WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 5 मेघ – वर्षा

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WBBSE Class 8 Geography Chapter 5 Question Answer – मेघ – वर्षा

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
कैसे बादल से वर्षा होती है ?
उत्तर :
वर्षी बादल (Nimbus clouds )

प्रश्न 2.
वर्षा को किस यंत्र से मापा जाता है ?
उत्तर-
रेनगेज या वर्षा मापी यंत्र ।

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प्रश्न 3.
समान वर्षा वाले स्थान को जिस रेखा से मिलाते हैं उसका नाम बताओ ।
उत्तर :
समवर्षी रेखा ।

प्रश्न 4.
भूमध्य रेखीय क्षेत्र में किस तरह की वर्षा होती है ?
उत्तर :
संवाहनीक वर्षा ।

प्रश्न 5.
भारत में स्थित एक वृष्टि छाया प्रदेश का नाम बताओ ।
उत्तर :
पूना !

प्रश्न 6.
सबसे अधिक ऊँचाई पर किस तरह का बादल पाया जाता है ?
उत्तर :
सिरास (Cirrus Clouds) या पक्षाभ मेघ

प्रश्न 7.
बज्र बादल किसे कहा जाता है ?
उत्तर :
क्यूमलोनिम्बास |

प्रश्न 8.
जिस तापमान पर वायु संपृक्त होती है उसे क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
सम्पृक्त बिन्दू (Point of saturation)

प्रश्न 9.
भारत में सन् 2008 में पूर्वी तट पर कौन सा तूफान आया था ?
उत्तर :
आइला ।

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प्रश्न 10.
सन् 2013 में भारत के पूर्वी तट पर आने वाले तूफान का क्या नाम है ?
उत्तर :
फाइलेन ।

प्रश्न 11.
कैरेबियन सागर में आने वाले चक्रबाती तूफान का नाम बताओ ।
उत्तर :
हरिकेन ।

प्रश्न 12.
पूर्वी चीन सागर के चक्रवातीय तूफान का क्या नाम है ?
उत्तर :
टाइफून ।

प्रश्न 13.
स्तरीय मेघ की ऊँचाई बताओ।
उत्तर :
लगभग 2000 मीटर ।

प्रश्न 14.
आकाश में किन मेघों की आकृति लहरों के समान लगती है ?
उत्तर :
अल्ट्रोक्यूमूलस या कपासी मध्य मेघ की।

प्रश्न 15.
पहाड़ों की ऊँचाई पर किन मेघों के एकत्रित रहने से विमान चालकों एवं पर्वतारोहियों को असुविधा होती है ?
उत्तर :
स्टेटस या स्तरी मेघ के एकत्रित होने से।

प्रश्न 16.
किन मेघों से वज्रपात के साथ भीषण तूफानी वर्षा होती है ?
उत्तर :
क्यूमूलोनिम्बस या कपासी वर्षी मेघ से।

प्रश्न 17.
जलवाष्प युक्त गर्म वायु कब ठंडी होने लगती है ?
उत्तर :
ऊपर उठकर ठंडी वायु के सम्पर्क में आकर ।

प्रश्न 18.
किन क्षेत्रों में सम्पूर्ण वर्ष भर सूर्य किरणें लम्बवत् पड़ती हैं?
उत्तर :
भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में.

प्रश्न 19.
पश्चिमी घाट का कौन ढाल वृष्टिछआया प्रदेश के अन्तर्गत आता है ?
उत्तर :
पूर्वी ढाल

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प्रश्न 20.
मौसमी वायु की किस शाखा के प्रभाव से चेरापूँजी में वर्षा होती है ?
उत्तर :
बंगाल की खाड़ी की शाखा से ।

प्रश्न 21.
उष्ण चक्रवात कहाँ अधिक शक्तिशाली होते हैं?
उत्तर :
जलीय भाग के ऊपर ।

प्रश्न 22.
जिन देशों में मानसूनी वायु प्रवाहित होती है, वहाँ किन ऋतुओं में चक्रवातीय वर्षा होती है ?
उत्तर :
शरद एवं हेमन्त ऋतुओं में ।

प्रश्न 23.
मध्य अक्षांशीय देशों में शीतऋतु में किस प्रकार की वर्षा होती है ?
उत्तर :
चक्रवातीय वर्षा ।

प्रश्न 24.
पश्चिम बंगाल में ओलावृष्टि किन ऋतुओं में होती या देखी जाती है ?
उत्तर :
बसंत एवं ग्रीष्म ऋतुओं में ।

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प्रश्न 25.
शरद ऋतु में पश्चिम बंगाल में आने वाले चक्रवातीय तूफानों को क्या कहते हैं?
उत्तर :
अश्विन झड़ एवं काल बैशाखी

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
बादल क्या है ?
उत्तर :
बादल (Clouds ) – संघनन के कारण ऊँचाई पर जलवाष्प जलकणों या हिम- कणों के रूप में बदल जाती है। वायु में ऊँचाई में तैरने वाले जलकणो या हिमकणों के समूह को बादल कहते हैं ।

प्रश्न 2.
संघनन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जलवाष्प के जल (द्रव) अथवा हिम (ठोस) कणों के रूप में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

प्रश्न 3.
वाष्पीकरण क्या है ?
उत्तर :
जल के द्रव अवस्था से गैस अवस्था में बदलने की क्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।

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प्रश्न 4.
ओसांक बिन्दु किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वह तापक्रम जिस पर कोई वायु संतृप्त हो जाती है उसे संतृप्त बिन्दु या ओसांक बिन्दु कहते हैं।

प्रश्न 5.
संतृप्त वायु किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी निश्चित तापक्रम पर वायु जब अपनी पूर्ण सामर्थ्य भर जलवाष्प ग्रहण कर लेती है तब उसे संतृप्त वायु (Saturated Air) कहते हैं ।

प्रश्न 6.
वर्षा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वायु में विद्यमान जलवाष्प ठण्डा होकर तथा धूल कणों की सहायता से घनीभूत होकर जलकणों के रूप में बदल जाता है। ये आपस में मिलकर इतने बड़े हो जाते हैं कि वायु उन्हें संभाल नहीं सकती और वे जलकण या हिमकण के रूप में तीव्र गति से धरातल पर गिरने लगते हैं। उसे वर्षा कहते हैं ।

प्रश्न 7.
कुहासा किसे कहते हैं?
उत्तर :
कुहासा (Fog) – पृथ्वी के तल के निकट मिलने वाले जलकणों के समुद्र को कुहासा कहते हैं। वास्तव में बहुत ही कम ऊँचाई पर मिलने वाले बादल को कुहासा कहते हैं। इनसे दृश्यता घट जाती है और अंधेरा छा जाता है। इसे वर्षा नहीं होती है ।

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प्रश्न 8.
वायु का शिशिरांक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जिस तापक्रम में वायु संपृक्त हो जाते हैं उस तापक्रम को वायु का शिशिरांक कहते हैं।

प्रश्न 9.
अधिक ऊँचाई वाले मेघों की औसत निम्नतम ऊँचाई कितनी है ? ?
उत्तर :
20000 फुट लगभग ।

प्रश्न 10.
वाष्प किसे कहते हैं?
उत्तर :
सूर्य के ताप से समुद्र, नदी, तालाब इत्यादि का जल गर्म हो कर वाष्प में परिवर्तित होता है ।

प्रश्न 11.
शरद ऋतु में पश्चिम बंगाल में जो तूफान आता है उसका नाम क्या है ?
उत्तर :
आइला और फाइलेन

प्रश्न 12.
संतृप्त वायु (Saturated air) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
निश्चित तापमान पर निश्चित परिमाण वाली कोई वायु, यदि अपने में इतना जलवाष्प धारण किए हुए है, जितनी उसकी क्षमता है तो उस वायु को संतृप्त वायु कहा जाता है। संतृप्त वायु की आपेक्षिक आर्द्रता 100 प्रतिशत होती है।

प्रश्न 13.
वर्षण या अध: पतन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वर्षण या आर्द्रता का अध: पतन (Precipitation) :- निरन्तर संघनन होने से वायु में विद्यमान जलकण या हिम-कण आपस में मिलकर इतने बड़े हो जाते हैं कि वायु उन्हें सम्भाल नहीं पाती और वे जल की बूँदों या हिम- कणों के रूप में तीव्र गति से पृथ्वी पर गिरने लगते हैं। वायु में विद्यमान जलवाष्प के घनीभूत होकर जल की बूँदों या हिम-कणों के रूप में धरातल पर गिरने की क्रिया को वर्षण (Precipitation) या आर्द्रता का अध: पतन (Throwing down of Moisture) कहते हैं ।

प्रश्न 14.
सापेक्ष आर्द्रता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
सापेक्ष आर्द्रता किसी निश्चित तापक्रम पर किसी निश्चित वायु में विद्यमान जलवाष्प तथा उसके वाष्प ग्रहण करने की सामर्थ्य के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहते हैं । अर्थात् सापेक्ष आर्द्रता = निरपेक्ष आर्द्रता / वाष्प ग्रहण करने की सामर्थ्य । इसे प्रतिशत में भी व्यक्ति किया जा सकता है।
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उदाहरण के लिए 22°C तापक्रम पर यदि किसी वायु में 20 ग्राम जलवाष्प धारण करने की क्षमता है और उसमें 15
ग्राम जलवाष्प विद्यमान है, तो उस वायु की सापेक्षिक आर्द्रता
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प्रश्न 15.
आपेक्षिक आर्द्रता और तापमान के बीच क्या सम्बन्ध है?
उत्तर :
तापमान एवं वायु की आर्द्रता सामर्थ्य में सीधा सम्बन्ध होने के कारण तापमान एवं आपेक्षिक आर्द्रता में विपरीत. सम्बन्ध होता है अर्थात् यदि वायु का तापमान बढ़ जाता है तो उसकी जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता भी बढ़ जाती है, जिससे आपेक्षिक, आर्द्रता कम हो जाती है। इसके विपरीत यदि वायु का तापमान घट जाता है तो उसकी जलवाष्प ग्रहण करने की क्षमता भी कम हो जाती है जिससे वायु की सापेक्षिक आर्द्रता बढ़ जाती है।

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प्रश्न 16.
वृष्टि छाया प्रदेश से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
वृष्टि – छाया प्रदेश (Rain Shadw Region) :- भाप भरी हवा किसी पर्वत से टकराकर पवनाभिमुख ढाल . पर तो खूब वर्षा करती है। परन्तु ये हवा जब पर्वत के पवनविमुख ढाल वर्षा से वंचित रह जाते हैं। इस भाग को वृष्टिछाया प्रदेश कहते हैं। उदाहरण के लिए अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएँ पश्चिमी घाट पर्वत में टकराकर भारत के पश्चिमी तटीय मैदान में तो खूब वर्षा करती हैं, परन्तु पश्चिमी घाट पर्वत के पूर्व में स्थित भाग वृष्टि – छाया प्रदेश में पड़ जाता है जिससे नागपुर, पूना तथा बंगलोर में बहुत कम वर्षा हो पाती है।

प्रश्न 17.
मुम्बई की तुलना में पुणे में वर्षा कम क्यों होती है?
उत्तर :
मुम्बई पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल की ओर स्थित है। पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल अरब सागर की ओर से आने वाली आर्द्र मानसूनी हवाओं के मार्ग में सम्मुख स्थित है अत: ये हवाएँ इस ढाल से टकराकर ऊपर उठकर मुम्बई में प्रचुर वर्षा करती हैं। इसके विपरीत पुणे पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल की ओर स्थित है, जहाँ वर्षा बहुत कम होती है । इसीलिए मुम्बई की तुलना में पुणे में कम वर्षा रेकार्ड की जाती है।

प्रश्न 18.
‘चक्रवात की आँख’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
उष्ण चक्रवातों के केन्द्रीय भाग को ‘चक्रवात की आँख’ कहते हैं। इस केन्द्रीय भाग पर वायुदबाव सबसे कम रहता है तथा आकाश स्वच्छ एवं मौसम शांत रहता है।

प्रश्न 19.
रेनगेज या वर्षामापी यन्त्र क्या है?
उत्तर :
जिस यन्त्र की सहायता से वर्षा की मात्रा या परिमाण ज्ञात किया जाता है उसे रेनगेज (Raingauge ) या वर्षामापी यन्त्र कहते हैं । इस यन्त्र को किसी खुले स्थान पर इस तरह रखा जाता है कि वर्षा की बूँदें ठीक यन्त्र के भीतर प्रवेश करें। जिन स्थानों पर वर्षा न होकर हिमपात होता है, वहाँ बर्फ को गलाकर जल में परिवर्तित करके उसका परिमाप ज्ञात किया जाता है। है

प्रश्न 20.
समवर्षा रेखा (Isohyet) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी पर समान औसत वर्षा प्राप्त करने वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को समवर्षा रेखा (Isohyet) कहते हैं ।

विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
वर्षा मापी यंत्र या रेनगेज किसे कहते हैं?
उत्तर :
वर्षा की माप वर्षामापी यन्त्र या रेनगेज (Rain gauge) द्वारा मिलीमीटर या सेन्टीमीटर में की जाती है। इस यन्त्र में शीशे का एक बोतल होता है। बोतल के मुँह पर एक किप लगी होती है। कीप सहित बोतल को एक धातु के बड़े बर्तन में रखा जाता है। कीप का व्यास बोतल के पंदे के व्यास के बराबर होता है। इस यंत्र को खुले स्थान पर कुछ ऊँचाई पर रख देते हैं। इसमें वर्षा का जल इकट्ठा होता है। इस जल को नपना गिलास में गिराकर वर्षा की माप कर लेते हैं।

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प्रश्न 2.
संवाहनिक वर्षा किसे कहते हैं?
उत्तर :
संवाहनिक वर्षा (Convectional Rainfall) – पथथ्वी पर जिन अंचलों या क्षेत्रों में वर्ष भर सूर्य की किरणें लम्बवत् पड़ती है उस स्थान पर अधिक गर्मी पड़ती है जिससे गर्म धरातल के सम्पर्क से नीचे की वायु गर्म होकर फैलती है तथा हल्की होकर ऊपर उठती है। इस खाली स्थान को भरने के लिए आसपास की ठण्डी हवाएँ आती हैं। लेकिन वह भी गर्म होकर ऊपर उठ जाती है। इस प्रकार वायु में संवहन धारायें उत्पन्न हो जाते हैं।

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अधिक ऊँचाई पर जाने पर यही भाप भरी हवाएँ ठण्डी होकर संतृप्त हो जाती है और बाद में संघनित होकर वर्षा करती है। वायु में संवहन धाराओं के उत्पन्न होने से होने वाली वर्षा को संवाहनिक वर्षा कहते हैं। ऐसी वर्षा मुख्य रूप से भूमध्य रेखीय प्रदेश में प्रतिदिन दिन के तीसरे पहर बादलों की गरज तथा बिजली की चमक के साथ मूलसाधार वर्षा होती है।

प्रश्न 3.
संवाहनिक वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों के बारे में लिखें।
उत्तर :
ऐसी वर्षा मुख्य रूप से भू-मध्यरेखीय प्रदेशों में होती है। साथ ही जल भाग अधिक होने के कारण यहाँ जलवाष्प अधिक पाया जाता है। जल वाष्प युक्त उष्ण वायु हल्की होकर ऊपर उठ जाती है और ठंडी होकर संवाहनिक वर्षा के रूप में बरसती है।

  • शीतोष्ण क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु के आरम्भ में यह वर्षा होती है।
  • उष्ण क्षेत्रों में जहाँ मौसमी वायु का प्रभाव है जैसे – भारत, बांग्लादेश, वियतनाम एवं म्यांमार में साधारण मौसमी वायु के आने के पहले एवं शरदकाल में संवाहनिक वर्षा होती है।

प्रश्न 4.
पर्वतीय वर्षा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पर्वतीय या धरातलीय वर्षा (Mountain or Orographic or Relief Rainfall)- समुद्र से आने वाली भाप भरी हवाओं के मार्ग में जब कोई ऊँचा पर्वत आ जाता है तो हवा को बाध्य होकर ऊपर उठना पड़ता है। पर्वत के जिस ढाल से हवा ऊपर चढ़ती है उसे पवनाभिमुख ढाल (Wind-ward Slope) कहते हैं तथा उसके विपरीत ढाल को पवनविमुख ढाल (Leeward slope) कहते हैं।

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ऊपर उठने के कारण यह वायु ठण्डी होकर संतृप्त होने लगती है। फलस्वरूप उनका जलवाष्प घनीभत होकर बादलों के रूप में बदल जाता है। इस प्रकार यह भाप भरी वायु पवनाविमुख ढाल पर वर्षा करती है। इसे पर्वतीय या धरातलीय वर्षा कहते हैं। पर्वतीय वर्षा का अच्छा उदाहरण भारत का पश्चिम तटीय मैदान है।

प्रश्न 5.
अधःपतन के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करो।
उत्तर :
बहुत छोटे-छोटे जलकणों ( 0.5 मिमी०) से धरातल पर फब्वारे की तरह वर्षा होती है। इस तरह होने वाली वर्षा को फब्बारी वर्षा कहते हैं। अनेक बार ऐसी वर्षा के साथ बहती हुई वायु को देखकर ऐसा लगता है जैसे छोटे-छोटे जलकण वायु में तैर रहे हैं। जलकणों एवं तुषार कणों के अधिक मिश्रित रूप को स्लिट कहते हैं। ऊर्ध्वमुखी वायु प्रवाह के कारण जलकण अनेक बार अधिक ऊँचाई तक पहुँच जाते हैं।

जहाँ पहुँचकर ये जलकण तेजी से ठंडा होकर छोटे-छोटे बर्फ के टुकड़ों में बदल जाते हैं। इस बर्फ के टुकड़ों के साथ अतिरिक्त जलकणों के मिश्रण से बर्फ के टुकड़े जलकणों के साथ धरातल पर गिरने लगते हैं। इसी को ओला वृष्टि कहते हैं। ओला वृष्टि से घर, मकान तथा फसलों को हानि पहुँचती है।

शीत प्रधान देशों में जलवाष्प युक्त वायु हिमांक से भी कम तापक्रमो में घनीभूत होने लगता है। वहां ये जलकण छोटेछोटे बर्फ के टुकड़ों में परिवर्तित हो जाते हैं। पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण ये तुषार धरातल पर गिरने लगते हैं, जिसे तुषारपात कहते हैं।

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प्रश्न 6.
चक्रवातीय वर्षा किसे कहते हैं?
उत्तर :
चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic Rainfall) – गर्म व नम वायु हल्की होती है जबकि ठण्डी शुष्क वायु भारी होती है। जब गर्म व नम वायु ठण्डी व शुष्क वायु से टकराती है। तो ठण्डी व शुष्क वायु भारी होने के कारण नीचे बैठ जाती है और वह गर्म व नम वायु को ऊपर धकेल देती है। ऊपर जाकर यह वायु ठण्डी होकर वर्षा करती है। इसे चक्रवातीय वर्षा कहते हैं।
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प्रश्न 7.
उष्ण चक्रवात से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
उष्ण चक्रवात (Tropical Cyclone) – ये चक्रवात उष्णकटिबन्ध में उत्पन्न होते हैं तथा व्यापारिक हवाओं के साथ पूर्व से पथ्चिम की ओर चलते हैं। इन चक्रवातों का घेरा कम होता है। वायुभार में अधिक अन्तर मिलने के कारण इन चक्रवातों के चक्रीय गति तेज होती है। परन्तु आगे बढ़ने की गति धीमी होती है। कभी-कभी ये चक्रवात बहुत ही विनाशकारी होते हैं। इन चक्रवातों को पश्चिम द्वीप समूह में हरिकेन, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में टारनैडो तथा पश्चिमी प्रशान्त तथा चीन सागर में टाइफून कहते है।

प्रश्न 8.
शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात किसे कहते हैं?
उत्तर :
शीतोष्ण चक्रवात (Temperater Cyclone) – ये चक्रवात दोनों गोलार्द्धों में उष्ण व नम पछुआ हवाओं तथा ठण्डी व शुष्क भुवीय हवाओं के मिलने से उत्पन्न होते हैं। ये पछुआ हवाओं के साथ पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है। ये चक्रवात सैकड़ों किलोमीटर तक विस्तृत होते हैं। वायु भार में विशेष अन्तर न मिलने के कारण इनकी चक्रीय गति धीमी होती है। परन्तु इनकी आगे बढ़ने की गति तेज होती है।

प्रश्न 9.
अधिक ऊँचाई वाले बादलों का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर :
आकाश में 20,000 फुट से अधिक ऊँचाई पर पाए जाने वाले बादलों या मेघों को उच्च मेघ या अधिक ऊँचाई वाले मेघ कहते हैं। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित तीन प्रकार के बादलों को सम्मिलित किया जा सकता है।

(i) सिरसा या पक्षाभ मेघ – स्वच्छ सफेद रंग के ये मेघ वायुमण्डल में सबसे अधिक ऊँचाई पर पाए जाते हैं। जब ये मेघ सम्पूर्ण आकाश में अव्यवस्थित तथा बिखरे होते हैं तो साफ मौसम के सूचक होते हैं, परन्तु जब ये एक दूसरे के ऊपर आकर मोटी परत का निर्माण कर देते हैं तब मौसम खराब हो जाता है।

(ii) सिरोस्ट्रेटस (Cirro-stratus) या पक्षाभ स्तरी मेघ :- जब पक्षाभ मेघ सफेद चादर की तरह आकाश को घेर लेते हैं तो इन्हें पक्षाभ स्तरी या सिरो स्ट्रेटस मेघ कहते हैं। इनसे ढका आकाश माक्रेल मछली की पीठ की तरह लगता है। इसीलिए इन मेघो से ढँके आकाश को माक्रेल आकाश कहते हैं। ये मेघ स्वच्छ मौसम को सूचित करते हैं। ये प्रात:काल दिखाई देते हैं तथा धूप होने पर विलीन हो जाते हैं।

(iii) सिरोक्यूमूलस (Cirro-cumulus) – या पक्षाभ कपासी मेघ :- धुनी हुई रूई के समान दिखाई देने वाले इन मेघों से ढँककर आकाश माक्रेल मछली की पीठ की तरह लगता है। इसीलिए इन मेघों से ढँके आकाश को माक्रेल आकाश कहते हैं। ये मेघ स्वच्छ मौसम को सूचित करते हैं। ये प्रातःकाल दिखाई देते हैं तथा धूप होने पर विलीन हो जाते हैं।

प्रश्न 10.
मध्यम ऊँचाई वाले बादलों के बारे में संक्षेप में लिखिए –
उत्तर :
आकाश में 6500 से 20,000 फुट तक की ऊँचाई वाले मेघों को मध्यम ऊँचाई वाले मेघ कहते हैं। ये निम्नलिखित हैं-
(i) अल्टो स्ट्टेटस (Alto – stratus) या स्तरी मध्य मेघ :- हल्के नीले एवं भूरे रंग के ये मेघ एक विशाल चादर की तरह पूरे आकाश को घेर लेते हैं। इनसे सूर्य चन्द्रमा का प्रकाश धुँधला सा पड़ जाता है। आकाश में इन मेघों के रहने से विस्तृत क्षेत्र में लगातार वर्षा की सम्भावना रहती है।

(ii) अल्टोक्यूमूलस (Alto – cumulus) – या कपासी मध्य मेघ :- ये मेघ सफेद अरै भूरे रंगों के होते हैं। आकाश में ये पंक्तिबद्ध या लहरों के रूप में पाए जाते हैं। जब ये मेघ मध्यवर्ती ऊँचाई पर पहुँच जाते हैं तो धब्बे के रूप में आकाश में बिखर जाते हैं जिससे इनके बीच-बीच में नीला आकाश दिखाई देता है।

प्रश्न 11.
निम्न ऊँचाई वाले मेघों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
आकाश में जिन मेघों की औसत ऊँचाई 6500 फुट के आसपास रहती है उन्हे निम्न ऊँचाई वाले मेघो के अन्तर्गत शामिल किया गया है। ये मेष निम्नलिखित हैं –
(i) स्ट्रटोक्यूमूलस (Strato cumulus) या स्तरी कपासी मेघ :- ये मेघ आकाश में कम ऊँचाई वाले मेघों के अन्तर्गत शामिल किया गया है। ये स्तरों में विभाजित होकर आकाश में बिछ्छे रहते हैं। इनका रंग हल्का भूरा होता है तथा निचले स्थर में कभी-कभी काले रंग के होते हैं।

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(ii) स्ट्रेटस (Stratus) या स्तरी मेघ :- निचले स्तर के इन मेघों का निर्माण दो प्रकार की वायु राशियों के मिलने से होता है। ये सफेद से भूर रंग के होते हैं तथा धरातल से कुछ ऊँचाई पर आकाश को कुहरे की तरह ढँक लेते हैं जिससे पर्वतारोहियों और विमान चालकों को असुविधा होती है। इनसे बीच-बीच में हल्की वर्षा होती है।

(iii) निम्बोस्ट्रेटस (Nimbo stratus) या वर्षा स्तरी मेघ :- लैटिन भाषआ में निम्बस का अर्थ होता है घना मेघ। ये निम्न स्तरीय मेघ घने, मोटे तथा भूरे से काले रंग के होते हैं। इसका कोई निश्धित आकार नहीं होता है तथा आकाश में इनकी उपस्थिती खराब मौसम की सूचना देती है।

प्रश्न 12.
ऊर्ध्वाधर या लम्बवत् विकास वाले मेघों का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर :
(i) कपासी बादल (Cumulus Clouds) : सामान्यत: ये बादल 1 से 3 कि०मी॰ की ऊँचाई तक पाये जाते है ये लम्ब रूप स्तम्भ की भाँति बने होते हैं। ये बहुत अधिक समतल होते हैं किन्तु शीर्ष हवा की ओर ऊपर उठते हैं। ये फूल गोभी की तरह दिखते हैं। इनका रूप छोटा, श्वेत और रूई की तरह होता है। इनसे कभी-कभी वर्षा होती है।

(ii) वर्षी बादल (Numbus Clouds) : ये बादल काले घने पिण्ड के समान होते हैं। ये घरातल से लगभग डेढ़ \(1\frac{1}{2}\) कि॰मी॰ नीचे होते हैं कभी-कभी धरती को छूते नजर आते हैं। इनका कोई विशिष्ट आकार नहीं होता है। ये कुँज रूप में छाये रहते हैं, इनके किनारे आपस में मिले रहते हैं। ये प्राय: इतने सघन होते हैं कि सूर्य की किरणें इनमें प्रवेश कर धरती पर नहीं पहुँच पाती है। इन बादलों से अन्धकार-सा छा जाता है तथा बहुत ही काला होता है। इनसे बहुत ही शीघ्य तथा मुसलाधार वर्षा होती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
मूसलाधार वर्षा होती है –
(a) कपासी बादल से
(b) निम्बोस्ट्रोटास से
(c) स्तरी बादल से
(d) जलीय बादल से
उत्तर :
(b) निम्बोस्ट्रोटास से।

प्रश्न 2.
भूमध्य रेखीय प्रदेश में वर्षा होती है –
(a) संवाहनिक वर्षा
(b) चक्रवातीय वर्षा
(c) पर्वतीय वर्षा
(d) हिम वर्षा
उत्तर :
(a) संवाहनिक वर्षा।

प्रश्न 3.
वर्षा का माप ज्ञात किया जाता है –
(a) रेनगेज से
(b) बैरोमीटर से
(c) थर्मामीटर से
(d) पैरामीटर से
उत्तर :
(a) रेनंगेज से।

प्रश्न 4.
समान वर्षा के स्थानों को मिलाने वाली रेखा को कहा जाता है –
(a) समताप रेखा
(b) समदाब रेखा
(c) सम वर्षा रेखा
(d) अम्लवर्षा रेखा
उत्तर :
(c) सम वर्षा रेखा।

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प्रश्न 5.
सफेद रंग का मेघ होता है –
(a) सिरास
(b) स्ट्रोटास
(c) निम्बो स्ट्रोटास
(d) स्ट्रोटास
उत्तर :
(a) सिरांस।

प्रश्न 6.
धुनि हुई रूई के समान बादल होता है –
(a) सिरास
(b) स्ट्रोटास
(c) सिटोक्यूमूलस
(d) निम्बो स्ट्रोटास
उत्तर :
(c) सिटोक्यूमूलस।

प्रश्न 7.
जल का वाष्प में परिवर्तन होना कहलाता है –
(a) वाष्मीकरण
(b) उबलना
(c) सिरसा
(d) घोलीकरण
उत्तर :
(a) वाष्पीकरण।

प्रश्न 8.
पर्वतीय ढाल पर वर्षा होती है –
(a) मानसूनी वर्षा
(b) पर्वतीय वर्षा
(c) चक्रवातीय वर्षा
(d) संवहनीय वर्षा
उत्तर :
(b) पर्वतीय वर्षा

प्रश्न 9.
चक्रवात के केन्द्र को कहते हैं –
(a) तूफान की आँख
(b) चक्रवात की आँख
(c) वर्षा की आंख
(d) चक्रवात केन्द्र
उत्तर :
(b) चक्रवात की आँख।

प्रश्न 10.
शीत ऋतु की रात्रि में तीव्रता से तापविकीरण करने के कारण भू-पृष्ठ होता है –
(a) गर्म
(b) ठण्डा
(c) नरम
(d) उष्ण
उत्तर :
(b) ठण्डा।

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प्रश्न 11.
फब्वारे वाली वर्षा को कहते हैं –
(a) स्लिट
(b) फब्वारी वर्षा
(c) ओलावृष्टि
(d) तेज वर्षा
उत्तर :
(b) फब्वारी वर्षा।

प्रश्न 12.
जलकणों के साथ-साथ बर्फ के टुकड़े को घरातल पर गिरने को कहते हैं –
(a) स्लिट
(b) ओलावृष्टि
(c) कुहासा
(d) हिमपात
उत्तर :
(b) ओलावृष्टि

प्रश्न 13.
पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण तुषार के धरातल पर गिरने को कहते हैं –
(a) तुषारपात
(b) कुहासा
(c) ओलावृष्टि
(d) स्लिट
उत्तर :
(a) तुषारपात।

प्रश्न 14.
पूर्वी चीन सागर के चक्रवातीय तूफान को कहते हैं –
(a) हरिकेन
(b) फाइलेन
(c) टाईफून
(d) फॉन
उत्तर :
(c) टाईफून।

प्रश्न 15.
चेरापूँजी में औसत वार्षिक वर्षा होती है –
(a) 1115 मिमी०
(b) 11560 मिमी०
(c) 1220 मिमी०
(d) 1500 मिमी०
उत्तर :
(b) 11560 मिमी०।

प्रश्न 16.
अल्ट्रोस्ट्रेटस या स्तरीं मध्य मेघ का रंग होता है –
(a) धूसर की तरह सफेद
(b) धूसर या भूरा से काला
(c) धूसर या भूरा से नीला
(d) गहरा काला
उत्तर :
(c) धूसर या भूरा से नीला

प्रश्न 17.
वज्रपात के साथ भीषण तूफानी वर्षा के लिए उत्तरदायी मेघ हैं –
(a) क्यूमूलस या कपासी मेघ
(b) स्ट्रेटस या स्तरीय मेघ
(c) क्यूमूलोनिम्बस या कपासी-वर्षी मेघ
(d) निम्बोस्ट्रेटस या वर्षा स्तरी मेघ
उत्तर :
(c) क्यूमूलोनिम्बस या कपासी-वर्षी मेघ

प्रश्न 18.
मेघों से वर्षा होती है –
(a) ट्रोपोस्सेयर या क्षोभ मण्डल में
(b) स्ट्रेटोस्फेयर या समताष मण्डल में
(c) आयनोस्फेयर या अयन मण्डल में
(d) मेसोस्फेयर या मध्य मण्डल में
उत्तर :
(a) ट्रापोस्फेयर या क्षोभ मण्डल।

प्रश्न 19.
तापमान कम होने पर वायु की आपेक्षिक आर्द्रता –
(a) घट जाती है
(b) बढ़ जाती है
(c) अपरिवर्तित रहती है
(d) बहुत घट जाती है
उत्तर :
(b) बढ़ जाती है

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 5 मेघ – वर्षा

प्रश्न 20.
आपेक्षित आर्द्रता को व्यक्त किया जाता है –
(a) प्रतिशत में
(b) मीटर में
(c) लीटर में
(d) ग्राम में
उत्तर :
(a) प्रतिशत में।

प्रश्न 21.
उष्ण चक्रवातों का निर्माण होता है –
(a) दोनों गोलार्द्धों में 5°-20° अक्षाशों के मध्य
(b) दोनों गोलार्दो में 25°-45° अक्षांशों के मध्य
(c) दोनों गोलार्द्धो में 45°-65° अक्षांशों के मध्य
(d) दोनों गोलार्दों में 65°-85° अक्षाशों के मध्य
उत्तर :
(a) दोनों गोलार्द्धों में 5°-20° अक्षाशों के मध्य

प्रश्न 22.
बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले उष्ण चक्रवातों को कहते हैं-
(a) साइक्लोन
(b) टाइफून
(c) हरिकेन
(d) टारनेडो
उत्तर :
(a) साइक्लोन।

प्रश्न 23.
शीतोष्ण चक्रवातों की उत्पत्ति होती है –
(a) उष्ण एवं आर्द्र तथा ठंडी एवं शुष्क वायु के विपरीत दिशाओं से आकर टकराने से
(b) उच्च तापमान के कारण वायु दबाव के अचानक कम हो जाने के कारण
(c) वायु में जलवाष्ष की मात्रा अधिक हो जाने के कारण
(d) उपरोक्त सभी कारणों से।
उत्तर :
(a) उष्ण एवं आर्द्र तथा ठंडी एवं शुष्क वायु के विपरीत दिशाओं से आकर टकराने से।

प्रश्न 24.
ओस का निर्माण होता है –
(a) शीतत्तु की बादलरहित रातों में
(b) ग्रीष्मऋतु की बादलरहित रातों में
(c) शीतत्तु की मेघाच्छादित रातों में
(d) ग्रीष्मत्रतु की मेघाच्छादित रातों में।
उत्तर :
(a) शीतऋतु की बादलरहित रातों में।

प्रश्न 25.
कुहासा अधिकतर देखा जाता है –
(a) वर्षात्रु में
(b) ग्रीष्मःतु में
(c) शरदत्त में
(d) शीतऋतु में
उत्तर :
(d) शीतऋतु में।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. जल का _________ में परिवर्तन होना वाष्पीकरण है ।
उत्तर : जलवाष्प

2. जलवाष्प का _________ के रूप में बदलना संघनन कहलाता है।
उत्तर : जलकणों

3. सभी प्रकार के बादलों से वर्षा _________ होती है।
उत्तर : नहीं

4. भूमध्य रेखीय प्रदेश में _________ वर्षा होती है।
उत्तर : संवाहनिक

5. भारत के पश्चिमी तट पर _________ वर्षा होती है।
उत्तर : पर्वतीय

6. पवन विमुख बाल को _________ प्रदेश कहते हैं।
उत्तर : वृष्टि छाया

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 5 मेघ – वर्षा

7. आइला और फाइलेन एक प्रकार _________ चक्रवात है।
उत्तर : उष्णग कटिबन्धीय

8. वर्षा को _________ नामक यंत्र से मापते हैं।
उत्तर : रेनगेज

9. भारत में आइला तूफान ई०_________ में आया था।
उत्तर : 2009

10. वायु में तैरने वाले जल कणों या हिम-कणों के समूह को _________ कहते हैं।
उत्तर : बादल

11. अल्टोस्टेटस या स्तरी मध्य मेघ _________ ऊँचाई वाले मेघ हैं।
उत्तर : मध्यम

12. क्यूमूलस या कपासी मेघ साधारणत: _________ मौसम की सूचना देते हैं।
उत्तर : स्वच्छ

13. जलवाष्पयुक्त वायु शुष्क वायु की अपेक्षा _________ होती है।
उत्तर : हल्की

14. जिस तापमान पर वायु संतृप्त हो जाती है उस तापमान को वायु का _________ कहते हैं।
उत्तर : शिशिरांक या ओसांक

15. उर्ध्वगामी वायु का दबाव कम होने से उसकी भी _________ कम होती है।
उत्तर : उष्णता

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 5 मेघ – वर्षा

16. जलकण, घूलकणों से मिलकर_________ का निर्माण करते हैं।
उत्तर : बादल

17. शीतोष्ण क्षेत्रों में _________ ऋतु के आरम्भ में संवहनीय वर्षा होती है।
उत्तर : ग्रीष्म

18. पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल की ओर स्थित दक्षिण का पठारी अंचल _________ प्रदेश के अन्तर्गत आता है।
उत्तर : वृष्टिछाया

19. उष्ण चक्रवातों से_________ वर्षा होती है।
उत्तर : मूसलाधार

20. केरेबियन सागर में उत्पत्र होने वाले उष्ण चक्रवातों को _________ कहा जाता है।
उत्तर : हरिकेन

21. _________ मकान एवं फसलों को बहुत हानि पहुँचाती है।
उत्तर : ओलावृष्टि

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. भूमध्य रेखीय क्षेत्र में पर्वतीय वर्षा होती है।
उत्तर : False

2. विश्च में सवसे ज्यादा वर्षा चेरापूंजी में होता है।
उत्तर : True

3. जल का वाष्प या गैस में बदलने की क्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।
उत्तर : True

4. जलवाष्म का जल कणों में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।
उत्तर : True

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5. सभी प्रकार के बादलों से वर्षा होती है।
उत्तर : False

6. भूमध्य रेखीय प्रदेश में प्रतिदिन दिन के तीसरे पहर में वर्षा होती है।
उत्तर : True

7. पर्वतों के विमुख दाल पर अधिक वर्षा होता है।
उत्तर : False

8. पर्वतों के जिस ढाल पर वर्षा नहीं होती उसे वृष्टिछाया प्रदेश कहते हैं।
उत्तर : True

9. जलकणों एवं तुषारकणों के आशंकि मिश्रण के रूप को स्लिट कहा जाता है।
उत्तर : True

10. विभिन्न स्थानों पर वायु में उपस्थित जलवाष्प का परिमाण अलग-अलग होता है।
उत्तर : True

11. मध्य यूरोपीय देशों में शीतकाल में चक्रवातीय वर्षा होती है।
उत्तर : False

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12. चीन सागर में उत्पन्न उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को हरिकेन कहा जाता है।
उत्तर : True

13. शिलांग वृष्टिछाया प्रदेश में पड़ता है।
उत्तर : True

14. सिरसा या पक्षाभ मेघ गहरे काले रंग के होते हैं।
उत्तर : False

15. सिरोस्ट्रेटस या पक्षाभस्तरी मेघ सूर्य एवं चन्द्रमा के चारों ओर वलय या प्रभा मण्डल का निर्माण करते हैं।
उत्तर : True

16. अल्टोक्यूमूलस या कपासी मध्य मेघों की आकृति आकाश में लहरों के समान लगती है।
उत्तर : ……..

17. स्ट्रेटोक्यूमूलस या स्तरी कपास मेघों से लगातार मूसलाधार वर्षा होती है।
उत्तर : False

18. क्यूमूलोनिम्बस या कपासी वर्षी मेघ का एक और नाम वज्र मेघ (Thuder cloud) भी है।
उत्तर : ………

19. निम्बोस्ट्रेटस या वर्षा स्तरी मेघो से शिलावृष्टि भी होती है।
उत्तर : False

20. संवहनीय वर्षा गरज एवं बिजली की चमक के साथ होती है।
उत्तर : True

21. शिलांग में चेरापूँजी की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है।
उत्तर : False

22. उष्ण चक्रवातों के कम वायु दबाव वाले केन्द्रीय भाग को चक्रवात की आँख कहते हैं।
उत्तर : False

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23. साधारणत: शरदकाल में चक्रवात का प्रकोप अधिक देखा जाता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

Detailed explanations in West Bengal Board Class 8 Geography Book Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 8 Geography Chapter 4 Question Answer – चापवलय और वायु प्रवाह

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
कितनी डिग्री अक्षांश को अश्व अक्षांश कहते हैं?
उत्तर :
30° – 35° अक्षांश

प्रश्न 2.
ड्रोलड्रम्स किस वायु भार की पेटी में स्थित है ?
उत्तर:
भूमध्य रेखीय निम्न वायु भार की पेटी में ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 3.
कर्क एवं मकर रेखीय अंचल में किस प्रकार के वायु चाप वलय पाया जाता है?
उत्तर :
उच्च वायु चाप अक्षांश ।

प्रश्न 4.
प्राचीन काल में किस अक्षांश से गुजरने वाली जहाजों की गति अवरूद्ध हो जाती थी ?
उत्तर :
अश्व अक्षांश या घोड़ों का अक्षांश (Horse Latitude)।

प्रश्न 5.
हमारी पृथ्वी पर वायु भार की कितनी पेटियाँ हैं ?
उत्तर :
सात ।

प्रश्न 6.
ध्रुवीय प्रदेशों में किस प्रकार का वायुभार होता है ?
उत्तर :
उच्च वायुभार ।

प्रश्न7.
सन् 1835 ई० में किस वैज्ञानिक ने विक्षेपकारी बल की पहचान की ?
उत्तर :
जी० जी० कोरियोलिस ने ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 8.
पृथ्वी पर कौन – सी स्थाई वायु ठंडी होती है ?
उत्तर:
ध्रुवीय वायु ।

प्रश्न 9.
पश्चिम बंगाल में गर्मी के दिनों में प्रायः आने वाले तूफान को क्या कहते हैं?
उत्तर :
काल वैशाखी ।

प्रश्न 10.
सहारा मरूस्थल और भूमध्य सागरीय अंचल में कौन अधिक समृद्धशाली है?
उत्तर :
भूमध्य सागरीय प्रदेश

प्रश्न 11.
कैसी वायु से तटीय भागों में वर्षा होती है?
उत्तर :
समुद्र से आने वाली मानसून वायु से।

प्रश्न 12.
सुबह के समय समुद्र या नदी में बहने वाली पालयुक्त नाव किस वायु की सहायता से गतिमान होता है ?
उत्तर:
स्थलीय पवन

प्रश्न 13.
शाम के समय समुद्र के किनारे बैठने पर किस ओर से आने वाली वायु अधिक ठंडी होती है?
उत्तर :
समुद्री वायु ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 14.
पूर्वी वायु का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
व्यापारिक हवाएँ।

प्रश्न 15.
शीतकालीन मौसमी वायु से वर्षा क्यों नहीं होती है ?
उत्तर :
ये स्थल की ओर से चलती हैं।

प्रश्न 16.
उत्तरी अमेरिका के रॉकी पर्वत के पूर्वी ढाल से होकर बहने वाली हवा को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
चिनूक |

प्रश्न 17.
हारमाटोन और बोरा कैसी वायु है ?
उत्तर:
ठंडी एवं शुष्क ।

प्रश्न 18.
वायु की दिशा बताने वाली यंत्र का नाम बताओ ।
उत्तर :
विंडवेन ।

प्रश्न 19.
सिरस्को किस प्राकर की वायु है?
उत्तर :
उष्ण,
शुष्क एवं धूल से भरी हुई ।

प्रश्न 20.
तुषार भक्षक किस वायु को कहा जाता है ?
उत्तर :
चिनूक को ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 21.
फन किस पर्वत के ऊपरी ढाल से बहती है ?
उत्तर :
आल्पस पर्वत ।

प्रश्न 22.
डाक्टर वायु किस हवा को कहते हैं ?
उत्तर :
हारमाटोन को ।

प्रश्न 23
1999 ई० में उड़ीसा में आने वाले तूफान का नाम क्या था ?
उत्तर :
सुपर साइक्लोन ।

प्रश्न 24.
किस यंत्र से वायुभार मापते हैं ?
उत्तर :
बैरोमीटर से ।

प्रश्न 25.
किस अंचल में जल भाग का विस्तार अधिक है?
उत्तर :
भूमध्यरखेयी अंचल में ।

प्रश्न 26.
किस वायु का घनत्व अधिक रहता है ?
उत्तर :
शुष्क एवं ठंडी वायु का ।

प्रश्न 27.
25°- 30° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशो को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
अश्व अक्षांश के नाम से।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 28.
कोरियोलिस बल की उत्पत्ति पृथ्वी की किस गति के कारण होती है?
उत्तर :
आवर्तन या घूर्णन गति के कारण ।

प्रश्न 29.
उत्तरी गोलार्द्ध में व्यापारिक वायु किस नाम से जानी जाती है ?
र-पूर्व व्यापारिक वायु ।
उत्तर :

प्रश्न 30.
दक्षिणी गोलार्द्ध में व्यापारिक का वेग कितना रहता है?
उत्तर :
11 से 30 कि० मी० प्रति घण्टा |

प्रश्न 31.
ध्रुवीय वायु कहाँ प्रवाहित होती है ?
उत्तर :
दोनों ध्रुवीय क्षेत्रों से वृत्तीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर ।

प्रश्न 32.
वायु की उष्णता का प्रधान स्रोत कौन है?
उत्तर :
सूर्य ।

प्रश्न 33.
दक्षिणी गोलार्द्ध में किन हवाओं को गरजनेवाली चालीसा क्रोधोन्मत्त पचासा एवं चित्कार वाली साठा कहा जाता है।
उत्तर :
पछुआ हवाओं को ।

प्रश्न 34.
किस वायु के प्रभाव से ठंडे प्रदेशों की ठंड कुछ कम हो जाती है ?
उत्तर :
पछुआ वायु के प्रभाव से ।

प्रश्न 35.
किस वायु के कारण ध्रुव वृत्तीय अंचलों में तुषारापात होता है ?
उत्तर :
ध्रुवीय वायु के कारण।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 36.
स्थलीय वायु कब प्रवाहित होती है ?
उत्तर :
रात के समय।

प्रश्न 37.
किस स्थानीय वायु के प्रभाव से उत्तरी अमेरिका में बर्फ पिघलने की सृष्टि होती है।
उत्तर :
चिनूक के प्रभाव से

प्रश्न 38.
किस उष्ण एवं शुष्क वायु के प्रभाव से मध्य यूरोप में दावानल की सृष्टि होती है ।
उत्तर :
फॉन के प्रभाव से !

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प्रश्न 39.
किन चक्रवातों से प्रभावित अंचलों में बहुत देर तक रिमझिम वर्षा होती है ?
उत्तर :
शीतोष्ण चक्रवातों से प्रभावित अंचलों में ।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
वायु मण्डल क्या है?
उत्तर :-
वायुमण्डल (Atmosphere) :- पृथ्वी के चारों ओर रंगहीन, गंधहीन एवं स्वादहीन गैसों का एक आवरण है जिसे वायुमण्डल कहते हैं

प्रश्न2.
वायुदाब किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी की आकर्षण शक्ति के कारण प्रत्येक भौतिक पदार्थ में भार पाया जाता है। वायु भी एक भौतिक पदार्थ अतः इसमें भार या दबाव का होना स्वाभाविक है। वायु में अपना वजन है, इस वजन से वायु पृथ्वी पर दबाव बनाती है । इस दाब या चाप को वायुदाब कहते हैं।

प्रश्न 3.
भूमध्य रेखायी निम्न वायुभार की पेटी का शांत या डोलड्रम्स किसे कहते हैं? ..
उत्तर :
सूर्य की किरणों के लम्बवत पड़ने के कारण यहाँ वर्ष भर अधिक गर्मी पड़ती है जिससे निम्न वायुभार पाया जाता है। धरातल पर समानांतराल पर वायु प्रवाहित नहीं होती। इस कारण यहां वायु प्रवाह का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। वायु शांत रूप से गतिशील रहती है। अत: यह एक शांत पेटी है जिसे शांत मण्डल या डोलड्रम्स (Doldrums) कहते हैं।

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प्रश्न 4.
अश्व अक्षांश (Horse Latitude) किसे कहते हैं?
उत्तर :
अश्व अक्षांश (Horse Latitude) – प्राचीन काल में मकर एवं कर्क रेखीय प्रदेशों में हल्के पालदार जहाज वायु के अधिक दबाव के कारण डगमगाने लगते थे। शीत भण्डारण की व्यवस्था न होने के कारण उस समय के जहाज के नाविक भोजन के लिए अपने साथ घोड़े लाते थे ताकि आवश्यकतनुसार उन्हें मारकर भोजन के लिए उनके ताजे मांस प्रयोग किया जा सके। इन पेटियों में पहुंच कर नाविकों को जहाजों का भार कमकरने के लिए कभी-कभी अपने घोड़ों को पानी में फेंक देना पड़ता था। इसी से इन पेटियों को अश्व अक्षांश कहते हैं।

प्रश्न 5.
वायु प्रवाह किसे कहते हैं ?
उत्तर :
धरातल के समानान्तर चलने वाली हवा या पवन (Wind) कहते हैं। हवाओं के चलने का सबसे प्रमुख कारण. तापक्रम एवं वायु भार में अन्तर का मिलना है। जिस प्रकार जल सदा ऊँचे भाग से निम्न भाग की ओर बहता है, उसी प्रकार हवाएँ भी सदा उच्च वायुभार क्षेत्र से निम्न वायुभार क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है। उच्च वायु भार और निम्न वायुभार के मध्य अंतर अधिक होने से वायु प्रवाह की गति बढ़ जाती है। पुनः चाप कम होने से एवं अंतर कम हो जाने से वायु की गति धीमी हो जाती है। लेकिन जब वायु चापों के मध्य अंतर नहीं होता तब मौसम शांत रहता है।

प्रश्न 5.
कोरियोलिस बल से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
पृथ्वी की आवर्तन या घूर्णन गति के कारण पृथ्वी के ऊपर स्थित किसी भी स्वच्छंद, गतिशील वस्तु के ऊपर एक प्रकार का बल प्रभाव डालता है जिससे वस्तुओं की दिशा परिवर्तित हो जाती है। इस दिशा परिवर्तनकारी बल को कोरीयोलिस (Coerieolies Force) बल कहते हैं।

प्रश्न 6.
फेरल का नियम क्या है ?
उत्तर :
फेरल का नियम (Ferrel’s Law) – फेरल ने सन् 1855 ई० में एक नियम बनाया जिसे उन्हीं के नाम पर फेरल का नियम (Ferrel’s Law) कहते हैं । ” इस नियम के अनुसार धरातल पर स्वतंत्र रू से चलने वाली सभी गतिशील वस्तुएँ जैसे हवाएँ एवं धाराएँ पृथ्वी की दैनिक गति के प्रभाव से उत्तरी गोलार्द्ध में अपने से दाहिनी ओर तथआ दक्षिणी गोलार्द्ध में अपने से बायीं ओर मुड़ जाता है। ”

प्रश्न 7.
बाइज बैलेट का सिद्धान्त क्या है?
उत्तर :
बाइज़ बैलेट का नियम (Byse Balat’s Law) – डच मौसम विज्ञानी बाइज बैलेट ने सन् 1857 ई० में फेरल के नियम के आधार पर ही यह नियम निकाला। “यदि हम आती हुई हवा की ओर पीठ करके खड़े हो जाएँ तो और यदि हम उत्तरी गोलार्द्ध में हैं तो हमारी दाहिनी ओर उच्च वायुभार तथा बाईं ओर निम्न वायु भार होगा। इसके विपरीत यदि हम दक्षिणी गोलार्द्ध में हैं तो हमारी दाहिनी ओर निम्न वायुभार तथा वायीं ओर उच्च भार होगा । ”

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 8.
स्थायी वायु किसे कहते हैं?
उत्तर :
स्थायी वायु (Permanent Winds) – स्थायी प्रभाव न पड़ने पर जो हवाएं उच्च वायु भार की पेटियों से निम्न वायु भार की पेटियों की ओर वर्ष भर स्थायी रूप से चला करती है उन्हें स्थायी हवाएँ कहते हैं।

प्रश्न 9.
गरजने वाली चालिसा किसे कहते हैं?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° से 60° अक्षांश के बीच स्थल खण्डों के अभाव के कारण ये हवाएँ अत्यन्त तीव्र गति से तथा आवाज करती हुई चलती है । अत: इस भाग की पछुआ हवाओं को गरजने वाली चालिसा (Roaring Fifties) या चीखने वाली साठी (Screaching Sixties) कहते हैं ।

प्रश्न 10.
सामयिक पवनों से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर :
सामयिक पवनें (Periodical Winds) – वर्ष भर एक निश्चित दिशा में बहकर जो हवाएं दिन के विभिन्न अवसरों अथवा वर्ष की विभिन्न ऋतुओं, भिन्न-भिन्न दिशाओं में बहती है उन्हें सामयिक पवन कहते हैं।

प्रश्न 11.
समुद्री वायु क्या है ?
उत्तर :
संध्या के समय समुद्र के किनारे की ओर से आने वाली हवा सुहावनी लगती है। क्योंकि हवाएँ समुद्र के उच्च वायुभार के क्षेत्र से निम्न वायुभार स्थल की ओर चलने लगती है इसे जलीय या समुद्री समीर (Sea Breeze) कहते हैं ।

प्रश्न 12.
स्थलीय वायु किसे कहते हैं ?
उत्तर :
रात में स्थल भाग शीघ्र ही ठण्डा हो जाता है जबकि समुद्री भाग गर्म बना रहता है। अतः स्थल पर उच्च व समुद्र पर निम्न वायुभार का क्षेत्र स्थापित हो जाता है। अतः स्थल से हवाएँ समुद्र की ओर चलने लगती है। इसे स्थलीय समीर (Land Breeze) कहते हैं । अर्द्ध रात्रि में इस वायु की गति बढ़ जाती है।

प्रश्न 13.
एनाबैटिक वायु किसे कहते हैं ?
उत्तर :
एनाबैटिक वायु (Anabatic Winds) – दिन के समय सूर्य के ताप के कारण पर्वतीय शिखरों की कठोर चट्टानें शीघ्रता से ताप ग्रहण करती है एवं शीघ्रता से ताप छोड़ती भी है। दिन में पर्वत शिखर शीघ्र गर्म हो जाता है। अतः उनके ऊपर की वायु भी गर्म होकर फैलती है तथा हल्की होकर ऊपर उठ जाती है। जिससे वहाँ का वायु भार अपेक्षाकृत ठंडी होती है। जिससे घाटी में उच्च वायुभार हो जाता है। फलस्वरूप वायुघाटी से पर्वत शिखर की ओर चलने लगता है। इन्हें घाटी पवन या Anabatic Winds कहते हैं ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 14.
कैटाबैटिक वायु किसे कहते हैं ?
उत्तर :
कैटाबेटिक वायु (Catabatic Winds) – रात्रि के समय तीव्र विकिरण के कारण पर्वत शिखर शीघ्र ठण्डे हो जाते हैं। अत: उनके ऊपर की वायु ठण्डी होकर सिकुड़ती है तथा भारी होकर शिखरों पर जमा होने लगती है। इसके विपरीत घाटी की वायु भी गर्म रहती है। जिससे वहाँ वायुभार कम रहता है। अतः पृथ्वी के आकर्षण के प्रभाव के कारण पर्वत शिखरों से-वायु घाटियों की ओर उतरने लगते हैं। उन्हें पर्वतीय गुरुत्व पवन (Gravity Winds) या (Catabatic Winds) कहते हैं।

प्रश्न 15.
आकस्मिक वायु क्या है ?
उत्तर :
भू-पृष्ठ पर किसी छोटे क्षेत्र में अचानक वायुचापों के बीच अंतर होने से अनियमित रूप से प्रवाहित होने वाली वायु या हवा को आकस्मिक वायु कहते हैं।

प्रश्न 16.
चक्रवात किसे कहते हैं ?
उत्तर –
चक्रवात (Cyclone) – चक्रवात वृत्ताकार या अण्डाकार समवायुभार रेखाओं की एक ऐसी व्यवस्था है जिसके बीच किसी कारण से तापक्रम बढ़ जाने से निम्न वायु भार का केन्द्र स्थापित हो जाता है तथा बाहर क्रमश: वायुभार अधिक होता है। अत: बाहर के उच्च वायु भार के क्षेत्रों से हवाएं निम्न वायुभार के केन्द्र की ओर चलने लगती है जिससे वहाँ हवा का एक चक्र बन जाती है। जिसकी दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में अघड़ीवत (Anti Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ीवत (Clockwise) होती है। केन्द्र में पहुँचकर वायु गर्म होकर फैलने लगती है तथा हल्की होकर ऊपर उठ जाती है, जिसे चक्रवात या आंधी कहते हैं ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 17.
प्रति-चक्रवात (Anti-Cyclone) किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रति चक्रवात (Anti Cyclone) – यह वृत्ताकार एवं अण्डाकार समभार रेखाओं की ऐसी व्यवस्था होती है जिसके केन्द्र में किसी कारण से तापक्रम घट जाने के कारण वायुभार उच्च हो जाती है एवं उसके बाहर वायुभार घटता जाता है। अत: हवाएँ केन्द्र के उच्च वायुभार क्षेत्र से बाहर चारों ओर चलने लगती है जिससे वहां हवाओं का एक चक्र बन जाता है। इसके घुमने की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ीवत (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में अघड़ीवत (Anti clockwise) होती है।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह 1

केन्द्र में उच्च वायुभार होने के कारण हवाएँ ऊपर से नीचे उतरती रहती है जिससे वे क्रमश: गर्म होती जाती है। यही कारण है कि प्रति चक्रवात में वर्षा नहीं होती तथा मौसम सुहावना तथा आकाश निर्मल बना रहता है।

प्रश्न 18.
ध्रुवीय क्षेत्र किसे कहते हैं ?.
उत्तर :
दोनों गोलार्द्धां में 80°- 90° अक्षांश रेखा के मध्यवर्ती ध्रुवीय प्रदेशों में वायुदाव वलयों की सृष्टि होती है। ये दोनों ध्रुवीय प्रदेश लगभग सम्पूर्ण वर्ष बर्फ से ढके होते हैं। इसी कारण यहाँ तापक्रम हिमांक से नीचे चला जाता है। इसी से यहां की वायु अत्यधिक ठंडी एवं भारी होती है।

प्रश्न 19.
पूर्वी या व्यापारिक हवाएँ किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ये हवाएँ दोनों गोलार्द्ध में उपोष्ण उच्च वायुभार की पेटियाँ (25° से 35°) अक्षांशों से भूमध्य रेखीय निम्नवायु भार की पेटी (5° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश) की ओर चला करती हैं। इसे पूर्वी या व्यापारिक हवाएँ कहते हैं ।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 20.
पछुआ वायु किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ये हवाएँ दोनों गोलाद्ध में उपोष्ण एवं उच्च वायुभार की पेटी (25° से 35° अक्षांशों) उपध्रुवीय निम्न वायुभार की पेटियों (55° से 65° अक्षांशों) की ओर चला करती हैं। पश्चिम की ओर से आने के कारण इसे पश्चिमी वायु कहते हैं। ये हवाएँ कुछ तीव्र गति से चलती हैं।

प्रश्न 21.
ध्रुवीय वायु क्या है?
उत्तर :
ये हवाएँ दोनों गोलाद्ध में उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवीय वायुभार की पेटियों से उप ध्रुवीय उच्च वायुभार की पेटियों से उप ध्रुवीय निम्न वायु भार की पेटियों (55° से 65° अक्षांशों) की ओर चला करती है। ये हवाएँ मन्द गति से चला करती हैं तथा अत्यन्त ठंडी होती है। इनके सम्पर्क में आने वाले प्रदेशों का तापमान हिमांक तक गिर जाता है।

प्रश्न 22.
‘शीत या वर्षा’ – किस ऋतु में वायु दबाव कम होता है तथा क्यों?
उत्तर :
वर्षा ऋतु में वायु दबाव कम रहता है, क्योंकि इस ऋतु में वायु में जलवाष्प की मात्रा अधिक रहने के कारण यही हल्की होती है।

प्रश्न 23.
डोलड्रम क्या है ?
उत्तर :
भूमध्यरेखीय अंचल में अत्यधिक तापक्रम के कारण वायु गर्म होकर फैलती है तथा ऊपर उठती है। यहाँ वायु धरातल के समानान्तर क्षैतिज रूप में नहीं प्रवाहित होती, जिससे वातावरण शान्त रहता है। इस शांत वातावरण के कारण प्राचीन काल में इस अंचल में गुजरने वाले जलयानों के संचालन में व्यवधान उत्पन्न होता था, इसीलिए नाविकों ने उस अंचल को डोलड्रम (Doldrum – शन्त क्षेत्र) नाम दिया।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 24.
पृथ्वी पर कुल कितनी वायु दाब पेटियाँ हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर :
पृथ्वी पर कुल सात वायु दाब पेटियाँ हैं जो निम्नलिखित हैं-

  • उत्तरी ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
  • सुमेरुवृत्त प्रदेशीय (आर्कटिक वृत्त प्रदेशईय) निम्न वायुदाब पेटी
  • कर्क रेखीय अंचल (उपोषअण अंचल) उच्च वायुदाब पेटी
  • भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी
  • मकर रेखीय अंचल (उपोष्ण अंचल) उच्च वायुदाब पेटी
  • कुमेरु वृत्त प्रदेशीय (अण्टार्कटिक वृत्त प्रदेशीय) निम्न वायुदाब पेटी
  • दक्षिणी ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी ।

प्रश्न 25.
वायु प्रवाह का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर :
धरातल पर दो अंचलों के बीच वायु दबाव की स्थिति में अन्तर वायु प्रवाह का मुख्य कारण है। वायु अधिक दाब वाले अंचल से कम दाब वाले अंचल की ओर प्रवाहित होती है तथा इन दोनों अंचलों में वायु दबाव का अन्तर अधिक होने पर वायु तीव्र गति से प्रवाहित होती है तथा वायु दबाव का अन्तर कम होने से वायु मंद गति से प्रवाहित होती है।

प्रश्न 26.
वायु का नामकरण किस आधार पर किया जाता है ?
उत्तर :
वायु जिस दिशा में प्रवाहित होती है, उसी दिशा के अनुसार उसका नामकरण किया जाता है। जैसे पूरब की ओर से आने वाली वायु को पूर्वी वायु कहते हैं तथा पश्चिम की ओर से आने वाली वायु को पछुआ वायु कहते हैं।

प्रश्न 27.
भूमध्यरेखीय अभिसरण अंचल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दोनों गोलार्द्धां की व्यापारिक वायु अर्थात् उत्तरी गोलार्द्ध की उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक वायु तथा दक्षिणी गोलार्द्ध की दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक वायु भूमध्यरेखीय अंचल में मिलती हैं। दो विपरीत दिशाओं से आने वाली वायु का मिलन स्थल होने के कारण इस अंचल को भूमध्यरेखीय अभिसरण अंचल कहते हैं।

प्रश्न 28.
गरजने वाली चलीसा, क्रोधोन्मत्त पंचासा तथा चीत्कार वाली साठा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
दक्षिणी गोलार्द्ध में 40°-60° अक्षांशों के मध्य स्थल खण्ड की कमी के कारण पछुआ हवाओं के मार्ग में कोई रुकावट पैदा नहीं होती। अतः इन अक्षांशों के बीच ये हवाएँ प्रचण्ड गति से प्रवाहित होती हैं। प्रचण्ड वेग के कारण ही यहाँ इन्हें 40° अक्षांशों के पास गरजने वाली चालीसा 50° अक्षांशओं के पास क्रोधोन्मत्त पचासा तथा 60° अक्षांशों के पास चीत्कार वाली साठा के नाम से जाता है ।

प्रश्न 29.
व्यापारिक वायु के मार्ग में महादेशों के पश्चिमी क्षेत्र में उष्ण मरुस्थलों का निर्माण क्यों हुआ?
उत्तर :
दोनों गोलार्द्ध में व्यापारिक वायु की दिशा पूरब से पश्चिम की ओर है अतः समुद्री भाग से होकर आने वाली व्यापारिक हवाएँ महादेशों के पूर्वी भाग में पहले पहुँचकर पर्याप्त वर्षा करती हैं, परन्तु पश्चिम भाग तक पहुँचते-पहुँचते ये शुष्क हो जाती हैं जिसके कारण यह पश्चिमी भाग वर्षा से वंचित रह जाता है, इसीलिए व्यापारिक वायु के मार्ग में महादेशों के पश्चिमी क्षेत्र में उष्ण मरुस्थलों का निर्माण हुआ है।

प्रश्न 30.
घाटी वायु किसे कहते हैं?
उत्तर :
दिन के समय जो वायु घाटी के तल से पर्वत शिखर की ओर चलती है, उसे घाटी वायु कहते हैं। दिन के समय पर्वतीय उच्च ढाल घाटी की तुलना में जल्दी गर्म हो जाते हैं जिससे घाटी में उच्च वायु दाब तथा पर्वतीय ढालों पर निम्न वायुदाब की सृष्टि होती है जिससे घाटी की तल से ठंडी वायु पर्वतीय शिखर की ओर आने लगती है फलस्वरूप घाटी वायु की प्रादुर्भाव होता है। घाटी वायु को एनाबेटिक वायु (Anabatic wind) भी कहते हैं ।

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प्रश्न 31.
भारतीय उपमहादेश में किन मानसूनी हवाओं से वर्षा होती है तथा क्यों ?
उत्तर :
भारतीय उपमहादेश में दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं या ग्रीष्मकालीन मानसूनी हवाओं से वर्षा होती है क्योंकि अत्यधिक गर्मी पड़ने के कारण इस ऋतु में भारतीय उपमहादेश में निम्न वायुदाब का गठन होता है, जबकि हिंदमहासागरीय क्षेत्र में उच्च वायुदाब रहता है अतः ग्रीष्म ऋतु में हिन्द महासागर की ओर से आने वाली भाप भरी हवाएँ भारतीय उपमहादेश में प्रवेश करती हैं तथा वर्षा करती हैं।

विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
कर्क एवं मकर रेखीय अंचल क्या है? वर्णन करो।
उत्तर –
पृथ्वी पर उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में 25° से 35° अक्षांश रेखा के मध्य भाग को क्रमश: कर्क एवं मकर रेखीय क्षेत्र कहते हैं । इन दो अंचलों में दो वायु चाप वलय स्थित है। भूमध्य रेखीय शांत वलय की तरह इन्हें क्रमश: कर्क रेखीय शांत पेटी ओर मकर रेखीय शांत पेटी कहा गया है।

भूमध्य रेखीय अँचल से उष्ण आर्द्र और हल्की वायु ऊपर की तरफ उठना शुरू करती है। इन उर्ध्वगामी वायु की उष्णता क्रमशः कम होती जाती है। वायु ठंडी एवं भारी होकर ऊपर पहुंचती है जहाँ इनका घनत्व बढ़ जाता है। यह ठंडी एवं भारी वायु कर्क एवं मकर रेखीय अंचल में उतर जाती है। फिर ध्रुवीय अंचल से ठंडी एवं शुष्क वायु नीचे उतर कर इन दोनों उष्ण अँचलों में पहुँचती है। दो विपरीत धर्मी वायु के दो उष्ण अंचलों में मिलने से यहाँ की वायु का परिमाण बढ़ जाता है, और घनत्व भी बढ़ता है।

प्रश्न 2.
ध्रुव वृत्त प्रदेशीय अंचल (क्षेत्र) किसे कहते हैं? वर्णन करो ।
उत्तर –
दोनों गोलार्द्धां में 60°- 70° अक्षांश रेखा के मध्यवर्ती भाग को ध्रुव वृत्त प्रदेशीय क्षेत्र कहते हैं। अर्थात् सुमेरू वृत्त और कुमेरू वृत्त के बराबर दो वायु चाप वलय स्थित हैं। इन दो वायु चाप वलयों को उत्तरी गोलार्द्ध में सुमेरू वृत्त प्रदेशीय वायुचाप वलय और दक्षिणी गोलार्द्ध में कुमेरू प्रदेशीय वायुचाप वलय के नाम से जाना जाता है। इन गोलार्द्ध में ध्रुवीय अंचल की तुलना में पार्श्ववर्ती ध्रुववृत्त के प्रदेशीय अंचल की उष्णता अधिक होती है।

यह ऊर्ध्वगामी वायु, पृथ्वी की आवर्तन गति के कारण उत्तर और दक्षिण की तरफ विक्षिप्त हो, दोनों गोलाद्ध के उष्ण व ध्रुवीय अंचलों में उतर जाती है। अर्थात् उत्तरी गोलार्द्ध के सुमेरू वृत्त प्रदेशीय अंचल से उर्ध्वगामी वायु उत्तर में विक्षिप्त होकर उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों एवं दक्षिणी विक्षिप्त वायु कर्क रेखीय अंचलों में उलंब स्रोत से प्रवाहित होती है। इस कारण इन दो ध्रुवीय प्रदेशों में वायु का परिमाण कम हो जाता है। या घनत्व कम हो जाता है।

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प्रश्न 3.
पृथ्वी की वायु भार एवं स्थायी हवाओं के पेटियों के स्थान परिवर्तन का क्या कारण है?
उत्तर –
पृथ्वी की वायुभार की पेटियाँ पूर्ण रूप से स्थिर न होकर उत्तर या दक्षिण खिसका करती है। वायुभार एवं स्थाई हवाओं की पेटियों के खिसकने का निम्नलिखित कारण है :-

  • पृथ्वी की कीली का झुका होना ।
  • पृथ्वी की क़ीली का सदा एक ही ओर झुका होना ।
  • पृथ्वी की वार्षिक गति ।

यदि पृथ्वी अपनी कीली पर झुकी न होती तो सूर्य की किरणें वर्ष भर भूमध्य रेखा पर ही लम्बवत पड़ती। ऐसी दशा में स्थाई वायुभार की पेटियों के साथ-साथ स्थाई हवाओं की पेटियां भी वर्ष भर स्थिर रहती है। लेकिन पृथ्वी अपनी किली पर 23° झुकी हुई है तथा वर्ष भर में एक बार सूर्य की परिक्रमा कर लेती है जिससे सूर्य की लम्बवत् किरणों की स्थिति में परिवर्तन होता रहता है।

तापक्रम की परिवर्तन के साथ-साथ वायुभार एवं हवाओं की पेटियाँ भी सूर्य की किरणों के साथ-साथ उत्तर एवं दक्षिण खिसका करती है। सूर्य की उत्तरायण की स्थिति में (22 दिसम्बर से 21 जून) एवं दक्षिणायन की स्थिति (22 जून से 22 दिसम्बर) इन दिनों होती है।

सूर्य की उत्तरायण की स्थिति में कर्क रेखा एवं दक्षिणायन की स्थिति में मकर रेखा पर सूर्य की किरणें लम्बवत् पड़ती है। इस कारण वायुभार की पेटियाँ उत्तर व दक्षिण गोलार्द्ध में 50° से 10° अक्षाशों तक खिसक जाती है। दोनों गोलाद्ध में 30° से 45° अक्षांश मध्य स्थित स्थानों के मौसम पर विशेष प्रभाव पड़ता है। यह क्षेत्र ग्रीष्मकाल की व्यापारिक वायु और शीतकाल की पछुआ वायु द्वारा विशेष रूप से प्रवाहित होता है।

प्रश्न 4.
व्यापारिक वायु किसे कहते हैं? इस वायु की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर –
सम्पूर्ण वर्ष नियमित रूप से कर्क एवं मकर रेखीय उच्च वायुदाब पेटी से भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाव पेटी की ओर प्रवाहित होने वाली वायु को व्यापारिक वायु कहते हैं
इस वायु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) यह वायु दोनों गोलार्द्धां में 5°25° अक्षांशों के मध्य प्रवाहित होती है।

(ii) उत्तरी गोलार्द्ध में व्यापारिक वायु कर्करेखीय उच्च वायुदाब पेटी से भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर सीधे – पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर प्रवाहित प्रवाहित न होकर फेरल के नियम के अनुसार दायीं ओर मुड़ जाती है तथा उत्तर- होती है। अंत: उत्तरी गोर्लर्द्ध में इसे उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक वायु के नाम से जाना जाता है। दक्षिणी गोलार्द्ध में व्यापारिक वायु मकररेखीय उच्च वायुदाब पेटी से भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी को ओर प्रवाहित होती है तथा फेरल के नियम के अनुसार बायीं ओर मुड़कर दक्षिण – पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है फलस्वरूप दक्षिणी गोलार्द्ध में इसे दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक वायु के नाम से जाना जाता है।

(iii) उत्तरी गोलार्द्ध में स्थलीय भाग के विस्तार के कारण पर्वत-पहाड़ियाँ, मानव बस्तियाँ, पेड़-पौधे आदि व्यापारिक वायु के मार्ग में बाधा उपस्थित करते हैं अतः यहाँ इन हवाओं का वेग (लगभग 16 कि०मी० प्रति घंटा) अपेक्षाकृत कम रहता है। इसके . विपरीत दक्षिणी गोलार्द्ध में जलीय भाग की अधिकता के कारण ये हवाएँ बिना किसी बाधा के तीव्र गति (लगभग -22-30 कि०मी० प्रति घंटा) से प्रवाहित होती हैं। व्यापारिक वायु का वेग शीत ऋतु में अधिक तथा ग्रीष्म ऋतु में कम रहता है।

प्रश्न 5.
पछुआ वायु किसे कहते हैं? इस वायु की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर –
कर्क एवं मकर रेखीय उच्च वायुदाब पेटी से सुमेरु वृत्त (आर्कटिक वृत्त) कुमेरुवृत्त (अण्टार्कटिक वृत्त० अंचल के निम्न वायुदाब पेटी की ओर प्रवाहित होने वाली वायु को पछुआ वायु कहते हैं। पश्चिम की ओर से आने के कारण उस वायु का नामकरण पछुआ वायु हुआ है।

पछुआ वायु की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) यह वायु दोनों गोलार्द्धां में 35° से 60° अक्षांशों के मध्य स्थित अंचलों में प्रवाहित होती है।

(ii) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न कोरियोलिस बल के कारण इन हवाओं के प्रवाह की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है अतः उत्तरी गोलार्द्ध में इन्हें दक्षिणी-पश्चिमी पछुआ वायु कहते हैं। इसी प्रकार दक्षिणी गोलार्द्ध में ये हवाएँ उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर प्रवाहित होती है अत: उन्हें यहाँ उत्तरी पश्चिमी पछुआ वायु के नाम से जाना जाता है।

(iii) दक्षिणी गोलार्द्ध में महासासागरीय भाग की अधिकता के कारण पछुआ हवाओं के मार्ग में कोई अवरोध नहीं होता अतः यहाँ इनके प्रवाह की गति तीव्र होती है। तीव्र प्रवाह के कारण ही 400 से 650 दक्षिणी अक्षांशों के बीच नाविकों ने इन्हें गरजने वाली चालीसा, क्रोधोन्मत्त पचासा तथा चीत्कार वाली साठा आदि विविध नाम दिए हैं।

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प्रश्न 6.
स्थायी वायु दाब पेटियों के खिसकाव या स्थान परिवर्तन के कारण का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
उत्तर :
स्थायी वायु दाब पेटियों के स्थान परिवर्तन या खिसकाव के कारण (Causes):- वायुभार एवं स्थायी हवाओं की पेटियों के खिसकने के निम्नलिखित कारण हैं –

  • पृथ्वी का कीली पर झुका होना,
  • पृथ्वी की कीली का सदा एक ही ओर झुका होना और
  • पृथ्वी की वार्षिक गति ।

यदि पृथ्वी अपनी कीली पर झुकी न होती तो सूर्य की किरणे वर्ष भर भूमध्यरेखा पर ही लम्बवत् पड़तीं। ऐशी दशा में वायुभार की पेटियों के साथ-साथ स्थायी हवाओं की पेटियाँ भी वर्ष भर स्थिर रहतीं । परन्तु पृथ्वी अपनी कीली पर 23 1/ 2. झुकी हुई है तथा वर्ष में एक बार सूर्य की परिक्रमा कर लेती है जिससे सूर्य की लम्बवत् किरणों की स्थिति में परिवर्तन होता रहता है ।

अतः तापक्रम के परिवर्तन के साथ-साथ वायुभार एवं हवाओं की पेटियाँ भी सूर्य की किरणों के साथ-साथ उत्तर एवं दक्षिण खिसका करती हैं। 21 मार्च एवं 23 सितम्बर को सूर्य की किरणें भूमध्यरेखा पर लम्बवत् पड़ती है । अतः इस दिन वायुभार एवं हवाओं की पेटियाँ अपनी वास्तविक मध्यम स्थिति में रहती हैं।

21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण हो जाता है तथा 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकने लगता है। अतः तापक्रम के कटिबन्धों के साथ-साथ वायुभार एवं स्थायी हवाओं की पेटियाँ भी उत्तर की ओर खिसक जाती हैं। इसके विपरीत 23 सितम्बर के बाद सूर्य भी दक्षिणायन हो जाता है तथा 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत् चमकने लगता है ।

अतः तापक्रम के कटिबन्धों के साथ-साथ वायुभार एवं स्थायी हवाओं की पेटियाँ भी दक्षिण की ओर खिसक जाती हैं। समुद्र के समकारी प्रभाव के कारण वायुभर एवं हवाओं की पेटियाँ स्थल की अपेक्षा समुद्री भाग में कम खिसकती है। वायुभार एवं हवाओं की पेटियाँ 5° से 10° अक्षांशों तक ही खिसकती हैं।

प्रश्न 7.
स्थायी वायुदाब पेटियों के खिसकाव या स्थान परिवर्तन के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
स्थायी वायुदाब पेटियों के स्थान परिवर्तन या खिसकाव के प्रभाव (Effects) :- हवाओं की पेटियों के खिसकने के कारण बहुत से प्रदेश वर्ष भर में दो प्रकार की हवाओं की पेटियों के प्रभाव में आ जाते हैं जिसका उसकी जलवायु पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार के दोहरे प्रभाव में आने वाले तीन प्रमुख प्रदेश हैं –

(i) भूमध्य रेखा के निकट 5° से 15° अक्षांशों के बीच के भाग ग्रीष्मकाल में भूमधअय रेखीय निम्न वायुभआर की पेटी में आ जाते हैं जिससे गर्मी में वहाँ प्रतिदिन दिन के तीसरे पहर संवाहनिक वर्षा होने लगती है। शीतकाल में ये प्रदेश व्यापारिक हवाओं की पेटी में आ जाते हैं जिनसे महाद्वीपों के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं वर्षा होती है।

(ii) दोनों गोलाद्धों में 30° से 45° अक्षांशों के मध्य के भाग ग्रीष्मकाल में व्यापारिक हवाओं की पेटी में आ जाते हैं, जबकि शीतकाल में पछुआ हवाओं के प्रभाव में। इससे इन अक्षांशों में स्थित महाद्वीपों के पश्चिम भाग में केवल जाड़े में वर्षा होती है और ग्रीष्मकाल शुष्क रहता है। इस प्रकार यहाँ भूमध्यसागरीय जलवायु पायी जाती है।

(iii) 60° से 70° अक्षांशों के बीच वाले प्रदेश गर्मी में गर्म पछुआ हवाओं के प्रभाव से गर्म रहते हैं परन्तु जाड़ों में शीत ध्रुवीय हवाओं के प्रभाव से अत्यन्त ठण्डे हो जाते हैं ।

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प्रश्न 8.
स्थायी वायु का जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
स्थायी हवाओं का दूसरा नाम ग्रहीय हवाएं हैं एवं स्थायी हवाओं के तीन भेद होते हैं।

  • पूर्वी या व्यापारिक हवाएँ
  • पछुआ हवाएँ
  • ध्रुवीय हवाएँ

पूर्वी या व्यापारिक वायु का जलवायु पर प्रभाव :- पूर्वी वायु का जलवायु पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है।

  • उष्ण एवं शुष्क प्रायः हरितीमाविहीन मरूस्थलीय क्षेत्र में तापमान बहुत अधिक रहता है।
  • धूल से भरा मरूस्थल खेती और और यातायात के लिए अनुपयुक्त है।
  • इस भाग में मनुष्य का जीवन-यापन कष्टकर हो जाता है।
  • पूर्व की ओर से आने के कारण इनसे महाद्वीप के पूर्वी भाग में वर्षा होती है। लेकिन पश्चिम में आते-आते ये हवाएं शुष्क हो जाती हैं जिससे पश्चिम में वर्षा नहीं होती।
  • प्राचीन काल में युरोप से अमेरिका जाने वाले जहाज इन्हीं हवाओं की सहायता से व्यापार किया करते थे।
  • उष्ण व्यापारिक वायु पूर्व से पश्चिम में महासागर के ऊपर से प्रवाहित होने के कारण जलवाष्प से भर जाती है।

पछुआ वायु का जलवायु पर प्रभाव पछुआ वायु का जलवायु पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है।

  • गर्म भू-भाग से ठंडे भू-भआगों की ओर प्रवाहित होने वाली पश्चिमी वायु के प्रभाव से ठंडे प्रदेशों की ठंड कुछ कम
    हो जाती है।
  • शीतकाल में जल भाग स्थल भाग की तुलना में ज्यादा गर्म रहता है। इस समय जलवाष्पयुक्त पश्चिमी वायु या पछुआ वायु पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होते हैं एवं पर्याप्त वर्षा होता है।
  • भूमध्य सागर के तटवर्ती क्षेत्रों में कृषि कार्य और यातायात व्यवस्था पर्याप्त विकसित है।
  • ग्रीष्मकाल की हल्की ठंड आरामदायक होती है।
  • इन भू-भागों में जीविका निर्वाह के साधन उत्तम हैं। इस कारण यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है। ध्रुवीय वायु का जलवायु पर

प्रभाव:- ध्रुवीय वायु का जलवायु पर निम्नलिखित प्रभाव होता है।

  • ध्रुवीय प्रदेश में बर्फ की चादर से ढँके टुण्ड्रा प्रदेश में वर्ष में 3 से 9 महीने की लम्बी शीत ऋतु होती है।
  • यह भू-भाग कृषि के आयोग्य है एवं यह भाग यातायात के प्रतिकूल है।
  • यहाँ रहने वाले मनुष्य प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करके जी रहे हैं।
  • दोनों गोलार्द्ध की ध्रुवीय वायुहिम शीतल अंचलों से अपेक्षाकृत उष्ण अंचलों में प्रवाहित होती है।
  • यहाँ वर्षा बिल्कुल नहीं होती है जो भी वर्षा होती है वह हिम के रूप में ही होती है।
  • इस भाग में जलवायु इतनी कठोर है कि यहाँ वनस्पति का उगना असम्भव है। भूमि सदा बर्फ से ढंकी रहती है। अत: यह भाग वनस्पति शून्य है ।

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प्रश्न 9.
स्थानीय वायु क्या है ? कुछ प्रमुख स्थानीय हवाओं का संक्षेप में वर्णन करो ।
उत्तर :
स्थानीय हवाएँ (Local Winds) – किसी स्थान विशेष पर स्थानीय कारणों से उत्पन्न होने वाली हवाओं को स्थानीय हवाएँ कहते हैं । जिस क्षेत्र या स्थान पर ये प्रवाहित हैं उसी स्थान के नाम से इस वायु की पहचान होती है। कुछ प्रमुख स्थानीय वायु :

(i) फान (Fahn) – भूमध्य सागर से आने वाली भाप भरी हवाएँ आल्पस पर्वत से टकरा कर उसके दक्षिण भाग पर वर्षा करती हुई उत्तर में आल्पस पर्वत को पार कर यूरोप में प्रवाहित होती है। प्रभाव – इन हवाओं के प्रभाव से आल्पस पर्वत की उत्तरी घाटियों का तापक्रम 15°C से तक 20°C तक बढ़ जाता है। ये हवाएं वहाँ अंगुर की फसलों के लिए विशेष लाभदायक होती है।

(ii) चिनूक (Chinook ) – प्रशान्त महासागर से आने वाली भाषभरी हवाएँ उत्तरी अमेरिका के रॉकी पर्वत से टकरा कर पश्चिमी भाग में खूब वर्षा करती है लेकिन रॉकी पर्वत पार करने पर जब यह पूर्वी ढाल से नीचे उतरती है तो गर्म व शुष्क हो जाती है। प्रभाव – इन गर्म व शुष्क हवाओं के प्रभाव से अमेरिका के प्रेरीज की बर्फ पिघल जाती है। इसी से इस भाग में इस हवा को हिम भक्षिणी (Snowcater) कहते हैं।

(iii) हरमैटन (Harmattan)- अफ्रीका की पूर्वी तथा उत्तरी-पूर्वी भाग में स्थित सहारा मरुस्थल में उत्तर-पूर्व से दक्षिण पश्चिम में चलने वाली शुष्क तथा धूल भरी हवा को हरमेटन कहते हैं। ये इतनी गर्म व शुष्क होती है कि इससे पेड़ तने फट जाते हैं। प्रभाव – पश्चिमी अफ्रीका के गिनीतट के समीप पहुँचकर यह वायु वहाँ की आर्द्रता को समाप्त कर देती है जिससे वहाँ मौसम अचानक खुशनुमा तथा स्वास्थ्यप्रद हो जाता है ।

(iv) बोरा (Bora) – बोरा एक शुष्क व ठंडी वायु है जो जाड़े में एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारे – मुख्यत: इटली के उत्तरी भाग में बहती है ।
प्रभाव – स्थल से आने के कारण ये हवाएं ठंडी व शुष्क होती है लेकिन एंड्रियाटिक सागर पार करते समय इसमें कुछ मी आ जाती है जिससे इन हवाओं से कभी-कभी वर्षा होती है।

(v) पम्पेरो (Pampero) – यह वायु गर्म एवं शुष्क होती है जो एण्डीज पर्वत को पार करके पूर्व की ओर बहती है। प्रवाह – पंपास क्षेत्र को ग्रीष्मकालीन जलवायु का तापक्रम बहुत कम कर देती है जिससे यहाँ की जलवायु सुहावनी हो जाती है ।

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(vi) सिरोको (Sirocco ) – चक्रवातीय व्यवस्था के कारण भूमध्य सागर पर निम्न वायुभार तथा सहारा प्रदेश में उच्च वायुभार का क्षेत्र बन जाता है। जिस कारण सहारा मरुस्थल से भूमध्यसागर की ओर शुष्क गर्म तथा धूल भरी हवाएँ चलती हैं। प्रभाव – इन हवाओं के कारण मौसम बड़ा कष्टप्रद हो जाता है। शरीर शिथिल हो जाता है और कार्य करने की इच्छा नहीं होती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
भूमध्य रेखीय क्षेत्र में निम्न वायु दाब का क्या कारण है ?
(a) तिरछी किरणों का पड़ना
(b) वर्ष भर सूर्य की लम्बवत् किरणों का पड़ना
(c) दोनों किरणों का होना
(d) सीधी किरणों का पड़ना
उत्तर :
(b) वर्ष भर सूर्य की लम्बवत् किरणों का पड़ना।

प्रश्न 2.
निम्न वायु दाब कहां पाया जाता है ?
(a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र में
(b) धुवीय प्रदेश में
(c) टुण्ड्रा प्रदेश में
(d) धुवीय अंचल में
उत्तर :
(a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र में।

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प्रश्न 3.
किस अंचल को शांत वलय कहा जाता है ?
(a) कर्क एवं मकर रेखीय अंचल
(b) धुवीय अंघल
(c) भूमध्य रेखीय अंचल
(d) टुण्ड़ा प्रदेश
उत्तर :
(c) भूमध्य रेखीय अंचल

प्रश्न 4.
अश्व अक्षांश कहा जाता है –
(a) 0° 1° को
(b) 25°-36° को
(c) 60°-65° को
(d) 70°-75° को
उत्तर :
(b) 25°-36° को

प्रश्न 5.
पृथ्वी पर वायुभार की पेटियों की संख्या
(a) 7
(b) 6
(c) 5
(d) कोई नहीं
उत्तर :
(a) 7

प्रश्न 6.
पृथ्वी पर वायु प्रवाह का कारण है –
(a) दो स्थानों के वायुभार में अंतर
(b) दो स्थानों के वायु भार में समानाता
(c) इनमें से कोई नहीं।
(d) a और b दोनों
उत्तर :
(a) दो स्थानों के वायुभार में अंतर।

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प्रश्न 7.
पृथ्वी पर वायु प्रवाह का कारण है –
(a) निम्न वायुभार से उच्च वायुभार की ओर
(c) इनमें से कोई नहीं
(b) उच्च वायु भार से निम्न वायुभार की ओर
(d) a और b दोनों
उत्तर :
(b) उच्च वायु भार से निम्न वायुभार की ओर

प्रश्न 8.
हवाएं उत्तरी गोलार्द्ध में मुड़ जाती है –
(a) ऊपर के तरफ
(b) वार्यी ओर
(c) दाहिनी ओर
(d) नीचे की ओर
उत्तर :
(c) दाहिनी ओर

प्रश्न 9.
अश्व अक्षांशों में विषुवत रेखा की ओर चलने वाली हवाओं का नाम है –
(a) धुवीय पवन
(b) व्यापारिक पवन
(c) लू
(d) संवहनीय पवन
उतर –
(b) व्यापारिक पवन

प्रश्न 10.
कर्क रेखा से भूमध्य रेखा की ओर चलने वाली पवनों का नाम है –
(a) द॰पू० व्यापारिक पवन
(b) धुवीय पवन
(c) उ० पू० व्यापारिक पवन
(d) संवहनीय पवन
उत्तर :
(c) उ० पू० व्यापारिक पवन

प्रश्न 11.
वायुदाब को कौन से यन्त्र से मापा जाता है?
(a) बैरोमीटर
(b) थर्मामीटर
(c) विन्डवेन
(d) सिस्मोग्राफ
उत्तर :
(a) बैरोमीटर।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 12.
भूमध्य रेखीय निम्न वायुभार क्षेत्र को कहा जाता है –
(a) अश्व अक्षांश
(b) डोलड्रम
(c) गरजने वाली चलीसा
(d) ध्रुवीय अक्षांश
उत्तर :
(b) डोलड्रम।

प्रश्न 13.
वे हवाएं जो वर्ष भर एक निश्चित दिशा की ओर प्रवाहित होती है उन्हें कहते हैं –
(a) सामयिक पवन
(b) अस्थाई हवाएँ
(c) स्थाई हवाएँ
(d) असामयिक पवन
उत्तर :
(c) स्थाई हवाएँ।

प्रश्न 14.
बोरा हवाएँ हैं –
(a) उष्ण एवं शुष्क
(b) ठंडी एवं शुष्क पवन
(c) आर्द्र
(d) उष्षार्द
उत्तर :
(b) ठंडी एवं शुष्क पवन

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 4 चापवलय और वायु प्रवाह

प्रश्न 15.
भूमध्यरेखीय अंचल में वायुमण्डल गर्म होता है –
(a) संचालन विधि से
(b) संवहनीय विधि से
(c) सम्पर्क विधि से
(d) उपरोक्त किसी भी विधि से नहीं
उत्तर :
(b) संवहनीय विधि से

प्रश्न 16.
भूमध्यरेखीय अंचल में वायु प्रवाह रहता है –
(a) क्षैतिज
(b) उर्ष्वगामी
(c) स्थल से सागर की ओर
(d) सागर से स्थल की ओर।
उत्तर :
(b) उर्ध्वगामी

प्रश्न 17.
कर्क एवं मकर रेखीय अंचलों में उच्च वायु दाब की सृष्टि का मुख्य कारण है-
(a) अत्यधिक कम तापमान का होना
(b) वायुमण्डल में अत्यधिक नमी का होना
(c) ठण्डी एवं भारी वायु का नीचे उतरना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) ठण्डी एवं भारी वायु का नीचे उतरना।

प्रश्न 18.
वायु प्रवाह का मुख्य कारण है-
(a) दो अंचलों के बीच ऊँचाई में अन्तर
(b) दो अंब्लों के बीच वायु दाबाव में अन्तर
(c) दो अंचलों के बीच वर्षा में अन्तर
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर :
(a) दो अंचलों के बीच वायु दबाव में अंतर।

प्रश्न 19.
उच्च वायुदबाव एवं निम्न वायुदबाव के मध्य अन्तर अधिक हो जाने से-
(a) वायु के प्रवाह की गति कम हो जाती है
(b) मौसम शांत रहता है
(c) वायु के प्रवाह की गति बढ़ जाती है.
(d) वायु के प्रवाह की गति सामान्य रहती है
उत्तर :
(c) वायु के प्रवाह की गति बढ़ जाती है।

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प्रश्न 20.
कोरियोलिस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में हवाएँ एवं धाराएँ मुड़ती हैं –
(a) उत्तर की ओर
(b) पूरब की ओर
(c) दायीं ओर
(d) बायीं ओर
उत्तर :
(c) दायीं ओर।

प्रश्न 21.
कोरियोलिस बल का मान सर्वाधिक रहता है –
(a) धुवीय अंचल पर
(b) उपध्रुवीय अंचल पर
(c) भूमध्य रेखीय अंचल पर
(d) अयनरेखीय अंचल पर
उत्तर :
(a) ध्रुवीय अंचल पर

प्रश्न 22.
भू-पृष्ठ पर सम्पूर्ण वर्ष एक ही दिशा में प्रवाहित होने वाली वायु को कहते हैं –
(a) आकस्मिक वायु
(b) सामयिक वायु
(c) स्थायी वायु
(d) अस्थायी वायु
उत्तर :
(c) स्थायी वायु।

प्रश्न 23.
उत्तरी-पूर्वी एवं दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक वायु मिलती है –
(a) उपधुवीय अभिसरण अंचल में
(b) अयनरेखीय अंचल में
(c) भूमध्यरेखीय अभिसरण अंचल में
(d) ध्रुवीय अंचल में।
उत्तर :
(c) भूमध्यरेखीय अभिसरण अंचल में।

प्रश्न 24.
दक्षिणी गोलार्द्ध में पछुआ वायु के प्रवाह की गति अधिक होने का कारण है –
(a) स्थलीय भाग की अधिकता
(b) सागरीय भाग की अधिकता
(c) उच्च वायुदाब का होना
(d) निम्न वायुदाब का होना
उत्तर :
(b) सागरीय भाग की अधिकता।

प्रश्न 25.
धुवीय वायु होती है –
(a) उष्ण एव आर्द्र
(b) उष्ण एवं शुष्क
(c) शुष्क एवं शीतल
(d) आर्द्र एवं श्रितल
उत्तर :
(c) शुष्क एवं शीतल

प्रश्न 26.
सूर्य की उत्तरायण की स्थिति में वायुदाब पेटियाँ खिसकती हैं –
(a) कुछ पूरब की ओर
(b) कुछ दक्षिण की ओर
(c) कुछ पथ्धिम की ओर
(d) कुछ उत्तर की ओर
उत्तर :
(d) कुछ उत्तर की ओर।

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प्रश्न 27.
सागरीय वायु (Sea Breaze) की गति सबसे अधिक रहती है –
(a) मध्याह्न के बाद
(b) मध्याह्न के पहले
(c) अर्द्धरात्रि के समय
(d) भोर में
उत्तर :
(a) मध्याह्न के बाद।

प्रश्न 28.
सागरीय एवं स्थलीय वायु का प्रभाव रहता है –
(a) महादेशों के भीतरी भागों में
(b) पर्वतीय अंचलों में
(c) तटीय अंचलों में
(d) पर्वतपदीय अंघलों में
उत्तर :
(c) तटीय अंचलों में।

