WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 Question Answer – कश्मीर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कश्मीर हमारे देश का क्या है ?
(क) संकट
(ख) मुकुट
(ग) राजधानी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) मुकुट।

प्रश्न 2.
कश्मीर की घाटी में बहने वाली नदी है –
(क) गंगा
(ख) यमुना
(ग) झेलम
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) झेलम।

प्रश्न 3.
अछबल क्या है।
(क) नदी
(ख) तालाब
(ग) झरना
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) झरना।

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प्रश्न 4.
अवन्ति वर्मा ने किस मंदिर का निर्माण करवाया था ?
(क) शिव
(ख) गणेश
(ग) विष्णु
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) विष्णु।

प्रश्न 5.
मुगल सम्राटों ने किसे अपना विश्राम शिविर बनाया था ?
(क) नैनीताल
(ख) मंसूरी
(ग) कश्मीर
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) कश्मीर।

प्रश्न 6.
राजतरंगिणी के लेखक हैं –
(क) कालिदास
(ख) कल्हण
(ग) मुद्राराक्षस
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) कल्हण।

प्रश्न 7.
‘कश्मीर’ निबंध के लेखक हैं –
(क) रामचंद्र शुक्ल
(ख) रामकुमार वर्मा
(ग) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(घ) रामविलास शर्मा
उत्तर :
(ख) रामकुमार वर्मा।

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प्रश्न 8.
डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) ग्वालियर
(ख) सागर
(ग) नागपुर
(घ) भोपाल
उत्तर :
(ख) सागर।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कश्मीर को हमारे कवियों ने क्या कहा है?
उत्तर :
कश्मीर को हमारे कवियों ने स्वर्ग का एक कोना कहा है।

प्रश्न 2.
जम्मू और कश्मीर राज्य का क्षेत्रफल कितना है ?
उत्तर :
जम्मू और कश्मीर राज्य का क्षेत्रफल लग भग पचास हजार वर्गमील है।

प्रश्न 3.
राजतरंगिणी के लेखक कौन हैं ?
उत्तर :
राजतरंगिणी के लेखक महाकवि कल्हण हैं।

प्रश्न 4.
पहलगाँव किस घाटी में स्थित है ?
उत्तर :
पहलगाँव लिदर की घाटी में स्थित है ।

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प्रश्न 5.
झेलम के उत्तरी भाग में स्थित झरने का क्या नाम है ?
उत्तर :
झेलम के उत्तरी भाग में स्थित झरने का नाम अछबल झरना है।

प्रश्न 6.
डॉ० रामकुमार वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
डॉ॰ रामकुमार वर्मा का जन्म 15 सितंबर, 1905 ई० में मध्यपद्रदेश के सागर जिला में हुआ था।

प्रश्न 7.
कश्मीर का वरदान किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
झेलम नदी को कश्मीर का वरदान कहा जाता है।

प्रश्न 8.
कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध झीलों के नाम लिखें।
उत्तर :
कश्मीर के कुछ प्रसिद्ध झीलों में वुलर झील एवं मानसबल झील प्रमुख हैं।

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प्रश्न 9.
मेवों का देश किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
कश्मीर को मेवों का देश कहा जाता है ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
मुगल बादशाह जहाँगीर ने कश्मीर के संबंध में क्या कहा है ?
उत्तर :
मुगल बादशाह जहाँगीर ने कश्मीर के संबंध में कहा है कि यदि जमीन पर बहिश्त (स्वर्ग) है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है।

प्रश्न 2.
राजतरंगिणी में क्या वर्णित है ?
उत्तर :
राजतरंगिणी में कश्मीर के इतिहास का वर्णन है। कश्मीर के ऐतिहासिक वैभव का खंडहर इसमें दृष्टिगत होता है।

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प्रश्न 3.
मार्तण्ड मंदिर का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मार्तण्ड मंदिर के नीचे से सरोवरों के छोटे-बड़े आकार की बड़ी कलात्मक कृतियाँ बनी हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानों एक बड़े थाल में कलाकंद के छोटे-बड़े टुकड़े तराशे गए हैं। इन कुंडों में मछलियाँ स्वच्छंदता से विचरण करती हैं। इन्हें देख कर मन मुग्ध हो जाता है।

प्रश्न 4.
अछबल झरने की सुंदरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
अछबल झरने को देखकर ऐसा लगता है मानों सौन्दर्य और संगीत तरल होकर निर्झर रूप से बह रहे हैं। इस झरने की सुंदरता पर मुग्ध होक़र सम्राट जहाँगीर ने यहाँ एक सुंदर बगीचा बनवाया था। भूमि के कोड़ से तीन धाराएँ ऊपर उभरती हैं, मानों ये जलधाराएँ भूमि की नाभि से ऊपर तक जाने वाली त्रिवली रेखाएँ हैं।

प्रश्न 5.
कोकड़ नाग के बारे में आपको क्या ज्ञात हुआ है?
उत्तर :
कुक्कुट शब्द का कश्मीरी रूप कोकड़ है। यहाँ भूमि के अनेक स्थानों से जल-धारा प्रवाहित होती है। लगता है जल आँख-मिचौनी खेल रहा है। कितने स्थानों से जल की पतली-पतली धाराएँ निकल कर स्थूल बन जाती है। अत्यंत शीतल निर्मल जल तीव्र गति से बहता है।

प्रश्न 6.
कश्मीर को धरती का स्वर्ग क्यों कहा गया है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा गया है। यहाँ के लहलहाते खेत, कल-कल की ध्वनि करते झरने, गाती हुई नदियाँ, मनोरम प्राकृतिक दृश्य मन को मुग्ध कर देते हैं। इस मधुर प्रदेश में जीवन मुस्कान से भर उठता है। ईश्वर ने प्रकृति के सौन्दर्य से इसे अनेक प्रकार से सँवारा है। उपत्यकाएँ, हिमशैल, बादल, पुष्पराशि और वृक्ष-राशि ने कश्मीर की सुषमा को सौन्दर्य के एक नवीन स्वर्ग में आसीन कर दिया है। कवियों ने इसे स्वर्ग का एक कोना कहा है।

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प्रश्न 7.
जब यात्री गण्र उस मार्ग पर चलते हैं तो ऐसा लगता है जैसे किसी विश्वामित्र की शक्ति से अनेक त्रिशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं – इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
चन्दनबाड़ी जाते समय दूर तक रास्ता साफ-सुथरा और सीधा है फिर पहाड़ों के निकट चढ़ाई है। लेखक ने पहाड़ी पर चढ़ते यात्रियों की तुलना स्वर्ग की चढ़ाई करने वाले त्रिशंकु से की है। विश्वामित्र ॠषि ने अपने तपोबल की शक्ति से त्रिशंकु को स्वर्ग भेजने का प्रयल् किया था। इस पहाड़ी पर चढ़ने वाले यात्री ऐसे लगते थे मानों विशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य तथा धरती की रमणीयता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
कश्मीर की नैसर्गिक सुषमा निराली है। ईश्वर ने प्रकृति के सौदर्य से इसे अनेक प्रकार से सजाया है। उपत्यकाएँ, हिमशैल, पुष्पराशि, वृक्षराशि ने कश्मीर की सुषमा को सौन्दर्य के एक नवीन स्वर्ग में आसीन कर दिया है। शीतल, मंद और सुगंधित समीर हर समय और हर स्थान पर बहती रहती है। वृक्षों के हरे-हरे पत्ते, वाटिकाओं में रंगबिरंगे पुष्ष, उन पर भ्रमरों की गुंजार चित्त को मोहित करती हैं।

सम्राट जहाँगीर ने कहा था यदि धरती पर स्वर्ग है तो यहीं है। वसन्त ॠतु में सारा पठार फूलों का एक विशाल साप्राज्य प्रतीत होता है, झेलम नदी के कारण सारे भू भाग के झरनों, लहरों तथा झीलों का जाल बिछा हुआ है। कश्मीर की घाटी के बीच बहने वाली झेलम नदी तुलर झील, मान सबल झील तथा चन्दनबाड़ी इस प्रदेश की शोभा है। हरे -भरे खेत केसर की क्यारियाँ, सेव, अंगूर, सुबार्नी आदि मेवे इस घाटी के उपज की विशेषताएँ हैं। इसीलिए कश्मीर को मेवों का देश कहा जाता है ।

सफेद वृक्षों की घनी छाया, चिनार वृक्ष वनउपवन की शोभा बढ़ाते हैं। झेलम के उत्तरी भाग में अछबल का झरना है। मटन स्थान में मार्तण्ड का मंदिर है। यहाँ नीचे सरोवरों के छोटे-बड़े आकार की कलात्मक आकृतियाँ हैं। अछबल में संगीत और सौन्दर्य का रूप साकार हो उठता है। यहाँ सम्माट जहाँगीर ने एक बगीचा बनवाया था। विशाल वृक्ष यहाँ सौन्दर्य के प्रहरी प्रतीत होते हैं। कोकड़ानाग में अनेक स्थानों से जलधारा प्रवाहित होती है। कितने स्थानों से जल की पतली-पतली धाराएँ निकलकर स्थूल बन जाती हैं। बहता हुआ जल पत्थरों से अठखेलियाँ करता हुआ हँस पड़ता है।

लिदर की घाटी में पहाड़ियों के नीचे छोटी सी बस्ती पहलगाँव है । दाहिनी ओर हटकर लिदर नदी है। यह अपने अनवरत नाद में प्रकृति के सौन्दर्य का जयघोष करती है । तीनों ओर गौरव से मस्तक उठाए हुए गिरि-भृृर हैं। इनके कोने में कभी-कभी हिम राशि स्थिर हो जाती है। चन्दनबाड़ी यहाँ से दस मील दूर है। पहाड़ों के निकट चढ़ाई पर चढ़ते हुए यात्री गण ऐसे लगते हैं मानों अनेक त्रिशंकु स्वर्ग पर चढ़ रहे हैं। पहाड़ियों के बीच की समतल भूमि पर बर्फ के बड़े-बड़े मैदान बन गए हैं। ऊँची पहाड़ियों पर भूर्ज-पत्र के अनेक वृक्ष हैं। कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। कश्मीर की नैसर्गिक सुषमा मन में आनंद की धारा बहा देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

भाषा-बोध :

1. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए : –

सौन्दर्य – कश्मीर का सौन्दर्य मन को मोह लेता है।
कश्मीर – कश्मीर हमारे देश का मुकुट है।
झेलम – झेलम के उत्तरी भाग में अछबल झरना है।
राजतरंगिणी – कवि कल्हण ने राजतरंगिणी की रचना की है।
कलात्मक – मंदिर में अनेक कलात्मक आकृतियाँ हैं।

2. विलोम शब्द लिखें –

मानव – दानव
महान – तुच्छ
स्वर्ग – नरक
समाट – प्रजा
आयात – निर्यात

WBBSE Class 6 Hindi कश्मीर Summary

जीवन-परिचय :

रामकुमार वर्मा का जन्म सन् 1905 ई。 में मध्य प्रदेश के सागर जनपद में हुआ था। वर्मा बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार हैं। वे कवि, कथाकार, आलोचक तथा निबंधकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी प्रसिद्ध काव्य रचनाएँएकलव्य, चित्तौड़ की चिता, निशीथ आदि हैं। इनके प्रसिद्ध एकांकी संग्रह-पृथ्वीराज की आँखें, रेशमी टाई आदि हैं। वर्मा प्रयाग विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्रध्यापक तथा विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।

पाठ का सारांश – प्रस्तुत पाठ में लेखक ने कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुपम चिर्रण किया है। फूलों से परिपूर्ण कश्मीर की धरती सौन्दर्य का आगार है। देश का मुकुट कश्मीर की सुषमा को देखकर ही कवियों ने इसे धरती का स्वर्ग कहा है। जम्मू और कश्मीर का क्षेत्रफल लगभग पचास हजार वर्ग मील है। सारा पठार फूलों से परिपूर्ण अत्यंत मोहक लगता है। झेलम नदी, वुलर झील, मानसबल झील, चंदनबाड़ी आदि कश्मीर की शेभा है। झेलम के उत्तरी भाग में अछबल का झरना है। राजतरंगिणी में कश्मीर के ऐतिहासिक वैभव के खंडहर दृष्टिगत होते हैं। अवन्ति वर्मा के द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर के खंडहर आज बिखरे पड़े हैं। मार्तण्ड मंदिर की कलात्मक आकृतियाँ आकर्षक है। अछबल झरने की सुन्दरता पर लोग मुग्ध हो जाते हैं। कोंकड़नाग में भूमि के अनेक स्थानों से जलधारा प्रवाहित होती है।

लिदर की घाटी में पहलगाँव स्थित है। लिदर नदी अपने नाद से प्रकृति के सौन्दर्य का जयघोष करती है। चन्दनबाड़ी यहाँ से दस मील दूर है। पहाड़ों के निकट की चढ़ाई स्वर्ग की चढ़ाई के समान प्रतीत होती है।

ऊँची पहाड़ियों पर भूर्ज-पत्र के अनेक वृक्ष हैं। इन्हीं वृक्षों के छालों पर हमारे महर्षियों ने अमर साहित्य की रचना की है। वस्तुत: कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। उसकी सुरक्षा और उसके प्रति श्रद्धा-समर्पण प्रत्येक भारतीय का कर्त्तव्य है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 कश्मीर

शब्दार्थ :

  • मुकुट – ताज।
  • सँवारा – सजाया।
  • सुषमा – सुंदरता।
  • सर्पिल – साँप जैसा, टेढ़ा।
  • मनोरम – सुंदर।
  • कलकल – मधुर शब्द।
  • निनाद – शब्द, आवाज।
  • स्थूलकाय – पुष्ट शरीर, विशाल शरीर।
  • शिविर – छावनी, डेरा।
  • स्मृतियाँ – यादें।
  • सर्पण – अर्पण।
  • विपुलता – अधिकता।
  • प्रशस्त – मजबूत।
  • मेहरबान – कृपालु ।
  • खुश किस्मती भाग्यशाली।
  • उपत्यकाएँ – घाटी, पर्वत के पास की भूमि।
  • वरदान – इष्ट वस्तु की प्राप्ति।
  • खंडहर – भग्नावशेष।
  • वैभव – धन-संपत्ति।
  • उत्कीर्णित – खुदे हुए।
  • विर्गलित – द्रवित।
  • अवसाद – विषाद, दीनता।
  • भंगिमा – हाव-भाव।
  • अठखेलियाँ – ठिठोली, चुलबुलापन।
  • अनवरत – निरंतर, लगातार।
  • फेनाज्ज्वल – उज्ज्वल फेन।
  • हिम-शैल – बर्फीले पहाड़।
  • उत्तरीय – चादर।
  • मार्तण्ड – सूर्य।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Chapter 1 दो भाई to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – दो भाई

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कलावती के कितने बेटे थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 2.
कलावती के दोनों बेटों का नाम था –
(क) माधव और जाधव
(ख) माधव और राघव
(ग) माधव और केदार
(घ) केदार और जाधव
उत्तर :
(ग) माधव और केदार

प्रश्न 3.
कलावती के दोनों बहुओं का नाम था –
(क) गीता और सीता
(ख) चंपा और श्यामा
(ग) गीता और चंपा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चंपा और श्यामा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 4.
केदार क्या पढ़ रहे थे?
(क) गीता
(ख) रामायण
(ग) महाभारत
(घ) कुरान
उत्तर :
(ख) रामायण।

प्रश्न 5.
केदार की बुद्धि थी –
(क) सुस्त
(ख) चुस्त
(ग) मंद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) चुस्त ।

प्रश्न 6.
प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था ?
(क) प्रेम प्रकाश.
(ख) धनपतराय
(ग) नबाब राय
(घ) मुंशीराय
उत्तर :
(ख) धनपतराय ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 7.
प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था ?
(क) सन् 1880 में
(ख) सन् 1882 में
(ग) सन् 1884 में
(घ) सन् 1886 में
उत्तर :
(क) सन् 1880 में ।

प्रश्न 8.
प्रेमचंद के जन्म स्थान का नाम क्या था?
(क) सोरों
(ख) लमही
(ग) विसपी
(घ) छतरपुर
उत्तर :
(ख) लमही ।

प्रश्न 9.
प्रेमचंद के प्यार का नाम क्या था?
(क) नबाबराय
(ख) राम
(ग) धनपतराय
(घ) अजबराय
उत्तर :
(क) नबाबराय ।

प्रश्न 10.
प्रेमचंद के पिता का नाम क्या था?
(क) शिवचंद्रराय
(ख) अजायब राय
(ग) सुंघनीसाहू
(घ) श्रीरामचंद्र
उत्तर :
(ख) अजायब राय ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 11.
प्रेमचंद् की माता का नाम क्या था ?
(क) आनंदी देवी
(ख) लक्ष्मी देवी
(ग) राधा देवी
(घ) मंगला देवी
उत्तर :
(क) आनंदी देवी ।

प्रश्न 12.
रेहन लिखने वाला कौन था ?
(क) केदार
(ख) माधव
(ग) शिवदत्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) माधव।

प्रश्न 13.
घर का रेहन कितने रुपये में लिखवाया गया ?
(क) पचास
(ख) साठ
(ग) अस्सी .
(घ) नब्बे
उत्तर :
(ग) अस्सी।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
माधव और केदार में बड़ा भाई कौन था ?
उत्तर :
माधव और केदार में बड़ा भाई केदार था।

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प्रश्न 2.
माधव के कितने पुत्र एवं पुत्रियाँ थीं ?
उत्तर :
माधव के चार पुत्र एवं चार पुत्रियाँ थीं ।

प्रश्न 3.
माधव को किसकी लालसा थी ?
उत्तर :
माधव को धन-संपत्ति की लालसा थी।

प्रश्न 4.
केदार को किसकी अभिलाषा थी ?
उत्तर :
केदार को संतान की अभिलाषा थी।

प्रश्न 5.
बेचारी चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में क्यों पिसना पड़ता था ?
उत्तर :
श्यामा अपने लड़कों को संवारने-सुधारने में लगी रहती थी। उसे घरेलू काम से फुरसत नहीं मिलती थी। इस कारण चंपा को चूल्हे में जलना और चक्की में पिसना पड़ता था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 6.
चम्पा और श्यामा का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर :
चम्पा कार्यकुशल और श्यामा शांत स्वभाव की थी।

प्रश्न 7.
रेहन लिखवाने के लिए किन्हें बुलाया गया था ?
उत्तर :
रेहन लिखवाने के लिए गाँव के मुखिया और नम्बरदार को बुलाया गया था।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कलावती का स्वभाव कैसा था ?
उत्तर :
कलावती का स्वभाव बड़ा ही उदार, कोमल तथा वात्सल्य से भरा हुआ था। उसके हृदय में प्रेम तथा नेत्रों में गर्व था। दोनों बेटों के स्नेह को देखकर वह फूली नहीं समाती थी। बेटों को गोद में खेलते देख कर उसके नेत्रों में अभिमान, हृदय में गर्व, उत्साह तथा उमंग का भाव था। वह दोनों बहुओं में सामंजस्य बैठाना चाहती थी। केदार की स्वार्थपरता को देखकर उसका हृदय शोक-संताप से भर उठा।

