WBBSE Class 10 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 दीपदान

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WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 Question Answer – दीपदान

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 : ‘दीपदान’ एकांकी के आधार पर पन्ना धाय की प्रमुख विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 2 : ‘दीपदान’ एकांकी के प्रमुख पात्र की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 3 : ‘दीपदान’ एकांकी में जिस पात्र ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया है उसका चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 4 : “नमक से रक्त बनता है, रक्त से नमक नहीं ” – के आधार पर पत्रा का चरित्र-चि:न
अथवा
प्रश्न 5 : “यहाँ का त्योहार आत्पबलिदान है” – के आधार पर पन्ना की चारित्रिक विशेषताओं को लगकें
अथवा
प्रश्न 6 : ‘थाय माँ पन्ना’ के पुत्र का क्या नाम था ? उसने अपने पुत्र को कहाँ और क्यों सुला ‘दीपदान’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
अथवा
प्रश्न 7 : ‘मेरे महाराणा का नमक मेरे रक्त से भी महान् है’ – के आधार पर संबंधित चरित्र-चित्रण करें।
अथवा

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प्रश्न 8 : “आज मैने भी दीप-दान किया है। दीप-दान”। – पंक्ति के आधार पर पन्ना का ‘स्त्रचित्रण करें।
अधवा
प्रश्न 9 : “अपने जीवन का दीप मैंने रक्त की धारा पर तैरा दिया है” – पंक्ति के आधार पर प क? चरित्र-चित्रण करें।
अथवा.
प्रश्न 10 : “ऐसा दीप-दान भी किसी ने किया है”! – पंक्ति के आधार पर पत्रा की चा” जाक विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 11 : “सारे राजपूताने में एक ही धाय माँ है, पत्ना ! सबसे अच्छी !”- गृ्यांश के आघहर पर पब्ना का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 12 : “महल में धाय माँ अरावली पहाड़ बनकर बैठ गई है” – कथन के आधार पर संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 13 :
सिद्ध कीजिए कि पत्रा के चरित्र में माँ की ममता, राजपूतानी का रक्त, राजभक्ति और आत्म-त्याग की भावना है ।
उत्तर :
‘धाय माँ पत्ना’ के पुत्र का क्या नाम चन्दन था।
पम्ना धाय ‘दौपदान’ एकांकी की प्रतिनिधि पात्रा है। सच कहा जाय तो वही इस एकांकी की नायिका है तथा एकाकी की संपूर्ण कथा उसके इर्द-गिर्द ही घूमती है। इस एकांकी में उसका चरित्र एक वीरांगना के रूप में प्रस्तुत है जा है। यह वह भारतीय नारी नहीं है जिसके बारे में प्रसाद जी ने कहा था –

“‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत पग-पग तल में।
पीयूष स्रोत-सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।”

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पन्ना धाय में हमें एक साथ पृथ्वी की-सी क्षमता, सूर्य जैसा तेज, समुद्र की-सी गंभीरता, चन्द्रमा की-सी शॉंतलता तथा पर्वतों के समान मानसिक उच्चता दिखाई पड़ती है।

पत्ना धाय केवल एक आदर्श धाय ही नहीं है बल्कि उसमें सच्ची देशभक्ति तथा कर्त्तव्य परायणता भी कूटकृट कर भरी है। इन्हीं गुणों के कारण वह चित्तौड़ के उत्तराधिकारी कुंवर उदय सिंह की रक्षा बनवीर से करने के लिए अपने पुत्र को बलिदान करने से भी नहीं हिचकती। यद्यपि रणवीर उसे धन का लालच देकर खरीदना चाहता है लैकिन पत्ना उसे दो दूक जवाब देती है –

“राजपूतानी व्यापार नहीं करती, महाराज ! वह या तो रणभूमि पर चढ़ती है या चिता पर।” इस प्रकार हम कह सकते हैं कि पन्ना धाय ‘दीपदान’ एकांकी की प्रमुख पात्रा होने के साथ-साथ एक आदर्श भारतीय नारी का उदाहरण हमारे सामने प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 14 : ‘दीपदान’ एकांकी के आघार पर बनवीर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा
प्रश्न 15 : “महाराज बनवीर नहीं कहा? मेरे कहने भर से तुम देवी हो गई” !- गद्यांश के आधार पर बनवीर का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 16 : “रक्त तो तलवार की शोमा है’ – कथन के आधार पर बनवीर का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 17 : ‘विश्राम मैं करूँ ? बनवीर ! जिसे राजलक्ष्मी को पाने के लिए दूर तक की यात्रा करनी है ” – कथन के आधार पर संबेधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 18 : “यदि मेरा नाम लेना है तो जयकार के साथ नाम लो” – पंक्ति के आधार पर बनवीर का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 19 : “चुप रह घाय ! बच्चे को पालने वाली – कथन के आधार पर संबंधित पात्र का चरित्रचिन्नण करें।
अध्रवा
प्रश्न 20 : “लोरियाँ सुनानेवाली एक साधारण दासी महाराणा से बात करती है ?”-क्थन के आधार पर संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 21 : “वह दैत्य बन गया है – संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 22: “सर्प की तरह उसकी भी दो जीभें हैं जो एक से नहीं कुझेगी” – कथन के आयार पर बनवीर का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 23 : “उसे दूसरा रक्त भी चाहिए” – संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 24 : “वह पशु से भी गया-बीता है” – कथन के आधार पर संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 25 : “विलासी और अत्याचारी राजा कभी निष्केटक राज नहीं करता” – संबंयित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 26 : आज की रात में ही वह अपने को पूरा महाराणा बना लेता चाहता है – कथन के आधार पर बनवीर का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :
बनवीर ‘दीपदान’ एकांकी का दूसरा प्रमुख पात्र है। वह महाराजा साँगा के भाई पृथ्वौराज का दासपुत्र है। प्रकृति से वह कूर तथा विलासी है। उसके रक्त में विश्वासधात का जहर भरा हुआ है। ऐसे ही चरित्र के कारण भारत का मध्यकालीन इतिहास का पन्ना काले अक्षरों में लिखा गया है। बनवीर के चरित्र को निम्नांकित शीषकों के अंतर्गत रखा जा सकता है –

(क) विलासी प्रकृति – बनवीर की बिलासी प्रकृति का पता इसी से चलता है उसने रावल सरूप सिंह की रूपवती, नटखट बेटी सोना को अपने प्रेम-जाल में फांस लिया है। वह बनवीर की प्रकृति से बेखबर उसके झृं प्रम में पागल हो चुकी है। बनवीर के प्रेम को वह जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि मानती है।

(ख) राजसत्ता का लालची – बनवीर के अंदर राजसत्ता का लालच इतना भर चुका है कि वह अपना विवेक खों बैठता है। राजसिंहासन पाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार है मौका देखकर वह राजदरबागियों तथा सैनके के भी लालच देकर अपनी ओर मिला लेता है।

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(ग) असभ्य – बनवीर असभ्य है। सत्ता-लालच में वह यह भी भूल गया है कि जिस पन्ना को पूरा महल घाइ गा कहकर पुकारता है, वह उसके साथ अत्यंत कूर तथा असभ्यता से पेश आता है।
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विश्वासधाती – बनवौर को महाराणा विक्रमादित्य काफी प्रेम करते हैं। इतना कि उनकी आत्मोयता में वह आभल है। इतना ही नहीं, अंत-पुर की रानियाँ भी उनसे काफी स्नेह करती हैं इसलिए वह अंत पुर में बेरोक-टोक आबा सकता है। अपने स्वार्थ के लिए वह इतने सारे लोगों के साध विश्वासघात करता है।

(द) हत्यारा – बनबौर की सत्ता लोलुपता इतनी बढ़ जाती है कि वह रातो-रात ही राजा बन जाना चाहता है। इसके लिए वहृ वड्बंत्न रचकर नगर में दौप-दान का उत्सव कराता है। उसी शोर-शराबे के बीच वह महाराणा के कक्न मे जाकर अनकी हत्या कर देता है। महाराणा का उत्तराधिकारी कुवंर उदय सिंह है। इसलिए चह उसे भी अपने रासे से हटाने के निए उम्म की हत्या करने का निश्चय कर सेता है। इसकी आशंका महल की परिचारिका सामली को पहले ही हो जाती है। वह कत्रा से कहती है –

“मर्ष की तरह उसकी भी दो जीभें हैं जो एक से नहीं दुझेंगी। उसे दूसरा रक्त भी चाहिए।”
अंतः वह कुंवर उदय सिंह के धोखे में पन्ना धाय के पुत्र चंदन को हत्या कर देता है।
हैस प्रकारह्म कह सकते हैं कि बनवीर का वरित्र एक स्वार्थलोलुज, विश्वासघाती तथा हत्यारे का चरित्र है। सेकिन अमें चरित्र का यह काला पहलू हो पज्ञा धाब के चरिज् को और भी उज्जल बना देता है।

प्रश्न 27 : ‘दीपदान’ एकांकी के सोना का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 28 : “धाय माँ, पागलपर्त कहीं कम होता है”‘ – के आधार पर सोना का चरित्र-चित्रण करें। अथवा,
प्रश्न 29 : “शायद सामंब्त की बेटी बनुँ, शायद महाराज की बेटी बनूँ” – पंक्ति के आघार पर सोना का यरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 30 : “कुछ बहुकर ही बनूनीय” – कथन के आयार पर संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें। अथवा,
प्रश्न 31 : “यहाँ आग की लपटें नाचती हैं, सोना जैसी रावल की लड़कियाँ नहीं “- कथन के आजा पर सोना का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा

प्रश्न 32 :
“में रावल की बेटी हैँ, शायद सार्मंत की बेटी बनूं” – पंक्ति के आधार पर संबंधित पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :
सोना ‘दीपदान’ एकांकी के प्रमुख पात्रों में से एक है। यद्यापि वह बहुत कम समय के लिए एकाकी में आती है होकित इतने समय में ही अपना प्रभाव छोड़ जाती है। म्षोता का चरित्र-वित्रण निम्नांकित शौर्षकों के अंतर्गत किया जा सकता है –

(क) रावल की पुत्री-सौना चित्तौड़ के महाराजा के अधौन रावल (सरदार) की पुत्री है। राजदरबार से गुड़े होने के कारण दछाँ के सभी लोगों से उसका संबंध परिवार की तरह हो गया है। इस बात का पता उसकी बातदीत से चलता है उनको (बनवीर) हमारा नाच बहुत अच्छा लगा। ओहो बनवीर। उन्हें श्री महाराजा बनवीर कहो।”

(ख) रुपवती एवं नटखट – सोना की उन्न सोलह वर्ष है। वह जितनी रुपवती है उतनी ही नटखट भी है। जितनी वेर वक वह एकांकी में उपस्थित रहती है उसके नटखटपन का अंदाजा हमें लगता रहता है। वह थोड़ी देर के लिए भी चुररकानहीं जानती –

“‘धाय माँ, पागलपन कहीं कम होता है? पहाड़ बढ़कर कभी छोटे हुए हैं ? नदियाँ आगे बढ़कर कभी लौटी हैं ? फूल खिलने के बाद कभी कली बने हैं ?'”

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(ग) अपनी किस्मत पर इठलाने वाली — सोना एक साधारण सरदार की पुत्री होकर भी जिस तरह वह बनवीर की कृपापात्र बनी है उसे वह अपनी किस्मत ही मानती है। उसकी सोच है कि यह उसका भाग्य ही है जिसके कारण वह इतना कुछ पा रही है –
“भाग्य तो सबके होता है धाय माँ ! ये नूपुर मेरे पैरों में पड़े हैं, तो यह भी इनका भाग्य है। मेरे आगमन का संदेश पहले ही पहुँचा देते हैं, तो यह भी इनका भाग्य है।’

(घ) बनवीर के प्रेम में पागल – सोना बनवीर के प्रेम में पागल है। वह बनवीर की कूटनीति को समझ नहीं पाती तथा उसके प्रेम को सच्चा मानती है जबकि पन्ना उसे सावधान करते हुए कहती है-
“‘आँधी में आग की लपट तेज ही होती है, सोना ! तुम भी उसी आँधी में लड़खड़ाकर गिरोगी। तुम्हारे ये सारे नूपुर बिखर जाएंगे। न जाने किस हवा का झोंका तुम्हारे इन गीतो की लहरों को निगल जाएगा।”

(ङ) सुनहरे भविष्य का सपना देखने वाली – सोना का यह विश्वास है कि आगे चलकर शायद उसकी किस्मत भी खुल जाएगी। वह आने वाले उन दिनों को याद करती हुई पन्ना से कहती है –
“मैं रावल की बेटी हूँ, शायद सामंत की बेटी हूँ, शायद महाराज की बेटी बनूँ ! कुछ बढ़कर ही बनूँगी। और तुम धाय माँ ? सिर्फ धाय माँ ही रहोगी।” इस प्रकार हम पाते हैं कि सोना का चरित्र इस एकांकी में बनवीर के चरित्र का प्रतिबिंब बनकर आया है। उसकी बातों से बनवीर के दुष्चक्र की गंध आती है। इन्हीं कारणों से वह एकांकी के प्रमुख पात्रों में अपना स्थान बनाती है।

प्रश्न 33 : ‘दीपदान’ एकांकी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
अथवा
प्रश्न 34 : ‘दीपदान’ एकांकी के शीर्षक का औचित्य निर्धारित कीजिए।
अथवा

प्रश्न 35 :
‘दीपदान’ शीर्षक एकांकी की कथावस्तु को अपने में समेटे है – अपना विचार प्रस्तुत करें।
उत्तर :
‘दीपदान’ डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित एक ऐतिहासिक एकांकी है। किसी भी रचना का शीर्षक उसके प्रमुख पात्र या घटना पर आधारित होता है। इस एकांकी में दीप-दान कई अर्थों में हमारे सामने आता है – पहले अर्थ में दीप-दान – जो चित्तौड़ का एक सास्कृतिक उत्सव है तथा इसमें तुलजा भवानी की अराधना कर दीप-दान किया जाता है।

दूसरे अर्थ में दीप-दान का आशय अपने कुलदीपक चंदन के बलिदान से है। एक ओर जब सारा चित्तौड़ तुलजा भवानी के लिए दीप-दान कर रहा है तो वहीं दूसरी और मातृभूमि तथा भावी राजा की रक्षा के लिए पत्ना अपने ही पुत्र चंदन को मातृभूमि की भेंट चढ़ा देती है – ” आज मैंने भी दीपदान किया है, दीपदान ! अपने जीवन का दीप मैने रक्त की धारा पर तैरा दिया है। ऐसा दीपदान भी किसी ने किया है।”

तीसरे अर्थ में जहाँ एक ओर राज्य की सुख-समृद्धि के लिए चित्तौड़ के लोग दीपदान करते हैं, पत्रा मातृभूमि के लिए अपने पुत्र का ही दीपदान करती है वहीं बनवीर भी है जो अपनी सत्ता लोलुपता के कारण अपने रास्ते के कॉंटे कुँवर उदयसिंह के धोखे में चंदन का दीप-दान करता है –

” आज मेरे नगर में स्त्रियों ने दीप-दान किया है। मैं भी यमराज को इस दीपक का दान करूँगा। यमराज ! लो इस दीपक को। यह मेरा दीप-दान है।’ इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि चाहे विषय की दृष्टि से हो, चाहे चित्तौड़ की संस्कृति की दृष्टि से हो या अपने कुल के दीप के दान करने की बात हो या फिर बनवीर द्वारा सत्ता पाने के लिए यमराज को दीपदान करने की बात हो हर दृष्टि से इस एकांकी का शौर्षक ‘दीपदान’ बिल्कुल सार्थक एवं उपयुक्त है।

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प्रश्न 36 :
‘दीपदान’ एकांकी के आधार पर कीरत बारी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
कीरत बारी ‘दीपदान’ एकांकी का गौण पात्र है लेकिन अपनी कर्तन्तन्यनिष्ठा, साहस तथा राजभक्ति से वह पाठको का दिल जीत लेता है। कीरत बारी यद्याप राजमहल में जूठी पत्तलें उठाता है लेकिन वह पक्का राजभक्त है। यह सच्चाई उसके इस कथन से झलकती है – “अन्नदाता ! प्यार कहने में जबान पर कैसे आवे ? वो तो दिल की बात है। मौके पे ही देखा जाता है और कहने को तो मैं कह चुका हूँ कि उनके लिए अपनी जान तक हाजिर कर सकता हूँ।”

जब कीरत बारी को पन्ना धाय से यह पता चलता है कि कुंवर जी की जान को खतरा है तो वह पन्ना धाय के कहने के अनुसार उसे जूठी पत्तलों की टोकरी में छिपाकर बाहर निकालने को तैयार हो जाता है। उसे यह पता है कि पकड़े जाने पर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा पर वह अपनी जान की परवाह नहीं करता।

इस प्रकार हम पाते हैं कि कीरत बारी एक अत्यंत ही छोटा आदमी है लेकिन अपने कार्य से वह आसमान की ऊँचाइयों को छूता है। पन्ना धाय भी उसके इस उपकार तथा राजभक्ति के बारे में कहती है – “तो जाओ कीरत! आज तुम जैसे एक छोटे आदमी ने चित्तौड़ के मुकुट को संभाला है। एक तिनके ने राज-सिंहासन को सहारा दिया है । तुम धन्य हो!” इस प्रकार हम पाते हैं कि कीरत बारी ‘दीपदान’ एकांकी का आदर्श पात्र है।

प्रश्न 37 :
“बनवीर की महत्वाकाष्था ने उसे हत्यारा बना दिया है” – इस कथन की पुष्टि अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर :
बनवीर ‘दीपदान’ एकांकी का खलनायक है। वह महाराज साँगा के भाई पृथ्वीराज का दासपुन्त है लेकिन उसमें राजसिंहासन पाने की महत्वाकांक्षा बुरी तरह घर कर चुकी है। अपने इस महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए वह बड़े से बड़े जधन्य तथा अनैसिक काम कर सकता है। उसकी इस प्रवृत्ति ने उसे प्रकृति से क्रूर तथा विलासी बना दिया है।

राजसिंहासन पाने के लिए वह मौका देखकर राजदरबारियों तथा सैनिकों को अपनी ओर मिला लेता है ताकि वह महाराजा के उत्तराधिकारी कुंबर सिंह की हत्या कर रातो-रात राजा बन जाय। लेकिन पन्नाधाय तथा कीरत बारी के बलिदान से वह कुंवर की हत्या के बदले पत्रा धाय के पुत्र की हत्या कर देता है। बनवीर का यह कार्य इस बात को सिद्ध करता है कि वह स्वार्थलोलुप, विश्वासघाती तथा हत्यारा है। उसकी महत्वाकांक्षा ने ही उसे हत्यारा बना दिया है।

WBBSE Class 10 Hindi दीपदान Summary

सुप्रसद्धि एकांकीकार डॉ०० रामकुमार वर्मा का जन्म मध्यप्रदेश के सागर जिले के गोपालगंज नामक मुहल्ले में सन् 1905 में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी०ए०, एम० ए० तथा सन् 1940 में नागपुर विश्वविद्यालय से पी एच० डी० की उपाधि प्राप्त की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही अध्यापन कार्य किया तथा सन् 1966 में अवकाश प्राप्त किया। इस महान साहित्यकार का निधन सन् 1990 में हो गया। डॉ० रामकुमार वर्मा की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 दीपदान 2

एकांकी-संग्रह – ‘पृथ्वीराज की आँखें’, ‘रेशमी टाई’, ‘चारममित्रा’, ‘विभूति’, ‘सप्तकिरण’, रूपरंग’, ‘रजतरश्मि’, ॠतुराज’, ‘दीपदान’, ‘रिमझिम’, ‘इंद्रधनुष’, ‘पांचजन्य’, ‘कौमुद्महोत्सव’, ‘मयूर पंख’, ‘खट्टे-मीठे एकांकी’, ‘ललित-एकांकी’, ‘कैलेंडर का आखिरी पन्ना’, ‘जूही के फूल’।,

नाटक – ‘विजयपर्व’, ‘कला और कृपाण’, ‘नाना फड़नवीस’, ‘सत्य का स्वप्न’।
काव्य-संग्रह – ‘चित्ररेखा’, ‘चंद्रकिर’, ‘अंजलि’, ‘अभिशाप’, ‘रूपराशि’, ‘संकेत’, ‘एकलव्य’, ‘वीर हम्मीर’, ‘कुल ललना’, ‘चित्तौड़ की चिता’, ‘नूरजहाँ शुजा’, ‘निशीथ’, ‘जौहर’, ‘आकाश-गंगा’, ‘उत्तरायण’, ‘कृतिका’।
गद्यगीत-संग्रह – ‘हिमालय’।
आलोचना एवं साहित्य का इतिहास – ‘कबीर का रहस्यवाद’, इतिहास के स्वर’, ‘साहित्य समालोचना’, ‘साहित्य शास्त्र’, ‘अनुशीलन’, ‘समालोचना समुच्चय’, ‘हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास एवं हिंदी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास’।
संपादन – कबीर ग्रंथावली’।
पुरस्कार – पद्मभूषण (सन् 1963), साहित्य वाचस्पति (सन् 1968)

हिंदी की लघु नाटय परपरा को नया मोड़ देनेवाले डॉ० रामकुमार वर्मा आधुनिक हिंदी साहित्य में एकांकी समाट के रूप में जाने जाते हैं। एकांकी साहित्य के विकास और वृद्धि में उन्होंने जो योगदान दिया इसके लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions एकांकी Chapter 1 दीपदान

शब्दार्थ

पृष्ठ संख्या – 160

  • संरक्षण = अच्छी तरह से पालन-पोषण करना, रक्षा करना।
  • धाय = दाई माँ।
  • रूपवती = सुंदर।
  • अन्त पुर = महल का वह भीतरी भाग जहाँ रानियाँ रहती थीं।
  • परिचारिका = सेविका, सेवा करनेवाली।
  • कूर = कठोर।
  • विलासी = ऐश करने वाला, अय्याश।
  • कक्ष = कमरा।
  • पार्श्व = पीछे ।
  • शैया = बिस्तर ।
  • सिरहाने = सिर की ओर।
  • नेपथ्य = रंगमंच का पिछला हिस्सा।
  • नृत्य धन्वनि = नाचने गाने की आवाज।
  • मृदंग = ढोल की तरह का एक वाद्य।
  • कड़खे = एक प्रकार का वाद्य।
  • कंकन-बंधन = विवाह के बंधन में बँधना।
  • रण चढ़ण = युद्ध में जाना।
  • पुत्र बधाई = पुत्र प्राप्ति की
  • बधाई = चाव = इच्छा ।
  • दिहाड़ा = दिन ।
  • रंक = दरिद्र। राव = राजा।
  • घर जातां = पलायन करना।
  • श्रम पलटतां = परिश्रम से भागना।
  • त्रिया = स्त्री।
  • पडंत = पड़ना ।
  • ताव = पलायन, तीव्र बुखार।

पृष्ठ संख्या – 161

  • ऐ = ये ।
  • तीनहु = तीनों ।
  • मँरण रा = मरण के समान ।
  • तुलजा भवानी = एक देवी ।
  • राजवंश = राज का वंश।
  • कुलदीपक = वंश का दीपक।

पृष्ठ संख्या – 162

  • कुंड = तालाब।
  • उद्यत = बेचैन
  • प्रस्थान = जाना।

पृष्ठ संख्या – 163

  • नुपुर-नाद = घुंघरू के स्वर।
  • अट्टहास = भयंकर हँसी।
  • मातृत्व = ममता।
  • झूल = आवरण।
  • चीर = वस्व।

पृष्ठ संख्या – 164

  • भवसागर = संसाररूपी सागर।
  • ज्ञात = मालूम।
  • उषा = रात्रि बीतने तथा प्रात: होने के बीच का समय।
  • अनुग्रह = कृपा।
  • मल्ल-कीड़ा = कुश्ती।
  • प्रलाप = रोना।
  • स्नेह = प्रेम ।
  • राजसेवा = राजा की सेवा।

पृष्ठ संख्या =165

  • आगमन = आने ।
  • संदेश = सूचना, समाचार ।
  • मौन = चुप ।
  • आप-से-आप = खुद, स्वंय।
  • सूर्यलोक = स्वर्गलोक।
  • विद्रोह = बागावत ।
  • राग-रंग = प्रेम और मस्ती।
  • जौहर = अपनी इज्जत बचाने के लिए स्वियों का आग में कूदना।
  • आत्मबलिदान = अपने-आप को बलिदान करना।

पृष्ठ संख्या – 166

  • प्रतिध्वनि = ध्वनि की ध्वनि, गूँज।
  • जमाव = जमा होना
  • गुमसुम = चुपचाप

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पृष्ठ संख्या – 167

  • धावा = आक्रमण।
  • दाने = मोती।
  • यकायक = अचानक।
  • धमक = आवाज।

पृष्ठ संख्या – 168

  • सर्वनाश = सब कुछ नाश।
  • कुसमय = बुरा समय।

पृष्ठ संख्या – 169

  • कांड = घटना।
  • रच देता = अंजाम दे देता।
  • निष्कंट = बिना किसी काँटे / अवरोध के।

पृष्ठ संख्या – 170

  • सिसकी = घीरे-धीरे रोने की आवाज।
  • युक्ति = उपाय।

पृष्ठ संख्या – 171

  • चरन लागों = पैर पड़ता हूँ, चरण स्सर्श करता हूँ।
  • पैड़े = महल।
  • पैसारा = प्रवेश।
  • बारी = जूठी पत्तलें उठानेवाला।
  • बेखटके = बिना रोक-टोक के ।
  • मालमता = घन-दौलत।
  • ब्यालू = भोजन ।
  • उजियार = उजियाला ।
  • हर-भजन = ईश्वर का भजन।
  • चौर-छतर = सिंहासन एवं छत्र सगर जहान = सारी दुनिया।
  • बन्दगी = वंदना।
  • तीन तिरबाचा = तीन-पाँच।

पृष्ठ संख्या – 172

  • धूर = धूलि।
  • सरीखा = तरह ।
  • तरवार = तलवार ।
  • तरकीब = उपाय।
  • हुकुम करा = आदेश किया।

पृष्ठ संख्या – 173

  • जस = यश।

पृष्ठ संख्या – 174

  • सिर पर खून चढ़ना = बदले की भावना से भरा होना।

पृष्ठ संख्या = 175

  • वज = बिजली।
  • भीषण = भयंकर ।
  • प्रहार = चोट ।
  • मयार्दा = प्रतिष्ठा ।
  • धर्म = कर्त्तव्य ।
  • झरोखे = खिड़की।

पृष्ठ संख्या – 176

  • आखेट = शिकार।

पृष्ठ संख्या – 177

  • जागीरें = भू-संपत्ति।
  • धावा = हमला।
  • स्मरण = याद।

पृष्ठ संख्या – 178

  • शूल-सी = दर्द जैसा।
  • बेरूआ = पक्षी।
  • साँझ = शाम।
  • बाटडली जोही = रास्ता देखा।
  • मेड्या = मेड़ पर, खेत की सीमा पर बना मिट्टी का घेरा।

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पृष्ठ संख्या – 179

  • भारिया = भर गया ।
  • नैन = आँख।
  • भयी = हो गयी मुसकल = मुश्किल, कठिन।
  • घड़ी = समय ।
  • नित्रा = नौंद कपट = धोखा।
  • अंगरों = आग।
  • सेज = बिछावन ।
  • फूल-से = फूल की तरह कोमल ।
  • लाल = पुत्र।
  • मुख = चेहरा।
  • मघ्घ = शराब।

पृष्ठ संख्या – 180

  • मंगल-कामना = अच्छी भावना, इच्छा।
  • जागीर = संपत्ति।
  • रक्त = खून।

पृष्ठ संख्या – 181

  • चिता = लकड़ी का ठेर जिसपर लाश जलायी जाती है।
  • नारकी = नरक में जानेवाला।

पृष्ठ संख्या – 182

  • तीव्रता = तेजी।
  • चिर-निद्रा = हमेशा के लिए नींद में सो जाना, मृत्यु।
  • नराधम = नीच व्यक्ति।
  • कटार = एक प्रकार का चाकू ।
  • अबोध = भोला।
  • कंटक = काँटा।
  • मूच्छिंत = बेहोश।
  • मन्द = धीमी।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक

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WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 5 Question Answer – धावक

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भंबल दा की साइकिल के बारे में क्या प्रसिद्ध था?
उत्तर :
भंबल दा की साइकिल के बारे में यह बात प्रसिद्ध थी कि घंटी छोड़कर उसका सब कुछ बजता है।

प्रश्न 2.
भंबल दा अपनी विधवा बहन को कैसे सहायता देते थे ?
उत्तर :
भंबल दा अपनी विधवा बहन को 50 रु० (पचास रुपये) प्रतिमाह भेजकर उसकी सहायता किया करते थे।

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प्रश्न 3.
स्पोट्र्स का मैदान कैसा था ?
उत्तर :
स्सोदर्स का मैदान ज्यामितिक अल्पना से अलंकृत था।

प्रश्न 4.
औरतों से भंबल दा को विरक्ति क्यों हो गई थी?
उत्तर :
अपनी भाभी अर्थात् अशोक दा की पत्नी के उपेक्षापूर्ण व्यवहार के कारण भंबल दा को औरतों से विरक्ति हो गई थी ।

प्रश्न 5.
भंबल दा की जीवन के प्रति क्या धारणा थी ?
उत्तर :
भंबल दा की जीवन के प्रति यह धारणा थी कि जिंदगी शान की नहीं बल्कि सम्मान की होनी चाहिए।

प्रश्न 6.
स्पोर्द्स का मैदान कैसा था?
उत्तर :
स्पोर्ट्स का मैदान ज्यामितिक अल्पना से अलंकृत (सजा) था।

प्रश्न 7.
मैदान में किसकी कमी थी?
उत्तर :
मैदान में भंबल दा की कमी थी।

प्रश्न 8.
लेखक ने हड़बड़ाकर किस पर नजर डाली?
उत्तर :
लेखक ने हड़बड़ाकर धावकों पर नजर डाली।

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प्रश्न 9.
लेखक ने खेल प्रारम्भ कराने के लिए क्या किया?
उत्तर :
लेखक ने खेल प्रारम्भ कराने के लिए पिस्तौल का घोड़ा दबा दिया।

प्रश्न 10.
स्पोर्द्स अधिकारी से भंबल दा ने क्या पूछा?
उत्तर :
स्योर्द्स अधिकारी से भंबल ने पूछा क्या सभी खिलाड़ियों को समान सुविधा देने का कोई कानून नहीं है?

प्रश्न 11.
भंबल दा को लोग क्या कहकर ललकार रहे थे ?
उत्तर :
भंबल दा को लोग, ‘बढ़े चलिए बम भोले भैया’ ” कहकर ललकार रहे थे।

प्रश्न 12.
भंबल दा धीरे-धीरे क्यों दौड़ रहे थे?
उत्तर :
भंबल दा थकान के प्रभाव से धीरे-धीरे दौड़ रहे थे।

प्रश्न 13.
भंबल दा को लंगी मारने पर लोग क्या कह कर चिल्ला रहे थे?
उत्तर :
भंबल दा को लंगी मारने पर लोग मारो-मारो कहकर चिल्ला रहे थे।

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प्रश्न 14.
भंबल दा हँसते हुए क्या कहते ?
उत्तर :
भंबल दा हँसते हुए कहते भला किसान-मजदूर को कसरत की क्या जरूरत।

प्रश्न 15.
लोग किसकी आयु को पाँच साल की कहते हैं?
उत्तर :
लोग स्सोर्ट्समैन और बीमा कम्पनी के एजेन्ट की आयु को पाँच साल का कहते हैं।

प्रश्न 16.
भंबल दा अपवाद क्यों थे?
उत्तर :
भबल दा 25 वर्षो से स्पोर्ट्स में भाग लेते आ रहे हैं, इसलिए अपवाद थे।

प्रश्न 17.
खेल अधिकारी, चाहकर भी भंबल दा को क्यों बैठा नहीं सकते थे?
उत्तर :
दर्शकों के जबर्दस्त समर्थन के कारण खेल अधिकारी चाहकर भी भंबल दा को बैठा नहीं सकते थे।

प्रश्न 18.
पिछली बार बाधा दौड़ में कितने प्रतियोगी थे?
उत्तर :
पिछली बार बाधा-दौड़ में महज चार प्रतियोगी थे।

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प्रश्न 19.
भंबल दा किसलिए दौड़ते थे?
उत्तर :
भंबल दा पुरस्कारों के लिए नहीं बल्कि अपने को तौलने के लिए दौड़ते थे।

प्रश्न 20.
भंबल दा को कैसी जिन्दगी प्यारी थी?
उत्तर :
भंबल दा को शान की नहीं सम्मान की जिन्दगी प्यारी थी।

प्रश्न 21.
भंबल दा के अनुसार शान की जिन्दगी कैसी होती है?
उत्तर :
भंबल दा के अनुसार शान की जिन्दगी दूसरों से अपने को ऊँचा दिखाने, कूरता और खुदगर्जी की होती है।

प्रश्न 22.
भंबल दा सम्मान को क्या मानते थे?
उत्तर :
भंबल दा सम्मान को परस्सर सौहार्द और समता का द्योतक मानते थे।

प्रश्न 23.
चीफ पर्सनल अफसर के रूप में अशोक दा क्या करते थे?
उत्तर :
चीफ पर्सनल अफसर के रूप में अशोक दा जायज को नाजायज और नाजायज को जायज किया करते थे।

प्रश्न 24.
भंबल दा को क्यों औरतों से विरक्ति हो गयी थी?
उत्तर :
भंबल दा को अपनी भाभी के आचरणों के कारण औरतों से विरक्ति हो गयी थी।

प्रश्न 25.
माँ ने लेखक को बुलाकर क्या कहा?
उत्तर :
माँ ने लेखक को बुलाकर भंबल दा की शादी के लिए कहा।

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प्रश्न 26.
‘धावक’ कहानी के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर :
‘धावक’ कहानी के रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न 27.
स्पोर्द्स के मैदान में किसकी कमी थी?
उत्तर :
स्पोटर्स के मैदान में भंबल दा की कमी थी।

प्रश्न 28.
‘बम भोले भैया’ के नाम से किसे जाना जाता है?
उत्तर :
भंबल दा को बम भोले भैया के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 29.
अजीब खब्ती आदमी है – ‘खब्ती आदमी’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
भंबल दा को ‘खब्ती आदमी’ आदमी कहा गया है।

प्रश्न 30.
लेखक स्पोट्स के मैदान में किस बात पर चौकन्ना थे ?
उत्तर :
लेखक इस बात पर चौकन्ना थे कि कहीं सामान्य मजदूर-बाबू क्लास के लोग वी.आई.पी. की जगहों को न हधिया लें।

प्रश्न 31.
लोग भंबल दा के किस बात आश्वस्त थे?
उत्तर :
लोग भंबल दा के इस बात पर आश्वस्त थे कि खेल में दूसरे भले ही बेईमानी कर बैठें लेकिन भंबल दा कभी बेईमानी नहीं कर सकते।

प्रश्न 32.
लेखक भंबल दा की किस बात से कुढ़ते थे?
उत्तर :
अक्सर जब दौड़ समाप्त हो चुकी होती और धावक अपने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर खड़े होकर दर्शंको का अभिवादन कर रहे होते उस समय भी भंबल दा अपनी दौड़ पूरी करने के लिए ट्रैक पर दौड़ रहे होते थे।

प्रश्न 33.
अशोक दा हतबुद्धि कब हो गये थे?
उत्तर :
जब भंबल दा ने पुरस्कार लेने से इन्कार कर दिया था उस समय अशोक दा हत्बुद्धि हो गये थे।

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प्रश्न 34.
लेखक ने भंबल दा को अन्य धावकों की तरह क्या नहीं करते देखा ?
उत्तर :
लेखक ने भंबल दा को अन्य धावकों की तरह कभी दौड़ का अभ्यास करते नहीं देखा।

प्रश्न 35.
“भला किसान-मजदूर को कसरत की क्या जरूरत” – कथन किसका है?
उत्तर :
यह कथन भंबल दा का है।

प्रश्न 36.
लोग स्पोट्स मैन तथा बीमा कंपनी के एजेंट के बारे में क्या कहते हैं ?
उत्तर :
इनकी आयु पाँच साल होती है।

प्रश्न 37.
भंबल दा किसके अपवाद थे ?
उत्तर :
लोगों के अनुसार स्सोद्संमैन तथा बीमा कंपनी के एजेंट की आयु पाँच साल होती है – भंबल दा इस नियम के अपवाद थे।

प्रश्न 38.
किसने कभी नहीं खेलों के नियमों का उल्लंघन किया ?
उत्तर :
भंबल दा ने खेलों के नियमों का उल्लंघन कभी नहीं किया।

प्रश्न 39.
पिछली बार की बाधा दौड़ में कुल कितने प्रतियोगी थे?
उत्तर :
पिछली बार के बाधा दौड़ में कुल चार प्रतियोगी थे।

प्रश्न 40.
जब एक प्रतियोगी ने भंबल दा के बाधा दौड़ में द्वितीय आने को गलत बताकर माँ की कसम खाने को कहा तो भंबल दा ने क्या उत्तर दिया?
उत्तर :
“तुम्हारी माँ नहीं है शायद वरना तुम इस तुच्छ पुरस्कार के लिए माँ को दाँव पर नहीं लगाते मेरे भाई।”

प्रश्न 41.
भंबल दा के बड़े भाई का नाम क्या था?
उत्तर :
भंबल दा के बड़े भाई का नाम अशोक दा था।

प्रश्न 42.
भंबल दा तथा उनके भाई अशोक दा की उपलब्घियों में कितना अंतर था?
उत्तर :
भंबल दा तथा उनके भाई अशोक दा की उपलब्धियों में वर्षो का नहीं युगों का अंतर था। भंबल दा एक किरानी थे जबकि अशोक दा चीफ पर्सनल ऑफिसर थे ।

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प्रश्न 43.
भंबल दा की शिक्षा कहाँ तक हुई ?
उत्तर :
भंबल दा की शिक्षा मैट्रीक्यूलेशन तक हुई ची।

प्रश्न 44.
भंबल दा मैट्रीक्यूलेशन में कितनी बार फेल हुए थे ?
उत्तर :
भंबल दा मैट्रीक्यूलेशन में बार बार फेल हुए थे।

प्रश्न 45.
किसने काफी करीब से भंबल दा को देखा था ?
उत्तर :
लेखक ने भंबल दा को काफी करीब से देखा था।

प्रश्न 46.
“आदमी को शान से जीना चाहिए या तो इस दुनिया से कूच कर जाना चाहिए” – यह कथन किसका और किसके प्रति है?
उत्तर :
यह कथन भंबल दा के बड़े भाई अशोक दा का है तथा यह भंबल दा के प्रति है।

प्रश्न 47.
अशोक दा अक्सर भंबल दा से क्या कहा करते थे?
उत्तर :
अशोक दा अक्सर भंबल दा से यह कहा करते थे कि, ” आदमी को शान से जीना चाहिए या तो इस दुनिया से कूच कर जाना चाहिए। मेरा भाई मेरी गरिमा के अनुकूल होकर आता है तो उसका स्वागत है, वरना उसे यहाँ आने की जरूरत ही क्या है? माँ को मेरे पास छोड़ दे या उसे लेकर किसी दूसरे शहर घला जाय। मैं दूसरे को खैरात बाँटता हूँ. उन्हें भी ढाई सी भेज दिया करूँगा।

प्रश्न 48.
भंबल दा को कैसी जिंदगी चाहिए थी ?
उत्तर :
भंबल दा को शान की नहीं सम्मान की जिंदगी चाहिए थी।

प्रश्न 49.
भंबल दा के अनुसार शान क्या होती है?
उत्तर :
भंबल दा के अनुसार शान द्वारा अपने को ऊँचा दिखाने की क्रूरता तथा खुदगर्जी होती है।

प्रश्न 50.
भंबल दा के अनुसार सम्मान क्या होता है?
उत्तर :
भंबल दा के अनुसार सम्मान आपसी प्रेम तथा समता का प्रतीक होता है।

प्रश्न 51.
लेखक के सामने भंबल दा को लेकर क्या समस्या थी?
उत्तर :
लेखक के सामने भंबल दा को लेकर समस्या यह थी कि कैसे उन्हें बाकी सहकर्मियों से आगे बढ़ाकर शीर्ष पर ले जाएँ।

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प्रश्न 52.
लेखक भंबल दा को किस बात के लिए उकसा रहे थे ?
उत्तर :
लेखक भंबल दा को इस बात के लिए उकसा रहे थे कि वे ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट होकर किसी ट्रेड में विशेषता प्राप्त कर लें।

प्रश्न 53.
भंबल दा केवल परिवार ही नहीं, मुहल्ले तक में अपनी जड़ जमाए हुए थे – कैसे ?
उत्तर :
भंबल दा सबके गम, सबकी खुशी में शरीर होने वाले थे – चाहे वह बंगाली हो, गैर बंगाली हो, हिन्दू हो या फिर मुसलमान हो। जहाँ भी उनकी जरूरत होती थी- वे वहीं हाजिर हो जाते थे। अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण भिंबल दा केवल अपने परिवार में ही नहीं, मुहल्ले तक में अपनी जड़े जमाए हुए थे।

प्रश्न 54.
किसकी शादी से भंबल दा की माँ टूट गई थी?
उत्तर :
भंबल दा के भाई अर्थात् अपने बड़े बेटे अशोक की शादी से भिंबल दा की माँ टूट गई थी।

प्रश्न 55.
माँ को कौन-सी चीज बुरी तरह सालती थी ?
उत्तर :
माँ को यह बात बुरी तरह सालती थी कि उनका एक बेटा (अशोक) उनकी छाया तक से बचता चलता है।

प्रश्न 56.
भंबल दा को सोया जानकर माँ क्या करती थीं?
उत्तर :
भिंबल दा को सोया जानकर माँ अपने दिल के दरवाजे-खिड़कियाँ बंद कर तनहाइयों में डूब जाती थी।

प्रश्न 57.
अपने दर्द को झूठलाने के लिए माँ क्या करती थीं ?
उत्तर :
अपने दर्द को झूठलाने के लिए माँ अशोक दा की खूब प्रशंसा किया करती थीं।

प्रश्न 58.
परिवार का शुभचिंतक होने के नाते लेखक के सामने कौन-सा रास्ता बच रहा था?
उत्तर :
परिवार का शुभचिंतक होने के नाते लेखक के सामने एक ही रास्ता बच रहा था। वह रास्ता था – भिंबल दा तथा अशोक दा के बीच की कड़ी को जोड़ देना।

प्रश्न 59.
क्या भंबल दा का प्रमोशन हुआ ? क्यों ?
उत्तर :
नहीं, भंबल दा का प्रमोशन नहीं हो पाया क्योंकि वह गलत तरीके से प्रमोशन लेना नहीं चाहते थे।

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प्रश्न 60.
भंबल दा के विवाह के बारे में क्या मुश्किल थी ?
उत्तर :
भंबल दा के विवाह के बारे में मुश्किल यह थी कि वे उम्र के उस दौर में पहुँच रहे थे जहाँ मनचाही लड़कियाँ नहीं मिलती हैं।

प्रश्न 61.
लेखक ने भंबल दा से शादी के लिए किसे राजी क्या ?
उत्तर :
लेखक ने एक मास्टरनी को भंबल दा से शादी के लिए राजी किया।

प्रश्न 62.
लेखक ने जिसके साथ भंबल दा की विवाह तय किया – क्या वह विवाह हो पाया?
उत्तर :
लेखक ने जिसे भंबल दा के साथ विवाह के लिए राजी किया था उसके साथ विवाह नहीं हो पाया ।

प्रश्न 63.
मास्टरनी के सामने पड़ने से किसकी रूह काँपती थी और क्यों ?
उत्तर :
मास्टरनी के सामने पड़ने से लेखक की रूह काँपती थी। क्योकि उसका विवाह भंबल दा के साथ नहीं हो पाया।

प्रश्न 64.
भंबल दा ने अपना मकान कैसे बनवाया था?
उत्तर :
भंबल दा ने को-आपरेटिव और पी०एफ० के लोन से अपना मकान बनवाया था।

प्रश्न 65.
भंबल दा ने विवाह क्यों नहीं किया ?
उत्तर :
भंबल दा का मासिक वेतन साढ़े तीन सौ रुपये था। माँ के इलाज के बाद इतने पैसे नहीं बचते थे कि पत्ली का भी भार वहन कर सकते। यही कारण था कि भंबल दा ने विवाह नहीं किया।

प्रश्न 66.
कौन भंबल दा की पैसे की समस्या हल कर सकता था ?
उत्तर :
भंबल दा की भावी पत्नी पैसे की समस्या हल कर सकती थी।

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प्रश्न 67.
भंबल दा को किसका अहसानमंद बनना कुबूल न था?
उत्तर :
भावी पत्नी का अहसानमंद बनना भंबल दा को कुबूल न था।

प्रश्न 68.
किसने, किससे, किसके लिए शादी करने की कोशिश करने की बात लेखक से कही?
उत्तर :
भंबल दा की माँ ने लेखक से भबल दा की शादी के लिए कोशिश करने की बात कही।

प्रश्न 69.
पचीस वर्षो में पहली बार भंबल दा को कौन-सा पुरस्कार मिलने जा रहा था?
उत्तर :
पचीस वर्षो में पहली बार भंबल दा को विदूपक का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिलने जा रहा था।

प्रश्न 70.
भंबल दा को पहला स्ट्रोक कब हुआ?
उत्तर :
जिस दिन भंबल दा को विदूषक का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई उसी रात भंबल दा को पहला स्ट्रोक हुआ।

प्रश्न 71.
भंबल दा का मकान कहाँ था ?
उत्तर :
स्टेशन के पास ही भंबल दा का मकान था।

प्रश्न 72.
भंबल दा का मकान कितने कमरे का था?
उत्तर :
भंबल दा का मकान दो कमरे का था।

प्रश्न 73.
भंबल दा के कमरे की दशा कैसी थी?
उत्तर :
भंबल दा के कमरे की दशा काफी अस्त-व्यस्त थी। माँ काली के चित्र के सामने जली हुई धूप-काठियों की ढेर थी। मकड़े के जाले लटक रहे थे। पिछ्छले तीन महीने से कैलेण्डर का पन्ना नहीं बदला गया था तथा चमगादड़ों ने वहाँ अपना घर बना लिया था।

प्रश्न 74.
भंबल दा ने जो कागज भैया (अशोक दा) के नाम छोड़ा था उसमें क्या लिखा था?
उत्तर :
भंबल दा ने अपने भाई के लिए छोड़े गए कागज में लिखा – ”भैया, दौड़ में जीत उसी की होती है जो सबसे आगे निकल जाता है, चाहे लंगी मारकर हो, या गलत ट्रैक हथिया कर हो।… मुझे खुशी है कि मैने लंगी नहीं मारी, गलत ट्रैक नहीं पकड़ा।”

प्रश्न 75.
भंबल दा के पड़ोस के दूर-दूर खड़े लोग, औरतें, बच्चे लेखक तथा अशोक दा को किस नजर से देख रहे थे ?
उत्तर :
भंबल दा के पड़ोस के दूर-दूर खड़े लोग, औरतें, बच्ये तथा लेखक अशोक दा को अजूबा-सा देख रहे थे।

प्रश्न 76.
समाज का कामुक, कूर वर्ग किसका रस लेते आघाता नहीं है ?
उत्तर :
समाज का कामुक तथा क्रूर वर्ग सांड़-युद्ध, ग्लैडियेटर्स तथा ग्यूजिकल चेयर जैसे खेल की रस लेते अघाता नहीं है।

प्रश्न 77.
कुछ दिनों से एक नया कौन-सा रुचि-संस्कार जन्मा है ?
उत्तर :
पिछले कुछ दिनों से एक नया रुचि-संस्कार जो जन्मा है, वह है – लड़कियों, युवतियों की म्यूजिकल वेयर।

प्रश्न 78.
लेखक पिछले कई सालों से रस ले-लेकर क्या देख रहे हैं?
उत्तर :
लेखक पिछले कई सालों से रस ले-लेकर कामुक तथा क्रूर वर्ग की मानसिकता को देख रहे हैं।

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प्रश्न 79.
अपनी असमय मृत्यु के बारे में भंबल दा ने अशोक दा को पत्र में क्या लिखा ?
उत्तर :
अपनी असमय मृत्यु के बारे में भंबल दा ने अशोक दा को पत्र में लिखा कि, “मैं भी तुम्हारी तरह होता तो दीर्घायु होता। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आठ साल ज्यादा जो लोगे यही न? जिस जुनून में जिया, उसकी तासीर का एक क्षम भी तुम्हारे ताम-झाम के सालों से उम्दी है।’

प्रश्न 80.
कौन भंबल दा की मृत्यु के विरोध का प्रदर्शन कर रहा था ?
उत्तर :
लोको का काला धुआँ काले पताके की तरह भंबल दा की मृत्यु का विरोध कर रहा था।

प्रश्न 81.
आर्थिक अभाव के बावजूद भंबल दा ने विधवा बहन के लिए क्या किया?
उत्तर :
आर्थिक अभाव के बावजूद प्रत्येक महीने पचास रुपये विधवा बहन को भेज देते थे।

प्रश्न 82.
भंबल दा कैसी जिंदगी जीना चाहते थे?
उत्तर :
भंबल दा ईमानदारी तथा सम्मान की जिंदगी जीना चाहते थे।

प्रश्न 83.
भंबल दा क्या थे?
उत्तर :
भंबल दा लोको में एक सामान्य किरानी थे।

प्रश्न 84.
भंबल दा के बड़े भाई क्या थे?
उत्तर :
भंबल दा के बड़े भाई लोको में चीफ पर्सनल मैनेजर थे।

प्रश्न 85.
खेल प्रतियोगिताओं से भंबल दा क्यों बहिष्कृत होते चले गए?
उत्तर :
बढ़ती उम्र के कारण भंबल दा खेल प्रतियोगिताओं से बहिष्कृत (बाहर) होते चले गए क्योंकि खेल के भी अपने नियम-कानून होते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है।

प्रश्न 86.
अशोक दा द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार को अस्वीकार करते समय भंबल दा ने क्या कहा था?
उत्तर :
अशोक दा द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार को अस्वीकार करते समय भंबल दा ने कहा था – “गलत पुरस्कार मैं नहीं लेता दादा ! इसे मेरी ओर से तुम रख लो, खानदान का नाम रौशन करने के लिए।”

प्रश्न 87.
भंबल दा द्वारा पुरस्कार अस्वीकार करने पर अशोक दा ने क्या कहा?
उत्तर :
भंबल दा द्वारा पुरस्कार अस्वीकार करने पर अशोक दा ने गुस्से से भरकर कहा- ‘“ अपनी करनी का पुरस्कार ले जाओ -शर्म काहे की ? खानदान में एक जोकर तो निकला।”

प्रश्न 88.
भंबल दा की साइकिल कैसी थी?
उत्तर :
भंबल दा की साइकिल खटारा थी।

प्रश्न 89.
अगर आप बगल वाली मेरी ट्रैक पर होते तो प्रथम आते …. के जवाब में भंबल दा ने क्या कहा?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति के जवाब में भंबल दा ने कहा कि, “यदि मैं दो साल पहले पैदा हुआ होता तो चीफ पर्सनल मैनेजर होता और दो साल बाद पैदा हुआ होता तो विधवा।”

प्रश्न 90.
जब भंबल दा के लिए पुरस्कार की घोषणा हुई तो लोगों ने क्या सोचा?
उत्तर :
जब भंबल दा के लिए पुरस्कार की घोषणा हुई तो लोगों ने सोचा कि शायद उन्हें बाघा-दौड़ के दूसरे स्थान या तीसरे स्थान का विशेष पुरस्कार दिया जा रहा होगा।

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प्रश्न 91.
खानदान में एक जोकर तो निकला – ‘जोकर’ शब्द का प्रयोग यहाँ किसके लिए किया गया है?
उत्तर :
‘जोकर’ शब्द का प्रयोग यहाँ भंबल दा के लिए किया गया है।

प्रश्न 92.
अपने प्रमोशन के बारे में भंबल दा ने अशोक दा से क्या कहा ?
उत्तर :
अपने प्रमोशन के बारे में भंबल दा ने अशोक दा से यह कहा कि मुझे केवल अपनी योग्यता का रिटर्न चाहिए कोई अवाई नहीं।

प्रश्न 93.
पीठ पर तुम्हारा छोड़ा हुआ बोझ था – किसकी पीठ पर किसका छोड़ा हुआ बोझ था?
उत्तर :
भंबल दा की पीठ पर अशोक दा का छोड़ा हुआ बोझ था क्योंकि वे परिवार को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं देते थे।

प्रश्न 94.
ग्लैडियेटर्स किसे कहा जाता था?
उत्तर :
रोमन साम्राज्य में उन गुलामों को ग्लैडियेटर्स कहा जाता था जिन्हें अपनी मुक्ति के लिए हिंसक जानवरों से युद्ध करना होता था। जीत जाने पर उन्हें कैद से मुक्ति तथा हार जाने पर जीवन से मुक्ति मिल जाती थी। रोमन राजा तथा जनता के लिए यह मनोरंजन का एक प्रमुख साधन था।

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प्रश्न 95.
अशोक दा स्वस्थ रहने के लिए क्या करते थे?
उत्तर :
अशोक दा स्वस्थ रहने के लिए बुलबर्कर का अभ्यास करते, आसन तथा योगा करते थे।

प्रश्न 96.
भंबल दा किसलिए दौड़ते थे ?
उत्तर :
अपनी प्रकृति से धावक होने के कारण भंबल दा दौड़ते थे ।

प्रश्न 97.
लोग भंबल दा को किस बात पर आश्वस्त थे ?
उत्तर :
लोग भंबल दा की इस बात्तर आश्वस्त थे किस वे दौड़ में अवश्य भाग लेंगे ।

प्रश्न 98.
भंबल दा की पढ़ाई क्यों बाधित हो गयी थी ?
उत्तर :
मैट्रीक्युलेशन में बार बार फेल होने तथा घर-खर्च का बोझ सिर पर आ पड़ने के कारण।

प्रश्न 99.
भंबल दा किसमें भाग लेते थे ?
उत्तर :
दौड़ में ।

प्रश्न 100.
भंबल दा के अनुसार ‘सम्मान’ क्या होता है ?
उत्तर :
परस्सर सौहार्द और समता (बराबरी) का भाव ही सम्मान होता है।

प्रश्न 101.
भंबल दा की साइकिल के बारे में क्या प्रसिद्ध था ?
उत्तर :
उसकी घंटी छोड़कर सबकुछ बजता है ।

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प्रश्न 102.
भंबल दा किसके अपवाद थे ?
उत्तर :
भंबल दा अपने भाई अशोक दा के अपवाद थे ।

प्रश्न 103.
भंबल दा किन बातों पर हैसा करते थे?
उत्तर :
भंबल दा, अशोक दा के स्वस्थ रहने के लिए आसन तथा योगाभ्यास करने की बात पर हँसा करते थे

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: ‘धावक’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 2 : ‘धावक’ कहानी में निहित संदेश को लिखें।
अथवा
प्रश्न 3 : ‘धाबक’ कहानी के माध्यम से लेखक ने हमें क्या संदेश देना चाहा है?
अथवा
प्रश्न 4: ‘धावक’ कहानी का मूल भाव लिखते हुए उसके उद्देश्य पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 5 : ‘धावक’ कहानी का मूल भाव लिखते हुए इसके शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 6 : ‘थावक’ कहानी की समीक्षा करें।
अथवा
प्रश्न 7: ‘धावक कहानी की कथावस्तु को संक्षेप में लिखें।
उत्तर :
‘धावक’ कहानी के रचनाकार संजीव हैं। इनकी कहानियाँ अनुभवों तथा अपने आस-पास के जीते-जागते पात्रों की कहानियाँ हैं न कि किसी कल्पनालोक की उपज। कथाकार संजीव ने ‘धावक’ कहानी में एक ऐसे ही व्यक्ति भंबल दा की स्मृतियों को पिरोया है।

भंबल दा ‘धावक’ कहानी के नायक हैं। वे सच्चे अर्थों में खिलाड़ी है। कंपनी की ओर से आयोजित कोई भी क्रीड़ा प्रतियोगिता भंबल दा के बिना अधूरी है। भले ही भंबल दा किसी प्रतियोगिता में स्थान न बना पाते हों लेकिन वे खेल के नियमों का पूरा-पूरा पालन करते हैं। पुरस्कार पाने के लिए अन्य खिलाड़ियों की तरह उन्होंने कभी बेइमानी का सहारा नहीं लिया। अपनी इमानदारी, समाज-सेवा तथा पारिवारिक बोझ के कारण ही वे जिदगी की दौड़ में भी पिछड गये। लेकिन उन्हें इसका ज़रा-सा भी मलाल नहीं है।

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भंबल दा के विपरीत उनके बड़े भाई ने अपने साहब की लड़की से विवाह कर तथा पारिवारिक दायित्वों की उपेक्षा कर जीवन में काफी आगे निकल गए। भंबल दा केवल किरानी बनकर ही रह गए लेकिन अशोक दा चीफ पर्सनल मैनेजर तक पहुँच गए।

कम आय होने के कारण भंबल दा कभी विवाह के लिए राजी नहीं हुए। इस स्थिति में भी उन्होंने बहन को प्रतिमाह रूपये भेजने में कभी कोताही नहीं की।

धीरे – धीरे यह बोझ असहनीय हो गया तथा एक दिन भंबल दा इस दुनिया से उसी तरह चल बसे जिस प्रकार भारत में खिलाड़ी उम्र निकल जाने के बाद गुमनामी के अंधेरे में खो जाते है।

इस प्रकार कथाकार संजीव ने धावक भंबल दा के माध्यम से उन खिलाड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहा है जो सुविधा के अभाव में असमय ही जीवन के दौड़ से निकल जाते हैं। ऐसे खिलाड़ियों के प्रति समाज तथा देश की कुछ जिम्मेवारी होनी चाहिए यही संदेश इस कहानी में छिपा है।

जहाँ तक कहानी के शीर्षक की बात है – यह शीर्षक ही भंबल दा के सम्पूर्ण जीवन की कहानी कह देता है। एक ऐसे धावक की कहानी जो बेइमानी, दुनिया की चालाकी और अपने ही बोझ से जीवन में पीछे ही रह गया। सम्पूर्ण कहानी की पृष्ठभूमि में धावक ही छाया हुआ है। इसलिए हम ऐसा कह सकते हैं कि कहानी का शीर्षक अपने-आप में सर्वथा उपयुक्त है।

प्रश्न 8 : ‘धावक’ कहानी के आधार पर भम्बल दा का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 9 : ‘धावक’ कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 10 : ‘धावक’ कहानी के जिस पात्र ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया है, उसका चरित्न-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 11 : ‘चावक’ पाठ के प्रमुख पात्र की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन करें।
अथवा
प्रश्न 12 : पठित कहानी के आधार पर भंबल दा का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 13 : “भंबल ऐसे पुरस्कारों के लिए नहीं दौड़ता” – के आधार पर भंबल दा का चरित्रचित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 14 : ‘गलत पुरस्कार मै नहीं लेता दादा” – के आधार पर भंबल दा का चरित्र-चित्रण करें। अथवा
प्रश्न 15 : मगर मुझे खुशी और संतोष है कि मैंने लंगी नहीं मारी, गलत ट्रैक नहीं पकड़ा – के आधार पर भंबल दा का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 16 : जिस जुनून में जिया, उसकी तासीर का एक क्षण भी तुम्हारे तमाम ताम-झाम के सालों से उम्दा है। – के आधार पर भबल दा का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :
भम्बल दा ‘धावक’ कहानी के मुख्य पात्र हैं। पूरी कहानी में उनके चरित्र का ताना-बाना लेखक संजीव ने कुछ इस तरह से बुना है कि पाठक चाहकर भी उनके व्यक्तित्व से अपने आपको अलग नहीं कर पाता।

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भम्बल दा का चरित्र-चित्रण निम्नांकित शीर्षको के अंतर्गत किया जा सकता है –

(क) आदतन खिलाड़ी – भम्बल दा की पहचान धावक के रूप में है। कोई भी दौड़ प्रतियोगिता हो, वह उनके बिना अधूरी लगती है। भले ही वे कभी अव्यल नहीं आ पाते लेकिन प्रतियोगिता में भाग लेना मानो उनकी आदत में शामिल थी। दौड़ में सबसे पीछे रह जाने पर भी वे अपनी दौड़ पूरा करके ही दम लेते। इतना ही नहीं, बाषा दौड़ और साइकिल रेस में भी वे अवश्य भाग लेते थे।

(ख) भावुक एवं माँ से अत्यंत प्रेम करने वाले – भम्बल दा भावुक होने के साथ-साथ माँ से अत्यंत प्रेम करने वाले हैं। एक बार बाधा दौड़ में बेईमानी होने पर किसी ने विश्वास दिलाने के लिए भम्बल दा को माँ की कसम खाने को कहा। जवाब में उन्होने जो कहा, वह उनके मातृप्रेम को दर्शाता है – “तुम्हारी माँ नहीं है शायद वरना तुम इस तुच्छ पुरस्कार के लिए माँ को दाँव पर नहीं लगाते मेरे भाई।”

(ग) समाज-सेवक – आर्थिक स्थिति से विपन्न होने के बावजूद भम्बल दा सबके दुःख-सुख में शरीक होते थे। अगर किसी को अस्पताल पहुँचाना है तो उनके कंधे एंबुलेंस की तरह हाजिर, श्रशान जाना हो तो उनके कंधे अर्थी के लिए हाजिर, कब्बिस्तान जाना हो या फिर किसी के लिए सामान का जुगाड़ करना हो- भम्बल दा हर जगह मौजूद रहते थे।

(घ) पारिवारिक जिम्मेवारियों को उठाने वाले – यद्धपि भम्बल दा की स्वयं की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक है फिर भी वे शक्ति भर पारिवारिक जिम्मेवारियों को निभाने की कोशिश करते हैं। भाई अशोक से किसी प्रकार की सहायता न पाने पर भी वे बहन की शादी करते हैं। जब वह विधवा हो जाती है और उसे बड़े भाई के यहाँ भी शरण नहीं मिलती, तब वे उसे प्रतिमाह पचास रुपये मदद के तौर पर भेजते हैं।

(ङ) स्वाभिमानी : भम्बल दा किसी भी स्थिति में अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करते। यदि वे चाहते तो अपनी भावी पत्नी से आर्थिक सहायता ले सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इतना हीं नहीं, मरने के पहले उन्होने अपने स्वार्थी भाई के लिए एक संदेश भी छोड़ दिया, ” जिस जुनून में जिया, उसकी तासीर का एक क्षण भी तुम्हारे तमाम तामझाम के सालों से उम्दा है। हो सके तो चखकर कभी देखना।” इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि भम्बल दा का चरित्र एक स्वाभिमानी आदमी का चरित्र है जो टूटकर बिखर जाता है लेकिन पंगु व्यवस्था के सामने घुटने नहीं टेकता।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भंबल दा के भाई का क्या नाम था?
(क) अशोक
(ख) सुरेश
(ग) दिनेश
उत्तर :
(क) अशोक

प्रश्न 2.
माँ किसके साथ रहती थी ?
(क) अशोक दा के साथ
(ख) भंबल दा के साथ
(घ) राकेश
(ग) अपनी बेटी के साथ
उत्तर :
(ख) भंबल दा के साथ

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प्रश्न 3.
‘भम्बल दा को मैने काफी करीब से देखा है।’ – यह कौन-सा वाक्य है ?
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सरल वावय

प्रश्न 4.
‘धावक’ कहानी के रचनाकार कौन हैं ?
(क) कृष्णा सेबती
(ख) संजीव
(ग) शिवमूर्ति
(घ) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
उत्तर :
(ख) संजीव।

प्रश्न 5.
‘तीस साल का सफरनामा’ (कहानी-संग्रह) किसकी रचना है?
(क) गुलेरी की
(ख) प्रेमचंद की
(ग) संजीव की
(घ) शिवमूर्ति की
उत्तर :
(ग) संजीव की।

प्रश्न 6.
‘प्रेतमुक्ति’ (कहानी-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) संजीव
(ख) कृष्णा सोबती
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) शिवमूर्ति
उत्तर :
(क) संजीव।

प्रश्न 7.
‘प्रेरणास्रोत और अन्य कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) प्रेमचंद
(ख) संजीव
(ग) गुलेरी
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर :
(ख) संजीव।

प्रश्न 8.
‘ब्लैकहोल’ (कहानी-संग्रह) के लेखक कौन हैं ?
(क) कृष्णा सोबती
(ख) गुलेरी
(ग) शिवमूर्ति
(घ) संजीव
उत्तर :
(घ) संजीव।

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प्रश्न 9.
‘खोज’ (कहानी-संग्रह) किसकी रचना है?
(क) शैल रस्तोगी की
(ख) महादेवी वर्मा की
(ग) संजीव की
(घ) पंत की
उत्तर :
(ग) संजीव की।

प्रश्न 10.
‘दस कहानियाँ’ के रचनाकार कौन हैं ?
(क) संजीव
(ख) निराला
(ग) डॉ० रामकुमार वर्मा
(घ) कृष्णा सोबती
उत्तर :
(क) संजीव।

प्रश्न 11.
‘गति का पहला सिद्धांत’ किसकी कृति है ?
(क) निराला की
(ख) प्रसाद् की
(ग) पंत की
(घ) संजीव की
उत्तर :
(घ) संजीव की।

प्रश्न 12.
‘गुफा का आदमी’ (कहानी-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) शिवमूर्ति
(ख) संजीव
(ग) अनामिका
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर :
(ख) संजीव।

प्रश्न 13.
‘आरोहण’ (कहानी-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) अनामिका
(ख) संजीव
(ग) कृष्णा सोबती
(घ) शैल रस्तोगी
उत्तर :
(ख) संजीव।

प्रश्न 14.
‘किशनगढ़ के अहेरी’ (उपन्यास) के रचनाकार कौन हैं ?
(क) प्रेमचंद
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) संजीव
(घ) निराला
उत्तर :
(ग) संजीव।

प्रश्न 15.
‘सावधान! नीचे आग है’ के उपन्यासकार कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) संजीव
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) निराला
उत्तर :
(ख) संजीव।

प्रश्न 16.
‘धार’ (उपन्यास) के लेखक कौन हैं ?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) (निराला)
(ग) अनामिका
(घ) संजीव
उत्तर :
(घ) संजीव।

प्रश्न 17.
‘रानी की सराय’ (किशोर उपन्यास) किसकी रचना है ?
(क) बंग महिला की
(ख) महादेवी वर्मा की
(ग) संजीव की
(घ) निराला की
उत्तर :
(ग) संजीव की।

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प्रश्न 18.
‘डायन और अन्य कहानियाँ’ (बाल-साहित्य) के रचनाकार कौन हैं?
(क) संजीव
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) निराला
(घ) प्रेमचंद
उत्तर :
(क) संजीव।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मान कथाकार संजीव को प्राप्त नहीं हुआ है?
(क) प्रथम कथाक्रम सम्मान
(ख) अन्तर्रोश्टीय इन्दु शर्मा सम्मान
(ग) सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार
(घ) भिखारी ठाकुर सम्मान
उत्तर :
(ग) सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मान कथाकार संजीव को प्राप्त नहीं हुआ है ?
(क) भिखारी ठाकुर सम्मान
(ख) अकादमी अवार्ड
(ग) पहला सम्मान
(घ) श्री लाल शुक्ल स्मृति सम्मान
उत्तर :
(ख) अकादमी अवार्ई।

प्रश्न 21.
कथाकार संजीव का जन्म किस प्रदेश में हुआ था?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) मध्य पदेशे
(ग) हिमाचल प्रदेश
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 22.
भंबल दा की कमी कहाँ खलती थी?
(क) घर में
(ख) स्पोट्स्स के मैदान में
(ग) आंफिस में
(घ) कवि सम्मेलन में
उत्तर :
(ख) स्पोर्स्स के मैदान में।

प्रश्न 23.
भंबल दा को लोग अन्य किस नाम से पुकारते थे?
(क) गोबर गणेश भैया
(ख) खिलाड़ी भैया
(ग) बम भोले भैया
(घ) धावक भैया
उत्तर :
(ग) बम भोले भैया।

प्रश्न 24.
“अजीब खब्ती आदमी है” – खब्ती किसे कहा गया है ?
(क) अशोक दा को
(ख) भंबल दा को
(ग) लेखक को
(घ) प्रबीण को
उत्तर :
(ख) भंबल दा को।

प्रश्न 25.
भंबल दा कोथाय – का अर्थ है ?
(क) भंबल दा मर गए
(ख) भंबल दा हार गए
(ग) भंबल दा कहाँ हैं
(घ) भंबल दा चले गए ?
उत्तर :
(ग) भंबल दा कहाँ हैं ?

