WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – वह चिड़िया जो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
चिड़िया के पंख हैं –
(क) नीले
(ख) पीले
(ग) हरे
(घ) लाल
उत्तर :
(क) नीले।

प्रश्न 2.
चिड़िया कैसी है ?
(क) मोटी
(ख) बड़ी
(ग) छोटी
(घ) काली
उत्तर :
(ग) छोटी।

प्रश्न 3.
चिड़िया किसके लिए गाती है ?
(क) आदमी के लिए
(ख) बच्चों के लिए
(ग) पशु-पक्षियों के लिए
(घ) बूढ़े वन-बाबा के लिए
उत्तर :
(घ) बूढ़े वन-बाबा के लिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

प्रश्न 4.
चिड़िया कौन-से मोती ले जाती है ?
(क) सोने के
(ख) चाँदी के
(ग) जल के
(घ) दाने के
उत्तर :
(ग) जल के।

प्रश्न 5.
चिड़िया किसका दिल टटोलती है ?
(क) बूढ़े बाबा का
(ख) कवि का
(ग) इस्सान का
(घ) नदी का
उत्तर :
(घ) नदी का।

प्रश्न 6.
कविता के रचयिता कौन हैं ?
(क) केदारनाथ अप्रवाल
(ख) सरोजिनी नायडू.
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर :
(क) केदारनाथ अप्रवाल।

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प्रश्न 7.
चिड़िया किसके दाने खाती है
(क) मूँगफली के
(ख) जुंडी के
(ग) चने के
(घ) धान के
उत्तर :
(ख) जुंडी के।

प्रश्न 8.
दूध से भरे हुए क्या हैं?
(क) नदियाँ
(ख) तालाब
(ग) जुंडी के दाने
(घ) मक्का के दाने
उत्तर :
(ग) जुंडी के दाने।

प्रश्न 9.
चिड़िया का गीत कैसा है ?
(क) उबाऊ
(ख) नीरस
(ग) कर्कश
(घ) मधुर
उत्तर :
(घ) मधुर।

प्रश्न 10.
चिड़िया का स्वभाव कैसा हैं ?
(क) संतोपी
(ख) चिड़चिड़ा
(ग) घुमक्कड़
(घ) फुर्तोला
उत्तर :
(क) संतोषी।

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प्रश्न 11.
चिड़िया कैसे गाती है ?
(क) तीव स्वर में
(ख) कंठ खोलकर
(ग) धीरे-धीरे
(घ) मंद स्वर में
उत्तर :
(ख) कंठ खोलकर।

प्रश्न 12.
‘संतोषी’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय लगा हुआ है ?
(क) षी
(ख) तोषी
(ग) ई
(घ) सम्
उत्तर :
(ग) ई।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में कौन-सा अन्न का नाम है ?
(क) चना
(ख) जुंडी
(ग) गेहूँ
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

प्रश्न 14.
‘नदी’ शब्द का बहुवचन रूप कौन-सा है ?
(क) नदियाँ
(ख) नदियों
(ग) नदीएँ
(घ) नदें
उत्तर :
(क) नदियाँ।

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प्रश्न 15.
इनमें ‘जल’ शब्द का पर्यायवाची कौन-सा है ?
(क) नीर
(ख) तोय
(ग) वारि
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

प्रश्न 16.
चिड़िया स्वयं को ‘छोटी संतोषी’ कहती है, क्योंकि –
(क) वह छोटी-छोटी चीजों से ही संतोष कर लेती है
(ख) वह जौ-बाजरे के दाने खाकर ही संतोष कर लेती है
(ग) वह यह मानकर संतोष कर लेती है कि वह छोटी है
(घ) वह केवल चोंच मारकर ही खा लेती है
उत्तर :
(ख) वह जौ-बाजरे के दाने खाकर ही संतोष कर लेती है।

प्रश्न 17.
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है, क्योंकि –
(क) वह अन्न का महत्व समझती है
(ख) अन्न उगाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है
(ग) उसे अन्न खाना ही अच्छा लगता है
(घ) वह छोटी और संतोषी चिड़िया है
उत्तर :
(क) वह अन्न का महत्व समझती है।

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प्रश्न 18.
चिड़िया बूढ़े वन-बाबा की खातिर रस उँड़ेलकर गाती है, क्योंकि –
(क) वह जानती है कि वन-बाबा बूढ़े हैं
(ख) वन-बाबा को रसीले गीत सुनना अच्छा लगता है
(ग) वन-बाबा को धन्यवाद देना चाहती है
(घ) वह छोटी, मुँहबोली और नीले पंखोंवाली है
उत्तर :
(घ) वह छोटी, मुँहबोली और नीले पंखोंवाली है।

प्रश्न 19.
चिड़िया को विजन से बहुत प्यार है, क्योंकि –
(क) विजन उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है
(ख) उसे एकांत स्थान में रहना अच्छा लगता है
(ग) विजन में उसके अलावा कोई नहीं रहता
(घ) विजन में वन-बाबा रहते हैं
उत्तर :
(ख) उसे एकांत स्थान में रहना अच्छा लगता है।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कविता में कैसी चिड़िया की बात की गई है।
उत्तर :
कविता मे छोटी संतोषी चिड़िया की बात की गई है।

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प्रश्न 2.
चिड़िया अपनी चोंच से किस प्रकार के दाने खाती है ?
उत्तर :
विड़िया अपनी चोंच से दूध से भरे अधपके जुंडी अर्थात् ज्वार-बाजरा की बालियों के दानें ख्वादपूर्वक खाती है।

प्रश्न 3.
चिड़िया का स्वभाव कैसा है ?
उत्तर :
चिड़िया का संतोषी स्वभाव है।

प्रश्न 4.
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है। कैसे ?
उत्तर :
चिड़िया का पेट अन्न से ही भरता है। वह अन्न के दानों को पूरे मन और स्वाद से खाती है। इसालिए उसे अन्न से बहुत प्यार है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए –
(क) जुंडी
(ख) संतोषी
उत्तर :
(क) जुंडी : ज्वार-बाजरा की बालियाँ।
(ख) संतोषी : जिसे संतोष हो या संतोष करने वाली।

प्रश्न 6.
कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर :
कवि का नाम केदारनाथ अम्रवाल एवं कविता का नाम वह चिड़िया जो।

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प्रश्न 7.
चिड़िया किसकी खातिर गाती है?
उत्तर :
चिड़िया बूढ़े (पुराने) जंगल की खातिर गाती है।

प्रश्न 8.
चिड़िया का गाना कैसा है ?
उत्तर :
चिड़िया का गाना सुरीला, रसीला तथा आकर्षक है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के अर्थ लिखिए –
(क) कंठ
(ख) विजन
उत्तर :
(क) कंठ : गला।
(ख) विजन : एकांत जंगल।

प्रश्न 10.
चिड़िया नदी से जल कैसे लेती है ?
उत्तर :
चिड़िया जल की मोती के समान बूँद लेने से पूर्व उसका हृदय टटोलती है अर्थात् उसकी इच्छा जानती है।

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प्रश्न 11.
चिड़िया को किससे प्यार है ?
उत्तर :
चिड़िया को अन्न, वन और नदी से प्यार है।

प्रश्न 12.
“जल का मोती ले जाती है।” पंक्ति का क्या आशय है ?
उत्तर :
पंक्ति का आशय है – जल से मोती रूपी बूँद ग्रहण करना।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘वह चिड़िया जो’ कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर :
इस कविता में कवि ने एक छोटी सी चिड़िया की विशेषताओं का वर्णन किया है। वह छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच से ज्वार के दाने प्रेम से खाती है। वह सदा संतुष्ट रहती है, अन्र से प्यार करती है। बूढ़े वन-बाबा के लिए मधुर कंठ से गीत गाती है। उस प्यारी चिड़िया को एकान्त से बहुत प्यार है। वह बढ़ी हुई नदी के जल से मोती निकाल लेती है। वह गर्वीले स्वभाव की है। उसे नदी से बहुत प्यार है।

प्रश्न 2.
चिड़िया कौन-कौन से कार्य करती है ?
उत्तर :
चिड़िया अपनी चोंच मारकर ज्वार के दाने खाती है। बूढ़े वन-बाबा के लिए गीत गाती है। बढ़ी नदी के जल से मोती लाती है। नदी से प्यार करती है।

(क) वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।
(i) इस पद्यांश के कवि कौन हैं ? यह किस शीर्षक से उद्धुत है ?
उत्तर :
इस पद्यांश के कवि श्री केदारनाथ अप्रवाल हैं। यह कविता ‘वह चिड़िया जो’ शीर्षक से उद्धृत है।

(ii) चिड़िया को किससे प्यार है ? उसे संतोषी क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
चिड़िया को अन्न से बहुत प्यार है। चिड़िया को संतोषी कहा गया है क्योंकि वह जुंडी के दूध भरे दाने को बड़े शौक तथा आनंद से खाकर प्रसन्न हो जाती है। इसी से संतुष्ट हो जाती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

(ख) वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ।
मुझे विजन से बहुत प्यार है।
(i) चिड़िया को मुँह बोली क्यों कहा गया है?
उत्तर :
चिड़िया सभी को बहुत प्यारी होती है। वह मधुर बोलती है तथा मधुर गीत गाती है। इसलिए चिड़िया को मुँह बोली कहा गया है।

(ii) विजन का क्या अर्थ है? चिड़िया को विजन से क्यों प्रेम है ?
उत्तर :
विजन का अर्थ एकांत प्रदेश से है। चिड़िया को विजन से प्रेम है क्योंकि एकांत में चिड़िया निडर होकर विचरती तथा गीत गाती है। वहाँ बूढ़े वन-बाबा के लिए वह मधुर कंठ से गीत गाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘वह चिड़िया जो’ कविता के माध्यम से क्या सीख दी गई है? उसे हम अपने जीवन में कैसे अपना सकते हैं?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में प्रगतिवादी कवि केदारनाथ अग्रवाल ने चिड़िया के माध्यम से हमें उदार, संतोषी, सेवा परायण तथा परिश्रमशील बनने की प्रेरणा दी है। चिड़िया, संतोषी स्वभाव वाली है। वह जुंडी के दाने से अपनी रुचि और लगन से दूध खींच लेती है। वह अन्न से बहुत प्यार करती है। मनुष्य को भी अपने परिश्रम तथा प्रयल्न से जीवन में आनंद ग्रहण करना चाहिए। बिना परिश्रम के उसे कुछ नहीं मिल सकता। उसे समझनना चाहिए कि अन्न ही प्राण है। अन्न से प्यार करना चाहिए। अन्न उत्पादन तथा रक्षण के लिए सदा प्रयत्न करना चाहिए। अन्न सृष्टि जीवन मात्र का आधार है। अत: अन्न का एक कण भी व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

चिड़िया खुले कंठ से बूढ़े वन बाबा के प्रति सम्मान का भाव रखती है। वह उनके आनंद के लिए अपने कंठ से सरस मीठे गीत गाती है। उसे एकोंत से, जंगल से, वन वृक्षों से अतिशय प्रेम और लगाव है। हमें भी अपने जीवन में वृद्धजनों की सेवा करनी चाहिए। उनकी प्रसनता के लिए मधुर वचन और उनके मनोरंजन के लिए मीठे गान का आयोजन करना चाहिए। चिड़िया की तरह हमें भी वन से, वहाँ के पेड़-पौधों से तथा एकांत से प्यार करना चाहिए। यह प्रकृति ही जीवन का आधार है। वन रहेंगे तब हम भी रहेंगे। इसलिए आज हमें प्रकृति की ओर बढ़ने की जरूरत है।

चिड़िया नदी से प्यार करती है। स्वाभिमान का भाव रखती है। वह नदी की बाढ़ को देखकर भयभीत नहीं होती, बल्कि नदी से मोती प्राप्त कर लेती है। मनुष्य को भी नदी से प्यार करना सीखना चाहिए। जल ही जीवन है। नदी अपने जल से सभी प्राणियों की नि: ख्वार्थ भाव से सेवा करती है। हमें साहस औरपरिश्रम से गहरे पानी में जाकर मोती प्राप्त करना चाहिए व्योंकि गहरे पानी में प्रवेश करने से ही मोती मिल सकता है। बड़ी वस्तु पाने के लिए ठोस प्रयल करना चाहिए। इस प्रकार हमें चिड़िया की सीख को अपने जीवन में अपना लेना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द :
चिड़िया -खग, विहग, पक्षी।
नदी-सरिता, सरि, तटनी।
मोती- मुक्ता, मौक्तिक, सीपिज।
दूध-दुग्ध, क्षीर, पय, गोरस।
वन- कानन, जंगल, विपिन।
(ख) चिड़िया, जड़िया, डाकिया, धुनिया।

WBBSE Class 6 Hindi वह चिड़िया जो Summary

जीवन-परिचय :

केदारनाथ अप्रवाल का जन्म बाँदा जनपद के कमासिन गाँव में सन् 1911 में हुआ था। प्रगतिवादी कवियों में इनका प्रमुख स्थान है। गाँव में जन्मे केदारनाथ अग्रवाल का गाँव से गहरा लगाव रहा। इनकी कविताओं में मानव और प्रकृति के सौन्दर्य का बड़ा ही सहज और उन्मुक्त चित्रण मिलता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ–युग की गंगा, लोक और आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं आदि हैं। इनकी मृत्यु सन् 2000 में हुई।

पद – 1

वह चिड़िया जो –
चोंच मारकर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से रस से खा लेती है
वह छोटी संतोषी चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ :

  • जुंडी – ज्वार।
  • रुचि – शौक।
  • रस – आनंद।
  • संतोषी – संतुष्ट।
  • अन्न – अनाज।

संदर्भ : प्रस्तुत कविता ‘वह चिड़िया जो’ पाठ से ली गई है। इसके कवि श्री केदारनाथ अग्रवाल हैं।

व्याख्या : इस कविता में कवि ने चिड़िया की विशेषताओं का वर्णन किया है । वह छोटी सी चिड़िया अपनी चोंच मारकर जुंडी के दानें जिसमें दूध भरे रहते हैं उसे खाकर अपनी भूख मिटाती है। उस दाने को वह बड़े शौक तथा आनंद से खाती है। वह सदा संतुष्ट एवं प्रसन्न रहने वाली है, जिसके पंख नीले रंग के हैं। वह चिड़िया मैं ही हूँ। मैं अन्न को बहुत रुचिकर एवं प्यारा समझती हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

पद – 2

वह चिड़िया जो –
कंठ खोलकर
बूंढ़े वन-बाबा की खातिर
रस उड़ेलकर गा लेती है
वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखोंवाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ :

  • कंठ – गला।
  • मुँहबोली – प्यारी, मधुर बोलने वाली ।
  • विजन – एकांत ।
  • वन – बाबा-जंगल।

संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने छोटी चिड़िया के स्वरूप, उसकी विशेषताओं तथा कार्यों का वर्णन किया है।

व्याख्या : जो छोटी सी प्यारी चिड़िया वृद्ध वन -बाबा (जंगल) की प्रसन्नता के लिए खुले गले से मधुर गीत गाती है। अपने मधुर कंठ से रस भर देती है अर्थात् आनंद से भर देती है। वह चिड़िया सभी को अत्यंत प्यारी तथा मीठी बोली बोलनेवाली लगती है। उसके पंख नीले रंग के हैं। उसे एकांत से बहुत प्यार है। वह चिड़िया मैं ही हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 3 वह चिड़िया जो

पद – 3

वह चिड़िया जो –
चोंच मारकर
चढ़ी नदी का दिल टटोलकर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़िया
नीले पंखों वाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्यार है।

शब्दार्थ –

  • चढ़ी – जल से भरी ।
  • दिल – मन ।
  • टटोलना – जाँचना ।
  • परख करना, गरबीली – गर्ववाली, घमंडी।

संदर्भः प्रस्तुत कविता में कवि ने चिड़िया के दिल की परख, प्रयत्न, उसके स्वभाव तथा नदी के प्रति प्यार का वर्णन किया है।

व्याख्या : जो चिड़िया निडर होकर बढ़ी नदी के भीतर जाँच-परख कर जल के भीतर से मोती प्राप्त कर लेती है। वह छोटी सी चिड़िया गर्वीले स्वभाव वाली है। उसके पंख नीले हैं। वह नदी से बहुत प्यार करती है। वह चिड़िया मैं ही हूँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 5 रक्षा बंधन to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – रक्षा बंधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
राखी कौन बाँधती है?
(क) माँ
(ख) बेटी
(ग) बहन
(घ) पत्नी
उत्तर :
(ग) बहन

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 2.
भाई कहाँ जा रहा है?
(क) विद्यालय
(ख) मन्दिर
(ग) घर
(घ) समर में
उत्तर :
(घ) समर में।

प्रश्न 3.
मूल रूप से इस कविता का स्रोत है :
(क) बहन-भाई प्रेम
(ख) प्रकृति प्रेम
(ग) वात्सल्य प्रेम.
(घ) देश प्रेम एवं स्वतंत्रता
उत्तर :
(घ) देश प्रेम एवं स्वतंत्रता

प्रश्न 4.
रक्षा बंधन के लिए भाई अपनी बहन को कौन-सा उपहार देना चाहता है?
(क) अमूल्य उपहार
(ख) आँखों के आँसू
(ग) स्वतंत्रता
(घ) निद्रा
उत्तर :
(ख) आँखों के आँसू

प्रश्न 5.
‘प्रेमी’ किस कवि का उपनाम है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ग) हरिकृष्ण
(घ) सोहनलाल
उत्तर :
(ग) हरिकृष्ण

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 6.
हरिकृष्ण प्रेमी का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1909
(ख) सन् 1910
(ग) सन् 1911
(घ) सन् 1912
उत्तर :
(क) सन् 1909

प्रश्न 7.
हरिकृष्ग ‘प्रेमी’ का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) झाँसी
(ख) ग्वालियर
(ग) गुड़गाँव
(घ) गाजियानाद
उत्तर :
(ख) ग्वालियर

प्रश्न 8.
शीश का अर्थ क्या है ?
(क) मस्तक
(ख) पहाड़
(ग) कुटिया
(घ) पावन
उत्तर :
(क) मस्तक

प्रश्न 9.
भाई-बहन से क्या बनकर दर-दर घूमने को कहता है ?
(क) सैनिक
(ख) भिखारीन
(ग) बंधु
(घ) फेरीवाला
उत्तर :
(ख) भिखारीन

प्रश्न 10.
भाई-बहन से अंतिम बार क्या बाँधने को कहता हैं ?
(क) राखी
(ख) रक्षा सूत्र
(ग) कंगन
(घ) फांसी
उत्तर :
(क) राखी

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रक्षा बंधन कविता में किसके किस अत्याचार की बात कही जा रही है?
उत्तर :
रक्षा बंधन कविता में अंग्रेज शासकों के अत्याचार की बात कही जा रही है। अन्यायी शासकों ने लाखों युवतियों को विधवा बना डाला। हमारे देश को बेसहारा बना दिया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 2.
आश्रयहीन होने पर बहन का माथा ऊँचा कैसे होगा?
उत्तर :
आश्रयहीन होने पर भी बहन का माथा इसलिए ऊँचा होगा कि उसका भाई मातृभूमि की आजादी के लिए, देश को जालिमों के अत्याचार से बचाने के लिए आत्म बलिदान कर दिया। देश के नवयुवक वीरों को देश पर मिटने के लिए अलख जगाने का उसे अवसर मिल जाएगा।

प्रश्न 3.
बहन भाई के उपहार को क्या कहती है?
उत्तर :
भाई के उपहार आँसुओं की बूदों को बहन मणियों की भाँति बहुमूल्य कहती है क्योंकि उन मणियों पर संसार योयावर हो जाता है।

प्रश्न 4.
भाई अमर नशे में कब झूमने की कामना करता है?
उत्तर :
भाई रणक्षेत्र में आत्म बलिदान करने के लिए प्रस्थान की तैयारी कर रहा है। वह अपनी बहन को उपहार के रूप में आँखों के आँसुओं को देना चाहता है। उसी समय वह बहन से कहता है कि बहन अपने चरण कमल बढ़ाओ में उन्हें चूम लूँ। उसी समय भाई उसके पवित्र स्नेह से अमर नशे में झूमने की कामना करता है।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत कविता में भाई अपनी बहन से कहाँ जाने की बात कहता हैं ?
उत्तर :
पसस्तुत कविता में भाई अपनी बहन से युद्ध में जाने की बात कहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 6.
भाई अपनी बहन से क्या आशीर्वाद चाहता है ?
उत्तर :
भाई अपने बहन से सिर-कटने के पहले नहीं ज्ञुकने का आर्शीबाद चाहता है।

प्रश्न 7.
‘रक्षा बन्धन’ कविता में जननी किसे कहा गया है ?
उत्तर :
‘रक्षा बन्धन’ कविता में जननी ‘मातृभूमि’ को कहा गया है।

प्रश्न 8.
भाई को कौन-सा दुःख मिटाना है ?
उत्तर :
भाई को गुलामी का दुःख मिटाना है।

प्रश्न 9.
भाई अपने साथियों को कब निद्रा लेने को कहता है ?
उत्तर :
भाई अपने साधियों को स्वाधीनता प्राप्त करने के बाद निद्रा लेने को कहता है।

प्रश्न 10.
बहन मणियाँ किसको कहती है ?
उत्तर :
बहन मणियाँ भाईयों के अश्रुकणों (आँसू की बूँदों) को कहती है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) ‘रक्षा बन्धन’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवकों को गुलामी की जंजीर तोड़ देने के लिए तथा सहर्ष बलिदान कर देने की प्रेरणा दी है। आजादी की लड़ाई में जाने से पूर्व भाई-बहन से कह रहा है कि उसे समर में जाना है, इसलिए वह उसे राखो बाँध दे आशीर्वाद दे कि वह भारत माता के चरणो पर आत्म-और बलिदान कर दे। जिस अन्यायी शासकों ने देश को वीरान तथा अनाथ बना दिया उनकी प्यास वुझाने के लिए देश के लाखो वीर नवयुवक विजय पथ पर जा रहे हैं।

बहन उसके मस्तक पर हांथ रख दे जिससे उसका मस्तक कभी झुुके नहीं। उन हत्यारों ने हमारे देश को तहस-नहस कर डाला। आज हमारे पास बहन को उपहार देने के लिए केवल मेरी आँखों के आँसू हैं, जिन्हें वह मणियों के समान बहुमूल्य समझती है। भाई प्रस्थान करने के पूर्व बहन के चरण छूकर उसके पवित्र स्नेह में झूमना चाहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

(ख) इस कविता के माध्यम से आप कैसे कह सकते हैं कि यह स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी? जिन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है, उन्हें लिखिए।
उत्तर :
इस कविता के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कविता स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी। निम्न पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है।

  • यह पोंछ ले अश्रु गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है।
  • उस हत्यारे ने तेरा माथ।

(ग) भाई बहन को समर में जाने के पूर्व क्या-क्या कह रहा है?
उत्तर :
भाई समर में जाने के पूर्व बहन को कह रहा है कि वह उसे आशिष दे, उसके आँस पोंछ ले। अन्तिम बार राखी बाँधकर प्यार कर ले। मस्तक पर स्नेहपूर्वक अपना हाथ रख दे। अंग्रेज शासकों ने न जाने कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया। कितने भारतीय वीरों को समापन कर डाला। आश्रयहीन होने पर वह सर्वत्र लोगों को विजय पाने के लिए प्रेरित करे। अन्तिम बार वह बहन के चरण कमलों का स्पर्श करने के लिए कहता है।

(घ) हमारा देश कब और किस प्रकार अनाथ हो गया?
उत्तर :
हमारा देश जब पराधीन था, अत्यायारी अंग्रेज यहाँ के शासक थे, उस समय हमारा देश अनाथ हो गया। अन्यायी सरकार ने भारतीयों पर अनेक जुल्म किये। हमारे देश की सारी संपत्ति लूट कर अपने देश ले गए। देश को वीरान बना डाला। देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नवुयवकों को शूली पर चढ़ा दिए। न जाने कितनी युवतियों के सौभाग्य लुट गये। इस प्रकार देश अनाथ हो गया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

(ङ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न 1.
अपना शीश कटा जननी की, जय का मार्ग बनाना है।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि का कथन है कि अन्यायी शासकों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक रण क्षेत्र के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। सभी देशभक्त वीर पुरुष अपना मस्तक बलिदान कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। अर्थांत् अपने को न्योछावर कर भारत को स्वाधीन बनाएँगे ।

प्रश्न 2.
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दुःख मिटाना है।
उत्तर :
भाई बहन से कह रहा है कि वह उसके आँसू पोंछ कर उसे निर्द्वन्द्व बना दे। जिससे वह निश्चिन्त होकर रणक्षेत्र में अपनी वीरता से देश को स्वाधीन बना सके। शासकों को परास्त कर ही पराधीनता के दुःखों से देश को हुटकारा दिलाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
उठो बन्धुओं, विजय वथू को वरो तभी निद्रा लेना।
उत्तर :
कवि भारतीय वीर युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे उठें, शक्तिशाली बनकर विजय प्राप्त करें, विजय रूपी दुल्हन का वरण करें। विजय हासिल कर लेने के बाद ही सुख की नींद सोऐं, जब तक विजय नहीं मिलती तब तक आराम से दूर रहें।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर 

(क) ‘रक्षा बन्धन’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवकों को गुलामी की जंजीर तोड़ देने के लिए तथा सहर्ष बलिदान कर देने की प्रेरणा दी है। आजादी की लड़ाई में जाने से पूर्व भाई-बहन से कह रहा है कि उसे समर में जाना है, इसलिए वह उसे राखी बाँध दे आशीर्वाद दे कि वह भारत माता के वरणों पर आत्म-और बलिदान कर दे।

जिस अन्यायी शासकों ने देश को वीरान तथा अनाथ बना दिया उनकी प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वौर नवयुवक विजय पथ पर जा रहे हैं। बहन उसके मस्तक पर हाथं रख दे जिससे उसका मस्तक कभी युके नहीं। उन हत्यारों ने हमारे देश को तहस-नहस कर डाला। आज हमारे पास बहन को उपहार देने के लिए केवल मेरी आँखों के आँसू हैं, जिन्हें वह मणियों के समान बहुमूल्य समझती है। भाई प्रस्थान करने के पूर्व बहन के चरण छूकर उसके पवित्र स्नेह में झूमना चाहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

(ख) इस कविता के माध्यम से आप कैसे कह सकते हैं कि यह स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी? जिन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है, उन्हें लिखिए।
उत्तर :
इस कविता के पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कविता स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई थी। निम्न पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है।

  • यह पोंक ले अभ्रु गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है।
  • उस हत्यारे ने तेरा माथ।

(ग) भाई बहन को समर में जाने के पूर्व क्या-क्या कह रहा है?
उत्तर :
भाई समर में जाने के पूर्व बहन को कह रहा है कि वह उसे आशिष दे, उसके आँसू पोंछ ले। अन्तिम बार राखी बाँधकर प्यार कर ले। मस्तक पर स्नेहपूर्वक अपना हाथ रख दे। अंग्रेज शासकों ने न जाने कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया। कितने भारतीय वीरों को समापन कर डाला। आश्रयहीन होने पर वह सर्वत्र लोगों को विजय पाने के लिए प्रेरित करे। अन्तिम बार वह बहन के चरण कमलों का स्पर्श करने के लिए कहता है।

(घ) हमारा देश कब और किस प्रकार अनाथ हो गया?
उत्तर :
हमारा देश जब पराधीन था, अत्याचारी अंग्रेज यहाँ के शासक थे, उस समय हमारा देश अनाथ हो गया। अन्यायी सरकार ने भारतीयों पर अनेक जुल्म किये। हमारे देश की सारी संपत्ति लूट कर अपने देश ले गए। देश को वीरान बना डाला। देश की आजादी के लिए आवाज उठाने वाले नवुयवकों को शूली पर चढ़ा दिए। न जाने कितनी युवतियों के सौभाग्य लुट गये। इस प्रकार देश अनाध हो गया।