प्रश्न 2.
कलावती के दोनों बेटे वैमनस्य के शिकार कैसे हो गए ?
उत्तर :
दोनों बेटों की बहुओं के स्वभाव में भिन्नता थी। केदार को कोई संतान न हुई। माधव को चार पुत्र एवं चार पुत्रियाँ हुई। केदार को संतान की लालसा तथा माधव को धन-संपत्ति की चाह थी। भाग्य की इस कूटनीति ने धीरे-धीरे दोनों भाइयों में द्वेष का रूप धारण कर लिया। इस प्रकार दोनों वैमनस्य के शिकार हो गए।

प्रश्न 3.
माधव एवं केदार की पतियाँ कैसी थीं ?
उत्तर :
माधव की पत्नी सॉवली-सलोनी अत्यंत रूपवती थी। वह मधुर बोलनेवाली, सुंदर शीलवाली तथा शांत स्वभाव की थी। केदार की पत्नी अधिक बोलनेवाली तथा चंचल स्वभाव की थी। वह कार्य कुशल थी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 4.
माधव को केदार ने किस एवज में पैसे दिए ?
उत्तर :
माधव ने अपनी कन्या के गहने बंधक रखकर दो साल का बकाया लगान चुका दिया। सवा सौ रुपये में बंधक रखे गहनों को छुड़ाने के लिए माधव केदार के पास गया था। केदार ने रेहन लिखा कर माधव को पैसे दिए।

प्रश्न 5.
केदार के व्यवहार से कलावती दु:खी क्यों थी ?
उत्तर :
कलावती माँ थी। दोनों बेटे उसके हददय के टुकड़े थे। दोनों को अपनी छाती का दूध पिलाकर उसने बड़ा किया था। दोनों बेटों के प्रति उसके दिल में असीम स्नेह का भाव था। माधव की शोचनीय आर्थिक दशा पर वह क्षुब्ध थी। केदार ने माधव की सवा सौ रुपये के लिए उसका घर रेहन लिखा लिया। माँ ने जब यह सुना तो वह अत्यंत दु:खी हो गई। उसने सोचा कि क्या केदार बिना रेहन लिखाए छोटे भाई की मदद नहीं कर सकता था।

प्रश्न 6.
‘हृदय चाहे रोए पर होंठ हँसते रहें’ कहने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
माधव की आर्थिक दशा शोचनीय थी। आमदनी कम थी पर खर्च अधिक था। कुल की प्रतिष्ठा का भी निर्वाह करना था। इसलिए माधव अपने मन की व्यथा को मन में छिपा कर रखना चाहता था। उसके दिल में अपनी दरिद्रता का दर्द था, वह उस दर्द को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहता था। मन में भले पीड़ा सहे पर उस दर्द को वाणी से प्रकट नहीं करता था। हमेशा हँसता तथा प्रसन्नता प्रकट करता था।

प्रश्न 7.
इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर :
इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भाई-भाई के बीच परिवार की तरह स्नेह एवं ममत्व का व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख एवं दु:ख में साथ देना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘दो भाई’ कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? इस कहानी के द्वारा लेखक ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर :
दो भाई कहानी द्वारा लेखक ने मानव समाज को यह शिक्षा दी है कि भाई-भाई के बीच कुटुम्ब-सा व्यवहार होना चाहिए। हमेशा एक दूसरे के सुख-दु:ख में साथ देना चाहिए। कहानी में केदार और माधव दोनों भाइयों के उदाहरण से लेखक ने इस कटु सत्य को उजागर किया है कि संसार में स्वार्थ आदमी को संकीर्ण बना देता है अपने तथा परायेपन की भावना भाई-भाई में नफरत का भाव पैदा कर देती है। बचपन में दोनों भाइयों में कितना प्रेम था, कितनी सौम्यता थी, पर सयाना तथा समझदार होते ही सारी सरसता समाप्त हो गई। एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना पैदा हो गई। दूसरे के अभाव को अपने स्वार्थ पूर्ति तथा आनन्द का साधन माना जाने लगा।

भाई-भाई में अविश्वास उत्पन्न हो गया। एक माँ के गर्भ से उत्पन्न होने वाले, सहोदर कहे जाने वाले सगे भाई भी इतने स्वार्थी तथा लोलुप हो जाते हैं कि मनुष्यता भी लजाने लगती है। केदार ने अपने सहोदर भाई को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए उसे 80 रु० देने के लिए उससे उसका घर रेहन लिखवा लेता है। गाँव के मुखिया, नंबरदार तथा मुख्तार भी केदार के काम से विस्मित हो गए। लेखक ने इस भावना और संकीर्णता को निंदनीय बतलाया है। संसार में सहोदर भाई मिलना कठिन है। इसलिए कभी भी भाई का अपमान करना, उसे नफरत की दृष्टि से देखना मानवता के खिलाफ है।

हमारी भारतीय संस्कृति भ्रातृ पेम की, भाई-भाई के बीच मधुर व्यवहार की शिक्षा देती है। भाई के सुख-दुःख को अपना समझना एक दूसरे के प्रति हमदर्दी दिखलाना उचित कर्तुव्य है। भाई के दु:ख को अपना दु:ख समझ कर उसे दूर करने का प्रयल्ल करना चाहिए। उसे अपना अभिन्न अंग समझना चाहिए। जहाँ भाइयों में परस्पर मेल, सद्भावना एवं सहयोग की भावना है वहीं सुख, शांति तथा संतोष का वातावरण बना रहता है । जहाँ नफरत, घृणा, विद्वेष का भाव है वहाँ सुख शांति नहीं घुटन और पीड़ा का साम्राज्य है। अत: भाई-भाई के बीच मधुर स्नेह-पूर्ण संबंध बनाकर गृहस्थ जीवन को आनंदमय बना लेना चहिए। लेखक ने यही संदेश दिया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

प्रश्न 2.
‘दो भाई’ कहानी के आधार पर माँ कलावती की पीड़ा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कलावती का हदय माता का हृदय था। वह ममत्व तथा सेह से परिपूर्ण था। उसके दोनों बेटे- केदार और माधव उसके हदय के टुकड़े थे। दोनों बेटों को जाँघों पर बैठाकर दूध और रोटी खिलाती। उन्हें पुचकार कर बुलाती और बड़े-बड़े कौर खिलाती। उसके हूदय में प्रेम की उमंग और नेत्रों में गर्व की झलक थी। दोनों भाई साथ-साथ स्नेहपूर्वक स्कूल जाते, साथ-साथ खाते और साथ ही रहते थे। दोनों को निहार कर माँ निहाल हो जाती थी।

दोनों भाइयों का विवाह हो गया। दोनों भाई अपनी पतियों पर मुग्ध थे, पर माँ कलावती का मन किसी से न मिला। दोनों से प्रसन्न और दोनों से अप्रसन्न थी। दोनों भाई सयाने और समझदार हो गए। माधव को धन की लालसा थी और केदार को संतान की। अब दोनों भाइयों में धीरे धीरे द्वेष का भाव उत्पन्न होने लगा। परिणामस्वरूप चंपा और श्यामा दोनों बहुएँ अलग हो गई। उस दिन एक ही घर में दो चूल्हे जले। कलावती विवश थी, वह सारे दिनरोती रही। दोनों बेटे माँ की तनिक परवाह न किए।

दोनों भाई कभी एक ही पलथी पर बैठते थे, एक ही थाली में खाते थे और एक ही छाती से दूध पीते थे, उन्हें अब एक घर में एक गाँव में रहना कठिन हो गया। अब उनमें मातृ स्नेह न था। केवल भाई के नाम की लाज थी, लड़कियों की शादी में खर्च के कारण माधव की दशा अत्यंत दयनीय बन गई। विवश होकर उसे बड़े भाई केदार के पास जाना पड़ा। केदार और चंपा को अवसर मिल गया श्यामा और माधव को नीचा दिखाने का। एक गोद में खेलने वाले, एक छाती में दूध पीने वाले आज इतने बेगाने हो गए। केदार ने माधव का घर अपने नाम रेहन लिखाकर उसे रुपये दिए। इस घटना से सभी लोग चकित हो गए। भाई-भाई के बीच इतना बड़ा अविश्वास। बूढ़ी माँ कलवाती ने सुना तो उसकी आँखों से आँसू की नदी उमड़ आई।

उसने आकाश की ओर देखकर अपना माथा ठोंक लिया। उसे दोनों बेटों की बचपन की याद आई। उस समय माँ के नेत्रों में कितना अभिमान था। हुदय में कितनी उमंग और कितना उत्साह था। आज लाचार बूढ़ी माँ के नेत्रों में लज्जा और हृदय में शोक-संताप था। उसने पृथ्वी को देखकर, अपने हृदय की गहरी पीड़ा से क्रुब्ध होकर कातर स्वर में ईश्वर को संबोधित कर कहने लगी कि ऐसे ही पुत्रों को मेरी कोख में जन्म लेना था। आज दोनों बेटों के जन्म को वरदान नहीं बल्कि अभिशाप समझने लगी।

भाषा-बोध :

(क) संज्ञा – सूर्य, रोटी, माधव, पाठशाला, कुशलता।
सर्वनाम – वह, उसे, अपना, मेरा, उसका।
विशेषण – चतुर, सलोनी, मलीन, खुश, प्यारी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखें।
प्रसन्न – खुश, संतुष्ट, हर्षित ।
मुरझाया – कुम्हलाया, सुस्त, उदास।
अभिलाषा – लालसा, इच्छा, चाह, कामना।
छोटा – लघु, न्यून, उम्र में कम।
भाई – भाता, भैया, बंधु।

WBBSE Class 6 Hindi दो भाई Summary

जीवन-परिचय :

इनका असली नाम मुंशी धनपतराय प्रेमचंद है । इनका जन्म सन् 1880 ई० में वाराणसी जनपद के लमही नामक गाँव में हुआ था। ये हिन्दी साहित्य जगत् में कथा सम्राट माने जाते हैं। इनका जीवन अनेक कठिनाइयों में बीता। इनकी रचनाओं में कृत्रिमता नहीं है। इनकी भाषा तथा शैली में एक अनोखी सजीवता तथा चुस्ती पाई जाती है। इनकी प्रमुख रचनाएँ – सेवासदन, कर्मभूमि, गबन, गोदान, प्रतिज्ञा आदि हैं। इनकी कहानियाँ ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में प्रकाशित हैं। गोदान हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। इनकी मृत्यु सन् 1936 में हुई।

कहानी का सारांश – माँ कलावती अपने दोनों बेटों – केदार व माधव को जाँघों पर बैठा कर दूध-रोटी खिलाती, प्यार से पुचकारती थी । दोनों बेटे उसकी आँखों के तारे थे। दोनों में बड़ा स्नेह था। दोनों बेटों को निहारकर कलावती गर्व और प्रेम से भर जाती थी। दोनों साथ-साथ पाठशाला जाते, साथ-साथ खाते और साथ-साथ रहते थे। दोनों भाई बड़े हुए दोनों का विवाह हुआ। बड़े बेटे केदार की बहू चंपा चंचल स्वभाव की थी। छोटे भाई माधव की वधू श्यामा सांवली, सुन्दर एवं शान्त रूपराशि की खान थी। कलावती का मान किसी से न मिला। केदार को संतान की अभिलाषा थी। माधव को धन संपत्ति की। माधव को चार पुत्र तथा चार पुत्रियाँ थीं ।

दोनों भाई समझदार और बुद्धिमान हो गए। दोनों में धीरे-धीरे वैर-भाव पनपने लगा। दोनों भाई अलग हो गए। एक ही घर में दो चूल्हे जले। कलावती सारे दिन रोती रही। माँ के दिल के टुकड़े माँ के सामने ही अलग हो गए । उन्हें अब अपने पराये की पहचान हो गई। माधव की दशा शोचनीय थी। खर्च अधिक था, आमदनी कम। दो कन्याओं के विवाह में जमीन बिक गई। तीसरी लड़की के विवाह में घर में जो कुछ था समाप्त हो गया।

कन्या का गौना भी न हुआ था कि माधव पर दो साल के बकाया लगान का वारंट आ गया। कन्या के गहने बंधक रख कर उसका समाधान किया। चंपा ने नातेदारों को इसकी सूचना दे दी। दूसरे ही दिन एक नाई और दो ब्राह्मण माधव के दरवाजे पर आ गए। अब माधव अधीर तथा बेचैन हो उठा, कोई दूसरा रास्ता न देख, विवश था। केदार के सामने सहायता का प्रस्ताव रखा।

केदार और चंपा दोनों को अच्छा मन चाहा मौका मिल गया। चंपा ने कहा कि दोनों कोठरी पर कोई महाजन कदाचीत ही रुपये दे । केदार ने एक महाजन से अपनी जान-पहचान के बारे में बतलाया पर कोई महाजन सवा सौ रुपये नहीं दे सकता था । अंत में मामला तय हो गया। माधव की इच्छा पूरी नहीं हुई। केदार और चंपा दोनों की मनोकामना पूरी हुई। चंपा ने सोचा कि अब श्यामा रानी इस घर में कैसे शान से रहेंगी। सबेरे केदार के द्वार पर मुखिया, नंबरदार, मुंशी दातादयाल सब उपस्थित हुए। केदार और चंपा प्रसन्न थे। माधव विषाद से भरा हुआ था।

अभी तक माधव तथा आए हुए लोग समझते थे कि भाई की सहायता के लिए केदार किसी महाजन से रुपये दिला रहे हैं । पर रेहन का कागज लिखते समय केदार ने लिखने वाले का नाम माधव तथा लिखाने वाले का नाम केदार बतलाया तो सभी विस्मित हो गए। माधव चकित होकर बड़े भाई की ओर निहारने लगा। सभी ने सोचा – भाई-भाईके बीच इतना अविश्वास। सभी को आश्चर्य हुआ।

बूढ़ी माँ ने सुना तो उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उसने आकाश की ओर देखकर माथा ठोंक लिया। उसे उनके बचपन के दिनों की याद आई, जब दोनों उसकी गोद में उछल-कूद कर दूध रोटी खाते। उस समय माँ के नेत्रों में कितना अभिमान था, उमंग थी, उत्साह था, पर आज नयनों में लज्जा तथा हृदय में शोक-संताप है। पृथ्वी की ओर देख कर कातर स्वर में कहा है नारायण! क्या ऐसे पुत्रों को मेरी कोख से जन्म लेना था।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Chapter 1 दो भाई

शब्दार्थ :

  • सुहावनी – सुंदर।
  • अमित भाषिणी – बहुत अधिक बोलने वाली।
  • हृदयोद्गार – मन का उबाल।
  • सलोनी – सुंदर ।
  • घाम – धूप।
  • मृदु भाषिणी – मधुर बोलने वाली।
  • कौर – निवाला।
  • रीझे – प्रसन्न हुए।
  • उमंग – उत्साह।
  • वधू – बहू। नेत्रों – आँखो।
  • गिरो – बंदक (बंधक) ।
  • व्यर्थ – बेकार।
  • विवश – लाचार।
  • व्यय – खर्च।
  • जायदाद – संपत्ति।
  • कुत्सित – बुरा।
  • मर्म भेदी – हदय में चुभने वाली।
  • लालसा – इच्छा।
  • सेंत – मुफ्त।
  • अभिलाषा – इच्छा।
  • सराहना प्रशंसा।
  • वैमनस्य – शत्रुता।
  • निपुण – चतुर।
  • रमणी – स्री।
  • बेगाने – पराये।
  • कातर – व्याकुल, विवश।
  • संताप – कष्ट।
  • गँवार – अनपढ़।
  • गवई – गाँव का।
  • छटा – शोभा।
  • मर्यादा – प्रतिष्ठा।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

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WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – माँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
माँ किसका फूल बिखरा देती है?
(क) कमल का
(ख) ममता का
(ग) क्रूरता का
(घ) घृणा का
उत्तर :
(ख) ममता का

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 2.
रचनाकार ने किसे परिवार और समाज से ऊपर माना है?
(क) पिता को
(ख) भाई-भतीजे को
(ग) सास-ससुर को
(घ) माँ को
उत्तर :
(घ) माँ को

प्रश्न 3.
‘माँ’ किस विधा की रचना है ?
(क) कविता
(ख) कहानी
(ग) नाटक
(घ) एकांकी
उत्तर :
(क) कविता

प्रश्न 4.
‘माँ’ कविता किसने लिखी है ?
(क) ममता कालिया
(ख) रंजना श्रीवास्तव
(ग) मैन्रेयी पुष्पा
(घ) अलका सरावगी
उत्तर :
(ख) रंजना श्रीवास्तव

प्रश्न 5.
रंजना श्रीवास्तव का जन्म कब हुआ था ?
(क) 9 सितंबर 1959 ई०
(ख) 15 सितंबर 1969 ई०
(ग) 21 सितंबर 1949 ई०
(घ) 15 सितंबर 1939 ई०
उत्तर :
(क) 9 सितंबर 1959 ई०

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 6.
रंजना श्रीवास्तव का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) गोरखपुर
(ख) जौनपुर
(ग) आजमगद़
(घ) गाजीपुर
उत्तर :
(घ) गाजीपुर

प्रश्न 7.
कौन ममता की प्रतिमूर्ति होती है ?
(क) कवि
(ख) माँ
(ग) समाज
(घ) सास
उत्तर :
(ख) माँ

प्रश्न 8.
माँ किसकी डाँट-फटकार सहती है ?
(क) बच्चों का
(ख) समाज का
(ग) पिता का
(घ) कवि का
उत्तर :
(ग) पिता का

प्रश्न 9.
कौन ‘वंदनीय’ और ‘अतुलनीय’ है ?
(क) कवि
(ख) ममता
(ग) माँ
(घ) श्वसुर
उत्तर :
(ग) माँ

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवयित्री आश्चर्यचकित क्यों हो जाती है?
उत्तर :
माँ घर, परिवार के तमाम कष्टों को अपने भीतर ही आत्मसात् कर लेती है। अपनी पीड़ा को कभी प्रकट नहीं करती। सभी के साथ प्यार का व्यवहार करती है। अतः माँ की सहनशीलता तथा ममता की भावना पर कवयित्री आश्चर्यंकित हो जाती हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 2.
‘परम्परावादी’ और ‘बदरंग आदर्श’ से क्या समझते हो?
उत्तर :
परम्परावादी का अर्थ है पुरानी रीतियों का पोषक। वंश परंपरा से चली आ रही प्रथाओं को मानने वाले। बदरंग आदर्श से तात्पर्य है रंगहीन या बेमेल रंग के नमूने। वंशानुक्रम से चली आ रही अशोभनीय बेढंगी प्रथाएँ।