प्रश्न 26.
‘नगणय प्राणी’ किसे कहा गया है ?
(क) भंबल दा को
(ख) प्रवीण को
(ग) लेखक को
(घ) अशोक दा का
उत्तर:
(क) भंबल दा को।

प्रश्न 27.
लेखक भंबल दा को कितने वर्षों से जानते हैं ?
(क) बीस
(ख) पच्चीस
(ग) तीस
(घ) पैंतीस
उत्तर :
(ख) पच्चीस।

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प्रश्न 28.
भंबल दा ने निम्नलिखित में से किस खेल में भाग नहीं लिया?
(क) कार-रेस
(ख) लौंग जम्प
(ग) हाई जम्य
(घ) हर्डल्स रेस
उत्तर :
(क) कार रेस।

प्रश्न 29.
भंबल दा ने निम्लिखित में से किस खेल में भाग नहीं लिया ?
(क) डिस्क शो
(ख) साइकिल रेस
(ग) म्यूजिकल चेयर
(घ) मील भर की दौड़
उत्तर :
(ग) म्यूजिकल चेयर।

प्रश्न 30.
मायूसी का भंबल दा पर क्या असर होता था?
(क) गुस्सा हो जाते थे
(ख) रूँआसे हो जाते थे
(ग) चेहरा लाल हो जाता
(घ) चेहरा सूज आता
उत्तर :
(घ) चेहरा सूज आता।

प्रश्न 31.
टका-सा भोथरा जवाब – क्या था?
(क) भाग जाओ
(ख) बाद में आना
(ग) नहीं बोलो
(घ) ठीक है, मत पार्टिसिपेट करो
उत्तर :
(घ) ठीक है, मत पार्टिसिपेट करो।

प्रश्न 32.
भंबल दा क्या नहीं कर सकते?
(क) बेईमानी
(ख) चोरी
(ग) साइकिल चलाना
(घ) सच बोलना
उत्तर :
(क) बेईमानी।

प्रश्न 33.
साइकिल-रेस में भंबल दा की चाल कैसी रहती?
(क) तेज
(ख) बहुत तेज
(ग) भोली
(घ) कम तेज
उत्तर :
(ख) भोली।

प्रश्न 34.
लोगों के अनुसार स्पोट्समैन और बीमा कं० के एजेण्ट की आयु कितनी होती है?
(क) पाँच साल
(ख) सात साल
(ग) दस साल
(घ) पंद्रह साल
उत्तर :
(क) पाँच साल।

प्रश्न 35.
‘आप यहाँ हैं’ (कहानी-संग्रह) के रचनाकार कौन हैं?
(क) संजीव
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) कृष्णा सोबती
(घ) बंग महिला
उत्तर :
(क) संजीव।

प्रश्न 36.
लेखक ने किसे काफी करीब से देखा है?
(क) अशोक दा को
(ख) भंबल दा की माँ को
(ग) भबल दा को
(घ) जोगन मुण्डा को
उत्तर :
(ग) भंबल दा को।

प्रश्न 37.
अशोक दा भंबल दा से कितने वर्ष बड़े थे?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ख) दो

प्रश्न 38.
भंबल दा मैट्रीक्युलेशन में कितनी बार फेल हुए?
(क) एक बार
(ख) दो बार
(ग) तीन बार
(घ) चार बार
उत्तर :
(घ) चार बार।

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प्रश्न 39.
भंबल दा को कैसी जिंदगी चाहिए थी?
(क) शान की
(ख) गरीबी की
(ग) सम्मान की
(घ) अमीरी की
उत्तर :
(ग) सम्मान की।

प्रश्न 40.
किसने लेखक को बुलाकर कसकर डाँटा था?
(क) यशराज ने
(ख) अशोक दा ने
(ग) माँ ने
(घ) विधवा बहन ने
उत्तर :
(ख) अशोक दा ने।

प्रश्न 41.
भंबल दा की जवान बहन किस पर आश्रित थी?
(क) माँ, पर
(ख) अशोक दा पर
(ग) भंबल दा पर
(घ) किसी पर नहीं
उत्तर :
(ग) भंबल दा पर।

प्रश्न 42.
किसकी शादी से माँ पूरी तरह टूट गई थीं?
(क) अशोक दा की
(ख) बेटी की
(ग) भंबल दा की
(घ) लेखक की
उत्तर :
(क) अशोक दा की।

प्रश्न 43.
“माँ के लिए बेटा-बेटा ही होता है”‘ – गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ?
(क) नन्हा संगीतकार
(ख) धावक
(ग) चपल
(घ) नमक
उत्तर :
(ख) धावक।

प्रश्न 44.
“अपने दिल के दरवाजे-खिड़कियाँ बंद कर फिर उन्हीं तनहाइयों में डूब जाती” – प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ?
(क) चप्पल
(ख) नन्हा संगीतकार
(ग) धावक
(घ) नमक
उत्तर :
(ग) धावक।

प्रश्न 45.
“बात पानी में फेंके गए मुर्दे की तरह ही उतरा आयी” – प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ?
(क) धावक
(ख) चपल
(ग) नन्हा संगीतकार
(घ) नमक
उत्तर :
(क) धावक।

प्रश्न 46.
“तुम्हें दूसरे के काम में दखल नही देना चाहिए” – वक्ता कौन है ?
(क) अशोक दा
(ख) भवस दा
(ग) माँ
(घ) सफिया
उत्तर :
(ख) भंबल दा।

प्रश्न 47.
“क्यों क्या किया है मैने’ = वक्ता कौन है ?
(क) सकिया
(ख) भंबल दा
(ग) अशोक दा
(घ) जेनको
उच्चर :
(ग) अशोक दा।

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प्रश्न 48.
“मास्टरनी के सामने पड़ने से तो अब्ष घेरी रुह ही काँपती है” – वक्ता कौन है ?
(क) गाँ
(ख) भंबल दा
(ग) अशोक दा
(घ) लेखक
उत्षर :
(घ) लेखक।

प्रश्न 49.
‘डन्हें औरतों से विरक्ति हो गई” – ‘उन्हें से कौन संकेतित है?
(क) मास्टर साहब
(ख) कस्टम आंकिसर
(ग) भंबल दा
(घ) रंगख्या
उत्तर :
(ग) भंबल दा।

प्रश्न 50.
भंबल दा का वेत्रन कितना था?
(क) दो सौ रुपये
(ख) ढाई सौ रुपये
(ग) तौन सौ रुपये
(घ) सढेतीन सौ रुपये
उत्तर :
(घ) साढे तीन सौ रुषये।

प्रश्न 51.
‘हमारा कलेजा घक-सा रह जाता है”‘- प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
(क) चामल
(ख) नमक
(ग) नन्हा संगीतकार
(घ) धावक
उत्तर :
(घ) घावक।

प्रश्न 52.
“आज सुबह ही वे गुजर गए” – पंक्ति किस पाठ से उद्दृत है ?
(क) जावक
(ब) चमल
(ग) इनमें से कोई नहीं
(घ) नमक
उच्चर :
(क) धावक।

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प्रश्न 53.
“कल रात ही उन्हें दूसरा दौरा पड़ा था” – उन्हें से कौन संकेतित है?
(क) रंगख्या
(ख) सिल्ध बीवी
(ग) भंबल दा
(घ) अशोक दा
उत्तर :
(ग) अंबल दा।

प्रश्न 54.
‘आज सुबह ही वे गुज्रा गए'” – ‘वे’ कौन हैं?
(क) रंगख्या
(ख) सक्रिया
(ग) अशोक दा
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(घ) भंबल दा।

प्रश्न 55.
“लड़का लौट आता है”‘ = पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
(क) धावक
(ख) नमक
(ग) वणस
(घ) नन्हा सोगीतकार
उत्तर :
(क) हावक।

प्रश्न 56.
‘”मगर मुझे खुशी और संतोष है” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
(क) धावक
(ख) नमक
(ग) चण्पल
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(क) धावक ।

प्रश्न 57.
‘एक छोटी-सी आयताकार जर्द-सी उठान’ – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है?
(क) चप्पल
(ख) धावक
(ग) उसने कहा था
(घ) नमक
उत्तर :
(ख) धावक।

प्रश्न 58.
“माँ की मौत के समय विदेश में थे'” – यहाँ किसके बारे में कहा गया है?
(क) रंगय्या
(ख) सफिया
(ग) अशोक दा
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(ग) अशोक दा।

प्रश्न 59.
‘”मैं तुम्हारी तरह होता” – ‘मै’ कौन है?
(क) रमण
(ख) सफिया का भाई
(ग) अशोक दा
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(घ) भंबल दा

प्रश्न 60.
“आठ साल ज्यादा जी लोगे यही न?” – वक्ता कौन हैं?
(क) अशोक दा
(ख) लेखक
(ग) भंबल दा
(घ) रंगय्या
उत्तर :
(ग) भंबल दा।

प्रश्न 61.
“हो सके तो चखकर कभी देखना” – वक्ता कौन है ?
(क) सफिया
(ख) मास्टर साहब
(ग) लेखक
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(घ) भंबल दा।

प्रश्न 62.
“रूहें पनाह माँगती फिरेंगी” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
(क) नमक
(ख) उसने कहा था
(ग) चपल
(घ) धावक
उत्तर :
(घ) धावक।

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प्रश्न 63.
“फिर गये कहाँ” – पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) नमक
(ख) चण्पल
(ग) धावक
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(ग) धावक।

प्रश्न 64.
“पता नहीं कितना कुछ हो सकता था”‘ – पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) धावक
(ख) उसने कहा था
(ग) नमक
(घ) चप्यल
उत्तर :
(क) धावक।

प्रश्न 65.
“इतना सोचने का भी वक्त नहीं था मेरे लिए?” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
(क) नमक
(ख) धावक
(ग) चप्पल
(घ) नन्ही संगीतकार
उत्तर :
(ध) धावक।

प्रश्न 66.
“मुझे जो भुगतना पड़ा उसे बताना मुनासिब नहीं?” – प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(क) धावक
(ख) नमक
(ग) चपल
(घ) नौबतखाने में इबादत
उत्तर :
(क) धावक।

प्रश्न 67.
“अभी भी माँ को बचाया जा सकता है”‘ – पंक्ति किस पाठ से उद्दुत है ?
(क) नमक
(ख) चपल
(ग) धावक
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(ग) धावक।

प्रश्न 68.
“इस बात को वे भूल न पाते’ – ‘वे’ से कौन संकेतित है?
(क) भंबल दा
(ख) लेखक
(ग) अशोक दा
(घ) बिस्मिल्ला खाँ
उत्तर :
(ग) अशोक दा।

प्रश्न 69.
‘इस बात को वे भूल न पाते” – पंक्ति के रचनाकार कौन हैं?
(क) यतीद्र मिश्र
(ख) संजीव
(ग) प्रसाद
(घ) प्रेमघंद
उत्तर :
(घ) संजीव।

प्रश्न 70.
‘इसका अंजाम अच्छा होगा या बुरा” – पंक्ति किस पाठ से उद्धतत है?
(क) उसने कहा था
(ख) नौबतखाने में इबादत
(ग) धावक
(घ) चपल
उत्तर :
(ग) धावक।

प्रश्न 71.
“गलत पुरस्कार मैं नहीं लेता दादा” – वक्ता कौन है?
(क) लेखक
(ख) रंगय्या
(ग) भंबल दा
(घ) अशोक दा
उत्तर :
(ग) भंबल दा।

प्रश्न 72.
‘गलत पुरस्कार मैं नहीं लेता'” – पंक्ति के रचनाकार कौन हैं?
(क) संजीव
(ख) यतींद्र मिश्र
(ग) गुलेरी
(घ) रजिया सज्जाद जहीर
उत्तर :
(क) संजीव।

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प्रश्न 73.
‘तुप्हारी पुरस्कार-लिप्सा तुप्हीं को मुबारक” – ‘तुम्हीं’ से कौन संकेतित है?
(क) लेखक
(ख) भंबल दा
(ग) अशोक दा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) अशोक दा।

प्रश्न 74.
“इसे मेरी ओर से तुम रख लो” – वक्ता कौन है?
(क) लहना सिंह
(ख) जेन
(ग) सफिया
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(घ) भंबल दा।

प्रश्न 75.
‘इसे मेरी ओर से तुम रख लो” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
(क) चण्पल
(ख) नमक
(ग) धावक
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(ग) धावक।

प्रश्न 76.
‘कोई बोलता नहीं कुछ’ – पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) धावक
(ख) नमक
(ग) चप्पल
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(ग) धावक।

प्रश्न 77.
“मगर हम जैसों का क्या कसूर” -वक्ता कौन है?
(क) सफिया
(ख) लहना सिंह
(ग) रंग्या
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(घ) भंबल दा।

प्रश्न 78.
“वह चुपचाप देखता आया है” = ‘वह’ कौन है?
(क) लेखक
(ख) रंगख्या
(ग) कामुक क्रूर वर्ग
(घ) कस्टम ऑफिसर
उत्तर :
(ग) कामुक क्रूर वर्ग।

प्रश्न 79.
”कुछ दिनों से एक नया रुचि-संस्कार जन्मा है'” – नया रुचि संस्कार क्या है?
(क) साँड़-युद्ध
(ख) ग्लैडियेटर्स-युद्ध
(ग) मुर्गे की लड़ाई
(घ) म्यूजिकल चेयर
उत्तर :
(घ) म्यूजिकल चेयर।

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प्रश्न 80.
“हम बच-बचकर निकल रहे थे” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
(क) नमक
(ख) उसने कहा था
(ग) चफल
(घ) धावक
उत्तर :
(घ) धावक।

प्रश्न 81.
“तुम्हें तो शुक्रुजार होना चाहिए” – वक्ता कौन है?
(क) सफिया
(ख) सिख बीबी
(ग) भंबल दा
(घ) लेखक
उत्तर :
(ग) भंबल दा।

प्रश्न 82.
“तुम्हें तो शुक्रगुजार होना चाहिए” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) धावक
(ख) चप्पल
(ग) नमक
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(क) घावक।

प्रश्न 83.
“जिसमें कुछ वर्षो पहले भाभी प्रथम आई थी” = भाभी कौन है ?
(क) सफिया की भाभी
(ख) सिख बीबी
(ग) अशोक दा की पत्नी
(घ) भंबल दा की माँ
उत्तर :
(ग) अशोक दा की पत्नी।

प्रश्न 84.
“शर्म काहे की” – वक्ता कौन है?
(क) सरदारनी
(ख) सफिया
(ग) सिख बीबी
(घ) अशोक दा
उत्तर :
(घ) अशोक दा।

प्रश्न 85.
“चाहे कुछ भी हो, कहीं भी पहुँच जाए” – वक्ता कौन है?
(क) लहना सिंह
(ख) कस्टम ऑफिसर
(ग) भंबल दा की माँ
(घ) लेखक
उत्तर :
(ग) भंबल दा की माँ।

प्रश्न 86.
‘बस एक ही चिंता थी” – पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) धूमकेतु
(ख) उसने कहा था
(ग) नमक
(घ) धावक
उत्तर :
(घ) धावक।

प्रश्न 87.
”खून हरहरा आया था'” – पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) उसने कहा था
(ख) नमक
(ग) चणल
(घ) धावक
उत्तर :
(घ) धावक।

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प्रश्न 88.
‘मगर वह होती कैसे'” – पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) धावक
(ख) नमक
(ग) चणल
(घ) धूमकेतु
उत्तर :
(ग) भंबल दा।

प्रश्न 89.
संजीव का जन्म हुआ था –
(क) 6 जुलाई 1947
(ख) 6 अगस्त 1950
(ग) 10 जुलाई 1958
(घ) 15 अगस्त 1957
उत्तर :
(क) 6 जुलाई 1947

प्रश्न 90.
संजीव विद्यार्थी थे –
(क) इतिहास के
(ख) साहित्य के
(ग) विज्ञान के
(घ) अंग्रेजी के
उत्तर :
(ग) विज्ञान के ।

प्रश्न 91.
संजीव ने किस रूप में कार्य किया –
(क) प्रोफेसर
(ख) डॉक्टर
(ग) वैज्ञानिक
(घ) रसायनज्ञ
उत्तर :
(घ) रसायनज्ञ।

प्रश्न 92.
संजीव किस प्रदेश में कार्यरत् थे ?
(क) उत्तर प्रदेश में
(ख) पश्चिम बंगाल में
(ग) उड़ीसा में
(घ) महाराष्ट्र में
उत्तर :
(ख) पश्चिम बंगाल में।

प्रश्न 93.
संजीव ने कितने उपन्यासों की रचना की ?
(क) चार
(ख) आठ
(ग) बारह
(घ) बीस
उत्तर :
(ख) आठ।

प्रश्न 94.
भंबल दा को लोग क्या कहते थे ?
(क) बड़े भइया
(ख) बमभोले भइया
(ग) मझले भइया
(घ) छोटे भइया
उत्तर :
(ख) बमभोले भइया।

प्रश्न 95.
“खब्ती आदमी” का अर्थ है –
(क) ईमानदारी
(ख) बेइमान
(ग) सनकी
(घ) चालाक
उत्तर :
(ग) सनकी।

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प्रश्न 96.
लेखक ने सोचना छोड़कर क्या किया?
(क) खेल शुरू किया
(ख) घोड़ा दबा दिया
(ग) चिल्लाना शुरू किया
(घ) समझाना शुरु किया
उत्तर :
(ख) घोड़ा दबा दिया।

प्रश्न 97.
भंबल दा खेलों से –
(क) सन्यास ले लिए
(ख) बहिष्कृत किये गये
(ग) शामिल किये गये
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) बहिष्कृत किये गये।

प्रश्न 98.
टका-सा भोथरा जवाब किसने दिया ?
(क) लेखक ने
(ख) खेल अधिकारी ने
(ग) भंबल दा ने
(घ) अशोक दा ने
उत्तर :
(ख) खेल अधिकारी ने।

प्रश्न 99.
बिना सारे चक्र पूरा किये कौन नहीं बैठता था ?
(क) अशोक दा
(ख) भंबल दा
(ग) लेखक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) भंबल दा।

प्रश्न 100.
भीड़ क्या कहकर चीख पड़ी ?
(क) बाहर निकालो
(ख) मारो-मारो
(ग) उसे बुलाओ
(घ) आगे बढ़ो
उत्तर :
(ख) मारो-मारो।

प्रश्न 101.
स्पोर्ट्समैन की आयु होती है ?
(क) चार वर्ष की
(ख) पाँच वर्ष की
(ग) तीन वर्ष की
(घ) दस वर्ष की
उत्तर :
(ख) पाँच वर्ष की।

प्रश्न 102.
भंबल दा के प्रति दर्शकों का समर्थन था –
(क) मामूली
(ख) जबर्दस्त
(ग) हल्का
(घ) एकदम नहीं
उत्तर :
(ख) जबर्दस्त।

प्रश्न 103.
भंबल दा को जिन्दगी चाहिए –
(क) शान की
(ख) सम्मान की
(ग) अपमान की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सम्मान की।

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प्रश्न 104.
भंबल दा अशोक से कितने छोटे थे ?
(क) दो वर्ष
(ख) चार वर्ष
(ग) दस वर्ष
(घ) आठ वर्ष
उत्तर :
(क) दो वर्ष।

प्रश्न 105.
‘आदमी को शान से जीना चाहिए’ -किस का कथन है?
(क) अशोक दा का
(ख) भंबल दा का
(ग) लेखक का
(घ) लोगों का
उत्तर :
(क) अशोक दा का।

प्रश्न 106.
‘भूमिका और अन्य कहानियाँ’ किसकी कृति है ?
(क) गुलेरी की
(ख) प्रेमचंद की
(ग) यतीन्द्र मिश्र की
(घ) संजीव की
उत्तर :
(घ) संजीव की।

प्रश्न 107.
भंबल दा ड्यूटी के बाद पार्ट टाइम क्या करते थे ?
(क) समाज सेवा
(ख) मुनीमी
(ग) खेती
(घ) व्यवसाय
उत्तर :
(ख) मुनीमी।

प्रश्न 108.
‘कोल्हू के बैल की तरहे किसे कहा गया है ?
(क) अशोक दा को
(ख) भंबल दा को
(ग) शांति दा को
(घ) किसी को नहीं
उत्तर :
(ख) भंबल दा को।

प्रश्न 109.
माँ के लिए बेटा होता है ?
(क) पराया ही
(ख) बेटा ही
(ग) अपना ही
(घ) कुछ नहीं
उत्तर :
(ख) बेटा ही।

प्रश्न 110.
किसको एक ही चिंता थी ?
(क) लेखक को
(ख) भंबल दा को
(ग) अशोक दा को
(घ) माँ को
उत्तर :
(क) लेखक को।

प्रश्न 111.
लेखक को एक ही चिंता क्या थी?
(क) भंबल को जिताने की
(ख) अशोक दा से मेल की
(ग) माँ को बचाने की
(घ) कुछ भी नही
उत्तर :
(ग) माँ को बचाने की।

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प्रश्न 112.
भंबल दा को औरतों से क्या थी ?
(क) अनुरक्ति
(ख) विरक्ति
(ग) टकराव
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर :
(ख) विरक्ति।

प्रश्न 113.
अशोक दा ने भंबल दा को क्या कहा ?
(क) पागल
(ख) जोकर
(ग) मूख
(घ) बेइमान
उत्तर :
(ख) जोकर।

प्रश्न 114.
“आप भंबल दा के भाई हैं” – किसका कथन है ?
(क) लेखक का
(ख) अधिकारी का
(ग) लड़के का
(घ) किसी का नहीं
उत्तर :
(ग) लड़के का।

प्रश्न  115.
भंबल दा का मकान था ?
(क) एक कमरे का
(ख) दो कमरे का
(ग) तीन कमरे का
(घ) चार कमरे का
उत्तर :
(ख) दो कमरे का।

प्रश्न 116.
भंबल दा का मकान था ?
(क) शहर के बीचों-बीच
(ख) स्टेशन के बगल में
(ग) धियेटर के सामने
(घ) नदी किनारे
उत्तर :
(ख) स्टेशन के बगल में।

प्रश्न 117.
“आदमी को शान से जीना चाहिए” – किसका कथन है ?
(क) अशोक दा
(ख) भंबल दा
(ग) लेखक
(घ) लोगों का
उत्तर :
(क) अशोक दा।

प्रश्न 118.
पिछली बार बाधा-दौड़ में कितने प्रतियोगी थे ?
(क) पाँच
(ख) चार
(ग) तीन
(घ) दो
उत्तर :
(ख) चार।

प्रश्न 119.
‘दुनिया की सबसे हसीन औरत’ (कहानी-संग्रह) किसकी रचना है ?
(क) संजीव की
(ख) यतीन्द्र मिश्र की
(ग) महादेवी वर्मा की
(घ) प्रेमचंद की
उत्तर :
(क) संजीव की

प्रश्न 120.
बिना सारे चक्र (चक्कर) पूरा किए कौन नहीं बैठता था
(क) अशोक
(ख) लेखक
(ग) भंबल दा
(घ) रामदास
उत्तर :
(ग) भंबल दा।

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प्रश्न 121.
“हम दोनों टग ऑफ वार’ के दोनों ओर आजमाइश करते रहे हैं” – यह किसका कथन है ?
(क) कधाकार संजीव का
(ख) भंबल दा का
(ग) अशोक दा का
(घ) सफ़िया का
उत्तर :
भंबल दा का।

प्रश्न 122.
“गलत पुरस्कार मैं नहीं लेता” – यह किसका कथन है ?
(क) भंबल दा
(ख) संजीव
(ग) रमण
(घ) रंगस्या
उत्तर :
(क) भंबल दा।

प्रश्न 123.
भंबल दा की बहन उनसे कितनी छोटी या बड़ी थी ?
(क) 2 वर्ष छोटी
(ख) 4 वर्ष बड़ी
(ग) 1 वर्ष छोटी
(घ) चार वर्ष बड़ी
उत्तर :
(क) 2 वर्ष छोटी।

प्रश्न 124.
भंबल दा को किससे विरक्ति हो गई थी ?
(क) चाची से
(ख) भाभी से
(ग) नानी से
(घ) मामी से
उत्तर :
(ख) भाभी से।

प्रश्न 125.
‘धावक’ कहानी का मुख्य पात्र कौन है ?
(क) संजीव
(ख) अशोक
(ग) कुणाल
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(घ) भंबल दा।

प्रश्न 126.
भंबल दा थे —
(क) धावक
(ख) गायक
(ग) कलाकार
(घ) साहित्यकार
उत्तर :
(क) धावक।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. “आदमी को शान से जीना चाहिए या तो इस दुनियाँ से कूच कर जाना चाहिए”

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है?
उत्तर :
प्रस्तुत कथन का वक्ता भंबल दा के भाई अशोक दा हैं।

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प्रश्न :
कथन की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
भंबल दा काफी संघर्ष करके केवल अप्रेष्टिससिप पा सके थे। बड़े ऑफिसार थे और भंबल दा उनकी गरिमा के अनुकूल नहीं थे । यह बात अशोक दा को नागवार गुज़रती थी इसलिए वे अक्सर कहा करते थे कि आदमी को शान से जीना चाहिए या तो इस दुनिया से कूच कर जाना चाहिए।

2. ‘इसे मेरी ओर से तुम्हीं रख लो।’

प्रश्न :
प्रस्तुत अंश किस पाठ से उद्युत है ?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘धावक’ पाठ से उद्तृत है ।

प्रश्न :
वक्ता का नाम लिखते हुए प्रस्तुत अंश का स्रसंग आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पच्चीसवीं वर्ष गांठ पर भंबल दा को सर्वश्रेष्ठ धावक का नहीं बल्कि उनको सर्वश्रेष्ठ विदूषक का पुरस्कार दिया जा रहा था। इतना ही नहीं, पुरस्कार देते समय अशोक दा ने व्यंग्य किया – “अपनी करनी का पुरस्कार ले जाओ – शर्म काहे की ? खानदान में एक जोकर तो निकला।” इस अपमान को न सह पाने के कारण भंबल दा ने अशोक दा से कहा कि इसे मेरी ओर से तुम्हीं रख लो।

3. बमभोले भैया कहाँ हैं ?
अथवा
4. सचमुच भंबल दा या बमभोले भैया का कहीं अता-पता नहीं था।
अथवा
5. फिर गये कहाँ?
अथवा
6. अजीब खब्ती आदमी है।
अथवा
7. सूची में तो उनका नाम था।
अथवा

8. आज उन्हीं की कमी यूँ अखर रही थी मानो सारा मैदान सूना है।

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
भंबल दा का कहाँ अता-पता नहीं था?
उत्तर :
स्पोट्स मैदान में भंबल का कहीं अता-पता नहीं था।

प्रश्न :
‘अजीब खब्ती आदमी’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
भंबल दा को अजीब खब्ती आदमी कहा गया है।

प्रश्न :
किस सूची में किसका नाम था?
उत्तर :
धावकों की सूची में भंबल दा का नाम था।

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प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पप्ट करें।
उत्तर :
भबल दा को उनके भोलेपन के कारण लोग बमभोले भैया भी कहा करते थे। एक बार लेखक स्पोट्स के मैदान में एक मील की दौड़ को शुरू करने वाले थे। सारे घाबक मैदान में आ चुके थे। स्टेडियम में लाउडसीकर से धावकों के नाम पुकारे जा रहे थे, दौड़ से संबंधित सारे निर्देश दुहराये जा रहे थे, लेकिन भंबल दा का कोई अता-पता नहीं था। उनके बगैर मैदान सूना लग रहा था क्योंकि वे लोगों के हीरो थे।

लेखक भी परेशान था क्योंकि धावकों की सूची में उनका नाम तो था लेकिन अभी तक वे मैदान में नजर नहीं आ रहे थे। लेखक घुंझलाहट में उन्हें खब्ती आदमी तक कह डालते हैं। कारण यह है कि उनका कोई ठिकाना नहीं। हो सकता है कि निकले हों स्पोर्स के मैदान के लिए और कहीं समाज-सेवा के काम में लग गए हों। भंबल दा के इस रवैये पर कबीर की यह उक्ति बिल्कुल सटीक बैठती है – “आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।”

9. धीरे-धीरे अधिकांश खेलों से बहिष्कृत होते गए भंबल दा।
अथवा
10. जब भी ऐसा होता मायूसी में उनका चेहरा और भी सूज आता।
अथवा
11. खेल का एक न्यूनतम मानक होता है।
अथवा
12. क्या सभी खिलाड़ियों-धावकों को समान सुविधा देने का कोई कानून नहीं है।
अथवा
13. साहबों के एक बर्बर मनोरंजन से अधिक इस स्पोट्स का कोई महत्व है?

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार संजीव हैं।

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प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
हरेक खेल के अपने कुछ नियम होते हैं जो उम्म, वजन आदि से जुड़े होते हैं। इन नियमों के अनुसार ही खिलाड़ियों का चयन किया जाता है। उम्र बढ़ते जाने के कारण भंबल दा धीरे-धीरे कई खेलों से बाहर होते जा रहे थे। लेकिन उनका भोला खिलाड़ी मन इन नियमों को मानने से इन्कार कर देता था। उनका यह कहना था कि खिलाड़ीखिलाड़ी में कोई किसी आधार पर कोई भेद-भाव नहीं किया जाना चाहिए। अगर ऐसा किया जाता है तो यह केवल साहबों के एक बर्बर मनोरंजन से अधिक कुछ नहीं है।

14. लोग उन्हें ललकार रहे होते।
अथवा
15. चलिए, चलिए जान।
अथवा
16. बढ़े चलिए, बढ़े चलिए।
अथवा
17. कभी-कभी तो हमें भी उनकी वास्तविक स्थिति का भ्रम हो जाता।
अथवा
18. दूसरे भले ही बेईमानी कर बैठें, भंबल दा नहीं कर सकते।
अथवा
19. बिना सारे चक्र पूरे किए वे बैठते कैसे?
अथवा
20. यह स्पोट्समैन के रुतबे के खिलाफ हो जाता न!

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा इसके रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
‘स्पोद्सम्समेन’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
भंबल दा को स्योट्समैन कहा गया है।

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प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
हालाँकि भंबल दा अपनी सुस्त चाल से सभी खेलों में अंतिम स्थान पर ही आते थे फिर भी वे लोगों के आकर्षण के केंद्र थे। उनकी कहुआ चाल के बावजूद दर्शंक चिल्ला-चिल्ला उनका हौसला बढ़ाते रहते थे। जब दौड़ समाप्त हो चुकी होती, प्रथम, द्वितीय एवं तीसरे स्थान पर आने वाले के नामों की घोषणा हो रही होती – फिर भी भंबल द अपना चक्र पूरा करने मे लगे रहते थे। दौड़ को पूरा किए ही बीच में छोड़ देना उनके स्पोर्टमैन के रुतबे के खिलाफ था। फिर भी भंबल दा में एक बड़ी खूबी थी कि उन्होंने बेईमानी कर कभी कोई स्थान पाने की कोशिश नहीं की।

21. घंटी छोड़कर उसका सब कुछ बजता है।

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा इसके रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भंबल दा साइकिल रेस में भाग लेने से नहीं चूकते थे। साइकिल रेस के लिए खिलाड़ी अच्छी-अच्छी तथा कम वजन की साइकिलें लेकर आते थे। लेकिन भंबल दा इस अवसर पर भी अपनी खटारा साइकिल ही लेकर आते थे जिसके बारे में लोगों के बीच में यह प्रसिद्ध था कि उनकी साइकिल का घंटी छोड़कर सबकुछु बजता है। साइकिल रेस के लिए किसी से साइकिल उधार लेना उनके स्वाभिमान के खिलाफ था।

22. कभी अन्य धावकों की तरह रियाज करते नहीं देखा।
अथवा
23. पति-पत्नी दोनों ही ‘योगा’ करते।
अथवा
24. भला किसान-मजदूर को कसरत की क्या जरूरत?

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
पति-पत्नी से कौन संकेतिक है?
उत्तर :
अशोक दा और उनकी पत्नी संकेतित हैं।

प्रश्न :
कौन अपने को किसान-मजदूर कह रहा है?
उत्तर :
भंबल दा अपने को किसान-मजदूर कह रहे हैं।

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प्रश्न :
पंक्ति का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा खिलाड़ी थे फिर भी वे अन्य खिलाडियों की तरह कोई अभ्यास नहीं करते थे। उनका कहना था कि श्रम करके जीने वाले किसी किसान-मजदूर को कसरत या अभ्यास करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके विपरीत उनके भाई अशोक दा का खेल से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी दोनों पति-पत्नी अपने-आपको चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए योगा किया करते थे।

25. हम उन्हें चाहकर भी बैठा न पाते।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से उद्धत है?
उत्तर :
प्रस्तु गद्यांश ‘धावक’ पाठ से उद्धृत है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
खेलों में अपनी सुस्त-चाल तथा ट्रैक जाम रखने के कारण भंबल दा को कई बार लोगों के व्यंग्यवाण तथा अफसरों की घुड़कियों को भी सहना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने न तो कभी खेल के नियमों का उल्लंघन किया, न किसी का विरोध किया और सबसे बड़ी बात यह कि खेलों में भाग लेना भी नहीं छोड़ा। भंबल दा को दर्शकों का इतना जबर्दस्त समर्थन प्राप्त था कि खेल के अधिकारी उन्हें चाहकर भी कभी खेल से बिठाना तो दूर, उसके बारे में सोच भी नहीं पाए।

26. यूँ भंबल दा उसकी मुखरता की तुलना में मौन थे।
अथवा
27. आप माँ की कसम खा लीजिए।
अथवा
28. मैं अपना दावा छोड़ देता हूँ।
अथवा
29. तुम्हारी माँ नहीं है शायद।
अथवा
30. इस तुच्छ पुरस्कार के लिए माँ को दाँव पर नहीं लगाते मेरे भाई।
अथवा
31. तुम्हें शायद मालूम नहीं।
अथवा
32. भंबल ऐसे पुरस्कारों के लिए नहीं दौड़ता।
अथवा
33. मुझे तो सिर्फ अपने को तौलना था।
अथवा
34. और वह मैं कर चुका…..।

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प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
एक बार भंबल दा बाधा दौड़ में दूसरे स्थान पर आए लेकिन दूसरे प्रतियोगी ने उन्हें गलत बताया था। कहा कि वह दूसरे स्थान पर आया है। इतना ही नहीं, उसने कहा कि अगर भंबल दा माँ की कसम खाकर बोलें कि वे दूसरे स्थान पर आए हैं तो वे मान लेंगे। माँ की कसम की बात सुनते ही भंबल दा भावुक हो आए। उन्होने कहा कि शायद तुम्हारी माँ नहीं है वरना इस तुच्छ पुरस्कार के लिए तुम माँ को दाँव पर नही लगाते। इस तुच्छ पुरस्कार का मूल्य माँ से बढ़कर नहीं हो सकता।

35. आज दोनों की उपलब्धियों में वर्षों का नहीं, युगों का फासला था।

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा इसके रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
‘दोनों’ से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
दोनों से भंबल दा तथा अशोक दा संकेतित हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा तथा अशोक दा सगे भाई थे। लेकिन दोनों की उपलब्धियों में काफी अंतर था। अशोक दा सहीगलत तरीके को अपना कर चीफ पर्सनल आंफिसर के पद तक पहुँच गए थे। जीवन की सारी सुख-सुविधाओं के साथसाथ रुतबा भी था। इसके विपरीत भंबल दा के जीवन की उपलब्धि केवल किरानी के पद तक सिमट कर रह गयी थी। पारिवारिक बोझ्न का वहन करने में ही वे जिंदगी की दौड़ में पीछे रह गए।

36. फिर तो देश-देशान्तर घूमने का एक क्रम ही चल पड़ा।

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना का नाम ‘धावक’ है तथा रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
अशोक दा की शादी बड़े साहब की बेटी से हुई थी। स्कॉलरशिप पाने के कारण वे बड़े साहब को पसंद आ गए थे। शादी होते ही वे बड़े साहब के बंगले में रहने को आ गए थे। फिर बड़े साहब के पैसों से ही उन्होंने देश-विदेश की कई यात्रा भी कर डाली।

37. खैर उस बार फेल नहीं हुए।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘धावक’ पाठ से उद्दुत है।

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प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा मैट्रिक की परीक्षा में चार बार फेल हो चुके थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पाँचवीं बार परीक्षा दी और पास हो गए। अगर पाँचवीं बार भी वे पास नहीं हो पाते तो शायद फिर कभी पास नहीं कर पाते क्योंकि बढ़ते घर-खर्च के कारण वे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते।

38. आदमी को शान से जीना चाहिए या तो इस दुनिया से कूच कर जाना चाहिए।
अथवा
39. मेरा भाई मेरी गरिमा के अनुकूल होकर आता है तो उसका स्वागत है।
अथवा
40. उसे यहाँ आने की जरूरत ही क्या है?
अथवा
41. उसे लेकर किसी दूसरे शहर चला जाय।
अथवा
42. उन्हें भी ढाई सौ भेज दिया करूँगा।

प्रश्न :
वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता भंबल दा के भाई अशोक दा हैं।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा तथा अशोक दा के पद, प्रतिष्ठा तथा हैसियत में जमीन-आसमान का अंतर था। वे चाहते थे कि उनका भाई भी ऊँचाइयों को छुए क्योंकि भंबल दा को इस फटेहाल में अपना भाई स्वीकार करने में उन्हें लज्जा आती थी। वे साफ-साफ शब्दों में कहते थे कि अगर जिंदगी शानदार न हो तो उससे अच्छा मर जाना है।

मेरा भाई भी अगर मेरी तरह की हैसियत लेकर मेरे पास आए तो मैं उसका स्वागत करूँगा। इस फटेहाली में उसे मेरे पास आने की जरूरत नहीं है। वह माँ को मेरे पास छोड़कर या उसे लेकर दूसरे शहर चला जाय। उसके खाना-खर्ची के लिए मैं उसे ढाई सौ रुपये हरेक महीने भेज दिया करूँगा।

43. भंबल दा को शान की नहीं, सम्मान की जिंदगी चाहिए थी।
अथवा
44. उनके अनुसार शान में दूसरे से अपने को ऊँचा दिखाने की कूरता और खुदगर्जी होती है।
अथवा
45. सम्मान उनके लिए परस्पर सौहार्द और समता का द्योतक था।

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प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
भंबल दा कैसा जीवन जीना चाहते थे?
उत्तर :
भंबल दा सीधे-सरल व्यक्ति थे। वे चाहते थे कि वे शान की नहीं, सम्मान की जिंदगी जिएँ। जो शान की जिंदगी जीते हैं उनमें स्वार्थ की भावना होती है। दूसरों से अपने को ऊँचा दिखाने के लिए वे सही-गलत की परवाह भी नहीं करते हैं। जबकि सम्मान का जीवन इससे बिल्कुल अलग होता है। सम्मान में आपसी प्रेम तथा समानता की भावना होती है – उसमें खुदगर्जी नहीं होती है।

46. बंगाली हो या गैर-बंगाली, हिन्दू या दूसरे मजहबों को मानने वाला भंबल दा या बमभोले भैया सबकी खुशी-गमी में शरीक।
अथवा
47. किसी को अस्पताल पहुँचाना है, तो एंबुलेंस बनकर उनके कंधे हाजिर।
अथवा
48. कब्रिस्तान में जा रही मौन भीड़ में कंधे झुकाए चले जा रहे हैं।
अथवा
49. शादी का सामान जुगाड़ करना है तो कंधे सामान के लिए हाजिर।
अथवा
50. घूम-फिर कर सुस्त कोल्नू के बैल की तरह वहीं रह गए।

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन किसके बारे में है?
उत्तर :
प्रस्तुत कथन ‘धावक’ कहानी के भंबल दा के बारे में है

प्रश्न :
संदर्भित व्यक्ति की विशेषताओं को लिखें।
उत्तर :
भंबल दा में मानवता तथा भाइचारे की भावना कूट-कूट कर भरी थी। वे जाति, धर्म या भाषा के आधार पर किसी के साथ भेद्भाव नहीं करते थे। वे सबकी खुशी, सबके गम में शामिल होते थे। किसी को अस्पताल पहुँचाना हो तो एंबुलेंस का इतजार न कर अपने कंधे हाजिर कर देते थे।

किसी मुसलमान भाई की मौत पर उन्हें कंधे झुकाए जनाजे मे शामिल देखा जा सकता था। अगर किसी के घर में शादी हो तो सामानों की व्यवस्था का जिम्मा स्वयं ले लेते थे मानो उनके अपने सगे की शादी हो। उनका जीवन ऐसा था कि वे सबके लिए थे और सब उनके लिए थे।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक

51. माँ के लिए बेटा-बेटा ही होता है।
अथवा
52. यह चीज बुरी तरह सालती कि उनका एक बेटा उनकी छाया तक से बचता चलता है।
अथवा
53. चाहे कुछ भी हो, कहीं भी पहुँच जाए, कहायेगा तो मेरा बेटा और तेरा भाई ही न!
अथवा
54. थ्रोड़ी देर बाद उनकी नाक ही माँ की बातों का उत्तर देने के लिए बची रहती।
अथवा
55. अपने दिल के दरवाजे-खिड़कियाँ बंद कर फिर उन्हीं तनहाइयों में डूब जातीं।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
शादी के बाद अशोक दा ने परिवार की परवाह करना विल्कुल छोड़ दी थी। यहाँ तक कि वे माँ का भी ख्याल नहीं रखते थे। माँ को भी यह दर्द हमेशा टीसता रहता था कि उनका ही एक बेटा उनकी छाया से भी दूर भागता फिरता है। फिर भी उन्होंने कभी भी अशोक दा की निंदा नहीं की। उल्टे अपने मन तथा भंबल दा को दिलासा देने के लिए वह उसकी तारीफ ही करती थी।

चाहे कुछ भी हो वह तो उनका बेटा ही है और भंबल के लिए उसका बड़ा भाई। भंबल दा भी वास्तविकता जानते थे इसलिए वे माँ की हाँ में हाँ मिलाते हुए सो जाते। माँ की बातों का उत्तर केवल उनकी वजती नाक ही देती थी। भंबल दा को सोया जानकर माँ फिर अपने अकेलेपन में डूब जाती थी।

56. इसका अंजाम अच्छा होगा या बुरा, इतना सोचने का भी वक्त नहीं था मेरे लिए।
अथवा
57. बात पानी में फेंके गए मुरदे की तरह उतरा आई।
अथवा
58. तुम्हें दूसरे के काम में दखल नहीं देना चाहिए।
अथवा
59. क्यो क्या किया है मैने?
अथवा
60. मुझे जो भुगतना पड़ा। उसे बताना मुनासिब नहीं।
अथवा
61. मैने उनके मामले में रुचि लेना छोड़ देने में ही अपनी भलाई समझी।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति का अशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लेखक ने सोचा कि किसी तरह भंबल दा का प्रमोशन कराकर ऑफिस सुपरिटेंडेंट बना दिया जाय। चाहे इसके लिए अच्छा या बुरा जो भी क्षेलना पड़े। लेकिन यह छिपी नहीं रह गई और उसी तरह उजागर हो गई जैसे मुर्दा पानी में उतरा जाता है। भबल ने इसके बारे में अशोक दा को फटकारते हुए कहा कि जैसे वे दूसरों के काम में दखल नहीं देते उसी प्रकार उन्हें भी नहीं देना चाहिए। इन सबके कारण लेखक को काफी कुछ भुगतना पड़ा वयोंकि यह सोच उन्हीं की थी। इतना सब कुछ भुगत लेने के बाद लेखक ने मन ही मन यह तय कर लिया कि अब वे कभी भंबल दा के किसी मामले में टांग नहीं अड़ाएँगे।

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60. मुझे आशा की नयी किरण दिखने लगी।
अथवा
61. उप्र उस दौर में पहुँच रही थी जहाँ वांछित लड़कियाँ नहीं मिल सकती थीं।
अथवा
62. हमने बूँढ़-ढाँढ़ कर एक मास्टरनी को राजी कर ही लिया।
अथवा
63. मास्टरनी के सामने पड़ने से अब मेरी तो रुह की काँपती है।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता लेखक हैं।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर :
एक बार भंबल दा की भाँ ने लेखक को बुलाकर उनकी शादी के बारे में कोशिश करने को कहा। लेखक को लगा कि यदि ऐसा हो पाया तो भंबल दा की जिंदगी दरे पर आ जाएगी। लेकिन ऐसा होना आसान नहीं था क्योंकि भंबल उम की उस सीमा को छू रहे थे जहाँ मनचाही लड़की नहीं मिल सकती थी।

आखिरकार लेखक ने शादी के लिए एक मास्टरनी को राजी कर ही लिया। लेकिन किसी कारणवश यह शादी भी नहीं हो पाई। इसका खामियाजा भी लेखक को भुगतना पड़ा तथा वे उस मास्टरनी को अपना मुँह दिखाने के लायक भी नहीं रह गए। वे उसका सामना करने से कतराने लगे।

64. हमें तो लगा उनकी जवानी आयी ही नहीं और वे बुढ़ा भी गये।
अथवा
65. वे वहीं के वहीं ठहरे पड़े रहे।
अथवा
66. वक्त उनके कदमों के तले-तले तेजी से सरकता गया।
अथवा

67. उनका किशोर मन पच्चीस सालों से लगातार दौड़ता ही रहा।
प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किसके बारे में कही गई है?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति भंबल दा के बारे में कही गई है।

प्रश्न :
कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा के जौवन के वर्ष इतनी तेजी से सरकते गए कि लगा किशोरावस्था के बाद सीधे बुढ़ापा ही आ गया। वे अपनी जगह पर ही बने रहे और समय कब उनके कदमों से नीचे सरक गया- यह पता ही न चला। कहने का भाव यह है कि बड़े भाई की उपेक्षा, घर-परिवार की जिम्मेवारियों के बोझ के नीचे उनका जीवन इस तरह गुजर गया कि जवानी के आने-जाने का पता ही न चला।

66. यदि मैं दो साल पहले पैदा हुआ होता तो चीफ पर्सनल पैदा हुआ होता।
अथवा
69. दो साल बाद पैदा होता तो विधवा।

प्रश्न :
वक्ता का नाम लिखें।
उत्तर :
वक्ता ‘धावक’ कहानी के नायक भंबल दा हैं।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का उद्देश्य लिखें।
उत्तर :
भंबल दा नियतिवादी थे। वे भाग्य में लिखे पर विश्षास करते थे। इसलिए प्रथम आने वाले धावक के यह कहने पर कि यदि वे उसके ट्रैक पर रहते तो प्रथम आ जाते । इसी के जवाब में उन्होंने कहा कि किस्मत से ज्यादा कुछ मिलने वाला नहीं है। यदि वे दो साल पहले जन्म लेते तो भाई की जगह पर्सनल ऑंकिसर होते और अगर दो वर्ष बाद पैदा होते तो अपनी बहन की तरह विधवा। उनका जन्म ही गलत समय में हुआ अन्यथा उन्हें यह सब क्यों भोगना पड़ता।

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70. क्यों न रजत-जयंती मना भी ली जाये आपकी?

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता लेखक हैं।

प्रश्न :
किसकी रजत जयंती मनाने की बात कही जा रही है?
उत्तर :
भंबल दा की रजत जयंती मनाने की बात कही जा रही है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
पच्चीस वर्षो तक लगातार खेलों में हिस्सा लेने के कारण एक बार लेखक ने कहा कि क्यों न पच्चीस वर्ष बीत जाने के उपलक्ष में आपकी रजत जयंती मना ली जाय। अब जाकर भंबल दा को पच्चीस वर्ष बीत जाने का अहसास हुआ। जब उन्होंने आइने में अपना चेहरा देखा तो चेहरों की झाइयाँ तथा अधपके बाल उनके उम्र की चुगली कर रहे थे।

71. मानो सबकुछ एकाएक उसी दिन हो गया था।

प्रश्न :
रचना का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना का नाम ‘धावक’ है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लेखक के यह याद दिलाने पर कि भंबल का खिलाड़ी-जीवन पच्चीस वर्षों का हो गया है- उन्हे अपनी उम्म के बीत जाने का अहसास हुआ। आइने में चेहरा देखने पर उन्हें लगा कि आज अचाजक ही चेहरों पर झाइयाँ आ गई हैं, बाल पकने शुरू हो गए हैं। आज तक उन्होंने इस ओर कभी ध्यान न दिया था कि इतनी उम बीत चुकी है और उसका असर चेहरे पर दिखाई पड़ने लगा है।

72. भंबल दा अचकचाकर बढ़े मंच की ओर।

प्रश्न :
रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर :
रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
भंबल दा अचकचाकर मंच की ओर क्यों बढ़े?
उत्तर :
एक बार भंबल दा का नाम पुरस्कार के लिए घोषित किया गया तो अचानक उन्हें विश्धास नहीं हुआ। आज तक ऐसा नहीं हुआ था। अपना नाम सुनते ही वे अचकचाकर मंच की ओर बढ़े क्योंक घोषणा में केवल उनका नाम ही पुरस्कार के लिए पुकारा गया था। यह पुरस्कार किसके लिए दिया जा रहा है इसकी घोषणा नहीं की गयी थी।

73. अपनी करनी का पुरस्कार ले जाओ।
अथवा
72. शर्म काहे की?
अथवा
75. खानदान में एक जोकर तो निकला।

प्रश्न :
वक्ता तथा श्रोता का नाम लिखें।
उत्तर :
वक्ता अशोक दा तथा श्रोता भंबल दा हैं।

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प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा कभी किसी प्रतियोगिता में पुरस्कार नहीं पा सके। खेल के आयोजकों ने उन्हें विशेष पुरस्कार देने के बारे में सोचा क्योंकि उन्होंने कम से कम लोगों का मनोरंजन तो किया था। पुरस्कार देने का भार भंबल दा के बड़े भाई अशोक दा को सौंपा। जब भंबल दा ने पुरस्कार लेने से इनकार किया तो अशोक दा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने भंबल दा पर व्यंग्य करते हुए कहा- ‘ अपनी करनी का पुरस्कार ले जाओ-शर्म काहे की? खानदान में एक जोकर तो निकला।”

76. गलत पुरस्कार मैं नहीं लेता दादा !
अथवा
77. तुम्हारी पुरस्कार-लिप्सा तुम्हीं को मुबारक!
अथवा
78. इसे मेरी ओर से तुम रख लो, खानदान का नाम रोशन करने के लिए।
अथवा

79. सारी कड़वाहट मवाद की तकरह शिष्ट लहजे में बह निकली थी।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता भबल दा हैं।

प्रश्न :
वक्ता और श्रोता में क्या संबंध है?
उत्तर :
वक्ता और श्रोता में भाई का संबंध है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब विदूषक के लिए भंबल दा को पुरस्कार देने की घोषणा की गई तो उन्होने लेने से इनकार कर दिया। यह उनके स्वाभिमान को चोट पहुँचाने वाली बात थी। उन्होंने साफ शब्दों में अशोक दा से कहा कि वे गलत पुरस्कार लेने वालों में से नहीं हैं।

पुरस्कार पाने की चाहत उन्हें नहीं है, इसिलए यह पुरस्कार तुम्हीं रख लो ताकि इस पुरस्कार से खानदान का नाम रोशन हो सके। कहने का भाव यह है कि अशोक दा ने जो कुछ किया वह न केवल उनके लिए या भंबल दा के लिए बल्कि पूरे खानदान के लिए कलंक की बात थी।

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80. उस रात पहला स्ट्रोक हुआ था उन्हें।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ तथा रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
किस रात किसे स्ट्रोक हुआ और क्यों?
उत्तर :
विदूषक के लिए अपने ही भाई अशोक दा से पुरस्कार दिए जाने की बात से भंबल दा को गहरा मानसिक आयात लगा। वे सोच भी नहीं पा रहे थे कि क्या एक भाई अपने सगे भाई के साथ ऐसी दिल्लगी भी कर सकता है। इसी सोच तथा मानसिक आघात के कारण उसी रात को उन्हे पहला स्ट्रोक हुआ।

81. हवा में पुराने दिनों की ठहरी हुई गन्ध है।
अथवा
82. मकड़ी के जाले रह-रहकर कपड़ों और चेहरों पर लिपट रहे थे।
अथवा
83. कैलेण्डर पर पिछले तीन माह से तारीख बदली ही नहीं गयी थी।
अथवा
84. माँ के निधन के बाद समय जहाँ का तहाँ ठहरा पड़ा था।
अथवा
85. घर के इस कोटर में उनके पंखों की उदास फड़फड़ाहट इन दीवारों में ही घुटकर रह गयी होगी।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा रनाचाकर संजीव हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश में निहित भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
माँ की मृत्यु के काफी दिनों बाद अशोक दा और लेखक भंबल दा के कमरे में गए। उस कमरे की हवा में मानों ठहरे हुए समय की गंध भी घुलमिल गई थी। साफ-सफाई न होने के कारण मकड़े के जाले चारों और लटक रहे थे जो कपड़ों तथा चेहरों पर लिपट रहे थे।

पिछले तीन महीने से कैलेण्डर का पन्ना नहीं बदला गया था। ऐसा लग रहा था कि माँ की मृत्यु के बाद उस कमरे का समय ठहर-सा गया हो। कमरे के माहौल को देखकर यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं था कि कैसे माँ की सोच के उदास पंख फड़फड़ाकर इस कमरे की दीवारों में भी घुटकर रह गयी होगी। बाहर किसी ने उसकी आवाज न सुनी होगी।

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86. दूर-दूर खड़े लोग, औरतें, बच्चे हमें अजूबा-से देख रहे हैं।
अथवा
87. कोई बोलता नहीं कुछ।
अथवा
88. हम बच-बचकर निकल रहे थे।
अथवा
89. कम्बख्त लड़का भी हमें छोड़कर जाने कहाँ भाग गया है?
अथवा
90. लड़का लौट आता है।
अथवा
91. श्मशान घाट से आ रहे हैं न?
अथवा
92. हमारा कलेजा धक से रह जाता है।
अथवा
93. नहीं, क्यों क्या हुआ?
अथवा
94. आपको नहीं मालूम …. ?
अथवा
95. आज सुबह ही वे गुजर गए।

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प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘धावक’ है तथा रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पप्र करें।
उत्तर :
शायद भंबल दा की खराब तबीयत के बारे में सुनकर ही अशोक दा लेखक को साथ लेकर भंबल दा के घर पहुँचे। घर के आसपास के लोगों में एक घुप्पी-सी छायी थी। केवल सब उन्हें अजीब-सी नजरों से देख रहे थे। जिस लड़के ने उन दोनों को भंबल दा के घर तक पहुँचाया था, वह भी न जाने कहाँ चला गया था। थोड़ी देर बाद जब लड़का लौटकर आता है तथा इन दोनो से यह सवाल करता है कि शमशान घाट से आ रहे हैं? तो दोनों का कलेजा धक से रह जाता है।

भंबल तो सुबह ही गुजर गए थे तथा मुहल्ले वाले उनका दाह-संस्कार करने श्मशान ले गए थे। इन्हे भरोसा नहीं हो रहा था कि इतनी जल्दी भंबल दा इन्हें छोड़कर चले जाएँगे। और तो और मुहल्लेवालों ने भी अशोक दा को खवर देने की जरूरत नहीं समझी थी। इन सारी परिस्थितियों के कारण दोनों वहाँ के वातावरण में अपने-आपको उपेक्षित-सा महसूस कर रहे थे।

96. यह कागज छोड़ गए हैं भैया के नाम।
अथवा
97. ‘दौड़ में जीत उसी की होती है जो सबसे आगे निकल जाता है, चाहे लंगी मारकर हो या गलत ट्रैक हथिया कर।”
अथवा
98. पुरस्कार पाने का जुनून ही सवार रहता है उस समय।
अथवा

99. मुझे खुशी और संतोष है कि मैंने लंगी नहीं मारी, गलत ट्रैक नहीं पकड़ा।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से उद्धुत है?
उत्तर :
प्रस्तुत गद्यांश ‘धावक’ पाठ से उद्दृत है।

प्रश्न :
गद्यांश का अभिप्राय संदर्भ सहित स्पष्ट करें।
उत्तर :
वह लड़का जो लेखक तथा अशोक दा को भंबल दा के घर तक छोड़ आया था उसने एक चिट्री दी। यह चिट्ठी भंबल दा ने अशोक दा के लिए लिखी थी। चिट्ठी में भंबल दा ने लिखा था कि आजकल दौड़ में वही जीत पाता है जो सही-गलत की परवाह किए बिना आगे निकल जाता है। जब पुरस्कार पाने का जुनून सिर पर सवार हो तो फिर सहीगलत की किसे परवाह रह जाती है। लेकिन उनके लिए यह बात खुशी और संतोष की है कि उन्होंने पुरस्कार जीतने या दौड़ में आगे निकलने के लिए कभी गलत नहीं किया। न कभी किसी को लंगी मारी और न ही कभी गलत ट्रैक पकड़ा। लेकिन यही सब करने वाले व्यक्ति आज सफल माने जाते हैं।

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100. पीठ पर तुम्हारा छोड़ा हुआ बोझ था।
अथवा
101. उसे लेकर पूरी दौड़ दौड़नी थी मुझे।
अथवा
102. इनका हिसाब-किताब नहीं हुआ करता दौड़ के इतिहास में।
अथवा
103. तुम्हारे जैसे तेज-तर्रार लोग हम जैसों को ट्रैकों पर रेंगते हुए देखकर गुस्से से भर जाते हैं।
अथवा
104. मगर हम जैसों का क्या कसूर?
अथवा
105. तुम्हें तो शुकगुजार होना चाहिए।
अथवा
106.
तुम जैसे अव्घल आने वालों की विजय-लिप्सा हमारे पिछड़ने से तृप्त हो सकती है।
अथवा
107. यही कूर तृप्ति धीरे-धीरे तुम्हें उस दलदल में लिए चली जाती है, जो यह दौड़ दौड़ता नहीं।

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन किसका अंश है?
उत्तर :
प्रस्तुत कथन भंबल दा द्वारा अशोक दा को लिखे गए पत्र का अंश है।

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा ने चिट्री में लिखा था कि अगर उनकी पीठ पर परिवार का बोझ नहीं होता तो वे भी जिंदगी की दौड़ में आगे निकल सकते थे। खैर, दौड़ में इन सब बातों को कोई अहमियत नहीं देता है। जो तेज दौड़ने वाले हैं वे धीमी चाल वालों को ट्रैक पर देखकर ही गुस्से तथा घृणा से भर जाते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि इन्हीं फिसड्डी लोगों के कारण वे विजयी होते हैं। जो सही तरीके को अपना कर दौड़नेवाले नहीं हैं – वे भला इसकी कीमत क्या समझ पाएँगे।

108. वह चुपचाप देखता आया है साँड़-युद्ध को।
अथवा
109. तप्त चटखारे ले-लेकर देखता आया है।
अथवा
110. आज वही दल म्यूजिकल चेयर जैसे खेल रचाता है।
अथवा
111. इसके नए-नए संस्करण करता है।
अथवा
112. कामुक कूर वर्ग उनका रस लेते हुए आघाता नहीं।
अथवा
113. पिछले कई सालों से मैं भी रस ले-लेकर इसी वर्ग की मानसिकता को देखता रहा हूँ।

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प्रश्न :
वक्ता कौन हैं ?
उत्तर :
वक्ता लेखक हैं।

प्रश्न :
‘वह’ कौन है?
उत्तर :
वह कामुक क्रूर वर्ग है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गय्यांश का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लेखक ने यह अनुभव किया है कि समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो सुख-सुविधाओं से पूर्ण है। उसकी कामुकता ही साँड़-युद्ध, ग्लैडियेटर्स से लेकर म्यूजिकल चेयर जैसे खेलों को जन्म देता है। वे खुद खेलों में शामिल नहीं होते बल्कि खेलों से अपनी कामुकता को शांत करते हैं। लेखक भी मजे लेकर कई सालों से कामुक-कूर वर्ग की इस मानसिकता को देखता आ रहा है।

114. कह नहीं सकता, तुम आओगे या नहीं।
अथवा
115. इस छोटे-से मकान पर हक मत जतलाना।
अथवा
116. हम दोनों ‘टग ऑफ वार’ के दोनों ओर शक्ति आजमाइश करते रहे हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन किसका है?
उत्तर :
प्रस्तुत कथन भंबल दा का है।

प्रश्न :
‘हम दोनों’ से कौन संकेतित हैं?
उत्तर :
हम दोनों से भंबल दा और अशोक दा संकेतित हैं।

प्रश्न :
‘टग ऑफ वार’ क्या है ?
उत्तर :
‘टग ऑफ वार’ रस्साकशी (अपनी-अपनी ओर रस्सी खींचना) का खेल है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब माँ की मृत्यु हुई तो उस समय भी अशोक दा विदेश में थे। भंबल दा इसलिए अपने पत्र में कहते हैं कि न जाने उसकी मृत्यु के समय भी आ पाएँगे या नहीं। अगर आ भी जाएँ तो छोटे-से मकान पर अपना हक नहीं जमाने को कहते हैं। शायद यह मकान भंबल दा जैसे किसी व्यक्ति के काम आ जाए।

जीवन भर दोनों रस्साकशी का खेल खेलते रहे- इस खेल में भी भंबल दा हार गए। आगे वे कहते हैं कि यदि वे भी तेज-तर्रार होते, गलत-सही की परवाह किए बिना दौड़ जीतने में लगे रहते तो उनकी भी उम लंबी होती। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस रस्साकशी के खेल में भी भंबल दा अशोक दा से हार गए।

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117. निश्चय ही मेरी सम्बद्धता अपने दल के साथ है।

प्रश्न :
वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता भंबल दा हैं।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा ने मृत्यु से पहले लिखे गए पत्र में लिखा था कि वे हमेशा उन लोगों के साथ हैं जो भले ही दौड़ में नहीं जीत पाए हों लेकिन कभी बेईमानी नहीं की, किसी को लंगी नहीं मारी और न ही कभी गलत ट्रैक पकड़।। वे इन लोगों के साथ हैं जो शान नहीं, सम्मान की जिंदगी जीना चाहते हैं।

118. मैं भी तुम्हारी तरह होता तो तुम्हारे जैसा दीर्घायु होता।
अथवा
119. आठ साल ज्यादा जी लोगे यही न?
अथवा
120. जिस जुनून में जिया, उसकी तासीर का एक क्षण भी तुम्हारे वर्षों के तमाम ताम-झाम के सालों से उम्दा है।
अथवा

121. हो सके तो चखककर कभी देखना।

प्रश्न :
रचता का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना का नाम ‘धावक है।’

प्रश्न :
‘मैं’ और ‘तुम्हारी’ से कौन संकेतित हैं?
उत्तर :
‘मै’ से भंबल दा और ‘तुम्हारी’ से अशोक दा संकेतित हैं।

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प्रश्न :
वक्ता इस बात को किस माध्यम से कहता है?
उत्तर :
वक्ता इस बात को पत्र के माध्यम से कहता है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भंबल दा ने मृत्यु से पहले लिखे पत्र में अशोक दा को लिखा कि अगर वे भी गलत ट्रैक पकड़ते तो वे भी दीर्घायु होते। लेकिन गलत ट्र्क पकड़ने पर भी इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी कि आठ वर्ष ज्यादा जी लेंगे। उन्होने जितना भी जीवन जिया सम्मान के साथ जिया। उन्होंने जिस जुनून के साथ जिंदगी को जिया, उसमें जो संतुष्टि मिली, उसका एक क्षण भी तुम्हारे लिए दुर्लभ है। अगर अपनी ताम-झाम वाली जिंदगी से कभी फुरसत मिले तो उसे चखकर देखना- तब तुम्हें दोनों की जिंदगी के अंतर का पता चलेगा।

122. मगर इस बार भंबल दा इससे पहले ही आगे बढ़ गए हैं।
अथवा
123. लगता नहीं है कि भंबल दा नहीं रहे।
अथवा

124. लगता है दौड़ते हुए दृप्टि सीमा के पार चले गए हैं।

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार संजीव हैं।

प्रश्न :
कौन दृप्टिसीमा के पार चले गए हैं?
उत्तर :
भंबल दा दृश्शिसीमा के पार चले गए हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पप्ट करें।
उत्तर :
जीवन में भंबल दा कभी प्रतियोगिता नहीं जीत पाए लेकिन इस बार की दौड़ में वे आशोक दा से आगे निकल गए। जन्म में भले ही वे दो वर्ष पीछे रह गए हों पर मृत्यु की दौड़ में उन्होंने अशोक दा को कम से कम आठ वर्ष पीछे छोड़ दिया। भंबल दा इस दुनिया से गुजर गए लेकिन लगता नहीं है कि वे नहीं रहे। ऐसा लगता है कि दौड़ दौड़ते हुए इतनी दूरी तक पहुँच गए हैं जो हमारी देखने की सीमा से परे है। इस बार वे सबसे आगे निकल गए हैं।

WBBSE Class 10 Hindi धावक Summary

लेखक – परिचय

कथाकार संजीव का जन्म 6 जुलाई सन् 1947, सुत्लानपुर (उत्तर प्रदेश) के बाँगरकलाँ गाँव में हुआ था।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक 1

इनकी शिक्षा-दीक्षा पध्चिम बगाल में हुई थी जहाँ से उन्होंने रसायन-शास में स्नातकोत्तर के समकक्ष डिग्री हासिल की। सेन्ट्रल ग्रोथ वर्क्स (इस्का) कुल्टी (पश्चिम बंगाल) में वर्षों रसायनज्ञ के रूप में कार्य करने के बाद फिलहाल स्वतन्न्र लेखन के कार्य से जुड़े हुए हैं। समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य के जाने-माने कथाकार हैं। वे अपने शोधपरक लेखन और वर्जित विषयों के अवगाहन के लिए विख्यात हैं। उनके आठ उपन्यास और सौ से अधिक कहानियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विविध विषयों और विविध विधाओं में वे लगातार लेखनरत हैं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक

प्रमुख रचनाएँ – तीस साल का सफरनामा, आप यहाँ हैं, भूमिका और अन्य कहानियाँ, दुनिया की सबसे हसीन औरत, प्रेतमुक्ति, प्रेरणास्तोत और अन्य कहानियाँ, ब्लैक होल, खोज, दस कहानियाँ, गति का पहला सिद्धान्त, गुफा का आदमी, आरोहण (कहानी-संग्रह), किशनगढ़ के अहेरी, सर्कस, सावधान! नीचे आग है, धार, पाँव तले की दूब, जंगल जहाँ शुरू होता है, सूत्रधार (उपन्यास), रानी की सराय (किशोर उपन्यास), डायन और अन्य कहानियाँ (बालसाहित्य)

सम्मान – प्रथम कथाक्रम सम्मान (1997), अन्तर्राष्ट्रीय इन्दु शर्मा सम्मान (2001) (लन्दन), भिखारी ठाकुर सम्पान (2004), पहला सम्मान (2005) । उन्हें श्रीलाल शुक्ल स्पृति सम्मान (2013) से सम्मानित किया गया है।

शब्दार्थ

पृष्ठ संख्या – 133

  • ध्वज = झंडे।
  • चूर्ण = पाउडर ।
  • अल्पना = जमीन पर चूने से बनाई गई कलाकृति।
  • अलंकृत = सजा हुआ।
  • उथलाथी = उमड़ती।
  • तमाम = अनेक।
  • चीफ गेस्ट = मुख्य अतिथि।
  • अगवानी = आगे बढ़कर स्वागत करना। रिसीव-लेने।
  • इंटरनेट = मनोरंजन।
  • चौकन्ना = सावधान।
  • बाबूक्लास = अधिकारी वर्ग।
  • हधिया = अधिकार।
  • नगण्य = सामान्य।
  • कोथाय = कहाँ हैं ?
  • धावक = दौड़ने वाले।
  • ऐन वक्त = सही समय।
  • खब्ती = सनकी, पागल।
  • अनचाहे = बिना चाहे।
  • अखर = महसूस।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक

पृष्ठ संख्या – 134

  • लौंग जम्प = लम्बी कूद ।
  • हाई जम्प = ऊँची कूद।
  • जेबलिन थो = भाला फेंकना।
  • डिस्क थ्रो = पहिया फेंकना।
  • बहिष्कृत = बाहर।
  • मायूसी = निराशा।
  • न्यूनतम मानक = कम से कम नियम ।
  • पार्टीसिपेट = भाग लेना, हिस्सा लेना।
  • ललकार = चिल्ला कर पुकारना, हौसला बढ़ाना।
  • क्लांति = पकावट ।
  • आश्वस्त = निध्रिंत।
  • आक्रोश = गुस्सा।
  • बेकाबू = नियंत्रण से बाहर।
  • वी. आई. पी. = अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्ति।
  • ट्रैक = वह रास्ता जिस पर धावक दौड़ते हैं।
  • रूतबे = शान।
  • खिलाफ = विरुद्ध।
  • खटराग = पुरानी बातें।
  • रियाज = अभ्यास।
  • समग्रवत = पूरे तौर पर।
  • कस्बे = गाँव।

पृष्ठ संख्या – 135

  • बुलवर्कर = कसरत करने का यंत्र।
  • चरितार्थ = सही।
  • अपवाद = नियम के विरुद्ध।
  • घुड़कियाँ = धमकी।
  • फब्तियाँ = व्यंग्य।
  • प्रतिवाद = विरोध।
  • महज = केवल।
  • अतिक्रमण = पार करना।
  • शिनाख्त = पहचान।
  • मुखरता = वाचालपन, अधिक बोलना।
  • हुलिया = हालत, दशा।
  • तुच्छ = छोटे।
  • फासला = दूरी।
  • चौकियाँ = छलाँग।
  • अदनी = छोटी।
  • देशान्तर = देश के बाहर, विदेश।
  • क्रम = सिलसिला।
  • गृहत्याग = घर छोड़कर ।
  • जुगाड़ = व्यवस्था।
  • पापड़ें बेलना = कष्ट सहना।
  • गाहे-बेगाहे = जब-तब।
  • कूच = विदा।
  • गरिमा = प्रतिष्ठा।
  • खैरात = दान।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक

पृष्ठ संख्या – 136

  • क्रूरता = कठोरता।
  • खुदर्गी = स्वार्थी ।
  • परस्सर = आपस में।
  • समता = बराबरी।
  • द्योतक = प्रतीक ।
  • सेलेक्शन = चुनाव।
  • सहकर्मियों = साथ काम करने वाले।
  • प्रत्यक्ष = सामने।
  • परोक्ष = पीछे।
  • ग्रेजुएसी = बी. ए. ।
  • पोस्ट ग्रेजुएसी = एम.ए.।
  • आश्रिता = निर्भर।
  • कदर = तरह ।
  • मज़हब = धर्म ।
  • शरीक = शामिल, सम्मिलित।
  • कसर = कोशिश।
  • मरखप कर = कठिनाई से।
  • सालती = लगती।
  • वार्ताएँ = बातचीत।
  • तनहाइयों = अकेलपना।
  • निरंतर = लगातार।
  • शुभचिन्तक = भला चाहने वाला।
  • लिहाज= कारण।
  • आत्मसात = अपनाना।
  • समकक्षप्राय = बराबरी का होना।
  • अंजाम = परिणाम।

पृष्ठ संख्या – 137

  • उतरा = ऊपर आ जाना।
  • जायज = सही।
  • नाजायज = गलत।
  • रिटर्न = बदले में।
  • एवार्ड = पुरस्कार।
  • अवाक् = आश्चर्यचकित।
  • संदर्भ = कौन-सी बात, किसके बारे मे कही जा रही है।
  • शीर्ष = ऊँचाई।
  • खटारा खड़काते = टूटी-फूटी साइकिल की आवाज के साथ।
  • रूचि = इच्छा।
  • बाँछित = मनचाही।
  • राजी = तैयार।
  • रूह = आत्मा।
  • आचरण = व्यवहार ।
  • विरक्ति = नफरत।
  • वहन = उठाना।
  • भावी = होने वाली ।
  • हल = समाधान, सुलझा।
  • अहसानमंद = उपकार को मानना।
  • कुबूल करना = मंजूर।
  • आशंका = बुरे होने का भय।
  • सांघातिक = बड़ी।
  • जोखिम् = खतरे।
  • निष्कृति = निकलने।
  • राह = रास्ता ।
  • तलाश = खोज।
  • प्रकरण = विषय।
  • तले = नीचे ।
  • सरकता = खिसकता।
  • नियतिवादी = भाग्यवादी, किस्मत को मानने वाला।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 5 धावक

पृष्ठ संख्या – 138

  • लहजे = तरीके
  • झांइयों = झुर्रियों।
  • जायजा = निरीक्षण।
  • अचकचाकर = हड़बड़ा कर
  • ग्रहण = लेने ।
  • विदूषक = जोकर, लोगों को हँसानेवाला।
  • खिसिया-सी = गुस्से की तरह।
  • तेवर = भुकुटि, भौंगों पर बल /लकीर पड़ जाना।
  • विद्रूण = कोध भरा चेहरा।
  • पुरस्कार-लिप्सा = पुरस्कार पाने का लालच।
  • मुबारक = बधाई।
  • मवाद = घाव से निकलने वाली पीव।
  • शिष्ट = सभ्य।
  • हतबुद्धि = बुद्धि का काम न करना।
  • दीर्घा = कतार।
  • स्ट्रोक = हंदय का आघात (हार्ट अटैक)।

पृष्ठ संख्या – 139

  • छहर = फैल।
  • गुम = गायब।
  • जर्द-सी = पीले रंग की।
  • निधन = मृत्यु।
  • स्मृतियों = यादों।
  • कोटर = वृक्ष के तने का खोखला भाग जिसमें पक्षी अपना घोंसला बना लेते हैं।
  • घुटकर = दबकर। पूर्व = पहले।
  • अजूबा-सा = अजीब-सी चीज।
  • वजूद = अस्तित्व।
  • शिनाख्त = पहचान।
  • गुजर गए = मगर गए।
  • जुनून = पागलपन।
  • अवान्तर = विषय से अलग।
  • शुक्रगुजार = अहसानमंद।
  • अव्वल = प्रथम।
  • विजय-लिप्सा = जीतने का लालच।
  • तृप्त = संतुष्ट।
  • रस = आनंद।
  • तप्त = गर्म।
  • आगात नहीं = संतुष्ट नहीं होता।
  • होड़ = प्रतियोगिता।
  • एक – दूजे = एक-दूसरे।
  • विभेद = अंतर।
  • छद्म = छल।

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पृष्ठ संख्या – 140

  • अस्वस्थ = बीमार ।
  • पनाह = आसरा ।
  • हक = अधिकार ।
  • आजमाइश = आजमाना।
  • अभिजात = उच्च वर्ग ।
  • दीर्घायु = लंबी उम्रवाला।
  • तासीर = असर।
  • तमाम = अनेक ।
  • उम्दा = अच्छा।
  • प्रतिवाद = विरोध।
  • परिदृश्य = दृश्य, नज़ारा।
  • दृष्टि सीमा = जहाँ तक दिखाई पड़े।

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पुस्तक की आत्मकथा

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • उपयोगिता
  • राम की जीवन गाथा
  • उपसंहार।

मैं हिन्दी-साहित्य का एक प्रमुख महाकाव्य हूँ, मेरी रचना तुलसीदास ने की थी । उस महापुरुष ने मेरी रचना कर हिन्दी-साहित्य को धन्य बनाया । मैं भी अन्य पुस्तकों की भाँति ही एक पुस्तक हूँ, लेकिन मेरा सौभाग्य इसी में है कि मेरे प्रमुख पात्र, मर्यादा एवं शील सम्पन्न प्रभु श्री रामचन्द्रजी हैं । मुझे कई बार पढ़ने के बाद भी पाठकगण बार-बार पढ़ना चाहते हैं। राम का नाम लेने से मुक्ति मिल सकती है, किन्तु मुझमें इस प्रकार की कोई शक्ति विद्यमान नहीं है जिससे मैं मनुष्यों को मोक्ष दे सकूँ । यह शक्ति तो प्रभु श्री रामचन्द्र जी में है, जो प्रत्येक युग में अवतार लेकर लोगों के दु:ख-दर्द का हरण करते हैं तथा अत्याचारियों का विनाश करते हैं। मेरे रचयिता के शब्दों में –

जब-जब होहि धरम की हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी ।
तब-तब धर प्रभु मनुज शरीरा, हरहि कृपा निधि सज्जन पीरा ।

मुझे सामान्य जन ही नहीं, बड़े-बड़े ॠषि-मुनि एवं ज्ञानी महात्मा जन भी अपने घर में श्रद्धा और भक्ति के साथ रखते हैं। वे लोग प्रभु श्री रामचन्द्रजी की गाथा पढ़ने एवं सुनने के लिए मुझे अपने पास रखते हैं। मेरी सुरक्षा के लिए वे मुझे लाल रंग के आवरण से हमेशा ढँककर रखते हैं तथा पढ़ते समय वे मुझे खोलकर एक रेहल नामक सुविधाजनक आसन पर रख देते हैं। यदि आपको मेरे सम्बन्ध में और अधिक जानकारी प्राप्त करनी है तो, आप उन महात्माओं से नि:संकोच पूछ सकते हैं जो लोग सदैव मुझे अपने पास रखते हैं।

मैं भर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र की जीवन-गाथा हूँ। इसीलिए लोग मुझे ‘रामचरित-मानस’ कहते हैं। श्री रामचन्द्र परमेश्वर हैं। शक्ति, शील और सौन्दर्य-उनकी तीन विभूतियाँ हैं।
मेरे रचयिता ने मुझे शंकर-पार्वती के संवाद के रूप में प्रस्तुत किया है। शिव पार्वती से कहते हैं :-

उमा कहौं मैं अनुभव अपना।
बिनु हरिभजन जगत सब सपना।।

श्रीराम भी शिव का पूजन करते हैं और कहते हैं :-

शिव द्रोही मम दास कहावा ।
सो नर मोहि सपनेहु नहि भावा ।।

श्री रामचन्द्रजी ने तो यहाँ तक कह डाला है कि-

शंकर प्रिय मम द्रोही शिव द्रोही ममदास ।
सो नर करहि कल्प-भर घोर नरक मँह वास ।

मुझसे अत्याचारी राजा भी भयभीत होते हैं, क्योंकि मैं उन्हें चेतावनी देते हुए यह कहती हूँ कि-

जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी ।
सो नृप अवसि नरक अधिकारी ।

मेरे अन्दर वे तमाम गुण उपलब्ध हैं जिनका अनुकरण कर व्यक्ति एक आदर्श नागरिक बन सकता है। माता का पुत्र के साथ, पिता का पुत्र के साथ, भाई का भाई के साथ, स्वामी का सेवक के साथ, राजा का प्रजा के साथ, कैसा सम्बन्ध होना चाहिए इन सबका वर्णन मुझमें निहित है ।

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गंगा की करुण गाथा

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • गंगा के प्रदूषित होने के कारण
  • प्रदूषण से बचाने के उपाय
  • उपसंहार।

मैं गंगा हूँ – वही गंगा, जिसे भागीरथ ने स्वर्ग से धरती पर उतारा था और जिसमें सगर पुत्रों का उद्धार किया था। तब से लेकर आज तक मैं लोगों की आस्था तथा श्रद्धा का पात्र हूँ । पृथ्वी पर मेरा जन्म भूगोलवेताओं के अनुसार हिमालय की गोद से हुआ । गंगोत्री से लगभग 15 मील दूर गोमुख से मैं प्रकट होती हूँ । मेरे बारे में यह विश्वास आदिकाल से हो चला आ रहा है कि गंगा का जल कभी खराब नहीं होता। समय बदलने के साथ ही मेरी स्थिति में भी परिवर्तन आया। अब मेरा जल इतना प्रदूषित हो चुका है कि लोग गंगाजल की बजाय ‘मिनरल वाटर’ को अधिक महत्व देने लगे हैं।

आजकल मुझमें न जाने कितने ही प्रकार की गंदगी, दूषित जल और अनेक प्रकार के जहरीले पदार्थ बहा दिए जाते हैं । जैसे-जैसे कल-कारखानों, उद्योगों की संख्या बढ़ती जा रही है, मेरा जल प्रदूषित होता जा रहा है । मेरे तट के पास के कारखानों से टनों-टन कूड़ा-करकट तथा दूषित जल मेरी धारा में प्रतिदिन बहाए जा रहे हैं । जो लोग मुझमें स्नान करने आते हैं, जल को प्रदूषित करने में उनका भी कम योगदान नहीं हैं। वे मेरे जल में साबुन, गंदे कपड़े धोने, जानवरों को नहलाने तथा मरे जानवरों को बहाने के साथ लाश को भी बहा देते हैं। इससे मेरा जल दिन-प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है ।

वैज्ञानिकों की गंभीर चेतावनी के बाद सन् 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी में गंगाजल के शुद्धिकरण की दिशा में लोगों को जागृत करने के लिए कदम उठाए । लेकिन उनकी मृत्यु के कारण कुछ समय के लिए यह कार्यक्रम थम-सा गया। 5 जनवरी, 1985 को राजीव गाँधी के समय में ‘केन्द्रीय गंगा प्रधिकरण’ की स्थापना की गई तथा 292 करोड़ रुपए का एक वृहत् कार्यक्कम बनाया गया । इस संदर्भ में पहला गंगा-शद्धिकरण का पहल कार्य हरिद्वार तथा ॠषिकेश और फिर वाराणसी में हुआ । मेरी शुद्धिकरण के प्रति केवल भारत-सरकार ही नहीं बल्कि कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का भी योगदान है । इसमें मुख्य रूप से नीदरलैण्ड, ब्रिटेन और फ्रांस सहयोगी हैं ।

यदि लोगों तथा सरकार का मेरे प्रति यह सहानुभूतिपूर्ण रवैया रहा तो निश्चय ही मैं अपनी खोई हुई गरिमा को फिर से पाने में सफल हो सकूंगी । लेकिन अपने लाभ के लिए मैं उद्योग-धंधों को भी नष्ट नहीं करना चाहती । ऐसी व्यवस्था की जाय जिससे कारखाने और उद्योग तो बने रहें लेकिन उनसे उत्पन्न प्रदूषण का खात्मा हो जाय । जिस दिन ऐसा होगा, उसी दिन मेरी करुण गाथा का अंत होगा लेकिन क्या कभी ऐसा हो पाएगा ?

