) मजनू शाह
(ख) अब्दुल बहाव
(ग) तीतूमीर
(घ) दुधू मियां
उत्तर :
(ख) अब्दुल वहाब।

प्रश्न 96.
सबसे अधिक दिनों तक चलने वाला विद्रोह था –
(क) मुण्डा विद्रोह
(ख) संद्यदिहिलोह (अकीर हिलेह)
(ग) रंगपुर विद्रोह
(घ) भील विद्रोह
उत्तर :
(ख) संन्यासी विद्रोह (फकीर विद्रोह)

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प्रश्न 97.
आदिवासी लोग किस प्रकार की कृषि करते थे ?
(क) आधुनिक कृषि
(ख) परम्परागत कृषि
(ग) झूम कृषि
(घ) व्यापारिक कृषि
उत्तर :
(ग) झूम कृषि

प्रश्न 98.
किस ऐक्ट के द्वारा किसानों को नील की खेती के लिए बाध्य किया गया ?
(क) रेग्यूलेशन V एवं VII
(ख) रेग्यूलेशन – XI
(ग) रेग्यूलेशन – IX
(घ) रेग्यूलेशन – ।
उत्तर :
(क) रेग्यूलेशन V एवं VII

प्रश्न 99.
फराजी नामक धार्मिक सम्पदाय की स्थापना कब हुई ?
(क) 1801 ई० में
(ख) 1802 ई० में
(ग) 1803 ई० में
(घ) 1804 ई० में
उत्तर :
(घ) 1804 ई० में

प्रश्न 100.
बंगाल में अकाल कब पड़ा था ?
(क) 1772 ई० में
(ख) 1771 ई० में
(ग) 1770 ई० में
(घ) 1780 ई० में
उत्तर :
(ग) 1770 ई० में

प्रश्न 101.
‘द संथाल इन्स्योरेक्शन’ नामक पुस्तक किसने लिखा ?’
(क) डॉ॰ काली किंकर दत्ता
(ख) आर० सी॰ मजुमदार
(ग) एस० सी॰ राय
(घ) बी० बी० राय
उत्तर :
(क) डॉ॰ काली किंकर दत्त

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प्रश्न 102.
कृषक राहत अधिनियम कब पारित हुआ था ?
(क) 1870 ई० में
(ख) 1872 ई० में
(ग) 1875 ई० में
(घ) 1880 ई० में
उत्तर :
(ग) 1875 ई० में

प्रश्न 103.
1922 ई० में किसके नेतृत्व में वन कानून लाया गया –
(क) श्यामगंजन
(ख) दुर्जल सिंह
(ग) सीता राजू
(घ) जगत्राथ सिंह
उत्तर :
(ग) सीता राजू

प्रश्न 104.
पावना में लागू था –
(क) स्थाई बन्दोवस्त
(ख) महलवाड़ी व्यवस्था
(ग) सहायक संधि
(घ) रैयतवाड़ी
उत्तर :
(क) स्थाई बन्दोवस्त

प्रश्न 105.
चुआड़ विद्रोह का द्वितीय चरण माना जाता है-
(क) 1798-1799 ई० तक
(ख) 1799-1800 ई0 तक
(ग) 1797-1778 ई० तक
(घ) 1796-1798 ई0 तक
उत्तर :
(क) 1798-1799 ई० तक

प्रश्न 106.
रंगपुर के किसान ने किनके अत्याचारों से तंग आकर विद्रोह किया-
(क) कम्पनी के अत्याचारों से
(ख) जमींदार देवी सिंह के अत्याचारों से
(ग) किसानों के अत्याचारों से
(घ) नूरुद्दीन के अत्याचारों से
उत्तर :
(ख) जमींदार देवी सिंह के अत्याचारों से

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 mark)

1. बहावी का अर्थ है…………|
उत्तर : पुर्नजागरण

2. सैय्यद अहमद बरेलवी के ऊपर……….. का प्रभाव अधिक था।
उत्तर : दिल्ली के संत शाहवली उल्लाह एवं अरब के अब्दुल वहाब।

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3. भारत में ‘तारीख-ए-मुहम्मदिया’ आन्दोलन का प्रमुख केन्द्र…………था।
उत्तर : पटना।

4. ………… में वहाबियों और सिक्खों के बीच बालाकोट में भयकर युद्ध हुआ।
उत्तर : सन् 1831 ।

5. ………… भारत की प्राचीन आदिवासियों की एक जाति है, जो झारखण्ड के जंगल क्षेत्र में निवास करती है।
उत्तर : कोल।

6. कोलों के प्रमुख परम्परागत हधियार…………. थे।
उत्तर : तीर- धनुष, माले एवं कुल्हाड़ी

7. संथाली तीर-धनुष, कुल्हाड़ी एवं …………के साथ…………हुए जमींदारों तथा महाजनों के घरों को लुटते थे।
उत्तर : नगाड़ा, पीटते।

8. …………ने संथाल विद्रोह को स्वाधीनता संग्राम की संज्ञा दी है।
उत्तर : डॉ॰ रमेश बन्द्र मजुमदार।

9. मुण्डा विद्रोह में…………की भी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उत्तर : महिलाओं।

10. रंगपुर विद्रोह का दमन …………नामक स्थान पर पूर्ण रूप से हो गया।
उत्तर : पटग्राम।

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11. मेवाड़ में भील ………… लम्बे समय से वसूल करते आ रहे थे।
उत्तर : मोलाई एवं रखवाली।

12. बंगाल में वहाबी आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य …………लाना था।
उत्तर : मुस्लिम समाज में सुधार।

13. तीतूमीर का बारासात का विद्रोह …………में हुआ।
उत्तर : नारकेलबेरिया।

14. बंगाल में प्रमुख बुद्धिजीवियों,…………ने पाबना आन्दोलन का समर्थन किया।
उत्तर : बंकिमचन्द्र चटर्जी तथा आर०सी० दत्त।

15. नील विद्रोह का नेता………… थे।
उत्तर : रामरतन मल्लिक।

16. …………प्रमुख कथन एक नील काश्तकार हाजी मुल्ला की है।
उत्तर : ‘भीख माँग लूँगा परन्तु नील नहीं उगाऊँगा’ नामक।

17. 1857 ई० में भील विद्रोह के नेता भगोजी तथा…………थे।
उत्तर : काजल सिंह।

18. फकीर विद्रोह 1776 ई० से 1777 ई० तक………… में हुआ।
उत्तर : बंगाल।

19. फराजी आन्दोलन के धार्मिक नेता…………थे।
उत्तर : शरीयतुल्लाह।

20. वहाबी आन्दोलन को…………आन्दोलन भी कहा जाता है।
उत्तर : वल्लीउल्लाह।

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21. नील विद्रोह सर्वप्रथम बंगाल के ………………..जिले में हुआ था।
उत्तर : नदिया।

22. कोल विद्रोह के नेता……………….. थे।
उत्तर : बुद्ध भगत।

23. ………………..और……………….. संथाल विद्रोह के नेता थे।
उत्तर : सिद्धू कान्हू।

24. ……………….. ई० में बारासात विद्रोह हुआ था।
उत्तर : 1931 ई०।

25. ………………..ने आनन्द मठ लिखा।
उत्तर : बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय।

26. कोल लोग ………………..में निवास करते थे।
उत्तर : छोटानागपुर अंचल।

27. ‘दारूल-हर्व’ का अर्थ ………………..होता है।
उत्तर : काफिरों के देश।

28. ‘दारूल इस्लाम’ का अर्थ ………………..है।
उत्तर : मुसलमानों का देश।

29. हाजी शरीयत उल्लाह के बाद दूधू मियां ………………..के नेता बने।
उत्तर : फराजी आंदोलन।

30. ……………….. ने नील दर्पण नाटक की रचना की।
उत्तर : दीनबंधु मित्र।

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 mark)

1. फराजी एक प्राचीन जनजाति का नाम है।
उत्तर : False

2. मीर निसार अली ने बाँस के किले का निर्माण किया था।
उत्तर :True

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3. भारत में वहाबी आन्दोलन की शुरूआत शाह वलीउल्लाह ने की थी।
उत्तर : False

4. सिद्ध कोल विद्रोह के नेता थे।
उत्तर : False

5. बीरसा मुण्डा नील विद्रोह के नेता थे।
उत्तर : False

6. जोआ भगत चुआड़ विद्रोह के नेता थे।
उत्तर : False

7. बुद्धू भगत एवं केशव भगत चुआड़ विद्रोह के नेता थे।
उत्तर : False

8. संथाल विद्रोह के नेता सिद्धू-कानू को गिरफ्तार कर फाँसी दे दी गयी।
उत्तर : True

9. तीतूमीर ने फराजी आन्दोलन का नेतृत्व किया।
उत्तर : False

10. कोल जाति के लोगों का प्रधान पेशा कृषि था।
उत्तर : True

11. दामन-ए-कोह का अर्थ पहाड़ों का प्रस्तर प्रदेश है।
उत्तर : True

12. तीतूमीर का विद्रोह बारासात विद्रोह के नाम से जाना जाता है।
उत्तर : True

13. चुआड़ विद्रोह बिहार में हुआ।
उत्तर : False

14. रंगपुर विद्रोह के नेता बिरसा मुण्डा थे।
उत्तर : False

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15. फराजी शब्द का अर्थ अल्लाह (ईश्वर) का सेवक है ।
उत्तर : True

16. भील विद्रोह छोटानागपुर में हुआ।
उत्तर : False

17. वीरसा मुण्डा की मृत्यु चालीस वर्ष की आयु में हुई थी।
उत्तर : False

18. पाबना विद्रोह सन् 1850 में हुआ।
उत्तर : False

19. वीरसा मुण्डा के राजनीतिक गुरू आनन्द पाण्डे थे।
उत्तर : True

20. 1860 ई० में फराजी आन्दोलन का दमन कर दिया गया।
उत्तर : True

21. पागलपंथी विद्रोह के नेता इनायत अली थे।
Answer: False

22. संन्यासी और फकीर दोनों विद्रोह 40 वर्षों तक बंगाल में चलता रहा।
उत्तर : True

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 3 प्रतिरोध और आन्दोलन

23. ‘दारूल हर्ब’ का अर्थ ‘काफिरों का देश’ से है।
उत्तर : True

24. फकीर विद्रोह बिहार में चलाया गया।
उत्तर : False

25. ‘तारीख-ए-मुहम्मदिया’ का अर्थ ‘मुस्लिम समाज में पुनरुद्धार आन्दोलन’ से है।
उत्तर : True

26. ‘दादनी प्रथा’ का संबंध फराजी आन्दोलन से है।
उत्तर : False

27. नील की प्रमुख फैक्टरियाँ फरीदपुर, पावना, जैसोर तथा ढाका में थी।
उत्तर : True

28. 1856 ई० तक संथाल विद्रोह को कुचल दिया गया।
उत्तर : False

29. सेवारम के नेतृत्व में पुन: भील आन्दोलन 1831 ई० एवं 1840 ई० में हुए।
उत्तर : False

30. 1960 ई० तक वहाबी आन्दोलन का दमन कर दिया गया।
उत्तर : False

31. चुआड़ विद्रोह गैर जनजाति किसानों का विद्रोह था।
उत्तर : True

32. नील विद्रोह 1857 ई० में आरम्भ हुआ था।
उत्तर :True

33. नील दर्पण माइकेल मधुसूदन दत्त ने लिखा।
उत्तर : False

34. सिद्धू-कानू को गिरफ्तार कर आजीवन जेल की सजा दी गयी।
उत्तर : False

35. तीतूमीर ने फराजी आन्दोलन का नेतृत्व किया।
उत्तर : False

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 3 प्रतिरोध और आन्दोलन

36. नील विद्रोह की शुरूआत विष्णु चरण विश्वास और दिगम्बर विश्वास ने नदिया जिला के चौगच्वा गाँव में की थी।
उत्तर : True

निम्नलिखित कथनों की सही व्याख्या चुनकर लिखिए : (1 Mark)

प्रश्न 1.
कथन : अंग्रेजी सरकार ने अधिनियम III 1872 ई० में पास किया था।
व्याख्या 1 : इसका उद्देश्य हिन्दू, मुसलमान एवं ईसाई समाज को संगठित करना था।
व्याख्या 2 : इसका उद्देश्य जनसाधारण की आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक उन्नति करना था।
व्याख्या 3 : इस अधिनियम का उद्देश्य बालविवाह एवं बहुविवाह प्रथा को बन्द करना एवं विधवाविवाह को कानूनी सिद्ध करना।
उत्तर :
व्याख्या 3 : इस अधिनियम का उद्देश्य बालविवाह एवं बहुविवाह प्रथा को बन्द करना एवं विधवाविवाह को कानूनी सिद्ध करना।

प्रश्न 2.
कथन : ‘एका’ आन्दोलन का सूत्रपात उत्तर प्रदेश में हुआ था।
व्याख्या 1 : यह एक व्यक्तिगत आन्दोलन था।
व्याख्या 2 : यह एक किसान आन्दोलन था।
व्याख्या 3 : यह एक श्रमिक आन्दोलन था।
उत्तर :
व्याख्या 2 : यह एक किसान आन्दोलन था।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 3 प्रतिरोध और आन्दोलन

प्रश्न 3.
कथन : संथाल व कोल आदिवासी ‘दिकू’ लोगों से क्षुख्य थे -‘
व्याख्या 1 : ‘दिकू’ लोग आदिवासियों का शोषण करते थे।
व्याख्या 2 : वे आदिवासियों से बेगारी करवाते थे।
व्याख्या 3 : उनकी भूमि छिनने का प्रयास करते थे।
उत्तर :
व्याख्या 1 : ‘दिकू’ लोग आदिवासियों का शोषण करते थे।

प्रश्न 4.
कथन : आदिवासियों के मन में मिशनरियों के खिलाफ असंतोष था।
व्याख्या 1 : मिशनरियाँ उन्हें केवल सुझाव देती थी।
व्याख्या 2 : मिशनरियाँ उन्हें अपना घर्म बदलने को कहती थी।
व्याख्या 3 : मिशनरियाँ उनकी कई प्रकार से सहायता करती थी।
उत्तर :
व्याख्या 2 : मिशनरियाँ उन्हें अपना धर्म बदलने को कहती थी।

प्रश्न 5.
कथन : संथाल विद्रोह का मुख्य कारण दामिन-ए-कोह पर अधिकार करना था।
व्याख्या 1: यह एक उपजाऊ भूमि था।
व्याख्या 2 : क्षेत्र धार्मिक मान्यताओं के साथ था।
व्याख्या 3 : कर-मुक्त भूमि
उत्तर : व्याख्या 3 : कर-मुक्त भूमि

प्रश्न 6.
कथन : ब्रिटिश न्याय व्यवस्था में आदिवासियों की आस्था नहीं थी क्यों
व्याख्या 1 : न्याय प्रशासन की दृष्टि से आदिवासी समाज भिन्न था।
व्याख्या 2 : आदिवासियों को समय के साथ-साथ काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
व्याख्या 3 : न्याय प्रशासन से कई बार उन्हें न्याय नहीं मिला था।
उत्तर :
व्याख्या 3 : न्याय प्रशासन से कई बार उन्हें न्याय नहीं मिला था।

WBBSE Class 10 History MCQ Questions Chapter 3 प्रतिरोध और आन्दोलन

प्रश्न 7.
कथन : संथाल विद्रोह को कुचल दिया गया।
व्याख्या 1: संथाल अंग्रेजी सेना का मुकाबला अपने परम्परागत हथियार तीर या कुल्हाड़ियों से करते रहे।
व्याख्या 2 : संथाल युद्ध छापामार प्रणाली से करते रहे।
व्याख्या 3 : संथालों के नेता सिद्धू तथा कानू को गिरफ्तार कर फाँसी दी गई।
उत्तर :
व्याख्या 1 : संथाल अंग्रेजी सेना का मुकाबला अपने परम्परागत हथियार तीर या कुल्हाड़ियों से करते रहे।

प्रश्न 8.
कथन : सन्यासी विद्रोह 1770 ई० में बंगाल में ही शुरू हुआ था।
व्याख्या 1 : संन्यासियों के अनुयायी शंकराचार्य थे।
व्याख्या 2 : संन्यासियों को सिर्फ श्रमण करने पर रोक थी।
व्याख्या 3 : संन्यासियों पर धार्मिक कर बढ़ाने तीर्थ स्थानों पर आने-जाने तथा मंदिरों में प्रवेश निषेध को लेकर क्षुब्ध थे।
उत्तर :
व्याख्या 3 : संन्यासियों पर धार्मिक कर बढ़ाने तीर्थ स्थानों पर आने-जाने तथा मंदिरों में प्रवेश निषेध को लेकर क्षुब्ध थे।

प्रश्न 9.
कथन : 1860 ई० में ब्रिटिश सरकार ने रेग्यूलेशन XI पारित किया।
व्याख्या 1 : अंग्रेजों ने अग्रिम राशि लेने वाले किसानों को बाध्य किया कि वे नीलहे साहबों की आर्थिक क्षति को पूरा करें।
व्याख्या 2 : नील की खेती बंगाल में बंद कर दी गई।
व्याख्या 3 : सती प्रथा को प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया।
उत्तर : व्याख्या 2 : नील की खेती बंगाल में बंद कर दी गई।

प्रश्न 10.
कथन : संथाल विद्रोह का कारण था-
व्याख्या 1 : भू-राजस्व बढ़ गया था, अत: किसान कर देने में लाचार हो गये।
व्याख्या 2 : बाहर के लोग संथालों के क्षेत्र में आकार बस गये थे।
व्याख्या 3 : ईसाई मिशनरियाँ संथालों का धर्म परिवर्तन कर रही थीं।
उत्तर :
व्याख्या 3 : ईसाई मिशनरियाँ संथालों का धर्म परिवर्तन कर रही थीं।

स्तम्भ ‘क’ को स्तम्भ ‘ख’ से सुमेलित कीजिए :

प्रश्न 1.

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) ‘The Santhal Insurrection’ पुस्तक (a) भवानी पाठक एवं देवी चौधुरानी
(ii) दक्कन विद्रोह के नेता (b) सैय्यद अहमद बरेलवी
(iii) दूधू मियाँ के पुत्र (c) उमा नाइक
(iv) फकीर विद्रोह के हिन्दू नेता (d) डॉ० काली किंकर दत्त
(v) ‘तारीख-ए-मुहम्मदिया’ के नेता (e) नोवा खाँ

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) ‘The Santhal Insurrection’ पुस्तक (d) डॉ० काली किंकर दत्त
(ii) दक्कन विद्रोह के नेता (c) उमा नाइक
(iii) दूधू मियाँ के पुत्र (e) नोवा खाँ
(iv) फकीर विद्रोह के हिन्दू नेता (a) भवानी पाठक एवं देवी चौधुरानी
(v) ‘तारीख-ए-मुहम्मदिया’ के नेता (b) सैय्यद अहमद बरेलवी

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प्रश्न 2.

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) तीतूमीर का जन्म (a) हिरिया
(ii) भारत में वहाबी आन्दोलन के नेता (b) मुल्ला कादर
(iii) भील नेता (c) अक्षय कुमार दत्त
(iv) खुलना में नील विद्रोह (d) चौबीस परगना में
(v) ‘तत्वबोधिनी’ के सम्पादक (e) शेख कमारत अली

उत्तर :

‘क’ स्तम्भ ‘ख’ स्तम्भ
(i) तीतूमीर का जन्म (d) चौबीस परगना में
(ii) भारत में वहाबी आन्दोलन के नेता (e) शेख कमारत अली
(iii) भील नेता (a) हिरिया
(iv) खुलना में नील विद्रोह (b) मुल्ला कादर
(v) ‘तत्वबोधिनी’ के सम्पादक (c) अक्षय कुमार दत्त

प्रश्न 3.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) चुआड़ विद्रोह (a) बंगाल
(ii) कोल विद्रोह (b) मिदनापुर
(iii) भील विद्रोह (c) खान देश
(iv) संन्यासी विद्रोह (d) छोटानागपुर

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) चुआड़ विद्रोह (b) मिदनापुर
(ii) कोल विद्रोह (d) छोटानागपुर
(iii) भील विद्रोह (c) खान देश
(iv) संन्यासी विद्रोह (a) बंगाल

प्रश्न 4.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) कोल विद्रोह (a) 1855-56 ई०
(ii) संथाल विद्रोह (b) 1831-32 ई०
(iii) मुण्डा विद्रोह (c) 1783 ई०
(iv) रंगपुर विद्रोह (d) 1899-1900 ई०

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) कोल विद्रोह (b) 1831-32 ई०
(ii) संथाल विद्रोह (a) 1855-56 ई०
(iii) मुण्डा विद्रोह (d) 1899-1900 ई०
(iv) रंगपुर विद्रोह (c) 1783 ई०

प्रश्न 5.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1831 ई० (a) संथाल विद्रोह
(ii) 1855 ई० (b) कोल विद्रोह
(iii) 1899 ई० (c) नील विद्रोह
(iv) 1859 ई० (d) मुंडा विद्रोह

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) 1831 ई० (b) कोल विद्रोह
(ii) 1855 ई० (a) संथाल विद्रोह
(iii) 1899 ई० (c) नील विद्रोह
(iv) 1859 ई० (d) मुंडा विद्रोह

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प्रश्न 6.

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) चुआड़ विद्रोह (a) बुद्धू भगत
(ii) कोल विद्रोह (b) सिद्धू, कानू
(iii) संथाल विद्रोह (c) वीरसा
(iv) मुण्डा विद्रोह (d) दुर्जन सिंह

उत्तर :

स्तम्भ ‘क’ स्तम्भ ‘ख’
(i) चुआड़ विद्रोह (d) दुर्जन सिंह
(ii) कोल विद्रोह (a) बुद्धू भगत
(iii) संथाल विद्रोह (b) सिद्धू, कानू
(iv) मुण्डा विद्रोह (c) वीरसा

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 5 वैकल्पिक विचार एवं प्रयास

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WBBSE Class 10 History Chapter 5 Question Answer – वैकल्पिक विचार एवं प्रयास

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
श्रीरामपुर मिशन प्रेस की स्थापना किस वर्ष में हुई थी ?
उत्तर :
1800 ई० में।

प्रश्न 2.
‘बसु विज्ञान मंदिर’ संस्था की स्थापना किसने किया था ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बसु ने।

प्रश्न 3.
बंगाल के किस सदी को नवजागरण सदी कहा जाता है ?
उत्तर :
बंगाल में 19 वीं सदी को नवजागरण सदी कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
‘श्री रामपुर त्रयी’ किसको कहा जाता है?
उत्तर :
श्री रामपुर मिशनरी प्रेस के संस्थापक विलियम कैरी, जोशुआ मार्शमैन एवं विलियम वार्ड को संयुक्त रूप से ‘श्री रामपुर त्रयी’ कहा जाता है।

प्रश्न 5.
एक व्यंगचित्र शिल्पी का नाम लिखें।
उत्तर :
गगनेन्द्र नाथ टैगोर।

प्रश्न 6.
एण्टी सर्कुलर सोसाइटी के संस्थापक कौन थे?
उत्तर :
सचीन्द्र नाथ बसु ने।

प्रश्न 7.
बनारस में संस्कृत कॉलेज की स्थापना किसने किया था ?
उत्तर :
जानाथन डंकन ने।

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प्रश्न 8.
विश्व भारती की स्थापना में किस जमींदार का योगदान था ?
उत्तर :
रायपुर के जमीदार सीतिकान्त सिन्हा का।

प्रश्न 9.
1906 ई० में स्थापित बंगाल तकनीकी संस्थान का उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
बंगाल में तकनीकी शिक्षा का प्रसार करना।

प्रश्न 10.
भारत में किसने व्यवसायिक मुद्रण की शुरूआत की थी ?
उत्तर :
उपेन्द्रनाथ राय चौधरी।

प्रश्न 11.
‘छेड़े आसा ग्राम’ पुस्तक के लेखक कौन है ?
उत्तर :
दक्षिणा रंजन मुखर्जी।

प्रश्न 12.
गगनेन्द्र नाथ टैगोर किस प्रकार की चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध थे ?
उत्तर :
हास्य व्यग्य चित्रकारी के लिए।

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प्रश्न 13.
संजीवनी साप्ताहिक पत्रिका के सम्पादक कौन थे ?
उत्तर :
‘कृष्ण कुमार मित्र।

प्रश्न 14.
दक्षिण एशिया का पहला छापाखाना (मुद्रणालय) 1913 ई० में किसने स्थापित किया था?
उत्तर :
उपेन्द्रनाथ राय चौधरी ने।

प्रश्न 15.
1917 ई० में ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बसु ने।

प्रश्न 16.
इण्डियन एसोसिएसन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइन्स के एक शानदार शिक्षक का नाम बताइए।
उत्तर :
महेन्द्रलाल सरकार।

प्रश्न 17.
श्रीरामपुर त्रयी मठ की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर :
डॉ॰ विलियम कैरी ने।

प्रश्न 18.
सिल्वालेवी कौन थे ?
उत्तर :
सिल्वा लेवी फ्रान्स के एक महान शिक्षाशास्त्री थे, जिन्होनें शान्ति-निकेतन की काफी प्रशंसा की थी।

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प्रश्न 19.
बंगाल में प्रथम ‘अंघ विद्यालय’ कब खोला गया ?
उत्तर :
बंगाल में प्रथम ‘अंध विद्यालय’ सन् 1925 में खोला गया।

प्रश्न 20.
‘ए नेशन इन मेकिंग’ (A Nation in Making) के रचनाकार कौन थे ?
उत्तर :
सुरेन्द्रनाथ बनर्जी।

प्रश्न 21.
भारतीय समाचार पत्र अधिनियम (Vernacular Press Act) कब पारित किया गया था ?
उत्तर :
सन् 1878 में।

प्रश्न 22.
चन्द्रशेखर बेंकटरमन को अन्य किस नाम से भी जाना जाता था ?
उत्तर :
रमन प्रभाव (Raman Effect) के नाम से।

प्रश्न 23.
‘बंगाल गजट’ नामक समाचार-पत्र का पहला प्रकाशन कब हुआ ?
उत्तर :
1780 ई० में।

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प्रश्न 24.
‘बंगाल तकनीकी संस्थान’ (Bengal Technical Institute) की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
सन् 1906 में।

प्रश्न 25.
उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी के पुत्र का क्या नाम था ?
उत्तर :
सुकुमार रॉय।

प्रश्न 26.
‘बंगाल गजट’ नामक समाचार-पत्र का पहला प्रकाशन किसने किया ?
उत्तर :
जेम्स अगस्ट्स हिक्की ने।

प्रश्न 27.
‘संवाद कौमुदी’ का सम्पादन कब हुआ ?
उत्तर :
सन् 1821 ई० में।

प्रश्न 28.
‘सोमप्रकाश’ साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन कब हुआ ?
उत्तर :
सन् 1858 ई० में।

प्रश्न 29.
‘इंडियन मिरर’ पत्रिका का सम्पादन कब हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1861 ई० में।

प्रश्न 30.
‘बंगवासी’ पत्र के सम्पादक कौन थे ?
उत्तर :
जोगेन्द्रनाथ बोस।

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प्रश्न 31.
पुर्तगालियों ने सर्वप्रथम मुद्रणालय (प्रेस) की स्थापना कहाँ किया ?
उत्तर :
गोवा में।

प्रश्न 32.
एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना किसने किया ?
उत्तर :
सर विलियम जोन्स ने।

प्रश्न 33.
उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
सन् 1915 में।

प्रश्न 34.
जगदीश चन्द्र बसु का जन्म कब हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1858 में।

प्रश्न 35.
जगदीश चन्द्र बसु की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
सन् 1937 में।

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प्रश्न 36.
‘कलकत्ता विज्ञान कॉलेज’ (Calcutta Science College) की स्थापना किसने किया ?
उत्तर :
आशुतोष मुखर्जी ने।

प्रश्न 37.
देश का पहला ‘होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज’ की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
सन् 1880 में।

प्रश्न 38.
‘हिन्दू पैट्रियट’ समाचार-पत्र किसके द्वारा सम्पादित हुआ था ?
उत्तर :
हरीशचन्द्र मुखर्जी द्वारा।

प्रश्न 39.
‘हिन्दू पैट्रियट’ समाचार-पत्र कब प्रकाशित हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1853 ई० में।

प्रश्न 40.
‘सुलभ समाचार’ बंगला का महत्वपूर्ण दैनिक पत्र किसके द्वारा सम्पादित किया गया था ?
उत्तर :
केशवचन्द्र सेन के द्वारा।

प्रश्न 41.
‘अल हिलाल’ नामक पत्रिका किसके द्वारा सम्पादित किया गया था ?
उत्तर :
मौलाना अबुल कलाम आजाद द्वारा।

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प्रश्न 42.
सेंट जेवियर्स कॉलेज की स्थापना कब हुई थी ?
उत्तर :
सेंट जेवियर्स कॉलेज की स्थापना सन् 1860 में हुई थी।

प्रश्न 43.
जगदीश चन्द्र बसु के पिता का नाम क्या था ?
उत्तर :
भगवान चन्द्र बसु।

प्रश्न 44.
चन्द्रशेखर बेंकट रमन का देहान्त कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
बैंगलोर, कर्नाटक, भारत में।

प्रश्न 45.
‘इंडिया विन्स फ्रीडम’ के रचनाकार कौन थे ?
उत्तर :
मौलाना अबुल कलाम आजाद।

प्रश्न 46.
‘युगान्तर’ की स्थापना की थी।
उत्तर :
अरविंद घोष की।

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प्रश्न 47.
किस शताब्दी के उत्तरार्ध में कलकत्ता दक्षिण एशिया का प्रमुख छापाखाना केन्द्र के रूप में उभरा था ?
उत्तर :
18 वीं शताब्दी में।

प्रश्न 48.
1770 से 1800 ई० के बीच शॉ टेरेस के तत्वावधान में कितने छापेखाने चलते थे ?
उत्तर :
चालीस।

प्रश्न 49.
उपेन्द्र किशोर राय चौधरी द्वारा लिखित रचनाएँ कौन सी हैं ? नाम लिखें।
उत्तर :
बालक, छेलेदेर रामायण, छेंदेर महाभारत, दुनदुनर बोई इत्यादि।

प्रश्न 50.
नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन की स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
1906 ई० में।

प्रश्न 51.
भारत में आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रवर्तक कौन थे ?
उत्तर :
आचार्य जगदीशचन्द्र बसु।

प्रश्न 52.
मैकाले शिक्षा पद्धति का प्रमुख उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
मैकाले द्वारा अंग्रेजी शिक्षा प्रारम्भ करने का प्रमुख उद्देश्य भारत में अंग्रेजी सरकार के प्रति एक ऐसा वर्ग तैयार करना, जो रूप-रंग से भारतीय हो, पर सभ्यता और बुद्धि से अंग्रेज हो।

प्रश्न 53.
इसाई धर्म के प्रति ग्रांट डफ का क्या विचार था ?
उत्तर :
ग्रांट डफ का विचार था कि भारत में इसाई धर्म का अधिक प्रचार-प्रसार हो।

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प्रश्न 54.
रवीन्द्रनाथ टैगोर के माता-पिता का क्या नाम था ?
उत्तर :
इसके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था।

प्रश्न 55.
रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार शिक्षा की कौन-सी भाषा होनी चाहिए ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार शिक्षा की भाषा मातृभाषा के माध्यम से होनी चाहिए।

प्रश्न 56.
विश्व भारती कहाँ स्थापित है ?
उत्तर :
विश्व भारती बंगाल के शान्ति निकतन में स्थापित है।

प्रश्न 57.
विश्वभारती के प्रमुख उद्देश्यों में से किसी एक उद्देश्य को बताएँ।
उत्तर :
भारतीय संस्कृति एवं आदशों का उद्देश्यों के आधार पर शिक्षा प्राप्त करें।

प्रश्न 58.
विश्वभारती में शिक्षा किस प्रकार प्रदान की जाती है ?
उत्तर :
विश्व भारती में शिक्षा प्राच्य तथा पाश्चात्य संस्कृति में समान्त्रय स्थापित करके शिक्षा प्रदान की जाती है।

प्रश्न 59.
विश्व भारती की किसी एक विशेषता को बताएँ।
उत्तर :
विश्व भारती की एक प्रमुख विशेषता इसका सैद्धान्तिक रूप से एक मौलिक तथा आवासीय शिक्षण संस्थान है। यह संस्थान भारत का प्रतिनिधित्व करती है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
चार्ल्स विल्किन्स कौन थे ?
उत्तर :
चार्ल्स विल्किन्स एक अंग्रेज विद्वान थे। इन्होंने ही सर्वप्रथम गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया था। इन्होंने ने ही पंचानन कर्मकार के साथ मिलकर पहला छापाखाना का टाइपफेस का निर्माण किया था।

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प्रश्न 2.
बांग्ला लाइनोटाइप छपाई का क्या महत्व था ?
उत्तर :
बांग्ला लाइनोटाइप के विकास से बांग्ला भाषा में समाचार, पत्र-पत्रिकायें पुस्तके तेजी से छपने लगे। फलस्वरूप छापाखाना, प्रकाशन, पुस्तक व्यवसाय का तेजी से विकास हुआ।

प्रश्न 3.
बंगाल में छापाखाना के विकास में पंचानन कर्मकार की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
भारत में पंचानन कर्मकार एवं चार्ल्स विल्किस को बंगला तथा नागरी मुद्रण (अक्षर टाइप) का जनक माना जाता है। पंचानन कर्मकार छपाई के अक्षर बनाने वाले कलाकार थे। जिन्होंने 700 देवनागरी की एक सुन्दर माला तैयार की थी। इन्हीं के कारण श्री रामपुर मिशन छापाखाना का विकास हुआ। जहाँ से देवनागरी संम्बन्धी सभी माँगे देश भर में पूरी होती थी। इस प्रकार उन्होंने कम लागत में मुद्रण कला के विकास मे महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन्होंने बंगला हरफ के अलावा अरबी, फारसी, गुरूमुखी, मराठी तेलगु, वर्मी चीनी आदि 14 भाषाओं के वर्णमालाओं का हरफ (अक्षर) बनाया था। इसलिए छपाई की दुनिया में उनकी विशिष्ट पहचान एवं योगदान है।

प्रश्न 4.
बंगाली छापाखाना के इतिहास में बटाला प्रकाशन का क्या महत्व है ?
उत्तर :
कोलकाता के चितपुर सड़क मार्ग (रोड) पर स्थित ‘बटाला प्रकाशन’ का यही महत्व है कि यह बंगला भाषा तथा अन्य भाषा का सबसे पुराना प्रकाशन शिल्प केन्द्र था। यहाँ से देशी मजदूरों द्वारा हाथ की छपाई, चित्र, कहानियाँ, छोटीछोटी पुस्तकें, अनुवादित साहित्य तथा बाबू समाज के लोगों के सम्बन्ध से जुड़ी बातें प्रकाशित होती थी।

प्रश्न 5.
उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध ‘सभा समिति युग’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
उन्नीसवी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में राजनैतिक एकता तथा जनमत तैयार करने के उद्देश्य से अनेकों बंग भाषा प्रकाशिका सभा, जमींदार सभा, भारतीय सभा आदि सभा-समितियों का गठन हुआ। इसलिए डॉ॰०निल सेन ने उन्नीसवी सदी को सभा-समितियों का युग कहा है।

प्रश्न 6.
विश्व-भारती की स्थापना किसने और किस उद्देश्य से की थी ?
उत्तर :
विश्व-भारती की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की थी। इसका उद्देश्य खुले वातांवरण में परम्परागत एवं आधुनिक दोनों प्रकार की साथ-साथ शिक्षा देने के लिए किया गया था।

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प्रश्न 7.
कलकत्ता सांइस (विज्ञान) कालेज की स्थापना किसने और कब की थी ?
उत्तर :
कलकत्ता विज्ञान कालेज की स्थापना आशुतोष मुखर्जी ने सन् 1904 में की थी।

प्रश्न 8.
‘श्री रामपुर त्रयी’ किसको कहा जाता है ?
उत्तर :
श्री रामपुर मिशनरी प्रेस के संस्थापक विलियम कैरी, जोशुआ मार्शमैन एवं विलियम वार्ड को संयुक्त रूप से ‘श्री रामपुर त्रयो’ कहा जाता है।

प्रश्न 9.
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट क्या था ?
उत्तर :
1878 ई० में वायसराय लाईड लिटन ने देशी समाचार पत्रों के प्रकाशन पर रोक लगा दिया था। इसे ही वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट कहा जाता है।

प्रश्न 10.
प्रिंटिंग प्रेस का जनक किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
उपेन्द्र किशोर रायचौधुरी को प्रिंटिंग प्रेस का जनक कहा जाता है। इनके द्वारा ‘U. N. Roy and Sons’ मुद्रणालय की स्थापना की गई थी, जो दक्षिण एशिया का पहला मुद्रणालय या प्रेस था, जहाँ से काले एवं सफेद (Block and White) तथा रंगीन (Colourtul) फोटोग्राफ्स मुद्रित होते थे।

प्रश्न 11.
पंचानन कर्मकार कौन थे ? उन्होने कुल कितने भाषाओं के हरफ बनाये थे ?
उत्तर :
मुद्रण कला में बंगला अक्षर (हरफ) के जनक का नाम पंचानन कर्मकार था। इनका जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के त्रिवेणी में हुआ था। कलकत्ता में जब ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना हुई तब इन्होंने उसके प्रेस में कार्य किया था। बंगला हरफ के अलावे इन्होंने अरबी, फारसी, गुरूमुखी, मराठी, तेलगु, वर्मी, चीनी आदि 14 भाषाओं के वर्णमालाओं का हरफ बनाया था।

प्रश्न 12.
यू० एन० राय प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना किसके द्वारा एवं कब की गई ?
उत्तर :
यू० एन० राय प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना उपेन्द्र किशोर राय चौधरी द्वारा 1885 ई० में की गई जो उस समय की एक बेहतरीन एवं दक्षिणी एशिया का प्रथम प्रिंटिग प्रेस था।

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प्रश्न 13.
कलकत्ता विज्ञान कॉलेज की स्थापना किसने और कब की ?
उत्तर :
कलकत्ता विज्ञान कॉलेज (Calcutta Science College) : कलकत्ता विज्ञान कॉलेज जो बंगाल में विज्ञान के क्षेत्र में हुई विकास का प्रतीक माना जाता है, की स्थापना सन् 1914 में आशुतोष मुखर्ज़ी ने किया था। उनके इस कार्य में श्री तारकनाथ पालित और श्री रासविबहारी बोस ने सहयोग दिया।

प्रश्न 14.
इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइन्स की स्थापना क्यों की गई ?
उत्तर :
भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान, ऊर्जा बहुलक तथा पदार्थों के सीमावर्ती क्षेत्रों में मौलिक शोध कार्य के लिए सन् 1876 में इसे स्थापित की गई।