प्रश्न 29.
शीतकालीन मौसमी वायु से वर्षा नहीं होती है क्योंकि –
(a) यह वायु स्थल से सागर की ओर चलती है
(b) यह वायु सागर से स्थल की ओर चलती है
(c) यह वायु पर्वत से घाटी की और चलती है
(d) यह वायु घाटी से पर्वत की ओर चलती है
उत्तर :
(a) यह वायु स्थल से सागर की ओर चलती है।

प्रश्न 30.
मध्य यूरोप में तापमान में अचानक वृद्धि के लिए उत्तरदायी स्थानीय वायु है –
(a) फॉन
(b) बोरा
(c) सिरक्को
(d) पम्पेरो
उत्तर :
(a) फॉन।

प्रश्न 31.
‘The Doctor’ के नाम से पुकारी जाने वाली स्थानीय वायु है –
(a) सिरक्को
(b) बोरा
(c) हरमटटान
(d) चिनूक
उत्तर :
(c) हंरमटटान

प्रश्न 32.
चक्रवातों के केन्द्र में रहता है –
(a) उच्च वायु दबाव
(b) निम्न वायु दबाव
(c) निम्न तापमान
(d) उच्च तापमान
उत्तर :
(c) निम्न वायु दबाव।

प्रश्न 33.
प्रतिचक्रवातों में हवाएँ चलती हैं –
(a) बाहर से केन्द्र की ओर
(b) केन्द्र से बाहर की ओर
(c) किसी भी दिशा में।
(d) सम्वहन धारा के रूप में केन्द्र से ऊपर की ओर
उत्तर :
(b) केन्द्र से बाहर की ओर।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. वायु में अपना _________ होता है।
उत्तर : भार

2. हवाएँ उच्च वायुभार से _________वायुभार की ओर चला करती है।
उत्तर : निम्न

3. भू-पृष्ठ पर वायु के समानान्तर चलने को _________कहते हैं।
उत्तर : वायु प्रवाह

4. वायु भार को _________से मापते हैं।
उत्तर : बैरोमीटर

5. तापक्रम बढ़ने पर वायुभार _________हो जाता है।
उत्तर : कम

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6. पूर्वी हवाओं को _________हवाएं भी कहते हैं।
उत्तर : व्यापारिक हवाएं

7. भूमध्य रेखीय अंचल को _________कहते हैं।
उत्तर : शांत वलय

8. मौसम वैज्ञानिक फेरल के सिद्धान्त को _________कहते हैं।
उत्तर : फेरल का नियम

9. डच मौसम वैज्ञानिक वायस बैलेट के वायुचाप के _________सिद्धान्त को कहा जाता है।
उत्तर : वायश वैलेट

10. वायु जिस दिशा में प्रवाहित होती है उस दिशा के अनुसार उसका _________किया जाता है।
उत्तर : नामकरण

11. समुद्री स्थलीय वायु का प्रवाह _________होता है।
उत्तर : प्रतिदिन

12. वायु अपने वजन से पृथ्वी पर _________बनाती है।
उत्तर : दबाव

13. उर्ध्वगामी वायु की उष्णता क्रमश: _________होती जाती है ।
उत्तर : कम

14. अश्व अक्षांशों से गुजरने वाले जलयानों की गति _________हो जाती थी।
उत्तर : अवरुद्ध

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15. ध्रुवीय अंचल की वायु में _________का परिमाण कम रहता है।
उत्तर :जलवाष्प

16. वायु के प्रवाहित होने वाली दिशा में कोरियोलिस बल _________पर प्रभाव ड़ालता है।
उत्तर : समकोण

17. पछुआ वायु व्यापारिक वायु की तुलना में कुछ _________होती है ।
उत्तर : अनियमित

18. ध्रुवीय वायु दोनों गोलार्द्ध में _________उच्च वायु दाब से _________ निम्न वायु दाब की ओर प्रवाहित होती है।
उत्तर : ध्रुवीय, उप-ध्रुवीय

19. 30°- 40° अक्षांशों के मध्य का अंचल ग्रीष्म काल में _________वायु से प्रभावित होती है।
उत्तर : व्यापारिक

20. व्यापारिक हवाओं के मार्ग में महादेशों के पश्चिमी भाग में _________पाए जाते हैं।
उत्तर : उष्ण मरुस्थल

21. उत्तरी गोलार्द्ध की तुलना में दक्षिणी गोलार्द्ध में ध्रुवीय वायु अधिक _________रूप से बहती है।
उत्तर : नियमित

22. तटीय अंचलों में दिन के समय सागर से स्थल की ओर चलने वाली वायु को _________कहते हैं।
उत्तर : सागरीय वायु

23. _________वायु को सागरीय और स्थलीय वायु का वृहद संस्करण कहा जाता है।
उत्तर : मानसूनी

24. चिनूक का अर्थ है _________I
उत्तर : तुषार भक्षक

25. पम्पेरो अत्यधिक _________एवं _________वायु है।
उत्तर : ठण्डी, शुष्क

26. _________यूरोप के दक्षिणी भाग में प्रवाहित होने वाली स्थानीय वायु है।
उत्तर : सिरक्को

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. भूमध्य रेखीय निम्न वायु भार की पेटी में किरणें वर्ष भर लम्बवत् पड़ती हैं।
उत्तर : True

2. हमारी पृथ्वी पर कुल सात वायुभार की सात पेटियाँ हैं।
उत्तर : True

3. भूमध्य रेखीय पेटी का दूसरा नाम अश्व अक्षांश है।
उत्तर : False

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4. भूमध्य रेखीय पेटी को अश्व अक्षांश भी कहा जाता है।
उत्तर : False

5. ऊँचाई पर जाने पर वायु भार घटता है।
उत्तर : True

6. 25°-26° अक्षांशों को अश्व अक्षांश कहा जाता है।
उत्तर : True

7. सुमेरू और कुमेरू पर निम्न चाप वलय है।
उत्तर : False

8. एनिमोमीटर नामक यंत्र से वायु की गति मापा जाता है।
उत्तर : True

9. कोरीयालिस ने सर्वप्रथम विक्षेपकारी बल की पहचान की।
उत्तर : True

10. वायु प्रवाह का मुख्य कारण तापक्रम एवं वायुभार में अन्तर का मिलना है।
उत्तर : True

11. वायु जिस दिशा में प्रवाहित होती है उस दिशा के अनुसार उसका नामकरण होता है।
उत्तर : True

12. धुवीय वायु गर्म होती है।
उत्तर : False

13. स्थानीय वायु अर्घरात्रि में तीव्रगति से बहती है।
उत्तर : True

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14. चिनूक एक शुष्क एवं उष्ण वायु है।
उत्तर : True

15. बोरा शुष्क एवं ठंडी वायु है।
उत्तर : True

16. 40° दक्षिणी अक्षांश रेखा के पास पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होने वाली गरजती हुई वायु को गरजने वाली चालीसा कहा जाता है।
उत्तर : True

17. वायु में जलवाष्म धारण करने की क्षमता अधिक होने से वायु भारी हो जाती है।
उत्तर : False

18. भूमध्यरेखीय अंचल में हल्की वायु प्रसारित होकर ऊपर उठती है।
उत्तर : True

19. उर्ष्वगामी वायु की उष्णता क्रमशः कम होती जाती है।
उत्तर : True

20. धुव वृत्तीय प्रदेशों में उच्च वायु दबाव की सृष्टि होती है।
उत्तर : False

21. दोनों धुवीय अंचलों में लगभग सम्पूर्ण वर्ष तापमान हिमांक से नीचे रहता है।
उत्तर : True

22. व्यापारिक वायु दोनों गोलार्द्धों में 30°-60° अक्षांशों के मष्य प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

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23. वायु दबाव के ऊपर तापमान का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है।
उत्तर : True

24. अलग-अलग अक्षांशों पर वायु की उष्णता समान रहती है।
उत्तर : True

25. वायुदाब पेटियों का खिसकाव दोनो गोलार्द्धों में 5° से 10° अक्षांशों तक होता है।
उत्तर : True

26. भारतीय उपमहादेश में साधारणत: मानसूनी वायु प्रवाहित होती है।
उत्तर : True

27. पर्वतीय वायु को एनाबेटिक वायु कहते हैं।
उत्तर : True

28. फॉन के प्रभाव से मध्य यूरोप का तापमान बहुत कम समय में बढ़ जाता है।
उत्तर : True

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29. पम्पेरो यूरोप के दक्षिणी भाग में प्रवाहित होती है।
उत्तर : False

30. शीतोष्ण अंचल का चक्रवात विष्वंसकारी होता है।
उत्तर : False

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 3 चट्टान

Detailed explanations in West Bengal Board Class 8 Geography Book Solutions Chapter 3 चट्टान offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 8 Geography Chapter 3 Question Answer – चट्टान

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
कौन-सी चट्टान प्राथमिक चट्टान कहलाती है?
उत्तर:
आग्नेय चट्टान।

प्रश्न 2.
किस चट्टान में जीवाश्म (Fossils) पाये जाते हैं।
उत्तर:
अवसादी चट्टान में।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 3 चट्टान

प्रश्न 3.
पातालीय आग्नेय चट्टान का एक उदाहरण बताओ।
उत्तर :
गेब्रो।

प्रश्न 4.
ज्वालामुखी चट्टान का उदाहरण दो।
उत्तर :
बेसाल्ट।

प्रश्न 5.
विज्ञान की जिस शाखा में चट्टान का अध्ययन किया जाता है, उसे किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर :
पेट्रेलॉजी

प्रश्न 6.
खनिजों का अध्ययन विज्ञान के किस शाखा के अंतर्गत किया जाता है?
उत्तर :
मिनरेलॉजी।

प्रश्न 7.
आग्नेय चट्टान की कोई एक विशेषता बताओ।
उत्तर :
ये परतहीन होती है।

प्रश्न 8.
हमारी पृथ्वी पर सबसे अधिक किस तरह की चट्टानें पायी जाती हैं?
उत्तर :
अवसादी चट्टान लगभग 75 प्रतिशत।

प्रश्न 9.
खनिज तेल और प्राकृतिक गैस किस तरह की चट्टानों में पाई जाती है?
उत्तर :
अवसादी चद्टानों में।

प्रश्न 10.
कोयला किस प्रकार का चट्टान है ?
उत्तर :
अवसादी चट्रान

प्रश्न 11.
चुना पत्थर और बालू पत्थर कौन-सी चट्टान है ?
उत्तर :
अवसादी चट्टानें

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 3 चट्टान

प्रश्न 12.
शेल का परिवर्तित रूप क्या है?
उत्तर :
स्लेट।

प्रश्न 13.
चूना पत्थर का एक उदाहरण क्या है?
उत्तर :
संगमरमर।

प्रश्न 14.
किस प्रकार के चट्टानी क्षेत्र में कास्ट टोपोग्राफी पाई जाती है?
उत्तर :
चूना पत्थर

प्रश्न 15.
बेसाल्ट चट्टानों से बनने वाली मिट्टी का रंग कैसा होता है?
उत्तर :
काला।

प्रश्न 16.
ग्रेनाइट चट्टानों से बनने वाली मिट्टी का रंग कैसा होता है?
उत्तर :
लाल।

प्रश्न 17.
विश्व के सबसे मुल्यवान चट्टान का नाम बताओ।
उत्तर :
हीरा।

प्रश्न 18.
रासायनिक अवसादी चट्टान का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
पोटाश।

प्रश्न 19.
एक ही खनिज से बनी किसी चट्टान का नाम लिखिए।
उत्तर :
चूना पत्थर।

प्रश्न 20.
पेग्माटाइम किस प्रकार की चट्टान हैं?
उत्तर :
उप-पातालीय आग्नेय चट्टान।

प्रश्न 21.
विखण्डित चट्टान-चूर्ण के जमा होने से निर्मित किसी एक अवसादी चट्टान का नाम लिखिए।
उत्तर :
बालुका पत्थर।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 3 चट्टान

प्रश्न 22.
चट्टानों में रूपान्तरण के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं।
उत्तर :
ताप एवं दबाव।

प्रश्न 23.
संगमरमर का बचाव किससे किया जाता है?
उत्तर :
एसिड मिश्रित जल से।

प्रश्न 24.
स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट के मिलने से किसका निर्माण होता है?
उत्तर :
चूना पत्थर के स्तम्भों का।

प्रश्न 25.
किस खनिज की उपस्थिति के कारण ग्रेनाइट चट्टान चमकीली दिखती है?
उत्तर :
अभक की उपस्थिति के कारण।

प्रश्न 26.
भारत के किस पठार को ‘खनिजों का भण्डार गृह’ कहते हैं?
उत्तर :
छोटानागपुर पठार को।

प्रश्न 27.
गेहूँ और कपास की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी आदर्श है?
उत्तर :
काली मिट्टी।

प्रश्न 28.
किस मिट्टी में लौह-ऑक्साइड की अधिकता है?
उत्तर :
लाल मिट्टी में।

प्रश्न 29.
उत्तरी भारत की समतल भूमि का गठन किस मिट्टी से हुआ है?
उत्तर :
जलोढ़ मिट्टी से।

प्रश्न 30.
छोटानागपुर के पठार और मेघालय के अंचलों में कौन-सी मिट्टी पायी जाती है?
उत्तर:
लैटेराइट मिट्टी।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
चट्टान किसे कहते हैं ?
उत्तर:
चट्टान (Rock) – भूगोल में हम उन सभी पदार्थो को चट्टान कहते हैं जिनसे पृथ्वी के प्रथम आवरण या भूपटल (Earth’s Crust) का निर्माण हुआ है। चाहे वे अत्यन्त कठोर हो, जैसे – ग्रेनाइट अथवा अत्यन्त कोमल हो, जैसे बालू और मिट्टी। चट्टानों की कोई निश्चित रासायनिक रचना नहीं होती। वास्तव में ये दो या दो से अधिक खनिजों के मिश्रण से बनती हैं। इस प्रकार खनिजों के योग फल (Aggregate of minerals) को चट्टान कहते हैं।

प्रश्न 2.
चट्टान कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर:
चट्टान तीन प्रकार के होते हैं।

  • आग्नेय चट्टान (Igneous Rocks)
  • अवसादी चट्टान (Sedmentary Rocks)
  • रूपान्तरित चट्टान (Metamorphic Rocks)

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प्रश्न 3.
पेट्रोलॉजी किसे कहते हैं ?
उत्तर:
विज्ञान की वह शाखा जिसमें चट्टान और उसके विशिष्टता का अध्ययन किया जाता है उसे पेट्रोलॉजी (Petrology) कहते हैं।

प्रश्न 4.
मिनरेलॉजी किसे कहते हैं?
उत्तर:
विज्ञान की वह् शाखा जिसमें खनिजों का अध्ययन किया जाता है उसी को मिनिरोलॉजी(Minerology) कहते हैं।

प्रश्न 5.
आग्नेय चट्टान किसे कहते हैं ?
उत्तर:
आग्नेय चट्टान (Igneous Rocks) – आग्नेय शब्द का अर्थ है, अग्नि से निर्मित। पृथ्वी के अत्यंत तप्त तथा पिघले मैग्मा (लावा) के ठण्डा होकर ठोस हो जाने से निर्मित होने वाली चट्टानों को आग्नेय चट्टान कहते हैं।

प्रश्न 6.
जीवाश्म किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जीवाश्म (Fossils) – अवसादों के साथ वनस्पतियों एवं जीवों के सड़े-गले अंश तथा पेड़-पौधों के दब जाने से अवसादी चट्टान का निर्माण होता है। इन्हीं कारणों से अवसादी चट्टान में जीवाश्म पाया जाता है।

कारण बताओ : 3 MARKS

प्रश्न 1.
चूना पत्थर के अँचलों में जलाशयों का निर्माण करना उचित नहीं होता है ।
उत्तर:
चूना पत्थर के अंचलों में किसी बाँध या जलाशय का निर्माण करना उचित नहीं होता क्योंकि वर्षा या नदी का जल के स्पर्श से चूना पत्थर के जल्द गलने से बाँध के टूटने का डर रहता है। साथ ही ऐसे अंचल में ऊंची इमारतें और अतिरिक्त सड़कों का निर्माण भी नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 2.
स्थापत्य शिल्पों का निर्माण अवसादी चट्टानों से होता है ।
उत्तर:
बालू पत्थर से निर्मित भूमि में लवण की मात्रा ज्यादा होती है। इस भूमि की उर्वरता अत्यधिक कम होती है। प्राचीन काल में भारत के अनेक स्थापत्य शिल्पों में जैसे- ताजमहल, लालकिला, उदयगिरि, खंडगिरि का मंदिर, खजुराहो का मंदिर बनाने में बालूका पत्थर का इस्तेमाल किया गया है।

प्रश्न 3.
आग्नेय चट्टान को प्राथमिक चट्टान क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
भू-पृष्ठ के ऊपरी एवं मध्य भागों में सर्वप्रथम आग्नेय चट्टान का ही निर्माण हुआ, इसीलिए इसे प्राथणिक चट्टान भी कहते हैं ।

प्रश्न 4.
अम्लीय आग्नेय चट्टान से तुम क्या समझते हो ?
उत्तर:
वे आग्नेय चट्टानें जिनमें सिलिका की मात्रा अधिक (65% से अधिक) होती है, अम्लीय आग्नेय चट्टान कहलाती है। इनका रंग हल्का एवं घनत्व कम होता है । जैसे- ग्रेनाइट रायोलाइट तथा पेग्माटाइट ।

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प्रश्न 5.
क्षारीय आग्नेय चट्टान किसे कहा जाता है ?
उत्तर:
वे आग्नेय चट्टानें जिनमें सिलिका की मात्रा 45 से 55 प्रतिशत होती है तथा क्षारीय ऑक्साइड की मात्रा 55 से 45 प्रतिशत तक होती है, क्षारीय आग्नेय चट्टान कहलाती हैं। इन चट्टानों का रंग गहरा एवं घनत्व अधिक होता है । जैसे बैसाल्ट तथा गैो ।

प्रश्न 6.
अवसादी चट्टानों का निर्माण प्रक्रिया क्या है?
उत्तर :
नदी, हिमनद, पवन तथा सागरीय लहरों आदि के द्वारा लाए गए चट्टान- चूर्ण निचले भागों में परतों के रूप में जमा होते रहते हैं। परतों के बढ़ते भार एवं दबाव के कारण विभिन्न परतें संगठित होकर अवसादी चट्टान का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 7.
अवसादी चट्टानों के महत्त्व पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर:
अवसादी चट्टानें आर्थिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इन चट्टानों से कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, चूना पत्थर, बालुका पत्थर, डोलोमाइट आदि खनिजों की प्राप्ति होती है। इनमें कोयला, खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस का उपयोग ईंधन एवं शक्ति संसाधन के रूप में किया जाता है। चूना पत्थर का उपयोग सीमेन्ट एवं लौह-इस्पात उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 8.
चूना पत्थर का संक्षिप्त विवरण दीजिए ।
उत्तर:
चूना पत्थर का निर्माण उन जीवों तथा वनस्पतियों के अवशेषों के जमाव से होता है जिनमें चूना की प्रधानता होती है। इसकी रचना घुलनशील तत्व कैल्शियम कार्बोनेट से होती है, अत: यह जल में शीघ्रता से घुल जाता है । इसीलिए इस पर रासायनिक अपक्षय का प्रभाव अधिक होता है। चूना पत्थर का रंग सफेद, धूसर, हरा याकालमि युक्त हो सकता है। सीमेण्ट तथा लौह-इस्पात उद्योग में इसका उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 9.
बालुका पत्थर के बारे में संक्षेप में लिखिए |
उत्तर:
बालुका पत्थर का निर्माण बालू के कणों के संगठन से होता है। इसके संयोजक पदार्थ सिलिका, कैल्शियम, लोहे के ऑक्साइड तथा चीका हैं। यह चट्टान प्रवेश्य होती है परन्तु इसकी क्षय प्रतिरोधी क्षमता अधिक होती है। यह पीले, लाल, गुलाबी, नारंगी, सफेद तथा धूसर आदि रंगों में पाया जाती है। इसका उपयोग भवन निर्माण में किया जाता है।

प्रश्न 10.
चीका मिट्टी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चट्टान चूर्ण के बारीक कणों के निक्षेपण से चीका मिट्टी का निर्माण होता है। यह कालिमा लिए धूसर रंग को होती है। मुलायम प्रकृति की होने के कारण यह जल्दी टूट जाती है।

प्रश्न 11.
संगमरमर (Marble) – के बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
अत्यधिक ताप एवं दबाव के कारण चूना पत्थर का रूपान्तरण संगमरमर में होता है। यह सुंदर, मुलायम एवं चमकीला होता है। जब मौलिंक चूना पत्थर शुद्ध होता है तो उससे बना संगमरमर सफेद रंग का होता है। सफेद के अतिरिक्त यह हरे, धूसर एवं नीले रंग का भी होता है। इसका उपयोग भवन निर्माण एवं मूर्ति निर्माण में अधिक होता है ।

प्रश्न 12.
स्लेट क्या है?
उत्तर:
स्लेट रूपान्तरित चट्टान है जिसका निर्माण शेल के क्षेत्रीय रूपान्तरण से होता है। यह अपेक्षाकृत मुलायम चट्टान होती है, जो सामान्यत: नीले, धूसर एवं काले रंग की होती है। लिखने के उपकरण बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 13.
नीस से क्या समझते हो ?
उत्तर:
ग्रेनाइट के रूपान्तरण से नीस का निर्माण होता है। इसका प्रमुख खनिज फेटसपार है। यह एक प्रतिरोध शैल है जिस पर अपक्षय एवं अपरदन का प्रभाव जल्दी नहीं होता। सड़कों के निर्माण में इस चट्टान का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 14.
कार्स्ट स्थानृति (Karst Topography) किसे कहते हैं?
उत्तर:
चूना पत्थर के प्रदेशों में जल के अपरदन कार्य द्वारा सतह के ऊपर तथा नीचे विशेष प्रकार की स्थालकृतियों का निर्माण हुआ है, जिन्हें कार्स्ट स्थलाकृति (Karst Topography) कहते हैं ।

प्रश्न 15.
मोह स्केल क्या है ?
उत्तर:
खनिज की कठोरता का परिमाप जिस स्केल से किया जाता है, उसे मोह स्केल कहते हैं । कठोरता को सबसे मुलायम से सबसे कठोर के क्रम में मापने के लिए 1 से 10 तक के मानक रहते हैं ।

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प्रश्न 16.
भारत के किस पठार को खनिज सम्पदा का भण्डार कहा जाता है तथा क्यों ?
उत्तर:
भारत के छोटानागपुर के पठार को खनिज सम्पदा का भण्डार कहा जाता है, क्योंकि यहाँ लौह-अयस्क, ताँबा बॉक्साइड, मैंगनीज, डोलोमाइट, अभ्रक आदि खनिज प्रचुर परिमाण में पाए जाते हैं ।

 विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
उत्पत्ति के आधार पर आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण करो ।
उत्तर:
आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण (Classification of Igneous Rocks) – उत्पत्ति के अनुसार आग्नेय चट्टानों के दो भेद हैं।
(i) आन्तरिक आग्नेय चट्टान (Intrusive Igneous Rock) –
(ii) वाह्य आग्नेय चट्टान (Extrusive Igneous Rocks)

(i) आन्तरिक आग्नेय चट्टान (Intrusive Igneous Rock ) – जब भूगर्भ से निकलने वाला लावा धरातल के अत्यन्त गहरे भाग में ठण्डा होकर जम जाता है तो इस प्रकार बनने वाली आग्नेय चट्टान को पतालीय चट्टान कहते हैं। अधिक गहराई पर स्थित होने के कारण ये धीरे-धीरे ठण्डी होकर ठोस बनती हैं। अतः इसके रवे बड़े आकार के होते हैं। जैसै- ग्रेनाइट । इस तरह यह उदभेदी चदान पुनः दो रूपों में पाई जाती हैं। भूगर्भ का मैग्मा जब किसी दरार में धीरे- धीरे कठोर हो जाता है तो ऐसी चट्टान उप पातालीय चट्टान कहलाता है। जैसे- डोलेराइट ।
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(ii) वाह्य आग्नेय चट्टान (Extrusive Igneous Rocks) – जब भूगर्भ से निकलने वाला लावा ज्वालामुखी के उद्गार से धरातल के बाहर आ जाता है तो इस लावा के ठण्डा होकर ठोस होने से बनने वाली आग्नेय चट्टान को बाह्य चट्टान कहते हैं। वायु के प्रभाव से ये शीघ्र ही ठण्डी हो जाती है । अत: यह प्राय: रवाहीन होती हैं।
जैसे – वेसाल्ट

प्रश्न 2.
आग्नेय चट्टान की विशेषताएं लिखो?
उत्तर:
आग्नेय चट्टान की मुख्य विशेषताएं निम्न हैं|

  • ये चट्टानें कठोर होती है। इनके कण संगठित होते हैं। अतः इनका अपक्षरण आसानी से नहीं होता है । परन्तु विखण्डन (Weathering) संभव है।
  • ये परतहीन (Unstratified) होती है।
  • ये चट्टानें रवेदार या दानेदार (Crystalied) होती है।
  • ये छिद्ररहित (Non Porus) होती है। अत: इनमें जल बहुत कम प्रवेश कर पाता है।
  • इन चट्टानों में जीवों एवं वनस्पतियों के अवशेष (Fossils) नहीं पाये जाते हैं ।
  • ज्वालामुखी क्षेत्रों में ये चट्टानें अधिक पायी जाती हैं।

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प्रश्न 3.
अवसादी चट्टान किसे कहते हैं ?
उत्तर:
अवसादी चट्टान (Sedimentary Rocks) – अवसाद शब्द का अर्थ है नीचे बैठने वाले पदार्थ । नदी, या हिमनद वायु समुद्र के बहाकर या हवा द्वारा उड़ाकर लाये गये पदार्थों या जीवाशेष के निम्न भागों में एकत्र होने से निर्मित चट्टानों को अवसादी चट्टान कहते हैं। जैसे बालू पत्थर, चुना पत्थर, शेल, कोयला, जिप्सम आदि ।

प्रश्न 4.
अवसादी चट्टानों की विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर:
अवसादी चट्टानों की निम्नलिखित विशेषतायें हैं –

  • ये चट्टानें परतदार (Stratifed) होती हैं।
  • ये चट्टानें रवादार होती हैं।
  • इनका निर्माण छोटे-छोटे कणों के मिलने से हुआ है। अतः ये संरभ्रीय या छिद्र युक्त (Porus) होती हैं।
  • इन चट्टानों में जिवाश्म (Fossils) एवं वनस्पति के अवशेष अधिक पाये जाते हैं।
  • इसका विखण्डन (Weathering) एवं अपक्षरण (Erosion) आसानी से होता है।
  • धरातल का 75 प्रतिशथ भाग इन्हीं चट्टानों से घिरा है।

प्रश्न 5.
रूपांतरित चट्टान किसे कहते हैं ? रूपान्तरित चट्टानों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
परिवर्तित चट्टाने या रूपान्तरित चट्टानें (Metamorphic Rock) – पृथ्वी के आन्तरिक ताप, दबाव अथवा दोनों के प्रभाव से आग्नेय, अवसादीय अथवा अन्य परिवर्तित चट्टानों के मूल रूप में परिवर्तन हो जाने से बनने वाली चट्टानों को ‘परिवर्तित या रूपान्तरित’ चट्टान कहते हैं। कभी-कभी चट्टानों के रूप, गुण, रंग, खनिज एवं रवों में इतना अधिक परिवर्तन हो जाता है कि यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि ये आग्नेय चट्टानों से बने हैं या अवसादीय चट्टानों से।

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भू गर्भ में प्रचंड ताप और दबाव के कारण देहाअवशेष हाइड्रोजन व कार्वन में परिवर्तन होने से खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस पाये जाते है.। चट्टान अनेक कारणों से रूपांन्तरित होते है ।

  • तापीय या सम्पर्कीय रूपान्तरण से निर्मित होने वाली चट्टाने – संगमरमर, स्लेट ग्रेफाइट से कोयला ।
  • दबाव या गत्यात्मक रूपान्तरण से निर्मित होने वाली चट्टाने – चीका मिट्टी व शेल शिल्ट में, ग्रेनाइट नीस में तथा लिग्नाइट कोयला एन्थासाइट कोयला में ।
  • रसायनिक क्रिया के प्रभाव से निर्मित होने वाली रूपान्तरित चट्टान – ग्रेनाइट के रूपान्तरण वनानीस पून: रूपान्तरीत होकर फाइलाइट में तथा फाइलाइट पून: रूपान्तरित होकर शिल्ट में बदल जाता है ।

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प्रश्न 6.
परिवर्तित चट्टानों की क्या विशेषताएं हैं?
उत्तर:
परिवर्तित चट्टानों की विशेषताएं (Characteristics of metamorphic Rocks)- परिवर्तित चट्टानों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं।

  • ये चट्टानें काफी कठोर होती हैं।
  • इनका विखण्डन (Weatheing) एवं अपक्षरण (Erosion) बड़ी कठिनाई से होता है।
  • ये छिद्रहीन होती है। क्योंकि इनके कण अत्यन्त संगठित होते हैं।
  • इनमें न तो रवे मिलते हैं और न परत।
  • रूपान्तरण के कारण चट्टानों में खनिज सम्बन्धी गुण आ जाते हैं।

प्रश्न 7.
चट्टान चक्र (Rock Cycle) – किसे कहते हैं ?
उत्तर:
चट्टान चक्र (Rock Cycle) – जैसा कि हम जानते हैं कि निर्माण ढंग के आधार पर या चट्टान के तीन रूप होते हैं। आग्नेय चट्टान, अवसादी चट्टान, रूपान्तरित चट्टान। आग्नेय चट्टानों की रचना भूगर्भ के पिघले मैग्मा या लावा के ठण्डा होकर ठोस होने से होता है। प्रारम्भ में पृथ्वी तप्त एवं पिघली अवस्था में थी। इसी से पृथ्वी पर सबसे पहले आग्नेय चट्टानों का निर्माण हुआ। आग्नेय अवसादी तथा रूपान्तरित चट्टानों के विखण्डन था।
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अपक्षरण द्वारा टूट-फूट कर निम्न स्थानों में जमा होने से अवसादी चट्टानों का निर्माण होता है। पुन: ताप अथवा दबाव से या दोनों के सम्मिलित प्रभाव से आग्नेय या अवसादी चट्टानों के मूलरूप में परिवर्तन हो जाने से रूपान्तरित चट्टान का निर्माण होता है। लेकिन रूपान्तरित चट्टान बनने की क्रिया में आग्नेय और अवसादी चट्टान ठोस अवस्था में ही रहता है।

पिघलता नहीं है। ज्यों ही भू-गर्भ में अधिक गहराई में जाने पर यह पिघल जाता है तो वह मैग्मा का रूप धारण कर लेता है। यह पिघला मैग्मा ठंडा होकर ठोस हो जाता है तो पुन: आग्नेय चट्टान निर्माण हो जाता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि आग्नेय → अवसादीय → रूपान्तरित → आग्नेय चट्टानों का निर्माण क्रम चलता रहता है। इसे शिलाचक्र (Rock Cycle) कहते हैं।

प्रश्न 8.
खनिज पदार्थ का क्या महत्व है ?
उत्तर:
खनिज पदार्थों का महत्व : खनिज पदार्थ हमारे दैनिक तथा व्यावसायिक जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं। हम प्रकृति में खनिज के प्रभाव को स्पए रूप से देख सकते हैं। लोहा अथवा बाक्साइड समृद्ध भृमि का ऊपरी स्तर ठोस व लाल रंग का होता है। जिप्सम समृद्ध भूमि नरम, हल्की पीली रंग की होती है। नरम बैल्साइट खनिज से चूना पत्थर का निर्माण होता है जो जल्द ही क्षय ग्रस्त हो जाता है जिस क्षेत्र में खनिज तेल या प्राकृतिक गैस पाये जाते हैं वह अंचल अधिक नरम एवं प्रवेश्य अवसादी चट्टानों से बना होता है।

खनिजों की अधिकता से मिट्टी लाल या लेटराइट हो जाती है। जिसमें खेती नहीं किया जा सकता है। भारत का छोटानागपुर का पठार खनिजों का भंडार है। जैसे लोहा, ताँबा, बाक्साइट, मैगनीज, डोलो माइट, माइका, इत्यादि खनिज पदार्थ पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसलिए छोटानागपुर को भारत के खनिज पदार्थों का भण्डार गृह कहते हैं।

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प्रश्न 9.
चड्टान के द्वारा निर्मित होने वाली मिट्टियों का वर्णन करो।
उत्तर:
विखण्डन से चद्टानों की टूट-फूट होती है। इन्ही चूर्ण से मिट्टी का निर्माण होता है। मिट्टी के ऊपर प्रतिमंडल का निवास होता है। प्राकृतिक शक्तियों जैसे- नदी, वायु, वर्षा, समुद्र तरंग, हिम नद द्वारा अनेक वर्षों में चद्टानों के गठनकारी खनिजों के विखंडित चूर्णों को एक स्थान पर एकत्रित करती है। इनके साथ-साथ जल, वायु, जैव पदार्थों के मिश्रण से मिट्टी का निर्माण होता है। चट्टानों से निर्मित मिट्टियों के निम्न रूप होते हैं।

बेसाल्ट चट्टानों से बनने वाली मिट्टी :- बेसाल्ट चट्टानों से बनने वाली मिट्टी का रंग काला होता है। इस मिट्टी के कण बहुत सूक्ष्म होते हैं। साथ ही इनमें जल धारण करने की क्षमता अधिक होती है। खेती के लिए यह मिट्टी अच्छी होती है। गेहूँ और कपास की खेती के लिए यह आदर्श मिट्टी है। भारत के दक्षिण मालभूमि में यह मिट्टी पायी जाती है।

बलुई मिट्टी:- बालूका पत्थर के क्षेत्र की भूमि बलुई मिट्टी से बनी है। इसका रंग हल्का पीला धूसर बादामी तक होता है। इसके दाने अधिक बड़े होते हैं। इस मिट्टी के कण एक दूसरे से अलग होते हैं। इस प्रकार इस मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता बहुत कम होती है। यह मिट्टी खेती के अनुकूल नहीं होती है। भारत के राजस्थान की मरूभूमि में बलुई मिट्टी पायी जाती है।

लाल मिट्टी :- यह मिट्टी लाल या भूरे रंग की होती है। लोहे की मात्रा अधिक होने के कारण इस मिट्टी का रंग लाल होता है। इस मिट्टी में जीवांश का अभाव होता है। इस मिट्टी के कण बड़े होते हैं। अतः इसमें जल धारण करने की क्षमता कम होती है। यह मिट्टी खेती के उपयुक्त नहीं है। पश्चिम के पठारी भाग में यह मिट्टी पायी जाती है।

जलोढ़ मिट्टी :- जलोढ़ मिट्टी में खनिजों की कण सूक्ष्म रूप में पाये जाते हैं। यह मिट्टी, नदी एवं वायु द्वारा बहाकर लाये गये अवसादों से बनता है। यह मिट्टी अत्यन्त उपजाऊ होती है। इस मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता अधिक होती है तथा इसमें जीवाश्म भी अधिक पाये जाते हैं। कृषि के लिए यह मिट्टी सर्वाधिक उपयोगी है। उत्तरी भारत की समतल भूमि का निर्माण इसी मिट्टी से हुआ है।

लेटराइट मिट्टी :- लेटराइट शब्द लेटर शब्द से बना है। जिसका अर्थ है- ईंट, लोहा, और एल्युमीनियम ऑक्साइड) की अधिकता के कारण लेटराइट मिट्टी का निर्माण होता है। इस मिट्टी का रंग लाल होता है। इसी से इसे लेटराइट कहते हैं। यह मिट्टी अनुपजाऊ एवं कृषि के अयोग्य है। इस तरह की मिट्टी पश्चिम के पठारी भाग में पाया जाता है।

पर्वतीय मिट्टी :- पर्वतीय अंचलों में बड़े-बड़े पत्थरों एवं छोटे-छोटे कण-पत्थर से मिलकर बनी पतली मिट्टी के स्तर को पर्वतीय मिट्टी कहते हैं। ये मिट्टियां नवीन होती हैं क्योंकि इनका निर्माण पूरी तरह से नहीं हुआ है। यह मिट्टी कृषि के अयोग्य होता है। लेकिन पहाड़ी ढालों पर मिट्टी में हूमस का अंश मिलता है। इसलिए यह मिट्टी चाय की खेती के योग्य है। हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में यह मिट्टी पायी जाती है।

लवणयुक्त मिट्टी :- समुद्र तटीय क्षेत्रों में चट्टानों के पूर्ण ज्वार के समय जब समुद्र के जल के संपर्क में आते हैं तो इस प्रकार की मिट्टी का निर्माण होता है। समुद्र के ज्वार के आये हुए जल के प्रभाव के कारण यह मिट्टी नमकीन हो जाती है। इसलिए इसे नोना मिट्टी भी कहते हैं। ऐसी मिट्टी पश्चिम बंगाल राज्य के सुन्दरवन क्षेत्र में पायी जाती है।

कादा मिट्टी :- पत्थर के चूर्ण और किचड़ से बनी मिट्टी को कादा मिट्टी कहते हैं। इस मिट्टी के कण में बहुत सूक्ष्म छिद्रतायुक्त एवं अप्रवेश होते हैं। इसलिए इसमें जल धारण करने की अतिरिक्त क्षमता होती है। इसकी उर्वता शक्ति मध्यम है।

प्रश्न 10.
खनिज से आप क्या समझते हैं? कुछ प्रमुख खनिजों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले समांगी ठोस अजैव पदार्थ खनिज कहलाते हैं। खनिजों की सुव्यवस्थित आणविक संरचना तथा निश्चित रासायनिक संघटन रहता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि भू-पृष्ठ का निर्माण लगभग 2000 खनिजों से हुआ है, परन्तु इनमें से 12 सामान्य खनिज हैं जो पृथ्वी के सभी स्थानों पर पाए जाते हैं। इन 12 खनिजों को चट्टान निर्माणकारी खनिज कहते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:

(i) क्वार्ट्ज – यह सफेद रंग का अत्यन्त कठोर खनिज है जिसमें सिलिका की मात्रा अधिक होती है। ग्रेनाइट तथा बैसाल्ट का यह प्रमुख उपादान है एवं जल में अघुलनशील है। इसका उपयोग आभूषण बनाने में तथा काँच एवं पत्थर को काटने में होता है।

(ii) फेल्डस्पर – भू-पृष्ठ के निर्माण में फेल्डस्पर खनिज का योगदान सबसे अधिक है। यह मुलायम प्रकृति का होता तथआ गुलाबी एवं क्रीम के रंगों में पाया जाता है। सफेद या क्रीम रंग के प्लैजीओ फेल्डस्पर का मूल रासायनिक उपादान ओडियम है तथा गुलाबी रंग के आर्थोक्लेज फेल्डस्पर का मूल उपादान पोटैशियम है। इसका उपयोग चीनी मिट्टी के बर्तन तथा काँच बनाने के लिए किया जाता है।

(iii) अभ्रक – यह चमकीला, मुलायम, पतला तथा शीघ्र विखण्डित होनेवाला खनिज है, जो पोटैशियम, एल्युमीनियम, लोहा, मैग्नीशियम एवं सिलिका आदि से बनता है। यह मुख्य रूप से आग्नेय तथा रूपान्तरित चट्टानों में पाया जाता है। इसके कारण ही ग्रेनाइट चट्टान चमकीली दिखती है। इसका उपयोग विद्युत उपकरण एवं मूर्ति निर्माण तथा रंग बनाने में किया जाता है।

(iv) जिप्सम – यह हल्के पीले रंग का मुलायम खनिज है। सीमेण्ट तथा खाद निर्माण उद्योग में इसका उपयोग किया जाता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
आग्नेय चट्टान का उदाहरण है –
(a) ग्रेनाइट
(b) चिकनी मिट्टी
(c) कोयला
(d) पत्थर
उत्तर:
(a) ग्रेनाइट

प्रश्न 2.
अवसादी चट्टान का उदाहरण है :-
(a) कोबाल्ट
(b) प्यूमिस
(c) शेल
(d) नीस
उत्तर:
(a) कोबाल्ट

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प्रश्न 3.
रूपान्तरित चद्टान का उदाहरण है –
(a) संगमरमर
(b) चुना पत्थर
(c) नीस
(d) ग्रेनाइट
उत्तर:
(a) संगमरमर

प्रश्न 4.
कौन-सी चट्टान प्रारम्भिक चट्टान है ?
(a) आग्नेय
(b) रूपान्तरित
(c) अवसादी
(d) बेसाल्ट
उत्तर:
(a) आग्नेय

प्रश्न 5.
पृथ्वी अपने निर्माणकाल में किस अवस्था में थी ?
(a) तरल एवं ठोस
(b) ठंडी
(c) गर्म एवं तरल
(d) गर्म
उत्तर:
(c) गर्म एवं तरल

प्रश्न 6.
पातालीय चट्टान का उदाहरण है –
(a) आग्नेय
(b) बेसाल्ट
(c) डोलेराइट
(d) ग्रेनाइट
उत्तर:
(a) आग्नेय

प्रश्न 7.
चुना पत्थर का परिवर्तित रूप है –
(a) नीस
(b) ग्रेफाइट
(c) संगमरमर
(d) चूना पत्थर
उत्तर:
(c) संगमरमर

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प्रश्न 8.
ग्रेफाइट चट्टान होती है –
(a) तरल
(b) बहुत कठोर
(c) गर्म
(d) ठंडी
उत्तर:
(b) बहुत कठोर

प्रश्न 9.
सेल का परिवर्तित रूप होता है –
(a) शिल्ट
(b) स्लेट
(c) क्वार्टजाइट
(d) कोबाल्ट
उत्तर:
(b) स्लेट

प्रश्न 10.
मध्यवर्ती चट्टान है –
(a) डोलेराइट
(b) नीस
(c) कोयला
(d) कोयला
उत्तर:
(a) डोलेराइट

प्रश्न 11.
बेसाल्ट चट्टानों से बनी मिट्टी का रंग है –
(a) काला
(b) पीला
(c) लाल
(d) हरा
उत्तर:
(a) काला

प्रश्न 12.
लैटराइट मिट्टी का रंग है –
(a) भूरा
(b) पीला
(c) लाल
(d) काला
उत्तर:
(c) लाल

प्रश्न 13.
किस प्रकार की चट्टान में जल प्रवेश कर सकता है ?
(a) आग्नेय चट्टान
(b) अवंसादी चट्टान
(c) रूपान्तरित चट्टान
(d) संगमरमर
उत्तर :
(b) अवसादी चट्टान

प्रश्न 14.
पृथ्वी पर सबसे मूल्यवान चट्टान है –
(a) हीरा
(b) कोयला
(c) जिप्सम
(d) संगमरमर
उत्तर
(a) हीरा

प्रश्न 15.
जीवाष्म पाये जाते हैं –
(a) आग्नेय चट्टान में
(b) रूपान्तरित चट्टान में
(c) अवसादी चट्टान में
(d) चूना पत्थर
उत्तर
(c) अवसादी चट्टान में

प्रश्न 16.
गौण चट्टान है :-
(a) अवसादी चट्टान
(b) आग्नेय चट्टान
(c) रूपान्तरित चट्टान
(d) ग्रेफाइट
उत्तर :
(a) अवसादी चट्टान

प्रश्न 17.
विज्ञान की वह शाखा जिसमें चट्टान और उसकी विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है कहलाती है
(a) पेट्रोलॉजी (Petrology)
(b) मिनरेलोंजी (Mineralogy)
(c) जियोलॉजी (Geology)
(d) पेडोलॉजी (Pedology)
उत्तर :
(a) पेट्रोलॉजी (Petrology)

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प्रश्न 18.
प्राथमिक चट्टान कहते हैं –
(a) रूपान्तरित चट्टान को
(b) अवसादी चट्टान का
(c) आग्नेय चट्टान को
(d) कायान्तरित चट्टान
उत्तर :
(c) आग्नेय चट्टान को

प्रश्न 19.
नि:सारी या बाह्य आग्नेय चट्टान है –
(a) ग्रेनाइट
(b) डोलेराइट
(c) खड़िया
(d) बैसाल्ट
उत्तर :
(d) बैसाल्ट

प्रश्न 20.
महासागरीय भू-पृष्ठ का निर्माण हुआ है –
(a) बैसाल्ट चट्टान से
(b) डोलोराइट चट्टान से
(c) ग्रेनाइट चट्टान
(d) डायराइट चट्टान से
उत्तर :
(a) बैसाल्ट चट्टान से

प्रश्न 21.
बलुई मिट्टी पायी जाती है –
(a) दक्षिण के पठारी अंचल में
(b) पर्वतीय अंचलों में
(c) राजस्थान के मरुस्थलीय अंचल में
(d) छोटानागपुर के पठारी अंचल में
उत्तर :
(c) राजस्थान के मरुस्थलीय अंचल में

प्रश्न 22.
रासायनिक अवसादी चट्टान है –
(a) जिप्सम
(b) बालु का पत्थर
(c) कोयला
(d) चीका मिट्टी
उत्तर :
(a) जिप्सम

प्रश्न 23.
छोटानागपुर के पठारी अंचल का गठन हुआ है –
(a) ग्रेनाइट बट्टान से
(b) बैसाल्ट चट्टान से
(c) चूना पत्थर
(d) चीका मिट्टी से
उत्तर :
(a) ग्रेनाइट चट्टान से

प्रश्न 24.
लौह ऑक्साइड की अधिकता होती है –
(a) काली मिट्टी में
(b) पर्वतीय मिट्टी में
(c) लाल मिट्टी में
(d) चीका मिट्टी में
उत्तर :
(c) लाल मिट्टी में

प्रश्न 25.
उत्तरी भारत की समतल भूमि का निर्माण हुआ है –
(a) जलोढ़ मिट्टी से
(b) लेटराइट मिट्टी से
(c) बलुई मिट्टी से
(d) काली मिट्टी से
उत्तर :
(a) जलोढ़ मिट्टी से

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. अपने निर्माण काल के समय पृथ्वी अत्यधिक गर्म एवं _________अवस्था में थी।
उत्तर : तरल

2. हमारी पृथ्वी पर सबसे पहले _________चट्टान का निर्माण हुआ था।
उत्तर : आग्नेय

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3. _________को प्राथमिक चट्टान कहते हैं।
उत्तर : आग्नेय

4. अवसादी चट्टान में _________पाये जाते हैं।
उत्तर : जीवाश्म

5. अवसादी चट्टानें _________होती हैं।
उत्तर : परतदार

6. आग्नेय और अवसादी चट्टानों का परिवर्तित रूप _________है।
उत्तर : रूपांतरित

7. चुना पत्थर का रूपान्तरित रूप है।
उत्तर : संगमरमर

8. स्लेट परिवर्तित रूप है _________का।
उत्तर : शेलका

9. मिद्टी का मूल उपादन विखंडित _________के चूर्ण हैं।
उत्तर : चट्टानो

10. बेसाल्ट चट्टानों से बनने वाली मिट्टी का रंग _________होता है।
उत्तर : काला

11. सबसे मूल्यावान चट्टान _________है।
उत्तर : हीरा

12. लेटराइट मिट्टी का रंग _________होता है।
उत्तर : लाल

13. विज्ञान की जिस शाखाओं में खनिजों का अध्ययन किया जाता है, उसका नाम _________है।
उत्तर : मिनरेलॉजी

14. आग्नेय चट्टानों का घनत्व _________होता है।
उत्तर : अधिक

15. पातालीय या आग्नेय चट्टानों के रवों या दानों का व्यास _________से अधिक होता है।
उत्तर : 3 मिलिमीटर

16. चट्टान परतदार _________होती है।
उत्तर : अवसादी

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17. छिद्रयुक्त अवसादी चट्टानों में ही _________एवं _________पाए जाते हैं।
उत्तर : खनिज, तेल, म्राकृतिक गैस

18. _________से निर्मित भूमि में लवण की मात्रा अधिक होती है।
उत्तर : बालुका पत्थर

19. सड़कों के निर्माण में _________चट्टान का उपयोग अधिक किया जाता है।
उत्तर : नीस

20. _________ की उपस्थिति के कारण ही चट्टानें अधिक क्षय प्रतिरोधी होती हैं।
उत्तर : क्वार्ट्ज

21. बैसाल्ट के विखण्डन से निर्मित काली मिट्टी का जलधाण क्षमता_________ होती है।
उत्तर : अधिक

22. जलोढ़ मिट्टी में खनिजों के कण बहुत _________अवस्था में होते हैं।
उत्तर : सूक्ष्म

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. चट्टान एक या एक से अधिक खनिजों का मिश्रण है।
उत्तर : True

2. आग्नेय चट्टान मुलायम चट्टान है।
उत्तर : False

3. अवसादी चट्टानों में परतें एवं जीवश्म पाये जाते हैं।
उत्तर : True

4. आग्नेय चट्टान में जिवाश्म नहीं पाये जाते।
उत्तर : True

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5. अपने निर्माण काल में पृथ्वी कठोर थी।
उत्तर : False

6. हमारी पृथ्वी पर सर्वप्रथम आग्नेय चट्टान का निर्माण हुआ।
उत्तर : True

7. प्राथमिक चट्टान आग्नेय चट्टान को कहते हैं।
उत्तर : True

8. अवसादी चट्टानों को गौड़ चट्टान भी कहते हैं।
उत्तर : True

9. शेल का परिवर्तित रूप स्लेट होता है।
उत्तर : True

10. संगमरमर चुना पत्थर का परिवर्तित रूप है।
उत्तर : True

11. हीरा विश्च में सबसे मुल्यवान चट्टान है।
उत्तर : True

12. लेटराइट मिट्टी का रंग पीला होता है।
उत्तर : False

13. मैग्मा के ठण्डा होकर ठोस होने से अवसादी चट्टानों का निर्माण हुआ है।
उत्तर : False

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14. बाह्य या नि:सारी आग्नेय चट्टानों के रवे (दाने) बहुत सूक्ष्म होते हैं।
उत्तर : True

15. ग्रेनाइट चट्टान बहुत कठोर एवं भारी होती हैं।
उत्तर :

16. खनिज तेल के ऊपरी स्तरों पर प्राकृतिक गैस उपस्थित रहती है।
उत्तर : True

17. जिप्सम जैविक तत्वों से निर्मित अवसादी चट्टान है।
उत्तर : True

18. डोलोमाइट रासायनिक तत्वों से निर्मित अवसादी चट्टान है।
उत्तर : True

19. पीट कोयले का ग्रेफाइट में रूपान्तरण अत्यधिक दबाव के कारण हुआ है।
उत्तर : False

20. रूपान्तरित चट्टानों में जीवाश्म पाए जाते हैं।
उत्तर : False

21. ग्रेनाइट की अपेक्षा नीस कम कठोर होती है।
उत्तर : True

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 3 चट्टान

22. फेल्ड्सकर का उपयोग काँच तैयार करने में किया जाता है।
उत्तर : True

23. दक्षिण के पठार के दक्कन ट्रैप अंचल में काली मिट्टी पायी जाती है।
उत्तर : True

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

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WBBSE Class 9 Physical Science Chapter 4 Question Answer – पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
पृथ्वी का कितना भाग जल से ढँका हुआ है ?
उत्तर :
पृथ्वी का 75 % भाग जल से ढँका है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का कितना प्रतिशत जल मीठा जल है ?
उत्तर :
पृथ्वी पर पीने योग्य जल की मात्रा कुल उपलब्थ जल का 0.01 प्रतिशत है।

प्रश्न 3.
जल के किस गुण के कारण पेड़ पौधे फलते-फूलते हैं ?
उत्तर :
रसारोहण।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 4.
द्रव में द्रव के घोल का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
पानी में अल्कोहल।

प्रश्न 5.
घोल की सान्द्रता की इकाई क्या है ?
उत्तर :
ग्राम/लीटर।

प्रश्न 6.
पायस किस प्रकार का घोल है ?
उत्तर :
द्रव मे द्रव का।

प्रश्न 7.
एक ठोस एरोसॉल का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
धुआँ।

प्रश्न 8.
एवोगैड्रो संख्या का मान कितना होता है ?
उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 9.
हाइड्रोजन के कितने आइसोटोप होते हैं ?
उत्तर :
तीन।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 10.
इथाइल अल्कोहल का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर :
इथेनॉल।

प्रश्न 11.
निर्देशक क्या है ?
उत्तर :
वह रासायनिक पदार्थ जो स्वयं अपने रंग परिवर्तन द्वारा किसी उदासीन प्रतिक्रिया को पूर्ण होने की सूचना देता है, निर्देशक कहलाता है।

प्रश्न 12.
क्लोरोफार्म का आणविक सूत्र लिखिए।
उत्तर :
CHCl3

प्रश्न 13.
परमाणु के केन्द्रक में पाये जानेवाले कणों के नाम लिखो।
उत्तर :
म्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन।

प्रश्न 14.
शुद्ध जल के pH का मान कितना होता है ?
उत्तर :
7.0

प्रश्न 15.
ऐरोसोल क्या है?
उत्तर :
ऐरोसोल गैस में ठोस कणों के मिश्रण को कहते हैं।

प्रश्न 16.
दो रेडियो सक्रिय तत्व का नाम लिखो।
उत्तर :
यूरेनियम, रेडियम।

प्रश्न 17.
परमाणु के केन्द्रक में कौन धन आवेशित कण रहता है।
उत्तर :
प्रोट्रान।

प्रश्न 18.
एवोगैड्रो संख्या का मान क्या होता है?
उत्तर :
6.023 × 1023

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 19.
1 ग्राम अणु का आयतन कितना होता है?
उत्तर :
22.4 लीटर।

प्रश्न 20.
हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान 1.675 × 10-24 ग्राम है। 1 मोल हाइड्रोजन का द्रव्यमान क्या होगा ?
उत्तर :
1 मोल हाइड्रोजन का द्रव्यमान 3.350 × 10-24 g होगा।

प्रश्न 21.
NA से क्या प्रदर्शित किया जाता है ?
उत्तर :
NA से एवोगैड्रो संख्या को प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 22.
1.8 ग्राम जल में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
उत्तर :
6.022 × 1022 होगी।

प्रश्न 23.
यदि STP पर V लीटर हाइड्रोजन में अणुओं की संख्या n हो, तो V10 लीटर CO2 में STP पर अणुओं की संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
अणुओं की अभीष्ट संख्या \(\frac{n}{10}\) होगी।

प्रश्न 24.
मनुष्य के शरीर में कितना प्रतिशत जल होता है ?
उत्तर :
मनुष्य के शरीर में 80 % जल होता है।

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प्रश्न 25.
क्या जल एक परिवर्तनशील या बहुमुखी घोलक है ?
उत्तर :
हाँ, जल एक बहुमुखी अथवा सार्वत्तिक (Universal) घोलक (Solvent) है।

प्रश्न 26.
किस उपधातु की अधिकता के कारण जल प्रदूषण होता है ?
उत्तर :
आर्सेनिक !

प्रश्न 27.
किसने बताया कि परमाणु एक समान आवेशित गोला है ?
उत्तर :
जे. जे. थामसंन ने।

प्रश्न 28.
परमाणु का व्यास कितना सेमी० होता है ?
उत्तर :
10-6 से॰मी०।

प्रश्न 29.
समांग मिश्रण का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जल में चीनो का घोल।

प्रश्न 30.
परमाणु के नाभिक में कैसा विद्युत आवेश रहता है ?
उत्तर :
धनावेश।

प्रश्न 31.
परमाणु उदासीन क्यों होता है ?
उत्तर :
परमाणु में धन आवेशित कण प्रोटॉन एव ऋण आवेशित कण इलेक्ट्रॉन समान संख्या मे पाए जाते है जो एक दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।

प्रश्न 32.
नाभिक का आवेश उसके किस कण पर निर्भर करता है।
उत्तर :
प्रोटान पर।

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प्रश्न 33.
परमाणु संख्या क्या है ?
उत्तर :
परमाणु में उपस्थित प्रोटान या इलेक्ट्रॉन की संख्या।

प्रश्न 34.
परमाणु द्रव्यमान क्या है ?
उत्तर :
परमाणु द्रव्यमान का मान परमाणु की द्रव्यमान संख्या अर्थात् परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन की संख्या एवं न्यूट्रॉन की संख्या के योगफल के बराबर होता है।

प्रश्न 35.
आयन कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
आयन दो प्रकार के होते हैं – (i) धनायन, (ii) ॠणायन।

प्रश्न 36.
समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान में क्यों भिन्नता होती है ?
उत्तर :
उनके नाभिक में न्यूट्रॉन की संख्या भित्र-भिन्न होती है।

प्रश्न 37.
विसर्ग नली में कैथोड किरणें कहाँ से निकलती हैं ?
उत्तर :
कैथोड से।

प्रश्न 38.
किसी परमाणु में 13 प्रोटॉन हैं। इसकी परमाणु संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
परमाणु संख्या 13 होगी।

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प्रश्न 39.
संकेत \({ }_7^{14} \mathrm{~N}\) में परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या बताएँ।
उत्तर :
परमाणु संख्या = 7, द्रव्यमान संख्या = 14।

प्रश्न 40.
किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में 3 प्रोटॉन तथा 4 न्यूट्रॉन हैं। उस तत्व की द्रव्यमान संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
तत्व की द्रव्यमान संख्या 7 होगी।

प्रश्न 41.
किसी लिटमस पर अमोनियम क्लोरायड के जलीय विलयंन की क्रिया से क्या होता है ?
उत्तर :
नीला लिटमस पत्र लाल हो जाता है।

प्रश्न 42.
मधुमक्खी के डंक मारने से प्रभावित क्षेत्र की राहत के लिए किसी भस्मीय पदार्थ का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर :
क्योंकि भस्मीय पदार्थ के उपयोग से पभावित क्षेत्र की जलन से राहत मिलती है।

प्रश्न 43.
एक ठोस द्रव मिश्रण का उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
चीनी एवं पानी का घोल।

प्रश्न 44.
बारूद एवं चूना पत्थर में कौन मिश्रण है ?
उत्तर :
बारूद।

प्रश्न 45.
STP पर ऑक्सीजन के एक नमूने का आयतन 22.4 लीटर है। इसमें अणुओं की संख्या कितनी है ?
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 46.
यदि STP पर V लीटर हाइड्रोजन में अणुओं की संख्या n हो, तो लीटर CO2 में STP पर अणुओं की संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
\(\frac{n}{10}\)

प्रश्न 47.
परमाणु के मौलिक कणों के नाम बताएँ।
उत्तर :
इलेक्ट्रान, प्रोटॉन, न्यूट्रान 1

प्रश्न 48.
परमाणु के नाभिक में उपस्थित मौलिक कणो के नाम लिखें।
उत्तर :
प्रोटॉन, न्यूट्रान।

प्रश्न 49.
इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के आविष्कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन के आविष्कारक के नाम जे॰ जे० थाम्सन है । प्रोटॉन के आविष्कारक के नाम अर्नेस्ट रदरफोर्ड है।

प्रश्न 50.
हाईड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम बताएँ।
उत्तर :
Protium, Deuterium, Tritium

प्रश्न 51.
उस तत्व का नाम बताएँ जिसके परमाणु में सिर्फ दो मूल कण पाए जाते हैं?
उत्तर :
हाइड्रोजन।

प्रश्न 52.
परमाणु-संरचना के किस भाग पर तत्व के रासायनिक गुण निर्भर करते हैं।
उत्तर :
केन्द्रक।

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प्रश्न 53.
हाइड्रोजन परमाणुओं के नाभिक में क्या होते हैं?
उत्तर :
1 प्रोटॉन।

प्रश्न 54.
किस कण में द्रव्यमान होता है परंतु आवेश नहीं?
उत्तर :
न्यूट्रान।

प्रश्न 55.
कैल्सियम हाइड्राक्साइड के घुलनशीलता पर तापक्रम का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
घटती।

प्रश्न 56.
शुद्ध पेय जल में आर्सेनिक का मात्रा क्या होता है?
उत्तर :
6.5 – 8.5

प्रश्न 57.
पेय जल में आर्सेनिक का मात्रा क्या होता है?
उत्तर :
0.05 mg / L

प्रश्न 58.
फ्लोराइड के अधिकता से होने वाला रोग है?
उत्तर :
दन्तक्षय।

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प्रश्न 59.
इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण कितना होता है ?
उत्तर :
1.60 × 10-19 कुलम्ब (c)

प्रश्न 60.
रेड़ियो सक्रिय तत्व को विद्युतीय क्षेत्र में रखने पर कितनी किरणें निकलती हैं ?
उत्तर :
3 किरणें।

प्रश्न 61.
ग्लाउबर लवण का रासायनिक नाम क्या है ?
उत्तर :
सोडियम सल्फेट Na2 SO4 10 H2O।

प्रश्न 62.
हाइपो का रासायनिक नाम क्या है ?
उत्तर :
Na2 S2 O3 5 H2O सोडियम थायो सल्फेट।

प्रश्न 63.
वाष्पीकरण क्या है ?
उत्तर :
द्रव का वाष्प में बदलने की क्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।

प्रश्न 64.
अल्कोहल और जल में किसका क्वथनांक कम होता है ?
उत्तर :
अल्कोहल और जल में अल्कोहल का क्वथनांक कम होता है।

प्रश्न 65.
कच्चे तेल से बिटुमिन प्राप्त करने के लिए तापक्रम कितना ° C चाहिए ?
उत्तर :
कच्चे तेल से बिटुमिन पदार्थ करने के लिए तापक्रम 500° C होना चाहिए।

प्रश्न 66.
पेट्रोलियम का जेट जलावन क्या है ?
उत्तर :
गैसोलीन।

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प्रश्न 67.
परमाणु के मौलिक कणों में सबसे हल्का कण कौन-सा है ?
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन।

प्रश्न 68.
एक अम्ल का नाम बताओ।
उत्तर :
नाइट्रिक एसिड (HNO3) ।

प्रश्न 69.
हाइड्रोजन युक्त यौगिक जिनके जलीय घोल विद्युत विच्छेदन करने पर क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर :
हाइड्रोजन युक्त जल का विद्युत विच्छेदन करने पर हाइड्रोजन (H+) एवं हाइड्रांक्सिल (OH) आयन प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 70.
घोल की अम्लीय या भास्मिक प्रकृति किस स्केल से प्राप्त करते हैं ?
उत्तर :
घोल की अम्लीय या भास्मिक प्रकृति pH स्केल से ज्ञात करते हैं।

प्रश्न 71.
एक सूचक (Indicator) का नाम बताओ।
उत्तर :
मिथाइल ऑरेंज है।

प्रश्न 72.
जेल का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
जिलेटीन ।

प्रश्न 73.
α-कण क्या होते हैं?
उत्तर :
होलियम नाभिक।

प्रश्न 74.
एक मोल हाइड्रोजन में अणुओं की संख्या कितनी होगी?
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 75.
STP 16 ग्राम आक्सीजन का आयतन क्या है?
उत्तर :
11.2 लोटर

प्रश्न 76.
पदार्थ के परिमाण की इकाई क्या है?
उत्तर :
Mole

प्रश्न 77.
NA से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर :
नाइट्रोजन के 4 परमाणु।

प्रश्न 78.
नाइट्रोजन का ग्राम अणुभार कितना है?
उत्तर :
28 ग्राम है।

प्रश्न 79.
वास्तविक घोल में वितरित कणों का आकार क्या होता है?
उत्तर :
वास्तविक घोल में वितरति कणों का आकार 10-8 से॰मी॰ से 10-7 से॰मी०।

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प्रश्न 80.
CaOCl2 यौगिक का प्रचलित का नाम क्या है?
उत्तर :
Calcium oxy chloride

प्रश्न 81.
वह अभिक्रिया क्या कहलाती है जब कोई अम्ल किसी भष्म से अभिक्रिया कर लवण एवं जल बनाते हैं।
उत्तर :
उदासीकरण।

प्रश्न 82.
किसी ऐसे अम्ल का नाम बतायें जिसका प्रयोग स्नानघर साफ करने में किया जाता हैं।
उत्तर :
Hcl

प्रश्न 83.
किसी ऐसे गैस का नाम बतायें जिसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
उत्तर :
NH3

प्रश्न 84.
विस्थापित हाइड्रोजन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
अम्ल में उपस्थित हाइड्रोज जो धातु द्वारा प्रतिस्थापित होता है । यह H+होता है ।

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प्रश्न 85.
जल की विशिष्ट उष्मा कितनी होती है?
उत्तर :
जल की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता 4.186 J / g° C होती है।

प्रश्न 86.
जल का क्वथनांक कितना होता है?
उत्तर :
100° C

प्रश्न 87.
जल की अस्थाई कठोरता को किस विधि दूर किया जा सकता है?
उत्तर :
जल की अस्थायी कठोरता को आयन विनिमय प्रक्रिया द्वारा दूर किया जा सकता है।

प्रश्न 88.
जल में कैल्सियम एवं मैग्नीशियम के सल्फेट एवं क्लोराइड घुले रहने पर किस प्रकार की कठोरता उत्पन्न होती है?
उत्तर :
स्थाई कठोरता।

प्रश्न 89.
अम्ल का स्वाद कैसा होता है ?
उत्तर :
खट्टा।

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प्रश्न 90.
एक तनु अम्ल का नाम बताओ।
उत्तर :
टारटेरिक अम्ल, एसिटिक अम्ल।

प्रश्न 91.
फिनाल्फ्थैलीन का स्वाभाविक तथा क्षारीय रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
स्वाभाविक रंग रंगहीन तथा क्षारीय रंग गुलाबी होता है।

प्रश्न 92.
मिथाइल आरेंज का स्वाभाविक तथा अम्लीय रंग कैसा होता है ?
उत्तर :
मिथाइल आरेंज का स्वाभाविक रंग नारंगी तथा अम्लीय रंग गुलाबी होता है।

प्रश्न 93.
Ca(OH)2 की अम्लीयता कितनी है ?
उत्तर :
2 ।

प्रश्न 94.
pH स्केल का मान कितना से कितना होता है ?
उत्तर :
0 से 14 तक।

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प्रश्न 95.
शुद्ध जल का pH colour code क्या है ?
उत्तर :
71

प्रश्न 96.
भास्मिक आक्साइड के दो उदाहरण दें।
उत्तर :
C2O, MgO।

प्रश्न 97.
एक अम्लीय लवण का उदाहरण दो।
उत्तर :
NaHSO4

प्रश्न 98.
एक भास्मिक लवण का उदाहरण दें।
उत्तर :
PbCOHCl।

प्रश्न 99.
भूमिगत जल के अधिक दोहन से क्या होता है ?
उत्तर :
आर्सेनिक युक्त जल निकलता है।

प्रश्न 100.
विभिन्न घनत्व वाले द्रवों के मिश्रण को किस विधि द्वारा अलग करते हैं ?
उत्तर :
पृथक्करण कीप द्वारा अलग करते हैं।

प्रश्न 101.
PVC का पूरा नाम क्या है?
उत्तर :
Poly Vinyl Chloride.

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प्रश्न 102.
ATP का पूरा नाम क्या है?
उत्तर :
Adenosine Triphosphate.

प्रश्न 103.
H2SO4 के घोल में नीले लिटमस को डुबाने पर कौन-सा रंग प्राप्त होता है ?
उत्तर :
लाल रंग प्राप्त होता है।

प्रश्न 104.
जल में कार्बन-डाई-ऑक्साइड के मिलने से कौन-सा अम्ल प्राप्त होता है ?
उत्तर :
कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) प्राप्त होता है।

प्रश्न 105.
वर्षा जल की सान्द्रता क्या होनी चाहिए।
उत्तर :
71

प्रश्न 106.
एक लवण का नाम बताओ जिससे जल में स्थाई कठोरता उत्पन्न होती है।
उत्तर :
कैल्सियम क्लोराइड (CaCl2)

प्रश्न 107.
एक मोल Na+ आयन में कणों की संख्या बताओ।
उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 108.
एक मोल जल (H2O) में जल अणुओं की संख्या क्या होगी ?
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 109.
C-12 समस्थानिक के एक मोल में कार्बन की मात्रा कितनी होती है ?
उत्तर :
12 g।

प्रश्न 110.
1 ग्राम ऑक्सीजन मोल में आक्सीजन अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
उत्तर :
1.88 × 1022

प्रश्न 111.
6.023 × 1023 हाइड्रोजन परमाणुओं का भार कितना होगा ?
उत्तर :
1.008 g।

प्रश्न 112.
N.T.P. पर 22.4 लीटर गैस के आयतन में अणुओं की संख्या बताओ।
उत्तर :
6.022 × 1023

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प्रश्न 113.
एक मोल CO2 अणु में, अणुओं के कणों की संख्या बताओ।
उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 114.
एक नन एक्वश साल्वेन्ट का नाम बताओ।
उत्तर :
अल्कोहल।

प्रश्न 115.
क्या चीनी की घुलनशीलता कोलकाता और दार्जिलिंग में समान होगी ?
उत्तर :
चीनी की घुलनशीलता कोलकाता एवं दार्जिलिंग में समान नहीं होगी।

प्रश्न 116.
प्रोटान और न्यूट्रान परमाणु में कहाँ स्थित है?
उत्तर :
केन्द्रक में।

प्रश्न 117.
परमाणु कौन-सा मौलिक कण केन्द्र के बाहर घूमता रहता है?
उत्तर :
Electron

प्रश्न 118.
क्या संतृत्प घोल को असंतृप्त घोल में तैयार किया जा सकता है?
उत्तर :
हाँ, घोलक की मात्रा बढ़ाकर।

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प्रश्न 119.
आयनमुक्त जल क्या है ?
उत्तर :
आसवित जल (Distilled Water) !

प्रश्न 120.
अम्ल के गुण बताओ।
उत्तर :
अम्ल का स्वाद खट्टा होता है यह भस्म या क्षार से क्रिया कर लवण बनाते हैं तथा धातु से क्रिया कर H2 देता है।

प्रश्न 121.
नाइट्रिक अम्ल का औद्योगिक उपयोग लिखो।
उत्तर :
खाद्य बनाने में।

प्रश्न 122.
घोल में ठोस घोल का उदाहरण बताइये।
उत्तर :
धुआँ का हवा में मिलना।

प्रश्न 123.
रंग में किरासिन मिलाने से वाष्प के कारण क्या हानियाँ होती हैं ?
उत्तर :
शरीर के चमड़े की पपड़ी जल जाती है अम्लीयता या भस्मीकृत के कारण।

प्रश्न 124.
ग्राम परमाणु से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
किसी तत्व के परमाणु द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करने पर ग्राम परमाणु कहलाता है।

प्रश्न 125.
किस उपधातु के जल में घुले रहने पर जल प्रदूषित होता है?
उत्तर :
यूरेनियम, थोरियम।

प्रश्न 126.
एवोगैड्रो संख्या का मान कितना होता है ?
उत्तर :
6.023 × 1023

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
शुद्ध पदार्थ क्या हैं ? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
शुद्ध पदार्थ (Pure matter) : हमारे दैनिक जीवन में शुद्ध पदार्थ अत्यन्त आवश्यक हैं। शुद्ध पदार्थों के अपने निक्वित गुण होते है। सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा तथा सभी रासायनिक योगिक शुद्ध पदार्थों के उदाहरण हैं। सभी ठास शुद्ध पदार्थों का एक निध्चित गलनांक होता है।

प्रश्न 2.
मिश्रण से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :
मिश्रण : जब किसी शुद्ध पदार्थ में अन्य पदार्थ मिले होते हैं तो वह मिश्रण कहलाता है। मिश्रण में मिले हुए पदार्थों को उनके अवयव कहा जाता है। कुछ मिश्रण ऐसे होते है जिनमें इन अवयवों को आसानी से देखा जा सकता है। किन्तु कुछ मिश्रण में इन्हें अलग-अलग देखना सम्भव नहीं होता।

प्रश्न 3.
समांगी मिश्रण के बारे में उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) : ऐसे मिश्रण जिनमें दो या दो से अधिक अवयव उपस्थित हो किन्तु उन्हें अलग-अलग देखा न जा सके, समांगी मिश्रण कहलाते हैं। जेसै चीनी एवं पानी के मिश्रण में चीनी और पानी को अलग-अलग देखा नहीं जा सकता है। अतः चीनी और पानी का मिश्रण एक समांग मिश्रण है।

प्रश्न 4.
विषमांगी मिश्रण के बारे में उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर :
विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture) : ऐसे मिश्रण जिनमें उनके अवयवी पदार्थों को अलगअलग देखा जा सकता है, विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं। जैसे बालू और लोहे के मिश्रण में बालू और लोहे को अलग-अलग देखा जा सकता है।

प्रश्न 5.
कैथोड किरण किस मौलिक कण का गतिशील समूह है ?
उत्तर :
कैथोड किरणे मौलिक कण इलेक्ट्रॉन का गतिशील समूह है।

प्रश्न 6.
प्रोटॉन की खोज का क्या आधार था ?
उत्तर :
प्रोटॉन की खोज का आधार इलेक्ट्रॉन को खोज थी क्योंकि इलेक्ट्रॉन पर ऋण आवेश होता है और परमाणु उदासीन होता है। अत: परमाणुओं में धन आवेश युक्त कण की उपस्थित अनिवार्य थी।

प्रश्न 7.
रदरफोर्ड के α – विकर्णन प्रयोग में α – कण क्या हैं ?
उत्तर :
रदरफोर्ड के α प्रकीर्णन प्रयोग में α-कण हीलियम परमाणु (2H4) के समतुल्य धन आवेशित कण हैं।

प्रश्न 8.
रदरफोर्ड ने α कण विकर्णन प्रयोग किस धातु की पत्तर पर किया ?
उत्तर :
रदरफोर्ड में α – कर्ण प्रकीर्णन का प्रयोग सोने की पत्तर पर किया था।

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प्रश्न 9.
जल को उबालने से जल की किस प्रकार की अशुद्धि दूर होती है ?
उत्तर :
जल को उबालने से जल की अस्थाई कठोरता दूर होती है।

प्रश्न 10.
निथारना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
निथारना (Decantation) : “वह विधि जिसमें द्रव के रूप में किसी मिश्रण में उपस्थित अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव के नीचे अवक्षेपित करके ऊपर स्थित द्रव को पृथक कर लिया जाता है, उसे निथारना कहते है। बालू एवं पानी के मिश्रण से अघुलनशील ठोस बालू को पानी से अलग करना।

प्रश्न 11.
छानना क्या है ?
उत्तर :
छानना (Filtration) : “वह विधि जिसमें छन्ना कागज की सहायता से किसी मिश्रण में उपस्थित ठोस एवं तरल पदार्थों को पृथक किया जाता है, उसे छानना कहते हैं।” इस विधि का प्रयोग उस समय किया जाता है जब किसी मिश्रण में अघुलनशील ठोस पदार्थ के कण अत्यन्त छोटे-छोटे रहते हैं एव द्रव में तैरते रहते हैं।

प्रश्न 12.
पृथक्कारी कीप क्या है ? इसके उपयोग का उल्लेख करें।
उत्तर :
पृथक्कारी कीप एवं इसका उपयोग (Use of separating funnel) : पृथक्कारी कीप काँच का एक बल्ब होता है जिसकी डंडी में एक स्टॉप कांक (stopcock) लगा रहता है। इसका उपयोग दो या दो से अधिक अमिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है । उदाहरण के लिए, तेल एवं जल के मिश्रण से तेल और जल को पृथक्कारी कीप की सहायता से पृथक किया जा सकता है।

प्रश्न 13.
मोलर मात्रा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
मोलर मात्रा (Molar mass) : किसी तत्व अथवा यौगिक की मोलर मात्रा का निर्धारण पारमाणविक, आणविक अथवा अणुसूत्र भार ज्ञात करके इस मान को ग्राम/मोल में व्यक्त किया जाता है। यथा बोमिन (Br) की मोलर मात्रा 79.904 ग्राम/मोल तथा क्लोरिन (Cl) की मोलर मात्रा 35.4527 ग्राम/मोल है।.
किसी विशिष्ट प्रकार के प्रारम्भिक कणों (परमाणुओं, अणुओं अथवा आयनो) के एक मोल की ग्राम में अभिव्यक्त मात्रा उस कण की मोलर मात्रा (Molar Mass) कहलाती है। यह वास्तविक रूप उस वस्तु के 6.023 × 1023 कणों की ग्राम में अभिव्यक्त मात्रा है।

प्रश्न 14.
साथारण साबुन के व्यवहार सें जल को वर्गीकृत करो।
उत्तर :
जिस जल के साथ साबुन का जल्द झाग बनता है वह जल मृदुल जल (Soft Water) होता है। जिस जल के साथ सुगमता से झाग कम बनता है वह कठोर जल (Hard Water) होता है।

प्रश्न 15.
परमाणु को परिभाषित करें।
उत्तर :
किसी तत्व की सबसे, छोटी इकाई जो स्वतंत्र अवस्था में नहीं पायी जाती है बल्कि जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकती है उसे परमाणु कहते है। हर ठोस, तरल, गैस, और प्लाज्मा तटस्थ या आयनन परमाणुओं से बना है।

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प्रश्न 16.
घोल से क्या समझते हो?
उत्तर :
दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को घोल कहते हैं। किसी निश्वित तापमान पर घोल के उपादानों का आपेक्षकि अनुपात एक सीमा तक परिवर्तित किया जा सकता है। जब नमक को पानी में घोला जाता है तो एक समांगी मिश्रण बनता है। यह समांगी मिश्रण नमक का पानी में घोल कहलाता है।

प्रश्न 17.
आसवन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
आसवन (Distillation) : वह प्रक्रिया, जिसमें किसी द्रव को गर्म करके वाष्प में परिवर्तित किया जाता है, फिर उस वाष्य को ठडा करके पुन: द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।

प्रश्न 18.
पेट्रोलियम के शोधन की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर :
पेट्रोलियम के शोधन की आवश्यकता (Necessity of refining of petroleum) : पेट्रोलियम भूरे-काले रंग का गाढ़ा द्रव होता है। यह एक जीवाश्म ईधन है जो भूमि में जल के गहरे कुए खोद करके प्राप्त किया जाता है। यह तेल अनेक हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है। इसमें पानी, मिट्टी तथा नमक के कण मिले होते हैं। यह चिपचिपा एक प्रतिदीप्तिशील, दुर्ग्धयुक्त द्रव होता है और इसमें एल्केन हाइड्रोकार्बन भी मिश्रित होता है। इसलिये इसे उपयोग में लाने के लिये इसका परिष्करण करते हैं।

प्रश्न 19.
भंजक आसवन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
भंजक या प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) : यह विधि दो या दो से अधिक मिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवी द्रवों को पृथक करने में अपनाई जाती है, जिनके अवयवी द्रवों के क्वथनांक का अंतर बहुत कम (10° C. या कम) हो। उदाहरण के लिए, मेथिल अल्कोहॉल (क्वथनांक 65° C) को ऐसीटोन (क्वथनांक 56° C) से इस विधि द्वारा पृथक किया जा सकता है।

प्रश्न 20.
परमाणु में इलेक्ट्रॉन की स्थिति बताएँ।
उत्तर :
परमाणु में इलेक्ट्रॉन केन्द्रक के चारों तरफ विभिन्न कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं।

प्रश्न 21.
रदरफोर्ड के उस प्रयोग का संक्षिप्त वर्णन करें जिससे किसी परमाणु के नाभिक का पता चलता है।
उत्तर :
रदरफोर्ड ने अपन α – कण प्रकीर्णन प्रयोग के अंतर्गत रेडियोसक्रिय पदार्थ रेडियम द्वारा तीव्र गति से निकले α कणों का सोने की पत्तर (foil) पर प्रहार कराया तो देखा कि अधिकांश α-कण अपने मार्ग से बिना विचलित हुए स्वर्ण पत्तर को पार करके सीधे निकल जाते हैं, तथा कुछ α – कण अपने मार्ग से थोड़ा विचलित हो जाते हैं एवं बहुत ही कम – कण (20,000 में से एक कण) टकराकर अपने मार्ग पर पुन: वापस आ जाते हैं।

इस प्रयोग से रदरफोर्ड ने निम्नांकित निष्कर्ष निकाले।
(i) परमाणु में अधिकतर स्थान रिक्त हैं जिसके कारण अधिकतर α कण उसमें से सीधे निकल जाते हैं। (ii) धन आवेशित α – कणों का सभी दिशाओं में विचलित होना यह दर्शाता है कि परमाणु के मध्य स्थान पर कोई समान आवेश (धन आवेश) उपस्थित है। α-कणों की संख्या बहुत कम होती है, अत: परमाणु के अन्दर उपस्थित धन आवेशित वस्तु का आयतन अत्यंत ही कम होता है।

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प्रश्न 22.
परमाणु की कक्षाओं को ऊर्जा स्तर क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
ऊर्जा स्तर (Energy Level) : केन्द्रक के चारो तरफ विभित्र कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन बिना ऊर्जा क्षय (loss of energy) के लगातार चक्कर लगाते रहते हैं। अत:, इन कक्षों को मुख्य ऊर्जा स्तर (energy level) या क्वांटम स्तर (Quantam level) कहते हैं। इन ऊर्जा स्तरों को क्वाटम संख्या (Quantam Number) n द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। पहली से सातवीं कक्ष अर्थात् K से Q तक के सेल का ऊर्जा स्तर n का मान क्रमशः 1 से 7 तक होता है। n का मान जितना ही कम होगा वह कक्ष केन्द्र से उतना ही नजदीक होगा तथा उसकी ऊर्जा उतनी ही कम होगी।

प्रश्न 23.
समस्थानिक क्या है ?
उत्तर :
समस्थानिक (Isotope) : यदि किसी तत्व के परमाणु इस प्रकार पाये जाएँ कि उनकी परमाणु संख्या समान किन्तु द्रव्यमान संख्या विभिन्न हो, तो उन्हें उस तत्व का समस्थानिक कहते हैं।
जैसे हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक, \({ }_1 H^1\), \({ }_1 H^2\) तथा, \({ }_1 H^3\) हैं।

प्रश्न 24.
मात्रा संख्या किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन की संख्या के योगफल को मात्रा संख्या कहते है।

प्रश्न 25.
केन्द्रक बल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
केन्द्रक बल (Nuclear force) : केन्द्रक पर उपस्थित प्रोटानों तथा न्यूट्रॉनों के बीच आवेश का आदानप्रदान होता रहता है जिसके फलस्वरूप एक तीव्र आकर्षण बल की सृष्टि होती है। इस आकर्षण बल को केन्द्रीय बल (Nuclear force) कहते हैं।

प्रश्न 26.
तनु तथा सांद्र घोल में मुख्य किस चीज का अन्तर होता है ?
उत्तर :
तनु में घोलक (जल) की मात्रा अधिक और सान्द्र में जल की मात्रा कम होती है।

प्रश्न 27.
प्रबल अम्ल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रबल अम्ल या तीव्र अम्ल (Strong Acid) : वह अम्ल जो जलीय घोल में पूर्णत: आयनीकृत होकर अधिक हाइड्रोजन आयन (H+)उत्पन्न करते हैं, प्रबल अम्ल या तीव्र अम्ल कहलाते हैं।
जैसे – HCl, HNO3, H2SO4 आदि।

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प्रश्न 28.
कॉपर तथा चाँदी के साथ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल प्रतिक्रिया क्यों नहीं करता है ?
उत्तर :
कॉपर तथा चाँदी हाइड्रोजन से अधिक विद्युतात्मक है।

प्रश्न 29.
सोडियम हाइड्राक्साइड के साथ तनु HCl प्रतिक्रिया करके क्या बनता है ?
उत्तर :
साथारण नमक अैर पानी बनता है।

प्रश्न 30.
Universal Indicator क्या है ?
उत्तर :
Universal Indicator : यह एक Litmus paper की तरह ही एक सूचक है जो यह दिये गये घोल का strength कितना pH है ज्ञात करने में करते हैं। इसक रंग हरा होता है । यदि किसी घोल में इस Universal incicator को डुबा कर उसके रंग में आये परिवर्तन को दिये गये ऊपर रंग chart से मिलाने पर जो रंग मिलता है वही उसका pH होता है। इस तरह तुम अपने रक्त, मूत्र, लार, दूध तथा नींबू का भी pH निकाल सकते हो।

प्रश्न 31.
जल की कठोरता के क्या कारण हैं ?
उत्तर :
जल की कठोरता के कारण : धातुएँ जैसे कैल्सियम (Ca), मैग्नेशियम (Mg) तथा लोहा (Iron) के क्लोराइड, सल्फेटस या नाइट्रेट्स और बाईकार्बोनेट लवणों का प्राकृतिक जल मे घुला होना जल की कठोरता के कारण हैं। इन धातुओं के क्लोराइड और सल्फेट साधारणतया मिट्टी में उपस्थित रहते हैं जो जल में सीधे घुलकर जल को कठोर बना देते हैं। इन धातुओं के बाईकार्बोनेट मिट्टी में उपस्थित नहीं होते लेकिन इनके कार्बेनेटस जल में कुछ मात्रा में घुली वायुमण्डलीय कार्बनडाईक्साईड से प्रतिक्रिया कर बाईकार्बोनेट उत्पन्न करते हैं और जल कठोर हो जाता है।

प्रश्न 32.
समभारिक क्या है ?
उत्तर :
समभारिक (Isobar) : ऐसे तत्वों को समभारिक (isobars) कहा जाता है जिनका परमाणु द्रव्यमान समान होता है, किन्तु परमाणु संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती है। परमाणु संख्या में अन्तर का कारण उन तत्वों के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्याओं का भिन्न-भित्र होना है।

प्रश्न 33.
अधिकतर तत्वों के परमाणु द्रव्यमान भिन्नांक क्यों होते हैं ?
उत्तर :
परमाणु भार भिन्न के रूप में होने का कारण : अधिकांश तत्वों के दो या दो से अधिक आइसोटोप होते हैं। चूँक किसी तत्व का परमाणु भार उसके सभी आइसोटोप के भारों का औसत होता है, अत: यह प्राय: भिन्न के रूप में प्राप्त है।

प्रश्न 34.
संकेत \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\) क्या सूचना देता है ?
उत्तर :
संकेत \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\) क्लोरीन परमाणु की सूचना देता है जिससे पता चलता है कि क्लोरीन की द्रव्यमान संख्या 35 एवं परमाणु संख्या 17 होती है।

प्रश्न 35.
ताजा दूध का pH मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH मान में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर :
दूध से दही बनने पर यह अम्लीय हो जाता है, अत: इसका pH मान 6 से कम हो जायेगा।

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प्रश्न 36.
क्षार क्या होते हैं ? क्षार के दो उदाहरण दें।
उत्तर :
क्षार (Alkali) : जल में घुलनशील भसम (base) क्षार कहलाते हैं। उदाहगण के लिए, सोडियम एवं पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड, कैल्सियम के हाइड्रॉंक्साइड इत्यादि जल में घुलनशील होते है, अत: ये क्षार हैं। लेकिन कॉपर के हाइड्रॉक्साइड, लोहे के हाइड्रॉक्साइड, अल्युमिनियम का हाइड्रॉक्साइड इत्यादि जल में घुलनशील नहीं हैं, इसलिए ये भस्म क्षार नहीं है।

प्रश्न 37.
निम्नलिखित अम्लों में सामान्य लवण एवं अम्लीय लवण को चुनें –
(a) कैल्सियम सल्फेट (CaSO4)
(b) सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3)
(c) सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट (NaHSO4)
(d) द्वि सोडियम हाइड्रोजन-फॉस्फेट (Na2HPO4)
उत्तर :
(a) कैल्सियम सल्फेट (CaSO4) सामान्य लवण
(b) सोडियम काबोंनेट (Na2CO3) सामान्य लवण
(c) सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट (NaHSO4) अम्लीय लवण
(d) द्वि सोडियम हाइड्रोजन-फॉस्फेट (Na2 HPO4) अम्लीय लवण

प्रश्न 38.
आप कैसे दिखायेंगे कि मैग्निशियम धातु तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है ?
उत्तर :
मैग्नेशियम तथा लोहा जैसी धातुएँ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया कर सल्फेट लवण उत्पन्न करती हैं तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।

Mg + H2SO4 arrow MgSO4 + H2
Fe + H2SO4 arrow FeSO4 + H2

प्रश्न 39.
क्या होता है जब कैल्सियम कार्बोनेट हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करता है ? इस अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण भी लिखें।
उत्तर :
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से केल्सियम कार्बोनेट की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप कैल्सियम लवण एवं कार्बन डाई आक्साइड उत्पव्न होती है।

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प्रश्न 40.
मोल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
मोल (Mole) : अत्यन्त कम मात्रा वाले पदार्थों में भी अणुओं, परमाणुओं या आयनों की संख्या बहुत अधिक होती है। यह संख्या बहुत अधिक होने के कारण उनकी गणना असुविधाजनक होती है। अतः जिस प्रकार अपने दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुओं की गणना दर्जन (1 दर्जन = 12), सैकड़ा (1 सैकड़ा =100), ग्रुस (1 ग्रुस = 144) आदि में करना सुविधाजनक होता है उसी प्रकार से परमाणु, अणु या आयन की संख्या की गणना के लिए 6.022 × 1023 को इकाई मान लिया जाता है। इस इकाई को मोल (Mole) कहते हैं।
अत: 1 mole = 6.022 × 1023 अणु, परमाणु या आयन।

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प्रश्न 41.
मोल के किसी दो महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
मोल का महत्व (Importance of mole) : मोल से हमें निम्नलिखित बातों की जानकारी प्राप्त होती है।

  1. यह पदार्थ के 6.022 × 1023 काणों का निरूपण करता है।
  2. किसी तत्व के 1 मोल का द्रव्यमान उसके 6.022 × 1023 परमाणुओं के कुल द्रव्यमानों के बराबर होता है।
  3. पदार्थ का एक मोल उस पदार्थ के एक ग्राम-सूत्र द्रव्यमान को व्यक्त करता है।

प्रश्न 42.
एवोगैड्रो संख्या की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या (Avogadro number) : किसी पदार्थ के 1 ग्राम अणु (1 mole) में उपस्थित अणुओं की संख्या को ऐवोगैड़ो संख्या कहते हैं। इसे ‘NA‘ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसका मान 6.022 × 1023 होता है। मोल (Mole) का प्रयोग अणु, परमाणु और आयन तीनों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 43.
एवोगैड्रो संख्या का संकेत क्या है ? इसका मान कितना होता है ?
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या को NA से प्रदर्शित करते हैं। इसका मान 6.022 × 1023 होता है।

प्रश्न 44.
जल के एक अणु का ग्राम में भार कैसे ज्ञात करेंगे ?
उत्तर :
जल के एक आणु का ग्राम में भार ज्ञात करने के लिए जल के ग्राम अणुभार में एवोगैड्रो संख्या से भाग दिया जाता है। जैसे – जल (H2O) का अणु भार =18
18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या = 6.022 × 1023
जल के एक्र उगुण का ग्राम में भार = \(\frac{18}{6.022}\) × 1023 = 2.989 × 10-33

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प्रश्न 45.
ग्राम परमाणु की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
ग्राभ पारमाणविक द्रव्यमान (Gram Atomic Mass Or Weight) : किसी तत्व के परमाणु द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करने पर वह ग्राम परमाणु द्रव्यमान कहलाता है।
जैसे – आक्सीजन (O) का पारमाणविक द्रव्यमान = 16
अत: आवसीजन का ग्राम पारमाणविक द्रव्यमान = 16 ग्राम।
इसी प्रकार नाइट्रोजन (N) का ग्राम पारमाणविक द्रव्यमान = 14 ग्राम।
हाइड्रोजन (H) का ग्राम पारमाणविक द्रव्यमान = 1 ग्राम।

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प्रश्न 46.
ग्राम अणु की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
ग्राम अणु या ग्राम आणविक द्रव्यमान (Gram-mole or gram molecular mass or Weight) : आणविक द्रव्यमान को ग्राम में व्यक्त करने पर वह ग्राम-अणु या ग्राम-आणविक द्रव्यमान (Gram mole or gram molecular mass) कहलाता है।
जैसे – आवसीजन (O2) का आणविक द्रव्यमान = 32
अत: आक्सीजन (O2) का ग्राम-आणविक द्रव्यमान = 32 ग्राम
इसी प्रकार हाइड़ोजन (H2) का ग्राम-आणविक द्रव्यमान = 2 ग्राम
नाइट्रोजन (N2) का ग्राम-आणविक द्रव्यमान = 28 ग्राम
जल (H2O) का ग्राम आणविक द्रव्यमान =  18 ग्राम

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प्रश्न 47.
ग्राम अणु या मोलर आयतन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
ग्राभ अणु या मोलर आयतन (Molar Volume or gram-molecular volume) : सामान्य तापमान व दाब (STP) पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है और इस गैस में 6.022 × 1023 अणु होंते हैं। इस आयतन को ग्राम-आणविक आयतन या मोलर आयतन (Molar Volume) कहते हैं। उदाहरण के लिए, STP पर 22.4 लीटर हाइड्रोजन का द्रव्यमान 2.016 ग्राम होता है। अर्थात् 1 मोल H2 का भार =2.016 ग्राम। इतनी से में 6.022 × 10^{33 अणु रहते हैं। इसी प्रकार STP पर 22.4 लीटर ऑक्सीजन का भार 32.00 ग्राम होता है तथा इसमे 6.022 × 10-3 अणु रहते हैं।

प्रश्न 48.
जल की विशिए्ट उष्मा पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति एवं उसके रख-रखाव को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर :
जल की विशिष्ट उष्मा पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति एवं रख-रखाव : जल की विशिष्ट उष्मा 1 कैलोरी/ग्राम ° C = 4.186 जूल/ग्राम ° C होती है जो किसी अन्य सामान्य पदार्थों से उच्च होता है।

परिणामस्वरूप, तापमान के नियत्रण में जल महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसके साथ-साथ जल के वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा भी अधिक हांती है। इसका मान 40.65 किलो जूल/मोल होता है। जल की उच्च विशिष्ट उष्मा एवं उच्च वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा के फलस्वरूप हाइड्रोजन के अणुओं के बीच विस्तृत बंधन (bonding) की उत्पत्ति होती है। जल के ये दोनों असामान्य गुण तापमान के बंड़े उतार-चढ़ाव में प्रतिरोध उत्पन्न करके जल को पृथ्वी की जलवायु (Climate) को संतुलित रखने में मदद करते हैं। इससे पृथ्वी पर प्राणियों एवं वनस्पतियों का लगातार समुचित विकास संभव होता है।

प्रश्न 49.
जल के उच्च क्वथनांक का क्या महत्व है ?
उत्तर :
जल के उच्च क्वथनांक का महत्व (Importance of high boiling point of water) : “‘सामान्य वायुमण्डलीय दबाव पर वह निधित तापक्रम जिस पर किसी द्रव के सम्पूर्ण भाग से तेजी से वाष्पन की क्रिया होने लगती है, उस निध्वित तापक्रम को उस द्रव का ववथनाक कहते हैं।” यह तापक्रम तब तक स्थिर रहता है जब तक सम्पूर्ण दत्र वाष्पित न हो जाये। जल एवं अन्य सभी पदार्थो का क्वथनांक बैरोमीटर के दबाव पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, वृंकि अक्षांश वायुमण्डलीय दबाव में थोड़ा परिवर्तन करता है, अत: समुद्र तल पर जल के 100° C (212° F) पर उबलने की तुलना में माउण्ट एवरेस्ट पर जल 68°C

(154° F) पर उबलता है। इसके त्रिपरोत समुद्र की गहराई में भू-उष्मीय निकास द्वार के पास जल का तापमान सैकड़ों डिग्री तक पहुँच जाता है फिर भी जल द्रव के ही रूप मे रहल है। फलस्वरूप समुद्री जीव-जन्तु एवं वनस्पतियों का लगातार समुचित उद्भव एवं विकास जारी रहता है

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प्रश्न 50.
जल के कोशिकीय कार्य के महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
जल के कोशिकीय कार्य के महत्व (Importance of capillary action of water) : चाँक जल के अणु रेखीय नहीं हैं और हाइड्रोजन परमाणुओं की तुलना में आक्सीजन परमाणुओं की निद्युत ऋणात्मकता (electrogativity) अधिक होती है, अत: ऑक्सीजन परमाणु थोड़ा ऋणात्मक आवेश वहन करते हैं, जबकि हाइड्रोजन परमाणु थोड़ा धन आवेशित होते हैं। परिणामस्वरूप, जल विद्युतीय द्विधुवोय आघूर्ण वाला एक ध्रुवीय अणु है। जल अपने आकार वाले अणु के लिए एक असाधारण तौर से बड़ी संख्या में (4) अन्तर आणविक हाइड्रोज बच भी उत्पन्न कर सकता है। इन कारकों की वजह से जल के अणुओं के बीच प्रब्बल (strong) आकर्षाण बल पाया जाता है जो जल के उच्च पृष्ट तनाव (surface tension) एवं कोशिकीय बल (capillary force) को उत्पन्न करता है। कोशिकींय क्रिया (capillany action) गुरुत्व बल के विरुद्ध एक पतली नलो से होकर जल के ऊपर चढ़ने की प्रतृत्ति को निर्देशित करती है। जल के इसी गुण पर सभी वैस्कुलर (vascular) पौधे जैसे तृक्ष, निर्भर करते हैं।

प्रश्न 51.
क्लोरीनीकरण क्या है ? इसकी कमियों का उल्लेख करें।
उत्तर :
क्लोरीनीकरण (Chlorination) : इस विधि के द्वारा पेय जल को शुद्ध करने के लिए इसमे क्लोरीन (Cl2) या हाइपोक्लोराइट मिला दिया जाता है। इससे पेय जल में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु नए्ट हो जाते हैं। इस प्रकार उनकी वृद्धि रुक जाती है और जल हमारे लिए पीने योग्य हो जाता है। इस नरह पोने योग्य जल से उत्पन्न होने वाली बोमारियों को रोका जा सकता है। यह जल शुद्धीकरण की सुस्थापित तकनीक है।

कमियाँ (Limitation) : जल क्लोरीनीकरण विधि की कमियों में से एक disinfection by product प्रोडक्य (HCP) का बनना है जिसमें से अधिकतर ट्राइक्लोरोमीथेन (THM), क्लोरोफार्म, डाइक्लोरोमोशेन, डाइब्रोमोक्लोरोमीथेन एवं बोमोफार्म हैं। इनका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 52.
पराबैंगनी किरणों द्वारा जल को कैसे शुद्ध किया जा सकता है ?
उत्तर :
पराबैंगनी किरणों द्वारा पेयजल का शुद्धीकरण (Purification of drinking water by ultra violet rays) : पराबैंगनी किरणों द्वारा जल का शुद्धीकरण करने के लिए पराबेगनी प्रकाश का उपयोग किया जाता है जो सूर्य के प्रकाश की तरह होती हैं। इन किरणों को पेय जल से गुजारने पर उसमें उपस्थित माइक्रोब्स (microbes) इसके सम्पर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। पेय जल के शुद्धीकरण मे रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया के कोटाणुओं को नष्ट करने के लिए यह विधि सबसे अधिक प्रभावी है।
पेय जल आपूर्ति के लिए पराबेंगनी शुद्धीकरण लैम्प का इस्तेमाल करना चाहिए। जल शुद्धीकरण के लिए पराबेगनी लैप ही एकमात्र विधि है। पराबैंगनी जल शुद्धीकरण लैम्प UVC या “germicidal UV” उत्पन्न करते हैं जिनकी तीवता (intensity) सूर्य की किरणों से कहीं अंधिक होती है।

प्रश्न 53.
मृदु जल एवं कठोर जल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
कठोर जल (Hard Water) : वह जल जा साबुन के साथ कम झाग उत्पन्न करता है, कठोर जल कहलाता है। जल की कठोरता जल में कैल्सियम व मैग्नीशियम लवणों की उपस्थिति के कारण होंती है। ये लवण साबुन से रासायनिक अभिक्रिया करके अविलेय पदार्थ बनाते हैं। इसलिए कठोर जल से कपड़ा धोना कठिन होता है।
मृदु जल (Soft Water) : वह जल जो साबुन के साथ आसानी से अधिक झाग उत्पत्र करता है, मृदु जल कहलाता है। इसलिए मृदु जल से कपड़ा धोना आसान होता है।

प्रश्न 54.
जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जल प्रदूषण (Water Pollution) : जल में आवश्यकता से अधिक खानज पदार्थ, लवण, कार्बीनक और अकार्बनिक पदार्थ, कल-कारखाने और औद्योगिक प्रंतिष्ठानों से निर्गत कचरा, मल-मूत्र, कूड़ा-करक्रट आदि के मिश्रत हो जाने से जल के लाभदायक गुण नष्ट हो जाते हैं और वह पीने योग्य नहीं रह जाता। ऐसा जल प्रदूषित जल (Polluted water) कहलाता है।
अत: “मानव के क्रिया-कलापों के फलस्वरूप जल के प्राकृतिक गुणों में प्रतिकूल परिवर्तन का उत्पन्न होना जिससे उसकी उपयोगिता में कमी आ जाती है, जल प्रदूषण कहलाता है।”

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प्रश्न 55.
जल प्रदूषण के कारण तालाबों में शैवाल प्रस्फुट का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर :
जल प्रदूषण के कारण तालाबों में शैवाल प्रस्फुट़न डिटर्जेंट द्वारा वातावरण प्रदूषण : डिटर्जेट में उपस्थित फास्फेट साल्ट के कारण जलाशयों में एल्गी (algae) की उत्पत्ति जभ वन्कि लहुन तेजी से होती है जिसके फलस्वरूप जल का अनाक्सीकरण (Deoxygenation) होता है जिससे जलाशयों में उपस्थित मछली जैसे जलीय जन्तु आक्सीजन की कमी के कारण मर जाते हैं। साबुन की अपेक्षा अंधिक उपयोगी होने के बावजूद डिटर्जेंट का उपयोग करने पर जल प्रदूषण अधिक खतरनाक हो सकता है।

प्रश्न 56.
पेट्रोलियम के शोधन की क्यों आवश्यकता है ?
उत्तर :
पेट्रोलियम के शोधन की आवश्यकता है क्योकि इसमें अनेक पदार्थ मौजूद पाये जाते हैं।

प्रश्न 57.
पेयजल गुणवत्ता के मापदंड क्या हैं ?
उत्तर :
पेयजल गुणवत्ता के मापदंड (Quality parameters of drinkings water) : पेय जल रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन एवं स्वच्छ होना चाहएि । इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ या अवांछित तत्व, बैक्टीरिया के कीटाणु इत्यादि; जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हों, नहीं घुले होने चाहिए।
पेय जल के pH का मान (pH value of drinking water) : पेय जल में अम्लीबता एवं क्षार के अंश का अभाव होना चाहिए। यह पूर्ण रूप से उदासीन (neutral) होना चाहिए। इसका pH मान 7 होना चाहिए।
पेयजल में घुलित आक्सीजन की मात्रा (Quantity of dissolved oxygen in drinking water) : (i) एल्बेर्टा पर्यावरण 1977 (Alberta Environment 1977) के अनुसार स्वच्छ पेय जल में घुलित ऑक्सीजन की न्यूनतम मात्रा किसी भी समय 5 mg / L होनी चाहिए। (ii) अलास्का (Alaska) 1979 के अनुसार पेय जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 4 mg / L होनी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) के अनुसार पीने योग्य जल में –

  1. घुलित आर्सेनिक की मात्रा 10 μ g / L
  2. घुलित फ्लूराइड की मात्रा 1.5 mg / L या 1500 μ g / L
  3. कार्बन ट्रेटाक्लोराइड की मात्रा 4 μ g / L
  4. विनालय क्लोराइड की मात्रा (यूरोपियन यूनिनय स्टैण्डर्ड के अनुसार) 0.50 μ g / L होनी चाहिए।

प्रश्न 58.
जल की कठोरता दूर करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ?
उत्तर :
जल की कठोरता दूर करने की विधियाँ :
कठोर जल के साथ साबुन का अधिकांश भाग कैल्सियम या मैग्नेशियम के विलेय लवणों से अभिक्रिया करने में व्यय हो जाता है। केवल अभिक्रिया के बाद शेष बचा साबुन ही जल के साथ झाग बनाता है। चूँकि झाग के द्वारा ही मैल दूर होती है। अत: धुलाई के काम के लिए कठोर जल उपयुक्त नहीं है।

जल उबालने के पात्रों में जब कठोर जल उबाला जाता है, तो जल वाष्मीकृत हो जाता है और पात्र की दीवारों पर जल में घुले लवणों की पपड़ी जम जाती है। यह पपड़ी उष्मा की कुचालक है। अत:, पपड़ी लगे पात्रों में जल उबालने से अधिक उष्मा लगती है। अत: कठोर जल उपयुक्त नहीं है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 59.
जल में किसकी अधिकता से दंत क्षय, हडी क्षय, पैर में काले चकते जैसे रोग होते हैं ?
उत्तर :
जल में आर्सेनिक एवं प्लूराइड जैसे तत्वों के अधिक मात्रा में घुले रहने से दंत क्षय, पैर में काले चकते जैसे रोग होते हैं।.