प्रश्न 3.
प्रस्तुत पाठ में किसकी किस दशा का चित्रण हुआ है?
उत्तर :
प्रस्तुत पाठ में माँ की पीड़ामयी दशा का चित्रण हुआ है। माँ समस्त परिवार के साथ ममता भरा व्यवहार रखते हुए भी सभी की उपेक्षा तथा तिरस्कार पाती है। अपनी पीड़ाको प्रकट नहीं करती। उसमें अद्भुत सहनशीलता है।

प्रश्न 4.
माँ वन्दनीय और अतुलनीय कैसे होती है?
उत्तर :
माँ उदारता, ममता तथा सहनशीलता की प्रतिमूर्ति होती है। परिवार के अपने ही लोगों से उपेक्षा एवं तिरस्कार पाती है। सभी यातनाओं को सहते हुए भी मौन बनी रहती है। सबसे भिन्न होते हुए भी सभी को आत्मसात् कर लेती है। इसीलिए माँ वन्दननीय और पूजनीय होती है।

प्रश्न 5.
माँ किसकी डाँट-फटकार सहती रहती है ?
उत्तर :
माँ पिता की डाँट-फटकार को सहती रहती है।

प्रश्न 6.
कवयित्री ने माँ को कौन-कौन से उपमान दिये हैं ?
उत्तर :
कवयित्री ने माँ को साहस की जननी, ममता की प्रतिमूर्ति, वंदनीय और अतुलनीय जैसे उपमान दिये हैं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

प्रश्न 7.
माँ की क्या खुखियाँ सबमें समहित करती हैं ?
उत्तर :
माँ दूसरों के सुख से सुखी एवं दु:ख से दु:खी होती है। यही उसको सबसे अलग पर सबसे समाहित करतीहै।

WBBSE Class 7 Hindi माँ Summary

जीवान पिचय

रंजना श्रीवास्तव का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में 1959 ई० में हुआ था। गोरखपुर विश्वविद्यालय से इन्होंने एम० ए०, बी०एड० किया। शिक्षिका तथा प्रधानाचार्या के पद पर कुछ समय बिताकर इन्होंने स्वतंत्र लेखन तथा संपादन में योगदन दिया। अनेक महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में इनके लेख तथा कहानियाँ प्रकाशित हुई हैं। बींसवीं सदी के महिला कथाकारों में इनका नाम सुपरिचित है।

पद – 1

ओह माँ! तुम
इतनी पीड़ाओं को
अपने में समाहित कर
कैसे जी लेती हो ?
और बिखरा देती हो
ममता के अनगिनत फूल

शब्दार्थ :

  • पीड़ाओं – कष्टों
  • बिखरा – फैलाना
  • समाहित – आत्मसात् कर लेना
  • ममता – प्यार, ममत्व, लगाव

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘माँ’ कविता से उद्धृत हैं । इसकी कवययित्री रंजना श्रीवास्तव हैं।

सन्दर्भ – प्रस्तुत अंश में कवयित्री ने माँ की पीड़ा और उसकी ममता का मार्मिक चित्रण किया है।

व्याख्या – कवयित्री माँ की सहनशीलता तथा ममता की भावना पर दु:ख तथा आश्चर्य प्रकट करती है। माँ अद्भुत सहनशील होती है जिससे जीवन के इतने कष्टों को आत्मसात् कर लेती है। सारी पीड़ाओं को सहते हुए भी न जाने कैसे जीती रहती है। जीवन से हार नहीं मानती। लोगों में प्यार के अनंत फूल बिखेर देती है। सभी बच्चों, बच्चियों तथा परिवार के सभी लोगों के प्रति ममत्व एवं प्यार का भाव रखती है। अपने सेह सूत्र में सभी को पिरो कर रखती है।

पद -2

अपने
कलेवर से
सहती हो पिता की
डाँट-फटकार
उनके फुफकारते हुए
कुद्ध अभिमान को…
सास को, श्वसुर को
भाई, भतीजों को
लिजलिजे परम्परावादी
बदरंग आदर्शों को
पीढ़ियों से घिसी-पिटी
अपमानजनक बातों को
अपने से जुड़ी छलनामयी
आघातों को

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

शब्दार्थ :

  • कलेवर – आकार, डोल-डौल
  • अभिमान – अहंकार, स्वाभिमान
  • परंपरावादी – पुरानी रीतियों के पोषक
  • आदर्श – नमूना, अनुकरणीय
  • छलनामयी – धोखा, प्रताड़ना
  • फुफकार – फुंकार
  • लिजलिजे – बेढंगे, अशोभनीय
  • बदरंग – रंगहीन
  • पीढ़ियों – पुश्त, वंशानुक्रम
  • आघातों – प्रहारों

व्याख्या- कवयित्री ने स्पष्ट किया है कि किस प्रकार माँ परिवार के लोगों के कटु व्यवहार सहती है, पिता की डाँटफटकार को, क्रोध से भरे हुए उनके अहंकार भरी फुंकार को वह अपने उदार स्वभाव,अपने व्यवहार से सहन कर लेती है। पुरानी रीतियों के पोषक सास, ससुर, भाई, भतीजों के अशोभनीय बेढंगी वंशानुक्रम से चली आ रही पुरानी अपमान एवं अन्य बातों को सहती है। अपने से संबंधित धोखों से परिपूर्ण आघातों को भी धैर्यपूर्वक सहन कर लेती है। इस प्रकार कवयित्री ने माँ की अद्भुत सहनशीलता का चित्रण किया है।

पद – 3

ओह माँ! साहस की जननी
ममता की प्रतिमूर्ति
क्या सूख गये हैं
तुम्हारे आँसू ?
या फिर उन्हें
जज्ब कर लेती हो
सहनशीलता के
दामन में
मौन हो जाती हैं संवेदनाएँ
तुम्हारी विशालता से
टकराकर….

शब्दार्थ –

  • जननी – माता
  • प्रतिमूर्ति – प्रतिकृति
  • संवेदनाएँ – सहनुभूति, अनुभूति
  • जज्ब – शोषण, आकर्षण
  • दामन – आँचल
  • मौन – चुप, शान्त

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने माँ के हृय की विशालता तथा अतिशय उदारता का वर्णन किया है। कवयित्री माँ के साहस तथा ममत्व के प्रति आश्चर्य क्रकट करते हुए कहती है कि माँ ऐसी माता है जो साहस तथा ममता की प्रतिमूर्ति है। परिवार से उत्पन्न पीड़ा को सहर्ष सहती है, क्या उसके आँसू सूख गए हैं। अथवा सभी पीड़ाओं को सहनशीलता के आँचल में सोख लेती है। माँ की अतिशय महानता तथा उदारता के कारण सारी संवेदनाएँ चुप हो जाती हैं।

पद – 4

ओह माँ ! तुम परिवार से
समाज से
कहीं बहुत ऊपर हो
तभी तो तुम्हारे
मन के आकाश में
खिले फूलों पर
तेज धूप पर
हवा के विपरीत रुख का
असर नहीं हो पाता

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 8 माँ

शब्दार्थ –

  • विपरीत – विरुद्ध, प्रतिकूल।
  • रुख – तरफ, सामने, दिशा

व्याख्या – माँ का हृदय इतना विशाल है कि जमाने का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। माँ का स्वभाव, विचार, परिवार तथा समाज से कहीं बहुत ऊपर है। इसी कारण माँ के हृदय रूपी आकाश में खिले फूलों पर तेज धूप का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। माँ का हृदय आकाश की तरह विशाल तथा खिले फूल की तरह दिव्य और पवित्र है। जमाने की कठोरता तथा संकीर्णता का माँ के विचारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । हवा की प्रतिकूल दिशा कभी उस पर कोई प्रभाव नहीं डालती, सामाजिक विषमता, परायापन, तुच्छता का उस पर कोई असर नहीं पड़ता।

पद – 5

वन्दनीय हो तुम
अतुलनीय भी
सबसे बिल्कुल अलग
फिर भी सबमें समाहित।

शब्दार्थ

  • न्दनीय – पूजनीय, वंदन करने योग्य।
  • अतुलनीय- बेजोड़, अपरिमित ।
  • समाहित-समालेना, आत्मसात् कर लेना।

व्याख्या – माँ अनंत गुणों का भंडार है। परिवार की तमाम यातनाओं को सहते हुए भी वह अपनी उदारता, उच्चाशयता को नहीं छोड़ती। इसीलिए माँ वंदना करने योग्य, पूजनीय है। वह परिवार और समाज में बेजोड़ है। सबसे बिल्कुल भिन्न अलग रहते हुए सभी को आत्मसात् कर लेती है। किसी के प्रति भी उसके मन में नफरत या द्वेष की भावना नहीं पनपती। सभी को वह अपना समझती है। सभी के कल्याण की कामना करती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 8 बादल चले गये वे to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 Question Answer – बादल चले गये वे

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
किसने अपने चित्रों से आकाश सजाया ?
(क) वर्षा ने
(ख) सूर्य ने
(ग) तारों ने
(घ) बादल ने
उत्तर :
(घ) बादल ने।

प्रश्न 2.
बादल के जाने के बाद आसमान कैसा दिखाई देता है ?
(क) हरा
(ख) सफेद
(ग) काला
(घ) नीला
उत्तर :
(घ) नीला।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 3.
इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं ?
(क) सुख
(ख) दुःख
(ग) सुख -दुःख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सुख -दुःख दोनों ।

प्रश्न 4.
त्रिलोचन किस साहित्यिक धारा के अंतिम कड़ी माने जाते हैं ?
(क) छायावाद
(ख) हालावाद
(ग) प्रगतिशील धारा
(घ) प्रयोगवादी धारा
उत्तर :
(ग) प्रगतिशील धारा।

प्रश्न 5.
‘चित्त’ का क्या अर्थ है ?
(क) मन
(ख) धन
(ग) गाड़ी
(घ) मस्तिष्क
उत्तर :
(क) मन।

प्रश्न 6.
इस जग में मनुष्य के संगी कौन हैं ?
(क) सुख
(ख) टु:ख
(ग) सुख और दु:ख दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सुख और दु:ख दोनों।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 7.
कवि के अनुसार जीवन में कितने दिन दुःख-सुख रहता है ?
(क) दो दिन
(ख) तीन दिन
(ग) चार दिन
(घ) एक दिन
उत्तर :
(क) दो दिन।

प्रश्न 8.
कवि ने किसे मेहमान के समान बताया है ?
(क) दु:ख को
(ख) धरती को
(ग) बादल को
(घ) आसमान को
उत्तर :
(ग) बादल को।

प्रश्न 9.
कौन सदा आकाश में नहीं ठहरते ?
(क) जल
(ख) बादल
(ग) तारे
(घ) सूरज
उत्तर :
(ख) बादल।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 10.
बादल अपनी शोभा से लोगों के ………. मुग्ध बना देते हैं ?
(क) मन को
(ख) दिल को
(ग) पड़ोस को
(घ) खेतो को
उत्तर :
(क) मन को।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कौन अपनी छवि से चित्त चुरा लेता है ?
उत्तर :
सूने आकाश में सुन्दर चित्र सजाकर बादल अपनी छवि से चित्त चुरा लेता है।

प्रश्न 2.
धरती का रंग कैसा दिखाई देता है ?
उत्तर :
धरती का रंग पीला दिखाई देता है।

प्रश्न 3.
पाहुन किसे कहा गया है ?
उत्तर :
पाहुन आकाश में आकर चले जाने वाले बादल को कहा गया है।

प्रश्न 4.
शिशिर ॠतु का प्रभात कैसा होता है?
उत्तर :
शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला तथा ओस के कणों से भीगा होता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 5.
इस संसार में सभी का जीवन किससे युक्त रहता है ?
उत्तर :
इस संसार में सभी का जीवन नवीन तरंगों से युक्त रहता है ?

प्रश्न 6.
शीत काल का सबेरा कैसा दिखाई पड़ता है ?
उत्तर :
शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भीगा हुआ दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 7.
‘त्रिलोचन’ का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
‘त्रिलोचन’ का जन्म 20 अगस्त, 1917 ई० को उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिला के कठघरा चिराना पट्टी नामक गाँव. में हुआ था ।

प्रश्न 8.
‘त्रिलोचन’ का वास्तविक नाम क्या था ?
उत्तर :
‘त्रिलोचन’ का वास्तविक नाम ‘वासुदेव सिंह’ था।

प्रश्न 9.
‘त्रिलोचन’ किस दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे ?
उत्तर :
त्रिलोचन ‘जनवार्ता’ नामक दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

प्रश्न 10.
आसमान का रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
आसमान का रंग नीला होता है ।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
आसमान अब नीला-नीला क्यों दिखाई देने लगा है ?
उत्तर :
बादलों ने सूने आकाश में आकर सुन्दर चित्र बनाकर आकाश को सुन्दर तथा बहुरंगी बना दिया था। पर जब वे बादल आकाश से चले गए तो आकाश फिर सूना हो गया। उसका निरंतर बना रहने वाला रंग नीला दिखाई देने लगा।

प्रश्न 2.
बादलों ने सूने आकाश को किस प्रकार सजाया ?
उत्तर :
बादलों ने सूने आकाश में सुन्दर बहुरंगी चित्र बनाकर उसे सजा दिया। अपने विविध रंग, अपनी शोभा से, क्षण-क्षण परिवर्तित रूप से आकाश को सुसज्जित कर दिया।

प्रश्न 3.
सुख-दु:ख जीवन के संगी क्यों कहे गए हैं ?
उत्तर :
सुख-दुःख व्यक्ति के जीवन में सदा आते-जाते रहते हैं। दुःख भी थोड़े समय के लिए आता है, सुख भी थोड़े समय के लिए आता है। सुख-दु:ख के इस मधुर मिलन से जीवन परिपूर्ण होता है। इसीलिए सुख-दु:ख जीवन के संगी कहे गए हैं।

प्रश्न 4.
‘बादल चले गए वे’ कविता का मूलभाव लिखिए।
उत्तर :
‘कविता का सारांश देखिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए –
(क) बना-बनाकर चित्र सलोने, यह सूना आकाश सजाया।
(i) पाठ और कवि का नाम बताइए ।
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘बादल चले गए वे’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि त्रिलोचन हैं।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शिशिर ऋतु शीतकाल का मौसम है। इस ऋतु का सबेरा चमकीला होता है। सबेरे सूर्य की सुनहली किरणें चारों और फैल जाती हैं। रात में ओस के कण पड़ते हैं। इसलिए वातावरण सबेरे आर्द्र बना रहता है।

(ii) उपर्युक्त पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बादल के चले जाने के बाद आकाश नीला-नीला दिखाई देने लगा है। अब वह साँवला सजधज से युक्त नजर आने लगा है। धरती का रंग पीले रंग का दिखाई देता है। वह हरी भरी तथा रस से भरी हुई और आनंद से परिपूर्ण नजर आती है । शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भींगा हुआ दिखाई पड़ता है। अब बादल आकाश से चले गए हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
आकाश से बादलों के चले जाने पर प्रकृति में क्या परिवर्तन होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
ग्रीष्म ॠतु का अवसान होते ही वर्षा ऋतु का आगमन होता है। आकाश का कलेवर काले-काले बादलों से ढँक जाता है। सावन के आकाश में छाए बादलों की शोभा निराली बन जाती है। बादल अपनी विभिन्न प्रकार की आकृति के सुन्दर चित्र बनाकर सूने आकाश को अलंकृत कर देते हैं। आकाश की शोभा अत्यंत मोहक बन जाती है। अपने बहुरंगी रूपों तथा आकार से वे बादल आकाश को सुन्दर बना देते हैं। क्षण-क्षण परिवर्तित होने वाला उनका आकार उनकी शोभा मन को अपनी ओर खींच लेती है। बादलों के चले जाने पर आकाश का रंग नीला हो जाता है। आकाश नीले-साँवले रंग से सज जाता है।

धरती पीली हो जाती है। सर्वत्र हरियाली तथा सरंसता छा जाती है। प्रकृति बड़ी ही मोहक बन जाती है। शिशिर ॠतु का सबेरा तो बड़ा ही सुहावन बन जाता है। सारा वातावरण भीगा-भीगा तथा प्रकाशमान बन जाता है। प्रभात में सूर्योदय के समय सूर्य की सुनहली किरणें वातावरण को चमकीला बना देती हैं। जिस प्रकार ऋतु परिवर्तन से प्रकृति में परिवर्तन हो जाता है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी परिवर्तन होता रहता है। मनुष्य के जीवन में सुख-दु:ख दोनों आते-जाते रहते हैं।

न तो दु:ख ही स्थायी रहता है और न सुख ही। दोनों एक दूसरे के साथी हैं। आते-जाते रहना उनकी नियति है। जीवन में कभी हास्य है तो कभी रुदन है। सुख-दुःख के मधुर मिलन से जीवन पूर्ण होता है। जिस प्रकार घर में कोई मेहमान आता है और दो दिन रहकर चला जाता है, उसी प्रकार बादल भी वर्षा ऋतु के बीतते ही आकाश से कूच कर जाते हैं। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत् नियम है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द लिखें –
आसमान – नभ, आकाश
बादल – मेघ, घन, जलद
धरती – पृथ्वी, धरा, भूमि
अश्रु – आँसू, नयनजल, नयन नीर
सुख – आनंद, चैन, मजा

(ख) विलोम शब्द –
राग – द्वेष, विराग
दिन – रात
एक – अनेक
श्याम – श्वेत
जीवन – मृत्यु

WBBSE Class 6 Hindi बादल चले गये वे Summary

जीवन-परिचय :

त्रिलोचन (1917-2007) का मूल नाम वासुदेव सिंह था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम. ए. की परीक्षा पास की और लाहौर से शास्त्री की डिग्री ली। ये ‘आज’ और ‘जनवार्ता’ दैनिक समाचार पत्र से भी जुड़े रहे। इनकी कविता सहजता, कोमलता तथा माधुर्य से परिपूर्ण हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – मिट्टी की बारात, ताप के तपे हुए दिन हैं। इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

कविता का सारांश – कवि त्रिलोचन ने बादल के उदाहरण से स्पष्ट किया है कि जीवन में सुख-दुःख दोनों आतेजाते रहते हैं। बादल आकाश को अपने रंगों से सजाकर, अपनी शोभा से सभी को प्रसन्न कर छिप जाते हैं। आकाश नीले रंग -काले रंग में तथा धरती पीले रंग में हरी भरी बन जाती है। शिशिर ऋतु का प्रभात चमकीला हो जाता है। सुखदु:ख दोनों जीवन के संगी हैं क्योंकि जीवन में कभी खुशहाली तथा कभी रुदन आता है। इसी प्रकार मेहमान की तरह बादल भी आकर चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

शब्दार्थ :

  • सलोने – सुंदर ।
  • प्रभात – सबेरा ।
  • राग – प्रेम ।
  • पाहुन – मेहमान ।
  • चित्र – आकृति ।
  • समुज्ज्वल – चमकीला ।
  • छवि – शोभा ।
  • नवल – नया ।
  • हास – हँसी, खुशी ।
  • तरंगी – तरंग युक्त, मनमौजी ।
  • सजीला – सजधज के साथ रहने वाला।
  • शिशिर – शीतकाल ।