प्रश्न 15.
आशुतोष मुखर्जी क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
श्री आशुतोष मुखर्जी एक प्रसिद्ध वकील, कलकत्ता विश्वविद्यालय के उप-कुलपति और प्रसिद्ध विद्वान थे। शिक्षा के क्षेत्र में आशुतोष मुखर्जी का बहुत बड़ा योगदान है।

16.
‘द बंगाल गजट’ के शीघ्र बाद किन पत्रों का प्रकाशन हुआ ?
उत्तर :
कलकत्ता गजट (1784 ई०), बंगाल जनरल (1785 ई०), कलकत्ता क्रॉनिकल (1786 ई०) एवं द एशियाटिक मिरर आदि पत्रों का प्रकाशन हुआ।

प्रश्न 17.
किस काल को बंगाल का नव जागरण काल कहा जाता है ?
उत्तर :
19 वीं शदी के प्रारम्भिक काल को जो राजा राममोहन राय (1774-1833 ई०) से प्रारम्भ होकर रवीन्द्रनाथ टैगोर (1861 – 1941 ई०) तक के समय को बंगाल का नवजागरण काल कहा जाता है।

प्रश्न 18.
बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना क्यों किया गया ?
उत्तर :
विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए इस कॉलेज की स्थापना की गई।

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प्रश्न 19.
उपेन्द्र किशोर रॉय चौधरी कौन थे ?
उत्तर :
उपेन्द्र किशोर रॉय चौधरी बंगाल के प्रमुख साहित्यकार, चित्रकार एवं तकनीशियन थे। इन्होंने आधुनिक अक्षर कला का निर्माण किया था।

प्रश्न 20.
हिन्दू कॉलेज की स्थापना किस उद्देश्य से हुई थी ?
उत्तर :
हिन्दू कॉलेज की स्थापना का उद्देश्य यूरोप तथा इग्लैंण्ड से आने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को हिन्दी भाषा की शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी।

प्रश्न 21.
प्रिंटिंग प्रेस का आदि युग किस काल को कहा जाता है ?
उत्तर :
18 वीं सदी के अंतिम समय को ही प्रिंटिंग प्रेस का आदि युग कहा जा सकता है क्योंकि उसी दौरान बंगाल में मुद्रण उद्योग की स्थापना की शुरुआत हुई थी।

प्रश्न 22.
रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के संबंध में क्या विचार था ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के संबंध में कहना था कि ‘सरोंच्च शिक्षा वही है जो सम्पूर्ण दृष्टि से हमारे जीवन में सामंजस्य स्थापित करती है।”

प्रश्न 23.
छापेखाने ने जन-जीवन को कैसे प्रभावित किया ?
उत्तर :
छापेखाने से विचारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के द्वार खुले। स्थापित सत्ता के विचारों से असहमत होने वाले लोग भी अब अपने विचारों को छाप कर फैला सकते थे। छपे हुए संदेश के जरिये वे लोगों को अलग ढंग से सोचने के लिए बाध्य कर सकते थे। इस बात का जन-जीवन के कई क्षेत्रों में गंभीर प्रभाव पड़ा। उनमें आधुनिकता के प्रति जागरुकता आयी।

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प्रश्न 24.
रमण प्रभाव क्या था ?
उत्तर :
1912 ई० में सी.वी. रमन यूरोप गये तथा वहाँ प्रकाश विकिरण पर खोज किया और यह प्रमाणित किया कि ग्रकाश तथा पदार्थ के अणुओं के आपसी टकराव से प्रकाश नये रंग में परिवर्तित हो सकता है। यह आविष्कार ‘रमण प्रभाव’ के नाम से विख्यात है।

प्रश्न 25.
तारकनाथ पालित एवं रासबिहारी घोष कौन थे ?
उत्तर :
तारकनाथ पालित एवं रासबिहारी घोष बंगाल के प्रसिद्ध वकील एवं समाज सुधारक थे। इन महापुरुषों ने कलकत्ता साइंस कॉलेज की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता दी थी।

प्रश्न 26.
तारक नाथ पालित का नाम क्यों स्मरणीय है ?
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्, बंगाल ने स्वदेशी औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए बेंगाल टेक्नीकल इन्स्टीट्यूट (BIT) की स्थापना किया। इसकी स्थापना के लिए श्री तारकनाथ पालित ने 10 लाख रुपए तथा अपर सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास को भी दान कर दिया। बंगाल की तकनीकी शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए श्री तारक नाथ पालित स्मरणीय है।

प्रश्न 27.
कलकत्ता विश्वविद्यालय की स्थापना के दो उद्देश्य बताओ।
उत्तर :
(i) उच्च शिक्षा का प्रसार एवं भारतीयों को अंग्रेजी शिक्षा में शिक्षित करने के उद्देश्य से कलकत्ता विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। (ii) इसकी स्थापना लंदन विश्वविद्यालय के स्तर पर हुई थी जिसमें 41 सदस्यों की एक समिति बनाकर नीति निर्धारण का उद्देश्य रखा गया।

प्रश्न 28.
राष्ट्रीय शिक्षा परिषद से आप क्या समझते है ?
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा परिषद या नेशनल काउन्सिल आंफ एडुकेशन की स्थापना 1906 ई० में की गई। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों में विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना था। पराधीन भारत में नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन एक ऐसी संस्था थी जो राष्ट्रीय नियंत्रण के आधार पर छात्रों में ऐसी वैज्ञानिक एवं तकनकी शिक्षा का प्रसार करना चाहती थी, जो अंग्रेजी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को चुनौती दे सके।

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प्रश्न 29.
एन. बी. हेलहेड क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
एन. बी. हेलहेड ने हिन्दू धर्म शास्त्रों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर A Code of Gentoo Laws के नाम से प्रकाशित किया था।

प्रश्न 30.
प्रिंटिंग प्रेस के विकास का काल किस समय को कहा जाता है ?
उत्तर :
19 वीं सदी के पूवार्द्ध समय को प्रिंटिंग प्रेस के विकास का काल माना जाता है जब विलियम कैरी तथा कुछ और अंग्रेजों ने हुगली के श्रीरामपुर में ‘श्रीरामपुर मिशन प्रेस’ की स्थापना किया था।

प्रश्न 31.
प्रिंटिंग प्रेस के विकास का आधुनिक युग किस काल को कहा जाता है ?
उत्तर :
19 वीं सदी के उत्तरार्द्ध तथा 20 वीं सदी के पूवार्द्ध से प्रिटिंग प्रेस के विकास को आधुनिक युग माना जाता है जब एक के बाद एक प्रिंटिंग प्रेसों की स्थापना होने लगी।

प्रश्न 32.
औपनिवेशिक शिक्षा नीति क्या था ?
उत्तर :
भारत में आधुनिक शिक्षा का प्रसार करने में ब्रिटिश सरकार के अतिरिक्त ईसाई धर्म के प्रचारको और प्रबुद्ध भारतीयों की प्रमुख भूमिका रही। किन्तु भारतीयों को शिक्षित करने के पीछे उनका उद्देश्य एक ऐसा वर्ग तैयार करना था जो अंग्रजों के सहायक की भूमिका अदा कर सकें। गवर्नर जनरल की कौसिल के सदस्य मैकाले ने अपने महत्वपूर्ण आलेखपत्र द्वारा अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाने पर जोर दिया था।

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प्रश्न 33.
औपनिवेशिक शिक्षा नीति के प्रति रवीन्द्रनाथ का मत क्या था ?
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा की आवश्यकता, उसके स्वरूप एवं लक्ष्य आदि पर बोलते हुए रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा, “भारत में विदेशियों द्वारा शिक्षा का नियंत्रण और निर्देशन सबसे अधिक अस्वाभाविक घटना है। स्वय अपने प्रयासों और साधनों के द्वारा सार्वजनिक शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। देश की आवश्यकताओं को पूरा करना ही भारत में राष्ट्रीय शिक्षा का उद्देश्य और लक्ष्य हो।”

प्रश्न 34.
रवीन्द्रनाथ टैगोर का शांतिनिकेतन के प्रति क्या धारणा थी ?
उत्तर :
‘शांति निकेतन’ की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1863 में किये थे। रवीन्द्रनाथ टैगोर को ‘शांति निकेतन’ आश्रम से बड़ा ही लगाव था। वे वहाँ अक्सर जाया करते थे। उनको वहाँ का वातावरण बड़ा ही मनमोहक लगता था। इसी कारण रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने वहाँ अर्थात् ‘शांति निकेतन’ में सन् 1901 में पाँच छात्रों को लेकर एक आश्रम या विद्यालय खोले थे। उनका मानना था कि शांतिनिकेतन ‘शांति का घर’ है जहाँ लोग मन की एकाग्रता पाते हैं।

प्रश्न 35.
शिक्षा में मनुष्य एवं परिवेश के शामिल होने के प्रति रवीन्द्रनाथ टैगोर का मत क्या था ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने खुद ‘प्रकृति’ को महान शिक्षक का दर्जा दिया है, जो हमेशा जीवित रहता है अर्थात् महान शिक्षक होने के साथ-साथ, एक जीवित शिक्षक भी। ‘प्रकृति’ के साथ रहकर अबोध बच्चे या बालक या बालिका जीवन के हर एक रहस्य को सीख पाते हैं। टैगोर जी का मानना है कि समाज में पठन-पाठन का केन्द्र या विद्यालय खुले प्राकृतिक वातावरण में हो ताकि बच्चे खुले प्राकृतिक वातावरण में पढ़कर विकसित हो पायेंग।

प्रश्न 36.
‘गोरा’ उपन्यास की रचना कब और किसके द्वारा की गई ?
उत्तर :
गोरा उपन्यास की रचना रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा 1909 ई० में की गई थी।

प्रश्न 37.
‘भारतमाता’ का चित्र का क्या महत्व शा ?
उत्तर :
भारतमाता अवनीन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा बनाई गई एक अनमोल चित्र था जो दुर्गा मा की प्रतिकृति जैसी थी। इस कलाकृति ने भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना को बहुत ही प्रखर किया था। स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह कलाकृति लोगों के लिए एक आदर्श बन गई थी।

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प्रश्न 38.
जगदीश चन्द्र बसु ने बोस इन्सटीच्युट की स्थापना क्यों किया ?
उत्तर :
जगदीश चन्द्र बसु के प्रयास से बंगाल में सन् 1917 में ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ की स्थापना किया गया। बाद में चलकर ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ का नाम ‘बोस संस्था’ (Bose Institute) रखा गया जहाँ विज्ञान से संबंधित हर प्रकार की शिक्षा दी जाती है। इस संस्थान के द्वारा ‘कलेरा’ के विष प्रभाव पर किये गये कार्य काफी महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 39.
तकनीकी शिक्षा की संवर्द्धन के लिए सोसाईटी की स्थापना किसने किया और उसका उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
सन् 1938 में कांग्रेस सरकार ने ‘मेघनाद साहा’ की अध्यक्षता में तकनीकी शिक्षा से संबंधित एक समिति का गठन किया। इस समिति ने भारत के विभिन्न प्रान्तों में तकनीकी शिक्षा के विकास पर जोर दिया। इस समिति के अन्य सदस्य थे – जगदीश चन्द्र बोस, बीरबल साहनी, शान्तिस्वरूप भटनागर एवं नजीर अहमद।

प्रश्न 40.
कलकत्ता मदरसा की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
कलकत्ता मदरसा की स्थापना गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने सन् 1781 में किया।

प्रश्न 41.
‘स्कूल बुक सोसाइटी’ (School Book Society) की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
‘स्कूल बुक सोसाइटी’ (School Book Society) की स्थापना सन् 1817 में डेविड हेयर ने किया।

प्रश्न 42.
विश्वभारती विश्वविद्यालय के प्रमुख दो उद्देश्य क्या है ?
उत्तर :
(i) भारतीय संस्कृति एवं आदर्शों के आधार पर शिक्षा प्रदान करना।
(ii) प्राच्य-पाश्चात्य संस्कृतियों में समन्वय स्थापित करना।

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प्रश्न 43.
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘ब्रहाचर्य आश्रम’ नामक विद्यालय की स्थापना किया, इस कार्य में उनका साथ किन-किन लोगों ने दिया ?
उत्तर :
महान शिक्षाविद् बह्मबांधव उपाध्याय, सतीश चन्द्र राय, मोहित चन्द्र सेन, अजीत कुमार चक्रवर्ती तथा विलियम पियरसन आदि।

प्रश्न 44.
‘विद्या-भवन’ में क्या-क्या सिखाया जाता है ?
उत्तर :
‘विद्या-भवन’ में प्राच्य की विभिन्न भाषाओं, साहित्य एवं संस्कृति पर शोध कार्य सिखाया जाता है।

प्रश्न 45.
रवीन्द्र भवन की स्थापना क्यों की गई ?
उत्तर :
इसकी स्थापना सन् 1942 में रवीन्द्रनाथ टैगोर के साहित्यों का अध्ययन करने के लिए किया गया। इसके बगल में ही विचित्र भवन है जिसमें टैगोर जी द्वारा लिखी किताबें, उनकी चित्रकारी, पत्र, उनकी पुस्तकालय तथा उनसे जुड़ी विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ रखी गईं हैं।

प्रश्न 46.
‘कला भवन’ की स्थापना क्यों की गई थी ?
उत्तर :
‘कला भवन’ की स्थापना, विभिन्न प्रकार की चित्रकारी शिक्षा प्रदान करने के लिए किया गया था। यह शिक्षा नन्दलाल बोस के नेतृत्व में दिया जाता था। यहाँ लकड़ी पर नक्काशी, स्थापत्य कला की योजना तथा पत्थर की मूर्तियों एवं सूईयों से विभिन्न प्रकार की कलाकारी करना सिखाया जाता है।

प्रश्न 47.
‘हिन्दी भवन’ में क्या-क्या सिखाया जाता है ?
उत्तर :
‘हिन्दी भवन’ में हिन्दी भाषा एवं साहित्य के अध्ययन एवं उन पर शोध करना सिखाया जाता है।

प्रश्न 48.
‘चीन भवन’ क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
इसलिए कि वहाँ पर हिन्दी-चीन पारम्परिक संबंध पर अध्ययन एवं शोध कार्य करना सिखाया जाता है। इसकी स्थापना 1937 ई० में प्राध्यापक ‘तान युन सान’ (Tan Yun San) ने किया था।

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प्रश्न 49.
‘पाठ भवन’ तथा ‘शिक्षा भवन’ की स्थापना क्यों किया गया ?
उत्तर :
क्योंकि ‘पाठ भवन’ में माध्यमिक स्तर की शिक्षा एवं ‘शिक्षा भवन’ में उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती थी।

प्रश्न 50.
रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के संबंध में क्या विचार था ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के संबंध में विचार ‘ससर्वोच्च शिक्षा वही है जो समूर्ण सृष्टि से हमारे जीवन का सामंजस्य स्थापित करती है।”

प्रश्न 51.
किस काल को बंगाल का नवजागरण काल कहा जाता है, और क्यों ?
उत्तर :
1861 ई० से 1941 ई० के बीच के समय को ‘बंगाल का पुर्नजागरण काल’ कहा जाता है, व्योंकि इस काल में साहित्य, कला, समाचार पत्र, पत्रिकाओं, ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी शिक्षा आदि का पर्याप्त विकास हुआ, जिसके कारण लोगों में सामाजिक और राजनीतिक विकास हुआ इसीलिए इस काल को बंगाल का नवजागरण काल कहा जाता है।

प्रश्न 52.
बंगाल में प्रेस (छापाखाना) की स्थापना सर्वप्रथम किसने और कब की ?
उत्तर :
बंगाल में सबसे पहले प्रेस की स्थापना Statesman ने 1770 ई० में की थी।

प्रश्न 53.
श्रीरामपुर मिशन प्रेस की स्थापना कब और किसने किया था ? आगे चलकर इसका किस प्रेस के साथ विलय हो गया ?
उत्तर :
श्रीरामपुर मिशन प्रेस की स्थापना सन् 1800 में सर विलियम केरी एवं विलियम वार्ड ने की थी। आगे चलकर 1835 ई० में बापटिस्ट मिशन प्रेस के साथ इसका विलय हो गया, यह प्रेस देशी भाषा में पुस्तकों का प्रकाशन करता था।

प्रश्न 54.
भारत में सबसे पहले प्रेस की स्थापना किसने और कब की थी ?
उत्तर :
भारत में सबसे पहले प्रेस की स्थापना पुर्त्तगालियों ने 1550 ई० में की थी।

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प्रश्न 55.
बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना कब और किस उद्देश्य से की गई थी ?
उत्तर :
1921 ई० में कोलकाता में Bengal Engeneering College की स्थापना की गई थी। बाद में इसका स्थानान्तरण 1947 ई० में हावड़ा के शिवपूर में की गई थी। बंगाल में तकनीकी शिक्षा की बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई थी।

प्रश्न 56.
बंगाल का पहला समाचार पत्र कौन-सा था ? उसका प्रकाशन कब और किसने किया ?
उत्तर :
बंगाल का पहला समाचार-पत्र बंगाल गजट था, जिसका प्रकाशन 1780 ई० में जे० के० हिक्की ने किया था।

प्रश्न 57.
उपेन्द्र किशोर रॉय चौधरी द्वारा छापी गई दो पुस्तकों का नाम बताइए।
उत्तर :
उपेन्द्र किशोर रॉय चौधरी द्वारा छापी गई दो पुस्तक हैं – छेलेदेर रामायण, छेलेदेर महाभारत तथा दून्दूनेर बोई प्रकाशित किया था।

प्रश्न 58.
U.N. Roy and Sons प्रेस की स्थापना कब और किसने की थी ?
उत्तर :
1913 ई० में U.N.Roy द्वारा U.N.Roy and Sons प्रेस की स्थापना की गई थी, जो एशिया का सबसे बड़ा प्रेस था।

प्रश्न 59.
‘आधुनिक अक्षर निर्माण कला (Block Making)’ का निर्माण किसने किया तथा इसके साथ ही उन्होंने क्या शुरू किये ?
उत्तर :
‘आधुनिक अक्षर निर्माण कला (Block Making)’ का निर्माण उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी ने किया तथा इसके साथ ही उन्होंने ‘रंगीन निर्माण कला’ (Colour Block Making) की भी शुरूआत किये।

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प्रश्न 60.
‘प्रकाशन घर’ के नाम से किसे जाना जाता था ? गणितीय विश्लेषण तथा वैज्ञानिक तरीकों से छाया-प्रति (Negative making) का निर्माण किसने किया ?
उत्तर :
‘प्रकाशन घर’ के नाम से ‘यू० एन० रॉय एण्ड सन्स (U.N. Roy and Sons) नामक प्रेस को जाना जाता था। गणितीय विश्लेषण तथा वैज्ञानिक तरीकों से छाया-प्रति (Negative making) का निर्माण उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी के पुत्र सुकुमार रॉय ने किया।

प्रश्न 61.
भारतीय समाचार पत्र अधिनियम (Vernacular Press Act) किसने और क्यों पारित किया था ?
उत्तर :
भारतीय समाचार पत्र अधिनियम (Vernacular Press Act) लार्ड लिटन ने पारित किया था ताकि भारतीय समाचारपत्रों पर प्रतिबंध लगाया जा सके।

प्रश्न 62.
भारतीय समाचारपत्र अधिनियम (Vernacular Press Act) को कब और किसने समाप्त किया?
उत्तर :
भारतीय समाचारपत्र अधिनियम (Vernacular Press Act) को सन् 1882 में लॉड रिपन ने समाप्त किया।

प्रश्न 63.
किन-किन लोगों ने बंगालियों द्वारा संचालित तथा संपादित पत्रों की संख्या में प्रगति लाया ?
उत्तर :
सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, कृष्ण कुमार मित्र, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर तथा अरबिंद घोष आदि ने बंगालियों द्वारा संचालित तथा सपादित पत्रों की संख्या में प्रगति लाये।

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प्रश्न 64.
चन्द्रशेखर वेंकटरमन को कब नोबेल पुरस्कार मिला और क्यों ?
उत्तर :
चन्द्रशेखर वेंकटरमन को सन् 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला क्योंकि उन्होंने सन् 1928 में ‘प्रकाश के प्रकीर्णन’ के प्रभाव पर अपना बहुर्चित आविष्कार किया था। [नोट : भौतिक विज्ञान के कारण नोबेल पुरस्कार मिला]]

प्रश्न 65.
कब और किसने रमन प्रभाव को अंतर्राष्ट्रीय ऐतिहासिक रासायनिक युगांतकारी घटना की स्वीकृति प्रदान की ?
उत्तर :
सन् 1998 में ‘अमेरिकन केमिकल सोसाइटी’ (American Chemical Society) ने रमन प्रभाव को अंतर्राष्ट्रोय ऐतिहासिक रासायनिक युगांतकारी घटना की स्वीकृति प्रदान की।

प्रश्न 66.
कब और कहाँ चन्द्रशेखर वेकटरमन भौतिक के विविध विषयों पर शोध कार्य करते थे ?
उत्तर :
सन् 1907 से लेकर 1933 ई० तक ‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेश ऑफ साईन्स’ में चन्द्रशेखर वंक्टरमन भौतिक के विविध विषयों पर शोध कार्य किया करते थे।

प्रश्न 67.
18 वीं शताब्दी के अंत में बंगाल से कौन-कौन पत्र प्रकाशित हुए ?
उत्तर :
कलकत्ता कैरियर, एशियाटिक मिरर तथा ओरिएंटल स्टार आदि।

प्रश्न 68.
हिन्दू कॉलेज के सदस्यों का नाम बताइए, जिन्होंने इसकी स्थापना किया ?
उत्तर :
डेविड हेयर, राजा राममोहन राय और न्यायाधीश एडवर्ड हाइड ईस्ट इत्यादि।

प्रश्न 69.
भारत में आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंघान के संस्थापक कौन थे ? उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी ?
उत्तर :
आचार्य जगदीश चन्द्र बोस तथा उनकी उपलब्धि बोस इंस्टीट्यूट की स्थापना की।

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प्रश्न 70.
राष्ट्रीय योजना आयोग से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक कौन थे ?
उत्तर :
वेज्ञानिक मेघनाद साहा तथा ज्ञानचन्द्र घोष।

प्रश्न 71.
बोस इंस्टीट्यूट की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
प्रमुख उद्देश्य बंगाल में विज्ञान की प्रगति को बढ़ावा देना था।

प्रश्न 72.
बोस संस्थान में किन-किन विषयों पर अनुसंधान होता था ?
उत्तर :
भौतिकी, रसायन प्लांट वायोलोजी, माइक्रो, बायोलॉजी, बायो कैमिस्ट्री, बायो फिजिक्स, एनिमल फिजियोलॉजी एवं पर्यावरण विज्ञान आदि।

प्रश्न 73.
अलीगढ़ साइण्टिफिक सोसाईटी की स्थापना किसने और कब की ?
उत्तर :
सर सैयद अहमद खान ने 1864 ई० में।

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प्रश्न 74.
नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन के प्रमुख सदस्य कौन-कौन थे ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर, अरविन्द घोष, राजा सुबोध चन्द्र मल्लिक, ब्रजेन्द्र किशोर राय चौधरी आदि।

प्रश्न 75.
बनारस संस्कृत कॉलेज की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
हिन्दू कानून, धर्म और साहित्य का विकास करना।

प्रश्न 76.
हिन्दू कॉलेज की स्थापना किस उद्देश्य से हुई थी ?
उत्तर :
हिन्दू कॉलेज की स्थापना का उद्देश्य अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं तथा यूरोष और एशिया के साहित्य एवं विज्ञान की शिक्षा देना था।

प्रश्न 77.
जन शिक्षा समिति का गठन किसने और कब किया ?
उत्तर :
विल्सन ने 1823 ई० में गठन किया।

प्रश्न 78.
कलकत्ता विज्ञान कॉलेज से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम बताइए ।
उत्तर :
प्रमुख वैज्ञानिक पी० सी० रॉय, सी० वी० रमन तथा के० एस० कृष्णन आदि थे।

प्रश्न 79.
ग्रांट डफ कौन थे ?
उत्तर :
ग्रांट डफ एक उच्ब स्तरीय ब्रिटिश आधिकारी था। उसने भारत में ईसाई धर्म के प्रचार का समर्थन किया था।

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प्रश्न 80.
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने किन-किन क्षेत्रों में योगदान किए ?
उत्तर :
इन्होन धर्म तथा सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए साथ ही न्यायसंगत राजनीतिक व्यवस्था के लिए बहुत काम किये।

प्रश्न 81.
रवीन्द्रनाथ रामायण तथा महाभारत को पाठ्यक्रम में क्यों शामिल करना चाहते थे ?
उत्तर :
इसलिए शामिल करना चाहते थे कि बच्चे इनके माध्यम से अपनी भाषा एवं संस्कृति सीखेंगे तथा चरित्र का गठन करेंगे।

प्रश्न 82.
चन्द्रशेखर वेंकटरमन क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
चन्द्रशेखर वेंकटरमन आई० ए० सी० एस० (I.A.C.S.) ने 1907 से 1933 ई० तक भौतिकी के विविध विषयों पर शांधकार्य करते रहे तथा 1928 ई० में उन्होंने प्रकाश के प्रकीर्णन के प्रभाव पर अपना बहुचर्चित आविष्कार किया जिसने उन्हे ख्याति के साथ अनेक पुरस्कार भी दिलवाए, जिनमें 1930 ई० में प्राप्त नोबेल पुरस्कार भी शामिल है। इन सभी कार्यों के वजह से ही वे प्रसिद्ध है।

प्रश्न 83.
राश्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल के मुख्य दो उद्देश्य को लिखें।
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा परिषद का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र के विकास के लिये विज्ञान और तकनीकी शिक्षा प्रदान करना था।

प्रश्न 84.
किस उद्देश्य से बंगाल टेक्नीकल इन्स्टीट्यूट की स्थापना की गई ?
उत्तर :
बंगाल टेक्नीकल इन्सटीटयूट राष्ट्रीय शिक्षा परिषद द्वारा स्वदेशी उद्योग लगाने के लिये स्थापना की गई।

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प्रश्न 85.
शांति निकेतन में विद्यालय की स्थापना किसने और कब की ?
उत्तर :
शांतिनिकेतन में विद्यालय की स्थापना रवीन्द्रनाथ के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 1863 ई० में की।

प्रश्न 86.
प्रफुल्ल चन्द्र राय क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
प्रफुल्ल चन्द्र राय ने बंगाल केमिकल एवं फर्मसेयुटिकल वर्क्स नामक संस्था की स्थापना की इसलिये वे प्रसिद्ध हुए।

प्रश्न 87.
रवीन्द्रनाथ ने खुले आकाश में प्रकृति के बीच शिक्षा संस्थान की स्थापना क्यों की ?
उत्तर :
वे मानते थे कि बढ़ते हुए बच्चे के सुसुप्त गुणों के उचित विकास के लिये प्रकृति के साथ तादाम्य आवश्यक है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
छपी पुस्तकों एवं शिक्षा के विस्तार में सम्बन्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
छपी पुस्तकों और शिक्षा के विस्तार में सम्बन्ध :- भारत में छपी पुस्तक और शिक्षा प्रसार दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए है। सर्वपथम 1557 ई० में पुर्तगालियों ने गोवा में छापाखाना की स्थापना की। इसके बाद धीरे-धीरे देश के विभिन्न भागो में अनेको छापाखाना स्थापित हुए। जिनमें बंगाल के उपेन्द्र किशोर राय चौधरी, श्रीरामपुर त्रयी का विशेष योगदान रहा। छापाखाना स्थापित होने से पुस्तकों, समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, व्यंग चित्रों का छपाई करना सरल हो गया। छापा खानों से छपने वाली पुस्तको से लोग ब्रिटिश सरकार की आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक नीतियों के साथ-साथ पश्चिमी ज्ञान, विज्ञान तकनीकी से सम्बन्धित विषय आदि छपने लगे तथा लोगों तक सस्ती कीमत पर आसानी से पहुँचने लगी।

जिससे देश की जनता घर बैठे तथा पुस्तकालयों के द्वारा इन बातों की जानकारी प्राप्त करने लगी। फलस्वरूप उनमें जागरुकता आयी। अंग्रेजों के अच्छे-बूरे कर्मो से लोग परिचित हुए। उनमें अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित होकर लड़ने जैसी राष्टोय भावना का संचार हुआ। शुरु में छपी पुस्तकों का प्रभाव समाज के धनी सम्पन्न शिक्षित तथा प्रभावशाली वर्ग तक सोमित रहा। बाद में धीरे – धीरे उसका प्रचार-प्रसार होते हुए समाज के मध्यम तथा अन्य पिछड़े वर्ग तक पहुँचा।

इस प्रकार छपी पुस्तक और शिक्षा प्रसार दोनों एक-दूसरे के पूरक बन गए तथा देश के सभी वर्गों तक शिक्षा को पहुँचाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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प्रश्न 2.
बंगाल में विज्ञान चर्चा के विकास में डा० महेन्द्रलाल सरकार का क्या योगदान था ?
या
विज्ञान के विकास में ‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइस’ का महत्व स्पष्ट करें।
या
‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
या
‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस’ (IACS) पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
उत्तर :
बंगाल में 20 वी शताब्दी के प्रारम्भ में विज्ञान के क्षेत्र में अनेको विकास हुए, जैसे – ‘कलकत्ता विज्ञान कॉलेज’ और ‘बसु विज्ञान मंदिर’ की स्थापना आदि। इन सभी विकासों में ‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर, द्र कल्टीवेशन ऑफ साइस(ACS)’ महत्वपूर्ण स्थान रखता था, जो भौतिक, रासायनिक, जैविक ऊर्जा तथा पदार्थ विज्ञान् की शिक्षा प्रदान किया जाता था।

इस संस्था के पहले विज्ञान के क्षेत्र में 19 वीं शताब्दी के अंत तक विभिन्न संस्था को स्थापित किया गया, जिनमें कलकत्ता विश्वववद्यालय (1857 ई०) और होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज (1880 ई०) तथा कलकत्ता साईस कॉलेज (1914 ई०) आदि हैं।

इस शोध संस्था को 29 जुलाई, 1876 ई० को डॉ॰ महेन्द्रलाल सरकार ने स्थापित किया था। ऐसा माना जाता है कि यह शोध संस्था भारत का सबसे प्राचीनतम शोध संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य भौतिकी, रासायन, जीव विज्ञान, ऊर्जा, बहुलक तथा पदार्थों के विषय में छात्र-छात्राओं को जानकारी देना तथा शिक्षित करना था ताकि छात्र-छात्राएँ विज्ञान के क्षेत्र में अग्रसर रूप से प्रौढ़ हो पायें। यह संस्था छात्र-छात्राओं को मानक (Doctorate) की उपाधि भी प्रदान करती है।

इसी शोध संस्था में ‘चन्द्रशेखर वेंकटरमन’ सन् 1907 से लेकर 1933 ई० तक भौतिक विज्ञान पर शोध कार्य करते रहे। इन्होंने ही सर्वप्रथम सन् 1928 ई० में ‘किरणों के परावर्तन का प्रभाव’ (Celebrated effect on scattering of light) अर्थात ‘भौतिक विज्ञान’ की खोज किया, जो बाद में चलकर ‘रमन इफेक्ट’ के नाम से जाना गया। इसी पर ‘सी० वी० रमन’ को सन् 1930 ई० में ‘नोबेल पुरस्कार’ दिया गया था जो विज्ञान के जगत में एक अहम स्थान रखती है। इतना ही नहीं ‘अंरिकन केमिकल सोसाइटी’ (American Chemical Society) ने सन् 1998 में ‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) को अरर्राष्ट्रोय ऐतिहासिक रासायनिक युगांतकारी घटना की स्वीकृति प्रदान की है।

‘IACS’ के प्रति डॉ॰ महेन्द्रलाल सरकार की योजना बहुत ही महत्वपूर्ण थी। उनका उद्देश्य मौलिक अन्वेषण करने के साध-साध विज्ञान को लोकप्रिय भी बनाना था। इसीलिए उसकी स्थापना उन्होंने किया था। धीरे-धीरे यह शोध संस्था विज्ञान, ध्वनि विज्ञान, प्रकाश के प्रकीर्णन, चुम्बकत्व आदि विषयों में शोध का महत्वपूर्ण केन्द्र बन गया। इस प्रकार बगाल में विज्ञान की शिक्षा को बढ़ावा देने में डॉ० महेन्द्र लाल सरकार का महत्वपूर्ण योगदान था।

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प्रश्न 3.
बंगाल में तकनीकी शिक्षा के विकास का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
19 वी सदी की आरम्भ तक बंगाल में देशी और परम्परागत तरीकें से ही शिक्षा पद्धति का विकास हुआ, इसके विकास में 1784 ई० में सर विलियम जोन्स द्वारा स्थापित Asiatic Society का बड़ा योगदान रहा। विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इसकी स्थापना की गयी थी। इसी संस्था के स्थापना के बाद 1828 ई० में कलकत्ता मेडिकल एवं फििजकल सोसाइटी, 1835 ई० में Calcutta Medical College, 1847 ई० में हावड़ा के निकट शिवपुर में बंगाल का पहला Shibpur Engineering College, 1876 ई० में महेन्द्र लाल सरकार द्वारा Indian Association for the Cultivation of Science को स्थापना की गई, इसी संस्था के अध्ययनकर्त्ताओं एवं शोधकत्ताओं विविन्न क्षेत्रों में नई-नई खांज की जिसमें C.V. Raman द्वारा किरणों के परावर्तन के प्रभाव की खोज (1928) ई० था। Raman Effects को खोज और इस पर 1930 ई० में नोबेल पुरस्कार मिला था।

इसके बाद 1904 ई० में आशुतोष मुखर्जी द्वारा Calcutta Science College की स्थापना की गई इस कॉलेज के कुछ प्रमुख छात्र सत्येन्द्रनाथ बोस, आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय, सी॰ वी० रमण, जगदीशचन्द्र बसु ने विज्ञान के क्षेत्र में नयी ऊँचाईया को छुआ और इस संस्थान को नई दिशा प्रदान की, 1906 ई० में प्रफुल्लचन्द्र राँय द्वारा देश की पहली मेडिसिन एवं रसायन बनाने वाले कपनी Bengal Chemical and Phramcetical Works की स्थापना की, 1917 ई० में कलकत्ता के महान वैज्ञानिक जगदोश चन्द्र बसु ने बसु विज्ञान मन्दिर की स्थापना की आगे चलकर इसका नाम Bose institute पड़ा। इस संस्थान ने भी विज्ञान के क्षेत्र में नई-नई खोजों की खोज कर महान उपलब्धि प्राप्त की, तथा देश और डुनिया मे भारत को गौरव दिलायी।

बगाल में तकनीकी शिक्षा के विकास में औद्योगिक अनुसंधान परिषद का महत्वपूर्ण योगदान रहा, इसके प्रयास से अलोगद्ध में Scientific Society, Bengal Technical Institute की स्थापना हुई, जिसकी स्थापना 1906 ई० में नारक्रनाथ पालित ने किया था।
इस प्रकार बंगाल में स्वदेशी आन्दोलन के ज्वार ने बंगाल में विज्ञान, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 4.
बंगाली छापाखाना के विकास में गंगा किशोर भद्टाचार्य का क्या योगदान था?
उत्तर :
बर्द्रवान जिले के वहड़ा ग्रामवासी गंगकिशोर भट्टाचार्य का बंगला मुद्रणालय (छापाखाना) उद्योग के विकास में विशिष्ट योगदान है। वे बंगाली पहला मुद्रण व्यवसायी, पुस्तक व्यवसायी प्रकाशक एवं ग्रन्थाकार थे। वे काम-काज की खोज में श्रीरामपुर मिशनरी के सम्पर्क में आये और अपनी सेवा शुरू की।

श्रीरामपुर मिशनरी छापाखाना में वे मुद्रण संपादन और प्रकाशन का कार्य करते थे। इसके बाद वे 19 वीं शताब्दी के दूसरे उसक में वे श्रोरामपुर मिशनरी छापाखाना कार्य छोड़कर कलकत्ता चले आये और यहाँ पर अपना छापाखाना स्थापित किया। इस प्रकार से वे यहाँ पर मुद्रण (छापाखाना) और पुस्तक विक्रय का कारोबार शुरू किया। इसके बाद वे कलकत्ता से छापाखाना के कारोबार को लेकर अपने गाँव बहड़ा चले गये।

गंगकिशार भट्टाचार्य ने अपने गाँव में ‘बग्ला गजट यन्तालय’ नाम से छापाखाना खोला। यही से उन्होंने साप्ताहिक प्रत्रिका ‘बग्ला गजट’ का प्रकाशन शुरू किया। इसी छापाखाना से वे भारत चन्द्र द्वारा सम्पार्दित सचित्र प्रथम बांग्ला भाषा पुस्तक ‘आन्नदामंगल’ को प्रकाशित किया। इसी प्रकार से उन्होंने ‘ए ग्रामर इन इंग्लिस एण्ड बंगाली’, ‘गणित नामता’, व्याकरण लिखने का आदर्श, ‘हितोपदेश’, ‘दायभाग’ एवं चिकित्सापर्व नामक अन्य पुस्तकों का प्रकाशन किया।
इस प्रकार छापाखाना के क्षेत्र में प्रथम बंग्ला व्यवसायी के रूप में इनका अमूल्य योगदान रहा।

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प्रश्न 5.
श्रीरामपुर मिशन प्रेस किस प्रकार एक अग्रणी मुद्रण प्रेस के रूप में परिणत हुआ ?
उत्तर :
1800 ई० से 1837 ई० के 38 वर्षों तक बंगला मुद्रण और प्रकाशन के क्षेत्र में श्रीरामपुर मिशन प्रेस का महत्वपूर्ण योगदान रहा तथा यह निम्नलिखित कार्यों के द्वारा देश का अग्रणीय छापाखाना बन सका –
(i) 1800 ई० में विलियम केरी ने श्रीरामपुर मिशन प्रेस तथा श्रीरामपुर वायोपिस्ट मिशन प्रेस की स्थापना की। इन दोनों छापाखानों में दो वर्ष पहले से लकड़ी के छपाई यन्त्र से विभिन्न देशी भाषा और बंगला भाषा में पुस्तक एवं पत्रिकायें छपती रही। 1812 ई० से इन छापाखानों में लोहे के यन्त्रों द्वारा छपाई होने लगी।
(ii) विलियम केरी ने जशुआ मार्शमैन, विलियम वार्ड और चार्ल्स ग्राण्ट को साथ लेकर पुस्तक छापने के कार्यक्रम का बीड़ा उठाया। पुस्तक छपाई के क्षेत्र में श्रीरामपुर त्रयी की विशिष्ट भूमिका रही।
(iii) श्रीरामपुर मिशन छापाखाना से पहली पुस्तक वाइविल का अनुवाद छपा था। इस प्रेस से पहले-पहल धार्मिक पुस्तकों का अनुवाद ही छपते रहे। इसके बाद छात्रों की पाठ्यपुस्तके, पत्र-पत्रिकाए जैसे दिगदर्शन, समाचार दर्शन, बंगाल गजट, संवाद कौमुदी तथा अनुवादित पुस्तके सिहांसन बत्तीसी, हितोपदेश, राजाबली, प्रबोध चन्द्रिका, लिपिमाला आदि अन्य महत्वपूर्ण पुस्तके प्रकाशित होने लगी।
(iv) इसी प्रेस से फोर्टविलियम कॉलेज के साथ-साथ अन्य स्कूल एवं कालेजों की पाठ्य-पुस्तके छपने लगी। इस प्रकार मिशन प्रेस सहयोगी के हिसाब से व्यापारिक रूप से पुस्तके छापने लगा।
(v) श्रीरामपुर मिशन प्रेस एक काठ की छपाई मशीन से छापाखाना का व्यवसाय शुरू किया जो 1832 तक आते-आते 18 लौहे के छापाखाना स्थापित कर लिए। जिसमें 40 भाषाओं में 2 लाख से अधिक पुस्तके छपने व प्रकाशित होने लगी। इस प्रकार से श्रीरामपुर मिशन प्रेस देश में सबसे बड़ा छापाखाना बन सका।