प्रश्न 60.
छानना विधि द्वारा किस प्रकार के मिश्रण को अलग किया जाता है ?
उत्तर :
छानना विधि द्वारा द्रव मिश्रण में मिले ठोस पदार्थो को अलग किया जाता है।

प्रश्न 61.
केन्द्रक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
केन्द्रक (Nucleus) : परमाणु का वह भीतरी भाग जहाँ परमाणु की लगभग सम्पूर्ण मात्रा निहित होती है, उसे केन्द्रक (Nucleus) कहते हैं। यह परमाणु के आयतन की तुलना में अति सूक्ष्म आयतन वाला क्षेत्र है।

प्रश्न 62.
न्यूट्रॉन के आविष्कारक कौन थे ? परमाणु में ये कहाँ उपस्थित होते हैं ?
उत्तर :
न्यूट्रॉन के आविष्कारक सर जेम्स चैडविक थे। यह परमाणु के केन्द्रक में उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 63.
अम्ल एवं भस्म में दो अन्तर बताओ।
उत्तर :
अम्ल का स्वाद खट्टा है, अम्ल धातु से क्रिया कर हाइड्रोजन देता है। भस्म कड़वा होता है, यह OH देता है।

प्रश्न 64.
सभी क्षार भस्म है परन्तु सभी भस्म क्षार नहीं – की व्याख्या करो ?
उत्तर :
सभी क्षार भस्म हैं परन्तु सभी भस्म क्षार नहीं : सभी क्षार भस्म है परन्तु सभी भस्म क्षार नहीं क्योंकि वे भस्म जो जल में घुलनशील होते हैं, क्षार कहलाते हैं। सभी भस्म जल में घुलनशील नहीं होते। इसलिए सभी भस्म क्षार नहीं होते। बल्कि सभी क्षार भस्म होते हैं।.जैसे -Na2 O भस्म है लेकिन यह जल में घुलकर NaOH उत्पन्न करता है इसलिये यह क्षार है और OH आयन उत्पत्न करता है। इसी प्रकार Zn(OH)2 या Fe(OH)3 भस्म है, क्षार नहीं क्योंकि ये जल में घुलनशील नहीं होते हैं।

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प्रश्न 65.
1 amu का मान कितना है?
उत्तर :
1 amu सामान्य कार्बन परमाणु के बारहवे हिस्से के बराबर द्रव्यमान का होता है। एक हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान लगभग 1 amu के बराबर होता है ।

प्रश्न 66.
वास्तविक घोल किसे कहते हैं?
उत्तर:
वास्तविक घोल (True Solution) : वास्तविक घोल में ठोस घुलित होकर वितरण (dispersion) के कारण घोलक में घुल जाते हैं। घुलित के इस प्रकार वितरित (dispersed) कणों का आकार 1-10 A°(108-10. 7 सेमी० व्यास) होता है। दूसरे शब्दों में घुलित के कण True घोल में अणु के रूप में (non-electrolyte दशा में) या lonic size (Electrolyte दशा) में रहते हैं।

प्रश्न 67.
इमल्सन किसे कहते हैं? जल में तेल का एक उदाहरण दो।
उत्तर :
इमल्सन दो या इससे अधिक अमिश्रणीय तरल पदार्थो से बना एक मिश्रण है। इमल्सन के उदाहररण में शामिल हैं, मक्खन और मार्जरीन, दूध और क्रीम, फोटो फिल्म का प्रकाश संवेदी पक्ष, मैग्मा और धातु काटने मे काम आने वाले तरल। जल में तेल का उदाहरण दूध और वैनिशिंग क्रीम है ।

प्रश्न 68.
असंतृप्त घोल किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी निश्चित ताप पर यदि किसी घोल में विलेय की ओर अधिक मात्रा को घोला जा सकता है अर्थात जब किसी विलयन में इतना सामर्थ्य हो कि वह ओर विलेय को घोलने की क्षमता रखे तो एसे घोल को असतृत्त घोल कहते है ।

प्रश्न 69.
pH स्केल क्या है?
उत्तर :
pH किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता का एक माप है। इसे द्रवीभूत हाइड्रोजन आयनों (H+)की गतिविधि के सह-लघुगण़क (कॉलॉगरिदम) के रूप में परिभाषित किया जाता है।

प्रश्न 70.
अम्लीय आक्साइड किसे कहते हैं?
उत्तर :
अधातुओं के ऑक्साइड जो जल के साथ अभिक्रिया करके अम्ल बनाते है, उसे अम्लीय ऑक्साइड कहते हैं। (CO2),(SO2)(P2 O5),(SO3),(NO2) आदि ।

प्रश्न 71.
उभयधर्मी आक्साइड किसे कहते हैं?
उत्तर :
अधिकतर धात्विक ऑक्साइड क्षारीय ऑक्साइड होते हैं। लेकिन कुछ धात्चिक ऑक्साइड अम्लीय और क्षारीय दोनों अभिलक्षण दर्शाते हैं, अर्थात यह अम्ल और क्षारों दोनों से अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाते हैं। ऐसे ऑक्साइडों को उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं। जिंक, ऐलुमिनियम, काँच और टिन के ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं।

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प्रश्न 72.
एन्टासीड क्या है इसका उपयोग क्यो करते हैं?
उत्तर :
एंटासिड ऐसी दवाएं होती हैं जो अपच और सीने की जलन को दूर करने के लिए आपके पेट में एसिड को बेअसर करती हैं ! एंटासिड का उपयोग एसिडिटी, पेट फूलना और पेट का अल्सर के इलाज में किगा जाता है। यह पेट में दर्द या जलन जैसे लक्षणों से राहत देने में मदद करता है।

प्रश्न 73.
कोलाइडल घोल से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
समांगी (Homogeneous) तथा विषमांगी (Heterogeneous mixture) मिश्रणों के बीच के गुण वाला एक मिश्रण जिसके कण घोल में समान रूप से फैले होते हैं, कोलाइडल घोल कहलाते है।

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प्रश्न 74.
रवाकरण से क्या समझते हैं?
उत्तर :
रसायन विज्ञान में रवाकरण विधि के द्वारा अकाबनिक ठोस मिश्रण को अलग किया जाता है। इस विधि में अशुद्ध ठोस मिश्रण को उचित विलायक के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है तथा गर्म अवस्था में ही कीप द्वारा छान लिया जाता है। छानने के बाद विलयन को कम ताप पर धीरे-धीरे ठण्डा किया जाता है।

प्रश्न 75.
पेयजल में आर्सेनिक की अधिकता से उत्पन्न रोगों का नाम बताओ।
उत्तर :
आर्सेनिक प्रदूषित जल के उपयोग से चर्म रोग, चर्म कैंसर, यकृत, फेफड़े, गुर्दे एवं गक्त विकार संबंधी रोगों के अलावा हाइपर केरोटोसिस, काला पांव, मायोकॉर्डयल, स्थानिक अरक्तता आदि होने का खतरा होता है।

प्रश्न 76.
पेयजल में उपस्थित फ्लोराइड की अधिकता से उत्पन्न रोगों के नाम बताओ।
उत्तर :
पेयजल में अधिक फ्लोराइड की उपस्थिति गर्दन, पीठ, कंध व घुटनों के जोड़ों व हट्द्धियों को प्रभावित करता है। कैंसर, स्मरण शक्ति कमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बाझझपन जैसी समस्या भी इससे हो सकती है। विदेश में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक सामान्य मानी जाती है, जबकि भारत में यह दर 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
मिश्रण के अवयवों को पृथक करने की क्या आवश्यकता है ? पृथक्करण की खास विधियों का चुनाव आप कैसे करेंगे ?
उत्तर :
मिश्रण के अवयवों को पृथक करने की आवश्यकता : किसी मिश्रण से उसके अवयवों को निम्नलिखित उद्देशयों की पूर्ति के लिए अलग किया जाता है।

  1. अवांछित अवयवों को पृथक करने के लिए,
  2. लाभदायक अवयवों को प्राप्त करने के लिए,
  3. शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए,
  4. मिश्रण के अवयवों की तुलनात्मक मात्रा ज्ञात करने के लिए।

पृथक्करण की खास विधियों का चुनाव : किसी मिश्रण के अवयवों को एक दूसरे से पृथक करने के लिए एक अवयव के उन गुणों को जानना होता है जो दूसरे अवयव के गुण से अलग हों। इसी गुण के आधार पर प्रथक्करण की खास विधियों का चयन करते हैं।

उदाहरण के लिए लोहे एवं गंधक के मिश्रण से लोहे को पृथक करने में लोहे के चुम्बकीय गुण को आधार माना जाता है। चुम्बक लोहे को आकर्षित करता है, गन्धक को नहीं। इसी प्रकार चीनी एवं बालू के मिश्रण से चीनी को पृथक करने की प्रक्रिया में पानी में चीनी की घुलनशीलता को आधार माना जाता है। चीनी पानी में घुलनशील है किन्तु बालू पानी में अघुलनशील है। इस प्रकार पृथक्करण की प्रक्रिया में मिश्रण के एक अवयव के उस गुण का उपयोग किया जाता है जो दूसरे अवयवों में न हों।

किसी मिश्रण से उनके अवयवों को पृथक करने के लिए उनके भार, आकार, आकृति, रंग, घुनलशीलता तथा चुम्बक के प्रति आकर्षण इत्यादि को आधार मानकर निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है।

  1. ठोस को ठोस से पृथक करने के लिए : इस प्रकार के पृथक्करण में पटकना और ओसाना, बीनना, चालना, चुम्बकीय पृथक्करण तथा ऊर्ष्वपातन जैसी विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  2. अघुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से पृथक करने के लिए : इस प्रकार के पृथक्करण में तलछटीकरण और निथारना, छानना तथा भारण इत्यादि विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  3. घुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से पृथक करने के लिए : इस प्रकार के पृथक्करण में आंशिक आसवन तथा क्रीस्टलीकरण जैसी विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  4. अघुलनशील द्रव पदार्थों को अन्य द्रवों से पृथक करने के लिए पृथक्कारी कीप का उपयोग किया जाता है।
  5. ठोस पदार्थों को गैसों से पृथक करने के लिए : धुआँ, कार्बन के छोटे-छोटे कणों तथा वाष्पशील गैसों का मिश्रण होता है।

इस प्रकार के मिश्रण से कार्बन के कणों को पृथक करने के लिए आजकल कल-कारखानों की चिमनी की निचली सतह पर विशेष चुम्बकीय युक्ति द्वार कार्बन के कणों को गैसों से पृथक कर दिया जाता है। यह कार्बन पृथक होकर चिमनी की निचली सतह पर एकत्र होता रहता है। समय समय पर इसे चिमनी से हटा दिया जाता है। इस विधि का उपयोग आजकल थर्मल पावर स्टेशनों में किया जाता है।

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प्रश्न 2.
मिश्रण के अवयवों को पृथक करने की आसवन विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तरं :
आसवन (Distillation) : वह प्रक्रिया, जिसमें किसी द्रव को गर्म करके वाष्प में परिवर्तित किया जाता है, फिर उस वाष्प को ठंडा करके पुन: द्रव में संघनित किया जाता है, आसवन कहलाती है।

आसवन की क्रिया एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में कराई जाती है। इसे आसवन फ्लास्क कहते हैं। इस फ्लास्क की गरदन में एक पाश्श्व नली (sidetube) रहती है जो एक संघनक से जुड़ी रहती है। इसे लीबिंग संघनक (Libig condenser) कहते हैं। इसी संघनक में द्रव की वाष्प ठंड़क पाकर द्रवीभूत हो एक ग्राहक (receiver) में एकत्र होती है। उपकरणों की सजावट को पाश्व्व चित्र में दिखाया गया है। द्रव को आसवन फ्लास्क में लेकर बालू ऊष्मक पर धीरे-धीरे गर्म करके उबालते हैं तथा द्रव की वाष्प को संघनक से होकर प्रवाहित होने देते हैं। वाष्प संघनक में ठंडी होकर द्रव में परिणत हो जाती है जिससे ग्राहक में एकत्र कर लिया जाता है। द्रव में उपस्थित ठोस अशुद्धियाँ आसवन फ्लास्क में ही रह जाती हैं।

प्रश्न 3.
मिश्रण के अवयवों को अलग करने की प्रभाजी आसवन विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) : यह विधि दो या अधिक मिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवों को पृथक करने में अपनाई जाती है, जिनके अवयवी द्रवों के क्वथनांक का अंतर बहुत कम (10° C. या कम) हो। उदाहरण के लिए, मेथिल एल्कोहॉल (ववथनांक 65° C) को एसीटोन (क्वथनांक 56° C) से इस विधि द्वारा पृथक किया जा सकता है।

मिश्रण को एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में लेकर बालू उष्मक पर गर्म करते हैं। यह फ्लास्क एक प्रभाजक स्तभ (factionating column) से जुड़ा रहता है, जैसा कि पार्श्व चित्र में दिखाया गया है। प्रभाजक स्तभ में कई फदे (traps) होते हैं जिनमें उच्च क्वथनांक वाले या काम वाष्पशील द्रव की वाष्प संघनक में जाकर संघनित हो जाते है, जिसे एक अलग ग्राहक में एकत्र कर लिया जाता है। इस द्रव के क्वथनांक पर तापमान तब तक स्थिर रहता है जब तक कि यह द्रव पूर्णत: वाष्पित होकर निकल नहीं जाता। इसके पश्थात तापमान बढ़ने लगता है और अगले उच्च क्वथनांक वाले द्रव के क्वथनांक पर पुन: स्थिर हो जाता है। यह द्रव भी पूर्णतः वाष्पित होकर संघनक में द्रवीभूत होता है जिसे एक दूसरे ग्राहक में एकत्र कर लिया जाता है। इस प्रकार से मिश्रण के सभी अवयवों को अलग-अलग प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 4.
पृथक्कारी कीप क्या है ? इसके उपयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पृथक्कारी कीप एवं इसका उपयोग (Use of separating funnel) : पृथक्कारी कीप काँच का एक बल्ब होता है जिसकी डंडी में एक स्टॉप कॉक (stopcock) लगा रहता है। इसका उपयोग दो या दो से अधिक अमिश्रणीय द्रवों के मिश्रण के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है उदाहरण के लिए, तेल और जल को इसके मिश्रण से पृथक्कारी कीप की सहायता से पृथक किया जा सकता है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण 4

जब द्रवों के मिश्रण के अवयव अमिश्रणीय (Immiscible) होते हैं, तो उन्हें पृथक्कारी कीप द्वारा अलग करते हैं। सर्वप्रथम दो द्रवों के मिश्रण को पृथक्कारी कीप में डालते हैं। पृथक्कारी कीप में डालने पर दोनों द्रव अलग-अलग सतहों में बँट जाते हैं। अब पृथक्कारी कीप में लगी टोटी को खोलकर भारी द्रव को, जो नीचे की सतह में जमा है, अलग कर लिया जाता है। पुन: पृथक्कारी कीप के हल्के द्रव को भी अलग पात्र में निकाल लिया जाता है। जल एवं किरासन तेल के मिश्रण से जल एवं किरासन तेल को इसी विधि से अलग करते हैं। किरासन तेल से जल का घनत्व अधिक होने के कारण यह नीचे की सतह में जमा होता है। इस प्रकार उपरोक्त प्रक्रिया के द्वारा इसे मिश्रण से पृथक कर लिया जाता है।

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प्रश्न 5.
प्रकृति में आर्सेनिक की उपस्थिति एवं इसके दुष्मभाव का उल्लेख कीजिए ?
उत्तर :
प्रकृति में आर्सेनिक की उपस्थिति (Occurrance of arsenic in nature) : प्रकृति में आर्सेनिक की उपस्थिति मुख्य रूप से दो कारणों से है – प्राकृतिक एवं मानव विकास के इतिहास से संबंधित। प्रकृति में आर्सेनिक वृहत रूप में उपस्थित है एवं प्रधान रूप से अकार्बनिक एवं कार्बनिक यौगिकों के रूप में पायी जाती है न कि मुक्त अवस्था में आर्सेनिक तत्व के रूप में। अकार्बनिक यौगिकों आर्सेनाइट, सबसे अधिक विषेले रूप में एवं आर्सेनिक कम विषेले रूप में पाया जाता है।

आर्सेनिक के मुख्य अयस्क आर्सेनोपाइराइट, एर्पीमिट, रीलगर एवं आर्सेनोपैलेडेनाइट हैं। यह प्रकृति में आयरन आर्सेनेट, आयरन, सल्फेट एवं कैल्केरियस मिट्टी में कैल्केरियस आर्सेनोलाइट के रूप में पाया जाता है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में यह आर्सेनाइट के रूप में पाया जाता है। मानव विकास के इतिहास के क्षेत्र में इसके मुख्य स्रोत औद्योगिक वर्ज्य पदार्थ, फास्फेट, उर्वरक, कोयला, तेल, सीमेंट, भूमिगत खनन के उत्पाद, स्मेल्टिंग, अयस्क प्रसंस्करण, धातु निष्कर्षण, धातु शुद्धीकरण रासायनिक पदार्थ, सीसा, चमड़ा, वस्त, क्षार, पेट्रोलियम शोधक कारखाने, अम्ल की खाने, मिश्र धातुएँ वर्णक (pigments), कीटनाशक एवं उत्पेरक इत्यादि हैं।

आजकल कृषि कार्य में अनेक प्रकार की कीटनाशक दवायें उपयोग में लायी जाती हैं। इनमें से कुछ कीटनाशक दवाओं में आर्सेनिक मौजूद होता है, जैसे – कैल्शियम आर्सेनेट, सोडियम आर्सेनेट आदि। इन कीटनाशकों के प्रयोग से इनमे उपस्थित आर्सेनिक मिट्टी में मिल जाता है जो वर्षा के जल या कृषि कार्य में प्रयुक्त जल के माध्यम से नदियों, झीलों तथा तालाबों में प्रवाहित होता है जिससे प्राकृतिक जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं।

आर्सेनेट, आर्सेनाइट एवं फ्लूराइड का विषैला प्रभाव (Toxic effects of arsenate, arsenite and fluride) : (i) पीने योग्य जल में आर्सेनिक की अधिक मात्रा की उपस्थिति से ब्लैक फुट (Black foot), लकवा मारना (paralysis of nerves) तथा अस्थिमज्जा का प्रभावित होना, आर्सेनिक डर्मेटोसिड (Arsenic Dermatosis), हाइपरकेराटोसिस (hyper keratosis), मेलानोसिस (melanosis) विभिन्न अंगों में कैसर तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधित बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं।

पीने योग्य जल में फ्लूराइड की अधिक मात्रा घुली रहने के कारण दाँत की बीमारी, श्वसन तंत्र का ठीक ढंग से काम न करना, अस्थिपंजर का क्षतिग्रस्त होना, लकवा मारना (paralysis) जैसी बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 6.
जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं ?-जल प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
जल प्रदृषण : जल में आवश्यकता से अधिक खनिज पदार्थ, लवण, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ, कलकारखानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निर्गत कचरा, मल-मूत्र, कूड़ा-करकट आदि के मिश्रित हो जाने से जल के लाभदायक गुण नष्ट हो जाते हैं और वह पीने योग्य नहीं रह जाता है। ऐसा जल प्रदूषित जल (Polluted water) कहलाता है।
अत:’ ‘मानव के क्रिया-कलापों के फलस्वरूप जल के प्राकृतिक गुणों में प्रतिकूल परिवर्तन का उत्पन्न होना जिससे उसकी उपयोगिता में कमी आ जाती है, जल प्रदूषण कहलाता है।”
जल प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव (Harmful effects of water pollution) :

  1. प्रदूषित जल का सेवन करने से हैजा, टायफाइड एवं पेचिश जैसी जानलेवा बीमारियाँ पैदा होती हैं।
  2. जल प्रदूषण के कारण पेय जल संकट का सामना करना पड़ता है।
  3. प्रदूषित जल से सिंचाई करने पर फसलों के उत्पादन में कमी आती है तथा कृषि क्षेत्र से प्राप्त होने वाले अनाज, फल-फूल एवं साग सब्जी की गुणवत्ता में कमी आती है।
  4. जल प्रदूषण के कारण जलाशयों में शैवाल की तेजी से वृद्धि होने पर जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है। इसके फलस्वरूप जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है।

प्रश्न 7.
कैथोड किरण की नली का प्रायोगिक उपयोग क्या है ?
उत्तर :
कैथोड किरण नली का प्रायोगिक उपयोग :
इलेक्ट्रॉन की खोज (Discovery of electron) : काँच की एक विसर्ग नली (discharge tube) में किसी गैस को लेकर अत्यंत कम दाब (0.01 mmHg) तथा उच्च विभवांतर (10.000 v) पर विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विसर्ग नली के कैथोड से एक प्रकार की किरणें निकलती हैं जो सीधी रेखा में गमन करते हुए सामने की दीवार पर पड़ती हैं। इन किरणों का नाम कैथोड किरण रखा गया है।

कैथोड किरणों के गुण (Properties of cathod rays) :

  1. ये किरणें कैथोड से निकलकर अतितीव्र वेग से सीधी रेखा में गमन करती हैं।
  2. इनके मार्ग में अपारदर्शक वस्तु के रखने पर वस्तु की छाया कैथोड के दूसरी तरफ बनती है। इससे प्रमाणित होता है कि ये किरणें सीधी रेखा में चलती हैं।
  3. इन किरणों के मार्ग में हल्का पाद-चक्र (paddle wheel) रखने पर यह अपनी धुरी पर नाचने लगंती है। इससे सिद्ध होता है कि ये किरणें अत्यंत छोटे-छोटे द्रव्यकणों से बनी होती हैं।
  4. वैद्युत या चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से ये किरणें विचलित होती हैं।

इनके विचलन की दिशा से ज्ञात होता है कि ये किरणे ऋण आवेशित हैं। विसर्ग नली में भित्र-भिन्न गैसों तथा भिन्न-भिन्न धातुओं के कैथोडों का प्रयोग करने पर पता चलता है कि हर हालत में एक ही प्रकार के कण निकलते हैं। अत: ॠण आवेशित ये कण प्रत्येक तत्व के प्रत्येक परमाणु के मौलिक अवयव हैं। टॉमसन (Thomson) ने इन कणों के आवेश (θ) और द्रव्यमान (m) का अनुपात (e / m) प्रयोगों द्वारा ज्ञात किया। इन्होंने विभिन्न विसर्ग नलियों का उपयोग किया, विभिन्न धातुओं के इलेक्ट्रोडों को काम में लाया तथा विसर्ग नली में विभिन्न गेसों का प्रयोग किया। हर हालत में (e / m) का मान (1.76 × 103) कूलॉम/ग्राम ही पाया गया। इससे सिद्ध होता है कि वे कण सभी परमाणुओं के मौलिक अवयव हैं। इन्हीं कणों का नाम इलेक्ट्रॉन (electron) रखा गया।

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प्रश्न 8.
वास्तविक घोल, कोलायडी घोल एवं निलंबन की उदाहरण सहित परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
आलम्बन (Suspension) : जब एक ठोस पदार्थ को महीन चूर्ण के रूप में एक द्रव (माना जल) जिसमें ठोस पदार्थ अघुलनशील है, में डालकर हिलाते हैं, तो ठोस के महीन कण कुछ समय तक घोल में फैले रहते हैं और फिर बर्तन की पेंदी में बैठ जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त मिश्रण आलम्बन (Suspension or Course suspension) कहलाता है। परीक्षणों से ज्ञात होता है कि द्रव में इस प्रकार निलंबित (suspended) ठोस के कणों का आकार 1000 AO(10-5 – 10-3 सेमी॰ व्यास) से अधिक होता है। ये खुली आँख शक्तिशाली Hand-lens या साधारण सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा अक्सर देखे जाते है।

वास्तविक घोल (True Solution) : वास्तविक घोल में ठोस घुलित होकर वितरण (dispersion) के कारण घोलक में घुल जाते हैं। घुलित के इस प्रकार वितरित (dispersed) कणों का आकार 1-10 A°(10-6-10-7. सेमी० व्यास) होता है। दूसरे शब्दों में घुलित के कण True घोल में अणु के रूप में (non-electrolyte दशा में) या lonic size (Electrolyte दशा) में रहते हैं।
कोलाइडल घोल में कण, द्रव माष्यम में ही वितरित रहते हैं। इसमें पदार्थ के कणों का आकार निलंबन (suspension) और वास्तविक (True) घोल के बीच का होता है। अर्थात् इसमें पदार्थ के कणों का व्यास 10-7-10-5 सेमी० का होता है।

कोलायड (Colloidal solution) की परिभाषा : कोलायड घोल एक स्थाई असमांग सिस्टम (Stable hetrogenerous system) है जिसमें वितरित प्रावस्था (disperesed phase) एवं वितरण माध्यम (dispersion medium) दो अवस्थाएँ (phases) होती हैं। वितरित पावस्था (dispersed phase) पदार्थ के सूक्ष्म कणों का बना होता है जिसका व्यास 10-7 से॰मी॰ से 10-5 से॰मी॰ होता है तथा लगातार माध्यम (continuous medium) वितरण माध्यम (dispersion medium) कहलाता है। इसमें घुलित के कण समान रूप से बिखरे (dispersed) होते हैं। कोलायडल घोल साधारण फिल्टर पेपर से पार हो सकता है लेकिन पार्चमेंनट पेपर से नहीं। ऐसे घोल के वितरित कण (dispersed particle) घोल को काफी देर तक स्थिर छोड़ देने पर भी नीचे नहीं बैठ पाते हैं।

प्रश्न 9.
विभिन्न कोलायडी घोल को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कुछ प्रमुख कलिलीय गोल (कोलायड) के उदाहरण नीचे दिये गये हैं –
साल (Sols) : इनमें वितरित प्रावस्था ठोस और वितरण माध्यम द्रव होता है। जैसे – गोल्ड, सिल्वर, फेरिक हाइड्राक्साइड आदि कलिलीय घोल हैं। जब वितरण माध्यम जल होता है तो साल को हाइड्रोसाल (Hydrosol) कहते हैं।

पायस (Emulsions) : इनमें वितरित प्रावस्था और वितरण माध्यम दोनों ही द्रव होते हैं अर्थात् यदि किसी द्रव में कोई दूसरा अमिश्रणीय (Immiscible) द्रव कलिलीय आकार के कणों में वितरित हों, तो उस घोल को पायस कहते हैं। दूध प्राकृतिक पायस का एक अच्छा उदाहरण हैं। इसमें द्रव वसा (fat) के कण जल में वितरित रहते हैं। किरासन तेल की कुछ बूँदों को पानी के साथ एक बोतल में हिलाने से पानी में वितरित तेल का पायस मिलता है। यह पायस अस्थायी होता है क्योंकि थोड़ी ही देर में पानी तथा तेल अलग-अलग हो जाते हैं।

जेल्स (Gels) : जब किसी ठोस में द्रव वितरित रहता है तो उसे जेल्स (gels) कहते हैं। जैसे – जेली, पनीर; मक्खन। मक्खन में वितरित प्रावस्था द्रव और वितरण माध्यम ठोस वसा होता है। इसी प्रकार द्रव में गैस का कलिलीय घोल फेन (Forth) है। ठोस में गैस के कलिलीय घोल का उदाहरण प्यूमिस पत्थर है।

प्रश्न 10.
घोल में कणों की गति की व्याख्या करें।
उत्तर :
घोल में कणों की गति (Motion of particles in solution) : अति सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा यह देखा गया है कि कलिलीय घोल में कोलायड के कण स्थिर रूप से और टेढ़ी-मेढ़ी (Zig-Zag) तीव्र गति में रहते हैं, जिसे बाउनियन गति (Brownian movement) कहते हैं। इस महत्वपूर्ण घटना का परीक्षण रॉबर्ट ब्राउन ने 1827 ई० में किया था। निलम्बन एवं वास्तविक घोल में बाउनियन गति नहीं पायी जाती है।

ब्राउनियन गति की व्याख्या : कलिलीय घोल में ब्राउनियन गति वितरण माध्यम (dispersion medium) के अणुओं का कोलायड के कणों पर बमबारी (bombardment) के कारण होती है। जब दूसरी तरफ की अपेक्षा एक तरफ से अधिक अणु टकराते हैं, तो गति की दिशा बदल जाती है। इस तरह इस लगातार बमबारी के प्रभाव में कलिलीय घोल के कण लगातार टेढ़ी-मेढ़ी गति से गतिशील रहते हैं।

महत्व (Significance): (a) गतिज सिद्धान्त (Kinetic theory) के अनुसार घोल के अणुओं में अनवरत बिना रुके गति होती रहती है। (b) तीव्र एवं टेढ़ी-मेढ़ी गति कोलायडल कणों को गुरुत्व के प्रभाव से स्थिर होकर जमा होने से रोकती है और इस तरह कलिलीय घोल को कुछ हद तक स्थिर रखने में मदद करती है।

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प्रश्न 11.
मोल की अवधारणा के बारे में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
मोल की अवधारणा (Molar concept) : हमलोग जानते हैं कि किसी पदार्थ का अंतिम कण परमाणु या अणु होता है। प्रयोगशाला में कार्य करते समय हमें किसी पदार्थ के परमाणुओं या अणुओं की एक निश्चित संख्या का ही उपयोग करना पड़ता है। अत: हमें प्रयुक्त होने वाले परमाणुओं या अणुओं की संख्या की स्पष्ट जानकारी रखना आवश्यक है। इसके लिए मोल की परिकल्पना अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है।
लैटिन भाषा में मोल शब्द का अर्थ ढेर या अंबार होता है।

परमाणुओं का एक मोल, परमाणुओं का वह अंबार है जिसका कुल द्रव्यमान एक ग्राम-परमाणु द्रव्यमान के बराबर होता है। चूँकि विभिन्न तत्वों के मोलों की समान संख्या में उनके परमाणुओं की संख्या समान रहती है, अतः तत्वों की मात्रा को मोल में व्यक्त करना अधिक सुविधाजनक होता है। मोल कणों (परमाणु, अणु, आयन या इलेक्ट्रॉन) की एक निध्चित संख्या को व्यक्त करता है । इस निश्थित संख्या को एवोगेड्रो संख्या कहा जाता था परन्तु अब हम इस संख्या को एवोगैड्रो स्थिरांक कहते हैं, जो कुल 6.022 × 1023 कणों के बराबर होता है। अत: मोल को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है।

” मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें मूल कणों (परमाणु, अणु, आयन, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि) की संख्या उतनी ही होती है जितनी कार्बन – 12 के ठीक, 12 ग्राम में उसके परमाणुओं का संख्या होती है।”

किसी तत्व के परमाणुओं के एक मोल का द्रव्यमान ग्राम में व्यक्त उसका सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान है। उदाहरण के लिए, सोडियम (Na) का परमाणु द्रव्यमान 23.0 amu होता है। अत: 1 मोल सोडियम का द्रव्यमान ठीक 23.0 ग्राम है। 1 मोल सोडियम = 23.0 ग्राम सोडियम

इसी प्रकार 1 मोल अणुओं का द्रव्यमान 17.031 ग्राम होता है। अतः 1 मोल अमोनिया का द्रव्यमान 17.031 ग्राम है। 1 मोल आमोनिया = 17: 031 ग्राम अमोनिया।

प्रश्न 12.
मोल का क्या महत्व है ?
उत्तर :
मोल का महत्व (Importance of mole) : मोल से हमें निम्नलिखित बातों की जानकारी प्राप्त होती है।

  1. मोल का द्रव्यमान उसके 6.022 × 1023कणों का निरूपण करता है।
  2. किसी तत्व के 1 मोल का द्रव्यमान उसके 6.022 × 1023परमाणुओं के कुल द्रव्यमानों के बराबर होता है।
  3. पदार्थ का एक मोल उस पदार्थ के एक ग्राम-सूत्र द्रव्यमान को व्यक्त करता है।

उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) का 1 मोल = (1 + 35.5) g या 36.5 g हाइड्रोजन क्लोराइड अत:, मोल हाइड्रोजन क्लोराइड के 6.022 × 1023 अणुओं के कुल द्रव्यमान का निरूपण करता है।
4 मानक तापमान और दाब पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 l होता है। (मानक तापमान = 0° C या 273 K और मानक दाब = पारा का 76 cm दाब।

प्रश्न 13.
एवोगैड्रो संख्या के बारे में विस्तार से समझाइए।
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या (Avogadro’s Number) NA : एवोगैड्रो के नियम के अनुसार, तापमान एवं दबाव को समान शर्तों पर बराबर आयतन वाली सभी गैसों में अणुओं की संख्या समान होती है। पुन: यह प्रमाणित किया जा चुका है कि मानक तापमान एवं दबाव (S.T.P.) पर किसी गैस या वाष्प के एक मोल या ग्राम मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है। इस प्रकार यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि किसी पदार्थ के एक ग्राम मोल में अणुओं की संख्या समान होती है यद्यपि विभिन्न पदार्थो के एक मोल का भार भिन्न-भिन्न होता है।
‘किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के एक मोल में उपस्थित कणों की संख्या को एवोगैड्रो संख्या (Avogadro’s Number) कहते हैं।”
एवोगैड्रो संख्या का मान 6.022 × 1023 होता है। एवोगैड्रो संख्या को NA से प्रदर्शित किया जाता है।

इस प्रकार, किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के एक ग्राम मोल में अणुओं की संख्या 6.022 × 1023 होती है एवं किसी तत्व के एक ग्राम परमाणु में परमाणुओं की संख्या 6.022 × 1023 होती है।
चूँकि S.T.P. पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है, अत: एवोगैड्रो संख्या को इस प्रकार भी परिभाषित किया जा सकता है कि “S.T.P. पर किसी गैस के 22.4 लीटर में उपस्थित अणुओं की संख्या को एवोगैड्रो संख्या कहते हैं।”

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प्रश्न 14.
एवोगैड्रो संख्या की व्यापकता का उल्लेख करें।
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या की व्यापकता (Enormity of Avogadro’s number (NA) :
भौतिक विज्ञान एवं जीव विज्ञान में महत्व (Importance in Physics and Biology) : एवोगैड्रो संख्या स्थूल दुनिया एवं सूक्ष्म दुनिया के बीच कड़ी का काम करता है।

6.022 × 1023 संख्या के परिमाण के बारे में कल्पना करना कठिन है। इसके बारे में कुछ जानकारी के लिए, 1 मोल सेकेण्ड उस समयावधि के 4 मिलियन (1 मिलियन = दस लाख) गुना समय को प्रदर्शित करता है जितना पृथ्वी को अपने अस्तित्व में आए हुए बीता है अर्थात् जितना अभी तक पृथ्वी की उम्र है एवं एक मोल संगमरमर के द्वारा पूरी पृथ्वी को 40 मील की गहराई तक ढ़का जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ, चूँकि परमाणु इतने छोटे होते हैं कि एक मोल परमाणुओं अथवा अणुओं को रासायनिक क्रिया में प्रयोग के लिए पूर्णरूपेण प्रबंध किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
एवोगैड्रो संख्या के रसायन विज्ञान में महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
एवंगैड्रो संख्या का रसायन विज्ञान में महत्व : ऐवोगैड्रो संख्या की सहायता से तत्वों के परमाणुओं तथा तत्वों या यौगिकों के वास्तविक द्रव्यमान निकाले जा सकते हैं।

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हाइड्रोजन परमाणु का वास्तविक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए, हाइड्रोजन के ग्राम परमाणु भार में एवोगैड्रो संख्या से भाग देते हैं। जैसे – हाइड्रोजन का परमाणु भार = 1.008
∴ हाइड्रोजन का ग्राम परमाणु भार = 1.008 ग्राम
∴ 1.008 ग्राम हाइड्रोजन में परमाणुओं की संख्या = 6.022 × 1023
∴ हाइड्रोजन के 1 परमाणु का द्रव्यमान = \(\frac{1.008}{6.022}\) × 1023 ग्राम = 1.67386 × 10-24 ग्राम
∴ H परमाणु का द्रव्यमान = 1.67358 × 10-24 ग्राम

प्रश्न 16.
परमाणु द्रव्यमान इकाई क्या है ? इसके आधार पर तत्व के सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
परमाणु द्रव्यमान इकाई : परमाणु के द्रव्यमान को सरलतापूर्वक व्यक्त करने के लिए एक इकाई का चुनाव किया गया है जिसे परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic mass unit) कहते हैं। इसे संक्षेप में a.m.u. लिखा जाता है। \({ }^{12} \mathrm{C}\) = 12.00 स्केल पर सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान :
किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान एक संख्या है जो यह बताती है कि उस तत्व के परमाणु का द्रव्यमान कार्बन 12 परमाणु के द्रव्यमान के 12 वे भाग से कितना गुना अधिक है।

अत: किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान एक सापेक्ष राशि है।

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1 amu = \(\frac{1}{12}\) × C – 2 परमाणु का द्रव्यमान = 1.66 × 10-24 g = 1.66 × 10-27 kg

प्रश्न 17.
STP पर गैसों के मोलर आयतन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
मानक तापमान एवं दबाव पर गैसों का मोलर आयतन (Molar Volume of Gases at S.T.P.) : एवोगैड्डो के नियमानुसार समान तापमान एवं दबाव पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। इसके विपरीत सभी गैसों के समान अणुओं का आयतन समान दबाव और समान तापक्रम पर बराबर होता है। किसी भी पदार्थ के एक मोल में अणुओं की संख्या 6.022 × 1023 होती है। अत: S.T.P. पर सभी गैसो के एक मोल का आयतन भी एक समान होगा।
S.T.P. पर किसी भी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है, इस आयतन को 22.4 लीटर होता है, इस आयतन को S.T.P. मोलर आयतन (S.T.P. Molar Volume) कहते हैं।
S.T.P. पर गैसों के मोलर आयतन का मान दबाव स्थिर रखते हुए तापमान बढ़ाने पर बढ़ता है तथा तापमान स्थिर रखते हुए दबाव बढ़ाने पर आयतन घटता है।

उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन के एक मोल (32gram) या नाइट्रोज़न के एक मोल (= 28 gram) या CO2 के एक मोल (= 44 gram) का आयतन S.T.P. पर 22.4 लीटर होता है।.

प्रश्न 18.
उदासीनीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं ? इसे दो उदाहरण के द्वारा समझायें।
उत्तर :
उदासीनीकरण (Neutralisation) : जिस रासायनिक प्रतिक्रिया में अम्ल तथा क्षार परस्पर प्रतिक्रिया करके अपने-अपने गुणों को त्याग कर लवण तथा जल उत्पन्न करते हैं, उसे उदासीनीकरण (Neutralisation) कहते हैं।

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इस क्रिया में अम्ल तथा क्षार क्रमश: अम्लीय तथा क्षारीय गुणों को त्याग कर उदासीन (Neutral) हो जाते हैं।

प्रश्न 19.
‘जल ही जीवन है’-क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
जल की व्यापकता तथा प्रचुरता के कारण यह सभी जीवधारियों के लिए अति आवश्यक पदार्थ है। यह मुक्त अवस्था में पृथ्वी के 75 % भागों में पाया जाता है। इसकी अनुपस्थिति में पृथ्वी के सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे तथा मनुष्य जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। अत: जल ही जीवन है।

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प्रश्न 20.
जल के कौन से भौतिक गुण जीवन की उत्पत्ति एवं रख-रखाव को प्रभावित करते हैं ?
उत्तर :
जल की भूमिका (Role of Water) :
जल की विशिष्ट उष्मा उच्चतम होती है। इसी कारण से स्वचालित वाहनों के रेडिएटरों में शीतलता के लिए जल का प्रयोग किया जाता है। सेकने के लिए Water bottle में जल को तापक (heater) के रूप में व्यवहार किया जाता है।
जल की उच्च वाष्पन उष्मा तथा उच्च उष्मा धारिता ही जीवों के शरीर तथा जलवायु के ताप को सामान्य बनाए रखते हैं। वनस्पतियों तथा प्राणियों के Matabolism (उपापचय) में जल एक उत्तम घोलक का कार्य करता है।
जल ठोस में बदलता है तो उसका आयतन बढ़ता है क्योकि जल के हाइड्रोजन अणु कठोरता से एक दूसरे के साथ होते हैं, जिसके कारण इनके अणु को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ताप शक्ति की आवश्यकता होती है। इसीलिए जल का क्वथनांक तथा गलनांक अधिक होता है।
जल में Capillary action (केशिकाएँ प्रभाव) के कारण ही पौधे के पतले-पतले मूल रोम (Root hair) मिट्टी के कणों से जल का अवशोषण कर लेते हैं। Cappilary action के कारण ही Paint करनेवाले ब्रश के Hair में रंग उठ जाता है तथा पतली नली में गुरुत्व बल के विरुद्ध में भी जल भर जाता है।

प्रश्न 21.
किसी घोल में घोलक तथा घुलित का निर्णय कैसे करते हैं ? उदाहरण सहित समझाओ।
उत्तर :
घोल के जिस उपादान की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो एवं जो किसी अन्य पदार्थ (ठोस, द्रव या गैस) में घुल कर समांग मिश्रण बनाए उसे घुलित (Solute) कहते हैं। जैसे – चीनी, नमक, तूतिया, शोरा आदि जल में घुल जाता है। अत: चीनी, नमक, तूतिया, शोरा आदि को घुलित (Solute) कहेंगे।
घोल में जिस उपादान की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो एवं उसकी भौतिक अवस्था के समान घोल की भौतिक अवस्था हो तो उसे घोलक (Solvent) कहते हैं।

साधारणत: किसी घोल में घोलक द्रव रूप में होता है और घुलित ठोस रूप में किन्तु घोलक का सदैव द्रव अवस्था में होना आवश्यक नहीं है। यदि किसी घोल में घुलित तथा घोलक की भौतिक अवस्था समान हो तो उन दोनों में जिसकी मात्रा अधिक होगी वह घोलक के रूप में माना जाता है।
घोल, घोलक तथा घुलित से बना होता है। घोल सदा द्रव रूप में नहीं होता। यह घोलक तथा घुलित की अवस्था पर निर्भर करता है। जिसकी मात्रा अधिक होगी वही घोल की अवस्था होगी।

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प्रश्न 22.
परमाणु के अन्दर में कण कहाँ एवं कैसे स्थित होते हैं तथा इनपर कौन सा आवेश होता है ?
उत्तर :
परमाणु के मौलिक कण के नाम (i) इलेक्ट्रॉन, (ii) प्रोटॉन, (iii) न्यूट्रॉन।

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान एवं आवेश (Mass and charge of Electron):
द्रव्यमान (Mass) : एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 × 10-28 ग्राम (लगभग) 9.1 × 10-31 kg होता है। एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (Mass) एक हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग \(\frac{1}{1838}\) होता है।

आवेश (Charge) : प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर 1.602 × 10-19 कूलम्ब ऋण आवेश रहता है। सबसे हल्का और सबसे कम आवेग वाला कण इलेक्ट्रॉन ही है। अत: इलेक्ट्रॉन के ॠण आवेश को ही विद्युत आवेश की न्यूनतम इकाई मानी गयी है।
अत: इलेक्ट्रॉन एक ऐसा कण है, जिसका द्रव्यमान लगभग शून्य होता है तथा जिस पर इकाई ऋण-आवेश (Negative charge) रहता है।
प्रोटॉन का द्रव्यमान एवं आवेश (Mass and charge of Proton) : किसी एक प्रोटॉन का द्रव्यमान (Mass of Proton) हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है। यह मान 1.00753 amu = 1.6726 × 10-24 ग्राम = 1.6726 × 1-27 किलोग्राम होता है।

प्रोटॉन का आवेश : प्रोटॉन एक धन-आवेशयुक्त कण है। इसका आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर, किन्तु विपरीत आवेश वाला होता है.। इसके आवेश का परिमाण 1.602 × 10-19 कूलॉम होता है। इस इकाई को इकाई धन आवेश (Unit positive charge) कहते हैं।

न्यूट्रॉन का द्रव्यमान एवं आवेश (Mass and charge of Neutron)
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान : न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है। न्यूट्रॉन का द्रंव्यमान = 1.008 amu = 1.67493 × 10-24 ग्राम या 1.67493 × 1-27 किलोग्राम होता है।

प्रश्न 23.
चार्ट बनाकर इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन की प्रकृति, स्थिति, मात्रा, आवेश की मात्रा, त्रिज्या का विवरण दें।
उत्तर :
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प्रश्न 24.
निम्न का परिचय देते हुए उनका उपयोग लिखें – (a) क्लोरोफार्म (b) एसीटोन (c) मिथाइल अल्कोहल।
उत्तर :
(a) क्लोरोफार्म : इसका दूसरा नाम ट्राई क्लोरो मिथेन है। इसका सूत्र CHCl3 है। यह जल से भारी है तथा जल में नहीं घुलते हैं।
उपयोग : (i) यह कार्बनिक घोल में घुलनशील है। (ii) इसका उपयोग शल्य चिकित्सा में रोगी को बेहोश करने में किया जाता है।
(b) एसीटोन : इसका दूसरा नाम डाई मिथाइल किटोन है तथा इसकां सूत्र CH3 COCH3 है। यह एक रंगहीन द्रव है। उपयोग : (i) इसका उपयोग क्लोरोफार्म के उत्यादन में होता है। (ii) रेजिन, प्लास्टिक, एसीटिलिन इसमें घुल जाते हैं।
(c) मिथाइल अल्कोहल : इसका दूसरा नाम मेथेनाल है तथा इसका सूत्र CH3 OH है। यह एक रंगहीन द्रव है।
उपयोग : (i) इसका उपयोग वार्निश तथा पालिश में घोलक के रूप में प्रयोग किया जाता है। (ii) इसका उपयोग मोटरगाड़ी के ईंधन के रूप में होता है।

प्रश्न 25.
जल की स्थायी अशुद्धि दूर करने की एक विधि का सचित्र वर्णन करें। सान्द्र व तनु अम्ल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
जल की स्थायी कठोरता को lon-exchange resins process का प्रयोग किया जाता है। रेजिन दो प्रकार के होते हैं।
(i) धनायन विनिमय रोजिन में अघुलनशील अम्लीय कार्बनिक रेजिन का दाना तथा -SO3 H या – COOH का बहुलक अणु होता है।
(ii) ॠणायन विनिमय रेजिन में Amines से प्राप्त क्षारीय वर्ग का कार्बनिक बहुलक अणु होता-है।

जल को सबसे पहले Cation Exchanger रेजिन से भरे स्तम्भ में प्रवाहित करके कठोर जल में उपस्थित Ca+, Na+, Mg+आदि धनायनों का रेजिन के H+में विनिमय हो जाता है।
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धनायन विनिमय रेजिन में से प्रवाहित करने के बाद जल को ऋणायन विनिमय रेजिन से भरे स्तम्भ से प्रवाहित करने पर जल उपस्थित \(\mathrm{Cl}^{-1}, \mathrm{SO}_4^{-2}, \mathrm{NO}_3^{-1}\) ॠण्यायनों का रेजिन के OHआयनों से विनिमय हो जाता है।

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H+, OHद्वारा उदासीन कर देता है तथा H2 O बनाते हैं।
H+ + OH + = H2 O

इस विधि द्वारा आसुत जल या मृदुजल प्राप्त होता है जो प्रयोगशाला में व्यवहार किया जाता है। प्रथम टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सान्द्र HCl से अभिक्रिया कराते हैं।

(RCOO) 2 Ca + 2 HCl → CaCl2 + 2 RCOOH

इसी प्रकार दूसरे टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सोडियम हाइड्राक्साइड से अभिक्रिया कराते हैं।

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सान्द्र अम्ल : जिस अम्ल में सतृप्त करने योग्य जंल मौजूद रहता है उस अम्ल को सान्द्र अम्ल कहते हैं।
तनु अम्ल : जिस अम्ल में संतृप्त करने योग्य जल की मात्रा से अधिक जल मौजूद रहता है उसे तनु अम्ल कहते हैं। सान्द्र अम्ल तनु अम्ल से ज्यादा सक्रिय होता है।

प्रश्न 26.
निम्न में इलेक्ट्रॉन, प्रोट्रॉन व न्यूटॉन की संख्या ज्ञात करें :
\({ }_{11} \mathrm{Na}^{+}, 19^{\mathrm{K}^{+}}, 20^{\mathrm{Ca}^{++}}, 12^{\mathrm{Mg}^{+}}\)
उत्तर :
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प्रश्न 27.
रदरफोर्ड का α-कण के प्रयोग को लिखो।
उत्तर :
रदरफोर्ड का α-कण का प्रयोग (Rutherford’s alpha Particle experiment) :
प्रयोग : रदरफोर्ड ने सन् 1911 ई० में एक वायु शुन्य नली में सोने की पतली पत्तर (लगभग 0.0004 ~mm} मोटाई वाले) पर α किरणों का आघात करने पर α किरणों के गमन पथ का सूक्ष्म निरीक्षण करने पर पाया कि :

  • α-कणों का अधिकांश सूक्ष्म धनावेशित भाग बिना विक्षेपित हुए सोने की पत्तर का भेद कर सरल रेखीय पथ से बाहर निकल जाता है।
  • कुछ α-कण 90° या उससे अधिक कोण में विक्षेपित होते हैं।
  • बहुत कम संख्या में (लगभग 20,000 में से एक कण) α-कण जिस पथ से आते हैं, उसी पथ पर 180° पर मुड़ जाते हैं।

निष्कर्ष : (i) परमाणु के अन्दर अधिकांश भाग खाली (Empty) होता है।
क्योंकि सोने की पत्तर परमाणुओं का बना होता है। यदि परमाणु के अन्दर खाली स्थान नहीं होते तो α-कण परमाणुओं से टकराकर अपने मूल पथ से विचलित हो जाते। लेकिन ऐसा न होकर अधिकांश α-कण बिना विचलित हुए पत्तर को पार करके सीधा निकल जाते हैं। अत: परमाणुओं के अन्दर अधिकांश खाली स्थान होता है।

(ii) कुछ ही धनावेशित α-कण विक्षेपित होते हैं।
क्योंकि यह विक्षेपण अवश्य ही अत्यधिक प्रतिकर्षण बल (Repulsive force) के कारण होगा। परमाणु के अन्दर धनावेश समान रूप से बँटा हुआ नहीं है। धनावेश बहुत कम आयतन के अन्दर संकेन्द्रित होगा, जिससे धनावेशित अल्फा कणों का प्रतिकर्षण और विक्षेपण हुआ है।
ऊंपर दिये गये परिणामों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का केन्द्रक (Nucleus) मॉडल प्रस्तुत किया जो निम्न है :

(i) परमाणु का धनावेश तथा अधिकांश मात्रा एक अति अल्प क्षेत्र में केन्द्रित होती है। इस क्षेत्र को परमाणु का रदरफोर्ड ने केन्द्रक (Nucleus) कहा 1

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(ii) परमाणु की सम्मूर्ण मात्रा तथा सम्पूर्ण धन आवेश केन्द्रक में केन्द्रित होता है इसलिए केन्द्रक पर धन आवेश पाया जाता है।
(iii) परमाणु ठोस नहीं होते हैं क्योंकि परमाणु के भीतर अधिकांश भाग रिक्त होता है। क्योंकि केन्द्रक का अर्द्धव्यास 10-13 से॰मी॰ तथा सम्पूर्ण परमाणु के अर्द्धव्यास 10-8 से॰मी॰ होता है। अर्थात् केन्द्रक का अर्द्धव्यास, परमाणु के अर्द्धव्यास का \(\frac{1}{100000}\) भोग होता है। यदि केन्द्रक को क्रिकेट की गेंद जितना माना जाए तो परमाणु का अर्द्धव्यास लगभग 5 किलोमीटर होगी।
(iv) इन्हीं कारणों से केन्द्रक का आयतन परमाणु के कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है।
(v) परमाणु उदासीन होता है। इसका कारण यह है कि केन्द्रक के धन आवेश को संतुलित करने के लिए इसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार पथ में अनवरत परिक्रमा करते रहते हैं।
(vi) केन्द्रक तथा इलेक्ट्रॉन के बीच अपकेन्द्र बल (Centrifugal force) उत्पन्न होता है, वह इलेक्ट्रॉन को बाहर की ओर खींचकर केन्द्रक से दूर रखने का चेष्टा करता है, किन्तु धन आवेश युक्त केन्द्रक स्थिर-विद्युत बल के द्वारा विपरीत आवेश (ऋण आवेश) वाले इलेक्ट्रॉन को अपनी ओर आकृष्ट करता है जिसे अभिकेन्द्र बल (Centripetal force) कहते हैं।
इन्हीं दोनों विपरीतमुखी बल के कारण इलेक्ट्रॉन केन्द्रक के चारों तरफ एक निश्धित कक्ष (orbit) में परिभ्रमण करते रहते हैं।

प्रश्न 28.
कोई घोल संतृप्त है, असंतृप्त या अति संतृप्त है, इसकी पहचान कैसे करेंगे ?
उत्तर :
किसी निध्वित तापक्रम पर जब किसी घोलक में घुलित की अधिकतम मात्रा घुली हो और उस घोलक में और अधिक घुलित घुलने की क्षमता न हो तो उस विशेष तापक्रम पर उस घोल को संतृप्त घोल (Saturated solution) कहा जाता है।
साधारण तापक्रम पर एक बीकर में कुछ जल लेकर थोड़ा-थोड़ा साधारण नमक मिलाते हैं तथा काँच की छड़ से मिश्रण को हिलाते रहते हैं। साधारण नमक मिलाने की क्रिया तब तक करते हैं जब तक साधारण नमक जल में घुलता रहे। कुछ समय के पश्वात् हम देखते हैं कि साधारण नमक बीकर की पेंदी में अघुलित के रूप में बैठ जाता है अर्थात् उस जल में और अधिक साधारण नमक घोलने की क्षमता नहीं है। अब इस घोल को फिल्टर पेपर से छान लेते हैं। छानने के पश्वात् जो घोल प्राप्त होता है उस तापक्रम पर साधारण नमक के संतृप्त घोल होता है।
इस संतृप्त घोल का तापक्रम बढ़ाने से तथा घोलक के परिमाण को बढ़ाने से घोल को असंतृप्त घोल में बदला जा सकता है। किसी निथित तापक्रम पर वह घोल जिसमें घुलित की मात्रा संतुप्त करने वाली मात्रा से अधिक घुली हो तो वह घोल अतिसंतृप्त घोल कहलाता है।

प्रश्न 29.
बोर परमाणु संरचना क्या है ?
उत्तर :
बोर मॉडल के अनुसार (According to Bohr’s model) :
इलेक्ट्रॉन जिस किसी अर्द्धव्यास वाले वृत्ताकार कक्ष में परिभमण नहीं करता है। इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित अर्द्धव्यास वाले वृत्ताकार कक्षों में ही परिभ्रमण कर सकते हैं। यह कक्ष स्थायी होते हैं।
प्रत्येक कक्ष की ऊर्ज़ा निर्दिष्ट होती है। जिसे कक्ष का ऊर्जा स्तर (Energy level) कहते हैं। इसलिए परिभ्रमण के समय इलेक्ट्रॉन में से ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है। जिसके कारण इलेक्ट्रॉन को केन्द्रक में गिररे की सम्भावना नहीं रहती है।
जब कोई इलेक्ट्रॉन बाहर कक्ष से अन्दर के कक्ष में जाता है तब इस इलेक्ट्रॉन से तरंग के रूप में एक निश्चित परिमाण की ऊर्जा बाहर निकलती है और अन्दर वाले कक्ष से कोई इलेक्ट्रॉन बाहर वाले कक्ष में जाता है तो वहाँ ऊर्जा का शोषण होता है। यहाँ ऊर्जा का निकलना तथा ऊर्जा का शोषण होना बराबर होता है। अत: केन्द्रक के निकट कक्ष की ऊर्जा कम होती है तथा दूर स्थित कक्ष की ऊर्जा का स्तर अधिक होता है।
इसमें कक्षों की संख्या सात होती है, जो क्रमश: K, L, M,N …. आदि अक्षरों द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न 30.
घुलनशीलता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
घुलनशीलता या विलेयता (Solubility) : किसी निध्वित तापक्रम और दाब पर 100 ग्राम घोलक में घुलने वाली घुलित की अधिकतम मात्रा को उस घुलित पदार्थ की उस घोलक में घुलनशीलता (Solubility) कहलाता है।
माना कि t° C तापक्रम पर W ग्राम जल में किसी घुलित पदार्थ के अधिक से अधिक w ग्राम घुले हुए हैं तो उस तापक्रम पर उस घुलित की जल में घुलनशीलता होगी।
घुलनशीलता = \(\frac{w \times 100}{w}\) होगी।

प्रश्न 31.
सोल तथा जेल कोलायडल क्या हैं ? उदाहरण सहित बतायें।
उत्तर :
सोल (Sols) : वे कोलाइडल जिसमें ठोस कण द्रव में परिक्षेपित (Dispersed) होते हैं। उसे सोल (sols) कहते हैं। जैसे – कोशिका का तरल, पेन्ट इत्यादि।
जेल (Gels) : वे कोलाइडल जिसमें ठोस कण द्रव में परिक्षेपित (Dispersed) होते हैं लेकिन उसमें प्रवाह (Flow) नहीं होता है, इसलिए कि वे जम जाते हैं। जैसे – जेली तथा जिलेटिन।

प्रश्न 32.
मोलरता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
1 लीटर घोलक में घुले हुए घुलित के मोलों की संख्या को उस घोल की मोलरता (Molarity) (M) कहते हैं।

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प्रश्न 33.
अजलीय घोलक किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अजलीय घोलक (Non-aqueous solvent) : जल के अतिरिक्त अन्य घोलक जो कुछ्छ पदार्थों को ही घोल पाता है उसे अजलीय घोलक (Non-aqueous solvent) कहलाता है। जैसे – इथाइल अल्कोहल, मिथाइल अल्कोहल, एसीटोन, क्लोरोफार्म तथा केरोसिन इत्यादि।

प्रश्न 34.
आरहेनियस के अनुसार अम्ल की परिभाषा दें।
उत्तर :
आरहेनियस के अनुसार अम्ल की परिभाषा : वे हाइड्रोजन युक्त यौगिक जिनका जलीय घोल का विद्युत विच्छेदन करने पर धनायन (cation) के रूप में केवल H+ आयन प्राप्त होता है, उन्हें अम्ल (acid) कहते हैं। जैसे –

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प्रश्न 35.
आरहेनियस के अनुसार भस्म की परिभाषा उदाहरण सहित दें।
उत्तर :
आरहेनियस के अनुसार भस्म की परिभाषा : जिन योगिकों के जलीय घोल आयनित (lonised) होकर हाइड्राक्साइड (OH) आयन उत्पन्न करते हैं और OHके अलावा अन्य कोई ॠणायन (anion) उत्पत्र नहीं करते हैं उन्हें भस्म (Base) कहते हैं। जैसे –

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प्रश्न 36.
सोडियम हाइड्राक्साइड का औद्योगिक क्षेत्र में क्या उपयोग है ?
उत्तर :
सोडियम हाइड्राक्साइड (NaOH) : सोडियम हाइड्राक्साइड का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में निम्न हैं –

  1. साबुन तथा डिटर्जेण्ट बनाने में।
  2. कृत्रिम रेयॉन का सूता बनाने में।
  3. अखबार और पेपर उद्योग में।
  4. बाक्साइड अयस्क का शुद्धीकरण करके अल्यूमिनियम धातु निकालने में।
  5. तेलशोधन में, रंग तथा ब्लीचिंग करने में।

प्रश्न 37.
सल्फ्यूरिक अम्ल की पहचान की रासायनिक प्रतिक्रिया क्या है ?
उत्तर :
सल्फ्यूरिक अम्ल की पहचान (Identification of H2 SO4) : एक परखनली में स्वच्छ बेरियम क्लोराइड (BaCl2) का स्वच्छ घोल बनाकर उसमें कुछ बूँद सान्द्र या तनु सल्फ्यूरिक अम्ल को डालते हैं तो इस परख नली में सफेद अपक्षय प्राप्त होता है। जो सान्द्र HCl या HNO3 में अघुलनशील होता है। लेकिन BaCl2 का HCl या HNO3 के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है। अत: यह अम्ल H2 SO4 है।

BaCl2 + H2 SO4 = BaSO4 ↓ + 2 HCl

प्रश्न 38.
मत्स्य पालन पर अम्ल वर्षा का प्रभाव क्या पड़ता है ?
उत्तर :
मत्स्य पालन में (Pisciculture) : जिस तरह मनुष्य के शरीर का pH 7 से 7.8 के बीच रहने पर वह सही ढंग से कार्य करता है उसी प्रकार जलीय प्राणी (मछली) के लिए भी झील तथा नदियों का pH इसी श्रेणी में रहना चाहिए। लेकिन अम्ल वर्षा (Acid rain) के कारण झील तथा तालाबों का जल का pH 5.6 हो जाता है जिससे जलीय प्राणी का बचना कठिन हो जाता है और यह अम्लीय जल जलीय प्राणी (मछली) को मार देता है। अत: अम्लीय जल को उदासीन करने के लिए जल में बीच-बीच में कैल्सियम कार्बेनेट का छिड़काव करते रहना चाहिए जो मछली को मरने से बचाता है।

मछली पालन में भी उस तालाब में बीच-बीच में कैल्सियम आक्साइड (Calcium oxide) का छिड़काव किया जाता है जिससे छोटी-छोटी मछलियों को कोई रोग न हो जाय।

प्रश्न 39.
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या है तथा इस मॉडल की त्रुटियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford’s model of an atom) : रदरफोर्ड ने अपने प्रयोगों के आधार पर जो निष्कर्ष निकाला उसके अनुसार, परमाणु का केन्द्र धनावेशित होता है जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है। अपने निष्कर्षो के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया। इसके अनुसार,

  1. परमाणु का संपूर्ण द्रव्यान उसके नाभिक में स्थित होता है।
  2. परमाणु के अन्दर अधिकांश स्थान रिक्त (empty) होता है।
  3. परमाणु में ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉनों और धन आवोशित प्रोटॉनों की संख्याएँ समान होने के कारण परमाणु विद्युत: उदासीन (electrically neutral) होता है।
  4. नाभिक का आयतन परमाणु के आयतन की तुलना में काफी कम (नगण्य) होता है।
  5. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्तीय पथों पर चक्कर लगाते हैं। इन वृत्तीय पथों को कक्षाएँ (Orbit) कहते हैं। इलेक्ट्रॉन के वेग से उत्पन्न अपकेन्द्री बल (centrifugal force) नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच लगे आकर्षण बल (centripetal force) को संतुलित करता है।

रदरफोर्ड परमाणु मॉडल के दोष (Limitations of Rutherford’s model of an atom) : रदरफोर्ड परमाणु मॉडल के निम्नलिखित दोष हैं –
रदरफोर्ड के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाया करते हैं, युक्तिसंगत नहीं लगता, व्योंकि इस प्रकार का परमाणु कभी स्थायी नहीं हो सकता। विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार चक्कर लगाने वाले ऋण-आवेशित इलेक्ट्रॉन से लगातार ऊर्जा का हास होता रहेगा और नाभिक के आकर्षण बल के कारण यह नाभिक मे गिर जाएगा और परमाणु का विनाश हो जाएगा। लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता है, क्योंकि परमाणु स्थायी है।
रदरफोर्ड मॉडल की कक्षाओं में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या निश्चित नहीं की गई थी।

प्रश्न 40.
नगरों में वितरित होनेवाले पेय जल के शुद्धीकरण की विधियों का वर्णन करो।
उत्तर :
नदियों, कुओं तथा नलकूपों से प्राप्त जल को उबाल कर शुद्ध करके नगरों में पेयजल का वितरण करना सम्भव नहीं है। उसे निम्नलिखित जलशोधन प्रक्रिया द्वारा शुद्ध करके नगरों में वितरण किया जाता है।
जो निम्नलिखित है :
(a) एकत्रीकरण : नगर को पेय जल उपलब्ध कराने होते जल का शोधन करने के लिए सर्वप्रथम नदी में से पम्प द्वारा जल खींचकर टैंकों में एकत्रित किया जाता है जिसे निलम्बित (suspension) अशुद्धिया टैंकों के पेंदे में बैठ जाती हैं। इस टैंक को अवसादन टैंक कहते हैं। कोलायड (Colloid) अशुद्धियों का अवक्षेपण करने के लिए जल में थोड़ी फिटकरी भी डाली जाती है जिससे अशुद्धियाँ जमा हो जाती हैं।
(b) छानना : अवसादन टैंकों से अशुद्ध जल फिल्टर टैंकों में डाला जाता है। फिल्टर में नीचे से ऊपर की ओर क्रमश: ककड़, ईंट, रेत तथा लकड़ी के कोयले की मोटी परत बिछि होती है। अशुद्धियों के सूक्ष्म कण इन परतों में रह जाते है तथा शुद्ध जल छनकर नीचे निकल जाता है।
(c) जल का जीवाणुनाशक (Sterilization) : अब जल में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करना भी आवश्यक होता है। इसके लिए निम्न विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं।

क्लोरोनीकरण : क्लोरीन जीवाणुनाशक पदार्थ है। जल में जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए द्रव क्लोरीन या विरंजक चूर्ण (CaOCl2) की उचित मात्रा प्रयोग में लायी जाती है।
ओजोनीकरण : ओजोन (O3) भी जीवाणुनाशक है । जल में ओजोन गैस प्रवाहित की जाती है जिससे जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। जल को एक स्तम्भ में ऊपर से डाला जाता है, स्तम्भ में कोक के टुकड़े भरे होते हैं। नीचे से ओजोन गैस प्रवाहित की जाती है। जल की धारा ओजोन से मिलती है जिसमें जल के जीवाणु नष्ट हो जाते है।
पराबैंगनी किरणों से (U.V. Method) : पराबैंगनी किरणें भी जीवाणु नष्ट करने का उपयुक्त साधन हैं। इन किरणों को मरकरी लैम्प से प्राप्त करके जल की धारा पर प्रवाहित किया जाता है। इससे बहुत ही कम समय में जीवाणुओं का नाश हो जाता है तथा जल में कोई अन्य गन्थ या स्वाद भी नहीं उत्पत्र होता है।
वायु प्रवाह द्वारा : जल को वायु में फव्वारों के रूप में उछाला जाता हैं जिसमें सूर्य की पैराबैंगनी किरणें प्रभावित होती हैं तथा जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

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प्रश्न 41.
समांग एवं विषमांग मिश्रण की परिभाषा देते हुए दोनों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
समांग पदार्थ : यह दो या दो से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण है। इसके कणों का आकार 10-8 ~cm} होता है जो परिक्षेपण माध्यम में इस प्रकार घुल जाता है कि उनका विभेद करना कठिन हो जाता है। यह छन्न पत्र से पार हो जाते हैं। यह स्थायी तथा पारदर्शक होते हैं। जैसे नमक पानी का घोल, चीनी पानी का घोल।
विषमांग पदार्थ : यह दो या से अधिक पदार्थों का विषमांग मिश्रण है। इसका आकार Colliode से बड़ा 10-5 cm इससे अधिक होता है। यह छन्ना पत्र के आर-पार नहीं जा सकता है। इसे खुली आँखों से देख सकते हैं। यह अस्थायो होता है। इसे परिक्षेपण माध्यम से अलग किया जा सकता है। जैसे – नदी का गंदा जल, वायु में धुआँ आदि।.

प्रश्न 42.
आयन विनिमय रेजिन विधि द्वारा जल की कठोरता को कैसे दूर किया जा सकता है ?
उत्तर :
lon Exchange resins process : आजकल प्रयोगशालाओं तथा उद्योगों में, अस्थाई तथा स्थायी भारीपन दोनों तरह के भारी जल को lon Exchange resins द्वारा मुदु जल बनाया जाता है। जल में उपस्थित ion या Mineral को बहुत उच्च अणुभार, जल में अघुलनशील तथा कार्बनिक बहुलक (Polymer) पदार्थ आयन विनिमय रेजिन हटा दिया जाता है। रेजिन दो प्रकार का होता है।
(i) धनायन विनिमय रेजिन में अघुलनशील अम्लीय कार्बनिक रेजिन का दाना तथा -SO3 H या – COOH का बहुलक अणु होता है।
(ii) ऋणायन विनिमय रेजिन में Amines से प्राप्त क्षारीय वर्ग का कार्बनिक बहुलक अणु होता है।

जल को सबसे पहले Cation Exchanger रेजिन से भरे स्तम्भ में प्रवाहित करके कठोर जल में उपस्थित Ca+, Na+, Mg}+आदि धनायनों का रेजिन के H+में विनिमय हो जाता है।

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धनायन विनिमय रेजिन में से प्रवाहित करने के बाद जल को ऋणायन विनिमय रेजिन से भरे स्तम्भ से प्रवाहित करने पर जल उपस्थित Cl-1, \(\mathrm{NO}_3\), \(\mathrm{NO}_3^{-1}\) ॠणायनों का रेजिन के OH आयनों से विनिमय हो जाता है।

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H+, OH द्वारा उदासीन कर देता हैं तथा H2 O बनाते हैं।
H+ + OH = H2 O

इस विधि द्वारा आसुत जल या मृदुजल प्राप्त होता है जो प्रयोगशाला में व्यवहार किया जाता है।-
प्रथम टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सान्द्र HCl से अभिक्रिया कराते हैं।

(RCOO)2 Ca + 2 HCl → CaCl2 + 2 RCOOH

इसी प्रकार दूसरे टैंक की रेजिन को पुन: काम में लाने के लिए सोडियम हाइड्राक्साइड से अभिक्रिया कराते हैं।

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प्रश्न 43.
बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य तथ्य लिखो।
उत्तर :
बोर परमाणु मॉडल (Bohr’s atomic model) : रदरफोर्ड मॉडल के दोषों को दूर करने के लिए नील बोर ने सन् 1913 में परमाणु की संरचना के संबंध में संशोधित सिद्धांत प्रस्तुत किया जिसे बोर का परमाणु मॉडल कहा जाता है। इसके अनुसार –
(i) परमाणु में इलेक्ट्रान केवल निश्चित अर्द्धव्यास वाले वृत्ताकार कक्षों में ही परिभ्रमण कर सकते हैं। ये कक्ष स्थायी होते हैं।
(ii) प्रत्येक कक्ष की ऊर्जा निर्दिष्ट होती है, जिसे कक्ष का ऊर्जा स्तर (Energy level) कहते हैं। इसलिए परिभ्रमण के समय इलेक्ट्रान से ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है जिसके कारण इलेक्ट्रान को केंद्रक में गिरने की संभावना नहीं रहती है।
(iii) इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर (Energy level) या ऊर्जा शेल (Energy shell) कहते हैं। इनमें कक्षों की संख्या सात होती है जो क्रमशः अंदर से बाहर की ओर K, L, M, N, ….. या 1, 2, 3, 4, ….. द्वारा प्रदर्शित की जाती हैं।
(iv) जब कोई इलेक्ट्रान बाहरी कक्ष से अंदर के कक्ष में जाता है, तब इस इलेक्ट्रान से तरंग के रूप में एक निश्चित परिमाण की ऊर्जा बाहर निकलती है और अंदर वाले कक्ष से कोई इलेक्ट्रान बाहरी कक्ष में जाता है तो वहाँ ऊर्जा का शोषण होता है। यहाँ ऊर्जा का उत्सर्जन तथा ऊर्जा का शोषण दोनों समान होता है। अतः केंद्रक के निकटवर्ती कक्ष की ऊर्जा कम होती है तथा दूरवर्ती कक्ष की ऊर्जा का स्तर अधिक होता है।

प्रश्न 44.
जे०जे० थामसन परमाणु मॉडल का वर्णन करो।
उत्तर :
तत्वों के परमाणु में तीन प्रकार के मौलिक कण इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन उपस्थित रहते हैं। केवल साधारण हाइड्रोजन के परमाणु में न्यूट्रॉन नहीं पाया जाता है। परमाणु पर कोई आवेश नहीं होता है। अत: इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की संख्या परस्पर समान होती है। परमाणु में ये तीन कण किस रूप में उपस्थित है, इसके विषय में विभिन्र वैज्ञानिकों ने समयसमय पर विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किये।
इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के आविष्कार के बाद 1901 ई० में जोसेफ जॉन थॉमसन (J.J. Thomson) ने परमाणु के स्वरूप के सम्बन्ध में अपनी अवधारणा को प्रस्तुत किया। इनके अनुसार, (i) परमाणु एक भारी धनाविष्ट गोला है, जिसमें धनाविष्ट कण प्रोटॉन समान रूप में वितरित रहते हैं। (ii) गोले के अन्दर इलेक्ट्रॉन इस प्रकार से समाए (Embeded) रहते हैं कि परमाणु विद्युतः उदासीन बन जाता है।

प्रश्न 45.
pH स्केल का सिद्धान्त बताइये।
उत्तर :
सन् 1909 ई० में Sorenson ने अम्ल तथा क्षार के घोल की अम्लीयता तथा क्षारीयता का ताकत (Strength) ज्ञात करने के लिए एक स्केल का निर्माण किया जिसे pH स्केल (pH Scale) कहते हैं।
pH की कोई इकाई नहीं होती है, यह एक शुद्ध संख्या है। इस स्केल में स्केल का मान 0 से 14 है।
pH, हाइड्रोजन आयन H+ की सान्द्रता का अर्थ अधिक pH से होता है।
अत: किसी घोल में हाइड्रोजन आयनों के सान्द्रता के व्युत्क्रम Logaithm को उस घर का pH कहते हैं।
pH = log \(\frac{1}{\left[\mathrm{H}^{+}\right]}\)
या pH = -log10[H+]

चूँकि उदासीन जल में हाइड्रोजन आयनों की सान्द्रता 10-7 M होती अत: [H+] = 10-7 M.

∴ pH = -log [H+]
= -log 10-7
= -(-7) log 10
= 7.