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जल संरक्षण

प्रस्वावना :- धरतो पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिये जल का संरक्षण और बचाव बहुत जरूरी होता है क्योंकि बिना जल के जीवन संभव नहीं है। पूरे बहाण्ड में एक अपवाद के रुप में धरती पर जीवन चक्र को जारी रखने मे जल मदद करता है क्योंकि धरती इकलौता अकेला ऐसा ग्रह है जहाँ पानी और जीवन दोनों मौनूद है।

जल का संरक्षण :- पानी की जररत हमारे जीवन भर है इसलिये इसको बचाने के लिये केवल हम ही जिम्मेदा है। संयुक्त राष्द्र के संचालन के अनुसार, ऐसा पाया गया है कि राजस्थान में लड़कियाँ स्कूल नहीं जाती है क्योकि उन्द पानी लाने के लिये लंबी दूरी तय करनी पड़ती है जो उनके पूरे दिन को खराब कर देती है इसलिये उन्हें किसी और का के लिये समय नहीं मिलता है। राश्रेय अपराध रिकार्डस्यूरो के सर्वेक्षण के अनुसार, ये रिकाई किया गया है कि लगभा 16,632 किसान (2,369 महिलाएँ) आत्महत्या के द्वारा अपने जीवन को समाप्त कर चुके हैं, हालांकि, 14.4 मामले सूखे के कारण घटित हुए हैं। इसलिये हम कह सकते हैं कि भारत और दूसरे विकासशील देशों में अशिक्षा, आत्महत्या लड़ाई और दूसरे सामाजिक मुद्दो का कारण भी पानी की कमी है। पानी की कमी वाले ऐसे क्षेत्रों में, भविष्य पीढ़ी के बच्हे अपने मूल शिक्षा के अधिकार और खुशी से जीने के अधिकार को प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

भारत के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, पानो की कमी के सभी समस्याओं के बारे में हमें अपने आपको जागरा क रखना चाहिये जिससे हम सभी प्रतिज्ञा ले और जल संरक्षण के लिये एक-साथ आगे आये। ये सही कहा गया है कि सभी लोगों का छोटा प्रयास एक बड़ा परिणाम दे सकता है जैसे कि बूंद-बूंद कर के तालाब, नदी और सागर बन सकता है।

जल को कैसे बचायें :-

रोजाना पानी को कैसे बचा सकते है उसके लिये हमने यहाँ कुछ बिन्दु आपके सामने प्रस्तुत किये हैं:

  • लोगों को अपने बागान या उद्यान में तभी पानी देना चाहिये जब उन्हे इसकी जरुरत हो।
  • कार को धोने के लिये पाइप की जगह बाल्टी और मग का इस्तेमाल करें।
  • हमें फलों और सब्जियों को खुले नल के बजाय भरे हुए पानी के बर्तन में धोना चाहिये।
  • बरसात के पानी को जमा करना शौच, उद्यानों को पानी देने आदि के लिये एक अच्छा उपाय है जिससे स्बच्छ जल को पीने और भोजन पकाने के उद्देश्य के लिये बचाया जा सकता है।
  • फुहारे से नहाने के बजाय बाल्टी और मग का प्रयोग करें।
  • हमें हर इस्तेमाल के बाद अपने नल को ठीक से बंद करना चाहिये।
  • जागरुकता फैलाने के लिये हमें जल संरक्षण से संबंधित कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिये।

निष्कर्ष :- धरती पर जीवन का सबसे जरूरी स्रांत जल है क्योंकि हमें जीवन के सभी कार्यों को निष्पादित करने के लिये जल की आवश्यकता है जैसे पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़ा धोने, फसल पैदा करने आदि के लिये। बिना इसको पद्निषि किये भविष्य की पीढ़ी के लिये जल की उचित आपूर्ति के लिये हमें पानी को बचाने की जरूरत है। हमें पानी की बर्बादी को रोकना चाहिये, जल का उपयोग सही ढंग से करें तथा पानी की गुणवत्ता को बनाए रखें।

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देशप्रेम

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • देशप्रेम की स्वाभाविकता
  • देश-प्रेम का महत्व
  • उपसंहार।

देशप्रेम वह पुण्य क्षेत्र है, अमल असीम त्याग से विलसित ।
आत्मा के विकास से जिसमें, मानवता होती है विकसित ।।

प्रस्तावना :- मनुष्य जिस देश अथवा समाज में पैदा होता है, उसकी उन्नति में सहयोग देना उसका प्रथम कर्त्रव्य है, अन्यथा उसका जन्म लेना व्यर्थ है। देशप्रेम की भावना ही मनुष्य को बलिदान और त्याग की प्रेरणा देती है । मनुष्य जिस भूमि पर जन्म लेता है, जिसका अन्न खाकर, जल पीकर अपना विकास करता है उसके प्रति प्रेम की भावना का उसके जीवन में सर्वोच्च स्थान होता है । इसी भावना से ओत-प्रोत होकर कहा गया है-

‘जननी जन्मभूमिश्च सवर्गादपि गरीयसी’ (अर्थात् जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।)

देशप्रेम की स्वभाविकता : मनुष्य तथा पशु आदि जीवधारियों की तो बात ही क्या, फूल-पौधों में भी अपने देश के लिए मिटने की चाह होती है । पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने पुष्प के माध्यम से इस अभिलाषा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया है-

मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर तुम देना फेंक
मातृभूमि को शीश चढ़ाने जिस पथ जाएँ वीर अनेक ।

अपने देश अथवा अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम होना मनुष्य की एक स्वाभाविक भावना है ।
देश-प्रेम का महत्व :- देश-प्रेम विश्व के सभी आकर्षणों से बढ़कर है । यह एक ऐसा पवित्र तथा सात्विक भाव है जो मनुष्य को लगातार त्याग की प्रेरणा देता है । देश-प्रेम का संबंध मनुष्य की आत्मा से है । मानव की हार्दिक इच्छा रहती है कि उसका जन्म जिस भूमि पर हुआ है, वहीं पर वह मृत्यु को वरण करे । विदेशों में रहते हुए भी व्यक्ति अंत समय में अपनी मातृभूमि का दर्शन करना चाहता है।

देशप्रेम की भावना मनुष्य की उच्चतम भावना है । देश-प्रेम के सामने व्यक्तिगत लाभ का कोई महत्व नहीं है । जिस मनुष्य के मन में देश के प्रति अपार प्रेम और लगाव नहीं है, उस मानव के हृदय को कठोर, पाषाण-खंड कहना ही उपयुक्त होगा । इसीलिए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण के अनुसार –

भरा नहीं है जो भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं ।
हृदय नहीं पत्थर है वह, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ।।

जो मानव अपने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर देता है तो वह अमर हो जाता है, कितु जो देश-प्रेम तथा मातृभूमि के महत्व को नहीं समझता, वह तो जीवित रहते हुए भी मृतक जैसा है-

जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है ।
वह नर नहीं, नर-पशु निरा है और मृतक समान है ।।

केवल राष्ट्र हित में राजनीति करने वाला व्यक्ति ही देश-प्रेमी नहीं है । स्वस्थ व्यक्ति सेना में भर्ती होकर, मजदूर, किसान व अध्यापक अपना कार्य मेहनत, निष्ठा तथा लगन से करके और छात्र अनुशासन में रहकर देश-प्रेम का परिचय दे सकते हैं।

उपसंहार :- प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है कि वह अपना सब कुछ अर्पित करके भी देश की रक्षा तथा विकास में सहयोग दें । हम देश में कहीं भी रहें, किसी भी रूप में रहें, अपने कार्य को ईमानदारी से तथा देश के हित को सर्वोपार मानकर करें । आज जब देश अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे समय में प्रत्येक नागरारक का कर्त्तव्य है कि हम अपने व्यक्तिगत सुखों का त्याग करके देश के सम्मान की रक्षा तथा विकास के लिए तन-मन-धन का अर्पित कर दें ।
प्रत्येक नागरिक के लिए छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद के ये शब्द आदर्श बन जाएँ –

जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे या हर्ष ।
निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।।

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विद्यार्थी और अनुशासन
अथवा
छात्र जीवन में अनुशासन का महत्व

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • अनुशासन न होने से उत्पन्न समस्या
  • अनुशासन से लाभ
  • विद्यार्थियो के लिये अनुशासन की अनिवार्यता
  • उपसंहार ।

अनु-शासन, इन दो शब्दों के मेल से ‘अनुशासन’ शब्द बना है । इसमें ‘अनु’ उपसर्ग का अर्थ है-पश्चात, बाद में साथ आदि । ‘शासन’ का अर्थ है नियम, विधान, कानून आदि । इस प्रकार दोनों के मेल से बने अनुशासन का सामान्य एवं व्यावहारिक अर्थ यह हुआ कि व्यक्ति जहाँ भी हो, वहाँ के नियमों, उपनियमों तथा कायदे-कानून के अनुसार शिष्ष आचरण करे । एक आदमी अपने घर में अपने छोटों या नौकर-चाकरों के साथ जिस तरह का व्यवहार कर सकता है वैसा घर के बाहर अन्य लोगों के साथ नहीं कर सकता । घर से बाहर समाज का अनुशासन भिन्न होता है ।

इसी तरह दफ्तर में आदमी को एक अलग तरह के माहौल में रहना और वहाँ के नियम-कानूनों का पालन करना होता है। इसी तरह मन्दिर का नियम-अनुशासन अलग होता है, बाजार एवं मेले का अनुशासन अलग हुआ करता है । ठीक इसी तरह एक छात्र जिस विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने जाता है, वहाँ उसे एक अलग तरह के माहौल में रहना पड़ता है। वहाँ का अनुशासन भी उपर्युक्त सभी स्थानों से सर्वथा भित्न हुआ करता है । अतः व्यक्ति जिस किसी भी तरह के माहौल मे हो, वहाँ के मान्य नियमों, सिद्धान्तों का पालन करना उसका कर्त्तव्य हो जाता है। इस कर्त्तव्य का निर्वाह करने वाला व्यक्ति ही अनुशासित एवं अनुशासनप्रिय कहलाता है ।

सन् 1974 ई० की समग्रक्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण तथा आपातकाल विरोधी आंदोलन के नेताओं ने शासन के विरुद्ध विद्यार्थी वर्ग का खुलकर प्रयोग किया। विरोधी आंदोलनों के परिणामस्वरूप मई, सन् 1977 ई० के बाद तो अनुशासनहीनता चारों ओर फैलती जा रही है। स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात आपातकाल से पहले तक का समय ऐसा था जब स्कूल-कॉलेजों में अनुशासन का पूर्ण रूप से पालन कर छात्रों में गुरुजनों के प्रति श्रद्धा का भाव था। वे निर्यमित रूप से एकाग्रचित होकर अध्ययन करते थे । अब तो छात्र आये दिन कोई न कोई उपद्रव खड़ा करते रहते है ।

अनुशासन तोड़ने पर शारीरिक दण्ड देना कानूनी अपराध है। तब विद्यार्थी को किस तरह डराकर रखा जाये ? तुलसीदास जी ने कहा है, ‘भय बिनु होय न प्रीति।’ जब भय नहीं तो विद्रोह होना स्वाभाविक है।

आज के स्वार्थपूर्ण, अस्वस्थ वातावरण में विद्यार्थियों को शांत और नियम में रहना अस्वाभाविक जान पड़ता है। अस्वस्थ प्रवृत्ति के विरुद्ध विद्रोह उसकी जागरूकता का परिचायक है। जिस प्रकार अग्नि, जल और अणुशक्ति का रचनात्मक तथा विध्वंसात्मक दोनों रूपों में प्रयोग सम्भव है, उसी प्रकार युवा- शक्ति का उपयोग भी ध्वंसात्मक और रचनात्मक दोनों रूपों में किया जा सकता है। युवा-शक्ति का रचनात्मक उपयोग ही राष्ट्र-हित में वांछनीय है । यह तभी सम्भव है जब शिक्षक की भूमिका गरिमापूर्ण हो तथा राजनीति को शिक्षा से दूर रखा जाये।

WBBSE Class 10 Hindi रचना शैक्षिक निबंध

शिक्षक दिवस

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • डा० सर्वप्त्नी राधाकृष्णन के जन्मोस्सब के रूप में
  • उपसंहार।

डॉ० सर्वपल्ती राधाकृष्णन पसिद्ध दार्शनिक, शिक्षा-शाखी एवं संस्कृत विधय के प्रकाण्ड विद्वान थे। सन् 1962 से 1967 ई. तक वे भारत के राश्रपति भौ रहे । राश्पति पद पर मतिष्डत होने से पहले वे शिक्षा जगत् से जुडेे हुए थे। मे दर्शनशाख के प्रोफेसर पद को अलकृत किया । सन् 1936 ई० से सन् 1939 ई. तक आवसफोर्ड विश्वविद्यालय में पूर्वों टेशों के भर्म और दर्शन के स्पालिंडन प्रोफेसर पद को सम्मानित किया। सन् 1939 से सन् 1948 हं. तक काशी हिन्दू निश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे। राप्रपति बनने के बाद इनके प्रशंसकों ने दनका जन्मदिन सार्वजनिक रूप से मनाना चाहा तो इन्होने जीवनपर्यन्त ख्यय शिक्षक रहने के कारण पाँच सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा गक्त की । तब से हर वर्ष पाँच सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

शिक्षकों को गरिमा प्रदान करने का दिन है – शिक्षक दिवस। शिक्षक राप्र के निर्माता और राप्र संस्कृति के संरक्षक Aी अध्वापक का पर्यायवाची शब्द गुरू है। उपनियद के अनुसार गु अर्थात् अंधकार और रू का अर्थ है निरोधक। अंकार का निरोध करने वाला गुरू कहा जाता है। वे शिक्षा द्वारा बालको के मन में सुसंस्कार डालते हैं तथा उनके अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर देश का अच्छा नागरिक वनाने का प्रयास करते है। राप्र के सम्पूर्ण विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक का कार्यक्षेत्र विस्तृत है। किन्तु यह दिवस प्राधमिक, माष्यमिक, उच्च तथा वरिष्ठ याध्यमिक शिक्षण संस्थाओं तक ही सीमित है।

पत्येक प्रादेशिक सरकार अपने स्तर पर शिक्षण के प्रति समर्षित और विद्यार्थियों के प्रति मेम रखने वाले शिक्षकों की सची तैदार करती है। ऐसे वरिष्ठ और योग्य शिक्षकों को मंत्रालय द्वारा 5 सितम्बर को सम्मानित किया जाता है

शिक्षक ज्ञान की कुंजी होते हैं। उनके प्रति सम्मान मदर्शिंत करने के लिये शिक्षक दिवस का अपना महत्व है। मगर आज शिक्षकों तथा छातो का रूप बदल गया है। आज शिक्षको का लक्ष्य सही दिशा और ज्ञान देने की अपेक्षा धन कमाना हो गया है। छात्र भी शिक्षक के महत्व को नहीं समझते । उनके हंदय में शिक्षक के प्रति श्रद्धा का भाव न रहकर, उन्हे उपहार देकर अपने नम्बर बढ़बाने की लालसा रखते हैं।

जिस मूल-भाव या उद्देश्य के लिये शिक्षक दिवस मनाया जाता है, वर्तमान समय में वह उद्देश्य लुप्त हो गया है। अब शिश्षक दिवस मनाने की औपचारिकता हो शेप बची है ।

यही वजह है कि आज शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। शिक्षा मात्र व्यवसाय बन कर रह गई है। शिक्षा का मुख्य उद्वेश्य शिक्षक और छात्र भूलते जा रहे हैं। आज शिक्षक को सम्मानित करना राजनीतिक दावपेंच के अतर्गत आ गया है। इसी वजह से अच्छे और अनुकरणीय शिक्षक इस सम्मान से वंचित रह जाते हैं। यदि शासकीय प्रशासन, निपक्ष भाव से योग्य शिक्षकों को ही सम्मानित करे और उन्हें पघ्यश्री जैसे अलंकारों से विभूषित करे तो शिक्षक दिवस की गरिमा बनी रह सकती है।

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हिन्दी दिवस

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • हिन्दी के अस्तित्व की सुरक्षा
  • हिन्दी की समद्धि
  • उपसंहार।

देश आजाद होने के पश्चात् संविधान सभा ने 14 सितम्बर, सन् 1949 ई० को हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित किया। संविधान के अनुच्छेद 343 में लिखा गया –
‘संघ की सरकारी भाषा देवनागरी लिषि हिन्दी होगी और संघ के सरकारी प्रयोजनों के लिये भारतीय अंकों का अतर्राध्रीय रूप होगा । अधिनियम के खण्ड दोमें लिखा गया कि इस संविधान के लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी प्रयोजनों के लिये अंग्रेजी का प्रयोग सहायक भाषा के रूप में होता रहेगा। अनुच्छेद (ख) धारा तीन में व्यवस्था दी गई कि संसद उक्त पंद्रह वर्ष की कालावधि के पश्चात् विधि द्वारा अंग्रेजी भाषा का (अथवा) अंकों के देवनागरी रूप का ऐसे प्रयोजन के लिये प्रयोग उपबन्धित कर सकेगी जैसे की ऐसी विधि में उल्लेखित हो।

इसके साथ ही अनुच्छेद एक के अधीन संसद् की कार्यवाही हिन्दी अथवा अंग्रेजी में सम्पन्न होगी। 26 जनवरी, सन् 1965 ई० के बाद संसद की कार्यवाही केवल हिन्दी में ही निष्पादित होगी, बशर्ते संसद कानून बनाकर कोई अन्य व्यवस्था न करे।”

14 सितम्बर हिन्दी दिवस, हिन्दी के राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित होने का गौरवपूर्ण दिन है। हिन्दी दिवस, एक पर्व के रूप में मनाया जाता है। हिन्दी के प्रचार के लिए प्रदर्शनी, गोष्ठी, मेला, सम्मेलन तथा समारोहों का आयोजन किया जाता है। यह दिन हिन्दी की सेवा करने वालों को पुरस्कृत करने का दिन है। सरकारी, अर्द्धसरकारी कार्यालयों तथा बड़े उद्योगिक क्षेत्रों में हिन्दी दिवस, हिन्दी सप्ताह और हिन्दी पखवाड़ा के रूप में मनाकर हिन्दी के प्रति प्रेम प्रकट किया जाता है।

भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में हिन्दी जैसी लोकभाषा की उपेक्षा का अर्थ है लोकभावना की उपेक्षा । लोकभावना की उपेक्षा करके कोई लोकतन्त्र कैसे और कब तक टिक सकता है ? पिछले ढाई सौ वर्षों में भारत की तीन प्रतिशत आबादी भी अंग्रेजी नहीं सीख पाई। यदि अंग्रेजी सिखाई नहीं जा सकी तो क्या अंग्रेजी लादी जाती रहेगी ? यह कैसी विडम्बना है कि केवल दो प्रतिशत अंग्रेजीपरस्त लोग देश की 98 प्रतिशत जनता पर अपना भाषाई आधिपत्य जमाए हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है ।

हिन्दी के प्रति उनकी जो वचनबद्धता थी वे आज उसे भूल गये हैं। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाकर भी हिन्दी का अपमान किया गया। अंग्रेजी सहायक भाषा होकर भी उन्नति, प्रगति और समृद्धि का सोपान बन गई। अंग्रेजी को आधुनिक जीवन के लिये अनिवार्य माना जाने लगा। आज तो स्कूल-कॉलेज सभी कुकुरमुत्ते की भाँति अंग्रेजी-माध्यम में बदलते जा रहे हैं। अंग्रेजी का प्रयोग न करने वाला पिछड़ा कहलाता है। हिन्दी बोलने वालों को हेय दृष्टि से देखा जाता है। अंग्रेजी बोलने वालों को हर क्षेत्र में वरीयता दी जाती है।

हिन्दी के चापलूस, स्वार्थी और भ्रष्ट अधिकारियों ने हिन्दी के विकास और समृद्धि के नाम पर अदूरदर्शिता और विवेकहीनता का परिचय दिया है। राजकीय कोष से हर वर्ष करोड़ों रुपये हिन्दी का उपकार करने के लिए खर्च किये जाते हैं, लेकिन यह सब केवल दिखावा है ।

परिणामस्वरूप हिन्दी समृद्धशाली होने के बावजूद अपने ही घर में अपने ही लोगों द्वारा हेय दृष्टि से देखी जा रही है। हिंदी भाषी बुद्धिजीवी तथा हिन्दी समर्थक अपने स्वार्थपूर्ति के चक्कर में हिन्दी के प्रति अपनी आवाज ठीक ढंग से नहीं उठाते। भारतेंदु आदि मनीषियों ने जो सपना देखा था वह साकार नहीं हो सका –

अपने ही घर में हो रहा अपमान हिंदी का,
पैरों तले रौंदा रहा सम्मान हिंदी का ।

हिन्दी-भाषी बुद्धिजीवी हिन्दी के पक्ष में लच्छेदार भाषण तो देते हैं, मगर हिन्दी को प्रतिष्ठित करने के लिये सक्रिय रूप से कोई कार्य नहीं करते। परिणामस्वरूप बृहत रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषा होकर भी इसे वह सम्मान प्राप्त नहीं हुआ, जिसकी वह अधिकारिणी थी। राष्ट्रभाषा हिन्दी होने के बावजूद सरकारी कार्य अभी भी अंग्रेजी में होते हैं। हिन्दी में पत्र-व्यवहार तो एक प्रकार से खत्म हो गया है। आज हिन्दी की पत्र-पत्रिकायें धन तथा पाठकों के अभाव में बंद होती जा रही हैं। आजादी के पहले जितनी पत्र-पत्रिकायें निकलती थीं उनकी तुलना में आज पत्र-पत्रिकाओं की संख्या नगण्य है।

अत: हिन्दी दिवस सिर्फ एक दिखावे का पर्व बनकर रह गया है। यह आवश्यक है कि हम हिंदी के प्रति प्रेम प्रकट करें तथा हिंदी के विकास के लिये पूर्ण रूप से अपना योगदान करें । भारतवासियों को यह शपथ लेनी होगी कि स्वतंत्रता के पृर्व हिन्दी को जो आश्वासन दिया गया था, उसे सच्चे अर्थों में पूरा करेंगे और इस बात का ध्यान रखेंगे कि उसकी सहायक भाषा बनकर कोई उसे निगल न ले। ऐसा करके ही हम सच्चे अर्थों में हिन्दी दिवस मना सकेंगे और हिन्दी के प्रति अपनी निष्ठा और श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे । यह निश्चित है कि हिन्दी भाषा की ज्वलंत प्राण-शक्ति सारे विरोधों को अनायास काट देगी और भारत-भारती के रूप में प्रतिष्ठित होगी । गोपाल सिंह ‘नेपाली’ के शब्दों में –

इस भाषा में हर मीरा को मोहन की माला जपने दो ।
हिन्दी है भारत की बोली तो अपने-आप पनपने दो ।

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जीवन में खेल का महत्व
अथवा
खेल जीवन की महत्वपूर्ण अंग है

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • खेल-कूद का जीवन में महत्व
  • खेल-कूद मनोरंजन का भी उत्कृष्ट साधन है
  • उपसंहार ।

मानव-जीवन परमात्मा का सर्वश्रेष्ठ उपहार है और खेल जीवन के रस-प्राण है। खेल के बिना जीवन जड़ है। खेलमय जीवन में ही जागृति और उत्थान है। जैनेंद्र जी कहते हैं – “जीवन दायित्व का खेल है और खेल में जीवन दायित्व की प्राण-संजीवनी शक्ति है।”

वैदिक काल से ही मनुष्य की इच्छा रही है कि मेरा शरीर पत्थर के समान मजबूत हो और दिनोंदिन वह फूले-फले। इस इच्छा की पूर्ति निरोगी काया द्वारा हो सकती है जिसके लिये जरूरी है खेल।

गतिशीलता जीवन का लक्षण है और गतिशीलता निर्भर करती है स्वस्थ शरीर पर। जीवन भोग का कोश है। इंद्रियजनित इच्छा और सुख की तृप्ति के लिए चाहिए शक्ति। शक्ति के लिए जरूरी है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास खेल द्वारा बढ़ता है। खेलों के कई रूप हैं, मनोविनोद तथा मनोविज्ञान के खेल और धनोपार्जन कराने वाले खेल। मनोरंजन वाले खेलों में हैं – ताश, शतरंज, कैरम, जादुई-करिश्मे आदि। व्यायाम के खंलों में हैं – एथेलेटिक्स, कुश्ती, निशानेबाजी, घूँसेबाजी, घुड़दौड़, साइक्लिंग, जूडो, तीरंदाजी, हॉंकी, वालीबॉल, फुटबॉल, टेनिस, क्रिकेट, कबड्डी, खा-खो आदि ।

धनोपार्जन के खेलों में सर्कस, जादू के खेल तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले खेल आते हैं। मनोरंजन के खेल मानसिक व्यायाम के साधन हैं। खेल मानसिक थकावट दूर कर जीवन में नवस्कूर्ति भर देता है । खेल-कूद से मनुष्य में पूरी तन्मयता से काम करने की भावना जागृत होती है। जब कोई खेलता है तो वह जीतने के लिये अपनी पूरी शक्ति का प्रयोग करता है। इससे जीवन में किसी भी काम को करने के लिये खिलाड़ी प्रवृत्ति से काम करने का स्वभाव विकसित होता है।

खेल मनुष्य में सहनशीलता की भावना उत्पन्न करता है। खेलते वक्त लगी चांट उसे प्रतिशोध लेने की बजाय पीड़ा सहने की शक्ति देती है।

खेलने से व्यक्ति जीवन के संघर्ष में सफलता की शिक्षा भी पाता है। खेल में वह अपनी बुद्धि तथा शरीर से संघर्ष करता हुआ विजय प्राप्त करता है। यही स्वभाव उसको जीवन के संघर्षों में निर्भय होकर लड़ने तथा विजय पाने की शक्ति प्रदान करता है।

नैपोलियन को हराने वाले अंग्रेज नेल्सन ने कहा था – The war of waterloo was won in the fields of Eton, तात्पर्य यह है कि मैंने वाटरलू के युद्ध में जो सफलता पाई है उसका प्रशिक्षण ईटन के खेल के मैदान में मिला था।

अत: हम कह सकते हैं कि खेल के माध्यम से हम जीवन के सभी मूल्यों को प्राप्त करने की शक्ति प्राप्त करते हैं। खेल नैतिकता का पाठ पढ़ाता है और शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है। इसलिए जीवन में खेल का महत्वपूर्ण स्थान है। प्राय: कहा जाता है :-
“तेज होते हैं, पहिए तेल से, तेज होते हैं, बच्चे खेल से ।”

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मेरा प्रिय खेल

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • किकेट खेल का प्रारम्भ
  • किकेट खेल की विधि
  • भारत में किकेट
  • उपसंहार।

मानव-जीवन में खेल का महत्त्वपूर्ण स्थान है। हमारे देश में अनेक प्रकार के खेल है। हॉकी, फुटबॉल, बास्केटबॉल, टेनिस, शतरंज, टेबल टेनिस, गोल्फ, पोलो, बिलियर्ड, क्रिकेट आदि। ये सारे खेल विश्व-भर में खेले जाते हैं। इन सारे खेलों में मेरा प्रिय खेल है क्रिकेट।

क्रिकेट और हॉकी वर्तमान समय में सबका प्रिय खेल है। इनके मैचों का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर भी दिखाया जाता है। क्रिकेट बैट, बॉल और स्टम्प का खेल है।

क्रिकेट के लिए मैदान चाहिए। खेल सीधा और आसान होने के बावजूद परिश्रम से भरा हुआ है। खेल के मैदान के बीचो-बीच चौकोर रेखा खींची जाती है, जिसके दोनों किनारों पर तीन-तीन स्टम्प लगाए जाते हैं और उनके ऊपर दो गिल्लियाँ रखी जाती हैं। दोनों दलों में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। खेल आरम्भ करने के पहले टॉस होता है और जो टीम ठोस जीतती है वह अपनी इच्छानुसार गेंद फेंकना या बैटिंग चुनती है। खेल के नियमों को ध्यान में रखते हुए निर्णय देने के लिए अम्पायर की जरूरत होती है। जो आउट, नो बॉल, वाइड बॉल आदि का निर्णय देता है।

खेल प्रारम्भ होने पर बैटिंग करने वाले दल के दो खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। वे पैड, हेलमेट, ग्लब्ज, बैट आदि लेकर आते हैं और दूसरी टीम के सभी खिलाड़ी बोलिंग और फिल्डिंग के लिए मैदान में उतरते हैं। बैटिंग करने वाले खिलाड़ी के पीछे एक खिलाड़ी विकेट-कीपर की हैसियत से खड़ा होता है। फिल्डिंग के लिए अन्य खिलाड़ी मैदान में चारों तरफ बिखर जाते हैं। उनमें से एक खिलाड़ी बॉलिंग करता है। गेंदबाजी क्रमानुसार टीम के अच्छे गेंदबाजों द्वारा बारी-बारी से की जाती है। खेल के लिए ओवर निश्चित होते हैं। उन ओवरों में जितनी गेदे फेंकी जाती हैं उनमें अधिक से अधिक रन बनाने की कोशिश की जाती है और दूसरी टीम, जो गेंदबाजी करती है उसे अधिक रन बनाकर मैच जीतना होता है।

क्रिकेट का आनंद ही कुछ अलग है। दर्शकों की नजर एक-एक गेंद पर होती है। हर चौके-छक्के पर लोग उछल पड़ते हैं। क्रिकेट का मौसम आने पर, मैं अपने दोस्तों के साथ मैदान में क्रिकेट खेलने जाता हूँ। भारत का जब भी मैच होता है, मैं सब काम छोड़कर मैच देखने लगता हूँ।

क्रिकेट देखते समय जब भारतीय टीम को हारते देखता हूँ तो मुझे बड़ा गुस्सा आता है और मन करता है कि मैं मैदान में उतर कर चौके-छक्के की बरसात कर दूँ।

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समाचार-पत्र की आत्मकथा

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • ज्ञानवर्धन
  • मनोरंजन
  • समाचार-पत्रों का दायित्व।
  • उपसंहार।

मैं समाचार-पत्र हूँ । मेरा आरम्भ सोलहवीं शताब्दी में चीन में हुआ था। ‘पीकिंग-गजट’ विश्व का पहला समाचार पत्र था । भारत का पहला समाचार-पत्र इण्डिया-गजट था जो अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। हिन्दी का सबसे पहला समाचार-पत्र उदंत-मार्तड था, जो सन् 1826 ई० में कोलकाता में प्रकाशित हुआ था । अब तो विश्वभर में मैं छप रहा हूँ । केवल भारतवर्ष में ही लगभग 2,400 दैनिक समाचार-पत्र तथा 400 साप्ताहिक पत्र प्रकाशित होते हैं ।

आधुनिक समय में शिक्षा का उद्देश्य बदल गया है। पहले शिक्षा का जो स्वरूप था, आज की शिक्षा उससे बिल्कुल भिन्न है। आज केवल किताबी ज्ञान हासिल कर डिग्री प्राप्त करना ही जीवन का उद्देश्य बन गया है।

विनोबा भावे जी ने ‘जीवन और शिक्षण’ नामक निबंध में शिक्षा के मुख्य उद्देश्य पर व्यापक प्रकाश डाला है और आज की शिक्षण-प्रणाली की विकृतियों को उद्घाटित किया है।

शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक ज्ञान की प्राप्ति के साथ-साथ जीवन जीने की कला की प्राप्ति करना भी है । किन्तु आज स्कूलों, कॉलेजों में केवल किताबी शिक्षा दी जाती है। बच्चे जब उस शिक्षा को प्राप्त कर जगत में निकलते है तब उन्हे सारी शिक्षा बेमानी लगती है।

अधिकतर बच्चों के लिये शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना रह गया है। इसी कारण वे न तो किताबी ज्ञान पूर्ण रूप से प्राप्त कर पाते हैं और न ही जगत् का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर पाते हैं। वास्तव में सरकार द्वारा अपनायी जाने वाली शिक्षा-पद्धति ही उचित नहीं है।

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शिक्षा और व्यवसाय
अथवा,
आधुनिक शिक्षाप्रणाली

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • आधुनिक शिक्षा का आरम्भ
  • दोष
  • शिक्षा की आवश्यकता
  • लाभ
  • सुधार
  • उपसंहार।

शिक्षा और व्यवसाय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। शिक्षा के बिना जीविकोपार्जन सम्भव नहीं है, व्यवसाय के ब्रिना शिक्षा बेकार है। अतः शिक्षा और व्यवसाय मानवीय प्रग्गति के सम्बल हैं।
प्राचीन युग में शिक्षा का अर्थ ज्ञानार्जन करना था। उस समय शिक्षा धनोपार्जन का माध्यम नहीं थी।
समय-परिवर्तन के साथ भारतीय जनता में अंग्रेजी के साथ-साथ आधुनिक विषय जैसे विज्ञान, वाणिज्य-शास्ख, अर्थशास्त्र आदि सीखने का प्रचलन चला। वर्तमान शिक्षा प्रणाली का इतिहास बहुत पुराना है। जब भारत पराधीन था, विदेशी शासकों ने अपने स्वार्थ के लिये अंग्रेजी शिक्षा-पद्धति को भारत में प्रचालत किया था।मैकाले इसक प्रवर्तक थे। यह शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, परम्परा एवं राष्ट्रीय जीवन के विपरीत थी।

पिछले कुछ वर्षों में समाज की मान्यताओं, मूल्यों, आवश्यकताओं, समस्याओं और विचारधाराओं में बहुत परिवर्तन हुए हैं। इन परिवर्तनों के साथ समाज का सामंजस्य होना आवश्यक है। इन परिवर्तनों के अनुरूप शिक्षा के स्वरूप, प्रणाली और व्यवस्था में परिवर्तन आया है। अब शिक्षा व्यवस्था को अधिक उपयोगी, व्यावहारिक तथा जीविकोपार्जन का माध्यम बनाया जा रहा है ।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली की महत्वपूर्ण देन है – बाबू संस्कृति अर्थात् कुसीं पर बैठकर काम करने की प्रवृत्ति और नागरिक संस्कृति अर्थात नगरों तथा महानगरों में रहकर ही काम करने की प्रवृत्ति। परिणामस्वरूप नगरों में जहाँ तेजी से बेकारी बढ़ी है वहीं गाँव का विकास उतनी तेजी से नहीं हो पा रहा है।

व्यावसायिक शिक्षा व्यक्ति को सामाजिकता से परिचित कराती है। शिक्षा रोजगार पैदा नहीं करेगी, वह तों व्यक्ति को रोजगार प्राप्त करने में सहायता पहुँचाती है। व्यावसायिक शिक्षा से व्यक्ति का दृष्टिकोण व्यापक बनेगा।

व्यावसायिक शिक्षा की दृष्टि से देश में आई.आई.टी, तकनीकी शिक्षा, औद्यांगक प्रशिक्षण केंद्र, कृषि विश्शावद्यालयो तथा वैज्ञानिक संस्थानों का जाल बिछ गया है। व्यावसायिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिये देश भर में कई स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को लागू किया गया है, ताकि अधिक से अधिक संख्या में छात्रों कां इसका लाभदायक फल मिल सके। देश में व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम को तकनीकी और शैक्षणिक सहायता प्राप्त कराने के लिये जुलाई, सन् 1993 ई० में भोपाल में केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान की स्थापना की गई है।

किन्तु इन सारे पाठ्यक्रमों और शिक्षा-विधियों ने छात्रों पर अत्यधिक बोझ लाद दिया है। सभी विषयों के अधकचरे ज्ञान ने उसे रटंत-तोता बनाकर छोड़ दिया है।

व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् भी, प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण होना छात्रों के लिये अति आवश्यक हो गया है। इन परीक्षाओं को पास करने के पश्चात् नौकरी न मिलना और अर्थाभाव की वजह से निजी व्यवसाय न कर पाने से युवाओं में कुण्ठा और निराशा का भाव भरता जा रहा है।

शिक्षा-प्रवेश की भेदभावपूर्ण नीति ने उच्च तकनीकी तथा वैज्ञानिक शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े वर्गों के लिए आसन सुरक्षित कर दिया है, इसी कारण योग्य छात्र बाहर की धूल फाँकने को मजबूर हो जाता है।

देश में बढ़ती बेरोजगारी, युवाओं में पनपती दुष्मवृत्तियाँ तथा असामाजिक कार्यों की तरफ झुकाव, देश को अराजकता की तरफ धकेल रहा है। हमारी शिक्षा का व्यवसाय के साथ सामंजस्य और संतुलन होना चाहिए और शिक्षा जीविकाकेन्द्रित होनी चाहिए ।

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राष्ट्र-निर्माण में युवा पीढ़ी का सहयोग

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • युवा पीढ़ी का कर्तव्य
  • युवा पीढ़ी का योगदान
  • उपसंहार ।

राष्र्र-निर्माण में युवा पीढ़ी का सहयोग राष्ट्र के प्रति उसके दायित्व की अनुभूति का ज्वलंत प्रमाण है। यही उसकी राष्ट्रवंदना, और राष्ट्र-पूजा है। यह सहयोग उसके राष्ट्र-प्रेम, देशभक्ति तथा मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को प्रकट करता है। राष्ट्र का प्रत्येक महान् कार्य युवकों के सहयोग के बिना अधूरा ही रह जाता है। निर्माण सदैव बलिदानों पर आधारित होता है। बलिदान की भावना युवा पीढ़ी में बलवती होती है। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, सुखदेव, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, बिस्मिल जैसे सहस्तों युवकों ने राष्ट्र-निर्माण के लिये अपना जीवन बलिदान कर दिया। गांधीजी के नेतृत्व में लाखों नौजवानों ने स्वतंत्रता की लड़ाई में भागीदारी की। अपने जीवन को जेलों में सड़ाया, लेकिन स्वतंग्रता की माँग नहीं छोड़ी। इन्हीं वीरों को याद करते हुए दिनकर जी ने कहा था –

जो अगणित लघु दीप हमारे।
तूफानों में एवन विन्नारे ।
जल-जलकर बुझ गये किसी दिन।
माँगा नहीं स्ने मुँह खोल।
कलम आज उनकी जय बोल।

इसी प्रकार सन् 1974 ई० में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित किया, तब लाखों युवकों ने इंदिरा गाँधी की तानाशाही के विरुद्ध आवाज उठाई और जेल गये। युवा-देशभक्तों का राष्ट्र-निर्माण के विविध क्षेत्रों में सहयोग सदा स्मरणीय रहेगा।

युवा पीढ़ी समाचार-पत्रों के माध्यम से समय-समय पर अपने उच्च विचारों को अभिव्यक्ति देकर जन-जागरण का शंखनाद कर सकती है और देश की वैचारिक सम्पदा की अभिवृद्धि कर सकती है।

आज देश बढ़ती हुई जनसंख्या से परेशान है। देश के युवा वर्ग परिवार-नियोजन द्वारा देश की इस समस्या को कम कर सकते हैं।

दहेज की कुप्रथा की वजह से कई लड़कियों को अपनी जान गँवानी पड़ती है। अत: युवा पीढ़ी को देश की इस कुप्रथा को दूर करने के लिये बिना दहेज विवाह करने का प्रण लेना चाहिए ताकि देश की कुरीतियों का अंत हो सके और देश स्वस्थ, स्वच्छ और सुंदर बन सके ।

देश के प्रौढ़ व वयोवृद्ध वर्ग का यह नैतिक दायित्व है कि वह युवाओं का सही मार्गदर्शन करें। उनके सुखद जीवनयापन की अपेक्षित सुविधायें जुटायें और उनके भविष्य निर्माण के लिये सच्चे दिल से प्रयास करें। आज धर्म-गुरु व राजनीतिक नेता युवा पीढ़ी को पथभ्रष्ट करने में सबसे आगे हैं । अतः सामान्य जन को इस दिशा में गम्भीरता से सोचना चाहिये और युवा वर्ग के प्रति सामाजिक दायित्व का परिपालन करना चाहिये ।

भारतीय समाज अनेक पाखण्डों और कुप्रथाओं से ग्रस्त है। नई पीढ़ी इन कुप्रथाओं को दूर करने की प्रतिज्ञा कर ले तो देश को ऊँच-नीच के भेदभाव, नारी-शोषण, यौन-उत्पीड़न और बलात्कार के संकट से मुक्त किया जा सकता है। चोरी, छीना-झपटी, अपहरण, हत्या, पाखण्ड और अंधविश्वास से देश को मुक्ति दिलाई जा सकती है ।

गरीबों, बाल मजदूरों जैसे निरक्षर लोगों को साक्षर बनाकर युवा पीढ़ी देश में जागृति और नई चेतना का भाव भर सकते हैं।

आज युवा पीढ़ी का एक अंश आक्रोश, आंदोलन और हड़ताल द्वारा राष्ट्र को क्षति पहुँचा रही है। अत: युवाओं को ऐसे कार्यों से बचना चाहिये और अपने रचनात्मक कार्यों से राष्ट्र की उन्नति में सक्रिय योगदान करना चाहिये । जैनेंद्र जी ने कहा था “‘युवकों का उत्साह ताप बन कर न रह जाये, यदि उसमें तप भी मिल जाये तो और अधिक निर्माणकारी हो सकता है ।”

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विश्व पर्यावरण दिवस

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • अनेकानेक उद्योग-धन्धों के कारण
  • पर्यावरण को बचाने के उपाय
  • उपसंहार।

पूरे विश्व में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट करने और समस्या के समाधान के लिये हर वर्ष पाँच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र संघ तथा अन्य संस्थाओं द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण गोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं, जिसमें पर्यावरण प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिये सुझाव प्रस्तुत किये जाते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण से मानव अस्तित्व पर संकट आ गया है। औद्योगीकरण और नगरीकरण की वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। कारण यह है कि विकास के लिये घने-घने वन-उपवन उजाड़ दिये गये हैं जिससे प्राकृतिक सम्पदा ही नहीं, पूरा वायुमण्डल प्रदूषित हो गया है।

भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण भी वनों को नष्ट किया जा रहा है। परिणामत: चट्टानों का खिसकना, भूमिकटाव से ग्रामों के अस्तित्व का लोप होना, अनियंत्रित वर्षा, सूखा, बाढ़ और निरंतर तापमान में वृद्धि हो रही है।

आज देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1,880 लाख हेक्टेयर हिस्सा भू-क्षरण का शिकार है । सन् 1977 ई० के बाद आज तक खतरनाक भू-क्षरण वाले क्षेत्रों का विस्तार दुगुना हो गया है। जंगलों को काट कर समतल बनाया जा रहा है, जिसका परिणाम यह हुआ कि आपूर्ति क्षमता की तुलना में जलावन के लिये लकड़ी की माँक्ष गुना अधिक हो गयी है।

प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ करने का परिणाम यह है कि जीवन के लिये अति आवश्यक वस्तु, हवा भी जहरीली हो गई है। महानगरों में चलने वाले परिवहन के अनेक साधन दिन-प्रतिदिन वायु को और अधिक दूषित करते जा रहे हैं । औद्योगिक कल-कारखानों से निकलने वाला धुआँ तथा राख भी वायु को अत्यधिक प्रदूषित कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लगाये गए अनुमान के अनुसार विश्व के लगभग आधे शहरों में कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा हानिकारक स्तर तक पहुँच गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रदूषित जल से होने वाले निम्नलिखित रोग बतलाये हैं – हैजा, डायरिया, टायफाईड, पालियोमाईटिस, राउण्डवर्म, फाईलेरिया, मलेरिया, डेंगू फीवर आदि।

कभी बाढ़, कभी सूखा तथा तरह-तरह की बीमारियों की वजह यही पर्यावरण प्रदूषण है। अतः प्रकृति को प्रदूषण से बचाने के लिये पर्यावरण दिवस के दिन सबको प्रकृति की रक्षा करने का संदेश दिया जाता है तथा हर व्यक्ति से अपील की जाती है कि वह कम से कम एक पौधा अवश्य लगाये । वृक्षारोपण इस समस्या का मुख्य समाधान है।

हमें चाहिए कि गंदगी तथा जल-जमाव करके बीमारियों को जन्म न दें। वातावरण को स्वच्छ तथा साफ-सुथरा रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य है। अत: पर्यावरण की सुरक्षा सभी को करनी चाहिए, ताकि मानव-जाति को नष्ट होने से बचाया जा सके । विश्व पर्यावरण दिवस हमें इसी जिम्मेदारी की याद दिलाता है ।

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विद्यार्थी-जीवन

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • विद्यार्थी जीवन की स्थिति
  • विद्यार्थी जीवन में ज्ञानार्जन, विद्या तथा चरिज्र का महत्व
  • विद्यार्थी के आवश्यक गुण
  • प्राचीन विद्यार्थी और आधुनिक विद्यार्थी
  • विद्यार्थी के कर्त्तव्य
  • उपसंहार।

प्रस्तावना :- विद्यार्थी ही देश के भावी कर्णधार हैं । विद्यार्थी-जीवन, मानव-जीवन का सबसे अधिक महत्वपूर्ण काल है । जन्म के समय बालक अबोध होता है । शिक्षा के द्वारा उसके जीवन का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है, उसकी बुद्धि विकसित की जाती है । जिस काल में वह पूर्ण मनोयोग से विद्याध्ययन करता है, उस काल को विद्यार्थी-जीवन कहते हैं ।

विद्यार्थी-जीवन की स्थिति :- विद्यार्थी-जीवन, मानव-जीवन का सर्वश्रेष्ठ काल है । इस काल में मनुष्य जो कुछ सीखता है वह आजन्म उसके काम आता है। विद्यार्थी-जीवन मानव के जीवन की ऐसी विशिष्ट अवस्था है, जिसमें उसे सही दिशा का बोध होता है । इसी कारण, इस काल को अत्यंत सावधानी से व्यतीत करना चाहिए ।

विद्यार्थी-जीवन में ज्ञानार्जन, विद्या तथा चरित्र का महतव :-विद्यार्थी का उद्देश्य केवल विद्या प्राप्त करना नहीं होता अपितु ज्ञान की वृद्धि, शारीरिक-मानसिक विकास एवं चारित्रिक सदगुणों की वृद्धि भी उसका लक्ष्य होता है । विद्याध्ययन का काल ही वह काल है जिसमें सहयोग, प्रेम, सत्यभाषण, सहानुभूति, साहस आदि गुणों का विकास किया जाता है । अनुशासन, शिष्टाचार आदि प्रवृत्तियाँ भी इसी समय जन्म लेती हैं।

विद्यार्थी-जीवन में विद्या के साथ ही चारित्रिक विकास का भी महत्वपूर्ण स्थान है । वरित्रहीन व्यक्ति अपने जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता । चरित्र के द्वारा ही विद्यार्थी में अनेक सद्गुणों का विकास होता है, अतः विद्यार्थी-जीवन मे चरित्र-निर्माण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया जाता है ।

विद्यार्थी के आवश्यक गुण :-प्राचीनकाल में आचार्यो ने विद्यार्थी के लिए आवश्यक गुणों की चर्चा इस प्रकार की है काकचेष्टा

वकोध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च ।
अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम् ।।

विद्यार्थी का प्रमुख कार्य विद्या का अध्ययन है । उसे श्रेष्ठ विद्या प्राप्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए । अपने से छोटे अथवा किसी भी वर्ग के पास यदि अच्छी विद्या है तो उसे प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए।

प्राचीन विद्यार्थी और आधुनिक विद्यार्थी :- प्राचीन काल में छात्र नगर के जीवन से दूर पविन्र आश्रमों में गुरू के संरक्षण में शिक्षा ग्रहण करता था। वह सादा जीवन बिताकर, गुरू की इच्छा से कार्य करता था। वह विद्वान, तपस्वी, योगी तथा सदाचारी होता था। उसके विचार उच्चकोटि के होते थे । आज का विद्यार्थी अपने इस बहुमूल्य जीवन के प्रति सजग और गंभीर नहीं रह गया है । आज तो वह पैसे के बल पर मात्र पैसे के लिए विद्या प्राप्त करता है । शिक्षा नौकरी का पर्याय बनकर रह गई है । विद्यार्थी के लिए स्वाध्याय एवं आत्मोन्नति का विशेष महत्व नहीं रहा है । विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता और स्वच्छंदता की प्रवृत्ति बढ़ रही है । उनमें विनयशीलता का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है । अध्यापकों का अपमान, दिन-रात के लड़ाई-झगड़े, आंदोलन, हड़ताल ही मानों उनके जीवन का लक्ष्य बन गया है ।

विद्यार्थी के कर्त्तव्य :- भारत एक स्वतंत्र देश है । उसकी आजादी की रक्षा करना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्त्तव्य है। इसके लिए यह आवश्यक है कि हम आदर्श विद्यार्थी बनें । हमारी शिक्षा का उद्देश्य अधिकाधिक ज्ञानार्जन होना चाहिए, केवल नौकरी पाना नहीं । केवल नौकरी प्राप्त करके हम न तो देश का और ना ही समाज का भला कर सकते हैं। शिक्षा नौकरीपरक न होकर रोजगारपरक होनी चाहिए । इस विशाल राष्ट्र की दृढ़ता एवं प्रगति के लिए विद्यार्थी को अत्यंत सबल, सक्षम और शिक्षित होना चाहिए । उसे अपनी संस्कृति तथा मूल्यों को अपनाना चाहिए तथा पाश्चात्य सभ्यता के अंधे अनुकरण से बचना चाहिए । गुणी और साहसी विद्यार्थी ही देश की रक्षा का भार उठाने में सक्षम होगा ।

उपसंहार :- विद्यार्थी को देश का सच्चा निर्माता तभी कहा जा सकता है, जब वह चारित्रिक, मानसिक, शारीरिक दृष्टि से पूर्ण समर्थ हो । विद्यार्थी को चाहिए कि अपने विद्यार्थी-जीवन को मौज-मस्ती का साधन न बनाकर उसे शिक्षा ग्रहण करने में लगाए । विद्यार्थी-जीवन की सफलता ही विद्यार्थी के उन्नति की आधारशिला है ।

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पुस्तकालय का महत्व

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • पुस्तकालयो के प्रकार
  • महत्व
  • पुस्तकालय से लाभ- ज्ञान की प्राप्ति
  • मनोर जन का स्वस्थ साधन, दुर्लभ तथ्नो की प्राप्ति के साथन
  • पठन-पाठन में सहयोगी
  • भारत में पुस्तकालयों की सिर्थित
  • उपसंहार।

प्रस्तावना :- पुस्तकालय का अर्थ होता है पुस्तकों का घर, अर्थात् जहॉँ पुस्तकों को रखा जाता हो या संग्रह किया जाता हो । अतः पुस्तकों के उन सभी संग्रहालयों को पुस्तकालय कहा जा सकता है, जहाँ पुस्तकों का उपयोग पठन-पाठन के लिए किया जाता हो । पुस्तकों को ज्ञान-प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम माना गया है । पुस्तकें ज्ञान-राशि के अथाह भंडार को अपने में संचित किए रहती हैं । ज्ञान ही ईश्वर है तथा सत्य एवं आनंद है ।

केवल एक कमरे में पुस्तकें भर देने से ही वह पुस्तकालय नहीं बन जाती, अपितु यह ऐसा स्थान है जहाँ पुस्तकों के उपयोग आदि का सुनियोजित विधान होता है ।

पुस्तकाल्यों के प्रकार :- पुस्तकालय के विभिन्न प्रकार होते हैं । जैसे –

  • व्यक्तिगत पुस्तकालय
  • विद्यालय एवं महाविद्यालय के पुस्तकालय
  • सार्वजनिक पुस्तकालय
  • सरककारी पुस्तकालय आदि ।

व्यक्तिगत पुस्तकालय के अंतर्गत पुस्तकों के वे संग्रहालय आते हैं, जिनमें कोई-कोई व्यक्ति अपनी विशेष रुचि एवं आवश्यकता के अनुसार पुस्तकों का संग्रह करता है । विद्यालयों तथा महाविद्यालयों के अंतर्गत वे पुस्तकालय आते हैं, जिनमें क्वात्रों तथा शिक्षकों के पठन-पाठन हेतु पुस्तकों का संग्रह किया जाता है । कोई भी व्यक्ति इसका सदस्य बनकर इसका उपयोग कर सकता है । सरकारी पुस्तकालयों का प्रयोग राज्य कर्मचारियो एवं सरकारी अनुमति प्राप्त विशेष व्यक्तियों द्वारा किया जाता है ।

पुस्तकालयों का महत्व :- पुस्तकालय सरस्वती देवी की आराधना-मंदिर है । यह व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र तीनों के लिए महत्वपूर्ण है । पुस्तकें ज्ञान-प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन हैं । इनसे मनुष्यों के ज्ञान का विकास होता है तथा उनका दृष्टिकोण व्यापक होता है । एक ज्ञानी व्यक्ति ही समाज एवं राष्ट्र के साथ-साथ मानवता का कल्याण कर सकता है। प्रत्यक व्यक्ति अपनी रुचि एवं आवश्यकता के अनुसार पुस्तकें खरीद नहीं सकता।

कोई भी व्यक्ति आर्थिक रूप से इतना सशक्त नहीं होता कि वह मनचाही पुस्तकें खरीद सकें । बहुधा पैसा जुटा लेने पर भी पुस्तकें प्राप्त नहीं होती हैं, क्यांकि उनमें से कुछ का प्रकाशन बंद हो चुका होता है और उनकी प्रतियाँ दुर्लभ हो जाती हैं । पुस्तकालय में जिज्ञासु अपनी आवश्यकता एवम् प्रयोजन के अनुसार सभी पुस्तकों को प्राप्त कर लेता है तथा उनका अध्ययन करता है ।

पुस्तकालय से लाभ :- पुस्तकालय ज्ञान का भंडार होता है । विषयगत ज्ञान के वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करने के लिए तथा उस विषय से संबंधित ज्ञान प्राप्त करने के लिए अन्य पुस्तकों के अध्ययन के लिए पुस्तकालय की आवश्यकता होती है ।

प्रत्येक मनुष्य के लिए मनोरंजन आवश्यक होता है तथा मनोरंजन के लिए पुस्तकों से अच्छा कोई साधन नहीं है । यह मनोरंजन के साथ-साथ संसार के अन्य विषयों की जानकारी भी बढ़ाती है ।

किसी भी विषय पर शोध एवं अनुसंधानात्मक कायों के लिए पुस्तकालयों में संग्रहित पुस्तकों से व्यक्ति उन दुर्लभ तथ्यों को प्राप्त कर सकता है जिनकी जानकारी उसे अन्य किसी प्रकार से नहीं हो सकती ।

पुस्तकालय छात्र तथा अध्यापक दोनों के पठन-पाठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । शिक्षक तथा छात्र दोनों ही अपनी बौद्धिक शक्तियों एवं विषयगत ज्ञान के विस्तार की दृष्टि से पुस्तकालय में संग्रहित पुस्तकों से लाभान्वत होने हैं।

भारत में पुस्तकालयों की स्थिति :- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने गाँव-गाँव में पुस्तकालयों की स्थापना करने का एक अभियान चलाया था जो अनेक कारणों से असफल रहा । इन पुस्तकों की सामग्री राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए थी । उसमें ज्ञान, बौद्धिक विकास की सामग्री का अभाव था। अत: जन सामान्य ने इसकी ओर रुिि नहीं दिखलाई । सरकारी नीति की उदासीनता के कारण यह योजना असफल हो गई ।

उपसंहार :- पुस्तकालय ज्ञान का वह भंडार है जो हमें ज्ञान प्रदान करता है । ज्ञान की प्राप्ति से ही मनुष्य वास्तविक अर्थों में मनुष्य बनता है । ऐसे ही मनुष्यों से समाज या राष्ट्र का कल्याण होता है । अतः पुस्तकालय हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक है । आज सरकार तथा स्वयं सेवी सामाजिक संस्थाओं को संपूर्ण देश में अधिक से अधिक पुस्तकालयों की स्थापना करनी चाहिए।

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भूकम्प : एक प्राकृतिक प्रकोप

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • धन-जन की अपार क्षति
  • कहीं निर्माण-तो कहीं विनाश
  • उपसंहार।

सृष्टि के आरम्भ से ही मनुष्य का प्रकृति के साथ अदूट सम्बन्ध रहा है । प्रकृति के साथ मनुष्य के संघर्ष की कहानी भी सृष्टि के प्रारम्भ से ही चली आ रही है। प्रकृति अपने विभिन्न रूपों में मानव के सामने आती है । प्रकृति के मोहक तथा भयानक दोनों ही रूप हैं । जहाँ प्रकृति का मोहक रूप हमारा मन मोह लेता है, वहीं इसके रौद्र रूप के स्मरण मात्र से हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बाढ़, सूखा, अकाल, महामारी, भूकम्प आदि प्रकृति के रौद्र रूप हैं ।

भूकम्प शब्द ‘भू’ और कम्प’ इन दो शब्दों के योग से बना है । भू का सामान्य अर्थ है – भूमि और कम्प का – काँपना या हिलना-डुलना है । अत: जब भूमि काँप उठती है तो उसे भूकम्प कहते हैं । लेकिन समस्त पृथ्वी एक साथ नहीं काँपती। एक बार में पृथ्वी का कोई एक विशेष भाग ही काँपता है ।

जब पृथ्वी की सतह अचानक हिलती या कम्पित होती है तो उसे भूकम्प कहते हैं। सतह के कम्पन के साथ प्रकृति सर्वनाश करनेवाली जो प्रकोप प्रकट करती है, उसी को भूकम्प की संज्ञा दी जाती है। भूपटल का फटना भूकम्प का लक्षण है। ज्वालामुखी के उद्गार भी भूकम्प के कारण बनते हैं। भूमि की चट्टानों के असंतुलन से भी भूकम्प आ सकता है।

भूकम्प की उत्पत्ति सृष्टि के निर्माणकर्ता का मायावी कौतुक है। प्रकृति का माया रूपी हृदय जब डोलता है तो वह अपना प्रकोप प्रकट करता है।

जिस प्रकार जल-प्रलय प्रकृति का विनाशक ताण्डव है, उसी प्रकार भूकम्प उससे भी भयानक विनाशक विक्षोभ है। दो-चार सेकेंड के हल्के भूकम्प से ही छोटे भवन, दीर्घ प्रासाद और उच्च अट्टालिकाएँ काँपती हुई पृथ्वी के चरण चूमने लगती हैं। गाँव के गाँव नष्ट हो जाते हैं। शवों के ढेर लग जाते हैं। सभी चीजें नष्ट-भ्रष्ट हो जाती हैं। 20 अक्टूबर, सन् 1991 ई. को उत्तरकाशी में आये भूकम्प में 15,000 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हुई और सहस्तों लोग घायल हुए। सन् 1993 के लातूर एवं उस्मानाबाद क्षेत्रों के विनाशकारी भूकम्प की चपेट में 81 गाँवों पर कहर बरपा जिसमें 25 से ज्यादा गाँव श्मशान में बदल गये ।

भूकम्प का प्रभाव नदियों पर भी पड़ता है। पहाड़ों के नीचे धँसने से, या चट्टानों, पत्थरों और गीली मिट्टी के जमाव से नदी का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने और पानी जमा होने से वह स्थान झील के रूप में परिणत हो जाता है। जलमग्न भवन भूकम्प के प्रकोप से बचकर भी प्रकृति की प्रकोप के चपेट में आ जाते हैं। सन् 1978 ई० में भूकम्प के कारण भूस्खलन से गंगोत्री मार्ग पर 500 मीटर ऊँचा मिट्टी-पत्थर का ढेर लग गया। गंगाजल अवरुद्ध हो गया। फलस्वरूप वहाँ झील बन गई।

भूकंप प्रकृति का क्षोभ ही नहीं वरदान भी है। 16 दिसम्बर, सन् 1880 को आये नैनीताल के भूकम्प से चाइना पीक के लिये एक सुगम मार्ग स्वयं ही बन गया था। इससे जगह-जगह झरने फूट पड़े थे। इस प्रकार भूकम्प ने नैनीताल के सौंदर्य को विस्तार दिया था ।

भूकम्प के प्राकृतिक प्रकोप विनाश के अमिट चिह्न पृथ्वी पर छोड़ जाते हैं। मनुष्य की स्मृति में भी आतंक के ऐसे अवशेष छोड़ जाते हैं जो सपने में भी उसे आतंकित कर जाते हैं। गुजरात और उड़ीसा के भूकंप ऐसे ही थे। प्रत्येक ध्वंस नये निर्माण का संदेश लेकर आता है। प्रकृति में नाश और निर्माण दोनों ही शक्तियाँ हैं।

इस प्रकार भूकम्प जब बस्तियों को नष्ट करता है तब मनुष्य फिर कुछ नया और सुंदर बनाने की चेष्टा करता है। प्रकृति का प्रकोप मनुष्य को फिर से कुछ नया और बेहतर बनाने की शक्ति प्रदान करता है। इस प्रकार भूकंप शाप भी है और वरदान भी ।

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राष्ट्रभाषा हिंदी

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी
  • हिन्दी ही क्यों
  • भारत की सांस्कृतिक भाषा हिन्दी
  • राष्ट्रभाषा से राजभाषा
  • विदेशों में हिन्दी
  • उपसंहार ।

प्रस्तावना :- प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक भाषा होती है, जिसमें उस देश के प्रशासनिक कार्य किये जाते हैं तथा देश के अधिकांश लोग पारस्परिक व्यवहार में उस भाषा का प्रयोग करते हैं। उसी भाषा के माध्यम से उस देश के वैदेशिक सम्बन्ध संचालित होते हैं । राष्ट्रीय न्यायालयों के कार्य उसके ही प्रयोग से सम्पन्न किये जाते हैं । विश्वविद्यालयों में उच्चशिक्षा के लिये उसका ही प्रयोग होता है । जिस देश में एक से अधिक भाषाएँ प्रचलित होती हैं, उस देश की किसी एक भाषा को राजभाषा, सम्पर्क भाषा अथवा राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है ।

ऐसी भाषा के बोलनेसमझने वालों की संख्या सर्वाधिक होती है और अन्य लोगों द्वारा वह काफी सरलता से सीख ली जाती है । भारत में स्वतंत्रता-पूर्व शासकों की भाषा अंग्रेजी प्रशासन, शिक्षा, न्याय आदि की प्रमुख भाषा थी । किन्तु स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया तथा हिन्दी के साथ-साथ कुछ समय के लिये अंग्रेजी को भी सरकारी कामकाज के लिये अस्थायी रूप में स्वीकार कर लिया गया था, ताकि इस बीच अहिन्दी भाषा- भाषी भी हिन्दी की जानकारी हासिल कर लें।

भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी :- भारत विश्व का सर्वाधिक विशाल गणतन्न्र है, जो संघात्मक होते हुए भी एकात्मक है । यहाँ पंजाब की भाषा पंजाबी, बंगाल की बंगला, केरल की मलयालम, उड़ीसा की उड़िया, असम की असमी, आंध की तेलगू तथा तमिलनाडु की भाषा तमिल है । ऐसी स्थिति में यह आवश्यक था कि किसी ऐसी भाषा की खोज की जाय जो उक्त सारे क्षेत्रों के बीच एकसूत्रता स्थापित कर सके । इस दृष्टि से राष्ट्रीय नेताओं ने खड़ी बोली हिन्दी को सर्वाधिक उपयोगी पाकर उसे ही भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया।