प्रश्न 6.
बंगाल में कारीगरी शिक्षा के विकास में बंगाल टेक्निकल (तकनीकी) इंस्टीट्यूट की क्या भूमिका थी?
उत्तर :
बंगाल में कारीगरी शिक्षा के विकास में बंगाल तकनीकी संस्थान की भूमिका :- बंगाल में तकनीकी शिक्षा का ज क तारकनाथ पालित को माना जाता है। सर्वप्रथम 25 जुलाई, 1906 ई० को कलकत्ता में उन्होंने तकनीकी स्कूल की स्थांगा की। बाद में इसे राष्ट्रीय शिक्षा परिषद के अधीन कर दिया गया।

इसकी स्थापना का उद्देश्य बंगाल के युवा वर्ग में तकनीकी और कारीगरी शिक्षा के विकास को बढ़ावा देना था। इस कॉलेज में वर्कशाप के साथ-साथ शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के निवास करने की सुख-सुविधा की व्यवस्था की गयी थी। धीरे – धीरे इसमें शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की संख्या बहुत अधिक हो गयी तथा इसका नाम बंगाल सहित पूरे देश में चर्चित हो गया। तब इसका नाम बदल कर यादवपुर तकनीकी कॉलेज रख दिया गया।

जिसे 1955 ई० में स्वायतशासी संस्था की मान्यता प्रदान कर दी गयी। इसके बाद यहाँ बड़ी संख्या में बंगाल के तथा भारत के अन्य भागों से छात्र आकर सफलतापूर्वक तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने लगे और यहाँ से शिक्षा प्राप्त छात्र राज्य और देश के विभिन्न भागों में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने लगे। इस प्रकार बंगाल तकनीकी संस्थान ने बंगाल में कारीगरी शिक्षा के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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प्रश्न 7.
बंगाल में प्रिंटिंग प्रेस के विकास में उपेन्द्र किशोर राय चौधरी की भूमिका का वर्णन करो।
उत्तर :
20 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में बंगला साहित्य एवं प्रेस में अदभुत परिवर्तन आया जिसके कारण बंगला साहित्य (Bengali Literature) और मुद्रण (Press) दौर बढ़े। ऐसा लगा मानो उनमें जान आ गयी। इसके पहले 19 वीं शताब्दी के मध्य तक इन दोनों क्षेत्रों में कोई पहल नहीं था, जिसके कारण बंगला साहित्य एवं मुद्रण (Press) पिछड़ता चला गया था। लेकिन 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में एक ऐसे व्यक्ति का अभ्युदय हुआ जिनके प्रयास से बंगला साहित्य एवं मुद्रण (Press) का पर्याप्त विकास हुआ। उस महान व्यक्ति का नाम ‘उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी’ था।

उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी का जन्म सन् 1863 में बांग्लादेश के मैमन सिंह जिला के मोउसा या मसूया गाँव में हुआ था जो उस समय बंगाल के अन्तर्गत था, अब यह बंगाल से अलग हो गया है अर्थात् यह गाँव अब बंगलादेश का हिस्सा बन चुका है। उनके पिता का नाम कालीनाथ राय था। उनके पिता द्वारा दिया गया नाम कामदारंजन राय था। पाँच वर्ष की उम्र में एक अणुत्रक जमींदार ने उन्हें गोद ले लिया था और उनका नया नाम ‘उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी’ रखा था। वे द्वारिकानाथ गाँगुली के दामाद, लोकम्रिय हास्य लेखक सुकुमार राय के पिता तथा अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सत्यजीत राय के दादा थे। उनकी मृत्यु सन्श 915 में हो गयी।

उपेन्द्रकिशोर रॉय चौधरी एक प्रसिद्ध बंगाली साहित्यकार थे। इसके साथ ही वे एक प्रसिद्ध चित्रकार, सितारवादक, गीतकार, तकनीशियन तथा उत्साही व्यवसायी भी थे। उन्होंने भारत में पहली बार बच्चोंके लिए ‘संदेश’ नामक पत्रिका का शुभारंभ किया, जो एक बंगाली मिठाई के नाम पर रखी गयी थी। इन्होंने दक्षिण एशियां में प्रेस के क्षेत्र में ‘आधुनिक अक्षर निर्माण कला’ (Block making) का निर्माण किया तथा इसके साथ ही ‘रंगीन ब्लाक मेंकिग’ (Colour block making) का भी शुरूआत किये। इतना ही नहीं, उन्होंने कलकत्ता में भी यह परम्परा शुरू की।

उन्होंन स्वयं एक प्रकाशन संस्था का निर्माण किया तथा अपने प्रकाशन घर का नाम ‘यू० एन० राय एण्ड सन्स’ (U. N. Roy and Sons) रखा जहाँ से अनेकों रचनाएँ प्रकाशित हुई जिनमें ‘छेलेदेर या छोटोदेर रामायण’, ‘छोटोदेर महाभारत’, ‘गोपी गाइन बाघा बाइन’ तथा ‘टुनटुनीर बोई’ इत्यादि प्रमुख रचनाएँ हैं। इतना ही नहीं, इन्होंने वैज्ञानिक तरीकों से ‘छाया-प्रति’ (Negative making) का भौ निर्माण किया था। इस कार्य की प्रशंसा न केवल भारत में हुआ था बल्कि बिटन की प्रत्रिका ‘पनरोज एनुवल वॉल्यूम – XI’ (Penrose Annual Volume – XI) में भी काफी कुछ छपा था।

इनके द्वारा स्थापित मुद्रणालय दक्षिण एशिया का पहला मुद्रणालय या प्रेस था, जहाँ से काले एवं संफेद (Block and White) तथा रंगीन (Colourful) फोटोग्राफ्स मुद्रित होते थे।

प्रश्न 8.
विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना तथा उसके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये गये योगदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना : विश्वभारती की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बीरभूम जिले के बोलपृर संशंश से 2 की॰ मी॰ दूर शांतिनिकेतन नामक स्थान पर स्थापित किया था। प्रारम्भ में यह एक विद्यालय था, जिसे रोंन्द्रनाथ ने पाँच छात्रों को लेकर शुरू किया था। शुरू में यह विद्यालय अध्यात्मिक ध्यान और मनोयोग का केन्द्र था। 1908 ई० में इसमें अन्य विषयों की शिक्षा दी जाने लगी। 23 दिसम्बर 1931 ई० को भारत सरकार ने इसे महाविद्यालय को मान्यता दी। जब यह महाविद्यालय पूरे देश में शिक्षा और ज्ञान का केन्द्र बन गया, तब स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1951 ई० में इसे पूर्ण विश्वविद्यालय की मान्यता प्रदान की गई और रवीन्द्रनाथ ठाकूर इसके पहले कुलपति थे। आज यह पूरे देश में विश्व-भारती केन्द्रीय विश्वविद्यालय के नाम से विख्यात हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान : रवीन्द्रनाथ ने बोलपूर के निकट शांतिनिकेतन में 1901 ई० में जिन पाँच छात्रों को लेकर शातिनिकेतन विद्यालय के रूप में शुरुआत की वो 1951 ई० तक आते-आते शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय का रूप ग्रहण कर लिया, जहाँ देश और विदेश के विद्यार्थी अपने धर्म, संस्कृति, भाषा, कला, संगीत, विज्ञान, स्थापत्य कला विभिन्न सामाजिक विज्ञान आदि विषयों का अध्ययन करते हैं। शांतिनिकेतन में विद्यार्थियों को शिक्षा बन्द कमरे में नहीं, बल्कि प्रकृति के गोद में वृक्षों के छाया तले, योग्य गुरूओं द्वारा दी जाती हैं। यहाँ का शांत, आदर्श, खुला वातावरण भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था ‘गुरूकूल’ के शिक्षा व्यवस्था की याद दिलाती है। आज यह विश्वविद्यालय देश और विदेश में शिक्षा, सास्कृतिक और बौद्धिक ज्ञान के आकर्षण का केन्द्र बन गया है।

प्रश्न 9.
रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा प्रतिपादित शिक्षा के उद्देश्य को संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर की दृष्टि में शिक्षा का उद्देश्य : रवीन्द्रनाथ जी एक महान प्रकृति प्रेमी, संगीत प्रेमी, विद्यानुरागी, शिक्षा-शास्त्री थे, वे बच्चों को चारदिवारी के बन्द कमरे में शिक्षा ने देकर खुले, स्वस्थ और शांत वातावरण में शिक्षा देने के पक्षधर थे, उनकी दृष्टि में शिक्षा के निम्न उद्देश्य थे –

  1. सत्य के विभिन्न रूपों की प्राप्ति के लिए विभिन्न दृष्टिकोण से मानव मस्तिष्क का अध्ययन किया जाना।
  2. प्राचौन और नवीन विधि से पढ़ने-पढ़ने के तौर-तरिकों में सम्बन्ध बनाये रखना चाहिए।
  3. पूर्वी तौर-तरिकें और पध्विमी तौर-तरिकें को एक दूसरे से जोड़ने का प्रयत्न करना चाहिए, तथा एक-दूसरे के संभावित अच्छे विचारों का आदान-प्रदान किया जाना चाहिए।
  4. बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक्त अध्यात्मिक, नैतिक, सांस्कृतिक विषयों का भी ज्ञान देना चाहिए।
  5. इन्हीं उंदेश्यां को ध्यान में रखते हुये छात्रों के सर्वोमुखी उन्नति के लिए उन्होंने सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में शांतिनिकेतन में विश्वभारती स्थापना की थी।

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प्रश्न 10.
बंगाल की राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : 1905 ई० में बंगाल विभाजन के फलस्वरूप बंगाल व देश में उभरे स्वदेशी आन्दोलन के ज्वार ने भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (बंगाल) को जन्म दिया, इस समय बंगाल के तथा देश के कई बुद्धजीवीयों ने मिलकर 1906 ई० में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद कि स्थापना की, जिसका उद्देश्य देश का निर्माण और विकास करना था, इस परिषद कं अधक प्रयास से देश के विभिन्न भागों में देशी-भाषा और मातृ-भाषा में अनेकों विद्यालय, स्कूल, तकनीकी कॉलेज, इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेज स्थापित किये गये। इस परिषद की स्थापना में महेन्द्रलाल सरकार, तारकनाथ पालित, अरविन्द घाष, रासबिहारी बोस, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, आशुतोष चौधरी का विशेष योगदान रहा, इसके प्रयास से हि देश में विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उच्च शिक्षा का विकास हुआ और भारत आधुनिक शिक्षा के रास्ते पर चल पड़ा।

प्रश्न 11.
विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना तथा उसके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये गये योगदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्वभारती की स्थापना में टैगोर की शिक्षा संबंधी धारणा का वर्णन करो।
उत्तर :
विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना :- विश्वभारती की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 1863 ई० में बीरभूम जिले के बोलपुर स्टेशन से 2 कि०मी० दूर शांति निकेतन नामक स्थान पर स्थापित किया था। प्रारम्भ में यह एक विद्यालय था, जिसे रवीन्द्रनाथ ने पाँच छात्रों को लेकर शुरु किया था। शुरु मे ही यह विद्यालय अध्यात्मिक ध्यान और मनायोग का केन्द्र था। 1908 ई० में इसमें अन्य विषयों की शिक्षा दी जाने लगी। 23 दिसम्बर 1931 ई० को भारत सरकार ने इसे महाविद्यालय की मान्यता दी, तब यह महाविद्यालय के रूप पूरे देश में शिक्षा और ज्ञान का केन्द्र बन गया, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1951 ई० में इसे पूर्ण विशविद्यालय की मान्यता प्रदान की गई और रवीन्द्रनाथ ठाकूर इसके पहले कुलपति बने। आज यह पूरे भारत में विश-भारती केन्द्रीय विश्शविद्यालय के नाम से विख्यात है।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान :- रवीन्द्रनाथ ने बोलपुर के निकट शांतिनिकेतन में 1901 ई० में पाँच छात्रों को लेकर शातिनिकेतन में विद्यालय के रूप में शुरुआत की, और 1951 ई० तक आते-आते शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय का रूप ग्रहण कर लिया। जहाँ देश और विदेश के विद्यार्थी अपने धर्म, सस्कृति, विज्ञान, स्थापना कला विभिन्न समाजिक विज्ञान आदि विषयों का अध्ययन करते हैं, यहाँ का शांत, आदर्श, खुला वातावरण भारत के प्राचीन शिक्षा व्यवस्था ‘गुरुकुल’ के शिक्षा व्यवस्था की याद दिलाती है। आज यह विश्चविद्यालय देश और विदेश में शिक्षा संस्कृति और बौद्धिक ज्ञान के आकर्षण का केन्द्र बन गया है।

प्रश्न 12.
बंगाल की राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा नीति :- 1905 ई० में बंगाल विभाजन के फलस्वरूप बंगाल व देश में उभरे स्वदेशी आन्दोलन के ज्वार ने भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (बंगाल) को जन्म दिया, इस समय बंगाल के तथा देश के कई बुद्ध-जीवियों ने मिलकर 1906 ई० में ‘राष्ट्रीय’ शिक्षा परिषद की स्थापना की जिसका उद्देश्य देश का निर्माण और विकास करना था। इस परिषद के अथक प्रयास से देश के विभिन्न भागों में देशी-भाषा और मातृभाषा में अनेकों स्कूल, तकनीकी कालेज, इंजीनीयरिंग एवं मेडिकल कालेज स्थापित किये गये। इस परिषद की स्थापना में महेन्द्रलाल, तारकनाथ पालित, अरविन्द घोष, रासविहारी बोस, सुरेन्द्रनाथ बेनर्जी, आशुतोष चौधरी का विशेष योगदान रहा। इनके प्रयास से ही देश में विज्ञान तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उच्च शिक्षा का विकास हुआ और भारत आधुनिक शिक्षा के रास्ते पर चल पड़ा।

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प्रश्न 13.
आधुनिक चिकित्सा के विकास में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की भूमिका/योगदान का सक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में आधुनिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए लार्ड विलियम बेंटिक के प्रयास व आदेश से 28 जनवरी 1835 ई० को कलकत्ता में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई। इसकी स्थापना से भारत में उच्च च्चिकित्सा के शिक्षा क्षेत्र में एक नये युग की शुरुआत हुई। इस कॉलेज में देश के नवयुवको को आधुनिक चिकित्सा की सुविधा प्रदान की गयी। इस मेडिकल काँलेज में दवाओं की शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थी को मानव-शरीर की चिर-फाड़ की शिक्षा दी जाने लगी।

प० मधुसूदन गुप्ता भारत और एशिया के पहले शल्य डाक्टर बने, उनके इस सफल कार्य के लिए अंग्रेज सरकार ने उन्हें 50 तोपों कों सलामी दी। इस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर विद्यार्थी देश के विभिन्न भागों में जाकर आधुनिक चिकित्सा का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रकार कलकत्ता मेडिकल कॉलेज ने देश के विभित्र-प्रान्तों में पश्चिमी आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 14.
औपनिवेशिक शिक्षा से तुम क्या समझते हो ? शिक्षा-शास्त्रियों ने इस शिक्षा नीति की समालोचना क्यों किया है ?
उत्तर :
औपनिवेशिक शिक्षा : भारत में शिक्षा को लेकर अनेक उतार-चढ़ाव हुआ जिसमें भारत देश का भविष्य निहित था। उतार-चढ़ाव कहने का मतलब अंग्रेजो के समय में भारतीय शिक्षा में अनेकों बदलाव किया गया। यह सभी बदलाव देखा जाय तो अंग्रेज अपने पक्ष में ही करते थे। अपनी सभ्यता तथा संस्कृति को भारतीय शिक्षा के माध्यम से भारतवासियों के ऊपर थोपना चाहते थे। अर्थात् अंग्रेजी प्रशासन भारतवासियों के शोषण करने हेतु हर हथकण्डे अपनाया करते थे। परन्तु इस प्रशासन में ही कुछ ऐसे गवर्नर-जनरल भी थे, जो न केवल अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देते थे बल्कि संस्कृति शिक्षा को भी बढ़ावा देते थे।

अंग्रेजों या अंग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत में प्राच्य शिक्षा के अलावा पाश्चात्य शिक्षा को अधिक महत्त्व देते थे। वे प्राच्य एवं पाश्चात्य भाषाओं में समन्वय सथापित न करके उनमें मतभेद पैदा किया करते थे ताकि प्राच्य भाषा का अन्त हो जाये। लेकिन कुछ गवर्नर जनरल पाश्चात्य शिक्षा के साथ-साथ प्राच्य शिक्षा को भी लेकर चलना चाहते थे। एसे गवर्नर-जनरलों ने बहुत सारे विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों की स्थापना किये।

समालोचना : भारतीय शिक्षा शास्त्रियों ने औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था की समालोचना प्राच्य और पाश्चात्य शिक्षा व्यवस्था के आधार पर किये। इसके निम्न कारण हैं –
i. लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह थी इसके द्वारा छात्रों को भारतीय संस्कृति और सभ्यता से दूर रखने का प्रयास किया गया था। इस शिक्षा व्यवस्था को धर्म से भी दूर रखा गया था। रवीन्द्रनाथ चाहते थे कि विद्यार्थी के मस्तिष्क में धार्मिकता का विकास हो तथा नैतिकता और चरित्र का विकास भारतीय आदर्शों के अनुकूल हो।

ii. मैकाले की शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषा को अनदेखा किया गया था जबकि अधिकतर शिक्षाविद् यह मानते थे कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए। महान चिन्तक रवीन्द्रनाथ ने अपने विद्यालय में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा को ही माना।

iii. मैकाले की शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य मात्र रोटी और भौतिकता तक सीमित था। भारत में शिक्षा व्यवस्था के संचालक साधु-संत तथा ऋषि-मुनि थे जो नैतिक गुणों और आध्यात्मिकता पर जोर देते हैं।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 5 वैकल्पिक विचार एवं प्रयास

प्रश्न 15.
बंगाल में ‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद’ (National Education Council) के अवदान का अभिमूल्यन करो।
उत्तर :
राष्ट्रीय शिक्षा परिषद : तकनीकी शिक्षा के विकास में ‘नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन’ था ‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद’ का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओ को तकनीकी शिक्षा प्रदान कराना था। इतना ही नहीं, छोटे-छोटे बच्चों को तकीनीकी शिक्षा किस प्रकार प्राप्त हो इसका भी ध्यान रखा जाता था। इस कार्य में अनेकों तकनीकी शिक्षा के प्रेरणा स्रोत थे जिनमें रवीन्द्रनाथ टैगोर, अरबिन्द घोष, राजा सुबोध चन्द्र मल्लिक, ब्रजेन्द्र किशोर रॉय चौधरी इत्यादि उल्लेखनीय है।

ऐसे तो माना जाता है कि राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल (The National Council of Education’ Bengal) का जन्म बंग-भंग के दौरान किया गया स्वदेशी आन्दोलन (1905 ई०) द्वारा हुआ था अर्थात् राष्ट्रीय शिक्षा परिषद् बंगाल की स्थापना सन् 1906 में प्रमुख शिक्षाविदों के सम्मिलित प्रयासों से हुआ था। इस परिषद् के तहत राज्य के समस्त विज्ञान एवं तकनीकी स्कूल एवं कॉलेज खोले गये। इसी परिषद् ने ‘बंगाल तकनीकी कॉलेज (B.I.T.) की स्थापना किया। बाद में चलकर राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल सन् 1955 में ‘यादवपुर विश्वविद्यालय’ में मिला दिया गया। इस परिषद की स्थापना में प्रमुख भूमिका ‘रासबिहारी घोष’, ‘आशुतोष चौधरी’, ‘हिरेन्द्रनाथ दत्त’ तथा ‘सुरेन्द्रनाथ बनरी’ ने पालन किया था।

इस तरह बंगाल में विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के विकास में ‘कलकत्ता विज्ञान कॉलेज’ तथा ‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्, बंगाल’ की अहम या महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रश्न 16.
मानव, प्रकृति एवं शिक्षा के समन्वय में रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, चिन्तक तथा समाज सुधारकों में गिने जाते थे। इसी आधार पर रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि के साथ-साथ एक महान शिक्षक भी थे। टैगोर जी ने एक शिक्षक के रूप में छात्रों एवं छात्राओं के लिए हर सम्भव कार्य किये जिनकी जरूरत उनको थी। एक शिक्षक के रूप में टैगोर जी का प्रारम्भिक कार्य छात्र-छात्राओं को सही आचरण, व्यवहार और अच्छी ज्ञान प्राप्त कराना था।

रवीन्द्रनाथ टैगोर खुद एक शिक्षक थे। इसीलिए उन्होंने ‘पकृति’ को महान शिक्षक की दर्जा दिया है, जो हमेशा जीवित रहता है अर्थात् महान शिक्षक होने के साथ-साथ, एक जीवित शिक्षक भी। ‘प्रकृति’ के साथ रहकर अबोध बच्चे जीवन के हर एक रहस्य को सीख पाते हैं। ‘प्रकृति’ एक अबोध मनुष्य को बोधगम्य बनाती है। टैगोर जी का मानना है कि समाज में पठन-पाठन का केन्द्र या विद्यालय खुले प्राकृतिक वातावरण में हों ताकि बच्चे खुले प्राकृतिक वातावरण में पढ़कर विकसित हो पायेंगे। इतना ही नहीं, बच्चे प्रकृति की गोद में रहकर ममता रूपी प्यार पाकर बहुत कुछ सीख पाते हैं। इस संदर्भ में रवीन्द्रनाथ टैगोर का कथन है –

” सांसारिक बन्धनों में पड़ने से पहले बालकों को अपने निर्माण काल में प्रकृति का प्रशिक्षण प्राप्त करने दिया जाना चाहिए।” रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार प्रकृति या वातावरण में एक विद्यालय के सभी सामान हैं । जैसे – किताबें, पाठ्यक्रम, डेस्क, श्यामपट, शिक्षक या शिक्षिका तथा विद्यालय का माहौल आदि। अर्थात् प्रकृति या वातावरण खुद एक शिक्षक है, उनकी विभिन्न दृश्य किताबें एवं पाठ्यक्रमें हैं, जहाँ बच्चे प्रकृति या वातावरण में विद्यालय के भाँति पढ़ते एवं सीखते हैं। इसीलिए टैगोर जी के अनुसार प्रकृति या वातावरण एक महान जीवित शिक्षक है।
उपर्युक्त उल्लेखों से हम पाते हैं कि प्रकृति या वातावरण सही रूप में एक महान् जीवित शिक्षक है, जिसका वर्णन टैगोर जी ने किया है।

प्रश्न 17.
विज्ञान के विकास में ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ की भूमिका क्या थी ?
या
विज्ञान के विकास में ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ का क्या महत्व है ?
या
‘बसु विज्ञान मन्दिर’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
विज्ञान के विकास के लिए अनेकों संस्थाएँ बनाई गई, जो विज्ञान के क्षेत्र में अद्भुत आविष्कार माना जाता है। इन्हीं आविष्कारों के माध्यम से आज विज्ञान इस कदर चल पड़ा है कि मानो लंगड़ा घोड़ा दौड़ पड़ा हो। 20 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में विज्ञान में अनेकों परिवर्तन आये, जो विज्ञान के विकास को आगे बढ़ाया। इतना ही नहीं, 20 वी शताब्दी में इतना विकास हुआ कि इस दौर को आधुनिक विज्ञान का दौर माना गया। इस दौर को लाने वाले एकमात्र ‘जगदीश चन्द्र बोस’ थे, जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से विज्ञान के क्षेत्रों में अद्भुत विकास लाये। इसीलिए तो इन्हें आधुनिक विज्ञान का दाता माना जाता है। इन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अनेकों आविष्कार किये जिसके बलबुते पर विज्ञान में विकास आ पाया और विज्ञान का स्वरूप आधुनिक हो पाया।

जगदीश चन्द्र बसु के प्रयास से बंगाल में सन् 1917 में ‘बसु विज्ञान मन्दिर’ की स्थापना किया गया। इस संस्था में भौतिकी (Physics), रसायन (Chemistry), वसस्पति-जीव विज्ञान (Plant Biology), अणुजीव विज्ञान (Microbiology), जीवन रसायन (Bio-chemistry), जीव शरीर विज्ञान (Animal Physiology), जीव सूचना विज्ञान (Bio-informatics) एवं पर्यावरण विज्ञान (Environment Science) इत्यादि विषयों पर शोध होता है। बाद में चलकर ‘बसु विज्ञान मन्दि’

का नाम ‘बोस संस्था’ (Bose Institute) रखा गया जहाँ विज्ञान संबंधित हर प्रकार की शिक्षा दी जाती है। इस संस्थान के द्वारा ‘कलरा’ के विष प्रभाव पर किये गये कार्य काफी महत्वपूर्ण है। इस कार्य में ‘प्रोफेसर एस० एन० दे०’ का अमृल्य योगदान है। इतना ही नहीं, आचार्य जगदीश चन्द्र बसु भारत में ‘आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान’ के संस्थापक माने जाते हैं।

‘बोस संस्थान’ वर्तमान में एक संग्रहालय भी है, जिसका प्रारम्भ खुद आचार्य जगदीश चन्द्र बसु ने अपने समय से ही कर दिया था। वे अपने उपकरणों का प्रदर्शन भी किया करते थे। इस तकनीकी संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य आचार्य जगदीश चन्द्र बसु द्वारा उपयोग में लाये गए वस्तुओं उपकरणों एवं स्मृति चिन्हों की प्रदर्शनी है।

उपर्युक्त विवरणों से हमलोग जान पाते हैं कि आचार्य जगदीश चन्द्र बसु द्वारा स्थापित ‘बोस संस्थान’ विज्ञान के विकास के क्षेत्र में एक अद्भुत प्रयास है। जो आधुनिक विज्ञान का प्रतीक माना जाता है, जिसने विज्ञान के क्षेत्र में हलचल मचा दिया।

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प्रश्न 18.
19 वीं शताब्दी में बंगाल में प्रेसों का आविर्भाव किस प्रकार हुआ ?
या
बंगाल में पाठ्यपुस्तकों की छपाई के विकास की परिचर्चा कीजिए।
उत्तर :
19 वीं शताब्दी में बंगाल में प्रेसों के आविर्भाव का स्वरूप मिलाजुला पाया जाता हैं। अर्थात् 19 वीं शताब्दी में प्रेसों के माध्यम से अनेकों पत्र, पत्रिका एवं समाचार पत्र छापे गये जो न केवल बंगला भाषा में थे बल्कि हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में भी थे। ये सभी पत्र, पत्रिका एवं समाचार-पत्र 19 वी शताब्दी के बंगाल में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। 19 वीं शताब्दी में बंगाल में प्रेसों के माध्यम से विभिन्न विषयों, राजनीति से लेकर मनोरंजन के उपलब्ध जानकारी जान पात थे।

19 वीं शताब्दी में अनेक पत्र, पत्रिका और समाचार पत्रों का प्रकाश हुआ था, जिनमें सन् 1780 ई० में ‘जे० के० हिक्की’ का ‘बंगाल गजट’ नामक समाचार पत्र था। यह एक सप्ताहिक पत्र था। परन्तु इसकी प्रतियाँ उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण इसकी जानकारी अपर्याप्त है। सन् 1780 ई० में ही भारत का दूसरा समाचार पत्र प्रकाशित हुआ जिसका नाम ‘इण्डिया गजट’ था। सन् 1818 ई० में ‘मार्शमैन’ के नेतृत्व में बंगाल में ‘दिग्दर्शन’ नामक मासिक पत्रिका बंगला भाषा में निकला।

1818 ई० में बंगाली भाषा में ‘संवाद कौमु’ का प्रकाशन ‘राजा राममोहन राय’ ने किया था। इतना ही नहीं, सन् 1822 ई० में राजा राममोहन राय ने ‘मिरातउल अखबार’ का भी प्रकाशन किया। इन दोनों अखबारों के माध्यम से राजा राममोहन राय सामाजिक एवं धार्मिक सुधार समाज में लाना चाहते थे। राजा राममोहन राय ने अंग्रेजी भाषा में ‘ब्राह्मिनिकल मैगजीन’ निकाले। इसके बाद द्वारिका नाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर तथा राजा राममोहन राय के प्रयास सन् 1830 ई० में बंगला भाषा में ‘बंगदत्त’ पत्र निकाला गया।

ऐसा माना जाता है कि 19 वीं शताब्दी के मध्य से ही भारत और बंगाल क्षेत्र के अन्तर्गत आधुनिक मुद्रण या प्रेस का आविर्भाव हो चुका था। लेकिन उसका पहल 20 वीं शताब्दी के शुरू आत में उपेन्द्रकिशोर रॉय बौधरी ने किया, जो भारत एवं बंगाल में आधुनिक प्रेस के दाता या जनक माने जाते हैं।

कहा जाता है कि डुबती हुई नैय्या को खेवैय्या पार लगाता है, ठीक उसी प्रकार बंगाल में प्रेसों के विकास की शुरुआत 19 वीं शताब्दी में हुई और इसके सूत्रकार आधुनिक पुरुष राजा राममोहन राय माने जाते थे। जिन्होंने अपने पत्रों के माध्यम से समाज एवं धार्मिक सुधार का बेड़ा उठाये।

प्रश्न 19.
रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा प्रतिपादित शिक्षा का उद्देश्य निर्धारित कीजिए।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, समाज सुधारक एवं राजनैतिक चिन्तक माने जाते थे, इतना ही नहीं, वे एक महान शिक्षावादी भी थे। रवीन्द्रनाथ टैगोर एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होने अपने जीवन में अनेको महत्वपूर्ण कार्य किये। जैसे शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना। रवीन्द्रनाथ टैगोर शिक्षा के प्रति अत्यन्त ही सजग रहते थे। वे शिक्षा को सर्वोपरि देखना चाहते थे, तभी तो उनका मानना था कि शिक्षा मनुष्य के शरीर के कण-कण में निवास करती है। अर्थात् शिक्षा वह हो जो मनुष्य को सर्वोच्च स्थान दिलाने में मदद करे। इतना ही नहीं,समनुष्य को शिक्षा के माध्यम से जो ज्ञान प्राप्त होता है, उसे मनुष्य का शारीरिक, सामाजिक, मानसिक तथा अन्य विकास होता है जो मनुष्य को प्रगति के रास्ते पर ले जाता है। तभी तो रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शिक्षा के संबंध में अपना विचार निम्नरूप में व्यक्त करते हैं :-
“सर्वोच्च शिक्षा वही है जो सम्पूर्ण दृष्टि से हमारे जीवन का सामंजस्य स्थापित करती है।”

टैगोर जी ने माना है कि शिक्षा मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, नैतिक, चारित्रिक, विश्व-बंधुत्व और राष्ट्रीयता का विकास करता है। इसीलिए प्रत्येक मनुष्य को शिक्षा के प्रति समर्पित होना चाहिए। रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने मनुष्य को बताने का प्रयास किया है कि किस प्रकार से हमें शिक्षा आर्जित करना है, जिससे हमें या हमारे भीतर सभी प्रकार का बौद्धक विकास हो पाये, शिक्षा या ज्ञान की प्राप्ति हो सकें। शिक्षा के संबंध में उनका निम्नलिखित सिद्धान्त रहा है कि मनुष्य को शिक्षा प्रहण करके प्रकृति का अनुसरण क्रिया के माध्यम से जीवन क्रियाओं द्वारा, खेल द्वारा, बार-बार अध्ययन द्वारा, मनन द्वारा तथा ध्यान केन्द्रित करके करना चाहिए।

इन सभी सिद्धान्तों के माध्यम से हमें पूर्णरूप से ज्ञान की प्राप्ति होता है जिससे हमारे विभिन्न क्षेत्रों में भी विकास होता है। अर्थात् इन सभी कार्यो के माध्यम से एक अबोध बालक या बालिका को बोध हो पाता है। टैगोर का मानना है कि एक अबोध बालक या बालिका जन्म से ही कुछ न कुछ सीख पाते है। उन्हें इन सभी मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, तभी वे एक बोध या शिक्षित बालक या बालिका हो पाते हैं।

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प्रश्न 20.
‘मानवों’ के संबंध में रवीन्द्रनाथ टैगोर का क्या विचार था ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, सुधारक, सामाजिक, शिक्षाविद के साथ-साथ एक महान चिन्तक भी थे। उनका जन्म कलकत्ता महानगर के जोड़ासाँकू अंचल में हुआ था। भले ही उनका जन्म कोलकत्ता जैसे महानगर में हुआ था, लेकिन वे एक भमणकारी या घुमक्कड़ किस्म से व्यक्ति थे।

कभी यूरोप तो कभी अमेरीका जैसे महान देशों में घुमने के लिए गये थे। लेकिन उनका मूल उद्देश्य विभिन्न मानवों के आंतरिक चरित्र या व्यवहार को टटोलना था। विभिन्न मनुष्यों से मिलकर मनुष्य जाति के व्यवहार को जानना था कि लोग कितने किस्म के होते है, उनके विचार क्या-क्या होते हैं। इतना ही नहीं, दूसरे लोगों के प्रति उनका चरित्र या व्यवहार कैसा होता है।

टैगोर जी का ‘मानवो’ के संबंध में कुछ ऐसा ही विचार था कि विभित्न मानव के विचार या व्यवहार भिन्न-भिन्न होते हैं लेकिन शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिसके माध्यम से मानव का चरित्र तथा व्यवहार दूसरों के प्रति समान हो जाता है अर्थात् दूषित चरित्र और व्यवहार के मानव शिक्षा से जुड़कर शिक्षित हो जाते हैं तथा दूसरों के प्रति अच्छा आचरण व्यक्त करते हैं। टैगोर के अनुसार देखा जाय तो प्रकृति, मानव और शिक्षा तीनों ही देश के लिए उज्ज्वल भविष्य हैं।

टैगोर जी का मानना है कि शिक्षित मानव के अन्दर अच्छी आचरण, चरित्र और व्यवहार का आविर्भाव उसकी रुचि (Interest) से प्राप्त होता है। अर्थात् यदि मनुष्य में रुचि होगी तभी वह शिक्षित हो पायेगा और उसके अन्दर मानसिक, शरीरिक, सामाजिक तथा राजनैतिक विकास हो पायेगा जो एक सामाजिक मनुष्य के लिए आवश्यक तत्व है।

उपर्युक्त विवरणों से हम पाते हैं कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने मनुष्य के प्रति अपना भिन्न विचार व्यक्त किये हैं जिसका संबंध न केवल मनुष्य से है बल्कि शिक्षा एवं प्रकृति से भी है। अर्थात् देखा जाय तो मनुष्य एक ऐसा तत्व है जिसका संबंध प्रकृति एवं शिक्षा से है।

प्रश्न 21.
शांति निकेतन के बारे में रवीन्द्रनाथ टैगोर के क्या विचार थे ?
या
शांति निकेतन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
या
शांति निकेतन की स्थापना में रवीन्द्रनाथ टैगोर का योगदान या भूमिका का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
‘शांति निकेतन’ का अर्थ होता है, ‘शांति’ अर्थात् ‘शांत’, ‘सुनसान ‘ तथा ‘जहाँ हलचल अधिक न हो’ और ‘निकेतन’ का अर्थ ‘आवास’, ‘घर’ और ‘जहाँ कोई निवास करता हो’, अर्थात् ‘शांति का घर’। कहने का तात्पर्य यह है कि ‘शांति निकेतन’ ‘शांति का घर’ है। जहाँ सांसारिक समस्यायों से परेशान लोग शांत या एकांत या मन की एकाग्रता पाते हैं। जहाँ संसार का सर्वोच्चतम् सुख प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में देखा जाय तो, ‘शांति निकेतन’ ‘परम सुख़’ न होकर ‘मोक्ष प्राप्ति की जगह’ है, जहाँ लोग सांसारिक समस्याओं से परेशान होकर मोक्ष प्राप्ति के लिए आते हैं।

‘शांति निकेतन’ की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1863 में किये थे। शांति निकेतन भारत के पश्चिम बंगाल प्रदेश में वीरभूम जिले के अन्तर्गत बोलपुर नामक छोटे से शहर में है। जो कोलकाता से लगभग 180 कि०मी० उत्तर की ओर स्थित है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर को ‘शांतिनिकेतन’ आश्रम से बड़ा ही लगाव था। वे वहाँ अक्सर जाया करते थे। उनको वहाँ का वातावस्ण बड़ा ही मनमोहक लगता था। इसी कारण रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने वहाँ अर्थात् ‘शांतिनिकेतन’ में सन 1901 में पाँच छात्रों को लेकर एक आश्रम या विद्यालय खोले थे। उस आश्रम या विद्यालय का नाम ‘ब्रह्मचर्य आश्रम’ रखा गया था। उनके इस कार्य में उस समय के शिक्षाविद, ब्रह्मबांधव उपाध्याय, सतीश चन्द्र राय, मोहित चन्द्र सेन, अजीत कुमार चक्रवर्ती, चार्ल्स फ्रायर तथा विलियम पियरसन् आदि लोगों ने साथ दिया था।

उपर्युक्त विवरणों के आधार पर देखा जाता है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर जी के पिला ने जो महान कार्य किया था उसे और अधिक विकसित करने का कार्य रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने बड़ी विनम्रता के साथ किया।

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प्रश्न 22.
शांति निकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना का क्या उद्देश्य था, संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
‘शांति निकेतन’ की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1863 ई० में किया था। शांति निकेतन भारत के पश्चिम बंगाल प्रदेश में वीरभूम जिले के अन्तर्गत बोलपुर नामक छोटे से शहर में हैं जो कोलकाता से लगभग 180 कि॰मी० उत्तर की ओर स्थित है।
रीन्द्रनाध टैगोर को शांति निकेतन आश्रम से बड़ा ही लगाव था। वे वहाँ अक्सर जाया करते थे। सन् 1921 ई० में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को लोगों को समर्पित कर दिया। सन् 1922 को इस संस्था के नियम कानून बनाए गए, जो इसके उद्देश्यों को सबके समक्ष लाते हैं। इसके उद्देश्य निम्न है –