प्रश्न 46.
H2SO4 HCl का रासायनिक गुण लिखो।
उत्तर :
सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) का रासायनिक गुण : H2SO4 के रासायनिक गुण निम्न हैं :
क्षार के साथ H2SO4 की प्रतिक्रिया : H2 SO4 तीव अम्ल तथा द्विभास्मिक अम्ल है। इसलिए H2SO4 क्षार के साथ प्रतिक्रिया करके प्रथम अम्लीय लवण तथा बाद में भार की अधिकता में सामान्य लवण उत्पन्नकरता है।

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A कार्बोनेट से प्रतिक्रिया : H2SO4 कार्बोनेट लवणों के साथ क्रिया करके सल्फेट लवण, CO2 तथा जल उत्पत्न करता है।

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B बाई कार्बोनेट से प्रतिक्रिया : यह बाई कार्बोनेट लवणों के साथ प्रतिक्रिया करके बाइसल्फेट लवण, CO2 तथा जल उत्पन्न करता है।

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धातुओं से प्रतिक्रिया : विद्युत रासायनिक श्रेणी में रखी गयी धातुओं में हाइड्रोजन के ऊपर के सभी धातु में ठण्डे तथा तनु H2 SO4 से प्रतिक्रिया करके हाइड्रोजन उत्पत्न करता है।

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लेकिन विद्युत रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन के नीचे के धातु ठण्डा तथा तनु H2SO4 से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है। यह धातु सान्द्र तथा गर्म H2SO4 से Zn Al, Sn, Fe तथा Cu आदि धातुओं को उसके सल्फाइड लवण में ऑक्सीकृत करता है तथा स्वयं अवकृत होकर SO2 गैस उत्पत्र करता है।

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सान्द्र तथा ठण्डे H2 SO4 के साथ हाइड्रोजन के नीचे वाली धातुओं में जैसे Pb, Ag, Cu, Au से प्रतिक्रिया नही करता है। HCl अम्ल का रासायनिक गुण : सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के घोल में HCl.अम्ल मिलाने पर सफेद अवक्षेप सिल्वर क्लोराइड प्राप्त होता है। यह अवक्षेप नाइट्रिक अम्ल (HNO3) अघुलनशील होता है, लेकिन अतिरिक्त NH4 OH में घुलनशील होता है।

प्रश्न 47.
अम्ल और क्षार का उपयोग करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए ?
उत्तर :
अम्ल तथा भस्म (कार) से सावधानियाँ : सान्द्र अम्ल तथा सान्द्र क्षार का प्रयोग करते हुए बहुत ही सावधानियाँ रखनी पड़ती हैं।
खनिज से प्राप्त अम्ल जैसे HCl, H2SO4 तथा HNO3 से अधिक सावधान रहना चाहिए क्योंकि यदि किसी असावधानी से हमारे शरीर पर गिर जाये तो यह त्वचा को जला देता है तथा लकड़ी पर गिर जाये तो उस पर काला धब्बा उत्पन्न कर देता है। यह तीनों अम्ल सान्द्र रूप में बहुत ही क्षयकारी होते हैं। इसका प्रभाव धातु के वस्तु तथा संगमरमर पर भी पड़ता है तथा उसे भी क्षय कर देता है। इसलिए प्रयोगशाला में अम्ल को धातु के बर्तन में न रख कर कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में रखते हैं।

उसी प्रकार प्रबल क्षार (भस्म) (Strong bases) भी हमारी त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं जैसे सोडियम हाइड्राक्साइड। इसकी भी सान्द्र प्रकृति (गुण) क्षयकारी होती है। इसलिए खनिज अम्ल तथा सान्द्र सोडियम हाइडाक्साइड रखे बर्तन पर आकास्मिक दुर्घटना का चि्न बना होता है। सान्द्र अम्ल में जल मिलाने पर तन् अम्ल प्राप्त होता है लेकिन यह एक उष्मादायक विधि है इसलिए यहाँ भी सावधानी रखनी पड़ती है कि जल में सान्द्र अम्ल धीरे-धीरे मिलना चाहिए कभी भी सान्द्र अम्ल में जल नहीं डालना चाहिए अन्यथा दुर्घटना घट सकती है।

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प्रश्न 48.
कृषि और मछली पालन में pH मान का क्या महत्व है ?
उत्तर :
कृषि क्षेत्र (Agriculture) : कृषि भूमि का pH 7 के लगभग रहने पर पैदावार अच्छी होती है। लेकिन मिट्टी यदि अधिक अम्लीय तथा अधिक क्षारीय हो जाने दोनों ही कारण से पैदावार में कमी आ जाती है।
यदि मिट्टी अम्लीय हो जानें पर उसे उदासीन करने के लिए क्षार, जैसे चूना (Calcium oxide), बुझा चूना (Calcium Hydroxide) या चाक (Calcium Carbonate) का छिड़काव किया जाता है। यदि मिट्टी क्षारीय हो जाने पर उसे उदासीन करने के लिए अम्ल जैसे कार्बनिक खाद का प्रयोग किया जाता है जो मिट्टी की क्षारीयता को कम कर देता है। मछली पालन में (Pisciculture): जिस तरह मनुष्य के शरीर का pH 7 से 7.8 के बीच रहने पर वह सही ढंग से कार्य करता है उसी प्रकार जलीय प्राणी (मछली) के लिए भी झील तथा नदियों का pH इसी श्रेणी में रहना चाहिए। लेकिन अम्ल वर्षा (Acid rain) के कारण झील तथा तालाबों का जल का pH 5.6 हो जाता है जिससे जलीय प्राणी का बचना कठिन हो जाता है और यह अम्लीय जल जलीय प्राणी (मछली) को मार देता है। अतः अम्लीय जल को उदासीन करने के लिए जल में बीच-बीच में केल्सियम कार्बेनिट का छिड़काव करते रहना चाहिए जो मछली को मरने से बचाता है।
मछली पालन में भी उस तालाब में बीच-बीच में कैल्सियम आक्साइड (Calcium oxide) का छिड़काव किया जाता है जिससे छोटी-छोटी मछलियों को कोई रोग न हो जाय।

प्रश्न 49.
20° C पर लेड नाइट्रेट की घुलनशीलता 54.4 है। इस कथन का अर्थ क्या है ?
उत्तर :
20° C पर लेड नाइट्रेट की घुलनशीलता 54.4 है इस कथन का अर्थ है कि 20° C पर 100 gm जल में 54.4 gm लेड नाइट्रेट घुलकर संतृप्त घोल बनता है।

प्रश्न 50.
सोडियम क्लोराइड के भारानुसार 10 प्रतिशत (w/w) जलीय घोल का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :
100 m / घोलक (जल) में घुल घुलित (सोडियम क्लोराइड) के द्रव्यमान को द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत कहते हैं। यह इकाई औषधियों तथा फार्मेसी में उपयोग होता है। इसका इकाई % \(\frac{W}{V}\) होता है।

प्रश्न 51.
जल के भौतिक गुणों को लिखो।
उत्तर :
जल का भौतिक गुण (Physical Properties of water) :

  1. द्ध जल एक रंगहीन, स्वादहीन तथा गंधहीन द्रव है।
  2. जल 0° C पर जम जाता है तथा 100° C पर क्वथन होता है।
  3. जल का घनत्व 4° C पर 1 gm cm3 होता है।
  4. यह विद्युत का कुचालक है।
  5. जल की विशिष्ट उष्मा सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 52.
कैथोड किरणों के गुण लिखो।
उत्तर :
कैथोड किरणों के गुण निम्नलिखित हैं –

  1. ये सरल रेखा में गमन करती हैं।
  2. इनमें गतिज ऊर्जा होती है।
  3. इनमें ऋण आवेश होता है।
  4. ये विद्युतीय तथा चुम्बकीय क्षेत्र में विक्षेपित होती हैं।
  5. ये प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती हैं।

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प्रश्न 53.
प्रोटॉन का आविष्कार कैसे हुआ ?
उत्तर :
चूँकि परमाणु विद्युतीय रूप से उदासीन होता है एवं इलेक्ट्रान परमाणु का एक मौलिक कण है जो ऋणावेशित होता है। अतः परमाणु में कोई धनावेशित कण अवश्य होना चाहिए। इस धनआवेश युक्त कणों के अस्तित्व का प्रमाण गोल्डस्टीन (Goldstein) ने 1886 ई० में विसर्जन नली में कैशोड के लिए किद्रयुक्त इलेक्ट्रोड का प्रयोग करके दिया। विसर्जन नली में कम दबाव पर विद्युत विसर्जन करने पर कैथोड से कैथोड किरणें निकलने के साथ ही साथ एनोड से कैथोड की ओर अदृश्य किरणें तीव्र वेग से निकलती हैं एवं कैथोड के छिद्रों से होकर सरल रेखा में बाहर निकल जाती हैं जो जिंक सल्फाइड लेप किये हुए दीवार से टकराकर हरे रंग की प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती है।

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सन् 1907 में सर ज़ेजेे॰ थॉमसन ने इसे धनात्मक किरण (Positive rays) कहा। एनोड से निकलने के कारण इसे एनोड किरण (Anode rays) भी कहा जाता है। ये किरणे विद्युत धनात्मक क्षेत्र द्वारा विकर्षित होती हैं, किन्तु विद्युत ॠणात्मक क्षेत्र द्वारा आकर्षित होती हैं। अत: इनमें धनावेशित कण उपस्थित हैं। सन् 1920 में लॉर्ड रदरफोर्ड ने इस कण का नाम म्रोटॉन (Proton) रखा।

प्रश्न 54.
जल एक उत्तम एवं बहुआयामी घोलक है – व्याख्या करो।
उत्तर :
जल व्यापक घोलक है (Water as versatile solvent) : जल एक उत्तम घोलक है तथा इसे व्यापक घोलक कहते हैं। इसका कारण यह है कि अधिकांश पदार्थ – ठोस, तरल या गैस जल में घुलनशील हैं। वह घोल जिसमें जल घोलक हो उसे जलीय घोल (aqueous solution) कहते हैं। जल एक अकार्बनिक घोलक है। जल में सभी लवण, क्षार, अम्ल घुल जाते हैं। सभी विद्युत संयोजक यौगिक (Electrovalent compound) जल में घुलनशील होते हैं साथ ही कुछ सह संयोजक यौगिक (Co-valent compound) भी ज़ल में घुलनशील होते हैं जैसे चीनी, यूरिया, एसीटान, इथाईल अल्कोहल, मिथाईल अल्कोहल आदि।

जल के अतिरिक्त और भी घोलक है। जैसे – अल्कोहल, ईथर, बेन्जीन, क्लोरोफार्म, कार्बन-ट्रेटा-क्लोराइड आदि। लेकिन जल की व्यापकता सभी घोलक से अधिक है। अत: जल एक Versatile solvent है।

प्रश्न 55.
न्यूट्रॉन का आविष्कार कैसे हुआ ?
उत्तर :
सन् 1930 में बूथ तथा बेकर ने दिखाया कि जब हल्की धातु बेरिलियम (Be9) के ऊपर अल्फा किरणों से आघात किया जाता है तो विशेष प्रकार की अदृश्य किरणें निर्गत होती हैं जो विद्युतीय या चुम्बकीय क्षेत्र से श्रभावित नहीं होती हैं।
ये किरणें उदासीन या आवेशरहित होती हैं।

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बूथ और बेकर इसका सही नामकरण नहीं कर पाये, किन्तु लॉर्ड रदरफोर्ड के छात्र जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने 1932 ई० में प्रयोगों के आधार पर प्रमाणित किया कि ये किरणे विद्युतीय रूप से उदासीन किरणों के समूह हैं जिनका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के समान है। उन्होंने इसका नाम न्यूट्रान (Neutron) रखा।

लीथियम, बोरॉन, इत्यादि अन्य हल्के तत्वों पर अल्फा-कणों की बमबारी करने पर न्यूट्रॉन प्राप्त होते हैं, अनेक नाभिकीय अभिक्रियाओं के अध्ययन से अब यह ज्ञात हो चुका है कि केवल साधारण हाइड्रोजन के परमाणु को छोड़कर सभी तत्वों के परमाणु में न्यूट्रॉन उपस्थित है, अर्थात् न्यूट्रॉन द्रव्य (Matter) का एक मूल कण है।

प्रश्न 56.
रदरफोर्ड के प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकलता है ?
उत्तर :
रदरफोर्ड के प्रयोग से निष्कर्ष : विभिन्न स्थानों पर उत्पत्र चमक की जाँच से यह ज्ञात हुआ कि-

  1. अधिकतर α-कण धातु की पन्नी को पार करके एक सीधी रेखा में चले जाते हैं। चित्र में यह प्रदर्शित करता है कि परमाणु में अधिकांश स्थान रिक्त (खोखला) है।
  2. कुछ α-कण अपने मूल पथ से थोड़ा विक्षेपित (deflect) हो जाते हैं। यह प्रदर्शित करता है कि परमाणु के केंद्र में धनावेशित भाग है जो कि अति सूक्ष्म स्थान घेरे हुए हैं।
  3. बहुत कम α-कण 90° के कोण से अधिक कोण पर विक्षेपित हो पाते हैं। यह प्रदर्शित करता है कि परमाणु के केंद्र में जो अति सूक्ष्म धनावेशित भाग है वह भारी (सघन) और दृढ़ (rigid) है.।

α-कण प्रकीर्णन से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि परमाणु का कुल धनावेश और लगभग समस्त द्रव्यमान परमाणु के केंद्र में एक अति सूक्ष्म स्थान में संचित है। परमाणु के केंद्रीय भाग को, जिसमें परमाणु का कुल धनावेश और लगभग समस्त द्रव्यमान संकेंद्रित हैं, परमाणु का नाभिक (nucleus) कहते हैं।

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α-कण प्रकीर्णन प्रयोग से प्राप्त जानकारी के आधार पर रदरफोर्ड नें परमाणु संरचना के संबंध में यह विचार अकट किया कि परमाणु में भिन्न प्रकार के दो भाग है – (i) अति सूक्ष्म धनावेशित नाभिक और (ii) नाभिक के बाहर का अपेक्षाकृत विशाल क्षेत्र, जिसमें इलेक्ट्रान रहते हैं। नाभिक की त्रिज्या लगभग 10-13 से 10-12 सेमी० और इलेक्ट्रान की त्रिज्या लगभग 10-13 सेमी० होती है। परमाणु की तुलना में नाभिक बहुत सघन (dense) और दृढ़ (rigid) होता है, वयोंकि परमाणु का लगभग समस्त द्रव्यमान बहुत छोटे आयतन के नाभिक में संकेद्रित रहता है। नाभिक का आयतन परमाणु के आयतन का लगभग 10-12 भाग होता है तथा नाभिक का घनत्व परमाणु के घनत्व से लगभग 10^{12} गुना अधिक होता है।

इलेक्ट्रान परमाणु के नाभिक में नहीं रहते हैं, वे नाभिक के बाहर जो विशाल क्षेत्र है उसमें रहते हैं तथा नाभिक के चारों ओर कक्षाओं (orbits) में गतिशील रहते हैं। परमाणु में इलेक्ट्रानों की संख्या परमाणु नाभिक पर स्थित धनावेश की यूनिटों की संख्या के बराबर होती है, इसीलिए परमाणु विद्युत उदासीन होते हैं।

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प्रश्न 57.
समस्थानिकों के उपयोग क्या हैं ?
उत्तर :
समस्थानिकों का उपयोग : किसी तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है किन्तु केन्द्रक (Nucleus) पर उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या में विभित्रता के कारण उनकी मात्रा संख्या (mass number) भिन्न-भिन्न होती है उन्हें आइसोटोप (Isotope) कहते हैं।

आइसोटोप को किसी रासायनिक विधि द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनका रासायनिक गुण समान होता है। आइसोटोप की खोज केवल Mass number के विभिन्नता के आधार पर की जाती है।

हिलियम के दो समस्थानिक (isotopes) होते हैं। इसके भारी परमाणु में 2 इलेक्ट्रॉन तथा केन्द्रक में 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं। इसे 2 He4 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसके हल्के परमाणु में 2 इलेक्ट्रॉन तथा केन्द्रक में 2 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होते हैं। इसे 2 He3 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

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हिलियम के दोनों Isotopes का Atomic number -2 , Proton no, -2 तथा Electron no. -2 होती है। परन्तु Mass number क्रमश: 4 और 3 होता है। इस Isotopes में न्यूट्रान की संख्या क्रमशः (4-2) = 2 तथा (3 -2) = 1 होती है।

प्रश्न 58.
हाइड्रोजन के समस्थानिकों के केन्द्रक में क्या अंतर है ? उनके परमाणु की संरचना दिखाओ।
उत्तर :
हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes of hydrogen) : हाइड्रोजन के तीन Isotopes हैं।
(a) साधारण हाइड्रोजन (Ordinary Hydrogen) या प्रोटियम (Protium) : इसके केन्द्रक में केवल एक प्रोटॉन पाया जाता है, न्यूट्रॉन नहीं होता है। इसका atomic number 1 तथा mass number भी 1 होता है। इसे \({ }_1 H^{\prime}\) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(b) भारी हाइड्रोजन (Heavy hydroge) या ड्यूटीरियम (Deuterium) : इसके केन्द्रक में एक प्रोटॉन तथा एक न्यूट्रॉन होता है। अत: इसका atomic number 1 तथा mass number 2 होता है। इसे, H2 द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

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(c) ट्राइटियम (Tritium) : 2 इसके केन्द्रक में एक प्रोटॉन तथा दो न्यूट्रान होता है। इसका atomic number 1 तथा Mass number 3 होता है। इसे H3 द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
अतः हाइड्रोजन के तीनों Isotopes में atomic number 1 लेकिन mass number क्रमशः 1, 2 और 3 है जो भिन्न-भिन्न हैं।

प्रश्न 59.
सोडियम (11 Na23) की परमाणु संरचना बताओ। सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखो एवं सोडियम की संयोजकता बताओ।
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन की संख्या = 11
प्रोटॉन की संख्या = 11
न्यूट्रॉन की संख्या = 23 – 11 = 12
सोडियम का इलेक्ट्रानिक विन्यास 2,8,1 इसकी संयोजकता 1 है।

प्रश्न 60.
वृहत् जगत एवं सूक्ष्म जगत के बीच एवोगैड्रो संख्या एक कड़ी का कार्य करती है – कैसे ?
उत्तर :
एवोगैड्रो संख्या स्थूल दूनियाँ एवं सूक्ष्म दुनिया के बीच कड़ी का काम करता है।
6.022 × 1023 संख्या के परिमाण के बारे में कल्पना करना कठिन है। इसके बारे में कुछ जानकारी के लिए, 1 मोल सेकेण्ड उस समयावधि के 4 मिलियन (1 मिलियन = दस लाख) गुना समय को प्रदर्शित करता है जितना पृथ्वी को अपने अस्ति में आगे बीता है अर्थात् जितना अभी तक पृथ्वी की उम्र है एवं एक मोल संगमरमर के द्वारा पूरी पृथ्वी को 40 मील की गहराई तक ढंका जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ, चूँकि परमाणु इतने छोटे होते हैं कि एक मोल परमाणुओं अथवा अणुओं को रासायनिक क्रिया में प्रयोग के लिए पूर्णरूपेण प्रबंध किया जा सकता है।

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प्रश्न 61.
वायु को प्रदूषित करने वाले कौन-कौन से निलंबित पदार्थ हैं ?
उत्तर :
यदि किसी छिद्र से सूर्य का प्रकाश आता है तो उस प्रकाश में देखते हैं कि धूल के छोटे-छोटे कण उड़ते हुए दिखाई पड़ते है यही घूल कण वायु को प्रदूषित कर देता है। इन कणों का आकार निलंबन के आकार का होता है।

वायु में उड़नेवाले ठोस तथा द्रव कण जिसका आकार Colloide के समान होता है उसे Suspended particulate matter (SPM) कहते हैं।
इन्हीं Suspended particulate matter के कारण वायु प्रदूषित होता है।

ये suspended particulate पदार्थ धूलकण है, जो शहरों तथा खेतों की धूल होते हैं, राख (Fly ash), जो Thermal Power station से निकलता है, कार्बन, जो गाड़ियों से निकलता है तथा धातु के कण जो उद्योग से तथा खदान से निकलता है। ये suspended particulate वायु से मिलकर उसे मदूषित कर देता है।
इन धूलकणों से फेफड़े की बीमारी, त्वचा की बीमारी, श्वास की बीमारी तथा कैंसर आदि रोग हो जाता है।

प्रश्न 62.
तेल-जल तथा साबुन-जल से इमल्सन कैसे बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
किरासन तेल की कुछ बूँदों को पानी के साथ एक बोतल में हिलाने पर पानी में वितरित (dispersed) तेल का पायस (emulsion) प्राप्त होता है। यह पायस अस्थाई होता है क्योंकि थोड़ी देर बाद पानी तथा तेल अलग-अलग हो जाते हैं।
इसी प्रकार एक बरतन में पानी लेकर उसमें साबुन को पानी में घोलते हैं। पानी में साबुन के वितरीत होने पर साबुन का पायस (Emulsion) प्राप्त होता है। यह पायस भी अस्थाई होता है क्योंकि कुछ समय पश्चात् साबुन बरतन की पेंदी में जमा हो जाता है और पानी उसके ऊपर अलग जमा रहता है।

प्रश्न 63.
सान्द्र HCl से भींगे हुए ग्लास छड़ को एक गैसजार में प्रवेश कराते हैं जिससे सफेद घुआँ उत्पन्न होता है। गैसजार में गैस का नाम बताओ। समीकरण दो।
उत्तर :
गैस से भरे गैस जार के अन्दर सान्द्र HCl से भींगे ग्लास छड़ को प्रवेश कराने पर जो सफेद धुआँ बनता है वह धुआँ अमोनियम क्लोराइड (NH4 Cl) का होता है। गैस जार में अमोनिया (NH3) गैस है।

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प्रश्न 64.
Na2O एक भास्मिक ऑक्साइड है, जबकि ZnO एक उभयधर्मी ऑक्साइड है-क्यों ?
उत्तर :
Na2 O एक भास्मिक ऑक्साइड है क्योंकि यह केवल अम्ल से क्रिया कर लवण तथा जल देते हैं। यह क्षार से क्रिया नहीं करता है।
Na2 O + 2 HCl = 2 NaCl + H2O
ZnO एक उभय धर्मी ऑक्साइड है जो अम्ल और क्षार प्रतिक्रिया लवण तथा जल बनाते हैं।

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प्रश्न 65.
रासायनिक समीकरण की सहायता से बताओ क्या होता है जब –
(i) सान्द्र HNO3 को ताँबे की छीलन के साथ गर्म करते हैं ?
(ii) अल्युमिनियम पावडर को सान्द्र NaOH के जलीय घोल के साथ गर्म करते हैं।
उत्तर :
(i) (क) सान्द्र HNO3 को ताँम्बे की छीलन के साथ गर्म करते हैं।
(ख) अल्युमीनियम पाउडर को सान्द्र NaOH के जलीय घोल के साथ गर्म करते हैं।
(ii) (क) सान्द्र HNO3 को ताँबे की छीलन के साथ गर्म करते हैं तो नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (NO2) भूरे रंग के साथ निकलता है।

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(ख) अल्युम्मिनियम पाउडर को सान्द्र NaOH के जलीय घोल के साथ गर्म करते हैं तो हाइड्रोजन गैस निकलती है और सोडियम अल्युमिनेट बनता है।

2 Al + NaOH + 2 H2O = 2 NaAlO2 + H2

प्रश्न 66.
गैसीय ऑक्साइडों को जल में घुलने से जल का अम्लीकरण कैसे होता है ?
उत्तर :
जल का अम्लीकरण (Acidification of water) : कल-कारखानों, बिजलीघरों तथा स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधनों (Fossil fuels), (डीजल, पेट्रोल आदि), का प्रयोग किया जाता है। इन इधनों के जलने से SO2CO2 तथा NO2 गैस उत्पन्न होती है जो वायु में मिलकर वायु को प्रदूषित कर देती है। वायु में उपस्थित जलवाष्प में SO2 ऑक्सीकृत होकर H2SO4 में CO2 ऑक्सीकृत होकर H2CO3 में तथा NO2 ऑक्सीकृत होकर HNO3 में परिवर्तित जाता है। यही अम्ल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आते हैं, जिसे अम्ल वर्षा (Acid rain) कहते हैं।
2 SO2 + 2 H2O = 2 H2SO4 सल्फ्यूरिक अम्ल
CO2 + H2O = H2CO3 कार्बोनिक अम्ल
3 NO2 + H2O = 2 HNO3 + NO नाइट्रिक अम्ल

प्रश्न 67.
अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव बताओ।
उत्तर :
अम्ल वर्षा का हानिकारक प्रभाव (Harmful effects of Acid Rains) :

  1. यह पेड़-पौधों की पत्तियों को क्षति पहुँचाता है तथा उसके पोषक तत्वों को निष्कासित कर देता है।
  2. नदियों, झीलों तथा तालाबों के जल को यह अम्लीय बना देता है जिससे स्वच्छ जल में रहनेवाले जीव-जन्तु प्रभावित होते है तथा उनकी आबादी काफी कम हो जाती है।
  3. यह मिट्टी में मिलकर उसे अम्लीय बना देता है जिससे मिट्टी की उर्वराशक्ति नष्ट हो जाती है।
  4. इससे बड़ी-बड़ी ऐतिहासिक इमारतो जो संगमरमर से बनी होती हैं, जैसे ताजमहल, विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता, बिड़ला तारामण्डल कोलकाता को काफी क्षति पहुँचती है।

अम्ल वर्ष संगमरमर से प्रतिक्रिया करके कैल्सियम सल्फेट बनाता है तथा CO2 गैस मुक्त करता है जिससे उसकी सुन्दरता तथा चमक नष्ट हो रही है।

CaCO3 + H2 SO4 = CaSO4 + H2O + CO2

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प्रश्न 68.
दंतक्षय, कृषि एवं मत्स्य पालन में pH का महत्व बताओ।
उत्तर :
pH का प्रभाव (Effect of pH ) : pH का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन तथा हमारे शरीर पर पड़ता है।
दन्त क्षय (Tooth decay) : जब हम चीनी युक्त कोई पदार्थ खाते हैं, तो मुख के अन्दर का बैक्टीरिया उस चीनी को अम्ल में तोड़ देता है। यह अम्ल हमारे मुख के pH को कम कर देता है। जब मुख का pH 5.5 से नीचे होने पर यह अम्ल हमारे दन्त के मसूड़ों (Enamel) को जो कैल्शियम फॉस्फेट नामक कठोरतम पदार्थ से बना होता है, उसको भी नष्ट कर देता है।

सुरक्षा : (i) इससे बचने का सरल उपाय यह कि प्रत्येक खाने के बाद कुल्ला करें तथा मुख को अच्छी तरह से धो लें।
(ii) उत्पन्न अम्ल को उदासीन करने के लिए अच्छे Tooth Paste से बश करें, जो अम्ल को क्षार में बदल देता है।
(iii) मिठाई, चॉकलेट, आइसक्रीम इत्याद का प्रयोग कम करना चाहिए।

कृषि क्षेत्र (Agriculture) : कृषि भूमि का pH 7 के लगभग रहने पर पैदावार अच्छी होती है। लेकिन मिट्टी यदि अधिक अम्लीय या अधिक क्षारीय हो जाती है, तो इन दोनों ही कारणों से पैदावार में कमी आ जाती है।
मिट्टी की अम्लीयता सामान्य करने हेतु क्षार, जैसे चूना (Calcium oxide) बुझा चूना (Calcium Hydroxide) या चॉक (Calcium Carbonate) का छिड़काव किया जाता है। इसी प्रकार मिट्टी क्षारीय हो जाने पर उसकी क्षारीयता नियत्रित करने के लिए अम्ल, जैसे कार्बनिक खाद, का प्रयोग किया जाता है।

मत्स्य पालन में (Pisciculture) : जिस तरह मनुष्य के शरीर का pH 7 से 7.8 के बीच रहने पर वह सही ढंग से कार्य करता है, उसी प्रकार जलीय प्राणी (मछली) के लिए भी झील तथा नदियों का pH इसी श्रेणी में रहना चाहिए। लेकिन अम्ल वर्षा (Acid rain) के कारण झील तथा तालाबों के जल का pH 5.6 हो जाता है, जिससे यह जलीय प्राणी (मछली) को मार देता है। अत: अम्लीय जल को सामान्य करने के लिए जल में बीच-बीच में कैल्सियम कार्बोनेट का छिड़काव करते रहना चाहिए।
मछली पालन में भी उस तालाब में Calcium oxide का छिड़काव किया जाता है, जिससे छोटी-छोटी मंछलियों को कोई रोग न हो जाय।

आंकिक प्रश्नोत्तर (Numrical Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
यदि 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n हो, तो 100 ग्राम CaCO3 एवं 44 ग्राम CO2 में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
हल : जल (H2 O) के अणुभार = 2 × 1 + 2 × 16 = 18 g
CaCO3 का अणुभार = 40 + 12 + 16 × 3 = 100 g
CO2 का अणुभार = 12 + 16 × 2 = 44 g
एवोग्गड्रो के नियमानुसार, चूँकि प्रत्येक पदार्थ के 1 मोल में अणुओं की संख्या समान होती है एवं एक मोल जल (H2O) अर्थात् 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n हैं।
∴ 1 मोल CaCO3 एवं 1 मोल CO2 अर्थात् 100 ग्राम CaCO3 एवं 44 ग्राम CO2 में भी अणुओं की संख्या n होगी।
उत्तर :
अणुओं की अभीष्ट संख्या = n

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प्रश्न 2.
STP पर 8 ग्राम आक्सीजन का आयतन ज्ञात करें।
हल : ऑक्सीजन का अणुभार = 2 × 16 = 32 g
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उत्तर :
5.6 लीटर।

प्रश्न 3.
22 ग्राम कार्बन डाई आक्साइड में आक्सीजन परमाणुओं की संख्या क्या है ?
हल : 44 ग्राम CO2 में अणुओं की संख्या = 6.022 × 1023

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उत्तर :
6.022 × 1023

प्रश्न 4.
STP पर 4 ग्राम सल्फर डाई आक्साइड का आयतन क्या है ?
हल : सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2) का अणुभार = 32 + 2 × 16 = 64 g
∵ S.T.P. पर 64 g SO2 का आयतन 22.4 लीटर है।
∴ S.T.P. 1 g का आयतन \(\frac{22.4}{64}\) लीटर
∴ S.T.P. 1 g का आयतन \(\frac{4 × 22.4}{64}\) लीटर = 1.4 ली०
उत्तर :
1.4 लीटर।

प्रश्न 5.
द्रव्यमान प्रतिशत के रूप में उस घोल के सान्द्रण की गणना करें जिसके 150 g जल में 10 g पोटैशि़यम नाइट्रेट घुला हुआ है।
हल : ग्राम प्रतिशत में घोल का सान्द्रण

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= \(\frac{10}{160}\) × 100 = 6.25 %
उत्तर :
6.25 %

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प्रश्न 6.
40 g साधारण नमक 320 ml जल में घुला हुआ है। इस घोल का सान्द्रण द्रव्यमान प्रतिशत में ज्ञात करें। हल : घोल का सान्द्र OP द्रव्यमान प्रतिशत में
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उत्तर :
12.5 %

प्रश्न 7.
मैंगनीज डाई ऑक्साइड मिश्रित 122.5 ग्राम पोटैशियम क्लोरेट गर्म करने पर N.T.P. पर कितना ग्राम पोटैशियम क्लोराइड बनेगा ? यहाँ मैंगनीज डाई ऑक्साइड की क्या भूमिका है ?
हल : 2 KclO3+[MnO2] heat = 2 KCl + 3 O2 + [MnO2]
2[39 + 35.5 + 16 × 3] = 2[39 + 35.5]
= 2 × 122.5 = 2 × 74.5
= 245 gm = 149 gm
∵ 245 gm KclO3 से N.T.P. पर 149 gm Kcl प्राप्त होता है।

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उत्तर :
यहाँ MnO2 एक धन उत्प्रेरक का काम करता है।

प्रश्न 8.
260 ग्राम K2 SO4 में कितना मोल K2 SO4 होगा ?
हल :
K2 SO4 = 39 × 2 + 32 + 16 × 4
= 78 + 32 + 64
= 174 gm
∵ 174 gm K2SO4 में 1 mole K2 SO4 है।
∴ 260 gm ” ” = \(\frac{1}{174}\) × 260 = 1.5 mole K2 SO4
उत्तर :
1.5 mole 2 SO4

प्रश्न 9.
यदि S.T.P पर 22.4 लीटर CO2 गैस में अणुओं की संख्या 6.022 × 1023 हों, तो, S.T.P पर 11.2 लीटर O2 गैस में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
हल :
∵ 22.4 लीटर O2 गैस में S.T.P. पर 6.022 × 1023 अणु
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उत्तर :
3.011 × 1023 अणु

प्रश्न 10.
प्रमाणित तापक्रम एवं दाबव पर 7 ग्राम नाइट्रोजन गैस का आयतन क्या होगा ?
हल :
∵ 14 gm नाइट्रोजन गैस का N.T.P. आयतन 22.4 लीटर है।
∴ 7 gm ” ” ” “= \(\frac{22.4}{14}[latex] × 7 = 11.2 लीटर
उत्तर :
11.2 लीटर

प्रश्न 11.
27° C और 750 मि० मी० पारे के दबाव पर 500 C . C HCl गैस में 1.2 × 1023 अणु उपस्थित हैं। सामान्य तापक्रम एवं दाबव पर 2.5 लीटर गैस में अणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।

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उत्तर :
6.6 × 1022 अणु।

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प्रश्न 12.
2.3 ग्राम सोडियम में Na परमाणुओं की संख्या कितनी है ? हल :
∵ 23 ग्राम सोडियम में 6.023 × 1023 परमाणु है।

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प्रश्न 13.
0.2 मोल H2 अणुओं का द्रव्यमान बताओ (H2 का अणु भार = 2 )
हल :
∵ 1 मोल H2 अणुओं को द्रव्यमान 2 ग्राम है।
∴ 0.2 ” ”  ” ” ” = 2 × 0.2
उत्तर :
= 0.4 gm है।

प्रश्न 14.
साधारण नमक की घुलनशीलता 30° C पर 45 gm है। नमक साधारण घोल का 90 gm तैयार करने के लिए जल का भार ज्ञात कीजिए।
हल :
∵ 45 gm नमक 30° पर घुले हैं 100 gm जल में
∴ 90 gm ” ” ” ” = [latex]\frac{100}{45}\) × 90
= 200 gm जल।
उत्तर :

प्रश्न 15.
जब 100 gm संतुप्त घोल 50° C वाष्पित होता है और 50 gm ठोस रह जाता है तब 50° C पर पदार्थ की घुलनशीलता क्या होगी ?
हल : 100 घोल से 50 gm ठोस मिला
∴ घोलक = 100-50 = 50 gm
∵ 50 gm घोलक में 50° C पर ठोस 50 gm घुले हैं

∴ 100gm ” ” ” ” = \(\frac{50gm}{50gm}\) × 100 = 100gm
उत्तर :
ठोस की घुलनशीलता = 100 gm है।

प्रश्न 16.
10 ग्राम कैल्सियम कार्बोनेट में उसके कितने मोल होंगे। परमाणु संख्या : Ca = 40, C = 12, O = 16]
हल : CaCO3 = 40 + 12 + 16 × 3 = 100
∵ 100 gm CaCO3 में CaCO3 का 1 मोल है।
∴ 10gm ” ” ” = \(\frac{1}{100}\) × 10 = 0.1 मोल
उत्तर :
0.1 मोल।

प्रश्न 17.
यदि हाइड्रोजन के एक परमाणु द्रव्यमान 1.6736 × 10-24 ग्राम हो तो amu में हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान कितना होगा ?
हल :
∵ 1 a.m.u. = 1.6603 × 10-24
∴ 1.6603 × 10-24 का H2 परमाणु का द्रव्यमान 1 a.m.u
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण 42
= 1.008 a.m.u
उत्तर :
1.008 a.m.u

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प्रश्न 18.
(a) हाइड्रोजन (b) ऑक्सीजन एवं (c) कार्बन परमाणुओं का द्रव्यमान a m u में व्यक्त करो। (1 amu = 1.6603 × 10-24 ग्राम)
हल : (a) हाइड्रोजन का एक परमाण द्रव्यमान = 1.6736 × 10-24

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उत्तर :
H = 1.008 a.m.u, O = 15.99 a.m.u, C = 12.0002 a.m.u

प्रश्न 19.
(a) एक हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान एवं
(b) जल के एक अणु का द्रव्यमान ज्ञात करो।
हल : (a) हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान = 1.6603 × 10-24 × 1.008 = 1.67358 × 10-24 gm
(b) जल के एक अणु का द्रव्यमान = 1.6603 × 10-24 × 6.03 = 2.989 × 10-23
उत्तर :
हाइड्रोजन (H) = 1.67358 × 10-24 ग्राम, H2 O = 2.989 × 10-23 ग्राम

प्रश्न 20.
हीलियम (He) के 9.033 × 1024 परमाणुओं में कितने मोल हैं ?
हल : 1 मोल हीलियम में 6.023 × 1024 परमाणु हैं।
∵ 6.023 × 1024 परमाणु हीलियम के 1 मोल में हैं।

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उत्तर :
15 मोल।

प्रश्न 21.
ऑंक्सीजन के 0.2 मोल में अणुओं की संख्या बताओ। हल : 0.2 मोल में आक्सीजन के अणु = 6.023 × 1024 × 0.2 अणु
= 1.2046 × 1024 अणु
उत्तर :
1.2046 × 1024 अणु।

प्रश्न 22.
11 ग्राम कार्बन डाई-ऑक्साइड में कितने मोल होंगे ?
हल : CO2 = 12 + 16 × 2 = 44 gm
∵ 44 gm CO2 में कार्बन-डाई-आक्साइड का 1 मोल
∴ 11gm ” ” ” ” ” ” \(\frac{1}{44}\) × 11=0.25 मोल।
उत्तर :
0.25 मोल।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 23.
0.5 मोल सोडियम में परमाणुओं की संख्या बताओ।
हल :
∵ 1 मोल सोडियम 6.023 × 1023 परमाणु
∴ 0.5 ,, = 6.023 × 1023 × 0.5
= 3.0115 × 1023 परमाणुं
उत्तर :
3.0115 × 1023 परमाणु।

प्रश्न 24.
4 मोल अल्युमिनियम परमाणुओं की मात्रा ज्ञात करो। (AI का पारमाणविक द्रव्यमान = 27 U) हल :
∵ 1 मोल अल्यूमिनियम परमाणु की मात्रा 27
∴ 4 मोल अल्यूमिनियम परमाणु की मात्रा = 27 × 4 = 108 u

प्रश्न 25.
यदि 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n हो, तो 100 ग्राम CaCO3 और 44 ग्राम CO2 में अणुओं की संख्या कितनी होगी ?
हल : 18 ग्राम जल में अणुओं की संख्या n है।
100 ग्राम CaCO3 में भी अणुओं की संख्या n है।
44 ग्राम CO3 में भी अणुओं की संख्या n है।

प्रश्न 26.
22 ग्राम कैल्सियम कार्बोनेट तनु HCl की अधिकता में प्रतिक्रिया करके NTP पर कितना लीटर CO2 गैस उत्पन्न करता है? (Ca = 40 u, O = 16 u, C = 12 u)
हल :

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण 45

प्रश्न 27.
24.5 ग्राम पोटैशियम क्लोरेट NTP पर कितना लीटर ऑक्सीजन गैस उत्पन्न करता है ?
(K = 39 u, Cl = 3 5 . 5 u,O = 16u)
हल :
2 KClO3 = 2 Kacl + 3 O2
2[39 + 35.5 + 16 × 3] ,, 3[16 × 2]
= 2 × 122.5 = 96 gm
= 245 gm
∵ 245 gm KClO3 से 96 gm आक्सीजन मिलती है

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण 50

प्रश्न 28.
60° C पर 80 ग्राम जल में 16 ग्राम पोटैशियम सल्फेट घुलता है, तो इसी तापमान पर पोटैशियम सल्फेट की घुलनशीलता बताओ।
हल : पोटाशियम की घुलनशीलता (60° C) = \(\frac{16}{80}\) × 100 = 20

प्रश्न 29.
यदि 20 ग्राम जल में 13 ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट 40° C तापमान पर घुलकर संतृप्त घोल बनाता है तो 40° C पर पोटैशियम नाइट्रेट की घुलनशीलता निर्णय करो।
हल : 40° C पर पोटैशियम नाइट्रेट की घुलनशीलता = \(\frac{13}{20}\) × 100 = 65

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 30.
सोडियम क्लोराइड की घुलनशीलता 20° C पर 36 है। यदि सोडियम क्लोराइड के संतृप्त घोल को 20° C तापमान पर वाष्पीकृत किया जाय तो 25 ग्राम संतृप्त घोल में कितना लवण रहेगा?
हल :
100 gm जल में 36 gm NaCl है
संतृप्त घोल की मात्रा = 100+36 = 136 gm
∵ 136 gm संतृप्त घोल (20° C. पर) में 36 gm सोडियम क्लोराइड है

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प्रश्न 31.
5 लीटर सोडियम हाइड्राक्साइड के जलीय घोल में 40 ग्राम NaOH है तो घोल की सान्द्रता ग्राम प्रति लीटर में ज्ञात करो।
हल :
5 लीटर घोल में 40 gm NaOH
1 ,, ,, ,, = \(\frac{40}{5}\) = 8 ग्राम/लीटर

प्रश्न 32.
1 लीटर सोडियम क्लोराइड के जलीय घोल में 25 ग्राम सोडियम क्लोराइड घुला हुआ है तो घोल की सांद्रता प्रतिशत में ज्ञात करो।
हल :
∵ 1000 gm NaCl के जलीय घोल में 25 gm सोडियम क्लोराइड है
∴ 100 ,, ,, ,, = \(\frac{25}{1000}\) × 100 = 2.5 gm

प्रश्न 33.
यदि 6 ग्राम तूतिया 44 ग्राम जल में घुला हो तो तूतिया का प्रतिशत भार ज्ञात करो।
हल : 6 ग्राम तूतिया 44 ग्राम जल में घुला है
संतृप्त घोल की मात्रा = 44 + 6 = 50
∵ 50 gm संतृप्त घोल में 6 gm तूतिया है
∴ 100 ,, ,, ,, = \(\frac{6}{50}\) × 100 = 12 gm

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 4 पदार्थ : संरचना, पदार्थ के भौतिक तथा रासायनिक गुण

प्रश्न 34.
किसी घोल के 250 मिलीलीटर में एक पदार्थ का 0.5 ग्राम अणु घुला हुआ हो तो घोल की मोलरता क्या होगी ?
हल :
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WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 2 परिवर्तनशील पृथ्वी

Detailed explanations in West Bengal Board Class 8 Geography Book Solutions Chapter 2 परिवर्तनशील पृथ्वी offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 8 Geography Chapter 2 Question Answer – परिवर्तनशील पृथ्वी

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
हमारी पृथ्वी पर प्रमुख प्लेटें कितनी हैं ?
उत्तर:
6

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प्रश्न 2.
सर्वप्रथम किसने प्लेट शब्द का प्रयोग किया था ?
उत्तर:
जे. टी. विल्सन ।

प्रश्न 3.
एस्थेनोसफियर का तापमान कितना होता है ?
उत्तर:
लगभग 1500°C

प्रश्न 4.
जिस स्थान पर प्लेटें परस्पर एक दूसरे से दूर होती हैं उस किनारा को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
अपसारी प्लेट किनारा ।

प्रश्न 5.
हमारी पृथ्वी के सबसे गहरा समुद्री गर्त का नाम बताओ ।
उत्तर:
मेरियाना गर्त ।

प्रश्न 6.
मेरियाना गर्त किस महासागर में स्थित है ?
उत्तर:
प्रशांत महासागर में ।

प्रश्न 7.
किस प्लेट के किनारे अधिक ज्वालामुखी पर्वतों का निर्माण होता है ?
उत्तर:
अधीन प्लेट किनारा ।

प्रश्न 8.
विनासकारी प्लेट किनारा किस प्लेट को कहा जाता है ?
उत्तर:
अधीन प्लेट किनारा को ।

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प्रश्न 9.
किसे सँसरी प्लेट किनारा कहा जाता है ?
उत्तर:
ट्रांसफार्म प्लेट किनारा को ।

प्रश्न 10.
अधिकांश मोड़दार पर्वत किस प्रकार के प्लेट के संघर्षण से बने हैं?
उत्तर:
महादेशीय प्लेट ।

प्रश्न 11.
यूरेशिया किसे कहते हैं?
उत्तर:
यूरोप व एसिया का सम्मिलित नाम यूरेसिया कहलाता है।

प्रश्न 12.
भारत के एक लावा निर्मित समतल भूमि का नाम बताओ ?
उत्तर:
दक्षिण भारत की माल भूमि ।

प्रश्न 13.
हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में किस तरह के भूकंप आते हैं?
उत्तर:
विवर्तनिक भूकंप ।

प्रश्न 14.
भूकंप की तीव्रता किस यन्त्र से मापते हैं?
उत्तर:
रिक्टर स्केल (Ricater Scale) से।

प्रश्न 15.
भूकंप की तरंगों को किस स्केल से मापा जाता है।
उत्तर:
सिस्मोग्राफ से ।

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प्रश्न 16.
हिमसैल के टूटकर गिरने एवं वेगवान लहरों के तट पर टकराने पर कैसा भूकंप आता है ?
उत्तर:
लघु भूकंप ।

प्रश्न 17.
विश्व के कौन-से क्षेत्र में सर्वाधिक भूकंप आते हैं?
उत्तर:
प्रशांत महासागर के तटवर्ती भाग में ।

प्रश्न 18.
समुद्र में आने वाले भूकंप को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
नाम

प्रश्न 19.
26 जनवरी 2001 में गुजरात के किस शहर में भूकंप आया था ?
उत्तर:
भुज में ।

प्रश्न 20.
भारत के किस भाग में सर्वाधिक भूकंप आते हैं ?
उत्तर:
हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में ।

प्रश्न 21.
ओल्ड फेथफुल गीजर किस देश में है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका में ।

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प्रश्न 22.
आइसलैण्ड में किस प्रकार का विद्युत अधिक उत्पन्न किया जाता है ?
उत्तर:
भूतापीय ऊर्जा ।

प्रश्न 23.
प्लेट विवर्तनिक सिद्धान्त का प्रतिपादन कब हुआ ?
उत्तर:
1960 के दशक के अन्तिम वर्षों में ।

प्रश्न 24.
पृथ्वी पर मँझोले एवं छोटे प्लेटों की संख्या कितनी है ?
उत्तर:
बीस

प्रश्न 25.
किन प्लेट किनारों पर न तो नए भू-पृष्ठ का निर्माण होता है और न ही पुराने भू-पृष्ठ का विनाश होता है?
उत्तर:
अपसारी प्लेट किनारों पर ।

प्रश्न 26.
भारत के एक प्राचीन मोड़दार पर्वत का नाम लिखिए।
उत्तर:
अरावली ।

प्रश्न 27.
किस प्रकार के लावा में सिलिका की मात्रा अधिक होती है?
उत्तर:
अम्लीय लाबा में।

प्रश्न 28.
मोनालोया ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण किस प्रकार के लावा से हुआ है?
उत्तर:
क्षात्रीय लावा से।

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प्रश्न 29.
मुख्य भूकम्प के बाद हल्के भूकम्प क्यों आते हैं?
उत्तर:
भूगर्भ के पदार्थो का संतुलन बनाने के लिए।

प्रश्न 30.
प्राथमिक तरंग किस प्रक्रिया द्वारा प्रवाहित होती है?
उत्तर:
संकुचन एवं प्रसारण प्रक्रिया द्वारा।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
पृथ्वी के प्रमुख प्लेटों के नाम बताओ ।
उत्तर:
पृथ्वी के प्रमुख प्लेटों के नाम निम्नलिखित हैं –

  • प्रशांत महासागरीय प्लेट
  • यूरेसियन प्लेट
  • अमेरिकन प्लेट
  • अफ्रीकन प्लेट
  • भारत अस्ट्रेलिया प्लेट,
  • अंटार्कटिका प्लेट

प्रश्न 2.
अपसारी प्लेट किनारा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जिस स्थान पर प्लेटें एक दूसरे से क्रमशः दूर होती हैं, वहाँ अपसारी प्लेट किनार(Divergent Plate Margin) क्षेत्र होता है। जब दो महासागरीय प्लेटें एक दूसरे से दूर होती हैं तो उसके मध्य स्थित दायरों में भू-गर्भ को उत्तप्त गालत पदार्थ (मैग्मा) ऊपर आकर इकट्ठा हो लगता है। यहाँ मैग्मा ठंडा और कठोर होकर महासागरोय पृष्ठ और मध्य सामुद्रिक शैलाशीरा (Mid-oceanic Ridge) का निर्माण करती है। इस कारण इस क्षेत्र को अपसारी प्लेट किनारा कहा जाता है।

प्रश्न 3.
अभिसारी प्लेट किनारा क्या है?
उत्तर:
अभिसारी प्लेट किनारा (Convergent Plate Margin) – यह वह स्थान है जहाँ प्लंटें परस्पर एक दिशा में ही आगे बढ़ती हैं। वहाँ अभिसारी प्लेट किनारा का क्षेत्र बन जाता है। महासागरीय और महाद्वीपोय प्लेटो के परस्पर अभिमुखी बलन से भारी महासागरीय प्लेट महादेशीय प्लेट के नौचे खिसके लगतो है। इसके कारण गहरे सामुद्रिक गर्त का निर्माण होता है। भू-पृष्ठ का यह भाग अस्थिर है। इसके कारण यहाँ लगातार भू-आलाड़न या भूका आंत हैं, इसलिए इस क्षेत्र को विनाशकारी प्लेट किनारा भी कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
ट्रांसफार्म प्लेट किनारा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
ट्रांसफार्म प्लेट किनारा (Transform Plate Margin) – जहाँ प्लेट परस्पर समानांतराल में पास – पास संचरित होता है वह क्षेत्र ट्रांसफार्म प्लेट किनारा कहलाता है। इस क्षेत्र में प्लेट के किनारे पर किसी नये भू-पृष्ठ का निर्मांग नहीं होता और न ही पुराने भू-पृष्ठ का विनाश होता है। इस कारण इस प्लेट को संरक्षणशील या निरेेक्ष जेट किनारा (Conservative Plate Margin) कहा जाता है।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी क्या है?
उत्तर:
ज्वालामुखी (Volcano) :- भू-गर्भ में स्थित गलित, सान्द्र, मैग्मा, गैस, जलीय वाष्प किसी गहवर या दरारों से निकलकर प्रचंड वेग में या धीर शांत गति से भू-पृष्ठ के बाहर आने लगते हैं। इस प्रक्रिया को अग्निपात कहते हैं। इन अग्निपातों के उद्ग्रम स्थल को ज्वालामुखी (Volcano) कहते हैं।
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प्रश्न 6.
आग्नेय पर्वत क्या है ?
उत्तर:
आग्नेय पर्वत (Volcanic Mountains) :- ज्वालामुखी के उद्गार से निकलने वाले लावा, राख, शिलाखण्ड, चट्टानों के चूर्ण आदि पदार्थ उसके मुंह (Cratery) के चारों ओर शँकु (Cone) के आकार में जमा हो जाती है। जिससे आग्नेय पर्वत या ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण होता है। ये पर्वत त्रिकोण आकृति के होते हैं तथा इसका ऊपरी भाग कीप के आकार का होता है।

ज्वालामुखी के संग्रह से निर्मित होने के कारण इन पर्वतों-पठारों को संग्रहित पर्वत भी कहते हैं। इन पर्वतों के अच्छे उदाहरण, जापान का फ्यूजीयामा, अफ्रीका के केनियाव किलिमंजारो, इटली के विसूवियस तथा एटना सिसली का स्ट्राम्बोलियन, बर्मा का पोपा, भारत का बारेन आदि इस श्रेणी के पर्वत हैं|

प्रश्न 7.
अम्लीय लावा और क्षारीय लावा किसे कहते हैं?
उत्तर:
अम्लीय लावा : अम्लीय लावा में सिलिका या क्वार्ट्ज की मात्रा (65-85) प्रतिशत तक होती है। ये अधिक सान्द्र स्थिति में रहते हैं। इस कारण अधिक दूर तक नहीं फैल पाते हैं। इस लावा से निर्मित होने वाली शंकु की आकृति अधिक उन्नत होती है। जैसे – माउण्ट पिली ज्वालामुखी की शंकु आकृति।

क्षारीय लावा :- क्षारीय लावा में सिलिका की मात्रा कम ( 45 से 60 प्रतिशत) होती है। कम सान्द्र होने से यह दूर तक फैलती है। इससे तैयार होने वाले शंकु में मन्द डाल होता है। यह विशाल आग्नेय गिरि निर्मित करती है। जैसे मोनालोथा।

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प्रश्न 8.
भूकंप किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी ज्ञात या अज्ञात वाह्म या आन्तरिक कारणों से भू-पटल पर तीव्रगति से होने वाले कम्पन- को भू-कम्प कहते हैं। इस प्रकार भू-कम्प वह घटना है। जिससे भू-पटल के किसी हिस्से में हलचल पैदा हो जाती है तथा वहां कम्पन होने लगता है।

प्रश्न 9.
भूकंप केन्द्र तता उपेकन्द्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भूकंप केन्द्र (Seismic Focus) :- भू-गर्भ में वह स्थान जहाँ से भूकंपीय तरंगों की उत्पत्ति होती है उसे भूकंप केन्द्र (Seismic Focus) कहते हैं। अधिकांश भूकंप केन्द्र भू-पृष्ठ से 50-100 किमी० की गहराई में स्थित रहते हैं।

उपकेन्द्र (Epicenter) :- पृथ्वी के जिस स्थान पर सर्वप्रथम भू-कंप के लहरों का अनुभव होता है उसे भूकंप उप केन्द्र (Epicenter) कहते हैं। इसी स्थान पर भू-कंप का प्रभाव सबसे अधिक होता है एवं भूकंप का अनुभव सबसे पहले होता है।

प्रश्न 10.
भू-कंप की विभिन्न तरंगों के बारे में क्या जानते हो?
उत्तर:
(i) प्राथमिक तरंग (Primary wake (P) wave) : सबसे द्रुत गति (6 किमी०/से) भू-पृष्ठ पर सबसे पहले पहुँचता है। कठोर, तरल, गैसीय पदार्थो से गुजरती हुई यह तरंग संकुचन और प्रसारण प्रक्रिया द्वारा प्रवाहित होती है।

(ii) द्वितीय अनुगामी तरंग (Secondary wave ‘S’ wave) : यह तरंगP तरंग के उपरांत भू-पृष्ठ पर पहुँचती है। मात्र तरल और गैसीय पदार्थो के मध्य से प्रवाहित होने वाली यह तरंग क्रमशः ऊपर-नीचे उठती-गिरती प्रसारित होती हैं।

(iii) पृष्ठ तरंग (Surface wave) : भुकंप केन्द्र से भू-पृष्ठ पर लगातार दो तरह के तरंगों का संचार होता रहता है जिसे पृष्ठ तरंग (Surface wave) कहते हैं। इन्हें लव तरंग (Love wave) एवं रेल्फ तरंग (Reyleigh wave) भी कहते हैं। इन पृष्ठ तरंगों के कारण ही अधिकांश क्षति होती है।

प्रश्न 11.
सिस्मोग्राफ क्या है?
उत्तर:
सिस्मोग्राफ (Sismograph) : भूकम्प संबन्धी घटनाओं जैसे भूकंप की लहरों की तीव्रता, दिशा एवं अवधि का अकंन (Record) करने वाले यन्त्र को भूकंप लेखी यन्त्र (Seismograph) कहते हैं। इस यंत्र द्वारा भूकपप के लहरों का कागज पर अंकन किया जाता है। इसकी सहायता से भूकंप की उत्पत्ति का स्थान एवं भूकंप के कारणों का सहज ही अनुमान कर लिया जाता है।
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प्रश्न 12.
रिक्टर स्केल क्या है?
उत्तर:
इस यंत्र का अविष्कार कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर C. F. Richter ने 1935 ई० में किया था। यह उपकरण भूकंप लेखी यंत्र (Seismograph) में लगा होता है। इससे भूकंप की तीव्रता मापा जाता है। इस पर 0 से 9 तक की संख्यायें होती हैं। जब भूकंप की तीव्रता 7 से अधिक होती है। तब भूकंप विनाशकारी माना जाता है।

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प्रश्न 13.
सक्रिय ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन ज्वालामुखी में हमेसा उद्गार होता रहता है उन्हें सक्रिय ज्वालामुखी कहते हैं। जैसे भारत का बैरन सक्रिय ज्वालामुखी का उदाहरण है ।

प्रश्न 14.
सुषुप्त ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर:
ये वे ज्वालामुखी होती हैं जिनमें एक बार उद्गार होने के बाद लंबे समय तक उद्गार नहीं होता परन्तु विस्फोट की संभावना बनी रहती है उन्हें सुषुप्त ज्वालामुखी कहते हैं। जैसे – इटली का विसुवियस इसका प्रमुख उदाहरण है।

प्रश्न 15.
मृत ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर:
ये वे ज्वालामुखी हैं जिनमें एक बार उद्गार होने के बाद भविष्य में कोई उद्गार नहीं होता है। उसे मृत ज्वालामुखी कहते हैं । जैसे इरान का कोह सुल्तान, म्यांमार का पोपा-हवाई द्वीप का मोनालोशा इसके प्रमुख उदाहरण हैं ।

प्रश्न 16.
अपसारी प्लेट किनारों को रचनात्मक या गठनकारी प्लेट किनारा क्यों कहते हैं?
उत्तर:
अपसारी प्लेट किनारों के सहारे जब दो प्लेटें एक दूसरे के विपरीत दिशा में गतिशील होती हैं तो इनके मध्य भूपटल पर दरार का निर्माण होता है। इस दरार से भू-गर्भ का मैग्मा भू-पृष्ठ पर आकर नए भूपटल का निर्माण करता है। इसीलिए अपसारी प्लेट किनारों को रचनात्मक प्लेट किनारा कहते हैं।

प्रश्न 17.
अभिसारी प्लेट किनारों को विनाशात्मक प्लेट किनारा क्यों कहते हैं?
उत्तर:
जब दो प्लेटें आमने-सामने संचालित होकर टकराती हैं, तो इनके सीमान्त क्षेत्र को अभिसारी प्लेट किनारा. कहते हैं। टकराव के कारण अधिक घनत्व की भारी प्लेट का अग्र किनारा कम घनत्व की हल्की प्लेट के नीचे मेण्टल में क्षेपित होकर नष्ट हो जाता है। चूँकि यहाँ प्लेट का विनाश होता है, इसीलिए इसे विनाशात्मक प्लेट किनारा कहते हैं।

प्रश्न 18.
उत्तप्त स्थल (Hot Spot) का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
प्लेट के नीचे गुरुमण्डल में कहीं-कहीं रेडियो सक्रिय तत्वों की अधिकता के कारण भूतापीय ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है। यह ऊर्जा संवहनीय धाराओं द्वारा ऊपर उठती है तथा जिस स्थान पर प्लेट की निचली सतह तक आती है वहाँ उत्तप्त स्थल (Hot Spot) का निर्माण होता है।

प्रश्न 19.
उष्ण झरना (Hot Spring) क्या है ?
उत्तर:
उष्ण झरना वे जलस्रोत हैं जिनसे गर्म जल अनवरत रूप से निकलता रहता है। इस प्रकार के उष्ण जलस्रोत प्राय: ज्वालामुखी प्रदशों में पाए जाते हैं, परन्तु कभी-कभी ये उन क्षेत्रों में भई देखने को मिलते हैं जहाँ ज्वालामुखी नहीं पाए जाते हैं, जैसे- बिहार के मुंगेर का सीताकुंड ।

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प्रश्न 20.
गीजर क्या है ?
उत्तर:
गीजर गर्म जल का स्रोत होता है, जिससे समय-समय पर गर्म जल तथा वाष्प फव्वारे के रूप में निकलता रहता है। जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित येलोस्टोन नेशनल पार्क का ओल्ड फेथफुल गीजर ।

प्रश्न 21.
प्रशान्त महासागर के अग्निवलय से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विश्व के लगभग दो तिहाई ज्वालामुखी प्रशान्त महासागर के दोनों तटीय भागों तथा समुद्री द्वीपों के सहारे पाए जाते हैं, जो इसे चक्र की तरह घेरु हुए हैं। इस ज्वालामुखी श्रृंखला को प्रशान्त महासाग का अग्निवलय या ज्वालावृत्त कहते हैं ।

 विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्लेट संचरण सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
हमारी पृथ्वी की ऊपरी आवरण बहुत कठोर, ठोस खंडों एवं भूप्लेटों में विभक्त है। इन प्लेटों की मोटाई इनकी आयतन के अनुपात में कम होती है। महादेश महासागर अथवा महादेश व महासागर दोनों तरह का अंश मिलकर ही प्लेट का निर्माण कर सकते हैं। महासागरीय प्लेटों की अपेक्षा महादेशीय प्लेटों की मोटाई अधिक होती है एवं सभी प्लेटें गतिशील होती है।

ये प्लेट एक प्लास्टिकनुमा सतह पर तैर रहे हैं। इनके बीच-बीच में मध्यम एवं छोटे आकार के प्लेटें भी आती रहती हैं। इस कारण इन प्लेटों के ऊपर स्थित महादेश या महासागर भी संचरित होते रहते हैं। भू-पृष्ठ से 100 से 200 किमी० की गहराई में वाह्य गुरुमंडल के ऐस्योनेस्फीयर का तापमान 1500°C है। इस तापमान में स्थित शिला या चट्टान संपूर्ण या आंशिक रूप से पिघल कर तरल अवस्था में आ जाता है।

ऊपरी स्तर के दबाव के कारण भूगर्भ में मौजूद ये पदार्थ ऊपर की ओर अग्रसर होते हैं। इस प्रकार ताप के परिवहन में एक परिचालन स्रोत बनता है। इस तरह से परिचालन स्रोत जो आस-पास स्थित होते हैं के मध्य में ऊर्ध्वमुखी स्रोत के ऊपर स्थित प्लेटें एक दूसरे से दूर होती हैं।

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प्रश्न 2.
नवीनि मोड़दार पर्वतों को नवीन किसलिए कहा जाता है?
उत्तर:
नवीन मोड़दार पर्वत(New Fold Mountain) : पृथ्वी के आन्तरिक शक्तियों के कारण महादेशीय प्लेटों के संघर्षण से पृथ्वी के अधिकांश मोड़दार पर्वतों का निर्माण होता है। इनमें प्रमुख अपलेसियन, युराल, अरावली जैसे पर्वतों का निर्माण लगभग 3-4 करोड़ वर्ष पहले हुआ है। हिमालय, आल्पस, एण्डिज इन पर्वतों का निर्माण 40 लाख वर्ष पहले हुआ और इन मोड़दार पर्वतों की निर्माण की प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हुई है।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 2 परिवर्तनशील पृथ्वी 3

इस कारण इनमें उत्थान की क्रिया चलती रहती है। पृथ्वी के निर्माण काल से वर्तमान तक के समय को भू-तात्विक काल कहा जाता है। इसके सापेक्ष में 40 लाख वर्ष पहले का समय नगण्य प्रतीत होता है। इसलिए इस समय के मोड़दार पर्वतों को नवीन एवं 3-4 करोड़ वर्ष पुराने पर्वतों का प्राचीन कहा जाता है। इसलिए हिमालय विश्व का सबसे नवीन मोड़दार पर्वत है और अरावली विश्व का सबसे प्राचीन मोड़दार पर्वत है। इनके अलावा एण्डिज विश्व का सबसे लम्बा मोड़दार पर्वत है।

प्रश्न 3.
प्लेट किनारे और ज्वालामुखी उद्गार के क्या संबंध हैं ?
उत्तर :
अभिसारी प्लेट किनारा के बराबर नीचे की ओर खिसकने वाली महासागरीय प्लेट का कुछ अंश गल कर दरारों के मार्ग में लावा बन कर बाहर निकलता है। प्रशांत महासागर की घाटी में इस तरह की अभिसारी प्लेट किनारा ज्यादा पाये जाते हैं। लगभग (80 प्रतिशत) अग्नि उद्गार बनकर बाहर निकलता है। ठीक इसी प्रकार अपसारी प्लेट किनारा मध्य सामुद्रिक शैलियां या गर्त में मिलने पर समुद्र के नीचे अविरत रूप से अग्निपात घटित होता है। स्थल भाग में इस तरह के प्लेटों से पृथ्वी का 15% भू-भाग जीवंत होता है।

पृथ्वी के 5 प्रतिशत आग्नेयगिरि प्लेट के मध्य स्थल के उत्ताप केन्द्र इसके ऊपर अवस्थित होते हैं। भू-गर्भ की गहराई में तेज सक्रियता की उत्ताप के वृद्धि में ही ऐसे स्थलों का निर्माण होता है। यहीं से ऊर्ध्वमुखी परिचालन सोत के माध्यम से मैग्मा का उद्गार होता है। गुरुमंडल में स्थित इन स्थानों की स्थिति निश्चित है एवं प्लेटों की संचरण या स्थान परिवर्तन होने पर भी इसकी स्थिति नहीं बदलती है।

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प्रश्न 4.
विश्व के भू-कंप प्रभावित क्षेत्रों का वर्णन करो ?
उत्तर:
विश्व के अधिकांश भूकंप क्षेत्र ज्वालामुखी क्षेत्रों अथवा नवीन मोड़दार पर्वतों के क्षेत्रों में ही पाये जाते हैं।

(i) हमारी पृथ्वी पर अधिकांश जीवंत भूकंष ज्वालामुखी प्रशान्त महासागर के चारों ओर के समुद्र के तटीय भाग सम्मिलित हो। इसी से इसे प्रशान्त का अग्निवृत्त (Feiory Ring of Pacific) कहते हैं। यहां पर ज्वालामुखी विस्फोटों से भूकंप आते हैं। पृथ्वी के लगभग 40% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं।

(ii) यह क्षेत्र युरेसिया महाद्वीप के बीच नवीन मोड़दार पर्वतों के सहारे पश्चिम से पूर्व तक फैला है। चहाँ प्राय: विवर्तनिक (Tectonic) एवं भू-संतुलन सम्बन्धी (Isostetic adjustment) क्रियाओं के कारण/भूकंप आते रहते हैं। इस क्षेत्र में विश्व का 34% भूकंप आते हैं।

(ii) कठोर चट्टानों से बने हुए अति प्राचीन भागों का भू-संतुलन अब स्थिर हो चुका है। अत: वे भूकंों से अप्रभावित रहते हैं। ये सब प्राचीन गौण्डावानालैण्ड, अंगारालैण्ड तथा लारोशिया भूमि के अंग हैं। दक्षिण भारत का पठार, ब्राजील का पठार, कनाडा एवं उत्तरी रूस आदि ऐसे ही क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों को भूकपशून्य क्षेत्र कहा जाता है।

प्रश्न 5.
ज्वालामुखी के प्रभावों का वर्णन करो :-
उत्तर:
ज्वालामुखी का प्रभाव : ज्वालामुखी पृथ्वी की आन्तरिक शक्ति का बाह्य रूप है। ऐसी घटना से जहाँ पृथ्वी की भू-प्रकृति, जलवायु में बड़ा परिवर्तन घटित होता है, वहीं दूसरी ओर जीवन सम्पात्ति, ध्वंस जैसी विपदा भी आती है। विध्वंसकारी ज्वालामुखियों या अग्निपात के कारण विश्व के बहुत से भू-भाग लुप्त हो चुके हैं। विसुवियस ज्वालामुखी विस्फोट में प्राचीन रोम का पम्पई शहर बहुत कम समय में नष्ट हो गया था। महादेशीय क्षेत्रों में प्रतिवर्ष 50 से भी अध्रिक

शक्तिशाली ज्वालामुखो का विस्फोट होता है। मनुष्य के जानकारी के पहले ही ये विशाल विस्फोट व लावास्ताव होने लगते हैं। 1902 में माउण्ट पिलि तथा 1980 में सेन्ट ह्वेलन्स में आने वाले ऐसे ही विस्फोटों में जन धन की हानि होती है। साथ ही वायुमंडल के ओजोन स्तर की पर्याप्त क्षति होती है। सन् 1883 में क्राकातोया, 1991 ई० में माउण्ट पिनाहक के विस्फोरण से गैस, भस्म, धुआँ के उठने से बनने वाले, विशाल मेघों ने पृथ्वी के वायुमण्डल को ढंक लिया जिसके कारण सूर्य का प्रकाश और ताप पृथ्वी तक पहुँचने में कठिनाई हुई।

समुद्र के नीचे होने वाली ऐसे विस्फोटों से तटीय अंचलों में जल प्लावन या सुनामी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। सन् 1983 में क्राकातोआ के विस्फोरण से आने वाली सुनामी में लगभग 40,000 लोगों की मृत्यु हुई। आग्नेय गिरि से संलग्न क्षेत्रों में उष्ण झरने, गीजर से अनेक बार मूल्यवान रत्न एवं खनिजों की भी प्राप्ति होती है। दक्षिण अफ्रीका का किम्बर ले क्षेत्र ऐसा ही क्षेत्र है। जहाँ हीरे की खुदाई होती है।

प्रश्न 6.
भूकंप के विनाशकारी प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
भूकंप के विनाशाकारी प्रभाव :- प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप सबसे भीषण एवं विनाशकारी होते हैं। ये हमारे सामने क्षण भर में प्रलय का दृश्य उपस्थित कर देते हैं।
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(i) घन जन की हानि :- भूकंप द्वारा थोड़े समय में जितनी अधिक धन-जन की हानि होती है उतना किसी अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नहीं होता है। 30 सितम्बर 1993 ई० में महाराष्ट्र राज्य के लातुर एवं उस्मानावाद जिलों में आये भूकंप से लगभग 20,000 लोग मारे गये थे। 26 जनवरी 2001 में गुजरात के कच्छ क्षेत्र में आये भूकंप में 10 हजार से अधिक लोग मारे गये।

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(ii) धरातल पर दरारों का पड़ना :- भूकंप के कारण धरातल पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ जाती हैं। जिनमें कभी-कभी पूरा नगर या गाँव समा जाता है।

(iii) जहरीली गैसों का निकलना :- भूकंप के कारण कभी-कभी पृथ्वी के भूगर्भ से जहरीली गैसे निकलती हैं जो पशुओं एवं मनुष्यों के लिए बड़ी घातक होती हैं।

(iv) नदियों में बाढ़ का आना :- नदी में भूकप आने के कारण कभी-कभी उसकी तली उठ जाती है। जिससे नदी का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और उसमें भयकर बाढ़ आ जाती है।

(v) समुद्रों में लहरों का उठना :- भूकप आने पर समुद्र में भयकर एवं विनाशकारी लहरे उठती हैं। ये लहरे समुद्र तट पर पहुँचकर वहाँ विनाश-लीला शुरू कर देती है। भूकप के कारण सागर तली में उथल-पुथल हो जाने से सागर जल में उत्पम्न लहरों को जापान में सुनामिस (Sunamis) कहते हैं।

(vi) परिवहन में बाधा :- भूकंप से रेल की पटरियाँ मुड़ जाती हैं तथा पुल और टेलीफोन के तार दूट जाते हैं जिससे परिवहन में बाधा पडतती है।

(vii) भूमि का कृषि के अयोग्य होना :- भूकप के कारण कहीं-कहीं उपजाऊ स्थानों पर बालू फैल जाता है साथ ही भूमि के धंसने से कुछ भाग जलमग्न हो जाते हैं। इस प्रकार भूमि कृषि के अयोग्य हो जाती है।

प्रश्न 7.
भूकंष के लाभकारी प्रभाव का वर्णन करो :-
उत्तर :
भूकंष के लाभकारी प्रभाव :- भूकंप से जहां हानि या विनाश होता है वहीं भूकंप से कई लाभ भी है।

(i) नये स्थल रूपों का निर्माण :- भूकंप के कारण कहीं भूमि ऊपर उठ जाती है जिसे नये द्वीप या मैदान बन जाते है। कहीं भूमि धंस जाती है जिससे झोलें बन जाती हैं। ये द्वीप, मैदान व झीलें मानव जीवन के लिए बड़े ही उपयोगी होते हैं।

(ii) उपजाऊ मैदान का निर्माण – भूकंप के कारण कभी-कभी लावा बहने लगता है। यह लावा ऊपजाऊ मिट्टी को जन्म देता है। भूकप के कारण कभी-कभी सागरतटीय जलमग्न भूमि समुद्र से बाहर निकल आते हैं जिससे उपजाऊ तटीय मैदानों की रचना हो जाती है।

(iii) ऊँचे पर्तवों का निर्माण :- भू-सन्तुलन सम्बन्धी भूकंपों से ऊँचे पर्वतों की रचना हो जाती है। ये ऊँचे पर्वत भाप भरी हवाओं को रोक कर वर्षा कराने में सहायता करता है।

(iv) खाड़ियों का निर्माण :- भूकप के कारण कहीं-कहीं पहाड़ और कही-कहीं खाड़ियाँ बन जाती हैं। पहाड़ वर्षा में सहायक होता है और खाड़ियों पर उत्तम बन्दरगाह बन जाते हैं।

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(v) नये जल-स्रोतों का निर्माण — भूकप के प्रभाव से धरातल के चट्टानों में अचानक मोड़ (Folding) या भांशन (Faulting) की क्रिया होने से नये जल-स्रोत बन जाते हैं। ये जल-सोत अनेक प्रकार से मानव के लिए उपयोगी है। भूकप के कारण कभी-कभी धरातल के फट जाने से गन्धकीय जल-स्रोत फूट जाते हैं जिसमें स्नान करने से चर्म रोग नष्ट होता है।

(vi) खनिज पदार्थो की प्राप्ति की सुविधा – भूकंप के कारण भू-गर्भ में छिपे खनिज ऊपर उठकर धरातल के समीप आ जाते हैं। जिन्हें खोदकर निकालना आसान होता है।

प्रश्न 8.
उद्गार की अवधि के आधार पर ज्वालामुखी कितने प्रकार के होते हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर –
उद्गार की अवधि के अनुसार ज्वालामुखी का वर्गीकरण (Classification based on duration of eruption) :- उद्गार की अवधि के आधार पर ज्वालामुखी पर्वतों के निम्नलिखइत तीन भेद हैं :-

(i) सक्रिय ज्वालामुखी (Active volcanoes) :- वे ज्वालामुखी जिनके मुख से सदैव लावा, राख, घूल, घुआँ, जलवाष्प, गैसें अथवा शैलखण्ड निकला करते हैं अथवा किसी भी समय उद्गार की आशा की जा सकती है, उन्हें सक्रिय ज्वालामुखी कहते है। इनका मुख सदैव खुला रहता है। जैसे इटली का एटना, स्ट्राम्बोलियन एवं विसूवियस तथा भारत के अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह के बारेन द्वीप के ज्वालामुखी।
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(ii) प्रसुप्त ज्वालामुखई (Dormant volanoes) :- वे ज्वालामुखी दो दीर्घकाल तक शान्त रहने के बाद अचानक किसी समय सक्रिय हो जाते हैं, उन्हें प्रसुप्त ज्वालामुखी कहते हैं। जैसे जापान काफ्यूजीयामा, मैक्सिको का पोपोकेटेपेटी (Popocatepeti) तथा इन्डोनेशिया का क्राकातोआ।

(iii) शान्त या मृत ज्वालामुखी (Extinct volcanoes) :- वे ज्वालामुखी जिनसे अब कोई उद्गार नहीं होता और न तो भविष्य में उद्गार होने की कोई आशा ही रहती है, उन्हें मृत या शांत ज्वालामुखी कहते हैं। इनके मुख ज्वालामुखी पदार्थों एवं लावा के जमने से बन्द हो जाते हैं। बर्मा का पोपा शान्त या मृत ज्वालामुखी का उदाहरण है।

प्रश्न 9.
विश्व के प्रमुख भूकम्प प्रवण क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व के अधिकांश भूकम्प क्षेत्र ज्वालामुखी क्षेत्रों तथआ नवीन मोड़गदार पर्वत जैसे कमजोर एवं अस्थिर क्षेत्रों में आते हैं। इस आधार पर विश्व के भूकम्प प्रवण क्षेत्रों को निम्नलिखित तीन पेटियों में विभाजित किया गया है –

(i) प्रशान्त महासागरीय तटीय पेटी (Circum Pacific Belt) :- इस पेटी के अन्तर्गत प्रशान्त महासागर के चारों ओर के तटीय भाग सम्मिलित हैं। यह विश्व का सबसे विस्तृत भूकम्प क्षेत्र है जहाँ समस्त पृथ्वी के 70% भूकम्प आते हैं। यह ज्वालामुखी क्षेत्रों की प्रमुख पेटी है इसीलिए प्राशन्त महासागरीय अग्निवलय (Pacific Ring fire) कहते हैं। यहाँ ज्वालामुखियों के विस्फोटों के कारण भूकम्प आया करते हैं।

(ii) मध्य महाद्वीपीय पेटी (Mid Continental Belt) :- यह पेटी महाद्वीपीय प्लेट अभिसरण क्षेत्र में नवीन मोड़दार पर्वतों के सहारे भूमध्य सागर से लेकर आल्पस, काकेशश, हिमालय से होते हुए पूर्वी-द्वीप समूह तक विस्तृत है। यहाँ विवर्तनिक (Tectonic) एवं भू-संतुलन सम्बन्धी क्रियाओं के कारण भूकम्प आते हैं। विश्व की 20 प्रतिशत भूकम्पीय घटनाएँ इस क्षेत्र में घटित होती हैं।

(iii) मध्य अटलांटिक पेटी (Mid Atlantic Belt) – यह पेटी मध्य अटलांटिक कटक के सहारे उत्तर में आइसलैण्ड से लेकर दक्षिण में बोवेट द्वीप तक विस्तृत है। यहाँ भूकम्प का मुख्य कारण प्लेटों के अपसरण के कारण ज्वालामुखी का दरारी उद्गार है।

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बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
पृथ्वी का भू-पटल चारों ओर समान है :-
(a) स्थिर
(b) अस्थिर
(b) व्यवक्रित
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) अस्थिर

प्रश्न 2.
सबसे पहले प्लेट शब्द का प्रयोग किया था :-
(a) वेगनर
(b) पारकर
(c) जे॰ड़ी॰ विलसन
(d) निकोलसन
उत्तर :
(c) जे०डी० विलसन

प्रश्न 3.
हमारी पृथ्वी पर बड़ी प्लेटों की संख्या है :-
(a) 18
(b) 6
(c) 10
(d) 15
उत्तर :
(b) 6

प्रश्न 4.
पृथ्वी पर सभी प्लेटों की स्थित है :-
(a) गतिवान
(b) अस्थिर
(c) स्थिर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) स्थिर

प्रश्न 5.
प्लेट संचरण तथ्यों का पता चला –
(a) 1970 में
(b) 1967 ई० में
(c) 1980 में
(d) 1990 में
उत्तर :
(b) 1967 ई० में

प्रश्न 6.
प्लेट संचरण का विस्तृत व्याख्या किया था –
(a) टामेली ना
(b) विल्सन ने
(c) मोर्गन ने
(d) पारकर ने
उत्तर :
(c) मोर्गन ने

प्रश्न 7.
जिस स्थान पर प्लेटें एक दूसरे से दूर होती जाती है, उसे कहा जाता है :
(a) गठनकारी प्लेट किनारा
(b) संगठन प्लेट किनारा
(c) अपसारी प्लेट किनारा
(d) अभिसारी प्लेट किनारा
उत्तर :
(c) अपसारी प्लेट किनारा

प्रश्न 8.
अफ्रीकन और अमेरिकन महाद्वीपों की प्लेटों के परस्पर दूर हटने से बनने वाली गर्त का नाम है।
(a) प्रशान्त महासागर
(b) अटलांटिक महासागर
(c) अरब सागर
(d) हिन्द महासासागर
उत्तर :
(b) अटलांटिक महासागर

प्रश्न 9.
जिस स्थान पर प्लेट परस्पर समानांतराल में पास-पास संचरित होता है वह क्षेत्र कहलाता है :-
(a) ट्रान्सफार्म प्लेट किनारा
(b) गरुन कारी प्लेट किनारा
(c) एण्डीज प्लेट किनारा
(c) तटवर्ती किनारा।
उत्तर :
(a) ट्रान्सफार्म प्लेट किनारा

प्रश्न 10.
भारतीय और यूरोशियाई प्लेटों के संघर्ष से जिस पर्वत श्रेणी का निर्माण हुआ है उसका नाम है :-
(a) आल्पस
(b) हिमालय
(c) एण्डीज
(d) एवरेस्ट
उत्तर :
(b) हिमालय

प्रश्न 11.
एक सक्रिय ज्वालामुखी का नाम है :-
(a) एटना
(b) बिसुवियस
(c) स्ट्राबोली
(d) प्यूजियामा
उत्तर :
(c) स्ट्राबोली

प्रश्न 12.
एक प्रसुप्त ज्वालामुखी का नाम है :-
(a) फ्यूजियामा
(b) घाटकुटिन
(c) बैरन
(d) एटना
उत्तर :
(a) फ्यूजियामा

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प्रश्न 13.
एक मृत ज्वालामुखी का उदाहरण है :-
(a) एटना
(b) घाटकुटिन
(c) क्राकाटोआ
(d) बैरन
उत्तर :
(b) घाटकुटिन

प्रश्न 14.
भूकंप को मापने वाला यंत्र है :-
(a) सिस्मोग्राफी
(b) सिस्मोग्राफ
(c) बैरोमीटर
(d) थर्मोमीटर
उत्तर :
(b) सिस्मोग्राफ

प्रश्न 15.
भू-गर्भ के नीचे जिस स्थान से भूकंप का उद्गम होता है। वह कहलाता है :-
(a) भूकप तरंग
(b) भूकंप अन्तः केन्द्र
(c) भूकंप का उपकेन्द्र
(d) भूकंष का बाह्म केन्द्र
उत्तर :
(b) भूकंप अन्त: केन्द्र

प्रश्न 16.
वेगनर ने समस्त संलग्न स्थल भाग का नाम रखा –
(a) पैंजिया
(b) पैंथालालास
(c) लारेशिया
(d) गोण्डवाना
उत्तर :
(a) पैंजिया

प्रश्न 17.
पृथ्वी के अधिकांश जीवंत या जागृत ज्वालामुखी एक चक्र की तरह घेरे हुए हैं –
(a) प्रशान्त महासागर के तटिय क्षेत्र में
(b) अटलाण्टिक महासागर के तटिय क्षेत्र में
(c) हिन्द महासागर के तटिय क्षेत्र में
(d) आर्कटिक महासागर के तटिय क्षेत्र में
उत्तर :
(a) प्रशान्त महासागर के तटिय क्षेत्र में

प्रश्न 18.
एस्थेनोस्फेयर या दुर्बलता मण्डल का तापमान है –
(a) 1500°C
(b) 1000°C
(c) 2000°C
(d) 800°C
उत्तर :
(a) 1500°C

प्रश्न 19.
मध्य महासागरीय कटकों (Mid-ocenic Ridges) का निर्माण होता है –
(a) अपसारी प्लेट किनारों के सहारे
(b) संरक्षी या निरपेक्ष प्लेट किनरों के सहारे
(c) अभिसारी प्लेट किनारों के सहारे
(d) इनमें से कहीं भी नहीं
उत्तर :
(a) अपसारी प्लेट किनारों के सहारे –

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प्रश्न 20.
कैलिफोर्निया का सैन ऑन्ड्रिज फॉल्ट (San – Andreas fault) उदाहरण –
(a) अपसारी प्लेट किनारा का
(b) निरपेक्ष या संरक्षी प्लेट किनारा का
(c) अभिसारी प्लेट किनारा का
(d) इनमें से किसी का भी नहीं
उत्तर :
(b) निरपेक्ष या संरक्षी प्लेट किनारा का

प्रश्न 21.
भारत का बैरन है, एक –
(a) सुप्त ज्वालामुखी
(b) सक्रिय ज्वालामुखी
(c) मृत ज्वालामुखी
(d) गर्म झरना
उत्तर :
(b) सक्रिय ज्वालामुखी

प्रश्न 22.
विश्व के 80 प्रतिशत ज्वालामुखी पाए जाते हैं –
(a) अपसारी प्लेट किनारों के क्षेत्र में
(b) संरक्षी प्लेट किजारों के क्षेत्र में
(c) अभिसारी प्लेट किनारों के क्षेत्र में
(d) उत्ताप केन्द्र (Hot spot) पर
उत्तर :
(c) अभिसारी प्लेट किनारों के क्षेत्र में

प्रश्न 23.
सर्वाधिक विनाशकारी भूकम्पीय तरंग है –
(a) द्वितीय तरंग या ‘S’ तरंग
(b) प्राथ्थमिक तरंग या ‘p’ तरंग
(c) Pg तरंग
(d) पृष्ठ तरंग
उत्तर :
(d) पृष्ठ तरंग

प्रश्न 24.
विश्व के 70 प्रतिशत भू-कम्प आते हैं –
(a) मध्य महाद्वीपीय पेटी में
(b) प्रशान्त महासागर के तटीय क्षेत्रों में
(c) मध्य अटलाण्टिक पेटो में
(d) अन्य क्षेत्रों में
उत्तर :
(b) प्रशान्त महासागर के तटीय क्षेत्रों में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. हमारी पृथ्वी का भूपटल सर्वत्र ________अवस्था में नहीं है।
उत्तर : स्थिर

2. हमारी पृथ्वी की आंतरिक शक्ति के कारण ________पर परिवर्तन होता है।
उत्तर : भू-पृष्ठ

3. ________के विघनट से स्थल भाग दूटकर अलग-अलग दिशा में संचालित हो गया।
उत्तर : पैंजिया

4. हमारी पृथ्वी पर ________प्रमुख प्लेटें हैं।
उत्तर : 7

5. हमारी पृथ्वी पर से ________भी अधिक ज्वालामुखी है।
उत्तर : 1000

6. अम्लीय लावा में की ________मात्रा अधिक होती है।
उत्तर : सिलिका

7. ________के संपर्क में आकार भू-गर्भ का जल गर्म होकर उष्ण झरना के रूप में बाहर निकलता है।
उत्तर : मैग्मा

8. क्षारीय लावा में की ________मात्रा कम होती है।
उत्तर : सिलिका

9. हमारी पृथ्वी के निर्माण काल से वर्तमान तक के ________समय को कहते हैं।
उत्तर : भू-तात्विक

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10. हिमालय, आल्पस ________श्रेणी के पर्वतों के प्रमुख उदाहरण हैं।
उत्तर : मोड़दार

11. माउण्ट फ्यूजियामा ________पर्वत है।
उत्तर : ज्वालामुखी

12. प्लेटों की मोटाई उनके ________के अनुपात में कम है।
उत्तर : आयतन

13. अभिसारी प्लेट किनारों को ________प्लेट किनारा भी कहते हैं।
उत्तर : विनाशात्मक

14. सिसली का माउण्ट एटना एक ________ ज्वालामुखी है।
उत्तर : सक्रिय

15. ________ ज्वालामुखी अत्यन्त खतरनाक होते हैं ।
उत्तर : सुप्त

16. ________ज्वालामुखी में भविष्य में पुन: उद्गार की सम्भावना बहुत कम है।
उत्तर : मृत

17. मोनालोया ________लावा से निर्मित ज्वालामुखी पर्वत है ।
उत्तर : क्षारीय

18. संयुक्त राज्य अमेरिका के इयालोस्टोन नेशनल पार्क का ________गीजर विश्व प्रसिद्ध है।
उत्तर : ओल्ड फेथफुल

19. भूकम्प की प्रवणता के अनुसार भारत को ________अंचलों में विभिक्त किया गया है।
उत्तर : पाँच

20. ज्वालामुखी विस्फोट से वायुमण्डल के ________स्तर को क्षति पहुँचती है।
उत्तर : ओजोन

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. हमारी पृथ्वी का धरातल स्थिर है।
उत्तर : False

2. भारत का एक ज्वालामुखी पर्वत बैरन है।
उत्तर : True

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3. पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के कारण धरातल पर परिवर्तन होता है।
उत्तर : True

4. हमारी पृथ्वी पर 17 प्रमुख प्लेटें हैं।
उत्तर : False

5. पृथ्वी की प्लेटें गतिमान हैं।
उत्तर : True

6. कालांतर में पृथ्वी के संपूर्ण भाग आपस में मिले हुए थे जिसको पैजिया कहा जाता था।
उत्तर : True

7 ट्रांसफार्म प्लेट के किनारे पर न तो किसी नये भू-पृष्ठ का निर्माण होता है और न ही पुराने भू-पृष्ठ का विनाश होता है।
उत्तर : True

8. ट्रांसफार्म प्लेट के किनारे को ही निरपेक्ष प्लेट का किनारा कहा जाता है।
उत्तर : True

9. मोड़दार पर्वत महासगरीय प्लेटों के संघर्षण के कारण ही बनते हैं।
उत्तर : False

10. यूरोशिया और अफ्रीकी प्लेटों के संघर्ष के कारण ही हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है।
उत्तर : False

11. माउण्ट फ्यूजियामा जापान का एक मोड़दार पर्वत है।
उत्तर : False

12. इटली में स्थित विसुवियस ज्वालामुखी पर्वत है।
उत्तर : False

13. क्षारीय लावा में सिलिका की मात्रा कम होती है।
उत्तर : True

14. भू-गर्भ स्थित जिस स्थान से भूकंप की उत्पत्ति होती है उसे फोकस या अन्तः केन्द्र कहते हैं।
उत्तर : ……..

15. भूकंष का पूर्वाभास नहीं दिया जा सकता है।
उत्तर : True

16. विश्ष में सबसे ज्यादा भू-कंप परि-प्रसान्त पेटी में आता है।
उत्तर : False

17. भूगर्भ में जिस स्थान से भूकंप की उत्पत्ति होती है उसे भू-कंप का केन्द्र कहते हैं।
उत्तर : True

18. दक्षिण भारत का पठार भूकंप शून्य क्षेत्र है।
उत्तर : True

19. अपने निर्माण काल से ही पृथ्वी लगातार परिवर्तित होती आ रही है।
उत्तर : True

20. प्लेटों के ऊपर स्थित महादेश या महासागर स्थिर अवस्था में हैं।
उत्तर : False

21. प्रशान्त महासागरीय प्लेट वर्ष में 5 सें०मी० पश्चिम की ओर अग्रसर हो रही है।
उत्तर : False

22. भूगर्भ में स्थित गाढ़े तरल पदार्थ को लावा कहते हैं।
उत्तर : False

23. मैक्सिको का पारकुटिन एक मृत ज्वालामुखी है।
उत्तर : True

24. भूकम्प उत्पत्ति केन्द्र से प्रसारित होने वाले कम्पन्न को भूकम्प तरंग कहते हैं।
उत्तर : True

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25. रिक्टर स्केल पर ‘6’ की मात्रा वाले भूकम्प अधिक क्षति पहुँचाने वाले होते हैं।
उत्तर : True

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग

Detailed explanations in West Bengal Board Class 8 Geography Book Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 8 Geography Chapter 1 Question Answer – पृथ्वी का आंतरिक भाग

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
हमारी पृथ्वी का व्यास कितना है ?
उत्तर :
6370 किमी०

प्रश्न 2.
पृथ्वी की सबसे गहरे प्राकृतिक गर्त का नाम बताओ ।
उत्तर :
कोला उपद्वीप

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग

प्रश्न 3.
पृथ्वी के आन्तरिक भाग में प्रति 33 मि० की गहराई पर तापमान में किस दर से वृद्धि होती है ?
उत्तर :
1°C

प्रश्न 4.
तरल माध्यम में कौन-सी तरंग प्रवाहित होती है?
उत्तर :
S तरंग

प्रश्न 5.
पृथ्वी की केन्द्र की गहराई कितनी है ?
उत्तर :
6370 किमी० लगभग

प्रश्न 6.
बक्रेश्वर में किस प्रकार के जल का झरना है ?
उत्तर :
उष्ण जल का झरना ।

प्रश्न 7.
भू-ताप क्या है ?
उत्तर :
भू-ताप एक प्रकार की ऊर्जा है।

प्रश्न 8.
भू-पृष्ठ का औसत घनत्व कितना है?
उत्तर :
5.5. ग्रा० प्रति घन सेंमी०

प्रश्न 9.
रेखा का क्या नाम है ?
उत्तर :
गुटेनवर्ग वियुक्ति रेखा

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग

प्रश्न 10.
भू-पृष्ठ और गुरुमंडल के मध्य वियुक्ति रेखा का नाम बताओ ?
उत्तर :
मोहो वियुक्ति रेखा ।

प्रश्न 11.
शिलामंडल के नीचे और गुरुमंडल के ऊपर स्थित विशेष स्तर को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :
एस्थेनोस्फीयर

प्रश्न 12.
पृथ्वी का सबसे गहरा प्राकृतिक गर्त कहाँ स्थित है?
उत्तर :
उत्तरी पश्चिमी रूस में

प्रश्न 13.
भू – ताप शक्ति से किसका उत्पादन किया जा सकता है ?
उत्तर :
विद्युत का

प्रश्न 14.
सिमा परत में किन तत्वों की प्रधानता होती है?
उत्तर :
सिलिका तथा मैग्निशियम की

प्रश्न 15.
निफेसिमा की गहराई कितनी है ?
उत्तर :
700 2900 कि०मी०

प्रश्न 16.
क्रेफेसिमा एवं निफेसिमा के मध्य कौन सी वियुक्ति रेखा स्थित है?
उत्तर :
रेपेटी वियुक्ति रेखा

प्रश्न 17.
वाह्य केन्द्रमंण्डल एवं अन्तः केन्द्रमण्डल को अलग करने वाली वियुक्ति रेखा का क्या नाम है ?
उत्तर :
लेहमेन वियुक्ति रेखा

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग

प्रश्न 18.
भूगर्भ के किस भाग में दबाव, ताप एवं घनत्व सबसे अधिक है?
उत्तर :
अन्त: केन्द्र मण्डल में

प्रश्न 19.
समस्त पृथ्वी में किस तत्व की मात्रा सर्वाधिक है?
उत्तर :
लोहा की

प्रश्न 20.
पृथ्वी के कुल आयतन के कितने प्रतिशत भाग पर केन्द्र मण्डल का विस्तार है ?
उत्तर :
16 प्रतिशत भाग पर ।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
मैग्मा किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-पटल के अधिक दबाव के कारण भू-गर्भ के ये अति तप्त पदार्थ गैस तथा वाष्प से मिलकर तरल अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं। अत: इस अति तप्त चिपचिपे (Sticky) एवं पिघले (Moltem) पदार्थ को मैग्मा (Magma) कहते हैं।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग

प्रश्न 2.
लावा किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी कारण से अत्यंत गर्म एवं तरल इस पिघले एवं गैस रहति मैग्मा के भूगर्भ से बाहर निकलकर धरातल पर फैल जाता है उसे लावा (Lava) कहते हैं ।

प्रश्न 3.
भू-ताप शक्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-ताप एक प्रकार की शक्ति है। पृथ्वी के केन्द्र का ताप धीरे-धीरे बाहर की तरफ अर्थात् भू-पृष्ठ के ऊपरी आवरण की तरफ प्रवाहित होता रहता है, इस ताप शक्ति को ही भू-ताप शक्ति कहते हैं ।

प्रश्न 4.
सियाल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
सियाल (Sial) – यह परत 60 किलोमीटर से 300 किलोमीटर तक मोटी होती है। इस परत का निर्माण मुख्यत: सीलिका (Silica) तथा अल्यूमिनियम (Aluminium) तत्वों के योग से हुआ है। इसलिए इस परत का संक्षिप्त नाम सियाल (Sial) है। इसका घनत्व 27 है। अर्थात् यह पानी से 2.7 गुना भारी है। महाद्वीपों के नीचे इस पर परत का विस्तार मिलता है।

प्रश्न 5.
सिमा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
सिमा (Sima ) – इस परत का विस्तार सियाल परत के नीचें होता है। इसकी मोटाई 1000-2000 किलोमीटर तक होती है। इस परत का निर्माण सिलिका (Silica) तथा मैग्नेशियम (Magnesium) तत्वों से हुआ है । इसलिए इस परत को सिमा के नाम से पुकारा जाता है। इसका घनत्व 2.9 से 4.75 तक है। महासागरों के नीचे सिमा का विस्तार मिलता है । अतः कहा जाता है कि सभी महाद्वीप सिमा के ऊपर तैर रहे हैं।

प्रश्न 6.
निर्फ किसे कहते हैं?
उत्तर:
निफे (Nife) – यह भूगर्भ का केन्द्रीय निर्माण है। इसमें मुख्यत: निकिल (Nickel) तथा फेरियम (Ferium) अर्थात् लोहे जैसे कठोर धातुओं का योग है । इसका घनत्व 11 है।

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प्रश्न 7.
भू-पटल क्या है?
उत्तर:
भू-पटल (Earth’s crust)- पृथ्वी के ऊपरी ठोस एवं पतले आवरण को भू-पटल कहते हैं ।

प्रश्न 8.
वियुक्ति रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-पृष्ठ से केन्द्र तक जहाँ-जहाँ भूकंप तरंगों की गति वेग में परिवर्तन होता है, उस स्थान को भूगोलविद् वियुक्ति रेखा कहते हैं ।

प्रश्न 9.
पदार्थ का घनत्व क्या है?
उत्तर:
सभी पदार्थ का कुछ ना कुछ भार अवश्य होता है। इसलिए उसके परिमाप को पदार्थ का घनत्व कहा जाता है जो प्रति घन सें. मी० में व्यक्त किया जाता है ।

प्रश्न 10.
कनरांड वियुक्ति रेखा क्या है?
उत्तर:
सियाल और सिमा परतों के बीच की वियुक्ति रेखा को कनारड वियुक्ति रेखा कहते हैं ।

प्रश्न 11.
मैग्मा और लावा में क्या अंतर है?
उत्तर:
मैग्ना और लावा में निम्नलिखित अंतर है :-

मैग्मा लावा
(i) भू-गर्भ के अति तप्त चिपचिपे एवं पिघले पदार्थ को मैग्मा कहते हैं। (i) भू-पटल के दबाव के बढ़ने पर मैग्मा पिघलकर ऊपर आने लगता है इस पिघले गैस रहित मैग्मा को लावा कहते हैं ।
(ii) मैग्मा गैसयुक्त होता है । (ii) लावा गैस से मुक्त होता है।

प्रश्न 12.
भू-गर्भ की जानकारी प्राप्त करने के प्रमुख साधन कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
ज्वालामुखी उद्गार से निकले पदार्थों तथा भू-कम्पीय लहरों की गतिविधियों का अध्ययन करके हम भू-गर्भ की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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प्रश्न 13.
शिला मण्डल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
भू-पृष्ठ एवं गुरु मण्डल के ऊपरी भाग को लेकर शिला मण्डल का निर्माण हुआ है। इसकी गहराई प्राय: 100 कि०मी० है। इसमें ग्रेनाइट चट्टान की अधिकता तथा इसमें सिलिका एवं एल्यूमीनियम मुख्य रूप से पाए जाते हैं ।

प्रश्न 14.
क्रोफेसिमा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गुरु मण्डल का 30-700 कि०मी० का स्तर क्रोफेसिमा कहलाता है, क्योंकि इस स्तर में क्रोमियम (Cr), लोहा, (Fe) सिलिकन (Si) तथा मैग्नेशियम (Mg) तत्वों की अधिकता है।

प्रश्न 15.
निफेसिमा क्या है?
उत्तर:
गुरु मण्डल का 700-2900 कि०मी० तक का स्तर निफेसिमा कहलाता है, क्योंकि इस स्तर में निकेल (Ni), फेरियम अर्थात् लोहा (Fe) सिलिकन (Si) तथा मैग्नेशियम (Mg) तत्वों की अधिकता है।

प्रश्न 16.
वियुक्ति रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-पृष्ठ से केन्द्र तक जहाँ-जहाँ भूकम्पीय तरंगों की गति में परिवर्तन होता है, उस स्थान को भूगोलवेत्ता वियुक्ति रेखा (Discontinuity) वियुक्ति रेखआ द्वारा दो भिन्न-भिन्न उपादान एवं घनत्व के भू-स्तर अलग किए जाते हैं।

 विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
पृथ्वी के केन्द्रमण्डल या क्रोड की विभिन्न परतों का संक्षिप्त वर्ण करो ।
उत्तर:
केन्द्र मंडल या कोड (Centrosphere or core) : भू-गर्भ में स्थित इस भाग का निर्माण भारी या अधिक घनत्व वाले पदार्थों जैसे निकेल (Ni) और लोहे (Fe) के संयोग से हुआ है। इसलिए इस भाग को नीफे (Nife) कहते हैं । इसका औसत घनत्व 11.1 से 13.5 ग्राम प्रति घन सेंमी० है तथा इस भाग का तापमान लगभग 5500°C होता है और इस भाग को बैरिस्फेशर (Barysphere) भी कहा जाता है। इस भाग की औसत मोटाई 360 किमी० है । घनत्व के आधार पर भूगोलविदों ने इसे निम्न दो भागों में बांटा है।
WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग 1
(i) आन्तरिक क्रोड (Inner Core) – यह परत पृथ्वी के केन्द्र के ठीक चारों ओर स्थित है। एवं इसकी गहराई 5200 किमी० से 6270 किमी० तक होती है। इस भाग में तापक्रम अधिक होने के बावजूद अधिक घनत्वीय पदार्थों के प्रचंड दबाव के कारण यहां पदार्थ ठोस अवस्था में पाये जाते हैं।

(ii) वाह्य केन्द्रमण्डल या क्रोड (Outer Centrosphere or Core) :- आन्तरिक केन्द्र मंडल के चारों तरफ जो परत स्थित है उसे वाह्य केन्द्र मंडल या क्रोड कहते हैं। इसकी औसत मोटाई 2900 किमी० से 5200 किमी० तक होता है। केन्द्र मंडल की तुलना में यहां चाप, ताप और घनत्व कम होता है। इस भाग का औसत घनत्व5 से 12 तक होता है। तापमान अधिक होने के कारण यहाँ पदार्थ तरल अवस्था में पाये जाते हैं।

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प्रश्न 2.
पृथ्वी के गुरुमंडल या प्रवाह का वर्णन करो।
उत्तर:
गुरुमंडल या प्रवाह (Manter) :- भू-पृष्ठ तथा केन्द्रमण्डल के मध्य एक समान घनत्व वाले स्तर को गुरु मंडल या प्रवाह कहते हैं जिसकी मोटाई लगभग 2000 किमी० से 2900 किमी० तक है। इसका तापमान 1300C° से 2750C° के मध्य पाया जाता है। इस भाग का घनत्व इसे 3.4 तक है। तथा इस भाग में मुख्यत: सिलिकन (Si) और मैग्नेशियम (Mg) तत्वों की प्रधानता अधिक होती है। इसके अलावा निकेल और लोहे युक्त पदार्थ भी पाये जाते हैं। इसलिए गुरुमंडल के निचले भाग को निफेसिमा कहते हैं।

प्रश्न 3.
पृथ्वी के भू-पृष्ठ का वर्णन करो।
उत्तर:
भूपटल (Earth’s Crust) : पृथ्वी के ऊपरी ठोस एवं पतले आवरण को भू-पटल कहते हैं। इसका ऊपरी आवरण आतंरिक भाग की अपेक्षा अधिक पतला होता है।
महासागर के नीचे भू-पृष्ठ की गहराई 6 किलोमीटर है और महाद्वीप के नीचे भू-पृष्ठ की गहाई60-70 किलोमीटर होती है। महासागर के नीचे मुख्यत: सिलिका (si) और मैग्नेसियम (Mg) से बनी एक परत है। जिसे सिमा (SIMA) कहते हैं।

यह अन्य परतों (Layers) की तुलना में अधिक भारी होता है। यह परत बेसाल्ट चट्टानों से बनी है। अतः यह आग्नेय चट्टान है। इसका घनत्य 9 से 4.75 तक होता है। महाद्वीपों के नीचे स्थित परत का निर्माण मुख्य रूप से सिलिकन Si) और एल्युमिनियम (AI) से हुआ है। अत: इस परत का नाम सियाल है एवं यह परत भू-पृष्ठ का ऊपरी परत है। इस परत का निर्माण ग्रेनाइट श्रेणी की आग्नेय चट्टान से हुआ है।

यह परत सिमा परत से हल्का होता है और साथ ही यह परत हर जगह एक समान नहीं है। इसका औसत घनत्र. 7 है। महाद्वीपों के नीचे इसका विस्तार पाया जाता है। भू-पृष्ठ के चट्टान कई तरह के खनिजों से समृद्ध हैं। भू-पृष्ठ का ऊपरी भाग मिट्टी है। भू-पृष्ठ के अधिकांश भाग (47 प्रतिशत) में ऑक्सीजन गैस मिली है। वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा से अधिक ऑक्सीजन भू- पृष्ठ के साथ रासायनिक अवस्था में घुली मिली है। भू-पृष्ठ का द्वितीय प्रधान उपादान सिलिकन है।
WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग 2

प्रश्न 4.
भूकंप क्या है ? विभिन्न भूकंपीय तरंगों का वर्णन करो।
उत्तर:
भूकंप (Earthquakes) : किसी ज्ञात या अज्ञात वाह्य या आन्तरिक कारण से धरातल के अचानक कांप उठने की घटना को भूकंप कहते हैं।
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप तरंगों का निरीक्षण कर भूमि के भितरी भाग के संबंध में जानकारी प्राप्त की जाती है। भूकंप तरंगें जब विभिन्न पदार्थों से होकर गुजरती है तो उस पदार्थ की कहीं दीर्घ, कहीं छोटी, कहीं तीव्र, कहीं धीमी गति उत्पन्न होती है। भू-कंप तरंग (P व S) भूभाग के भीतरी हिस्से में कहां किस गति से प्रवाहित होती है इससे पृथ्वी के आन्तरिक भाग के बारे में परिचय देते हैं। (P) तरंग भू-गर्भ में ठोस और तरल किसी भी माध्यम में प्रवाहित हो सकती है।