(ङ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न 1.
अपना शीश कटा जननी की, जय का मार्ग बनाना है।
उत्तर :
इस पंक्ति में कवि का कथन है कि अन्यायी शासकों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक रण क्षेत्र के लिए प्रस्थान कर रहे हैं। सभी देशभक्त वीर पुरुष अपना मस्तक बलिदान कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। अर्थात् अपने को न्योछावर कर भारत को स्वाधीन बनाएँगे ।

प्रश्न 2.
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दुःख मिटाना है।
उत्तर :
भाई बहन से कह रहा है कि वह उसके आँसू पोंछ कर उसे निर्द्वन्द्ध बना दे। जिससे वह निश्चिन्त होकर रणक्षेत्र में अपनी वीरता से देश को स्वाधीन बना सके। शासकों को परास्त कर ही पराधीनता के दु:खों से देश को छुटकारा दिलाया जा सकता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

प्रश्न 3.
उठो बन्धुओं, विजय वधू को वरो तभी निद्रा लेना।
उत्तर :
कवि भारतीय वीर युवकों को प्रेरणा दे रहा है कि वे उठें, शक्तिशाली बनकर विजय प्राप्त करें, विजय रूपी दुल्हन का वरण करें । विजय हासिल कर लेने के बाद ही सुख की नींद सोएँ, जब तक विजय नहीं मिलती तब तक आराम से दूर रहें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
‘रक्षा बंधन’ कविता के कवि ने देश के नवयुवकों को क्या शिक्षा दी है?
उत्तर :
खवतंत्रता के पूर्व लिखी गई प्रस्तुत कविता में कवि ने देश के नवयुवको को स्वतंत्रता के महत्व को बतलाकर उन्हें मातृभूमि की बलि वेदी पर अपने को समर्पित कर देने के लिए कहा है। घर, परिवार, भाई-बहन की ममता को छोड़कर स्वतंग्रता के युद्ध में जाने के लिए हर नवयुवक तैयार है। पराधीनता की पीड़ा को दूर करना है। भारत माता के वरणों में शीश चढ़ाने की शुभ बेला आ गई है। बहन की या परिवार की ममता इसमें बाधक न बने। प्यार के बंधन को तोड़कर ही इस महान लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। अत्याचारी अंग्रेज शासकों ने फाँसी देने की सारी तैयारी पूरी कर ली है।

पापी अंग्रेजों ने लाखों नारियों की मांगों के सिन्दूर पोछकर उन्हें विधवा बना दिया। अब नव-युवकों के विनाश के लिए वे तत्पर हैं। न जाने देश के कितने नर-नारियों के हैदयों को इन्होंने चकनाचूर कर दिया। इसलिए उन पापियों की प्यास बुझाने के लिए देश के लाखों वोर नवयुवक अपना बलिदान कर देने के लिए युद्ध भूमि में जाने के लिए उतावले है। लोगों में उत्साह है कि अपने बलिदान से वे निश्चय ही विजय प्राप्त कर भारत माता को पराधीनता के चंगुल से मुक्त कर लेंगे। शीश भले कट जाए पर कभी दुकेंगे नहीं। गर्व के साथ हमेशा मस्तक ऊँचा बना रहे। हत्यारे शासको ने हमारे देश को वीरान बना डाला। सारा देश अनाथ हो गया। लोगों के दर्द को सुनने वाला कोई न रहा।

नवयुवकों के बलिदान से आहत बहनो को भी कवि ने प्रेरित किया है। उन्हें दीन, भिखासि बन कर हर गली, कूचे में घूमघूम कर लोगों को जगाना है। नवयुवकों को आराम करना छोड़कर विजय के लिए आगे बढ़ना है। नवयुवक भाइयों के पास अपनी बहनों को उपहार देने के लिए केवल उनकी आँखों में आसू हैं। ये आँसू साधारण मूल्यहीन नहीं हैं।

बल्कि ये अमूल्य मगि रत के समान हैं। नवयुवक युद्ध के लिए प्रस्थान करने की शुभ घड़ी में बहन के चरणों को चूम लेना चाहता है। बहन के पवित्र स्वर्गीय स्नेह के शाश्वत् नशे में झूमते हुए वह स्वतंग्रता संग्राम में बलिदान करने को जाना चाहता है। इस प्रकार कवि ने देश के नवयुवकों को बतलाया है कि देश सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है और देश पर मर मिटना ही सबसे बड़ा बलिदान है।

भाषा-बोध

(क) इन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।

  • भीषण-युद्ध में भीषण अस्त्रों का प्रयोग होता है ।
  • क्रूर – क्रूर शासको ने देश पर जुल्म उहाया।
  • विमल – विमल जल पीने लायक होता है।
  • आँचल – वह आँचल फेला कर दया की भीख माँग रही थी।

(ख) शब्दों के अर्थ में अन्तर बतलाइए ।

  • स्नेह (छोटो से) – बच्चों से स्नेह।
  • प्यार – प्रेम-लोगों से प्रेम।
  • अमूल्य – बेहद कीमती – कोहीनूर हीरा अमूल्य है।
  • बहुमूल्य – कीमती – यह कपड़ा बहुमूल्य है।
  • ऊंचा – उन्नत, ऊपर उठा हुआ।
  • ऊँचाई – उठान, श्रेष्ठता।
  • डाल – शाखा, तलवार का फल ।
  • ढाल – आधात रोकने का एक साधन।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

(ग) ‘अ’ और ‘उप’ उपसर्गों से शब्द बनाइए-

  • अ – अमूल्य, अकर्म, अचल, अजर, अधर्म।
  • उप – उपहार, उपकार, उपवन, उपकरण।

(ख) इन, ईय, हीन प्रत्ययों के योग से शब्द बनाइए।

  • इन – भिखारिन, मालकिन, नातिन, पडोसिन।
  • ईय – स्वर्गीय, जातीय, भारतीय, राष्ट्रीय।
  • हीन- आश्रयहीन, जलहीन, शक्तिहीन।

WBBSE Class 7 Hindi रक्षा बंधन Summary

जीवनन परिचया

हरिकृष्ण प्रेमी का जन्म सन् 1909 ई० में ग्वालियर के गुना नामक स्थान में हुआ था। प्रेमी ने स्वाधीनता संग्राम में भी योगदान दिया। इन्हें कविता तथा नाटक के क्षेत्र में विशेष सफलता मिली। इनकी भाषा सहज, संयत तथा बोधगम्य है। गाँधी जी का इनपर विशेष प्रभाव था। इनकी प्रमुख रचनाएँ शिव साधना, रक्षा बंधन, प्रतिशोध, अनंत के पथ पर आदिहैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 5 रक्षा बंधन

पद – 1

बहन बाँध दे रक्षा बंधन मुझे समर में जाना है,
अब के घन गर्जन में रण का भीषण छिड़ा तराना है ।
दे आशिष, जननी के चरणों में यह शीश चढ़ाना है,
बहन पोंछ ले अश्रु, गुलामी का यदि दु:ख मिटाना है ।।

अन्तिम बार बाँध ले राखी,
कर ले प्यार अखिरी बार ।
मुझको, जालिम ने फाँसी की,
डोरी कर रखी तैयार ।।

शब्दार्थ :

  • समर – युद्ध तराना – गाना, विशेष प्रकार के गीत
  • घन गर्जन – मेघ की गर्जना
  • भीषण-भयंकर
  • रण-युद्ध जालिम- दुष्ट, शत्रु, चालबाज
  • आशिष – आशीर्वाद
  • शीश – मस्तक

संदर्भ – प्रस्तुत अंश रक्षा बंधन कविता से उद्धृत है। इसके कवि हरिकृष्ण प्रेमी हैं।

प्रसंग – इस अंश में कवि ने स्वाधीनता संग्राम में जाने के लिए प्रस्तुत नवयुवक के मन की आत्म बलिदान की भावना का मार्मिक चित्रण किया है।

व्याख्या – स्वतंत्रता के पूर्व लिखी गई इस कविता में एक नवयुवक भाई अपनी बहन से कह रहा है कि बहन मेरी कलाई में तुम रक्षा सूत्र बाँध दो। बादलों की गर्जना में युद्ध का भयंकर गीत छिड़ा हुआ है। भारत माता के चरणों में हमें अपना मस्तक चढ़ा देना है । अत: मुझे आशीर्वाद दो और आँसू पोंछ लो। मुझे भारतवर्ष की पराधीनता की पीड़ा को दूर करना है। बलिदान के लिए भाई कह रहा है कि अन्तिम बार मुझे राखी बाँधकर प्यार कर लो, क्योंकि अन्यायी दुश्मनों ने मुझे शूली पर चढ़ाने के लिए फाँसी की रस्सी तैयार कर रखी है।

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पद – 2

जिसने लाखों ललनाओं के पोंछ दिए सिर के सिंदूर,
गड़ा रहा कितनी कुटियाओं के दीपों पर आँखें कूर ।
वज्र गिराकर कितने कोमल हृद्य कर दिए चकनाचूर,
उस पापी की प्यास बुझाने, बहन जा रहे लाखों शूर ।।

अपना शीश कटा जननी की,
जय का मार्ग बनाना है।
बहन बाँध दे रक्षा बन्धन,
मुझे समर में जाना है ।।

शब्दार्थ :

  • ललनाओं – युवतियों
  • कुटिया – झोपड़ी
  • क्रूर – निष्ठुर
  • वज्र – इन्द्र का अस्त्र
  • चकनाचूर – नष्ट, समाप्त कर देना
  • शूर – वीर, योद्धा।

व्याख्या – प्रस्तुत अवतरण में कवि ने अंग्रेज शासकों के अत्याचारों और उनकी क्रूरता का चित्रण किया है। भाई अपनी बहन से कह रहा है कि अंग्रेज शासकों ने अनगिनत युवतियों के सिर का सिंदूर पोंछ दिया। उनके पति की हत्या कर उन्हें विधवा बना दिया। अनेक झोपड़ियों के दीपकों पर अपनी निष्ठुर आँखें गड़ा रखा है।

वज्रपात कर तथा भयंकर अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग कर न जाने कितने नव युवकों को खत्म कर दिया। पापी, अन्यायी शासकों की प्यास शान्त करने के लिए देश के लाखों वीर नवयुवक प्रस्थान कर रहे हैं। सभी वीर पुरुष अपना मस्तक अर्पण कर भारत माता के विजय पथ को प्रशस्त बनाएँगे। इसलिए बहन, मुझे राखी बाँध दो, मैं रण-क्षेत्र में जाने के लिए तैयार हूँ।.

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पद – 3

बहन शीश पर मेरे रख दे, स्नेह सहित अपना शुभ हाथ,
कटने के पहले न झुके यह ऊँचा रहे गर्व के साथ ।
उस हत्यारे ने कर डाला अपना सारा देश अनाथ,
आश्रयहीन हुई यदि तो भी ऊँचा होगा मेरा माथ ।।

दीन भिखारिन बनकर तू भी,
गली-गली फेरी देना ।
उठो बंधुओं, विजयवधू को,
वरो, तभी निद्रा लेना ।।

शब्दार्थ :

  • स्नेह – प्रेम आश्रयहीन – बेसहारा
  • गर्व – स्वाभिमान
  • अनाथ – बेसहारा
  • वरो – चुनो फेरी देना – भ्रमण करना, घूमना
  • दीन – गरीब
  • विजयवधू – विजयरूपी दुल्हन

व्याख्या – भाई अपनी बहन से कह रहा है कि बहन तुम अपना शुभ हाथ प्रेमपूर्वक हमारे मस्तक पर रख दो। हमारा यह मस्तक कटने के पूर्व जालिमों के सामने न झुके। स्वाभिमान के साथ मस्तक सदा ऊँचा रहे। हत्यारें शासकों ने सारे देश को बेसहारा बना दिया। सभी अनाथ हो गए। हमारे बलिदान से यदि तुम बिना सहारे के हो गई तो भी तुम्हारा मस्तक सदा ऊँचा बना रहेगा। लाचार भिखारिन बनकर हर गली-मार्ग में जाकर, घूम-घूमकर लोगों को प्रेरणा देना कि बंधुओं उठो तैयार हो जाओ, जयरूपी दुल्हन का वरण करने के बाद नींद लेना, आराम करने की बात करना। विजय के बाद ही खुशियाँ मनाना।

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पद – 4

आज सभी देते हैं अपनी बहनों को अमूल्य उपहार,
मेरे पास रखा ही क्या है, आँखों के आँसू दो चार ।
ला दो चार गिरा दूँ, आगे अपना आँचल विमल पसार,
तू कहती है – “ये मणियाँ हैं, इन पर न्योछावर संसार ।।

बहन बढ़ा दे चरण कमल मैं,
अंतिम बार उन्हें लूँ चूम ।
तेरे शुचि स्वर्गीय स्नेह के,
अमर नशे में लूँ अब झूम ।।

शब्दार्थ :

  • अमूल्य-अनमोल, बहुमूल्य
  • उपहार – भेंट पसारो – फैलाओ
  • मणियाँ – रत्न न्योछावर – अर्पण
  • शुचि – पवित्र, शुद्ध
  • स्नेह-प्रेम
  • अमर – जो कभी न मरे
  • विमल – निर्मल, पवित्र
  • स्वर्गीय – स्वर्ग संबंधी जिसमें दिव्य पवित्रता है।
  • नशे – मद, गर्व, अभिमान

व्याख्या – भाई बहन से कहा रहा है कि इस रक्षा बंधन के पावन पर्व पर सभी भाई अपनी बहनों को मूल्यवान उपहार देते हैं। मेरे पास उपहार देने के लिए कुछ भी नहीं है, केवल मेरी आँखों में आँसू की बूँदे हैं। तुम अपना आँचल फैलाओ मैं उपहार के रूप में दो चार आँसुओं की बूँदें उस पर गिरा दूँ। तुम तो कहती हो कि ये आँसू रत्न के समान अमूल्य हैं, इन आँसुओं पर संसार समर्पित है। बहन तुम अपने कमल के समान कोमल चरणों को बढ़ा दो, मैं अन्तिम बार उन्हें चूम लूँ। तुम्हारे पवित्र, दिव्य प्रेम के शाश्वत् स्वभिमान में मैं मस्त हो जाऊँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 4 जागरण गीत to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – जागरण गीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
‘जागरण गीत’ कविता के कवि हैं :
(क) माखन लाल चतुर्वेदी
(ख) माहेश्वरी प्रसाद द्विवेदी
(ग) सोहनलाल द्विवेदी
(घ) हरिकृष्ण प्रेमी
उत्तर :
(ग) सोहनलाल द्विवेदी

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 2.
कवि इस कविता के द्वारा कैसे लोगों को जगाने की बात कर रहा है ।
(क) वास्तविक जीने वाले को
(ख) कल्पनात्मक जीवन जीने वालों को
(ग) कर्मशील जीवन वाले को
(घ) निराश जीवन वाले को
उत्तर :
(ख) कल्पनात्मक जीवन जीने वाले को।

प्रश्न 3.
‘जागरण गीत’ कविता का कवि लोगों को कहाँ नहीं जाने देगा ?
(क) उदयाचल
(ख) अस्ताचल
(ग) विंध्याचल
(घ) अरूणांचल
उत्तर :
(ख) अस्ताचल

प्रश्न 4.
कवि इस कविता द्वारा कैसे लोगों को जगाने की बात कर रहा है ?
(क) वास्तविक जीवन वाले
(ख) कल्पनात्मक जीवन वाले
(ग) कर्मशील जीवन वाले
(घ) निराश जीवन वाले
उत्तर :
(ख) कल्पनात्मक जीवन वाले

प्रश्न 5.
कवि ने किसको तोड़ने की बात की है ?
(क) श्रृंखलाएँ संकीर्णताएँ
(ख) संबंध
(ग) आवरण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) श्रृंखलाएँ संकीर्णताएँ

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 6.
‘सिंधु’ शब्द का शाष्दिक अर्थ क्या है ?
(क) सागर
(ख) नदी
(ग) लहर
(घ) झरना
उत्तर :
(क) सागर

प्रश्न 7.
कवि शूल को क्या बनाने आ रहे हैं ?
(क) फूल
(ख) धूल
(ग) भूल
(घ) मूल
उत्तर :
(क) फूल

प्रश्न 8.
कविता में शूल तथा फूल किसका प्रतीक हैं ?
(क) दुख:सुख
(ख) हँसी-खुशी
(ग) न्याय-अन्याय
(घ) चल-अचल
उत्तर :
(क) दुख:सुख

प्रश्न 9.
‘शूल’ शब्द का अर्थ क्या है ?
(क) नदी
(ख) कवि
(ग) काँटा
(घ) फूल
उत्तर :
(ग) कॉटा

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 10.
कवि के अनुसार किसके उठने से धरती और आकाश का सिर उठेगा ?
(क) जीवन
(ख) लोगों
(ग) कल्पना
(घ) धीरज
उत्तर :
(ख) लोगों

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘उदयाचल’ और ‘अस्ताचल’ शब्दों का क्या अर्थ है?
उत्तर :
उदयाचल का अर्थ है- पूर्व दिशा में स्थित वह काल्पनिक पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है। यह जीवन में प्रगति का प्रतीक है। अस्ताचल का अर्थ है- पश्चिम का वह कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना माना जाता है।

प्रश्न 2.
‘विपथ’ होने का आशय क्या है?
उत्तर :
यह उनके लिए कहा गया है जो अज्ञान और अकर्मण्यता के कारण सच्चे रास्ते को छोड़कर पथभ्रष्ट बन जाते हैं। अपने लक्ष्य पथ से भटक जाते हैं।

प्रश्न 3.
‘कल्पना में उड़ने’ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
कल्पना में उड़ने से तात्पर्य है- कल्पना के हवाई महल बनाना, मन में ऊँची-ऊँची कल्पनाएँ करना, मन में करोड़ों की संपत्ति जोड़ना। ऐसे लोग कर्मठ बनकर कार्य सिद्ध करने की चेष्टा नहीं करते। केवल बड़ी-बड़ी बातें किया करते रहते हैं।

प्रश्न 4.
मँझधार में कवि किसको और कैसे पार लगाएगा?
उत्तर :
जो लोग मँझधार को देखकर घबड़ा जाते हैं उन्हें कवि पार लगाना चाहता है। उन्हें कवि सहारा दे रहा है कि पतवार लेकर घबड़ाएँ नहीं। कवि उन्हें तट पर थकने नहीं देगा, उन्हें पार लगाने की चेष्टा करेगा।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

प्रश्न 5.
सोहनलाल द्विवेदी के जन्म का समय लिखें।
उत्तर :
सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905, में हुआ था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) प्रस्तुत कविता में कवि किसे जगा रहा है तथा उन्हें क्या हिदायतें दे रहा है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि उन लोगों को जगा रहा है जो वास्तविक स्थितियों से मुंह मोड़कर कल्पनाओं की दुनिया में जीते हैं। कवि उन्हें हिदायत दे रहा है कि अब कल्पना करना छोड़कर वास्तविक जीवन जीने का प्रयास करें। अपने को पतन की ओर नहीं, प्रगति की ओर ले जाएँ। प्रयत्ल करने से वे पीछे न हटें। आकाश छोड़कर धरती पर अपनी निगाह रखें। कर्मठ, कर्त्तव्य परायण बनें। अज्ञान की नींद छोड़कर सजग सावधान बनें।

(ख) मानव मन की किन संकीर्णताओं का वर्णन पाठ में हुआ है? उनका वर्णन करें।
उत्तर :
कवि ने मानव मन की अनेक संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है। आज लोगों के मन में जाति, धर्म, संप्रदाय, अमीर, गरीब को लेकर संकीर्णताएँ बनी हुई हैं। लोगों में हीन ग्रंथि बनी हुई है। उनके मन को नाना प्रकार के सामाजिक बंधन, रूढ़ियाँ, अंध विश्वास जकड़ रखे हैं। जब तक मन में साहस शक्ति का संचार नहीं होगा, आत्मबल नहीं बढ़ेगा, तब तक वह प्रगति मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता।

(ग) कवि लोगों को क्या करने और क्या न करने का संदेश दे रहा है?
उत्तर :
कवि लोगों को यह संदेश दे रहा है कि वे सजग, सावधान होकर कर्त्तव्य पथ पर आगे बढ़ें। कल्यना लोक में विचरना बंद कर वास्तविक जगत् में रहे। मन में कवेल ऊँची-ऊँची कल्पनाएँ न करें। वास्तविक जीवन के बारे में सोचें। धरती के प्राणी बनें। कठिन कार्य के निर्वाह में सच्चा सुख मिलता है। प्रतिकूल स्थिति तथा रास्ते की कठिनाइयों को देखकर वे विचलित न हों। मन की संकीर्ण रूऩियों के बंधन को तोड़कर उदारवादी तथा मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाएँ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

(घ) निम्न पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 1.
प्रगति के पथ पर बढ़ाने आ रहा हूँ।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में कवि कह रहा है कि वह लोगों को प्रगति की ओर ले जाने के लिए प्रस्तुत है। कवि लोगों के मन में शक्ति, साहस का संचार कर रहा है और मेरित कर रहा है कि वे आलस्य, अकर्मण्यता छोड़कर कर्त्तव्य परायण बने, कल्पना करना छोड़कर वास्तविक धरातल पर जोएँ। पथभष्टन बनें, सच्चे रास्ते का परित्याग न करें, मन में कभी हीन भावना न लाएँ, अपने को कमजोर न समझें । तभी निश्चित् रूप से वे जीवन में उन्नति करेंगे और प्रगति की और बढ़ेंगे।

(ङ) शूल तुम जिसको समझते थे अभी तक
फूल मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
उत्तर :
कवि लोगों को आश्वस्त कर रहा है कि वे जिसे काँटा समझ रहे हैं उसे वे फूल बनाने के लिए प्रस्तुत हैं। वे लोगों के दु:ख को दूर कर उसे सुख के रूप में बदलना चाहते है। इसलिए कवि ने स्सष्ट किया है कि बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करना ही सुख नहीं है। इस झूठे सुख में नहीं पड़ना चाहिए। साहस के साथ कठिन से कठिन कर्त्त्य का निर्वांह करना ही सच्चा सुख है। सच्चा सुख उत्तरदायित्व के निर्वाह में ही मिलता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न : प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने भारतवासियों को सजग, कर्मशील बनने की प्रेरणा दी है। अब इस बात की जरूरत है कि हमारे देशवासी आलस्य, निद्रा, अकर्मण्यता को छोड़कर कर्मठ बने, कवि उन्हें जगाने का प्रयल कर रहा है। अब वे पीछे न जाकर आगे बढ़े, सूर्योंय की भॉंति दीप्यमान बनकर चतुर्दिक रोशनी फैलाएँ।

कल्पना के महल बनाना छोड़ कर वास्तविक संसार में विचरण करें। आज तक वे कर्महीन एवं निश्चेष्ट रहकर प्रयत्न और परिश्रम से मुँह मोड़ते रहे। पर अब वे आकाश में उड़ने की कल्पना त्याग कर वास्तविक जीवन में रहें, धरती पर रहकर घरती के वास्तविक जीवन की बात करें। बड़े-बड़े सपने बनाना, बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करना कभी सुखद नहीं हो सकती, कल्पना के मोदक से कभी तन-मुन को संतुष्टि नहीं हो सकती।

उत्तरदायित्व का निर्वाह करने में, गुरुतर भार वहन करने से कभी दुःख नहीं होता, इससे तो मन और आत्मा को संतुष्टि मिलती है। जिसे लोग अभी तक काँटा अर्थात्दुःख समझते रहे, कवि उस कांटे को फूल बनाकर उनके मार्ग को प्रशस्त करना चाहता है। यदि मनुष्य प्रयत्न और परिश्रम का सदुपयोग करे तो निश्चय ही शूल को फूल अर्थात् पीड़ा को आंनद में बदल सकता है। व्यक्ति में इतना साहस और हिम्मत हो जिससे वह भयंकर लहरों वाली धारा को देखकर विचलित न हो, घबड़ाए नहीं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

वीर पुरुष सामने की कठिनाई को देखकर घबड़ाता नहीं, पतवार लेकर घबड़ाए नहीं, बल्कि तेज धारा की ओर पतवार घुमाकर आगे बढ़े। कवि चाहता है कि वह तट पर थके नहीं, बल्कि पार उतरने के लिए तत्पर होकर सफल हो। आज इस बात की आवश्यकता है कि व्यक्ति सारे बंधनों को तोड़ कर मन में युगों से मौजूद क्षुद्रता व तुच्छ भावना का परित्याग कर उदारता दिखलाए। सभी के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाए, उसे आज बूँद नहीं समुद्र बनने की जरूरत है।

अतः व्यक्ति हीन प्रवृत्ति को छोड़कर तेजस्वी बने। मन, कर्म और वचन से दिव्य कर्मों का अनुष्ठान करे। व्यक्ति के आगे बढ़ने, उन्नति के शिखर पर पहुँचने पर सारी पृथ्वी सारा आकाश उठकर उसका स्वागत करेगा। उसके गतिशील होने पर नवीन गति झनझ्षना उठेगी। कवि चाहता है कि व्यक्ति सन्मार्ग से कभी विचलित न हो। सही दिशा से कभी न भटके, व्यक्ति को प्रग्गति और विकास के चरम शिखर पर पहुंचना है। इस प्रकार कवि ने हमें साहसी, कर्त्तव्यपरायण, आशावादी, प्रगतिशील बनने की प्रेरणा दी है।

(क) वाक्य प्रयोग –

  • प्रगति – उत्थान- कर्मठ बनकर ही मनुष्य जीवन में प्रगति कर सकता है।
  • अरुण – लाल सूर्य – प्रभात होते ही बाल अरुण उदय हो जाता है।
  • शूल – काँटा (दु:ख) – मनुष्य प्रयत्न कर शूल को फूल बना सकता है।
  • शृंखला – बंधन – हमें सभी शृंखलाओं को तोड़ देना चाहिए।
  • पतवार – पार उतारने का साधन – हाथ में पतवार लेकर नाविक थकता नहीं।

(ख) विलोम शब्द –

  • आकाश – पाताल
  • कल्पना – यथार्थ
  • दु:ख-सुख
  • गुरु – लघु
  • फूल – शूल

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

(ग) उपसर्ग लगे शब्द –

  • प्र – प्रगति
  • वि-विपथ
  • अ – अतल.
  • सम् – संकीर्णताएँ

पर्यायवाची शब्द –

  • नभ – आकाश, गगन, आसमान।
  • धरती – धरा, पृथ्वी, भू।
  • फूल – पुष्प, सुमन, कुसुम।
  • सिन्धु – सागर, समुद्र, रत्नाकर।

WBBSE Class 7 Hindi जागरण गीत Summary

जीवनल रिचय

सुकवि श्री सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905 ई० में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में बिंदकी गाँव में एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मालवीय जी के संपर्क से इनके हदय में राष्ट्रीयता की भावना जागी। काव्य रचना के साथ-साथ इन्होंने स्वाधीनता आन्दोलन में भी भाग लिया। इनकी कविता में गाँधीवादी विचारधारा दिखाई पड़ती है।

सन् 1988 ई० में इनका देहावसान हो गया। इनकी प्रमुख रचनाएँ – भैरवी, पूजा गीत, सेवाग्राम, प्रभाती, जय भारत, जय, कुणाल, वासवदता, वासंती आदि हैं। इन्होंने बालोपयोगी कविताएँ भी लिखी हैं। इनकी भाषा सीधी-सादी, सरल तथा बोधगम्य है। इनके काव्य में राष्ट्रीय जागरण, भारत की गरिमा, संस्कृति, ग्राम सुधार, समान सुधार की भावना है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 1