  1. भारतीय संस्कृति एवं आदर्शों के आधार पर शिक्षा प्रदान करना।
  2. विश्व-बधुत्व को भावना विकसित करके विश्व शाति के लिए आधार बनाना।
  3. प्राच्य-पाश्चात्य संस्कृतियों में समन्व्वय स्थापित करना।
  4. इस संस्था को सास्कृतिक संश्लेषण के साधन के रूप में बनाना।

इस प्रकार हमलोग देखते हैं कि विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना विभिन्न उद्देश्यो को सामने रख कर की गयी थी। इतना ही नहीं, स विश्वाविद्यालय की अपनी कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। इस विश्वविद्यालय में शिक्षक और छात्रों के बीच संबंध अच्छे है।

प्रश्न 23.
रवीन्द्रनाथ टैगोर के बारे में संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, साहित्यकार, समाज सुधारक एवं राजनीतिज्ञ थे। वे अपने विचारों के बड़े ही क्के थे और उनके जीवन में शिक्षा का सर्वोपरि स्थान था। उनका शिक्षा के साथ बहुत ही गहरा रिश्ता था। वे प्रकृति की पाद में रहकर शिक्षा प्राप्त किये थे। इसीलिए वे प्रकृति को शिक्षा की जननी मानते थे।

एसे महान व्यक्ति का जन्म 7 मई, सन् 1861 में ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेन्सी के कलकत्ता में स्थित जोड़ासाँकू हाकुरवाड़ी में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर एवं माता का नाम शारदा देवी था। इनके बचपन का नाम रवि’ था। रवीन्द्रनाथ टैगोर के भाई, ‘द्विजेन्द्रनाथ’, ‘सत्येन्द्रनाथ’, तथा ‘ज्योतिरीन्द्रनाथ’ थे तथा बहन ‘स्वर्णकुमारी’ थी जो एक कवसित्री थी। रवीन्द्रनाथ टैगोर की पत्नी ‘मृणालिनी’ थी, जिनकी सन् 1902 में मृत्यु हो गयी। टैगोर के पाँच बच्चे थे, उनमें से दो बच्चों की मृत्यु बाल्यावस्था में ही हो गई।

रवोन्द्रनाथ टैगोर ने अपने पिता द्वारा स्थापित बोलपुर के शांति निकेतन’ में एक आश्रम या विद्यालय सन् 1901 में खोले। जहाँ वे पाँच छात्रों को लेकर पठन-पाठन का कार्य किया करते थे। उन पाँच छात्रों में उनका एक पुत्र भी शामिल था। उस आश्रम या विध्यालय का नाम ‘बह्मचर्य आश्रम’ (Brahamcharya Ashram) था। उनके इस कार्य में अनेकों शिक्षाविद शामिल थे। जैसे – विलियम पियरसन, अजीत कुमार चक्रवर्ती तथा अन्य आदि।

टैगार जी ने जा विद्यालय खोला था, उसी विद्यालय को सन् 1921 में ‘विश्वभारती विश्वविद्यालय’ के रूप में परिवर्तित कर सन् 1922 में इस संस्था का नियम कानून बनाया गया।

रवीन्द्रनाथ टैगोर की अनेक कृतियाँ हैं, जैसे – उनकी कविता – ‘मानसी’, ‘सोनार तरी’, ‘गीतांजली’, ‘गीतिमाल्य’, ‘बलाका’ तथा ‘भानुसिंह टैगोर की पदावली’। उनका नाटक – ‘बाल्मिकि प्रतिभा’, ‘विसर्जन’, ‘राजा’, ‘डाकघर’, ‘अचलायतन ‘मुक्तधारा’ तथा ‘रक्तकरवी’ आदि।
इसके अलावा उनके और भी कार्य हैं जिनमें ‘गोरा’, ‘जन-गण-मन’, ‘रवीन्द्र संगीत’ तथा ‘आमार सोनार बांगला’ आदि का उल्लेख किया जा सकता है:
सन् 1913 में साहित्य में उनको ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला, जो 25 अप्रैल 2004 ई० को विश्वभारती विश्वविद्यालय से ही चोरी हो गया था।
रीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु 7 अगस्त, 1941 ई० को (लगभग 80 वर्ष की उम्म में) कलकत्ता में हुई।

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प्रश्न 24.
भारत में तकनीकी शिक्षा के विकास के बारे में संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारत में तकनीकी शिक्षा के विकास में काफी प्रयास किया गया है। परन्तु इसका सफरा 8 वीं सदी से लेकर 20 वी सदी तक को है। इस दौराना भारत में तकनीकी शिक्षा का विकास जोर-शोर से हुआ 118 वीं सदी से लेकर आजतक भारत में तकनीकी शिक्षा के रूप में विभिन्न संस्थाएँ बनायी गयी, जिसके माध्यम से भारत में तकनीकी शिक्षा का प्रसार-प्रचार और विकास हुआ।

सन् 1938 में कांग्रेस सरकार ने ‘मेघनाथ साहा’ की अध्यक्षता में तकनीकी शिक्षा संबंधित एक समिति का गठन किया। इस समिति ने भारत के विभिन्न प्रान्तों में तकनीकी शिक्षा के विकास पर जोर दिया। इस समिति के अन्य सदस्य थे जगदीश चन्द्र बोस, बीरबल साहनी, शान्तिस्वरूप भटनागर एवं नजीर अहमद। सन् 1942 में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सी० एस० आई० आर) की स्थापना की गई।

सन् 1944 में ए० बी० हिल की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भारत में वैजानिक एवं तकनीकी शोधों से संबंधित अनेक सिफारिशें की। वैसे इसके पहले बम्बई, मद्रास, कन्नूर तथा कूसौली आदि में तकनीकी को विकसित करने के लिए कई प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में अन्य संस्थाने खोलो गई। जिसमें 1864 ई० में सर सैख्यद खान द्वारा अलीगढ़ साइण्टिफिक सोंसाइटी एवं 1876 ई० में एम० एन० सरकार का ‘एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ साइंसेज’ हैं।
इस प्रकार हम लोग देख पाते हैं कि भारत में तकनीकी शिक्षा का विकास निरन्तर होते चला आ रहा हैं।

प्रश्न 25.
राष्ट्रीयता के विकास में प्रेसों तथा मुद्रित पुस्तकों की भूमिका का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
राश्रीयता के विकास में प्रेसों तथा मुद्रित पुस्तकों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम मे ही पूरे राष्ट्र में जानकारी व्याप्त हो पाया है। प्रेस ने जनता को आवश्यक राजनैतिक शिक्षा दी। प्रेस के माध्यम से ही विभिन्न राजनैतिक नेताओं ने अपने विचारों को आम जनता तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त की। सरकार की वास्तविक नीति को उसकी दोहरी चालों को तथा उसके द्वारा भारतीयों के शोषण को सबके समक्ष रखने वाला तथा सरकार की कटु आलोचना को जनता तक पहुँचाने वाला माध्यम प्रेस ही था।

भारत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पहले समाचार पत्र ही देश में लोकमत का प्रतिनिधित्व कर रहा था। पत्रकारिता के साथ अनेक प्रतिष्ठित देशभक्तों तथा जाने-माने नेताओं का नाम जुड़ा हुआ था। देशभत्तों ने अपने लाभ या व्यावसायिक दृष्टि से पत्रकारिता को नहीं अपनाया था। उनको समाचार-पत्रों से कोई लाभ नहीं होता था, बल्कि उनको इसके प्रकाशन में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। परन्तु इन सभी समस्याओं के बावजूद भी राष्ट्रीयता के संदर्भ में प्रेसों तथा मुद्रित पुस्तकों की भूमिका अहम मानी जाती है।

प्रश्न 26.
पंचानन कर्मकार और 19 वी सदी के पाठ्यपुस्तकों की छणाई के विकास का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर :
मुद्रण कला में बगला अक्षर (हरफ) के जनक का नाम पंचानन कर्मकार था। इनका जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के त्रिवेणी में हुआ था। कलकत्ता में जब ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना हुई तब इन्होंने उस के प्रेस में कार्य किया था। बंगला हरफ के अलावे इन्होंने अरबी, फारसी, गुरूमुखी, मराठी, तेलगु, वर्मी, चीनी आदि 14 भाषाओं के वर्णमालाओं का हरफ बनाया था।

19 वी सदी के प्रारम्भ में ही पाठशाला और स्कूल अधिक मात्रा में खुलने लगे। फलस्वरूप पाठ्युपस्तकों की मांग काफी बढ़ गई। श्रीरामपुर मिशनरीज, कलकत्ता बुक सोसाइटी तथा कलकत्ता स्कूल सोसाइटी ने पाठ्यपुस्तक प्रकाशन का कार्य आरम्भ किया। मदन मोहन तारकालंकार और ईश्वरचन्द्र विद्यासागर द्वारा रचित विभिन्न वर्ण मालाओं की पुस्तके काफी विख्यात हुई।

छपाई तकनीकी के विकास के कारण पाठचपुस्तकों की उपलब्धता बढ़ गई और यह छात्रों तथा पाठको को सुगमता से प्राप्त होने लगी, जिससे अध्ययन के लिए एक उत्तम माहौल बनने लगा तथा बंगाल ने साहित्य और शिक्षा की अग्रगति में उल्लेखनीय प्रगति प्राप्त किया।
इस प्रकार हमलोग पंचानन कर्मकार और 19 वीं सदी के पाठ्यपुस्तको की छपाई के विकास के बारे में जान पाते हैं।

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प्रश्न 27.
भारतीय मनीषियों ने औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था की आलोचना क्यों की ?
उत्तर :
भारतीय मनीषियों ने औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था की आलोचना प्राच्य और पाश्चात्य शिक्षा व्यवस्था के आधार पर किये। इसके निम्न कारण हैं –
i. लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह थी इसके द्वारा छात्रों को भारतीय संस्कृति और सभ्यता से दूर रखने का, प्रयास किया गया था। इस शिक्षा व्यवस्था को धर्म से भी दूर रखा गया था। रवीन्द्रनाथ चाहते थे कि विद्यार्थी के मस्तिष्क में धार्मिकता का विकास हो तथा नैतिकता और चरित्र का विकास भारतीय आदर्शों के अनुकूल हो।

ii. मैकाले की शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषा को अनदेखा किया गया था जबकि अधिकतर शिक्षाविद यह मानते हैं कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए। महान् चिन्तक रवीन्द्रनाथ ने अपने विद्यालय में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा को ही माना।

iii. मैकाले की शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य मात्र रोटी और भौतिकता तक सीमित था। भारत में शिक्षा व्यवस्था के संचालक साधु-संत तथा ऋषि-मुनि थे जो नैतिक गुणों और आध्यात्मिकता पर जोर देते हैं।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
19 वीं सदी में बंगाल में विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी के विकास का वर्णन करो।
अथवा
बंगाल में विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी के विकास में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं नेशनल कांडसिल आफ एडुकेशन की भूमिका का वर्णन करो।
उत्तर :
बंगाल भारत का एक ऐसा प्रदेश या क्षेत्र है, जहाँ हमेशा विज्ञान एवं तकीकी का विकास होता रहा है। भारत के अन्य क्षेत्रों में भी इसका विकास हुआ है परन्तु देखा जाय तो बंगाल में इन दोनों क्षेत्रों में आज से नहीं बल्कि ब्रिटिश जमाने से ही विकास होता चला आ रहा है। विज्ञान एवं तकनीकी का जहाँ प्रादुर्भाव होता है, वह क्षेत्र अत्यधिक लाभान्वित होता है। विज्ञान एवं तकनीकी किसी प्रदेश को उभारता है तो किसी प्रदेश को नष्ट भी करता है। जैसे – द्वितीय विश्व युद्ध की बात कही जाय तो, जहाँ अमेरिका ने जापान पर बम फेंका तो वहाँ तबाही का दृश्य छा गया। अर्थात् जहाँ अमेरिका ने विज्ञान एवं तकनीकी के माध्यम से अपने आपको मजबूत किया वहीं जापान इन दोनों लाभों से चूक गया। ठीक इसी भाँति बंगाल में 19 वीं शताब्दी से लेकर 20 वी शताब्दी तक विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्रों में विभिन्न विकास हुए।

इसी विकास के क्रम में बंगाल में ‘कलकत्ता विज्ञान कॉलेज’ एवं ‘नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसका उल्लेख निम्नरूप है –
कलकत्ता विज्ञान कॉलेज (Calcutta Science College) : कलकत्ता विज्ञान कॉलेज जो बंगाल में विज्ञान के क्षेत्र में हुई विकास का प्रतीक माना जाता है, की स्थापना सन् 1914 में आशुतोष मुखर्जी ने किया था। उनके इस कार्य में श्री तारकनाथ पालित और श्री रासबिहारी बोस ने सहयोग दिया। तीनों महान् पुरुषों के प्रयास से इस महान संस्था की स्थापना हो पायी। यह कॉलेज वर्तमान में ‘University College of Science and Technology’ के नाम से परिचित है। यह ‘कलकत्ता विश्वविद्यालय’ के चार प्रमुख कैम्पसों में से एक है। उस समय के महान वैज्ञानिक पी.सी.रॉय, सी.वी.रमन, के एस. कृष्णन इत्यादि इस कॉलेज से जुड़े हुए थे।

इस कॉलेज में भौतिकी, रसायन, जैविक विज्ञान के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के अनुसंधान या शोध किये जाते थे। विशेष कर Bio-chemistry, Bio-technology तथा Bio-medical जैसे विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर यहाँ चर्चा की जाती थी। इस कॉलेज में छात्र-छात्राएँ बड़े ही रुचि के साथ शिक्षा अर्जित किया करते थे। इस कॉलेज के प्रमुख़ शिक्षकों में सर चन्द्रशेखर वेंकट रमन, शिशिर कुमार मित्र, आचार्य प्रफुल्लचन्द्र रॉय, सत्येन्द्रनाथ बोस, ज्ञान चन्द्र घोष तथा ज्ञानेन्द्र मुखर्जी इत्यादि थे। ये सभी शिक्षके इस कॉलेज में रहकर शोधकार्य करते थे। आचार्य प्रफुल्लचन्द्र रॉय ने ‘बंगाल केमिकल एवं फर्मासेयुटिकल वर्क्स (Bengal Chemical and Pharmaceutical Works) नामक संस्था की स्थापना किया।

नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन : तकनीकी शिक्षा के विकास में ‘नेशनल काउन्सिल ऑफ एडुकेशन’ का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को तकनीकी शिक्षा प्रदान कराना था। इतना ही नहीं, छोटे-छोटे बच्चों को तकीनीकी शिक्षा किस प्रकार प्राप्त हो इसका भी ध्यान रखा जाता था। इस कार्य में अनेकों तकनीकी शिक्षा के प्रेरणा सोत थे जिनमें रवीन्द्रनाथ टैगोर, अरबिन्द घोष, राजा सुबोध चन्द्र मल्लिक, बजेन्द्र किशोर रॉय चौधरी इत्यादि सम्मिलित थे।

राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, बंगाल (The National Council of Education, Bengal) का जन्म बंग-भंग के दौरान किये गये स्वदेशी आन्दोलन (1905 ई०) के दौरान हुआ था। इसकी स्थापना सन् 1906 ई० में प्रमुख शिक्षाविदों के सम्मिलित प्रयासों से हुआ था। इस परिषद् के तहत राज्य के समस्त विज्ञान एवं तकनीकी स्कूल एवं कॉलेज खोले गये। इसी परिषद् ने ‘बंगाल तकनीकी कॉलेज’ की स्थापना किया। बाद में चलकर राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्, बंगाल को सन् 1955 ई० में ‘यादवपुर विश्वविद्यालय’ में मिला दिया गया। इस परिषद की स्थापना में प्रमुख भूमिका ‘रासबिहारी घोष’, ‘आशुतोष चौधरी’, ‘हिरेन्द्रनाथ दत्त’ तथा ‘सुरेद्र्रनाथ बनर्जी’ ने निभाई थी।
इस तरह बंगाल में विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के विकास में ‘कलकत्ता विज्ञान कॉलेज’ तथा ‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्, बंगाल’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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प्रश्न 2.
20 वीं शताब्दी में बंगाल के नवजागरण में प्रेस की भूमिका वर्णन कीजिए।
या
19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तथा 20 वीं शताब्दी में बंगाल में प्रेस की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
19 वीं शताब्दी उत्तरार्द्ध तथा 20 वीं शताब्दी में बंगाल में प्रेस की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है जिसकी वजह से छापाखाना का स्तर बढ़ा एवं तरह-तरह के समाचार पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ एवं पुस्तके अत्यधिक मात्रा में छपने लगे। इतना ही नहीं, इन सभी समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिका एवं पुस्तको की छपाई का मुख्य उद्देश्य, लोगों को हर प्रकार का या हर क्षेत्रों का ज्ञान देना था। इसी उद्देश्य से छापाखाना से विभिन्न पत्र-पत्रिका, सामाचार पत्र एवं पुस्तकें छपा करता था।

ऐसे तो माना जाता है कि 19 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में कलकत्ता में स्याही (Ink) द्वारा छुपाई का कार्य किया जाता था जिसका प्रारम्भ ‘ग्राह्म शॉ’ (Grahm Shaw) ने किया था। उसके बाद बंगाल के कई क्षेत्रों में प्रेसों की स्थापना किया गया जिनमें सन् 1800 ई० में विलियम कैरी, विलियम वार्ड तथा कुछ और अंग्रेजों ने मिलकर हुगली के श्रीरामपुर में ‘श्रीरामपुर ‘मिशन प्रेस’ की स्थापना किया था। यहाँ लगभग 45 भाषाओं में हजारों पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता था। धीरे-धीरे छपाई के कार्यों में विकास आया।

19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक प्रेसों में अत्यधिक विकास आया, जिसकी वज़ह से बहुत सारी पत्र-पत्रिकायें एवं पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। उन सभी पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकों में कुछ प्रमुख थे – मार्शमैन का ‘दिगदर्शन’, राजा राममोहन राय का ‘संवाद कौमुदी’ तथा ‘मिरातउल अखबार’ एव ‘ब्राह्मिनिकल मैगजीन’, काशीसेन का ‘समाचार दर्पण’, ब्रिटिश व्यापारियों का ‘जेम्स सिल्क बकिंधम’ एवं ‘बंगदत्त’ आदि पत्र-पत्रिका एवं पुस्तके तथा समाचार पत्रें थे।

इसके बाद 20 वीं शताब्दी में छापाखाना में इतना अधिक विकास हुआ कि मानों बंगाल में नवजागरण आ गया हो। अर्थात् बंगाल विकास के पहिए के सहारे दौर पड़ा हो। कहा जाय तो 20 वीं शताब्दी में बंगाल में नवजागरण आने का प्रमुख कारण ‘ ‘छापाखाना’ में विकास ही था। 20 वीं शताब्दी के पहले ही बंगाल में छापाखाना के अनेकों संस्थाएं खोले गये, जिसकेमाध्यम से बंगाल में अनेकों पत्र, पत्रिका एवं पुस्तकों का प्रकाशन किया गया।

उनमें से कुछ पत्र-पत्रिका एवं पुस्तके महत्वपूर्ण हैं, जैसे- ‘सोम प्रकाश’ जिसका प्रकाशन ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने सन् 1859 ई० में किया। सन् 1853 ई० में हरिश्चन्द्र मुखर्जी जी ने ‘हिन्दू पैट्रियॉट’ का सम्पादन किया। सन् 1861 ई० में देवेन्द्रनाथ टैगोर और मनमोहन घोष ने ‘इण्डियन मिरर’ का प्रकाशन किये। लार्ड लिटन ने ‘ वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट’ लागू किया। केशवचन्द्र द्वारा प्रकाशित बंगला का महत्वपूर्ण दैनिक पत्र ‘सुलभ समाचार’ था। शिशिर कुमार घोष द्वारा सम्पादित ‘अमृत बाजार पत्रिका’ था।

20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों की होड़ मच गयी। इस दौरान बंगवासी, संजीवनी नामक पत्र का भी प्रकाशन हुआ जो बंगाल का प्रमुख पत्र माना जाता था। इनमें बंगवासी नामक पत्र का प्रकाशन जोगेन्द्रनाथ बोस ने किया था। सुरेन्द्रनाथ बनर्जी का ‘बंगाली’ पत्र था। मौलाना अबुल कलाम आजाद ने कलकत्ता से सन् 1912 ई० में ‘अल हिलाल’ तथा सन् 1913 ई० में ‘अल बिलाग’ नामक पत्रिका का प्रकाशन किया।

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प्रश्न 3.
विश्वभारती विश्वविद्यालय के उद्देश्यों एवं विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, साहित्यकार, समाज-सुधारक एवं राजनीतिज्ञ थे जिनका जन्म सन् 1816 ई० में कलकत्ता महानगर के जोड़ासाँकू में हुआ था। इनके पिता का नाम महर्षि देवेन्द्रनाथ टैगोर एवं माता का नाम शारदा देवी था। सन् 1863 ई० में इनके पिता देवेन्द्रनाथ टेगोर ने बंगाल के वीरभूम जिले के बोलपुर शहर में ‘शांति निकेतन’ आश्रम की स्थापना किया था। इसी आश्रम में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1901 ई० में एक विद्यालय की स्थापना किये थे जिसका नाम ‘बह्मचर्य आश्रम’ था।

वे पाँच छात्रों को लेकर इस विद्यालय की स्थापना किये थे। इनके इस कार्य में प्रमुख शिक्षाविदों, बहाबांधव उपाध्याय, सतीश चन्द्र राय, मोहित चन्द्र सेन, अजीत कुमार चक्रवर्ती तथा विलियम पिरयसन आदि ने साथ दिया था। बाद में चलकर यह विद्यालय लोकप्रिय बन गयी। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस विद्यालय को ‘विश्वभारती विश्वविद्यालय’ में रूपान्तरित कर लोगों को समर्पित कर दिया। इसकी स्थापना सन् 1921 ई० में किया गया तथा सन् 1922 ई० में इस संस्था का नियम-कानून बनाया गया।

उद्देश्य : इस संस्था के कुछ प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार से है –
1. भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केन्द्र :- विश्वभारती विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य है कि छात्र-छात्राओं को शिक्षा या ज्ञान सिर्फ भारतीय संस्कृति, आदर्शों तथा सभ्यता को आधार बना कर दिया जाय न कि पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति को अधार बनाकर। ऐसा करने से छात्र-छात्राओं में अपने देश के प्रति भावनाएँ उत्पन्न होगी न कि द्वेष उत्पत्र होगी।

2. प्राच्य-पाश्चात्य संस्कृतियों में समन्वय :- इस संस्था का एक और मुख्य उद्देश्य था, प्राच्य-पाश्चात्य संस्कृतियों अर्थात् हिन्दी एवं अंग्रेजी संस्कृतियों में समानता स्थापित करना था ताकि इस संस्था में छात्र-छात्राओं न केवल प्राव्य या हिन्दी भाषा में बल्कि पाश्चात्य या अंग्रेजी भाषा में भी शिक्षा अर्जित कर सकें।

3. विश्व में बंधुत्व की भावना की स्थापना :- इस संस्था का तीसरा मुख्य उद्देश्य विश्व बंधुत्व, भाईचारा तथा शांति की भावना को स्थापित करना था, जो छात्र-छात्राओं के मानसिक विकास में सहायता करता है।

4. एशिया में व्याप्त जीवन के प्रति दृष्टिकोण एवं विचारों के आधार पर पश्चिमी देशों से सम्पर्क बढ़ाना।

5. इस संस्था के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए शांति निकेतन में एक ऐसे सांस्कृतिक केन्द्र की स्थापना किया जाय, जहाँ धर्म, साहित्य, विज्ञान एवं हिन्दू, बौद्ध, जैन, मुस्लिम, सिख इसाई और अन्य सभ्यताओं की कला का अध्ययन और उनमें शोधकार्य, पश्चिमी संस्कृति के साथ, आध्यात्मिक विकास के अनुकूल सादगी के वातावरण में किया जाए।

विशेषताएँ : विश्व भारती विश्वविद्यालय की विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

1. विद्या भवन :- इस संस्था के कई विभाग हैं, जिनमें से एक विद्या भवन भी है। जहाँ प्राच्य के विभिन्न भाषाओं, साहित्य एवं संस्कृति पर शोधकार्य होता है।

2. चीन भवन :- यह विभाग भी इस संस्था का ही भाग है, जहाँ हिन्दी-चीनी शिक्षाओं पर अध्ययन एवं शोधकार्य होता है। इस विभाग का गठन सन् 1937 ई० में प्राध्यापक ‘तान युन सान’ के प्रयासों से हुआ था।

3. हिन्दी भवन :- यह विभाग भी इस संस्था की देन है जिसका गठन सन् 1939 ई० में हुआ था, जहाँ पर हिन्दी भाषा एवं साहित्य के अध्ययन पर शोधकार्य किया जाता है।

4. पाठ-भवन :- इस विभाग में माध्यमिक स्तर पर शिक्षा या ज्ञान दिया जाता था।

5. शिक्षा भवन :- इस विभाग में उच्च-स्तरीय शिक्षा या ज्ञान प्रदान किया जाता था।

6. रवीन्द्र भवन :- इस विभाग की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर जी के साहित्यों का अध्ययन करने के लिए किया गया था । इसकी स्थापना सन् 1942 ई० में हुआ था।

7. कला भवन :- इस विभाग की स्थापना चित्रकारी, लकड़ी पर नक्कशी, स्थापत्य कला की योजना एवं पत्थर की मुर्तियों एवं सूईयों से विभिन्न कलाकारी के लिए किया गया था। यह सभी कला के कार्य ‘नन्द लाल बोस’ के नेतृत्व में किया जाता था। इस विभाग में सन् 1936 ई० में ‘लोक शिक्षा संसद’ की स्थापना किया गया था।

उपर्युक्त उल्लेखों से पाते हैं कि रवीन्द्रनाथ टेगोर जी द्वारा स्थापित ‘विश्वभारती विश्वविद्यालय’ के विभिन्न उद्देश्य एवं विशेषताएँ है, जो इस संस्था का भविष्य माना जाता है। इस संस्था की प्रसिद्धि न केवल राष्ट्रिय स्तर पर है, बल्कि अर्त्तराष्ट्रीय स्तर पर भी है।

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प्रश्न 4.
भारत में शिक्षा के संबंध में औपनिवेशिक विचारों पर प्रकाश डालिए।
या
औपनिवेशक शिक्षा पद्धति पर टीप्पणी लिखिए।
उत्तर :
भारत में शिक्षा को लेकर अनेक उतार-चढ़ाव हुआ जिसमें भारत देश का भविष्य निहित था। उतार-चढ़ाव कहने का मतलब अंग्रेजों के समय में भारतीय शिक्षा में अनेकों बदलाव किया गया। यह संभी बदलाव देखा जाय तो अंग्रेज अपने पक्ष में ही करते थे। अपनी सभ्यता तथा संस्कृति को भारतीय शिक्षा के माध्यम से भारतवासियों के ऊपर थोपना चाहते थे।

अर्थात् अंग्रेजी प्रशासन भारतवासियों के शोषण करने हेतु हर हथकण्डे अपनाया करते थे। परन्तु इस प्रशासन में ही कुछ ऐसे गवर्नर-जनरल थे, जो न केवल अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देते थे बल्कि संस्कृति शिक्षा को भी बढ़ावा देते थे।

अंग्रेजों या अंग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत में प्राच्य शिक्षा के अलावा पाश्चात्य शिक्षा को अधिक महत्व देते थे। वे प्राच्य एवं पाश्चात्य भाषाओं में समन्वय स्थापित न करके उनमें मतभेद पैदा किया करते थे ताकि प्राच्य भाषा का अन्त हो जाये। लेकिन कुछ गवर्नर जनरल पाश्चात्य शिक्षा के साथ-साथ प्राच्य शिक्षा को लेकर चलना चाहते थे। एसे गवर्नर-जनरलों ने बहुत सारे विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों की स्थापना किये। जैसे – ‘वारेन हेस्टिंगस’ ने कलकत्ता में सन् 1781 में एक मदरसा की स्थापना किया, सर विलियम जोन्स ने सन् 1784 में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना किये, तथा जोनाथन डंकन द्वारा बनारस में सन् 1791 में एक संस्कृति कोंलेज की स्थापना किया गया।

इस सभी संस्थाओं का मूल उद्देश्य प्रत्येक जाति, धर्म एवं साहित्य में विकास लाना था। भारतीय शिक्षा को अंग्रेजों ने एक नया रूप दिया जिसमें अंग्रेजी शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति शिक्षा भी हो। इसी उद्देश्य से सन् 1813 ई० में एक चार्टर एक्ट पास किया गया जिसके तहत प्राच्य शिक्षा या भाषा के स्थान पर पाश्चात्य शिक्षा या भाषा का अधिक महत्व दिया गया।

इतना ही नहीं, प्राच्य तथा पाश्चात्य संस्कृतियों के समन्वय की स्थापना भी किया गया ताकि भारत में शिक्षा के स्तर को बढ़ाया जाय। परन्तु ऐसा हो न सका। जहाँ समन्वय यानी समानता स्थापित करना था वहाँ असमन्वय यानी असमानता व्याप्त हो गया। औपनिवेशिक शिक्षा पद्धति के तहत गवर्नर जनरल ‘सर चार्ल्स वुड’ ने भारतीय शिक्षा में कैसे विकास या उन्नति लाया जाय इस विषय में उन्होंने सन् 1854 में वुड डिस्पैच निकाले।

इसके माध्यम से सर चार्ल्स वुड ने भारत में प्राच्य भाषा और पाश्चात्य भाषा दोनों में किस प्रकार से विकास लाया जाय विभिन्न कदम उठाये थे – विद्यालयों में दोनों भाषाओं में पढ़ाई की व्यवस्था हो, माध्यमिक स्तर पर हिन्दी भाषा का बोलबाला हो तथा उच्च स्तर पर हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा का भी बोलबाला हो। कॉलेजों में प्रथम भाषा के रूप में पश्चात्य यानी अंग्रेजी भाषा को उपयोग में लाया जाय।

इस प्रकार चार्ल्स वुड ने ‘वुड डिस्पेच’ का गठन किया ताकि प्राच्य यानी हिन्दी भाषा और पाश्चात्य यानी अंग्रेजी भाषा में शिक्षा का आदान-प्रदान हो।

इतना ही नहीं, इसके पहले भी सन् 1817 में भी कुछ इस तरह का कार्य किया गया था। डेविड हेयर, राजा राममाहन राय तथा न्यायाधीश, एडवर्ड हाइड ईस्ट ने मिलकर कलकत्ता में हिन्दू कॉलेज की स्थापना किये जिसके माध्यम से हिन्दी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में भी शिक्षा प्रदान किया जाता था। सन् 1823 में विल्सन की अध्यक्षता में जन शिक्षा की समिति (Committee of Public Instrucations) की स्थापना किया गया। समिति को शिक्षा स्तर में सुधार लाने के लिये बनाया गया था।

शिक्षा के स्तर को किस तरह से विकसित किया गया जाय इसके सन्दर्भ में लगभग सन् 1882 में सर विलियम हण्टर की अध्यक्षता में हण्टर आयोग (Hunter Commission) का गठन किया गया। इसके माध्यम से भारतीय शिक्षा स्तर में विभिन्न विकास लाया गया जिनमें माध्यमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम हिन्दी भाषा हो, उच्च स्तर पर शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी भाषा के साथ हिन्दी भाषा को भी रखा जाय। कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा शिक्षा का माध्यम बने। इतना ही नहीं, इनमे व्यायाम की भी व्यवस्था हो ताकि छात्र-छात्राएँ मानसिक तथा शारीरिक रूप से शिक्षा अर्जित कर सके।

औपनिवेशिक शिक्षा पद्धति में ‘हण्टर आयोग’ के बाद ‘सेण्डलर आयोग’ सन् 1917 में विलियम सेण्डलर की अध्यक्षता में गठित किया गया। इस आयोग का भी उद्देश्य भारतीय शिक्षा व्यवस्था में उन्नति या विकास लाना था तथा छात्र-छात्राओं के लिए हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में विभिन्न क्रियात्मक कार्यो की व्यवस्था किया जाना था। ताकि उनमें क्रियात्मक विकास भी हो पाये जो बहुत ही आवश्यक था।

उपर्युक्त विवरणों से पता चलता है कि भारत में शिक्षा व्यवस्था के संबंध में औपनिवेशकों के भिन्न-भिन्न विचार थे। परन्तु भारतीय शिक्षा व्यवस्था में विकास का एकमात्र कारण प्राच्य या हिन्दी और पाश्चात्य या अंग्रेजी भाषाओं का समागम होना था। आज वर्तमान समय में पाश्चात्य भाषाओं के समागम से भारतीय शिक्षा का विकास तो हुआ है, लेकिन भारतीय संस्कृति नष्ट हो गयी है।

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प्रश्न 5.
मुद्रित साहित्य एवं ज्ञान के प्रसार में संबंध को स्पष्ट करें।
उत्तर :
मुद्रित साहित्य एवं ज्ञान के प्रसार का संबंध ब्रिटिश जमाने से अर्थात् 19 वीं शताब्दी के पहले से ही माना जाता था। मुद्रित साहित्य, जो मुद्रणालय से प्रकाशित होती है उसकी समाज में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। प्रेसों से जो समाचार-पत्र, पत्रिका एवं पुस्तके छप कर आती हैं वही समाज में, लोगों में तथा छात्र-छात्राओं में ज्ञान को उजागर करती हैं। 19वी शताब्दी में जब बंगाल में मुद्रण या प्रेसों का आविर्भाव हुआ, तब से ज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक विकास हुआ। इतना ही नहीं, विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में भी छापेखाने का जबर्दस्त प्रभाव था।

ऐसा माना जाता है कि भारत में लगभग 1557 ई० में पहला समाचार पत्र एवं पत्रिका निकाला गया और इसकी शुरुआत गोवा में व्याप्त पुर्तगालियों ने किया था। लेकिन सही रूप से भारत, बंगाल में प्रेसों का आविर्भाव 19 वीं शताब्दी से माना जाता है जिसकी पहल ‘ग्राह्म शॉ’ ने कलकत्ता में किया। उन्होंने स्याही के माध्यम से छपाई का कार्य शुरू किया। इस मशोन के द्वारा छपाई कार्य और बाइडिंग कार्य या कम्पोजिंग कार्य भी किया जा सकता था। अर्थात् 19 वीं शताब्दी से सही रूप से प्रेसों के माध्यम से समाचार पत्र, पत्रिका एवं पुस्तकों को छपाई का कार्य ने तीव्र रूप धारण कर लिया।

इस तरह भारत तथा बंगाल में तरह-तरह के समाचार पत्र, पत्रिका एवं पुस्तके आद सामने आने लगे जिससे लोगों को अत्यधिक जानकारी प्राप्त होने लगा। अर्थात् कह सकते हैं कि मुद्रणालयों ने लोगों को ज्ञान-विज्ञान तथा तकनीकी से अवगत कगया बगाल में प्रेस के माध्यम से सन् 1780 में पहला समाचार पत्र ‘द बंगाल गजट’ प्रकाशित हुआ जिसका सम्पादक ‘जेम्स आगस्टस हिक्की’ थे। इस पत्र का दूसरा नाम ‘द कलकत्ता जेनरल एडवरटाइजर’ (The Calcutta General Advertiser) था।

इसी साल एक और समाचार पत्र प्रकाशित हुआ जिसका नाम इण्डिया गजट (India Gazatte) था। सन 1784 में ‘कलकत्ता गजट’ (Calcutta Gazatte) प्रकाशित हुआ एवं 1785 ई० में ‘ओरिएण्टल मैगजीन ऑफ कलकत्ता’ (Oriental Magazine of Calcutta) का प्रकाशन हुआ था।

इसी तरह 18 वीं शताब्दी के अंत तक बंगाल में कई और पत्रों का प्रकाशन किया गया जिनमें ‘कलकत्ता कैरियर’ (Calcutta Carrier), ‘एशियाटिक मिरर’ (Asiatic Mirror), ‘ओरिएण्टल स्टार’ (Oriental star) आदि प्रमुख थे। बम्बई में ‘बम्बई ग़जट’ (Bombay Gazatte) नामक समाचार पत्र के प्रकाशन से ज्ञान के विकास अर्थात् प्रचार-प्रसार में काफी मदद मिला। इतना ही नहीं, इनके प्रकाशन सं केवल जानकारियाँ ही नहीं मिलती थी बल्कि ज्ञान को अर्जित करने की प्रेरणा भी मिलती थी। इसकी मदद या सहायता से विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में आपार उन्नति या विकास हो पाया। अर्थात् म्रेसों के आ जाने से ज्ञान के प्रसार में अत्यधिक मद्द मिला।

19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से लेकर 20 वीं शताब्दी तक भारत एवं मुख्य रूप से बंगाल में मानों प्रेसों के गाध्यम से समाचार पत्र, पत्रिका एवं पुस्तकों की होड़ मच गया जिसका सीधा सीधा असर ज्ञान, विज्ञान एवं तकनीकी के क्षत्रों पर पड़ा इनमें ‘दिग्रर्शन’, ‘संवाद कौमुदी’, ‘मिरातुल अखबार’, ‘ब्राह्मिनिकल मैगजीन’, ‘ईश्वरचन्द्र विद्यासागर’ की ‘सामपकाश’, ‘लाई्ड लिटन’ का ‘वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट’, केशवचन्द्र सेन का ‘सुलभ समाचार’, हरिशचन्द्र मुखर्जी का ‘हिन्दू पैंट्रयाट’, शिशिर कुमार घोष का ‘अमृत बाजार पत्रिका’, ‘बंगवासी’, ‘संजीवनी’, ‘बंगाली’ तथा मौलना अबुल कलाभ आजाद का ‘अल हिलाल’ तथा ‘अल बिलाग’ आदि था। इन सभी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं पुस्तकों के माध्यम से समाज एव लोंगों में ज्ञान यानी जानकारी मिलता था जिसके माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार किया जाता था।

इतना ही नहीं, मुद्रण और ज्ञान या जानकारी का संबंध हर क्षेत्रों में भी है। 18 वों शताब्दी से लेकर 20 वीं शताब्दी तक भारत और मुख्य रूप से बंगाल में प्रेसों का जाल बिछा रहा क्योंकि उस समय हमारा भारतवर्ष अंग्रेजा का गुलाम था। और भारतवासी अंग्रेजों का गुलामी किया करते थे। परन्तु इसका मतलब यह नहीं की उनके भीतर देशर्भक्ति को भावना मर गयी थी। बशर्ते उनके इस भक्ति-भावना को चिंगारी देने की देर थी और यही काम मुद्रणालयों या प्रेसों ने कर दिया।