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जबकि (S) तरंग तरल या अर्ध तरल माध्यमों में प्रवाहित नहीं होती। भूकंप तरंगों और ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा का पर्यवेक्षण कर वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के आन्तरिक भाग को तीन परतों में विभाजित किया है। सबसे ऊपर भू-पटल (Earth’s Crust) भू-पटल का नीचे का स्तर सियाल (Sial) सिमा (Sima) कहलाता है। इन सब में सबसे नीचे पृथ्वी के केन्द्र को घेर हुए केन्द्रमंडल (Core) या निफे (Nife) है।

प्रश्न 5.
पृथ्वी के मेण्टल या गुरुमण्डल का विवरण दीजिए ।
उत्तर:
गुरुण्डल (Mantle) :- भू-पृष्ठ और गुरुमण्डल के ऊपरी अंश को लेकर शिलामण्डल का गठन हुआ है, जिसकी मोटाई (गहराई) 100 कि०मी० है। भू-पृष्ठ के नीचे 60 किमी० से 2900 किमी० तक की समान घनत्व वाली परत (स्तर) गुरुण्डल कहलाता है। यह परत लोहा, निकेल, क्रोमियम, सिलिकन एवं मैग्नेशियम जैसे तत्वों को मिलाकर बनी है।

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग 3

इस भाग का तापमान 2000°C से 3000°Ć रहता है। इसका घनत्व 3.4 से 5.6 ग्राम प्रति घन सें०मी० है। भू-पृष्ठ और गुरुमण्डल के बीच की वियुक्ति रेखा को मोहारोभिसिक या मोहो वियुक्त (Mohrovicic of Moho Discontinuity) कहते हैं, जो एक दूसरे को अलग करती है।

शिला मण्डल के नीचे और गुरुमण्डल के ऊपर एक विशेष परत पाई जाती है, जिसे दुर्बलता मण्डल (Asthenosphere) कहते हैं। इस स्तर के पदार्थ अर्द्ध तरल व अर्द्ध ठोस अवस्था में पाए जाते हैं, ठीक गले हुए पीच (Peach) की तरह। इस भाग में पदार्थ गर्म होकर नीचे – ऊपर होते रहते हैं।

गुरुमण्डल में भी पदार्थ की संरचना एवं घनत्व में अन्तर पाया जाता है। गुरुण्डल के 30 से 700 कि०मी० तक का भाग मुख्य रूप से क्रोमियम (Cro), लोहा (Fe), सिलिका (Si) और मैग्नेशियम (Mg) जैसे चार तत्वों से मिलकर बना है। इस कारण इन चारों तत्वों के मेल से निर्मित इस परत को क्रोफेसिमा (Cro+Fe+Si+Ma= Crofesima) कहा जाता है।

ठीक इसके नीचे 700 से 2900 कि०मी० तक का भाग निकेल (Ni), फेरियम (Fe), सिलिका (Si) और मैग्नेशियम से बना है। इस कारण इस स्तर को निफेसिमा (Ni+fe+Si+ma= Nifesima) कहते हैं। क्रोफेसिमा और निफेसिमा के बीच की वियुक्ति रेखा को रेपिती वियुक्ति रेखा ( Repetti Discontinuity) कहते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर (Multiple Choice Question & Answer) : (1 Mark)

प्रश्न 1.
हमारी पृथ्वी का व्यास है –
(a) 1230 कि०मी०
(b) 6370 कि॰मी०
(c) 5000 कि॰मी०
(d) 1500 कि॰मी॰
उत्तर :
(b) 6370 कि०मी०

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प्रश्न 2.
हमारी पृथ्वी का आंतरिक भाग है –
(a) ठण्डा
(b) खुद्धरा
(c) गर्म
(d) ठोस
उत्तर :
(c) ठोस

प्रश्न 3.
पृथ्वी पर सबसे गहरा प्राकृतिक गर्त का नाम है –
(a) कोला उपद्वीप
(b) स्कैण्डीनेषिया
(c) विस्के की खाड़ी
(d) ग्रेणाइड कैनियन
उत्तर :
(a) कोला उपद्वीप

प्रश्न 4.
पृथ्वी का सबसे गहरा प्राकृतिक गर्त स्थित है –
(a) अमेरिका में
(b) भारत में
(c) रूस में
(d) चीन में
उत्तर :
(c) रूस में

प्रश्न 5.
अपनी उत्पत्ति के समय पृथ्वी का स्वरूप था –
(a) ठोस
(b) एक गैसीय पिण्ड के स्मान
(c) गर्म
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) एक गैसीय पिण्ड के समान

प्रश्न 6.
पृथ्वी का औसत घनत्व है –
(a) 12 ग्रा० प्रतिघन
(b) 2.4 ग्रा० प्रति सेकेंड
(c) 15 ग्रा० मति घन्टा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(b) 2.4 ग्रा० प्रति सेकेंड

प्रश्न 7.
हमारी पृथ्वी के केन्द्र मण्डल का तापक्रम है –
(a) 700°C
(b) 1000°C
(c) 4000°C
(d) 5000°C
उत्तर :
(d) 5000°C

प्रश्न 8.
हमारी पृथ्वी के उत्पत्ति कितने वर्षों पहले हुई –
(a) 7000 वर्ष
(b) 460 करोड़ वर्ष
(c) 800 करोड़
(d) 10000 करोड़
उत्तर :
(b) 460 करोड़ वर्ष

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प्रश्न 9.
महासागर के नीचे भू-पृष्ठ की गहराई है –
(a) 5 किमी०
(b) 6 किमी०
(c) 10 किमी०
(d) 500 किमी०
उत्तर :
(b) 6 किमी०

प्रश्न 10.
महाद्वीप के नीचे भू-पृष्ठ की गहराई है –
(a) 20 किमी०
(b) 60-70 किमी०
(c) 90 किमी०
(d) 120 किमी०
उत्तर :
(b) 60-70 किमी०

प्रश्न 11.
सिमा परत का घनत्व है –
(a) 3.5 ग्रा० पति घन सें०मी०
(b) 3.7 ग्राम प्रति घन सें॰मी०
(c) 2.9 ग्रा० प्रति घन सें०मी०
(d) 4.00 ग्रा० प्रति घन सें॰मी०
उत्तर :
(c) 2.9 ग्रा० प्रति घन सें०मी०

प्रश्न 12.
भूपटल के सर्वाधिक चट्टान का निर्माण किस खनिज से होता है –
(a) सीलिकां
(b) मैग्नेसियम
(c) चीका
(d) डोलोमाइट
उत्तर :
(a) सीलिका

प्रश्न 13.
सियाल एवं सीमा परतों के बीच वियुक्ति रेखा का नाम है –
(a) मोहो वियुक्ति रेखा
(b) रेपिकी वियुक्ति रेखा
(c) गुतेनवर्ग वियुक्ति रेखा
(d) करनाल वियुक्ति रेखा
उत्तर :
(d) करनाल वियुक्ति रेखा

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प्रश्न 14.
गुरुमंडल और केन्द्रमंडल के मध्य स्थित वियुक्ति रेखा का नाम क्या है ?
(a) गुटेनवर्ग वियुक्ति रेखा
(b) रोपिकी वियुक्ति रेखा
(c) मोहो वियुक्ति रेखा
(d) लेहमान वियुक्ति रेखा
उत्तर :
(a) गुटेनवर्ग वियुक्ति रेखा

प्रश्न 15.
भूकंप की वह कौन-सी तरंग भू-गर्भ के ठोस और तरल किसी भी माध्यम से प्रभावित हो सकती है –
(a) S तरंग
(b) P तरंग
(c) L तरंग
(d) इनमे से कोई नहीं।
उत्तर :
(b) P तरंग

प्रश्न 16.
चाप या दबाव बढ़ने से पदार्थ का घनत्व –
(a) बढ़ जाता है
(b) कम हो जाता है
(c) अपरिवर्तित रहता है
(d) बढ़ने के बाद कम होने लगता है
उत्तर :
(a) बढ़ जाता है

प्रश्न 17.
भूकम्पीय तरंगों से हमें जानकारी होती है-
(a) महाद्वीपों एवं महासगारों की उत्पत्ति की
(b) पृथ्वी के आन्तरिक भाग की
(c) महासागरीय जल के घनत्व की
(d) वायुमण्डल के विभिन्न स्तरों की
उत्तर :
(b) पृथ्वी के आन्तरिक भाग की

प्रश्न 18.
पृथ्वी का सबसे ऊपरी भाग कहलाता है –
(a) गुरुमण्डल
(b) मिश्रित मण्डल
(c) केन्द्रमण्डल
(d) भू-पटल।
उत्तर :
(d) भू-पटल

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प्रश्न 19.
सिमा परत का गठन हुआ है –
(a) बेसाल्ट चट्टानों से
(b) ग्रेनाइट चट्टानों से
(c) लोहा एवं निकेल से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) बेसाल्ट चट्टानों से

प्रश्न 20.
गुरुण्डल की उष्णता है –
(a) 2000°C -3000°C
(b) 1000°C-2000°C
(c) 1500°C-2000°C
(d) 3000°C-4000°C
उत्तर :
(a) 2000°C -3000°C

प्रश्न 21.
निफेसिमा स्थित है –
(a) 30-700 कि॰मी॰ की गहराई तक
(b) 700 – 2900 कि॰मी० की गहराई तक
(c) 500-700 कि॰मी० की गहराई तक
(d) 51-6370 कि॰मी॰ की गहराई तक
उत्तर :
(b) 700 – 2900 कि॰मी० की गहराई तक

प्रश्न 22.
दुर्बलता मण्डल के पदार्थ हैं –
(a) अर्द्धत्रल अवस्था में
(b) पूर्ण तरल अवस्था में
(c) ठोस अवस्था
(d) गैसीय अवस्था में
उत्तर :
(a) अर्द्धतरल अवस्था में

प्रश्न 23.
केन्द्रमण्डल की मोटाई है –
(a) लगभग 5100 कि०मी०
(b) लगभग 2900 कि॰मी०
(c) लगभग 3500 कि०मी०
(d) लगभग 6370 कि०मी०
उत्तर :
(c) लगभग 3500 कि०मी०

प्रश्न 24.
अन्तः केन्द्रमण्डल एवं बाह्य केन्द्रमण्डल के मध्य स्थित वियुक्ति रेखा को कहते हैं-
(a) गुटेनवर्ग वियुक्ति रेखा
(b) लेहमान वियुक्ति रेखा
(c) रेपेटी वियुक्ति रेखा
(d) मोहो वियुक्ति रेखा
उत्तर :
(b) लेहमान वियुक्ति रेखा

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प्रश्न 25.
पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति का निर्माण होता है –
(a) अन्तः केन्द्रमण्डल में
(b) गुरु मण्डल में
(c) शिला मण्डल
(d) बाह्य केन्द्रमण्डल में
उत्तर :
(d) बाह्य केन्द्रमण्डल में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) : (1 Mark)

1. हमारी पृथ्वी का व्यास _________किमी० है।
उत्तर : 6370

2. पृथ्वी का आन्तरिक भाग_________ है।
उत्तर : गर्म

3. पृथ्वी की उत्पत्ति आज से लगभग_________ करोड़ वर्ष पहले हुआ था।
उत्तर : 460

4. _________से पृथ्वी के केन्द्र की दूरी 6370 किमी० है।
उत्तर : भृ-पृष्ठ

5. भूगर्भ के इस अति तप्त, चिपचिपे एवं पिघले पदार्थ को _________कहते हैं।
उत्तर : मैग्मा

6. हमारी पृथ्वी का औसत घनत्व _________ग्राम प्रति घन सेंमी० है।
उत्तर : 5.5 i

7. भूकंप की _________भूगर्भ के ठोस और तरल किसी भी माध्यम से प्रवाहित हो सकती है।
उत्तर : P तरंग

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8. कौन-सी _________तरंग तरल माध्यम से होकर नहीं प्रवाहित हो सकती है।
उत्तर : S तरंम

9. पृथ्वी के आन्तरिक भाग को _________परतों में बाँटा गया है।
उत्तर : तीन

10. पृथ्वी का सबसे ऊपरी भाग _________कहलाता है।
उत्तर : भू-पटल

11. भू-पृष्ठ के अधिकांश भाग में _________गैस घुली है।
उत्तर : ऑक्सीजन

12. सीमां परत का औसत घनत्व _________ग्राम प्रति घन सेंमी० है।
उत्तर : 2.9

13. सियाल एवं सीमा परत के बीच _________वियुक्ति रेखा है।
उत्तर : करनाल

14. भू-पृष्ठ एवं गुरुमंडल के ऊपरी अंश को लेकर _________का गठन हुआ है।
उत्तर : शीला मंडल

15. पृथ्वी की केन्द्र मण्डल का औसतन तापमान _________है ।
उत्तर : 5000°C

16. पृथ्वी के आन्तरिक भाग में _________एवं _________दोनों अत्यधिक मात्रा में है।
उत्तर : ताप, दबाव

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17. पृथ्वी के केन्द्र के समीप पदार्थों का घनत्व _________जाता है।
उत्तर : लोहा, निकेल

18. महादेशों के नीचे स्थित स्तर का निर्माण _________और _________से हुआ है।
उत्तर : सिलिकन, एल्युमीनियम

19. भू-पृष्ठ और गुरुण्डल के बीच _________वियुक्ति रेखा स्थित है।
उत्तर : मोहरोविसिक

20. बाह्य केन्द्रमण्डल _________ के चारों ओर स्थित है।
उत्तर : विद्युत क्षेत्र

सही कथन के आगे ‘ True ‘ एवं गलत कथन के आगे ‘ False ‘ लिखिए : (1 Mark)

1. पृथ्वी का आंतरिक भाग गर्म है।
उत्तर : True

2. हम जैसे-जैसे पृथ्वी के भूमध्य रेखा की ओर जाते हैं तापमान बढ़ता जाता है।
उत्तर : True

3. हम पृथ्वी के केन्द्र मंडल तक पहुँच सकते हैं।
उत्तर : False

4. भू-पटल की दूसरी प्रधान उपादान सिलिकन है।
उत्तर : True

5. भू-पटल का सबसे महत्वपूर्ण उपादान ऑक्सीजन है।
उत्तर : True

6. पृथ्वी की आन्तरिक संरचना कैसी है? यह आज भी एक रहस्य का विक्य है।
उत्तर : True

7. हमारी पृथ्वी का औसत घनत्व 2.9 ग्राम प्रति घन सेंमी० है।
उत्तर : False

8. सियाल परत का औसत घनत्व 2.5 ग्राम प्रति घन सेंमी० है।
उत्तर : False

9. पृथ्वी के आन्तरिक भाग में प्रति 32 मीटर जाने पर 1°C तापमान बढ़ जाता है।
उत्तर : True

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10. भूपटल के अत्यधिक दबाव के कारण पृथ्वी का केन्द्रीय भाग ठोस होता है।
उत्तर : True

11. सीमा परत का विस्तार महासागरों के नीचे मिलता है।
उत्तर : True

12. पृथ्वी के ऊपरी ठोस एवं पतले आवरण को भू-पटल कहते हैं।
उत्तर : True

13. बक्रेश्र में ठंडा जल का झरना है।
उत्तर : False

14. भू-ताप एक प्रकार की शक्ति है।
उत्तर : True

15. पृथ्वी के आंतरिक भाग को तीन परतों में विभाजित किया गया है।
उत्तर : True

16. उत्तरी पश्चिमी रूस का कोला उपद्वीप पृथ्वी का सबसे गहरा प्राकृतिक गर्त है।
उत्तर : True

17. परिचलन स्रोत से भू-गर्भ का ताप ऊपर की तरफ आता है।
उत्तर : True

18. अन्त: केन्द्रमण्डल में दाबाव, ताप तथा घनत्व सर्वाधिक रहता हैं।
उत्तर : True

19. पृथ्वी के कुल आयतन के लगभग 84 प्रतिशथ भाग में गुरु मण्डल फैला हुआ है।
उत्तर : True

WBBSE Class 8 Geography Solutions Chapter 1 पृथ्वी का आंतरिक भाग

20. पृथ्वी के आन्तरिक भाग में स्थित पदार्थों का घनत्व सभी स्थान पर एक समान है।
उत्तर : False

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Physical Science Book Solutions Chapter 7 ध्वनि offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Physical Science Chapter 7 Question Answer – ध्वनि

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
तरंग कितने प्रकार की होती हैं ? उनके नाम बताएँ।
उत्तर :
ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य एवं अनुप्रस्थ दो प्रकार की होती हैं।

प्रश्न 2.
वायु में ध्वनि-तरंगे अनुदैर्घ्य हैं या अनुप्रस्थ ?
उत्तर :
वायु में छ्वनि तरंगें अनुदैर्घ्य होती हैं।

प्रश्न 3.
ध्वनि का संचरण किन-किन माध्यमों में हो सकता है ?
उत्तर :
ध्वनि का गमन ठोस, द्रव एवं गैस तीनों माष्यमों में हो सकता है।

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प्रश्न 4.
क्या ध्वनि के परावर्तन में आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होता है।
उत्तर :
हाँ, ध्वनि के परावर्तन में आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होता है।

प्रश्न 5.
सूर्य की सतह पर होनेवाले विस्फोट पृथ्वी से क्यों नहीं सुनाई पड़ते ?
उत्तर :
क्योंकि सूर्य एवं पृथ्वी के बीच का अधिकांश भाग माध्यमहीन अर्थात् शून्य है। अत: पदार्थीय माध्यम के अभाव हैं ध्वनि का गमन नहीं होने के कारण सूर्य की सतह पर होनेवाले धमाकों को पृथ्वी से नहीं सुन पाते।

प्रश्न 6.
मनुष्य के मस्तिष्क पर किसी ध्वनि का प्रभाव कितने समय तक रहता है ?
उत्तर :
\(\frac{1}{10}\) से॰ तक।

प्रश्न 7.
किसी माध्यम के कंपित कणों का माध्यम स्थिति से महत्तम विस्थापन को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
किसी माष्यम के कम्पित कणों की माष्यम स्थिति से अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं।

प्रश्न 8.
क्या दो क्रमिक शीर्षों अथवा गर्तो के बीच की दूरी को तरंग का तरंगदैर्ध्य कहते हैं ?
उत्तर :
हाँ, तरंग लम्बाई।

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प्रश्न 9.
सांगीतिक ध्वनि की विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर :

  • तीव्रता
  • तारत्व
  • गुणता।

प्रश्न 10.
ध्वनि की तीव्रता की इकाई क्या है ?
उत्तर :
डेसीबल।

प्रश्न 11.
ध्वनि किस प्रकार की ऊर्जा है?
उत्तर :
गतिज ऊर्जा (यात्रिक ऊर्जा)।

प्रश्न 12.
प्रतिध्वनि उत्पत्र करने के लिए परावर्तक सतः दूरी कितनी होनी चाहिए?
उत्तर :
16.6 m

प्रश्न 13.
कान की सबसे छोटी अस्थि का नाम क्या है ?
उत्तर :
स्टिरप अस्थि या स्टापेस।

प्रश्न 14.
किसी तरंग (जैसे ध्वनि-तरंग) की चाल किन दो राशियों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
किसी माध्यम में तरंग की चाल माध्यम की प्रकृति एवं उसके घनत्व पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 15.
एक व्यक्ति अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गया हुआ है। क्या वह व्यक्ति अपने मित्र द्वारा वहाँ उत्पन्न ध्वनि को सुन सकता है ?
उत्तर :
नहीं, चन्द्रमा पर वायुमण्डल (गैसीय माष्यम) की अनुपस्थिति के कारण व्यक्ति अपने मित्र द्वारा उत्पम्न ष्वनि को नहीं सुन सकता।

प्रश्न 16.
किसी ध्वनि-तरंग की आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य उसकी चाल से किस प्रकार संबंधित है ?
उत्तर :
तरंग की चाल = आवृत्ति x तरंग दैर्ष्य
या, V = π

प्रश्न 17.
क्या किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के तापमान पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
हाँ, किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के तापमान पर निर्भर करती है।

प्रश्न 18.
वायु, जल तथा लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि की चाल सबसे तेज होती है ?
उत्तर :
लोहे में ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है।

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प्रश्न 19.
क्या आप बता सकते हैं कि (i) सितार तथा (ii) कार का हार्न में से किसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि का तारत्व अधिक है ?
उत्तर :
सितार से उत्पत्न ध्वनि का तारत्व (Pitch) अधिक होगा।

प्रश्न 20.
सामान्य मानव कान के लिए श्रव्यता परास क्या है ?
उत्तर :
सामान्य मानव कर्ण के लिए श्रव्यता का परास 20 c/s से 20,000 c/s है।

प्रश्न 21.
हर्ज्ज किस राशि का मात्रक है ?
उत्तर :
आवृत्ति का मात्रक Hz से अधिक।

प्रश्न 22.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
किसी विस्तृत अवरोध से परावर्तित होकर ध्वनि के पुन: सुनने की घटना को ध्वनि की प्रतिध्वनि कहते हैं।

प्रश्न 23.
एक ध्वनि-तरंग के आवर्तकाल का मान 0.01s ध्वनि-तरंग की आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर :
ध्वनि की तरंग की आवृत्ति  \(\frac{1}{0.01}\) Hz या 100 Hz होगी।

प्रश्न 24.
ध्वनि तरंगों का यांत्रिक तरंगे क्यों कहते हैं?
उत्तर :
यह माध्यम में गमन करती है ।

प्रश्न 25.
क्या प्रकाश-तरंगें अनुप्रस्थ तरंगे हैं?
उत्तर :
हाँ, क्योंकि इसके घटक इसके प्रसार की दिशा के लम्बवत कम्पन करते है।

प्रश्न 26.
तरंग का कौन-सा गुण (i) प्रबलता और (ii) तारत्व को निर्धारित करता है?
उत्तर :
प्रबलता – आयाम पर । तारत्व – आवृत्ति पर ।

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प्रश्न 27.
दिए गए ध्वनियों से संबंधित आवृत्तियों का परास लिखें – (क) अवश्रव्य तरंगे तथा (ख) पराश्रव्य तरंगे।
उत्तर :
अवश्रव्य तरंगे – जिनकी आवृत्ति 20 Hz से नीचे होती है ।
पराश्रव्य तरंगे – जिनकी आवृत्ति 20000 Hz से अधिक होती है ।

प्रश्न 28.
20 Hz से कम आवृत्तिवाली ध्वनि को क्या कहते हैं – अवश्रव्य या पराश्रव्य ध्वनि?
उत्तर :
अवश्रव्य ध्वनि।

प्रश्न 29.
ध्वनि की आवृत्ति 500 Hz है। आवर्तकाल का मान क्या होगा?
उत्तर :
T=\(\frac{1}{t}=\frac{1}{500}\) Sec.

प्रश्न 30.
ध्वनि का तारत्व और ध्वनि स्रोत की आवृत्ति में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
ध्वनि का तारत्व ध्वनि सोत की आवृत्ति के सीधा समानुपाती होता है।

प्रश्न 31.
क्या ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है?
उत्तर :
हाँ, ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है।

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प्रश्न 32.
क्या मनुष्य पराश्रव्य ध्वनि सुन सकता हैं?
उत्तर :
नही, मनुष्य पराश्रव्य ष्वनि नहीं सुन सकता है।

प्रश्न 33.
मनुष्यों के लिए श्रव्य-परास कितना होता है?
उत्तर :
मनुष्यों के लिये श्रव्य-परास 20-20,000 cs होता है।

प्रश्न 34.
ध्वनि कैसे उत्पत्र होता है?
उत्तर :
कम्पन से।

प्रश्न 35.
क्या ध्वनि शून्य में गमन करती है?
उत्तर :
नहीं।

प्रश्न 36.
अनुदैर्घ्य तरंग में दो लगातार संपीडन के बीच की दूरी क्या कहलाता है?
उत्तर :
तरंग, दैर्ध्य।

प्रश्न 37.
गर्भस्थ शिशु की जानाकरी किसके द्वारा प्राप्त करते हैं?
उत्तर :
सोनोग्राफी द्वारा।

प्रश्न 38.
कान का कार्य सुनना तथा और क्या है?
उत्तर :
कान का कार्य सुनने के अलावा शरीर का संतुलन बनाये रखना है।

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प्रश्न 39.
ध्वनि के गमन के लिये कैसे माध्यम की आवश्यकता होती है ?
उत्तर :
लचीला तथा अविच्छित्र पदार्थीय माध्यम (Elastic and continuous material medium.)

प्रश्न 40.
आवर्तकाल की SI इकाई क्या है ?
उत्तर :
सेकेण्ड।

प्रश्न 41.
Hertz किस भौतिक राशि की इकाई है?
उत्तर :
आवृत्ति

प्रश्न 42.
ध्वनि के परावर्तन का एक व्यावहारिक उपयोग क्या है?
उत्तर :
Sonar

प्रश्न 43.
प्रतिध्वनि सुनाई देने की कोई एक शर्त लिखिए।
उत्तर :
स्रोत से परावर्त्तक तल की न्यूनतम दूरी 56ft या 16.6m होनी चाहिए ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2 MARKS

प्रश्न 1.
ध्वनि के परावर्तन क्या हैं ? ध्वनि के परावर्तन के नियमों को लिखो।
उत्तर :
ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) : ध्वनि तरंग जब एक माष्यम से चलकर किसी अन्य माध्यम के संस्पर्श तल (line of separation) पर आपतित होती है, तो इस आपतित ध्वनि तरंग का कुछ्छ अंश पुन: पहले वाले माध्यम में वापस लौट आता है। इस घटना को छ्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) कहते हैं।

ध्वनि के परावर्तन के नियम (Laws of Reflection of Sound) : ध्वनि के परावर्तन के निम्नलिखित दो नियम हैं-

  • आपतित ध्वनि तरंग, परावर्तित ष्वनि तरंग और परावर्तक सतह के ऊपर आपतन बिन्दु से खींचा गया अभिलंब एक ही तल (Plane) में स्थित होते हैं।
  • आपतन कोण और परावर्तन कोण परस्पर समान होते हैं।

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प्रश्न 2.
ध्वनि के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखो।
उत्तर :
ध्वनि के परावर्तन का व्यावहारिक उपयोग (Practical Applications of Reflection of Sound) : ध्वनि के परावर्तन के निम्नलिखित व्यावहारिक उपयोग होते हैं –

(i) स्टेथोस्कोप (Stethoscope) : रोगी के हृय की घड़कन, फेफड़ों (lungs) या श्वॉस नली में जमे कफ की प्रवृत्ति को जाँचने के लिए डॉक्टर स्टेथोस्कोप यंत्र की सहायता लेते हैं। इसमें रबर की दो नलियाँ, ग्राहक (receiver) से जुड़ी होती हैं। दोनों नलियों के सिरो को कान में लगाकर और गोल चकतीनुमा ग्राहुक को रोगी की छाती या पीठ पर रख कर शरीर के भीतर की धीमी ध्वनि को भी सुना जा सकता है। इस यंत्र में इदय के स्पंदन की धीमी ध्वनि नलियों के भीतरी दीवार से बार-बार परावर्तित होकर चिकित्सक के कान तक पहुँचती हैं। इसमें ध्वनि तरंगे बाहर की ओर फैल नहीं पातीं, इसलिए धीमी होने पर भी स्पष्ट सुनाई देती हैं।

(ii) बात-चीत की नली (Speaking Tube) : एक ही समान व्यास की नली के सिरे पर धीरे से भी बोली गई बात या अक्षर दूसरे सिरे पर स्थित व्यक्ति को स्पष्ट सुनाई पड़ती है। वास्तव में ध्वनि, नली की दीवारों के बीच बार-बार परावर्तित होकर श्रोता तक पहुँचती है। इस व्यवस्था में ध्वनि ऊर्जा का कहीं हास नहीं होता।

प्रश्न 3.
श्रुति निर्बध क्या है ?
उत्तर :
किसी ध्वनि को कान से सुनने पर जितने समय तक घ्वनि का प्रभाव मष्तिष्क में बना रहता है, श्रुति निर्बध (Persistence of Hearing) कहलाता है।

प्रश्न 4.
ध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ध्वनि (Sound) : किसी कंपनशील वस्तु से उत्पत्र वह ऊर्जा जो किसी प्रत्यास्थ पदार्थीय माष्यम से होकर तरंगों के रूप में गमन करते हुए हमारे कानों में पहुँचती है और मस्तिष्क मे एक विशेष प्रकार की संवेदना की अनुभूति उत्पन्न करती है, उसे छ्वनि (Sound) कहते हैं।

प्रश्न 5.
प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक शर्त क्या हैं ?
उत्तर :
प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक शर्त (Essential conditions for hearing an echo) :

  • परावर्तक तल विशाल होना चाहिये।
  • मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के श्रोता के पास पहुँचने का कम से कम \(\frac{1}{10}\) से० का अंतर होना चाहिए क्योंकि किसी ध्वनि की अनुभूति हमारे कान में \(\frac{1}{10}\) से॰ तक बनी रहती है। यदि परावर्तित ध्वनि \(\frac{1}{10}\) से॰ के अंदर ही हमारे कान तक पहुँच जाएगी तो दोनों छ्वनियाँ मिल जाएंगी एवं प्रतिष्वनि नहीं सुन पायेंगे।

प्रश्न 6.
किसी ध्वनि की गुणवत्ता किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
ध्वनि की गुणवत्ता को प्रभावित करनेवाले कारक निम्नलिखित हैं –

  • मूलसुर के साथ उपस्थित उपसुर की संख्या।
  • ध्वनि द्वारा उत्पत्र तरंग।
  • मूलसुर तथा उपसुर की आवृत्ति का अनुपात।

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प्रश्न 7.
ध्वनि प्रदूषण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) : विभिन्न म्रकार की अवाछ्छीय ध्वनियों के कारण हमारे वातावरण मे जो हलचल उत्पन्न होती है उसे ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) कहा जाता है। ष्वनि प्रदूषण ओद्योगिकीकरण तथा आधुनिक सभ्यता की देन है। ध्वनि पदूषण को डेसीबल (Decibel) ‘db’ में मापा जाता है। वह ध्वनि जिसकी तीव्रता 70 db या इससे अधिक होती है ष्वनि प्रदूषण उत्पन्न करती है। साधारणतया मनुष्य 30 -40 डेसिबल ‘db’ तक की ध्वनि सहन कर सकता है।

प्रश्न 8.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रतिध्वनि (Echo) : जब कोई ध्वनि दूर स्थित किसी विस्तृत परावर्तक तल से परावर्तित होकर पुन: अलग एवं स्पष्ट सुनाई पड़ती है तो वह दुहराई गई छ्वनि, मूल ध्वनि की प्रतिष्वनि कहलाती है।

प्रश्न 9.
प्रतिध्वनि कैसे उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
जब हम किसी पहाड़ी के सामने या किसी गहरी घाटी के दूर के सिरे पर या किसी भवन की बड़ी दीवार के सामने बोलते हैं तो हमें प्रतिष्वनि सुनाई देती है। यहाँ प्रतिष्वनियों के बनने में पहाड़ी, घाटी या भवन परावर्तक तल का कार्य करते है।

प्रश्न 10.
छोटे कमरे में प्रतिध्वनि क्यों नहीं सुनाई देती है ?
उत्तर :
छोटे कमरे में प्रतिध्वनि का सुनाई नहीं देना : चूँकि छोटे कमरे की लंबाई 16.6 मीटर से कम होती है। अतः परावर्तित ध्वनि \(\frac{1}{10}\) सेकेंड के अंदर ही हमारे कान में पहुँच जाती है, जबंकि मूल ध्वनि की अनुभृति अभी बनी रहती है। फलतः दोनों ध्वाियाँ मिल जाती हैं एवं हम प्रतिष्वनि सुन नहीं पाते हैं।

प्रश्न 11.
ध्वनि की गूँज से क्या समझते हो ?
उत्तर :
गुँज (Reverberation): जब ध्वनि विभिन्न विशाल परावर्तक तलों से बार-बार परावर्तित होकर काफी देर तक सुनाई देती है तो इसे ध्वनि की गूँज (Reverberation of sound) कहते हैं।

प्रश्न 12.
चमगादड़ रात में भी अपने शिकार को पकड़ने के लिए पराश्रय तरंगों का उपयोग किस प्रकार करता है ?
उत्तर :
चमगादड़ों की श्रवण सीमा बहुत अधिक होती है। ये 100,000 Hz की तरंगें उत्पन्न कर सकते हैं एव सुन सकते हैं। इसलिए वे प्रतिष्वनि का उपयोग कर अपने रास्ते में पड़नेवाले अवरोष का पता कर लेते हैं एवं बचकर निकल जाते हैं। पराश्रव्य ध्वनि की प्रतिष्वनि को सुनने में लगे समय अंतराल से परावर्तक सतह अर्थात् अवरोध की दूरी का अनुमान लगा लेते हैं एवं उनसे टकराने से बच जाते है। अवरोघ यदि उनका शिकार ही हो तो उसे पकड़ लेते हैं।

प्रश्न 13.
किसी मोटरगाड़ी के निकट पहुँचने के पहले ही उसके हॉर्न की आवाज क्यों सुनाई पड़ जाती है ?
उत्तर :
मोटर गाड़ी के होर्न द्वारा उतन ध्चनि की तीबता अधिक होने के कारण इसकी मबल्ता अधिक होती है। अतः ध्वनि अधिक जोर तथा अधिक दूरी तक सुनाई पड़ती है, जिससे मोटर गाड़ी के निकट पहुँनने के पहले ही हार्न की आवाज सुनाई पड़ जाती है।

प्रश्न 14.
ध्वनि-तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों है ?
उत्तर :
ध्वनि तरंगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर माध्यम के कणों के संपीडन एवं विरलन के माध्यम से होता है, जिसमें माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानान्तर होता है। अत: ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्घ्य होती है।

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प्रश्न 15.
ध्वनि-तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
छ्वनि-तरंगों को यांत्रिक तरंगे कहते हैं क्योंकि इनके संचरण के लिए किसी द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 16.
एक व्यक्ति अपने मित्र के साथ चंद्रमा पर गया हुआ है। क्या वह व्यक्ति अपने मित्र द्वारा वहाँ उत्पन्न ध्वनि को सुन सकता है ?
उत्तर :
नहीं क्योंकि वहाँ वायुमण्डल नहीं है।

प्रश्न 17.
अनुप्रस्थ तरंग और अनुदैर्ध्य तरंग में क्या अंतर है ?
उत्तर :
अनुप्रस्थ तरंग और अनुदैर्ध्य तरंग में अंतर :

अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal wave)
(i) इसमें माध्यम के कणों का कम्पन ध्वनि संचरण की दिशा के लम्बवत् होता है। (i) इसमें माध्यम के कणों का कम्पन ध्वनि संचरण की दिशा के समानान्तर होता है।
(ii) पानी में पत्थर फ़ेंकने से उत्पन्न तरंग एवं प्रकाश तरंग। (ii) गैस एवं वायु में उत्पत्न तरंग इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 18.
किसी ध्वनि की तीव्रता और प्रबलता में क्या अंतर है ? समझाइए।
उत्तर :
ध्वनि की तीव्रता एवं प्रबलता में अन्तर :

तीव्रता (Intensity) प्रबलेता (Loudness)
(i) ध्वनि गमन की दिशा के लम्बवत् रखे तल के इकाई क्षेत्रफल से होकर प्रति सेकेण्ड गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा के परिमाण को तीव्रता कहते हैं। (i) यह ध्वनि का वह लक्षण है जिससे पता चलता है कि ध्वनि तेज है या धीमी।
(ii) अधिक तीव्रता वाली ध्वनि की प्रबलता अधिक होती है। (ii) ध्वनि प्रबलता की माप उसकी तीव्रता से की जाती है।

प्रश्न 19.
वैसे तो आकाश में तड़ित (बिजली) की चमक तथा मेघगर्जन साथ-ही-साथ उत्पत्र होते हैं, परंतु चमक पहले दिखाई पड़ती है और मेघगर्जन कुछ समय बाद। क्यों ?
उत्तर :
वायु में प्रकाश का वेग ष्वनि के वेग से बहुत अधिक होता है। वर्षा के समय आकाश में बादलों के आपस में टकराने से उत्पत्र होने वाली बिजली की चमक एवं आवाज दोनों एक साथ ही उत्पन्न होते हैं। लेकिन बिजली की चमक तुरन्त दिखाई देती है और बादलों की गरज कुछ देर बाद सुनाई पड़ती है। इस प्राकृतिक घटना के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वायु में प्रकाश का वेग ध्वनि के वेग से काफी अधिक होता है।

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प्रश्न 20.
क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका प्रकाश-तरंगें करती हैं ? इन नियमों को लिखें।
उत्तर :
ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) : प्रकाश तरंगों के परावर्तन के समान ही ध्वनि तरंगों में भी परावर्तन होता है। ध्वनि का परावर्तन भी समतल अथवा गोलाकार सतह पर होता है तथा ध्वनि तरंगें परावर्तन के निम्नलिखित दो नियमो का पालन करती है –

  • आपतित ध्वनि, परावर्तित ष्वनि और आपतन बिन्दु से परावर्तक सतह पर डाला गया अभिलम्ब तीनों एक ही
    समतल में होते हैं।
  • आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं।

प्रश्न 21.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं ? यह कब सुनाई पड़ती है ?
उत्तर :
प्रतिष्वनि (Echo) : किसी ध्वनि से उत्पन्न ध्वनि दूर स्थित किसी विशाल अवरोध से परांवर्तित होकर उसे पुन : सुने जाने की घटना को ध्वनि की प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं। विशाल परावर्तक तल जैसे पहाड़ी, घाटी, ऊँची दीवार, गहरा कुआँ अदि से ध्वनि परावर्तन होती है। जब हम कुएँ के मुँह पर बोलते है तो हमारी आवाज दोहराई जाती है। यह दोहराई जानेवाली ध्वनि ही हमारी मूल ध्वनि (आवाज) की प्रतिध्वनि होती है। यहाँ प्रतिष्वनि के बनने में कुएँ का जल परावर्तक तल का काम करता है।

प्रश्न 22.
पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तुओं को साफ करने में कैसे किया जाता है ?
उत्तर :
पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तुओं को साफ करने में : पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तु के उन भागों को साफ करने में किया जाता है जिन तक पहुँचना कठिन होता है; जैसे – सर्पिलाकार नली, इत्यादि। जिन वस्तुओं को साफ करना होता है उन्हें साफ करनेवाले घोल में रखा जाता है और इस घोल में पराश्रव्य तरंगें भेजी जाती हैं। इन तरंगों की उच्च आवृत्ति के कारण घूल, गंदगी के कण तथा चिकने पदार्थ (greasy material) अलग होकर नीचे गिर जाते हैं और वस्तु पूरी तरह साफ हो जाती है।

प्रश्न 23.
क्या ध्वनि निर्वात में गमन कर सकती है ? मान लो दोनों आपस में बातचीत कर सकते हो ?
उत्तर :
छ्वनि निर्वात या शून्य में गमन नहीं कर सकती। चंद्रमा पर बातचीत संभव नहीं हो सकता क्योंकि वहाँ पर कोई वायुमंडल या माध्यम नहीं है जिससे छ्वनि गमन कर सके।

प्रश्न 24.
ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव को लिखो।
उत्तर :

  • ध्वनि प्रदूषण हमारे शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति चिड़िंड़ा स्वभाव का हो जाता है एवं वह अच्छी तरह से सो भी नहीं सकता है। उसकी निद्रा भंग हो जाती है।
  • ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। व्यक्ति को घीरे-धीरे कम सुनाई देने लगता है एवं अंत में वह बहरा भी हो सकता है।
  • खासतौर से एयरपोर्ट इलाके के लोग कम सुनते हैं। कल-कारखानों की मशीनों की भीषण आवाज से उसमें काम करने वाले लोग क्रोधी एवं चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते है।
  • छात्र अपनी पढ़ाई में ठीक ढ़ंग से अपने मस्तिष्क को केंद्रित नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 25.
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के दो उपाय बताइए।
उत्तर :

  • कल कारखानों को आबादी से दूर लगाना चाहिए।
  • सड़कों के किनारे पेड़-पौधों को लगाना चाहिए।

प्रश्न 26.
ध्वनि की गुणवत्ता किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
ध्वनि की गुणवत्ता निम्न कारकों पर निर्भर करती हैं –

  • मूल स्वर के साथ उपस्थित उपसुर की संख्या
  • मूल सुर तथा उपसुर की मस्तिष्क का अनुपात
  • मूलसुर तथा उपसुर की आपेक्षिक तीवत्रता
  • ध्वनि सोत से उत्पन्न ध्वनि तरंग का रूप
  • उपसुर की आवृत्ति में विभिम्नता।

प्रश्न 27.
सुरीली ध्वनि की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :

  • तीव्रता (Intensity) : यह ष्वनि का वह लक्षण है, जिससे पता चलता है कि ध्वनि तेज है या धीमी।
  • तारत्व (Pitch) : यह सुरीली ध्वनि का वह लक्षण है, जिससे पता चलता है कि कौन ध्वनि मोटी और कौन पतली है।

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प्रश्न 28.
पराश्रव्य ध्वनि का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर :
पराश्रव्य ध्वनि का एक उपयोग : पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग समुद्रु की गहराई तथा पनहुब्बी का पता लगाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 29.
श्रुतिनिबंध किसे कहते हैं ? इसका मान कितना है ?
उत्तर :
जब कोई ध्वनि हमारे कानों से टकराती है, तो इसका असर हमारे मस्तिष्क में \(\frac{1}{10}\) सेकेंड होता है।

प्रश्न 30.
प्रतिध्वनि या पराश्रव्य ध्वनि की सहायता से निम्नलिखित को कैसे ज्ञात करेंगे-
(i) समुद्र की गहराई
(ii) उड़ते हुए हवाई जहाज की ऊँचाई।
उत्तर :
(i) समुद्र की गहराई ज्ञात करने में (Depth of Sea) : पराश्रव्य ध्वनि तरंग द्वारा समुद्र की गहराई ज्ञात करने में तथा समुद्र के अन्दर उपस्थित दुश्मनो की पनडुल्बो की स्थिति को ज्ञात किया जाता है।

(ii) वायुयान की ऊँचाई (Height of an aeroplane) : इसी प्रकार पराश्रव्य ध्वनि द्वारा वायुयान की ऊँचाई ज्ञात की जाती है कि वायुयान पृथ्वी तल से कितनी ऊंचाई पर उड़ान भर रहा है। हवाई अड्डों पर वायुयानों के मार्ग दर्शन में किया जाता है।

प्रश्न 31.
ध्वनि के गमन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
ध्वनि का गमन (Propagation of Sound) : ध्वनि के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की क्रिया को ध्वनि का गमन कहते हैं। ध्वनि ऊर्जा के रूप में तरंग द्वारा आगे बढ़ती है और हमारे कान तक पहुँचती है। जब कोई वस्तु किसी माध्यम में कंपन करती है तो वह माध्यम के उन कणो को, जो वस्तु के समीप हैं, गति में ला देती है। ये कण अपने समीपवर्ती कणों को भी उसी प्रकार से गतिमय कर देते हैं। इस प्रकार माध्यम में हलचल (Disturbance) उत्पन्न हो जाती है जो उस माध्यम में आगे बढ़ती है।

प्रश्न 32.
किसी कंपित वस्तु के संदर्भ में परिभाषा दो –
(i) पूर्ण कंपन
(ii) आयाम
(iii) आवर्तकाल
(iv) आवृत्ति
उत्तर :
(i) पूर्ण कंपन (Complete Oscillation) : जब कोई कंपन करता हुआ कण, अपने किसी स्थान से चलकर पुन: उसी स्थान पर दुबारा उसी दिशा में गति करता हुआ पहुँचता है तो इस पूरी यात्रा को एक पूर्ण कंपन कहते हैं।

(ii) आयाम (Amplitude) : कोई मी कंपित कण अपनी मध्यमान स्थिति के दोनों तरफ जितनी अंधिकतम दूरी तक विस्थापित होता है, उस दूरी को कंपन का आयाम (Amplitude) कहते हैं।

(iii) आवर्तकाल (Time Period) : किसी कपित वस्तु को एक पूर्ण कंपन में जितना समय लगता है, आवर्तकाल (Time Period) कहलाता है। इसे प्राय: ‘T ‘ अक्षर से सूचित किया जाता है। आवर्तकाल की S.I. इकाई सेकेंड है।

(iv) आवृत्ति (Frequency) : कोई भी कंपित कण एक सेकेंड में जितनी बार पूर्ण कपन करता है, उसे उसकी आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। इसकी इकाई साइकिल/सेकेंड है। आवृत्ति को ‘n’ अक्षर से सूचित करते हैं।

C.G.S. या S.I. पद्धति में आवृत्ति की इकाई सायकिल्स प्रति सेकेंड cycles/second या c.p.s. अथवा हटर्ज (Hertz या Hz) होती है। प्रसिद्ध जर्मन वैज्ञानिक हेनरिख हट्र्ज के नाम पर आवृत्ति (Frequency) की इकाई Hertz ली गई है।

प्रश्न 33.
तरंग के संदर्भ में निम्नलिखित की परिभाषा दो।
(i) तरंग आयाम
(ii) आवर्तकाल
(iii) तरंग आवृत्ति
(iv) तरंग-दैर्घ्य
(v) तरंग वेग
उत्तर :
(i) तरंग आयाम (Wave amplitude) : एक तरग के किसी कण का उसकी मध्यमान स्थिति से दायें या बायें जितना अधिकतम विस्थापन होता है, उसे ही तरंग आयाम कहते हैं। चित्र में BP या QD तरंग आयाम हैं।

(ii) आवर्तकाल (Time period) : किसी तरंग कण (Wave particle) को एक पूर्ण कंपन करने में जो समय लगता है, उसे ही तरंग का आवर्त काल कहते हैं। इसे ‘ T ‘ द्वारा पदरशित करते है।

(iii) तरंग आवृत्ति (Wave frequency) : किसी माध्यम में तरंग संचारित होने पर, माध्यम का कोई कण एक सेकेण्ड में जितनी बार कंपन करता है, उसे ही तरंग आवृत्ति कहते है। इसे ‘n’ द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

(iv) तरंग-दैर्ध्य (Wave-length) : किसी तरंग गति में समान काल में दोलन करने वाले दो क्रमागत कणों के बीच की दूरी को तरंग लंबाई कहते हैं। चित्र में BF या DH दूरी तरंग-लंबाई है।

(v) तरंग वेग (Wave velocity) : तरंग द्वारा एक सेकेण्ड में तय की गई दूरी को तरग वेग कहते है, इसे ‘v’ द्वारा प्रदर्शिंत करते हैं।

प्रश्न 34.
पराश्रव्य ध्वनि के क्या उपयोग हैं ?
उत्तर :
पराश्रव्य ध्वनि के उपयोग (Uses of Uitrasonic sound) :

  • समुद्र की गहराई ज्ञात करने में,
  • वायुयान की ऊँचाई ज्ञात करने में,
  • दुर्घटनाग्रस्त जलयान या वायुमान के अवशेषों का समुद्र के अंदर जानकारी करने एवं निशानदेही करने में,
  • मत्स्यसमूहो की गहराई एवं उनकी गतिविधियों की जानकारी करने में,
  • मानव शरीर में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में,
  • गर्भस्थ शिशु की जानकारी प्राप्त करने में,
  • वृक्क (Kidney) के पत्थर को तोड़ने में।

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प्रश्न 35.
SONAR क्या है ?
उत्तर :
SONAR का पूरा नाम है – Sound Navigation And Ranging.
यह वह विधि है जिसमें जल के अंदर ध्रनि के गमन का उपयोग मार्ग निर्देशन के लिये या जल की सतह के नीचे की वस्तुओं, जैसे पनड्बी या जल के ऊपर की वस्तुओं का पता लगाने के लिये या दूसरे जहाज से वार्ता करने के लिये किया जाता है।

प्रश्न 36.
शेर की दहाड़ एवं मच्छर की भिनभिनाहट में क्या अंतर है ?
उत्तर :
शेर को दहाड़ जोर से सुनाई पड़ती है क्योंकि शेर की दहाड़ की तीवता अधिक एवं तारत्व कम होता है, जबकि मच्छर की भिनभिनाहट में तीव्रता कम एवं तारल्व अधिक होता है। इसलिए मच्छर की आवाज में तीक्षणा अधिक होती है।

प्रश्न 37.
ध्वनि किस माध्यम में सुचारु रूप से गमन करती है ?
उत्तर :
ध्वनि का संचरण (Propogation of Sound) : यदि ध्वनि सोत और हमारे कान के बीच कोई माध्यम न हो, तो हमें कोई ध्वनि सुनाई नहीं पड़ेगी। ध्वनि शून्य (vaccum) से होकर नहीं जा सकतो है। ध्वनि के संघरण के लिए, किसी पदार्थीय माध्यम का होना आवश्यक है।

संक्षिप्त प्रश्नोत्तर (Brief Answer Type) : 4 MARKS

प्रश्न 1.
0°C पर वायु का वेग 332 मी॰/से॰ होने पर प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक तल के बीच कम से कम दूरी कितनी होनी चाहिए ?
उत्तर :
मनुष्य के मस्तिष्क में सुनी हुई ध्वनि का प्रभाव लगभग \(\frac{1}{10}\) सेकेंड तक रहता है। इसे श्रुतिनिबंध (persistence of hearing) कहते हैं। अत: दूसरी ष्वनि (यहाँ प्रतिष्वनि) उसे साफ-साफ उसी अवस्था में सुनाई पड़ेगी, जब वह पहली ध्वनि के पहुँचने के \(\frac{1}{10}\) सेकेंड के बाद उसके पास पहुँचे। ध्वान का वेग 0°C पर हवा में 332 मी०/सेकेंड होता है। धन्वनि का हा में वेग =332 मी॰/से०
∴ \(\frac{1}{10}\) सेकेंड में छ्वनि द्वारा तय की गई दूरी =33.2 मी०
1 सेकेंड में ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी =332 मी०
∴ \(\frac{1}{10}\) सेकेंड में ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी = 332 x \(\frac{1}{10}\) = 33.2 मी०

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अर्थांत् ध्वनि द्वारा ध्वनि सोत तथा परावर्तक सतह तक तथा परावर्तक सतह से परावर्तित होकर ध्वनि स्रोत तक तय की गई दूरी 33.2 मी० है। अत: श्रोता तथा परावर्तक तल के बीच की आवश्यक न्यूनतम दूरी =\(\frac{33.2}{2}\) = 16.6 मी०

प्रश्न 2.
एक प्रयोग से सिद्ध करो कि ध्वनि के गमन के लिए पदार्थीय माध्यम की आवश्यकता होती है।
उत्तर :
ध्वनि का गमन ठोस माध्यम से होकर होता है। इसे निम्नलखित उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।
(i) एक लम्बे मेज के एक सिरे पर एक घड़ी को रखकर, मेज के दूसरे सिरे से कान को सटाकर रखने पर घड़ी की टिक्टिक् की ध्वनि स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ती है। यहाँ ध्वनि का विस्तार ठोस माध्यम (लकड़ी) द्वारा होती है।

(ii) एक लोहे के लम्बे पाइप के एक सिरे को धीरे-धीरे लकड़ी द्वारा चोट करने पर यदि दूसरे सिरे पर कोई कान लगाकर रखता है तो यह ध्वनि स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ती है। यहाँ ध्वनि ठोस माध्यम (पाइप) द्वारा होती है।

(iii) यदि दूर से आती हुई अदृश्य ट्रेन की आवाज वायु में सुनाई नहीं पड़ती है लेकिन रेल की पटरी पर कान रख करके सुनने पर ट्रेन के पहिये का घर्षण की आवाज सुनाई पड़ती है। यह आवाज पटरी (ठोस) के माध्यम से पहुँचती है। ठोस में ध्वनि का वेग वायु की अपेक्षा अधिक होता है।

प्रश्न 3.
तरंग और तरंग गति से क्या समझते हो ? तरंग कितने प्रकार की होती हैं ? उदाहरण के साथ परिभाषा दो।
उत्तर :
तरंग (Wave) : तरंग किसी विक्षोभ का वह रूप है जो किसी पदार्थीय माध्यम के एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ऊर्जा को संचालित करती है, किन्तु माध्यम के कण स्थान परिवर्तन नहीं करते।

तरंग गति (Wave motion) : जिस पद्धति द्वारा ऊर्जा एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक स्थानांतरित होती है, उसे तरंग गति (Wave motion) कहते हैं। तरंग दो प्रकार की होती है –

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(i) अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) : वह तरंग जिसमें माध्यम के कंणों का कंपन तरंग चलने की दिशा के लंबवत् होता है, अनुप्पस्थ तरंग (Transverse wave) कहलाती है। तालाब के शांत जल में एक पत्थर के टुकड़े को फेकने से जल में उत्पत्न तरंगें अनुप्थ तरंगें होती हैं।
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(ii) अनुदैध्ध्य तरंग (Longitudinal wave) : वह तरंग जिसमें माध्यम के कण अपनी मध्यमान स्थिति के आगे और पीछे उसी दिशा में कंपन करते हैं जिस दिशा में माध्यम में तरंग आगे बढ़ती है अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal wave) कहलाती है। स्वरित्र, घंटी, ढोल आदि के कंपन से आस-पास की हवा में उत्पत्न तरंग अनुदैर्ध्य तरंग होती है।
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प्रश्न 4.
मानव कान की संरचना का वर्णन करो।
उत्तर :
मानव कान की संरचना (Structure of human ear) : मनुष्य के कान को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

  • बाह्य कर्ण (External ear),
  • मध्य कर्ण (Middle ear),
  • अंतःकर्ण (Internal ear)।

बाह्य कर्ण (External ear) : बाह्य कर्ण में तीन भाग होते हैं –

  • कर्ण पल्लव (Ear Pinna),
  • बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal),
  • कर्ण पटल (Eardrum or Tympanic membrance or Tympanum)।

कर्ण पल्लव (Ear Pinna) : यह बाह्य कर्ण का सबसे बाहरी भाग है जो अनियमित एवं कीप के आकार का होता है। यह कार्टिलेज से बना होता है।

बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal) : कर्ण पल्लव से कर्णपटल तक फैली हुई नलिका को बाह्य कर्ण नलिका कहते हैं। इसकी दीवारें कार्टिलेज की बनी होती है जिसमें ग्रंथियाँ (Cerumen glands) पाई जाती हैं जो सेरूमेन या ear wax का स्राव करती है।

कर्ण पटल (Ear drum or Tympanic membrane or Tympanum) : बाह्य कर्ण नलिका एवं मध्यकर्ण के संयोग स्थल पर उपस्थित पतली झिल्ली को कर्ण पटल कहते हैं।

मध्यकर्ण (Middle ear) : कर्ण पटल से अंत:कर्ण के बीच के भाग को मध्य कर्ण कहते हैं।

कर्ण अस्थियाँ (Ear ossicles) : मध्य कर्ण में तीन छोटी-छोटी अस्थियाँ – मैलियस (Malleus), इन्कस (Incus) तथा स्टापेस (Stapes) पाई जाती हैं जो लिगामेंद्स के द्वारा एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं।

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प्रश्न 4.
मानव कान की संरचना का वर्णन करो।
उत्तर :
मानव कान की संरचना (Structure of human ear) : मनुष्य के कान को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –
(i) बाह्य कर्ण (External ear)
(ii) मध्य कर्ण (Middle ear)
(iii) अंतःकर्ण (Internal ear)।

(i) बाद्य कर्ण (External ear) : बाह्य कर्ण में तीन भाग होते हैं –
(a) कर्ण पल्लव (Ear Pinna), (b) बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal), (c) कर्ण पटल (Ear drum or Tympanic membrance or

Tympanum)।

  • कर्ण पल्लव (Ear Pinna) : यह बाह्य कर्ण का सबसे बाहरी भाग है जो अनियमित एवं कीप के आकार का होता है। यह कार्टिलेज से बना होता है।
  • बाह्य कर्ण नलिका (External auditory canal) : कर्ण पल्लव से कर्णपटल तक फैली हुई नलिका को बाह्य कर्ण नलिका कहते हैं। इसकी दीवारें कार्टिलेज की बनी होती है जिसमें ग्रंथियाँ (Cerumen glands) पाई जाती हैं जो सेरूमेन या ear wax का साव करती है।
  • कर्ण पटल (Ear drum or Tympanic membrane or Tympanum) : बाह्य कर्ण नलिका एवं मध्यकर्ण के संयोग स्थल पर उपस्थित पतली झिल्ली को कर्ण पटल कहते हैं।

(ii) मध्यकर्ण (Middle ear) : कर्ण पटल से अंत:कर्ण के बीच के भाग को मध्य कर्ण कहते हैं।

  • कर्ण अस्थियाँ (Ear ossicles) : मध्य कर्ण में तीन छोटी-छोटी अस्थियाँ – मैलियस (Malleus), इन्कस (Incus) तथा स्टापेस (Stapes) पाई जाती हैं जो लिगामेंद्स के द्वारा एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं।
  • यूस्टेचियन नलिका (Eustachian tube) : यह मध्य कर्ण तथा ग्रसनी के बीच एक वायुपूर्ण नली है जो मध्य कर्ण तथा ग्रसनी के बीच के वायुदाब को नियंत्रित करती है।
  • फेनेस्ट्रा ओवैलिस (Fenestra Ovalis) : स्टापेस का अंतिम सिरा एक अंडाकार झिल्लीदार खिड़की से जुड़ा होता है जिसे फेनेस्ट्रा ओवैलिस या Oval window कहते हैं।

(iii) अंतःकर्ण (Internal ear) : इसकी रचना दो प्रकार के लेबिरिन्थ अस्थिलेबिरिन्थ (Bony Labyrinth) तथा मेम्ब्रेनस लेबिरिन्थ (Membraneous labyrinth) से होती है। दोनों लेबिरिन्थ में पेरिलिम्फ (PArilymph) नामक द्रव पाया जाता है। मेम्ब्रेनस लेबिरिन्थ में चार प्रकार की रचनाएँ – सेकुल (Saccule), यूट्रीकल (Utricle), अर्द्धचंद्राकार नलियाँ (Semicircular Canals) तथा काक्लिया (Cochlea) पाई जाती है। इनमें प्रथम तीन रचनाओं को वेस्टीबुलर ऐपरेटस (Vestibular Apparatus) कहते हैं। इसमें इण्डोलिम्फ (Endolymph) नामक द्रव भरा रहता है। सेकुल एक छोटी-सी गोल रचना है जो पीछे की तरफ बढ़कर घुमावदार काक्लिया का निर्माप्प करता है।

काक्लिया (Cochlea) : यह एक घुमावदार रचना है जो सेकुल के पिछ्ले भाग से बनती है। इसकी आंतरिक गुहा तीन समानांतर नलियों में बँटी होती है जो झिल्ली द्वारा एक-दूसरे से अलग रहती है। इनमें से ऊपरी एवं निचली नलिकाओं में पेरिलिम्फ तथा मध्यवाली नलिका में इण्डोलिम्फ भरा रहता है। मध्य नलिका में एक ध्वनिग्राहक संवेदी अंग पाया जाता है जिसे ऑर्गन ऑफ कार्टी (Organ of corti) कहते हैं। यह संवेदी अंग ध्वनि तंत्रिका द्वारा जुड़ा होता है।

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प्रश्न 5.
मानव कान द्वारा ध्वनि के सुनने की क्रियाविधि का वर्णन करो।
उत्तर :
मानव कान द्वारा ध्वनि सुनने की क्रियाविधि (Mechanism of hearing of sound by human ear) : कोई भी कंपित ध्वनि-स्रोत हवा में संपीडन एवं विरलन उत्पन्न करते हैं। जब ये बाह्य कान पर पहुँचते हैं तब ये कर्णनलिका में प्रवेश करके कर्णपट के निकट पहुँच कर इसे धकेलते हैं जिससे यह कंपन करने लगता है। कर्णपट के कंपित होने से आपस में जुड़ी तीनों अस्थियाँ कंपन करने लगती हैं। ये अस्थियाँ एक लीवर का कार्य करती है, जिससे कंपन के समय विस्थापन बढ़ जाता है।

इससे वलयक (Stirrup or stapes) का विस्थापन कर्णपट के कंपन के आयाम से कई गुना बढ़ जाता है। इस तरह जब कपन वलयक तक पहुँचता है तो कंपन का आयाम बढ़ जाता है। वलयक, जो कर्णावर्त (Cochlea) से जुड़ा होता है, कर्णावर्त के तरल में संपीडन और विरलन के स्पन्दन को प्रतिष्ठापित करता है और ये स्पन्दन विद्युत संकेतों में परिवर्तित हो जाते हैं जो श्रवण तंत्रिका (Auditory nerve) द्वारा मस्तिष्क को भेज दिये जाते हैं। मस्तिष्क इनकी व्याख्या ध्वनि के रूप में करता है।

प्रश्न 6.
एक स्वच्छ चित्र की सहायता से बताएँ कि ध्वनि के स्रोत के निकट की वायु में संपीडन तथा विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं ?
उत्तर :
अनुदैर्ध्य तरंग-गति के प्रदर्शन के लिए एक प्रयोग : एक सर्पिल कमानी (spiral spring) को किसी टेबुल पर रखकर इसके एक सिरे B को दीवार में लगी कील से जकड़कर, दूसरे सिरे, A को हाथ से लम्बाई की दिशा में दबाकर छोड़ देते हैं। दबाने से बाएँ सिरे के पास कमानी के फेरे (turns) एक-दूसरे के निकट हो जाते हैं। इस सिकुड़े भाग, को संपीडन (compression), C कहते हैं। दाब हटाते ही दबे हुए फेरे कमानी के लचीलेपन के कारण अपनी पुरानी स्थिति में आना चाहेंगे, जिस कारण कमानी की लंबाई की दिशा में आगे के कुछ फेरों को दबाएँगे और इस प्रकार संपीडन, C दाएं ओर निश्चित चाल से बढ़ता जाएगा।

अब यदि कमानी के सिरे A को बायीं ओर खींचकर छोड़ दिया जाए, तो इस सिरे के पास कमानी के फेरे एक-दूसरे से दूर होकर फैल जाएंगे ऐसे फैले हुए भाग को विरलन (rarefaction) R कहते हैं। कमानी के लचीलेपन के कारण विरलन निश्चित चाल से दायीं ओर बढ़ेगा।

यदि सर्पिल कमानी के सिरे A को किसी ऐसे दोलक से जोड़ दें, जो कमानी की लंबाई की दिशा में दोलित हो, तो कमानी पर एक के बाद एक संपीडन C तथा विलन, R उत्पन्न होंगे और ये निश्चित चाल से आगे बढ़ते जाएंगे, किन्तु कमानी के फेरे आगे नहीं बढ़ंगे केवल अपनी विरामावस्था की स्थिति के आगे-पीछे कंपन करेंगे। कमानी के फेरे पर कागज के छोटे टुकड़े को रखकर यह आसानी से देखा जा सकता है।

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प्रश्न 7.
ध्वनि की प्रबलता से आप क्या समझते हैं ? यह किन-किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर :
ध्वनि की प्रबलता : ध्वनि की प्रबलता (loudness) इसका वह गुण है जिसके कारण यह कान को धीमी अथवा तेज सुनाई पड़तीं है। वस्तुतः ध्वनि की प्रबलता कान में उत्पत्र एक संवेदना है जिसके आधार पर ध्वनि को तेज (तीव्र) अथवा धीमी कहते हैं। ध्वनि की प्रबलता मूल रूप से श्रोता के कान की सुग्राहिता पर निर्भर करती है। ध्वनि की प्रबलता ध्वनि के आयाम (amplitude) से जानी जा सकती है। चूँकि ध्वनि ऊर्जा से संबंधित है, इसलिए प्रबल ध्वनि में ऊर्जा अधिक होती है और मृदु ध्वनि में कम।

ध्वनि की तीव्रता या प्रबलता (Intensity of loudness) निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है –

  • ध्वनि स्रोत की दूरी पर
  • माध्यम के घनत्व पर
  • कम्पन आयाम पर तथा
  • ध्वनि स्रोत के आधार पर।

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प्रश्न 8.
बताएँ कि चमगादड़ हवा में अपने शिकार को पकड़ने के लिए पराश्रव्य तरंगों का उपयोग किस प्रकार करता है ?
उत्तर :
चमगादड़ तथा डालफिन के द्वारा उपयोग : चमगादड़ रात को भोजन की खोज में निकलते हैं तो यह अपना रास्ता आँखों से देखकर नहीं तय करते हैं बल्कि पराश्रव्य तरंगों को सुनकर करते हैं। इस तरंग को सुनने की क्षमता उसमें है।

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इसी कारण यदि कोई बाधा उसके रास्ता में आती है तो तुरन्त अपना रास्ता बदल लेता है। चमगादड़ शिकार को पकड़ने के लिए एक लाख हर्ज्ज की आवृत्तिवाला कम्पन उत्पन्न करता है तथा इसके मार्ग में आनेवाले किसी शिकार से परावर्तित होने वाली प्रतिध्वनि को सुनकर शिकार को पकड़ता है।

प्रश्न 9.
ध्वनि, वस्तु के कंपन से उत्पन्न होती है- सिद्ध करो।
उत्तर :
निम्नलिखित प्रयोग से यह सिद्ध किया जा सकता है कि किसी वस्तु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है एक स्वरित्र द्विभुज को रबर के पैड से चोट करते हैं तो उससे ध्वनि उत्पत्र होती है। इसकी भुजाएँ बहुत तेजी से कंपन करती हैं। इन कंपनों को हम स्पष्ट रूप से नहीं देख पाते, परंतु कंपन करती हुई भुजाएँ धुँधले रूप से दिखाई देती हैं। अब यदि एक सरकण्डे की गोली (Pith ball) को धागे से लटकाया जाता है। अत: इस प्रयोग से इस बांत की पुष्टि होती है कि कंपित वस्तुएँ ही ध्वनि के स्रोत हैं।

प्रश्न 10.
सुरीली ध्वनि और कोलाहल में दो अन्तर का उल्लेख कीजिए। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के एक संभावित उपाय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
सुरीली ध्वनि और कोलाहल में अन्तर :

सुरीली ध्वनि (Musical sound) कोलाहल (Noise)
सुरीली ध्वनि कर्णप्रिय ध्वनि होती है। कोलाहल का प्रभाव कानों के लिये अप्रिय होता है।
सुरीली ध्वनि कर्णप्रिय ध्वनि होती है। कोलाहल के रूप में ध्वनि निम्न आवृत्ति की होती है।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के एक संभावित उपाय :

  • कल-कारखानों में ध्वनिविहीन यंत्रों को लगाना चाहिए।
  • कल-कारखानों के निकट लोगों को नहीं बसने देना चाहिये।
  • घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कानून बनाकर कल-कारखानों के बनने पर रोक लगानी चाहिये।
  • कानून बनाकर अनावश्यक रूप से वाहनों द्वारा हॉर्न (horn) के बजाने पर रोक लगानी चाहिए।
  • ध्वनि विस्तारक यंत्र (loud speaker) के बजने पर रोक लगानी चाहिए।
  • कानून बनाकर पटाखों के बजाने पर रोक लगानी चाहिए।
  • विज्ञापन द्वारा ध्वनि प्रदूषण के कुप्रभाव से लोगों को अवगत कराना चाहिए।

प्रश्न 11.
कुछ उदाहरण दो जिनसे यह सिद्ध होता है कि किसी वस्तु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
उत्तर :
वस्तुओं के कपन से ध्वनि उत्पन्न होती है – निम्नलिखित उदाहरणों से इसकी पुष्टि की जा सकती है –
(i) पीतल के घंटे को लकड़ी के हथौड़े से चोट करने पर घंटा बजता है। घंटे को स्पर्श करने पर अनुभव होता है कि घंटे में कंपन हो रहा है।

(ii) एक नगाड़े (बाजा) पर बालू के कुछ कण को फैला देते हैं। अब एक छड़ी से नगाड़े पर हल्के-हल्के चोट करते हैं तो नगाड़े पर रखे हुए बालू के कण थिरकते हुए दिखाई पड़ते हैं, साथ ही साथ क्वनि भी उत्पत्र होती है। जैसे ही नगाड़े को अंगुली से स्पर्श करते हैं, ध्वनि उत्पत्र होना बंद हो जाता है तथा बालू के कण स्थिर हो जाते हैं। अत: वस्तु के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।

(iii) सितार, वायलिन, गिटार आदि वाद्ययंत्रों के तारों को जब अंगुलियों से छेड़ते हैं तो एक मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है। इन वाद्य-यंत्रों में तार, ध्वनि के स्रोत हैं। बाँसुरी, शहनाई आदि को मुँह से फूँकने पर एक मधुर ध्वनि निकलती है। यहाँ वायु की परतें, ध्वनि के स्रोत का कार्य करती हैं। तबला, ढोलक आदि में चमड़े की झिल्ली को हाथों से ठोंकने पर ध्वनि उत्पत्न होती है। यहाँ चमड़े की झिल्ली ध्वनि के स्रोत हैं।

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प्रश्न 12.
मानव वाक् तंतु द्वारा ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है ?
उत्तर :
सामान्य तौर पर मुनष्य द्वारा उत्पन्न की जानेवाली ध्वनि की क्रियाविधि को तीन भागों में बाँटा जा सकता है फेफड़ा (Lungs), लारिक्स (Larynx) के अंदर वोकल फोल्ड्स (Vocal folds) एवं शब्दों का सही उच्चारण करने वाला अंग (articulaters) है। वाक् तंतु या वोकल कॉड्र्स (Vocal cords) ध्वनि के प्राथमिक स्रोत हैं। मनुष्य के गले में स्थित स्वरयंत्र (Vocal cord) में दो पतली झिल्लियाँ होती हैं जिनके कंपन के फलस्वरूप ध्वनि उत्पन्न होती है। जैसे यदि कागज के दो पतले टुकड़ों को एक साथ सटाकर दोनों किनारों को जोर से पकड़ कर उन टुकड़ों के बीच में मुँह से फूँकते हैं तो दोनों कागज के टुकड़ों में कंपन उत्पन्न होता|
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है तथा विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। हमारे फूँकने की क्रिया में परिवर्तन के साथ-साथ कागज के टुकड़ों के फड़फड़ाने एवं उनसे निकलनेवाली आवाजों के लक्षणों में भी परिवर्तन देखने को मिलता है। स्वरयंत्र (Vocal cord) जिस तरह से क्रियाशील होते हैं, उसी के अनुसार मुँह के बाहर फेफड़े से वायु बाहर आती है और कागज के टुकड़ों में कपन उत्पन्न होता है। तदनुसार कागज के टुकड़ों के कंपन से उनके मध्य उपस्थित वायु में कंपन होने से विभिन्न प्रकार की आवाजें उत्पत्र होती हैं।
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प्रश्न 13.
समतल सतह से ध्वनि के परावर्तन को दिखाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।
उत्तर :
समतल सतह पर ध्वनि का परावर्तन : टेबुल पर लकड़ी का एक समतल तख्ता AB सीधा खड़ा किया जाता है। एक-एक मीटर लम्बी दो नलियाँ (A और B) ली जाती हैं। इसमें एक नली को टेबुल पर इस प्रकार रखा जाता है कि इसका अक्ष तख्ते के Q बिन्दु पर कुछ कोण बनाए। नली के दूसरे मुँह पर एक टेबुल पर इस प्रकार रखते हैं कि उसका अक्ष भी Q बिन्दु पर पड़े।

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दूसरी नली के दूसरे मुँह पर कान लगाकर नली को टेबुल पर इस प्रकार रखते हैं कि घड़ी की टिक्-टटिक् की स्पष्ट ध्वनि सुनाई पड़े। दोनों नलियों के बीच लकड़ी का एक पर्दा खड़ा कर दिया जाता है जिससे घड़ी की आवाज सीथे कान तक न पहुँचे। इससे पता चलता है कि ध्वनि पहली नली के भीतर से चलकर समतल तख्ता AB से टकराती है और वहाँ से परावर्वित होकर दूसरी नली से होते हुए कान तक पहँचती है। यहाँ PQ आपतित ध्वनि, QR परावर्तित ध्वनि तथा QS अभिलम्ब को दर्शाते हैं। ये तीनों एक ही समतल में स्थित हैं। तथा आपतन कोण <PQS= परावर्तन कोण <RQS

प्रश्न 14.
कम्पन से सम्बन्धित भौतिक राशियाँ कौन-कौन हैं ? प्रत्येक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
कम्पन से सम्बन्धित भौतिक राशियाँ निम्नलिखित हैं –
(i) आयाम (Amplitude),
(ii) आवर्त काल (Time Period),
(iii) आवृत्ति (Frequency)।

(i) आयाम (Amplitude) : कोई कम्पन करने वाली वस्तु अपनी मध्यमान स्थिति की किसी एक तरफ जितना अधिक से अधिक विस्थापित होती है, उस विस्थापन को आयाम (Amplitude) कहते हैं। इसकी S.I. इकाई मीटर है।

(ii) आवर्त काल (Time Period) : कम्पन करने वाली किसी वस्तु को एक पूर्ण कम्पन करने में जो समय लगता है, उस समय को आवर्तकाल कहते हैं तथा इसे T द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(iii) आवृत्ति (Frequency) : किसी कम्पित वस्तु द्वारा एक सेकेण्ड में किये गये पूर्ण कम्पनों की संख्या को उस वस्तु की आवृत्ति कहते हैं। इसे n द्वारा प्रदर्शित करते हैं। कम्पनशील वस्तु जितनी देर में एक कम्पन करती है, उतने समय में एक तरंग की सृष्टि होती है। ∴ n = \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)

अत:, किसी माध्यम में प्रति सेकेण्ड उत्पन्न होने वाली पूर्ण तरंगों की संख्या को आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। S.I. पद्धति में आवृत्ति की इकाई सायकिल प्रति सेकेण्ड (Cycle/second) या हुर्ज (Hertz) होती है।

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प्रश्न 15.
ध्वनि के गुण क्या हैं ?
उत्तर :
ध्वनि के गुण (Quality or Timbre of Sound) : एक ही तारत्व और एक ही तीवता की दो ध्वनियों की पहचान जिस गुण द्वारा करते हैं, उसे गुणता (Quality or Timbre) कहते हैं। गुणता के द्वारा ही सिर्फ आवाज सुनकर हम उस व्यक्ति की पहचान कर लेते है।
सुरीली ध्वनि की गुणता स्वर (note) में उपस्थित उप सुरों (over tones) की संख्या एवं तरंग-रूप पर निर्भर करती है। विभिन्न स्वरों का तरंग रूप (wave form) भिन्न-भिन्न होता है।

प्रश्न 16.
श्रव्य, अपश्रव्य तथा पराश्रव्य ध्वनि से क्या समझते हो ?
उत्तर :
20 से 20,000 Cycle/sec आवृत्ति वाली ध्वनियों को श्रव्य ध्वनि (Audible sound) कहते हैं। 20 Cycle/sec से कम आवृत्ति वाली ध्वनियों को अपश्रव्य ध्वनि (Infrasonic sound) कहते हैं। इसे हम नहीं सुन सकते हैं। 20,000 Cycle/sec से अधिक आवृत्ति वाली छ्वनियों को पराश्रव्य घ्वनि (Super or ultra sonic sound) या अति श्राविक ध्वनि कहते हैं। इसे कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ आदि जन्तु सुन सकते हैं, लेकिन मनुष्य नहीं सुन सकता।

प्रश्न 17.
ध्वनि के परावर्तन का व्यावहारिक उपयोग क्या है ?
उत्तर :
ध्वनि परावर्तन का व्यावहारिक उपयोग (Practical application of reflection of sound) :

(i) दूर से आती हुई धीमी आवाज्ज को स्षष्ट रूप से सुनने के लिए हम अपनी हथेली को कर्ण पल्लव से सटाकर रखते हैं। यहाँ हथेली परावर्तक तल का कार्य करती है, जिससे ध्वनि परावर्तित होकर कर्ण मार्ग में प्रवेश करती है और ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ने लगती है।

(ii) बोलने की नलिका (Speaking tube) : यह धातु की बनी चोगा के आकार (Conical shape) वाली एक नली होती है। इसके पतले सिरे पर बोलने से ध्वनि तरंग बाहर नहीं फैलने पाती बल्कि नली की दीवार से परावर्तित होकर नली के दूसरे सिरे से बाहर निकलती है, जिससे ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती है। इसका उपयोग दूर से बोलने, भीड़ी-भाड़ या जनसमूह को सम्बोधित करने आदि में किया जाता है।

(iii) स्टेथोस्कोप (Stethoscope) : हुदय की धड़कन, फेफड़े में श्वसन नाड़ी की गति आदि की परीक्षा करने के लिए चिकित्सकों द्वारा इस यंत्र का उपयोग किया जाता है। इसकी कार्यपणाली भी ध्वनि के परावर्तन पर आधारित है।

(iv) मर्मश्रावी गैलरी (Whispering gallery) : बड़े-बड़े हालों, गिरजाघरों या संगीत घरों की दीवारें तथा छते अवतल आकार (concave shape) की बनाई जाती हैं, जिससे एक किनारे पर बोली गई ध्वनि लगातार परावर्तित होकर दूसरे सिरे पर स्षष्ट सुनाई पड़ती है। यह ध्वनि इतनी स्सष्ट होती है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पास में ही बैठा कोई व्यक्ति बात कर रहा है। इस प्रकार की गैलरी सर्वपथम लंदन में सेटपाल गिरिजाघर में बनाई गयी थी।

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प्रश्न 18.
स्वरित्र क्या है ? ध्वनि के प्रयोग में स्वरित्र का इतना महत्वपूर्ण स्थान क्यों है ?
उत्तर :
स्वरित्र (Tuning Fork) : यह स्टील का बना हुआ U आकार का होता है। इसमें दो भुजाएँ होती हैं। इसके मोड़ पर एक हैंडिल लगा होता है। जब हैंडिल को पकड़ कर इसकी एक भुजा पर रबर पैड से चोट करते हैं तो इसकी दोनों भुजायें कपन करने लगती हैं।ध्वनि के प्रयोग में स्वरित्र का महत्व इसलिए है कि इससे उत्पत्न ध्वनि एक निर्दिष्ट आवृत्ति (Frequency) वाली होती है। इसलिए स्वरित्र से उत्पन्न ध्वनि को सुर (Tone) कहते हैं। ध्वनिविज्ञान में विभिन्न प्रयोगों में स्वरित्र का उपयोग किया जाता है।
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 10

प्रश्न 19.
वायु में ध्वनि के गमन की क्रिया विधि को समझाओ।
उत्तर :
वायु में ध्वनि के गमन की क्रिया विधि (Mechanism of Propagation of Sound through air) : वायु में ध्वनि का गमन, संपीडन (compression) तथा विरलन (rarefaction) के बनने से होता है। संपीडन तथा विरलन ध्वनि उत्पादक वस्तु के कंपन करने से, वायु या किसी अन्य गैसीय माध्यम में उत्पन्न हो जाती है, जो एक निश्चित वेग से तरंग के रूप में आगे बढ़ती है और ये कान तक पहुँच कर ध्वनि का आभास कराती है। चित्र में ध्वनि उत्पादक वस्तु स्वरित्र (Tunning fork) है जिसकी एक भुजा RO के सामने बराबर दूरी पर स्थित सामानांतर वायु की असंख्य परतें हैं।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 9

चित्र में जब स्वरित्र की भुजा RP स्थिति से RQ स्थिति में कंपन करती हुई आती है तो अपने सामने की वायु परतों को दबाती हैं। ये परतें अपने से आगे वाली परतों को दब्वाती हैं। यह दबाव माध्यम की लगातार परतों पर पहुँचता जाता है और इस तरह संपीडित परत (compresed layer) A1 B1 की रचना हो जाती है। चूँकि स्वरित्र की भुजा के प्रत्येक बिंदु पर कंपन की गति समान नहीं होती। अत: A1B1 के सभी भागों पर संपीडन भी समान नहीं होता। स्वरित्र की भुजा की RO

स्थिति में वेग अधिकाधिक और सिरों RP तथा RQ स्थिति में करीब नहीं के बराबर होता है। अत: A1 B2 के बीच वाले भाग में संपीडन अधिकाधिक तथा A1 और B1 सिरों पर करीब-करीब नहीं के बराबर होता है। यह संपीडित परत A1 B1 इस संपीडन से स्वयं मुक्त होना चाहती है। अत: अपना संपीडन समान लंबाई की दूसरी परत को दे देती है।

यही क्रम लगातार जारी रहता है और संपीडन एक परत से दूसरी परत में एक निश्चित गति से आगे की तरफ बढ़ता चला जाता है। जब स्वरित्र की भुजा R Q स्थिति में पुन: लौटती है तो वह अपने पीछे आंशिक शून्य छोड़ने की कोशिश करती है जिससे उसके संपर्क वाली परत A2B2 से दबाव हटने से वह भुजा की ओर फैलती है। इस प्रकार A2B2 के अंदर विरलन.

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 20.
अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य तरंगों में अंतर लिखो।
उत्तर :
अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में अन्तर :

अनुप्रस्थ तरंग अनुदैर्ध्य तरंग
(i) इसमें माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा के लम्बवत् कम्पन करते हैं। (i) इसमें माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा के अनुदिश (समानान्तर) कम्पन करते हैं।
(ii) यह तरंग श्रृंगों तथा गर्तों के रूप में आगे बढ़ती है। एक श्रृंग तथा एक गर्त से मिलकर एक अनुप्थस्थ तरंग बनाती है। (ii) यह तरंग संपीडनों तथा विरलनों के रूप में आगे बढ़ती है। एक संपीडन तथा एक विरलन से मिलकर एक अनुदैर्ष्य तरंग बनाती है।
(iii) यह तरंग केवल ठोस माध्यम में तथा द्रव के ऊपरी तल पर उत्पन्न हो सकती है। द्रव के भीतर अथवा गैसों में नहीं। (iii) यह तरंग ठोस, द्रव तथा गैस तीनों प्रकार के माध्यमों में उत्पन्न हो सकती है।
(iv) इसमें दाब तथा घनत्व में परिवर्तन नहीं होते हैं। (iv) इसमें द्रव तथा घनत्व में परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 21.
प्रयोग विधि द्वारा ध्वनि के परावर्तन को प्रदर्शित करो और इसके नियमों की सत्यता को प्रमाणित करो।
उत्तर :
ध्वनि तरंग का परावर्तन (Reflection of Sound Waves) : समतल द्वारा ध्वनि परिवर्तन दिखाने के लिए दो नलियाँ N1 और N2 जो लगभग 1 मीटर लम्बी तथा 6 से॰मी॰ व्यासवाली लेते हैं। इसके लिए लकड़ी का (पद्दा) टुकड़ा, एक लकड़ी का बोर्ड तथा एक घंटी लेते हैं।

एक लकड़ी के मेज पर समतल लकड़ी का बोर्ड A B को लम्बवत् सीधा खड़ा करके रखते हैं। अब N1 और N2 को मेज पर इस प्रकार रखते हैं कि दोनों का अक्ष बोर्ड A B के C बिन्दु पर मिलते हैं। C से A B के लम्बवत् एक सरल रेखा C D खींचा जो N1 तथा N2 के साथ समान कोण बनायें।

अब C D (ध्वनि निरोधक पर्दा) को खड़ा करके रखते हैं। इसी अवस्था में N1 नली के मुख के पास एक घंटी को रखतें हैं तथा N2 नली के मुख के पास कान लाने से घंटी की टन-टन की ध्वनि सुनाई पड़ती है। यहाँ C D पर्दा घंटी की टन-टन सीधा कान तक आने से रोकता है। इस तरह घंटी की ध्वनि N1 से

होकर A B पर आपतित होती है तथा परावर्तित होकर N2 नली से होकर कान में प्रवेश करती है । यदि N2 नली की स्थिति को इधर-उधर खिसका देने पर ध्वनि सुनने की चेष्टा करते हैं किन्तु कोई ध्वनि नहीं सुनाई पड़ती है। इस अवस्था में हम देखते हैं कि दोनों नलियों का अक्ष, मेज पर खींचे गये अभिलम्ब C D के साथ बराबर कोण बनाता है। अत: आपतन तथा परावर्तन कोण बराबर है और आपतित ध्वनि तरंग तथा परावर्तित ध्वनि तरंग आपतन बिन्दु पर खींचा हुआ अभिलम्ब एक ही तल में स्थित रहते हैं।

प्रश्न 22.
ध्वनि की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर :
ध्वनि की प्रमुख विशेताएँ : हम प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की ध्वनियों को सुनते हैं। सितार या बाँसुरी की ध्वनि, तबला या वायलिन की ध्वन्वनि से भित्र होती है। मंदिर में बजनेवाली घंटी वहीं खड़े व्यक्ति को कर्णकटु लगती है, परंतु मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित व्यक्ति को वह कर्णप्रिय प्रतीत होती है । हमें छ्वनि सुनने में कैसी लगती है यह बहुत सी बातो पर निर्भर करता है। अभी हम उन्ही बातो की चर्चा करेंगे। सुरीली या संगीतात्मक ध्वनि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं।

  • प्रबलता (Loudness)
  • तारत्व (Pitch)
  • गुणता (Quality)।

प्रबलता (Loudness) : ध्वन का वह लक्षण, जिससे यह ज्ञात होता है कि ध्वनि तेज है या धीमी, उसे ध्वनि की प्रबलता (Loudness) कहते हैं। यह गुण सांगीतिक तथा कोलाहल दोनों प्रकार की ध्वनि में पाया जाता है । ध्वनि-प्रबलता की माप उसकी तीव्रता (Intensity) द्वारा की जाती है। ध्यनि गमन की दिशा के लम्बवत रखे तल के इकाई क्षेत्रफल से होकर प्रति सेकेण्ड जिस परिमाण में छ्वनि ऊर्जा गुजरती है, उसे ध्वनि की तीव्रता (Intensity) कहते हैं। अधिक तीव्रता वाली ध्वनि की प्रबलता (Loudness) अधिक होती है। अर्थांत् अधिक जोर (Loud) तथा अधिक दूरी तक सुनाई पड़ती है।

तारत्व (Pitch) : यह संगीतात्मक ध्वनि का वह लक्षण है, जिससे पता चलता है कि कौन ध्वनि मोटी है और कौन पतली है।
यह सांगीतिक ध्वनि का मौलिक गुण (Fundamental Property) है। यह वह गुण है जिसके आधार पर समान तीव्रता वाली ध्वानयों से पतली सुरीली (Shril) तथा मोटी (Flat) ध्वनियों को पृथक किया जाता है।

तारत्व ध्व्वान खोत की आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है अर्थांत् तारत्व आवृत्ति के सीधा समानुपाती होता है। अधिक आवृत्ति वाली ष्वनियाँ उच्च तारत्व (High Pitch) वाली होती हैं तथा Shrill और Sharp होती हैं। बच्चों की आवाज पतली अर्थात् उच्व तारत्व की होती है। पुरुषों की आवाज से स्त्रियों की आवाज पतली अर्थात् उच्च तारत्व की होती है।

गुणता (Quality) : गुणता सागीतात्मक ध्वनि का वह लक्षण जिसके द्वारा समान नीव्रता तथा तारत्व वाली ध्वनियों में अन्तर स्पष्ट किया जाता है, उसे गुणता (quality) कहते है। जैसे – सितार, सारंगी, बांसुरी या हारमोनियम आदि वाद्य यन्त्रों से समान तीव्रता एव तारत्व वाली कोई तार जैसे – सा, रे, गा, मा – सा बजाई जाए तो बिना आँख से देखे केवल ध्वनियों को सुनकर हम कह सकते है कि विभिन्न वाद्ययन्त्रो की गुणता (Quality) भिन्न-भिन्न होती है।

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 23.
स्वतंत्र कम्पन और प्रेरित कम्पन किसे कहते हैं ? प्रत्येक का एक एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
स्वतंत्र या स्वाभाविक कम्पन (Free or natural vibration) : जब कोई वस्तु अपने स्वत: के गुण जैसे लम्बाई, मात्रा आदि के आधार पर कम्पन करती है, तो इस कम्पन को स्वतः कम्पन (Natural vibration) कहते हैं। जैसे स्वरित्र का कम्पन।

प्रेरित कम्पन (Forced vibration) : जब कोई वस्तु एक शक्तिशाली आवर्त बल (Strong periodic force) के प्रभाव में कम्पन करती है, जिसकी आवृत्ति उसकी मूल आवृत्ति (Natural frequency) से भिन्र होती है, तो ऐसे कम्पन को प्रेरित कम्पन (Forced vibration) कहते हैं।

प्रश्न 24.
प्रतिध्वनि सुनने की शर्ते क्या हैं ?
उत्तर :
प्रतिध्वनि सुनाई देने की शर्ते (Conditions for hearing echo) : प्रतिष्वनि सुनाई देने के लिए निम्नलिखित शर्ते हैं –

  • परावर्तक तल का विस्तार अधिकतम होना चाहिए।
  • ध्वनि उत्पन्न करने वाले सोत से परावर्तक तल की कम से कम दूरी 16.6 मीटर होनी चाहिए।
  • एक अक्षर के उच्चारण वाली ध्वनि (articulate sound) की प्रतिध्वनि सुनने के लिये परावर्तक तल की दूरी 33.2 मीटर होनी चाहिए।

आंकिक प्रश्नोत्तर (Numrical Answer Type) : 3 MARKS

प्रश्न 1.
उस तरंग की आवृत्ति ज्ञात करें जिसका आवर्तकाल 0.002 s है।
हल : T = 0.002
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 11
∴ n=500 Hz
उत्तर :
n=500 Hz.

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंग का आवर्तकाल निकालें जिसकी आवृत्ति 400 Hz है।
हल:
n = 400 Hz
T = \(\frac{1}{\mathrm{n}}=\frac{1}{400}\) = 0.0025 s
उत्तर :
0.0025s

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 3.
उस ध्वनि- तरंग की तरंगदैर्ध्य की गणना करें जिसकी आवृत्ति 300 Hz और चाल 330ms है। हल : n=300 Hz, V =330m/s, λ= ?
λ = \(\frac{V}{n}\)
= \(\frac{330}{300}\) = 1.1m
उत्तर :
1.1m

प्रश्न 4.
एक ध्वनि-तरंग की आवृत्ति 1,000 Hz और तरंगदैर्ध्य 34 cm है। इस ध्वनि-तरंग को 1 km की दूरी तय करने में कितना समय लगेगा ?
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 12
उत्तर :
2.94 सेकेण्ड

प्रश्न 5.
एक ध्वनि-तरंग 340 m/s की चाल से चलती है। यदि इसका तरंगदैर्ध्य 2 cm हो, तो तरंगों की आवृत्ति क्या है ? क्या यह श्रव्य परास में होगा ?
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 13
उत्तर :
17000Hz

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 6.
एक पहाड़ी से 100 m दूर ध्वनि उत्पन्न होती है तथा 3/5 s पश्चात् प्रतिष्वनि सुनाई देती है। ध्वनि कीं चाल ज्ञात करें।
हल : D=100 × 2=200 मी०
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 14
उत्तर :
333.3 m/s

प्रश्न 7.
एक पहाड़ी से कुछ दूरी पर एक तीव्र ध्वनि वाले पटाखे से उत्पन्न ध्वनि की प्रतिध्वनि एक व्यक्ति 6 5 के बाद सुनता है। उस व्यक्ति से पहाड़ी की दूरी निकालें (हवा में ध्वनि की चाल =340m/s)
हल : v=340 m/s, t=6s, D= ?
D = vt
=340 × 6
= 2040 मी०
व्यक्ति से पहाड़ी की दूरी =\(\frac{D}{2}\)
=\(\frac{2040}{2}=1020 \) मी०
उत्तर :
1020 मी०

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 8.
एक गोताखोर A समुद्र के अंदर एक-दूसरे गोताखोर B को जो उससे 3km की दूरी पर है ध्वनिसंकेत भेजता है। B उस ध्वनि-संकेत को कितनी देर के बाद सुनेगा? (समुद्री जल में ध्वनि की चाल = 340 m/s)
हल : v=340m/s, t= ?, D=31 cm × 2=6 km
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 15
उत्तर :
17.6 sec.