अब न गहरी नींद में तुम सो सकोगे,
गीत गाकर मैं जगाने आ रहा हूँ ।
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूँगा,
अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • अतल – अथाह, बहुत गहरा
  • अरुण – लाल

उदयाचल – पूर्व दिशा में स्थित वह पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है।
आस्ताचल – पश्चिम का कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना मानाजाता है, पश्चिमाचल पर्वत।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘जागरण गीत’ कविता से उद्धृत हैं। इसके कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी हैं।

प्रसंग – इस कविता में कवि ने लोगों को जगाने का प्रयास किया है। कवि लोगों में साहस, कर्म तथा आशावादी भावना का विकास करना चाहता है।

व्याख्या – कवि भारतवासियों को संबोधित करते हुए उन्हें प्रेरणा दे रहा है कि अब वे आलस्य तथा अकर्मण्यता की नींद को त्याग कर कर्मशील बनें। कवि उन्हें जगा कर कर्त्तव्य मार्ग पर लाना चाहता है। अब उन्हें अतल में अस्ताचल की ओर नहीं जाने देगा। वह तो अब जहाँ से बाल रवि उदित होते हैं उसे सजाने के लिए प्रस्तुत है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 2

कल्पना में आज तक उड़ते रहे तुम,
साधना से सिहरकर मुड़ते रहे तुम ।
अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूँगा,
आज धरती पर बसाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ :

  • कल्पना – भावना, अनुमान
  • साधना – किसी कार्य को सिद्ध करना
  • धरती-पृथ्वी
  • सिहर कर – डरकर

व्याख्या – कवि लोगों को कर्त्तव्यशील तथा प्रबुद्ध बनने के लिए कह रहा है। आज तक तो लोग कल्पना की दुनिया में हवाई महल बनाते रहे, सदा भावनाओं में बहते रहे। कार्य तथा साधना से डर कर पीछे हटते रहे, पर अब कवि उन्हें कोरी कल्पना नहीं करने देगा। उन्हें आकाश में उड़ने नहीं देगा। उन्हें पृथ्वी पर बसाने के लिए वह प्रयत्नशील है। अर्थात् कल्पना से हटाकर वास्तविकता की दुनिया में लाने की चेष्टा कर रहा है।

पद – 3

सुख नहीं यह, नींद में सपने सँजोना,
दुख नहीं यह, शीश पर गुरु भार ढोना ।
शूल तुम जिसको समझते थे अभी तक,
फूल में उसको बनाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • शूल – काँटा, कविता में शूल दु:ख का तथा फूल सुख का प्रतीत है।
  • सपने सजाना – बड़ी-बड़ी कल्पना करना।
  • गुरु भार – बड़ा उत्तरदायित्व्व।
  • शीश – मस्तक

व्याख्या – कवि लोगों को सावधान कर रहा है कि बड़ी-बड़ी कल्पनाएँ करने से सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। बड़े कर्त्तव्य का पालन करने, उत्तरदायित्व का निर्वाह करने से दु;ख नहीं होता। जिसे तुम अभी तक काँटा अर्थात् दु:ख समझते रहे, उसे मैं फूल अर्थात् सुख बनाने के लिए प्रयत्नशील हूँ।

पद – 4

देखकर मँझधार को घबरा न जाना,
हाथ ले पतवार को घबरा न जाना।
मैं किनारे पर तुम्हें थकने न दूँगा,
पार मैं तुमको लगाने आ रहा हूँ ।

शब्दार्थ :

  • मंझधार – नदी के बीच की धारा,
  • किनारे – तद
  • पतवार – पार उतारने का साधन।

व्याख्या – कवि लोगों को उत्साहित करने के लिए कह रहा है कि नदी के बीच की धारा को देखकर घबराना नहीं चाहिए। हाथ में पतवार लेकर धैर्य नहीं खोना चाहिए। कवि तट पर उन्हें थकने नहीं देगा। वह लोगों को पार लगाने के लिए प्रस्तुत है। तात्पर्य यह है कि जीवन पथ पर कठिनाइयों को देखकर व्यक्ति को कभी घबड़ाना नहीं चाहिए। कवि उन्हें साहस प्रदान कर सफल करना चाहता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 4 जागरण गीत

पद – 5

तोड़ दो मन में कसी सब श्रृंखलाएँ,
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिन्दु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूँगा,
सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ :

  • श्रृंखलाएँ- बंधन, जंजीर, कड़ियाँ।
  • संकीर्णता- क्रुद्रता, ओछापन, तंगदिली।

व्याख्या : कवि लोगों को उदार महान बनने की प्रेरणा दे रहा है। लोगों के मन में जकड़ी हुई जाति पाँति ऊँच-नीच छुआधूत, धर्म-संप्रदाय आदि की रूढ़ियों अंधविशासों के बंधन तथा क्नुद्रता, ओछापन को तोड़कर सागर की भाँति विशाल बनने की प्रेरणा दी है। कवि कह रहे हैं कि मैं तुम्हें बूँद की क्षुद्र-सीमित दायरे में नहीं रहने दूँगा, बल्कि सागर के विशाल कलेवर के समान विशाल एवं उदार बनाने के लिए तत्पर हूँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 Question Answer – इनसे सीखो

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
फूलों से हमें क्या सीखना चाहिए ?
(क) गाना
(ख) पढ़ना
(ग) हँसना
(घ) खिलना
उत्तर :
(ग) हँसना।

प्रश्न 2.
दीपक हमें क्या सिखाते हैं ?
(क) जलना
(ख) बुझना
(ग) अंधेरा हरना
(घ) अंधेरा करना
उत्तर :
(ग) अंधेरा हरना।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 3.
पृथ्वी सें हमें क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?
(क) सच्ची सेवा करनां
(ख) झगड़ा करना
(ग) कष्ट सहना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सच्ची सेवा करना।

प्रश्न 4.
ज़लधारा से हमें क्या सीखना चाहिए ?
(क) जीवन पथ पर चढ़ना
(ख) सच्ची सेवा करना
(ग) जगना और जगाना
(घ) चरित्र निज गढ़ना
उत्तर :
(क) जीवन पथ पर चढ़ना।

प्रश्न 5.
हरदम उँचे पर चढ़ना किससे सीखना चाहिए ?
(क) जल से
(ख) धुएं से
(ग) लता से
(घ) वृक्षों से
उत्तर :
(ख) धुएं से

प्रश्न 6.
अपने गुरु से क्या सीखना चाहिए ?
(क) खेलना
(ख) दीपक जलाना
(ग) पढ़ना
(घ) गले लगाना
उत्तर :
(ग) पढ़ना।

प्रश्न 7.
जगना और जगाना किससे सीखना चहिए ?
(क) सूरज से
(ख) चन्द्रमा से
(ग) तारा से
(घ) लोगों से
उत्तर :
(क) सूरज से

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 8.
चरित्र को आदर्शवान और व्यावहारिक बनाने के लिए कौन प्रेरणा देता है ?
(क) गुरु
(ख) दीपक
(ग) महान और सज्जन व्यक्ति
(घ) पृथ्वी
उत्तर :
(ग) महान और सज्जन व्यक्ति

प्रश्न 9.
श्रीधर पाठक का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) बंगाल
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) उड़ीसा
उत्तर :
(ग) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 10.
श्रीधर पाठक किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(घ) आधुनिक काल।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-सी रचना श्रीधर पाठक की है ?
(क) भारत-भारती
(ख) भारत गीत
(ग) भारतवर्ष
(घ) भारतमाता
उत्तर :
(ख) भारत गीत।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 12.
लता और वृक्ष से क्या सीखना चाहिए ?
(क) हाथ मिलाना
(ख) सेवा करना
(ग) गले लगाना
(घ) आगे बढ़ना
उत्तर :
(ग) गले लगाना।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें क्या सिखाती हैं ?
उत्तर :
पेड़ की झुकी डालियाँ हमें शीश झुकाना सिखाती हैं।

प्रश्न 2.
सूरज की किरणें हमें क्या शिक्षा देती हैं ?
उत्तर :
सूरज की किरणें हमें जागने और जगाने की शिक्षा देती हैं।

प्रश्न 3.
अपने गुरु से हमें क्या सीखनी चाहिए ?
उत्तर :
अपने गुरु से हमें उत्तम विद्या सीखना चाहिए।

प्रश्न 4.
हमारा चरित्र कौन गढ़ता है ?
उत्तर :
सत्पुरुषों का आदर्श जीवन हमारा चरित्र गढ़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 5.
श्रीधर पाठक का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक का जन्म 11 जनवरी, 1858 ई० में आगरा (उत्तर प्रदेश) जिला के जौंधरी नामक गाँव में हुआ था ।

प्रश्न 6.
श्रीधर पाठक ने किन भाषाओं में कविता लिखी है ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक ने बजभाषा और खड़ी बोली हिन्दी में कविताएँ लिखी हैं।

प्रश्न 7.
श्रीधर पाठक के पिता का नाम क्या था ?
उत्तर :
श्रीधर पाठक के पिता का नाम पण्डित लीलाधर पाठक था।

प्रश्न 8.
श्रीधर पाठक की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
उनकी मृत्यु 13 सितम्बर, 1928 ई० में हो गई ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
हमारे जीवन में सत्पुरुष औरगुरु का क्या योगदान है ? स्पष्ट करे ।
उत्तर :
सज्जन पुरुष और गुरु का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। सत्पुरुषों के जीवन से हमें चरित्र गठन की शिक्षा मिलती है। हमारे अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। गुरु से बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है। शिक्षा के बिना व्यक्ति जीवन में उन्नति नहीं कर सकता। जिन्दगी में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा जरूरी है।

प्रश्न 2.
दीपक की क्या विशेषता है ? हमें उससे क्या शिक्षा लेनी चाहिए ?
उत्तर :
दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर प्रकाश फैला देता है। हमें दीपक से शिक्षा लेनी चाहिए कि हम भी शक्ति भर अपने आस-पास के अंधकार को दूर करें। लोगों के मन के अज्ञान, अशिक्षा को दूर कर उनके मन में ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

प्रश्न 3.
‘इनसे सीखो’ कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘इनसे सीखो’ कविता में कवि ने बच्चों को अपने आस-पास के परिवेश से शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा दी है। कवि ने बच्चों को प्रेरणा दी है कि वे फूलों से हँसना और खुश रहना सीखें। वृक्ष की डालियों से नग्र रहना सीखें। सूर्य की किरणों से प्रात: जागने और दूसरों को जगाना सीखें। लता और वृक्षों से दूसरों से प्रेम करना सीखें। दीपक से आसपास के अंधकार को दूर करने तथा पृथ्वी से प्राणियों की सच्ची सेवा करना सीखें। जल की धारा से सदा जीवन में आगे बढ़ने तथा धुएँ से सदा ऊपर चढ़ना, जीवन में उन्नति करना सीखें। सज्जनों से वरित्र निर्माण तथा गुरु से श्रेष्ठ विद्या ग्रहण करना सीखें। इस प्रकार इन सभी से शिक्षा प्राप्त कर बच्चे जीवन में उन्नति कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
‘इनसे सीखो’ कविता में किस-किस से क्या सीखने की प्रेरणा दी गई है?
उत्तर :
‘इनसे सीखो’ कविता में बच्चों को फूलों से, भौरों से, वृक्ष की डालियों से, सूर्य की किरणों से, लता और वृक्षों से, दीपक और पृथ्वी से, जलधारा से, धुएँ से, सत्पुरुषों से तथा अपने गुरु से सीखने की प्रेरणा दी गई है। फूलों से हँसने की, भौंरों से गुनगुनाने की, वृक्ष की डालियों से मस्तक ड्युकाने, सूर्य की किरणों से जगने और जगाने, लता वृक्षों से गले लगाने, दीपक से अंधकार हरने, पृथ्वी से जीवों की सेवा करने, जल-धारा से जीवन में आगे बढ़ने, धुएँ से ऊँचाई पर चढ़ने, सत्पुरुषों से चरित्र गठन करने तथा गुरु से उत्तम विद्या पढ़ने के लिए सीखने की प्रेरणा दी गई है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

(क) फूलों से नित …………. सीखो शीश झुकाना।
(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘इनसे सीखो’ पाठ से उद्धृत हैं। इसके कवि श्रीधर पाठक हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता की प्रथम संख्या में अर्थ दिया गया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

(ख) जलधारा से सीखो ………… ऊँचे पर ही चढ़ना।
(i) जीवन पथ से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
जीवन-पथ का तात्पर्य है जिन्दगी का रास्ता। व्यक्ति को अपने जीवन में सदा अपने पथ पर-अपने लक्य्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिस प्रकार जल की धारा रुकती नहीं निरंतर अपने रास्ते पर बढ़ती रहती है, उसी प्रकार मनुष्य को सदा चलते रहने चाहिए।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता चार की व्याख्या को देखिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
‘इनसे सीखो’ कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
सुकवि श्रीधर पाठक ने प्रस्तुत कविता में बड़े ही सहज ढंग से हमें विनम्रता, सद्भावना, सेवा, सहानुभूति की भावना तथा जीवन में सच्ची शिक्षा प्राप्त कर प्रगतिशील होने की प्रेरणा दी है। मनुष्य को फूलों जैसा खिला हुआ, हँसता हुआ सदा प्रसन्नचित्त बने रहना चाहिए। भौरे सदा गुनगुनाया करते हैं। मनुष्य को भी उनसे सीख लेकर सदा गुनगुनाते रहना चाहिए। जिस प्रकार वृक्ष की डालियाँ द्रुकी रहती हैं, उसी प्रकार व्यक्ति को भी मस्तक द्युकाकर विन्म बने रहना चाहिए। इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है। सूर्य के उदित होते ही उसकी सुनहली किरणें सभी को जागरण की शिक्षा देती हैं।

उसी प्रकार हमें भी जागृत होने और दूसरों को भी जागरण के लिए उत्साहित करना चाहिए। लताओं और वृक्षों से शिक्षा लेकर हमें दूसरों से प्रेम से मिलना, गले लगना चाहिए। नन्हा सा दीपक अपनी रोशनी से आस-पास के अंधकार को दूर कर देता है, हमें भी उससे सीख लेकर चारों ओर प्रकाश फैलाना चाहिए। पृथ्वी समस्त प्राणियों की सेवा करती है, उसी प्रकार हमें भी सभी प्राणियों की सच्ची सेवा लगनपूर्वक पेम से करनी चाहिए।

कवि ने हमें जीवन में निरंतर उन्नति करने और प्रगतिशील बनने की प्रेरणा दी है। जिस प्रकार जल धारा सदा अपने लक्ष्य की ओर प्रवाहित होती रहती है, वैसे ही मनुष्य को भी सदा जीवन पथ पर लक्ष्य की ओर अग्रसर होते रहना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi इनसे सीखो Summary

जीवन-परिचय :

श्रीधर पाठक जी का जन्म उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के जौंधरी गाँव में सन् 1859 में हुआ था। बज भाषा तथा खड़ीबोली में इन्होंने स्वदेश प्रेम, समाज सुधार तथा देश प्रेम से संबंधित सरस कविताओं की रचना की है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कश्मीर सुषमा, जगत सच्चाई सार, भारत गीत हैं। इनकी रचना ‘एकांतवासी योगी’ में सीधी-सादी खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है । इसमें जनता की रुचि तथा रूप का निर्वाह हुआ है। सन् 1928 में इनकी मृत्यु हो गई।

पद – 1

फूलों से नित हँसना सीखो
भौरों से नित गाना,
तरु की झुकी डालियों से नित
सीखो शीश झुकना।

शब्दार्थ :

  • नित = प्रतिदिन, हमेशा।
  • तरु = वृक्ष, पेड़।
  • हँसना = खुश होना।

संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘इनसे सीखो’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बच्चों को यह नसीहत दी है कि फूलों, भौरों तथा वृक्ष की डालियों से सीख लें ।

व्याख्या : कवि ने बच्चों को प्रेरणा दी है कि वे खिले हुए हंसते फूलों से सदा प्रसन्न बने रहना तथा हँसते रहना सीखें। भौौंरों से सदा गुनगुनाना अर्थात् गाते रहना सीखें तथा वृक्ष की झुकी हुई डालियों से सर्वदा मस्तक झुकाना अर्थात् नम्र बने रहना सीखें। कवि चाहता है कि बच्चे हमेशा हँसते हुए, गाते हुए तथा विनम्र बने रहें।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 2
सूरज की किरणों से सीखो
जगना और जगाना,
लता और वृक्षों से सीखो
सबको गले लगाना।

शब्दार्थ :

गले लगाना = भेंटना, आलिंगन करना।

व्याख्या : इस कविता में कवि ने सूर्य की किरणों तथा लता-वृक्षों से सीखने की प्रेरणा दी है।

कवि ने बच्चों को यह प्रेरणा दी है कि वे सूर्य की किरणों से सबेरे जगना तथा जगाना सीखें। रात बीतते ही सूर्य उदय होता है, सूर्य की किरणों के प्रकाश में बच्चों को भी जाग कर दूसरों को जगाना चाहिए। जिस प्रकार लता और वृक्ष आपस में लिपटते-गले लगते है, उसी प्रकार बच्चों को भी उनसे शिक्षा लेकर आपस में प्रेम से एक दूसरे को गले लगाना चाहिए।

पद – 3

दीपक से सीखो जितना
हो सके अंधेरा हरना,
पृथ्वी से सीखो जीवों की
सच्ची सेवा करना।

शब्दार्थ :

  • दीपक = दीया, दीप ।
  • अंधेरा = अंधकार ।
  • जीवों = प्राणियों।

व्याख्या – इस कविता में कवि ने दीपक तथा पृथ्वी से सीखने की प्रेरणा दी है।,

कवि ने बन्चों से कहा है कि वे जितना हो सके दोपक से अंधकार दूर करने की शिक्षा लें। नन्हा-सा दीपक अपने चारों ओर के अंधकार को दूर कर रोशनी कर देता है। वैसे ही बच्चों को भी दीपक से सीख कर अपने आस-पास के अंधेरे को दूर कर देना चाहिए। जिस प्रकार पृथ्वी सभी प्राणियों की सच्ची सेवा करती है, उसी प्रकार बच्चों को भी पृथ्वी के सभी प्राणियों की सच्चाई के साथ सेवा करने की सीख लेनी चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 4

जलधारा से सीखो आगे
जीवन-पथ पर बढ़ना,
और धुएँ से सीखो हरदम
ऊँचे ही पर चढ़ना।

शब्दार्थ :

  • जलधारा = जल का प्रवाह ।
  • जीवन पथ = जीवन रूपी मार्ग ।
  • हरदम = हमेशा।

व्याख्या – इस कविता में कवि ने बच्चों को जल-धारा तथा धुएँ से सीखने की प्रेरणा दी है।

जल का प्रवाह सदा आगे बढ़ता रहता है। उससे सीख लेकर बच्चों को भी सदा अपने जीवन के मार्ग पर अर्थात् अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जिस प्रकार आग से निकलने वाला धुआँ सदा ऊपर ही चढ़ता रहता है, उसी प्रकार बच्चों को भी धुएँए से सीख लेकर हमेशा ऊँचाई पर चढ़ते रहना चाहिए अर्थात् सदा उन्नति करते रहना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 2 इनसे सीखो

पद – 5

सत्पुरुषों के जीवन से सीखो
चरित्र निज गढ़ना,
अपने गुरु से सीखो बच्चों
उत्तम विद्या पढ़ना।

शब्दार्थ :

  • सीख = शिक्षा, परामर्श।
  • गढ़ना = रचना, बनाना।
  • निज = अपना।
  • उत्तम = श्रेष्ठ।
  • सत्पुरुष = सज्जन व्यक्ति।

व्याख्या – प्रस्तुत कविता में कवि ने बच्चों को सज्जन लोगों तथा गुरु से सीखने की प्रेरणा दी है।

कवि ने बच्चों को गह परामर्श दिया है कि वे सज्जन पुरुषों के जीवन से शिक्षालेकर अपने चरित्र का निर्माण करें। अपने गुरु से वे सदा श्रेष्ठ अच्छी विद्या की शिक्षा प्राप्त करें। गुरु से अन्छी विद्या सीख कर ही वे जीवन में उन्नति कर सकते हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 Question Answer – भारत वर्ष

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निर्वासित राजकुमार कौन थे?
(क) अशोक
(ख) राम
(ग) दधीचि
(घ) सिद्धार्थ
उत्तर :
(ख) राम

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 2.
भारतवर्ष कविता के कवि हैं :
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तर :
(ग) जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 3.
रताकर का शाब्दिक अर्थ है :
(क) गागर
(ख) सागर
(ग) नदी
(घ) रत्न का आकार
उत्तर :
(ख) सागर

प्रश्न 4.
दधीचि कौन थे?
(क) एक राजा
(ख) बौद्ध भिक्षु
(ग) एक ऋषि
(घ) एक भिखारी
उत्तर :
(ग) एक ऋषि

प्रश्न 5.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) इलाहाबाद
(ख) काशी
(ग) महिषादल
(घ) दरभंगा
उत्तर :
(ख) काशी ।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 6.
जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ था?
(क) सन् 1889 में
(ख) सन् 1890 में
(ग) सन् 1891 में
(घ) सन् 1888 में
उत्तर :
(क) सन् 1889 में।

प्रश्न 7.
जयशंकर प्रसाद के पूर्वज किस नाम से प्रसिद्ध थे?
(क) मुरली बाबू
(ख) सुंघनी साहू
(ग) मंगल्ला बाबू
(घ) जीवन बाबू
उत्तर :
(ख) सुंघनी साहू।

प्रश्न 8.
जयशंकर प्रसाद किस वाद के कवि हैं?
(क) छाम्यावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) प्रयोगवाद
(घ) जनवाद
उत्तर :
छायावाद।

प्रश्न 9.
हिमालय का औँगन किस देश को कहा गया है ?
(क) भारतवर्ष
(ख) श्रौलंका
(ग) नेपाल
(घ) भूटान
उत्तर :
(क) भारतवर्ष

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 10.
‘रत्नाकर’ का शाब्दिक अर्थ है –
(क) रत्न में आकार
(ख) सागर
(ग) नदी
(घ) रत्ल का आकार
उत्तर :
(ख) सागर

प्रश्न 11.
किसने पहनाया हीरक हार ?
(क) तम ने
(ख) उषा ने
(ग) मोहन ने
(घ) साहेब ने
उत्तर :
(ख) उषा ने

प्रश्न 12.
महर्षि दधीचि ने देवराज इन्द्र को क्या दान दिया ?
(क) हड्डुयाँ
(ख) रल
(ग) देवलोक
(घ) जल
उत्तर :
(क) हड्डियाँ

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
द्धीचि ने क्या दान किया था तथा क्यों?
उत्तर :
दर्धीचि ने अस्थि दान किया था। उनकी हड्डी से इन्द्र ने वज का निर्माण कर वृत्रासुर का वध किया। अत: देवताओं की विजय तथा असुरों की पराजय के लिए दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान किया।

प्रश्न 2.
बौद्ध भिभ्यु बनकर घूमनेवाले राजा कौन थे? इसका कारण क्या था?
उत्तर :
बौद्ध भिक्षु बनकर घूमने वाले राजा अशोक थे। बौद्ध धर्म के प्रचार तथा मानवता के कल्याण के लिए सम्वाट अशोक घर-घर जाकर दौन-दुखियों के प्रति द्या तथा करुण भावना व्यक्त करते थे।

प्रश्न 3.
निर्वासित राजा की प्रसिद्धि का क्या कारण है ?
उत्तर :
निर्वांसित राजकुमार राम ने रावण का विनाश करने के लिए तथा देवताओं, ॠषियों, और मानवता के संकट को दूर करने के लिए सागर की छाती पर सेतु का निर्माण तथा रावण को पराजित कर देव संस्कृति की रक्षा की। यही उनकी प्रसिद्धि का कारण है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 4.
हिमालय का आँगन किसे और क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
हिमालय का आँगन भारतवर्ष को कहा गया है, क्योंकि भारत हिमालय के चरणों में स्थित है। हिमालय भारत का गौरव है । हिमालय का सांस्कृतिक महत्त्व है।

प्रश्न 5.
जयशंकर प्रसाद की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर :
जयशंकर पसाद की मृत्यु 1937 ई० में हुई थी ।

प्रश्न 6.
जयशंकर प्रसाद के पिता का क्या नाम था ?
उत्तर :
जयशांकर प्रसाद के पिता का नाम सुँघनी साहू था।

प्रश्न 7.
सुष्टि का बीज किसने बचाया ?
उत्तर :
सृष्टि का बौज मनु ने बथाया।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 3 भारत वर्ष

प्रश्न 8.
पुरन्द्र किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
पुरन्दर इन्द्र को कहा जाता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) भारत के प्राचीन गौरव का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
कविवर जयशंकर म्रसाद ने ‘भारतवर्ष’ कविता में भारत के अतीत का गौरवमय चित्रण किया है। सर्वम्मथम हिमालय की गोद में स्थित भारत में ही सभ्यता और ज्ञान की किरणें फूटीं। संगीत के सात स्वरो को सरस्वती ने वीणा के तारों से झंकृत किया। सामवेद की रचना इसी भारत भूमि में हुई । हमारे आदि पुरुष मनु ने बीज रूप में सृष्टि को बचाया। महर्षि दर्धीचि का अस्थिदान हमारी जातीयता के विकास का उदाहरण है।

उनकी अस्थि से देवराज इन्द्र ने वज्र बनाकर वृत्रासुर का वध किया। इस प्रकार देव-संस्कृति की रक्षा हुई। निर्वासित होते हुए भी त्री राम ने राक्षसी संस्कृति के विनाश तथा रावण को पराजित करने के हेतु समुद्र पर सेतु का निर्माण कर दिया। भगवान बुद्ध और महावीर ने धर्म के नाम पर हो रही नर बलि तथा पशु बलि को समाप्त कर विश्व को शांति और अहिसा का संदेश दिया। भारतीय वीरों ने तलवार के द्वारा विजय के स्थान पर धर्म और प्रेम की विजय को विश्व में प्रचारित किया।

सामाट अशोक भिक्षु बनकर घूम-घूम कर शांति, अहिंसा और प्रेम का प्रचार करते रहे। सम्माट चन्द्रगुप्त ने युद्ध में यवन सेनापति सेल्युकस को पराजित करके भी उसे प्राण दान देकर अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। हमारे पूर्वज भारतवासी चरित्रवान, शक्तिशाली, दृढ़ प्रतिश तथा परोपकारी थे। शब्ति सम्पन्न होकर भी विनप्र थे।

(ख) ‘पुरंदर ने पवि से है लिखा अस्थियुग का मेरे इतिहास’ में वर्णित इस पौराणिक कथा का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
देवासुर संग्राम की घटना का युग अस्थियुग था। देवताओं के राजा इन्द्र संग्राम में असुरों के सेनापति वृत्रासुर से भयमीत थे। जहा के निर्देश से वे महर्धि दधीचि के पास आए, क्योंकि दधीचि की हद्धियों से निर्मित अस्व से ही वृद्रासुर का वध हो सकता था। राक्षस राज वृश्रासुर के संहार के लिए देवराज इन्द्र ने महार्षि दधीीचि से अस्थिदान की माँग की। महर्षि ने देवत्व की रक्षा के लिए सहर्ष इन्द्र का प्रस्ताव स्वीकार कर प्राण त्यागकर अपनी हड्डियाँ दे दीं। इन्द्र ने उनकी अस्थि से वज्र का निर्माण कर राक्षस राज वृत्रासुर का संहार किया। दधीचि का यह अस्थि त्याग भारतीय जाति के त्याग का अनुपम उदाहरण है।