पद – 1

बना-बनाकर
चित्र सलोने
यह सूना आकाश सजाया
राग दिखाया
रंग दिखाया
क्षण-क्षण छवि से चित्त चुराया
बादल चले गये वे।

व्याख्या : प्रस्तुत पद्यांश त्रिलोचन कवि रचित ‘बादल चले गये वे’ कविता से उद्धृतं है। इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि सूने आकाश को बादल किस प्रकार सजा देते हैं।

सूने आकाश में आकर बादल अपने चिर्रों से आकाश को सुसज्जित कर देते हैं। वे सुन्दर चित्र बनाकर आकाश को सजा देते हैं। वे अपना प्रेम प्रकट करते हैं। अपना विविध रंग दिखलाते हैं। हर क्षण अपनी शोभा से लोगों के मन को मुग्ध बना देते हैं पर वे बादल सदा आकाश में नहीं ठहरते। अपनी सुन्दरता, अपना रंग दिखा कर वे चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 8 बादल चले गये वे

पद – 2

आसमान अब
नीला-नीला
एक रंग रस श्याम सजीला
धरती पीली
हरी रसीली
शिशिर प्रभात समुज्ज्वल गीला
बादल चले गये वे ।

व्याख्या – बादल के चले जाने के बाद आकाश नीला-नीला दिखाई देने लगा है। अब वह साँवला सजधज से युक्त नजर आने लगा है। धरती का रंग पीले रंग का दिखाई देता है। वह हरी-भरी तथा रस से भरी हुई आनंद से परिपूर्ण नजर आती है। शीतकाल का सबेरा चमकीला तथा ओस के कणों से भींगा हुआ दिखाई पड़ता है। अब बादल आकाश से चले गए हैं।

पद – 3

दो दिन दु:ख का
दो दिन सुख का
दु:ख-सुख दोनों संगी जग में
कभी हास है
कभी अश्रु है
जीवन नवल तरंगी जग में
बादल चले गये वे
दो दिन पाहुन जैसे रहकर।

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि सुख-दुःख जीवन के संगी हैं। जीवन में दुःख भी थोड़े दिनों के लिए आता है और सुख भी थोड़े दिनों के लिए आता है। सुख-दुःख का क्रम सदा बना रहता है। जीवन में कभी हासविलास अर्थात् खुशियाँ रहती हैं। कभी आँसू अर्थात्यु:ख भरे दिन होते हैं। इस संसार में सभी का जीवन नवीन तरंगों से युक्त बना रहता है। फिर कवि ने बादल को मेहमान के समान बतलाया है। जिस प्रकार किसी के घर मेहमान कुछ समय के लिए आते हैं फिर अपने घर चले जाते हैं, उसी प्रकार बादल आकाश में मेहमान की तरह आकर फिर चले जाते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

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WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – कठपुतली

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
गुस्से से कौन उबली ?
(क) कठपुतली
(ख) लड़की
(ग) खेल्ली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कठपुतली।

प्रश्न 2.
कठपुतली के आगे-पीछे क्या है ?
(क) कठपुतली
(ख) धागा
(ग) आदमी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) धागा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 3.
कठपुतली ने दूसरी कठपुतिलयों से क्या कहा ?
(क) बंधन तोड़ने के लिए
(ख) आत्मनिर्भर होने के लिए
(ग) स्वतंत्र होने के लिए
(घ) दिए गए सभी
उत्तर :
(घ) दिए गए सभी।

प्रश्न 4.
कठपुतलियों ने पहली कठपुतली के समक्ष क्या सहमति दी ?
(क) स्वतंत्र हो जाए
(ख) भाग जाए
(ग) धीरे-धीरे आगे बढ़ने की
(घ) एक साथ मिलकर आगे बढ़ने की
उत्तर :
(क) स्वतंत्र हो जाए।

प्रश्न 5.
‘हमें अपने मन के छंद हुए’ से क्या तात्पर्य है ?
(क) अपने लिए जीना
(ख) अपने मन की बात सुनना
(ग) इशारों पर नाचना
(घ) नया जीवन जीना
उत्तर :
(ख) अपने मन की बात सुनना।

प्रश्न 6.
पहली कठपुतली क्या सोचने लगी ?
(क) क्या बंधन टूट जाएँगे ?
(ख) क्या स्वतंत्र होना सुखमय होगा ?
(ग) क्या आगे बढ़ पाएँगे ?
(घ) क्या लक्ष्य पा लेंगे ?
उत्तर :
(ख) क्या स्वतंत्र होना सुखमय होगा ?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 7.
क्या कठपुतलियाँ स्वतंत्र हो पाई ? यदि हो पाई तो कौन-सी ?
(क) नहीं, कोई भी नहीं
(ख) आधी हो गई
(ग) हाँ
(घ) सबसे छोटी वाली हो गई
उत्तर :
(क) नहीं, कोई भी नहीं।

प्रश्न 8.
‘कठपुतली’ शब्द का क्या अर्थ है?
(क) कटी हुई पुतली
(ख) काठ की पुतली
(ग) काठ और पुतली
(घ) उपर्युक्त सभी गलत
उत्तर :
(ख) काठ की पुतली।

प्रश्न 9.
कठपुतली का जीवन कैसा था ?
(क) रस्सी में बँधा हुआ
(ख) स्वतंत्र का
(ग) परतंत्रता का
(घ) आजादी का
उत्तर :
(ग) परतंत्रता का।

प्रश्न 10.
कठपुतली को किस बात का दु:ख था ?
(क) हर समय नाचने का
(ख) मुस्कराते रहने का
(ग) धागे में बँधने का
(घ) दूसरों के इशारे पर नाचने का
उत्तर :
(घ) दूसरों के इशारे पर नाचने का।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 11.
‘पाँवों पर छोड़ देने’ का क्या भाव है ?
(क) स्वतंत्र कर देना
(ख) गुलाम बना लेना
(ग) सहारा लेना
(घ) सहारा छीन लेना
उत्तर :
(क) स्वतंत्र कर देना।

लघूतरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर :
कठपुतली ने सोचा कि वह धागे से बँधी हुई पराधीन है। उसके आगे-पीछे धागे हैं। वह अपने पाँव पर खड़ी नहीं हो सकती। इसीलिए कठपुतली को गुस्सा आया।

प्रश्न 2.
कठपुतली क्या तोड़ने के लिए कहती है ?
उत्तर :
कठपुतली अपने आगे-पीछे के धागों के बंधन को तोड़ने के लिए कहती है ।

प्रश्न 3.
कठपुतली की बात का समर्थन किसने किया ?
उत्तर :
कठपुतली की बात का समर्थन सभी कठपुतलियों ने किया।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 4.
पहली कठपुतली क्या सोचने लगी ?
उत्तर :
पहली कठपुतली सोचने लगी कि हमारे मन में यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई। यह चुनौती भरा कदम समझदारी से उठाना चाहिए।

प्रश्न 5.
उपर्युक्त पद्यांश किस कविता से लिया गया है ?
उत्तर :
उपर्युक्त पद्यांश ‘कठपुतली’ नामक कविता से लिया गया है।

प्रश्न 6.
कठपुतली क्यों कोधित हो गई ?
उत्तर :
कठपुतली धागे से बँधे-बँधे तथा दूसरों के इशारों पर नाचते-नाचते परेशान हो गई थी, इसलिए वह क्रोधित हो गई थी।

प्रश्न 7.
कठपुतली ने क्या कहा ?
उत्तर :
कठपुतली ने कहा कि मेरे आगे-पीछे ये धागे क्यों हैं, इन्हें तोड़कर मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

प्रश्न 8.
“मुझें मेरे पाँवों पर छोड़ दो।” पंक्ति से कठपुतली का क्या आशय है ?
उत्तर :
कठपुतली आत्मनिर्भर होना चाहती है। वह अपनी इच्छानुसार कार्य करना चाहती है, इसलिए उसने कहा कि मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 9.
कठपुतली के कथन का क्या आशय है ?
उत्तर :
कठपुतली के कथन का आशय है कि वह स्वतंत्र होना चाहती है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कठपुतली कविता का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने कठपुतली के माध्यम से स्वतंत्रता के महत्त्व को स्सष्ट किया है। पराधीनता किसी को भी अच्छी नहीं लगती। गुलामी की बेड़ययों को सभी उतार कर फेंक देना चाहते हैं। धागे में बँधी हुई पराधीन कठपुतली को दूसरों के इशारे पर नाचने से दु:ख होता है। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। गुलामी को दूर करने के लिए वह विद्रोह का स्वर मुखर करती है। स्वाधीनता के महत्त्व को बतलाना ही कविता का उद्देश्य है।

प्रश्न 2.
कठपुतली स्वयं को अपने पांवों परँछोड़ द्रेने के लिए क्यों कहती है ?
उत्तर :
कठुपुली को धागों का बंधन पसंद नहीं है। वह धागों में बँधी हुई पराधीन है। उसे दूसरों के इशारे पर नाचना पड़ता है। वह अपने पाँवों पर खड़ा होना चाहती है। इसीलिए वह ख्वयं को अपने पाँवों पर छोड़ देने के लिए कहती है।

प्रश्न 3.
‘ये कैसी इच्छा मेरे मन में जगी’ पहली कठपुतली के ऐसा सोचने का क्या कारण है ?
उत्तर :
पहली कठपुतली की बात सभी को अच्छी लगी। सभी कठपुतलियाँ स्वतंत्र होना चाहती थीं। अब पहली कठपुतली पर सब की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आ गई तो उसने भली-भाँति सोच-विचार कर ही कोई कदम उठाना चाही। इसीलिए पहली कठपुतली सोचने लगी कि मेरे मन में एकाएक यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

प्रश्न 4.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया ?
उत्तर :
कठपुतली बहुत दिनों से धागे से बँधी थी तथा उसे दूसरे लोग अपनी अँगुलियों के इशारों पर नचा रहे थे। वह इस पराधीनता से मुक्त होना चाहती थी। वह आज़ाद रहना चाहती थी तथा अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहती थी, इसलिए उसे गुस्सा आया।

प्रश्न 5.
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती ?
उत्तर :
कठपुतली को स्वतंत्र रूप से अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा है, लेकिन वह खड़ी नहीं होती क्योंकि वह धागों से बँधी हुई है। वह दूसरों के अधीन है। उसका स्वयं पर कोई वश नहीं चलता। दूसरों की इच्छा पर ही वह अपने हाथ-पैर हिला सकती है।

प्रश्न 6.
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी ?
उत्तर :
आज़ादी सबको अच्छी लगती है। पराधीन रहना किसी को पसंद नहीं। सभी अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहते हैं। किसी भी कठपुतली को धागे से बँधे रहना और दूसरों की इच्छा से नाचना पसंद नहीं था। इसीलिए पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को अच्छी लगी।

प्रश्न 7.
पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि – ‘ये धागे क्यों हैं मेरे पीछे-आगे / इन्हें तोड़ दो / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।’ तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि – ‘ये कैसी इच्छा / मेरे मन में जगी ?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए –
उसे दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी महसूस होने लगी।
उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।
वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने ली।
वह डर गई, क्योंकि उसकी उप्र कम थी।
उत्तर :
जब पहली कठपुतली बंधन का जीवन जीते-जीते दु:खी हो गई थी, उसे अपनी पराधीनता पर कोध आ गया, तब उसने स्वतंत्र होने की इच्छा जताई, लेकिन जब सारी कठपुतलियाँ उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिलाने लगी और उसके नेतृत्व में विद्रोह के लिए तैयार होने लगी, तो वह डर गई। वह सोच में पड़ गई कि सबकी जिम्मेदारी लेकर वह इतना बड़ा कदम कैसे उठाए। अब तक सभी दूसरों पर आश्रित रहे हैं, एकदम से मिली स्वतंत्रता में कहीं उनके कदम लड़खड़ा तो नहीं जाएँगे। यही कारण था कि पहली कठपुतली चिंतित होकर अपने फैसले के विषय में सोचने लगी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

(क) सुनकर बोली और – और
कठपुतलियाँ
कि हाँ
बहुत दिन हुए
हमें अपने मन के छंद छुए।

(i) प्रस्तुत पद्यांश किस कवि की किस रचना से उद्धुत है ?
उत्तर :
प्सस्तुत पद्यांश भवानी प्रसाद मिश्र रचित ‘कठुुतली’ कविता से उद्धृत हैं।

(ii) ‘मन के छंद छुए’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पहली कठपुतली की स्वतंग्रता की बात सुन कर सभी कठुुतलियाँ कहने लगी कि बहुत दिनों से हमारे मन में कोई उमंग, कोई खुशी नहीं आई। बंधन के कारण मन सदा वुझा सा रहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘कठपुतली’ कविता के आधार पर बतलाइए कि पराधीनता या गुलामी का जीवन हर प्रकार से दु:खद है।
उत्तर :
कठपुतली अपने हाथ-पाँव धागे या रस्सियों से बँधा देखकर क्रोध से उबल पड़ती है। वह उन धागों को तोड़कर स्वतंत्र होने तथा अपने पाँवों पर खड़े होने की इच्छा व्यक्त करती हैं। अन्य कठपुतलियाँ भी उसके प्रस्ताव का समर्थन करती है। दीर्घकाल से वे सभी पराधीनता के कारण अपने मन के स्वतंत्र विचार को व्यक्त करने की इच्छानुसार व्यवहार करने में असमर्थ बनी रहीं। पहली कठपुतली सोचने लगी कि एकाएक मन में यह इच्छा क्यों उत्पन्न हुई? विचार कर परिणाम सोचकर ही किसी क्रांति या आन्दोलन का नेतृत्व करना चाहिए।

इस प्रकार इस कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि पराधीनता का जीवन हर प्रकार से दुखदाई होता है। पराधीनता में सपने में भी सुख नहीं होता। पशु-पक्षी भी पराधीनता को अभिशाप समझते हैं। पराधीनता की जंजीरों को तोड़कर सभी आजाद होना चाहते हैं। अपने अधीन रहना, स्वाधीन जीवन जीना सब प्रकार से सुखद होता है। पर वश में रहना कभी सुख संतोष, शांतिमय नहीं हो सकता। क्रांति या आन्दोलन द्वारा स्वतंत्र होना कौन नहीं चाहता। पर इसका अगुआ होना सभी के वश की बात नहीं। परिणाम क्या होगा इसे कोई नहीं सोच सकता।

अत: सफलता-असफलता के गंभीर परिणाम को भलीभाँति सोच-विचार कर उचित कदम उठाना चाहिए। दूसरे के अधीन और नियंत्रण में रहना कोई नहीं चाहता। पराधीनता की स्थिति में मन तथा बुद्धि कुंठित हो जाती है। अनुचित बंधन से मन उबलने लगता है। प्राण और मन पर यह बोझ जीवन को धोर निराशा तथा पीड़ा से भर देता है। गुलामी की स्थिति में सुख के सारे साधक भी व्यर्थ प्रतीत होते हैं। सोने के पिंजड़े में कैद पक्षी मुक्त होना चाहता है। अत: स्वाधीनता हर प्रकार के सुख, शांति एवं उल्लास से जीवन को भर देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

भाषा-बोध :

(क) पर्यायवाची शब्द लिखें –
मुन – चित्त, जी, अंतर, मानस।
इच्छा – चाह, कामना, अभिलाषा।
गुस्सा – कोप, कोध, रोष, क्षोभ।
दिन – वार, दिवस, वासर, दिवा।

(ख) लिंग बताइए –
कठपुतली – स्त्रीलिंग
दिन – पुलिंग
छंद – पुलिंग
इच्छा – स्व्रीलिंग
मन – पुलिंग

WBBSE Class 6 Hindi कठपुतली Summary

जीवन-परिचय :

इनका जन्म सन् 1913 ई० में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ था। प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा सोहागपुर, जबलपुर एवं होशंगाबाद में हुई थी। बी. ए. की शिक्षा के बाद ये कल्पना में सम्पादक हुए फिर ऑल इन्डिया रेडियो में नौकरी की। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कमल के फूल, वाणी की दीनता, सतपुड़ा के जंगल आदि हैं। इनकी मृत्यु सन् 1985 ई० में हुई ।

कविता का सारांश – प्रस्तुत कविता में कठपुतलियाँ स्वाधीन होने की इच्छा व्यक्त करती हैं। पहली कठपुतली सभी धागों को तोड़ देने की बात कहती है। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। उसकी बात सुनकर सभी कठपुतलियाँ प्रसन्न होती हैं। पर पहली कठपुतली स्वतंग्रता की जिम्मेदारी के प्रश्न पर सोच-समझकर कदम उठाना चाहती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

शब्दार्थ :

  • कठपुतली – काठ की बनी हुई पुतली ।
  • गुस्से – कोध ।
  • पुतली – गुड़िया ।
  • पाँवों – पैरों ।
  • इच्छा-कामना; चाह ।
  • जगी – पैदा हुई।
  • उबली – नाराज हुई ।

पद -1

कठपुतली
गुस्से से उबली
क्यों हैं मेरे पीछे-आगे ?
इन्हें तोड़ दो
मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ कठपुतली पाठ से ली गई है। इसके कवि भवानी प्रसाद मिश्र हैं। इन पंक्तियों में पहली कठपुतली स्वतंत्र होने की इच्छा व्यक्त कर रही है।

व्याख्या – धागे में बँधी हुई कठपुतली अपनी पराधीनतां को देखकर क्रोध और आवेग से भर उठती है। वह जोश में आकर कहने लगती है कि उसके आगे-पीछे ये धागे क्यों हैं ? इन धागों को तोड़ दीजिए, मुझे मेरे चरणों पर खड़े होने तथा चलने के लिए मुक्त कर दीजिए। वह अपने पाँव पर खड़ा होना चाहती है। इस प्रकार पराधीनता के दुःख से बाहर निकलने के लिए वह विद्रोह कर देती है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 7 कठपुतली

पद – 2

सुंनकर बोली और- और
कठपुतलियाँ
कि हाँ ।
बहुत दिन हुए।
हमें अपने मन के छंद हुए।

व्याख्या – पहली कठपुतली की बात सभी कठपुतलियों को अच्छी लगती है क्योंकि स्वतंत्र रहना सभी चाहती हैं। अजादी सभी को अच्छी लगती है। वे कहने लगती हैं कि बहुत दिनों से हमारे मन में कोई उमंग, कोई खुशी नहीं आई। धागे में बँधी हुई हम सदा से पराधीन हैं। दूसरों के इशारे पर हमें नाचना पड़ता है। अपने मन के अनुसार हम कोई काम नहीं कर सकतीं।