प्रश्न 9.
एक मनुष्य 1.6 km की दूरी पर स्थित कारखाने की दोपहर वाली सीटी से अपनी घड़ी मिलाता है। बताएँ कि कारखाने की घड़ी से उसकी घड़ी कितनी सुस्त है। (हवा में ध्वनि की चाल =332 m/s)
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 16
उत्तर :
4.8s

प्रश्न 10.
सोगार का उपयोग कर पानी की सतह पर ध्वनि संकेत उत्पन्न किए जाते हैं। इन संकेतों का संस्चन पानी की तली से परावर्तन के बाद किया जाता है। यदि ध्वनि संकेत के उत्पादन से इनके संसूचन में लगा समय 4 s हो, तो पानी की गहराई निकालें। (पानी में ध्वनि की चाल =1530 m/s.
हल : केवल तल तक जाने में समय = \(\frac{4 \mathrm{~s}}{2}\) = 2s
पानी की गहराई d = v × t
=1530 × 2
=3060 × मी॰
उत्तर :
3060 मी०

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 11.
जब एक स्वरित्र को वायु में कपित किया जाता है तो 0.85 मीटर से तरंग लंबाई पैदा होती है। यदि ध्वनि का वेग वायु में 340 मी०/से० हो, तो स्वरित्र आवृत्ति ज्ञात करो।
उत्तर :
यहाँ v=340 m/s, x=0.85 m, n = ?
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 17
प्रश्न 12.
एक स्वरित्र वायु में कम्पन कर रहा है जिससे 1.7 मी॰ तरंग दैर्ध्य वाली तरंग उत्पन्न हो रही है। यदि वायु में ध्वनि का वेग 340 मी०/से० हो, तो स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल : v=340 m/s, λ=1.7 m, n= \(\frac{\mathrm{v}}{\lambda}\)
= \(\frac{340}{1.7}=\frac{3400}{17}\) = 200 Hz
उत्तर :
200 Hz

प्रश्न 13.
एक स्वरित्र की आवृत्ति 200 कम्पन/ सेकेण्ड है। ध्वनि का वेग यदि 330 मीटर/ से० हो, तो ध्वनि की तरंग की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल : v=330m/s, n=200 कम्पन/s
\(\lambda=\frac{v}{n}=\frac{330}{200}\) =1.65 मी०
उत्तर :
1.65 मीटर

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 14.
एक स्वरित्र हवा में कम्पन्न कर 1 1/2 मीटर लम्बी तरंग उत्पन्न करता है। हवा में ध्वनि की गति 330 मीटर/ सेकेण्ड है। उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति और आवर्त काल ज्ञात करो।
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 18
उत्तर :
0.0045 sec

प्रश्न 15.
ध्वनि का वेग गैस में 320 मीटर/ सेकेण्ड और स्वरित्र की आवृत्ति 500 cycle/sec है। ध्वनि तरंग लम्बाई ज्ञात करो।
हल : v=320 m/s, n=500 cycles/s
λ = \(\frac{v}{n}=\frac{320}{500}\) =0.64m
उत्तर :
0.64 metre

प्रश्न 16.
स्वरित्र की आवृत्ति 400 Cycle/sec और ध्वनि की तरंग लम्बाई 0.83 मीटर है। ध्वनि का वेग ज्ञात क
हल : λ =400 cycles/ s, λ = 0.83 m
v=n λ
=400 × 0.83
=332.00
=332 m/sec
उत्तर :
332 m/sec

प्रश्न 17.
ध्वनि का वेग हवा में 335 मीटर/सेकेण्ड और तरंग लम्बाई 0.8 मीटर है। स्वरित्र की आवृत्ति बताओ।
हल : v=335 m/s, λ = 0.8 m
WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि 19
उत्तर :
418.75 cycles/s

प्रश्न 18.
एक किले में निश्चित समय पर बन्दूक दागने पर प्रेक्षक अपनी घड़ी का समय ठीक करता है। बाद में पता लगता है कि घड़ी आधा मिनट देर से है। प्रेक्षक से किले की दूरी बताओ। ध्वनि का वेग 332 m/sec है।
हल : समय (t)= \(\frac{1}{2}\) मिनट =\(\frac{1}{2}\)×60 = 30sec
वेग (v)=332 m/sec
दूरी = वेग x समय
=332 × 30
=9960 × मी॰
उत्तर :
9960 मी०

प्रश्न 19.
बन्दूक से गोली दागने पर चमक के 6 sec के बाद ध्वनि प्रेक्षक को सुनाई पड़ती है। ध्वनि की गति 332 m/sec है। प्रेक्षक और बन्दूक दागने की जगह की दूरी बताओ।
हल : वेग =332 m/s} समय = 6 सेकेण्ड
दूरी = वेग x समय
=332 × 6
=1992  मी॰
उत्तर :
1992 मी०

प्रश्न 20.
प्रतिध्वनि छः अक्षरों को दोहराती है, तो परावर्तक तल की दूरी कितनी है ? ध्वनि की गति 332 m/sec है। हल : किसी मी ध्वनि का असर  \(\frac{1}{10}\) sec रहता
∴ \(\frac{1}{10}\) second में चली दूरी = \(\frac{332}{10}\) = 33.2
चूंकि प्रतिध्वनि दोहराता है अत:
दूरी =33.2 × 2=66.4
कुल दूरी λ से० में =332+66.4
= 398.4 मी०
उत्तर :
398.4 मी०

WBBSE Class 9 Physical Science Solutions Chapter 7 ध्वनि

प्रश्न 21.
दूर स्थित फैक्टरी के सायरन की आवाज सुनकर एक व्यक्ति अपनी घड़ी का समय ठीक करता है, पता चलता है कि घड़ी 5 सेकेण्ड देर से चल रही है। व्यक्ति से फैक्टरी की दूरी कितनी है ? ध्वनि की गति 332 m/sec है।
हल : दूरी = वेग x समय
=332 × 5
=1660 × मी॰
उत्तर :
1660 मी०

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Life Science Book Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Life Science Chapter 5 Question Answer – वातावरण तथा उसके संसाधन

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
तापीय विद्युत ऊर्जा नवीकरणीय है या अनवीकरणीय ?
उत्तर :
नवींकरणीय।

प्रश्न 2.
वह साधन या वस्तु जिसपर लगातार निर्भर रहना चाहिए, क्या कहलाता है ?
उत्तर :
संसाधन।

प्रश्न 3.
निर्वहनीय जल प्रबंध का एक उपाय लिखिए।
उत्तर :
पानी का आवश्यकतानुसार, उचित एवं बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करें। पानी अत्यन्त सीमित है उसको भविष्य के लिए बचाएँ।

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प्रश्न 4.
सजीवों के चारों ओर जो कारक होते हैं वे उनके लिए क्या निर्माण करते हैं ?
उत्तर :
वातावरण का।

प्रश्न 5.
आबादी किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी क्षेत्र या स्थान पर एक समय विशेष में एक या अनेक जातियों के जीवों की संख्या आबादी कहलाती है।

प्रश्न 6.
ऑक्सीजन चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर :
गैस को अपने सोत से निकलकर सजीवों में प्रवेश करने और जैविक क्रियाओं के सम्पन्न होने के बाद पुन: अपने स्रोत में लौट जाने की क्रिया को ऑक्सीजन चक्र कहते हैं।

प्रश्न 7.
पारितंत्र के कुछ कार्बनिक पदार्थों के नाम बताएँ।
उत्तर :
प्रोटीन, वसा, शर्करा।

प्रश्न 8.
‘द्स प्रतिशत नियम’ किसने प्रतिपादित किया है ?
उत्तर :
रेमन्ड लिण्डेमैन (1942)।

प्रश्न 9.
वनों को ज़लवायु का नियंत्रक क्यों कहा जाता है ?
उत्तर :
वन आर्द्रता (बादलों) को रोककर वर्षा कराते है। वे विभिन्न भू-जैविक रासायनिक चक्रों को संतुलित रखते है और तापमान का नियत्रण करते हैं। इस कारण वनो को जलवायु का नियत्रक कहा जाता है।

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प्रश्न 10.
द्वितीय उपभोक्ता का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
मेढ़क, मछलिया।.

प्रश्न 11.
मनुष्य के शरीर में जल की मात्रा कितनी प्रतिशत होती है ?
उत्तर :
60 %

प्रश्न 12.
हाइड्रा प्राणी के शरीर पर पाये जाने वाले शैवाल का क्या नाम है ?
उत्तर : कवक।

प्रश्न 13.
भारत में किसी व्यक्ति को प्रतिदिन आवश्यक जल की कितनी मात्रा मानी गई है?
उत्तर :
3 से 4 लीटर।

प्रश्न 14.
वायुमण्डल क्या है ?
उत्तर :
पुथ्वी की ऊपरी सतह में स्थित हवा के घेरे को वायुमण्डल (Atmosphere) कहते हैं।

प्रश्न 15.
संरक्षण में रखे गये कुछ जन्तुओं के नाम बताइये ?
उत्तर :
संरक्षण में रखे गये जन्तु-बाघ, गैण्डा, घड़ियाल आदि हैं।

प्रश्न 16.
बयोम क्या है?
उत्तर :
बायोम (जीवोम) स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र का ही एक प्रमुख भाग है।

प्रश्न 17.
ऑटेकोलॉजी क्या है?
उत्तर :
जीवधारियों का पारिस्थितिक अध्ययन को ऑंटेकोलॉजी कहते है।

प्रश्न 18.
सिनेकोलॉजी क्या है?
उत्तर :
एक विशेष जीव समुदाय के पारिस्थितिक तंत्र सम्बन्थ के अध्ययन को सिनेकोलॉजी कहते है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 19.
समुदाय कहने से तुम क्या समझते हो?
उत्तर :
समुदाय : किसी स्थान पर उपस्थित भिन्न-भिन्न जातियों की आबादी को सम्मिलित रूप से समुदाय कहते है।

प्रश्न 20.
भारतीय भैसों की प्रमुख प्रजातियों के नाम लिखो।
उत्तर :
मुर्रा, सुरती, जाफराबादी, मेहसाना, भदावरी, गोदावरी, नागपुरी, सांभलपुरी, तराई, टोड़ा, साथकनारा।

प्रश्न 21.
इकोतंत्र शब्द सबसे पहले किसने दिया ?
उत्तर :
A. G. Tansley

प्रश्न 22.
प्राथमिक उपभोक्ता कौन है ?
उत्तर :
शाकाहरी प्राणी।

प्रश्न 23.
दालों में किस प्रकार का खाद्य प्रांप्त होता है ?
उत्तर :
प्रोटीन।

प्रश्न 24.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सहजीवी बैक्टीरिया का नाम बताइये ?
उत्तर :
राइ्रोबियम।

प्रश्न 25.
गैर परम्परागत ऊर्जा में कौन प्रमुख ऊर्जा है ?
उत्तर :
सौर ऊर्जा।

प्रश्न 26.
नाइट्रोजन चक्र में कौन बैक्टीरियम नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदल देता है ?
उत्तर :
नाइट्रोसोमोनस।

प्रश्न 27.
पश्चिम बंगाल के एक संरक्षित वन का नाम बताइये ?
उत्तर :
गोरूमारा।

प्रश्न 28.
एक संकट में पड़े जंगली जन्तु का नाम बताइये ?
उत्तर : शेर।

प्रश्न 29.
वातावरण के सजीव तथा निर्जीव के मध्य आपसी सम्बन्ध का पता किस शब्द से चलता है ?
उत्तर :
इकोसिस्टम (Ecosystem)

प्रश्न 30.
FAO का पूरा नाम क्या है?
उत्तर :
Food and Agricultre Organisation.

प्रश्न 31.
भारत में बाघ संरक्षण योजंना केन्द्र का नाम बताइये ?
उत्तर :
सुन्दरवन (पशिचम बंगाल)।

प्रश्न 32.
नाइट्रोजन युक्त यौगिकों से अमोनिया बनने की क्रिया को क्या कहा जाता है ?
उत्तर :
अमोनिफिकेशन।

प्रश्न 33.
जलदापाड़ा अभयारण्य किस प्राणी संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
एक सींग वाला गैण्डा।

प्रश्न 34.
किस जन्तु के लिए सुन्दरवन प्रसिद्ध है ?
उत्तर :
रॉयल बंगाल टाइगर।

प्रश्न 35.
इकोसिस्टम के दो मुख्य अवयव कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
इकोसिस्टम के दो मुख्य अवयव है :-
(a) जैविक (Biotic) तथा
(b) अजैविक (Abiotic)

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प्रश्न 36.
आबादी क्या है ?
उत्तर :
किसी निश्चित इकाई क्षेत्र में एक ही जाति के समूह को आबादी कहते हैं।

प्रश्न 37.
जैव मण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जल, थल एव वायु का वह भाग जिसमें जीवधारी पाये जाते हैं, उसे जैवमण्डल (Biophere) कहते है।

प्रश्न 38.
स्थल मण्डल क्या है ?
उत्तर :
पृथ्वी के उस बाहरी भाग को जिसमें मिट्टी तथा चट्टानें पायी जाती हैं, उसे स्थलमण्डल(Lithosphere) कहते है।

प्रश्न 39.
जल मण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी के जलमग्न भाग को जल मण्डल (Hydrosphere) कहते हैं।

प्रश्न 40.
सजीव और निर्जीव के आपसी सम्बन्यों का अध्ययन है।
उत्तर :
पारिस्थितिकी तंत्र।

प्रश्न 41.
वह जन्तु जो एक दूसरे जन्तु को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।
उत्तर :
साँप, चील, शेर इत्यादि।

प्रश्न 42.
वह जीवधारी जो किसी अन्य जीवधारी द्वारा भोजन के रूप में उपयोग कर लिया जाता है।
उत्तर :
मेंढक, खरगोश।

प्रश्न 43.
एक स्वच्छ जल वाली मछली का नाम बताएँ।
उत्तर :
रोहू और कतला।

प्रश्न 44.
परजीविता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जब एक जीव अपने भोजन के लिए दूसरे पर आश्रित होता है, तो उसे परजीविता कहते हैं।

प्रश्न 45.
पौषे किस रूप में नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं ?
उत्तर :
पौधे मिट्टी से जड़ों द्वारा घुलनशील लवणों के रूप में N2 अहण करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2/3 MARKS

प्रश्न 1.
पारिस्थितिकी (Ecology) से आप क्या समझते है ?
उत्तर :
विजान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत सजीवों तथा उनके वातावरण के बीच क्रियात्मक सम्बन्ध का अध्ययन किया जाता है, उसे पारिस्थितिकी (Ecology) कहते हैं।

प्रश्न 2.
एक उदाहरण द्वारा समझाइए कि प्राणियों के उपापचय पर तापमान परिवर्तन का प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर :
तापक्रम के परिवर्तन से प्राणियों के उपापचय पर असप्पडता अत्याधिक है । शीत से बचने के लिए प्राणियों का शरीर घने बालों से ढका रहता है । इनकी त्वचा.के नीचे बसा का स्तर पाया जाता है ।

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प्रश्न 3.
परितन्त्र में उत्पादक का क्या कार्य है?
उत्तर :
परितंत्र में उत्पादक प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य की किरण से प्रकाश को अहण कर उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करके अपने शरीर में भोजन के रूप में संचित कर लेता है । जन्तु अपना भोजन प्रत्यक्ष या अपत्यक्ष रूप में पौधों से ही प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 4.
आबादी वृद्धि दर से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
आबादी वृद्धि दर (Growth rate of population) : जन्मदर तथा मृत्यु दर के अन्तर को आबादी अनुपात $37: 14$ था। बच्चों तथा बू़ों की चिकित्सकीय सुविधाओं में वृद्धि के कारण मृत्युदर में काफी वृद्धि हुई है।

प्रश्न 5.
स्थानान्तरण किसे कहते हैं ?
उत्तर :
स्थानान्तरण (Migration) : जब्न जीवधारी अपने गृह स्थान से स्थानान्तरित होकर दूसरी जगह जाते हैं परन्तु पुन: वापस अपने गृह स्थान आ जाते हैं, तो उसे स्थानान्तरण कहते है। जैसे – अत्यधिक सर्दी के कारण साइबेरिया के पक्षी भारत में आते हैं परन्तु गर्मी के दिनों में पुन: वापस चले जाते हैं।

प्रश्न 6.
आबादी वृद्धि दर को कम करने के दो उपाय बताइये ?
उत्तर :
आबादी वृद्धि दर को कम करने के उपाय :-

  • लोगों को परिवार नियोजन के सम्यन्ध में तथा उसके तरीकों की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
  • लोगों को शिक्षित कर बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्याओं से अवगत कराना चाहिए।

प्रश्न 7.
परजीविता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
परजीविता (Parasitism) : कुछ जीव ऐसे होते हैं कि बे अपने भोजन के लिए दूसरे असमान जीवधारी पर निर्भर रहते है। जैसे – अमरबेल (Cuscuta) किसी अन्य पौधे से अपना भोजन चूसती है। उसी प्रकार गोलकृमि हमारी आहारनाल में रहकर उससे अपना भोजन ग्रहण करती है। इस क्रिया को परजीविता (Parasitism) कहते हैं। इसमें जो सजीव भोजन के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहता है, उसे परजीवी (Parasite) और जिस पर वह निर्भर रहता है, उसे पोषक (Host) कहते हैं। जैसे – गोलकृमि परजीवी है और मनुष्य पोषक है।

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प्रश्न 8.
सहयोगिता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सहयोगिता (Co-operation) : दो जीव पौधे या जन्तु एक साथ रहकर एक दूसरे को भोजन या आवास में मदद करते हैं। इन दोनों जीवो को सहायोगी तथा एक साथ परस्पर सहयोग को सहयोगिता कहते हैं।

प्रश्न 9.
परितंत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वातावरण के जैविक तथा अजैविक अवयवों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। यह सम्बन्ध मिलकर एक तंत्र की रचना करते है यह तंत्र पारिस्थितिकी तंत्र या पारितंत्र कहलाता है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा पिरामिड की विशेषता बताएँ।
उत्तर :
ऊर्जा पिरामिड की विशेषताएँ : ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है, इसके आधार पर उत्पाद्कों में ऊर्जा का परिमाण सबसे अधिक तथा शीर्ष की ओर स्थित उपभोक्ताओं में ऊर्जा का परिमाण घटता जाता है। एक खाद्य स्तर से दूसरे खाद्य स्तर में ऊर्जा का हास लगभग 10%है।

प्रश्न 11.
वन किसे कहते हैं?
उत्तर :
किसी क्षेत्र पर स्थित पेड़-पौधों तथा जानवरों के समूह को वन कहते है। वनों में जंगली जानवर तथा जंगली पौधे पाए जाते है।

प्रश्न 12.
स्वपोषी को परितंत्र में उत्पादक क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
जो जीव स्वंय अपना भोजन बनाते हैं, उन्हें स्वपोषी या उत्पादक कहा जाता है। हरे पेड़-पौधे किसी परितंत्र के उत्पादक होते हैं। ये अकार्बनिक पदार्थों एवं सौर ऊर्जा द्वारा अपने भोजन का निर्माण प्रकाश-संश्लेषण क्रिया द्वारा करते हैं।

प्रश्न 13.
खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर :
उत्पादक से उच्च श्रेणी के उपभोक्ता तक खाद्य ऊर्जा का स्थानान्तरण खाद्य श्रृंखला कहलाता है। ओडम (Odum) के अनुसार, जिस शक्ति द्वारा खाद्ध ऊर्जा, उत्यादक पौधों से क्रमबद्ध रूपों में उपभोक्ताओं और विभिन्न प्राणी समूहों के मध्य से गुजरती है, उसे खाद्य श्रृंखला कहते हैं।

प्रश्न 14.
बागानी कृषि से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
बागानी कृषि (Horticuture) : सामान्य कृषि के अलावे फलोत्पादन के लिए फलों के बागान लगाए जाते हैं। जिन्हें बागानी कृषि कहा जाता है। यहाँ संख्या के रूप में मचुर मात्रा में विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होते हैं। जैसे – आम, केला, नींबू, अनार, पयीता, अमरूद, चीकू, कटहल, लीची, अंगूर, सेब; नाशपाती, आंलू बुखारा, खुबानी, बादाम, अखरोट आदि।

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प्रश्न 15.
खाद्य जाल किसे कहते हैं ?
उत्तर :
खाद्य जाल (Food Web) : किसी इकोसिस्टम के जैव समुदाय में विभिन्न प्रकार की खाद्य शृंखलायें पायी जाती हैं। इन खाद्य श्रृंखलाओं के द्वारा जैव समुदाय एक दूसरे से परस्पर जुड़े रहते हैं। इस प्रकार खाद्य श्रृंखलायें एक जाल बनाती हैं, जिन्हें खाद्य जाल कहते हैं।

प्रश्न 16.
ऊर्जा हमारे लिए क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर :
कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। जीवधारियों को जीवित रहने के लिए तथा अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा आवश्यक है। समस्त जीवित तथा अजीवित प्राणियों तथा वस्तुओं के अस्तित्व के लिए ऊर्जा आवश्यक ही नहीं, बल्कि उनकी वृद्धि तथा प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी देश का विकास भौ ऊर्जा पर ही निर्भर है।

प्रश्न 17.
पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण देकर विभिन्न पोषी स्तर को बताओ।
उत्तर :
आहार श्रृंखला में उत्पादक और उपभोक्ता का स्थान ग्रहण करने वाले जीव जीवमंडल को कोई संरचना प्रदान करते हैं और इसे पोषी स्तर कहते हैं। आहार श्रृंखला में पहला स्थान उत्पादक का होता है। शाकाहारियों में सिर्फ उत्पादक (पौधे) उपभोक्ता होता है और माँसाहारियों की श्रृंखला में उपभोक्ता अधिक होते हैं।
आहार श्रृंखला का उदाहरण : घास → हिरन → शेर

इस खाद्य शृंखला में विभिन्न पोषी स्तर निम्नलिखित हैं –

  • प्रथम पोषी स्तर घास है यह उत्यादक है।
  • द्वितीय पोषी स्तर हिरन है यह प्रथम उपभोक्ता है इसे शाकाहारी भी कहते हैं।
  • तृतीय पोषी स्तर शेर है यह उच्च मांसाहारी है।

प्रश्न 18.
उत्पादक एवं उपभोक्ता में क्या अन्तर है?
उत्तर :
उत्पादक प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया से अपना भोजन बनाते हैं। हरे पौषे उत्पादक कहलाते हैं। उपभोक्ता अपने भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर करते हैं, सभी जन्तु उपभोक्ता कहलाते हैं।

प्रश्न 19.
पशुपालन की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
पशु पालन : विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत पालतू पशुओं के भोजन, आवास, प्रजनन, स्वास्थ्य आदि विषयों का अध्ययन किया जाता है, पशु पालन कहलाता है। पालतू पशु के चार वर्ग हैं :

  • दुधारू पशु
  • श्रमिक पशु
  • मांस तथा अण्डा उत्पादक पशु
  • चर्म उत्पादक पशु।

प्रश्न 20.
मिश्रित मछली संवर्धन किसे कहते हैं?
उत्तर :
इस तंत्र में एक ही तालाब में 5 से 6 प्रकार की मछलियों का पालन होता है। इसमें मंछलियाँ आहार के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं, वे अपना-अपना आहार तालाब के अलग-अलग क्षेत्रों से ग्रहण करती हैं। इसमें मछलियों के उत्पादन में दूसरे तंत्रों की अपेक्षा में शीघ्र वृद्धि होती है।

प्रश्न 21.
जन्तु उत्प्लावी किसे कहते हैं? उदाहरण दो।
उत्तर :
प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता जन्तु उत्लावी तथा बेन्थोस होते हैं। (जल की सतह पर तैरने वाले सूक्ष्मदर्शीय जन्तुओं को जन्तु उत्त्लावी कहते है। जैसे – अमीबा, कीट, लार्वा इत्यादि। जल की तलहटी में रहने वाले जन्तुओ को बेन्थोस कहते हैं; जैसे – सीप, घोधा इत्यादि।) ये हरे पौधों को अपने भोजन के रूप में उपयोग करते हैं।

प्रश्न 22.
विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तन्न्रों के नाम लिखो।
उत्तर :
पारिस्थितिकी तंत्र के दो प्रकार हैं :
(i) प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र,
(ii) मानवनिर्मित पारिस्थितिकी तंत्र।

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(i) प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र : माकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र वह होता है जो पूरी तरह से प्राकृतिक द्वारा निर्मित होता है। इसके निर्माण में मनुष्य का कोई योगदान नहीं होता। प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को दो भागों में बाटा जाता है :

  • जलीय पारिस्थितिकी तंत्र,
  • स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र।

(ii) मानवमिर्मित पारिस्थितिकी तंत्र : पारिस्थितिक तंत्र को मनुष्यों द्वारा अपने आवश्यकता के अनुसार ढालने के क्रिया मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र कहलाता है।

मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार : कृषि परितंत्र, वृक्षारोपण परितंत्र, नगरीय परितंत्र, एग्रीकल्वर परितंत्र, बाँध परितंत्र, जलाशय परितंत्र, ग्रामीण परितंत्र, आघ्योगिक परितंत्र, प्रयोगशाला परितंत्र।

प्रश्न 23.
जैव-भू-रासायनिक चक्र क्या है?
उत्तर :
जीवमंडल में प्राणियों तथा वातावरण के बीच रासायनिक पदार्थों के आदान-प्रदान की चक्रीय गति को जैव-भू -रासायनिक चक्र कहते है। पृथ्वी के वातावरण में सभी तत्वों की एक निध्चित मात्रा होती है। जिसकी आवश्यकता जीवधारियों को हमेशा रहती है।

प्रश्न 24.
ऊर्जा संरक्षण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) : अधिकतर उद्योगों एवं यातायात के साधनों में ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। उद्योगों को प्रदृषण का जनक कहा जाता है। ऊर्जा की बर्बादी इन्हीं उद्योगों में मुख्य रूप से होती हैं। पेट्रो रसायन उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग, वस्त्र उद्योग, कागज उद्योग के अतिरिक्त यातायात व्यवस्था में भी ऊर्जा की भारी बरादी होती है। हम अपने दैनिक जीवन में ऊर्जा की बचत के लिए बहुत सारे उपाय कर सकते हैं।

प्रश्न 25.
वातावरण के चार प्रमुख भाग कौन-कौन हैं ?
उत्तर :
वातावरण के निम्नलिखित चार भाग होते हैं –

  • वायुमण्डल (Atmosphere)
  • जल मण्डल (Hydrosphere)
  • स्थलमण्डल (Lithosphere)
  • जीवमण्डल (Biosphere)

प्रश्न 26.
उत्पादक से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
किसी इकोतंत्र का वह जैविक अवयव जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य की किरण ऊर्जा को प्रहण कर उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करके अपने शरीर में संचित कर लेता है, उत्पादक कहलाता है। जैसे – हरे पौधे ।

प्रश्न 27.
वातावरण किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सजीवों के चारों तरफ पाये जाने वाले अवयवों को उसका वातावरण कहते हैं ।

प्रश्न 28.
उपभोक्ता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वे सभी सजीव जो अपने भोजन का निर्माण स्वयं नहीं करते हैं तथा अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या अग्रत्यक्ष रूप में उत्पादक पर निर्भर रहते है, उन्हें उपभोक्ता कहते हैं।

प्रश्न 29.
अपघटनकर्ता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वे सूष्मदर्शी जीव जो पौधों तथा जन्तुओं के शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में विघटित कर देते हैं, अपघटनकर्ता कहलाते हैं। जैसे – फंगस, मृतोपजीवी बैक्टीरिया आदि।

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प्रश्न 30.
ऊर्जा प्रवाह क्या है ?
उत्तर :
ऊर्जा प्रवाह (Energy) : सूर्य के प्रकाश में उपस्थित विकिरण ऊर्जा के रूपान्तरित होकर इकोसिस्टम के उत्पादक स्तर में प्रवेश कर तथा वहाँ से उपभोक्ता तथा अपघटनकर्ता स्तरों में स्थानान्तरित तथा रूपान्तरित होने की क्रिया को ऊर्जा प्रवाह कहते हैं।

प्रश्न 31.
जैवमण्डल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
जैवमण्डल : स्थलमण्डल, जलमण्डल, वायुमण्डल तथा इसमें पाये जाने वाले सभी जन्तुओं तथा पौघों को सम्मिलित रूप से जैवमण्डल कहा जाता है। इसका विस्तार वायुमण्डल से 40,000 फुट से अधिक ऊँचाई तक, समुद्र में 30,000 फुट से अधिक गहराई जक तथा जमीन पर 10,000 फुट नीचे तक होता है।

प्रश्न 32.
जीव आपसी सम्बन्ध बनाये रखने के लिए कौन-कौन सी क्रियाएँ करते हैं ?
उत्तर :
जीव आपसी सम्बन्ध बनाये रखने के लिए निम्नलिखित कियाएँ करते हैं।

  • परजीविता (Parasitism)
  • सहयोगिता (Co-operation)
  • प्रतियोगिता (Competition)
  • अन्योन्याश्रय (Predation)

प्रश्न 33.
मुख्य प्राकृतिक साधन क्या-क्या हैं ?
उत्तर :
मुख्य प्राकृतिक साधनों में सौर ऊर्जा, वायु, जल, भूमि, पेड़-पौघे, प्रकाश, पृथ्वी का ताप, जीवाश्म ईधन, खनिज, जन्तु तथा सूक्ष्म जीव सम्मिलित हैं।

प्रश्न 34.
वैकल्पिक भोजन क्यों आवश्यक हैं।
उत्तर :
अनाओं की कमी और जनसंख्या में वृद्धि के कारण लोग भोजन के प्रमुख सोतों के अलावे कुछ अन्य सोतों का भी उपयोग कर रहें हैं। इन्हें वैकल्पिक खाद्य सोत कहते है। कुछ लोग भोजन के रूप में कीटो को तथा कुत्ते की मांस को भी खाते हैं। कीट पोषक पदार्थों के अच्छे स्रोत हैं। कुत्ते की मांस में अन्य मांस की अवेक्षा ऊर्जा अधिक मिलती है। मांस महंगा होने के कारण आजकल लोग उसके स्थान पर सोयाबीन का भी प्रयोग करते हैं। ये सभी भोजन के वैकल्पिक सोत हैं।

प्रश्न 35.
इकोसिस्टम के तीन कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थो के नाम बताइये ?
उत्तर :
कार्बनिक पदार्थ : कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड्स
अकार्बनिक पदार्थ : कैल्शियम, नाइट्रोजन, सल्फर, फास्फोरस, ज़ल, मिट्टी आदि।

प्रश्न 36.
वनों की उपयोगिता क्या-क्या है ?
उत्तर :
वनों की उपयोगिता :

  • वायुमण्डलीय कायों का नियंत्रण (Atmospheric Regulation)
  • अपरदन नियंत्रण (Erosion Control)
  • जल सम्पदा का संरक्षण (Watershed Protection)
  • स्थानीय तथा उत्पादन मूलक उपयोग (Local and productive use)

प्रश्न 37.
जल संरक्षण के कोई,तीन उपाय बताइये।
उत्तर :
जल संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए :

  • कारखानों से निकले बेकार पदार्थो से उपफल (By Prdocut) बनाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • शहरों के मलमूत्र को नदियों में नहीं गिराना चाहिए बल्कि इसे एकत्र कर किसी आर्थिक लाभ वाले काम में लगाना चहिए।
  • समुद्र तथा नदी में तेल से चलने वाले वाहनों पर प्रतिबंष लगा देना चाहिए।

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प्रश्न 38.
प्राकृतिक संसाधनों को कितने भागों में बाँटा गया है, वर्णन कीजिए।
उत्तर :
प्राकृतिक संसाधनों को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है –

  • नवीनीकरण योग्य प्राकृतिक साधन (Renewable natural Resourse) : वे प्राकृतिक संसाधन मिट्टी, जल, पेड़, जन्तु आदि हैं जिनकी पुन: आपूर्ति हो सकती है।
  • नवीनीकरण अयोग्य प्राकृतिक साघन (Non-renewable natural Resource): जिन प्राकृतिक सम्पदाओं की आपूर्ति क्षय के बाद सम्भव नही है। जैसे – प्राकृतिक गैसें, कोयला, पेट्रोलियम आदि।
  • अपरिवर्तनशील प्राकृतिक साधन (Unalterable natural Resource) : जिन प्राकृतिक साथनों का क्षय जल्दी सम्भव नहीं होता, जैसे – समुद्र, प्राकृतिक दृश्य आदि।

प्रश्न 39.
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की तीन विशेषताएं बताइये।
उत्तर :
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की विशेषताएँ :

  • ऊर्जा प्रवाह एक मुखी होता है। अर्थात यह प्रवाह उत्पादक से उपभोक्ता की ओर होता है।
  • पदार्थीय चक्रों (N, O, C आदि) की तरह ऊर्जा प्रवाह का चक्र नहीं चलता।
  • जब ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरित होती है तब कुछ ऊर्जा का नाश होता है।

प्रश्न 40.
जैव भू-रासायनिक चक्र का महत्व बताइये।
उत्तर :
जैव भू-रासायनिक चक का महत्व :

  • इन चक्रों के द्वारा सजीवों को आवश्यक तत्वों की आपूर्ति होती है।
  • इकोसिस्टम को संतुलित करने के लिए ये चक्र अत्यन्त आवश्यक होते हैं।
  • पृथ्वी पर सभी सजीवों का अस्तित्व बनाये रखने के लिए यह चक्र आवश्यक है।
  • मिट्टी की उर्वराशक्ति को बनाये रखने में इन चकों का महत्वपूर्ण योगदान है।
  • इन चकों के माष्यम से निर्जीव उपादान सजीव उपादान में परिवर्तित हो जाते हैं।

प्रश्न 41.
चरण खाद्य मृंखला क्या है ?
उत्तर :
चरण खाद्य श्रृंखला (Grazing food chain) : वह भोजन भृंखला जो पौधों से शुरू होकर मांसाहारी जन्तुओं के साथ समाप्त हो जाती है उसे चरण खाह श्रृंखला कहते हैं।
जैसे – उत्पादक → खरगोश → सियार → शेर
हरे पौधे → प्रथम उपभोक्ता → द्वितीय उपभोक्ता → तृतीय उपभोक्ता।

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प्रश्न 42.
खाद्य शंखला तथा खाद्य जाल में अन्तर बताइये।
उत्तर :
खाद्य शृंखला (Food Chain) तथा खाद्य जाल (Food Web) में अन्तर :

  • खाद्य शृंखला का निर्माण खाब्ध जाल से नहीं होता है बल्कि खाध जाल का निर्माण खाद्य भृंखला से होता है।
  • खाद्य जाल का कोई प्रकार नहीं होता है, जबकि खाद्य शृंखला कई प्रकार की होती है।
  • इकोसिस्टम के लिए खाद्य जाल, खाद्य भृंखला से अधिक मौलिक होता है।

प्रश्न 43.
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की तीन अवस्थायें बताइये।
उत्तर :
इकोसिस्टम में ऊर्जा प्रवाह की तीन अवस्थायें –

  • ऊर्जा का ग्रहण
  • ऊर्जा का उपयोग
  • ऊर्जा का स्थानान्तरण

प्रश्न 44.
खाद्य मृंखला तथा खाद्य जाल के बीच आपसी सम्बन्य को बताइये।
उत्तर :
खाद्य शृंखला तथा खाद्य जाल के बीच आपसी सम्बन्थ : किसी इकोसिस्टम में उत्पादक के उपभोक्ताओं तक भोज्य पदार्थ के क्रमबद्ध स्थानान्तरण से उत्पन्न शृंखला को खाद्य-शृंखला का सुंयक्त रूप खाद्य जाल (Food Web) कहलाता है। इसलिए खाद्य जाल का निर्माण खाद्य शृंखलाओं से होता है तो आपस में मिलकर इकोतंत्र का मूल आधार बनाता है। अत: खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल के बीच घनिष्ठ सम्बन्ष है।

प्रश्न 45.
प्रकृति में सजीव किस प्रकार संगठित होते हैं ?
उत्तर :
प्रकृति में सजीव चार स्तरों पर संगठित होते हैं –

  • व्यक्तिगत स्तर
  • आबादी स्तर
  • समुदाय स्तर
  • इकोतंत्र स्तर ।

प्रश्न 46.
अनुकूलन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सभी सजीवों के उस गुण को जिनके द्वारा ये अपने वातावरण में सहज ढंग से जीवन यापन करते हुए अपनी वंश परम्परा को कायम रखते हैं, उसे अनुकूलन कहते हैं।

प्रश्न 47.
पौधो में प्रकाश के प्रति अनुकूलन बताइए ।
उत्तर :
कुछ पौधे छाया में रहना पसंद करते है तो कुछ प्रकाश में । छाया में उगनेवाले पौधों की पत्तियों में क्लोरोफिल का वितरण असमान होता है । जैसे क्रोटान प्रकाश में उगने वाले पौधों में प्रकाश संश्लेषण और श्वसन की दर तेज होती है ।

प्रश्न 48.
जन्तुओं में प्रकाश के प्रति अनुकूलन बताइए।
उत्तर :
सुबह में सूर्य का प्रकाश मिलने के साथ ही जन्तुओं की दैनिक क्रिया का मारम्भ हो ज़ाता है । अंधकार में रहनेवाले जन्तुओं को दैनिक क्रिया और व्यवहार में भी अन्तर देखने को मिलता है । जैसे -ऊल्लू।

प्रश्न 49.
आर्द्रता के प्रति पौधों में अनुकूलन बताइए ।
उत्तर :
जल की अधिकता वाले पौधों की पत्तिया बड़े आकार की होती है। इनकी सतह पर स्टोमेंटा की संख्या अधिक होती है । जैसे – कमल । जल की कमी वाले स्थान में उगनेवाले पौधों की पत्तियाँ काँटे के रूप यें परिवर्तित हो जाती है। जैसे – नागफनी।

प्रश्न 50.
मानव जनसंख्या के वृद्धि के क्या कारण है ?
उत्तर :
मानव जनसंख्या के वृद्धि के कारण –

  • शिक्षा की कमी एवं बेरोजगारी।
  • मृत्यु दर में कमी।
  • अकाल एवं महामारी पर नियंत्रण ।

प्रश्न 51.
आबादी के विस्फोट के परिणाम के बारे में बताइए ।
उत्तर :
आबादी में अत्यधिक वृद्धि के निम्नलिखित परिणाम होंगे –

  • भूखमरी बढ़ेगी
  • बेरोजगारी बढ़ेंगी
  • पीने के जल की कमी होगी
  • कपड़े एवं आवास की भी कमी होगी।

प्रश्न 52.
किसी समुदाय में जंतु और पौधे किस प्रकार से एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं ?
उत्तर :
भोजन : सभी जन्तु अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में प्रकाश संश्लेषी पौधों पर निर्भर रहते हैं।
प्रजनन : पौधे परागण की क्रिया के लिए जन्तुओं जैसे कीट, चमगादड़, पक्षी इत्यादि पर निर्भर रहते हैं।
सुरक्षा : कुछ कीट पौधों में छिप कर रहते है । कुछ सुक्ष्म शैवाल मालुस्क जन्तुओं के शरीर पर चिपके हुए आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 53.
प्राकृतिक संसाधन किसे कहते हैं ? इनके नाम बताइए।
उत्तर :
प्रकृति में मिलने वाले पदार्थो को प्राकृतिक संसाधन कहते हैं।
नाम :

  • जंगल
  • जल
  • भोजन
  • ऊर्जा।

प्रश्न 54.
भोजन के स्रोत क्या है ?
उत्तर :
भोजन के सोत दो है –

  • पौधा
  • जन्तु ।

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प्रश्न 55.
कृषि की शाखाओं का नाम बताइए ।
उत्तर :
कृषि की निम्नलिखित शाखाएँ है –

  • एग्रोनामी
  • हार्टिकल्बर
  • ओलोरी कल्चरं।

प्रश्न 56.
फसल के कितने प्रकार होते हैं ?
उत्तर :
फसल के चार प्रकार होते हैं-

  • धान्य फसल – जैसे धान, गेहूँ, बाजरा ।
  • दाल फसल – जैसे बना, मटर, अरहर ।
  • तेल बीज फसल – जैसे सरसो, मूँगफली, सूर्यमुखी।
  • मसाले – जैसे मिर्चा, हल्दी, काली मिर्च ।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
इकोसिस्टम के विभिन्न जैविक घटक की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इकोसिस्टम के विभिन्न जैविक घटक की भूमिका :-
उत्पादक की भूमिका (Role of Producer) :

  • उत्पादक अजैविक वातावरण से जल, CO2 की सहायता से प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा ग्लूकोज़ का निर्माण कहते हैं।
  • ये सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं।
  • ये अजैविक अवयवों को जैविक अवयवों में बदलने में सहायता करते हैं।

उपभोक्ता की भूमिका (Role of Consumer) : प्रत्यक्ष रूप का अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता उत्पादक पर निर्भर हैं। ये उत्पादक द्वारा निर्मित भोजन को ग्रहण कर इकोसिस्टम को संतुलित बनाये रखने में सहायता करते हैं।
अपघटन कर्ता की भूमिका (Role of Decomposer): अपघटनकर्ता मृत जीवद्रव्य के जटिल यौगिकों को इन्जाइम की सहायता से सरल रूप में तोड़ देते हैं। इस क्रिया में अपघटित पुदार्थों को भोजन के रूप में अवशोषित करते हैं तथा कुछ सरल रूपों को वातावरण में लौटा देते हैं।

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प्रश्न 2.
वनों के कार्य के बारे में लिखिए।
उत्तर :
वनों के कार्य :
(i) जल सम्पदा की सुरक्षा (Watershed Protection): वर्षा जल को सोखने तथा उसके प्रवाह को धीमा करने में वन भूमि की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके कारण भूमि में जल-स्तर और ऊपर आ जाता है और कुएं तथा ट्यूबवेल नहीं सूखते हैं। जल का संरक्षण कर इसे धीमी गति से नदियों, तालाबों झीलों तथा बाँध की ओर प्रवाहित करतें हैं। वनों से वायुमण्डलीय आर्द्रता बढ़ती है तथा वायुमण्डल में नमी बनी रहती है।

(ii) वायुमण्डलीय कार्यों में नियंत्रण (Atmospheric Regulation) : जलवाष्प के उत्सर्जन के दौरान सौर ऊर्जा का अवशोषण करना

  • पौधों की वृद्धि के लिए CO2 का स्तर बनाए रखना
  • स्थानीय जलवायु की दशायें बनायें रखना। मनुष्यों तथा सभी जीवों के श्वसन के लिए विभिन्न प्रकार के दहनों के लिए आवश्यक आक्सीजन तथा जो कार्बनडाईआक्साइड त्यागा जाता है, उसे अवशोषित करने के लिए हम पौधों पर ही निर्भर हैं।
  • अपरदन नियंत्रण (Erosion Control) : मृदा अपरदन रोकने के लिए पौधे मृदा का आवरण बनाते हैं। पौधों की जड़े, घास, झाड़ियाँ इत्यादि भूमि की ऊपरी उपजाऊ परत को जकड़े रखती हैं जिसमें भूमि का कटाव नहीं होता है। मिट्टी के पोषक तत्वों तथा ढाँचे को बनाए रखता है।

(iv) उत्पादक उपयोग (Productive use) : वन इकोसिस्टम में संतुलन बनाये रखने का काम करते हैं। वन अनेक जीव जन्तुओं के प्राकृतिक आवास होते हैं। वनों से प्राप्त उपयोगी काष्ठ (Timber) द्वारा अनेक घरेलू तथा औद्योगिक कार्यों तथा परिवहन के साधन तथा उपकरण बनाये जाते हैं। गोंद, रबर, रेजिन, कार्क, रेशे, मोम, तेल, तारपीन, कपूर, कुनैन, औषधीय पदार्थ आदि बहुत सारे उपयोगी पदार्थ वनों से प्राप्त होते हैं।

बहुत सारे आदिवासी वर्ग वनों में निवास करते है तथा इनसे आजीविका प्राप्त करते हैं। वनों से जलाने की लकड़ी प्राप्त होती है। लकड़ी एक उपयोगी कच्चा माल भी है जो कागज, लुगदी, दियासलाई, प्लाईडड, पैकिंग, सामर्गी, सिन्थेटिक रेशम आदि बनाने में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
ऊर्जा प्रवाह क्या है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) : सौर ऊर्जा का रूपान्तरण होकर उत्पादक स्तर में तथा यहाँ से उपभोक्ता व अपघटनकर्ता स्तरों में स्थानान्तरित होने की क्रिया को ऊर्जा प्रवाह कहते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का स्रोत सूर्य है। पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का बहाव एक ही दिशा में (Unidirectional) होता है। सौर ऊर्जा को अवशोषित कर हरे पड़े पौधे उसे रासायनिक ऊर्जा के रूप में परिवर्तित कर अपने शरीर में संचित कर लेते हैं।

उत्पादक में संचित इस ऊर्जा का उपयोग उनकी विभिन्न क्रियाओं में होता है तथा शेष ऊर्जा का स्थानान्तरण प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता में होता है। इस प्रकार प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा का कुछ भाग उनके मेटाबोलिक क्रियाओं में खर्च हो जाता है तथा शेष भाग द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता में स्थानान्तरित हो जाता है।

उपभोक्ता के प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का क्षय होता है अत: उत्पादको द्वारा अर्जित कुल ऊर्जा (Gross energy) का कुछ भाग ही प्रथम उपभोक्ता ग्रहण करते है। उसी प्रकार प्रथम उपभोक्ता से क्रमश: द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता ऊर्जा का कुछ भाग ही ग्रहण करते हैं। उसका उपयोग करते हैं और कुछ ऊर्जा ताप ऊर्जा (Heat energy) में बदल जाती है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

प्रश्न 4.
प्रवासन क्या है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर :
प्रवासन (Migration) : जब जीवधारी अपने गृह स्थान से स्थानान्तरित होकर अन्यत्र जाते हैं लेकिन पुन: अपने गृह क्षेत्र में लौट आते हैं, तो उसे स्थानान्तरण या प्रवासन कहा जाता है। इसे आव्रजन-प्रवजन भी कहा जाता है। इसका प्रभाव आबादी पर कम पड़ता है। उदाहरण के लिए साइबेरिया की कड़के की सर्दों से आक्रान्त बहुत सारे पक्षी भारत में आते हैं लेकिन ग्रौष्म ऋतु में पुन: वापस चले जाते हैं। बहुत सारे श्रमिक नगरों में अर्थोपार्जन के बाद अपने ग्रामीण गृह में लौट जाते हैं और कुछ समय के बाद पुन: शहर वापस आते हैं।

इसके अन्तर्गत आप्रवासन तथा उत्पवासन का उल्लेख किया जा सकता है।
आप्रवासन : उसी जाति के व्यक्तियों की वह संख्या है जो दी गई समय अवधि के दौरान आवास में कहतं और से आये हैं।
उत्रवासन : आबादी के व्यक्तियों की वह संख्या है जो दी गई समयावधि के दौरान आवास छोड़कर अन्यत्र चले गये हैं।

प्रश्न 5.
समुदाय स्तर किसे कहते हैं ? जीवों के आपसी सम्बन्धों का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
समुदाय स्तर (Community Level) : प्रकृति में विभिन्न जीवों की आबादियाँ या समष्टियाँ मिल-जुलकर रहती है, अर्थात् ये समष्टियाँ जोवन-संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु परस्पर आश्रित होती हैं। ऐसा कभी भी नहीं होता है कि हमें किसी स्थान पर एक ही प्रकार की जाति दिखाई पड़े, क्योंकि यह काफी समय तक जीवित नहीं रह सकती, जैसे गौरैया को खाने के लिए कीड़े, बीज आदि चाहिए एवं रहने के लिए वृक्ष भी चाहिए जहाँ उसका आवास-स्थान (habitat) या घोंसला बन सकता है।

इस तरह एक स्थान पर वातावरणीय अनुकूलता के अनुसार विभिन्न जाति के जीवधारी (जंतु तथा पौधे) एक साथ समूह बनाकर रहते हैं। अतः किसी विशिष्ट आवास-स्थान की जीव-समष्टियों का स्थानीय संघ समुदाय कहलाता है। इसे प्रायः बायोटा (biota) अथवा जैव समुदाय (biotic community) भी कहते हैं।

आवास-स्थान की भिन्नता के आधार पर जैव समुदाय में भी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं, जैसे जीव की विभिन्न जातियाँ जो तालाब में रहती हैं, उन्हें तालाब समुदाय (pond community) कहते है। इसी प्रकार, किसी भी पर्यावरण, जैसे वन, घास के मैदान, मरुस्थल आदि में पाई जानेवाली जीवो की जातियाँ पारस्परिक निर्भरता के आधार पर वन समुदाय (forest community), घासस्थली समुदाय (grassland community), मरुस्थल समुदाय (desert community) आदि बनाती हैं।

प्रश्न 6.
जंगल की कटाई के क्या-क्या कारण हैं ? वर्षा जल संचय क्या है?
उत्तर :
जंगल की कटाई के कारण : वर्तमान समय में जंगल की कढाई बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए चिन्ता का विषय है। बढ़ती आबादी, कृषि के लिए जमीन, नये-नये शहरों की बढ़ती खपत, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, आवासीय मकान आदि जंगल की कटाई के मुख्य कारण हैं। औद्योगिक फैलाव, सड़को का निर्माण, घाटी-बाँध योजनायें, खनिज उत्बन्न के कारण भी जंगल नष्ट होते जा रहे हैं।

वर्षा जल संचय (Rain Water Harvesting) : वर्षा के दिनों में छोटे-छोटे तालाब, जलाशय, झील बनाकर उसमें जल संचय करने से भूमिगत जल स्तर में वृद्धि होती है। सूखाप्रस्त या जल की कमी वाले क्षेत्रो में इस संचय किये गये जल का घरेलू उपयोग, सिंचाई, उसे स्वच्छ कर पेय जल की आपूर्ति की जा सकती है। नगरों में छत के ऊपर टंकी बनाकर उसमें जल का संचय कर उसका उपयोग कपड़े घोने, बर्तन धोने, बागवानी आदि में किया जा सकता है। वर्षा के जल का इस तरह संचय कर भविष्य में इसके उपयोग करने की प्रकिया को जल-संचय कहते हैं।

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प्रश्न 7.
इकोसिस्टम क्या है ? पारिस्थितिकी तंत्र के जैविक तथा अजैविक अवयवों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
इकोसिस्टम (Ecosystem) : किसी स्थान विशेष में रहने वाले जैव समुदाय तथा अजैविक वातावरण में स्थापित में स्थापित परस्पर क्रियात्मक संबंध को इकोसिस्टम कहते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र के अवयव (Components of Ecosystem) :

  • अजैविक (Abiotic) तथा
  • जैविक (Biotic)

अजैविक अवयव (Abiotic Component) : यह निम्न तीन प्रकार के होते हैं :-

  • अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic substance) : आक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर, फास्फोरस, कैल्शियम, खनिज लवण आदि।
  • कार्बनिक पदार्थ (Organic substance) : प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट लिपिड आदि। ये सभी जीवधारियों के शरीर में पाये जाते हैं। अपघटन कर्ता इनका विघटन कर देते हैं जिसे हरे पौधे पुन: ग्रहण कर लेते हैं।
  • भौतिक पदार्थ (Physical substance) : प्रकाश, तापक्रम, सौर ऊर्जा, वायु, जल, आर्द्रता, आदि सभी भौतिक अवयव हैं जो सजीवों की प्राणशक्ति को बनाये रखने में सहायक है।

जैविक अवयव (Biotic component) : इकोसिस्टम के जैविक अवयव निम्न है : –

  • उत्पादक (Producer),
  • उपभोक्ता (Consumer) तथा
  • अपघटनकर्ता (Decomposer)

उत्पादक (Producer) : वे जीवधारी जो अपने भोजन का निर्माण स्वय करते हैं, उत्पादक कहलाते हैं। ये हरे पौधे होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। आम, कटहल, पीपल, जल में तैरने वाले छोटेछोटे पौधे सभी उत्पादक कहलाते हैं।

उपभोक्ता (Consumer) : वे जीवधारी जो अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर करते हैं; उपभोक्ता कहलाते हैं। उपभोक्ता को निम्नलिखित तीन श्रेणीयों में बाँटा गया है :-

  • प्रथम श्रेणी का उपभोक्ता (Primary Consumer) : वे उपभोक्ता जो अपने भोजन के लिए पूर्णरूप से उत्पादक अर्थात हरे पेड़-पौधों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें प्रथम श्रेणी का उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – बकरी, गाय, टिड्डा, खरगोश, चूहा आदि।
  • द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता (Secondary Consumer) : वे उपभोक्ता जो अपने भोजन के लिए प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता पर निर्भर रहते हैं, उन्हें द्वितीय श्रेणी का उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – मकड़ी, टोड, सर्प, छूछून्दर आदि।
  • तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता (Teriary Consumer) : वे उपभोक्ता जो द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं को खाते है, उन्हें तृतीय श्रेणी का उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – चील, गिद्ध, बड़ी मछली, बाघ, शेर, चिता, शार्क, बाज आदि।

अपघटन कर्ता (Decomposer) : वे जीवधारी जो मृत पौधों तथा जन्तुओं के शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित कर देते हैं, अपघटनकर्ता कहलाते हैं। जैसे – जीवणु, फंगस आदि।

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प्रश्न 8.
खाद्य के वैकल्पिक स्रोतों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
खाद्य के वैकल्पिक स्रोत (Alternate food sources) : वर्तमान में विश्व में वैकल्पिक खाद्य के संसाधन काफि सिमटे हुए हैं। फिर भी खोज तथा प्रयास जारी है। ऐसी पैदावार की खोज हो रही है जो किसी भी मिट्टी तथा वातावरण में उपज सके तथा कम समय में ज्यादा उपज दे सकें।

उदाहरण स्वरूप मान्निगा ओलिफेरा (Mornige oleifera) जो सहजन वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है जो किसी भी मिट्टी तथा वातावरण में उगाया जा सकता है। इसके बीज में पाए जाने वाला एन्टिबोयोटिक जल को स्वच्छ बनाते हैं। इसकी पत्ती में प्रोटीन, गाजर से चार गुना विटामिन A तथा संतरे से सात गुना अधिक विटामिन C पाया जाता है। खाद्य का अभाव होने पर इसे पकाकर खाया जा सकता है।

ब्रोकली (Broccoli), काले (Kale), एवोकेडिज (Avocadoes), वी पोलेन (Bee pollen) इत्यादि भी अधिक उपजाक वाले कुछ अन्य वैकल्पिक खाद्य हैं। मैक्सिको, कोरिया तथा अफ्रीका आदि में कीटों को वैकल्पिक खाद्य में रूप में व्यवहार किया जाता है।

झींगुर, झींगा तथा तथा गोबरेला आदि ऐसे कीट है जो प्राय: सभी देशों में सामान्य हैं प्रोटीन, लौह तथा कैल्शियम आदि कीटों में पाये जाते हैं।कीटों को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। खाद्य के अभाव में वैकल्पिक खाद्ध के रूप में उपयोग करके जीवन की रक्षा हो सकती है।

प्रश्न 9.
विश्व खाद्य समस्या का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
विश्व खाद्य समस्या : विश्व की जनसंख्या में से 1.3 अरब लोग भुखमरी की हालत में रहते हैं और 80 करोड़ लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता तथा 50 करोड़ लोग कुपोषण की समस्याओं से ग्रस्त हैं। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अनेक देशों में हरित क्रान्ति के एक या दूसरे स्वरूपों में उपयोग के परिणामस्वरूप विश्व का खाद्य उत्पादन तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया है, परन्तु मानव आबादी की तीव्र वृद्धि, विशेषकर विकासशील राष्ट्रों ने खाद्य उत्पादन की इस प्रभावशाली वृद्धि को बहुत पीछे छोड़ दिया है। इसके बावजूद लगभग एक सौ से अधिक राष्ट्रों को आज भी विकसित राष्ट्रों से खाद्य सामग्रियाँ आयात करनी पड़ती हैं।

खाध्य पदार्थों की कमी के कारण अनेक विकासशील देशों में कुपोषण एवं भूखमरी फैली रहती है। ऐसे विकासशील राष्ट्रों में भुखमरी का मुख्य कारण निर्धनता या गरीबी होती है। निर्धनता खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद गरीबों के उत्थान और उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामगी खरीदने से रोकती है।

प्रश्न 10.
पारिस्थितिकी व्यवस्था के कितने स्तर होते हैं ? किसी एक का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
परिस्थितिकी व्यवस्था के चार स्तर होते हैं –

  • जीव या व्यष्टि स्तर (Individual Level)
  • जनसंख्या स्तर (Population Level)
  • समुदाय स्तर (Community Level)
  • परितंत्र स्तर (Ecosystem Level)

जीव या व्यष्टि स्तर (Individual Level) : यद्यपि जैव व्यवस्था के बहुत से स्तर हैं, लेकिन सबसे सुस्पष्ट इकाई जीव है। किसी जीव में अपनी जीव क्रिया होती है जो किसी अन्य जीव से भिन्न होती है। कुछ जीव, जैसे अमीबा, क्लेमाइडोमोनास आदि एक-कोशिकीय होते है, अर्थात् ऐसे जीवों का शरीर केवल एक कोशिका का बना होता है और इसी कोशिका के द्वारा जीवन-संबंधी सारे कार्य सम्पन्न होते है।

लेकिन जटिल जीव जैसे वृक्ष, अधिकांश जंतुएँ, मनुष्य आदि बहुकोशिकीय होते है, अर्थात् उनका शरीर असंख्य कोशिकाओं का बना होता है, जो अनेक विशिष्ट कार्य सम्पन्न करते हैं। प्राय: जीवों की गणना की जा सकती है, लेकिन बहुत से मामलों, जैसे घास, स्पंज या कोरल की कॉलोनियों में जीव कार्बनिक आधार पर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं एवं ऐसे मामलों में जीवों के अष्ययन के लिए विशेष दक्षता की आवश्यकता होती है। कायिक, अलैंगिक या लेंगिक जनन-क्रिया द्वारा जीव जनन करते हैं एवं संतति गुणों में अपने माता-पिता सें मिलती-जुलती है।

इससे जीवन की तारतम्यता कायम रहती है। पृथ्वी तल पर पाये जाने वाले पौधे और प्राणी हजारों जातियों और प्रजातियों में विभक्त हैं जिनकी आनुवंशिकी, आकृति, संख्या और पारिस्थितिकी क्षमता भिन्न-भिन्न हैं । कुछ जातियों (Species), में पर्यावरण से अनुकूलन (Adaptation) की क्षमता अधिक होती है जबकि कुछ में यह बहुत कम पायी जाती है। फलत: जिन जातियों में यह क्षमता अधिक होती है उनकी कुल संख्या अधिक और पृथ्वी तल पर वितरण भी विस्तृत क्षेत्र में पाया जाता है।

एक विशेष भौतिक परिवेश में पलने वाली जैव जाति अपने जीवन चक्र को यथासम्भव संतुलित बनाये रखने का प्रयास करती है ताकि उसकी वंश पर म्परा चलती रहे। इस प्रकार पर्यावरण और जीवों की अन्त:प्रक्रिया एक निश्चित व्यवस्था से संचालित होती है जिसे हम प्राकृतिक नियम कह सकते हैं। इस शाश्वत नियम का अनुपालन प्रत्येक जीव को करना पड़ता है जो उसके आचरण से प्रकट होता है।

इस प्रकार पर्यावरण और जीवों की अन्तःप्रक्रिया पारिस्थितिकी तंत्र में दो रूप में देखने को मिलती है – पहला एकांकी जाति की अन्त:प्रक्रिया से उत्पन्न पारिस्थितिकी और दूसरी अनेक जातियों की सामूहिक अन्त:पक्रिया से उत्पन्न पारिस्थितिकी। जब एकाकी जाति (individual species) की पारिस्थितिकी के संदर्भ में उसके जीवन- चक्र की विविध अवस्थाओं की अन्त:प्रक्रिया को पर्यावरण और अन्य जीवों के संदर्भ में अध्ययन किया जाता है तो उसे स्वपारिस्थितिकी (Autecology) कहते हैं।

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प्रश्न 11.
प्रकृति जीवधारी को संगठित किस प्रकार से करती है ? संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर :
प्रकृति जीवों की जननी, पालनहारी और विनाशक है । जीव भी प्रकृति का उत्पादक, उपभोक्ता, आक्रामक एवं स्वार्थी तत्व हैं। प्रकृति द्वारा उत्पन्न जीव पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मानव पर्यावरण की गोद में पलते हैं और अपनी पारिस्थितिकी से अन्तःप्रक्रिया करते हुए पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। इस परस्पर सम्बन्ध को जीवन का आधार कहा जा सकता है क्योंकि बिना जीव प्रकृति का मूल्य नहीं है, और बिना प्रकृति का जीवन सम्भव नहीं है।

इसी गहरे सम्बन्ध की अभिव्यक्ति पारिस्थितिकी संतुलन में प्रकट होती है। वास्तव में परस्पर सम्बन्ध को संतुलित बनाये रखने में प्राकृतिक नियम अपने ढंग से क्रियाशील रहते है। पारिस्थितिकी तंत्र में भौतिक और जैविक शक्तियाँ एक दूसरे को प्रभावित करने में कभीकभार सीमा का अतिक्रमण भी कर जाती है, जिसे प्रकृति अपने ढंग से नियंत्रित करती है।

पारिस्थितिकी तंत्र में भौतिक तथा जैविक शक्तियाँ अपने ढंग से एक दूसरे को प्रभावित करती हैं। अतः पौधे की सफलता का कारण ज्ञात करना अत्यन्त कठिन कार्य है। इसके अतिरिक्त पौधे आनुवंशिक गुणों की सुघट्यता (Plasticity) में एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

प्रश्न 12.
जल का कृषि और उद्योग में क्या महत्व है ?
उत्तर :
जल का कृषि और उद्योग में महत्व :
(i) पीने के लिए (Drinking) : हम प्यास लगने पर पानी पीते हैं। जितने भी जीवधारी (भाणी या पौधे) हैं उनकी संरचना में पानी का एक बड़ा भाग है। मनुष्य के स्वयं की बनावट में 60 प्रतिशत पानी है। यही नहीं बल्कि उसकी सम्पूर्ण क्रियाओं में और उसके स्वयं के रखरखाव में भी पानी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह हड्डियों के बीच के जोड़ों को चिकना बनाये रखता है, ताकि वे आपस में रगड़कर एक दूसरे को हानि न पहुँचाए।

ऊतक (Tissues) और पेशियों (Muscles) को घेर कर उन्हें आपस में चिपकने से रोकता है। शरीर के अत्यन्त महत्तूर्ण अवयव जैसे हृदय, मस्तिष्क आदि को पानी से बने द्रव का एक कवच संरक्षण प्रदान करता है, और तो और यह शरीर के अन्दर महत्वपूर्ण संचार माध्यम भी है तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच सम्पर्क बनाये रहता है। यही पोषक तत्व, ऑक्सीजन, कार्बन डाई-ऑक्साइड का वाहक है और शरीर के मालन पदार्थों को पसीना, मल और मूत्र के जरिये बाहर ले जाती है। इसी कारण पानी की कमी मनुष्य को सहन नहीं हो पाती और अधिक जल की कमी से उसकी मृत्यु हो जाती है।

(ii) कृषि कार्य के लिए (Agricultural Use) : पूर्वी तथा दक्षिणी एशिया विश्व के सघन आबाद प्रदेश हैं। इन देशों में विशाल जनसंख्या के पोषण के लिए वर्ष में दो या तीन फसले उगायी जाती हैं। ये मानसूनी जलवायु के देश है जहाँ वर्षा वर्ष के सीमित महीनों में संकेन्द्रित होती हैं। अतएव यहाँ कृषि के लिए सिंचाई की बहुत आवश्यकता होती है। भारत, चीन एवं पाकिस्तान में गेहूँ, जौ, चना, तिलहन आदि शीतकालीन फसलों के लिये भी सिंचाई की बहुत आवश्यकता होती है।

(iii) औद्योगिक जल आपूर्ति (Industrial water supply) : औद्योगिक संयन्त्रों (plants) को घरेलू कार्यों की अपेक्षा अधिक जल की आवश्यकता होती है। उद्योगों में भाप (Steam) बनाने, रसायनों के घोलने, आर्द्रका (humidifierrs) एवं प्रशीतकों (refrigerators), गर्म धातुओं को ठण्डा करने (cooling) कोक धोने, रासायनिक उद्योगों में अम्लों (acids) तथा क्षारों (alkalies) के निर्माण खालों (hides) को धोने तथा रगने आदि में बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 13.
पारिस्थितिकी तंत्र क्या है ? पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
इकोसिस्टम : वातावनण के जैविक तथा अजैविक अवयवों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। यह सम्बन्ध मिलकर एक तंत्र की रचना करते हैं यह तंत्र पारिस्थितिकी तंत्र कहलाता है।

पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह : हरे पौधें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सूर्य से विकिरण ऊर्जा लेकर भोजन बनाते हैं। बनाये गये भोजन को जन्त अपना भोजन बनाते हैं। इस भोजन के माध्यम से सूर्य की विकिरण ऊर्जा रूपान्तरित होकर जीवमण्डल में प्रवेश करती है।

अब विकिरण ऊर्जा का रूप स्थितिज ऊर्जा के रूप में हो गया है। शाकाहारी जन्तुओं के भोजन का मुख्य स्रोत पौधे हैं अत: पौधों में संचित स्थितिज ऊर्जा भोजन के साथ जन्तु शरीर में चला जाता है। जन्तु शरीर ऊर्जा का उपयोग जन्तु अपने जैव कार्यों में करते हैं। इस प्रकार हम देखते है कि ऊर्जा का प्रवाह जीव मण्डल में एक श्रृंखला में होता है जिसको ऊर्जा प्रवाह कहते हैं।

प्रश्न 14.
खाद्य जाल से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर :
खाद्य जाल (Food Web) : किसी इकोसिस्टम के जैव समुदाय में विभिन्न प्रकार की खाद्य- शृंखलायें पायी जाती है। इन खाद्य भृंखलाओं के द्वारा जैव समुदाय एक दूसरे से परस्पर सम्बन्धित रहते हैं। इस प्रकार खाध भृंखलायें एक जाल बनाती है, जिसे परस्पर सम्बन्धित रहते हैं। इस प्रकार खाद्य शृंखलाये एक जाल बनाती है, जिसे खाद्य जाल कहते हैं। जैसे –
(a) हरे पौधे → टिद्ड़ा → छिपकली → बाज
(b) हरे पौथे → खरगोश → बाज
(c) हरे पौधे → चूहा → साँप → बाज
(d) हरे पौधे → चूहा→ बाज
(e) हरे पौधे → कौट पतंग → मेढ़क → साँप → बाज
इस प्रकार हम देखते हैं कि हरे पेड़-पौधे (उत्पादक) तथा उच्च उपभोक्ता (बाज) विभिन्न खाद्य शृंखलाओं द्वारा परस्पर जुड़े हुए है। अत: ये पाँच खाद्य-श्रृंखलायें परस्पर मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं।

प्रश्न 15.
समुदाय और इसके सदस्यो के बीच अन्त: सबंध का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर :
समुदाय (Community) : प्रकृति में जीवधारी अकेले न रहकर एक दूसरे के साथ रहना पसन्द करते हैं। अर्थात् विभिन्न प्रकार के जीवधारी एक समूह के रूप में ऐसे स्थान पर रहते हैं जहाँ पर उनकी आवश्यकताएं पूरी होती हैं। अत: हम यह कह सकते हैं कि समुदाय किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र में रहने वाले पौधों और जन्तुओं का एक ऐसा समूह है जिसमें प्रत्येक जीवधारी अपनी कम से कम आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। जीवधारियों के इस समूह को समुदाय या

जैव समुदाय (Biotic community) कहते हैं। इसमें पौधे, जन्तुओं और सूक्ष्म जीवों के समुदाय ऊर्जा संसाधन और वास-स्थान के लिये एक दूसरे से अन्तःक्रियाएँ करते हैं। पौधे जन्तुओं को भोजन और ऑक्सीजन पदान करते हैं। इसके बदले उन्हे जन्तुओं से कार्बन डाई-आक्साइड प्राप्त होती है। जन्तु पौधों में परागण (Pollination) तथा उनके बीजों के विकिरण में सहायक हैं। सूक्ष्मजीव जन्तुओं और पौधों से विभिन्न प्रकार की पारस्परिक क्रियाएँ करते हैं।

ये जीयों में रोग उत्पत्र कर सकते हैं, नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर सकते हैं और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ा या घटा सकते है और ये कार्बनिक मृत पदार्थों को विघटित कर सकते हैं। इस पदार्थ को पुनः यौधे ग्रहण कर सकते हैं। सभी जीव पारिस्थितिकीतंत्र के सफल संचालन में तथा ऊर्जा-प्रवाह और पोषक तत्वों के चक्रण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। किसी विशेष समुदाय में रहने वाले जीवधारियों के बीच कई प्रकार की अन्त: क्रियाएँ होती रहती हैं।

प्रश्न 16.
पशुपालन से होने वाले आर्थिक लाभों का विवरण दो। अधिक अण्डे तथा मांस के उत्पादन हेतु मुर्गी पालन में कैसे सुधार लाया जा सकता है ? गाय की उन्नत प्रजातियों के नाम लिखो।
उत्तर :
पशुपालन (Animal husbandry) : विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत पालतू पशुओं के भोजन, आवास, स्वास्थ्य, प्रजनन आदि पक्षों का अध्ययन किया जाता है । उपयोगिता के आधार पर पालतू पशुओं के चार वर्ग है – दुधारू पशु (milk animals), मांस तथा अण्डा उत्पादक पशु (meat and egg giving animals), श्रमिक पशु (working animals) तथा चर्म उत्पादक पशु (skin-yielding animals)।

दुधारू पशुओं की अत्यधिक संख्या होने के बावजूद हमारे देश में दूध का उत्पादन संतोषजनक नहीं है। हमारे देश में औसतन एक गाय 200 किलो दूध प्रतिवर्ष देती है, जबकि यह औसत आस्ट्रेलिया तथा नीदरलैण्ड में 3500 किग्रा० तथा स्वीडेन में 3000 किग्रा० प्रतिवर्ष है। अत: हॉल्सटाइन-फीसिऑन, जर्सी जैसी गायों के विकास की आवश्यकता है जिससे क्षेत क्रान्ति (White revolution) आ सके।

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हमारे देश की प्रति व्यक्ति भोजन के रूप में मांस की खपत (वार्षिक) 131 ग्राम है जबकि अमेरिका में यह 1318 किग्रा०। जनसंख्या के अनुरूप भोजन की बढ़ती आवश्यकता की पूर्ति के लिए अधिक पुष्ट, मांसल तथा जल्दी बढ़ने वाली नस्ल की मुर्गियाँ तथा अण्डा उत्पादन के लिए मुर्गियाँ प्रजनन के द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं क्योंकि जनसंख्या के अनुरूप हमारे देश में अण्डे की खपत दिनोदिन बढ़ती जा रही है।

भारत में भोजन के रूप में अण्डे की प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत केवल 6 है जबकि अमेरिका में यह 295 । मछली उत्पादन (Fishery) की सम्भावना हमारे देश में बहुत अधिक है, प्रथानत: मृदुजल की मछलियाँ। हमारे देश में भोजन का एक प्रमुख सोत मछलियाँ हैं। इनसे पौष्टिक भोजन के अतिरिक्त तेल, उर्वरक जैसे अन्य उपयोगी पदार्थ भी मिलते हैं। देश को मछली उत्पादों के निर्यांत से करीब 4000 करोड़ रुपये की वार्षिक आमदनी होती है।

प्रश्न 17.
खाद्य श्रृंखला क्या है ? विभिन्न प्रकार के खाद्य श्रृंखला का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
खाद्य शृंखला (Food Chain) : उत्पादक से उच्य श्रेणी के उपभोक्ता तक खाद्य ऊर्जा का स्थानान्तरण खाद्य श्रृंखला कहलाता है। ओडम (Odum) ने सन् 1966 ई० में खाद्य श्रंखला की वैज्ञानिक विधि से व्याख्या की? उनके अनुसार, जिस शक्ति द्वारा खाद्य ऊर्जा, उत्पादक पौधों से कमबद्ध रूपों में उपभोक्ताओं और विभिन्न प्राणी समूहों के मध्य से गुजरती है, उसे खाद्य भृखला कहते हैं।

पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेषण क्रिया में सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं। यह ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के रूप में पौधों के विभिन्न संचयी अंगों में संचित हो जाती है। प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता उत्पादक को अपने भोजन के रूप में प्रहण करते हैं, फलस्वरूप पौधों में संचित ऊर्जा प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताओं के शरीर में पहुँच जाती है। पुन: द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता में स्थानान्तरित हो जाती है। इस तरह खाद्य ऊर्जा उत्पादक से क्रमश: प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी के उपभोक्ताओ में स्थानान्तरित होती रहती है तथा खाद्य शृंखला का अट्टूट क्रम बलता रहता है।

खाद्य शृंखला का प्रकार :-
(i) चारण आहार श्रृंखला (Grazing Food Chain) : वह भोजन श्रृंखला जो उत्पादक से शुरू होकर मांसाहारी जन्तु के साथ समाप्त हो जाती है। इसे चारण आहार श्रृखला कहते हैं।
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(ii) परजीवी आहार शृंखला (Parasitic Food Chain) : वह भोजन शृखला जो उत्पादक से शुरु होकर बड़ेबड़े जीवों से होते हुए अन्त में परजीवी जन्तु के साथ समाप्त होती है। इसे परजीवी आहार शृंखला कहते है।
हरे पौधे → मनुष्य → फीताकृमि या एन्ट अमीबा

(iii) अरपद आहार शृंखला (Saprophytic food chian) : वह भोजन श्रृंखला जो मृत कार्बनिक पदार्थों से प्रारम्भ होकर अन्य उपभोक्ताओं से होते हुए जीवाणुओं के साथ अन्त होती है, जिसे मृतोपजीवी भोजन श्रृंखला कहते हैं। मृत कार्बनिक पदार्थ → केंचुआ → जीवाणु

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(iv) डीट्रिटस भोजन शृंखला (Detritus food chain) : इस प्रकार की खाद्य श्रृंखला सड़े-गले पदार्थों से शुरू होकर विघटनकर्ता अर्थात सूक्ष्म जीवाणुओं से गुजरती हुई उपभोक्ता के शरीर में पहुँचती है। इसे डीट्रिटस भोजन शृंखला कहते हैं।WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन 3WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन 1

प्रश्न 18.
जनसंख्या स्तर किसे कहते हैं ? जन्म दर का आकलन कैसे किया जाता है ?
उत्तर :
जनसंख्या स्तर (Population Level) : समुदाय पारिस्थितिकी के अध्ययन में आबादी पारिस्थितिकी का अध्ययन विशेष महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसी क्षेत्र के सम्पूर्ण जैविक समाज का मूल्यांकन किया जाता है। किसी क्षेत्र या स्थान पर एक समय विशेष में एक या अनेक जातियों (Species) के जीवों की संख्या आबादी कहलाती है। उदाहरण के लिए एक जनपद में किसी निश्चित समय पर मनुष्यों की संख्या या गोपशुओं की संख्या या फलदार पौधों की संख्या वहाँ की आबादी कहलाती है।

जातीय और भौतिक परिवेश के कारण विविध जातियों के जीवों की आबादी अनेक विशिष्टताओं से युक्त होती है। जैसे उनकी संख्या में उतार-चढ़ाव, लिंग अनुपात, जन्म एवं मृत्युदर, जनन क्षमता, आयु रचना, वितरण प्रतिरूप एवं आव्रजन-प्रव्रजन आदि में अन्तर पाया जाता है। जब आबादी के इन लक्षणों का अध्ययन व्याख्यामक दृष्टिकोण से किया जाता है तो उसे जनांकिकी (Demography) कहा जाता है। लेकिन जब आबादी का अध्ययन भौतिक पर्यावरण और जैविक गुण के संदर्भ में किया जाता है तो उसे आबादी पारिस्थितिकी कहा जाता है। एक जैव जाति की आबादी उसकी प्रजनन प्रक्रिया से जुड़ी रहती है।

अनुकूल परिवेश में एक जाति के जीव प्रजनन प्रक्रिया से अपनी आबादी बढ़ा लेते हैं और परिवेश के प्रतिकूल होने पर उनकी वशवृद्धि रुक जाती है जिससे आबादी घट जाती है। आबादी के बढ़ने से पर्यावरण भी प्रभावित होता है। एक समय ऐसा भी आ जाता है कि बदले हुए पर्यावरण के कारण उस जाति की प्रजनन प्रक्रिया बाधित होती है जिससे आबादी का ह्रास होता है। पर्यावरणीय बाधाओं के कारण प्राणियों का विसरण भी होता है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 5 वातावरण तथा उसके संसाधन

जिससे आबादी का वितरण प्रभावित होता है। कहा जाता है कि मध्य एशिया की जलवायु के शुष्क होने के कारण आदिमनुष्य अपने गृह स्थल को त्यागने के लिये बाध्य हुआ जिसके फलस्वरूप अनेक दिशाओं में प्रत्रजित होकर मानव प्रजातियों (Human Races) में विभक्त हो गया। नये पर्यावरण से समायोजन स्थापित करने की प्रक्रिया में उसमें अनेक शारीरिक-मानसिक अन्तर आ गये। पृथ्वी तल पर पर्यावरण की विविधता के कारण कोई एक जाति के जीव सर्वव्यापी नहीं हो सकते हैं क्योंकि किसी भी जाति के जीवों की पारिस्थितिकीय क्षमता (Ecological Tolerance) ऐसी नहीं होती कि वह सभी प्रकार के पर्यावरण में अपना जीवन-चक्र पूरा कर सके।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 4 जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

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WBBSE Class 9 Life Science Chapter 4 Question Answer – जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
एण्टिभेनिम का उपयोग किस रोग के उपचार में किया जाता है?
उत्तर :
सर्प-दंश (साँप के काटने के उपचार में)।

प्रश्न 2.
जन्मजात रोग निरोधक क्षमता को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रतिरक्षा।

प्रश्न 3.
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले एक सूक्ष्मजीव का नाम लिखिए।
उत्तर :
राइजोबियम।

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प्रश्न 4.
इन्जेक्शन या मुँह के द्वारा पिलाकर शरीर में प्रविष्ट कराने वाली रोग निरोध क्षमता को क्या कहते हैं?
उत्तर :
टीकाकरण।

प्रश्न 5.
प्रोफाइलैक्सिस क्या है?
उत्तर :
टीकाकरण को वैज्ञानिक भाषा में प्राफाइलैक्सिस कहते हैं।

प्रश्न 6.
इम्यूनोजन्स किसे कहते हैं?
उत्तर :
इम्यूनोजेन्स एक पदार्थ हे जो प्रतिक्षा प्रतिकिया को प्रेरित करता है।

प्रश्न 7.
चेचक के टीका का आविष्कार किसने किया था ?
उत्तर :
एडवर्ड जेनर (Edward Jenner)

प्रश्न 8.
पोलियो वाइरस में किस प्रकार का केन्द्रक अम्ल पाया जाता है।
उत्तर :
RNA

प्रश्न 9.
रेबीज का टीका किसने तैयार किया था?
उत्तर :
लुई पास्वर

प्रश्न 10.
डायरिया नामक बीमारी कैसे होती है ?
उत्तर :
डायरिया नामक बीमारी आँत में जीवाणुओं, विषाणुओं तथा प्रोटोजोआ आदि के संक्रमण से होती है।

प्रश्न 11.
टीका शब्द का आविष्कार किसने किया था?
उत्तर :
एडवर्ड जेनर

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प्रश्न 12.
मलेरिया का कारक कौन हैं?
उत्तर :
प्लाज्मोडियम परजीवी।

प्रश्न 13.
DPT का टीका बच्चों को किस उग्र में लगवाना चाहिए ?
उत्तर :
18-24 माह।

प्रश्न 14.
डेंगू कैसे फैलता है ?
उत्तर :
डेंगू एक संक्रामक बीमारी है। यह मादा एडिस एजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है ।

प्रश्न 15.
मनुष्य के किस उम्र में टिटनस बूस्टर का टीका लगाया जाता है ?
उत्तर :
10 वर्ष के उम्म में टिटनस बूस्टर का टीका लगाया जाता है।

प्रश्न 16.
जल जनित तीन बीमारियों के नाम बताइये।
उत्तर :
जल जनित तीन बीमारियाँ है – हैजा, पेचिश तथा टायफायड।

प्रश्न 17.
AIDS रोग के कारक का नाम बताइये।
उत्तर :
HIV (Human Immunodeficiency Virus)

प्रश्न 18.
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया किस प्रकार हमारे लिए लाभदायक है?
उत्तर :
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूष को दही में बदलने के लिए काम में आता है।

प्रश्न 19.
WASH का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Water and Sanitation Hygiene.

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प्रश्न 20.
टैब क्या है ?
उत्तर :
टायफायड रोग जैसे हीन संक्रमण से बचाव के लिए उपयोग में लाने वाले टीके को टैब (TAB) कहते हैं।

प्रश्न 21.
मलेरिया रोग किस प्रोटोजोआ के कारण होता है?
उत्तर :
प्लास्मोडियम जाति के प्रोटोजोआ द्वारा।

प्रश्न 22.
डिप्थेरिया रोग के कारक का नाम क्या है ?
उत्तर :
डिप्थेरिया रोग का कारक कोरिन-बैक्टीरियम डिप्थेरा नामक जीवाणु है।

प्रश्न 23.
एक रोगाणुवाहक का नाम लिखिए।
उत्तर :
मच्छर, घरेलू मक्खी ।

प्रश्न 24.
प्रतिरक्षणता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रतिरक्षणता : हमारे शरीर में पायी जानेवाली रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रतिरक्षणता कहते हैं।

प्रश्न 25.
क्षयरोग की अवधि लिखो।
उत्तर :
2 – 10 सप्ताह।

प्रश्न 26.
ORS क्या है ? यह किस बीमारी में काम करता है ?
उत्तर :
ORS एक प्रकार का पावडर घोल है जो डायरिया बीमारी में काम करता है।

प्रश्न 27.
मिद्टी की उर्वरा शक्ति को किस प्रकार से बनाये रखा जा सकता है ?
उत्तर :
फसल चक्र द्वारा मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कायम रखा जाता है ।

प्रश्न 28.
एक हानिकारक वाइरस का नाम बताइये।
उत्तर :
HIV

प्रश्न 29.
एक लाभदायक जीवाणु का नाम बताइये।
उत्तर :
एजेटोबैक्टर।

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प्रश्न 30.
मलेरिया रोग किस प्रोटोजोआ के कारण होता है।
उत्तर :
प्लाज्मोडियम वाइवेक्स (Plasmodium Vivex)

प्रश्न 31.
एक हानिकारक कवक का नाम लिखिए।
उत्तर :
पक्सिनिया आ्मामिनिस (Puccinia graminis)

प्रश्न 32.
किस मच्छर के द्वारा डेंगू फैलता है?
उत्तर :
एडिस मच्छर।

प्रश्न 33.
एक ऐसे वाइरस का नाम बताइये जिसमें RNA तथा DNA दोनों पाया जाता है।
उत्तर :
पोलियो वाइरस।

प्रश्न 34.
पोलियो वाइरस में किस प्रकार का केन्द्रक अम्ल पाया जाता है।
उत्तर :
RNA

प्रश्न 35.
कौन-सा जीवाणु T.B. रोग फैलाता है ?
उत्तर :
माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस।

प्रश्न 36.
हैजा फैलाने वाले जीव का नाम बताइये।
उत्तर :
Vibrio cholera

प्रश्न 37.
टिटेनस किस जीवाणु के कारण होता है।
उत्तर :
क्लास्ट्रीडियम टेटानी।

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प्रश्न 38.
यकृत में होनेवाला जानलेवा रोग क्या है ?
उत्तर :
हेपेटाइटिस।

प्रश्न 39.
एक लाभदायक कवक का नाम बताइये।
उत्तर :
यीस्ट।

प्रश्न 40.
WHO का पूरा नाम बताइये ?
उत्तर :
वर्ड्ड हेल्य आर्गनाइजेशन (World Health Organisation)

प्रश्न 41.
AIDS का पूरा नाम बताइये ?
उत्तर :
Acquired Immuno Deficiency Syndrome

प्रश्न 42.
जैव उर्वरक क्या है ?
उत्तर :
जैव उर्वरक एक प्रकार का जीव है जो मृदा की उर्वरता तथा पोषक गुणवत्ता को बढ़ाता है।

प्रश्न 43.
डी० पी० टी० का टीका किस रोग का उपचार है।
उत्तर :
डिप्थेरिया, परटयूसिस और टिटनेस।

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प्रश्न 44.
जैव उर्वरक के मुख्य स्रोत क्या हैं ?
उत्तर :
जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया आदि जैव उर्वरक के मुख्य सोत हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2/3 MARKS

प्रश्न 1.
इम्यूनिटी किसे कहते हैं ? उदाहरण दें।
उत्तर :
हमारे शरीर में वातावरण में उपस्थित अनेक प्रकार के रोग उत्पादक (Pathogenic) विषाणुओं, जीवाणुओं, कवकों (Fungi) तथा परजीवी जीवधारियों का आक्रमण होता रहता है। वातावरण से अनेक विषेले पदार्थ भी हमारे शरीर में पहुँचते रहते हैं। शरीर के अन्दर भी आक्रमणकारी जीवों द्वारा विषैले पदार्थ मुक्त होते हैं। हमारे शरीर में इन हानिकारक पदार्थों (घतिजन) से प्रतिरोध करने की क्षमता को इम्यूनिटी (Immunity) कहते हैं।

प्रश्न 2.
एन्टीबाडीज़ क्या है ?
उत्तर :
प्रतिरक्षी (Antibodies) : प्रतिरक्षी पदार्थ (Antibodies) लम्फोसाइट्स द्वारा निर्मित वे प्रोटीन्स होते हैं जो शरीर में आने वाले प्रतिजन की क्रियाशीलता को नष्ट कर शरीर को रोगों से बचाते हैं।

प्रश्न 3.
सहज प्रतिरक्षा किसे कहते हैं ?
उत्तर :
सहज प्रतिरक्षा : सहज प्रतिरक्षा (इनेट इम्यूनिटी) एक प्रकार की आवेशिष्ट रक्षा है जो जन्म के समय से मौजूद होती है।

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प्रश्न 4.
पैथोजेनिक सूक्ष्म जीवों की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
शरीर में उपस्थित अनेक प्रकार के रोग उत्पादको जैसे विषाणु, जीवाणु, कवक तथा परजीवी जीवधारिंयों को पैथोजेनिक कहा जाता है।

प्रश्न 5.
अच्छे स्वास्थ्य की तीन मूल शर्तों के नाम लिखो।
उत्तर :

  • पीने का पानी शुद्ध एवं संक्रमणरहित होना चाहिए।
  • भोजन स्वास्थ्यकर तरीके से पकाना चाहिए।
  • वैज्ञानिक विधि से पास्तूरीकृत किया हुआ कीटाणुरहित दूध पीना चाहिए।

प्रश्न 6.
फैगोसाइटोसिस से आप क्या समझते हो ?
उत्तर :
श्वेत रक्त कणिकाओं द्वारा रोगाणुओं के भक्षण की विधि को फैगोसाइटोसिस (Phagocytosis) कहते हैं।

प्रश्न 7.
अर्जित प्रतिरक्षा किसे कहते हैं?
उत्तर :
मनुष्य के शरीर में रोगाणुओं द्वारा कुछ रोगों के होने या उनके मृत या कमजोर रोगाणुओं को शरीर में इंजेक्शन से खा मुँह द्वारा पिलाकर शरीर के अन्दर प्रवेश कराने से भविष्य में उनके प्रति स्थायी अथवा अस्थायी रोग प्रतिरोधकता उत्पन्न हो जाती है जिसे अर्जित प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 8.
एन्टीबायोटिक क्या है ?
उत्तर :
ये विशिष्ट जीवों जैसे बैक्टीरिया, कवक आदि के उपापचयी उत्पादों (metabolic products) से प्राप्त किये जाते हैं। इनका उपयोग अन्य सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 9.
टीकाकरण (Vaccination) क्या है ?
उत्तर :
ऐसी क्रिया जिसमें मृत या जीवित या विशिष्ट सूक्ष्म जीव के परिवर्तित लक्षण को सूई लगाकर अथवा मुख द्वारा स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कराया जाता है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो जाती है, टीकाकरण कहलाता है।

प्रश्न 10.
चेचक के टीके का आविष्कार कब और किसने किया?
उत्तर :
डॉ॰ एडवर्ड जेनर ने सन् 1898 में चेचक के टीके का आविष्कार किया था ।

प्रश्न 11.
WHO के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
W.H.O. के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा – “वह स्थिति जिसमें पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सम्पन्नता हो, न कि केवल बीमारियों या पीड़ा का न होना।”

प्रश्न 12.
निम्न के सम्पूर्ण नाम लिखो – WHO, DPT, BCG, AIDS, HIV तथा DOTS.
उत्तर :
WHO – World Health Organisation
DPT – Diphtheria, Pertussis and Tetanus,
BCG – Bacillus Calmette Guerin,
AIDS – Acquired Immune Deficiency Syndrome
HIV – Human Immuno Deficiency Syndrome Virus,
DOTS – Direct Observed Treatment Short Course.