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(ग) ‘भारतवर्ष’ कविता का मूल सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
प्रसादजी ने प्रस्तुत कविता में भारत के अतीत का गौरव, भारतीयों की जातीय, चारिप्रिक विशेषताओं का वर्णन किया है।
सर्वपथम उषा ने हिमालय की गोद में स्थित भारत को अपनी स्वर्णिम किरणों का उपहार दिया। सर्वप्रथम भारतवासी ही ज्ञान संपन्न हुए और विश्व के अन्य भागों में भी ज्ञान का विस्तार और प्रसार किए। हमारे आदि पुरुष मनु ने पेलय से सृष्टि को यनाया। यहीं पर सरस्वती की वीणा के तारों से संगीत के सातों स्वर फूटे। सामवेद की रचना इसी भारत भूमि में हुई। महार्षि दर्धीचि ने अस्थिदान देकर राक्षस राजा वृन्रासुर का संहार किया था।

राजकुमार राम ने सागर की छाती पर सेतु का निर्माण कर रावणत्व का समूल नाश किया। भगवान बुद्ध तथा स्वामी महावीर ने पशु बलि प्रथा को बन्द कर विश्व को प्रेम, शांति, अहिंसा का उपदेश दिया। सम्माट अशोक ने भिक्षु बनकर घर-घर जाकर दया, करुणा का पाठ पदा़ाया। समाट चन्द्रगुप्त ने रणक्षेत्र में यवन सेनापति सेल्युकास को पराजित करके भी प्राणदान दे दिया। हमने चीन को धर्म दृष्टि, लंका तथा सिंहल को शील की शिक्षा दी।

जातियों का उत्थान-पतन यहाँ होता रहा। विदेशियों के बर्बर आक्रमणों को झेलते हुए भी हम अडिग बने रहे । हमारी जन्मभूमि यही है, हम कहीं बाहर से नहीं आए हैं। हमने किसी का कुछ भी छीना नहीं। हम परोपकारी अतिधि सेवी, दृढ़, प्रतिश, साहसी तथा शांति के हिमायती रहे। हम भारत के गौरव की रक्षा के लिए सर्वस्व त्याग के लिए मस्तुत रहेंगे। इस प्रकार इस कविता में देश प्रेम तथा राष्ट्रोय भावना का चित्रण हुआ है।

(घ) निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या ससन्दर्भ कीजिए ।

प्रश्न 1.
हमारे संचय में था दान अतिधि थे सदा हमारे देव।
उत्तर :
यह अंश कविवर जयशंकर प्रसाद की रचना ‘भारतवर्ष’ कविता से उद्धृत है। इस पंक्ति में कवि ने अतीत मे भारतीयों की दानशीलता तथा उदारता का चिद्रण किया है। हमारे पूर्वज अपने सुख के लिए, भोग की कामना के लिए धन-संचय नही करते थे। अपने अर्जित धन से गरीबों-अनाधों को दान देकर उनकी सहायता करते थे। उनमे परोपकार की भावना थी। अतिथियों का देवतुल्य सत्कार करते थे। वे सच्चे अर्थों में अतिथि सेवी थे। अतिथि देवो भव’ उनका सिद्धांत था।

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प्रश्न 2.
बचाकर बीज रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय की शीत।
उत्तर :
हमारे आदि पुरुष ने बीज रूप में सृष्टि की रक्षा की। प्रलय के समय सबय कुछ जल- मग्न हो गया। अकेले मनु एक नाव में बैठकर हिमालय की चोटी पर पहुँच गए। प्रयय कालीन शीत लहरी को सहकर भी निडर बने रहे। श्रद्धा के सहयोग से उन्होंने सृष्टि को बचाया।

प्रश्न 3.
जिएँ तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष।
उत्तर :
यह अंश ‘भारतवर्ष’ कविता से उद्धृत है। इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद है।
यहाँ कवि की राष्ट्रीय भावना तथा देश प्रेम की इच्छा व्यक्त हुई है। कवि का कथन है कि हमारा जीवन स्वदेश भारतवर्ष के लिए है। अतः हम जोएँ तो भारत के लिए और मरें तो भारत के लिए। हमें इस बात का अभिमान तथा हर्ष होना चाहिए कि हमारा जीवन अपने देश के लिए ही है। हमें स्वदेश के लिए अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व अर्षण कर देने के लिए सदैव प्रस्तुत रहना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दधीचि के त्याग को कवि ने जातीयता का विकास क्यों कहा है?
उत्तर :
दधीचि एक महान त्यागी-तपस्वी कषि थे। भारत के इतिहास में वह युग अस्थियुग था। देवराज इन्द्र असुरों के सेनापति वृत्रासुर से संत्रस्त थे। उसे पराजित करने के लिए इन्द्र दधीचि ॠषि के पास जाकर उनसे उनकी अस्थियों (हड्युयों) की याचना की। देव जाति की रक्षा के लिए महर्षि दरीचि अपनी अस्थियों का दान देकर अनुपम त्याग का परिचय दिया।

दधीचि की अस्थियों से वज्र बनाकर इन्द्र ने वृत्रासुर का वध कर देवजाति की रक्षा की। इस प्रकार इन्द्र ने अस्थियुग के इतिहास को वज्र से लिखा। ॠषि दधीचि के इस अनुपम त्याग और बलिदान से स्षष्ट हो जाता है कि उस युग में सामाजिक स्तर पर भारतीय जाति कितनी विकसित, कितनी महान तथा आदर्शमयी थी।

प्रश्न 2.
कवि ने भारत को प्रकृति का पालना क्यों कहा है?
उत्तर :
हमारा देश प्राकृतिक शोभा तथा सुषमा का आँगन है। यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता निराली है। पर्वतों, वन प्रदेशों, नदियों तथा शस्य-श्यामला धरती का सौन्दर्य अतीव मोहक एवं निराला है। षड्कतुओं की शोभा अपने आप में चित्ताकर्षक है। इसीलिए कवि ने इसे प्रकृति का पालना कहा है।

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प्रश्न 3.
पाठ में आए पौराणिक तथा ऐतिहासिक पुरुषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मनु – पौराणिक कथाओं के अनुसार मनु हमारे आदि पुरुष हैं। प्रलय काल में सृष्टि के जलमग्न हो जाने पर मनु एक नाव पर सवार हो गए। उनकी नाव उस बाढ़ में उत्तर गिरि से टकराई। वहाँ उतर कर मनु ने श्रद्धा के संपर्क से बीज रूप में सृष्टि को बचाया।

पुरन्दर (इन्द्र) – ये देवताओं के अधिपति तथा स्वर्ग के राजा थे। देवासुर संग्राम में वे देवजाति के सेनापति थे। वृत्रासुर का वध कर इन्होंने देवजाति की रक्षा की।

राम – अयोध्यापति महाराज दशरथ के पुत्र राम भगवान के अवतार माने जाते है। निर्वासित होते हुए भी राम ने सागर की छाती पर सेतु का निर्माण कर रावण को समाप्त कर देवत्व की रक्षा की।

बुद्ध – कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन के पुत्र राजकुमार गौतम ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध कहलाए। इन्हें भगवान का अवतार माना जाता है। ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी) में दिया।

अशोक – ये भारत के प्रसिद्ध सम्राट थे। प्रजा की भलाई के लिए इन्होंने अनेक कल्याण- कारी योजनाओं को मूर्तरूप दिया। बौद्ध धर्म स्वीकार कर ये भिक्षु बनकर, करुणा, दया तथा प्रेम का संदेश देने लगे।

चन्द्रगुप्त – चन्द्रगुप्त भारत के प्रतापी सम्माट थे। महान् नीतिज्ञ चाणक्य के शिष्य थे। सम्राट अशोक इनके पौत्र थे। चन्द्रगुप्त यवन सेनापति सेल्युकस को युद्ध में पराजित कर उसे प्राण दान दिया। सेल्युकस की पुत्री राजकुमारी हेलेन (कार्नेलिया) से शादी की। इस प्रकार उन्होंने यवन को दया का दान दिया।

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भाषा-बोध

(क) उपसर्ग एवं मूल शब्द अलग कीजिए ।

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(ख) संधि विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए।
हिमालय – हिम + आलय – स्वर संधि
संसृति – सम् + सृति – व्यंजन संधि
निर्वासित – नि: + वासित – विसर्ग संधि
संचय – सम् + चय – व्यंजन संधि
रत्नाकर – रत्न + आकर – स्वर संधि

(ग) सामासिक पदों का विग्रह कर समास का नाम लिखिए ।
सप्त स्वर – सात स्वरों का समाहार – द्विगु समास
उत्थान-पतन – उत्थान और पतन – द्वनन्द् समास
शान्ति संदेश – शांति का संदेश – तत्पुरुष समास
अस्थियुग – अस्थि का युग – तत्पुरुष समास

(घ) प्रत्ययों से बने शब्द –
इत – निर्वासित
ता – जातीयता, नम्रता
यों – जातियों
ई – हमी, वही
आ- लिखा

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(ङ) अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग कीजिए-
पुरन्दर – इन्द्र – पुरन्दर ने वज्र से वृत्रासुर का वध किया।
रत्नाकर – समुद्र – राम ने रत्नाकर की छाती पर पुल बना दिया।
सर्वस्व – सबकुछ – हमें स्वदेश पर सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहिए।
नम्रता – विनय – हमारे पूर्वजों में सदा नम्रता बनी रही।
अभिनंदन – प्रशंसा, स्वागत-हमें महान पुरुषों का अभिनंदन करना चाहिए।

WBBSE Class 7 Hindi भारत वर्ष Summary

जीवन वरचचय

जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई० में वाराणसी के एक सुप्रसिद्ध वैश्य कुल में हुआ था। स्कूली शिक्षा मात्र सातवीं कक्षा तक मिली, तदनंतर घर पर ही इन्होंने हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, बंगला आदि का अध्ययन किया।1937 ई० में इनका देहावसान हो गया। घरेलू समस्याओं के बावजूद प्रसादजी अध्ययन, मनन, पर्यवेक्षण तथा लेखन से विमुख न हुए। इन्हें जन्म से ही कवि हृदय मिला था। प्रसादजी की भाषा साहित्यिक, परिमार्जित, संस्कृत निष्ठ होते हुए भी बोधगम्य है।

उसकी सरलता तथा प्रवाह मन को मुग्ध कर लेता है। ये छायावाद के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्रसादजी बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न साहित्यकार थे। शब्द विन्यास, वस्तु चयन, अलंकार योजना, भाषा की सरलता आदि सभी दृष्टियों से प्रसाद जी का काव्य हिन्दी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता हैं। प्रसादजी अपने युग के सबसे बड़े पौरुषवान कवि थे।

इनकी काव्य रचनाएँ- लहर, झरना, आँसू, महाराणा का महत्त्व तथा कामायनी आदि हैं। नाटक-स्कदंगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुव स्वामिनी, जनमेजय का नागयज्ञ आदि। कहानी संग्रह-छाया, प्रतिध्वनि, इन्द्रजाल आँधी, आकाशदीप। उपन्यास-कंकाल, तितली, इरावती। प्रसादजी की रचनाओं में प्रेम-सौन्दर्य तथा देश प्रेम की मनोरम झाँकी मिलती है।

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पद – 1

हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार,
उषा ने हँस अभिनंदन किया और पहनाया हीरक हार।
जगे हम, लगे जगाने विश्व, लोक में फैला फिर आलोक,
व्योम तम पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।।

शब्दार्थ :

  • किरण – रश्मि व्योम – आकाश
  • उपहार – भेंट
  • आंगन – प्रांगण
  • हीरक-हीरा
  • किरणों का उपहार – ज्ञान का प्रकाश
  • संसृति – संसार, सृष्टि
  • हम – भारतवासी
  • तम पुंज – अंधकार का समूह
  • आलोक-प्रकाश
  • अखिल – संपूर्ण, समस्त
  • अशोक – शोक रहित, खुश
  • उषा- प्रभात, अरुणोदय

सन्दर्भ – प्रस्तुत अंश ‘भारतवर्ष’ शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद हैं।

प्रसंग – इस अंश में कवि ने भारत के गौरवपूर्ण अतीत का वर्णन किया है। सर्वप्रथम भारत में ही ज्ञान-विज्ञान का प्रकाश फैला।

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कथन है कि सर्वप्रथम हिमालय प्रांगण भारत में ज्ञान रूपी सूर्य का उदय हुआ। प्रभात की किरणों ने हँसकर हीरों का हार पहनाकर उसका स्वागत किया। भारत ही सर्वपथम ज्ञान की ज्योति से सुशोभित हुआ। भारतवासियों ने ज्ञान संपन्न होकर सारे विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। सारा संसार ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो उठा। सारे विश्व का अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट हो गया। संपूर्ण संसार शोक रहित हो गया। सर्वत्र प्रसन्नता का वातावरण छा गया।

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पद – 2

विमल वाणी ने वीणा ली, कोमल-कमल-कर में सप्रीत।
सप्तस्वर सप्तसिन्धु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम संगीत।
बचाकर बीज-रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय का शीत।
अरुण-केतन लेकर निज हाथ, वरुण-पथ में हम बढ़े अभीत।।

शब्दार्थ :

  • विमल – स्वच्छ, निर्मल
  • वाणी – सरस्वती
  • कर – हाथ
  • सम्रीत – प्रेमपूर्वक
  • सप्तस्वर – संगीत के सात स्वर
  • वरुण पथ – जल मार्ग
  • साम संगीत – साम वेद का संगीत
  • सृष्टि – संसार
  • प्रलय – सर्वनाश
  • अरुण केतन- लाल पताका
  • सप्त सिन्धु – सप्त सैन्धव प्रदेश
  • अभीत – निडर

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कथन है कि ज्ञान की देवी दिव्य रूप वाली सरस्वती ने अपने कमल के समान कोमल हाथों में वीणा धारण कर सर्वप्रथम संगीत के स्वर निःसृत की। उनकी वीणा से नि:सृत संगीत के सातों स्वर इसी आर्यावर्त (सप्त सिन्धु – सप्त सैन्धव) में गूँज उठे। संगीत शास्त्र के आदि ग्रंथ सामवेद की रचना इसी देश में हुई। सामवेद के संगीत के स्वर सर्वप्रथम इसी देश में प्रसारित हुए। प्रलयकालीन जल प्लावन के समय भारतपुत्र मनु बीज के रूप में सृष्टि को विनाश से बचाये। नाव पर बैठ कर प्रलयकालीन शीत लहरी को सहते हुए उन्होंने सृष्टि का उद्धार किया। हमारे पूर्वज भारतवासी ने स्वदेश की लाल पताका लेकर जल मार्ग से जाकर प्रेम, सद्भावना का संदेश दिया।

पद – 3

सुना है दधीचि का वह त्याग, हमारा जातीयता-विकास।
पुरन्दर ने पवि से है लिखा, अस्थि-युग का मेरे इतिहास।
सिन्धु-सा विस्तृत और अथाह, एक निर्वासित का उत्साह।
दे रही अभी दिखायी भग्न, मग्न रत्नाकर में वह राह ।।

शब्दार्थ :

  • जातीयता – जाति का भाव, गुण
  • निर्वासित – निकाला हुआ (राम)
  • पवि – वज्र
  • अस्थि – हड्डी
  • राह – रास्ता, मार्ग
  • पुरन्दर – इन्द्र
  • उत्साह – जोश
  • भग्न – डूबे हुए
  • रत्नाकर – समुद्र
  • भग्न-खण्डहर

व्याख्या – दधीचि एक महर्षि थे। देवासुर संग्राम में असुरों के सेनापति वृत्रासुर के संहार के लिए इन्द्र ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थियों (हड्डियों) की माँग की। उनकी हड्डी से वज्र का निर्माण कर इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। दधीचि का यह अस्थि त्याग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। महर्षि दधीचि ने सहर्ष अस्थिदान कर यह स्पष्ट कर दिया कि त्याग, बलिदान आदि गुणों के क्षेत्र में यह त्याग जातीयता के विकास को प्रमाणित करता है। इन्द्र ने वज्र से वृत्रासुर का संहार कर अस्थियुग के इतिहास को अमर बना दिया। निर्वासित राम का उत्साह सागर की भाँति अथाह और असीम था। राम ने रावण का विनाश करने के लिए सागर की छाती पर सेतु बाँध कर लंका पर चढ़ाई की थी। सागर में सेतु के भग्नावशेष आज भी जल में दिखाई पड़ते हैं।

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पद – 4

धर्म का ले लेकर जो नाम, हुआ करती बलि, कर दी बन्द।
हमीं ने दिया शान्ति-सन्देश, सुखी होते देकर आनन्द।
विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम ।
भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाते घर-घर घूम ।।

शब्दार्थ :

  • बलि – वह पशु जो किसी देवता के निमित्त मारा जाए
  • भिक्षु – संन्यासी
  • धूम – प्रसिद्धि
  • सम्राट – महाराजाधिराज
  • आनंद – खुशियाँ

व्याख्या – प्राचीन काल में यज्ञों में देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धर्म के नाम पर पशुबलि की प्रथा प्रचलित थी। धर्म के नाम पर होने वाली इस बलि-प्रथा को भगवान बुद्ध तथा महावीर ने अपने उपदेशों द्वारा बन्द करवाया। सारे विश्व को हमने प्रेम, शांति तथा अहिंसा का दिव्य संदेश दिया। हम भारतवासी दूसरों को आनंद प्रदान कर स्वयं सुखी होते थे।

तलवार द्वारा बर्बरतापूर्ण विजय में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि धर्म के प्रचार-प्रसार से विश्व में अपनी कीर्ति स्थापित करते थे। इसी देश में सम्राट आशोक बौद्ध धर्म स्वीकार कर भिक्षु के रूप में घूम-घूम कर धर्म का प्रचार करते रहे। वे घर-घर जाते और सभी को दया तथा करुणा का उपदेश देते थे।

पद – 5

यवन को दिया दया का दान, चीन को मिली धर्म की दृष्टि ।
मिला था स्वर्ण-भूमि को रत्न, शील की सिंहल को भी सृष्टि ।
किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं ।
हमारी जन्म भूमि थी यहीं, कहीं से हम आये थे नहीं ।।

शब्दार्थ :

  • यवन – यूनान के निवासी स्वर्ण
  • भूमि – वर्मा, सुमात्रा
  • रत्न – मणि
  • पालना – झूला
  • शील – उत्तम स्वभाव, आचरण
  • सृष्टि – संसार

व्याख्या – भारतवर्ष के सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने युद्ध भूमि में यवन सेनापति सेल्युकस को पराजित कर उस पर दया दिखलाते हुए प्राण दान दिया। चीन को धर्म-दृष्टि, वर्मा, सुमात्रा को, त्रित्न (ज्ञान, दर्शन, चरित्र) की तथा लंका को शील की शिक्षा देकर उपकृत किया। भारतीयों ने किसी भी देश या जाति से बलपूर्वक कुछ नहीं प्राप्त किया। यह देश प्राकृतिक शोभा, सुंदरता तथा सुषमा का आंगन है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता अनुपम है । हम भारतीय इसी देश के मूल निवासी हैं। हम आर्यों की संतान हैं। आर्य बाहर से यहाँ आए, यह कथन भ्रमपूर्ण तथा असत्य है। अत: आर्यों का मूल देश भारत ही है। हम कहीं बाहर से नहीं आए थे।

पद – 6

जातियों का उत्थान-पतन, आँधियाँ झड़ीं प्रचण्ड समीर ।
खड़े देखा, झेला हँसते, प्रलय में पले हुए हम वीर ।
चरित के पूत, भुजा में शक्ति, नप्रता रही सदा सम्पन्न ।
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न ।।

शब्दार्थ :

  • उत्थान – प्रगति
  • पतन – विनाश
  • पूत – पवित्र नम्रता – विनय
  • गौरव – बड़प्पन, आदर
  • विपन्न – दु:खी
  • प्रचंड – उग्र, भयंकर
  • समीर – हवा
  • गर्व – स्वाभिमान
  • सम्पन्न – धनी, परिपूर्ण

व्याख्या – हमारे देश में कई जातियों का विकास हुआ, लेकिन कालक्रम से वे नष्ट भी हो गये। इस देश पर कई बार विदेशी लुटेरों तथा विजय एवं धन की कामना करने वाले विजेताओं के आक्रमण हुए। हमने अशांति, संकट और आक्रमण रूपी आँधियों तथा तूफानों का सामना किया। वीर भारतवासी उन भयंकर संकटों को सहते रहे, हँसते हुए जूझते रहे। पर कभी डरे नहीं, साहस नहीं छोड़े, सदा स्थिर बने रहे। वीरतापूर्वक मुकाबला करते रहे। हम प्रलय जैसी विभीषिका को भी पार कर चुके हैं। हमारा चरित्र पवित्र था। हम शारीरिक शक्ति से भी सम्पन्न थे। फिर भी अतिशय विनम्र तथा शालीन बने रहे। हृदय में स्वाभिमान की भावना भरी हुई थी। हम किसी की विपन्नता, अभाव को नहीं देख सकते थे। पर सेवा तथा परोपकर की भावना से परिपूर्ण थे।

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पद – 7

हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव ।
वचन में सत्य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव ।
वही है रक्त, वही है देश, वही साहस है, वैसा मान ।
वही है शान्ति, वही है शक्ति, वही हम दिव्य आर्य-सन्तान ।
जिएँ तो सदा उसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष ।
निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।।

शब्दार्थ :

  • संचय – संग्रह
  • वचन – वाणी
  • टेव – हठ, दृढ़ता
  • अभिमान – गर्व
  • निछावर-उत्सर्ग
  • अतिथि – मेहमान
  • प्रतिज्ञा – प्रण, शपथ
  • दिव्य – भव्य, अलौकिक
  • हर्ष – खुशी, आनंद
  • सर्वस्व – सब कुछ

व्याख्या – हम भारतवासी परोपकार तथा दान के लिए धन-संग्रह करते थे। स्वार्थ के लिए नहीं। अतिथि का सम्मान देवता की तरह करते थे। हमारी वाणी में सत्य का संचार था। हृदय में तेजस्विता थी, प्रतिज्ञा में दृढ़ता थी। प्राण देकर की हुई प्रतिज्ञा का पालन करते थे। हम भारतवासी आर्यों की मूल संतान हैं। हमारी नसों में उन्हीं का खून विद्यमान है। उन्हीं की भाँति हममें साहस तथा ज्ञान है। हम उन दिव्य आर्यों के वंशज हैं, इसलिए हम में वही शान्ति तथा शक्ति है। हममें हर्ष तथा स्वाभिमानपूर्वक यह भाव होना चाहिए कि हमारा जीवन स्वदेश भारत के लिए है। हम अपना तन, मन, धन अर्थात् सर्वस्व प्यारे स्वदेश के लिए न्योछावर कर दें। यही प्यारा देश हमारी जन्मभूमि है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 1 वृंद के दोहे to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 Question Answer – वृंद के दोहे

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
वृंद किस काल के कवि हैं ?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर :
(ग) रीतिकाल।

प्रश्न 2.
कवि वृंद के पिता का क्या नाम था ?
(क) रूपजी
(ख) स्वरूपजी
(ग) भूपजी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रूपजी।

प्रश्न 3.
वृंद के गुरु कौन थे ?
(क) रामानंद
(ख) तारा पंडित
(ग) नरहरिदास
(घ) बल्लभाचार्य
उत्तर :
(ख) तारा पंडित।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 4.
वृंद किसके दरबारी कवि थे ?
(क) अकबर के
(ख) शाहजहाँ के
(ग) औरंगजेब के
(घ) बहादुरशाह के
उत्तर :
(ग) औरंगजेब के।

प्रश्न 5.
युद्ध में क्या शोभा नहीं देता हैं ?
(क) तलवार
(ख) वीरता
(ग) श्रृंगार
(घ) भाला
उत्तर :
(ग) शृंगार।

प्रश्न 6.
सौर का क्या अर्थ हैं ?
(क) सूर्य
(ख) चादर
(ग) पेड़
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चादर ।

प्रश्न 7.
विष को कंठ में किसने बसाया हैं ?
(क) बह्मा ने
(ख) विष्णु ने
(ग) शिव ने
(घ) इन्द्र ने
डत्तर :
(ग) शिव ने।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार सब लोग किसकी सहायता करते हैं ?
(क) निर्बल की
(ख) सबल की
(ग) दुर्बल की
(घ) इनमें से किसी की नहीं
उत्तर :
(ख) सबल की

प्रश्न 9.
हमें दान किसको देना चाहिए ?
(क) हीन को
(ख) प्रवीन को
(ग) दीन को
(घ) किसीं को नहीं
उत्तर :
(ग) दीन को

प्रश्न 10.
कौन आग को बढ़ा देता है और दीपक को बुझा देता है ?
(क) पानी
(ख) बादल
(ग) हवा
(घ) वर्षा
उत्तर :
(ग) हवा

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दान किसको देना चाहिए ?
उत्तर :
दान दीन को अर्थात् गरीब व्यक्ति को देना चाहिए।

प्रश्न 2.
विद्या की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम तथा उद्यम करना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 3.
मीठी बोली बोल कर तोता कहाँ कैद हो जाता है ?
उत्तर :
मीठी बोली बोलकर तोता पिंजड़े में कैद हो जाता है।

प्रश्न 4.
कौन अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है ?
उत्तर :
दुष्ट अर्थात् नीच व्यक्ति अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता है।

प्रश्न 5.
विष कौन-सा गुण नहीं त्यागता है ?
उत्तर :
विष अपनी स्यामला अर्थात् कालिमा गुण को नहीं त्यागता है।

प्रश्न 6.
कवि वृंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
कवि वृदद का जन्म 1643 ई० मे बीकानेर के मेड़ता नामक गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
कवि वृंद ने किस प्रकार की रचनाएँ लिखी हैं ?
उत्तर :
कवि वृंद ने रीति और नीतिपरक रचनाएँ लिखी हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 1 वृंद के दोहे

प्रश्न 8.
वृंद की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर :
बारहमासा, नयन पचीसी, यमक-सतसई, इत्यादि वृंद की कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं।

प्रश्न 9.
प्यास कहाँ नहीं बुझती हैं?
उत्तर :
रीते सरवर अर्थात् सूखे तालाब के पास जाने से प्यास नहीं बुझुती है।

प्रश्न 10.
औषधि किसको देनी चाहिए ?
उत्तर :
औषधि बीमार व्यक्ति को देनी चाहिए।

प्रश्न 11.
सबकी चिंता कौन करता है ?
उत्तर :
सबकी चिंता ईश्वर करता है।

प्रश्न 12.
रिश्ता तोड़कर जोड़ने पर क्या होता है?
उत्तर :
रिश्ता तोड़कर पुनः जोड़ने पर मन में एक गाँठ पड़ जाती है अर्थात् शंका रह जातीं है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दुष्ट की दुष्टता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
दुष्ट व्यक्ति कभी भी अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। उसे कितना ही बड़ा स्थान मिल जाय अथवा बड़े लोगों की संगति मिल जाय पर वह अपनी दुष्टता को, अपनी बुराइयों को नहीं छोड़ पाता। जैसे विष अपने स्वाभाविक धर्म-गुण को नहीं छोड़ता, उसी प्रकार दुष्ट लोग भी अपने दोष को कभी नहीं छोड़ सकते।