भारत तथा विशेष रूप से बंगाल के जितने देशभक्त, क्रान्तिकारी एवं अन्य सम्पादक थे, सभी लोगों ने मिलकर अंग्रेज विरोधी ब्रिभिन्न प्रकार के समाचार पत्र, पत्रिका एवं पुस्तके निकाले। जिनका एक ही लक्ष्य अंग्रेज भारत को छोड़ो था। इस तरह अंग्रेजी विरोधी समाचार पत्र, पत्रिका एवं पुस्तकों के समाज में आने से सभी भारतवासियों को एक नई उर्जा मिन्न गयी, जिनके माध्यम से वे अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिये।

प्रेसों ने न केवल लोगों में अपने देश के प्रति देश भक्ति की भावनाको उत्पन्न किया, बल्कि लोगों को विभिन्न प्रकार का ज्ञान भी दिया, जैसे – विभिन्न धर्म की जानकारी, विभिन्न संस्कृतियों में समानता की जानकारी तथा विभिन्न सभ्यता का जान। इतना ही नहीं, लोगों में राजनीति का महत्व भी उजागर किया तथा दुष्ट राजनेताओं के शोषण से बचने के उपाय का ज्ञान भी दिया।

उपर्युक्त विवरणों से पाते हैं कि मुद्रण एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिये ज्ञान का प्रसार किया जा सकता है तथा लांगों को विभिन्न जानकारियाँ भी दिया जा सकता है। मुद्रण के जरिये विभिन्न समाचार पत्रों का प्रकाशन होता है, जिसकं माध्यम से लोगों को विभिन्न क्षेत्रों के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है। यही प्रक्रिया 18 वीं शताब्दी से लेकर 20 वीं शताब्दी तक तीव्र थी और आज भी प्रेस अपने कार्यो में कार्यरत है।

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प्रश्न 6.
व्यावसायिक कार्य के रूप में मुद्रणालय के विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
व्यावसायिक कार्य के रूप में मुद्रणालय (Press) की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। मुद्रणालय की स्थापना के बाद यह एक व्यावसायिक कार्य के रूप में विकसित-हुआ। कलकत्ता के जेम्स आगस्टस का प्रेस व्यावसायिक कार्य करता था। इसमें इस्ट इण्डिया कं० का मिलिटरी बिल, भत्ते का फार्म, सामरिक वाहिनी के नियम-कानून आदि छपते थे। हिक्की ने भारत तथा दक्षिण एशिया में सर्वप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र बंगाल गजट, 1780 ई० में अपने भस में छापना शुरू किया।

विलकिन्स ने 1781 ई० में एक प्रेस की स्थापना की। इसका नाम था ‘आनरेबुल कम्पनीज प्रेस’। यह 18 वीं शताब्दी में कलकत्ता का सबसे बड़ा प्रेस हो गया। इस प्रेस में सरकारी काम के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक चीजें भी छपती थी। एशियाटिक सोसाइटी की पत्रिका ‘एशियाटिक रिसर्चेज’ विलियम जोन्स द्वारा अनुदित कालीदास की पुस्तक ‘ऋतु संहार’ की छपाई भी इसी प्रेस में हुई थी। 1780-1790 ई० के बीच कलकत्ता के विभिन्न प्रेसों से 19 साप्ताहिक एवं 6 मासिक पत्र प्रकाशित होते थे।

इसके बाद अनेक बंगाली व्यावसायियों ने प्रेसों की स्थापना की। गंगाप्रसाद भट्टाचार्य प्रथम बंगाली प्रकाशक और पुस्तक बिक्रेता थे। इन्होंने ही सर्वप्रथम सचित्र बंगला की पुस्तक ‘अन्नदामगल’ का प्रकाशन किया। इस पुस्तक के चित्र निर्माता थे – रामचन्द्र राय। सन् 1800 तक कलकत्ता में छपी कुल पुस्तकों की संख्या 650 थी।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जीवन काल में ही उनकी पुस्तक वर्ण-परिचय के 152 संस्करण छपे और इस पुस्तक की 35 लाख से अधिक प्रतियाँ छात्रों के हाथ में पहुँची। 1869 – 1880 ई० के बीच 12 वर्षों में बाल्य-शिक्षा की 41 लाख से अधिक पुस्तकें छपी। स्कूल बूक सोसायटी ने अपनी स्थापना के चार वर्षो के भीतर केवल बंगला भाषा में 50 हजार पुस्तके छपवाई। प्रेसों के मालिक विभिन्न प्रकार की पुस्तके छाप कर अपना व्यवसाय बढ़ाने लगे।

स्कूली पुस्तकों के अतिरिक्त हितोपदेशक, बत्रिस सिंहासन, तोता इतिहास, बोधोदय, बंगाल पंचविशंति, नीति कथा आदि पुस्तकों की भी मांग तीव्र गति से बढ़ी। भूगोल, इतिहास, साहित्य, गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, इन्जीनियरिंग, औषधि विज्ञान आदि की पुस्तकों की मांग और बिक्री बढ़ी।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 5 वैकल्पिक विचार एवं प्रयास

प्रश्न 7.
रवीन्द्रनाथ शिक्षा के क्षेत्र में प्रकृति, मनुष्य एवं शिक्षा के समन्वय के समर्थक क्यों थे? इस कार्य के लिए उन्होंने क्या किया ?
उत्तर :
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, चिन्तक तथा समाज सुधारकों में गिने जाते थे। इसी आंधार पर रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि के साथ-साथ एक महान शिक्षक भी थे। टैगोर जी ने एक शिक्षक के रूप में छात्रों एवं छात्राओं के लिए हर सम्भव कार्य किये जिनकी जरूरत उनको थी। एक शिक्षक के रूप में टैगोर जी का प्रारम्भिक कार्य छात्र-छात्राओं को सही आचरण, व्यवहार और अच्छी ज्ञान प्राप्त कराना था।

रवीन्द्रनाथ टैगोर खुद एक शिक्षक थे। इसीलिए उन्होंने ‘प्रकृति’ को महान शिक्षक की दर्जा दिया है, जो हमेशा जीवित रहता है अर्थात् महान शिक्षक होने के साथ-साथ, एक जीवित शिक्षक भी। ‘प्रकृति’ के साथ रहकर अबोध बच्चे जीवन के हर एक रहस्य को सीख पाते हैं। ‘प्रकृति’ एक अबोध मनुष्य को बोधगम्य बनाती है। टैगोर जी का मानना है कि समाज में पठन-पाठन का केन्द्र या विद्यालय खुले प्राकृतिक वातावरण में हों ताकि बच्चे खुले प्राकृतिक वातावरण में पढ़कर विकसित हो पायेंगे। इतना ही नहीं, बच्चे प्रकृति की गोद में रहकर ममता रूपी प्यार पाकर बहुत कुछ सीख पाते हैं। इस संदर्भ में रवीन्द्रनाथ टैगोर का कथन है –

“सांसारिक बंन्धनों में पड़ने से पहले बालकों को अपने निर्माण काल में प्रकृति का प्रशिक्षण प्राप्त करने दिया जाना चाहिए।” रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार प्रकृति या वातावरण में एक विद्यालय के सभी सामान हैं। जैसे – किताबें, पाठबक्रम, डेस्क, श्यामपट, शिक्षक या शिक्षिका तथा विद्यालय का माहौल आदि। अर्थात् पकृति या वातावरण खुद एक शिक्षक है, उनकी विभिन्न दृश्य किताबें एवं पाठ्यक्रमें हैं, जहाँ बच्चे प्रकृति या वातावरण में विद्यालय के भाँति पढ़ते एवं सीखते हैं। इसीलिए टैगोर जी के अनुसार प्रकृति या वातावरण एक महान जीवित शिक्षक है।

उपर्युक्त उल्लेखों से हम पाते हैं कि प्रकृति या वातावरण सही रूप में एक महान् जीवित शिक्षक है, जिसका वर्णन टैगोर जी ने किया है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर एक महान कवि, सुधारक, सामाजिक, शिक्षाविद के साथ-साथ एक महान चिन्तक भी थे। उनका जन्म कलकत्ता महानगर के जोड़ासाँकू अंचल में हुआ था। भले ही उनका जन्म कोलकत्ता जैसे महानगर में हुआ था, लेकिन वे एक भ्रमणकारी या घुमक्कड़ किस्म से व्यक्ति थे। कभी यूरोप तो कभी अमेरीका जैसे महान देशों में घुमने के लिए गये थे।

लेकिन उनका मूल उद्देश्य विभिन्न मानवों के आंतरिक चरित्र या व्यवहार को टटोलना था। विभिन्न मनुष्यों से मिलकर मनुष्य जाति के व्यवहार को जानना था कि लोग कितने किस्म के होते हैं, उनके विचार क्या-क्या होते हैं। इतना ही नहीं, दूसरे लोगों के प्रति उनका चरित्र या व्यवहार कैसा होता है।

टैगोर जी का ‘मानवो’ के संबंध में कुछ ऐसा ही विचार था कि विभिन्न मानव के विचार या व्यवहार भिन्न-भिन्न होते हैं। लेकिन शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिसके माध्यम से मानव का चरित्र तथा व्यवहार दूसरों के प्रति समान हो जाता है। अर्थात् दूषित चरित्र और व्यवहार के मानव शिक्षा से जुड़कर शिक्षित हो जाते हैं तथा दूसरों के प्रति अच्छा आचरण व्यक्त करते हैं। टैगोर के अनुसार देखा जाय तो प्रकृति, मानव और शिक्षा तीनों ही देश के लिए उज्ज्वल भविष्य हैं।

टैगोर जी का मानना है कि शिक्षित मानव के अन्दर अच्छी आचरण, चरित्र और व्यवहार का आविर्भाव उसकी रुचि (Interest) से प्राप्त होता है। अर्थात् यदि मनुष्य में रुचि होगी तभी वह शिक्षित हो पायेगा और उसके अन्दर मानसिक, शरीरिक, सामाजिक तथा राजनैतिक विकास हो पायेगा जो एक सामाजिक मनुष्य के लिए आवश्यक तत्व है।

उपर्युक्त विवरणों से हम पाते हैं कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने मनुष्य के प्रति अपना भिन्न विचार व्यक्त किये हैं जिसका संबंध न केवल मनुष्य से है बल्कि शिक्षा एवं प्रकृति से भी है। अर्थात् देखा जाय तो मनुष्य एक ऐसा तत्व है जिसका संबंध प्रकृति एवं शिक्षा से है।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण : विशेषताएँ तथा विश्लेषण

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WBBSE Class 10 History Chapter 4 Question Answer – संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण : विशेषताएँ तथा विश्लेषण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
एन्टी सर्कुलर सोसाइटी की स्थापना किसने की ?
उत्तर :
एन्टी सर्कुलर सोसायटी की स्थापना सचीन्द्र प्रसाद बसु ने की।

प्रश्न 2.
किस ऐतिहासिक घटना की पृष्ठभूमि में ‘भारतमाता’ का चित्र अंकित है ?
उत्तर :
बंग-भंग विरोधी आन्दोलन की पृष्ठभूमि में भारत माता का चित्र अंकित है।

प्रश्न 3.
1857 ई० के विद्रोह के समय ब्रिटेन का प्रधानमंत्री कौन था ?
उत्तर :
लार्ड पार्मस्टन।

प्रश्न 4.
महान विद्रोह का एक मात्र सर्मथन करने वाला अंग्रेज अधिकारी कौन था ?
उत्तर :
कैप्टन गाँर्डन।

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प्रश्न 5.
1857 ई० के विद्रोह को ‘सैनिक विद्रोह’ कहा है ?
उत्तर :
सर जॉन लॉरिन्स एवं ट्रैवेलियन ने।

प्रश्न 6.
‘द ग्रेट रिभोल्ट’ (महान विद्रोह) पुस्तक के लेखक कौन है ?
उत्तर :
अशोक मेहता।

प्रश्न 7.
भारत के किस वर्ग ने 1857 ई० के विद्रोह में साथ नहीं दिया था ?
उत्तर :
प्रबुद्ध मध्यम् वर्ग ने।

प्रश्न 8.
1857 ई० के विद्रोह को सैनिको तक सूचना पहुँचाने का प्रतीक क्या था ?
उत्तर :
रोटी

प्रश्न 9.
1867 ई० में नवगोपाल मिश्र द्वारा गठित ‘हिन्दू मेला’ का आयोज़न किस महीने में होता था ?
उत्तर :
चैत्र महीने में।

प्रश्न 10.
किस पुस्तक को भारतीयों का ‘स्वदेश प्रेम का गीता’ कहा जाता है ?
उत्तर :
आन्नदमठ को।

प्रश्न 11.
किसने कहा कि, “गोरा मात्र एक उपन्यास् नहीं है, यह आधुनिक भारत का महाकाव्य है ?”
उत्तर :
‘कृष्णा कृषलानी’ ने।

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प्रश्न 12.
‘भारतमाता’ की तुलना किससे किया गया है ?
उत्तर :
भारतीय संस्कृति की सभी देवी-देवताओं से, विशेषकर देवी दुर्गा के रूप से।

प्रश्न 13.
‘गोरा’ उपन्यास में ‘गोरा’ का साहित्यिक अर्थ क्या है ?
उत्तर :
‘गोरा’ उपन्यास मे ‘गोरा’ का साहित्यिक अर्थ ‘गौर वर्ण का व्यक्ति’ है।

प्रश्न 14.
किस वर्ष अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘भारतमाता’ का चित्र बनाया ?
उत्तर :
सन् 1905 में।

प्रश्न 15.
‘लैण्ड होल्डर्स एसोसिएशन’ या ‘बंगाल जमींदार सभा’ की स्थापना कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
कलकत्ता में।

प्रश्न 16.
‘इण्डियन लीग’ के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर :
शिशिर कुमार घोष।

प्रश्न 17.
गगनेन्द्रनाथ टैगोर कौन थे ?
उत्तर :
एक उच्चकोटि के चित्रकार थे।

प्रश्न 18.
‘पील आयोग’ (Peal Commission) का गठन किस वर्ष हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1858 ई० में।

प्रश्न 19.
1857 ई० के विद्रोह के तुरन्त बाद इसे एक ‘राष्ट्रीय विद्रोह’ की संज्ञा किसने दी ?
उत्तर :
बेंजामिन डिजरायली ने।

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प्रश्न 20.
किसकी वीरता से प्रभावित होकर ब्रिटिश सैन्य अधिकारी ह्यूरोज ने कहा- ‘भारतीय कान्तिकारियों में यह अकेली मर्द है’?
उत्तर :
रानी लक्ष्मीबाई के।

प्रश्न 21.
झाँसी में 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था ?
उत्तर :
रानी लक्ष्मीबाई ने।

प्रश्न 22.
लखनऊ में 1857 ई० का विद्रोह कब आरंभ हुआ ?
उत्तर :
4 जून, 1857 ई० में।

प्रश्न 23.
महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र किसने पढ़ा था ?
उत्तर :
महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र लार्ड कैनिंग ने पढ़ा था।

प्रश्न 24.
बंगाल में राजनीतिक आन्दोलन को आरम्भ करने का श्रेय किसको है ?
उत्तर :
राजा राममोहन राय को।

प्रश्न 25.
‘बंगभाषा प्रकाशिका सभा’ की स्थापना किस वर्ष हुई ?
उत्तर :
सन् 1836 में।

प्रश्न 26.
‘बंगभाषा प्रकाशिका सभा’ की स्थापना कहाँ हुई थी ?
उत्तर :
कलकत्ता में।

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प्रश्न 27.
‘लैण्ड होल्डर्स एसोसिएशन’ या ‘बंगाल जमींदार सभा’ की स्थापना किस वर्ष हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1838 में।

प्रश्न 28.
‘हिन्दू मेला’ का गठन किस वर्ष हुआ था ?
उत्तर :
सन् 1867 में।

प्रश्न 29.
‘गोरा’ उपन्यास की रचना कब हुई ?
उत्तर :
सन् 1909 ई० में।

प्रश्न 30.
‘गोरा’ उपन्यास में ‘गोरा’ का साहित्यिक अर्थ क्या है ?
उत्तर :
‘गोरार’ उपन्यास में ‘गोरा’ का साहित्यिक अर्थ ‘गौर वर्ण का व्यक्ति’ है।

प्रश्न 31.
बरेली में 1857 ई० का विद्रोह किस वर्ष समाप्त हुआ?
उत्तर :
सन् 1858 ई० में।

प्रश्न 32.
फैजाबाद में 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया ?
उत्तर :
मौलवी अहमद उल्ला ने।

प्रश्न 33.
फैजाबाद में 1857 ई० का विद्रोह का किस वर्ष दमन हुआ ?
उत्तर :
सन् 1858 में।

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प्रश्न 34.
फतेहपुर में 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया ?
उत्तर :
अजीमुल्ला ने।

प्रश्न 35.
झाँसी में 1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर :
रानी लक्ष्मीबाई ने।

प्रश्न 36.
कानपुर में 1857 ई० का विद्रोह कब शुरू हुआ ?
उत्तर :
5 जून, 1857 ई० में।

प्रश्न 37.
लखनऊ में 1857 ई० का विद्रोह कब आरंभ हुआ ?
उत्तर :
4 जून, 1857 ई० में।

प्रश्न 38.
जगदीशपुर में 1857 ई० का विद्रोह कब शुरू हुआ ?
उत्तर :
अगस्त, 1857 ई० में।

प्रश्न 39.
1857 के विद्रोह के संदर्भ में किसने कहा कि – ‘ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए भारतीय जनता की क्रान्ति’ ?
उत्तर :
कार्ल मार्क्स ने।

प्रश्न 40.
वह कौन-सा ब्रिटिश सेनापति था, जिसकी 1857 ई०के विद्रोह को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही ?
उत्तर :
कैम्पबल।

प्रश्न 41.
1857 ई०के क्रान्ति के स्थानीय विद्रोही नेताओं में सर्वप्रथम प्रसिद्ध कौन था ?
उत्तर :
सतारा के रंगा बापूजी गुप्त जी।

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प्रश्न 42.
बंगाल का प्रथम राजनीतिक संगठन का क्या नाम था ?
उत्तर :
बंगभाषा प्रकाशिका सभा।

प्रश्न 43.
‘वर्तमान भारत’ कब प्रकाशित हुआ ?
उत्तर :
सन् 1905 में। [नोट : इस समय ‘वर्तमान भारत’ एक पुस्तक के रूप में है।]

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
जमींदार सभा एवं भारत सभा में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर :
जमींदार सभा और भारत सभा में दो अन्तर निम्नलिखित है –
(i) जमींदार सभा की स्थापना 1838 ई० में द्वारकानाथ ठाकुर ने की थी। जबकि भारत सभा की स्थापना 1876 ई० में सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने की थी।
(ii) जमींदार सभा का उद्देश्य जमींदारों के हितों की रक्षा करना था। जबकि भारत सभा का उद्देश्य समान्य व मध्यम वर्गीय जनता के अधिकारों के लिए अंग्रेजों से लड़ना था।

प्रश्न 2.
उन्नीसवीं शताब्दी में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करने के लिए ‘भारतमाता’ के चित्र की क्या भूमिका थी ?
उत्तर :
‘भारतमाता’ का चित्र : 19वीं शताब्दी में चित्रित इस चित्र ने भारतवर्ष में राष्ट्रीयता का प्रचार-प्रसार किया। सन् 1905 में ‘अवनीन्द्रनाथ टैगोर जी ने ‘भारतमाता’ का एक चित्र बनाया जो विभिन्न नामों से भी जाना जाता है, जैसे’भारताम्बा’ (Bharatamba) और ‘बंगमाता’ (Bangmata) आदि। इस चित्र को देखते ही देशवासियों में देश के प्रति लड़ने मरने का साहस व उत्साह पैदा हो जाता था। इस प्रकार भारतमाता का चित्र देशवासियों में देशप्रेम की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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प्रश्न 3.
‘महारानी के घोषणापत्र’ (1858 ई०) का मूल उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
1858 ई० के महारानी विक्टोरिया के ‘घोषणा पत्र’ का मूल उद्देश्य भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कुव्यवस्था को समाप्त करना, और भारत के शासन को प्रत्यक्ष रूप में बिटिश शासन के अधीन लाना तथा नये शासन व्यवस्था के नीतिनियमों से भारतवासियों को परिचित करना और उसके साथ जोड़ना था।

प्रश्न 4.
कार्टून चित्र खींचने के क्या उद्देश्य हैं ?
उत्तर :
कार्टून चित्र (हास्य-व्यंग्य चित्र) चित्रकला की एक शाखा है जिसमें व्यक्तिगत, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक परिवारिक समस्याओं ज्रुटियों, दोषों को भावपूर्ण तरीकें से व्यंग्य-कटाक्ष के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य गम्भीर से गम्भीर व बड़े विषय हो या बड़ा व्यक्ति ही क्यों न हो, उनसे जुड़ी बातों को सरल ढंग से कटाक्ष रूप में प्रस्तुत कर समाज के शेष, व विचार को प्रकट करना, तथा उनमें सुधार लाना है। जैसा कि गगनेन्द्रनाथ ठाकुर ने तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था तथा बंगाली समाज के बाबू लोगों की भाव-भंगिमाओं को दर्शाया करते थे।

प्रश्न 5.
हिन्दू मेला की स्थापना का दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
उद्देश्य : (i) हिन्दू मेला की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं को एकत्रित कर उनमें राष्ट्रीयता की भावना को भरना था।
(ii) भारतीय राष्ट्रीय चेतना को अग्रसर करने तथा राष्ट्रीयता की विकास के लिए इसका गठन किया गया था।

प्रश्न 6.
‘भारत सभा’ की स्थापना के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर :
‘भारत सभा’ की स्थापना के दो उद्देश्य निम्नवत् है –
1. देश के लोगों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करना।
2. सभी वर्गो, जातियों तथा धर्मों के लोगों में एकता का भाव स्थापित करना था।

प्रश्न 7.
‘आनन्द मठ’ उपन्यास ने किस प्रकार से राष्ट्रीयता की भावना का संचार किया ?
उत्तर :
प्रेम तथा देश के आजादी के दिवानों द्वारा गाया जाने वाला ‘बन्दे मातरम’ गीत ने देश के नवयवका मातृभूमि के प्रति अट्टूट का संचार किया और वे देश की आजादी के लिए लड़ने-मरने को तैयार होने लगे।

प्रश्न 8.
आनंद मठ किसकी रचना है ? इसका मूल विषय क्या है ?
उत्तर :
आन्नद मठ की रचना ॠषि बंकिम चन्द्र चटर्जी ने की थी। इसका मूल विषय संयासी विद्रोह के द्वारा राष्ट्रीयता की भावना का संचार करना है।

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प्रश्न 9.
1857 ई० के महान विद्रोह का नेतृत्व प्रदान करने वाले दो नेताओं का नाम लिखिए।
उत्तर :
1857 ई० के महान विद्रोह का नेतृत्व प्रदान करने वाले दो नेता नाना साहेब एवं वीर कुँवर सिंह थे।

प्रश्न 10.
हिन्दू मेला की स्थापना किसने और किस उद्देश्य से की थी ?
उत्तर :
हिन्दू मेला की स्थापना 1867 ई० में नव गोपाल मित्र ने की थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य भारतीयों का एकता के सूत्र में बाँधना तथा उनमें राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करना था।

प्रश्न 11.
बंगाल का नवजागरण यूरोपीय नवजागरण से किस प्रकार भिन्न था ?
उत्तर :
बंगाल का नवजागरण 16 वीं शताब्दी में केवल शिक्षा समाचार पत्र एवं संगीत तक सीमित था जबकि यूरोप में 14 वी सदी में पुनर्जागरण हुआ तथा उद्योग कला, साहित्य, उद्योग, कृषि व्यापार, यातायात एवं सभी क्षेत्रों में हुआ था। इस प्रकार बंगाल से यूरोप का नवजागरण भिन्न था।

प्रश्न 12.
जमींदार सभा की स्थापना कब और क्यों किया गया था ?
उत्तर :
राजनीतिक सुधारों के लिए राजा राममोहन राय ने जिस आन्दोलन का सूत्रपात किया उसे जारी रखने के लिए बंगाल के जमीदारों ने एक संगठन की बात सोची और उसी के आधार पर द्वारकानाथ टैगोर के प्रयासों के फलस्वरूप 1838 ई० में जमींदार सभा का गठन हुआ।

प्रश्न 13.
शिक्षा के विस्तार में मुद्रित पुस्तकों ने किस प्रकार मुख्य भूमिका पालन की ?
उत्तर :
शिक्षा के विकास एवं प्रसार में प्रेसों तथा मुद्रित पुस्तकों की भूमिका : राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रत्येक पहलू के विषय में वाहे वह शिक्षा हो या सास्कृतिक, आर्थिक हो या सामाजिक, अथवा राजनैतिक, प्रेस तथा उससे मुद्रित पुस्तकों की भूमिका उल्लेखनीय रही है। प्रेस के ही माध्यम से विभिन्न राजनैतिक नेताओं ने अपने विचारों को आम जनता तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त की। जनता में जागृति पैदा करने के उद्देश्य से मुद्रणालय और मुद्रित पुस्तकों का सहारा लिया गया।

प्रश्न 14.
1857 ई० के महाविद्रोह के दो विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर :
विशेषताएँ : (i) 1857 ई० का महाविद्रोह भारतवासियों के भीतर देश-प्रेम एवं राष्ट्रीय प्रेम की भावना को जागृत किया था।
(ii) इस विद्रोह के नेताओं में राष्ट्रीय चरित्र की भावना कूट-कूट कर भरी थी जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में दिखाई दिया।

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प्रश्न 15.
गगनेन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा चित्रित कुछ कार्टून (हास्याप्रद चित्रों) के नाम बताइए।
उत्तर :
गगनेन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा चित्रित कुछ कार्टून हैं — अद्भुत लोक, नव हुलोड़, बिरूप बाजरा, भोडोर बहादुर, अलिक बाबू, द फाल्स बाबू।

प्रश्न 16.
गगनेन्द्रनाथ टैगोर की दो कार्टुन चित्रों का वर्णन करो।
उत्तर :
गगनेन्द्रनाथ टैगोर एक महान चित्रकार एवं कार्दुनिस्ट थे। सन् 1917 में ‘बाजरा’ एवं ‘अन्दुत लोक’ तथा सन् 1921 में ‘नव हुलोड़े’ आदि इनके कार्दुन चित्र थे जिसमें औपनिवेशिक समाज का व्यंग्यपूर्ण चित्रण को दर्शाती थी। इनके चित्रों में जाति प्रथा, पाखण्ड, हिन्दू पूजारी तथा पथ्थिमी शिक्षा का घोर विरोध भी छिपा रहता था।

प्रश्न 17.
महाराणी की उद्योषणा से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र 1 नवम्बर, 1858 ई० को इलाहाबाद के मिण्टो पार्क में लार्ड कैनिंग के द्वारा घोषित किया गया जिसमें अनेकों बात कही गयी।
(a) राज्य हड़प की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त किया गया।
(b) देशी राजाओं और राजकुमारों को अपनी इच्छानुसार अपना उत्तराधिकारी चुनने की छूट दी गयी।
(c) जाति, धर्म तथा रंग का भेदभाव किये बिना सरकारी सेवा में नियुक्ति किया जाये इत्यादि।

प्रश्न 18.
1857 ई० के महाविद्रोह को जन आंदोलन क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
1857 ई० के महाविद्रोह को जन आंदोलन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस विद्रोह में अधिकांशतः भारतीयों ने भाग लिया था, जिनमें निम्न वर्ग, मध्य वर्ग और उच्च वर्ग के साथ-साथ कई क्षेत्रो के जमीन्दार और ठेकेदार भी शामिल थे। इस विद्रोह ने लोगों में अपनी मातृभूमि के प्रति भक्ति की भावना भर दिया था। इन्हीं विशेषताओ के कारण इस जन विद्रोह कहा जाता है।

प्रश्न 19.
बंग भाषा प्रकाशिका सभा की स्थापना कब और क्यों किया गया ?
उत्तर :
बंग भाषा प्रकाशिका सभा की स्थापना राजा राममोहन राय के अनुयायियों (Followers) ने किया जिनमे गौरीशंकर तर्कबागीस एवं द्वारकानाथ ठाकुर (टैगोर) आदि प्रमुख थे। इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य सरकार के नीतियों की समीक्षा कर उनकी गलतियों को सुधारना था। अत: लोगों में राश्ट्रीयता एवं देश-प्रेम की भावना का प्रचार-प्रसार व जागृति लाने के लिए इस सभा की स्थापना की गई।

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प्रश्न 20.
भारत सभा का गठन कब और किसके द्वारा किया गया था ?
उत्तर :
भारत सभा की स्थापना सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा आनन्द मोहन बोस ने सन् 1876 में अल्बर्ट हॉल (Elbert Hall), कलकत्ता में किये। ‘भारत सभा’ के संस्थापक सुरेन्द्रनाथ बनर्जी माने जाते थे, जबकि आनन्द मोहन बोस इसके सचिव माने जाते थे। बाद में इसके अध्यक्ष कलकत्ता के प्रमुख बैरिस्टर मनमोहन घोष चुने गए। इस संस्था के अन्य संस्थापकों में शिवनाथ शास्ती तथा द्वारकानाथ गंगोपाध्याय भी थे।

प्रश्न 21.
कब और किसके द्वारा हिन्दू मेला नामक संगठन की स्थापना की गई ? इसे चैत मेला क्यों कहा जाता था ?
उत्तर :
हिन्दू मेला : हिन्दू मेला की स्थापना महान राष्ट्रेमी राज नारायण बोस के प्रमुख शिष्य नव गोपाल मित्र द्वारा सन्र 867 में किया गया। यह मेला प्रत्येक वर्ष के चैत्र महीने में होता था इसीलिए इस मेला को ‘चैत्र मेला’ के नाम से भी जाना जाता था।

प्रश्न 22.
दुर्गादास बनर्जी ने 1857 के विद्रोह का कैसा वर्णन किया है ?
उत्तर :
दुर्गादास बनर्जी जो क्रान्ति के समय वारणसी में सैन्य अधिकारी थे, ने लिखा है कि, “विद्रोही सिपाहियों में अनुशासन का अभाव था। वे दुकानदार, धनिको यहाँ तक कि साधारण जनता को भी लूटते थे। हिन्दूओं को गाय का मांस और मुसलमानों को सुअर का मांस दिखाकर उनसे छिपाये गये धन का पता लगाते थे । वोरी, लूट, बलात्कार आम जीवन की घटना थी। हिन्दू-मुसलमानों के बीच साम्प्रदायिक तनाव अपने चरम पर था।”

प्रश्न 23.
किशोरीचन्द्र मित्र ने 1857 के विद्रोह का कैसा वर्णन किया है ?
उत्तर :
प्रसिद्ध बंगाली विद्वान किशोरीचन्द्र मित्र ने 1857 के विद्रोह के सम्बन्ध में लिखा है कि, ‘ यह मूल रूप में एक सैनिक विद्रोह था जिसमें आम जनता ने भाग नहीं लिया और सैनिकों की भागीदारी भी कम ही थी। विद्रोह में भाग लेने वालों की संख्या, अंग्रेजी सरकार के प्रति सहानुभूति रखने वालों की तुलना में नगण्य थी।”

प्रश्न 24.
1857 ई० की क्रान्ति का तत्कालीन कारण क्या था ?
उत्तर :
1857 ई० की क्रान्ति का तत्कालीन कारण गाय और सूअर की चर्बी से बने कारतूस को भारतीय सैनिकों द्वारा चलाने से इन्कार करना तथा अंग्रेज अधिकारी ह्यूडसन द्वारा बार-बार दबाव दिये जाने पर बैरकपूर छावनी के एक सिपाही मंगल पाण्डे द्वारा गोली मार देने से उग्रतम घटना थी।

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प्रश्न 25.
1857 ई० की क्रान्ति में मध्यमवर्ग भाग क्यों नहीं लिया था ?
उत्तर :
1857 ई० के महान विद्रोह में अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त उनके रंग में रंगे शिक्षित मध्यमवर्ग ने विशेषकर बंगाली मध्यम वर्ग ने भाग नहीं लिया था, क्योंकि उन्हें अंग्रेजों की नौकरी तथा अन्य सुख सुविधा छीन लिये जाने का भय था, तथा वे अंग्रेजों को आधुनिक भारत का निर्माणकर्ता और न्यायकर्ता मानते थे। इसी स्वार्थ और दकियानूसी (संकीर्ण) सोच के कारण मध्यम वर्ग ने विद्रोह में भाग नहीं लिया था।

प्रश्न 26.
19 वीं शताब्दी के उन महान रचनाओं में से किन्हीं चार का नाम लिखिए जो देशवासियों में राष्ट्रीय भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ?
उत्तर :
नील-दर्पण, आनन्द मठ, जीवनेर झाड़ापाता, वर्तमान भारत, गोरा आदि साहित्य रचनाओं ने देशवासियों में राष्ट्रभावन्म को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 27.
अवनीन्द्र नाथ टैगोर कौन थे ? वे भारतीय इतिहास में क्यों प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
अवनीन्द्र नाथ टैगोर एक प्रसिद्ध लेखक, कलाकार और चित्रकार थें। वे भारत-माता, बुद्ध और सुजाता जैसी राष्ट्रीयता के प्रतीक वाले चित्र को बनाये जाने के कारण भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 28.
विद्युत साहिनी सभा की स्थापना किसने और किस उद्देश्य से की थी ?
उत्तर :
विद्युत साहिनी सभा की स्थापना बंगला भाषा के प्रसिद्ध उपन्यासकार काली प्रसन्न सिन्हा ने 14 वर्ष की उम्र में कलकत्ता में की थी।
इसकी स्थापना का उद्देश्य बंगाल में शिक्षा, साहित्य, नाटक, व्यंग्य आदि विधाओं के विकास के लिये किया गया था।

प्रश्न 29.
गगनेन्द्र नाथा टैगोर कौन थे ? वे क्यों भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध हैं ?
उत्तर :
गगनेन्द्र नाथ टैगोर बंगला साहित्य के एक प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य चित्रकार (Cartoonist) थे। वे बंगाल के मध्यम बाबू वर्ग के हास्य व्यंग्य चित्र द्वारा उनका उपहास उड़ाये जाने के कारण भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 30.
1857 ई० के विद्रोह की उन दो महिलाओं के नाम लिखिए जिन्होंने क्रान्तिकारियों से गद्दारी करके अंग्रेजों का साथ दिया ?
उत्तर :
राविया बेगम, बेजा बाई, जीनतमहल ने क्रान्तिकारियों से गद्दारी करके अंग्रजों का साथ दिया था।

प्रश्न 31.
किस उपन्यास को स्वदेश प्रेम का गीता कहा जाता है ? क्यो ?
उत्तर :
ॠषि बकिमचन्द्र द्वारा रचित उपन्यास ‘आनन्दमठ’ को ‘स्वदेश प्रेम का गीता’ कहा जाता है, क्योंकि इस पुस्तक ने देशवासियों को देश-प्रेम एवं राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाया। जिसके कारण देशवासियों में राष्ट्रीयता का ज्वार उत्पन्न हुआ। इसीलिए आनन्दमठ को स्वदेश प्रेम का गीता कहा जाता है।

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प्रश्न 32.
लार्ड डलहौसी की राज्य हड़प नीति द्वारा हड़पे गये चार देशी राज्यों का नाम बताइए।
उत्तर :
सताड़ा, जैतपुर, संभलपूर, झाँसी थें। इनमें सताड़ा पहला देशी राज्य था, जिसे अंग्रेजो ने हड़प कर अपने राज्य में मिला लिया था।

प्रश्न 33.
1857 ई० के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था ? और उसकी मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर :
1857 ई० के विद्रोह का राष्ट्रीय नेतृत्व बहादुर शाह जफर (II) ने किया था।
अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर (II) को गिरफ्तार कर वर्मा के माण्डले जेल भेज दिया जहाँ उनकी मृत्यु हुई। इस प्रकार एक बादशाह का दुखद अन्त हुआ।

प्रश्न 34.
भारत का अन्तिम गवर्नर जनरल और प्रथम वायसराय कौन था ?
उत्तर :
भारत का अन्तिम गवर्नर जनरल और प्रथम वायसराय लार्ड कैनिंग था।

प्रश्न 35.
तात्या टोपे कौन था ? उसका वास्तविक नाम क्या था ?
उत्तर :
गुल्लि युद्ध प्रणाली में दक्ष तात्या टोपे नानासाहब का सेनापति था। इसका वास्तविक नाम राम चन्द्र पाण्डूरंग था।

प्रश्न 36.
1857 ई० की कान्ति में मर्द का रूप ग्रहण कर क्रान्ति मे भाग लेने वाली महिला का नाम लिखो।
उत्तर :
झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई और अजीजन बाई।

प्रश्न 37.
भारत में सिपाही विद्रोह सबसे पहले कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
भारत में सिपाही विद्रोह 10 मई 1857 ई० को मेरठ में हुआ था। जिसमें 85 घुड़सवार सैनिकों ने विद्रोह किया था।

प्रश्न 38.
रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित दो उपन्यासों का नाम लिखिए।
उत्तर :
गोरा, घोरे बाइरे, चार अध्याय इत्यादि।

प्रश्न 39.
‘आनन्दमठ’ उपन्यास के प्रमुख दो प्रमुख पात्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
‘आनन्दमठ’ उपन्यास के प्रमुख दो पात्रों का नाम ‘महेन्द्र’ और ‘कल्याणी’ है।

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प्रश्न 40.
कब और किसने ‘वर्तमान भारत’ को ‘रामकृष्ण मठ’ और ‘रामकृष्ण मिशन’ के मुख्य पत्र के रूप में प्रकाशित किया था ?
उत्तर :
सन् 1899 में ‘उद्बोधन’ प्रकाशन ने ‘वर्तमान भारत’ को ‘रामकृष्ण मठ’ और ‘रामकृष्ष्ण मिशन’ के मुख्य पत्र के रूप में प्रकाशित किया था। [नोट : इस समय ‘वर्तमान भारत’ एक निबन्ध के रूप में है।]

प्रश्न 41.
‘गोरा’ उपन्यास को कब और किस पत्रिका के माध्यम से क्रमबद्ध रूप दिया गया ?
उत्तर :
‘गोरा’ उपन्यास को 1907 ई० से 1909 ई० के बीच ‘प्रवासी’ (Prabasi) पत्रिका के माध्यम से क्रमबद्ध रूप दिया गया।

प्रश्न 42.
व्यंग्य-चित्र से क्या समझते हो ?
उत्तर :
कला मे रूप में व्यग्य-चित्र एक दृश्य कल्पना है जिसका उद्देश्य वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक जीवन को दर्शाना है । मुख्यतः इस कला के दो उद्देश्य होते हैं – प्रथम पूर्ण मनोरंजन और द्वितीय आलोचना करना। साधारणतः मनोरंजन और व्यग्य-चित्रों के दो मुख्य अंग हैं।