हिन्दी ही क्यों :- भारत द्वारा हिन्दी को राष्ट्रभाषा मानने के कई कारण हैं। यह लगभग हजार वर्षो से भारतीय जनता के बीच लोकप्रिय रही है । आज देश की लगभग आधी जनसंख्या अच्छी तरह हिन्दी लिख-बोल सकती है । वाणिज्य, तीर्थयात्रा, परिवहन आदि क्षेत्र में हिन्दी का प्रचार काफी अच्छा है । देश भर के तीर्थों में हिन्दी के जानकार पंडित, पुजारी तथा पण्डे हैं । रेलवे स्टेशनों के कुली हिन्दी बोल लेते हैं। भारत के बाहर श्रीलंका, बर्मा, गुयाना, मारीशस, फिजी, सुरीनाम आदि देशों में भी हिन्दी जानने वालों की काफी अच्छी संख्या है ।

इतनी अधिक लोकप्रियता के साथ-साथ हिन्दी को अपनाने का एक कारण यह भी है कि यह बहुत ही सरल भाषा है, इसे सीखने में विशेष असुविधा नहीं होती । इसकी देवनागरी लिपि भी सरल एवं वैज्ञानिक है । मराठी एवं नेपाली भाषाओं की लिपियाँ नागरी लिपि की ही प्रतिरूप हैं। अत: उन भाषा-भाषियों के लिए हिन्दी सीखना अत्यधिक सरल है । हिन्दी की यह भी एक विशेषता है कि संस्कृत की उत्तराधिकारिणी होने के कारण इसने भारत की प्राचीनतम परम्परा की अधिकांश विशेषताओं को अपने भीतर समेट लिया है । अपनी इन्हीं कतिपय विशिष्टताओं के कारण हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा बन सकी है ।

राष्ट्रभाषा से राजभाषा :- स्वतंत्र भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया तथा उसी क्षण से यह भी निश्चित हो गया कि 15 वर्षो बाद देश के सरकारी कामकाज हिन्दी में होने लगेंगे । किन्तु सन् 1965 में तमिलनाडु द्वारा विरोध किए जाने पर यह निश्चय किया गया कि जब तक सभी अहिन्दी भाषी प्रान्त हिन्दी में पत्र-व्यवहार करना स्वीकार न करें, तब तक उनके साथ अंग्रेजी में पत्र-व्यवहार किया जायेगा ।

गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब आदि ने तो हिन्दी में पत्र-व्यवहार आरंभ कर दिया तथा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार एवं राजस्थान ने हिन्दी को अपनी राजभाषा घोषित कर दिया । 1985 ई० में स्थिति यह रही कि केन्द्र सरकार के तथा संसद के सारे कार्य दोनों भाषाओं अर्थात् हिन्दी और अंग्रेजी में किए जाने लगे । सेवा आयोगों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी भी परीक्षा का माध्यम मान ली गई।

उपसंहार :- राजनीतिक कारणों से यदा-कदा हिन्दी साम्राज्यवाद के नाम पर हिन्दी के विरोध की आवाज उठने लगती हैं तथापि हिन्दी का प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । देश की जनता राष्ट्रीय कर्त्तव्य एवं दायित्व के प्रति जागरूक है, अत: हिन्दी-विरोधियों का प्रभाव नगण्य है। हिन्दी चलचित्रों की व्यापक लोकप्रियता तथा अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में भी हिन्दी प्रेमियों के प्रयास जैसे साधनों से इसका प्रचार क्षेत्र सहजता से ही बढ़ता जा रहा है ।

सरकारी तथा गैरसरकारी संस्थाओं की चेष्टा से न्याय, औषधि, यांत्रिकी, वाणिजय आदि क्षेत्रों के लिए विभिन्न शब्दावरियों का निर्माणकार्य तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है । यह विश्वास सहज ही पनपता है कि इस शताब्दी के अन्त तक भारत अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा की विवशता से पूर्ण मुक्त हो जाएगा एवं राज्यों में राज्य की तथा केन्द्र में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का अक्षुण्ण स्थान प्राप्त हो सकेगा ।

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भारत में साक्षरता अभियान

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • पराधीन भारत में निरक्षरता
  • निरक्षरता एक अभिशाप है
  • स्वतंत्र भारत में निरक्षरता के दूरीकरण की चेष्टा
  • साक्षरता का महत्व
  • उपसंहार ।

प्रस्तावना :- देश के अगणित मनुष्य यदि अज्ञान के अंधकार में डूबे रहें, यदि मनुष्यत्व विकास के सभी सम्भव पथ अवरुद्ध हो जायँ, यदि अंशक्षा, अन्याय, अपमान तथा शोषण से जीवन संकुचित होता रहे, तब हमारा सब कुछ व्यर्थ हो जायेगा। ज्ञान-विज्ञान का प्रकाशमय जगत् सदा के लिये हमसे दूर हो जायेगा । किसी देश की उन्नति के मूल में उस देश की जनता की जागरुकता ही मुख्यत: हुआ करती है । वस्तुत: मानव के अंतर में अमित शक्ति सुप्त रहती है । जागृत रूप में यही शक्ति देश को आगे बढ़ाती है और यह शक्ति जागृत होती है शिक्षा के द्वारा।

पराधीन भारत में निरक्षरता :-अंग्रेजों के भारत में आने से पूर्व मंडप, टोल, चौपाल, वटवृक्षतल, मदरसा, पाठशाला आदि विभिन्न स्थानों में जो परंपरागत शिक्षादान की व्यवस्था थी, उनके द्वारा भी देश का काफी बड़ा भाग साक्षरता प्राप्त कर लेता था । पर अंग्रेजों के आगमन के बाद पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव से यहाँ का सब कुछ बदल गया। पराधीन भारत में शिक्षा का क्षेत्र बिल्कुल संकुचित हो गया । देश के विदेशी शासक यहाँ शिक्षा का प्रसार कतई नहीं चाहते थे ।

उनका एकमात्र उद्देश्य था देश का अबाध शोषण । गरीबी और निरक्षरता बहुत बढ़ गयी । प्रायः दो सौ वर्ष के अंग्रेजी शासन में पूरे देश में साक्षर लोगों की संख्या मात्र चौदह प्रतिशत ही रही । सन् 1930 में कानून द्वारा प्राइमरी शिक्षा को अनिवार्य बनाया गया । किन्तु सरकार की उदासीनता के कारण यह कानून देश में तत्परतापूर्वक नहों लागू किया गया । फलत: निरक्षरता का परिणाम पूर्ववत् बना रहा।

निरक्षरता अभिशाप है :- निरक्षरता किसी भी देश के निवासियों के लिये एक अभिशाप है। देश के बहुसंख्यक लोग शिक्षा के अभाव में चरमहीनता और वंचना का जीवन बिताते हैं। वे समझ नहीं पाते कि सब कुछ होते हुए भी वे उनसे क्यों वंचित हैं, क्यों वे इतने निगृहीत हैं। अपने भाग्य की दुहाई देते रहते हैं। समाज के विभिन्न अंगों से उन पर अत्याचार होता है। उनका शोषण होता है । निरक्षरता के कारण, लगता है कि मनुष्यत्व का अधिकार ही गँवा बैठे है। उनमें गण-तंत्रात्मक बोध के साथ ही आत्मसम्मान की भावना भी लुप्त हो गयी है ।

स्वतन्त्र भारत में निरक्षरता के दूरीकरण की चेष्टा :-युग संचित इस अभिशाप से देशवासायों को मुक्त करने के लिये स्वतन्न्र भारत में शिक्षा की नवीन योजना बनाई गई है । देश की जनता में शिक्षा को अधिकाधिक व्यापक बनाने के लिये सरकार ने राधाकृष्णन , मुदालियर और कोठारी कमीशनों का गठन किया। आज देश से निरक्षरता उन्मूलन करना नितान्त आवश्यक हो गया है। इस दिशा में कार्य हो रहा है, पर अभी तक साक्षर लोगों की संख्या में आशानुरूप वृद्धि नहीं हुई है। शहरों में ही शिक्षित और साक्षर लोगों की संख्या अधिक है, गाँवों में बहुत कम । जनसंख्या की द्रुत वृद्धि को ध्यान में रखते हुए ही निरक्षरता दूरीकरण की व्यवस्था को भी अधिक गतिमुखर बनाना पडेगा।

उपसंहार :- देश की जनता को शिक्षा का अधिकार देना पड़ेगा । उनमें गणतान्त्रिक चेतना का संगार काना पडेगा। निरक्षरता के दूर होते ही आत्मनिर्भर हो जायगा देश । समृद्धि के दिगन्त उन्मोचित होंगे । चरिज्न-गतन ओर उन्नत जीवन-मान-—न लक्ष्यों की प्राप्ति शिक्षा के व्यापक प्रसार से ही हो सकेगी । केवल प्राइमरी और माध्यािव सतरों की शिक्षा को अनववार्य बना देने से ही काभ नहीं चलेगा । देश के अगणित व्यस्क लोगों को साक्षर बनाने की याँजना को भी वास्तविक रूप से लागू करना पड़ेगा । जब तक यह नहीं होता, तब तक अनवरत सक्रियतापूर्वक इस दिधा 4 लगी रहना पड़ेगा ।

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व्यायाम और स्वास्थ्य

भगवान बुद्ध ने कहा था – “हमारा कर्त्तव्य है कि हम अपने शरीर को स्वस्थ रखें अन्यथा हम अपने मा नो सक्षम और शुद्ध नहीं रख पाएँगे ।”

आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में इंसान को फुर्सत के दो पल भी नसीब नहीं हैं । घर से दफ्तर, दफ्तर से घग तो कभी घर ही तफ्तर बन जाता है यानि इंसान के काम की कोई सीमा नहीं है । वह हेमाश खुद को व्यस्त रखता है । इस व्यस्तता के कारण आज मानव शरीर तनाव, थकान, बीमारी इत्यादि का घर बनता जा रहा है । आज उसने हर प्रकार की सुख-सुविधाएँ तो अर्जित कर ली हैं, किन्तु उसके सामने शारीरिक एवं मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने की चनौती ज़ा खड़ी हुई है।

यद्यपि चिकित्सा एवं आयुर्विज्ञान के क्षेत्र में मानव ने अनेक प्रकार की बीमारियों पर विजय हासिल की है, कित्तु इगये उसे पर्याप्त मानसिक शान्ति मिल गईं है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। तो क्या मनुष्य अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है ? यह ठीक है कि काम जरूरी है, लेकिन काम के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाए, तो यहा सोने पेसहहागा वाली बात ही होगी । महात्मा गाँधी ने भी कहा है – “स्वास्थ्य ही असली धन है, सोना और चाँटी नहीं।”

सचमुच यदि व्यक्ति स्वस्थ न रहे तो उसके लिए दुनिया की हर खुशी निरर्थक होती है। रुपये के ढेर पर बैठ कर आदमी को तब ही आनन्द मिल सकता है, जब वह शारीरिक रूप से स्वस्थ्य हो। स्वास्थ्य की परिभाषा के अन्तर्गत केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ्य होना ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी शामिल है । व्यक्ति शारीरि क रूप से स्वस्थ हां, किन्तु मानसिक परेशानियों से जूझ रहा हो, तो भी उसे स्वस्थ नहीं कहा जा सकता । उसी व्यक्ति को स्नस्थ कहा जा सकता है, जो शारीरिक एवं मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ हो । साइरस ने ठीक कहा है कि अच्छा स्वास्थ्य एवं अच्छी समझ, जीवन के दो सर्वोत्तम वरदान हैं।

व्यक्ति का शरीर एक यन्त्र की तरह है । जिस तरह यन्त्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए उसमें तेल-ग्रीस आर्ादि का प्रयोग किया जाता है, उसी प्रकार मनुष्य को अपने शरीर को क्रियाशील एवं अन्य विकारों से दूर रखने के लिए शर्भाग क व्यायाम करना चाहिए । शिक्षा एवं मनोरंजन के दृष्टिकोण से भी व्यायाम का अत्यधिक महत्त्व है । शरीर के स्जस्थ रदने पर ही व्यक्ति कोई बात सीख पाता है अथवा खेल, नृत्य-संगीत एवं किसी प्रकार के प्रदर्शन का आनन्द उटा पाता है । अस्वस्थ व्यक्ति के लिए मनोरंजन का कोई महत्त्व नहीं रह जाता ।
जॉनसन ने कहा है – “उत्तम स्वास्थ्य के बिना संसार का कोई भी आनन्द प्राप्त नहीं किया जा सकता।”

देखा जाए तो स्वास्थ्य की दृष्टि से व्यायाम के कई लाभ हैं – इससे शरीर की मांसपेशियाँ एवं हड्डियाँ मजबूत होती हैं। रक्त का संचार सुचारु रूप से होता है । पाचन क्रिया सुदृढ़ होती है। शरीर को अतिरिक्त ऑक्सीजन मिलती है और फेफड़े मज़बूत होते हैं । व्यायाम के दौरान शारीरिक अंगों के सक्रिय रहने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोंधक क्षमता बढ़ती है । इस तरह व्यायाम मनुष्य के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है ।
किसी कवि ने ठीक ही कहा है –

‘पत्थर-सी हों मांसपेशियाँ, लोहे-सी भुजदण्ड अभय ।
नस-नस में हो लहर आग की तभी जवानी पाती जय।’

इस तरह, स्वास्थ्य एवं व्यायाम का एक-दूसरे से घनिष्ठ सम्बन्ध है । व्यायाम के बिना शरीर आलस्य, अकर्मन्यता एवं विभिन्न प्रकार की बीमारियों का घर बन जाता है । नियमित व्यायाम शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से आवश्यक है । इस सन्दर्भ में हिप्पोक्रेट्स ने बड़ी महत्वपूर्ण बात कही है – “यदि हम प्रत्येक व्यक्ति को पोषण और व्यायाम की सही राशि दे सकते, जो न बहुत कम होती और न बहुत ज्यादा, तो हमें स्वस्थ रहने का सबसे सुरक्षित रास्ता मिल जाता ।” अत: हमें इनकी शिक्षा को जीवन में उतारने की कोशिश करनी चाहिए ।

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समय और उसका सदुपयोग

कबीर ने मृत्यु को अवश्यम्भावी बताकर जीवन के एक-एक पल का सदुपयोग करने की सीख देते हुए कहा है –

“‘काल करै सो आज कर, आज करै सो अब ।
पल में परलय होएगी, बहुरि करैगा कब ।।”

‘परीक्षा में तो अभी काफ़ी दिन बाकी हैं, कल से पढ़ना शुरू कर देंगे’, ऐसा सोचकर कुछ विद्यार्थी कभी नहीं पढ़ते, किन्तु परीक्षा नियत समय एवं तिथि पर ही होती है । परीक्षा के प्रश्नों को देखकर उन्हें लगता है कि यदि उन्होंने समय का सदुपयोग किया होता, तो परीक्षा हॉल में यूँ ही खाली नहीं बैठना पड़ता । इसलिए कहा गया है – ” अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” प्रसिद्ध लेखक मेसन ने समय की महिमामण्डित वर्णन करते हुए कहा है – “स्वर्ण के प्रत्येक कण की तरह ही समय का प्रत्येक क्षण भी मूल्यवान है।” प्लेटफॉर्म पर खड़ी रेलगाड़ी अपने यात्रियों की प्रतीक्षा नहीं करती और देर से पहुँचने वाले अफ़सोस करते रह जाते हैं।

इसी तरह, समय भी किसी की प्रतीक्षा नहीं करता । अंग्रेजी में कहा गया है ‘Time and tide waits for none’ अर्थात् समय और समुद्र की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करते । मानव जीवन में समय की महत्ता को समझाने के लिए प्रकृति में भी उदाहरण भरे पड़े हैं । कभी-कभी बरसात के मौसम में वर्षा इतनी देर से शुरू होती है कि खेतों में लगी फसलें सूख जाती हैं। ऐसे में भला वर्षा होने का भी क्या लाभ। भक्त कवि तुलसीदास ने प्रकृति के इसी उदाहरण का उल्लेख करते हुए जीवन में समय की महत्ता को इस प्रकार से समझाया है –

“का बरखा जब कृषी सुखाने ।
समय चूकि पुनि का पछताने ।।

एक बार एक चित्रकार ने समय का चित्र बनाया, जिसमें एक अति सुन्दर व्यक्ति हँसता हुआ दोनों हाथ फैलाए खड़ा था । सामने से उसके केश सुन्दर दिख रहे थे, पर पीछे से वह बिल्कुल गंजा था । इस चित्र के माध्यम से चित्रकार यह सन्देश देना चाहता था कि समय जब आता है, तो आपकी ओर बाँहें फैलाए आता है । ऐसे में यदि आपने सामने से आते हुए समय के केश पकड़ लिए, तो वह आपके काबू में होगा, किन्तु यदि आपने उसे निकल जाने दिया, तो पीछे से आपके हाथ उसके गंजे सिर पर फिसलते रह जाएँगे और फिर वह आपकी पकड़ में नहीं आएगा। इसलिए समय को पहचानकर उसका सदुपयोग करना चाहिए । समय के सदुपयोग में ही जीवन की सफलता का रहस्य निहित है । राजा हो या रंक, मूर्ख हो या विद्वान्, समय किसी के लिए अपनी गति मन्द नहीं करता । इसलिए सबको जीवन में सफलता पाने के लिए समय का सदुपयोग करना ही पड़ता है। आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनकी सफलता का रहस्य जीवन के हर पल का सदुपयोग ही रहा है ।

जो व्यक्ति अपना निश्चित कार्यक्रम बनाकर, मानसिक वृत्तियों को स्थिर एवं संयमित करके कार्य करता है, उसे जीवन-संग्राम में अवश्य सफलता प्राप्त होती है । वैसे तो यह नियम प्रत्येक आयु वर्ग के व्यक्ति पर लागू होता है, किन्तु विद्यार्थी जीवन में इस नियम की सर्वाधिक महत्ता है। जो विद्यार्थी नियत समय में पूर्ण मनोयोग के साथ अपनी पढ़ाई करते हैं, उन्हें सफलता अवश्य मिलती है । इस तरह, समय का अपव्यय करना तो आत्महत्या के समान है ही, समय का दुरुपयोग भी उससे कुछ कम नहीं ।

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यदि मैं किसान होता

भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारी सम्पन्नता मुख्यत: हमारे कृषि उत्पादन पर निर्भर करती है। इस लक्ष्य का प्राप्ति के लिये भारतीय कृषक की एक बड़ी भूमिका है । वास्तव में भारत कृषकों की भूमि है । हमारी $75 \%$ जनता गांवा में रहती है ।

भारतीय किसान का सर्वत्र सम्मान होता है । वही सम्पूर्ण भारतवासियों के लिए अन्न एवं सब्जियाँ उत्पन्न करता है । पूरा वर्ष भारतीय कृषक खेत जोतने, बीज बोने एवं फसल उगाने में व्यस्त रहता है। वास्तव में उसका जीवन अत्यन्त व्यस्त होता है, तथापि मुझमें भी एक किसान बनने की इच्छा जाग्रत होती है।

यदि में किसान होता तो अन्य किसानो की भांति ही रोज प्रातः तड़के उठता और अपने हल एवं बेल लेकर खंतों की ओर चला जाता, वहाँ घंटों खेत जोतता, तत्पश्चात नाश्ता करता । हमारे घर-परिवार के सदस्य मेरे लिए खेत पर ही खाना लाते । खाने के पश्चात पुनः अपने काम में व्यस्त हो जाता। मैं अपने खेतो में कृषि के प्रति कठोर परिश्रम करता और अपने परिश्रम के माध्यम से अधिक-से-अधिक फसल के उत्पादन का प्रयास करता जिससे अपने घर-परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए राष्ट्र के आर्थिक विकास में भी एक नागरिक की हैसियत से अपनी भूमिका पालन करता।

यदि मैं किसान होता तो अपने खलिहान में दो-चार दुधारु गाय, भैंस एवं बकरी जैसे पशुओं का पालन करता जिससे हमें शुद्ध दुग्ध की प्राप्ति होती जिसका उपयोग मैं अपने घर-परिवार के सदस्यों के लिए करता साथ ही उसका एक भाग बाजार में बिक्री कर कुछ नकद आय की उपार्जन भी करता । किसान होने के नाते मैं अपने घर के तथा खेत-खलिहान के आस-पास अधिक-से-अधिक पेड़-पौधे लगाकर प्रोदुछण-मुक्त पर्यावरण के संरक्षण में अपनी भागीदारी का पालन करता।

किसान बहुत सीधा-सादा जीवन जीता है । उसका पहनावा ग्रामोण होता है। वह घास फूस के झोपड़ा में रहता है. हालांकि बहुत से कृषकों के पक्के मकान भी हैं। उसकी सम्पत्ति कुछ बैल, हल एवं कुछ एकड़ धरती ही होती है। वह अधिकतर अभावों का जीवन जीता है । तथापि, एक किसान राष्ट्र की आत्मा होता है । हमारे दिवंगत प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया था ‘जय जवान, जय किसान’ । उन्होंने कहा था कि कृषक राष्ट्र का अन्नदाता है। उसी पर कृषि उत्पादन निर्भर करता है । अतएव, एक किसान होने के नाते मैं उनके स्वप्नों को साकार करने की यथासभव प्रयास करता ।

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यदि मैं प्रधानमंत्री होता

यदि मैं प्रधानमंत्री होता-अरे ! यह मैं क्या सोचने लगा । प्रधानमंत्री बन पाना खाला जी का घर है क्या ? भारत जैसे महान् लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बनना वास्तव में बहुत बड़े गर्व और गौरव की बात है, इस तथ्य से भला कौन इन्कार कर सकता है । प्रधानमंत्री बनने के लिए लम्बे और व्यापक जीवन-अनुभवों का, राजनीतिक कार्यों और गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव रहना बहुत ही आवश्यक हुआ करता है । प्रधानमंत्री बनने के लिए जनकार्यो और सेवाओं की पृष्ठभूमि रहना भी जरूरी है और इस प्रकार के व्यक्ति का अपना जीवन भी त्याग-तपस्या का आदर्श उदाहरण होना चाहिए ।

आज के युग में छोटे-बड़े प्रत्येक देश और उसके प्रधानमंत्री को कई तरह के राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय दबाबों, कूटनीतिजों के प्रहारों को झेलते हुए कार्य करना पड़ता है। अत: प्रधानमंत्री बनने के लिए व्यक्ति को चुस्त-चालक, कूटनीति प्रवण और दबाव एवं प्रहार सह सकने योग्य मोटी चमड़ी वाला होना भी बहुत आवश्यक माना जाता है । निश्चय ही मेरे पास ये सारी योग्यताएँ और ढिठाइयाँ नहीं हैं; फिर भी अक्सर मेरे मन-मस्तिष्क में यह बात मथती रहा करती है, रह-रहकर गुँज गूज उठा करती है कि यदि मैं प्रधान मंत्री होता, तो ?

यदि मैं प्रधानमंत्री होता, तो सब से पहले स्वतंत्र भारत के नागरिकों के लिए, विशेष कर नई पीढियों के लिए पृरी सख्ती और निष्ठुरता से काम लेकर एक राष्ट्रीय चरित्र निर्माण करने वाली शिक्षा एवं उपायों पर बल देता।

आज स्वतंत्र भारत में जो संविधान लागू है, उसमें बुनियादी कमी यह है कि वह देश का अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक अनुसूचित जाति, जन-जाति आदि के खानों में बाँटने वाला तो है, उसने हरेक के लिए कानून विधान भी अलग-अलग बना रखे हैं जबकि नारा समता और समानता का लगाया जाता है । यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो संविधान में सभी के लिए एक शब्द ‘भारतीय’ और समान संविधान-कानून लागू करवाता ताकि विलगता की सूचक सारी बाते स्वतः ही खत्म हो जाएँ । भारत केवल भारतीयों का रह जाए न कि अल्प-संख्यक, बहुसंख्यक आदि का ।

यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो सभी तरह की निर्माण-विकास योजनाएँ इस तरह से लागू करवाता कि वे राष्ट्रीय संसाधनों से ही पूरी हो सके । उनके लिए विदेशी धन एवं सहायता का मोहताज रह कर राष्ट्र की आन-बान को गिरवी न रखना पड़ता । दबावों में आकर इस तरह की आर्थिक नीतियाँ या अन्य योजनाएँ लागू न करने देना कि जो राष्ट्रीय स्वाभिमान के विपरीत तो होती ही हैं, निकट भविष्य में कई प्रकार की आर्थिक एवं सांस्कृतिक हानियाँ भी पहुँचाने वाली हैं।

यदि मैं प्रधानमंत्री होता, तो भ्रष्टाचार का राष्ट्रीयकरण कभी न होने देता। किसी भी व्यक्ति का भष्टाचार सामने आने पर उसकी सभी तरह की चल-अचल सम्पत्ति को तो छीन कर राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित करता ही, चीन तथा अन्य कई देशों कौ तरह श्रष्ट कार्य करने वाले लोगों के हाथ-पैर कटवा देना, फाँसी पर लटका या गोली से उड़ा देने जैसे हूदयहीन कहेमाने जाने वाले उपाय करने से भी परहेज नहीं करता । इसी प्रकार तरह-तरह के अलगाववादी तत्वों को न तो उभरने देता और उभरने पर उनके सिर सख्वी से कुचल डालता । राष्ट्रीयहित, एकता और समानता की रक्षा, व्यक्ति के मान-सम्मान की रक्षा और नारी-जाति के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार का दमन मैं हर संभव उपाय से करता-करवाता।

इस तरह स्पष्ट है कि यदि मैं भारत का प्रधानमन्त्री होता, तो देश एवं जनता को सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं शेक्षिक स्तर पर सुदृढ़ कर भारत को पूर्णत: खुशहाल देश बनाने का अपना सपना साकार करता, ताकि हमारा देश पुन: सौन की चिड़िया कहलाने लगे ।

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यदि मैं शिक्षक होता
अथवा,
एक शिक्षक का सपना

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • आदर्श शिक्षक
  • शिक्षा-प्रणाली में परिवर्तन
  • आदर्श शिक्षक के कर्तव्य
  • उपसंहार ।

शिक्षक होना सचमुच बहुत बड़ी बात हुआ करती है । शिक्षक की तुलना उस सृष्टिकर्ता बह्मा से भी कर सकते हैं। जैसे संसार के प्रत्येक प्राणी और पदार्थ को बनाना बह्या का कार्य है, उसी प्रकार उस सब बने हुए को संसार के व्यावहारिक ढाँच में ढालना, व्यवहार योग्य बनाना, सजा-संवार कर प्रस्तुत करना वास्तव में शिक्षक का ही काम हुआ करता है । यदि मैं शिक्षक होता, तो एक वाक्य में कहूँ तो हर प्रकार से शिक्षकत्व के गौरव, विद्या, उसकी शिक्षा, उसकी आवश्यकता और महत्त्व को पहले तो स्वयं भली प्रकार से जानने और हृदयंगम करने का प्रयास करता; फिर उस प्रयास के आलोक में ही अपने पास शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा से आने वाले विद्यार्थियों को सही और उचित शिक्षा प्रदान काता, जैसा कबीर कह गए हैं ;

”गुरु कुम्हार सिष कुम्भ है, गढ़ि-गढ़ि खोट ।
भीतर हाथ सहार दे, बहार बाहे चोट ।।”

अर्थात् जिस प्रकार एक कुम्हार कच्ची और गीली मीटी को मोड़-तोड़ और कुशल हाथों से एक साँचे में ढालकर घड़ा बनाया करता है उसी प्रकार मैं भी अपनी सुकुमार-मति से छात्रों का शिक्षा के द्वारा नव-निर्माण करता, उन्हें एक नये साँचे मे ढालता । जैसे कुम्हार, मिट्टी से घड़े का ढाँचा बना कर उसे भीतर से एक हाथ का सहारा दे और बाहर से ठोंक कर उसमें पड़े गर्त आदि को समतल बनाया करता है, उसे भीतर से एक हाथ का सहारा दे और बाहर से ठोक कर उसमें पड़े गर्त आदि को समतल बनाया करता है, उसी प्रकार मैं अपने छात्रों के भीतर यानि मन-मस्तिष्क में ज्ञान का सहारा देकर उनकी बाहरी बुराइयाँ भी दूर करके हर प्रकार से सुडौल, जीवन का भरपूर आनन्द लेने के योग्य बना देता । लेकिन सखेद स्वीकार करना पड़ता है कि मैं शिक्षक नहीं हूँ और जो शिक्षक हैं, वे अपने कर्त्तव्य का इस प्रकार गुरुता के साथ पालन करना नहीं चाहते।

यदि मैं शिक्षक होता तो न केवल स्वयं आदर्श शिक्षक बनता बल्कि अपने छात्रों को आदर्श गुरु की पहचान भी बताता। एक गुरु वे होते हैं, जिसके बीते हुए कल आपके आनेवाले कल के मार्गदर्शक बन सकते हैं। इसलिए किसी ऐसे आदर्श को खोजें जो आपको अपना शिष्य भी बना सके। एक अच्छा गुरु आपको सही राह दिखा सकता है लेकिन एक घटिया गुरु आपको गुमराह कर सकता है। याद रखें – “अच्छे गुरु आपकी प्यास नहीं बुझाते, बल्कि आपको प्यासा बनाएंगे। वे आपको जिज्ञासु बनाते है।”

एक राजा की कहानी है, जो किसी ऐसे व्यक्ति का सम्मान करना चाहता था जिसने समाज की उन्नति के लिए सबसे ज्यादा योगदान किया हो। हर तरह के लोग, जिनमें डॉक्टर और व्यवसायी भी आये थे, मगर राजा उनसे प्रभावित नहीं हुआ। अंत में एक बुजुर्ग इंसान आया, जिसके चेहरे पर चमक थी और उसने खुद के एक शिक्षक बताया। राजा ने अपने सिंहासन से उतर और युककर उस शिक्षक को सम्मानित किया। समाज के भविष्य को बनाने और संवारने में सबसे बड़ा योगदान शिक्षक का ही होता है – इस मूलमंत्र को मैं एक शिक्षक के रूप में सदैव याद रखता यदि में शिक्षक होता।

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छात्र जीवन में राजनीति

सूचना प्रौद्योगिकी के इस उन्नत युग में भी व्यावसायिक शिक्षा की अपेक्षित व्यवस्था अब तक भारत में नहीं हो पाई है। पारम्परिक शिक्षा प्राप्त कर तथा उच्च उपाधि प्राप्त करने के बावजूद अधिकतर छात्र किसी विशेष काम लायक नहीं रहते। इसके कारण शिक्षित बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। भारत में हर वर्ष लगभग पाँच लाख से अधिक छात्र अभियान्रिकी एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षाप्राप्त करते हैं। इनमें से सभी योग्य अभियन्ता नहीं होते। इसलिए उनको डिग्री के अनुरूप नौकरी नहीं मिल पाती। इस स्थिति में छात्रों का असन्तुष्ट होना स्वाभाविक ही है।

शिक्षा के निजीकरण के कारण उच्च शिक्षा प्रदान करने वाली शिक्षण संस्थाओं की बाढ़ तो आ गई है, किन्तु इन संस्थानों में छात्रों का अत्यधिक शोषण होता है। यहाँ शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधनों का भी अभाव होता है। छात्रों द्वारा विरोध किए जाने पर उन्हें संस्थान से निकाले जाने की धमकी दी जाती है। निजी शिक्षण संस्थानों को चलाने वाले व्यवसायियों की पहुँच ऊपर तक होती है। इसलिए उनकी शिकायत का भी कोई परिणाम नहीं निकलता। अत: छात्रों के पास कुण्ठित होकर अपनी किस्मत को कोसने के अलावा और कोई रास्ता शेष नहीं बचता।

कुछ स्वर्थी राजनीतिक दल छात्रों को अपने साथ मिलाकर अपना उल्लू सीधा करने में जुटे रहते हैं। इसलिए ये शिक्षण संस्थाओं में राजनीति को बढ़ावा देते हैं। इसके कारण देश के कुछ प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान राजनीति के अखाड़े का रूप लेते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों की पढ़ाई बाधित तो होती ही है, इस स्थिति के कारण भी छात्रों में शिक्षा के प्रति असन्तोष की भावना उत्पन्न होती है।

इस तरह बेरोजगारी का डर, पारम्परिक शिक्षा का वर्तमान समय के अनुरूप न होना, व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने वाली शिक्षण संस्थाओं का अभाव, शिक्षण संस्थाओं को राजनीति का केन्द्र बनाया जाना, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का अपने कर्तव्यों से विमुख होना, निजी शिक्षण संस्थाओं की मनमानी, इत्यादि भारत में छात्र असन्तोष के कारण हैं। छात्र ही देश के भविष्य होते हैं। यदि उनका भला नहीं हो पाया, यदि वे बेरोजगारी का दंश झेल रहे हों, यदि उनके साथ नाइन्साफी हो रही हो, यदि उनके भविष्य से खिलवाड़ हो रहा हो, तो देश का भला कैसे हो सकता है! नि:सन्देह इसके कारण देश की आर्थिक ही नहीं, सामाजिक एवं राजनीतिक प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए समय रहते इस समस्या का निदान करना आवश्यक है।

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विश्व में कोरोना महामारी का कहर

पिछले कुछ महीनों में हमारी दुनिया एकदम बदल गई है । लाखों लोगों की जानें चली गई । लाखों लोग बीमार पड़े हुए हैं। इन सब पर एक नए कोरोना वायरस का कहर दूटा है और जो लोग इस वायरस के प्रकोप से बचे हुए हैं, उनका रहन सहन भी एकदम बदल गया है। ये वायरस दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में पहली बार सामने आया था। उसके बाद से दुनिया में सब कुछ उलट-पुलट हो गया।

शुरुआत वुहान से ही हुई, जहां पूरे शहर की तालाबंदी कर दी गई। इटली में इतनी बड़ी तादाद में वायरस से लोग मरे कि बहां दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से पहली बार लोगों की आवाजाही पर इतनी सख़्त पाबंदी लगानी पड़ी। बिटेन की राजधानी लंदन में पब, बार और थिएटर बंद कर दिए गए। लोग अपने घरों में बंद हो गए। दुनिया भर में उड़ानें रद्द कर दी गई और बहुत से संबंध सोशल डिस्टेंसिंग के शिकार हो गए।

ये सारे कदम इसलिए उठाए गए ताकि नए कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके और इससे लगातार बढ़ती जा रही मौतों के सिलसिले को थामा जा सके ।

प्रदूषण में भारी कमी : इन पाबंदियों का एक नतीजा ऐसा भी निकला है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। अगर, आप राजधानी दिल्ली से पड़ोसी शहर नोएडा के लिए निकलें, तो पूरा मंजर बदला नज़र आता है। सुबह अक्सर नींद अलार्म से नहीं, परिंदों के शोर से खुलती है। जिनकी आवाज़ भी हम भूल चुके थे । चाय का मग लेकर ज़रा देर के लिए बालकनी में जाएं, तो नज़र ऐसे आसमान पर पड़ती है, जो अजनबी नज़र आता है। इतना नीला आसमान, दिल्लीएनसीआर में रहने वाले बहुत से लोगों ने जिंदगी में शायद पहली बार देखा हो। फ़लक पर उड़ते हुए सफ़ेद रूई जैसे बादल बेहद दिलकश लग रहे थे ।

सड़के बीरान तो थीं मगर मंज़र साफ़ हो गया था। सड़क किनारे लगे पौधे एकदम साफ़ और फूलों से गुलज़ार यमुना नदी तो इतनी साफ़ कि पूछिए ही मत। सरकार हज़ारों करोड़ ख़र्च करके भी जो काम नहीं कर पाई, लॉकडाउन के 21 दिनों ने वह कर दिखाया ।

प्रकृति के लिए वरदान ?: ऐसी ही तस्वीरें दुनिया के तमाम दूसरे शहरों में भी देखने को मिल रही थीं। इसमें शक नहीं कि नया कोरोना वायरस दुनिया के लिए काल बनकर आया है। इस नन्हें से वायरस ने लाखों लोगों को अपना निवाला बना लिया है। अमरीका जैसी सुपरपावर की हालत ख़राब कर दी है। इन चुनौतियों के बीच एक बात सौ फ़ीसद सच है कि दुनिया का ये लॉकडाउन प्रकृति के लिए बहुत मुफ़ीद साबित हुआ है। वातावरण धुल कर साफ़ हो चुका है। हालांकि ये तमाम क्रवायाद कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हैं।

लॉकडाउन की वजह से तमाम फैैक्ट्रययां बंद हैं। यातायात के तमाम साधन बंद हैं। अंतराष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को भारी धक्का लग रहा है । लाखों लोग बेरोज़गार हुए हैं। शेयर बाज़ार अंधे मुंह आ गिरा है। लेकिन अच्छी बात ये है कि कार्बन उत्सर्जन रुक गया। नाइट्रोजन डाइ आक्साइड उत्सर्जन कम हो रहा है। ब्रेटेन और स्सुन की भी कुछऐसी ही कहानी है ।

लॉकडाउन के बाद ? : कुछ लोगों का कहना है कि इस महामारी को पर्यावरण में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अभी सब कुछ बंद है, तो कार्बन उत्सर्जन रुक गया है। लेकिन जब दुनिया फिर से पहले की तरह चलने लगी तो क्या ये कार्बन उत्सर्जन फिर से नहीं बढ़ेगा ? पर्यावरण में जो बदलाव हम आज देख रहे हैं क्या वे हमेशा के लिए स्थिर हो जाएंगे।

स्वीडन के एक जानकार और रिसर्चर किम्बर्ले निकोलस के मुताबिक़, दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन का 23 फ़ीसदी परिवहन से निकलता है। इनमें से भी निजी गाड़ियों और हवाई जहाज़ की वजह से दुनिया भर में 72 फीसदी कार्बन उत्सर्जन होता है। लोग ऑफ़िस का काम भी घर से कर रहे थे। अपने परिवार और दोस्तों को वक़्त दे पा रहे थे। निकोलस कहते हैं कि मुश्किल की इस घड़ी में हो सकता है लोग इसकी अहमियत समझें।

अगर ऐसा होता है तो मौजूदा पर्यावरण के हालात थोड़े परिवर्तन के साथ लंबे समय तक चल सकते हैं। वहीं निकोलस ये भी कहते हैं कि बहुत से लोगों के लिए हर रोज़ ऑफिस आना और दिल लगाकर काम करना ही जिंदगी का मक़सद होता है। इन दिनों उन्हें घर में बैठना बिल्कुल नहीं भा रहा होगा। वे इस लॉकडाउन को कैदन की तरह देख रहे होंगे। हो सकता है वे अभी ये प्लानिंग ही कर रहे हों कि जैसे ही लॉकडाउन हटेगा वे फिर से कहीं घूमने निकलेंगे।

लॉन्ग ड्राइव पर जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो बहुत जल्द दुनिया के आब-ओ-हवा में ज़हर घुलने लगेगा। ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी महामारी के चलते कार्बनडाई ऑक्साइड का स्तर कम हुआ हो। इतिहास में इसके कई उदाहरण मिलते हैं। यहां तक कि औद्योगिक क्रांति से पहले भी ये बदलाव देखा गया था। जर्मनी की एक जानकार जूलिया पोंग्रात्स का कहना है कि यूरोप में चौदहवीं सदी में आई ब्लैक डेथ हो, या दक्षिण अमरीका में फैली छोटी चेचक। कोरोना वायरस की महामारी ने ना जाने कितनों से उनके अपनों को हमेशा के लिए जुदा कर दिया है।

हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बहुत नकारात्म और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ना जाने कितनों का रोज़गार खत्म हुआ है। अर्थव्यवस्था पटरी पर कब लौटेगी यह भी कहना मुश्किल है। लेकिन इस महामारी ने एक बात साफ़ कर दी कि मुश्किल घड़ी में सारी दुनिया एक साथ खड़ी होकर एक दूसरे का साथ देने के लिए तैयार है तो फिर क्या यही जज़्बा और इच्छा शक्ति हम पर्यावरण बचाने के लिए ज़ाहिर नहीं कर सकते ? हमें उम्मीद है, समय के इस अंधकार को हम स्वच्छ और हरे-भरे वातावरण से मिटा देंगे ।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 4 नमक

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions कहानी Chapter 4 नमक to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 4 Question Answer – नमक

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लाहौर से लौटते समय सफ़िया ने क्या निश्चय किया?
उत्तर :
मुहब्बत का तोहफा वह चोरी से नहीं ले जाएगी।

प्रश्न 2.
सफ़िया का भाई क्या था ?
उत्तर :
सफिया का भाई पुलिस अफसर था।

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प्रश्न 3.
सिख बीबी को देखकर साफिया क्यों हैरान रह गई थी ?
उत्तर :
सिख बीबी की शक्ल-सूरत साफिया की माँ से बहुत मिलती-जुलती थी इसलिए वह उन्हें देखकर हैरान रह गई थी।

प्रश्न 4.
‘नमक’ के रचनाकार कौन हैं ?
उत्तर :
रज़िया सज्जाद ज़हीर।

प्रश्न 5.
सफ़िया किस कहानी की पात्र है ?
उत्तर :
‘नमक’।

प्रश्न 6.
किसकी सूरत सिख बीबी से मिलती थी ?
उत्तर :
सफिया की माँ से।

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प्रश्न 7.
सिख बीबी का चेहरा कैसा था ?
उत्तर :
खुली किताब की तरह।

प्रश्न 8.
सिख बीबी ने कैसा दुपट्टा ओढ़ा था?
उत्तर :
सिख बीबी ने सफेद मलमल का वैसा दुप्टा ओढ़ा था जैसा उसकी अम्मा मुहर्रम में ओढ़ा करती थी।

प्रश्न 9.
सफ़िया कहाँ जा रही थी ?
उत्तर :
पाकिस्तान।

प्रश्न 10.
सफ़िया किससे मिलने पाकिस्तान जा रही थी ?
उत्तर :
सफ़िया अपने भाई-भाभी तथा उनके बच्चों से मिलने पाकिस्तान जा रही थी।

प्रश्न 11.
सिख बीबी ने किसे प्यारा शहर कहा ?
उत्तर :
लाहौर को।

प्रश्न 12.
कहाँ के लोग खूबसूरत, उम्दा खाने, नफीस कपड़ों के शौकीन, सैर-सपाटे के रसिया तथा जिंदादिली की तस्वीर होते हैं ?
उत्तर :
लाहौर (पाकिस्तान) के।

प्रश्न 13.
सफिया ने सिख बीबी से क्या पूछा?
उत्तर :
माता जी, आपको तो यहाँ आए बहुत साल हो गए होंगे ।

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प्रश्न 14.
आपको तो यहाँ आए बहुत साल हो गए होंगे – ‘आपको’ से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
सिख बीबी।

प्रश्न 15.
सिख बीबी हिंदुस्तान कब आई थी ?
उत्तर :
हिंदुस्तान बनने के समय आई थी।

प्रश्न 16.
सिख बीबी मूलतः कहाँ की रहने वाली थी ?
उत्तर :
पाकिस्तान के लाहौर की।

प्रश्न 17.
सिख बीबी को किसकी बहुत याद् आती थी?
उत्तर :
लाहौर की।

प्रश्न 18.
सफ़िया सिख बीबी से कहाँ मिली थी ?
उत्तर :
कीर्तन में।

प्रश्न 19.
कीर्तन कितने बजे खत्म हुआ।
उत्तर :
ग्यारह बजे।

प्रश्न 20.
सफ़िया ने सिख बीबी से थीमे से क्या पूछा ?
उत्तर :
“आप लाहौर से कोई सौगात मँगाना चाहें तो मुझे हुक्म दीजिए।”

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प्रश्न 21.
सिख बीबी किस कपड़े का दुपट्टा ओढ़े थी ?
उत्तर :
सफेद बारीक मलमल का।

प्रश्न 22.
किसकी आँखों में नेकी, मुहब्बत और रहमदिली की रोशनी जगमगाया करती थी?
उत्तर :
सफ़िया की माँ की आँखों में।

प्रश्न 23.
सफ़िया की अम्मा मुहर्रम में कैसा दुपट्वा ओढ़ा करती थी ?
उत्तर :
सफेद बारीक मलमल का दुप्टा।

प्रश्न 24.
किसने, कई बार, किसे मुहब्बत से देखा?
उत्तर :
सफ़िया ने सिख बीबी को कई बार मुहल्यत से देखा।

प्रश्न 25.
कीर्तन के दौरान सफ़िया और सिख बीबी क्या करते रहे?
उत्तर :
आहिस्ता-आहिस्ता बातें।

प्रश्न 26.
सिख बीबी ने सफ़िया से लाहौर से क्या लाने को कहा ?
उत्तर :
लाहौरी नमक।

प्रश्न 27.
सफ़िया पाकिस्तान/लाहौर में कितने दिन रही ?
उत्तर :
पंद्रह दिन।

प्रश्न 28.
लाहौर से लौटते समय सफ़िया के सापने बड़ी समस्या क्या थी?
उत्तर :
दामी कागज में लिपटे सेर भर लाहौरी नमक को छिपाने की।

प्रश्न 29.
सिख बीबी ने किससे सफिया के बारे में पूछा?
उत्तर :
सफिया के घर की बहू से।

प्रश्न 30.
सफ़िया ने बड़े भाई से क्या पूछा?
उत्तर :
क्यों भैया, नमक ले जा सकते हैं?

प्रश्न 31.
नमक ले जाने के बारे में सफ़िया के बड़े भाई ने क्या कहा?
उत्तर :
लाहौर से नमक हिन्दुस्तान ले जाना गैरकानूनी है।

प्रश्न 32.
कौन-सी बात सफ़िया के बड़े भाई की समझ में नहीं आई और क्यों?
उत्तर :
जब नमक ले जाने के बारे में सफिया ने माँ का जिक्र किया तो यह बात सफ़िया के बड़े भाई की समझ़नें नें नहीं आई क्योंकि माँ तो बँटवारे के पहले ही मर चुकी थी।

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प्रश्न 33.
सफ़िया कितने बजे लाहौर से हिन्दुस्तान के लिए रवाना हुई?
उत्तर :
दिन में दो बजे।

प्रश्न 34.
कौन अपने-आप को सैयद कहता है ?
उत्तर :
सफ़िया।

प्रश्न 35.
सफ़िया ने सिख बीबी से क्या वादा किया था?
उत्तर :
लाहौरी नमक लाने का वादा।

प्रश्न 36.
सफ़िया जान देकर भी कौन-सा वादा पूरा करना चाहती है?
उत्तर :
लाहौरी नमक लाने का वादा।

प्रश्न 37.
सफ़िया ने नमक को कहाँ छुपाने के बारे में सोचा?
उत्तर :
कीनुओं को टोकरी में।

प्रश्न 38.
हिन्दुस्तान से सब लोग कौन-सा फल लाहौर ले जा रहे थे ?
उत्तर :
केला।

प्रश्न 39.
लाहौर से हिन्दुस्तान आने वाले कौन-सा फल ला रहे थे?
उत्तर :
कीनू।

प्रश्न 40.
सफ़िया किस कहानी को याद कर रही थी?
उत्तर :
उस शहजादे की कहानी को जिसमें वह रान चौर कर , हीरा छिपाकर देवों, भूतों तथा राक्षसी के सरहदो को पार कर जाता था।

प्रश्न 41.
लाहौर में सफ़िया के कितने भाई थे ?
उत्तर :
तोन भाई थे।

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प्रश्न 42.
सफ़िया के बाप की कब कहाँ थी?
उत्तर :
पांकिस्तान के लाहौर में।

प्रश्न 43.
सफ़िया के भतीजे-भतीजियाँ उससे क्या पूछते थे?
उत्तर :
फूफी जान, आप हिंदुस्तान में क्यों रहती हैं, जाएँ हमलोग नहीं आ सकते।

प्रश्न 44.
सफ़िया कितने समय बाद दुबारा लाहौर आ सकती थी?
उत्तर :
एक साल के बाद।

प्रश्न 45.
सफ़िया सपने में किन चीजों को देख रही थी ?
उत्तर :
इकबाल का मकबरा, लाहौर का किला, हवा मे रची-बसी मौलसिरी की खुशबू।

प्रश्न 46.
सफ़िया हिन्दुस्तान में कहाँ रहती थी?
उत्तर :
लखनऊ में।

प्रश्न 47.
पहले कस्टम अफसर ने सफ़िया को अपने बारे में क्या बताया?
उत्तर :
मेरा वतन देहली है जब पाकिस्तान बना था तभी आए चे, मगर हमारा वतन तो देहली ही हैं।

प्रश्न 48.
लाहौर से देहली (दिल्ली) तक का किराया सफिया को किसने दिया?
उत्तर :
सफ़िया के बड़े भाई ने।

प्रश्न 49.
सफिया लाहौर से दिल्ली किससे लौटी?
उत्तर :
रेलगाड़ी से ।

प्रश्न 50.
बहू ने सफ़िया के बारे में सिख बीबी को क्या बताया ?
उत्तर :
बहू ने सफ़िया के बारे में सिख बोबी को बताया कि ये मुसलमान हैं और कल ही अपने भाइयों से मिलने पाकिस्तान जा रही है।

प्रश्न 51.
सफ़िया ने कस्टमवालों को क्या दिखाने का निश्चय किया?
उत्तर :
लाहौरी नमक।

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प्रश्न 52.
कस्टम ऑफिसर ने नमक को सफिया के बैग में देते हुए क्या कहा?
उत्तर :
“मुहब्यत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।”

प्रश्न 53.
सफ़िया को स्टेशन तक कौन विदा करने आए थे?
उत्तर :
सफ़िया के बहुत से दोस्त, भाई तथा रिश्तेदार।

प्रश्न 54.
पाकिस्तानी पुलिस किस स्टेशन पर उतर गई।
उत्तर :
अटारी।

प्रश्न 55.
हिन्दुस्तानी पुलिस किस स्टेशन पर सवार हुई?
उत्तर :
अटारी।

प्रश्न 56.
बंगाली दिखने वाले कस्टम ऑफिसर से सफिया ने क्या कहा ?
उत्तर :
‘देखिए, मेरे पास नमक है थोड़ा-सा।’

प्रश्न 57.
बंगाली दिखनेवाले कस्टम ऑंफिसर किस वतन का था?
उत्तर :
द्वाका का।

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प्रश्न 58.
“हमारी जमीन, हमारे पानी का मजा ही कुछ और है'” – किसने, किससे कहा?
उत्तर :
बंगाली कस्टम ऑफिसर ने सफ़िया से कहा।

प्रश्न 59.
अमृतसर के पुल पर चढ़ती हुई सफ़िया क्या सोच रही थी?
उत्तर :
किसका वतन कहाँ है – वह कस्टम के इस तरफ से या उस तरफ।

प्रश्न 60.
सिख बीबी ने सफ़िया को लाहौर के बारे में क्या बताया?
उत्तर :
लाहौर बड़ा ही प्यारा शहर है। वहाँ के लोग कैसे खूबसूरत होते हैं, उम्दा खाने और नफीस कपड़ों के शौकीन, सैर-सपाटे के रसिया, जिंदादिली की तस्वीर।

प्रश्न 61.
लाहौर से सौगात मंगवाने के बारे में पूछने पर सिख बीबी ने क्या कहा?
उत्तर :
“अगर ला सको तो थोड़ा-सा लाहौरी नमक लाना।”

प्रश्न 62.
लाहौर से नमक ले जाने के बारे में सफिया ने किससे पूछने को सोचा ?
उत्तर :
अपने बड़े भाई से।

प्रश्न 63.
किस पर भावना के स्थान पर बुद्धि थीरे-धीरे हावी हो रही थी?
उत्तर :
सफिया पर।

प्रश्न 64.
भावना के स्थान पर बुद्धि के हावी होने का क्या अर्थ है?
उत्तर :
हरेक काम केवल भावनाओं में बहकर नहीं किया जा सकता। कभी-कभी भावना के स्थान पर बुद्धि से काम लेना अच्छा होता है।

प्रश्न 65.
कानून कब हैरान रह जाता है?
उत्तर :
मुहब्बत के आगे जब कस्टमवाले भी हार जाते हैं तब कानून हैरान रह जाता है।

प्रश्न 66.
सिख बीबी सफिया की ओर क्यों आकर्षित हुई?
उत्तर :
सिख बीबी भी लाहौर की थी और सफिया भी – इसलिए वह सफिया की ओर आकर्षित हुई।

प्रश्न 67.
कब सफिया के पैर तले की जमीन खिसकने लगी? क्यों?
उत्तर :
जब अमृतसर के कस्टम ऑफिसर ने सफिया को कुर्सी पर बिठाकर एक पुलिसवाले को ईशारा किया तब उसके पैर तले की जमीन खिसकने लगी। उसे लगा कि कस्टम औंकिसर उसे गिरफ्तार करवा देगा।

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प्रश्न 68.
‘नमक’ कहानी में नोबेल पुरस्कार प्राप्त किस कवि का जिक्र है?
उत्तर :
रवीन्द्रनाध टैगोर का।

प्रश्न 69.
‘नमक’ कहानी में किन तीन कवियों का जिक्र है?
उत्तर :
इकबाल, रवीन्द्रनाथ टैगोर तथा नजरूल इस्लाम।

प्रश्न 70.
अमृतसर में जाँच करने वाले कस्टम अधिकारी का नाम क्या है?
उत्तर :
सुनील दासगुप्त।

प्रश्न 71.
सुनील दासगुप्त को उसके किस मित्र ने कौन-सी किताब, कब दी थी?
उत्तर :
शमसुल इस्लाम ने सुनौल दास गुप्त के जन्मदिन पर सन् 1946 में।

प्रश्न 72.
सुनील दास गुप्त सफ़िया के किस प्रश्न का थोड़ा बुरा मान गए।
उत्तर :
वतन के बारे में पूछ्छे पर वे थोड़ा बुरा मान गए।

प्रश्न 73.
“हमारी जमीन, हमारे पानी का मजा ही कुछ और है” – हमारी जमीन का आशय किससे है?
उत्तर :
ढाका से।

प्रश्न 74.
जब सफ़िया अमृतसर के पुल पर चढ़ रही थी तब कस्टम अधिकारी सुनील दास गुप्त क्या कर रहे थे?
उत्तर :
पुल की सबसे निचली सीढ़ी के पास सिर झुकुकाए चुपचाप खड़े थे।

प्रश्न 75.
कस्टम अधिकारी सुनील दासगुप्त की उपहार स्वरूप प्राप्त पुस्तक के पहले सफ़े (पन्ना) पर क्या लिखा था?
उत्तर :
“शमसुल इस्लाम की तरफ से सुनील दासगुप्त को प्यार के साथ, ढाका 1961 ।”

प्रश्न 76.
सबसे पहले सफ़िया ने कहाँ नमक छिपाने का निश्चय किया?
उत्तर :
कीनुओं की टोकरी में।

प्रश्न 77.
“बाकी सब रफ्ता-रफ्ता ठीक हो जाएगा”‘ – किसके ठीक होने की बात कही जा रही है?
उत्तर :
हिंदुस्तान और पाकिस्तान के आपसी संबंधों के ठीक होने की बात कही जा रही है।

प्रश्न 78.
पुलिसवाला सफ़िया को क्यों घूरता चला गया?
उत्तर :
कस्टमवाले सामान्य यात्री के लिए चाय नहीं मंगाते और न ही उनकी खातिरदारी करते हैं इसलिए पुलिसवाला सफ़्रिया को घूरता चला गया।

प्रश्न 79.
“इनके सामान का ध्यान रखिएगा” – कौन, किसके समान का ध्यान रखने को कह रहा है?
उत्तर :
अमृतसर के दो कस्टम अधिकारी एक-दूसरे से सफ़िया के सामान का ध्यान रखने को कह रहे हैं।

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प्रश्न 80.
सफ़िया को बचपन में सुनी कौन-सी कहानी याद आने लगी?
उत्तर :
शहजादों की कहानी।

प्रश्न 81.
किन दोनो के हाथों में भरी हुई बंदूके थीं?
उत्तर :
हिन्दुस्तानी तथा पाकिस्तानी पुलिस के हाथों में।

प्रश्न 82.
नमक की पुड़िया को कीनू की टोकरी की तह में रखने के बाद सफ़िया को कैसा महसूस हुआ?
उत्तर :
उसे ऐसा महसूस हुआ मानो उसने अपने किसी प्यारे को कझ की गहराई में उतार दिया हो।

प्रश्न 83.
सफ़िया किसे देखकर हैरान रह गई थी ?
उत्तर :
सफ़िया सिख बीबी (औरत) को देखकर हैरान रह गई थी।

प्रश्न 84.
नमक कहानी किस भारतीय-ऐतिहासिक घटना को आधार बनाकर लिखी गई है ?
उत्तर :
भारत-विभाजन की ऐतिहासिक घटना को आधार बनाकर लिखी गई हैं।

प्रश्न 85.
‘जामा मस्जिद की सीढ़ियों को मेरा सलाम कहिएगा”‘ – कौन किससे कहता है ?
उत्तर :
पाकिस्तानी कस्टम ऑंफिसर ने सफ्रिया से कहा ।

प्रश्न 86.
सफ़िया नमक क्यों ले जाना चाहती थी?
उत्तर :
सफ़िया ने सिख बीबी से लाहौरी नमक लाने का वायदा किया था इसलिए वह नमक ले जाना चाहती थी।

प्रश्न 87.
‘अदीब’ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
लेखक/लेखिका को ही ‘अदीब’ कहते हैं।

प्रश्न 88.
सफ़िया ने नमक को कहाँ छुपाने के बारे में सोचा ?
उत्तर :
सफिया ने नमक को कीनू की टोकरी में हुपाने के बारे में सोचा ।

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प्रश्न 89.
सिख बीबी अपना मूल वतन किसे मानती है ?
उत्तर :
लाहौर को ।

प्रश्न 90.
सफ़िया को लाहौर और अमृतसर में अंतर क्यों नहीं प्रतीत हुआ ?
उत्तर :
जिमखाना की शामें, दोस्तों की मुहब्बत, भाइयों की खातिरदारियाँ और सुहाने मौसम के कारण सफ़िया को लाहौर और अमृतसर में अंतर नही प्रतीत हुआ ।

प्रश्न 91.
सिख बीबी ने कौन-सी सौगात मँगाई थी ?
उत्तर :
लाहौरी नमक।

प्रश्न 92.
सफ़िया के भाई ने अदीबों पर व्यंग्य क्यों किया ?
उत्तर :
अदीब दिमाग की बजाय दिल से सोचते हैं इसालिए सफ़िया के भाई ने अदीबों पर व्यग्य किया ?

प्रश्न 93.
सफ़िया को बचपन में सुनी कहानियाँ क्यों याद आने लगी ?
उत्तर :
सफ़िया को बचपन में सुनी कहानियाँ इसलिए याद आने लगी क्योंकि उसमें शहजादा अपनी रानों (जांघ) को चीर कर हीरे छिपा लेता था – और उसके सामने भी लाहौरी नमक छिपाने की समस्या थी।

प्रश्न 94.
‘हाँ, मेरा वतन ढाका है’ – यह कौन किससे कहता है ?
उत्तर :
सुनौल दास गुप्त, कस्टम ऑंफिसर सफ़िया से कहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘नमक’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 2. ‘नमक’ कहानी का मूल भाव अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 3. नमक कहानी के माध्यम से लेखिका ने हमें क्या संदेश देना चाहा है?
अथवा
प्रश्न 4. नमक’ कहानी को सारांश लिखते हुए उसके उद्केश्य पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 5. ‘नयक’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 6. ‘नमक’ कहानी हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की एकता का पाठ पडाने वाली कहानी है । अपने विचार लिखें।
अथवा
प्रश्न 7. “मुहष्बत को कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है”, के आधार पर ‘चमक’ कहानी की विशेषताओं तथा उदेश्य को लिखें।
अथवा
प्रश्न 8. नमक कहानी में व्यक्त लेखिका के विचारों को अपने शब्दों में लिखें।
आथवा
प्रश्न 9. नमक’ भारत-पाक विभाजन के बाद विस्थापित लोगों के दिलों को टटोलती मार्मिक कहानी है – समीक्षा करें।
अथवा
प्रश्न 10. ‘क्या सब कानून हुकूमत के ही होते है” के आधार पर ‘नमक’ कहानी में व्यक्त लेखिका के विचारों की लिखें।
अथवा
प्रश्न 11. “पेरी तरफ से कहिएगा कि लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा’- पंक्ति के आधार पर ‘नमक’ कहानी में व्यक्त लेखिका के संदेश को लिखें।
अशवा
प्रश्न 12. “एक जमीन थी, एक जबान थी, एक-सी सूरतें और लिबास, एकरस लबोलहजा और अंदाज” पैक्ति के आशार पर हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के आपसी संबंधों पर प्रकाश डालें।
अभवा

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प्रश्न 13.
नमके कहानी की मार्मिकता पर अपने विवार व्यक्त कीजिए।
उत्तर :
रज़िया सज्ज़ाद ज़हीर की कहानी ‘नमक’ भारत-पाकिस्तान के आम लोगों के संबंधों पर आधारित मर्मस्पर्शी कहानी है।
कहानी के प्रारंभ में सफ़िया सिख बीवी से एक कीर्तन में मिलती है। वह उसकी ओर सहज ही आकर्षित हो जाती है क्योकि उसका चेहरा बिल्कुल सफिया की माँ से मिलता है। वह भारत-विभाजन के पहले ही इस दुनिया से विदा हो चुकी है। सफिया के मुसलमान होने तथा उसके लाहौर जाने के बारे में घर की बहू से पता चलता है। सिख बीवी का वतन भी

बँटवारे के पहले लाहौर ही था लेकिन वे आज भी उसे वतन मानती है। लाहौर की वह जी भर प्रशंसा करती है। सफिया के यह पूछने पर कि क्या वह लाहौर से कुछ सौगात मँगवाना चाहेगी, सिख बीवी उसे लाहौरी नमक लाने को कहती है।

पंद्रह दिन लाहौर में अपने भाइयों तथा अपने पुरानों अजीजों के साथ वह हिन्दुस्तान आने की तैयारी करती है। समस्या एक ही है कि लाहौरी नमक को कैसे ले जाया जाय क्योंकि उसे पाकिस्तान से हिन्दुस्तान ले जाना कानूनन जुर्म है। वह तय करती है कि कीनुओं की टोकरी में उसे छिपाकर ले जएगी। लेकिन अंत में वह निश्चय करती है कि मुहब्बत के इस सौगात को छिपाकर नहीं कस्टम ऑफिसर को बताकर ले जाएगी।

लाहौर तथा अमृतसर-दोनों के ही कस्टम ऑफिसर सारी बातें जानने के बाद सफ़िया के साथ नरमी से पेश आते हैं तथा नमक ले जाने की इजाजत दे देते हैं। लाहौर के कस्टम ऑफिसर ने चलते वक्त कहा भी – “मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है। “बहुत कुछ यही हाल अमृतसर के कस्टम ऑंकिसर सुनील दास गुप्त का भी है।

सफ़िया अमृतसर के रेलवे प्लेटफार्म के पुल पर चढ़ती हुई सोचती है कि हमारे रहनुमाओं ने भले ही हिन्दुस्तानपाकिस्तान और बांग्लादेश को सरहदों में बाँट रखा हो लेकिन लोगों के दिल नहीं बैटे। लोगों के दिलों के बीच कोई सरहद नहीं है।

यह सही है कि बँटवारे के बाद पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। आज भी अच्छे नहीं हैं लेकिन आप लोगों के दिलों में कहीं कोई भेदभाव नहीं है। लोग आज भी अपने वतन की यादों की खुशबू में खोए रहते हैं। हमारा हिन्दुस्तान कभी भी धर्म या मजहब के खाने में नहीं बँटा था। भक्तिकाल के कवि तुलसीदास, जो वर्ण-व्यवस्था को मानने वाले तथा परम्मरा के अनुयायी थे, ने भी कहा था –

“माँगी के खाइबो, मसीत (मस्जिद) : में सोइबो।”
जहाँ तक दोनों देशों के आपसी संबंधों के रफ्ता-रफ्ता सुधरने की बात है, उसके आसार नजर नहीं आते। शिक्षा में भी साप्रदायिक घुसपैठ शुरू कर दी गई है। पाकिस्तान में इतिहास को भी तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। आए दिन उसकी आतंकबादी गतिविधियों के कारण हमें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में चाहे वह हिंदुस्तान हो या पाकिस्तान या फिर बांग्लादेश- विभाजन का दर्द उन्हें ही झेलना पड़ रहा है क्योंकि आम आदमी आजाद होकर भी सरहदों का गुलाम है –

सत्ता – परिवर्तन में सौदा करने पर कत्लेआम हुआ
हिसा – नफरत पर रखी गई आज़ादी की आधारशिला आज़ाद हुआ बस लाल किला।
लेखिका सफ़िया की इस कहानी के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का संदेश देना ही मुख्य उद्देश्य है। उन्हें अपने उद्देश्य में पूरी-पूरी सफलता मिली। कहानी का शीर्षक ‘नमक’ भी अपने-आप में सार्थक है क्योंकि कहानी के केंद्रबिंदु में नमक हो है।

प्रश्न 14. नमक कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 15. ‘गमक’ कहानी के जिस पात्र ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया है उसका चरित्र-धित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 16. ‘नमक’ कहानी के आधार पर सफ़िया का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 17. सफ़िया की चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
अथवा

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प्रश्न 18.
‘नमक’ कहानी के आधार पर लिखें कि सफ़िया के चरित्र की किन विशेषताओं ने आपको आकर्षित किया है।
उत्तर :
सफ़िया ‘नमक’ कहानी की मुख्य पात्र है। कहानी की लेखिका रजिया सज्जाद जहीर ने इस चरित्र की सृष्टि ही इस उद्देश्य से किया है कि पाठकों को भारत-पाकिस्तान एकता व धार्मिक एकता का पाठ पढ़ाया जा सके। इसीलिए सफिया के चरित्र ने हमें सबसे अधिक प्रभावित किया है। सफ़िया की चारित्रिक विशेषताओं को निम्नांकित शीर्षकों के अंतर्गत देखा जा सकता है-

(क) सभी धर्मों के प्रति समान भाव-सफिया के दिल में सभी धर्मों के प्रति समान आदर की भावना है। इसकी इस विशेषता का पता हमें उसके कीर्तन में शामिल होने से चलता है। वह वहाँ के माहौल में इस प्रकार घुल-मिल ज्ञाती है कि सिख बीवी उसे भी सिख ही समझ लेती है। घर की बहू के बताने पर वह यह जान पाती है कि सफ़िया मुसलमान है।

(ख) बड़ों के प्रति आदर की भावना – सफ़िया के दिल में अपनों से बड़ों के प्रति आदर की भावना है। सिख बीवी में अपनी माँ की छवि पाकर वह उनके साथ वैसा ही व्यवहार करती है जैसे वह उसकी अपनी माँ हो। इतना ही नहीं जब उसे पता चलता है कि सिख बीवी भी लाहौर से हैं तो उनसे निवेदन करती है कि – ” आप लाहौर से कोई सौगात मँगाना चाहें तो मुक्षे हुक्म दीजिए।”

(ग) वायदे को निभानेवाली – सफ़िया ने सिख बीवी से यह वायदा किया था कि वह सौगात के तौर पर पाकिस्तान से उनके लिए लाहौरी नमक लेकर आएगी। वहाँ जाकर उसे पता चलता है कि ऐसा करना कानून जुर्म है फिर भी वह काफी परेशानी झेलकर भी उनके लिए नमक लाती है। अपने किए गए वायदे को पूरा करने के लिए वह कोई भी जोखिम उठाने को तैयार हो जाती है – “लेकिन फिर उस वायदे को क्या होगा जो हमने अपनी माँ से किया था? … फिर वायदा करके झुठलाने के क्या मायने? जान देकर भी वायदा पूरा करना होगा।

(घ) मुहब्यत के कानून को सबसे ऊपर मानने वाली – जब सफ़िया को अपने पुलिस अफसर भाई से यह पता चलता है कि वह अपने साथ लाहौरी नमक लेकर हिन्दुस्तान नहीं ले जा सकती तो उसका दिल बगावत कर उठता है। जब भाई उसे बार-बार इस बात को समझने की कोशिश करता है तो उसी पर बिगड़ पड़ती है- “अरे, फिर वही कानून-कानून कहे जाते हो! वया सब कानून हुकूमत के ही होते हैं, कुछ मुहब्बत, मुरौन्यत, आदमियत, इसानियत के नहीं होते?”

(ङ) सचचाई का साथ लेने वाली – सफ़िया बुरे वक्त में भी सच्चाई का साथ छोड़ने वाली नहीं है। नमक ले जाने के कानूनी अड़चन जानने के बाद भी वह निश्चय करती है कि वह नमक छिपाकर नहीं कस्टम वालों को बताकर ले जाएगी। वह नमक के बारे में पाकिस्तान तथा हिन्दुस्तान-दोनों के कस्टम आंफिसर को सच-सच बता देती है। दोनों उसकी सच्चाई से प्रभावित होकर कानून को नजर अदाज कर नमक ले जाने की इजाजत दे देते हैं।

कानून मुहब्बत से हार जाता है। पाकिस्तानी कस्टम ऑंफिसर तो यह कहता है – “‘मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।” इस प्रकार हम पाते हैं कि सफिया के चरित्र के माध्यम से लेखिका ने दोनों देशों के दिलों को टटोला है। अपने-पराए, देस-परदेश की प्रचलित धारणाओं पर सवाल खड़े किए हैं कि – ‘किसका वतन कहाँ है- वह कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ।”

प्रश्न 19. नमक ले जाने के बारे में सफिया के मन में उत्पन्न द्वन्दू का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रश्न 20. “मुझे तो लाहौर का नमक चाहिए, मेरी माँ ने यही मेंगवाया है” – के आधार पर सफ़िया के मन में उत्पन्न द्वन्द्य का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रश्न 21. “तो मजबूरी है, छोड़ देंगे।”- पंक्ति के आधार पर सफिया के मानसिक द्वन्द्व के बारे में लिखें।
अथवा
प्रश्न 22. ‘लेकिन फिर उस वायदे का क्या होगा जो हमने अपनी माँ से किया था” – के आधार पर सफ़िया के मन में उत्पन्न द्वन्दू के बारे में लिखें।
अथवा
प्रश्न 23. “यही ठीक है, फिर देखा जाएगग” – के आधार पर सफ़िया के मानसिक दूंद का वर्णन करें। अथवा
प्रश्न 24. “वह अपना दिल चीरकर उसमें यह नमक छिपा लेती” – के आधार पर सफ़िया के मानसिक द्वंद्व का वर्णन करें
अथवा
प्रश्न 25. इतने कीनुओं के ढेर में भला कौन इसे देखेगा- के आधार पर सफिया के मानसिक द्वंद्व का वर्णन करें।
अथवा
प्रश्न 26. मानो उसने अपने किसी प्यारे को कब्र की गहराई में उतार दिया हो – पंक्ति के आधार पर सफ़िया के मानसिक दूंद्व का वर्णन करें।
अथवा
प्रश्न 27. छुपा के जाऊंगी? मैं तो दिखा के, जता के ले जाऊँगी – पंक्ति के आधार पर सफ़िया के मानसिक द्वंद्व का वर्णन करें।
अथवा
प्रश्न 28. मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा – प्रस्तुत कथन के आधार पर सफ़िया के मानसिक द्वंद्ध का वर्णन करें।
अथवा

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प्रश्न 29.
“जान देकर भी वायदा पूरा करना होगा” – पंक्ति के आधार पर लाहौरी नमक के बारे में सफ़िया के मानसिक दूंद्व का वर्णन करें।
उत्तर :
सफ़िया ने लाहौर आने से एक दिन पहले सिख बीवी से सौगात के तौर पर लाहौरी नमक लाने का वायदा किया था। लाहौर से लौटते समय उसके सामने सबसे बड़ी समस्या यह पैदा हो गई कि इस नमक को वह हिन्दुस्तान कैसे ले जाए। ऐसा करना कानूनन जुर्म था। सफिया के पुलिस ऑफिसर भाई ने उसे इसके बारे में समझाते हुए कहा कि, ‘ देखिए बाजी! आपको कस्टम से गुजरना होगा और अगर एक भी चीज ऐसी-वैसी निकल आई तो आपके सामान की चिंदी-चिंदी बिखेर देंगे कस्टमवाले।”

सफ़िया इस कानून को मानने को तैयार न थी। उसका तर्क था कि “क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं, कुछ मुहब्बत, मुरौव्वत, आदमियत, इंसायनित के नहीं होते ?’