पद -3

मगर
पहली कठपुतली सोचने लगी
ये कैसी इच्छा
मेरे मन में जगी।

व्याख्या – पहली कठपुतली के द्वारा कही गई स्वतंत्र होने की इच्छा का सभी कठपुतलियों ने स्वागत किया लेकिन पहली कठपुतली पर जब स्वतंत्रता की जिम्मेदारी आती है तो वह सोच समझ कर कदम उठाना चाहती है। इस लिए वह कहने लगती है कि मेरे मन में एकाएक यह कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई? यह चुनौती भरा कदम समझदारी से समझ-बूझ कर ही उठाना चाहिए।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 6 जीवन का झरना to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – जीवन का झरना

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झारने से
(घ) समुद्र से
उत्तर :
(ग) झरने से

प्रश्न 2.
निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर :
(क) आगे बढ़ने को

प्रश्न 3.
जीवन रूपी निर्झर के दो तीर हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दु;ख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर :
(ख) सुख-दुख

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 4.
यह जीवन क्या है ?
(क) नदी
(ख) निर्झर
(ग) आकाश
(घ) वायु
उत्तर :
(ख) निर्झर।

प्रश्न 5.
निईर का जन्म कहाँ होता है?
(क) पर्वत के भीतर
(ख) जल में
(ग) तालाब में
(घ) आकश में
उत्तर :
(क) पर्वत के भीतर।

प्रश्न 6.
‘जीवन का झरना’ किसकी रचना है ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) श्रीधर पाठक
(ग) आरसी प्रसाद सिंह
(घ) भवानी प्रसाद मिश्र
उत्तर :
(ग) आरसी प्रसाद सिंह।

प्रश्न 7.
‘आरसी प्रसाद सिंह’ का जन्म किस राज्य में हुआ था ?
(क) बिहार
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) हरियाणा
उत्तर :
(क) बिहार।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 8.
चंदा मामा किस तरह की रचना है ?
(क) स्त्री साहित्य
(ख) दलित साहित्य
(ग) प्रबंध काव्य
(घ) बाल साहित्य
उत्तर :
(घ) बाल साहित्य।

प्रश्न 9.
कवि ने जीवन की तुलना की है –
(क) नदी से
(ख) वायु से
(ग) झरने से
(घ) समुद्र से
उत्तर :
(ग) झरने से।

प्रश्न 10.
निर्झर हमें क्या करने को कहता है ?
(क) आगे बढ़ने को
(ख) मस्ती करने को
(ग) सोचने को
(घ) विश्राम करने को
उत्तर :
(क) आगे बढ़ने को।

प्रश्न 11.
जीवन रूपी निर्झर के दो किनारे (तीर) हैं –
(क) जय-पराजय
(ख) सुख-दुःख
(ग) हानि-लाभ
(घ) उत्थान-पतन
उत्तर :
(ख) सुख-दु:ख।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 12.
‘दुर्दिन’ शब्द का क्या अर्थ है ?
(क) दु:ख भरे दिन
(ख) दूर के मित्र
(ग) दूर के दिन
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर :
(क) दु:ख भरे दिन।

प्रश्न 13.
‘निई्झर कहता है
(क) लड़े चलो
(ख) भाग चलो
(ग) बढ़े चलो
(घ) सोये रहो
उत्तर :
(ग) बढ़े चलो।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें सतत् गतिशील बने रहने, जीवन-पथ पर सदा आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है।

प्रश्न 2.
निर्झर की धुन क्या है ?
उत्तर :
निई्ईर की सिर्फ एक धुन सतत् चलते रहने, आगे बढ़ते रहने की है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 3.
झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
झरने की गति रुक जाने पर उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 4.
जीवन का आनंद किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनंद सतत कर्म करते रहने तथा जीवन में आगे बढ़ते रहने में ही है।

प्रश्न 5.
जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा झरना से दी गई है।

प्रश्न 6.
आरसी प्रसाद सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
आरसी प्रसाद सिंह का जन्म 19 अगस्त, 1911 ई० को बिहार के दरभंगा जिला के एरोट नामक गाँव में हुआ था ।

प्रश्न 7.
निर्झर’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘निर्झर’ झरना का पर्याय है और झरना जीवन की गतिशीलता का।

प्रश्न 8.
झरना हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
झरना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देता है ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 9.
निईरार हमें क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
निईर की बस एक ही धुन है – सतत् चलते रहने की ।

प्रश्न 10.
झरने की गति रुक जाने पर क्या होगा ?
उत्तर :
झरने की गति रुक जाने पर वह सूख जाएगा, अर्थात् उसकी मृत्यु हो जाएगी।

प्रश्न 11.
जीवन का आनन्द किस बात में है ?
उत्तर :
जीवन का आनन्द सतत् आगे बढ़ने, मुसीबतों को हराकर पार करने तथा सुख-दुःख दोनों में अविचलित हुए बगैर चलते रहने में है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने किन कारणों से जीवन की तुलना निईरा से की है?
उत्तर :
कवि ने जीवन की तुलना झरने से की है क्योंकि मनुष्य का जीवन झरने के समान है। जिस प्रकार झरना दो किनारों के बीच स्वच्छंद गति से चलता है उसी प्रकार मनुष्य भी सुख-दु:ख दो किनारों के बीच जीवन बिताता है।

प्रश्न 2.
जीवन का झरना कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर :
पाठ के प्रारंभ में दिया गया हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

प्रश्न 3.
निर्झर का जन्म कहाँ होता है? वह अपनी यात्रा में किन-किन अवरोधों का सामना करता है ?
उत्तर :
निर्झर का जन्म पर्वत के अन्तस्थल से होता है। वह अपनी यात्रा में अनेक अवरोधों का सामना करता है। उसके रास्ते पर रोड़े आकर बाधा डालते हैं, कठोर चट्टानें पड़ जाती हैं। जंगल के वृक्ष रास्ते में पड़ जाते हैं पर वह सभी बाधाओं को पार कर आगे बढ़ता जाता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) यह जीवन क्या ……….. मनमानी है।
(i) इस अंश के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर :
इस अंश के रचनाकार आरसी प्रसाद सिंह हैं।

(ii) जीवन की उपमा किससे दी गई है ?
उत्तर :
जीवन की उपमा निर्झर से दी गई है ।

(iii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता संख्या 1 की व्याख्या देखिए।

(ख) चलना है केवल चलना है ……….. निईर झर कर यह कहता है।
(i) यह अंश किस पाठ से लिया गया है ?
उत्तर :
यह अंश जीवन का झरना पाठ से लिया गया है।

(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता सात की व्याख्या देखिए ।

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(ग) बाधा के रोड़ों से लड़ता ……….. यौवन से मदमाता।
(i) बाधा के रोड़ों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
निई्झर के रास्ते में पत्थर के कठोर टुकड़े आ जाते हैं। वे इसके मार्ग को रोककर बाधा बनते हैं। पर निर्झर अपनी शक्ति से उनसे लड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है।

(ii) इस अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कविता की व्याख्या देखिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
कवि ने इस कविता में जीवन की तुलना झरने से किस प्रकार की है? यह कविता हमें क्या संदेश देती है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि ने जीवन की तुलना झरने से की है। कवि ने झरने के माध्यम से जीवन को समझाने की कोशिश की है कि मनुष्य का यह जीवन एक झरना है। इस जीवन रूपी झरने के पानी जीवन का आनंद है। सुख और दु:ख इस जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं। मानव जीवन सदा सुख-दुःख में बीतता रहता है। जीवन में सदा सुख-दुःख का क्रम बना रहता है। झरना पर्वत से निकल कर विभिन्न अंचलों से नीचे उतरता है। फिर विभिन्न घाटियों से होता हुआ समतल क्षेत्र में बहने लगता है। व्यक्ति का जीवन भी अनेक पड़ावों से गुजरता हुआ, अपनी समस्याओं का समाधान करता हुआ स्थिर शान्त जीवन बिताने लगता है।

झरना अपनी मस्ती में गाता हुआ निरंतर गतिशील बना रहता है। आगे बढ़ते रहना ही उसका जीवन है। मनुष्य को भी सादा अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ते रहने का दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए। झरना अपने मार्ग में पड़ने वाले पत्थरों से लड़ता हुआ, पेड़ों से टकराता हुआ अपने यौवन की शक्ति से संपन्न वह आगे बढ़ता रहता है। मनुष्य भी अपने जीवन पथ में आने वाली समस्त बाधाओं से संघर्ष करता हुआ अपने लक्ष्य तक पहुँचता है ।

झरने की गतिशीलता ही उसका जीवन है। जिस दिन उसकी गति रूक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मनुष्य के जीवन में ही चलते रहना, कर्म करते रहना ही जीवन है, रुकना, जड़ हो जाना ही मौत है। जिस दिन मनुष्य अपने कर्त्तव्य से विमुख होकर निष्क्रिय बन जाएगा, उस दिन उसका भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसलिए जीवित रहना है तो कर्त्तव्य करते रहना चाहिए। झरना कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता, सदा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहता है, अन्त में अपने लक्ष्य पर पहुँच कर ही दम लेता है। मनुष्य को भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। मनुष्य को किसी प्रकार सोच-विचार में न पड़कर केवल अपने लक्ष्य पर चलना ही उचित है। मनुष्य को जीवन में निरतंतर चलते रहना चाहिए। रुकना मर जाना है। कर्म से विरत हो जाने, निष्क्रिय हो जाने से जीवन का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है।

‘जीवन का झरना’ कविता हमें संदेश देती है कि निरंतर आगे बढ़ते रहना, गतिशील बने रहना ही जीवन है। चलना, गतिशील रहना तथा सक्रिय रहने में ही जीवन में सुख शांति है। जीवन-पथ पर गतिशील रह कर ही बाधाओं तथा विपत्तियों को परास्त कर अपना जीवन प्रशस्त बना सकते हैं। गतिशीलता एवं सक्रियता में ही जीवन का सच्चा आनंद है। निष्क्रियता तो नारकीय पीड़ा है। चलते रहना ही जीवन की निशानी है।

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भाषा-बोध :

(क) लिंग निर्णय कीजिए –
जीवन -पुलिंग
गति – स्त्री लिंग
पानी – पुलिंग
चट्टान – स्त्री लिंग

(ख) पर्यायवाची शब्द लिखिए –
पानी – जल, नीर, वारि, तोय
पेड़ – वृक्ष, विटप, तरु, पादप
मानव – मनुष्य, आदमी, इंसान, मनुज
जग – संसार, विश्व, जगत्, दुनिया
गिरि – पहाड़, अचल, पर्वत, नग

(ग) विलोम शब्द लिखें –
समतल – असमतल, खुरदरा
सुख – दु:ख
अन्तर – समान
गति – रुकना
दुर्दिन-सुदिन

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(घ) वचन बदलिए –
तारों – तारा
पेड़ों – पेड़
चट्टानों – चट्टान
राह – राहें
बाधा – बाधाएँ
मानव – मानवों

WBBSE Class 6 Hindi जीवन का झरना Summary

जीवन-परिचय :

इनका जन्म सन् 1911 ई॰ में बिहार के दरभंगा जनपद में ‘एरोट’ गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रकृति और जीवन की विविध प्रवृत्तियों का सरल, सुगम व मधुर हिन्दीभाषा में रचित रचनाओं द्वारा अत्यन्त सरस एवं प्रभावपूर्ण किया है। इनकी प्रमुख रचनाएं-शतदल, सूर्यमुखी, जीवन और यौवन, पांचजन्य आदि हैं। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य-साधना में लगा दिया।

कविता का सारांश – प्रस्तुत कविता में कवि झरने के माध्यम से बतलाया है कि मनुष्य का जीवन झरने के समान होना चाहिए। सुख-दु:ख जीवन रूपी झरने के दो किनारे हैं। झरना पर्वत के ह्रदय से फूटकर विभिन्न प्रदेशों से नीचे उतरता है। वह समतल भूमि पर आकर बहने लगता है। इसलिए वह मस्ती से गाते हुए आगे बढ़ता रहता है। रास्ते में पत्थरों से लड़ता हुआ, पेड़ों से टकराता हुआ चट्टानों पर चढ़ जाता है।

आगे बढ़ते रहना ही उसका जीवन है। जिस दिन उसकी गति रुक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। उसी दिन वह भी इस संसार से दिन गिनकर समाप्त हो जाएगा। मनुष्य भी जिस दिन रुक जाएगा, कर्त्तव्य से विमुख हो जाएगा । झरना, सदा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता रहता है। कहता है कि चलते रहना ही जीवन है । रूक जाना ही मृत्यु है। अत: मनुष्य को सदा सन्मार्ग पर चलते रहना चाहिए।

शब्दार्थ :

  • निर्झर – झरना।
  • मस्ती – आनंद।
  • तीर – किनारा।
  • गिरि – पर्वत।
  • अन्तर – हृदय।
  • अंचल – प्रदेश।
  • गति – चाल।
  • धुन – लगन।
  • समतल – समान भूमि।
  • रोड़ा – चट्टान।
  • जग – संसार।
  • दुर्दिन – बुरा समय।
  • राह – रास्ता।
  • यौवन – जवानी।
  • बाषा – रुकावट ।
  • घड़ियाँ – क्षण, पल।
  • घाटी – पर्वतों के बीच की समतल भूमि।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 1

यह जीवन क्या है ? निई्झर है,
मस्ती ही इसका पानी है।
सुख – दुःख के दोनों तीरों से,
चल रहा चाल मनमानी है।

व्याख्या – प्रस्तुत कविता ‘जीवन का झारना’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि आरसी प्रसाद सिंह हैं। यहाँ कवि ने मनुष्य जीवन की तुलना झरने से की है। यह संदेश दिया है कि झरने की तरह मनुष्य को सदा गतिशील रहना चाहिए। क्योंकि गतिशीलता ही जीवन है । मनुष्य का जीवन झरने के समान है। उसके जीवन की खुशियाँ ही उसका जल है। जिस प्रकार झरना दोनों किनारों के बीच स्वच्छंद गति से आगे बढ़ता है, उसी प्रकार मनुष्य सुख-दु:ख इन दो किनारों के बीच जीवन जीता रहता है।

पद – 2

कब फूटा गिरि के अन्तर से,
किस अंचल से उतरा नीचे।
किस घाटी से बहकर आया,
समतल में अपने को खींचे।

व्याख्या – यह झरना पहाड़ के भीतर से न जाने कब निकला और न जाने किस प्रदेश से नीचे उतरा । विभिन्न घाटियों से बहता हुआ यह अपने को आगे खींचता हुआ मैदान की समतल भूमि पर आ गया।

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पद – 3

निर्झर में गति है, यौवन है,
वह आगे बढ़ता जाता है।
धुन एक सिर्फ है चलने की
अपनी मस्ती में गाता है।

व्याख्या : झारने में गति है, जवानी की शक्ति है। इसलिए वह तेज गति से आगे बढ़ता जाता है। उसके मन में केवल आगे बढ़ने की लगन है। अपनी मस्ती में वह कल-कल की ध्वनि करता हुआ आगे बढ़ता जाता है।

पद – 4

बाधा के रोड़ों से लड़ता,
वन के पेड़ों से टकराता।
बढ़ता चट्टानों पर चढ़ता,
चलता यौवन से मदमाता।

व्याख्या : झरने के रास्ते में पत्थर के टुकड़े आकर उसे बाधा पहुँचाते हैं, परंतु झरना अपनी शक्ति से उनसे लड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है। कठोर चट्टानों पर भी चढ़ जाता है। जंगल के वृक्षों से टकराकर आगे निकल जाता है। जवानी की शक्ति से भरा हुआ वह मस्ती के साथ आगे बढ़ता रहता है।

पद – 5

निर्झर में गति ही जीवन है,
रुक जाएगी यह गति जिस दिन ।
उस दिन मर जाएगा मानव,
जग-दुर्दिन की घड़ियाँ गिन-गिन ।

व्याख्या : हमेशा आगे बढ़ते रहना, गतिशील बने रहना ही झरने का जीवन है। जिस दिन उसकी गति रुक जाएगी, उसी दिन उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मनुष्य भी जब तक गतिशील है तभी तक उसका जीवन है। जिस दिन उसके जीवन की गति रुक जाएगी, वह चलना, आगे बढ़ना बंद कर देगा, उसी दिन वह सांसारिक बुरे क्षण को देख कर समाप्त हो जाएगा।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 6 जीवन का झरना

पद – 6

निईर कहता है – ‘बढ़े चलो’
तुम पीछे मत देखो मुड़कर।
यौवन कहता है – बढ़े चलो,
सोचो मत क्या होगा चलकर।

व्याख्या : झारना हमेशा यह संदेश देता रहता है कि गतिहीन हो जाने पर मनुष्य का जीवन निस्सार एवं मृत्यु-तुल्य हो जाता है। अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़ता जाए। कभी भी पीछे मुड़कर न देखे। मनुष्य की शक्ति, उसका यौवन (जवानी) भी यही प्रेरणा देता है कि जीवन में सदा आगे बढ़ते चलो। परिणाम के विषय में मत सोचो।

पद – 7

चलना है केवल चलना है,
जीवन चलता ही रहता है।
मर जाना है बस, रूक जाना,
निर्झर झरकर यह कहता है।

व्याख्या : मनुष्य का जीवन आगे बढ़ते रहने के लिए ही है। मनुष्य जीवन की सार्थकता आगे बढ़ने में ही है। सदा आगे बढ़ता हुआ झरना भी यही संदेश देता है कि चलते रहना ही जीवन है और रुक जाना ही मृत्यु है। इसलिए मनुष्य को सदा कर्त्रव्य करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। जीवन में सदा गतिशील बने रहना ही सच्चा जीवन है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 Question Answer – कोई चिराग नहीं हैं

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इस पाठ के कवि कौन हैं ?
(क) साबीर अली
(ख) बशीर बद्र
(ग) जाबीर बद्र
(घ) कैफी आजमी
उत्तर :
(ख) बशीर बद्र

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता का छंद है –
(क) दोहा
(ख) चौपाई
(ग) गज़ल
(घ) रुबाई
उत्तर :
(ग) गज़ल

प्रश्न 3.
क्या नहीं हैं मगर उजाला है ?
(क) चन्दा
(ख) चिराग
(ग) फूल
(घ) सुरज
उत्तर :
(ख) चिराग

प्रश्न 4.
गजल की शाख पे क्या खिलने वाला है ?
(क) बेली
(ख) भँवरा
(ग) फूल
(घ) पत्ती
उत्तर :
(ग) फूल

प्रश्न 5.
‘कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है’ किसकी रचना है ?
(क) साबीर अली
(ख) बशीर बद्र
(ग) जाबीर बद्र
(घ) कौफी आजमी
उत्तर :
(ख) बशीर बद्र

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

प्रश्न 6.
बशीर बद्र का जन्म कब हुआ था ?
(क) 18 फरवरी 1930 ई०
(ख) 15 फरवरी 1932 ई०
(ग) 15 फरवरी 1934 ई०
(घ) 15 फरवरी 1936 ई०
उत्तर :
(घ) 15 फरवरी 1936 ई०