प्रश्न 43.
गगनेन्द्रनाथ के प्रमुख व्यंग्य चित्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
गगनेन्द्रनाथ टैगोर के व्यंग्य-चित्रों में एमोन कर्म आर कोरबो ना, विरुप बंजारा, आलिक बाबू, My love of my country as Big as I am, आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 44.
गगनेन्द्रनाथ टैगोर के व्यंग्यात्मक चित्रों से क्या जानकारी मिलती है ?
उत्तर :
गगनेन्द्रनाथ टैगोर के व्यंग्यात्मक चित्रों से औपनिवेशिक राजनीति, आमलोगों की जीवन शैली और समाज के उच्च वर्गों के रीति-रिवाजों की जानकारी मिलती है।

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प्रश्न 45.
‘इल्बर्ट बिल विवाद’ कब और किसने पेश किया ?
उत्तर :
सन् 1883 में मिस्टर पी० सी० इल्बर्ट ने पेश किया।

प्रश्न 46.
‘भारत सभा’ द्वारा किये गये दो महत्वपूर्ण कार्य क्या थे ?
उत्तर :
दो महत्वपूर्ण कार्य : (1) सिविल सर्विस परीक्षा विरोधी आन्दोलन और (2) इल्बर्ट बिल का विरोध आन्दोलन आदि

प्रश्न 47.
‘इण्डियन एसोसिएशन’ की स्थापना कहाँ और किसने किया ?
उत्तर :
कलकत्ता में आनन्द मोहन बोस और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने किया।

प्रश्न 48.
‘आनन्दमठ’ उपन्यास की विषय-वस्तु क्या थी ?
उत्तर :
‘आनन्दमठ’ उपन्यास में 1770 ई० में आरम्भ हुए बंगाल के भीषण आकाल एवं सन्यासी विद्रोह का वर्णन है।

प्रश्न 49.
भारत सभा की स्थापना के दो उद्देश्यों का उल्लेख करो।
उत्तर :
दो उद्देश्य : (1) सम्पूर्ण देश में लोकमत का निर्माण और (2) हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच एकता और मैत्री की स्थापना आदि।

प्रश्न 50.
भारतमाता का चित्र किसने और कब बनाया ?
उत्तर :
अवनीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा 1905 ई० में भारतमाता का चित्र बनाया गया। इस चित्र को बंग-भंग के विरोधी आन्दोलनकारियों द्वारा काफी पसन्द किया गया।

प्रश्न 51.
1857 ई० के विद्रोह को सैनिक विद्रोह बतलाने वाले दो इतिहासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर :
(i) ट्रेविलियन (ii) मुइनुद्दीन।

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प्रश्न 52.
1857 ई० के विद्रोह के समय मुगल बादशाह कौन थे एवं अंग्रेजों ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था ?
उत्तर :
1857 ई० के विद्रोह के समय भारत का मुगल बादशाह बहादुरशाह जफ्फर (द्वितीय) था।अंग्रेजो ने उनकी पेशन बन्द कर दी। सिक्को पर से उनका नाम हटवा दिया था । इस प्रकार अंग्रेजों ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया था।

प्रश्न 53.
1857 ई० के विद्रोह को स्वतंत्रता आंदोलन बतलाने वाले दो इतिहासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर :
(i) जे० सी० विल्सन (ii) केथी।

प्रश्न 54.
‘बंगाल ब्रिटिश इण्डिया सोसायटी’ की स्थापना किसने और कहाँ किया ?
उत्तर :
जॉर्ज थॉमसन ने कलकत्ता में किया।

प्रश्न 55.
‘ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन’ की स्थापना किसने और कहाँ किया ?
उत्तर :
राजा राधाकान्त देव ने कलकत्ता में किये।

प्रश्न 56.
‘ईस्ट इण्डिया एसोसिएशन’ की स्थापना किसने और किस वर्ष किया ?
उत्तर :
दादाभाई नौरोजी ने सन् 1866 में किया।

प्रश्न 57.
‘पूना सार्वजनिक सभा’ की स्थापना किसने और कहाँ किया ?
उत्तर :
महादेव गोविन्द रानाडे ने पूना में किया।

प्रश्न 58.
‘इण्डियन लीग’ का गठन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर :
सन् 1875 में कलकत्ता में।

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प्रश्न 59.
‘कलकत्ता स्टुडेण्ट्स एसोसिएशन’ का गठन कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1875 में आनन्द मोहन बोस ने किया।

प्रश्न 60.
‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की स्थापना किसने और कहाँ किया ?
उत्तर :
ए० ओ० ह्यूम ने बम्बई में किया।

प्रश्न 61.
‘बम्बई प्रेसीडेंसी ऐसोसिएशन’ की स्थापना किसने और कहाँ किये ?
उत्तर :
फिरोजशाह मेहता और बदरुद्दीन तैय्यब जी ने बम्बई में किये।

प्रश्न 62.
‘इण्डियन सोसाइटी’ का गठन कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1872 में आनन्द मोहन बोस ने किया।

प्रश्न 63.
‘बॉम्बे ऐसोसिएशन’ का गठन किसने और कहाँ किया ?
उत्तर :
जगत्नाथ शंकर ने बम्बई में किया।

प्रश्न 64.
‘मद्रास महाजन सभा’ की स्थापना कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1884 में वी० राघवाचारी एवं एस० अय्यर ने किया।

प्रश्न 65.
‘भारतीय राष्ट्रीय कॉन्क्रेंस’ का गठन कब और किसने किया ?
उत्तर :
सन् 1883 में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने किया।

प्रश्न 66.
‘नेशनल इण्डिया एसोसिएशन’ का गठन किसने और कहाँ किया ?
उत्तर :
मेरी कारपेंटर ने लंदन में किया।

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प्रश्न 67.
दिल्ली में 1857 ई० के विद्रोह को किसने और कब दबाया ?
उत्तर :
निकलसन एवं हडसन ने 21 सितम्बर, 1857 ई० में दबाया।

प्रश्न 68.
कानपुर में 1857 ई० के विद्रोह को कब और किसने समाप्त किया ?
उत्तर :
6 दिसम्बर, 1857 ई० में कैम्पबल ने समाप्त किया।

प्रश्न 69.
लखनऊ में 1857 ई० के विद्रोह को कब और किसने दमन किया ?
उत्तर :
21 मार्च, 1858 ई० में कैम्पबल ने दमन किया।

प्रश्न 70.
झाँसी में 1857 ई० के विद्रोह को किस ब्रिटिश नायक ने कब समाप्त किया ?
उत्तर :
बिटिश नायक ह्यूरोज ने 3 अप्रैल, 1858 ई० में समाप्त किया।

प्रश्न 71.
इलाहाबाद में 1857 ई० के विद्रोह को किस ब्रिटिश नायक ने कब समाप्त किया ?
उत्तर :
ब्रिटिश नायक कर्नल नील ने सन् 1858 में समाप्त किया।

प्रश्न 72.
जगदीशपुर में 1857 ई० के विद्रोह को किस ब्रिटिश नायक ने कब समाप्त किया ?
उत्तर :
बिटिश नायक विलियम टेलर एवं विंसेट आयर ने सन् 1858 में समाप्त किया।

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प्रश्न 73.
फतेहपुर में 1857 ई० के विद्रोह को किस ब्रिटिश नायक ने कब दमन किया ?
उत्तर :
बिटिश नायक जनरल रेनर्ड ने सन् 1858 में दमन किया।

प्रश्न 74.
‘नेशनल जिमनासियम’ (National Gymnasium) का गठन कब और किसने किया ?
उत्तर :
‘नेशनल जिमनासियम’ (National Gymnasium) का गठन सन् 1868 में नव गोपाल मित्र ने किया।
[नोट : यह एक जिमनास्टिक स्कूल था।]

प्रश्न 75.
‘नेशनल जिमनासियम’ के प्रमुख सदस्य या छात्र कौन-कौन थे ?
उत्तर :
‘नेशनल जिमनासियम’ के प्रमुख सदस्य या छात्र विपिनचन्द्र पाल, सुन्दरी मोहन दास, राजचन्द्र चौधरी एवं स्वामी विवंकानन्द थे।

प्रश्न 76.
‘आनन्दमठ’ उपन्यास का प्रकाशन कब और किस भाषा में हुआ था ?
उत्तर :
‘आनन्दमठ’ उपन्यास का प्रकाशन सन् 1882 में बंगला भाषा में हुआ था।

प्रश्न 77.
‘आनन्दमठ’ उपन्यास के पृष्ठभूमि की शुरूआत कब और किसके संदर्भ में हुआ था ?
उत्तर :
‘आनन्दमठ’ उपन्यास के पृष्ठभूमि की शुरूआत सन् 1771 में बंगाल के अकाल के संदर्भ में हुआ था।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
‘बंगभाषा प्रकाशिका सभा’ को प्रथम राजनैतिक संस्थान कहा जाता है, क्यों ?
उत्तर :
बंगभाषा प्रकाशिका सभा : ‘बंगभाषा प्रकाशिका सभा’ भारत का प्रथम राजनैतिक संगठन थी। इस संगठन की स्थापना सन् 1836 में हुआ था। इसकी स्थापना राजा राममोहन राय की मृत्यु के बाद उनके अनुयायियों (Followers) ने किया जिनमें गौरीशंकर तर्कबागीस एवं द्वारकानाथ ठाकुर (टैगोर) आदि प्रमुख थे। इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य सरकार की नीतियों की समीक्षा कर उनकी गलतियों को सुधारना था। यद्यपि इसे बंगाल में कोई संवैधानिक महत्व नहीं मिला फिर भी इस संस्था ने बंगालियों को संगठित कर उन्हें ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रान्ति करने के लिए प्रेरित करती थी। इस संस्था ने लोगों में राष्ट्रीयता एवं देश-प्रेम की भावना का प्रचार-प्रसार किया। इसीलिए इस संस्था की भूमिका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस कारण इसे भारत का प्रथम राजनैतिक संस्थान कहा जाता है।

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प्रश्न 2.
हिन्दू मेला की स्थापना का उद्देश्य क्या था ?
उत्तर :
हिन्दू मेला (Hindu Mela) : भारतीय राष्ट्रीय चेतना को अग्रसर करने तथा राष्ट्रीयता की विकास के लिए इस संस्था का गठन किया गया था। यह एक संस्था नहीं था बल्कि एक मेला था, जो चैत्र महीने में होता था। इसके आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिन्दुओं को एकत्रित कर उनमें राष्ट्रीयता की भावना को भरना था। ‘हिन्दू मेला’ की स्थापना महान राष्ट्रेमी ‘राज नारायण बोस’ के प्रमुख शिष्य ‘नव गोपाल मित्र’ ने सन् 1867 में किया। यह मेला प्रत्येक वर्ष के चैत्र महीने में होता था, इसीलिए इस मेला को ‘चैत्र मेला’ के नाम से भी जाना जाता था। चूँकि यह मेला राष्ट्रीय स्तर पर होता था, इसीलिए इस मेला को ‘राष्ट्रीय मेला’ के नाम से भी जाना जाता था।

प्रश्न 3.
1857 ई० के महाविद्रोह को क्या सामन्त श्रेणी विद्रोह कहा जा सकता है ?
उत्तर :
1857 ई० के महान विद्रोह की प्रकृति के सम्बन्ध में भिन्न-भिन्न इतिहासकारों ने अपने अलग-अलग मत प्रकट किये हैं, उनमें से कुछ इतिहासकारों ने इस महान विद्रोह को सामन्ती श्रेणी का विद्रोह कहा है –
(i) डॉ॰ सुरेन्द्रनाथ सेन ने अपनी पुस्तक 1857 (Eighteen fifty seven) डॉ॰० शशि भूषण चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘सिविल रिबेलियन इन द इण्डियन मिनटस 1857-59 ई० में तथा जवाहरलाल नेहरू ने इसे सामन्तशाही विद्रोह कहा है।
(ii) इन इतिहासकारों का मत है कि अंग्रेजों ने ही सामन्तों नवाबों तथा जमीन्दारों से सत्ता छिनी थी। इस कारण यह वर्ग उनसे क्रुद्ध था।
(iii) अंग्रेजों की पश्चिमी संस्कृति के प्रसार तथा अत्याचार से यह वर्ग नाखुश था।
(iv) इस विद्रोह का नेतृत्व बहादुर शाह द्वितीय ने किया तथा इसका साथ नाना साहब, लक्ष्मीबाई हजरत महल, कुंवर सिंह एवं अन्य सामन्तों एवं जमीदारों ने दिया ताकि अंग्रेजों को हराकर पुरातन सामन्ती व्यवस्था स्थापित किया जा सके। इसलिए उमेश चन्द्र मजूमदार ने कहा है – यह विद्रोह मृतप्राय सामन्तो का मृत्युकालीन आर्तनाद था।

इस प्रकार मार्क्सवादी लेखक महान विद्रोह को सामन्तशाही विद्रोह मानते हैं वे कहते हैं कि यह विद्रोह सैनिकों ने शुरू किया था जबकि अन्त में दिल्ली के सिहांसन पर मुस्लिम बादशाह को पुन: बैठा दिया। वास्तव यह विद्रोह न सामन्ती था, न ही सैनिक था विशुद्ध रूप से इसका स्वरूप राष्ट्रीय था। इसमें जनता ने ब्रिटिश शासन का अन्त कर अपना शासन स्थापित करने के उद्देश्य से एकजुट होकर प्रयास किया था। अतः महान विद्रोह की प्रकृति एकदम स्वतन्त्रता संग्राम तथा राष्ट्रीय विद्रोह जैसा था।

प्रश्न 4.
उपनिवेशिक सरकार ने किस उद्देश्य से जंगल कानून लागू किया ?
उत्तर :
भारत में सर्वप्रथम अंग्रेज सरकार द्वारा 1865 ई० तथा 1875 ई० में क्रमश: दो वन कानून पास किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे –

  1. बिटिश राजकीय नौसेना के प्रसार तथा भारतीय रेल पथ के विस्तार के लिए लकड़ियों के स्लिाप बिछाने की आवश्यकता थी। इसलिए सरकार की लोलुप नजर भारतीय वन सम्पदा पर थी।
  2. भारत के विस्तृत वन भूमि का सफाया कर उसे कृषि भूमि में बदलना तथा आदिवासियों की झुम कृषि को रोक कर उसे स्थायी कृषि में परिवर्तित कर भूरा द्वारा अधिक लाभ अर्जित करना था।
  3. वन क्षेत्र एवं वनसम्पदा का अधिग्रहण कर उसका व्यापारिक लाभ अर्जित करना था।
  4. ब्रिटिश सरकार भारत के वन क्षेत्रों को तीन श्रेणियों सुरक्षित वन संरक्षित वन एवं ग्रामीण वन या असुरक्षित वन में विभाजित कर उपनिवेशिक स्वार्थ एवं लाभ कमाने हेतु वन अधिनियम लागू किया था।

इस प्रकार उपनिवेशिक अंग्रेज सरकार का वन कानून बनाने व लागू करने का मुख्य उद्देश्य उपनिवेशिक स्वार्थ की पूर्ति तथा वन क्षेत्र पर अपना वर्चस्व स्थापित करना था। इसको लेकर आदिवासियों की कई जातियों एवं उपजातियों ने विद्रोह किया था।

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प्रश्न 5.
1857 ई. के महाविद्रोह के प्रति शिक्षित बंगाली समाज की धारणा क्या थी ?
उत्तर :
महान विद्रोह के प्रति शिक्षित बंगाली समाज की धारणा : अंग्रेजों को माई-बाप मानने वाला शिक्षित बंगाली समाज की 1857 ई० के महान विद्रोह के प्रति यही धारणा थी कि यदि विद्रोहियों का साथ दिया तो अंग्रेजों की चाटुकारित से मिलने वाली सुख -सुविधा के साधन, अर्थात जमीनदारी, बाबुगिरि नौकरी छिन ली जायेगी। जिससे जीवनजीना कठिन हो जायेगा। कुछ भद्र बंगाली बाबुओं को भय था कि अंग्रेज चले जायेगे तो भारत में पश्चिमी सभ्यता संस्कृति, तथा आधुनिकीकरण के विकास की क्रिया रूक जायेगी।

भारत पुन: अन्धकार के गर्त में डूब जायेगा और चारो तरफ अराजकता की स्थिति फैल जायेगी। इसी भय की वजह से शिक्षित मध्यमवर्गीय बंगाली समाज ने क्रान्तिकारियों का साथ न देकर विद्रोह को कुचलने में अंग्रेज महाम्रभुओं का साथ दिया था। इस प्रकार विद्रोह के प्रति उनकी धारणा राष्ट्रहित के विरुद्ध निजी स्वार्थ से परिपूर्ण उदासीनता की, थी।

प्रश्न 6.
रानी की घोषणा पत्र – 1858 ई० का ऐतिहासिक महत्व क्या था ?
उत्तर :
सन् 1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि इसी विद्रोह के परिणामस्वरूप भारतीय प्रशासनिक मामलों में कई प्रकार के परिवर्तन किये गये और इन परिवर्तनों के आधार पर ही महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र भी था। गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया ऐक्ट, 1858 ई० द्वारा किये गये परिवर्तनों की विधिवत घोषणा 1 नवम्बर, 1858 ई० को इलाहाबाद के मिण्टो पार्क में लार्ड कैनिंग के द्वारा किया गया। इस घोषणा पत्र में विभिन्न बाते कही गयी जिनमें –

भारतीय शासन की बागडोर ईस्ट इण्डिया कंपनी से निकलकर इंग्लैण्ड की सरकार के हाथों में चली गयी, जिसके तहत घोषणापत्र में वायसराय उपाधि का प्रयोग प्रथम बार हुआ। गवर्नर जनरल का पद भारत सरकार के विधायी कार्य का प्रतीक था तथा समाट का प्रतिनिधित्व करने के कारण उसे वायसराय कहा गया, अर्थात् भारत के गवर्नर जनरल अब वायसराय बन गए।

विक्टोरिया की घोषणापत्र में कुछ महत्वपूर्ण नीतियों को स्पष्ट किया गया था। इसका प्रथम भाग राजाओं से संबंधित था। इसमे उनके क्षोभ को शान्त करने के उद्देश्य से अंग्रेजी राज्य की अपहरण नीति या राज्य हड़प नीति के त्याग को बात कही गई।

भारतीय जनता के लिए धार्मिक सहनशीलता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया गया। घोषणा में भारतवासियों पर ईसाई धर्म थोपने की इच्छा एवं अधिकारी का स्वत्व भी त्याग दिया गया।

घोषणापत्र में कहा गया कि शिक्षा, योग्यता एवं ईमानदारी के आधार पर बिना जाति या वंश का ध्यान रखे लोक सेवाओं में जनता की भर्ती की जाय।

भारतीय परम्परागत अधिकारों, रीतिरिवाजों तथा प्रथाओं के सम्मान का उल्लेख किया गया। भारतीय नागरिकों को उसी कर्त्तव्य एवं सम्मान का आभासन दिया गया जो सम्राट के अन्य नागरिकों को प्राप्त थे।

भारत में आन्तरिक शान्ति स्थापित होने के बाद उद्योगों की स्थापना में वृद्धि, लोक-कल्याणकारी योजना, सार्वज़निक कार्य तथा प्रशासन व्यवस्था का संचालन समस्त भारतीय जनता के हित में किये जाने की बात कही गई।

भारतीय सैनिको की संख्या और यूरोपीय सैनिकों की संख्या का अनुपात विद्रोह के पूर्व5: 1 था जिसे घटाकर 2: 1 कर दिया गया। विद्रोह के समय भारतीय सैनिकों की संख्या 2 लाख 38 हजार थी जो घटकर 1 लाख 40 हजार हो गई।

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प्रश्न 7.
1857 ई० की क्रान्ति का तत्कालीन कारण का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
तत्कालीन कारण : 1857 ई० के विद्रोह का तत्कालीन एवं सैनिक कारण गाय, सुअर की चर्बी से बने कारतूस के प्रयोग वाली घटना थी। अंग्रेजों ने सेना के लिए एक नयी राइफल एण्डफिल्ड देने का निश्चय किया। जिसमें प्रयोग होने वाली गोली के मुँह पर गाय, सुअर की चर्बी लगी होती थी। जिसका प्रयोग करने से पहले दाँत से नोचकर बन्दूक में भरनी पड़ती थी।

बैरकपुर छावनी के सैनिको ने इस कारतूस का प्रयोग करने से इन्कार कर दिया, किन्तु रेजीमेण्ट मेजरहुडसन ने बार-बार गोली चलाने के लिए दबाव डालने लगा तब उसे रेजीमेन्ट के एक सैनिक मंगल पाण्डे ने उस अधिकारी को गोली मार दी, यह घटना पूरे देश में आग की तरह फैल गयी, और 1857 ई० की क्रान्ति की ज्वाला धधकती गयी। इस प्रकार 1857 ई० की क्रान्ति में कारतूस वाली घटना 1857 ई० की क्रान्ति का तत्कालीन कारण बन गया।

इस क्रान्ति में कैप्टन गार्डन एक मात्र अंग्रेज अधिकारी था। जो भारतीयों की ओर से लड़ा था। सम्मूर्ण भारत में 31 मई 1857 ई० को यह क्रान्ति सुनिश्चित थी। परन्तु बंगाल के मंगल पाण्डे के कारतूस वाली घटना के कारण यह क्रान्ति 29 मार्च को ही शुरु हो गयी थी। लेकिन वास्तविक रूप से इसकी शुरूआत 10 मई को मेरठ छावनी के सैनिको ने दिल्ली कुच करने के साथ शुरू किया था।

सैनिक कारण : 1857 ई० के क्रान्ति के विद्रोह का सैनिक कारण अंग्रेज सैनिको की अपेक्षा भारतीय सैनिको को कम वेतन देना था। साथ ही भारतीय सैनिको से भेद-भाव किया जाता था। भारतीय सैनिकों का समुद्र पार करना अनिवार्य कर दिया गया, सैनिको की चिठ्ठी पर शुल्क लगाया गया था। इन्हीं सब कारणों से भारतीय सैनिकों का अंग्रेजों के प्रति अंसतोष बढ़ता गया, यही असंतोष 1857 ई० की क्रान्ति का सैनिक विद्रोह का आधार बना।

प्रश्न 8.
1857 ई० की क्रान्ति के असफलता के कारणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
1857 ई० की क्रान्ति के असफलता के कारण : इस जनक्रान्ति की असफलता के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी थे :-
(i) संगठन एवं योजना का अभाव :- 1857 ई० की क्रान्ति में संगठन और कुशल कार्य योजना का अभाव था, जिसके चलते सुनियोजित क्रान्ति की क्रियाकलाप सही समय पर लागू न हो सकी।
(ii) राष्ट्रीय नेतुत्व का अभाव :- 1857 ई॰ की क्रान्ति का पूरे राष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देने वाला कोई सर्वमान्य राष्ट्रीय नेता नहीं था, अतः राष्ट्रीय नेतृत्व के अभाव में क्रान्ति की कार्य योजना ठीक ढंग से लागू न हो सकी।
(iii) क्रान्ति का समय से पूर्व शुरु हो जाना :- 1857 ई० की क्रान्ति को पूरे देश में 31 मई 1857 ई० को एक ही समय पर एक ही साथ शुरु-करने की योजना तैयार की गई थी, किन्तु दुर्भाग्यवश बैरकपुर छावनी की कारतूस वाली घटना के कारण क्रान्ति समय से पहले 10 मार्च को ही शुरु हो गई। अतः समय से पूर्व क्रान्ति शुरु हो जाने के कारण इसकी योजनाए ठीक समय पर लागू न की जा सकी।
(iv) देशी राजाओं का असहयोग :- क्रान्ति के समय बहुत से देशी राजाओं तथा आरामतलब जिन्दगी जी रहे मध्यमवर्गीय जनता ने क्रान्तिकारियों का साथ न देकर अंग्रेजों का साथ दिया था, ऐसे में राजाओं तथा जनसहयोग के अभाव में क्रान्ति सफल न हो सकी।
(v) अंग्रजों का कुशल नेतृत्व :- क्रान्ति को कुचलने के लिए अंग्रेजी प्रशासन एवं सैनिक अधिकारियों ने बड़ी कुशलता एवं सूझ-बूझ से सेना का नेतृत्व किया। जिसका सामना भारतीय क्रान्तिकारी नहीं कर सके
(vi) अंग्रेजों का कुर दमन चक्र :- अंग्रेजों ने क्रान्ति को दबाने के लिए कठोर एवं कुर दमन चक्र का सहारा लिया, अंग्रेज सैनिकों ने गाँव के गाँव फूक डाले, हजारों लोगों को तोपो के मुह पर बाँधकर एक साथ उड़ा दिया, बहुत से क्रान्तिकारियों को जनता के सामने फाँसी पर लटका दिया गया, अंग्रेजों के इस अमानवीय दमन कार्य से देश की जनता और भयभीत हो उठी, और समय पर क्रान्तिकारियों का साथ न दे सकी, जिसके कारण यह क्रान्ति असफल सिद्ध हो गयी।

प्रश्न 9.
सन् 1857 ई० के विद्रोह को सैनिक विद्रोह भी कहते हैं, वर्णन करें।
उत्तर :
सन् 1857 के विद्रोह को सैनिक विद्रोह भी कहा जाता है, क्योंकि विभिन्न इतिहासकारों का मानना है कि यह विद्रोह सैनिकों के द्वारा ही शुरू किया गया था। इसीलिए इस विद्रोह को सैनिक विद्रोह भी कहा जाता है। हालाँकि इस विद्रोह के अनेकों रूप माने गये है परन्तु इसका यह रूप सबसे प्रभावी माना जाता है। 1857 ई० के विद्रोह का प्रारम्भ मेरठ से माना जाता है, जिसकी शुरूआत 10 मई, 1857 ई० में हुआ। इस विद्रोह में अनेकों नेताओं ने अपनी भूमिका निभाया।

जैसे – बहादुर शाह जफर, नाना साहेब, तात्या टोपे, बेगम हजरत महल, रानी लक्ष्मीबाई, लियाकत अली, कुँअर सिंह, खान बहादुर खाँ, मौलवी अहमद उल्ला, अजीमुल्ला तथा मंगल पाण्डे आदि। इन्होंने अपने देश की आजादी के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये। ये लोग देश के अनमोल खजाने थे, जो देश के लिए नष्ट हो गये।

सर जॉन लारेन्स और सीले जैसे अंग्रेजी विद्वानों ने इस विद्रोह को ‘सैनिक विद्रोह’ कहा है. क्योंकि अंग्रेजी संनाओं में अधिकतर भारतीय सैनिक ही थे। अंग्रेजी हुकूमत सेनाओं के बीच भेद-भाव करते थे। यही भावना धीरे-धीरे आग की तरह फैलती गयी जिसके कारण बैरकपुर छावनी में नई तकनीकी से बना हुआ कारतूस आया तो सैनिकों में यह अफवाह फैल गयी कि कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी मिलाया गया है। अत:, जो भारतीय सैनिक थे, वे इस कारतूस को मुंह में लेने सं साफ मना कर दिये क्योंकि उनके धर्म पर इसका प्रभाव पड़ता। उन भारतीय सैनिकों में एक मंगल पाण्डे था, जिसने पहली बार इस कारतूस को मुँह से काटने से साफ मना कर दिया। अंग्रेज उनको पकड़कर 8 मई, 1857 ई० को फाँसी पर लटका दिये।

यह खबर फैलते ही न केवल बैरकपुर छावनी में बल्कि समस्त उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में यह विद्रोह शुरू हो गया। पी० ई० रॉबर्द्स भी इसे विशुद्ध सैनिक विद्रोह मानते थे। वी० ए० स्मिथ ने लिखा है कि, “”यह एक शुद्ध रूप से सैनिक विद्रोह था, जो संयुक्त रूप से भारतीय सैनिकों की अनुशासनहीनता एवं अंग्रेज सैनिक अधिकारियों की मूर्खता का परिणाम था।” सुरेन्द्रनाथ सेन ने अपनी पुस्तक ‘एटीन फिफ्टी सेवन’ 1857 ई० में लिखा है, “आन्दोलन एक सैनिक विद्रोह को भौति आरम्भ हुआ, किन्तु केवल सेना तक सीमित नहीं रहा। सेना ने भी पूरी तरह विद्रोह में भाग नहीं लिया।” डॉं० आर० सी० मजुमदार ने इसे ‘सैनिक विप्लब’ बताया।

इस प्रकार हम देख पाते हैं कि ‘चर्बी वाला कारतूस की घटना ही वास्तविक रूप सैनिक विद्रोह को जन्म दिया है। इसीलिए इस विद्रोह को ‘सैनिक विद्रोह’ भी कहा जाता है।

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प्रश्न 10.
1857 ई० के विद्रोह को ‘भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम’ कहा जाता है, तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
उत्तर :
सन् 1857 ई० का विद्रोह 10 मई, 1857 ई० को मेरठ से प्रारम्भ हुआ। ऐसे तो यह विद्रोह 29 मार्च 1857 ई० को ही बैरकपुर छावनी से ही आरंभ हो गयी थी, लेकिन इस विद्रोह का सही रूप 10 मई, 1857 ई० को मेरठ से देखा गया। इस विद्रोह में अनेक नेता शामिल थे। जिनमें कुँअर सिंह, लियाकत अली, रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पाण्डेय, नाना साहेब, तात्या टोपे, बेगम हजरत महल और बहादुर शाह जफर (II) आदि महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

1857 ई० के विद्रोह को भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम भी कहा जाता है। इसके कई कारण हैं। जैसे, इस विद्रोह में अधिकांशत: भारतीयों ने ही भाग लिया था, जिनमें निम्न वर्ग, मध्य वर्ग और उच्च वर्ग के साथ-साथ कई क्षत्रों के जमीन्दार और ठेकेदार भी शामिल थे। सभी लोगों ने मिलकर अंग्रेजों का विरोध किये ताकि हमारा देश स्वाधीन हो सके। इतना ही नहीं इस विद्रोह की आग इतनी तीव्व गति से फैल गयी मानो आग में किसी ने घी डाल दिया हो।

अर्थात् भारतवासियों में भारत को स्वाधीन कराने की भावना तीव्र हो गयी। यह विद्रोह लोगों में अपनी मातृभूमि के प्रति भक्ति की भावना भर दिया था, जिसके कारण समस्त भारतवासी अपने देश के प्रति अपने प्राण तक न्यौछावर करने के लिए तत्पर हो उठे। इसीलिए 1857 ई० के विद्रोह को भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम भी माना जाता है, जिसने भारत के अधिकांश भाग को प्रभावित किया। विभिन्न विद्वानों ने भी 1857 ई० के विद्रोह को ‘भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम’ माना है, जिनमें सर्वपथम नाम ‘विनायक दामादर सावरकर’ का था।

इसके अतिरिक्त अन्य और भी विद्वान थे जिनके अनुसार यह विद्रोह भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था। जिनमें पट्टाभि सीतारमैया, अशोक मेहता तथा बैन्जामिन डिजरेली आदि थे। जिन विद्वानों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम माना है, उन्होंने अपने मत के समर्थन में तर्क दिया है कि- “इस संग्राम में हिन्दू और मुसलमानों ने कंधे से कधा मिलाकर समान रूप से भाग लिया और इन्हें जनसाधारण की सहानुभूति प्राप्त थी। अत: इसे केवल सैनिक विद्रोह या सामन्तवादी प्रतिक्रिया अथवा मुस्लिम षड्यंत्र नहीं कहा जा सकता।’

उपर्युक्त विवरणों से देखा जाता हैं कि 1857 ई० का विद्रोह न केवल सैनिक विद्रोह था बल्कि यह विद्रोह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी था जिसमें पहली बार भारत के समस्त जाति, धर्म तथा कट्टर थी आदि लोगों ने भाग लिया।

प्रश्न 11.
1857 ई० के विद्रोह में शामिल प्रमुख नेताओं की भूमिका का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
सन् 1857 ई० का विद्रोह एक प्रकार से देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम था जिसमें अपने देश को अंग्रेजी सरकार के गुलामी से बचाने के लिए प्रत्येक धर्म एवं जाति के लोगों ने विभिन्न नेताओं के नेतृत्व में विद्रोह किया। इन विभिन्न नेताओं में दिल्ली के अन्तिम मुगल समाट बहादुरशाह जफर द्वितीय महत्वपूर्ण थे। उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी क्योंकि विद्रोह का सारा बागडोर इनको ही सौंपा गया था। अन्तिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर ने 12 मई, 1857 से दिल्ली में इस विद्रोह की शुरुआत किया था तथा अंग्रेजों का विरोध किया।

इसके बाद विद्रोह का सूत्रपात कानपुर में नाना साहब एवं तात्या टोपे ने संभाला। उन्होंने अपनी वीरता का परिचय देने हुए, सितम्बर, 1857 ई० तक कानपुर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करते रहे।
झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के साथ वीरतापूर्वक विद्रोह करती रही तथा महिला होने के बावजूद वह अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दी।

बिहार के जगदीशपुर में कुँवर सिंह ने इस विद्रोह का सूत्रपात किया। अगस्त, 1857 ई० में उन्होंने बिहार में इस विद्रोह की शुरुआत किया तथा अंग्रेजों के रातों की नींद तक उड़ा दिया।

इसके अतिरिक्त, लखनऊ से बेगम हजरत महल, इलाहाबाद से लियाकत अली, बरेली से खान बहादुर खां, फैजाबाद से मौलवी अहमद उल्ला और फतेहपुर से अजीमुल्ला आदि ने भी इस विद्रोह का सूत्रपात किये तथा अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये। उपर्युक्त विवरणों से देखा जाता है कि सन् 1857 ई० का विद्रोह अलग-अलग क्षेत्रों मे भिन्न-भिन्न नेताओं के नेतृत्व में हुआ और सभी नेताओं ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया।

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प्रश्न 12.
1857 ई० की क्रान्ति के परिणामों को उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
1857 ई० की क्रान्ति के निम्नलिखित परिणाम हुए :
i. इस विद्रोह के बाद भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए, इस्ट इण्डिया के कम्पनी के शासन को समाप्त कर इंग्लैण्ड के महारानी अर्थात् इंग्लैण्ड (ब्रिटिश) ताज के हवाले हो गया।
ii. इस विद्रोह के बाद सैन्य व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए। सेना में ब्राह्मण, क्षेत्रीय एवं मुसलमानों की भर्ती पर रोक लगा दी गई और जाति के आधार पर सैनिकों की भर्ती होने लगी। इस प्रकार भारतीय सेना की संख्या कम करके उसे जाति-वादी सेना बना दिया गया।
iii. इस विद्रोह के बाद महारानी का घोषणा-पत्र लागू हुआ, जिसमें भारतीय राजाओं को आश्वासन दिया गया कि उनके आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इस घोषणा-पत्र के द्वारा भारतीयों के योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई।
iv. यह क्रान्ति भले ही असफल रही, किन्तु अंग्रेजी शासन के नींव को हिलाने में सफल रहीं, इस भय एवं कमजोरी के कारण अंग्रेज ऐशिया के अन्य देशों, जैसे – चीन, जापान आदि पर अपना साम्राज्य स्थापित नहीं कर सके।

इस प्रकार यह क्रान्ति भले ही असफल रही किन्तु अंग्रेजों को सीख दे गयी, जिसके कारण अंग्रेज भारत के शासन व्यवस्था में सुधार करने के लिए बाध्य हुए और भारतीय भी अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ने-मरने को तैयार हो गए।

प्रश्न 13.
सन् 1857 का विद्रोह को क्या सैनिक विद्रोह कहा जा सकता है ?
उत्तर :
सन् 1857 का विद्रोह सैनिक विद्रोह नहीं था। ऐसा इसलिए कहा जाता है कि इस विद्रोह में केवल भारतीय सैनिक भाग नहीं लिये थे बल्कि इस विद्रोह में भारत के उत्तरी अंचल के समस्त निम्नवर्गों ने भाग लिये थे। इसीलिए यह विद्रोह केवल सैनिक विद्रोह ही नहीं था बल्कि भारतीय निम्नवर्गों का विद्रोह था।

इस विद्रोह में जिन नेताओं ने प्रमुख भूमिका पालन किया उनमें लक्ष्मीबाई, नाना साहब एवं तात्या टोपे थे। जिन्होने निम्न जाति एवं महिलाओं को अपना आधार बनाये थे।

डॉ॰ ताराचन्द के अनुसार भी यह विद्रोह सैनिक विद्रोह न होकर निम्नवर्गो द्वारा अपनी खोई हुई सत्ता को पुन: प्राप्त करने का प्रयास था जो अंग्रेजी प्रशासन से मुक्ति पाना चाहता था। क्योंकि अंग्रेज इन निम्नवर्गों को कुचलने का प्रयास किये थे तथा उन्हें अपना गुलाम भी बनाना चाहते थे।
अतः हम कह सकते हैं कि 1857 का विद्रोह-सैनिक विद्रोह न होकर निम्नवर्गो द्वारा चलाया गया विद्रोह था।

प्रश्न 14.
1857 ई० के विद्रोह के राष्ट्रीय चरित्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
1857 ई० के विद्रोह के राष्ट्रीय चरित्र का सुन्दर एवं मार्मिक वर्णन किया गया है क्योंक पूर्णरूप से यह विद्रोह देशभक्ति, देशप्रेम एवं राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत है। इस विद्रोह की शुरूआत मेरठ के एक पैदल टुकडी 20 N.I. ने किया था, जो पूर्णरूप से देशप्रेम एवं देशभक्ति पर आधारित था। इतना ही नहीं, सैनिको की देशभक्ति एवं राष्ट्रीय प्रेम का उदाहरण बेरकपुर छावनी के भारतीय सिपाही मंगल पाण्डेय द्वारा देखा गया, जो अंग्रेजों से वीरता पूर्वक लड़ते हुए मारे गये (फाँसी द्वारा)।

इसी प्रकार के कई और वीरतापूर्ण दृश्य भी देखने को मिलते हैं। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई जो एक महिला थी, अपन देश की रक्षा के लिए अंग्रेजों से वीरतापूर्वक लड़ते हुए मारी गयी। इनमें कुट-कुट कर देशभक्ति एवं राष्ट्रीय प्रेम की भावना व्याप्त थी।

इस प्रकार हम देखते हैं कि सन् 1857 का विद्रोह भारतवासियों के भीतर देशग्रेम एवं राष्ट्रीय प्रेम की भावना को जागृत करता हैं तथा इस विद्रोह के नेताओं में कुट-कुट कर राष्ट्रीय चरित्र की भावना भरी थी, जो भारतीय स्वंतत्रता संग्राम के रूप में दिखायी पड़ी।

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प्रश्न 15.
विक्टोरिया की घोषणा पत्र के प्रमुख बातों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
रानी की घोषणा पत्र- 1858 ई० का ऐतिहासिक महत्व क्या था ?
उत्तर :
महारानी विक्टोरिया का घोषण्णापत्र : 1857 ई० की क्रान्ति के बाद भारत के शासन व्यवस्था में भारी परिवर्तन हुआ, तत्कालीन गर्वनर जनरल लार्ड कैनिंग ने नवम्बर सन् 1858 ई० को इलाहाबाद में अंग्रेजी दरबार का आयोजन किया, और उसी आयोजन मे इग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया के घोषणा पत्र को पढ़कर सुनाया, जिसे विक्टोरिया की घोषणापत्र कहा जाता है। इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित थी-