फिर उसके मन में भय पैदा होता है तथा वह सोचती है कि अगर ऐसा है तो वह नमक छोड़ देगी। लेकिन दूसरे ही पल उसे अपने किए वायदे का ख्याल आता है। वह निश्चय करती है कि नमक को वह कीनुओं की टोकरी में छिपाकर ले जाएगी। उसने देखा था कि कस्टमवाले फलों की टोकरी की तलाशी नहीं लेते।

सोफिया जैसे ही कस्टम पर जाँच के लिए पहुँची उसने अचानक अपना फैसला बदल दिया- “मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा, नमक कस्टमवालों को दिखाएगी वह।” और वह ऐसा ही करती है। पाकिस्तान तथा हिन्दुस्तान दोनों के ही कस्टम ऑफिसर सफिया की पूरी कहानी सुनने के बाद उसे नमक ले जाने की इजाजत दे देते हैं। हुकूमत के कानून के ऊपर मुहब्बत, इंसानियत के कानून की जीत होती है तथा अमृतसर आते-आते उसका यह दूंद्व एक प्रश्न में बदल जाता है- ‘किसका वतन कहाँ है – वह कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ।”

नमक को लेकर सफिया का द्वंद हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के आपसी संबंधों तथा दोनों देशों के हार्दिक पहलू को परतदर-परत उघाड़ देता है और एक सवाल भी छोड़ जाता है कि क्या अब रफ्ता-रफ्ता ठीक हो जाएगा?

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सिख बीबी ने सफिया को लाहौर से क्या लाने के लिए कहा था?
(क) सेब
(ख) नमक
(ग) संतरा
(घ) पैसा
उत्तर :
(ख) नमक

प्रश्न 2.
‘मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।’ यह अंश किस कहानी से लिया गया है?
(क) धावक
(ख) उसने कहा था
(ग) नमक
(घ) सिरी उपमा जोग
उत्तर :
(ग) नमक।

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प्रश्न 3.
सफिया लाहौर ____ महीने में गई थी।
(क) मार्च
(ख) अप्रैल
(ग) फरवरी
(घ) अगस्त
उत्तर :
(क) मार्च।

प्रश्न 4.
‘नमक’ कहानी के रचनाकार कौन हैं ?
(क) गुलेरी
(ख) शिवमूर्ति
(ग) रजिया सज्जाद जहीर
(घ) कृष्णा सोबती
उत्तर :
(ग) रजजिया सज्जाद जहीर।

प्रश्न 5.
‘जर्द गुलाब’ (उर्दू कहानी-संग्रह) किसकी रचना है?
(क) कृष्णा सोबती की
(ख) रजजिया सज्जाद जहीर की
(ग) प्रेमचंद की
(घ) जयशंकर प्रसाद की
उत्तर :
(ख) रज़िया सज्जाद जहीर की।

प्रश्न 6.
किसे देखकर सफ़िया हैरान रह गई थी?
(क) लाहौर को
(ख) सिख बीबी को
(ग) कस्टम आंफिसर को
(घ) इकबाल को
उत्तर :
(ख) सिख बीबी को।

प्रश्न 7.
सिख बीबी की शक्ल किससे मिलती थी?
(क) सफिया की माँ से
(ख) सफ़िया की बहन से
(ग) सफिया की भाभी से
(घ) सफिया की बहू से
उत्तर :
(क) साफिया की माँ से।

प्रश्न 8.
भारी-भरकम जिस्म किसका था?
(क) कस्टम ऑंफिसर का
(ख) सफ़िया के भाई का
(ग) सिख बीबी का
(घ) सफ़िया की बहू का
उत्तर :
(ग) सिख बीबी का।

प्रश्न 9.
“चेहरा जैसे कोई खुली हुई किताब”‘ – यहाँ किसके चेहरे के बारे में कहा गया है?
(क) सफ़िया
(ख) सुनील दास गुप्त
(ग) इकवाल
(घ) सिख बीबी
उत्तर :
(घ) सिख बीबी।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 4 नमक

प्रश्न 10.
सफ़िया ने कई बार किसकी ओर मुहब्बत से देखा?
(क) सिख बीबी की ओर
(ख) भतीजे- भतीजी की ओर
(ग) भाई की ओर
(घ) कस्टम ऑफिसर की और
उत्तर :
(क) सिख बीबी की ओर ।

प्रश्न 11.
“जब हिन्दुस्तान बना था तभी आए थे” – वक्ता कौन है?
(क) सफिया
(ख) सुनील दासगुप्त
(ग) सिख बीबी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) सिख बीबी।

प्रश्न 12.
कीर्तन कितने बजे खत्म हुआ?
(क) दस बजे
(ख) बारह बजे
(ग) नौ बजे
(घ) ग्यारह बजे
उत्तर :
(घ) ग्यारह बजे।

प्रश्न 13.
“साडा लाहौर” – वक्ता कौन है?
(क) सक्रिया
(ख) सिख बीबी
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सिख बीबी।

प्रश्न 14.
“लाहौर बहुत याद आता है” – किसे लाहौर बहुत याद आता है?
(क) सफिया
(ख) सुनील दासगुप्त
(ग) बहू
(घ) सिख बौबी
उत्तर :
(घ) सिख बीबी।

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प्रश्न 15.
सिख बीबी ने किस रंग का दुपट्टा ओढ़ा था?
(क) लाल
(ख) नौला
(ग) पीला
(घ) सफेद
उत्तर :
(घ) सफेद्।

प्रश्न 16.
सफ़िया कहाँ जा रही थी?
(क) पाकिस्तान
(ख) अफगानिस्तान
(ग) डाका
(घ) हिन्दुस्तान
उत्तर :
(क) पाकिस्तान।

प्रश्न 17.
‘सफ़िया’ किस कहानी की पात्र है?
(क) चपल
(ख) नमक
(ग) ढाका
(घ) नन्हा संगीतकार
उत्तर :
(ख) नमक।

प्रश्न 18.
‘जिंदादिली की तस्वीर’ किसे कहा गया है?
(क) सिख्ब बीबी को
(ख) सफ़िया को
(ग) लाहौर वालों को
(घ) अमृतसर वालों को
उत्तर :
(ग) लाहौर वालों को।

प्रश्न 19.
“सब ठीक ही है” – वक्ता कौन है ?
(क) सफ़िया
(ख) सफ्रिया का भाई
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) सिख बीबी
उत्तर :
(घ) सिख बीबी।

प्रश्न 20.
सफ़िया पाकिस्तान में कितने दिन रही?
(क) दस
(ख) पन्द्रह
(ग) बीस
(घ) पचीस
उत्तर :
(ख) पन्द्रह।

प्रश्न 21.
मेरी माँ ने यही मँगवाया है – वक्ता कौन है?
(क) सफ़िया का भाई
(ख) सुनील दासगुप्त
(ग) सिख बीबी
(घ) सफ़िया
उत्तर :
(घ) सफिया।

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प्रश्न 22.
“मुझे तो लाहौर का नमक चाहिए” – वक्ता कौन है ?
(क) सिख बीबी
(ख) सफ्रिया
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सफ़िया।

प्रश्न 23.
“आपको कस्टम से गुज़रना होगा” – वक्ता कौन है?
(क) कस्टम ऑफिसर
(ख) सिपाही
(ग) सफ़िया का भाई
(घ) सिख बीबी
उत्तर :
(ग) सफ़िया का भाई।

प्रश्न 24.
‘वे तो बँटवारे से पहले ही मर चुकी थीं – ‘वे’ कौन हैं ?
(क) सिख बीबी
(ख) सफ्रिया की माँ
(ग) सफ़िया की बहन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सफ़िया की माँ 1

प्रश्न 25.
“आपलोगों के हिस्से में तो हमसे बहुत ज्यादा नमक आया है” – वक्ता कौन है ?
(क) कस्टम ऑफिसर
(ख) सफ्रिया
(ग) सफ़िया का भाई
(घ) पुलिस
उत्तर :
(ग) सफिया का भाई।

प्रश्न 26.
“सिर्फ दो चीजें रह गई” – कौन-सी दो चीजें रह गई?
(क) टी० वी० और नमक
(ख) कीनू और नमक
(ग) संतरा और नमक
(घ) सूटकेस और बिस्तरबंद
उत्तर :
(ख) कीनू और नमक ।

प्रश्न 27.
माल्टे की तरह रंगीन और मीठा, संतरे की तरह नाजुक किसे कहा गया है?
(क) कीनू को
(ख) सिख बीबी को
(ग) सफ़िया को
(घ) लाहौरवालों को
उत्तर :
(क) कीनू को

प्रश्न 28.
‘हम अपने को सैयद कहते हैं” – वक्ता कौन है ?
(क) सफ्रिया का भाई
(ख) संफ्रिया
(ग) लाहौरवाले
(घ) अमृतसरवाले
उत्तर :
(ख) सफ़िया।

प्रश्न 29.
“एक समस्या थी” – समस्या क्या थी?
(क) कस्टमवालों को समझ्षाना
(ख) सिख बीबी को समझाना
(ग) सफ़िया को समझाना
(घ) लाहौरी नमक ले जाना
उत्तर :
(घ) लाहौरी नमक ले जाना।

प्रश्न 30.
बिछुड़ी हुई परदेसी बहन कौन है?
(क) सिख बीबी
(ख) संफ़िया
(ग) लेखिका
(घ) लाहौर की स्त्वियाँ
उत्तर :
(ख) सफ़िया।

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प्रश्न 31.
“फिर वायदा करके झुठलाने के क्या फायदे'” – किसने कहा?
(क) सफ्रिया ने
(ख) सिख बीबी ने
(ग) भतीजियों ने
(घ) बहुओं ने
उत्तर :
(क) सफ़िया ने।

प्रश्न 32.
सब लाहौर/पाकिस्तान से कौन-सा फल हिंदुस्तान ला रहे थे?
(क) आम
(ख) केला
(ग) लीची
(घ) कीनू
उत्तर :
(घ) कीनू।

प्रश्न 33.
हिन्दुस्तान से लोग पाकिस्तान कौन-सा फल सौगात के रूप में ले जा रहे थे?
(क) केले
(ख) कीनू
(ब) चीक्
(घ) नारंगी
उत्तर :
(क) केले।

प्रश्न 34.
रज़िया सज्जाद जहीर का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) अमृतसर
(ख) लाहौर
(ग) अजमेर
(घ) अटारी
उत्तर :
(ग) अजमेर।

प्रश्न 35.
सफ़िया के बाप की कब्न कहाँ थी?
(क) अमृतसर में
(ख) अजमेर में
(ग) लखनऊ में
(घ) लाहौर में
उत्तर :
(घ) लाहौर में।

प्रश्न 36.
आप हिन्दुस्तान में क्यों रही हैं – वक्ता कौन है ?
(क) कस्टम ऑफिसर
(ख) सिख बीबी
(ग) भतीजा-भतीजी
(घ) बहू.
उत्तर :
(ग) भतीजा-भतीजी।

प्रश्न 37.
सपने में सफिया ने किसका मकबरा देखा?
(क) पीर का
(ख) इकबाल का
(ग) मिर्जा गालिब का
(घ) नजरूल इस्लाम का
उत्तर :
(ख) इकबाल का।

प्रश्न 38.
‘यह हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की एकता का मेवा है”-वक्ता कौन है ?
(क) कस्टम ऑफिसर
(ख) भाई
(ग) सफिया का दोस्त
(घ) सिख बीबी
उत्तर :
(ग) सफ़िया का दोस्त।

प्रश्न 39.
किसे हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की एकता का मेवा कहा गया है?
(क) काजू को
(ख) किशमिश को
(ग) छुहारा को
(घ) कीनू को
उत्तर :
(घ) कीनू को।

प्रश्न 40.
लाहौरी नमक के बारे में सफ़िया ने क्या फैसला किया?
(क) वह नमक नहीं ले जाएगी
(ख) मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा
(ग) मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से ही जाएगा
(ब) वह सिख बीबी को दिया वचन वापस ले लेगी।
उत्तर :
(ख) मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा।

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प्रश्न 41.
“मैं आपसे कुछ पूछना चाहती हूँ ?” – वक्ता कौन है?
(क) सफ़िया
(ख) सिख बीबी
(ग) बहू
(घ) भतीजी
उत्तर :
(क) सफ़िया।

प्रश्न 42.
‘आप कहाँ के रहनेवाले हैं ?’ – ‘आप’ से कौन संकेतित है ?
(क) सफ़िया
(ख) सिख बीबी
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) सुनील दासगुप्त
डत्तर :
(ग) कस्टम ऑफिसर।

प्रश्न 43.
“मैं लखनऊ की हूँ” – कौन लखनऊ की है?
(क) सिख बीबी
(ख) सफ़िया
(ग) पोली
(घ) बहू
उत्तर :
(ख) सफ़िया।

प्रश्न 44.
‘वे लोग इधर आ गए हैं’ – ‘वे’ से कौन संकेतित है?
(क) सफिया के भाई
(ख) सफिया की बहन
(ग) सफ्रिया के पति
(घ) सफ़िया के ससुरालवाले
उत्तर :
(क) सफ़िया के भाई।

प्रश्न 45.
‘मगर हमारा वतन तो देहली ही है” – वक्ता कौन है?
(क) सिख बीबी
(ख) सफ़िया
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) सफिया का बड़ा भाई
उत्तर :
(ग) कस्टम ऑफिसर।

प्रश्न 46.
“जब पाकिस्तान बना था तभी आए थे” – वक्ता कौन है?
(क) बह
(ख) सफ्रिया
(ग) सिख बीबी
(घ) कस्टम ऑफिसर
उत्तर :
(घ) कस्टम ऑंकिसर।

प्रश्न 47.
कस्टम ऑफिसर ने सफ़िया से किसे अपना सलाम कहने को कहा?
(क) अब्बाजान को
(ख) इकबाल को
(ग) जामा मस्जिद्न की सीढ़ियों को
(घ) सिख बीबी को
उत्तर :
(ग) जामा मस्जिद् की सीढ़ियों को।

प्रश्न 48.
‘लाहौर अभी तक उनका वतन है”‘ – ‘उनका’ से कौन संकेतित है?
(क) सिख बीबी
(ख) जो बंटवारे के बाद भारत में रह गए
(ग) सफ़िया का भाई
(घ) इकबाल
उत्तर :
(क) सिख बीबी।

प्रश्न 49.
“इधर आइए ज़रा।” – वक्ता कौन है?
(क) सफ्रिया
(ख) सिख बीबी
(ग) पुलिस
(घ) सुनील दास गुप्त
उत्तर :
(घ) सुनील दास गुप्त।

प्रश्न 50.
किसके पैर तले की जमीन खिसकने लगी?
(क) सिख बीबी की
(ख) कस्टम ऑफिसर की
(ग) सफ़िया की
(घ) पुलिस की
उत्तर :
(ग) सफिया की

प्रश्न 51.
सुनील दास गुप्त को उपहार में मिली पुस्तक के बाईं ओर किसकी तस्वीर थी?
(क) नजरूल इस्लाम की
(ख) इकबाल की
(ग) टैगोर की
(घ) मिर्जा गालिब की
उत्तर :
(क) नजरूल इस्लाम की।

प्रश्न 52.
“अब उधर भी कुछ गोलमाल हो गया है” – ‘उधर’ से किसके बारे में कहा गया है?
(क) पाकिस्तान
(ख) हिन्दुस्तान
(ग) ढाका
(घ) लाहौर
उत्तर :
(ग) ढाका।

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प्रश्न 53.
‘हमारे यहाँ डाभ की क्या बात है’ – ‘हमारे यहाँ’ से अर्थ है?
(क) पाकिस्तान
(ख) हिन्दुस्तान
(ग) दाका
(घ) लाहौर
उत्तर :
(ग) ढाका।

प्रश्न 54.
“हमारी जमीन, हमारे पानी का मजा ही कुछ और है’ – ‘हमारी जमीन’ किसे कहा गया है?
(क) ढाका को
(ख) लाहौर को
(ग) लखनऊ को
(घ) श्रोलंका को
उत्तर :
(क) दाका को।

प्रश्न 55.
अमृतसर के पुल पर चढ़ते समय सफ़िया क्या सोच रही थी?
(क) अद वह कभी पाकिस्तान नहीं जाएगी
(ख) वह कभी नमक नहीं लाएगी
(ग) किसका वतन कहाँ है
(घ) लाहौर कहाँ खत्म हुआ
उत्तर :
(ग) किसका वतन कहाँ है?

प्रश्न 56.
‘नमक’ कहानी में किस महीने की सुहानी हवा के बारे में कहा गया है?
(क) मार्च
(ख) अप्रैल
(ग) मई
(घ) जून
उत्तर :
(क) मार्च।

प्रश्न 57.
सफ़िया का भाई क्या था?
(क) व्यापारी
(ख) वकील
(ग) पुलिस ऑफिसर
(घ) डॉक्टर
उत्तर :
(ग) पुलिस ऑंफिसर।

प्रश्न 58.
‘नमक’ कहानी का मुख्य विषय क्या है?
(क) लहौरी नमक की कहानी
(ख) हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की कहानी
(ग) हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के लोगों के आपसी संबंध की कहानी
(घ) पाकिस्तान से लाहौरी नमक लाना कठिन है
उत्तर :
(ग) हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के लोगों के आपसी संबंध की कहानी।

प्रश्न 59.
भारतीय कस्टम ऑफिसर कहाँ का था?
(क) भारत का
(ख) लाहौर का
(ग) दाका का
(घ) नेपाल का
उत्तर :
(ग) ढाका का ।

प्रश्न 60.
भाई और बहन के बीच कौन-सा मुद्दा कानूनी मुद्दा था?
(क) लाहौरी नमक का मुद्दा
(ख) पाकिस्तान के बंटवारे का मुद्धा
(ग) पाकिस्तान से लौटने का मुद्दा
(घ) कीनू ले जाने का मुद्दा
उत्तर :
(क) लाहौरी नमक का मुद्दा।

प्रश्न 61.
सफ़िया ने पहले नमक को कहाँ छिपाने का निश्चय किया?
(क) सूटकेस में
(ख) बिस्तर बंद में
(ग) कीनू की टोकरी में
(घ) हैंडबैग में
उत्तर :
(ग) कीनू की टोकरी में।

प्रश्न 62.
सफ़िया बचपन में किससे कहानियाँ सुना करती थी ?
(क) माँ से
(ख) बहन से
(ग) नानी से
(घ) दादी से
उत्तर :
(क) माँ से।

प्रश्न 63.
जामा मस्जिद कहाँ है?
(क) दिल्ली में
(ख) अज़मेर में
(ग) लखनऊ में
(घ) अमृतसर में
उत्तर :
(क) दिल्ली में ।

प्रश्न 64.
किसका नाम सुनकर सिख बीबी सफिया के पास आ बैठी ?
(क) कीर्तन का
(ख) प्रसाद का
(ग) नमक का
(घ) लाहौर का
उत्तर :
(घ) लाहौर का।

प्रश्न 65.
“देखिए बाजी”‘ – बाजी कौन है?
(क) सिख बीबो
(ख) सफ़िया
(ग) बहू
(घ) भतीजी
उत्तर :
(ख) सफ़िया।

प्रश्न 66.
‘वह हैरान होकर बोला” – ‘वह’ कौन है?
(क) पुलिस
(ख) कस्टम ऑफिसर
(ग) सुनील दासगुप्त
(घ) सफ़िया का भाई
उत्तर :
(घ) सफ़िया का भाई।

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प्रश्न 67.
“सिर्फ दो चीजें रह गई” – दो चीजें कौन थीं?
(क) संतरे और माल्टे
(ख) सूटकेस और बिस्तरबंद
(ग) कीनू और नमक की पुड़िया
(घ) कीनू और मेवे
उत्तर :
(ग) कीनू और नमक की पुड़िया।

प्रश्न 68.
“तो आप यहाँ कब आए?” – वक्ता कौन है?
(क) सफ़िया
(ख) सिख बीबी
(ग) भाई
(घ) कस्टम ऑंफिसर
उत्तर :
(क) सफ्रिया।

प्रश्न 69.
यही ठीक है फिर देखा जाएगा – वक्ता कौन है ?
(क) सिख बीबी
(ख) कस्टम ऑफिसर
(ग) सफ़िया
(घ) सुनील दासगुप्त
उत्तर :
(ग) सफ़िया।

प्रश्न 70.
“उसने एक आह भारी” – किसने आह भरी?
(क) सिख बीबी
(ख) सफ़िया
(ग) बहू
(घ) भतीजी
उत्तर :
(ख) सफ़िया।

प्रश्न 71.
“उसने सोचा कि वह ठीक राय दे सकेगा” – ‘वह’ से कौन संकेतित है?
(क) कस्टम ऑफिसर
(ख) सुनील दासगुप्त
(ग) सफ़िया का भाई
(घ) शमसुल इस्लाम
उत्तर :
(ग) सफ़िया का भाई।

प्रश्न 72.
“हो सकता है, साल भर बाद फिर आए” – पंक्ति किस पाठ से उद्धात है?
(क) चण्यल
(ख) नमक
(ग) धावक
(घ) नौबतखाने में इबादत
उत्तर :
(ख) नमक।

प्रश्न 73.
“हमें वहाँ से आए तो बहुत दिन हो गए” – वक्ता कौन है?
(क) सफ्रिया
(ख) सुनील दासगुप्त
(ग) सिख बीबी
(घ) शमसुल इस्लाम
उत्तर :
(ग) सिख बीबी।

प्रश्न 74.
“तो तुम कल चली जाओगी?” – वक्ता कौन है?
(क) सिख बीबी
(ख) भतौजी
(ग) सफ़िया का भाई
(घ) कस्टम ऑफिसर
उत्तर :
(ग) सफिया का भाई।

प्रश्न 75.
“अब कब आओगी?” – वक्ता कौन है?
(क) सफ़िया का भाई
(ख) सिख बीबी
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) सुनील दासगुप्त
उत्तर :
(क) सफ़िया का भाई।

प्रश्न 76.
”वह कुछ जाँच नहीं रही थी’ – वह कौन है?
(क) सफ़िया
(ख) वर्दी
(ग) सिख बीबी
(घ) नमक की पुड़िया
उत्तर :
(ख) वर्दी।

प्रश्न 77.
“लेकिन सिर्फ वही जानती है” – प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(क) चप्पल
(ख) नन्हा संगीतकार
(ग) नमक
(घ) धावक
उत्तर :
(ग) नमक।

प्रश्न 78.
“हीं, मेरा ढाका है।” – वक्ता कौन है?
(क) सुनील दास गुप्त
(ख) सफ़िया
(ग) सिख बीबी
(घ) कस्टम ऑफिसर
उत्तर :
(क) सुनील दास गुप्त।

प्रश्न 79.
“सफ़िया ने उसके पीछे चलना शुरू किया” – सफ़िया ने किसके पीछे चलना शुरू किया?
(क) भाई
(ख) सिख बीबी
(ग) सुनील दास गुप्त
(घ) भतीजी
उत्तर :
(ग) सुनील दास गुप्त।

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प्रश्न 80.
‘वह कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ” – ‘वह’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) सफिया
(ख) सिख बीबी
(ग) वतन
(घ) जामा मस्जिद
उत्तर :
(ग) वतन।

प्रश्न 81.
‘”दो चाय लाओ, अच्छी वाली'” – प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
(क) चणल
(ख) नमक
(ग) नौबतखाने में इबादत
(घ) नन्हा संगीतकार
उत्तर :
(ख) नमक।

प्रश्न 82.
“अब क्या होगा” – प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है?
(क) नमक
(ख) धावक
(ग) चपल
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(क) नमक।

प्रश्न 83.
“जब डिवीजन हुआ तभी आए” – वक्ता कौन है?
(क) सिख बीबी
(ख) सफिया
(ग) सुनील दास गुप्त
(घ) सफिया का भाई
उत्तर :
(ग) सुनील दास गुप्त।

प्रश्न 84.
‘मगर हमारा वतन ढाका है'” – वक्ता कौन है?
(क) सुनोल दास गुप्त
(ख) सफ़िया
(ग) सिख बीबी
(घ) सफ़िया का भाई
उत्तर :
(क) सुनील दास गुप्त।

प्रश्न 85.
“मैं तो कोई बारह-तेरह साल का था” – वक्ता कौन है?
(क) सिख बीबी
(ख) सफ़िया का भाई
(ग) सफ़िया का दोस्त
(घ) सुनील दास गुप्त
उत्तर :
(घ) सुनील दास गुप्त।

प्रश्न 86.
सफ़िया और सिख बीबी की पहली मुलाकात कहाँ हुई ?
(क) रेलगाड़ी में
(ख) सिनेमा हॉल में
(ग) कीर्त्तन में
(घ) लाहौर में
उत्तर :
(ग) कीर्त्तन में।

प्रश्न 87.
बंगाली-सा लगनेवाले कस्टम अधिकारी का नाम था ?
(क) अनिल कुमार गुप्ता
(ख) सुनील कुमार गुप्ता
(ग) सुनील दास गुप्ता
(घ) अनिल दास गुप्ता
उत्तर :
(ग) सुनील दास गुप्ता।

प्रश्न 88.
कीनू की टोकरी में क्या छिपाया गया ?
(क) नमक
(ख) चीनी
(ग) मोती
(घ) माला
उत्तर :
(क) नमक।

प्रश्न 89.
अटारी क्या है ?
(क) एक स्टेशन
(ख) एक शहर
(ग) सामान रखने की जगह
(घ) एक औजार
उत्तर :
(क) एक स्टेशन।

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प्रश्न 90.
पाकिस्तानी कस्टम ऑफिसर का वतन कहाँ था ?
(क) लाहौर में
(ख) सिंध में
(ग) अमृतसर में
(घ) दिल्ली में
उत्तर :
(घ) दिल्ली में।

प्रश्न 91.
भारतीय कस्टम ऑफिसर का वतन कहाँ था ?
(क) अमृतसर
(ख) लाहौर
(ग) द्वाका
(घ) दिल्ली
उत्तर :
(ग) द्वाका ।

प्रश्न 92.
‘नमक’ कहानी में किस नमक की चर्चा की गई है ?
(क) साधारण नमक
(ख) काला नमक
(ग) लाहौरी नमक
(घ) सेंधा नमक
उत्तर :
(ग) लाहौरी नमक ।

प्रश्न 93.
सफ़िया सौगात के तौर पर लाहौर से लाना चाहती थी –
(क) छुहारे
(ख) सेव
(ग) कीनू
(घ) लाहौरी नमक
उत्तर :
(घ) लाहौरी नमक।

प्रश्न 94.
‘मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा’ यहाँ किस तोहफे की बात हो रही है ?
(क) कीमती कपड़ों की
(ख) लाहौरी नमक की
(ग) कीनू की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) लाहौरी नमक की।

प्रश्न 95.
“हमारी जमीन, हमारे पानी का मज़ा ही कुछ और ही है” – ‘हमारी जमीन’ किसे कहा गया है ?
(क) लाहौर को
(ख) अमृतसर को
(ग) ढाका को
(घ) श्रीलंका को
उत्तर :
(ग) दाका को ।

प्रश्न 96.
सफ़िया किसको देख कर हैरान रह गई थी ?
(क) सिख बीबी को
(ख) सुनील दास गुप्त को
(ग) मशहूर शायर इकबाल को
(घ) अपने भाई को
उत्तर :
(क) सिख बीबी को।

प्रश्न 97.
इकबाल का मकबरा किस शहर में है ?
(क) ढाका
(ख) लाहौर
(ग) दिल्ली
(घ) अमृतसर
उत्तर :
(ख) लाहौर।

प्रश्न 98.
“बे मुसलमान हैं” – किसके बारे में कहा गया है?
(क) सफ़िया
(ख) सफ़िया का भाई
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) सफिया के दोस्त
उत्तर :
(क) सफ़िया।

प्रश्न 99.
“लाहौर कितना प्यारा शहर है” – किसने कहा?
(क) संफ़िया
(ख) सिख बीबी
(ग) कस्टम ऑफिसर
(घ) सुनील दासगुप्त
उत्तर :
(ख) सिख बीब्री।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. “आप अदीब ठहरीं और सभी अदीबों का दिमाग थोड़ा-सा तो जरूर घूमा हुआ होता है।”

प्रश्न :
बह किसका कथन है?
उत्तर :
यह कथन सफ़िया के पुलिस अफसर भाई का है।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति की प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
जब सफ़िया कानून की बात दरकिनार कर अपने भाई से कहती है कि ” क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं, कुछ मुहब्बत, मुरौवत, आदमियत, इसानियत के नहीं होते ?” तो इसी के जवाब में भाई कहता है कि आप अदीब (लेखिका) ठहरीं और सभी अदीबों का दिमाग थोड़ा-सा तो जरूर घूमा हुआ होता है। कारण यह है कि अदीब दिमाग की बजाए दिल से ज्यादा काम लेते हैं।

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2. उन सिख बीबी को देखकर सफ़िया हैरान रह गई थी।
अथवा
3. वही भारी भरकम जिस्म, छोटी-छोटी चमकदार आँखें।
अथवा
4. चेहरा जैसे कोई खुली हुई किताब।

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रज़िया सज्जाद ज़हीर।

प्रश्न :
कौन, किसकी माँ से मिलती थी ?
उत्तर :
सिख बीबी की सूरत सफ़िया की माँ से मिलती थी।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब सफ़िया ने उस सिख बीबी को कीर्तन में देखा तो हैरानी से देखती रह गई थी। उसकी शक्ल-सूरत बिल्कुल उसकी माँ से मिलती थी जो कई साल पहले ही चल बसी थी। माँ की ही तरह उसका जिस्म भी भारी-भरकम, आँखे छोटी-छोटी पर चमकदार थीं। उनका चेहरा ऐसा था मानो खुली हुई किताब हो। कहने का भाव यह है कि कोई मी भाव उनके वेहरे पर आसानी से पढ़ा जा सकता था जैसे किसी खुली-किताब को पढ़ा जा सकता है।

5. उन्हें बताया गया ये मुसलमान हैं।
अथवा
6. कल ही सुबह लाहौर जा रही है।

प्रश्न :
किसे, किसके बारे में बताया गया?
उत्तर :
सिख बीबी को सफ़िया के बारे में बताया गया।

प्रश्न :
लाहौर कौन जा रही है?
उत्तर :
सफ़्रिया लाहौर/पाकिस्तान जा रही है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
जिस तरह सफ़िया सिख यीबी की तरफ आकर्षित हुई थीं ठीक उसी प्रकार सिख बीबी भी सफ़िया की ओर आकर्षित हुई। जब सफिया ने कई बार प्रेम की नजजरों से उनकी और देखा तो सिख बीबी ने घर की बहू से पूछा। बहू ने सिख बीबी को सफ़िया के बारे में बताया कि वह सिख नहीं मुसलमान है तथा कल ही अपने भाइयों से मिलने पाकिस्तान जा रही है। कीर्तन में शामिल होने के कारण सिख बीबी अभी तक सफ़िया को मुसलमान न समझजकर सिख ही समझ रही थीं।

7. उनका लाहौर कितना प्यारा शहर है।
अथवा
8. वहाँ के लोग कैसे खूबसूरत होते हैं।
अथवा
9. उम्दा खाने और नफीस कपड़ों के शौकीन।
अथवा
10. सैर-सपाटे के रसिया, जिंदादिली की तस्वीर।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
सिख बीवी भी मूलत: लाहौर की ही थीम। भारत-विभाजन के समय उन्हें लाहौर छोड़ना पड़ा था। जब उन्हें सफिया के लाहौर जाने के बारे में पता चला तो उन्होंने वहाँ की तारीफों के पुल बाँध दिए कि लाहौर बहुत ही प्यारा शहर है और वहाँ के लोग भी उतने ही प्यारे हैं। वहाँ के लोग खूबसूरत, अच्छे खाने-कपड़े के शौकान, घूमने-फिरने के शौकीन तथा दरिया दिल होते हैं। लाहौर छोड़ने के बावजूद उनके मन में लाहौर तथा वहाँ के लोगों के बारे में कोई कड़वाहट नहीं थी।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 4 नमक

11. वे आहिस्ता-आहिस्ता बातें करती रहीं।
अथवा
12. हाँ बेटी! जब हिन्दुस्तान बना था तभी आए थे।
अथवा
13. लाहौर बहुत याद आता है।
अध्रवा
14. हमारा वतन तो जी लाहौर ही है।
अथवा
15. फिर पलकों से कुछ सितारे दूटकर दूधिया आँचल में समा जाते हैं।
अथवा
16. बात आगे चल पड़ती, मगर घूम-फिरकर फिर उसी जगहु पर आ जाती।
अथवा
17. साडा लाहौर!

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
उत्तर :
प्रस्तुत गद्यांश ‘नमक’ पाठ से लिया गया है।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता सिख बीवी है।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब सिख बीवी को सफ़िया के भी लाहौर के होने का पता चला तो दोनों बातें करने में मशगूल हो गई। सिख बीवी ने बताया कि भ्रारत-विभाजन के समय उनन्हें लाहौर छोड़ना पड़ा लेकिन लाहौर आज भी उनकी यादों में बसा है। उन दिनों को याद कर आँस के कुछ कतरे उनके सफेद दुपट्टे पर टपक पड़ते हैं। इधर-उधर की बाते होतीं पर बात घूमफिर कर फिर लाहौर पर ही चली आती। वे आज भी इस बात को नहीं भूल पाती कि उनका वतन तो लाहैर ही है। लाहौर के प्रति उनके दिल में जो प्रेम है व इन शब्दों में झलक जाता है – ‘साडा लाहौर।’

18. आप लाहौर से कोई सौगात मँगाना चाहें तो पुझे हुक्म दीजिए।
अथवा
अगर ला सको तो थोड़ा-सा लाहौरी नमक लाना।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रजिया सज्जाद ज़ीर ।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
सिख बीवी का लाहौर के प्रति प्रेम देखकर साफियया के दिल में यह बात आती है कि वहाँ कोई का सौगात पाकर उन्हें बेइंतहा खुशी होगी। इसलिए वे सिख बीवी से कहती हैं कि अगर वे लाहौर से अपने लिए कोई सौगात मंगवाना चाहें तो बेहिचक कहें। लेकिन सफ़िया को आध्रर्य होता है जब सिख बेवी सफ़िया से कहती है – “अगर ला सको तो थोड़ासा लाहौरी नमक लाना।”

20. पंद्रह दिन बों गुजरे कि पता ही नहीं चला।

प्रश्न :
प्रस्तुत गय्यांश किस पाठ से लिया गया है?
उत्तर :
प्रस्तुत गद्यांश ‘नमक’ पाठ से लिया गया है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
पाकिस्तान जाने के पहले सफिया ने मन ही मन यह सोचा होगा कि न जाने इतने वर्षों बाद उसके पंद्रह दिन कैसे गुजरेगे। लेकिन दोस्तों की मुहबत, जिमखाना में बिताई गई शामों, भाइयों की आवभगत में उसके पंद्रह दिन मानो कर्पूर की तरह उड़ गए। उसे पता ही न चला कि पंद्रह दिन कैसे बीत गए। भाइयों के मन में यह तमना भी थी कि बहन के लिए वे जिनता भी कर पाएँ वह करे। पता नहीं, वह फिर कब उन लोगों से मिल पाएगी।

21. एक समस्या थी।
अथवा
22. सबसे बड़ी समस्या थी – दामी कागज की एक पुड़िया।

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रजिया सज्जाद ज़हीर।

प्रश्न :
किसके लिए क्या समस्या थी?
उत्तर :
सफिया ने लाहीर से लौटने की तैयारी कर ली। सारे सामान पैक कर लिए। लेकिन सबसे बड़ी समस्या दामी कागज में लिपटे लाहौरी नमक की पुड़िया की जिसे लाने का वादा उसने सिख बीवी से किया था। समस्या इसिलए धी क्योकि पाकिस्तान से हिन्दुस्तान में लाहौरी नमक लाने पर कानूनी रोक है। अगर वह उसे लाते समय कस्टम ऑफिसर से पकड़ी जाती तो इस जुर्म में उसकी गिरफ्तारी हो सकती थी और सज्ञा भी।

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23. उसने सोचा कि वह ठीक राय दे सकेगा।
अथवा
24. चुपके से पूछने लगी
अथवा
25. क्यों भैया, नमक ले जा सकते हैं ?

प्रश्न :
रचना का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना का नाम ‘नमक’ है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
सिख बीवी के लिए सफ़िया पाकिस्तान से लाहौरी नमक ले जाना चाहती थी। उसने सिख बीवी से इसका वादा किया था। लेकिन उसे पता था कि ऐसा करना कानून जुर्म है। उसने सोचा कि इस बारे में वह अपने भाई से सलाह ले सकती है। वह पुलिस ऑफिसर तथा इस मामले में साफ़िया को सही राय दे सकता था। इसिलए उसने भाई से चुपके से पूछ्छा कि “क्यों भैया नमक ले जा सकते है?”

26. नमक तो नहीं ले जा सकते, गैरकानूनी है।
अथवा
27. यह तो आप बहुत ही गलत बात करेंगी।

प्रश्न :
प्रस्तुत गघ्यांश के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रज़िया सज्जाद जाहीर।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
साफ़िया को यह पता था कि पाकिस्तान से लाहौरी नमक हिन्दुस्तान ले जाना कानूनी अपराध है। इस बारे में उसने अपने भाई जो पुलिस अफसर था, से पूछा। भाई ने उसे कहा कि उसका ऐसा करना गैरकानूनी है। अगर वह ऐसा करेगी तो बहुत ही गलत करेगी तथाउसे इस जुर्म के लिए कस्टम ऑफिसर उसके साथ कार्रवाई भी कर सकते हैं।

28. आप लोगों के हिस्से में तो हमसे बहुत ज्यादा नमक आया है।
अथवा
29. मैं हिस्से-बखरे की बात नहीं कर रही हूँ।
अथवा
30. मुझे तो लाहौर का नमक चाहिए।
अथवा
31. मेरी माँ ने यही मँगवाया है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश के रचनाकर का नाम लिखें।
उत्तर :
रज़िया सज्जाद जहीर।

प्रश्न :
गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब साफ़िया ने लाहौरी नमक ले जाने की बात कही तो उसके भाई ने कहा कि ऐसे नमक का खान तो हिन्दुस्तान के हिस्से में पाकिस्तान से ज्यादा आया है। साफ़िया ने उसकी यात काटते हुए कहा कि बँटवारे की बात से उसे कोई लेना-देना नहीं है। उसने अपनी माँ से यहाँ का लाहौरी नमक लाने का वादा किया है और उसे केवल यहीं का नमक चाहिए।

32. भाई की समझ में कुछ नहीं आया।
अथवा
33. माँ का जिक्र क्यों था ?
अथवा
34. वे तो बँटवारे से पहले ही मर चुकी थीं।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ?
उत्तर :
प्रस्तुत गद्यांश ‘नमक’ पाठ से लिया गया है।

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प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब साफ़िया ने कहा कि उसे अपनी माँ के लिए लाहौरी नमक ले जाना है तो यह बात उसके भाई को समझ से बाहर हो गई। माँ तो बँटवारे के पहले ही इस दुनिया से विदा ले चुकी थी। इसलिए भाई की समझ में यह नहीं आया कि वह किस माँ की बात कर रही है। फिर भी उसने बात को आगे नहीं बढ़ाया।

35. मैं क्या चोरी से ले जाऊँगी ?
अथवा
36. छुपा के ले जाऊँगी?
अथवा
37. मैं तो दिखा के, जता के लिए जाऊँगी।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता साफ़िया है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का भाव स्पष्ट करें।
उत्चर :
सकिया को जब पुलिस अफसर भाई ने नमक ले जाने को जुर्म बताया तो साफिया ने कहा कि जुर्म तो तब होगा जब वह छिपा कर ले जाएगी। उसने कहा कि वह लाहौरौ नमक चोरी से या छिपाकर नहीं ले जाएगी वल्कि कस्टम ऑफिसर को दिखाकर ले जाएगी। अगर वह कस्टम ऑफिसर को दिखा-बताकर ले जाएगी तो तब तो यह जुर्म नहीं होगा।

38. अरे, फिर वही कानून-कानून कहे जाते हो!
अथवा
39. क्या सब कानून हुकूमत के ही होते हैं।
अथवा
40. कुछ मुहब्बत, मुरौवत, आदमियत, इंसानियत के नहीं होते?
अथवा
41. आखिर कस्टमवाले भी इंसान ही हैं, कोई मशीन तो नहीं होते।

प्रश्न :
वक्ता और श्रोता कौन हैं ?
उत्तर :
वक्ता सफ़िया और श्रोता उसका पुलिस अफसर भाई है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
सफ़िया के पुलिस अफसर भाई ने जब उसे बार-बार यह समझाया कि यहाँ से नमक ले जाना कानूनी जुर्म है तो वह झल्ला उठी। उसे भाई को झिड़कते हुए कहा कि क्या सारे कानून सरकार के ही बनाए होते हैं। इससे भी अलग कानू है जिसे मुहब्बत, मुरौव्वत, आदमियत तथा इसानियत बनाती है। वह कानून सरकार या हुकूमत के बनाए कानून से भी ऊपर है। इस कानून को कस्टम ऑफिसर भी मानेंगे। क्योंकि वे भी इससान हैं, कोई मशीन नहीं। आखिर उनके सीने के अंदर भी दिल धड़कता है।

42. भावना के स्थान पर बुद्धि धीरे-धीरे उस पर हावी हो रही थी।
अथवा
43. तो मजबूरी है, छोड़ देंगे।
अथवा
44. लेकिन फिर उस वायदे का क्या होगा जो हमने अपनी माँ से किया था?
अथवा
45. हम अपने को सैयद कहते हैं।
अथवा
46. फिर वायदा करके झुठलाने के क्या मायने?
अथवा
47. जान देकर भी वायदा पूरा करना होगा। मगर कैसे ?

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नमक’ तथा रचनाकार रज़िया सज्जाद ज़हीर हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
सफ़िया ने पुलिस ऑंफिसर भाई द्वारा समझाने पर कि पाकिस्तान से लाहौरी नमक से जाना कानूनी जुर्म है कुछ सोचने पर विवश हो गई। अभी तक वह भावना में बहकर भाई की बातो को मानने से इंकार कर रही थी लेकिन अवि

वह बुद्ध से काम लेने की सोच रही थी। एक बार उसने नमक ले जाने के अपने फैसले को रह करना चाहा लेकिन दूसरे ही पल उसे यह भी ध्यान आया कि सिख बीवी से किए गए वायदे का क्या होगा? वह सैयद है और सैयद अपने वादे से नहीं फिरा करते, चाहे उसे पूरा करने के लिए जान की कीमत क्यों न चुकानी पड़े। वह सिख बीवी से किए गए वायदे को पूरा तो करना चाहती थी लेकिन यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि वह यह कैसे करेगी?

48. यही ठीक है, फिर देखा जाएगा।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रबना ‘नमक’ है तथा रचनाकार रजियात सज्ज़ाद ज़ीर हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
नमक ले जाने के बारे में साफिया ने सोच-विचार कर यह तय किया कि वह नमक को कीनू की टोकरी के नीचे छिपा कर ले जाएगी। आते समय उसने देखा था कि सब लोगों के सामानों की तो तलाशी ली जा रही थी लेकिन फलों की टांकरौ की तलाशी कोई कस्टम ऑफिसर नहीं ले रहा था। नमक को फलों की टोकरी में ही छिपाकर ले जाना अच्छा रहेगा। बाकी जो होगा सो देखा जाएगा।

49. उसे ऐसा महसूस हुआ मानो उसे अपने किसी प्यारे को कब्र की गहराई में उतार दिया हो।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ ‘नमक’ है।

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प्रश्न :
पंक्ति का अशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
काफी सोच-विचार कर साफिया ने लाहौरी नमक को टोकरी में कीनू के नीचे छिपा दिया। उसे कीनुओं के नीचे नमक की पुड़िया को इस तरह छिपाकर रखना बहुत ही बुरा लग रहा था। उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो उसने अपने किसी अजीज को कल में दफना दिया हो।

50. उन कहानियों को याद करती रही जिन्हें वह अपने बचपन में अम्मा से सुना करती थी।
अथवा
51. शहजादा अपनी रान चीरकर हीरा छिपा लेता था।
अथवा
52. देवों, खौफनाक भूतों तथा राक्षसों के सामने से होता हुआ सरहदों से गुजर जाता था।
अथवा
53. इस माने में ऐसी कोई तरकीब नहीं हो सकती थी।
अथवा
54. वह अपना दिल चीरकर उसमें यह नमक छिपा लेती।
अथवा
55. उसने एक आह भरी।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नमक’ तथा रचनाकार रजिया सज्जाद ज्र है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
सफिया अपने साथ लाहौरी नमक ले जाने के बारे में तरह-तरह के उपाय सोच रही धी लेकिन उसे कोई उपाय पसंद नहीं आ रहा था। इसी समय उसे उन कहानियों की याद आती है जिन्हें बचपन में अपनी माँ से सुना करती थी। उन कहानियों का नायक शहजादा हीरे को अपनी जाँघ चीरकर छिपा लेता था तथा देवों, भूतों तथा राक्षसों के सामने से उनकी सरहद पार कर जाता था।

उसे लग रहा था कि काश, वह भी उस शहजादे की तरह अगर दिल में नमक को छिपाकर कस्टम आंफिसर के सामने से सरहद (सीमा) पार कर जाती तो कितना अच्छा होता। लेकिन यह सब तो केवल किस्सेकहानियों में ही होता है। अपनी बेवशी पर उसने एक ठंडी आह भरी।

56. यह पाकिस्तान था।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्दुत है?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘नमक’ पाठ से उद्धृत है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
साफ़िया पाकिस्तान में अपने भाई के घर में थी। रात के करीब डेढ़ बजे उसकी नींद खुली। उ गने पाया कि मार्च को सुहानी हवा खिड़की की गली से कमरे में आ रही है। रात चाँदनी और उंडी थी। खिडकी के बाहर चपा का एक वृक्ष सुहानी हवा में लहरा रहा था। कभी-कभी किसी के खाँसने, कुत्ते के भौंकने या चौकीदार की सीटी का आवाज से रात का सन्नाटा भंग होता था।

सारी प्रकृति, सारा वातावरण, मस्त हवा, चाँद की चाँदनी सब कुछ वैसा ही ॥ जैसा कि हिन्दुस्तान में। उसने सोचा कि प्रकृति अपनी ओर से किसी को अपना सब कुछ लुटाने में कोई भेदभाव नही करनी। वह सरहदों की सीमा को नहीं मानती। लेकिन इसान ने अपने को सरहदों मे क्यो केद कर रखा है।

57. नन्हें-नन्हें भतीजे- भतीजियाँ थीं जो उससे वही मासूमियत से पूछते।
अथवा
58. उन सबके और सफ़िया के बीच में एक सरहद थी।

प्रश्न :
रचना का नाम लिखें।
उत्तर :
रबना ‘नमक’ है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
पाकिस्तान सें साफिया अपने परिवारवालों के बीच बहुत अच्छा समय गुजार रही थी। भतोजे जीजियाँ भी काफी खुश थे। जब उन्होंने साफिया से पूछा कि ‘फूफीजान, आप हिंदुस्तान में क्यों रहती हैं, जहाँ हमल गण नहीं आ सकते, तो यह सुनकर उसे बड़ा दु:ख होता है। अब बच्चों को वह किस प्रकार समझाए कि उन सबके औ भाफिया के बीच एक सरहद है जो दोनों को एक नहीं होने देता।”

59. हो सकता है, साल भर बाद फिर आए।
अथवा
60. यह भी हो सकता था कि अब कभी न आ सके।

प्रश्न :
यहाँ किसके बारे में कहा जा रहा है?
उत्तर :
यहाँ साफ्रिया के बारे में कहा जा रहा है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लाहौर से हिन्दुस्तान लौटने के एक दिन पहले भाइयों तथा भतीजे भतीजियों से बिछ्युड़ने की व पना कर के साफ़िया दुखी हो जाती है। उसे लगता है कि अब एक साल के बाद ही फिर पाकिस्तान आने का वीज़ा मि ग पाएगा तो शायद वह आ सकेगी। फिर तो वक्त की बात है कि शायद वह फिर कभी दुबारा पाकिस्तान न आ सके।

61. यह हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की एकता का मेवा है।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता साफ़िया का दोस्त है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लाहौर से लौटने के एक दिन पहले साफिया के एक दोस्त ने उसे कीनू फल की टोकरी भंट की थी ताकि वह उसे अपने साथ हिन्दुस्तान ले जा सके। यह तोहफा देते समय उसने साफिया को यह कहा कि ‘ यह हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की एकता का मेवा है।’ कहने का भाव यह है कि यही फल पाकिस्तान से लोग सौगात के रूप में हिन्दुस्तान ले जाते हैं। उनके रिश्तो में भी कीनू की मिठास रची-बसी है।

62. उसने फैसला किया कि मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा।

प्रश्न :
किसने फैसला किया ?
उत्तर :
फैसला साफिया ने लिया।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
भाई के मना करने पर साफिया ने यह तय किया था कि वह लाहौरी नमक को कीनुओं की टोकरी में छिपाकर ले जाएगी। पर अंतिम समय में उसके दिल ने कहा कि मुहब्बत के इस तोहफे को वह चोरी-छिपे हिन्दुस्तान नहीं ले जाएगी। मुहब्बत तो जताने की चीजद है न कि छिपाकर रखने की। इसलिए मुहब्यत के तोहफे को चोरी से ले जाना तो इंसानियत, आदमियत के नजरिये से हुकूमत के कानून के जुर्म से भी बड़ा है। अंत में उसने अपना पक्का निश्चय कर लिया कि वह इसे छिपाकर, चोरी से नहीं ले जाने वाली है।

63. वह कुछ जाँच नहीं रही थी।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से उद्धत है।
उत्तर :
प्रस्तुत गद्यांश ‘नमक’ पाठ से उद्दृत है।

प्रश्न :
‘वह’ शब्द किसके लिए आया है?
उत्तर :
‘वह’ शब्द कस्टम ऑफिसर की वर्दी के लिए आया है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
लाहौर स्टेशन पर सामान की जाँच के बाद साफिया एक कस्टम आफिसर की ओर बढ़ी। वह उसे अपने हैंडबैग में रखे लाहौरी नमक के बारे में बताना चाहती थी। उस कस्टम ऑफिसर ने अपनी वर्दी पहन रखी थी लेकिन उसके दुबले-पतले शरीर, लंबा कद तथा उसकी खिचड़ी बालों के साथ वर्दी नहीं जँच रही थी। उसकी वर्दी उसके व्यक्तित्व से मेल नहीं खा रही थी।

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64. मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है।

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नमक’ है तथा रचनाकार रज़िया सज़्जाद ज़ीर हैं।

प्रश्न :
प्रस्तु पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
लाहौर में साफिया ने कस्टम ऑफिसर से अपने हैंडबैग में लाहौरी नमक होने की न केवल बात कह दी। उसने नमक का पुड़िया भी निकालकर उसके सामने टेबल पर रख दिया। सफ़िया यह जानती थी कि ऐसा करना जुर्म है फिर भी ऐसा करने की उसने वजह भी बता दिया। पूरी कहानी सुनने के बाद नमक वापस उसके हैंडबैग में रख दिया और कहा कि मुहब्यत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है। कहने का भाव यह है कि जब दिल आपस में मिले हों, तो वहाँ कानून भी मुहब्बत से हार जाता है।

65. लाहौर अभी तक उनका वतन है और देहली मेरा।
अथवा
66. तो बाकी सब रफ्ता-रफ्ता ठीक हो जाएगा।

प्रश्न :
रचना का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना का नाम ‘नमक’ है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लाहौर के रेलवे प्लेटफार्म के कस्टम आंफिसर ने सफिया से पूरी कहानी सुनने के बाद नमक वापस उसके हैंडबैग में रख दिया। जब सफिया चलने लगी तो उसने सिख बीवी के लिए संदेश दिया के वे अभी भी लौहार को अपना वतन समझें और देहली मेरा वतन है। यदि सभी पाकिस्तानी-हिन्दुस्तानी के दिलो में यही भावना आ जाय तो दोनों देशों की कटुता धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा।

67. कुछ समझ में नहीं आता था कि कहाँ से लाहौर खत्म हुआ और किस जगह से अमृतसर शुरू हो गया।
अथवा
68. एक ज़मीन थी, एक जबान थी।
अथवा
69. एक-सी सूरतें और लिबास, एक-सा लबो-लहजा और अंदाज थे।
अथवा
70. गालियाँ भी एक ही-सी थीं जिन्हें दोनों बड़े प्यार से एक-दूसरे को नवाज रहे थे।
अथवा
71. बस मुश्किल सिर्फ इतनी थी कि भरी हुई बंदूकें दोनों के हाथों में थीं।

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नमक’ है तथा इसके रचनाकार रज़िया सज्जाद जहीर है।

प्रश्न :
प्रस्तु गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
लाहौर स्टेशन पर कस्टम ऑफिसर ने सफिया के साथ जो मुहब्बत भरा व्यवहार किया था वह उसी के बारे में सोचती जा रही थी। सोचने के क्रम में लाहौर कहाँ खत्म हुआ और कहाँ से अमृतसर शुरु हुआ- यह उसे पता ही न चला।

आखिर पता भी कैसे चलता ? दोनों देशों के लोगों की जमीन एक, भाषा एक-सी, लिबास एक-सी, सूरतें भी एक-सी थीं। हाँ तक कि गालियाँ देने का अंदाज भी एक-सा था जिसका बड़े प्रेम से एक-दूसरे को दे रहे थे। अंतर केवल इतना ही था कि हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी दोनों ही पुलिसवलालों के हाथों में भरी हुई बंदूके थी। यही एक अंतर था जो दोनों देशों तथा देशवासियों को एक-दूसरे से अलग कर रहा था।

72. सफ़िया के पैरों तले की जमीन खिसकने लगी – अब क्या होगा?

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार रज़िया सज्जाद ज़ीर हैं।

प्रश्न :
सफिया के पैरों तले की जमीन क्यों खिसकने लगी?
उत्तर :
अमृतसर में सफिया ने कस्टम ऑफिसर से अपने पास नमक होने की बात कही। उसने सफिया की पूरी बात सुनी तथा उसे अपने साथ आने को कहा। प्लेटफार्म के एक सिरे पर के एक कमरे में सफिया को उसने कुर्सी पर बैठने को कहा। बाहर की तरफ देखर उसने एक पुलिसवाले को कुछ इशारा किया। सफिया ने सोचा कि उसे अवश्य ही लाहौर से नमक लाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह सोचकर ही उसके पैरों तले की जमौन खिसकने लगो। भयभीत होकर वह मन ही मन सोचने लगी कि न जाने अब क्या होने वाला है।

73. शमसुल इस्लाम की तरफ से सुनील दास गुप्त को प्यार के साथ।
अथवा
74. बचपन के दोस्त ने मुझे यह किताब दी थी।
अथवा
75. उस दिन मेरी सालगिरह थी।

प्रश्न :
रचना एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘नमक’ है तथा रचनाकार रज़िया सज्जाद जहीर हैं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 4 नमक

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उतर :
अमृतसर का कस्टम ऑफिसर सफ़िया के साथ बहुत इज्जत के साथ पेश आया। उसने सफिया को चाय भी पिलाई। उराने सफ़िया को अपने दोस्त शमसुल इस्लाम की दी हुई एक किताब भी दिखाई। यह उसने उसके जन्म दिन पर दिया था। किताब बगाल के सुप्रसिद्ध कवि नजरूल इस्लाम की थी। यह सब उसने सफ़िया को इसलिए बताया व्योंकि उसका भी भानना था कि प्रेम तथा भाईचारा किसी सरहद से नहीं बँटा होता है । धर्म कोई भी हो वह जोड़न का काम करता है। कि तो झेने का । सरहद की यह दीवार तो हमने बनाई है।

76. पर नज़रुल और टैगोर को तो हमलोग बचपन से पढ़ते थे।

प्रश्न :
वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता कस्टम ऑफिसर सुनील दास गुप्त है।

प्रश्न :
पंक्ति में निहित आशय को स्पष्ट करें।
उत्तर :
कस्टम आफिसर सुनील दास गुप्त ने सफिया को यह बताया कि भारत-विभाजन से भले ही पाकिस्तान, हिन्दुस्तान और बांग्ला देश बने हों लेकिन विभाजन से पहले सब लोग बड़े प्रेम से रहते थे। जितना सम्मान टैगोर को दिया जाता था उःना ही नजरूल इस्लाम को। बच्चों को शुरू से ही शांति, प्रेम, भाईचारा का पठा पढ़ाया जाता था। उन्हें सभी धमो का दा दर करना सिखाया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे हम चीजों को भूलते जा रहे हैं।

77. हागरी जमीन, हमारे पानी का मज़ा ही कुछ और है।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता कस्टम ऑंकिसर सुनील दास गुप्त है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
अपना वतन, अपनी मातृभूमि सबको प्यारी होती है। सुनील दास गुप्त हिन्दुस्तान मे कस्टम ऑफिसर हैं लेकिन उा वा वतन ढाका है। डाभ की चर्धा करते हुए वे कहते हैं कि वैसे तो डाभ बंगाल में भी होता है लेकिन ढाका के डाण की बात हो कुछ और है। कहने का भाव यह है कि कोई दुनिया के किसी भी हिस्से में रहे लेकिन वह अपनी मातृभूमि से कटकर ॠहीं रह सकता। इसलिए वे अपनी मातृभूमि ढाका की प्रशंसा करते नहीं थकते।

78. रुफिया सोचती जा रही थी कि किसका वतन कहां है ?
अथवा
79. वह कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ!

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचनाकार रज़िया सज्ज़ाद जहीर हैं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 4 नमक

प्रश्न :
पंक्ति में निहित भाव को स्पष्ट करें।
उत्तर :
सफिया पाकिस्तान से लौटकर जब अमृतसर स्टेशन के पुल पर चढ़ रही थी तो पाकिस्तान में बिताए अपने पद्रह दिन तथा दोनों देशों के कस्टम ऑंफिसर के अच्छे व्यवहार के बारे में ही सोच रही थी। वह साँच रही थी कि जिसे हम वतन कहते है – वह कहाँ है? वह कस्टम के इधर है या उधर। अगर कस्टम की बात छाड़ दे, सरहद की बात छोड़ दे तो फिर दानो देशों में अंतर ही क्या रह जाता है। आखिरकार आम लोग कब तक सरहदों की सीमा में कैद रहेंगे?

WBBSE Class 10 Hindi नमक Summary

लेखक – परिचय

रज़िया सज्जाद जहीर का जन्म 15 फरवरी, सन् 1917 को अज़मेर (राजस्थान) में हुआ था। ये मूल रूप से उर्दू की कहानीकार हैं। बी० ए० तक की शिक्षा घर पर प्राप्त की। इलाहाबाद से उर्दू में एम० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। सन् 1947 से इन्होंने लखनऊ के करामत हुसैन गर्ल्स कॉलेज में पढ़ाने का कार्य शुरू किया। फिर सन् 1965 में सोवियत सूचना विभाग में इनकी नियुक्ति हुई। 18 दिसम्बर सन् 1979 को इन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 4 नमक 1

प्रमुख रचनाएँ – जर्द गुलाब (उर्दू कहानी-संग्रह)
सम्मान – सोवियतभूमि नेहरू पुरस्कार, उत्तर प्रदेश का उर्दू अकादमी पुरस्कार, अखिल भारतीय लेखिका संघ पुरस्कार।

शब्दार्थ

पृष्ठ संख्या – 126

  • हैरान = आश्चर्यचकित।
  • कदर = तरह ।
  • जिस्म = शरीर ।
  • नेकी = भलाई, उपकार।
  • मुहब्बत = प्रेम ।
  • रहमदिली = दयावान।
  • बारीक = पतला।
  • मलमल = एक प्रकार का महीन कपड़ा (ढाके का मलमल विश्वप्रसिद्ध है)।
  • दुपट्टा = ओढ़नी।
  • अम्मा = माँ। मुहर्रम = मुसलमानों का एक त्यौहार जिसमें इमाम हुसैन तथा उनके परिवार की शहादत की याद में शोक
  • मनाया जाता है ।
  • उम्दा = अच्छा, स्वादिष्ट।
  • नफ़ीस = खूबसूरत।
  • रसिया = प्रेमी।
  • जिंदादिली = खुले दिल की।
  • आहिस्ता = धीरे।
  • वतन = देश।
  • साडा लाहौर = हमारा लाहौर।
  • दुआएँ = अर्शीवाद।
  • रूखसत = विदा।
  • सौगात = उपहार।
  • हुक्म = आदेश।

पृष्ठ संख्या – 127

  • हिचकिचाकर = असमंजस से ।
  • लाहौरी = लाहौर का।
  • गुजरे = बीत गए।
  • जिमखाना = व्यायामशाला।
  • खातिरदारियाँ = स्वागत।
  • परदेसी = दूसरे देश की।
  • अजीजों = चाहने वालों ।
  • दामी = कीमती।
  • सेर = लगभग एक किलो।
  • राय = सलाह।
  • गैरकानूनी = कानून के विरुद्ध।
  • हिस्से = भाग।
  • बखरे = बँटवारे।
  • जिक्र = उल्लेख।
  • नरमी = मुलायमी।
  • बाजी = दीदी कस्टम = चिंदी = टुकड़े।
  • जता = बतला
  • हुकूमत = सरकार।
  • मुरौवत = दया।
  • रवाना = जाना
  • कीनू = नारंगी और संतरे का मिला हुआ एक प्रकार का फल।
  • सैयद = मुसलमानों की एक जाति।

पृष्ठ संख्या =128

  • मायने = अर्थ।
  • तह = पेंदी ।
  • महसूस = अनुभव ।
  • उकड्रू = पैर मोड़कर बैठना
  • शहजादा = राजकुमार।
  • रान = जंघा, जांघ।
  • खौफनाक = भयानक।
  • सरहदों = सीमा।
  • तरकीब = उपाय।
  • आश्वस्त = निश्चित।
  • दोहर = चादर ।
  • तकरीबन = लगभग।
  • करीब = निकट।
  • घनाखत = घना पेड़।
  • अक्स = चेहरा।
  • दरख्त = पेड़।
  • आहट = आवाज।
  • लहका = हिला।
  • सगे = अपने।
  • बेशुमार = बेहद, बहुत अधिक ।
  • मासूमियत = भोलेपन।
  • इकबाल = उर्दू के प्रसिद्ध शायर, कवि।
  • मौलसिरी = एक खुशबूदार फूल का नाम।
  • बेजान = बिना प्राण के।

पृष्ठ संख्या – 129

  • दूब = घास।
  • रसीले = रस से भरे ।
  • मेवा = फल।
  • झिरझिरी = कंपकपाहट।
  • मेजें = टेबुलें।
  • इक्का-दुक्का = एकाष।
  • खिचड़ी बाल = सफेद और काले बाल मिले हुए।
  • ऐनक = चश्मा।
  • फरमाइए = कहिए।
  • लहजे = तरीके।
  • अजीजों = प्रिय लोगों।

पृष्ठ संख्या – 130

  • खातून = स्वी।
  • रफ्ता-रफ्ता = धीरे-धीरे ।
  • हसरत = चाहत, उम्मीद।
  • भिचे = किसे।
  • अटारी = हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच का एक स्थान/स्टेशन।
  • जबान = बोली। सूरतें = चेहरे ।
  • लिबास = वस्त्र।
  • लबोलहजा = बोलने का अंदाज।
  • नवाज रहे थे = आदान-प्रदान कर रहे थे/ले-दे रहे थे।

पृष्ठ संख्या – 131

  • सिरे = छोर ।
  • दाखिल = प्रवेश।
  • सफे = पन्ने।
  • फख = गर्व ।
  • डिवीजन = बंटवारा।
  • सालगिरह = जन्मदिन।
  • डाभ = हरा नारियल जिसका पानी पिया जाता है।

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions and रचना साहित्यिक निबंध to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

निबन्ध-लेखन :

निबंध उस गद्य-रचना को कहते हैं जिसमें किसी विषय का वर्णन किया गया हो । निबंध के माध्यम से लेखक उस विषय के बारे में अपने विचारों और भावों को बड़े प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने की कोशिश करता है। एक श्रेष्ठ, सुगठित एवम् व्यवस्थित निबंध-लेखक को विषय का अच्छा ज्ञान होना चाहिए, उसकी भाषा पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अभिव्यक्ति होती है । इसलिए एक ही विषय पर हमें अलग-अलग तरीकों से लिखे गए निबंध मिलते हैं।

किसी एक विषय पर विचारों को कमबद्ध कर सुंदर, सुगठित और सुबोध भाषा में लिखी गई रचना को निबंध कहते हैं। अनेक विद्वानों ने निबंध शब्द की पृथक्-पृथक् व्याख्या की है –

  • निबंध अनियमित, असीमित और असंबद्ध रचना है ।
  • निबंध वह लेख है जिसमें किसी गहन विषय पर विस्तृत और पांडित्यपूर्ण विचार किया जाता है।
  • मन की उन्मुक्त उड़ान निबंध कहलाती है ।
  • मानसिक विश्व का बुद्धि-विलास ही निबंध है ।
  • सीमित समय और सीमित शब्दों में क्रमबद्ध विचारों की अभिव्यक्ति ही निबंध है ।

अच्छे निबंध की विशेषताएँ –

एक अच्छे/श्रेष्ठ निबंध की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • निबंध की भाषा विषय के अनुरूप होनी चाहिए।
  • विचारों में परस्पर तारतम्यता होनी चाहिए।
  • विषय से संबंधित सभी पहलुओं पर निबंध में वर्चा की जानी चाहिए।
  • निबंध के अंतिम अनुच्छेद में ऊपर कही गई सभी बातों का सारांश होना चाहिए ।
  • वर्तनी शुद्ध होनी चाहिए तथा उसमें विराम-चिह्नों का उचित प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • निबंध लिखते समय शब्दों की सीमा का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।
  • निबंध किसी निश्चित उद्देश्य तथा एक विषय को लेकर लिखा जाना चाहिए।
  • निबंध में लेखक का व्यक्तित्व प्रतिफलित होना आवश्यक है ।
  • निबंध अधिक विस्तृत न होकर संक्षेप में होना चाहिए ।
  • निबंध-लेखन विचारों की एक अखंड धारा होती है, उसका एक निश्चित परिणाम होना चाहिए।

प्रस्तुतिकरण की दृष्टि से निबंध निम्नलिखित प्रकार के होते हैं –

  • वर्णनात्मक (माघ मेले का वर्णन, यात्रा का वर्णन, किसी त्योहार का वर्णन, विविध आयोजनों का वर्णन आदि)।
  • विवरणात्मक (ताजमहल, हिमालय आदि) ।
  • भावप्रधान (मेरी माँ, मेरा प्रिय मित्र आदि) ।
  • विचारप्रधान (समय नियोजन, सच्ची मित्रता, स्वदेश प्रेम आदि) ।

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

निबंध-लेखन : पूर्व तैयारी :

निबंध लेखन से पूर्व विषय के विभिन्न बिंदुओं/पक्षों पर गहराई से विचार करना अपेक्षित है । विषय की निश्चित धारणा मन में बना लेनी चाहिए ताकि कोई आवश्यक बिंदु न छूटने पाए। इस दृष्टि से लेखक को अपने साथियों से चर्चा करके निबंध की रूपरेखा तैयार कर लेना उपयुक्त रहता है।

रूपरेखा-निर्माण के बाद विषय संबंधी सामग्री तथा विभिन्न स्रोतों का संचयन करना उपयोगी होता है । उद्धरणों, विषयानुकूल उदाहरण सूक्तियों, तर्कों, प्रमाणों का संकलन कर लेना चाहिए ताकि उनका उपयुक्त प्रयोग किया जा सके ।
निबंध लिखने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए ।

  • विभिन्न सोतों से विषय संबंधी जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए।
  • छात्रों द्वारा अपने अध्यापक के साथ विषय पर चर्चा करने के उपरांत विषय की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।
  • रूपरेखा के आधार पर निबंध लिखते समय छात्रों द्वारा यथा-प्रसंग अपने निजी अनुभवों का उल्लेख किया जाना चाहिए।

निबंध का गठन : निबंध के तौन अंग होते है – (क) प्रस्तावना या भूमिका (ख) विषय का प्रतिपादन (ग) उपसंहार ।

यह पहले से निश्चित कर लेना चाहिए कि जितनी जानकारी विषय के संबंध में है, उसमें से कितनी प्रस्तावना में रहनी चाहिए, कितनी निबंधों के मुख्य अंश में और कितनी उपसंहार में ।
(क) प्रस्तावना :- प्रस्तावना ऐसी हो जो पाठक के मन में निबंध के विषय के प्रति उत्सुकता उत्पन्न कर दे । प्रस्तावना लंबी नहीं होनी चाहिए । कुछ ही वाक्यों के बाद विषय पर पहुँच जाना चाहिए ।
(ख) विषय का प्रतिपादन :-विषय के प्रतिपादन की दृष्टि से तथ्यों, भावों और विचारों का तर्कसंगत रूप में संयोजन किया जाना चाहिए । साथ ही उनकी क्रमबद्धता और सुसंबद्धता का ध्यान रखा जाना अपेक्षित है ।
निबंध के मुख्य अंश में सभी बातें और सभी विचार अलग-अलग अनुच्छेदों में लिखने चाहिए। एक अनुच्छेद में सामान्यत: एक ही बात या विचार रखा जाए । बातों और विचारो को प्रस्तुत करने में एक निश्चित क्रम होना चाहिए । सभी अनुच्छेद आपस में संबद्ध होने चाहिए, जिससे विचारों की एक श्रृंखला बनी रहे । ऐसा करने से ही निबंध सुगठित होता है और उसमें कसावट आती है ।
जहाँ आवश्यकता हो उद्धरण वहीं देना चाहिए । उद्धरण गद्य तथा पद्य दोनों में हो सकते हैं।
निबंध की भाषा शुद्ध, प्रांजल और विषय के अनुकल होनी चाहिए । यदि भाषा में किसी प्रकार की शिथिलता या कमज़ोरी रह जाती है तो निबंध का वांछित प्रभाव पाठक पर नहीं पड़ता।
(ग) उपसंहार :- निबंध के अंत में, विषय-विवेचन के आधार पर निश्चित निष्कर्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए । इसका अंत इस प्रकार लिखा जाए कि निबंध का पाठक पर स्थायी प्रभाव पड़े।

प्रारंभ में सामान्य और परिचित विषयों पर निबंध लिखने का अभ्यास करना चाहिए । फिर गंभीर विषयों पर निबंध लिखने चाहिए । यहाँ कुछ निबंधों के उदाहरण दिए गए हैं –

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

सार्दित्यिक निबंध

मेरी प्रिय पुस्तक ‘श्रीरामचरितमानस’ :

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • श्री रामचरितमानस की विशेषताएँ
  • उपसंहार।