प्रश्न 7.
बशीर बद्र का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) कानपुर
(ख) नागपुर
(ग) मेरठ
(घ) इलाहाबाद
उत्तर :
(क) कानपुर

प्रश्न 8.
बरसात का दुशाला कहाँ है ?
(क) नदी में
(ख) पहाड़ पर
(ग) समुद्र में
(घ) पठार पर
उत्तर :
(ख) पहाड़ पर

प्रश्न 9.
मस्जिद से निकलकर बच्चे ने कहाँ फूल डाला है ?
(क) जली मूरत पर
(ख) लाश पर
(ग) मजार पर
(घ) कहीं पर नहीं
उत्तर :
(क) जली मूरत पर

प्रश्न 10.
अजीब लहजा है दुश्मन की …………. का –
(क) बहादुरी का
(ख) तलवार का
(ग) मुस्कुराहट का
(घ) विचार का
उत्तर :
(ग) मुस्कुराहट का

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प्रश्न 11.
दुशाला का अर्थ है –
(क) चादर
(ख) पट्टा
(ग) शर्ट
(घ) दुपट्टा
उत्तर :
(क) चादर

प्रश्न 12.
तमाम वादियों में सेहरा में क्या रोशन हैं ?
(क) खुशियां
(ख) खुशबू
(ग) आग
(घ) दीपक
उत्तर :
(ग) आग

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने दुश्मन के किस लहजे को अजीब कहा है और क्यों?
उत्तर :
कवि ने दुश्मन की मुस्कराहट के लहजे को अजीब कहा है क्योंकि दुश्मन अपने उस लहजे से कभी उसे पतन की और ढकेलता है, कभी संभालता है। दुश्मन की परिवर्तित विचारधारा को कवि अजीब मानता है।

प्रश्न 2.
गज़ल की शाख का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इसका आशय यह है कि कवि की कविता की हर पंक्ति में फूल खिला है। अर्थात् हर पंक्ति में विचारो भावों की खुशबू है।

प्रश्न 3.
‘फसाद में जली मूरत पे हार डाला है’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर :
कवि का कथन है कि दंगों में निर्दोष लोग जलाए जाते है, लोगों को बेसहारा बना दिया जाता है। निर्दोष ही प्रभावित होते हैं। अबोध बालक इन दंगों या अग्नि कांड से अपरिचित है। उस निरीह मासूम बच्चे को क्या पता कि इस आदमी को क्यों जलाया गया। कवि ने दंगों के अमानवीय पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

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प्रश्न 4.
बेलिवास का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बेलिवास का अर्थ है बिना लिवास के, बिना परिधान या अच्छादन के यहाँ बेलिवास पत्थर का जिक्र है। पत्थर बिल्कुल नग्न अर्थात् आच्छादन रहित है। भाव यह है कि दंगों के कारण समाज बेपर्द हो जाता है।

प्रश्न 5.
बशीर बद्र का वास्तविक नाम क्या है ?
उत्तर :
बशीर बद्र का वास्तविक नाम सैयद मोहम्मद बशीर है।

प्रश्न 6.
बशीर बद्र को पद्मश्री पुरस्कार कब मिला ?
उत्तर :
बशीर बद्र को पद्मश्री पुरस्कार 1999 ई० में मिला।

प्रश्न 7.
‘बेंलिवास’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर :
‘बेलिवास’ का तात्पर्य नग्न या वस्व विहीन है।

प्रश्न 8.
कवि को कैसे मौसमों ने पाला है ?
उत्तर :
कवि को खिजाँ अर्धात् पतझड़ वाले मौसमों ने पाला है। स्सष्ट है कि कवि विपरीत परिस्थितियों के मध्य पले हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) इस कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए :
उत्तर :
प्रस्तुत काव्यांश में सुप्रसिद्ध शायर बशीर बद्र ने गजल या कविता के महत्व को स्पष्ट करते हुए बतलाया है कि सत्य स्थिर नहीं रहता, उसका मापदंड समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार बदलतर है। बिना दीपक के ही गजल के विचार प्रकाश फैलाते है। गजल के विचार डाली पर खिले फूल की भांति चारों ओर अपनी खुशबू बिखेरते हैं। कविता मन की संकीर्णता तथा अझ्ञान-अंधकार को दूर कर ज्ञान की रोशनी फैलाती है। प्रकृति के क्रियाकलाप अद्भुत हैं।

पहाड़ के प्रस्तर खंड पर कहीं कठोर भूप पड़ती है कहीं वर्षा की चादर बिक्छ-बिछ जाती है। इसलिए समय, दशा और परिस्थिति के अनुसार व्यक्ति को कद्टरपन छोड़कर उदार होना चाहिए। शत्रु की मुस्कान विचित्र होती है। उसकी मुस्कराहट कभी पतन की और ले जाती है तो कभी पतन से संभाल भी लेती है।

उसकी मुस्कान कभी चिढ़ाने के लिए होती है, कभी हददय को खुशियों से भर देती है। कवि ने मंदिर-मस्जिद को लेकर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले, साम्पदायिक हिंसा को प्रश्रय देने वालों को निंदनीय बतलाया है। कुछ समाज विरोधी लोग ही हिंसा और उपद्रव करते हैं। दंगे के कारण एक निर्दोष बालक मस्जिद में पनाह लेता है। उपद्रव के शान्त हो जाने पर बाहर जली हुई एक मूर्ति के गले में फूलों की माला पहना देता है।

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अत: मन्दिर -मस्जिद को लेकर धार्मिक हिंसा निंदनीय है क्योंकि कोई भी मजहब शत्रुता की शिक्षा नहीं देता। अन्तिम गजल में कवि ने बतलाया की प्रतिकूल परिस्थिति तथा वातावरण में उसका जीवन अग्रसर हुआ है। कवि का जीवन वसन्त में नहीं पतझड़ में बीता है। विषम परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए कवि ने अपने जीवन का निर्माण किया है । संघर्षो में आगे बढ़ना ही सच्चा जीवन दर्शन है।

(ख) ‘कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है’ – कवि ऐसा क्यों कहता है? इसका प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी दीपक के चारों ओर रोशनी फैली हुई है। दीपक का उजाला वहाँ फैलता है जहाँ अंधकार रहता है, परतु जहाँ प्रकाश है वहाँ तो दीपक की रोशनी के बिना उजाला रहता है। कवि अपनी कविता की पंक्तियों में फूल की महक की बात कह कर यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि जाँँ पविश्र भाव हो, संकीर्णता नही हो, वहाँ मानवता का प्रकाश स्वत: बिना दीपक के प्रकाशमान बना रहता है।

(ग) निम्नलिखित पंक्तियों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए –

प्रश्न  1.
निकल के पास की मस्जिद से एक बच्चे ने
फसाद में जली मूरत पै हार डाला है।
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘कोई चिराग नहीं मगर उजाला है’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि बशीर बद्र हैं। इस अंश में कवि ने दंगों की भयंकरता का वर्णन किया है। दंगा-फसाद असामाजिक तत्वों द्वारा किया जाता है। परंतु इसमें निरीहनिर्दोष लोगों को जान गँवानी पड़ती है। मस्जिद में लोगों को पनाह लेनी पड़ती है। ऐसे ही एक दंगे की ओर कवि ने संकेत किया है। दंगे की आग में जल जाने से किसी का शरीर बाहर पड़ा हुआ है। पास की मस्जिद से निकलकर एक बच्या उस पर फूलों की माला डाल कर सम्मान करता है।

प्रश्न  2.
तमाम वादियों से सेहरा में आग रोशन है,
मुझे खिजाँ के इन्हीं मौसमों ने पाला है।
इस पंक्ति की भावार्थ सहित व्याख्या करें।
उत्तर :
सभी घटियों में, तटों पर, बस्तियों में आग प्रदीप्त हो रही है। बड़े-बड़े लोगों पर भी इसका प्रभाव है। इन्हीं वीरान स्थितियों में इन्हीं मुरझाए वातवरण ने कवि का पालन किया है। कवि कह रहा है कि ऐसे पतझड़ के मौसम में ही उसका जीवन बीत रहा है। प्रतिभाशाली व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल बना लेता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

प्रश्न 3.
गजब की धूप है इक बेलिवास पत्थर पर
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।
इस पंक्ति की संदर्भ सहित व्याख्या करें।
उत्तर :
कवि स्पष्ट कर रहा है कि इन नंगे पत्थरों पर विचित्र धूप पड़ रही है। पहाड़ पर बरसात की चादर बिछी हुई है। कहीं नग्न स्थिति है। कहीं परिषान, कोई बेपर्द है तो कहीं आवरण से नग्नता ढुकी हुई है।

भाषा-बोध

(क) पाठ में आए निम्नलिखित उर्दू के शब्दों का हिन्दी रूप लिखिए।

  • रोशन- प्रकाशमान
  • वादियों- घाटियों
  • खिजां- पतझड़
  • फसाद – उपद्रव
  • शाख-टहनी

(ख) वाक्य प्रयोग

  • मस्जिद – मस्जिद मुसलमानों का प्रार्थना स्थल है।
  • मुस्कराहट – बच्चे के चेहरे पर स्वच्छ मुस्कुराहट है।
  • दुशाला – कश्मीर का ऊनी दुशाला प्रसिद्ध है।
  • चिराग – चिराग के नीचे अंधेरा होता है।
  • अजीब-यह बालक अजीब स्वभाव का है।

(ग) विलोम शब्द :

  • धूप – छाया
  • बेलिवास – लिवास
  • दुश्मन – मित्र
  • आग-पानी
  • फसाद – शान्ति

(घ) दुश् उपसर्ग के तीन शब्द बनाओ।
दुश्- दुश्चरित्र, दुश्मन, दुष्कर्म, दुस्साहस

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर यथा निर्देश लिखिए-

1. अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कराहट का कभी गिराया है, मुझको कभी सँभाला है।
(क) प्रस्सुत पंक्तियाँ किस कवि की किस कविता से उदधृत है ?
(ख) ‘अजीब लहजा’ से क्या तात्र्य है?
(ग) कवि दुश्मन की मुस्कराहट को अजीब क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ बशीर बद्र रचित ‘कोई चिराग नहीं मगर उजाला है’ शीर्षक कविता से उद्धृत हैं।
(ख) यहाँ ‘अजीब लहजा’ का तात्पर्य शत्रु के विचित्र ढंग या तरीके से है।
(ग) कवि ने बतलाया है कि दुश्मन की चाल, उसका ढंग बड़ा ही निराला है। उसकी मुर्कराहट में भी विचित्रता भरी है। वह अपनी चेष्टा से कभी हमें गिरा देता है। परास्त कर देता है, पर कभी संभाल भी लेता है।

WBBSE Class 7 Hindi कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है Summary

जीवन शिचाय

डॉ० बशीर का जन्म सन् 1936 ई० को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ है। बशीर हिन्दी और उर्दू के प्रसिद्ध शायर हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ- उजाले, अपनी यादों के, उजालों की परियाँ, आस रोशनी के घरौंदे आदि हैं। साहित्य और अकादमी में इनके उल्लेखनीय योगदन के लिए इन्हे पदम्र्री से सम्मानित किया गया।

पद -1

कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है,
गजल की शाख पे इक फूल खिलनेवाला है।

शब्दार्श :

  • चिराग – दीपक।
  • शाख – टहनी।
  • मगर – लेकिन।
  • उजाला- प्रकाश।

अर्थ : प्रख्यात शायर डॉ० बशीर बद्र ने प्रस्तुत गजल में स्पष्ट किया है कि आधुनिक जीवन और जगत में गजल ही धार्मिक रूढ़ियों, सांपदायिक संकीर्णताओं को दूर कर भाईचारे और उदार विचारों के प्रसार से समाज में नई रोशनी ला सकता है। गजलकार का कथन है कि जिस प्रकार पुष्प की डाली पर खिला हुआ फूल सुगंधि को चारों ओर फैला देता है, उसी प्रकार गजल में व्यक्त विचार फूल की भाँति खुशबू बिखेरते हैं। बिना दीपक के ही गजल के विचार और शिक्षाओं से प्रकाश फैल जाता है। वास्तव में कविता ही मन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। अच्छे विचारों की खुशबू फैलती है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 7 कोई चिराग नहीं हैं मगर उजाला है

पद -2

गजब की घूप है इक बेलिवास पत्थर पर,
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।

शब्दार्थ :

  • बेलिवास – नग्न।
  • दुशाला – चादर।

अर्थ : प्रस्तुत गजल में बद्र जी ने बतलाया है कि प्रकृति के क्रियाकलाप अद्भुतु है। एक ही समय में कहीं धूप पड़ती है कहीं छाया। कहीं शहनाई बजती है कहीं मातम होता है। पहाड़ पर कहीं तेज बरसात की चादर फैल जाती है उसी पहाड़ के अंश में एक ओर नग्न पत्थर पर कठोर धूप पड़ती है। पहाड़ पर सर्वत्र एक समान धूप तथा वर्षा का प्रभाव नहीं पड़ता। इस तथ्य को देखकर व्यक्ति को कट्टरवादी ने होकर परिवर्तन शील स्वभाव और विचार का होना चाहिए। सदा एक ही विचार पर दृढ़ बने रहना ठीक नहीं। समय, दशा तथा परिस्थिति के अनुसार उदार होकर परिस्थिति के अनुसार अपने आप को ढाल लेना चाहिए।

पद – 3

अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कराहट का,
कभी गिराया है मुझको कभी सँभाला है।

शब्दार्थ :

  • अजीब – अनोखा, विचित्र।
  • लहजा – तरीका, ढंग।
  • दुश्मन – शत्रु ।
  • गिराया – अवनत किया।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने शब्रु के मुस्कराने के ढंग को विलक्षण बतलाया है क्योंकि शत्रु की मुस्कराहट रहस्यपूर्ण होती है, कभी तो उसका उद्देश्य पतन की ओर ढकेलना असफलता की ओर बढ़ाना होता है, कभी उसकी मुस्कराहट में कल्याणकारी भाव भरा रहता है, वह गिरने से सभांल लेता है। सचमुच मुस्कराहट चाहे शत्रु की हो चाहे प्रेमिका की हो, वह रहस्यपूर्ण होती है, उसमें दोनों प्रकार के भाव भरे रहते हैं। मुस्कराहट कभी तो चिढ़ाने के लिए होती है कभी प्रेम पूर्ण होती है कि हृदयकलिका को प्रफुल्ल बना देती है।

पद – 4

निकल के पास की मस्जिद से एक बच्चे ने,
फ़साद में जली मूरत पे हार डाला है।

शब्दार्थ :

  • फसाद – दंगा, उपद्रव।
  • मूरत – मूर्ति।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि धर्म या संप्रदाय विशेष को अथवा मंदिर मस्जिद को लेकर दंगा करना, उपद्रव मचाना धार्मिक उन्माद के कारण हिंसा करना सर्वथा निंदनीय है। देगे के समय उपद्रवी मानवीय मूल्यों तथा संवेदनाओं को भूल जाते है। दंगे के समय एक निर्दोष बालक एक मस्जिद में शरण लेता है, जब उपद्रव शान्त हो जाता है तो वह मस्जिद से निकलकर बाहर देखता है कि एक मूर्ति को दंगे में उपद्रवियों ने जला दिया है, बच्चा जाकर उस मूर्ति के गले में फूलों की माला पहना देता है। बच्चे के हुदय में धार्मिक उन्माद नहीं, वह तो निर्मल एवं पवित्र है।

अतः धर्म के केन्द्र मंदिर-मस्जिद को दंगे से जोड़ना अनुचित है। इन दंगो में सच्चे धार्मिक पवित्र दिल वाले इंसान भाग नहीं लेते। केवल स्वार्थी, संकीर्ण मनोवृत्ति के लोग धर्म के नाम पर उपद्रव रचते हैं। कहा है मजहब नहीं सिखाते आपस में बैर करना। देखा गया है क उपद्रव के समय कितने मुसलमान हिन्दू मित्रों को पनाह देते हैं, कितने हिन्दू मुस्लिम भाइयों की रक्षा करते है। सांम्पदायिकता समाज के लिए कलंक है। अत हिन्दू. मुस्लिम दोनों के बीच भाई-चारे का प्रेम का, सौहार्र का सम्बन्ध होना चाहिए।

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पद – 5

तमाम वादियों में सेहरा में आग रोशन है,
मुझे खिजाँ के इन्हीं मौसमों ने पाला है।

शब्दार्थ :

  • वादियों – घाटी, जंगल।
  • सेहरा – पगड़ी, मुकुट।
  • खिजाँ – पतझड़।
  • मौसम – वातावरण।

अर्थ : प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने स्पष्ट किया है कि चाहे जैसा भी वातावरण हो, अनुकूल हो या प्रतिकूल हो, उसे अपने अनुकूल बना लेना चाहिए। जिस समय सर्वं्र विपरीत स्थिति हो सर्वत्र विध्वंस हो रहा हो, उस समय भी दृढ़ विचार वाला व्यक्ति स्थिर बना रहता है। कवि ने अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बतलाया है कि अत्यंत भयावह विषम वातावरण में उसका निर्वाह हुआ है।

संघर्षो या बाधाओं में व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है। सोना आग में जलकर ही कुन्दन बनता है। समस्त घाटियाँ, जंगलों तथा राजमुकुटों में आग की ज्वाल दहक रही है। इसी विकट परिवेश में पतझड़ के मौसम में ही कवि का पालन पोषण हुआ है। पर कवि पर इनका प्रभाव न पड़ा। वह बसन्त की वयार के लिए कभी परेशान नहीं हुआ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 5 धानों का गीत to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 Question Answer – धानों का गीत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 2.
कवि किसको आने के लिए कहता है ?
(क) चन्दा को
(ख) सूरज को
(ग) बादल को
(घ) हवा को
उत्तर :
(ग) बादल को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 3.
आगे कौन पुकारेगा ?
(क) अँखड़ियाँ
(ख) डगरिया
(ग) गुजरिया
(घ) कलगियाँ
उत्तर :
(ख) डगरिया।

प्रश्न 4.
‘धान का गीत’ किसकी रचना है ?
(क) केदारनाथ अग्रवाल
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) नागार्जुन
(घ) निराला
उत्तर :
(ख) केदारनाथ सिंह।

प्रश्न 5.
‘धान का गीत’ किस विधा की रचना है ?
(क) कहानी
(ख) गीत
(ग) कविता
(घ) नाटक
उत्तर :
(ग) कविता।

प्रश्न 6.
खेत में धान उगने को कवि किस रूप में देखता है ?
(क) प्रान उगेंगे
(ख) ज्ञान उगेंगे
(ग) जान उगेंगे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) प्रान उगेंगे।

प्रश्न 7.
ज्वार कब झारेंगे ?
(क) सुबह
(ख) दोपहर
(ग) रात
(घ) पूजा की बेला में
उत्तर :
(घ) पूजा की बेला में।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 8.
किस पौधे को पवित्र माना जाता है ?
(क) धान
(ख) तुलसी
(ग) कनेर
(घ) बेंत
उत्तर :
(ख) तुलसी।