  1. अब से भारत का शासन इंग्लैण्ड के ताज (राजा) के अधीन होगा और उसका प्रतिनिधित्व करने वाला भारत का प्रधान शासक वायसराय कहलायेगा।
  2. भारतीय राजाओं के साथ की गई संधियों को ईमानदारी के साथ लागू किया जायेगा और उन्हें अपने उत्तराधिकारी के लिए बच्चो को गोद लेने का अधिकार दिया जायेगा।
  3. अय कोई भी भारतीय देशी राज्यों को अंग्रेजी राज्य में नहीं मिलाया जायेगा।
  4. क्रान्ति के सभी अपराधियों को क्षमा-दान दे दिया जायेगा।
  5. ब्रिटिश सरकार भारतीयों के सामाजिक और धार्मिक कार्यों में किसी प्रकार की दखलअंदाजी नहीं करेगी।
  6. सभी भारतीयों को योग्यता के आधार पर बिना-किसी भेद-भाव के सरकारी नौकरी पाने का अधिकार होगा।

इसी घोषणा के बाद भारत की शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार एवं परिवर्तन हुआ। 1861 ई० में इसी घोषणा पत्र के आधार पर भारतीय जन सेवा कानून बनाया गया।

प्रश्न 16.
अवनीन्द्रनाथ द्वारा चित्रित की गई भारत माता का चित्र किस प्रकार से भारतीयों के अन्दर राष्ट्रीयता एवं देशप्रेम की भावना को विकास करने में सहायक सिद्ध हुआ।
उत्तर :
भारत माता का चित्र : भारत माता का चित्र 1905 ई० में अवनीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा बनाया गया था। इस चित्र ने एक प्रतीक के रुप में देशवासियों के मन में उत्साह, साहस, राष्ट्रीयता एवं देशप्रेम की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाई।

1905 ई० में अवनीन्द्र नाथ टैगोर ने बंग-भंग के विरोध में उत्पन्न हुए स्वदेशी एवं बहिष्कार आन्दोलन के समय देशवासियों में वीरता, उत्साह, साहस, देशप्रेम की भावना को जागृत करने के लिए और अंग्रेजों की गुलामी से देश को आज़ादी दिलाने के लिए एक प्रतीक के रूप में भारत माता (वंग माता) का चित्र एक सुन्दर सन्यासी युवती के रूप में बनाया था, जिसके दंवी लक्ष्मी के समान चार भुजाए थी, जिसके एक हाथ में तलवार, दूसरे हाथ में त्रिशूल, तीसरे हाथ में निरंगा और चौथे हाथ में माला लिये हुए और उनके बगल में शेर का चित्र दर्शाया गया था।

इस प्रकार माँ भारती का यह चित्र एक दंवी के रूप में अपने संतानो को सभी प्रकार का सुख देने का वरदान देते हुए, दिखाई देती है यह चित्र देखते ही दंशवासी अपने सभी भेद-भाव को भूलकर एक-जूट होकर आन्दोलन के लिए मचल कर सक्रिय हो उठते थे। यही चित्र आगंग चलकर देश के स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए शक्ति, साहस, संघर्ष और विजय का प्रतीक बन गई, भारत माता की जयकार लगाते हुए देशवासी स्वतंत्रता आन्दोलन में अपनी आहूति देने के लिए तत्पर होने लगे।

सर्वप्रथम बनारस में भारत माता की मन्दिर स्थापित किया गया, जिसका उद्घाटन साबरमती के संत महात्मा गाँधी ने किया था, इस ग्रकार भारत-माता का चित्र देशवासियों के साहस, शक्ति, संघर्ष, स्वतंत्रता के शक्ति का स्रोत बन कर उन्हें देश-प्रेम के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता रहा।

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प्रश्न 17.
गोरा उपन्यास किस प्रकार से देशवासियों में राष्ट्रीय भावना के विकास में सहायक सिद्ध हुआ?
उन्तर :
गोरा उपन्यास और राष्ट्रीयता की भावना का विकास :- विश्व कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा 1909 ई० में लिखित उपन्यास गोरा बंगाल सहित पूरे देश के युषाओं में देश के लिए कुछ कर गुजरने, /मर – मिटने जैसी राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गांरा उपन्यास में एक गोरे रंग का व्यक्ति जो विदेशी/अंग्रेजों के प्रतीक के रूप मे चित्रित किया गया है। वह गोरा व्यक्ति बिदेशी अंग्रेज होने के बावजूद भी हिन्दू रीति-रिवाज को मानते हुए, देवी-देवता की पूजा पाठ करता है। भारत की आजादी के लिए दुआ माँगता है। इसके माध्यम से टैगोर ने देशवासियों को यह संदेश देने का प्रयास किया था, कि मनुष्य को अपने पूर्व जीवन की क्रियाओं को छोड़कर हिन्दू सभ्यता के वर्तमान सभ्यता और सस्कृति को अपनाना चाहिए।

हमें अपने समाज के कुरीतियों, मतभेदों को त्याग कर, नये राष्ट्रीय, सामाजिक, आर्थिक, सास्कृतिक धार्मिक विचारों को अपनाना चाहिए, जब सात-समुद्र पार का एक विदेशी अपनी सभ्यता-संस्कृति को त्यागकर, भारतीय ब्ननकर समाज और देश के लिए मरमिटने का प्रयास करता है तो हम अपने मिट्टी से जुड़े हुए, भारतीय क्यों नहीं कर सकते? इसी संदेश ने गुलामी की मानसिकता में जी रहे, लोगों को क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने के लिए बाध्य किया। हम पुराने कमजोरियों, बुराईयों को त्यागकर नये प्रगतिशील विचारों को अपनाकर आजादी की लड़ाई के लिए संघर्ष करने लगे, इस प्रकार गोरा उपन्यास ने देशवासियों को राष्ट्रीयता एवं देशप्रेम का पाठ-पढ़ाया, जिसकी सबक ने हमें अन्ततः आजादी दिलायी।

प्रश्न 18.
‘वर्तमान भारत’ में स्वामी विवेकानन्द ने किस प्रकार तत्कालीन भारत का वर्णन किया है ?
उत्तर :
भारतीय राष्ट्रीयता के विकास में ‘वर्तमान भारत’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ‘वर्तमान भारत’ में स्वामी विवेकानन्द ने तत्कालीन भारत का वर्णन किया है। विवेकानन्द जी ने ‘वर्तमान भारत’ नामक कृति की रचना सन्1905 में किये। आरम्भ में यह एक प्रकार का निबन्ध था, जिसको सन् 1899 में उद्वोधन प्रकाशन ने ‘रामकृष्ण मठ’ एव ‘रामकृष्ण मिशन’ के मुखपत्र के रूप मे प्रकाशित किया। बाद में स्वामी विवेकानन्द जी ने इस निबंध को पुस्तक का रूप दिया।

इस पुस्तक में स्वामी विवेकानन्द जी ने तत्कालीन भारत के निम्न जाति एवं गरीबों की दयनीय एवं मार्मिक जींवन का वर्णन किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने जातिवाद पर अपने कठोर विचार व्यक्त किये हैं कि इस देश की जातिवाद रूपी डिम्बक ने इसे खोखला बना दिया है। इसीलिए तत्कालीन भारत के लोगों से वे जातिवाद को समाप्त कर भाईचारें को अपनाने का अपील किये हैं।

अतः देखा जाय तो स्वामी विवेकानन्द जी ने अपनी रचना ‘वर्तमान भारत’ में तत्कालीन भारत का इस रूप में वर्णन किया। जिसमें निम्न जातियों की विभिन्न समस्या एवं जातिवाद को दर्शाया गया है।

प्रश्न 19.
‘समितियों का युग’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
भारत में 18 वीं शताब्दी के अन्त से लेकर 19 वीं शताब्दी के प्रारम्भ तक कई राजनैतिक समितियों या सभा अथवा संगठन का गठन किया गया जो भारतीय राष्ट्रवाद (Indian Nationalism) के जन्मदाता माने जाते थे। इन समितियों ने ही भारत में राष्ट्रवाद को जन्म दिया अर्थात् बढ़ावा दिया जिसके माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का बोजारोपण किया गया। इन समितियों ने ही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमे ‘बगभाषा प्रकाशिका सभा’ तथा ‘बगाल जमीदार सभा’ या ‘लैण्ड होल्डर्स एसोसिएशन’ आदि महत्वपूर्ण थे। इसीलिए डॉ॰ अनिल सेन ने 19 वीं सदी को समितियों का युग कहा है।

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प्रश्न 20.
बंगाल जमींदार सभा किस प्रकार का संस्थान था, इसने किस प्रकार राष्प्रीयता को बढ़ावा दिया ?
उत्तर :
‘बंगाल जमींदार सभा’ या ‘लैण्ड होल्डर्स एसोसिएशन’ : ‘बंगाल जमींदार सभा’ या ‘लैण्ड होल्डर्स एसासिएशन’ भारत में समितियों के युग की दूसरी संस्था थी जिसका गठन सन् 1838 ई० में द्वारकानाथ टैगोर ने कलकत्ता में किया। इतना ही नहीं, इस संस्था के गठन में बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा के जमींदार वर्ग की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस संस्था के प्रमुख भारतीय सचिव प्रसन्न कुमार ठाकुर और द्वारकानाथ ठाकुर आदि थे। अंग्रेजी सचिव या नेता में जॉन क्रॉफर्ड, जे० ए० प्रिसेप, विलियम थियोवेल्ड, थियोडर डिकेस तथा विलियम काब्बी आदि थे। ‘बंगाल जमींदार सभा’ का प्रमुख उद्देश्य जमोंदारों के हितों की रक्षा करना था। इतना ही नहीं, यह संस्था जमींदार वर्ग को बंगाल में बढ़ावा भी देती थी। यह संस्था आधुनिक भारत की ‘प्रथम संवैधानिक राजनीतिक संस्था’ थी।

उपर्युक्त बिवरणों से पाते हैं कि ‘बंग भाषा प्रकाशिका सभा’ एवं ‘बंगाल जमींदार सभा’ दोनों ही भारतीय राष्ट्रवाद को विस्तृत करने में तत्पर संस्थाएँ थी जिसका उद्देश्य भारतीय राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना था।

प्रश्न 21.
गगनेन्द्रनाथ टैगोर द्वारा अंकित कार्टुन चित्र में किस प्रकार औपनिवेशिक समाज प्रतिविंबितहुआ है ?
अथवा
गगनेन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) की चित्रकारी में औपनिवेशिक समाज का व्यंग्यपूर्ण चित्रण है, कथन को स्पष्ट कीजिए।
अशवा
महान चित्रकार एवं कार्टुनिस्ट गगनेन्द्रनाथ टैगोर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
गगनेन्द्रनाथ टैगोर जी एक महान चित्रकार एवं कार्टुनिस्ट थे। इनका जन्म 18 सितम्बर, 1867 ई० को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसडेन्सी के कलकत्ता में हुआ था। ये रवीन्द्रनाथ टैगोर के भतीजे तथा अवनीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे। इनके पिता का नाम गगनन्द्रनाथ टैगोर तथा दादा का नाम गिरीन्द्रनाथ टैगोर था। ये एक महान चित्रकार थे। इनकी चित्र दूसरों से हटकर हाती थी तथा प्रत्येक चित्रों में औपनिवेशिक समाज का व्यग्य छिपा होता था। उन्होंने उस समय के जाने-माने चित्रकार हरिनारायण बंदोपाध्याय से प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

गगनेन्द्रनाथ टैंगोर ने चित्रकला एवं कार्टुन से संबंधित अनेको कार्य किये। जैसे- सन् 1917 में ‘बाजरा’ एवं ‘अद्धुत लोक’ तथा सन 1921 में ‘नव हुलोड़े’ आदि थे जो औपनिवेशिक समाज के व्यंग्यपूर्ण चित्रण को दर्शाती थी। इनके चित्रों में विभिन्न प्रकार के व्यंग्य छिपे होते थे। जैसे – जाति प्रथा, पाखण्ड, हिन्दू पुजारी तथा पश्चिमी शिक्षा का घोर विरोध भी छिपा रहता था। इतना हो नहीं, उस समय के प्रसिद्ध नाटककार ज्योतिन्द्रनाथ टैगोर के नाटक ‘एमन कर्म आर करबो ना’ में गगनेन्द्रनाथ टैगोर के हास्यास्पद चित्रों का समावेश मिलता है। उनके नाटक के प्रमुख पात्र ‘अलिफ बाबू’ तथा ‘द फाल्स बाबू’ इत्यादि गगनेन्द्रनाथ टैगोर के हाथों की उपज हैं।

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प्रश्न 22.
भारत सभा की स्थापना के उद्देश्य एवं इसके कार्य क्या थे ?
उत्तर :
भारत सभा (Indian Association) : भारत में गुप्त समितियों के रूप में ‘भारत सभा’ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस संस्था की स्थापना सुरेन्द्रनाथ बनर्जी तथा आनन्द मोहन बोस द्वारा सन् 1876 में कलकत्ता के इल्बर्ट हॉल (Elbert Hall) में की गई। ‘भारत सभा’ के संस्थापक सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनन्द मोहन बोस इसके सचिव माने जाते हैं। बाद में इसके अध्यक्ष कलकत्ता के प्रमुख बैरिस्टर मनमोहन घोष चुने गए। इस संस्था के अन्य संस्थापकों में शिवनाथ शाखी तथा द्वारकानाथ गंगोपाध्याय भी थे।

‘भारत सभा’ के निम्नलिखित उद्देश्य थे, जिनमें

  1. सम्पूर्ण देश में लोकमत का निर्माण करना,
  2. हिन्दूओं और मुसलमानों के बीच एकता एवं मैत्री को स्थापित करना,
  3. सामूहिक आन्दोलनों में किसानों का सहयोग प्राप्त करना, तथा
  4. विभिन्न जातियों में एकता के सूत्र को संचार करना एवं उनके सहयोग को प्राप्त करना इत्यादि।

इस संस्था ने अनेकों आलोलन चलाये जिनमें से कुछ निम्न प्रकार के थे –

1. सिविल सर्विस परीक्षा विरोधी आन्दोलन : ‘भारत सभा’ के संस्थापक सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने सिविल सर्विस परीक्षा को भारत में आयोजित किये जाने के उद्देश्य से सिविल सर्विस परीक्षा विरोधी आन्दोलन चलाए। जब लार्ड सेल्वरी ने भागतीयों को ‘इण्डयन सिविल सर्विस’ की परीक्षा से वंचित करने के उद्देश्य से परीक्षा में बैठने की उम्र 21 से घटाकर 19 वर्ष कर दिया, तो सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने उम्र 19 से बढ़ाकर 21 करने के लिए आन्दोलन चलाया।

2. वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट विरोधी आन्दोलन : भारत सभा के संस्थापक सुरेन्द्रनाथ बनर्जी एवं उनके साथियों ने मिलकर वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट विरोधी आन्दोलन चलाया। जब लार्ड लिटन ने सन् 1878 में यह एक्ट लागू कर भारतीय समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया, तब इसके विरोध मे ‘भारत सभा’ ने आन्दोलन चलाया।

प्रश्न 23.
गोरा एवं आनन्दमठ उपन्यासों ने राष्ट्रीयता को जगाने में किस प्रकार सहायक हुआ ?
उत्तर :
‘गोरा’ (Gora) उपन्यास : ‘गोरा’ उपन्यास एक आकर्षक प्रेम-कथा है जिसमें ‘गोरा’ एक प्रमुख नायक के तौर पर है और इसी के नाम पर उपन्यास को नाम ‘गोरा’ शीर्षक के रूप में रखा गया है। ‘गोरा'(Gora) का साहित्यिक अर्थ है ‘गौर वर्ण या जाति’ का व्यक्ति । इस उपन्यास को रचना महान विश्च कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने सन्1 909 में किया था। यह उपन्यास उनके द्वारा रचित बारह (12) उपन्यासों में से एक है। यह एक काफी जटिल उपन्यास माना गया है।

रवोद्र्रनाथ टैगोर जी मूलतः एक कवि थे। उनकी बहुचर्चित काव्यमयी रचना ‘गीतांजलि’ पर उन्हें 1913 ई० में विश्च का सर्वाच्च नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने अपनी इस रचना में सामाजिक एवं राजनैतिक रूप, सामाजिक जीवन एवं बुराइयाँ, बगाली संस्कृति, राष्ट्रीयता की भावना एवं मित्रता आदि को दर्शाया हैं।

रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने अपने उपन्यास ‘गोरा’ में भारतवासियों के प्रति राष्ट्रवाद की भावना को दर्शाया है, जो स्वतंत्रता के मार्ग को दिखाती है। उस समय बंगाल लार्ड कर्जन के बंग-भंग क्रिया की काली छाया से होकर गुजर रहा था। ऐसे समय मेंगोर जी की इस उपन्यास ने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार किया, जा उनके लिए अनमोल था।

‘आनन्दमठ’ (Anandmath) : भारतीय साहित्यिक कृतियों में सर्वप्रमुख स्थान ‘आनन्दमठ’ कृति की है, जिसने भारत में राष्ट्रवाद या राष्ट्रीयता के विकास को जन्म दिया अर्थात राष्ट्र के प्रति हमेशा अग्रसर रहा। इसकी रचना बंकिम चन्द्र बटर्जी ने 1882 ई० में किया। इस कृति की रचना बंगला भाषा में किया गया था। यह एक उपन्यास है, जिसकी पृष्ठभृनि की शुरु आत 1771 ई० के बंगाल के अकाल के समय से होती है। यह अकाल वास्तव में सन् 1770 में आया था, परन्तु इसका संचयन सन् 1771 में किया गया।

इस उपन्यास के मुख्य पात्रों में ‘महेन्द्र’ और ‘कल्याणी’ हैं। इतना ही नही, 18 वीं शताब्दी के संन्यासी विद्रोह का वर्णन भी इस उपन्यास में किया गया है तथा भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वन्देमातरम’ (Vande Matramj भी सर्वप्रथम इस उपन्यास में ही प्रकाशित किया गया था।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण : विशेषताएँ तथा विश्लेषण

प्रश्न 24.
भारतीय साहित्यिक कृतियों के रूप में ‘आनन्दमठ’ तथा ‘वर्तमान भारत’ के द्वारा राष्ट्रीयता या राप्ट्रवाद का विकास या संचार किस प्रकार हुआ?
या, ‘आनन्दमठ’ और ‘वर्तमान भारत’ पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
18 वों शतबब्दी के अंत में भारतीय साहित्यिक कृतियों में कई परिवर्तन आये। अनेक कृतियों की रचना किया गया जिसका एक ही मकसद था, देश के प्रति देश-प्रेम को जागृत करना, राष्ट्रवाद को जन्म देना तथा उनमें विकास. लाना, ंश्रा्वस्यों में देश के प्रति देशभक्ति की भावना को जन्म देना तथा अपने देश को अंग्रेजों के बंधनों से मुक्त कराना।

हाँलाकि ये सभी कार्य 18 वी शताब्दी के मध्य तक अनेकों पत्र-पत्रिकाओं ने किया परन्तु देश के प्रति ऐसी भावना को जागृत नहीं कर पाये, जितना ये साहित्यिक कृतियाँ कर पाये। इन पत्र-पत्रिकाओं में – अमृत बाजार पत्रिका, इण्डिया मिरर, सोमप्रकाश, संवाद कौमुदी तथा संजीवनी आदि प्रमुख थे।

‘आनन्दमठ’ (Anandmath) : भारतीय साहित्यिक कृतियों में सर्वपमुख स्थान ‘आनन्दमठ’ कृति की है, जिसने भारत में राष्ट्रवाद या राष्ट्रीयता के विकास को जन्म दिया अर्थात राष्ट्र के प्रति हमेशा अग्रसर रहा। इसकी रचना बंकिम चन्द्र चटुर्जी या चट्टॉपाध्याय ने 1882 ई० में किये। इस कृति की रचना बंगला भाषा में किया गया था। यह एक उपन्यास है, जिसकी पृष्ठभूमि की शुरुआत 1771 ई० के बंगाल के अकाल के समय से होती है।

यह अकाल वास्तव में सन् 1770 ई० में आया था, परन्तु इसका संचयन सन् 1771 ई० में किया गया। इस उपन्यास के मुख्य पात्रों में ‘महेन्द्र’ और ‘कल्याणी’ हैं। इतना ही नहीं, 18 वीं शताब्दी के संन्यासी विद्रोह का वर्णन भी इस उपन्यास में किया गया है तथा भारत का राष्ट्रीय गोत ‘वन्देमातरम’ (Vande Matram) भी सर्वप्रथम इस उपन्यास में ही प्रकाशित किया गया था।

‘वर्तमान भारत’ (Bartaman Bharat) : भारतीय राष्ट्रीयता के विकास मे ‘वर्तमान भारत’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 19 त्वीं सदी में भारतीय लोगों को जागृत करने तथा उनमें देश-प्रेम और देश-भक्ति को जगाने में ‘वर्तमान भारत ‘

ने अहम भूमिका निभाई। इस अनमोल कृति की रचना ‘स्वामी विवेकानन्द जी’ ने सन् 1905 ई० में किया। आरम्भ में यह एक प्रकार का निबंध था, जिसको सन् 1899 ई० में उद्वोधन प्रकाशन ने रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन के मुख्यपत्र के रूप में प्रकाशित किया। बाद में स्वामी विवेकानन्द ने इस निबंध को एक पुस्तक का रूप दिया। इस पुस्तक का उद्देश्य भारत में राष्ट्रीयता का संचार यानि विकास करना तथा देशवासियों के भीतर देशप्रेम और देश-भक्ति की भावना को जागृत करना था। उपर्युक्त विवरणों से पाते हैं कि भारतीय राष्ट्रीयता के संचार यानि विकास के क्षेत्र में ‘आनन्दमठ’ तथा ‘वर्तमान भारत’ की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

प्रश्न 25.
गगनेन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) की चित्रकारी में औपनिवेशिक समाज का व्यंग्यपूर्ण चित्रण है, कथन को स्पष्ट कीजिए।
या
महान चित्रकार एवं कार्टुनिस्ट गगनेन्द्रनाथ टैगोर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर :
गगनेन्द्रनाथ टैगोर जी एक महान चित्रकार एवं कार्टुनिस्ट थे। इनका जन्म 18 सितम्बर, 1867 ई० को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसिडेन्सी के कलकत्ता में हुआ था। ये रवीद्द्रनाथ टैगोर के भतीजे तथा अवनीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे। इनके पिता का नाम गुनेन्द्रनाथ टैगोर तथा दादा का नाम गिरीन्द्रनाथ टैगोर था। ये एक महान चित्रकार थे। इनकी चित्र दूसरों से हटकर होती थी तथा प्रत्येक चित्रों में औपनिवेशिक समाज का व्यंग्य छिपा होता था। उन्होंने उस समय के जाने-माने जलचित्रकार हरिनाराद बबंद्योपाध्याय से प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

उन्होंने 1907 ई० में अपने छोटे भाई के साथ मिलकर ‘Indian Society of Oriental Art’ की स्थापना किये। उन्होंने सन् 1906 से लेकर 1910 ई० के बीच जापान के प्रसिद्ध चित्रकार ‘याकोहामा तैकान’ से यूरोपियन रंग एवं जापानी ब्रश तकनीकी का मिश्रण करना भी सीखा। इसीलिए सर्वप्रथम गगनेन्द्रनाथ टैगोर को भारत में चित्रकला के क्षेत्र मे ब्रश के प्रयोग का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने अपनी चित्रकलाओं में भारतीय तकनीकी का एकदम प्रयोग नहीं किया। ठाकुरबाड़ी में 1915 से लेकर 1919 ई० के बीच उन्होंने विचित्रा क्लब प्रतिस्थापित किया, जहाँ कई नामी चित्रकार आते थे।

गगनेन्द्रनाथ टैगोर ने चित्रकला एवं कार्टुन संबंधित अनेको कार्य किये। जैसे- सन् 1917 ई० मे ‘बाजरा’, 1917 में ही ‘अद्धुत लोक’ तथा सन् 1921 ई० मे ‘नव हुलोड़े’ आदि थे जो औपनिवेशिक समाज का व्यग्यपूर्ण चित्रण को दर्शाती थी। इनके चित्रों में विभिन्न प्रकार के व्यग्य छिपे होते थे। जैसे – जाति प्रथा, पाखण्ड, हिन्दू पुजारी तथा पथ्चिमी शिक्षा का घोर विरोध भी छिपा रहता था। इतना ही नहीं, उस समय के प्रसिद्ध नाटककार ज्योतिन्द्रनाथ टैगोर के नाटक ‘एमन कर्म आर करबो ना’ में गगनेन्द्रनाथ टैगोर के हास्यास्पद चित्रों का समावेश मिलता है। उनके नाटक के प्रमुख पात्र ‘अलिफ बाबू’ तथा ‘द फाल्स बाबू’ इत्यादि गगनेन्द्रनाथ टैगोर के हाथों की उपज हैं।

गगनेन्द्रनाथ टैगोर इसके अतिरिक्त और भी विभिन्न कार्य हैं, जिनमें –

1. ‘सर्वागेर अश्रुपात’- इसमें उन्होंने एक भद्रलाक को पथ्चिमी सभ्यता की नकल करते हुए उसका उपहास किया है।
2. ‘A Noble Man’- इसमें वर्धमान के महाराजा अमीर बंगाली समाज के प्रतीक हैं। मोटे-तगड़े महाराजा एक हास्यात्मक काल्पनिक चरित्र है। इसी तरह और भी कई कार्य हैं, जिनमें उन्होंने व्यंग्यात्मक चित्रों के माध्यम से औपनिवेशिक समाज की आलोचना किये हैं।

उपर्युक्त उल्लेखों से हम पाते हैं कि गगनेन्द्रनाथ टैगोर एक महान चित्रकार एवं कार्टुनिस्ट थे। इनके प्रत्येक चित्र एवं कार्टुन में औपनिवेशिक समाज की व्यंग्यपूर्ण आलोचना पाया जाता है।

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प्रश्न 26.
इल्बर्ट बिल विवाद से क्या समझते हैं ?
या
इल्बर्ट बिल विवाद के बारे में संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
इल्बर्ट बिल सन् 1883 ई० में पी०सी० इल्बर्ट ने पेश किया था। यह बिल लाईड रिपन के समय में पारित किया गया था। सर पी०सी० इल्वर्ट लार्ड रिपन की परिषद के विधि सदस्य थे। इस विधेयक में भारतीय न्यायाधीशों के प्रति कहा गया था कि भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपियन अपराधियों के मुकदमें सुनने का अधिकार दिया जाय। परन्तु ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं यूरोपियन रक्षा संघ ने इस बिल का भारत एवं इंग्लैण्ड में विरोध किया जिससे यह बिल एक विवाद का विषय बन गया। इसीलिए इस बिल को ‘इल्बर्ट बिल विवाद’ (libert Bill Controvecy) कहते हैं।

इस बिल के विरोध में यूरोपियन संघों ने जो आन्दोलन चलाया उसका प्रभाव भारत की राजनीति पर गहरा पड़ा, जो निम्न रूप में उल्लेखित है –
1. यूरोपियनों ने इल्बर्ट बिल के विरोध में एक होकर आन्दोलन चलाया, इसने भारतीयो की आँखें खोलने का काम किया।
2. भारतीयों को समझ में आ गया कि उन्हें सरकार से कुछ भी पाने के लिए एक होकर संघर्ष करना पड़ेगा।

उपर्युक्त विवरणों से पाते हैं कि इल्बर्ट बिल विवाद राष्ट्रीय नहीं बल्कि अन्तराष्ट्रीय समस्या या विवाद था।

प्रश्न 27.
क्या आप मानते हैं कि 1857 ई० का विद्रोह मुस्लिम सत्ता की पुन: स्थापना का प्रयास था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
ऐसा माना जाता है कि सन् 1857 के विद्रोह का प्रमुख कारण भारत में मुसलमानों की सत्ता की पुन: स्थापना की अर्थात् मुस्लिम सत्ता को किस प्रकार से भारत में पूर्ण रूप में स्थापित किया जाय तथा भारत में मुस्लिम धर्म का प्रचार-प्रसार किस प्रकार से हो। इसी आधार पर मुसलमानों ने हिन्दुओं के विरूद्ध षड्यंत्र करना शुरू कर दिया।

जिसका परिणाम 1857 ई० का विद्रोह था, जिसमें मुसलमानों ने हिन्दुओं के शक्ति के बल पर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते थे। इसकी पुष्टि प्रसिद्ध इतिहासकार ‘सर जेम्स आउटरम’ ने किया। स्मिथ ने भी इसका सर्मथन किये। इस आधार पर हम देख पाते हैं कि यह विद्रोह भारतीय मुसलमानों का बड्बंत्र था। इतना ही नहीं यह मुसलमान मुगल सम्राट बहादुरशाह द्वितीय या जफर के नेतृत्व में मुस्लिम सत्ता स्थाप्ति करना चाहते थे। इस विद्रोह का नेतृत्व बाद में बेगम हजरत महल ने भी की।

परन्तु, देखा जाय तो सर जेम्स आउटरम की यह कथन अर्थहीन एवं असत्य है, क्योंकि यह कांति पूर्ण रूप से भारतीय स्वतंत्रता के लिये हुआ था, जिसमें विभिन्न नेताओं ने अपना योगदान दिये। जैसे – नाना साहब, तात्या टोपे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, कुवँर सिंह, मंगल पाण्डेल तथा मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर या द्वितीय आदि। इसीलिए यह विद्रोह मुस्लिम सत्ता की पुन: स्थापना का प्रयास न होकर भारतीय स्वतंत्रता की स्थापना का प्रयास था।

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प्रश्न 28.
‘आनन्दमठ’ का प्रसिद्ध गीत ‘वन्देमातरम्’ के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
‘आनन्दमठ’ उपन्यास की रचना बंकिम चन्द्र चटर्जी जी ने सन् 1882 में किया। इस कृति की रचना बंगला भाषा में किया गया था जिसकी पृष्ठभूमि की शुरूआत सन् 1771 के बंगाल के अकाल के समय से होती है।
बंकिम चन्द्र चटर्जी ने अपनी उपन्यास ‘आनन्दमठ’ मे ‘वन्देमातरम’ शीर्षक गीत की रचना किये थे। महत्वपूर्ण दृष्टि से इस गोत ने बंगाल विभाजन के समय न केवल बंगालियों बल्कि समस्त भारतवासियों के भीतर राष्ट्रीय प्रेम तथा देशर्ति की भावना को विस्तृत किया था।
मुख्य रूप से बंगाल प्रदेश की क्रांति के लिए यह गीत भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह गीत पूरे भारतवर्ष में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रान्ति की भावना फूँक दिया था। ऐसा लगता था मानो कि समस्त भारतवासी अंग्रेजो को कुचल डालेंगे।

ऐसा माना जाता है कि सन् 2003 में वी०वी०सी० वर्ल्ड सर्विस द्वारा आयोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार ‘वन्दमातरम्’ गीत चयनित शीर्ष के 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था। अर्थात् इस आयोजन में दुनिया भर के 7000 गीतों को रखा गया था तथा 155 देश के लोगों ने इसमें अपना मतदान किया था।
राष्ट्रीय प्रम एवं देशभक्ति के आधार पर देश के स्वतंत्रत होने के बाद इस गीत को राष्ट्रगीत का मान्यता दिया गया ।

प्रश्न 29.
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट के बारे में लिखिए।
उत्तर :
भारतवर्ष में भारतीय समाचार पत्रों ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाया जिसके कारण भारतीय समाचार पत्रों ने समस्त भारतवर्ष में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रान्ति का आह्नान शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह क्रान्ति समस्त भारतवर्ष में आग का रूप ले लिया। भारतीय समाचार पत्रों की भूमिका अंग्रेजों की समस्या बन चुकी थी ।

अंग्रेजी प्रशासन ने भारतीय समाचार पत्र पर लगाम लगाने के लिए लार्ड लिटन को नियुक्त किया । लार्ड लिटन ने ‘भारतीय भाषा समाचार पत्र अधिनियम’ (Vernacular Press Act) को सन् 1878 में पास किया जिसके तहत भारतीय समाधार पत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। समस्त भारतीय समाचार पत्रों ने इस अधिनियम (Act) का विरोध किया परन्तु ‘पायनियर अखबार’ इस अधिनियम का समर्थन किया था। बाद में चलकर नियुक्त लार्ड रिपन ने इस अधिनियम को सन् 1882 में समाप्त कर दिया जिसके तहत भारतीय समाचार पत्रों पर लगी प्रतिबंध समाप्त हो गयी और स्वतंत्र रूप से भारतीय समाचार पत्र अपना कार्य करने के लिए सक्षम हो गया।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 8 MARKS

प्रश्न 1.
1857 ई० के विद्रोह का स्वरूप या प्रकृति एवं विशेषताओं का वर्णन करें। $5+3$ (M. P. 2017)
उत्तर :
सन् 1857 के विद्रोह के स्वरूप (Nature) के सम्बन्ध में इतिहासकारों में बड़ा मतभेद रहा है। इस घटना का इतिहास लेखन किस रूप में किया जाये, यह अभी तक चर्चा का विषय बना हुआ है। पाश्चात्य विद्वानों ने इसे सिपाही विद्रोह, सामन्तवादी प्रतिक्रिया एवं मुस्लिम षड्यंत्र आदि की संजा दी है। दूसरी ओर अधिकांश भारतीय इतिहासकार इसे राष्ट्रीय आन्दोलन स्वीकार करते है जो भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ा गया। मोटे तौर पर विविध विचारधाराओ को दो पक्ष मान सकते हैं।

एक विचारधारा के समर्थकों में लारन्स, जॉन केची, राइसहोम, आउट्रम, मैलीसन, ट्रेविलियन, राबिन्सन, सीले, राबर्ट्स, स्मिथ एवं आर०सी॰ मजुमदार को रखा जा सकता है। इन लेखकों का उद्देश्य निष्पक्ष राय देना नहीं था बल्क यह सिद्ध करना था कि इस विशाल क्षेत्र पर फैले विद्रोह का मूल कारण भारत सरकार की नीतियाँ एवं प्रशासनिक कमजोरी न थी बल्कि सैनिक द्वारा प्रारम्भ किया गया यह विद्रोह था जिसका मूल कारण सैनिकों में व्याप्त असंतोष था जिसमें सामन्तों एवं मुस्लिम वर्ग ने अपने स्वार्थवश सहयोग दिया।

दूसरे पक्ष के समर्थक विद्वानों में विनायक दामोदर सावरकर, सुरेन्द्रनाथ से, शशिभूषण चौधरी, पूरनचद जोशी तथा अशोक मेहता आदि का उल्लेख किया जा सकता है। ये विद्वान 1857 ई० के विद्राह को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मानते हैं।

विभिन्न स्वरूपों के आधार पर 1857 ई० के विद्रोह को निम्नरूप जाना जा सकता है :-

सैनिक विद्रोह : सर जॉन सीले के अनुसार, यह एक पूर्णतया देश भक्तिहीन और स्वार्थ सिद्ध सैनिक विद्रोह था इतना ही नहीं, सर जॉन लॉरिन्स ने भी इस विद्रोह को सैनिक विद्रोह कहा है और इसका प्रमुख कारण ‘चर्बी वाले कारतूस’ को घटना को बताया है। जिसमें बैरकपुर छावनी में मंगल पाण्डे सहित कई भारतीय सैनिकों ने गाय एवं सुअर की चर्बी से बने कारतूस को मुँह में लेने से साफ इन्कार कर दिये थे, (यह एक विशेष प्रकार की कारतूस थी जो मुँह से काटना पड़ता था।) अतः अंग्रेजी सेना ने उनको पकड़कर फाँसी दे दिया। यह खबर आग की तरह पूरे उत्तर भारत में फैल गयी जो इस विद्रोह के शुरू होने का प्रमुख कारण है। इसीलिए इस विद्रोह को सैनिक विद्रोह कहा जाता है।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम : 1857 ई० के विद्रोह को विनायक दामोदर सावरकर, अशोक मेहता, सुरेन्द्रनाथ सेन, शशिभूषण चौधरी तथा पूरनचंद जोशी आदि जी ने भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा है । क्योंकि उनका मानना है कि देश का यह प्रथम राष्ट्रीय आन्दोलन था जिसमें समस्त धर्म, जाति, जमीन्दार एवं ठेकेदार ने भाग लिया था। प्रथम बार भारतीयों ने महसूस किया कि अब हमें अपने देश की आजादी के लिए लड़ना चाहिए। इसीलिए इन विद्वानों ने इस विद्राह को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा है।

मुस्लिम सत्ता को पुनःस्थापित करने का प्रयास : सर जेम्स आउट्रम के विचार से यह राष्ट्रीय आन्दोलन नहीं था बल्कि मुस्लिम सत्ता को पुन रस्थापित करने का एक षड्यंत्र था जिसने हिन्दुओं की कठिनाइयों का लाभ उठाया और चर्बी लगे कारतूसो ने इस घटना को द्विगुणित कर दिया। स्मिथ ने आउट्रम के मत का समर्थन करते हुए लिखा है, यह सामन्तवादी पड्यंत्र था जिसकी नींव को मेरठ की दुर्घटना (चिंनगारी) ने समय से पहले ही उखाड़ फेंका।

सामन्ती विद्रोह : डॉ॰ आर० सी० मजुमदार, सुरेन्द्रनाथ सेन, मार्क्सवादी विधारक आर० पी० दत्त और केम्ब्रिज इतिहासकार इरिक स्टोक्स के अनुसार, यह विद्रोह सामन्तों का विद्रोह था। उनके अनुसार यह उनकी अन्तिम परम्परावादी विद्रोह माना जाता था।

उपर्युक्त विवरणों से हम पाते हैं कि 1857 ई० का विद्रोह के स्वरूप में विभिन्नता पायी जाती है, जो महत्वपूर्ण तो है, साथ ही साथ यह विद्रोह एक नयी पीढ़ी का सृजनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम भी माना जाता है।

भारतीय इतिहासकारों एवं विद्वानों तथा पाश्चात्य इतिहासकारों एवं विद्वानों द्वारा दिये गये विवरणों में अभी भी मतभेद की भावना निहित है। अर्थात् 1857 ई० के विद्रोह का स्वरूप अभी भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह विद्रोह सैनिक विद्रोह था या प्रथम स्वतंत्रता सग्राम है। अगर हमलोग 1857 ई० के विद्रोह की विशेषताओं की बात करें तो इस विद्रोह के स्वरूप में ही इसकी विशेषताएँ छिपी हुई हैं।