प्रस्तावना :- जिस प्रकार मनुष्य की आँखें आकाश में असंख्य तारों के होते हुए भी धुव तारे को ही खोजती हैं । उपवन में अनेक प्रकार के पुष्छों के होते हुए भी गुलाब का अपना महत्व है। उसी प्रकार हिंदी साहित्य में हजारों ग्रंथों के होते हुए भी ‘श्रीरामचरितमानस’ सबसे अधिक लोकप्रिय ग्रंथ है। यही वह महान ग्रंथ है जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को उचित दिशा प्रदान करता है। आज से लगभग चार सौ वर्ष पूर्व इस महाकाव्य की रचना हुई तथा आज भी इस महान रचना का महत्व सर्वाधिक है। यह एक विश्वप्रसिद्ध साहित्यिक एवं आध्यात्मिक ग्रंथ है । यही एकमात्र हिंदी का ऐसा ग्रंथ है जो हिंदी एवं अहिंदी भाषी सभी का प्रिय एवं सम्माननीय ग्रंथ है।’श्रीरामचरितमानस’ सदियों से एक महान ग्रंथ के रूप में स्वीकृत एवम् लोकप्रिय बना हुआ है।

‘श्रीरामचरितमानस’ में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पावन चरित्र की झाँकी प्रस्तुत की गई है। महाकवि तुलसीदास ने संवत् 1631 में इसे लिखना प्रारंभ किया तथा यह महान प्रंथ संवत् 1633 में लिखकर पूरा हुआ। इस प्रंथ की रचना अवधी भाषा में हुई है । इसमें सात कांड हैं-बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड।

तुलसीदास द्वारा रचित ‘श्रीरामचरितमानस’ एक ऐसा ग्रंथ है जिसके अध्ययन से प्रत्येक व्यक्ति को संतुष्ट, सुखी तथा सर्वहितकारी जीवन व्यतीत करने में सहायता मिलती है।

श्रीरामचरितमानस सदाचार की शिक्षा देने वाला एक महाकाव्य है। इस ग्रंथ के प्रारंभ में ही कवि ने सदाचार के संबध मे कहा है कि, वे ही व्यक्ति वन्दनीय हैं जो दुःख सहकर भी दूसरों के दोषों को प्रकट नहीं करते –

जे सहि दुख परछिद्र दुरावा । वंदनीय जेहिं जग जस पावा ।।

तुलसीदास जी का दृष्टिकोण व्यापक था । उन्होंने उसी व्यक्ति और वस्तु को सर्वश्रेष्ठ माना है, जिससे सबका हित होता हो, किसी एक का नहीं –

कीरति भनिति भूति भल सोई । सुरसरि सम सब कहँ हित होई ।।

‘श्रीरामचरितमानस’ में तुलसीदास ने जिन पात्रों की सृष्टि की है वे मानव-जीवन के आदर्श पात्र हैं।’श्रीरामचरितमानस’ में आदर्श भाई, आदर्श पत्नी, आदर्श पुत्र, आदर्श माता, आदर्श पिता, आदर्श सेवक, आदर्श राजा एवं आदर्श प्रजा को प्रस्तुत करके तुलसीदास जी ने उच्चस्तरीय मानव-आदर्श की कल्पना की है ।

‘श्रीरामचरितमानस’ में एक ऐसे राज्य की कल्पना की गई है जिसमें कोई किसी से वैर नहीं करता । जिसमें सभी प्रेम के साथ रहते हैं तथा अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। जहाँ सभी उदार हों, कोई भी निर्धन न हो, कोई भी अज्ञानी न हो, किसी को भी दु:ख न हो, किसी को रोग न हो। आजादी के बाद गाँधीजी ने भी भारत में ऐसे ही रामराज्य की कल्पना की थी ।

‘श्रीरामचरितमानस’ का स्थान हिंदी-साहित्य में ही नहीं, जगत् के साहित्य में निराला है । इसके जोड़ का ऐसा ही सर्वांगुंदर उत्तम काव्य के लक्षणों से युक्त भगवान की आदर्श मानव-लीला तथा उनके गुण, प्रभाव, रहस्य और प्रेम के गहन-तत्व को अत्यंत सरस, रोचक एवं ओजस्वी शब्दों में व्यक्त करने वाला कोई दूसरा ग्रन्थ हिंदी-भाषा में ही नही, कदाचित् संसार की किसी भी भाषा में आज तक नहीं लिखा गया ।
उपर्युक्त गुणों के कारण ही ‘श्रीरामचरितमानस’ मेरा सर्वाधिक प्रिय ग्रंथ है ।

मेरे प्रिय कवि : तुलसीदास
अथवा, लोकनायक तुलसीदास

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • तुलसीदास के जन्म की पृष्ठ-भूमि
  • तुलसीदास : एक लोकनायक के रूप में
  • तुलसीदास की निष्काम भक्ति-भावना
  • तुलसी की समन्वय साधना
  • तुलसी के दार्शनिक विचार
  • तुलसीकृत रचनाएँ
  • उपसंहार ।

राम छोड़कर और की जिसने करी न आस ।
रामचरितमानस-कमल, जय हो तुलसीदास ।। – जयशंकर प्रसाद

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

प्रस्तावना :- मैंने हिंदी साहित्य के अंतर्गत कबीर, सूर, तुलसी, देव, घनानंद, बिहारी आदि अनेक कवियों का अध्ययन किया। आधुनिक कवि प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी वर्मा तथा दिनकर का भी अध्ययन किया है किंतु भक्तकवि तुलसीदास ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया । तुलसी के काव्य की अलौकिकता के समक्ष मैं सदैव नत-मस्तक होता रहा हूँ। उनकी भक्ति-भावना, समन्वयात्मक दृष्टिकोण तथा काव्य-सौष्ठव ने मुझे स्वाभाविक रूप से आकृष्ट किया है ।

तुलसीदास का जन्म ऐसी विषम परिस्थितियों में हुआ जब हिंदू समाज अशक्त होकर विदेशी चंगुल में फैंस चुका था। हिंदू समाज की संस्कृति और सभ्यता प्राय: विनष्ट हो चुकी थी तथा कहीं कोई आदर्श नहीं रह गया था । इस काल में मन्दिरों का विष्वंस हो रहा था, ग्रामों तथा नगरों का विनाश हुआ वहीं संस्कारों की भ्रष्टता भी चरम सीमा पर थी । तलवार के दबाव से हिंदुओं को मुसलमान बनाया जा रहा था ।

लोकनायक गोस्वामी तुलसीदास ने अंधकार के गर्त में डूबी हुई जनता के सामने भगवान राम का लोकमंगलकारी रूप प्रस्तुत किया । इससे जनता में आशा और शक्ति का संचार हुआ । युगद्रष्टा गोस्वामी तुलसीदास ने अपनेरामचरितमानस द्वारा भारतीय समाज में व्याप्त विभिन्न मतों, संप्रदायों तथा धाराओं का समन्वय किया। उन्होंने उस युग को नवीन दिशा, नई गति तथा नवीन प्रेरणा प्रदान की । उन्होंने सच्चे लोकनायक के समान वैमनस्य की चौड़ी खाई को भरने का सफल प्रयास किया ।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार, “लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय कर सके क्योंकि भारतीय समाज में नाना प्रकार की विरोधिनी संस्कृतियाँ, साधनाएँ, जातियाँ, आचार-निष्ठा और विचार-पद्धतियाँ प्रचलित हैं । भगवान बुद्ध समन्वयकारी थे, गीता’ ने समन्वय की चेष्टा की और तुलसीदास समन्वयकारी थे।”

जब ईश्वर के सगुण एवं निर्गुण दोनों रूपों से संबंधित विवाद, दर्शन एवं भक्ति दोनों ही क्षेत्रों में प्रचलित था तो तुलसीदास ने कहा –

सगुनहिं अगुनहिं नहिं कछु भेदा । गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा ।।

साहित्यिक क्षेत्र में भाषा, छंद, रस तथा अलंकार आदि की दृष्टि से भी तुलसी ने अनुपम समन्वय स्थापित किया। उस समय साहित्यिक क्षेत्र में विभिन्न भाषाएँ विद्यमान थीं । विभिन्न छन्दों में रचनाएँ की जाती थीं । तुलसी ने अपने काव्य में संस्कृत, अवधी तथा ब्रजभाषा का अद्भुत समन्वय किया ।

तुलसी के बारह प्रंथप्रामाणिक माने जाते हैं। ये प्रंथ हैं-श्रीरामचरितमानस’, विनय-पत्रिका, गीतावली, कवितावली’, ‘दोहावली’, रामललानहछू’, पार्वतीमंगल’, जानकीमंगल’, ‘बरवै रामायण’, ‘वैराग्य संदीपनी’, ‘श्रीकृष्णगीतावली’ तथा ‘रामाज्ञाप्रश्नावली’ । तुलसीदास की ये रचनाएँ विश्व-साहित्य की अनुपम एवम् अमूल्य निधि हैं।

उपसंहार :- तुलसी ने अपने युग और भविष्य, स्वदेश और विश्व तथा व्यक्ति और समाज आदि सभी के लिए महत्वपूर्ण सामग्री दी है । तुलसी को आधुनिक दृष्टि ही नहीं, प्रत्येक युग की दृष्टि मूल्यवान मानेगी, क्योंकि मणि की चमक अंदर से आती है बाहर से नहीं । वस्तुतः तुलसीदास हिंदी साहित्य के सर्वाधिक प्रतिभासंपन्न तथा युग को नवीन दिशा प्रदान करने वाले महान कवि हैं।

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

कबीर दास
अथवा
मेरे प्रिय भक्त कवि

रूपरेखा :

  • जन्मकालीन परिस्थितियाँ
  • जीवन वृत्त
  • समाज सुधार ।
  • धार्मिक सिद्धान्त
  • हिन्दी साहित्य में कबीर का स्थान
  • उपसंहार।

महात्मा कबीर का जन्म संवत् 1456 में हुआ था । कबीर पंथियों ने इनके जन्म के सम्बन्ध में यह दोहा लिखा है –

चौदह सौ छण्पन साल गए, चन्द्रवार एक ठाठ भए ।
जेठ सुदी बरसाइत की, पूरनमासी प्रकट भए ।।

किंवदंती के अनुसार कबीर किसी विधवा बाह्मणी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । लोक-लाज के कारण वह इन्हें लहरतारा नामक तालाब के किनारे छोड़ आई थी । वहाँ से नीमा और नीरू नामक जुलाहा दम्पत्ति इन्हें ले आये, जिनके द्वारा इनका पालन-पोषण हुआ । कबीर के बाल्यकाल का विवरण अभी तक अज्ञात ही है पर इतना अवश्य है कि उनकी शिक्षा-व्यवस्था यथावत् नहीं हुई थी । उन्होंने स्वयं लिखा है –

मसि कागद छूऔ नहिं, कलम गही नहिं हाथ ।

संक्रांतिकाल में पथ-प्रदर्शन करने वाले किसी भी व्यक्ति को जहाँ जनता के अंधविश्वासों और मूर्खतापूर्ण कृत्यों का खण्डन करना पड़ता है, वहाँ उसे समन्वय का एक बीच का मार्ग भी निकालना पड़ता है । यही कार्य कबीर को भी करना पड़ा है । जहाँ इन्होंने पण्डितों, मौलवियों, पीरों, सिद्धों और फकीरों को उनके पाखण्ड और ढोंग के लिये फटकारा, वहाँ उन्होंने एक ऐसे सामान्य धर्म की स्थापना की जिसके द्वार सबके लिए खुल गये थे । एक ओर इन्होंने हिन्दुओं के तीर्थ, वृत्त, मठ, मन्दिर, पूजा आदि की आलोचना की तो दूसरी ओर मुसलमानों के रोजा, नमाज और मस्जिद की भी खूब निन्दा की। माला फेरने वाले पण्डित-पुजारियों के विषय में उन्होंने कहा-

माला फेरत जुग गया, गया न मन का फेर ।
कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर ।।
X X X X X X X X X X X X X
जप माला छापा तिलक, सरै न एको काम ।
मन काँचे नाचे वृथा, साँचे राँचे राम ।।

कबीर निर्गुणकारी थे, साकार भक्ति में उन्हें विश्वास नहीं था, इसलिए स्थान-स्थान पर उन्होंने मूर्ति-पूजा का विरोध किया-

पाहन पूजै हरि मिलें, तो, मैं पूजूँ पहार ।
चाकी कोई न पूजई, घीस खाय संसार ।।

कवि के लिए प्रतिभा, शिक्षा, अभ्यास ये तीनों बातें आवश्यक होती हैं। कबीर ने न तो कहीं शिक्षा प्राप्त की थी और न किसी गुरु के चरणों में बैठकर काव्य-शास्त्र का अभ्यास ही किया था, परन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि वे ज्ञान से शून्य थे । भले ही उनमें परावलम्बी ज्ञान न रहा हो, परन्तु स्वावलम्बी ज्ञान की उनमें कमी नहीं थी । उन्होंने सत्संग से पर्याप्त ज्ञान संचय किया था। वे बहुश्रुत थे, उनके काव्य में विभिन्न प्रतीकों तथा अलंकारों की छटा दिखाई पड़ती है । उनके रूपक और उलटबांसियों के विरोधाभास तो अद्वितीय हैं। भाषा सधुक्कड़ी होने पर भी अभिव्यक्तिपूर्ण है।

कबीर को कोई-कोई विद्वान केवल समाज सुधारक और ज्ञानी मानते हैं, परन्तु कबीर में समाज-सुधारक, ज्ञानी और कवि, तीनों रूप मिलकर एकाकार हो गये हैं । वे सर्वप्रथम समाज-सुधारक थे, उसके पश्चात् ज्ञानी और उसके पश्चात् कवि । कबीर ने अपनी प्रखर भाषा और तीखी भावाभिव्यक्ति से साहित्यिक मर्यादाओं का अतिक्रमण भले ही कर दिया हो परन्तु उन्होंने जो काव्य-सृजन किया, उसके द्वारा साहित्य तथा धर्म में युगान्तर अवश्य उपस्थित हुआ ।

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

महाकवि सूरदास
अथवा
मेरे प्रिय कवि

रूपरेखा :

  • भूमिका
  • जीवन-परिचय
  • साहित्य-सेवा
  • उपसंहार।

वात्सल्य भाव के अमर गायक महाकवि सूरदास मध्यकाल में चलने वाली सगुण भक्तिधारा के अन्तर्गत चलने वाली कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुख एवं प्रतिनिधि कवि थे। इन्हें हिन्दी-साहित्य-आकाश का सूर्य एवं एक अमर विभूति माना जाता है ।

महाकवि सूरदास का जन्म सम्वत् 1535 में एक निर्धन सारस्वत बाह्मण-परिवार में हुआ मान जाता है । इस बात में मत- भेद पाया जाता है कि सूरदास जन्मान्ध थे या नहीं । एक मत के लोग मानते है कि सूरदास जन्म से ही अन्धे थे ।

कविवर सूरदास गोस्वामी वल्लभाचार्य के परम शिष्य, उनके पुत्र गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित ‘अष्टछाप’ के कवियों में सर्वप्रमुख कवि थे । उनके आदेश से श्रीनाथ जी के मन्दिर में स्वरचित पद गाकर भजन-कीर्तन किया करते थे।

सूरदास की रचनाओं की संख्या तेईस-चौबीस तक कही जाती है ; पर उपलब्ध और मुख्य तीन रचनाओं के नाम है – सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी । इन की कीर्ति का आधार स्तम्भ है – सूरसागर । सूरसागर में कवि ने श्रीमद्भगवत पुराण के दशम स्कन्ध के आधार पर कृष्ण-लीलाओं का गायन करते हुए भी अपनी अद्भुत मौलिक प्रतिभा का परिचय दिया है । इनमें राधा की परिकल्पना तो कवि की अपनी देन है ही, सूरसागर में संकलित ‘भ्रमरगीत’ को भी कवि ने अपनी मौलिक कल्पना से नया रूप-रंग प्रदान कर दिया है और भी अनेक मौलिक उद्भावनाओं से कृष्ण-जीवन को नया स्वरूप प्रदान किया है । सूरकाव्य में वात्सल्य रस प्रधान है।

वात्सल्य के बाद ‘सूरसागर’ का दूसरा प्रमुख रस है श्रृंगार । भृंगार के संयोग एवं वियोग दोनों पक्षों का वर्णन अत्यन्त सजीव एवं ताजगी लिए हुए है । भ्रमरगीत’ प्रसंग की रचना इन्होंने निर्गुण-निराकारवाद, ज्ञान-योग के खण्डन के लिए तो की ही थी, वियोग-शृंगार का उत्कर्ष दिखाना भी उसका उद्देश्य प्रतीत होत है । अपने लीला के पदों में कविवर सूरदास ने सख्यभाव का भी उत्कर्ष दिखाया है । सूरदास की दूसरी रचना ‘सूर सारावली के 1103 पदों में सूरसागर का सार संकलित किया गया है । हैँ, कृष्ण लीला के जो प्रसंग सूरसागर में नहीं आ पाए, कुछ ऐसे प्रसंग भी इसमें वर्णित हैं।

सूरदास का समस्त काव्य मनोविज्ञान का सुंदर अध्ययन है, विशेषकर वात्सल्य वर्णन । सूर के वात्सल्य वर्णन के बारे में डाँ० हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है – “यशोदा के वात्सल्य में सब कुछ है, जो माता शब्द को इतना महिमामय बनाए हुए है । यशोदा के बहाने सूरदास ने मातृ-हृदय का ऐसा स्वाभाविक, सरल और हुदयग्राही चित्र खींचा है कि आश्चर्य होता है। माता संसार का ऐसा पवित्र रहस्य है, जिसे कवि के अतिरिक्त किसी को व्याख्या करने का अधिकार नहीं । सूरदास जहाँ पुत्रवती जननी के प्रेम-पोषक हुदय को छूने में समर्थ हुए हैं, वहाँ वियोगिनी माता के करुणा विगलित हृदय को छूने में भी समर्थ हुए हैं ।’

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त

रूपरेखा :

  • जीवन वृत्त
  • काव्य की पृष्ठभूमि
  • रचनायें
  • काव्य की विशेषतायें
  • उपसंहार ।

वर्तमान काव्यधारा के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि श्री मैधिलीशरण गुप्त का जन्म संवत् 1943 में झाँसी जिले के चिरगाँव नामक स्थान में हुआ था । उनके पिता का नाम सेठ रामचरण था । वैष्णव भक्त होने के साथ-साथ सेठ जी का कविता के प्रति भी असीम अनुराग था । वे कनकलता के नाम से कविता किया करते थे । गुप्त जी का पालन-पोषण भक्ति एवम काव्यमय वातावरण में ही हुआ । वातावरण के प्रभाव से गुप्त जी बाल्यावस्था से ही काव्य रचना करने लगे थे ।

गुप्त जी की शिक्षा-व्यवस्था घर पर ही हुई । अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे झाँसी आये किन्तु वहाँ उनका मन न लगा। काव्य-रचना की ओर प्रारम्भ से ही उनकी प्रवृति थी । एक बार अपने पिता जी की उस कॉपी में, जिसमें वे कविता किया करते थे, अवसर पाकर एक छण्पय लिख दिया । पिता जी ने जब कॉपी खोली और उस छण्पय को पढ़ा, तब वे बहुत प्रसन्न हुए । उन्होंने मैथिलीशरण को बुलाकर महाकवि होने का आशीर्वाद दिया ।

गुप्त जी की प्रारम्भिक रचनायें कलकत्ता के ‘जातीय पत्र’ में प्रकाशित हुआ करती थी। पण्डित महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्पर्क में आने पर उनकी रचनायें सरस्वती’ में प्रकाशित होने लगीं । द्विवेदी जी ने समय-समय पर उनकी रचनाओं में संशोधन किया और उन्हें ‘सरस्वती’ में प्रकाशित कर उन्हे प्रोत्साहन दिया । द्विवेदी जी से प्रोत्साहन पाकर गुप्त जी की काव्य-प्रतिभा जाग उठी और शनै:-शनै: उसका विकास होने लगा । आज के हिन्दी साहित्य को गुप्त जी की काव्यप्रतिभा पर गर्व है ।

गुप्त जी अपने जीवन के प्रथम चरण से ही काव्य-रचना में प्रवृत्त रहे । राष्ट्र प्रेम, समाज प्रेम, राम, कृष्ण तथा बुद्ध सम्बन्धी पौराणिक आख्याओं एवं राजपूत, सिक्ख तथा मुस्लिम संस्कृति प्रधान ऐतिहासिक कथाओं को लेकर गुप्त जी ने लगभग चालीस काव्य-प्रन्थों की रचना की है । गुप्त जी ने मौलिक ग्नन्थों के अतिरिक्त बंगला के काव्य-ग्रन्थों का अनुपम अनुवाद भी किया है । अनुवादित रचनायें ‘मधुप’ के नाम से हैं।

उन्होंने फारसी के विश्व-विश्रुत कवि उमर खैयाम की रुबाइयों का अनुवाद भी अंग्रेजी के द्वारा हिन्दी में किया है । रंग में भंग, जयद्रथ वध, भारत भारती, शकुन्तला, वैतालिका, पद्मावती, किसान, पंचवटी, स्वदेशी संगीत, हिन्दू-शक्ति, सौरन्धी, वन वैभव, वक संहार, झंकार, अनघ, चन्द्रहास, तिलोत्तमा, विकट भट, मंगल घट, हिडिम्बा, अंजलि, अर्ध्य, प्रदक्षिणा और जय भारत उनके काव्य हैं। ‘साकेत’ पर हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से उन्हें मंगला प्रसाद पारितोषिक भीप्राप्त हुआ था। ‘जय भारत’ उनकी नवीनतम कृति थी।

गुप्त जी की ‘भारत-भारती’ में देश-प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है । अंग्रेजी शासन के विरोध में होने के कारण यह पुस्तक कुछ समय तक जब्त भी रही थी । इसमें उन्होंने अतीत गौरव की भव्य झाँकी प्रस्तुत की है । भारतवर्ष की तत्कालीन दुर्दशा पर दुःख प्रकट करते हुए आपने लिखा है-

हम कौन थे क्या हो गए हैं, और क्या होंगे अभी ।
आओ विचारें आज मिलकर, ये समस्यायें सभी ।।

भारतवर्ष में स्री जाति चिरकाल से उपेक्षित रही है । गुप्त जी उनकी इस दशा पर दुःखी हो उठते हैं-

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी,
आँचल में है दूध और आँखों में पानी ।

गुप्त जी की कविता की भाषा सरल और सुबोध है । उसे साधारण से साधारण व्यक्ति भी समझ सकता है । गुप्त जी की कविता में कोमलता और माधुर्य का अभाव है । कहीं कहीं तो रुखा गद्य-सा जान पड़ता है । इनकी कविता की सफलता का रहस्य भाषा तथा भावों की सुबोधता है न कि उनका काव्य-सौन्दर्य । एक आलोचक का विचार है, कि गाँधी जी जो कुछ भी अपने भाषणों में कह देते थे, प्रेमचन्द जी उसे अपने उपन्यासों में और मैथिलीशरण उसे अपनी कविता में ज्यों का त्यों कुछ उलट-फेर करके उतार दिया करते थे ।

WBBSE Class 10 Hindi रचना साहित्यिक निबंध

उपन्यास-सम्राटप्रेमचन्द
अथवा,
मेरे प्रिय लेखक (मॉडल प्रश्न – 2007)

रूपरेखा :

  • प्रस्तावना
  • जीवन परिचय
  • साहित्य सेवा
  • रचनागत विशेषताएँ
  • उपसंहार ।

प्रेमचन्द का जन्म बनारस के निकट लमही नामक गाँव में सन् 1880 में हुआ था । उनके पिता मुंशी अजायब राय डाकखाने के एक साधारण लिपिक थे, अतः परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। प्रेमचन्द जी के बचपन का नाम धनपत राय था । इनकी साहित्यिक प्रतिभा से प्रभावित होकर द्याराम निगम नामक एक उर्दू लेखक ने इनका नाम प्रेमचन्द रखा ।

प्रेमचन्द जी महान कथा-शिल्पी थे । उपन्यास तथा कहानियों के अतिरिक्त उन्होंने नाटक, निबन्ध आदि भी लिखे । उनकी प्रारम्भिक रचनाएँ उर्दू में लिखी गयीं, किन्तु कुछ समय बाद ही वे हिन्दी में लिखने लगे । यही कारण है कि प्रेमचन्द जी को हिन्दी तथा उर्दू भाषा-भाषियों में समान रूप से लोकप्रियता मिली । प्रेमचन्दजी के साहित्य को हम निम्न रूप में श्रेणीबद्ध कर सकते हैं :-

उपन्यास :- सेवासदन, कर्मभूमि, कायाकल्प, निर्मला, प्रतिज्ञा, प्रेमाश्रय, वरदान, रंगभूमि, गबन तथा गोदान आदि।
कथा-संग्रह :- सप्त सरोज, प्रेम पचीसी, प्रेम प्रसूना, प्रेम पूर्णिमा, प्रेमतीर्थ, प्रेम प्रमोद, प्रेम द्वादशी, प्रेम प्रतिज्ञा, कफन, नवनिधि, पाँच फूल, मानसरोवर के 8 खण्ड आदि ।
नाटक :- प्रेम की वेदी, कर्बला, संग्राम, रूठी रानी ।
निबन्ध संग्रह :- कुछ विचार तथा निबन्ध-संग्रह ।
जीवनी :- कलम, त्याग और तलवार, दुर्गादास और महात्मा शेखसादी ।
बाल-साहित्य :- कुत्ते की कहानी, जंगल की कहानियाँ, रामचर्चा और मनमोदक ।
अनुवाद :- टाल्स्टाय की कहानियाँ, सुखदास, चाँदी की डिबिया, हड़ताल आदि ।
रचनागत विशेषताएँ :- प्रेमचन्द जी ने अपनी कला को जीवन के प्रति समर्पित किया, अतः उनके प्रत्येक शब्द और वाक्य में जीवन की अनुगूँज सुनाई देती है । उनकी रचनाएँ भारत के दीन-दु:खी किसानों, शोषित मजदूरों सामाजिक दुष्पवृत्तियों की शिकार अबलाओं की मर्मव्यथा का सजीव चित्र देकर पाठकों के हृदय में सच्ची सहानुभूति जगाती हैं तथा उनसे जटिल समस्याओं का निदान ढूँढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
उपसंहार :- प्रेमचन्द जी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति हैं । उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द जी का स्थान विश्व साहित्यकला शिल्पियों की प्रथम श्रेणी में प्रतिष्ठित हो चुका है । शोषितों, दलितों तथा दीन-दुखियों को कथानायक बनाकर एवं उनकी मूक व्यथा को वाणी प्रदान कर प्रेमचन्द जी ने जैसी लोकप्रियता अर्जित की है वह बाद के किसी भी हिन्दी लेखक को प्राप्त नहीं हो सकी ।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions and व्याकरण वाच्य to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
कर्मवाच्य किसे कहृते हैं?
उत्तर :
कर्म के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो, तो उसे कर्मवाच्य कहते हैं। जेसे – रोटी राम द्वारा खाई गई।

प्रश्न 2.
‘बढ़ई मेज बनाता है।’ कर्मवाच्य में बदले।
उत्तर :
बढ़ई द्वारा मेज बनायी जाती है।

प्रश्न 3.
‘लड़के क्रिकेट खेल रहे हैं।’ – इस वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
लड़कों ने क्रिकेट खेला।

प्रश्न 4.
भाववाच्य किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
भाव (किया) के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो, तो उसे भाव वाच्य कहते हैं। जैसे – राम से चला नहां जाता।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 5.
‘वह बेचारा चल नहीं सकता’ भाव वाच्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
उस बेचारे से चला नहीं जा सकता।

प्रश्न 6.
‘लड़कों द्वारा गेन्द खेला जा रहा है।’ इस वाक्य को कर्वृवाच्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
लड़कें गेन्द खेल रहे हैं।

प्रश्न 7.
वाच्य किसे कहते हैं?
उत्तर :
कर्ता, कर्म या भाव (क्रिया) के अनुसार किया के रूप-परिवर्तन को वाच्य कहते हैं।

प्रश्न 8.
वाच्य के कितने भेद हैं?
उत्तर :
वाच्य के तीन भेद हैं – (क) कर्तृवाच्य (ख) कर्मवाच्य और (ग) भाववाच्य।

प्रश्न 9.
कर्तृवाच्य की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
कर्ता के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो, तो उसे कर्तृवाच्य कहते हैं। जैसे – राम रोटी खाता है।

प्रश्न 10.
कर्वृवाच्य और कर्पवाच्य में क्या अंतर है?
उत्तर :
कर्ता के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो तो उसे कर्तृवाच्य कहते हैं लेकिन कर्म के अनुसार यदि क्रिया में परिवर्तन हो तो उसे कर्मवान्य कहते हैं।
जैसे – राम रोटी खाता है। – कर्तृवाच्य
राम ने रोटी खाई। – कर्मवाच्य

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प्रश्न 11.
‘वाच्य’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर :
वाच्य का शाब्दिक अर्थ है – बोलने का विषय।

प्रश्न 12.
कर्मवाच्य में क्रिया के लिंग का प्रयोग किस प्रकार होता है?
उत्तर :
कर्मवाच्य में क्रिया के लिंग, वचन आदि कर्म के अनुसार होते हैं।

प्रश्न 13.
कर्वृवाच्य में किस क्रिया का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर :
कर्वृवाच्य में सकर्मक तथा अकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 14.
कर्मवाच्य में किस क्रिया का प्रयोग होता है?
उत्तर :
कर्मवाच्य में केवल सकर्मक क्रियाओं का प्रयोग होता है।

प्रश्न 15.
भाववाच्य का प्रयोग प्रायः किस रूप में होता है।
उत्तर :
भाव वाच्य का प्रयोग प्रायः निषेधार्थ में होता है।

प्रश्न 16.
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाने के दो नियमों को लिखें।
उत्तर :
(क) कर्तृवाच्य की क्रिया को सामान्य भूतकाल में बदलना चाहिए।
(ख) इनमें ‘से’ अथवा ‘के द्वारा’ का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 17.
कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाने के दो नियमों को लिखें।
उत्तर :
(क) इसके लिए क्रिया को अन्य पुरुष और एकवचन में रखना चाहिए।
(ख) कर्ता में करण कारक की विर्भक्ति लगानी चाहिए।
(ग) आवश्यकतानुसार निषेधसूचक ‘नहीं’ का प्रयोग करना चाहिए।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 18.
वाच्य-रूपांतर किसे कहते हैं?
उत्तर :
एक वाच्य से दूसरे वाच्य में परिवर्तन वाच्य-रूपांतर या वाव्य-परिवर्तन कहलाता है।

प्रश्न 19.
भाववाच्य में किसकी प्रधानता होती है?
उत्तर :
भाववाच्य में किया की प्रधानता रहती है।

वाच्य-रूपांतर या परिवर्तन के उदाहरण

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य 1

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘वजीरा सिंह द्वारा पानी पिलाया गया।’ वाक्य में कौन-सा वाच्य है ?
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) (क), (ख), (ग) तीनों
उत्तर :
(ख) कर्मवाच्य

प्रश्न 2.
‘अधिकार छीना जाता है।’ – कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) (क) और (ख) दोनों
उत्तर :
(ग) भाववाच्य

प्रश्न 3.
राधिका ने खाना बनाया – वाच्य बताएँ –
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृवाच्य

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 4.
भारत में हिन्दी बोली जाती है – वाच्य बताएँ –
(क) कर्तृवाच्य
(ख) भाववाच्य
(ग) कर्मवाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) कर्मवाच्य

प्रश्न 5.
उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद होते हैं –
(क) 3
(ख) 4
(ग) 5
(घ) 6
उत्तर :
(ख) 4

प्रश्न 6.
तनुजा किताब पढ़ती है – इस वाक्य में कौन सा वाच्य है?
(क) भाववाच्य
(ख) कर्तृवाच्य
(ग) कर्मवाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्तृवाच्य

प्रश्न 7.
‘हर आवाज वह डूबकर सुनता।’ – इसमें कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृवाच्य
(ख) कर्मवाच्य
(ग) भाववाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृवाच्य

प्रश्न 8.
कर्मवाच्य बनाते समय कर्ता के साथ प्रयोग होता है :
(क) को या से द्वारा
(ख) से या के द्वारा
(ग) के या में द्वारा
(घ) से या में द्वारा
उत्तर :
(ख) से या के द्वारा

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 9.
तुम सो जाओ – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्म वाच्य
(ख) कर्ता वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 10.
एक अध्यापक बच्चे से कुछ पढ़वा रहे थे – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्ता वाच्य
(ख) भाव वाच्य
(ग) कर्म वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) कर्म वाच्य।

प्रश्न 11.
रंगय्या ने ऐसा महसूस किया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्ता वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 12.
मास्टर साहब ने उधर देखा – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्म वाच्य
(ख) भाव वाच्य
(ग)) कर्ता वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 13.
रंगय्या से रूका नहीं गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) भाव वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) कर्ता वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) भाव वाच्य।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 14.
रंगय्या से देते नहीं बना – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्म वाच्य
(ख) भाव वाच्य
(ग) कर्ता वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) भाव वाच्य।

प्रश्न 15.
गंगा ने चटनी परोस दी – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्म वाच्य
(ख) कर्ता वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उतर :
(ख) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 16.
सूरज डूब चुका था – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्ता वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(7) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 17.
कीड़े-मकोड़े के द्वारा भिनभिनाया जा रहा था – में कौन-सा वाच्य है?
(जि) कर्ता वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 18.
उसने आकर पूजा-पाठ किया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्म वाच्य
(ख) कर्ता वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्ता वाच्य।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 19.
सूबेदारनी ओबरी में चली गई – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्ता वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 20.
वजीरा के द्वारा वैसा ही किया गया – में कौन-सा वाच्य है?
(ī) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(गi) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 21.
फौज लाम पर जाती है – में कौन-सा वाच्य है ?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 22.
बोधा गाड़ी पर लेट गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 23.
मैं लपटन साहब की खबर लेता हूँ – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 24.
चुपचाप सब तैयार हो गए – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 25.
लड़के के द्वारा घर की राह ली गई – में कौन-सा वाच्य है ?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 26.
लड़की से भागा नहीं जाता – में कौन-सा वाच्य है ?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

प्रश्न 27.
खाँ साहब अफसोस जताते हैं – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 28.
रीड के द्वारा शहनाई को फूंका जाता है – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 29.
घूमकेतुओं से डरा नहीं जाता –
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 30.
खाईवालों ने सुन ली थी – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 31.
स्वप्न से चला नहीं जाता – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

प्रश्न 32.
क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते हैं जिससे ….
(क) वाक्य में कर्त्ता की प्रधानता का बोध हो।
(ख) वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो।
(ग) वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ग) वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो।

प्रश्न 33.
तुम्हारे द्वारा मेरे प्राण बचाए गए थे – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 34.
वह इस दुनिया में आया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 35.
उसके द्वारा इस दुनिया में आया गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 36.
रात में जब मेढ़क टर्राते – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 37.
देर तक वह उसे बजाता रहता – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 38.
एक शाम उसके द्वारा देखा गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 39.
बुलबुल के द्वारा कुहुकना शुरू किया गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 40.
मास्टर सा’ब ने मना किया था – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 41.
मास्टर सा’ब के द्वारा मना किया गया था – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाच्य

प्रश्न 42.
संसार से बदला न जा सका – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

प्रश्न 43.
एक काली मोटर के द्वारा धूल उड़ाया गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 44.
वह हँसा – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 45.
उसके द्वारा हँसा गया – मैं कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वान्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

प्रश्न 46.
उससे हँसा नहीं जाता – में कौन-सा वाच्य है ?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

प्रश्न 47.
वह स्कूल की तरफ चल दिया – मैं कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 48.
उसके द्वारा स्कूल की तरफ जाया गया – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तु वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्म वाच्य।

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प्रश्न 49.
रंगय्या वहाँ नहीं रूका – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्ता वाच्य।

प्रश्न 50.
रंगय्या से रूका न जा सका – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

प्रश्न 51.
रंगय्या ने एक गहरी साँस ली – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 52.
वह सामान बाँधने लगी – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्तृ वाच्य।

प्रश्न 53.
यह तोहफा चोरी से नहीं जाया जा सकेगा – में कौन-सा वाच्य है?
(क) कर्तृ वाच्य
(ख) कर्म वाच्य
(ग) भाव वाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) भाव वाच्य।

प्रश्न 54.
विजया पत्र लिखती है – इस वाक्य में कौन-सा वाच्य है ?
(क) भाव वाच्य
(ख) कर्तृवाच्य
(ग) कर्मवाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) कर्तृवाच्य।

प्रश्न 55.
मेरे द्वारा गाना गाया गया – इस वाक्य में वाच्य का कौन-सा रूप है?
(क) कर्मवाच्य
(ख) भाववाच्य
(ग) कर्तृवाच्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) कर्मवाच्य।

प्रश्न 56.
क्रिया के उस रूपान्तर को कर्तृवाच्य कहते हैं जिससे –
(क) वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो।
(ख) वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो।
(ग) वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(ख) वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो।

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प्रश्न 57.
क्रिया के उस रूपान्तर को भाववाच्य कहते हैं जिससे –
(क) वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो।
(ख) वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो।
(ग) वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) वाक्य में भाव की प्रधानता का बोध हो।

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Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions and व्याकरण वाक्य to reinforce their learning.

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लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘मिश्र वाक्य’ किसे कहते हैं?
उत्तर :
जिस वाक्य में एक प्रधान तथा अन्य आश्रित उपवाक्य हो उसे ‘मिश्र वाक्य’ कहते हैं। जैसे – कमला ने कहा कि वह बाजार जाएगी।

प्रश्न 2.
‘मैं बाज़ार जाकर पुस्तक लाया।’ – वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदले।
उत्तर :
मैं बाज़ार गया और वहाँ से पुस्तक लाया।

प्रश्न 3.
‘वह गरीब किसान बीमार था।’ – इसे मिश्र वाक्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
मिश्र वाक्य : जो बीमार था, वह गरीब किसान था।

प्रश्न 4.
‘संयुक्त वाक्य’ की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
जहाँ दो या दो से अधिक सरल वाक्य आपस में किसी योजक शब्द या विराम चिह्न से जुड़े हों वह ‘संयुक्त वाक्य’ होता है। जैसे – मैं पढ़ रहा हूँ और तुम सो रहे हो।

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प्रश्न 5.
‘टोपीवाला लड़का कहाँ गया?’ – इस वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलिए।
उत्तर :
जो टोपी वाला लड़का था, वह कहाँ गया?

प्रश्न 6.
बाहर जाकर खेलो – वाक्य को विधिवाचक वाक्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
बाहर जाकर खेल रहा है ।

प्रश्न 7.
‘क्या आप बालू से तेल निकाल सकते हैं’ निषेधवाचक वाक्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर :
‘आप बालू से तेल नहीं निकाल सकते हैं’

प्रश्न 8.
‘वाक्य’ किसे कहते हैं?
उत्तर :
ऐसा सार्थक शब्द-समूह जो भाव या विचार को पूर्णतः व्यक्त कर सके, वाक्य कहलाता है।

प्रश्न 9.
वाक्य में कौन कौन-से गुण होने चाहिए ?
उत्तर :
वाक्य में सार्थकता, योग्यता, निकटता, पद-क्रम तथा अन्वय जैसे गुण होने चाहिए।

प्रश्न 10.
‘वाक्य का घटक’ किसे कहते हैं?
उत्तर :
जिन अवयवों को मिलाकर वाक्य की रचना होती है उन्हें ‘वाक्य का घटक’ कहते हैं।

प्रश्न 11.
संरचना की दृष्टि से वाक्य के प्रधान घटक कितने होते हैं?
उत्तर :
दो-उद्देश्य (कर्ता) तथा विधेय (क्रिया)।

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प्रश्न 12.
‘उद्देश्य’ किसे कहते हैं?
उत्तर :
वाक्य में जिसके बारे में जो कुछ कहा जाय उसे ही उद्देश्य कहते हैं।

प्रश्न 13.
‘विधेय’ किसे कहते हैं?
उत्तर :
उद्देश्य के बारे में जो कहा जाय उसे ‘विधेय’ कहते हैं।

प्रश्न 14.
वाक्य की किन्हीं दो विशेषताओं को लिखें।
उत्तर :
(क) वाक्य भाषा की ऐसी इकाई है जो भाव या विचार को प्रकट करती है।
(ख) वाक्य में आने वाले शब्दों के मध्य एक निश्चित क्रम होता है।

प्रश्न 15.
सामान्य रूप से वाक्य के कितने भेद हैं?
उत्तर :
दो – (क) अर्थ के आधार पर वाक्य-भेद
(ख) रचना के आधार पर वाक्य-भेद

प्रश्न 16.
अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं? नाम लिखें।
उत्तर :
आठ भेद। इनके नाम हैं :-
(क) कथनात्मक
(ख) नकारात्मक या निषेधात्मक
(ग) आज्ञार्थक या विधिवाचक
(घ) प्रश्नवाचक
(ङ) इच्छावाचक
(च) संदेहवाचक
(छ) विस्मयादिबोधक
(ज) संकेतवाचक

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प्रश्न 17.
कथनात्मक वाक्य की सोदाहरण परिभाषा लिखें।
उत्तर :
किसी वस्तु या व्यक्ति की अवस्था का बोध कराने वाले वाक्य को कथनात्मक वाक्य कहते हैं। जैसे – पूरब में सूरज उगता है। मैं कल कोलकाता गया था।

प्रश्न 18.
नकारात्मक (निषेधवाचक) वाक्य की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिन वाक्यों में किसी कार्य के निषेध होने का बोध होता है, उन्हें नकारात्मक या निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे – अब वह नहीं मिलेगा।

प्रश्न 19.
आज्ञार्थक (विघिवाचक) वाक्य की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिन वाक्यों में आज्ञा, निर्देश, प्रार्थना अथवा विनय आदि का भाव प्रकट होता है, उन्हें आज्ञार्थक या विधिवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे – कल तक आ जाना। कृपया इधर आएं।

प्रश्न 20.
प्रश्नवाचक वाक्य की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिन वाक्यों में प्रश्न किया जाय उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे –
आप कहाँ जा रहे हैं? तुम कौन हो?

प्रश्न 21.
‘इच्छावाचक वाक्य’ की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
वक्ता की इच्छा, आशा अथवा आशीर्वाद को व्यक्त करनेवाले वाक्य को इच्छावाचक वाक्य कहते हैं। जैसे – आपकी यात्रा शुभ हो। दीपावली शुभ हो।

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प्रश्न 22.
‘संदेहवाचक वाक्य’ की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिन वाक्यों में संदेह की भावना प्रकट हो वह संदेहवाचक कहलाता है। जैसे – शायद वह सुधर जाए।

प्रश्न 23.
‘विस्मयादिबोधक वाक्य’ की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिन वाक्यों में आश्चर्य (विस्मय), हर्ष, शोक, घृणा आदि के भाव व्यक्त हों उन्हें विस्मयादिबोधक वाक्य कहते हैं। जैसे – ओह ! कितना सुंदर फूल है। हाय ! मैं मर गया।

प्रश्न 24.
‘संकेतवाचक वाक्य’ की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिन वाक्यों में एक क्रिया के दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध होता है उन्हें ‘संकेतवाचक वाक्य’ या ‘हेतुवाचक वाक्य’ या ‘शर्तवाचक वाक्य’ भी कहते हैं। जैसे – वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती। अगर वह आ जाता तो मैं न जाता।

प्रश्न 25.
रचना के आधार पर वाक्य कितने प्रकार के होते हैं? नाम लिखें।
उत्तर :
रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं – (क) सरल वाक्य (ख) मिश्र वाक्य (ग) संयुक्त वाक्य।

प्रश्न 26.
‘सरल वाक्य’ की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिस वाक्य में एक उद्देश्य तथा एक मुख्य क्रिया हो उसे ‘सरल’ या ‘साधारण वाक्य’ कहते हैं। जैसे – रेखा खाना खा रही है।

प्रश्न 27.
मिश्र वाक्य तथा संयुक्त वाक्य के किसी एक अंतर को लिखें।
उत्तर :
मिश्र वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य होता है, लेकिन संयुक्त वाक्य में एक से अधिक प्रधान उपवाक्य होते हैं।

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प्रश्न 28.
‘प्रधान उपवाक्य’ किसे कहते हैं?
उत्तर :
प्रधान उपवाक्य वह होता है जिसकी किया मुख्य होती है।

प्रश्न 29.
आश्रित उपवाक्य की पहचान लिखें।
उत्तर :
जो आश्रित उपवाक्य होते हैं उनका प्रारंभ कि, जो, जिसे, क्योंकि, अगर, मगर, परंतु आदि से होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘परिश्रमी’ व्यक्ति अवश्य सपल होगा।’ कोन-सा वाक्य है?
(क) संयुक्त वाक्य
(ख) सरल वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) सरल वाक्य

प्रश्न 2.
‘बच्चा रोते-रोते सो गया’ – वाक्य है –
(क) संयुक्त
(ख) सरल
(ग) मिश्र
(घ) नकारात्मक
उत्तर :
(ख) सरल

प्रश्न 3.
जब माँ बाजार गई तब फल लाई – वाक्य है –
(क) सरल
(ख) मिश्र
(ग) संयुक्त
(घ) नकारात्मक
उत्तर :
(ख) मिश्र

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प्रश्न 4.
सीता घर जाती है – वाक्य में ‘सीता’ है –
(क) उद्देश्य वाक्य
(ख) विधेय वाक्य
(ग) सरल वाक्य
(घ) संयुक्त वाक्य
उत्तर :
(क) उद्देश्य वाक्य

प्रश्न 5.
‘मैने हड़बड़ाकर एक नजर धावकों पर डाली।’- इसका संयुक्त वाक्य क्या होगा
(क) मैं हड़बड़ाया और एक नजर धावकों पर डाला।
(ख) धावकों पर एक नजर डालते हुए मैं हड़बड़ा गया।
(ग) हड़बड़ाते हुए मैंने धावकों पर एक नजर डाली।
(घ) मैंने हड़बड़ाहट में एक नजर धावकों पर डाली।
उत्तर :
(क) मैं हड़बड़ाया और एक नजर धावकों पर डाला।

प्रश्न 6.
तेज बारिश होने के कारण वह स्कूल न जा सका। – यह कौन-सा वाक्य है?
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सरल वाक्य

प्रश्न 7.
‘सीता लिखकर ही उठेगी’ इस वाक्य में उद्देश्य है –
(क) लिखकर
(ख) उठेगी
(ग) ही
(घ) सीता
उत्तर :
(घ) सीता

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से इच्छावाचक वाक्य चुनकर लिखिए :
(क) आप जा सकते हैं।
(ख) आपकी यात्रा मंगलमय हो।
(ग) अरे! तुम आ गए।
(घ) क्या तुम पढ़ोगे ?
उत्तर :
(ख) आपकी यात्रा मंगलमय हो।

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प्रश्न 9.
रचना के आधार पर वाक्य के कितने भेद हैं ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) छ:
उत्तर :
(ख) तीन।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में कौन-सा निषेधात्मक वाक्य है –
(क) परीक्षा में चोरी मत करो
(ख) मेरी नजरों से दूर हो जाओ
(ग) कृपया मेरी बातों पर ध्यान दें
(घ) अभय आरहा होगा
उत्तर :
(क) परीक्षा में चोरी मत करो।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में कौन-सा मिश्र वाक्य है?
(क) माँ देखती है कि बच्चा रो रहा है
(ख) माँ के सामने बच्चा रो रहा है
(ग) माँ जगी रहती है और बच्चा सोता रहता है
(घ) क्या माँ के बिना बच्चा सोया नहीं रह सकता
उत्तर :
(क) माँ देखती है कि बच्चा रो रहा है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में कौन-सा सरल वाक्य है ?
(क) रात हुई और तारे निकले
(ख) श्याम धीरे-धीरे पुस्तक पढ़ता है
(ग) उसने कहा कि कहानी समाप्त हो गई है
(घ) जो महान है, उन्हें सम्मान करो
उत्तर :
(ख) श्याम धीरे-धीरे पुस्तक पढ़ता है।

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित में कौन-सा मिश्र वाक्य है ?
(क) परिश्रमी छात्र परीक्षा में सफल होता है
(ख) छात्र परिश्रम करता है और परीक्षा में सफल होता है
(ग) जो छात्र परिश्रम करता है, वह परीक्षा में अवश्य सफल होता है
(घ) क्या परिश्रमी छात्र परीक्षा में सफल नहीं होता
उत्तर :
(ग) जो छात्र परिश्रि करता है, वह परीक्षा में अवश्य सफल होता है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित वाक्यों में संयुक्त वाक्य कौन-सा है ?
(क) माँ सोई है और शिशु खेल रहा है
(ख) माँ के पास शिशु सोया है
(ग) माँ के सो जाने पर भी बच्चा खेल रहा है
(घ) माँ देख रही है कि उसके बच्चे आपस में झगड़ रहे है
उत्तर :
(क) माँ सोई है और शिशु खेल रहा है।

प्रश्न 15.
निम्नांकित में सरल वाक्य बताएँ –
(क) अखिलेश्वर गीत गाता आ रहा है
(ख) अखिलेश्वर गा रहा है और हँस रहा है
(ग) क्या अखिलेश्वर गाता हुआ आ रहा है
(घ) जो गाता हुआ आ रहा है, वह मेरा छोटा भाई है
उत्तर :
(क) अखिलेश्वर गीत गाता आ रहा है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में सरल वाक्य बताएँ –
(क) मैं बीमार था, अतः विद्यालय नहीं गया
(ख) वह खेलता भी है और पढ़ता भी है
(ग) धन्नू गरीब है, पर पढ़ने में तेज है
(घ) दयानिधान प्रतिभाशाली छात्र है
उत्तर :
(घ) दयानिधान प्रतिभाशाली छात्र है।

प्रश्न 17.
निम्नांकित में कौन-सा संकेत सूचक वाक्य है ?
(क) आप घर कब जाएँगे
(ख) कहीं पिताजी देख न लें
(ग) ईश्वर करे कि तुम शीघ्र अच्छे हो जाओ
(घ) यदि वर्षा हुई तो मैं नहीं जा सकूँगा
उत्तर :
(घ) यदि वर्षा हुई तो मैं नहीं जा सकूँगा।

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प्रश्न 18.
‘पुलिस को देखते ही चोर भाग गए।’ वाक्य है –
(क) विधि वाचक
(ख) इच्छा वाचक
(ग) संकेत वाचक
(घ) प्रश्न वाचक
उत्तर :
(क) विधि वाचक

प्रश्न 19.
‘एक शाम उसने देखा कि नौकरों के कमरे में कोई नहीं था।’ -यह किस प्रकार का वाक्य है?
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) इच्छावाचक वाक्य
उत्तर :
(ग) मिश्र वाक्य

प्रश्न 20.
‘मोर को नाचते सबने देखा है।’ वाक्य है –
(क) इच्छावाचक वाक्य
(ख) विधिवाचक वाक्य
(ग) विस्मयादि बोधक वाक्य
(घ) प्रश्नवाचक वाक्य
उत्तर :
(ख) विधिवाचक वाक्य

प्रश्न 21.
जिस वाक्य में दो या दो से अधिक सरल या मिश्र वाक्य अव्यय के द्वारा जुड़े हो, उसे कहते हैं –
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) उपवाक्य विहीन वाक्य
उत्तर :
(ग) संयुक्त वाक्य

प्रश्न 22.
“आपने परिश्रम तो बहुत किया किन्तु सफलता नहीं मिली।”- वाक्य भेद का उदाहरण है –
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) विप्रह
(घ) विच्छेद
उत्तर :
(ख) संयुक्त वाक्य।

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प्रश्न 23.
मैने वही मकान खरीदा है जो आपका है – यह वाक्य है
(क) सरल
(ख) मिश्र
(ग) संयुंक्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मिश्र।

प्रश्न 24.
‘अपने हाथों झटका करेंगे और पेट भर खा कर सो रहेंगे।’ – वाक्य है –
(क) सरल
(ख) मिश्र
(ग) संयुक्त
(घ) निषेधात्मक
उत्तर :
(ग) संयुक्त।

प्रश्न 25.
‘सर विलियम जोन्स संस्कृत के एक उत्कृष्ट विद्वान थे’- इस वाक्य में उद्देश्य है-
(क) उत्कृष्ट
(ख) विद्वान
(ग) सर विलियम जोन्स
(घ) संस्कृत
उत्तर :
(ग) सर विलियम जोन्स।

प्रश्न 26.
“इससे स्पष्ट हो गया कि धूमकेतु नजदीक से सूर्य की परिक्रमा करते है”) – यह किस प्रकार का वाक्य है ?
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) प्रश्नवाचक वाक्य
उत्तर :
(ख) मिश्र वाक्य

प्रश्न 27.
‘वायलिन का जुनून उस पर मंडरा रहा था’ -यह किस प्रकार का वाक्य है ?
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) निषेधात्मक वाक्य
उत्तर :
(क) सरल वाक्य

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प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से मिश्र-वाक्य चुनकर लिखिए।
(क) आपने कठिन परिश्रम किया और सफल हो गए।
(ख) आप इसलिए सफल हो गए, क्योंकि आपने कठिन परिश्रम किया।
(ग) कठिन परिश्रम से सफल हुए।
(घ) क्या आप कठिन परिश्रम करके सफल हुए ?
उत्तर :
(ख) आप इसलिए सफल हो गए, क्योंकि आपने कठिन परिश्रम किया।

प्रश्न 29.
निम्नलिखित में से इच्छावाचक वाक्य चुनकर लिखिए।
(क) आप जा सकते हैं।
(ख) आपकी यात्रा मंगलमय हो।
(ग) अरे ! तुम आ गए।
(घ) क्या तुम पढ़ोगे ?
उत्तर :
(ख) आपकी यात्रा मंगलमय हो

प्रश्न 30.
वह सब्जी मंडी से केले, संतरे और टमाटर लाया।
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) सरल वाक्य

प्रश्न 31.
‘रात हुई और चाँद निकला’ एक –
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) जटिल वाक्य
उत्तर :
(ग) संयुक्त वाक्य

प्रश्न 32.
‘वजीरा सिंह पानी पिला’ – यह किस प्रकार का वाक्य है –
(क) आदेशात्मक
(ख) नकारात्मक
(ग) प्रश्नवांचक
(घ) संकेतवाचक
उत्तर :
(क) आदेशात्मक

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प्रश्न 33.
“उसने मुझसे कहा कि यहाँ आकर बैठो ।” – यह कैसा वाक्य है ?
(क) सरल
(ख) मिश्र
(ग) संयुक्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) मिश्र

प्रश्न 34.
“वह पीकर आया है और बक-बक कर रहा है ।” – यह कैसा वाक्य है ?
(क) सरल
(ख) मिश्र
(ग) संयुक्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) संयुक्त

प्रश्न 35.
वह परिश्रमी है और ईमानदार भी है – वाक्य है –
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिभ्र वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) मिश्र वाक्य

प्रश्न 36.
निम्नलिखित में से मिश्र वाक्य चुनकर लिखिए –
(क) बाजार से जूता खरीदा
(ख) वह जूते खरीदने के लिए बाजार गया
(ग) जूते खरीदने के लिए बाजार गया
(घ) क्योंकि उसे जूते खरीदने थे, इसलिए वह बाजार गया
उत्तर :
(घ) क्योंकि उसे जूते खरीदने थे, इसलिए वह बाजार गया

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प्रश्न 37.
‘समय बहुत खराब है इसलिए जल्दी घर लौट आया करो।’ वाक्य है –
(क) सरल वाक्य
(ख) संयुक्त वाक्य
(ग) मिश्र वाक्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) मिश्र वाक्य

प्रश्न 38.
छात्र पढ़ते हैं और अध्यापक उन्हें देखते हैं – यह कैसा वाक्य है?
(क) सरल वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) संयुक्त वाक्य
(घ) प्रश्नवाचक वाक्य
उत्तर :
(ग) संयुक्त वाक्य।

पाठ्य पुस्तक पर आधारित व्याकरण

धूमकेतु :

1. धूमकेतु शब्द बहुत पुराना है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – ‘धूमकेतु’ एक शब्द है लेकिन यह बहुत पुराना है।

2. पुराने जमाने में धूमकेतु को भयंकर खतरे का सूचक माना जाता था। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – पुराने जमाने में भी धूमकेतु दिखाई देता था और उसे भयंकर खतरे का सूचक माना जाता था।

3. छठी सदी में हमारे देश में वराहमिहिर एक बड़े ज्योतिषी हुए। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वराहमिहिर एक बड़े ज्योतिषी थे लेकिन वे छठी सदी के थे।

4. लेकिन अब धूमकेतुओं से न कोई डरता है और न बीमार पड़ता है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – अब धूमकेतुओं से कोई डरता या बीमार नहीं पड़ता है।

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5. आइजेक न्यूटन के एक मित्र थे एडमंड हेली। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – आइजेक न्यूटन के एक मित्र थे जिनका नाम था एडमंड हेली।

6. यदि मेरी बात ठीक है, तो 76 साल बाद 1758 ई० में यह धूमकेतु पुन: प्रकट होगा। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मेरी भविष्यवाणी के अनुसार 76 साल बा 1758 ई० में यह धूमकेतु पुनः प्रकट होगा।

7. हेली की भविष्यवाणी सही निकली। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – हेली ने एक भविष्यवाणी की थी जो सही निकली।

8. धूमकेतु ग्रहों की तरह, सौर मंडल के सदस्य हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – धूमकेतु गहहों की तरह सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
मिश्र वाक्य – धूमकेतु सौर-मंडल के सदस्य हैं क्योंकि वे सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

9. नाभिक का व्यास आधे किलोमीटर से 50 किलोमीटर तक हो सकता है। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – नाभिक का व्यास विशाल होता है क्योंकि यह 50 किलोमीटर तक हो सकता है।
संयुक्त वाक्य – नाभिक का व्यास बहुत बड़ा होता है, यह व्यास आधे से 50 किलोमीटर तक हो सकता है।

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10. धूमकेतु जब सूर्य के समीप पहुँचता है तो सूर्य के ताप से यह गर्म हो जाता है। (सरल एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सूर्य के निकट होने पर धूमकेतु गर्म हो जाता है।
संयुक्त वाक्य – धूमकेतु सूर्य के निकट आता है और सूर्य के ताप से यह गर्म हो जाता है।

11. सभी धूमकेतु अत्यधिक अंडाकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – सभी धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करते हैं लेकिन अंडाकार कक्ष में।

12. कुछ धूमकेतु इस नियम के अपवाद हैं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – कुछ धूमकेतु हैं जो इस नियम के अपवाद हैं।

13. इससे स्पष्ट हो गया कि धूमकेतु नजदीक से सूर्य की परिक्रमा करते हैं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – स्पष्ट रूप से धूमकेतु नजदीक से सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

14. जो धूमकेतु नजदीक से सूर्य की परिक्रमा करते हैं, वे अंत में नष्ट हो जाते हैं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – नजदीक से सूर्य की परिक्रमा करने वाले धूमकेतु अंत में नष्ट हो जाते हैं।

15. सभी धूमकेतु नजदीक से सूर्य की परिक्रमा नहीं करते। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्ष – सभी धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा करते हैं लेकिन नजदीक से नहीं करते।

16. कुछ धूमकेतु हजारों साल बाद लौटते हैं। (मिश्र तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – कुछ धूमकेतु लौटते हैं लेकिन हजारों साल बाद।
संयुक्त वाक्य – कुछ धूमकेतु काफी वर्षों बाद लौटते हैं, उन्हें परिक्रमा करने में हजारों साल लग जाते हैं।

17. इन धूमकेतुओं से डरने की कोई बात नहीं है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – इन धूमकेतुओं में ऐसी कोई ऐसी बात नहीं है कि इनसे डरा जाए।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

18. ये सारे धूमकेतु हमारे सौर-मंडल के ही सदस्य हैं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – ये सारे धूमकेतु सौर-मंडल के ही सदस्य हैं लेकिन हमारे सौर-मंडल के।

19. धीरे-धीरे ये दो टुकड़े एक-दूसरे से दूर चले गए। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – दो टुकड़े थे और धीरे-धीरे ये दो टुकड़े एक-दूसरे से दूर चले गए।

20. ये सूर्य की परिक्रमा करते हैं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – ये परिक्रमा करते हैं लेकिन सूर्य की।

नौबतखाने में इबादत –

1. अमीरूद्दीन को पता नहीं है कि राग किस चिड़िया को कहते हैं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – अमीरूद्दीन को राग के बारे में पता नहीं है।

2. हर दिन की शुरुआत वहीं ड्योढ़ी पर होती है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – हर दिन की शुरुआत होती है लेकिन ड्योढ़ी पर से।

3. डुमराँव का इतिहास में कोई स्थान बनता हो, ऐसा नहीं लगा कभी भी। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – डुमराँव का इतिहास में कोई स्थान नहीं है।

4. पर यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

5. रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूंका जाता है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – पोली रीड के सहारे शहनाई को फूंका जाता है।

6. रसूलन और बतूलन जब गाती है तब अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – रसूलन और बतूलन के गाने से अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है।
संयुक्त वाक्य – रसूलन और बतूलन गाती है और उनके गाने से अमीरूद्दीन को खुशी मिलती है।

7. वे नमाज के बाद सज़दे में गिड़गिड़ाते हैं। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वे सज़दे में गिड़गिड़ाते हैं लेकिन नमाज के बाद।
संयुक्त वाक्य – वे पहले नमाज पढ़ते हैं और फिर वे सज़दे में गिड़गिड़ाते हैं।

8. इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – उनकी हँसी बालसुलभ है और इस हँसी में कई यादें बंद हैं।

9. वह छुपकर नाना को शहनाई बजाते हुए सुनता था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वह नाना को शहनाई बजाते हुए सुनता था लेकिन छुपकर सुनता था।

10. काशी में संगीत-आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – काशी में संगीत-आयोजन की एक परंपरा है जो प्राचीन एवं अद्भुत है।
संयुक्त वाक्य – काशी में संगीत-आयोजन की एक परंपरा है और यह परंपरा प्राचीन एवं अद्भुत है।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

11. यह मंदिर शहर के दक्षिण में लंका पर स्थित है। (मिश्र तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – यह मंदिर स्थित है लेकिन शहर के दक्षिण में लंका पर स्थित है। संयुक्त वाक्य – एक मंदिर है और यह मंदिर शहर के दक्षिण में लंका पर स्थित है।

12. काशी संस्कृति की पाठशाला है। (मिश्र तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – काशी पाठशाला है लेकिन संस्कृति की पाठशाला है।
संयुक्त वाक्य – काशी पाठशाला है और यहाँ संस्कृति का पाठ पढ़ाया जाता है।

13. खाँ साहब को ताल मालूम है, राग मालूम है। (मिश्र और सरल वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – खाँ साहब को ताल मालूम है और राग भी मालूम है।
सरल वाक्य – खाँ साहब को ताल और राग मालूम है।

14. लुंगिया का क्या है, आज फटी है तो कल सी जाएगी। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – फटी लुंगिया कल सी ली जाएगी।

15. किसी दिन एक शिष्या ने डरते-डरते खाँ साहब को टोका। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – किसी दिन एक शिष्या ने खाँ साहब को टोका लेकिन डरते-डरते टोका।
संयुक्त वाक्य – किसी दिन एक शिष्या ने खाँ साहब को टोका, टोकते समय वह डर रही थी।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

16. अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जाएगा। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – अभी आगे बहुत कुछ है जो इतिहास बन जाएगा।

17. फिर भी कुछ बचा है जो काशी में है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – काशी में अभी भी कुछ बचा है।

18. उस फकीर की दुआ लगी जिसने अमीरूद्दीन से कहा था – “बजा, बजा।” (सरल एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – “बजा, बजा” कहने वाले फकीर की दुआ लग गई।
संयुक्त वाक्य – उस फकीर की दुआ लग गई, उसने कहा था – “बजा, बजा।”

19. अजादारी होती है। हजारों आँखें नम। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – अजादारी में हजारें आँखें नम रहती हैं।

20. फिर अमीरूद्दीन जो हम सबके प्रिय हैं, अपने उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ साहब हैं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – अमीरूद्दीन अर्थात् बिस्मिल्ला खाँ हम सबके प्रिय हैं।

उसने कहा था – 

1. यह बात नहीं कि उनकी जीभ चलती ही नहीं, चलती हैं पर मीठी छुरी की तरह वार करती हैं। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – उनकी जीभ मीठी छुरी की तरह वार करती हैं।
संयुक्त वाक्य – उनकी जीभ चलती है और जीभ मीठी छुरी की तरह वार करती हैं।

2. उसके बालों और उसके ढीले सुथने से जान पड़ता था कि दोनों सिख हैं। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उसके बाल और ढीलें सुथने से जान पड़ता था कि दोनों सिख हैं।
संयुक्त वाक्य – उसके बाल बड़े और सुथने ढीले थे, वे दोनों सिख जान पड़ते थे।

3. दुकानदार एक परदेशी से गुँथ रहा था, जो सेर भर गीले पापड़ों की गड्डी को गिने बिना हटता न था। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – दुकानदार सेर भर गीले पापड़ों की गड्डी गिनने वाले परदेशी से गुँथ रहा था।
संयुक्त वाक्य – दुकानदार एक परदेशी से गुँथ रहा था, वह सेर भर गीले पापड़ों की गड्डी को गिने बिना हट नहीं रहा था।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

4. मैं भी मामा के यहाँ आया हूँ, उनका घर गुरूबाजार में है। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मैं भी गुरुबाजार में मामा के यहाँ आया हूँ।
मिश्र वाक्य – मैं भी मामा के यहाँ आया हूँ, जिनका घर गुरूबाजार में है।

5. इतने में दुकानदार निबटा और इनका सौदा देने लगा। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – इतने में दुकानदार निबटकर इनका सौदा देने लगा।
मिश्र वाक्य – दुकानदार निबटा ताकि इनको सौदा दे सके।

6. लड़की भाग गई। लड़के ने घर की राह ली। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – लड़की के भागने पर लड़के ने घर की राह ली।
मिश्र वाक्य – लड़की भाग गई पर लड़के ने घर की राह ली।

7. कहती है, तुम राजा हो, मेरे मुल्क को बचाने आए हो। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम राजा बनकर मेरे मुल्क हो बचाने आए हो।
मिश्र वाक्य – तुम राजा हो तभी तो मेरे मुल्क को बचाने आए हो।

8. चार दिन तक पलक नहीं झँपी। (मिश्र तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – चार दिन हो गए पर पलक नहीं झँपी।
संयुक्त वाक्य – चार दिन हो गए और पलक नहीं झँपी।

9. बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – बिना फेरे-लड़े घोड़ा और सिपाही बिगड़ते हैं।

10. न मालूम बेईमान मिट्टी में लिपटे हुए हैं या घास की पत्तियों में छिपे रहते हैं। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – बेईमान मिट्टी और घास की पत्तियों में छिप रहते हैं।
संयुक्त वाक्य – ये बेईमान मिट्टी में लिपटे रहते हैं, घास की पत्तियों में छिपे रहते हैं।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

11. लाख कहते हैं, दाम नहीं लेती। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – लाख कहने पर भी दाम नहीं लेती।
मिश्र वाक्य – लाख कहते हैं पर दाम नहीं लेती।

12. परसों ‘रिलीफ’ आ जाएगी फिर सात दिन की छुट्टी। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – परसों ‘रिलीफ’ आ जाने पर सात दिन की छुट्टी हो जाएगी।
मिश्र वाक्य – सात दिनों की छुट्टी हो जाएगी अगर परसों ‘रिलीफ’ आ जाए।

13. संगीन देखते ही मुँह फाड़ देते हैं और पैर पकड़ने लगते हैं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – संगीन देखते ही मुँह फाड़कर पैर पकड़ने लगते हैं।

14. किसी वैष्णवी से टकराकर अंधे की उपाधि पाई, तब कहीं घर पहुँचा। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – किसी वैष्णवी से टकराकर अंधे की उपाधि पाकर घर पहुँचा।
संयुक्त वाक्य – किसी वैष्णवी से टकराया और उससे अंधे की उपाधि पाकर घर पहुँचा।

15. इस गैबी गोले से बचे तो कोई लड़े। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – इस गैबी गोले से बचकर ही कोई लड़ सकता है।

16. इसपर सब खिलखिला पड़े और उदासी के बादल फट गए। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सबके खिलखिलाने से उदासी के बादल फट गए।
मिश्र वाक्य – उदासी के बादल फट गए क्योंकि सब खिलखिला पड़े।

17. आज तक मैं उसे समझा न सका कि सिख तंबाकू नहीं पीते। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सिख के सिगरेट न पीने की बात मैं आज तक उसे समझा नहीं पाया।
संयुक्त वाक्य – सिख तंबाकू नहीं पीते, यह बात मैं आज तक उसे समझा न सका।

18. सारी खंदक गीत से गूँज उठी और सिपाही फिर ताजे हो गए। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सारी खंदक के गीत से गूँज उठने पर सिपाही फिर ताजे हो गए।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

19. अंधेरा है। सत्नाटा छाया हुआ है। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – अंधेरा होने के कारण सन्नाटा छाया हुआ है।
मिश्र वाक्य – सत्राटा छाया हुआ है क्योंकि अंधेरा है।

20. मेरे पास सिगड़ी है, मुझे गरमी लगती है, पसीना आ रहा है। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सिगड़ी की गरमी से मुझे पसीना आ रहा है।
मिश्र वाक्य – मुझे गरमी से पसीना आ रहा है क्योंकि मेरे पास सिगड़ी है।

21. देखो, इसी दम धावा करना होगा। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – धावा करना होगा लेकिन इसी दम।

22. मील भर की दूरी पर पूरब के कोने में एक जर्मन खाई है। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक जर्मन खाई है जो मील भर की दूरी पर पूरब के कोने में है।
संयुक्त वाक्य – एक जर्मन खाई है और वह मील भर की दूरी पर पूरब के कोने में है।

23. जहाँ मोड़ है, वहाँ पन्द्रह जवान खड़े कर आया हूँ। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मोड़ पर पंद्रह जवान खड़े कर आया हूँ।
संयुक्त वाक्य – आगे मोड़ है और वहाँ पर पंद्रह जवान खड़े कर आया हूँ।

24. खंदक छीनकर वहीं, जब तक दूसरा हुक्म न मिले, डटे रहो। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – खंदक छीनकर दूसरा हुक्म मिलने तक वहीं डटे रहो।

25. लहना सिंह समझकर चुप हो गया। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – लहना सिंह चुप रहा क्योंकि वह समझ गया था।
संयुक्त वाक्य – लहना सिंह समझ गया, वह चुप रहा।

26. कयामत आई है और लपटन साहब की वर्दी पहनकर आई है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – कयामत लपटन साहब की वर्दी पहनकर आई है।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

27. उनकी वर्दी पहनकर यह कोई जर्मन आया है। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – यह कोई जर्मन है जो उनकी वर्दी पहनकर आया है।
संयुक्त वाक्य – यह कोई जर्मन है और यह उनकी वर्दी पहन कर आया है।

28.
सूबेदार से कहो कि एकदम लौट आवें। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सूबेदार से एकदम लौट आने को कहो।

29. खंदक के पीछे से निकल जाओ, पत्ता तक न खड़के। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – बिना पत्ता खड़काए खंदक के पीछे से निकल जाओ।
मिश्र वाक्य – खंदक के पीछे से निकल जाओ कि पत्ता तक न खड़के।

30. एक-एक अकालिया सिख सवा लाख के बराबर होता है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – जो अकालिया सिख होता है, वह सिख सवा लाख के बराबर होता है।