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प्रश्न 13.
रोग-प्रतिरक्षण क्या है ?
उत्तर :
यह शरीर की स्वाभाविक रूप से या टीको के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता है। जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को टीका के माध्यम से किसी विशेष बीमारी के लिए प्रतिरोधी बनाया जाता है ।

प्रश्न 14.
रोग क्या है ?
उत्तर :
रोग हमारे शरीर की वह अवस्था है जिसमें सामान्य शारीरिक कियाएँ बाधित हो जाती हैं, शारीरिक अंग और अंग तंत्र सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 15.
हेपेटाइटिस की रोकथाम कैसे करोगे?
उत्तर :
हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए हेपेटाइटिस – B का टीका लगवाना चाहिए । दैनिक रहन-सहन पर पूर्ण स्वच्छता रखनी चाहिए, जिससे इस रोग का प्रादुर्भाव न होने पाए। संक्रमण से सुरक्षा के लिए पेयजल आयोडाइज्ड तथा UV-किरणों से उपचारित होना चाहिए।

प्रश्न 16.
हेपेटाइटिस रोग के लक्ष्षण क्या हैं ?
उत्तर :
हेपेटाइटिस रोग के लक्षण : विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस के लक्षण भिन्न-भिन्न होते हैं। सिर दर्द, हल्का बुखार, जॉन्डिस एवं गहरे रंग का मूत्र इस रोग के साधारण लक्षण हैं। भूख में कमी, शरीर का वजन घटने लगता है। यकृत में जलन होती है।

प्रश्न 17.
डिप्येरिया रोग के लक्षण क्या हैं ?
उत्तर :
तेज बुखार, त्वचा में अलसर, गले में सूजन आदि डिप्थेरिया रोग के लक्षण है r

प्रश्न 18.
प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया की तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :

  • आक्रामक को पहचानना
  • आकामक को नष्ट करना
  • आक्रामक को परद रखना

प्रश्न 19.
जैव नियंत्रण किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जैव नियंत्रण का अर्थ है वैज्ञानिक विधि से पौधों को रोगों तथा पोड़कों (Pests) का नियंत्रण करना। आजकल ये समस्याएँ विभिन्न रसायनों, कीटनाशकों एवं पीड़क नाशकों के फ्रयोग से नियत्रित की जाती हैं।

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प्रश्न 20.
उपार्जित प्रतिरक्षण किसे कहते हैं? टीका तथा टीकाकरण में अन्तर बताओ।
उत्तर :
कुछ रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता हम अपने जीवन काल में विकसित करते हैं। ऐसी प्रतिरक्षा को उपार्जित प्रतिरक्षा कहते हैं । टीका एक जीवों के शरीर का उपयोग करके बनाया गया द्रव्य है जिसके प्रयोग से शरीर में किसी रोग विशेष से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। टीकों को शरीर में प्रवेश कराने की विधि को टीकाकरण कहते है ।

प्रश्न 21.
रक्त शून्यता क्या है? इस बीमारी के लक्षण बताओ।
उत्तर :
रक्त शून्यता वह स्थिति है जिसमें आपके शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन ले जाने के लिए पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है। जिसे कम हीमोग्लोबिन भी कहा जाता है, आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कराता है।
लक्षण : थकान या सांस की तकलीफ।

प्रश्न 22.
शारीरिक रोध क्या है ? एक उदाहरण दो।
उत्तर :
शारीरिक रोध : हमारे शरीर पर त्वचा मुख्य अवरोधक है जो सूक्ष्मजीवों के मवेश को रोकता है। श्वसन जठरांत्र (गैस्ट्रोइटेटाइनल) और जननमूत्र पथ को आस्तरित करने वाली एपिथीलियम का श्लेष्मा आलेप (म्यूकस कोटिंग) भी शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं को रोकने में सहायता करता है।

प्रश्न 23.
एण्टीजेन तथा एण्टी बॉडी की परिभाषा लिखो।
उत्तर :
एण्टीजेन (Antigen) : शरीर के अन्दर भी आक्रमणकारी जीवों द्वारा विषैले पदार्थ मुक्त होते हैं। इन विषैले पदार्थों (Toxins) को एण्टीजेन (Antigen) कहते हैं।

एण्टीबॉडी : हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले हानिकारक वाइरस या विषेलों पदार्थों या वाइरस के प्रभाव को समाप्त करने के लिए एक दूसरा पदार्थ उत्पन्न होता है। उसे एन्टीबॉडी (Antibody) कहते हैं।

प्रश्न 24.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
नाइट्रोजन स्थिरीकरण : वायुमण्डलीय नाइट्रोजन गैस को सरल एवं घुलनशील अकार्बनिक यौगिकों जैसे नाइट्रेट तथा नाइट्राइट आदि के रुप में बदलने की क्रिया को नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कहते हैं।

प्रश्न 25.
राइजोबियम क्या है ?
उत्तर :
राइजोबियम छड़ के आकार का एक लाभदायक बैक्टीरिया है। ये दलहन जातीय पौषे जैसे – चना, मटर आदि पौधों की जड़ों के ग्रंथों में उपस्थिति रहते हैं। इनमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता होती है जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

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प्रश्न 26.
माइक्रोब्स (Microbes) से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
माइक्रोब्म (Microbes) : ऐसे सारे जीव जिन्हें हम अपनी खुली आँखों से देख नही पाते है, जिन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र (माइकोस्कोप) की आवश्यकता होती है, माइकाब्स कहलाते हैं।

प्रश्न 27.
प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्या है ?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural immunity) : कुछ रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता शरीर में जन्म से ही पाई जाती है, इसे ही प्राकृतिक प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 28.
वाइरस क्या है ?
उत्तर :
न्यूक्लिओ प्रोटीन गठित वह सूक्ष्मतम रोग कारक, अकोशिकीय परजीवी जिसमें सजीव तथा निर्जीव दोनों के गुण जाये जाते हैं, वाइरस कहलाता है।

प्रश्न 29.
दो रोग उत्पन्र करने वाले जीवाणुओं के नाम बताइये ?
उत्तर :

रोग का नाम जीवाण का नाम
डिष्थेरिया कोरिन बैक्टीरिया डिप्थेरी (Coryne bacterium diphtheriae)
टायफायड साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi)

प्रश्न 30.
फंगस क्या है?
उत्तर :
फंगस (Fungus) : क्लोरोफिल रहित मृतोपजीवी या परजीवी एक कोशिकीय या बहुकोशिकीय पौधों को फंगस कहते हैं। इसमें जड़, तना तथा पत्ती का अभाव होता है।

प्रश्न 31.
मच्छरों द्वारा संक्रमित रोग के नाम बताएँ ।
उत्तर :
मादा संक्रमित मच्छर द्वारा मलेरिया बुखार तथा मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फाइलेरिया संक्रमित होते हैं।

प्रश्न 32.
बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाले रोगों के नाम बताइये।
उत्तर :
बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाले रोग – न्यूमोनिया, हैजा, डायरिया, टी० बी०, प्लेग, टिटनेस, कोढ़ आदि हैं।

प्रश्न 33.
दो रोग फैलानेवाले प्रोटोजोआ के नाम लिखिए।
उत्तर :

प्रोटोजोआ रोग
प्लाज्मोडियम वाइवेक्स (Plassmodium vivax) मलेरिया (Malaria)
एण्टामिबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba Histolytica) अमीबियोसिस (Amoebiasis)

प्रश्न 34.
क्षयरोग या टी० बी० के लक्षण क्या हैं ?
उत्तर :
सामान्यत: हल्का बुखार होना, लगातार खाँसी आना, खाँसते समय कफ या बलगम के साथ रक्त निकलना तथा रात में शरीर में पसीना निकलना क्षयरोग के प्रमुख लक्षण हैं।

प्रश्न 35.
रक्तधान द्वारा संचारित रोगों के नाम बताइये ?
उत्तर :
रक्तधान द्वारा संचारित रोग :

  • Hepatitis
  • AIDS
  • Malaria

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प्रश्न 36.
मलेरिया रोग के लक्षण बताइए।
उत्तर :
मलेरिया में रोगी को जाड़ा तथा कँपकँपी के साथ तेज बुखार आता है। सिर तथा शरीर में अत्यधिक दर्द होता है।

प्रश्न 37.
जीवाणुओं का आर्थिक महत्व लिखिए।
उत्तर :

  • बैक्टीरिया का उपयोग चाय एवं तम्बाकू उद्योग, चर्म उद्योग, रबर उद्योग, टेक्स्टाइल उद्योग, प्लास्टिक उद्योग आदि में किया जाता है।
  • यह मक्खन, पनीर, दही, घी आदि के उत्पादन में सहायक होते हैं।

प्रश्न 38.
डायरिया से रोकथाम के लिए कुछ उपाय बताइये ।
उत्तर :
डायरिया से रोकेथाम के उपाय :

  • पीने का जल शुद्ध तथा संक्रमण रहित होना चाहिए
  • सभी को व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
  • भोजन को अच्छी तरह पकाना चाहिए।

विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्रतिरक्षा क्या है? प्रतिरक्षा कितने प्रकार की होती है? परिभाषा सहित लिखिए।
उत्तर :
प्रतिरक्षा (Immunity) : शरीर में प्रवेश करने वाले जीवाणु, विषाणु, विषाक्त पदार्थो इत्यादि को निष्किय कर उनके हानिकारक प्रभव से बचने की स्वयं की क्षमता को प्रतिरक्षा कहते हैं। प्रतिरक्षा निम्न दो प्रकार की होती हैं –

  • प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural immunity) : किसी सजीव में जन्म से ही प्राप्त अपनी रक्षा की क्षमता को प्राकृतिक प्रतिरक्षा कहते हैं। जैसे – प्लाज्मा में एन्टिबोंडिज का पाया जाना
  • उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired immunity) : किसी खास रोग के कीटाणुओं के प्रवेश करने पर इसके हानिकारक प्रभाव से बचने के लिए प्लाज्मा में एन्टिबॉंडिज उत्पन्न करने की घटना को उपार्जित प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 2.
टी॰ बी० के लक्षण तथा संचरण विधि लिखिए।
उत्तर :
टी० बी० के लक्षण : लगातार खाँसी आना, हल्का बुखार होना, खाँसते समय कफ ग़ा बलगम के साथ रक्त का निकलना, छाती में दर्द होना, थकान महसूस होना, श्वाँस लेने में तकलीफ, बेचैनी तथा शरीर का वजन लगातार घटते जाना आदि लक्षण हैं।
टी० बी० के संचरण : यह रोग संक्रमित रोगी के थूक, कफ, खाँसी के माध्यम से फैलता है।

प्रश्न 3.
AIDS क्या है ? एड्स रोग किस प्रकार फैलता है ?
उत्तर :
AIDS (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) रोग HIV (Human Immuno Deficiency Virus) के कारण होता है। इस अवस्था में शरीर की रोग निरोधी क्षमता कम हो जाती है तथा शरीर विभिन्न प्रकार के रोगजनक संक्रमण से संक्रमित हो जाता है। रोगी का जीवित रहना सम्भव नहीं हो पाता है।

एड्स रोग के फैलने के तरीके : यह रोग निम्नलिखित तरीक से फैलता है :-

  • मुख्यतः यह रोग अनैतिक यौन संबंधों के कारण होता है। एड्स से पीड़ित व्यक्ति से यौन सम्बन्ध स्थापित करने पर स्वस्थ मनुष्य भी एड्स का शिकार हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के रक्त को दूसरे व्यक्ति में चढ़ाने पर इस रोग के विषाणु का स्थानान्तरण हो जाता है।
  • HIV से संकमित इंजेक्शन की सूई के व्यवहार से भी AIDS का संचरण होता है।
  • एड्स पीड़ित गर्भवती महिला का शिशु भी AIDS का शिकार हो जाता है।

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प्रश्न 4.
जैव नियंत्रण कारक से आप क्या समझते हैं ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
जैव नियंत्रण कारक (Biocontrol Agents) : फसलों में रोग पैदा करने वाले सूक्ष्म-जीव, फसलों को नष्ट करने वाले कीड़े-मकोड़े तथा खेतों में अनावश्यक उगने वाली घासों को सूक्ष्म जीवधारियों के उपयोग से नियंत्रित करने की प्रक्रिया को जैविक नियंत्रण कहते हैं। जैव नियत्रण के उपयोग में आने वाले जैविक कारको को जैव नियत्रण कारक (Biocontrol Agents) कहा जाता है।

जैव नियंत्रण में उपयोग किये जाने वाले सूक्ष्म जीवधारी : जीवाणु, विषाणु, कवक तथा एक कोशिकीय जन्तु शामिल है। जैव नियंत्रण कारको का उपयोग मुख्यतः फसलों को क्षति पहुँचाने वाले कीटों के नियंत्रण में किया जाता है, कभी-कभी इनका उपयोग खेतों में अनावश्यक घासों तथा फसलों तथा फसलों की बीमारियो को नियंत्रित करने के लिए भी किया जाता है।

प्रश्न 5.
टीकाकरण क्या है ? कुछ प्रचलित टीके तथा इनसे दूर होने वाले रोगों के नाम लिखिए ?
उत्तर :
टीकाकरण : टीकों को शरीर में प्रवेश की विधि को टीकाकरण कहते हैं।
कुछ प्रचलित टीके तथा उनसे दूर होने वाले रोगों के नाम निम्नलिखित है :-

टीका बीमारी
BCG T.B.
MMR Mumps, Measles & Rubella
Polio (Oral) Polio
Toxoid serum Diptheria
Cholera Vaccine Cholera
DPT Diptheria, Pertusis & Tetanus
TT Tetanus
Rubella Vaccine Small pox, German measles

प्रश्न 6.
‘WASH’ से आप क्या समझते हैं ? इसके दो उपयोग लिखें।
उत्तर :
जल-सफाई और स्वच्छता (WA-Water, S-Sanitation, H-Hygienc – WASH) : यूनिसेफ एक संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ जल तथा सफाई प्रदान करना और उनको स्वस्थ बनाना है। इस संस्था के कार्यकारी बोई ने 2006 ई० में इस कार्य को करने की मंजूरी दी। जावा और इंडोनेशिया में एक शौचालय के निर्माण से इस संस्था ने अपना कार्य प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित जल और बुनियादी स्वच्छता की सेवाओं को बेहतर ढग से

बढ़ावा देना है। इस संस्था के दो प्रमुख लक्ष्य है –

  • 2015 ई० तक सुरक्षित पीने का पानी और बुनियादी स्वच्छता के लक्ष्य को पूरा करना है।
  • सभी विद्यालयों में पर्याप्त बच्चों के अनुकूल पानी और शौचालय की सुविधा तथा स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम को सुनिश्चित करना है।

WASH के उपयोग : WASH के निम्नलिखित उपयोग हैं –

  • यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिये योगदान सुनिश्चित करता है कि सभी देश जागरूक होकर स्वच्छता के द्वारा सुधार लायें। यह पारिवारिक स्तर पर अधिक ध्यान केन्द्रित करके जल की गुणावत्ता, उन्नत स्वास्थ्य और आरोग्यता के क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाता है।
  • यूनिसेफ डब्ल्यूएचओ (WHO) के साथ वैथ्थिक क्षेत्र में निगरानी करता है। यह राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है। यह स्वास्थ सचेतना की उत्नति में तकनीकी सहयोग द्वारा शिक्षा, स्वयं एवं पोषण के माध्यम से व्यावहारिक परिवर्तन को बढ़ावा देगा एवं स्वस्थ जीवन और विकास को क्रियान्वयन में मदद करेगा। संक्षेप में WASH का प्रमुख उद्देश्य सभी को स्वच्छ जल, सफाई के साधन और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना और उनके विकास में सहयोग करना है।

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प्रश्न 7.
इम्यून प्रतिक्रियाओं से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
इम्यून प्रतिक्रियाएँ (Immune Responses) : इम्यून प्रतिरक्षा में दो विभिन्न प्रकार की, परन्तु परस्पर सम्बन्धित प्रतिक्रियाएँ होती है और दोनों ही प्रतिजनों (antigens) द्वारा उत्रेरित होती हैं। इनमें से एक प्रकार की प्रतिक्रियाओं को कोशिका-मध्यस्थीय अर्थात् कोशिकीय इम्यून प्रतिक्रियाएँ (cell-mediated or cellular immune responses – CMI) तथा दूसरी को प्रतिरक्षी-मध्यस्थीय अर्थात् इम्यून ह्यूमरल प्रतिक्रियाएँ (antibody-mediated or humoral immune responses – AMI) कहते हैं।

CMI प्रतिक्रियाओं में CD8+T कोशिकाएँ प्रचुरोद्भवन (proliferation) द्वारा अनक विनाशी टी-कोशिकाएँ (killer T-cells) बनाती हैं जो प्रतिजनों पर सीघे आक्रमण करती हैं। AMI प्रतिक्रियाओं में B- कोशिकाएँ प्लाज्मा कोशिकाओं (plasma cells) में रूपान्तरित होती हैं जो भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रतिजनों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की प्रतिरक्षा (antibodies) प्रोटीन्स का संश्लेषण करती हैं। इन प्रतिरक्षी प्रोटीन्स को इम्यूनोग्लोबुलिन्स (immunoglobulins) कहते हैं। ये सम्बन्धित प्रतिजनों से बँधकर इन्हे निष्किय करती हैं।

प्रश्न 8.
चेष्ट एवं निश्चेप्ट प्रतिरक्षा किसे कहते हैं।
उत्तर :
चेष्ट प्रतिरक्षा (Active Immunity) : टीका लगाने के बाद शरीर में अपनी प्रतिरक्षण प्रतिक्रियाओं द्वारा ही उपयुक्त एन्टीबॉडोज का संश्लेषण होता है। इसे इसीलिए चेष्ट प्रतिरक्षा कहते है।

निश्चेष्ट प्रतिरक्षा (Passive Immunity) : कुछ रोगों से बचाव के लिए उपयुक्त एन्टीबॉडीज (antibodies) प्रयोगशालाओं में तैयार करके रोग की सम्भावना से पहले ही, शरीर में इन्जेक्ट कर दिए जाते हैं। किसी ऐसे व्यक्ति के रुधिर सीरम (blood serum) को भी, जो रोग से प्रभावित होकर ठीक हो गया हो, दूसरे व्यक्ति के शरीर में इन्जेक्ट कर सकते है, क्योंकि इस सीरम में उपयुक्त एन्टीबॉडीज होते हैं।

ऐसे रुधिर सीरम को एन्टीसीरम (antiserum) कहते हैं। इसमें उप्पस्थित एन्टीबॉडीज कुछ समय के लिए शरीर में सक्रिय बने रहते हैं। यदि इस बीच सम्बन्धित रोगाणु या पतिजन शरीर में पहुंच जाते हैं तो इन्हें ये एन्टीबॉडीज नष्ट कर देते हैं। इसे शरीर की निश्चेष्ट (passive) प्रतिरक्षा कहते हैं। इसकी ख़ोज सन् 1890 में एमिल वान बेहरिंग (Emil von Behring) ने पशुओं में टिटेनस (tetanus) तथा मनुष्य में रोहिणी रोग अर्थात् डिथ्थीरिया (diptheria) नामक रोगों की रोकथाम के प्रयास के दौरान की।

प्रश्न 9.
एलर्जी क्या है ? यह किस प्रकार से होता है ?
उत्तर :
एलर्जी (Allergy) : यह प्रतिरक्षण का एक महत्वपूर्ण पार्श्व-प्रभाव (side effect) होता है।

एलजी होने की विधि एवं प्रभाव : यदि किसी ऐसे मलिजन की, जिसके लिए प्रतिरक्षण तंत्र अतिसंवेदनशील (hyperserisitive) हो चुका है, बहुत-सी मात्रा अचानक शरीर में पहुँचकर फैलती है, तो कुछ ही मिनटों में प्राय: पूर्ण शरीर में, तीव एवं असाधारण (abnormal) या विपथगामी (aberrant) प्रतिरक्षण प्रतिक्रिया होने लगती है। सभी ऊतकों में प्रदा (inflammation) प्रतिक्रिया के फलस्वरूप, पूरा शरीर फूल सकता है

या त्वचा पर दाने उभर आते हैं। इसे एलर्जी कहते हैं। इसमें उतको की विस्तृत क्षति और व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। कुछ लोगों को दवाइयों, सौन्दर्य-पसाधन (cosmetics) रंगों आदि से प्रायः सीमित एलर्जी हो जाती है । एलर्जी उत्पत्र करने वाले पदार्थों को एलर्जेन्स (allergens) भी कहते हैं। कभी-कभी अपने ही शरीर में बनने वाले किसी पदार्थ या अपने ही शरीर के किसी ऊतक के प्रति प्रतिरक्षण तंत्र अति संवेदनशील होकर एलर्जी उत्पन्न कर देता है।

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प्रश्न 10.
डेंगू की प्रकृति, लक्षण एवं प्रसार का वर्णन करें।
उत्तर :
डेंगू (Dengue) : डेंगू का वाइरस ऐडीज नामक मच्छरों की मादाओं में पाया जाता है। यह सभी उष्ण कटिबंधीय देशों में परन्तु मुख्यतः दक्षिणी-पूर्वी एशिया; अफ्रीका तथा अमेरिका के दक्षिणी एवं मध्य भागों में पाया जाता है। इसे सामान्यत: हड्डीतोड़ बुखार भी कहते हैं। इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं – तेज ज्वर, सिर दर्द तथा पेशियों में दर्द। पेशियों और हड्डियों में अत्यधिक पीड़ा होती है जिस कारण इसे हड्डीतोड़ बुखार कहा जाता है। प्रायः सभी देशों में इस रोग के वाइरस पाये जाते हैं। एडीज मच्छरों की मादाओं द्वारा इस रोग को फैलाया जाता है। यह एक सक्रामक बीमारी है।

प्रश्न 11.
स्वच्छता का क्या आशय है ? इसे कैसे उपयुक्त बनाया जा सकता है ?
उत्तर :
पीने के लिए शुद्ध जल, रहने के लिए साफ सूथरा जगह और रोगों से रक्षा की व्यवस्था करना, स्वच्छता है। स्वच्छता की योजना को लागू करने के उपाय :-

  • यूनिसेफ सुधार स्वच्छता को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही तीन स्तम्भ दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जायेगा।
  • स्वच्छता, सफाई और पानी के कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर बच्चों का समुचित विकास किया ज़ायेगा और उन्हें स्वस्थ रखा जायेगा।
  • संतुलित राष्ट्रीय कार्यक्रमों के ढांचे को बढ़ावा देना।
  • स्थायी ‘WASH’ कार्यक्रमों को स्केलिंग के लिए उत्मेरक और निरंतर समर्धन प्रदान करना।
  • यह संस्था सक्रिय रूप से ‘WASH’ की सेवा को स्थिरता प्रदान करेगी।
  • सहायक यूनिसेफ नगर निगम, जिला और प्रांत आदि में मजबूत संस्थानों को बनाने में मदद करेगा।
  • जल संसाधन प्रबंधन के माध्यम से स्थाई जल की आपूर्ति को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही मीठे जल के संसाधनों को बचाने का उपाय भी करना इसका उद्देश्य है।

प्रश्न 12.
आरोग्य विज्ञान क्या है ? विशेष अवस्थाओं के लिए सफाई-प्रबन्ध का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
व्यक्तिगत स्तर तथा घरेलू स्तर पर सफाई (Hygiene) स्वस्थ रहने के लिए नितान्त आवश्यक है । सोकर उटने के बाद नित्य कर्मो से निवृत्त होकर हमे प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। गर्मी के दिनों में सम्भव हो सके तो दो बार स्नान करना लाभप्रद होता है। स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए। यदि कपड़े साफ और शरीर स्वच्छ नहीं तो इनकी गंदगी सूक्ष्म जोवाणुओं की वृद्धि में सहायक होती है। गंदगी केवल दुर्गध ही पैदा नहीं करती, बल्कि यह शरीर को भी अस्वस्थ कर सकती है।

प्रतिदिन सुबह एवं रात्रि को सोने से पहले दाँतों को भी प्रभावित करते हैं, जिससे पायरिया नामक रोग हो सकता है । बढ़े हुए नाखूनों को काटना तथा उन्हें साफ करना भी निहायत आवश्यक है अन्यथा नाखूनों में मैल के जमा होने पर हंम प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। खाने के पहले तथा खाने के बाद में हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना, अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। बच्चों को यह शिक्षा घर के वातावरण से प्राप्त होनी वाहिए जिससे उनमें अच्छी आदते विकसित हों।

विद्यालयों में भी मध्याह्ल भोजन (Mid-day meal) के समय इस म्रकार की आदतों के विकास के लिए शिक्षिक/शिक्षिका की निगरानी में साबुन द्वारा हाथों को साफ करवाया जाता है। विद्यार्थियों के बर्तनों की जाँच समय-समय पर होती है, ताकि वे साफ व सुखे रहैं।

अच्चे स्वास्थ्य के लिए घर को साफ तथा हवादार रखना भी आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर कोटाणुओं (germs) का विकास होने लगता है। इसलिए यह भी आवश्यक है कि घर के अगल-बगल का स्थान स्वच्छ रहे, कहीं पानी का जमाव नहीं हो, नहीं तो मच्छर, मक्खियाँ वृद्धि करने लगते हैं। रोग उत्पन्न करने वाले जीव तथा रसायन, हमारे शरीर में भोजन तथा पानी के माष्यम से प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए स्वच्छ भोजन के साथ स्वच्छ जल का सेवन अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है

प्रश्न 13.
जैव-खाद क्या है ? जैविक खाद का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर :
जैव उर्वरकों के मुख्य सोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया (Cyanobateria) होते हैं। लेग्यूमिनस पौधों की जड़ों की गाँठों के अन्दर पाये जाने वाले राइजोबियम हवा की N2 को मिट्टी में स्थिर करने का कार्य करते हैं। यही N2 पौधे के शरीर में पादप प्रोटीन बनाने के काम आता है तथा हम जन्तुओं को भी प्रोटीन की प्राप्ति होती है । दुसरे जीवाणु जैसे ऐजोस्पाइरिलम तथा एजोबैक्टर मिट्टी में स्वतन्त्र अवस्था में रहकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण का कार्य करते है। इस तरह मिट्टी में N2 की मात्रा बढ़ जाती है।

सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित सूक्ष्म जीव है। जो जलीय तथा स्थलीय वातावरण में मिलते हैं तथा नाइट्रोजन के स्थिरीकरण (Nitrogen fixation) का कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए-ऐनाबीना, नॉसटाक, आंसिलेटोरिया आदि। धान के खेत के लिए सायनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव-उर्वरक की भूमिका निभाते हैं। कवक पादपों के साथ सहजीवी सम्बन्ध (Mycorrhiza) बनाते हैं। ग्लोमस जीनस के बहुत से सदस्य माइकोराइजा बनाते हैं। इससे भोजन में कवकीय सहजीवी मृदा से फॉस्फोरस (P) का अवशोषण कर उसे पादपों में भेज देते हैं।

इस प्रकार हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि हमारे किसानों द्वारा जैव-उर्वरकों का व्यवहार बढ़ रहा है। हमें यह भी मालूम होना चाहिए कि जैव-उर्वरकों की एक बड़ी संख्या, बड़े पैमाने पर बाजार में उपलब्य है। इनके प्रयोग से मृदा का संरक्षण निश्चित रूप में होगा और रासायनिक उर्वरकों पर हमारी निर्भरशीलता घटेगी।

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प्रश्न 14.
मलेरिया क्या है ? मलेरिया के लक्षण क्या हैं ? मलेरिया की रोकथाम के उपाय क्या हैं ?
उत्तर :
मलेरिया (Malaria) : मलेरिया एक प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम की विभिन्न प्रजातियों से होने वाला रोग है। प्लाज्मोडियम की चार प्रजातियाँ हैं – वाइवेक्स, ओवेल, फैल्सीपेरम तथा मलेरिआई। यह परजीवी मनुष्य के यकृत एवं R.B.C. में तथा मादा एनोफिलीज मच्छर के आमाशय में विभाजित होकर वृद्धि करता हैं। जब संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर किसी मनुष्य को काटता है तो उसके लार के साथ अनेक परजीवी मनुष्य के रक्त में चले जाते हैं।

लक्षण (Symptoms) : मलेरिया का साधारण लक्षण है – कंपन के साथ तेज बुखार, सिर दर्द एवं पेशियों में दर्द। RBC टूटने से रक्त शून्यता होने लगती है। प्लीहा का आकार बढ़ जाता है। रोगी को प्रति 48 घंटे पर तेज बुखार आता है। RBC के फटने से रक्त में एक विषैला पदार्थ हीमोजोइन (Haemozoin) मुक्त होता है। इसी विषैले पदार्थ के कारण मनुष्य को तेज बुखार होता है।

रोकथाम :

  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए तथा खुले भागों में मच्छर-निरोधक कीम या सरसों का तेल लगाना चाहिए।
  • मच्छर के प्रजनन स्थानों पर कीटनाशक रसायनों जैसे – DDT का छिड़क्तव करना चाहिए।
  • छोटे-छोटे नालों या गद्दे को भर देना चाहिए ताकि मच्छरों का नाश हो
  • मकान के आसपास टूटे-फूटे बरतन या ऐसे पात्र जिसमें जल जमा रहता है, नहीं रहने देना चाहिए।

प्रश्न 15.
संक्रामक बीमारी किसे कहते हैं ? कुछ संक्रामक रोग तथा उनके रोगाणुओं के नाम बताइये।
उत्तर :
संक्रामक बीमारी (Infectious disease) : सूक्ष्म जीव रोगाणुओं द्वारा होने वाले रोगों को संक्रामक बीमारी कहते हैं। जैसे – T.B., AIDS, मलेरिया आदि।

कुछ संक्रामक रोग तथा उनके रोगाणु |

रोग रोगाणु
1. AIDS, चेचक, डेंगू, पित्तज्वर आदि विषाणु
2. हैजा, डायरिया, प्लेग, न्यूमोनिया, कोढ़, टिटेनस, T.B. आदि जीवाणु
3. मलेरिया, कालाजार आदि प्रोटोजोआ
4. फाइलेरिया, हाथी रोग आदि कृमि
5. चर्मरोग, भोजन का विषाक्त होना आदि कवक

प्रश्न 16.
सूक्ष्म जीव मानव कल्याण में किस प्रकार सहायक हैं ?
उत्तर :
मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव :- सूक्षजीव सर्वव्यापी होते हैं। सूक्ष्म जीव उन स्थानों पर भी उपस्थित रहते हैं, जहाँ जीवन सम्भव नहीं है। ये सूक्ष्म वायु, जल, मिट्टी, प्राणी, पौषे आदि में व्याप्त होते हैं। ये सूक्ष्म जीव हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में कार्य करते हैं। सभी सूक्ष्म जीव रोग पैदा नहीं करते हैं, इनमें से कुछ तो बहुत ही लाभदायक होते हैं दूध को दही में बदलने का काम लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु करता है।

डोसा, इडली, बनाने में जीवाणु द्वारा किण्वन होता है। पावरोटी बनाने में भी आटे के साथ खमीर (Yeast) सारकोमाइसजी सेरीविसी का प्रयोग किया जाता है। सूक्ष्म जीवों का प्रयोग सोयाबिन, किण्वित मछली आदि के भोजन तैयार करने में किया जाता है। लाभप्रद सूक्ष्म जीवों द्वारा पेनिसिलीन नामक एन्टीबायोटिक का उत्पादन किया जाता है। सूक्ष्म जीव द्वारा उत्पन्न बायोगैस का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के रूप में किया जाता है। इस प्रकार मानव कल्याण में सूक्ष्म जीवों का बहुत बड़ा योगदान है, ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 17.
एडवर्ड जेनर कौन थे ? इन्होंने किसका आविष्कार किया ? किस प्रकार से टीकाकरण द्वारा हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ? लिखो।
उत्तर :
टीकाकरण की क्रिया का विचार सर्वप्रथम एडवर्ड जेनर (Edward Jenner 1748-1823) के मस्तिष्क में उत्पन्न हुआ। एडवर्ड जेनर एक डॉक्टर थे। एकबार इंग्लैण्ड में स्माल पॉक्स की बहुत ही भयकर बीमारी फैल गई। इसके प्रभाव से अधिकतर शहरी निवासियों की मृत्यु हो गई। परन्तु गायो के निवास स्थानों (गोशाला) में रहने वाले ग्रामीण लोगों अर्थात् ग्वालों पर इसका प्रभाव बहुत ही कम था।

अधिकतर किसान और दूथ उद्योग से संबंधित काउ पॉक्स द्वारा प्रभावित होकर शीघ्र ही स्वस्थ हो गये। इसे देखकर उन्होंने अनुभव किया कि ऐसे व्यक्ति जो काउ पोंक्स के वैक्सिन लिये हैं उनको स्माल पॉक्स से सुरक्षा हो जाती है। डॉ० जेनर ने मई 1796 ई० में अपनो इस टीकाकरण की विधि एक बच्चे के ऊपर प्रयोग करके सफलता प्राप्त की।

जेनर ने शरीर में जीवाणु के विषैले प्रभाव को नष्ट करने के लिए उत्पन्न हुए प्रतिरक्षी पदार्थ का नाम वैविसन (Vaccine) रखा और शरीर के अन्दर इसे प्रदान करने की क्रिया को टीकाकरण (Vaccination) कहा। किसी रोग से सुरक्षा करने के लिए वैक्सिन के उपयोग की विधि को वैक्सिनोधिरापी (Vaccinotherapy) कहते हैं। लुईस पास्तूर ने जेनर के सिद्धान्त को स्वीकार करके ऐंच्थेक्स, चिकेन पोंक्स, हैजा, रैबिस(Hydrophobia) का वैक्सिन तैयार किया।

प्रश्न 18.
वैक्सिन कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :
वैक्सिन के प्रकार (Types of vaccine) : वैक्सिन निम्न प्रकार की होती हैं –

  • जीवित वैक्सिन (Live vaccine): यह सजीवों के शरीर से प्राप्त की जाती है। यह निर्जीव वैक्सिन से अधिक सक्रिय है। जैसे – ओरल पोलियो (B.C.G.), स्मालपॉक्स, मीजील्स (Measles) और मम्पस (Memps) की वैक्सि।
  • मृतजीवों से प्राप्त वैक्सिन (Killed vaccines) : इस वैक्सिन को प्राप्त करने के लिए पहले जीवधारी को उष्मा या रासायनिक पदार्थों द्वारा जान से मार दिया जाता है। इनकी कोशिकाओं से प्राप्त वैक्सिन को जब शरीर में प्रेषित किया जाता है तो यह शरीर में इम्यूनिटी उत्पत्र करती है।

प्रश्न 19.
जैव उर्वरक के रूप में सायनो बैक्टीरिया तथा माइकोराइजा के महत्व पर प्रकाश डालो।
उत्तर :
जीवाणु जैविक उर्वरक के रूप में (Bacteria as biofertilizer) : कुछ जीवाणु भूमि में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाते है। इस प्रकार पौधों को कृत्रिम उर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। ये जीवाणु सहजीवी (Symbiotic), स्वतंत्र रहने वाले और उच्च श्रेणी के पौधों की जड़ों के पास में जैसे-तैसे रहने वाले है।

जैविक उर्वरक (Biofertilizer) : जैविक उर्वरक वे सूक्ष्म जीवधारी हैं, जो अपनी जैविक क्रियाओं से भूमि में पोषक पदार्थो (Nutrients) की पूर्ति करते हैं। जीवाणु और साइनोजीवाणु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को भूमि में नाइट्रोजन के यौगिकों के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। इस कार्य में कुछ फफुंद (Fungi) भी सहायता करते हैं। जैसे माइकोराइजा।

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प्रश्न 20.
जैव उर्वरकों से क्या समझते हो ? इसके प्रयोग को किस प्रकार से प्रोत्साहित किया जायेगा ? जैव कृषक किनको कहते हैं ?
उत्तर :
जैव उर्वरकों : नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने के कारण कुछ जीवाणु जैव उर्वरक का कार्य करते हैं। एजोला एक तैरने वाला और तीव्र गति से उगने वाला फर्न का पौधा है। इसकी पत्तियों में उपस्थित रिक्त स्थानों में साइनोवैक्टिरियम और एनाबिना एजोला (Cynsbacterias and Anabaena azolla) रहते हैं।

ये वायु की स्वतंत्र नाइट्रोजन को पत्तियों के रिक्त स्थानों में ग्रहण कर नाइट्रोजन के यौगिकों के रूप में परिवर्तित करते हैं। यह एक उत्तम उर्वरक का कार्य करता है। इसके उपयोग से लगभग 50% फसल की उपज बढ़ जाती है। एनाबिना और नोस्टाक (Anabaena and Nostoc) भी प्रकाश-संश्लेषण से नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिये ऊर्जा प्राप्त करते है। अत: ये भी उर्वरक का कार्य करते हैं।

जैविक उर्वरक के रूप में फफूंद (Fungi as biofertilizer) : कुछ फंजाई वर्ग के पौधे परजीवी के रूप में पौरों की जड़ों के ऊपर या उनकी कोशिकाओ में रहते हैं। वाह्म माइकोराइजा (Ectomycorrhiza) पाइनस और ओक की रेशेदार जड़ों के साथ रहता है। यह पौधे से अपना पोषक पदार्थ प्राप्त करता है और उसे पोषण के लिए नाइट्रोजन फॉस्फोट और केल्शियम प्रदान करता है। अन्तः माइकोराइजा (Endomycorrhiza) फंगस पौधों की कोशिकाओं के मध्य या कॉर्टेक्स की कोशिकाओं के अन्दर सहजीवी के रूप में रहता है। यह तम्बाकू, बाय, रबर और आर्किड आदि पौथों की जड़ों में पाया जाता है।

प्रश्न 21.
एक शिशु को विभिन्न समय की किन-किन बीमारियों से बचाव हेतु टीके लगाये जाते हैं ?
उत्तर :
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प्रश्न 22.
हेपेटाइटिस क्या है ? हेपेटाइटिस के लक्षण क्या हैं ? यह रोग कैसे फैलता है ?
उत्तर :
हेपेटाइटिस यकृत में होने वाला मुख्य रूप से वाइरस से फैलने वाला एक रोग है। हेपेटाइटिस का नाम वाइरस के विभिन्न प्रकार के अनुसार दिया जाता है। इस रोग को उत्पन्न करने वाले 6 प्रकार के वाइरस होते हैं। ये Hepatitis A से लेकर Hepatitis F हैं।

लक्षण : विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस के लक्षण भिन्न भिन्न होते हैं। सिर दर्द, बुखार, जांन्डिस एवं गहरे पीले रंग का मूत्र इस रोग के साधारण लक्षण हैं। भूख न लगना, के होना, लिवर का आकार बढ़ जाना तथा जोड़ों में दर्द होना आदि भी इस रोग के लक्षण हैं।

रोग का फैलना : अनैतिक यौन संबंध स्थापित करने से, एक ही ब्लेड या रेजर से दाढ़ी बनवाने से, एक ही सीरिंज से कई लोगों को सूई लगाने से, नाक कान छेदाने से, थूक, लार आदि द्वारा यह रोग फैलता है। इस रोग से पीड़ित गर्भवती महिला का शिशु भी इस रोग का शिकार हो जाता है।

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प्रश्न 23.
प्राकृतिक प्रतिरक्षा के विभिन्न रोधों का वर्णन कीजिए?
उत्तर :
प्राकृतिक प्रतिरक्षा के निम्न चार रोध है :-

  • शारीरिक रोध (Physical barriors) : हमारे शरीर पर त्वचा मुख्य अवरोधक है जो सूक्ष्म जीवों के प्रवेश को रोकती है।
  • कायकीय रोध (Physiological barriors) : आमाशय में अम्ल, मूँह में लार, आँखों के आँसू आदि कायकीय रोध हैं।
  • कोशिकीय रोध (Cellular barriors) : W.B.C. में उपस्थित मोनोसाइट्स, लिम्फोसाइट्स आदि।
  • साइटोकाइन रोध (Cytokine barriors) : विषाणु संक्रमित कोशिकायें इन्टरफेरॉन नामक प्रोटीन का स्नाव करती है जो असकमित कोशिकाओं को और आगे विषणणु के संक्रमण से बचाती है।

प्रश्न 24.
डायरिया क्या है ? डायरिया के लक्षण क्या हैं ? इसकी रोकथाम के उपाय क्या हैं ?
उत्तर :
डायरिया (Diarrhoea) : डायरिया आँत में जीवाणुओं, विषाणुओं तथा अमीबा आदि के संक्रमण से होता है। इसके रोगाणु आँत को संकमित करते हैं। तीक्ष्ण डायरिया में प्रायः उदरशूल तथा ज्वर भी हो जाता है।

लक्षण :

  • दस्त तथा उल्टी का बार-बार होना डायरिया के सामान्य लक्षण हैं।
  • लगातार दस्त होने के कारण शरीर में जल तथा आवश्यक लवण की कमी हो जाती है।

इसके कारण निर्जलीकरण होता है एवं रोगी प्यास का अनुभव करता है। आँखे अन्दर की ओर धँसने लगती है, साँसे तेज चलने लगती हैं, वजन घटने लगता है, रोगी को बुखार तथा जोड़ों में दर्द हो सकता है।

रोकथाम :

  • इस रोग के संक्रमण से बचने के लिए सभी को व्यक्तिगत सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
  • पीने का ज़ल शुद्ध तथा संक्रमण रहित होना चाहिए।
  • भोजन स्वस्थकर तरीके से पकाना चाहिए तथा इसे ढंककर रखना चाहिए।
  • हमेशा ताजा तथा गर्म भोजन करना चाहिए।
  • इस रोग के रोगी को ORS पिलाना चाहिए।

प्रश्न 25.
संक्रामक रोग क्या है ? संक्रामक रोग कितने तरीके से स्थानान्तरित होते हैं ?
उत्तर :
संक्रामक रोग (Communicable disease) : प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक कुछ कीटाणुओं द्वारा स्थानान्तरित होने वाले रोगों को संक्रामक रोग कहते है। इस प्रकार के रोग को छुआछूत की बीमारी (Infectious disease) भी कहा जाता है । यह रोग जीवाणु, विषणु, कवक तथा प्रोटोजोआ द्वारा फैलता है। संकामक रोग का स्थानान्तरण निम्नलिखित तरीके से होता है।

प्रश्न 26.
बैक्टीरिया से होने वाले विभिन्न रोगों तथा बैक्टीरिया के नाम लिखिए।
उत्तर :
मनुष्य में होंने वाले विभिन्न रोग तथा रोग को फैलाने वाले बैक्टीरिया के नाम निम्नलिखित हैं :-

(i) वायु द्वारा डिप्थेरिया, इन्फ्लूएंजा।
(ii) स्पर्श द्वारा Chiken pox
(iii) जल द्वारा हैजा, पेचिश
(iv) भोजन द्वारा वादुलिज्म (Batulism)
(v) काटने से रैबिज
(vi) कीटों द्वारा मलेरिया

प्रश्न 27.
घरेलू मक्खी मानव रोगों को फैलाने में किस प्रकार भूमिका निभाती है ?
उत्तर :
मक्खी एक कीटर समुदाय का प्राणी है जो गन्दे स्थानों, जैसे – थूक, खखार, मल, धाय, उल्टी आदि पर अपना भोजन महहण करने के लिए बैठती है। इन गन्दे स्थानों में उपस्थित रोग के कीटाणु उनके पैरों तथा मुखांग में चिपक जाते हैं।

पुन: जब यह भोजन खुले खाद्य पदार्थों, मिठाई आदि पर बैठती है तो पैरों तथा मुखांगों में चिपके रोग के कीटाणु भोज्य पदार्थें में मिल जाते हैं। जब कोई व्यक्ति इन भोज्य पदार्थों को खाता है तो रोगाणु शरीर में पहुँचक्र रोग उत्पन्न करते हैं।
हैजा के कीटाणु टायफायड के कीटाणु, T.B. के कीटाणु, डायरिया आदि के कीटाणुओं का संवहन मविखयों द्वारा होता है।

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प्रश्न 28.
रक्तधान से होने वाली बीमारियों के नाम लिखिए ? इन बिमारियों से होने वाली प्रमुख समस्यायें क्या हैं ?
उत्तर :
रक्तधान (Blood transfussion) से होने वाली बीमारियाँ :-

  • AIDS
  • मलेरिया
  • हेपेटाइटिस

इन बीमारियों से होने वाली समस्यायें :

  • AIDS : AIDS में मनुष्य के शरीर में प्रतिरक्षा क्षमता समाप्त हो जाती है।
  • मलेरिया : इसमें रोगी को कँपक्रेपी तथा जाड़े के साथ बुखार आता है। सिर तथा शरीर मे अत्यधिक दर्द होता है।
  • हेपेटाइटिस : इसमें यकृत की कोशिका नष्ट हो जाती है, जिसंमें पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। इसमें भूख में कमी, सिर दर्द, तेज बुखार आदि होने लगता है।

प्रश्न 29.
रोग क्या है ? मनुष्य के मच्छर तथा घरेलू मक्खियों द्वारा संचारित रोग का नाम बताइये ? मनुष्य में मलेरिया, फाइलेरिया, हैजा टायफायड पेचिश, पीत ज्वर आदि रोगों का संक्षेप में वर्णन कीजिए ?
उत्तर :
रोग :- रोग हमारे शरीर की वह व्यवस्था है जिसमें सामान्य शारीरिक क्रियाएँ बाधित हो जाती हैं, शारीरिक अंग तथा अंग तंत्र सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं। मच्छरों द्वारा फैलाने वाले रोग :

  • मलेरिया
  • फाइलेरिया
  • पीत ज्वर
  • इन्सेफलाइटिस।

घरेलू मक्खियों द्वारा फैलने वाले रोग :

  • हैजा
  • पेचिश
  • टायफायड।

A. मलेरिया (Malaria) : यह एक प्रोटोजोआ द्वारा होने वाला रोग है जो मादा एनाफिलीज के कारण फैलता है। मलेरिया रोग प्लाज्मोडियम वाइवेक्स (Plasmodium Vivax) नामक एक प्रोटोजोआ द्वारा होता है। इसमें रोगी को कँपकंपी होकर तेज़ बुखार आता है तथा सिर दर्द होने लगता है, बदन दूटने लगता है। जाड़ा होकर बुखार आता है तथा बाद में पसीना आता है।

B. फाइलेरिया (Filaria) : फाइलेरिया रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फैलता है। इस रोग के परजीवी मनुष्य के रक्त तथा लसिका को प्रभावित करते हैं। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति का हाथ-पाँव फूल जाता है, तेज बुखार आ जाता है। इस रोग से ग्रसित रोगी का पैर इतना फूल जाता है कि हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है।

C. हैजा (Cholera) : हैजा से ग्रसित रोगी को दस्त तथा उल्टी होने लगता है, शरीर में जल की कमी हो जाती है। पेट में दर्द होने लगता है। शरीर सुस्त हो जाता है। रोगी को बुखार आ जाता है। पेशाब बन्द हो जाता है। ऐसे रोगी का शीष्र उपचार आवश्यक हो जाता है, अन्यथा मृत्यु भी हो सकती है।

D. टायफायड (Typhoid) : टायफायड साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु द्वारा होता है। इस रोग से प्रसित व्यक्ति को लगातार 3-4 सप्ताहों तक बुखार रहता है। इस रोग में हुदय की धड़कन कम हो जाती है। मस्तिष्क disorder हो जाता है। मल का रंग हरा हो जाता है। रोगी के शरीर में गुलाबी दाग आ जाता है।

E. पेचिश (Dysentry) : पेचिश ऐन्ट-अमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba Histolytica) के कारण होता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के मल-मूत्र त्यागने पर उनके मल के साथ ट्रोफोज्वाएट सिस्ट (Trophozoit cyst) भी बाहर निकल जाते हैं एवं अगल-बगल की सब्जियों तथा जल को दूषित कर देते हैं.। ये मक्खियो द्वारा भी संक्रमित होते हैं। हरी सब्जियाँ या जल इनको स्वस्थ पुरुष के शरीर में ले जाता है।

F. पीत ज्वर (Yellow fever) : पीत ज्वर मादा मच्छर द्वारा फैलता है। जब कोई व्यक्ति रोग से ग्रसित हो जाता है तो उसे तेज बुखार आ जाता है। रोगी कुछ ही दिनों में पीलिया रोग से प्रसित हो जाता है, ऐसे में रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 4 जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

प्रश्न 30.
जीवित वैक्सिन क्या है ? वैक्सिन उपयोग की विधि को क्या कहते हैं।
उत्तर :
जीवित वैक्सिन (Live vaccine) : यह सजीवों के शरीर से प्राप्त की जाती है। यह निर्जीव वैक्सिन से अधिक सक्रिय है। जैसे – ओरल पोलियो (B.C.G.), स्मालपॉक्स, मीजील्स (Measles) और मम्पस (Memps) की वैक्सिन। टीकों को शरीर में प्रवेश कराने की विधि टीकाकरण (Vaccination) कहलाती है। यह वह विधि है जिसके द्वारा सूक्ष्म रोगाणुओं को किसी विशिष्ट रसायन के माध्यम से विकसित कर, अत्यन्त कम मात्रा में, किसी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कराया जाता है । रोगाणु मिश्रित इस विशिष्ट रसायन को टीका (Vaccine) कहते हैं।

इसे सूई लगाकर अथवा दवा के रूप में पिलाकर शरीर में प्रवेश कराया जाता है। किसी विशेष रोग का टीका जब शरीर में प्रवेश करता है तब शरीर का प्रतिरक्षक तन्न (Immune system) उस रोक के विरोध में एण्टीव विकसित कर लेता है जो शरीर में अस्थायी अथवा स्थायी रूप से उपस्थित रहता है। जब कभी रोग फैलाने वाला वह सूक्ष्म जीव शरीर के अन्दर पहुँच जाता है तो पहले से उपस्थित इस एण्टीबोंडीज के द्वारा वह नष्ट कर दिया जाता है। इस प्रकार से उस विशेष रोग से हमारे शरीर को छुटकारा

मिल जाता है। हैजा, पोलियो, चेचक जैसी बीमारियों के लिए टीकों का विकास किया जा चुका है तथा इसके प्रभावी नतीजे भी प्राप्त हुए है। भारत सरकार की योजना है कि देश से विभित्र बीमारियों; जैसे – मलेरिया, पोलियो आदि को जड़ से समाप्त कर दिया जाये। इस अभियान में राज्य सरकारे तथा विभिन्न संगठन अपनी-अपनी विशेष भूमिका निभा रहे हैं, ताकि भारत का हर बच्चा स्वस्थ रहे एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी को निभाये।

टीका बीमारी
BCG T.B.
MMR Mumps, Measles & Rubella
Polio (oral) Polio
Toxoid serum Diptheria
Cholera vaccine Cholera
Rubella vaccine German measles, Small pox
TT Tetanus
DPT Diptheria, Pertussis & Tetanus

हमें यह ज्ञात हो चुका है कि रोग उत्पन्न करने वाले कई सूक्ष्म जीवों के शरीर में प्रवेश करने से शारीरिक रोगों की उत्पत्ति होती है। अत: सूक्ष्म जीव रोगाणुओं (Pathogens) द्वारा होने वाले रोगों को संक्रामक बीमारी (Infectious disease) कहते हैं; जैसे – हैजा, T.B., AIDS, मलेरिया आदि।

प्रश्न 31.
द्यूबरकुलोसिस किस जीवधारी के कारण होता है ? इसके लक्षण लिखें।
उत्तर :
क्षयरोग या टी.बी. (Tuberculosis) : क्षयरोग या टी.बी. एक प्रकार के बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) के कारण होता है। शरीर में पहुँचने के बाद यह बैक्टीरिया एक जहरीला पदार्थ द्यूबरकुलीन (Tuberculin) मुक्त करता है। यह रोगाणु सामान्यत: फेफड़ा को प्रभावित कर उसके ऊतकों को क्षतिग्रस्त कर देता है।

रोग का समुचित इलाज न होने पर यह फेफड़ा के अतिरिक्त आहारनाल, मस्तिष्क तथा हड्डियों तक फैलकर उन्हें भी प्रभावित करता है। मनुष्य के शरीर में टी.बी. के बैक्टीरिया का उद्भव अवधि कुछ सप्ताह से कई वर्षों तक का होता है। यह रोग संक्रमित रोगी के थूक, कफ, खाँसी के माध्यम से फैलता है। क्षयरोग से ग्रसित गाय के दूध को बिना अच्छी तरह उबाले पीने से भी यह रोग होता है। यह तीव्रता से फैलने वाला संक्रामक रोग है।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 4 जीव विज्ञान एवं मानव कल्याण

लक्षण :

  • सामान्यत: हलका बुखार होना, लगातार खाँसी आना, खाँसते समय कफ या बलगम के साथ रक्त निकलना तथा रात में शरीर से पसीना निकलना क्षयरोग के प्रमुख लक्षण हैं।
  • रोग के शीम्य उपचार न होने पर भूख लगना सामान्य से कम हो जाता है जिससे शरीर का वजन लगातार घटते जाता है।
  • इस रोग के लक्षण घीरे- धीरे प्रकट होते हैं। करीब 3 महीने सें ज्यादा खाँसी के साथ-साथ हलका बुखार रहना इस रोग के प्रारम्भिक लक्षण हैं। रोग पुराना होने पर कफ के साथ रक्त निकलता है। सीने में दर्द रहता है तथा चलने पर रोगी हाँफने लगता है।

प्रश्न 32.
जल स्वच्छता क्यों जरूरी है ? तथा इसके क्या उपाय किये जा सकते हैं ?
उत्तर :
यूनिसेफ एक संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ जल तथा सफाई प्रदान करना और उनको स्वस्थ बनाना है। इस संस्था के कार्यकारी बोर्ड ने 2006 ई० में इस कार्य को करने की मंजूरी दी। इसका जावा और इंडोनेशिया में एक शौचालय के निर्माण से कार्य प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के द्वारा बच्चों को सुरक्षित जल और बुनियादी स्वच्छता की सेवाओं को बेहतर ढंग से बढ़ावा देना है।

इस संस्था के दो प्रमुख लश्ष्य हैं –

  • 2015 ई० तक सुरक्षित पीने का पानी और बुनियादी स्वच्छता के लक्ष्य को पूरा करना है।
  • सभी विद्यालयों में पर्याप्त बच्चों के अनुकूल पानी और शौचालय की सुविधा तथा स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम को सुनिध्धित करना है।

प्रश्न 33.
स्वास्थ्य संरक्षण के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
स्वास्थ्य संरक्षण के लिए हमें निम्नलिखित उपाय करना चाहिए :-

  • व्यक्तिगत स्तर पर तथा घरेलू स्तर पर सफाई पर ध्यान रखना चाहिए।
  • हमे प्रतिदिन स्नान करना चाहिए।
  • भोजन को हमेशा ढंककर रखना चाहिए।
  • स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।
  • प्रतिदिन सुबह तथा रात को सोने से पहले दाँतों की सफाई अवश्य करनी चाहिए।
  • बढ़े हुए नाखून को काटना तथा साफ करना चाहिए।
  • शौचालय के उपयोग के बाद, घर की सफाई के पहले और बाद, भोजन बनाने के पहले, खाद्य पदार्थ सम्भालते समय, खाने के पहले तथा खाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
  • घर के आस-पास की सफाई करनी चाहिए। कचरा एकत्र करने के लिए कूड़ा-दान का व्यवहार करना चाहिए।
  • हमें अपशिष्ट पानी का खुले में बहाव नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि यह बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं तथा विषाणुओं को आकर्षित करता है।
  • पकाए हुए भोजन को साफ-सुथरे एवं ढ़ँके हुए बर्तन में रखना चाहिए।
  • शुद्ध पानी न होने पर पानी को उबालकर ठण्डा कर लेना चाहिए इसके बाद व्यवहार में लाना चाहिए।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 3 जीवन की शारीरिक क्रियाएँ

Detailed explanations in West Bengal Board Class 9 Life Science Book Solutions Chapter 3 जीवन की शारीरिक क्रियाएँ offer valuable context and analysis.

WBBSE Class 9 Life Science Chapter 1 Question Answer – जीवन की शारीरिक क्रियाएँ

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Very Short Answer Type) : 1 MARK

प्रश्न 1.
नेफ्रॉन में ग्लोमेरुलस को घेरने वाली रचना का क्या नाम है?
उत्तर :
वोमैन्स कैप्सूल।

प्रश्न 2.
प्राणी शरीर के किस अंग में ग्लोमेरुलस पाया जाता है?
उत्तर :
वृक्क

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प्रश्न 3.
सहजीवी पौधे का नाम लिखिए।
उत्तर :
लाइकेन (शैवाल और कवक)

प्रश्न 4.
रक्त की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
रक्त (Blood) : रक्त एक विशेष प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है जो खाद्य पदार्थ, ऑक्सीजन, कार्बनडाई – आक्साइड, हार्मोन, खनिज लवण, उत्सर्जी पदार्थ आदि के लिए परिवहन माध्यम का कार्य करता है।

प्रश्न 5.
पौधों के किस अंग द्वारा वाष्पोत्सर्जन की क्रिया सबसे अधिक होती है ?
उत्तर :
पौधों में पत्तियों द्वारा वाष्पोत्सर्जन की क्रिया सबसे अधिक होती है ।

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प्रश्न 6.
किस प्राणी में खुला रक्त परिवहन पाया जाता है ?
उत्तर :
तिलचट्टा, टिड्डा, झींगा आदि।

प्रश्न 7.
पौधों के पत्तों में बने भोजन का स्थानान्तरण किस उत्तक के द्वारा होता है।
उत्तर :
फ्लोएम।

प्रश्न 8.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से कौन-सा अंगाणु सम्बन्धित है ?
उत्तर :
क्लोरोप्लास्ट।

प्रश्न 9.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में ऊर्जा का स्रोत क्या है ?
उत्तर :
सूर्य का प्रकाश।

प्रश्न 10.
प्रकाश संश्लेषण की इकाई क्या है ?
उत्तर :
क्वान्टासोम (Quantasome)

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प्रश्न 11.
किस विधि में प्रकाश ऊर्जा का संग्रह स्थिति ऊर्जा में होता है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण।

प्रश्न 12.
किस रंग में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सबसे तेज होती है ?
उत्तर :
लाल रंग।

प्रश्न 13.
PGA का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Phospho Glyceric Acid.

प्रश्न 14.
प्रकाश संश्लेषण का नाम सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया ?
उत्तर :
Barnes (1898) ने।

प्रश्न 15.
किसने सर्वप्रथम प्रकाश अभिक्रिया की खोज की ?
उत्तर :
रोंबिन हिल (Robin Hill) नामक वैज्ञानिक ने।

प्रश्न 16.
श्वसन का केन्द्रस्थल क्या है ?
उत्तर :
माइटोकोण्ड़या तथा साइटोप्लाज्म।

प्रश्न 17.
एक ऐसे जन्तु का नाम बताइये जिसमें अनाक्सी श्वसन होता है।
उत्तर :
मोनोसिस्टिस।

प्रश्न 18.
किस श्वसन क्रिया में O2 आवश्यक है ?
उत्तर :
आक्सी श्वसन।

प्रश्न 19.
एक ऐसे जन्तु का नाम बताइये जो वायु के बिना श्वसन कर सकता है।
उत्तर :
फीताकृमि।

प्रश्न 20.
जल तथा वायु दोनों में श्वसन करने वाले जन्तु का नाम बताइये।
उत्तर :
टोड।

प्रश्न 21.
ग्लाइकोलाइसिस की क्रिया कहाँ होती है ?
उत्तर :
साइटोप्लाज्म में।

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प्रश्न 22.
किस जन्तु में श्वसन गीली त्वचा के द्वारा होती है ?
उत्तर :
केंुुआ।

प्रश्न 23.
तिलचड्टा का श्वसन अंग क्या है ?
उत्तर :
ट्रैकिया।

प्रश्न 24.
झंगा के रक्त में कौन सा श्वसन रंगा पाया जाता है ?
उत्तर :
हीमोसार्यनि।

प्रश्न 25.
शरीर की सतह द्वारा श्वसन करने वाले जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर :
अमीबा।

प्रश्न 26.
मनुष्य के पोषण की दूसरी अवस्था क्या है ?
उत्तर :
पाचन (Digestion)

प्रश्न 27.
कौन सा आहार आदर्श आहार कहलाता है ?
उत्तर :
दूध।

प्रश्न 28.
लार ग्रन्थि से उत्पन्न होने वाले एन्जाइम का नाम बताइये।
उत्तर :
टायलिन (Ptaylin)

प्रश्न 29.
कौन सा एन्जाइम वसा को वसीय अम्ल में तोड़ देता है ?
उत्तर :
लाइपेज।

प्रश्न 30.
किस पाचक रस में विकर अनुपस्थित रहता है ?
उत्तर :
पित्त रस (Bile)

प्रश्न 31.
B. M. R. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर :
Basal Metabolic Rate

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प्रश्न 32.
किस पाचक रस द्वारा वसा का इमल्सिफिकेशन होता है ?
उत्तर :
पित्त (Bile)

प्रश्न 33.
जीवधारियों के शरीर में ऊर्जा का स्रोत क्या है ?
उत्तर :
भोजन (Food)

प्रश्न 34.
पाचन के बाद प्रोटीन किस भोज्य पदार्थ के रूप में आँतों में अवशोषित होते हैं ?
उत्तर :
अमीनो अम्ल।

प्रश्न 35.
नेफ्रान किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वृक्क की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को नेफान कहते है।

प्रश्न 36.
कौन सा WBC घाव के भरने में सहायक है ?
उत्तर :
दीर्घ लिम्फोसाइट (Large Lymphosite)

प्रश्न 37.
सजीवों में प्रकाश संश्लेघण की क्रिया किस समय होती है ?
उत्तर :
सजीवों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दिन में प्रकाश की उपस्थिति में होती है।

प्रश्न 38.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया किस ऊत्तक में होती है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पत्तियों के ऊपरी तथा निचली बाह्य त्वचा के बीच उपस्थित मिजोफिल ऊत्तक में होती है।

प्रश्न 39.
क्या प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सभी जीवधारियों में होती है ?
उत्तर :
नही, प्रकाश संश्लेषण की क्रिया केवल क्लोरोफिल युक्त कोशिकाओं वाले जोवधारियों में होती है।

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प्रश्न 40.
प्रकाश संश्लेषण के अवयवों के नाम लिखिए।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक अवयव कार्बन डाई-आक्साइड, जल, क्लोरोफिल एवं प्रकाश है।

प्रश्न 41.
प्रकाश संश्लेषण का उपक्रिया फल क्या है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में O2 तथा H2O उपक्रिया फल है।

प्रश्न 42.
प्रकाश संश्लेषण क्रिया का कार्य स्थल क्या है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण किया का कार्यस्थल क्लोरोप्लास्ट का ग्रेना तथा स्ट्रोमा भाग है।

प्रश्न 43.
फोटान क्या है ?
उत्तर :
प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बण्डलों को फोटान (Photan) कहते हैं।

प्रश्न 44.
उन जन्तुओं के नाम लिखिए जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया युग्लिना, क्रिसअमीबा आदि जन्तुओ में होती है।

प्रश्न 45.
प्रकाश संश्लेषण में आक्सीकारक तथा अवकारक क्या-क्या है ?
उत्तर :
आक्सीकारक – कार्बन डाई-आक्साइड CO2
अवकारक – जल (H2O)

प्रश्न 46.
श्वसन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर :
श्वसन से सजीवों में नियमित रूप से ऊर्जा की पर्ति होती है, इसलिए श्वसन आवश्यक है।

प्रश्न 47.
श्वसन की क्रिया सजीवों के शरीर में कहाँ होती है ?
उत्तर :
सजीवों के शरीर में श्वसन की क्रिया सभी जोवित कोशिकाओं मे होती है।

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प्रश्न 48.
श्वसन पदार्थ क्या है ?
उत्तर :
वे यौगिक जिनका आक्सीकरण कोशिकाओं के अन्दर होता है, उन्हें श्वसन पदार्थ कहते है ; जैसे – ग्लूकोज।

प्रश्न 49.
आक्सी श्वसन की दोनों अवस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
आक्सी श्वसन को दो अवस्याएँ – ग्लाइकोलाइसिस तथा केष्स चक्र हैं।

प्रश्न 50.
ग्लूकोज में उपस्थित तत्वों के नाम बताइये।
उत्तर :
ग्लूकोज में उपस्थित तत्व कार्बन (C) हाइड्रोजन (H) तथा आक्सीजन (O) होते है।

प्रश्न 51.
माइटोकोण्ड्रया का मुख्य कार्य क्या है ?
उत्तर :
माइटोकोण्डिया का मुख्य कार्य ATP का निर्माण करना है।

प्रश्न 52.
खाद्य के ऐसे दो अवयवों के नाम बताइये जिनसे ऊर्जा प्राप्त नहीं होती है।
उत्तर :
विटामिन तथा खनिज लवण ऊर्जा प्रदान नहीं करते है।

प्रश्न 53.
आमाशय में किस प्रकार के भोजन का पाचन होता है ?
उत्तर :
आमाशय में प्रोटीन तथा वसा का पाचन होता है।

प्रश्न 54.
मनुष्य के आमाशय के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।
उत्तर :
आमाशय के तीन भाग हैं – कार्डियक, फंडस तथा पाइलोरिक भाग।

प्रश्न 55.
संतुलित आहार किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर :
संतुलित आहार व्यक्ति के उम्म, लिग, जलवायु तथा कर्म आदि बातों पर निर्भर करता है।

प्रश्न 56.
एक व्यक्ति को प्रतिदिन कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है ?
उत्तर :
एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 2500-3000 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 57.
भोजन के किन-किन अवयवों के लिए पाचन की आवश्यकता नहीं होती है ?
उत्तर :
भोजन के विदामिन, जल तथा खनिज लवण के लिए पाचन की आवश्यकता नहीं होती है।

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प्रश्न 58.
ऊर्जा उत्पादक भोजन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
पोषण प्रदान करने वाले भोजन को ऊर्जा उत्पादक भोजन कहते है, जैसे – कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि।

प्रश्न 59.
आवश्यक तत्व से क्या समझते हो ?
उत्तर :
वे तत्व जो सजीवों के शरीर की वृद्धि तथा पाषण के लिए अत्यन्त ही अनिवार्य होते है। इन तत्वो की अनुपस्थिती में किसी सजीव का जीवन वक्र ही पृरा नहीं हो सकता है उन्हें आवश्यक तत्व कहते हैं।

प्रश्न 60.
विकर (एन्जाइम) क्या है ?
उत्तर :
जीवित कोशिकाओ में उत्पन्न नाइट्रोजन युक्त कार्वनिक योगिको को जो अपनी उपस्थिति भाग से क्रिया दर को बदलती है उन्हे विकर या एन्जाइम कहते हैं। जैसे – एमाइलेज।

प्रश्न 61.
पेरिस्टेलसिस (Peristaisis) क्या है ?
उत्तर :
आहार नाल के भीतरी दोवारों पर होनेवाली संकुचन तथा परासरण की क्रमबद्ध क्रिया को पेरिस्टेलसिस कहते है।

प्रश्न 62.
मनुष्य के संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा का अनुपात क्या है ?
उत्तर :
मनुष्य के संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट, ग्रोटीन तथा वसा का अनुपात 4: 1: 1 होता है।

प्रश्न 63.
पित्त किस अंग में अस्थाई रूप में जमा होता है ?
उत्तर :
अस्थायी तौर पर पित्त, पित्ताशय (Gail bladder) में जमा होता है।

प्रश्न 64.
पौधे में पोटाशिम के अभाव में कौन सा लक्षण प्रकट होता है ?
उत्तर :
पोटाशियम के अभाव में पौधों का किनारा पोला होने लगता है।

प्रश्न 65.
पाचक रस क्या है ?
उत्तर :
पाचन प्रंथि से स्रावित ऐसे सभी तरल जिससे पाचन क्रिया सम्पन्न होती है, उसे पाचक रस कहते हैं।

प्रश्न 66.
रक्त का रंग लाल क्यों होता है ?
उत्तर :
रक्त के लाल रक्त कणों में हिमोग्लोबिन नामक श्वसन कण पाये जाने के कारण रक्त का रंग लाल होता है।

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प्रश्न 67.
चिंगड़ी के रक्त में नीलापन क्यों होता है ?
उत्तर :
चिंगड़ी के रव्त में ताम्रयुक्त तथा प्रोटीन जातीय एक श्वसन कण होता है जो नीला रंग का होता है, हिमोसायनिन कहलाता है। हिमोसायनिन के कारण चिंगड़ी के रक्त का रंग नीला होता है।

प्रश्न 68.
लसिका (Lymph) क्या है ?
उत्तर :
लसिका एक स्वच्छ पोले रंग का क्षारीय तथा तरल यौगिक ऊत्तक है जो लसिका वाहिनियों में पाया जाता है।

प्रश्न 69.
हिमोसायनिन का क्या कार्य है ?
उत्तर :
हिमोसायनिन का प्रमुख कार्य O2 तथा CO2 का परिवहन करना है।

प्रश्न 70.
R. B.C. के दो कार्यों को लिखिए।
उत्तर :
R. B. C. के कार्य –
(i) O2 तथा CO2 का परिवहन करना।
(ii) रक्त की सान्द्रता बनाये रखना है।

प्रश्न 71.
संरक्षक आहार किसे कहते हैं ?
उत्तर :
भोजन के वे उपादान जो शरीर को निरोग रखते है, संरक्षक आहार कहलाते हैं। जैसे – विटामिन, खनिज लवण तथां जल।

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प्रश्न 72.
विसरण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
विसरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें पदार्थ के गतिशील अणु अधिक सान्द्रता वाले स्थान से कम सान्द्रता वाले स्थान की ओर बहते हैं।

प्रश्न 73.
मानव शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा क्या है ?
उत्तर :
मानव शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा 14-16 ग्राम प्रति 100 मि० ली० है।

प्रश्न 74.
पित्ताशय कहाँ स्थित है ? क्या पित्ताशय एक ग्रंथि है ?
उत्तर :
पित्ताशय यकृत पिण्डों के बीच स्थित होता है। पित्ताशय एक ग्रंथि नहीं है।

प्रश्न 75.
मनुष्य के रक्त में कितने रक्त वर्ग हैं ?
उत्तर :
मनुष्य के रक्त में चार रक्त वर्ग पाए जाते है –

  • रक्त वर्ग – A
  • रक्त वर्ग – B
  • रक्त वर्ग – AB
  • रक्त वर्ग – O

प्रश्न 76.
लैटेक्स क्या है ? यह कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर :
लैटेक्स श्वेत, पीला व भूरे रंग का दूध जैसा तरल पदार्थ होता है। यह बरगद, मदार, पीपल, रबर आदि पौधों में पाया जाता है।

प्रश्न 77.
क्वीनिन क्या है ?
उत्तर :
क्वीनिन (Quinine) सिनकोना पेड़ की छाल में पाया जाता है। इससे मलेरिया बुखार की दवा बनाई जाती है।

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प्रश्न 78.
मनुष्य में वृक्क के अलावा दूसरा कौन उत्सर्जी अंग है ?
उत्तर :
मनुष्य में वृक्क (किडनी) के अलावा यकृत, त्वचा, छोटी आँत आदि उत्सर्जी अंग हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type) : 2/3 MARKS

प्रश्न 1.
क्या है? यह किस पौधे में पाया जाता है?
उत्तर :
लैटेक्स श्वेत, पीला व भूरे रंग का दूष जैसा तरल पदार्थ होता है। यह बरगद, मदार, पीपल, रबर आदि पौधों में पाया जाता है।

प्रश्न 2.
प्रकाशिक अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
उत्तर :
प्रकाशिक अभिक्रिया : प्रकाश-संश्लेषण की इस प्रक्रिया के लिये प्रकाश आवश्यक है। यह प्रक्रिया क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना वाले भाग में सम्पन्न होती है। इस प्रक्रिया के प्रारम्भ में प्रकाश की किरणें क्लोरोफिल अणु पर पड़तीहैं।

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प्रश्न 3.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया आक्सीकरण-अवकरण क्रिया कहलाती है, क्यों ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण क्रिया के अन्तर्गत जल का आक्सीकरण आक्सीजन में तथा कार्बन डाई-आक्साइड का अवकरण ग्लूकोज में होता है। इसलिए प्रकाश संश्लेषण की क्रिया आक्सीकरण-अवकरण क्रिया कहलाती है।

प्रश्न 4.
अप्रकाशिक अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
उत्तर :
अप्रकाशिक अभिक्रिया : प्रकाश-संश्लेषण की इस प्रक्रिया में प्रकाश की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह प्रक्रिया क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा वाले भाग में होती है। इसे ब्लैकमैन अभिक्रिया (Blackman’s reaction) भी कहतें हैं।

प्रश्न 5.
एक अल्केलाइड के नाम एवं उसके स्रोत बताएँ।
उत्तर :
एक अल्केलाइड का नाम निकोटिन है जिसका स्रोत तम्बाकू की पत्तियाँ है ।

प्रश्न 6.
एक जन्तु का नाम लिखो जिसमें प्रकाश संश्लेषण होता है तथा एक पौधे का नाम लिखो जो प्रकाश संश्लेषण में असमर्थ है।
उत्तर :
जन्तु का नाम – यूग्लिना (Euglena), पौधा का नाम – कवक।

प्रश्न 7.
पौधों में विभित्र पदार्थों का स्थानान्तरण कैसे होता है ।
उत्तर :
पौधे में जल का प्रवेश परासरण एवं खनिज पदार्थों का प्रवेश मिट्टी से जड़ में अवशोषण की विधि से होता है । जड़ की कोशिकाओं से जल रसारोहण विधि से पत्तियों में पहुँचता है। पत्तियों में बने भोजन का स्थानान्तरण फ्लोयम उत्तक की सहायता से होता है ।

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प्रश्न 8.
रात में पेड़ के नीचे सोना हानिकारक क्यों है ?
उत्तर :
रात में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रूक जाती है। पौधों के श्वसन के फलस्वरूप पौधों के आसपास कार्बन डाईआक्साइड की सांद्रता बढ़ जाती है जो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। अत: रात के समय पेड़ के नीचे नहीं सेना चाहिए।

प्रश्न 9.
NADP, PGA, ATP तथा CAC का सम्पूर्ण नाम लिखो।
उत्तर :
NADP : Nicotinamide Adenine Dinucleotide Phosphate.
PGA : Phospho Glyceric Acid.
ATP : Adenosine Tri Phosphate.
CAC: Citric Acid Cycle.

प्रश्न 10.
दौड़ते समय साँसें तेज चलती हैं क्यों ?
उत्तर :
व्यायाम करते समय शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोशिकाओं में भोज्य पदार्थ का आक्सीकरण तेज गति से होने लगता है। तेज गति से आक्सीकरण के लिए अधिक मात्रा में आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है अतः श्वसन क्रिया तेज हो जाती है।

प्रश्न 11.
मनुष्य के उत्सर्जन क्रिया में त्वचा की क्या भूमिका होती है?
उत्तर :
उत्सर्जन क्रिया में त्वचा की भूमिका :- त्वचा शरीर का सबसे बाहरी रक्षात्मक ‘आवरण है। त्वचा की भीतरी सतह पर रक्त वाहिनियाँ तथा अनेक पसीना ग्रंथियाँ (Sweat glands) होती हैं जिनसे पसीने (Sweat) का स्राव होता है। पसीना के साथ-साथ अनेक उत्सर्जी पदार्थ जैसे – यूरिया, लवण, अमोनिया इत्यादि बाहर निकलते हैं।

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प्रश्न 12.
मनुष्य के गैसीय उत्सर्जी पदार्थ क्या है?
उत्तर :
अमोनिया, एसीटोन, अल्कोहल, आदि ।

प्रश्न 13.
प्रकाश-संश्लेषण की रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर :
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प्रश्न 14.
सूक्ष्म पोषक तत्व की परिभाषा लिखो तथा एक उदाहरण दो।
उत्तर :
जिन आवाश्यक तत्वों की कम मात्रा की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों में लोहा, तांबा, बोरान, क्लोरिन, जस्ता और मोलिब्डेनम आदि शामिल हैं।

प्रश्न 15.
वसा में घुलनशील तथा पानी में घुलनशील एक-एक विटामिन का नाम लिखो।
उत्तर :
वसा में घुलनशील एक विटामिन का नाम : विटामिन A
पानी में घुलनशील एक विटामिन का नाम : विटामिन C

प्रश्न 16.
क्यूटिकूलर वाष्पोत्सर्जन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
क्यूटिकूलर वाष्पोत्सर्जन : इस प्रकार का वाष्पोत्सर्जन तने, पत्तियाँ तथा अन्य अंगों की सतह पर पाये जाने वाले क्यूटिकल (Cuticle) के द्वारा होता है।

प्रश्न 17.
वाष्पोत्सर्जन का एक महत्व बताए।
उत्तर :
वाष्पोत्सर्जन की क्रिया की तीव्रता के परिणामस्वरूप कोशिकाओं के अन्दर विलेय पदार्थों (Solutes) की सान्द्रता बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप फलो में शर्करा (Sugar) की मात्रा अधिक हो जाती है।

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प्रश्न 18.
विसरण क्या है ?
उत्तर :
विसरण (Diffusion) : विसरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें घुल्य के अणुओं का प्रवाह अधिक सान्द्रता से कम सान्द्रता की ओर होता है।

प्रश्न 19.
परासरण की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
परासरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें जल के अणुओं का प्रवाह कम सान्द्रता से अधिक सान्द्रता की ओर एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा होता है।

प्रश्न 20.
श्वसन क्या है ?
उत्तर :
श्वसन (Respiration) : श्वसन वह जैव रासायनिक क्रिया है जिसमें भोज्य पदार्थों के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 21.
जल का प्रकाशीय अपघटन क्या है?
उत्तर :
सूर्य के प्रकाश द्वारा क्लोरोफिल की सहायता से जल (H2O) को उनके आयन H+ तथा OH में विच्छेदित होने की क्रिया को जल का खिण्डन कहते हैं।

प्रश्न 22.
क्लोरोप्लास्ट के उस भाग का नाम बताइए जहाँ प्रकाश प्रतिक्रिया होती है।
उत्तर :
क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना (Grana) में प्रकाश-रासायनिक प्रतिकिया होती हैं।

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प्रश्न 23.
ग्रेनम किसे कहते हैं ?
उत्तर :
ग्रेनम : पादप कोशिका के क्लोरोप्लास्ट के उस भाग को जिसमें क्लोरोफिल उपस्थित है और प्रकाश संश्लेषण की पहली अवस्था प्रकाश अभीक्रिया सम्पन्न होती है, उसे ग्रेनम कहते हैं।

प्रश्न 24.
पौधों में क्लोरोफिल अणु के निमार्ण में आवश्यक धात्विक तत्व का नाम बताएँ?
उत्तर :
पौधों में क्लोरोफिल अणु के निमार्ण में आवश्यक धात्विक तत्व का नाम मैग्नेसियम है।

प्रश्न 25.
ऑक्सी श्वसन का अन्तिम उत्पाद क्या है?
उत्तर :
ऑक्सी श्वसन का अन्तिम उत्पाद CO2 तथा H2O है।

प्रश्न 26.
वेनस हद्यय क्या है ? एक उदाहरण दो।
उत्तर :
वेनस हदय (Venous Heart) : वह हृदय जिसमें केवल अशुद्ध रक्त (impure or deoxygenated blood) प्रवाहित होता है उसे वेनस हृदय कहते हैं। इस प्रकार का हदय मछालयों में पाया जाता है।

प्रश्न 27.
पेस मेकर क्या है ?
उत्तर :
पेस मेकर (Pace maker) : हदय के दाहिने अलिन्द की दीवारों पर स्थित उस केन्द्र को जो हुय को स्पंदन करने की प्रेरणा देता है उसे पेस मेकर कहते हैं।

प्रश्न 28.
श्वसन में किसी अणु ग्लूकोज को संपूर्णतया ऑक्सीकृत करने के लिए कितने अणु ऑक्सीजन की आवश्यकता है?
उत्तर :
एक अणु ग्लुकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए 6 (छः) अणु ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है ।

प्रश्न 29.
श्वसन की क्रिया किस कोशकांग में होती है?
उत्तर :
सजीवों के शरीर में श्वसन की क्रिया माइटोकाण्ड्रिया में होती है।

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प्रश्न 30.
सहायक श्वसन अंग किस प्राणी में पाया जाता है? उदाहरणदें।
उत्तर :

  • कवई (Koi) – Labyrinthine organ (लेबिरिन्थीन आर्गन)
  • मांगुर (Mangur) – Arboresent organ (आर्बोरिसेन्ट आर्गन)
  • सिंघी (Singhi) – Extrabranchial diverticulum (एक्सट्रा ब्रांकियल डाइवर्टिकुलम)

प्रश्न 31.
प्रकाश-संश्लेषण किस प्रकार की उपापचयी क्रिया है और क्यों?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण क्रिया एक रचनात्मक क्रिया है, व्योंकि इस क्रिया में जल तथा कार्बन डाई-आक्साइड के संयोग से रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप ग्लूकोज के नये अणुओं का निर्माण होता है जिसके फलस्वरूप पौषे के शुष्क भार मे वृद्धि होती है। इस क्रिया के फलस्वरूप जीवद्रव्य का निर्माण होता है। अतः प्रकाश-संश्लेषण एक रचनात्मक क्रिया है।

प्रश्न 32.
अनॉक्सी श्वसन करने वाले एक पौधे और एक प्राणी का नाम बताएँ।
उत्तर :
पौधे का नाम – यीस्ट। प्राणी का नाम – फीताकृमि।

प्रश्न 33.
ग्लाइकोलिसिस किसे कहते हैं?
उत्तर :
ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis) : यह आक्सी श्वसन की पहली अवस्था है। यह आक्सीजन की अनुपस्थिति में कोशिका के अन्दर साइटोप्लाज्म में सम्पन्न होती है। इसमे ग्लूकोज का आंशिक आक्सीकरण होता है। इसका नियन्तण कोशिका के साइटोप्लाज्म में उपस्थित विभिन्न एन्जाइम द्वारा होता है। इस क्रिया के फलस्वरूप ग्लूकोज का प्रत्येक अणु आंशिक रूप से आक्सीकृत होकर पाइरूविक अम्ल में बदल जाता है।

प्रश्न 34.
प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की भूमिका :- क्लोरोफिल के अणु विकिरण ऊर्जा ग्रहण करके जल को H+ तथा OH आयनों में तोड़ देते हैं। क्लोरोफिल विकिरण ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देता है।

प्रश्न 35.
प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा सौर ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में किस प्रकार परिवर्तित हो जाती है?
उत्तर :
जीवधारियों के लिए ऊर्जा का एकमात्र स्रोत सूर्य से प्राप्त प्रकाशीय ऊर्जा है, परन्तु यह प्रकाशीय ऊर्जा जीवों के द्वारा प्रत्यक्ष रूप में ग्रहण नहीं की जा सकती है। केवल हरे पौधे ही इस ऊर्जा को ग्रहण कर सकते हैं। हरे पौधों की कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोफिल पाया जाता है। प्रकाशीय ऊर्जा का लगभग 20% भाग क्लोरोफिल के अणुओं द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। यह अवशोषित ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदल दिया जाता है।

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प्रश्न 36.
प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाई-आक्साइड की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाई-आक्साइड की भूमिका :- कार्बन डाई आक्साइड गैस प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए एक कच्यी सामग्री है । इसके कार्वन और आक्सीजन दोनों ही तत्व ग्लूकोज के निर्माण में भाग लेते है ।

प्रश्न 37.
विटामिन ‘C’ का स्रोत क्या है ? इसकी कमी से कौन-सा रोग होता है?
उत्तर :
विटामिन ‘C’ का स्रोत :- यह आवला, नींबू, सतरा, ताजा मांस, टमाटर आदि में पाया जाता है।
कमी से रोग :- इसकी कमी से स्कर्वी नामक रोग होता है।

प्रश्न 38.
ट्रेस तत्व क्या है ? एक ट्रेस तत्व का नाम लिखिए।
उत्तर :
ट्रेस तत्व : वे तत्व जो जीवधारियों के पाषण के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं उन्हें माइको या ट्रेस तत्व कहा जाता है। उदाहरण : जिंक (Zn), मोलिख्डेनम (MO), बोरान (B) इत्यादि।

प्रश्न 39.
एक पूर्ण परजीवी पौधे का नाम लिखिए।
उत्तर :
पूर्ण परीजवी : ऐसे पौधे जो अपने भोजन के लिए पूर्णतः पोषक पर निर्भर करते हैं, पूर्ण परजोवी कहलाते है। जैसे- अमरलता जैसे पौधों की जड़ें वूषकांग कहलाती है क्योंकि इन्हीं की सहायता से ये पोषक से भोजन चूसते हैं।

प्रश्न 40.
मानव शरीर में प्रोटीन का पाचन कैसे होता है?
उत्तर :
आमाशय में उपस्थित जठर ग्रंधियों द्वारा सावित जठर रस में उपस्थित Hcl भोजन को अम्लीय बनाता है तथा निष्क्रय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है। यह एन्जाइम प्रोटीन प्रकृति के खाद्य पदार्थों पर किया करता है। अतः यह आमाशय में आये प्रोटीन प्रकृति के खाद्य पदार्थों पर क्रिया करके, पेप्टोन (Peptone) तथा प्रोटीओजेज (Proteoses) में बदल देता है।

प्रश्न 41.
वृहत् पोषक क्या है?
उत्तर :
कुछ खनिज हैं जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है और किसी भी अन्य तत्वों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण होते है । जैसे – कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्रोमियम, कोबाल, आयोडीन, लोहा, सेलेनियम और मैंगंनीज।

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प्रश्न 42.
अवशोषण तथा रसारोहण का संबंध बताओ।
उत्तर :
रसारोहण क्रिया का प्रारम्भ अवशोषण से ही होता है । अवशोषण के दौरान जल एवं खनिज लवण विसरण एवं परासरण की क्रिया द्वारा कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं और वहाँ से ये जाइलम वाहिनियों तक पहुँचाये जाते हैं। वाष्पोत्सर्जन खिंचाव और मूल दाब के कारण जड़ की जाइलम वाहिनियों से पत्तियों के जाइलम वाहनियों तक जल का एक निरंतर स्तम्भ बना रहता है जो रसारोहण की क्रिया द्वारा बनता है । इस प्रकार रसाराहण और अवशोषण की क्रिया परस्पर एक दूसरे की पूरक होती है। अवशोषण के अनुपस्थिति में रसारोहण की क्रिया नहीं हो सकती है ।

प्रश्न 43.
रक्त किस प्रकार से जमता है ?
उत्तर :
रक्त साव के समय रक्त में उपस्थित प्लेटेलेट्स हवा के सम्पर्क में आकर टूटने लगते हैं। इनके दूटने से थ्रम्बोप्लास्टीन (Thromboplastin) नामक इन्जाइम उत्पत्न होता है जो प्लाज्मा प्रोटीन के मोध्रोम्बिन के सम्पर्क में आकर विटामिन K की उपस्थिति में सक्रिय ध्रोम्बिन (Thrombin) नामक इन्जाइम बनाता है। सक्रिय वोम्बिन केल्शियम आयन (Ca++)की उपस्थिति में प्लाज्मा प्रोटीन फाइबिनोजेन (Fibrinogen) को फाइबिन (Fibrin) तन्तुओं में बदल देते हैं । रक्त कणिकाएँ इन फाइब्रिन तन्तुओं के जाल में फस कर रक्त का थक्का (clot) बनाती हैं और रक्त का साव बन्द हो जाता है।

प्रश्न 44.
केशिका गुच्छ कहाँ पाया जाता है? इसका कार्य क्या है?
उत्तर :
केशिका गुच्छ वोमेन सम्मुट में पायी जाती है । परानिस्पन्दन द्वारा गलोमेरूलर निस्पन्दन करना ।

प्रश्न 45.
परजीवी की परिभाषा दें। परजीवी पौथे का एक उदाहरण दें।
उत्तर :
परजीवी (Parasite) : जो अपने भोजन के लिए दूसरे जीवधारी या स्वपोषी पर निर्भर होते हैं, उन्हें परजीवी कहते हैं।
उदाहरण : अमरलता।

प्रश्न 46.
वाष्पोत्सर्जन क्या है ?
उत्तर :
पौधों के वायवीय भागों द्वारा आवश्यकता से अंधिक जल का वाष्प बनकर बाहर निकलने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।

प्रश्न 47.
मनुष्य के हृदय में दाएँ आलिन्द और दाएँ निलय के बीच स्थित कपाटिका (वाल्व) का नाम लिखिए।
उत्तर :
दाएँ आलिन्द और दाएँ निलय के बीच त्रिदलन कपाट (Tricuspid Valve) रहता है ।

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प्रश्न 48.
हिमोग्लोबिन में उपस्थित धात्विक तत्व का नाम क्या है?
उत्तर :
हिमोग्लोबिन में उपस्थित धात्विक तत्व का नाम लोहा है।

प्रश्न 49.
रक्तदान क्या है?
उत्तर :
रक्त दान (Blood Donation) : जरूरत मंद व्यक्तियों (रोगियों) को आवश्यकता पड़ने पर उसे दूसरे व्वस्थ व्यक्तियों का रक्त चढ़ाना पड़ता है । ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति का अपना रक्त दूसरे के प्राण की रक्षा के लिए देना । क्तदान कहलाता है ।

प्रश्न 50.
सीरम क्या है?
उत्तर :
कटे भाग पर रक्त स्वाव बन्द हो जाने पर वहाँ तुन्त संकुचित हो जाते हैं और हल्का पीला द्रव निकलता है, सीरम कहलाता है।

प्रश्न 51.
सामान्य अवस्था में रक्त नलिका में रक्त न जमने के दो कारण लिखिए।
उत्तर :
(i) रक्त में उपस्थित हिपैरिन रक्त को धमनी तथा शिराओं में नहीं जमने देती है।
(ii) रक्त वाहिनियों की भीतरी दोवारें चिकनी होती हैं जिससे रक्त का रूकावट नहीं होता है ।

प्रश्न 52.
माइट्रोकॉन्डिया किसे कहते हैं ?
उत्तर :
माइट्रोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) : यह सभी जन्तु तथा पादप कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य में बिखरी दण्डरूपी धागेनुमा, दानेदार या गोल छोटी आकृतियाँ हैं।

प्रश्न 53.
श्वसन अंगों की विशेषता बताएं।
उत्तर : इनकी सतह कोमल और नम होती है। इनकी सतह पर रक्त केशिकाओं का जाल बिछा रहता है। नम रहने के कारण इन पर उपस्थित श्लेष्म (mucous) में ऑक्सीजन घुल जाती है। यह ऑक्सीजन विसरण द्वारा रक्त केशिकाओं के रक्त में प्रवेश कर जाती है।

प्रश्न 54.
वाह्य श्वसन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वाह्य श्वसन (External respiration) : श्वॉसोच्छ्वास क्रिया में बाहरी वातावरण एवं श्वसन अंगों (जैसे फफड़े) के बोच गैसों का आदान-प्रदान होता है। यह क्रिया दो चरणों में सम्पन्न होती है – नि:श्वसन (Inspiration) अर्थात् फफड़ों में वायु का मवेश करना । सांस लेना और उच्छ्वसन (Expiration) अर्थात् फेफड़ों में श्वसन के फलस्वरूप उत्पन्न कार्बन डाई-ऑक्साइड का वहाँ से बाहर वातावरण में निकलना अर्थात् साँस छोड़ना। यह क्रिया वाह्य श्वसन कहलाती है।

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प्रश्न 55.
कोशिकीय श्वसन किसे कहते हैं?
उत्तर :
सजीव कोशिकाओं में भोजन के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होने की क्रिया को कोशिकीय वसन कहते है। यह एक केटाबोलिक क्रिया है जो आक्सीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति दोनो ही अवस्थाओं में सम्मन्न हो सकतो है।

प्रश्न 56.
क्रेब्स चक्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :
यह आक्सी श्वसन की दूसरी अवस्था है। यह आक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकोण्ड़या के अन्दर सम्पन्न होती है। इस क्रिया में Pyruvic acid, O2 तथा कुछ एन्जाइम की उपस्थिति में पूर्णरूप से आक्सीकृत होकर CO2 तथा H2O में बदल जाता है। इस क्रिया में अधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। इस बरण की क्रियाएँ एक चक के रूप में चलती रहती हैं। इसमें कुछ कार्बनिक अम्ल मध्यवर्ती पदार्थ के रूप में उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 57.
पोषण क्या है ?
उत्तर :
पोषण (Nutrition) : शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करने वाले, टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत करने वाले तथा शारीरिक वृद्धि में सहायता प्रदान करने वाले पोषक तत्वों के म्रहण तथा उनका समुचित उपयोग करने की किया को पोषण कहते हैं।

प्रश्न 58.
स्वांगीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर :
अवशोषित भोजन का जीवद्रव्य में रूपान्तरण स्वांगीकरण कहलाता है।

प्रश्न 59.
प्रकिण्व की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
प्रकिणव : ‘एन्जाइम वे घुलनशील कार्बनिक नाइट्रोजन युक्त जैवकि उत्त्रेरक (bio catalyst) हैं, जो जीवित कोशिकाओं द्वारा गठित होकर बहि: स्वावी ग्रंथियों (exo-crine glands) द्वारा सावित होते हैं तथा अपनी उपस्थिति मात्र से रासायनिक क्रियाओं की दर को बढ़ा या घटा देते हैं।”

प्रश्न 60.
मेटाबोलिज्म की परिभाषा लिखें?
उत्तर :
उपापचय (Metabolism) : जीवधारियों के शरीर निर्माण, ऊर्जा उत्पन्न करने एवं अन्य विभिन्न कायों को सम्पन्न करने के लिये उनकी कोशिकाओं में विभिन्न प्रकार की रासायनिक क्रियायें होती रहती हैं। इन्हें उपापचय(Metabolism) कहते है।

प्रश्न 61.
आहार की परिभाषा लिखें?
उत्तर :
वे सभी कार्बनिक पदार्थ जिन्हें ग्रहण करने से शरीर में वृद्धि, पोषण, ऊर्जा की उत्पत्ति तथा शारोरिक क्षात पूर्ति के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होती है, उसे आहार कहते हैं।

प्रश्न 62.
संतुलित आहार की परिभाषा लिखें।
उत्तर :
संतुलित आहार (Balanced diet) : जिस आहार में भोजन के सभी अवयव या सभी पोषक पदार्थ उचित अनुपात में उपस्थित होते हैं उसे संतुलित आहार कहते हैं। बच्चों के लिए दूध (Milk) एक संतुलित आहार है।

प्रश्न 63.
श्वसन सतह की क्या विशेषताएँ हैं ?
उत्तर :

  • श्वसन की सतह पतली होनी चाहिए ।
  • सतह का क्षेत्रफल अधिक होना चाहिए ।
  • यह O2 और CO2 के लिए पारगम्य होना चाहिए ।

प्रश्न 64.
रूधिर को परिभाषा लिखें?
उत्तर :
रूधिर (रक्त) एक विशेष प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है जो खाद्य पदार्थ, ऑक्सीजन, कार्बनड़ाई आक्साइड, हार्मोन्स, खनिज लवण, उत्सर्जी पदार्थ आदि के लिए परिवहन माध्यम का कार्य करता है।

प्रश्न 65.
उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
उत्सर्जन (Excretion) : सजीवों के शरीर में चयापचयी कियाओं के फलस्वरूप बने हानिकारक वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

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प्रश्न 66.
श्वसन अंग इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं ?
उत्तर :
श्वसन सजीवों में जीवन को कायम रखने के लिए अत्यन्त ही आवश्यक क्रिया है । इस क्रिया के लिए और इस क्रिया के अन्त में गैसे उत्पन्न होती है (जैसे आक्सीजन गैस और कार्बन डाइ आक्साइड गैस)। इन गैसो को अन्दर करने और बाहर निकालने के लिए श्सवन अंग आवश्यक है।

प्रश्न 67.
स्वपोषित पोषण किसे कहते है।
उत्तर :
इस प्रकार के पोषण में, जोव सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में सरल कार्बनिक पदार्थो जैसे कार्बन ड़ाइ़ांक्साइड और पानी की मदद से अपना भोजन बनाते हैं। हरे पौधों में स्वपोषी पोषण प्रणाली होती है और ऐस जोवों को आँटोटॉप्र्स (Autotrophs) के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 68.
सिस्टोलिथ की परिभाषा लिखो एवं एक उदाहरण दो।
उत्तर :
वनस्पति विज्ञान में, सिस्टोलिथ त्वचीय कोशिकाओं की सतह के ऊपर निर्मित उभार जैसी संरचना को कहते हैं जो कोशिका के भीतर कैल्सियम कार्बोनेट के जमाव के कारण उत्पन्न होती है और आमतौर पर कुछ विशेष प्रकार के पौधों की पत्तियों में पायी जाती है। जैसे – बरगद।

प्रश्न 69.
रेफाइड की परिभाषा लिखो एवं एक उदाहरण दो।
उत्तर :
रेफाइड अरूई, बंडा, जलकुम्भी, सूरन आदि पौधों का उत्सर्जी पदार्थ है जो रवा के रूप में रहता है। केल्सियम आक्जलेट के लम्बे-लम्बे सूई के आकार के ये रवे समूहों में रहते हैं। ये दोनों सिरों पर नुकीले होते हैं। किसी प्रकार यदि कोशिकाओ को हानि पहुँचती है तो रेफाइड तेजी से कोशिका के नुकोले सिरे से बाहर निकल आते हैं।

प्रश्न 70.
ऑरनिथिन चक्र कहाँ चलता है? ADH का पूरा नाम लिखो।
उत्तर :
ऑरनिथिन चक्र यकृत (Liver) में चलता है।
ADH : Antidiuretic Hormone.