1857 ई० का विद्रोह विशेष तौर पर एक सिपाही विद्रोह (Sepoy Munity) तथा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है जिसमें अनेको भारतीय नायकों ने अपने देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिये। इतना ही नहीं, यह विद्रोह धीरेधीरे राष्ट्रीय आन्दोलन भी बन गया था। गौर करने की बात यह है कि देश का यह पहला विद्रोह था जिसमें प्रत्येक धर्म एवं जाति के लोगों ने भाग लिया था। इस विद्रोह की ये सभी बड़ी विशेषताएँ मानी गयी हैं। इसके अतिरिक्त इस विद्रोह की अन्य भी विशेषताएँ हैं जैसे- देश का यह पहला विद्रोह था जिसने अंग्रेजों की कमर तक तोड़ दिया।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण : विशेषताएँ तथा विश्लेषण

प्रश्न 2.
1857 ई० की क्रान्ति के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं तत्कालिन कारणों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
1857 ई० की क्रान्ति के कारण : बहादुर शाह जफर द्वितीय के नेतृत्व में शुरू हुआ, 1857 ई० की क्रान्ति अंग्रेजों के विरूद्ध भारतीय द्वारा एकजुट होकर स्वतंत्रता के लिए लड़ा जाने वाले पहला विद्रोह, क्रान्ति थी, ललकार था। अतः इस विद्रोह के महत्वपूर्ण कारण निम्नलिखित है –
i. राजनीतिक कारण : 1857 ई० की क्रान्ति का राजनीतिक कारण लार्ड डलहौजी (अग्रेजों) की राज्य हड़प नीति थी, इस नीति के कारण भारतीय राजाओं में यह भय फैल गया था, कि अंग्रेज धीरे-धीरे उनके राज्यों को छीनकर अंग्रेजी राज्य में मिला देंगे, क्योंकि इससे पहले अंग्रेजों ने कई भारतीय राज्यों को अपने राज्य में मिला लिया था। सताड़ा, लाई डलहोजी की अपहरण नीति का शिकार बनने वाला पहला राज्य था।

इसके अलावा अंग्रेजों ने अवध के नवाब वाजिद अली शाह जफर को अपमानित करके लाल किले से बाहर निकाल दिया, सिक्कों पर से नाम हटा दिया, सम्पत्ति जब्त कर ली, उनके पेंशन को भी बन्द कर दिया, अनेक राजाओं के किलों को तोड़ दिया गया, इस प्रकार देशी राजाओं के राज्यों के खत्म होंने से लाखों लोग बेरोजगार हो गये। इन्हीं सब राजनीतिक कारण से अंग्रेजों के विरुद्ध देश में एक व्यापक जनविरोधी भावना तैयार हुई। जिसका विस्फोट 1857 ई० की क्रान्ति के रूप में प्रकट हुआ।

ii. सामाजिक कारण : अंग्रेजों की सदैव से यही सोच रही है, कि वे सम्पूर्ण विश्व में सबसे ऊँची और बुद्धिमान जाती है, शेष उनसे नीचे है । यह स्थिति भारतीयों के प्रति और खराब थी, वे भारतीयों को काले तथा कुत्ते कहा करते थे। उनकों नीच दृष्टि से देखते थें, उनके द्वारा संचालित पार्क, होटल, रेलवे के प्रथम क्षेणी के डिब्बे पर मोटे-मोटे अक्षरों से लिखा हुआ रहता था, कि – “कुत्ते और भारतीय के लिए प्रवेश वर्जित है’ (No Entry to dog and Indian) इतना ही नहीं अंग्रेज भारतीयों के निजी-सामाजिक जीवन में भी दखल देने लगें थे, वे सती प्रथा बाल-विवाह की प्रथा की अंत करके विधवाविवाह को बढ़ावा दे रहे थे।

हिन्दू रीती-रीवाज परम्परा का खुलेआम निंदा करते थें, अपनी सभ्यता और संस्कृति का बड़ाई कर भारतीय को नीचा दिखाते थें। भारतीय महिलाओं के साथ र्दुव्यवहार करते थे, जिस प्रकार किसी भी अवसर पर भारतीय को अपमान करने से नहीं चूकते थे। अंग्रेजो की भारतीयों के सामाजिक जीवन में इस तरह की दखलअदाजी स्वीकार नहीं थी, अत: भारतीयों का अंग्रेजों के प्रति नफरत बढ़ता गया, जो 1857 ई० की क्रान्ति के रूप में प्रकट हुआ।

iii. आर्थिक कारण : अंग्रेजों ने अपनी उपनिवेशिक शोषण नीति से भारत के सभी उद्योग-धंधे, व्यापार व्यवसाय, कृषि सब नष्ट कर दिये थे, जिससे देश की आर्थिक स्थिति एक-दम खराबं हो गयी थी, उस पर से असमय अकाल, सूखा, बाढ़ की स्थितियों ने भारतीयों को और दरिद्र बना दिया था, उस पर अंग्रेजों की नयी भूव्यवस्था के कारण जमीन्दारों द्वारा किसानों की भूमि छीनने और उनपर अत्याचार की घटनाएँ बढ़ गयी थी।

अधिकांश लोग बेरोजगार हो गये थे, और अग्रेज का गुलाम बन कर जीवीकापार्जन के लिए मजबूर हो गये थे, इस प्रकार भारतीय का आर्थिक शोषण कर अंग्रेज मालामाल हो गये थे। एसो-आराम की जिन्दगी जी रहे थे। दूसरी तरफ भारतीय जी-तोड़ मेहनत के बाद भी दो जून (वक्त) को रोटी के लिए तरस रहे थे। यही आर्थिक विषमता और असंतोष ने 1857 ई० में भारतीयों को अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ने-मरने के लिए विवश कर दिया था।

iv. धार्मिक कारण : 1813 ई० के कम्पनी चार्टर के एक्ट द्वारा ईसाई मिशनरियों को भारत आने की सुविधा प्राप्त हो गयी और वे भारत आकर बिना रोक-टोक के ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे, वे जेल के कैदियों को नियमित रूप से ईसाई धर्म की शिक्षा देने लगे। लड़कियों के लिए नियमित ईसाई धर्म का शिक्षा दिया जाने लगा। ईसाई धर्म स्वीकार करन वाले सैनिकों को पद उन्नति का लालच दिया जाने लगा, 1850 ई० में धार्मिक अयोग्यता कानून पास करके हिन्दू धर्म के नियमों और कानून को बदल दिया गया।

हिन्दू धर्म में पहले नियम था कि धर्म परिवर्तन करने वाले हिन्दुओं को पिता के सम्पत्ति से वंचित कर दिया जायेगा, किन्तु अंग्रेजों ने इस नियम (कानून) को बदल दिया कि जो ईसाई धर्म स्वीकार करंगा उस पिता के सम्पत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार उन्होंने सती प्रथा, बाल-विवाह प्रथा, गोद लेने की प्रथा को समाप्त कर दिया एवं विधवा विवाह को अनुमति दे दी।

एक अंग्रेज अधिकारी ने कहा था, कि – “हमारा भारत पर अधिकार करने का अंतिम उद्देश्य है, कि हम भारत को ईसाई देश बना दे।” हिन्दू धर्म में अंग्रेजों एवं उनके कार्यों को शंका की दृष्टि से देखने लगे, उनके इस सब कायों ने भारतीयों के आक्रोश एवं असंतोष की भावना को बढ़ावा दिया जिसका अंतिम परिणाम 1857 ई० का विद्रोह हुआ था।

v. तत्कालीन कारण : 1857 ई० के विद्रोह का तत्कालीन कारण गाय और खुअर की चर्बी से बने कारतूस की प्रयोग वाली घटना थी। अंग्रेजों ने सेना के लिए एक नयी राइफल एण्ड्रफिल देने का निश्चय किया जिसमें प्रयोग होने वाली गोली के मुहँ पर गाय या सुअर की चर्बी लगी होती थी। जिसको प्रयोग करने से पहले दाँत से नोचकर बन्दुक में भरनो पड़ती थी।

बैरकपुर छावनी के सैनिकों ने इस कारतूस का प्रयोग करने से इन्कार कर दिया, किन्तु रेजीमेण्ट के मेजर हुयडसन ने बार-बार गोली चलाने के लिए दबाव डालने लगा तब रेजीमेन्ट के एक सैनिक मंगल पाण्डे ने उस अधिकारी को गोली मार दी. यह घटना पूरे देश में आग की तरह फैल गयी, और 1857 ई० की क्रान्ति की ज्वाला धधकती गयी। इस प्रकार 1857 ई० की क्रान्ति में कारतूस वाली घटना तत्कालीन कारण बनी।

इस क्रान्ति में कैप्टन गार्डन एक मात्र अंग्रेज अधिकारी था, जो भारतीयों की ओर से लड़ा था। सम्पूर्ण भारत में 31 नई 1857 ई० के यह क्रान्ति सुनिश्चित थी, परन्तु बंगाल के मंगल पाण्डे के कारतूस वाली घटना ने यह क्रान्ति 29 मार्च को ही शुरू हो गयी थी।

vi. सैनिक कारण : 1857 ई० के क्रान्ति के विद्रोह का सैनिक कारण अंग्रेज सैनिकों की अपेक्षा भारतीय सैनिको को कम वेतन दिया जाना था। साथ ही भारतीय सैनिकों के साथ भेद-भाव किया जाता था। भारतीय सैनिकों का समुद्र पार करना अनिवार्य कर दिया गया था। सैनिको को पगड़ी की जगह चमड़े की टोपी अनिवार्य कर दिया गया। सैनकों के चिट्ठी पर शुल्क लगा दिया गया था। इन्हीं सब कारणों से भारतीय सैनिकों का अंग्रेजों के प्रति असंतोष बढ़ता गया, यही असंतोष सैनिक विद्रोह की आधारशिला बनी।

WBBSE Class 10 History Solutions Chapter 4 संगठनात्मक क्रियाओं के प्रारम्भिक चरण : विशेषताएँ तथा विश्लेषण

प्रश्न 3.
19 वीं शताब्दी को समितियों का युग क्यों कहा जाता है ? इसका स्पष्टीकरण करते हुए इस शताब्दी में स्थापित कुछ प्रमुख समिंतियों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध (बाद का समय) की युग को सभा-समितियों का युग कहा जाता है, क्योंकि इस काल में 1857 ई० की क्रान्ति के बाद मध्यमवर्गीय भारतीय जनता ने महसूस किया कि बिना संगठित राजनैतिक संगठन के अंग्रजों के विरूद्ध न लड़ा जा सकता है, और न इन्हें भारत के बाहर खदेड़ा जा सकता है। अतः राजनैतिक सभा-संगठन और समितियों की आवश्यकता को महसूस करते हुए अनेको राजनीतिक संगठन जैसे – जमींदार संगठन, बम्बई एसोसियेशन, बंगाल ब्रिटिश इण्डिया सोसायटी, हिन्दू मेला, डक्कन एसोसियेशन, मद्रास एसोसियेशन, भारतीय सभा, पूना सार्वजनिक सभा जैसे सैकड़ो संगठन की स्थापना हुई इसलिए डॉ० अनिल सेन ने 19 वी सदी को समितियों का युग कहा है।

19 वीं शताब्दी में स्थापित प्रमुख समितियाँ : डॉ॰ अनिल सेन ने 19 वी शताब्दी को समितियों का युग कहा है । उनमें से कुछ प्रमुख सभा-समितियों और संगठन का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है –
i. बंग भाषा प्रकाशिका सभा : इस सभा की स्थापना 1836 ई० में राजा राममाहन राय और गौरी शंकर वांगोस ने कलकत्ता में की थी। इस सभा को बंगाल का प्रथम राजनैतिक संगठन माना जाता है। इसकी स्थापना का उद्देश्य सरकारी क्रियाकलापी नीतियों की समीक्षा कर उसमें सुधार लाने के लिए ब्रिटिश सरकार के पास प्रार्थना पत्र भेजना था, आगे चल कर ये संस्था देश के विभिन्न भागों में राजनीतिक संगठन स्थापित करने और ब्रिटिश सरकार के शोषण और अत्याचार को जनता के बीच कर उनमें राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ii. जमींदार सभा : ह्यूडोर डेकेन्स नामक अंग्रेज वकील के सलाह पर 1838 ई० में द्वारिकानाथ टैगोर और राधाकान्त देव ने बंगाल के जमींदारों के अनुरोध पर जमींदारी सभा की स्थापना कलकत्ता में की थी, इसका उद्देश्य जमींदारों के हितों की रक्षा करना, भारतीय जनता के लिए सरकार से कुछ राजनीतिक अधिकार व सुविधाएँ प्राज्त करना था। ये देश का पहला राजनीतिक संगठन माना जाता है, क्योंकि सर्वप्रथम देश में राजनीतिक एवं सांविधानिक सुधारों की माँग शुरू की। यद्यपि यह संगठन जमीदारो एवं धनी वर्गों का संगठन था तथापि इसने किसानों और प्रजा के हित के लिए भी कई कार्य किये।

iii. भारतीय सभा (Indian Association) : भारतीय सभा की स्थापना 1876 ई० में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनन्द मोहन बोस ने कलकत्ता के एलबर्ट हॉल में की थी। यह देश में कांग्रेस की स्थापना से पूर्व पूरे देश का महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली संगठन था।
इस संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है –
(a) देश के लोगों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करना।
(b) सभी जाति, धर्म, सम्पदाय के लोगों में एकता स्थापीत करना।
(c) सिविल सर्विस परीक्षा में भारतीयों के साथ किये जाने वाले भेद-भाव का विरोध करना था।

सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने पूरे देश में श्रमण कर सिविल-सर्विस परीक्षा के स्थान, तौर-तरीकों, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, इलबर्ट बिल-विवाद जैसे विषयों को लेकर पूरे देश में प्रचार और आन्दोलन किया तथा अपने द्वारा सम्पादित ‘बंगाली’ समाचार पत्र को मुख्य हथियार के रूप में प्रयोग किया। अन्त: 1885 ई० में इस संगठन का कांग्रेस में विलय कर दिया गया।

iv. हिन्दू मेला : बंगाल के महान राष्ट्रेमी राज नारायण बोस के चर्चित शिष्य नव गोपाल मित्र ने 1867 ई० में कलकत्ता में हिन्दू मेला नामक संगठन की स्थापना की। यह मूल रूप से एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन था, इसकी स्थापना का उद्देश्य देश के युवाओं में खेल-कूद, कला, शिक्षा, कुश्ती, सांस्कृतिक प्रतियोगिता आदि के माध्यम से युवाओं में अपनी भाषा सभ्यता और संस्कृति के प्रति रूचि पैदा करना, उसे श्रेष्ठ बनाने का निर्माण करना, और उनमें राष्ट्रीयता और देश-प्रेम की भावना को जागृत करना और राष्ट्र के नव निर्माण में योगदान देना था।

v. थियूसोफिकल सोसाइटी : मूलतः इस सोसायटी की स्थापना 1856 ई० में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में रूसी महिल एच० पी० ब्लावटिस्ट तथा अमेरिका कर्नल अर्कात् ने की थी। थियोसाफिकल शब्द ग्रीक भाषा के ‘धियोमोफिया’ से बना है, जिसका अर्थ होता है ‘ईश्वर का ज्ञान’। इस संस्था ने भारत के धर्म, शिक्षा और संस्कृति से प्रभावित होकर 1882 ई० में कर्नल अर्कात् ने इसकी एक शाखा मद्रास में स्थापित की जिसका उद्देश्य भारत के लोगों में राष्ट्रीय गौरव और भाईचारे की भावना का विकास करना था। आगे चलकर यह संस्था भारत में सामाजिक एवं राजनीतिक सुधार एवं जागरण का प्रमुख केन्द्र बन गई।

1893 ई० में विवेकानन्द जी ने भारत के प्रतिनिधि के रूप में न्यूयॉर्क के विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया और उनके विचारों से प्रभावित होकर आयरलैण्ड की महिला श्रीमती Annie Besant भारत आयी। वह पहले ही इंग्लैण्ड में थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बन चुकी थी, उनका भारत के वेदों, संस्कृति और विवेकानन्द के विचारों से विशेष लगाव था, वे भारत आने के बाद ईसाई धर्म को छोड़कर हिन्दू धर्म को ग्रहण की और जीवन भर हिन्दू धर्म, समाज और माँ भारती की सेवा करती रही,

उन्होंने 1913 ई० में ‘भारतीय स्वराज लीग’ नामक संगठन की स्थापना की, और उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के साथ मिलकर 1916 ई० में होमरूल आन्दोलन की शुरूआत की, जिससे देश के लोगों में राजनीतिक भावना जागृत हुई, उनके इसी अमूल्य योगदान को देखते हुये 1917 ई० में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया, जो कांग्रेस पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष थी, इस प्रकार थियोसोफिकल सोसायटी और भारत में उसके अध्यक्ष एनी बेसन्ट ने मरते दम तक मातृभूमि की रक्षा और देश की स्वतंत्रता के लिये कार्य करती रही।

vi. एसियाटिक सोसाइटी : 1784 ई० में सर विलियम जोन्स ने एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना कलकत्ता में की थी। इस संस्था की स्थापना का उद्देश्य भारत में पथ्चिमी ज्ञान-विज्ञान का प्रचार करना था, आगे चलकर यही संस्था देश का पहला संग्रहालय बना जो आज ‘भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय’ के नाम से जाना जाता है। इसमें इतिहास, राजनीति, धर्मविज्ञान, जीव जन्तुओं एवं अन्य ज्ञानोपयोगी वस्तुओं का संग्रह करके रखा गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है।

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प्रश्न 4.
भारत की क्रान्तिकारी समितियों के रूप में ‘इण्डियन एसोसिएशन’ का विस्तारपूर्वक वर्णन करें। अथवा, राजनैतिक समिति के रूप में ‘इणिडयन एसोसिएशन’ की भूमिका का वर्णन करो।
उत्तर :
भारत की क्रान्तिकारी गुप्त समितियों के रूप में ‘इण्डियन एसोसिएशन’ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। 18 वों सदी के अन्त तक तथा 19 वीं सदी के प्रारम्भ में भारत में कई गुप्त समितियों का अविर्भाव हुआ था। इनमें से ही एक ‘इण्डियन एसोसिएशन’ थी। यह संस्था भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करती थी। ऐसे तो हमलोग जानते हैं कि भारत में 19 वीं सदी के प्रारम्भ का समय ‘समितियों का समय’ माना जाता है।

डों० अनिल सेन ने इस समय को ‘समितियों का युग’ (Age of Association) से विभूषित किये थे। सभी संस्थाएँ भारत में अंग्रेजी प्रभाव को कम करने के लिए ही बनी थी जिसका एक ही मकसद था, देश से अंग्रेजों को भगाना। इसी संदर्भ में सभी समितियों या संस्थाओं को गठित किया गया था। इन सभी संख्थाओं में ‘भारत सभा’ (Indian Association) ने देश को आजादी दिलाने में अथक प्रयत्न किया। गुप्त समिति के रूप में तथा देश को आजादी दिलाने के संदर्भ में भारत सभा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

भारत सभा (Indian Association) : भारत में गुप्त समितियों के रूप में ‘भारत सभा’ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस संस्था की स्थापना सुरेन्द्रनाथ बनजीं तथा आनन्द मोहन बोस ने सन् 1876 में अल्बर्ट हॉल (Elbert Hall), कलकत्ता में किये। ‘भारत सभा’ के संस्थापक सुरेन्द्रनाथ बनर्जी माने जाते थे, जबकि आनन्द मोहन बोस इसके सचिव माने जाते थे। बाद में इसके अध्यक्ष कलकत्ता के प्रमुख बैरिस्टर मनमोहन घोष चुने गए। इस संस्था के अन्य संस्थापकों में शिवनाथ शाख्ती तथा द्वारकानाथ गंगोपाध्याय भी थे।

‘भारत सभा’ के निर्नलिखित उद्देश्य थे, जिनमें –

  1. सम्पूर्ण देश में लोकमत का निर्माण करना
  2. हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच एकता एवं मैत्री को स्थापित करना।
  3. सामूहिक आन्दोलनों में किसानों का सहयोग प्राप्त करना। तथा
  4. विभिन्न जातियों में एकता के सूत्र को संचार करना एवं उनके सहयोग को प्राप्त करना इत्यादि।

इस संस्था के विभिन्न शाखाएँ विभिन्न क्षेत्रों में थी। जैसे- आगरा, कानपुर, लखनऊ, मेरठ एवं लाहौर इत्यादि।
‘भारत सभा’ के उद्देश्य का क्षेत्र केवल इंतना तक ही सीमित नहीं था, इस संस्था के नेतृत्व में कई आन्दोलन चलाये गये, जो इनका प्रमुख उद्देश्य भी माना जाता था। ये आन्दोलन कुछ इस प्रकार के थे-
1. सिविल सर्विस परीक्षा विरोधी आन्दोलन : ‘भारत सभा’ के संस्थापक सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने सिविल सर्विस परीक्षा को भारत में आयोजित किये जाने के उद्देश्य से सिविल सर्विस परीक्षा विरोधी आन्दोलन चलाये। जब लार्ड सेल्वरी ने भारतीयों को ‘इण्डियन सिविल सर्विस’ की परीक्षा से वंचित करने के उद्देश्य से परीक्षा में बैठने की उम्म 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दिया, तो सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने उम्र 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने के लिए आन्दोलन चलाया।

2. वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट विरोधी आन्दोलन : भारत सभा के संस्थापक सुरन्द्रनाथ एवं उनके साथियों नें मिलकर वर्नाक्यूलर प्रेंस एक्ट विरोधी आन्दोलन चलाये। जब लार्ड लिटन ने सन् 1878 ई० में यह एक्ट लागू कर भारतीय समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया, तब इसके विरोध में ‘भारत सभा’ ने यह आन्दोलन चलाया।
इसके अंतिरिक्त ‘भारत सभा’ ने और कई आन्दोलन चलाये, जिनमें आर्म्स एक्ट तथा इल्बर्ट बिल आद्य महत्वपूर्ण माना जाता है।

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प्रश्न 5.
‘भारतमाता’ के चित्र एवं ‘गोरा’ उपन्यास के द्वारा भारतीयों में राष्ट्रीयता का विकास किस प्रकार हुआ?
या
भारतीय साहित्यिक कृतियों तथा चित्रकला के रूप में ‘भारतमाता’ के चित्र एवं ‘गोरा’ उपन्यास का वर्णन करें। 4 + 4 = 8
उत्तर :
भारतीय साहित्यिक कृतियों तथा चित्रकला के रूप में ‘भारतमाता’ के चित्र एवं ‘गोरा’ उपन्यास की भूमिका को अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दोनों कृतियों ने भारतीय राष्ट्रीयता को भारतवासियों के मध्य संचार किया है। 19 वी शताब्दो के प्रारम्भ में इन दोनों कृतियों ने भारतवासियों के भीतर राष्ट्रवाद की भावना को भरा है। राष्ट्रवाद की भावना को जन्म देने का कार्य कई और पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकों ने किया जिनमे अमृत बाजार पत्रिका, द हिन्दु, स्वंदेश मित्रम इण्डियन मिरर, सोम प्रकाश, संवाद प्रभाकर तथा संजीवनी आदि प्रमुख थे।

इन सभी पत्र-पत्रिकाओं ने भारतवासियां के भीतर राष्ट्रवाद, देश प्रेम एवं देश- भक्ति आदि की भावनायें जागृत करने में महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। ठीक इसी भॉन ‘गारा उपन्यास एवं ‘भारतमाता’ का चित्र ने भी भारतीयों के भीतर राष्ट्रवाद, देश-प्रेम एवं देश- भक्ति की भावना का जागृत किये हैं तथा अपने देश को अंग्रेजों के बंधनों से मुक्त कराने का प्रयास किये। 19 वी सदी के प्रारम्भ में ये भावनाएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती चली गयी और चारों तरफ भारतीय साहित्यिक कृतियों की बोल-बाला होने लगा।

‘भारतमाता’ का चित्र : 19 वीं शताब्दी में चित्रित इस चित्र ने भारतवर्ष में राष्ट्रीयता का प्रचार-प्रसार किया। संन् 1905 में अवनीन्द्रनाथ टैगोर जी ने ‘भारतमाता’ का एक चित्र बनाया जी विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे- ‘भारताम्ब्रा’ (Bharatamba) और ‘बंगमाता’ (Bangmata) आदि। ये चित्र भारतवासियों को जागृत करने के लिए बनाया गया था।

जब अंग्रेज हमारे भारतवासियों को अपना गुलाम बना लिये थे तथा उन पर घोर अत्याचार किया जा रहा था, तब अवनीन्द्रनाथ टैगोर जी ने ऐसे मुश्किल समय में भारतीयों को जाग्रत करने तथा अंग्रेजों से अपने देश को मुक्त कराने के लिए ‘भारतमाता’ का चित्र बनाये थे। अवनीन्द्रनाथ टेगोर जी एक महान् चित्रकार तथा लेखक थे। वे गगननेन्द्रनाथ ट्रेगोर जी के छोटे भाई तथा विश्व कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर जी के भतीजे थे।

अवनीन्द्रनाथ की ‘भारतमाता’ के चित्र में दर्शाया गया है कि भारतमाता गेरुवा वस्त धारण किये हुए है, हाथां में त्रिशुल लिये हैं तथा साथ में दुष्टों को नाश हेतु शेर भी है। अर्थात् भारतमाता की ऐसे चित्र को देखकर समस्त भारतवासियों के भीतर अंग्रेजों के विरुद्ध क्रान्ति की भावना जागृत हो उठती है, जो राष्ट्रवाद के विकास का प्रतीक माना जाला है। इसी संदभ्भ में सन् 1936 में सर्वपथम वाराणसी में ‘भारतमाता’ का एक मन्दिर भी स्थापित किया गया, जिसका उद्धाटन स्वय महात्मा गाँधी जो ने किया था। इसके बाद से ही समस्त भारतवासी अपने जूलुसों, हड़तालों तथा समारोहों में ‘भारतमाता’ के चित्र का उपयोग बढ़-चढ़कर करने लगे।

‘गोरा’ (Gora) उपन्यास : ‘गोरा’ उपन्यास एक आकर्षक प्रेम-कथा की विषय-वस्तु है। जिसमे ‘गोरा’ एक प्रमुख नायक के तौर पर है और इसी के नाम पर ‘गोरा’ नाम शीर्षक के रूप में रखा गया है। इस उपन्यास का शीर्षक ‘गोरा’ (Gora) का साहित्यिक अर्थ है ‘गौर वर्ण या जाति’ का व्यक्ति। इस उपन्यास की रचना महान विश्व कवि रवीन्द्रनाथ टैंगोर जी ने सन् 1909 ई० में किया। यह उपन्यास उनके द्वारा रचित बारह (12) उपन्यासों में सें एक है। यह काफी जटिल उपन्यास माना गया है।

‘गोरा’ उपन्यास में एक श्यामल वर्ण के व्यक्ति का वर्णन किया गया है, जो बंगाल नामक प्रदेश में रहता है। इस उपन्यास के आरम्भ से लेकर अन्त तक गोरा, जो कि इस उपन्यास का मुख्य पात्र है, को हिन्दू रीति-रिवाजों को मानते एवं पूजापाट करते दिखाया गया है। रवीन्द्रनाथ टैगोर जी मूलतः एक कवि थे। उनकी बहुर्चर्चित काव्यमयी रचना ‘गोनार्जालि’ पर उन्हें 1913 ई० में विश्य का सर्वोच्च नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने अपनी इस रचना में सामाजिक एवं राजनैतिक रूप, सामाजिक जीवन एवं बुराइयां, बंगाली संस्कृति, राष्ट्रीयता की भावना एवं मित्रता आदि को दर्शाये है –
रवीन्द्रनाथ जी की ‘गोरा’ उपन्यास की रचना देश के तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा आर्थिक दृश्यों की भूमि पर किया गया है।

अत: इससे प्रतीत होता है कि भारतीय साहित्यिक कृतियों एवं चित्रकला के रूप में ‘भारतमाता’ का चित्र एवं ‘गोरा’ उपन्यास की महत्वपूर्ण भूमिका है जिसने देश के केवल नौजवानों को ही नहीं बल्कि समस्त भारतवासियों के अन्दर देशप्रेम एवं देशभक्ति की भावना को भर दिया है।

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प्रश्न 6.
महारानी विक्टोरिया के घोषणा-पत्र की प्रमुख शर्तें क्या थीं?
उत्तर :
सन् 1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि इसी विद्रोह ने अंग्रेजी सरकार की कमर तोड़ दी थी तथा भारतवासियों में एक जजबा भरी स्वतंत्रता को जन्म दे दिया था। 1857 ई० के विद्रोह के परिणामस्वरूप भारतीय प्रशासनिक मामलों में कई प्रकार के परिवर्तन किये गये और इन परिवर्तनों के आधार पर महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र भी था। गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट, 1858 ई० द्वारा किये गये परिवर्तनों की विधिवत घोषणा 1 नवम्बर, 1858 ई० को इलाहाबाद के मिण्टो पार्क में लार्ड कैनिंग के द्वारा किया गया। इस घोषणा पत्र में विभिन्न बाते कही गयो। जिनमें –
भारतीय शासन की बागडोर ईस्ट इण्डिया से निकलकर इंग्लैण्ड सरकार के हाथों में चली गयी, जिसके तहत घोषणापत्र में वायसराय उपाधि का प्रयोग प्रथम बार हुआ। गवर्नर जनरल का पद भारत सरकार के विधायी कार्य का प्रतीक था तथा सम्राट का प्रतिनिधित्व करने के कारण उसे वायसराय कहा गया, अर्थात् भारत का गवर्नर जनरल अब वायसराय बन गया।

विक्टोरिया की घोषणापत्र में कुछ महत्वपूर्ण नीतियों को स्पष्ट किया गया था। इसका प्रथम भाग राजाओं से संबंधित था। इसमें उनके क्षोभ को शान्त करने के उद्देश्य से अंग्रेजी राज्य की अपहरण नीति या राज्य हड़प नीति के त्याग की बात कही गई, जिसकी चर्चा ‘सहायक संधि नीति’ एवं ‘जब्ती के सिद्धान्त’ नामक अध्याय में की गई है।

भारतीय जनता के लिए धार्मिक सहनशीलता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया गया। घोषणा में भारतवासियों पर ईसाई धर्म थोपने की इच्छा एवं अधिकारी का स्वत्व भी त्याग दिया गया। इसमें स्पष्ट किया गया है कि भारतीय जनता के धार्मिक जीवन में किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा। इस क्षेत्र में अधिकारियों द्वारा किया गया आज्ञा का उल्लंघन रानी की अत्यधिक अप्रसन्नता का कारण होगा।

घोषणापत्र में कहा गया कि शिक्षा, योग्यता एवं ईमानदारी के आधार पर बिना जाति या वंश का ध्यान रखे लोक सेवाओं में जनता की भर्ती की जाय।

भारतीय परम्परागत अधिकारों, रीतिरिवाजों तथा प्रथाओं के सम्मान का उल्लेख किया गया। भारतीय नागरिकों को उसी कर्त्तव्य एवं सम्मान का आश्रासन दिया गया जो सम्राट के अन्य नागरिकों को प्राप्त थे।

भारत में आन्तरिक शान्ति स्थापित होने के बाद उद्योगों की स्थापना में वृद्धि, लोक-कल्याणकारी योजना, सार्वजनिक कार्य तथा प्रशासन व्यवस्था का संचालन समस्त भारतीय जनता के हित में किये जाने की बात कही गई।

विधि निर्माण के समय प्राचीन परम्पराओं एवं व्यवहार को भी ध्यान में रखा जाये। इसी तरह उत्तराधिकार एवं भूसम्पत्ति के मामले में भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाय। दूसरे शब्दों में पैतृक भूमि से लगाव को दृष्टिगत रखते हुए भारतवासियों के परम्परागत अधिकारों की रक्षा का आधासन दिया गया। भूमि के अधिकारों को तब तक निभाने की बात कही गई जब तक शासन द्वारा लगाये गये कर (Tax) का भुगतान कृषक वर्ग करता रहे।

भारतीय सैनिकों की संख्या और यूरोपीय सैनिकों की संख्या का अनुपात विद्रोह के पूर्व $5: 1$ था जिसे घटाकर $2: 1$ कर दिया गया। विद्रोह के समय भारतीय सैनिकों की संख्या 2 लाख 38 हजार थी जो घटकर 1 लाख 40 हजार हो गई।

भारत की देखभाल के लिए एक नये अधिकारी ‘भारतीय राज्य सचिव’ (Secretary States of India) की नियुक्ति की गई तथा इनकी सहायता के लिए 15 सदस्यों की एक ‘मंत्रणा परिषद’ बनाई गई। इनमें 8 सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा एवं 7 की ‘कोर्ट ऑफ डाइरेक्टर्स’ द्वारा होनी तय की गई।

इस प्रकार घोषणा में 1857 ई० के विद्रोह के लिए जिम्मेदार, भारतीय नरेशों की अंग्रेजी राज्य की अपहरण नीति, भारतीयों को बलपूर्वक ईसाई बनाने का भय, कृषकों तथा भू-स्वामियों की भूमि अपहरण की शंका के समाधान का प्रयास किया गया । अत: उपर्युक्त व्याख्या से यह देखा जाता है कि 1857 ई० के विद्रोह के परिणामस्वरूप महारानी विक्टोरिया के घोषणा पत्र को जारी किया गया था जिसके तहत भारतवासियों के पक्ष एवं विपक्ष में बहुत सारी शर्तें या बाते कही गयी थी जो महत्वपूर्ण मानी जाती थी।

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प्रश्न 7.
भारत के तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक स्थिति पर ‘गोरा’ उपन्यास का क्या प्रभाव पड़ा है ?
उत्तर :
‘गोरा’ उपन्यास महान विश्व कवि ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर’ द्वारा रचित एक जटिल उपन्यास है जिसकी रचना इन्होने सन् 1909 में किया गया था। इन्होंने ‘गोरा’ उपन्यास का गठन देश के तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक दृश्यों की भूमि पर किये हैं। इसी कारण इस उपन्यास के नायक गोरा में हम दयानन्द सरस्वती, रामकृष्ण तथा ऐनी बेसेंट की भूमिका को पाते हैं।

‘गोरा’ उपन्यास में एक श्यामल वर्ण के व्यक्ति का वर्णन किया गया है, जो बंगाल नामक प्रदेश में रहता है। टैगोर जी ने अपनी रचना में सामाजिक एवं राजनैतिक रूप, सामाजिक जीवन एवं बुराईयाँ आदि का वर्णन किये हैं।

‘गोरा’ उपन्यास ने हिन्दू समाज के विभिन्न बुराईयों तथा महिलाओं के ऊपर हुए अत्याचार को प्रदर्शित किया है। जो तत्कालीन भारत के सामाजिक स्थिति पर प्रभाव डालता है और जिसके माध्यम से ‘गोरा’ नायक हिन्दू धर्म की तमाम संकीर्णताओं को तोड़कर देशभक्त हो जाता है।

इतना ही नहीं, टैगोर जी ने विधवाओं की नारकीय जीवन का वर्णन ‘हरिमोहिनी’ पात्र के द्वारा किये हैं, जिसमें कहा गया है कि बंगाली संस्कृति में प्रेम-विवाह वर्जित है। इन्होंने भारतीय बंगाली समाज में प्रेम-विवाह की भावना को भी जन्म दिये है तथा मध्यम वर्गों को सम्मानित स्थान दिये हैं।

तत्कालीन भारत के राजनीतिक स्थिति पर ‘गोरा’ उपन्यास का जबर्दस्त प्रभाव पड़ा है। टैगोर जी ने अपने उपन्यास में भारतवासियों के प्रति राष्ट्रवाद की भावना को दर्शायें है, जो स्वतंत्रता के मार्ग को दिखलाती हैं। उस समय बंगाल लाई कर्जन के बंग-भंग की छाया से ओत-प्रोत होकर गुजर रहा था। ऐसे समय में टैगोर जी की इस उपन्यास ने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार किया, जो उनके लिए अनमोल था।

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प्रश्न 8.
आनन्दमठ उपन्यास की पृष्ठभूमि एवं प्रमुख पात्रों के क्रिया-कलापों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
भारतीय साहित्यिक कृतियों में सर्वप्रमुख स्थान ‘आनन्दमठ’ की है, जिसने भारत में राष्ट्रवाद के विकास को जन्म दिया। इस कृति की रचना बंकिम चन्द्र चटर्जी ने 1872 ई॰ में किया। इस कृति की रचना बंगला भाषा में किया गया था।

‘अनन्दमठ’ एक उपन्यास है, जिसकी पृष्ठभूमि की शुरूआत 1771 ई० के बंगाल के अकाल के समय से होती है। यह अकाल वास्तव में सन् 1770 में आया था, परन्तु इसका संचयन सन् 1771 में किया गया।

इस उपन्यास के मुख्य पात्रों में ‘महेन्द्र’ और ‘कल्याणी’ हैं। इतना ही नहीं, 18 वीं शताब्दी के सन्यासी विद्रोह का वर्णन भी इस उपन्यास में किया गया है-तथा भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वन्देमातरम्’ भी सर्वपथम इस उपन्यास में ही प्रकाशित किया गया था।

सन् 1770 के बंगाल के अकाल के समय ‘महेन्द्र’ तथा ‘कल्याणी’ तड़प रहे थे, कष्ट से तिलमिला रहे थे। उन दोनों की दशा बहुत ही खराब थी। कल्याणी जंगल में घूमने वाले शिकारियों से बचने के लिए घने जंगल में अपने नवजात शिशु को लंकर भागी जाती है। एक नदी के किनारे बेहोश होकर गिर जाती है। जब उसे होश आता है तो अपने आप को एक हिन्दू भिक्षु संत सत्यानन्द के पास पाती है। संत सत्यानन्द कल्याणी एवं उसके नवजात शिशु की सहायता करता हैं। जब महेन्द्र अपनी पत्नी कल्याणी एवं बच्चे से मिलता है और संत सत्यानन्द के बारे में जानता है, तो बहुत ही प्रभावित होता है तथा वे एक-दूसरे के प्रति मानवता की कसम लेते हैं।

सन्यासियों की ऐसी प्रवृत्ति को देखकर महेन्द्र दंग रह जाता हैं। वह भी सन्यासी की मदद करना चाहता हैं। जब सन्यासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किये तब महेन्द्र तथा उसका पुत्र उनका साथ दिये, वे भी अंग्रेज के विरोधी हो गये। अतः इस विद्रोह में सन्यासी का नेतृत्व महेन्द्र करता है और वह वीरतापूर्वक अंग्रेजों से लड़ाई करता है। परन्तु सन्यासियों की कमजोर नीति के कारण सन्यासी विद्रोह का दमन हो जाता है।

उपर्युक्त विवेचन से हम पाते हैं कि बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा रचित उपन्यास ‘आनन्दमठ’ में पूर्ण रूप से संन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया है जो अंग्रेज विरोधी आन्दोलन था।