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प्रश्न 2.
बिना अवसर की बात कैसी लगती है ?
उत्तर :
बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। शृंगार की बात संभी को अच्छी लगती है लेकिन युद्ध या लड़ाई के समय यदि भृंगार रस की बात कही जाय तो वह किसी को अच्छी नहीं लगेगी। उचित अवसर पर ही उचित बात का महत्व होता है। कितनी भी अन्छी बात हो, पर अनुपयुक्त अवसर पर कही जाती है तो किसी को अच्छी नहीं लगती।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
“जाही ते कछु पाइये ………. कैसे बुझत पिआस’
(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।
उत्तर :
प्रस्तुत दोहा ‘वृंद के दोहे’ पाठ से लिया गया है। इसके कवि का नाम वृंद है।

(ii) उपर्युक्त अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत नीति-परक दोहे में कवि वृंद ने यह व्यावहारिक शिक्षा दी है कि जिससे कुछ प्राप्त करने की उम्मीद हो, उसी की आशा करनी चाहिए। ऐसे व्यक्ति से कभी भी कुछ आशा नहीं करनी चाहिए जो स्वयं अक्षम हो। वहाँ से निराशा ही हाथ लगेगी। जैसे सूखे, जलहीन सरोवर में जाने पर किसी की प्यास नहीझ सकती।

प्रश्न 2.
“विद्या धन उद्यम बिना ………… ज्यों पंखे का पौन।”
(i) विद्या रूपी धन की प्राप्ति कैसे हो सकती है ?
उत्तर :
विद्या रूपी धन की प्राप्ति प्रयास, परिश्रिम तथा उद्यम करने से हो सकती है। आलसी व्यक्ति को, परिश्रम से जी चुराने वाले व्यक्ति को विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि वृंद ने बतलाया है कि परिश्रमी व्यक्ति ही अपनी मेहनत से विद्या रूपी धन की प्राप्ति कर सकता है। आलसी तथा निठल्ला व्यक्ति कभी भी विद्या को नहीं प्राप्त कर सकता। इस संबंध में कवि ने पंखे की हवा का उदाहरण दिया है। हवा की प्राप्ति के लिए, शरीर को सुख पहुँचाने के लिए पंखे को हिलाने का श्रम करना पड़ता है। बिना डुलाए, बिना परिश्रम किए हवा नहीं मिल सकती। उसी प्रकार विद्या-रूपी अमूल्य धन को पाने के लिए सद़ा परिश्रम करना ही पड़ता है।

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प्रश्न 3.
“कबहूँ प्रीति न जोरिये ………… गाँठि परति गुन माहि।’
(i) कवि यहाँ क्या नहीं करने को कहता है ?
उत्तर :
कवि यहाँ प्रीति न जोड़ने और जोड़ कर न तोड़ने के लिए कह रहा है।

(ii) इस दोहे से कवि क्या संदेश देना चाहता है ?
उत्तर :
इस दोहे से कवि व्यावहारिक जीवन में सफल होने का संदेश देना चाहता है। कवि ने इस सच्चाई को सष्ट किया है कि प्रीति कर के उसे तोड़ देने का परिणाम अच्छा नहीं होता।

इसलिए यदि किसी से लगाव बनाते हैं तो उसका निर्वाह कीजिए। प्रीति करके कभी उसे मत तोड़िए क्योंकि एक बार जब प्रीति दूट जाती है तो फिर नहीं जुड़ती, यदि जुड़ती भी है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। एक रस्सी के उदाहरण से कवि ने इसे समझाया है। जिस प्रकार रस्सी के तोड़ने तथा फिर जोड़ने से उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रीति के टूट जाने पर फिर सच्चा प्रेम नहीं हो पाता। संदेह की गाँठ पड़ जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
वृंद के दोहों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
कवि वृंद को मानव प्राकृति और व्यवहार का अच्छा ज्ञान था। इनके नीतिपूर्ण दोहे मानव जीवन में बड़े ही उपयोगी हैं। इनके कुछ दोहे लोक-जीवन की वाणी बने हुए हैं। कवि ने व्यावहारिक शिक्षा देते हुए कहा है कि मनुष्य को अवसर के अनुकूल ही कोई बात कहनी चाहिए। बिना अवसर के कही गई अच्छी बात भी बुरी लगती है। जैसे युद्ध के की उम्मीद हो, जो समर्थ हो, उसी से पाने की आशा रखनी चाहिए। जलहीन सूखे तालाब में जाने पर प्यास नहीं बुझ सकती।

कवि ने कहा है कि मनुष्य को अपनी क्षमता, साधन तथा स्थिति के अनुकूल ही कार्य करना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करता तो कष्ट में पड़ जाता है, उसे उसका कुफल भोगना पड़ता है। कहा भी गया है कि चादर जितनी लंबी हो हमें अपना पाँव उतना ही फैलाना चाहिए। चादर के बाहर पैर पसारना कष्ट को आमंत्रित करना है। कार्य आरंभ करने के पूर्व अपनी क्षमता, स्थिति तथा साधन का मूल्यांकन कर लेना चाहिए। यदि हम अपनी क्षमता और साधन के अनुकूल कार्य करते हैं तो हम निश्चय ही सफलता और सुख-शांति की प्राप्ति करने में सफल होंगे।

परिश्रम के बिना इस संसार में कोई भी व्यक्ति विद्या-रूपी अमूल्य धन नहीं पा सकता। इस जगत् में शक्ति संपन्न व्यक्ति की ही सब लोग सहायता करते हैं। कभी-कभी गुण भी दोष बन जाता है। अच्छाई भी दु:ख का कारण बन जाती है। मधुर वाणी बोलने के कारण ही तोता को पिंजड़े में कैद होना पड़ता है। कवि बड़ी उपयेगीी बात बतलाई है कि हमें अभावग्रस्त, पीड़ित गरीब व्यक्ति को ही दान देना चाहिए जिससे उसकी दरिद्रता दूर हो जाए। दबा उसी को दी जानी चाहिए जिसके शरीर में रोग हो। अतः सम्पन्न व्यक्ति को दान देना व्यर्थ है। महान स्थान पाकर भी दुष्ट अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ता। महादेव के गले में स्थान पाकर भी विष अपनी कालिमा का परित्याग नहीं करता।

कवि ने परमेश्वर की प्राणियों पर असीम अनुकेपा का वर्णन किया है। ईश्वर जगत के सभी प्राणियों के कल्याण की चिन्ता करते हैं। बच्चे के जन्म के पहले ही प्रभु उसे जीवित रहने के लिए माता की छाती में दूध की व्यवस्था कर देते हैं। बच्चे को दुग्ध पान की व्यवस्था ईश्वर की अतिशय कृपा है। फिर नीति की उपयोगी बात कवि ने बतलाई है। व्यक्ति को कभी भी अपने परस्पर के प्रेम संबंध को नहीं तोड़ना चाहिए। एक बार यदि प्रेम संबंध टूट जाता है फिर वह नहीं जुड़ता है। जुड़ता भी है तो उसमें संदेह की गाँठ पड़ जाती है। पूर्व जैसी एकरसता नहीं रह जाती। कवि ने रस्सी के उदाहरण से स्पष्ट किया है रस्सी के टूट जाने पर यदि पुनः उसे जोड़ा जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। अतः हमें अपने प्रेम संबंध को बचाकर रखना चाहिए।

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भाषा-बोध :

(क) शब्दों के शुद्ध रूप –

सिंगार – शृंगार
पिआस – प्यास
करतब – कर्त्तव्य
पौन – पवन
सबन – सब
प्रीति – प्रीति (प्रेम)

(ख) पर्यायवाची शब्द –

अवसर – मौका, समय, संयोग।
सरवर – सरोवर, तालाब, जलाशय।
पवन – वायु, हवा, अनिल।
आग – अग्नि, पावक, अनल।
शरीर – तन, देह, बदन, काया।

WBBSE Class 6 Hindi वृंद के दोहे Summary

जीवन-परिचय :

वृंद का जन्म सन् 1643 में जोधपुर के मेड़ते ग्राम में एक बाह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही ये सुशील, गंभीर और तीव्र बुद्धि के थे। काशी में तारा पंडित के पास रहकर इन्होंने, व्याकरण, वेदान्त, साहित्य तथा गणित आदि का ज्ञान प्राप्त किया। औरंगजेब के दरबारी कवि रहे। इनकी मृत्यु सन् 1723 में हुई । इनकी प्रमुख रचनाएं बारह मासा, नयन पचीसी, पवन पचीसी और यमक सतसई हैं। इनके दोहे सरल, सरस तथा कलापूर्ण हैं। इनके दोहे लोकजीवन की वाणी बन गए हैं। सूक्तिकार के रूप में ही ये अधिक प्रसिद्ध हैं। इनकी भाषा परिष्कृत ब्रज भाषा है। नीति काव्य रचना के क्षेत्र में कवि वृन्द का स्थान अन्यतम है।

पद – 1, 2

नीकी पै फीकी लगै, बिन अवसर की बात।
जैसे बरनत युद्ध में, नहिं सिंगार सुहात ।।
जाही ते कछु पाइये, करिये ताकी आस ।
रीतै सरवर पर गये, कैसे बुझत पिआस ।।

शब्दार्थ :

  • नीकी = अच्छी।
  • जाही ते = जिससे।
  • फीकी = बुरी, खराब।
  • ताकी = उसकी।
  • बरनत = वर्णन करना।
  • आस = आशा।
  • सिंगार = शृंगार।
  • रीते = खाली।
  • सुहात = अच्छा लगना।
  • सरवर = तालाब।
  • बुझत = बुझना ।
  • पिआस = प्यास।

सन्दर्भ – प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘वृंद के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। यहाँ कवि ने नीति की उपयोगी शिक्षा दी है।

व्याख्या – कविवर वृंद कहते हैं कि अच्छी बात भी अगर बिना अवसर के कही जाती है तो वह खराब लगती है। अर्थात् उपयुक्त अवसर पर कही गई बात ही अन्छी लगती है। जैसे युद्ध के समय यदि श्रृंगार का वर्णन किया जाता है तो वह किसी को अच्छा नहीं लगता।

कवि ने यह व्यावहारिक शिक्षा दी है कि जिससे कुछ पाने का निश्चय हो, उसी की आशा करनी चाहिए। जैसे खाली (जल रहित) तालाब में जाने पर कैसे प्यास बुझ सकती है। अर्थात् बिना जलवाले सूखे तालाब में जाने पर किसी की प्यास नहीं बुझ सकती। अतः जिसके दिल में दया, परोपकार की भावना नहीं है, जो स्वभाव से कंजूस है, उसके पास जाना, उससे कुछ पाने की आशा रखना व्यर्थ है।

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पद – 3,4

अपनी पहुँच विचारि कै, करतब करिये दौर ।
तेते पाँव पसारिये, जेती लंबी सौर ।।
विद्या धन उद्यम बिना, कहा जु पावै कौन ।
बिना डुलाये ना मिले, ज्यों पंखे का पौन।।

शब्दार्थ :

  • पहुँच = सामर्थ्य।
  • उद्यम = उद्योग।
  • करतब = कर्त्रव्य ।
  • पावै = पाना ।
  • दौर = दौड़कर ।
  • डुलाये = हिलाना।
  • तेते = उतना।
  • ज्यों = जिस प्रकार ।
  • पाँव = पैर।
  • पौन = हवा।
  • पसारिये = फैलाइए।
  • सौर = चादर।

संदर्भ – प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने यह शिक्षा दी है कि अपने साधनों के अनुसार ही व्यक्ति को काम करना चाहिए। व्याख्या – मनुष्य को अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही दौड़ कर अपना कर्त्वव्य करना चाहिए। जितनी लंबी चादर हो, उतना ही पैर फैलाना चाहिए अर्थात् अपनी आमदनी के अनुसार ही खर्च करना चाहिए। आमदनी से अधिक खर्च करने से मुसीबत का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार इस दोहे में कवि ने शिक्षा दी है कि मनुष्य को अपनी क्षमता तथा साधन के अनुसार ही कोई कार्य करना चाहिए। तभी उसे सफलता मिल सकती है।

प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने विद्या की प्राप्ति के लिए प्रयत्न, परिश्रम तथा उद्यम की आवश्यकता पर बल दिया है।
विद्या रूपी धन परिश्रम के बिना कोई कैसे पा सकता है , अर्थात् प्रयत्न और मेहनत के बिना कोई भी मनुष्य विद्या रूपी धन को प्राप्त नहीं कर सकता। इस संबंध में कवि ने पंखे की हवा का उदाहरण दिया है। पंखा हिलाए बिना पंखे की हवा नहीं मिल सकती। हमें हवा प्राप्त करने के लिए पंखा हिलाने का परिश्रम करना पड़ता है। अत: विद्या की प्राप्ति के लिए हमें परिश्रम करना ही होगा। आलसी को विद्या नहीं मिल सकती।

पद – 5, 6

सबै सहायक सबल को, कोई न निबल सहाय।
पवन जगावत आग को, दीपहि देत बुझाय।।
कहूँ-कहूँ गुन ते अधिक, उपजत दोष सरीर।
मधुरी बानी बोलि कै, परत पींजरा कीर।।

शब्दार्थ :

  • सबल = शक्तिशाली।
  • कहूँ = कहीं।
  • निबल = कमजोर।
  • गुन = गुण।
  • पवन = हवा।
  • उपजत = उत्पन्न होना।
  • दीपहि = दीये को।
  • मधुरी = मीठी।
  • सहाय = सहायक।
  • बानी = वाणी।
  • जगावत = जगाना।
  • कीर = तोता।

सन्दर्भ : प्रस्तुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि सभी लोग ताकतवर व्यक्ति की ही सहायता करते हैं, कमजोर की कोई नहीं।

व्याख्या : इस संसार में शक्तिशाली व्यक्ति के सहायक सभी हो जाते हैं पर कमजोर-दुर्बल व्यक्ति की सहायता कोई नहीं करता। हवा और दीपक के उदाहरण से कवि ने इसे समझाया है। हवा आग को जगा देती है अर्थात् तीव्र बना देती है पर वही हवा छोटे दीपक को अपने झोंके से बुझा भी देती है।

प्रतुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि कभी-कभी गुण भी दोष बन जाता है और प्राणी के जीवन को दु:खी कर देता है।
कहीं-कहीं शरीर का गुण ही दोष उत्पन्न कर देता है। तोता की मीठी बोली ही उसके लिए बुराई बन जाती है। मधुर वाणी के कारण वह पींजरे में पड़कर बन्दी का जीवन जीता है। मीठी बोली के कारण ही लोग तोते को पिंजड़े में बन्द करके पालते हैं।

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पद – 7, 8

दान दीन को दीजिए, मिटै दरिद की पीर ।
औषधि वाको दीजिए, जाके रोग शरीर।।
दुष्ट न छाड़ै दुष्टता, बड़ी ठौर हूँ पाय।
जैसे तजत न स्यामला, विष शिव कंठ बसाय।

शब्दार्थ :

  • दीन = गरीब।
  • दुष्ट = नीच।
  • मिटै = खतम होना।
  • दुष्टता = नीचता।
  • दरिद = दरिद्र, गरीब।
  • ठौर = स्थान ।
  • पीर = पीड़ा।
  • तजत = छोड़ना।
  • औषधि = दवा।
  • स्यामला = कालिमा।

संदर्भ : प्रस्तुत नीति परक दोहे में कवि ने गरीब की सहायता करने के लिए कहा है।

व्याख्या : गरीब व्यक्ति को ही दान देकर उसकी सहायता करनी चाहिए। इससे उस दीन-हीन दुखी व्यक्ति की पीड़ा, उसकी दरिद्रता खत्म हो जायगी। दवा उसी को दी जानी चाहिए जिसके शरीर में कोई रोग हो। नीरोगी को दवा देना व्यर्थ है। उसी प्रकार जरूरतमंद की ही सहायता करनी चाहिए।

प्रस्तुत दोहे में कवि ने बतलाया है कि सम्मानजनक बड़ा स्थान पाकर भी दुष्ट व्यक्ति अपनी दुष्टता को, अपनी स्वाभाविक बुराई को नहीं छोड़ता। जैसे विष शिव जी के गलेमें स्थान पाकर भी अपनी कालिमा को, अपने दोष को नहीं छोड़ता।

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पद – 9

प्रभु को चिन्ता सबन की, आपु न करिये ताहिं।
जनम आगरू भरत है, दूध मातृ-धन माहिं।।

शब्दार्थ :

  • प्रभु = ईश्वर।
  • जनम = जन्म।
  • सबन = सब।
  • आगरू = पहले ही।
  • आपु = स्वयं।
  • भरत = भर देते हैं।
  • चिन्ता = सोच, फिक्र।
  • मातृ = माँ।

व्याख्या : प्रस्तुत दोहे में ईश्वर की महिमा का वर्णन करते हुए कवि ने बतलाया है कि ईश्वर सब प्रकार से सभी प्राणियों की रक्षा करते हैं। सचमुच ईश्वर सभी की चिन्ता करते हैं। सभी के हित के विषय में सोचते हैं। इसलिए व्यक्ति को स्वयं चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। प्रभु को लोगों के हित की इतनी चिन्ता रहती है कि शिशु के जन्म के पहले ही वे माँ की छाती में दूध भर देते हैं, जिससे जन्म लेते ही बच्चे को माँ का दूध मिलने लगता है।

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पद – 10

कबहूँ प्रीति न जोरिए, जोरि तोरिये नाहिं।
ज्यों तोरे-जोरे बहुरि, गाँठ परति गुन माहिं।।

शब्दार्थ :

  • प्रीति = प्रेम ।
  • ज्यों = जैसे, जिस प्रकार।
  • जोरिये = जोड़ना।
  • बहुरि = फिर, पुनः।
  • तोरिये = तोड़ना।
  • गुन = रस्सी।

व्याख्या : इस दोहे में कवि ने नीति की उपयोगिता पर शिक्षा दी है। कवि का कथन है कि बहुत सोच-समझकर ही प्रेम संबंध बनाना चाहिए। बिना विचारे प्रेम नहीं करना चाहिए। प्रेम संबंध बनाकर तोड़ना नहीं चाहिए। प्रेम के टूट जाने पर यदि पुन: जोड़ने की चेष्टा की जाती है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। जिस प्रकार रस्सी के टूट जाने पर यदि उसे जोड़ा जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रेम के टूट जाने पर यदि फिर प्रेम संबंध जोड़ा जाता है तो उसमें संदेह की गाँठ पड़ जाती है। पहले जैसे प्रेम की सरसता नहीं रह जाती।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 नया रास्ता

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions सहायक पाठ Chapter 1 नया रास्ता to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions सहायक पाठ Chapter 1 Question Answer – नया रास्ता

अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर :

प्रश्न 1.
आनेवाले मेहमान को विशेष महत्व क्यों दिया जा रहा है?
उत्तर :
आनेवाले मेहमान मेरठ वालों को मीनू का फोटो पसंद आ गया है। इसलिए वे मीनू को देखने तथा रिश्ता निश्धित करने के लिए आ रहे हैं। पहले भी कई लड़कों ने देखा पर शादी करने से इनकार कर दिया। इस परिवार में मीनू को पसंद किया है। मीनू के परिवार को विश्चास है कि अब मीनू का रिश्ता पक्का हो जाएगा। इसलिए मेहमान का विशेष महत्व दिया जा रहा है। उनके स्वागत के लिए हर प्रकार की तैयारीयाँ की जा रही हैं।

प्रश्न 2.
आनेवाले मेहमान से परिवार के लोगों को क्या उम्मीद है?
उत्तर :
आनेवाले मेहमान से परिवार के लोगों को यह उम्मीद है कि इस बार मीनू का रिश्ता पक्का हो जाएगा । निश्चित रुप से मीनू को वे लोग पसंद कर लेगें।

प्रश्न 3.
लेखिका मीनू को दृढ़ता और साहस की मूर्ति क्यों कहा है?
उत्तर :
मीनू योग्य तथा होनहार युवती थी। कई लड़कों ने छोटे कद तथा साँवले रंग के कारण रिश्ते से इनकार कर दिया था। पर इससे मीनू हतप्रभ तथा निराश न हुई उसने साहस से काम लिया। उसने नया रास्ता चुना। विवाह का सपना देखना ही छोड़ दिया। वह अपनी जिन्दगी का एक क्षण भी व्यर्थ नहीं होने देना चाहती थी। उसने वकील बनकर अपने पैरों पर खड़ी होने का निश्धय किया। रुढ़िवादी समाज की संकीर्ण विचार धारा को नकारते हुए उसने स्वयं अपना भविष्य निर्धारित किया। इसी कारण लेखिका ने उसे दृढ्ता एवं साहस की मूर्ति कहा है।

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प्रश्न 4.
विवाह के अलावा मीनू के जीवन का लक्ष्य क्या था?
उत्तर :
विवाह के अलावा मीनू के जीवन का लक्ष्य था वकील बनकर अपने पैरों पर खड़ा होना। उसके मन में लगन थी कुछ बनने की कुछ कर दिखाने की। अपने पाँव पर खड़े होकर वह इतना पैसा कमा लेना चाहती थी कि जिससे समाज में सिर ऊँचा करके रह सके।

प्रश्न 5.
मीनू समाज के झूठे आवरण को हटाकर एक सत्य दिखाना चाहती है -स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मीनू आधुनिक प्रबुद्ध विचारों की दृढ़ व साहसी युवती है। समाज में व्याप्त रूढ़ियों, अंध विध्रासों, सड़ी गली परंपराओं को वह नकार देती है। दकियानूसी समाज की मान्यता रही है कि लड़कियों का कार्य क्षेत्र घर की चारदीवारी के भीतर है। उनकी मान्यता है कि माता-पिता की इच्छानुसार विवाह कर लड़कियाँ घर के भीतर गृह कार्य संपन्न करे। मीनू इस झूठे आवरण हटा कर सत्य का रास्ता दिखाना चाहती है। वह चाहती है कि पुरुषों की तरह लड़कियाँ भी अपनी प्रगति और विकास का मार्ग चुन सकती हैं। अपने दृढ़ आत्मबल से मीनू वकालत प्रथम श्रेणी में पास कर सफल वकील बनकर समाज को जीवन की सच्चाई दिखा देती है।

प्रश्न 6.
धनीमल और मायाराम कौन हैं? उनके बीच क्या बातचीत हो रही है?
उत्तर :
धनीमल शहर के एक धनी और सम्पन्न व्यक्ति थे। मायाराम अमित के पिता थे जो मीनू को देखने और रिश्ता तय करने के लिए मीनू के घर जा चुके थे। धनीमल अपनी बेटी सरिता का रिश्ता लेकर मायाराम के घर आए थे। यहाँ धनीमल और मायाराम के बीच अमित और सरिता के रिश्ते के विषय में बातचीत हो रही है। मायाराम ने कहा कि हुम एक लड़की देखकर आए हैं, सब को लड़की पसंद आ गई है। एक बड़े घर की लड़की लेकर वे बेटे को बेच डालना नहीं चाहते । धनीमल शादी में पाँच लाख रुपये लगाने के लिए कहा। धनीमल जी रुपये का लोभ देकर सरिता की शादी के लिए प्रयास कर रहे थे। वे चाहते हैं कि बेटी सरिता का विवाह मायाराम के बेटे अमित संग संपन्न हो जाए।

प्रश्न 7.
अमित और सरिता किस विषय में बात कर रहे थे?
उत्तर :
अमित और सरिता को एकान्त में बातें करने का अवसर दिया गया। अमित ने सरिता से उसकी रुचि के बारे में पूछा। सरिंता ने जवाब दिया कि पेंटिग व कार ड्राइविंग में उसकी विशेष रुि है। फिर अमित ने घर के काम काज के विषय में पूछा तो सरिता ने स्पष्ट बतला दिया कि उसे घर के काम नहीं आतें। घर में चार-चार नौकर हैं। अत: उसे काम करने की न जररत ही है न घर के काम में उसकी रुचि ही है। उसने यह भी कहा कि पिता जी शादी के बाद उसके साथ एक नौकर घर का काम करने के लिए भेज देंगे।

प्रश्न 8.
“मुझे पेंटिग व कार ड्राइविंग में विशेष रुचि है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
यह कथन शहर के अमीर व्यक्ति धनीमल की बेटी सरिता का है। अमित ने सरिता से उसकी रुचि और पसंद के बारे पूछा तो धनी बाप की बेटी सरिता ने अमीरों की बेटियों की भौंत स्सष्ट कह दिया कि उसकी रुचि पेंटिग में तथा कार ड्राइविंग में है। इस कथन से सप्ट हो जाता है कि सरिता का जीवन विलासिता पूर्ण वातावरण में बीत रहा है। घर में उसे सुख और आराम की सभी सुविधाएँ थीं। गृह काम-काज से उसे कोई मतलब नहीं था।

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प्रश्न 9.
अमीत की स्मृतियों में डूब जाने पर मीनू उदास क्यों हो जाती है?
उत्तर :
मीनू को अपनी जिन्दगी के कुछ क्षण याद आ गए। पहले भी कई लड़कों ने उसे देखा था, पर किसी ने कद की छोटी व किसी ने साँवली बताते हुए शादी करने से इनकार कर दिया था। हर बार उसके मीठे सपने चूर हो जाते थे। यह अतीत की याद उसके लिए पीड़ादायक हो जाती थी। इसी कारण अतीत की स्मृतियों में डूब जाने पर वह उदास हो जाती थी।

प्रश्न 10.
‘कई लड़के उसे नापसंद कर चुके थे’ -स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मौंनू छोटे कद की तथा साँवले रंग की लड़की थी। कई रिश्ते उसकी शादी के लिए आए पर उसके कद तथा रंग के कारण अस्वीकार कर दिए। यद्वापि वह कुरुप नहीं थी, पर अधिक सुंदर भी नहीं थी इसलिए कई लड़के उसे पसद न किए।

प्रश्न 11.
मीनू अपनी सहेलियों के साथ कहाँ जा रही है?
उत्तर :
मीनू अपनी सहेलियों के साथ होस्टल के बाहर चाय-समोसे खाने जा रही है।

प्रश्न 12.
नवयुवक कौन है?
उत्तर :
नवयुवक अमित है जो मेरठ से विवाह के निमित्त्र उसे देखने आया था, पर माता-पिता के दबाव से वह शादी न कर सका। यद्यापि वह मीनू को पसंद कर चुका था।

प्रश्न 13.
मीनू उस नवयुवक को देखकर क्यों चौंक गई?
उत्तर :
निलिमा के विवाह के अवसर पर मीनू के गीत की प्रशंसा उस नवयुवक ने की थी। मीनू ने जैसे ही उसकी ओर देखा तो वह चौंक गई, क्योंक वह नवयुवक वही अमित था जो उसे देखने मेरठ से आया था। स्वयं वह मीनू को पसंद कर लिया था, पर माता-पिता के सामने उसकी एक न चली।

प्रश्न 14.
मीनू अपनी प्रशंसा सुनकर खुश क्यों नहीं हुई?
उत्तर :
अपनी प्रशंसा सुनने के बाद भी मीनू अपने दिल में बिलकुल खुश न हुई, बल्कि उसका हृदय पीड़ा से आकुण्ठ हो उठा। क्यों कि जिस नवयुवक अमित ने उसकी प्रशंसा की थी, जिसने उसे देखने के बाद उसका दिल तोड़ा था।

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प्रश्न 15.
हमारे समाज में लड़के के विवाह की अपेक्षा लड़की के विवाह को आज इतना महत्व क्यों दिया जाता है?
उत्तर :
हमारे समाज में लड़की के विवाह को अधिक महत्व दिया जाता है। लड़को का विवाह माता-पिता के लिए कठिन मालूम पड़ता है। समाज में दहेज प्रथा अभिशाप बन गई है। लड़की सयानी हो जाती है, विवाह में और अधिक कठिनाई होती है। बिना पर्याप्त दहेज के योग्य शादी मिलते नहीं। लड़की के विवाह में देर ही जाने से समाज में लोग ऊँगली उठाने लगते हैं। लड़की की शादी होने पर माँ-बाप चिन्ता मुक्त हो जाते है। क्वाँरा लड़का घर में रह सकता है, पर क्वाँरी लड़की घर में बेठे तो समाज नाना प्रकार से लाँछन लगाता है।