31. लहना ने पतलून की जेबों की तलाशी नहीं ली थी। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – लहना ने तलाशी ली थी लेकिन पतलून के जेबों की नहीं।

32. तीन महीने हुए, एक तुर्की मौलवी मेरे गाँव में आया था। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तीन महीने पहले मेरे गाँव में एक तुर्की मौलवी आया था। मिश्र वाक्य – तीन महीने हुए जब एक तुर्की मौलवी मेरे गाँव में आया था।

33. औरतों के बच्चे होने की ताबीज बांटता था और बच्चों को दवाई देता था। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – औरतों के बच्चे होने की ताबीज और बच्चों को दवाई देता था।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

34. हिन्दुस्तान में आ जाएंगे, तो गो-हत्या बन्द कर देंगे। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – हिन्दुस्तान आने पर गो-हत्या बंद कर देंगे।
संयुक्त वाक्य – वे हिन्दुस्तान आएंगे और गो-हत्या बंद कर देंगे।

35. डाकखाने से रुपये निकाल लो, सरकार का राज जाने वाला है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – डाकखाने से रुपये निकाल लो क्योंकि सरकार का राज जाने वाला है।

36. साहब की जेब में से पिस्तौल चली और लहना की जाँघ में गोली लगी। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – साहब की जेब में से पिस्तौल चलने से लहना की जाँष में गोली लगी।

37. एक हड़का हुआ कुत्ता आया था, मार दिया। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – हड़का हुआ एक कुत्ता को मार दिया।

38. इतने में सत्तर जर्मन चिल्लाकर खाई में घुस पड़े। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य : इतने में जर्मन चिल्लाकर खाई में घुस पड़े जिनकी संख्या सत्तर थी।
संयुक्त वाक्य : जर्मन चिल्लाकर खाई में घुस पड़े, उनकी संख्या सत्तर थी।

39. तू न होता तो आज सब मारे जाते। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तेरे न होने से आज सब मारे जाते।

40. मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति बहुत साफ हो जाती है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – जब मृत्यु आती है तो स्मृति बहुत साफ हो जाती है।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

41. वहाँ रेजीमेंट अफसर की चिट्ठी मिली की फौज लाम पर जाती है। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – फौज के लाम पर जाने के बारे में रेजीमेंट अफसर की चिट्ठी मिली।
संयुक्त वाक्य – वहाँ रेजीमेंट अफसर की चिट्ठी मिली, फौज लाम पर जा रही है।

42. सूबेदार का गाँव रास्ते में पड़ता था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – सूबेदार का गाँव था जो रास्ते में पड़ता था।

43. जब चलने लगा, तब सूबेदार बेड़े में से निकलकर आया। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – चलने के समय सूबेदार बेड़े में से निकलकर आया।
संयुक्त वाक्य – वह चलने लगा और सूबेदार बेड़े में से निकलकर आया।

44. सरकार ने बहादुर का खिताब दिया है, लायलपुर में जमीन दी है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सरकार ने बहादुर के खिताब के साथ लायलपुर में जमीन दी है।

45. ऐसे ही इन दोनों को बचाना, यही मेरी भिक्षा है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – इन दोनों को बचाना ही मेरी भिक्षा है।

46. रोती-रोती सूबेदारनी ओवरी में चली गई। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – सूबेदारनी ओवरी में चली गई लेकिन रोती-रोती।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

47. जब माँगता है, तब पानी पिला देता है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – माँगने पर पानी पिला देता है।

48. जितना बड़ा तेरा भतीजा है, उतना ही यह आम है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम्हारे भतीजा जितना बड़ा ही यह आम है।

49. लहना का सिर अपनी गोदी पर रखे वजीरा सिंह बैठा है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वजीरा सिंह बैठा है लेकिन लहना का सिर अपनी गोदी में रखकर।

50. फौज में भरती हुए उसे एक ही वर्ष हुआ। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक ही वर्ष हुआ जब वह फौज में भरती हुआ।

नन्हा संगीतकार :

1. जब वह इस दुनिया में आया तो बेहद कमजोर और दुर्बल था। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – दुनिया में आने के समय वह बेहद कमजोर और दुर्बल था।

2. उनमें लुहार की पत्नी सबसे तजुर्बेकार थी। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वह सबसे तजुर्बेकार थी जो लुहार की पत्नी थी।

3. बेहतर होगा अगर कोई जल्दी से जाए। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – किसी का जल्दी से जाना बेहतर होगा।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

4. ईसाई आत्मा का इस दुनिया से विदा लेने का कोई इरादा नहीं था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – ईसाई आत्मा थी जिसका इस दुनिया से विदा लेने का कोई इरादा न था।

5. वह जोर-जोर से लातें चलाने लगा और रोना शुरू कर दिया। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – रोने के साथ ही उसने जोर-जोर से लातें चलाना शुरू कर दिया।

6. शिशु की साँसें नाजुक डोर से लटकी हुई थीं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – शिशु की साँसें थीं जो नाजुक डोर से लटकी हुई थीं।

7. दिन बीतते गए और वह दस बरस का हो गया। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – दिन बीतने के साथ वह दस बरस का हो गया।

8. उत्सुक निगाहें पक्षी की भांति यहाँ-वहाँ भटकती रहतीं। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उसकी निगाहें पक्षी की भांति उत्सुक थीं जो यहाँ-वहाँ भटकती रहती थीं।
संयुक्त वाक्य – उसकी निगाहें पक्षी की तरह थी और वह इधर-उधर भटकती रहती थीं।

9. बेचारी माँ क्या करती, मुशिकल से दो जून की रोटी जुटा पाती थी। (सरल तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – बेचारी माँ मुश्किल से दो जून की रोटी जुटा पाती थी।
संयुक्त वाक्य – माँ बेचारी क्या कर सकती थी, वह मुश्किल से दो जून की रोटी जुटा पाती थी।

10. हालाँकि जेन से उसे बेइन्तहा प्यार था पर उसकी पिटाई भी खूब करती। (सरल तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – जेन से बेइन्तहा प्यार होने के बावजूद वह उसे खूब पीटती थी।
संयुक्त वाक्य – जेन से उसे बेइन्तहा प्यार था और वह उसकी पिटाई भी खूब करती थी।

11. उसमें एक अनोखी खूबी थी। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उसमें एक खूबी थी जो अनोखी थी।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

12. जैसे-वैसे वह बड़ा होता गया, लय और सुर में उसकी दिलचस्पी बढ़ती गई। (सरल तथा संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – बड़े होने के साथ-साथ लय और सुर में उसकी दिलचस्पी बढ़ती गई।
संयुक्त वाक्य – जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया उसकी दिलचस्पी लय तथा सुर में भी बढ़ती गई।

13. पूरा जंगल गाता है, उसकी प्रतिध्वनि से जंगल गूँज उठता है। (सरल तथा मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – जंगल के गाने की प्रतिध्वनि से जंगल गूंज उठता है।
मिश्र वाक्य – पूरा जंगल गाता है तो उसकी प्रतिध्वनि से जंगल गूँज उठता है।

14. शाम ढलते ही उसे हर तरह की आवाजें सुनाई देती। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – शाम ढलती तो उसे हर तरह की आवाजें सुनाई देती।
संयुक्त वाक्य – शाम ढलती थी और उसे हर तरह की आवाजें सुनाई देने लगती थीं।

15. वह चरम आनंद की अनुभूति से भर उठता। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वह उस अनुभूति से भर उठता जो अनुभूति चरम आनंद की थी।

16. जेन्को तल्लीन होकर यह सब सुनता। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – जेन्को यह सब सुनता था लेकिन पूरी तल्लीनता से।

17. आँखें हर वक्त चौकन्नी और आँसुओं से भरी रहतीं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – आँखें हर वक्त चौकन्नी रहती लेकिन आँसुओं से भरी हुई।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

18. उसका वही हाल था, जो उस बेचारी गरीब सारंगी का था। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – उसका हाल भी बेचारी गरीब सारंगी जैसा ही था।

19. बालक हसरत भरी निगाहों से उसे निहारता। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – बालक उसे निहारता रहता लेकिन हसरत भरी निगाहों से।

20. एक शाम उसने देखा कि नौकरों के कमरे में कोई न था। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – एक शाम नौकरों के कमरे में कोई न था।

21. चंद्रमा अपने पूरे शबाब के साथ आसमान में दमक रहा था। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – चंद्रमा आसमान में दमक रहा था तथा वह अपने पूरे शबाब में था।

22. जेन्को ललचाई नजरों से उसे ताकने लगा। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – जेन्को उसे ताकने लगा लेकिन ललचाई नजरों से।

23. वायलिन का जुनून उस पर मंडरा रहा था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक जुनून उस पर मंडरा रहा था जो वायलिन का था।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

24. रात उजली और निर्मल थी। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – रात उजली थी, रात निर्मल थी।

25. केवल एक नन्हा पैर सीढ़ियों पर दिख रहा था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – केवल एक नन्हा पैर था जो सीढ़ियों पर दिख रहा था।

26. दीवार से माचिस की तीली रगड़ने की आवाज सुनाई दी। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक आवाज सुनाई दी जो दीवार से माचिस की तीली रगड़ने की थी।

27. तीसरे रोज उसने आखिरी साँस ली। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – तीसरे रोज उसने साँस ली जो उसकी आखिरी साँस थी।
संयुक्त वाक्य – तीसरे दिन उसने साँस ली और यह उसकी आखिरी साँस थी।

28. खेतिहर बालाएँ काम से लौट रही थीं और गाते हुए जा रही थीं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – खेतिहर बालाएँ गाते हुए काम से लौट रही थीं।

29. जेन्को की कब्र पर कितने ही कीड़े-मकोड़े भिनभिना रहे थे। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – कितने ही कीड़े-मकोड़े थे जो जेन्को की कब पर भिनभिना रहे थे।

चप्पल :

1. आठ साल का उसका बच्चा रमण सामने दिखाई दिया। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उसका बच्चा रमण सामने दिखाई दिया जो आठ साल का था।
संयुक्त वाक्य – उसका बच्चा रमण सामने दिखाई दिया, उसकी उम्र आठ साल की थी।

2. रमण के कंधों पर किताबों का बस्ता लटक रहा था। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – रमण के कंधों पर बस्ता लटक रहा था जो किताबों का था।
संयुक्त वाक्य – रमण के कंधों पर बस्ता लटक रहा था, वह बस्ता किताबों का था।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

3. वे चण्पल इतने खराब हैं कि ठीक करना बहुत मुश्किल है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – उन खराब चफलों को ठीक करना बहुत मुश्किल है।

4. एक काली मोटर घूल उड़ाते हुए आगे को निकल गई। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक काली मोटर थी जो धूल उड़ाते हुए आगे को निकल गई थी।
संयुक्त वाक्य – एक काली मोटर थी, वह मोटर धूल उड़ाते हुए आगे निकल गई।

5. फिर होश में आया तो उसको हँसी आ गई। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – होश में आने से उसे हँसी आई।

6. बाजू में चाय की एक छोटी-सी दुकान थी। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – बाजू में चाय की एक दुकान थी जो छोटी-सी थी।
संयुक्त वाक्य – बाजू में चाय की एक दुकान थी और वह दुकान छोटी-सी थी।

7. पाँच मिनट तक बड़े आराम से बैठकर वह रूक-रूककर चाय पीता रहा। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – पाँच मिनट तक बड़े आराम से बैठा ताकि रूक-रूककर चाय पी सके।
संयुक्त वाक्य – वह पाँच मिनट तक बैठा रहा और रूक-रूककर चाय पीता रहा।

8. दुकान का लड़का आकर गिलास उठाकर ले गया। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक लड़का गिलास उठाकर ले गया जो दुकान का था।
संयुक्त वाक्य – दुकान का लड़का था और वह गिलास उठाकर ले गया।

9. स्कूल एक छोटे-से खपरैली मकान में है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – स्कूल एक छोटे-से मकान में है, जो खपरैली है।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

10. मास्टर साहब एक स्टूल पर बैठे-बैठे बच्चों से कुछ कंठस्थ करवा रहे थे। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – मास्टर साहब एक स्टूल पर बैठे थे और वे बच्चों से कुछ कंठस्थ करवा रहे थे।

11. मास्टर साहब ने वह किताब दिखा दी, जो उनके हाथ में थी। (सरल एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मास्टर साहब ने हाथ वाली पुस्तक दिखा दी।
संयुक्त वाक्य – मास्टर साहब के हाथ में एक किताब थी और उन्होंने वह किताब दिखला दी।

12. मैं शाम को नहीं रहूँगा। कल सुबह भेज देना। (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – शाम की बजाय कल सुबह भेज देना।
मिश्र वाक्य – मैं शाम को नहीं रहूँगा इसलिए कल सुबह भेज देना।

13. रमण तुम्हारा बच्चा नहीं, मैं उसे अपना बच्चा समझता हूँ। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – रमण को मैं तुम्हारा नहीं अपना बच्चा समझता हूँ।

14. रंगय्या इतना खुश था कि उसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – खुशी के मारे रंगय्या के पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

15. तरह-तरह के विचार उसके मन में उठने लगे। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – तरह-तरह के विचार थे जो उसके मन में उठने लगे।

16. नाले के किनारे एक मोड़ पर ही है रंगय्या की झोपड़ी है। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – नाले के किनारे एक मोड़ है वहीं रंगय्या की झोपड़ी है।
संयुक्त वाक्य – नाले के किनारे एक मोड़ है और उसी मोड़ पर रंगय्या की झोपड़ी है।

17. धूप में चलने की वजह से उसका सिर चकरा-सा गया था। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – धूप में चला था इसलिए उसका सिर चकरा-सा गया था।
संयुक्त वाक्य – धूप में चलकर आया था और उसका सिर चकरा-सा गया था।

18.
सामने नाला बह रहा था और उसके पानी की बदबू से रंगय्या की नाक फट रही थी। (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सामने नाले के पानी के बदबू से रंगय्या की नाक फट रही थी।
मिश्र वाक्य – सामने नाले में बदबूदार पानी बह रहा था जिससे रंगय्या की नाक फट रही थी।

19.
चारेक रिक्शावाले उसके चारों ओर बैठकर खाना खा रहे थे। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – चारेक रिक्शावाले थे जो उसके चारों ओर बैठकर खाना खा रहे थे।
संयुक्त वाक्य – चार रिक्शावाले थे और वे उसके चारों ओर बैठकर खाना खा रहे थे।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

20. रंगय्या अन्न को नमस्कार करके खाने लगा। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – रंगय्या ने अन्न को नमस्कार किया फिर खाने लगा।
संयुक्त वाक्य – रंगय्या ने पहले अन्न को नमस्कार किया और वह खाना खाने लगा।

21. वहाँ हाथ धोकर पासवाले पीपल के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वहाँ हाथ धोया, फिर पास वाले पीपल के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया।
संयुक्त वाक्य – पहले उसने हाथ धोया और फिर वह पास वाले पीपल के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया।

22. थिएटर की तरफ का आसमान धुएँ से भरा हुआ था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – थिएटर की तरफ जो आसमान था, वह धुएँ से भरा हुआ था।

23. आग कैसे लगी, इसका किसी को पता नहीं लगा। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – आग लगने के कारण का किसी को पता नहीं लगा।

24. सब-की-सब झोपड़ियाँ आग में जल रही थीं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – झोपड़ियाँ थीं जो सब-की-सब आग में जल रही थीं।

25. रंगय्या हाँफते हुए आया। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – रंगय्या आया लेकिन हाँफते हुए।
संयुक्त वाक्य – रंगय्या आया, वह हाँफ रहा था।

नमक :

1. उन सिख बीबी को देखकर सफ़िया हैरान रह गई थी। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उन सिख बीबी को सफ़िया ने ज्योंही देखा, वह हैरान रह गई।
संयुक्त वाक्य – सफ़िया ने सिख बीबी को देखा और वह उसे देखकर हैरान रह गई।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

2. सफ़िया ने कई बार उनकी तरफ मुहब्बत से देखा। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – सफ़िया ने कई बार उनकी तरफ देखा लेकिन मुहब्बत से।

3. वे आहिस्ता-आहिस्ता बातें करती रहीं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – वे बाते करती रहीं लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता।

4. फिर पलकों से कुछ सितारे दूटकर दूधिया आँचल में समा जाते हैं। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – पलकों से कुछ सितारे टूटे लेकिन दूधिया आँचल में समा गए।
संयुक्त वाक्य – पलकों से कुछ सितारे टूटे और वे सितारे दूधिया आँचल में समा आए।

5. कीर्तन कोई ग्यारह बजे खत्म हुआ। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – कीर्तन खत्म हुआ लेकिन ग्यारह बजे।

6. सफ़िया का भाई एक बहुत बड़ा पुलिस अफसर था। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – सफ़िया का एक भाई था जो बहुत बड़ा पुलिस अफसर था।
संयुक्त वाक्य – सफिया का एक भाई था, वह बहुत बड़ा पुलिस अफसर था।

7. नमक तो नहीं ले जा सकते गैरकानूनी है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
संरल वाक्य – नमक ले जाना गैरकानूनी है।

8. सुबह के लिए व्यस्त कार्यक्रम बन चुका था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – सुबह का कार्यक्रम बन चुका था जो काफी व्यस्त था।

9. कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके वह सामान बाँधने लगी। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तरः
संयुक्त वाक्य – उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और वह सामान बाँधने लगी।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

10. तो मजबूरी है, छोड़ देंगे। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मजबूरी में छोड़ देंगे।

11. लेकिन सिर उस वायदे का क्या होगा जो हमने अपनी माँ से किया था? (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – माँ से किए गए वायदे का क्या होगा?

12. रात के तकरीबन डेढ़ बजे थे। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – रात का वक्त था, तकरीबन डेढ़ बजे थे।

13. मार्च की सुहानी हवा खिड़की की जाली से आ रही थी। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – मार्च की सुहानी हवा थी जो खिड़की की जाली से आ रही थी।

14. बेशुमार चाहनेवाले दोस्त थे। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – दोस्त थे जो बेशुमार चाहते थे।

15. उसने फैसला किया कि मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – उसने फैसला किया, मुहब्बत का यह तोहफा चोरी से नहीं जाएगा।

16. सफ़िया कुछ हिचकिचाकर बोली, “मैं आपसे कुछ पूछना चाहती हूँ।” (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सफिया हिचकिचाकर कुछ पूछना चाहती थी।
मिश्र वाक्य – सफ़िया कुछ हिचकिचाकर बोली कि मैं आपसे कुछ पूछना चाहती हूँ।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

17. मुहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून हैरान रह जाता है। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – कस्टम से मुहब्बत के गुजर जाने से कानून हैरान रह जाता है।
संयुक्त वाक्य – मुहब्बत कस्टम से गुजर जाता है और कानून हैरान रह जाता है।

18. अटारी में पाकिस्तानी पुलिस उतरी, हिन्दुस्तानी पुलिस सवार हुई। (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – अटारी में पाकिस्तानी पुलिस के उतरते ही हिन्दुस्तानी पुलिस सवार हुई।
मिश्र वाक्य – अटारी में पाकिस्तानी पुलिस उतरी और हिन्दुस्तानी पुलिस सवार हुई।

19. नौकरी भी मिल गई,पर हम वतन आते-जाते थे। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – नौकरी मिलने के बाद भी हम वतन आते-जाते थे।

20. बस मुश्किल सिर्फ इतनी थी कि भरी हुई बंदूकें दोनों के हाथों में थी। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – दोनों के हाथों में भरी हुई बंदूके ही मुश्किल थी।

धावक :

1. कमी थी तो एक भंबल दा की। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – केवल भंबल दा की कमी थी।

2. कभी-कभी तो हमें भी उनकी वास्तविक स्थिति का भ्रम हो जाता। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – कभी-कभी हमें ध्रम हो जाता कि उनकी वास्तविक स्थिति क्या है?

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

3. भंबल दा गिर पड़े थे। घुटने और केहुनी छिल गई थी। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – गिरने से भंबल दा के घुटने और केहुनी छिल गई थी।
मिश्र वाक्य – भंबल दा के घुटने और केहुनी छिल गई थी क्योंक वे गिर पड़े थे।

4. “भला किसान-मजदूर को कसरत की क्या जरूरत …? (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उन्हें कसरत की क्या जरूरत है जो किसान-मजदूर हैं।

5. पिछली बार बाधा-दौड़ में महज चार प्रतियोगी थे। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – पिछली बार जो बाधा दौड़ हुई थी उसमें केवल चार प्रतियोगी ही थे।
संयुक्त वाक्य – पिछली बार बाधा दौड़ हुई थी और उसमें महज चार प्रतियोगी थे।

6. भंबल दा को मैने काफी करीब से देखा है। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – भंबल दा को मैंने देखा है, वो भी काफी करीब से।

7. शादी क्या हुई, पूरी तौर पर गृहत्याग कर बँगले को अपना लिया अशोक दा ने। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – शादी के बाद गृहत्याग कर अशोक दा ने बँगले को अपना लिया।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

8. मगर भंबल दा को शान की नहीं, सम्मान की जिंदगी चाहिए थी। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – भंबल दा को शान की जिंदगी नहीं चाहिए थी, उन्हें सम्मान की जिंदगी चाहिए थी।

9. जवान बहन उन्हीं पर आश्रिता थी। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – एक जवान बहन थी जो उन्हीं पर आश्रित थी।

10. अशोक दा की शादी से पूरी तरह टूट गई थी माँ। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – अशोक दा की शादी हुई और माँ इस शादी से पूरी तरह टूट गई।

11. माँ को मैं निरंतर दूटते हुए देख रहा था। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – मैं देख रहा था कि माँ निरंतर टूट रही थी।

12. एक ही चिंता थी कि अभी भी माँ को बचाया जा सकता है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – माँ को बचाने की ही एक चिंता थी।

13. मास्टरनी के सामने पड़ने से अब तो मेरी रूह काँपती है। (मिश्र और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य : मास्टरनी के सामने पड़ता हूँ कि मेरी रूह काँपने लगती है।
संयुक्त वाक्य : मास्टरनी सामने पड़ती है और मेरी रूह काँपने लगती है।

14. उनकी जवानी आई ही नहीं और वे बुढ़ा भी गये। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – जवानी आए बिना ही वे बुढ़ा गए।
मिश्र वाक्य – उनकी जवानी आई नहीं कि बुढ़ापा आ गया।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

15. भारी-भरी कदमों से भंबल दा नीचे उतरे। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – भंबल दा नीचे उतरे लेकिन भारी-भारी कदमों से।

16. लड़का चुपचाप ताला खोल देता है और भागकर फिर गुम हो जाता है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – लड़का चुपचाप ताला खोलकर गुम हो जाता है।

17. दौड़ में जीत उसी की होती है जो सबसे आगे निकल जाता है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – सबसे आगे निकलने वाले की ही दौड़ में जीत होती है।

18. यदि आए भी तो इस छोटे-से मकान पर हक मत जतलाना। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – आने पर इस छोटे-से मकान पर हक मत जतलाना।

19. मैं भी तुम्हारी तरह होता तो दीर्घायु होता। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम्हारी तरह होने से में भी दीर्घायु होता।

20. कह नहीं सकता, तुम आओगे या नहीं। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम्हारे आने न आने की बात नहीं कह सकता।

दीपदान :

1. दिन भर तुम तलवार का खेल खेलते रहे, थक गए होगे। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – दिनभर तलवार का खेल खेलकर थक गए होगे।
मिश्र वाक्य – दिनभर तुम तलवार का खेल खेलते रहे इसलिए थक गए होगे।

2. आज हम लोगों ने दीपदान किया और मन भर नाचा। (सरल और मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – आज हमलोगों ने दीपदान पर मन भर नाचा।
मिश्र वाक्य – आज मन भर नाचा क्योंक हमलोगों ने दीपदान किया।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

3. सारे नगर-निवासी यह त्योहार मना रहे हैं – नहीं मना रही हो, तो तुम। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम्हें छोड़कर सारे नगर-निवासी यह त्योहार मना रहे हैं।

4. वे बहुत थक गए हैं। अब सो रहे होंगे। (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – थक जाने से वे अब सो रहे होंगे।
मिश्र वाक्य – वे बहुत थक गए हैं इसलिए अब सो रहे होंगे।

5. राजसेवा में जीवन जा रहा है – यही मेरे भाग्य की बात है। (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – राजसेवा में जीवन बीतना भाग्य की बात है।
मिश्र वाक्य में – यह मेरे लिए भाग्य की बात है कि राजसेवा में जीवन जा रहा है।

6. बनवीर से पूछना, इस राग-रंग का क्या अर्थ है? (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – बनवीर से पूछना कि इस राग-रंग का क्या अर्थ है?

7. कुँवर को नहीं जाने दिया तो बुरा मान गई। (सरल और संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – कुँवर को नहीं जाने देने से बुरा मान गई।
संयुक्त वाक्य – कुँवर को नहीं जाने दिया और वह बुरा मान गई।

8. कहते तो कुछ नहीं, बस देखते हैं। (सरल एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – बिना कुछ कहे देखते रहते हैं।
संयुक्त वाक्य – कुछ कहते नहीं हैं और बस देखते हैं।

9. कैसे कहूँ कि तुम्हारे त्रिशूल में अब शक्ति नहीं रही। (सरल एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम्हारं त्रिशूल में अब शक्ति नहीं रही।
संयुक्त वाक्य – कैसे कह सकता हूँ. तुम्हारे त्रिशूल में अब शक्ति नहीं रही।

10. उसने अवसर पाकर उनकी छाती में तलवार भोंक दी। (मिश्र एवं संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उसने अवसर पाया कि उनकी छाती में तलवार भोंक दी।
संयुक्त वाक्य – उसने अवसर पाया और उनकी छाती में तलवार भोंक दी।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

11. उसने महाराणा के कमरे में जाकर उनकी हत्या कर दी। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – वह महाराणा के कमरे में गया और उनकी हत्या कर दी।

12. विलासी और अत्याचारी राजा कभी निष्कंटक राज नहीं करता। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – जो राजा विलासी और अत्याचारी होता है वह कभी निष्कंटक राज नहीं कर सकता।

13. नमक से रक्त बनता है, रक्त से नमक नहीं। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – नमक से रक्त बनता है, रक्त से नमक नहीं बनता है।

14. घुटने टेक कर कुँवर की जीवन-भिक्षा माँगूगी। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – घुटने टेक दूँगो और कुँवर की जीवन-भिक्षा माँगूगी।

15. सर्प की तरह उसकी भी दो जीभें हैं। (मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
मिश्र वाक्य – उसकी भी दो जीभें है जैसे सर्प की होती है।

16. बनवीर के सिर पर खून चढ़ गया है। वह दैत्य बन गया है। (सरल एवं मिश्र वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – दैज्य बनवीर के सिर पर खून चढ़ गया है।
मिश्र वाक्य – बनवीर दैत्य बन गया है इसलिए उसके सिर पर खून चढ़ गया है।

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17. ऐसा मत कहो ! ऐसा मैं नहीं सुन सकूँगी। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – तुम्हारा ऐसा कहना मैं नहीं सुन सकूँगी।

18. यही राजपूतनी का व्रत है। यही राजपूतनी की पर्यादा है। यही राजपूतनी का धर्म है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – यही राजपूतनी का वृत, मर्यादा और धर्म है।

19. जैसे ही मैं नीचे कूदा, एक टूटा हुआ शीशा अँगूठे में चुभ गया। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – नीचे कूदते ही एक टूटा हुआ शीश अँगूठे में चुभ गया।

20. चित्तौड़ की अच्छी-अच्छी कहानियों को सोचते-सोचते सो जाओ। (संयुक्त वाक्य में)
उत्तर :
संयुक्त वाक्य – चित्तौड़ की अच्छी-अच्छी कहानियों के बारे में सोचो और सोचते-सोचते सो जाओ।

21. मैने अपने लाल को ऐसी निद्रा में सुला दिया कि अब यह न उठेगा। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मैने अपने लाल को चिरनिद्रा में सुला दिया।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य

22. एक बार तुम्हारा मुख देख लूँ। कैसा सुन्दर और भोला मुख है। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – एक बार तुम्हारा सुन्दर और भोला मुख देख लूँ।

23. तो लो मेरी जीभ काट लो, और यहाँ से चले जाओ। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मेरी जीभ काटकर यहाँ से चले जाओ।

24. यदि मेरा नाम लेना है तो जयकार के साथ नाम लो। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मेरा नाम जयकार के साथ लो।

25. मैं उसे लेकर सन्यासिनी हो जाऊँगी। तीर्थों में वास करूँगी। (सरल वाक्य में)
उत्तर :
सरल वाक्य – मैं उसको लिए सन्यासिनी होकर तीर्थो में वास करूँगी।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 Question Answer – चप्पल

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे?
उत्तर :
रंगय्या के पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।

प्रश्न 2.
रंगय्या के मन में गुरुजी के प्रति कैसा भाव प्रकट हुआ ?
उत्तर :
रंगय्या के मन में गुरुजी के प्रति आदर का भाव प्रकट हुआ।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल

प्रश्न 3.
रंगय्या की बस्ती में क्या दुर्घटना हो गई थी ?
उत्तर :
रंगख्या की बस्ती में दुर्घटना घटी कि न जाने कैसे उसकी पल्ली (बस्ती) में भीषण रूप में आग लग गयी थी।

प्रश्न 4.
रंगय्या ने चप्पल को कैसे बचाया ?
उत्तर :
रंगय्या ने आग में कूद कर मास्टर साहब की चपल को बचाया।

प्रश्न 5.
रंगय्या की सारी आशाएँ किस पर टिकी हुई थीं ?
उत्तर :
रंगय्या की सारी आशाएँ बेटे रमण पर थीं।

प्रश्न 6.
मास्टर साहब का व्यक्तित्व कैसा था ?
उत्तर :
मास्टर साहब का व्यक्तित्व दूसरों को प्रभावित करने वाला था – गोरा शरीर, सिर पर छोटी-सी चोटी, ललाट पर भस्म की रेखाएँ, चंदन का तिलक, धोबी की धुली हुई धोती तथा कंधे पर खादी की दुशाला।

प्रश्न 7.
रंगय्या ने भगवान वेंकटेश्वर से क्या प्रार्थना की?
उत्तर :
“हे भगवान ! मेरे बच्चे का उद्धार करो । उसको खूब पढ़ना-लिखना आ जाए। उसको तुम्हारी शरण में ले आऊंगा । उसके बाल तुम्हें अर्पित करूंगा अपने भी ।”

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प्रश्न 8.
रंगय्या के कदम स्कूल की ओर क्यों चल पड़े?
उत्तर :
रंगय्या अपने बेटे रमण को पढ़ते देखना चाहता था तथा मास्टर साहब के दर्शन भी करना चाहता था इसलिए उसके कदम स्कूल की ओर चल पड़े।

प्रश्न 9.
‘चमल’ कहानी के कहानीकार कौन हैं ?
उत्तर :
कावुदूरि वेंकट नारायणराव।

प्रश्न 10.
कावुदूरि वेंकट नारायणराव किस भाषा के रचनाकार हैं ?
उत्तर :
दक्षिण भारतीय भाषाओं के।

प्रश्न 11.
रंग्य्या किस कहानी का पात्र है ?
उत्तर :
‘चण्पल’ कहानी का।

प्रश्न 12.
रंगय्या क्या काम करता था ?
उत्तर :
रंगय्या चफल सिलने तथा मरम्मरत करने का काम करता था।

प्रश्न 13.
रमण किस कहानी का पात्र है ?
उत्तर :
‘चप्पल’ कहानी का।

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प्रश्न 14.
रमण किसका पुत्र है ?
उत्तर :
रंगय्या का।

प्रश्न 15.
रंगय्या किसका मन कभी नहीं दुखाता है ?
उत्तर :
रंगय्या अपने बेटे रमण का मन कभी नहीं दुखाता है।

प्रश्न 16.
रंगय्या ने रमण को कितने पैसे दिए?
उत्तर :
पाँच पैसे।

प्रश्न 17.
रंगय्या ने किस गर्व का अनुभव किया ?
उत्तर :
रंगय्या ने इस गर्व का अनुभव किया कि उसके भी एक बेटा है जो दूसरे की समय व्यर्थ न गंवा कर कुछ पढ़ना-लिखना सीख रहा है।

प्रश्न 18.
रंगय्या की सारी आशाएँ किस पर है ?
उत्तर :
बेटे रमण पर।

प्रश्न 19.
रंगय्या बेटे से क्या चाहता है ?
उत्तर :
रंगय्या बेटे से यह चाहता है कि वह खूब पढ़े, बड़ा आदमी बनकर अपने कुलवालों में अच्छा नाम कमाए।

प्रश्न 20.
रमण की खुशनसीबी क्या थी ?
उत्तर :
रमण की खुशनसीबी यह थी कि मास्टर साहब अपने यहाँ उसको खाना देकर पढ़ा-लिखा रहे हैं।

प्रश्न 21.
रंगय्या का हृदय किसके प्रति कृतज्ञता से भर गया ?
उत्तर :
रंगय्या का हुंदय मास्टर साहब के प्रति कृतज्ञता से भर गया।

प्रश्न 22.
मास्टर साहब के चप्पल कैसे थे ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चपल बड़े ही मामूली थे।

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प्रश्न23.
रंगय्या को मास्टर साहब के चप्पल कैसे लगे?
उत्तर :
महिमान्वित या एकदम परम पवित्र।

प्रश्न 24.
रंगय्या की जेब में कुल कितने पैसे थे ?
उत्तर :
छ: रुपये बीस पैसे।

प्रश्न 25.
क्या देखकर रंगय्या की खुशी का ठिकाना न रहा ?
उत्तर :
जेब में छ: रुपये बीस पैसे देखकर रंगय्या की खुशी का ठिकाना न रहा।

प्रश्न 26.
रमण का स्कूल कैसे मकान में था ?
उत्तर :
रमण का स्कूल छोटे-से खपरैली मकान में था।

प्रश्न 27.
रंगय्या किसे बूंढ़ रहा था ?
उत्तर :
रंगय्या रमण के मास्टर साहल को ढूंढ रहा था।

प्रश्न 28.
रमण किस क्लास में पढ़ता था ?
उत्तर :
पहली क्लास में।

प्रश्न 29.
पहली क्लास के बच्चे क्या याद कर रहे थे ?
उत्तर :
बारह खड़ी।

प्रश्न 30.
किसके भाग्य में पढ़ना-लिखना नहीं बदा था ?
उत्तर :
रंगय्या के भाग्य में पढ़ना-लिखना नहीं बदा था।

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प्रश्न 31.
स्टूल पर बैठे मास्टर साहब बच्चों से क्या करवा रहे थे ?
उत्तर :
पाठ कंठस्थ करवा रहे थे।

प्रश्न 32.
‘पेद्ध बाल शिक्षा’ क्या है ?
उत्तर :
तेलुगु बच्चो की प्रथम पुस्तक।

प्रश्न 33.
मास्टर साहब को किस बात की उम्मीद नहीं थी ?
उत्तर :
मास्टर साहब को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि रंगय्या इस प्रकार झुककर उनके पाँव छुएगा।

प्रश्न 34.
‘कोई देखेगा तो अच्छा नहीं होगा’ – वक्ता कौन है ?
उत्तर :
रमण के मास्टर साहब।

प्रश्न 35.
‘मैं उसे अपना बच्चा समझता हूँ’ – कौन, किसे अपना बच्चा समझता है ?
उत्तर :
मास्टर साहब रंग्या के बेटे रमण को अपना बच्चा समझते हैं।

प्रश्न 36.
रंगय्या को किसकी बातें अमृत के समान लगीं ?
उत्तर :
रंगय्या को मास्टर साहब की बाते अमृत के समान लगीं।

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प्रश्न 37.
रंगय्या को कौन-सी जगह स्वर्गधाम-सी लगी ?
उत्तर :
रंगय्या को रमण का स्कूल स्वर्गधाम-सा लगा।

प्रश्न 38.
रंगय्या ने बेटे के बारे में क्या सोचा ?
उत्तर :
रंगय्या ने बेटे के बारे में यह सोचा कि वह बड़ा भाग्यवान है।

प्रश्न 39.
किसके भोलेपन पर अध्यापक को हँसी आ गई ?
उत्तर :
रंगय्या के भोलेपन पर अध्यापक को हैसी आ गई।

प्रश्न 40.
किसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे ?
उत्तर :
रंगय्या के पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।

प्रश्न 41.
वह बहुत-कुछ पढ़ लेगा – ‘वह’ से कौन संकेतित है ?
उत्तर :
रंगय्या का बेटा रमण।

प्रश्न 42.
रंगय्या की झोपड़ी कहाँ थी ?
उत्तर :
थियेटर के सामने वाली झोपड़ियों के बीच।

प्रश्न 43.
किसकी झोपड़ी को इमारत जैसा कहा गया है ?
उत्तर :
रंग्या की झोपड़ी को।

प्रश्न 44.
रंगय्या का सिर क्यों चकरा-सा रहा था ?
उत्तर :
धूप में चलने के कारण।

प्रश्न 45.
किसके प्रति रंगय्या की बड़ी भक्ति थी ?
उत्तर :
भगवान वेंकटेश्वर के प्रति रंगय्या की बड़ी भक्ति थी।

प्रश्न 46.
रंगय्या को मामा कहने वाली लड़की का नाम क्या है ?
उत्तर :
पोली।

प्रश्न 47.
पोली की उम्र क्या है ?
उत्तर :
दस साल।

प्रश्न 48.
पोली ने रंगय्या से क्या कहा ?
उत्तर :
आज माँ की तबीयत ठीक नहीं है। आज खाना नहीं बना सकेगी।

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प्रश्न 49.
बिल्कुल नया रूप हो गया – किसका रूप बिल्कुल नया हो गया ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पलों का रूप बिल्कुल नया हो गया।

प्रश्न 50.
मास्टर साहब के चप्पलों की मरम्पत में रंगय्या को कितना समय लगा ?
उत्तर :
एक घंटा।

प्रश्न 51.
रंगय्या के बारे में कौन-सी बात सबको मालूम है ?
उत्तर :
रंगय्या नई चण्पलें बनाने का या पुराने को नया बनाने में माहिर हैं।

प्रश्न 52.
गंगा किस कहानी की पात्र है ?
उत्तर :
‘चप्पल’।

प्रश्न 53.
गंगा क्या करती है ?
उत्तर :
प्लेटफार्म पर छोटा-सा होटल चलाती है।

प्रश्न 54.
पल्ली (बस्ती) में आग लगने की सूचना रंगय्या को किसने दी ?
उत्तर :
नारिगा ने।

प्रश्न 55.
क्या सुनकर रंगय्या का दिल एकदम बैठ गया ?
उत्तर :
पल्ली में आग लगने की खबर सुनकर रंगय्या का दिल एकदम बैठ गया।

प्रश्न 56.
रंगब्या की पल्ली में आग कितने बजे लगी ?
उत्तर :
शाम के चार बजे।

प्रश्न 57.
रमण अपने पिता के पास किसके चप्पल मरम्पत के लिए लाया था ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पल।

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प्रश्न 58.
जाने वह किस आवेश में था – पंक्ति कस पाठ से ली गई है ?
उत्तर :
‘चपल’ पाठ से।

प्रश्न 59.
दमकलवालों ने सबसे पहले किसके घर की आग बुझाई ?
उत्तर :
रंगय्या के घर की।

प्रश्न 60.
कौन-सी खबर आग की तरह फैल गई ?
उत्तर :
रंगय्या जल गया।

प्रश्न 61.
एकाएक उसका काम रुक गया – पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर :
‘चप्पल’ पाठ से।

प्रश्न 62.
रमण को कौन-सी चीजें मुफ्त दी गई थी ?
उत्तर :
तेलगु की पहली पुस्तक, पाटी, पहाड़े आदि चीजें।

प्रश्न 63.
‘बहुत अच्छा ! बहुत अच्छा !!’ – पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर :
‘चण्पल!’

प्रश्न 64.
वह उसी की तरफ देख रहा था – कौन, किसकी तरफ देख रहा था ?
उत्तर :
रंगय्या धूल उड़ाकर आगे निकल गई काली मोटर की ओर देख रहा था।

प्रश्न 65.
संसार बहुत कुछ बदल गया – पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर :
चफल।

प्रश्न 66.
उसकी आँखों में उतावलापन दिख रहा था – किसकी आँखों में उतावलापन दिख रहा था?
उत्तर :
रमण की आँखों में।

प्रश्न 67.
किसे सारी दुनिया पाँच पैसे के रूप में दिखने लगी ?
उत्तर :
रंगय्या के बेटे रमण को।

प्रश्न 68.
उससे रहा नहीं गया – पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर :
‘चपल’ पाठ से।

प्रश्न 69.
रमण की उप्र कितनी थी ?
उत्तर :
आठ वर्ष।

प्रश्न 70.
रंगय्या की दो इच्छाएँ क्या थीं ?
उत्तर :
रंगय्या की पहली इच्छा थी – रमण को पढ़ाने वाले मास्टर साहब को साष्टांग प्रणाम करना, दूसरी इच्छा थी – बेटे रमण की पढ़ाई के बारे में जानना।

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प्रश्न 71.
रंगध्या के लिए सबसे बड़ा काम क्या था ?
उत्तर :
रंगय्या के लिए सबसे बड़ा काम यह था कि मास्टर साहब के चपलों की मरम्मत करके बिल्कुल नये जैसे बना देना :

प्रश्न 72.
रेलवे प्लेटफार्म पर होटल कौन चलाती है ?
उत्तर :
गंगी।

प्रश्न 73.
रंगय्या के निकलते हुए प्राणों को किसने देखा होगा ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चण्पलों ने।

प्रश्न 74.
मास्टर साहब ने रंगय्या से रमण के बारे में क्या कहा ?
उत्तर :
मास्टर साहब ने रमण के बारे में रंगय्या से कहा कि” रमण की चिन्ता न करो। वह बहुत बड़ा आदमी बन जाएगा। तुम्हें मोटर में बिठाकर घुमाएगा।”

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प्रश्न 75.
रंगय्या को मास्टर साहब की कौन-सी बातें अमृत के समान लगी ?
उत्तर :
मास्टर साहब का यह कहना है कि, ” रमण तुम्हारा बच्चा नहीं, मैं उसे अपना बच्चा समझता हूँ। तुम उसकी चिंता न करो ! उसका सारा भार मुझपर छोड़ दो।”

प्रश्न76.
“उसका सारा भार मुझपर छोड़ दो” – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है?
उत्तर :
‘चपल’ कहानी से उद्दत है।

प्रश्न 77.
रंगय्या को किन लोगों के साथ उठना-बैठना पसंद नहीं है ?
उत्तर :
रंगय्या को शराबी तथा गंदे लोगों के साथ उठना-बैठना पसंद नहीं है।

प्रश्न 78.
रंगय्या की झोपड़ी में किसकी तस्वीर लगी हुई थी ?
उत्तर :
भगवान वेकटेश्वर की।

प्रश्न 79.
‘चप्पल’ कहानी का हिंदी अनुवाद किसने किया है ?
उत्तर :
दण्डमूडि महीधर ने।

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प्रश्न 80.
रंगय्या के लिए जलती झोपड़ी में सबसे बहुमूल्य वस्तु क्या थी ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पल।

प्रश्न 81.
कौन-सा दृश्य देखकर लोग भय-कम्पित हो गए ?
उत्तर :
जला हुआ रंग्या मुँह के बल गिरा हुआ था।

प्रश्न 82.
रंगय्या ने मास्टर साहब के चप्पलों को आँखों से क्यों लगाया ?
उत्तर :
परम पवित्र मानने के कारण।

प्रश्न 83.
गंगा खाने की कीमत क्यों बढ़ाना चाहती थी?
उत्तर :
चावल की कीमत बढ़ जाने के कारण गंगा खाने की कीमत बढ़ाना चाहती थी।

प्रश्न 84.
रंगय्या की कौन-सी इच्छा बढ़ती जा रही थी ?
उत्तर :
रंगय्या की यह इच्छा बढ़ती जा रही थी कि वह स्कूल जाकर देखे कि उसका बेटा रमण कैसे पढ़ रहा है।

प्रश्न 85.
रंगय्या के किस सवाल पर अध्यापक ने आश्चर्य किया ?
उत्तर :
जब रंगय्या ने अध्यापक से यह पूछा कि, “क्या मैं भी पढ़ सकता हूँ ?” – तो इस पर उन्होने आश्चर्य किया।

प्रश्न 86.
किसके मन में तरह-तरह के विचार उठने लगे ?
उत्तर :
रंगय्या के मन में तरह-तरह के विचार उठने लगे।

प्रश्न 87.
“क्या हुआ है तेरी माँ को'” ? – वक्ता और श्रोता कौन हैं ?
उत्तर :
वक्ता रंगय्या तथा श्रोता पोली है।

प्रश्न 88.
“यहाँ पर कोई शराब पीता है” – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है?
उत्तर :
‘चपल’ कहानी से उद्धत है।

प्रश्न 89.
रंगय्या किन लोगों के बीच रहते हुए भी उनसे अलग था ?
उत्तर :
रंगय्या शराबी और गंदे लोगों के बीच रहते हुए भी उनसे अलग था।

प्रश्न 90.
रंगय्या ने मास्टर साहब के पास कितने रुपये जमा किए थे ?
उत्तर :
दो सौ चार रुपये।

प्रश्न 91.
रंगय्या जलते घर में क्यों कूद गया ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चष्पलों को बचाने के लिए रंगय्या जलते घर में कूद गया।

प्रश्न 92.
रंगय्या को किसकी बातें अमृत के समान लगी ?
उत्तर :
रंगय्या को मास्टर साहब की बातें अमृत के समान लगी।

प्रश्न 93.
रमण अपने पिता के पास किसके चप्पल मरम्पत कराने के लिए लाया था ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पल मरम्मत कराने के लिये लाया था।

प्रश्न 94.
रंगय्या के लिए सबसे बड़ा काम क्या था ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पलों की मरम्मत करना।

प्रश्न 95.
रंगय्या की झोपड़ी के चारों तरफ कैसे लोग रहते थे ?
उत्तर :
निम्न श्रेणी के, गंदे रहनेवाले तथा शराबी।

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प्रश्न 96.
रंगय्या के लिए सबसे बड़ा काम क्या था ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चपलों की मरम्मत करना

प्रश्न 97.
रंगय्या का दिल क्यों बैठ गया ?
उत्तर :
पल्ली में आग लगने की बात सुनकर रंगय्या का दिल बैठ गया।

प्रश्न 98.
रंगय्या किसे बड़े गौर से देख रहा था ?
उत्तर :
रंगय्या मास्टर साहब के चपलों को बड़े गौर से देख रहा था।

प्रश्न 99.
‘अटारी’ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
दीवार में बने सामान रखने की जगह को अटारी कहते हैं।

प्रश्न 100.
रंगय्या जलती झोपड़ी में क्या निकालने के लिए घुस गया ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चपल निकालने के लिए रंगय्या जलती झोपड़ी में घुस गया।

प्रश्न 101.
“दादा-परदादा के जमाने के दीख रहे है”‘- कौन किसके बारे में कह रहा है ?
उत्तर :
रंगय्या मास्टर साहब के चपलों के बारे में कह रहा है।

प्रश्न 102.
यह उसके लिए दुनिया की सबसे कीमती चीज थी – कौन-सी चीज, किसके लिए कीमती थी?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पल रंगय्या के लिए सबसे कीमती चीज धी।

प्रश्न 103.
रंगय्या के मन में क्या विचार आया ?
उत्तर :
रंगय्या के मन में यह विचार आया कि एकबार मास्टर साहब के सामने जाकर साप्टांग प्रणाम किया जाय।

प्रश्न 104.
किसका, किसके बजाय किसी दूसरी दुनिया से कोई वास्ता नहीं है ?
उत्तर :
रंगय्या का चपलें सीने के बजाय किसी दूसरी दुनिया से कोई वास्ता नहीं है।

प्रश्न 105.
रंगय्या कितने वर्षों से कौन-सा पेशा करता आ रहा है ?
उत्तर :
रंगय्या पचास वर्षों से चप्पलें सीने का पेशा करता आ रहा है।

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प्रश्न 106.
कितने बचचों के मर जाने के बाद रमण पैदा हुआ था ?
उत्तर :
पाँच बच्चों के मर जाने के बाद।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 : ‘चण्मल’ कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 2 : चणल’ कहानी का नायक कौन है ? उसका चरित्र-चित्रण करें।
अथवा
प्रश्न 3 : चचप्पल’ कहानी के किस पात्र ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया है? उसकी चारित्रिक विशेषताओं को लिखें।
अथवा
प्रश्न 4 : ‘चपल’ कहानी के आधार पर रंगय्या का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :
रंगय्या कावुदूरि वेंकट नारायणराव की कहानी ‘चपल’ का प्रमुख पात्र है। उसके चरित्र ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। वह समाज के उस वर्ग से है जिसे अछूत समझा जाता है। इस वर्ग से होने के बावजूद वह शिक्षा के माध्यम से अपने-आपको समाज में प्रतिष्ठित करना चाहता है।

रंगय्या के चरित्र की जिन विशेषताओं ने मुझे प्रभावित किया है, वे निम्नांकित हैं –

(क) सीधी-सादी जिंदगी जीने वाला : रंगय्या पेशे से चर्मकार है। वह पिछले पचास वर्षो से चपलें मरम्मत करने का कार्य करता आ रहा है। यही उसकी दुनिया है तथा दूसरी दुनिया से उसे कोई वास्ता नहीं है। इन पचास वर्षों में दुॉनया इतनी बदल गई लेकन उसके जीवन, पेशे तथा उसकी दुनिया वैसी की वैसी ही चल रही है।

(ख) पुत्र के लिए अपार प्रेम : अपने एकलौते बेटे रमण के लिए उसके दिल में अपार प्रेम है। पाँच बच्चों के मर जाने के बाद यही रमण जीवित रहा। रमण को जन्म देने के बाद उसकी माँ भी चल बसी। अब रंगय्या ही रमण की माँ और बाप-दोनो ही है। रमण ही उसके जीवन का एकमात्र आधार है। इन सब कारणों से बेटे रमण के लिए उसके दिल में अपार प्रेम है।

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(ग) शिक्षक के प्रति अपार श्रद्धा : रंगय्या स्वयं तो अनपढ़ है लेकिन शिक्षकों के लिए उसके मन में अपार श्रद्धा है। रमण के मास्टर साहब जाति-पांति का भेदभाव किए रमण को अपने पास रखकर पढ़ा-लिखा तो रहे ही हैं उसके भोजन तथा पुस्तकों का भी ध्यान रखते हैं। रंगय्या इसलिए कबीर की तरह सोचता है कि गुरू का त्रुण किसी भी रूप में नहों चुकाया जा सकता –

राम नाम वे पटंतरै देवै को कछु नाहिं।
क्या लै गुरू संतोखिये हौंस रही मन मांहि।।

(घ) शिक्षा पाने के लिए ललायित : रंगय्या अनपढ़ है। उसकी उम्र पचास वर्षों से अधिक की है फिर भी वह पढ़ना-लिखना चाहता है। इस बारे में वह रमण के स्कूल के एक अध्यापक से बातें भी करता है। इस उप्र में अपने पढ़ाई शुरू करने के बारे में काफी उधेड़बुन के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुँचता है –

‘सबको पढ़ना-लिखना चाहिए।
बड़ी उप्र हो गई तो क्या हुआ?”

इतना ही नहीं वह मास्टर साहब के उपकार के बारे में कहता है – “मैं अपना चमड़ा उतारकर चप्पल बना के दूंगा, फिर भी आपका ॠण नहीं चुका सकूँगा साब।”

(ङ) अच्छी जिंदगी जीने की इच्छा : रंगय्या जिस बस्ती में रहता है वहाँ सब निचले तबके के ही लोग रहते हैं तथा अपनी स्थिति को सुधारने के बारे में कभी नहीं सोचते लेकिन रंगय्या ऐसी जिंदगी से बेहतर जिंदगी चाहता है। इसीलिए रंगयय्या को अपनी बस्ती के ऐसे लोगों के साथ उठना-बैठना पसंद नहीं है।

(च) कुशल कारीगर : रंगय्या की ख्याति एक कुशल कारीगर के रूप में है। पुरानी से पुरानी चप्पलों की भी ऐसी मरम्मत करता है कि वे नई लगने लगती है। मास्टर साहब की टूटी-फूटी चपलो की वह ऐसी मरम्मत करता है कि उसकी सुंदरता पर स्वयं मुग्ध हो जाता है।

(छ) बचत करने वाला : रंगय्या की जो कमाई होती है वह बस्ती के अन्य लोगों की तरह उन पैसों को शराब में नहीं उड़ाता है। वह उन पैसों को रमण के मास्टर साहब के पास जमा करता जाता है ताकि वे पैसे भविष्य में रमण के काम आ सके।

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(ज) बेटे के भविष्य के सुनहले स्वप्न देखने वाला :रंगया चाहता है कि उसका बेटा रमण खूब पढ़े-लिखे। बड़ा आदमी बने तथा कुलवालों में अच्छा नाम कमाए। जब मास्टर साहब कहते हैं कि,”वह बहुत बड़ा आदमी बन जाएगा। तुम्हें मोटर में बिठाकर घुमाएगा।” रंगय्या उन दिनों के बारे में पूछता है – ‘क्या वह दिन मैं देख सकूँगा?'”

(झ) वचन निभाने वाला : रंगय्या अपने वचन को निभाना जानता है उसने मास्टर साहब के चपलों की मरम्मत करके शाम तक देने का वचन दिया है। सही समय पर चप्पलों की मरम्मत करके अपनी झोपड़ी में अटारी में रख दी। बस्ती में आग लगने से उसकी झोपड़ी भी आग की चपेट में आ जाती है। अपने वचन को निभाने के लिए वह जलती झापड़ी में चला जाता है। चणलें तो सुरक्षित रह जाती है लेकिन वह इस दुनिया से विदा हो जाता है। इस प्रकार अपने प्राण देकर भी वह वचन की रक्षा करता है।
दरअसल रंगय्या आधुनिक भारत का वह चरित्र है जिसके बारे मेंस्वामी विवेकानंद ने कहा था –

“शुद्र-शक्तियों से नवीन भारत एवं यथार्थ भारतीयता की किरणें फूटेंगी। वे ही भविष्य के ब्वाह्माण, क्षत्रिय हैं। ……… चिरकाल तक लड़कर ब्राह्मण-क्षत्रिय पस्त हो गए हैं ……….. उनका कार्य अब वे जातियाँ करेंगी जो अब तक सेवा करती आयी है।”

प्रश्न 5 : ‘चप्यल’ कहानी में लेखक के व्यक्त विचारों को अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 6 : ‘चष्पल’ कहानी के माध्यम से लेखक ने हमें क्या संदेश देना चाहा है?
अधवा
प्रश्न 7 : ‘चण्पल’ कहानी के उदेश्य पर प्रकाश डालें।
अथवा
प्रश्न 8 : ‘चप्पल’ कहानी के शीर्षक के औचित्य या सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
अथवा:
प्रश्न 9 : ‘चषल’ कहानी का मूल भाव अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 10 : ‘चष्पल’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
अथवा
प्रश्न 11 : ‘चण्मल’ कहानी दिशा-निर्देशक की भांति है – अपने विचार लिखें।
अथवा
प्रश्न 12: ‘चप्पल’ कहानी का उह्देश्य गुरू और शिष्य के रिश्तों की प्रासंगिकता पर आधारित है अपने विचार लिखें।
अधवा
प्रश्न 13 : ‘चण्पल’ कहानी रिश्तों को मजबूत बनाने वाली कहानी है – विवेचना करें।
उत्तर :
‘कावुदूरि वेंकट नारायणराव की कहानी ‘चप्पल’ गुरू तथा शिष्य के संबंधों पर आधारित एक आदर्शवादी कहानी है। यह हमें प्राचीन भारत की गुरू-शिष्य के संबंधों की दुनिया में ले जाती है।

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प्रस्तुत कहानी में मास्टर साहब उच्च जाति के हैं लेकिन रमण जाति से चर्मकार है जिसे अछूत माना जाता है। फिर भी मास्टर साहब बिना किसी भेद्भाव के उसे पढ़ाते-लिखाते हैं, उसके भोजन तथा पुस्तकों की भी व्यवस्था करते हैं। वह रमण को अपने पुत्र की तरह ही प्रेम देते हैं। वह रमण के पिता रंग्या जो चप्पलें मरम्मत करने का काम करता है उसे कहते हैं-
“रमण तुम्हारा बच्चा नहीं, मैं उसे अपना बच्चा समझता हूँ। तुम उसकी चिंता न करो। उसका सारा भार मुझ पर छोड़ दो।”

अपने इस उपकार के बदले वे रंगय्या से कुछ लेना भी नहीं चाहते। इतना ही नहीं, वह रंगय्या द्वारा पैर छूने पर उसे इस काम के लिए मना भी करते हैं – “‘तुम यह क्या कर रहे हो रंगय्या? कोई देखेगा तो अच्छा नहीं होगा……
रंगय्या को मास्टर साहब पर इतना विश्वास है कि वह अपनी कमाई के बचाए हुए रुपये भी उनके पास जमा करता है।
रंगय्या मास्टर साहब के टूटे चप्पलों को बड़ी हसरत से ठीक करता है, उन्हें फिर से नई बना देता है। वह अपने हाथों से उन्हें पहनाना चाहता है लेकिन वह इस हसरत को लिए हुए ही दुनिया से विदा हो जाता है। झोपड़ी में लगी आग से तो चप्पलो को बचा लेता है लेकिन स्वय झुलस कर मर जाता है। रमण की सारी जिम्मेवारी मास्टर साहब पर आ जाती है।

इस प्रकार हम पाते हैं कि इस कहानी के माध्यम से लेखक ने एक सच्चे गुरू-शिष्य की आर्दशवादी पंरपरा को हमारे सामने रखना चाहा है। वह पररपरा जिसके अंतर्गत – कबीर, तुलसी, चन्द्रगुप्त, स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों को उनके गुरु ने सजाया-संवारा था। गुरू और शिष्य के इस भेद-भाव रहित रिश्ते को दर्शाना ही लेखक का उद्देश्य है। उन्होंने जो संदेश देना चाहा है अगर उसे कबीर के शब्दों में कहें तो –
“कबीर गुर गरवा मिल्या, रलि गया आटैं लूंण।”

अर्थात् मुझे गौरवमय गुरूदेव मिल गए, उन्होंने अपने ज्ञान-स्वरूप में मुझे इसी प्रकार एक कर लयया, अपने मे मिला लिया जैसे आटे मे नमक मिल जाता है। इस कहानी की शुरूआत चप्पलों से होकर चप्पलों पर ही खत्म होती है, इसलिए इसका शीर्षक भी बिल्कुल सार्थक एवं उपयुक्त है।

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प्रश्न 14 : ‘चफ्पल’ कहानी के मास्टर साइब का चरित्र-चित्रण करें।
अधवा
प्रश्न 15 : चप्पल’ कहानी के जिस पात्र ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया है उसका चरित्र-चित्रण करें।
अधवा
प्रश्न 16 : ‘चप्य’ कहानी के मास्टर साइब एक आदर्श शिक्षक हैं – अपने विचार लिखें। अथवा अथवा
प्रश्न 18 : ‘चपल’ के मास्टर साहब एक आदर्श शिक्षक के प्रतीक है – अपने विचार लिखें।
उत्तर :
‘चपल’ कहानी में मास्टर साहब का चरित्र एक प्रभावशाली चरित्र हैं। उनमें एक आदर्श शिक्षक के सारे गुण है। यही कारण है कि उनके चरित्र ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मास्टर साहब की चारित्रिक विशेषताओं को इन शीर्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता है –

(क) प्रभावशाली व्यक्तित्व : मास्टर साहब का प्रभावशाली व्यक्तित्व किसी को अपनी और आकष्षित कर सकता है – गोरा-गोरा शरीर, सिर पर एक छोटी-सी चोटी, मस्तक पर भस्म की रेखाएँ, बन्दन का तिलक, धोबी की धुली हुई धोती और कंधे पर खादी की दुशाला।

(ख) जाति-पांति के भेदभाव से ऊपर : मास्टर साहब के वर्णन से प्रतीत होता है कि वे लाह्यण है। उच्च जाति क होने के बावजूद उनमें जाति-पांति के आधार पर भेदभाव की कोई भावना नहीं है। जाति से चर्मकार रमण को वे अपने बेंटे की तरह मानते ही नहीं है, अपनी रसोई में खाना खिलाते व साथ बिठाकर पढ़ाते-लिखाते भी हैं। वे अपना सारा ज्ञान रमण को दे डालना चाहते हैं। ऐसे ही गुरू एवं रमण के जैसे शिष्य के बारे में कबीर ने लिखा है –

गुरू तो ऐसा चाहिए सिख से कछु नहिं लेय।
सिस तो ऐसा चाहिए गुरू को सब वुन्छ देय।।

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(ग) कर्त्तव्यनिष्ठा व समर्पण : मास्टर साहब में अपने कर्त्तव्य के प्रति पूरी-पूरी निष्ठा व समर्पण का भाव है। वे वच्चों की शिक्षा के पीछे काफी परिश्रम करते हैं तथा अपने कर्त्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित है। एक आदर्श शिक्षक की तरह वे अपने छात्रों से मधुर संबंध रखते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं तथा पिता की तरह स्नेह करते हैं। इस गुण का पता उनके निम्नलिखित कथन से लग जाता है –
”तुम उसकी चिन्ता न करो ! उसका सारा भार मुझ पर छोड़ दो ! वह बहुत बड़ा आदमी बन जाएगा।”

(घ) आदर्श शिक्षक : आशावादी दृष्टिकोण, प्रशासनिक योग्यता, मनोवज्ञान का ज्ञान, समाज की आवश्यकताओं का ज्ञान, विनोदी स्वभाव, दूरदर्शिता, मिलनसार प्रवृत्ति, अपने कार्य के प्रति आस्था, प्रभावशाली व्यक्तित्च आदि एक आदर्श शिक्षक के गुण होते हैं। मास्टर साहब में ये सारे गुण हैं तथा वे आदर्श शिक्षक की श्रेणी में आते हैं।

(ङ) गुरु-शिष्य की प्राचीन परंपरा : प्राचीन काल में गुरु और शिष्य का संबध पिता-पुत्र के सबंध से बढ़कर होता था। आज शिक्षा एक व्यवसाय का रूप लेती जा रही है इसलिए शिक्षकों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिलता है। ऐसे परिवर्तन के दौर में भी मास्टर साहब इन सबसे अछूते हैं तथा वे अपनी भूमिका का निर्वाह अच्छी तरह से कर रहे हैं।

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विश्व के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था – “विद्यार्थियों में सृजनात्मक भाव और ज्ञान का आनंद जगाना ही एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण गुण है।’ – और इस कथन के आधार पर मास्टर साहब में ये सारे महत्वपूर्ण गुण हैं, इसलिए उनके व्यक्तित्व ने पूरी कहानी में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रमण कितने बच्चों के बाद पैदा हुआ था ?
(क) दो
(ख) तौन
(ग) पाँच
(घ) सात
उत्तर :
(ग) पाँच

प्रश्न 2.
‘चिल्लर’ का अर्थ क्या है ?
(क) छुटे पैसे
(ख) रुपये
(ग) खोटा सिक्का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) छुट्टे पैसे

प्रश्न 3.
रंगय्या ने चप्पल कहाँ रखी थी ?
(क) अटारी पर
(ख) अलमारी में
(ग) आँगन में
(घ) पेटी पर
उत्तर :
(क) अटारी पर

प्रश्न 4.
रंगय्या किस कहानी का पात्र है ?
(क) उसने कहा था
(ख) चप्पल
(ग) नमक
(घ) धावक
उत्तर :
(ख) चम्पल।

प्रश्न 5.
‘चप्पल’ कहानी के लेखक कौन हैं ?
(क) कृष्ण सोबती
(ख) शिवमूर्ति
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) कावुरूरि वेंकट नारायणराव
उत्तर :
(घ) कावुदूरि वेंकट नारायणराव।

प्रश्न 6.
‘चप्पल’ कहानी के अनुवादक कौन हैं ?
(क) शैल रस्तोगी
(ख) डॉ० रामकुमार वर्मा
(ग) द्णमूडि महीधर
(घ) गुलेरी
उत्तर :
(ग) दण्डमूडि महीधर।

प्रश्न 7.
किसका मुँह एकदम चमक उठा ?
(क) मास्टर साहब का
(ख) रमण का
(ग) पोली का
(घ) रंग्या का
उत्तर :
(घ) रंगय्या का।

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प्रश्न 8.
रंगय्या किसे बड़े गौर से देख रहा था ?
(क) रमण को
(ख) काली कार को
(ग) चप्यलों को
(घ) मास्टर साहब को
उत्तर :
(ग) चप्पलों को।

प्रश्न 9.
किसे किसी दूसरी दुनिया से कोई वास्ता नहीं ?
(क) रंगय्या को
(ख) रमण को
(ग) पोली को
(घ) मास्टर साहब को
उत्तर :
(क) रंगय्या को।

प्रश्न 10.
रंगय्या कितने सालों से चण्ले मरम्मत करने का काम करता आ रहा है ?
(क) तीस सालों से
(ख) चालीस सालों से
(ग) पचास सालों से
(घ) दस सालो से
उत्तर :
(ग) पचास सालों से।

प्रश्न 11.
किसकी जिंदगी मे किसी तरह का परिवर्तन नहीं आया ?
(क) मास्टर साहब
(ख) लेखक
(ग) अध्यापक
(घ) रंगय्या
उत्तर :
(घ) रंगय्या।

प्रश्न 12.
“मुझे क्या मालूम ?” – वक्ता कौन है ?
(क) रमण
(ख) रंगय्या
(ग) पोली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
रमण।

प्रश्न 13.
‘झुर्रियों की परतें खुल गयीं’ – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है ?
(क) दादी अम्मा
(ख) चप्यल
(ग) नमक
(घ) धावक
उत्तर :
(ख) चप्पल।

प्रश्न 14.
“अभी चाहिए ____जल्दी” ____ वक्ता कौन है ?
(क) रमण
(ख) मास्टर साहब
(ग) पोली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रमण।

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प्रश्न 15.
रंगय्या कभी भी किसका मन नहीं दुखाता ?
(क) मास्टर साहब का
(ख) अपने प्राहकों का
(ग) रमण का
(घ) मुहल्लेवालों का
उत्तर :
(ग) रमण का।

प्रश्न 16.
रंगय्या की सारी आशाएँ किस पर हैं ?
(क) मास्टर साहब पर
(ख) रमण पर
(ग) पैसे पर
(घ) पोली पर
उत्तर :
(ख) रमण पर।

प्रश्न 17.
‘चटसार’ का अर्थ है –
(क) ट्चूशन
(ख) संगीत विद्यालय
(ग) पाठशाला
(घ) छोटे बच्चों की पाठशाला
उत्तर :
(घ) छोटे बच्चों की पाठशाला।

प्रश्न 18.
रंगघ्या चाहता है कि रमण –
(क) खूब पढ़े
(ख) उससे भी अच्छी चण्पल बनाए
(ग) खेती करे
(घ) नही पढ़े
उत्तर :
(क) खूब पढ़े।

प्रश्न 19.
“ऐसा करूँगा कि मास्टर साहब याद रखें’ – वक्ता कौन है ?
(क) पोली
(ख) रंगय्या
(ग) रमण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) रंगय्या।

प्रश्न 20.
‘इनको ठीक कर दूँगा” – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है ?
(क) चषल
(ख) उसने कहा था
(ग) नन्हूा संगीतकार
(घ) धावक
उत्तर :
(क) चपल।

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प्रश्न 21.
“अन्दर आने का साहस नहीं हुआ” – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है ?
(क) उसने कहा था
(ख) धावक
(ग) चषल
(घ) नन्हा संगीतकार
उत्तर :
(ग) चप्यल।

प्रश्न 22.
“उसकी जबान लड़खड़ाने लगी” – किसकी जबान लड़खड़ाने लगी ?
(क) लहना सिहु की
(ख) भिम्बल दा की
(ग) रंगय्या की
(घ) जेन की
उत्तर :
(ग) रंगय्या की।

प्रश्न 23.
”उसका लड़का बड़ा खुशनसीब है”‘- ‘उसका’ से कौन संकेतित है ?
(क) जेन की माँ
(ख) रंगय्या
(ग) सूबेदार हजारा सिंह
(घ) इनमे से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) रंगय्या।

प्रश्न 24.
“तुम्हें मोटर में बिठाकर घुमाएगा” – वक्ता कौन है?
(क) रंगय्या
(ख) रमण
(ग) मास्टर साहब
(घ) पोली
उत्तर :
(ग) मास्टर साहब।

प्रश्न 25.
‘उसका सारा भार मुझ पर छोड़ दो’ – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) नौबतखाने में इबादत
(ख) नमक
(ग) धावक
(घ) चष्पल
उत्तर :
(घ) चमल।

प्रश्न 26.
‘क्या वह दिन मैं देख सकूँगा” – वक्ता कौन है ?
(क) लहना सिंह
(ख) बिस्मिल्ला खाँ
(ग) रंगय्या
(घ) जेन
उत्तर :
(ग) रंगय्या।

प्रश्न 27.
‘फूले अंग वह समा नहीं रहा था’ ” का अर्थ है ?
(क) खुश हो रहा था
(ख) शरीर अंग में नहीं समा रहा था
(ग) अंग फूल गया था
(घ) पूरा शरौर फूल गया था
उत्तर :
(क) खुश हो रहा था।

प्रश्न 28.
इसके पहले के दो सौ रुपये हुए'” – वक्ता कौन है ?
(क) गंगा
(ख) पोली
(ग) मास्टर साहब
(घ) रंगख्या
उत्तर :
(ग) मास्टर साहल।

प्रश्न 29.
रंगय्या को रमण का स्कूल कैसा लगा ?
(क) पुराना
(ख) स्वर्ग
(ग) खपरैल
(घ) दूटा-फूटा
उत्तर :
(ख) स्वर्ग।

प्रश्न 30.
“कौन हैं आप ?” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) नमक
(ख धावक
(ग) चप्पल
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(ग) चपल।

प्रश्न 31.
पढ़ना-लिखना उसके भाग्य में नहीं बदा था – ‘उसके’ से कौन संकेतित है?
(क) रमण
(ख) रंगख्या
(ग) पोली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) रंगय्या।

प्रश्न 32.
“मेरे साथ चलो” – वक्ता कौन है ?
(क) लहना सिंह
(ख) जेन
(ग) भम्बल दा
(घ) मास्टर साहब
उत्तर :
(घ) मास्टर साहब।

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प्रश्न 33.
‘बच्चों को भी वह कुछ अजीब-सा लगा'” – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है ?
(क) चष्पल
(ख) घावक
(ब) नमक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) चप्पल।

प्रश्न 34.
“कोई देखेगा तो अच्छा नहीं होगा”‘ – पंक्ति किस पाठ से उद्धतत है ?
(क) धावक
(ख) उसने कहा था
(ग) चण्पल
(घ) नमक
उत्तर :
(ग) चप्पल।

प्रश्न 35.
“कोई देखेगा तो अच्छा नहीं होगा” – वक्ता कौन है ?
(क) लहना सिंह
(ख) मास्टर साहब
(ग) सरदारनी
(घ) पोली
उत्तर :
(ख) मास्टर साहब।

प्रश्न 36.
“तुम उसकी चिंता न करो” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) चप्पल
(ख) उसने कहा था
(ग) नौबतखाने में इबादत
(घ) नमक
उत्तर :
(क) चप्पल।