प्रश्न 9.
भारतीय गाँवों के किसानों के जीवन का आधार क्या है ?
(क) धान
(ख) मकई
(ग) ज्वार
(घ) चाय
उत्तर :
(क) धान।

प्रश्न 10.
कवि किसको कच्ची धान की बालियां कहते है ?
(क) सूरज को
(ख) चंदा को
(ग) तारे को
(घ) जल को
उत्तर :
(ख) चंदा को ।

प्रश्न 11.
कवि किसको सूखी रेत में बाँधने की बात कहता है ?
(क) चंदा को
(ख) पानी को
(ग) सूर्य को
(घ) आग को
उत्तर :
(ग) सूर्य को।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 12.
धूप के ढलते ही किसके पत्ते झरने लगते हैं ?
(क) आम के
(ख) बेर के
(ग) तुलसी के
(घ) ज्वार के
उत्तर :
(ग) तुलसी के।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 13.
कवि चंदा को किसमें बाँधने की बात कहता है ?
उत्तर :
कवि चंदा को धान की कच्ची बालियों में बाँधने की बात कहता है।

प्रश्न 14.
गीली अँखड़ियाँ किसे पुकारेगी ?
उत्तर :
गीली अँखड़ियाँ संझा को पुकारेंगी।

प्रश्न 15.
धानों का गींत किस प्रकार की कविता है ?
उत्तर :
धानों का गीत ग्रामीण परिवेश का ग्राम्य कविता है।

प्रश्न 16.
केदारनाथ सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर :
केदारनाथ सिंह का जन्म 1 जुलाई, 1934 ई० में बलिया जिला के चकिया गाँव में हुआ था ।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 17.
किसके घिरने पर ज्वार झरने लगते हैं ।
उत्तर :
शाम के घिरने पर कनेर तथा पूजा की बेला में ज्वार झरने लगते हैं।

प्रश्न 18.
हमारे खेतों में क्या प्राण के समान हैं?
उत्तर :
हमारे खेतो में पके हुए धान हमारे प्राण के समान हैं ।

प्रश्न 19.
कवि धान की खेती के लिए किसका आह्वान करते हैं ?
उत्तर :
कवि धान की खेती के लिए वादल की आह्लान करते हैं।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किनके द्वारा किया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में बादल का स्वागत किसानों द्वारा किया गया है। किसानों के अतिरिक्त चंदा, सूरज, पेड़, पौधे, खेत-आदि सभी बादल का स्वागत करते हैं।

प्रश्न 2.
कवि ‘आनाजी बादल जरूर’ कहकर बादलों का आह्बान क्यों करता है?
उत्तर :
बादल कृषि प्रधान भारतवर्ष के लोगों के जीवन का आधार है। जल के अभाव में खेतों में धान की फसल सूख जाती है। सभी पेड़-पौधे, वन-उपवन वर्षा के लिए बेचैनी से बादलों की ओर निहारते रहते हैं। नदियाँ सूख जाती हैं। वर्षा होते ही सारी धरती हरी-भरी हो जाती है। सारि-सरोवर जल से परिपूर्ण हो जाते हैं। सर्वत्र आनंदमय वातावरण बन जाता है। इसीलिए कवि बादलों का आह्नान करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

प्रश्न 3.
बादल का स्वागत कौन-कौन और कब-कब करते हैं ?
उत्तर :
बादल का स्वागत किसान, वन पर्वत, खेत-खलिहान, रास्ते तथा खेतों की फसलें करती हैं। जब धरती वर्षा के अभाव में वीरान बन जाती है। फसलें जल के बिना-सूखने लगती हैं। गर्मी की कतु के बाद खेती करने का समय आषाढ़ का महीना आ जाता है। उस समय सभी बादल का स्वागत करते हैं।

प्रश्न 4.
‘धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे’ इस पंक्ति में धान को प्राण क्यों कहा गया है?
उत्तर :
कहा गया है कि अन्न ही प्राण है। अन्न के बिना प्राण की रक्षा नहीं हो सकती है। धान के पक जाने पर लोगों के प्राण की रक्षा करने वाला अन्न तैयार हो जाता है। धान लोगों की जीविका का आधार है। धान के पक जाने पर अर्थात् धान की फसल तैयार हो जाने पर लोग प्रसन्न हो उठते हैं। इसीलिए धान को प्राण कहा गया है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :

(क) धूप ढरे तुलसी वन झेरेंगे ……….. धान दिये की बेर।
(i) साँझ घिरने पर कौन झरता है?
उत्तर :
साँझ घिरने पर तुलसी-वन, कनेर, ज्वार झरता है।

(ii) ऊपर की पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पद 3 का अर्थ देखें।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

(ख) आगे पुकारेगी सूनी डगरिया पीछे झुके वन-बेंत।
(i) पाठ और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियाँ धानों का गीत पाठ से ली गई हैं। इसके कवि का नाम केदारनाथ सिंह है।

(ii) सूनी डगरिया से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर :
बादल के आने में देरी होने तथा वर्षा न होने से सब जगह वातावरण वीरान बन जाता है। कठिन गर्मी तथा धूप के कारण लोग घरों से नहीं निकल पाते। इसलिए सारे रास्ते सुनसान बन जाते हैं। कहीं चहल-पहल नहीं रह जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न :
कवि ने बादलों का आह्वान क्यों किया है? कविता के माध्यम से बादलों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य के जीवन में बादलों का बहुत अधिक महत्व है। बादलों के आने पर ही वर्षा होती है। धरती पर हरियाली और सरसता की सृष्टि होती है। भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है। इसलिए बादल और बादलों से होने वाली वर्षा ही कृषि का आधार है। वर्षा ही जीवन का आधार है। वर्षा के बिना धरती वीरान बन जाती है। जीवन की सरसता समाप्त हो जाती है। इसलिए कवि ने किसान के स्वर में बादल का स्वागत किया है।

जल से ही खेतों में धान की फसलें लहलहाती हैं और यही लोगों के प्राणों का आधार है। सूने रास्ते, वीरान वन-प्रदेश, पेड़-पौधे सभी बादल के लिए बेचैन हो उठते हैं। जब बादल धरती पर झुकेकर जल से उसे तृप्त कर देता है, पूरी पृथ्वी आनंदित हो उठती है। धान की फसल भी लहलहाने लगती है। पानी के बिना धान की खेती हो ही नहीं सकती । इसीलिए गाँव के किसान निरंतर बादल की प्रतीक्षा करते रहते हैं।

आकाश में बादल छा जाते हैं, जल की वर्षा करने लगते हैं, तो किसानों का मन ताजा हो जाता है। उनका मुर्झाया मन खिल जाता है। धान की बालियाँ लहलहा उठती हैं। जब धान खेत में पक जाते हैं तो किसान का सारा परिश्रम सफल हो जाता है। धान के पक जाने से किसान के प्राण भी ताजगी से भर उठते हैं। ज्वार आदि अन्य फसलें भी तैयार हो जाती हैं। इस प्रकार कवि ने कृषि प्रधान देश भारत के लोगों के जीवन में बादल के महत्व को स्पष्ट किया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

भाषा-बोध :

(क) तद्भव – तत्सम साँझ –
प्रान – प्राण अँखड़ियाँ –
चंदा _ चंद्रमा गीली –
खेत – क्षेत्र डगरिया –
सरज – सूर्य

(ग) पर्यायवाची शब्द लिखें :-
बादल – मेघ, घन, जलद
साँझ – संध्या, सायंकाल, दिनांत
भोर – प्रभात, सवेरा, प्रातःकाल
वन – कानन, जंगल, अरण्य

WBBSE Class 6 Hindi धानों का गीत Summary

जीवन-परिचय :

केदारनाथ सिंह का जन्म सन् 1934 ई० में उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुआ था। ये दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यापक रह चुके हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ – अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक गई, अकाल में सावन आये आदि हैं।

शब्दार्थ :

  • उगना – उपजना ।
  • कलगियाँ – धन की बालियाँ ।
  • रेत – बालू।
  • डगरिया – रास्ते ।
  • कनेर – एक वृक्ष।
  • संझा – शाम ।
  • तुलसी – एक पवित्र पौधा।
  • बेला – समय।
  • ढरे – ढलना ।
  • ज्वार – एक अन्न ।
  • बेर – बेला।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

पद – 1

धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे
उगेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर!
चन्दा को बाँधेंगी कच्ची कलगियाँ
सूरज को सूखी रेत में
आना जी बादल जरूर !

संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने किसान के स्वर में धान, चाँदनी तथा गाँव में प्रचलित विश्वास का सरस वर्णन किया है। कवि ने किसानों के स्वर में बादलों का स्वागत करते हुए उनका आह्वान किया है।

व्याख्या : भारतीय गाँवों के किसानों के जीवन का आधार खाद्यान्न धान है। उनके खेतों में उपजने वाले धान उनके प्राण के समान हैं। धान की खेती के लिए आवश्यक जल की वर्षा करने वाले बादल का वह आह्बान (पुकार) करता है कि बादल जरूर आएँ और जल की वर्षा करें। कवि चंदा को कच्ची धान की बालियों और सूर्य को सूखी रेत में बाँधने की बात कहता है।

पद – 2

आगे पुकारेगी सूनी डगरिया
पीछे झुके वन-बेंत,
संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ
भोर हुए धन-खेत,
आना जी बादल जरूर
धान कँपेंगे कि प्रान कँपेंगे
कँपेंगे हमारे खेत में
आना जी बादल जरूर !

व्याख्या : सुनसान गाँवों के रास्ते आगे पुकारेंगे । पीछे वन प्रदेश के बेंत झुके हुए हैं। गीली आँखें संध्या बेला में पुकारेंगी। खेतों में धान पक रहे हैं। हमारे खेतों में ये पके हुए धान ही हमारे पके प्राण के समान हैं। यहाँ धान को प्राण कहा गया है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 5 धानों का गीत

पद – 3

धूप ढरे तुलसी-वन झरेंगे
साँझ घिरे पर कनेर,
पूजा की बेला में ज्वार झारेंगे
धान-दिये की बेर,
आना जी बादल जरूर,
धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे
पकेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर !

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने गाँवों के निवासियों के विश्वास की ओर संकेत किया है। धूप के ढलते ही तुलसी के पत्ते झरने लगते हैं। शाम के घिरने पर कनेर तथा पूजा की वेला में ज्वार झरने लगते हैं। हमारे खेतों में धान पक कर तैयार हो गए हैं, इसलिए इन धानों के रूप में हमारे प्राणों को नव जीवन मिल गया है। इसलिए खेती के लिए, अन्य पेड़पौधों के लिए बादल अवश्य आए। हम उसका स्वागत करते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

Students should regularly practice West Bengal Board Class 6 Hindi Book Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए to reinforce their learning.

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 Question Answer – भगवान के डाकिए

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1.
पक्षी और बादल किसके डाकिए हैं ?
(क) मनुष्य के
(ख) भगवान के
(ग) धरती के
(घ) पक्षियों के
उत्तर :
(ख) भगवान के।

प्रश्न 2.
एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है?
(क) धन
(ख) अन्न
(ग) सुगंध
(घ) स्नेह
उत्तर :
(ग) सुगंग।

प्रश्न 3.
भगवान के डाकिए की चिट्ठी कौन बाँचता है ?
(क) पेड़
(ख) पौधे
(ग) पानी और पहाड़
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 4.
‘भगवान के डाकिए’ कविता के रचयिता कौन हैं ?
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर :
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’।

प्रश्न 5.
‘भगवान के डाकिए’ कविता में डाकिए किन्हे कहा गया है?
(क) मनुष्यों को
(ख) पक्षी तथा बादलों को
(ग) बच्चों को
(घ) उपर्युक्त सभी को
उत्तर :
(ख) पक्षी तथा बादलों को।

प्रश्न 6.
भगवान के द्वारा भेजे गए संदेश कौन पढ़ पाते हैं ?
(क) मनुष्य
(ख) अध्यापक
(ग) पेड़-पौधे, पानी, पहाड़
(घ) केवल भगवान के दूत
उत्तर :
(ग) पेड़-पौधे, पानी, पहाड़।

प्रश्न 7.
एक देश की धरती दूसरे देश की धरती को क्या भेजती हैं ?
(क) संदेश
(ख) चट्टान
(ग) पेड़-पौधे
(घ) सुगंध
उत्तर :
(घ) सुगंध।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 8.
इनमें ‘पंक्षी’ शब्द का पर्यायवाची है –
(क) खग
(ख) पंख
(ग) पर
(घ) प्रकाश
उत्तर :
(क) खग।

प्रश्न 9.
एक देश की भाप दूसरे देश तक किस रूप में जाती हैं ?
(क) फूल के रूप में
(ख) पानी के रूप में
(ग) हवा के रूप में
(घ) चट्टान के रूप में
उत्तर :
(ख) पानी के रूप में।

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
भगवान के डकिए कौन हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं।

प्रश्न 2.
भगवान के डाकिए कहाँ जाते हैं ?
उत्तर :
भगवान के डाकिए एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं।

प्रश्न 3.
एक देश की धरती दूसरे देश को क्या भेजती है ?
उत्तर :
एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है ?

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 4.
सौरभ कहा तैरता है?
उत्तर :
सौरभ हवा में और पक्षियों के पंखों पर तैरता है।

प्रश्न 5.
एक देश का भाप दूसरे देश में क्या बनकर गिरता है ?
उत्तर :
एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।

प्रश्न 6.
कवि ने डाकिए किन्हें और क्यों कहा ?
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादलों को डाकिए कहा है क्योंकि ये भगवान का संदेश पृथ्वी पर लाते हैं।

प्रश्न 7.
पक्षी और बादलों द्वारा लाए गए संदेश कौन पढ़ पाते हैं ?
उत्तर :
पक्षी और बादलों द्वारा लाए गए संदेश पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 8.
‘पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ में कौन-सा अलंकार’ है ?
उत्तर :
‘पेड़, पौधे, पानी तथा पहाड़’ में अनुप्रास अलंकार है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 9.
काव्यांश में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है ?
उत्तर :
काव्यांश की भाषा सरल तथा सहज है, जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 10.
कवि और कविता का नाम लिखिए ।
उत्तर :
कवि का नाम रामधारी सिंह ‘ दिनकर’ तथा कविता का नाम ‘भगवान के डाकिए’ है।

प्रश्न 11.
‘पक्षियों की पंखों पर’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
उत्तर :
‘पक्षियों की पंखों पर’ पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 12.
‘सौरभ’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर :
‘सौरभ’ शब्द के पर्यायवाची हैं – सुगंध, खुशबू।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए बताया है क्योंकि ये हमेशा एक देश से दूसरे देश में जाते रहते हैं और एक दूसरे की चिट्ठियाँ दूसरी जगह ले जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कवि ने पक्षी और बादल के महत्त्व को बतलाया है। ये दोनों एक देश के समाचार दूसरे देश में ले जाते हैं। वहाँ के पेड़-पौधों तथा पहाड़ पर इनका प्रभाव पड़ता है। इनके माध्यम से एक देश की धरती दूसरे देश को अपनी खुशबू भेजती है। बादल के द्वारा एक देश का भाप दूसरे देश में जल की वर्षा करता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

प्रश्न 3.
ये डाकिए परंपरागत डाकियों से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर:
परंपरागत डाकिए मनुष्य द्वारा मनुष्यों को भेजे गए संदेश लाते हैं जिन्हें मनुष्य स्वयं पढ़ लेता है, जबकि पक्षी और बादल भगवान के संदेश पृथ्वी पर लाते हैं, जिन्हें मनुष्य नहीं पढ़ पाता है, बल्कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ ही पढ़ पाते हैं।

प्रश्न 4.
पद्यांश में पक्षियों तथा बादलों की किस क्रिया का वर्णन किया गया है ?
उत्तर :
इस प्यांश में कवि का कहना है कि पृथ्वी पर एक देश के फूलों की सुगंध बिना किसी बाधा के दूसरे देश को जाती है। यह सुगंध पक्षियों के उड़ते पंखों के सहारे चारों ओर फैल जाती है और बादलों के द्वारा एक देश का पानी भाप बनकर दूसरे देश में बरस जाता है।

निर्देशानुसार उत्तर दीजिए :-

प्रश्न 1.
हम तो केवल यह आँकते हैं कि एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है ?
(i) पाठ और कवि का नाम बताइये।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से ली गई हैं। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।

(ii) उपर्युक्त अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस अंश में कवि ने यह अनुमान व्यक्त किया है कि पक्षी और बादल के माध्यम से एक देश की पृथ्वी दूसरे देश को अपनी खुशबू भेज देती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में किस प्रकार स्पष्ट किया है ? पक्षी और बादल डाकिए की भूमिका किस प्रकार निभाते हैं?
उत्तर :
आधुनिक जीवन में डाकिए का महत्व बढ़ गया है। यों तो आधुनिक युग में संचार माध्यमों के द्वारा डाकिए की भूमिका का निर्वाह किया जा रहां है। प्रस्तुत कविता में दिनकर जी ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए के रूप में चित्रित किया है। पक्षी और डाकिए दोनों ही भगवान के डाकिए माने जाते हैं। पक्षी भी एक देश से दूसरे देश उड़कर जाते हैं। बादलों की भी कोई सीमा नहीं होती, वे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में विचरण करते रहते हैं। मनुष्य भले ही उन्हें न समझ सके, मगर पेड़-पौधे, पानी और पर्वत उनके पत्रों को पढ़ते और समझते हैं। बादल भाप भरी हवाओं को लेकर जहाँ जाते हैं, वहाँ जल की वर्षा कर देते हैं। इस समाचार से पेड़-पौधे हरे-भरे और प्रफुल्ल बन जाते हैं। जलते हुए वीरान पर्वत प्रदेश भी जल प्राप्त कर तृप्त हो जाते हैं।

हम सब भी यही समझते हैं और अनुमान लगाते हैं कि एक देश की पृथ्वी, वहाँ के वातावरण और फूलों की सुगंधि दूसरे देशों में तैरने लगती है। पक्षी अपने पंखों को फैलाए हुए पवन के सहारे दूसरे देशों में जाते हैं। एक देश की सुगंधि दूसरे देश में इस प्रकार पहुँच जाती है। एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बन कर गिरता है । इस प्रकार पक्षी और बादल दोनों ही एक दूसरे देश की प्रकृति का, वातवरण का प्रचार-प्रसार करते हैं। अतः पक्षी और बादल सचमुच ईश्वर के डाकिए हैं, वे मनुष्य की चिट्ठियाँ नहीं ले जाते पर देशों व महादेशों को संदेशवाहक बनकर जोड़ते हैं।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

भाषा-बोध :

(क) महा + देश = महादेश ।
महा + पुरुष = महापुरुष ।

(ख) निम्नलिखित शब्दों का लिंग बताइए :-
चिट्ठी – स्त्रीलिंग
पहाड़ – पुलिंग
पेड़ – पुलिंग
सुगंध – स्त्रीलिंग
पक्षी – पुलिंग