प्रश्न 16.
नीलिमा कौन है? वह मीनू को राय क्यों दे रही है?
उत्तर :
नीलिमा मीनू की सबसे प्रिय सहेली है। नीलिमा चाहती है कि मीनू की शादी उसके भाई अशोक से हो जाए। अशोक मीनू को बहुत पसंद करता है। सदा उसकी प्रशंसा करता है। नीलिमा मीनू से कहने लगी अशोक भैया तेरे बहुत दिवाने हैं। तू तैयार हो जा तेरी शादी अशोक भइया से करा दूँगी। नीलिमा मीनू को शादी के लिए तैयार कर लेना चाहती है, परंतु मीनू के हठ के आगे उसकी एक न चली।

प्रश्न 17.
शादी के नाम से मीनू उदास क्यों हो जाती है?
उत्तर :
मीनू का रुप रंग साधारण था। उसे बहुत सुंदर नहीं कह सकते। उसकी शादी के लिए कई रिश्ते आए पर लड़के शादी करने से इनकार कर दिए। बार-बार रिश्ते टूटने से मीनू अत्यंत दुखी व उदस हो जाती मेरठ वालों को उसका फोटो पसंद आ गया। इसलिए मीनू और उसके परिवार को विश्वास हो गया कि यह रिश्ता निध्धित हो जाएगा। पर धन के लोभ में अमित के माता-पिता ने इस रिश्ते को अस्वीकार कर दिया। इससे रिश्ते के इनकार के कारण मीनू का दिल बिलकुल टूट गया। अब शादी के नाम से मीनू उदास हो जाती है।

प्रश्न 18.
नीलिमा उसकी (मीनू) शादी के लिए इतनी उत्साहित क्यों है?
उत्तर :
नीलिमा अपनी प्रियतम सहेली मीनू की शादी जल्दी हो जाए, यह दिल से चाहती थी। कई लड़को के इनकार कर देने से मीनू उदास तथा दुखी थी, नीलिमा उसकी इस उदासी को दूर करना चाहती थी। नीलिमा का भाई अशोक दिल से मीनू को पसंद करता था और चाहता था कि मीनू संग उसकी शादी हो जाए। इसलिए मीनू को शादी के लिए तैयार कर अपने भाई अशोक संग उसका विवाह संपन्न करा देना चाहती है। इसीलिए वह मीनू की शादी के लिए इतनी उत्साहित है।

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प्रश्न 19.
वर्षो के प्यार दुलार के बाद लड़की को बिद्धुड़ना क्यों पड़ता है ?
अथवा
प्रश्न 20.
‘बेटी पराया धन होती है’ का अर्थ स्प्ट्ट कीजिए।
उत्तर :
प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में बेटी को पराया धन माना जाता है। कालिदास ने भी कहा है ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ अर्थात् कन्या पराया धन है। माता-पिता भी लड़की के सयानी होते ही उसका विवाह कर जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते है। माता-पिता अपनी पुत्री को लाड़-य्यार करते हैं, उसका पालन-पोषण करते हैं, पर उस प्यार-दुलार के बाद लड़की को विछ्छुड़ना पड़ता है। पुरुष प्रधान समाज में घर का उत्तराधिकारी लड़का होता है। लड़की विवाह के अनंतर पराये घर की संपत्ति बन जाती है, वही घर उसका अपना हो जाता है। यह एक सामाजिक व्यवस्था तथा परंपरा है। पति तथा सास-ससुर की सेवा करना उसका धर्म हो जाता है। हर लड़की भी इस तथ्य को समझती है कि एक दिन उसे अपने माता-पिता का घर छोड़कर अन्यत्र पति के घर जाना ही है।

प्रश्न 21.
दीपक कौन है? वक्ता का उससे क्या संबंध है?
उत्तर :
दीपक मायाराम की पत्नी का भतीजा है। अमित की माँ वक्ता है । उसका दीपक से संबंध है कि वह उनके भाई का लड़का है।

प्रश्न 22.
शादी में जाने के लिए वे इतने उत्साहित क्यों हैं?
उत्तर :
मायाराम की पल्नी को अपने भाई के पास गए हुए कई वर्ष हो गए थे। इसलिए उन्होंने सोचा कि इस बार वे शादी में जाएँगी, और कुछ दिनों के लिए वहाँ रुकेंगी। इसीलिए वे शादी में जाने-के लिए इतनी उत्साहित हैं।

प्रश्न 23.
अमित मीनू के आने पर क्यों खुश हो गया?
उत्तर :
अमित ने जब पहली बार मीनू को देखा था तो समझा कि यह मीनू ही मेरे अरमानों की मंजिल है। वह सब प्रकार से मीनू को पसंद कर लिया। पर माता-पिता के दबाव के आगे उसकी एक न चली। मीनू की पीड़ा को वह समझ गया कि निराश हो कर मीनू ने वकालत पढ़कर अपने पैरों पर खड़ा होने का निश्थय कर लिया है। दिल दूट जाने से मीनू उससे घृणा करने लगी थी। जब उसे पता चला कि असताल में अक्सीडेंट से पीड़ित था अमित ने उसे याद किया है। अब मीनू के हूदय के कोने में अमीत के लिए कुछ सेह भाव उत्पन्न हो गया था। इसलिए अमित से मिलने अंसताल पहुँच गई। मीनू को देख कर अमित के उदास मुरझाये चेहरे पर प्रसन्रता झलक पड़ी। इस प्रकार अमित खुश हो गया।

प्रश्न 24.
वक्ता के वकालत पास करने से उन्हें विशेष खुशी क्यों हो रही है?
उत्तर :
वक्ता मीनू के वकालत पास करने से अमित को विशेष खुशी हो रही थी, क्योंकि मीनू ने वकालत पढ़ने व अपने पाँव पर खड़े होने का फैसला कर लिया था। इसीलिए उसने अभी तक उससे कुछ नहीं कहा। आज जब वकालत पूरी कर चुकी है तब कुछ कहने का समय आया।

प्रश्न 25.
समाज में स्त्री और पुरुष में इतना भेद क्यों है?
उत्तर :
हमारा समाज परंपरावादी समाज़ है। पुरुष प्रधान समाज परंपरा से पुरुष का अधिक महत्व देता रहा है। पुरुष ही घर का मालिक और समस्त सामाजिक क्रिया कलाप का कर्ता होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात रही कि पुरुष ही अर्थोपार्जन करता रहा है इसीलिए उसका वर्चस्व बना रहा। सभी बस परुष की अश्रित बन कर रह गई। उसका कार्य क्षेत्र घर के भीतर रहा है शिक्षा, नौकरी, व्यापार आदि क्रिया कलाप पुरुषों के अधीन रहा नारी का कार्य क्षेत्र चारदीवारी के भीतर रहा। अर्थ तंत्र पर उसका अधिकार न रहा। बेटी को पराया धन माना जाता है। वह कभी स्वाधीन न रही। पर आज कल यह व्यवस्था खतम हो चुकी है। अब स्त्री-पुरुष में भेद भाव नहीं बल्कि बराबर का दर्जा है। नारियाँ अब शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय सब में कंधे से कंधा मिलाकर पुरुष के साथ काम कर रही है।

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प्रश्न 26.
लड़की के जीवन में इतनी कठिनाइयाँ क्यों आती हैं?
उत्तर :
पुरुष प्रधान समाज में लड़कियों का कार्यक्षेत्र घर की सीमा के भीतर रहा है। उनका कार्य घर के भीतर का काम करना संतान उत्पन्न करना रहा है। अर्थतंत्र पर उनका कोई अधिकार नहीं था। हमेशा पुरुष का अनुगामी बनकर रहना पड़ता था। पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, व्यवसाय आदि पर पुरुषों का एकाधिपत्य था तथा बेटियाँ पराया धन समझी जाती थी। उनका विवाह कर विदा कर माता-पिता संतुष्ट हो जाते थे। इसीलिए लड़की के जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं। हर काम में उन्हे पुरुष का ही मुँह देखना पड़ता था। पर स्थिति बदल गई है। अब उच्च शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन होकर स्त्रियाँ समाज का महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है।

प्रश्न 27.
सामाजिक बंधन से क्या मीनू मुक्त हो सकी?
उत्तर :
निश्चित रुप से मीनू सामाजिक बंधन से मुक्त हो सकी। वकालत की प्रेक्टिश शुरू कर मीनू अर्थोपार्जन कर सशक्त बन गई। अब वह समाज का मुँहताज नहीं। समाज के झूठे आवरण को हटाकर वह सत्य और वास्तविकता का मार्ग स्वीकार की। किसी पर न रही। विवाह जैसा पवित्र संस्कार अब उसकी इच्छा पर आधारित हो गया। सक्षम होकर वह नया रास्ता दिखाने में समर्थ बन गई।

प्रश्न 28.
‘विशेष ख्याति’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
विशेष ख्याति से तात्पर्य है मीनू की बड़ी सफलता। प्रसिद्ध वकील बनकर मीनू आत्मविश्वास व लगन से विशेष ख्याति प्राप्त कर ली। जिस नारी को अबला कहा जाता रहा, जो सदा पुरुष की अनुगामिनी बनकर रहने को बाध्य हो जाती रही, वह नारी मीनू चतुर्दिक प्रशंसा तथा सम्मान का पात्र बनी।

प्रश्न 29.
उपन्यास के आधार पर मीनू का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर :
मीनू ‘नया रास्ता’ उपन्यास में सर्वाधिक सशक्त, प्रभावशाली, आदर्श नारी पात्र है। वह समाज में व्याप्त रूढ़ियों, सड़ीगली परंपराओं दकियानूसी विचारों को नहीं स्वीकारती। समाज ने सदा उसका तिरस्कार किया, उसके दिल को ठेस पहुँचाया, पर मीनू ने किसी की परवाह न की, साहस और आत्मबल को न खोई। अपना रास्ता स्वयं बनाया, अपने भाग्य का निर्माण स्वयं किया। अपनी दृढ़ता, साहस लगन तथा धैर्य से अपनी महत्वाकांक्षा को पूर्ण सफलता प्राप्त की। मीनू प्रगतिशील विचारों की प्रबुद्ध आधुनिक नारी है। उसके चरित्र की रुपरेखा इस प्रकार द्रस्टण्य है-

सुशिक्षित प्रबुद्ध नारी – मीनू मध्यम श्रेणी के परिवार की प्रबुद्ध नारी है। दकियानूसी विचारों और अंध विश्वासों को नहीं स्वीकारती। वह उच्चशिक्षा प्राप्त नारी है। वकालत की परीक्षा सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उच्च शक्षा प्राप्त करने के बाद भी उसमें अभिमान की भावना बिलकुल नहीं थी।

व्यवहार कुशल- मीनू व्यवहार में अत्यंत कुशल थी। अपने माता-पिता तथा भाई के प्रति सदा सरल सौम्य व्यवहार करती थी। अपने आचरण तथा बातचीत से कभी भी माता-पिता को ठेस नहीं लगने देती। वह एक आदर्श सहेली थी। उसकी सौम्य व्यवहार ही था कि नीलिमा सदा उसके हित के लिए प्रस्तुत थी। हास्टेल में माया से भी उसका प्रीतिपूर्ण व्यवहार था।

धैर्य और साहस की मूर्ति – मीनू के रुप रंग तथा आकार के कारण कितने लड़कों ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। पर मीनू कभी अपना धैर्य और साहस नहीं छोड़ती। सदा दृढ़ बनी रहती है। सच तो यह है कि इन्हीं परिस्थितियों ने मीनू को दृढ़ साहसी बना दिया। उसके वकालत पढ़ने, प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने तथा एक सफल वकील बनने में अद्भुत साहस और जोश था।

भावुकता एवं संवेदनशीलता – मीनू अत्यंत भावुक तथा संवेदनशील नारी थी। उसकी छोटी बहन आशा का विवाह हो गया सहेली नीलिया का विवाह ही नहीं पुत्र भी उत्पन्न हो गया, पर मीनू क्वाँरी ही बनी रही। उसके दिल में भावना कितनी प्रबल रही हो गी। पिता की बीमारी की खबर सुनते ही वह सब कुछ छोड़कर पिताजी को देखने चली गई। नीलिमा को तीव्र ज्वर था। उस समय मीनू नीलिमा के घर जाकर उसकी सेवा की, अपने हाथ से दवाई पिलाई। शादी से इनकार के बाद मीनू अमित से घृणा करती थी, पर अमित के एक्सीडेंट की खबर सुनकर वह उसे देखने अस्पताल पहुँच गई। अमित के नेत्रों में आँसू देखकर मीनू का दिल भी भर आया। वह भावविभोर हो उठी। अमित के प्रति उसके हुदय में प्यार व दया की भावना उमड़ पड़ी।

देश प्रेम की भावना – मीनू के हदय में अपने देश के प्रति लगाव था। वह चाहती थी कि पढ़ लिखकर नवयुवक देश की उन्नति में योगदान दें। नीलिमा ने बतलाया कि उसकै भाई अशोक पढ़ने के लिए अमेरिका गए है, वहाँ जाने पर लोग वही बस जाते है। मीनू ने अपना भाव व्यक्त किया कि भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है पर वे पैसे के लोभ से विदेश में जा बसें, यह बिलकुल उचित नहीं। यदि बुद्धिजीवी विदेशों में बस जाएँगे तो देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।

कर्मठ तथा महत्वाकांक्षी – मीनू कर्त्तव्यपरायण परिश्रम शील तथा दृढ़ निश्धयवाली स्वाभिमानी नारी थी। अपने परिश्रमी स्वभाव के कारण वह प्रत्येक परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। विपरीत परिस्थितियों में भी वह हार नहीं मानती। कभी निराश नहीं होती। विवाह का रिश्ता टूट जाने पर उसके मनोबल में नूतन निखार आ गया। वह एक प्रसिद्ध वकील बनना चाहती थी। अपने इस दृढ़ निश्धय को उसने पूर्ण रूप दे दिया। आत्मविश्षास व लगन से वह प्रसिद्ध वकील बनकर विशेष ख्याति प्राप्त कर ली। निश्चित रुप सें दृढ़ता और साहस की मूर्ति मीनू का चरित्र व जीवन आधुनिक युग की युवतियों के आदर्श स्वरूप है।

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प्रश्न 30.
अमित का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
अमित ‘नया रास्ता’ उपन्यास में प्रसिद्ध पुरुष पात्र है। संपूर्ण उपन्यास में उसका महत्वपूर्ण स्थान है। आदि से अन्त तक अमित कथा में प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से प्रभावशाली बना हुआ है। अमित पवित्र दिल का स्वाभिमानी युवक है। वह एक आदर्श पुत्र, आदर्श मित्र तथा सच्चा नि:-स्वार्थ प्रेमी है। यद्धपि अपने संकोची स्वभाव तथा माता-पिता के प्रति प्रेम और सद्भाव के कारण वह अपने दिल की भावना को दृढ़ता से व्यक्त न कर सका, माता-पिता का खुलकर विरोध न कर सका, पर वह अपने सच्ची प्रेम भावना फर सदा दृढ़ बना रहा। अमित के चरित्र की संक्षिप्त रूप-रेखा इस प्रकार है-

माता-पिता के प्रति आदर – अमित के हद्य में अपने माता-पिता के प्रति आदर सम्मान का भाव है। उसकी सबसे बड़ा इच्छा थी कि उसे ऐसी पत्नी मिले जो उसके माता-पिता के साथ ठीक से रह सके। उनका आदर सत्कार कर सके। मीनू ने संयुक्त परिवार में माता-पिता व बहन के साथ रहना स्वीकार कर लिया। इससे अमित को बड़ी प्रसन्नता हुई। वह नहीं चाहता कि कोई धनी बाप की लड़की माता-पिता से अलग रहे। इसीलिए वह सरिता को मन से स्वीकार न कर सका। यद्यपि माता-पिता का विरोध न कर सका।

निश्चल पवित्र स्वभाव – अमित पवित्र स्वभाव का निश्छल नवयुवक था। उसने प्रथम दृष्टि में ही मीनू को देखकर उसके भोले चेहरे के प्रति समर्पित हो गया। मीनू के प्रति उसका सच्चा प्यार आजीवन बना रहा। सरिता संग रिश्ता न होने पर वह प्रसन्न हो उठा। पर मीनू की स्नेह के प्रति सच्चे प्रेम के कारण शादी के लिए तैयार न हुआ। विवाह किया तो अन्त में मीनू के ही संग।

आदर्श चरित्र एवं समर्पण की भावना – अमित दृढ़ व्यक्तित्व का नवयुवक था। वह मीनू के प्रति समर्पित था। उसने संकोचवश सरिता संग रिश्ते का विरोध नहीं किया तथा माता-पिता के सामेने अपना दृढ़ निश्धय न बता सका। अपनी इसी भूल का प्रायाध्चित करने के लिए वह कहीं विवाह के लिए तैयार न हुआ। अस्पताल में मीनू के सामने उसने अपने दिल का सच्चा उद्गार अपनी सारी संवेदना प्रकट कर दी। मीनू के अलावा वह कहीं अन्यत्र विवाह के लिए राजी न रहा। पिता से उसने स्पष्ट कह दिया जहाँ तक मेरी पसंद की बात है मुझे तो सरिता बिल्कुल पसंद नहीं है।
अमित पढ़ा लिखा चरित्रवान नवयुवक था। अपने सिद्धान्त तथा दृढ़निश्चय के प्रति सदा तत्पर बना रहा।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस

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WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 Question Answer – कारतूस

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
खेमा कहाँ के जंगल में लगाया गया?
(क) गोरखपुर
(ख) बनारस
(ग) इलाहाबाद
(घ) लखनऊ
उत्तर :
(क) गोरखपुर

प्रश्न 2.
यहाँ किस जमाने की कहानी कही गई हैं?
(क) सन् 1899 .
(ख) सन् 1799
(ग) सन् 1977
(घ) सन् 1988
उत्तर :
(ख) सन् 1977

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प्रश्न 3.
किसके अफसाने सुनकर रॉबिन हुड की याद आ जाती थी?
(क) शाहेजमा
(ख) सुल्तान
(ग) वजीर अली
(घ) शमसुद्दौला
उत्तर :
(ग) वजीर अली।

प्रश्न 4.
वजीर अली के दिल में किसके प्रति नफरत कूट-कूट कर भरी थी?
(क) हिन्दुओं के
(ख) अंग्रेजों के
(ग) सिखों के
(घ) फौजियों के
उत्तर :
(ख) अंग्रेजों के

प्रश्न 5.
कारतूस किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) एकांकी
(घ) उपन्यास
उत्तर :
(ग) एकांकी

प्रश्न 6.
एकांकी में कितने अंक (दृश्य) होते हैं ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(क) एक

प्रश्न 7.
हबीब तनवीर ने ‘नया थियेटर’ की स्थापना कब की ?
(क) 1947 ई० में
(ख) 1950 ई० में
(ग) 1959 ई० में
(घ) 1963 ई० में
उत्तर :
(ग) 1959 ई० में

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प्रश्न 8.
‘कारतूस’ नामक रचना में किस जमाने की कहानी कही गई है ?
(क) 1899 ई० के
(ख) 1799 ई० के
(ग) 1977 ई० के
(घ) 1988 ई० के
उत्तर :
(ख) 1799 ई० के

प्रश्न 9.
वजीर अली ने कितने समय तक हुकूमत की ?
(क) पाँच दिन
(ख) पाँच सप्ताह
(ग) पाँच महीने
(घ) पाँच साल
उत्तर :
(ग) पाँच महीने

प्रश्न 10.
शाहे-जमा कहाँ का बादशाह था ?
(क) भारत
(ख) नेपाल
(ग) अरब
(घ) अफगानिस्तान
उत्तर :
(घ) अफगानिस्तान

प्रश्न 11.
कंपनी शासन ने किसके समय में सबसे ज्यादा विस्तार किया ?
(क) लार्ड वेलेजली
(ख) लार्ड क्लाइव
(ग) लार्ड कर्जन
(घ) लार्ड डलहौजी
उत्तर :
(ख) लार्ड क्लाइव

प्रश्न 12.
“दीवार हमगोश दारद, तन्हाई” – किसने कहा ?
(क) वजीर अली
(ख) सआद्त अली
(ग) शामसुद्दौला
(घ) आशिफुद्दौला
उत्तर :
(क) वजीर अली

प्रश्न 13.
कर्नल ने सवार को कितने कारतूस दिये ?
(क) एक
(ख) दस
(ग) सौ
(घ) हजार
उत्तर :
(ख) दस

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प्रश्न 14.
एंकाकी के प्रमुख पात्र कौन है ?
(क) अंग्रेज
(ख) वजीर अली
(ग) कर्नल लेफ्टीनेंट
(घ) सिपाही
उत्तर :
(ग) कर्नल लेफ्टीनेंट

प्रश्न 15.
किसने कंपनी के वकील की हत्या की ?
(क) वजीर
(ख) सिपाही
(ग) अंग्रेज
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) वजीर

प्रश्न 16.
वजीर को गर्वनर जनरल ने कहाँ तलब किया ?
(क) मुम्बई
(ख) कलकत्ता
(ग) दिल्ली
(घ) आगरा
उत्तर :
(ख) कलकत्ता

प्रश्न 17.
कौन सन्नाटे में स्तब्ध रह गया ?
(क) वजीर अली
(ख) कर्नल
(ग) लेफ्टीनेंट
(घ) सआदत अली
उत्तर :
(ख) कर्नल

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए क्यों कहा?
उत्तरः
सवार सरपट घोड़ा दौड़ाए सीधा लेफ्टीनेंट तथा कर्नल की तरफ आता हुआ मालूम पड़ा। कर्नल सिपांहियों से नजर रखने के लिए कहा, जिससे पता लगे कि वह किस तरफ जा रहा है।

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प्रश्न 2.
सवार ने क्यों कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है?
उत्तर :
सवार स्वयं वजीर अली ही था। उसने कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल हैं, क्योंकि वह एक जाँबाज सिपाही है। वह प्राण की बाजी लगाने वाला निडर सिपाही है।

प्रश्न 3.
सआदत अली कौन था? उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों कहा ?
उत्तर :
सआदत अली आसिफउद्दौला का भाई था। नवाब आसिफ उद्दौला के यहाँ लड़के की कोई उम्मीद नहीं थी। इस कारण वजीर अली की पैदाइश को सआदत अली ने अपनी मौत कहा।

प्रश्न 4.
सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?
उत्तर :
कर्नल ने उसे समझा कि वह वजीर अली को गिरफ्तार करने के लिए कारतूस मॉग रहा है। इसलिए तुरंत उसे दस कारतूस दे दिए। पर जब उसने अपना नाम वजीर अली बताया तो यह सुनकर कर्नल अपने को ठगा हुआ महसूस किए। फिर उन्हें किसी भी प्रकार का मौका दिए बिना वह सवार घोड़े पर बैठकर नौ-दो ग्यारह हो गया। किरिर्त्तव्य विमूढ़ होकर कर्नल हक्का-बक्का हो गए।

प्रश्न 5.
जाँबाज सिपाही किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर :
जाँबाज सिपाही वजीर अली को कहा गया है। पूरी एक फौज उसे गिरफ्तार करने के लिए उसका पीछा कर रही थी। वर्षों से वह कर्नल तथा उनकी फौज की आँखों से धूल झोंकता रहा, पर गिरफ्तार न हुआ। कर्नल केपास आकर उन्हें प्रमित कर उनसे कारतूस लेकर बाहर निकल गया। इसी कारण उसे जाँबाज सिपाही कहा गया है।

प्रश्न 6.
हबीब तनवीर का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
हबीब तनवीर का जन्म 1 सितंबर, 1923 ई० को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था।

प्रश्न 7.
तनवीर के बचपन का नाम क्या था ?
उत्तर :
तनवीर के बचपन का नाम हबीब अहमद खान था।

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प्रश्न 8.
‘कारतूस’ नामक रचना का मुख्य पात्र कर्नल का नाम क्या है ?
उत्तर :
कर्नल कालिंज।

प्रश्न 9.
शमसुद्दौला कौन था ?
उत्तर :
शमसुद्दौला भी नवाब का भाई और अंग्रेजों का विरोधी था।

प्रश्न 10.
सवार ने कर्नल से क्या माँगा ?
उत्तर :
सवार ने कर्नल से कारतूस माँगा।

प्रश्न 11.
सवार कौन था ?
उत्तर :
सवार वजीर अली था।

प्रश्न 12.
“दीवार हमगोश दारद” – का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
दीवारों के भी कान होते हैं।

प्रश्न 13.
कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था ?
उत्तर :
कर्नल कालिंज का खेमा वजीर अली को पकड़ने के लिए जंगल में डेरा डाले हुए था।

प्रश्न 14.
वजीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे ?
उत्तर :
सिपाही वजीर अली से इसलिए तंग आ चुके थे क्योंकि हफ्तों डेरा डालने और छापा मारने के बावजूद वजीर अली उनके हाथ नहीं आया था। वे जंगल की कष्ट-भरी जिंदगी से तंग आ चुके थे।

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प्रश्न 15.
कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए क्यों कहा ?
उत्तर :
कर्नल ने सवार पर नजर रखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि वह सवार वजीर अली का कोई दूत या जानकार या कोई साथी हो सकता था।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
सआदत अली को अवध के तख पर बैठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?
उत्तर :
सआदत अली कर्नल का दोस्त था। वह ऐश पसंद आदमी था, इसलिए कर्नल को आधी जायदाद तथा दस लाख रुपये नगद दिए। इसी कारण कर्नल ने सआदत अली को अवध के तख्त पर बैठाया।

प्रश्न 2.
कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली अपने को कैसे बचाया?
उत्तर :
वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली आजमगढ़ की तरफ तुरंत भाग गया। आजमगढढ़ के शासक ने उसे और उसके साथियों को अपनी हिफाजत में घागरा तक पहुँचा दिया। अब वे सब इन जंगलों में कई साल से भटक रहे थे। इस प्रकार सआदत अली ने अपने को बचाया।

प्रश्न 3.
वजीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
उत्तर :
कर्नल ने वजीर अली को अपने पद से हटाकर बनारस भेज दिया और तीन लाख रुपये वजीफा तय कर दिया। कुछ महीने बाद गर्वनर जनरल ने उसे कोलकाता तलब किया। वजीर अली वकील के पास जाकर शिकायत की कि गर्वनर जनरल उसे कोलकाता क्यों तलब करते है। वकील ने उसकी शिकायत की परवाह नहीं कि बल्कि उल्टा उसे बुरा भला सुना दिया। वजीर अली के दिल में अंग्रेजों के खिलाफ नफरत कूट-कूट कर भरी हुई थी। इसलिए उसने वकील का कत्ल कर दिया।

प्रश्न 4.
वजीर अली एक जाँबाज सिपाही था। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
वजीर अली बहुत बहादुर सिपाही था। वह निडर। साहसी तथां प्राण की भी चिन्ता नहीं करता था। तभी तो वह वकील का कत्ल कर दिया। पूरी फौज के साथ कर्नल उसका पीछा वर्षों तक किया पर गिरफ्तर न कर सका। निर्भय होकर वह कर्नल के पास जाकर उनसे दस करतूस लेता है। अपना नाम बताकर उनके सामने से प्रस्थान कर दिया। कर्नल हक्का-बक्का रह गया। उसके इन कारनामों से स्पष्ट हो जाता है कि वह एक जाँबाज सिपाही था।