प्रश्न 71.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कहाँ तथा कब होती है ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पौधों के सभी क्लोरोफिल युक्त कोशिकाओं तथा मिसोफिल ऊत्तक में होती है। यह क्रिया दिन के समय में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होती है।

प्रश्न 72.
प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
प्रकांश की तीव्रता को बढ़ाने पर प्रकाश संश्लेषण की दर भी बढ़ जाती है। अधिक प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है। बहुत तीव्र प्रकाश में संश्लेषण के इस प्रकार रुक जाने को सोलराइजेशन कहते हैं।

प्रश्न 73.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कार्बन स्वांगीकरण की क्रिया कहलाती है, क्यों ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण क्रिया में कार्बन डाई-आक्साइड का कार्बन एक जटिल पदार्थ अर्थात कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करता है, इसलिए यह क्रिया कार्बन स्वांगीकरण क्रिया कहलाती है।

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प्रश्न 74.
प्रकाश संश्लेषण को ऊर्जा परिवर्तन की क्रिया क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल सौर ऊर्जा को अवशोषित करता है तथा उसे रासायनिक ऊर्जा में बदल देता है जो ग्लूकोज के अणुओं में संचित हो जाता है। इसलिए प्रकाश संश्लेषण को ऊर्जा परिवर्तन की क्रिया भी कहते हैं।’

प्रश्न 75.
परासरण क्या है ? परासरण कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर :
परासरण (Osmosis) : परासरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें घोलक के अणुओं का प्रवाह कम सान्द्रता से अधिक सान्द्रता की ओर एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा होता है। परासरण दो प्रकार का होता है – अन्त: परासरण (Endosmosis) तथा बाह्य परासरण (Exosmosis)

प्रश्न 76.
वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन हैं?
उत्तर :
वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक :-

  • वायु की आर्द्रता
  • तापमान
  • वायु
  • प्रकाश
  • मिट्टी से प्राप्त जल।

प्रश्न 77.
रसारोहण क्या है ?
उत्तर :
रसारोहण (Ascent of Sap) : पौधों की जड़ों के मूलरोमों द्वारा जल तथा इसमें घुलनशील लवणों के घोल को अवशोषण के बाद जाइलम ऊत्तक द्वारा पत्तियों तक पहुँचाने की क्रिया को रसारोहण कहते हैं।

प्रश्न 78.
अवशोषण क्या है?
उत्तर :
अवशोषण (Absorption) : मिट्टी के कणों के बीच उपस्थित कोशिका द्वारा जल को जड़ के मूल रोमों की सहायता से जाइलम वाहिनियों तक पहुँचने की क्रिया को अवशोषण कहते हैं।

प्रश्न 79.
परिवहन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
परिवहन (Circulation) : सजीवों के शरीर में होने वाली वह क्रिया जिसमें भोज्य पदार्थ, उत्सर्जी पदार्थ, हार्मोन्स, गैसें तथा अन्य पदार्थ एक द्रव माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाये जाते हैं, उसे परिवहन कहते हैं।

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प्रश्न 80.
वाष्पोत्सर्जन और वाष्पीकरण में अन्तर लिखिए।
उत्तर :

वाष्पोर्त्सजन वाष्पीकरण
(i) यह क्रिया केवल पौधों में होती है । (i) यह क्रिया जन्तु और जल के स्रोत की सतह से होती है ।
(ii) यह वाह्य और आन्तरिक कारक से प्रमाणित है (ii) यह केवल बाहरी कारक से प्रमाणित है ।

प्रश्न 81.
वाष्पोत्सर्जन पौधों के लिए आवश्यक बुराई है ।
उत्तर :
जल पौधों के लिए अति आवश्यक है । वाष्पोत्सर्जन की क्रिया जल को पौधे के शरीर से बाहर निकालता है। इसके बावजूद भी यह क्रिया पौधों के लिए आवश्यक है क्योंकि जड़ से जल इसी क्रिया की सहायता से पत्तियों तक पहुँचता है। स्टोमेटा के खुलने एवं बंद होने में यह क्रिया सहायक है ।

प्रश्न 82.
फ्लोएम किसे कहते हैं ? इसका क्या कार्य है ?
उत्तर :
फ्लोएम (Phloem) : फ्लोएम एक जटिल ऊत्तक है। यह फ्लोएम पैरेनकाइमा, फ्लोएम तन्तु, चालनी नलिकाएँ तथा सह-कोशिकाओं द्वारा निर्मित होता है ।
कार्य : फ्लोएम का मुख्य कार्य पत्तियों में निर्मित खाद्य पदार्थों को पौधों के विभित्र भागों तक स्थानान्तरित करना है।

प्रश्न 83.
जाइलम क्या है ? जाइलम का क्या कार्य है ?
उत्तर :
जाइलम (Xylem) : जाइलम ट्रैकि, ट्रैकिड्स, जाइलम तन्तु तथा जाइलम पैरेनकाइमा द्वारा निर्मित एक जटिल ऊत्तक है।
कार्य : जाइलम का मुख्य कार्य मूल रोमों द्वारा अवशोषित जल तथा खनिज लवणों को पत्तियों तक पहुँचाना है।

प्रश्न 84.
आक्सी श्वसन क्या है ?
उत्तर :
आक्सी श्वसन (Aerobic respiration) : श्वसन की वह क्रिया जो आक्सीजन की उपस्थिति में होती है, उसे आक्सी श्वसन कहते हैं। इसमें भोज्य पदार्थ के पूर्ण आक्सीकरण के फलस्वरूप CO2 तथा H2O बनता है तथा अधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।

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प्रश्न 85.
अनाक्सी श्वसन क्या है ?
उत्तर :
अनाक्सी श्वसन (Anaerobic respiration) : श्वसन की क्रिया जो आक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है, उसे अनाक्सी श्वसन कहते हैं। इस क्रिया में भोज्य पदार्थ का पूर्ण आक्सीकरण नहीं होता है तथा कम मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 86.
दहन क्या है ?
उत्तर :
दहन (Combustion) : दहन वह भौतिक क्रिया है जिसे कोई पदार्थ आक्सीजन की उपस्थिति में जलकर बहुत अधिक मात्रा में ताप व प्रकाश उत्पन्न करता है। इस क्रिया के लिए किसी विकर (Enzyme) की आवश्यकता नहीं होती है। जैसे – लकड़ी, कोयला आदि का जलना।

प्रश्न 87.
श्वसन को अपचयी क्रिया क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
श्वसन को एक विनाशकारी क्रिया (Catabolic process) कहते है, क्योंकि श्वसन क्रिया में जटिल पदार्थ का आक्सीकरण होता है तथा सरल यौगिको का निर्माण होता है।

प्रश्न 88.
जन्तुओं तथा पौधों में परिवहन का माध्यम क्या है ?
उत्तर :
जन्तुओं में परिवहन का माध्यम जल, रक्त्तथा लसिका एवं पौधों में परिवहन का माध्यम जल है।

प्रश्न 89.
पोषक पदार्थ क्या है ?
उत्तर :
पोषक पदार्थ (Nutrients) : ऐसे सभी पदार्थ जो सजीवों की विभिन्न जैविक क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक हैं, उन्हें पोषक पदार्थ कहते हैं। जैसे – जल, विटामिन, खनिज लवण।

प्रश्न 90.
खुला परिवहन से क्या समझते हो ?
उत्तर :
खुला परिवहन (Open circulation) : परिवहन की वह विधि जिसमें रक्त, रक्त वाहिनियों द्वारा जन्तु शरीर में उपस्थित अनियमित स्थानों में पहुँचा दिया जाता है जहाँ से यह कोशिकाओं के सीधे सम्पर्क में आ जाता है, उसे खुला परिवहन कहते हैं। टिड्डा, झिंगा, तिलचट्टा आदि में खुला परिवहन होता है।

प्रश्न 91.
भोजन क्या है ?
उत्तर :
भोजन (Food) : वे कार्बनिक पदार्थ जिनसे सजीवों को ऊर्जा प्राप्त होती है तथा शरीर में वृद्धि, पोषण तथा नये ऊत्तकों का निर्माण होता है, उसे भोजन कहते हैं।

प्रश्न 92.
रक्त चाप क्या है ?
उत्तर :
रक्त चाप (Blood Pressure) : धमनियों के अन्दर प्रवाहित होने वाला रक्त धमनियों की दीवार पर दबाव डालता है। इस दबाव को रक्त चाप कहते हैं।

प्रश्न 93.
मृतोपजीवी क्या है ?
उत्तर :
मृतोपजीवी (Saprophyte): वे पौधे जो सड़े-ग्ले कार्बनिक पदार्थ पर उगकर उनसे अपना भोजन ग्रहण करते है, उन्हे मृतोपजीवी कहते है। जैसे – यीस्ट, म्यूकर, पेनिसिलियम आदि।

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प्रश्न 94.
प्रतिरक्षा क्या है ?
उत्तर :
प्रतिरक्षा (Immunity) : हानिकारक सूक्ष्म जीवों तथा अन्य विषैले पदार्थों के हानिकारक प्रभाव से बचने की स्वयं की क्षमता को प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 95.
जन्तुओं में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया क्यों नहीं होती है ? कुछ ऐसे जन्तु का नाम बताओ जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है ?
उत्तर :
जन्तुओं में क्लोरोफिल के अभाव के कारण इनमें प्रकाश संश्लेषण की किया नहीं होती है, परन्तु यूग्लिना (Euglena), क्रिस अमीबा (Chrysamoeba) नामक जन्तुओं की कोशिकाओं में क्लोरोफिल पाये जाने के कारण इनमें प्रकाश संश्लेषण की किया होती है।

प्रश्न 96.
श्वसन के बिना सजीव जीवित क्यों नहीं रह सकते ?
उत्तर :
श्वसन किया में भोज्य पदार्थो के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है। सभी सजीवों की जैविक क्रियाओ को सुचारु रूप से चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। बिना ऊर्जा के सजीव अपनी जैविक क्रिया नहीं चला सकते हैं। जैविक क्रिया नहीं चल पाने के कारण इनकी मृत्यु हो जायेगी। अतः सजीवों को जीवित रहने के लिए श्वसन अति आवश्यक है।

प्रश्न 97.
अन्तःश्वसन तथा नि:श्वसन से क्या समझते हैं ?
उत्तर :
अन्तःश्वसन (Inspiration) : वातावरण से वायु का श्वाँस अंगों के अन्दर जाने की क्रिया को अन्तः श्वसन कहते हैं।
निःश्वसन (Expiration) : श्वसन अंगों में उपस्थित वायु का बाह्म वातावरण में निकलने की क्रिया को निःश्वसन कहते हैं।

प्रश्न 98.
रक्त लयन (Hoemolysis) क्या है ?
उत्तर :
यह रक्त दूषण की एक प्रक्रिया है । इसके कारण रक्त के लाल रक्त कणिका से हीमोग्लोबिन मुक्त होने लगती है ।

प्रश्न 99.
क्रेब्स चक्र का महत्व क्या है ?
उत्तर :
केब्स चक्र का महत्व :-

  • क्रेब्स चक्र जटिल यौगिकों का विघटन कर CO2 गैस मुक्त करती है।
  • यह कोशिका का पारसरिक परिवर्तन केन्द्र है।
  • यह इलक्ट्रान के स्थानान्तरण के लिए इलेक्ट्रान्स को अपचयन शक्ति प्रदान करता है।

प्रश्न 100.
रक्त क्या है ? रक्त में उपस्थित कणिकाओं के नाम लिखिए।
उत्तर :
रक्त (Blood) : रक्त गाढ़े लाल रंग का तरल संयोजी ऊत्तक है। यह भोज्य पदार्थ, आक्सीजन, कार्बन-डाईआक्साइड, हार्मोन्स, खनिज लवण, उत्सर्जी पदार्थ आदि के लिए परिवहन माध्यम का कार्य करता है। रक्त में उपस्थित कणिकाएँ R. B. C. W.B.C तथा रक्त बिम्बाणु हैं।

प्रश्न 101.
श्वसन की परिभाषा और इसका समीकरण लिखिए।
उत्तर :
श्वसन (Respiration) : जीवित कोशिकाओं में जटिल भोज्य पदार्थ का वायुमण्डलीय O2 द्वारा आक्सीकृत होंकर सरल पदार्थों में विधटित हो जाने तथा ऊर्जा मुक्त होने की क्रिया श्वसन कहलाती है।
श्वसन का समीकरण :- C6H12O6+6O2=6H2O+6 CO2+674Kg cals

प्रश्न 102.
लाल रक्त कणिका का वैज्ञानिक नाम बताइए और इसका कार्य लिखिए ।
उत्तर :
लाल रक्त कणणिका का वैज्ञानिक नाम Erythrocyte है।
लाल रक्त कणिका के कार्य :-

  • यह आक्सीजन तथा कार्बन डाई-आक्साइड के परिवहन में सहायता करता है।
  • यह रक्त में अम्ल क्षार के संतुलन को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 103.
रक्त का जमना से क्या समझते हो ?
उत्तर :
शरीर के किसी अग के कटने से रक्त शरीर से निकलने लगता है। जिस प्रक्रिया से रक्त नलिकाओं के कटे भाग से प्रवाहित तरल रक्त अर्द्ध ठोस जेली के समान रचना में बदलकर अपना प्रवाह खो देता है, उस क्रिया को रक्त का जमना कहते है।

प्रश्न 104.
रक्त के कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
रक्त के कार्य :-

  • पोषक तत्वों को शरीर के अन्य भागों में पहुँचाना।
  • O2 को ले जाना।
  • CO2 को विभिन्न अंगों से एकत्र कर श्वसन अंग में पहुँचाना।
  • उत्सर्जन में सहायता करना।

प्रश्न 105.
हिमोग्लोबिन क्या है ? इसका कार्य क्या है ?
उत्तर :
हिमोग्लोबिन लौह युक्त प्रोटीन से बना एक श्वसन वर्णक है। यह 4% लोह तथा 96% ग्लोबिन से गठित होता है। इसकी उपस्थिति के कारण रक्त का रंग लाल होता है। यह सभी मेरूदण्डी प्राणी के लाल रक्त कणिका में तथा अमेरूप्रण्डी प्राणी के प्लाज्मा में पाया जाता है। कार्य :- इसका मुख्य कार्य O2 तथा CO2 का परिवहन करना है।

प्रश्न 106.
एण्टिजेन तथा एण्टिबॉड़ी क्या है ?
उत्तर :
एणि्टिजे (Antigen) : शरीर में उपस्थित या बाहर से प्रवेश करने वाले शरीर के लिए हानिकारक रोगाणुओं को एण्टिजन कहते हैं।
एण्टिबॉडी (Antibody) : रक्त के प्लाज्मा में उपस्थित उन यौगिकों को जो हानिकारक बाहरी पदार्थों के प्रभाव को निष्किय कर शरीर को स्वस्थ रखते हैं, उन्हें एण्टिबॉडी कहते हैं।

प्रश्न 107.
परजीवी पोषण से क्या समझते हो ?
उत्तर :
परजीवी पोषण (Parasitic Nutrition) : पोषण की वह विधि जिसमें पौधे आवश्यक पोषक पदार्थ किसी दूसरे पोधे या जन्तुओं द्वारा प्राप्त करते है, उसे परजीवी पोषण कहते हैं। जैसे – कस्कूटा, लोरेन्धस आदि।

प्रश्न 108.
अति आवश्यक तत्व से क्या समझते हो ?
उत्तर :
अति आवश्यक तत्व (Marco elements) : वे तत्व जो पौधों तथा जन्तुओं के लिए अति आवश्यक तथा अधिक मात्रा में उपयोग किये जाते हैं तथा जिनकी कमी से विभिन्न प्रकार के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं उन्हें अति आवश्यक तत्व कहते हैं।
इनमें 6 प्रमुख हैं – Ca, Na, Mg, K, P, Cl

प्रश्न 109.
पौधों में परिवहन कितने प्रकार का होता है ।
उत्तर :
पौधों में परिवहन दो प्रकार का होता है –

  • निष्क्रिय परिवहन (Passive transport)
  • सक्रिय परिवहन (Active transport) ।

प्रश्न 110.
निष्क्रिय परिवहन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जिस परिवहन में ऊर्जा का उपयोग नहीं होता है, उसे निष्क्रिय परिवहन कहते हैं । जैसे – परासरण, विसरण ?

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प्रश्न 111.
सक्रिय परिवहन किसे कहते हैं ?
उत्तर :
परिवहन की उस विधि को जिसमें कोशिकाओं में उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग किया जाता है उसे सक्रिय परिवहन कहते हैं । जैसे भूमि के जल से लवणों के आयन्स को खींच कर जाइलम में ले आना ।

प्रश्न 112.
आक्सीश्वसन की क्रिया कितनी अवस्थाओं में पूरी होती है ?
उत्तर :
आक्सीश्वसन की क्रिया तीन अवस्थाओं में पूरी होती है –

  • ग्लाइकोलिसिस
  • क्रेब्स चक्र
  • टरमिनल श्वसन

प्रश्न 113.
अनाक्सीश्वसन की क्रिया कितनी अवस्थाओं में पूरी होती है ?
उत्तर :
अनाक्सीश्वसन की क्रिया दो अवस्थाओं में पूरी होती है –

  • ग्लाइकोलिसिस
  • अल्कोहल का निर्माण

प्रश्न 114.
किण्वन (fermentation) किसे कहते है । इस क्रिया के स्थान एवं प्रकार बताइए।
उत्तर :
किण्वन : सूक्ष्म जीवों की उपस्थिति में जटिल कार्वनिक योगिकों को विघटित होकर सरल यौगिकों को उत्पन्न करनेवाली क्रिया को किण्वन कहते है।
किण्वन का स्थान : यह क्रिया चीनी के घोल में यीष्ट की उपस्थिति में होती है ।
किण्वन के प्रकार : यह क्रिया चार प्रकार के होती है –

  • अल्कोहलिक किण्वन
  • लैक्टिक अम्ल किन्वन
  • व्यूट्रिक अम्ल किन्वन
  • एसिटिक अम्ल किन्वन।

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प्रश्न 115.
अनाक्सी श्वसन और किणवन के अन्तर बताइए ।
उत्तर :

अनाक्सी श्वसन किण्वन
(i) यह क्रिया सूक्ष्म वर्ग के जीवों की कोशिका में होता है। (i) यह क्रिया कार्बनिक यौगिकों के घोल में होती है ।
(ii) यह एक जैव रासायनिक क्रिया है । (ii) यह एक रासायनिक क्रिया है

प्रश्न 116.
फ्ति में इन्जाइम नहीं है फिर भी यह पाचन की क्रिया में सहायक है । कैसे ?
उत्तर :
पित्त में लवण पाये जाते हैं। ये वसा को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटने में मदद करते हैं । ये लाइपेज को सक्रिय भी करते हैं। पित्त की प्रकृति क्षारीय है। इसलिये ये अम्लीय भोजन को उदासीन करती है । इन्हीं कारणों से फ्ति पाचन के लिए आवश्यक है ।

प्रश्न 117.
वयस्कों के लिए दूध संतुलित आहार नहीं है – क्यों ?
उत्तर :

  • दूध में जल की मात्रा अधिक है
  • इसमें आयरन की कमी है ।
  • इसमें विटामिन C का अभाव है।
  • इसमें उपस्थित प्रोटीन का शिघ्रता से पाचन नहीं होता है।

प्रश्न 118.
वासा वैसोरम (Vasa Vasorum) किसे कहते है ?
उत्तर :
रक्त वाहिनियों के दीवाल में आवश्यक तत्वों के लिए बारीक रक्त वाहिनियों का जाल होता है। इनके रक्त की आपूर्ति को वासा वैसोरम कहते हैं।

प्रश्न 119.
मानव जीवन के लिए रक्त इतना आवश्यक क्यों है ?
उत्तर :
मनुष्य के शरीर में रक्त परिवहन का माध्यम है । यह सभी कोशिकाओं को आवश्यक पदार्थो की आपूर्ति करता है और कोशिकाओं में बने वर्जों पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

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प्रश्न 120.
रक्तदान के बारे में लोगों की गलत धारणायें क्या है और इसकी वैज्ञानिक स्थिति क्या है ?
उत्तर :
रक्तदान के बारे में लोगों की धारणा यह है कि रक्त देने से वह व्यक्ति कमजोर हो जायेगा। उसके शररीर में रक्त की कमी हो जायेगी। वह बिमार रहने लगेगा।

रक्तदान के बारे में वैज्ञानिकों का विश्लेषण एवं सुझाव :

  • इससे हदय को लाभ मिलता है।
  • यह कैंसर के खतरे को कम करता है ।
  • लाल रक्त कणिका के उत्पादन की दर में वृद्धि होती है।
  • कोलेस्ट्राल का स्तर कम होने लगता है।
  • रक्त दान करने वाला व्यक्ति अपने को स्वस्थ समझने लगता है। वह प्रसत्र रहने लगता है ।

प्रश्न 121.
प्रकाश संश्लेषण तथा श्वसन में अन्तर बताइ
उत्तर :

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) श्वसन (Respiration)
(i) प्रकाश संश्लेषण एक रचनात्मक क्रिया है। (i) श्वसन एक विनाशकारी क्रिया है।
(ii) यह क्रिया पौधों की हरी कोशिकाओं में होती है। (ii) श्वसन की क्रिया सभी जीवित कोशिका
(iii) इस क्रिया में ऊर्जा का उपयोग होता है। (iii) श्वसन क्रिया में ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 122.
श्वसन तथा दहन में अन्तर बताइये।
उत्तर :

श्वसन (Respiration) दहन (Combustion)
(i) श्वसन की क्रिया जीवित कोशिका में होती है। (i) दहन की क्रिया निर्जीव वस्तुओं में होती
(ii) श्वसन कार्बनिक रासायनिक क्रिया है। (ii) दहन अकार्बनिक भौतिक रासायनिक
(iii) इस क्रिया के लिए निम्न तापमान की आवश्यकता होती है। (iii) इस क्रिया के लिए उच्च तापमान की होती है।
(iv) इस क्रिया में केवल उष्मा उत्पन्न होती है । (iv) इस क्रिया में उष्मा तथा प्रकाश दोनों
(v) इस क्रिया में ATP का निर्माण होता है। (v) इस क्रिया में ATP का निर्माण नहीं हो

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प्रश्न 123.
आक्सी श्वसन तथा अनाक्सी श्वसन में अन्तर बताइये।
उत्तर :

आक्सी श्वसन (Aerobic Respiration) अनाक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration)
(i) आक्सी श्वसन की क्रिया आक्सीजन की उपस्थिति में होती है। (i) अनाक्सी श्वसन की क्रिया आक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।
(ii) इस क्रिया में भोज्य पदार्थ का पूर्ण आक्सीकरण होता है। (ii) इस क्रिया में भोज्य पदार्थ का पूर्ण आक्सीकरण नहीं होता है।
(iii) इस क्रिया में अधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। (iii) इस क्रिया में कम मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।
(iv) यह क्रिया उच्च वर्ग के जीवों में होती है। (iv) यह क्रिया निम्न वर्ग के जीवों में होती है।
(v) इस क्रिया में ATP के 38 अणु बनते हैं। (v) इस क्रिया में ATP के दो अणु बनते हैं।

प्रश्न 124.
क्रेब्स चक्र तथा ग्लाइकोलाइसिस में अन्तर बताइये।
उत्तर :

क्रेब्स चक्र (Kreb’s Cycle) ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis)
(i) यह आक्सी श्वसन की दूसरी अवस्था है। (i) यह आक्सी श्वसन की प्रथम अवस्था है।
(ii) यह माइटोकोण्ड्रया में होती है (ii) यह कोशिका द्रव्य में होती है।
(iii) यह O2 की उपस्थिति में होती है। (iii) यह O2 की अनुपस्थिति में होती है।
(iv) इस क्रिया में अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। (iv) इस क्रिया में कम ऊर्जा उत्पन्न होती है।
(v) इस क्रिया का अन्तिम उत्पन्न पदार्थ जल तथा CO2 है। (v) इस क्रिया का अन्तम उत्पन्न पदार्थPyruvic acid है।

प्रश्न 125.
खुला परिवहन तथा बन्द परिवहन में अन्तर बताइये।
उत्तर :

खुला परिवहन (Open Circulation) बन्द परिवहन (Closed Ciculation)
(i) यह परिवहन की एक सरल विधि है। (i) यह परिवहन की एक विकसित विधि है।
(ii) इस परिवहन में रक्त कोशिका ऊत्तक के सीधे सम्पर्क में आती है। (ii) इस परिवहन में रक्त, रक्त वाहिनियों द्वारा ऊत्तक से अलग रहता है।
(iii) इसमें हमेशा मिश्रित रक्त प्रवाहित होता है । (iii) इसमें शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त अलग-अलग रहता है।
(iv) इस क्रिया में रक्त हृदय में वापस देहगुहा द्वारा आता है। (iv) इस क्रिया में रक्त हृदय में रक्त वाहिनियों द्वारा वापस आता है।

प्रश्न 126.
धमनी तथा शिरा में अन्तर बताइये।
उत्तर :

धमनी (Artery) शिरा (Vein)
(i) धमनी द्वारा शुद्ध रक्त का परिवहन होता है। (i) शिरा द्वारा अशुद्ध रक्त का परिवहन होता है।
(ii) धमनी में कपाट नहीं पाया जाता है। (ii) शिरा में कपाट पाया जाता है।
(iii) धमनी की दीवार मोटी होती है। (iii) शिरा की दीवार पतली होती है।
(iv) धमनी के अन्दर रक्त का प्रवाह बहुत तेज होता है। (iv) शिरा के अन्दर रक्त का प्रवाह धीमी गति से होता है।


विवरणात्मक प्रश्नोत्तर (Descriptive Type) : 5 MARKS

प्रश्न 1.
प्रकाश संश्लेषण का महत्व बताइये।
अथवा, प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से जन्तु जगत किस प्रकार लाभान्वित होता है?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण का महत्व :
(i) भोज्य पदार्थ का निर्माण :- प्रकाश संश्लेषण द्वारा ग्लूकोज का निर्माण होता है। ग्लूकोज से अन्य कार्बनिक पदार्थों जैसे – वसा, प्रोटीन, स्टार्च आदि का निर्माण होता है जो जीवों के लिए भोज्य पदार्थ के काम आते हैं।

(ii) ऊर्जा के स्रोत : ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है। प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण होता है और यह ऊर्जा इस प्रक्रिया के द्वारा कार्बनिक यौगिकों में रासायनिक ऊर्जा के रूप में संग्रहीत हो जाती है। सभी जीव अपनी जैविक क्रिया को पूरा करने के लिए ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

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(iii) O2 तथा CO2 का संतुलन : प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान कार्बन डाई-आक्साइड प्रहण की जाती है तथा आक्सीजन मुक्त होती है। सभी जीव श्वसन क्रिया में आक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन-डाई आक्साइड छोड़ते हैं। लकड़ी, कोयला तथा पेट्रोलियम पदार्थ आदि के जलने से CO2 की एक बड़ी मात्रा वायुमण्डल में आ जाती है। प्रकाश संश्लेषण क्रिया में इन गैसों का आदान-प्रदान होता रहता है जिससे वायुमण्डल में O2 तथा CO2 का संतुलन बना रहता है।

(iv) मानव उपयोग तथा अन्य वस्तुओं का स्रोत : मानव जीवन में प्रकाश संश्लेषण का बहुत महत्व है। ईधन, वस्त्र, दवा, मकान तथा फर्नीचर आदि का निर्माण पौधों द्वारा ही होता है।

प्रश्न 2.
आक्सी श्वसन तथा अनाक्सी श्वसन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
आक्सी श्वसन (Aerobic Respiration) : श्वसन की वह विधि जो आक्सीजन की उपस्थिति में होती है, आक्सी श्वसन कहलाती है। इस श्वसन में भोज्य पदार्थ का पूर्ण आक्सीकरण होता है तथा अधिक मात्रा में ( 686k. cal) ऊर्जा मुक्त होती है। श्वसन की यह क्रिया उच्च वर्ग के पौधों तथा जीवों में होती है। जिन जीवधारियों में यह श्वसन की क्रिया होती है, उन्हें Aerobic कहा जाता है।
C6H12O6+6O2=6 CO2+6 H2O+686 K cal ऊर्जा
अनाक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration) : श्वसन की वह विधि जो आक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है अनाक्सी श्वसन कहलाती है। इस श्वसन में भोज्य पदार्थ का पूर्ण आक्सीकरण नहीं होता है। इसमें ऊर्जा को कम मात्रा

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मुक्त होती है। श्वसन की यह क्रिया निम्न वर्ग के पौधों तथा निम्न श्रेणो के जन्तुओं जैसे – मोनोसिस्टिस, स्केरिस आदि में होती है। जिन जीवधारियों में यह श्वसन की क्रिया होती है उन्हें An-aerobes कहते हैं।
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प्रश्न 3.
उत्सर्जन क्या है ? पौथों में उत्सर्जन की क्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
उत्सर्जन (Excretion): सजीवों के शरीर में मेटाबोलिज्म क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना उत्सर्जन कहलाता है।

पौधों में उत्सर्जन क्रिया : पौधों में कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं होता है। ये अपने उत्सर्जी पदार्थो को निम्नलिखित विधियों द्वारा बाहर निकालते है :-
(i) पत्तियों का झड़ना : कुछ पौधों के उत्सर्जी पदार्थ पर्ण फलक आधार पर जमा रहते हैं। ये पत्तियाँ धीरे-धौरे पीली पड़कर पौधों से अलग हो जाती हैं। जब पत्तियाँ टूटती हैं तो उत्सर्जी पदार्थ भी अलग हो जाते हैं।

(ii) छालों का अलग होना : कुछ पौधों की छालों की कोशिकाओं में उत्सर्जी पदार्थ पाये जाते हैं। जब ये छाल पौधों से छूटकर अलग हो जाती है तो उत्सर्जी पदार्थ भी अलग हो जाता है। जैसे – अमरूद, अर्जुन आदि।

(iii) फलों का गिरना : नीबू, इमली, सेब आदि में साइट्रिक अम्ल, टारटेरिक अम्ल तथा मौलिक अम्ल आदि उत्सर्जी पदार्थों के रूप में जमा रहते है जो फलों के गिरने के साथ-साथ पौधो से अलग हो जाते हैं।

(iv) लैटेक्स द्वारा : रबर, युफोब्रिया आदि पौधे दूष जैसा सफेद, चिपचिपा जल में घुलनशील पदार्थ उत्पन्न करते हैं जिसके माध्यम से उत्सर्जी पदार्थ अलग होता है।

(v) फूलों का गिरना : कुछ पौधों के उत्सर्जी पदार्थ फूलों में जमा रहते हैं जो फूलों के झड़ने के साथ-साथ पौधों से अलग हो जाते हैं। उत्सर्जी पदार्थ के कारण ही फूलो में सुगन्ध होता है।

(vi) रेजिन द्वारा : पाइन, देवदार आदि पौधों के तना, शाखाओं तथा पत्तियों के रेजिन नलिकाओं में एक प्रकार का पीले रंग का उत्सर्जी पदार्थ जमा रहता है जिसे रेजिन कहते हैं। रेजिन नली को काटकर या इसमें छिद्र करके रेजिन बाहर निकाला जाता है।

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प्रश्न 4.
उत्सर्जी पदार्थ क्या है ? पौधों के नाइट्रोजनविहीन उत्सर्जी पदार्थों के नाम तथा उनका आर्थिक महत्व बतायें।
उत्तर :
उत्सर्जी पदार्थ (Excretory Product) : सजीवों के शरीर में केटाबोलिक क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पत्र अनुपायोगी पदार्थों को उत्सर्जी पदार्थ कहते हैं।
पौधों के नाइट्रोजनविहीन उत्सर्जी पदार्थो के नाम तथा उनका आर्थिक महत्व निम्नलिखित हैं :-
(i) गोंद (Gum) : म्रोत : बबुल, आम, सैजन, कटहल, नीम आदि पौधे।

आर्थिक महत्व :

  • दवाओं के निर्माण में गोंद का उपयोग होता है।
  • काठ उद्योग, पौष्टिक पदार्थों के निर्माण तथा कागज को चिपकाने में गोंद का उपयोग होता है।
  • रेजिन (Resin) : स्रोत : यह देवदार, चीड़ आदि के तने से प्राप्त होते हैं।

आर्थिक महत्व :

  • रंग, पेन्ट आदि के निर्माण में उपयोग किया जाता है।
  • जल निरोधक के रूप में उपयोग किया जाता है।

(iii) लैटेक्स (Latex) : स्रोत : बरगद, पीपल, पपीता, रबर, मदार, कटहल, आकन्द मनसा आदि पौधों की पत्तियों तथा तने में पाया जाता है।

आर्थिक महत्व :

  • व्यापारिक तौर पर रबर उद्योग में उपयोग किया जाता है।
  • विद्युत निरोधक के निर्माण में उपयोग होता है।

(iv) टैनिन (Tanin) : स्रोत : चाय की पत्ती, इमली, बहेरा आदि पौधों के फलों से प्राप्त होता है।

आर्थिक महत्व :

  • बमड़ा उद्योग में उपयोग किया जाता है।
  • रंग बनाने, औषधि निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है।

(v) कार्बनिक अम्ल (Organic acid) : स्रोत : सेब, नींबू, अंगूर, गत्रे आदि के रस में पाया जाता है।

आर्थिक महत्व :

  • दवाओं के निर्माण में।
  • विभिन्न शिल्प उद्योग में इसका उपयोग किया जाता है।

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(vi) सुगंधित तेल (Perfumed Oil) : स्रोत : गुलाब, जूही, गेंदा, चमेली, चम्पा आदि पौधों की पत्तियों तथा फूलों से प्राप्त होता है।

आर्थिक महत्व :

  • सुगन्धित साबुन, औषधि तथा विभिन्न प्रसाधन सामग्री के निर्माण में इसका उपयोग होता है।

(vii) खनिज लवण (Minerals) : बरगद की पत्तियों पर अंगूर के गुच्छे के रूप कैल्शियम कार्बोनेट के रवे पाये जाते हैं, जिन्हें सिस्टोलिथ (Cystolith) कहते हैं।
कैल्शियम आक्जेलेट के रवे सूई के आकार में कच्चू, ओल, सूरन आदि पौधों से प्राप्त होता है,
आर्थिक महत्व : औषधि के निर्माण में इनका उपयोग होता है।

प्रश्न 5.
उत्सर्जन का महत्व क्या है ?
उत्तर :
उत्सर्जन का महत्व : सजीवों में उत्सर्जन के निम्नलिखित महत्व हैं :-

  • शरीर की रक्षा : शरीर से दूषित तथा हानिकारक पदार्थो के उत्सर्जन से शरीर स्वस्थ तथा निरोग रहता है।
  • जीवद्रव्य की रक्षा : सजीवों में मेटाबोलिक क्रियायें कोशिकाओं के जीवद्रव्य में सम्पन्न होती है। इन मेटाबोलिक क्रियाओं के फलस्वरूप हानिकारक एवं वज्य पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इन वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर नहीं निकालने पर मेटाबालिक क्रियायें बन्द होने लगती हैं तथा कोशिकाओं की मृत्यु होने की सम्भावना रहती है। अतः जीवद्रव्य की रक्षा के लिए इन दूषित पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना आवश्यक है।
  • संतुलन : सजीव द्वारा अपने पोषण के लिए प्रकृति से विभित्र प्रकार के पदार्थों को ग्रहण किया जाता है। उत्सर्जन क्रिया द्वारा अनेक पदार्थ शरीर से बाहर निकलकर प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखते हैं।
    जैसे — O2 का ग्रहण तथा CO2 का त्याग।

प्रश्न 6.
पौधे तथा जन्तुओं के मुख्य उत्सर्जी पदार्थों के नाम बताओ।
उत्तर :
पौधों के नाइट्रोजन विहीन उत्सर्जी पदार्थ (Non-nitrogenous excretory produts of plants):

  • गोंद (Gum)
  • रेजिन (Resin)
  • लैटेक्स (Latex)
  • टैनिन (Tanin)
  • कार्बनिक अम्ल (Organic acid)
  • सुगन्धित तेल (Perfumed oil), खनिज रवे (Mineral crystals),
  • इटिओलिन (Etioline)

पौधों के नाइट्रोजन युक्त उत्सर्जी पदार्थ (Nitrogenous excretory products of plants) :

  • क्वीनिन (Quinine),
  • निकोटीन (Nicotine)
  • कैफिन (Caffine)
  • रिसर्पिन (Reserpine)
  • मारफिन (Morphine)
  • एट्रोपिन (Atropine)
  • डेटुरिन (Daturine)
  • स्ट्रिकनिन (Strychnine)
  • थीन (Theine)

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जन्तुओं के उत्सजी पदार्थ :
A. प्रोटीन के विघटन से बने उत्सर्जी पदार्थ :-

  • यूरिया (Urea),
  • यूरिक अम्ल (Uric acid)
  • अमोनिया (Ammonia)

B. कार्बोहाइड्रेट के विघटन से बने वर्ज्य पदार्थ :- CO2 और H2O

प्रश्न 7.
अनॉक्सी एवं ऑक्सी श्वसन में तीन अन्तर लिखिए। सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक क्यों है ?
उत्तर :
अनॉक्सी एवं ऑक्सी श्वसन में अन्तर :

ऑक्सी श्वसन (Aerobic repiration) अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic respiration)
(i) ऑक्सी श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। (i) अनॉक्सी श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।
(ii) इस क्रिया द्वारा भोज्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। (ii) इस क्रिया द्वारा भोज्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण नहीं होता है।
(iii) यह श्वसन क्रिया उच्च वर्ग के जीवों में होती है। (iii) यह श्वसन क्रिया निम्न वर्ग के जीवों में होती है।

सिगरेट के सेवन से फेफड़े ठीक ढंग से अपना कार्य सम्पन्न नहीं कर पाते। अधिक समय तक उपयोग करने पर फेफड़ों का कैंसर (Cancer) जैसी असाध्य बीमारियाँ हो जाती हैं जिससे निदान पाना मुश्किल हो जाता है।

प्रश्न 8.
जंक्शनल उत्तक क्या है ? S.A Node एवं A.V. Node के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर :
जंक्शनल उत्तक : हृदय में उपस्थित विभिन्न प्रकार की रूपान्तरित पेशियाँ पायी जाती हैं जिनके प्रसारण या संकुचन के फलस्वरूप हृदय में गति या स्पन्दन उत्पन्न होता है। इन पेशियों को जंक्शनल उत्तक कहते हैं।

S.A. Node (Sino atrial node) : यह हृदय गति का प्रधान संचालक अंग है। यह दाहिने आलिन्द के ऊपर तथा महाधमनी (Aorta) के समीप स्थित रहता है। यह प्रति मिनट 70 से 80 बार स्पन्दन करता है तथा हृदय की गति को नियंत्रित करता है। अत: इसे पेसमेकर (Pacemaker) कहते हैं।

A.V. Node (Atrio ventricular node) : कोरोनरी साइनस (Coronary sinus) के निकट तथा अन्त: आलिन्द की सतह के पीछे स्थित रहता है। यह S.A. Node के स्पन्दन को ग्रहण कर स्वयं प्रतिमिनट 40 से 60 बार कम्पन करता है।

प्रश्न 9.
एल्केलॉयड क्या है ? कुछ प्रमुख एल्केलॉयड के स्रोत तथा उपयोग बताइये ?
उत्तर :
एल्केलॉयड (Alkaloid) : पौधों के नाइट्रोजन युक्त उत्सर्जी पदार्थ जिनका निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन तथा नाइट्रोजन से होता है, उन्हें एल्केलॉयड कहते हैं। कुछ प्रमुख एल्केलॉयड के स्रोत तथा उपयोग :-

एल्केलॉयड के नाम स्रोत उपयोग
1. क्वीनिन (Quinine) सिनकोना पेड़ की छालों से मलेरिया बुखार की दवा के निर्माण में
2. निकोटिन (Nicotine) तम्बाकू की पत्तियों से मादक पदार्थ के रूप में तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करने में
3. रिसर्पिन (Reserpine) सर्पगन्धा पौधों की जड़ से उच्च रक्त चाप की दवा
4. कैफिन (Caeffine) काफी के बीजों में दर्द निवारण औषधि बनाने में
5. डेटुरिन (Daturine) धतूरा के पत्तों तथा फलों में दमा या श्वाँस की दवा बनाने में
6. स्ट्रिकनिन (Strychnine) कुचला पौधों के बीज में पेट दर्द निवारक औषधि के निर्माण में
7. मारफिन (Morphine) अफीम के कच्चे फल से नींद तथा दर्द की दवा बनाने में
8. एट्रोपिन (Atropine) बेलाडोना की पत्ती तथा जड़ से नेत्र सम्बन्धो रोगों की दवा बनाने में

प्रश्न 10.
एल्केलायड की प्रकृति तथा महत्व बताइये।
उत्तर :
एल्केलायड की प्रकृति (Nature of alkaloids) :

  • ये जटिल कार्बनिक यौगिक हैं।
  • ये कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन तथा आक्सीजन द्वारा बने होते हैं।
  • ये नाइट्रोजन युक्त उत्सर्जी पदार्थ हैं।
  • ये विपैले तथा कड़वे स्वाद वाले होते हैं।
  • ये जल में अघुलनशील तथा कार्बनिक घोलकों में घुलनशील होते हैं।
  • इनका निर्माण प्रोटीन द्वारा होता है।
  • ये कार्बनिक अम्ल के रूप में पौधों के संचय अंगों में जमा रहते हैं।
  • ये द्रव के रूप में या कोशा द्रव में ठोस पदार्थ के रूप में मिलते हैं।

एल्केलायड का आर्थिक महत्व (Economic importance of alkaloids) :

  • इनका उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है।
  • इनका उपयोग मादक पदार्थो के निर्माण में होता है।
  • ये भक्षक जीवों से पौधों की रक्षा करते हैं।

प्रश्न 11.
उत्सर्जन क्रिया में त्वचा, यकृत तथा फेफड़े की क्या भूमिका है ?
उत्तर :
उत्सर्जन क्रिया में त्वचा की भूमिका :- त्वचा शरीर का सबसे बाहरी रक्षात्मक आवरण है। त्वचा की भीतरी सतह पर रक्त वाहिनियाँ तथा अनेक पसीना प्रंथियाँ (Sweat glands) होती हैं जिनसे पसीने (Sweat) का साव होता है। पसीना के साथ-साथ अनेक उत्सर्जी पदार्थ जैसे – यूरिया, लवण, अमोनिया, NaCl इत्यादि बाहर निकलते हैं। जलीय प्राणियों में प्रायः त्वचा द्वारा अमोनिया का उत्सर्जन होता है।

उत्सर्जन में यकृत की भूमिका : प्रोटीन मेटाबोलिज्म के फलस्वरूप यकृत में आवश्यकता से अधिक अमीनो अम्ल यकृत की कोशिकाओं में विघटित हो जाते हैं। फलस्वरूप यूरिया का निर्माण होता है। यूरिया मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकलता रहता है। पुरानी तथा मृत RBC पित्त (Bile) के रूप में लिवर द्वारा पित्ताशय में जमा होता रहता है जो भोजन के साथ ग्रहणी में मिलकर मल (Faeces) के रूप में बाहर निकलता रहता है।

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उत्सर्जन में फेफड़े की भूमिका : श्वसन क्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न CO2 का त्याग फेफड़े द्वारा होता है। CO2 के साथ-साथ जलवाष्प तथा कुछ वाष्पशील पदार्थ जैसे – अल्कोहल, एसीटोन, आमोनिया आदि भी श्वसन के समय बाहर निकाल दिये जाते हैं।

प्रश्न 12.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में क्लोरोफिल तथा जल की भूमिका तथा स्रोत बताइये।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में क्लोरोफिल की भूमिका : क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा में उपस्थित फोटॉन नामक कणों को अवशोषित कर उत्तेजित हो जाते हैं तथा जल को H+ तथा OH में विखण्डित कर देते हैं। इस प्रकार क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपान्तरित कर देते है तथा पुन: अपनी मौलिक अवस्था में आ जाते हैं।

क्लोरोफिल के स्रोत : यह पत्ती के मिजोफिल ऊत्तक की कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना भाग में पाया जाता है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में जल की भूमिका : वायुमण्डल में मुक्त होने वाले O2 का मुख्य स्रोत जल है। फोटोलाइसिस क्रिया में जल के अणुओं का H+ तथा OH आयनों में विखण्डन हो जाता है। जल से प्राप्त H+ आयन का ग्लूकोज अणु के गठन के उपयोग होता है तथा OH आयन से पुनः जल का निर्माण होता है तथा O2 गैस मुक्त होती है।

जल के स्रोत : पौधों के लिए जल का मुख्य सोत मिट्टी है। स्थलीय पौधे मिट्टी के अन्दर स्थित कोशिका जल को अपनी जड़ों के मूलरोमों की सहायता से अवशोषित करते हैं। जलीय पौधे अपने वातावरण में उपस्थित जल को अपने पूरे शरीर की बाह्ल सतह से परासरण विधि द्वारा प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 13.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सूर्य के प्रकाश की भूमिका तथा स्रोत बताइए।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सूर्य के प्रकाश की भूमिका :

  • सूर्य के प्रकाश की विकिरण ऊर्जा क्लोरोफिल द्वारा अवशोषित होती है और क्लोरोफिल के अणु उत्तेजित होकर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को प्रारम्भ करते हैं।
  • सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही स्टोमेटा के मुँह खुलते हैं तथा गैसों का विनिमय होता है।

सूर्य के प्रकाश का स्रोत : पौधों को सूर्य का प्रकाश सूर्य से प्राप्त होता है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सूर्य प्रकाश के लाल तथा नीले रग में होती है। प्रकाश किरणों के छोटे-छोटे कण फोटॉन (Photon) कहलाते हैं। फोटॉन में उपस्थित ऊर्जा को क्वान्टम कहते हैं।

प्रश्न 14.
सहायक श्वसन अंग क्या है ? तीन जन्तुओं का उदाहरण दो जिनमें सहायक श्वसन अंग पाया जाता है। प्रत्येक सहायक श्वसन अंग की स्थिति बताइये।
उत्तर :
सहायक श्वसन अंग : कुछ जलीय जन्तुओं में मुख्य श्वसन अंग के अतिरिक्त विशेष प्रकार के अंग पाए जाते है, जो प्रतिकूल वातावरण में श्वसन में सहायता करते है, उन्हे सहायक श्वसन अंग कहते हैं।

जैसे –

  • कंवई (Koi) – Labyrinthine organ (लेबिरिन्थीन आर्गन)
  • मांगुर (Mangur) – Arboresent organ (आर्बोरिसेन्ट आर्गन)
  • सिंघी (Singhi) – Extrabranchiai diverticulum (एक्सट्रा ब्रांकियल डाइवर्टिकुलम)

सहायक श्वसन अंग की स्थिति :

  • मागुर में श्वसन अंग Arboresent organ शाखान्वित नलिका के समान होता है और गलफड़ से सटा हुआ रहता है।
  • कवई में सहायक श्वसन अंग Labyrithine organ गलफड़ के ऊपर दोनों और पंखें के समान स्थित रहता है।
  • सिंधी में सहायक श्वसन अंग Extrabranchial diverticulum लम्बी नलिका के समान Gill chamber में ऊपर की ओर लगा रहता है।

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प्रश्न 15.
रसारोहण क्या है ? पौधों में रसारोहण की क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रसारोहण (Ascent of Sap) : पौधों के मूलरोमों द्वारा अवशोषित जल तथा घुलित खनिज पदार्थो को जाइलम ऊत्तक द्वारा पोधों के ऊपरी भागों विशेषकर पत्तियों तक पहुँघाने की क्रिया रसारोहण क्रिया कहलाती है।

रसारोहण की क्रिया विधि :
डिक्सन तथा जाली का सिद्धान्त : Dixon तथा Joly ने सन् 1894 में Transpiration pull and coheison theory के रूप में अपना मत प्रतिपादित किया। यह मत अब तक सर्वमान्य है।

  • जल के अणुओं के बीच लगने वाला परसर आकर्षण बल
  • जल का लगातार स्तम्भ
  • वाष्पोत्सर्जन खिंचाव

पत्तियों की मिजोफिल कोशिकाओं की भित्तियों में जल का वाष्पन होता है। वाष्पन के कारण कोशिकाओं की परासरणसान्द्रता तथा उनमें जल की विसरण-दाब-य्यूनता अधिक हो जाती है जिसके कारण जल जाइलम वाहिनियों से खिंचकर परासरण द्वारा मिजोफिल कोशिकाओं में प्रवेश करता है।

इस क्रिया में पत्ती के जाइलम वाहिनी में उपस्थित जल में एक प्रकार का खिंाव बल उत्पन्न होता है जिसके कारण पिछले भाग से जल इस स्थान को भरने के लिए ऊपर की ओर वढ़ने लगता है। इस ख़ंचाव को वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (Transpiration pull) कहते हैं। इसी खिंचाव बल के कारण जल जड़ से तना तथा तना से पत्ती तक लगातार वढ़ता रहता है।

प्रश्न 16.
वाष्पोत्सर्जन क्या है ? विभित्र प्रकार के वाष्पोत्सर्जन का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) : पौधों के वायवीय भागो द्वारा आवश्यकता से अधिक जल को वाष्म के रूप में बाहर निकालने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
वाष्पोत्सर्जन के प्रकार :- वाष्योत्सर्जन निम्न तीन प्रकार के होंते है :-

  • स्टोमेटल वाष्पोत्सर्जन (Stomatal Transpiration) : वाष्पोत्सर्जन की वह किया जो स्टोमेटा द्वारा होती है, स्टोमेटल वाष्पोत्सर्जन कहलाते हैं। लगभग 90% वाष्पोत्सर्जन की क्रिया स्टोमेटा द्वारा होती है।
  • क्यूटिकूलर वाष्पोत्सर्जन (Cuticular Transpiration) : जब वोष्पोत्सर्जन की क्रिया तने, पत्तियों तथा अन्य भागों की सतह पर पायी जाने वाली क्यूटिकल द्वारा होती है, तो यह क्यूटिकूलर वाष्मोत्सर्जन कहलाती है।
  • लेन्टीकूलर वाष्पोत्सर्जन (Lenticular Transpiration) : तनों पर उपस्थित छिद्रों अर्थात लेन्टीसेल्स द्वारा होने वाली वाष्षोत्सर्जन क्रिया को लेन्टीकूलर वाष्षोत्सर्जन कहते हैं। केवल 1% वाष्मोत्सर्जन लेन्टीसेल्स द्वारा होता है।

प्रश्न 17.
वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक क्या हैं ?
उत्तर :
वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं :-

  • प्रकाश (Light)
  • तापक्रम (Temperature)
  • आर्द्रता (Humidity)
  • वायुमण्डल का दबाव (Atmospheric Pressure)
  • वायु (Wind)
  • मिट्टी-जल (Soil-Water)
  • पत्तियों का आकार (Size of Leaves)
  • क्यूटिकल की मोटाई (Thickness of Cuticle)
  • लेन्टिसेल की उपस्थिति (Presence of Lentical)

प्रश्न 18.
परिवहन क्या है ? परिवहन का महत्व बताइये।
उत्तर :
परिवहन (Circulation) : सजीवों के शरीर में होने वाली वह विशेष क्रिया जिसमें द्रव माध्यम द्वारा भोज्य पदार्थ, वर्ज्य पदार्थ तथा अन्य पदार्थ एक अंग से दूसरे अंग तक पहुँचाये जाते है, उसे परिवहन कहते हैं।

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परिवहन का महत्व : सजीवों में परिवहन के महत्व निम्नलिखित हैं :
(i) पोषण : पौधों की पत्तियों में निर्मित भोज्य पदार्थ फ्लोएम वाहिनी द्वारा पौधों की विभिन्न कोशिकाओं में पहुँचते हैं। जन्तुओं में पाचन के पश्यात् अवशोषण के द्वारा सरल भोज्य पदार्थ सभी जीवित कोशिकाओं में रक्त माध्यम द्वारा पहुँचाये जाते हैं। फलस्वरूप पोषण की क्रिया सम्पन्न होती है।

(ii) श्वसन : श्वसन के लिए O2 गेस परिवहन द्वारा ही विभिन्न कोशिकाओं में पहुँचायी जाती है तथा श्वसन के पश्चात् उत्पन्न CO2 पुन: रक्त माध्यम द्वारा ऊत्तकों से श्वसन अंगो में पहुँचायी जाती है जहाँ से वह शरीर से बाहर निकाला जाता है।

(iii) संचय : परिवहन द्वारा ही आवश्यकता से अधिक भोज्य पदार्थ संचय अंगों में पहुँचा दिये जाते हैं जहाँ पर ये भविष्य के लिए संचय किया जाता है।

(iv) हार्मोंन का परिवहन : परिवहन द्वारा अन्त सावी प्राथियों से सावित हार्मोन लक्ष्य अंगों तक पहुँचा दिये जाते हैं।

(v) उत्सर्जन : विभिन्न मेटाबोलिक कियाओं के फलस्वरूप कोशिकाओं में वर्ज्य पदार्थ का निर्माण होता है। ये वर्ज्य पदार्थ परिवहन द्वारा उत्सर्जी अंगों में पहुँचा दिये जाते हैं, जहाँ से ये शरीर से बाहर त्याग दिये जाते हैं।

(vi) शरीर में ताप का नियंत्रण : श्वसन किया द्वारा उष्मा प्राय: शरीर के आन्तरिक भागों में उत्पन्न होती है, जो परिवहन द्वारा शरीर के सभी भागों में समान रूप से पहुँचा दिये जाते हैं। फलस्वरूप शरीर मै ताप का नियंत्रण रहता है।

(vii) रक्त चाप : रक्त दाब को बनाये रखने में रक्त का परिवहन सहायक होता है। रक्त दाब के कारण ही विभिन्न प्रकार के घुलित पदार्थों तथा आयनों का आदान-प्रदान क्रमशः ऊत्तकों तथा रक्त के बीच होता रहता है।

प्रश्न 19.
रक्त वर्ग से क्या समझते हैं ? रक्त जमने की क्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रक्त वर्ग (Blood group) : एन्टीजेन्स या ऐन्टीबॉडीज के आधार पर मानव रक्त को चार वर्गों A, B, A B तथा O में बाँटा गया है। रक्त को इन चार वर्गों में विभाजित करने की पद्धति को A B O system कहते हैं। मनुष्य के R.B.C. में A तथा B ये दो प्रकार के ऐन्टिजेन्स होते हैं। किसी व्यक्ति में केवल एक प्रकार का और किसी में दोनों प्रकार का ऐन्टिजेन्स हो सकता है या दोनों प्रकार का ऐन्टिजेन्स अनुपस्थित भी हो सकता है। प्लाज्मा में भी दो प्रकार के एन्टिबॉडजी a तथा b होते हैं।

रक्त जमने की क्रिया विधि (Process of blood clotting) : रक्त जमने की क्रिया विधि एक जटिल क्रिया है जो निम्न अवस्थाओं में पूरी होती है :

  • जब कोई रक्त नलिका कट जाती है या कोई अंग कट जाता है और रक्त बाहर निकलने लगता है, तब क्षतिग्रस्त रक्त बिम्बाणु हवा के सम्पर्क में आकर थोम्बोप्लास्टिन (Thromboplastion) नामक एक एन्जाइम स्रावित करते हैं, जो हिपैरिन को नष्ट कर देता है।
  • थोम्बीप्लास्टिन केल्शियम आयनों के साथ मिलकर निष्किय प्रोधोम्बिन को सक्रिय थोम्बिन में बदल देता है।
  • थ्रोम्बिन एक अन्य प्लाज्मा प्रोटीन फ्राइब्रिनोजेन को फाइबिन में बदल देता है। फाइब्रिन अघुलनशील तथा तन्तुमय जाली का निर्माण करता है। इस जाली में रक्त कणिकाएँ उलझ जाती हैं। इस प्रकार चोट लगे हुए या कटे भाग पर रक्त का थक्का बन जाता है और रक्त निकलना बन्द हो जाता है।

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प्रश्न 20.
परासरण क्या है ? विभिन्न प्रकार के परासरण की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए।
उत्तर :
परासरण (Osmosis) : परासरण वह भौतिक क्रिया है जिसमें जल के अणुओं का प्रवाह कम सान्द्रता से अधिक सान्द्रता वाले अणुओं की ओर एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा होता है। परासरण दो प्रकार का होता है –

  • अन्तः परासरण (Endosmosis) : वह परासरण जिसमें अणुओं का प्रवाह अर्द्धपारगम्य झिल्ली से होकर कम घनत्व वाले स्थान से अधिक घनत्व वाले स्थान की ओर होता है, उसे अन्तः परासरण कहते है। जैसे – किशमिश के दाने को जल में रखने पर उसका फूल जाना।
  • बहि: परासरण (Exosmosis) : वह परासरण जिसमें अणुओं का प्रवाह अर्द्धपारगम्य झिल्ली से होकर अधिक घनत्व वाले स्थान से कम घनत्व वाले स्थान की ओर होता है, बहि: परासरण कहलाता है। जैसे – अगूर को चीनी के घोल में ड़ालने पर उसका सिकुड़ जाना।

प्रश्न 21.
उपापचय से आप क्या समझते हैं? स्वांगीकरण क्या है?
उत्तर :
उपापचय (Metabolism) : जीवधारियों के शरीर निर्माण, ऊर्जा उत्पन्न करने एवं अन्य विभित्र कार्यो को सम्पन्न करने के लिये उनकी कोशिकाओं में विभिन्न प्रकार की रासायनिक क्रियायें होती रहती हैं। इन्हे उपापचय(Metabolism) कहते हैं। यह शब्द ग्रीक भाषा के मेटोबल (Metabol) परिवर्तन से बना है। मेटबोलिक क्रियाये जीवद्रव्य में सम्पन्न होती हैं। इन्हें संचालन हेतु कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज), प्रोटीन और वसा के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त होती है।

इस क्रिया मे कुछ वर्ज्य पदार्थ भी बनते हैं। जिन्हें सजीव के शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। उपापचय की क्रिया रचनात्मक एवं विनाशात्मक दो प्रकार की होती है। उपापचय की रचनात्मक प्रक्रिया में जीवद्रव्य का निर्माण होता है। इसे उपचय (Anabolism) कहते है। जैसे प्रकाश-संश्लेषण।

उपापचय की जो क्रिया विघटनकारी होती है अर्थात् जिसमे कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज), वसा और प्रोटीन का विघटन होता है, उसे अपचय (Catabolism) कहते हैं। जैसे श्वसन। उपापचय की क्रिया कोशिकाओं के निर्माण, उनकी वृद्धि एव क्षतिपूर्ति के साथ ऊर्जा उत्पन्न करने एवं विभिन्न जैविक क्रियाओ के संपादन में सहायक हैं।
स्वांगीकरण (Assimilation) : अवशोषित भोजन का जीवद्रव्य में रूपान्तरण स्वांगीकरण कहलाता है। जीवद्रव्य हमारे जीवन का भौतिक आधार है।

प्रश्न 22.
प्राणियों के विभिन्न श्वसन अंगों के बारे में लिखिए।
उत्तर :
आवास स्थान के अनुकूल विभिन्न प्रकार के प्राणियों में विभिन्न प्रकार के श्वसन अंग पाये जाते हैं। कुछ प्राणियों के श्वसन अंग निम्नलिखित है :-

  • शरीर की बाह्य सतह (Body surface) : अमीबा, स्पंज, हाइड्रा आदि प्राणियों में कोई निश्चित श्वसन अंग नहीं होता है। ये प्राणी अपने शरीर की बाहरी सतह से विसरण विधि द्वारा श्वसन करते हैं।
  • त्वचा.(Skin) : कुछ जन्तुओं जैसे केंचुआ तथा जोंक आदि प्राणियों में पतली एवं नम त्वचा पाई जाती है। इन प्राणियों में आक्सीजन नम त्वचा से विसरण विधि के द्वारा अन्दर प्रवेश करती है तथा कार्बन डाई-आक्साइड शरीर से बाहर निकाल दी जाती है।
  • ट्रेकिया (Trachea) : तिलचट्टा, मक्खी, मच्छर आदि कीट जाति के प्राणियों में ट्रेकिया नामक नलियों का जाल पाया जाता है। ये नलियाँ बारीक शाखाओं में विभाजित होकर प्रत्येक उत्तक एवं कोशिका में जाती हैं। इन कीट जाति के प्रणियों में ट्रेकिया द्वारा श्वसन की किया सम्मन्न होती है।
  • फुलका (Gilis) : मछली, चिंगड़ी तथा घोधा आदि में श्वसन अंग फुलका होता है जो जल में घुली आव्सीजन को ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाई-आक्साइड को जल में त्यागते हैं।
  • बुक लंग (Book Lung) : मकड़ी, बिच्छु आदि का श्वसन अंग बुक लंग है।
  • बाह्य फुलका (External Gills) : टैडपोल का श्वसन अंग बाह्म फुलका है।
  • फेफड़ा (Lung) : सरीसृप, पक्षी तथा सभी स्तनधारी प्राणियों का मुख्य श्वसन अग फेफड़ा है।

प्रश्न 23.
पौधों में खनिज पोषण तत्व में मैग्नीशियम का कार्य बताएँ। मालिब्डीनम से आप क्या समझते हैं।
उत्तर :
पौधों में खनिज पोषण तत्व में मैग्नीशियम का कार्य : इस धात्विक आवश्यक तत्व को पौधे जमीन से मैग्निशीयम लवण के रूप में प्राप्त करते हैं। इसके द्वारा क्लोरोफिल के निर्माण में सहायता मिलतो है।

मालीब्डेनम : मालीब्डेनम आयन के रूप में अवशोषित होने वाला यह तत्व नाइट्रेट के अवकरण के लिए उत्पेरक का कार्य करता है। इसकी कमी से क्लोरोसिस (Chlorosis) रोग हो जाती है।

प्रश्न 24.
पोषण की अवधारणा तथा उसके पाँच चरण के नाम बताएँ।
उत्तर :
पोषण की अवधारणा (Concept of nutrition) : किसी जीव के पोषण का अर्थ उन क्रियाओं के सम्मिलित रूप से है जिनके द्वारा जीव अपना भोजन ग्रहण करता है, उसे पचाता है, पाचन के फलस्वरूप प्राप्त पोषक पदार्थ (nutrients) को जीवद्रव्य (Protoplasm) में सम्मिलित करता है तथा अनपवे भोजन का बहिष्कारण करता है।

इस तरह शारीरिक वृद्धि, कोकिाओं की दूट-फूट की मरम्मत तथा भोजन में संचित स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) को  गतिज ऊर्जा (Kinetic energy) में रूपान्तरित कर अपने जीवन सम्बन्धी क्रियाओं को सम्पन्न कराता है। कहने का तात्पर्य “पोषण वह क्रिया है जिसमें पोषक पदार्थों को ग्रहण कर शरीर में उनका समुचित उपयोग किया जाता है।”

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पोषण की अवधारणा के पाँच चरण के नाम :

  • अन्त:ग्रहण
  • पाचन
  • अवशोषण
  • स्वांगीकरण
  • वहिष्करण।

प्रश्न 25.
मनुष्य के आहार नाल के विभिन्न भाग के नाम बताएँ।
उत्तर :
मनुष्य के आहार नाल : मनुष्य का आहार नाल एक लम्बी नली होती है जिसका व्यास एवं आकार विभिन्न स्थानों पर भिन्न होता है। यह मनुष्य के मुखगुहा से मल द्वार तक फैली रहती है। आहार नाल के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं –

  • मुँह एव मुखगुहा (Mouth and Buccal cavity)
  • ग्रसनी (Pharynx)
  • ग्रास नली (Oesophagus),
  • आमाशय (Stomach)
  • छोटी आंत (Small Intestine)
  • बड़ी आँत (Large Intestine)।

प्रश्न 26.
पाचन क्या है ? रीढ़धारी के आमाशय में प्रोटीन का पाचन किस प्रकार होता है ? बताइये।
उत्तर :
पाचन (Digestion) : भोजन के जटिल, अमुलनशील तथा जटिल भोज्य पदार्थों को एन्जाइम की सहायता से सरल, घूलनशील तथा तरल अणुओं में तोड़ने की जैविक क्रिया को पाचन कहते हैं।

रीढ़धारी के आमाशय में प्रोटीन का पाचन : आमाशय में उपस्थित जठर प्रथियों द्वारा स्रावित जठर रस में उपस्थित HCl भोजन को अम्लीय बनाता है तथा निष्क्रय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेष्सिन में बदलता है। यह एन्जाइम प्रोटीन प्रकृति के खाद्य पदार्थों पर क्रिया करता है। अतः यह आमाशय में आये प्रोटीन प्रकृति के खाद्य पदार्थों पर क्रिया करके, पेप्टोन (Peptone) तथा प्रोटीओजेज (Proteoses) में बदल देता है।
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प्रश्न 27.
परजीवी किसे कहते हैं ? विभिन्न प्रकार के परजीवी पौधों की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए। अथवा, परपोषित पोषण किसे कहते हैं? इसके प्रकार बताएँ।
उत्तर :
परजीवी (Parasite) : जा अपने भोजन के लिए दूसरे जीवधारी या स्वपोषी पर निर्भर होते हैं, उन्हें परजीवी कहते हैं। ये भोजन के लिए जिनपर निर्भर होते हैं वे पोषक (Host) कहलाते हैं तथा यह क्रिया परजीविता (Parasitism) कहलाती है। परजीवी पौधों में मिलने वाले पोषण को परपोषी पोष्ण (Parasitic nutrition) कहा जाता है।

परजीवी दो प्रकार के होते हैं –

  • पूर्ण परजीवी (Total Parasite)
  • आंशिक परजीव्री (Partial Paratite)

पूर्ण परीजवी : ऐसे पौषे जो अपने भोजन के लिए पूर्णतः पोषक पर निर्भर करते है, पूर्ण परजीवी कहलाते है। जैसेअमरलता जैसे पौधों की जड़ें घूषकांग कहलाती है क्योंकि इन्हीं की सहायता से ये पोषक से भोजन चूसते हैं।

आंशिक परजीवी : ऐसे पौधे जो अपने भोजन का कुछ अंश स्वयं बनाते हैं तथा कुछ पोषक से प्राप्त करते हैं, आंशिक परजीवी कहलाते हैं। जैसै – विस्कम।

प्रश्न 28.
जन्तु सम पोषण की कितनी अवस्थायें हैं ? इन अवस्थाओं के नाम लिखो।
उत्तर :
जन्तुसम पोषण (Holozoic Nutrition) : पोषण की वह विधि जिसमें प्राणी ठोस तथा जटिल पदार्थों (कार्बनिक पदार्थो) को भोजन के रूप में ग्रहण करता है, जन्तुसम पोषण कहलाता है । इस पोषण में भोजन का अन्तर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वीकरण तथा बहिष्करण नामक दशायें होती हैं। भोजन प्राप्ति के आधार पर जन्तु शाकाहारी, मांसाहारी, कीटभक्षी, शवाहारी, सर्वाहारी इत्यादि हो सकते हैं। शाकाहारी जन्तु (Herbivorous animals) जेसे गाय, खरगोश इत्यादि तृणभोजी होते हैं।

मांसाहारी जन्तु (Carnivorous animal) दूसरे जन्तुओं के मांस को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। उदाहरण के लिए बाघ, सिंह आदि। छिपकली, टोड इत्यादि कीट पतंगों का भक्षण करते हैं अत: इन्हें कीटभक्षी जन्तु (insectivorous animals) कहा जाता है। कुछ ऐसे भी जन्तु होते है जैसे – कौआ, गिद्ध इत्यादि जो सड़े-गले मांस का भोजन के रूप में उपयोग करते है शवाहारी (Carrion feeders) कहलाते हैं। मनुष्य सर्वाहरी का सबसे उत्तम उदाहरण माना जाता है क्योंकि यह पेड़-पौधों से प्राप्त भोजन के साथ-साथ जन्तुओं के मांस को भौ भोजन के रूप में प्रयोग करता है।

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जन्तुसम पोषण की अवस्थाएँ :

  • भोजन का अर्न्तग्रहण (Ingestion)
  • पाचन (Digestion)
  • अवशोषण (Absorption)
  • स्वीकरण या स्वांगीकरण (Assimilation) तथा
  • बहिष्करण (Egestion)।

प्रश्न 29.
विकर किसे कहते हैं ? विकर की विशेषताओं को लिखो। पाचक विकरों का वर्णन करो।
उत्तर :
विकर (Enzyme) : विकर एक विशिष्ट घुलनशील तथा प्रोटीनयुक्त कार्बनिक उत्मेरक है जो जीवित कोशिकाओं द्वारा सावित होते हैं तथा स्वय अप्रभावित रहते हुए विभिन्न जैव रासायनिक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।

विकर के गुण (Characteristics of Enzymes) :

  • ये घुलनशील एवं कललीय (colloidal) प्रकृति के होते हैं।
  • ये जैव रासायनिक क्रियाओं में उत्र्रेरक का कार्य करते हैं।
  • ये एक निर्दिष्ट तापक्रम पर क्रियाशील होते हैं। तापक्रम अधिक होने पर ये नष्ट हो जाते हैं।
  • इस प्रकार के इन्जाइम किसी एक प्रकार के खाद्य पर ही क्रिया करते हैं।
  • ये माध्यम की अम्लीयता एवं क्षारीयता से प्रभावित होते हैं।
  • ये अपने कार्य के बाद नष्ट नहीं होते हैं और पुन: उपयोग में लाये जाते हैं।
  • प्राय: सभी विकर प्रोटीन जातीय होते हैं।
  • इनका अणु भार अधिक होता है।

वे विकर जो भोजन के पाचन में भाग लेते हैं उन्हें पाचक विकर (Digestive enzymes) कहते हैं। पाचक विकर निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं –

  • एमाइलोलिटिक विकर (Amyloytic enzyme) : वे विकर जो कार्बोहाइड्रेट के पांचन में सहायता करते हैं उन्हें एमाइलोलिटिक विकर कहते हैं। उदाहरण : टाइलिन, माल्टेज, सूक्रेज, आइसो माल्टेज आदि।
  • प्रोटियोलिटिक विकर (Proteolytic enzyme) : वे विकर जो प्रोटीन के पाचन में सहायक होते हैं, उन्हें प्रोटियोलिटिक विकर कहते हैं। उदाहरण : पेप्सिन, रेनिन, ट्रिप्सिन आदि।
  • लिपोलाइटिक विकर (Lipolytic enzyme) : वे विकर जो वसा के पाचन में सहायता करते हैं उन्हें लिपोलाइटिक विकर कहते हैं। जैसे – लाइपेज।

प्रश्न 30.
एक नेफ्रॉन का स्वच्छ तथा नामांकित चित्र खींचो।
उत्तर :
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प्रश्न 31.
श्वसन क्या है ? श्वसन तथा पोषण में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
अथवा
श्वसन किसे कहते हैं? दिन के समय प्रकाश संश्लेषण तथा श्वसन की क्रियायें किस प्रकार साथ-साथ होती है?
उत्तर :
श्वसन : यह कोशिका के अन्दर होने वाली एक ऐसी जैव रासायनिक क्रिया है जिसके फलस्वरूप भोज्य पदार्थ आक्सीकृत होकर ऊर्जा मुक्त होता है। C6H12O6+6O2=6 CO2+6 H2O+686 Kg Call ऊर्जा

श्वसन तथा पोषण में सम्बन्ध : श्वसन तथा पोषण दोनों ही जैव रासायनिक क्रियाएँ हैं जो सजीवों के शरीर में होती हैं। इन दोनों का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है। इन क्रियाओं के सम्पन्न होने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा की आपूर्ति श्वसन क्रिया के फलस्वरूप ही होती है। श्वसन में आक्सीकरण के लिए आवश्यक ग्लूकोज पोषण के दौरान ही बनता है।

पोषण के फलस्वरूप जीव को ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए आवश्यक पदार्थ ग्लूकोज प्राप्त होता है। इस तरह दोनों का एक दूसरे से बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध है। पोषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में बदलकर शरीर के ऊत्तकों तथा कोशिका के कोशिकाद्रव्य में पहुँचता है। वहाँ O2 की उपस्थिति या अनुपस्थिति दोनों ही अवस्था में ग्लूकोज का आक्सीकरण होता है, जिसके फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है तथा श्वसन की क्रिया होती है।

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प्रश्न 32.
विटामिन किसे कहते हैं? मानव शरीर में विटामिन के महत्व का संक्षेप में वर्णन कीजिए। विटामिन C तथा विटामिन D के कमी के लक्षण बताइये।
उत्तर :
विटामिन (Vitamin) : भोजन में अल्प मात्रा में पाये जाने वाले वे विशिष्ट कार्बनिक पदार्थ जो सजीवों में जैविक क्रियाओं के सम्पन्न करने के लिए आवश्यक है, विटामिन कहलाते हैं।
महत्व :

  • यह शरीर को स्वस्थ रखकर उसकी सुरक्षा करता है।
  • विटामिन A नेत्र व त्वचा सम्बन्धी दोषों को दूर करता है।
  • विटामिन D हड्डियों को मजबूत करता है।
  • विटामिन E जनन क्षमता को संतुलित रखता है।
  • विटामिन K रक्त को जमने में सहायता करता है।
  • विटामिन B Complex तन्त्रिका तन्त्र, रक्त-क्षीणता, वृक्क तथा वृद्धि व विकास इत्यादि से सम्बन्धित दोषों को दूर करके शरीर को स्वस्थ रखता है।

विटामिन C की कमी के लक्षण : दाँत के मसूड़े फूल जाते हैं तथा रक्त निकलने लगता है। त्वचा फट जाती है। शरीर कमजोर हो जाता है। मुख से दुर्ग्धन निकलने लगती है।

विटामिन D की कमी के लक्षण : बच्चों में सुखण्डी नामक रोग होता है जिसमें कंकाल टेढ़ा हो जाता है। विशेषकर रीढ़, पैर तथा खोपड़ी की हड्डियाँ टेढ़ी हो जाती हैं।

प्रश्न 33.
प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा लिखिए । प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक क्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण : प्रकाश संश्लेषण वह जैव रासायनिक क्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश में क्लोरोफिल की सहायता से जल तथा कार्बन डाई-आक्साइड की उपस्थिति में रासायनिक क्रिया करके कार्बोहाइड्रेट आर्थात ग्लूकोज का निर्माण करते हैं।

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प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक क्रिया :- प्रकाश संश्लेषण की क्रिया एक बहुत ही जटिल क्रिया है। ये क्रियाएँ क्रमशः कई चरणों में पूरी होती हैं। Barnes, Calvin तथा Ruben आदि वैज्ञानिकों ने इन क्रियाओं को एक साथ निम्नलिखित समीकरण द्वारा प्रदर्शित क्रिया है।
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अर्थात् CO2 के छ: अणु जल के बारह अणुओं के साथ मिलकर ग्लूकोज का एक अणु बनार्ते हैं। इस क्रिया में जल के छः अणु तथा आक्सीजन के छ: अणु सह-उत्पाद के रूप में बनते हैं।

प्रश्न 34.
प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाई-आक्साइड की भूमिका क्या है, लिखिए ?
उत्तर :
प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाई-आक्साइड की भूमिका :

  • CO2 के अवकरण के फलस्वरूप ग्लूकोज का निर्माण होता है। अतः ग्लूकोज में कार्बन तथा आक्सीजन अणु CO2 द्वारा गठित होते हैं।
  • मिजोफिल ऊत्तक में CO2 जल से प्रतिक्रिया कर कार्बनिक अम्ल का निर्माण करती है जो प्रकाश की उपस्थिति में पुन: CO2 तथा H2O में विखंडित हो जाता है। यह CO2 प्रकाशीय क्रिया के समय प्रकाश संश्लेषण के काम आता है।

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प्रश्न 35.
वातावरण में O2 तथा CO2 का संतुलन कैसे बना रहता है ?
उत्तर :
विभिन्न जीवधारियों के श्वसन तथा तेल, कोयला आदि के दहन के फलस्वरूप CO2 गैस उत्पन्न होती है। यह गैस जीवधारियों के लिए हानिकारक है । इस क्रिया में आक्सीजन गैस उत्पन्न होती है । श्वसन और प्रकाश संश्लेषण की क्रियायें  मिलकर वातावरण में O2 और CO2 का संतुलन कायम रखती हैं । परन्तु हरे पेड़-पौधे वातवरण में उपस्थित CO2 का उपयोग प्रकाश संश्लेषण में करते हैं।
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प्रश्न 36.
मनुष्य में साँस की क्रिया विधि का वर्णन करो।
उत्तर :
मनुष्य में सांस लेने की क्रिया विधि दो अवस्थाओं में पूरी होती है।
(i) नि:श्वसन (Inspiration) : इसके अन्तर्गत इंटर कोस्टल पेशियों के संकुचन से डायाफ्राम चिपटा हो जाता है तथा वक्षगुहा का आयतन बढ़ जाता है जिससे फेफड़ों में प्रसार होता है। परिणामस्वरूप O2 युक्त शुद्ध वायु इनमें प्रवेश करती है। इस वायु में O2 की मात्रा 20-21 % तथा CO2 की मात्रा 0.03- 0.04 % तक होती है।

(ii) उच्छश्वसन (Expiration) : उच्छश्वसन के समय श्वाँस पेशियाँ फैलने लगती हैं। डायाग्राफ के फैलने के फलस्वरूप वक्षगुहा का आयतन घट जाती है। इस प्रकार फेफड़ों के ऊपर दबाव पड़ने से ये सिकुड़ने लगते हैं। फलस्वरूप Alveoli में उपस्थित CO2 युक्त वायु श्वाँस मार्गों द्वारा होती हुई वायुमण्डल में बाहर निकल जाती है। CO2 युक्त वायु का फेफड़े से बाहर निकलना उच्छश्वसन कहलाता है।

प्रश्न 37.
श्वसन क्या है ? इसका रासायनिक समीकरण लिखिए। श्वसन का महत्व क्या है?
उत्तर :
श्वसन (Respiration) : श्वसन वह जैव रासायनिक क्रिया है जिसके अन्तर्गत भोज्य पदार्थो के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है। रासायनिक समीकरण :- C6H12O6+6O2 =+6CO2+6H2O+686 Kg Cal ऊर्जा
श्वसन का महत्व :

  • श्वसन के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है।
  • श्वसन की क्रिया द्वारा उत्पत्र ऊर्जा शरीर के तापक्रम को नियंत्रित रखता है।
  • वायुमण्डल में आक्सीजन तथा कार्बन डाई-आक्साइड का संतुलन बना रहता है।

प्रश्न 38.
आक्सी श्वसन क्या है ? किन-किन जन्तुओं तथा पौधों में आक्सी श्वसन की क्रिया होती है ?
उत्तर :
आक्सी श्वसन (Aerobic respiration) : जब किसी कोशिका के अन्दर आक्सीजन की उपस्थिति में भोज्य पदार्थ पूर्ण रूप से आक्सीकृत होकर जल तथा कार्बन डाई-आक्साइड गैस एवं 686kgcal. ऊर्जा उत्पन्न करता है तो उस श्वसन की क्रिया को आक्सी श्वसन कहते हैं। C6H12O6+6O2 → 6 CO2+6 H2O+686 k.Cal

मोल अर्थात 180 ग्राम ग्लूकोज के पूर्ण आक्सीकरण के फलस्वरूप 686 K. Cal ऊर्जा मुक्त होती है। आक्सी श्वसन दो चरणों में पूरा होता है –

  • ग्लाकोलाइसिस
  • क्रेब्स चक्र

जन्तु – टोड, मछली, चौपाया जन्तु, मनुष्य आदि
पौधे – आम, कटहल, नीम, अमरूद आदि

प्रश्न 39.
पौधों के श्वसन अंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पौधों के श्वसन अंग : पौधों में कोई विशेष श्वसन अंग या श्वसन तंत्र नहीं होता है। पौधों में आक्सीजन तथा कार्बन डाई- आक्साइड का बिनिमय शरीर की बाह्य त्वचा या स्टोमेटा आदि के माध्यम से होता है। निम्न श्रेणी के पौधों में तथा जलीय पौधों में शरीर की बाह्य त्वचा द्वारा विसरण विधि से आक्सीजन लिए जाते हैं तथा CO2 को शरीर से बाहर निकाले जाते हैं। उच्य श्रेणी के पौषे निम्नलिखित अंगों द्वारा श्वसन क्रिया को पूरा करते है।

(i) स्टोमेटा (Stomata) : पत्तियों के सतह पर असंख्य छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें स्टोमेटा कहते है। प्रत्येक स्टोमेटा का निर्माण दो रक्षक काशिकाओं के द्वारा होता है। ये गार्ड सेल स्टोमेटा के खुलने तथा बन्द होने को नियत्रित करते हैं। स्टोमेटा से होकर हवा पत्ती के अन्दर प्रवेश करती है तथा विसरण विधि से आक्सीजन कोशिकाओं में पहुँच जाती है।

(ii) लेन्टिसेल (Lenticel) : पुराने पेड़ों के तने पर उपस्थित छाल पर अनेक छोटे-छांटे छिद्र पाये जाते हैं जिन्हें लेन्टिसे कहते हैं। इसमें रक्षक कोशिकाएँ नहीं पायी जाती हैं। ये क्यूटिकल विहीन होते हैं तथा हर समय खुले रहते हैं। इन छिद्रों से होकर भी गैसीय आदान-प्रदान होता है।

(iii) न्यूमैटोफोर (Pneumatophore) या श्वसन मूल : मैम्रोव जातीय पौधे जैसे – सुन्दरी, गोरान आदि में श्वसन मूल पाये जाते हैं। श्वसन मूल के ऊपर असंख्य छिद्र पाये जाते हैं जिन्हें न्यूमैटोथोड्स कहते हैं। इन्हीं छिद्रों से पौधे वायु से आक्सीजन ग्रहण करते हैं।

प्रश्न 40.
श्वसन के महत्व को बताइये।
उत्तर :
श्वसन का महत्व :
(i) ऊर्जा उन्मोचन (Release of Energy) : श्वसन क्रिया में भोज्य पदार्थों के आक्सीकरण के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है जिससे जीवधारियों की सभी क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं।

(ii) भोजन का निर्माण (Manufacturing of Food) : श्वसन की क्रिया में विभिन्न जीवधारियों द्वारा त्यागा गया CO2 प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए पौधों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है । पौधों द्वारा बने भोजन को सभी जीवधारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गहण करते हैं।

(iii) O2 तथा CO2 का संतुलन (Balance of O2 and CO2) :- प्रकाश संश्लेषण के समय पौधे CO2 ग्रहण करते हैं तथा O2 त्यागते हैं। O2 श्वसन क्रिया में जन्तुओं द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है तथा CO2 मुक्त किया जाता है। इस प्रकार श्वसन क्रिया द्वारा O2 तथा CO2 गैस का संतुलन वायुमण्डल में बना रहता है।

(iv) ऊर्जा का संचय (Storage of energy) : श्वसन के समय मुक्त ऊर्जा का कुछ भाग ATP के रूप में संचित हो जाता है। ATP के रूप में संचित यह ऊर्जा जीवधारियों की विभिन्न जवविक क्रियाओं के संचालन में प्रयुक्त होती है।

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प्रश्न 41.
पोषण की दृष्टि से प्रोटीन, कोर्बोहाइड्रेट, विटामिन तथा वसा के महत्व को बताइये।
उत्तर :
प्रोटीन का महत्व :

  • इसका मुख्य कार्य शरीरिक वृद्ध, क्षति-पूर्ति तथा नयी कोशिकाओं का निर्माण करना है।
  • यह शरीर में ताप ऊर्जा उत्पन्न करता है।
  • यह एन्जाइम तथा हार्मोन का निर्माण करता है।
  • यह शरीर के लिए आवश्यक अमीनो अम्ल उपलग्व कराता है।
  • 1 ग्राम प्रोटीन के आक्सीकरण से 4.3 K.Cal ऊर्जा उत्पन्न होता है।

कार्बोहाइड्रेट का महत्व :

  • यह शरीर के ढाँचे के निर्माण तथा मरम्मत के लिए आवश्यक पदार्थ उपलब्ध कराता है।
  • यह शरीर के लिए आवश्यक कैलोरी का मुख्य खोत है। 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट के आक्सीकरण के फलस्वरूप 4.2 K. cal ऊर्जा उत्पत्र होती है।
  • कार्बोहाड्रेट जन्तुओं के यकृत तथा पेशियों में ग्लाइकोजेन के रूप में तथा पौधों में शर्करा के रूप में संचित हो जाता है।

विटामिन का महत्व :

  • यह कार्बोहाड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के चयापचय में सहायता करता है।
  • यह कई एन्जाइम को एन्जाइम के रूप में कार्य कराता है।

वसा का महत्व :

  • इसमे ऊर्जा उत्पत्र करने की क्षमता बहुत अधिक होती है। 1 ग्राम वसा में 9.3 K.Cal ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  • यह त्वचा के नीचे जमा हांकर शरीर को बाहरी आघत्तों से रक्षा करता है।
  • यह अनेक हार्मोन तथा विटामिन D का संश्लेषण करता है।
  • यह कोशिका झिल्ली के निर्माण में सहायक है।

प्रश्न 42.
आमाशय में भोजन के पाचन की क्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर :
आमाशय में भोजन के पाचन की क्रिया : भोजन मुख गुहा से ग्रासनली की दोवारों में होने वाली क्रमाकुंचन गति (Peristalsis) के कारण आमाशय में पहुँचता है। अमाशय में भोजन पहुँचते ही गैस्ट्रिन नामक हार्मोन के प्रभाव से आमाशय की भीतरी दीवारों पर उपस्थित जठर प्रंथियाँ उत्तेजित हो जाती हैं और लगभग 500-1000 ml जठर रस का साव करती हैं।

जठर रस में Hcl, पेष्सिन (Pepsin, गैस्ट्रिक लाइपेज, म्यूसिन आदि होते हैं। Hcl भोजन के साथ मिलकर उनमें उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा भोजन को अम्लीय बनाता है। पेप्सिन भोज्य पदार्थों में मौजूद प्रोटीन को पचाकर पेट्टोन में बदलती है। रेनिन दूध के प्रोटीन को केसिन में बदलती है। गैस्ट्रिक लाइपेज वसा के पाचन तथा अवशोषण में मदद करता है। गैस्ट्रिक लाइपेज वसा को वसीय अम्ल (Fatty acid) तथा गिलसरॉल (Glycerol) में बदल देता है।

प्रश्न 43.
छोटी आँत में भोजन के पाचन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
छोटी आँत में भोजन का पाचन : भोज्य पदार्थ के छोटी आँत के प्रहणी के अन्दर पहुँचते ही पित्ताशय से पित्त तथा पैंक्रियास से पैक्रियाटिक जूस और आन्त्र प्रन्धियों से आन्त्र रस आकर भोज्य पदार्थ से मिल जाता है। सबसे पहले पित्त अम्लीय भोजन को क्षारीय बना देता है। पैक्रियेटिक जूस में एमाइलेज, माल्टेज, ट्रीप्सिन एव पैक्रियेटिक लाइपेज नामक एन्जाइम पाया जाता है। अन्य रस में एमाइलेज, माल्टेज, सुकेज, लैक्टेज, इरोप्सिन एवं इन्टेस्टिनल लाइपेज एन्जाइम पाया जाता है। ये एन्जाइम निम्न रूप में कार्य करते है

  • एमाइलेज, स्टार्च को पचाकर माल्टोज में बदलता है।
  • माल्टेज, माल्टोज को सुकोज में बदलता है।
  • सेकेज, सुकोज को ग्लूकोज तथा फ्रुक्टोज में बदलता है।
  • लैक्टेज, लैक्टोज को पचाकर ग्लूकोज तथा ग्लैक्टोज में बदलता है।
  • ट्रीप्सिन, प्रोटीन अथवा पेप्टोन को पेप्टाइड में बदलता है।
  • इरेप्सिन, पेप्टाइज को पचाकर अमीनो अम्ल में बदलता है।
  • लाइपेज वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदलता है।

प्रश्न 44.
चयापचय से क्या समझते हो ? उपचय तथा अपचय की परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
चयापचय (Metabolism) : जीव के शररोर में भोज्य पदार्थो के प्रवेश से प्रारम्भ होकर उनके उत्सर्जित होने तक जो विशिष्ट जैव रासायनिक क्रियाएँ होती हैं, उन्हें ही सम्मिलित रूप में मेटाबोलिज्म कहा जाता है। मेटोबोलिज्म को निम्नलिखित दो भागो में बाँटा जाता है :-

  • उपचय (Anabolism) : सजीवों की जीवित कोशिकाओं के जीवद्रव्य मे होने वाली वह रचनात्मक क्रिया जिसमें सरल पदार्थो से जटिल पदार्थों का निर्माण होता है तथा जिसके फलस्वरूप शारीरिक वृद्धि, क्षतिपूर्ति तथा शुष्क भार में वृद्धि होती है, उपचय (Anabolism) कहलाती है। जैसे – प्रकाश संश्लेषण।
  • अपचय (Catabolism) : यह सजीवों की जीवित कोशिकाओं में होने वाली एक विघटनकारी किया है जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थ सरल कार्बनिक पदार्थ में टूट जाते हैं तथा ऊर्जा मुक्त होती है, सजीवों के शरीर का शुष्क भार घटता है। इसे अपचय (Catabolism) कहते हैं। जैसे – श्वसन।

प्रश्न 45.
रक्त परिवहन तंत्र के अवयव कौन-कौन हैं ? रक्त परिवहन तंत्र के विभित्र अवयवों के आपसी सम्बन्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रक्त परिवहन तंत्र के अवयव निम्नलिखित है :-
(i) रक्त (Blood)
(ii) हदय (Heart)
(iii) रक्त वाहिनियाँ (Blood vessels) –

  • धमनी (Artery),
  • शिरा (Vein),
  • केशिका (Capillary)

रक्त परिवहन तंत्र के विभिन्न अवयवों का आपसी सम्बन्ध : ऐसा तंत्र जो नलिकाओं के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों में रक्त पहुँचाने, पोषक पदार्थों एवं आक्सीजन को ऊत्तकों तक ले जाने तथा कार्बन डाई-आक्साइड तथा अन्य वर्ज्य पदारों को बाहर निकालने का कार्य करता है, परिवहन तंत्र कहलाता है।

रक्त परिवहन तंत्र का मुख्य अवयव रक्त है। रक्त परिवहन का माध्यम है। धमनी, शिरा तथा केशिकाओं में रक्त हमेशा रहता है। हृदय से धमनियाँ निकलती हैं। इन धमनियों द्वारा शुद्ध रक्त का परिवहन होता है।

धमनियाँ शाखाओं में बँटकर केशिकाएँ बनाती हैं। ये केशिकाएँ पुनः आपस में मिलकर शिरा बनाती हैं जो हुदय से मिल जाती है। हदय में संकुचन तथा प्रसार (Systole and diastole) के कारण रक्त वाहिनियों मे प्रवाहित होता रहता है। सबसे पहले हुदय से रक्त धमनियों द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों में प्रवाहित होता है और केशिकाओं में पहुँचता है। केशिकाओं में उपस्थित रक्त और ऊत्तकों के बीच पदार्थों, गैसों इत्यादि का आदान-प्रदान होता है। इसके बाद रक्त दूषित

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होकर पुन: शिराओं में आता है तथा शिरा द्वारा हदय में लौट जाता है। इस प्रकार रक्त परिवहन तंत्र के सभी अवयव एक दूसरे से सम्बन्धित होते हैं।

प्रश्न 46.
रक्त क्या है ? रक्त के विभिन्न कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
रक्त (Blood) : रक्त एक अपारदर्शक, अल्प क्षारीय, गाढ़ा लाल रंग युक्त, जटिल, तरल संयोजी ऊत्तक है।
रक्त के कार्य (Functions of Blood) :

  • पोषक पदार्थों का परिवहन : रक्त द्वारा पाचित भोज्य पदार्थ, विटामिन, जल आदि आहार नाल से शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाये जाते हैं।
  • O2 तथा CO2 का आदान-प्रदान तथा परिवहन : फेफड़े से O2 को रक्त द्वारा ही विभिन्न ऊत्तको में पहुँचाया जाता है तथा ऊत्तकों से O2 को फेफड़े तक पहुँचाया जाता है।
  • हार्मोन का परिवहन : अन्तः स्रावी प्रन्थियों द्वारा सावित हार्मोन को रक्त द्वारा ही अन्य अंगों तक पहुँचाया जाता है।
  • वर्ज्य पदार्थों का परिवहन : मेटाबोलिक क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न वर्ज्य पदार्थों को ऊत्तकों से उत्सर्जी अंगों तक पहुँचाया जाता है।
  • जल का संतुलन : रक्त शरीर में जल का संतुलन बनाये रखता है।
  • शरीर का ताप नियंत्रण : रक्त के प्रवाह के कारण शरीर में तापमान नियंत्रित रहता है।
  • रक्त के कारण ही अम्ल तथा क्षार का संतुलन बना रहता है।
  • WBC हानिकारक जर्म जीवाणुओं को निगल कर शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • रक्त जमने के गुण के कारण ही शरीर से रक्त क्षय को रोकने में सक्षम है।

प्रश्न 47.
लाल रक्त कणिका तथा श्वेत रक्त कणिका के कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
लाल रक्त कणिका के कार्य (Function of R.B.C.) –

  • O2 तथा CO2 का परिवहन करना।
  • R.B.C. रक्त के अम्ल क्षार का संतुलन नियंत्रित करता है।
  • रक्त की सान्द्रता को बनाये रखना।
  • शरीर के ताप नियंत्रण में सहायता करना।
  • Bilrubin तथा Bilverdin नामक वर्णक के निर्माण में सहायता करना।

श्वेत रक्त कणिका के कार्य (Function of W.B.C)

  • इओसिनोफिल एलर्जी प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करता है।
  • बेसोफिल हिपैरिन का निर्माण करता है, जो ऊत्तकों के पोषण तथा वृद्धि में सहायक है।
  • न्यूट्रोफिल हानिकारक जीवाणुओं का भक्षण करता है या उन्हें निगल जाता है।
  • लिम्फोसाइट एन्टीबॉडीज तथा फाइब्रिप्लास्ट का निर्माण करता है।
  • कुछ W.B.C. ट्रीफोन (Trephone) का निर्माण करता है जो ऊत्तको के पोषण तथा वृद्धि में सहायक है।

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प्रश्न 48.
मनुष्य के हृदय में रक्त सचार की क्रिया विधि का वर्णन स्वच्छ तथा नामांकित चित्र सहित कीजिए।
उत्तर :
मनुष्य के हृदय में रक्त संचार की क्रिया विधि दो अवस्थाओं में पूरी होती है – संकुचन (Systole) तथा प्रसार (Diastole)। सबसे पहले पल्मोनरी शिराओं द्वारा शुद्ध रक्त बायें अलिन्द में आता है। ठीक इसी समय अग्र तथा पश्च महाशिराओं द्वारा अशुद्ध रक्त दायें अलिन्द में आता है। दाहिने अलिन्द में स्थित S. A. Node से संकुचन प्रारम्भ होती है जिससे अलिन्दों में संकुचन होता है।

संकुचन के फलस्वरूप अलिन्दों में भरे रक्त में द्बाव पड़ता है। इसलिए दायें अलिन्द का अशुद्ध रक्त Tricuspid valve के खुल जाने से दायें निलय में आ जाता है। बायें अलिन्द का शुद्ध रक्त Biscuspid valve के खुल जाने से बायें निलय में आ जाता है। दोनों निलय में रक्त भर जाने के बाद निलय में संकुचन की क्रिया प्रारम्भ हो जाती है जिससे निलय से भरे रक्त पर दबाव पड़ता है। दबाव पड़ने से दाहिने निलय का रक्त पल्मोनरी धमनी से होकर फेफडे में चला जाता है। इसी समय बायें निलय का शुद्ध रक्त महाधमनी (Aorta) से होकर शरीर के विभिन्न भागों में जाता है।.

फेफड़े में गया अशुद्ध रक्त फिर शुद्ध होकर पल्मोनरी शिरा द्वारा बायें अलिन्द में वापस आ जाता है। शरीर के विभिन्न अंगों में जमा अशुद्ध रक्त अग्र तथा पश्च महाशिराओं द्वारा वापस दायें अलिन्द में आ जाता है। इस प्रकार मनुष्य में रक्त को एक चक्र पूरा करने में हृदय से दो बार गुजरना पड़ता है। इसलिए मनुष्य के रक्त परिवहन को द्विगुना परिवहन(Double Circulation) कहते हैं।

प्रश्न 49.
उत्सर्जन तथा उत्सर्जन तंत्र से क्या समझते हैं ? अमीबा, टेपवर्म, कीट, केंचु, झिंगा, टोड, हाइड्रा, स्पंज एवं मनुष्य का उत्सर्जी अंग बताइये।
उत्तर :
उत्सर्जन (Excretion) : जिस प्रक्रिया द्वारा सजीव उत्सर्जी या दूषित पदार्थों को बाहर निकालते हैं, उसे उत्सर्जन कहते हैं।
उत्सर्जन तंत्र (Excretory system) : जन्तुओं के उत्सर्जन क्रिया में भाग लेने वाले अंगों के सम्मिलित रूप को उत्सर्जन तंत्र कहते हैं।

जन्तुओं का नाम उत्सर्जी अंग
1. अमीबा 1. संकुचनशील रसधानी
2. टेप वर्म (टेनिया सोलियम, प्लेनेरिया आदि) 2. ज्वाला कोशिका
3. कीट (तिलचट्टा, टिड्डा, मच्छर आदि) 3. मालपिजियन नलिकाएँ
4. केंचुआ, जोंक आदि 4. नेफ्रिडिया (Nephrida)
5. झिंगा (Prawn) 5. हरी ग्रंथि (Green gland)
6. टोड 6. वृक्क
7. हाइड्रा, स्पंज 7. शारीरिक सतह
8. मनुष्य (मेरूदण्डी) 8. वृक्क, त्वचा, फेफड़ा, बड़ी आँत तथा यकृत मुख्य उत्सर्जी अंग- वृक्क

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प्रश्न 50.
मानव वृक्क की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर :
मनुष्य का मुख्य उत्सर्जी अंग वृक्क (Kideny) है।
मनुष्य के वृक्क की संरचना (Structure of human kidney) :
बाह्य संरचना (External structure) : वृक्क का आकार सेम के बीज की तरह होता है। यह गाढ़े भूरा लाल रंग का होता है। प्रत्येक वृक्क 11 cm. लम्बी, 6 cm चौड़ी तथा 2 cm मोटी होती है। एक पूर्ण वयस्क मनुष्य में इसका वजन लगभग 150 ग्राम होता है। इसकी बाहरी सतह उत्तल (Convex) तथा भीतरी सतह अवतल (Concave) होती है।

भीतरी सतह के मध्य में एक गर्त (Cavity) पायी जाती है जिसे हाइलम (Hilum) कहते हैं। हाइलम से होकर रीनल धमनी तथा रीनल शिरा वृक्क में प्रवेश करती है तथा मूत्र नलिका (Ureter) बाहर निकलती है। वृक्क एक आवरण द्वारा घिरा रहता है जिसे कैप्सूल (Capsule) कहते हैं।

WBBSE Class 9 Life Science Solutions Chapter 3 जीवन की शारीरिक क्रियाएँ 10

आन्तरिक संरचना (Internal structure) : किडनी को लम्बवत् दो भागों में काटने पर निम्नलिखित रचनाएँ दिखायी पड़ती हैं।

  • कार्टेक्स (Cortex) : यह किडनी का बाहरी लाल भाग है।
  • मेडूला (Medulla) : यह कार्टेक्स के भीतर का हल्का लाल भाग है। इस भाग में कई शक्वाकार पिरामिड जैसी रचनायें पायी जाती हैं जिन्हें रीनल पिरामिड (Renal Pyramid) कहते हैं।
  • पेल्विस (Pelvis) : यह कीप के आकार वाला भाग है जिससे युरेटर (Ureter) जुड़ा रहता है। यह भाग हाइलम द्वारा बाहर निकलता है। प्रत्येक वृक्क अंसख्य पतले-पतले धागे के समान कुण्डलित रचनाओं से बने होते हैं जिसे नेफ्रान कहते हैं। नेफ्रान कार्टेक्स तथा मेडूला दोनों ही भाग में फैले रहते हैं।