(ग) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :-
पहाड़ – पर्वत, गिरि, अचल।
सौरभ – सुगंध, खुशबू, महक।
पंख – पर, डैना।
पानी – जल, नीर, वारि।
धरती – पृथ्वी, धरा, भू।

WBBSE Class 6 Hindi भगवान के डाकिए Summary

जीवन-परिचय :

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908-1974) का जन्म सन् 1908 में बिहार के मुंगेर जनपद के सिमरिया गाँव में हुआ था। दिनकर जी राष्ट्रीय धारा के नवीन कवियों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इनके विचार राष्ट्रीय जन जागरण में बहुत सहायक हुए हैं। इन्होंने बी.ए, तक की शिक्षा प्राप्त की। ये हाई स्कूल के प्र,धानाध्यापक से लेकर विभिन्न पदों से होते हुए भारत सरकार के हिन्दी के सलाहकार भी रहे। भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया। इनकी मृत्यु सन् 1974 में हुई। इनकी प्रमुख रचनाएँ – कुरुक्षेत्र, रशिमरथी, हुंकार, उर्वशी आदि हैं। इनके काव्य ‘उर्वशी’ पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

पक्षी और बादल

पद – 1

ये भगवान के डाकिए हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।
हम तो समझ नहीं पाते है
मगर उनकी लाई चिद्ठियाँ,
पेड़, पौघे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।

शब्दार्थ :

  • डाकिए – डाक, चिट्ठी बाँटने वाले कर्मचारी ।
  • महादेश – महाद्वीप, चिट्ठियाँ – पत्र ।
  • बाँचना – पढ़ना।

संदर्भ – प्रस्तुत कविता हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य मेला’ के ‘भगवान के डाकिए’ पाठ से उद्धृत है। इसके कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।
इस कविता में कवि ने पक्षी और बादल को भगवान का डाकिया बतलाया है क्योंक ये विभिन्न देशों में विचरण करते हैं।

व्याख्या – कवि ने बतलाया है कि पक्षी और बादल भगवान के डाकिए हैं। ये हमेशा एक देश से दूसरे देश में भ्रमण करते हैं। इनके द्वारा लाए गए समाचार को हम समझ नहीं पाते। लेकिन पेड़, पौधे, जल और पर्वत इनके द्वारा लाई गई चिट्ठियों को पढ़ते हैं। पक्षी और बादल जहाँ भी जाते हैं वहाँ के पेड़-पौधों, जल तथा पहाड़ों पर इनका प्रभाव पड़ता है।

WBBSE Class 6 Hindi Solutions Poem 4 भगवान के डाकिए

पद – 2

हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।

शब्दार्थ :

  • आँकना – अनुमान करना ।
  • सुगंध – महक ।
  • सौरभ – सुगंध।
  • पाँखों – पंखों ।
  • भाप – वाष।

व्याख्या :- इन पंक्तियों में कवि ने बतलाया है कि डाकियों – पक्षी और बादल का दूसरे देशों पर क्या ग्रभाव पड़ता है। पक्षी और बादल एक देश से दूसरे देश में जाते हैं और उस देश के वातावरण को प्रभावित करते हैं। हमारा तो केवल यही अनुमान है कि इनके माध्यम से एक देश की पृथ्वी दूसरे देश को अपनी खुशबू भेजती है। वह सुगंध हवा में तिरता रहता है और पक्षियों के पंखों पर तैरने लगता है। बादल के द्वारा एक देश का वाष्य दूसरे देश में जल की वर्षा करता है।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

Students should regularly practice West Bengal Board Class 7 Hindi Book Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं to reinforce their learning.

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 Question Answer – वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 1.
इस कविता में कवि ने जीवन को क्या कहा है?
(क) खण्डहर
(ख) महासंग्राम
(ग) वरदान
(घ) नदी
उत्तर :
(ख) महासंग्राम

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

प्रश्न 2.
कवि इस कविता में किसकी प्रेरणा देता है?
(क) संधर्ष एवं कर्च्वव्य परायणता
(ख) स्मृति की
(ग) संपत्ति प्राप्ति की
(घ) भौख माँगने की
उत्तर :
(क) संघर्ष एवं कर्त्तव्य परायणता

प्रश्न 3.
‘सुमन’ किसका उपनाम है ?
(क) शिवमंगल सिंह
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) शामशेर बहादुर सिंह
उत्तर :
(क) शिवमंगल सिंह

प्रश्न 4.
‘वरदान माँगूँगा नहीं’ किसकी रचना है ?
(क) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(ख) गजानंद माधव ‘मुक्तिबोध’
(ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
(घ) श्रौधर पाठक
उत्तर :
(ग) शिवमंगल सिह ‘सुमन’

प्रश्न 5.
शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म कब हुआ ?
(क) सन् 1905
(ख) सन् 1910
(ग) सन् 1915
(घ) सन् 1920
उत्तर :
(ग) सन् 1915

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प्रश्न 6.
शिवमंगल सिंद ‘सुमन’ का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) गढ़कोला
(ख) उम्नाव
(ग) ग्वालियर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) उन्नाव

प्रश्न 7.
कवि कैसी भीख नहीं चाहता ?
(क) प्रेम
(ख) दया
(ग) धन
(घ) बल
उत्तर :
(ख) दया

प्रश्न 8.
कवि के अनुसार जीवन क्या है ?
(क) महासंग्राम
(ख) महान
(ग) हार
(घ) जय
उत्तर :
(क) महासंग्राम

प्रश्न 9.
कवि ने क्या माँगूँगा नही कहते हैं ?
(क) भीख
(ख) वरदान
(ग) भोजन
(घ) सुख
उत्तर :
(ख) बरदान

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प्रश्न 10.
कविता में ताप का अर्थ क्या है ?
(क) झूठा
(ख) श्राप
(ग) कष्ट
(घ) गर्मी
उत्तर :
(ग) कष्ट

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसके लिए कवि विश्व की संपत्ति नहीं चाहता?
उत्तर :
कवि अपने सुखद क्षणों को यादगार बनाने के लिए, अपने अभाबों की पूर्णता के लिए, भग्न अवशेषों के निर्माण के लिए विश्व की संपत्ति नहीं चाहता है।

प्रश्न 2.
‘लघुता’ शब्द से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
‘लघुता’ का अर्थ है तुच्छता या हल्कापन। यहाँ कवि ने बड़े लोगों से तुलना करते हुए अपने को उनके दृष्टिकोण से छोटा या अल्प शक्ति, सामर्थ्य वाला कहा है।

प्रश्न 3.
कवि किससे वरदान की कामना नहीं कर रहा है?
उत्तर :
कवि अपने को सामान्य वर्ग का व्यक्ति मानता है। वह अपने आपको महान, श्रेष्ठ, सर्वसाधन संपन्न समझने वाले लोगों से दूर ही रखना चाहता है। वे महान बने रहें। कवि ऐसे लोगों से वरदान की कामना नहीं कर रहा है।

प्रश्न 4.
कवि ने हार को क्या माना है ?
उत्तर :
कवि ने हार को विराम माना है।

प्रश्न 5.
संघर्ष पथ पर कवि को क्या-क्या स्वीकार है ?
उत्तर :
संघर्ष पथ पर कवि को हार-ज़ीत सब स्वीकार है।

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प्रश्न 6.
कवि कहाँ से भागना नहीं चाहता है ?
उत्तर :
कवि कर्तव्य पथ से भागना नहीं चाहता है।

बोधमूलक प्रश्नोत्तर

(क) ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ कविता का संक्षिप्त सार लिखिए।
उत्तर :
प्रस्तुत कविता में कवि जीवन को एक महासंग्राम तथा जीवन में पराजय को एक पड़ाव मानता है। वह किसी भी परिस्थिति में दया की भिक्षा नहीं माँग सकता। अपने सुखद यादों के लिए या अपने अभाव को पूरा करने के लिए भी वह विश्व का वैभव नहीं चाहता। महान बने लोगों से दूर रहकर वह अपने दिल के दर्द को नहीं छोड़ेगा। उसे कष्ट मिले या श्राप किन्तु वह कर्त्तव्य मार्ग पर अडिग बना रहेगा। वह कभी भी किसी से वरदान की याचना नहीं करेगा।

(ख) कवि किन-किन परिस्थितियों में वरदान नहीं माँगने की बात करता है?
उत्तर :
कवि अपने जीवन में चाहे तिल-तिल कर मिट जाए पर वह वरदान नहीं माँग सकता। अपनी सुखद यादों के लिए, अपनी कमी को पूर्ण करने के लिए, अपने हुदय की पीड़ा को दूर करने के लिए तथा संताप या अभिशाप की स्थिति में भी कवि वंरदान नहीं माँगना चाहता।

(ग) निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

प्रश्न 1.
संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही, वरदान माँगूँगा नहीं।
उत्तर :
कवि जीवन को महा संग्राम बतलाता है। यह जीवन यात्रा में आने वाली भयंकर स्थितियों से संघर्ष करना चाहता है। इस संघर्ष में हार या जीत होती है। पराजय एक पड़ाव के समान है। इस जीवन युद्ध में कवि तिल-तिल कर मिट जाने के बावजूद किसी से दया की भिक्षा स्वीकार नहीं कर सकता। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी की अनुकंपा नहीं चाहता। वह किसी से वरदान नहीं माँग सकता। वह किसी देवता या गुरुजन के सम्मुख इष्ट फल की प्राप्ति के लिए याचना नहीं कर सकता।

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प्रश्न 2.
कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु भाँगूँगा नहीं।
उत्तर :
कवि किसी भी महान व्यक्ति से, देवता से अथवा धन-कुबेर या राजनेता से किसी भी प्रकार की इष्ट वस्तु नहीं चाहता। चाहे उसके ह्बदय को पीड़ा मिले, चाहे श्राप मिले या उस पर मिथ्यावाद लगे। उससे चाहे जैसा भी व्यवहार हो, पर वह किसी भी परिस्थिति में कर्त्तव्य मार्ग से दूर नहीं हटेगा। कवि अपने जीवन को संघर्ष से ही सफल बनाना चाहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है?
उत्तर :
प्रस्तुत कविता के द्वारा कवि ने हमें अपने जीवन को सफल बनाने के लिए संघर्ष और कर्त्तव्य परायण बनने की प्रेरणा दी है। देश के लोगों को बतलाया है कि जीवन में पराजय एक विराम की तरह है। समग्र जीवन ही एक महासंग्राम है। इसलिए हर मुसीबत के बावजूद उन्हें भिक्षा याचना नहीं करनी चाहिए। किसी से इष्ट बस्तु भी माँगना नहीं

चाहिए। अपनी अतीत की यादों को सुखद बनाने के लिए, अपने जीवन की कमियों को पूरा करने के लिए भी वरदान नहीं माँगना चाहिए। संसार में संपत्ति प्राप्त करने के लिए याचना करना स्वाभिमान के खिलाफ है। जीवन एक संग्राम है। इसमें चाहे जय मिले या पराजय, पर व्यक्ति को विन्दुमात्र भी भयभीत या निराश नहीं होना चाहिए। हार-जीत तो होती ही रहती हैं। संघर्ष के पथ पर सदा अग्रसर होते रहना हीं सच्चा कर्त्रव्य है। जय या पराजय दोनों को सही समझ कर स्वीकार करना चाहिए। ऐसे समय में भी किसी के सामने हाथ फैलाना उचित नहीं है।

जो भी व्यक्ति अपने को सब प्रकार से संपन्न तथा महान समझता है, समझता रहे, उसकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए। अगर हमें छोटा समझता है तो उसकी भी परवाह नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने मन की पीड़ा को अपने मन में ही रखना चाहिए। व्यर्थ में उस पीड़ा को नहीं त्यागना चाहिए। अन्तर्वेदना को दूर करने के लिए किसी से भी वरदान माँगना उचित नहीं।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

हर स्थिति में कर्त्तव्य मार्ग पर दृढ़ बने रहना चाहिए। हृदय को चाहे कितनी भी पौड़ा मिले, चाहे हमें अभिशाप ही मिले, पर कभी भी सत्कर्त्तव्य पथ से भागना नहीं चाहिए।

भाषा-बोध

(क) विलोम शब्द

  • हार – जीत
  • जीवन-मृत्यु
  • स्मृति – विस्मृति
  • लघुता – गुरुता
  • वरदान – अभिशाप

(घ) उपसर्ग अलग कीजिए –

  • वरदान — वर + दान
  • अभिशाप — अभि + शाप
  • विराम — वि + राम
  • प्रहर — प्र + हर
  • सुखद — सु+खद
  • संग्राम — सम् + ग्राम
  • व्यर्थ — वि + अर्थ

(ग) पाठ से ता, ना और ओ प्रत्ययों से बने शब्दों को चुनकर लिखिए।
ता = लघुता, ओ – प्रहरों, खंडहरों। ना = वेदना

(घ) वाक्य प्रयोग – अभिशाप – प्रदूषण आज अभिशाप बन गया है।
कर्त्तव्य – सभी को अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए।
महासंग्राम – जीवन एक महासंग्राम है।
खण्डहर – सेतु के खण्डहर दिखलाई पड़ते हैं।
संघर्ष – संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

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WBBSE Class 7 Hindi वरदान माँगूँगा नहीं Summary

जीवन्रिचिय

डॉ० शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म उत्तरप्रदेश के उन्नाव जनपद के झगरपुर नामक ग्राम में सन् 1916 ई० में हुआ। सुमन ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम०ए० और डी० लिट० की उपाधियाँ प्राप्त की। इनकी रचनाओं में प्रगतिवादी विचारों के साथ प्रेम और शृंगार का भी चित्रण हुआ है। इन्होंने अपनी रचनाओं में शोषित मानव की पीड़ा, सामाजिक विषमता, वर्ग संघर्ष का भी चित्रण किया है।

इनकी रचनाएँ सहज, सरल तथा प्रभावोत्पादक हैं। इनकी रचनाएँ हिल्लोल, जीवन के गान, प्रलय सृजन पर आँखें नहीं भरी, विं्न हिमालय, विश्वास बढ़ता ही गया तथा मिट्टी की बारात आदि हैं। ‘मिट्टी की बारात’ पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

पद – 1

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिट्यूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • तिल-तिल मिटना – कण-कण खत्म हो जाना।
  • हार – पराजय, असफलता।
  • वरदान – देवता अथवा गुरुजन की प्रसन्नता के फलस्वरूप प्राप्त फल, इष्ट वस्तु की फल प्राप्ति।
  • विराम – पड़ाव, ठहराव, विश्राम।
  • महासंग्राम – जीवन यात्रा में आनेवाली कठिनाइयों से लड़ना, जीवन संग्राम।
  • संदर्भ – प्रस्तुत अंश ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ कविता से उद्धृत है। इस कविता के लेखक डॉ० शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।
  • प्रसंग – कवि इन पंक्तियों में अपनी अभिलाषा व्यक्त की है कि वह किसी भी स्थिति में वरदान नहीं माँगेगा।

व्याख्या – कवि जीवन को महा संग्राम बतलाता है। यह जीवन यात्रा में आने वाली भयंकर स्थितियों से संघर्ष करना चाहता है। इस संघर्ष में हार या जीत होती है। पराजय एक पड़ाव के समान है। इस जीवन युद्ध में कवि तिल-तिल कर मिट जाने के बावजूद किसी से दया की भिक्षा स्वीकार नहीं कर सकता। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी की अनुकंपा नहीं चाहता। वह किसी से वरदान नहीं माँग सकता। वह किसी देवता या गुरुजन के सम्मुख इष्ट फल की प्राप्ति के लिए याचना नहीं कर सकता।

WBBSE Class 7 Hindi Solutions Poem 6 वरदान माँगूँगा नहीं

पद – 2

स्मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्व की सम्पत्ति चाहूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • खंडहर – भग्नावशेष, दूटा फूटा घर
  • सुखद – सुख देने वाली
  • प्रहर – समय संपत्ति – वैभव
  • स्मृति – याद
  • जान लो – समझ लो

व्याख्या – कवि कह रहा है कि वह अपने जीवन में सुख की अनुभूति कराने वाली स्मृतियों के लिए तथा टूटे-फूटे को सजाने या अपनी अधूरी, बिखरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी किसी भी देवता या महान लोगों से वरदान की याचना नहीं कर सकता। सब को अपने विचारों से समझा देना चाहता है कि वह अपने जीवन में समस्त संसार के ऐश्वर्य एवं वैभव की कामना नहीं करता है। उसे जीवन में सुख, अधूरी इच्छा की पूर्ति तथा धन संपत्ति की कामना नहीं है।

पद – 3

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • किंचित- कुछ, थोड़ा
  • भयभीत – डर
  • संघर्ष – विरोध, टकराव
  • सही – सच।

व्याख्या – कवि ने स्पष्ट किया है कि जीवन यात्रा में चाहे विजय मिले या पराजय, मैं किसी भी परिस्थिति में तनिक भी भयभीत नहीं हो सकता। जीवन में विरोधी स्थिति भी आती है, टकराव भी होते हैं, पर मैं सभी को सच माऩकर स्वीकार करूँगा। किसी के सामने याचना नहीं करूँगा।

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पद – 4

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम ही महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • छुआ – स्पर्श करना
  • लघुता – तुच्छता, छोटापन, हल्कापन
  • त्यागूँगा – छोडूँगा
  • वेदना – पीड़ा

व्याख्या – प्रस्तुत अंश में कवि का कथन है कि वह अपनी स्थिति को यथावत् बनाए रखना चाहता है। इसलिए वह कहता है कि मेरी तुच्छता का मेरे हल्केपन को स्पर्श भी मत कीजिए। अपनी महानता को लेकर अहंकारी जीवन बिताते रहिए। अपने दिल के दर्द को मैं बेकार में नहीं छोड़ सकता। मेरी पीड़ा सदा मेरे मन में बनी रहेगी। पीड़ा को सहते हुए भी मैं किसी के सामने हाथ नहीं फैलाऊँगा। किसी से वरदान की याचना नहीं करूँगा।

पद – 5

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्त्तव्य पथ से किन्तु मैं भागूँगा नहीं,
वरदान माँगूँगा नहीं।

शब्दार्थ :

  • ताप – कष्ट पीड़ा
  • कर्त्तव्य पथ – करने योग्य मार्ग या कार्य
  • अभिशाप – श्राप, झूठा दोष

व्याख्या – कवि किसी भी महान व्यक्ति से, देवता से अथवा धन-कुबेर या राजनेता से किसी भी प्रकार की इष्ट वस्तु नहीं चाहता। चाहे उसके ह्बदय को पीड़ा मिले, चाहे श्राप मिले या उस पर मिथ्यावाद लगे। उससे चाहे जैसा भी व्यवहार हो, पर वह किसी भी परिस्थिति में कर्त्तव्य मार्ग से दूर नहीं हटेगा। कवि अपने जीवन को संघर्ष से ही सफल बनाना चाहता है।