प्रश्न 5.
‘मुट्ठी भर आदमी और ये दमखम” आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
वजीर अली अपने थोड़े से साथी.सैनिकों के साथ जंगल में घूमता फिरता रहा। कर्नल एक फौज के साथ उसका पीछा करते रहे, पर कामयाब न हो सके। कर्नल ने स्वयं स्वीकार किया कि वजीर अली के साथ थोड़े से लोग है, पर वे जान की बाजी लगाने वाला है, उनमें अद्भुत शक्ति तथा दृढ़ता भरी हुई है, स्वयं वजीर अली अत्यंत बहादुर आदमी है।

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प्रश्न 6.
वजीर अली के अफसाने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी ?
उत्तर :
वजीर अली बहुत हिम्मती, दिलेर और बहाटुर व्यक्ति था। उसके साहस के कारनामे लोगों की जबान पर थे। उसने कंपनी के वकील को उसके घर जाकर मार डाला था। ऐसे-ऐसे साहस-भरे किस्से सुनकर उसे रॉबिनहुड नामक साहसी योद्धा की याद आ जाती थी।

प्रश्न 7.
सआदत अली कौन था ? उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा ?
उत्तर :
सआदत अली अवध के नवाब आसिफउद्दौला का छोटा भाई था। उसे उम्मीद थी कि आसिफउद्दौला की कोई संतान नहीं होगी। इसलिए वही अवध का नवाब बनेगा। परंतु जैसे ही वजीर अली का जन्म हुआ, उसके सपने चूरचूर हो गए। उसे अपनी नवाबी खतरे में जान पड़ी। अत: उसने वजीर अली की पैदाइश को अपनी मौत समझा।

प्रश्न 8.
लेफ्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है ?
उत्तर :
लेफ्टीनेंट ने कर्नल से जाना कि कंपनी के खिलाफ केवल वजीर अली ही नहीं है, बल्कि दक्षिण में टीपू सुल्तान और बंगाल के नवाब का भाई शमसुद्दौला भी उनके खिलाफ है। तीनों ने कंपनी के विरुद्ध अफगानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को आक्रमण करने का निमंत्रण दिया था। इससे उसे आभास हुआ कि कंपनी के खिलाफ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है।

प्रश्न 9.
सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए ?
उत्तर :
सवार स्वयं वजीर अली था। उसे कारतूस चाहिए थे। उसे पता था कि कर्नल कालिंज उसे पकड़ने के लिए अपनी फौज के साथ जंगल में डेरा डाले हुए है। उसके पास कारतूस हैं। अत: वह बिना डरे कर्नल के डेरे में चला आया। उसने कर्नल के कमरे में जाकर एकांत में कर्नल से भेंट की। कर्नल ने सोचा कि यह सीवार उसे वजीर अली को पकड़ने में कुछ सहायता देगा। इसलिए उसने सवार के माँगने पर दस कारतूस उसे दे दिए।

प्रश्न 10.
सआदत अली वजीर अली का दुश्मन क्यों बन गया था ?
उत्तर :
सआदत अली आसिफड़द्दौला का छोटा भाई था। उसकी नजर अवध की नवाबी पर थी। उसे आशा थी कि आसिफउद्दोला की संतान नहीं होगी। परंतु जैसे ही वजीर अली का जन्म हुआ, उसे अपने सपने टूटते दिखे। वजीर अली उसकी नवाबी में सबसे बड़ी बाधा था। अतः वह उसका दुश्मन बन गया।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 कारतूस

प्रश्न 11.
वजीर अली किस बात पर गवर्नर जनरल से नाराज हो गया था ?
उत्तर :
वजीर अली गवर्नर जनरल की दो बातों से नाराज था। पहली यह कि उसने वजीर अली की रियासत अपने अधिकार में ले ली थी। दूसरी बात यह थी कि उसने वजीर अली को अपने कार्यालय कलकत्ता में बुलाया था। यह बात वजीर अली को बहुत बुरी लगी।

प्रश्न 12.
वजीर अली किस पद पर था ? उसे पद से क्यों हटाया गया था ?
उत्तर :
वजीर अली अवध का शासक था। उसे पद से इसलिए हटाया गया था क्योंकि वह अंग्रेजों के विरुद्ध था। अंग्रेज अवध की गद्दी पर अपने पिट्रू को बिठाना चाहते थे।

प्रश्न 13.
वजीर अली के मन में क्या योजना थी ? वह किसे हटाकर कब्जा करना चाहता था ?
उत्तर :
वजीर अली के मन में योजना यह थी कि वह किसी तरह नेपाल पहुँच जाए और वहाँ जाकर अफगानिस्तान के आक्रमण की प्रतीक्षा करे। तब तक वह सेना जुटाकर अवध की गद्दी से सआदत अली को हटाकर अंग्रेजों को देश से बाहर करना चाहता था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।
(क) ‘वो एक जाँबाज सिपाही है।’
1. यह उक्ति किस पाठ से उद्धृत है? इसके रचनाकार कौन हैं?
2. यह किसने, कब और किससे कहा?
3. जाँबाज सिपाही कौन हैं? उसकी विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
1. प्रस्तुत उक्ति ‘कारतूस’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार हबीब तनवीर है।
2. यह कथन सवार ने कर्नल से सवार कहा कि वजीर अली की गिरफ्तारी में मदद देने के लिए यह फौज रखी गई है। सवार वजोर अली की गिरफ्तारी को मुश्किल कार्य बताया। उसी समय सवार ने कर्नल से यह उक्ति कहीं।
3. जाँबाज सिपाही वजीर अली है। वजीर अली को कर्नल बहुत ही खतरनाक आदमी समझता था। वजीर अली ने अफगानिस्ता के समाट को हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने की दावत दी थी। वजीर अली बहुत ही बहादुर आदमी था। उसके दिल में अंग्रेजों के खिलाफ नफरत कूट-कूट कर भरी हुई थी। कंपनी के वकील का निर्भय होकर उसने हत्या कर दी। पाँच महीने की अपनी हुकूमत में उसने अंग्रेजों का दूर कर दिया। अंग्रेज सैनिक तंग आ गए। पर उसे पकड़ न सकें। वर्षों से वह अंग्रेजों आँखों में धूल झोकता रहा। जिस कर्नल ने उसे गिरफ्तार करने के लिए एक फौज लेकर वर्षों से परेशान था। उन्हीं कर्नल से मिलकर उनसे दस करतूस लिया और अपना वजीर अली नाम बताकर उनके नजरों के सामने से गायब हो गया। कर्नल स्तब्ध रहकर देखते ही रह गए।

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2. वजीर अली को एक जाँबाज सिपाही क्यों कहा गया है ? उसके सैनिक जीवन के क्या लक्ष्य थे ? “कारतूस” पाठ के आधार पर विस्तार से लिखिए।
उत्तर :
वजीर अली जाँबाज सिपाही था। वह अपने लक्ष्य के लिए जान न्योछावर करना जानता था। उसने अंग्रेज शासक के वकील की ही हत्या कर दी। इस प्रकार उसने अंग्रेज सरकार को खुली चुनौती दे दी। उसने अंग्रेजों की सत्ता स्वीकार करने की बजाय जंगल-जंगल भटकना उचितं समझा। वह इतना हिम्मती था कि जो अंग्रेज अधिकारी उसे ढूँढ़ने के लिए जिस डेरे में बैठा हुआ था, वह वहाँ अकेले जाकर उसे जान से मारने की धमकी दे आया।
वजीर अली के सैनिक जीवन का लक्ष्य था – अपने अधिकारों के लिए लड़ना और अंग्रेजों की अधीनता को चुनौती देना।

भाषा बोध :

1. कारक वाक्य में संज्ञा सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है।
निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनका नाम लिखें-
(क) जंगल की जिन्दगी बड़ी खतरनाक होती है-
(ख) कंपनी के खिलाफ सारे हिन्दुस्तान में एक लहर दौड़ गई-
(ग) वजीर को उसके पद से हटा दिया गया-
(घ) फौज के लिए कारतूस की आवश्यकता हैं।
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था
उत्तर :
(क) वजीर को – संबंध कारक
(ख) कंपनी के- संबंध कारक हिन्दुस्तान में – अधिकरण कारक
(ग) वीर को – कर्म कारक
पद से – अपादान कारक
(घ) फौज के लिए – संप्रदान कारक
(ङ) घोड़े पर – अधिकरण कारक

2. निम्नलिखित वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-

(क) घोड़ा पानी पी रहा था।
उत्तर :
घोड़े ने पानी लिया।

(ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
उत्तर :
बच्चों ने दशहरे का मेला देखा।

(ग) रॉबिन हुड गरीबों को मदद करता थां।
उत्तर :
रांबिन हुड ने गरीबों की मदद की।

(घ) देश भर के लोग उसकी प्रशंसा की।
उत्तर :
देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

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3. निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय शब्द लिखिएखिलाफ, उम्मीद, हासिल, कामयाब, नफरत, इंतजार।
उत्तर :
खिलाफ – विरोध, विरुद्ध।
उम्मीद – आशा, भरोसा।
हासिल – प्राप्त, पाया हुआ।
कामयाब – सफल, कृतकार्य।
नफरत – घृणा, अरुचि।
इतजार – प्रतीक्षा।

4. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

आँखों में धूल झोंकना – मेरी आँखों में धूल झोंकर ठग मेरे समान गायब कर दिया।
काम तमाम कर देना – भारतीय सैनिकों ने आतंकवादियों का काम तमाम कर दिया।
जान बखा देना – आपने ने मेरी भलाई की इसलिए आपकी जान बखा करता हूँ।
हक्का-बक्का रह जाना – उचक्का मेरे हाथ से घड़ी छीनकर भाग गया, मैं हक्का-बक्का रह गया।
फूट-फूट कर भरना – शत्रु के मन में घृणा कूट-कूट कर भरी हुई है।

5. निम्नलिखित संवादों को अनुच्छेद के रूप में बदलिए-

सवार – (बाहर से) मुझे कर्नल से मिलना है।
गोरा – (चिल्लाकर) बहुत खूब।
सवार – (बाहर से) से।
गोरा – (अंदर जाकर) हुजूर सवार आप से मिलना चाहता है।
कर्नल – भेज दो
लेफ्टीनेंट – वजीर अली का कोई आदमी होगा हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा।
कर्नल – खामोश रहो (सवार सिपाही के साथ अंदर आता है।)
सवार (आते ही पुकार उठता है) तन्हाई! तन्हाई!
कर्नल – साहब यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है, आप राजे दिल कह दे।
सवार – दीवार, हम गोरा दारद तन्हाई।
उत्तर :
सवार कर्नल से मिलने के लिए गोरा से कहता है। गोरा कर्नल के पास जाकर सूचित करता है। कर्नल भेज देने के लिए कहते हैं। लेफ्टीनेंट ने कहा कि वह वजीर का कोई आदमी होगा और हमसें मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा। कर्नल उन्हें शान्त रहने के लिए कहते हैं। सवार आते ही बिल्कुल एकांत की बातकरता है। कर्नल ने कहा कि यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है, इसलिए वह अपने मन की बात बेहिचक कह सकता है।

WBBSE Class 8 Hindi कारतूस Summary

लेखक-परिचय :

हबीब तनवीर का जन्म सन् 1923 ई० को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। हाबीब तनवीर नाटककार, कवि, पत्रकार, अभिनेता, नाद्य निर्देशक आदि क्षेत्रों में ख्याति अर्जित किए। 1982 ई० में वे पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित किये गएं। साहित्य तथा कला के क्षेत्र में इन्हें विविध संस्थाओं ने सम्मानित किया। भारतीय रंगमंच को समृद्ध करने में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 2009 ई० में इनका देहावसान हो गया।

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सारांश :

एकांकी के प्रमुख पात्र कर्नल लेफ्टीनेंट, सिपाही, सवार गोरखपुर के जंगल में रात्रि में कर्नन कालिंग और एक लेफ्टीनेंट खेमे के बाहर बातें कर रहे हैं। हफ्तों से बजीर अली को पकड़ने के लिए डेस डाले हुए हैं। सिपाही भी तंग आ गए हैं। पर वह हाथ नहीं लग रहा है। कर्नल उसके कारनामे बतला रहे हैं कि पाँच महीने के अपने शासनकाल में उसने अवध के दरबार को अंग्रेजों के प्रभाव से मुक्त कर दिया। कर्नल ने अपने मित्र सआदत अली को अवध तख्त पर बैठा दिया। सआदत अली आसिफउद्दौला का भाई है। बजीर अली, टीपू सुल्तान, शमसुद्दौला ने अफगानिस्तान के सम्राट को हिन्दुस्तान पर हमला करने के लिए दिल्ली बुलाया है। कम्पनी के खिलाफ यदि वे कामयाब हो गए तो क्लाइव की सफलता मिट्टी में मिल जाएगी।

कर्नल ने कहा कि वजीर वर्षों से आँखों में धूल झोंक रहा हैं। पकड़ में नहीं आ रहा है। उसके साथ थोड़े से सैनिक हैं, पर वे जान पर बाजी लगाने वाले हैं। उसी ने कंपनी के वकील की हत्या कर दी। वजीर अली के पद से हटाकर बनारस में रखकर उसे 3 लाख सालाना वजीफा निश्चित कर दिया था, कुछ दिन बाद गर्वनर जनरल ने उसे कोलकाता तलब किया। वजीर ने वकील से इसकी शिकायत की। वकील ने उसे बुरा-भला सुना दिया। चिढ़कर वजीर ने उसकी हत्या कर दी। वहाँ से अपने साथियों के साथ जंगलों में छिपा है। उसकी योजना है कि नेपाल पहुँचकर अफगानी हमले की प्रतीक्षा करें। अपनी शक्ति बढ़ाकर सआदत अली को पद से हटाकर अवध पर कब्जा करे और अंग्रेजों को हिन्दुस्तान से निकाल दे। हमारी सेना कड़ाई से उसका पीछा कर रही है।

उसी समय एक सिपाही दूर से गर्द उठने की सूचना दी। कर्नल सिपाहियों को तैयार रहने का आदेश देता है। खिड़की के पास जाकर कर्नल ने देखा कि एक सवार तेजी से घोड़े दौड़ाए आ रहा है। लेफ्टीनेंद ने इसी तरफ आने की बात कही। समीप आकर सवार ने गोरा से कहा कि वह कर्नल से मिलना चाहता है। कर्नल ने सोचा कि वह वजीर अली का कोई आदमी है जो हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा। सिपाही के साथ सवार कर कर्नल से बिल्कुल एकांत में बात करने का प्रस्ताव रखा। सब के बाहर चले जाने पर खेमे में अकेले कर्नल से सवार ने वहाँ खेमा डालने का कारण पूछा।

कर्नल ने उत्तर दिया कि कंपनी की आज्ञा है कि वजीर अली को गिरफ्तार किया जाए। इसीलिए इस फौज के साथ यहाँ टिका हूँ। सवार ने कहा कि वजीर अली एक जाँबाज सिपाही है, इसलिए उसकी गिरफ्तारी मुश्किल है। कर्नल ने सवार से उसका अभिप्राय पूछा। सवार ने बताया कि बजीर अली को गिरफ्तार करने के लिए कुछ कारतूस चाहिए। कारतूस पाकर सवार ने कर्नल को शुक्रिया दिया। कर्नल ने उससे उसका नाम पूछा। सवार ने अपना नाम वजीर अली बतलाकर कहा कि कारतूस देने के कारण वह उनकी जान नहीं ली। यह कह कर तुरंत प्रस्थान कर दिया। कर्नल सन्नाटे में स्तब्ध रह गया। लेफ्टीनेंट के पूछने पर कहा कि वह एक जाँबाज सिपाही था।

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शब्दार्थ :

  • अंदरूनी – भीतरी
  • खेमा – डेरा, तंबू
  • अफसाने – कहानियाँ
  • करनामे – स्मरणीय कार्य
  • हुकूमत – शासन
  • तख्ञ – सिंहासन
  • मसलेहत – रहस्य
  • हिफाजत – सुरक्षा, देखभाल
  • सन्नाटा – एकांत, निर्जनता
  • गिरफ्तारी – कैद करना
  • कामयाब – सफल
  • जाँबाज – जान की बाजी लगाने वाला
  • दमखम – शक्ति, साहस
  • जाती तौर से – व्यक्तिगत रूप से
  • वजीफा – वृत्ति, निर्वाह के लिए दी जाने वाली राशि
  • मुकर्रर – निश्चित, तय करना
  • तलब किया – सामने हाजिर किया
  • हुकमराँ – शासक
  • ऐश प्रसंद – भोग विलास पसंद करने वाला
  • हुक्म – आज्ञा, आदेश
  • इशारा – संकेत
  • काम तमाम करना – मार डालना, खत्म कर देना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 8 पानी की कहानी to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 Question Answer – पानी की कहानी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘पानी की कहानी’ पाठ किस शैली में लिखा गया है?
(क) वर्णनात्मक शैली
(ख) पत्र शैली
(ग) आत्मकथात्मक
(घ) डायरी शैली
उत्तर :
(ग) आत्मकथात्मक

प्रश्न 2.
ओस कहाँ से आई थी?
(क) घास से
(ख) पीपल के पेड़ से
(ग) आम के पेड़ से
(घ) बेर के पेड़ से
उत्तर :
(घ) बेर के पेड़ से

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

प्रश्न 3.
किसके लिए ओस के असंख्य बंधुओं ने अपने प्राण नाश किए?
(क) मनुष्य
(ख) पक्षी
(ग) जीव
(घ) पेड़
उत्तर :
(घ) पेड़

प्रश्न 4.
ओस के पुरखे कौन-कौन से गैस हैं?
(क) नाइट्रोजन ओषजन
(ख) हद्रजन कार्क्म डाईआक्साइड
(ग) हद्रजन – ओषजन
(घ) हद्रजन नाइट्रोजन
उत्तर :
(ग) हद्रजन ओषजन।

प्रश्न 5.
पृथ्वी प्रारंभ में कैसा गोला थी?
(क) लोहे का
(ख) ताँबे का
(ग) मिट्टी का
(घ) आग का
उत्तर :
(घ) आग का।

प्रश्न 6.
रामचंद्र तिवारी की मृत्यु कब हुई ?
(क) 4 जनवरी 2009 ई०
(ख) 4 फरवरी 2009 ई०
(ग) 4 मार्च 2009 ई०
(घ) 4 अप्रैल 2009 ई०
उत्तर :
(क) 4 जनवरी 2009 ई०

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प्रश्न 7.
पृथ्वी प्रारंभ में कैसा गोला थी ?
(क) लोहे का
(ख) ताँबे का
(ग) मिट्टी का
(घ) आग का
उत्तर :
(घ) आग का

प्रश्न 8.
ओस की बूँद के अनुसार जड़ों के रोएँ कैसे होते हैं ?
(क) दयालु
(ख) प्रेमी
(ग) निर्द्यी
(घ) कोमल
उत्तर :
(ग) निर्दयी

प्रश्न 9.
बूँद को उड़ने की शक्ति कौन देता है ?
(क) चंद्रमा
(ख) तारें
(ग) ग्रह
(घ) सूर्य
उत्तर :
(घ) सूर्य

प्रश्न 10.
बूँद भाग्य पर भरोसा करके कहाँ सिकुड़ी रही ?
(क) जड़ में
(ख) तना में
(ग) पत्ते में
(घ) धरती पर
उत्तर :
(ग) पत्ते में

प्रश्न 11.
अपने जन्म के आरंभिक काल में बूँद किस रूप में घूमा करती थी ?
(क) जल के रूप में
(ख) भाप के रूप में
(ग) बर्फ के रूप में
(घ) ओस के रूप में
उत्तर :
(घ) ओस के रूप में

प्रश्न 12.
बूँद को आरंभ में समुद्र की कौन-सी चीज अच्छी नहीं लगी ?
(क) विस्तार
(ख) गहराई
(ग) खारापन
(घ) धाराएँ
उत्तर :
(ग) खारापन

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प्रश्न 13.
ऊपर आकाश में पहुँचकर बूँद को किस पुरानी सहेली के दर्शन हुए ?
(क) तूफान
(ख) आँधी
(ग) बाढ़
(घ) ज्वार-भाटा
उत्तर :
(ख) आँधी

प्रश्न 14.
कौन धीरे-धीरे आँखों से ओझल हो गई ?
(क) लेखक
(क) बूँद
(ग) सूर्य
(घ) चन्द्रमा
उत्तर :
(क) बूँद

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
क्रोध और घृणा से कौन काँप उठी?
उत्तर :
ओस क्रोध और घृणा से काँप उठी।

प्रश्न 2.
किसके शरीर से चमक निकलती थी?
उत्तर :
प्रकाश पिंड के शरीर से चमक निकलती थी।

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प्रश्न 3.
इनका शरीर कब ओषजन और हद्रजन में विभाजित हो गया?
उत्तर :
उनका शरीर अरबों वर्ष पहले ओषजन और हद्रजन में विभाजित हो गया।

प्रश्न 4.
किस कारण वह बूँद बनकर नीचे कूद पड़ी?
उत्तर :
बहुत से भाप जल कणों के मिलने के कारण उसका शरीर भारी हो चला और नीचे झुक आया और एक बूँद ननकर नीचे कूद पड़ी।

प्रश्न 5.
पहाड़ों के पत्थरों का रेत रूप कैसे बनता है?
उत्तर :
बूँदों के प्रहार से पहाड़ों के पत्थर टूटकर खंड-खंड हो गए। इस प्रकार वे रेत के रूप में बन गए।

प्रश्न 6.
रामचंद्र तिवारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
रामघंद्र तिवारी का जन्म 4 जून, 1924 ई० को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के कुकुढ़ा नामक ग्राम में हुआ था।

प्रश्न 7.
ओस को लेखक के किस भाव से दु:ख हुआ ?
उत्तर :
ओस को लेखक के अविश्वास भाव से दु:ख हुआ।

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प्रश्न 8.
बूँद का शरीर कब ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित हो गया ?
उत्तर :
एक ऊँचे तापमान वाले स्थान पर जाने के बाद बूँद का शरीर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित हो गया।

प्रश्न 9.
बूँद को कब बाहर फेंक दिया गया ?
उत्तर :
बूँद जब ज्वालामुखी के निचले हिस्से में पहुँची, तब लावा के साथ उसे भी बाहर फेंक दिया गया।

प्रश्न 10.
बूँद नल से कैसे निकलकर भागी ?
उत्तर :
नल के पाइप में घूमते हुए बूँद एक ऐसी जगह पहुँची जहाँ नल टूटा हुआ था, वहीं से निकलकर वह भागी।

प्रश्न 11.
समुद्र के तल में कैसे पौधें उगे हुए हैं ?
उत्तर :
समुद्र की गहरी तल के नीचे छोटे ठिंगले मोटे पत्तों वाले पेड़ उगे हुए हैं।

प्रश्न 12.
बूँद ऊँची शिखर पर से कहाँ गिरें ?
उत्तर :
बूँद ऊँची शिखर पर से कूद कर एक चट्टान पर गिरी।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार मूलक प्रश्न
(क) ‘क्रोध और घुणा से उसका शरीर काँप उठा।’
1. यह पंक्ति किस पाठ से उद्धृत हैं? इसके रचनाकार का नाम लिखिए।
2. इसका पंक्ति का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
3. किसका शरीर काँप उठा और क्यों?
उत्तर :
1. प्रस्तुत पंक्ति ‘पानी की कहानी’ पाठ से उद्धृत है। इसके रचनाकार रामचंद्र तिवारी है।
2. पेड़ जितना बड़ा ऊपर दिखाई देता है, पृथ्वी के भीतर भी उतनी बड़ी उसका जड़ रहती है। उसकी जड़े और जड़ों के रोए अनगिनत जल कणों को सोख लेतें हैं। इस प्रसंग में यह पंक्ति कही गई है।
3. जल की बूँद शरीर के क्रोध और घृणा से काँप उठी। बूँद पेड़ के पास की भूमि में बहुत दिनों तक इधर-उधार घूमती रही, एकाएक पकड़ी गई, पेंड़ की जड़े तथा उनके रोएँ असंख्य जल कणों को बलपूर्वक पृथ्वी से खींच लेती हैं। कुछ को पेड़ बिल्कुल खा जाते है। अधिकांश का सब कुछ छीनकर उन्हें बाहर निकाल दूते हैं। यह देख कर बूँद का शरीर काँप उठा।

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बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
पानी का जन्म कैसे हुआ?
उत्तर :
हद्रजन और ओषजन गैसों से उत्पन्न भाप पृथ्वी के चारों ओर घूमने लगी। फिर वह ठोस बर्फ के रूप में बदल गई। फिर नीचे दबे हुए ठोस बर्फ दबकर पानी के रूप में परिवर्तित हो गई।

प्रश्न 2.
प्रारंभ में पानी के शरीर का रूप कैसा था और क्रमशः कैसा हो गया?
उत्तर :
प्रारंभ में पानी का शरीर हद्रजन और ओषजन गैसों के रूप में था। बाद में उन गैसों का अस्तित्व खत्म हो गया। फिर उनसे बनी ओस बूँदें, भाप बन गई। भाप पृथ्वी के चारों ओर घूमती-फिरती थी। उसके बाद वे ठोस बर्फ के रूप में बन गई। ठोस बर्फ ही पिघल कर पानी बन गए।

प्रश्न 3.
समुद्र के भीतर उसने क्या-क्या देखा?
उत्तर :
समुद्र के भीतर उसने धीरे-धीरे रेंगनेवाले घों, जालीदार मछालयाँ, कई-कई मनभारी कछुवे और हाथों वाली मछलियाँ देखा। एक मछली के आठ हाथ थे। उनसे वह अपने शिकार पकड़ लेती थी। समुद्र की गहराई में जाकर एक सुंदर मछली देखा, जिसके शरीर से एक प्रकार की चमक निकलती थी। समुद्र की गहरी तह में छोटे-ठिंगने मोटे पत्ते वाले पेड़, पहाड़ियों, घाटियों, गुफाओं में अनेक जीव-जन्तु को देखा।

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प्रश्न 4.
ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर :
पृथ्वी के फट जाने से उसमें धुआँ, रेत, पिघली, धातुएँ तथा लपटें निकलती हैं। इसे ज्वालामुखी कहते हैं।

प्रश्न 5.
पहाड़ से गिर सरिता बन वह क्या करती है और कहाँ पहुँचती है?,
उत्तर :
पहाड़ से गिर सरिता बन वह कभी भूमि को काटती, कभी पेड़ों, की खोखला कर उन्हें गिरा देती है। बहते-बहते वह एक दिन एक नगर के पास पहुँचती है।

भाषा बोध :

1. संस्कृत के वे शब्द जिनका हिन्दी में वैसे ही प्रयोग किया जाता है, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे-दुर्ध, दधि, अग्न, वर्षा आदि।
संस्कृत के जिन शब्दों को हिन्दी में बदलकर प्रयोग किया जाता है, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। जैसे- दूध, दही, आग, बारिश।

निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम शब्द और तद्भव शब्द को अलग कीजिए-
मोती, उज्ज्वल, हाथ, कार्य, दृश्य, छेद, क्षण, पत्थर, मुँह, कार्य, धुँआ, पुरखे, भूमि, प्रत्यक्ष, मनुष्य।
तत्सम शब्द –  तद्भव शब्द

  • उज्ज्यल – मोती
  • कार्य – हाथ
  • दृश्य – छेद
  • क्षण – पत्थर
  • कार्य – मुंह
  • भूमि – धुआँ
  • प्रत्यक्ष – पुरखे
    मनुष्य

2. जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं उन्हें विशेषण कहते हैं। जैसे- दयालु, भारतीय, सुन्दर आदि।
निम्नलिखित शब्दों के विशेषण रूप बनाइए-