प्रश्न 37.
“तुम उसकी चिंता न करो” – वक्ता कौन है ?
(क) रंगय्या
(ख) मास्टर साहब
(ग) लहना सिंह
(घ) सरदारनी
उत्तर :
(ख) मास्टर साहुब।

प्रश्न 38.
रंगय्या ने कितने रुपये मास्टर साहब के हाथ में रखे ?
(क) दो सौ चार
(ख) दो सौ
(ग) चार
(घ) चार सौ
उत्तर :
(ग) चार।

प्रश्न 39.
“उसको बड़ी तृप्ति हुई” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) चणल
(ख) नमक
(ग) नन्हा संगौतकार
(घ) धावक
उत्तर :
(क) चपल।

प्रश्न 40.
“यहाँ हर कोई शराब पीता है” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) चप्ल
(ख) उसने कहा था
(ग) धावक
(घ) दोपदान
उत्तर :
(क) चण्पल।

प्रश्न 41.
“बड़ी उम्र हो गई तो क्या हुआ” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) नमक
(ख) उसने कहा था
(ग) चमल
(घ) दीपदान
उत्तर :
(ग) चप्पल।

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प्रश्न 42.
‘बड़ी उम्र हो गई तो क्या हुआ’ – वक्ता कौन है ?
(क) रंगय्या
(ख) सरदारनी
(ग) गंगा
(घ) पन्ना धाय
उत्तर :
(क) रंगय्या।

प्रश्न 43.
रंगय्या की झोपड़ी कितने शहतीरों वाली है ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर :
(ग) तीन।

प्रश्न 44.
पोली की उप्र कितने वर्ष है ?
(क) चार
(ख) आठ
(ग) दस
(घ) बारह
उत्तर :
(ग) दस।

प्रश्न 45.
‘बिल्कुल नया रूप हो गया” – पंक्ति किस पाठ से उद्धत है ?
(क) नमक
(ख) नन्हा संगौतकार
(ग) चप्पल
(घ) धावक
उत्तर :
(ग) चप्पल।

प्रश्न 46.
“किसी की आवाज सुनाई दी” – पंक्ति किस पाठ से उद्दुत है ?
(क) चपल
(ख) नमक
(ग) उसने कहा था
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) चप्पल।

प्रश्न 47.
“उनकी सुंदरता पर स्वयं मुग्ध हो रहा था” – पंक्ति किस पाठ से उद्दुत है ?
(क) नमक
(ख) उसने कहा था
(ग) चपल
(घ) धावक
उत्तर :
(ग) चण्पल।

प्रश्न 48.
रंगय्या किस में बड़ा माहिर है ?
(क) बातें बनाने में
(ख) चपलें बनाने में
(ग) घर बनाने में
(घ) रंग करने में
उत्तर :
(ख) चणलें बनाने में।

प्रश्न 49.
“उसको बड़ी भूख लग रही थी'” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) नन्हा संगीतकार
(ख) चम्मल
(ग) नमक
(घ) धावक
उत्तर :
(ख) चपल।

प्रश्न 50.
‘क्यों नहीं। अभी लो!’ – वक्ता कौन है ?
(क) रंग्या
(ख) रमण
(ग) मास्टर साहब
(घ) गंगा
उत्तर :
(घ) गंगा।

प्रश्न 51.
नारिगा किस कहानी का पात्र है ?
(क) नमक
(ख) धावक
(ग) चम्मल
(घ) इनमें से किसी का नहीं
उत्तर :
(ग) चप्पल।

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प्रश्न 52.
“हमारी पल्ली में आग लग गई है आग” – वक्ता कौन है ?
(क) रमण
(ख) नारिगा
(ग) रंगय्या
(घ) पोली
उत्तर :
(ख) नारिगा।

प्रश्न 53.
“क्या करूँ” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) नमक
(ख) धावक
(ग) उसने कहा था
(घ) चप्पल
उत्तर :
(घ) चप्पल।

प्रश्न 54.
“शाम को चार बजे का वक्त था” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) धावक
(ख) चष्पल
(ग) नमक
(घ) नन्हा संगीतकार
उत्तर :
(ख) चषल।

प्रश्न 55.
“ज्वालाएँ आसमान को छू रही थीं” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) चणल
(ख) धावक
(ग) नमक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) चप्पल।

प्रश्न 56.
“तुम पागल तो नहीं हो गए” – पंक्ति किस पाठ से उब्द्त है ?
(क) चण्पल
(ख) नन्हा संगीतकार
(ग) धावक
(घ) नमक
उत्तर :
(क) चपल।

प्रश्न 57.
“अब कुछ नहीं हो सकता” – वक्ता कौन है ?
(क) रंगय्या
(ख) युवक
(ग) मास्टर साहब
(घ) रमण
उत्तर :
(ख) युवक।

प्रश्न 58.
‘इस घटना की खबर भी आग की तरह फैल गई” – किस घटना की खबर फैल गई ?
(क) जर्मनों के हमले की
(ख) धिम्बल दा के मरने की
(ग) रंगय्या के जलने की
(घ) लहना सिंह के घायल होने की
उत्तर :
(ग) रंगय्या के जलने की।

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प्रश्न 59.
दौड़कर सब-के-सब वहाँ इकट्ठे हो गए” – पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
(क) नमक
(ख) उसने कहा था
(ग) चण्पल
(घ) धावक
उत्तर :
(ग) चप्य।

प्रश्न 60.
‘‘न जाने वह किस आवेश में था” – ‘वह’ से कौन संकेतित है ?
(क) लहना सिंह
(ख) जेन
(ग) रमण
(घ) रंगय्या
उत्तर :
(घ) रंगय्या।

प्रश्न 61.
रंगय्या को पल्ली में आग लगने का पता कितने बजे चला ?
(क) बारह बजे
(ख) चार बजे शाम
(ग) सात बजे
(घ) आठ बजे सुबह
उत्तर :
(ख) चार बजे शाम।

प्रश्न 62.
रंगय्या की भक्ति किसके प्रति थी ?
(क) भगवान के प्रति
(ख) गुरु के प्रति
(ग) माँ के प्रति
(घ) पिता के प्रति
उत्तर :
(क) भगवान के प्रति।

प्रश्न 63.
रंगय्या की झोपड़ी में किसकी तस्वीर लगी हुई थी ?
(क) राम की
(ख) कृष्ण की
(ग) वेकटेश्वर की
(घ) महात्मा गाँधी की
उत्तर :
(ग) वेंकटेश्वर की।

प्रश्न 64.
‘चण्पल’ किस विधा की रचना है ?
(क) निबंध
(ख) कहानी
(ग) रेखाचित्र
(घ) संस्मरण
उत्तर :
(ख) कहानी।

प्रश्न 65.
जलती हुई झोपड़ी में रंगय्या के लिए सबसे कीमती वस्तु क्या थी ?
(क) रुपये-पैसे
(ख) घर के सामान
(ग) मास्टर साहब के चप्पल
(घ) शहतीर
उत्तर :
(ग) मास्टर साहब के चपल।

प्रश्न 66.
रमण कितने वर्ष की आयु में स्कूल में दाखिल हुआ था ?
(क) छ:
(ख) सात
(ग) आठ
(घ) नौ
उत्तर :
(ग) आठ।

प्रश्न 67.
नारिगा और पोली किस कहानी के पात्र हैं ?
(क) नमक
(ख) च्पावक
(ग) चप्पल
(घ) उसने कहा था
उत्तर :
(ग) यप्पल।

प्रश्न 68.
पोली और रंगय्या में क्या संबंध था ?
(क) बाप-बेटी
(ख) मामा-भगिनी
(ग) चाचा-भतीजी
(घ) भाई-बहन
उत्तर :
(ख) मामा-भगिनी।

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प्रश्न 69.
रंगय्या थैली से सामान निकालकर मास्टर साहब का क्या ठीक करने लगा ?
(क) कलम
(ख) चण्पल
(ग) छाता
(घ) जूते
उत्तर :
(ख) चपल।

प्रश्न 70.
रंगय्या को रमण का स्कूल कैसा लगा ?
(क) पुराना
(ख) स्वर्ग
(ग) खपरैल
(घ) टूटा-फूटा
उत्तर :
(ख) स्वर्ग।

प्रश्न 71.
किसे दूसरी दुनिया से वास्ता नहीं ?
(क) कर्ण को
(ख) रमण को
(ग) रंगय्या को
(घ) पोली को
उत्तर :
(ग) रंगय्या को।

प्रश्न 72.
चप्पल कहानी में किस विषय को प्रमुखता के साथ उभारा गया है ?
(क) ढहती मानवीयता
(ख) गुरू-शिष्य संबंध
(ग) शिक्षा-व्यवस्था
(घ) लघु रोजगार
उत्तर :
(ख) गुरू-शिष्य संबंध।

प्रश्न 73.
रंगय्या का सिर चकरा-सा गया था –
(क) भूख के कारण
(ख) धूप के कारण
(ग) चिंता के कारण
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) धूप के कारण।

प्रश्न 74.
रंगय्या के कितने बच्चों की मृत्यु हो गई थी ?
(क) तौन
(ख) पाँच
(ग) चार
(घ) छ:
उत्तर :
(ख) पाँच।

प्रश्न 75.
रमण के बस्ते में किस भाषा की पुस्तक थी ?
(क) संस्कृत
(ख) तेलगू
(ग) अंग्रेजी
(घ) तमिल
उत्तर :
(ख) तेलगू।

प्रश्न 76.
रमण की उम्र कितनी है ?
(क) सात
(ख) आठ
(ग) नौ
(घ) दस
उत्तर :
(ख) आठ।

प्रश्न 77.
रमण जमीन पर किससे गोल-गोल आकार बना रहा था ?
(क) अंगुली से
(ख) लकड़ी से
(ग) लोहे से
(घ) कलम से
उवर :
(क) अंगुली से।

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प्रश्न 78.
मास्टर साहब के हाथ में किस भाषा की पुस्तक थी ?
(क) तमिल
(ख) हिन्दी
(ग) तेलगू
(घ) बंगला
उत्तर :
(ग) तेलगू।

प्रश्न 79.
न जाने वह किस आवेश में था – ‘वह’ से कौन संकेतित है ?
(क) लहना सिंह
(ख) मास्टर साहब
(ग) रंगय्या
(घ) भंबल दा
उत्तर :
(ग) रंगय्या।

प्रश्न 80.
रंगय्या के लड़के का नाम क्या है ?
(क) रजत
(ख) राजन
(ग) रमण
(घ) राम
उत्तर :
(ग) रमण।

प्रश्न 81.
रंगय्या को मामा पुकारनेवाली लड़की का नाम क्या है ?
(क) पोली
(क) गंगा
(ग) नारिगा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) पोली।

प्रश्न 82.
यह धंधा कैसा चल रहा है – कथन किसका है ?
(क) नारिगा
(ख) मास्टर साहब
(ग) पोली
(घ) रंगय्या
उत्तर :
(घ) रंगय्या।

प्रश्न 83.
उठो दादा ! उठो जल्दी !- ‘दादा’ किसे कहा गया है ?
(क) रंगय्या को
(ख) नारिगा को
(ग) मास्टर साहब को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(क) रंगय्या को।

प्रश्न 84.
‘पल्ली’ का अर्थ है ?
(क) पीली वाली
(ख) पाँच सेर
(ग) बस्ती
(घ) घर
उत्तर :
(ग) बस्ती।

प्रश्न 85.
गंगा ने खाने में क्या बनाया था ?
(क) भात-दाल
(ख) रोटी-सब्जी
(ग) बैंगन का सांम्बर और चटनी
(घ) मसाला-दोसा
उत्तर :
(ग) बैंगन का सांम्बर और बटनी।

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प्रश्न 86.
रमण के कंबे पर क्या लटक रहा था ?
(क) चपलों का थैला
(ख) किताबों का बस्ता
(ग) सब्जी का थैला
(घ) मास्टरजी की चप्पलें
उत्तर :
(ख) किताबों का बस्ता।

वस्तुनिष्ठ सह व्याख्यामूलक प्रश्नोत्तर

1. “चलता हैं बेटे।”

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता रंगय्या है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब रंगय्या अपने बेटे रमण के स्कूल में गया था वहाँ मास्टर साहब के द्वारा अपने बेटे की प्रशंसा को सुनकर वह अत्यन्त खुश हुआ और वह अपनेटे से कहा कि चलता हूँ बेटे ।

2. “आप इसको खूब पढ़ाइए साब”‘

प्रश्न :
प्रस्तुत वाक्य किसने किससे कहा ?
उत्तर :
प्रस्तुत वाक्य रंगय्या ने मास्टर साहब से कहा ।

प्रश्न :
प्रस्तुत वाक्य का रचनाकार कौन है ?
उत्तर :
प्रस्तुत वाक्य का रचनाकार कावुदूरि वेंकट नारायणराव हैं।

3. ‘क्या वह दिन मैं देख सकूँगा ?’

प्रश्न :
प्रस्तुत अंश के रचनाकार का नाम लिखिए।
उत्तर :
इसके रचनाकार कावुदूरि वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
अंश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
रंगय्या बेटे रमण के मास्टर साहब से मिलता है तो उनके पैर खूकर प्रणाम करता है। इस पर मास्टर साहब कहते हैं कि रमण पढ़-लिखकर एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा और तुम्हें मोटर में बिठाकर घुमाएगा। मास्टर साहब की इस बात पर वह मास्टर साहब से सवाल करता है कि क्या वह सचमुघ वह दिन देख सकेगा ? ऐसा होना तो उसके लिए एक सपना ही है ।

4. उनका ॠण किसी भी रुप में चुकाया नहीं जा सकता।

प्रश्न :
अंश किस पाठ से उद्धुत है?
उत्तर :
प्रस्तुत अंश ‘चपल’ पाठ से उद्धृत है।

प्रश्न :
अंश में कौन-से ऋण की बात कही गई है ? उसे क्यों नहीं चुकाया जा सकता ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
यहाँ गुरू के क्रण की बात कही गई है । रंगय्या के बेटे रमण के जीवन में मास्टर साहब का प्रवेश वैसे ही हुआ था जैसे चंद्रगुप्त के जीवन में चाणक्य का तथा विवेकानंद के जीवन में रामकृष्ण परमहंस का। मास्टर साहब उच्च जाति के होते हुए भी रमण को खाना देकर अपने यहाँ पढ़ा-लिखा रहे थे । उनकी इस कृपा के लिए रंगय्या के मन में मास्टर साहब के प्रति कृतजता का भाव भरा हुआ था। यह ऐसा क्रण था जिसे रंगय्या किसी भी रुप में नहीं चुका सकता था।

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5. ठीक कराकर जल्दी लाने को कहा है।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता रगय्या का बेटा रमण है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमण अपने मास्टर साहब के चपलों को ठीक कराने के लिए अपने मोची पिता रंगय्या के पास लाया था। मास्टर साहब के पास चपलों की दूसरी जोड़ी नहीं थी इसलिए उन्होने चपलों को जल्दी से ठीक कराकर लाने को कहा था।

6. रंगय्या का मुँह एकदम चमक उठा।
अथवा
7. झुर्रियों की परतें खुल गई।

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचाकार कावुदूरि वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब रंगय्या को यह पता चला की रमण जिन चपलों को मरम्मत कराने के लिए लाया है – वह उसके मास्टर साहब के हैं तो उसका चेहरा खुशी के मारे दमकने लगा। उसे लगा कि इसी बहाने वह मास्टर साहब की कुछ सेवा कर पाएगा।

8. उसे किसी दूसरी दुनिया से कोई वास्ता नहीं।
अथवा
9. संसार बहुत कुछ बदल गया, मगर उसकी जिंदगी में किसी तरह का परिवर्तन नहीं आया।

प्रश्न :
यहाँ किसके बारे में कहा जा रहा है ?
उत्तर :
यहाँ रंगय्या के बारे में कहा जा रहा है।

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प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या को केवल अपने काम से मतलब था। दूसरी दुनिया से उसे कोई लेना-देना नहीं था। दुनिया तेजी से बदल रही थी। लेकिन उसकी जिंदगी पुराने ढरें पर चल रही थी। वह पचास वर्षो से चप्पल मरम्मत करने का वही पेशा करता आ रहा है।

10. अब इतनी जल्दी नहीं हो सकता है।
अथवा
11. शाम तक ….. जो कुछ होगा, मैं कर दूँगा।

प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘चपल’ है तथा इसके रचनाकार कावुदूरि वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमन अपने पिता रंगय्या के पास मास्टर साहब के पुराने चप्पल मरम्मत कराने के लिए लाया था। चप्पलों की हालत बहुत ही बुरी थी। उसके और गत्ते बाहर निकल गए थे तथा सारी सिलाई भी टूट-फूट गई थी। ऐसे चप्पलों की मरम्मत तुरंत नहीं हो सकती थी इसलिए रंगय्या ने कहा कि यह काम इतनी जल्दी नहीं हो सकता है । हो सकता है। वह शाम तक कर देने की कोशिश करेगा।

12. आज के जमाने में हर किसी को पैसे की जरूरत होती है।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘चप्पल’ पाठ से उद्दृत हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या को चण्पलें देकर रमण लौटा नहीं बल्कि वहीं खड़ा रहा। रंगय्या को यह समझतेदेर नहीं लगी कि रमण क्या चाहता है। वह अपनी जेब खर्च के लिए कुछ पैसे चाह रहा था। रंगय्या ने मन ही मन सोचा- यह ठीक ही है तो है। आज के जमाने में हर किसी को पैसे की जरुरत होती है।

13. रंग्य्या कभी भी उसका मन नहीं दुखाता।

प्रश्न :
रंग्या कौन है ?
उत्तर :
रंग्या ‘चप्पल’ कहानी का प्रमुख पात्र है।

प्रश्न :
वह कभी किसका मन नहीं दुखाता और क्यों ?
उत्तर :
रंग्या कभी भी अपने बेटे रमण का दिल नहीं दुखाता। पाँच संतान की मृत्यु के बाद उसके जीवन में रमण आया था। इतना ही नहीं जन्म देने के बाद उसकी माँ भी चल बसी थी। यही रमण उसके जीवन का एक मात्र आधार था इसीलिए वह कभी भी उसका दिल नहीं दुखाता है।

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14. उसका मन एकद्म पिघल गया।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का ‘चमल’ है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
पैसे लेकर जब रमण चला गया तो रंगय्या उसी के बारे में सोचने लगा। उसे इस बात का गर्व महसूस हो रहा था कि रमण पल्ली के अन्य बच्चों की तरह आवारागर्दी न करके पढ़ना-लिखना सीख रहा है। यह सोचकर ही बेटे के प्रति प्रेम के भाव से उसका मन एकदम पिघल गया।

15. बड़ा आदमी बन जाए और कुलवालों में अच्छा नाम कमाए।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता ‘चपल’ कहानी का प्रमुख पात्र रंख्या है।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमण रंगख्या के जीवन का एकमात्र सहारा था। उसकी पली भी रमण को जन्म देकर चल बसी थी। वह दिन रात मेहनत करके एक-एक पैसे जोड़ रहा था तथा रमण के मास्टर साहव के पास जमा कर रहा था ताकि उसकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए। उसका भविष्य संवर जाए। उसकी एकमात्र आकांक्षा थी कि रमण पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने तथा अपने कुलवालों में अच्छा नाम कमाए।

16. उसकी आँखों में उतावलापन दीख रहा था।
अथवा
17. सारी दुनिया उसको पाँच पेसे के रुप में दीखने लगी।
अथवा
18. जाने वह किस लोक में पहुँच जाता है।

प्रश्न :
यहाँ किसके बारे में कहा जा रहा है ?
उत्तर :
यहाँ रंग्या के बेटे रमण के बारे में कहा जा रहा है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या ने रमण को देने के लिए चिल्लरों से पाँच पैसे निकाले। उस पाँच पैसे के सिक्के को वह बड़े ही उतावलेपन से देख रहा था कि कब वह उसके हाथ में आए। इन पाँच पैसों में ही उसे सारी दुनिया नजर आ रही थी। बच्चे का स्वभाव ही ऐसा होता है कि बह थोड़े ही पैसों में अपनी कल्पना लोक में पहुँच जाते हैं। रमण की इस दशा की तुलना ‘ईदगाह’ कहानी के हामिद से की जा सकंती है।

19. ये दोनों इच्छाएँ पूरी हो जाएँगी।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘चमल’ है।

प्रश्न :
इस कथन का प्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
रमण के जाने के बाद रंख्या के मन में यह भाव आया कि वह रमण को पढ़ाने वाले मास्टर साहब को उनकी कृपा के लिए साष्टांग प्रणाम करें। वह स्कूल में रमण को देखे कि वह किस प्रकर पढ़ रहा है। उसने सोचा कि यदि वह स्कूल चला जाए तो उसकी ये दोनों ही इच्छाएँ पूरी हो जाएगी।

20. उनमें कोई खासियत नहीं थी।
अथवा
21. रंगघ्या को बड़े महिमान्वित से लगे।
अथवा
22. एकद्म परम पवित्र।
अथवा
23. उन्हें आँखों से लगाया।
अथवा
24. रंग्या ने सोचा।
अथवा
25. हाँ, इनको ठीक कर दूँगा।
अथवा
26. ऐसा करुँगा कि मास्टर साहब याद रखें।

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प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति के रचनाकार कावुट्रूरी वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
किसमें कोई खासियत नहीं थी ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चणलों में कोई खासियत नहीं थी।

प्रश्न :
रंगय्या को कौन महिमान्वित-से लगे ?
उत्तर :
रंगय्या को मास्टर साहब के चप्पल महिमान्वित से लगे।

प्रश्न :
रंगख्या ने क्या सोचा?
उत्तर :
रंगय्या ने सोचा कि इन चम्पलों को ठीक करना मुश्किल है।

प्रश्न :
वक्ता किसे ठीक करने की बात कर रहा है ?
उत्तर :
वक्ता मास्टर साहब के चप्यलों को ठीक करने की बात कह रहा है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमण मास्टर साहब के जिन चपलों को मरम्मत के लिए अपने पिता के पास लाया था उनकी हालत खस्ता थी। उनमें कोई विशेषता भी नहीं थी फिर भी वे उन्हें महिमा से भरे तथा परम पवित्र लगे। बड़े ही भक्ति-भाव से उसने उन चपलों को अपनी आँखों से लगाया। उसने मन ही मन तय किया की इन चप्पलों की मरम्मत करके ऐसा नया बना दूँगा कि मास्टर साहब भी याद रखेंगे।

27. चिल्लर ही चिल्लर हाथ लगा।
अथवा
28. उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।

प्रश्न :
किसके हाथ चिल्लर ही चिल्लर लगा ?
उत्तर :
रंगय्या के हाथ चिल्लर ही चिल्लर लगा।

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प्रश्न :
किसकी खुशी का ठिकाना न रहा ?
उत्तर :
रंगय्या की खुशी का ठिकाना न रहा।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या ने रमण को देखने के लिए स्कूल जाने के पहले अपनी जेब को टटोला तो उसमें से केवल चिल्लर ही चिल्लर निकले। ये चिल्लर भीउसकी उम्मीद से ज्यादा निकले। पिछले दिन उसने जितना परिश्रम किया था यह उसी का नतीजा था। यह देखकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा कि कुल मिलाकर छ: रू० बीस पैसे थे।

29. अंदर जाने का साहस नहीं रहा।

प्रश्न :
इस पंक्ति के लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर :
इस पंक्ति के लेखक कावुद्रूरि वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
मास्टर साहब को साष्टांग प्रणाम करने तथा बेटे रमण को पढ़ता हुआ देखने की इब्छा से रग्या स्कूल तक पहुँच गया। वहाँ का वातावरण देखकर कुछ समय के लिए तो वह जैसे अपने-आप को ही भूल गया। जब उसकी तंद्रा भंग हुई तब उसने अंदर जाने की सोची लेकिन उसे अंदर जाने का साहस नहीं हो रहा था।

30. कहीं वह ऐसा काम तो नहीं कर रहा है, जो उसे नहीं करना चाहिए?
अथवा
31. उसकी जबान लड़खड़ाने लगी।

प्रश्न :
‘वह’ कौन है ?
उत्तर :
‘वहं’ रंग्या है।

प्रश्न :
किसकी जबान लड़खड़ाने लगी।
उत्तर :
रंग्या की जबान लड़खड़ाने लगी।

प्रश्न :
प्रस्तुत पद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमण के स्कूल जाकर रंख्या को ऐसा लगा कि वह अनपढ़ है तथा पढ़े-लिखे लोगों के बीच कम से कम इस समय तो नहीं आना चाहिए। एक अध्यापक द्वारा आने का मकसद पूछ लिए जाने के बाद वह निरूत्तर ही हो गया कि वह यहाँ क्यों आया है। उसे मन ही मन इस बात का भय होने लगा कि उसने यहाँ आकर गलती की है। वह कहीं ऐसा काम तो नहीं करने जा रहा जो उसे नहीं करना चाहिए।

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32 : रंग्या की खुशी का ठिकाना न रहा।

प्रश्न :
पाठ के रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ के रचनाकार कावुदूरि वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
रंग्या की खुशी का ठिकाना क्यों न रहा ?
उत्तर :
एक अध्यापक के कहने पर जब वह रमण को देखने विद्यालय के अंदर गया तो यह देखकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा कि उसका बेटा भी अन्य बच्चों के साथ बैठकर कुछ याद कर रहा था । मास्टर साहब अपने हाथ में तेलगु की प्रथम पुस्तक लेकर बच्चों से उसे कठठस्थ करवा रहे थे। भले ही उसकी किस्मत में पढ़ना-लिखना नहीं हो लेकिन उसका बेटा तो पढ़-लिख रहा है। यह सब देख व सोचकर ही रंग्या को खुशी का ठिकाना न रहा।

33. मास्टर साहब ने वह किताब दिखा दी।
अथवा
34. क्या यह सच है मास्टर साहब ?
अथवा
35. मैं भी यही चाहता हूँ साब।

प्रश्न :
रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचाकार कावुदूरि वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत पद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
मास्टर साहब ने रंगय्या को रमण की पढ़ाई के बारे में बताते हुए यह कहा कि अब तो रमण ‘बाल-शिक्षा’ भी पढ़ने लगा है। विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने अपने हाथ की वह किताब भी रंगय्या को दिखा दी। लेकिन रंगय्या को अपनी आँखों व अपने कार्यों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उसने फिर मास्टर सहल से कहा कि वह भी यही चाहता है कि उसका रमण पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बने।

36. मास्टर साहब को इस बात की उम्मीद नहीं थी।
अथवा
37. बच्चों को भी वह कुछ अजीब-सा लगा।
अथवा
38. कोई देखेगा तो अच्छा नहीं होगा।

प्रश्न :
रचना तथा रचाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘चणल’ है तथा इसके रचनाकार कावुदूरी वेंकट नारायण राव हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का आशाय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमण के स्कूल में मास्टर साहब से मिलने के बाद कृतज्ञा-धाव से रंग्या ने उनके पाँव पकड़ लिए। यह सब इतना अचानक हुआ कि मास्टर साहब भी कुछ नहीं समझ पाए। यह सब देखकर कुछ अजीब-सा लग रहा था। वे माजरे को समझ नहीं पा रहे थे । तभी मास्टर साहब ने रंग्या को टोकते हुए कहा कि अगर कोई रंगय्या को इस तरह पांवों पर गिरते देखेगा तो लोग इसे अच्छा नहीं समझेंगे।

39. मैं उसे अपना बच्चा समझता हूँ।
अथवा
40. तुम उसकी चिंता न करो।
अथवा
41. उसका सारा भार मुझपर छोड़ दो।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता रमण के मास्टर साहब हैं।

प्रश्न :
वक्ता का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या की बातों से मास्टर साहब को ऐसा लगा कि वह अपने बेटे रमण की पढ़ाई-लिखाई के बारे में चिंतित है। इसीलिए मास्टर साहब ने उसे दिलासा देते हुए कहा कि रमण को अयने बच्चे की तरह मानते हैं। उसका सारा भार उनके ऊपर है। रंगख्या को उसकी चिंता करने की आवश्यता नहीं है।

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42. इसके पहले के दो सौ रुपए हुए ।
अथवा
43 : इस कमाई का क्या करोगे आखिर ?

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता रमण के मास्टर साहब हैं।

प्रश्न :
प्रस्तुत कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या का बेटा रमण मास्टर साहब के पास रहकर ही पढ़ता-लिखता था। वे उसे पुत्र की तरह मानते थे। रंगय्या अपनो कमाई से जो कुछ भी बचा पाता था, वह मास्टर साहब के पास जमा कर देता था ताकि वह रंगय्या की पढ़ाई-लिखाई तथा उसके भविष्य के काम आ सके।

44. जो आप उचित समझें, कीजिएगा !
अथवा
45. मैं क्या जानूँ साहब।

प्रश्न : वक्ता कौन है ?
उत्तर : वक्ता रंगय्या है।

प्रश्न :
कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या अपनी कमाई का बचा हिस्सा रमण के मास्टर साहब के पास जमा कर देता था ताकि वह उसकी पढ़ाई-लिखाई में काम आ सके। थोड़ा-थोड़ा बचत करते हुए उसने मास्टर साहब के पास दो सौ चार रुपये जमा कर लिए थे। समय के हिसाब से यह रकम भी थोड़ी नहीं थी। जब मास्टर साहब ने पूछ्छा कि इतने पैसे जमा करके वह क्या करेगा तो रंगय्या ने सीधेपन से जबाव दिया कि वे इन पैसों को जो उचित समझें करें। वह पढ़ा-लिखा न होने के कारण पैसों के उपयोग के बारे में नहीं बता सकता।

46. फूले अंग वह समा नहीं रहा था।

प्रश्न :
पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
उतर :
यह पंक्ति ‘चप्मल’ पाठ से उद्धित है।

प्रश्न :
कौन फूले अंग नहीं समा रहा था और क्यों?
उत्तर :
रंगय्या फूले अग नहीं समा रहा था क्योंकि उसकी दोनो इच्छाएँ पूरी हो गयी थी। पहली इच्छा यह कि वह मास्टर साहब को साष्टांग प्रणाम करे तथा दूसरी यह कि वह रमण के स्कूल जाकर उसे पढ़ता हुआ देखे। इन दोनों इच्छाओं की पूर्ति हो जाने से उसकी खुशी छलक रही थी।

47. उसे वह एक स्वर्गधाम-सा लगा।

प्रश्न :
‘उसे’ तथा ‘वह’ से कौन संकेतित है?
उत्तर :
‘उसे’ से रंग्या तथा ‘वह’ से रमण का स्कूल संकेतित है।

प्रश्न :
पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या अपने बेटे रमण को पढ़ते देख तथा मास्टर साहब को साष्टांग प्रणाम कर बाहर आया। बाहर आकर वह कुछ देर तक खड़ा होकर स्कूल को निहारता रहा। उसे लगा कि ऐसे पवित्र स्थान में स्थान पाना बड़े ही भाग्य की ज्यात है। विद्यालय उसे स्वर्ग के समान भव्य-सा लग रहा था।

48. उसका बेटा बड़ा भाग्यवान है।
अथवा
49. उसको बड़ी तृप्ति हुई।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘घपल’ है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का भावार्थ लिखिए।
उत्तर :
जब रंग्या ने स्कूल जाकर वहाँ के वातावरण को देखा, बच्चों के बीच अपने बेटे रमण को भी पढ़ते देखा नब उसे लगा कि उसका रमण बड़ा ही भाग्यशाली है जो उसे इतना अच्छा शिक्षा का माहौौल तथा उसे पढ़ानेवाले ऐसे मास्टर साहल मिले। यह सब देखकर उसके मन को बड़ी ही तृप्ति महसूस हुई।

50. क्या मैं भी पढ़ सकता हूँ?
अथवा
51. तो क्या मैं कल से पाटी लाकर यहाँ बैठ सकता हूँ?
अथवा
52. उसके भोलेपन पर अध्यापक को हैंसी आ गई।

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प्रश्न :
रचना तथा रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रथना ‘चण्मल’ है तथा इसके रचनाकार कावुद्रूरि वेंकट नारायणराव हैं।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
रमण के स्कूल पहुँचने पर रंगय्या के मन में एक जिझासा हुई कि कितना अच्छा होता अगर वह भी स्कूल में पढ़ पाता। यह बात उसने वहाँ के एक अध्यापक से पूछ्छी। उसके भोले सवाल पर अध्यापक को हंसी आ गई। उसने कहा कि हाँ वह क्यों नहीं पढ़ सकता।

53. आप जैसे लोगों के पढ़ने-लिखने के लिए वयस्कों की रात्रि-पाठशालाएँ हैं।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता रमण के स्कूल के एक अध्यापक हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब रंगय्या ने स्कृल में अपने पढ़ने के बारे में पूछा तो अध्यापक ने बताया कि उसके जैसे लोगों के लिए सरकार ने रात्रि-पाठशालाएँ खोली है। अगर आप चाहे तो रात में वहाँ जाकर पढ़ सकते हैं। आप कल शाम में मेरे पास आएंगे तो मैं खुद आपके साथ चलकर आपका दाखिला रात्रि-पाठशाला में करा दूँगा।

54. उसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।

प्रश्न :
यह पंक्ति किस पाठ से उद्ध्त है?
उत्तर :
यह पंक्ति ‘चणल’ पाठ से उद्दृत है।

प्रश्न :
संदर्भित पात्र की मनोदशा का वर्णन करें।
उत्तर :
रंगय्या जब रमण के स्कूल से वापस लौट रहा था तब वह काफी खुश था। उसे लग रहा था कि उसके जौवन की सबसे बड़ी इच्छा पूरी होने वाली है। अब वह भी रमण की तरह पढ़-लिख सकेगा तथा अनपढ़ नहीं रही जाएगा।

55. लेकिन इस उम्र में पढ़कर क्या करेगा ?
अथवा
56. सबको पढ़ना-लिखना चाहिए।
अथवा
57. बड़ी उप्र हो गई तो क्या हुआ ?
अथवा
58. तरह-तरह के विचार मन में उठने लगे।

प्रश्न :
यह पंक्ति किस पाठ से उद्धात है ?
उत्तर :
यह पंक्ति ‘चफल’ पाठ से उद्दृत है।

प्रश्न :
वक्ता के कथन का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
रंगय्या ने अध्यापक से रात्रि-पाठशाला के बारे में जानकर यह तो मन बना लिया कि वह भी रात्रि-पाठशाला में पढ़ेगा। लेकिन इस निश्चय के साथ ही तरह-तरह के सवाल भी उसके मन में उठ रहे थे। अंत में वह इस निष्कर्ष पर पहुँघता है कि उम्र के साथ पढ़ाई-लिखाई का कोई संबंध नहीं है। हरेक व्यक्ति को पढ़ना-लिखना चाहिए तभी तो सरकार भी इस दिशा में कार्य कर रही है।

59. यहाँ हर कोई शराब पीता है और गंदा रहता है।
अथवा
60. रंगय्या उन्हीं लोगों में से एक है।
अथवा
61. उनके साथ उठना-बैठना उसको बिल्कुल पसंद् नहीं।

प्रश्न :
पाठ एवं रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘चाल’ है तथा इसके रचनाकार कावुटरि वेकट नारायणराव हैं।

प्रश्न :
कहाँ हर कोई शराब पीता है और गंदा रहता है।
उत्तर :
रंगय्या की पल्ली (बस्ती) में हर कोई शराब पीता है और गदा रहता है।

प्रश्न :
रंगय्या किन लोगों में से एक है।
उत्तर :
रंगख्या बस्ती के लोगों मे से एक है।

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प्रश्न :
किन लोगों के साथ किसे उठना-बैठना बिल्कुल पसंदी नहीं है?
उत्तर :
शराबी तथा गंदे लोगों के साथ रंगय्या को उठना-बैठना बिल्कुल पसंद नहीं है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या जिस पल्ली (बस्ती) में रहता था वहाँ सब निचले तबके के लोग रहते थे। गरोब की जिंदगी जीते हुए भी वे उससे निकलने की नहीं सोचते थे। उस पल्ली के लोग गंदे थे तथा शराब के नशे में चूर रहते थे। हलांकि रंगय्या भी उसी पल्ली में रहता था फिर भी उसे वे लोग पसंद नहीं थे तथा वह उन लोगो के साथ उठना-बैठना पसंद नहीं करता था। ऐसा इसलिए था कि वह अपनी तथा अपने बेटे की जिंदगी को बेहतर बनाना चाहता था।

62. एक ही आकांक्षा उसके शरीर को चलाए जा रही है।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘चपल’ पाठ से उद्धृत है।

प्रश्न :
कौन-सी आकांक्षा किसके शरीर को चलाए जा रही है?
उत्तर :
रंगय्या की उम्म जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है, उसकी शारीरिक शक्ति भी क्षीण होती जा रही है। जीवन में उसकी एक ही आकांक्षा है कि उसका बेटा रमण पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने। सारी बिरादरी में उसका नाम हो। यही आकांक्षा उसके शरीर को चलाए रखने की शक्ति प्रदान करती है।

63. मेरे बच्चे का उद्धार करो।
अथवा
64. उसको खूब पढ़ना-लिखना आ जाए।
अथवा
65. उसको तुम्हारी शरण में ले आऊँगा।
अथवा
66. उसके बाल तुमको अर्पित करूँगा…….. अपने भी।

प्रश्न :
वक्ता कौन है?
उत्तर :
वक्ता रंगय्या है।

प्रश्न :
कौन, किसे, किसकी शरण में ले जाएगा?
उत्तर :
रंग्या अपने बेटे रमण को भगवान वेंकटेश्वर की शरण में ले जाएगा।

प्रश्न :
कौन, किसके बाल किसे अर्पित करेगा? पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगया अपने तथा अपने बेटे रमण के बाल भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित करेगा।
भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर दक्षिण भारत में है। लोग उनके मंदिर में अपनी आवश्यकतानुसर मनौतियाँ मानते हैं। वहाँ की यह परंपरा है कि मनौती पूरी होने के बाद भगवान वेंकटेश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए अपने बाल उन्हें अर्पित करते हैं। रंगय्या की भी जब इच्छा पूरी हो जाएगी तब वह तथा अपने बेटे के बाल भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित करेगा।

67. बच्चे उसी पानी में डुबकी लगा-लगाकर नहा रहे थे।
अथवा
68. औरतें उसी में कपड़े धो रही थीं।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘चण्पल’ पाठ से उद्दृत है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश की व्याख्या करें।
उत्तर :
रंगय्या जिस बस्ती में रहता था उसमें गरीब तथा निचले तबके के लोग रहते थे। गरीबी तथा अशिक्षा के कारण चारों ओर गंदगी ही गंदगी फैली रहती थी। वहाँ पानी की भी सुविधा नहीं थी। एक गंदा नाला बहता था तथा बच्चे उसी में डुबकियाँ लगाकर नहाते-घोते थे। औरतों को भी अपने कपड़े उसी गंदे नाले के पानी से धोना पड़ता था।

69. वह बच्ची चली गई।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘चणल’ है।

प्रश्न :
‘वह बच्ची’ कौन है ?
उत्तर :
रंगय्या की पत्नी रमण के जन्म के साथ ही चल बसी थी। रमण मास्टर साहब के यहाँ रहकर ही पढ़ाई करता था। घर में खाना बनानेवाला कोई न था। पड़ोस की एक मुँहबोली बहन उसका खाना बना दिया करती थी। लेकिन उसबी तबीयत भी खराब हो गई थी। इसलिए उसकी बेटी पोली ने रंगय्या से यह कहा कि ” आज मॉं की तबीयत ठीक नहीं है। आज खाना नहीं बना सकेगी।” — इतना कहकर वह चली गई।

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70. बिल्कुल नया रूप हो गया।
अथवा
71. यह सब करने में एक घंटा लगा।
अथवा
72. उनकी सुन्दरता पर स्वयं मुग्ध हो रहा था।
अथवा
73. यह बात उस गाँव में सबको मालूम है।

प्रश्न :
किसका रूप बिल्कुल नया हो गया ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चप्पलों का रूप बिल्कुल नया हो गया।

प्रश्न :
क्या सब करने में एक घंटा लगा ?
उत्तर :
मास्टर साहब के चपलों को ठीक करने में एक घंटा लगा।

प्रश्न :
मास्टर साहब के चप्पलों की सुंदरता पर कौन मुग्घ हो रहा था?
उत्तर :
मास्टर साहब के चपलों की सुंदरता पर रंग्या मुग्ध हो रहा था।

प्रश्न :
कौन-सी बात गाँव में सबको मालूम है?
उत्तर :
पुराने चफलों की मरम्मत करके उन्हें नया बना देने में रंग्या माहिर है – यह बात गाँव में सबकां मालूम है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रमण ने मास्टर साहब की चप्पलें पिता रंगय्या को मरम्मत करने के लिए दी थी। चपलों की हालत बहुत बुरी थी। रंगय्या ने श्रद्धा-भाव से मास्टर साहब के चापलों की इतनी अच्छो मरम्मत की कि उसका रूप-रंग ही बदल गया। ऐसा लग रहा था मानों वे चप्पलें बिल्कुल नई हो। पुरानी चप्पलों को नया बना देने में रंगय्या का कोई मुकाबला न था और उसकी यह खासियत उसकी पल्ली में सबको मालूम थी।

74. यह थंधा कैसा चल रहा है?

प्रश्न :
रचना व रचनाकार का नाम लिखें।
उत्तर :
रचना ‘चण्पल’ है तथा रचनाकार कावुटूरि वेंकट नारायणराव हैं।

प्रश्न :
पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
जब कभी रंगय्या की मुँहबोली बहन उसके लिए खाना नहीं बना पाती थी तब वह रेलबे प्लेटफार्म वाले होटल में चला जाता था। उस होटल को गंगा नामक औरत चलाती थी। खाना खाने के दौरान रंग्या उसके व्यवसाय के बारे में पूछता है कि उसका धंधा कैसा चल रहा है।

75. रंगय्या का दिल एकदम बैठ गया।

प्रश्न :
पंक्ति के लेखक का नाम लिखें।
उत्तर :
पंक्ति के लेखक कावुदूरि वेंकट नारायणराव हैं।

प्रश्न :
रंगय्या का दिल एकदम क्यों बैठ गया?
उत्तर :
रंगय्या रेलवे प्लेटफार्म वाले होटल में खाना खाकर थका होने के कारण वहीं पीपल के पेड़ के नीचे बेठकर सुस्ताने लगा। थकावट के कारण वह कब सो गया उसे पता ही न चला। उसकी नींद तब खुली जब पल्ली के नारगा नाम के एक आदमी ने उसे झकझोड़ कर उठाया। “उठो दादा! उठो जल्दी! हमारी पल्ली में आग लग गई है आग!” कहकर तेजी से भाग गया। यह सुनते ही मानो रंगय्या का दिल एकदम बैठ गया।

76. तुम जितना पैसा मॉगोगे दे दूँगा।
अथवा
77. तुम पागल तो नहीं हो गए?
अथवा
78. नहीं-नहीं! अब कुछ नहीं हो सकता!
अथवा
79. जाने वह किस आवेश में था।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘चपल’ है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर :
पल्ली में आग लगने की खबर पाकर जब रंगय्या वहाँ पहुँचा तो उसने देखा कि उसकी झोपड़ी चू-धू करके जल रही है। मास्टर साह्य के चयलों की बड़ी मेहनत से उसने मरम्मत की थी। झोपड़ी के अंदर डायरी पर ही उसने उन चषलों को रखा था। अभी झोपड़ी में उसके लिए सबसे मूल्यवान वही वस्तु थी। पास खड़े युवक से उसने उन चपलों को ला देने के बदले में पैसे देने की बात कही। लेकिन युक्क ने इन्कार कर दिया क्योंक आग बहुत तेजी से कैल चुकी थी तथा अब कुछ भी नहीं किया जा सकता था। लेकिन रंग्या था कि किसी भी कीमत पर उन चषलों को बचा लेना चाहता था।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल

80. वहाँ का दृश्य देखकर भय-कम्पित से हो गए।

प्रश्न :
पाठ का नाम लिखें।
उत्तर :
पाठ का नाम ‘चपल’ है।

प्रश्न :
कहाँ का, कौन-सा दृश्य देखकर कौन भय-कम्पित हो गए?
उत्तर :
जलती झोपड़ी से मास्टर साहब के चपलों को निकाल लाने के लिए रंगय्या ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी। वह झोषड़ी में प्रवेश कर गया। दमकलवालों के आग बुझाने के बाद जब लोग उसकी झोपड़ी में घुसे तो वे भय से कांप उठे। अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था । रंग्या का जला हुआ शरीर मुँह के बल जमीन पर पड़ा हुआ था। उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह जल गया था।

81. इस घटना की खबर भी आग की तरह फैल गई।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धुत है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘चमल’ पाठ से उद्धुत है।

प्रश्न :
किस घटना की खबर आग की तरह फैल गई ?
उत्तर :
रंगय्या मास्टर साहब के चपलों को बचाने की कोशिश में बुरी तरह जल गया था। उसके प्राणपखेरू उड़ चुके थ। रंगय्या के आग मे द्ञुलसकर मर जाने को खबर आग की तरह कैल गयी क्योंकि रंगय्या को सब उसके हुनर के कारण जानते-पहचानते थे।

82. तीनेक क्षण बीत गए।
अथवा
83. समय क्षण-क्षण कर जैसे बीतता जा रहा था?

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से ली गई है ?
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘चपल’ पाठ से ली गई है।

प्रश्न :
प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
रंगय्या रमण के स्कूल तो पहुँच गया लेकिन अंदर जा पाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। रमण को पढ़ते हुए देखने की इच्छा क्षण-प्रति-क्षण बढ़ती जा रही थी लेकिन उसके पैर मानो एक एक ही जगह चिपक गए थे। बहुत कोशिश करने के बाद भी वह अंदर जाने का साहस नहीं जुटा था रहा था।

84. एकाएक उसका काम रुक गया।

प्रश्न :
प्रस्तुत पंक्ति किस पाठ से उद्धृत है।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति ‘चणल’ पाठ से उद्दुत है।

प्रश्न :
किसका काम क्यों रूक गया ?
उत्तर :
रंगय्या सिर घुकाकर चण्पल सी रहा था। तभी उसके सामने ‘धड़ाम’ की आवाज के साथ पुराने चण्पल गिरे। इसी से रंग्या का ध्यान भंग हुआ तथा काम करते उसके हाथ रुक गए। देखा तो सामने उसका बेटा रमण था। वही उन चप्पलों को लाया था।

85. ये सब चीजें उसे मुफ्त में दी गई थीं।

प्रश्न :
‘उसे’ से कौन संकेतित है?
उत्तर :
‘उसे’ से रंगय्या का बेटा रमण संकेतित है।

प्रश्न :
उसे कौन-सी चीजें मुफ्त में दी गई थीं और क्यों ?
उत्तर :
रंगय्या के बेटे को तेलुगु की पहली पुस्तक, पाटी, पहाड़े की किताब आदि चीजें मुफ्त दी गई थीं। उसे ये सारी चीजे सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकार की ओर से दी गई थी। इस सर्वशिक्षा अभियान का उंदे्य उन बच्चो को भी स्कूली शिक्षा देना है जो गरीबी के कारण स्कूल नहीं जा सकते।

86. मैं अपना चमड़ा उतार कर चप्यल बना के दूँगा।
अथवा
87. आपका क्रण नहीं चुका सकूँगा साब।

प्रश्न :
वक्ता कौन है ?
उत्तर :
वक्ता ‘चषल’ कहानी का प्रमुख पात्र रंगय्या है।

प्रश्न :
आशय स्पष्ट करें।
उत्तर :
मास्टर साहब रमण को जितना स्नेह देकर तथा उसकी देखभाल करके पढ़ा रहे थे वह रगय्या के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। मास्टर साहब के उपकार का बदला किसी भी रुप में नही चुका सकता था। वह कोई एक मौका चाहता था। जिससे मास्टर साहब का कोई काम करके उनके उपकार का बदला दे सके। चाहे इसके लिए उसे कितना ही बड़ा त्याग क्यों न करना पड़े । इसलिए उसने कहा कि यदि वह अपना चमड़ा उतरवा कर भी उनका चपल बना दे तो भी उनके उपकार का बदला नहीं चुका पाएगा।

WBBSE Class 10 Hindi चप्पल Summary

लेखक – परिचय

कावुदूरि वेकट नारायणराव दक्षिण भारतीय भाषाओं एवं साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक हैं। इन्होने अपने साहित्य में उन लोगों को अपना विषय बनाया है जो समाज के निम्न तबके के हैं लेकिन शिक्षा के सहारे समाज में अपना एक स्थान बनाना चाहते है।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल 1

इनके पात्र जातिवाद, वर्गवाद तथा स्वार्थ से ऊपर उठकर एक उच्च आदर्श की स्थापना करते हैं। ‘चपल’ कहानी भी एक ऐसी ही कहानी है जो शिक्षक के आदर्श, शिष्य की कर्ताव्यपरायणता तथा मानवीयता व सहानुभूति-प्रेम की नीव पर खड़ी है। अपनी इन्हीं साहित्यिक विशेषताओं के कारण नारायणराव आज दक्षिण भारतीय भाषाओं के रचनाकारों में एक उज्ज्वल नक्षत्र की भाँति चमक रहे हैं।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल

शब्दार्थ

पृष्ठ संख्या – 115

  • धड़ाम = गिरने की आवाज।
  • घूरते = गौर से देखते।
  • बस्ता = बैग।
  • पाटी = स्लेट।
  • पहाड़े-किताब = गिनती सिखानेवाली किताब।
  • हुर्रियों = बुढ़ापे के कारण चेहरे पर पड़ी लकीरें।
  • परदादा = दादा के पिता।
  • मर्जी = इच्छा।
  • वास्ता = मतलब, संबंध।
  • पेशा = रोजगार।

पृष्ठ संख्या – 116

  • सन्देह = शक ।
  • खींजते = गुस्साते, झल्लाते ।
  • हामी = स्वीकृति।

पृष्ठ संख्या – 117

  • लोक = दुनिया।
  • कुलवालों = परिवारों, खानदानों।
  • नाम कमाए = प्रसिद्ध हो जाए।
  • खुशनसीबी = अच्छी किस्मत।
  • ॠण = कर्ज।
  • कृतझ्ञता = उपकार, भलाई की भावना।
  • चटसार = छोटे बच्चों की पाठशाला।
  • साष्टांग = लेटकर।
  • बाजू = बगल।
  • सीलोन = श्रीलंका।
  • नाल = अंग्रेजी यू के आकार का लोहा जिसे जूते के नीचे लगाया जाता था ताकि जूते का निचला हिस्सा कम घिसे।
  • मामूली = साधारण।
  • खासियत = विशेषता।
  • महिमान्वित = खूबियों से भरे ।

पृष्ठ संख्या – 118

  • चिल्लर = खुले पैसे ।
  • खपरैली = खपड़े से बनी।
  • चबूतरे = बरामदे।
  • सम्मिलित = मिला हुआ।
  • तमत्रा = इच्छा।
  • कंठस्वर = गले की आवाज।
  • तत्काल = तुरंत।
  • दर्जे = क्लास, वर्ग।
  • बराँडे = बरामदे।
  • बदा = लिखा, तय।
  • कंठस्थ = याद।

पृष्ठ संख्या – 119

  • ॠण = कर्ज।
  • फूले अंग = खुशी के मारे।
  • स्वर्गधाम = स्वर्गलोग।
  • भाग्यवान = भाग्यवाला, किस्मतवाला।

पृष्ठ संख्या – 120

  • तृष्ति = संतुष्टि ।
  • रात्रि-पाठशाला = वह पाठशाला जहाँ दिन में काम करने वाले व्यक्ति को रात में पढ़ाया जाता है।
  • दाखिल = प्रवेश, नाम लिखवाना।
  • पाँव जमीन पर नहीं पड़ना (मुहावरा) = अत्यंत खुश होना।
  • बिरादरी वाले = जातिवाले।
  • अचरज = आश्चर्य।
  • धिएटर = सिनेमा।

पृष्ठ संख्या – 121

  • शहतीर = मोटा तना जो खपरैल मकान में ऊपर छपर के सहारे के लिए लगाया जाता है।
  • इमारत = बड़ा मकान।
  • क्षीण = कमजोर, कम।
  • आकांक्षा = इच्छा।
  • मनौती = मन्नत, कबुला।
  • उद्धार = कल्याण।
  • बाजू = बगल।
  • मुग्ध = खुश, मोहित।

WBBSE Class 10 Hindi Solutions कहानी Chapter 3 चप्पल

पृष्ठ संख्या – 122

  • माहिर = कुशल।
  • अटारी = आला, दीवार में बनी जगह जिसे कोई छोटा सामान रखने के लिए बनाया जाता है।
  • हाँडी = खाना बनाने का बर्तन।
  • साम्बर = एक प्रकार की रसदार सब्जी, जिसे दक्षिण भारत में बड़े चाव से खाया जाता है।
  • चारेक = चार।

पृष्ठ संख्या – 123

  • बनियान = गंजी।
  • पल्ली = झोपड़पट्टी।
  • दिल बैठ जाना = अत्यंत दु:ख होना।
  • ज्वालाएँ = आग की लपटें।
  • आँच = गर्मी।

पृष्ठ संख्या – 124

  • बहुमूल्य = कीमती।
  • बेहतर = अच्छा।
  • दमकल = पानी के टंकीवाली गाड़ी जिससे आग बुझायी जाती है।
  • भय-कम्पित = भय से कांप जाना।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

Students should regularly practice West Bengal Board Class 10 Hindi Book Solutions and व्याकरण कारक to reinforce their learning.

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण कारक

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
‘उपमेय-उपमान’ की प्रधानता किस समास में होती है?
उत्तर :
कर्मधारय समास।

प्रश्न 2.
‘यथानियम’ का समास विग्रह बताएँ।
उत्तर :
नियम के अनुसार (अव्ययीभाव समास)।

प्रश्न 3.
‘दालरोटी’ सामासिक पद का विग्रह करते हुए उसका नाम लिखिए।
उत्तर :
दाल और रोटी – द्वंद्व समास।

प्रश्न 4.
किसी एक सामासिक पद का विग्रह कीजिए और नाम बताइए – चौराहा, पीताम्बर।
उत्तर :
चौराह : चार राहों का समाहार । (द्वंद्व समास)
पीताम्बर : पीत हो अम्बर जिसका । (बहुब्रीही समास)

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 5.
उदाहरण सहित बहुव्रीहि समास की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
जहाँ समस्त पद में आए हुए दोनों पद गौण होते हैं तथा ये दोनों मिलकर किसी तीसरे पद के विषय में संकेत करते हैं तथा यही तीसरा पद प्रधान होता है तो उसे बहुबीहि समास कहते हैं। जैसे –
नीलकंठ – नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिव।
वीणापाणि – वीणा है हाथ (वाणि) में जिसके अर्थात् सरस्वती।

प्रश्न 6.
तत्पुरुष समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिस समास का पहला पद गौण तथा दूसरा पद उसका विशेषण होने के कारण प्रधान होता है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –
शिवालय = शिव का आलय ; जनप्रिय = जन का प्रिय।

प्रश्न 7.
किसी एक सामासिक पद का विग्रह कीजिए और नाम बताइए- अपवित्र, मनोहर ।
उत्तर :
अपवित्र – बिना पवित्र – नज् समास । मनोकर – मन को हरने वाला – तत्पुरुष समास।

प्रश्न 8.
‘समास’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर :
संक्षिप्त करने की रचना विधि या छोटा करने का तरीका।

प्रश्न 9.
कौन-सी विधि समास कहलाती है?
उत्तर :
एक से अधिक शब्दों को मिलाने की संक्षिप्त विधि ही समास कहलाती है।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 10.
समास की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
परस्पर संबंध रखनेवाले दो या दो से अधिक शब्दों के मेल को समास कहते हैं।

प्रश्न 11.
समास-विग्रह किसे कहते हैं?
उत्तर :
जब सामासिक पदों को अलग-अलग किया जाता है तो उसे समास-विग्रह कहते हैं।

प्रश्न 12.
समास के लिए कम से कम कितने पद (शब्द) होने चाहिए?
उत्तर :
समास के लिए कम से कम दो पद होने चाहिए।

प्रश्न 13.
समास के पहले पद को क्या कहते हैं?
उत्तर :
पूर्वपद।

प्रश्न 14.
समास के दूसरे पद को क्या कहते हैं?
उत्तर :
उत्तर पद।

प्रश्न 15.
समास-प्रक्रिया के अंतर्गत कितने प्रकार से शब्दों की रचना हो सकती है?
उत्तर :
तीन प्रकार से –
(क) तत्सम शब्दों के समास से, जैसे – राजा + पुत्र = राजपुत्र
(ख) तद्भव शब्दों के समास से, जैसे – बैल + गाड़ी = बैलगाड़ी
(ग) विदेशी शब्दों के समास से, जैसे – जेब + खर्च = जेबखर्च

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 16.
समस्रोतीय समास किसे कहते हैं?
उत्तर :
जब एक ही स्रोत से आए शब्दों के समास से शब्दों का निर्माण हाता है तो उसे समस्रोतीय समास कहते हैं।

प्रश्न 17.
संकर समास किसे कहते हैं?
उत्तर :
दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने सामासिक पद को संकर समास कहते हैं। जैसे –
योजना (तत्सम) + कमीशन (विदेशी) = योजना कमीशन
डाक (तद्भव) + खाना (विदेशी) = डाकखाना
पॉकेट (विदेशी )+ मार (तद्भव )= पॉकेटमार

प्रश्न 18.
कर्म तत्पुरुष समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ पूर्वपद में कर्म कारक की विभक्ति (को) का लोप हो, वहाँ कर्म तत्युरुष होता है। जैसे – सर्व प्रिय – सर्व को प्रिय ; यशप्राप्त – यश को प्राप्त।

प्रश्न 19.
करण तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ पहले पद में करण कारक की विभक्ति (से, द्वारा) का लोप हो, उसे करण तत्पुरुष समास कहते हैं। भूखमरा – भूख से मरा ; तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत।

प्रश्न 20.
संप्रदान तत्पुरुष समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ पूर्वपद में संप्रदान कारक की विभक्ति (के लिए) का लोप हो, उसे संप्रदान तत्तुरुष समास कहते हैं। जैसे- चिकित्सालय – चिकित्सा के लिए आलय ; विद्यालय – विद्या के लिए आलय।

प्रश्न 21.
अपादान तत्पुरुष समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ समस्त पद के पहले खंड से अपादान कारक (से पृथक) विभक्ति का लोप हो उसे अपादान तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –
पथ भष्ट – पथ से भषष्ट ; देश निकाला – देश से निकाला।

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प्रश्न 22.
संबंध तत्पुरुष समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ समस्त पद के पहले खंड से संबंध कारक की विभक्ति (का, के, कीं) का लोप हो उसे संबंध तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –
समयानुसार – समय के अनुसार ; जीवनसाथी – जीवन के साथी ; प्राणहानि – प्राण की हानि।

प्रश्न 23.
अधिकरण तत्पुरुष समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ समस्त पद के पहले खंड के अधिकरण कारक की विभक्ति (में, पर, पे) का लोप हो उसे अधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –
कर्त्तव्यनिष्ठा – कर्त्तव्य में निष्ठा ; रथासीन – रथ पर आसीन।

प्रश्न 24.
नञ समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिस समस्त पद का पहला पद अभावात्मक (न का अर्थ देने वाला) हो उसे नज समास कहते हैं। जैसे असंभव – न संभव ; अनीति – न नीति ; नास्तिक – न आस्तिक।

प्रश्न 25.
कर्मधारय समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ पूर्वपद ‘विशेषण’ और उत्तरपद ‘विशेष्य’ या ‘उपमेय’- उपमान होता है उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे –
महावीर – महान है जो वीर ; अधपक – आधा है जो पका । – विशेषण-विशेष्य
नरसिंह – सिंह रूपी नर ; कनकलता – कनक (सोना) के समान लता। – उपमेय-उपमान

प्रश्न 26.
द्विगु समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ समस्त पद का पहला पद संख्यावाचक अथवा परिमाणवापक विशेषण होता है उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे त्रिफला – तीन फलों का समाहार ; सप्ताह – सात दिनों का समाहार।

प्रश्न 27.
कर्मधारय तथा बहुब्रीहि समास में सोदाहरण अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर : कर्मधारय समास में दूसरा पद प्रधान होता है जबकि बहुबीहि में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं। जैसे –
पीतांबर :
– पीत है जो अंबर – कर्मधारय समास।
– पीला है जिसका अंबर – बहुबीहि समास। अर्थात् कृष्ण

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 28.
दूंद्व समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिस समास के दोनों पद प्रधान हों तथा विप्रह करने पर ‘और’ या ‘एवं’ शब्द लगाना पड़ता है उसे द्वंद्ध समास कहते हैं। जैसे –
अपना – पराया = अपना और पराया।
अमीर – गरीब = अमीर एवं गरीब।

प्रश्न 29.
कर्मधारय समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जहाँ पूर्वपद ‘विशेषण’ और उत्तरपद ‘विशेष्य’ या ‘उपमेय’- उपमान होता है उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे –
महावीर – महान है जो वीर ; अधपक – आधा है जो पका । – विशेषण-विशेष्य
नरसिंह – सिंह रूपी नर ; कनकलता – कनक (सोना) के समान लता। – उपमेय-उपमान

प्रश्न 30.
अव्ययीभाव समास की परिभाषा सोदाहरण लिखें।
उत्तर :
जिस समास का पहला पद अव्यय हो तो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। इसका पहला पद प्रधान होता है। जैसे – आजन्म – जन्म से लेकर ; प्रतिवर्ष – प्रत्येक वर्ष।

प्रश्न 31.
अव्यय किसे कहते हैं?
उत्तर :
वैसे शब्द जिनका स्वरूप किसी भी लिंग-वचन या काल में प्रयोग करने पर बदलता नहीं है उसे अव्यय कहते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
दो पदों के मेल को कहते हैं?
(क) वाक्य
(ख) वाच्य
(ग) समास
(घ) कारक
उत्तर :
(ग) समास

प्रश्न 2.
नया-पुराना कौन-से समास का विग्रह है?
(क) नया है पुराना
(ख) नया या पुराना
(ग) नया और पुराना
(घ) नया से पुराना
उत्तर :
(ग) नया और पुराना

प्रश्न 3.
‘श्रमजीवी’ सामासिक पद का समास विग्रह कौन-सा होगा?
(क) श्रम पर जीनेवाला
(ख) श्रम के लिए जीनेवाला
(ग) श्रम को जीनेवाला
(घ) श्रम से जीनेवाला
उत्तर :
(क) श्रम पर जीनेवाला

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 4.
समास के भेद हैं –
(क) 2
(ख) 4
(ग) 6
(घ) 8
उत्तर :
(ग) 6

प्रश्न 5.
धीरे-धीरे समास है –
(क) द्वन्द्व
(ख) द्विगु
(ग) अव्ययीभाव
(घ) बहुव्रीहि
उत्तर :
(ग) अव्ययीभाव

प्रश्न 6.
‘राजा का पुत्र’ – समस्त पद है –
(क) राजा पुत्र
(ख) राज्य पुत्र
(ग) राजुपुत्र
(घ) राम पुत्र
उत्तर :
(ग) राजपुत्र

प्रश्न 7.
‘महादेव’ शब्द किस समास का उदाहरण है ?
(क) बहुबीहि
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) तत्पुरुष
उत्तर :
(क) बहुबीहि, (ग) कर्मधारय

प्रश्न 8.
अव्ययीभाव समास का उदाहरण है ?
(क) लवकुश
(ख) भरपेट
(ग) त्रिभुवन
(घ) छत्रधारी
उत्तर :
(ख) भरपेट

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 9.
दो पदों के मेल को कहते हैं –
(क) प्रत्यय
(ख) समास
(ग) संधि
(घ) उपसर्ग
उत्तर :
(ख) समास

प्रश्न 10.
‘प्रतिमाह’ में कौन-सा समास है –
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्विन्द्व
(ग) द्विगु
(घ) कर्मधारय
उत्तर :
(क) अव्ययीभाव

प्रश्न 11.
‘चुन-चुन’ शब्द में कौन-सा समास है ?
(क) बहुब्रीहि
(ख) कर्मधारय
(ग) द्वन्द्व
(घ) अव्ययीभाव
उत्तर :
(ग) द्वन्द्ध

प्रश्न 12.
अंशुमाली सामासिक पद में समास है –
(क) तत्पुरुष
(ख) द्विगु
(ग) बहुब्रीहि
(घ) द्वन्द्व
उत्तर :
(ग) बहुबीहि

प्रश्न 13.
किसमें द्विगु समास नहीं है?
(क) दो तरफा
(ख) तीन-तीन
(ग) चौरास्ता
(घ) पंचमेल
उत्तर :
(ख) तीन-तीन

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 14.
‘नीलकंठ’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्विगु
(ग) द्वन्द्व
(घ) तत्पुरुष
उत्तर :
(क) बहुवीहि

प्रश्न 15.
‘चद्रशेखर’ में कौन-सा समास है ?
(क) द्वन्द्व
(ख) कर्मधारय
(ग) बहुबीहि
(घ) तत्पुरुष
उत्तर :
(ग) बहुब्रीहि

प्रश्न 16.
‘विद्याघर’ – समास विग्रह :
(क) विद्या का घर
(ख) विद्या और घर
(ग) विद्या के लिए घर
(घ) विद्या ही है घर
उत्तर :
(ग) विद्या के लिए घर

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में अव्ययीभाव समास का उदाहरण नहीं है –
(क) यथारुप
(ख) रातोरात
(ग) हमसफर
(घ) गंगाजल
उत्तर :
(घ) गंगाजल।

प्रश्न 18.
किसमें सही सामासिक पद है –
(क) पुष्पधन्वी
(ख) दिवारात्रि
(ग) त्रिलोकी
(घ) मंत्रिपरिषद
उत्तर :
(ख) दिवारात्रि।

WBBSE Class 10 Hindi व्याकरण समास

प्रश्न 19.
‘समास’ शब्द का अर्थ है –
(क) संक्षेप
(ख) व्यास
(ग) टिप्पणी
(घ) सार
उत्तर :
(क) संक्षेप।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित शब्दों में से द्नन्द्ध समास किस शब्द में है –
(क) पाप-पुण्य
(ख) धड़ाधड़
(ग) कलाप्रवीण
(घ) त्रिभुवन
उत्तर :
(क) पाप-पुण्य।

प्रश्न 21.
जिस समास का उत्तर पद प्रधान हो, कहलाता है –
(क) तत्पुरुष
(ख) द्वंद्ध
(ग) द्विगु
(घ) बहुबीहि
उत्तर :
(क) तत्पुरुष।

प्रश्न 22.
‘गगनचुम्बी’ में कौन-सा समास है –
(क) कर्मधारय
(ख) तत्पुरुष
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु
उत्तर :
(क) कर्मधारय।

प्रश्न 23.
‘रंग भरी’ में कौन समास है –
(क) तत्पुरुष
(ख) कर्मधारय
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु
उत्तर :
(क) तत्पुरुष।

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प्रश्न 24.
किस समास को दो पद मिलकर अन्य अर्थ का बोध कराते हैं ?
(क) तत्पुरुष
(ख) कर्मधारय
(ग) बहुब्रीहि
(घ) द्वंद्व
उत्तर :
(ग) बहुब्रीहि।

प्रश्न 25.
किस समास का दोनों पद प्रधान होता है –
(क) कर्मधारय
(ख) द्वंद्व
(ग) द्विगु
(घ) अव्ययीभाव
उत्तर :
(ख) द्वंद्व।

प्रश्न 26.
किस समास का कारक चिह्नों के आधार पर विग्रह करते हैं –
(क) द्वंद्व
(ख) तत्पुरुष
(ग) कर्मधारय
(घ) बहुब्वीहि
उत्तर :
(ख) तत्पुरुष।

प्रश्न 27.
किस समास का पूर्व पद संख्यावाचक होता है –
(क) द्वंद्व
(ख) द्विगु
(ग) अव्ययीभाव
(घ) कर्मधारय
उत्तर :
(ख) द्विगु।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से द्विगु समास का उदाहरण कौन है –
(क) अनन्य
(ख) दिन-रात
(ग) चतुरानन
(घ) त्रिभुवन
उत्तर :
(घ) त्रिभुवन।

प्रश्न 29.
‘परमेश्वर’ शब्द किस समास का उदाहरण है –
(क) द्विगु
(ख) कर्मधारय
(ग) तत्पुरुष
(घ) अव्ययीभाव
उत्तर :
(ख) कर्मधारय।

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प्रश्न 30.
‘नवरल’ में कौन-सा समास है –
(क) द्विगु
(ख) द्वंद्ध
(ग) कर्मधारय
(घ) बहुबीहि
उत्तर :
(क) द्विगु।

प्रश्न 31.
‘चरणकमल’ में कौन-सा समास है –
(क) द्वंद्व
(ख) द्विगु
(ग) कर्मधारय
(घ) अव्ययीभाव
उत्तर :
(ग) कर्मधारय।

प्रश्न 32.
‘धनहीन’ में कौन-सा समास है –
(क) द्विगु
(ख) अव्ययीभाव
(ग) तत्पुरुष
(घ) कर्मधारय
उत्तर :
(ग) तत्पुरुष।

प्रश्न 33.
‘चतुरानन’ में कौन-सा समास है –
(क) कर्मधारय
(ख) बहुब्रीहि
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु
उत्तर :
(ख) बहुबीहि।

प्रश्न 34.
‘बेकाम’ में कौन-सा समास है –
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्वंद्व
(ग) द्विगु
(घ) कर्मधारय
उत्तर :
(क) अव्ययीभाव।

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प्रश्न 35.
‘गगनचुम्बी’ शब्द किस समास का उदाहरण है –
(क) बहुबीहि
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्विगु
(घ) कर्मधारय
उत्तर :
(ख) अव्ययीभाव।

प्रश्न 36.
‘लम्बोदर’ शब्द किस समास का उदाहरण है –
(क) द्वंद्व:
(ख) द्विगु
(ग) बहुब्रीहि
(घ) कर्मधारय
उत्तर :
(ग) बहुबीहि ।

प्रश्न 37.
दो या दो से अधिक शब्द अपने प्रत्ययों को छोड़कर मिलते हैं तब क्या कहलाते हैं –
(क) संधि
(ख) समास
(ग) उपसर्ग
(घ) प्रत्यय
उत्तर :
(ख) समास।

प्रश्न 38.
समास से भाषा में आती है –
(क) फैलाव
(ख) संक्षिप्ता
(ग) प्रमाणिकता
(घ) अप्राणिकता
उत्तर :
(ख) संक्षिप्ता।

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प्रश्न 39.
कर्मधारय को किस समास का भेद माना जाता है –
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) तत्पुरुष
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) तत्पुरुष।

प्रश्न 40.
न व्यय होने वाले शब्द कहलाते है –
(क) अव्यय
(ख) निपात
(ग) क्रिया
(घ) समास
उत्तर :
(क) अव्यय।

प्रश्न 41.
‘प्रतिदिन’ में कौन-सा समास है –
(क) अव्ययीभाव समास
(ख) द्वंद्व समास
(ग) द्विगु समास
(घ) कर्मधारय समास
उत्तर :
(क) अव्ययीभाव समास।

पाठ्य पुस्तक पर आधारित व्याकरण :

रैदास के पद

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आत्मत्राण

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नीड़ का निर्माण फिर-फिर

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मनुष्य और सर्प

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रामदास

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नौरंगिया

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देश-प्रेम

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धूमकेतु

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नौबतखाने में इबादत

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उसने कहा था

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नन्हा संगीतकार

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चप्पल

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नमक

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धावक

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दीपदान

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