  • अंगल – जंगली
  • प्रकृति – प्राकृतिक
  • नगर – नागरिक
  • दर्शन – दर्शनीय, दार्शनिक
  • श्रद्धा – श्रद्यालु
  • साहस – साहसी
  • अनुभव – अनुभवी
  • शक्ति – शक्तिमान, शक्तिशाली

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3. निम्नलिखित शब्द युग्मों को वाक्य में प्रयोग कीजिए –

  • इधर-उधर – इधर-उधर देखकर चलना चाहिए।
  • उथल-पुथल – वर्षा के कारण उथल-पुथल मच गई।
  • बंधु-बांधवों – मैने जन्म-दिन पर बंधु बाँधनों को निमंत्रित किया।
  • जैसे-तैसे – जैसे-तैसे उसने अपना काम सम्पन्न कर लिया।
  • चहल-पहल – मेले में बड़ी चहल-पहल थी।
  • आस-पास – हमारे घर के आस-पास वृक्षों की छाया बनी रहती है।
  • मैली-कुचैली – भिखारिन मैली-कुचैली धोती पहन रखी है।
  • लाल-पीला – मुझे देखते ही वह लाल-पोला हो गया।
  • उछलने-कूदने – बच्चों को उछलने-कूदने में मजा आता है।

4. निम्नलिखित शब्दों के अंग्रेजी के समान अर्थ वाले शब्द लिखिए –

  • हद्रजन – हाइड्रोजन
  • ओषजन – ऑक्सीजन
  • रासायनिक क्रिया – कैमिकल रिएक्शन
  • तापक्रम – टेम्परेचर
  • दुर्घटना – एक्सीडेंट
  • धुन्यवाद – थैंक्स

WBBSE Class 8 Hindi पानी की कहानी Summary

लेखक-परिचय :

आचार्य रामचंद्र तिवारी का जन्म सन् 1924 ई० में वाराणसी जनपद के कुकुढ़ा ग्राम में हुआ था। हिन्दी साहित्य में ये आलोचक के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी महत्वपूर्ण रचनाएँ- हिन्दी का गद्य साहित्य, मध्ययुगीय काल साधना, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, कबीर मीमांसा, आलोचना का दायित्व आदि है। सन् 2009 में इनका देहावसान हो गया।

सारांश :

एक दिन लेखक के हाथ पर मोती-सी एक बूँद आ पड़ी। वह बूँद लेखक को अपनी कहानी सुनाने लगी। बूँद कहने लगी कि में बेर के पेड़ से आई हूँ। सामने का पेड़ का ऊपरी हिस्सा जितना बड़ा है पृथ्वी के नीचे उसकी जड़ भी उतनी बड़ी है। हमारे असंख्य बन्धुओं ने इसे इतना बड़ा बनाने में अपने प्राण नाश किए हैं। पेड़ के रोएँ असंख्य जल कणों को खींचकर खा जाते हैं, कुछ को बाहर निकाल देते हैं। लगभग तीन दिन तक मैं एक कोठरी में साँसत भोगती रही। फिर पत्तों के छेदों से होकर भागी। रक्षा पाने के लिए तुम्हारे हाथ पर कूद पड़ी। सूर्य के निकलने पर उड़ने को शक्ति मिल जाएगी। मेरा जीवन विभिन्न घटनाओं से परिपूर्ण है। उसकी कहानी मैं तुम्हें सुना रहा हूँ।

बहुत दिन पहले मेरे पुरखे हद्रजन और ओषजन नामक दो गैसें सूर्य मंडल में लपटों के रूप में विद्धमान थीं। एक दिन बाह्मण्ड के उथल पुथल होने से अनेक ग्रह और उपग्रह बन गए। एक दिन एक प्रचंड प्रकाश पिंड सूर्य की ओर बढ़ने लगा। उसकी आकर्षक शक्ति से सूर्य का एक भाग टूट कर फिर से कई टुकड़ों में टूट गया। उन्हीं में से एक टुकड़ा हमारी पृथ्वी है। यह प्रारंभ में एक बड़ा आग का गोला थी। अरबों वर्ष पहले हद्रजन और ओषजन के रासायनिक क्रिया के कारण मैं पानी बन गई। मेरा शरीर पहले भाप रूप में था। बाद में मैं ठोस बर्फ के रूप में परिवर्तित हो गई।

भार के कारण मेरे कुछ भाई पानी हो गए। कई मास मैं समुद्र में घूमती रही। एक दिन गर्म धारा से पिघल कर मैं पानी बनकर समुद्र में मिल गई। समुद्र का दृश्य अद्भुत था। समुद्र में दूसरे जीवों की चहल पहल है। उसमें निरा नमक भरा है। एक दिन समुद्र की गहराई में जाकर मैने विचित्र विचित्र जीव देखें। धीरे-धीरे रेंगने वाले घोंघे, जालीदार, मछलियाँ, कई कई मन भांरी कछुये, और हाथों वाली मछलियाँ देखी। एक लंबी मछली के आठ हाथ थे।

और गहराई में जाने पर अँधकार में एक सुन्दर मछली दिखलाई पड़ी, जिसके शरीर से चमक निकल रही थी। छोटी-छोटी मछलियों को वह खा जाती थी। नीचे समुद्र की गहरी तल में जंगल में छोटे ठिंगले मोटे पत्तों वाले पेड़ उगे हुए हैं। वहाँ पर पहाड़ियों घाटियों की गुफाओं में जीव जन्तु रहते हैं। फिर मैं चट्टान में घुल गई। एक जगह ताप क्रम बहुत ऊँचा था। एक जोर के धक्के से ऊँचे आकाश में उड़ चलो। देखा कि पृथ्वी से धुँआ, रेत, पिघली, धातुएँ तथा लपटें निकल रही है। इसे ज्वाला मुखी कहते हैं।

बहुत से भाप जल कणों के मिलने के कारण भारी होकर एक दिन बूँद बनकर नीचे कूद पड़ी। ऊँची शिखर पर से कूद कर एक चट्टान पर गिरी। हमारे प्रहार से टूटकर खंड-खंड होकर पत्थर रेत बन गया। फिर समतल भूमि देखने की इच्छा से मैं एक छोटी धारा सरिता में मिल गई। नदी के तट पर एक मीनार से निकलनेवाली हवा को देखने के लिए मैं आगे बढ़ी और साथियों के साथ एक मोटे नल में खींच ली गई। एकाएक टूटे नल में पहुँचकर उसमें से भाग निकली। पृथ्वी के अंदर घूमते-घूमते इस बेर के पेड़ के पास पहुँची। सूर्य के निकलते ही मैं लेखक के पास न रह सकी। इस प्रकार ओस की बूँद धीरे-धीरे आँखों से ओझल हो गईई।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 8 पानी की कहानी

शब्दार्थ :

  • टटोलना – जाँच करना, परखना
  • साँसत – कठिनाई में पड़ना
  • दीर्घ जीवी – लंबे समय तक जीनेवाला
  • ज्ञान – जानकारी
  • वार्तालाप – बातचीत
  • किलकारी – हर्षध्वनि
  • खंड-खंड – टुकड़े-टुकड़े
  • रेत – धूल
  • विद्यमान – मौजूद
  • अस्तिव – विद्यमानता, सत्ता
  • ओझल-लुप्त, आँखों से परे
  • बहुतायत – अधिक
  • असहय – न सहने योग्य
  • अबाध – बाधा रहित, निर्विघ्न
  • किलोले- आनन्दं लहर
  • दृश्य – नजारा
  • अगुवा – आगे चलने वाला
  • शिखर – चोटी
  • प्रहार – आघात, हनन
  • वर्णनातीत – जिसका वर्णन न किया जा सके

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

Students should regularly practice West Bengal Board Class 8 Hindi Book Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति to reinforce their learning.

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 Question Answer – शाप मुक्ति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
शाप मुक्ति किस विद्या की रचना है?
(क) क्रविता
(ख) कहानी
(ग) निबंध
(घ) नाटक
उत्तर :
(ख) कहानी

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात के बचपन का क्या नाम था?
(क) चिंदू
(ख) बब्बू
(ग) मंदू
(घ) ढब्बू
उत्तर :
(ग) मंटू

प्रश्न 3.
डॉ० प्रभात किसके डॉक्टर थे?
(क) दाँतो के
(ख) हदय के
(ग) आँखों के
(घ) हड्डी के
उत्तर :
(ग) आँखों के

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 4.
डॉ प्रभात के पास बब्दू किसका इलाज करने आया था?
(क) अपनी नानी का
(ख) अपनी दादी का
(ग) अपनी माँ का
(घ) अपनी बहन का
उत्तर :
(ख) अपनी दादी का

प्रश्न 5.
दादी किसके समझाने पर इलाज कराने को तैयार हो गई?
(क) बब्बू
(ख) डॉ० प्रभात
(ग) मंटू
(घ) परिवार जन
उत्तर :
(ख) डॉ० प्रभात।

प्रश्न 6.
शाप-मुक्ति किसकी रचना है ?
(क) डॉं० रमेश उपाध्याय
(ख) रमेशचंद्र शाह
(ग) रामचंद्र शुक्ल
(घ) रामचंद्र तिवारी
उत्तर :
(क) डॉ० रमेश उपाध्याय

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

प्रश्न 7.
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म कब हुआ था ?
(क) 1 मार्च, 1942 ई०
(ख) 1 अप्रैल, 1942 ई०
(ग) 1 मई, 1942 ई०
(घ) 1 जून, 1942 ई०
उत्तर :
(क) 1 मार्च, 1942 ई०

प्रश्न 8.
मंदू के पिता पेशे से क्या थे ?
(क) डॉक्टर
(ख) वकील
(ग) इंजीनियर
(घ) शिक्षक
उत्तर :
(ख) वकील

प्रश्न 9.
मंटू ने पिल्लों की आँखों में क्या डाला ?
(क) गाय का दूध
(ख) सरसों का तेल
(ग) आक का दूध
(घ) तालाब का पानी
उत्तर :
(ग) आक का दूध

प्रश्न 10.
मंदू ने कितने पिल्लों की आँखों को खराब किया ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ग) तीन

प्रश्न 12.
मंटू और बब्बू में क्या संबंध था ?
(क) भाई
(ख) मित्र
(ग) रिश्तेदार
(घ) अजनबी
उत्तर :
(ख) मित्र

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प्रश्न 13.
आक के दूध से होनेवाले नुकसान की जानकारी मंदू को किसने दी ?
(क) शिक्षक ने
(ख) दादी ने
(ग) डॉक्टर ने
(घ) मंटू को खुद पता था
उत्तर :
(क) शिक्षक ने

प्रश्न 14.
बड़ा होकरें मंटू क्या बना ?
(क) नेत्र चिकित्सक
(ख) इन्जीनीयर
(ग) पुलीस
(घ) लेखक
उत्तर :
(क) नेत्र चिकित्सक

प्रश्न 15.
कौन डॉ० प्रभात से इलाज करवाने से इन्कार कर दिया।
(क) डॉ० रमेश
(ख) दादी
(ग) पड़ोसी
(घ) बब्बू
उत्तर :
(ख) दादी

प्रश्न 16.
डॉ० प्रभात ने अपने गलती के लिए किससे माफी माँगी ?
(क) बब्यू
(ख) चिंदू
(ग) दादी
(घ) लेखक
उत्तर :
(ग) दादी

लघुउत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
डॉ० प्रभात के पास दादी क्यों गई?
उत्तर :
दादी आँखों का इलाज कराने के लिए डॉ० प्रभात के पास गई।

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प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात किस प्रकार के डॉक्टर थे?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक थे। दूर-दूर से लोग उनके पास अपनी आँखों का इलाज कराने आते थे। वे देश के माने हुए डॉक्टर थे।

प्रश्न 3.
डॉ० प्रभात कहाँ के रहने वाले थे?
उत्तर :
डा० प्रभात इलाहाबाद के रहने वाले थे।

प्रश्न 4.
मंदू कौन था?
उत्तर :
डॉ० प्रभात का ही बचपन का नाम मंदू था।

प्रश्न 5.
दादी डॉक्टर के पास क्यों नहीं जाना चाहती थी?
उत्तर :
डॉक्टर अपने बचपन में तीन पिल्लों की आँखों फोड़ दी थी। दादी को यह घटना याद थी। उस समय दादी उन्हें शाप भी दी थी। बचपन की इसी घटना को लेकर दादी उनके पास नहीं जाना चाहती थी।

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प्रश्न 6.
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ० रमेश उपाध्याय का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था।

प्रश्न 7.
आक के दूध का क्या अवगुण है ?
उत्तर :
यदि आक का दूध आँखों में पड़ जाय तो आँखें अंधी हो जायेंगी।

प्रश्न 8.
दादी ने मंटू को क्या शाप दिया था ?
उत्तर :
जिस तरह मंदू ने पिल्लों की आँखें फोड़ी थी, उसी तरह मंदू की आँखें भी फूट जाय। यही शाप दादी ने मंदू को दिया था।

प्रश्न 9.
पिल्लों की मौत कैसे हुई ?
उत्तर :
मंदू द्वारा पिल्लों की आँखों में आक का दूध डालने के कारण उनकी मौत हो गई।

प्रश्न 10.
बब्नू ने एक पिल्ले को बचाने के लिए क्या प्रयास किया ?
उत्तर :
बब्बू ने एक पिल्ले को बचाने के लिए उसे पाल लिया और उसके आँखों का इलाज भी करवाया।

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प्रश्न 11.
तीसरा पिल्ला कैसे मरा ?
उत्तर :
तीसरा पिल्ला सड़क पर किसी गाड़ी के नीचे आकर मारा गया।

प्रश्न 12.
मंटू ने अपने अपराध का प्रायश्चित कैसे किया ?
उत्तर :
मंदू ने निश्चय किया कि वह आँख का डॉक्टर बनेगा और लोगों की आँखों को फिर से रोशन कर अपने अपराध का प्रायश्चित करेगा।

प्रश्न 13.
अंत में दादी ने मंदू को क्या आशीर्वाद दिया ?
उत्तर :
अंत में दादी ने मंदू को दीर्घायु होने और उसकी आँखों की ज्योति के हमेशा बने रहने का आशीर्वाद दिया।

बोधमूलक प्रश्न :

प्रश्न 1.
बब्बू ने मंदू के पापा का भेद क्यों खोल दिया?
उत्तर :
बब्बू ने पहले बात छिपाकर मित्र मंदू को बचाने की कोशिश की। दो पिल्ले तो मर गए तीसरे जीवित पिले को बचाना मंदू के कुकृत्य का भेद बता देने, और उसे पिटाई से बचाने से ज्यादा जरूरी था। इसलिए रोते हुए बब्बू ने भेद खोल दिया।

प्रश्न 2.
डॉ० प्रभात ने बचपन में किए पाप का प्रायश्चित किस प्रकार किया?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात नेत्र चिकित्सक बनकर हजारों लोगों को उनकी खोई हुई नेत्र-ज्योति ल्रौटाकर पाप का प्रायशचित कर लिया।

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प्रश्न 3.
शाप मुक्ति कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर :
इस प्रश्न का उत्तर पाठ का सारांश में देखिए।

प्रश्न 4.
‘शाप मुक्ति’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीव जन्तुओं के प्रति हमें सद्भाव रखना चाहिए। यदि कोई अपराध अनजान या जानबूझ में हो गया है तो अपने शुभ चिन्तकों से पूछकर प्रायश्चित कर लेना चाहिए। प्रायश्चित कर लेना, अपने पाप का अपराध के लिए अपनी गलती स्वीकार कर लेना सर्वथा उचित है। डॉ॰ प्रभात ने अपने बचपन की अबोध अवस्था में जो पाप कर्म किया था उसका प्रायश्चित उन्होंने नेत्र चिकित्सक बनकर हजारों लोगों की आँखों को ज्योति देकर कर लिया।

प्रश्न 5.
‘चेहरा किसी दुखदाई स्पृति में काला-सा हो गया’ किसका चेहरा दुखदाई स्मृति में काला हो गया था? वह दुखदाई स्मृति क्या है?
उत्तर :
डॉ॰ प्रभात का चेहरा किसी दुखदाई स्मृति में काला-सा हो गया। वह दुखदाई स्मृति डॉ॰ प्रभात का बचपन में अबोध अवस्था में किया गया पाप था उन्होंने एक कुतिया के तीन पिल्लों की आँखों में आक का दूध डाल कर उन्हें अंधा बना दिया था।

व्याख्या मूलक प्रश्न :

1. निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
‘जीते रहो, मेरे लाल! तुम्हारी आँखों की ज्योति हमेशा बनी रहे।’
(क) यह गद्यांश किस पाठ का है और इसके लेखक कौन हैं?
(ख) इस पंक्ति का वक्ता कौन हैं? वक्ता ने ऐसा कब और क्यों कहा ?
(ग) इस कथन के अनुसार स्पष्ट कीजिए कि प्रायश्चित कर लेने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है?
उत्तर :
(क) यह गद्यांश ‘शाप मुक्ति’ पाठ से उदधृत है। इस पाठ के लेखक डॉ० रमेश उपाध्याय हैं।

(ख) इस पंक्ति की वक्ता दादी है। डॉ० प्रभात दादी के घर आकर दादी को तसल्ली देने लगे। बचपन में दादी के द्वारा दिए गए शाप की याद दिला कर बोले कि उन्हें उस घटना से बचपन की अबोध अवस्था में किए गए पाप का बोध हुआ और तभी उन्होंने निश्चय कर लिया कि उन्हें जीवन में नेत्र चिकित्सक बनना है। डॉ० प्रभात की बातों से प्रभावित होकर दादी ने उन्हें आशीर्वाद् देते हुए यह कहा।

(ग) सचमुच प्रायश्चित कर लेने से व्यक्ति निष्पाप हो जाता है। बचपन मे अज्ञान की स्थिति में इस प्रभात ने पिल्लों की आँखें फोड़कर अपराध किया था। उन्हें इस अपराध का स्वयं ज्ञान हुआ। उन्होंने नेत्र चिकित्सक बनकर न जाने कितने लोगों की आँखों की ज्योति दीं। उनके पाप बोध पश्चाताप तथा नेत्र चिकित्सक बनकर अनेक आँखों को ज्योति देने से वे निष्पाप हो गये। स्वयं दादी ने अपने शाप को आशीर्वाद में बदल दिया। इस प्रकार डॉ० प्रभात निष्पाप हो गए।

भाषा बोध :

1. ‘बचपन’ में बच शब्द में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाई गई है। इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाइए।

(क) लड़ाका + पन = लड़कपन।
(ख) अजनवी + पन = अजनवीपन।
(ग) अन्धा + पन = अन्धापन।
(घ) अपना + पन = अपनापन।

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2. निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए-

पढ़ना – पढ़ाना
चलना – चलाना
रंगना – रंगाना
लिखना – लिखाना
पढ़वाना
चलवाना
रंगवाना
लिखवाना

3. किसी वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध क्रिया के साथ स्पष्ट होता है, उसे कारक कहते हैं-

(क) डॉ० प्रभात ने कोई उत्तर न दिया। कर्त्ता कारक
(ख) दादी के लिए दवाई का पर्ची लिखी। संप्यदान कारक
(ग) बाजार से दवा मँगवा लेना। अपादान कारक
(घ) दूध पिल्लों के आँखों में डाल रहा था। अधिकरण कारक
(ङ) सब लोगों ने मंदू को बुरा भला कहा। कर्म कारक

4. निम्नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

  • दिन – आज का दिन बहुत अच्छा है।
  • दीन – दीन जनों पर दिया दिखाना चाहिए।
  • कहा – मैं ने कुछ नहीं कहा।
  • कहाँ – तुम कहाँ रहते हो।
  • दादी – दादी माँ कहानी सुनाती है।
  • दीदी – हर भाई अपनी दीदी का सम्मान करता है।
  • बांग – बाग में बहुत पेड़ हैं।
  • बाघ – बाघ एक हिंसक जानवर है।
  • कल – मैं कल घर जाऊँगा।
  • काल – सदा काल बीतता रहता है।
  • बाहर – घर के बाहर बच्चे खेल रहे हैं।
  • बहार – इस ऋतु में बाटिका में बहार आ गई है।
  • भला – सब का भला हो।
  • भाला – भाला एक अस्त्र है।
  • धुल – उसका चेहरा धुल गया।
  • धूल – धूल में मत खेलो।
  • सुन – मैं सब कुछ सुन रहा हूँ।
  • सुन्न – उसके अंग सुन्न हो गए हैं।

WBBSE Class 8 Hindi शाप मुक्ति Summary

लेखक-परिचय :

डॉ० रमेश उपाध्याय का सन् 1942 ई० में उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के बढ़ारी बैस गाँव में हुआ था। डॉ० उपाध्याय आधुनिक युग के महत्वपूर्ण कहानीकार हैं। इनकी कहानियों में भारतीय संस्कृति तथा समाज का यथार्थ चित्रण मिलता है। अपनी पैनी दृष्टि से उन्होंने रूढ़ियों तथा अंधविश्वासों की तह तक पहुँच कर उनका पर्दाफाश किया है। इन्होने पन्द्रह कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, तीन-नाटक तथा अनेक आलोचनात्मक पुस्तकों की रचना की। साहित्य और संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका ‘कथन’ के वे संस्थापक सम्पादक रहे। वे अनेक पुरस्कार तथा सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन कार्य में संलग्न है।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

सारंश :

प्रस्तुत कहानी में लेखक ने अबोध अवस्था में एक बालक द्वारा हुए अपराध और उसके प्रायश्चित की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। एक दिन लेखक अपनी बूढ़ी दादी की आँखों का इलाज कराने दिल्ली के प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ॰ प्रभात के पास गया। कुछछ बातचीत के बाद डॉक्टर हँसते हुए दादी से बात करते हुए दादी की आँखों की जाँच की।

लेखक को डॉ० प्रभात की हँसी तथा उनका चेहरा कुछ परिचित सा जान पड़ा। लेखक के पूछने पर डॉक्टर साहब ने अपने को इलाहाबाद का बतलाया। लेखक भी इलाहाबाद का ही था। इलाहाबाद का पता पूछने पर दादी ने घर का पता बतला दिया। डॉंक्टर ने तुरंत पहचान कर लेखक के बचपन के नाम बब्बू को याद कर पूछा कि वह बब्बू हैं। लेखक ने अपने बाल सखा मंदू को पहचान लिया।

डॉक्टर ने पुराने मित्र से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की। दादी ने बतलाया कि इलाहाबाद में हमारे पड़ोस में एक वकील साहब रहते थे। इसी मंदू नाम का उनका लड़का बड़ा बदमाश था। सहसा डॉ॰ प्रभात बहुत गंभीर हो गए। दादी के लिए दवाई का पर्चा लिखते हुए फिर कभी बातें करने का इरादा व्यक्त किया। फिर उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह आँखों का ऑपरेशन होगा। ईश्वर की कृपा से आँखें ठीक हो जाएँगी।

बाहर आते ही दादी यह जान गई यही वकील का बेटा मंदू है, जिसने आक के पौधे का दूध डाल कर कुतिया के तीनों पिल्लों की आँखें फोड़ दी थी। दादी ने निश्चय किया कि अब इस दुष्ट से अपनी आँखें नहीं फुड़वाऊँगी। दवा लेना भी जिद्द करके नामंजूर कर दी। लेखक के समझाने पर भी दादी उस डॉक्टर से इलाज कराने को तैयार न हुई।

दादी के द्वारा याद दिलाए जाने पर लेखक के मन में वह दुखद स्मृति ताजी हो गई। इलाहाबाद में लेखक के पड़ोसी वकील साहब की कोठी के पीछे बाग की मेड़ पर आक के बहुत से पौधे उगे हुए थे। प्रक दिन स्कूल के अध्यापक ने लेखक को आक के पत्ते तोड़ते देखकर बतलाया कि इसका सफेद दूध यदि आँखों में चला जाए तो आदमी अंधा हो जाता है। इसकी सच्चाई जानने के लिए मंदू ने कुतिया के तीन पिल्लों की आँखों में आक के पौधे का दूध डाल दिया। लेखक ने इस बेवकूफी के लिए उसे झिड़का और कहा कि ये पिल्ले अब अंधे हो जाएँगे। तीनों पिल्ले अंधे हो गए।

मंदू को भी एहसास हो गया कि प्रयोग के रूप में उसने बड़ा पाप कर डाला। मंदू ने गिड़गिड़ाकर लेखक से कहा कि वह किसी को न बताए। दो पिल्ले तो मर गये, तीसरे को बचाने की इच्छा से लेखक ने सारी बात बताकर तीसरे पिल्ले को बचाने के लिए उसका इलाज कराने की जिद्द पकड़ ली। सब लोगों ने मंदू को बुरा-भला कहा। वकील साहब ने उसकी पिटाई भी की। तीसरे पिल्ले को लेखक ने पाल लिया। लेखक और उसकी दादी ने पिल्ले की बड़ी सेवा की। एक दिन वह सड़क पर किसी वाहन से कुचल कर मर गया आज वही मंटू इतनाबड़ा नेत्र चिकित्सक बन गया। दादी को पैंतीस साल की पुरानी घटना अब भी याद थी। प्रभात को भी वह घटना याद थी।

लेखक ने दादी को समझाया कि डॉ० प्रभात ने हजारों की नेत्र ज्योति लौटाई। अत: उनका बचपन का अबोध अवस्था में किया गया पाप अब धुल गया होगा। पर दादी टस से मस न हुई। उनसे अपना इलाज न कराने की जिद्द न छोड़ी। डॉ० प्रभात यह सुनकर बोले कि मैं आकर दादी को समझाऊँगा। डॉ० प्रभात हमारे घर आकर दादी से कहने लगे। दादी माँ, बचपन के पाप को मैं नहीं भूला हूँ। आप ने जो शाप दिया था कि ‘तुम्हारी भी आँख फूटेगी।’

वह भी नहीं भूला हूँ। आप के इस शाप से मुझे पाप का बोध हुआ। मैंने नेत्र-चिकित्सक बनने का फैसला कर लिया। अपनी आँख फूटने के पहले मैं बहुत सी आँखों को रोशनी दूँगा, उसमें दो आँखें आप की भी होंगी। डॉ० प्रभात की बातों में ऐसा जादू था कि सब की आँखों में आँसू आ गये। दादी भाव विद्धल होकर उन्हें हृदय से लगा लिया और आशीर्वाद दिया कि मेरे लाल तुम्हारों आँखों की ज्योति सदा बनी रहे।’ फिर लेखक से कहने लगी कि अपने बाल सखा की खातिरदारी करो। अच्छी सी मिठाई लाओ और मेरी आँखों के लिए जो दवाई लिखी थी वह भी खरीद लाना।

WBBSE Class 8 Hindi Solutions Chapter 7 शाप मुक्ति

शब्दार्थ :

  • अबोध – अनजान, अज्ञान
  • दुबारा – पुन: एक बार
  • आक – मदार
  • तकलीफ – कष्ट
  • अचरज-आश्चर्य
  • लुप्त – गायब
  • भाव – विचार, अभिप्राय
  • परिवर्तन – बदलाव
  • मासूम – कोमल, भोला
  • बाल सखा -बचपन का मित्र
  • उपकरण – सामग्री, सामान, यंत्र
  • असर – प्रभाव
  • स्मृति – याद
  • नेत्र चिकित्सक – आँखों का डॉक्टर
  • ज्योति – रोशनी
  • अकसर – प्राय:
  • कुकृत्य – बुरा कार्य
  • एहसास – समझ
  • जिज्ञासा – जानने की इच्छा
  • प्रयास – कोशिश
  • वाहन – सवारी
  • पिल्ला – कुत्ते का बच्चा
  • प्रायश्चित – जिस कृत्य को करने से पाप से छुटकारा मिल जाए।